Revenge Crime Story. नीट क्वालीफाई करने के बाद साहिल की छोटी बहन 22 वर्षीय सना का एम्स में सिलेक्शन होने पर घर में सब खुश थे. इसी बीच कालेज जाते वक्त शहर के धनाढ्य परिवार के बिगड़ैल लड़कों ने सना का सिर्फ किडनैप किया, बल्कि 3 दिनों तक उस के साथ रेप कर के सड़क पर फेंक गए. इस से साहिल बुरी तरह टूट गया. इस के बाद साहिल ने उन सभी से एकएक कर ऐसा अनोखा बदला लिया कि

सुंदरपुर कोई बड़ा शहर नहीं था. यहां खबरें अखबार से पहले चाय की दुकानों पर पहुंचती थीं. यहां पुलिस स्टेशन से ज्यादा ताकत स्थानीय नेताओं और ठेकेदारों के पास थी. स्थानीय न्यूज चैनल की पत्रकार रूबी, जो जिले में भ्रष्टाचार पर बेबाक रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती थी, एक शाम स्टूडियो से लौटते वक्त लापता हो गई.

वह स्टूडियो से घर अपनी कार से लौट रही थी, तभी उस की कार को अचानक ओवरटेक कर के एक बाइक सवार ने रोका. उस ने कार का शीशा खोल दिया. इस से पहले कि वह कुछ समझ पाती, बाइक सवार ने उस के मुंह पर कपड़ा रख दिया. तेज बदबू महसूस हुई और फिर चक्कर से आने लगा. आंखों के सामने अंधेरा छा गया.

रूबी को होश आया तो वह एक कमरे में थी. सीमेंट की मजबूत दीवारें, एक छोटा सा रोशनदान और जमीन पर बिछा एक गद्ïदा. हाथपैर खुले थे, पर दरवाजा बाहर से बंद.

जब रूबी को होश आया तो उस के हाथ पीछे की ओर मुड़े हुए थे. कलाइयों पर रस्सी की खुरदुरी जलन साफ महसूस हो रही थी. तभी उसे समझ आया कि वह जमीन पर बैठी है, दीवार से पीठ टिकाए. मुंह में सूखापन था, जैसे किसी ने जबरदस्ती कुछ पिलाया हो.

यादों में धुंध थी. कमरे में उस की नजर घूमी. एक तरफ लकड़ी का दरवाजा, जिस पर शायद बाहर से ताला जड़ा था. सामने एक पुरानी कुरसी और छोटी सी मेज, जिस पर आधी भरी बोतल और गिलास रखा था. फर्श पर बिखरे कुछ कागज, शायद उसी के नोट्स थे, जैसे किसी ने जानबूझ कर गिराए हों, उसे जताने के लिए कि उसे यहां क्यों रखा गया है. रूबी की धड़कन तेज हो गई. यह सिर्फ अपहरण नहीं था, यह एक चेतावनी थी. पत्रकार होने की कीमत.

रूबी जानती थी, यही वह पल है, जहां एक कहानी खत्म नहीं, शुरू होती है. दरवाजा खुला. एक युवा से थोड़ी अधिक उम्र का व्यक्ति आया. लंबा कद, सादा कपड़े, आंखों में अजीब ठहराव. आवाज नरम थी. डराने वाली नहीं. ”डरिए मत, रूबी. आप को कोई नुकसान नहीं होगा.’’ वह चौंक गई, ”तुम  मेरा नाम कैसे जानते हो?’’ वह मुसकराया, ”मैं आप को रोज सुनता हूं. आप की आवाज बहुत सुकून देती है.’’ उस ने अपना नाम साहिल बताया.

उसी समय शहर में खलबली मची थी. पिछले एक साल में 3 लड़कियां लापता हो चुकी थीं. सभी पढ़ीलिखी और सामाजिक रूप से मुखर थीं. उन के परिवार से फिरौती भी नहीं मांगी गई थी, न किसी लापता महिला का कोई सुराग मिला और न ही किसी का कोई शव बरामद हुआ. पुलिस हर बार नाकाम रही और रूबी अब भी लापता थी.

साहिल दूसरे दिन आया. रूबी यह पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी कि उसे यहां किडनैप कर के क्यों रखा गया है. साहिल खाना देता, बातें करता. कभी रूबी की  रिकौर्डिंग्स चलाता. वह हिंसक नहीं था. न चीखता, न मारता. रूबी के मन में एक सवाल उगने लगा, क्या यही वह सीरियल किलर है?

एक दिन उस ने साहस कर के पूछा, ”तुम उन लड़कियों के बारे में जानते हो, जो लापता हैं?’’ साहिल की आंखें पहली बार झुकीं. ”हां. बहुत अच्छे से.’’ यह सुन कर रूबी के होश उड़ गए. दिल थरथर कांपने लगा. रूबी ने उस से अगला प्रश्न नहीं किया. साहिल चला गया. रूबी रात भर यही सोचती रही कि यहां मुझे किडनैप कर के क्यों लाया है?

सुबह जब आंखें खुलीं तो सूरज उस धुंधले रोशनदान से झांक रहा था. लग रहा था कि दोपहर करीब आ रही है. सुबह के 10 से ज्यादा बज चुके थे. उस रात साहिल फिर कमरे पर आया. अचानक बिजली चली गई. मोमबत्ती की रोशनी में साहिल का चेहरा सख्त हो गया. मेरी मां पर 2 साल पहले मुसीबत का पहाड़ टूटा था.

कैद अजीब चीज होती है. समय धीमा हो जाता है. डर के बीच आदत जन्म ले लेती है. रूबी ने पहली बार उसे एक सच्चे इंसान के रूप में देखा. लंबी बातचीत के बाद पता चला कि सुंदरपुर की व्यस्त गलियों में, जहां दिन की चहलपहल रात के सन्नाटे में बदल जाती है, वहां एक आदमी रहता था जिस का नाम था साहिल.

बाहर से देखने में एक सामान्य इंसान लगता था. वह एक सफल बिजनैसमैन था, जो दिन में अपना कारोबार संभालता, कारपोरेट मीटिंग्स अटेंड करता और रात में घर लौटता. लेकिन उस की आंखों में एक अजीब सी चमक थी, एक ऐसी चमक जो सिर्फ अंधेरे में ही नजर आती.

साहिल न शराबी था, न अपराधी जैसा. वह रोज अदालत की बातें करता. कैसे केस सालों चलते हैं, कैसे सबूत गायब होते हैं, कैसे ताकतवर बरी हो जाते हैं. गहरी सांस लेने के बाद साहिल बोला, ”मेरी मां भी केस हार गई थी.’’ रूबी ने पूछा, ”वो कैसे?’’

फिर उस ने एक गहरी सांस ली. उस के चेहरे के भाव बदलने लगे. वह बोला, ”2 साल पहले की बात है. मेरी छोटी बहन सना कालेज से घर लौटते समय गायब हो गई. पहले लगा कि कहीं सहेली के घर होगी. कौल किया तो फोन बंद आ रहा था. मेरी मां की चिंता उन के चेहरे से स्पष्ट दिखाई दे रही थी.

”मैं ने कई रिश्तेदारों को फोन कर के सना के बारे में पता किया. सभी से जवाब मिला कि सना यहां नहीं आई है. 3 दिनों बाद वह एक सुनसान इलाके में बेहोश मिली. सना कालेज से लौट रही थी. बस स्टैंड से थोड़ी दूर, उसी पुरानी सड़क पर, जहां आम के पेड़ छाया देते थे. एक पुरानी मारुति वैन रुकी. 3-4 आदमी उतरे. चेहरे ढंके हुए. कोई कुछ बोला नहीं. बस एक झटके से रुमाल उस की नाक की तरफ लहराया और सना की दुनिया अंधेरे में डूब गई.

”उसे कहीं दूर, जंगल के बीच एक पुरानी फैक्ट्री में ले जाया गया. फिरौती नहीं मांगी गई. न कोई फोन, न कोई मांग. सिर्फ एक ही बात बारबार दोहराई गई कि तेरी इस मस्त जवानी का जूस निचोडऩा है. ”हर बार वे हंसते, शराब पीते और सना को तोड़ते. उस के चीखने पर वे और जोर से हंसते. उस के रोने पर वे और ज्यादा क्रूर हो जाते. उस की चीखें जंगल में गूंजतीं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था.

”3 दिन बाद वे उसे सड़क किनारे फेंक गए. अधमरा, कपड़े फटे, शरीर पर निशान, आत्मा पर जख्म. घर लौटी तो मां ने उसे गले से लगा लिया. मैं रोया नहीं, क्योंकि समझ नहीं आया कि क्या हुआ है. सना कुछ नहीं बोली. बस कमरे में बंद हो गई. आईने में खुद को देखा और चीख उठी. वो सना नहीं रही थी. वह अब बस एक टूटी हुई धारा थी, जिस में पानी नहीं, सिर्फ खून और आंसू बह रहे थे. सना ने पूरी सच्चाई बताई. कहा कि भैया, वे लोग बहुत बड़े और खतरनाक हैं. उन से मत उलझना.

”पुलिस ने 2 दिन तक रिपोर्ट ही नहीं लिखी. तीसरे दिन रिपोर्ट लिखी गई, अगले दिन सना घर आ गई. पुलिस ने बयान लिए. उस ने पूरी घटना पुलिस को बताई. आरोपियों के नाम सामने आते ही केस की रफ्तार धीमी पड़ गई. वे लोग रसूखदार थे. एक बिल्डर का बेटा, एक नेता का भतीजा और पुलिस अधिकारी का बेटा. 2 और शहर के रसूखदारों के बेटे. सबूत गायब हो गए. गवाह मुकर गए और केस ‘अपर्याप्त साक्ष्य’ के कारण छूट गया.

सना ने जीने की कोशिश की, लेकिन समाज की तिरछी नजरें और भीतर का डर उसे हर दिन मारता रहा. ”वह खाती नहीं थी. सोती नहीं थी. बस दीवार से टिकी रहती, घुटनों में सिर दिए. मां जब पूछती कि बेटी, कुछ बोल तो. तो सना सिर्फ फीकी मुसकान दे देती और कहती कि मां, पानी पिलाओ न, बहुत प्यास लगी है.

”सातवें दिन सुबह सना नहाई. नई साड़ी पहनी. वही जो मां ने उस के जन्मदिन पर दी थी. बाल संवारे. काजल लगाया. दिन भर हंसीखुशी बिताया. खाना भी खाया और मां से खूब बातें भी कीं.

”रात को उस ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और अगली सुबह वह इस दुनिया में नहीं थी. पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी. उस दिन मेरे भीतर कुछ मर गया और कुछ ने जन्म भी ले लिया. सना की तसवीर मेरे दिमाग में घूम रही थी. उस की किताबों को तरकीब से संभाल कर रख रहा था, जिस से उस की निशानी किताबों के रूप में सलामत रहे.

”सना पढ़ाई कर के डौक्टर बनना चाहती थी. बीएससी का यह दूसरा ही सेमेस्टर था. बीएससी पूरी करने से पहले ही एमबीबीएस के लिए दिए गए नीट के एग्जाम को क्वालिफाइ कर लिया था. उस का नंबर दिल्ली के एम्स यानी औल इंडिया इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज में आ गया था. टीसी आदि कागजों का संकलन करने के लिए कालेज गई थी. किताबें रखते समय मेरा ध्यान उस की एक डायरी की तरफ गया, जिस का पर्चा मुड़ा हुआ था.’’ रुबी ने पूछा, ”फिर क्या हुआ?’’

साहिल का गला रुंध गया. आवाज भर्रा गई. उस ने अपने आप को कई मिनट तक संभालने की कोशिश की, फिर आगे बताया, ”उस की डायरी में लिखा था ‘मां, मेरा झरना सूख गया है. अब इस में पानी नहीं बचा. मुझे माफ कर देना. तेरी सना हमेशा तुझे प्यार करेगी. साहिल भैया का खयाल रखना. मुझे भूल जाना. भैया से भी कहना वह हमेशा के लिए इस घटना को भूल जाए.’ उस के बाद पूरी घटना भी लिखी थी, जो उस के साथ बीती थी.’’ यह सब सुन कर रूबी की आंखें भी नम हो गईं.

साहिल ने कानून की किताबें पढ़ीं, अपराधियों की फाइलें खंगालीं. गुंडों की पारिवारिक जानकारी एकत्र की. उसे समझ आ गया कि इस शहर में कई ‘सम्मानित’ चेहरे दरअसल गुनहगार हैं, जो सुंदर, असहाय और अनाथ लड़कियों का शोषण करते हैं और पैसे के बल पर सबूत मिटा देते हैं.

साहिल का पहला शिकार वही बिल्डर था, जिस का नाम था जगत सिंह. उस की जवान बेटी नीतू ट्यूशन से घर आ रही थी, लेकिन घर नहीं पहुंची और उस का कुछ पता भी नहीं चला. कैसे जमीन खा गई या आसमान निगल गया.

जगत सिंह की तड़प और भागदौड़ कोई काम नहीं आ रही थी. पुलिस के चक्कर लगातेलगाते जगत सिंह थक गया था. नीतू 19 साल की थी. वह जगत सिंह के बेटे राजू से छोटी थी. मोहल्ले में सब कहते थे कि राजू की बहन बहुत ज्यादा सुंदर है. शाम को ट्यूशन से लौटते वक्त हमेशा हेडफोन लगाए गाने सुनती रहती थी.

उस शाम 7 बजे थे. नीतू बस स्टैंड से उतरी. मोबाइल पर मां से बात कर रही थी. ”हां मां, बस 5 मिनट में घर पहुंच रही हूं.’’ उस के बाद वह आज तक घर वापस नहीं पहुंची. राजू के घर की हालत पल भर में बदल गई थी. वह पहली बार समझ रहा था कि किसी अपने के गायब होने का दर्द क्या होता है. इस बार दर्द सिर्फ एक घर में नहीं, एक इंसान के भीतर भी जाग रहा था.

राजू के भीतर अपराधबोध की आग जल रही थी. राजू ही था जिस ने सना की पहली रात ‘ओपनिंग’ की थी. उस की नई वाली सलवारकमीज को चाकू से काटा. यह सीन याद कर के राजू की अचानक चीख निकल गई, लेकिन उस की चीख को सुनने वाला कोई नहीं था. मां बेहोश पड़ी थी और पिता की आंखें पथरा गई थीं. दिमाग सुन्न पड़ा था.

अगले दिन रूबी ने साहिल से पूछा तो फिर नीतू का क्या हुआ? यह बाद में बताऊंगा पहले आप इंसपेक्टर की दास्तान सुनो, जिस ने कहा था कि सना बालिग है. किसी मनचले का दिल आ गया होगा. 1-2 दिन में आ जाएगी, क्यों ढोंग करते फिर रहे हो.

उस समय मेरी मां पर क्या बीत रही थी, यह मैं अच्छी तरह समझ रहा था. हम दोनों मांबेटे मुंह लटकाए थाने से वापस आ गए. इस के अलावा कोई चारा नहीं था.  इंसपेक्टर का नाम जगराम था. उस का बेटा जानू अपने भ्रष्ट पिता की कमाई से लग्जरी जीवन व्यतीत कर रहा था. धनदौलत भरपूर होने के कारण अय्याशी उस का शौक थी. जो भी लड़की उसे पसंद आ जाती, उसे वह अपनी हवस का शिकार बना कर ही छोड़ता था.

एक रात वह अपनी लग्जरी कार में मृत मिला. संघर्ष के कोई निशान नहीं. पुलिस विभाग में खलबली मच गई. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, लेकिन पोस्टमार्टम में भी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो सका. विसरा सुरक्षित कर उसे जांच के लिए भेजा गया.

गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस की 4 टीमें गठित की गईं. कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया. आसपास सीसीटीवी कैमरा की तलाश की गई. पुलिस को ऐसा कोई सीसीटीवी कैमरा हाथ नहीं आया, जिस में उस कार की फुटेज मिल सके.

कई महीने की गहन जांचपड़ताल के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची तो थकहार कर फाइल बंद कर दी गई. पुलिस हैरान थी. कातिल साफ बच निकला. न कोई फिंगरप्रिंट, न कोई कैमरा फुटेज. किसी भी घटना का कोई न कोई चिह्नï मिल जाता है, लेकिन इस का कोई सबूत नहीं मिला. साहिल ने कहा कि बस मैं इस हत्या का दोषी हूं और इस का किसी के पास कोई सबूत नहीं है. मैं कानून की नजर में बेगुनाह हंू.

लेकिन तुम्हें मैं ने यह अपराध बता दिया है और मैं तुम्हारी नजर में एक अपराधी हंू. शहर से 3 लड़कियां जो गायब हैं, मेरा अगला कदम इन को बरामद करा कर अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाना है. इस में आप की बहुत मदद की जरूरत है. इसलिए आप को यहां कैद कर के रखा गया है.

यह सुन कर रूबी की जान में जान आई. जैसे उसे ताकत की कोई बूस्टर डोज मिल गई हो. ”बताओ, मेरी क्या मदद चाहिए?’’

इसी शहर में एक नेता का भतीजा है, जिस ने सना की जिंदगी तबाह की थी. नेता सुखवीर कई बार एमएलए रह चुका था, लेकिन इस बार चुनाव हार गया था. उस के 2 बेटियां थीं. बेटा कोई नहीं था. उस ने अपने भतीजे करण को गोद ले रखा था. करण को वह अपने उत्तराधिकारी के रूप में विकसित करना चाहता था. ऊंची सोसाइटी कहे जाने वाले कल्चर में करण को ढाला जा रहा था.

सुखवीर को हमेशा लगता था कि राजनीति की विरासत संभालने के लिए एक ‘वारिस’ चाहिए. इसी वजह से उस ने अपने भतीजे करण को गोद ले लिया था. बचपन से ही करण को बड़े स्कूलों में पढ़ाया गया, बड़े लोगों की महफिलों में बैठना सिखाया गया और उसे यह समझाया गया कि एक दिन वही इस साम्राज्य का मालिक होगा.

लेकिन इस चमकदार परवरिश के पीछे करण का स्वभाव कुछ और ही बनता जा रहा था. उसे लगता था कि ताकत का मतलब है, किसी से कुछ भी करवा लेना. कानून और नैतिकता जैसे शब्द उस के लिए सिर्फ किताबों में लिखी बातें थीं. रूबी ने कहा, ”मुझे करना क्या है, वो बताओ.’’

पिछले दिनों शहर में अचानक हलचल मच गई थी. कालेज जाने वाली एक बेहद खूबसूरत लड़की अचानक गायब हो गई. परिवार ने हर जगह तलाश किया, थाने में रिपोर्ट लिखवाई, लेकिन पुलिस की काररवाई ढीली थी.

एक साल के भीतर यह तीसरी लड़की थी, जो इस शहर से लापता हो गई थी. 2 लड़कियां गायब हैं, उस में कोई अपराधी सामने तो नहीं आया, लेकिन उस में भी करण का हाथ हो सकता है.

बेटी के वियोग में कुछ महीने बाद साहिल की मां गुजर गई. अब साहिल दुनिया में अकेला था. उस ने तय किया कि इस बार वह सच सामने ला कर रहेगा. दिन में वह रोजाना के काम करता, लेकिन रात में शहर के अलगअलग कोनों में जा कर जानकारी जुटाता. कालेज के दोस्तों से बात करता, पुराने गार्डों से पूछताछ करता, वह करण के हर कदम पर नजर रखने लगा.

इधर शहर में माहौल गरम होता जा रहा था. कुछ समाजसेवी संगठन लड़की के समर्थन में आगे आए. शहर के एसएसपी के कार्यालय के बाहर धरना शुरू हो गया. मीडिया भी धीरेधीरे इस मामले की ओर ध्यान देने लगी. यह सब जो हो रहा है, मेरे प्लान का ही एक हिस्सा है. आंदोलनकारियों को भी पूरी सपोर्ट मेरे ही द्वारा दी जा रही है.

सुखवीर सिंह को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था. उस के बंगले के भीतर कई बंद दरवाजों के पीछे मीटिंग्स हो रही थीं. वह बारबार यही कहता, ”यह सब राजनीति है, मेरे परिवार को बदनाम करने की साजिश.’’

लेकिन साहिल हार मानने वालों में से नहीं था. उसे कुछ छोटेछोटे सुराग मिल चुके थे. एक सुनसान बंद फैक्ट्री, कुछ संदिग्ध गाडिय़ों की आवाजाही, उस के सामने रास्ता कठिन था. सामने था सत्ता का अहंकार और पीछे था उस की बहन का टूटा हुआ जीवन.

साहिल बोला, ”मैं असली कातिल तक पहुंचना चाहता हूं, लेकिन अकेला नहीं कर सकता. मुझे तुम्हारी मदद चाहिए.’’ रूबी ने तीखी नजरों से उसे देखा, ”तो इस के लिए किडनैप करना जरूरी था?’’ साहिल ने हलकी मुसकान के साथ कहा, ”तुम मना कर देती.’’

अगले 2 दिन में रूबी को समझ आ गया कि साहिल सच बोल रहा है. रूबी को साहिल अपने घर ले गया. यहां से दोनों के दिलों में एकदूसरे के लिए प्यार के अंकुर फूट चुके थे. उस ने कमरे की दीवारों पर अखबारों की कटिंग लगा रखी थीं. गायब हुई लड़कियों की तसवीरें, तारीखें, जगहें, सब कुछ.

साहिल ने कहा, ”ये तीनों लड़कियां अभी जिंदा हैं, मुझे यकीन है.’’ धीरेधीरे दोनों साथ काम करने लगे. रातों को नक्शे बनाते. सुराग जोड़े जाते. कभीकभी बहस भी हो जाती. एक रात रूबी ने कहा, ”तुम्हें पता है तुम बहुत जिद्ïदी हो.’’ साहिल हंस पड़ा, ”…और तुम बहुत बहादुर.’’ कुछ देर बाद साहिल गंभीर हो गया, ”अगर तुम्हें कुछ हो गया तो?’’ रूबी ने उस की आंखों में देखते हुए कहा, ”पत्रकार डरने लगे तो सच कौन बताएगा?’’

उस पल पहली बार साहिल को एहसास हुआ कि वह रूबी की परवाह करने लगा है. जांच करतेकरते दोनों को पता चला कि शहर के बाहर एक बंद पड़ी फैक्ट्री में कुछ संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं. रूबी ने धीरे से कहा, ”यहीं हो सकती हैं वो तीनों लड़कियां.’’

साहिल की मुट्ठी भिंच गई. रात के करीब 2 बजे थे. शहर के बाहर पुरानी कैमिकल फैक्ट्री खंडहर जैसी दिख रही थी. चारों तरफ झाडिय़ां उगी थीं और टूटी दीवारों के बीच से ठंडी हवा सीटी बजाती हुई गुजर रही थी.

साहिल और रूबी कार से कुछ दूर पहले ही उतर गए. रूबी ने धीरे से पूछा, ”तुम्हें पूरा यकीन है कि वे यहीं हैं?’’ साहिल ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला. स्क्रीन पर एक लोकेशन खुली थी. ”मैं ने उन लोगों की गाड़ी का नंबर नोट किया था. उसी गाड़ी को आज शाम यहीं आते देखा है.’’ रूबी ने गहरी सांस ली, ”तो आज या तो सच मिलेगा या हम मुसीबत में पड़ जाएंगे.’’ साहिल हलका सा मुसकराया, ”डर लग रहा है?’’ रूबी ने उस की तरफ देखा, ”डर तो लग रहा है, लेकिन उन लड़कियों के बारे में सोच कर हिम्मत भी आ रही है.’’

दोनों टूटी हुई दीवार फांद कर अंदर पहुंचे. फैक्ट्री का बड़ा हौल अंधेरे में डूबा हुआ था. दूर एक कमरे में हलकी पीली रोशनी जल रही थी. अचानक साहिल ने रूबी का हाथ पकड़ लिया. ”रुको.’’ 2 आदमी सिगरेट पीते हुए बाहर निकले. रूबी ने तुरंत एक आइडिया दिया, ”सुनो, मैं पीछे की तरफ जा कर खिड़की से अंदर देखती हूं. तुम सामने वालों पर नजर रखो.’’

कुछ पल साहिल चुप रहा, फिर सिर हिलाया, ”ठीक है, लेकिन सावधान रहना.’’ साहिल ने फैक्ट्री के बाहर पड़ा एक लोहे का ड्रम जोर से लुढ़का दिया. धड़ाम की आवाज सुन कर दोनों गुंडे चौंक गए. ”कौन है?’’ वे टौर्च ले कर आवाज की तरफ भागे.

उधर पीछे की दीवार के पास रूबी धीरे से खिड़की तक पहुंच गई. उस ने अंदर झांका और उस की सांस अटक गई. कमरे के कोने में 3 लड़कियां बंधी हुई थीं. उन के हाथ रस्सी से बंधे थे और मुंह पर कपड़ा था. रूबी ने तुरंत साहिल को मैसेज किया, ‘तीनों यहीं हैं.’

साहिल चुपके से वापस आया और खिड़की के पास पहुंच गया.

देखा, साहिल ने धीरे से खिड़की का शीशा तोड़ा और अंदर कूद गया. रूबी भी पीछे से अंदर आ गई. पहली लड़की ने उन्हें देखते ही रोते हुए सिर हिलाया. साहिल ने जल्दी से रस्सियां खोलनी शुरू कर दीं.

”डरो मत, हम तुम्हें बचाने आए हैं.’’ रूबी ने उन के मुंह से कपड़ा हटाया. तभी बाहर से कदमों की आवाज आई. ”अरे, दरवाजा खुला क्यों है?’’ गुंडे वापस आ रहे थे. फैक्ट्री की पिछली दीवार में एक टूटा हुआ गेट था.

रूबी ने लड़कियों को संभाला. तीनों लड़कियां और रूबी धीरेधीरे बाहर निकलीं. उसी समय गुंडों ने उन्हें देख लिया. साहिल पास पड़ा लोहे का पाइप उठाया और उन के सामने खड़ा हो गया, ”रूबी, लड़कियों को ले कर निकलो!’’

कुछ मिनट की झड़प के बाद साहिल ने मारमार के दोनों को गिरा दिया. साहिल भी उन के पीछे दौड़ पड़ा. कार तक पहुंचते ही रूबी ने इंजन स्टार्ट किया. गाड़ी अंधेरी सड़क पर तेजी से दौड़ पड़ी. पीछे फैक्ट्री धीरेधीरे अंधेरे में गुम हो गई. कुछ देर बाद कार में सन्नाटा था.

तीनों लड़कियां रो रही थीं, लेकिन अब वह डर का नहीं, बच जाने का रोना था. वह खुशी के आंसू थे, जो लड़कियों की आंखों से बह रहे थे. उस रात पहली बार उसे लगा कि अब वह इस लड़ाई में अकेला नहीं है. उस रात के बाद शहर की कहानी बदलने वाली थी. और शायद रूबी और साहिल की जिंदगी भी, क्योंकि कभीकभी अंधेरे में शुरू हुई लड़ाई प्यार की रोशनी तक पहुंच जाती है.

वह उन लड़कियों को सीधे धरनास्थल ले गया. वहां परिवार वाले पिछले 3 दिनों से बैठे हुए थे. मोमबत्तियां जलाए, प्लेकार्ड उठाए. ”हमारी बेटियां वापस दो!’’ की चीखें आसमान छू रही थीं.

साहिल ने सब को उतारा. लोगों की भीड़ जमा हो गई. रूबी ने तुरंत अपने चैनल के औफिस फोन किया. पुलिस को सूचना दी गई. कुछ ही देर में इंसपेक्टर तेजा सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचा. तीनों लड़कियों के बयान दर्ज हुए. सोनिया ने कांपते स्वर में कहा, ”वे 5 थे.’’

पुलिस हरकत में आ गई. सुबह होतेहोते पांचों युवकों को उन के ऐश वाले बंगलों से उठा लिया गया. मीडिया में खबरें छा गईं, ‘पावरफुल किडनैपिंग गैंग का भंडाफोड़!’ एमएलए सुखबीर सिंह के गोद लिए बेटे का नाम आने से पूरा सिस्टम हिल गया. पता चला कि ये वही 5 थे, जिन्होंने 2 साल पहले साहिल की बहन को किडनैप किया था.

बड़ी मात्रा में पब्लिक के जोरदार प्रदर्शन से पुलिस दबाव में आ गई और सभी असरदार लोगों के बेटों को अरेस्ट करना पड़ा.

जगत सिंह नाम का एक मशहूर बिल्डर रहता था. उस की 2 औलादें थीं. बेटा राजू और बेटी नीतू. जगत सिंह की इमारतें आसमान को छूती थीं, लेकिन उस के घर का माहौल अंदर से सड़ रहा था. राजू अपने पिता की छत्रछाया में, बिना किसी डर के गलत रास्ते पर चल रहा था. उस की नजरें हमेशा कमजोर लड़कियों पर टिकती थीं.

कुछ साल पहले राजू ने एक निर्दोष लड़की को किडनैप किया था. साहिल की छोटी बहन सना. वह महज 22 साल की थी, कालेज की स्टूडेंट. राजू ने उसे अपने दोस्तों के साथ मिल कर दिनरात यातनाएं दीं. उस की जवानी लूट ली गई. बलात्कार हुआ. राजू बच गया. साहिल ने चुपचाप कसम खाई कि एक दिन तुझे भी वही दर्द महसूस होगा, राजू.

समय बीता. साहिल अब एक शांत, लेकिन अंदर से आगबबूला युवक बन चुका था. उस ने सब कुछ प्लान कर लिया. उस की नजर अब जगत सिंह की बेटी नीतू पर थी. नीतू 19 साल की खूबसूरत, पढ़ीलिखी लड़की थी. वह अपने भाई की करतूतों से अनजान थी.

नीतू की आंखों पर पट्टी बांध कर उसे एक पुराने, लेकिन साफसुथरे फार्महाउस में ले जाया गया. जब पट्टी हटाई गई तो नीतू डरी हुई थी. सामने साहिल खड़ा था एकदम शांत, लेकिन आंखों में गुस्सा चमक रहा था.

”तुम… तुम कौन हो? मुझे क्यों उठाया?’’ नीतू कांपते हुए बोली.

साहिल ने धीरे से मुसकराते हुए कहा, ”मेरा नाम साहिल है. मैं ने तुम्हें इसलिए नहीं उठाया कि तुम्हें कोई नुकसान पहुंचाऊं. मैं ने तुम्हारे भाई राजू को नहीं उठाया, बल्कि तुम्हें उठाया. ताकि वो भी एक पल के लिए महसूस कर सके कि जब उस की बहन को कोई उठा लेता है तो कितना दर्द होता है.’’

नीतू हैरान थी. साहिल ने आगे पूरी कहानी नीतू को बताई. सबूत दिखाए, पुरानी तसवीरें, मैडिकल रिपोट्र्स, सना की डायरी जिस में उस ने आपबीती लिखी थी. नीतू रोने लगी. वह कभी नहीं सोच सकती थी कि उस का भाई इतना गिरा हुआ हो सकता है.

”मैं तुम्हें छू भी नहीं रहा हूं नीतू,’’ साहिल ने कहा, ”मैं वैसा नहीं हूं जैसा तुम्हारा भाई है. मैं सिर्फ तुम्हें एक साल के लिए परिवार से अलग रखना चाहता हूं, ताकि राजू और तुम्हारे पिता को एहसास हो कि जब कोई अपनी बहन को खो देता है तो क्या होता है. लेकिन तुम सुरक्षित रहोगी.’’ नीतू ने पूछा, ”फिर क्या होगा मेरा?’’

साहिल ने मुसकराते हुए जवाब दिया, ”मेरे एक दोस्त के होटल में तुम्हारी मैनेजर की जौब लगवा दी है. नाम बदल कर नई जगह साल भर तुम वहां काम करोगी. परिवार से कोई संपर्क नहीं. फोन बंद. बस इतना ही. एक साल बाद तुम लौट सकती हो, लेकिन तब तक राजू को हर रात नींद नहीं आएगी. वो समझ जाएगा कि उस की बहन के साथ क्या हुआ था.’’

नीतू पहले तो डरी, लेकिन साहिल की बातों में सच्चाई थी. उस ने भाई राजू की करतूतें देखीं तो खुद ही उसे अपने भाई से नफरत हो गई. वह ऐसे भाई की सूरत भी देखना नहीं चाहती थी. उस ने फैसला लिया, ”ठीक है. मैं मान जाती हूं. शायद यह मेरे परिवार को भी सबक देगा.’’

अगले दिन साहिल ने नीतू को सुरक्षित तरीके से अपने दोस्त के होटल भेज दिया. नीतू का नया नाम रखा ‘अनन्या’, मैनेजर की पोस्ट. अच्छा वेतन, सुरक्षित कमरा. साहिल ने रूबी से कहा कि मैं नीतू को अपनी बहन की तरह मानूंगा. अब हम और तुम चलते हैं.

एक साल पूरा होने का दिन आ गया था. सुबह का समय था. हलकी ठंडी हवा चल रही थी. नीतू होटल की छत पर खड़ी आसमान को देख रही थी. ठीक एक साल पहले उस की जिंदगी जैसे अचानक रुक गई थी और आज वही जिंदगी फिर एक नया मोड़ लेने वाली थी.

Revenge Crime Story

कुछ देर बाद नीचे गाड़ी आ कर रुकी. जगत सिंह उतरे. उन के साथ पुलिस भी थी, लेकिन उन के चेहरे पर अब वह पुराना रुतबा नहीं था. आंखों में थकान और पछतावे की गहरी रेखाएं थीं.

नीतू सीढिय़ों से नीचे आई. पिता को देखते ही उस की आंखें भर आईं. जगत सिंह ने बेटी को सीने से लगा लिया. दोनों कुछ पल तक चुप रहे. तभी सामने से साहिल और रूबी धीरेधीरे चलते हुए आए. पुलिस के जवान चौकन्ने हो गए, मगर जगत सिंह ने हाथ उठा कर उन्हें रोक दिया. नीतू की आंखों में आंसू थे. उस ने धीमे से कहा, ”इन्होंने मुझे कैद नहीं किया, मुझे सोचने का समय दिया.’’

कुछ पल की खामोशी के बाद साहिल ने जगत सिंह की तरफ देखा, ”मैं बदला लेना चाहता तो आसान रास्ता था, लेकिन मेरी बहन को खोने के बाद समझ आया कि एक और लड़की की जिंदगी बरबाद कर के मुझे सुकून नहीं मिलेगा. मैं बस चाहता था कि आप लोग उस डर को महसूस करें, जो मेरी बहन ने महसूस किया होगा.’’ जगत सिंह की आंखों से आंसू बह निकले.

उन्होंने कांपती आवाज में कहा, ”मैं ने बहुत बड़ीबड़ी इमारतें खड़ी की हैं साहिल, मगर इंसानियत की नींव कमजोर रह गई. आज समझ आया कि किसी एक की हैवानियत पूरे समाज को शर्मिंदा कर देती है.’’

नीतू और उस के पिता वहीं खड़े थे, मगर अब उन के चेहरे पर डर नहीं, बल्कि एक संकल्प था. उस दिन 3 लोगों की जिंदगी बदल गई थी. साहिल ने बदले की आग छोड़ कर इंसानियत का रास्ता चुना था. जगत सिंह ने पहली बार दूसरों के दर्द को महसूस किया था. नीतू ने तय कर लिया था कि किसी और लड़की की आवाज अब दबने नहीं देगी.

रूबी ने नीतू से कहा कि अपने साहिल भैया को राखी बांधने जरूर आना. साहिल ने रूबी का हाथ पकड़ा और दोनों कार में बैठ कर चले गए. Revenge Crime Story

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