मामा का खूनी सिंदूर : परिवार ही बना निशाना – भाग 4

प्रवींद्र की छेड़छाड़ से संगीता भी रोमांचित हो उठी. उस ने भी अपनी बांहें फैला दीं. इस के बाद कमरे में सीत्कार की आवाजें गूंजने लगीं.उसी समय ऊषा की आंखें खुल गईं. वह बाथरूम जाने को आंगन में आई तो उसे संगीता के कमरे से अजीब सी आवाजें सुनाई दीं. वह जान गई कि कमरे में बेटी के साथ कोई और भी है. वह दबेपांव कमरे में पहुंची और दोनों को रंगरलियां मनाते रंगेहाथ पकड़ लिया. ऊषा ने संगीता की चोटी पकड़ कर खींची और गाल पर तड़ातड़ तमाचे जड़ दिए. उसी समय प्रवींद्र ने बहन ऊषा का हाथ पकड़ लिया और बोला, ‘‘आज तुझे विरोध बहुत महंगा पड़ेगा.’’

इस के बाद प्रवींद्र और संगीता ने ऊषा को दबोच लिया और कमरे में पड़ी चारपाई पर गिरा कर उस के हाथपैर रस्सी से बांध दिए. फिर वे दोनों उस कमरे में पहुंचे, जहां रमेशचंद्र तख्त पर सो रहे थे. उन दोनों ने मिल कर रमेश के भी हाथपांव रस्सी से बांध दिए. इस के बाद संगीता फावड़ा ले आई.उस ने मां की गरदन पर फावड़े से कई वार किए, जिस से उस की गरदन कट गई और बिस्तर खून से तरबतर हो गया. ऊषा की हत्या करने के बाद दोनों रमेश के पास पहुंचे. वहां प्रवींद्र ने फावड़े से गरदन पर वार कर उसे भी मौत की नींद सुला दिया.

2-2 हत्याओं को अंजाम देने के बाद प्रवींद्र और संगीता ने मिल कर पूरे घर को खंगाला. कमरे में रखे बक्सों में लगे तालों की चाबी से खोला. फिर उस में रखी नकदी व जेवर को अपने कब्जे में कर लिए. इस के बाद दोनों इत्मीनान से घर से फरार हो गए.दूसरे दिन सुबह 10 बजे तक जब रमेशचंद्र के घर में कोई हलचल नहीं हुई तो पड़ोसियों में चर्चा शुरू हुई. इसी बीच पड़ोसी राजू गौतम ने थाना गुरसहायगंज पुलिस को मोबाइल द्वारा सूचना दे दी.सूचना पाते ही कोतवाल नागेंद्र पाठक पुलिस टीम के साथ गौरैयापुर गांव स्थित रमेशचंद्र दोहरे के मकान पर आ गए. उन्होंने पुलिस के साथ घर में प्रवेश किया तो अवाक रह गए. 2 अलगअलग कमरों में ऊषा और रमेशचंद्र की निर्मम हत्या की गई थी.

दोनों के हाथपैर भी बंधे हुए थे. खून से सना फावड़ा कमरे में पड़ा था. जाहिर था कि दोनों की हत्या फावड़े से वार कर के की गई थी. कमरे में रखे बक्सों के ताले खुले पड़े थे, सामान बिखरा था. ऐसा लग रहा था जैसे बदमाशों ने हत्या के बाद लूटपाट भी की थी. घर से मृतक दंपति की जवान बेटी संगीता गायब थी.

शुरू में पुलिस भी हुई गुमराह

कोतवाल नागेंद्र पाठक ने डबल मर्डर की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ ही देर बाद एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह तथा एएसपी के.सी. गोस्वामी भी आ गए. उन्होंने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने जहां घटनास्थल का मुआयना किया वहीं फोरैंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए. पुलिस अधिकारियों ने मौकामुआयना कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए कन्नौज भिजवा दिया और हत्या में इस्तेमाल रस्सी व फावड़ा जाब्ते में शामिल कर लिए.

एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह को जांच के बाद लगा कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम बदमाशों ने दिया है और उस की बेटी संगीता का अपहरण कर लिया है, अत: उन्होंने इसी दिशा में जांच शुरू कराई.

जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि मृतका ऊषा देवी के भाई प्रवींद्र का घर में आनाजाना था. यह भी पता चला कि प्रवींद्र भी घर से फरार है. एक बात और भी चौंकाने वाली पता चली. वह यह कि प्रवींद्र और संगीता, जो रिश्ते में मामाभांजी हैं, के बीच नाजायज रिश्ता था और रमेश इस का विरोध करते थे.
प्रवींद्र और संगीता पुलिस की रडार पर आए तो उन की तलाश शुरू हुई. उन की लोकेशन पता करने के लिए पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा दिए. लेकिन मोबाइल बंद होने से उन की लोकेशन नहीं मिल पा रही थी. पुलिस ने उन की खोज दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि संभावित स्थानों पर की, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. तब पुलिस ने दोनों पर 25-25 हजार का ईनाम घोषित कर दिया.

इधर प्रवींद्र और संगीता डबल मर्डर करने के बाद बस द्वारा कानपुर आए. फिर ट्रेन से मुंबई पहुंचे. वहां वे एक हजार रुपए दे कर शमशाद नाम के  आटो ड्राइवर की झोपड़ी में रात भर रुके. फिर वहां से ट्रेन द्वारा हुगली शहर आए. हुगली शहर के भद्रेश्वर थानाक्षेत्र के आरबीएस रोड पर प्रवींद्र ने एक झोपड़ी किराए पर ले ली. झोपड़ी मालकिन नगमा को उस ने बताया कि वे दोनों पतिपत्नी हैं. प्रवींद्र वहां मेहनतमजदूरी कर अपना व संगीता का भरणपोषण करने लगा. धीरेधीरे 3 माह बीत गए.

नए साल में प्रवींद्र ने अपने मजदूर साथी से 500 रुपए में एक मोबाइल फोन खरीदा और उस में अपना सिम कार्ड डाल कर चालू किया. मोबाइल फोन चालू होते ही पुलिस को उस की लोकेशन पता चल गई. उस की लोकेशन हुगली शहर की थी. यह जानकारी जब एसपी अमरेंद्र प्रसाद को मिली तो उन्होंने एक पुलिस टीम हुगली रवाना कर दी. वहां पुलिस ने प्रवींद्र व संगीता को हिरासत में ले लिया.

8 जनवरी, 2020 को थाना गुरसहायगंज पुलिस ने अभियुक्त प्रवींद्र तथा संगीता को जिला अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार नहीं वासना के अंधे – भाग 3

सादिक अकसर उसे नशीले पदार्थ मुहैया कराता था. कभीकभार जरूरत पड़ने पर नशीले पदार्थ लेने अनूप रुखसार के घर भी जाता था और जब भी जाता था, तब उस का दिल रुखसार को देख कर बेकाबू होने लगता था, एक तो अधेड़, ऊपर से मामूली शक्लसूरत वाले अनूप को रुखसार पसंद नहीं करती थी इसलिए अनूप की दाल उस के सामने कभी नहीं गली.

सादिक और अनूप की मेल मुलाकातें बढ़ने लगीं और दोनों अकसर साथ बैठ कर नशा भी करने लगे. ऐसे में ही एक दिन जज्बाती हो कर सादिक ने उसे सब कुछ बता दिया कि तलाक के बाद भी वह रुखसार के पास जाता है और सेक्स सुख लेता है.

यह सुनते ही अनूप के खुराफाती दिमाग में यह खयाल आया कि अगर सादिक को शीशे में उतार लिया जाए तो रुखसार के संगमरमरी जिस्म पर फिसलने का मौका मिल सकता है. इतना सोचना था कि वह एकाएक अपने इस नशेड़ी दोस्त पर जरूरत से ज्यादा मेहरबान हो उठा और उस पर दिल खोल कर पैसा खर्च करने लगा. दोनों साथसाथ पार्टी करने लगे.

अनूप का पैसा सादिक के लिए सहूलियत वाली बात थी, इसलिए वह उससे दबने लगा और यही अनूप की मंशा भी थी. फिर एक दिन अनूप ने अपनी दिली ख्वाहिश भी सादिक पर जाहिर कर दी कि उसे भी एक बार रुखसार का सुख चाहिए.

इस पर सादिक तुरंत तैयार हो गया और उसे एक बार रुखसार से हमबिस्तर कराने का वादा भी कर डाला. सादिक का डर यह था कि अगर वह न कहेगा तो अनूप पैसे लुटाना बंद कर देगा और वैसे भी रुखसार अब उस की बीवी नहीं थी.

सादिक ने जब रूख्सार को अनूप की मंशा पूरी करने को कहा तो वह नागिन की तरह फुफकार उठी कि वह उसे कतई पंसद नहीं, चाहे कुछ भी हो जाए वह उस के सामने कभी नहीं बिछेगी. इस पर सादिक को खेल बिगड़ता नजर आया जो यह मान कर चल रहा था कि पैसों की खातिर रुखसार इस पेशकश पर इनकार नहीं करेगी.

अकसर अनूप उससे पूछता रहा कि कब मौज करवा रहे हो और हर बार सादिक उसे हिम्मत बंधाता रहता था कि जल्द ही करवा दूंगा, कोशिश कर रहा हूं तुम सब्र रखो. रुखसार कोई ऐसी वैसी औरत नहीं है, इसलिए मनाने में कुछ वक्त तो लगेगा.

लेकिन वह वक्त कभी नहीं आया जब भी सादिक रुखसार से अनूप को खुश करने की बात कहता तो उस का मूड खराब हो जाता था और वह उसे बुरी तरह दुत्कार देती थी. इसी तरह लंबा वक्त गुजर गया तो अनूप को लगा कि रुखसार के साथ सैक्स करने की उस की ख्वाहिश ख्वाब ही रहेगी.

इसलिए एक दिन उस ने थोड़ी कड़ाई से सादिक से बात की तो दोनों ने एक योजना बना डाली कि जब सीधी अंगुली से घी न निकले तो उसे टेढ़ी कर के घी निकाल लेना चाहिए.

इस योजना में तय हुआ कि सादिक रुखसार को नशे में इतना धुत कर देगा कि उसे होश ही न रहे, फिर अनूप अपनी ख्वाहिश पूरी कर लेगा. अनूप पर रुखसार को पाने की जिद सवार थी इसलिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार बैठा था.

योजना के मुताबिक पहली अक्तूबर सादिक रुखसार को नशा पार्टी की बात कह कर उसे अनूप के पत्तीपुरा वाले मकान में ले गया, जहां तीनों ने जम कर नशा किया और जानबूझ कर रुखसार को ज्यादा डोज दी. रुखसार को नशे में डूबते देख सादिक ने उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश शुरू कर दी. नशे में धुत रुखसार भी उत्तेजित हो गई और यह भूल गई कि अनूप भी घर में ही है.

जल्द ही दोनों निर्वस्त्र हो कर एकदूसरे में समाने लगे. यह दृश्य देख कर अनूप की कनपटियां गर्म हो उठीं, गला खुश्क होने लगा और नसों में खून 240 की स्पीड से दौड़ने लगा. रुखसार निर्वस्त्र हो कर बिना किसी शर्मोहया के सादिक से संबंध बना रही थी.

हल्की रोशनी में उस का दूधिया बदन अनूप की आंखों के सामने था. यह सोच कर उस का दिल धाड़धाड़ करता सीने के बाहर आने को बेताब हुआ जा रहा था कि सादिक के फारिग होने के बाद उस का नंबर है.

थोड़ी देर बाद सादिक और रुखसार अलग हुए तो वासना की आग में जलता अनूप रुखसार के नजदीक पहुंच गया और उस से संबंध बनाने की कोशिश करने लगा. रुखसार नशे में तो थी लेकिन इतनी भी नहीं कि यह न समझ पाती कि अनूप क्या करने की कोशिश कर रहा है.

रुखसार को अनूप की यह हरकत बेहद नागवार गुजरी तो वह गुस्से से भर उठी और नशे में ही एक जोरदार लात अनूप को मार दी. लड़खड़ाए अनूप ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और वह फिर उस पर छा जाने की कोशिश करने लगा, लेकिन हाथपैर मारती रुखसार ने उसे कामयाब नहीं होने दिया.

अब तक चुपचाप तमाशा देख रहे सादिक को भी गुस्सा आ गया और वह अनूप की मदद के लिए आगे गया. उस ने सख्ती से रुखसार के दोनों पैर पकड़ लिए लेकिन रुखसार में जाने कहां से इतनी हिम्मत और ताकत आ गई थी कि उस ने फिर विरोध किया, जिस से अनूप की मंशा अधूरी रह गई.

वासना में डूबे आदमी की हालत क्या हो जाती है, यह उस वक्त अनूप की हालत देख कर समझी जा सकती थी, जो कभी ताकत से रुखसार को हासिल करने की कोशिश कर रहा था और कामयाब न होने पर उस के सामने गिड़गिड़ा भी रहा था कि बस एक बार…

लेकिन जब उसे समझ आ गया कि रुखसार कैसे भी नहीं मानने वाली तो गुस्से में आ कर उस ने रुखसार का गला दबाना शुरू कर दिया, जिस से कुछ ही देर में वह लाश में तब्दील हो गई.

रुखसार के दम तोड़ते ही अनूप ने सादिक की तरफ देखा तो वह बोला, ‘‘तू चिंता मत कर मैं इस की लाश के छोटेछोटे टुकड़े कर दूंगा, तू बस इन्हें ठिकाने लगा देना.’’

ऐसा हुआ भी सादिक ने अपनी बीवी के लाश के टुकड़ेटुकड़े कर डाले, जिन्हें थैलों में भर कर अनूप नाले के पास फेंक आया. चूंकि एक दिन में यह काम मुमकिन नहीं था इसलिए टुकड़ों को ठिकाने लगाने में 2 दिन लग गए.

पुलिस की जांच में यह सब कुछ उस वक्त उजागर हो गया जब एक सीसीटीवी फुटेज में अनूप थैला ले जाते तो दिखा लेकिन वापस लौटते वक्त उस के हाथ खाली थे. दोनों एक एक कर गिरफ्तार हुए तो पुलिस की सख्ती के सामने उन्होंने सारी कहानी सुना डाली.

इस तरह रुखसार की कहानी और जिंदगी दोनों खत्म हो गए. अपने अंजाम की एक हद तक वह खुद भी जिम्मेदार थी. शादी के बाद वह पति की कमजोरी से समझौता कर उसे कामधंधा करने को तैयार कर लेती तो शायद इस तरह मरने से बच जाती.

सादिक भी कम गुनहगार नहीं जो अपने निकम्मेपन के चलते नशे के कारोबार और लत में अच्छाबुरा सब कुछ भुला कर अपनी ही तलाकशुदा बीवी को दूसरे के हवाले करने को न केवल तैयार हो गया, बल्कि इस के लिए उस ने अनूप की पूरी मदद भी की.

पुलिस ने घटनास्थल से वह धारदार चाकू और सुपारी काटने का सरौता भी बरामद कर लिया, जिस से सादिक ने रुखसार के जिस्म के टुकड़े किए थे. रुखसार की कान की बालियां भी बरामद हो गईं. घटनास्थल पर उस का खून भी फोरैंसिक जांच के लिए भेजा गया. अब दोनों जेल में हैं और तय है उन्हें सजा होगी, क्योंकि जुर्म वे स्वीकार कर चुके हैं और सिलसिलेवार उस की कहानी भी सुना चुके हैं.

अनूप शायद ही कभी समझ पाए कि त्रियाचरित्र को त्रियाचरित्र क्यों कहा जाता है. जो रुखसार उस की मंशा पूरी करने को राजी नहीं हुई तो नहीं हुई. उसे मरना गवारा था, लेकिन अपनी मरजी के खिलाफ उस के साथ हमबिस्तर होना नहीं. नशे की लत आदमी से क्या कुछ नहीं करवा देती, यह भी इस वारदात से समझ आता है.

कन्नौज बहन की साजिश – भाग 3

लेकिन खैरनगर नहर पुल पर उस के कोई परिचित मिल गए. उन का कोई जरूरी काम था, जिस की वजह से वह उन्हीं के साथ चला गया था. यह बात उसे पिंकी ने बताई थी. उस की हत्या किस ने और क्यों कर दी, उसे जानकारी नहीं है.

पिंकी से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उसे कई रोज से बुखार था. भैया आज सुबह 5 बजे उसे दवा दिलाने उमर्दा के लिए निकले थे. हम दोनों जब खैरनगर पुल पर पहुंचे तो भैया के 2 परिचित मिल गए. उन में एक तो भैया की उम्र का था, जबकि दूसरा 40-42 साल का था.

भैया उसे चाचा कह कर बतिया रहे थे. वह उन दोनों को पहचानती नहीं है. उन दोनों को भैया की मदद की जरूरत थी, इसलिए भैया ने उस से कहा कि दवा शाम को दिला देंगे. इस के बाद वह उसे गांव के बाहर छोड़ कर उन दोनों के साथ चले गए. भैया की हत्या किस ने की, उसे पता नहीं.

लायक सिंह और उस की बेटी पिंकी से पूछताछ के बाद सीओ सुबोध कुमार जायसवाल ने वहां मौजूद अन्य लोगों से भी बात की, लेकिन हत्यारों के बारे में कोई सुराग नहीं लगा. इस के बाद पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए कन्नौज के सरकारी अस्पताल भेज दी. थानाप्रभारी ने लायक सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा लिया और जांच शुरू कर दी.

थानाप्रभारी विजय बहादुर वर्मा ने बलराम यादव के हत्यारों की टोह में ताबड़तोड़ दबिशें दे कर पुराने कई अपराधियों को हिरासत में लिया. उन से कड़ाई से पूछताछ की, लेकिन न तो हत्या का रहस्य खुला और न ही हत्यारे पकड़ में आए. बलराम हत्याकांड अखबारों में छाया हुआ था, जिस से पुलिस अधिकारी भी परेशान थे.

जब 3 दिन बीत जाने के बाद भी बलराम हत्याकांड का खुलासा नहीं हुआ तो एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने एएसपी विनोद कुमार की देखरेख में खुलासे के लिए एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम में ठठिया थानाप्रभारी विजय बहादुर वर्मा, सीओ (तिर्वा) सुबोध कुमार जायसवाल, स्वाट टीम प्रभारी राकेश कुमार तथा सर्विलांस टीम को शामिल किया गया.

टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देखा समझा. रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के शरीर पर 18 घाव पाए गए थे. बलराम की मौत अधिक खून बहने, आंतों के जख्मी होने तथा गले की नस कटने से हुई थी. स्पष्ट था कि हत्यारे बलराम से बहुत ज्यादा नफरत करते थे.

पुलिस टीम ने इस बारे में लायक सिंह से पूछताछ की तो उस ने परिवार के ही एक युवक पर शक जताया. पुलिस ने उस युवक को हिरासत में ले लिया और 2 दिनों तक कड़ाई से पूछताछ की. उस युवक ने जब खुद को फंसता देखा तो उस ने चौंकाने वाली बात बताई.

उस ने पुलिस टीम को जानकारी दी कि बलराम की हत्या का रहस्य उस की बहन सावित्री उर्फ पिंकी के पेट में छिपा है. यदि उस पर सख्ती की जाए तो वह हत्या का परदाफाश कर सकती है.

उस की बात पुलिस टीम को हजम तो नहीं हुई, फिर भी पूछा, ‘‘भला बहन अपने सगे भाई के कत्ल में कैसे शामिल हो सकती है. और फिर वह तो अभी कुल 16 साल की लड़की है.’’

‘‘नहीं सर, आप उस की मासूमियत पर मत जाइए,’’ उस युवक ने अपनी बात मजबूती से कही.

‘‘तुम यकीन के साथ कैसे कह सकते हो कि पिंकी गुनहगार है?’’ पुलिस ने पूछा.

‘‘सर, पिंकी के घर पर कुछ दिन तक जेसीबी चालक प्रदीप यादव रहा था और उसी के घर में खातापीता था. इसी दौरान उस ने पिंकी को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया. पिंकी भी उस की दीवानी बन गई, जिस के चलते दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए.

‘‘दोनों के संबंधों की जानकारी पिंकी के भाई बलराम को हुई तो उस ने प्रदीप को अपमानित कर घर से भगा दिया. लेकिन घर से भगाए जाने के बावजूद पिंकी और प्रदीप के संबंध खत्म नहीं हुए थे.

‘‘प्रदीप व पिंकी हर रोज फोन पर संपर्क में रहते थे. प्रदीप ने ही पिंकी को मोबाइल खरीद कर दिया था. चूंकि बलराम दोनों के प्यार में बाधक था, इसलिए पिंकी और प्रदीप ने ही बलराम को ठिकाने लगाया होगा.’’

उस युवक ने बलराम की हत्या का जो कारण बताया, वह पुलिस टीम को इसलिए ठीक लगा क्योंकि ऐसा संभव था. अभी तक पुलिस टीम विपरीत दिशा में जांच में जुटी थी, लेकिन अब जांच की दिशा प्रेम संबंधों में उलझ गई.

16 वर्षीया सावित्री उर्फ पिंकी यादव पुलिस टीम के रेडार पर आई तो पुलिस ने उस से फिर से पूछताछ की. लेकिन पिंकी ने अपना पुराना बयान ही दोहरा दिया. इस बीच पुलिस टीम ने बहाने से पिंकी का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था.

सुलझ न सकी परिवार की मर्डर मिस्ट्री – भाग 2

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि सोनू के सिर व गले पर तेज धारदार हथियार से 20 से ज्यादा वार किए गए थे. बेटे व बेटी के सिर पर भी धारदार हथियार के 12 से 15 निशान मिले.

शव सौंपे जाने पर अंत्येष्टि को ले कर डा. प्रकाश सिंह और उन की पत्नी के पक्ष के बीच विवाद हो गया. सोनू सिंह की बहन सीमा अरोड़ा ने कहा कि वह सोनू और दोनों बच्चों के शवों की अंत्येष्टि दिल्ली ले जा कर करेंगी. इस पर डा. प्रकाश के परिजन बिफर गए. उन की बहन शकुंतला ने कहा कि अंत्येष्टि कहीं भी करो, लेकिन चारों की एक साथ ही होनी चाहिए.

बाद में अन्य लोगों के दखल पर यह तय हुआ कि चारों की अंत्येष्टि गुरुग्राम में सेक्टर-32 के श्मशान घाट में की जाए. बाद में जब मुखाग्नि देने की बात आई तो इस बात को ले कर भी विवाद होतेहोते बचा. आपसी सहमति से सोनू, अदिति व आदित्य के शव को मुखाग्नि सीमा अरोड़ा के परिवार वालों ने दी. जबकि डा. प्रकाश के शव को उन की बहन के परिवार वालों ने मुखाग्नि दी.

उत्तर प्रदेश में वाराणसी के रघुनाथपुर गांव के रहने वाले डा. प्रकाश सिंह के पिता रामप्रसाद सिंह उर्फ रामू पटेल एक किसान थे. प्रकाश ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की थी. सोनू सिंह भी उन के साथ ही पढ़ती थीं, इसलिए दोनों में जानपहचान हो गई. फिर वे एकदूसरे से प्यार करने लगे.

बाद में दोनों ने ही रसायन विज्ञान में एम.एससी. की. एम.एससी. में दोनों ने गोल्ड मैडल हासिल किए थे. इस के बाद दोनों ने डाक्टरेट की डिग्री हासिल की. डाक्टरेट की पढ़ाई के दौरान दोनों ने अपनेअपने घर वालों की इच्छा के खिलाफ 1996 में शादी कर ली.

दोनों ने भले ही शादी कर ली, लेकिन इस के बाद दोनों के ही परिवारों के बीच गांठ बन गई, जो नाराजगी के रूप में शवों की अंत्येष्टि के दौरान नजर आई.

विवाह के बाद डा. प्रकाश की पत्नी डा. सोनू ने पहले बेटी अदिति को जन्म दिया. इस के करीब 6 साल बाद बेटा हुआ. उस का नाम आदित्य रखा. डा. प्रकाश सिंह ने सब से पहले बेंगलुरु में नौकरी की थी. इस के बाद से ही उन का पैतृक गांव रघुनाथपुर में आनाजाना कम हो गया था.

करीब 12 साल पहले डा. प्रकाश और डा. सोनू सिंह नौकरी के सिलसिले में दिल्ली आ गए. दिल्ली में डा. प्रकाश ने रैनबैक्सी फार्मा कंपनी में नौकरी शुरू की. कुछ समय बाद वे गुरुग्राम आ कर बस गए और डा. प्रकाश सिंह सन फार्मा में नौकरी करने लगे. गुरुग्राम में उन्होंने ‘उप्पल साउथ एंड’ नाम की सोसायटी में फ्लैट ले लिया.

डा. प्रकाश की अच्छीखासी नौकरी थी. घर में सुखसुविधाओं और पैसे की कोई कमी नहीं थी. पतिपत्नी दोनों ही उच्चशिक्षित थे, इसलिए कोई परेशानी भी नहीं थी. डा. सोनू सिंह ऐशोआराम की जिंदगी जीने के बजाए सामाजिक कार्यों में रुचि लेती थीं. इसलिए एक एनजीओ बना कर उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाने और उन का जीवनस्तर ऊंचा उठाने का बीड़ा उठाया.

सोनू सिंह ने करीब 8 साल पहले गुरुग्राम के फाजिलपुर में किराए का भवन ले कर गरीब बच्चों के लिए क्रिएटिव माइंड स्कूल खोला था. बाद में उन्होंने सेक्टर-49 में ‘दीप प्ले हाउस’ नाम से दूसरा स्कूल खोल लिया. सोनू सिंह के एनजीओ के माध्यम से इन दोनों स्कूलों का संचालन केवल गरीब बच्चों के उत्थान के लिए किया जाता था.

रसायन वैज्ञानिक होने के बावजूद डा. प्रकाश सिंह भी बच्चों को पढ़ाने का शौक रखते थे, इसलिए उन्होंने सोहना में ‘क्रिएटिव माइंड स्कूल’ खोला. यह स्कूल बिना लाभहानि के चलाया जाता था. डा. प्रकाश ने अप्रैल 2018 में पलवल में व्यावसायिक नजरिए से एन.एस. पब्लिक स्कूल खोल लिया. पहले यह स्कूल एग्रीमेंट पर लिया गया और बाद में दिसंबर, 2018 में इसे रजिस्ट्री करवा कर खरीद लिया गया.

डा. प्रकाश सिंह की बेटी अदिति जामिया हमदर्द से बी.फार्मा की पढ़ाई कर रही थी. इस साल वह अंतिम वर्ष की छात्रा थी. उस ने पढ़ाई के साथ सन फार्मा कंपनी में इंटर्नशिप भी शुरू कर दी थी. अदिति ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर पिछले साल सोप डायनामिक्स नाम से स्टार्टअप शुरू किया था. डा. दंपति का सब से छोटा बेटा गुरुग्राम के ही डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रहा था.

डा. प्रकाश और उन की पत्नी सहित परिवार के चारों सदस्यों की मौत हो जाने से चारों स्कूलों के संचालन पर सवालिया निशान लग गए हैं. चारों स्कूलों में डेढ़ सौ से अधिक शैक्षणिक और गैरशैक्षणिक स्टाफ है. इन कर्मचारियों को वेतन और भविष्य की चिंता है. इस क ा मुख्य कारण यह है कि इन में 2 स्कूलों में खर्चे जितनी भी आमदनी नहीं होती.

पुलिस को जांचपड़ताल में पता चला कि डा. प्रकाश के घर उन के रिश्तेदारों का बहुत कम आनाजाना था. ज्यादातर सोनू सिंह की बहन सीमा अरोड़ा ही आती थीं. घटना से 10 दिन पहले भी वह परिवार के साथ यहां आई थीं. सीमा अरोड़ा के मुताबिक उस समय ऐसी कोई बात नजर नहीं आई थी, जिस का इतना भयावह परिणाम सामने आता.

डा. प्रकाश के परिवार से बहुत कम लोग कभीकभार ही यहां आते थे. डा. प्रकाश की मां अपने अंतिम समय में कुछ दिन उन के पास रही थीं. डा. प्रकाश 5 भाईबहनों में तीसरे नंबर के थे. 2 बहनें उन से बड़ी थीं और 2 छोटी. इन में एक बड़ी बहन का निधन हो चुका है. एक बहन परिवार के साथ नोएडा में और 2 बहनें बनारस में रहती हैं. डा. प्रकाश के मातापिता का निधन हो चुका है.

पुलिस दूसरे दिन भी वैज्ञानिक के परिवार की मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी रही. हालांकि मौके के हालात और सुसाइड नोट से साफ था कि डा. प्रकाश ने पत्नी, बेटी व बेटे की हत्या के बाद खुद आत्महत्या की थी. लेकिन फिर भी पुलिस यह सोच कर हर एंगल से जांच करती रही कि कहीं यह कोई साजिशपूर्ण तरीके से किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से की गई वारदात तो नहीं है.

मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस को डा. प्रकाश के घर में बाथरूम में मिले 3 मोबाइल फोन से मदद मिलने की उम्मीद थी, इसलिए इन मोबाइलों की काल डिटेल्स निकलवाई गई. इस के अलावा इन मोबाइलों का डेटा रिकवर करने का प्रयास भी किया गया.

प्यार किसी का मौत किसी को

7 मई, 2017 को मध्य प्रदेश के जिला झाबुआ की कोतवाली के प्रभारी आर.सी. भास्करे को हाथीपावा पहाड़ी पर चल रहे श्रमदान में जाना था. वहां एसपी महेशचंद जैन तथा जिलाधिकारी भी आ रहे थे, इसलिए वह समय से वहां पहुंच गए थे.

लेकिन आर.सी. भास्करे जैसे ही वहां पहुंचे, उन्हें किसी ने बताया कि नयागांव और डगरा फलिया के बीच सड़क पर एक लाश पड़ी है, जो नयागांव के रहने वाले तूफान थामोर की है. उस की मोटरसाइकिल भी वहीं पड़ी है. शायद रात को शराब पी कर वह मोटरसाइकिल से घर जा रहा था, तभी उस का एक्सीडेंट हो गया है.

आर.सी. भास्करे ने यह बात एसपी महेशचंद जैन को बताई तो उन्होंने दिशानिर्देश दे कर तुरंत उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने को कहा. जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मोटरसाइकिल गिरी पड़ी है. लाश उसी मोटरसाइकिल के नीचे पड़ी थी. उन्होंने गौर से मोटरसाइकिल और लाश का निरीक्षण किया तो उन्हें यह देख कर हैरानी हुई कि न तो मोटरसाइकिल में किसी तरह की टूटफूट हुई थी और न ही मृतक को कहीं चोट लगी थी.

वहां मोटरसाइकिल के घिसटने का भी कोई निशान नहीं था. जबकि अगर एक्सीडेंट हुआ होता तो मृतक को तो गंभीर चोट आई ही होती, मोटरसाइकिल भी उस के ऊपर गिरने के बजाय कहीं दूर पड़ी होती, साथ ही उस के घिसटने या गिरने के निशान भी होते.

मृतक और मोटरसाइकिल की स्थिति देख कर आर.सी. भास्करे को समझते देर नहीं लगी कि यह हत्या का मामला है. तूफान की हत्या कर के उस के ऊपर मोटरसाइकिल रख कर उसे एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की गई है. आर.सी. भास्करे ने मृतक के घर सूचना भिजवा दी थी. सूचना पा कर मृतक की पत्नी रेमुबाई रोती हुई आ पहुंची. वह लाश पर सिर पटकपटक कर रो रही थी. पुलिस ने सांत्वना दे कर उसे अलग किया.

crime

आर.सी. भास्करे लाश और मोटरसाइकिल का निरीक्षण कर रहे थे कि एसपी महेशचंद्र जैन भी आ गए. उन्होंने भी लाश एवं घटनास्थल का निरीक्षण किया. आर.सी. भास्करे ने उन्हें अपने मन की बात बताई तो उन्होंने भी उन की बात का समर्थन किया. एसपी साहब थानाप्रभारी को आवश्यक निर्देश दे कर चले गए.

इस के बाद आर.सी. भास्करे के साथ आए एसआई पी.एस. डामोर, एम.एल. भाटी, एएसआई अनीता तोमर, आरक्षक रामकुमार व गणेश की मदद से घटनास्थल की काररवाई निपटाने लगे. उन्होंने सारी औपचारिकताएं पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

अब तक मृतक की पत्नी रेमुबाई काफी हद तक शांत हो गई थी. आर.सी. भास्करे ने उस से पूछताछ शुरू की तो उस ने बताया कि उस के पति की मौत एक्सीडेंट से हुई है. पुलिस ने जब उस से कहा कि तूफान की मौत एक्सीडेंट से नहीं हुई, किसी ने उस की हत्या की है तो उस ने हैरानी से कहा, ‘‘साहब, मेरे पति की कोई हत्या क्यों करेगा? उन की तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी. आप को गलतफहमी हो रही है. रात में वह रोज शराब पी कर लौटते थे. कल भी शराब पी कर आ रहे होंगे, रास्ते में दुर्घटना हो गई होगी.’’

‘‘जब तुम्हारे पति रात में घर नहीं पहुंचे तो तुम ने उन की खोजखबर नहीं ली?’’ आर.सी. भास्करे ने पूछा.

‘‘साहब, खोजखबर क्या लेती, यह कोई एक दिन की बात थोड़े ही थी. अकसर शराब पी कर वह रात को घर से गायब रहते थे. कल वह घर नहीं पहुंचे तो मैं ने यही समझा कि हमेशा की तरह आज भी कहीं रुक गए होंगे.’’ रेमुबाई ने कहा.

रेमुबाई जिस तरह आत्मविश्वास के साथ पुलिस के सवालों का जवाब दे रही थी, वह भी हैरानी की बात थी. जिस औरत का पति मर गया हो, उस का इस तरह जवाब देना पुलिस को शक में डाल रहा था. क्योंकि इस स्थिति में तो औरत को कुछ कहनेसुनने का होश ही नहीं रहता.

बहरहाल, इस पूछताछ में पता चला था कि मृतक तूफान झाबुआ के बसस्टैंड के पास स्थित नीरज राठौर के टेंटहाउस में काम करता था. उस दिन शाम को घर आने के बाद साढ़े 10 बजे के करीब थोड़ी देर में लौट आने को कह कर वह मोटरसाइकिल ले कर घर से निकला तो लौट कर नहीं आया था.

आर.सी. भास्करे ने टेंटहाउस के मालिक नीरज राठौर और उस के यहां काम करने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की तो उन सभी ने भी यही बताया कि तूफान बहुत ही मेहनती और सीधासादा आदमी था. ऐसे आदमी की भला किसी से क्या दुश्मनी होगी, जो उस की हत्या कर दी जाए.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, तूफान की मौत मारपीट की वजह से हुई थी. अब पूरी तरह से साफ हो गया था कि यह एक्सीडेंट का मामला नहीं था. इस के बाद कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

आर.सी. भास्करे जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा करना चाहते थे, लेकिन 3 दिनों की जांच में उन के हाथ कोई सुराग नहीं लगा. अंत में उन्होंने मुखबिरों की मदद ली. किसी मुखबिर से उन्हें पता चला कि तूफान की हत्या के बाद से उस की पत्नी रेमुबाई ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है.

यह सुन कर आर.सी. भास्करे सोच में पड़ गए कि रेमुबाई ने आखिर अपना मोबाइल फोन क्यों बंद कर लिया है? उन्हें कुछ गड़बड़ लगा तो उन्होंने तूफान के बेटे को कोतवाली बुला कर पूछताछ की. एक सवाल के जवाब में बच्चा गड़बड़ाया तो उस का जवाब उन्होंने अपनी मां से पूछ कर बताने को कहा.

इस पर बच्चे ने कहा कि उस की मां का मोबाइल फोन बंद है, इसलिए वह उन से सवाल का जवाब नहीं पूछ सकता. थानाप्रभारी की समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी कौन सी वजह है कि रेमुबाई ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया है.

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अब उन्हें तूफान की हत्या में रेमुबाई का हाथ होने का शक हुआ. उन्होंने यह बात एसपी महेशचंद्र जैन को बताई तो उन्होंने तुरंत रेमुबाई को थाने बुला कर पूछताछ करने का आदेश दिया.

थाने बुला कर रेमुबाई से पूछताछ शुरू हुई तो वह एक ही जवाब दे रही थी कि उसे नहीं मालूम कि उस रात क्या हुआ था? उसे सिर्फ यही पता है कि वह रात को घर से निकले तो लौट कर नहीं आए. घर आते समय उन का एक्सीडेंट हो गया था.

जब आर.सी. भास्करे ने पूछा कि तूफान की मौत के बाद उस ने अपना मोबाइल फोन क्यों बंद कर लिया तो इस का जवाब देने में रेमुबाई बगलें झांकने लगी. घबराहट उस के चेहरे पर साफ नजर आने लगी.

फिर तो थानाप्रभारी को समझते देर नहीं लगी कि तूफान की हत्या में किसी न किसी रूप में इस का भी हाथ है.  उन्होंने रेमुबाई को एएसआई अनीता तोमर के हवाले कर दिया. उन्होंने सख्ती से उस से पूछताछ शुरू की तो रेमुबाई ने पति की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करने में देर नहीं लगाई. इस के बाद उस ने पति की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस तरह थी—

मध्य प्रदेश के जिला झाबुआ की कोतवाली के अंतर्गत रहने वाले तूफान की पत्नी रेमुबाई के पेट में ऐसा दर्द उठा कि कई डाक्टरों के इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ. तभी उस के एक परिचित ने बताया कि झाबुआ से ही जुड़े गुजरात के जिला दाहोद के थाना कतवारा के गांव खगेला का रहने वाला तांत्रिक मंथूर उस का इलाज कर सकता है.

उसे पूरा विश्वास है कि उस की झाड़फूंक से वह निश्चित रूप से ठीक हो जाएगी. यह करीब 4 साल पहले की बात है. रेमुबाई पति तूफान को ले कर तांत्रिक मंथूर के पास पहुंची. रेमुबाई पर एक गहरी नजर डाल कर तांत्रिक मंथूर ने कहा कि उसे 16 शनिवार बिना नागा लगातार आना पड़ेगा. तूफान नौकरी करता था, इसलिए वह पत्नी को हर शनिवार ले कर तांत्रिक के यहां नहीं जा सकता था. इसलिए रेमुबाई अकेली ही तांत्रिक मंथूर के यहां हर शनिवार झाड़फूंक कराने जाने लगी.

तांत्रिक मंथूर ने 4 शनिवार तक नीम की पत्तियों से उस की झाड़फूंक की. 5वें शनिवार को उस ने रेमुबाई से अपने कपड़े ढीले कर के फर्श पर लेट जाने को कहा. रेमुबाई को किसी तरह का कोई शकशुबहा तो था नहीं, इसलिए वह कपड़े ढीले कर फर्श पर लेट गई. करीब 2 घंटे तक मंथूर मंत्र पढ़ते हुए उस के शरीर पर हाथ फेरते हुए उस की बीमारी भगाता रहा.

रेमुबाई के अनुसार, मंथूर भले ही अधेड़ था, लेकिन उस के हाथों में ऐसी तपिश थी कि जब वह उस के शरीर पर हाथ फेरता था तो उसे अजीब सा सुख मिलता था.

7वें शनिवार को मंथूर ने उस से सारे कपड़े उतार कर लेटने को कहा तो रेमुबाई मना नहीं कर सकी. वह कपड़े उतार कर लेटने लगी तो तांत्रिक मंथूर ने दवा के नाम पर उसे थोड़ी शराब पीने को दी.

इस के बाद तांत्रिक ने भी शराब पी. झाड़फूंक करतेकरते मंथूर रेमुबाई के ऊपर लेट गया तो तांत्रिक प्रक्रिया समझ कर रेमुबाई ने कोई विरोध नहीं किया. इस तरह तांत्रिक मंथूर ने उस के साथ शारीरिक संबंध बना लिए.

इस के बाद रेमुबाई जब भी उस के यहां इलाज कराने जाती, मंथूर उसे शराब पिला कर उस के साथ शारीरिक संबंध बनाता. मंथूर के प्यार में तूफान से ज्यादा जोश और गरमी थी, इसलिए उसे उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने में आनंद आने लगा. दूसरी ओर मंथूर भी रेमुबाई का दीवाना हो चुका था. अब वह इलाज के बहाने उस के घर भी आने लगा था.

16 शनिवार पूरे हो गए तो तूफान ने पत्नी से कहा, ‘‘अब तो तुम्हारा इलाज पूरा हो चुका है, अब तुम तांत्रिक के यहां क्यों जाती हो?’’

तांत्रिक के प्यार में उलझी रेमुबाई ने कहा, ‘‘अभी मैं पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हूं, इसलिए अभी मुझे इलाज की और जरूरत है.’’

आखिर कब तक रेमुबाई बहाने बना कर तांत्रिक के पास जाती रहती. मंथूर भी उस के घर लगातार आता रहा. इन्हीं बातों से तूफान को पत्नी पर शक हुआ तो वह पत्नी को मंथूर के यहां जाने से रोकने लगा. अब इलाज तो सिर्फ बहाना था, रेमुबाई तो मंथूर से मिलने जाती थी, इसलिए पति के मना करने के बावजूद वह नहीं मानी.

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रेमुबाई की जिद से तूफान को चिंता हुई. फिर तो दोनों में झगड़ा होने लगा. रेमुबाई को लगा कि इलाज और बीमारी के नाम पर अब यह खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता. जबकि वह मंथूर के प्यार में इस कदर कैद हो चुकी थी कि अब उस के बिना नहीं रह सकती थी, इसलिए वह उस के लिए कुछ भी कर सकती थी.

शायद यही वजह थी कि उस ने मंथूर से तूफान को रास्ते से हटाने के लिए कह दिया. मंथूर भी रेमुबाई के लिए कुछ भी करने को तैयार था. इसलिए उस के कहने पर वह भी तूफान की हत्या करने को तैयार हो गया.

योजना बना कर 6 मई, 2017 को मंथूर अपने दोस्त गोरचंद के साथ नयागांव डूंगरा के जंगल में पहुंचा और एक पेड़ की आड़ में छिप कर बैठ गया. रेमुबाई को उस ने यह बात बता दी, इसलिए जैसे ही तूफान घर आया, उस ने बहुत ज्यादा पेट में दर्द होने की बात कह कर कहा, ‘‘मंथूर किसी का इलाज करने झाबुआ आया है, मैं ने उसे फोन किया था, वह आने को तैयार है, इसलिए तुम डूंगरा जा कर उसे ले आओ.’’

तूफान बिना देर किए मोटरसाइकिल ले कर तांत्रिक मंथूर को लेने चला गया. नयागांव और डूंगरा के बीच मंथूर गोरचंद के साथ बैठा तूफान के आने का इंतजार कर रहा था.

जैसे ही तूफान उन के करीब पहुंचा, दोनों ने लाठियों से पीटपीट कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद उस की लाश को मोटरसाइकिल के नीचे रख दिया, ताकि देखने से लगे कि इस का एक्सीडेंट हुआ है.

लेकिन उन की यह चाल कामयाब नहीं हुई और थानाप्रभारी आर.सी. भास्करे को सच्चाई का पता चल गया.

रेमुबाई की गिरफ्तारी के बाद आर.सी. भास्करे ने तांत्रिक मंथूर और उस के साथी गोरचंद को भी गिरफ्तार कर लिया था. इस के बाद तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. जेल जाने के बाद रेमुबाई के हाथ से वह सब भी निकल गया, जो था. आखिर पति के साथ उसे ऐसी क्या तकलीफ थी, जो अधेड़ तांत्रिक के प्यार में पड़ कर अपना सब लुटा बैठी.

मुंहबोले भाई की करतूत : अपनों ने ही दिया धोखा

18 जून, 2017 की  सुबह होते ही मानिकपुर गांव के कुछ लोग खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी उन में से किसी की नजर एक बैंगन के खेत की ओर चली गई. उस खेत में किनारे पर ही एक युवक की लाश पड़ी थी. लोग वहां इकट्ठा हो कर लाश को पहचानने की कोशिश करने लगे.

लाश को नजदीक से देख कर लोग हैरान रह गए, क्योंकि लाश गांव के अजय कुमार राव उर्फ बबलू की थी. अजय की हत्या की खबर गांव पहुंची तो उस के घर वालों के अलावा गांव के और लोग भी घटनास्थल पर पहुंच गए. अजय के घर वाले गांव वालों की मदद से लाश को बैंगन के खेत से घर ले आए. इसी बीच किसी ने इस की सूचना थाना अहरौरा पुलिस को दे दी थी.

सूचना पा कर कुछ ही देर में थानाप्रभारी प्रवीन कुमार सिंह एसएसआई विनोद कुमार दुबे और अन्य स्टाफ के साथ मानिकपुर गांव स्थित अजय के घर पहुंच गए. उन्होंने लाश का मुआयना किया तो उस के गले पर निशान पाए गए. इस के बाद उन्होंने उस जगह का निरीक्षण किया, जहां लाश मिली थी.

प्रवीण कुमार सिंह ने मृतक के घर वालों से किसी से दुश्मनी के बारे में पूछा तो मृतक अजय के पिता ने बताया कि उन की किसी से दुश्मनी नहीं है. अजय भी मोहल्ले में सब से मिलताजुलता था. उस का मकान बन रहा था, बीती रात उस ने घर पर मजदूरों को दावत भी दी थी.

दावत खा कर सभी मजदूर अपनेअपने घर चले गए थे. उन के जाने के बाद अजय भी छोटे भाई प्रद्युम्न के साथ सोने चला गया था. इस के बाद रात करीब साढ़े 11 बजे उस के मोबाइल पर किसी का फोन आया था. फोन पर बातें करता हुआ वह घर से गया तो फिर लौट कर नहीं आया.

उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना देने के बाद थानाप्रभारी प्रवीण कुमार सिंह ने जरूरी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. सूचना मिलने पर एसपी आशीष तिवारी, एएसपी (औपरेशन) हफीजुल रहमान, सीओ (औपरेशन) के.पी. सिंह ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर मृतक के घर वलों से बातचीत की. मृतक के पिता रामराज की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

एसआई विनोद कुमार ने केस की जांच शुरू की. अजय ने जिन लोगों को अपने यहां पार्टी में बुलाया था, उन से बात की गई. अजय जिस मोबाइल फोन पर बात करता हुआ घर से निकला था, वह मोबाइल गायब था. वह बैंगन के खेत में लाश के पास भी नहीं मिला था. अजय के पास आखिरी फोन किस का आया था, यह जानने के लिए पुलिस ने उस के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स से पता चला कि अजय के फोन पर आखिरी काल थाना इलिया के गांव डेहरी निवासी अनीता की आई थी. वह दिनेश कुमार की पत्नी थी. पुलिस अनीता के घर पहुंची तो पता चला कि वह पति के साथ कहीं गई हुई है.

एक मुखबिर ने थानाप्रभारी को बताया कि अनीता और अजय के बीच नाजायज संबंध थे. यह बात गांव के बच्चेबच्चे को पता है. इस जानकारी के बाद थानाप्रभारी के दिमाग में हत्या की पूरी कहानी घूमने लगी. वह समझ गए कि मामला प्रेमसंबंध का है. पुलिस ने उन दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए. मदद के लिए मुखबिरों को भी लगा दिया.

घटना के 3 दिनों बाद 21 जून की देर शाम मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दिनेश और उस की पत्नी अनीता को चकिया तिराहा, अहरौरा से गिरफ्तार कर लिया. वे दोनों कहीं भागने की फिराक में थे.

पुलिस दोनों को पकड़ कर थाने ले आई. उन से अजय की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों की नींव पर उपजे अपराध की कहानी थी-

दिनेश कुमार उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली के थाना इलिया के गांव डेहरी का रहने वाला था. पैतृक संपत्ति के बंटवारे को ले कर उस का अपने घर वालों से विवाद चल रहा था. कलह ज्यादा बढ़ गई तो वह परेशान रहने लगा. उस का कामधंधे में भी मन नहीं लगता था, जिस से पत्नी को घर का खर्च चलाने में परेशानी होने लगी.

इस के बाद दिनेश का अनीता से भी रोजाना विवाद होने लगा. रोजरोज की किचकिच से तंग आ कर अनीता मायके चली गई. उस का मायका मीरजापुर जिले के मानिकपुर गांव में था. पिछले 3 सालों से वह मायके में ही रह रही थी.

चूंकि इलिया और अहरौरा गांवों के बीच कोई खास दूरी नहीं थी, इसलिए जब भी दिनेश का मन करता, पत्नी से मिलने ससुराल पहुंच जाता. जिस तरह गांव के लोग एकदूसरे के घर आतेजाते हैं, उसी तरह अनीता के घर गांव के ही अजय उर्फ बबलू का आनाजाना था. दोनों का रिश्ता भाईबहन का था, इसलिए अजय अनीता से बातें करता तो उस के घर वालों को जरा भी बुरा नहीं लगता था.

पर युवा मन कब फिसल जाए, कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही कुछ अजय और अनीता के साथ भी हुआ. कहने को तो उन का रिश्ता भाईबहन का था, लेकिन अजय अनीता को दूसरी ही नजरों से देखता था. और वह उस के यहां अकसर तभी आता था, जब उस के घर कोई नहीं होता था.

बातोंबातों में वह अनीता को छू भी लिया करता था. कभी सिर पर हाथ फेर देता तो कभी हाथ पकड़ लेता. पहले तो अनीता ने उस की इन बातों पर गौर नहीं किया, लेकिन धीरेधीरे उस की भी समझ में आने लगा कि अजय के मन में क्या चल रहा है. वह चुप रही, इसलिए अजय उस की स्वीकृति समझ बैठा.

अब वह उपयुक्त अवसर की तलाश में था. संयोग से एक दिन उसे मौका मिल ही गया. उस दिन अनीता घर पर बिलकुल अकेली थी. घर के कामकाज निपटा कर वह थोड़ी फुरसत में हुई ही थी कि दबेपांव अजय घर में आ गया. अचानक अजय को आया देख कर अनीता बोली, ‘‘बबलू भैया तुम?’’

अनीता उसे बबलू ही कहती थी. उस की बात बीच में ही काट कर अजय ने कहा, ‘‘क्यों क्या हुआ, मैं ने आ कर कोई गलत किया क्या?’’

‘‘अरे नहीं, तुम तो बुरा मान गए. मेरे कहने का मतलब यह नहीं था.’’ अनीता कुछ और कहती, अजय उस के मुंह पर हाथ रख कर, ‘‘अब छोड़ो न उस बात को, मुझे प्यास लगी है.’’

‘‘…तो पहले क्यों नहीं कहा तुम ने, मैं अभी पानी लाती हूं.’’ इतना कह कर अनीता पलट कर पानी लेने जाने लगी. अनीता के पीछेपीछे अजय भी हो लिया और जैसे ही वह मटके से पानी ले कर चलने को हुई, उस ने अनीता को पीछे से अपनी बांहों में दबोच लिया.
अजय की इस हरकत से अनीता घबरा गई. उस ने कहा, ‘‘यह तुम क्या कर रहे हो? छोड़ो, कोई देख लेगा तो बवाल हो जाएगा.’’

‘‘घबराने की कोई बात नहीं है, मैं ने आते समय दरवाजे की कुंडी लगा दी है.’’ इतना कह अजय ने अपनी बांहों की जकड़न और बढ़ा दी. अनीता ने उस से बचने की लाख कोशिश की, लेकिन उस के आगे वह बेबस हो गई. अंतत: अजय ने उस दिन अपनी इच्छा पूरी कर ही ली. इस के बाद अजय जातेजाते अनीता को धमका भी गया कि अगर उस ने इस बात को किसी से बताया तो उसी की बदनामी होगी.

अपनी बदनामी की वजह से अनीता ने यह बात किसी को नहीं बताई. वह चुप्पी साधे रही. अनीता से एक बार जबरन संबंध बनाने के बाद अजय ने उस की चुप्पी को हथियार बना लिया. वह अकसर मौका देख कर उस के घर आ आता और संबंध बनाने के लिए उसे विवश करता. अनीता चाह कर भी अपना मुंह नहीं खोल पा रही थी. धीरेधीरे वह अजय की हरकतों से तंग आ चुकी थी.

आखिर वह ऐसे कब तक घुटघुट कर जीती रहती. उस ने एक दिन अपने पति दिनेश को सारी बात बता दी. पत्नी की व्यथा सुन कर दिनेश आगबबूला हो उठा. उस ने तय कर लिया कि वह अजय को इस की सजा जरूर देगा. इस के बाद उस ने पत्नी के साथ मिल कर अजय को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.

योजना के मुताबिक अनीता ने 17 जून, 2017 की रात अजय को फोन कर के उस के घर से करीब 200 मीटर दूर सीवान के करीब एक बैंगन के खेत में बुलाया. उस दिन अजय ने अपने घर पर मजदूरों को पार्टी दी थी. खापी कर वह अपने छोटे भाई प्रद्युम्न के साथ सोया हुआ था. मोबाइल फोन की घंटी बजने पर उस ने जैसे ही हैलो कहा. दूसरी ओर से अनीता की आवाज सुन कर उस की नींद गायब हो गई.

उस ने कहा, ‘‘बबलू अभी मौका है, तुम सीवान के पास बैंगन वाले खेत में आ जाओ. मैं वहां पहुंच रही हूं.’’

यह सुन कर अजय की बांछें खिल उठीं. खुशी में पागल हुआ अजय फोन कान से लगाए बातें करता हुआ अपने कमरे से बाहर आ गया और सीधे बैंगन के खेत की ओर चल पड़ा. वहां पहले से ही दिनेश छिपा बैठा था. रात करीब साढ़े 11 बजे जैसे ही अजय बैंगन के खेत में पहुंचा, वहां अनीता को देख कर खुशी से झूम उठा.

अजय को इस बात की जरा भी आशंका नहीं थी कि जिस अनीता को देख कर वह खुशी के मारे पागल हुआ जा रहा है, आज वही खुशी उस की मौत बन कर खड़ी है.

सुनसान जगह पर अनीता को देख कर अजय ने उसे अपनी बांहों में समेटने की कोशिश की तो तभी अनीता ने कहा, ‘‘अरे, इतनी भी क्या जल्दी है, जो इतना उतावले हुए जा रहे हो. मैं कहीं भाग नहीं रही हूं. आज तुम्हें यहां इसीलिए बुलाया है कि हम जी भर कर प्यार करेंगे.’’

‘‘मुझे पता था कि एक न एक दिन तुम मेरी बांहों में खुद आओगी. देखो वह दिन आ भी गया.’’ अजय ने कहा.
अजय ने फिर से अनीता को बांहों में समेटने की कोशिश की तो पीछे से घात लगाए बैठे अनीता के पति दिनेश ने दबेपांव आ कर अजय के गले में नायलौन की रस्सी डाल कर गला कसना शुरू कर दिया.

अप्रत्याशित ढंग से हुए इस हमले से अनभिज्ञ अजय अपने बचाव में जब तक कुछ कर पाता, तब तक दिनेश ने दोनों हाथों से उस के गले में पड़ी रस्सी कस दी, जिस से उस की मौत हो गई.

दिनेश ने उसे बचने का बिलकुल भी मौका नहीं दिया. अजय उर्फ बबलू को मौत की नींद सुलाने के बाद दिनेश और अनीता ने उस की लाश को बैंगन के खेत में डाल दिया और अपनेअपने घर चले गए.

घटना के बाद दोनों गांव में ही लोगों की नजरों से बच कर रह रहे थे और पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे.

जब उन्हें लगा कि वह गांव में ज्यादा दिनों तक पुलिस से बच कर नहीं रह सकते तो कहीं जाने के लिए वे अहरौरा के चकिया तिराहे पर पहुंचे, तभी पुलिस की गिरफ्त में आ गए.

दोनों से पूछताछ कर के पुलिस ने उन की निशानदेही पर बैंगन के खेत से नायलौन की रस्सी और मृतक का मोबाइल फोन बरामद कर लिया. पुलिस ने दोनों को सक्षम न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक दोनों की जमानत नहीं हो पाई थी.

उधर पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने अभियुक्तों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम की पीठ थपथपाई. अनीता ने अगर यह बात पहले ही घर वालों को बता दी होती तो आज इस की नौबत नहीं आती. उस ने समझदारी से काम लिया होता तो पति के साथ उसे जेल भी न जाना पड़ता.

—कथा पुलिस तथा मीडिया सूत्रों पर आधारित

अवैध संबंध पत्नी के, जान गई पति की

12 मई, 2017 की बात है. उस दिन पंजाब के शहर जालंधर का रहने वाला रिंकू सुबह से ही काफी परेशान था. क्योंकि तलाक के मामले में उस की पेशी थी. वह उस रात भी सो नहीं सका था. उस के दोनों बच्चे स्कूल चले गए तो कमरे में बैठ कर वह कुछ सोचने लगा. 10 बजे वह बच्चों को खाना पहुंचाने स्कूल गया, जहां से 11 बजे लौटा.

इस के बाद वह कमरे में बैठ कर कुछ लिखने लगा. दोपहर को 11 साल की बेटी पलक घर लौटी तो उस ने जैसे ही दरवाजा खोला, सामने का दृश्य देख कर वह चीख पड़ी. उस के पिता बलविंदर उर्फ रिंकू कपड़े के फंदे में पंखे से लटके थे.

पलक की चीख और रोने की आवाज सुन कर घर वालों के अलावा पड़ोसी भी आ गए. रिंकू को उस हालत में देख कर उस के पिता प्रेमनाथ भी फफकफफक कर रो पड़े. यह पुलिस केस था, इसलिए लाश को नीचे नहीं उतारा. किसी ने फोन कर के इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी जीवन सिंह एएसआई कुलविंदर सिंह, हवलदार जगजीत सिंह, सुरजीत सिंह, सिपाही जसप्रीत सिंघौर, महिला सिपाही वीना रानी के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. पुलिस ने रिंकू की लाश उतार कर कब्जे में ले ली.

चूंकि आमतौर पर आत्महत्या के मामलों में आसपास सुसाइड नोट मिल जाता है, इसलिए पुलिस ने कमरे की तलाशी शुरू कर दी. इस तलाशी में बैड के गद्दे के नीचे एक सुसाइड नोट मिल गया. जिस में रिंकू ने अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी पत्नी ज्योति और उस के प्रेमी रजनीश को ठहराया था. सुसाइड नोट में साफसाफ लिखा था कि इन्हीं दोनों के डर की वजह से वह मौत को गले लगा रहा है.

पुलिस ने मृतक के घर वालों से जरूरी पूछताछ कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया और मृतक के पिता प्रेमनाथ के बयान और सुसाइड नोट  के आधार पर ज्योति और उस के प्रेमी रजनीश मल्होत्रा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस घटनास्थल पर काररवाई कर ही रही थी कि रोतीबिलखती ज्योति वहां पहुंच गई. थानाप्रभारी के आदेश पर महिला सिपाही वीना रानी ने ज्योति को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने अपने प्रेमप्रसंग से ले कर पति के आत्महत्या करने तक की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी-

ज्योति जालंधर शहर की बस्ती दनिशां के कटरा मोहल्ले के रहने वाले बलविंदर उर्फ रिंकू की पत्नी थी. रिंकू 4 भाईबहनों में सब से बड़ा था. उस के पिता प्रेमनाथ का टैंट हाउस था. वह पिता के साथ उसी पर बैठता था. करीब 14 साल पहले सन 2003 में ज्योति  के साथ उस की शादी हुई थी. ज्योति जम्मू की रहने वाली थी.

दोनों की गृहस्थी ठीकठाक चल रही थी. ज्योति 2 बच्चों की मां बन गई थी. वह काफी बोल्ड स्वभाव की थी. शादी से पहले उस के कहीं आनेजाने पर रोक नहीं थी. पर शादी के बाद उस की स्थिति खूंटे से बंधी गाय की तरह हो गई थी. वह घर से निकल कर बाहर घूमना चाहती थी. वह चाहती थी कि उस के ऊपर किसी तरह की कोई पाबंदी न हो. जहां उस का मन करे, वह आएजाए. रिंकू से वह अपने मन की यह बात कहती तो वह खुद के व्यस्त होने की बात कह देता.

एक बार ज्योति पति के साथ जालंधर के शेखां बाजार स्थित आर्टिफिशियल ज्वैलरी के शोरूम पर गई. यह शोरूम जालंधर के टांडा रोड के रहने वाले रजनीश मल्होत्रा का था. वह काफी बड़ा शोरूम था, जहां तमाम लड़कियां काम करती थीं. ज्योति बेहद खूबसूरत थी.

रजनीश मल्होत्रा दिलफेंक किस्म का इंसान था. हालांकि वह बालबच्चेदार था, इस के बावजूद वह सुंदर महिलाओं की तरफ आकर्षित हो जाता था. ज्योति भी उस के दिल की घंटी बजा गई. इसलिए वह उस के बारे में जानने के लिए बेचैन हो उठा. बहरहाल, अपने यारदोस्तों से उस ने पता कर लिया कि जो महिला उस के दिल की घंटी बजा कर बेचैन कर गई है, उस का नाम ज्योति है और वह कटरा मोहल्ले के रहने वाले रिंकू की बीवी है. इस के बाद रजनीश ने कटरा मोहल्ले के ही रहने वाले अपने एक दोस्त से ज्योति और उस के परिवार के बारे में पता किया और ज्योति से नजदीकी संबंध बनाने के उपाय खोजने लगा.

रजनीश ने सोचा कि पहले ज्योति के पति से दोस्ती की जाए, पर पता चला कि रिंकू तो दिन भर पिता के साथ टैंट हाउस पर बैठा रहता है. वह किसी के साथ उठताबैठता नहीं है.

दोस्त ने बताया कि ज्योति को घर में कैद रहना पसंद नहीं है. वह कहीं नौकरी करना चाहती है. यह सुन कर रजनीश खुश हो गया. उस ने दोस्त से कहा कि वह किसी से ज्योति के पास तक यह खबर पहुंचवा दे कि उस की ज्वैलरी शौप में एक काउंटर गर्ल की जरूरत है. दोस्त ने यह बात ज्योति तक पहुंचा दी.

ज्योति अपने घर वालों की इच्छा के खिलाफ नौकरी के लिए रजनीश के शोरूम पर पहुंच गई. रजनीश ने औपचारिक बातचीत के बाद उसे नौकरी पर रख लिया. इस के बाद दोनों में बातें होने लगीं. जल्दी ही उन में दोस्ती भी हो गई.

रजनीश ने अपनी लच्छेदार बातों से ज्योति को जल्द ही अपने जाल में फांस लिया. कुछ ही दिनों में ज्योति वहां केवल मुलाजिम ही नहीं रही, बल्कि रजनीश के दिल पर राज करने लगी. केवल रजनीश ही उसे नहीं चाहता था, बल्कि वह भी रजनीश की दीवानी हो गई थी. ज्योति और रजनीश के बीच अवैधसंबंध बन गए थे.

ज्योति के अवैधसंबंधों की बात गलीमोहल्ले में फैली तो प्रेमनाथ की बदनामी होने लगी. वह सीधेसादे शरीफ इंसान थे. चार लोगों के बीच उन का उठनाबैठना था. लोग उन का बड़ा सम्मान करते थे. बहू के बारे में ऐसी बातें सुन कर उन का सिर शर्म से झुक गया.

और यही बात जब मोहल्ले से होते हुए रिंकू के कानों तक पहुंची तो घर में क्लेश होने लगा. रिंकू ने ज्योति को प्यार से समझाते हुए कहा, ‘‘तुम शादीशुदा और 2 बच्चों की मां हो. हमारे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं. घर की बड़ी बहू होने के नाते परिवार के प्रति तुम्हारी कुछ जिम्मेदारियां हैं, जिन से तुम मुंह नहीं मोड़ सकती. ऐसी बातें तुम्हें शोभा नहीं देतीं.’’

‘‘दम घुटता है मेरा यहां, मैं खुले आसमान और खुली हवा में जीना चाहती हूं. अपनी खुशी के लिए अगर मैं किसी से हंसबोल लेती हूं तो बताओ किसी का क्या बिगड़ जाता है.

नहीं बनना है मुझे किसी के घर की छोटीबड़ी बहू. मत पढ़ाओ मुझे खोखली मर्यादाओं और खोखले संस्कारों का पाठ. मैं किसी बात की परवाह नहीं करती. मैं जैसी हूं, वैसी ही बनी रहना चाहती हूं. मुझे जंजीरों में जकड़ने की कोशिश मत करो.’’ ज्योति ने मन की बात कह दी.

पत्नी की बातें सुन कर रिंकू का मुंह खुला का खुला रह गया. वह जानने की कोशिश कर रहा था कि बड़ों का सम्मान करने वाली ज्योति एकदम से बदल कैसे गई. रिंकू को मुंह तोड़ जवाब दे कर ज्योति की जैसे हिम्मत ही बढ़ गई थी. अब वह अपनी मरजी से घर के बाहर जाती, मरजी से लौटती और कभीकभी तो लौटती ही नहीं थी.

जब ज्योति बेकाबू हो गई तो रिंकू ने इस बात की शिकायत उस के मायके वालों से कर दी. ज्योति के पिता कृष्णलाल ने भी उसे समझाया, पर उस पर तो इश्क का जुनून सवार था, इसलिए उस पर पिता की भी बात का कोई असर नहीं हुआ. समय के साथ मामला इतना बढ़ गया कि ज्योति की शह पर रिंकू के घर में रजनीश का पूरा दखल हो गया.

जब भी रिंकू पत्नी को समझाने की कोशिश करता, रजनीश उस के घर आ जाता और रिंकू को बुराभला कहता. कई बार तो उस ने ज्योति के सामने रिंकू की पिटाई भी की. रिंकू बच्चों के भविष्य और परिवार की इज्जत की खातिर अपना मुंह बंद किए रहा. पतिपत्नी के झगड़े के बीच अब अकसर बातबात में ज्योति तलाक की मांग करने लगी.

लगभग 6 महीने पहले रिंकू की बेटी पलक का जन्मदिन था. ज्योति ने घर पर छोटी सी पार्टी रखी थी, जिस में रजनीश ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था. रिंकू के पिता इस पार्टी में नहीं आए थे. पिता होने के नाते रिंकू को बच्चों के साथ बैठना पड़ा.

पार्टी के दौरान ही रजनीश के सामने ज्योति ने तलाक की बात छेड़ते हुए कहा कि उसे हर हालत में तलाक चाहिए. उसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि रजनीश ने बच्चों के सामने ही रिंकू के गालों पर 3-4 थप्पड़ जड़ दिए. इस के 2 दिनों बाद ही ज्योति ने पति का घर छोड़ दिया और वह मखदूमपुर के चरनजीतपुरा में अलग कमरा ले कर रहने लगी.

दिखावे के लिए उस ने यह कमरा अपने आप लिया था, पर वास्तविकता यह थी कि यह कमरा उसे रजनीश ने दिलवाया था और वह भी उसी के साथ रहता था. मार्च, 2017 मे रिंकू ने थाना डिवीजन-5 में ज्योति के घर छोड़ने और रजनीश द्वारा मारपीट करने की शिकायत दर्ज करवा दी थी.

इस के पहले भी समयसमय पर रिंकू ने थाने जा कर अपने घर में बढ़ रहे रजनीश के दबदबे की शिकायत की थी, पर रजनीश अपने प्रभाव से उस की शिकायत की सुनवाई नहीं होने देता था. स्थानीय भाजपा नेता होने के कारण रजनीश का क्षेत्र में काफी दबदबा था. पर इस बार रिंकू ने पुलिस के बड़े अधिकारियों के सामने गुहार लगाई थी, इसलिए उसे थाने में पेश होना पड़ा.

पुलिस पर दबाव बनाने के लिए रजनीश पार्टी कार्यकर्ताओं के पूरे काफिले के साथ थाने पहुंचा था. उस ने पुलिस के सामने लिखित में माफी मांगते हुए रिंकू से कहा था कि आज के बाद वह उस के घर में कोई दखल नहीं देगा. यह 16 मार्च, 2017 की बात है.

इस के 2 दिनों बाद ही रिंकू को ज्योति का तलाक के लिए भेजा हुआ अदालत का नोटिस मिला था. उसी शाम ज्योति ने रिंकू के घर पहुंच कर उसे धमकी दी थी कि बात बढ़ाने से कोई फायदा नहीं है, वह उसे तलाक दे कर अपना पीछा छुड़ा ले वरना अंजाम बड़ा भयानक होगा.

रिंकू अदालत की नोटिस से उतना नहीं डरा था, जितना ज्योति की धमकी से डर गया था. वह अच्छी तरह से जानता था कि ज्योति की इस धमकी के पीछे रजनीश का हाथ है. वह रजनीश की दबंगई से अच्छी तरह परिचित था. इस के बाद रिंकू डराडरा रहने लगा था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस मामले में क्या करे.

पत्नी की वजह से रिंकू की समाज में काफी बदनामी हो चुकी थी. पत्नी की वजह से उस का परिवार समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहा था. इस के अलावा रजनीश ने पिटाई कर के उसे कई बार बेइज्जत किया था. इस से वह काफी हताश हो गया था. इसलिए उस ने 12 मई, 2017 को पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली. पूछताछ के बाद ज्योति को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

रजनीश कुछ दिनों तक अपने बचाव के लिए सिफारिशें करवाता रहा. उस ने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से थाने और रिंकू के पिता के पास फोन करवा कर मामले को रफादफा करवाने की कोशिश की, पर उस की दाल नहीं गली, अंत में उस ने थाने में आत्मसमर्पण कर दिया. पूछताछ के बाद उसे भी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जीजासाली का खूनी इश्क : प्रेम ने तोड़ी सीमा – भाग 2

अजय ने बाथरूम में जा कर हाथमुंह धोया और तौलिए से पोंछने के बाद कुरसी पर आ कर बैठ गया. सामने किचन में कविता खड़ी चाय बना रही थी.

अब उस के शरीर पर लाल जोड़े की जगह सफेद सलवारसूट था. कलाई में चूडि़यां भी नहीं थीं. उस ने चेहरा पानी से जरूर धो लिया था, पर मेकअप की मौजूदगी अब भी नुमायां हो रही थी.

आंखें मिलते ही कविता मुसकराई, ‘‘जीजाजी, खूब मजे से सोए.’’

अजय ने मन ही मन में जवाब दिया, ‘सपने में बिजली गिरा कर मासूम बन रही हो.’ लेकिन जुबान से बोला, ‘‘मजा ले कर सो रहा था या कजा से गुजर रहा था, बाद में बताऊंगा. पहले तुम बताओ, कब आईं?’’

‘‘थोड़ी ही देर में आ गई थी. घर आ कर देखा तो आप सो गए थे. इसलिए मैं भी घर के कामों मे लग गई थी.’’ कविता ने मुसकरा कर कहा और उस के सामने टेबल पर चाय का कप रख दिया. फिर उसी के पास बैठ गई.

अजय को उस समय वहां अपनी सास की मौजूदगी खल रही थी. कविता अकेली होती तो वह उसे रिझाने का प्रयास करता. अजय की मजबूरी यह थी कि वह न सास को वहां से जाने को कह सकता था और न कविता का हाथ पकड़ कर अकेले में बात करने के लिए ले जा सकता था.

रात को खाना खाने के बाद अजय को कविता के कमरे में सोने के लिए पहुंचा दिया गया. और कविता सविता के कमरे में उस के साथ सो गई.

अगले दिन सुबह होने पर अजय के सासससुर खेतों पर चले गए. सविता स्कूल चली गई. इस से अजय को कविता से बात करने का मौका मिल गया. उस समय कविता नहाने जा रही थी. अजय ने उस से पूछा, ‘‘कविता, नहाने के बाद तुम कौन से कपड़े पहनोगी?’’

कविता ने सहजता से उत्तर दिया, ‘‘मुझे कहीं जाना तो है नहीं, इसलिए घर में जो पहनती हूं, वही पहन लूंगी.’’

‘‘घर में पहनने वाले नहीं,’’ अजय ने मन की परतें उस के सामने खोलनी शुरू कर दीं, ‘‘तुम वही लाल जोड़ा पहनो, जो तुम ने कल पहना था.’’

‘‘वह रोज पहनने के लिए थोड़े ही है,’’ कविता मुसकरा कर बोली,‘‘ वह लाल जोड़ा विशेष अवसरों पर पहनने के लिए बनवाया है. कहीं विशेष प्रोग्राम होता है, तभी पहनती हूं.’’

अजय कविता के सामने आ कर खड़ा हो गया और उस की आंखों में आंखें डाल कर बोला, ‘‘तुम मुझे चाहती हो न?’’

कविता जीजा के मन का मैल नहीं समझ सकी. उस ने सहजता से जवाब दिया, ‘‘हां, चाहती हूं.’’

‘‘अगर तुम मुझे चाहती होगी तो वही लाल जोड़ा पहनोगी.’’

‘‘जीजाजी, मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तुम लाल जोड़े को पहनने की जिद क्यों कर रहे हो?’’ वह बोली.

‘‘इसलिए कि उसे पहन कर तुम दुलहन जैसी लगती हो.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि आप लोग मेरा विवाह कर के मुझे इस घर से निकालने पर तुले हैं.’’ कविता हंसी, ‘‘अब तो मैं उसे हरगिज नहीं पहनने वाली.’’ कह कर कविता तेजी से बाथरूम की ओर बढ़ गई.

लड़की ‘न’ कहे तो उस की ‘हां’ समझना चाहिए, सोच कर अजय के होंठों पर मुसकान फैल गई. अजय पहले ही तैयार हो चुका था. इसलिए वह बैठ कर अखबार पढ़ने लगा.

कुछ देर बाद जब कविता नहा कर तैयार हुई तो मन ही मन खयाली पुलाव पका रहे अजय ने देखा तो जैसे उस के अरमान बिखर कर रह गए. कविता ने लाल जोड़ा नहीं पहना था. उस ने मेहंदी कलर का सलवारसूट पहन रखा था.

उस सलवार सूट में भी उस का सौंदर्य कयामत ढा रहा था. भीगे बालों से टपकती बूंदें उस के चेहरे पर आ कर ठहर गई थी, जिस से भीगाभीगा उस का सौंदर्य दिल को लुभाने वाला था. अजय बेकाबू हो उठा और उस ने कविता को बांहों में भर लिया और उस के गालों को चूम लिया.

कविता स्तब्ध रह गई. जीजा ने यह क्या गजब कर डाला. किसी तरह उस ने स्वयं को अजय के चंगुल से आजाद किया और कमरे से निकल भागी. तभी सास भी घर लौट आई.

जबकि उन्होंने दीदी से प्रेम विवाह किया है.

दोपहर को अजय को भोजन कराने के बाद उषा किसी काम से बाजार चली गई. अजय कविता के कमरे में गया और उस के पास बैठते हुए बोला, ‘‘कविता जब से तुम को लाल जोड़े में देखा है, दिल वश में नहीं है. कुछ करो कविता, वरना मैं तुम्हारे वियोग में तड़पतड़प कर मर जाऊंगा.’’

‘‘अब मैं क्या कर सकती हूं, आप की शादी तो सरिता दीदी से हो गई और वह भी आप ने लव मैरिज की है.’’

‘‘तुम पहले मिल जाती तो सरिता से बिलकुल शादी नहीं करता. लेकिन अब भी देर नहीं हुई है शादी टूटने में कितनी देर लगती है. तुम हां बोलो तो मैं सरिता को तलाक दे कर तुम से विवाह करने का जतन करूं.’’ अजय बेबाकी से बोला.

‘‘धत्त,’’ कविता हंसते हुए बैड से उठ खड़ी हुई, ‘‘जीजा, तुम पागल हो गए हो.’’

उस के बाद उस ने हाथ छुड़ाया और कमरे से जाने लगी तो अजय बेसब्र हो उठा और उस का हाथ पकड़ कर खींच कर बैड पर गिरा लिया. इस के बाद वह उसे पागलों की तरह चूमने लगा.

कविता के कुंवारे बदन को परपुरुष का कामुक स्पर्श मिला तो वह भी बहक गई. उस के बाद उन के बीच अनैतिक रिश्ता कायम हो गया. कविता को अपने जीजा के प्यार में गजब का न भूलने वाला आनंद मिला. इस के बाद जब तक अजय रहा, वह कविता के साथ मजे लेता रहा.

संबंधों का यह सिलसिला चलता रहा. दूसरी ओर सरिता ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम तनु रखा गया. लेकिन अजय तो कविता के प्यार में पागल था. अब वह ससुराल के अधिक चक्कर लगाने लगा.

मामा का खूनी सिंदूर : परिवार ही बना निशाना – भाग 3

इज्जत के नाम पर दबा दी बात

अपराधबोध के कारण प्रवींद्र ने सिर झुका लिया. फिर जब ऊषा का गुस्सा ठंडा पड़ गया तो प्रवींद्र ने बहन के पैर पकड़ लिए, ‘‘दीदी, जवानी के जोश में हम और संगीता बहक गए थे. इस बार माफ कर दो. आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी.’’चूंकि बेटी का मामला था. ज्यादा शोर मचाने से उसी की बदनामी होती, इसलिए ऊषा ने हिदायत दे कर प्रवींद्र को माफ कर दिया. प्रवींद्र अपने घर चला गया. इस के बाद करीब 3 महीने तक प्रवींद्र बहन के घर नहीं आया. हां, इतना जरूर था कि संगीता और प्रवींद्र जबतब मोबाइल फोन पर बात कर लेते थे और अपने दिल की लगी बुझा लेते थे.

3 माह बाद जब प्रवींद्र को संगीता की ज्यादा याद सताने लगी तो वह एक रोज बहन के घर आ पहुंचा. ऊषा ने प्रवींद्र के आने पर ऐतराज तो नहीं जताया, लेकिन संगीता से दूर रहने की हिदायत दी. प्रवींद्र अब ऊषा के सामने ही संगीता से बात करता तथा रात को घर के अंदर के बजाए घर के बाहर सोता. इस तरह प्रवींद्र का आनाजाना फिर से शुरू हो गया.कहावत है कि आग और फूस एक साथ होंगे तो धुआं तो उठेगा ही और जलेंगे भी. संगीता और प्रवींद्र भी आगफूस की तरह थे. कुछ दिनों तक तो वे दोनों सुलगते रहे. आखिर में जब नहीं रहा गया तो वे पुन: सतर्कता के साथ मिलने लगे. ऊषा और रमेश दोनों ही संगीता व प्रवींद्र पर नजर रखते थे, परंतु वे उन की पकड़ में नहीं आए.

संगीता अब तक 20 साल की उम्र पार करचुकी थी और उस के कदम भी बहक गए थे. इसलिए ऊषा और रमेश चाहते थे कि जितना जल्दी हो, उस के हाथ पीले कर दिए जाएं. संगीता का विवाह करने के लिए दोनों ने उपयुक्त घरवर की तलाश भी शुरू कर दी.संगीता को शादी वाली बात पता चली तो वह प्रवींद्र की छाती से मुंह छिपा कर बिलख पड़ी, ‘‘कुछ करो मामा, किसी दूसरे से मेरी शादी हो गई तो मैं जहर खा कर मर जाऊंगी.’’प्रवींद्र की आंखें भी बरसने लगीं, ‘‘तुम्हारे बगैर मैं भी कहां जिंदा रह सकता हूं. तुम ने जहर खाया तो मैं भी जहर खा कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लूंगा.’’

‘‘हमारी आशिकी का जनाजा निकलने में देर नहीं है, इसलिए कह रही हूं कि जल्दी ही कुछ करो.’’
‘‘करना तो चाहता हूं पर समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं.’’ प्रवींद्र उलझन में पड़ा हुआ था, ‘‘हम दोनों की शादी हो नहीं सकती और हमेशा के लिए तुम्हें अपना बनाने का रास्ता सूझ नहीं रहा है.’’

‘‘प्रवींद्र, मुझे एक तरकीब सूझी है,’’ संगीता अचानक उल्लास से भर गई, ‘‘अगर तुम उस पर अमल करने को राजी हो जाओ तो हम हमेशा के लिए एक हो सकते हैं.’’‘कैसी तरकीब?’’ प्रवींद्र ने पूछा ‘‘चलो हम भाग चलें,’’ संगीता ने राह सुझाई, ‘‘दिल्ली, मुंबई जैसे शहर में हम अपने प्यार की अलग दुनिया बसाएंगे. वहां इतनी भीड़ रहती है कि कोई भी हमें ढूंढ नहीं सकेगा.’’प्रवींद्र कुछ देर सोचता रहा फिर बोला, ‘‘संगीता, तुम्हारी तरकीब तो सही है लेकिन मुझे डर सता रहा है.’’

‘‘कैसा डर?’’ संगीता ने अचकचा कर पूछा. ‘‘यही कि मैं तुम्हें ले कर भागा तो तुम्हारे घर वाले मेरे खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देंगे. फिर पुलिस हमें पकड़ेगी. उस के बाद तुम अपने मातापिता के सुपुर्द कर दी जाओगी. और मैं जेल जाऊंगा. जब तक मैं जेल से बाहर आऊंगा, तब तक पता चलेगा कि घर वालों ने तुम्हें समझाबुझा कर किसी दूसरे से तुम्हारी शादी कर दी है. ऐसे मामलों में अकसर यही होता है.’’ प्रवींद्र बोला.  प्रवींद्र की बात सुन कर संगीता के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं. अपनी बात का असर पड़ता देख प्रवींद्र आगे बोला, ‘‘दूसरी बात यह है कि घर से भाग कर दूसरे शहर में बसना आसान नहीं. उस के लिए पैसे चाहिए. और पैसे हमारे पास हैं नहीं.’’

संगीता कुछ देर सोच में डूबी रही. उस के बाद बोली, ‘‘प्रवींद्र, मुझे मातापिता का विरोध और तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं होती. हम हर हाल में अपना घर बसाना चाहते हैं. इस के लिए तुम कुछ भी करो, मैं तुम्हारा साथ दूंगी.’’ ‘‘तो सुनो, एक तरकीब है मेरे पास. लेकिन उस के लिए तुम्हें अपना कलेजा मजबूत करना होगा. उस तरकीब से हमारी सारी समस्या हल हो जाएगी और धन भी मिल जाएगा.’’ प्रवींद्र ने कहा.

‘‘ऐसी कौन सी तरकीब है?’’ संगीता ने विस्मय से पूछा.‘‘मुझे अपने बहनबहनोई और तुम्हें अपने मातापिता को मौत की नींद सुलाना होगा. फिर घर से नकदी और गहने ले कर फरार हो जाएंगे. इस तरकीब से किसी को हम पर शक भी नहीं होगा. लोग समझेंगे कि बदमाशों ने घर में लूट की और विरोध पर दोनों की हत्या कर दी और लड़की का अपहरण कर लिया.’’

बन गई खून बहाने की योजना

संगीता, प्रवींद्र के प्यार में अंधी हो चुकी थी, इसलिए वह खूनी मांग सजाने को तैयार हो गई. उस ने प्रेमी मामा प्रवींद्र की तरकीब को मान लिया और अपनों का खून बहाने को राजी हो गई.इस के बाद प्रवींद्र और संगीता ने रमेशचंद्र और ऊषा के कत्ल की योजना बनाई. योजना के तहत प्रवींद्र अपने गांव चला गया ताकि बहन के पड़ोसियों को उस पर शक न हो. गांव में रहने के दौरान वह संगीता के संपर्क में बना रहा.

8 अक्तूबर, 2019 की सुबह प्रवींद्र ने संगीता से मोबाइल पर बात की और रात में घटना को अंजाम दे कर फरार होने की बात बताई. उस ने यह भी कहा कि वह रात 10 बजे उस के घर पहुंचेगा, दरवाजा खुला रखे. प्रेमी मामा से बात होने के बाद संगीता घर से भागने की तैयारी में जुट गई.

उस ने मां से चोरीछिपे बैग में अपने कपड़े तथा जरूरी सामान रख लिया. बैग को उस ने कमरे में रखे बड़े संदूक में छिपा दिया. अन्य दिनों के अपेक्षा उस शाम संगीता ने कुछ जल्दी खाना बना कर मांबाप को खिला दिया. खाना खा कर ऊषा और रमेश कमरे में पड़े तख्त पर जा कर लेट गए. कुछ देर बाद दोनों गहरी नींद सो गए.इधर रात 10 बजे प्रवींद्र संगीता के दरवाजे पर पहुंचा. उस ने दरवाजे पर दस्तक दी तो संगीता ने दरवाजा खोल कर उसे घर के अंदर कर लिया. वह बेसब्री से उसी का इंतजार कर रही थी. संगीता प्रवींद्र को कमरे में ले गई. एकांत पा कर प्रवींद्र का मन मचल उठा और वह संगीता से शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा.