Extramarital Affair Murder. साबिया 10 साल छोटे मुबारक के प्यार में इस कदर पागल हुई कि पति और बच्चों को छोड़ कर उस पर निकाह के लिए दबाव डालने लगी. जबकि मुबारक उस से नहीं, उस की बेटी से शादी करना चाहता था. बात बिगड़ी तो साबिया को जान से हाथ धोना पड़ा.
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के थाना कछौना के गांव टुटियारा के पास स्थित जंगल की ओर कुछ लोग गए तो उन्हें जंगल में एक जवान महिला की खून से लथपथ लाश दिखाई दी. समझदारी दिखाते हुए उन्होंने इस बात की सूचना लोनहरा गांव के चौकीदार अहिबरन को दी तो वह तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया.
लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर के चौकीदारी ने इस बात की जानकारी कछौना कोतवाली जा कर इंसपेक्टर रामेंद्र कुमार सिंह को दी तो वह थाने में उपस्थित पुलिस बल ले कर 4 किलोमीटर दूर स्थित घटनास्थल पर जा पहुंचे.
लाश देख कर उन्होंने अनुमान लगाया कि मृतका की उम्र 35-36 साल होगी. उस के शरीर पर कोई गहना नहीं था. इस से अंदाजा लगाया गया कि यह हत्या लूटपाट के इरादे से की गई है. लाश के पास ही एक रंगीन लेडीज पर्स पड़ा था, जो यकीनन मृतका का ही रहा होगा.
रामेंद्र कुमार सिंह ने चौकीदार से उस पर्स को मंगा कर देखा तो पहली नजर में वह बिलकुल खाली नजर आया. लेकिन जब उसे अच्छी तरह से खंगाला गया तो उस में एक सिमकार्ड मिला. लेकिन उस में कोई मोबाइल फोन नहीं था. सिम मिलने से रामेंद्र कुमार सिंह को उम्मीद बंधी कि इस की मदद से न केवल लाश की शिनाख्त हो सकेगी, बल्कि इस केस को सुलझाने में भी मदद मिल सकेगी.
खाली सिम मिलने से अनुमान लगाया गया कि मृतका 2 नंबरों का इस्तेमाल करती रही होगी. जरूरत पड़ने पर ही वह इस सिम को मोबाइल में डालती रही होगी. आसपास के निरीक्षण में कुछ दूरी पर एक जूता मिला, जो आदमी का था.
पुलिस को लगा कि हड़बड़ी में यह जूता हत्यारे के पैर से निकल गया होगा. भागने की जल्दी में वह जूता पहन नहीं सका. घटनास्थल पर मिला पर्स, मोबाइल का सिम और जूता जब्त कर पुलिस ने लाश के फोटो आदि करवा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भिजवा दिया.
कोतवाली लौट कर रामेंद्र कुमार सिंह ने चौकीदार अहिबरन की ओर से अपराध संख्या 80/2016 पर हत्या का यह मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. उन्होंने पर्स से मिले सिम को अपने मोबाइल में लगा कर उस में ‘सेव’ नंबरों की जांच शुरू की. उस में सेव नंबरों में से एक नंबर पर उन्होंने फोन किया तो फोन किसी असलम ने रिसीव किया.
पूछने पर उस ने बताया कि वह लखनऊ के थाना ठाकुरगंज के मोहल्ला न्यूआसरानगर में रहता है. यह नंबर उस की पत्नी साबिया का है, जो 2 दिनों से गायब है. रामेंद्र कुमार सिंह ने अपना परिचय दे कर असलम को कछौना कोतवाली बुला लिया. उसे जिला चिकित्सालय स्थित मोर्चरी में रखी महिला की लाश दिखाई गई तो उस ने उस की शिनाख्त साबिया के रूप में कर दी.
रामेंद्र कुमार सिंह ने साबिया के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाने के साथसाथ उस के लखनऊ स्थित घर के आसपास रहने वालों से पूछताछ की तो चौंकाने वाली जानकारी यह मिली कि उस के पति असलम की अनुपस्थिति में एक युवक लगभग रोज साबिया से मिलने उस के घर आता था और घंटों रुकता था.
जब उस युवक के बारे में पता किया गया तो वह युवक हरदोई की कोतवाली संडीला के मोहल्ला इमाम चौक मंडई में रहने वाली साबिया की बहनों के घर के निकट रहने वाला मुबारक निकला. काल डिटेल्स की जांच की गई तो साबिया की जिस मोबाइल नंबर से सब से ज्यादा बात हुई थी, वह नंबर भी मुबारक का ही था.
घटना वाली रात उस के फोन की लोकेशन भी उस जगह की पाई गई थी, जहां लाश मिली थी, साथ ही साबिया के भी फोन की लोकेशन उस के साथ थी. इतनी जानकारी उसे हिरासत में लेने के लिए काफी थी. रामेंद्र कुमार सिंह ने तत्काल मुबारक के संडीला स्थित घर पर छापा मारा, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. शायद उसे शंका हो गई थी, इसलिए वह फरार हो गया था.
मुबारक घर पर नहीं मिला तो रामेंद्र कुमार सिंह ने उस का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाने के साथ मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. आखिर 11 अप्रैल की शाम साढ़े 4 बजे उन्होंने मुखबिर की सूचना पर मुबारक और संजय को मल्लपुर मोड़ से उस समय गिरफ्तार कर लिया था, जब वे सिल्वर रंग की बोलेरो जीप से कहीं जा रहे थे.
कोतवाली ला कर जब मुबारक और संजय से सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों ने पहले तो आनाकानी की, लेकिन जब उन्हें लगा कि उन की जान छूटने वाली नहीं है तो उन्होंने साबिया की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. इस के बाद उन्होंने पुलिस को जो बताया, उस के पीछे चौंका देने वाली जो प्रेम कहानी सामने आई, उसे सुन कर पुलिस अधिकारी हैरान रह गए.
साबिया का मायका हरदोई के थाना कोतवाली देहात के मोहल्ला अब्दुलपुरवा में था. साबिया के अब्बा का नाम जलील तथा अम्मी का आसमां था. जलील छोटामोटा काम कर के परिवार की परवरिश कर रहा था. साबिया 7 बहनों और एक भाई में आठवें नंबर पर थी. उस की छोटी बहन रुखसार को छोड़ कर सभी बहनों की शादी हो चुकी थी.
साबिया की भी शादी सीतापुर जिले के थाना मिश्रिख के गांव नौरंगाबाद के रहने वाले हामिद से हुई थी. शादी के कुछ सालों बाद साबिया एक बेटे राशिद और बेटी सानमा की मां बनी. 2 बच्चे होेने के बाद ऐसा न जाने क्या हुआ कि हामिद और साबिया के बीच कलह होने लगी.
जब साबिया को लगा कि हामिद के साथ उस का गुजारा नहीं होगा तो वह दोनों बच्चों को ले कर अलग रहने लगी. इस के बाद उस ने लखनऊ के थाना ठाकुरगंज के मोहल्ला न्यूआसरानगर के रहने वाले असलम से शादी कर ली. असलम मूलरूप से सीतापुर के थाना मिश्रिख के पतौंजा का रहने वाला था.
साबिया की तरह असलम की भी यह दूसरी शादी थी. उस ने भी पहली पत्नी को तलाक दे दिया था. लेकिन पहली पत्नी से पैदा हुए 2 बेटे सलमान और सुलेमान उसी के साथ रहते थे.
साबिया से शादी करने के बाद असलम का परिवार बढ़ गया था, जिस की वजह से वह सुबह ही अपने धंधे के लिए निकल जाता था तो देर रात ही वापस आता था. चारों बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद साबिया घर में अकेली ही रह जाती थी.
साबिया थोड़ा खुले विचारों वाली थी. उस ने असलम से निकाह अवश्य कर लिया था, लेकिन उस की हसरतें अभी भी जवां थीं. वह नई उम्र के लड़केलड़कियों की तरह अपने दिल के उन सारे अरमानों को पूरा कर लेना चाहती थी, जिन्हें वह अभी तक पूरे नहीं कर सकी थी.
साबिया की 2 बड़ी बहनें शबाना और शबनम हरदोई के कस्बा संडीला के इमाम चौक मंडई में एक ही घर में 2 सगे भाइयों को ब्याही थीं. कुछ दिनों से साबिया की अम्मीजान आसमां उन्हीं के यहां आ कर रहने लगीं, इसलिए साबिया भी जबतब वहां आती रहती थी.
उस की बहनों की सुसराल के पास ही मुबारक का घर था. उस के 4 छोटे भाई शाहबान, शादाब, फरहान, अरशद तथा 2 बहनें शबाना तथा आफरीन थीं. 25 साल के मुबारक की अभी शादी नहीं हुई थी. उस का भी साबिया की बहनों के घर आनाजाना था. वह जरी का काम करता था.
साबिया की बहनें रिश्ते में उस की फूफी लगती थीं, इसलिए जाहिर है, साबिया से भी वहीं रिश्ता होगा. डेढ़ साल पहले की बात है. संडीला में हर साल झाड़ीशाह का उर्स लगता है, जिस में दूरदाराज के लोग शामिल होने के लिए आते हैं. उस साल साबिया भी उर्स के मेले में शामिल होने आई थी.
उसी मेले में साबिया की मुलाकात मुबारक से हुई. मुबारक साबिया से 10 साल छोटा था. लेकिन प्यार के दीवाने उम्र की परवाह कहां करते हैं. उसी पहली मुलाकात में मुबारक साबिया को दिल दे बैठा.
साबिया ने देखा कि मुबारक उस में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहा है तो उसे लगा कि यह लड़का उस के काम का है. अगर यह किसी तरह उस के रूपजाल में फंस जाता है तो वाकई उस की जिंदगी में बहार आ जाएगी.
यही सोच कर साबिया थोड़ी ही देर में उस से ऐसी घुलमिल गई, जैसे उसे मुद्दत से जानती हो. बातों ही बातों में साबिया ने मुबारक को बता दिया कि वह यहां अपनी बहन शबाना के घर आई है.
शबाना का नाम सुन कर मुबारक चौंका. उस ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह उन की बहनों को न केवल जानता है, बल्कि उन के यहां उस का आनाजाना भी है. मुबारक की बात सुन कर साबिया किसी अल्हड़ युवती की तरह चहक कर बोली, ‘‘लो, यह तो और भी अच्छी बात है कि तुम हमारे रिश्तेदार भी हो.’’
दोनों ने मेले में साथसाथ काफी समय बिताया और अपनेअपने घर लौटने से पहले अपनेअपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए. साबिया के पति असलम को साबिया से ज्यादा रुचि अपने सब्जी बेचने वाले धंधे में थी. वह सुबह 6 बजे घर से निकलता था तो देर रात 10-11 बजे लौटता था.
वह दिनरात अपने धंधे को आगे बढ़ाने की फिराक में लगा रहता था कि अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दे सके. जबकि साबिया चाहती थी कि वह उसे भी जी कर प्यार करे. मेले में जब साबिया की मुलाकात मुबारक से हुई तो उस ने पहली ही नजर में उस के नैनों की भाषा पढ़ने में कोई गलती नहीं की थी. जो हाल साबिया के दिल का था, कुछ वैसा ही हाल मुबारक के दिल का भी था.
अब उन्हें जब भी समय मिलता, दोनों एकदूसरे से अपनेअपने दिल का हाल बयां कर मन का बोझ हल्का कर लेते. आग जब दोनों ओर बराबर लगी हो तो शोला भड़कने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. साबिया किसी न किसी बहाने संडीला आ जाती, जहां मौका निकाल कर दोनों रंगरलियां मनाते.
कुछ ही दिनों बाद साबिया उसे घर भी बुलाने लगी, क्योंकि घर में वह पूरे दिन अकेली ही होती थी, इसलिए दोनों को मिलने में अड़चने नहीं आती थीं. इस तरह दोनों पूरे दिन साथ रहते थे. मुबारक का अपने प्रति जुनूनी इश्क देख कर साबिया जल्द ही उस से निकाह के सपने देखने लगी.
एक दिन प्यार के मधुर पलों में साबिया ने मुबारक से कह भी दिया कि वह उस से शादी करना चाहती है, इस के लिए वह तैयार है या नहीं? मुबारक को साबिया से उस समय अपना मतलब निकालना था, इसलिए उस का मन रखने के लिए उस ने कह दिया कि समय आने पर वह उस से शादी कर लेगा.
जबकि सच्चाई यह थी कि उस के मन में ऐसी कोई बात नहीं थी. मुबारक जरी का काम करता था, जिस से उसे अच्छी कमाई हो रही थी, इसलिए वह जब भी साबिया से मिलने आता था, उस के लिए महंगे तोहफे ले कर आता था. इन महंगे तोहफों को देख कर ही साबिया के मन में लालच आया और वह किसी न किसी बहाने मुबारक से अपनी मजबूरी जता कर रुपए ऐंठने लगी.
लगभग डेढ़ साल तक चले इश्क के दौरान साबिया ने मुबारक से करीब 45 हजार रुपए ले लिए थे. दरअसल साबिया ने मन ही मन तय कर लिया था कि वह असलम को छोड़ कर मुबारक से शादी कर लेगी. जबकि मुबारक ऐसा नहीं चाहता था. उस ने साबिया की बेटी को देख रखा था. उस की इच्छा थी कि साबिया उस के एहसानों तले दब जाएगी तो अपनी बेटी की शादी उस के साथ कर देगी. लेकिन यहां होनी को तो कुछ और ही मंजूर था.
28 मार्च को साबिया अपने न्यूआसरानगर स्थित घर से शौहर असलम से यह कर कर निकली कि वह देवाशरीफ, बाराबंकी जा रही है. वह उस दिन देवाशरीफ तो गई, लेकिन वहीं से उस ने मुबारक को फोन कर के मिलने का प्रोग्राम भी बना लिया.
29 मार्च को वह बाराबंकी से लखनऊ लौटी, लेकिन अपने घर जाने के बजाय मुबारक को फोन किया. मुबारक ने कहा कि वह हरदोई में है तो उस से मिलने की तड़प में साबिया हरदोई पहुंच गई. लेकिन उस बीच मुबारक हरदोई से कछौना आ गया था. साबिया ने उसे दोबारा फोन किया तो मुबारक ने उसे कछौना आने को कहा.
शाम के वक्त साबिया कछौना पहुंची तो मुबारक उसे बाहर ही मिल गया. वह उसे टुटियारा के जंगल की ओर ले जाने लगा तो साबिया को लगा कि मुबारक उसे मौजमस्ती के लिए जंगल में ले जा रहा है. वह मुबारक का हाथ थामे जंगल में बढ़ती चली गई.
मौजमस्ती के दौरान साबिया ने मुबारक से शादी के लिए कहा तो वह हांहूं करता रहा. लेकिन जब लौटते समय साबिया मुबारक से जल्द शादी करने की बात करने लगी तो उस का मूड खराब हो गया, क्योंकि वह तो उस की बेटी से शादी करना चाहता था.
उस ने निकाह करने से मना कर दिया तो साबिया ने अपने संबंधों के बारे में सब को बताने की धमकी दे दी. इस से बात बिगड़ गई तो मुबारक ने उसे रास्ते से हटाने का निर्णय कर लिया. चूंकि वह जगह सुनसान थी, इसलिए उस के लिए मौका अच्छा था.
रात को जंगल में दूरदूर तक सन्नाटा पसरा था. मुबारक ने अपने घर के पास रहने वाले दोस्त संजय से चाकू और बोलेरो ले कर टुटियारा जंगल में आने को कह दिया. प्रेमी की भयानक योजना से अनजान साबिया उस से शादी करने की जिद पर अड़ी थी.
अपने प्रति बढ़ती दीवानगी देख कर मुबारक डर गया कि अगर आज की रात उस ने साबिया को छोड़ दिया तो कल की सुबह यह न जाने क्या कर दे. थोड़ी ही देर में संजय बोलेरो से टुटियारा के जंगल में मुबारक के पास पहुंच गया.
मुबारक ने जीप के पास जा कर चाकू लिया और साबिया पर टूट पड़ा. साबिया ने बचाने की गुहार लगाई, लेकिन वहां उस की पुकार सुन ने वाला कोई नहीं था. मुबारक ने संजय के साथ मिल कर साबिया की चाकूसे हत्या कर दी. साबिया को मौत के घाट उतार कर मुबारक और संजय ने उस के पर्स में रखे रुपए, मोबाइल तथा उस के शरीर के गहने उतार लिए.
जाते समय मुबारक के एक पैर का जूता गड्ढे में कीचड़ में फंस कर उतर गया तो वह उसे छोड़ कर संजय की बोलेरो पर सवार हो कर संडीला चला गया. उन्होंने शिनाख्त के लिए कुछ नहीं छोड़ा था, लेकिन साबिया के पर्स से मिले सिम ने उन का खेल बिगाड़ दिया.
रामेंद्र कुमार सिंह ने मुबारक और संजय की निशानदेही पर साबिया के कानों के कुंडल, पायल, मोबाइल फोन तथा अन्य सामान बरामद कर लिया. हत्या में प्रयुक्त चाकू व बोलेरो जीप भी बरामद कर ली गई. इस के बाद दोनों को नामजद कर के 12 अप्रैल को अदालत में पेश किया गया. जहां उन्हें जेल भेज दिया गया. Extramarital Affair Murder
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






