Dehradun Crime: नादान शालू की रवि राजपूत से दोस्ती हो गई, जिसे रवि प्यार समझ बैठा. परेशानी तब हुई, जब इस प्यार ने रवि को जुनूनी बना दिया. वह शालू को भगा कर अपनी दुनिया बसाना चाहता था. एक रात वह शालू को भगा ले जाने के इरादे से आया तो शालू ने इंकार कर दिया. दोनों की इस जिद में शालू की जान गई तो रवि अपराधी बन गया.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पौश कालोनी पाम सिटी में लोगों की एक से बढ़ कर एक कोठियां और फ्लैट्स हैं. इन्हीं कोठियों में से कोठी नंबर 91 के.के. अरोड़ा की है. खुशमिजाज शख्स के तौर पर पहचाने जाने वाले के. के. अरोड़ा पेशे से प्रौपर्टी डीलर थे. वह होटल कारोबार से भी जुड़े रहे हैं. हर शख्स चाहता है कि उस का परिवार खुश रहे, आर्थिक रूप से संपन्न अरोड़ा भी इस चाहत को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करते थे.

उन के परिवार में पत्नी लक्ष्मी के अलावा 2 बेटियां थीं, शालू व शालिनी और एक छोटा बेटा विशाल. शालू शहर के ही एक कालेज में इंटर की छात्रा थी. उस के दोनों भाईबहन भी पढ़ाई कर रहे थे. अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह परिवार बेहद खुशहाल था. किस की जिंदगी में खुशियों का सूरज कब रेशमी किरणें फैलाने लगे और कब शाम का रंग लाल हो कर दिल दहला जाए, कोई नहीं जानता. 21 जून, 2015 को विश्व योग दिवस मनाया जाना था. इसे ले कर शहर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने थे. के. के. अरोड़ा को भी एक ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाना था, जहां सामूहिक रूप से योगा किया जाना था. उस दिन वह भोर में करीब साढ़े 5 बजे जाग गए थे.

उन की कोठी चूंकि 2 मंजिला थी, लिहाजा सभी के सोने के लिए अलगअलग कमरे बने हुए थे. सुबहसुबह अरोड़ाजी कोठी की छत पर जा कर टहलने लगे. तब तक उन की पत्नी लक्ष्मी भी उठ कर बैडरूम से बाहर आ गई थीं. वह बड़ी बेटी शालू के कमरे की तरफ गईं. लेकिन वह अपने कमरे में नहीं थी. आमतौर पर हर रोज उस वक्त शालू सोती हुई मिला करती थी. बेटी को बिस्तर पर न पा कर लक्ष्मी थोड़ा चौंकीं. उन्हें नहीं पता था कि वह कहां चली गई थी. उन्होंने पति के पास पहुंच कर बताया कि शालू अपने कमरे में नहीं है.

अरोड़ा ने सामान्य सा जवाब दिया, ‘‘हो सकता है घूमने चली गई हो.’’

कालेज की छुट्टियां चल रही थीं. कभीकभी ऐसा भी होता था कि शालू मौर्निंग वाक पर निकल जाती थी. लक्ष्मी दूसरी बेटी शालिनी के पास गईं. तब तक वह जाग चुकी थी. उन्होंने उस से भी पूछा, ‘‘शालू कहीं नहीं दिख रही, तूने देखा है क्या उसे?’’ लेकिन शालिनी ने भी शालू को देखने की बात से इनकार किया.

वैसे तो यह मामूली सी बात थी. लेकिन बच्चे मातापिता की नजरों के सामने न हों या उन्हें बिना बताए कहीं चले जाएं तो चिंता हो ही जाती है. बेटियों के मामले में तो चिंता और बढ़ जाती है. लक्ष्मी को चिंता हुई तो वह ‘शालू शालू’ पुकारते हुए कोठी में दूसरी तरफ गईं. उसी वक्त अनायास उन की निगाह लौबी की ओर चली गई. वहां शालू खून के सैलाब में डूबी फर्श पर पड़ी थी. यह नजारा देख कर उन के होश उड़ गए. उन्होंने आगे बढ़ कर ‘बेटीबेटी’ पुकारते हुए शालू को हिलायाडुलाया, उसे झिंझोड़कर देखा. लेकिन उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई.

बदहवास सी लक्ष्मी चिल्लाते हुए पति की तरफ दौड़ीं. वह भी दौड़ कर आए. बेटी को इस दशा में देख कर वह भी जड़वत रह गए. शालू का शव खून से लथपथ पड़ा हुआ था. इस खौफनाक मंजर ने लक्ष्मी की रुलाई को हृदयविदारक चीखों में तब्दील कर दिया. आसपड़ोस के लोगों ने चीखने और रोने की आवाज सुनी तो वे घरों से बाहर निकल आए. कुछ लोग ऐसे भी थे, जो पहले से ही मौर्निंग वाक के लिए सड़क पर टहल रहे थे. वे भी अंदर आ गए. रक्तरंजित नजारा देख कर उन के कलेजे कांप गए. निस्संदेह किसी ने शालू की हत्या कर दी थी.

आननफानन में 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया गया. करीब 20 मिनट में एक गश्ती पीसीआर मौके पर पहुंच गई. यह इलाका थाना पटेलनगर में आता था. थानाप्रभारी पंकज गैरोला, वरिष्ठ उप निरीक्षक नत्थीलाल उनियाल तथा अन्य पुलिसकर्मी भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटना सनसनीखेज थी, सूचना मिलते ही एसएसपी पुष्पक ज्योति और एसपी सिटी अजय कुमार वगैरह भी वहां आ पहुंचे. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. 17 वर्षीया शालू 3 फुट की लौबी में पड़ी थी. उस के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था. उस का सिर फटा हुआ था और आसपास खून फैल कर जम गया था.

मौके पर काले व सफेद रंग का एक मर्दाना गमछा पड़ा था. संभवत वह कातिल का था. पुलिस ने उसे अपने कब्जे में ले लिया. एसएसपी के निर्देश पर क्राइम ब्रांच की फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी बुलाया गया. जांच में मदद के उद्देश्य से ट्रेनर पुलिसकर्मी ने प्रशिक्षित कुत्ते को घटनास्थल और लाश को सुंघा कर छोड़ दिया. वह छत व सीढि़यां उतर कर नीचे गया और टहल कर वापस आ गया. जाहिर है इस से कोई स्पष्ट अनुमान नहीं लगाया जा सकता था.

क्राइम ब्रांच की टीम ने भी अपने हिसाब से घटनास्थल की जांच की. पुलिस ने परिजनों से भी औपचारिक पूछताछ की. मृतका के बहन और भाई गमगीन होने की वजह से बात करने की स्थिति में नहीं थे. सब से चौंकाने वाली बात यह थी कि शालू की हत्या का सैटरडे नाइट में परिवार के किसी सदस्य को पता तक नहीं लग सका था. किसी ने उस के चीखने की आवाज भी नहीं सुनी थी. यह बात थोड़ी अजीब लगने वाली थी. वैसे भी घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था.

शुरुआती जांच में 3 बातें स्पष्ट हुईं. एक तो यह कि सिर पर किसी चीज से प्रहार किया गया था. दूसरा यह कि मामला सीधेसीधे हत्या का था, न कि लूटपाट में हुई हत्या का. क्योंकि घर से कोई चीज गायब नहीं थी. तीसरा यह कि वारदात में किसी ऐसे व्यक्ति का हाथ था, जो घर की भौगोलिक स्थिति से भी परिचित था. यह भी संभव: हो सकता था कि बदमाश लूटपाट के इरादे से कोठी में घुसे हों और इसी बीच शालू लौबी में गई हो और उन्होंने उस की हत्या कर दी हो. इस के बाद वे बिना लूटपाट किए ही भाग गए हों. यह केवल अनुमान भर था.

प्राथमिक काररवाई पूरी कर के पुलिस ने के. के. अरोड़ा की तहरीर पर अज्ञात हत्यारे के खिलाफ पटेलनगर थाने में भादंवि की धारा 302 के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया. साथ ही शालू के शव को पोस्टमार्टम के लिए दून अस्पताल भिजवा दिया. इस केस की विवेचना एसएसआई नत्थीलाल उनियाल के सुपुर्द की गई. घटना का पता चलने पर डीआईजी संजय गुंज्याल के निर्देश पर एसएसपी पुष्पक ज्योति ने केस की जांच के लिए एक टीम गठित की, जिस में थाना पुलिस के अलावा सहसपुर थानाप्रभारी यशपाल सिंह बिष्ट, प्रेमनगर थानाप्रभारी रवि कुमार सैनी, एसआई मनोज नैनवाल, नरोत्तम सिंह, विक्रम सिंह, कांस्टेबल अनिल, संदीप, सहदेव त्यागी, हितेश कुमार व आशीष राठी के अलावा क्राइम ब्रांच को शामिल किया गया.

पोस्टमार्टम के बाद शालू का शव उस के परिवार वालों को सौंप दिया गया. पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने रिपोर्ट में बताया कि शालू की मृत्यु सिर पर हुए प्रहार के कारण अत्यधिक रक्तप्रवाह की वजह से हुई थी. उस के सिर की हड्डी भी टूटी पाई गई थी. पुलिस ने पड़ताल शुरू की. सुरक्षा के लिहाज से कालोनी के एंट्री गेट पर रात में एक सिक्योरिटी गार्ड रहता था. उस के मुताबिक घटना वाली रात 12 बजे के बाद कालोनी में किसी का आवागमन नहीं हुआ था. हालांकि कालोनी के कुछ घरों में सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे, परंतु उन के फोकस का दायरा सीमित था. कातिल बाहर से नहीं आया था तो शालू की हत्या किस ने की, यह अहम सवाल था.

पुलिस ने शालू के घर वालों से पुन: पूछताछ की तो उन्होंने रवि राजपूत नामक युवक पर अपना संदेह जताया. मृतका की बहन ने पुलिस को बताया कि नजदीक के एक फ्लैट में रहने वाला लड़का रवि राजपूत शालू को परेशान किया करता था. उस ने यह भी बताया कि मौकाएवारदात पर जो मर्दाना गमछा पाया गया है, उसे उस ने रवि के गले में कई बार देखा था. पुलिस ने रवि को शक के दायरे में रख कर जांच आगे बढ़ाई. पुलिस वहां पहुंची, जिस फ्लैट में रवि रहता था. पता चला कि रवि मूलरूप से हरियाणा के जिला करनाल के रहने वाले रूप सिंह का बेटा था. वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर चुका था.

उस फ्लैट में वह अपने ममेरे भाई ऋषिपाल के पास कभीकभी आ कर ठहरता था. ऋषिपाल मूलरूप से सहारनपुर के बड़गांव का रहने वाला था और प्रौपर्टी का काम करता था. उस वक्त वह भी लापता था. पुलिस ने शालू का मोबाइल हासिल किया तो उस में लौक लगा था. एक्सपर्ट से उस का लौक खुलवाया गया. उस में लेट नाइट की एक आखिरी काल थी. जांच में वह नंबर रवि का निकला. पुलिस ने शालू व रवि के नंबरों की काल डिटेल्स और लोकेशन निकलवाई. उन से साबित हुआ कि घटना वाली रात उस की न सिर्फ शालू से बातें हुई थीं, बल्कि आधी रात के बाद रवि की लोकेशन भी पाम सिटी में ही थी.

रवि पूरी तरह शक के दायरे में आ गया था. पुलिस टीम ने उस की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी. पुलिस ने लोकेशन के आधार पर उसे उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह देहरादून से भागने की कोशिश कर रहा था. उस के साथ सुनील राणा व उस का दोस्त प्रताप सिंह भी थे. पुलिस तीनों को थाने ले आई. पुलिस पूछताछ में उन्होंने अपना अपराध स्वीकार किया तो एक चौंकाने वाली कहानी पता चली. रवि बचपन से ही जिद्दी और दबंग स्वभाव का युवक था. बुरे लड़कों की संगत में रह कर वह कालेज के लड़ाईझगड़ों में पड़ने लगा था. परिजनों ने उसे डांटाफटकारा, समझाया, लेकिन वह नहीं समझा. उस ने जैसेतैसे इंटरमीडिएट तो पास कर लिया, लेकिन इस से आगे वह न पढ़ा.

बेटा सुधर जाए इस उम्मीद में पिता ने 2015 में उसे देहरादून की पाम सिटी में रह रहे ऋषिपाल के पास भेज दिया था. उन्हें लगता था कि वह उस के साथ रह कर कोई काम करेगा तो सुधर जाएगा. रवि देहरादून आया तो उसे और भी आजादी मिल गई. वह शराब भी पीने लगा. उस के हावभाव से ले कर बातों में दबंगई होती थी. अपनी दबंगई के लिए वह अपने पास एक तमंचा भी रखता था. देहरादून में भी उस ने अपने कई दोस्त बना लिए थे. यहीं पर एक दिन राह से गुजरते हुए रवि की नजरें शालू से चार हो गईं. पहली ही नजर में शालू उस के दिल में उतर गई.

रवि उन युवाओं में से था, जो उम्र से पहले ही सबकुछ पा लेना चाहते हैं. वह चालाक किस्म का युवक था. एक दिन उस ने बहाने से शालू से बातचीत की और उस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. बड़े शहरों में लड़केलड़कियों के बीच यह कोई बड़ी बात नहीं होती. शालू ने भी बिना सोचेसमझे उस की दोस्ती स्वीकार कर ली. शालू ने अपनी छोटी बहन शालिनी को भी यह बात बता दी थी. कई बार की बातों और सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए दोनों एकदूसरे के संपर्क में बने रहे. शालू उस के मैसेज का जवाब दे देती थी. इस से उस के हौसले बढ़ गए. शालू खूबसूरत लड़की थी. रवि उसे अपना बनाने का सपना देखने लगा. उस ने एक दिन अपने प्यार का इजहार भी कर दिया, लेकिन शालू ने इनकार कर दिया.

रवि को लगा कि उस का इनकार सिर्फ दिखावा है, अंदर से शालू भी उस से प्यार करती है. दोनों की मेलमुलाकातें हुईं तो शालू के रिश्ते के एक भाई आशीष ने उन्हें देख लिया. उस ने शालू को डांटा, क्योंकि वह रवि की आवारगी जानता था. इस के बाद उन का मिलनाजुलना कम हो गया. दूसरी तरफ रवि शालू को पाने के सपने देखने लगा था. शालू जब उस से बात नहीं करती तो वह रास्ते में उसे रोकने की कोशिश कर के उसे परेशान करता. शालिनी इन बातों को जानती थी. फोन पर वह न केवल शालू के संपर्क में रहने लगा, बल्कि उसे मैसेज भी भेजा करता था. रवि के सिर पर प्यार का भूत सवार था. शालू ने उस के एकतरफा प्यार को जब ज्यादा तवज्जो नहीं दी तो उस ने अपनी एक फोटो इंटरनेट के जरिए उसे भेज दी.

उस फोटो में वह फांसी का फंदा हाथ में लिए नजर आ रहा था. उस ने लिखा था, ‘यदि तुम मुझ से प्यार नहीं करोगी तो मैं अपनी जान दे दूंगा.’ यह देख कर शालू उलझन में पड़ गई. वह नहीं चाहती थी कि उस की वजह से कोई मर जाए, तभी रवि का फोन आ गया. वह बोला, ‘‘अब बोलो, तुम मुझ से प्यार करती हो ना?’’

‘‘देखो, मैं कुछ नहीं कहना चाहती. तुम्हें जो समझना है समझो और हां प्लीज ऐसी कोई हरकत आगे से मत करना.’’

रवि ने उस की इन बातों को इकरार समझ लिया. उसे लगा कि शालू को उस की फिक्र है, इसलिए वह उसे मरने नहीं देना चाहती. इस के बाद वह उस के खयालों में ही खोया रहने लगा. अंजाम से बेखबर शालू उस के जुनून को समझ नहीं पाई. उस ने यह बातें अपने मातापिता को भी नहीं बताईं. यह उस की नादान उम्र का तकाजा था. अलबत्ता शालू ने रवि के फोटो भेजने वाली बात अपनी बहन शालिनी को जरूर बता दी थी. रवि को ले कर कोई बदनामी न हो, इसलिए शालू ने उस से थोड़ी दूरी बनाने की सोची. वह उस से कम बातें करने लगी. इस से रवि को लगा कि शायद वह अपने परिवार की वजह से ऐसा करती है.

उस के दिमाग में सुबहशाम, दिनरात शालू की ही छवि घूमती रहती थी. उसे देखे बिना उसे सुकून नहीं आता था. शालू से दोस्ती के किस्से उस ने अपने दोस्तों को भी सुना रखे थे. इसी बीच वह करनाल चला गया. वहां जाने के बाद उसे दूरियां बरदाश्त नहीं हुईं. शालू भले ही उसे तवज्जो नहीं देती थी, लेकिन अपनी तरफ से वह उसे बहुत प्यार करता था. शालू ने सोचा कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा और रवि उसे अपने दिमाग से निकाल कर अपने काम पर ध्यान देगा. उधर रवि के सिर पर शालू को पाने की जिद सवार हो गई थी. उस ने मन ही मन फैसला कर लिया था कि अब वह शालू को अपनी बना कर ही दम लेगा. इस के लिए रवि ने उसे भगाने की योजना बनाई.

उस ने सोचा कि शालू परिवार की मजबूरियों में कैद है, इसलिए वह उस से ज्यादा बात नहीं कर पाती. वह उस के सामने प्रस्ताव रखेगा तो वह उस के साथ खुशीखुशी चल देगी. उस ने यह बात अपने दोस्त सुनील व प्रताप को बताई कि वह एक लड़की से प्यार करता है और उसे भगा कर शादी करना चाहता है. रवि ने उन्हें बताया कि वह उसे हर सूरत में हासिल करना चाहता है. रवि की चाहत देख कर वे दोनों उस की मदद करने को तैयार हो गए. 19 जून की शाम रवि सुनील व प्रताप के साथ शालू को भगा ले जाने के इरादे से देहरादून आया. तीनों जीएसएम रोड स्थित एक होटल में रुके.

रवि अपने साथ एक तमंचा भी लाया था. उस ने सोचा था कि अगर शालू के घर वाले किसी वजह से रोकने की कोशिश करेंगे तो वह उन्हें डराधमका कर रोक देगा. अगली रात उस ने शालू को फोन कर के कहा, ‘‘शालू मुझे तुम से मिलना है.’’

‘‘अब रात में?’’ शालू चौंकी.

‘‘हां, मेरे पास वक्त कम है और तुम से नहीं मिला तो सच में मैं मर जाऊंगा. मुझे तुम से जरूरी बात करनी है.’’

‘‘क्या बात है? मोबाइल पर ही बता दो.’’

‘‘नहीं, मिल कर ही बताऊंगा और तुम्हें मेरी बात माननी होगी.’’

‘‘मानने वाली होगी तो ही मानूंगी ना, फिर ऐसी कौन सी बात है?’’

‘‘पहले मुझे आने दो.’’

‘‘तुम जानते हो यह गलत है और कोई गड़बड़ भी हो सकती है.’’

‘‘कुछ नहीं होगा मैं लेट नाइट आ जाऊंगा.’’ रवि ने कहा तो शालू सोच में डूब गई. वैसे भी उसे रवि की दोस्ती परेशान करने लगी थी और वह उस से पीछा छुड़ाने के बारे में सोच रही थी. वह रवि पर विश्वास करती थी, इसलिए उस ने इजाजत भी दे दी, ‘‘ठीक है, तुम आ जाना, मैं पिछला दरवाजा खोल दूंगी.’’

कोठी के पीछे की तरफ से भी एक छोटा खिड़कीनुमा दरवाजा था. इस भौगोलिक स्थिति को रवि जानता था. यह बात उसे शालू ही बता चुकी थी. रवि करीब एक बजे सुनील व प्रताप के साथ होटल से निकला. ये लोग पैदल चल कर कारगी चौक की ओर गए. उधर से ही पाम सिटी का रास्ता था. कालोनी में जाने के लिए उस ने मुख्य गेट नहीं चुना. वह जानता था कि शालू के भागने के बाद हंगामा मचेगा तो वह पकड़ा जा सकता है.

पाम सिटी कालोनी की चारदीवारी थी. उस के बाहर खेत व जंगल था. खेतों के रास्ते वे लोग दीवार फांद कर कालोनी में दाखिल हो गए. करीब डेढ़ बजे कोठी के पीछे पहुंच कर रवि ने शालू को फोन किया. उस ने चुपके से दरवाजा खोल दिया. तीनों अंदर आ गए. सुनील व प्रताप लौबी में ही खड़े रहे, जबकि शालू के साथ रवि ड्राइंगरूम में पहुंच गया. शालू ने उस से पूछा, ‘‘बोलो क्या बात है?’’

‘‘शालू मैं तुम्हें ले जाने के लिए आया हूं.’’

‘‘मतलब?’’ उस की बात सुन कर शालू चौंकी.

‘‘तुम्हें यहां से आजाद करा कर मैं तुम से शादी कर लूंगा.’’

सुन कर शालू के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे नहीं पता था कि रवि इतने बड़े ख्वाब देख चुका है.

‘‘पागल हो गए हो तुम?’’ शालू ने गुस्से में कहा.

‘‘तुम चाहे जो समझो, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. तुम्हें मेरे साथ चलना ही होगा. तुम डरती किस से हो, मैं सब को देख लूंगा.’’ कहते हुए उस ने तैश में आ कर तमंचा निकाल कर शालू को दिखाया. लेकिन शालू ने उस के साथ जाने से इनकार कर दिया.

इस के बावजूद वह करीब एक घंटा उसे समझाता रहा. शालू नानुकूर करती रही. रवि जबरन प्यार हासिल करना चाहता था. उस ने मन ही मन सोच लिया कि या तो वह शालू को साथ ले जाएगा या हमेशा के लिए उस का किस्सा खत्म कर देगा. शालू समझ गई कि यह बिगड़ैल किस्म का युवक है, इसलिए उस से पीछा छुड़ाना ही बेहतर है. बात करतेकरते दोनों लौबी में आ गए. शालू ने उसे चले जाने को कहा.

रवि को अपनी योजना फेल होती नजर आई तो उस ने निर्णायक अंदाज में पूछा, ‘‘शालू आखिरी बार पूछ रहा हूं, तुम मेरे साथ चलोगी या नहीं?’’

शालू ने साफ इनकार कर दिया, ‘‘बिलकुल नहीं, तुम पागल हो गए हो.’’

‘‘मैं तुम्हें उठा कर ले जाऊंगा, फिर देखता हूं तुम्हारी मरजी कैसे चलेगी.’’ उस ने कहा तो शालू ने उसे चेतावनी भरे लहजे में जवाब दिया. ‘‘ऐसी गलती मत करना रवि, मैं शोर मचा कर तुम सब को अभी पकड़वा दूंगी समझे. अब तुम चुपचाप यहां से चले जाओ.’’

अपनी जिद पूरी न होते देख रवि गुस्से में आ गया. उस ने शालू को हाथ पकड़ कर खींचना चाहा तो शालू ने उस के गाल पर तमाचा जड़ दिया. इस से वह आगबबूला हो गया. तब तक उस के साथी भी आ गए थे. रवि ने तमंचा निकाल कर उस की बट से शालू के सिर पर वार कर दिया. वार तेज था. खून बहा तो मामूली चीख के साथ वह सिर थाम कर नीचे बैठ गई. उस ने चिल्लाने की कोशिश की तो रवि ने उस का मुंह दबा दिया और नीचे गिरा दिया. फिर उस का सिर पकड़ कर फर्श में दे मारा. उस के साथियों ने शालू के हाथपैर पकड़ लिए. रवि तब तक उस का सिर पटकता रहा, जब तक कि उस की मौत नहीं हो गई. इस से उस का सिर बुरी तरह फट गया और आसपास खून फैल गया.

विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने रवि की निशानदेही पर तमंचा बरामद कर लिया. उस के साथियों का कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि रवि इस तरह हत्या कर देगा. वह तो शालू को भगाने में उस का सहयोग करने के लिए उस के साथ चले आए थे. अगले दिन पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

शालू नादान उम्र में रवि जैसे सिरफिरे की दोस्ती में न पड़ी होती और उस की हरकतों के बारे में अपने पिता को बता दिया होता तो शायद ऐसी नौबत कभी नहीं आती. रवि ने भी अपने जिद्दी स्वभाव की वजह से प्यार के जुनून में खून से हाथ रंग कर अपना भविष्य खराब कर लिया. कथा लिखे जाने तक रवि व उस के साथियों की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर रही थी. Dehradun Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

 

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