Hindi Best Stories : प्यार की परख

Hindi Best Stories : फेमिली वालों की मरजी से अपने प्रेमी बैंक मैनेजर आशुतोष वर्मा से शादी कर के सुधा खुश थी. पति का मुंबई ट्रांसफर हो जाने के बाद सुधा एक एनजीओ खोल कर गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा करने लगी. एनजीओ के सहयोग से पुलिस ने रेडलाइट एरिया में छापा मारा तो कोठे से बरामद नाबालिग लड़कियों के साथ माधुरी को देख कर सुधा चौंक गई. माधुरी कालेज में साथ पढऩे वाली उस की पक्की सहेली थी. माधुरी वेश्यावृत्ति के अड्डे तक आखिर कैसे पहुंची? पढ़ें, यह सस्पेंस से भरी रोमांटिक कहानी.

सुबह का सूरज आसमान में फैली लालिमा से निकल कर बाहर आया तो सुनहरी धूप खिल गई. सुधा 4 बजे ही बिस्तर से उठ कर स्नान आदि .से निवृत्त हो जाती थी. फिर घर के मंदिर में वह पूजा की थाली ले कर पहुंच जाती थी. यह उस का रोज का नियम था. उस के फेमिली वाले जानते थे कि सुधा संस्कारी लड़की है. मंदिर में उस का साथ देने के लिए वे सब भी नहाधो कर उपस्थित होते थे. उस दिन भी मंदिर की घंटी जैसे ही बजी, सुधा के दादा दीनानाथ, मम्मी जानकी और छोटी बहन कुसुम मंदिर में आ कर खड़े हो गए.

सुधा ने बड़े श्रद्धा भाव से राधाकृष्ण की पूजा की, आरती गाई, फिर मूर्ति के चरणों में नमन करने के बाद वह आरती की थाली ले कर दादाजी के पास आ गई. उस ने झुक कर एक हाथ से दादाजी के चरण स्पर्श किए, फिर पूजा की थाली उन के सामने बढ़ा दी.

दादाजी ने पूजा की थाली में जल रहे आशुतोष पर दोनों हथेलियां घुमा कर हथेलियों को आंखों से स्पर्श किया और सुधा के सिर पर हाथ रख कर प्यार से बोले, ”बेटी, सुबहसुबह तुम्हारी मधुर वाणी से आरती सुन कर मन को बहुत शांति मिलती है, मेरी आत्मा प्रसन्न हो जाती है.’’

सुधा मुसकरा कर मम्मी जानकी के करीब आ गई. पहले उस ने मम्मी के चरण छुए, फिर पूजा की थाली उन के सामने करते हुए बोली, ”आरती लो मम्मी.’’

जानकी ने आरती ली और दादाजी से बोली, ”सुधा में आप के ही संस्कार हैं पिताजी, आज अगर इस के डैडी जीवित होते तो वह अपनी संस्कारी बेटी को देख कर फूले नहीं समाते.’’

दीनानाथ की आंखें सजल हो आईं, वह ठंडी सांस भर कर बोले, ”हां बहू! इस तेजी से बदल रहे समाज में ऐसे बच्चे हर किसी को कहां नसीब होते हैं. तुम भाग्यवान हो जो इस प्यारी बेटी ने तुम्हारी कोख से जन्म लिया.’’

दीनानाथ कुछ और कहते कि तभी सुधा की सहेली माधुरी ने वहां प्रवेश किया. सुधा उसे देख कर चौंक गई. पूजा की थाली मेज पर रखते हुए पूछा, ”माधुरी, तुम इतनी सुबह यहां! सब ठीक तो है न?’’

”सब ठीक है,’’ माधुरी मुसकराई, ”तुम ने एक वादा किया था, कहो तो दादाजी के सामने बता दूं.’’ कहते हुए माधुरी ने अपनी दाईं आंख दबाई.

सुधा ने जल्दी से कहा, ”बता दो. तुम ने साथ में लाइब्रेरी चलने का वादा ही तो लिया था.’’

माधुरी हंसी, ”जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं तुम्हारे कमरे में बैठती हूं जा कर.’’

” ठीक है, मैं तुरंत तैयार होकर आती हूं.’’ कहते हुए सुधा ड्रेसिंग रूम की तरफ बढ़ गई. माधुरी उस के कमरे में चली गई.

थोड़ी देर में सुधा तैयार हो गई. मम्मी और दादाजी को बता कर वह माधुरी के साथ घर से निकल आई. थोड़ी दूर आने पर माधुरी ने सुधा की कमर में चिकोटी काटी, ”तुम ने मुझे आज अपने ‘वो’ से मिलवाने का वादा किया था और दादाजी के सामने लाइब्रेरी जाने की बात गढऩे लगी.’’

”तो क्या दादाजी के आगे कह देती कि मैं तुम्हें आशुतोष से मिलवाने वाली हूं.’’ अपनी कमर सहलाते हुए सुधा बोली.

मुसकरा पड़ी माधुरी, ”वाह! दादाजी की संस्कारी पोती, दादाजी से ही फ्लर्ट.’’

सुधा गंभीर हो गई, ”माधुरी, दादाजी से आशुतोष से मुलाकात करने की बात छिपा कर मुझे अच्छा नहीं लग रहा है, लेकिन मैं पहले आशुतोष को अच्छे से परख लेना चाहती हूं, फिर मैं दादाजी को सब कुछ बता दूंगी.’’

माधुरी हैरत से सुधा को देखने लगी, ”प्यार में परखना कैसा सुधा, जिसे चाहो उस की तनमन से प्रेयसी बन आओ, यही तो प्यार होता है.’’

”वाह! यह जाने बगैर कि उस के और हमारे विचार मिलते हैं या नहीं, वह हमें सुखी रख पाएगा, हम उसे मन में बसा लें. नहीं माधुरी, यह प्यार नहीं, यह तो प्रेमी को जबरन अपने ऊपर थोप लेने जैसा हुआ.’’

”तुम्हारा कहना है जिस से दिल लगाओ, पहले उसे मटके की तरह ठोंकबजा कर देख लो.’’

”हर्ज क्या है इस में. माधुरी, आखिर हम उसे जीवनसाथी के रूप में चुनने जा रहे हैं. आंख बंद कर के प्यार के फैसले नहीं लिए जा सकते.’’

”यह तुम्हारी सोच है सुधा.’’ माधुरी गंभीर हो गई, ”मैं प्यार में रोमांटिक हो कर जीना चाहती हूं, मरना नहीं.’’

सुधा ने हैरानी से माधुरी को घूरा, ”मैं समझी नहीं.’’

”सीधी सी बात है यार, प्यार इंजौय करने के लिए है, इसे दिल की गहराई से लगा कर आह! उफ!! करने और प्यार में आत्महत्या करने का समय नहीं है मेरे पास.’’

”ऐसी सोच वाली लड़कियों को एक दिन पछताना पड़ता है माधुरी.’’

”मैं पछताने वालों में से नहीं हूं सुधा. तू साथी को परखते हुए परेशान होती रहना, मैं प्यार में मौजमस्ती करती हुई बहुत आगे चली जाऊंगी.’’ माधुरी ने कहा और हंसने लगी. सुधा उस की बेफिक्री पर उसे देखती रह गई. कानपुर के महक रेस्टोरेंट में आशुतोष वर्मा नाम का युवक टेबल के सामने बैठा किसी का इंतजार कर रहा था. वह स्मार्ट था और देखने में किसी अच्छे घर का लगता था. आशुतोष के सामने टेबल पर कांच की नक्काशीदार प्लेट रखी थी, उस प्लेट में गुलाब का ताजा फूल रखा हुआ था.

तभी रेस्टोरेंट में एक अन्य युवक ने प्रवेश किया. उस ने लाल टी शर्ट और आसमानी रंग की जींस पहनी हुई थी. वह शक्ल से ही आवारा किस्म का लगता था, नाम था रोशन. उस ने दरवाजे पर खड़े हो कर अंदर हाल में नजर दौड़ाई. उस की नजर उस आशुतोष वर्मा पर चली गई, जो प्लेट सजाए किसी का इंतजार करता प्रतीत हो रहा था. रोशन के होंठों पर शरारती मुसकान फैल गई. वह लंबेलंबे कदम रखता हुआ आशुतोष की टेबल की तरफ बढ़ गया. टेबल के पास आ कर उस ने प्लेट में सजा कर रखे गुलाब के फूल को उठा लिया और नाक के पास ले जा कर संूघते हुए बोला, ”वाह! कितनी अच्छी खुशबू है इस गुलाब में.’’

आशुतोष गुस्से में बोला, ”यह क्या बदतमीजी है रोशन?’’

”मैं ने क्या बदतमीजी की यार, कहीं तुम गुलाब का फूल उठा लेने से तो खफा नहीं हो गए हो?’’

”यह फूल मैं ने किसी को देने के लिए खरीदा था रोशन.’’

”ओह, तो तुम्हें भी प्यार का रोग लग गया है.’’ रोशन कहते हुए शरारत से आगे झुका, ”कौन है वह बेबकूफ लड़की, जिस ने तुम जैसे गधे से दिल लगाया है.’’

”तुम्हारी जुबान बहक रही है रोशन.’’ युवक तीखे स्वर में बोला.

”बहकेगी ही आशुतोष बाबू,’’ रोशन लापरवाही से बोला, ”तुम ठहरे किताबी कीड़े, किताबों के अलावा तुम्हें कुछ नजर नहीं आता, फिर लड़की कैसे नजर आ गई तुम्हें. क्या मैं नाम जान सकता हूं उस का?’’

आशुतोष झल्ला कर बोला, ”तुम से मतलब.’’

”मत बता यार, यहां आ रही है, देख ही लूंगा.’’ रोशन मुसकरा कर बोला.

वह एक खाली टेबल पर टांग पसार कर बैठ गया. आशुतोष उसे फाड़ खाने वाली नजरों से देखने लगा. उसी समय एक वेटर रोशन के पास आ कर बोला, ”सर, आप को बार काउंटर पर कोई याद कर रहा है.’’

रोशन उठ खड़ा हुआ, ”चलो!’’

वेटर आगे बढ़ा, तब रोशन आशुतोष की टेबल पर झुक गया, ”घूरो मत यार, माना कि लड़कियां मेरी कमजोरी हैं, लेकिन मैं इतना भी कमाधुरी नहीं हूं कि यारों का माल ही डकार जाऊं. तुम्हारा फूल तुम्हें ही मुबारक.’’

कहने के बाद गुलाब का फूल टेबल पर रखी प्लेट में फेंक कर रोशन तेजी से बार काउंटर की तरफ चला गया. आशुतोष ने गहरी सांस ली, ”बला टली!’’

प्लेट में रखा गुलाब का फूल उठा कर आशुतोष ने डस्टबिन में डाल दिया और खाली पड़ी दूसरी टेबल पर जा कर बैठ गया. उस का मूड खराब हो गया था.

सुधा अपनी सहेली माधुरी के साथ महक रेस्टोरेंट में आई तो आशुतोष वर्मा को अपना इंतजार करते देख कर उस के होंठों पर मीठी मुसकान उभर आई. वह आशुतोष की तरफ बढ़ी. तभी पीछे आ रही माधुरी बार काउंटर की तरफ जा रहे रोशन से टकरा गई. उस के हाथ से पर्स छिटक कर फर्श पर जा गिरा. माधुरी पर्स उठाने के लिए झुकने को हुई तो रोशन भी झुक गया. माधुरी का पर्स उठा कर वह मुसकराता हुआ खड़ा हो गया.

”सौरी मिस… मैं जरा जल्दी में था, यह रहा आप का पर्स.’’

”कोई बात नहीं, ऐसा हो जाता है.’’ माधुरी मुसकरा कर बोली, ”मैं मिस माधुरी हूं.’’ कहने के बाद वह पर्स हिलाती हुई सुधा के पीछे लपकी. उस के कानों में उस युवक (रोशन) के शब्द सुनाई पड़े, ”वाह! क्या मस्त जवानी है.’’

माधुरी ने पलट कर युवक की तरफ कातिल मुसकान बिखेरते हुए हाथ की अंगुलियां नचाईं. फिर सुधा के पीछे उस टेबल पर आ गई, जहां सुधा का दोस्त आशुतोष बैठा हुआ था.

”गुड मार्निंग आशुतोष.’’ सुधा ने

मुसकरा कर अभिवादन करते हुए माधुरी की तरफ इशारा किया, ”यह मेरी सहेली

माधुरी है और माधुरी, यह हैं मेरे दोस्त आशुतोष वर्मा.’’

”हैलो!’’ माधुरी ने बड़ी अदा से हैलो कहते हुए आशुतोष की तरफ अपना हाथ बढ़ाया.

आशुतोष ने तुरंत दोनों हाथ सादगी से जोड़ते हुए कहा, ”नमस्ते जी, बैठिए.’’

माधुरी ने मुंह बनाया, ”आप एडवांस नहीं हैं. शायद आप नहीं जानते कि अब हाथ जोड़े नहीं जाते, पकड़े जाते हैं.’’

आशुतोष ने सुधा की तरफ देख कर बड़े शांत भाव से कहा, ”जिस का हाथ पकडऩा था, मैं पकड़ चुका हूं माधुरीजी. अब सुधा ही मेरी जीवनसंगिनी बनेगी. मैं इसे दिल की गहराई से सच्चा प्यार करता हूं.’’

”लेकिन यह तो आप को इस प्रेम कहानी में ठोंकबजा कर परखना चाहती है मिस्टर आशुतोष.’’ माधुरी ने कटाक्ष किया.

”अच्छी बात है.’’ आशुतोष इत्माधुरीन से बोला, ”मैं इस की कसौटी पर खरा उतरूंगा तभी तो यह मुझे अपना जीवनसाथी बनाएगी. यह तो हर लड़की को करना चाहिए.’’

”आशुतोष बाबू, मान लीजिए, यदि आप इस की कसौटी पर खरे नहीं उतरे तो..?’’ माधुरी ने कनखियों से सुधा की तरफ देखते हुए प्रश्न किया.

सुधा ने आशुतोष से पूछे गए सवाल का जवाब खुद दिया, ”अगर ऐसा हुआ तो हम लाइफ पार्टनर नहीं बनेंगे, किंतु एक अच्छे दोस्त बने रहेंगे हमेशा. यह अपनी पसंद की पत्नी के साथ खुश, मैं अपने पति के साथ खुश.’’

माधुरी ने मुंह बिगाड़ा, ”ऊंह! तुम दोनों घिसेपिटे लोगों में से हो. काश! मेरा कोई बौयफ्रेंड होता तो मैं तुम को दिखाती. ये जवानी दूरदूर बैठ कर आहें भरने के लिए नहीं मिली है. यह तो एकदूसरे से लिपट कर प्यार करने के लिए मिली है.’’

सुधा मुसकराई, ”तो बना लो किसी

को अपना और मिटा लो अपने मन की हसरतें.’’

”कोई मिले तो यार.’’ माधुरी ने हाथ उठा कर अंगड़ाई ली. फिर एकाएक जैसे उसे कुछ याद आया, ”यार सुधा, अभी यहां आते हुए मैं जिस युवक से टकराई थी, वह कैसा रहेगा मेरे लिए?’’

”उस का नाम रोशन है, हमारे

कालेज का स्टूडेंट है, निकम्मा और फरेबी.’’ आशुतोष ने बताया. उस ने सुधा के पीछे आ रही माधुरी को रोशन से टकराते हुए देख लिया था.

माधुरी कुछ कहती, तभी रोशन वहां आ टपका. उस ने आशुतोष के आखिरी शब्दों को सुन लिया था. मुसकरा कर बोला, ”मुझ से जलने वाले मेरी तारीफ इसी तरह करते हैं माधुरीजी. अगर मैं तुम्हारी नजर में अच्छा हूं तो क्या तुम मुझ से दोस्ती करोगी?’’

माधुरी ने झट अपना हाथ रोशन की तरफ बढ़ाया और चहक कर बोली, ”तुम से दोस्ती करूंगी रोशन. सिर्फ दोस्ती ही नहीं, मैं दोस्ती के आगे की हदें भी पार कर के दिखाना चाहती है. मैं सुधा को दिखाना चाहती हूं कि प्यार रोनेतड़पने के लिए नहीं बना है, यह मौजमस्ती करने के लिए बना है.’’

रोशन ने माधुरी की नाजुक कलाई पकड़ कर अपनी ओर खींची और उस की पतली कमर में हाथ डाल कर लरजते स्वर में बोला, ”आओ माधुरी, इस पहली मुलाकात को हसीन और रंगीन बनाते हैं.’’

रोशन माधुरी को ले कर बार की तरफ बढ़ गया. सुधा ठगी सी खड़ी उसे देखती रह गई. आशुतोष ने गहरी सांस भर कर सुधा से कहा, ”तुम्हारी सहेली ने इस शैतान की तरफ हाथ बढ़ा कर अच्छा नहीं किया है सुधा.’’

सुधा ने सिर हिलाया, ”हां आशुतोष! यह लड़की अपनी बरबादी की पहली सीढ़ी पर पांव रख चुकी है. इस का अंजाम ठीक नहीं होगा.’’

एक होटल के कमरे में रोशन सोफे पर बैठा हुआ था. रोशन के सामने शराब की बोतल रखी थी, जिस में से बना कर वह 2 पैग गले से नीचे उतार चुका था. अब वह तीसरा पैग बना रहा था. सोफे के पास ही पलंग बिछा था, जिस पर माधुरी सिर पकड़ कर बैठी हुई थी. वह अपने पूरे होशोहवास में नहीं थी. नशे से उस की पलकें मुंदी हुई थीं. वह बड़बड़ा रही थी, ”यह तुम ने मुझे क्या पिला दिया रोशन, मेरा सिर घूम रहा है.’’

रोशन कुटिलता से मुसकराया, ”व्हिस्की पीने के बाद सिर घूमता ही है जान, कुछ देर सो जाओ…’’

”लेकिन तुम ने तो मुझे बीयर पिलाने की बात की थी…’’

”बीयर बच्चे पीते हैं माधुरी डार्लिंग, तुम तो अब जवान हो गई हो रानी.’’

”रानी!’’ माधुरी ने जबरन अपनी आंखें खोलीं, ”तुम ने मुझ को रानी कहा?’’

”हां डार्लिंग, तुम मेरी रानी हो और मैं तुम्हारा राजा हूं. हम इस समय अपने राजमहल में जश्न मनाने के लिए बैठे हैं.’’

”जश्न! कैसा जश्न?’’ माधुरी लडख़ड़ाती आवाज में इतना ही बोली. उसे जोर का चक्कर आया तो वह पलंग पर लुढ़क गई.

तभी दरवाजे की बेल बजी. रोशन ने तीसरा पैग जल्दी से पी लिया और उठ कर दरवाजा खोल दिया. दरवाजे पर उस के 3 दोस्त खड़े थे. दरवाजा खुलते ही तीनों अंदर आ गए. रोशन दरवाजा लौक कर के सोफे पर आया तो उस ने तीनों को माधुरी की तरफ ललचाई नजरों से देखते हुए पाया. उस का एक दोस्त जयपाल जीभ होंठों पर फिराते हुए बोला, ”गजब की मछली फंसाई है रोशन, इस का जायका तो बहुत स्वादिष्ट होगा.’’

”रोशन नाम है मेरा, मेरी मक्कारी के जाल में ऐसी ही मछलियां खुद आ फंसती हैं.’’ रोशन बेहयाई से हंसते हुए बोला, ”एकदम ताजा माल है, कांटा एक भी नहीं है इस में. मांसल मास बहुत लजीज होगा खाने में.’’ तीनों दोस्त हंसने लगे.

अद्र्धबेहोशी में पड़ी माधुरी फिर बड़बड़ाई, ”कौन हंस रहा है यहां?’’

”मेरे दोस्त हैं जान. 3 हैं, यह जश्न में शामिल होने आए हैं.’’ रोशन दोस्तों की तरफ आंख दबा कर बोला, ”मैं ने इन्हें तुम्हारी जवानी की दावत दी है. लो दोस्तो, पहले मूड बना लो.’’

माधुरी कुछ समझ नहीं पाई. रोशन के दोस्त रोशन के साथ बैठ कर शराब के जाम छलकाने लगे. जब उन के हलक अच्छी तरह तर हो गए, तब उन्होंने पलंग पर बेसुध सी पड़ी माधुरी को घेर लिया और उस के बदन से छेड़छाड़ करने लगे. माधुरी को नशे में भी यह एहसास होने लगा कि उस की आबरू खतरे में है. वह सिर झटक कर आंखें खोलने का प्रयास करती हुई चिल्लाई, ”यह क्या कर रहे हो रोशन..?’’

रोशन बेहयाई से हंसा, ”तुम दोस्ती के आगे की हदें पार करने की बात कर रही थी जान, मेरे दोस्त और मैं तुम्हें उसी हद से आगे ले कर जा रहे हैं.’’

माधुरी के जिस्म से छेड़छाड़ बढ़ती चली गई. वह 4 पुरुष थे और वह नशे में डूबी बेबस नारी. कब तक उन का विरोध करती, कितना चीखपुकार मचाती. उन्होंने उसे बारीबारी से अपनी हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया. उधर सुधा का ग्रैजुएशन कंपलीट हो गया था. अब वह कालेज नहीं जाती थी. घर पर ही रहती थी. माधुरी 2 साल से लापता थी. जिस दिन सुधा उसे अपने दोस्त आशुतोष से मिलवाने के लिए महक रेस्टोरेंट में ले कर गई थी और वहां माधुरी ने रोशन की बाजू थाम ली थी, तभी से वह न घर लौटी थी, न कालेज में ही आई थी. आशुतोष से सुधा को मालूम हुआ था कि उस दिन से रोशन भी कानपुर शहर में नजर नहीं आया था.

फेमिली वालों ने माधुरी के गुम होने की पुलिस में सूचना भी दर्ज करवाई थी, किंतु पुलिस भी उस का पता नहीं निकाल पाई थी. यह मान कर कि माधुरी ने रोशन के साथ भाग कर किसी शहर में शादी कर ली है और वह उसी प्रेमी के साथ प्रेमपूर्वक रह रही है. फेमिली वाले और पुलिस चुप लगा कर बैठ गई थी. हकीकत से सभी अंजान थे. इधर आशुतोष भी अपना ग्रैजुएशन पूरा कर के सरकारी जौब की कोशिश करने लगा था. अभी तक सुधा ने घर में किसी को आशुतोष से प्रेम होने और उसी के साथ सात फेरे लेने का निश्चय करने की बात नहीं बताई थी. वह सही मौके का इंतजार कर रही थी.

एक दिन उसे यह मौका मिल गया. रात को आशुतोष ने उसे मैसेज कर के खुशखबरी दे दी थी कि उसे भारतीय स्टेट बैंक में मैनेजर के पद की नियुक्ति मिल गई है. वह 2 दिन बाद ही ड्यूटी जौइन कर लेगा. दूसरी सुबह नित्य की तरह जब घर के लोग मंदिर में आरती के लिए एकत्र हुए तो पूजाअर्चना के बाद नाश्ते की मेज पर सुधा ने धीरे से दादाजी से कहा, ”एक बात कहूं दादाजी, आप बुरा तो नहीं मानेंगे?’’

”तुम हमारी समझदार बेटी हो, तुम ऐसी कोई बात ही नहीं कहोगी जो हमें बुरी लगे. निस्संकोच कहो, क्या कहना चाहती हो?’’ दादाजी ने स्नेह से कहा.

”दादाजी, मैं 3 साल से एक युवक से दोस्ती निभाती आ रही हूं, युवक अच्छे घर का है और नेकनीयत वाला है. मैं अब उस से शादी करने का आप लोगों से आशीर्वाद लेना चाहती हूं.’’

”यह हमारी बेटी का फैसला है तो हम इंकार नहीं करेंगे. हमारी बेटी किसी गलत जीवनसाथी का चुनाव अपने लिए नहीं करेगी, यह मैं जानता हूं.’’

”लेकिन पिताजी, इस से पूछिए 3 साल से यह उस युवक से दोस्ती करती रही है, हमें यह सस्पेंस पहले क्यों नहीं बताया?’’ सुधा की मम्मी जानकी ने पूछा.

”मम्मी, आशुतोष को मैं किसी अच्छी पोस्ट मिलने का इंतजार कर रही थी, अब उन्हें भारतीय स्टेट बैंक में मैनेजर की नौकरी मिल गई है.’’

”वाह! यह हुई न सोने पर सुहागे वाली बात.’’ दादाजी हंस कर बोले, ”तुम आज ही हमें आशुतोष से मिलवाओ. कल हम तुम्हारा रिश्ता ले कर खुद उस के घर जाएंगे. सुधा ने बहुत दिन इस घर के मंदिर में घंटी बजा ली है.’’ दादा दीनानाथ की बात पर सभी खुल कर हंस पड़े.

उसी दिन सुधा ने आशुतोष को घर बुला कर सभी से मिलवा दिया. आशुतोष सभी को पसंद आना था, क्योंकि यह सुधा की अपनी पंसद थी. दूसरे दिन जानकी और दीनानाथजी ने आ कर आशुतोष के मम्मीपापा से मुलाकात की और उन से सुधा के रिश्ते की बात की. आशुतोष के पापा ने यह रिश्ता स्वीकार कर लिया. फिर शादी की तारीख तय हुई और निश्चित दिन आशुतोष और सुधा की बड़ी धूमधाम से शादी संपन्न हो गई. शादी के 6 माह बाद ही आशुतोष को मुंबई की एसबीआई ब्रांच में भेज दिया गया. वहां उस के रहने के लिए फ्लैट भी दिया गया. आशुतोष जिद कर के सुधा को भी मुंबई ले आया. दिन गुजरते रहे.

आशुतोष सुबह जाता तो शाम को ही घर लौटता था. सुधा बोर हो जाती थी, इसलिए उस ने अपना ‘सहारा’ नाम से एनजीओ खोल लिया और गरीब, असहाय लोगों के लिए हर प्रकार की मदद करने लगी. उस के एनजीओ में कई पढ़ीलिखी युवतियां और बुद्धिजीवी, समाजसेवी लोग भी जुड़ते चले गए. थोड़े समय में ही ‘सहारा’ एनजीओ मुंबई भर में मशहूर हो गया. सहारा एनजीओ मुंबई के मालाबार हिल के क्षेत्र में था. एक दिन एक समाजसेवी विष्णु दत्ता ने सुधा को जानकारी दी कि पीला हाउस के रेडलाइट्स एरिया में कुछ नाबालिग लड़कियों से जबरन धंधा करवाया जा रहा है. जहां ये नाबालिग लड़कियां लाई गई हैं, वह रेशमा बाई का कोठा है.

सुधा यह सूचना पाते ही पीला हाउस के पुलिस स्टेशन में पहुंच गई. वहां का इंचार्ज एकनाथ कांबले था. सुधा ने उस से मिल कर अपना परिचय देते हुए रेशमा बाई के कोठे की सच्चाई बताई. इंचार्ज एकनाथ कांबले ने उस क्षेत्र के डीसीपी से रेशमा बाई के कोठे की हकीकत बताते हुए वहां रेड डालने की इजाजत मांगी तो उन्हें इजाजत मिल गई. आधी रात को इंचार्ज एकनाथ कांबले ने 15 महिला और पुरुष सिपाहियों के साथ रेशमा बाई के कोठे पर छापा मारा. उस वक्त सुधा और समाजसेवी विष्णु दत्ता उस पुलिस दल के साथ थे. कोठे पर पुलिस का छापा पड़ा तो कोठे पर बने छोटेछोटे केबिनों से देहबालाएं और उन के साथ हमबिस्तरी कर रहे पुरुष निर्वस्त्र ही निकल कर भागे. पुलिस ने उन्हें दबोच लिया.

कोठे की संचालिका रेशमा बाई और 2 दलाल भी इन के हाथ आ गए. कोठे की तलाशी ली गई तो एक बंद कोठरी से, जिस पर ताला लगा कर रखा गया था, 3 नाबालिग लड़कियां और एक युवती को आजाद किया गया. जो युवती उस कोठरी में से मिली, उस पर नजर पड़ते ही सुधा बुरी तरह चौंक पड़ी. यह कोई और नहीं माधुरी थी, जो 3 साल पहले कानपुर से लापता हो गई थी. सुधा को पहचान कर माधुरी उस के गले से लिपट गई और फूटफूट कर रोने लगी. सुधा की भी आंखें भर आईं. वह माधुरी की पीठ सहलाते हुए बोली, ”तुझे मैं ने कहांकहां तलाश नहीं किया माधुरी. तू यहां कोठे पर कैसे पहुंच गई?’’

”सब बताऊंगी मैं, पहले मुझे सुरक्षित इस नरक से मुक्ति दिलवा दो सुधा. यहां यह रेशमा नाम की डायन मुझे मांस का लोथड़ा समझ कर रोज जिस्म के भूखे कुत्तों के आगे फेंकती है. ये हवस के दङ्क्षरदे मुझे पूरी बात भभोड़ते हैं, मेरे जिस्म को नोंचते हैं…’’

”अब तुम्हें कोई छुएगा भी नहीं. तुम पुलिस और मेरी ‘सहारा’ एनजीओ के संरक्षण में हो. आओ, थाने चल कर बात करेंगे.’’ पुलिस दल सभी को साथ ले कर पीला हाउस पुलिस स्टेशन में लौट आया.

सुधा भी माधुरी को साथ ले कर पुलिस स्टेशन आ गई. यहां माधुरी की कोठे से बरामदगी के कागजात पूरे करा कर सुधा माधुरी को साथ ले कर अपने एनजीओ वापस लौट आई. सुबह होने वाली थी. सुधा ने आशुतोष को फोन कर के एनजीओ बुला लिया. नाश्ता लाने के लिए भी उस ने पति आशुतोष को कह दिया था. आशुतोष एनजीओ नाश्ता ले कर 7 बजे पहुंचा, तब तक सुधा ने माधुरी को फ्रेश करवा कर नए कपड़े पहनवा दिए थे. आशुतोष रास्ते भर हैरान था कि आज सुबहसुबह सुधा ने उसे नाश्ता ले कर एनजीओ क्यों बुलाया है. जब उस ने सुधा के औफिस में प्रवेश किया तो वहां बैठी माधुरी को देख कर वह बहुत हैरान हो गया.

”यह माधुरी मुंबई कब आ गई सुधा, तुम ने तो मुझे फोन पर बताया ही नहीं कुछ.’’ आशुतोष शिकायती लहजे में बोला.

”यह मुंबई कैसे पहुंची, मैं भी जानना चाहती हूं आशुतोष. फिलहाल तो यह जान लो मैं ने रात को इसे पीला हाउस के रेड लाइट्स एरिया से छुड़वाया है. माधुरी रेशमा बाई के कोठे में पुलिस छापा डालने के दौरान मुझे मिली है.’’

”ओह!’’ आशुतोष ने गहरी सांस ली, ”इसे बरबादी के नरक में उसी कमीने रोशन ने झोंका होगा.’’

”हां आशुतोषजी!’’ माधुरी ने भर्राए स्वर में कहा, ”गलती मेरी थी, मुझे सच्चे प्यार की परख नहीं थी. मैं प्यार को जिस्म की हसरतें पूरी करने का माध्यम मान कर रोशन के हाथों लुटी. उस दिन महक रेस्टोरेंट में मैं ने रोशन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा कर बहुत बड़ी भूल की थी. वह मुझे बार में ले गया और शराब पिलाई, फिर मुझे किसी होटल में ले कर गया, वहां पर रोशन ने अपने 3 दोस्तों के साथ मेरी अस्मत से खिलवाड़ किया. उस ने मेरी अश्लील फिल्म बना ली और डराधमका कर मुझे दोस्तों के आगे परोसता रहा.

”कई दिनों तक वह मेरे जिस्म की कमाई खाता रहा, फिर मुझे वह मुंबई में ले आया. यहां उस ने रेशमा बाई के कोठे पर मुझे मोटी कीमत में बेच डाला और उस गलीज धंधे में मुझे धकेल कर वह भाग गया. यदि रात सुधा रेशमा बाई के कोठे पर रेड ने डलवाती तो मैं उसी नरक में सड़सड़ कर किसी दिन मौत के मुंह में समा जाती.’’ माधुरी अपनी बात खत्म करके रोने लगी.

”मैं तुम से हमेशा कहती थी माधुरी, प्यार पूजा और इबादत का ही दूसरा नाम है. प्यार के लिए सच्चे मन से जीया जाता है.

आज के दौरान प्रेम पर वासना हावी हो गई है. आज प्रेमी प्यार की आड़ ले कर प्रेमिका के जिस्म को पाने की फिराक में लगा रहता है, जो लड़कियां प्रेमी के झांसे में आ जाती हैं, एक दिन शरम और अपमान में पछताती हैं. कुछ आत्महत्या कर लेती है, कुछ देह के धंधे में उतर कर समाज को गंदा करती रहती हैं.

”प्यार को सच्चे मन से पूजने वाले प्रेमी अब बहुत कम मिलेंगे. मुझे देखो माधुरी, मैं ने अपने प्यार आशुतोष को ठोंकबजा कर परखा था, यह मुझे सच्चा प्यार करते थे. आज परिवार की रजामंदी से हमारा विवाह हुआ और हम सुखी गृहस्थ जीवन जी रहे हैं.

”आशुतोष यहां मुंबई में एसबीआई बैंक में मैनेजर हैं. हमारा यहां मालाबार हिल में फ्लैट है. मैं यह ‘सहारा’ एनजीओ चलाती हूं. आज से तुम मेरे इस एनजीओ में असहाय लोगों की सेवा का भाव ले कर जिओगी. यूं समझो, आज से तुम्हें नया जन्म मिला है.’’

सुधा ने माधुरी के कंधे पर प्यार से अपना हाथ रखा तो माधुरी सुधा के गले से लिपट गई. उस की आंखों से अभी भी आंसू बह रहे थे. आशुतोष के होंठों पर मीठी मुसकान थी. Hindi Best Stories

 

 

Hindi Social Stories : शहरों की पहचान हैं ये बदनाम इलाके

Hindi Social Stories : एक समय था, जब देह व्यापार के लिए बड़े शहरों में एक खास मोहल्ला निर्धारित होता था. लेकिन जैसेजैसे तकनीकी का विकास हुआ तो इस धंधे के तरीके भी हाईटैक हो गए. धंधा कोठों से निकल कर ब्यूटी पार्लर, मसाज सेंटर, होटलों तक पहुंच गया. भले ही कोठों की तवायफों में अब पहले जैसी नजाकत और अदाएं नहीं हैं. लेकिन वहां कुछ तो खास है, जो लोग अभी भी वहां जाते हैं. पेश है कुछ बड़े शहरों के कोठों के हाल…

देह व्यापार के तौरतरीके कितने हाईटेक हो चले हैं, यह बात अब किसी सबूत की मोहताज नहीं रह गई है. दुनिया के सब से बड़े और पुराने इस कारोबार की खूबी है कि यह वक्त के हिसाब से खुद को बदलता रहा है. एक वक्त था जब देह व्यापार के लिए हर शहर में एक खास मोहल्ला हुआ करता था, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते अब पूरे शहर में ही देह व्यापार होने लगा है. यह भी ग्राहकों की मांग की ही देन कहा जाएगा. ब्यूटी पार्लर और मसाज पार्लर अब देह व्यापार के बड़े केंद्र बन चुके हैं. छोटी से ले कर नामी सितारा होटलों और रिसौर्ट्स तक में देह बेची और खरीदी जाती है.

लेकिन कुछ तो बात है बदनाम इलाकों में, जो इन की पहचान पूरी तरह धुंधली नहीं पड़ रही. कहा जा सकता है कि मंडी मंडी ही होती है और फुटकर दुकान फुटकर ही होती है, जो शहर को कोई पहचान नहीं देती. देश के चुनिंदा शहरों के कुछ इलाके आज भी पूरी शिद्दत से देह व्यापार के लिए जानेपहचाने जाते हैं. इन में से कई खत्म हो चुके हैं और कई खत्म किए जा रहे हैं, जो हर्ज की बात नहीं, बशर्ते सैक्स वर्कर्स के विस्थापन को गंभीरता से लिया जाए तो.

कानून और धर्म तो सैक्स वर्कर्स के साथ कभी नहीं रहे और वह समाज जो इन का उपभोग करता है, वह भी इन्हें तिरस्कृत करता रहा है.आइए देखें कुछ देह मंडियों के ताजा हाल, जो बताते हैं कि अब तवायफों में भी पहले सी नजाकत और अदाएं नहीं रह गई हैं जो अब फुलटाइम या पार्टटाइम कालगर्ल्स में तब्दील हो चुकी हैं. कोलकाता का सोनागाछी सोनागाछी यानी सोने का पेड़ जो न केवल देश और एशिया बल्कि दुनिया के सब से बड़े रेडलाइट इलाके का नाम है, कोलकाता में है. इस बदनाम बाजार में कालगर्ल्स की तादाद 10 हजार के लगभग है जिन की बदहाली का रोना मीडिया और समाजसेवियों का पार्टटाइम बिजनैस, जौब या शौक कुछ भी कह लें, है.

दिक्कत तो यह है कि यहां के लिए कोई कुछ कर भी नहीं सकता और जो कर सकते हैं, वे इस इलाके में झांकते तक नहीं, लेकिन वह पूरी खबर यहां की रखते हैं. लौकडाउन के दौरान सूनी पड़ी रही जिस्मफरोशी की इस मंडी में थोड़ी हलचल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिली थी, जब कुछ मीडियाकर्मियों ने यहां की सैक्स वर्कर्स के इंटरव्यू हमेशा की तरह लिए थे. हमेशा की ही तरह नतीजा कुछ नहीं निकला, जिस की उम्मीद यहां की सैक्स वर्कर करती भी नहीं. लेकिन लौकडाउन के दौरान जो मुसीबतें इन लोगों ने झेलीं, उस से इन्हें भी एहसास हो गया कि सिवाय ग्राहक के हमारा कोई और पालनहार नहीं.

मुसीबत के उन दिनों में कई सैक्स वर्कर्स को उन के नियमित ग्राहकों ने नेट बैंकिंग के जरिए पैसा भेजा था. उत्तरी कोलकाता में बसी इस देह मंडी का इतिहास कुछ भी हो, पर वर्तमान कभी अच्छा नहीं रहा. खासतौर से नेपाल, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर राज्यों सहित ओडिशा व झारखंड से बड़ी तादाद में नाबालिग लड़कियां यहां जबरन देह व्यापार के लिए लाई जाती हैं. तंग संकरी गलियों के छोटेछोटे बदबूदार मकानों और कमरों में रहने को मजबूर सोनागाछी की सैक्स वर्कर्स की आंखों में कोई बड़ेबड़े सपने नहीं होते. उन्हें बस एक बार की सर्विस के एवज में मिले औसतन 2 सौ रुपए ही बहुत लगते हैं.

साल भर में कोई एक हजार नई लड़कियां इस बाजार में आती और लाई जाती हैं. इन में से कई दूसरे शहरों का रुख कर लेती हैं तो कुछ पैसों की जरूरत के मुताबिक शाम ढलने के बाद पार्टटाइम धंधे के लिए आतीजाती हैं. हां, कोई 6 हजार जरूर स्थाई रूप से यहां बस गई हैं. उन के घर भी हैं, पति भी है और बच्चे भी हैं. नहीं है तो बस आगे की जिंदगी की गारंटी, जो सोनागाछी नाम पड़ने के बाद से ही दलालों की मुट्ठी में कैद है. जरूरतमंद और शौकीन लोगों की चहलपहल से आबाद इस इलाके में दरअसल में एक नर्क सा बसता है, जिस में सुधार की बाबत कुछ नहीं हो रहा.

कभीकभार स्वास्थ कैंप लग जाते हैं, कंडोम बंट जाते हैं और जिन के पास राशन कार्ड हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाता है.  पर यह नाकाफी है क्योंकि यहां जिस्म बेचना मुनाफे का सौदा नहीं है. इस से इन का पेट भर भरता है, गाड़ी और बंगले नहीं आ जाते.  फिर हालात और वक्त की मारी औरतें कहां जाएं. इस सवाल का जबाब शायद ही कोई समाजशास्त्री या विद्वान दे पाएगा और देगा भी तो यही कि ये यहीं ठीक हैं, यदि कहीं और धंधा करेंगी तो ज्यादा शोषण का शिकार होंगी. घुटन भरी जिंदगी जी रही इन देहजीवाओं को ज्यादा सहूलियतें देने का मतलब होगा यहां की पहचान खत्म करना. सोनागाछी की इस देहमंडी के बाद कोलकाता शहर रसगुल्ले के लिए मशहूर है.

मुंबई का कमाठीपुरा सोनागाछी में बहुत कुछ है पर सब कुछ नहीं है. यह सब कुछ मुंबई के रेडलाइट इलाके कमाठीपुरा में मिलता है. साउथ का सांवला माल भी, कश्मीरी भी और पंजाबी व उत्तराखंड सहित देश भर की लड़कियों का मिलना ग्राहकों को कमाठीपुरा खींच लाता है. मुंबई फिल्म वालों की भी है, अंडरवर्ल्ड व माफिया की भी है. अमीरों की भी है और गरीबों की भी है. गलत नहीं कहा जाता कि पैसा कमाने का जज्बा और जूनून हो तो मुंबई आप को निराश नहीं करेगी. अंगरेजों ने कमाठीपुरा, जिस का नाम पहले लाल बाजार हुआ करता था, विकसित तो अपने सैनिकों की हिफाजत और सहूलियत के लिए किया था, पर देखते ही देखते यह रेडलाइट इलाके में तब्दील हो गया.

देशदुनिया की लड़कियां कमाठीपुरा की शान और जान हैं, जिन्हें मुंबई की चकाचौंध से कोई वास्ता नहीं. चालों में रहने वाली ये कालगर्ल्स बिंदास हैं पर शोषित भी कम नहीं हैं. वेश्याओं की जिंदगी पर जितनी भी फिल्में अब तक बनी हैं, उन में कहीं न कहीं कमाठीपुरा जरूर दिखा है. जो लोग मुंबई घूमने जाते हैं उन की भी उत्सुकता एक बार कमाठीपुरा देख लेने की होती है. लेकिन यह हर कोई नहीं समझ पाता कि हाथ में सिगरेट और दारू का ग्लास पकड़ कर नाचने और झूमने की एक्टिंग करती कालगर्ल्स की हालत बहुत ज्यादा अच्छी नहीं. अपनी चमड़ी बेच कर जो कमाई ये करती हैं, उस का आधे से भी ज्यादा हिस्सा पुलिस वालों, दलालों, गुंडों और मवालियों की जेब में चला जाता है.

बाबजूद तमाम सचों के बड़ा सच यह है कि यहां की दुश्वार भरी जिंदगी जीने वाली कालगर्ल्स इस धंधे के संविधान में समयसमय पर जरूरी संशोधन करती रही हैं, मसलन वह कमाठीपुरा ही है, जहां की सैक्स वर्कर्स फैशन सब से पहले अपनाती हैं. सत्तर के दशक में यहां मीना कुमारी मधुबाला और हेमा मालिनी जैसा दिख कर ग्राहकों को लुभाया जाता था तो अब करीना कपूर, आलिया भट्ट और विद्या बालन जैसी स्टाइल चलन में हैं. कोई भी नया फैशन आम घरों में दाखिल होने से पहले कमाठीपुरा की खिड़कियों और दरवाजों से झांकता दिख चुका होता है.

साल 2000 की शुरुआत में जैसे ही डिजिटल युग का आगाज हुआ तो यह मंडी सब से पहले डिजिटल हुई. दूसरे राज्यों की सैक्स वर्कर्स जब नोकिया के बटन वाले फोन को चलाना सीख रही थीं, तब ये सैमसंग और दूसरी कंपनियों के टच स्क्रीन मोबाइल फोन औपरेट करने लगी थीं. हालांकि इस से उन की दुर्दशा नहीं सुधरी, पर थोड़ा फायदा धंधे में जरूर इन्हें हुआ. जबरिया देह धंधे में लाई जाने वाली लड़कियों का यह ट्रेनिंग सेंटर सरीखा है. कम उम्र में दलाल और रिटायर्ड सैक्स वर्कर्स इन्हें धंधे के सारे गुर सिखा देती हैं, जिन की कोशिश इन के जरिए ज्यादा से ज्यादा पैसे बना लेने की होती है.

कमाठीपुरा में सैक्स वर्कर्स की तादाद 4 हजार के लगभग ही आंकी जाती है लेकिन यह बदनाम इतना है कि सुधार और कल्याण के नाम पर मशहूर रामकथा वाचक मोरारी बापू भी यहां आ चुके हैं. अप्रैल 2018 में उन्होंने कमाठीपुरा की कोई 60 कालगर्ल्स को रामकथा सुनने अयोध्या बुलाया था, जिस के लिए न केवल आनेजाने का किराया भी उन्होंने दिया था बल्कि रामनगरी में खानेपीने, ठहरने और घूमनेफिरने का इंतजाम भी किया था. बहुत गौर से देखें तो कमाठीपुरा का नाम भी बिकता है. संजय लीला भंसाली निर्देशित और आलिया भट्ट अभिनीत फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी के नाम का विरोध भी यहां की सैक्स वर्कर्स ने किया था. और अब जल्द ही प्रदर्शित होने जा रही वेब सीरीज कमाठीपुरा के नाम का विरोध भी खूब हुआ.

इस में इस इलाके में रहने वाले लोगों ने भी सैक्स वर्कर्स का साथ दिया, लेकिन क्या यह हल है और क्या इस से गुंडेमवालियों जैसी मुसीबतों से इन्हें छुटकारा मिल जाएगा. इस सवाल का जबाब हां में तो कतई नहीं मिलता दिखता. जब तक देह है तब तक कमाठीपुरा कमाठीपुरा ही रहेगा, जो हर शहर में अलग नाम से होता है जैसे कि देश की राजधानी दिल्ली में जीबी रोड है. दिल्ली का जीबी रोड शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास…

रौनकें जितनी यहां हैं औरतों के दम से हैं. मशहूर शायर मुनीर नियाजी ने यह शेर किस मूड में कहा होगा, यह तो वही जानें लेकिन दिल्ली की जीबी रोड का आबाद रहना बताता है कि दिल्ली की तमाम रौनकों में से एक रौनक यह बदनाम इलाका भी है. मुगल काल में यहां 5 कोठे यानी रेडलाइट इलाके हुआ करते थे, जिन्हें अंगरेजों ने मिला कर एक कर दिया था और नाम दिया था गारस्टिन बास्टिन रोड, जिसे संक्षेप में जीबी रोड कहा जाने लगा. दिल्ली आने वाले लगभग सभी लोगों ने जीबी रोड नाम सुना होता है और उन के दिमाग में इस की एक अलग तसवीर भी होती है.

जान कर कोई भी आसानी से यकीन नहीं कर सकता कि जीबी रोड हार्डवेयर और आटोमोबाइल का एक बड़ा बाजार भी है, जो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीकी अजमेरी गेट से ले कर लाहौरी गेट तक फैला हुआ है. दिन भर दुकानों पर हार्डवेयर और आटोमोबाइल का व्यापार होता है, लेकिन रात होते ही सब कुछ ठीक वैसे ही बदल जाता है जैसे ठीक से न देख पाने के चलते  परदे पर मंजर बदल जाया करते हैं. इस इलाके की 25 इमारतों में कोई एक हजार सैक्स वर्कर रहती हैं, जिन से शाम होते ही यह इलाका गुलजार हो उठता है. यह शायद देश का पहला रेडलाइट इलाका है, जहां लौकडाउन और उस के भी पहले नोटबंदी तक ग्राहक कतार में लगे नजर आते थे.

अब बात पहले सी नहीं रही खासतौर से लौकडाउन के बाद देह के शौकीन लोग यहां आने से कतराने लगे हैं. जिन्हें फरमाइश और खासा पैसा देने के बाद मुजरा भी देखने को मिल जाता था. देश के दूसरे बदनाम इलाकों की तरह जीबी रोड के कोठों पर लड़कियां बहुत बड़ी तादाद में जबरिया नहीं लाई जातीं. कहने का मतलब यह नहीं कि यहां शौक के चलते देह व्यापार होता है बल्कि यहां भी हालात की सताई औरतें सजधज कर होंठों पर फरजी मुसकराहट लिए ग्राहकों को इशारे से बुलाती नजर आती हैं. चूंकि यह एक तरह से परंपरागत इलाका है इसलिए कालगर्ल का रेट भी यहां के मर्द तय करते हैं. जैसे ही ग्राहक 2 दुकानों के बीच बनी सीढि़यों से हो कर ऊपर पहुंचता है तो उस का पहला सामना खुद को खूंखार दिखाने की कोशिश कर रहे दलाल से होता है, जो उसे कालगर्ल दिखाता है. वह ग्राहक को उस का रेट बताता है.

फुलनाइट चार्ज यहां के मेन्यू कार्ड का सब से ज्यादा दाम वाला आइटम है, जिस की शुरुआत ही 5 हजार से ऊपर होती है फिर इस से रेट का बढ़ना लड़की की उम्र और जिस्म के भूगोल पर निर्भर करता है. मुगलों के जमाने में यहां की तवायफों की बड़ी इज्जत हुआ करती थी. हरेक ब्रांडेड तवायफ का तयशुदा दाम हुआ करता था, जिस में आज की तरह मोलभाव नहीं होता था. यह कोठों और कोठेवालियों की तौहीन मानी जाती थी. पर अब सब गुजरे कल की बातें हो चली हैं. कभीकभार ग्राहकों और दलालों के बीच का झगड़ा बढ़ जाता है तो पुलिस की सेवाएं लेनी पड़ती हैं जो सभी को मंहगी पड़ती है खासतौर से ग्राहक को. अगर वह दिल्ली के बाहर का हो तो बेचारा जेब से निचुड़ जाता है.

वैसे भी पुलिस के छापे पड़ना यहां आम बात है, क्योंकि हर किसी की नजर यहां की बेशकीमती जमीनों पर है जहां रह रहे नगीनों को हटाने की साजिश आए दिन रची जाती है. पुलिसिया छापों में जब नाबालिग पकड़ाती हैं तो खूब सनसनी मचती है कि गौर से देखिए 12 साल की इस मासूम को, जिसे जिस्मफरोशों ने देह व्यापार की दलदल में धकेल दिया… और यह मासूम… यह  तो आगरा से बहलाफुसला कर लाई गई थी. इसे अच्छी नौकरी और बेहतर जिंदगी देने का वादा दिया गया था, लेकिन जब आंखें खुलीं तो स्कूल जाने और खिलौनों से खेलने की उम्र वाली इस मासूम के सामने जिस्म के भूखे भेढि़ए जीभ लपलपा रहे थे.

तमाम कोशिशों के बाद भी सैक्स वर्कर्स को यहां से खदेड़ा नहीं जा सका. साल 1965 में इसी मकसद से जीबी रोड का नाम श्रद्धानंद मार्ग रख दिया गया था, जिस का कोई फर्क नहीं पड़ा. अब फिर जीबी रोड की रौनक वापस लौटने लगी है. देश भर के छोटेमोटे व्यापारी जो दिल्ली आते हैं, वे पहाड़गंज के बजाय जीबी रोड की होटलों में ठहरने को तवज्जो देते हैं क्योंकि यह नजदीकी उन्हें सस्ती पड़ती है. ये लोग मुनीर नियाजी के कलाम तो दूर की बात है, उन के नाम से भी वाकिफ नहीं होते पर यह बेहतर जानते हैं कि रौनकें तो औरत से ही होती हैं फिर वे चाहे जैसी भी हो. वाराणसी का शिवदासपुर

कभी तवायफों के लिए मशहूर रहे वाराणसी के रेडलाइट इलाके शिवदासपुर का मुजरा सुनने और नृत्य देखने देश भर के शौकीन लोग आया करते थे, जो काशी विश्वनाथ के दर्शन भी हाथोंहाथ कर लेते थे. इसी मंदिर से सटा इलाका था दाल मंडी, जो देहव्यापार का बड़ा अड्डा था. 70 के दशक में तवायफों को शिवदासपुर शिफ्ट कर दिया गया था. परंपरागत वेश्यावृत्ति के लिए पहचाने जाने वाले वाराणसी शहर की फिजा अब बदल रही है. अब शरीफ लोग चाहते हैं कि जिस्मफरोशी का यह कलंकित धंधा बंद हो. वाराणसी की वेश्याओं ने बहुत उतारचढ़ाव देखे हैं.

कई बार उन का विस्थापन और पुनर्वास हुआ है लेकिन हर बार उन की संख्या घटी है. अब शिवदासपुर के 40-45 घरों से ही यह धंधा होता है जिस में सैक्स वर्कर्स की तादाद पूरी एक हजार भी नहीं. अब जो बची हैं उन में से ज्यादातर पीढ़ी दर पीढ़ी यह धंधा करती रही हैं.  उजड़ी नवाबी और जमींदारी की तरह नई पीढ़ी की तवायफों के पास भी अपने वैभवशाली इतिहास के संस्मरण भर बचे हैं.इस रिहायशी इलाके में हर तरह के लोग रहते हैं. कुछ घरों में तो गृहस्थ घर होने की तख्ती भी टंगी है जिस से ग्राहक गलतफहमी में पड़ कर देर रात उन का  दरवाजा न खटखटाएं. फिर भी कलह और कहासुनी रोज रोज की बात है.

3 साल पहले यहां के लोगों ने एक बड़ा धरना दिया था कि वेश्याओं को यहां से हटाओ. अपनी जगह इन के अपने तर्क सटीक थे, पर जबाब में तवायफों ने भी कई दलीलें दी थीं जिन की कोई काट नहीं. वाराणसी की तवायफें सहज ही किसी पर भरोसा नहीं करतीं. हालांकि वे शाम से ही सजधज कर बैठ जाती हैं और उन में से कइयों के परिवारजन नीचे ग्राहक तलाश रहे होते हैं. नरेंद्र मोदी जब यहां से सांसद बने थे तो इन तवायफों ने भी उन से ज्यादा उम्मीदें पाल लीं थीं. कई घरों में मोदी की तसवीर भी लटकती नजर आती है. इन तवायफों को अब धीरेधीरे समझ आ रहा है कि कोई राजनैतिक दल इन का भला नहीं कर सकता, इसलिए वे अब किसी पचड़े में नहीं पड़तीं.

अपने बच्चों के लिए शिवदासपुर में स्कूल की मांग सालों से सैक्स वर्कर कर रही हैं, लेकिन उन की कहीं सुनवाई नहीं होती. आए दिन परेशान करने की गरज से वेश्यावृत्ति का मुकदमा दायर कर दिया जाता है जिस में खासा वक्त और पैसा तवायफों का जाया होता है.  प्रयागराज का मीरगंज वाराणसी के शिवदासपुर की तरह ही प्रयागराज का मीरगंज भी बदहाल है, जहां देह व्यापार कोई 200 साल से हो रहा है. लेकिन अब यहां कहने भर को ही कालगर्ल्स बची हैं. साल 2016 में एक बड़ा छापा मीरगंज में पड़ा था, जिस में लगभग 200 सैक्स वर्कर्स को यहांवहां के आश्रमों में भेज दिया गया था. इन में से कुछ ही वापस आ पाईं, बाकी दूसरे शहरों में जा कर धंधा करने लगीं.

शहर के बीचोबीच के इस पौश इलाके के चौक की संकरी गलियों में लड़कियां सजसंवर कर बैठ जाती हैं और आतेजाते लोगों को आ जा राजा मजे ले ले. जैसे जुमलों से बुलाती नजर आ जाती हैं. मीरगंज भी पहले तवायफों और मुजरों के लिए मशहूर था लेकिन धीरेधीरे यह भी पूर्वी उत्तर प्रदेश का देहव्यापार का बड़ा अड्डा बन गया.  ऐसा माना जाता है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जन्म मीरगंज में हुआ था. इस पर आए दिन बहस और विवाद होते रहे हैं जिस से सैक्स वर्कर्स को कोई लेनादेना नहीं होता. वे अब अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहीं हैं, जो हालात देख लगता नहीं कि ज्यादा चल पाएगी.

मीरगंज की सैक्स वर्कर्स की दशा श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित 1983 में प्रदर्शित फिल्म ‘मंडी’ जैसी होती जा रही है, जिस में वेश्याओं को खदेड़ने नेता, अधिकारी और रियल एस्टेट के कारोबारी साजिश रच कर उन्हें पुनर्वास के नाम पर यहां से वहां भगाते रहते हैं. लेकिन अफसोस की बात यह है कि मीरगंज में तो ऐसा भी नहीं हो रहा. पुणे का बुधवार पैठ दिल्ली के जीबी रोड की तरह ही बसाहट है पुणे के बुधवार पैठ इलाके की, जहां नीचे ज्ञान बांटती किताबों का बाजार है और ऊपर हैं कालगर्ल्स के मकान, जिन्हें कोठे कहा जाता है.  इस इलाके में इलेक्ट्रौनिक्स का कारोबार भी बड़े पैमाने पर होता है.

बुधवार पैठ को सोनागाछी के बाद देश का दूसरा बड़ा रेडलाइट इलाका माना जाता है, जहां लगभग 3 हजार स्थाई और 4  हजार अस्थाई कालगर्ल्स अपना और अपनों का पेट देह बेच कर पालती हैं. दिलचस्प बात यह कि यहां नेपाली लड़कियों की भरमार है जो साल 2 साल में एकाध बार घर का चक्कर लगा आती हैं और साथ में एक नई लड़की लटका लाती हैं. यह दृश्य देख कर सहज ही गरीबी नाम के अभिशाप को समझा जा सकता है. बुधवार पैठ का नजारा ठीक वैसा ही रहता है जैसा कि हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता रहा है. तंग गलियों की भीड़भाड़ में हाथ में गजरा लपेटे ग्राहक, उन्हें खोजते दलाल, पान की दुकानों पर होता मोलभाव, नशे में झूमते लोग, ऊपर की मंजिल से सैक्सी इशारे कर रही कालगर्ल्स और गानों की तेज आवाज लेकिन असल तसवीर हर किसी को नहीं दिखती कि यह रौनक चंद घंटों की होती है.

सुबह होते ही इक्कादुक्का लोग नजर आते हैं. दोपहर बाद सेक्स वर्कर्स सो कर उठती हैं रोजमर्रा के काम निबटाती हैं और फिर कभी न खत्म होने वाले धंधे में अपना रोल निभाने तैयार हो जाती हैं. बुधवार पैठ की सैक्स वर्कर्स पर मुंबई का असर जल्द होता है शायद यही वजह थी कि लौकडाउन के दौरान उन्हें भी बाहर से मदद मिलती रही थी. कइयों ने सेठ साहूकारों और व्यापारियों से कर्ज भी लिया था. आम दिनों में सैक्स वर्कर्स की औसत आमदनी 25 हजार रुपए महीना होती है, लेकिन इस में भी खर्च मुश्किल से चलता है. अधिकांश लड़कियों को आधा पैसा घर भेजना पड़ता है. खुद वे भी बहुत अच्छी स्थिति में नहीं रहतीं. कई तो पुराने जमाने के लकड़ी के बने मकानों में रह रही हैं. इन के पास अपनी पहचान साबित करने के जरूरी दस्तावेज भी नहीं हैं.

साल 2008 में माइक्रोसाफ्ट के मुखिया बिल गेट्स जब बुधवार पैठ आए थे और कोई एक घंटे सैक्स वर्कर्स से बात की थी, तब खासा हल्ला देशदुनिया में मचा था. बिल गेट्स ने 200 अरब डालर की भारीभरकम मदद का ऐलान किया था. इस पैसे का क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं मालूम. हां, यह जरूर साफसाफ दिखता है कि बुधवार पैठ में कोई बदलाव नहीं आया है. यहां की सैक्स वर्कर्स अंधेरे बदबूदार सीलन भरे कमरों में ही रहती हैं. नागपुर का गंगाजमुना बीती 26 अगस्त को नागपुर में उस वक्त सन्न्नाटा सा खिंच गया था, जब प्रशासन ने यह फरमान जारी कर दिया था कि आगामी 2 महीने तक शहर के बदनाम इलाके गंगाजमुना में देह व्यापार प्रतिबंधित रहेगा.

ऐसा स्थानीय नागरिकों की शिकायतों पर किया गया था, जिन के मुताबिक यहां की सैक्स वर्कर्स आए दिन राह चलते लोगों को भद्दे इशारे करती हैं और इस इलाके में अपराध अब आम हो चले हैं. अलावा इस के नाबालिग लड़कियों से भी देह व्यापार कराया जाता है. ये शिकायतें पूरी तरह गलत नहीं हैं क्योंकि यह नागपुर के इस बदनाम इलाके का उजागर सच है.  लेकिन एक कड़वा सच इस सवाल का जबाब न मिलना भी है कि कोई एक हजार सैक्स वर्कर्स अब कैसे पेट भरेंगी क्योंकि प्रशासन ने उन के लिए कोई वैकल्पिक जगह नहीं सुझाई है. अब मुमकिन है ये आसपास के शहरों में अस्थाई पलायन कर जाएं पर यह समस्या का हल नहीं है.

विदर्भ में देह व्यापार का इतिहास काफी पुराना है जिस का सीधा संबंध गरीबी और भुखमरी से है, जो अभी भी ज्यों की त्यों हैं. नागपुर जंक्शन पूरे देश को जोड़ता है, जहां चारों दिशाओं से लोग कामकाज की तलाश में आते हैं. जिन को काम नहीं मिलता, उन की औरतें धंधा करने लगती हैं जिस में गंगाजमुना उन का बड़ा मददगार होता है. यहां देह दूसरे शहरों के मुकाबले सस्ती है और माहौल भी परंपरागत बाजारों जैसा है. शरमाए सकुचाए पहली बार आए ग्राहकों का हाथ पकड़ कर सैक्स वर्कर्स अपने कमरों में ले जाती हैं और उस की पूरी जेब खाली कर देती हैं. तंग संकरी गलियां गंगाजमुना की भी पहचान हैं जहां के अधिकांश मकान नीचे ही हैं. बीते कुछ सालों में नागपुर में तेजी से बार खुले तो मुंबई के बारों की तरह यहां के बारों में भी जवान लड़कियां कमर, छाती और कूल्हे मटका कर बारबाला की नौकरी करने लगीं और देह व्यापार के नए नए अड्डे भी विकसित होने लगे. स्थानीय लोगों ने इन लड़कियों को वारांगनाएं शब्द दे दिया है.

अब आलम यह है कि इन्हें मुश्किल से भी रहने के लिए किराए पर मकान नहीं मिलते. दूसरे दलालों ने धंधा बढ़ता देख अपना नेटवर्क बढ़ाना शुरू कर दिया, जिस से नागपुर बदनाम तो हुआ पर इस से  सैक्स वर्कर्स को एक नया ठिकाना भी मिला, जिसे प्रशासन साजिश के तहत खत्म कर रहा है. 2 महीने बाद गंगाजमुना की तसवीर कुछ और होगी जो सैक्स वर्कर्स दूसरे शहरों का रुख कर रही हैं, वे सभी वापस नहीं लौटने वाली. लेकिन यह तय है कि तब तक और नई लड़कियां यहां सप्लाई होंगी यानी परेशानी और समस्या बजाय कम होने के और बढ़ेगी. बदल रही है पहचान सारे देश के बदनाम इलाकों की इमारतें इस पेशे की तरह जर्जर हालत में हैं, जिन के पूरी तरह टूटने का इंतजार भूमाफिया के अलावा स्थानीय लोग भी कर रहे हैं, जो सीधे इन से टकराने की हिम्मत नहीं जुटा पाते.

मेरठ का कबाड़ी बाजार हो, ग्वालियर का रेशम बाड़ हो या फिर इंदौर का बौंबे बाजार, इन सभी की पहचान धीरेधीरे खत्म हो रही है. इन बाजारों में अब कहने भर को कालगर्ल्स बची हैं. ग्राहकों को भी यहां आना महंगा पड़ने लगा है क्योंकि सैक्स वर्कर अब हर कहीं मिल जाती हैं. कल तक रिक्शे, तांगे और आटो वाले जो इन के दलाल तो नहीं कहे जा सकते पर इन से वाकिफ अच्छे से हुआ करते थे, इन्हें ग्राहक लाने पर ठीकठाक बख्शीश मिल जाया करती थी. उन का दायरा भी इन्हीं की तरह बढ़ने के नाम पर तितरबितर हो गया है.  देहव्यापार धर्म और संस्कृति का अटूट हिस्सा हमेशा से ही रहा है और अब भी है क्योंकि तमाम जिल्लतें झेलने के बाद भी सैक्स वर्कर्स धर्मभीरु ही हैं.

हर बदनाम इलाके में स्कूल हों न हों लेकिन पाप धोने को मंदिर जरूर हैं. नई साजिश एनजीओ वगैरह के जरिए इन इलाकों में घुसपैठ कर उन्हें उजाड़ने की हो रही है. ये संस्थाएं सैक्स वर्कर्स को बदनाम ज्यादा करती हैं उन की बेहतरी के लिए ठोस कुछ नहीं करतीं. आज जो सभ्य शहरी लोग इन इलाकों की पहचान पर एक खतरे की तरह मंछरा रहे हैं, वे शायद यह नहीं सोच पा रहे कि कल को उन्हीं के पौश इलाके में यह कारोबार फलेगाफूलेगा और ऐसा होने भी लगा है. रिहायशी इलाकों से पकड़ाते सैक्स रेकेट इस बात के गवाह भी हैं. Hindi Social Stories

Kanpur Crime : सामाजिक संस्था की आड़ में चलता जिस्मफरोशी का धंधा

Kanpur Crime : कुछ लड़कियां अपनी महत्त्वाकांक्षा के चलते, तो कुछ मजबूरी में बरखा उर्फ लवली जैसी धंधेबाज औरतों के जाल में फंस जाती हैं. देह व्यापार की पुरानी खिलाड़ी महिलाएं उन्हें ऐसी दलदल में उतारती हैं, जहां से…

कानपुर (साउथ) की एसपी रवीना त्यागी को एक मुखबिर ने जो जानकारी दी थी, वह वाकई चौंकाने वाली थी. एकबारगी तो उन्हें खबर पर विश्वास ही नहीं हुआ, पर इसे अविश्सनीय समझना भी ठीक नहीं था. अत: उन्होंने फोन द्वारा तत्काल सीओ (नजीराबाद) गीतांजलि सिंह को अपने कार्यालय आने को कहा. कुछ देर बाद ही गीतांजलि सिंह एसपी (साउथ) रवीना त्यागी के कार्यालय पहुंच गईं. रवीना त्यागी ने गीतांजलि की ओर मुखातिब हो कर कहा, ‘‘गीतांजलि, नजीराबाद थाना क्षेत्र के लाजपत नगर के मकान नंबर 120/18 में हाईप्रोफाइल सैक्स रैकेट चलने की जानकारी मुझे मिली है.

रैकेट की संचालिका लवली चक्रवर्ती उर्फ बरखा मिश्रा है, जो सामाजिक संस्था की आड़ में यह धंधा करती है. यह भी पता चला है कि नजीराबाद थाना और चौकी के कुछ पुलिसकर्मी भी कालगर्ल्स को संरक्षण दे कर उन की मदद कर रहे हैं. आप इस मामले में जल्द से जल्द काररवाई करो. इस बात का खयाल रखना कि यह खबर लीक न हो.’’

आगे की काररवाई के लिए एसपी (साउथ) रवीना त्यागी ने एक टीम का भी गठन कर दिया. टीम में सीओ (नजीराबाद) गीतांजलि सिंह, सीओ (बाबूपुरवा) मनोज कुमार अग्रवाल, इंसपेक्टर मनोज रघुवंशी, महिला थानाप्रभारी अर्चना गौतम, महिला सिपाही कविता, पूजा, सरिता आदि को शामिल किया गया. 24 नवंबर, 2019 की रात 8 बजे पुलिस टीम लाजपत नगर पहुंची और मकान नंबर 120/18 का दरवाजा खटखटाया. चंद मिनट बाद एक खूबसूरत महिला ने दरवाजा खोला. सामने पुलिस को देख कर वह बोली, ‘‘कहिए, आप लोगों का कैसे आना हुआ?’’

‘‘क्या आप का नाम लवली उर्फ बरखा मिश्रा है?’’ सीओ गीतांजलि सिंह ने पूछा.

‘‘जी हां, कहिए क्या बात है?’’ वह महिला बोली.

‘‘मैडम, पता चला है कि इस मकान में जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा है.’’ सीओ गीतांजलि ने कहा.

यह सुन कर भी लवली उर्फ बरखा मिश्रा न डरी और न सहमी, बल्कि वह मुसकरा कर बोली, ‘‘आप जिस लवली या बरखा की तलाश में आई हैं, मैं वह नहीं हूं. मैं तो समाजसेविका हूं. भ्रष्टाचार निरोधक कमेटी की मैं वाइस प्रेसीडेंट हूं.’’ कहते हुए उस ने कमेटी का परिचयपत्र सीओ को दिखाया. लवली उर्फ बरखा मिश्रा ने सीओ साहिबा को झांसे में लेने की पूरी कोशिश की लेकिन वह उस के दबाव में नहीं आईं. साथ आए पुलिसकर्मियों को साथ ले कर मकान के अंदर पहुंचीं तो वहां का नजारा कुछ और था.

पहले ही कमरे में एक युवक एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में था. दूसरे कमरे में 3 अन्य युवतियां सजीसंवरी बैठी थीं. वे या तो ग्राहकों के इंतजार में थीं या फिर किसी होटल में ग्राहकों के लिए जाने वाली थीं. सीओ गीतांजलि सिंह ने महिला पुलिसकर्मियों के सहयोग से संचालिका लवली उर्फ बरखा मिश्रा सहित चारों युवतियों को कस्टडी में ले लिया. जबकि इंसपेक्टर मनोज रघुवंशी ने युवक को दबोच लिया. पुलिस ने फ्लैट की तलाशी ली तो वहां से 50 हजार रुपए नकद, शक्तिवर्द्धक दवाएं, कंडोम तथा अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद हुईं. संचालिका बरखा मिश्रा के पास से प्रैस कार्ड, भ्रष्टाचार निरोधक कमेटी का कार्ड तथा आधार कार्ड व पैन कार्ड बरामद हुए. पुलिस बरामद सामान के साथ हिरासत में लिए गए युवक व युवतियों को थाना नजीराबाद ले आई.

सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ होने की जानकारी मिलने पर एसएसपी अनंतदेव तिवारी तथा एसपी (साउथ) रवीना त्यागी भी नजीराबाद आ गईं. पुलिस अधिकारियों के समक्ष जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो चौंकाने वाली जानकारी मिली. देह व्यापार में लिप्त युवतियों में से एक ने अपना नाम सविता उर्फ विनीता, निवासी आर्यनगर, थाना स्वरूपनगर कानपुर बताया. दूसरी युवती ने अपना नाम नीतू चौधरी, मूल निवासी अमृतसर, पंजाब और वर्तमान पता दिल्ली बताया. तीसरी युवती ने अपना नाम पूजा कर्मकार निवासी करनाल (हरियाणा) बताया. चौथी युवती ने अपना नाम प्रीति आचार्य, मूल निवासी कोलकाता तथा वर्तमान पता लक्ष्मी नगर, दिल्ली बताया.

संचालिका लवली चक्रवर्ती उर्फ बरख मिश्रा ने अपना मूल निवास 14-बी, मधुर मिलन, ए-2 खार, मुंबई तथा वर्तमान पता 120/18 लाजपत नगर, नजीराबाद, कानपुर बताया. अय्याशी करते पकड़े गए युवक ने अपना नाम सलमान, निवासी आजाद पार्क, चकेरी कानपुर नगर बताया. चमड़े का व्यवसाय करने वाले सलमान को रिहा कराने के लिए कई व्यापारियों, नेताओं व रसूखदार लोगों ने अपने स्तर से पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाया लेकिन वे नाकाम रहे. संचालिका लवली उर्फ बरखा मिश्रा भी देर रात तक मामले को निपटाने की डील करती रही लेकिन मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में था,इसलिए यह डील नहीं हो सकी.

गीतांजलि सिंह ने हिरासत में ली गई सविता उर्फ विनीता, नीतू चौधरी, पूजा कर्मकार, प्रीति आचार्य, लवली उर्फ बरखा मिश्रा तथा सलमान के विरुद्ध अनैतिक देह व्यापार अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. एसीपी ने इस केस की जांच सीओ (बाबूपुरवा) मनोज कुमार अग्रवाल को सौंप दी. सीओ मनोज कुमार ने आरोपियों से पूछताछ की तो सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई. सैक्स रैकेट की संचालिका लवली उर्फ बरखा मिश्रा व अन्य आरोपियों के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो चौंकाने वाली बातें उजागर हुईं. बरखा मिश्रा का पूरा नेटवर्क औनलाइन चल रहा था.

उस ने कई वेबसाइट पर युवतियों की फोटो व मोबाइल नंबर अपलोड किए थे, जिन के जरिए ग्राहक संपर्क करते थे. यही नहीं, वाट्सऐप, फेसबुक के जरिए भी ग्राहकों को युवतियों की फोटो व मैसेज भेज कर संपर्क किया जाता था. कानपुर नगर ही नहीं दिल्ली, आगरा, इलाहाबाद, बनारस, दिल्ली व मुंबई के दलालों के जरिए वह ग्राहकों की डिमांड पर रशियन व नेपाली युवतियों को भी मंगाती थी. जिस के लिए वह युवतियों को अच्छाखासा पैसा चुकाती थी. बरखा को संरक्षण देने में कुछ मीडियाकर्मी, रसूखदार व प्रशासनिक अधिकारी भी लिप्त थे. समाजसेवा का लबादा ओढ़े कुछ सफेदपोश भी बरखा मिश्रा को संरक्षण देते थे तथा खुद भी रंगरलियां मनाते थे.

सैक्स रैकेट की संचालिका लवली उर्फ बरखा मिश्रा बचपन से ही बेहद खूबसूरत थी. साधारण परिवार में पली बरखा ने जब जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो उस के रूप में निखार आ गया. जब वह बनसंवर कर कालेज जाती तो मनचले युवक उस पर फब्तियां कसते. उस ने उन में से कुछ बौयफ्रैंड बना लिए थे, जो कालेज के छात्र थे. वह उन के साथ घूमतीफिरती और मौजमस्ती करती थी. बरखा के जवान होने पर मांबाप ने उस की शादी कर दी. ससुराल में बरखा कुछ समय तक तो बहू बन कर रही, उस के बाद वह खुलने लगी. दरअसल बरखा ने जैसे सजीले युवक से शादी का सपना देखा था, उस का पति वैसा नहीं था. उस का पति दुकानदार था और उस की सीमित आमदनी थी. वह न तो पति से खुश थी और न उस की आमदनी से उस की जरूरतें पूरी होती थीं. जिस से घर में आए दिन कलह होने लगी.

पति चाहता था कि बरखा मर्यादा में रहे और देहरी न लांघे. लेकिन बरखा को बंधन मंजूर नहीं था. वह तो चंचल हिरणी की तरह विचरण करना चाहती थी. उसे घर का चूल्हाचौका और कठोर बंधन में रहना पसंद नहीं था. बस इन्हीं सब बातों को ले कर पति व बरखा के बीच झगड़ा बढ़ने लगा. पति का साथ छोड़ने के बाद बरखा मिश्रा कौशलपुरी में किराए पर रहने लगी. वह पढ़ीलिखी व खूबसूरत थी. उसे विश्वास था कि जल्द ही उसे कहीं न कहीं नौकरी मिल जाएगी और उस का जीवनयावन मजे से होने लगेगा.

इसी दिशा में उस ने कदम बढ़ाया और नौकरी की तलाश में जुट गई. वह जहां भी नौकरी के लिए जाती, वहां उसे नौकरी तो नहीं मिलती, लेकिन उस के शरीर को पाने की चाहत जरूर दिखती. उस ने सोचा कि जब शरीर ही बेचना है तो वह नौकरी क्यों करे. वह खूबसूरत और जवान थी. उसे ग्राहकों की कोई कमी की. शुरूशुरू में तो उसे इस धंधे में झिझक हुई, लेकिन कुछ समय बाद वह खुल गई. उस ने अपने जाल में कई लड़कियां फंसा लीं और सैक्स रैकेट चलाने लगी. इस धंधे से उसे आमदनी होने लगी तो उस ने अपना कद और दायरा भी बढ़ा लिया. अब वह किराए पर फ्लैट लेती और नई उम्र की लड़कियों को सब्जबाग दिखा कर अपने जाल में फंसाती और देह धंधे में उतार देती. वह स्कूलकालेज की ऐसी लड़कियों को ज्यादा फंसाती थी, जो अभावों की जिंदगी गुजार रही होतीं.

बरखा खूबसूरत होने के साथसाथ मृदुभाषी भी थी. अपनी भाषाशैली से वह सामने वाले को जल्द प्रभावित कर लेती थी. इसी का फायदा उठा कर उस ने समाजसेवी नेताओं, मीडिया वालों व पुलिसकर्मियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मधुर संबंध बना लिए. इन्हीं की मदद से वह बड़े मंच साझा करने लगी. पुलिस थानों में पंचायत करने लगी तथा शासनप्रशासन के कार्यों में भी दखल देने लगी. यही नहीं उस ने एक मीडियाकर्मी को ब्लैकमेल कर उस से प्रैस कार्ड भी बनवा लिया था. साथ ही कई सामाजिक संस्थाओं में पद भी हासिल कर लिए थे. लवली उर्फ बरखा मिश्रा को देहव्यापार से कमाई हुई तो उस ने अपना दायरा और अधिक बढ़ा लिया. दिल्ली, मुंबई, आगरा व बनारस के कई बड़े दलालों से उस का संपर्क बन गया.

इन्हीं दलालों की मार्फत वह लड़कियों को शहर के बाहर भेजने लगी तथा डिमांड पर दलालों के जरिए विदेशी लड़कियों को शहर में बुला लेती थी. रशियन व नेपाली बालाओं की उस के यहां ज्यादा डिमांड रहती थी. ये बालाएं हवाईजहाज से आतीं फिर हफ्ता भर रुक कर वापस चली जाती थीं. बरखा के अड्डे पर 5 से 50 हजार रुपए तक लड़की बुक होती थी. होटल व खानपान का खर्च अलग से. बरखा मिश्रा देह व्यापार का पूरा नेटवर्क औनलाइन चलाने लगी थी. वाट्सऐप ग्रुप के अलावा उस ने लोकांटो नाम की एक वेबसाइट भी बना रखी थी. वेबसाइट पर उस ने अपने नंबर का प्रचार करते हुए लड़कियों की सप्लाई का विज्ञापन डाल रखा था. वहीं वाट्सऐप पर कई दलालों के अलावा कालगर्ल्स को भी जोड़ रखा था. वहां वे फोटो और लड़कियों की डिटेल्स क्लायंट को भेजी जाती थी.

बरखा इस धंधे में कोर्ड वर्ड का प्रयोग करती थी. एजेंट को वह चार्ली नाम से बुलाती थी और कालगर्ल को चिली नाम देती थी. किसी युवती को भेजने के लिए वाट्सऐप पर भी चार्ली टाइप करती थी. वापस मैसेज में भी वह इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करती थी. चार्ली नाम के उस के दरजनों एजेंट थे, जो युवतियों को सप्लाई करते थे. एजेंट से जब उसे लड़की मंगानी होती तो वह कहती, ‘‘हैलो चार्ली, चिली को पास करो.’’

बरखा मिश्रा एक क्षेत्र में कुछ महीने ही धंधा करती थी. जैसे ही धंधे की सुगबुगाहट दूसरे लोगों को होने लगती तो वह क्षेत्र बदल देती. पहले वह गुमटी क्षेत्र में धंधा करती थी. फिर उस ने क्षेत्र बदल दिया और स्वरूपनगर क्षेत्र में धंधा करने लगी. उस ने स्वरूपनगर स्थित रतन अपार्टमेंट में किराए पर फ्लैट लिया था. इस के बाद उस ने फीलखाना क्षेत्र के पटकापुर स्थित सूर्या अपार्टमेंट में ग्राउंड फ्लोर पर एक फ्लैट किराए पर लिया. यह फ्लैट किसी वकील का था. उस ने वकील से कहा कि वह पत्रकार है. समाचार पत्र के लिए कार्यालय खोलना है. उस ने यह भी कहा कि वैसे वह वर्तमान में आजादनगर स्थित रतन अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहती है.

दरअसल, एक मीडियाकर्मी ने ही बरखाको सुझाव दिया था कि वह समाचार पत्र का कार्यालय खोल ले. इस से पुलिस तथा फ्लैटों में रहने वाले लोग दबाव में रहेंगे. मीडियाकर्मी का सुझाव उसे पसंद आया और इसी बहाने उस ने फ्लैट किराए पर ले लिया और सैक्स रैकेट चलाने लगी. उस ने फ्लैट के बाहर समाचार पत्र का बोर्ड लगा दिया. यही नहीं, उस ने फ्लैट पर धंधा करने आने वाली लड़कियों से कहा कि अगर कोई उन से यहां आने का मकसद पूछे तो बता देना कि वे प्रैस कार्यालय में काम करती हैं. देह व्यापार के अड्डे से पकड़ी गई 19 वर्षीय सविता उर्फ सबी उर्फ विनीता सक्सेना आर्यनगर में रहती थी. मध्यम परिवार में पलीबढ़ी विनीता बेहद खूबसूरत थी. इंटरमीडिएट पास करने के बाद जब उस ने डिग्री कालेज में प्रवेश लिया तो वह रंगीन सपनों में खोने लगी.

उस की कई सहेलियां ऐसी थीं, जो रईस घरानों की थीं. वे महंगे कपड़े पहनतीं और ठाटबाट से रहतीं. महंगे मोबाइल से बात करतीं. रेस्टोरेंट जातीं और खूब सैरसपाटा करतीं. विनीता

जब उन्हें देखती तो सोचती, ‘काश!

ऐसे ठाटबाट उस के नसीब में भी होते.’

एक रोज एक संस्था के मंच पर विनीता की मुलाकात बरखा मिश्रा से हुई. उस ने विनीता को बताया कि वह समाजसेविका है. राजनेताओं, समाजसेवियों, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में उस की अच्छी पैठ है. बरखा मिश्रा की बातों से विनीता प्रभावित हुई, फिर वह उस से मिलने उस के घर जाने लगी. घर आतेजाते बरखा ने विनीता को रिझाना शुरू कर दिया और उस की आर्थिक मदद करने लगी. बरखा समझ गई कि विनीता महत्त्वाकांक्षी है. यदि उसे रंगीन सपने दिखाए जाएं तो वह उस के जाल में फंस सकती है.

इस के बाद विनीता जब भी उस के घर आती, बरखा उस से प्यार भरी बातें करती. उस के अद्वितीय सौंदर्य की तारीफ करती तथा उस की जवानी को जगाने का प्रयास करती. धीरेधीरे बरखा ने विनीता को अपने जाल में फंसा कर देह व्यापार में उतार दिया. विनीता जवान और खूबसूरत थी, सो उस के लिए आसानी से ग्राहक मिल जाते. सैक्स रैकेट चलते अभी एक महीना ही बीता था कि किसी ने इस की सूचना पुलिस को दे दी. पुलिस ने सैक्स रैकेट का परदाफाश कर लवली उर्फ बरखा मिश्रा को जेल भेज दिया. लवली उर्फ बरखा लगभग 6 महीने जेल में रही, उस के बाद जुलाई, 2018 में उसे जमानत मिल गई.

कानपुर जेल से छूटने के बाद लवली उर्फ बरखा मिश्रा मुंबई चली गई. वहां उस ने अपने दलाल के मार्फत 14बी रोड मधुर मिलन ए-2 खार में एक कमरा किराए पर ले लिया और वहीं रहने लगी. इस बीच उस ने कई कालगर्ल्स संचालिकाओं से संबंध बना लिए. वहां भी वह धंधा करने लगी. लवली उर्फ बरखा मिश्रा कानपुर शहर में एक बार फिर पैर जमाना चाहती थी, क्योंकि यह उस का जानासमझा शहर था. अनेक सफेदपोश नेताओं, कथित मीडियाकर्मियों व पुलिस से उस के अच्छे संबंध थे. अगस्त 2019 में लवली उर्फ बरखा मिश्रा वापस कानपुर आ गई. यहां उस ने पौश कालोनी लाजपत नगर में सुजैन सचान नाम की महिला का मकान 20 हजार रुपए प्रतिमाह के किराए पर ले लिया और हाईप्रोफाइल सैक्स रैकेट चलाने लगी.

सैक्स रैकेट चलाते अभी 2 महीने ही बीते थे कि किसी ने इस की सूचना एसपी (साउथ) रवीना त्यागी को दे दी. रवीना त्यागी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एक टीम गठित की. इस टीम ने छापा मारा और लवली को बंदी बना लिया. उस के अड्डे से 4 युवतियां और एक युवक को रंगेहाथों पकड़ लिया. सैक्स रैकेट में पकड़ी गई 25 वर्षीय नीतू चौधरी मूलरूप से भटिंडा, पंजाब की रहने वाली थी. बीमार मातापिता की मौत के बाद वह एक करीबी रिश्तेदार के माध्यम से अपनी छोटी बहन के साथ दिल्ली आ गई. वह पढ़ीलिखी थी, अत: प्राइवेट नौकरी करने लगी.

नीतू अपनी छोटी बहन को पढ़ालिखा कर योग्य बनाना चाहती थी ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके. लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहर में प्राइवेट नौकरी से मकान का किराया, घर तथा बहन की पढ़ाई का खर्च जुटाना संभव नहीं था. अत: वह कमाने के लालच में दलाल के मार्फत सैक्स रैकेट से जुड़ गई और देह का धंधा करने लगी. नीतू चौधरी ने बताया कि दलाल के मार्फत वह कानपुर की देह संचालिका लवली उर्फ बरखा के संपर्क में आई. बरखा ने उसे यह कह कर कानपुर बुलाया था कि एक होटल में बैचलर पार्टी है. एक रात का 20 हजार रुपए मिलेगा. सौदा तय होने पर वह कानपुर आ गई. घटना वाली रात वह सजसंवर कर होटल जाने वाली थी, तभी पुलिस का छापा पड़ा और वह पकड़ी गई.

पुलिस द्वारा पकड़ी गई पूजा कर्मकार करनाल (हरियाणा) की रहने वाली थी. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ी थी. बीकौम करने के बाद पूजा ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया. इस के बाद वह नौकरी करने लगी. पूजा का भाई बीमार रहता था. उस की किडनी खराब हो गई थी. किडनी बदलवाने के लिए पूजा को 10 लाख रुपए चाहिए थे, इतनी बड़ी रकम वह प्राइवेट नौकरी से नहीं जुटा सकती थी. पूजा परेशान थी, तभी उस की मुलाकात एक दलाल से हो गई. उस दलाल ने पूजा को रकम जुटाने के लिए देह बेचने का रास्ता सुझाया.

पूजा कई दिनों तक पसोपेश में पड़ी रही. फिर उस ने देह का धंधा अपना लिया. दलाल के जरिए वह दिल्ली, मुंबई, बनारस तथा विदेश तक जाने लगी. पूजा शरीर से हृष्टपुष्ट व जवान थी. अत: उस की खूब डिमांड होने लगी. पूजा कर्मकार ने बताया कि दलाल के मार्फत ही वह कानपुर की देह संचालिका लवली उर्फ बरखा के संपर्क में आई थी. बरखा ने उसे 20 हजार रुपए में बुक किया था. लाजपत नगर स्थित लवली के अड्डे पर वह 24 नवंबर की दोपहर पहुंची थी. उस समय वहां 3 अन्य युवतियां मौजूद थीं. सभी को किसी होटल की बैचलर पार्टी में जाना था. लेकिन होटल जाने के पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ गई.

पूजा ने बताया कि उस की अगली बुकिंग कनाडा के एक होटल के लिए हो चुकी थी. उस के साथ दिल्ली की 2 अन्य युवतियों को भी जाना था. फ्लाइट पकड़ कर उसे मंगलवार को दिल्ली पहुंचना था. कनाडा में उसे एक हफ्ते के 6 लाख रुपए मिलने वाले थे. कानपुर में वह महज 20 हजार रुपए में आई थी. जिस्मफरोशी के धंधे में पकड़ी गई 30 वर्षीया युवती प्रीति आचार्य मूलरूप से कोलकाता की रहने वाली थी. उस का पति अभिजीत आचार्य दिल्ली के लक्ष्मीनगर में रहता था, पांडव नगर स्थित मदर डेयरी में कामकरता था. प्रीति का पति शराबी था. वह जो कमाता, सब शराब में उड़ा देता था. प्रीति रोकती तो उसे मारतापीटता था.

परेशान हो कर आखिर उस ने पति का साथ छोड़ दिया और नौकरी करने लगी. लेकिन जिस्म के भूखे लोगों ने नौकरी के बजाय उस के जिस्म को ज्यादा तवज्जो दी. प्रीति ने सोचा जब जिस्म ही बेचना है तो नौकरी क्यों करे. प्रीति के साथ काम करने वाली एक युवती जिस्मफरोशी का धंधा करती थी. उस युवती ने प्रीति को देह के दलाल से मिलवा दिया. दलाल के माध्यम से प्रीति देह का धंधा करने लगी. दलाल के मार्फत ही उस की बुकिंग 10 हजार रुपए में कानपुर के लिए हुई थी. वह शाम 4 बजे लाजपत नगर स्थित लवली के अड्डे पर पहुंची थी. लवली उसे तथा एक अन्य युवती को गुमटी नंबर- 5 स्थित एक ब्यूटीपार्लर ले गई थी.

उसे बताया गया था कि एक होटल में पार्टी में जाना है. वह सजसंवर कर आई ही थी कि पुलिस का छापा पड़ा और वह भी अन्य युवतियों के साथ पकड़ी गई. सैक्स रैकेट के अड्डे से पकड़ा गया सलमान आजाद पार्क चकेरी में रहता था. वह चमड़े का व्यवसाय करता था और अय्याश प्रवृत्ति का था. घटना वाले दिन वह दलाल के मार्फत लाजपत नगर स्थित लवली के अड्डे पर पहुंचा था. लवली ने उसे सविता उर्फ विनीता को दिखा कर पूरी रात का 10 हजार रुपए में सौदा किया था. सलमान पूजा के साथ कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में था, तभी पुलिस का छापा पड़ा और कालगर्ल के साथ वह भी पकड़ा गया.

25 नवंबर, 2019 को थाना नजीराबाद पुलिस ने आरोपी लवली उर्फ बरखा मिश्रा, सविता उर्फ विनीता, नीतू चौधरी, पूजा कर्मकार तथा अभियुक्त सलमान को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट आर.के. शर्मा की अदालत में पेश किया, जहां से उन सभी को जिला जेल भेज दिया गया.

 

गर्लफ्रेंड को जीबी रोड बेचने आए प्रेमी ने की एसएचओ से डील

दिल्ली के थाना कमला मार्केट के थानाप्रभारी सुनील कुमार ढाका के सरकारी मोबाइल फोन पर  लगातार ऐसी काल्स आ रही थीं, जिस में फोन करने वाला अपने बारे में कुछ न बता कर उन से ही पूछता था कि आप कौन हैं और कहां से बोल रहे हैं? जब वह उसे अपने बारे में बताते तो फोन करने वाला तुरंत काल डिसकनेक्ट कर देता.

शुरुआत में तो वह यही समझ रहे थे कि शायद किसी से गलत नंबर लग जा रहा है. पर जब रोजाना ही अलगअलग नंबरों से ऐसी काल्स आने लगीं तो उन्हें शक हुआ. क्योंकि फोनकर्ता पुलिस का नाम सुनते ही फोन काट देता था. वह यह जानना चाहते थे कि आखिर फोन करने वाला कौन है और वह चाहता क्या है. क्योंकि एक ही फोन पर लगातार रौंग काल आने की बात गले नहीं उतर रही थी.

इस के बाद उन के पास एक अनजान नंबर से काल आई तो उन्होंने फोन करने वाले से झूठ बोलते हुए कहा, ‘‘मैं अशोक बोल रहा हूं, आप कौन हैं और किस से बात करनी है?’’

‘‘जी, मैं ने जीबी रोड फोन मिलाया था.’’ उस ने कहा.

जीबी रोड दिल्ली का बदनाम रेडलाइट एरिया है. लेकिन अब इस का नाम बदल कर श्रद्धानंद मार्ग हो गया है. यहां पर मशीनरी पार्ट्स का बड़ा मार्केट है और उन्हीं दुकानों के ऊपर तमाम कोठे हैं, जहां सैकड़ों की संख्या में वेश्याएं धंधा करती हैं. रोड का नाम कागजों में भले ही बदल गया है, लेकिन लोगों की जबान पर आज भी जीबी रोड ही रटा हुआ है.

जैसे ही उस आदमी ने जीबी रोड का नाम लिया, थानाप्रभारी उस के फोन करने का आशय समझ गए. वह बात को आगे बढ़ाते हुए बोले, ‘‘आप ने सही जगह नंबर मिलाया है. मैं वहीं से बोल रहा हूं. बताइए, किसलिए फोन किया है?’’

‘‘मैं वहां पूरी रात एंजौय करना चाहता हूं, कितना खर्च आएगा.’’ उस ने पूछा.

इस बात पर थानाप्रभारी को गुस्सा तो बहुत आया कि वह पुलिसिया भाषा में उसे सही खुराक दे दें, लेकिन उन्होंने गुस्सा जाहिर करना उचित नहीं समझा. उन्होंने बड़े प्यार से कहा, ‘‘आप यहां आ जाइए. जिस लड़की को पसंद करेंगे, उसी के हिसाब से पैसे बता दिए जाएंगे. आप जब यहां आएंगे तो मैं यकीन दिलाता हूं कि खुश हो कर ही जाएंगे. आप यहां मार्केट में आने के बाद मेरे इसी नंबर पर फोन कर देना, मैं किसी को भेज दूंगा.’’

इतना कह कर थानाप्रभारी ने उस से पूछा, ‘‘वैसे एक बात यह बताओ कि मेरा यह नंबर आप को कहां से मिला?’’

‘‘यह नंबर एक सैक्स साइट पर था. मैं जीबी रोड की एक वीडियो देख रहा था. उसी में यह फोन नंबर था. वहीं से ले कर मैं आप को फोन कर रहा हूं.’’ उस आदमी ने कहा.

सैक्स साइट पर पुलिस का फोन नंबर होने की बात पर थानाप्रभारी चौंके. जब नंबर वहां है तो ऐसे ही लोगों के फोन आएंगे. चूंकि उन की फोन पर बातचीत जारी थी, इसलिए उन्होंने कहा, ‘‘मैं तो यह सोच रहा था कि यह नंबर हमारे किसी कस्टमर ने आप को दिया होगा.’’

‘‘नहीं, कस्टमर ने नहीं दिया, सैक्स साइट से ही लिया है.’’ उस ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं, आप जब आएं तो मुझे बता देना. अच्छी व्यवस्था करा दूंगा.’’ उन्होंने कहा और काल डिसकनेक्ट कर दिया.

इस तरह के फोन काल्स से थानाप्रभारी परेशान थे. इस से बचने के 2 ही रास्ते थे. पहला यह कि वह अधिकारियों से बात कर इस नंबर के बदले कोई दूसरा नंबर ले लें और दूसरा यह कि जिस सैक्स साइट पर उन का यह नंबर डाला गया है, वहां से यह नंबर हटवा दें.

इंटरनेट पर सैक्स से संबंधित तमाम साइटें हैं. यह फोन नंबर पता नहीं किस साइट पर है. फिर भी थानाप्रभारी ने गूगल पर कई साइट्स खोजीं, लेकिन उन्हें अपना नंबर नहीं मिला. जिस फोन नंबर से उन के पास फोन आया था, उन्होंने उसी नंबर को रिडायल किया. पर वह नंबर स्विच्ड औफ पाया गया. उन्होंने सोचा कि अब की बार इस तरह का किसी का फोन आएगा तो उस से साइट का नाम भी पूछ लेंगे.

19 नवंबर, 2017 को भी थानाप्रभारी अपने औफिस में बैठे थे, तभी सुबह करीब पौने 9 बजे उन के मोबाइल पर किसी ने फोन कर के पूछा, ‘‘क्या आप जीबी रोड से बोल रहे हैं?’’

यह सुन कर थानाप्रभारी झुंझलाए लेकिन खुद पर काबू पाते हुए उन्होंने फोन करने वाले से कहा, ‘‘हां, मैं वहीं से बोल रहा हूं. कहिए, कैसे याद किया?’’

‘‘दरअसल, बात यह है कि मेरे पास एक न्यू ब्रैंड टैक्सी है. मैं उसे बेचना चाहता हूं.’’ उस आदमी ने धीरे से कहा.

चूंकि जीबी रोड थाना कमला मार्केट इलाके में ही है. यहां पर टैक्सी धंधा करने वाली महिला को कहते हैं, इसलिए वह समझ गए कि यह किसी लड़की का सौदा करना चाहता है. जो लड़की या महिला यहां लाई जाती है, वह यहीं की हो कर रह जाती है.  उस आदमी की बात से लग रहा था कि वह इस क्षेत्र का पुराना खिलाड़ी है, क्योंकि वह कोड वर्ड का प्रयोग कर रहा था. उस लड़की की जिंदगी बचा कर थानाप्रभारी उस गैंग तक पहुंचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने कहा, ‘‘यह बताओ कि टैक्सी किस हालत में है?’’

‘‘एकदम न्यू ब्रैंड है. बस यह समझ लो कि वह अभी सड़क पर भी नहीं उतरी है.’’ उस ने कहा, ‘‘वह केवल 15 साल की है.’’

15 साल की है तो उसे जरूर प्रेमजाल में फांस कर या नौकरी के बहाने लाया गया होगा. उस की नीयत को भांप कर थानाप्रभारी ने उस से बातचीत जारी रखी, ‘‘ठीक है, हम उसे खरीद लेंगे.’’

‘‘कितने रुपए देंगे उस टैक्सी के?’’ वह बोला.

‘‘देखो भाई, हम बिना देखे उस के दाम कैसे बता सकते हैं. अच्छा, यह बताओ कि वह है कैसी? आप हमें उस के फोटो वगैरह दिखाइए, उस के बाद ही बताया जाएगा.’’

‘‘वह एकदम स्लिम है और लंबाई करीब 5 फुट है.’’ उस ने बताया, ‘‘मैं उस के फोटो भी दिखा दूंगा. कोई लफड़ा तो नहीं होगा.’’

‘‘लफड़ा किस बात का. देखो, तुम्हें बेचना है और हमें खरीदना तो इस में लफड़े की कोई बात ही नहीं है.’’

‘‘आप को एक बात ध्यान रखना है कि किसी भी तरह वह लड़की अपने घर वालों को फोन न कर पाए. अगर उस ने फोन कर दिया तो हम दोनों ही फंसेंगे.’’ उस ने आशंका जताते हुए कहा.

‘‘यहां आने के बाद किसी का भी घर लौटना मुमकिन नहीं होता. और तो और बाद में जब तुम भी यहां आओगे तो वह तुम्हें भी यहां नहीं दिखेगी.’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘तुम से मिलने मैं आ जाऊंगा, तभी बात करते हैं.’’

‘‘ठीक है आ जाना, पर तुम यहां कोठे पर मत आना, क्योंकि इस तरह के सौदे बाहर ही होते हैं. दूसरी जगह कहां मिलना है, इस बारे में हम फोन कर के तय कर लेंगे.’’ थानाप्रभारी ने कहा.

इस पूरी बातचीत में थानाप्रभारी सुनील ढाका ने यह जाहिर नहीं होने दिया कि वह पुलिस अधिकारी हैं. वह कोठों के दलालों की स्टाइल में ही बात करते रहे.

इस के बाद भी उस दिन 3-4 बार उसी आदमी ने फोन कर इस संबंध में बात की. इस बातचीत में उस ने तय कर लिया कि कल वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आएगा और वहां बैठ कर आपस में बात की जाएगी.

‘‘ठीक है, तुम वहां आ जाना. मैं 2 लड़कों गुलाब और सुंदर को भेज दूंगा. लड़की का फोटो वगैरह देख कर वे डील फाइनल कर लेंगे. इस के बाद तुम लड़की ले आना और वहीं हम तुम्हें पैसे दे देंगे.’’ थानाप्रभारी ने कहा. इसी के साथ उन्होंने गुलाब का फोन नंबर भी उसे दे दिया.

थानाप्रभारी ने इस मामले की जानकारी एसीपी अमित कौशिक और डीसीपी मंजीत सिंह रंधावा को दे दी. मामला एक लड़की की जिंदगी उजड़ने से बचाना था, इसलिए डीसीपी ने कहा कि वह बातचीत में ऐहतियात बरतें. लड़की बेचने वालों को किसी तरह का शक नहीं होना चाहिए, वरना गड़बड़ हो सकती है.

डीसीपी के निर्देश के बाद सुनील कुमार ढाका ने उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस से उन के पास लड़की का सौदा करने वाले का फोन आया था. उस फोन की लोकेशन गुड़गांव की आ रही थी.

20 नवंबर को थानाप्रभारी उस आदमी से फोन द्वारा संपर्क में रहे. उस ने बताया कि वह दिल्ली के लिए मैट्रो से चल पड़ा है. शाम 4, साढ़े 4 बजे तक वह नई दिल्ली पहुंच जाएगा.

‘‘ठीक है, तुम नई दिल्ली मैट्रो स्टेशन पहुंचो, मेरे दोनों लड़के गुलाब और सुंदर वहां पहुंच जाएंगे. तुम उन से बात कर लेना.’’ थानाप्रभारी ने कहा.

थानाप्रभारी ने उसे अपने कांस्टेबल गुलाब का फोन नंबर दे दिया था, इसलिए वह गुलाब के संपर्क में आ गया. उस ने बताया कि वे 2 लोग आ रहे हैं और शाम साढ़े 4 बजे मैट्रो के गेट नंबर-4 के बाहर मिलेंगे. कांस्टेबल सुंदर और गुलाब मैट्रो के गेट नंबर 4 के बाहर खड़े हो गए.

मैट्रो ट्रेन से उतरने के बाद उस आदमी ने गुलाब से बात की तो गुलाब ने बताया कि वह मैट्रो के गेट नंबर 4 पर खड़ा है. कुछ देर बाद वहां 2 युवक पहुंचे. उन्होंने अपने नाम अमर और रंजीत बताए. अमर गुलाब से बातें करने लगा और रंजीत वहां से कुछ दूर जा कर खड़ा हो गया. अमर ने अपने मोबाइल फोन में उस लड़की की फोटो गुलाब को दिखाई, जिस का सौदा करना था. 15 साल की वह लड़की वास्तव में खूबसूरत थी. अमर ने उस लड़की के साढ़े 3 लाख रुपए मांगे.

‘‘साढ़े 3 लाख तो बहुत ज्यादा है. मैं कल ही बंगाल से 70-70 हजार में 2 लड़कियां लाया हूं. भाई, जो मुनासिब है ले लो.’’ गुलाब ने कहा.

‘‘देखिए, मेरे पास इस के अलावा 5 लड़कियां और हैं. अगर सही पैसों में तुम से डील हो जाती है तो सारी की सारी तुम्हें ही दे दूंगा.’’ अमर ने कहा.

‘‘हमारे पास भी आल इंडिया से लड़कियां आती हैं. हमारे आदमी हर स्टेट में हैं. वे हम से जुड़ कर मोटी कमाई कर रहे हैं. तुम भी ऐसा कर सकते हो.’’

दोनों ही तरफ से लड़की का मोलभाव होने लगा. अंत में बात 2 लाख 30 हजार रुपए में तय हो गई. अमर ने कहा कि वह लड़की को यहीं ले आएगा और किसी बहाने से उसे छोड़ कर चला जाएगा.

गुलाब और सुंदर अमर और रंजीत से इस तरह बातचीत कर रहे थे, जैसे वे सचमुच में पक्के धंधेबाज हों. गुलाब ने उन के साथ सेल्फी ली और एक दुकान पर बैठ कर चायनाश्ता भी किया. कुछ ही देर की बातचीत में वे सब एकदूसरे से घुलमिल गए. अमर ने बताया कि वह कल 11-12 बजे के बीच लड़की को यहां ले आएगा. लौटते समय गुलाब ने अमर को एक हजार रुपए थमा दिए.

‘‘ये पैसे किस बात के?’’ अमर ने पूछा.

‘‘इन्हें ऐसे ही रख लो. इतनी दूर से आए हो, किराएभाड़े के लिए हैं. घबराओ मत, इन्हें मैं सौदे की रकम से नहीं काटूंगा. वह पैसे तो लड़की के मिलते ही तुम्हें हाथोंहाथ दे दूंगा.’’ गुलाब ने कहा.

इस के बाद अमर और रंजीत मैट्रो से ही वापस चले गए.  कांस्टेबल गुलाब ने विश्वास बनाए रखने के लिए उन से यह भी नहीं पूछा कि वे कहां से आए हैं. अगले दिन दोपहर डेढ़ बजे अमर ने फोन कर के गुलाब से कहा, ‘‘आप लोग गुड़गांव बसअड्डे पर आ जाइए. यहीं पर लड़की भी दिखा दूंगा और पैसे ले कर सौंप भी दूंगा.’’

थानाप्रभारी ने कांस्टेबल गुलाब से पहले ही कह दिया था कि डील करते समय वह किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करेंगे. उन से खरीदार की तरह ही बातचीत करें. इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुलाब ने उस दिन गुड़गांव आने से मना कर दिया.

उन्होंने कहा कि हम आज गुड़गांव नहीं आ सकते, क्योंकि आज उन्हें अपने एक रिश्तेदार के यहां शादी में जाना है. अगर ज्यादा जल्दी हो तो वे लड़की को ले कर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आ जाएं.

कुछ देर सोच कर अमर ने कहा, ‘‘ठीक है, आप लोग कल ही गुड़गांव आ जाइए.’’

‘‘हां, यही ठीक रहेगा.’’ गुलाब ने उस की बात का समर्थन करते हुए कहा.

अमर सुनील कुमार ढाका और गुलाब से फोन पर दिन में कईकई बार बातें कर रहा था, लेकिन अगले दिन यानी 21 नवंबर को उन के पास अमर का कोई फोन नहीं आया. इस से थानाप्रभारी को आशंका हुई कि कहीं उसे उन के पुलिस होने की भनक तो नहीं लग गई.

यदि ऐसा हुआ तो गड़बड़ हो जाएगी. अगर उस ने किसी तरह लड़की कोठे पर पहुंचा दिया तो वहां लड़की को तलाश पाना मुश्किल हो जाएगा.

वह गुलाब से इसी मुद्दे पर बात कर रहे थे कि तभी 11 बजे के करीब अमर का फोन आ गया. उस ने कहा, ‘‘आप लोग गुड़गांव आ जाइए. मैं बसअड्डे के पास आप का इंतजार करूंगा. यहीं पर आप लड़की को देख लेना.’’

थानाप्रभारी ने एएसआई विजय, कांस्टेबल गुलाब और सुंदर को निर्देश दे कर गुड़गांव भेज दिया. तीनों गुड़गांव पहुंच गए. रास्ते भर गुलाब अमर से फोन पर बातचीत करते रहे.

जब वह वहां पहुंचे तो अमर और उस का साथी बसअड्डे के पास ही खड़े मिले. चूंकि वे गुलाब और सुंदर को ही जानते थे, इसलिए एएसआई विजय बसअड्डे के पास एक दुकान पर खड़े हो गए. गुलाब ने अमर से लड़की के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि वह अभी उसे ले कर नहीं आया है. उस ने मोबाइल फोन में लड़की के कुछ अन्य फोटो उन्हें दिखाए.

इस बार उस के मोबाइल में लड़की के अलगअलग तरह के फोटो थे. उस ने कहा कि वह लड़की को यहीं ले आता है, वे यहीं पैसे दे कर लड़की को ले जाएं.

‘‘लेकिन अभी हम पैसे नहीं लाए हैं. ऐसी बात थी तो पहले बता देते, हम पैसे ले कर आते. अब बताइए, क्या करें.’’ गुलाब ने कहा.

‘‘करना क्या है, हम चाह रहे थे कि यह मामला आज ही निपट जाए.’’ अमर ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं, आज नहीं तो कल निपट जाएगा. लेकिन हम चाहते हैं कि लड़की को ले कर तुम दिल्ली आ जाओ. पैसे वहीं मिल जाएंगे.’’

अगले दिन 22 नवंबर, 2017 को अमर अपने दोस्त और उस लड़की को ले कर मैट्रो से दिल्ली के लिए निकल पड़ा. दिल्ली के लिए निकलने से पहले उस ने गुलाब को फोन कर के बता दिया.

कांस्टेबल गुलाब ने यह बात थानाप्रभारी को बता दी. थानाप्रभारी ने एक पुलिस टीम बनाई, जिस में एसआई दिनेश कुंडू, एएसआई सर्वेश, विजय, कांस्टेबल गुलाब, सुंदर, महिला कांस्टेबल मधु को शामिल किया. गवाही के लिए वह किसी स्थानीय आदमी को साथ रखना चाहते थे. इस के लिए उन्होंने मोहम्मद हफीज उर्फ बबलू प्रधान से बात की और उसे अपनी टीम के साथ नई दिल्ली मैट्रो स्टेशन पर ले गए.

चूंकि अमर ने मैट्रो के गेट नंबर 4 के पास मिलने को कहा था, इसलिए उस गेट के आसपास सभी पुलिसकर्मी तैनात हो गए.

दिल्ली पहुंच कर अमर ने गुलाब को फोन किया तो गुलाब अपने साथी सुंदर के साथ वहां पहुंच गए. वह अमर को पहचानते थे, इसलिए मैट्रो के गेट नंबर 4 के पास उन्होंने अमर को खड़े देखा तो वह उस से बड़ी गर्मजोशी से मिले.

उन्होंने उसे 20 हजार रुपए दे कर बाकी के पैसे लड़की सौंपते समय देने को कहा. वहां अमर अकेला था. उस ने लड़की को अपने साथी रंजीत के साथ वहां से थोड़ी दूरी पर खड़ी कर दिया था.

अमर जल्द ही अपनी बकाया की रकम ले कर लड़की को उन के हवाले कर वहां से खिसक जाना चाहता था, इसलिए वह गुलाब को उस जगह ले गया, जहां रंजीत के साथ लड़की खड़ी थी. लड़की को देख कर गुलाब ने अपने सिर को खुजाया. यह उन का इशारा था. इस के बाद थानाप्रभारी सहित उन की टीम के सदस्य वहां पहुंच गए. उन्होंने अमर और उस के साथी को हिरासत में ले लिया.

गुलाब और सुंदर को जीबी रोड कोठे का दलाल समझने वाले अमर और रंजीत को जब पता चला कि वे दलाल नहीं, बल्कि पुलिस वाले हैं तो उन के होश उड़ गए. जिस मनीषा नाम की लड़की को वे बेचने लाए थे, उसे महिला कांस्टेबल मधु ने अपनी हिफाजत में ले लिया.

थाने ले जा कर जब अमर और रंजीत से पूछताछ की गई तो पता चला कि वे दोनों बिहार के रहने वाले थे और वह लड़की भी बिहार की थी.

लड़की को अपने प्यार के जाल में फांस कर उसे रेडलाइट एरिया में बेचने की कोशिश करने की उन्होंने जो कहानी बताई, वह बहुत ही हैरान कर देने वाली थी—

24 साल का अमर मूलरूप से बिहार के सुपौल जिले के इरारी गांव के रहने वाले लक्ष्मण का बेटा था. इसी गांव के रहने वाले रंजीत शाह से उस की अच्छी दोस्ती थी. अमर दिल्ली और गुड़गांव में पहले नौकरी कर चुका था.

मई, 2017 की बात है. अमर बिहार के मोतिहारी जिले में अपने एक जानकार के यहां आयोजित भोज में गया था. वहीं पर मनीषा से उस की मुलाकात हुई. 15 साल की मनीषा खूबसूरत के साथ हंसमुख भी थी. वह भी परिवार के साथ उसी भोज में आई थी. पहली मुलाकात में ही दोनों एकदूसरे से काफी प्रभावित हुए. उसी दौरान उन्होंने अपने फोन नंबर एकदूसरे को दे दिए.

भोज से घर लौटने के बाद अमर के दिलोदिमाग में मनीषा ही घूमती रही. अगले दिन मन नहीं लगा तो उस ने मनीषा को फोन लगा दिया. दोनों में औपचारिक बातें हुईं. इस के बाद उन के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो गया. धीरेधीरे बातों का दायरा बढ़ता गया और वह प्यार के बंधन में बंधते गए. दोनों ही एकदूसरे को इतना चाहने लगे कि उन्होंने शादी करने का फैसला ले लिया.

इस के बाद योजना बना कर दोनों 15 अक्तूबर, 2017 को अपनेअपने घरों से भाग निकले. 15 साल की मनीषा अपना घर छोड़ कर मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई, जहां अमर अपने दोस्त रंजीत के साथ उस का इंतजार कर रहा था.  मोतिहारी से तीनों दिल्ली आ गए. दिल्ली से मैट्रो द्वारा गुड़गांव पहुंच गए. चूंकि गुड़गांव से अमर और रंजीत अच्छी तरह वाकिफ थे, इसलिए गुड़गांव सेक्टर-10 के शक्तिनगर में रह रहे अपने जानकार की मदद से एक कमरा किराए पर ले लिया.

चूंकि अमर ने मनीषा से शादी करने का वादा किया था, इसलिए अपने ही कमरे में 2 दोस्तों के सामने उस ने मनीषा से शादी कर ली. अग्नि के फेरे लगा कर पर मनीषा की मांग में सिंदूर भर दिया. इस के बाद दोनों पतिपत्नी की तरह रहने लगे.

शादी के बाद अमर ने मनीषा को बताया कि वह शादीशुदा तो है ही, उस का एक बच्चा भी है. इस पर मनीषा ने हैरानी से कहा, ‘‘तुम ने यह बात पहले क्यों नहीं बताई?’’

‘‘तुम ने कभी पूछा ही नहीं, इसलिए मैं ने नहीं बताया. लेकिन तुम परेशान मत होओ, भले ही मैं शादीशुदा हूं, तुम्हारा पूरा खयाल रखूंगा. पहली पत्नी से मेरा एक बच्चा है. एक बच्चा मैं तुम से चाहता हूं. मैं वादा करता हूं कि तुम्हें हर तरह से खुश रखने की कोशिश करूंगा.’’ अमर ने कहा.

मनीषा बिना सोचेसमझे ऐसा कदम उठा चुकी थी जो उस के लिए नुकसानदायक साबित हुआ था. वह अमर से शादी कर चुकी थी. इसलिए घर वापस जाना उस ने जरूरी नहीं समझा. लिहाजा उस ने तय कर लिया कि अब चाहे जो भी हो, वह अमर के साथ ही रहेगी. आगे जो होगा, देखा जाएगा. वह अमर के साथ हंसीखुशी से रहने लगी.

15-20 दिनों बाद अमर का मनीषा से मन भर गया. अब मनीषा उसे गले की हड्डी लगने लगी. वह उस से छुटकारा पाना चाह रहा था. इस बारे में उस ने दोस्त रंजीत से बात की. उसे अकेली छोड़ कर वह जा नहीं सकता, क्योंकि बाद में मनीषा द्वारा पुलिस से शिकायत करने पर उस के फंसने की आशंका थी. अगर वह उस की हत्या कर देता तो भी उस के जेल जाने की आशंका थी.

ऐसे में रंजीत ने उसे कोठे पर बेचने की सलाह दी. कोठे पर जाने के बाद कोई भी लड़की बाहर नहीं आ सकती और इस में उन्हें अच्छीखासी रकम भी मिल जाती. दोस्त का यह आइडिया अमर को पसंद आ गया. उन्होंने जीबी रोड के कोठों का नाम सुना था. वे उसे दिल्ली के जीबी रोड के किसी कोठे पर बेचना चाहते थे.

वे ऐसे किसी दलाल को नहीं जानते थे, जो उन का यह काम करा देता. वे सीधे कोठे पर यह सोच कर नहीं जा रहे थे कि सौदा न पटने पर कहीं कोठे वाली पुलिस से पकड़वा न दे. लिहाजा वे मनीषा को कोठे पर बेचने का कोई और तरीका खोजने लगे.

आजकल ज्यादातर लोगों के पास स्मार्टफोन है, जिन पर इंटरनेट का खूब प्रयोग होता है. इस स्मार्टफोन ने लोगों को स्मार्ट बना दिया है. उन्हें कोई भी जानकारी चाहिए, झट गूगल पर सर्च करने बैठ जाते हैं. रंजीत के दिमाग में जाने क्या आया कि वह गूगल पर सैक्स से संबंधित साइट्स खोजने लगा. इस के बाद उस ने यूट्यूब पर जीबी रोड रेडलाइट एरिया से संबंधित वीडियो देखीं.

एक वीडियो में जीबी रोड के कोठों के अंदर के दृश्य भी दिखाए गए थे. वीडियो देखते देखते रंजीत की नजर दीवार पर लिखे एक फोन नंबर 8750870424 पर गई, जहां लिखा था कि कोई भी समस्या या शिकायत इस नंबर पर करें.

यह फोन नंबर दिल्ली के कमला मार्केट थाने के थानाप्रभारी का था. यह फोन नंबर मध्य जिला के डीसीपी ने इस आशय से जीबी रोड के कोठों पर लिखवाया था कि किसी जरूरतमंद लड़की से जबरदस्ती धंधा कराए जाने पर वह इस नंबर पर शिकायत कर सके.

रंजीत को यह जानकारी नहीं थी कि यह नंबर पुलिस का है. उस ने सोचा कि यह कोठे के संचालक का होगा. दोनों दोस्तों ने तय कर लिया कि इस फोन नंबर पर बात कर के वे मनीषा को बेचने की कोशिश करेंगे.

रंजीत ने अमर को यह बात पहले बता दी थी कि मनीषा का सौदा जितने रुपयों का होगा, उस में से एक लाख रुपए वह लेगा. इन रुपयों को खर्च करने का प्लान भी उस ने बना लिया था. रंजीत ने तय कर लिया था कि वह कोई पुरानी कार खरीद कर अपने घर ले जाएगा. इस के बाद अमर ने उसी नंबर पर फोन किया.

जैसे ही अमर ने पूछा कि आप जीबी रोड से बोल रहे हैं तो थानाप्रभारी सुनील कुमार ढाका ने हां कह दिया. क्योंकि इस से पहले भी उन के पास ऐसी कई काल आ चुकी थीं. उन्होंने अमर से ऐसे बात की, जैसे वह किसी कोठे के संचालक हों.

उन की इसी समझदारी पर मनीषा कोठे पर बिकने से बच गई. उन्होंने अमर और रंजीत के खिलाफ भादंवि की धारा 120बी, 363, 366ए, 376, 370 और पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. उन्हें गिरफ्तार कर 23 नवंबर, 2017 को न्यायालय में महानगर दंडाधिकारी कपिल कुमार के समक्ष पेश कर एक दिन का रिमांड लिया.

रिमांड अवधि में पूछताछ करने के बाद उन्हें फिर से 24 नवंबर को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मनीषा को चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी भेज दिया.

थानाप्रभारी के इस कार्य की पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक, डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा ने भी सराहना की है. उन्होंने इसे एक सच्ची समाजसेवा बताया. मनीषा बिहार के मोतिहारी जिले के लौकी थानाक्षेत्र की थी. लिहाजा थानाप्रभारी सुनील कुमार ढाका ने इंटरनेट से मोतिहारी के एसएसपी औफिस का नंबर हासिल किया. फिर उन्होंने एसएसपी औफिस से थाना लौकी का फोन नंबर लिया.

वहां के थानाप्रभारी रामचंद्र चौपाल को उन्होंने मनीषा के बरामद होने की सूचना दी तो उन्होंने बताया कि मनीषा एक गरीब परिवार की है. घर वालों ने उस के भाग जाने की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई थी.

बहरहाल, थानाप्रभारी रामचंद्र चौपाल ने मनीषा के घर वालों को मनीषा के दिल्ली से बरामद होने की जानकारी दे दी. कथा संकलन तक मनीषा के घर वाले दिल्ली नहीं पहुंच सके थे. मामले की जांच थानाप्रभारी सुनील कुमार ढाका कर रहे हैं.

जीबी रोड के कोठे में लिखे इस फोन पर भले ही किसी शोषिता ने पुलिस से शिकायत न की हो, पर इस नंबर ने एक लड़की को शोषित होने से जरूर बचा लिया. देश भर के सभी रेडलाइट एरिया में यदि स्थानीय पुलिस के नंबर इसी तरह प्रसारित किए जाएं तो और भी तमाम लड़कियां देह व्यापार के धंधे में जाने से बच सकती हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. मनीषा परिवर्तित नाम है.