Delhi Crime News : बंद फ्लैट में मिलीं 2 नाइजीरियन की लाशें

Delhi Crime News : एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिस ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. जहां देश की राजधानी दिल्ली के डाबड़ी इलाके के चाणक्य प्लेस स्थित एक फ्लैट से 2 नाइजीरियाई नागरिकों के शव बरामद हुए हैं, जिस से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. चलिए आप को बताते हैं इस पूरी खबर को विस्तार से-

यह घटना 3 अगस्त, 2025 को साउथ वेस्ट दिल्ली के डाबड़ी इलाके में हुई, जहां एक फ्लैट से 2 नाइजीरियाई नागरिकों जोशेप और चिबिटर्न की लाशें एक संदिग्ध हालत में मिलीं, जिस से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. बताया गया कि दोनों 3 अगस्त की रात बुराड़ी से डाबड़ी आए थे और किसी पार्टी में शामिल हुए थे. अगली सुबह उन के शव फ्लैट में मिले.

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शुरुआती जांच के बाद क्राइम ब्रांच व फोरैंसिक टीम को बुलाया गया. टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है.

पुलिस को जांच में पता चला कि मृतकों के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं हैं. दोनों युवक बुराड़ी इलाके में रहते थे और एक दिन पहले ही अपने परिचित हैनरी के पास डाबड़ी आए थे. हैनरी ने वह फ्लैट किराए पर लिया था, जहां दोनों के शव मिले.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच में अब तक किसी गड़बड़ी के संकेत नहीं पाए गए हैं. दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) हौस्पिटल की मोर्चरी भेज दिया है. मृतकों मौत के कारणों की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस की एक टीम को बुराड़ी भेजा है. अधिकारी का कहना है कि उन की मौत के बारे में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. Delhi Crime News

Delhi News : प्रेमिका की हत्या के आरोपी ने अस्पताल में की आत्महत्या

Delhi News : एक चौंकाने वाले मामले में 22 अप्रैल, 2025 को प्रेमिका की हत्या के आरोप में पकड़े गए एक सख्स ने अस्तपाल में फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली. पुलिस जब अस्पताल में पहुंची तो वह  फंदे पर लटका हुआ था. पुलिस भी उसे देख कर दंग रह गई. सवाल उठता है आखिर इस शख्स ने खुदखुशी अस्पताल में ही क्यों की? पढ़ते हैं पूरी घटना विस्तार से-

यह घटना 13 जुलाई, 2025 को दिल्ली के तिहाड़ जेल की है, जहां रमेश करमाकर नामक एक मुलजिम ने जेल के अस्पताल की खिड़की पर लटक कर आत्महत्या कर ली. बताया गया कि 28 मई से रमेश करमाकर जेल नंबर 4 में बंद था.  उसे तिहाड़ की जेल नम्बर 3  में स्थित अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था. कर्मचारी जब 14 जुलाई को सुबह अस्पताल के कमरे में पहुंचे तो देखा कि कैदी फंदे पर लटका हुआ था. लटके हुए शव को देख पुलिस भी हैरान थी.

पुलिस ने तुंरत रमेश के शव को खिड़की से नीचे उतारा. घटना की जानकारी जब पुलिस प्रशासन को मिली तो पूरे जेल परिसर में हड़कंप मंच गया. पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम रमेश  करमाकर था, जो होटल में साफ सफाई का काम किया करता था. उसे अपनी प्रेमिका की हत्या के आरोप में  तिहाड़ की 4 नम्बर की जेल लाया गया था.  जेल में रमेश को चक्कर आने की शिकायत होने लगी और उस के दाएं कान में दर्द होने लगा था. उस की सुनने की क्षमता कम होने के कारण उसे 28 मई, 2025 को तिहाड़ जेल के अस्पताल मे इलाज के लिए भरती कराया गया. जहां उस का इलाज चल रहा था, लेकिन 13 जलाई की सुबह पुलिस ने देखा कि रमेश ने सुसाइड कर लिया है.

पुलिस ने बताया कि रमेश को 22 अप्रैल को अपनी पार्टनर की हत्या के आरोप में अरेस्ट किया गया था. जांच में सामने आया रमेश की पार्टनर यानि उस की प्रेमिका उसे बारबार धमकी दे रही थी कि वह उन के रिश्ते की सच्चाई उस की पत्नी को बता देगी. इसी डर के कारण रमेश ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी थी.

प्रशासन पर उठे सवाल

तिहाड़ जेल में सख्त सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद भी रमेश के सुसाइड ने पुलिस प्रशासन पर अब सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस अब हर पहलू पर जांच की कर रही है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रही है कि रमेश को खुदखुशी क्यों  करनी पड़ी. पुलिस अधिकारी अब यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी कौन सी वजह थी, जिस ने रमेश को आत्महत्या करने के लिए मजबूर  कर दिया था. पुलिस इस मामले की  गहराई से जांच कर रही है. Delhi News

Murder Story : सोनाली फोगाट हुई साजिश का शिकार

कई सवालों में घिरी टिकटौक स्टार और भारतीय जनता पार्टी की नेता सोनाली फोगाट की संदिग्ध मौत की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. इसी के साथ सारे जहां में यह बात भी फैल गई, ‘एक थी सियासत की सयानी सोनाली. जिस की हरियाणवी फिल्म का नाम है- म्हारो छोरी छोरों से कम है के!’

उन की इकलौती बेटी यशोधरा फोगाट का सपना था कि वह 21 सितंबर, 2022 को मां का 43वां जन्मदिन धूमधाम से मनाए. किंतु यह सपना ठीक एक माह पहले 22 अगस्त को अचानक से सदमे में बदल गया. सुंदर, मिलनसार, हंसमुख और घरपरिवार और गांव में सब से अलग दिखने वाली मध्यम किसान परिवार की लड़की सोनाली किशोरावस्था की दहलीज पार करने वाली थी. गांव के खेतोंखलिहानों में कुलांचे मारती हुई जब तंग गलियों से हो कर घर पहुंचते ही खिलखिला कर हंस देती थी, तब अकसर उसे अपनी मां संतोष ढाका की डांट सुननी पड़ती थी, ‘‘कित्ती बार कहा है इस तरह उछलकूद मत किया कर. बातबात पर ऐसे ना खिलखिलाया कर. अब तुम्हारी दौड़नेकूदने की उमर ना है!’’

‘‘क्यों ना है अम्मा?’’ सोनाली तपाक से पूछ बैठती.

‘‘तू लड़की जात है, कोई ऊंचनीच हो गई तब?’’ मां सतोष चिंता जताती हुई बोलीं.

‘‘अरे अम्मा, तुम भी न जाने किस जमाने में जी रही हो… दुनिया कहां से कहां चली गई. हम हरियाणा की छोरी हैं…खेलती हैं, कूदती हैं, मेडल जीतती हैं. पुलिस बने हैं, जहाज उड़ावे हैं. मौका मिले तब मंत्री भी बने हैं. का का न करे हैं हम छोरियां…तू क्या जाने हमें. कुछ ना तो खेतां में ट्रैक्टर तो चला ही देवे हैं,’’ आंगन में कूदतीफांदती सोनाली बोलती चली गई.

‘‘अरे, तू पढ़ेगीलिखेगी तब न कुछ बन पाएगी. मन्ने तो लागे है कि तू नेता ही बनेगी और कुछ ना.’’ अभीअभी घर आए उस के बापू महावीर ढाका टोकते हुए बोल पड़े थे.

सोनाली अपने पिता की आवाज सुन कर तुरंत उन के गले लग गई. मां की शिकायत करने लगी, ‘‘देखो ना बापू, अम्मा हमेशा मन्ने डांटती रहती हैं. भाई को तो कुछ ना कहतीं.’’

‘‘अच्छा चलचल, पीने का पानी ले कर आ. और हां बेटी, थोड़ी पढ़ाई भी कर लिया कर,’’ पिता ने समझाया.

सोनाली भागती हुई रसोई में चली गई.

‘‘मन्ने तो 10 क्लास पास कर ली…’’ सोनाली बोली

‘‘…और कित्ता पढ़ेगी छोरी?’’ अम्मा बीच में ही बोल पड़ीं.

‘‘16 क्लास तक तो पढ़ूंगी बापू, अम्मा को समझा दो. हिसार जाऊंगी पढ़ने, देख लेना.’’ सोनाली तुनकती हुई बोली.

‘‘पहले अच्छे नंबर से 12वीं कर ले फिर हिसार का है छोरी, दिल्ली भेज दूंगा. तुझे बड़ा अफसर बनाऊंगा.’’ पिता बोले.

‘‘बापू यह हुई न मेरीतेरी बात,’’ सोनाली खुश हो गई और चहकती हुई अपने कमरे की ओर दौड़ पड़ी.

‘‘का खाक पढ़ेगी छोरी! मन्ने तो उस के रंगढंग ठीक न लागे हैं. बोले सै हेमा मालिनी बनेगी. उस की जैसी सुंदर है? हीरोइन बनेगी? तन्ने उसे सिर पर जादा न चढ़ावो, बेटी जात है.’’ संतोष अपने पति से बोली. पति महावीर उस की बातों पर हंसते हुए अपने कमरे की तरफ बढ़ गए.

हरियाणा में हिसार से करीब 50 किलोमीटर दूर फतेहाबाद में स्थित भूथन कलां सोनाली का पैतृक गांव है. गांव में 21 सितंबर, 1979 को जन्म लेने वाली सोनाली का बचपन गांव के परिवेश में बीता था. उन की 3 बहनें और एक भाई हैं. उन में बड़ी बहन रेमन, छोटी बहन रुकेश, 2 छोटे भाई वतन और रिंकू हैं.

hindi-manohar-politics-crime-story

वह गांव की सब से सुंदर लड़की थी. हीरोइन जैसी दिखती थी. तब उस का नाम सोनाली नहीं, सुदेश हुआ करता था और घरपरिवार समेत गांव के लोग उसे देसा कह कर बुलाते थे.

मध्यमवर्गीय परिवार की होनहार थी सोनाली

सुदेश का परिवार साधारण मध्यमवर्गीय था. मां घर संभालती थीं, पिता खेत. सुदेश शुरू से चुलबुली और होशियार रही. हर काम में आगे. चाहे डांस हो, गाना हो, खेल हो या पढ़ाई. सब से अलग पहचान रखने वाली सुदेश को कोई माधुरी दीक्षित कह कर बुलाता था तो कोई हेमा मालिनी कहता था. यह बात धीरेधीरे उस के दिमाग में बैठ गई थी.

वैसे सोनाली ने ग्रैजुएशन तक पढ़ाई पूरी कर ली थी. हीरोइन बनने का सपना पूरा करने की दिशा में भी वह कदम बढ़ा चुकी थी. मौडलिंग से ग्लैमर की दुनिया में प्रवेश मिल गया था. हरियाणा दूरदर्शन पर एंकरिंग का काम मिल गया था. इस तरह से सोनाली फोगाट को एक पहचान मिल गई थी. यानी कि गांव की गलियों से सोनाली ने एक ऐसी उड़ान की शुरुआत की थी, जो अब किसी परीकथा जैसी जान पड़ती है. सुदेश के साथ पहली से आठवीं तक पढ़ाई करने वाली उन की दोस्त लक्ष्मी का कहना है कि वह हर काम में इंटेलिजेंट थी. हर बार  26 जनवरी को स्कूल के प्रोग्राम में उस का डांस जरूर होता था. अकसर भारतमाता वही बनती थी. उस के कपड़े, उस का रहनसहन, उस की बातें सब से अलग थीं. टीवी और गानों का इतना शौक था कि पूछिए मत.

टीवी पर हेमा मालिनी को देख कर कहती, ‘एक दिन हेमा मालिनी बनूंगी. मुंबई जाऊंगी, तू देखियो!’ जब मैं कहती कि कैसे जाएगी?’ तो कहती, ‘चाहे जो हो, जा कर दिखाऊंगी.’

बचपन की ये बातें हम भूल चुके थे, पर जब वह टीवी में और फिर बिगबौस में पहुंची तो सब याद आ गया. उस ने जो कहा था कर के दिखाया. लक्ष्मी उस की जिद पूरी करने वाली सोच और पहनावे के बारे में बताती है, ‘‘वो जो सोच लेती थी, कर के ही दम लेती थी. एक दिन ऊंचे पांयचे का सूट और छोटी चाक वाली कुरती पहन ली. तब सभी उसे टेढ़ी नजरों से देखने लगे. कारण, गांव में कोई लड़की ऐसे कपड़े पहनने की सोचती तक नहीं थी. जबकि वह पहन कर और भी इठलाने लगी. कहने लगी- ये मेरा नूरी सूट है.

‘‘… इसलिए मैं दावे के साथ कहती हूं कि वह गांव की सब से सुंदर लड़की थी. फैशन सेंस तो कमाल का था. कपड़े पहनने, कपड़ों का रंग चुनने, नए डिजाइन में सिलवाने और मेकअप करने तक में उस का कोई जवाब नहीं था. कोई टोकता भी तो अपने इरादे को डिगने नहीं देती. हमें तो बचपन से उस में हीरोइन ही दिखती थी.’’

ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी घमंड नहीं आया

किरण रोहिला, छोटी बहन लक्ष्मी वह सोनाली की बहन रुकेश की क्लासमेट रही हैं. वह सोनाली के बारे में कहती हैं, ‘‘कभी सोनाली को देखते तो यही सोचते थे कि काश! उस के जैसा डांस हम भी कर सकते. उन का कौन्फिडेंस अलग लेवल का था. शादी के कई साल बाद एक कौमन फ्रैंड की शादी में वो आई तो गले लग कर मिली थी. इतनी बढ़ी शख्सियत हो जाने के बाद भी उस में घमंड नहीं था.’’

इसी बात को भूथन कलां में सोनाली के पड़ोसी कृष्ण टेलर भी अपने अनुभव के तौर पर बताते हैं, ‘‘सोनाली गांव में जबजब आती थी, हर किसी से मिलती थी. सभी से दिक्कत या परेशानी के बारे पूछती थी. एक बार गली में बिजली की समस्या थी. तब उन्होंने अलग से ट्रांसफार्मर लगवा दिया था.’’

सोनाली के घर के चौकीदार त्रिलोक चंद  अपना अनुभव सुनाते हैं, ‘‘एक बार गांव में जनसभा थी. सोनाली की नजर उन पर पड़ी. उन्होंने इशारा कर मुझे स्टेज पर बुला लिया और कहा, ‘‘आ साथ में फोटो खिंचाते हैं.’’

त्रिलोक चंद गरीबों के साथ सोनाली के व्यवहार के बारे में बताते हैं, ‘‘गरीब से गरीब आदमी के साथ सोनाली मजबूती से खड़ी हो जाती थी. उस की ऐसी ही सोच ने उसे राजनीति में आगे बढ़ाया. जब बीजेपी ने उसे नलवा हल्का सौंपा तो उन्होंने बहुत मेहनत की. वहां की परफौरमेंस देख कर ही उसे आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई के सामने खड़ा करवाया.

‘‘सब जानते थे कि ये बहुत मुश्किल काम था. वह उन का गढ़ था. और तो और, सोनाली को टाइम भी मिला बस 15 दिन का. पर उस ने ना नहीं किया. मजबूती से जुटी और अपने विपक्षी की चूलें हिला दीं. थोड़ा टाइम मिल गया होता तो शायद जीत भी जाती. संघर्षशील थी, समझदार थी.’’

जून 2020 में एक कृषि अधिकारी को चप्पल से पीटने का वीडियो वायरल होने के बारे में उन के पड़ोसी भजन लाल बताते हैं कि उसे ये बरदाश्त नहीं था कि किसान भाइयों का हक कोई मारे. वो अफसर यही कर रहा था. वह अपने लिए नहीं, समाज के लिए, देश के लिए लड़ रही थी. उस के इस पक्ष को भी देखना चाहिए. हमारे गांव का दुर्भाग्य है कि हम ने उस जैसा जिंदादिल लीडर खो दिया. सोनाली फोगाट की मौत को ले कर भूथन कलां के लोग उदास हो गए हैं. उन का कहना है कि गांव की गलियां अपनी बेटी की खिलखिलाहट कभी नहीं सुन सकेंगी. गली की छांव में ताश खेलते बुजुर्गों के कान तक सोनाली की ‘राम-राम’ नहीं पहुंच सकेगी. गांव में रह जाएंगे तो बस उस के फसाने. वे यादें जहां लोग उस की जिंदादिली की बात कर सकेंगे.

उन की शादी हरियाणा के हरिता गांव में उन की बड़ी बहन के देवर संजय फोगाट से हो गई थी, जो भाजपा के एक लोकप्रिय नेता थे और प्रदेश भाजपा में उन की अच्छी पकड़ थी. साल 2016 में सोनाली फोगाट उस समय चर्चा में आ गई थीं, जब उन के पति की फार्महाउस में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी और वह मुंबई में फिल्मों की शूटिंग के सिलसिले में व्यस्त थीं. तब उन पर ही पति की मौत का इल्जाम लगा दिया गया था.

hindi-manohar-politics-crime-story

पति की मौत के बाद सोनाली फिल्मों के साथसाथ राजनीति और सामाजिक कार्यों में भी दखल देने लगी थीं. राजनीतिक कार्यक्रमों में आनेजाने लगी थीं. उन्हीं दिनों नयानया टिकटौक आया था. उस पर नएनए वीडियो डालना उन की दिनचर्या में शामिल हो गया था. देखते ही देखते उन के करोड़ों फालोअर्स और विजिटर्स बन गए थे. वैसे इस के पहले भाजपा ने उन्हें आदमपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया था. वहां वोटरों पर उन के टिकटौक का जादू नहीं चल पाया था और कुलदीप बिश्नोई से हार गई थीं.

इस चुनाव प्रचार के दौरान भी सोनाली एक बयान को ले कर सुर्खियों में आ गई थीं.  चुनाव प्रचार के दौरान सोनाली ने एक नारा लगवाया था. नारे पर लोगों में उत्साह कम दिखा तो वह नाराज हो गई थीं. नाराज भी इस कदर हुईं कि सीधेसीधे नारा न लगाने वालों को पाकिस्तानी कह दिया.

सोनाली ने लोगों से कहा था, ‘आप भी मेरे साथ एक जयघोष करेंगे- भारत माता की जय!’ इस पर लोगों ने ‘जय’ का नारा लगाया. कुछ लोगों ने तो नारा लगाया ही नहीं.

इसी के साथ सोनाली ने तुरंत मंच से कहा, ‘क्यों भई? आप लोग पाकिस्तान से आए हो क्या? पाकिस्तानी हो क्या? अगर हिंदुस्तानी हो तो भारत माता की जय बोलो!’

इस के बाद सोनाली ने 2 बार और नारा लगवाया, उन्हें फिर उम्मीद से कम रेस्पौंस मिला तो उन्होंने कहा, ‘शर्म आती है आप पर, शर्म आती है कि आप जैसे लोग भी हिंदुस्तान में रहते हैं.’

सोनाली की पहचान हरियाणा में बीजेपी की एक तेजतर्रार महिला नेता की थी. वह महिला मोर्चा के साथ भी काम कर चुकी थीं. साथ ही हरियाणा बीजेपी की नैशनल एग्जीक्यूटिव मेंबर भी रही थीं. हालांकि बाद में विवाद के बाद पार्टी आलाकमान का दबाव बना, तब उन्होंने इस पर माफी भी मांग ली थी.

यूं लिखी गई मौत की इबारत

गोवा पुलिस को 23 अगस्त, 2022 की सुबहसुबह वहां के रेस्टोरेंट के लेडीज वाशरूम में एक युवती की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. मौके पर पुलिस टीम ने पहुंच कर उस की शिनाख्त की. शुरुआती जांच में लाश की पहचान हरियाणा की भाजपा नेता सोनाली फोगाट के रूप में हो गई थी. जांचपड़ताल हुई तो पता चला कि जब वह बाथरूम में थीं, उस वक्त वहां सोनाली के पीए सुधीर सांगवान और सुखविंदर भी मौजूद थे. उन्होंने ही सुबह 8 बजे के करीब सोनाली के भाई और पुलिस को फोन कर उन की मौत की सूचना दी थी.

मामला मृतक के देश में सत्तारूढ़ दल भाजपा से संबंध होने के कारण हाईप्रोफाइल बन गया था.

कुछ समय में ही सोनाली की मौत की खबर गोवा के उच्च पुलिस अधिकारियों से ले कर गोवा और हरियाणा के मुख्यमंत्री तक जा पहुंची. जांच का सिलसिला शुरू हुआ, तब उन की मौत से संबंधित कई सवाल उठ खड़े हुए. मौत का कारण हत्या तक माना जाने लगा. गोवा के लिए कुख्यात ड्रग और रेव पार्टी एक बार फिर सुर्खियां बन गईं. जैसेजैसे जांच का सिलसिला आगे बढ़ा, वैसेवैसे ब्रेकिंग न्यूज की हेडलाइन बदलती चली गई. डेथ एक मिस्ट्री बन गई. इस ने पुलिस की जांच को भी कठघरे में खड़ा कर दिया.

जांच की रिपोर्ट के अनुसार, 22 अगस्त को सोनाली, सुधीर और सुखविंदर ने गोवा के रिसौर्ट में 2 कमरे बुक करवाए थे. इन में एक कमरे मे सोनाली और सुधीर साथ ठहरे थे, जबकि दूसरे कमरे में सुखविंदर रुका था. उसी दिन शाम को 7 बजे तीनों कर्लीज रेस्टोरेंट गए थे. पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, वहां एक छोटी सी पार्टी रखी गई. इस दौरान ही सोनाली को पानी में मिला कर ड्रग्स पिलाई गई थी. उसे पीने के बाद ही सोनाली की तबियत बिगड़ गई थी और मौत का यही कारण भी बनी.

hindi-manohar-politics-crime-story

इस से अलग सोनाली के परिवार वालों ने उन की तबियत बिगड़ने और उन्हें 2 घंटे तक वाशरूम में रखने को ले कर कई सवाल खड़े कर दिए. उन की मौत को अप्राकृतिक बताया. उन्होंने साथ गए पीए पर हत्या का आरोप लगा दिया. इस के बाद रेस्टोरेंट में बहुत ही कम कपड़ों में सोनाली के लड़खड़ाते कदमों की छोटी सी वीडियो क्लिपिंग और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई, तब और भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ गए.

4 घंटे से अधिक समय तक चला पोस्टमार्टम 3 डाक्टरों के पैनल ने किया. उस रिपोर्ट में सोनाली के शरीर पर कई ब्लंट कट यानी गुम चोट होने का जिक्र किया गया. यह चोट ठीक वैसी ही थी जैसे किसी लाठीडंडे या घूंसों के मारने से होती है. पोस्टमार्टम के बाद सोनाली की लाश उस के भाई और जीजा को सौंप दी गई थी. सोनाली की आकस्मिक और संदिग्ध मौत का सब से गहरा असर उन की 15 साल की बेटी यशोधरा फोगाट पर हुआ. करीब 6 साल पहले ही उस के सिर पर से पिता का साया भी उठ गया था. मां की अर्थी को यशोधरा ने भरी आंखों से कंधा दिया, बल्कि अपने चचेरे भाई के साथ मिल कर मुखग्नि भी दी.

सीबीआई के हाथों में पहुंचा केस

इस दौरान भारी संख्या में लोग ‘सोनाली अमर रहे’ और ‘सोनाली के कातिलों को फांसी दो’ के नारे लगाते रहे. उस से बुरी तरह से टूट चुकी यशोधरा को आत्मबल मिला और उस ने मां की मौत की जांच सीबीआई से करवाने के लिए प्रधानमंत्री से गुहार लगाई. इसी तरह सोनाली के वृद्ध मातापिता ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के जरिए सीबीआई जांच की मांग की थी. इस संबंध में सोनाली की बेटी यशोधरा, भाई, बहन और जीजा ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल से मिल कर दरख्वास्त की.

परिवार की लिखित मांग पर हरियाणा सरकार ने गोवा सरकार से आग्रह किया कि वह इस केस को सीबीआई को सौंप दे.  सोनाली के घरवालों ने इस के लिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस को भी पत्र लिखा था. मामले की जांच सीबीआई से करवाने को ले कर जब केंद्रीय गृह मंत्रालय तक से गुहार लगाई गई, तब आखिरकार इस की मंजूरी देनी ही पड़ी. जांच का आदेश मिलते ही 2 दिनों बाद सीबीआई के अधिकारी ने 16 सितंबर को सोनाली के पैतृक गांव पहुंच कर उन के पिता को नई एफआईआर की कौपी सौंप दी.

डेथ मिस्ट्री के 5 आरोपी गिरफ्तार

सोनाली फोगाट मर्डर केस की जांच करने के लिए सीबीआई की 2 सदस्यीय टीम में शामिल डीएसपी राजेश कुमार और इंसपेक्टर ऋषिराज ने भूथन कलां में उन के परिवार से मुलाकात की. सीबीआई टीम ने सोनाली के भाई रिंकू ढाका से भी केस से जुड़ी जानकारियां लीं और सोनाली के घर वालों को अपना फोन नंबर दे दिया.

hindi-manohar-politics-crime-story

गोवा सरकार से आधिकारिक तौर पर केस मिलने के बाद सीबीआई की टीम ने नई एफआईआर दर्ज की, जिस में 2 टीमें समानांतर रूप से काम कर रही हैं. इन में से ही एक टीम  सोनाली के गांव गई और दूसरी टीम ने गोवा के अंजुना थाने पहुंच कर इस केस से जुड़े दस्तावेज हासिल कर लिए. सोनाली की मौत से जुड़ा केस अंजुना थाने में ही दर्ज किया गया था.

सोनाली फोगाट की मौत का मामला 23 अगस्त, 2022 को गोवा के अंजुना थाने में दर्ज किया गया था. इस मामले में सुधीर सांगवान व सुखविंदर के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया. इस के अलावा इन दोनों के साथ रूमबौय दत्ता प्रसाद गाओंकर, कर्लीज क्लब का मालिक एडविन और रमा मांड्रेकर के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का केस भी दर्ज किया गया है. पांचों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया.

गोवा पुलिस की एफआईआर के अनुसार, सुधीर और सुखविंदर ने साजिश के तहत सोनाली को मारा. दत्ता प्रसाद ने सुधीर को 12 हजार रुपए में ड्रग्स उपलब्ध कराई थी. इस के लिए सुधीर ने दत्ता को 2 बार में 5 हजार रुपए और 7 हजार रुपए का भुगतान किया. एडविन ने अपने रेस्टोरेंट में ड्रग्स के इस्तेमाल का विरोध नहीं किया. रमा मांड्रेकर नशा तस्कर है, जिस से दत्ता प्रसाद ने ड्रग्स ले कर सुधीर को दी थी. सोनाली की मौत की जांच करने गोवा पुलिस की 2 सदस्यीय टीम हरियाणा भी गई. हिसार, गुरुग्राम और नोएडा में सर्च की गई. सुधीर सांगवान और सोनाली के फ्लैट से पासपोर्ट, आभूषण बरामद किए गए. हिसार स्थित सोनाली के घर से प्रौपर्टी के कागजात बरामद किए गए. तहसील जा कर सोनाली की प्रौपर्टी का रिकौर्ड लिया गया.

सुधीर के घर वालों से पूछताछ की गई. साथ ही सीबीआई सोनाली की 3 डायरियां जब्त कर साथ ले गई. एक लौकर को भी सील कर दिया गया. इसी दौरान पता चला कि सुधीर, सोनाली की भूमि का कुछ हिस्सा लीज पर लेना चाहता था.

अस्पताल पहुंचने से पहले ही  हो चुकी थी मौत

दरअसल, मामले में शक की सुई सोनाली के पीए सुधीर और होटल पर ही घूमती रही. पुलिस को आशंका थी कि जिस होटल में सोनाली रुकी थी, वहीं कुछ न कुछ गड़बड़ी की शुरुआत हो चुकी थी. इस जांच में गोवा पुलिस को सोनाली की बहन रूपेश से मिली जानकारियों से मदद मिली. उस के अनुसार, घटना से पहले 22 अगस्त की शाम के वक्त सोनाली ने रूपेश को फोन किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई थी. इस बारे में रूपेश ने बताया कि सोनाली उन से वाट्सऐप पर बात करना चाहती थी. मगर उस ने (सोनाली ने) काल अचानक डिसकनेक्ट कर दी थी.

इस से भी परिवार और गोवा पुलिस को घटनाक्रम पर संदेह हुआ. घटना के मुताबिक, सोनाली फोगाट जब गोवा में स्थित एक रेस्तरां में खाना खा रही थीं, तभी उन की तबियत अचानक बिगड़ गई थी. सेंट एंथोनी अस्पताल ले जाने पर डाक्टरों ने सोनाली को मृत बताया. डाक्टरों का अनुमान था कि सोनाली फोगाट की मौत दिल का दौरा पड़ने (संभवत: कार्डियक अरेस्ट) से हुई. अगले दिन 23 अगस्त ( मंगलवार) की शाम आतेआते जब गोवा पुलिस ने संदिग्ध मौत का मुकदमा दर्ज कर लिया. तब अचानक कई बातें बदल गईं. इस बारे में गोवा के डीजीपी जसपाल सिंह ने भी बताया था.

अस्पताल में सोनाली के साथ कोई सांगवान नाम का शख्स भी था. जिस तरीके से अचानक चंद लम्हों में खाना खातेखाते ही सोनाली की तबियत खराब हो गई और अस्पताल पहुंचते ही उन की मौत भी हो चुकी थी. इसी के साथ यह सवाल भी उठा कि यह सब इतनी जल्दी कैसे और किन परिस्थितियों में संभव हो पाया? फोरैंसिक साइंस एक्सपर्ट्स की नजर में भी संदेह बरकरार है. उन का कहना है कि  सोनाली फोगाट की डेथ नैचुरल हुई या फिर अननैचुरल इस का पता लगाना जरूरी होगा, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता लगाया जा सकता है.

कारण नैचुरल कारणों में ब्रेन हेमरेज, दिल का दौरा या फिर कार्डियक अरेस्ट अटैक हो सकता है. अननैचुरल कारणों में मुख्यरूप से जहर की आशंका बनती है. जहर दिए जाने की बात पर फोरैंसिक एक्सपर्ट डा. बी.एन. मिश्रा का कहना है कि हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और ब्रेन हेमरेज अगर हुआ होगा तो नसों में खून जमा मिलेगा. जिसे मैडिकल साइंस में ब्लौकेज भी कहा जाता है. इस के अलावा दिमाग में कहीं खून भी जमा हुआ मिल सकता है.

जहां तक इस मामले में आशंका जहर के इस्तेमाल की है तो जहर किसी भी इंसान को 3 प्रकार से पहुंचाया जा सकता है. कान, नाक और मुंह के रास्ते. नाक और कान के रास्ते अगर जहर दिया गया होगा, जिस की संभावना सोनाली फोगाट की मौत के मामले में 1-2 फीसदी ही लगती है तो वो जगह बहुत जल्दी सीधेसीधे दिमाग पर असर करता है. जिस से ब्लड सर्कुलेशन बाधित होता है और इंसान को सांस लेने में ठीक वैसे ही दिक्कत होने लगती है जैसे कि हार्ट अटैक या फिर कार्डियक अरेस्ट के मामले में.

hindi-manohar-politics-crime-story

इस से इंसान की स्वत: बिना किसी के द्वारा गला घोटे हुए या नाक दबाए बगैर दम घुटने लगता है. ऐसी स्थिति में इंसान को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है. जैसा कि सोनाली फोगाट के मामले में हुआ लगता है.

आस्तीन में छिपा सांप निकला सुधीर

बहरहाल, सोनाली फोगाट की मौत ने न केवल उन के परिवार के सभी सदस्यों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि गोवा की पुलिस पर भी अंगुली उठ गई है. जैसेजैसे सोनाली फोगाट हत्याकांड पर से परतें उतरती चली गईं, वैसेवैसे उन के सहयोगी सुधीर सांगवान के कारनामों से भी परदा हटता चला गया. वह सोनाली के लिए आस्तीन में छिपे जहरीले सांप से कम नहीं था.

15 दिसंबर, 2016 को पति संजय फोगाट की खेतों में मौत को ले कर सोनाली विवादों से घिर गई थीं. जिस का उन्होंने डंट कर सामना किया और अपनी बेटी के साथ ससुराल में रह कर ही उन के राजनीतिक सपनों को पूरा करने की भी सौगंध ली. वैसे भी प्रदेश भाजपा की सदस्यता उन्होंने पहले से ही ले रखी थी. पति कोई दूर का नहीं, बल्कि उन के जीजा का भाई ही था. बड़ी मुश्किल से सोनाली अपने सिनेमा के करिअर को आगे बढ़ा पाई थीं. शूटिंग के सिलसिले में उन का एक पांव मुंबई में होता तो दूसरा ससुराल, मायके और दिल्ली एनसीआर गुड़गांव, नोएडा में रहता था.

वह जहां भी जाती थीं, लोगबाग उन के साथ सेल्फी लेने और साथ में फोटो लेने के लिए मचल उठते थे. चाहे राजनीति का मंच हो या फिर फिल्मों के प्रमोशन और दूसरे कार्यक्रम का, सोनाली अपने प्रशंसकों से घिर जाती थीं. सोनाली के सामने व्यस्त लाइफ को मैनेज करने की यह एक तरह से अलग तरह की समस्या थी. इस काम में पहले पति का साथ मिल जाता था, लेकिन उन के नहीं रहने के बाद कोई नहीं था, जो उन के पीछे कामकाज को संभाल सके.

उन्हीं दिनों एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उन की मुलाकात हरियाणा के रहने वाले सुधीर सांगवान से हुई थी. यह मुलाकात फिल्म क्षेत्र से जुड़े एक सहयोगी ने करवाई थी.

सुधीर ने जल्द ही जीत लिया था सोनाली का दिल

इस बीच आम चुनाव की तैयारियां जोरों पर शुरू हो चुकी थीं. भाजपा ने सोनाली को भी राजनीतिक मंच पर उतार दिया था. उन का फिल्मों की शूटिंग और उन की पोस्ट प्रोडक्शन के कामकाज के अलावा जनसभाओं में जाने का शेड्यूल भी बन गया था. इसे बैलेंस कर कार्यक्रमों को मैनेज करने का काम सुधीर ने बखूबी संभाल लिया था. बताते हैं सुधीर ने एक तरह से अपनी कार्यशैली और हमेशा तत्पर रहने के चलते सोनाली का दिल जीत लिया था. वह सोनाली के इतने करीब आ गया था कि उस के बगैर एक पत्ता तक नहीं हिलता था.

एक बार सोनाली फोगाट के जेठ कुलदीप फोगाट चुनाव के दौरान ही सोनाली से मिलने गए. सुधीर ने उन्हें सोनाली से मिलने से मना कर दिया. जब उन्होंने बताया कि वह सोनाली के जेठ हैं, तब सोनाली से मिलवाया था. सुधीर ने सोनाली को पहली मुलाकात में खुद को एनआरआई बताया था. उस ने यह भी बताया कि आस्ट्रेलिया में उस की फैक्ट्री थी, जिसे वह बेच चुका है. बाद में पता चला कि सुधीर न तो एनआरआई था और न ही उस की कहीं कोई फैक्ट्री ही थी, बल्कि उस ने एक समय में पोल्ट्री फार्म का बिजनैस जरूर किया था. उस में असफल होने पर पोल्ट्री बिजनैस के लिए सब्सिडी दिलाने संबंधी बिचौलिए का काम करने लगा था. हां, उस ने वकालत की डिग्री ले रखी थी और हरियाणा के ही लोअर कोर्ट में प्रैक्टिस करता था.

दरअसल, वह गोहाना बार एसोसिएशन का सदस्य है. एलएलबी करने के बाद उस ने गोहाना में एक वकील के रूप में करिअर की शुरुआत की थी, उस में असफल होने पर अपने गांव के पास पोल्ट्री फार्म शुरू किया था, उस में भी सफलता नहीं मिली. बाद में सोनाली ने सुधीर को अपना निजी सचिव बना लिया. कुछ दिनों बाद सुधीर ने अपने साथ एक और सहायक को रख लिया. सुधीर ने 4-5 महीने में ही अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी और सोनाली को अपने कामकाज से प्रभावित कर लिया. आम चुनाव के बाद उसी साल हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान उस ने काफी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया.

कारण सोनाली को भाजपा ने आदमपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया था और प्रचार के लिए समय भी काफी कम था. तब सुधीर निजी सचिव के रूप में काम करते हुए सोनाली के घर में ही रहने लगा था.

hindi-manohar-politics-crime-story

यहीं से उन के बीच अंतरंगता और गहरी हो गई थी. इस बीच सुधीर को समझ आ गया कि परिवार में सोनाली का कौन करीबी है और कौन उन के विरोधी. सुधीर ने न सिर्फ चुनाव प्रचार के दौरान उन की मदद की, बल्कि उस दौरान सोनाली के लिए सारे ऐशोआराम की सुविधाओं के भी इंतजाम किए. जैसे लग्जरी सजावटी सामानों की व्यवस्था, आरामदायक बैड बिछावन और खानेपीने से ले कर मेकअप आदि के सामान, नौकरचाकर और आनेजाने के लिए महंगी गडि़यां आदि.

लग्जरी वाहनों में मर्सिडीज, फोर्ड एंडेवर और स्कोडा कारें शामिल की गई थीं. इसी क्रम में सोनाली को हरियाणा के सीएम तक का सपना दिखा दिया था उस ने. विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी सुधीर ने सोनाली का साथ नहीं छोड़ा. बताते हैं कि उस ने सोनाली को हतोत्साहित होने और अवसाद में घिरने से बचाते हुए आगे की तैयारी करने की योजना बना दी.

इस में वक्त था तब फिल्मी करिअर की ओर ध्यान देने की सलाह दे कर एक विश्वसनीय हितैषी बन गया. इस दौरान सोनाली की सारी जिम्मेदारियां उस ने अपने माथे ले लीं. तब तक दोनों को राजनीति का नशा लग चुका था. इसी साल 2022 में गुड़गांव ग्रींस सोसाइटी, सेक्टर 102 में किराए पर एक फ्लैट लिया और इस के लिए बने दस्तावेज सुधीर ने सोनाली फोगाट को अपनी पत्नी के रूप में नामित कर लिया.

तब तक सुधीर और सोनाली के करीबी सूत्रों की मानें तो वे राजनीतिक हस्तियों के करीब रहना भी पसंद करते थे. सुधीर ने एक बार सुखविंदर सिंह को सोनाली फोगाट से यह कहते हुए मिलवाया था कि वह गोवा में उन का काम संभालेंगे. गोवा में भी सोनाली और सुधीर होटल में पतिपत्नी के रूप मे ही ठहरे थे. बहरहाल, सुधीर ने अपने पासपोर्ट पर रोहतक का पता दिया हुआ है. इस पते पर संपर्क करने पर पुलिस ने पाया कि काफी समय पहले वह वहां रहता था. मकान मालिक ने उसे बाहर निकाल दिया था. पुलिस उस का पुराना पुराना रिकौर्ड तलाशने में जुटी हुई है.

रोहतक के पुलिस अधीक्षक उदय सिंह मीणा के अनुसार, उस के खिलाफ किस तरह के या कितने मामले दर्ज हैं, यह कहना फिलहाल मुश्किल है. विभाग की टीम रिकौर्ड जांच कर इस का ब्यौरा तैयार करेगी. इस के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

प्रेमिका से शादी के लिए मां बाप से खूनी दुश्मनी

28 अप्रैल, 2018 को दिल्ली के कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि जाकिर नगर की गली नंबर 7 में रहने वाले शमीम अहमद का दरवाजा अंदर से बंद है. काफी आवाजें देने के बावजूद भी उन के कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही.

चूंकि यह मामला दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना जामिया नगर के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से वायरलेस द्वारा यह सूचना थाना जामिया नगर को दे दी गई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी संजीव कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. वहां पर शमीम अहमद के बेटे अब्दुल रहमान के अलावा आसपास के लोग भी जमा थे.

अब्दुल रहमान ने पुलिस को बताया कि कल रात खाना खाने के बाद उस के अम्मीअब्बू अपने कमरे में सोने के लिए चले गए थे, जबकि वह दूसरे कमरे में सो गया था. रोजाना उस के अम्मीअब्बू ही सुबह पहले उठते थे. वही उसे जगाते भी थे, लेकिन आज वह अभी तक नहीं उठे. मैं ने काफी देर दरवाजा खटखटाया इस के बावजूद भी अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही. वहां मौजूद पड़ोसियों ने भी अब्दुल रहमान की हां में हां मिलाई.

अब्दुल रहमान की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी संजीव कुमार ने भी दरवाजा खटखटाया लेकिन वास्तव में अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उन्हें भी शक होने लगा. तब उन्होंने लोगों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा तोड़ने के बाद जैसे ही पुलिस अंदर घुसी तो पहले कमरे में ही फर्श पर शमीम अहमद और उन की पत्नी तसलीम बानो की लाशें पड़ी थीं.

रहस्यमय मौतें

अम्मी और अब्बू की लाशें देख कर रहमान दहाडें़े मार कर रोने लगा. पड़ोसी भी हतप्रभ थे कि दोनों की मौत कैसे हो गई. उन के शरीर पर किसी चोट आदि का निशान भी नहीं था. दोनों की मौत कैसे हुई उस समय इस का पता लगाना संभव नहीं था. थानाप्रभारी संजीव कुमार ने इस मामले की जानकारी डीसीपी चिन्यम बिश्वाल को दे दी. साथ ही क्राइम इन्वैस्टीगेशन टीम को भी मौके पर बुलवा लिया.

थानाप्रभारी ने मौकामुआयना किया तो पता चला कि उस दरवाजे पर औटोमैटिक लौक लगा हुआ था, जो अंदर और बाहर दोनों तरफ से बंद हो जाता था. उन के कमरे में सवा 5 लाख रुपए की नकदी के अलावा ज्वैलरी भी मिली. इस से वहां पर लूट की संभवना नजर नहीं आई. कमरे में 2 लोग सो रहे थे, दोनों की ही संदिग्ध मौत हो गई थी.

ऐसा भी नहीं था कि उन की मौत कमरे में मौजूद किसी जहरीली गैस की वजह से हुई हो क्योंकि जब कमरे का दरवाजा तोड़ा गया था तो उस समय कमरे में किसी जहरीली गैस आदि की स्मैल भी नहीं आ रही थी. यानी उस समय कमरे में पर्याप्त मात्रा में औक्सीजन थी. लग रहा था कि उन दोनों के खाने में कोई जहरीली पदार्थ मिला दिया गया होगा.

बहरहाल इन दोनों की मौत कैसे हुई यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग सकता था. लिहाजा थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर के दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. डीसीपी चिन्मय बिश्बाल ने भी घटनास्थल का दौरा किया. अब्दुल रहमान शमीम अहमद का इकलौता बेटा था. वही उन के साथ रहता था, इसलिए पुलिस ने अब्दुल रहमान से कहा कि जब तक इस केस की जांच पूरी न हो जाए वह दिल्ली छोड़ कर कहीं न जाए.

2-3 दिन बाद पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि उन की मौत दम घुटने की वजह से हुई थी. यानी किसी ने उन का दम घोट कर हत्या की थी. पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गई कि उन का कातिल कौन है.

उधर मृतकों का बेटा अब्दुल रहमान थाने और डीसीपी औफिस के चक्कर काट कर अपने मातापिता के हत्यारे का पता लगा कर उसे गिरफ्तार करने की मांग कर रहा था. जबकि पुलिस अलगअलग तरीके से जांच कर केस को खोलने की कोशिश में लगी थी.

इस दौरान थानाप्रभारी संजीव कुमार ने अब्दुल रहमान से भी 2 बार पूछताछ की थी. लेकिन उस से कोई क्लू नहीं मिल सका था. उन के यहां जिनजिन रिश्तेदारों या परिचितों का आनाजाना था, पुलिस ने उन्हें भी थाने बुला कर पूछताछ की.

इतना ही नहीं पुलिस ने उन पेशेवर हत्यारों को भी उठा लिया जो उस समय जेल से बाहर थे. लेकिन उन से भी कोई जानकारी नहीं मिली. इधर मामले को ले कर पुलिस भी परेशान थी. घटना के 3 सप्ताह बाद पुलिस ने अब्दुल रहमान को एक बार फिर थाने बुलाया. थाना प्रभारी और इंसपेक्टर भारत कुमार की टीम ने उस से फिर पूछताछ की. सख्ती से की गई पूछताछ में अब्दुल रहमान ने अपना मुंह खोलते हुए कहा कि अपने मांबाप का हत्यारा मैं ही हूं. मैं ने ही अपने दोस्तों के साथ उन की हत्या की थी.

उस की बात सुन कर एक बार तो पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई कि वह अपने मांबाप का एकलौता बेटा था तो ऐसी क्या बात हो गई कि घर के इसी चिराग ने अपने मांबाप का ही खून कर दिया. पुलिस ने अब्दुल रहमान से मांबाप की हत्या करने की वजह जानने के लिए पूछताछ की तो उस ने उन की हत्या की जो कहानी बताई वह हैरान करने वाली थी.

फेसबुक की दोस्त बनी महबूबा

अब्दुल रहमान अपने मांबाप की इकलौती संतान था. पिता शमीम अहमद और मां तसलीम बानो ने उसे हमेशा अपनी पलकों पर बिठा कर रखा था. वह उस की हर फरमाइश पूरी करते थे. मांबाप का लाडला अब्दुल रहमान पढ़ाई में भी होशियार था. उस का माइंड क्रिएटिव था इसलिए उस ने एनिमेशन में डिप्लोमा किया.

मांबाप चाहते थे कि उन के बेटे की कहीं अच्छी जगह नौकरी लग जाए. शमीम अहमद ने करीब डेढ़ साल पहले उस की शादी कर दी थी, लेकिन किसी वजह से उस की पत्नी से नहीं बनी. दोनों के विचारों में विरोधाभास था, इसलिए उस ने पत्नी को तलाक दे दिया. इस के बाद फेसबुक के माध्यम से अब्दुल रहमान की दोस्ती कानपुर की रहने वाली एक लड़की से हो गई.

यह दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे. यहां तक कि दोनों शादी के लिए भी तैयार हो गए. लड़की ने कह दिया कि वह उस के लिए अपने घर वालों तक को छोड़ने के लिए तैयार है. अब बात अब्दुल रहमान को फाइनल करनी थी. वह तो तैयार था लेकिन उसे उम्मीद थी कि शायद उस के घर वाले कानपुर वाली उस की दोस्त से शादी करने के लिए तैयार नहीं होंगे.

फिर भी अब्दुल रहमान ने अपने मातापिता से कानपुर वाली अपनी दोस्त के बारे में बताया और कहा कि वह उस से शादी करना चाहता है. शमीम अहमद ने साफ कह दिया कि वह अपनी बिरादरी की लड़की के साथ ही उस की शादी करना पसंद करेंगे. इसलिए कानपुर वाली उस लड़की को वह भूल जाए. उस के साथ उस की शादी नहीं हो सकती.

मांबाप पर भारी पड़ी प्रेमिका

पिता ने जितनी आसानी से भुला देने वाली बात कही थी, वह अब्दुल रहमान के लिए उतनी आसान नहीं थी. बहरहाल घर वालों की बातों को दरकिनार करते हुए वह अपनी उस फेसबुक फ्रेंड के संपर्क में बना रहा. इतना ही नहीं वह उस से मिलने भी जाता था. इसी दौरान घर वालों ने अब्दुल रहमान की दूसरी शादी कर दी. घर वालों के दबाव में उस ने शादी कर जरूर ली थी लेकिन उस के दिल में तो उस की कानपुर वाली प्रेमिका बसी हुई थी.

दूसरी शादी हो जाने के बाद भी वह अपनी प्रेमिका को नहीं भूला था. वह एक काल सेंटर में नौकरी करता था, इसलिए प्रेमिका को महंगे गिफ्ट आदि देने और उस से मिलने के लिए कानपुर जाता रहता था. वह अब्दुल रहमान पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी. वह भी सोचता था कि यदि प्रेमिका ही उस की पत्नी बन जाए तो उस का जीवन हंसीखुशी से बीतेगा. लेकिन इस काम में सब से बड़ी रुकावट उस के मांबाप ही थे.

अब्दुल रहमान ने एक बार फिर से अपने मांबाप को मनाने की कोशिश की कि वह उस की कानपुर वाली दोस्त के साथ उस की शादी कर दें. लेकिन शमीम अहमद ने बेटे को न सिर्फ जम कर फटकार लगाई बल्कि हिदायत भी दी कि वह उस लड़की को भूल कर अपनी घरगृहस्थी में ध्यान लगाए.

अब्दुल रहमान की कोशिश नाकाम हो चुकी थी पर वह हारना नहीं चाहता था. आखिर उस ने भी एक सख्त फैसला ले लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए वह अपनी प्रेमिका को दुलहन बना कर घर लाएगा. इस के लिए उस ने अपने मांबाप को रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. यानी प्रेमिका की खातिर उस ने मांबाप तक की हत्या करने की ठान ली.

इतना बड़ा काम वह खुद नहीं कर सकता था. इस बारे में उस ने दिल्ली के नांगलोई इलाके के रहने वाले अपने दोस्त नदीम खान (32) और गुड्डू से बात की. दोनों ढाई लाख रुपए में यह काम करने के लिए तैयार हो गए. तीनों ने शमीम अहमद और तसलीम बानो की हत्या करने की पूरी योजना बना ली.

योजना के अनुसार 27-28 अप्रैल की रात नदीम खान और गुड््डू जाकिर नगर इलाके में आ गए. अब्दुल रहमान के मातापिता जब खाना खा कर अपने कमरे में सोने के लिए चले गए तो रात 11 बजे के करीब अब्दुल रहमान ने फोन कर के अपने दोनों दोस्तों को घर बुला लिया. उन के घर आने के बाद अब्दुल रहमान उन्हें अपने मातापिता के कमरे में ले गया. उन के दरवाजे पर आटोमैटिक लौक लगा था जो दोनों तरफ से बंद हो जाता था.

इन लोगों ने मुंह पर तकिया रख कर एकएक कर दोनों का दम घोंट दिया और उन की लाशें बेड से उतार कर फर्श पर डाल दीं. इस के बाद अब्दुल रहमान ने दरवाजे को बंद कर दिया. अपना काम कर के नदीम खान और गुड्डू रात में ही वहां से चले गए. अब्दुल रहमान अपने कमरे में आ गया. इस के बाद उसे रात भर नींद नहीं आई. सुबह होने पर उस ने मोहल्ले के लोगों को यह कह कर इकटठा कर लिया कि पता नहीं क्यों आज अम्मी और अब्बू दरवाजा नहीं खोल रहे.

अब्दुल रहमान से पूछताछ के बाद पुलिस ने नदीम खान को भी गिरफ्तार कर लिया जबकि गुड्डू फरार हो गया था. दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.