Mumbai Triple Murder Case. बबली के घर धंधा करने वाली सबीना ने उस की अलमारी में मोटी रकम देखी तो उस की नीयत खराब हो गई. उस रकम को हथियाने के लिए उस ने साथियों के साथ जो किया, उस से रकम तो हाथ लगी नहीं, 3 लोगों के खून से हाथ जरूर रंग गए.

23  जून, 2016 को मुंबई के उपनगर मलाड मालवणी की न्यू कलेक्टर कालोनी की शवरी मंजिल की रहने वाली बबली साहू ने सुबह न घर का दरवाजा खोला और न नल पर पानी भरने आई तो पड़ोसियों को हैरानी हुई. कहीं वह सो न गई हो, यह सोच कर पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाने के लिए जैसे ही कुंडी पर हाथ रखा, वह अपनेआप खुल गया.

दरवाजा खुलने पर पड़ोसियों ने जो मंजर देखा, उन के होश उड़ गए. सामने ही 3 लाशें पड़ी थीं. सभी को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. पड़ोसियों ने इस क्रूरतम हत्याकांड की खबर थोड़ी दूरी पर रह रहे मृतका बबली साहू की बहन के बेटे संजीव साहू को दी तो उस ने तुरंत इस घटना की सूचना थाना मालवणी पुलिस को दे दी.

थाना मालवणी के थानाप्रभारी मिलिंद खेतले ने तुरंत ड्यूटी पर तैनात सबइंसपेक्टर अवधूत धाड़ीकर से डायरी बनवाई और इस की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे कर खुद एआई महेश ठाकुर, अमृत पवार, संदीप ऐडाले, संदीप पंचागने, सिपाही चंद्रकांत तिवारी को साथ ले कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए.

थाने से घटनास्थल करीब आधा किलोमीटर दूर था, इसलिए यह पुलिस टीम 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गई. पूछताछ में पता चला कि हत्या 45 वर्षीया बबली साहू, उस के 12 साल के नाती आर्यन शेख और 9 साल की नातिन सानिया शेख की हुई थी. बबली उस मकान में नाती आर्यन और नातिन सानिया के साथ ही रहती थी.

बबली मूलरूप से पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर की रहने वाली थी. रोजीरोटी की तलाश में वह काफी पहले अपनी बेटी तुलसी के साथ मुंबई आई थी. यहां वह मलाड मालवणी में रह कर कोई कामधाम करने के बजाय वेश्यावृत्ति करने लगी थी. वह बेटी से भी वही सब कराना चाहती थी, लेकिन उस ने मां का कहना नहीं माना और उसी परिसर में रहने वाले इस्माइल शेख से प्यार कर के निकाह कर लिया था.

इस्माइल शेख का अपना मीट का कारोबार था, इसलिए उस के यहां किसी चीज की कमी नहीं थी. तुलसी उस के साथ हंसीखुशी से रहने लगी थी. समय के साथ वह बेटे आर्यन और बेटी सानिया की मां बनी. उस का संपन्न परिवार तो था ही, बच्चे होने से सुखी भी हो गया था. इस्माइल बीवीबच्चों के साथ खुश था, लेकिन उस की यह खुशी कायम नहीं रह सकी. क्योंकि तुलसी को कैंसर जैसी खरतनाक बीमारी हो गई थी.

इस्माइल ने पत्नी का बहुत इलाज कराया, लेकिन वह बच नहीं सकी. उस समय आर्यन और सानिया छोटेछोटे थे. वह उन्हें संभाले या कारोबार देखे. बेटी के प्रेमविवाह से बबली नाराज जरूर थी, लेकिन उस स्थिति में वह आगे आई और बेटी के दोनों बच्चों को अपने पास रख लिया. वह उन की देखभाल करने लगी. मालवणी के मदर टेरेसा जैसे बढि़या स्कूल में उन का दाखिला करा दिया था. इस समय आर्यन सातवीं में पढ़ रहा था तो सानिया पांचवीं में.

इस्माइल अपने बच्चों को बहुत चाहता था. चूंकि वह पड़ोस में ही रहता था, इसलिए उन से रोजाना मिलता तो था ही, उन का खर्च भी वही उठाता था. बच्चों को किसी तरह की तकलीफ न हो, इस के लिए वह बबली को अलग से भी पैसे देता था. लेकिन जब इस्माइल ने दूसरी शादी कर ली तो बबली ने इस्माइल से बच्चों का खर्च लेना तो बंद ही कर दिया, वह उसे बच्चों से मिलने भी नहीं देती थी.

मिलिंद खेतले घटनास्थल और लाशों का निरीक्षण कर के पूछताछ कर रहे थे कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी डाग स्क्वायड, प्रैस फोटोग्राफर, फिंगरप्रिंट ब्यूरो के साथ आ गए. क्राइम ब्रांच यूनिट 11 के सीनियर इंसपेक्टर चिभाजी आढ़ाव भी अपने स्टाफ के साथ आ गए थे.

डाग स्क्वायड, प्रैस फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो का काम खत्म हो गया तो एक बार फिर अधिकारियों एवं क्राइम ब्रांच की टीम ने घटनास्थल एवं लाशों का निरीक्षण किया. घटनास्थल की स्थिति काफी मार्मिक थी. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से तीनों हत्याएं की थीं.

अधिकारियों के जाने के बाद घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी कर तीनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए कांदीवली के अंबेडकर अस्पताल भिजवा दिया गया था. मामला गंभीर था. 3 हत्याएं हुई थीं. थाना पुलिस तो इस मामले की जांच में लग ही गई थी, क्राइम ब्रांच यूनिट 11 के इंसपेक्टर चिभाजी आढाव ने भी इस मामले की जांच के लिए अपनी एक टीम बना ली थी, जिस में उन्होंने इंसपेक्टर एल.जी. शिंदे, एआई मनोहर हरपुड़े, रईस शेख, शरद झिने, कांस्टेबल अशोक गोले, नरेंद्र मयेकर, अभिनाश शिंदे, शिवाजी सावंत, रवींद्र मलिक, किशोर नलावडे़ को शामिल किया था.

टीम तो बन गई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ाने की कोई राह नहीं मिल रही थी. क्योंकि बबली जो काम कर रही थी, उस में उस के यहां आनेजाने वालों की कोई गिनती नहीं थी. पहले तो वह खुद वेश्यावृत्ति करती रही थी, अब उस की उम्र ज्यादा हो गई थी, इसलिए वह अपने घर में वेश्यावृत्ति कराने लगी थी. इस स्थिति में उस के दोस्तों और दुश्मनों का पता लगाना आसान नहीं था. लेकिन पुलिस ने इसे नामुमकिन भी नहीं माना.

घटनास्थल के निरीक्षण में शुरू में पुलिस को लगा था कि ये हत्याएं लूट के लिए की गई हैं. इस का अंदाजा पुलिस ने इस बात से लगाया था कि पूछताछ में इस्माइल ने बताया था कि उस की सास ने जल्दी ही हावड़ा की अपनी प्रौपर्टी करोड़ों में बेची थी. इस से पुलिस को लगा कि कहीं हत्या के इस मामले के तार हावड़ा से तो नहीं जुड़े.

इसी बात को ध्यान में रख कर चिभाजी आढ़ाव ने अपनी जांच आगे बढ़ाई. उन का सोचना था कि हत्याएं जिस ने भी की हैं, वह मुंबई से भाग जाने में खुद को सुरक्षित समझ रहा होगा. इस के लिए वह मुंबई के लोकल रेलवे स्टेशनों का इस्तेमाल करेगा.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या का जो समय बताया गया था, उस समय की मालवणी से कांदीवली, बोरीवली, गोरेगांव रेलवे स्टेशनों के रास्तों में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर चैक की गई. इस के अलावा रात में इन सड़कों पर चलने वाले औटो के ड्राइवरों से भी पूछताछ की गई. बबली के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर उस में से भी 15 संदिग्ध नंबरों को छांट कर उन के बारे में पता किया गया.

क्राइम ब्रांच की टीम यह सब कर ही रही थी कि एक मुखबिर ने बताया कि जिस रात घटना घटी थी, सुबह 3 लोग बोरीवली रेलवे स्टेशन पर आए थे. उन में 2 लड़के और एक औरत थी, जो ढाई-3 साल का एक बच्चा लिए थी. उन सभी के चेहरों पर अजीब सी घबराहट थी. उन में से एक लड़के का एक हाथ जख्मी था, जिस पर वह महिला की ओढ़नी लपेटे था.

मुखबिर के बताए अनुसार, वे गुजरात एक्सप्रैस पकड़ कर अजमेर जाने की बात कर रहे थे. उस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में उन की शिनाख्त भी कर दी थी. हालांकि यह निश्चित नहीं था कि ये हत्याएं उन्होंने ही की थीं, फिर भी पुलिस को उन के बारे में जांच कर लेने में कोई बुराई नजर नहीं आई.

चिभाजी आढ़ाव ने उन की तलाश में कुछ सिपाहियों को लगा दिया. गुजरात एक्सप्रैस में पता किया गया तो एक फेरी वाले ने उन का फोटो देख कर बताया कि जिस लड़के का हाथ घायल था, वह ट्रेन में बेहोश हो गया था. उस का इलाज कराने के लिए वे लोग वलसाड़ रेलवे स्टेशन पर उतर गए थे.

चिभाजी की टीम वलसाड़ रेलवे स्टेशन पर उतर गई और आसपास के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में उन की खोज शुरू की तो रेलवे अस्पताल के डाक्टर से पता चला कि उस तरह का एक मामला उन के पास आया जरूर था, लेकिन इलाज करा कर कुछ देर पहले ही वे वहां से चले गए थे. यह पुलिस के लिए निराशा वाली बात थी, लेकिन निराश होने के बजाय पुलिस टीम आगे बढ़ गई.

अब यह टीम अजमेर जाना चाहती थी, जिस के लिए स्टेशन पर आ कर ट्रेन के इंतजार में इधरउधर टहलने लगी. टहलते हुए ही किसी की नजर स्टेशन के एक कोने में बैठे कुछ लोगों पर पड़ी तो उसे उन पर शक हुआ. उस ने उन के पास जा कर पूछताछ की तो वे बुरी तरह से घबरा गए.

उन में से एक का हाथ जख्मी भी था. जब उस से उस जख्म के बारे में पूछा गया तो वह उस के बारे में ठीक से कोई जवाब नहीं दे सका. पुलिस टीम को लगा कि ये वही लोग हैं, जिन की उन्हें तलाश है तो वे उन्हें साथ ले कर मुंबई के क्राइम ब्रांच के औफिस आ गए. मुंबई में पुलिस अधिकारियों के सामने जब उन से पूछताछ की गई तो डर के मारे उन्होंने तुरंत अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उन्होंने अपने अपराध की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

पकड़े गए लोगों के नाम थे, मोफिद उर्फ सलमान, सबीना उर्फ सना और सुलतान. मोफिद उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर के थाना दामपुर के गांव लल्लावाला का रहने वाला था. सन 2010 में वह रोजीरोटी की तलाश में मुंबई आया और उपनगर मलाड मालवणी के अंबुज वाड़ी में किराए का मकान ले कर रहने लगा.

गुजरबसर के लिए सुबह वह मलाड और्लेम चर्च चौराहे पर दाबेली की रेहड़ी लगाता था. इस के बाद अतिरिक्त कमाई के लिए रात को किराए का औटो ले कर चलाता था.

सबीना उर्फ सना से मोफिद की जानपहचान 2 साल पहले हुई थी. वह अपने 3 साल के बेटे के साथ जिस चाल में रहती थी, उसी में मोफिद भी रहता था. सबीना के पति की 3 साल पहले मौत हो चुकी थी. गुजरबसर के लिए उसे कोई ढंग का काम नहीं मिला तो वह देहव्यापार करने लगी थी.

सबीना देहधंधे से जुड़ी थी, इसलिए अकसर उस की मुलाकात औटो चालक मोफिद से होती रहती थी. कभीकभी वह ग्राहक की तलाश में मोफिद के औटो का भी उपयोग कर लिया करती थी. इन्हीं मुलाकातों में दोनों करीब आ गए थे और निकाह कर के साथसाथ रहने लगे थे.

सबीना पिछले 8 महीने से देहधंधे के लिए बबली के घर का उपयोग कर रही थी. यही वजह थी कि वह बबली के घर के कोनेकोने से परिचित थी. बबली धंधे और ब्याज से आए पैसों को कमरे में रखी अलमारी में रखती थी. सबीना ने कई बार बबली को अलमारी में रुपए रखते हुए देखा था. अलमारी में रखे ढेरों रुपए देख कर उस के मन में लालच आ गया था.

उस का सोचना था कि अगर यह सारा पैसा उस के पास आ जाए तो वह अपना एक छोटा सा घर खरीद सकती है, अपने बच्चे को किसी अच्छे स्कूल में पढ़ा सकती है. इधर जब सबीना को पता चला कि बबली ने हावड़ा की अपनी प्रौपर्टी करोड़ों में बेची है तो वह उस का सारा पैसा उड़ाने के बारे में सोचने लगी.

जून के पहले सप्ताह में सबीना मोफिद के साथ अजमेर घूमने गई तो वहीं उस ने बबली की अलमारी में रखे रुपयों के बारे में उसे बताया. अलमारी में रखे ढेरों रुपयों के बारे में सुन कर मोफिद की नीयत खराब हो गई. बस वहीं दोनों ने बबली के घर लूट की योजना बना डाली.

15 जून, 2016 को अजमेर से लौटने के बाद रेकी के लिए दोनों बबली के घर गए. घर का पूरी तरह से निरीक्षण करने के बाद उन्हें लगा कि दोनों बच्चों के साथ होने की वजह से लूट करना आसान नहीं था. इस के लिए उन्हें एक साथी की जरूरत महसूस हुई. इस के लिए मोफिद ने अपने पड़ोसी गांव मानकपुर के रहने वाले सलमान से बात की तो मोटी रकम के लालच में वह साथ देने को तैयार हो गया. सलमान भी औटो चलाता था.

21 जून, 2016 को सबीना और मोफिद ने मलाड की बाजार से 2 तेज धार वाले चाकू खरीद लिए. 22 जून, 2016 को दोनों सलमान के घर गए और बबली के घर लूट की योजना तैयार की. वहां से लौट कर सबीना ने बबली के घर जा कर कहा कि उस रात के लिए उस के पास 2 ग्राहक हैं, इसलिए उसे सारी रात के लिए उस का कमरा चाहिए.

बबली ने 7 सौ रुपए में पूरी रात के लिए सबीना को अपना कमरा दे दिया. कुछ देर बाद सबीना, मोफिद और सलमान के साथ बबली के घर पहुंची और ऊपर के कमरे में चली गई. वहां बैठ कर साथ लाई बीयर पीते हुए वे बबली और उस के बच्चों के सोने का इंतजार करने लगे.

रात एक बजे सलमान पेशाब करने के बहाने जायजा लेने नीचे आया तो देखा बबली और सानिया टीवी देखते हुए सोफे पर ही सो गई थीं, जबकि आर्यन पास के बैड पर सो रहा था. तीनों को सोते देख वह अलमारी की चाबी ढूंढ़ने लगा, लेकिन चाबी नहीं मिली.

इस के बाद सबीना और मोफिद भी नीचे आ गए. नीचे आते ही मोफिद ने पूरी ताकत से बबली का मुंह दबा लिया तो सलमान ने साथ लाए चाकू से उसे मार दिया. लेकिन उस के छटपटाने की वजह से उस से लिपट कर सो रही सानिया जाग गई. मोफिद ने चाकू से उसे भी मार दिया. लेकिन जब वह सानिया पर चाकू से वार कर रहा था तो सलमान को उस पर दया आ गई.

उस ने उसे बचाने की कोशिश की तो उस का हाथ जख्मी हो गया. इस के बाद उस ने आर्यन की भी बेरहमी से हत्या कर दी. तीनों को मार कर वे अलमारी की चाबी खोजने लगे. काफी कोशिश के बाद भी उन्हें चाबी नहीं मिली. अलमारी वे तोड़ नहीं सकते थे, क्योंकि तोड़ने पर आवाज होती, जिस से लोग जाग सकते थे.

सलमान ने अपने जख्मी हाथ में सबीना की ओढ़नी लपेटी और सभी एक औटो से बोरीवली रेलवे स्टेशन आ गए, जहां से साढ़े 7 बजे गुजरात एक्सप्रैस पकड़ अजमेर के लिए निकल पड़े. संयोग से अजमेर पहुंचने से पहले ही वे पकड़े गए.

मोफिद, सलमान और सबीना से पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच ने उन के खिलाफ बबली, आर्यन और सानिया की हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें थाना मलाड मालवणी पुलिस को सौंप दिया. थाना पुलिस ने पूछताछ के बाद तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. आगे की जांच सबइंसपेक्टर महेश ठाकुर कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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