Bihar News: ट्यूटर के प्यार में लिपटी अस्मिता

Bihar News: समस्तीपुर (बिहार) की रहने वाली अस्मिता शराबी पति सोनू झा के जुल्मोसितम से ऊब चुकी थी. इसी बीच बेटे के ट्यूशन टीचर हरिओम को वह दिल दे बैठी. इन दोनों के प्यार ने एक ऐसे अपराध को जन्म दिया कि…

अपनी प्रेमिका अस्मिता झा को उस के पति सोनू झा द्वारा प्रताडि़त करने की बात सुन कर हरिओम का गुस्से में खून खौल गया. वह प्रेमिका को भरोसा देते हुए बोला, ”ठीक है भाभीजी, अब आप परेशान मत हो. मैं जल्दी ही इस का कुछ हल सोचता हूं. अगर तुम्हारे दिमाग में कोई आइडिया हो तो बताओ.’’

”अभी तो कोई आइडिया नहीं आ रहा, लेकिन तुम इस जालिम पति से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाओ, तभी हम आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं.’’ अस्मिता बोली.

”भाभीजी, आप चिंता न करो. अब यह काम मेरा है, बहुत जल्दी आप को उस से छुटकारा मिल जाएगा.’’ यह तसल्ली देने के बाद हरिओम अगले दिन आने को कह कर चला गया. लेकिन उस दिन अस्मिता के दिल में कुछ आस जरूर जागी थी. 25 जुलाई, 2025 की शाम को अस्मिता ने हरिओम को फोन पर बताया कि सोनू आज अभी थोड़ी देर पहले ही आटो ले कर घर से निकला है. वह रात देर से ही घर पहुंचेगा. वह तुरंत आ कर उस से मिले. इस जानकारी के मिलते ही हरिओम पागलों की तरह बिना देर लगाए अस्मिता के घर पर जा पहुंचा. उस वक्त अस्मिता का बेटा सो चुका था.

सोनू के घर के दरवाजे के पास ही एक छोटा सा कमरा बना हुआ था, जिस में उस के पापा टुनटुन झा अकेले ही सोते थे. उसी कमरे के पास एक ग्रिल लगा हुआ था, जिस पर रात में ताला लगाया जाता था. उस ताले की एक चाबी सोनू और दूसरी अस्मिता के पास होती थी. सोनू जब कभी भी आता तो वह उस ताले को खोल कर घर में चला जाता था. 25 जुलाई, 2025 को जब सोनू देर से निकला तो अस्मिता को उम्मीद थी कि वह सुबह तक ही घर वापस आ पाएगा, इसी कारण उस ने उस दिन उस ग्रिल में ताला ही नहीं लगाया. ताकि हरिओम बिना किसी आहट के घर में आ सके.

सोनू के घर से निकलते ही अस्मिता ने प्रेमी हरिओम को फोन कर सारी जानकारी दे दी, जिस के तुरंत बाद ही हरिओम दबेपांव उस के घर में प्रवेश कर गया. घर में अस्मिता को अकेला पा कर हरिओम जवानी के जोश में अपने होश खो बैठा था. अस्मिता को घर में अकेला पाते ही वह उस के साथ संबंध बनाने के लिए आतुर हो उठा, लेकिन इत्तफाक रहा कि सोनू को किसी काम से रास्ते से ही घर आना पड़ा. लेकिन घर में आते ही उस ने जो देखा, वह उस की कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था.

उस वक्त उस की पत्नी अस्मिता हरिओम के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी. पत्नी और हरिओम को ऐसी हालत में देखते ही सोनू अपना आपा खो बैठा. अस्मिता के पास पहुंचते ही सोनू ने उस के बाल पकड़ते हुए कहा, ”रंडी, मुझे तुझ से ऐसी उम्मीद नहीं थी. कुतिया अपने मर्द को तो पूरी तरह से संतुष्ट कर नहीं पाती, दूसरों के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है.’’

इतना कहते ही सोनू ने अस्मिता को बुरी तरह से पीटना शुरू कर दिया था. सोनू को घर आया देखकर पहले तो हरिओम ने घर से भागने की कोशिश की, लेकिन फिर उस ने अस्मिता को सोनू से बचाने की हिम्मत जुटाई. हरिओम को अस्मिता के बचाव में आते देख सोनू ने उस के साथ भी मारपीट शुरू कर दी थी.

प्रेमी के सामने बनाने लगा संबंध

सोनू को गुस्से में देखते ही हरिओम ने उस कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया, ताकि घर में हो रहे शोरशराबे की बाहर तक आवाज तक न जा सके. तभी गुस्से से तिलमिलाए सोनू ने अस्मिता की चोटी पकड़ कर उसे फर्श पर दे पटका. वह उस के प्रेमी के सामने ही उस से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा. अस्मिता उस का विरोध कर रही थी. फिर वह हैवान बन कर पत्नी के कपड़ों को फाडऩे लगा. देखते ही देखते वह पत्नी के सीने पर चढ़ बैठा. अचानक अस्मिता की चीखपुकार निकली. उस ने प्रेमी हरिओम को ललकारते हुए कहा, ”हरिओम, देख क्या रहे हो, कर दो इस का काम तमाम. इस से अच्छा मौका और कब मिलेगा.’’

अस्मिता को खतरे में देख कर हरिओम को पारा हाई हो गया. उस ने इधरउधर नजर दौड़ाई तो सामने एक केतली रखी नजर आई. उस ने केतली उठाई और फिर उसी केतली से सोनू के सिर पर लगातार कई वार कर डाले. पीछे से सिर पर केतली के बार होते ही सोनू अपना सिर पकड़े नीचे गिर गया. तभी फर्श पर पड़ी अस्मिता भी उठ गई. वह फुरती से घर में रखी लाठी और डंडा ले आई. उस के बाद दोनों ने लाठी और डंडों से पीटपीट कर सोनू को बुरी तरह से अधमरा कर दिया. जब सोनू बेहोशी की हालत में पहुंच गया तो हरिओम ने घर में रखे बिजली के तार से सोनू का गला भी घोंट दिया. बाद में उस की मौत को कंफर्म करने के लिए हरिओम ने सोनू के शरीर पर बिजली का करेंट भी लगाया, ताकि उस की मौत को बिजली का करंट लगने से मौत दिखाया जा सके.

सोनू की हत्या करने के बाद अस्मिता ने अपने कपड़े चेंज किए और फिर हरिओम की जिद के आगे उस के साथ संबंध भी बनाए. इस के बाद हरिओम वहां से चला गया.सोनू को मौत की नींद सुलाने के बाद अस्मिता और हरिओम पूरी तरह से बेफिक्र हो गए थे. उस की हत्या का शक किसी भी तरह से उन के ऊपर नही आने वाला. अगले दिल जैसे ही भोर हुआ, अस्मिता ने रोनाचिल्लाना शुरू कर दिया. उस ने रोते हुए ही लोगों को बताया कि सोनू को बिजली का करंट लग गया, जिस के कारण उस की मौत हो गई. सोनू की मौत की खबर पाकर उस के पापा टुनटुन झा मौके पर पहुंचे.

उन्होंने कमरे के अंदर जा कर देखा तो उन्हें तो मामला कुछ और ही नजर आया. सोनू का बिस्तर भी खून से सना था, साथ ही उस के बिस्तर के पास दीवार पर खून के छींटे भी लगे हुए थे. उस कमरे के फर्श पर भी खून लगा हुआ था. उस की आंखें भी सूजी हुई थीं. यह सब देख कर टुनटुन झा का माथा ठनक गया. उन्हें लगा कि उस की मौत बिजली के करंट से नहीं, बल्कि बुरी तरह से मारपीट कर उस की हत्या की गई है. देखते ही देखते यह चर्चा मोहल्ले में फैल गई. लोग तरहतरह की बातें बनाने लगे थे. तभी गांव वालों ने सोनू की हत्या की सूचना मुफ्फसिल थाने में दी.

इस घटना की जानकारी मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची. घटना स्थल पर पहुंचते ही एसएचओ अजीत प्रसाद सिंह ने मामले की जांचपड़ताल की तो पता चला कि मृतक सोनू झा की मौत बिजली के करंट से नहीं, बल्कि उस को बुरी तरह से पीटपीट कर मारा गया था. घटनास्थल से पुलिस ने एक 10 मीटर लंबा बिजली का तार भी बरामद किया था, जिस से बिजली का करंट लगाने की आशंका थी. मृतक के सिर पर गहरे चोट के निशान थे.

ससुर ने बताई बहू की सच्चाई

इस जानकारी के बाद एएसपी संजय कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. जिन्होंने घटनास्थल पर पहुंचते ही मृतक के फेमिली वालों से पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में मृतक के पापा टुनटुन झा ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि सोनू देर रात घर पहुंचा था. लेकिन अगली सुबह वह मृत हालत में घर में पाया गया. टुनटुन झा ने बताया कि सोनू के घर पर हरिओम का आना जाना था. कोई लगभग 6 महीने पहले सोनू ने हरिओम को अपनी पत्नी अस्मिता के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया था. तब से सोनू और उस की पत्नी के बीच मनमुटाव रहने लगा था, लेकिन हरिओम अभी भी उस के बेटे को ट्यूशन पढ़ाने आता था. हरिओम और अस्मिता के बीच लव अफेयर के कारण ही उस की हत्या की गई थी.

इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर सोनू की लाश को पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेज दिया. इस मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया था.   हालांकि अस्मिता और हरिओम ने इस घटना को दुर्घटना का रूप देने की काफी कोशिश की थी, लेकिन पुलिस के सामने उन की एक भी चाल सफल न हो सकी. सोनू के फेमिली वालों द्वारा दोनों पर शक जाहिर होते ही पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स भी निकलवाई, जिस से जानकारी मिली कि हर रोज अस्मिता और हरिओम के बीच काफी लंबी बातचीत होती थी. फिर सोनू के कमरे से मिले हत्या के साक्ष्य उस की हत्या करने की पूरी गबाही दे रहे थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी साफ हो गया था कि अस्मिता और हरिओम ने हत्या करने से पहले उसे बुरी तरह से मारापीटा था. उस के शरीर पर चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. उस की एक आंख के पास चोट का गहरा निशान और उस का एक हाथ भी टूटा हुआ पाया गया था. उस का दम घोंटते समय उस के मुंह और नाक से भी काफी खून निकला था.   अस्मिता को गिरफ्तार कर पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था. पुलिस पूछताछ में अस्मिता ने पति की हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

ट्यूटर से ऐसे मिले नैना

 

बिहार के समस्तीपुर जिले के थाना मुफ्फसिल के अंतर्गत एक गांव है लगुनियां रघुकंठ. इसी गांव में रहता था, टुनटुन झा का परिवार. टूनटून झा के 4 बेटे थे. साल 2017 में सोनू की शादी अस्मिता के साथ हुई थी. सोनू की शादी के बाद से दोनों भाई अलगअलग रहने लगे थे. सोनू झा ने अपना एक आटोरिक्शा ले रखा था, जिसे चला कर वह अपने परिवार की गुजरबसर करता था. सोनू में शराब पीने की लत थी, जिस के कारण आए दिन अस्मिता और उस के बीच लड़ाईझगड़ा होता रहता था.

शादी के बाद अस्मिता 2 बच्चों की मां बनी, जिस में उस की बेटी बड़ी और बेटा छोटा था. दोनों ही बच्चे स्कूल जाते थे. बच्चे होने के बाद अस्मिता को उम्मीद थी कि सोनू शराब पीना छोड़ देगा, लेकिन उस ने शराब पीनी नहीं छोड़ी, जिस के कारण पति और पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया. उसी विवाद के चलते अस्मिता कई बार सोनू से रूठ कर अपने मायके चली जाती थी. इन दोनों के रिश्तों को बनाए रखने के लिए कई बार सोनू की ससुराल में पंचायत भी हुई. कई बार पंचायत के फैसले पर अस्मिता अपनी ससुराल भी आई, लेकिन उस के बाद भी दोनों के बीच लड़ाईझगड़ा शांत नहीं हुआ.

उसी दौरान अस्मिता की मुलाकात कुंवारे हरिओम से हुई. हरिओम उस के दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर पर ही आता था. जिस वक्त हरिओम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था, उस वक्त घर पर उस की फेमिली का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं होता था. मौके का फायदा उठाते हुए अस्मिता ने हरिओम के साथ दोस्ती कर ली. दोस्ती के बाद दोनों के बीच मधुर संबंध बनते ही अबैध संबंध भी स्थापित हो गए थे. हरिओम और अस्मिता के बीच प्यार पनपा तो वह पति को कम चाहने लगी थी. अस्मिता झा को लगने लगा था कि हरिओम भी उसे बहुत ही चाहता है. अस्मिता ने उसी दिन फैसला लिया कि वह किसी भी तरह से हरिओम से अपने संबंध मजबूत करेगी.

हरिओम और अस्मिता को मिलनेजुलने में न तो कोई पाबंदी थी और न ही कोई रोकटोक. हरिओम के फेमिली वालों के साथसाथ गांव वाले भी जानते थे कि वह हर रोज सोनू के लड़के को ट्यूशन पढ़ाने के लिए उस के घर जाता है. इसी कारण कोई भी उन दोनों पर कोई शक नहीं करता था. दोनों के बीच प्यार की शुरुआत होते ही उन के बीच की दूरियां सिमटने लगी थीं. सोनू झा सुबह होते ही अपना आटोरिक्शा ले कर घर से निकल जाता. लेकिन घर आने का उस का कोई टाइम फिक्स नहीं था, जिस का लाभ उठाते ही अस्मिता हरिओम को फोन कर कभी भी बुला लेती थी.

बच्चों को बनाना चाहता था काबिल

गांव हो या शहर, यह प्यार करने की बीमारी सभी जगह पनप रही है. लेकिन उसे समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक छिपाया नहीं जा सकता. यही हरिओम और अस्मिता की लव स्टोरी में भी हुआ. हरिओम कुंवारा था, जबकि उस की पे्रमिका शादीशुदा. देखते ही देखते दोनों ही लोगों की नजरों में आ चुके थे. फिर जल्दी ही दोनों की प्रेम कहानी सोनू झा के पास भी जा पहुंची थी.

सोनू झा एक शराबी किस्म का युवक था. जैसे ही यह बात उसे पता लगी, उस का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उस ने घर पहुंचते ही अस्मिता को खरीखोटी सुनाते हुए उस के साथ मारपीट भी की. अगले दिन हरिओम बेटे को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर पहुंचा तो उसे भी काफी भलाबुरा कहा. साथ ही उस ने बेटे का ट्यूशन भी बंद कर दिया था. उस के बाद हरिओम का अस्मिता से मिलनाजुलना पूरी तरह से बंद हो गया था, जिस के बाद हरिओम और अस्मिता एक दूसरे के वियोग में तड़पने लगे.

ऐसे आगे बढ़ी लव स्टोरी

अस्मिता सोनू के व्यवहार से भलीभांति परिचित थी. शराब के नशे वह भले ही हैवान बन बैठता था. लेकिन जैसे ही उस का नशा उतरता, वह फिर से उसे प्यार जताने लगता था. सोनू ने हरिओम के अपने घर आने पर पावंदी लगा दी थी, लेकिन हरिओम अभी भी सोनू के बड़े भाई के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था. तब सोनू को लगा कि उस के बेटे की पढ़ाई खराब हो रही है. यही बात सोच कर एक दिन अस्मिता ने सोनू को समझाने की कोशिश की, ”देखो जी, गांव वाले हमारी खुशी देख कर जलने लगे हैं, इसीलिए वह मुझ पर मास्टर साहब को ले कर कीचड़ उछालने लगे हैं. जबकि यह तो मैं ही जानती हूं कि हरिओम और मेरे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है.

अगर हम ने बेटे का ट्यूशन हटाया तो वह पढ़ाई में बहुत कमजोर हो जाएगा. फिर हम तो कहीं के भी नही रहेंगे. मेरा तो आप को समझाने का काम था, बाकी आप की मरजी.’’

अस्मिता की बात सोनू के दिल में उतर गई. वह तो गांव वालों से पहले ही परेशान था, लेकिन उस ने बेटे के जन्म के बाद ही तय कर लिया था कि वह अपने बेटे को अपनी छाया से बहुत ही दूर रखेगा. वह दिनरात मेहनत कर के उसे उच्च शिक्षा दिलाने के बाद बड़ा आदमी बनाएगा. यही सोच कर उस ने फिर से हरिओम को राहुल को ट्यूशन पढ़ाने की इजाजत दे दी थी, जिस के बाद फिर से हरिओम और अस्मिता की लव स्टोरी चोरीछिपे आगे बढऩे लगी थी. हरिओम पहले की तरह फिर से सोनू के बेटे को उस के घर ट्यूशन पढ़ाने जाने लगा था, जिस के बाद फिर से अस्मिता और हरिओम के बीच अवैध संबधों का सिलसिला चालू हो गया.

हालांकि दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि दोनों के बीच यह पक रही खिचड़ी ज्यादा दिनों तक नहीं पक सकती. क्योंकि सोनू हर रोज देर रात शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर लौटता तो किसी भी बात पर अस्मिता से लडऩेझगडऩे लगता था. इस घटना से लगभग 6 महीने पहले एक दिन सोनू ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया, जिस के बाद सोनू ने अस्मिता को काफी मारापीटा भी. उस के बाद से सोनू ने अपने बेटे का ट्यूशन भी बंद कर दिया था, लेकिन घर की इज्जत की खातिर सोनू ने इस की कंपलेन थाने में नहीं की थी. इस छोटी सी भूल ने अस्मिता के हौसले बुलंद कर दिए थे. अस्मिता को लगा कि सोनू हरिओम से डरता है. इसी कारण उसने पुलिस से उन की शिकायत नहीं की.

यही कारण रहा कि हरिओम और अस्मिता के बीच फिर से मौजमस्ती का सिलसिला चालू हो गया, लेकिन यह बात जल्दी ही किसी तरह से सोनू के पास पहुंच गई. इस जानकारी के मिलते ही उसने फिर से पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी. सोनू के जुल्मों से तंग आ कर कर अस्मिता एक दिन अपने दोनों बच्चों को ले कर अपने मायके घटहो चली गई. फिर वह दोनों बच्चों को मायके में ही छोड़कर सोनू के साथ ससुराल आ गई.

घर पर बच्चों के न होने के कारण अस्मिता बिलकुल ही फ्री हो गई थी. वह हर रोज मौका पाते ही अपने प्रेमी हरिओम को अपने घर बुलाती और सारी रात उस के साथ मौजमस्ती करती थी. लेकिन सोनू झा के दिमाग में यह बात बैठ गई थी कि अस्मिता का हरिओम के साथ अभी भी चक्कर चल रहा है, इसलिए वह छोटीछोटी बातों को ले कर पत्नी से झगड़ता और बात बढऩे पर उस की पिटाई तक कर देता था.

एक गुनाह प्रेमिका की खातिर

एक दिन अस्मिता शायद घर के कामकाज में बिजी थी. उस का बेटा घर के आंगन में अकेला ही खेल रहा था. हालांकि अस्मिता ने हरिओम को घर में प्रवेश करते वक्त देख लिया था, लेकिन उस दिन पहली बार ऐसा हुआ कि अस्मिता हरिओम को देखते ही कमरे के अंदर चली गई थी. कमरे के अंदर से ही उस ने बेटे को आवाज लगाई थी, ”बेटा, मास्टर साहब आ गए. कमरे में जाकर ट्यूशन पढ़ लो.’’

थोड़ी देर में ही बेटा अपना बस्ता थामे बैठक में चला गया था. जहां पर बैठा हरिओम उस का इंतजार कर रहा था. बेटे के आते ही हरिओम ने उस की स्कूल की कौपी निकाल कर चैक की. उस दिन बेटे को काफी होमवर्क मिला था. हरिहोम ने सब से पहले उस का होमवर्क कराया, लेकिन उस वक्त भी उस का दिमाग अस्मिता में ही लगा हुआ था. डस दिन हरिओम को अस्मिता का व्यवहार कुछ बदला नजर आया तो उस के मन में उथलपुथल मचने लगी. एक रात ही राम में अस्मिता को क्या हो गया था, जो उस के घर आते ही कई बार बैठक में चक्कर लगाती थी, लेकिन आज वह एक बार भी उस के पास नहीं आई.

हरिओम अभी उस के बारे में सोच ही रहा था. तभी अस्मिता चाय ले कर बैठक में पहुंच गई. उस के आते ही सब से पहले हरिओम की नजर उस के चेहरे पर पड़ी. उस के चेहरे का एक हिस्सा सूझा हुआ दिख रहा था, जिस को अस्मिता बारबार ढंकने की कोशिश कर रही थी.

आंसुओं ने बयां की दास्तां

अस्मिता के चेहरे को देखते ही हरिओम को समझने में तनिक भी देर नही लगी कि जरूर अस्मिता के साथ कोई अनहोनी घट चुकी है, जिस के कारण वह अपने चेहरे को बारबार छिपाने की कोशिश कर रही है. इस से पहले कि अस्मिता वहां से जा पाती, हरिओम ने उस से पूछ ही लिया.’’ भाभीजी, यह आप के चेहरे पर क्या हुआ? कल तक तो आप ठीकठाक थीं. फिर यह अचानक क्या हुआ?’’

हरिओम के इस प्रश्न ने जैसे अस्मिता के जख्म को और भी कुरेद डाला था. देखते ही देखते अस्मिता की आंखें आंसुओं से सराबोर हो चुकी थीं. फिर भी उस ने जैसेतैसे कर अपने को संभाला और अपनी चुन्नी के पल्लू से अपने आंसुओं को पोंछने की कोशिश करते हुए बोली, ”नहींनहीं, कुछ भी तो नहीं. रात अचानक मेरा पैर फिसल गया और मेरे चेहरे पर चोट लग गई.’’

अस्मिता ने हरिओम के सामने अपने दर्द को छिपाने की कोशिश की, लेकिन हरिओम का दिल उस की इस बात को मानने को तनिक भी तैयार न था. उस के बाद हरिओम उस की सच्चाई जानने के लिए उस के पीछे ही पड़ गया, ”भाभीजी, अगर आप चलतेचलते ही गिरी हैं तो आप को कोई और भी चोट लगी होगी. भाभीजी, आप जरूर सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही हैं.’’

जब हरिओम अस्मिता की सच्चाई जानने के लिए हाथ धो कर उस के पीछे पड़ गया तो उस ने अपनी चुप्पी तोड़ दी. उस ने कहा, ”क्या बताऊं हरिओम,मेरी तो किस्मत ही फूट गई. मेरा इस शराबी इंसान ने जीना हराम कर रखा है. हर रोज शाम को शराब पी कर आता है, फिर रात में वह मेरे साथ गालीगलौज करते हुए मारपीट भी करता है. मैं उसे कहां तक झेलूं.

”हर रोज की तरह कल शाम भी मेरा पति सोनू दारू पी कर आया था. उस के बाद उस ने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी थी, जिस के कारण मेरे चेहरे पर भी चोट लग गई थी.’’ अपना दर्द सुनातेसुनाते अस्मिता फफकफफक कर रोने लगी थी. हरिओम अस्मिता को दिल से प्यार करने लगा था. जब अस्मिता ने उसे अपनी दुख भरी कहानी सुनाई तो उस के तनबदन में आग लग गई, लेकिन यह मामला मियांबीवी का था. इस में हरिओम कर भी क्या सकता था. उस के बाद भी उस ने किसी तरह से अस्मिता को समझा बुझा कर शांत कर दिया था, लेकिन उस दिन के बाद से उस के दिल में सोनू के प्रति नफरत पैदा हो गई थी.

उसी दौरान हर दिन की तरह हरिओम ट्यूशन पढ़ाने सोनू के घर पहुंचा. उस दिन सोनू के बेटे की तबियत कुछ ठीक नहीं थी. अस्मिता झा ने हरिओम के आने से पहले ही उसे दवा दे कर सुला दिया था. जैसे ही हरिओम ट्यूशन पढ़ाने के लिए अस्मिता के घर पहुंचा, वह उसे देखते ही फूटफूट कर रोने लगी, ”हरिओम, अब पानी सिर के उपर से गुजरने लगा है. सोनू ने रात भी बिना वजह मेरे साथ मारपीट की. अगर तुम मुझे सच्चा प्यार करते हो तो तुम ही मुझे किसी तरह से इस जंजाल से निकालो. कुछ ऐसा करो कि मैं उस की रोजरोज की मार से निजात पा सकूं. वरना मुझे एक दिन जहर खा कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने पर मजबूर होना पड़ेगा.’’

”नहींनहीं, भाभी यह आप क्या कह रही हो. ऐसा आप कभी सपने में भी नहीं सोचना. आप ने ऐसा कर लिया तो फिर मेरा क्या होगा. मैं आप के बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता. आप तो मुझे केवल आदेश करो. यह बंदा आप के लिए क्या कर सकता है. आप के लिए मेरी जान भी हाजिर है.’’ कहतेकहते हरिओम ने अस्मिता को अपने गले लगा लिया.

”हरिओम, तुम सही कह रहे हो. तुम्हारे बिना मैं भी एक पल के लिए जिंदा नहीं रह सकती. तुम्हारे साथ मुझे जो जिंदगी का सच्चा सुख प्राप्त होता है, वह सोनू न तो आज तक दे पाया और न ही दे सकता है. अब तो यह दिल भी केवल तुम्हारे लिए ही धड़कता है.’’ कहते हुए अस्मिता की आंखें आंसुओं से सराबोर हो गईं.

इस के बाद दोनों ने तय कर लिया कि सोनू को ठिकाने लगाए बगैर अब सुकून से नहीं जिया जा सकता. जल्द ही अब कुछ करना पड़ेगा. इस से पहले कि वह योजना बना कर उसे ठिकाने लगाते 25 जुलाई, 2025 को ऐसे हालात बन गए और मौका भी मिल गया, जिस से उन्होंने सोनू की हत्या कर दी. फिर उसे बिजली के करंट से दुर्घटना दिखाने की कोशिश की, लेकिन कमरे में मिले सबूतों और सोनू झा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन्हें कानून के शिकंजे में फांस लिया.

इस घटना में उस के प्रेमी हरिओम को भी काफी चोटें आई थीं. बाद में उस ने किसी अस्पताल में जा कर अपना इलाज कराया था. पुलिस ने अस्मिता झा और हरिओम की निशानदेही पर सोनू झा की हत्या में प्रयुक्त केतली और लाठीडंडे भी बरामद कर लिए थे. केस के खुलते ही पुलिस ने अस्मिता झा और हरिओम दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. Bihar News

 

 

क्या प्यार में अंधी सिपाही पत्नी ने फैमिली के 5 लोगों का किया कत्ल

प्रेमी पंकज से विवाह करने के बाद नीतू ठाकुर खुश थी, लेकिन बिहार पुलिस में सिपाही की नौकरी मिल जाने के बाद वह घमंडी हो गई. इसी दौरान उस का सिपाही सूरज ठाकुर के साथ चक्कर चल गया. वासना की आग में वह इतनी अंधी हो गई कि खूनी खेल के नतीजे में 5 मौतों का मंजर सामने आया…

बिहार पुलिस की कांस्टेबल नीतू ठाकुर रात होने पर औफिस से अपने क्वार्टर पर आई थी. उस के 2 बच्चे, सास और पति काफी समय से उस का इंतजार कर रहे थे. छोटी बेटी श्रेया तो सो गई थी. सास आशा कुंवर रसोई में खाना पका रही थीं, पति पंकज कुमार सिंह साढ़े 4 साल के बेटे शिवांश के साथ बैडरूम में था. बाहर खिड़की से कमरे में बाइक की जैसे ही तेज रोशनी आई, शिवांश बोल उठा, ”मम्मी आ गइल…आ गइल.’’

भागता हुआ वह घर के मेन दरवाजे पर जा पहुंचा. मम्मी को देख कर उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया. नीतू उसे गोद में उठाते हुए बोली, ”शिब्बू, खाना खइल!’’

ना मम्मी!’’ प्यार से शिकायती लहजे में शिवांश बोला.

ना खइल अभी तक, दादी ने कुछ देले बिया… आ पापा कहां बाडऩ हो बेटा!’’ नीतू गोद में लिए बेटे को पुचकारने लगी.

का हो कनिया, आज फिर देर से अइलू? देख तो श्रेया दूध पीए खातिर तोहरा के इंतजार करतेकरते सुत गइल बिया!’’

काहे, दूध नइखे देवलो होकरा के!’’ नीतू बोली.

कहत रही, महतारी से दूध पीयब!’’ 

सास रसोई में रोटी बेलती हुई बोली.

पंकज का करत रहुवें? हम औफिसो में ड्यूटी करीं और घर संभालीं…आ उहां के घर में खाली पलंग तोडि़हें…कोई काम करत नइखे तो कम से कम बचवन के तो संभाले के चाही!’’

उल्टा! तू रोजरोज देर से घर आवतारु, आ हमरे के ताना मारतारु…आज केकरा साथ अइलू ह! आफिस में तहार ड्यूटी तो सांझे के खत्म हो जा ला!’’ नीतू का पति पंकज नाराजगी के साथ बोला.

तू सरकारी नौकरी करब तबे न पता चली कि केतना काम करे पड़े ला…सीनियर के बात माने पड़े ला… ओकरा के बात नइखे मानब, तब हमार नौकरिए खतरा में पड़ जाई…’’

हमरा के मूरख बनवा तारु? हम नइखे जानत तहरा के काम और आफिस में ड्यूटी!’’ पंकज बोला.

का जान तर हो! जरा हमहूं तो सुनीं? …पुलिस के नौकरी बा कोने प्राइवेट नइखे! पचहत्तर गो काम करे पड़ेला…’’ नीतू बिफरती हुई बोली.

हांहां पचहत्तर गो काम में घूमेफिरे के भी बा… दोस्तयार संगे!’’ पंकज ने ताना मारा.

नीतू ठाकुर (30) बिहार में भागलपुर एसएसपी औफिस के आरटीआई सेक्शन में कांस्टेबल थी. वह रहने वाली भोजपुर जिलांतर्गत बक्सर की थी. उस ने  पुलिस में नौकरी लगने के बाद सवर्ण जाति के युवक पंकज कुमार सिंह (32 वर्ष) से प्रेम विवाह किया था. हालांकि दोनों का प्रेम संबंध काफी पहले से चल रहा था. नीतू की पहली जौइनिंग 2015 में सिपाही के तौर पर नवगछिया में हुई थी. उस के 7 साल बाद 2022 में उस की पोस्टिंग भागलपुर के एसएसपी औफिस स्थित आरटीआई सेक्शन में हो गई थी. इस तैनाती के बाद नीतू पूरे परिवार के साथ भागलपुर पुलिस लाइन के क्वार्टर नंबर सीबी-38 में आ गई थी. 

पंकज पहले अपने पैतृक शहर बक्सर के एक माल में काम करता था. वह भी पत्नी के साथ भागलपुर आ गया था और प्राइवेट जौब करने लगा था. साथ में नीतू की 65 वर्षीया सास और 2 बच्चे भी रहते थे. 

कैसे आगे बढ़ी नीतू की प्रेम कहानी

पंकज ने जब नीतू से शादी करने का फैसला लिया था, तब उसे परिवार के काफी विरोध का सामना करना पड़ा था. उन की प्रेम कहानी भी कुछ कम अनोखी नहीं थी. वे पहली बार बक्सर के एक माल में मिले थे. नीतू की मां शांति देवी जनवरी 2003 में अपने पति के निधन के बाद 4 बेटियों और एक बेटे को ले कर सारण के हरपुर जान गांव से बक्सर आ गई थीं. उन का बक्सर के नई बाजार स्थित तातो मोहल्ले में मायका था. मायके में पिता गणेश ठाकुर और भाई नागेंद्र ठाकुर के परिवार के साथ आ कर अपने पांचों बच्चों की परवरिश के लिए रहने लगी थी. इस तरह से नीतू का बक्सर ननिहाल है. उस की 2 बहनों की शादी हो चुकी थी, जबकि एक कुंवारी थी और भाई सेना में नौकरी करता था.

नीतू ने बक्सर में ही ग्रैजुएशन किया. पंकज कुमार सिंह भोजपुर जिले के मझियांव गांव का रहने वाला था. उस ने भी बक्सर कालेज से पढ़ाई की थी और बक्सर के एक माल में काम करता था. वहीं घरेलू खर्च में सहयोग देने के लिए नीतू भी काम करने आई थी, जहां उस की मुलाकात पंकज से हुई. जल्द ही वे एकदूसरे से प्यार करने लगे. जबकि वे यह जानते थे कि उन की जातियां अलगअलग हैं. पंकज नीतू से प्यार जरूर करता था और शादी भी करना चाहता था, लेकिन उसे आशंका थी कि उस के घर वाले नीतू को पसंद नहीं करेंगे. इस का मुख्य कारण नीतू का पिछड़ी जाति से होना था, जबकि पंकज सवर्ण था.

नीतू का ध्यान प्रेम संबंध को ले कर जितना था, उस से कहीं अधिक वह अपने करिअर को ले कर गंभीर थी. वह बिहार सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होती रहती थी. पढ़ाई में अव्वल थी. दिखने में भी सुंदर और कदकाठी भी मजबूत थी. बातचीत का लहजा एकदम से स्पष्ट और ठोस था. बातें बनाना उसे नहीं आता था, लेकिन हर बात का जवाब वह तर्क के साथ देती थी. यह कहना गलत नहीं होगा कि वह एक समझदार और सुलझी हुई युवती थी और किसी को भी अपनी पहली मुलाकात में मोह लेती थी. यह बात पंकज को पसंद थी. पंकज भी कुछ इसी मिजाज का था. घर से सुखीसंपन्न था. खेतीबाड़ी थी. उस ने ठान रखा था कि सरकारी नौकरी मिले न मिले, वह एक दिन अपने पैरों पर खड़ा हो कर कुछ अलग काम करेगा. अपनी पहचान बनाएगा. 

उस के दिमाग में नई योजनाओं का आइडिया चलता रहता था. उस की यह बात नीतू को पसंद थी और उसे अपना दिल दे बैठी थी.

सिपाही बन कर नीतू क्यों हो गई घमंडी

एक दिन नीतू के लिए खुशी की वह घड़ी आ गई, जब उस ने बिहार पुलिस की प्रतियोगिता परीक्षा पास कर ली और कांस्टेबल की नौकरी मिल गई. यह जान कर पंकज भी बहुत खुश हुआ और उस ने ठान लिया कि चाहे जो अड़चन आए, वह उस से शादी जरूर करेगा. पंकज की जिंदगी में एक तरफ खुशी आई थी तो दूसरी तरफ वह तनाव से भी घिर गया था. पत्नी के ड्ïयूटी जाने पर घर संभालने की सारी जिम्मेदारी उस पर आ गई थी. न चाहते हुए उसे वह सब काम करने पड़े जो घरेलू महिलाएं करती हैं. यहां तक कि बच्चों की देखभाल में उन्हें नहलानाधुलाना, उन के कपड़ेलत्ते धोना, मलमूत्र साफ करना आदि जैसे काम भी करने पड़े. 

वह नीतू के लिए महज अपने कामधंधे के खयालों में डूबा रहने वाला एक बेरोजगार पति बन कर रह गया था. हालांकि उस के साथ उस की 65 वर्षीय मां आशा कुंवर भी रहती थीं. जैसेजैसे नीतू पर नौकरी का रंग चढऩे लगा, वैसेवैसे वह खुद को एक रुतबे वाली समझने लगी और पंकज के प्रति उस के व्यवहार में भी रूखापन आने लगा. छोटीछोटी बातों पर पंकज के काम में मीनमेख निकालने लगी थी. कई बार तो वह घर के काम में कोई गलती हो जाने पर पंकज से काफी उलझ जाती थी और बेरोजगारी का ताना मारने लगती थी.

पंकज उस के बदले हुए बरताव को समझ नहीं पा रहा था कि वह अपना बचाव कैसे करे? वह भीतर ही भीतर घुटने लगा था. उस की भावनाएं आहत होने लगी थीं. पुलिस असोसिएशन चुनाव के बाद जब से नीतू डेलिगेट्स बनी, तब से उस के व्यवहार में काफी फर्क आ गया था. उस के प्रति प्रेम में कमी आने लगी थी. इसी बीच कोरोना का दौर भी आ गया. लौकडाउन में नीतू की ड्यूटी सख्त हो गई. पंकज पर भी जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया. इस दौरान नीतू पंकज पर और अधिक हुकुम जताने लगी. उस के प्रति जरा भी प्यार के बोल नहीं निकलते थे. वह उसे आदेश देने लगी, जिस से वह चिड़चिड़ा हो गया. 

वह भीतरी पीड़ा से आहत था. जब भी समय मिलता, वह अपने दोनों बच्चों संग समय बिता कर या फिर खास दोस्त को दिल की बात बता कर मन हलका कर लिया करता था. नीतू के साथ खराब होते रिश्तों के कारण बच्चों पर भी असर पडऩे लगा था. तब नीतू का तबादला भागलपुर हो गया था. शिवांश की पढ़ाई को ले कर वह चिंतित रहता था. वहीं बेटे के लिए पंकज ने घर पर महिला ट्यूटर को लगा दिया था. बाद में ट्यूशन बंद करने के बाद बेटे का टेक्नो मिशन में एडमिशन करवा दिया था.

भागलपुर के पुलिस लाइन क्वार्टर में रहते पंकज और भी परेशान हो गया था. नीतू के बदले मनमिजाज और घरपरिवार के प्रति लापरवाही को ले कर पंकज ने एक दोस्त अवध को बताया था कि वह किस हद तक बेपरवाह हो गई है. घर आते ही एसी औन कर देती है और बैड पर लेट कर मोबाइल देखने लगती है. मानो उसे किसी से कोई लेनादेना ही न हो. वह बात करते हुए भाव खाती और बातबात पर उसे दुत्कार देती थी. वह उसे कमाने के लिए शहर जाने को कहती और उस की बेरोजगारी पर तंज कसती थी. वह उसे क्वार्टर से जाने के लिए भी दबाव देने लगी थी.

इसी बीच उसे नीतू के चालचलन को ले कर भी संदेह हो गया था. कारण, नीतू का पुलिस विभाग में ही काम करने वाले सूरज ठाकुर से मेलजोल काफी बढ़ गया था. उस के साथ काम करने वाला सूरज बक्सर का ही रहने वाला था. ड्यूटी खत्म होने के बाद नीतू सूरज के साथ समय गुजारने के लिए शहर में घूमने निकल जाती थी. दोनों क्लब, पार्क आदि में घंटों साथ उठतेबैठते थे. देर से क्वार्टर पर आना उस की नियमित आदत बन गई थी. वह अकसर जब सूरज के साथ बाइक पर आती थी, तब आसपास के लोग उसे गलत निगाहों से देखते थे. कई बार पड़ोसियों ने पंकज को टोका भी था और पत्नी को गैरमर्द के साथ अधिक समय तक रहने से मना करने के लिए भी कहा था.

नवगछिया में रहते हुए पंकज नीतू के रूखेपन से आहत था, जबकि भागलपुर में उस के सामने एक नई समस्या उस की बदचलनी की आ गई थी. इस की जानकारी बहुतों को थी. भोजपुर जिले के पीरो का रहने वाला उस का दोस्त अवध भी सब कुछ जानता था. उस ने जब पंकज से कोई कदम उठाने की बात कही. तब वह मायूस हो कर अपनी भाषा में बोला, ”का बोलीं अवध… बहुते प्रयास करनी कि नीतू पहिले जेंखां हो जास, लेकिन कुछो सुने के तैयारे नइखे… अब त हमरा मारे के भी उठ जा तारी… हमरे पर हाथ देत बिया… का करी दोस्त! हम नीतू के खातिर आपन गांवजवार, रिश्तानाता सभे छोड़ देहलीं, इन का के कुछो असरे ना होता…’’

जा एक बार फिर ओकरा के प्यार से समझाव… बालबच्चे के भविष्य की खातिर बोल… शायद मन बदल जाय!!’’ अवध ने सुझाव दिया.

तू कहा तार त, जा तानी आज ड्यूटी खतम होखे समय. सूरजो से बात करब, ओकरा के समझाइब.’’ पंकज बोला.

हां, यही ठीक रही.’’

और घर में मिलीं 5 लाशें

तारीख 12 अगस्त, 2024 की सोमवार का दिन था. पंकज अपने दोस्त के कहने पर शाम के वक्त नीतू के औफिस गया. दोनों वहां नहीं मिले. पता चला कि उन दोनों को साथसाथ क्लब में जाते देखा गया है. पंकज भी वहां जा पहुंचा और सूरज को नीतू के साथ हंसहंस कर बातें करते देखा. उस के इस रोमांस को देख कर पंकज और भी चिढ़ गया. उस ने नीतू को सूरज के साथ रंगेहाथों पकड़ा था. उन्हें देखते ही पंकज आगबबूला हो गया. सूरज को समझाना तो दूर वह नीतू संग ही उलझ गया. जबरदस्त बहस होने लगी. नीतू उसे गालियां देने लगी थी. उसे बेरोजगार और नामर्द तक कह डाला था. दोनों वहीं लडऩेझगडऩे लगे. उन का झगड़ा सड़क पर आ गया.

दोनों के बीच धक्कामुक्की की नौबत आ गई. पंकज नीतू को घर चलने के लिए घसीटने लगा, इस पर नीतू ने उस पर थप्पड़ जड़ दिए थे. अचानक नीतू के इस हमले से पंकज लडख़ड़ा कर गिर पड़ा था. नीतू उस पर पैर चलाने लगी थी. वहां भीड़ जुट गई थी, जबकि मौके की नजाकत को देख कर सूरज वहां से चला गया था. थोड़ी देर बाद नीतू और पंकज अपनेअपने रास्ते चले गए थे. अगले रोज 13 अगस्त, 2024 की सुबह करीब 9 बजे नीतू के घर दूध पहुंचाने वाला दूधिया आया था. काफी देर तक आवाज लगाने के बाद भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला, तब तक वहां आसपास के क्वार्टरों में रहने वाले पुलिसकर्मी और उस के परिवार के लोग पहुंच गए. जैसे ही उन में से एक पड़ोसी कादिर ने दरवाजे पर पैर मारा तो वह टूट गया. 

क्वार्टर के पहले कमरे में जहां नीतू की सास आशा कुंवर का गला रेता हुआ शव पड़ा था. वहीं, उस कमरे के भीतर की ओर जाने वाले बरामदे की छत से लगी लकड़ी में नायलौन की रस्सी के फंदे से पंकज का शव लटका हुआ था. बरामदे के साथ के एक दूसरे कमरे में नीतू और उस के दोनों बच्चों के भी गला रेते हुए शव पड़े थे. घटना की जानकारी मिलने पर भागलपुर (पूर्वी क्षेत्र) के डीआईजी विवेकानंद, एसएसपी आनंद कुमार, एसपी (सिटी) राज, डीएसपी (सिटी) अजय कुमार चौधरी, डीएसपी (लाइन) संजीव कुमार सहित कई पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए. 

घटनास्थल पर पुलिस को महिला कांस्टेबल नीतू ठाकुर (30 वर्ष), उस के 2 बच्चे यानी बेटा शिवांश उर्फ शिब्बू (साढ़े 4 वर्ष) और बेटी श्रेया (साढ़े 3 वर्ष) सहित सास आशा कुंवर (65 वर्ष) का गला रेता हुआ मिला. जबकि, नीतू के पति पंकज कुमार सिंह (32 वर्ष) का शव क्वार्टर के कमरे के बाहर फंदे से लटका हुआ मिला था. पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिस में पंकज ने इस बात का उल्लेख किया था कि उस की पत्नी नीतू ने पहले बच्चों और उस की मां आशा कुंवर की गला रेत कर हत्या कर दी थी. इसलिए नीतू की हत्या कर वह खुद फांसी लगा कर खुदकुशी कर रहा है.

पुलिस को घटनास्थल से घटना में प्रयुक्त चाकू और खून से सनी ईंट भी मिली. इस से यह स्पष्ट हो गया था कि नीतू की सास और उस के दोनों बच्चों का गला रेता गया होगा. जबकि नीतू की गला रेतने के बाद ईंट से कूच कर हत्या किए जाने के सबूत मिले. पुलिस इस बात की जांच में जुट गई थी सुसाइड नोट के मुताबिक पहले नीतू ने बच्चों और अपनी सास की हत्या की या फिर सभी की हत्या पंकज ने ही कर के खुदकुशी कर ली. या फिर घर में घुसे किसी अन्य व्यक्ति ने घटना को अंजाम दिया और घर के पीछे आंगन से हो कर वहां से फरार हो गया. यानी कि 4 हत्याएं और एक आत्महत्या का मामला काफी गंभीर था.

सिपाही सूरज ठाकुर के प्यार से परिवार में क्यों घुला जहर

बरामद सुसाइड नोट में पंकज ने क्राइम शाखा में कार्यरत कांस्टेबल सूरज ठाकुर को इस के लिए जिम्मेदार ठहराया था. उस ने पत्नी नीतू का अवैध संबंध होने का जिक्र भी किया था. इस कारण उस पर ही वारदात का संदेह हो गया था. उसी रोज घटना की सूचना में नीतू के मामा नागेंद्र ठाकुर को सूचना दे दी गई. उन्होंने इशाकचक थाने में केस दर्ज करवा दिया. उन्होंने दर्ज शिकायत में पंकज कुमार सिंह को ही सब का हत्यारा बताया. कांस्टेबल सूरज ठाकुर को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया. पुलिस इस हत्याकांड की जांच में जुट गई. 

पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करते हुए 14 अगस्त, 2024 को आरोपी सूरज ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया. उस के बारे में पता चला कि वह उस दिन दोपहर से ड्यूटी से गायब था. किशनगंज जिले के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में भातढाला का रहने वाला आरोपी सिपाही सूरज ठाकुर ने बिना किसी झिझक के नीतू से अपने प्रेमसंबंध कुबूल कर लिए. उस से शारीरिक संबंध की बात स्वीकार कर ली, लेकिन इस बात से इनकार किया कि इस सामूहिक हत्याकांड में उस का कोई हाथ है. सूरज के अनुसार नीतू से उस की जानपहचान भागलपुर में ही तब हुई थी, जब वह नवगछिया से ट्रांसफर हो कर एसएसपी कार्यालय के आरटीआई विभाग में आई थी. सूरज भी उसी कार्यालय के डीसीबी शाखा में तैनात था. दोनों शाखाएं एक ही कमरे में थीं. इस कारण उन की जानपहचान जल्द हो गई. उन के बीच एक संयोग और था कि दोनों एक ही बिरादरी के थे. इस कारण वे जल्द ही एकदूसरे के दोस्त बन गए थे.

सूरज सरकारी क्वार्टर में रहने के बजाय भागलपुर के सुरखीलाल मोहल्ले में किराए पर अकेले रहता था. सितंबर 2023 में सूरज कई दिनों से औफिस नहीं आया था. उसे डेंगू हो गया था. यह जान कर नीतू चिंतित हो गई थी. उन्हीं दिनों वह सूरज के कमरे पर गई. वहां उस की हालत देख कर और भी चिंतित हो गई. उस ने वहां जा कर कुछ घरेलू कामकाज निपटाए, दवाइयां दीं. इस आत्मीयता को पा कर सूरज के मन को काफी संतोष मिला. नीतू का सूरज के घर आनेजाने का सिलसिला कई दिनों तक बना रहा. वह औफिस से छुट्टी होने के बाद सूरज के पास चली जाती थी. सूरज भी उस की तीमारदारी से स्वस्थ होने लगा था. 

इस बीच इधरउधर की बातें कर एकदूसरे का मन बहला लिया करते थे. बातों ही बातों में एक दिन सूरज ने टोक दिया, ”यदि तुम पहले मिली होती तो मैं तुम से शादी कर लेता.’’  इस का जवाब नीतू ने हंसते हुए दिया था, ”अभी भी मैं जवान हूं, कहो तो पंकज को तलाक दे दूं?’’  उस के बाद दोनों हंसने लगे. सूरज बोला, ”और पंकज क्या करेगा?’’

कुछ भी करे, मुझे उस से क्या? कोई अच्छी नौकरी तो कर नहीं रहा.’’ नीतू तुनकती हुई बोली.

सूरज ने उस का हाथ थाम लिया था. धीरे से दबाता हुआ बोला, ”आई लव यू नीतू!’’

सेम टू’’ नीतू शरमाती हुई बोली.

कौन था 4 हत्याओं का जिम्मेवार

उस रोज नीतू और सूरज ने अपनेअपने दिल की बात कह डाली थी. बातों ही बातों में सूरज ने कहा था कि वह तो उसी की बिरादरी का है, चाहे तो वह उस से शादी कर सकता है. यहां तक कि उस ने नीतू और पंकज के बच्चों को अपनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी. उस रोज एक तरह से दोनों ने विवाह करने की शपथ ले ली थी. मई 2024 में आम चुनाव होने के दरम्यान नीतू और सूरज को साथ रहने के कई मौके मिले. इसी बीच वे कामाख्या मंदिर भी घूमने गए और मौका मिलते ही दोनों ने शारीरिक संबंध भी बना लिए.

इसी साल दोनों घूमने के लिए जुलाई में दार्जिलिंग गए थे. पति पंकज से नीतू ने झूठ बोला था कि उसे वहां विशेष प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया है. वहां भी उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए. वारदात के दिन 12 अगस्त को नीतू ने शाम को 6 बजे सूरज को काल कर बताया कि वह पूजा करने मंदिर जा रही है. वहां से लौट कर दोबारा काल करेगी. फिर रात के करीब 8 बजे नीतू का सूरज को काल आया, लेकिन व्यस्तता की वजह से काल रिसीव नहीं कर पाया. अगले रोज जब सूरज औफिस पहुंचा, तब उसे नीतू के परिवार समेत आकस्मिक मौत की खबर मिली. वह भागाभागा नीतू के क्वार्टर पर गया. वहां बहुत भीड़ लगी थी. उस के पहुंचते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया.

लव क्राइम की इस लोमहर्षक वारदात का एकमात्र आरोपी कांस्टेबल सूरज ठाकुर ही था, जिस के खिलाफ कथा लिखे जाने तक इशाकचक एसएचओ उत्तम कुमार की जांच जारी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह संशय बना हुआ था कि किस की मौत कब हुई और किस ने किसे मारा? रेंज डीआइजी विवेकानंद के निर्देश पर एसपी (सिटी) मिस्टर राज के नेतृत्व में गठित एसआईटी इस दिशा में तेजी से काम कर रही थी. एसएसपी आनंद कुमार स्वयं मामले की मौनिटरिंग कर रहे थे. फोरैंसिक जांच टीम ने घटनास्थल पर मिले खून लगे चाकू, तौलिया के अलावा क्वार्टर के दोनों कमरों के बैड से भी फिंगर प्रिंट के नमूने ले लिए थे.

कथा लिखने तक पुलिस नीतू के प्रेमी कांस्टेबल सूरज से पूछताछ कर रही थी. बहरहाल, नीतू के घमंड और अवैध संबंधों से एक हंसताखेलता परिवार खत्म हो गया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित