Travel Scam. उत्तराखंड में बादल फटने जैसी आपदा से बाढ़ की डरावनी तसवीर या विदेशों में जंग की विभीषिका की खबर से डर का माहौल बना कर की गई साइबर जालसाजी का एक हैरान करने वाला तरीका सामने आया है. कैसे की गई यह ठगी, कैसे बना ली नकली बाढ़ की तसवीरें और वीडियो, कौन फंस जाते थे इस फरजीवाड़े में? पढ़ें इस कहानी में

मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले 32 वर्षीय अजय मखीजा ने बीते साल 3 सितंबर, 2025 को परिवार के साथ वियतनाम घूमने का प्लान बनाया था. उन्होंने इंटरनेट पर टूर पैकेज के बारे में जानकारी तलाश की. उन्हें ‘लव फार माउंटेन’ की एक कंपनी के बारे में जानकारी मिली. उस की आईडी से संपर्क किया. वहां टूर के कई लुभावने पैकेज थे. उस कंपनी के संचालक राकेश सिंह बिष्ट से बातचीत हुई.

उन्होंने मखीजा को टूर पैकेज के बारे विस्तार से समझाया. टूर में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में संतोषजनक जानकारी दी. इस सिलसिले में हर तरह की सुविधाओं का दावा करते हुए बिष्ट ने मखीजा को भरोसे में ले लिया.

इस के बाद टूर पैकेज देने के बहाने कंपनी ने उन से अलगअलग किस्तों में 9 लाख 6 हजार 800 रुपए ले लिए. किंतु मखीजा की वियतनाम के टूर पर जाने की तारीख तय नहीं हो पा रही थी. इस बारे में उन्हें बताया गया कि अभी वियतनाम में युद्ध जैसे हालात हैं. वहां बाढ़ और बारिश का मौसम भी है, इसलिए वहां जाना ठीक नहीं है.

इन कारणों से मखीजा का टूर 5 महीने तक टलता रहा. जब टूर का प्रोग्राम नहीं बन पाया, तब मखीजा ने अपने पैसे वापस मांगे. इस पर कंपनी कोई न कोई बहाना बनाती रही. एक समय आया, जब कंपनी के संचालक बिष्ट ने अपना फोन बंद कर लिया.

मखीजा इसे ले कर परेशान हो गए. क्योंकि न तो उन के टूर प्रोग्राम की कोई उम्मीद दिख रही थी और न ही पैसे वापस मिल रहे थे. आखिरकार उन्होंने फरवरी, 2026 में सागर के मोतीनगर पुलिस स्टेशन में कंपनी के खिलाफ एक शिकायत दी.

सुभाष नगर वार्ड के रहने वाले अजय मखीजा ने शिकायत में लिखा कि ट्रैवल कंपनी ने उन से वियतनाम टूर के नाम पर 9 लाख 6 हजार 800 रुपए लिए, लेकिन न तो टिकट दिए और न ही पैसे वापस किए.

मामला वेबसाइट कंपनी से जुड़ा था और सभी तरह की जनकारियों से ले कर पैसे का भुगतान औनलाइन हुआ था. पुलिस ने साइबर सेल से मदद ली और मखीजा द्वारा दिए गए कंपनी संचालक राकेश सिंह बिष्ट के मोबाइल नंबर, कंपनी आईडी और अन्य सबूतों के आधार पर जांच शुरू की गई. कंपनी के रजिस्ट्रैशन से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की गई.

आरोपी के मोबाइल नंबर का एक महीने का डेटा निकाला गया. उस की लोकेशन उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के पिलोली गांव में मिली. दस्तावेजों की जांच के दौरान भी इस बात की पुष्टि हो चुकी थी. जैसे ही लोकेशन का पता चला, सागर पुलिस की टीम अल्मोड़ा पहुंच गई. यह सब करते हुए पुलिस को 3 महीने लगे.

उन्होंने पिलोली गांव में छापा मारा और आरोपी राकेश सिंह बिष्ट को गिरफ्तार कर लिया गया. उसे पुलिस की जांच टीम 6 मई, 2026 को सागर ले आई. उसे कोर्ट में पेश किया गया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में ले कर जेल भेज दिया गया.

पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि अजय से सितंबर में पैसे लेने के बाद मखीजा को अक्तूबर, 2025 में वियतनाम का टिकट देने का वादा किया था. किंतु करीब 10 दिन बाद अजय ने उस से संपर्क किया और टिकट मांगा, लेकिन बिष्ट ने टिकट नहीं दिया. उस ने कहा, ‘वियतनाम में भारी बारिश और बाढ़ का मौसम चल रहा है, इसलिए अभी वहां जाना सुरक्षित नहीं है.’

इस के सबूत के तौर पर बिष्ट ने मखीजा को बाढ़ की कुछ तसवीरें भी भेजीं और कहा कि टिकट दिसंबर में बुक होंगे. 2 महीने बाद जब दिसंबर आया तो मखीजा ने यात्रा के टिकट मांगे. इस बार राकेश ने एक नया बहाना बनाया और कहा कि वहां युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. उस ने कहा कि टिकट फरवरी तक कंफर्म हो जाएंगे, लेकिन फरवरी में भी कुछ नहीं हुआ.

इसी के साथ पूछताछ में बिष्ट ने अपने कुछ दूसरे कारनामों के राज भी खोले. उसे औनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी, घुड़सवारी पर दांव लगाने और शेयर बाजार की लत थी.

अपने शौक पूरे करने के लिए उस ने लगभग ढाई साल पहले उत्तराखंड में ‘लव फौर माउंटेन’ नाम की एक टूर एंड ट्रैवल्स कंपनी रजिस्टर करवाई थी. रजिस्ट्रैशन के बाद उस ने कंपनी की वेबसाइट तैयार करवाई.

ऐसे फंसते थे लोग

वेबसाइट पर उस ने विदेश यात्राओं के लिए कम कीमतों पर टूर पैकेज लांच किए. जो कोई पर्यटक औनलाइन सर्च करते और कंपनी से संपर्क करते तो वह उन की टूर की जरूरत के अनुसार पर्यटन करवाने का वादा करता था. उन्हें लुभावनी सुविधाओं के बारे में बताता था.

पर्यटकों का भरोसा जीत लेता था. फिर उन से अलगअलग खातों में पैसे जमा करवाता था और पैसे मिलने के बाद लापता हो जाता था.

राकेश सिंह बिष्ट की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उस के परिवार के बारे में जानकारी मिली. जांच से पता चला कि बिष्ट के पेरेंट्स अल्मोड़ा जिले के एक गांव में रहते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं. वह अपने परिवार में इकलौता बेटा है. उस की 5 बहनें हैं.

एक मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण, घर का खर्च मुश्किल से चल पाता था. जबकि राकेश की बिगड़ी आदतों के चलते वह अपने शौक पूरा करने लिए परिवार पर दबाव बनाते रहता था, जबकि घर से ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे. इसलिए वह गलत काम करने लगा था.

वह क्या काम करता है, इस की जानकारी परिवार वालों को भी नहीं थी. उन्हें जब पुलिस से अपने बेटे के फ्रौड के बारे में पता चला तो उन्हें काफी सदमा लगा. पुलिस को उन्होंने बताया कि राकेश बचपन से ही बिगड़ी हुई फितरत का था. उस के दोस्तों का सर्कल भी अच्छा नहीं था. उस ने शरीर पर कई टैटू भी बनवा रखे थे.

हालांकि उस के बुजुर्ग पेरेंट्स हमेशा उसे गलत काम करने से रोकते थे, लेकिन वह उन की एक भी बात नहीं सुनता था. इस कारण परिवार वाले भी उस की हरकतों से परेशान थे.

बिष्ट ढाई साल से पर्यटकों के साथ धोखाधड़ी करने वाला एक नेटवर्क चला रहा था. उस ने धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे घुड़सवारी, शेयर बाजार, औनलाइन गेमिंग और जुए में उड़ा दिए.

पूछताछ में आरोपी बिष्ट ने फरजी आईडी के माध्यम से ठगी करना स्वीकार कर लिया.  पुलिस ने उस के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है.  न्यायालय में पेश करने के बाद आरोपी को केंद्रीय जेल सागर भेज दिया गया है.

बिष्ट की धोखाधड़ी से पुलिस के सामने ठगी का एक अनोखा मामला सामने आया, जिस में ठग उत्तराखंड में बादल फटने या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की डरावनी तसवीरों और वीडियो का इस्तेमाल करते हैं.  वे लोगों को कौल कर के या सोशल मीडिया पर मैसेज भेज कर दावा करते हैं कि वे आपदा राहत कोष के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे हैं.

इसी तरह से जालसाज वैश्विक तनाव या युद्ध के नाम पर लोगों को डराते हैं. वे पीडि़तों से संपर्क कर यह भ्रम फैलाते हैं कि उन के बैंक खाते या व्यक्तिगत दस्तावेज किसी संदिग्ध गतिविधि, जैसे मनी लौंड्रिंग या जासूसी से जुड़े हैं और उन्हें ‘युद्ध के आपातकालीन नियमों’ के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है.

यहां तक कि डर का माहौल बना कर ठग वीडियो कौल के जरिए पीडि़त को ‘डिजिटल अरेस्ट’  कर लेते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखा कर उन से पैसे ऐंठते हैं. पहाड़ों में आई बाढ़ की भयानक तसवीरों और फरजी सूचनाओं के वायरल होने के पीछे कई बार एआई से बनाई गई तसवीरें भी शामिल होती हैं.

उत्तराखंड पुलिस और साइबर सेल ऐसी घटनाओं और फरजी कौल सेंटरों के खिलाफ लगातार काररवाई कर रही हैं. इसे ले कर  उत्तराखंड पुलिस साइबर हेल्पलाइन (1930) जारी की गई है या फिर आधिकारिक नैशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. Travel Scam

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