Rajasthan Gangster. राजू मांजू राजस्थान के सब से कुख्यात और वांटेड गैंगस्टरों में से एक है. वह पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय कुख्यात ‘007 गैंग’ का सरगना है. अपराध की दुनिया में उस के साथी उसे ‘बिल्ला’ के नाम से भी बुलाते हैं. उस पर हत्या, अपहरण, लूट और हथियारों की तस्करी सहित लगभग 36 से ज्यादा गंभीर मुकदमे दर्ज हैं. 2023 में जमानत पर छूटने के बाद से वह फरार चल रहा था. फिर 75 हजार रुपए का यह इनामी गैंगस्टर कैसे आया पुलिस की गिरफ्त में?

राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को सूचना मिली थी कि 007 गैंग का सरगना राजाराम बिश्नोई उर्फ राजू मांजू जयपुर में हथियार लेने आया हुआ है. वह लगातार जयपुर के चक्कर काट रहा है.

यह सूचना 007 गैंग के ही एक पूर्व सदस्य ने एएनटीएफ को दी थी. वह व्यक्ति पहले राजू मांजू के साथ काम करता था. बाद में उस की राजू से किसी बात को ले कर अनबन हो गई थी. उसे जब राजू मांजू के जयपुर में पुराने गैंग के सदस्यों से मिलने एवं हथियार खरीदने के बारे में जानकारी मिली तो उस ने इस की खबर पुलिस को दे दी थी.

राजू मांजू के बारे में जानकारी मिली तो एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार ने एडीजी दिनेश एम.एन. के निर्देशन में एक विशेष टीम बनाई. पुलिस ने राजू मांजू को पकडऩे के लिए ‘औपरेशन मद मार्जार’ कोड नेम दिया.

राजू अपराध की दुनिया में बिल्ली की तरह दबे पांव और चालाकी से चलता था, इसलिए उस के साथी उसे ‘बिल्ला’ कहते थे. मार्जार बिल्ली का संस्कृत पर्यायवाची शब्द है और मद राजस्थान का नंबर वन गैंगस्टर बनने का उस का अहंकार. इन दोनों शब्दों को जोड़ कर इस मिशन का नाम रखा गया, जिस ने आखिरकार राजू मांजू की चालाकी को मात दे दी.

राजाराम बिश्नोई उर्फ राजू मांजू पुत्र रावल राम बिश्नोई निवासी जंभेश्वर नगर, तहसील लोहावट, जिला फलोदी, राजस्थान का रहने वाला है. फलोदी, जोधपुर, श्रीगंगानगर जिलों के विभिन्न थानों में उस पर 36 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस ने उस पर 75 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था. 75 हजार रुपए के इनामी इस अपराधी पर हत्या, लूट, रंगदारी, राज कार्य में बाधा, पुलिस पर हमला जैसे मामले दर्ज हैं.

पिछले 3 साल से अधिक समय से वह पुलिस से छिपता फिर रहा था. ऐसे आरोप हैं कि गैंगस्टर राजू ठेहठ की हत्या में जो हथियार इस्तेमाल किए गए थे, वे हथियार राजू मांजू की 007 गैंग ने उपलब्ध कराए थे. राजू ठेहठ की हत्या के बाद से राजू मांजू फरार था.

अब 3 साल बाद एएनटीएफ को गत अप्रैल माह में जब सूचना मिली कि राजू मांजू बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए हथियारों की तलाश में जयपुर के चक्कर काट रहा है तो आईजी विकास कुमार के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया. एएनटीएफ टीम ने खुद को हथियार सप्लायर बता कर राजू से संपर्क किया.

राजू बेहद सतर्क था और कई दिनों तक केवल फोन और पार्सल के जरिए डील करने की जिद करता रहा. राजू को शक था कि हथियार सप्लायर के रूप में कहीं पुलिस तो नहीं. इसी कारण वह पार्सल के जरिए हथियार भेजने व पेमेंट औनलाइन करने की बात पर अड़ा रहा. मगर पुलिस ने यहां पर यह कहा कि पार्सल भेजने में खतरा है. हम पुलिस द्वारा पकड़े जा सकते हैं.

इस तरह काफी मशक्कत के बाद राजू मांजू जयपुर के मानसरोवर के पास एक पार्क में साथियों को भेजने के लिए राजी हो गया. पुलिस टीम 3 दिन तक इस पार्क के पास डेरा डाले रही. एक पुलिस जवान तो वहां चाय की थड़ी पर चाय बेचने का काम करने लगा, ताकि वह पार्क पर नजर रख सके.

मगर 3 दिन तक राजू मांजू ने अपना कोई आदमी नहीं भेजा. एएनटीएफ टीम के साथ जोधपुर पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी भी साथ थे, जो राजू मांजू की पहचान करने के लिए साथ में थे. पुलिस 3 दिन तक मानसरोवर में पार्क के पास चक्कर लगाती रही.

पुलिस को लग रहा था कि कहीं राजू को शक तो नहीं हो गया. मगर ऐसा कुछ नहीं था. राजू को जब यकीन हो गया कि हथियार सप्लायर ही उस से डील करना चाहते हैं. तब उस ने गुरुवार 16 अप्रैल, 2026 को कहा कि वह आज अपने एक साथी को पार्क में भेज रहा है, उस ने लाल टोपी और काला चश्मा पहन रखा है.

टीम पार्क पर नजर जमाए थी. टीम ने 16 अप्रैल, 2026 को पार्क में एक युवक को लाल टोपी व काले चश्मे में काफी देर से बैठे देखा तो सादा वर्दी में पुलिस टीम उस के पास पहुंची और कहा, ‘लाल टोपी काला चश्मा.’ तो राजू मांजू ने हां में गरदन हिलाई.

बस, फिर क्या था, पुलिस टीम ने उसे घेर लिया. पुलिस चौकी जोधपुर के जवानों ने लाल टोपी और काले चश्मे वाले व्यक्ति की पहचान कर दी. वह गैंगस्टर राजू मांजू ही था. पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. जब टीम ने उसे पकड़ लिया तो वह समझ गया कि वह पुलिस के शिकंजे में आ फंसा है. तब उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया.

इस तरह एएनटीएफ टीम ने 30 वर्षीय राजू मांजू को एक इनपुट पर जयपुर के मानसरोवर से दबोच लिया. राजू मांजू को गिरफ्तार कर एएनटीएफ थाने लाया गया. उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि जोधपुर की प्रतिद्वंदी गैंग के सदस्य की हत्या करने के लिए हथियार चाहिए था.

पूरी काररवाई औपरेशन मद मार्जार लौंच कर की गई. राजू मांजू ने पूछताछ में बताया कि हाल ही में ‘रक्तांचल’ वेब सीरीज देख कर उसे एजेंट बन कर आने का आइडिया आया था. वह राजू मांजू का एजेंट बन कर ‘रक्तांचल’ मूवी के एजेंट की तरह हथियार लेने आया और पकड़ा गया.

राजू मांजू की गिरफ्तारी के बाद एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार ने प्रैसवार्ता कर अपराधी राजू मांजू की गिरफ्तारी की जानकारी दी. आईजी ने औपरेशन मद मार्जार चला कर राजू मांजू को कितनी कठिनाई से पकड़ा, यह भी बताया.

राजू मांजू की गिरफ्तारी से अपराध जगत में हड़कंप मचा है. अपराधी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं ताकि पुलिस के चंगुल से बचे रहें. 007 गैंग के सरगना राजाराम उर्फ राजू मांजू से पुलिस ने कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

कैसे बना गैंगस्टर

राजस्थान के जिला जोधपुर से अलग कर के नवगठित जिला फलोदी की तहसील लोहावट के अंतर्गत आने वाले जंभेश्वर नगर गांव के रावलराम बिश्नोई का बेटा है राजाराम बिश्नोई उर्फ राजू मांजू. वह बचपन से शांत और सरल स्वभाव का था. मगर 17 साल की उम्र में साल 2013 में राजू मांजू के अपराधी बनने की कहानी शुरू हुई.

गांव में क्रिकेट मैच के दौरान हुए एक झगड़े और मारपीट के बाद उस पर डौन बनने की सनक शुरू हुई. क्रिकेट मैच के दौरान झगड़ा हुआ तो राजू मांजू ने पिटाई कर दी. जिस लड़के की पिटाई की थी, वह बदमाश प्रवृत्ति का था. उस ने राजू को देख लेने की धमकी दी थी.

उस मारपीट के बाद राजू साथियों के बीच हीरो बन गया था. साथी राजू का सम्मान करने लगे. राजू उस समय नाबालिग था तो उस की दोस्ती भी हमउम्र लड़कों से थी. वे लड़के भी नाबालिग थे.

खेतीकिसानी कर के परिवार का पेट भरने वाले रावलराम ने राजू को सही राह पर चलने की सीख दी. मगर क्रिकेट मैच के दौरान हुए झगड़े व मारपीट के बाद उस ने राजस्थान का नंबर वन डौन बनने का मन बना लिया.

साल 2017-18 में उस ने अपने गुरु श्याम पूनिया के साथ मिल कर 007 गैंग बनाई. 2017 से पहले 007 गैंग का कोई वर्चस्व नहीं था. 2017 तक राजस्थान में आनंदपाल गैंग का ही बोलबाला था. 2017 में गैंगस्टर आनंदपाल का एनकाउंटर हुआ तो उस का गैंग बिखर गया. इसी का फायदा उठाया श्याम पूनिया उर्फ श्यामलाल बिश्नोई निवासी भींयासर, थाना भोजासर, जिला फलोदी राजस्थान ने.

श्याम पूनिया ने 007 गैंग बना लिया. उस के गैंग में कई लड़के जुड़ गए थे. श्याम पूनिया के गैंग में राजू मांजू भी शामिल हो गया था. श्याम पूनिया ने सोशल मीडिया पर 007 गैंग का खूब प्रचार किया. हथियार लहराते, फायरिंग करते गैंग के लोगों के फोटो, वीडियो सोशल मीडिया पर देख कर लोग उस से खौफ खाने लगे.

इस का फायदा श्याम पूनिया और राजू मांजू ने उठाना शुरू किया. 007 गैंग ने शराब ठेकेदार अनिल मांजू का शराब ठेका जला दिया. शराब की दुकान जली तो अनिल मांजू ने भी अपनी मांजू गैंग बना ली. अनिल मांजू के गैंग में भी कई अपराधी लड़के शामिल हो गए थे.

अनिल मांजू गैंग ने 007 गैंग के मुखिया श्याम पूनिया के घर में आग लगा कर शराब ठेका जलाने का बदला ले लिया. इस तरह 007 गैंग और अनिल मांजू गैंग एकदूसरे के खून की प्यासी हो गई. इन गैंग्स की करतूत जोधपुर पुलिस तक भी पहुंचने लगी थी. इन गैंगों से पहले मारवाड़ में सरपंच गैंग थी. विशनाराम गैंग का मुखिया विशनाराम विश्नोई जब बहुचर्चित एएनएम भंवरी हत्याकांड के आरोप में जेल चला गया तो उस की गैंग बिखर गई थी.

इसी दौरान राजू ठेहठ गैंग उभरा. ठेहठ गैंग का दुश्मन आनंदपाल मारा गया था. इस कारण ठेहठ गैंग अपराध जगत में उभरने लगा था. ठेहठ गैंग जयपुर, सीकर और शेखावटी तक सीमित था. गैंगस्टर लारेंस के गैंग ने भी जोधपुर तक अपने पैर पसार लिए थे. इस दौरान जब लारेंस बिश्नोई जेल चला गया तो 007 गैंग ने अपना रुतबा मारवाड़ में जमा लिया.

बनाया 007 गैंग

राजू मांजू व उस के गुरु श्याम पूनिया ने मारवाड़ में भौकाल मचा रखा था. 007 गैंग मारवाड़ में खुलेआम फायरिंग और खूनी संघर्ष करने लगी. मारवाड़ के शांत इलाके में 007 गैंग का डर व्याप्त हो गया.

राजू मांजू और श्याम पूनिया अपने दोस्तों के लिए जान तक देने को तैयार रहते थे. इस कारण उन के गैंग से 300 युवक जुड़ गए थे. इन में से करीब 2 दरजन खूंखार अपराधी थे, कई हिस्ट्रीशीटर थे. 007 गैंग का वर्चस्व बीकानेर, गंगानगर, नागौर, जोधपुर, पाली, जैसलमेर तक था.

राजू मांजू के गैंग ने ‘भारतमाला सड़क परियोजना’ और टोल प्लाजा के अधिकारियों को डराधमका कर करोड़ों की रंगदारी वसूली. भारतमाला सड़क परियोजना में ठेके भी राजू मांजू एवं श्याम पूनिया के निर्देश पर दिए जाते थे. जिस ठेकेदार का नाम राजू मांजू आगे करता, उसे ही ठेका दिया जाता था. ठेका लेने के इच्छुक अन्य ठेकेदार चूं तक नहीं करते थे.

राजू उन ठेकेदारों को धमकाता था कि अगर जान प्यारी है तो ठेका मत लेना. हथियारबंद गुंडों की फौज के आगे ठेकेदार भला क्या करता. वह ठेका छोड़ देता था. राजू मांजू जिसे ठेका दिलाता था, उस से मोटी रकम वसूलता था. पहले जहां धमकाने पर 2-3 लाख मिलते थे, वहीं वक्त के साथ 50 लाख तक मिलने लगे थे. करोड़ों के ठेके में राजू मांजू करोड़ों वसूलता था.

टोल प्लाजा पर भी राजू मांजू का सिक्का चलता था. वहां से भी लाखों के वारेन्यारे थे. गुरु श्याम पूनिया व चेले राजू मांजू ने रंगदारी, वसूली, मारपीट शुरू की तो उन के खिलाफ कई मामले दर्ज होने लगे. 14 मामले तो राजू मांजू पर भारतमाला सड़क परियोजना टोल प्लाजा से जुड़े लोगों ने दर्ज करा रखे थे.

श्याम पूनिया पर मामले दर्ज हुए तो उस की तलाश की जाने लगी. तब तक वह करोड़ों रुपए रंगदारी वसूल चुका था. जोधपुर ग्रामीण डीएसटी (डिस्ट्रिक्ट स्पैशल टीम) ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थानीय पुलिस के साथ मिल कर 007 गैंग के सरगना श्याम पूनिया, उस के साथ ही श्रीराम मांजू व श्रवण को एक मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था.

गुरु श्याम पूनिया के जेल चले जाने के बाद 007 गैंग का राजू मांजू खुद सरगना बन बैठा. गैंग को राजू संचालित करने लगा. देखते ही देखते उस का मुकाबला 0029 गैंग, सरपंच गैंग और ऊर्जाराम गैंग जैसे प्रतिद्वंदी गैंगों से होने लगा. इस से लोगों में भय व्याप्त हो गया था.

साल 2018 में राजू मांजू हुबली (कर्नाटक) में गिरफ्तार हुआ. जेल से रिहा होने के बाद वह फिर से अपराध करने लगा. राजू मांजू ने न केवल जमीनी स्तर पर आतंक मचाया, बल्कि तकनीक और दिखावे का भी सहारा लिया. उस ने भारतमाला सड़क परियोजना और टोल प्लाजा के अधिकारियों को डराधमका कर करोड़ों की रंगदारी वसूली. भारतमाला सड़क परियोजना का काम जोधपुर जिले के मतोड़ा थाना इलाके में साल 2020 में चल रहा था.

13 अगस्त, 2020 की रात को लाखेटा स्थित कैंप में मैनेजर के रूम में 007 गैंग सरगना राजू मांजू अपने साथियों के साथ घुस गया. बदमाशों ने पिस्तौल व तलवार दिखाते हुए मैनेजर को धमकाया कि यहां काम करना है तो हफ्ता के रूप में 50 लाख रुपए देने होंगे, नहीं तो जान से मार देंगे. इस के बाद बदमाश चले गए, मगर फोन पर भी धमकियां दीं. इस से मैनेजर डर गया था.

उस ने घटना की सूचना पुलिस को दी. इस पर तत्कालीन आईजी (जोधपुर रेंज) नवज्योति गोगोई ने स्थानीय गुडों पर तत्काल काररवाई के निर्देश दिए. एसपी (जोधपुर ग्रामीण) राहुल बारहट ने इस की जिम्मेदारी जिला विशेष टीम (डीएसटी) के प्रभारी नरेंद्र पूनिया को सौंपी.

पकडऩे की बनी योजना

007 गैंग के बदमाशों का पहले से डाटाबेस तैयार कर रहे डीएसटी के सदस्य देवाराम बिश्नोई ने प्रोजेक्ट मैनेजर को धमकी देने वाले गुंडों के बारे में सुराग जुटाए. गहनता से पड़ताल के बाद डीएसटी के साथ एएसपी (फलोदी) दीपक कुमार के निर्देशन में फलोदी के डीएसपी पारस सोनी, इंसपेक्टर राजीव भादू, मतोड़ा थाने के एसएचओ नेमाराम इनाणिया, बाप थाने के एसएचओ हरि सिंह राजपुरोहित, लोहावट के एसएचओ इमरान खान, ओसियां के एसएचओ बाबूराम डेलू की अलगअलग टीमें बना कर तलाशी अभियान शुरू किया.

टीम को पता चला कि वांछित बदमाशों को बीकानेर के बज्जू थाना क्षेत्र के स्थानीय नेता भागीरथ तेतरवाल ने अपने घर में शरण दे रखी है. पुख्ता जानकारी के आधार पर पुलिस टीमों ने दबिश दे कर आरोपियों राजाराम उर्फ राजू मांजू, मनीष शेखानी, हनुमान उर्फ लादेन बिश्नोई, पप्पूराम उर्फ बबलू, जीवणराम बिश्नोई और ओमप्रकाश बिश्नोई को गिरफ्तार किया.

भागीरथ तेतरवाल ने आरोपियों को एयर कंडीशन हौल में ठहरा रखा था. उन के कब्जे से पुलिस ने 3 विदेशी पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, 2 तलवारें, लाखों रुपए और 2 स्विफ्ट कार जब्त की थी. नेता भागीरथ के खिलाफ भी अलग से काररवाई की गई थी. गिरफ्तार बदमाशों के खिलाफ जोधपुर बीकानेर रेंज के कई थानों में लूट, डकैती, हत्या, तस्करी के मामले दर्ज थे और कई जिलों की पुलिस को इन की तलाश थी.

Rajasthan Gangster

राजू मांजू की यह दूसरी बार गिरफ्तारी हुई थी. गिरफ्तार सभी 6 बदमाश पूछताछ के बाद जोधपुर जेल भेज दिए गए थे. गैंग का सरगना राजू मांजू जेल गया तो गैंग के लोग एक्टिव हुए.

गैंग के लोगों ने कोर्ट में वकीलों की फौज खड़ी कर दी. राजू मांजू की जमानत के प्रयास शुरू हुए और राजू मांजू जेल से बाहर आ गया. उस की जमानत हो गई. जेल में रहने के दौरान राजू मांजू की मुलाकात लारेंस के भाई अनमोल बिश्नोई से हुई. अनमोल ने राजू को लारेंस के साथ काम करने का सुझाव दिया.

राजू मांजू मान गया. वह लारेंस के साथ काम करने लगा. गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई राजू मांजू के जरिए ही मारवाड़ में अपने गैंग को बढ़ा रहा था. जेल से छूटते ही राजू मांजू की 007 गैंग फिर सक्रिय हो गई थी.

राजू मांजू के गैंग का हथियारों के साथ नाचते और फायरिंग करते वीडियो सामने आए. वीडियो में गैंग के सदस्य डीजे पर हाथ में गन लिए नाच रहे थे. वीडियो लोहावट का बताया जा रहा था.

यहां एक शादी समारोह में राजू मांजू अपने गुर्गों के साथ पहुंचा था. इस दौरान जम कर हवाई फायरिंग की गई. इस से पहले राजू मांजू का हथियारों के साथ प्रैक्टिस करते वीडियो भी आया था. फिर शादी में 2 गुटों में फायरिंग का वीडियो भी सामने आया. बड़ी बात यह है कि गैंग सोशल मीडिया पर हथियार बेचने के लिए धड़ल्ले से पोस्ट भी डाल रही थी.

गैंग के लोग अपने वाट्सऐप नंबर भी डाल रहे थे. राजू मांजू जोधपुर रेंज के टौप 10 वांछित बदमाशों की सूची में शामिल है. 007 गैंग के लोगों के हथियार लहराते डांस करते फायरिंग करते वीडियो सामने आने पर पुलिस अधिकारी नियमानुसार सख्त काररवाई की बात तो करते, मगर काररवाई नहीं होती.

लाखों इंस्टाग्राम फालोअर्स

शादीशुदा व 2 बच्चों का बाप होते हुए भी राजू एक युवती प्रीति से प्यार कर बैठा. प्रीति भी उस से प्यार करती थी तो दोनों ने लव मैरिज कर ली. गैंगस्टर राजू मांजू के अपराध की दुनिया में सक्रिय होने के बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर उस के 2 लाख से अधिक फालोअर्स हैं. वह हथियारों के साथ तसवीरें डाल कर युवाओं को अपने गैंग की ओर आकर्षित करता था.

वहीं, एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि सोशल मीडिया पर उस की फैन फालोइंग में लड़कियों की संख्या भी अच्छीखासी बताई जाती है. इंस्टाग्राम पर 2 लाख फालोअर्स और हथियारों के साथ तसवीरें डाल कर राजू युवाओं को भ्रमित करता था.

अपराध की दुनिया अकसर सोशल मीडिया का उपयोग ‘रौबिनहुड’ वाली छवि बनाने के लिए करती है, जो वास्तव में सिर्फ नई भरती का जरिया है. राजू मांजू ने भी रंगदारी, लूट, डकैती, मादक पदार्थ (डोडा अफीम) की तस्करी से 2 नंबर की करोड़ों की काली कमाई की थी. उसे यह पैसा सफेद दिखाना था. उस की छवि गैंगस्टर की बन चुकी थी.

ऐसे में उस ने अपने गांव जंभेश्वर नगर में 500 गायों की ‘रामदेव गौशाला’ खोली. रामदेव गौशाला जैसा संस्थान खोलना उस की चालाकी का हिस्सा थी, ताकि वह कानून और समाज की नजरों में खुद को निर्दोष दिखा सके. अपराधी अकसर धर्म और सेवा की आड़ ले कर अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश करते हैं.

ऐसा ही राजू मांजू ने भी किया. उस ने गांव में गौशाला खोली और राजस्थान के भजन गायकों को ‘एक शाम गौमाता के नाम’ भजन संध्या कार्यक्रम में बुलाया. सोशल मीडिया पर लोगों से गौशाला में भजन संध्या में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधारने का आग्रह किया. हजारों लोग भजन संध्या कार्यक्रम में आए.

गौमाता की सेवा के लिए लोगों ने बढ़चढ़ कर दान में चंदा दिया. राजू मांजू यही चाहता था. उस का कमाया काला धन सफेद हो गया. लोग राजू मांजू की गौसेवा व हिरण सेवा से खूब प्रभावित हुए. उस पर लगे अपराध के दाग धुल गए. राजू मांजू अब गौसेवा करते वीडियो और फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर करने लगा. लोग उसे समाजसेवी, धर्मप्रेमी, गौ प्रेमी, रौबिनहुड कहने लगे थे.

बना गौसेवक

राजू जो चाहता था, वही हुआ. राजू मांजू अब गौशाला से 007 गैंग चलाने लगा. वहीं पर गैंग के गुर्गों के साथ मीटिंग करता, गौशाला में ही मादक पदार्थ व हथियार रखता और गुर्गों के जरिए इन्हें सप्लाई करने लगा. गंगानगर के अपराधी तक राजू के साथ जुड़े थे. राजू गंगानगर तक मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा. इस कारण गंगानगर के कई थानों में उस के खिलाफ मामले दर्ज होने लगे.

धर्म और गौशाला की आड़ में उस का धंधा दिन दोगुना रात चौगुना बढऩे लगा. राजू मांजू मारवाड़ का डौन बन बैठा था. उस के 007 गैंग में 300 से ज्यादा गुर्गे थे. मारवाड़ में उस की सब से बड़ी गैंग थी.

भंवरी हत्याकांड में 10 साल की सजा काट कर 0029 गैंग का सरगना विशनाराम जांगू जेल से साल 2021 में बाहर आया तो उसे पता चला कि मारवाड़ पर 007 गैंग के राजू मांजू का राज है. विशनाराम 10 साल जेल में था तो उस का गैंग बिखर चुका था. मगर विशनाराम अपने आप को डौन समझता था. वह भला राजू मांजू को कैसे सहन करता.

उस ने अपने 0029 गैंग को दोबारा खड़ा किया. 0029 गैंग में 100 गुर्गे थे. इन गुर्गों की मदद से विशनाराम अपना साम्राज्य चलाने लगा. उस की गैंग तस्करी, लूट, रंगदारी एवं मारपीट जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल थी. 0029 गैंग के सरगना विशनाराम पर 5 दरजन से अधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं.

गैंगवार में बची जान

साल 2021 में जोधपुर जिले के थाना देचू अंतर्गत गिलाकोर गांव में एक शादी थी. उस शादी में सरपंच गैंग, 007 गैंग और 0029 गैंग के सरगना व गुर्गे शामिल हुए थे. 0029 गैंग के सरगना विशनाराम ने राजू मांजू को वहां देखा तो उस का खून खौल उठा.

राजू मांजू के आसपास लोग जमे थे. विशनाराम से यह सहन न हुआ. राजू का वहां पर मानसम्मान ज्यादा देख डीजे बजाने की बात पर विशनाराम और राजू मांजू में बहस हो गई. फिर क्या था, वहां पर दोनों गैंगों ने एकदूसरे पर हथियार तान दिए. हवाई फायर किए. राजू मांजू गैंग के वहां कम लोग थे, विशनाराम गैंग के ज्यादा. इस कारण राजू मांजू अपनी गाड़ी में बैठ कर भागने लगा.

विशनाराम गैंग ने गाड़ी का पीछा किया तो रेत में राजू की गाड़ी फंस गई. अपनी जान मुश्किल में देख राजू पैदल ही साथियों के साथ भाग निकला.

सरपंच गैंग ने बीचबचाव का प्रयास किया, मगर दोनों सरगना नहीं माने. इस के बाद सरपंच गैंग की पहल पर लक्ष्मण नगर में सुलह के लिए सभी इकट्ठा हुए. अचानक वहां पर भी बात बिगड़ गई और मारपीट हो गई.

007 गैंग और अन्य गैंग मारवाड़ में अपना वर्चस्व जमाने के लिए एकदूसरे के खून के प्यासे थे. जिस गैंग के सामने विपक्ष की गैंग पड़ती तो गोलियों की आवाज गूंज उठती.

जिस गैंग के लोग कम होते, वे पिटाई खा लेते थे. मौका मिलते ही वे बदला ले लेते थे. 0029 गैंग तो इतनी खूंखार थी कि तस्करी के दौरान पुलिस आड़े आती तो गाड़ी उस पर भी चढ़ा देते थे. गाहेबगाहे पुलिस भी काररवाई कर बदमाशों को जेल की हवा खिलाती रहती थी.

राजू मांजू मारवाड़ का डौन बन बैठा था. अब उस की चाहत राजस्थान का डौन बनने की थी. वह अपराध जगत में राज करना चाहता था. 007 गैंग से मारवाड़ में किसी गैंग ने टक्कर ली तो उसे धूल चटा दी. राजू मांजू का जो ठेकेदार, कंपनी या व्यक्ति कहना नहीं मानता उसे राजू के कहर से कोई नहीं बचा पाता था.

राजू मांजू सड़क पर अपने गैंग के काफिले के साथ निकलता तो सड़कें वीरान हो जातीं. जो राजू से टक्कर लेता, उस के पीछे 007 गैंग की गाडिय़ां दौड़ा कर उसे घेर लिया जाता और हाथपैर तोड़ कर फेंक दिया जाता था.

007 गैंग की अकसर 0029 गैंग, मांजू गैंग, ऊर्जा राम गैंग व सरपंच गैंग से गैंगवार होती रहती थी. राजू मांजू के गैंगस्टर रोहित गोदारा व लारेंस बिश्नोई गैंग के साथ अच्छे संबंध थे. राजू मांजू इन गैंगस्टरों के साथ काम करता था.

अब वह गौ सेवा के नाम पर चंदा वसूलने लगा था. गौशाला से वह 007 गैंग संचालित करने लगा था. यहीं से हथियार तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी भी की जाती थी. इस की जानकारी पुलिस को हुई तो पुलिस अधिकारियों ने 2 पुलिसकर्मियों को राजू मांजू के पास नौकरी करने भेजा. पुलिसकर्मी, मजदूर बन कर गौशाला पहुंचे और राजू मांजू से गौशाला में नौकरी मांगी. राजू मांजू ने उन्हें गरीब समझ कर अपनी गौशाला में काम दे दिया.

वे पुलिसकर्मी मजदूर बन कर रहे और पूरी जानकारी इकट्ठा कर अधिकारियों को दी. गैंग की शिकायत पुलिस मुख्यालय तक पहुंची तो जोधपुर जिला पुलिस को निर्देश दिया गया कि इन गैंगों का खात्मा करो. साल 2023 में जोधपुर ग्रामीण पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर बदमाशों की धरपकड़ का अभियान चलाया था.

इस के तहत सोशल मीडिया पर अपराधियों को फालो करने वालों पर भी काररवाई की गई थी. अपराधियों को फालो करने वालों को समझायाबुझाया गया, उन्हें बताया गया कि अपराधी और आपराधिक जीवन बहुत ही परेशानियों भरा है.

तत्कालीन एसपी (जोधपुर ग्रामीण) धर्मेंद्र यादव अपराधियों की धरपकड़ अभियान में पूरे एक्शन में नजर आए थे. उन्होंने 007 गैंग के अपराधियों पर लगातार काररवाई की. पुलिस ने इस गैंग के सरगना राजू मांजू को भी गिरफ्तार किया था.

साल 2023 में जोधपुर ग्रामीण पुलिस ने औपरेशन हिस्ट्रीशीटर अपराधी धरपकड़ चला कर पश्चिमी राजस्थान के कुख्यात गैंग्स 007 गैंग, 0029 गैंग, सरपंच गैंग, ऊर्जाराम गैंग, भादू गैंग, गडरिया गैंग, 0044 गैंग, कौशल गैंग, लारेंस बिश्नोई गैंग और रोहित गोदारा गैंग का खात्मा कर दिया था.

इन गैंगों के सरगना पकड़े गए थे. 200 से ज्यादा गैंग्स के गुर्गे भी पकड़े गए थे. पुलिस काररवाई ने उन दिनों अपराधियों में डर पैदा कर दिया था. गैंग सरगना व कुख्यात बदमाश पकड़े गए तो छोटे अपराधी बिलों में जा छिपे थे. जोधपुर ग्रामीण के तत्कालीन एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने कहा था, ‘अपराधियों ने लोगों के मन में जो खौफ पैदा किया था, पुलिस की काररवाई ने वही खौफ अपराधियों में पैदा कर दिया है. अगर अपराध की दुनिया में आए हो तो पकड़े जाओगे.’’

007 गैंग और 0029 गैंग के सरगना राजू मांजू व विशनाराम विश्नोई के पुलिस ने सिर के बाल और मूंछें मुंडवा दी थीं. दोनों गैंगस्टर सिर और मूंछ मुंडवा कर हाथ जोड़े खड़े थे और गुनाहों की माफी मांग रहे थे. नसीहत दे रहे थे कि बदमाशी में कुछ नहीं रखा, बरबाद कर देगी, ढाबे पर बरतन मांजने पड़ेंगे, अपराध छोड़ दीजिए.

पुलिस ने मारवाड़ की छोटीबड़ी सभी गैंग का खात्मा कर दिया था. गैंग सरगनाओं को जेल के पीछे धकेल दिया था. गैंग के खात्मे से मारवाड़ के लोगों ने चैन की सांस ली थी.

साल 2023 में जेल से बाहर आने के बाद राजू मांजू छिपता फिर रहा था. राजू मांजू पिछले कई दिनों से किसी बड़ी वारदात की फिराक में जयपुर के चक्कर लगा रहा था. वह गोपनीय तरीके से अपने साथियों से संपर्क कर हथियारों की व्यवस्था करने की कोशिश में था. उस के एक पुराने साथी ने चुपके से यह सूचना एएनटीएफ तक पहुंचा दी. एएनटीएफ टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में आरोपी राजू मांजू ने बताया कि उस को विपक्षी गैंग के दुश्मन को मारने के लिए हथियार चाहिए था. मगर वह हथियार के चक्कर में पकड़ा गया था.

पूछताछ के बाद गैंगस्टर राजू मांजू को कोर्ट के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका था. मारवाड़ के डौन राजू मांजू का सपना था कि वह राजस्थान का नंबर वन डौन बने, मगर उस का सपना अधूरा रह गया है. कथा लिखने तक उस की जमानत नहीं हुई थी.

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