खतरनाक मंसूबे की चपेट में नीलम

4 अप्रैल, 2019 गुरुवार का दिन था. सुबह के लगभग साढ़े 4 बजे थे. सिपाही नीलम शर्मा की सुबह 5 बजे से दोपहर एक  बजे तक मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ड्यूटी थी. नीलम ने तैयार हो कर अपना लंच बौक्स पिट्ठू बैग में रखा और दामोदरपुरा के मुख्यद्वार पर प्याऊ के पास पहुंच गई. यहीं पर रोजाना उसे लेने के लिए पुलिस की बस आती थी. प्याऊ के पास खड़ी हो कर वह स्टाफ की बस का इंतजार करने लगी.

बस आने के लगभग 5 मिनट पहले एक कार नीलम शर्मा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर आ कर रुकी. उस समय नीलम का ध्यान अपनी बस के आने की तरफ था. अचानक आगे बढ़ी कार नीलम के पास आई. झटके से रुकी कार से उतर कर एक युवक तेजी से नीलम की ओर बढ़ा. जबकि कार में बैठे अन्य युवकों ने कार स्टार्ट रखी.

कार से उतरे युवक ने नीलम से कुछ बात की, इस के बाद उस ने नीलम के ऊपर तेजाब फेंक दिया. नीलम ने अपना बैग उस के मुंह पर मारा तो वह फुरती से कार में जा कर बैठ गया. कार वहां से कुछ दूर जा कर खड़ी हो गई.

अचानक हुए एसिड अटैक से झुलसी 26 वर्षीय नीलम घबरा गई. वह तेजाब की जलन से तड़पने लगी. उस ने शोर मचाया. मदद के लिए वह इधरउधर भागने लगी. जो भी उसे मिला, उस ने उसी से मदद की गुहार लगाई.

इस बीच अखबार के एक हौकर ने महिला सिपाही को बचाने का प्रयास किया. तभी हमलावरों ने उन दोनों पर कार चढ़ाने की कोशिश की. लेकिन हौकर महिला सिपाही को ले कर एक तरफ हट गया, जिस से दोनों बच गए. हौकर ने उस कार पर पत्थर भी फेंके पर कार रुकी नहीं, तेज गति से चली गई.

रोते बिलखते वह सिपाही एक दुकान के आगे गिर गई और दर्द की वजह से चीखने लगी. तेजाब से नीलम के कपड़े भी जल गए थे. यह देख दुकानदार ने मौर्निंग वाक पर निकली महिलाओं को बुलाया और उन की चुन्नी से नीलम को ढंका. उसी समय किसी ने इस घटना की जानकारी फोन द्वारा पुलिस को दे दी.

नीलम ने किसी तरह अपनी सहकर्मी सिपाही नीतू को फोन कर दिया था. थोड़ी देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई और नीलम को जिला अस्पताल में भरती करा दिया.

जानकारी मिलते ही एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह, एसपी (क्राइम) अशोक कुमार मीणा, एसपी (सुरक्षा) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी अस्पताल पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंच कर साक्ष्य जुटाए. यह घटना विश्वप्रसिद्ध धार्मिक नगरी मथुरा में घटी थी.

नीलम पिछले एक साल से थाना सदर बाजार क्षेत्र के दामोदरपुरा में प्रधान सुरेंद्र सिंह के यहां अपनी सहकर्मी नीतू के साथ रह रही थी. नीलम के मकान मालिक सुरेंद्र सिंह भी नीतू के साथ अस्पताल पहुंच गए.

महिला सिपाही नीलम पर एसिड अटैक की घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. पूछताछ में नीलम ने पुलिस को बताया कि इस वारदात को संजय नाम के युवक ने अपने साथियों के साथ अंजाम दिया था.

वह संजय को पहले से जानती थी. नीलम ने सदर बाजार थाने में संजय सिंह उर्फ बिट्टू निवासी नेमताबाद, खुर्जा (बुलंदशहर) व सोनू सहित 4 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. भादंवि की धारा 326(ए), 332 व 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस हमलावरों की तलाश में जुट गई.

नीलम की हालत थी नाजुक

जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि नीलम तेजाब से लगभग 45 फीसदी झुलस गई है. एसिड से उस का चेहरा, एक आंख, हाथ व शरीर के अन्य हिस्से जल गए थे. नीलम की नाजुक हालत को देखते हुए उसी दिन शाम को उसे आगरा के सिकंदरा क्षेत्र स्थित सिनर्जी अस्पताल रेफर कर दिया गया. एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह खुद उसे ले कर सिनर्जी अस्पताल में भरती कराने पहुंचे.

सिनर्जी अस्पताल के डाक्टर नीलम के इलाज में जुट गए. उन्होंने बताया कि नीलम की हालत स्थिर बनी हुई है. जब नीलम के घर वालों को बेटी के साथ घटी दिल दहलाने वाली घटना की जानकारी मिली तो उन के होश उड़ गए. वे भी सीधे सिनर्जी अस्पताल पहुंच गए.

आगरा के सिनर्जी अस्पताल में भरती नीलम इस हादसे से बेहद डरी हुई थी. कहने को अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा लगाई गई थी लेकिन पीडि़ता के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से और कड़ी सुरक्षा की मांग की. उन्हें डर था कि फरार संजय उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा.

इस पर एसएसपी ने पीडि़ता व उस के घर वालों को हरसंभव सुरक्षा देने का वायदा किया. घर वालों के अलावा अन्य किसी को भी अस्पताल में पीडि़ता से मिलने पर रोक लगा दी गई.

महिला सिपाही पर एसिड अटैक की यह दुस्साहसिक घटना पुलिस के लिए सिरदर्द बन गई थी. हर कोई पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा था. इलैक्ट्रौनिक और प्रिंट मीडिया में यह खबर सुर्खियां बन गई थीं. इस से पुलिस की किरकिरी हो रही थी.

अभियुक्तों के फरार होने को ले कर उस दिन सोशल मीडिया पर भी सवाल खड़े होते रहे. लोगों का कहना था कि जब पुलिस वाले ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो भला आम आदमी का क्या होगा.

उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया ओ.पी. सिंह ने मथुरा के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज से महिला कांस्टेबल नीलम शर्मा पर हुए एसिड अटैक की पूरी जानकारी ली. उन्होंने निर्देश दिए कि हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए. इस एसिड अटैक के लिए जिम्मेदार कहीं भी हों, उन्हें ढूंढ निकाला जाए.

मथुरा में पुलिसकर्मी नीलम पर हुए एसिड अटैक के बाद महिला संगठनों के साथसाथ छात्राओं ने भी आक्रोश व्यक्त किया. वात्सल्य पब्लिक स्कूल, राधाकुंड, चरकुला ग्लोबल पब्लिक स्कूल और गौड़ शिक्षा निकेतन में शिक्षिकाओं एवं छात्रछात्राओं ने पीडि़ता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की.

उन्होंने एसिड फेंकने वाले दोषी लोगों को फांसी देने की मांग की. वहीं आगरा के सिनर्जी अस्पताल में भरती नीलम को देखने के लिए महिला शांति सेना की सदस्याएं पहुंची. संरक्षिका कुंदनिका शर्मा ने आरोपियों को शीघ्र पकड़ने व कड़ी सजा दिलाने की मांग की.

पकड़ा गया मुख्य आरोपी

एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने आरोपियों को पकड़ने के लिए अलगअलग थानों के तेजतर्रार पुलिस अफसरों की 5 पुलिस टीमें बनाईं. ये टीमें मथुरा के अलावा खुर्जा और बुलंदशहर जा कर आरोपियों को तलाशने लगीं. इस बीच पुलिस को हमलावरों की कार नंबर डीएल 2पीए8381 घटनास्थल से कुछ दूर लावारिस हालत में खड़ी मिली. कार पुलिस ने जब्त कर ली.

पुलिस टीम ने अगले दिन 5 अप्रैल को शाम 5 बजे मुखबिर की सूचना पर एक आरोपी सोनू को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने बताया कि नीलम शर्मा के ऊपर तेजाब संजय सिंह ने डाला था. सोनू की निशानदेही पर रात करीब 11 बजे घटना के मुख्य आरोपी संजय सिंह को मुठभेड़ के बाद यमुनापार इलाके के राया रोड स्थित राधे कोल्डस्टोरेज के पास से गिरफ्तार कर लिया गया.

मुठभेड़ के दौरान संजय के बाएं पैर में गोली लग गई थी. पुलिस ने इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती करा दिया था. संजय के कब्जे से पुलिस ने एक तमंचा और एक बाइक बरामद की. पुलिस ने संजय सिंह से जब सख्ती से पूछताछ की तो सिपाही नीलम शर्मा पर एसिड अटैक करने की जो कहानी सामने आई, वह प्यार की चाशनी में डूबी हुई निकली—

नीलम शर्मा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर की कोतवाली शिकारपुर के गांव आंचरू कलां की रहने वाली थी. उस के पिता का नाम सुंदरलाल शर्मा था. जबकि मुख्य आरोपी संजय सिंह खुर्जा में एक कंप्यूटर सेंटर चलाता था. जब नीलम पढ़ाई कर रही थी, तब उस का संजय सिंह की दुकान पर आनाजाना लगा रहता था.

संजय और नीलम की मुलाकात कंप्यूटर सेंटर में हुई जो बाद में दोस्ती में बदल गई थी. दोस्त बन जाने के बाद दोनों फोन पर भी बातें करने लगे. दोस्ती बढ़ी तो संजय नीलम को एकतरफा प्यार करने लगा, जबकि नीलम उसे केवल अपना दोस्त ही समझती थी.

एक दिन संजय ने अपने मन की बात नीलम के सामने जाहिर कर दी तो नीलम ने उसे झिड़क दिया और उस से दूरी बना ली. इस पर संजय ने इस बारे में नीलम के घर वालों से बात की. चूंकि संजय उन की बिरादरी का नहीं था, इसलिए नीलम के पिता सुंदरलाल शर्मा ने नीलम की शादी संजय से करने को मना कर दिया.

इस के बाद नीलम की सन 2016 में उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नौकरी लग गई. नौकरी लगने के बाद भी संजय ने उसे परेशान करना बंद नहीं किया. और कोई रास्ता न देख नीलम ने अपना फोन नंबर बदल दिया. लेकिन इस के बावजूद संजय ने उसे ढूंढ निकाला और परेशान करने लगा.

संजय लगातार उस पर शादी के लिए दबाव डाल रहा था. इस से परेशान हो कर नीलम के घर वालों ने उस की शादी कहीं दूसरी जगह तय कर दी.यह बात संजय को बुरी लगी. उसे लगने लगा कि उस की प्रेमिका अब किसी और की हो जाएगी.

सन 2017 में नीलम की पोस्टिंग मथुरा में हो गई. कुछ दिनों वह पुलिस लाइन में रही, इस के बाद सन 2018 में उस की तैनाती श्रीकृष्ण जन्मस्थली की सुरक्षा में हो गई. इस पर नीलम मथुरा के दामोदरपुरा में प्रधान सुरेंद्र सिंह के यहां किराए पर रहने लगी. उस ने अपनी बैचमेट और सहेली नीतू को भी उस कमरे में अपने साथ रख लिया था.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में संजय सिंह ने बताया कि वह नीलम से प्यार करता था. उस से उस की पिछले 10 सालों से जानपहचान थी. वह उस से शादी करना चाहता था, लेकिन उस ने बात तक करनी बंद कर दी थी. जब उसे पता चला कि नीलम की शादी कहीं और तय हो गई है, तब उस ने तय कर लिया था कि वह अपनी प्रेमिका को किसी और की हरगिज नहीं होने देगा.

खतरनाक इरादे

उस की शादी रोकने के लिए उस ने नीलम के ऊपर तेजाब डालने का फैसला कर लिया. इस काम के लिए उस ने अपने दोस्तों हिमांशु ठाकुर, बौबी, किशन शर्मा और सोनू को भी तैयार कर लिया. ये सब उस की प्रेम कहानी को जानते थे.

सब से पहले इन लोगों ने नीलम के आनेजाने के मार्ग की रेकी की. इस से पता लग गया कि उस की ड्यूटी श्रीकृष्ण जन्मस्थली की सुरक्षा पर लगी है और वह सुबह पैदल ही दामोदरपुरा के प्याऊ पर पहुंचती है. वहां से वह पुलिस की बस में बैठ कर जाती है.

उन्होंने प्याऊ के पास ही योजना को अंजाम देने का फैसला कर लिया. यह भी तय कर लिया था कि यदि नीलम बच गई तो उसे गोली मार देंगे. और अगर उस के साथ उस की सहेली नीतू हुई तो उसे भी जिंदा नहीं छोड़ेंगे.

सभी ने बौबी की कार से घटना को अंजाम देने की बात तय कर ली. योजना बनाने के बाद संजय ने खुर्जा में पाहसू रोड स्थित दुकानदार पुनीत शर्मा के यहां से तेजाब खरीद लिया. फिर 4 अप्रैल, 2019 की सुबह उन्होंने वारदात को अंजाम दे दिया.

संजय की निशानदेही पर पुलिस ने तेजाब विक्रेता पुनीत शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद पुलिस ने संजय सिंह, सोनू और पुनीत शर्मा को कोर्ट में पेश कर संजय का रिमांड मांगा.

गोली लगने की वजह से संजय अस्पताल में भरती था. अदालत ने पुलिस की मांग मंजूर कर सोनू और पुनीत शर्मा को जेल भेज दिया और गोली से घायल संजय को पुलिस कस्टडी में सौंप दिया.

पुलिस को अभी कई आरोपी गिरफ्तार करने थे. संजय की निशानदेही पर 6 अप्रैल को पुलिस ने बौबी और किशन शर्मा को गोकुल बैराज मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. शाम 6 बजे के करीब वे दोनों मथुरा आए हुए थे. पुलिस के अनुसार, उन का अपराध इसलिए भी गंभीर हो गया क्योंकि उन्होंने संजय को रोकने के बजाए उकसाया था.

पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रविवार को जेल भेज दिया. एसिड अटैक के अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे. अभी एक आरोपी हिमांशु ठाकुर पुलिस की गिरफ्त से दूर था.

पुलिस को 9 अप्रैल, 2019 को पता चला कि फरार आरोपी हिमांशु मथुरा आ रहा है. इस के बाद स्वाट टीम प्रभारी राजीव कुमार, थाना सदर बाजार प्रभारी लोकेश भाटी और छाता कोतवाली प्रभारी हरवेंद्र मिश्रा ने घेराबंदी कर के गोकुल बैराज पर उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह फायर कर के बाइक से भागने लगा. उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने भी गोली चलाई.

गोली उस की दाहिनी टांग में लगी थी. घायल आरोपी वहीं गिर गया. इस के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेने के बाद जिला अस्पताल में भरती करा दिया.

अपराध में हिमांशु भी था बराबर का हिस्सेदार

हिमांशु की सीधे हाथ की अंगुलियां तेजाब से जल गई थीं. पुलिस ने उस के पास से बाइक व तमंचा भी बरामद कर लिया. पूछताछ में उस से काम की कई बातें पता चलीं. हिमांशु को भी अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

उधर मुख्य आरोपी संजय सिंह जिस की बाईं टांग में गोली लगी थी, उस का औपरेशन किया गया. उसे 2 यूनिट खून भी चढ़ाया गया.

प्रैस कौन्फ्रैंस में एसएसपी ने बताया कि आरोपी संजय ने जबरन शादी के लिए इस घटना को अंजाम दिया था. महिला पुलिसकर्मी पर एसिड अटैक की दिल दहला देने वाली घटना में शामिल सभी 6 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.

इन में से 4 को जेल भेज दिया गया, जबकि 2 घायल आरोपी अस्पताल में भरती हैं, जहां उन का उपचार चल रहा है. सभी पर एनएसए भी लगाया जाएगा. एसिड अटैक से घायल महिला पुलिसकर्मी नीलम की हरसंभव सहायता की जाएगी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रिश्तों की आग में जली संजलि – भाग 3

तहेरा भाई योगेश ही था संदिग्ध

शाम को शहर में एक दुकान पर वैसा ही लाइटर मिला. इस के पीछे एसएसपी का मकसद था कि जिस दुकान पर लाइटर मिला है, वहां आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएं. शायद कोई सुराग मिल जाए.

संजलि के तहेरे भाई योगेश पर पुलिस को पहले से ही शक था. उस के खुदकुशी कर लिए जाने से पुलिस का काम कुछ आसान हो गया. पुलिस को उस पर शक इसलिए हुआ था क्योंकि पहले दिन आगरा अस्पताल में जहां संजलि भरती थी, उस ने आईसीयू में घुसने का प्रयास किया था. उस की मौत के बाद फोरैंसिक टीम को योगेश के मकान की छत के ऊपर बने कमरे से कीटनाशक मिला.

पुलिस ने जब उस के परिजनों से खुदकुशी की वजह पूछी तो वह कुछ नहीं बता पाए. पुलिस द्वारा योगेश के जब्त किए गए मोबाइल की जांच के दौरान फोन में कुछ नहीं मिला. तब पुलिस ने मोबाइल को डेटा रिकवरी के लिए लेबोरेटरी भेज दिया. इस के साथ ही योगेश के घर की गहन तलाशी भी ली गई.

sanjali-hatyara-mukesh

योगेश

गांव में यह भी चर्चा थी कि योगेश संजलि के परिवार के ज्यादा करीब था. योगेश ने संजलि को मौडल बनाने का सपना दिखाया था. इस के लिए उस ने संजलि के कई वीडियो भी शूट कराए, फोटो भी खिंचवाए.

कुछ दोस्तों को बुलाया, बताया कि नोएडा से आए हैं जो संजलि का वीडियो बनाएंगे. घर पर ही वीडियो शूट कराया गया, लेकिन वह संजलि को मौडल नहीं बनवा सका. इस के बाद दोनों के बीच बातचीत कम ही होती थी.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – प्यार, सेक्स और हत्या : प्यार बना हैवान

लैबोरेटरी में जांच के दौरान योगेश के मोबाइल का सारा डेटा रिकवर हो गया. वाट्सऐप चैट में चैटिंग देख कर पुलिस अधिकारी चौंके. संजलि द्वारा एक मैसेज योगेश को भेजा गया था. मैसेज में 23 नवंबर को पिता पर हुए हमले के संबंध में संजलि ने कहा था, ‘‘क्या तुम ने ही पापा पर हमला किया था?’’

इस से पुलिस को जांच की दिशा मिल गई. योगेश के कमरे की तलाशी ली गई. तलाशी के दौरान पुलिस को उस के कमरे से एक कौपी मिली, जिस के कुछ पन्ने फाड़े गए थे. इन पन्नों का प्रयोग पत्र लिखने के लिए किया गया था, वह पत्र भी मिल गए. इस के साथ ही एक साइकिल की रसीद और संजलि के नाम का एक प्रमाणपत्र भी मिला.

पुलिस ने कर दिया खुलासा

दिल दहला देने वाले संजलि हत्याकांड का पुलिस ने कड़ी मेहनत के बाद 8वें दिन 25 दिसंबर को परदाफाश कर दिया. यह खुलासा चौंकाने वाला था.

संजलि की मौत के कुछ घंटे बाद ही खुदकुशी कर लेने वाला उस का तहेरा भाई ही मास्टरमाइंड योगेश था. इस जघन्य वारदात की वजह यह रही थी कि संजलि ने उसे वाट्सऐप चैट में ‘लूजर’ कह दिया था. इसी से आहत हो कर योगेश ने यह साजिश रची थी.

उस के मन में प्रतिशोध की भावना घर कर गई थी. इस साजिश के लिए उस ने 15-15 हजार रुपए का लालच दे कर अपने 2 रिश्तेदार युवकों को शामिल कर लिया. 25 दिसंबर को पुलिस ने इन दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया. इन में विजय निवासी कलवारी, जगदीशपुरा, आगरा जो योगेश के मामा का बेटा है तथा आकाश निवासी मनिया, मलपुरा हाल निवासी लखनपुर, शास्त्रीपुरम, आगरा जो विजय की बहन का देवर है, शामिल थे.

संजलि को अपने जाल में फंसाने के लिए ही योगेश ने उसे साइकिल खरीद कर दी थी. उस ने घर पर बताया था कि संजलि ने यह साइकिल प्रतियोगिता में जीती है. इस प्रतियोगिता का सर्टीफिकेट भी योगेश ने अपने कंप्यूटर से तैयार किया था. भाई योगेश की हरकतों और गलत इरादों का पता चलने पर संजलि ने उस से दूरी बनाने के साथ ही अपने घर आने से भी मना कर दिया था. योगेश ने उसे मौडल बनाने का सपना भी दिखाया.

कुछ दिनों तक संजलि भाई के गलत इरादे नहीं भांप सकी. जब योगेश की नीयत का अहसास हुआ तो वह विरोध करने लगी. योगेश को यह नागवार गुजरा, इसीलिए उसे सबक सिखाने का निर्णय लिया.

23 नवंबर को योगेश ने ही संजलि के पिता पर हमला कराया था. उस के बाद उस ने संजलि को जलाने की योजना बनाई. अपनी इस योजना में उस ने अपने दोनों रिश्तेदारों को पैसों का लालच दे कर शामिल कर लिया.

18 दिसंबर को उस ने ममेरे भाई विजय को रेकी के लिए लगाया. छुट्टी के बाद संजलि जब स्कूल से निकली, वह उस के पीछे लग गया. पैशन प्रो बाइक पर विजय हैलमेट लगाए अलग चल रहा था. जबकि सफेद रंग की अपाचे बाइक जिसे आकाश चला रहा था, के पीछे योगेश बैठा था. दोनों हेलमेट पहने हुए थे. रास्ते में संजलि पर योगेश ने ही पैट्रोल डाला और लाइटर से आग लगा दी.

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त दोनों बाइक, वारदात के दौरान प्रयोग किए हैलमेट, मौकाएवारदात पर संजलि का फोटो, योगेश का बैग, जिस में वह कपड़े ले कर गया था, साइकिल की रसीद जो संजलि के पास थी, योगेश के घर पर मिला सर्टिफिकेट जैसा एक सर्टिफिकेट संजलि के घर पर भी मिला. संजलि को लिखे लवलेटर जो वह संजलि को नहीं दे सका था, आदि पुलिस ने बरामद कर लिए.

एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि योगेश संजलि से एकतरफा प्यार कर उसे हासिल करना चाहता था. इस के लिए उस ने मौडल बनवाने का सपना दिखा कर उसे अपने जाल में फंसाने का प्रयास किया. यहां तक कि अपनी ओर से उसे एक साइकिल भी खरीद कर दी. प्रतियोगिता का फरजी प्रमाणपत्र उस ने अपने कंप्यूटर पर तैयार किया था.

योगेश ने टीवी पर क्राइम सीरियल देख कर संजलि की हत्या की ऐसी साजिश रची थी कि कई बार पुलिस भी गच्चा खा गई. वह एकतरफा मोहब्बत में संजलि को हासिल करना चाहता था. लेकिन जब वह सफल नहीं हुआ तो उस ने घटना को अंजाम दे कर भाईबहन के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – बेपनाह इश्क की नफरत : 22 साल की प्रेमिका का कत्ल

संजलि की बड़ी बहन अंजलि को भी उस ने नौकरी लगाने का झांसा दिया था. बाद में मना कर दिया कि तुम्हारी नौकरी नहीं लग सकती. इस पर अंजलि नाराज हुई तो नौकरी के लिए दिए गए उस के सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की फोटोकौपी उस ने जला दीं.

यूट्यूब पर मोटिवेशनल चैनल चलाने वाले योगेश की युवाओं में मोटिवेशन गुरू के रूप में पहचान थी. सभी उस की गंभीरता की मिसाल देते थे. मगर उस गंभीर चेहरे के पीछे शातिर क्राइम मास्टर दिमाग छिपा था.

योगेश चलाता था यूट्यूब चैनल

आरोपी आकाश ने बताया कि योगेश पैट्रोल पंप से बोतल में पैट्रोल नहीं लाया था, बल्कि उस ने बाइक में ही अलग से 60 रुपए का पैट्रोल भरवाया था. इस से पहले उस ने 150 रुपए का तेल भरवाया था. योगेश अपने घर से ही प्लास्टिक की बोतल लाया था. पैट्रोल पंप से कुछ दूर जा कर उस ने बोतल में पैट्रोल निकाल लिया.

आग जलाते समय कहीं हाथ न जल जाएं, इसलिए वह खास तरह के दस्ताने ले कर गया था. संजलि के आग में जलने के दौरान योगेश के कपड़ों में भी आग लग गई थी, तब उस ने दस्ताने पहने हाथ से आग बुझाई.

इसी दौरान उस के हाथ से लाइटर मौके पर ही गिर गया, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया. आरोपी विजय ने बताया कि योगेश घटना के बाद सारे सबूत जलाता चला गया.

योगेश ने जो कपड़े वारदात के समय पहने थे, जला दिए, उस के साथ ही विजय और आकाश के पहने कपड़े भी जलवा दिए. बाइक वह अपने एक दोस्त से मांग कर लाया था, वह उस ने लौटा दी. यह सब उस ने पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए किया था.

योगेश की साजिश में यह बात शामिल थी कि संजलि को जलाए जाते वक्त सब खामोश रहेंगे. ऐसा ही किया गया, इस के पीछे योजना थी कि यदि संजलि बच जाए तो उसे पता न चले कि किस ने जलाया है. विजय को अकेला बाइक पर रेकी के लिए लगाया गया था.

विजय को घटना के बाद कुछ देर रुक कर पूरे हालात की जानकारी ले कर योगेश को देनी थी. बाद में जब वे लोग मिले, तो विजय ने घटना के बारे में बताया कि संजलि मरी नहीं है.

आकाश और विजय ने बताया कि वारदात के बाद उन्हें 15-15 हजार रुपए मिलने थे, वह भी उस ने नहीं दिए थे. दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – प्रेमिका का एसिड अटैक : सोनम ने की प्रेम की हद पार

रिश्तों की आग में जली संजलि – भाग 2

लोगों ने श्रद्धांजलि के साथ साथ मांगें भी बढ़ा दीं

गांव में एकत्र लोगों ने मांगों को ले कर हंगामा कर दाह संस्कार रोक दिया. परिवार व संगठनों की मांग थी कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी व एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए. पुलिस भीड़ के सामने खुद को असहाय महसूस कर रही थी.

यह देख एसएसपी ने वहां भारी संख्या में पुलिस फोर्स भेज दी. भीड़ ने हंगामा किया तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हलका बल प्रयोग करना पड़ा. पुलिस अधिकारियों के काफी समझाने के बाद रात साढ़े 9 बजे संजलि का अंतिम संस्कार हो सका.

sanjali-murder-candle-march

संजलि की मौत के बाद स्कूलों कालेजों के साथ विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने हत्यारों को गिरफ्तार कर संजलि को इंसाफ दिलाने की मांग को ले कर कैंडिल मार्च निकाले. संजलि के शोक में लालऊ का बाजार भी बंद रहा.

इस घटना में नया मोड़ तब आया, जब संजलि की मौत से दुखी हो कर उस के ताऊ के 24 साल के बेटे योगेश ने एक दिन बाद ही 20 दिसंबर की सुबह जहर खा लिया. उसे परिवार वाले अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उस की मौत हो गई.

योगेश द्वारा अचानक आत्महत्या कर लिए जाने से सभी दुखी व स्तब्ध थे. पुलिस की संदिग्धों की सूची में योगेश पहले से ही शक के घेरे में था. पुलिस उस का मोबाइल जब्त कर के छानबीन करने लगी.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – विभा ने खुद ही चुनी कांटों भरी राह

संजलि के परिवार के नजदीकी लोगों का कहना था कि संजलि डेली डायरी लिखती थी. उसे जो भी अच्छा लगे, बुरा लगे, उसे डायरी में लिखती थी. 15 दिन पहले उस के साथ छेड़छाड़ की जो घटना हुई थी, उस के बारे में उस ने अपने घर वालों को नहीं बताया था.

लेकिन उस ने अपनी डायरी में जरूर लिखा होगा. पुलिस ने उस के घर पर डायरी खोजी लेकिन डायरी घर में नहीं मिली. उस की सहेलियों ने बताया कि वह डायरी को अपने बस्ते में रखती थी, जो घटना में जल कर राख हो चुका था.

मौत से पहले संजलि ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डबडबाई आंखों और थरथराते होंठों से मां से कहा था, ‘‘मां, यदि मैं ठीक हो गई तो हमलावरों को छोड़ूंगी नहीं, उन्हें सबक जरूर सिखाऊंगी. और अगर मैं मर गई तो हमलावरों को छोड़ना मत, उन्हें सजा जरूर दिलाना. मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है, ऐसा किसी के साथ न हो.’’

नेताओं ने लगाए संजलि के घर के चक्कर

संजलि को पैट्रोल डाल कर जिंदा जलाने की घटना की गूंज प्रदेश की विधानसभा तक पहुंच गई. 21 दिसंबर को लालऊ में हरेंद्र सिंह के घर दिन भर नेताओं के आने का तांता लगा रहा.

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने पीडि़त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें जहां सांत्वना दी, वहीं न्याय का भी पूरा भरोसा दिलाया. संजलि के पिता हरेंद्र सिंह की मांग थी कि बड़ी बेटी अंजलि को सरकारी नौकरी और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए.

उपमुख्यमंत्री ने 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता सरकार की ओर से देने की घोषणा की. घटना के 3 दिन बाद भी संजलि के हत्यारों के न पकड़े जाने से गांव में गमगीन माहौल था. ग्रामीणों व विभिन्न संगठनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा था. प्रदेश ही नहीं, देश में सनसनी फैला चुके इस जघन्य हत्याकांड के गुनहगार पुलिस की गिरफ्त से दूर थे.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – प्यार में मिली मौत की सौगात

संजलि की जघन्य हत्या पर केवल आगरा में ही नहीं, बल्कि मैनपुरी, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, मथुरा, एटा, बुलंदशहर, लखनऊ, देश की राजधानी दिल्ली में भी आक्रोश था.

sanjali-prdarshan

राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर संजलि के घर वालों से मिलने गांव पहुंचे. उन्होंने सरकार से इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए पीडि़त परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने की बात कही.

संजलि को जिंदा जला कर मार देने की खबर इलैक्ट्रौनिक और प्रिंट मीडिया में प्रमुखता से छाने लगी, जिस से पुलिस पर दबाव बढ़ता जा रहा था. लेकिन पुलिस अपने काम में जुटी रही. पुलिस की जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही थी.

पुलिस को मिली जांच की दिशा

संजलि को जिन 2 बाइक सवारों ने जलाया था, पुलिस उन में योगेश को पुलिस मुख्य संदिग्ध मान रही थी, पर उस ने आत्महत्या कर ली थी. उस का दूसरा साथी कौन था, यह जानकारी पुलिस को नहीं मिल पा रही थी. गुत्थी उलझने से पुलिस असमंजस में थी.

पुलिस के आला अधिकारी इस हत्याकांड को सुलझाने में जुटे थे. इस के लिए एक दरजन से अधिक टीमें बनाई गईं. इन टीमों को अलगअलग काम सौंपे गए. हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस ने शहरी क्षेत्रों में सूत्र तलाशने के साथ ही संजलि के स्कूल के आसपास के पैट्रोल पंपों व रास्ते के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी.

संजलि के गांव में भी सादा कपड़ों में महिला पुलिस लगा दी गई. इस के साथ ही योगेश के दोस्तों की सूची बना कर उन पर निगाह रखी जाने लगी.

पुलिस ने इस जघन्य वारदात को अंजाम देने के मामले में लालऊ व आसपास के गांवों से 20 युवकों को हिरासत में ले कर उन से पूछताछ की. लेकिन घटना के कई दिन बाद भी आरोपियों के संबंध में कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका. पुलिस गोपनीय तरीके से जांच में जुटी रही.

इस बीच 22 दिसंबर को एसएसपी अमित पाठक ने विधिविज्ञान प्रयोगशाला, आगरा की टीम को घटनास्थल पर बुलाया. फोरैंसिक वैज्ञानिक अरविंद कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम ने शनिवार को क्राइम सीन रीक्रिएट किया. साथ ही खाई से सड़क तक की दूरी नापी.

यह जानने के लिए पैट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए कि वहां से किस ने बोतल में पैट्रोल लिया. लेकिन पुलिस को कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिस से इस केस के आरोपी पकड़े जा सकें.

फोरैंसिक विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि संजलि को अचानक रोक कर उस पर पैट्रोल नहीं डाला गया बल्कि कुछ दूरी से उस पर पैट्रोल फेंका गया था. पैट्रोल में मोबिल औयल मिला हुआ था, यह सड़क पर जहां जहां गिरा, वहां निशान अभी तक बने हुए थे.

घटना के पांचवें दिन आगरा निवासी एक युवक जो आरओ का काम करता है, ने एसएसपी अमित पाठक को बताया कि 18 दिसंबर को वह अपनी बाइक से जगनेर जा रहा था. नामील के पास उस के मोबाइल की घंटी बजी. जब वह फोन पर बात कर रहा था, तभी बाइक सवार 2 युवकों ने एक लड़की के ऊपर पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी.

दोनों युवक पैशन प्रो बाइक पर थे. इसी बीच छात्रा चीखी और उस के शरीर से आग की लपटें उठने लगीं. उन में से एक युवक काले रंग की जैकेट पहने था. डर की वजह से वह भी घटनास्थल से चुपचाप आगे बढ़ गया. पुलिस ने संजलि के स्कूल के पास एक शोरूम के बाहर लगे सीसीटीवी की फुटेज भी देखी.

फुटेज में संजलि साइकिल से जाती हुई दिखाई दे रही थी. एक बाइक पर 2 युवक व दूसरी बाइक पर एक युवक हैलमेट लगाए उस का पीछा करते दिखाई दिए. पुलिस को अब तक की गई जांच में यह पता चल गया था कि इस हत्याकांड को पूरी प्लानिंग से अंजाम दिया गया था.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – सिसकती मोहब्बत : प्यार बना जान का कारण

घटनास्थल से जो लाइटर मिला, वह गन शेप में था. एसएसपी अमित पाठक ने उस लाइटर को विभिन्न वाट्सऐप ग्रुप में शेयर किया और यह भी पूछा कि लालऊ आगरा शहर में किन किन दुकानों पर ऐसा लाइटर मिलता है. पुलिस भी इस जांच में जुट गई.

पुलिस सदर, नामनेर, चर्चरोड, किनारी बाजार आदि जगहों की उन दुकानों पर पहुंची, जहां गैस चूल्हे और लाइटर मिलते हैं. सभी जगह से लाइटर के फोटोग्राफ लिए गए.

रिश्तों की आग में जली संजलि – भाग 1

18 दिसंबर, 2018 को मंगलवार था. स्कूल की छुट्टी के बाद संजलि अपनी सहेलियों के साथ साइकिल से घर जाने के लिए निकली. सहेलियों से बातचीत करती हुई वह चौराहे पर पहुंची. वहां से वह अपने गांव की सड़क की तरफ मुड़ गई. उस की सहेलियां दूसरी सड़क पर चली गईं.

संजलि ने सहेलियों से अगले दिन मिलने का वादा किया था, लेकिन उस के साथ रास्ते में एक ऐसी घटना घट गई, जो दिल को दहलाने वाली थी. रास्ते में 2 बाइक सवार युवकों ने पैट्रोल डाल कर उसे जिंदा जला दिया.

यह घटना उत्तर प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध आगरा शहर में घटी. यहां के थाना मलपुरा का एक गांव है लालऊ. हरेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ लालऊ गांव में ही रहते थे. संजलि उन्हीं की मंझली बेटी थी. हरेंद्र सिंह सिकंदरा स्थित एक जूता फैक्टरी में जूता कारीगर थे. उन की 15 वर्षीय बेटी संजलि घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर नौमील गांव स्थित अशरफी देवी छिद्दा सिंह इंटर कालेज में 10वीं कक्षा में पढ़ती थी.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – मंजू और उसके 2 प्रेमी : घर गृहस्थी को किया बरबाद

हर रोज की तरह उस दिन भी स्कूल की छुट्टी दोपहर डेढ़ बजे हुई. छुट्टी के बाद संजलि को चले अभी 10-15 मिनट ही हुए थे. जब वह घर से 500 मीटर पहले जगनेर रोड पर लालऊ नाले के पास पहुंची, तभी 2 बाइक सवार युवक पीछे से संजलि की साइकिल के बराबर में आए.

यह देख कर वह डर गई और साइकिल की गति तेज कर दी. क्योंकि कुछ दिन पहले भी 2 युवकों ने उस के साथ छेड़छाड़ की थी. वह बात उस ने अपने घर वालों को नहीं बताई थी. साइकिल की गति तेज होते ही युवकों की बाइक की गति तेज हो गई. पीछा करने वाले कौन हैं और क्या चाहते हैं, यह सोच कर संजलि परेशान थी. इस से पहले कि वह कुछ समझ पाती, बाइक पर पीछे बैठे युवक ने हाथ में पकड़ी प्लास्टिक की बोतल से संजलि के ऊपर पैट्रोल डाला और फुरती से लाइटर से आग लगा दी.

इतना ही नहीं, हमलावरों ने जलती हुई संजलि को सड़क किनारे खाई में धक्का दे दिया, इस से वह खाई में जा गिरी. दोनों युवक वारदात को अंजाम दे कर वहां से फरार हो गए.

संजलि आग की लपटों से घिर गई थी, उस के खाई में गिरने से वहां की झाडि़यों ने भी आग पकड़ ली. आग में घिरी संजलि हिम्मत कर के जैसे तैसे सड़क पर पहुंची, उस की मर्मांतक चीख सुन कर कई राहगीर रुक गए. जलती हुई लड़की को देख कर उन के होश उड़ गए.

संजलि ने जमीन पर लेट कर आग बुझाने की कोशिश की. तब तक आग से उस की पीठ पर लटका स्कूली बैग पूरी तरह जल चुका था. उसी समय वहां से एक बस गुजर रही थी. दिल दहलाने वाला मंजर देख कर बस चालक मुकेश ने बस वहीं रोक ली और बस में रखा अग्निशमन यंत्र ले कर दौड़ा लेकिन दुर्भाग्य से वह चल नहीं पाया. इस पर वह बस में रखा दूसरा यंत्र ले कर आया और आग बुझाई. इस बीच बस की सवारियां व अन्य राहगीर भी वहां एकत्र हो गए, आग बुझाने के प्रयास में बस चालक मुकेश के हाथ भी झुलस गए थे.

वहां से अजय नाम का एक युवक भी गुजर रहा था. उस ने जलन से तड़पती संजलि को पहचान लिया और फोन से संजलि के घर खबर कर दी. घटना की जानकारी मिलते ही उस के मातापिता के होश उड़ गए. वे गांव के लोगों के साथ बदहवास से घटनास्थल पर पहुंचे. आग से झुलसी संजलि ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने घर वालों को दे दी.

इसी बीच किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी. सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम की टीम वहां पहुंच गई. पुलिस ने संजलि को आगरा के एस.एन. मैडिकल कालेज के आईसीयू में भरती कराया. डाक्टरों ने बताया कि वह 75 फीसदी जल चुकी है.

उस समय प्रदेश के डीजीपी ओ.पी. सिंह आगरा में ताजमहल के पास स्थित अमर विलास होटल में आगरा रेंज के अधिकारियों के साथ मीटिंग में थे. वहां मौजूद अधिकारियों को सरेराह एक छात्रा को जिंदा जलाने की घटना की सूचना मिली तो पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए.

एडीजी अजय आनंद, डीआईजी लव कुमार और एसएसपी अमित पाठक अस्पताल पहुंच गए. उधर घटनास्थल पर भी थाना पुलिस पहुंच गई थी. पुलिस टीम ने घटनास्थल से प्लास्टिक की एक खाली बोतल व लाइटर जब्त किया.

पुलिस अधिकारियों ने संजलि से बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. झुलसी अवस्था में वह रुकरुक कर बात कर पा रही थी. उस ने बताया कि 15 दिन पहले 2 युवकों ने उस का पीछा किया था. वह उन्हें नहीं जानती.

पुलिस को संजलि के घर वालों से पता जला कि 23 नवंबर को संजलि के पिता हरेंद्र पर मलपुरा नहर के पास 2 अज्ञात लोगों ने हमला किया था, जिस में हरेंद्र को मामूली चोटें आई थीं. लेकिन उन्होंने इस की थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी. मारपीट करने वाले कौन थे, हरेंद्र पहचान नहीं पाए थे.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – प्यार के लिए खूनी नोटिस : कातिल बहन

कुछ नहीं समझ पा रही थी पुलिस

पुलिस की एक टीम मौके पर जांचपड़ताल करने लगी, जबकि दूसरी टीम हमलावर बाइक सवारों की तलाश में निकल गई. पुलिस पिता पर हमले की कडि़यों को बेटी के साथ हुई घटना से जोड़ कर देखने का प्रयास कर रही थी. साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि कुछ दिन पूर्व संजलि के साथ छेड़छाड़ करने वाले 2 युवक कौन थे.

15 साल की किशोरी की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है, जिस की वजह से उसे जिंदा जलाने की कोशिश की गई. पुलिस ने संजलि की सहेलियों व स्कूल स्टाफ से इस संबंध में पूछताछ की. पुलिस अनुमान लगा रही थी कि आरोपी संजलि के परिचित हो सकते हैं. ऐसा इसलिए माना जा रहा था कि दोनों ने हैलमेट लगाया था, ऐसा उन्होंने पहचान छिपाने के लिए किया होगा.

जिस स्थान पर वारदात हुई, वह घर से करीब आधा किलोमीटर पहले और स्कूल से एक किलोमीटर दूरी पर था. माना यह भी जा रहा था कि हमलावर स्कूल से ही अंजलि के पीछे लगे होंगे. संजलि और उस के परिवार वालों से पूछताछ के बाद भी पुलिस को ऐसा कोई क्लू नहीं मिला, जिस से घटना का खुलासा हो सके.

गांव के लोग भी कुछ नहीं बता रहे थे, न पुलिस को ऐसा कोई व्यक्ति मिल रहा था जिस ने हमलावरों को भागते हुए देखा हो. पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

गंभीर रूप से जली किशोरी की गंभीर हालत को देखते हुए उसी दिन शाम 6 बजे उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. सफदरजंग अस्पताल के डाक्टर संजलि के इलाज में जुट गए. उन का कहना था कि 48 घंटे गुजर जाने के बाद ही उस की हालत के बारे में कुछ कहा जा सकता है.

ये क्राइम स्टोरी भी पढ़ें – फंदे पर लटकी मोहब्बत : असहमति का अंजाम

आखिर 36 घंटे बाद 19 नवंबर की रात डेढ़ बजे संजलि जिंदगी की जंग हार गई. उसी दिन पोस्टमार्टम के बाद उस का शव शाम साढ़े 5 बजे उस के गांव लालऊ पहुंचा. संजलि जब दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही थी, उस समय कई सामाजिक संगठनों व ग्रामीणों ने हमलावरों की गिरफ्तारी व पीडि़ता को आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग को ले कर जुलूस भी निकाले थे. इसलिए संजलि के शव के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स उस के गांव पहुंच गई थी.

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 3

गड़े धन के लालच में क्यों फंसा अजय शुक्ला

परिवार व गांव वालों ने नीरज विश्वकर्मा को ले कर अजय शुक्ला के कान भरने शुरू किए तो उस ने उस के घर आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी. इस के बाद संतोष कुमारी ने प्रेम प्रसंग में बाधा बन रहे पति को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक भी बात नहीं मानी.

संतोष कुमारी जानती थी कि उस का पति गड़े धन के लालच में कुछ भी कर सकता है. क्योंकि इस से पहले भी वह गड़े धन की लालसा में कई बार तांत्रिकों से मिल चुका था.

उस के बाद भी वह गड़ा धन पाने के लिए कुछ न कुछ हरकतें करता ही रहता था. इस के लालच में वह कहीं भी जा सकता है, जिस के सहारे उसे मौत की नींद सुलाना भी बहुत ही आसान काम था. प्रेमी को पाने के लिए उस ने उस के पति को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया.

इस के बाद वह एक दिन नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर मिली और उसे अपनी योजना के बारे में बताया. नीरज विश्वकर्मा तो पूरी तरह से संतोष कुमारी का दीवाना हो चुका था. वह उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. संतोष कुमारी की बात सुनते ही वह उस का साथ देने को तैयार हो गया.

फिर उसी योजना के तहत एक दिन गड़े धन का लालच दे कर नीरज ने अजय शुक्ला से बात की. कहीं पर गड़े धन की जानकारी मिलते ही अजय शुक्ला उस के साथ जाने के लिए तैयार हो गया.

यह बात अजय शुक्ला ने अपनी पत्नी संतोष कुमारी को बताई तो उस ने भी उस की हां में हां कर दी. वह तो पहले से ही चाहती थी कि वह किसी तरह से उस के प्रेमी नीरज विश्वकर्मा के साथ चला जाए.

योजना बनाने के बाद नीरज विश्वकर्मा और उस की प्रेमिका संतोष ने टीवी पर क्राइम स्टोरीज के सीरियल देखने शुरू किए. क्राइम सीरियलों में हमेशा ही अपराध करना और उस से बचने के उपायों को बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया जाता है. उन सीरियलों को देख कर संतोष कुमारी को पूरा विश्वास हो गया था कि वह भी अपने पति की हत्या करवा कर उस के जुल्म से पूरी तरह से बच जाएगी.

cpolice hirasat main aaropi

10 बच्चे कैसे हुए अनाथ 

एक दिन नीरज विश्वकर्मा का फोन आते ही अजय घर से बाइक उठा कर चलने को तैयार हुआ तो संतोष कुमारी ने उस का मोबाइल घर पर ही यह कह कर रखवा लिया कि कहीं रात में गिर गया तो कहां कहां ढूंढोगे.

संतोष कुमारी जानती थी कि पुलिस मोबाइल की लोकेशन निकाल कर उस का पता कर सकती है. अगर उस के पास मोबाइल नहीं होगा तो उस के मरने के बाद पुलिस भी उस का अता पता नहीं कर पाएगी और जंगली जानवर उस की लाश को खा जाएंगे.

पत्नी के कहने पर अजय शुक्ला ने मोबाइल घर पर ही छोड़ दिया. उस के बाद वह सीधा नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर उस से मिला. उस वक्त तक शाम हो चुकी थी. अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज विश्वकर्मा अपनी बाइक से अजय शुक्ला के साथ चल दिया. नीरज कुमार ने अपनी बाइक रास्ते में पडऩे वाले पैट्रोल पंप पर खड़ी कर दी.

फिर वह अजय शुक्ला की बाइक पर बैठ कर उसे ले कर रामसनेही घाट कोतवाली के प्रतापपुरवा के जंगल में ले गया. वहां पर जा कर नीरज विश्वकर्मा ने अजय शुक्ला को एक जगह दिखाते हुए बताया कि गड़ा धन इसी जगह के नीचे है. इस जगह को किसी तरह से खोदना होगा.

अजय शुक्ला गड़े धन के लालच में पूरी तरह से पागल सा हो गया था. उस के मन में अमीर बनने के सपने घूमने लगे थे. जैसे ही अजय शुक्ला अपनी बाइक से उतर कर उस जगह की तरफ को जाने लगा तो पीछे से मौका पाते ही नीरज विश्वकर्मा ने उसी के हेलमेट से उस के सिर पर जोरदार वार कर दिया.

अचानक सिर पर ताबड़तोड़ हैलमेट की चोट से अजय शुक्ला बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़ा. उस के बाद नीरज ने चाकू से उस की हत्या कर दी.

अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज विश्वकर्मा अपने घर चला आया. अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज शुक्ला ने उसी के नंबर पर फोन कर उस की सूचना अपनी प्रेमिका संतोष कुमारी को दी, ताकि अगर यह भेद खुलता भी है तो पुलिस उस की बीवी पर शक न कर सके.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने अपने पति की हत्या की साजिश रचने वाली संतोष्ज्ञ कुमारी और नीरज विश्वकर्मा को अजय शुक्ला को अगवा कर उस की हत्या करने के आरोप में कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था.

इस मामले में मृतक अजय शुक्ला की पत्नी की तरफ से 5 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बदलाव किया गया. उसी अभियोग में धारा 34 भादंवि को जोड़ दिया गया तथा आलाकत्ल चाकू की बरामदगी के आधार पर धारा 4/25 आम्र्स ऐक्ट व धारा 120 बी/201 भी जोड़ दी गई. भले ही अपने प्रेम प्रसंग को छिपाने और अपने प्रेम में बाधा बने अजय शुक्ला को उसी की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर षडयंत्र के तहत रास्ते से हटा दिया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते दोनों ही जेल की सलाखों के पीछे चले गए थे.

उन के जेल जाते ही 10 बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए थे. आरोपी नीरज विश्वकर्मा के भी 5 बच्चे थे और संतोष कुमारी के भी 5.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 2

इस कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी के थाना असंद्रा के एक छोटे से गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से. 40 वर्षीय अजय शुक्ला इसी गांव का रहने वाला था और वह किसी तरह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. उस की शादी कई साल पहले संतोष कुमारी के साथ हुई थी.

समय के साथसाथ संतोष कुमारी 5 बच्चों की मां बनी. घर में बच्चों के हो जाने के बाद अजय शुक्ला बहुत ही खींचतान कर बच्चों का लालनपालन कर पाता था.

घर की आर्थिक स्थिति डगमगाने से वह लगभग 15 लाख रुपयों के कर्ज के बोझ में दब गया था. नशे और जुए का आदी होने के कारण उस ने अपनी जुतासे की जमीन भी बेच डाली थी. लेकिन जमीन बेच कर उस ने पैसे जुए और शराब में उड़ा दिए. जिस के बाद उस की पत्नी हर वक्त उस से खफा रहती थी.

अब से लगभग 6 साल पहले संतोष कुमारी कुछ सामान खरीदने के लिए महमूदपुर गई थी. नीरज कुमार विश्वकर्मा महमूदपुर में ही एक घड़ी और मोबाइल की दुकान चलाता था. अपने घर का सामान खरीदने के बाद वह जैसे ही अपने घर वापस आ रही थी, उस की नजर एक मोबाइल की दुकान पर बैठे नीरज कुमार पर पड़ी.

संतोष कुमारी का चलते वक्त मोबाइल नीचे गिर गया था, जिस के कारण उस का मोबाइल का स्क्रीन गार्ड टूट गया था. वह स्क्रीन गार्ड लगवाने के लिए उस के पास पहुंची. उसी दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई थी. नीरज कुमार के व्यवहार से संतोष कुमारी पहली ही मुलाकात में काफी प्रभावित हुई थी.

जब तक नीरज कुमार ने उस के मोबाइल पर स्क्रीन गार्ड लगाया, तब तक उस ने नीरज से सारी जानकारी जुटा ली थी. उस के बाद वह उस का मोबाइल नंबर भी ले आई थी.

उस दिन के बाद नीरज कुमार संतोष कुमारी के दिल में बस गया. संतोष कुमारी उस से बात करने के लिए बेचैन हो उठी. उस ने कई बार उसे फोन मिलाने की कोशिश की, लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह किस बहाने से उसे फोन करे.

आखिरकार उस ने एक दिन हिम्मत कर के उस ने फोन मिलाया. नीरज कुमार तुरंत ही उस की आवाज पहचान गया. फिर उस दिन दोनों की काफी समय तक बात हुई. दोनों के बीच एक बार फोन पर बात हुई तो आगे यह सिलसिला बढ़ता ही गया.

दरअसल, संतोष कुमारी को नीरज कुमार से प्यार हो गया, जिस से वह अकसर उस से घंटों घंटों तक बात करने लगी थी. उस के बाद दोनों ही मिलने के लिए बेचैन रहने लगे थे. संतोष कुमारी उस से मिलने के लिए कोई न कोई बहाना बना कर घर से निकल जाती और फिर उस की दुकान पर पहुंच जाती. अजय शुक्ला तो सुबह ही रिक्शा ले कर घर से निकल जाता और देर शाम को ही घर पहुंचता था.

इस दौरान संतोष कुमारी नीरज कुमार को फोन करती. वह नीरज कुमार से अपने घर आने के लिए कहती, लेेकिन नीरज अपनी दुकान के चलते उस के पास नहीं आ पाता था. फिर उस के घर आने पर उस के अन्य परिवार वाले भी ऐतराज उठा सकते थे.

हसरतों ने इस तरह भरी उड़ान

इसी सब से बचने के लिए संतोष कुमारी के दिमाग में एक आइडिया आया. उस ने सोचा कि अगर किसी तरह से उस के पति की दोस्ती नीरज कुमार से हो जाए तो उस के घर आने की सारी बाधाएं खत्म हो जाएंगी. यही सोच कर उस ने एक दिन अपने मोबाइल का स्क्रीन गार्ड जानबूझ कर तोड़ दिया.

अगली सुबह जब उस का पति अजय शुक्ला घर से निकल रहा था तो उस ने कहा, ”तुम महमूदपुर में तो आते जाते रहते हो. मेरा मोबाइल ले जाओ.’’

उस के बाद उस ने नीरज कुमार की दुकान का हवाला देते हुए कहा, ”आप उस पर नीरज की दुकान से स्क्रीन गार्ड लगवा लाना.’’

अजय शुक्ला अपनी बीवी का मोबाइल ले कर नीरज कुमार की दुकान पर पहुंचा. उस के पहुंचने से पहले ही संतोष कुमारी ने नीरज को फोन कर समझा दिया था कि आज मेरे पति तुम्हारी दुकान पर आएंगे. किसी भी तरह से तुम उन के साथ दोस्ती गांठ लेना. अगर तुम ने उन से दोस्ती कर ली तो हमारा मिलनेजुलने का रास्ता साफ हो जाएगा.

अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज कुमार ने उस के साथ मीठीमीठी बातें की, जिस के बाद अजय शुक्ला भी उस से काफी प्रभावित हुआ. फिर जल्दी ही दोनों के बीच दोस्ती भी हो गई. उसी दोस्ती की आड़ में नीरज कुमार उस के घर आनेजाने लगा था. जिस के बाद दोनों प्रेमियों के बीच मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

अजय शुक्ला हमेशा ही शाम को शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर पहुंचता था. उस के बाद नीरज कुमार भी अपनी दुकान बंद कर के अजय शुक्ला के घर आ जाता था. देखते ही देखते दोनों में दांत काटी दोस्ती हो गई, जिस के बाद वह अजय शुक्ला के हर दुखसुख में काम आने लगा था.

कभी कभार ज्यादा रात हो जाने के कारण नीरज कुमार अजय शुक्ला के घर पर ही रुक जाता था. इस दौरान जब कभी भी अजय शुक्ला को पैसे की जरूरत होती तो नीरज ही उस के काम आता था.

धीरेधीरे अजय शुक्ला नीरज कुमार का लाखों रुपयों का कर्जदार हो गया था. जिस के कारण अजय शुक्ला नीरज कुमार के अहसानों तले दबता चला गया, जिस का नीरज कुमार भरपूर लाभ ले रहा था.

जब नीरज कुमार विश्वकर्मा का उस के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना हो गया तो उस के परिवार वाले ऐतराज करने लगे. उन्होंने कई बार इस बात की शिकायत अजय शुक्ला से की, लेकिन उस ने हर बार उन की बातों को एक कान सुना और दूसरे से निकाल दिया.

यही बात जब घर से निकल कर गांव में फैलनी शुरू हुई तो अजय शुक्ला को थोड़ा बुरा लगने लगा. उस के बाद उसे भी अपनी पत्नी और नीरज विश्वकर्मा के बीच अवैध संबंधों का शक हो गया था. जिस के बाद अजय शुक्ला अकसर ही अपनी पत्नी से झगडऩे लगा था, जिस की जानकारी संतोष कुमारी ने नीरज विश्वकर्मा को भी दे दी थी.

अजय ने कई बार नीरज को अपने घर आने जाने से रोकना चाहा तो उस ने उस से साफ कहा कि भाई मेरा पैसा मुझे वापस कर दो. मैं तुम्हारे घर क्या तुम्हारे गांव की तरफ नहीं आऊंगा. लेकिन अजय शुक्ला को उस समय बहुत ही मजबूरी थी. न तो वह जुआ खेलना ही छोड़ सकता था और न ही वह बिना शराब के रह सकता था.

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 1

लाश की सूचना पाते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस ने देखा तो वहां पर एक व्यक्ति की लाश क्षतविक्षत हालत में पड़ी हुई थी. पुलिस ने वहां पर मौजूद लोगों से उस लाश की शिनाख्त करानी चाही लेकिन किसी ने भी उसे नहीं पहचाना. उस के बाद पुलिस को ध्यान आया कि उसी दिन के अखबारों में एक व्यक्ति की गुमशुदगी की खबर छपी थी.

इस बात के सामने आते ही पुलिस ने सब से पहले असंद्रा थाने से संपर्क किया, क्योंकि वह गुमशुदगी की खबर उसी थाने की थी. असंद्रा थाने से संपर्क होते ही पुलिस ने उस फोटो से मृतक का चेहरा मिलाया तो शिनाख्त हुई कि मृतक अजय शुक्ला ही था.

पुलिस काररवाई कर रही थी कि उसी समय संतोष कुमारी नाम की महिला रोती बिलखती अपने 5 बच्चों के साथ घटनास्थल पर पहुंची.

लाश को देखते ही संतोष कुमारी अपना आपा खो बैठी. क्योंकि वह लाश उस के पति अजय शुक्ला की थी. वह पति की लाश से लिपट लिपट कर बुरी तरह से रोने चिल्लाने लगी. उस के बच्चों का भी रोरो कर बुरा हाल था. पुलिस ने किसी तरह से संतोष कुमारी को शांत कराया. उस के बाद पुलिस ने जांचपड़ताल की तो अजय शुक्ला के सिर व पेट पर चोटों के काफी निशान थे.

इस से एक दिन पहले ही संतोष कुमारी 18 दिसंबर, 2023 की शाम के वक्त बाराबंकी जिले के थाना असंद्रा पहुंची थी. उस ने एसएचओ संतोष कुमार सिंह को बताया था कि वह मल्लपुर मजरे सुपामऊ गांव की रहने वाली है. सुबह लगभग 11 बजे उस के पति अजय कुमार शुक्ला बाइक से किसी काम से मस्तान बाबा की कुटी पर जाने के लिए निकले थे. लेकिन उस के बाद वह वापस नहीं लौटे.

उस ने बताया था कि जाने से पहले वह अपना मोबाइल भी घर पर ही भूल गए थे. एसएचओ ने संतोष कुमारी से उस के पति के बारे में कुछ और जानकारी हासिल करने के बाद अजय कुमार की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली थी.

उसी जांचपड़ताल के तहत सब से पहले एसएचओ पुलिस टीम के साथ गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर रह रहे मस्तान बाबा की कुटिया पर पहुंचे. कुटिया पर पहुंच कर उन्होंने वहां पर अजय कुमार शुक्ला के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि अजय कुमार शुक्ला वहां पर आया ही नहीं था. उस के बाद पुलिस ने अजय कुमार शुक्ला की हर जगह तलाश की, लेकिन कहीं भी उस का अतापता नहीं चला.

इस के बाद पुलिस ने उस के गुमशुदा होने की सूचना स्थानीय अखबारों में छपवाई, लेकिन उस के बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली. इस सब का कारण था कि अजय शुक्ला अपने साथ मोबाइल नहीं ले गया था, जिस के कारण उसे तलाशने में पुलिस के सामने बड़ी समस्या आ खड़ी हुई थी.

उसी दौरान 19 दिसंबर, 2023 को गांव प्रताप पुरवा के पास एक व्यक्ति की लाश पड़ी होने की सूचना रामसनेही घाट कोतवाली को मिली. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई. रामसनेही घाट पुलिस ने इस की सूचना असंद्रा थाने में भी दे दी थी, क्योंकि उस थाने के एक लापता व्यक्ति की सूचना अखबार में छपी थी.

इस जानकारी के मिलते ही सब से पहले असंद्रा पुलिस ने उस की पत्नी संतोष कुमारी को इस की जानकारी दी. उस के तुरंत बाद ही असंद्रा थाने के एसएचओ भी उस जगह पहुंच गए, जहां पर अजय शुक्ला की लाश मिली थी. संतोष कुमारी ने उस लाश की शिनाख्त अपने पति अजय शुक्ला के रूप में कर ली.

घटनास्थल से समस्त जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई आगे बढ़ाई. फिर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उस के बाद पुलिस ने संतोष कुमारी से पूछा कि गांव में तुम्हारे पति की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी.

यह बात सुनते ही संतोष कुमारी पहले तो चुप्पी साध गई, फिर उस ने बताया कि उस के पति का गांव के ही कुछ लोगों से जमीन को ले कर विवाद चल रहा था, जिस के कारण ही उन लोगों ने उन की हत्या की होगी.

संतोष कुमारी के शक के आधार पर पुलिस ने गांव के ही 5 लोगों माताबदल, महेश, रामकुमार, बाबा सोनी व प्रदीप को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने संतोष कुमारी की तरफ से शक के आधार पर इन पांचों पर भादंवि की धारा 302/34 के तहत मामला दर्ज कर लिया.

इन पांचों से पुलिस ने कड़ी पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी उस की हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली. पुलिस ने इस मामले में उन के गांव जा कर अन्य लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि पांचों ही लोग बेहद ही शरीफ और सज्जन इंसान थे.

गांव वालों की जानकारी से पुलिस को भी लगने लगा था कि कहीं न कहीं ये पांचों निर्दोष हैं. उसी दौरान गांव वालों का संतोष कुमारी पर दबाव बना तो वह भी उन की गिरफ्तारी को ले कर कुछ ढीली नजर आई. उस के बाद वह भी उन की पैरवी पर उतर आई थी, जिस के बाद अजय शुक्ला की हत्या के शक की सूई संतोष कुमारी की ओर ही घूम गई थी.

फिर पुलिस ने उस के परिवार वालों के साथसाथ गांव वालों से भी उस के चरित्र के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि अजय शुक्ला के एक दोस्त नीरज विश्वकर्मा का उस के घर पर आनाजाना था. वह अजय शुक्ला की गैरमौजूदगी में भी उस के घर आयाजाया करता था. उस के बाद संतोष कुमारी स्वयं ही पुलिस की शक की निगाहों में चढ़ गई थी.

ये भी पढ़ें – बेवफाई की लाश

पुलिस को मृतक की पत्नी पर क्यों हुआ शक

शक की सूई संतोष कुमारी की तरफ घूमते ही पुलिस ने उस के और मृतक अजय शुक्ला और उस की पत्नी के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया. इस से पुलिस को एक खास जानकारी मिली.

तहकीकात के दौरान पता चला कि संतोष कुमारी काफी समय से महमूदपुर निवासी नीरज कुमार विश्वकर्मा से मोबाइल पर बात करती थी. घटना वाले दिन भी संतोष कुमारी ने नीरज कुमार से बात की थी.

इस बात की जानकारी मिलते ही सब से पहले पुलिस नीरज कुमार के घर पहुंची, लेकिन नीरज कुमार घर से लापता मिला. उस के बाद पुलिस ने उस के मोबाइल पर कई बार काल की तो पहले तो उस ने उठाया नहीं, दूसरी बार करने पर उस ने फोन स्विच्ड औफ कर दिया. इस के बावजूद भी पुलिस ने उस की लोकेशन के आधार पर उसे अपनी हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने उस से अजय शुक्ला की हत्या के संबंध में कड़ी पूछताछ की तो उस ने हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. फिर उस ने हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली निकली—

संतोष कुमारी भले ही पढ़ीलिखी नहीं थी, लेकिन उस का दिमाग इतना तेज था कि वह अपने पति अजय शुक्ला को कुछ भी नहीं समझती थी. अजय शुक्ला एक रिक्शाचालक था. उस के 5 बच्चे थे, जिस से परिवार की गुजरबसर ठीक से नहीं हो पा रही थी. उस के साथ ही उस में शराब पीने की लत भी थी.

यही कारण रहा कि उस ने नीरज कुमार विश्वकर्मा के साथ दोस्ती होते ही अपने पति को अपनी जिंदगी का कांटा समझ कर उसे हटाने के लिए एक सुनियोजित रास्ता चुना. लेकिन पुलिस के लंबे हाथों से वह बच नहीं पाई.

साजिश के चक्रव्यूह में मासूम

11 वर्षीय आदर्श सिंह अपने कमरे में बैठा पढ़ रहा था, तभी उस के कानों में आवाज आई, ‘‘हैलो आदर्श!’’  आदर्श ने पलट कर देखा तो कमरे के दरवाजे पर मुकेश खड़ा था. आदर्श मुकेश पांडेय को अच्छी तरह जानता था. वह पड़ोस में रहने वाली चांदमती का भतीजा था. मुकेश बुआ के पास घूमने आया था. मुकेश को देखते ही आदर्श बोला, ‘‘नमस्ते मुकेश भैया.’’

‘‘नमस्ते नमस्ते, क्या कर रहे हो आदर्श?’’ मुकेश ने सामने खाली पड़ी कुरसी पर बैठते हुए पूछा.

‘‘कुछ भी नहीं भैया, किताबों में मन नहीं लग रहा था इसलिए चंपक पढ़ रहा हूं.’’ आदर्श ने शालीनता से उत्तर दिया.

‘‘अच्छा, मुझे भी बचपन में चंपक पढ़ने का बड़ा शौक था,’’ मुकेश ने कहा, ‘‘लगता है तुम्हें कहानियों और कार्टून का बहुत शौक है.’’

‘‘हां भैया,’’ आदर्श ने कहा.

‘‘तो ठीक है, मैं तुम्हें तुम्हारे ही काम की एक चीज दिखाता हूं.’’

कहने के बाद मुकेश ने अपनी पैंट की जेब से एक बड़े आकार का चमचमाता हुआ सेलफोन निकाला. नया मोबाइल फोन देख कर आदर्श के चेहरे पर मुसकान थिरक उठी. मुकेश के हाथ से मोबाइल ले कर आदर्श उत्सुकतावश उसे उलटपलट कर देखने लगा, ‘‘ये तो काफी महंगा होगा भैया?’’

‘‘हां, महंगा तो है,’’ मुकेश ने जवाब दिया, फिर उस की ओर देख कर पूछा, ‘‘तुम्हें पसंद हो तो तुम इसे अपने पास रख सकते हो.’’

आदर्श उस की तरफ आश्चर्य से देखते हुआ बोला, ‘‘इतना महंगा फोन भला कोई दूसरे को देता है क्या, जो आप मुझे दे दोगे.’’

‘‘तुम्हारे लिए यह फोन क्या चीज है, आदर्श मैं तो तुम्हारे लिए जान भी दे दूं, एक बार कह कर तो देखो.’’

‘‘नहीं भैया, मुझे आप की जान नहीं चाहिए. आप सहीसलामत रहें. यही मेरे लिए काफी होगा. आप मुझे एक काम की कोई चीज दिखा रहे थे. वो क्या है?’’ आदर्श ने पूछा.

‘‘ठीक है बाबा, दिखाता हूं तुम्हें वो चीज, तुम भी क्या याद रखोगे कि मुकेश भैया जो कहता है वह कर के दिखाता भी है.’’

मुकेश ने अपने फोन में इंटरनेट औन कर के बच्चों वाली एक कार्टून फिल्म चला दी. फिल्म चालू कर के उस ने फोन उस के हाथों में थमा दिया. कार्टून फिल्म देख कर आदर्श का चेहरा खुशियों से खिल उठा और वह पूरी तन्मयता से फिल्म देखने लगा.

मोबाइल के जरिए मुकेश और आदर्श के बीच धीरेधीरे दोस्ती गहरी होती गई. शाम के वक्त जब भी आदर्श स्कूल से घर लौटता, उस के थोड़ी देर बाद ही मुकेश उस के पास पहुंच जाता था.

फिर मोबाइल में उस की पसंदीदा कार्टून फिल्म चालू कर के उसे मोबाइल पकड़ा देता था. आदर्श भी स्कूल का काम छोड़कर घंटों फिल्म देखने में मशगूल हो जाता था. ये देख कर आदर्श की मां और पिता दोनों परेशान रहते थे कि मुकेश मोबाइल में फिल्म दिखा कर उन के बेटे को बिगाड़ रहा है.

एक दिन जयप्रकाश सिंह ने आदर्श को अपने पास बैठा कर बड़े लाड़प्यार से घंटों तक समझाया कि वह मुकेश से दूर रहा करे. मुकेश अच्छा लड़का नहीं है, जिस तरह वह तुम्हें मोबाइल दे कर बिगाड़ रहा है, उस की हरकतें उन्हें पसंद नहीं हैं. बेटा, तुम उस से दूर ही रहा करो, यही तुम्हारे लिए बेहतर होगा.

आदर्श पिता की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था. उस ने पिता की बातों पर अमल भी किया. उस दिन के बाद आदर्श ने मुकेश के मोबाइल पर कार्टून फिल्म देखनी बंद कर दी. इतना ही नहीं, उस ने मुकेश से मिलना भी कम कर दिया.

बात 4 अक्तूबर, 2018 की है. शाम के 5 बज रहे थे. आदर्श अब तक स्कूल से घर नहीं लौटा था. उस की मां पूनम सिंह बेटे को ले कर बेहद परेशान और चिंतित थी. पूनम के 2 और बेटे रितिक व बैजनाथ भी भाई की वजह से परेशान थे. जबकि तीनों बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते थे.

उन की स्कूल की छुट्टी भी साथ ही होती थी और साथ ही घर से निकलते भी थे. लेकिन उस दिन पता नहीं कैसे तीनों का साथ छूट गया. उस दिन घर के लिए आगे पीछे निकले थे. रितिक और बैजनाथ तो घर लौट आए थे, लेकिन आदर्श नहीं लौटा था.

पूनम ने बच्चों से आदर्श के बारे में पूछा तो रितिक ने कहा कि वह आ रहा होगा. हो सकता है, छुट्टी के समय हम से पहले निकल लिया होगा, तभी छुट्टी होने पर हमें दिखाई नहीं दिया था. थोड़ी देर इधरउधर तलाशने के बाद जब वह हमें नहीं मिला तो हम यह सोच कर घर आ गए कि वह घर पहुंच गया होगा. शायद अपने दोस्तों के साथ पीछे आ रहा होगा. बेटे का जवाब सुन कर पूनम चुप हो गई और अपने कामों में लग गई.

शाम के 5 बज रहे थे. अब से पहले आदर्श को घर लौटने में इतनी देर कभी नहीं हुई थी. बेटे की चिंता में पूनम का दिल बुरी तरह घबरा रहा था. उस ने पति जयप्रकाश सिंह को फोन कर के यह बात बता दी. बेटे के स्कूल से घर न लौटने की बात सुन कर जयप्रकाश सिंह घर पहुंच गए.

उन्होंने अपने मोहल्ले के लोगों के साथ बेटे को संभावित जगहों पर ढूंढा लेकिन उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. वह मायूस हो कर घर लौट आए.

रहस्यमय तरीके से गायब बेटे को ले कर जयप्रकाश सिंह काफी परेशान थे. धीरेधीरे अंधेरा भी घिरता जा रहा था. जयप्रकाश सिंह की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें. मोहल्ले के लोग भी उन्हें तरह तरह की सलाह देने लगे.

अंतत: अपने शुभचिंतकों के साथ वह अपने नजदीकी थाने सिकरीगंज पहुंच गए. यह थाना गोरखपुर जिले के अंतर्गत आता है. जयप्रकाश ने वहां मौजूद इंसपेक्टर दिनेश मिश्र को बेटे के गायब होने की जानकारी दे दी.

पुलिस ने आदर्श की गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी. दूसरे दिन शाम को पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा. किसी ने इंसपेक्टर को बताया कि बीती शाम लगभग 4 बजे आदर्श स्कूल ड्रेस और बैग लिए गांव के ही मुकेश पांडेय और गौतम पांडेय के साथ गांव के बाहर पुलिया के पास कहीं जाते हुए दिखा था.

पुलिस ने जयप्रकाश सिंह से मुकेश और गौतम के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मुकेश और गौतम पड़ोस में रहने वाली चांदमती का भतीजा और नाती हैं. ये दोनों कई दिनों से यहां आ कर रह रहे हैं. इतना ही नहीं पिछले कई दिनों से मुकेश घर आ कर आदर्श से मिलता था.

आदर्श उस के साथ घंटों मोबाइल पर खेलता था. उन्होंने कई बार बेटे को समझाया भी, पर वह नहीं माना. यह सुन कर पुलिस का माथा ठनका कि कहीं आदर्श के गायब होने में उन दोनों का हाथ तो नहीं है.

उसी शाम पुलिस चांदमती देवी के घर पहुंची और उस से मुकेश और गौतम के बारे में से पूछताछ की. पूछताछ के दौरान पता चला कि मुकेश और गौतम बीती रात अपने अपने घर चले गए. मुकेश गोपालगंज (बिहार) के मीरगंज के बड़कागांव में रहता था, जबकि गौतम संत कबीर नगर जिले की धनघटा के मझौरा का रहने वाला था.

यह बात पुलिस को कुछ हजम नहीं हुई कि आदर्श के अचानक लापता होते ही मुकेश और गौतम भी गांव से अचानक गायब क्यों हो गए. यह बात इत्तफाक नहीं हो सकती थी. इस में उन्हें जरूर कोई न कोई लोचा दिखाई दिया.

2 दिन बीत जाने के बाद आदर्श का कहीं पता नहीं चला तो गांव वालों के दिलों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ने लगा. धीरेधीरे माहौल विस्फोटक बनता जा रहा था. इंसपेक्टर दिनेश मिश्र माहौल को भांप गए और इस से एसएसपी को अवगत करा दिया. एसएसपी शलभ माथुर ने गुत्थी को सुलझाने के लिए इंसपेक्टर दिनेश मिश्र को अहम दिशानिर्देश दिए.

एसएसपी के आदेश पर इंसपेक्टर दिनेश मिश्र ने आदर्श के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली. चूंकि आदर्श के पिता ने गौतम और मुकेश पर शक जताया था, इसलिए इन की तलाश में एक पुलिस टीम उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर और दूसरी टीम बिहार के गोपालगंज रवाना कर दी गई. लेकिन दोनों जगहों पर गईं पुलिस टीमें खाली हाथ वापस लौट आईं.

पता चला कि मुकेश और गौतम अपने गांव नहीं पहुंचे थे. इस से यह बात साफ हो गई कि आदर्श के अपहरण में दोनों का कहीं न कहीं हाथ जरूर है, तभी दोनों पुलिस से बचने के लिए इधरउधर भागते फिर रहे थे.

इधर पुलिस अपहरण की गुत्थी सुलझाने की कोशिश में जुटी हुई थी कि 8 अक्तूबर, 2018 की दोपहर बारी गांव के बाहर रामपाल अपने धान के खेत में सिंचाई करने गया तो उस ने वहां लाश पड़ी देखी. वह उलटे पैर गांव लौट आया और यह सूचना थाना सिकरीगंज को दे दी.

सूचना मिलते ही इंसपेक्टर दिनेश मिश्र मय फोर्स के मौके पर पहुंच गए. उन्होंने लाश का मुआयना किया तो वह किसी बच्चे की लाश निकली. लाश इतनी क्षतविक्षत थी कि उसे पहचाना नहीं जा सकता था. जंगली जानवरों और चील कौओं ने उसे नोचनोच कर खा लिया था. साथ ही तेज बदबू भी आ रही थी.

लाश की सूचना मिलते ही मौके पर गांव वालों का मजमा लग गया. सूचना मिलते ही जयप्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने जब वह लाश देखी तो उस की कमर पर अंडरवियर के अलावा कोई कपड़ा नहीं था. उस की कदकाठी और चेहरे की बनावट देख कर जयप्रकाश सिंह पहचान गए. उन्होंने उस की पुष्टि अपने बेटे आदर्श के रूप में की.

बेटे की लाश देख कर जयप्रकाश सिंह वहीं गश खा कर गिर पड़े. थोड़ी देर बाद जब उन्हें होश आया तो वह दहाड़ें मार कर रोने लगे. इंसपेक्टर दिनेश मिश्र ने अपहरण हुए बच्चे की लाश मिलने की सूचना एसएसपी शलभ माथुर, एसपी (साउथ) और सीओ (बासगांव) को दे दी.

सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने लाश का मुआयना कर के अंदाजा लगाया कि आदर्श जिस दिन लापता हुआ था, शायद उसी दिन उस की हत्या कर दी गई होगी.

पुलिस ने मौके की आवश्यक काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल गोरखपुर भिजवा दी. पुलिस ने पहले से दर्ज अपहरण की रिपोर्ट में भादंवि की धारा 302 और 201 और जोड़ दीं.

4 दिनों से रहस्यमय तरीके से गायब आदर्श की हत्या से परिवार वाले दुखी थे. वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि बदमाशों ने उन के मासूम बेटे की हत्या क्यों की थी? उन्हें उन के बेटे या उन से क्या चाहिए था? जिस की वजह से उस की हत्या कर दी.

पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों की तलाश तेज कर दी. कहीं से पुलिस को दोनों आरोपियों मुकेश और गौतम के मोबाइल नंबर मिल गए. दोनों नंबरों को पुलिस ने सर्विलांस पर लगा दिया और उन का पता लगाने के लिए मुखबिर भी लगा दिए.

5वें दिन यानी 12 अक्तूबर, 2018 को पुलिस को बड़ी सफलता मिली. इंसपेक्टर दिनेश मिश्र को मुखबिर से सूचना मिली कि दोनों आरोपी मुकेश और गौतम सिकरीगंज के पिपरी तिराहे के पास खड़े हैं. वे कहीं भागने की फिराक में हैं.

मुखबिर की सूचना मिलते ही इंसपेक्टर दिनेश मिश्र सादे कपड़ों में अपनी टीम के साथ पिपरी चौराहा पहुंच गए. सरकारी जीप उन्होंने चौराहे से थोड़ी दूर खड़ी कर दी और आरोपियों को चारों ओर से घेर लिया ताकि वे भाग न सकें.

सादा वेश में कुछ लोगों को अपनी ओर आता देख मुकेश और गौतम समझ गए कि शायद वे पुलिस वाले हैं. जैसे ही वह भागने को हुए तो पुलिस टीम ने दोनों को पकड़ लिया. पुलिस दोनों को थाने ले आई.

थाने ला कर इंसपेक्टर दिनेश मिश्र ने मुकेश और गौतम से अलगअलग पूछताछ की. पूछताछ के दौरान दोनों आरोपी पुलिस के सामने टूट गए और आदर्श का अपहरण करने के बाद उस की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया.

उन की निशानदेही पर पुलिस ने चांदमती के घर से हत्या में इस्तेमाल चाकू, खून से सनी शर्ट, ताबीज, स्कूल के जूतेमोजे और स्कूल बैग बरामद कर लिया. पूछताछ के बाद आदर्श सिंह अपहरण और हत्याकांड की सनसनीखेज कहानी इस तरह सामने आई—

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के सिकरीगंज थाने के बारीगांव के रहने वाले जयप्रकाश के 3 बेटे थे, जिन में 11 वर्षीय आदर्श कुमार सिंह मंझले नंबर का था. आदर्श पढ़ाई में बहुत होशियार था. जयप्रकाश सिंह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे. उन के वेतन से परिवार का भरणपोषण होता था.

जयप्रकाश अपनी सैलरी के सारे पैसे पत्नी के हाथों पर रख देते थे. आदर्श अकसर पिता द्वारा मां को पैसे देते देखता था. पैसे देख कर उस के बालमन को लगता था कि उस के पिता की महीने की कमाई लाखों रुपए है. उस के पापा के पास बहुत सारा पैसा है.

यह बात आदर्श अकसर बाहर वालों को बता भी देता था कि उस के पापा के पास बहुत सारा पैसा है. वह पैसे घर की अलमारी में रखते हैं.

यह बात आदर्श के पड़ोस में रहने वाली 80 वर्षीय विधवा चांदमती देवी के 30 वर्षीय भतीजे मुकेश पांडेय ने भी सुन ली थी. उस ने मासूम आदर्श के मुंह से जब से रुपए वाली बात सुनी थी, उस दिन से उस के दिमाग में शैतानी कीड़े कुलबुलाने लगे थे.

चूंकि मुकेश अपनी बुआ चांदमती के यहां अकसर आता रहता था, इसलिए गांव वाले उसे अच्छी तरह जानते और पहचानते थे. जयप्रकाश सिंह के यहां भी मुकेश का आनाजाना लगा रहता था. वह मोबाइल चार्ज करने के बहाने जयप्रकाश सिंह के घर आता था और घंटों बैठा रहता था.

धीरेधीरे उस ने आदर्श की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया. मुकेश आदर्श को अपने फोन में कार्टून फिल्म दिखाता था. आदर्श चूंकि बच्चा था, इसलिए वह उस की बातों में फंसता गया.

30 वर्षीय मुकेश पांडेय मूलरूप से बिहार के गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के बड़का गांव का रहने वाला था. वह पढ़ालिखा और परिश्रमी युवक था. पढ़लिख कर उस ने सरकारी नौकरी पाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली थी.

मुकेश कुछ ऐसा करना चाहता था जिस से कम मेहनत और कम समय में वह लखपति बन जाए. वह जिस गांव में रहता था, उस गांव में कम ही लोगों के घरों में शौचालय थे. सरकार गांवों में शौचालय बनवाने के लिए गांव वालों को प्रोत्साहन राशि मुहैया कराती थी.

मुकेश के दिमाग में आया कि क्यों न वह सरकारी योजनाओं का लाभ उठाए, जिस से गांव वालों को भी लाभ पहुंचे और उस की भी जेब गरम होती रहे. मुकेश ने सरकार से मिलने वाली योजनाओं का लाभ गांव वालों को समझाया कि शौचालय बनवाने के लिए कुछ पैसे सरकार उन्हें दे रही है और कुछ पैसे उन्हें अपने पास से लगाने होंगे. तब जा कर एक बेहतर शौचालय बन सकता है.

मुकेश ने गांव वालों को इस शातिराना अंदाज से बातों में फंसाया कि वे उस के झांसे में आ गए. करीब 20-25 लोगों ने उसे 10-10 हजार रुपए इकट्ठा कर के दे दिए. इस तरह उस के पास जब ढाई लाख रुपए जमा हो गए तो वह गांव से गायब हो गया. महीनों बीत गए, न तो मुकेश का पता चला और न ही उन के शौचालय बने.

गांव वालों को अपने साथ धोखे का अहसास हुआ तो वे मुकेश के घर वालों पर रुपए लौटाने के लिए दबाव बनाने लगे. मुकेश ने सारे पैसे खर्च कर डाले थे. उस के पास फूटी कौड़ी तक नहीं बची थी. तब वह बिहार से भाग कर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की सिकरीगंज थाने के बारीगांव में अपनी बुआ चांदमती के यहां जा कर छिप गया.

उधर गांव वाले रुपए को ले कर उस के घर वालों पर जबरदस्त दबाव बनाए हुए थे. मुकेश का दिमाग काम नहीं कर रहा था कि वह दो ढाई लाख रुपयों का इंतजाम कहां से करे. उसे डर था कि अगर उस ने उन के रुपए वापस नहीं किए तो वह उस पर मुकदमा कर देंगे. इस से मुकेश डर गया. वह नहीं चाहता था कि उस पर पुलिस केस हो. पुलिस केस हो जाने से उस का जीवन बरबाद हो सकता था.

इसी बीच उस की मुलाकात गांव के जयप्रकाश सिंह के बेटे आदर्श से हो गई. आदर्श ने बताया कि उस के पिता के पास लाखों रुपए हैं. आदर्श को ले कर मुकेश के दिमाग में एक खतरनाक योजना यह पनपी कि यदि आदर्श का अपहरण कर लिया जाए तो फिरौती के तौर पर उसे 10-20 लाख रुपए आसानी से मिल सकते हैं.

वह उन्हीं रुपयों से गांव वालों के रुपए लौटा देगा और बाकी के रुपयों से ऐश करेगा. यह बात दिमाग में आते ही उस के चेहरे पर शैतानी मुसकान थिरक उठी.

यह काम मुकेश के अकेले के वश का नहीं था. इत्तफाक से उन्हीं दिनों चांदमती की बेटी का बेटा यानी उन का नाती गौतम पांडेय अपनी ननिहाल में रहने के लिए आया. मुकेश और गौतम रिश्ते में मामाभांजे थे. मुकेश ने रुपए का लालच दे कर भांजे गौतम को अपनी योजना में शामिल कर लिया.

योजना के मुताबिक, मुकेश फोन चार्ज करने के बहाने जयप्रकाश सिंह के घर जाया करता था और आदर्श को मोबाइल पर कार्टून फिल्म दिखा कर उस से घर का सारा भेद ले लेता था. भावावेश में आ कर मासूम आदर्श घर की सारी जानकारी मुकेश को दे देता था. जानकारी पाने के बाद मुकेश ने अपनी योजना गौतम को बताई.

योजना के अनुसार आदर्श का अपहरण करने के बाद उसी दिन उस की हत्या कर देनी थी. उस के बाद उस के कपड़े, बैग, जूते आदि को हथियार बना कर आदर्श को जिंदा बताया जाता. फिर उस के पिता जयप्रकाश से 15 लाख की फिरौती वसूली जाती. यह योजना गौतम को जंच गई. यह 4 अक्तूबर, 2018 की बात है.

योजना के अनुसार 4 अक्तूबर की शाम आदर्श के स्कूल से आने की प्रतीक्षा में मुकेश और गौतम गांव के बाहर पुलिया के पास खड़े हो गए. आदर्श को अकेला आता देख कर दोनों के चेहरे पर शातिराना मुसकान थिरक उठी.

जैसे ही आदर्श पुलिया के पास पहुंचा मुकेश ने मोबाइल फोन दिखा कर उसे अपनी बातों में उलझा लिया और पुलिया से ही उसे दूसरी ओर ले कर चल दिया. गौतम भी उस के साथ था. गांव के एक युवक ने आदर्श को मुकेश और गौतम के साथ जाते हुए देख लिया था. उसी ने पुलिस को यह जानकारी दी थी.

गौतम और मुकेश आदर्श को अपनी बातों के जाल में उलझा कर शाम ढलने की प्रतीक्षा कर रहे थे. शाम ढलते ही दोनों आदर्श को ले कर रामपाल के धान के खेत में पहुंचे. खेत में पहुंचते ही मुकेश ने आदर्श का गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. फिर चाकू से उस का गला रेत दिया ताकि वह जीवित न बचे. क्योंकि उस के जीवित रहने से उन्हें जेल की हवा खानी पड़ती.

आदर्श की हत्या के बाद मुकेश और गौतम ने उस के कपड़े, जूते, बैग और गले में पहना ताबीज अपने पास रख लिया ताकि वह जयप्रकाश सिंह को यह विश्वास दिला सकें कि उन का बेटा जिंदा है, जिस से फिरौती की रकम आसानी से वसूली जा सके.

मुकेश और गौतम चांदमती के जिस कमरे में रह रहे थे, उसी में उन्होंने आदर्श का सामान छिपा कर रख दिया. जब आदर्श की खोज तेज हुई और मामला पुलिस तक पहुंचा तो दोनों डर गए और गांव छोड़ कर भाग गए.

लेकिन एक चश्मदीद गवाह ने मुकेश के इरादों पर पानी फेर दिया और वे दोनों जा पहुंचे जेल. कथा लिखे जाने तक दोनों जेल में बंद थे. पुलिस अदालत में दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित