Bihar Crime: सनकी आशिक से रहें अलर्ट

Bihar Crime: 18 वर्षीय आरती वरमाला के समय बेहद खुश थी. स्टेज पर जैसे ही उस ने अपने मंगेतर के गले में जयमाला डाली, उसी दौरान किसी ने उस के पेट में सटा कर गोली मार दी. एक झटके में ही 2 परिवारों की खुशियां जयमाला के टूटे फूलों की तरह बिखर गईं…ऐसा क्यों हुआ? किस ने किया? पढ़ें, इस सिरफिरे प्रेमी की कहानी में…

वैसे तो बिहार के शहर बक्सर के जर्रेजर्रे में आज भी वीरता का गौरवशाली इतिहास बोलता है. अंगरेजों से लोहा लेने वाली बंदूकों की आवाज की गूंज की कहानियां भी सुनीसुनाई जाती हैं. किंतु विवाह के मौके पर लोगों का बारात में बंदूक ले कर आना और आतिशबाजी की तरह आसमानी फायर करना सामान्य बात है. बक्सर के चौसा नगर पंचायत में 24 फरवरी, 2026 को नंद चौधरी के घर पर उन की 18 वर्षीय बेटी आरती की बारात आने वाली थी. रात के 10 बज चुके थे. घर पूरी तरह रोशनी से नहाया हुआ था. आवागमन के मुख्य रास्ते पर करीब 250 मीटर की दूरी तक और अगलबगल की गलियों में एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट्स और तेज रोशनी वाले वैपर लाइट की दिन के उजाले जैसी रोशनी फैली हुई थी.

वहां घर के लोगों का आनाजाना हो रहा था. बच्चे भी अपनी धुन में खेलकूद रहे थे. घर के पास में ही एक चौड़ी जगह पर जयमाला का इंतजाम किया गया था. इस के लिए एक किनारे पर टेंट के नीचे मंच सजा दिया गया था. उस पर मुश्किल से 8-10 लोग खड़े हो सकते थे. मंच के सामने कुछ कुरसियां लगाई जा चुकी थीं. वहां की भी सजावट जबदरस्त थी. फूलों की सजावट साथसाथ चौंधिया देने वाली रंगीन रोशनी से गजब का माहौल बन गया था.

घर के लोग बारात आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. हालांकि बलिया से आई बारात जनमासे में पहुंच चुकी थी. बारातियों को नाश्ता वगैरह भी करवाया जा रहा था. उन के तैयार हो कर निकालने की भी लगभग तैयारी हो चुकी थी. बारातियों में से एक व्यक्ति ने उस की कमान संभाल ली थी और सभी को जल्द कमरे और हौल से बाहर निकलने को कह रहे थे. कुछ इसी तरह का माहौल दुलहन के कमरे में भी बना हुआ था. ब्यूटी पार्लर द्वारा सजीधजी दुलहन अपनी सहेलियों और रिश्तेदारों से घिरी बैठी थी. उस की सुंदरता की तरीफें हो रही थीं. हंसीमजाक भी चल रही थी, जबकि घर में विवाह के मुख्य कर्ताधर्ता इस शादी के कार्यक्रम को तेजी से बढ़ाने में लगे हुए थे.

महिलाओं को द्वार पर जल्द बारात लगाए जाने का इंतजार था. वे बारातियों के स्वागत की थाली सजाए हुए थीं. थाली का दीपक बुझने नहीं पाए, इस के लिए साथ में माचिस भी रखी थी. उन में दूल्हे के साथ पारंपरिक रस्में निभाने की उत्सुकता थी. महिलाओं ने इस के लिए अपनेअपने काम बांट लिए थे. इसी बीच एक बुजुर्ग महिला बोली, ”अरे तुम सब यहीं हंसीठिठोली करती रहोगी, बाहर जा कर पता तो करो…बारात जनमासे से निकली भी है या अभी वहीं सज रही है?’’

”आंटी, बारात निकल चुकी है…बैंड की तेज आवाज सुनाई दे रही है.’’ दुलहन की एक सहेली बोली.

”ठीक है, दुलहन को छत पर ले जा, उसे बारात दिखा कर तुरंत ले आना…’’ महिला बोली.

”दुलहन को क्या आंटी?’’ सहेली ने प्रश्न किया.

”अरे, यह भी एक रस्म है…दुलहन को अपनी बारात देखने से उस के लिए शुभ होता है.’’

”अच्छा तो यह बात है…ठीक है आंटी… अरे, चलोचलो, दुलहन को ले चलते हैं छत पर…’’ यह कहती हुई लड़कियां दुलहन को छत पर ले गईं. वहां वे छत के मुंडेर के किनारे जा जा कर खड़ी हो गईं.

तब तक बैंडबाजे की आवाज काफी तेज हो चुकी था. इस का मतलब था कि बारात दरवाजे के नजदीक पहुंच चुकी थी.

घर की बड़ीबुजुर्ग महिलाएं हाथों में दीपबाती का थाल लिए हुए दूल्हे के स्वागत के लिए सजी गाड़ी के पास पहुंच गई थीं. कुछ मिनटों में ही दूल्हे की आरती और पूजन की रस्म अदायगी हो गई. दूल्हे को पास ही मंच पर ले जाया गया. इसी बीच एक महिला ने आवाज लगाई, ”दुलहन को जल्दी से ले कर आओ, जयमाला करनी है.’’

बैंड की तेज आवाज में कौन, क्या बोल रहा है, ठीक से किसी को समझ में नहीं आ रहा था. किंतु उपस्थित लोग इशारेइशारे में वहां के स्वागतसत्कार का काम निपटा रहे थे. फेमिली वालों की तरफ के लड़के बारातियों की आवभगत कर रहे थे. उन्हें कोल्डड्रिंक और नाश्ता परोसा रहे थे, जबकि घर की कुछ लड़कियां और औरतें दूल्हे के आसपास मंच पर जा पहुंची थीं. वे एक लय के साथ विवाह गीत में बारातियों के लिए गालियां गाए जा रही थीं.

दुलहन जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे से अपनी सहेलियों के साथ बाहर निकली, फोटाग्राफर और वीडियोग्राफर की लाइटें उस ओर फोकस हो गईं. तेज रोशनी में दुलहन का चेहरा और भी निखरा हुआ दिखने लगा था. वह धीरेधीरे मंच की ओर नजाकत के साथ चलती हुई दूल्हे के पास पहुंच चुकी थी. उन्हें दुल्हे के बगल में बिठाने से पहले जयमाला की रस्म निभानी थी, सो वह घर की 2 लड़कियों के साथ खड़ी हो गई थी. उन के सामने दूल्हा भी आ कर खड़ा हो गया था. उन के साथ भी कुछ लड़के थे. संभवत: वे उन के दोस्त और रिश्तेदार थे.

आरती – जयमाला के समय प्रेमी की गोली का शिकार

दोनों के हाथों में जयमाला पकड़ा दी गई थी. जयमाला पहनाने की पहल दुलहन की तरफ से की गई. उस की एक सहेली ने हाथ में वरमाला को अच्छी तरह पकडऩे को कहा, ”दूल्हा लंबा है, एक झटके में पैर उचका कर माला डाल देना. हम लोग भी तुम्हें सहारा देख थोड़ा उठा देंगे.’’

दुलहन ने इशारे में गरदन हां में हिला दी. एक सहेली बोली, ”लड़के वालो! रेडी हो जाओ… ठीक से जयमाला पकड़ लो…पहले दुलहन माला पहनाएगी, उस के बाद दूल्हे को माला पहनाना है. हां, कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए.’’

”आप जैसी खूबसूरत साली हो, तब तो गड़बड़ी हो कर ही रहेगी.’’ दूल्हे का एक दोस्त चुटकी लेते हुए बोला और लड़कियों की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया.

”जो कुछ बोलना है, मुंह से बोल लो… हमें टच करने की कोशिश भी नहीं करना!’’

”साली हो कर इतनी सख्ती ठीक नहीं है.’’

”क्या ठीक, क्या नहीं वह सब बाद में करना पहले लड़के को और पास लाओ!’’ लड़की बोली और दुलहन को एक कदम आगे बढ़ा कर वरमाला के लिए इशारा कर दिया.

दुलहन ने वरमाला दूल्हे की गरदन में डालने के हाथ उठाया, लेकिन यह क्या, दूल्हे को 2 लड़कों ने पैर पकड़ कर काफी ऊंचा उठा दिया… और दुलहन हाथ में वरमाला पकड़े ठगी सी उसे देखती रह गई.

”चालाकी खेलते हैं. अभी मैं भी दिखाती हूं. फेल करती हूं तुम्हारी चालाकी.’’

इसी बीच मंच पर लड़के वालों की तरफ से हलचल मच गई…’’अरेअरे, तू कौन है भाई? बारात का तो नहीं लगता. और…और यहां पिस्टल ले कर कैसे घुस गया दूल्हादुलहन के बीच में? फायरिंग करनी है, तो नीचे जा कर हवाई फायरिंग कर न! यहां जयमाला की रस्म होने दे.’’ दूल्हे का एक दोस्त नाराजगी के साथ बोला.

”मैं तो यहीं फायरिंग करूंगा…तू रोक सकता है तो रोक ले!’’ मंच पर अचानक चढ़ आया युवक भी उसी के लहजे में आक्रोश के साथ बोला और अपनी पिस्टल उस की ओर तान दी.

”अरे…अरे भाई! मजाक मत कर यार, गोली चल जाएगी…हटा ले इसे सामने से!’’ दूल्हे के साथ खड़ा दूसरा लड़का बोल पड़ा.

पिस्टल ताने लड़के ने उस की तरफ से पिस्टल हटा ली, किंतु अगले पल उस ने दुलहन आरती को निशाना बना लिया था. उस की यह हरकत स्टेज पर मौजूद सभी को अटपटी लगी. कई लोगों ने एक सुर में विरोध किया. बैंडबाजे और डेक स्पीकर की आवाज में सभी पिस्टल थामे लड़के को चिल्ला कर बोले जा रहे थे. इसी बीच कब गोली चलने की आवाज आई किसी को पता ही नहीं चला… मंच पर अफरातफरी मच गई. दुलहन वहीं गिर गई थी…उसे गोली लग गई थी.

जयमाला के समय दुलहन आरती की गोली मार कर हत्या का प्रयास करने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु

यह क्या हो गया? क्या हो गया दुलहन को?… उठाओ जल्दी…! अगले पल वह लड़का वहां से फरार हो गया था. मंच पर जयमाला के फूल बिखर गए थे. एक पल में गोली चलने की बात फैल गई. कुछ लोगों ने तुरंत दुलहन को हाथ और पैरों से टांग कर गाड़ी में डाला और अस्पताल ले गए. तुरंत अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उस की हालत नाजुक बनी हुई है. पेट से खून निकल रहा था. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डौक्टर जांच करने लगे. तब तक मुफस्सिल थाने की पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी. कानूनी काररवाई शुरू कर दी गई. पुलिस को डौक्टर से मालूम हुआ कि दुलहन को  पेट में सटा कर गोली दागी गई थी.

गोली मारते ही वैवाहिक कार्यक्रम में हड़कंप मच गया. शादी की खुशियां चीखपुकार में बदल गईं. दुलहन आरती को गंभीर हालत में वाराणसी रेफर कर दिया गया. गोली शरीर के नाजुक हिस्से में लगी थी, जिस से उस की स्थिति चिंताजनक बन गई थी. जबकि गोली मारने वाला युवक फरार हो गया था. इस मामले को मुफस्सिल थाना क्षेत्र में दर्ज कर लिया गया. बाराती और ग्रामीण भी जान बचाने के लिए इधरउधर भाग गए थे. पुलिस ने इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों और विवाह में आए लोगों से पूछताछ की.

बारात उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुलेमानपुर गांव से आई थी. पूरे विधिविधान के साथ विवाह की रस्मों के दरम्यान यह घटना हो गई. पूछताछ में मालूम हुआ कि अचानक जयमाला के मंच पर चढ़ आया युवक पड़ोस का ही दीनबंधु था. उस ने दुलहन को निशाना बना कर गोली चलाई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया गया. आरोपी युवक आरती का पड़ोसी था और दोनों के बीच पहले से संबंध होने की चर्चा गांव में थी. कुछ लोगों ने बताया कि आरती की शादी तय होने से युवक नाराज था और इसी रंजिश में उस ने यह खौफनाक कदम उठाया.

पुलिस ने जांच में इस जानकारी को नोट कर लिया. सवाल था कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक गुस्से में अंजाम दी गई. मुफस्सिल थाना पुलिस द्वारा मौके पर छानबीन के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने समारोह स्थल से साक्ष्य जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ पूरी हो जाने के बाद फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने लगी. इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था. ग्रामीणों में आक्रोश साफ देखा देखा जा रहा था. लोग कानूनव्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे. वहीं दुलहन की फेमिली पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. शादी की खुशियां पल भर में मातम में बदल गई थीं. इस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा था. यूट्यूबर अपनेअपने अंदाज में वारदात का विवरण दे रहे थे.

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दूल्हादुलहन स्टेज पर मौजूद दिखे और पूरा घर शादी की खुशियां मनाता नजर आ रहा था. इतने में जयमाला लाई जाती है और दू्ल्हादुलहन को दी जाती है, जैसे ही रस्म की बारी आती है वैसे ही एक सिरफिरा स्टेज पर आता है और दुलहन पर पिस्टल से फायर कर देता है. दुलहन को गोली लग जाती है. सभी दुलहन को संभालने लगते हैं. मेहमानों के होश उड़ जाते हैं. दुलहन भी बेहोश होकर वहीं स्टेज पर गिर जाती है. हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका था.

दुलहन की बारात लौट गई थी. बारात में आए लोगों की प्रतिक्रिया भी जले पर नमक छिड़कने जैसी ही थी. दूल्हे का कहना का कहना था कि अगर पहले पता होता तो वो कभी नहीं आते. घायल दुलहन का भी एक वीडियो आने से पता चल चुका था कि उसे गोली मारने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु था. वह लंबे से उस के पीछे पड़ा था. पुलिस उस की गिरफ्तारी में जुट गई थी.

जल्द ही आरोपी दीनबंधु गिरफ्तार भी कर लिया गया. जब उस की क्राइम हिस्ट्री की जांच की, तब पाया गया कि शराब तस्करी के मामले में 2021 में वह जेल जा चुका था. उस से पुलिस के लिए यह जानना भी आवश्यक था कि उस के पास हथियार कैसे आए और गोली मारने के पीछे उस की असली मंशा क्या थी? क्या यह सिर्फ प्रेम प्रसंग का मामला था या इस के पीछे कोई और भी कारण था?

आरती के फादर नंद मल्लाह का कहना है कि वह एकतरफा प्यार करता था. लड़की उसे पसंद नहीं करती थी, इसलिए उस ने गोली मार दी. उन्होंने बताया कि आरोपी एक बार पहले भी उन की बेटी की शादी तुड़वा चुका है.

जब शादी तय हुई थी, तब आरोपी ने लड़के के घर वालों को धमकाया था. धमकी से डर कर लड़के वालों ने वह रिश्ता तोड़ दिया था. इस के बाद गांव वालों ने पंचायत बिठाई थी. लड़के को गांव से बाहर भेज दिया गया वह उस पर नजर बनाए हुए था. पुलिस ने आरोपी दीनबंधु के पास से पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी. एसपी शुभम आर्य ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह एक से अधिक गोली मारना चाहता था, लेकिन पिस्टल फंस जाने के कारण वह दोबारा गोली नहीं चला सका. उस के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में हत्या या हत्या के प्रयास की बीएनएस की धारा 109 लगाई गई. भारतीय कानून के तहत किसी व्यक्ति को जान से मारने की कोशिश एक गंभीर अपराध माना जाता है.

इस मामले में दुलहन आरती का बयान भी महत्त्वपूर्ण था. उस ने गिरतेगिरते कहा था, ”दीनबंधु ने मुझे गोली मार दिया है.’’

गोली लगने के बाद आरती को तुरंत बक्सर सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां उस की हालत गंभीर बताई गई, जिस के बाद आरती को वाराणसी के बीएचयू में रेफर कर दिया गया. दीनबंधु ने पुलिस को बताया कि वह और आरती एक ही मोहल्ले में पलेबढ़े. बचपन में दोनों साथ खेलते थे. जब आरती सिर्फ 6 साल की थी, तब उस के परिवार ने उसे बाहर खेलने से मना कर दिया. इस के बाद वक्त का ऐसा पहिया घूमा कि अगले 15 सालों तक दीनबंधु ने आरती की झलक तक नहीं देखी. वह बस उस की यादों के सहारे बड़ा हुआ.

साल 2024 में दीनबंधु ने आरती को पहली बार सलवारसूट में देखा तो उसे लगा कि यही वो लड़की है जिस के साथ वह अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहता है. दीनबंधु ने हिम्मत जुटाई और अपने दोस्तों के उकसाने पर आरती का पीछा किया. उस ने बीच सड़क पर आरती को रोक कर अपने प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन आरती ने साफसाफ न कह दिया.

उस के बाद उस के दिल और दिमाग में जो हलचल हुई, उस बारे में दीनबंधु ने कहा कि आरती की न सुनने के बाद उसे लगा कि अब पूरी दुनिया खत्म हो गई है. एक बार न सुनने के बाद भी वो लगातार आरती को मनाने की कोशिश करता रहा. उसे लगा कि शायद उस के पुराने आपराधिक रिकौर्ड की वजह से आरती उसे पसंद नहीं कर रही है.

जब उसने दोबारा कोशिश की, तो आरती ने दोटूक शब्दों में कह दिया, ”मैं तुम जैसे लड़के से कभी शादी नहीं करूंगी.’’

आरती की यही बात उस के दिल में सूई की तरह चुभ गई और उस के प्यार को एक जिद में बदल दिया. आरती की शादी एक साल पहले कहीं तय हुई थी. यह खबर सुनते ही वह आपा खो बैठा. वह सीधे लड़के वालों के घर पहुंच गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी. डर के मारे लड़के वालों ने शादी तोड़ दी. इस हरकत से आरती के पापा ने समाज के सामने दीनबंधु के फेमिली वालों को काफी खरीखोटी सुनाई. बेइज्जती से तंग आ कर दीनबंधु के फादर ने उसे काम करने के लिए पंजाब भेज दिया, ताकि वह सुधर जाए, पर उस का दिमाग आरती में ही अटका था.

पंजाब में बैठ कर भी दीनबंधु अपने दोस्तों के जरिए आरती की हर हलचल पर नजर रखे हुए था. उसे पता चला कि अगस्त 2025 में आरती की शादी दोबारा तय हो गई है. यह सुनते ही उस के सिर पर खून सवार हो गया. वह पंजाब से 1300 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के गहमर गांव पहुंचा. यह गांव गाजीपुर जिले में गंगा किनारे स्थित है. इसे सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. यहां के लगभग हर घर से सेना में जवान हैं. यहां के एक परिचित से उस ने 32 हजार रुपए में एक पिस्टल खरीदी.

22 फरवरी, 2026 को वह चुपचाप अपने गांव पहुंचा और घर जाने के बजाय दोस्त के कमरे पर रुका, ताकि किसी को भनक नहीं लगे. फिर आरती की शादी के रोज वो स्टेज के पास गया और उसे गोली मार दी. उस ने सोचा कि आरती उस की नहीं तो किसी की नहीं हो सकती. संयोग से उस की घटनास्थल पर मौत नहीं हो सकी और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भरती करवा दिया गया. कथा लिखे जाने तक आरती का औपरेशन सफल हो गया था, लेकिन खतरा बना हुआ था. वह बोलने से असमर्थ थी.

आरती के पापा इस घटना से काफी आहत हैं. वह कहते हैं कि अभी भी उन की बेटी बोल नहीं पा रही है और डौक्टर की निगरानी में है. उस की सर्जरी हुई थी, उस के 12 घंटे बाद होश आया था. हम ने शादी के लिए भी काफी कर्ज लिया था और अब इलाज में भी कर्ज ले कर ही पैसा बहा रहे हैं. मुझे पैसों की चिंता नहीं है, मैं बस यह चाहता हूं कि आरोपी के खिलाफ सख्त काररवाई हो. Bihar Crime

 

 

Family Story : पत्नी की मौत की सुपारी

Family Story : दंपति के बीच शक की फांस यदि समय रहते निकाली न जाए तो वह खतरनाक नासूर बन जाती है. श्यामशरण के साथ भी ऐसा ही हुआ. वह अपनी पत्नी आरती के ऊपर बने शक को अपराध में न बदलता तो शायद…

उस दिन मई 2021 की 18 तारीख थी. रात के 8 बज रहे थे. बिधनू थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह इलाके में गश्त पर निकलने वाले थे, तभी उन के मोबाइल फोन पर काल आई. उन्होंने काल रिसीव की तो फोनकर्ता ने चौंकाने वाली सूचना दी. उस ने बताया कि करसुई पुल के पास जो हनुमान मंदिर है, वहां एक महिला की लाश पड़ी है. उस की हत्या गोली मार कर की गई है. चूंकि मामला महिला की हत्या का था, अत: थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने गश्त पर जाने के बजाय उस जगह जाना जरूरी समझा जहां महिला की लाश पड़े होने की उन्हें सूचना मिली थी. इस से पहले उन्होंने घटना की खबर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी.

फिर पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो लिए. थाना बिधनू से करसुई नहर पुल की दूरी करीब 3 किलोमीटर थी. इसलिए पुलिस को वहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा. घटनास्थल पर उस समय कुछ लोग भी खड़े थे. उन्होंने महिला की लाश का मुआयना किया. मृतक महिला की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या गोली मार कर की गई थी. उस की पीठ पर 2 तथा सीने पर एक गोली दागी गई थी. महिला जींस व कमीज पहने थी. उस की मांग में सिंदूर तथा पैरों में बिछिया थे. स्पष्ट था कि महिला विवाहित थी. शव के पास ही सड़क किनारे उस की स्कूटी लुड़की पड़ी थी, जिस का नंबर यूपी78 जीएफ 3398 था. वहीं पर मृतका का पर्स व मोबाइल फोन पड़ा था, जिसे पुलिस ने सुरक्षित कर लिया.

थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रसाद सिंह तथा डीएसपी विकास पांडेय घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद कुछ लोगों से पूछताछ की. वहां मौजूद एक युवक ने पुलिस को बताया कि वह मंदिर में हनुमानजी के दर्शन करने आया था. तभी उसे फायर की आवाज सुनाई दी. वह वहां पहुंचा तो महिला मृत पड़ी थी. उस ने 2 हत्यारों को मोटरसाइकिल से भागते हुए देखा था. दोनों हेलमेट लगाए थे. उस ने ही पुलिस को सूचना दी थी.

अब तक महिला के शव को अनेक लोग देख चुके थे, लेकिन कोई उसे पहचान न सका था. तब पुलिस ने मौके काररवाई कर शव को पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया. महिला की स्कूटी को भी थाने भिजवा दी. घटनास्थल से मृत महिला का पर्स व मोबाइल फोन बरामद हुआ था. इस मोबाइल फोन को थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने खंगाला तो उस में उस के पिता का नंबर सेव था. थानाप्रभारी ने उस नंबर पर बात की तो पता चला कि वह नंबर बिरला नगर ग्वालियर के रहने वाले अनिल कुमार शर्मा का है. उन्होंने अनिल से पूछा कि जिस मोबाइल नंबर से वह बात कर रहे हैं, वह किस का है?

‘‘यह नंबर मेरी बेटी आरती शर्मा का है. लेकिन आप कौन है? मेरी बेटी का मोबाइल फोन आप के पास कैसे आया?’’ अनिल शर्मा ने घबराते हुए पूछा.

‘‘देखो शर्माजी, मैं कानपुर नगर के थाना बिधनू से इंसपेक्टर विनोद कुमार सिंह बोल रहा हूं. एक महिला के शव के पास से मुझे यह मोबाइल फोन मिला था. आप जल्दी से थाना बिधनू आ जाइए. शव की शिनाख्त भी हो सकेगी.’’

19 मई की सुबह 8 बजे अनिल कुमार शर्मा अपने साढू मनोज के साथ थाना विधनू पहुंच गए. इस के बाद थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह उन्हें पोस्टमार्टम हाउस ले कर आए. यहां महिला की लाश देख कर अनिल शर्मा फफक कर रो पड़े. उन्होंने बताया कि लाश उन की बेटी आरती की है. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने अनिल कुमार शर्मा को धैर्य बंधाया और फिर पूछताछ की. अनिल ने बताया कि उन्होंने कई साल पहले आरती की शादी हमीरपुर जिले के भरूवा सुमेरपुर कस्बा निवासी श्यामशरण शर्मा के साथ की थी. लेकिन दामाद और बेटी में पटरी नहीं खाती थी सो दोनों के बीच अकसर झगड़ा होता था. श्यामशरण को शक था कि आरती का किसी के साथ चक्कर चल रहा है. इसी बात को ले कर वह आरती को प्रताडि़त करता था.

अनबन होने पर आरती मायके में रहने लगी थी. दिसंबर 2020 में मैं ने दोनों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया था. लेकिन असफल रहा. समझौते के दौरान ही दोनों झगड़ा करने लगे थे. गुस्से में श्यामशरण ने आरती का सिर फोड़ दिया था. लोकलाज के कारण हम ने दामाद के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई थी. इस झगड़े के बाद आरती कानपुर के नौबस्ता थाना अंतर्गत सागरपुरी (गल्लामंडी) में किराए का मकान ले कर रहने लगी थी. जिस मकान में वह रहती थी, उसी में उस ने आइसक्रीम फैक्ट्री शुरू कर दी थी. शादी समारोह में आइसक्रीम की डिमांड खूब हो रही थी.

आरती पति से अलग जरूर रहती थी, लेकिन श्याम शरण उस पर निगरानी रखता था. फोन पर वह उसे धमकाता भी था. सर, मेरी बेटी आरती की हत्या उस के पति श्यामशरण तथा जेठ रामशरण ने की है. आप मेरी रिपोर्ट दर्ज कर उन दोनों को गिरफ्तार करें. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने अनिल कुमार शर्मा की तरफ से भादंवि धारा 302 आईपीसी के तहत श्यामशरण शर्मा व रामशरण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच में जुट गए. इधर महिला उद्यमी आरती हत्याकांड की खबर अखबारों में छपी तो आईजी (कानपुर जोन) मोहित अग्रवाल तथा एडीजी भानु भास्कर ने मामले को गंभीरता से लिया और घटनास्थल का निरीक्षण कर मृतका के पिता अनिल शर्मा से जानकारी हासिल की.

इस के बाद उन्होंने एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रसाद की देखरेख में पुलिस टीम गठित कर दी. खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपए का पुरस्कार भी घोषित कर दिया. गठित पुलिस टीम ने 3 बिंदुओं पर जांच शुरू की. पहली अवैध संबंधों की, दूसरी पति से अनबन तथा तीसरी व्यापारिक प्रतिस्पर्धा. टीम ने सब से पहले आरती शर्मा के पति श्यामशरण तथा जेठ रामशरण को भरुआ सुमेरपुर कस्बा में स्थित उन के घर से उठाया फिर दोनों को बिधनू थाने ला कर पूछताछ की. लेकिन दोनों ने जुबान नहीं खोली. पुलिस टीम ने आरती शर्मा के मोबाइल फोन को खंगाला तो उस में एक ऐसा वीडियो मिला, जिस में वह दोस्तों के साथ ड्रिंक कर रही थी और अश्लील हंसीमजाक कर रही थी.

टीम को समझते देर नहीं लगी कि आरती रंगीनमिजाज महिला थी. इसी मोबाइल में एक ऐसा नंबर भी था, जिस पर आरती की घटना से पहले बात हुई थी. इस नंबर को खंगाला गया तो पता चला कि यह नंबर प्रतापगढ़ के भौलपुर गांव निवासी जितेंद्र का है. पुलिस टीम ने जितेंद्र को उस के गांव से हिरासत में ले लिया और बिधनू थाने लाई. यहां उस से कड़ाई से पूछताछ हुई तो उस ने बताया कि उस का मोबाइल खो गया था. किसी ने गलत इस्तेमाल किया है. पुलिस को भी लगा कि जितेंद्र निर्दोष है, अत: उसे थाने से जाने दिया. पुलिस टीम को पक्का यकीन था कि आरती की हत्या का रहस्य उस के पति के पेट में ही छिपा है. अत: टीम ने श्यामशरण शर्मा से कड़ाई से पूछताछ की. पुलिस सख्ती से श्यामशरण टूट गया.

उस ने बताया कि आरती की हत्या उस ने शूटरों से कराई थी. मौत का सौदा उस ने 3 लाख 20 हजार रुपए में किया था, जिस में से 1 लाख 40 हजार शूटरों के खाते में ट्रांसफर कर दिया था.  श्यामशरण ने शूटरों के नाम शाहरुख खान निवासी इमलिया बाड़ा कस्बा भरुआ सुमेरपुर तथा नईम उर्फ भोलू निवासी ईदगाह कस्बा भरुआ सुमेरपुर जिला हमीरपुर बताया. 20 मई, 2021 को पुलिस टीम ने भरुआ सुमेरपुर थाना पुलिस की मदद से शाहरुख खान के घर पर छापा मारा. लेकिन वह घर से फरार था. दबाव बनाने के लिए पुलिस टीम ने उस की पत्नी रूबी, मां परवीन खातून तथा बहन रुखसार को हिरासत में ले लिया.

इस के बाद पुलिस ने ईदगाह निवासी नईम उर्फ भोलू के घर छापा मारा. वह भी घर से फरार था. पुलिस ने भोलू की मां शमीम, बहन रोजी तथा एक अन्य को हिरासत में ले लिया. सभी को थाना बिधनू लाया गया. दबाव बना कर पुलिस अधिकारियों के समक्ष उन से पूछताछ की गई और शाहरुख तथा नईम के ठिकानों की जानकारी जुटाई गई. पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. 23 मई को भरुआ सुमेरपुर थानाप्रभारी वी.पी. सिंह को एक खबरी के जरिए पता चला कि शाहरुख खान अपनी पत्नी रूबी से मिलने घर आया है. इस पर उन्होंने दबिश दे कर शाहरुख को उस के घर से दबोच लिया और थाने ले आए. इस के बाद उन्होंने उसे बिधनू पुलिस को सौंप दिया.

पुलिस टीम ने शाहरुख से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. शाहरुख ने बताया कि उसे 90 हजार रुपया मिला है. नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू की मार्फत वह वारदात में शामिल हुआ था. उस ने बताया कि आरती की हत्या में कबरई निवासी विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत भी शामिल हैं. ये दोनों प्रतापगढ़ के राजा शुक्ला गैंग के शूटर हैं. पुलिस ने शाहरुख खान की निशानदेही पर .315 बोर का तमंचा भी बरामद कर लिया, जिस से आरती पर फायर किया गया था. आरती हत्याकांड का खुलासा हो गया था. पुलिस ने अब इस मामले में श्यामशरण शर्मा, शाहरुख खान, नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू, विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत को नामजद कर लिया था.

श्यामशरण व शाहरुख खान तो पुलिस गिरफ्त में आ गए थे. लेकिन शेष आरोपी फरार थे. उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल फैलाया तो 25 मई को नईम उर्फ भोलू भी पकड़ में आ गया. नईम उर्फ भोलू ने भी अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसे 50 हजार रुपए मिले थे. विकास हजारिया और राहुल राजपूत को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी. रामशरण निर्दोष था. अत: उसे थाने से जाने दिया गया. पुलिस द्वारा की गई जांच, आरोपियों के बयानों तथा मृतका के पति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आरती हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस का विवरण इस प्रकार है.

मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है ग्वालियर. इसी ग्वालियर शहर के बिरला नगर मोहल्ले में अनिल कुमार शर्मा अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी आशा के अलावा 3 बेटियां आरती, अंजू, भारती तथा एक बेटा आदित्य था. अनिल कुमार शर्मा मेहनतकश इंसान थे. वह प्राइवेट नौकरी करते थे. नौकरी में मिलने वाले वेतन से वह परिवार का भरणपोषण करते थे. अनिल शर्मा की बेटी आरती अपनी बहनों में सब से बड़ी थी. वह अपनी अन्य बहनों से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी. उस ने वीरांगना लक्ष्मीबाई कालेज से पास कर ली थी और उसी कालेज से बीए की पढ़ाई कर रही थी. आरती स्वच्छंद थी. उस का स्वभाव भी चंचल था. इसलिए कालेज आतेजाते कई युवक उस के दोस्त बन गए थे. उन के साथ वह मौजमस्ती करती थी.

अनिल शर्मा को जब पता चला कि बेटी गलत राह पर जा रही है तो बदनामी से बचने के लिए उन्होंने उस का ब्याह जल्द करने का फैसला किया. उन्होंने आरती के योग्य वर की खोज की तो उन्हें श्यामशरण पसंद आ गया. श्यामशरण शर्मा, हमीरपुर जनपद के कस्बा भरुआ सुमेरपुर का रहने वाला था.  बड़े भाई रामशरण शर्मा का विवाह हो चुका था. दोनों भाई मिल कर व्यापार करते थे और साथ रहते थे. अनिल शर्मा ने जब श्यामशरण को देखा तो उन्होंने उसे अपनी बेटी आरती के लिए पसंद कर लिया. इस के बाद उन्होंने 20 फरवरी, 2004 को आरती का विवाह श्यामशरण के साथ कर दिया. शादी के बाद श्यामशरण और आरती ने हंसीखुशी से जीवन की शुरुआत की. देखतेदेखते 5 साल कब बीत गए, पता ही न चला. इन 5 सालों में आरती ने बेटी संस्कृति तथा बेटे सुमित को जन्म दिया.

आरती को अपनी खूबसूरती पर घमंड था, जिस से वह पूरे घर को अपनी अंगुलियों पर नचाती थी. कुछ समय तक तो आरती की ज्यादती उस के जेठजेठानी ने सहन की. उस के बाद विद्रोह के स्वर उभरने लगे. आरती को संयुक्त परिवार में रहना वैसे भी पसंद नहीं था. उस ने घर बंटवारे की मांग कर दी. कलह बढ़ी तो आरती की बात मान कर दोनों भाइयों के बीच घर, व्यापार का बंटवारा हो गया. हालांकि श्यामशरण बंटवारा नहीं चाहता था. आरती अलग रहने लगी, तो वह स्वच्छंद हो गई. उसे घर में कैद हो कर रहना पसंद नहीं था, सो वह बनसंवर कर घर से निकलती, फिर कस्बे के बाजारों में घूमती तथा होटल व रेस्टोरेंट में जाती.

श्यामशरण को पत्नी का इस तरह फिजूल में घूमनाफिरना अच्छा नहीं लगा था. उस ने आरती को फटकारा और बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने को कहा. लेकिन आरती ने पति की बात पर ध्यान नहीं दिया. वह पति पर तरहतरह की फरमाइशें पूरी करने का दबाव बनाती और लड़तीझगड़ती. श्यामशरण पत्नी के ऊलजुलूल खर्चों से परेशान था. उसे घर का खर्च चलाने और आरती की फरमाइशें पूरी करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही थी. 3 बच्चे पैदा करने के बाद श्यामशरण पत्नी की शारीरिक जरूरतों को भी अनदेखा करने लगा. जबकि आरती का यौवन खिल उठा था और वह हर रात पति का साथ चाहती थी. श्यामशरण कमाई के चक्कर में इस कदर व्यस्त हो गया था कि उसे न अपना होश रहा और न आरती का.

आजाद पंछी की तरह खुले आकाश में विचरण करने वाली आरती को अब पति का घर जेल जैसा लगने लगा था. पति की उदासीनता की वजह से चांदनी रातें भी उसे अमावस की काली रातों जैसी लगने लगीं. धीरेधीरे उन दोनों के बीच की दूरियां बढ़ती गईं. तब वह शारीरिक जरूरतों के लिए इधरउधर नजरें दौड़ाने लगी. परिणामस्वरूप जल्द ही उस की कस्बे के कई युवकों से यारी हो गई. उन के साथ वह गुलछर्रे उड़ाने लगी. श्यामशरण शर्मा को आरती की इस करतूत का पता चला तो उस ने शराब पी कर आरती से मारपीट तो की ही, उसे रंडी और वेश्या तक कह डाला. लेकिन इतनी मार खाने के बाद भी आरती कहती रही कि यह सब झूठ है. उसे गलतफहमी हुई है. जबकि श्यामशरण ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया.

अब आए दिन उन दोनों का झगड़ा मोहल्ले वालों के लिए मुफ्त का तमाशा बन गया था. रोजरोज की पिटाई से आहत हो कर आरती एक दिन अपने दोनों बच्चों को ले कर मायके ग्वालियर आ गई. कुछ माह बाद श्यामशरण आरती को लेने ग्वालियर आया. लेकिन आरती ने उस के साथ जाने को साफ मना कर दिया. धीरेधीरे कई साल बीत गए. लेकिन आरती पति के घर नहीं लौटी. श्यामशरण को बच्चों से मोह था. कभीकभी वह बच्चों से मिलने जाता, लेकिन आरती बच्चों से नहीं मिलने देती. अनिल शर्मा चाहते थे कि दोनों में सुलह हो जाए और आरती अपने बच्चों के साथ ससुराल चली जाए. वह सोचते थे कि आखिर जवान बेटी कब तक पिता की छाती पर मूंग दलेगी.

अनिल कुमार शर्मा ने इस दिशा में प्रयास शुरू किया तो दिसंबर 2020 में आरती और श्यामशरण आपसी सुलह को राजी हो गए. आरती अपने पिता के साथ ससुराल पहुंची. वहां दोनों के बीच बात शुरू हुई. आरोपप्रत्यारोप के बीच दोनों की भौंहें टेढ़ी हो गईं. गुस्से में श्यामशरण ने बट्टे से आरती के सिर पर प्रहार कर दिया, जिस से उस का सिर फट गया और खून बहने लगा. आरती अपने हाथ में खून ले कर गुस्से से बोली, ‘‘मिस्टर शर्मा, तुम्हें इस खून की कीमत चुकानी पड़ेगी. खून का बदला खून से न लिया तो आरती मेरा नाम नहीं.’’

इस के बाद वह पिता के साथ घर चली गई. उस के फटे सिर में 10 टांके लगाने पड़े थे. लेकिन उस के पिता ने दामाद के खिलाफ रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई थी. आरती अब सोचने लगी थी कि उसे बच्चों के भविष्य के लिए अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा. इसी उद्देश्य से वह कानपुर शहर आ गई. फिर एक रिश्तेदार के माध्यम से नौबस्ता थाने के सागरपुरी (गल्लामंडी) में एक मकान किराए पर लिया और रहने लगी. इस के बाद उस ने इसी मकान में आइसक्रीम फैक्ट्री शुरू कर दी. उस की मेहनत और लगन रंग लाई और उस का धंधा अच्छा चलने लगा. उस की आइसक्रीम की बुकिंग शादीविवाह व छोटेमोटे अन्य समारोह के लिए होने लगी. जल्दी ही आरती की पहचान उद्यमी महिला के रूप में हो गई.

आरती हंसमुख थी. सामने वाले को प्रभावित करने में वह माहिर थी. सजधज कर भी वह रहती थी. होंठों पर लिपस्टिक और आंखों का कजरा, उस की खूबसूरती में चारचांद लगाते थे. वह रंगीनमिजाज भी थी, जिस से कई रंगीनमिजाज युवक उस के दोस्त बन गए थे. उन के साथ वह होटल, क्लब जाती, शराब पीती और मौजमस्ती करती. अब उसे रोकनेटोकने वाला कोई न था. इधर श्यामशरण को जब से आरती ने बदला लेने की धमकी दी थी, तब से उस की रातों की नींद हराम हो गई थी. उसे लगने लगा था कि यदि आरती जीवित रही तो वह उस की हत्या करा देगी. लिहाजा श्यामशरण पत्नी आरती की हत्या कराने का फैसला ले लिया. इस के लिए उस ने भरुआ सुमेरपुर कस्बा के ईदगाह कालोनी निवासी कुख्यात अपराधी नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू से संपर्क साधा और 3 लाख 20 हजार रुपए में आरती की हत्या की सुपारी दी.

नईम ने अपने साथी शाहरुख तथा प्रतापगढ़ के राजा शुक्ला गैंग के शूटर विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत को शामिल किया. विकास कबरई (बांदा) का रहने वाला था, जबकि राहुल राजपूत प्रतापगढ़ का. 14 मई, 2021 को ईद वाले दिन नईम उर्फ रिंकू के घर सभी बदमाश इकट्ठे हुए और श्यामशरण शर्मा की मौजूदगी में आरती की हत्या की योजना बनी. श्यामशरण ने शूटरों को आरती का फोटो तथा मोबाइल नंबर दिया. इस के बाद शाहरुख ने फरजी आईडी पर एक सिम ऐक्टीवेट कराया और उस ने आरती से बात की. उस ने आइसक्रीम की क्वालिटी तथा रेट पूछे. उस ने कहा कि 20 मई को उस के यहां शादी है, उस के लिए 2-3 तरह की आइसक्रीम चाहिए. इस पर आरती ने जवाब दिया कि सभी क्वालिटी की आइसक्रीम आप को उचित रेट पर मिल जाएगी.

18 मई, 2021 की शाम 7 बजे नौबस्ता समाधि पुलिया के पास चारों शूटर इकट्ठे हुए. शूटर विकास हजारिया और राहुल राजपूत कार से आए थे. जबकि शाहरुख और नईम मोटरसाइकिल से. चारों ने मिल कर एक बार फिर से विचारविमर्श किया. फिर शाहरुख और नईम करसुई पुल की ओर रवाना हो लिए. विकास हजारिया ने लगभग साढ़े 7 बजे उसी फरजी सिम से आरती से बात की और करसुई पुल के पास आइसक्रीम का और्डर और एडवांस देने को बुलाया. आरती ने सोचा कि कोई बड़ी पार्टी है. अत: वह अपनी स्कूटी पर सवार हो कर करसुई पुल के पास पहुंच गई.

अब तक वहां चारों शूटर पहुंच चुके थे. नईम उर्फ भोलू आरती से बातचीत करने लगा. तभी पीछे से शूटर विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत ने आरती पर फायर झोंक दिए. दोनों गोलियां पीठ में लगीं. तीसरा फायर शाहरुख ने सामने से किया. गोली आरती के सीने में लगी. आरती वहीं गिर पड़ी और दम तोड़ दिया. हत्या करने के बाद चारों शूटर फरार हो गए. कुछ देर बाद एक युवक ने थाना बिधनू पुलिस को सूचना दी तो थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह मौके पर आ गए. 26 मई, 2021 को थाना बिधनू पुलिस ने आरोपी श्यामशरण शर्मा, शाहरुख तथा नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक 2 अन्य आरोपी विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत फरार थे. पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी. Family Story

—कथा पुलिस सूत्रोंं पर आधारित

 

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार – भाग 3

बाप बेटे क्यों बने जल्लाद

बेटी की इस गुहार पर भी पिता कृपाराम व भाई राघवराम का दिल नहीं पसीजा. आरती जब बीच में आई तो राघव ने डंडे से उसे भी मारना शुरू कर दिया. सिर में डंडा लगने से वह बेहोश हो गई. फिर रस्सी से बापबेटे ने उस का गला कस दिया.

आरती को मारने के बाद उन दोनों ने सतीश को भी पीटपीट कर अधमरा कर दिया. आपत्तिजनक हालत में आरती व सतीश  के पकड़े जाने से दोनों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. गुस्से में उन्होंने रस्सी से सतीश का गला भी कस दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद सतीश ने वहीं दम तोड़ दिया.

इस सनसनीखेज डबल मर्डर के बाद दोनों पुलिस की गिरफ्त से बचने की जुगत करने लगे. वहीं लाशों को ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगे. सतीश के शव को जंगल में छिपाने व आरती के शव को अयोध्या ले जा कर दफनाने की योजना बनाई गई. तय किया गया कि आरती के बारे में कोई पूछेगा तो कह देंगे कि रिश्तेदारी में गई है.

दोनों बापबेटे रात में ही एक चारपाई पर सतीश के शव को रख कर गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक गन्ने के खेत में ले गए. दोनों ने शव को गन्ने के खेत में छिपा दिया. जिस रस्सी से सतीश का गला कस कर हत्या की थी, उसे भी चारपाई के साथ ही खेत में फेंक आए.

सतीश के शव को छिपाने के बाद अब रात में ही आरती का शव ठिकाने लगाना था. कृपाराम और राघवराम आरती के शव को कार से ले कर गांव से 20 किलोमीटर दूर अयोध्या पंहुचे. अयोध्या में सरयू नदी के किनारे श्मशान घाट पर एक बालू के टीले में शव को दफन कर गांव वापस आ गए और घर में शांत हो कर बैठ गए. ताकि किसी को दोहरे हत्याकांड का पता न चल सके.

लेकिन मंगलवार 21 अगस्त को सुबह सतीश के नहीं मिलने पर उस के घर वालों ने उसे बहुत तलाशा. जब उन्हें जानकारी हुई कि आरती भी घर पर नहीं है तो उन लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी. क्योंकि वे लोग भी आरती और सतीश के रिश्ते के बारे में जानते थे.

थाने में आरती के पिता कृपाराम चौरसिया ने कहा कि हमारे यहां गांव के लड़के से शादी नहीं होती है. सतीश भले ही हमारी जाति का था, लेकिन वह था तो हमारे गांव का ही. ऊपर से वह आरती का भाई लगता था. आरती किसी दूसरे गांव के लड़के से बोलती तो हम लोग उसकी शादी करवा देते.

हमारे घर से 20 मीटर की दूरी पर ही सतीश का घर था. रोज का आमनासामना होता था. वह बचपन से घर आताजाता था. दोनों साथ खेले, हम लोग उसे आरती का बड़ा भाई कहते थे. हम लोग आरती के साथ उस का रिश्ता कैसे मंजूर कर लेते?

3-4 महीने पहले दोनों को गांव के एक युवक ने साथसाथ देख लिया था. दोनों बाहर कहीं साथ में बैठे थे. इस बात की जानकारी उस ने हमें दी थी. जब आरती की घर पर बहुत पिटाई की थी. उस को सख्ती से मना किया था कि वह कभी सतीश से न मिले, लेकिन हफ्ते भर पहले वह सतीश से मिलने फिर चली गई.

इस के बाद आरती के घर से  निकलने पर  पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी, लेकिन उस ने सतीश को 20-21 अगस्त की रात को घर बुला लिया. अगर हम अपनी बेटी को नहीं मारते तो वह हमें मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ती.

सतीश की निर्मम हत्या किए जाने पर उस के घर में कोहराम मच गया. मां प्रभावती और भाई बहनों का रोरो कर बुरा हाल हो गया. सतीश के घर वाले और रिश्तेदार गम के साथ गुस्से में दिखे.

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सतीश की मां प्रभावती का कहना था कि आरती के पिता कृपाराम चौरसिया, भाई राघवराम के साथ ही उस का चाचा आज्ञाराम और उस का बेटा विजय भी इस हत्याकांड में शामिल हैं. कृपाराम व राघवराम ने भी थाने में पुलिस को उन के नाम बताए थे. लेकिन पुलिस ने केवल बापबेटे को ही गिरफ्तार किया है.

आरती के पिता व भाई ने जुुर्म कुबूल कर लिया. इस से आरती के चाचा आज्ञाराम और उस के बेटे विजय को राहत मिली है. मगर सतीश की मां अपने बेटे को न्याय दिलाने की खातिर अभी भी मामले में आज्ञाराम व विजय को आरोपी बनाए जाने की मांग कर रही है.

उस का आरोप है कि जिस तरह से दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया है और दोनों की लाशों को घटनास्थल से हटाया गया है, उस में सिर्फ 2 लोग ही शामिल नहीं हो सकते. प्रभावती अंतिम सांस तक सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी काररवाई के लिए संघर्ष करने की बात कहती है.

गांव में हुए दोहरे हत्याकांड के खुलासे व आरती के पिता व भाई द्वारा हत्या करने का जुर्म कुबूल करने तथा दोनों की गिरफ्तारी से गांव के लोग सन्न रह गए. गिरफ्तारी के बाद आरती के अन्य परिजन घर में ताला लगा कर भाग गए थे. पूरे गांव में इसी घटना की चर्चा हो रही थी.

वहीं सतीश की हत्या की सूचना सोमवार को ही मोबाइल से पिता बिंदेेश्वरी प्रसाद चौरसिया को दी गई. वे ट्रेन से मुंबई से गांव पहुंच गए. वे अपने बेटे की हत्या पर फफकते हुए बोले, ”पता होता कि उस की हत्या कर दी जाएगी तो उसे भी अपने साथ मुंबई ले जाते. बेटे को तो न खोना पड़ता.’’

बिंदेश्वरी ने रोते हुए कहा कि फांसी की सजा देने का अधिकार तो सिर्फ अदालत को है, लेकिन बाप बेटे ने मिल कर जल्लाद की तरह मेरे जिगर के टुकड़े सतीश को फांसी दे दी.

औनर किलिंग के हत्यारों कृपाराम व राघवराम को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में एसएचओ सत्येंद्र वर्मा, एसआई विजय प्रकाश, हैडकांस्टेबल दया यादव, कुषार यादव, आशुतोष पांडे, अमरीश मिश्रा व कांस्टेबल रिषभ शामिल थे. एसपी अंकित मित्तल ने 24 घंटे में डबल मर्डर का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत किया.

गुमशुदगी की रिपोर्ट को भादंवि की धारा 302, 201 में तरमीम कर प्रेमी युगल आरती चौरसिया व सतीश चौरसिया की हत्या के आरोपी कृपाराम चौरसिया व उस के बेटे राघवराम चौरसिया को गिरफ्तार कर 23 अगस्त, 2023 को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया. जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

एएसपी शिवराज

हंसते खेलते युवा प्रेमी युगल को मौत की नींद सुला दिया गया, जहां आदमी चांद पर पहुंच रहा है. जमाना चाहे कितना भी आगे बढ़ गया हो, लेकिन दकियानूसी सोच उन्हें आगे नहीं बढऩे दे रही. कृपाराम और राघवराम जैसे लोग समाज में नासूर बने हुए हैं, जो झूठी आन, बान और शान के लिए औनर किलिंग जैसे अपराध करते हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार – भाग 2

गन्ने के खेत में मिला सतीश का शव

हत्या का जुर्म कुबूल करने के बाद पुलिस ने आरती के भाई राघवराम की निशानदेही पर गन्ने के खेत से सतीश का शव, चारपाई व रस्सी बरामद कर ली. फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड को भी बुला लिया गया था. खोजी कुत्ता गन्ने के खेत के बाद दौड़ता हुआ राघवराम के घर पर जा पहुंचा.

फोरैंसिकटीम ने भी घटनास्थल से कुछ साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. वहीं आरती को बालू के टीले में दफन किए जाने की जानकारी पर एसएचओ सत्येंद्र वर्मा ने डीएम से अनुमति ली.

इस के बाद पुलिस टीम के साथ अयोध्या जा कर वहां के अधिकारियों से बात कर के सरयू नदी के किनारे बालू के टीले में दफन आरती का शव निकलवाया. मौके की काररवाई के बाद उस का अयोध्या में ही पोस्टमार्टम कराया गया.

सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही परदाफाश कर दिया. इस डबल मर्डर की दिल दहलाने वाली जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

19 वर्षीय सतीश चौरसिया का गांव की ही रहने वाली 18 साल की आरती चौरसिया से पिछले लगभग 2 सालों से अफेयर चल रहा था. दोनों एक ही जाति के थे. गांव के नाते सतीश का आरती के घर आनाजाना था. दोनों ही जवानी की दहलीज पर कदम रख चुके थे.

सतीश कदकाठी का कसा हुआ नौजवान था. वह सुंदर भी था. आरती उस की ओर आकर्षित हो गई. जब भी सतीश घर पर आता, आरती उसे कनखियों से देखा करती थी. इस बात का आभास सतीश को भी था. वह भी मन ही मन आरती को चाहने लगा था.

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अब दोनों का बचपन का प्यार जवान हो गया था. जब कभी दोनों की नजरें मिलतीं तो दोनों एकदूसरे को देख कर मुसकरा देते थे. दोनों के बीच घर वालों के सामने सामान्य बातचीत होती थी.

धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब दोनों की मोबाइल पर प्यार भरी बातें होने लगीं. फिर उन की अकसर गांव के बाहर चोरी छिपे मुलाकातें होने लगीं. प्रेमीयुगल एकदूसरे का हाथ थाम कर शादी करने का फैसला भी ले चुके थे.

सतीश ने आरती से साफ लहजे में कह दिया था, ”आरती, दुनिया की कोई ताकत हम दोनों को शादी करने से नहीं रोक सकती है. मैं ने तुम से सच्चा प्यार किया है और आखिरी सांस तक करता रहंूगा.’’

आरती ने भी मरते दम तक साथ निभाने का वादा किया.

आरती और सतीश खुश थे. दोनों अपने भावी जीवन के सपने देखते. दुनिया से बेखबर वे अपने प्यार में मस्त रहते थे. पर गांवदेहात में लव स्टोरी ज्यादा दिनों तक नहीं छिप पाती. यदि किसी एक व्यक्ति को भी इस की भनक लग जाती है तो कानाफूसी से बात गांव भर में जल्द ही फैल जाती है.

किसी तरह आरती के घर वालों को भी इस बात का पता चल गया कि आरती का सतीश के साथ चक्कर चल रहा है. इस बात की जानकारी मिलने के बाद आरती के घर वाले कई बार विरोध कर चुके थे. विरोध के बाद सतीश का आरती के घर जाना बंद हो गया, लेकिन मौका मिलने पर दोनों चोरीछिपे मुलाकात जरूर कर लेते थे.

घर से निकलने पर क्यों लगाई पाबंदी

20-21 अगस्त, 2023 की रात को जब राघवराम घर आया, उस समय आरती और उस की मम्मी खाना बना रही थीं. पिता पास ही बैठे हुए थे. राघव पिता के पास जा कर बैठ गया. दोनों बाप बेटे कामकाज की बातें करने लगे. कुछ देर बाद खाना बन कर तैयार हो गया. तब मां ने आवाज लगा कर राघव व अपने पति को बुला लिया. दोनों खाना खाने किचन के पास पहुंच गए. किचन के पास ही बैठ कर चारों ने खाना खाया. ये लोग आपस में बात कर रहे थे, लेकिन आरती कुछ बोल नहीं रही थी.

आरती उन लोगों से नाराज थी. क्योंकि घर वाले एक हफ्ते से उसे घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे थे. दरअसल, आरती अपने प्रेमी सतीश से चोरीछिपे मिलती थी. जिस की जानकारी होने पर उस पर रोक लगाई गई थी.

आरती और सतीश के प्रेम प्रसंग की वजह से गांव में उन की बदनामी हो रही थी. जो घर वालों को बरदाश्त नहीं थी, लेकिन यह बात आरती नहीं समझ पा रही थी. वह तो सतीश के साथ शादी करने की जिद पर अड़ी हुई थी.

करीब एक हफ्ते से आरती घर वालों के डर से अपने प्रेमी सतीश से मिलने नहीं जा पा रही थी. उसे उन का यह फरमान नागवार गुजर रहा था. उधर सतीश भी आरती से मिलने के लिए बेचैन था. दोनों ही जल बिन मछली की तरह एकदूसरे के लिए तड़प रहे थे.

इस के चलते आरती ने फोन कर के सतीश को 20-21 अगस्त की रात को मिलने के लिए अपने घर के पीछे बुला लिया.

रंगेहाथों पकड़ा गया प्रेमी युगल

अपनी प्रेमिका आरती से मोबाइल पर बात होने के बाद सतीश ने घर वालों के सोने का इंतजार किया. रात साढ़े 12 बजे जब घर वाले सो गए तो वह बाहर की बैठक (कमरे) से निकल कर आरती के घर जा पहुंचा. उस समय आरती के घर वाले भी गहरी नींद में सोए हुए थे. आरती बेसब्री से उसी के आने की बाट जोह रही थी. उसे एकएक पल काटना भारी हो रहा था.

सतीश जैसे ही आरती के घर के पास पहुंचा, फोन करने पर आरती दरवाजा खोल कर बाहर आ गई. दोनों एकदूसरे का हाथ थामे वहीं घर के पीछे झाडिय़ों की आड़ में चले गए. वहां पहुंचते ही दोनों ने एकदूसरे को अपनी बांहों के घेरे में कस लिया. दोनों एकदूसरे से पूरे एक हफ्ते बाद मिले थे.

घर वालों से बेपरवाह हो कर युगल प्रेमी कानाफूसी में इतने मगन हो गए कि उन्हें किसी बात का अहसास ही नहीं हुआ. दोनों ही तनमन से प्यासे थे. वे अपने जज्बातों पर काबू नहीं कर पाए और दो तन एक हो गए.

रंगेहाथों पकड़े जाने पर डर की वजह से सतीश प्रेमिका के घर वालों से अपनी गलती की माफी मांगने लगा. मगर आरती के पिता व भाई के सिर पर खून सवार था. घर वाले दोनों को पकड़ कर पीटते हुए घर में ले आए. बापबेटे डंडे  से सतीश की जम कर पिटाई करने लगे.

अपने प्रेमी की हालत देख कर आरती रो पड़ी. प्रेमी के साथ पकड़े जाने पर आरती ने पिता और भाई से उसे छोडऩे की काफी विनती की. आरती ने उन के सामने हाथ जोड़ कर कहा, ”मैं सतीश के साथ ही जीना और मरना चाहती हंू. इसलिए मारना है तो हम दोनों को ही मार दो, एक को नहीं.’’

घर वालों को रास न आया बेटी का प्यार – भाग 1

उस रात सभी लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए. आधी रात को राघव को कुछ उलझन महसूस हुई  तो वह बाहर आ गया. बाहर टहलने के बाद राघव आरती के कमरे की ओर गया तो वह वहां नहीं थी. तब राघव मम्मी के पास गया, आरती वहां भी नहीं थी. इस के बाद राघव ने घर में सभी को उठा दिया. लेकिन बदनामी के डर से घर वालों ने शोर नहीं मचाया.

पहले तो आरती की घर में ही तलाश की फिर बाहर गांव में निकल गए, लेकिन  आरती कहीं नहीं मिल रही थी. घर वाले समझ गए कि वह सतीश चौरसिया के साथ ही होगी. उसे तलाशता हुआ राघव जब अपने घर के पीछे पहुंचा तो वहां का दृश्य देख कर उस का खून खौल उठा. आरती और सतीश आपत्तिजनक स्थिति में थे. राघव इसे बरदाश्त नहीं कर पाया. उस ने अपने पापा मम्मी को मौके पर बुला लिया.

उत्तर प्रदेश के जनपद गोंडा का एक थाना है धानेपुर. इस थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव मेहनौन आता है. इसी गांव के रहने वाले हैं बिंदेश्वरी चौरसिया. उन के 5 बेटे व एक बेटी थी. अपने 3 बेटों लवकुश, संजय और हरिश्चंद्र के साथ बिंदेश्वरी मुुंबई में रहते थे.

संजय व हरिश्चंद्र अपने पिता के साथ वहां पावरलूम में काम करते थे, जबकि लवकुश चाय की दुकान चलाता था. बिंदेश्वरी के 2 बेटे सतीश व विशाल गांव में ही अपनी मां के साथ रह रहे थे. जबकि बेटी की वह शादी कर चुके थे.

गांव में सब कुछ ठीक चल रहा था. अचानक बिंदेेश्वरी  का 19 वर्षीय बेटा सतीश चौरसिया 20-21 अगस्त, 2023 की रात घर से अचानक लापता हो गया. घर वाले सारी रात उस का इंतजार करतेे रहे. सुबह होने पर उन्होंने अपने तरीके से खोजबीन की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. इस पर सतीश की मां प्रभावती ने थाना धानेपुर में 21 अगस्त की सुबह सतीश की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

गुमशुदगी दर्ज हो जाने के बाद 22 अगस्त, 2023 को थाना धानेपुर के एसएचओ सत्येंद्र वर्मा जांच के लिए  पुलिस टीम के साथ गांव मेहनौन पहुंचे. सतीश के घर वालों से उन्होंने पूछताछ की.

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एसएचओ सत्येंद्र वर्मा

सतीश की मां प्रभावती ने उन्हें बताया कि 20-21 अगस्त की देर रात खाना खा कर सतीश घर के बाहरी हिस्से में बनी बैठक (कमरे) में सोने चला गया था. आधी रात को जब उस की आंखें खुलीं तो सतीश बैठक में नहीं दिखाई दिया.

उस ने सोचा कि शायद वह टायलेट के लिए खेत में गया होगा. लेकिन काफी देर बाद भी वह नहीं लौटा. सुबह होते ही सतीश को सभी ने गांव में तलाशना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिला.

पुलिस ने गांव में अपने स्तर से जांचपड़ताल करने के साथ ही सतीश के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि रात को सतीश की गांव की रहने वाली एक युवती से फोन पर बात हुुई थी. वह रात को उस से मिलने गया था. इस के बाद से ही वह लापता हो गया था.  सतीश की मां ने बताया कि उसे पता चला है कि गांव की आरती भी अपने घर पर नहीं है.

सतीश और आरती अपने घरों में नहीं थे. दोनों के इस तरह गायब हो जाने पर गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. सभी दबी जुबान से कह रहे थे कि दोनों गांव से भाग गए हैं. अब कहीं जा कर शादी कर लेंगे. कोई कह रहा था कि आरती सतीश पर जान छिड़कती थी. 2 साल से चल रहे उन के प्रेम प्रसंग के बारे में कौन नहीं जानता. जितने मुंह उतनी बातें.

घर वालों ने पुलिस को क्यों उलझाया

इस जानकारी के बाद पुलिस आरती के घर पहुंची. घर पर आरती के पिता कृपाराम चौरसिया और भाई राघवराम चौरसिया मिले. आरती के घर वाले शांति से अपने घर पर बैठे थे. आरती के पिता कृपाराम से एसएचओ ने आरती के बारे में पूछताछ की.

पहले तो उन लोगों ने पुलिस को अपनी बातों में उलझाया. कई तरह की बातें बनाईं. कृपाराम चौरसिया ने बताया कि गांव का सतीश चौरसिया उन की बेटी आरती को बहलाफुसला कर रात को अपने साथ भगा ले गया है. जिस से गांव में उन की बहुत बदनामी हो रही है.

तब एसएचओ सत्येंद्र वर्मा ने कहा कि आप लोग दोनों की तलाश क्यों नहीं कर रहे? अब तक थाने में रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं कराई?

बापबेटे इस बात पर बगलें झांकने लगे. अपनी बातों से पुलिस को उन्होंने हरसंभव उलझाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के तर्कों के आगे उन की एक नहीं चली.

पुलिस को पहले ही इस मामले में मुखबिर से महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल गई थी. सतीश के मोबाइल की काल डिटेल्स से यह पता चल गया था कि रात को सतीश आरती के घर गया था.

पुलिस ने अनहोनी का शक होने पर कृपाराम व उस के बेटे राघवराम को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने दोनों से कहा, ”सीधेसीधे सच बता दो, नहीं तो पुलिस फिर अपने तरीके से पूछेगी.’’

तब दोनों कहने लगे कि आरती की कई दिनों से तबियत खराब चल रही थी. हम लोग इलाज के लिए उसे अयोध्या ले जा रहे थे. रास्ते में उस की मौत हो गई. तब हम ने अयोध्या में ही उस का अंतिम संस्कार कर दिया. सतीश के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

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एसपी अंकित मित्तल

बापबेटे पलपल में बयान बदल रहे थे. तब पुलिस ने दोनों से सख्ती की इस पर वे टूट गए और सतीश और आरती की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया.  इस के बाद एसएचओ एएसपी शिवराज व सीओ शिल्पा वर्मा को घटना से अवगत करा दिया. दोनों पुलिस अधिकारी गांव पहुंच गए. दोनों ने पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसपी अंकित मित्तल को दी.