राजस्थान इंटेलिजेंस को अमेरिका (यूएस) की जांच एजेंसी एफबीआई से सूचना मिली कि जयपुर (राजस्थान) से ठग गिरोह के लोग अमेरिकी नागरिकों को केस में फंसाने की धमकी दे कर औनलाइन वसूली कर रहे हैं.

एफबीआई की इस सूचना पर राजस्थान इंटेलिजेंस ने इस की गुप्तरूप से जांच की तो मामला सच लगा. जयपुर शहर के 4 काल सेंटर से रात में अमेरिका, कनाडा लगातार काल कर के ठगी का मामला सामने आया. इस पर इंटेलिजेंस अधिकारियों ने जयपुर कमिश्नरेट पुलिस को इस की जानकारी दी.

जयपुर कमिश्नरेट पुलिस ने 7 जून, 2023 की रात को 4 थाना क्षेत्रों भांकरोटा, करणी विहार, चित्रकूट थाना एवं रामनगरिया थाना क्षेत्रों में 4 फरजी काल सेंटरों पर दबिश दी और वहां काम कर रहे 40 युवकयुवतियों को गिरफ्तार कर लिया. चारों काल सेंटरों पर विभिन्न वेबसाइट से यूएस नागरिकों का डेटा ले कर उन्हें झूठे केसों में फंसाने की धमकी देते. फिर केसों से बचने के बदले रकम वसूलते. चारों काल सेंटर से गिरफ्तार 40 आरोपी राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, नागालैंड, उत्तर प्रदेश के निवासी थे.

जांच में पता चला कि मानसरोवर निवासी अंकित सैनी करणी विहार थाना के अमलताश अपार्टमेंट में काल सेंटर चला रहा था. यहां से 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर 7 लैपटाप, 8 मोबाइल फोन, 6 हेडफोन, 1 मोडेम और अन्य सामान जब्त किया.

निर्माण नगर का रहने वाला लेख सिंह राजपुरोहित कमला नेहरू नगर भांकरोटा में सेंटर चला रहा था. यहां 10 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया. उन से 7 कंप्यूटर, 9 लैपटाप, 8 मोबाइल फोन, 14 हेडफोन, 1 मोडेम समेत अन्य सामान जब्त किया गया. परबतसर जिला नागौर निवासी मोहित सैनी चित्रकूट में काल सेंटर चला रहा था. यहां से 9 कर्मचारियों के साथ 7 लैपटाप, 8 मोबाइल फोन, एक मोडेम पुलिस ने बरामद किया.

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जगतपुरा निवासी वैभव रामनगरिया में काल सेंटर चला रहा था. यहां से 14 कर्मचारी काम करते मिले. सेंटर से 9 लैपटाप, 11 मोबाइल फोन, 9 हेडफोन, 5 मोडेम और अन्य सहायक सामग्री जब्त की गई. सीएसटी टीम गिरफ्तार सभी आरोपियों को संबंधित थाने ले आई. वहां पर आरोपियों से कड़ी पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद इन के द्वारा अमेरिकी नागरिकों के साथ ठगी करने की जो जानकारी मिली, वह इस प्रकार निकली—

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 4 ठगी करने वाले काल सेंटर चल रहे थे. अमेरिकी लोगों से ठगी करने वाले ये काल सेंटर जयपुर में 4 अलगअलग जगहों पर रात के समय औपरेट किए जा रहे थे. जयपुर के काल सेंटर में बैठा 10वीं फेल एक लडक़ा किसी अमेरिकी नागरिक को फोन करता और खुद को अमेरिकन गर्वनमेंट का औफिसर थौमस बता कर टैक्स नहीं भरने, ट्रैफिक रूल्स तोडऩे, पोर्न फिल्म देखने पर गिरफ्तारी की धमकी दे कर हजारों डालर की पेनल्टी लगाने या एसएसएन (अमेरिकन आधार कार्ड) ब्लौक करने की धमकी देता.

कुछ देर बाद उसी काल से अमेरिकन सिटिजन के पास एक और कुछ फोन जाता. फोन करने वाला अपना नाम जानसन बताता और कहता कि वह थौमस से बड़ा अधिकारी है, वह 100-150 डालर में मामला निपटाने का झांसा देता. घबराया अमेरिकी नागरिक उन की बातों में आ जाता और 100-150 डालर ट्रांसफर कर देता है. अमेरिकी जांच एजेंसी से मिली थी सूचना

अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो औफ इनवैस्टीगेशन (एफबीआई) से ठगी की सूचना मिलने पर पुलिस की इंटेलिजेंस टीम को जयपुर की 4 लोकेशन से हर रोज अमेरिकी नागरिकों को काल करने की जानकारी मिल रही थी. इस के बाद एफबीआई ने जांच की तो पता चला कि ये साइबर ठगी हिंदुस्तान के जयपुर शहर की विभिन्न लोकेशंस द्वारा की जा रही है. इस शिकायत के बाद जयपुर पुलिस ने यह काररवाई की.

आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि ये लोग हर महीने अमेरिकी नागरिकों से एक करोड़ रुपए की ठगी कर रहे थे. चौंकाने वाली बात ये है कि ठगी के ये फरजी काल सेंटर जयपुर शहर में 3-4 साल से चल रहे थे. एडीजी (इंटेलिजेंस) एस. सेंगाथिर ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से इंटेलिजेंस को सूचना मिल रही थी कि रात को जयपुर की अलगअलग लोकेशन से इंटरनेट और सामान्य काल अमेरिका जा रही हैं. इस पर काल ट्रेस कर लोकेशन देखी गई तो पता चला कि इन जगहों पर काल सेंटर औपरेट किए जा रहे थे.

काल सेंटर के फोन काल की डिटेल्स खंगाली गई तो पता चला कि ये अमेरिका में बैठे सीनियर सिटिजन को फोन कर उन के साथ बैंकिंग फ्रौड करते थे. कर्मचारियों को रात के समय ड्यूटी पर काल सेंटर पर बुलाया जाता था, क्योंकि उस समय अमेरिका में दिन होता है. चारों काल सेंटरों पर कर्मचारी रात 8 बजे से सुबह होने तक काम करते थे.

पुलिस ने भी इन काल सेंटर पर रात 12 बजे दबिश दे कर सभी 40 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. काल सेंटर के मालिकों ने कर्मचारियों को अमेरिका के मोबाइल नंबर दे रखे थे. इन मोबाइल नंबरों से इंटरनेट काल किया जाता था. मोबाइल नंबर अमेरिका के होने के कारण किसी अमेरिकी नागरिक को संदेह भी नहीं होता था. उन्हें लगता था कि काल अमेरिका के किसी सरकारी विभाग से आई है.

पुलिस ने चारों काल सेंटर से 35 मोबाइल फोन और अमेरिकी लोगों की कौंटैक्ट लिस्ट भी बरामद की. ये गिरोह ठगी के लिए सब से पहले डार्क वेब से अमेरिका और अन्य देशों के लोगों का डेटा खरीदते थे. इस में अमेरिकन सिटिजन के नाम, एड्रैस, मोबाइल नंबर, उन के बैंक खाते और इंश्योरेंस पौलिसी के बारे में जानकारी होती है.

इतना ही नहीं, जौब प्रोफाइल से ले कर उन के पर्सनल लोन, फैमिली डिटेल्स भी ले ली जाती थी. इस के बाद यह लिस्ट चारों काल सेंटरों पर दे दी जाती थी. इस के बाद उन नंबरों पर इंटरनेट काल कर लोगों को फंसाया जाता. पहले फोन पर अमेरिकन्स को उन के बारे में कुछ डिटेल्स बताते, जिस से उन्हें विश्वास हो जाता था कि ये फेक काल नहीं है.

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इस काम के लिए ऐसे लडक़ेलड़कियों को ही जौब पर रखा जाता, जो अमेरिकन एक्सेंट में बात कर सकें. फिर चाहे वो 10वीं फेल ही क्यों न हो. इस के बाद उन्हें 30 कौमन सवालजवाब याद करने की ट्रेनिंग दी जाती. इन कर्मचारियों की सैलरी 10 से 12 हजार रुपए प्रतिमाह थी. इन्हें हर ठगी पर 2 से 5 डालर का कमीशन भी अलग से दिया जाता था.

शिकार को फांसने वाले को डायलर कहा जाता है. जब शिकार फंस जाता, तब वह काल सीनियर अधिकारी से बात कराने को कह कर ‘क्लोजर’को ट्रांसफर कर दी जाती थी. डायलर खुद को आईआरएस या एसएसएन अधिकारी बताते. बुरी तरह हडक़ा देते थे अमेरिकी नागरिकों को इंडिया के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरह अमेरिका में इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) टैक्स कलेक्ट करने का काम करती है. काल सेंटर में बैठे ठग अमेरिकन सिटिजन से कहते, ‘‘आप ने टैक्स टाइम पर नहीं भरा है, अब आप को हजारों डालर्स की पेनल्टी देनी होगी.’’

डायलर को ट्रेनिंग दी जाती कि उन्हें धमकी भरे लहजे में ही बात करनी है. जब अमेरिकी सिटिजन डर जाते तो डायलर उन्हें कुछ ही डालर 100 या 150 डालर का भुगतान कर मामला निपटाने का औफर देते.

क्लोजर फोन पर खुद को बड़ा अधिकारी बताता और अमेरिकन सिटिजन से कहता, ‘‘आप को हजारों डालर की पेनल्टी से बचना है तो कुछ डालर का भुगतान कर दो, हम फाइल क्लोज कर देंगे.’’

ये साइबर ठग फरजी काल सेंटर्स से अमेरिकन्स को काल कर उन की मदद करने का झांसा देते. जब शिकार झांसे में आ जाता तो औनलाइन गिफ्ट वाउचर देने के लिए कहते. इस के बाद अमेरिकन से गूगल, ईबे, अमेजन के गिफ्ट वाउचर के नंबर ले कर यह पैसा अपने खाते में जमा करवा लेते.

ठग 2 तरीकों से पैसे भारत में लाते थे. पहला, हवाला के जरिए. ठगी के काल सेंटर चलाने वाला गिरोह गिफ्ट वाउचर को बैंक अकाउंट में जमा करवाता. बैंक अकाउंट दूसरे लोगों के होते, उन्हें पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए कमीशन देते थे. इस के अलावा फरजी बैंक खातों में भी पैसे ट्रांसफर किए जाते. इस के बाद बैंक खातों से यह पैसा हवाला के जरिए भारत में लाया जाता था.

दूसरा, वायर ट्रांसफर के जरिए. ठग अमेरिका में औनलाइन सर्वर किराए पर लेते. इस के जरिए रिमोट पीसी एक्सेस कर स्थानीय आईपी एड्रेस को काम में लेते. इस से बैंक को संदेह नहीं होता है कि वायर ट्रांजैक्शन किसी अन्य देश की आईपी एड्रेस पर किया जा रहा है. गिरोह के सरगना इतने शातिर हैं कि वायर ट्रांजैक्शन से विभिन्न बैंकों में शौप एक्ट के तहत फर्म रजिस्टर्ड करवा कर रखते. इस के बाद बैंक में अकाउंट खुलवा कर पैसे अकाउंट में जमा करवा लेते थे.

स्कीमों में फंस जाते अमेरिकन्स

औनलाइन ठग गिरोह एजुकेशन स्कीम का झांसा दे कर भी ठगी करते थे. अमेरिकन को बच्चों की एजुकेशन की नई पौलिसी या स्कीम देने का झांसा देते. लोग बच्चों की एजुकेशन के लिए गिरोह के झांसे में आ जाते. इस पर गिरोह वाले स्कीम में रजिस्ट्रेशन के लिए 200 डालर मांगते. यह 200 डालर औनलाइन गिफ्ट वाउचर के जरिए लेते थे.

काल सेंटर के ठग अमेरिका व कनाडा के लोगों को तकनीकी सहायता देने के लिए संपर्क करते. कई तरह के एंटी वायरस इंस्टाल करने व अन्य सहायता के लिए पौपअप भेजते. इसी के जरिए कंप्यूटर में तकनीकी समस्या पैदा कर देते. उस के बाद मदद के नाम पर 200-500 डालर ठग लिए जाते.

जयपुर में फरजी काल सेंटर बना कर अमेरिकन सिटिजन से हर महीने एक करोड़ रुपए से ज्यादा ठगने वाला मास्टरमाइंड नागौर जिला के परबतसर में मालियों के मोहल्ले का रहने वाला अभिषेक माली (22 वर्ष) है. अभिषेक माली पहले परबतसर में किराने की दुकान चलाता था. दुकान अब भी है. अभिषेक अपने पिता नेमीचंद के साथ किराने की दुकान पर बैठता था. वह पढ़ाई में कमजोर था.

आज से करीब 4 साल पहले अभिषेक परबतसर (नागौर) से जयपुर आ गया था. यहां अभिषेक ने अपनी बुआ के बेटे अंकित सैनी और दोस्त मोहित कुमावत के साथ मिल कर भांकरोटा, करणी विहार, चित्रकूट और रामनगरिया में 4 काल सेंटर शुरू किए. काल सेंटर का हैड रौनक नाम के युवक को बना रखा था, जो गुजरात का रहने वाला है. पुलिस रौनक की तलाश कर रही है.

जयपुर जाने के बाद अभिषेक माली की जिंदगी एक साल में ही बदल गई. उस ने अपने परिवार वालों को बता रखा था कि वह एक सौफ्टवेयर इंजीनियर है और उस की जौब मल्टीनैशनल कंपनी में लगी हुई है. परिवार वाले भी पड़ोसी और रिश्तेदारों को यही बताते थे. अभिषेक ने अपनी बुआ के बेटे अंकित और दूसरे लडक़ों को भी अपने साथ जोड़ लिया.

अभिषेक जब भी परबतसर में अपने घर जाता था तो लग्जरी कार से ही जाता था. अभिषेक की लाइफस्टाइल यानी महंगे कपड़े, लग्जरी घडिय़ां और लग्जरी कार देख कर हर कोई चौंक गया था. परबतसर में अभिषेक के पड़ोसयों के अनुसार अभिषेक हमेशा अपने परिवार वालों से मिलने के लिए रात के समय घर आता था. घर आने के बाद वह आसपड़ोस के किसी भी शख्स से बात नहीं करता था. वह सब से दूरी बना कर रखता था. सिर्फ अपने परिवार और रिश्तेदारों से मिल कर वापस जयपुर चला जाता था.

खुद को सौफ्टवेयर इंजीनियर बताता था अभिषेक

अभिषेक अपनी प्रोफाइल लोगों से छिपा कर रखना चाहता था. पड़ोसी जब उसे काम के बारे में पूछते तो वो सभी को सौफ्टवेयर इंजीनियर बताता था. अमेरिकन सिटिजन को ठगने के लिए आरोपी अभिषेक ने जयपुर से ढाई हजार किलोमीटर दूर नागालैंड के बेरोजगार लडक़ेलड़कियों को काल सेंटर पर रखा था. क्योंकि वहां के युवकयुवती आसानी से इंग्लिश बोल लेते हैं. इस के अलावा नागालैंड के युवाओं को काम पर लगाने से काल सेंटर पर ठगी की बात भी लीक होने का डर नहीं था.

ये लोग टैक्स नहीं भरने, ट्रैफिक रूल्स तोडऩे और पोर्न देखने के नाम पर अमेरिका के सीनियर सिटिजन को धमकाते थे. अभिषेक माली ने नागालैंड की सुरैया मंडल और शूरिला नाम की 2 लड़कियों को काल सेंटर की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी दे रखी थी. दोनों लड़कियों से उन ग्राहकों को काल करवाया जाता था, जो आसानी से झांसे में नहीं आते थे. उस से बात करने पर अमेरिकन आसानी से विश्वास कर लेते थे. उन्हें लगता था कि ये फेक काल नहीं है.

गिरफ्तारी से बचने को करते मामला रफादफा

काल सेंटर में काम करने वाले ये लोग अमेरिकन गवर्नमेंट के औफिसर बन कर अमेरिकन को काल करते थे. उन को फोन पर बताया जाता कि उन के खिलाफ लीगल कंप्लेंट आई है. लीगल कंप्लेंट में अलगअलग कारण बताए जाते थे. इन में समय पर टैक्स नहीं भरने, ट्रैफिक रूल्स तोडऩे, पोर्न देखने और कोई क्राइम करने की कंप्लेंट उन के खिलाफ दर्ज होने के बारे में बताया जाता था.

इस के बाद उन्हें धमकी भरे लहजे में डराया जाता था कि उन के खिलाफ टेक्सास कोर्ट से गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है. वारंट के नोटिस की एक फरजी कौपी बना कर फोटो अमेरिकन को भेजी जाती थी. इस से अमेरिकन डर जाते थे. इस के बाद एक दूसरे बड़े अधिकारी के नाम से दूसरा काल जाता था. इस में वारंट के नोटिस को निरस्त कर के मामला रफादफा करने की एवज में डालर या गिफ्ट वाउचर की डिमांड करते थे.

करणी विहार और भांकरोटा वाले काल सेंटर पर अमेरिकन को ठगने के लिए दूसरा तरीका अपनाया जाता था. यहां से अमेरिकन को हैकिंग का मैसेज भेजा जाता था. फिर काल सेंटर से फोन कर के बताते थे कि आप का पीसी या मोबाइल हैकर ने हैक कर लिया है. हैकर अब उन के डेटा को तसकरी, पोर्न क्राइम में यूज कर सकते हैं.

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साइबर ठग उन के एसएसएन कार्ड और आईडेंटिटी को यूज कर के क्राइम करेंगे और पुलिस उन को पकड़ लेगी. हैकर से बचने के लिए मदद के नाम पर अमेरिकन से हजारों डालर ठग लेते थे. आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए इंडिया के बजाय अमेरिका में रहने वाले लोगों को ठगने का प्लान बनाया था. ठगी के बाद अमेरिका के लोग वहां की लोकल पुलिस को कंप्लेन करते थे.

लोकल पुलिस को जब पता लगता कि ठगी करने वाले देश के बाहर से है तो वे भी काररवाई नहीं कर पाते थे. आरोपियों ने ठगने के लिए कुछ अमेरिकन को अपना टारगेट इसलिए बनाया कि अगर उन्हें जयपुर की पुलिस पकड़ भी लेगी तो उन के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाला कोई नहीं होगा. पुलिस को अपने स्तर पर मामला दर्ज करना होगा.

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 384, 419, 420, 120बी, 66, 66सी, 66डी आईटी ऐक्ट में मामला दर्ज किया है. लेकिन जिस के साथ ठगी हुई है, उस पीडि़त के मामला दर्ज नहीं करने के कारण आरोपियों को जल्दी जमानत मिलने की संभावना होती है.

पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में एडीजी (इंटेलिजेंस) एस. सेंगाथिर से इनपुट मिला था, जिस के बाद एडिशनल डीसीपी सुलेश चौधरी के नेतृत्व में अलगअलग टीमें गठित की गईं, स्थानीय पुलिस के सहयोग से काल सेंटर की जगह चिह्निïत कर के दबिश दी गई. गिरोह के मुख्य सरगना के तौर पर अभिषेक माली, अंकित सैनी और मोहित कुमावत की पहचान हुई है. इन तीनों को गिरफ्तार किया गया है और पूछताछ की जा रही है. इन के कब्जे से जब्त किए गए लैपटाप और मोबाइल की जांच भी जारी है.

काल सेंटर में काम करने वाले लडक़ेलड़कियों को रोज ठगी का टारगेट दिया जाता था. इन्हें रेजिडेंस से औफिस (काल सेंटर) तक देर शाम को बस के जरिए लाया जाता था. सुबह वापस छोड़ दिया जाता था. गिरफ्तार किए गए 40 आरोपियो में 14 आरोपी नागालैंड के हैं. 5 आरोपी महाराष्ट्र के हैं, जबकि अन्य हरियाणा, नई दिल्ली और राजस्थान के अलगअलग जिलों के रहने वाले हैं.

11 जून, 2023 पुलिस ने कुछ आरोपियों से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. वहीं कुछ आरोपी रिमांड पर चल रहे थे. काल सेंटर का हैड, रौनक जो गुजरात का है, वह फरार था. जयपुर पुलिस की टीमें उस की तलाश कर रही थीं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एडिशनल डीसीपी सुलेश चौधरी का कहना है कि युवा वर्ग अपराध की तरफ कदम न बढ़ाए, अपराध चाहे चोरी, डकैती, लूट, हेराफेरी या साइबर क्राइम या और कोई अपराध है उन से बचें, वरना एक न एक दिन पोल जरूर खुलेगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा.

अगर कोई बहकावे या लालच में आ कर ऐसे अपराध में शामिल है तो जितना जल्द हो यह रास्ता छोड़ कर ऐसा अपराध करने वालों की तत्काल खबर नजदीकी थाने में दें. साइबर ठग कई प्रकार से लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं. कई ठग बैंक खाता बंद होने, एटीएम कार्ड बंद होने, पैन कार्ड, आधार कार्ड बंद होने का झांसा दे कर फोन या मैसेज करते हैं. ओटीपी नंबर मांग कर बैंक खाता खाली कर देते हैं.

एडिशनल डीसीपी सुलेश चौधरी लोगों से अपील करते हैं कि वे किसी भी व्यक्ति को बैंक खाता, आधार कार्ड या उस व्यक्ति को यह जानकारी न दें. अगर कोई भी ठगी का शिकार हो गया है तो तुरंत संबंधित बैंक में खबर दे कर अपने खाते के लेनदेन को रुकवाने के साथ स्थानीय पुलिस थाने में तत्काल खबर दें ताकि समय रहते पुलिस काररवाई करे.

साइबर ठगी आजकल बहुत ज्यादा हो रही हैं. सचेत और सावधान रहें ताकि आप से कोई ठगी नहीं कर सके. झांसेबाज कई प्रकार के झांसे देते हैं, उन से किसी प्रकार की जानकारी साझा नहीं करें, वरना पछताने के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा.

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