True Crime Story: रूपम पाठक ने यौनशोषण करने वाले एक आरोपी विधायक राजकिशोर केसरी को खुद मौत के घाट उतार दिया था. जबकि दूसरे आरोपी विपिन राय को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुना दी है.

10 मार्च, 2016 को बिहार के पूर्णिया जिले के अपर सत्र न्यायाधीश (तृतीय) मोहम्मद एजाउद्दीन की अदालत खचाखच भरी थी. इस की वजह यह थी कि उस दिन बहुचर्चित रूपम पाठक यौनशोषण कांड का फैसला सुनाया जाना था. इस केस में भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी और उन का सहायक विपिन राय आरोपी थे. इसलिए वकीलों के अलावा अन्य तमाम लोग उस दिन अदालत में पहुंच कर माननीय न्यायाधीश द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे.

मामले में विधायक के फंसने के बाद दूसरी पार्टियों के नेताओं ने इसे बहुत तूल दिया था. इस केस के सहारे वे अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे थे. बाद में इस केस में कई उतारचढ़ाव आए. यह पूरा मामला क्या था और विधायक राजकिशोर केसरी इस केस में कैसे फंसे, जानने के लिए हमें अतीत में जाना होगा. दरअसल, रूपम अपने पति और 2 बच्चों के साथ इंफाल में रहती थी. सन 2006 में वह अपने पति अशोक पाठक और बच्चों के साथ बिहार के पूर्णिया शहर आ गई और शहर के ओली टोला में राजहंस पब्लिक स्कूल खोल लिया.

सन 2007 में स्कूल के सालाना जलसे में उस ने चीफ गेस्ट के रूप में पूर्णिया के विधायक राजकिशोर केसरी को बुलाया. वहीं से रूपम और विधायक की जानपहचान बढ़ी. विधायक के साथ उन का सहायक विपिन राय भी जलसे में पहुंचा था. जलसे में विधायक ने स्कूल के विकास के लिए विधायक फंड से रकम देने का ऐलान किया था. रूपम राजकिशोर के उसी झांसे में फंस गई थी. उसे यह लालच हो गया कि विधायक की मदद से वह अपने स्कूल की काफी तरक्की कर सकती है, जिस से उस की आमदनी में काफी इजाफा हो जाएगा. जलसा खत्म होने के कुछ दिनों बाद जब रूपम विधायक से रुपए पाने के लालच में उन के मधुबनी वाले घर पहुंची तो वहां मौजूद उस के सहायक विपिन से उस ने बात की.

विपिन ने रूपम के सामने पेशकश रखी कि यदि उसे स्कूल के लिए आर्थिक मदद चाहिए तो उसे विधायक के साथ बिस्तर पर जाना होगा. रूपम ने मना किया तो विपिन ने उसे जबरन विधायक के कमरे में धकेल कर दरवाजा बंद कर दिया. कमरे में पहले से मौजूद विधायक ने रुपए देने के बहाने उस के साथ बलात्कार किया. इतना ही नहीं, जब वह विधायक के कमरे से निकली तो विपिन ने भी डराधमका कर उस के साथ मनमानी की. उस के बाद विपिन जबतब रूपम के घर पहुंचने लगा और उसे ब्लैकमेल करने लगा.

वह रूपम से कहता था कि जैसा वह कहता है, करती रहे नहीं तो सारे शहर में उस की बदनामी करा देगा. इसी डर से रूपम कई सालों तक उन दोनों के शोषण का शिकार होती रही. फिर हिम्मत जुटा कर रूपम ने 18 अप्रैल, 2009 को विधायक राजकिशोर केसरी और उन के सहयोगी विपिन राय पर पिछले 3 सालों से दुराचार करने का आरोप लगाया. रूपम ने इस की शिकायत तत्कालीन एसपी से की थी. शिकायत के आधार पर पूर्णिया के केहाट थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में धारा-164 के तहत 18 जून, 2010 को रूपम का बयान रिकौर्ड कराया तो रूपम एफआईआर में लगाए गए आरोपों से पलट गई. इस का लाभ विधायक को मिला.

फिर एसपी ने इस मामले की जांच कराई और विधायक पर लगाए गए आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए 7 सितंबर, 2010 को सीजेएम कोर्ट में अपनी ओर से आखिरी रिपोर्ट फाइल करते हुए जांच को बंद कर दिया. इस के 10 दिनों बाद 16 सितंबर, 2010 को रूपम ने उसी कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर किया, जिस में उस ने 18 जून, 2010 को धारा-164 के तहत दिए बयान को दबाव में दिया गया बयान बताया. कोर्ट ने उस की पिटीशन मंजूर कर के सुनवाई के लिए 25 मार्च, 2011 की तारीख निश्चित कर दी.

इस के बाद इस केस में नया मोड़ तब आया, जब रूपम ने दिनदहाड़े विधायक राजकिशोर केसरी की चाकू मार कर हत्या कर दी. बात 4 जनवरी, 2011 की सुबह करीब सवा 9 बजे के आसपास की है. विधायक राजकिशोर केसरी अपने समर्थकों से अपने ही घर में बातचीत कर रहे थे. उसी दौरान शाल लपेटे रूपम वहां पहुंची. वह विधायक से बोली कि उसे उन से कुछ खास बात करनी है. विधायक ने सोचा कि शायद केस के बारे में कुछ बात करने आई होगी. इसलिए वह अपने समर्थकों के बीच से उठ कर उस के साथ किनारे की ओर बढ़ने लगे.

कुछ आगे बढ़ने के बाद रूपम ने अपना शाल हटाया और दनादन चाकू से विधायक के पेट पर वार करने लगी. खून से लथपथ विधायक घायल हो कर जमीन पर गिर पड़े. आननफानन में उन के समर्थक उन्हें उठा कर सदर अस्पताल ले गए, लेकिन इलाज के दौरान सवा 10 बजे के करीब उन की मौत हो गई. विधायक के घर में घुस कर सुरक्षागार्डों और उन के समर्थकों के बीच रूपम ने उन की हत्या कर दी. रूपम जैसी पढ़ीलिखी महिला ने विधायक की हत्या कर जीवन भर जेल की सलाखों के पीछे रहने का फैसला आखिर क्यों किया? इस राज का खुलासा पुलिस और अदालत की काररवाई के दौरान हुआ.

पुलिस ने विधायक की हत्या के आरोप में रूपम पाठक को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. रूपम ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा था कि वह विधायक के खिलाफ ठीक से कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती थी. उसे इस बात की आशंका थी कि विधायक की दबंगई की वजह से उसे न्याय नहीं मिल पाएगा, इसलिए उस ने खुद ही सजा देने का फैसला किया. जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, उस में बताया गया था कि हृदय से जुड़ी एब्डोमिनल एरोटा नस (महाधमनी) के कट जाने की वजह से विधायक की मौत हुई थी. राजकिशोर केसरी सन 2000 में पहली बार विधायक बने थे.

उस के बाद वह 4 बार पूर्णिया विधानसभा सीट से जीते थे. इस हत्याकांड से बिहार की सियासत में हलचल मच गई थी. उस समय राज्य में जदयू और भाजपा की सरकार थी. सरकार दोनों के बेहतर तालमेल के साथ चल रही थी. भाजपा विधायक पर जब रूपम ने दुराचार और 3 सालों तक यौनशोषण का आरोप लगाया था तो भाजपा की काफी फजीहत हुई थी. इस मामले की जांच के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता और उस समय के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी खुद 30 मई, 2010 को पूर्णिया गए थे. हर भाजपा नेता यही रट लगा रहा था कि रूपम ने विधायक केसरी पर मनगढं़त आरोप लगा कर उन की छवि को खराब करने की कोशिश की थी.

विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या के बाद अदालत ने रूपम के प्रोटेस्ट पिटीशन से विधायक का नाम हटा दिया. करीब एक साल तक चले गवाहों के बयान के बाद चीफ जुडीशियल मजिस्ट्रेट ने आरोपी विपिन राय के खिलाफ मामला संज्ञान में लिया. तब 19 मार्च, 2012 को विपिन राय ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. तब से ले कर इस केस की सुनवाई अदालत में होती रही. अपर सत्र न्यायाधीश (तृतीय) मोहम्मद एजाउद्दीन ने इस केस का फैसला 10 मार्च 2016 को सुनाने का दिन मुकर्रर किया. इसलिए फैसले को जानने के लिए तमाम लोग अदालत में पहुंच गए थे.

विपिन के वकील जनार्दन प्रसाद ने कोर्ट में यह दलील दी कि आरोपी की आयु का खयाल रखते हुए उस के अपराध पर सहानुभूति बरती जाए और कम से कम सजा दी जाए. वहीं पीडि़ता रूपम पाठक के वकील ने आरोपी विपिन को कठोरतम सजा देने की मांग की थी. दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायाधीश मोहम्मद एजाउद्दीन ने विपिन राय को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा के साथ 50 हजार रुपए का जुरमाना भी भरने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि जुरमाने की 80 फीसदी रकम पीडि़ता को दी जाए. उधर विधायक की हत्या के मामले में निचली अदालत ने रूपम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वह भी जेल की रोटियां तोड़ रही है. फिलहाल रूपम भागलपुर जेल में कैद है.

विधायक ने सैक्स के चक्कर में फंस कर अपनी जान गंवाई. अब विपिन की जवानी भी अंधेरी कालकोठरी में कटेगी. वहीं रुपयों के लालच में फंस कर रूपम ने इज्जत और आगे की जिंदगी दोनों बरबाद कर ली. राजकिशोर की हत्या के बाद उन का परिवार, विपिन के जेल जाने के बाद उस का परिवार और रूपम को उम्रकैद मिलने के बाद उस का परिवार भी घर पर सजा भुगतने को मजबूर है. यानी अविवेक में उठाए गए कदम का खामियाजा तीनों के परिवार भुगत रहे हैं. True Crime Story

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