कैसे हुईं 9 दिन में 3 बहनें गायब

शादी के नाम पर ऐसे होती है ठगी

प्यार की वो आखिरी रात – भाग 4

प्यार की थी वो आखिरी रात

रात 9 बजे के पहले ही दीपक जागेश्वर मंदिर परिसर पहुंच गया और बरखा की काल आने का इंतजार करने लगा. इधर बरखा व घर के अन्य सदस्य खाना खा कर आए ही थे सो सब सोने चले गए. बरखा, उस के दोनों बच्चे, बहन व मां एक कमरे में लेट गए. जबकि उस के पिता दूसरे कमरे में.

रात 10 बजे तक सभी गहरी नींद में सो गए. लेकिन बरखा को नींद कहां थी. वह छत पर जा कर चहलकदमी करने लगी. छत पर स्थित कमरे की भी उस ने साफसफाई कर दी थी.

रात करीब साढ़े 10 बजे बरखा ने दीपक को काल की और घर के दरवाजे पर आने को कहा. फोन पर बतियाते बरखा और दीपक दरवाजे पर आए. बरखा ने दरवाजा खोल कर दीपक को घर के अंदर कर लिया. इस के बाद वह दीपक को छत पर बने कमरे में ले आई. यहां दोनों ने पहले शारीरिक भूख मिटाई, फिर आपस में बतियाने लगे.

दीपक बोला, “बरखा, मैं तुम से बेइंतहा प्यार करता हूं. तुम्हारे बिना अब नहीं रह सकता. तुम मेरे साथ भाग चलो. हम दोनों अपनी नई दुनिया बसा लेंगे. इस बार हम इतनी दूर जाएंगे, जहां कोई हमें खोज न पाएगा.”

“दीपक अब यह सब संभव नहीं. अब मैं एक नहीं 2 बच्चों की मां हंू. छोटा बेटा बस 9 महीने का है. उसे छोड़ कर मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती. फिर भागने से 2 परिवारों की इज्जत भी मिट्टी में मिल जाएगी. मेरा तुम्हारा मिलन जैसे आज हुआ है, वैसा आगे भी होता रहेगा. मैं भी तुम्हारे लिए तड़पती रहती हूं. तुम सदा हमारे दिल में रहते हो.”

“लेकिन मुझे अब छिपछिप कर मिलना पसंद नहीं है. तुम्हें मेरे साथ आज ही चलना होगा. नहीं चली तो अनर्थ हो जाएगा.”

“क्या अनर्थ हो जाएगा. मुझे मार डालोगे क्या?” बरखा गुस्से से बोली.

“हां, मैं तुझे मार डालूंगा और खुद को भी मिटा लूंगा,” दीपक भी गुस्से से भर उठा.

बरखा ने दीपक की बात को मजाक समझा और हंसने लगी. इस पर दीपक का गुस्सा और बढ़ गया. उस ने उस का गला पकड़ा और कसने लगा. बरखा बेहोश हुई तो दीपक ने जेब से चाकू निकाल लिया और बरखा का गला रेत दिया.

प्रेमिका की हत्या करने के बाद दीपक चला गया. प्रेमिका के घर से दीपक गुरुदेव चौराहे पर आया. यहां से आटो पर बैठ कर झकरकटी आया. अब तक वह ग्लानि व पकड़े जाने के डर से घबराने लगा था. कुछ देर वह झकरकटी पुल के नीचे रेल लाइन के किनारे बैठा रहा फिर देर रात रेल से कट कर आत्महत्या कर ली.

मायके में लहूलुहान मिली बरखा

इधर रात लगभग 12 बजे बरखा का मासूम छोटा बेटा जाग गया. भूख से वह रोने लगा तो सरला की आंखें खुल गईं. उस ने छोटी बेटी कल्पना को जगा कर कहा कि देखो बरखा कहां है? उस का बच्चा भूख से रो रहा है.

कल्पना बरखा को खोजती छत पर गई तो वहां कमरे में बरखा की खून से तरबतर लाश देख कर वह चीख पड़ी. उस की चीख सुन कर सरला वहां पहुंची फिर उस का पति ओमप्रकाश सैनी. दोनों बेटी का शव देख कर अवाक रह गए.

ओमप्रकाश सैनी ने पहले बरखा के पति कृष्णकांत को मौत की सूचना दी फिर थाना नवाबगंज पुलिस को बेटी की हत्या की खबर दी. सूचना पाते ही एसएचओ प्रमोद कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए. उन की सूचना पर पुलिस कमिश्नर बी.पी. जोगदंड, एडिशनल डीसीपी (सेंट्रल) आरती सिंह तथा एसीपी (कर्नलगंज) मो. अकलम भी घटनास्थल आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका बरखा की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या चाकू जैसे किसी नुकीले हथियार से की हुई लग रही थी. घटनास्थल से पुलिस को मृतका का मोबाइल फोन मिला, जिसे अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा में ले लिया.

अब तक मृतका का पति कृष्णकांत तथा उस के मातापिता भी आ गए थे. पुलिस अधिकारियों ने मृतका के माता पिता तथा पति से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रात 9 बजे तक सब कुछ सामान्य था. उस के बाद सब सो गए. आशंका है कि रात में बदमाश लूटपाट के इरादे से घुसे, शायद बरखा जाग गई तो उन्होंने उस का गला रेत दिया. पूछताछ के बाद अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपत राय अस्पताल भिजवा दिया.

रेलवे लाइनों में मिली दीपक गुप्ता की लाश

ओमप्रकाश सैनी के घर के ठीक सामने जागेश्वर मंदिर है. वहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे. पुलिस अधिकारियों ने फुटेज चैक किए तो रात करीब साढ़े 10 बजे एक युवती फोन पर बतियाते घर से बाहर निकलते दिखाई दी. दूसरी तरफ एक युवक घर में प्रवेश करते दिखा. इस के बाद रात 11:35 पर वही युवक घर से बाहर जाते दिखा.

यह फुटेज ओमप्रकाश सैनी व कृष्णकांत को दिखाया गया तो उन्होंने बताया कि फोन पर बतियाती युवती उन की बेटी बरखा है. कृष्णकांत ने बताया कि फोन पर बतियाते दिख रहा युवक उस की पत्नी बरखा का प्रेमी दीपक गुप्ता है, जो उस के पड़ोस में रहता है.

इंसपेक्टर प्रमोद कुमार ने बरखा के फोन से दीपक को काल की तो जीआरपी थाने के एक सिपाही ने काल रिसीव की. उस ने बताया फोन धारक ने रेल से कट कर आत्महत्या की है. उस का शव अज्ञात में पोस्टमार्टम हाउस भेजा जा चुका है. दीपक के पिता विमल गुप्ता से शव की शिनाख्त कराई गई तो उन्होंने शव को तुरंत पहचान लिया.

पुलिस ने बरखा और दीपक के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि मरने से पहले दोनों के बीच 23 बार बात हुई थी. पिछले 2 महीने में दोनों के बीच 500 बार बात मोबाइल फोन पर हुई थी. जांचपड़ताल से स्पष्ट था कि दीपक ने ही पहले प्रेमिका की हत्या की फिर खुद रेल से कट कर आत्महत्या कर ली.

मृतका बरखा के पति कृष्णकांत ने पत्नी की हत्या की रिपोर्ट दीपक के खिलाफ दर्ज कराई. लेकिन दीपक द्वारा भी आत्महत्या कर लेने से पुलिस ने इस मामले को बंद कर दिया.

कथा संकलन तक मृतका के दोनों बच्चे नानानानी के पास पल रहे थे. कृष्णकांत को अपने बच्चों की चिंता सता रही थी. वह उन का पालनपोषण स्वयं करना चाहता है. इस के लिए उस के मांबाप भी राजी हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

चाहत का कहर : माशूका की खातिर – भाग 3

रामू की मुलायम सिंह, राहुल और तेजा से खूब पटती थी. इन में से मुलायम सिंह और तेजा पास के ही गांव के रहने वाले थे, जबकि राहुल मैनपुरी के कुरावली कस्बे का रहने वाला था. एक दिन सभी एक साथ एक ढाबे में बैठे खापी रहे थे, तभी राहुल न कहा, ‘‘यार रामू, कभी हम लोगों को भी कुसुमा भाभी से मिलवा.’’

‘‘तुम लोग उस से मिल कर क्या करोगे?’’ रामू ने पूछा.

तेजा ने हंसते हुए कहा, ‘‘जो तू करता है, वही हम लोग भी करेंगे.’’

‘‘खबरदार, कुसुमा के बारे में अब एक भी शब्द बोला तो…?’’ रामू गुर्राया.

‘‘इस में तुझे मिर्चें क्यों लग रही है? कौन सी वह तेरी बीवी है?’’ मुलायम सिंह ने रामू के कंधे पर हाथ रख कर कहा.

‘‘यह अच्छी बात नहीं है, इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम लोग उस की बात बिलकुल मत करो.’’ कह कर रामू उठ खड़ा हुआ.

राहुल ने रामू का हाथ पकड़ कर बैठाने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘भई, हम सब दोस्त हैं, इसलिए जो भी मिले, हम सब को मिलबांट कर खाना चाहिए.’’

राहुल की यह बात रामू को इतनी बुरी लगी कि उस ने गुस्से में उसे 2-4 तमाचे जड़ दिए. मुलायम ने रामू को धकेल कर अलग करते हुए कहा, ‘‘यह तुम ने अच्छा नहीं किया रामू.’’

‘‘कान खोल कर सुन लो, तुम में से किसी ने भी मेरी जिंदगी में दखल देने की कोशिश की तो मैं उस के साथ भी यही करूंगा.’’ कह कर रामू चला गया.

बाकी तीनों दोस्त रामू के इस रवैये से सन्न थे. किसी से कुछ कहते नहीं बन रहा था. आखिर चुप्पी मुलायम सिंह ने तोड़ी. ‘‘हम इतने भी गएगुजरे नहीं हैं कि इस की मारपीट चुपचाप सह लेंगे.’’

रामू के ये सभी दोस्त उस से जल रहे थे. वे कुसुमा को पाना चाहते थे, लेकिन रामू ने उन की इच्छाओं पर पानी फेर दिया था. इसलिए वे रामू को सबक सिखाने के बारे में सोचने लगे. 2 दिनों तक तीनों रामू द्वारा किए अपमान का बदला लेने की साजिश रचते रहे.

अंतत: उन्होंने तय किया कि रामू को ऐसी सजा दी जाए कि कोई दोस्त फिर कभी अपने किसी दोस्त का इस तरह अपमान न कर सके. इस के बाद उन्होंने योजना भी बना डाली. उसी योजना के तहत तीनों ने रामू से माफी मांगी. रामू ने सोचा कि जब इन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है तो उसे भी अपनी गलती के लिए माफी मांग लेनी चाहिए. उस ने भी दोस्तों से अपनी गलती के लिए माफी मांग ली.

इस के बाद मुलायम ने कहा, ‘‘इस खुशी में आज रात मैं सभी को पार्टी दे रहा हूं.’’

‘‘क्या खिलाएगा पार्टी में?’’ रामू ने पूछा.

‘‘भई पार्टी है तो कुछ अच्छा ही होगा. शाम को हम तुझे तेरे घर लेने आएंगे, तू तैयार रहना.’’ तेजा ने कहा.

शाम को रामू घर में ही था. उस के दोस्त उसे बुलाने आए तो मां को बता कर वह उन के साथ चला गया. एक ढाबे से गोश्त और रोटियां पैक कराई गईं. इस के बाद शराब की दुकान से एक बोतल शराब खरीदी गई. सारी व्यवस्था कर के तय किया गया कि भूरा की दुकान की छत पर बैठ कर खानापीना होगा.

भूरा की दुकान हिंदपुरम कालोनी के सामने ही थी. कालोनी अभी नईनई बस रही है, इसलिए यहां अभी इक्कादुक्का मकान ही बने हैं. दूसरी ओर खेत हैं, इसलिए लोगों का आनाजाना इधर कम ही होता है. यही वजह थी कि अंधेरा होते ही इधर सन्नाटा पसर जाता था. यह मैनपुरी का काफी संवेदनशील इलाका माना जाता है.

तीनों दोस्त रामू को साथ ले कर भूरा की दुकान की छत पर आ गए. इस के बाद बातचीत के बीच खानापीना होने लगा. रामू काफी अच्छे मूड में था, इसलिए उस ने शराब थोड़ी ज्यादा पी ली. दोस्तों ने उसे पिलाई भी कुछ ज्यादा. काफी देर हो गई तो रामू ने कहा, ‘‘भई, अब घर चलना चाहिए.’’

‘‘कौन से घर, मां के या माशूका के?’’ मुलायम सिंह ने छेड़ा.

रामू लड़ाईझगड़े के मूड़ में नहीं था, इसलिए उठ कर खड़ा हो गया.

वह चलता, उस के पहले ही मुलायम सिंह ने उसे छेड़ते हुए कहा, ‘‘चल, हम भी तेरे साथ तेरी माशूका के यहां मौजमस्ती करने चलते हैं.’’

दरअसल, मुलायम सिंह उसे उकसाना चाहता था. मुलायम की इस बात पर रामू को गुस्सा आ गया तो वह उस की ओर झपटा. फिर क्या था, तीनों दोस्तों ने उसे दबोच कर गिरा दिया. इस के बाद वहां रखे फावड़े से उस की गर्दन काट दी. अब उन्हें लाश को ठिकाने लगाना था. काफी सोचविचार कर वे लाश को घसीट कर नीचे ले आए और सड़क के उस पार बहने वाले नाले में फेंक कर भाग खड़े हुए.

काफी रात बीत गई और रामू नहीं लौटा तो शांति परेशान होने लगी. उस ने सोचा कि वह कुसुमा के यहां होगा. इसलिए उस ने सवेरा होते ही मनोज को कुसुमा के घर भेजा. तब पता चला कि रात में वह कुसुमा के घर भी नहीं था. इस के बाद उस की खोज शुरू हुई.

रामू अपने दोस्तों के साथ गया था. उस के दोस्तों से उस के बारे में पूछा जाता, उस के पहले ही किसी लड़के ने आ कर बताया कि रामू की लाश सड़क के किनारे बहने वाले नाले में पड़ी है.

कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई. सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर शंकर सिंह और क्षेत्राधिकारी वी.पी. सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे. निरीक्षण में उन्होंने देखा कि खून नाले से सामने की दुकान तक फैला है. छत पर जाने वाली सीढि़यों पर भी खून फैला था. पुलिस छत पर पहुंची तो वहां भी खून फैला दिखाई दिया. वहीं खून से सना फावड़ा भी पड़ा था. इस का मतलब यह था कि उसी फावड़े से छत पर मृतक की हत्या की गई थी.

पूछताछ में पता चल गया कि मृतक के मोहल्ले की ही एक महिला से अवैध संबंध थे. घरवालों ने भी बता दिया था कि कल शाम को रामू को उस के 3 दोस्त बुला कर ले गए थे.

इस के बाद रामू के छोटे भाई शिवशंकर ने मैनपुरी कोतवाली में भाई की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जो तहरीर दी, उस के आधार पर उसे पुलिस ने अपराध संख्या 641/13 पर भादंवि की धारा 302, 201, 120बी के तहत मुलायम सिंह पुत्र सूरज, निवासी नगला पंजाबा, राहुल पुत्र किशनलाल, निवासी कुरावली तथा तेजा पुत्र बाबूराम, निवासी हिंदपुरम कालोनी और कुसुमा पत्नी मुकेश, निवासी हिंदपुरम कालोनी के खिलाफ दर्ज कर लिया.

मुलायम सिंह, तेजा और राहुल तो पहले से ही फरार थे, कुसुमा को भी जब पता चला कि रिर्पोट में उस का भी नाम है तो वह भी फरार हो गई. लेकिन पुलिस ने जाल बिछा कर मुलायम सिंह, तेजा और राहुल को उसी दिन यानी 16 जुलाई, 2013 की देर शाम गिरफ्तार कर लिया.

तीनों को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर के रामू की हत्या की पूरी कहानी सुना दी. अगले दिन पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पूछताछ में उन्होंने साफसाफ कहा था कि रामू की हत्या में कुसुमा शामिल नहीं थी. लेकिन रिपोर्ट में उस का नाम शामिल था, इसलिए 26 जुलाई, 2013 को उस ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इस तरह कुसुमा की वासना की आग ने अपना घर तो जलाया ही, शांति के घर को भी नहीं बख्शा. शांति का कहना है कि रामू ने तो नादानी की ही, कुसुमा भी कम गुनहगार नहीं है. उसी ने उस के मासूम बेटे को गुमराह किया था. कथा लिखे जाने तक चारों आरोपी जेल में थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

दो बहनों का एक प्रेमी – भाग 3

जिस जगह शमीम बानो का कत्ल हुआ था, वहां घनी आबादी थी. शमीम का गला तो रेता ही गया था. उस के हाथ की अंगुली भी कटी हुई थी. इस का मतलब था कि मृतका का हत्यारों से संघर्ष हुआ था और उसी की वजह से उस की अंगुली कटी थी. आश्चर्य की बात यह थी कि इस के बावजूद किसी ने शोरशराबे की आवाज नहीं सुनी थी.

शमीम की हत्या किस ने और क्यों की, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. पुलिस ने इस मुद्दे पर गहराई से सोचा तो उस की निगाह रूबीना पर गई, क्योंकि शमीम और रूबीना की अच्छी दोस्ती थी. उसी ने उसे दिल्ली के किसी लड़के से मिलवाया था.

पुलिस ने इस पहलू पर भी गौर किया कि कहीं रूबीना कोई सैक्स रैकेट तो नहीं चलाती है. क्योंकि उस स्थिति में उस के रैकेट में शमीम के भी शामिल होने की संभावना हो सकती थी. साथ ही यह भी कि लेनदेन के किसी विवाद की वजह से शमीम की हत्या हो सकती थी.

शमीम की हत्या के मामले में कई दिनों तक अटकलों का बाजार गरम रहा. जितने मुंह उतनी बातें. पुलिस ने रूबीना से भी पूछताछ की. लेकिन रूबीना और शमीम की भाभी जरीना ने जो बयान दिए, उस ने आफरीन को ही कटघरे में ला कर खड़ा कर दिया.

रूबीना ने बताया कि आफरीन अपने चचेरे भाई सिद्दीक से प्यार करती थी. एक बार वह घर से 50 हजार रुपए ले कर सिद्दीक के साथ भाग भी चुकी है. वह सिद्दीक से शादी करना चाहती थी, लेकिन शमीम मना करती थी. उस का कहना था कि सिद्दीक एक तो कुछ कमाता नहीं है, ऊपर से लोफरलंपट स्वभाव का है.

रूबीना की भाभी जरीना ने बताया कि वह 4 बजे के आसपास शमीम के घर अपना सब्जी वाला डोंगा लेने गई थी. तब आफरीन घर में ही थी और उस ने दरवाजा नहीं खोला था. इस पर जरीना ने खिसिया कर कहा था कि कोई अंदर है क्या, जो तू दरवाजा नहीं खोल रही है. जवाब में आफरीन ने कहा था कि अप्पी घर में नहीं है, वह गेट नहीं खोलेगी.

जरीना ने अपना डोंगा मांगा तो उस ने गेट के ऊपर से उस का डोंगा थमा दिया. डोंगा ले कर वह अपने घर लौट आई थी. शाम 6 बजे के करीब जब जरीना खीर ले कर गई तो आफरीन ने दरवाजा खोल दिया और खीर लेने के बाद बोली, ‘‘भाभी, मेरी अप्पी को देख लो. किसी ने उस का गला काट दिया है.’’

जरीना और रूबीना के इस बयान के बाद शक की सुई आफरीन की तरफ घूम गई. सच्चाई की तह तक जाने के लिए पुलिस ने मुखबिरों का जाल बिछाया तो पता चला कि आफरीन साढ़े 4 बजे अपने घर से निकल कर सामने वाली पान की गुमटी पर आई थी और उस ने वहां से पान मसाला और सिगरेट लिया था. दुकानदार ने उस से पूछा भी था कि क्या कोई आया है. इस पर उस ने बताया था कि कुछ मेहमान आए हैं, उन्हीं के लिए ले जा रही हूं.

ये बातें पता चलने के बाद थानाप्रभारी आलोक कुमार ने आफरीन का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया. यहां स्पष्ट कर दें कि शमीम के पिता अब्दुल रशीद इस मामले में सिराज को दोषी ठहरा रहे थे और वह उस तसवीर को सिराज की बता रहे थे, जो आफरीन ने पुलिस को दी थी.

पुलिस ने वह तसवीर रूबीना सहित मोहल्ले के कई लोगों को दिखाई, लेकिन उसे किसी ने भी नहीं पहचाना. लोगों ने बताया कि तसवीर वाले लड़के को न तो कभी शमीम के घर पर देखा गया था और न ही वह कभी उसे मोहल्ले में दिखाई दिया था.

अगले दिन पोस्टमार्टम के बाद शमीम का शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. दूसरी ओर पुलिस सिराज की तलाश में तो लगी ही थी, साथ ही उस ने आफरीन और शमीम के फोन नंबरों की काल डिटेल्स भी निकलवा ली थीं. आफरीन की काल डिटेल्स में एक नंबर पर बहुत ज्यादा बातें हुई थीं. पुलिस ने उस नंबर का पता किया तो वह सिद्दीक का निकला.

तीसरे दिन शमीम का तीजा होने के बाद देर रात को पुलिस ने आफरीन, उस के पिता अब्दुल रशीद और भाई अतीक को उठा लिया. थाने में तीनों से बारीबारी से लंबी पूछताछ की गई. अंतत: पुलिस के सवालों से घबरा कर आफरीन टूट गई. उस ने अपने बयान में बताया कि कुछ दिनों पहले शमीम के संबंध सिद्दीक से थे.

बाद में सिद्दीक को शमीम की जगह उस से प्यार हो गया था. शमीम उन दोनों के प्यार में रोड़ा बन रही थी, इसलिए उस ने अपना रास्ता साफ करने के लिए सिद्दीक के साथ मिल कर बहन की हत्या करने की योजना बनाई.

इस योजना के मुताबिक सिद्दीक 11 दिसंबर, 2013 को बाजार से तीन पैकेट बिरयानी ले कर आया. उस ने एक पैकेट में पहले ही नशीली दवा मिला दी थी. नशीले पदार्थ वाली बिरयानी उन्होंने शमीम को दे दी और एकएक पैकेट दोनों ने ले लिए.

बिरयानी खाने के बाद शमीम अर्धबेहोशी में चली गई. उस के हाथपैर उस के वश में नहीं रहे. यह देख सिद्दीक और आफरीन ने मिल कर उस का गला रेत दिया. शमीम पर दवा का इतना ज्यादा असर था कि वह चीख भी नहीं सकी. अर्धबेहोशी के उसी आलम में उस ने अपने हाथ चला कर बचाने की कोशिश की थी, जिस से उस के हाथ की अंगुली में जख्म आ गया था.

शमीम के मरने के बाद सिद्दीक बाहर निकलने के लिए उपयुक्त समय का इंतजार करता रहा. जब सूरज छिप गया और अंधेरा घिर आया तो वह चुपचाप बाहर निकल गया. आफरीन के इस बयान के बाद पुलिस ने देर रात सिद्दीक को उस के घर इफ्तखाराबाद से गिरफ्तार कर लिया और आफरीन के पिता तथा भाई को छोड़ दिया.

16 दिसंबर को आफरीन की डाक्टरी जांच कराई गई, जिस में वह 3 महीने की गर्भवती पाई गई. डाक्टरी जांच के बाद सिद्दीक और आफरीन को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक दोनों जेल में थे.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार की वो आखिरी रात – भाग 3

दीपक और बरखा हद से ज्यादा डूब चुके थे प्यार में

धीरेधीरे समय बीतता रहा. दीपक के दिल में प्रेमिका बनी बरखा के प्रति चाहत और बढ़ गई. यह चाहत उस रोज और बढ़ गई, जब बरखा ने एक रोज अंतरंग क्षणों में दीपक से कहा कि उस के पति और मोहल्ले वालों को उन के प्यार की भनक लग गई है. इस से पहले कि उन के प्यार पर पहरे लगा दिए जाएं, उन दोनों को भाग कर अपनी नई दुनिया बसा लेनी चाहिए.

“पर भाभी यह कैसे हो सकता है?” दीपक सोच में पड़ गया.

“क्या तुम मुझ से प्यार नहीं करते?” बरखा दीपक से लिपट कर उस का मुंह चूमने लगी.

“प्यार तो अपनी जान से ज्यादा करता हूं तुम्हें भाभी.”

“तो अब यह तुम जानो कि मुझे पाने के लिए तुम्हें क्या करना चाहिए. बस इतना जान लो कि मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती. अगर तुम मुझे न मिले तो जमाने के तानों से तंग आ कर मैं अपनी जान भी दे दूंगी. फिर मेरे मुर्दा शरीर से प्यार करते रहना.”

“ऐसा मत बोलो भाभी. तुम चली गईं तो मैं ही जी कर क्या करूंगा,” दीपक ने जवाब दिया.

कृष्णकांत को दीपक और बरखा के रिश्तों के बारे में आए दिन कुछ न कुछ सुनने को मिल रहा था, अत: वह भी उस पर शक करने लगा था. उस का शक तब और बढ़ गया, जब उस के साथी कर्मचारी ने शराब पीने के दौरान सारी सच्चाई बयां कर दी.

उस ने कहा, “कृष्णकांत, तुम्हारी बीवी बदचलन है. वह तुम्हारे दोस्त दीपक के साथ रंगरेलियां मनाती है. उस पर लगाम कसो वरना वह तुम्हें छोड़ कर उस के साथ भाग जाएगी.”

कृष्णकांत को सहकर्मी की बात कड़वी तो लगी, लेकिन नकार न सका. शक होने पर वह बरखा पर नजर रखने लगा. उन्हीं दिनों एक रोज कृष्णकांत ने भी बरखा को अपने ही घर में दीपक के साथ रंगरेलियां मनाते पकड़ लिया. दीपक तो भाग गया, पर बरखा कहां जाती. कृष्णकांत ने उसे खूब जलील किया.

पत्नी की इस बेवफाई से आहत कृष्णकांत ने बरखा को ऊंचनीच समझाने का प्रयास किया. वह नहीं समझी तो कृष्णकांत ने लातों से उस की खबर लेना शुरू कर दी. कृष्णकांत ने सोचा था कि शायद मार खा कर बरखा रास्ते पर आ जाए. लेकिन उस पर इस का असर उलटा ही हुआ. वह कृष्णकांत से और अधिक नफरत करने लगी.

पतिपत्नी के संबंध कसैले हुए तो घर में क्लेश का वातावरण बन गया. राजकुमार ने बेटे से हाल समाचार पूछा तो उस ने पिता को बता दिया कि उन की बहू कभी भी उन की इज्जत को धूल में मिला सकती है. बहू का सच जान कर राजकुमार को भी गहरा दुख हुआ.

प्रेमी के संग हो गई फरार

कृष्णकांत को जिस बात की आशंका थी, वही हुआ. एक रोज बरखा सचमुच उस की इज्जत को पैरों तले रौंदते हुए अपने आशिक दीपक के साथ भाग गई. 10 वर्षीय बेटे को भी वह अपने साथ नहीं ले गई. बेटे का मोह भी उसे बांध न सका. उस रोज कृष्णकांत घर आया तो उस का बेटा मयंक घर में गुमसुम बैठा था. पूछने पर उस ने बताया कि मम्मी दीपक अंकल के साथ बाजार गई हैं. अटैची में सामान भी ले गई हैं. कृष्णकांत तब सब कुछ समझ गया.

कृष्णकांत ने बरखा के भाग जाने की खबर अपने मातापिता तथा बरखा के घर वालों को दी. खबर पाते ही बरखा के पिता ओमप्रकाश सैनी तथा कृष्णकांत के पिता राजकुमार और मां सुनीता आ गई. राजकुमार ने 4 घर दूर रहने वाले विमल गुप्ता से मुलाकात की और उन के बेटे दीपक के बारे में पूछा. विमल गुप्ता ने पहले तो कुछ भी बताने से मना कर दिया, लेकिन जब उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी तो विमल गुप्ता ने बेटे का ठिकाना बता दिया.

लगभग एक सप्ताह बाद किसी तरह ओमप्रकाश सैनी व राजकुमार बरखा को शिवराजपुर कस्बे से समझाबुझा कर घर ले आए. दीपक भी साथ था. घर में सैनी समाज के खास लोगों को बुलाया गया. उस के बाद पंचायत हुई. पंचायत में तय हुआ कि दीपक बरखा से मिलने घर नहीं आएगा. बरखा इज्जत से घर में रहेगी. कृष्णकांत बरखा का पूरा खयाल रखेगा. उस के साथ किसी तरह की मारपीट व बदसलूकी नहीं करेगा.

बरखा और कृष्णकांत ने पंचायत के लोगों की बात मान ली. उस के बाद कृष्णकांत बरखा के साथ रहने लगा. बरखा के सासससुर भी साथ रहने लगे. बरखा सासससुर की निगरानी में रहने लगी तो उस का अपने प्रेमी दीपक से मिलनाजुलना बंद हो गया. अब वह जब भी घर से बाहर निकलती तो सास उस के साथ रहती.

दूसरे बेटे के जन्म के बाद नहीं छोड़ा प्रेमी को

समय बीतता रहा. अगस्त 2022 में बरखा ने दूसरे बेटे को जन्म दिया. दूसरे बेटे के जन्म से एक बार फिर से घर में खुशियां लौट आईं. खुशी इस बात की भी थी कि 10 वर्ष बाद बरखा ने फिर से बेटे को जन्म दिया था. इस खुशी में राजकुमार ने समाज के लोगों को दावत दी.

दूसरे बेटे के जन्म के बाद कृष्णकांत को लगा कि बरखा अपने आशिक दीपक को भूल गई है, लेकिन यह उस की भूल थी. बरखा के दिल में अब भी दीपक बसा हुआ था. वह उस के लिए तड़पती भी थी. अपनी तड़प वह फोन के माध्यम से मिटाती थी. बरखा को जब भी मौका मिलता, वह दीपक से बतिया लेती थी और अपनी लगी बुझा लेती थी. दीपक भी बरखा के लिए बेचैन था, लेकिन उस का मिलन नहीं हो पाता था.

27 मई, 2023 को बरखा के अशोक नगर निवासी मामा संजय की तेरहवीं थी. इस कार्यक्रम में शामिल होने बरखा अपने पति कृष्णकांत के साथ अशोक नगर पहुंच गई. यहां उस की मां सरला तथा पिता ओमप्रकाश सैनी भी आए हुए थे. दिन भर मामा के घर जमावड़ा बना रहा.

शाम को कृष्णकांत ने बरखा से घर चलने को कहा तो उस ने कहा कि वह मातापिता के साथ नवाबगंज जा रही है. कल वह घर आ जाएगी. इस के बाद वह अपने दोनों बच्चों के साथ नवाबगंज चली गई और कृष्णकांत अपने घर चला गया.

इधर दीपक को पता चला कि बरखा मामा के यहां गई है तो उस ने फोन पर बरखा से बात की और जीटी रोड स्थित हनुमान मंदिर पर मिलने को कहा. लेकिन बरखा ने उस की बात यह कह कर नहीं मानी कि वह पति और मातापिता की निगरानी में है. इस के बाद कई बार दीपक ने फोन किया और बरखा के संपर्क में बना रहा.

शाम 5 बजे दीपक ने बरखा को फोन किया तो उस ने बताया कि वह मायके नवाबगंज जा रही है. इस पर दीपक ने कहा, “बरखा, आज अगर हमारा मिलन तुम से न हुआ तो मैं अपनी जान दे दूंगा. मैं बहुत दिनों से तुम्हारे लिए तड़प रहा हूं. अब मुझ से रहा नहीं जाता.”

जवाब में बरखा ने कहा, “तुम जान देने की बात मत करो. तुम जागेश्वर मंदिर परिसर आ जाओ. फोन पर संपर्क बनाए रखना. मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करने की पूरी कोशिश करूंगी. मेरी काल का इंतजार करना. कोई जल्दबाजी न करना.”

प्रेमिका को गोली मार की खुदकुशी – भाग 3

प्रेमी से दूर होने लगी नित्या

इधर कुछ दिनों से विशाल को यह लग रहा था कि उस की प्रेमिका नित्या उस से काफी दूरी रखने लगी है, मिलनाजुलना भी एकदम बंद सा कर दिया था. विशाल जब कभी उसे फोन करता तो पहले तो वह फोन उठाती ही नहीं थी. 8-10 बार काल करने के बाद फोन उठाती भी थी तो” ;बहुत बिजी हूं, बाद में बात करूंगी”, कह कर तुरंत फोन काट देती थी.

तभी विशाल को यह मालूम हुआ कि नित्या की शादी किसी इंजीनियर से तय हो गई है और इसी साल मई माह में शादी होगी. यह बात पता चलने पर विशाल को बहुत दुख हुआ और उस का गुस्सा सातवें आसमान चढ़ गया था  इसीलिए विशाल ने अब नित्या से अंतिम फैसला करने का निर्णय ले लिया था, इसीलिए 10 मार्च, 2023 को जैसे ही नित्या अपना पीरियड छोड़ कर आई तो विशाल उसे मिल मिल गया.

“नित्या, तुम से एक बात करनी है,” विशाल ने कहा.

“देखो, अभी मेरा पीरियड भी है और मुझे जल्दी घर भी जाना है.” नित्या ने उसे टालने के इरादे से कहा.

“नित्या, तुम से मेरी दोस्ती और प्यार एक लंबे समय से रहा है, आज मैं तुम से कुछ बात करना चाहता हूं. शायद यह मैं तुम से आखिरी बार कह रहा हूं, उस के बाद हमारे रास्ते अलग होने ही वाले हैं. इतनी सी बात है. चलो कहीं बैठ कर कुछ बातें करते हैं.” विशाल ने कहा.

नित्या ने सोचा कि आखिरी बार मिलने को कह रहा है तो मिल कर बात कर इस से हमेशा के लिए पल्ला भी छुड़ा लूंगी. इस को सच्चाई भी समझा दूंगी, यह सोचते हुए वह विशाल की बाइक पर बैठ गई थी.

विशाल अपनी प्रेमिका नित्या को ले कर जमसर गांव के पास स्थित रायल स्टार ढाबा एवं फैमिली रेस्टोरेंट पहुंचा, जहां पर वे दोनों पहले भी अकसर आया करते थे. विशाल ने चाय और साथ में खाने के लिए स्नैक्स का आर्डर दे दिया और नित्या के साथ रेस्टोरेंट के अंदर स्थित एक केबिन में बैठ गया.

“हां विशाल, बताओ मुझे मिलने के लिए क्यों बुलाया?”नित्या ने पूछा.

“आजकल तुम ने मिलना तो दूर, अब बात करनी तक छोड़ ही है. मुझ से कोई गलती हुई है क्या?” विशाल ने कहा.

‘नहीं, ऐसी बात नहीं है” नित्या ने कहा.

“साफसाफ क्यों नहीं कहती कि मई में तुम्हारी शादी एक इंजीनियर से होने जा रही है” विशाल ने कहा.

“तो क्या हुआ, ये सच बात तो है. इस में नई कौन सी बात है?” नित्या ने कहा.

“तो मेरे साथ अब तक पिछले डेढ़ साल से तुम ये सब कुछ कर रही थी, वह क्या था?” विशाल ने जोर से कहा.

“देखो विशाल, यही तो जिंदगी है. जिंदगी में परिवर्तन होना निश्चित है. मेरी शादी कहीं हो रही है, तुम्हारी भी शादी किसी लड़की से हो जाएगी, लेकिन हमारी दोस्ती बरकरार रहेगी, प्रेम संबंध अब खत्म, यही रीति भी है.” नित्या ने कहा.

नित्या, मैं ने तुम से अपने दिल की गहराइयों से प्यार किया है. तुम ने भी जिंदगी भर मेरा साथ निभाने का वादा किया था. तुम्हें आज अंतिम फैसला लेना होगा, नहीं तो हम दोनों के लिए अच्छा नहीं रहेगा.” यह कहते हुए विशाल अपनी कुरसी से खड़ा हो गया और उस ने अपनी कमर से तमंचा निकाल कर नित्या की ओर तान दिया.

विशाल ने नित्या पर चलाई गोली

अब नित्या सीधे आ कर विशाल को पकड़ कर उस से तमंचा छीनने का प्रयास करने लगी. दोनों के बीच हाथापाई होने लगी. तभी विशाल ने नित्या के सिर को निशाना बनाते हुए तमंचे से फायर झोंक दिया. वहां पर फायर की आवाज सुनते ही कर्मचारी आ गए.

विशाल ने सोचा कि नित्या शायद मर गई है, इसलिए वह वहां से सीधे दौड़ता हुआ बाथरूम में घुस गया और बाथरूम का दरवाजा भीतर से बंद कर उस ने अपनी कनपटी पर गोली मार कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.

रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने विशाल को पकड़ने का भरसक प्रयास भी किया था, लेकिन वे जब तक विशाल को पकड़ पाते, वह भाग कर बाथरूम में घुस गया था और दरवाजा भीतर से बंद कर लिया था.

कर्मचारियों ने यह भी बताया कि खुद के विरोध करने पर ही नित्या की जान बच पाई विशाल ने जब नित्या को मारने के लिए तमंचा निकाला था तो वह उस के बाद अपने प्रेमी विशाल से भिड़ गई थी. हाथापाई के दौरान विशाल ने उस के सिर का निशाना बनाते हुए फायर झोंक दिया था, जिस पर गोली उस के सिर को छूते हुए निकल गई और उस की जान बच गई.

आज अपने स्वार्थ में लोग इतने अधिक अंधे हो गए कि उन्हें अपने ऊपर चिंतनमनन करने के लिए तनिक भी समय नहीं है. आज के युवा स्त्री की गरिमा और पुरुष की महिमा को देहसुख के लिए मलीन कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में नित्या परिवर्तित नाम है.

कैसे हुईं 9 दिन में 3 बहनें गायब – भाग 3

स्टेशन पर भारत और राहुल कुछ बात करने लगेे. उस के बाद भारत ने राहुल को पैसे दिए, पैसे काफी अधिक दिख रहे थे. उस के बाद उन्होंने दोनों बहनों को मिठाई खाने के लिए दी. मिठाई खाने के बाद मनतारा की आंखें खुलीं तो वह पंजाब में थी. उस के साथ उस की बहन नहीं थी. वह एक कमरे में लेटी हुई थी. उस के सामने भारत बैठा हुआ था.

मनतारा ने उस से दीदी के बारे में पूछा तो वो बोला, “तुम्हारी दीदी दिल्ली में हैं. अभी हम लोग भी वहां चलेंगे.” उस के बाद भारत उसे भी दिल्ली ले कर चला गया. वहां उसे किसी के घर में रखा.

मनतारा हो चुकी थी गर्भवती

मनतारा ने बताया कि जहां रह रहे थे, उन्हें भारत ने बताया कि वो मुझे जौब दिलाने के लिए ले कर आया है. वहां भी उस की बहन नहीं थी. वह जब भी दीदी के बारे में पूछती तो भारत बोलता, “जल्द ही तुम अपनी दीदी से मिलोगी.”

फिर एक दिन भारत ने उस के साथ शारीरिक संबंध बनाए. भारत को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना. उस ने उसे भरोसा दिया कि वह उस से शादी करेगा और जौब भी दिला देगा. इसी तरह के आश्वासन दे कर उस ने कई बार उस के साथ संबंध बनाए. वह कभी दिल्ली तो कभी पंजाब उसे ले जाता.

मनतारा को डर बना रहता था कि कहीं विरोध करने पर वह उसे मार न डाले. फिर एक दिन उस घर में एक महिला आई, वह उसे ले कर पंजाब चली गई. वहां उस के साथ गलत काम होता. कभी होश में तो कभी बेहोशी में, उसे याद भी नहीं रहता था. मनतारा समझ गई थी कि उस के साथ बहुत गलत हुआ है. वे लोग उसे हमेशा घर में कैद रखते थे.

मनतारा किसी को देख नहीं सकती थी, न किसी से बात कर सकती थी. वह हमेशा रोती रहती थी. एक कमरे में ही उसे खाना और पानी दिया जाता था. मनतारा यह समझ गई थी कि बड़ी बहन ने ही उस के साथ छल किया है. वह बहुत परेशान रहती थी. वह समझ गई थी कि ये लोग उस से जिस्मफरोशी का धंधा कराना चाहते हैं.

निशा व राहुल को किया गिरफ्तार

अपहरण करने वाला आरोपी राहुल निवासी टिमरख तथा शमशाद की बड़ी बेटी निशा को इस बात का पता चल गया कि छोटी बहन मनतारा व भारत को पुलिस ने पकड़ लिया है. इस पर दोनों 19 मार्च, 2023 को मैनपुरी जायजा लेने के लिए आए.

उन की लोकेशन मिलने व मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश दे कर राहुल को मैनपुरी के तखरऊ पुल से गिरफ्तार कर लिया. उसे थाने ला कर पूछताछ की गई. राहुल की गिरफ्तारी की जानकारी होने पर निशा एसपी औफिस पहुंच गई. इस पर उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया.

दोनों को थाने लाया गया, जहां उन से गहराई से पूछताछ की गई. पूछताछ में बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ. निशा और राहुल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम का परदाफाश कर दिया.

पता चला कि बड़ी बहन निशा ने ही षडयंत्र रच कर इस घटना को अंजाम दिया था. उस ने अपनी दोनों नाबालिग बहनों को अपने प्रेमी राहुल की मदद से गायब कराया और अपने प्रेमी के दोस्त भारत सिंह को सौंपा था. पुलिस ने राहुल व निशा को जेल भेज दिया.

इस पूरी घटना के बाद घर वाले अब बीच वाली बेटी खुशबू के लिए परेशान थे. पिता का कहना था कि हम लोग एक बार बड़ी बेटी से मिलना चाहते हैं, उस से पूछना चाहते हैं उस ने ऐसा क्यों किया? निशा घर की बड़ी बेटी थी. उसे समझदार समझते थे, लेकिन वो तो अपनी ही बहनों की दुश्मन निकली. अपने इस कृत्य से उस ने पूरे परिवार की बदनामी करा दी है. हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे हैं.

बहन के धोखे का शिकार हुई मनतारा गर्भवती होने के बाद अब न्याय के लिए कानून के दरवाजे खटखटा रही है. राज्य बाल आयोग की सदस्य की ओर से पीडि़ता के न्यायालय में दोबारा बयान दर्ज कराने की बात कही है. उधर मामले में पीडि़ता किशोरी के गर्भपात को ले कर अभी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं. जबकि थाना पुलिस ने तीसरी बहन की तलाश और तेजी के साथ शुरू कर दी.

2 बहनों के मिलने के बाद पुलिस ने हार नहीं मानी. तीसरी किशोरी की बरामदगी के लिए अपने स्तर से प्रयास जारी रखे. राहुल और निशा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उन के विभिन्न ठिकानों की जानकारी हो गई थी. इसी बीच पुलिस को तीसरी बेटी खुशबू के बारे में जानकारी मिली.

तब एक पुलिस टीम को राजस्थान के गंगानगर के लिए रवाना किया गया, जहां दबिश दे कर एक स्थान से 6 अप्रैल, 2023 को बीच वाली बेटी खुशबू को भी बरामद करने के साथ ही भारत सिंह को गिरफ्तार कर लिया. मैनपुरी ला कर पुलिस ने खुशबू का मैडिकल कराने के बाद न्यायालय में पेश किया. न्यायालय ने पिता शमशाद की सुपुर्दगी में उस की बीच वाली बेटी खुशबू को सौंप दिया.

एएसपी राजेश कुमार ने बताया कि इस पूरी साजिश में निशा और उस का प्रेमी राहुल शामिल थे. जौब के बहाने निशा अपने प्रेमी राहुल के साथ पहले भी दिल्ली और पंजाब जा चुकी है. इन दोनों ने ही षडयंत्र रच कर खुशबू और मनतारा को दिल्ली लाने को तैयार किया था.

इन लड़कियों को राहुल अपने दोस्तों के साथ रखने वाला था. उन की साजिश यह थी कि इन लड़कियों को यहां ला कर इन से जिस्मफरोशी का धंधा करा के पैसे कमाएंगे. दिसंबर महीने से ही दोनों बहनों को लाने की साजिश शुरू कर दी गई थी. निशा ने सब से पहले अपनी सब से छोटी बहन मनतारा को तैयार किया.

21 दिसंबर को निशा ने गुपचुप तरीके से रात के समय मनतारा को घर से निकाल दिया. इस की घर वालों को कानोंकान खबर तक नहीं हुई. सुबह होने पर मनतारा के गायब होने की जानकारी हुई. उस के 9 दिन बाद 30 दिसंबर, 2022 को जब पिता छोटी बेटी मनतारा की तलाश में पंजाब गए हुए थे, उस ने बीच वाली बहन खुशबू को बरगलाया और उसे अपने साथ ले कर घर से निकल गई.

 

कोर्ट से गर्भपात कराने की मांगी अनुमति

गर्भवती मनतारा की ओर से न्यायालय में प्रार्थनापत्र दे कर गर्भपात करवाने की अनुमति मांगी गई. इस पर न्यायालय ने चिकित्सक की रिपोर्ट पर मनतारा का गर्भपात कराने की अनुमति प्रदान कर दी. परिजनों द्वारा अनुमति मिलने के बाद मनतारा का अस्पताल ले जा कर गर्भपात करा दिया गया.

निशा, उस का प्रेमी राहुल व उस का दोस्त भारत इस समय जेल में हैं. भारत को अपहरण, रेप व पोक्सो एक्ट की धाराओं में जेल भेजा गया है.

ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता है कि सगी बड़ी बहन अपने स्वार्थ की खातिर अपनी नाबालिग छोटी बहनों की लाइफ से खिलवाड़ कर सकती है. अपने प्रेमी व उस के दोस्तों के साथ षडयंत्र रच कर अपनी बहनों व परिवार की बदनामी करा कर निशा को क्या हासिल हुआ? उसे मिली जेल की सलाखें जिस की वह हकदार थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में मनतारा व खुशबू परिवर्तित नाम हैं

प्यार का जूनून

शादी के नाम पर ऐसे होती है ठगी – भाग 4

अजय परेशान था कि ऐसा क्या काम करे कि उसे मोटी कमाई हो. तभी उस के दिमाग में उच्च परिवार की तलाकशुदा ऐसी महिलाओं को ठगने का आइडिया आया जो फिर से शादी करना चाहती हों. इस के लिए उस ने जीवनसाथी डौटकौम वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करा कर अपनी आकर्षक प्रोफाइल बनाई.

प्रोफाइल में उस ने अपना नाम बदल कर राजीव यादव लिखा और अपनी जगह किसी दूसरे का फोटो लगा दिया. नोएडा के छलेरा गांव के रहने वाले युवक अमित चौहान को उस ने मोटी तनख्वाह पर नौकरी पर रख लिया था.

प्रभाव जमाने के लिए अजय ने खुद को आईपीएस अफसर और मिजोरम में डीआईजी के पद पर तैनात बताया. इस आकर्षक प्रोफाइल को देख कर ही अनुष्का उस के जाल में फंसी थी. जिस से उस ने साढ़े 24 लाख रुपए ठग लिए थे

पुलिस ने जालसाज अजय यादव उर्फ राजीव यादव और अमित चौहान को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल तो भेज दिया. लेकिन इस के बाद भी अनुष्का की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. अब अदालत की काररवाई में उसे कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

अनुष्का की ही तरह शालिनी भी शादी के विज्ञापन की वेबसाइट के जरिए एक ऐसे व्यक्ति के चंगुल में फंसी कि उस युवक ने उस के 6 लाख रुपए बड़ी आसानी से ठग लिए.

दिल्ली के कृष्णानगर इलाके के रहने वाला वरुण बीए सेकेंड ईयर किए हुए है. उस ने दरजनों संस्थानों में जौब की, लेकिन कहीं भी टिक नहीं पाया. इसी दौरान उस ने टीवी पर एक क्राइम शो देखा. शो में दिखाया गया था कि एक शख्स मैट्रीमोनियल साइट्स पर एकाउंट बना कर किस तरह महिलाओं को ठगता था. उसी टीवी शो से प्रेरित हो कर वरुण पाल ने भी मैट्रीमोनियल साइट्स के जरिए ठगी करने की योजना बनाई.

योजना के तहत उस ने मैट्रीमोनियल की 3 बड़ी वेबसाइट्स पर अपने कई एकाउंट बनाए और फेसबुक में हैंडसम दिखने वाले लड़कों की तसवीरें लगा दीं. अपनी प्रोफाइल में उस ने खुद को माइक्रोसाफ्ट कंपनी का आईटी मैनेजर बताया. अपना प्रभाव जमाने के लिए वरुण ने अपनी फेसबुक में कुछ अच्छे बंगलों की तसवीरें भी अपलोड कर दीं. उन बंगलों को वह अपने बताता था. खुद को रसूख वाला प्रोजैक्ट करने के बाद कई महिलाएं उस के जाल में फंसीं.

महिलाओं को अपने जाल में फांसने के बाद वह उन से मुलाकात करता और किसी तरह उन के न्यूड फोटोग्राफ हासिल कर लेता था. इस के बाद वरुण का ठगी का खेल शुरू हो जाता था. वह बिजनैस में मोटा घाटा होने की बात कह कर उन से मोटी रकम ऐंठता. जब कोई महिला पैसे देने में आनाकानी करती तो वह न्यूड तसवीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल करता.

शालिनी भी मैट्रीमोनियल साइट के जरिए वरुण पाल के जाल में फंस गई. वरुण ने शालिनी को शादी के जाल में फांस कर 6 लाख रुपए ठग लिए थे. शालिनी से जब वरुण ने और पैसों की डिमांड की तो शालिनी को अहसास हो गया कि उसे ठगा जा रहा है. उस ने और पैसे देने से मना कर दिया तो वरुण ने उसे धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए तो वह उस के न्यूड फोटो इंटरनेट पर डाल देगा.

शालिनी अब समझ चुकी थी कि जिसे वह अपना जीवनसाथी चुनने जा रही थी, वह बहुत शातिर ठग है. उस ने उसे सबक सिखाने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में लिखित शिकायत कर दी.

आर्थिक अपराध शाखा के डीसीपी एस.डी. मिश्रा ने इस मामले में त्वरित काररवाई करते हुए एक पुलिस टीम बनाई. पुलिस टीम ने 8 अगस्त, 2014 को आरोपी वरुण पाल को गिरफ्तार कर लिया.

मैट्रीमोनियल साइटों पर आज भी तमाम फरजी एकाउंट एक्टिव हैं. जिन लोगों ने ऐसे एकाउंट बना रखे हैं, उन का मकसद भोलीभाली लड़कियों, महिलाओं को अपने जाल में फंसा कर उन का आर्थिक और शारीरिक शोषण करना होता है.

ऐसे विज्ञापनों के जरिए शादी के बंधन में बंधने वालों को पहले अच्छी तरह से छानबीन कर लेनी चाहिए कि उस ने अपने प्रोफाइल में जो कुछ दे रखा है, वह सही है या नहीं. यदि बिना जांच किए शादी का प्रपोजल स्वीकार कर लिया तो अनुष्का और शालिनी की तरह पछताना पड़ सकता है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. अनुष्का और शालिनी नाम परिवर्तित हैं.