SDM Bribery Case. इसे कहते हैं सिर मुंडाते ही ओले की मार. राजस्थान में सवाई माधोपुर की नईनई बनी एसडीएम काजल मीणा के बारे में ऐसा ही कुछ कहा जा सकता. यह मुहावरा उस पर एकदम फिट बैठता है. वह 60 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ी गई. उसे एसीबी ने अपने शिकंजे में फंसाया और उस के पास से 4 लाख नकदी भी बरामद की.

दरअसल, आरएएस (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) काजल मीणा की पहली स्वतंत्र नियुक्ति एसडीएम (उपविभागीय मजिस्ट्रेट) के तौर पर सवाई माधोपुर में हुई थी. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) मुख्यालय को गुप्त सूचना मिली थी कि नवनियुक्त काजल मीणा रिश्वत लेने से पीछे नहीं हटती है.

एसीबी यानी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक गोविंद गुप्ता को मालूम हुआ था कि सवाई माधोपुर में एक परिवादी से उस की भूमि की फाइनल डिक्री जारी करने की एवज में एसडीएम काजल मीणा अपने रीडर दिनेश सैनी के मार्फत 60 हजार रिश्वत राशि की मांग कर परेशान किया जा रहा है.

यह मामला जमीन के बंटवारे से जुड़ी फाइनल डिक्री जारी करने से संबंधित था. जिस में परिवादी चरतलाल ने एसडीएम के रवैए से परेशान हो कर एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी.

परिवादी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि एसडीएम के रीडर दिनेश सैनी ने इस के लिए कुल 60 हजार रुपए मांगे थे, जिस में 50 हजार रुपए एसडीएम के लिए और 10 हजार रुपए खुद के कमीशन के तौर पर तय किए गए थे.

इस संबंध में एसीबी सवाई माधोपुर इकाई द्वारा गुप्त काररवाई शुरू की गई.

इस में काजल मीणा उपखंड अधिकारी, उपखंड नादोती जिला ने अपने रीडर दिनेश कुमार सैनी, प्रवीण धाकड़ वरिष्ठ सहायक के जरिए परिवादी से उस की भूमि की तकाशनामे की फाइनल डिक्री जारी करने की एवज में 60 हजार की रिश्वत राशि लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया. इस काररवाई के अनुसार एसीबी ने एसडीएम को पकडऩे के लिए 16 अप्रैल को जाल बिछाया. जैसे ही रीडर दिनेश सैनी ने परिवादी से 60 हजार रुपए लिए और उसे यूडीसी प्रवीण धाकड़ को सौंपा, तभी एसीबी ने धावा बोल कर दोनों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया.

लेकिन उस से पहले रीडर ने वाट्सऐप कौल के जरिए एसडीएम काजल मीणा को रिश्वत की राशि प्राप्त होने की सूचना दे दी थी, जो उन के गले की हड्ïडी बन गया. क्योंकि जिस समय एसडीएम ने अपनी सहमति दोनों आरोपियों की दी, उस समय टीम वहीं मौजूद थी. जो उन के खिलाफ पुख्ता सबूत बन गया.

काजल मीणा की यह पहली पोस्टिंग थी और महज 7-8 महीने में ही एसीबी की काररवाई ने कालिख का दाग लगा दिया. एसीबी ने काररवाई के दौरान यूडीसी प्रवीण के बैग से रिश्वत के 60 हजार रुपए के अलावा 4 लाख रुपए भी बरामद हुए. आरोपी पक्ष ने इसे फसल की आय बताया, लेकिन कोई संतोषजनक प्रमाण नहीं मिलने पर एसीबी ने इसे जब्त कर लिया.

इस के अलावा बताते हैं कि एसडीएम कार्यालय पर क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन को संरक्षण देने के भी गंभीर आरोप लगे हैं.

तीनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट भरतपुर में पेश किया गया, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. वहीं दूसरी तरफ  एसडीएम काजल मीणा को राजस्थान सरकार के जरिए निलंबित भी कर दिया गया. खबर लिखे जाने तक एसीबी सवाई माधोपुर की टीम मामले की गहन जांच में जुटी है. SDM Bribery Case

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...