Love Story: पति मनमुताबिक न निकला तो 37 वर्षीय आंगनवाड़ी सुपरवाइजर मुकेश कुमारी जाट ने उसे तलाक दे दिया था. फिर वह पत्नी से परेशान रहने वाले 38 वर्षीय शादीशुदा सरकारी टीचर मानाराम के संपर्क में आई और दोनों के बीच नजदीकी संबंध बन गए. वह उस पर शादी का दबाव बनाने लगी, लेकिन मानाराम पत्नी से तलाक के बाद शादी करने को कहता. यह विवाद एक दिन इतना खतरनाक हो गया कि…

आंगनवाड़ी सुपरवाइजर प्रेमिका मुकेश कुमारी की लगातार शादी करने की जिद से सरकारी टीचर मानाराम परेशान हो गया. उस ने प्रेमिका को लाख समझाया कि वह पत्नी को तलाक देने के बाद उस से शादी अवश्य करेगा, लेकिन वह उस की बात किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं थी. उस की जिद से परेशान हो कर मानाराम प्रेमिका से छुटकारा पाने के उपाय खोजने लगा. उस रोज 10 सितंबर, 2025 का दिन था. टीचर मानाराम ड्यूटी से बाड़मेर स्थित शिवनगर अपने घर लौट आया था. वह आराम कर रहा था. तभी कालबेल बजी.

मानाराम ने सोचा कि कोई पड़ोसी होगा. उस ने मुख्य गेट खोला तो सामने मुकेश कुमारी को देख वह आश्चर्यचकित रह गया. उसे घूरते देख मुकेश कुमारी बोली, ”आठवां अजूबा तो हूं नहीं, जो मुझे घूरघूर कर देख रहे हो. अंदर आने को नहीं कहोगे.’’

तब मानाराम साइड में हो गया और बोला, ”बगैर कोई जानकारी दिए आ गई, मानना पड़ेगा. आओ, अंदर आओ.’’

दोनों घर में आ गए. मानाराम चाय बना कर ले आया. दोनों चाय पीते हुए बतियाने लगे. मुकेश कुमारी ताना मारते हुए बोली, ”मुझ से मन भर गया है क्या, जो मेरे नंबर भी ब्लौक कर रखे हैं. मगर मैं भी पीछा छोडऩे वाली नहीं हूं. मैं ने तुम पर विश्वास कर तनमन तुम्हें समर्पित किया. तुम ने शादी करने का वादा किया था, अब तुम मुकर रहे हो. बहाने कर रहे हो. मगर बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, जितनी जल्द हो मुझ से शादी करो.’’

”मैं ने शादी करने से मना थोड़ी किया है. मेरा तो यह कहना है कि मेरा अपनी पत्नी से तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है. उस से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. जब तक पत्नी से तलाक नहीं हो जाता, तब तक मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अपना पक्ष रखते हुए मानाराम ने कहा.

इस पर गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी तुनकते हुए बोली, ”तुम्हारा पत्नी से तलाक 10 साल तक नहीं होगा. कोर्ट में केस चलता रहेगा तो ऐसे में मैं इंतजार थोड़े करूंगी. तुम्हारी बातों में आ कर अपना तन भी तुम्हें सौंप चुकी. अब मैं किसी अन्य व्यक्ति से शादी भी तो नहीं कर सकती. तुम अपने फेमिली वालों से मिलाओ मुझे. मैं उन्हें सारी बात बता कर शादी के लिए राजी कर लूंगी.’’

”मैं शादी के लिए मना नहीं कर रहा, जो तुम्हें मेरे परिवार से मिलना पड़े. वकील ने कहा है कि थोड़े दिनों में तलाक हो जाएगा. तब तक तुम्हें सब्र रखना होगा. पत्नी से तलाक मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा. तुम पढ़ीलिखी समझदार हो, फिर भी बेवजह शादी के लिए बहस कर कर रही हो. ठंडे दिमाग से सोचो, तब समझ में आ जाएगा कि मैं सही कह रहा हूं.’’ मानाराम ने उसे समझाया.

मुकेश कुमारी भी जानती थी कि जब तक मानाराम का पत्नी के साथ तलाक नहीं होगा, तब तक उन की शादी मान्य नहीं होगी. फिर भी वह उस पर शादी का दबाव डाल रही थी, ताकि वह उसे भूले नहीं. मुकेश कुमारी जिला झुंझुनंू की सूरजगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर खड़ेला, जिला सीकर में कार्यरत थी. मुकेश कुमारी तलाकशुदा थी. उस ने 2019 में पति से तलाक ले लिया था. तलाक के बाद खड़ेला में रह कर अपनी नौकरी कर रही थी. मुकेश कुमारी की शादी उस की इच्छा से नहीं हुई थी. इस कारण वह पति को पसंद नहीं करती थी. बस, इसी कारण उस ने पति से तलाक ले लिया था.

मुकेश कुमारी 2019 से 2024 तक अकेली रही तो उसे जीवनसाथी की जरूरत महसूस हुई. तब उस ने अगस्त 2024 में अखबार में विज्ञापन दिया कि तलाकशुदा हूं और आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हूं. तलाकशुदा सरकारी नौकरी वाले से शादी करना चाहती हूं. वैवाहिक विज्ञापन में मुकेश कुमारी ने अपने मोबाइल नंबर दे रखे थे. बाड़मेर जिले के चवा गांव निवासी मानाराम जो पेशे से सरकारी टीचर है, उस ने अखबार में विज्ञापन देख कर मुकेश कुमारी से संपर्क साधा.

उस ने मुकेश कुमारी से अक्तूबर, 2024 में मुलाकात की. दोनों ने एकदूसरे से बात की. मानाराम भी पहले से शादीशुदा था, उस के 2 बेटियां थीं, मगर पत्नी टीपू देवी से बनती नहीं थी. पत्नी उसे छोड़ कर मायके शिवकर जा कर रह रही थी. ऐसे में मानाराम ने पत्नी से तलाक का कोर्ट में मामला दाखिल कर दिया था. दोनों ही तलाक लेना चाहते थे. मानाराम अपनी पत्नी से 2013 से ही अलग रह रहा था. वह भी चाहता था कि उस की किसी तलाकशुदा हमउम्र महिला से शादी हो जाए तो उस की दोबारा गृहस्थी बस जाए.

ऐसे में मुकेश कुमारी का वैवाहिक विज्ञापन अखबार में देखा तो वह अपने को रोक नहीं पाया और मुकेश कुमारी से संपर्क साध कर उस से जा मिला. मानाराम जहां 38 साल का था, वहीं मुकेश कुमारी उस से एक साल छोटी थी. दोनों सरकारी नौकरी में थे. वह देखने में खूबसूरत थी. मुकेश कुमारी को मानाराम पसंद आ गया. मानाराम ने उसी समय बता दिया था कि पत्नी से तलाक के बाद ही वह उस से शादी करेगा. उस की बात से वह भी सहमत थी. दोनों ने एकदूसरे के फोन नंबर लिए और बातचीत करने लगे. सोशल मीडिया पर चैट करने लगे. आंगनवाड़ी में छुट्टी होती, तब मुकेश कुमारी खड़ेला से बाड़मेर चली जाती थी. मानाराम के परिवार के लोग चवा गांव में रहते थे.

मानाराम बाड़मेर शहर स्थित शिवनगर कालोनी में अपने घर में अकेला रहता था. वह बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में टीचर था. वह बाड़मेर से जसाई गांव रोजाना आनाजाना किया करता था. मुकेश कुमारी जब भी बाड़मेर मानाराम से मिलने आती थी, वह शिवनगर स्थित उस के घर पर उस के साथ में ही रुकती थी. दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे और शादी करने वाले थे. ऐसे में उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे. कभी मानाराम बाड़मेर से 600 किलोमीटर दूर खड़ेला, सीकर प्रेमिका से मिलने चला जाता तो कभीकभार मुकेश कुमारी बाड़मेर चली जाती थी.

दोनों के बीच बिना शादी किए संबंध बन गए तो थोड़े वक्त बाद वे खुल कर मिलने लगे और मौजमस्ती करने लगे. उन के लव अफेयर को 6 माह ही बीते थे कि मानाराम को प्रेमिका बासी लगने लगी. उस का मन भर गया. इस के बावजूद भी वह ‘शादी करूंगा’, कह कर मुकेश कुमारी के जिस्म से खेलता रहा. करीब 4 महीने पहले मुकेश कुमारी ने जब मानाराम पर शादी का दबाव डाला तो उस ने वही राग अलापा कि पत्नी से तलाक के बाद ही शादी करेगा. ऐसे में मुकेश कुमारी उस पर बिफर गई. उस ने धमकी दी कि अगर उस ने उस से शादी नहीं की तो अंजाम ठीक नहीं होगा.

मानाराम जानता था कि अगर मुकेश कुमारी ने उस पर रेप या यौन शोषण का केस कर दिया तो उस की सामाजिक प्रतिष्ठा एवं नौकरी चली जाएगी. तब उस ने उस से किनारा करना शुरू कर दिया. मगर मुकेश कुमारी उस का पीछा छोडऩे वाली नहीं थी. मानाराम ने उस के फोन नंबर ब्लौक कर दिए तो वह दूसरे नंबर से फोन कर उसे धमकाती थी. उस का कहना था कि उस ने उस पर विश्वास कर के उसे जिस्म सौंपा था. मेरे तन को भोग कर तुम मुझे छोड़ दो, यह मैं होने नहीं दूंगी. लिहाजा दोनों के बीच दूरियां बढऩे लगी थीं.

इस के बावजूद मुकेश कुमारी उस के पीछे पड़ी थी. उस ने एक ही रट लगा रखी थी कि मुझ से शादी करो. मानाराम तलाक होने के बाद शादी करने की बात कहता था. मानाराम के रूखे व्यवहार से मुकेश कुमारी को लगने लगा था कि वह शादी को जानबूझ कर टाल रहा है. उसे लग रहा था कि वह उस से शादी नहीं करेगा. मगर मुकेश कुमारी ने भी ठान लिया था कि वह मानाराम से शादी कर के ही दम लेगी. मानाराम की मजबूरी यह थी कि वह पत्नी से तलाक लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता था.

मुकेश कुमारी की जिद से मानाराम परेशान हो गया था. बस, इसी कारण उस ने कन्नी काटनी शुरू की थी. यह मुकेश कुमारी को अखर रहा था. उस ने इस बार निश्चय किया कि वह मानाराम के फेमिली वालों से मिल कर अपने और मानाराम के संबंधों के बारे में बता कर शादी की बात पक्की कर के ही लौटेगी. 10 सितंबर को मुकेश कुमारी खंडेला, सीकर से बाड़मेर पहुंची और प्रेमी मानाराम से मिली. उस से शादी की बात की. वह 4 दिन बाड़मेर में प्रेमी के साथ रही. दोनों में संबंध भी बने.

14 सितंबर, 2025 की शाम को मुकेश कुमारी अपनी आल्टो कार ले कर बाड़मेर से मानाराम के गांव चवा पहुंच गई. उस ने मानाराम से कहा कि वह उसे अपने फेमिली वालों से मिलाए, उन से उसे शादी की बात पक्की करनी है. मानाराम ने फेमिली वालों से मिलाने से मना कर दिया तो मुकेश कुमारी गुस्से में लालपीली पुलिस चौकी चवा पहुंची. उस ने गांव चवा के रहने वाले प्रेमी टीचर मानाराम निवासी पर आरोप लगाया कि उस ने उसे शादी का झांसा दिया है. अब अपने परिवार से मुझे मिला नहीं रहा है. इस पर चौकी इंचार्ज ने फोन कर मानाराम को पुलिस चौकी बुलाया.

मानाराम पुलिस चौकी पहुंचा. उस ने पुलिस से कहा, ”मेरा तलाक का प्रोसेस चल रहा है. अभी परिवार से नहीं मिला सकता हूं. पत्नी से तलाक के बाद मैं मुकेश कुमारी से शादी कर लूंगा.’’

चौकी इंचार्ज एवं अन्य ने भी मानाराम की बात को सही ठहराया. ऐसे में मुकेश कुमारी बिना कोई परिवाद या शिकायत दर्ज करवाए पुलिस चौकी से मानाराम के साथ निकल गई. दोनों गांव चवा से शिवनगर, बाड़मेर मानाराम के घर पर आ गए. मुकेश कुमारी बिना बताए मानाराम के गांव चवा भी गई थी. वह पुलिस चौकी भी शादी का दबाव डलवाने पहुंच गई थी. इस बात से मानाराम खफा था. उस ने उसे घर पर ला कर समझाया, मगर मुकेश कुमारी इस बात से नाराज थी कि उस ने अपने फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलाया. उस की सोच थी कि मानाराम उस से शादी नहीं करना चाहता.

इस पर मानाराम ने कहा, ”तुम मुझे बिना बताए मेरे गांव चवा क्यों गई थी? मैं शादी से मना करता तो गांव जा कर फेमिली वालों से मिलती, मगर तुम पर तो जैसे भूत सवार है. पढ़ीलिखी हो कर भी मेरी मजबूरी नहीं समझ रही. कैसी महिला हो?’’

”मैं सब समझती हूं, मगर फेमिली वालों से क्यों नहीं मिलने दिया. तुम्हारे दिल में जरूर कोई खोट है.’’ प्रेमिका ने जवाब में कहा.

तब मानाराम ने उसे समझाबुझा कर शांत किया. रात साथ में बिताई. अगले रोज 15 सितंबर, 2025 को अलसुबह मानाराम का मुकेश कुमारी से फिर शादी को ले कर झगड़ा हुआ. झगड़ा इतना बढ़ गया कि मानाराम ने घर में रखा लोहे का मोटा सरिया उठा कर मुकेश कुमारी के सिर पर दनादन कई वार कर दिए. मुकेश कुमारी के सिर से खून का फव्वारा बह निकला. थोड़ी देर तड़प कर वह मर गई. मुकेश कुमारी की लाश देख कर वह डर गया.

उसे जेल की सींखचे नजर आने लगीं. उस ने प्लान बनाया कि अब शव को ठिकाने लगा दूं, ताकि जेल जाने से बच जाए. उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी का शव उठा कर घर के बाहर खड़ी मृतका की आल्टो कार में ड्राइविंग सीट पर रखा और गाड़ी का दरवाजा बंद कर गाड़ी को धक्का मार कर सड़क से नीचे उतार दी. मानाराम को कार चलानी नहीं आती थी, इस कारण वह शव को दूर नहीं ले जा सका. गाड़ी को सड़क से उतार कर वह वापस घर पर आया. उस का शरीर डर के मारे थरथर कांप रहा था. उसे कुछ भी सूझ नहीं रहा था. तब उसे खयाल आया कि वकील से सलाह लूं.

सुबह पौने 7 बजे वकील को मानाराम ने कौल कर कहा, ”वकील साहब, मेरे हाथ एक महिला का मर्डर हो गया है. अब आप ही राय दें कि क्या करूं.’’

सुन कर वकील ने कहा, ”पुलिस के सामने सरेंडर कर दो. मैं पुलिस को घटना की खबर देता हूं.’’

कहने के साथ वकील ने सोमवार, 15 सितंबर की सुबह साढ़े 7 बजे फोन द्वारा थाना रीको बाड़मेर में अपने परिचय के साथ घटना की खबर देते हुए कहा, ”सर, शिवनगर कालोनी में मुकेश कुमारी नामक महिला का मर्डर हुआ है. मृतका का शव आल्टो कार में पड़ा है. यह हत्या सरकारी टीचर मानाराम जाट ने की है. आप जल्दी घटनास्थल पर पहुंच जाइए.’’

सुबहसवेरे महिला की हत्या की खबर पा कर एसएचओ मनोज कुमार सामरिया पुलिस बल के साथ 15 मिनट में घटनास्थल पर जा पहुंचे. सड़क पर आल्टो कार में ड्राइवर की सीट पर एक महिला का खून सना शव पड़ा था. घटनास्थल पर मृतका का मोबाइल भी था. एसएचओ मनोज कुमार सामरिया ने घटना की खबर उच्चाधिकारियों को दी. खबर पा कर सीओ (सिटी) रमेश कुमार, एएसपी जसाराम बोस, एसपी नरेंद्र सिंह मीणा थोड़ी देर में घटनास्थल पर पहुंचे. एफएसएल एवं एमओबी टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं और सुबूत इकट्ठा किए. पुलिस ने घटनास्थल का मौकामुआयना किया.

शव देख कर लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के शव को ड्राइवर की सीट पर रखा गया था. पुलिस को गाड़ी के पास खून के धब्बे मिले. तब पुलिस पास में मानाराम के घर गई. घर में भी खून दिखाई दिया. पुलिस को समझते देर न लगी कि हत्या घर में की गई थी, बाद में शव को गाड़ी में ले जा कर रखा गया था. गाड़ी को सड़क से नीचे उतारा गया था, ताकि मामला एक्सीडेंट का लगे. पुलिस ने मौके की काररवाई निबटा कर शव बाड़मेर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया.

मृतका के बारे में सामने आया कि उस का नाम मुकेश कुमारी था. वह झुंझुनंू जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत आने वाले गांव काशनी की रहने वाली थी. वह तलाकशुदा थी और खड़ेला जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थी. वह अपने प्रेमी टीचर मानाराम से मिलने बाड़मेर 10 सितंबर को आल्टो कार ले कर आई थी. पता चला कि वह प्रेमी टीचर पर शादी का दबाव बना रही थी. पुलिस ने झुंझुनंू एसपी औफिस में संपर्क कर घटना की खबर मृतका के परिजनों को दी.

मुकेश कुमारी की हत्या की खबर मिलते ही काशनी गांव में मातम छा गया. मृतका के घर में रुदन शुरू हो गया. मृतका के भाई अन्य परिजनों के साथ बाड़मेर के लिए रवाना हो गए. 600 किलोमीटर दूर बाड़मेर था तो उन्हें आने में समय लगना था. रीको थाना पुलिस ने आरोपी टीचर मानाराम को 15 सितंबर, 2025 को डिटेन कर लिया था. उस ने पुलिस पूछताछ में गर्लफ्रेंड मुकेश कुमारी की हत्या करने का गुनाह कुबूल कर लिया था.

16 सितंबर, 2025 को मृतका के फेमिली वाले बाड़मेर पहुंचे और एसएचओ मनोज कुमार से मिले. एसएचओ उन्हें घटनास्थल पर ले गए और मौका दिखाया. मृतका का शव मोर्चरी में देख कर उस के भाई धर्मपाल एवं सुरेंद्र रो पड़े. 16 सितंबर, 2025 को धर्मपाल निवासी गांव काशनी, थाना सूरजगढ़, जिला झुंझुनू ने अपनी छोटी बहन मुकेश कुमारी जाट की हत्या की रिपोर्ट टीचर मानाराम जाट निवासी चवा के खिलाफ दर्ज कराई. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी मानाराम को गिरफ्तार कर लिया. मृतका के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया. पोस्टमार्टम के बाद शव उस के फेमिली वालों को सौंप दिया गया. वह उसे गांव काशनी ले गए और वहां अंतिम संस्कार कर दिया.

आरोपी टीचर मानाराम को 17 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश कर पुलिस रिमांड पर मांगा. मजिस्ट्रैट ने आरोपी को 2 दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया. रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने आरोपी से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

राजस्थान के बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर एक गांव चवा आता है. सदर थाना बाड़मेर के अंतर्गत आने वाले इस गांव में किरताराम जाट अपने परिवार के साथ रहते हैं. खेतीकिसानी कर के किरताराम ने अपने बेटे मानाराम को खूब पढ़ाया. इसी का परिणाम था कि पढ़लिख कर वह टीचर बन गया. सरकारी टीचर की नौकरी मिली तो शादी के लिए रिश्ते आने लगे. 2008 में मानाराम की शादी बाड़मेर जिले के शिवकर गांव की टीकू देवी के साथ कर दी गई. शादी के बाद सुहागरात पर मानाराम ने नई दुलहन टीकू को देखा तो उसे गहरा आघात लगा. जैसी सुंदर पत्नी उसे चाहिए थी, वैसी टीकू नहीं थी.

मानाराम मन मसोस कर रह गया. टीकू से वह शादी तो कर चुका था, ऐसे में उसे निभाना तो था ही. मानाराम को टीकू से 2 बेटियां हुईं, जो इस समय 16 साल एवं 14 साल की हैं. बेटियों के जन्म के बाद पतिपत्नी में मनमुटाव बढ़ गया. मानाराम अपनी पत्नी को ज्यादा महत्त्व नहीं देता था. वह बातबात पर उसे ताने मारता था. उस के रंगरूप को ले कर तंज कसता था. दोनों में मनमुटाव इतना बढ़ा कि 2013 में टीकू अपने मायके शिवकर गांव जा बैठी. मानाराम ने पत्नी की तरफ मुड़ कर नहीं देखा. टीकू भी पति को मन से निकाल चुकी थी. सामाजिक पंचायत भी हुई, मगर दोनों के दिल नहीं मिले. दोनों ने अलग रहना ठीक समझा.

टीकू मायके में रह रही थी. मानाराम की इच्छा थी कि वह दोबारा शादी कर ले. मगर पहली पत्नी टीकू से जब तक तलाक नहीं होता, तब तक शादी करना संभव नहीं था. मानाराम ने फेमिली कोर्ट में टीकू से तलाक का केस दायर कर दिया. तलाक का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. मानाराम की ड्यूटी बाड़मेर शहर से 10 किलोमीटर दूर जसाई गांव के स्कूल में थी. वह बाड़मेर से जसाई आनाजाना करता था.

झुंझुनूं जिले के थाना सूरजगढ़ के अंतर्गत एक गांव काशनी आता है. काशनी गांव में लिखमाराम जाट अपने परिवार के साथ रहता था. वह सेना से रिटायर थे, उन के 8 बच्चे थे. मुकेश कुमारी 8 भाईबहनों में सातवें नंबर की थी. सभी भाईबहनों मे मुकेश कुमारी होशियार थी. काशनी गांव से उस ने आठवीं तक पढ़ाई की. इस के बाद उसे पढऩे के लिए शहर भेज दिया. पढ़ाई के दौरान ही मुकेश कुमारी का चयन राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद पर हो गया. बेटी की नौकरी लगने से पेरेंट्स बहुत खुश थे. उन्होंने उस के योग्य घरवर की खोज शुरू की.

मुकेश कुमारी की 9 जुलाई, 2011 को पिलानी थाना क्षेत्र के लिखवा गांव निवासी विकास जाट से शादी कर दी गई. शादी के बाद मुकेश कुमारी ससुराल गई तो उसे ससुराल पसंद नहीं आई. उसे पति विकास भी पसंद नहीं आया. बेटी की शादी के 3 साल बाद 2014 में हार्ट अटैक से लिखमाराम की मौत हो गई. जैसा जीवनसाथी मुकेश को चाहिए था, वैसा विकास नहीं था. मुकेश कुमारी अपनी ड्यूटी पर रहती थी. वह ससुराल नहीं जाती थी. विकास शादी कर के भी कुंवारा था. वह पत्नी को घर ले जाना चाहता था, मगर वह राजी नहीं थी.

एक दिन मुकेश ने पति विकास से कहा, ”मैं ने परिवार वालों का मन रखने के लिए तुम से शादी की थी. मगर अब मैं तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहती.’’

विकास ने उसे समझाया. मगर वह नहीं मानी. मुकेश कुमारी का पुलिस की नौकरी से मन भर गया था. उस ने आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर पद के लिए आवेदन किया. वहां उस का चयन हो गया, तब उस ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और खड़ेला, जिला सीकर में आंगनवाड़ी में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगी. मुकेश कुमारी ने पति विकास से 2019 में तलाक ले लिया. अब वह खड़ेला में रहने लगी. पति से तलाक के बाद मुकेश कुमारी को एक अच्छे जीवनसाथी की जरूरत महसूस होने लगी थी. ऐसे में वर्ष 2024 के अगस्त महीने में उस ने अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया कि तलाकशुदा महिला को तलाकशुदा सरकारी नौकरी करने वाला हमउम्र जीवनसाथी चाहिए.

इस वैवाहिक विज्ञापन को टीचर मानाराम जाट ने देखा. उस ने दिए गए फोन नंबर पर मुकेश कुमारी से संपर्क किया. मुकेश कुमारी के पास कई लोगों के फोन आए थे, मगर उसे पसंद आया मानाराम. वह सरकारी टीचर था. दोनों की उम्र भी बराबर थी. इस तरह दोनों बेहद करीब आ गए. मानाराम ने गत 3-4 महीने से मुकेश कुमारी को साइड में करना शुरू कर दिया था. मगर मुकेश कुमारी उसे किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी. 15 सितंबर, 2025 की अलसुबह दोनों में शादी की बात पर फिर से झगड़ा हुआ. मानाराम को प्रेमिका पर इतना गुस्सा आया कि उस ने प्रेमिका मुकेश कुमारी पर मोटे सरिए से कई वार कर हत्या कर दी.

रिमांड अवधि पूरी होने पर 19 सितंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपी मानाराम को फिर से कोर्ट में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया और थाने ला कर पूछताछ की. आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का सरिया बरामद कर लिया. आरोपी की निशानदेही पर पर खून से सनी निवार एवं बिस्तर के जले टुकड़े भी बरामद किए. पुलिस ने 20 सितंबर, 2025 को उसे न्यायिक मजिस्ट्रैट बाड़मेर के समक्ष पेश किया, जहां से उसे बाड़मेर जेल भेजने का आदेश दिया गया. Love Story

 

 

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