Diamond Robbery Mumbai. गरीबी के संकट से जूझ रहे उदयभान ठाकुर ने साढ़े 6 करोड़ के हीरे लूटने की जो योजना बनाई, उस में कामयाब भी हो गया. लेकिन पुलिस की सक्रियता से पकड़े जाने पर परिवार की गरीबी का संकट कम होने के बजाय और बढ़ गया.

मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कौंप्लेक्स (बीकेसी) स्थित मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक्स कंपनी महानगर मुंबई और उस के उपनगरों में ही नहीं, देशविदेश तक हीरों के गहनों का कारोबार करती है. यह कंपनी वैसे तो सभी तरह के हीरे जड़े गहने बनाती है, लेकिन इस के यहां के हीरे जड़े लौकेट कुछ खास होते हैं. इस के लिए इस कंपनी की ख्याति देश में ही नहीं, विदेशों तक फैली है.

कंपनी और्डर के हिसाब से सूरत के हीरा बाजार से माल मंगा कर मुंबई और उस के उपनगरों में सप्लाई करती है. सूरत से माल ले आ कर कंपनी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कंपनी ने एस.आर. सिक्योरिटी कंपनी को जिम्मेदारी दे रखी है. इस के लिए सिक्योरिटी कंपनी ने एक सुपरवाइजर रमेश कुमार गुप्ता और एक सिक्योरिटी गार्ड नियुक्त कर रखा था. माल कंपनी तक सुरक्षित पहुंच जाए, इस के लिए मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक्स कंपनी ने सुपरवाइजर रमेश कुमार गुप्ता को मदद के लिए अपनी ओर से ड्राइवर सहित एक सिक्योरिटी बोलेरो वैन और 2 सिक्योरिटी गार्ड दे रखे थे.

सुपरवाइजर रमेश कुमार गुप्ता अपनी कंपनी के एक सिक्योरिटी गार्ड तथा लौजिस्टिक कंपनी के 2 सिक्योरिटी गार्डों के साथ सूरत से हीरों और गहनों के पार्सल ट्रेन से ले आ कर बोरीवली रेलवे स्टेशन पर उतरते थे. यहां कंपनी की सिक्योरिटी बोलेरो वैन खड़ी मिलती थी, जिस से वे हीरों और उस से बने गहनों के पार्सल को बांद्रा-कुर्ला कौंप्लेक्स स्थित कंपनी तक पहुंचाते थे.

रमेश कुमार गुप्ता यह काम सालों से करते आ रहे थे, इसलिए मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक कंपनी और एस.आर. सिक्योरिटी कंपनी को उन पर पूरा विश्वास था.

हमेशा की तरह 9 मई, 2014 को भी रमेश कुमार गुप्ता अपने तीनों साथियों के साथ सूरत से हीरे जड़े कुछ गहने और कुछ खुले हीरों के 2 पैकेट ले कर बोरीवली रेलवे स्टेशन पर उतरे. कंपनी की सिक्योरिटी बोलेरो वैन आ कर पहले से ही वहां खड़ी थी.

दोनों पैकेट ले कर वे वैन में बैठ गए तो वैन अमित जे.के. लौजिस्टिक कंपनी की ओर चल पड़ी. वैन नेशनल पार्क वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर पहुंची तो ड्राइवर ने बोलेरो वैन रोक दी. सिक्योरिटी सुपरवाइजर रमेश कुमार गुप्ता ने ड्राइवर उदयभान ठाकुर की ओर सवालिया नजरों से देखा तो उस ने कहा, ‘‘लगता है, गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया है.’’

इतना कह कर ड्राइवर उदयभान ठाकुर नीचे उतर गया और बोलेरो वैन के टायर ठोंकठोंक कर देखने लगा. वह झुका पीछे के पहिए को ठोंक कर देख रहा था, तभी वहां एक टवेरा कार आ कर रुकी. उस के रुकते ही उस में से 4 लड़के उतरे और उन्होंने उस सिक्योरिटी वैन को घेर लिया. उन चारों लड़कों में से 3 के हाथों में पिस्तौलें थीं तो एक के हाथ में लंबे फल वाला चाकू था.

वैन के पहिए को चैक कर रहा ड्राइवर उदयभान ठाकुर, वैन में बैठे सिक्योरिटी सुपरवाइजर रमेश कुमार गुप्ता और उन के तीनों गार्ड साथी कुछ समझ पाते, इस के पहले ही उन लड़कों ने फुरती से वैन में सवार हो कर पिस्तौलों और चाकू के बल पर सभी को कब्जे में ले लिया. इस के बाद उन्हें जान से मारने की धमकी दे कर वैन के अंदर बनी सिक्योरिटी केबिन में ठूंस दिया.

वैन का ड्राइवर उदयभान नीचे था, उसे पकड़ कर उन्होंने टवेरा में बैठा लिया. चारों लड़कों में से एक ने वैन की ड्राइविंग सीट संभाल ली. वैन विरार की ओर चल पड़ी तो उस के पीछेपीछे बदमाशों की टवेरा कार भी चल पड़ी थी.

वैन नालासोपारा के बृजेश्वरी के पास पहुंची तो ईंधन खत्म होने की वजह से रुक गई. बोलेरो वैन अब आगे नहीं जा सकती थी, इसलिए बदमाश वैन में रखे हीरे जड़े गहनों एवं हीरों के दोनों पैकेट ले कर नीचे उतरे और पीछेपीछे आ रही टवेरा कार में सवार हो कर फरार हो गए. वैन के ड्राइवर उदयभान ठाकुर को भी वे अपने साथ ले गए थे.

रमेश कुमार गुप्ता और उन के साथी वैन की केबिन में बंद थे. उन्होंने शोर मचाया तो लोग इकट्ठा हो गए. लेकिन बाहर से ताला बंद था, इसलिए उन्हें निकालें कैसे. लोग तरकीब भिड़ाने लगे. आधे घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह उन्हें बाहर निकाला गया. रमेश कुमार गुप्ता लुट चुके थे, इसलिए इस की सूचना पुलिस को देनी जरूरी थी. उन के फोन भी बदमाश साथ ले गए थे, जिस से वे कंपनी को भी सूचना नहीं दे सकते थे. पुलिस को सूचना देने के लिए वे थाना विरार पहुंचे.

जिस समय रमेश कुमार गुप्ता तीनों गार्डों के साथ थाना विरार पहुंचे थे, उस समय शाम के साढे़ 6 बज रहे थे. जब उन्होंने अपने साथ घटी घटना के बारे में थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव को बताया तो दिनदहाड़े भीड़ भरी सड़क पर हुई इस लूट की घटना के बारे में सुन कर सन्न रह गए. चूंकि यह उन के थाने का मामला नहीं था, इसलिए उन्होंने रमेश कुमार गुप्ता से मुंबई के उपनगर बोरीवली (पूर्व) के थाना कस्तूरबा मार्ग जाने को कहा.

मामला गंभीर था, इसलिए रमेश कुमार गुप्ता के जाने के बाद थाना विरार के थानाप्रभारी चंद्रकांत जाधव ने इस घटना की जानकारी थाना कस्तूरबा मार्ग पुलिस को देने के साथ मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक कंपनी के मालिकों को भी दे दी थी. लूट की जानकारी मिलते ही कंपनी के मालिकों के हाथपैर फूल गए. क्योंकि दोनों पैकेटों में करोड़ों का माल था.

लूट की इस वारदात की जानकारी पा कर थाना कस्तूरबा मार्ग पुलिस हैरान थी, क्योंकि नेशनल पार्क के पास जहां लूट की यह वारदात हुई थी, एक तो वह भीड़भाड़ वाला इलाका था, दूसरे थाने के नजदीक भी था. इतनी बड़ी वारदात हो गई थी और उन्हें इस की भनक तक नहीं मिली थी.

उन्होंने तत्काल मामले की डायरी तैयार कराई और घटना की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस कंट्रोल रूम को भी दे दी थी. इतना सब करने के बाद थाना कस्तूरबा मार्ग की एक पुलिस टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई थी. घटनास्थल पर पहुंच कर इस पुलिस टीम ने नेशनल पार्क के मेनगेट पर तैनात सुरक्षा गार्डों, फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों तथा फेरी वालों से जब इस लूटपाट के बारे में पूछताछ की तो सब ने यह तो कहा कि लगभग 2 घंटे पहले यहां एक सिक्योरिटी बोलेरो वैन कुछ मिनटों के लिए रुकी जरूर थी, लेकिन वह यहां क्यों रुकी थी, उस में क्या हुआ था, इस की उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि सिक्योरिटी वैन के लुटेरे जो भी थे, वे काफी होशियार और शातिर दिमाग थे. उन्होंने वैन को इस तरह लूटा था कि किसी को खबर तक नहीं लग पाई थी.

चूंकि जिस कंपनी का माल लूटा गया था, वह नामीगिरामी और प्रतिष्ठित कंपनी थी, इसलिए सूचना पा कर मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया, क्राइम ब्रांच के जौइंट कमिश्नर सदानंद दाते, अपर पुलिस कमिश्नर के. प्रसन्ना, एडिशनल पुलिस कमिश्नर सत्यनारायण चौधरी, असिस्टैंट पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल भोसले, अरविंद महाबक्षी, सुनील देशमुख के अलावा क्राइम ब्रांच की कई यूनिटें घटनास्थल पर पहुंच गई थीं.

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और घटना की विस्तार से जानकारी ली. इस के बाद असिस्टैंट पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल भोसले, अरविंद महाबक्षी और सुनील देशमुख को आवश्यक दिशानिर्देश दे कर चले गए.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के जाने के बाद थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच पुलिस की टीमों ने अपने सीनियर अधिकारियों के निर्देशन में घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए सुबूत जुटाने की कोशिश शुरू कर दी.

घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा था कि घटना का शिकार हुए रमेश कुमार गुप्ता, उन के तीनों साथी गार्ड और कंपनी के मालिक वहां आ पहुंचे. उन लोगों के आ जाने से घटनास्थल के निरीक्षण का काम पुलिस के लिए काफी आसान हो गया.

घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद क्राइम ब्रांच पुलिस और थाना पुलिस ने मामले की जांच अलगअलग एक साथ शुरू कर दी. दोनों ने ही अलगअलग रमेश कुमार गुप्ता, उन के तीनों गार्ड साथियों तथा कंपनी मालिकों से विस्तारपूर्वक पूछताछ की.

मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक कंपनी के मालिकों के अनुसार, जो हीरे और गहने लूटे गए थे, बाजार में उन की कीमत साढ़े 6 करोड़ रुपए के आसपास थी. लुटेरे वैन के ड्राइवर उदयभान ठाकुर को साथ ले गए थे. इस मामले में संभावना यह भी थी कि वह बदमाशों से मिला हो सकता था. दूसरी संभायना यह भी थी कि सचमुच बदमाश उसे साथ ले गए थे. लेकिन पुलिस को पहली संभावना पर ज्यादा विश्वास था.

पुलिस ने जब ड्राइवर उदयभान ठाकुर के बारे में मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक्स कंपनी से जानकारी मांगी तो पता चला कि कंपनी के पास उस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

कंपनी की इस लापरवाही पर पुलिस अधिकारियों को गुस्सा तो बहुत आया कि बारबार चेतावनी और विज्ञापन देने के बावजूद लोग बिना वेरीफाई कराए लोगों को नौकरी पर रख लेते हैं. बहरहाल, अब पुलिस को अपने हिसाब से उस के बारे में पता करना था. चूंकि वह संदेह के घेरे में आ गया था, इसलिए उस के बारे में पता करना जरूरी भी हो गया था.

मामला काफी पेचीदा था, जिसे सुलझाने के लिए असिस्टैंट पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल भोसले, अरविंद महाबक्षी और सुनील देशमुख ने एक रणनीति तैयार की. उसी रणनीति के तहत लूट की इस घटना की जांच क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 के अधिकारियों को सौंप दी गई. उन की मदद के लिए एंटी रौबरी स्क्वायड की 6, 10 और 11 नंबर की यूनिटों को भी लगा दिया गया.

क्राइम ब्रांच यूनिट-12 के सीनियर इंसपेक्टर मिलिंद खेतले ने एंटी रौबरी स्क्वायड के सीनियर इंसपेक्टर अशोक खोत के साथ मिल कर, जांच को कैसे आगे बढ़ा कर लुटेरों तक पहुंचा जाए, इस पर गहराई से विचार किया. इस के बाद लुटेरों को पकड़ने के लिए अलगअलग 4 टीमें बनाई गईं, जिन में इंसपेक्टर संदीप विश्वासराव, चंद्रकांत पाटिल, परशुराम साटम, असिस्टैंट इंसपेक्टर मनोहर दलवी, उमेश गौड़, राहुल देशमुख, विजय कांदलगावकर, अनिल ढोले, भगवान कदम, विलास गरुड़, सचिन सावंत, सुधाकर कोकाटे और संतोष जगदेव को शामिल किया गया.

इन टीमों ने काफी सोचविचार किया और सुबूत की तलाश में घटनास्थल पर गईं. घटनास्थल के आसपास खूब बारीकी से निरीक्षण किया. पुलिस को वहां सीसीटीवी कैमरे दिखाई दिए. उन्हें लगा कि इन सीसीटीवी कैमरों में लुटेरों की फोटो जरूर आई होगी. यही सोच कर पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को काफी गौर से देखा.

एक जगह टीम की नजरें अटक गईं. जिस टवेरा कार का जिक्र सिक्योरिटी सुपरवाइजर रमेश कुमार गुप्ता और उस के तीनों गार्ड साथियों ने किया था, वह टवेरा कार संदिग्ध अवस्था में नेशनल पार्क के एक कोने में खड़ी दिखाई दी. उस का एक कोना और नंबर हलकाहलका नजर आ रहा था. इस के बाद उसी नंबर के सहारे पुलिस टवेरा कार के मालिक लक्ष्मण तक पहुंच गई.

इस के बाद लक्ष्मण से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि 2 दिन पहले उस की टवेरा कार वसई में रहने वाला उस का दोस्त राजेश सरोज मांग कर ले गया था. उस ने उस से कहा था कि गांव से उस के कुछ मेहमान आने वाले हैं. उन्हें वह शिरडी और मुंबई घुमाना चाहता है.

लक्ष्मण से पूछताछ के बाद पुलिस टीम वसई स्थित राजेश सरोज के घर पहुंची तो वह घर पर ही मिल गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और अपने औफिस ले आई. वहां जब उस से हीरों की लूट के बारे में पूछा गया तो उस ने हीरों की लूट की बात स्वीकार कर ली.

राजेश ने लूट में शामिल अपने साथियों के नाम भी बता दिए. चूंकि पूरा मामला खुल चुका था, इसलिए अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर भेजी गई. यह टीम ने वहां से अन्य लुटेरों धीरज सिंह, विपिन सिंह, उदयभान ठाकुर, ओमप्रकाश को गिरफ्तार कर के मुंबई ले आई.

ओमप्रकाश सिंह उदयभान ठाकुर का भतीजा है. मुंबई में उदयभान की भाभी सावित्री सिंह को गिरफ्तार किया गया. अजय सिंह और राम सिंह फरार होने में कामयाब हो गए थे. गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों से पूछताछ के बाद पता चला कि इन सब का सरगना सिक्योरिटी वैन चलाने वाला उदयभान सिंह यानी उदयभान ठाकुर था. उस ने साढ़े 6 करोड़ रुपए के हीरे लूटने की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

42 वर्षीय उदयभान सिंह उर्फ उदयभान ठाकुर उर्फ डाक्टर उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर के थाना महाराजगंज के गांव गौरीकला का रहने वाला था. वह अपने 3 भाइयों और एक बहन में सब से छोटा था. वह छोटा था तभी उस के मातापिता की मौत हो गई थी. मातापिता की मौत के बाद बड़े भाई अवधेश सिंह ने जैसेतैसे भाईबहनों को पालपोस कर बड़ा किया. धीरेधीरे सभी भाई अपने पैरों पर खड़े हो गए. बहन सहित घर में सभी की शादियां भी हो गईं. सभी अपनीअपनी गृहस्थी में रम गए.

उदयभान का बड़ा भाई अवधेश सिंह गांव में खेती करता था. समझदार होने पर उदयभान भी भाई की मदद करने लगा. लेकिन खेती के कामों में उस का मन नहीं लगता था. वह कोई ऐसा काम करना चाहता था, जिस में अच्छी आमदनी हो. ऐसा ही कोई काम करने के लिए वह दिल्ली चला गया.

दिल्ली में उस के कई दोस्त और रिश्तेदार रहते थे. उन्हीं लोगों के साथ रह कर वह छोटामोटा काम करता रहा. उसी बीच उस ने ड्राइविंग सीख कर लाइसेंस बनवा लिया. कुछ दिनों तक दिल्ली में गाड़ी चलाने के बाद वह महानगर मुंबई चला गया और अपने बड़े भाई अखिलेश के साथ रहने लगा. वहां वह वसई में किराए का टैंपो चलाने लगा.

टैंपो चलाने के दौरान ही कई आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से उस की जानपहचान हो गई. उन्हीं के बीच रह कर वह बम बनाना भी सीख गया. बम बनाने में माहिर होने की वजह से उस के साथी उसे डाक्टर कहने लगे थे. टैंपो चलाने से उसे कोई खास आमदनी नहीं होती थी, इसलिए वह कोई ऐसा काम करना चाहता था, जिस से उसे मोटी कमाई हो.

अपराधी प्रवृत्ति के उस के साथियों ने उसे सलाह दी कि मोटी कमाई तो किसी पैसे वाले को लूटने में ही हो सकती है. दोस्तों की यह सलाह उसे पसंद आ गई. उस ने उन लोगों से सलाह की तो वे भी उस का साथ देने को तैयार हो गए.

इस के बाद वे शिकार की तलाश में लग गए. जानकारी जुटा कर उन्होंने बोरीवली के एक हीरा व्यापारी को लूटने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुए. कस्तूरबा मार्ग थाने में इस मामले की रिपोर्ट दर्ज हुई. पुलिस ने उदयभान ठाकुर को साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया. कई महीने जेल में रहने के बाद वह जमानत पर बाहर आया तो दोस्तों के साथ उस ने सन 2003 में नांदेड़ के एक हीरा व्यापारी को मारपीट कर उस से 2 लाख रुपए के हीरे छीन लिए.

इस मामले में भी वे पुलिस से बच नहीं सके और नांदेड़ पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया. इस से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई. लूट के इन दोनों मामलों में अदालत ने सभी अभियुक्तों को 5-5 साल की सख्त सजा सुनाई.

2008 में उदयभान जब जेल से बाहर आया तो परिवार की आर्थिक हालत पहले से भी ज्यादा बदतर हो गई थी. इस बीच उस के पुराने दोस्त भी बिछुड़ चुके थे. उस ने नए दोस्त बनाए और नौकरी की तलाश शुरू कर दी. किसी तरह जुगाड़ कर के उस ने बीकेसी स्थित मल्का अमित जे.के. लौजिस्टिक कंपनी में सिक्योरिटी वैन चलाने की नौकरी पा ली.

यह कंपनी हीरों का कारोबार करती थी. कंपनी में ही उस की मुलाकात और जानपहचान विपिन सिंह से हुई. दोनों में जल्द ही दोस्ती हो गई. विपिन सिंह कंपनी के हीरे छिपाते हुए पकड़ा गया तो कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया. इस के बाद वह बेरोजगार हो गया.

उदयभान ठाकुर का इस नौकरी से किसी तरह गुजारा तो हो रहा था, लेकिन आर्थिक परेशानियां जस की तस थीं. बच्चे भी धीरेधीरे जवान हो रहे थे. उन की शादियों की चिंता उसे और घर वालों को खाए जा रही थी. इस के अलावा उस के बड़े भाई अखिलेश की बड़ी बेटी गंभीर रूप से बीमार रहती थी.

इस के लिए उसे मजबूरन अपने पुराने रास्ते को अपनाना पड़ा. इस बार उस ने योजना खुद तैयार की. उसे पता ही था कि उस की कंपनी में हीरों का व्यापार होता है. इसलिए उसे लगा कि अगर यहीं हाथ मारा जाए तो मोटा माल हाथ लग सकता है.

उदयभान ठाकुर ने पूरी योजना बना कर अपने दोस्त राजेश सरोज, धीरज सिंह, विपिन सिंह, अपने भाई के बड़े बेटे ओमप्रकाश सिंह, भाभी सावित्री सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह और रामअवतार सिंह को शामिल किया.

उदयभान ने सभी को नालासोपारा स्थित अपने भाई अखिलेश के घर पर बुलाया और लूट की रूपरेखा तैयार की. योजना को अंजाम देने के लिए एक कार की जरूरत थी. राजेश सरोज ने कहा कि कार का इंतजाम वह कर लेगा. वह अपने दोस्त लक्ष्मण की टवेरा कार मांग लाएगा. कार का इंतजाम होने के बाद उन्होंने हथियारों का भी इंतजाम कर लिया.

इस के बाद रेकी करने लगे कि लूट कहां की जाए. उन्हें लूट के लिए बोरीवली नेशनल पार्क के पास की जगह सही लगी.

उदयभान ने अपने सभी साथियों से कहा था कि जिस दिन सिक्योरिटी वैन में माल अधिक होगा, वह उन्हें सूचना दे देगा. वह पंक्चर के बहाने से रेकी की गई जगह पर वैन रोकेगा. वैन से नीचे उतर कर वह टायर के ऊपर हाथ मारेगा, तभी वे लोग वारदात को अंजाम दे देंगे.

9 मई, 2014 को उदयभान को जानकारी मिली कि आज लगभग साढ़े 6 करोड़ के हीरे आ रहे हैं. उस ने साथियों को इस बात की सूचना दे दी. सूचना पाते ही उस के सारे साथी निर्धारित जगह पर पहुंच गए और नेशनल पार्क के पास हाईवे पर सिक्योरिटी वैन के रुकते ही घटना को अंजाम दे कर हीरों के दोनों पैकेट ले कर फरार हो गए.

घटना को अंजाम देने के बाद उदयभान टवेरा कार से पहले नालासोपारा स्थित अपने घर गया. वहां उन्होंने पैकेट खोल कर हीरे और नेकलेसों का बंटवारा किया. इस के बाद सभी अपनाअपना हिस्सा ले कर फरार हो गए.

पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर लूटे गए हीरों के 261 नगों में से 226 नग बरामद कर लिए हैं, जिन की कीमत बाजार में 5 करोड़ 65 लाख रुपए है. इस के अलावा लूट में इस्तेमाल किए गए हथियारों में 2 देसी कट्टे, एक रिवाल्वर और एक चाकू भी बरामद कर लिया है.

सातों अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ कर के उन्हें बोरीवली के महानगर दंडाधिकारी के सामने पेश किया, जहां से उन्हें 26 जुलाई, 2014 तक के लिए रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि के दौरान उन्हें कस्तूरबा मार्ग पुलिस थाने को सौंप दिया गया. कस्तूरबा मार्ग थाना पुलिस आगे की तफ्तीश कर रही है.

कथा लिखे जाने तक अजय सिंह पकड़ा गया था, लेकिन राम सिंह पुलिस के हाथ नहीं लगा था. पुलिस उस की सरगरमी से तलाश कर रही है. Diamond Robbery Mumbai

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

—राम सिंह काल्पनिक नाम है.

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