Medicine Scam. दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में 650 से 700 करोड़ रुपए का घोटाला उजागर होने पर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है. फरजी दस्तावेजों, नियमों की अनदेखी और टेंडरों में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर के सरकारी खजाने को चूना लगाया गया. स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के नाम पर किए गए इस महाघोटाले ने न सिर्फ पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरी व्यवस्था को ही कटघरे में ला खड़ा किया है.
किसी भी सरकार को संचालित करने के लिए औक्सीजन कहां से मिलती है? अर्थात सरकार को चलाने और जन कल्याण की योजनाओं को लागू करने के लिए पैसा कहां से आता है? इस का सीधा सा जवाब होगा कि जनता से मिलने वाले टैक्स से.
जी हां, भारत में केंद्र और राज्य सरकारों की आय का मुख्य स्रोत टैक्स से मिलने वाला पैसा होता है, जिसे मुख्य रूप से 2 भागों—प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर में बांटा गया है. केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर ये कर वसूलती हैं, जिस से देश का विकास और सिस्टम संचालित होता है.
जो टैक्स सीधे जनता से और कंपनियों की आय के मुनाफे पर लगाया जाता है वो 'प्रत्यक्ष करÓ होता है जैसे इनकम टैक्स, कारपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स. जबकि अप्रत्यक्ष कर वो होता है, जो वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है और उपभोक्ता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुकाया जाता है.
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जैसे वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी, सीमा शुल्क, स्थानीय कर, स्टांप ड्यूटी, प्रौपर्टी टैक्स, एक्साइज टैक्स और विभिन्न तरह के लाइसेंस और अनुमति देने पर लिया जाने वाला शुल्क. इन सभी तरह के टैक्स से होने वाली इनकम से ही सरकार का खजाना भरता है.






