Etah Crime Story: सुखबीर के शक्की स्वभाव की वजह से पहली पत्नी छोड़ कर चली गई तो उस ने दूसरी शादी कर ली. लेकिन वह अपने स्वभाव को नहीं बदल सका. इस के बाद उस ने जो कुछ किया, उस की वजह से अब वह जेल में है.
उत्तर प्रदेश के जिला एटा के कस्बा भरथरा के रहने वाले गयाप्रसाद के परिवार में पत्नी के अलावा एक ही बेटा था सुखबीर. उस के पास खेती की ठीकठाक जमीन तो थी ही, कस्बे में बढि़या पक्का मकान भी था. छोटा परिवार था, इसलिए हर तरह से सुखी था. सुखबीर पढ़ाई के साथसाथ खेती के कामों में पिता का हाथ जरूर बंटाता था, लेकिन उस की सोच कुछ और ही थी. वह उस छोटे से कस्बे से निकल कर किसी बड़े शहर में रहना चाहता था.
सुखबीर का एक दोस्त राजपाल दिल्ली की एक गारमेंट बनाने वाली कंपनी में नौकरी करता था. वह जब भी घर आता, उसे देख कर सुखबीर को लगता था कि वह उस से ज्यादा सुखी है. उसी की देखादेखी सुखबीर ने कस्बे के टेलर सुलतान की दुकान पर कपड़ों की सिलाई का काम सीखा और अच्छा कारीगर बनने के लिए घर में ही कपड़ों की सिलाई की दुकान खोल ली. सुखबीर शादी लायक हो गया था और कमाने भी लगा था. उस के लिए रिश्ते भी आने लगे थे. गयाप्रसाद ने एटा निवासी मोहर सिंह की बेटी महादेवी को पसंद कर के उस की शादी कर दी. इस बीच सुखबीर कस्बे वाली अपनी सिलाई की दुकान बंद कर के दिल्ली चला गया था. शादी के बाद वह महादेवी को भी दिल्ली ले आया. दिल्ली में वह नंदनगरी में किराए का कमरा ले कर रहता था.
महादेवी काफी खुशमिजाज और मिलनसार थी, इसलिए जल्दी ही आसपास रहने वाली औरतों से उस की दोस्ती हो गई. सुखबीर सुबह नौकरी पर जाता तो शाम को ही आता था. घर आ कर वह रोजाना महादेवी पूछता, ‘‘कोई आया तो नहीं था?’’
2-4 दिन तो महादेवी को उस का यह सवाल सामान्य लगा. लेकिन जब सुखबीर रोजाना और लगातार यही सवाल करने लगा तो उसे हैरानी हुई. आखिर उस ने पूछ ही लिया, ‘‘अपने यहां कोई आने वाला है क्या, जो आप रोजाना एक ही बात पूछते हैं?’’
‘‘नहीं, मेरा मतलब पड़ोसियों से है.’’ सुखबीर ने कहा, ‘‘कोई पड़ोसी तो अपने यहां नहीं आया था?’’
‘‘पड़ोसियों को कोई काम पड़ेगा तो आएंगे ही. मुझे भी कोई काम पड़ता है तो मैं भी उन के यहां जाती हूं.’’ महादेवी ने सहजभाव से कहा.
महादेवी का इतना कहना था कि सुखबीर ने लपक कर उस के बाल पकड़ कर खींचते हुए कहा, ‘‘खबरदार, ऐसी भूल आगे से कतई मत करना. किसी भी पड़ोसी से कोई मतलब मत रखना. तुम्हें जिस भी चीज की जरूरत हो, मुझ से कहना.’’
पति का यह रूप देख कर महादेवी सन्न रह गई. उसे लगा कि उस का पति शक्की है. उस दिन के बाद महादेवी ने खुद को कमरे में कैद कर लिया. लेकिन अगलबगल रहने वालों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए मौका मिलने पर वे उस के पास आ कर बैठ जाते थे. महादेवी उन्हें मना भी नहीं कर सकती थी. उस दिन महादेवी को डांट कर शक्की स्वभाव के सुखबीर को लगा कि उस ने सब ठीक कर दिया है. महादेवी अब कमरे के बाहर कदम नहीं रखेगी. वह कमरे से बाहर ही नहीं निकलेगी तो उस की दोस्ती किसी से नहीं होगी.
दरअसल, सुखबीर को इस बात का डर था कि मिलनेजुलने से कहीं महादेवी की किसी लड़के से आंख न लड़ जाए. अगर आंख लड़ गई तो वह उसे छोड़ कर उस लड़के के साथ चली जाएगी. तब वह घर वालों और समाज को क्या जवाब देगा. सुखबीर महादेवी पर अंकुश लगा कर यही सोच रहा था कि अब उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन जब एक दिन पड़ोसी बाल्टी ले कर पानी मांगने आ गया तो सुखबीर का खून खौल उठा. उस ने उसे धक्का देते हुए कहा, ‘‘हमारे घर नगरपालिका का नल लगा है क्या, जो पानी लेने चले आए. आज के बाद कभी इधर दिखाई दिए तो ठीक नहीं होगा.’’
महादेवी को यह बुरा तो बहुत लगा, लेकिन न वह कुछ कह सकती थी और न कुछ कर सकती थी. शक्की आदमी का क्या भरोसा, उसे ही कुछ कह दे. शक की वजह से उस ने उस की जिंदगी नरक कर दी है. उस के पास सिर्फ 2 ही काम थे, घर के काम करना और रात को पति को खुश करना. उस की अपनी न कोई इच्छा रह गई थी, न खुशी.
महादेवी ने फोन कर के पिता को सारी बातें बता दी थीं. मोहर सिंह ने आश्वासन दिया था कि वह जल्दी ही दिल्ली आ कर उसे लिवा लाएगा. लेकिन इसी बीच महादेवी की सास सुजाता बीमार पड़ी तो सुखबीर उसे मां की सेवा के लिए गांव छोड़ गया. महादेवी की सेवा से सुजाता जल्दी ही ठीक हो गई. बहू की सेवा से वह बहुत खुश थी. गयाप्रसाद भी बहू से खुश थे.
महादेवी के गांव जाने के बाद सुखबीर बेचैन रहने लगा था. उसे लगता था कि वह गांव के किसी लड़के से जरूर प्यार कर बैठेगी. अपने इसी शक की वजह से एक दिन वह नौकरी छोड़ कर गांव आ गया. घर आ कर जब उसे पता चला कि महादेवी गर्भवती है, तब उसे लगा कि यह बच्चा उस का नहीं, किसी और का है. इतना ही नहीं, उस ने महादेवी से पूछ भी लिया, ‘‘महादेवी, तुम्हारे गर्भ में किस का पाप पल रहा है?’’
महादेवी ने उसे तो भलाबुरा कहा ही, यह भी तय कर लिया कि अब वह किसी भी कीमत पर उस शक्की आदमी के साथ नहीं रहेगी. उस ने पिता को फोन कर के सारी बात बता कर साथ ले चलने को कहा.
मोहर सिंह अगले ही दिन आ गए. उन्होंने जब गयाप्रसाद तथा सुजाता को पूरी बात बताई तो वे हैरान रह गए. क्योंकि उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं था. मोहर सिंह ने जब इस बारे में सुखबीर से बात की तो उस ने कहा, ‘‘महादेवी का चरित्र ठीक नहीं है. उस के गर्भ में पल रहा बच्चा मेरा नहीं है.’’
गयाप्रसाद ने उसे बहुत डांटाफटकारा. लेकिन महादेवी ने तो पहले ही तय कर लिया था कि अब उसे वहां नहीं रहना, इसलिए गयाप्रसाद और सुजाता के रोकने के बावजूद वह पिता के साथ चली गई.
समय पर उसे बेटा पैदा हुआ. मोहर सिंह ने इस बात की सूचना गयाप्रसाद को दे दी. गयाप्रसाद ने सुखबीर से बेटे और बहू को लाने के लिए कहा, पर उस ने मना कर दिया और दिल्ली चला गया. गयाप्रसाद और सुजाता अकेले पड़ गए थे. बेटे की हरकतों से वे बीमार रहने लगे और कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई. मांबाप की मौत के बाद सुखबीर को भी लगने लगा कि वह एकदम अकेला पड़ गया है, इसलिए उसे दूसरा विवाह कर लेना चाहिए.
सुखबीर दिल्ली में जहां रहता था, वहां से कुछ दूरी पर सरवरी बेगम रहती थी. उस के कई रिश्तेदार सीमापुरी और नंदनगरी में रहते थे. उस ने गांव के कई लड़कों की शादी कराई थी. उस की उन लोगों से जानपहचान थी, जो बंगाल, बिहार और उड़ीसा से लड़कियां लाते थे और जरूरतमंदों से पैसे ले कर उन की शादियां करवा देते थे.
सुखबीर ने सरवरी से कहा, ‘‘मौसी, तुम मेरी भी शादी करा दो, जो पैसे लगेंगे, मैं दे दूंगा.’’
सरवरी उस के शक्की स्वभाव को जानती थी, इसलिए उस ने मना कर दिया. लेकिन सुखबीर उस के पीछे पड़ गया. उस ने वादा किया कि अब वह पहले जैसा नहीं करेगा. इस के बाद सरवरी ने उस से पैसे तैयार रखने को कह दिया.
कुछ दिनों बाद सरवरी ने बिहार की काजल से उस की शादी करवा दी. सुखबीर ने काजल के लिए जो रकम खर्च की थी, उस के हिसाब से काजल बहुत अच्छी थी. इस तरह एक बार फिर सुखबीर की गृहस्थी बस गई. कमरे पर आते ही सुखबीर ने काजल से साफ कह दिया कि उसे अपना कमरा छोड़ कर न तो आसपड़ोस में किसी के यहां जाना है और न अपने कमरे में किसी को आने देना है. दरवाजा बंद कर के चुपचाप अपने कमरे में रहना है.
कुछ दिनों बाद सुखबीर ने वह कमरा छोड़ दिया. इस की वजह यह थी कि कहीं काजल को किसी से उस के शक्की स्वभाव के बारे में पता न चल जाए. नई जगह सुखबीर को बनाबनाया खाना भी मिलने लगा और देहसुख भी. काजल गरीब परिवार से आई थी, उसे कमाने वाला पति मिल गया था, इसलिए वह बहुत खुश थी, लेकिन उस की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी. सुखबीर जब तक घर से बाहर रहता, यही सोचता रहता कि कहीं कोई काजल को बरगला कर उसे भगा न ले जाए. मोहल्ले के कई लड़के अभी कुंवारे थे.
घर आ कर सुखबीर काजल से रोजाना पूछता कि वह दिन भर क्या करती रही, कोई आया तो नहीं था, तुम किसी के यहां गई तो नहीं थी?’’
एक जैसे सवालों का रोजरोज जवाब देतेदेते एक दिन काजल को गुस्सा आ गया. उस ने कहा, ‘‘तुम्हें क्या लगता है, मैं दिन भर कमरे के अंदर सोती रहूंगी, पड़ोस में किसी से बात नहीं करूंगी?’’
‘‘इस का मतलब मेरे जाने के बाद तुम आसपड़ोस में जा कर आवारागर्दी करती हो?’’ कह कर सुखबीर उस की पिटाई करने लगा.
काजल यह सोच कर परेशान थी कि उस ने ऐसा क्या कह दिया, जो सुखबीर उस की पिटाई करने लगा. जब वह थक गया तो उसे समझाने लगा, ‘‘तुम्हें पता नहीं, यहां आसपड़ोस में सब लफंगे रहते हैं, इन से मिलनाजुलना ठीक नहीं है. बिना मतलब की बदनामी होगी.’’
काजल ने कहा तो कुछ नहीं, लेकिन उसे पता था कि आसपड़ोस में कोई लुच्चालफंगा नहीं रहता. सभी एकदूसरे के सुखदुख में काम आने वाले हैं. उस का पति ही शक्की है.
एक दिन काजल ने सुखबीर को खाना देते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे गांव का कोई राजपाल आया था. वह तुम्हारे बारे में पूछ रहा था.’’
‘‘तुम ने उसे बैठाया नहीं?’’
‘‘मैं उसे क्यों बैठाऊंगी,’’ काजल ने कहा.
‘‘अच्छा किया, वह अच्छा आदमी नहीं है.’’
राजपाल का इस तरह कमरे पर आना सुखबीर को अच्छा नहीं लगा. वह उस का दोस्त था और उसी के साथ नौकरी करता था. सुखबीर को वही दिल्ली लाया था. राजपाल की शादी नहीं हुई थी, इसलिए सुखबीर को उस से खतरा महसूस होता था. अगले दिन सुखबीर नौकरी पर जा रहा था तो राजपाल उसे रास्ते में मिल गया. उस ने कहा, ‘‘अच्छा हुआ सुखबीर तुम मिल गए. खुशी की बात है कि तुम ने शादी कर ली. इसी तरह मेरी भी कहीं करा दो.’’
सुखबीर ने 2-4 बातें कर के किसी तरह राजपाल से पीछा छुड़ाया. राजपाल भी वहीं रहता था, इसलिए अकसर दोनों की मुलाकात हो जाती थी. उसे देखते ही सुखबीर मुंह घुमा कर चला जाता था. एक दिन राजपाल ने उसे रोक कर पूछा, ‘‘क्या बात है सुखबीर, तुम मुझे देख कर मुंह क्यों घुमा लेते हो?’’
‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. सुबह मिलते हो तो ड्यूटी पर जाना होता है, शाम को थका होता हूं.’’ सुखबीर बहाना बना कर चलने लगा तो राजपाल ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘शादी की है, कम से कम एक दिन घर में दावत ही कर दो. मन बदल जाएगा, होटल का खाना खाखा कर जी ऊब गया है.’’
‘‘काजल किसी से मिलनाजुलना पसंद नहीं करती.’’ सुखबीर ने कहा.
राजपाल हैरानी से उसे देखता रह गया. उस दिन काजल ने उस से कितनी इज्जत के साथ बात की थी. उस ने सोचा कि किसी दिन वह काजल से अकेले में बात करेगा.
दूसरी ओर सुखबीर को लगा कि राजपाल काजल के पीछे पड़ गया है. घर पहुंचते ही उस ने काजल से पूछा, ‘‘मेरे जाने के बाद राजपाल आता है क्या?’’
‘‘हां, 2-3 बार तुम्हें पूछने आया था?’’ काजल ने कहा.
सुखबीर उस की पिटाई करते हुए बोला, ‘‘तुम ने बताया क्यों नहीं?’’
बिना मतलब की यह मारपीट काजल से सहन नहीं हुई. उस ने सुखबीर को धक्का दे कर कहा, ‘‘तुम्हारी पहली पत्नी तुम्हारे इसी व्यवहार से छोड़ कर चली गई. तुम मुझे खरीद कर लाए हो तो इस का मतलब यह नहीं कि मैं तुम्हारा हर अत्याचार सहती रहूंगी.’’
काजल के इस तरह डट कर खड़ी होने से सुखबीर को लगा कि यह भी किसी के बहकावे में आ गई है. जरूर कोई इसे फुसला रहा है. कहीं यह उसे जहर दे कर उस के साथ चली न जाए, वह रात भर इसी बात पर विचार करता रहा. अंत में उस ने तय किया कि काजल को ले कर वह भरथरा चला जाएगा और फिर से कपड़े सीने की अपनी दुकान खोल लेगा.
सुखबीर काजल को ले कर गांव आ गया और अपनी कपड़े सीने वाली दुकान खोल ली. वह कपड़े अच्छे सिलता था, इसलिए उस की दुकान चल निकली.
कुछ दिनों बाद राजपाल गांव आया तो उस से मिलने उस की दुकान पर जा पहुंचा. जब राजपाल ने उसे बताया कि वह भी नौकरी छोड़ कर गांव आ गया है तो वह सन्न रह गया. उसे लगा कि इस ने नौकरी काजल के लिए छोड़ी है. अब वह काजल और राजपाल पर नजर रखने लगा. कुछ दिनों बाद जब काजल ने बताया कि वह गर्भवती है तो सुखबीर को लगा कि काजल और राजपाल के जो नाजायज संबंध हैं, यह उसी का परिणाम है. इस की वजह यह थी कि सुखबीर के शक्की मिजाज से काजल परेशान थी. इधर कभीकभार वह राजपाल से मिलने लगी थी.
दरअसल गांव में वह सिर्फ राजपाल को ही जानती थी. वह जब भी उस से मिलती सुखबीर की शिकायत कर के किसी भी तरह उस से छुटकारा दिलाने को कहती. राजपाल अविवाहित था. उसे काजल से हमदर्दी थी. साथ ही लगाव भी हो गया था. इसलिए वह उसे मौका मिलने पर छुटकारा दिलाने का आश्वासन देता रहता था.
सुखबीर काजल और राजपाल पर नजर रख ही रहा था, इसलिए उसे इन के मिलनेजुलने की जानकारी हो गई. लेकिन उस ने कभी अपनी आंखों से दोनों को नहीं देखा था. फिर भी वह घर में ताला लगा कर दुकान पर जाने लगा. काजल एक तरह से कैदी बन कर रह गई थी. एक दिन सुखबीर ताला बंद करना भूल गया तो काजल ने मौका पा कर एक बच्चे को भेज कर राजपाल को बुलवा लिया. उस ने राजपाल से कहा कि वह अपने मांबाप के पास जाना चाहती है, इसलिए किसी तरह उस का यह संदेश उस के मांबाप तक भिजवा दे.
इसी बीच सुखबीर को याद आया कि वह घर खुला छोड़ आया है. ताला बंद करने वह घर पहुंचा तो उस ने राजपाल और काजल को बातें करते देख लिया. इस के बाद वह खुद को रोक नहीं पाया और डंडा ले कर राजपाल को दौड़ा लिया.
राजपाल जान बचा कर भागा. वह तो उस के हाथ नहीं लगा, लेकिन काजल फंस गई. पहले उस ने लोहे की रौड से उस की पिटाई की. वह बेहोश हो गई तो घर में सब्जी काटने वाली छुरी से उस पर कई वार कर दिए. थोड़ी देर में काजल मर गई. पड़ोसियों ने काजल की चीखें तो सुनी थीं, लेकिन कोई सुखबीर के मामले में पड़ना नहीं चाहता था, इसलिए कोई उसे बचाने घर के अंदर नहीं गया.
सुखबीर का गुस्सा शांत हुआ तो उसे जेल जाने का डर सताने लगा. उस ने फावड़े से गड्ढा खोद कर लाश को गाड़ दिया और घर में ताला लगा कर भाग निकला. पड़ोसियों ने सुबह सुखबीर के घर ताला लगा देखा तो पुलिस को सूचना दे दी. कोतवाली देहात के प्रभारी पदम सिंह पुलिस के साथ सुखबीर के घर पहुंचे तो अंदर की स्थिति देख कर हैरान रह गए. ताजी खुदी मिट्टी के बीच एक पैर दिखाई दे रहा था.
पदम सिंह ने मिट्टी हटवाई तो काजल की लाश बाहर आ गई. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज करा कर सुखबीर की तलाश शुरू कर दी.
पुलिस जानती थी कि सुखबीर दिल्ली भाग सकता है, इसलिए दिल्ली जाने वाले सभी रास्तों पर नाकाबंदी कर दी गई. आखिर सुखबीर एटा के बसअड्डे पर मिल गया. वह भाग इसलिए नहीं सका, क्योंकि उस के पास किराए के पैसे नहीं थे. उस ने सोचा था कि रात को घर जाएगा और चुपके से कुछ पैसे और सामान ले कर भाग जाएगा.
पूछताछ में उस ने काजल की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस का कहना था कि काजल एक चरित्रहीन औरत थी, इसलिए उस ने उसे मार दिया. पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया. अपने शक्की स्वभाव के कारण उस ने घर तो उजाड़ा ही, जिंदगी भी बरबाद कर ली. Etah Crime Story






