Delhi News : दोस्ती पर दाग – जिगरी दोस्तों ने चाकू से ली एकदूसरे की जान

Delhi News : दिल्ली मे एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां दो जिगरी दोस्तों के बीच झगड़ा इतना बढ़ा कि उन्होंने एक दूसरे पर चाकू से हमला कर जान ले ली. कभी गहरे दोस्त रहे ये लड़के आखिर कातिल कैसे बन गए. जानते हैं पूरी स्टोरी विस्तार से दोस्तों ने ली एक दूसरे की जान,

यह घटना दिल्ली के तिलक नगर की है, जहां 13 जुलाई 2025 दिन रविवार रात के दिन यह वारदात हुई. जहां दो जिगरी यार एक पार्क में बैठे थे, तभी दोनों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू गई. दोनों के बीच यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों में हाथापाई होने लगी और फिर दोनों ने गुस्से में एक दूसरे पर चाकू से हमला शुरू कर दिया. यह हमला इतना गंभीर था कि दोनों गंभीर रुप से घायल हो गए.

फिर आसपास के लोगों ने दोनों घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले गए और पुलिस को भी सूचित कर दिया गया. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर अस्पताल पहुंच जाती है. पुलिस ने देखा कि दोनों बुरी तरह से घायल थे. डौक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया था, लेकिन गंभीर चोटों के कारण दोनों ने रात में दम तोड़ दिया.
पुलिस ने जांच में पाया कि मृतकों में एक का नाम आरिफ और दूसरे का नाम संदीप था. जो दोनों ही ख्याला बी ब्लौक के रहने वाले थे और एक ही गली में दोनों अपने परिवार के साथ रहते थे.

दिल्ली पुलिस के अनुसार, डीसीपी वेस्ट विचित्र ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस के द्वारा जांच गहराई से की जा रही है. पुलिस स्थानीय क्षेत्र में जाकर पता करने की कोशिश कर रही है कि दोनों जिगरी दोस्तों के बीच ऐसा क्या हुआ जिससे बहस खूनी संघर्ष में बदल गई. साथ ही पुलिस दोनों के परिवार वालों से पूछताछ कर रही है ताकि यह यह पता किया जा सके कि दोनों के बीच दोस्ती आखिर में दुश्मनी में कैसे बदल गई.

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिर्पोट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. पुलिस ने जांच में यह भी जाना कि आरिफ और संदीप दोनों शादीशुदा भी थे. संदीप का प्रौपर्टी का बिजनेस कर रहा था जबकि इससे पहले वह एक जिम ट्रेनर भी रह चुका था. वही आरिफ का भी अलग पेशा था. पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है. Delhi News

Extramarital Affair : पड़ोसी के प्यार में पागल पत्नी ने कराया पति का कत्ल

Extramarital Affair : तमाम पतिपत्नियों की तरह कपिल और खुशबू में लड़ाईझगड़ा होता था. लेकिन खुशबू इस झगड़े को नाक का सवाल बना कर मायके चली गई, जहां उस के संबंध चंदन से बन गए. खुशबू को चंदन की यारी ऐसी भाई कि उस ने…

दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना शाहीनबाग के अंतर्गत नई बस्ती ओखला के रहने वाले कपिल की ससुराल उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के आसफाबाद में थी. करीब 3 साल पहले किसी बात को ले कर उस का अपनी पत्नी खुशबू से विवाद हो गया था. तब खुशबू अपने मायके चली गई थी और वापस नहीं लौटी थी. इतना ही नहीं, ढाई साल पहले खुशबू ने फिरोजाबाद न्यायालय में कपिल के खिलाफ घरेलू हिंसा व गुजारा भत्ते का मुकदमा दायर कर दिया था. कपिल हर तारीख पर फिरोजाबाद कोर्ट जाता था और तारीख निपटा कर देर रात दिल्ली लौट आता था. 10 फरवरी, 2020 को भी वह इसी मुकदमे की तारीख के लिए दिल्ली से फिरोजाबाद आया था. वह रात को घर नहीं पहुंचा तो घर वालों ने उसे 11 फरवरी की सुबह फोन किया.

लेकिन उस का फोन बंद मिला. इस से घर वाले परेशान हो गए. उन्होंने 11 फरवरी की शाम तक कपिल का इंतजार किया. इस के बाद उन की चिंता और भी बढ़ गई. 12 फरवरी को कपिल की मां ब्रह्मवती, बहन राखी, मामा नेमचंद और मौसी सुंदरी फिरोजाबाद के लिए निकल गए. कपिल की ससुराल वाला इलाका थाना रसूलपुर क्षेत्र में आता है, इसलिए वे सभी थाना रसूलपुर पहुंचे और कपिल के रहस्यमय तरीके से गायब होने की बात बताई. थाना रसूलपुर से उन्हें यह कह कर थाना मटसैना भेज दिया गया कि कपिल कोर्ट की तारीख पर आया था और कोर्ट परिसर उन के थानाक्षेत्र में नहीं बल्कि थाना मटसैना में पड़ता है.

इसलिए वे सभी लोग उसी दिन थाना मटसैना पहुंचे, लेकिन वहां भी उन की बात गंभीरता से नहीं सुनी गई. ज्यादा जिद करने पर मटसैना पुलिस ने कपिल की गुमशुदगी दर्ज कर ली. गुमशुदगी दर्ज कर के उन्हें थाने से टरका दिया. इस के बाद भी वे लोग कपिल की फिरोजाबाद में ही तलाश करते रहे. इसी बीच 15 फरवरी की दोपहर को किसी ने थाना रामगढ़ के बाईपास पर स्थित हिना धर्मकांटा के नजदीक नाले में एक युवक की लाश पड़ी देखी. इस खबर से वहां सनसनी फैल गई. कुछ ही देर में भीड़ एकत्र हो गई. इसी दौरान किसी ने इस की सूचना रामगढ़ थाने में दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी श्याम सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. उन्होंने शव को नाले से बाहर निकलवाया. मृतक के कानों में मोबाइल का ईयरफोन लगा था.

पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद लोगों में से कोई भी उसे नहीं पहचान सका. पुलिस ने उस अज्ञात युवक की लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय फिरोजाबाद भेज दी. कपिल की मां ब्रह्मवती और बहन राखी उस समय फिरोजाबाद में ही थीं. शाम के समय जब उन्हें बाईपास स्थित नाले में पुलिस द्वारा किसी अज्ञात युवक की लाश बरामद किए जाने की जानकारी मिली तो मांबेटी थाना रामगढ़ पहुंच गईं. उन्होंने थानाप्रभारी श्याम सिंह से अज्ञात युवक की लाश के बारे में पूछा तो थानाप्रभारी ने उन्हें फोन में खींचे गए फोटो दिखाए. फोटो देखते ही वे दोनों रो पड़ीं, क्योंकि लाश कपिल की ही थी. इस के बाद थानाप्रभारी ब्रह्मवती और उस की बेटी राखी को जिला अस्पताल की मोर्चरी ले गए.

उन्होंने वह लाश दिखाई तो दोनों ने उस की शिनाख्त कपिल के रूप में कर दी. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी ने भी राहत की सांस ली. थानाप्रभारी ने शव की शिनाख्त होने की जानकारी एसपी (सिटी) प्रबल प्रताप सिंह को दे दी और उन के निर्देश पर आगे की काररवाई शुरू कर दी. थानाप्रभारी श्याम सिंह ने मृतक कपिल की मां ब्रह्मवती और बहन राखी से बात की तो उन्होंने बताया कि कपिल की पत्नी खुशबू चरित्रहीन थी. इसी बात पर कपिल और खुशबू के बीच अकसर झगड़ा होता था, जिस के बाद खुशबू मायके में आ कर रहने लगी थी. राखी ने आरोप लगाया कि खुशबू ने ही अपने परिवार के लोगों से मिल कर उस के भाई की हत्या की है.

पुलिस ने राखी की तरफ से मृतक की पत्नी खुशबू, सास बिट्टनश्री, साले सुनील, ब्रजेश, साली रिंकी और सुनील की पत्नी ममता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. चूंकि रिपोर्ट नामजद थी, इसलिए पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई. पुलिस ने मृतक की पत्नी खुशबू व उस की मां को हिरासत में ले लिया. उन से कड़ाई से पूछताछ की गई. खुशबू से की गई पूछताछ में पुलिस को कोई खास जानकारी हाथ नहीं लगी, बस यही पता चला कि कपिल पत्नी के चरित्र पर शक करता था. फिर भी पुलिस यह समझ गई थी कि एक अकेली औरत कपिल का न तो मर्डर कर सकती है और न ही शव घर से दूर ले जा कर नाले में फेंक सकती है. पुलिस चाहती थी कि कत्ल की इस वारदात का पूरा सच सामने आए.

इस बीच जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा. किसी ने थानाप्रभारी को बताया कि खुशबू चोरीछिपे अपने प्रेमी चंदन से मिलती थी. दोनों के नाजायज संबंधों का जो शक किया जा रहा था, उस की पुष्टि हो गई. जाहिर था कि हत्या अगर खुशबू ने की थी तो कोई न कोई उस का संगीसाथी जरूर रहा होगा. इस बीच पुलिस की बढ़ती गतिविधियों और खुशबू को हिरासत में लिए जाने की भनक मिलते ही खुशबू का प्रेमी चंदन और उस का साथी प्रमोद फरार हो गए. इस से उन दोनों पर पुलिस को शक हो गया. उन की सुरागरसी के लिए पुलिस ने मुखबिरों का जाल फैला दिया. मुखबिर की सूचना पर घटना के तीसरे दिन पुलिस ने खुशबू के प्रेमी चंदन व उस के साथी प्रमोद को कनैटा चौराहे के पास से हिरासत में ले लिया. दोनों वहां फरार होने के लिए किसी वाहन का इंतजार कर रहे थे.

थाने ला कर दोनों से पूछताछ की गई. थाने में जब चंदन और प्रमोद से खुशबू का आमनासामना कराया गया तो तीनों सकपका गए. इस के बाद उन्होंने आसानी से अपना जुर्म कबूल कर लिया. अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने खुशबू, उस के प्रेमी चंदन उर्फ जयकिशोर निवासी मौढ़ा, थाना रसूलपुर, उस के दोस्त प्रमोद राठौर निवासी राठौर नगर, आसफाबाद को कपिल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त रस्सी, मोटा सरिया व मोटरसाइकिल बरामद कर ली. खुशबू ने अपने प्यार की राह में रोड़ा बने पति कपिल को हटाने के लिए प्रेमी व उस के दोस्त के साथ मिल कर हत्या का षडयंत्र रचा था. खुशबू ने पति की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस तरह थी—

क्षिणपूर्वी दिल्ली की नई बस्ती ओखला के रहने वाले कपिलचंद्र की शादी सन 2015 में खुशबू के साथ हुई थी. शादी के डेढ़ साल तक सब कुछ ठीकठाक रहा. कपिल की गृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. करीब 3 साल पहले जैसे उस के परिवार को नजर लग गई. हुआ यह कि खुशबू अकसर मायके चली जाती थी. इस से कपिल को उस के चरित्र पर शक होने लगा. इस के बाद पतिपत्नी में तकरार शुरू हो गई. पतिपत्नी में आए दिन झगड़े होने लगे. गुस्से में कपिल खुशबू की पिटाई भी कर देता था. गृहक्लेश के चलते खुशबू अपने बेटे को ले कर अपने मायके में आ कर रहने लगी. ढाई साल पहले उस ने कपिल पर घरेलू हिंसा व गुजारा भत्ते के लिए फिरोजाबाद न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया.

मायके में रहने के दौरान खुशबू के अपने पड़ोसी चंदन से प्रेम संबंध हो गए थे. हालांकि चंदन शादीशुदा था और उस की 6 महीने की बेटी भी थी. कहते हैं प्यार अंधा होता है. दोनों एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे थे. मायके में रहने के दौरान चंदन खुशबू के पति की कमी पूरी कर देता था. लेकिन ऐसा कब तक चलता. एक दिन खुशबू ने चंदन से कहा, ‘‘चंदन, हम लोग ऐसे चोरीछिपे आखिर कब तक मिलते रहेंगे. तुम मुझ से शादी कर लो. मैं अपने पति से पीछा भी छुड़ाना चाहती हूं. लेकिन वह मुझे तलाक नहीं दे रहा. अगर तुम रास्ते के इस कांटे को हटा दोगे तो हमारा रास्ता साफ हो जाएगा.’’

दोनों एकदूसरे के साथ रहना चाहते थे. चंदन को खुशबू की सलाह अच्छी लगी. इस के बाद खुशबू व उस के प्रेमी चंदन ने मिल कर एक षडयंत्र रचा. मुकदमे की तारीख पर खुशबू और कपिल की बातचीत हो जाती थी. खुशबू ने चंदन को बता दिया था कि कपिल हर महीने मुकदमे की तारीख पर फिरोजाबाद कोर्ट में आता है. 10 फरवरी को अगली तारीख है, वह उस दिन तारीख पर जरूर आएगा. तभी उस का काम तमाम कर देंगे. कपिल 10 फरवरी को कोर्ट में अपनी तारीख के लिए आया. कोर्ट में खुशबू व कपिल के बीच बातचीत हो जाती थी. कोर्ट में तारीख हो जाने के बाद खुशबू ने उसे बताया, ‘‘अपने बेटे जिगर की तबीयत ठीक नहीं है. वह तुम्हें बहुत याद करता है. उस से एक बार मिल लो.’’

अपने कलेजे के टुकड़े की बीमारी की बात सुन कर कपिल परेशान हो गया और तारीख के बाद खुशबू के साथ अपनी ससुराल पहुंचा. कपिल शराब पीने का शौकीन था. खुशबू के प्रेमी व उस के दोस्त ने कपिल को शराब पार्टी पर आमंत्रित किया. शाम को ज्यादा शराब पीने से कपिल नशे में चूर हो कर गिर पड़ा. कपिल के गिरते ही खुशबू ने उस के हाथ पकड़े और प्रेमी चंदन व उस के साथी प्रमोद ने साथ लाई रस्सी से कपिल के हाथ बांधने के बाद उस के सिर पर मोटे सरिया से प्रहार कर उस की हत्या कर दी. कपिल की हत्या इतनी सावधानी से की गई थी कि पड़ोसियों को भी भनक नहीं लगी. हत्या के बाद उसी रात उस के शव को मोटरसाइकिल से ले जा कर बाईपास के किनारे स्थित नाले में डाल दिया गया. 15 फरवरी को शव से दुर्गंध आने पर लोगों का ध्यान उधर गया.

एसपी (सिटी) प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि कपिल की हत्या के मुकदमे में नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है. जो लोग निर्दोष पाए जाएंगे, उन्हें छोड़ दिया जाएगा. पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया. निजी रिश्तों में आई खटास के चलते खुशबू ने अपनी मांग का सिंदूर उजाड़ने के साथ पतिपत्नी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया. वहीं कांच की चूडि़यों से रिश्तों को जोड़ने के लिए मशहूर सुहागनगरी फिरोजाबाद को रिश्तों के खून से लाल कर दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Extramarital Affair : भाभी के प्यार में पागल छोटे भाई ने की बड़े भाई की हत्या

Extramarital Affair : संदीप को शराब पीने की लत थी, इस से उस की पत्नी अमनदीप परेशान रहती थी. इसी परेशानी के आलम में देवर गुरदीप से आंतरिक संबंध बन गए. अवैध संबंधों की परिणति छोटे भाई के हाथों बड़े भाई की हत्या के रूप में हुई. अगर अमनदीप…

खूबसूरत नैननक्श वाली अमनदीप कौर लखीमपुर खीरी के थाना कोतवाली गोला के अंतर्गत आने वाले गांव रेहरिया निवासी सरदार बलदेव सिंह की बेटी थी. अमनदीप के अलावा बलदेव सिंह की 2 बेटियां और एक बेटा और था. वह उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में नौकरी करते थे. चूंकि वह सरकारी कर्मचारी थे, इसलिए उन्होंने अपने चारों बच्चों की परवरिश अच्छे तरीके से की थी. अमनदीप कौर खूबसूरत लड़की थी. उसे सिनेमा देखना, सहेलियों के साथ दिन भर मौजमस्ती करना पसंद था. खुद को वह किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं समझती थी.

अमनदीप की आधुनिक सोच को देख कभीकभी बलदेव सिंह भी सोच में पड़ जाते थे. एक दिन अमनदीप की मां सुप्रीति कौर ने पति से कहा, ‘‘बेटी अब सयानी हो गई है. कोई अच्छे घर का लड़का देख कर जल्दी से इस के हाथ पीले कर दो तो अच्छा है.’’

पत्नी की बात बलदेव सिंह की समझ में आ गई. वह अमनदीप के लिए वर की तलाश में लग गए. इस काम के लिए बलदेव सिंह ने अपने रिश्तेदारों से भी कह रखा था. उन के दूर के एक रिश्तेदार ने उन्हें संदीप नाम के एक लड़के के बारे में बताया. संदीप लखीमपुर खीरी की तिकुनिया कोतवाली के अंतर्गत आने वाले गांव रायपुर कल्हौरी के रहने वाले मेहर सिंह का बेटा था. मेहर सिंह के पास अच्छीखासी खेती की जमीन थी. संदीप के अलावा मेहर सिंह की 3 बेटियां व एक बेटा और था. सन 2001 में मेहर सिंह ने पंजाब में हर्निया का औपरेशन कराया था, लेकिन औपरेशन के दौरान ही उन की मृत्यु हो गई थी. इस के बाद परिवार का सारा भार उन की पत्नी प्रीतम कौर पर आ गया था.

उन्होंने बड़ी मुश्किलों से अपने बच्चों की परवरिश की. जैसेजैसे बच्चे जवान होते गए, प्रीतम कौर उन की शादी करती रहीं. संदीप की शादी के लिए बलदेव सिंह की बेटी अमनदीप कौर का रिश्ता आया. यह रिश्ता प्रीतम कौर और परिवार के अन्य लोगों को पसंद आया. तय हो जाने के बाद संदीप और अमनदीप का सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह कर दिया गया. यह करीब 8 साल पहले की बात है. कहा जाता है कि पतिपत्नी की जिंदगी में सुहागरात एक यादगार बन कर रह जाती है. लेकिन अमनदीप कौर के लिए यह काली रात साबित हुई. उस रात संदीप का जोश अमनदीप के लिए पानी का बुलबुला साबित हुआ, अमनदीप की खामोशी और संजीदगी उस के होंठों पर आ गई. वह नफरतभरी निगाहों से संदीप की तरफ देख कर बिफर पड़ी, ‘‘मुझे तुम से इस तरह ठंडेपन की उम्मीद नहीं थी.’’

पत्नी की बात से संदीप का सिर शर्मिंदगी से झुक गया. वह बोला, ‘‘दरअसल, मैं बीमार चल रहा हूं. शायद इसी कारण ऐसा हुआ. तुम चिंता मत करो, मैं जल्द ही तुम्हारे काबिल हो जाऊंगा.’’ संदीप ने सफाई दी. इस के बाद संदीप ने अपने खानपान में सुधार किया. शराब का सेवन कम कर दिया, जिस का फल उसे जल्द ही मिला. वह पत्नी को भरपूर प्यार करने लायक बन गया. वक्त के साथ अमनदीप गर्भवती हो गई और उस ने बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम दलजीत रखा गया. इस के बाद उस ने एक बेटी सीरत कौर को जन्म दिया. इस वक्त दोनों की उम्र क्रमश: 6 और 4 साल है.

संदीप का परिवार बढ़ा तो खर्च भी बढ़ गया. वह पहले से और भी ज्यादा मेहनत करने लगा. जब वह शाम को थकहार कर घर लौटता तो शराब पी कर आता और खाना खा कर सो जाता. कभीकभी अमनदीप की चंचलता उसे विचलित जरूर कर देती, लेकिन एक बार प्यार करने के बाद संदीप करवट बदल कर सो जाता तो उस की आंखें सुबह ही खुलतीं. लेकिन वासना की भूख ऐसी होती है कि इसे जितना दबाने की कोशिश की जाए, उतना ही धधकती है. अमनदीप अपनी ही आग में झुलसतीतड़पती रहती. ऐसे में वह चिड़चिड़ी हो गई, बातबात में संदीप से उलझ जाती. शराब पी कर आता तो दोनों में जम कर बहस होती. कभीकभी संदीप उसे पीट भी देता था.

करीब 2 साल पहले संदीप की मां का देहांत हो गया था. घर पर संदीप, उस की पत्नी अमन और उस के बच्चे व छोटा भाई गुरदीप रहता था. संदीप तो अधिकतर खेतों पर ही रहता था. वह कभी देर शाम तो कभी देर रात घर लौटता था. अमनदीप के दोनों बच्चे स्कूल चले जाते थे. घर पर रह जाते थे गुरदीप और अमनदीप. गुरदीप अमनदीप को संदीप से लाख गुना अच्छा लगने लगा था. गुरदीप जब भी काम से बाहर जाता तो अमनदीप उस के वापस आने के इंतजार में दरवाजे पर ही खड़ी रहती. एक दिन अमनदीप जब इंतजार करतेकरते थक गई तो अंदर जा कर चारपाई पर लेट गई. कुछ ही देर में दरवाजा खटखटाने की आवाज आई तो अमनदीप ने दरवाजा खोला और उसे अंदर आने को कह कर लस्तपस्त भाव में जा कर फिर लेट गई.

गुरदीप ने घबरा कर पूछा, ‘‘क्या हुआ भाभी, इस तरह क्यों पड़ी हो? लगता है अभी नहाई नहीं हो?’’

अमनदीप ने धीरे से कहा, ‘‘आज तबीयत ठीक नहीं है, कुछ अच्छा नहीं लग रहा है.’’

गुरदीप ने जल्दी से झुक कर अमनदीप की नब्ज पकड़ कर देखा. उस के स्पर्श मात्र से अमनदीप के शरीर में झुरझुरी सी फैल गई. नसें टीसने लगीं और आंखें एक अजीब से नशे से भर उठीं. आवाज जैसे गले में ही फंस गई. उस ने भर्राए स्वर में कहा, ‘‘तुम तो ऐसे नब्ज टटोल रहे हो जैसे कोई डाक्टर हो.’’

‘‘बहुत बड़ा डाक्टर हूं भाभी,’’ गुरदीप ने हंस कर कहा, ‘‘देखो न, नाड़ी छूते ही मैं ने तुम्हारा रोग भांप लिया. बुखार, हरारत कुछ नहीं है. सीधी सी बात है, संदीप भैया सुबह काम पर चले जाते हैं तो देर शाम को ही लौटते हैं.’’

अमनदीप के मुंह का स्वाद जैसे एकाएक कड़वा हो गया. वह तुनक कर बोली, ‘‘शाम को भी वह लौटे या न लौटे, मुझे उस से क्या.’’

गुरदीप ने जल्दी से कहा, ‘‘यह बात नहीं है, वह तुम्हारा खयाल रखते हैं.’’

‘‘क्या खाक खयाल रखता है,’’ कहते ही उस की आंखों में आंसू छलछला आए.

भाभी अमनदीप को सिसकते देख कर गुरदीप व्याकुल हो उठा. कहने लगा, ‘‘रो मत भाभी, नहीं तो मुझे दुख होगा. तुम्हें मेरी कसम, उठ कर नहा आओ. फिर मन थोड़ा शांत हो जाएगा.’’

गुरदीप के बहुत जिद करने पर अमनदीप को उठना पड़ा. वह नहाने की तैयारी करने लगी तो वह चारपाई पर लेट गया. गुरदीप का मन विचलित हो रहा था. अमनदीप की बातें उसे कुरेद रही थीं. उस से रहा नहीं गया, उस ने बाथरूम की ओर देखा तो दरवाजा खुला था. गुरदीप का दिल एकबारगी जोर से धड़क उठा. उत्तेजना से शिराएं तन गईं और आवेग के मारे सांस फूलने लगी. गुरदीप ने एक बार चोर निगाह से मेनगेट की ओर देखा, मेनगेट खुला मिला. उस ने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया और कांपते पैरों से बाथरूम के सामने जा खड़ा हुआ.

अमनदीप उन्मुक्त भाव से बैठी नहा रही थी. उस समय उस के तन पर एक भी कपड़ा नहीं था. निर्वसन यौवन की चकाचौंध से गुरदीप की आंखें फटी रह गईं. वह बेसाख्ता पुकार बैठा, ‘‘भाभी…’’

अमनदीप जैसे चौंक पड़ी, फिर भी उस ने छिपने या कपड़े पहनने की कोई आतुरता नहीं दिखाई. अपने नग्न बदन को हाथों से ढकने का असफल प्रयास करती हुई वह कटाक्ष करते हुए बोली, ‘‘बड़े शरारती हो तुम गुरदीप. कोई देख ले तो…कमरे में जाओ.’’

लेकिन गुरदीप बाथरूम में घुस गया और कहने लगा, ‘‘कोई नहीं देखेगा भाभी, मैं ने बाहर वाले दरवाजे में कुंडी लगा दी है.’’

‘‘तो यह बात है, इस का मतलब तुम्हारी नीयत पहले से ही खराब थी.’’

‘‘तुम भी तो प्यासी हो भाभी. सचमुच भैया के शरीर में तुम्हारी कामनाएं तृप्त करने की ताकत नहीं है.’’ कहतेकहते गुरदीप ने अमनदीप की भीगी देह बांहों में भींच ली और पागल की तरह प्यार करने लगा. पलक झपकते ही जैसे तूफान उमड़ पड़ा. जब यह तूफान शांत हुआ तो अमनदीप अजीब सी पुलक से थरथरा उठी. उस दिन उसे सच्चे मायने में सुख मिला था. वह एक बार फिर गुरदीप से लिपट गई और कातर स्वर में कहने लगी, ‘‘मैं तो इस जीवन से निराश हो चली थी, गुरदीप. लेकिन तुम ने जैसे अमृत रस से सींच कर मेरी कामनाओं को हरा कर दिया.’’

‘‘मैं ने तो तुम्हें कई बार बेचैन देखा था, भाई से तृप्त न होने पर मैं ने तुम्हें रात में कई बार तन की आग ठंडी करने के लिए नंगा नहाते देखा है. तुम्हारी देह की खूबसूरती देख कर मैं तुम पर लट्टू हो गया था. मैं तभी से तुम्हारा दीवाना बन गया था. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं लेकिन तुम ने कभी मौका ही नहीं दिया.’’

‘‘बड़े बेशर्म हो तुम गुरदीप. औरत भी कहीं अपनी ओर से इस तरह की बात कह पाती है.’’

‘‘अपनों से कोई दुराव नहीं होता, भाभी. सच्चा प्यार हो तो बड़ी से बड़ी बात कह दी जाती है. आखिर भैया…’’

‘‘मेरे ऊपर एक मेहरबानी करो गुरदीप, ऐसे मौके पर संदीप की याद दिला कर मेरा मन खराब मत करो. हम दोनों के बीच किसी तीसरे की जरूरत ही क्या है. अच्छा, अब तुम कमरे में जा कर बैठो.’’

‘‘तुम भी चलो न.’’ कहते हुए गुरदीप ने अमनदीप को बांहों में उठा लिया और कमरे में ले जा कर पलंग पर डाल दिया. अमनदीप ने कनखी से देखते हुए झिड़की सी दी, ‘‘कपड़े तो पहनने दो.’’

‘‘क्या जरूरत है…आज तुम्हारा पूरा रूप एक साथ देखने का मौका मिला है तो मेरा यह सुख मत छीनो.’’

गुरदीप बहुत देर तक अमनदीप की मादक देह से खेलता रहा. एक बार फिर वासना का ज्वार आया और उतर गया. लेकिन यह तो ऐसी प्यास होती है कि जितना बुझाने का प्रयास करो, उतनी और बढ़ती जाती है. फिर अमनदीप के लिए तो यह छीना हुआ सुख था, जो उस का पति कभी नहीं दे सका. वह बारबार इस अलौकिक सुख को पाने के लिए लालायित रहती थी. दोनों इस कदर एकदूसरे को चाहने लगे कि अब उन्हें अपने बीच आने वाला संदीप अखरने लगा. हमेशा का साथ पाने के लिए संदीप को रास्ते से हटाना जरूरी था.

25 फरवरी, 2020 की रात संदीप शराब पी कर आया तो झगड़ा करने लगा. उस ने अमनदीप से मारपीट शुरू कर दी. इस पर अमनदीप ने गुरदीप को इशारा किया. इस के बाद अमनदीप ने गुरदीप के साथ मिल कर संदीप को मारनापीटना शुरू कर दिया. किचन में पड़ी लकड़ी की मथनी से अमनदीप ने संदीप के सिर के पिछले हिस्से पर कई प्रहार किए. बुरी तरह मार खाने के बाद संदीप बेहोश हो गया. लेकिन सिर पर लगी चोट से काफी खून बह जाने से उस की मृत्यु हो गई. संदीप की मौत के बाद दोनों काफी देर तक सोचते रहे कि अब वह क्या करें. इस के बाद सुबह होने तक उन्होंने फैसला कर लिया कि उन को क्या करना है.

सुबह दोनों बच्चों के साथ वह घर से निकल गए. साढ़े 11 बजे गुरदीप ने अपनी बड़ी बहन राजविंदर को फोन किया कि उस ने और अमनदीप ने संदीप को मार दिया है. कह कर काल काट दी और अपना फोन बंद कर लिया. इस के बाद राजविंदर ने यह बात रोते हुए अपने पति रेशम सिंह को बताई. दोनों संदीप के मकान पर आए तो वहां संदीप की लाश पड़ी देखी. इस के बाद राजविंदर ने तिकुनिया कोतवाली में घटना की सूचना दी. सूचना मिलते ही कोतवाली इंसपेक्टर हनुमान प्रसाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. मकान में घुसने पर पहले बरामदा था, उस के बाद सामने 2 कमरे और दाईं ओर एक कमरा था. सामने वाले बीच के कमरे में 3 चारपाई पड़ी थीं. कमरे के बीच में जमीन पर संदीप की लाश पड़ी थी. उस के सिर पर गहरी चोट थी, पुलिस ने सोचा कि शायद उसी चोट से अधिक खून बहने के कारण उस की मौत हुई होगी.

कमरे में ही खून लगी लकड़ी की मथनी पड़ी थी. इंसपेक्टर हनुमान प्रसाद ने खून से सनी मथनी अपने कब्जे में ले ली. पूरा मौकामुआयना करने के बाद इंसपेक्टर हनुमान प्रसाद ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. इस के बाद कोतवाली आ कर राजविंदर कौर से पूछताछ की तो उन्होंने पूरी बात बता दी. राजविंदर की तरफ से पुलिस ने अमनदीप और गुरदीप सिंह के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के बाद पुलिस उन की तलाश में जुट गई. इंसपेक्टर हनुमान प्रसाद को एक मुखबिर से सूचना मिली कि अमनदीप और गुरदीप सिंह लखीमपुर की गोला कोतवाली के ग्राम महेशपुर फजलनगर में अपने रिश्तेदार देवेंद्र कौर के यहां शरण लिए हुए हैं.

इस सूचना पर पुलिस ने 3 फरवरी, 2020 को सुबह करीब सवा 5 बजे उस रिश्तेदार के यहां दबिश दे कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया. कोतवाली ला कर जब उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने आसानी से अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या की वजह भी बयान कर दी. आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी के बाद पुलिस ने हत्यारोपी गुरदीप सिंह और अमनदीप कौर को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

देह का भूखा दानव

12 सितंबर, 2014 को सुबह कोई 10 बजे की बात थी. चांदनी अपने रोजमर्रा के कामों को निपटा कर कालेज जाने की  तैयारी कर रही थी कि उसी बीच उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी. वह एक खास तरह की रिंगटोन थी. वह रिंगटोन उस ने अपने प्रेमी संदीप के फोन नंबर के साथ सेट कर रखी थी. इसलिए रिंगटोन बजाते ही वह समझ गई कि संदीप का फोन आया है.

संदीप का फोन आने पर उस का दिमाग गुस्से से झनझनाने लगा. एक समय ऐसा भी था, जब उस का फोन आता था तो वह मारे खुशी के फूले नहीं समाती थी, लेकिन अब उस का फोन आने पर वह टेंशन में आ गई. एक दफा तो उस के मन में आया कि वह फोन काट दे या यूं ही घंटी बजने दे. कुछ देर तक वह फोन नहीं उठाएगी तो वह अपने आप ही फिर फोन नहीं करेगा.

लेकिन दूसरे ही पल दिमाग में विचार आया कि नहीं, आज वह आखिरी बार उस से बात कर ही ले कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा. यही सोच कर उस ने फोन रिसीव कर लिया. तभी चिरपरिचित अंदाज में फोन करने वाला संदीप बोला, ‘‘मैं एकडेढ़ घंटे में आ रहा हूं, तुम तैयार रहना.’’

‘‘लेकिन सुनो तो…’’ चांदनी ने अपनी बात कहने की कोशिश की. संदीप जानता था कि वह क्या कहेगी, इसलिए अपनी बात कहने के बाद बोला, ‘‘अब जो भी कहनासुनना है, वहीं कहना. ओके, बस तुम तैयार रहना.’’

चांदनी और संदीप कमल द्विवेदी के कैलाशपुरी कालोनी स्थित घर पर मिलते थे. कमल द्विवेदी संदीप का दोस्त था, जो कैलाशपुरी वाले घर में अकेला रहता था. जब भी वे दोनों उस के घर पहुंचते, दोस्ती निभाते हुए वह उन्हें खुल कर मौजमस्ती करने का मौका देने के लिए उन्हें अकेला छोड़ कर बाहर चला जाता था.

संदीप ने चांदनी को कमल के घर पहुंचने को कहा था, इसलिए वह बेबसी से तैयार होने के नाम पर कपड़े बदलने लगी. एक वक्त था जब वह संदीप से मिलने कमल के घर जाती थी तो वह उस की पसंद के कपड़े पहनती थी. जाने से पहले वह खूब मेकअप करती थी और बीच रास्ते में उस के लिए चाकलेट आदि खरीद कर ले जाती थी. घर से निकलते ही उस का दिल करता था कि उड़ कर चली जाए. तब उस के पैरों में पंख लगे रहते थे और दिल बेतहाशा धड़कता था.

लेकिन अब बात और थी. आज वह मन ही मन सख्त फैसला ले कर संदीप से मिलने जा रही थी. उस के मन में बेचैनी थी कि जाने आज भी संदीप उस के सवालों का ठीकठाक जवाब देगा या नहीं या हमेशा की तरह अपनी हवस की आग बुझाएगा और थोड़ाबहुत समझाबुझा या दुलारपुचकार कर चलता बनेगा. इन्हीं खयालों में डूबी चांदनी ने कमरे पर ताला लगाया. चांदनी रीवां के गवर्नमेंट गर्ल्स कालेज से एमएससी कर रही थी और रतहरा मोहल्ले में किराए पर रहती थी. कमरे पर ताला लगा कर वह बाहर आ गई.

सड़क पर धीरेधीरे पैदल चलती चांदनी अभी आधा किलोमीटर भी नहीं चली थी कि संदीप की बाइक उस के नजदीक आ कर रुकी. बगैर कुछ कहेसुने वह कूद कर संदीप के पीछे बैठ गई. संदीप तेज गति से बाइक चलाता हुआ कैलाशपुरी की तरफ निकल गया. वह इतनी नाराज थी कि उस ने रास्ते में उस से कोई बात नहीं की.

कमल ने जैसे ही अपने दोस्त को माशूका के साथ घर पर आया देखा, हर बार की तरह चुपचाप घर से बाहर निकल गया. संदीप और चांदनी एक कमरे में चले गए. अंदर पहुंचते ही संदीप ने पहला काम दरवाजा बंद करने का किया. इस के बाद हर बार की तरह उस ने चांदनी को अपनी बांहों में भर लिया और ताबड़तोड़ उसे चूमने लगा.

अपनी परेशानी में डूबी चांदनी को संदीप की यह हरकत पसंद नहीं आई. उस ने उसे झटक दिया और बेहद सख्त लहजे में कहा, ‘‘आज यह सब नहीं चलेगा. पहले मेरे सवालों का जवाब दो.’’

संदीप के ऊपर तो मिलन का भूत सवार था. प्रेमिका के व्यवहार से उसे झटका लगा. मौके की नजाकत को समझते हुए उस ने अपनी जल्दबाजी और बेसब्री पर काबू में ही भलाई समझी. पर उसे इस बात का भरोसा था कि थोड़ी नानुकुर के बाद चांदनी नौरमल हो जाएगी. क्योंकि बीते एक साल से यही हो रहा था.

चांदनी हर बार उस से यही पूछती, ‘‘संदीप, तुम शादी कब करोगे. आखिरकार हमारे इस रिश्ते का नाम क्या है. मैं खुद को भी मुंह दिखाने लायक नहीं रही. तुम आखिर समझते क्यों नहीं.’’

उस की बातों को वह एक कान से सुनता, दूसरे से निकाल देता था. उस का मकसद अपनी वासना को शांत करना होता था, इसलिए वह किसी तरह उसे बहलाफुसला कर रास्ते पर ला कर अपनी इच्छा पूरी कर लेता था.

इस तरह पिछले 2 सालों में वह चांदनी की रगरग से वाकिफ हो चुका था. काफी देर तक वह प्रेमिका की बातों को सुनता रहा. चांदनी की बात पूरी हो जाने के बाद वह अपनी लच्छेदार बातों से उसे संतुष्ट करने की कोशिश करने लगा. मानमनुहार करते हुए काफी देर हो गई, लेकिन चांदनी उस की बात मानने को तैयार नहीं थी. उस दिन वाकई बात जुदा थी.

अपनी बातों से बहलाने की कोशिश करते हुए संदीप को कोई एक घंटा बीत चुका था. चांदनी ने भी शायद खुद को उस के सामने समर्पण न करने का फैसला कर रखा था. तभी तो जब भी संदीप उसे स्पर्श करता, वह उस का हाथ झटक देती. जब काफी देर हो गई तो संदीप झुंझला कर बोला, ‘‘चांदनी, तुम यह बताओ कि हमारे बीच यह सब पहली बार थोड़े न हो रहा है, जो तुम इस तरह की बातें कर रही हो.’’

‘‘पहले जो भी हुआ, उसे भूल जाओ. लेकिन अब नहीं होगा.’’ चांदनी बोली.

संदीप के सब्र का बांध टूट चुका था. वह भी जिद करते हुए बोला, ‘‘होगा, आज भी होगा और प्यार से नहीं तो रिवाल्वर से होगा.’’ कहने के साथ ही उस ने जेब से रिवाल्वर निकाल लिया.

‘‘तो तुम मुझे मारोगे, मेरी हत्या करोगे?’’ बजाय डरने के चांदनी बेखौफ हो कर बोली, ‘‘तो कर लो मन की. तुम्हारी आज हरगिज नहीं चलेगी.’’

चांदनी नहीं डरी तो संदीप और झल्ला उठा, ‘‘मैं मजाक नहीं कर रहा. सीरियसली कह रहा हूं कि सीधेसीधे मान जाओ, नहीं तो…’’

‘‘नहीं तो क्या…’’

‘‘नहीं तो…’’ कहतेकहते संदीप ने उस के गुप्तांग पर निशाना साधते हुए गोली चला दी, जो कमर को चीरती हुई पार निकल गई.

चांदनी ने यह कभी सोचा भी नहीं था कि जिस प्रेमी को वह अपना सब कुछ सौंप चुकी थी, हवस के लिए वह उस का खून कर देगा. वह तो नाजनखरे दिखा कर उस से केवल शादी की बात पक्की करना चाहती थी. बहरहाल गोली लगते ही चांदनी की सलवार खून से लथपथ हो गई. संदीप ने प्रेमिका पर गोली तो चला दी, लेकिन खून देखते ही वह घबरा गया. उस के सिर से वासना का भूत उतर हो चुका था. अब उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे?

चांदनी असहनीय दर्द से जूझने लगी. संदीप से बोली, ‘‘संदीप मुझे अस्पताल ले चलो. मैं किसी से नहीं कहूंगी कि यह गोली तुम ने मारी है. अस्पताल वालों और पुलिस से कह दूंगी कि सेलिब्रेशन होटल के पास एक मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात लोगों ने उसे गोली मार दी. प्लीज, मुझे जल्दी ले चलो.’’

प्रेमिका की बात सुनने के बाद संदीप को भी लग रहा था कि चांदनी सच बोल रही है. इसलिए उस ने फोन कर के अपने दोस्त कमल द्विवेदी को बुला लिया और उसे संक्षेप में जानकारी दे दी. इस के बाद दोनों चांदनी को ले कर रीवां के नामी संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंच गए. कमल की परेशानी यह थी कि अगर चांदनी को उस के घर में कुछ हो जाता तो उस के लेने के देने पड़ जाते. लिहाजा वह संदीप का साथ देने को तैयार हो गया. इसलिए अपनी बोलेरो कार से वह चांदनी को अस्पताल ले गया.

आपातकालीन वार्ड में मौजूद डाक्टरों ने चांदनी की हालत देखते हुए उसे तुरंत भरती कर इलाज शुरू कर दिया. मामला पुलिस केस का लग रहा था, इसलिए अस्पताल की तरफ से इस की सूचना थाना सिविल लाइंस को दे दी गई.

सूचना मिलते ही सिविल लाइंस के थानाप्रभारी बृजेंद्र मोहन दुबे तुरंत अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने लड़की का इलाज कर रहे डाक्टरों से बात की. डाक्टरों ने जब बताया कि लड़की बयान देने की हालत में नहीं है तो उन्होंने लड़की को अस्पताल लाने वाले संदीप और कमल द्विवेदी से बात की. उन से बात करने के बाद वह हैरानी में पड़ गए कि एक लड़की को दिनदहाड़े गोली आखिर किस ने मारी? और गोली भी उस के खास अंग को निशाना साधते हुए चलाई.

संदीप और कमल काफी हद तक अपनी घबराहट पर काबू पा चुके थे. उन्हें उम्मीद थी कि ठीक होने पर चांदनी भी पुलिस को गुमराह करने वाला बयान दे देगी और वह बच जाएंगे.

संदीप ने थानाप्रभारी को दिए बयान में बताया, ‘‘चांदनी पटेल हमारी परिचित है. वह यहीं के रतहरा मोहल्ले में रहती है. वह गर्वमेंट गर्ल्स कालेज से एमएससी कर रही है. इस का छोटा भाई राहुल मेरा दोस्त है. चांदनी ने दोपहर कोई साढ़े बारह बजे मुझे फोन पर बताया था कि वह कालेज जा रही थी, तभी सेलीब्रेशन होटल के पास अज्ञात युवकों ने पीछे से आ कर उसे गोली मार दी. यह खबर मिलने पर मैं ने तुरंत अपने दोस्त कमल द्विवेदी को फोन कर के बुलाया और उस की बोलेरो जीप में डाल कर अस्पताल ले आए.’’

संदीप ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पुलिस को बयान दिया था, इसलिए पुलिस को उस पर कोई शक नहीं हुआ. चांदनी अभी बेहोश थी, उस के होश में आने के बाद ही पूरी जानकारी मिल सकती थी. इसलिए पुलिस उस जगह रवाना हो गई, जहां चांदनी को गोली मारने की बात बताई गई थी.

पुलिस ने होटल सेलिब्रेशन के आसपास के लोगों से अज्ञात बाइक सवारों द्वारा किसी लड़की को घायल करने के बारे में पूछा. तमाम लोगों से पूछताछ करने के बाद भी पुलिस को ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला, जिस ने गोली मारते देखी हो. वहां खून आदि के निशान भी नहीं मिले. पुलिस के लिए यह बात बड़ी ताज्जुब की थी. चांदनी की सलवार खून से तरबतर थी और घटनास्थल पर खून की बूंद तक नहीं गिरी थी. पहली ही नजर में मामला कोई दूसरा दिख रहा था.

उधर डाक्टर चांदनी के इलाज में लगे थे. पुलिस को इंतजार था कि चांदनी होश में आ कर बयान दे, जिस से पता चले कि आखिरकार हुआ क्या था. चांदनी के घायल होने की खबर उस के घर वालों को दी गई तो उस के पिता और भाई संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंच गए. जैसेजैसे गांव वालों को चांदनी के घायल होने की जानकारी मिलती गई, वे अस्पताल पहुंचने लगे. कुछ ही देर में तमाम लोग अस्पताल के बाहर जमा हो गए.

अस्पताल में भीड़ बढ़ती देख रीवां के एएसपी प्रणय नागवंशी भी वहां पहुंच गए. उन्होंने भी संदीप से पूछताछ की. जिस कालेज में चांदनी पढ़ती थी, उस कालेज के भी तमाम छात्रछात्राएं अस्पताल पहुंच गए. लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था. वे नारेबाजी करने लगे.

थोड़ी देर में एसपी के आदेश पर आसपास के थानों की पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई. पुलिस अधिकारियों ने जैसेतैसे लोगों को समझा कर आश्वासन दिया कि जल्दी ही हमलावरों का पता लगा कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

डाक्टर चांदनी के इलाज में लगे हुए थे, लेकिन उस की हालत में सुधार नहीं हो रहा था. आखिरकार दोपहर कोई 3 बजे उस ने दम तोड़ दिया. चांदनी के मरते ही संदीप ने चैन की सांस ली कि घटना की हकीकत उस के साथ ही दफन हो जाएगी. पुलिस को सच्चाई पता नहीं चलेगी. लेकिन चांदनी के मरने के बाद पुलिस की चिंता और बढ़ने लगी, क्योंकि लोगों के उग्र होने की संभावना थी. पुलिस ने फटाफट चांदनी का पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया.

इस के बाद पुलिस एक बार फिर होटल सेलिब्रेशन पहुंची. शायद इस बार वहां से हत्यारों के बारे में कोई क्लू मिल जाए. वह फिर से चश्मदीद को तलाशने लगी. काफी कोशिशों के बावजूद भी पुलिस को एक भी चश्मदीद नहीं मिला. आसपास के काम करने वाले लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने गोली चलने तक की आवाज नहीं सुनी. यह जान कर पुलिस को ताज्जुब हुआ कि इतनी बड़ी घटना हो गई और लोगों को पता तक नहीं चला. जबकि वह इलाका भीड़भाड़ वाला था.

इन बातों से पुलिस को संदीप के बयान पर शक होने लगा. लिहाजा पुलिस ने संदीप के बयान का पोस्टमार्टम करना शुरू किया. वह संदीप को घटनास्थल पर ले गई तो वह यह तक नहीं बता पाया कि वारदात किस जगह हुई थी.

अब पुलिस का शक यकीन में बदलता दिख रहा था, लिहाजा पुलिस ने संदीप से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने सारी कहानी बयां कर दी. उस ने चांदनी से प्यार होने से ले कर हत्या तक की सिलसिलेवार जो कहानी बताई वह इस प्रकार निकली:

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के रीवां जिले के एक गांव की रहने वाली चांदनी राजकीय कन्या महाविद्यालय से एमएससी कर रही थी. चूंकि रोजाना घर से कालेज आने में उस की पढ़ाई बाधित हो रही थी, इसलिए उस ने रतहरा में किराए पर कमरा ले लिया. कमरे पर उस ने अपने छोटे भाई को भी रख लिया था. वह भी बहन के साथ रह कर पढ़ाई करने लगा.

उसी दौरान सैमसंग कंपनी में नौकरी करने वाले संदीप नाम के युवक से उस की दोस्ती हुई, संदीप को जब पता चला कि चांदनी के साथ उस का भाई भी रह रहा है तो चांदनी से नजदीकी बढ़ाने के लिए उस ने उस के छोटे भाई से दोस्ती कर ली. इस के बाद वह चांदनी से मिलने लगा.

संदीप की चांदनी के साथ हुई दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. उन का प्यार परवान चढ़ते हुए इतना आगे निकल गया कि वे सारी हदें पार कर गए. उन के बीच जिस्मानी संबंध कायम हो गए. इतना ही नहीं, उन्होंने शादी कर के साथसाथ रहने का फैसला कर लिया था.

काफी दिनों तक दोनों चोरीछिपे मिलते रहे. संदीप का एक दोस्त था कमल द्विवेदी, जो अपने जमाने के कुख्यात डकैत महेश द्विवेदी का बेटा था. कमल कैलाशपुरी स्थित मकान में अकेला रहता था. कमल संदीप और चांदनी के प्रेमप्रसंग से वाकिफ था. इसलिए संदीप चांदनी को कमल के घर पर मिलने के लिए बुला लेता था.

जब भी मन होता, वे कमल के घर पर मौजमस्ती कर लेते थे. लेकिन कुछ दिनों बाद ही संदीप में बदलाव आना शुरू हो गया. जो संदीप जीवनभर प्रेमिका का साथ निभाने का वादा करता था, वह शादी करने से कतराने लगा. अब वह चांदनी को केवल मौजमस्ती का साधन समझने लगा. जब भी चांदनी उस से शादी की बात करती, वह कोई न कोई बहाना बना कर बात टाल देता था. चांदनी उस की बात समझ गई.

चूंकि वह अपनी इज्जत उस के हवाले कर चुकी थी, इसलिए उस पर शादी का दबाव बनाने लगी. शादी की बात सुनते ही संदीप असमंजस में फंसा महसूस करता. फिर भी वह किसी तरह उसे झूठा भरोसा दे कर उस के साथ मौजमस्ती करने में कामयाब हो जाता था. 12 सितंबर, 2014 को चांदनी ने अपने उस के सामने देह समर्पण नहीं किया तो वह हैवान बन उठा और उसे गोली मार दी.

संदीप से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस के दोस्त कमल द्विवेदी को भी सह अभियुक्त बना कर उसे गिरफ्तार कर लिया. दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. पुलिस मामले की तफतीश कर रही है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित