UP Crime News. हरिओम यादव से बोतल बाबा बने पाखंडी ने सुनियोजित तरीके से कानपुर देहात के गांवों में अपने चमत्कार का खूब प्रचार किया, जिस से उस के आश्रम में पीडि़तों की भीड़ जुटने लगी थी. उसे रोजाना हजारों रुपए की आमदनी होने लगी. समस्या निदान के बहाने वह महिलाओं को अपनी हवस का शिकार इस तरह बनाता कि…
हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा कुछ देर आंख बंद कर कोई मंत्र बुदबुदाता रहा, फिर उस ने आंखें खोलीं और एक भरपूर नजर सामने बैठी खूबसूरत रेखा पर डाली. फिर वह रेखा के ससुर सालिग राम की ओर मुखातिब हुआ, ”आप नींबू, चाकू और एक गिलास पानी लाइए. अभी पता चल जाएगा कि आप की बहू पर किसी मायावी शक्ति का साया है या वह शारीरिक व्याधि से पीडि़त है.’’
सालिग राम तांत्रिक बाबा की आज्ञा का पालन करते हुए किचन से नींबू, चाकू व एक गिलास पानी ले आए. तांत्रिक ने गिलास का पानी हाथ में लिया और मंत्र बुदबुदाते हुए कई फूंक मारे फिर रेखा से कहा कि इस पानी को पी लो.
इस के बाद उस ने जेेब से तह किया हुआ रूमाल निकाला फिर रूमाल से चाकू को कई बार हौलेहौले पोंछा. तत्पश्चात उस ने कोई अस्पष्ट सा मंत्र बुदबुदाना शुरू किया. सालिग राम तथा उस के परिवार वालों की आंखें तब हैरानी से भर गईं, जब उन्होंने देखा कि नींबू को काटने के बाद उस में नीबू के रस की जगह रक्त टपकने लगा है.
”इस का मतलब है तुम्हारी बहू शारीरिक व्याधि का शिकार नहीं है. बल्कि उस पर कोई शैतानी साया है. उसे भगाने के लिए अनुष्ठान करना होगा, तब वह बिलकुल ठीक हो जाएगी.’’ हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा ने कहा.
”मेरी बहू ठीक हो जाएगी न बाबाजी?’’ सालिग राम हाथ जोड़ कर बोले.
”बिलकुल हो जाएगी. लेकिन आप को वही करना होगा, जो मैं कहूंगा.’’
”हम वैसा ही करेंगे बाबाजी, ”सालिग राम हाथ जोड़ कर बोले, ”आप बताइए क्या करना होगा?’’
”तुम्हें अपनी बहू को हमारे चैन का पुरवा स्थित हरिधाम आश्रम में लाना होगा. वहां अनुष्ठान व पूजा करनी होगी. इस पूजा में मेरे साथ तुम्हारी बहू रेखा होगी. पूजा एकांत कमरे में होगी तथा रेखा को केवल साफ धुला हुआ रंगीन वस्त्र पहनना होगा. इस पूजा के बाद रेखा एकदम ठीक हो जाएगी. अनुष्ठान में लगभग 40 हजार का खर्च आएगा. उस का इंतजाम तुम्हें करना होगा.’’
सब के चेहरे पर अब एक आशा की झलक नाचने लगी थी. केवल रेखा खुद को असहज महसूस कर रही थी. यह बात 6 जून, 2026 की है. रेखा के मायके व ससुराल वालों ने 40 हजार रुपयों का इंतजाम कर बाबा को थमा दिए. बाबा ने तब उन्हें अनुष्ठान के लिए 15 जून, 2026 को अमावस्या के दिन आश्रम आने को कहा.
उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के फफूंद थाना अंतर्गत एक गांव है-मटेरा. इसी गांव में राजकुमार सपरिवार रहते थे. उस के परिवार में पत्नी ऊषा के अलावा 2 बेटियां रेखा व पूनम थीं. राजकुमार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे. वेतन से परिवार का भरणपोषण करते थे.
बड़ी बेटी रेखा सयानी हुई तो राजकुमार ने उस का विवाह फफूंद कस्बा निवासी सालिग राम के बड़े बेटे रघुवीर के साथ कर दिया. सालिग राम के 2 अन्य बेटे रामवीर व सुखवीर थे, जो उस के साथ ही किराए के मकान में रहते थे और प्राइवेट नौकरी करते थे.
रेखा पढ़ीलिखी, खूबसूरत सुशील युवती थी. उस ने ससुराल आते ही घर संभाल लिया था. रेखा की सास जानकी, सरल स्वभाव की बहू पा कर बेहद खुश थी. रेखा पति का ख्याल तो रखती ही थी, सासससुर व दोनों देवरों का भी खयाल रखती थी. हंसीखुशी से 2 साल बीत गए. इन 2 वर्षों में रेखा ने एक बेटे अमन को जन्म दिया. अमन के जन्म से घर में खुशियां छा गईं.
रेखा नहीं हो रही ठीक
बेटे के जन्म के बाद जब घर खर्च बढ़ा तो रेखा का पति रघुवीर कमाने के लिए कोटा (राजस्थान) चला गया. वहां वह वेल्डिंग का काम करने लगा. कमाई का पैसा वह हर महीने अपनी पत्नी रेखा को भेजता. रेखा इन पैसों से अपने बच्चों का पालनपोषण करती और जो पैसा बचता, सास को थमा देती. रघुवीर खास त्यौहारों पर ही घर आता था. महीने भर पत्नी के साथ रहता, फिर काम पर चला जाता था.
सब कुछ ठीक चल रहा था कि जुलाई 2025 में एक रोज रेखा गश खा कर कमरे में गिर गई. रेखा के देवर सुखवीर व रामवीर उसे डौक्टर के पास ले गए. डौक्टर ने उसे दवाई दी और घर भेज दिया. लेकिन दवा से रेखा ठीक नहीं हुई. वह दिन पर दिन कमजोर होने लगी. नींद में उसे डरावने सपने भी आने लगे. कभीकभी वह नींद में बड़बड़ाने भी लगी. उसे न अब खाने का होश रहता न लाज शर्म का.
बहू रेखा की यह हालत देख कर सालिग राम व उनकी पत्नी जानकी घबरा गई. उन्होंने बेटे रघुवीर को कोटा से घर बुलवा लिया. इस के बाद रेखा को एक के बाद एक औरैया व कानपुर के कई डौक्टरों से इलाज कराया गया.
कोई डौक्टर उसे मानसिक रोगी बताता तो कोई साधारण बुखार व कमजोरी बता कर दवा देता रहा. डौक्टरों के इलाज का असर यह हुआ कि रेखा कभी स्वस्थ दिखती और सामान्य व्यवहार करती, लेकिन कभी अनापशनाप बकनेझकने लगती और बिना बताए घर से भाग भी जाती थी.
रेखा को ले कर अब ससुराल वाले परेशान रहने लगे थे. उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें, क्या न करें. अड़ोसपड़ोस के गांव में झाडफ़ूंक करने वाले तांत्रिकों से भी वह रेखा की झाडफ़ूंक करा चुके थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था. रेखा अब अपने बच्चों के साथ कभी ससुराल तो कभी मायके में आ कर रहने लगी थी.
एक रोज सालिग राम कानपुर (देहात) जनपद के कस्बा भोगनीपुर में रहने वाले एक रिश्तेदार के घर गए. वहां उन्हें रिश्तेदार के मार्फत हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा के चमत्कारी कारनामों की जानकारी हुई.
प्रभावित हो कर सालिग राम ने हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा से मुलाकात की. बाबा का विशाल आश्रम और पीडि़तों की संख्या देख कर सालिग राम प्रभावित हुए. उन्होंने बाबा को अपनी समस्या बताई और बाबा को घर आने का आग्रह किया. बाबा ने उन का आग्रह स्वीकार कर लिया.
रेखा उन दिनों अपने मायके में थी. सालिग राम ने अपने बेटे रामवीर को भेज कर रेखा को अपने घर बुलवा लिया. सालिग राम ने कहा, ”बहू, कल हरिओम सरकार उर्फ बोतल बाबा हमारे घर आ रहे हैं. वह पहुंचे हुए तांत्रिक बाबा हैं. मुझे विश्वास है कि वह तुम्हें जरूर ठीक कर देंगे.’’
6 जून, 2026 की दोपहर हरिओम सरकार उर्फ बोतल बाबा फफूंद कस्बा स्थित सालिग राम के घर पहुंचा. खूबसूरत और जवान रेखा को देख कर उस के मन में वासना जाग उठी. उस ने घर के सभी सदस्यों को चमत्कार दिखा कर कहा कि रेखा पर काली साया है. षडयंत्र के तहत उस ने रेखा को अपने आश्रम बुलाया और अनुष्ठान व पूजा करने की बात कही.
रेखा ने बचाई इज्जत
15 जून, 2026 की दोपहर रेखा अपने देवर रामवीर व सुखवीर के साथ बाइक से चैन का पुरवा गांव स्थित बाबा के आश्रम पहुंची. बाबा उस समय समागम में बैठा पीडि़तों से बात कर रहा था. रेखा को देख कर वह मुसकराया और बोला, ”आ गई तुम. आज तुम संतुष्ट हो कर ही आश्रम से जाओगी.’’
कुछ देर बाद हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा कमरे में पहुंचा और अनुष्ठान के बहाने रेखा को कमरे के अंदर बुलाया. रेखा के पहुंचते ही बाबा ने कमरा अंदर से बंद कर लिया.
उस ने रेखा को अपने सामने बैठाया और बोतल के पानी में फूंक मार कर उस के शरीर पर छिड़का. इस के बाद वह उस के शरीर को गौर से निहारने लगा. उस की नजरें देख कर रेखा असहज हो उठी. उस की आंखों से आंसू टपकने लगे.
हरिओम यादव ने आगे बढ़ कर रेखा के आंसू पोंछ दिए और स्नेह से उस की पीठ थपथपाने लगा, ”अरे, तुम रो रही हो, मुझ पर भरोसा रखो.’’ कहतेकहते हरिओम का हाथ रेखा की पीठ को सहलातेसहलाते कमर तक पहुंच गया.
औरत पुरुष के स्पर्श मात्र से ही जान जाती है कि उस स्पर्श में कौन सी नीयत छिपी है. रेखा भी बाबा हरिओम यादव की नीयत भांप गई. वह झटके से उठ खड़ी हुई, ”आप बाबा हैं, पराई औरत पर बुरी नजर डालने में शर्म नहीं आती?’’
”कैसी बातें करती हो रेखा,’’ बाबा भी उठ खड़ा हुआ, ”क्या तुम्हें अपनी जान प्यारी नहीं. अपनी जान बचाने के लिए क्या तुम इतना भी बरदाश्त नहीं कर सकती?’’
”नहीं. मैं अपनी इज्जत से खिलवाड़ नहीं कर सकती.’’ रेखा गुस्से से बोली.
बाबा ठहाका लगा कर हंसा. उस की आंखों में वासना के लाललाल डोरे तैरने लगे. बाबा ने लपक कर रेखा को दबोच लिया और उस के नाजुक अंगों को मसलने लगा. रेखा ने विरोध किया तो वह और वहशी बन गया. वह रेखा के शरीर से कपड़े खींचने लगा और संबंध बनाने की कोशिश करने लगा.
रेखा समझ गई कि बाबा पर वासना का भूत सवार है. वह उस की इज्जत लूटना चाहता है. अत: बचाव में उस ने बाबा को एक जोरदार धक्का दिया. बाबा लडख़ड़ा कर गिर पड़ा. उस के बाद वह कमरे का दरवाजा खोल कर बाहर आ गई. उस ने वहां मौजूद लोगों को बताया कि बाबा ने पहले छेडख़ानी की फिर दुष्कर्म का प्रयास किया.
रेखा कुछ और बताती उस के पहले ही हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा हाथ में रस्सी का कोड़ा लिए कमरे से बाहर आया और बोला, ”इस महिला पर भूत सवार है. भूत उस से डर कर भाग रहा है. इसलिए महिला भी भाग रही है. अब उस का भूत उतारना जरूरी है.’’
इस के बाद बाबा ने अपने शिष्य (भतीजे) दीपक, कुंदन व उस के देवरों रामवीर व सुखवीर से कहा कि महिला को पकड़ो. बाबा के आदेश पर उन सब ने रेखा को पकड़ लिया.
उस के बाद बाबा रेखा के समीप पहुंचा और उस के बाल पकड़ कर कोड़े से पिटाई करने लगा. वह पिटाई के दौरान रेखा से पूछता कि बता उस के साथ कितने भूत हैं. उन के नाम बता, लेकिन रेखा डर के मारे चुप रही. बाबा बारबार नाम पूछ कर कभी कोड़े तो कभी चाकू जैसी नुकीली चीज से उस के हाथपैर और कमर पर वार करता रहा.
इस बीच रेखा बाबा के हाथ जोड़ती रही और बख्श देने की गुहार लगाती रही. बाबा के शिष्य दीपक, कुंदन व रेखा के देवरों ने भी उस की पिटाई की. मार खातेखाते रेखा जब बेहोश हो गई, तभी बाबा ने उसे छोड़ा. उस के बाद उस के देवर उसे ले कर घर आ गए.
रेखा के मन में बारबार बाबा को सबक सिखाने के लिए गुस्सा उमड़ रहा था. वह सारी बात पुलिस को बताना चाहती थी ताकि वह पाखंडी बाबा किसी अन्य महिला को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश न करे, लेकिन सासससुर ने उसे यह कह कर रोक दिया कि पुलिस में जाने से हमारे ही परिवार की बदनामी होगी.
रेखा उस वक्त तो चुप हो गई, लेकिन तांत्रिक के प्रति उस के मन में नफरत की आग सुलगती रही. आखिर में उस ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा कर बाबा को सबक सिखाने की ठान ली. उस ने अपने ऊपर हुए जुल्म की सारी दास्तां अपने मांबाप को भी बताई तथा मदद मांगी.
इधर बाबा हरिओम यादव को आभास हो गया था कि रेखा पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा सकती है. अत: पुलिस से बचने के लिए बाबा अपने भतीजे दीपक व कुंदन के साथ फरार हो गया. आश्रम के बाहर सजने वाली दुकानें भी बंद हो गईं. फरियादी भी लौटने लगे.
बोतल बाबा हुआ अरेस्ट
18 जून, 2026 की सुबह 10 बजे रेखा बाबा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने थाना देवराहट पहुंची. उस समय थाने में इंसपेक्टर सौरभ राणा मौजूद थे. रेखा ने उन्हें तांत्रिक व उस के शिष्यों द्वारा अपने साथ किए गए कुकृत्यों की सारी कहानी शुरू से अंत तक बता दी.
रेखा से सारी बातें सुनने के बाद इंसपेक्टर सौरभ राणा ने रेखा की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 316, 351, 115 व 74 के तहत हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा, उस के शिष्य दीपक, कुंदन, रेखा के देवर रामवीर, सुखवीर व 5 अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. रिपोर्ट दर्ज होते ही सौरभ राणा ने बाबा के चैन का पुरवा गांव स्थित आश्रम पर छापा मारा, लेकिन बाबा हाथ नहीं आया. वह शिष्यों के साथ आश्रम से फरार था.
19 जून, 2026 की दोपहर देवराहट इंसपेक्टर सौरभ राणा क्षेत्रीय गश्त पर थे, तभी उन्हें एक खास मुखबिर से पता चला कि आरोपी बाबा हरिओम यादव अपने भतीजे दीपक के साथ जल्लापुर गांव के पास मौजूद है.
मुखबिर की इस सूचना पर श्री राणा पुलिस दल के साथ जल्लापुर गांव पहुंचे और सड़क किनारे खड़े बाबा हरिओम यादव और उस के भतीजे दीपक को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने पुखरायां सीएचसी में बाबा का मैडिकल परीक्षण कराया, फिर उसे पुलिस मुख्यालय लाया गया.
यहां पर एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय, एएसपी आलोक प्रसाद तथा सीओ (भोगनीपुर) राजीव सिरोही ने हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ की.
पूछताछ में बाबा हरिओम यादव ने कहा कि उस पर महिला द्वारा लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं. उसे सुनियोजित ढंग से फंसाया गया है. औरैया जनपद के दिबियापुर कस्बा निवासी भाजपा नेता आशीष द्विवेदी ने उसे फंसाया है. देख लेने की धमकी भरा उन का फोन भी आया था. वह सनातनी बाबा है. सनातनियों को सताया जा रहा है.
लेकिन आशीष द्विवेदी का कहना है कि बाबा हरिओम पाखंडी है. वह कथित चमत्कार दिखा कर लोगों को बेवकूफ बनाता है. वह तंत्रमंत्र की दुकान चला कर 20 रुपए का पानी बेचता है और 250 रुपएकी आश्रम में प्रवेश फीस हर पीडि़त से वसूलता है. इस तरह वह रोजाना हजारों रुपए की कमाई करता है. महिला से उन का कोई लेनादेना नहीं है.
हरिओम यादव कौन था? वह स्वयंभू बाबा कैसे बना? महिला ने उस के पाखंड और धूर्तता का परदाफाश कैसे किया? यह सब जानने के लिए हम बाबा के अतीत की ओर चलते हैं.
उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर (देहात) जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर थाना देवराहट अंतर्गत एक गांव है-चैन का पुरवा. इसी गांव में फूलसिंह यादव सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी रामकली के अलावा 2 बेटे थे हरिओम व पुत्तीलाल. फूलसिंह काश्तकार था. उस के पास 10-12 बीघा जमीन थी, जिस में अच्छी उपज होती थी.
हरिओम बना बोतल बाबा
फूलसिंह का बड़ा बेटा हरिओम यादव बचपन से ही महत्त्वाकांक्षी था. उस के सपने ऊंचे थे. वह अपने पिता के साथ खेतों पर काम करता था. हालांकि उस का मन खेतीकिसानी में नहीं लगता था. पढ़ाईलिखाई में भी वह फिसड्ïडी था.
किसानी से मन हटा तो वह कानपुर देहात की अकबरपुर तहसील में बैठने लगा. तहसील में वह लोगों के आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनवाने का काम करने लगा तथा अकबरपुर कस्बे में ही एक किराए का कमरा ले कर रहने लगा. प्रमाण पत्र बनवाने में वह रोजाना 500-600 रुपए कमा लेता था.
वर्ष 2015 की बात है. चैत्र माह की नवरात्र में एक रोज हरिओम यादव भगवा वस्त्र धारण कर गांव आया. उस ने आवाज दे कर लोगों को चैपाल पर इकट्ठा किया, फिर बोला, ”गांव वालो, मेरी बात गौर से सुनो. रात में मेरे सपने में काली मां आई थी. उन्होंने आदेश दिया है कि वह काम करो, जिस के लिए तुम ने जन्म लिया है.’’
इस के बाद हरिओम यादव गांव में ही रहने लगा. उस ने गांव के बाहर अपनी जमीन पर काली माता का मंदिर बनवाया और पूजापाठ करने लगा. वह लोगों की समस्याएं सुन कर उन की मदद करने लगा. इस तरह 2 साल में ही हरिओम यादव आसपास के गांवों में फेमस हो गया.
उस ने प्रचारप्रसार के लिए अपने भतीजे दीपक व कुंदन को भी शामिल कर लिया. ये दोनों बेरोजगारों की टोली के साथ उस के चमत्कारों का प्रचारप्रसार करने लगे.
जिस जगह हरिओम यादव ने काली मां का मंदिर बनवाया था, उस के आसपास उस ने 8 बीघा भूमि पर आश्रम बनवा लिया तथा बड़ा सा भव्य गेट लगवा लिया. आश्रम का नाम दिया ‘हरिधाम आश्रम’.
8 अगस्त, 2022 को हरिओम यादव ने गांव में बड़ा आयोजन किया. हरिधाम आश्रम के उद्ïघाटन के लिए उस ने हनुमानगढ़ी के भरतदास महाराज, कर्पूरी सेना के अध्यक्ष श्याम नारायण और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज डा. आई.एम. कुद्दूसी को बुलाया.
आश्रम के उद्घाटन के बाद हरिओम यादव हर मंगलवार व शनिवार को आश्रम में दरबार लगाने लगा. लोगों के सामने वह सिंहासन पर बैठता था. इस में वह कभी दूल्हे के कपड़े पहनता तो कभी धोतीकुरते में आता.
धीरेधीरे उस के आश्रम में सैकड़ों लोग दूरदराज से आने लगे और हरिओम महाराज के जयकारे लगाने लगे. इस तरह हरिओम यादव स्वयंभू बाबा बन गया. चूंकि वह बोतल के पानी में फूंक मार कर इलाज करता था, अत: वह हरिओम सरकार उर्फ बोतल बाबा के नाम से लोगों के बीच चर्चित हो गया.
आश्रम में आने वाले हर पीडि़त को बाबा तक पहुंचने के लिए पहले 20 रुपए की पानी की बोतल खरीदनी पड़ती, उस के बाद 100 रुपए की प्रवेश फीस की परची कटानी पड़ती. बाद में प्रवेश फीस 250 रुपए हो गई. इस तरह बाबा की हर रोज हजारों रुपए की कमाई हो जाती.
पाखंड का फैलाया जाल
हरिओम सरकार उर्फ बोतल बाबा 3 तरह से लोगों को ठीक करने का दावा करता. पहला, बोतल में फूंक मार कर पानी को अमृत बनाने का दावा, कहता इसे पीने से बीमारी ठीक हो जाएगी. दूसरा, सेब पर फूंक मार कर दावा करता कि संतानहीन महिला इसे खा कर गर्भधारण करेगी और पुत्र ही होगा और तीसरा, फिच्चफिच्च की आवाज निकाल कर शरीर से दर्द खींच लेने का दावा.
इस के अलावा बाबा कैंसर, टीबी जैसी घातक बीमारी को भी ठीक करने का दावा करता था.
बोतल बाबा के इन दावों के बावजूद यदि कोई पीडि़त कहता कि उसे फायदा नहीं हुआ तो बाबा कहता कि तुम्हारे ऊपर काला साया है. विशेष पूजा करवानी होगी. बाबा के साथ रहने वाले लोग पूजा सामग्री लिखते और वही आश्रम से ही इसे खरीदना होता था. सामग्री की कीमत 5 से 10 हजार रुपए के बीच होती. कभी किसी पीडि़त से बाबा पूजा के नाम पर 20 से 40 हजार का सौदा भी कर लेता.
हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा आश्रम में आने वाले पीडि़तों को प्रभावित करने के लिए समयसमय पर चमत्कारिक गतिविधियां भी करता रहता था. यह चमत्कार वह अपने ही आदमियों के सहयोग से करता था.
एक रोज कुछ लोग एक महिला को ले कर आए और बताया कि महिला बीमार थी. डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया है. उस रोज आश्रम में भीड़ थी. बाबा ने उस महिला पर पहले फूंक मार कर जल छिड़का फिर बोला, ”मैं न बाबा हूं, न भगत और न ही तांत्रिक. न मेरा कोई गुरु है, न कोई कंठीमाला पहनता हूं. ये जो सूर्य है और ये जो काली मां है, यही मेरे गुरू हैं.’’
इस के बाद हाथ से जादू दिखाने जैसी हरकत करने लगा. फिर लेटी हुई महिला उठ गई. लोग जयजयकार करने लगे.
इसी तरह जालौन की रहने वाली आरती अपने पति के साथ आश्रम आई. संतान की चाह में वह आई थी. बाबा ने आरती से सेब मंगाया, फिर फूंक मार कर मंत्र पढ़ा. इस के बाद सेब आरती की झोली में फेंकतेे हुए बोला, ”चाहे कमी तुझ में हो या तेरे पति में, जा भिखारिन तुझे पुत्र प्राप्त होगा. इसे एकांत में बैठ कर खाना.’’
भोगनीपुर की रागिनी गृहकलह व गृह दोष से परेशान थी. समस्या के निदान के लिए वह बाबा के आश्रम आई. बाबा ने बोतल के पानी में फूंक मार कर उसे दिया और कहा कि इस पानी को पी ले. बचे हुए पानी को घर में छिड़कना तथा घर के लोगों को पिलाना. सब ठीक हो जाएगा.
हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा का पाखंड चरम पर था. वह लोगों को तंत्रमंत्र के बहाने ठग रहा था. लेकिन उस के पाखंड और कुकृत्य का परदाफाश तब हुआ, जब बाबा ने फफूंद कस्बा की रहने वाली महिला रेखा को काली साया दूर करने के बहाने अपने आश्रम में बुला कर अनुष्ठान के बहाने उस से छेड़छाड़ की तथा शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया.
20 जून, 2026 को पुलिस ने हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा तथा दीपक से पूछताछ के बाद उन्हें कानपुर (देहात) की माती कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयासरत थी. UP Crime News
—कथा मेें महिला पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.






