एल्विश यादव : जहर भी, ड्रग्स भी, सांप भी, लड़कियां भी – भाग 3

एल्विश के खिलाफ नोएडा सेक्टर-49 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 48ए, 49, 50, 51 और भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 120बी (अपराध की साजिश में शामिल) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर में कहा गया है कि उस के द्वारा रेव पार्टी में जहरीले सांपों को लाया जाता था, साथ ही विदेशी लड़कियां भी इस पार्टी में शामिल होती थीं.

आईपीसी की धारा 120बी की बात की जाए तो इस के तहत 6 महीने की सजा या जुरमाना या दोनों हो सकते हैं. वहीं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अलगअलग धाराओं के तहत दर्ज मामलों की बात करें तो इस में 3 साल तक की सजा हो सकती है और 10 हजार रुपए तक का जुरमाना लग सकता है. इस के अलावा आरोपी दूसरी बार भी ऐसा ही अपराध करेगा तो उसे 7 साल तक की सजा और 25 हजार रुपए तक जुरमाना लगाया जा सकता है.

पुलिस की भूमिका रही संदिग्ध

इस मामले को ले कर पुलिस की भूमिका भी कुछ कम संदिग्ध नहीं रही. उस की गिरफ्तारी को ले कर 3 राज्यों की पुलिस सक्रिय रही जरूर, लेकिन एल्विश भी अपनी पहुंच का फायदा उठा कर अपने बचाव के रास्ते निकालता रहा.

आखिर में यूपी और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों को इस मामले में दखल देनी पड़ी. उस के बाद एल्विश को नोएडा पुलिस के सामने पेश किया जा सका. उस से 8 नवंबर की आधी रात को 3 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ हुई.

आधी रात के करीब 2 बजे एल्विश यादव कोतवाली सेक्टर 20 पहुंचा था और वहां उस से पुलिस की टीम ने पूछताछ की. इस दौरान सांपों का जहर सप्लाई करने के मामले में कई सवाल पूछे गए. उसे 7 नवंबर को नोएडा पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था.

दोबारा पूछताछ करने की बात कह कर उसे छोड़ दिया गया, लेकिन गिरफ्तार आरोपी राहुल की रिमांड मिलने के बाद पुलिस एल्विश को उस के सामने बिठा कर पूछताछ करना चाहती है. इस मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड की सुनवाई कोर्ट में जारी की है और इस की पुलिस टीम जांच में जुटी हुई है.

नोएडा पुलिस ने जिन 5 सपेरों को 9 सांपों के साथ गिरफ्तार किया था. इन के पास सांप रखने का कोई लाइसेंस भी नहीं मिला था. वन विभाग की तरफ से कुछ सांपों के लिए लाइसेंस भी दिया जाता है. पुलिस अब इस मामले में विधिक राय ले कर आगे की कार्यवाई कर रही है और इस के बाद ही अलग धाराएं जोड़ी जा सकती हैं.

सांप के जहर का नशा और असर

नशे के आदी हो चुके लोगों के बीच सांप के जहर वाली नशीली दवा का चलन अब तेजी से बढ़ा है. रेव पार्टियों में सांपों के जहर का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है. इसे नशेड़ी मार्फीन और कोकीन जैसे ड्रग्स की तरह ही इसे इस्तेमाल करते हैं. हालांकि स्नेक वेनम ड्रग का इस्तेमाल आम लोगों की जानकारी से परे रहा है.

नैशनल इंस्टीट्यूट औफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक लोग मनोरंजन के लिए और अन्य नशीले पदार्थों के विकल्प के रूप में सांप और बिच्छू जैसे सरीसृपों के जहर का उपयोग करते रहे हैं. नैशनल लाइब्रेरी औफ मैडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में ऐसे कई ड्रग्स का चलन बढ़ रहा है, जो अल्कोहल एडिक्शन को बढ़ाते हैं. सांप का जहर भी इसी कैटेगरी में आता है. इन्हें सायकोएक्टिव पदार्थ कहते हैं. गांवों से लेकर शहरों तक इन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

कुछ साल पहले भारत में एक ऐसा भी मामला सामने आया था, जिस में 28 साल के एक युवा ने सांप का जहर पी लिया था. इस की शुरुआत अल्कोहल में सांप का जहर मिलाने से हुई थी. पहले उस ने शराब और जहर को मिला कर पीना शुरू किया, फिर एडिक्शन इतना बढ़ा कि उस ने सांप का जहर ही पी लिया.

जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस के लिए सांपों की कुछ खास प्रजातियों का इस्तेमाल किया जाता है. इस में नाजानाजा (कोबरा), औफियोड्रायस वर्नेलिस (ग्रीन स्नेक) और बंगेकरस केरिलियुस (क्रामन करैत) शामिल हैं. मुंबई और मंगलुरू समेत देश के कई शहरों में सांप के जहर के एडिक्शन के मामले सामने आ चुके हैं.

इंडियन जर्नल औफ फिजियोलौजी ऐंड फार्मेकोलौजी की रिपोर्ट के अनुसार कांटेदार पूंछ वाली छिपकलियों, जहरीले शहद, स्पैनिश मक्खियों और कैंथराइड्स की जली हुई लाशों का इस्तेमाल रेव पार्टियों में डोपिंग उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है.

ज्यादातर लोग लंबे समय तक नशे में रहने के लिए रेव पार्टियों में सांप के जहर का सेवन करते हैं. सांप के जहर का नशा करने के लिए लोग आमतौर पर सांप को अपने होंठों के पास रख कर खुद को डसवाते हैं. लोग अपनी जीभ या कान के निचले हिस्से पर भी सांप से डसवाते हैं.

रेव पार्टियों में सामान्य ड्रग्स की एक गोली की कीमत 2 से 5 हजार के बीच होती है, वहीं सांप के जहर से बनी एक गोली की कीमत 25 हजार से भी ज्यादा होती है. जो लोग सांप के जहर का सेवन करते हैं वे पहले से ही विभिन्न मनोदैहिक पदार्थों का उपयोग कर रहे होते हैं.

अधिकांश लोग हर समय नशे में रहने के लिए सांप के जहर को पसंद करते हैं. जब जहर व्यक्ति के रक्त में मिल जाता है तो यह सेरोटोनिन, ब्रैडीकाइनिन, पेप्टाइड्स और प्रोस्टाग्लैंडिंस छोड़ता है, जिन का शामक प्रभाव होता है.

हालांकि सांप के जहर का मानव शरीर और मस्तिष्क पर कोई न्यूरोटौक्सिक प्रभाव नहीं होने का कोई स्पष्ठीकरण नहीं दिया गया है. सांप के काटने के बाद होने वाला मनोदैहिक प्रभाव हर व्यक्ति में अलगअलग होता है, लेकिन इस का प्रभाव मार्फीन के समान होता है. सांप के काटने के बाद लक्षणों में सुस्ती, धुंधली दृष्टि, चक्कर आना, उनींदापन, तीव्र निरंतर उत्तेजना और घबराहट आदि शामिल हैं.

सांप के जहर को सायकोएक्टिव ड्रग की कैटेगरी में रखा गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक, सायकोएक्टिव ड्रग सीधे दिमाग पर असर छोड़ते हैं. अल्कोहल और निकोटिन भी इसी कैटेगरी में आते हैं. कानूनी तौर पर इन का इस्तेमाल दवा निर्माण और रिसर्च के क्षेत्र में किया जाता है. बिना डाक्टरी सलाह या प्रिस्क्रिप्शन के इसे खरीदना या किसी को देना कई देशों में अपराध के दायरे में आता है.

इस तरह के ड्रग का इस्तेमाल सीधे तौर पर मौत का खतरा बढ़ाता है. डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के ड्रग का इस्तेमाल मौत की वजह बनता है. 15 से 64 आयुवर्ग की दुनिया की 5.5 फीसदी (27 करोड़) आबादी ने पिछले साल ऐसे सायकोएक्टिव ड्रग का इस्तेमाल किया. इस में सालाना 5 लाख लोगों की मौत हो गई, जिस में साढ़े 3 लाख पुरुष और डेढ़ लाख महिलाएं थीं.

एल्विश यादव : जहर भी, ड्रग्स भी, सांप भी, लड़कियां भी – भाग 2

कौन हैं एल्विश यादव

यूट्यूबर से प्रसिद्धि पा कर बिगबौस ओटीटी बिगबौस-2 के विजेता बने एल्विश यादव कोई अपरिचित नाम नहीं है. उस की एक विशेष पहचान यूट्यूबर के साथसाथ एक वीडियोग्राफर या मनोरंजनकर्ता के रूप में भी है.

मूलरूप से हरियाणा के गुरुग्राम का रहने वाला एल्विश यादव 26 साल का (जन्म की तारीख 14 सितंबर, 1997) है. वह एक मशहूर स्ट्रीमर और गायक है. हालांकि उस के साथ कई विवाद भी जुड़े हुए हैं. उस के संबंध मनोरंजन जगत से ले कर राजनीतिक जगत से भी है.

अमीरजादे की जिंदगी जीने वाले स्टाइलिश एल्विश यादव की आमदनी यूट्यूब के अलावा दूसरे कई स्रोतों से भी होती है. कक्षा 1 से पहले उस का नाम सिद्धार्थ था, लेकिन उस की बड़ी बहन ने अनुरोध किया था कि उस का नाम एल्विश रखा जाए. अपनी बहन के अचानक निधन के बाद उस ने उस की इच्छा का सम्मान करने के लिए अपना नाम बदल कर एल्विश रख लिया.

एल्विश यादव के सितारे अचानक तब बुलंद हो गए थे, जब उस ने बिगबौस ओटीटी 2 में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की थी. अभिषेक मल्हान, मनीषा रानी, बेबिका धुर्वे और पूजा भट्ट के साथ 5 प्रतियोगियों में एक था. शो में आते ही वह छा गया था. घर घर में फेमस हो गया था. विनर बन कर तो उस ने इतिहास रच दिया था.

एल्विश ने 2016 में अपना यूट्यूब चैनल बनाया था और तब से वह फेमस होता चला गया. उस के देश भर में डेढ़ करोड़ से ज्यादा फालोअर्स हैं. उस के यूट्यूब पर 14 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं. वह लगभग 7.5 मिलियन सब्सक्राइबर्स के साथ एक और चैनल, एल्विश यादव व्लौग्स चलाता है. 16 मिलियन से ज्यादा फालोअर्स के साथ यादव की इंस्टाग्राम पर भी फैन फालोइंग है. एल्विश सेलेब्स की रोस्टिंग वीडियो बना कर सब से ज्यादा फेमस हुआ था.

करोड़ों के मालिक एल्विश के पास हरियाणा के गुरुग्राम में 14 करोड़ की कीमत का चारमंजिला आलीशान घर है. उस के पास तमाम लग्जरी कारें हैं जिन में पोर्श, हुंडई और फौर्च्युनर जैसी अनेक गाड़ियां शामिल हैं. हाल ही में एल्विश ने दुबई में भी करोड़ों का घर खरीदा है. यूट्यूबर ने अपने दुबई के घर का होम टूर भी कराया था.

एक अनुमान के मुताबिक उस की मासिक कमाई करीब 10-15 लाख रुपए और नेटवर्थ करीब 40 करोड़ रुपए बताई जाती है. उस के 2 यूट्यूब चैनल हैं. इन के अलावा वह कपड़ों के ब्रांड सिस्टम क्लोदिंग का मालिक है. वह अपने पापा राम अवतार सिंह यादव और मम्मी सुषमा यादव के साथ गुरुग्राम में ही रहता है.

विवादों में रहे हैं एल्विश यादव

वन्य जीव अधिनियम के तहत केस दर्ज होने के बाद उस पर सांपों की तस्करी, उन का जहर सप्लाई करने और गैरकानूनी रेव पार्टी का नया विवाद जुड़ गया है. हालांकि इन आरोपों को एल्विश यादव ने निराधार बताया है. इस से पहले भी उस का नाम कई विवादों में शामिल रहा है.

गमला चोरी केस से ले कर उस का नाम अभिनेता सलमान खान को रोस्ट करने तक के मामले को ले कर विवाद में आ चुका है. इतना ही नहीं, उस पर कई बार सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप लग चुके हैं.

सोशल मीडिया पर 2023 मार्च की शुरुआत में एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिस में एक एसयूवी कार से कुछ लोग जी20 के लिए लगाए गए गमलों को दिल्लीगुड़गांव हाईवे के शंकर चौक से चुराते हुए दिखे थे. इस कार पर वीआईपी नंबर प्लेट लगी हुई थी, जिस के बाद सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जाने लगा कि जिस कार से गमले चोरी किए गए, वह एल्विश यादव की थी या एल्विश उसे इस्तेमाल करता था.

एल्विश ने इन आरोपों से साफ इंकार कर दिया था, जिस के बाद हरियाणा पुलिस ने इस मामले में मनमोहन यादव नाम के शख्स को गिरफ्तार किया था.

साल 2019 में एल्विश ने सलमान खान पर एक बड़ा रोस्ट वीडियो बनाया था, जिस में उस ने कहा था कि पूरी बौलीवुड इंडस्ट्री सलमान खान से डरती है. जब उस ने विवेक ओबेराय का करिअर खा लिया तो कोई सपोर्ट में नहीं आया. सलमान ने इंडस्ट्री में सिर्फ महिलाओं को लांच किया है. वह जरूरतमंदों की मदद करने वाला अभिनेता है और उन पर अपनी कार भी चढ़ाता है. उस पर हिट ऐंड रन और काले हिरण का केस चल रहा है और वह अभी भी खुलेआम घूम रहा है. वह सूरज पंचोली जैसे अन्य अपराधियों की भी मदद करता है.

इस के साथ उस ने यह भी दावा किया था कि उसे साल 2019 में बिगबौस का औफर मिला था, लेकिन औडिशन राउंड पास करने के बावजूद उस ने इसे नहीं किया. हालांकि, बिगबौस ओटीटी 2 में सलमान खान ने एल्विश को अच्छे से लताड़ लगाई थी. एल्विश यादव की तरह ध्रुव राठी भी यूट्यूबर है. ट्विटर (अब एक्स) पर अपनीअपनी आइडियोलौजी को ले कर दोनों के बीच जम कर विवाद हो चुका है.

एल्विश यादव ने ध्रुव राठी को एक्सपोज करते हुए एक वीडियो शेयर किया था, जिस में उस ने ध्रुव को सरकार के खिलाफ उस की क्रिटिकल अप्रोच को ले कर फटकार लगाई थी. इस के साथ उस ने ध्रुव राठी पर उस के फालोअर्स को बरगलाने का भी आरोप लगाया था.

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने एल्विश यादव के खिलाफ 2021 में एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायत में स्वरा ने यूट्यूबर पर उस की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था. स्वरा का कहना था कि यूट्यूबर ने न सिर्फ फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ के सीन को ले कर उन की इमेज खराब करने की कोशिश की, बल्कि सोशल मीडिया पर उस के खिलाफ आपत्तिजनक हैशटैग भी ट्रेंड कराए.

यहां पर आप को बता दें कि एक समय पर एल्विश यादव ने लक्ष्य चौधरी के साथ मिल कर कुशा कपिला और अन्य फेमस यूट्यूबर को रोस्ट किया था.

स्नेक वेनम ड्रग सप्लाई का आरोप

रेव पार्टीज में स्नेक वेनम ड्रग इस्तेमाल को ले कर बुरे फंसे एल्विश पर लगातार शिकंजा कसता चला गया. उस पर और उस के 5 साथियों पर सांप की तस्करी के आरोप लगे हैं. उस के गैंग से 20 मिलीलीटर सांप का जहर, 9 जहरीले सांप बरामद हुए हैं. आरोप है कि इन का इस्लेमाल रेव पार्टी के दौरान एल्विश ने किया है. एफआईआर के मुताबिक उन के पास से 5 कोबरा, एक अजगर और एक दोमुंहा सांप, एक रैट स्नेक बरामद किया गया.

एल्विश यादव के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किए गए हैं. वन्य जीवन कानून के अनुसार किंग कोबरा, मोनोकल्ड कोबरा, स्पेक्टैकल्ड कोबरा और रसेल वाइपर जैसे जहरीले सांप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 2 में रखे गए हैं.

ऐसे सांपों को पालना या उन का जहर निकालना, उन के खिलाफ क्रूरता है, जिस के लिए कठिन से कठिन सजा मिल सकती है. ऐसे सांपों से छेड़छाड़ करने पर अधिकतम 3 से 7 साल की कैद हो सकती है. आर्थिक दंड भी एक हजार रुपए तक लगाया जा सकता है. यह राशि बढ़ाई भी जा सकती है.

रैट स्नेक और चेकर्ड कीलबैक और औलिव कीलबैक जैसे पानी वाले सांपों को भी अनुसूची 2 के तहत वर्गीकृत किया गया है. अगर इन्हें पाला जाता है, चोट पहुंचाई जाती है या इन्हें खतरे में डाला जाता है तो 10 हजार रुपए का जुरमाना या 7 साल तक की कैद हो सकती है.

एल्विश यादव : जहर भी, ड्रग्स भी, सांप भी, लड़कियां भी – भाग 1

पिछले दिनों सोशल मीडिया में प्रतिबंधित सांप के साथ एक वीडियो वायरल हो गया था. वीडियो में हरियाणा का बहुचर्चित रैपर एल्विश यादव नजर आ रहा था. वह ओटीटी बिगबौस 2 का विजेता रहा है. उस के गानों को ले कर लोकप्रियता युवाओं में जबरदस्त बनी हुई है. साथ ही वह सिनेमा और टेलीविजन के सितारों को ले कर अकसर विवादों में भी रहा है. इस की खबर ज्यों ही पीपुल्स फार एनिमल्स (पीएफए) को मिली, उस के कान खड़े हो गई. संस्था की टीम चौकन्नी हो गई.

दरअसल, संस्था को इस की संस्थापक पूर्व भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुकीं मेनका गांधी की सख्त हिदायत रही है कि किसी भी एनिमल पर अत्याचार या अनैतिक ढंग से इस्तेमाल करने की कहीं से भी कोई शिकायत मिले, इसे रोकने की पहल के साथसाथ स्थानीय थाने में इस की तुरंत शिकायत की जानी चाहिए.

प्रतिबंधित एनिमल सांप के दुरुपयोग की सूचना मिलते ही पीएफए की टीम ने 15 अक्तूबर, 2023 को गुरुग्राम पुलिस के आयुक्त से शहर के मशहूर रैपर एल्विश समेत अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत कर दी.

शिकायत में पीएफए के अधिकारी सौरभ गुप्ता ने बताया कि एल्विश यादव ने अपने साथियों के साथ मिल कर गुरुग्राम में 25 मिनट का एक वीडियो बनाया है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. इसे उन के 16 मिलियन से अधिक फालोअर देख चुके हैं. इस शिकायत के बावजूद 2 हफ्ते से अधिक दिनों तक पुलिस द्वारा कोई ऐक्शन नहीं लिया गया. इस संदर्भ में किसी भी तरह की कार्यवाई नहीं की गई. इसे देखते हुए पीएफए ने नए सिरे से पहल की.

सौरभ गुप्ता ने एक बार फिर नोएडा सेक्टर-49 थाने की पुलिस से संपर्क किया. इस शिकायत के साथ एफआईआर दर्ज करवाई कि उसे यूट्यूबर एल्विश यादव और उस के साथियों के द्वारा जिंदा सांपों के साथ दिल्ली एनसीआर के फार्महाउस में वीडियो शूट करवाने की सूचना मिली है.

वह गैरकानूनी रूप से पार्टियों में इन सांपों और उन के जहर का भी इस्तेमाल करता है. गुप्ता ने पुलिस को यह भी जानकारी दी कि एल्विश यादव की रेव पटियां होती थीं, जिस में विदेशी लड़कियों की भी भरमार रहती थी. इन पार्टियों में विदेशी लड़कियों को बुला कर स्नेक वेनम और दूसरे ड्रग्स का सेवन किया जाता था.

बताया जाता है कि यह शिकायत एनजीओ पीएफए ने जुटाए गए तथ्यों के आधार पर की थी. उस के एक मुखबिर ने एल्विश यादव से संपर्क कर नोएडा में रेव पार्टी करने व सांपों और कोबरा वेनम का इंतजाम करने के लिए कहा था. जिस पर उस ने अपने एजेंट का नाम बताया था. उस का मोबाइल नंबर देते हुए कहा था कि इस से उस का नाम ले कर बात कर लें.

मुखबिर ने उस कथित एजेंट से एल्विश यादव का नाम लेकर बात की तो वह पार्टी करने को तैयार हो गया. उस ने कहा कि आप जहां कहें, मैं सांपों के साथ अपने साथियों को ले कर आ जाऊंगा. इस तरह से एल्विश नोएडा 51 के सेवरोन बैंक्विट हौल में आने को तैयार हो गया.

इस जानकारी के आधार पर ही इस की सूचना नोएडा के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) को दी गई. नोएडा पुलिस ने वन विभाग के सहयोग से जाल बिछा दिया. पहले से तय समय के मुताबिक 3 नवंबर, 2023 को सांपों के साथ सपेरे सेवरोन बैंक्वेट हाल पहुंच गए. वहां पहले से मौजूद ग्राहकों ने सांपों को देखने की इच्छा जताई. सपेरों ने जैसे ही सांप दिखाए, वैसे ही वहां पुलिस भी पहुंच गई और उन्हें सबूत के साथ रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया गया.

उन की पहचान दिल्ली के टीटूनाथ, राहुल, जयकरन, नारायण और रविनाथ के रूप में हुई. उन्होंने ही पूछताछ में एल्विश यादव का नाम लिया और आरोप लगा दिया कि वह उस के कहने पर ही रेव पार्टी में सांप और सांप का जहर लाते थे.

पुलिस को मिला एक महत्त्वपूर्ण औडियो

उस के बाद ही नोएडा पुलिस ने एनजीओ की शिकायत पर सांप मामले में एल्विश यादव को भी आरोपी बना लिया. साथ ही एल्विश यादव के खिलाफ इस आधार पर नामजद एफआईआर कर दी गई. बाद में इस मामले को नोएडा के सेक्टर-20 थाने में ट्रांसफर कर दिया गया. इस की जांच इंसपेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी को सौंप दी गई.

गिरफ्तारों में दिल्ली के मोलड़बंद के रहने वाले राहुल ने दावा किया कि वह एल्विश यादव के कहने पर सांपों की सप्लाई करता था. पुलिस को जांच में उस के कई आडियो भी मिले, जिस में राहुल और किसी एनजीओ कर्मी से फोन पर बातचीत थी. यह बातचीत राहुल यादव और पीएफए टीम के मेंबर के बीच हुई थी. पीएफए ने कई सवाल किए थे, जिन के जवाब से पुलिस ने अनुमान लगाया कि एल्विश यादव की पार्टी में आखिर क्या होता था? बातचीत कुछ इस तरह हुई थी

“;…आप मुझे न, 1-2 वीडियो एल्विश भाई के भी भेज देना, जो शो किया होगा उस के. आप ने वो शो तो बहुत बढ़िया किया होगा.”

पीएफए मेंबर की रिक्वेस्ट पर राहुल यादव बोला, “;वो प्रोग्राम तो मैं ने किया था, लेकिन मैं बंदों को छोड़ कर वापस आ गया था. वहां पर विदेशी ही थे सारे. वो किसी विदेशी की बर्थडे पार्टी थी.”

“;नोएडा में पार्टी थी या दिल्ली में?” पीएफए मेंबर ने सवाल किया.

“;नहीं, नहीं… छतरपुर फार्महाउस में पार्टी थी, दिल्ली में.” राहुल बोला.

“;नोएडा में भी तो हुई थी पार्टी, वो क्या कहते हैं रेव पार्टी…” पीएफए मेंबर ने पार्टी के बारे में और अधिक बातें जाननी चाही.

“;हांहां, वो क्या है न कि प्रोग्राम करने वाले लड़के छोड़ कर आया था, मैं वीडियो नहीं बना पाया था. इस टाइप का प्रोग्राम मेरे से ऊपर कोई करता नहीं है.” राहुल बोला.

“;हूं..” पीएफए मेंबर धीमी आवाज में बोला.

“;दिल्ली में बहुत चैकिंग होती है, इसलिए थोड़ा संभल कर रहना होता है. हमारे पास हर तरह का सांप है. सब का जहर निकाल दिया है, खतरे की कोई बात नहीं है. हमारे पास अजगर, ब्लैक कोबरा, स्माल कोबरा, घोड़ा पछाड़ होगा, पदम नाग होगा.” राहुल बोला.

“;तुम जो एल्विश के यहां करते हो वहां कैसे ले जाते हो?” पीएफए मेंबर ने सवाल किया.

“;वहां पर क्या है, उन का प्रोग्राम रहता है विदेशियों वाला, जो उन का बुक करता है. उन का कौंटेक्ट भी तो कितना बड़ा है. उन के (एल्विश) वहां तो पुलिस वाले भी नहीं आते न. जब हम प्रोग्राम करने जाते हैं छतरपुर में, वहां सब को पता होता है कि उन के फार्महाउस में प्रोग्राम हो रहा है. लेकिन हां, ज्यादा देर नहीं होता, सिर्फ आधा घंटा. उस के बाद सब से पहले हमारी टीम को वो वहां से निकालते हैं. इन चीजों का रिस्क वो भी नहीं पालते हैं.” राहुल ने हिदायत के साथसाथ पार्टी के बारे में संक्षिप्त जानकारी भी दे दी थी.

इसी जानकारी को सबूत बना कर पीएफए ने एल्विश यादव के खिलाफ कार्यवाई की थी.

दुश्मन प्यार के

राजू को पड़ोस में रहने वाली सर्वेश से प्यार हुआ तो हर वक्त वह उस की एक झलक पाने की फिराक में रहने लगा. पूरा पूरा दिन वह उसे देखने के लिए दरवाजे पर चारपाई डाले पड़ा रहता. वह उस से मिल कर अपने दिल की बात कहना चाहता था. मौके तो उसे तमाम मिले, लेकिन उन मौकों पर वह उस से दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं कर सका.

राजू जिला कांशी रामनगर की कोतवाली खोरो के गांव दतलाना के रहने वाले रामवीर के 2 बेटों में छोटा बेटा था. बड़े बेटे अमर की शादी हो गई थी. शादी के बाद वह खेती के कामों में पिता की मदद करने लगा था. राजू ने हाईस्कूल कर के भले पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन घर का लाडला होने की वजह से घर का कोई काम नहीं करता था. घर का कोई आदमी उस से किसी काम के लिए कहता भी नहीं था.

मांबाप के लिए वह अभी भी बच्चा था, इसलिए वे नहीं चाहते थे कि उन का लाडला उन की आंखों से ओझल हो, इसलिए राजू ने दिल्ली जा कर नौकरी करने की इच्छा जताई तो उन्होंने उसे वहां भी नहीं जाने दिया. क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उन का लाडला बेटा अभी से किसी की गुलामी करे. इसलिए कोई कामधाम न होने की वजह से राजू दिनभर इधरउधर भटकता रहता था.

चारपाई पर पड़ेपड़े ही उस की नजर सर्वेश पर पड़ी थी तो कोई कामधाम न होने की वजह से उस की ओर आकर्षित हो गया था. कोई कामधाम न होने की ही वजह से हुआ था. जबकि सर्वेश को वह बचपन से ही देखता आया था. पहले ऐसा कुछ नहीं हुआ था.

सर्वेश राजू के पड़ोस में ही रहने वाले सुरेश की बेटी थी. वह कासगंज में किसी मशीनरी स्टोर पर नौकरी करता था, इसलिए सुबह टे्रन से कासगंज चला जाता था तो रात को ही लौटता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा बेटी सर्वेश तथा एक बेटा नीरज था. अपने इस छोटे से परिवार को सुखी रखने के लिए वह रातदिन मेहनत करता था.

पड़ोसी होने के नाते सर्वेश और राजू का आमनासामना होता ही रहता था. लेकिन जब से उस के लिए राजू के मन में आकर्षण पैदा हुआ, तब से सर्वेश के सामने पड़ने पर उस का दिल तेजी से धड़कने लगता. राजू अब सर्वेश के लिए बेचैन रहने लगा था. बेचैनी बरदाश्त से बाहर होने लगी तो एक दिन सर्वेश जब अपने दरवाजे पर खड़ी थी तो उस के पास जा कर राजू ने कहा, ‘‘सर्वेश, मैं तुम से एक बात कहना चाहता हूं. अगर आज शाम को तुम प्राइमरी स्कूल में आ जाओ तो मैं वह बात कह कर अपने दिल का बोझ हलका कर लूं.’’

‘‘जो बात कहनी है, यहीं कह दो. अंधेरे में वहां जाने की क्या जरूरत है?’’ सर्वेश ने बोली.

‘‘नहीं, वह बात यहां नहीं कही जा सकती. शाम को स्कूल में मिलना.’’ कह कर राजू चला गया.

सर्वेश इतनी भी बेवकूफ नहीं थी कि वह स्कूल में बुलाने का मकसद न समझती. वह सोच में पड़ गई कि उस का वहां जाना ठीक रहेगा या नहीं? वह भी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी. उस के मन में भी लालसा उठ रही थी कि वह स्कूल जा कर देखे तो राजू उस से क्या कहता है? वहां जाने में हर्ज ही क्या है? शाम होतेहोते उस ने स्कूल जा कर राजू से मिलने जाने का निर्णय कर लिया.

शाम को वह प्राइमरी स्कूल पहुंची तो राजू उसे वहां इंतजार करता मिल गया. राजू ने उस के पास आ कर कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास था कि तुम जरूर आओगी.’’

‘‘लेकिन अब बताओ तो सही कि तुम ने मुझे यहां बुलाया क्यों है?’’

राजू ने उस का हाथ पकड़ कह कहा, ‘‘सर्वेश, मुझे तुम से प्यार हो गया है.’’

सर्वेश को पता था कि राजू कुछ ऐसी ही बात कहेगा. लेकिन अभी वह इस के लिए तैयार नहीं थी. इसलिए अपना हाथ छुड़ा कर बोली, ‘‘यह अच्छी बात नहीं है. अगर यह बात मेरे पापा को पता चल गई तो वह दोनों को ही मार डालेंगे.’’

‘‘अब प्यार हो गया है तो मरने से कौन डरता है. तुम भले ही मुझ से प्यार न करो, लेकिन मैं तुम से प्यार करता रहूंगा.’’ राजू ने कहा.

राजू की इस दीवानगी पर सर्वेश ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘‘तुम पागल तो नहीं हो गए हो? मुझे मरवाना चाहते हो क्या?’’

‘‘प्यार में आदमी पागल ही हो जाता है. सर्वेश सचमुच मैं पागल हो गया हूं. अगर तुम ने मना किया तो मैं मर जाऊंगा.’’ राजू रुआंसा सा हो कर बोला.

प्यार सचमुच दीवाना होता है. इस का नशा दिल और दिमाग में चढ़ने में देर कहां लगती है. राजू ने सर्वेश की जवान उमंगों को हवा दी तो उस पर भी प्यार का सुरूर चढ़ने लगा. उसे राजू की बात भा गई. प्रेमी के रूप में वह उसे अच्छा लगने लगा. लेकिन उसे मांबाप का भी डर लग रहा था. इस के बावजूद उस ने अपना हाथ राजू की ओर बढ़ा दिया.

उसी दिन के बाद यह प्रेमी युगल जिंदगी के रंगीन सपने देखने लगा. जब भी मौका मिलता, दोनों एकांत में मिल लेते. इन मुलाकातों में दोनों साथसाथ जीनेमरने की कसमें खाने लगे थे. लेकिन एक बात का डर तो था ही कि वे कसमें चाहे जितनी खाते, यह इतना आसान नहीं था. मुलाकातों में दोनों इतने करीब आ गए कि उन के शारीरिक संबंध भी बन गए.

सर्वेश जानती थी कि उस के मांबाप उस की शादी किसी अच्छे परिवार के कमाने वाले लड़के से करना चाहते हैं. जबकि राजू कोई कामधाम नहीं करता था. वह ज्यादा पढ़ालिखा भी नहीं था. इसलिए किसी दिन एकांत में मिलने पर उस ने राजू से कहा, ‘‘राजू, अगर तुम मुझे पाना चाहते हो तो अपने पिता की खेती संभालो या फिर कोई नौकरी कर लो. तभी हमारे घर वाले मेरा हाथ तुम्हें दे सकते हैं.’’

गांव में कोई नौकरी तो थी नहीं, खेती वह कर नहीं सकता था. इसलिए उस ने कहा, ‘‘सर्वेश, मैं तुम से दूर जाने की सोच भी नहीं सकता. खेती मुझ से हो नहीं सकती. लेकिन तुम कह रही हो तो कुछ न कुछ तो करना ही होगा.’’

राजू और सर्वेश अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचा पाते, उस के पहले ही लोगों की नजर उन पर पड़ गई. गांव के किसी आदमी ने दोनों को एकांत में मिलते देख लिया. उस ने यह बात सुरेश को बताई तो घर आ कर उस ने हंगामा खड़ा कर दिया. उस ने पत्नी को भी डांटा और सर्वेश को भी.

उस ने सर्वेश को चेतावनी भी दे दी, ‘‘अब तुम अकेली कहीं नहीं जाओगी.’’

सुरेश जानता था कि बेटी इतनी आसानी से नहीं मानेगी. इसलिए खाना खा कर वह पत्नी मोहिनी के पास लेटा तो चिंतित स्वर में बोला, ‘‘मुझे लगता है, अब हमें सर्वेश की शादी कर देनी चाहिए. क्योंकि अगर कोई ऊंचनीच हो गई तो हम गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रह पाएंगे.’’

‘‘मैं भी यही सोच रही हूं. आप लड़का देख कर उस की शादी कर दीजिए. सारा झंझट अपने आप खत्म हो जाएगा.’’ मोहिनी ने कहा.

सुरेश ने रामवीर से भी कहा था कि वह राजू को सर्वेश से मिलने से रोके. गांव का मामला था, इसलिए रामवीर को राजू को डांटाफटकारा ही नहीं, गांव के लड़कों के साथ दिल्ली भेज दिया. वे लड़के पहले से ही दिल्ली में रहते थे. उन्होंने राजू को भी दिल्ली में नौकरी दिलवा दी.

राजू दिल्ली चला गया तो सुरेश को थोड़ी राहत महसूस हुई. उस ने सोचा कि राजू के वापस आने से पहले वह अगर सर्वेश की शादी कर दे तो ठीक रहेगा. किसी रिश्तेदार की मदद से उस ने अलीगढ़ के थाना दादों के गांव बरतोलिया के रहने वाले डोरीलाल के बेटे भूरा से सर्वेश की शादी तय कर दी.

डोरीलाल का खातापीता परिवार था. बेटा भूरा गुजरात में रहता था. सुरेश का सोचना था कि शादी के बाद भूरा सर्वेश को ले कर गुजरात चला जाएगा तो वह पूरी तरह से निश्चिंत हो जाएगा. यही सब सोच कर सुरेश ने सर्वेश की शादी भूरा से कर दी.

सर्वेश की शादी की जानकारी राजू को हुई तो पहले उसे विश्वास ही नहीं हुआ. सर्वेश ने कसम तो उस के साथ जीनेमरने की खाई थी, फिर उस ने दूसरे से शादी क्यों कर ली. प्रेमिका की बेवफाई पर उसे बहुत गुस्सा आया. इस के बाद उस का मन नौकरी में नहीं लगा और वह नौकरी छोड़ कर गांव आ गया.

राजू का आना मांबाप को बहुत अच्छा लगा. अब उन्हें चिंता भी नहीं थी, क्योंकि सर्वेश की शादी हो गई थी. लेकिन राजू काफी तनाव में था. वह सर्वेश से मिलना चाहता था, लेकिन वह ससुराल में थी. इसलिए तनाव कम करने के लिए उस ने शराब का सहारा लिया.

कुछ दिनों बाद भूरा अपनी नौकरी पर गुजरात चला गया तो सुरेश सर्वेश को लिवा लाया. राजू को सर्वेश के आने का पता चला तो वह उस से मिलने की कोशिश करने लगा. चाह को राह मिल ही जाती है, राजू को भी सर्वेश मिल गई. सुरेश अपनी नौकरी पर कासगंज चला गया था तो मोहिनी दवा लेने डाक्टर के पास गई थी. उसी बीच सर्वेश ने राजू को गली में जाते देखा तो घर के अंदर बुला लिया. अंदर आते ही राजू ने कहा, ‘‘तुम बेवफा कैसे हो गई सर्वेश?’’

‘‘मैं बेवफा कहां हुई. बेवफा होती तो तुम्हें क्यों बुलाती. मेरी मजबूरी थी. किस के भरोसे मैं विरोध करती. तुम दिल्ली में थे और तुम्हें संदेश देने का मेरे पास कोई उपाय नहीं था. भूरा से शादी कर के मैं बिलकुल खुश नहीं हूं. तुम कुछ करो वरना मैं मर जाऊंगी.’’

‘‘अभी तुम्हें थोड़ा इंतजार करना होगा. पहले मैं कामधाम की व्यवस्था कर लूं. उस के बाद तुम्हें अपने साथ दिल्ली ले चलूंगा.’’ राजू ने कहा.

सर्वेश को राजू पर पूरा भरोसा था. इसलिए उस ने उस की यह बात भी मान ली और मौका निकाल कर उस से मिलने लगी. उन के इस तरह एकांत में मिलने की जानकारी सुरेश को हुई तो वह परेशान हो उठा. शादीशुदा बेटी पर वह हाथ भी नहीं उठा सकता था. क्योंकि बात खुल जाती तो उसी की बदनामी होती. दामाद गुजरात में था. वह चाहता था कि दामाद सर्वेश को अपने साथ ले जाए.

उस ने यह बात भूरा से कही भी. तब भूरा ने कहा, ‘‘बाबूजी, मेरी इतनी कमाई नहीं है कि मैं पत्नी को अपने साथ रख सकूं. इसलिए सर्वेश को अभी वहीं रहने दो.’’

सुरेश दामाद को असली बात बता भी नहीं सकता था. बहरहाल इज्जत बचाने के लिए वह सर्वेश को उस की ससुराल पहुंचा आया. लेकिन इस से भी उस की परेशानी दूर नहीं हुई, क्योंकि राजू सर्वेश से मिलने उस की ससुराल भी जाने लगा.

ससुराल में पति नहीं था, इसलिए सर्वेश का जब मन होता, मायके आ जाती. मायके आने पर सुरेश सर्वेश पर नजर तो रखता था, लेकिन वह राजू से मिल ही लेती थी. इसी का नतीजा था कि एक रात सुरेश ने छत पर सर्वेश को राजू के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया.

सुरेश को देख कर राजू तो भाग गया, लेकिन सर्वेश पकड़ी गई. वह उसे खींचता हुआ नीचे लाया और फिर उस की जम कर पिटाई की. सुरेश की समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे अपनी बेटी को राजू से मिलने से रोके. उस ने उस की शादी भी कर दी थी. इस के बावजूद सर्वेश ने उस से मिलना बंद नहीं किया था.

काफी सोचविचार कर सुरेश भूरा के आने का इंतजार करने लगा. वह जानता था कि एक न एक दिन दामाद को बेटी की करतूतों का पता चल ही जाएगा. तब वह सर्वेश को छोड़ भी सकता था. ऐसे में सर्वेश की जिंदगी तो बरबाद होती ही, बदनामी भी होती. इसलिए उस ने सोचा कि वह खुद ही दामाद को सब कुछ बता कर कोई उचित राय मांगे. इस के बाद भूरा गांव आया तो उस ने कहा, ‘‘बेटा भूरा, गांव का ही राजू सर्वेश के पीछे पड़ा है. मैं ने कई बार उसे समझाया, लेकिन वह मानता ही नहीं है.’’

‘‘ठीक है, मैं उस से बात करता हूं.’’ भूरा ने कहा.

‘‘इस तरह बात करने से काम नहीं चलेगा. इस से हमारी ही बदनामी होगी. मैं इस कांटे को जड़ से ही खत्म कर देना चाहता हूं, जिस से सर्वेश और तुम चैन से जिंदगी जी सको.’’ सुरेश ने कहा.

भूरा को भी ससुर की बात उचित लगी. फिर दोनों ने राजू को मौत के घाट उतारने की योजना बना डाली. उसी योजना के तहत भूरा सर्वेश को लिवा कर अपने यहां चला गया.

इस के सप्ताह भर बाद ही थाना खोरों के थानाप्रभारी रामअवतार कर्णवाल को उठेर बांध के पास एक कंकाल के पड़े होने की सूचना मिली. सूचना मिलने के थोड़ी देर बाद थानाप्रभारी घटनास्थल पर पहुंच गए. नरकंकाल सिरविहीन था. कंकाल के पास एक बनियान और पैंट पड़ी थी.

उन्हें याद आया कि 7 दिनों पहले दतलाना के रहने वाले रामवीर के भाई फूल सिंह ने भतीजे राजू की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. उन्होंने सूचना दे कर फूल सिंह को वहीं बुला लिया. कंकाल से तो कुछ पता चल नहीं सकता था, उस के पास पड़े पैंट को देख कर फूल सिंह ने बताया कि यह पैंट उस के भतीजे राजू की है.

फूल सिंह ने राजू की हत्या का संदेह सुरेश पर व्यक्त किया था. उस ने पुलिस को वजह भी बता दी थी कि राजू के संबंध उस की बेटी सर्वेश से थे. थानाप्रभारी ने सुरेश को बुलाने के लिए सिपाही भेजा तो पता चला कि वह घर पर नहीं है. वह दामाद के साथ गुजरात चला गया था. इस से पुलिस को विश्वास हो गया कि राजू की हत्या कर के सुरेश गुजरात भाग गया था.

कपड़ों के अनुसार कंकाल राजू का ही हो सकता था, लेकिन पक्के सुबूत के लिए उस की डीएनए जांच जरूरी थी. डीएनए जांच के लिए हड्डियां विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेज दी गईं. रिपोर्ट आने से पहले रामअवतार कर्णवाल का तबादला हो गया. उन की जगह पर आए सुरेश कुमार.

जनवरी महीने में डीएनए रिपोर्ट आई तो पता चला कि वह कंकाल रामवीर के बेटे राजू का ही था. पुलिस को सुरेश पर ही नहीं, उस के दामाद भूरा, गंगा सिंह और रूप सिंह पर भी संदेह था. क्योंकि ये सभी उसी समय से गायब थे. संयोग से उसी बीच गंगा सिंह गांव आया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने राजू की हत्या का सारा राज उगल दिया.

गंगाराम ने बताया था कि 1 अक्तूबर की शाम को भूरा ने राजू को शराब और मुर्गे की दावत के लिए बुलाया. उस दावत में राजू को इतनी शराब पिला दी गई कि उसे होश ही नहीं रहा. इस के बाद उस की गला दबा कर हत्या कर दी गई.

उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए उठेर बांध पर ले जाया गया, जहां उस के सिर को धड़ से अलग कर दिया गया. सिर को नहर में फेंक दिया गया, जबकि धड़ को बांध के पास ही छोड़ दिया गया. पूछताछ के बाद पुलिस ने गंगा सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस ने मोहिनी से फोन करा कर सुरेश को बहाने से गांव बुलवाया और उसे भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने भी राजू की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस का कहना था कि इज्जत और बेटी की जिंदगी बचाने की खातिर उस ने यह कदम उठाया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे भी अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक भूरा और रूप सिंह पकड़े नहीं जा सके थे. शायद उन्हें गंगा सिंह और सुरेश के पकड़े जाने की जानकारी हो गई थी, इसलिए पुलिस के बहाने से लाख बुलाने पर भी वे गांव नहीं आए. दोनों गुजरात में कहीं छिपे हैं.

सुरेश ने जिस इज्जत को बचाने के लिए यह कू्रर कदम उठाया, राज खुलने पर इज्जत तो गई ही, सब के सब जेल भी पहुंच गए. बेटी की भी जिंदगी बरबाद हुई. एक तरह इसे नासमझी ही कहा जाएगा. अगर वह चाहता तो किसी और तरीके से इस मामले को सुलझा सकता था.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

महिला कांस्टेबल से ट्रेन में दरिंदगी

रेप में फंसा दिल्ली सरकार का अधिकारी

मैं चीज बड़ी हूं मस्त मस्त

मौत के मुंह से वापसी

नासमझी का घातक परिणाम

मैनेजमेंट गुरु बना शातिर ठग

इंग्लैंड में रहने वाली एनआरआई महिला निशा करावद्रा भारत आई हुई थीं. घर पर बैठी वह एक दैनिक अखबार पढ़ रही थीं, तभी उन की नजर अखबार में छपे एक विज्ञापन  पर गई. वह विज्ञापन एक कार का था, रेनोल्ट डस्टर नाम की उस एसयूवी कार का नंबर वीआईपी था. निशा को भारत में एक लग्जरी कार की जरूरी थी. उन्हें वीआईपी नंबर की वह कार पसंद आ गई. विज्ञापन में जो फोन नंबर दिया हुआ था, निशा ने उस नंबर पर बात की.

दूसरी तरफ से बोलने वाले व्यक्ति ने अपना नाम लार्ड मुकुल पौल तनेजा बताते हुए खुद को यूके का नामी शख्स बताया. उस ने निशा को बताया, ‘‘मैडम, नई दिल्ली के हौजखास इलाके में अगस्त क्रांति मार्ग पर, मेफेयर गार्डन में बी-20 नंबर का मेरा बंगला है. आप बंगले पर आ कर कार देख सकती हैं.’’

निशा उसी दिन उस बंगले पर पहुंच गईं. उस बंगले में औडी सहित अन्य कई महंगी गाडि़यां खड़ी थीं. यह सब देख कर उन्हें यकीन हो गया कि मुकुल पौल तनेजा ने अपने बारे में उसे जो बताया था, वह सही होगा. निशा ने वह कार वीआईपी नंबर की वजह से खरीदने का मूड बनाया था. उस का नंबर था—यूके07एएक्स-0999. काले रंग की वह कार उन्हें अच्छी कंडीशन में दिखी.

कार को चकाचक हालत में देख कर उन्होंने उसे खरीदने का फैसला कर लिया. उन्होंने मुकुल पौल तनेजा से जब कार खरीदने के बारे में बात की तो साढ़े 10 लाख रुपए में उस का सौदा हो गया. बाद में कुछ फौरमैलिटी पूरी करने के बाद निशा ने मुकुल पौल तनेजा को साढ़े 10 लाख रुपए दे दिए.

अब केवल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) ट्रांसफर करने का काम बचा था. मुकुल पौल तनेजा ने उन्हें आश्वासन दिया कि हफ्ता भर में आरसी ट्रांसफर हो जाने के बाद गाड़ी उन्हें सौंप देगा. हफ्ते भर बाद कार सौंपने की बात पर निशा को भी कोई ऐतराज नहीं था.

निशा ने भी सोचा कि अब केवल आरटीओ औफिस से कागज ट्रांसफर होने रह गए हैं. यह काम होते ही गाड़ी उन्हें मिल जाएगी. हफ्ते भर बाद भी जब उन्हें कार की आरसी नहीं मिली तो उन्होंने मुकुल पौल तनेजा से फोन पर फिर बात की. तब उस ने बताया कि देहरादून आरटीओ औफिस में कागज ट्रांसफर होने की प्रक्रिया चल रही है, जैसे ही यह काम हो जाएगा, गाड़ी उन्हें सौंप देगा.

इसी तरह कई महीने बीत गए, लेकिन न तो उन्हें खरीदी गई कार के कागजात मिले और न ही कार. जब वह कुछ कहतीं तो तनेजा कोई न कोई बहाना बना कर टाल देता. बार बार टालने पर उन्हें मुकुल की बातों पर शक होने लगा. तब उन्होंने देहरादून के आरटीओ औफिस में संपर्क किया.

वहां से उन्हें पता चला कि जो कार उन्होंने मुकुल पौल से खरीदी है, वह पंजाब नैशनल बैंक, मोतीबाग, नई दिल्ली से फाइनैंस कराई गई थी. फाइनैंस कराने के बाद कार की किस्तें जमा नहीं की गई थीं. इसलिए वह कार लोन चुकाए बिना किसी और के नाम नहीं की जा सकती. यानी बैंक से एनओसी लिए बिना कार की आरसी किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर नहीं हो सकती थी.

यह जानकारी मिलते ही निशा के जैसे होश उड़ गए. क्योंकि तनेजा ने उन से यह बात नहीं बताई थी. निशा ने इस बारे में मुकुल पौल से बात की तो उस ने कहा, ‘‘बैंक का जो भी लोन था, मैं ने चुका दिया है. बैंक से एनओसी ले कर मैं अथौरिटी में जमा करा दूंगा. अब तक मैं किसी दूसरे काम में बिजी था, जिस की वजह से लेट हो गया. अब आप चिंता न करें, जल्द ही कागज तैयार करा दूंगा.’’

निशा को लग रहा था कि मुकुल उन्हें बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है. फिर भी उन्होंने उस पर एक बार फिर से विश्वास कर लिया. काफी दिन बीत जाने के बावजूद भी निशा को आरसी नहीं मिली. अब निशा को लगने लगा कि मुकुल चीटर है. वह बारबार टाल कर उन्हें बेवकूफ बना रहा है. लिहाजा उन्होंने उस से अपने साढ़े 10 लाख रुपए वापस मांगे. तब उस ने पैसे लौटाने से मना कर दिया.

इतनी मोटी रकम भला वह कैसे छोड़ सकती थीं, इसलिए वह सख्त हो गईं. तब मुकुल पौल ने अपने राजनैतिक संबंधों का हवाला देते हुए उन्हें धमकाने की कोशिश की.

निशा चुप रहने वालों में नहीं थीं. उन्होंने ठान लिया कि वह धोखाधड़ी करने वाले इस शख्स को सबक जरूर सिखाएंगी. इंग्लैंड के एक सांसद जिन से निशा के अच्छे संबंध थे, से उन्होंने बात की और अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में बताया. उस सांसद ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात कर निशा करावद्रा की हेल्प करने की गुजारिश की.

इस के बाद निशा दिल्ली पुलिस कमिश्नर बी.एस. बस्सी से मिलीं और धोखाधड़ी करने वाले लार्ड मुकुल पौल तनेजा के खिलाफ कानूनी काररवाई करने की मांग की. कमिश्नर ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराने के आदेश दिए.

क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने धोखाधड़ी के इस मामले की जांच के लिए एंटी एक्सटोर्शन सेल के एसीपी होशियार सिंह के निर्देशन में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में तेजतर्रार सबइंसपेक्टर विनय त्यागी, अतुल त्यागी, हेडकांस्टेबल राजकुमार, संजीव, जुगनू त्यागी, नरेश पाल, कांस्टेबल राजीव सहरावत, विपिन कुमार आदि को शामिल किया.

पुलिस टीम आरोपी लार्ड मुकुल पौल तनेजा की तलाश में जुट गई. पुलिस को दिल्ली में हौजखास के अलावा उस के देहरादून स्थित बंगले का पता भी मिल गया. दोनों ही जगहों पर पुलिस ने दबिश डाली. लेकिन वह नहीं मिला. शायद उसे पुलिस काररवाई की भनक लग गई थी, इसलिए वह इधरउधर घूमता रहा.

अपने सूत्रों से पुलिस ने यह पता लगा लिया था कि मुकुल पौल एक ठग है. इस दौरान वह किसी और को अपना शिकार न बना ले, यह आशंका पुलिस को हो रही थी. उस का सुराग लगाने के लिए टीम ने अपने मुखबिरों को भी लगा दिया. इस का नतीजा जल्द ही सामने आ गया. एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आखिरकार 1 मई, 2014 को उसे दिल्ली की मुनीरका मार्र्केट के पास से हिरासत में ले लिया.

हिरासत में लिए जाने पर मुकुल पौल बौखला कर बोला, ‘‘लगता है, आप लोगों को कोई गलतफहमी हुई है. मैं ने किसी के साथ कोई चीटिंग नहीं की है. मैं एक हाईसोसायटी से हूं. मेरा संबंध राजनीति में रसूख रखने वाले लोगों से है, इसलिए आप लोग मुझे छोड़ दीजिए, वरना परेशानी में पड़ सकते हो.’’

पुलिस धमकी में न आ कर उसे पूछताछ के लिए अपने दफ्तर ले आई. 50 वर्षीय लार्ड मुकुल पौल तनेजा से जब क्राइम ब्रांच औफिस में पूछताछ शुरू हुई तो वह खुद को बेकुसूर बताता रहा. लेकिन पुलिस के पास इस बात के सुबूत थे कि उस ने निशा से साढ़े 10 लाख रुपए हड़प लिए थे. उन सुबूतों के आधार पर जब मुकुल पौल से पूछताछ की गई तो आखिर उसे निशा के साथ चीटिंग करने की बात स्वीकारनी पड़ी.

लार्ड मुकुल पौल तनेजा वास्तव में कोई आम आदमी नहीं था. पता चला कि वह एक उच्चशिक्षित लेखक, मैनेजमेंट गुरु और फिल्म प्रोड्यूसर था. उस से की गई पूछताछ के बाद ठगी का कारनामा करने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

मुकुल पौल तनेजा दक्षिणी दिल्ली के हौजखास इलाके में मेफेयर गार्डन के रहने वाले अर्जुन कुमार तनेजा का बेटा था. अर्जुन कुमार एक निजी कंपनी में उच्च पद पर नौकरी करते थे.

मुकुल पौल की मां निर्मल तनेजा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निदेशक थीं, जो 1989 में रिटायर हो चुकी थीं. मुकुल पौल ने सन 1983 में वसंतकुंज के मौडर्न स्कूल से 12वीं कक्षा पास की थी. इस के बाद उस ने दिल्ली के ही शेख सराय स्थित कालेज औफ वोकेशनल स्टडीज से सन 1987 में मार्केटिंग में बीबीए किया.

मुकुल पौल पढ़ाई में बहुत होशियार था. पढ़ाई में अव्वल होने की वजह से उसे स्कौलरशिप मिलती रही. जिस से उस ने विश्व के कई देशों में जा कर पढ़ाई की. सन 1989 में उस ने लंदन के कार्डिफ बिजनैस स्कूल से एमबीए किया और उस के बाद एलएलएम की डिग्री हासिल की.

इस के बाद उस ने भारत और ब्रिटेन के विभिन्न प्रतिष्ठित स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालयों में एमबीए में लेक्चर देने शुरू कर दिए. उस के लेक्चर पसंद किए जाने लगे. जिस के बाद उसे मैनेजमेंट गुरु के नाम से जाना जाने लगा.

बताया जाता है कि उस ने मैनेजमेंट पर कई किताबें भी लिखीं. उस की काबिलियत को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने उसे लार्ड की उपाधि से सम्मानित किया.

मैनेजमेंट गुरु के रूप में लार्ड मुकुल पौल तनेजा की अब अच्छी पहचान बन चुकी थी. इसी बीच 1992 में वह भारत आ गया. यहां आ कर उसे जयप्रकाश ग्रुप औफ इंडस्ट्रीज में नौकरी मिल गई. सन 1992 से 1995 तक उस ने इस ग्रुप में नौकरी की. नौकरी में उसे एक निश्चित पगार मिलती थी, जबकि उस की चाहत उस से कहीं ज्यादा थी. इसलिए उस ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया.

वह अपना कोई ऐसा बिजनैस करना चाहता था, जिस में उसे अच्छी आमदनी हो. एक साल बाद उस ने गारमेंट्स एक्सपोर्ट के बिजनैस में हाथ आजमाया. एमजीए एक्सपोर्ट नाम से उस ने एक एक्सपोर्ट फर्म खोली. इसी दौरान 1998 में राजस्थान के धौलपुर जिले के एक अमीर घराने की लड़की के साथ उस ने शादी कर ली.

लार्ड मुकुल पौल ने गारमेंट्स एक्सपोर्ट का जो बिजनैस शुरू किया था, उस में जब उसे घाटा होने लगा तो उस ने वह बिजनैस बंद कर दिया. फिर उस ने जम्मूकश्मीर विकास प्राधिकरण के साथ मिल कर होटल और रेस्तरां का बिजनैस शुरू किया. यह उस की बड़ी सोच थी. पूरे भारत में होटल और रेस्तरां खोलने की उस की योजना थी. लेकिन इस धंधे में भी उसे घाटा उठाना पड़ा तो उस ने सन 2001 में यह बिजनैस भी बंद कर दिया.

मुकुल पौल एक हाईक्लास फैमिली से ताल्लुक रखता था, उस का रहनसहन शानोशौकत वाला था. जबकि आमदनी उस की जरूरत से कम थी. बताया जाता है कि होटल का बिजनैस करते समय उसे जब जम्मूकश्मीर में रहना पड़ा तो उसी दौरान उसे आतंकी संगठन जेकेएलएफ की तरफ से धमकियां भी मिली थीं.

इस के बाद मुकुल पौल ने कमोडिटी ट्रेडिंग के क्षेत्र में हाथ आजमाया. उस ने यह धंधा बड़े पैमाने पर शुरू किया. इस के लिए उस ने नई दिल्ली के हौजखास और इंग्लैंड में औफिस खोले.  ब बिजनैस बड़े पैमाने पर शुरू किया तो उसे इस में मोटी रकम भी इनवैस्ट करनी पड़ी. कुछ दिनों बाद इस बिजनैस का भी वही हाल हुआ जो उस के दूसरे बिजनैसों का हुआ था. यानी इस में भी उसे मोटा घाटा हुआ.

लार्ड मुकुल पौल जिस बिजनैस में भी हाथ डाल रहा था, उसी में उसे घाटा उठाना पड़ रहा था. इस की एक वजह शायद यह थी कि काम शुरू करने से पहले उसे उन कामों की नालेज नहीं था. जिस का खामियाजा उसे बिजनैस के घाटे के रूप में देखने को मिल रहा था. लगातार घाटे से उबरने का उसे कोई उपाय नहीं सूझ रहा था.

बौलीवुड की कई हस्तियों से उस के अच्छे संबंध थे. मोटी कमाई के लिए उस ने बौलीवुड की कई आर्ट फिल्मों में पैसा लगाया. फिल्म फाइनैंस करने के अलावा उस ने फिल्में भी बनाईं, लेकिन फिल्में फ्लौप हो जाने से उसे बहुत इस में भी उठाना पड़ा. जिस से उस ने इस क्षेत्र में बढ़ाए अपने कदम भी खींच लिए. लेकिन अभिनेता शाहिद कपूर की मां नीलिमा अजीम से कानूनी विवाद होने की वजह से मुकुल पौल की फिल्म ‘नवाब नौटंकी’ पूरी नहीं हो सकी. नीलिमा अजीम ने भी मुकुल पौल को ठग बताया.

अपना सामाजिक स्तर बनाए रखने और शानोशौकत दिखाने के लिए मुकुल पौल ने औडी ए-6, सुजुकी किजाशी, फोक्सवैगन पोलो, फोर्ड इको स्पोर्ट्स, स्विफ्ट डिजायर, रेनोल्ट डस्टर आदि कारें खरीद रखी थीं. इन में से अधिकांश कारें विभिन्न बैंकों से लोन पर खरीदी गई थीं.

उस की शानोशौकत देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वह कितना कर्जदार है. बल्कि उस के व्यक्तित्व को देख कर उस से पहली बार मिलने वाला व्यक्ति उस से प्रभावित हो जाता था.

गाडि़यों पर ही नहीं, उस ने अपने बंगले पर भी 70 लाख का लोन ले रखा था. उस ने विभिन्न बैंकों से लोन तो ले लिया था, लेकिन आमदनी का कोई जरिया न होने की वजह से वह लोन की किस्तें भी नहीं चुका पा रहा था.

दिल्ली के मोतीबाग स्थित पंजाब नैशनल बैंक की शाखा से उस ने रेनोल्ट डस्टर और सुजुकी किजाशी कारें खरीदने के लिए लगभग 20 लाख रुपए का लोन लिया था. लोन की अदायगी न करने पर बैंक ने लार्ड मुकुल पौल तनेजा को डिफाल्टर घोषित कर कर के  इस का विज्ञापन विभिन्न अखबारों में भी छपवा दिया था.

मुकुल पौल की इनकम बंद थी और उस के खर्चे जस के तस थे. उस ने कई बैंकों से पहले ही मोटा कर्ज ले रखा था, किस्त अदायगी न होने की वजह से पंजाब नैशनल बैंक उसे डिफाल्टर घोषित कर चुकी थी, जिस की वजह से बैंकों से कर्ज लेना उस के लिए अब आसान नहीं था. कोई दूसरा धंधा शुरू करने के लिए उस के पास पैसे नहीं थे. पैसे कमाने के लिए वह क्या करे, यही सोच कर वह परेशान रहने लगा.

उस के पास जो लग्जरी कारें थीं, वे वीआईपी रजिस्टे्रशन नंबरों की थीं. उस ने उन्हीं लग्जरी कारों के जरिए धोखाधड़ी करने की योजना बनाई. उस ने विभिन्न अखबारों में वीआईपी नंबरों की लग्जरी कारों को बेचने के विज्ञापन देने शुरू कर दिए.  कोई व्यक्ति जब उस से कार खरीदने की बात करता तो वह गाड़ी का सौदा करने के बाद रकम ले लेता और गाड़ी व उस के रजिस्टे्रशन के कागज बाद में देने को कह देता.

कुछ दिनों बाद भी जब रजिस्टे्रशन सर्टिफिकेट उस व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं हो पाता तो वह व्यक्ति मुकुल पौल से शिकायत करता. मुकुल पौल उस व्यक्ति को कोई न कोई बहाना बना कर टालता रहता. फिर अंत में परेशान हो कर वह व्यक्ति मुकुल से अपने पैसे लौटाने की बात करता तो वह अपनी ऊंची राजनैतिक पहुंच होने की धमकी दे कर उसे चुप करा देता.

एनआरआई महिला निशा करावद्रा के साथ भी मुकुल पौल ने ऐसा ही किया. लेकिन निशा भी ऊंची पहुंच वाली महिला थीं, इसलिए वह उस की धमकी में नहीं आईं और ऐसे धोखेबाज आदमी को सबक सिखाने के लिए पुलिस का सहारा लिया. इस का नतीजा यह निकला कि लार्ड मुकुल पौल तनेजा पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

लार्ड मुकुल पौल तनेजा से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस की वीआईपी नंबर की रेनोल्ट डस्टर कार भी बरामद कर ली. फिर उसे 2 मई, 2014 को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. अब मामले की जांच सबइंसपेक्टर विनय त्यागी कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित