Love Triangle Murder. कुछ युवकों की सोच यही रहती है कि वह चाहे कहीं भी मुंह मारते घूमें, लेकिन उन की प्रेमिका केवल उन की ही बन कर रहे. जब युवक खुले सांड की तरह घूम सकता है तो उसे किसी युवती पर लगाम लगाने का अधिकार नहीं. आखिर प्रेमिका किसी की गुलाम तो नहीं होती, वह भी अपनी मनमरजी की मालिक है. यही सोच दृष्टि ने जाहिर की तो…

स्वच्छंद विचारों वाली दृष्टि ने प्यार की नींव रखी तो थी प्रेमी चिराग शिवहरे के साथ, लेकिन उस की अतिमहत्त्वाकांक्षाओं ने उस के कदम अंश जादौन की तरफ मोड़ दिए. फिर दृष्टि के नए आशिक अंश ने चिराग को रास्ते से हटाने के लिए ऐसी साजिश रची कि हत्या के आरोप में अपनी प्रेमिका सहित सलाखों के पीछे पहुंच गया था. हालांकि प्रेमिका दृष्टि के घटना के वक्त घटनास्थल पर मौजूद न रहने की वजह से कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया और दृष्टि के प्रेमी अंश जादौन को चिराग शिवहरे की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी.

ग्वालियर जिले के विश्वविद्यालय थाने के टीआई मनीष धाकड़ को 10 जुलाई, 2023 की दोपहर के एक बजे पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा सूचना मिली थी कि जिलाधीश कार्यालय के निकट पहाड़ी के करीब बहने वाले नाले में किसी इंसान की क्षतिग्रस्त लाश पड़ी हुई है.

सूचना मिलने पर टीआई मनीष धाकड़ एक एसआई, एक हैडकांस्टेबल और सिपाहियों को ले कर बताए गई जगह के लिए रवाना हो गए. घटनास्थल थाने से तकरीबन ढाई किलोमीटर दूर था, इसलिए वहां पहुंचने में उन्हें 10 से 15 मिनट का वक्त लगा.

अब तक लाश पड़ी होने की सूचना पूरे इलाके में फैल चुकी थी, इसलिए वहां अच्छीखासी भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी. लोग लाश को देख कर तरहतरह की बातें कर रहे थे.

सब से पहले टीआई ने वहां इकट्ठा लोगों को घटनास्थल से हटवाया, उस के बाद घटनास्थल और अवशेषनुमा लाश का निरीक्षण शुरू किया.

इस बीच सूचना पा कर एसपी राजेश चंदेल, एसएसपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया, सीएसपी रत्नेश तोमर पुलिस फोटोग्राफर और फोरैंसिक टीम को साथ ले कर मौके पर पहुंच गए.

फोटोग्राफर और फोरैंसिक टीम का काम समाप्त होते ही पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. इस के बाद टीआई मनीष धाकड़ को इस मामले में आवश्यक काररवाई करने के लिए दिशानिर्देश दे कर वहां से चले गए. अधिकारियों के जाने के बाद टीआई ने एक बार फिर घटनास्थल और अवशेषनुमा लाश का निरीक्षण किया.

मृतक की उम्र 25 से 30 साल के बीच रही होगी. लाश पहचानी न जा सके, इस के लिए हत्यारे ने लाश को जला दिया था. लाश के पास से मृतक के अधजले कपड़े, बिसलेरी की एक खाली बोतल तथा माचिस की डब्बी पड़ी हुई थी.

वहीं पर माचिस की तीलियां भी बिखरी हुई थीं. बोतल से पेट्रोल की गंध आ रही थी, इस का मतलब साफ था कि लाश को जलाने के लिए बोतल में पेट्रोल लाया गया था.

टीआई धाकड़ ने भीड़ में से कुछ लोगों को बुला कर लाश की शिनाख्त करवाने का प्रयास किया, लेकिन वहां मौजूद लोगों में से कोई भी लाश की पहचान नहीं कर सका. इस से स्पष्ट हो गया कि मृतक यहां का रहने वाला नहीं था.

टीआई ने शुरुआती काररवाई निपटाने के बाद घटनास्थल से मिली पानी की खाली बोतल, अधजले कपड़े, उपलों के टुकड़े, माचिस की डब्बी और तीलियों को सबूत के तौर पर अपने कब्जे में ले कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद वे थाने लौट आए और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मामला दर्ज कर लिया. यह बात 10 जुलाई की है.

हत्या के इस बहुचर्चित मामले की पड़ताल के लिए टीआई द्वारा एक पुलिस टीम बना दी गई. टीम में थाने के तेजतर्रार एएसआई, हैडकांस्टेबल और कांस्टेबल को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने पड़ताल शुरू कर दी.

पड़ताल को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस टीम के सामने सब से बड़ी चुनौती थी मृतक की पहचान. बिना पहचान के जांच को आगे बढ़ाना संभव नहीं था, इसलिए मृतक की पहचान करने के प्रयास शुरू कर दिए गए. मृतक कौन है, कहां का रहने वाला है, इस बात का पता लगाने के लिए टीआई ने सब से पहले अज्ञात युवक की अवशेषनुमा लाश का हुलिया बताते हुए यह सूचना वायरलेस से ग्वालियर जिले के सभी थानों को दे दी.

इस के अलावा मृतक फोटो वाले पैंफ्लेट्स छपवा कर जिले के सभी थानों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर लगवा दिए.

पैंफ्लेट्स चिपकवाने के चंद घंटों के बाद टीआई मनीष धाकड़ के पास तमाम लोगों के फोन आने शुरू हो गए. उन सभी लोगों को उन्होंने थाने बुलवा कर अवशेषनुमा लाश के रंगीन फोटो दिखाए, लेकिन अज्ञात लाश की पहचान नहीं हो सकी.

11 जुलाई की सुबह विश्वविद्यालय थाने में अनिल शिवहरे नाम का एक व्यक्ति अपने छोटे भाई दीपक शिवहरे और परिचितों को साथ ले कर टीआई के पास पहुंचा. उस ने उन्हें बताया कि वह डबरा के ठाकुर बाबा इलाके का रहने वाला है और फोम के गद्ïदे बेचने का कारोबार करता है. उस ने आगे बताया कि उस का इकलौता 25 वर्षीय बेटा चिराग भी बीबीए करने के बाद उस के कारोबार में हाथ बंटा रहा था. लेकिन पिछले 72 घंटे से उस का कुछ पता नहीं चल पा रहा है. वह 8 जुलाई की दोपहर अपने मित्र के घर जाने की कह कर घर से गया था.

उसी दिन शाम साढ़े 6 बजे मैं ने उसे कौल किया तो उस ने घंटे भर में घर वापस लौट आने का भरोसा दिलाया था. साहब, इस के बाद जब भी मैं ने उसे कौल किया तो उस ने कौल रिसीव नहीं किया. मगर रात साढ़े 7 बजे उस के मोबाइल से एक एसएमएस मेरे मोबाइल पर आया कि वह जल्दी ही घर लौट कर आ रहा है.

इस के बाद रात 8 बजे के बाद उस का मोबाइल अचानक स्विच्ड औफ आने लगा. अब वह कहां पर है और किस हाल में है, कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है. रात गहराने पर भी जब चिराग लौट कर घर नहीं आया तो पूरा परिवार अनहोनी की आशंका से चिंता में डूब गया.

अनिल शिवहरे ने पुलिस को यह भी बताया कि वह चिराग के सभी दोस्तों को  फोन कर कर उस के बारे में पूछ चुके हैं, फिर भी उस के बारे में अभी तक कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है.

अनिल शिवहरे ने बेटे चिराग की गुमशुदगी की रिपोर्ट इस उम्मीद से दर्ज करा दी थी कि यदि वह किसी दुर्घटना का शिकार हुआ होगा तो किसी न किसी थाने में प्रकरण अवश्य कायम हुआ होगा.

अनिल शिवहरे द्वारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की वजह से डबरा थाने के टीआई ने अनिल शिवहरे को कौल कर बताया कि आप के बेटे के हुलिए से मिलतीजुलती लाश ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में मिली है. अत: ग्वालियर जा कर एक बार उस अज्ञात लाश को देख आओ.

टीआई से बात करने के बाद अनिल शिवहरे थाना विश्वविद्यालय चला गया. टीआई मनीष धाकड़ ने अनिल शिवहरे को बरामद की गई अज्ञात लाश के फोटो दिखाए. फोटो देख कर अनिल शिवहरे की धड़कनें बढ़ गईं. हत्यारे द्वारा लाश को जला देने से फोटो में लाश स्पष्ट रूप से पहचान में नहीं आ रही थी, इसलिए उन्होंने लाश से मिले अधजले कपड़े और सामान दिखाया तो उन्हें देखते ही अनिल शिवहरे की चीख निकल गई. उन्होंने वह सामान देख कर उस लाश की शिनाख्त इकलौते बेटे चिराग के रूप में की.

अनिल शिवहरे के साथ गए उन के छोटे भाई दीपक शिवहरे की आंखों से भी आंसू बहने लगे. उधर जैसे ही चिराग की हत्या किए जाने की खबर मृतक के घर और डबरा में रहने वाले नातेरिश्तेदारों को लगी तो घर में कोहराम मच गया.

रेत कारोबारी अनिल शिवहरे ने बेटे की हत्या का आरोप दृष्टि ग्रोवर, अंश जादौन और उस के परिजनों पर लगाया. उन्होंने आरोपियों के मकान को बुलडोजर से गिराने की मांग को ले कर हाइवे पर चक्का जाम कर दिया. मृतक के चाचा दीपक शिवहरे का तो दोटूक शब्दों में कहना था कि क्या इतना बड़ा जघन्य अपराध कोई अकेला व्यक्ति कैसे कर सकता है?

पुलिस ने तुरंत काररवाई करते हुए आरोपी अंश को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. अंश बारबार अपने बयान बदलता रहा, लेकिन मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करने पर अंश ने कहा कि उस ने चिराग की गला दबा कर हत्या करने के बाद उस के शव को जला कर अगले दिन नाले में फेंक दिया था.

उस ने आगे बताया कि उस ने चिराग के पेट और सिर में गोली मारने के बाद शव को अपनी कार में रख कर डीएम औफिस के पीछे स्थित पहाड़ी पर उगी झाडिय़ों में ले जा कर शव पर उपले रखे फिर उस पर पेट्रोल छिड़क कर आग के हवाले कर दिया. अगले दिन शव के अवशेषों को पास में बहने वाले नाले में फेंक दिया था और फिर घर लौट कर कार को धो दिया था.

चिराग को मौत के घाट उतारने की भनक तक उस ने किसी को नहीं लगने दी थी. चिराग शिवहरे के चाचा दीपक शिवहरे ने मीडिया के सामने यही कहा कि क्या इतना बड़ा अपराध अंश अकेले कर सकता है? प्रेम त्रिकोण में चिराग को उलझा कर अंश के हाथों उस की हत्या करवाने वाली दृष्टि ग्रोवर से पुलिस द्वारा पूछताछ क्यों नहीं की गई? वह मुसकराते हुए जेल चली गई.

उधर लाश की शिनाख्त होने पर विश्वविद्यालय थाने के टीआई मनीष धाकड़ ने राहत की सांस ली. चूंकि उन्हें आगे की काररवाई भी करनी थी, इसलिए उन्होंने मृतक के पापा अनिल शिवहरे को सांत्वना दे कर किसी तरह शांत कराया.

उन्होंने सब से पहले अनिल शिवहरे से उन के इकलौते बेटे चिराग का मोबाइल नंबर लेने के साथ ही उस से संबंधित जानकारी ली. इस के बाद उन्होंने चिराग के फोन की कौल डिटेल्स निकलवा कर उस का गहन अध्ययन किया तो पता चला कि 8 जुलाई की दोपहर से ले कर शाम 7 बजे तक उस के मोबाइल फोन की लोकेशन डीएम औफिस के पास के पहाड़ी इलाके में थी.

टीआई ने चिराग के चाचा से पूछा कि दर्पण कालोनी में आप के भतीजे का कोई परिचित तो नहीं रहता? इस पर उन्होंने बताया कि दर्पण कालोनी में चिराग का मित्र अंश जादौन रहता है. वह भी ग्वालियर के उसी संस्थान से बीबीए की पढ़ाई कर रहा है, जिस में चिराग ने की थी. चिराग की कौल डिटेल्स का अध्ययन करने पर पता चला कि 8 जुलाई को उस के फोन पर दोपहर में दर्पण कालोनी इलाके से बात की गई थी. इसी के साथ ही इसी नंबर से एक अन्य नंबर पर भी रात के समय काफी देर तक बात हुई थी. उसी नंबर से चिराग के मोबाइल पर आधा दरजन बार बात की गई थी.

यह नंबर पुलिस के शक के दायरे में आ गया. टीआई ने इस फोन नंबर की भी कौल डिटेल्स निकलवाई. इस में उन्हें चौंकाने वाली यह जानकारी मिली कि इस नंबर से सिर्फ चिराग को ही नहीं, बल्कि एक अन्य मोबाइल नंबर पर ही बातें की गई थीं. इस से टीआई मनीष धाकड़ को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह नंबर सिर्फ चिराग और एक अन्य से बात करने के लिए ही लिया गया था.

अब वह यह जानने में जुट गए कि आखिरकार यह नंबर किस के नाम से लिया गया है? उन्हें मोबाइल कंपनी से जो जानकारी मिली, उस से पता चला कि यह नंबर दर्पण कालोनी निवासी अंश जादौन की आईडी से लिया गया है.

इस जानकारी के बाद रोशन के पापा अनिल शिवहरे और करीबी दोस्तों को पूछताछ के लिए थाने बुलवा कर उन से जानना चाहा कि चिराग को आखिरी बार कब और किस के साथ देखा गया था?

तभी चिराग के दोस्त ने बताया कि 3 दिन पहले उस ने चिराग को अंश जादौन के साथ ग्वालियर में सिकरोदा तिराहे के निकट कार में बैठा देखा था.

”यह अंश जादौन कौन है?’’ टीआई ने उस से पूछा.

”सर, अंश जादौन दर्पण कालोनी में रहता है और बीबीए सेकेंड ईयर का स्टूडेंट है. अंश पिछले कुछ दिनों से चिराग की सहपाठी रही उस की प्रेमिका दृष्टि ग्रोवर के काफी करीब आ गया था. अंश की बाहों में जाने के बाद दृष्टि चिराग को देख कर भी अनदेखा करने लगी थी. वह बिना किसी हिचकिचाहट के अंश के साथ कार में घूमनेफिरने लगी थी. हालांकि दृष्टि अंश और चिराग दोनों से रिश्ता रख रही थी. यह बात चिराग को पसंद नहीं थी.’’

उधर जब से चिराग को अंश और दृष्टि के संबंधों के बारे में पता चला, वह बहुत परेशान रहने लगा था. इस बारे में उस ने दृष्टि से फोन पर बात करनी चाही, लेकिन उस ने चिराग का फोन रिसीव नहीं किया, जबकि अंश जादौन से उस की दोस्ती होने से पहले दृष्टि से आसानी से बात हो जाया करती थी. इतना ही नहीं, वह दृष्टि पर अंश से संबंध समाप्त करने के लिए दबाव बना रहा था, लेकिन दृष्टि ऐसा करने के लिए कतई तैयार नहीं थी.

इस महत्त्वपूर्ण जानकारी के बाद पुलिस टीम तत्काल हरकत में आ गई और दर्पण कालोनी स्थित अंश के घर पर जा धमकी. संयोग से अंश घर पर ही मिल गया. पुलिस को देख कर वह बुरी तरह घबरा गया, उस से बात किए बिना ही पूछताछ के लिए पुलिस उसे थाने ले आई. थाने पहुंच कर अंश बुरी तरह घबरा गया. टीआई मनीष धाकड़ उस की घबराहट को भांप गए.

उन्होंने उस से चिराग शिवहरे के बारे में पूछा तो उस ने अनभिज्ञता जताई, जबकि अंश जादौन के हावभाव से स्पष्ट तौर पर लग रहा था कि वह सच्चाई छिपा रहा है, इसलिए उन्होंने उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की.

इस पर अंश ने कहा, ”सर, 8 जुलाई को मैं चिराग के द्वारा फोन कर के बुलाने पर डीबी मौल के पास मिला था और मुलाकात करने के बाद अपने घर वापस लौट आया था. चिराग वहीं पर रुक कर अपने किसी परिचित के आने का इंतजार करने लगा था. वह वहां से कहां गया, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.’’

अंश की इस बात की तसदीक करने के लिए पुलिस टीम द्वारा डीबी मौल और आसपास के प्रतिष्ठानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे गए, लेकिन किसी भी फुटेज में अंश और चिराग दिखाई नहीं दिए.

फुटेज देखने के बाद टीआई को इस बात पर हैरानी हुई कि अंश ने जानबूझ कर उन से यह झूठ क्यों बोला कि चिराग से उस की मुलाकात डीबी मौल के बाहर हुई थी. टीआई ने अंश से पूछा कि जब तुम चिराग से मिलने गए थे, तब उस के साथ और कौन था?

”सर, वह अकेला ही था.’’

यह जान कर टीआई को भरोसा हो गया कि चिराग का हत्यारा कोई और नहीं, अंश ही है. हो सकता है कि अंश की चिराग से मुलाकात के दौरान दोनों के बीच किसी बात को ले कर तकरार हो गई हो और गुस्से में अंश ने चिराग को मौत के घाट उतार दिया हो और उस के बाद उस की लाश को ठिकाने लगा दिया हो, इसलिए उन्होंने उस से सीधे सवाल किया, ”तुम ने चिराग की हत्या करने के बाद उस की लाश को कहां पर छिपा दिया है?’’

”सर, चिराग की लाश…’’ अंश घबरा कर बोला.

”हां, तुम सीधे बताते हो या फिर कोई दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा?’’ कहते हुए उन्होंने एक जोर का थप्पड़ अंश के गाल पर जड़ दिया.

अंश को ऐसी उम्मीद नहीं थी. वह हक्काबक्का रह गया. उस के मुंह से कोई जवाब नहीं निकला तो टीआई ने पूछा, ”तुम ने चिराग शिवहरे को क्यों मारा?’’

”सर, मैं ने चिराग को नहीं मारा.’’

लेकिन जैसे ही टीआई ने उसे सवालों से घेरा तो उस ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया.

इस के बाद उस ने चिराग की प्रेमिका दृष्टि ग्रोवर से इश्क से ले कर चिराग की हत्या करने तक की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

चिराग शिवहरे का व्यवहार ही ऐसा था कि एक बार वह जिस से मिल लेता, वह उस का मुरीद बन जाता था. इस से उस के तमाम दोस्त बन गए थे. उन्हीं में से एक दृष्टि ग्रोवर भी थी. चिराग शिवहरे भी मूलरूप से डबरा का रहने वाला था. दृष्टि की तरह वह भी ग्वालियर के आईटीएम इंजीनियरिंग कालेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहा था.

दृष्टि मूलरूप से डबरा की रहने वाली थी. वह डबरा में एक बेकरी का भी संचालन करती थी, इसलिए चिराग ने उस का नाम तो सुना था, लेकिन पहले कभी मुलाकात नहीं हुई थी. पहली बार चिराग ने दृष्टि ग्रोवर को तब देखा, जब वह बीबीए करने के लिए उसी की क्लासरूम में दाखिल हुई.

चिराग उसे देख कर काफी प्रभावित तो हुआ, साथ ही उस की सुंदरता उसे भा गई. क्लास खत्म हुई तो चिराग खुद को दृष्टि से मिलने से रोक नहीं सका. दोनों डबरा के ही रहने वाले थे, इसलिए दृष्टि को चिराग का मिलना अच्छा लगा.

दोनों का परिचय हुआ और थोड़ीबहुत बातचीत भी हुई. इस बातचीत में भी चिराग उस की सुंदरता की तारीफ किए बिना नहीं रह सका. उस ने यह भी कहा कि यह हमारी आखिरी मुलाकात नहीं है, बल्कि मैं आप से आगे भी मिलना चाहूंगा, इसलिए यदि आप अपना मोबाइल नंबर दे दो तो आप की बड़ी मेहरबानी होगी.

”क्यों नहीं, इस में हर्ज ही क्या है, मुझे भी आप से मिलने में खुशी ही होगी.’’ दृष्टि ने मुसकराते हुए कहा.

दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. इस के बाद जल्द मिलने का वादा कर के अपनेअपने घर चले गए. अब कालेज में दोनों की रोज मुलाकात होने लगी. कभीकभी चिराग दृष्टि से मिलने उस की बेकरी पर भी चला जाता.

कालेज में रोजाना मिलने से दृष्टि को भी चिराग अच्छा लगने लगा था. उसे चिराग से मिलना अच्छा लगता था. उस के जेहन में भी चिराग के प्रति चाहत पैदा होने लगी थी. हालांकि दृष्टि अपने मन की बात खुल कर चिराग से कह नहीं पा रही थी, लेकिन चिराग ज्यादा समय तक अपने दिल पर काबू नहीं रख सका.

अगली बार जब वह दृष्टि की बेकरी में उस से मिलने गया तो मौका देख कर उस ने अपने मन की बात दृष्टि से कह दी. चिराग ने बिना किसी हिचकिचाहट के दृष्टि से कहा, ”दृष्टि, मुझे तुम से प्यार हो गया है, तुम मेरे दिलोदिमाग में इस तरह बस गई हो कि पलभर के लिए भी मैं तुम्हें नहीं भूल पाता.’’

दृष्टि तो चिराग के मुंह से यही सब सुनने का कब से इंतजार कर रही थी, लेकिन यह सब सुन कर कुछ कहने के लिए उस के होंठ फडफ़ड़ाए जरूर मगर कुछ भी कह नहीं पाई. तब चिराग ने ही कहा, ”क्या तुम्हें मैं पसंद नहीं हूं?’’

दृष्टि ने मुसकराते हुए नजरें उठाईं, लेकिन बोली कुछ नहीं. तब चिराग बेचैन हो कर बोला, ”तुम कुछ बोलती क्यों नहीं? मैं तुम्हारा जवाब जानने के लिए कितना बेचैन हूं, शायद तुम्हें इस का अहसास नहीं है.’’

दृष्टि ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ”प्यार तो मैं भी सिर्फ तुम्हीं से करती हूं. मैं सिर्फ दिल बहलाने के लिए प्यार नहीं कर सकती, बल्कि मैं प्यार के सहारे जिंदगी गुजारना चाहती हूं. मैं ने तय कर रखा है कि मैं जिस से भी प्यार करूंगी, उसी से शादी भी करूंगी.’’

”दृष्टि, तुम ने तो मेरे दिल की बात कह दी, मैं भी यही चाहता हूं. मेरा वादा है कि मैं शादी तुम से ही करूंगा और अपनी आखिरी सांस तक तुम से प्यार करता रहूंगा.’’ चिराग ने भावुक हो कर कहा.

”हम दोनों बालिग हैं, कहीं शादी से पहले तुम बदल तो नहीं जाओगी? यदि तुम्हें मुझ से ज्यादा खूबसूरत और आर्थिक रूप से संपन्न लड़का मिल गया तो..?’’ चिराग ने शंका जाहिर की.

”वैसे तो तुम से सुंदर कोई दूसरा लड़का डबरा में हो ही नहीं सकता, लेकिन मैं तुम्हें वचन देती हूं कि आज के बाद तुम्हारे अलावा कोई दूसरा लड़का मेरी जिंदगी में नहीं आएगा.’’ दृष्टि ने चिराग का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा, ”तुम्हारे साथ धोखा करना मेरे जीवन की सब से बड़ी भूल होगी और ऐसी भूल मैं कभी नहीं करना चाहूंगी.’’

समय अपनी गति से गुजरता रहा. चिराग और दृष्टि तकरीबन 6 सालों तक घर के बाहर बेहिचक मिलतेजुलते और घूमतेफिरते रहे. उसी दौरान 5 महीने पहले स्वच्छंद विचारों वाली दृष्टि ने चिराग से बेवफाई कर डाली.

कालेज की फेयरवेल पार्टी में दृष्टि की आईटीएम इंजीनियरिंग कालेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहे 22 वर्षीय युवक अंश जादौन से मुलाकात हो गई. धीरेधीरे यही मुलाकात प्यार में बदल गई. प्यार जब परवान चढ़ा तो दोनों में मधुर संबंध बन गए. अलगअलग बिरादरी के होने के बाबजूद भी उन्होंने शादी कर के जिंदगी भर साथ रहने की सौगंध खा ली.

अंश की बांहों में जाने के बाद दृष्टि चिराग को लगभग भूल चुकी थी. वह अंश के साथ उस की कार में घूमतीफिरती थी, लेकिन काफी समय तक अपने संबंधों की भनक परिजनों को नहीं लगने दी.

चिराग जब भी दृष्टि से उस के बदले व्यवहार के बारे में जिक्र करता तो वह कोई न कोई बहाना बना देती. उधर अंश आए दिन दृष्टि को महंगे गिफ्ट तो देता ही था, साथ ही आर्थिक सहायता भी करता रहता था.

दृष्टि ने एक दिन अपने नएनवेले प्रेमी अंश जादौन को बताया कि उस का पूर्वप्रेमी चिराग उस पर इस बात के लिए दबाव बना रहा है कि मैं तुम्हें हमेशा के लिए भूल जाऊं. इतना ही नहीं, वह मुझे धमकी भी दे रहा है कि यदि तुम ने अंश से दूरी नहीं बनाई तो वह मेरे सारे अश्लील फोटो इंटरनेट पर डाल देगा.

दृष्टि ने अंश से कहा कि चिराग ऐसी कोई हरकत करे, उस से पहले कुछ करो.

अंश ने दृष्टि का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा, ”तुम बिलकुल भी चिंता मत करो, मैं चिराग का हमेशा के लिए नामोनिशान ही मिटा देता हूं.’’

दृष्टि के प्यार में पागल अंश ने खतरनाक फैसला ले लिया. योजना के अनुसार 8 जुलाई की दोपहर चिराग को वाट्सऐप कौल कर के बताया कि तेरी प्रेमिका तुझे धोखा दे रही है. वह काफी समय से मेरे साथ भी रिलेशनशिप में है, यदि तुम्हें मेरी बात पर भरोसा नहीं हो रहा तो दर्पण कालोनी स्थित मेरे घर पर आ जाओ. मैं दृष्टि की बेवफाई के सारे सबूत तुम्हें दिखा दूंगा.

अंश की योजना से बेखबर चिराग डबरा से ग्वालियर के लिए बस से निकला तो बस स्टैंड पहुंचने से पहले सिकरोदा तिराहे के पास अंश ने चिराग को बस से उतरवा कर अपनी कार में बैठा लिया. इस के बाद दोनों डीएम औफिस के समीप पहाड़ी पर पहुंचे और वायदे के मुताबिक अंश ने चिराग को दृष्टि ग्रोवर से अंतरंगता वाले फोटो दिखाए.

फोटो देखने के बाद चिराग तिलमिला उठा. दृष्टि को ले कर अंश और चिराग में जम कर नोकझोंक हुई. इसी दौरान अंश ने चिराग को जोर से धक्का दे दिया. वह कार की सीट पर गिर पड़ा. इसी दौरान अंश ने चिराग शिवहरे की गोली मार कर हत्या कर दी.

इस के बाद अंश ने सबूत मिटाने के लिए कार से चिराग की लाश को बाहर निकाल कर झाडिय़ों में ले जा कर कार के कवर से ढंक दिया और फिर घटनास्थल से लौट कर अपने घर के पास बनी दूध डेरी से उपले खरीद कर अपनी कार की डिक्की में रखे और पेट्रोल पंप से 2 लीटर पेट्रोल खरीद कर फिर से घटनास्थल पर पहुंचा.

फिर उस ने चिराग की लाश को उपलों पर रख दिया और पेट्रोल छिड़क दिया और आग लगा दी. दूसरे दिन शाम के धुंधलके में घटनास्थल से अधजला शव पास के नाले में फेंक आया.

इस के बाद अंश ने दृष्टि को फोन कर के बता दिया कि उस ने चिराग का काम तमाम कर दिया है. शातिर दिमाग अंश और दृष्टि को उम्मीद थी कि चिराग की हत्या एक पहेली बन कर रह जाएगी और वे दोनों कभी नहीं पकड़े जाएंगे. हालांकि पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर चिराग शिवहरे हत्याकांड के मास्टरमाइंड अंश जादौन को दबोच लिया था. इस के बाद पुलिस ने चिराग शिवहरे की गुमशुदगी को हत्या की धारा में तरमीम कर दिया.

हैरानी की बात यह थी कि चिराग शिवहरे की हत्या के आरोपी अंश जादौन ने 15 जुलाई की सुबह विश्वविद्यालय थाने की हवालात में ठंड लगने की बात कह कर चादर मांगी और फिर इसी चादर को रोशनदान से बांध कर फांसी लगा कर खुदकुशी करने का प्रयास किया.

इत्तफाक से थाने के संतरी सुरेंद्र खन्ना व हवलदार जगदीश शर्मा ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया तो आननफानन में अंश को फंदे से उतार कर अस्पताल पहुंचाया, जहां डौक्टरों ने अंश को बचा लिया गया था.

अस्पताल से अंश के डिस्चार्ज होते ही पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. उधर अंश के गिरफ्तार होते ही अंश की प्रेमिका दृष्टि ने भी न्यायालय में सरेंडर कर दिया. अंश और उस की प्रेमिका दृष्टि के वकील द्वारा दाखिल की गई उन दोनों की जमानत याचिका को पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार गुप्ता ने नामंजूर कर दिया.

हत्या के इस बहुचर्चित मामले में अंश जादौन का गुनाह छिप न सका. पुलिस ने उस के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का मुकदमा दर्ज कर लिया था. विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट पेश की.

तकरीबन 3 साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कौल डिटेल्स, चिराग और दृष्टि के बीच हुई चैट, मोबाइल फोन लोकेशन और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण कर के 14 अगस्त, 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार ने अंश जादौन को चिराग शिवहरे की हत्या और उस के शव को जला कर सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

हालांकि अंश जादौन की प्रेमिका दृष्टि ग्रोवर को भी पुलिस ने इस मामले में आरोपी बनाया था, लेकिन हत्या के वक्त उसके घटना स्थल पर मौजूद न होने की वजह से दृष्टि को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

अंश जादौन के पापा उपेद्र सिंह को भी कोर्ट ने हत्या की साजिश से बरी तो कर दिया, लेकिन मामले की गभीरता को देखते हुए हत्या के दौरान अंश जादौन द्वारा उपयोग में ली गई कार की मैट से लगे खून को साफ कर साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए उपेंद्र को 2 साल की सजा सुनाई.

इस प्रेम कहानी में उलझे रिश्तों का अंत ऐसा हुआ कि 2 परिवार उजड़ गए. एक के एकलौते जवान बेटे की हत्या हुई तो दूसरे को हत्या का दोषी पाए जाने पर उम्रकैद, दोनों परिवार के हिस्से में आया जिदंगी भर का दर्द. Love Triangle Murder

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