प्यार का खौफनाक जुनून : रूपिंदर बनी अपनों की कातिल

उस दिन शाम को सुखविंदर सिंह कुलवंत सिंह के घर पहुंचा तो अजीब नजारा देखने को मिला. मकान का दरवाजा खुला था लेकिन अंदर किसी प्रकार की रोशनी नहीं थी. सुखविंदर हैरत में पड़ गया कि आखिर ऐसा क्यों है. वह दरवाजे से अंदर घुसा तो अंधेरे में  उसे रूपिंदर कौर चहलकदमी करती दिखाई दी, वह काफी बेचैन दिख रही थी. रूपिंदर कुलवंत सिंह की पत्नी थी.

रूपिंदर ने दरवाजे पर खड़े सुखविंदर को देख भी लिया था. इस के बावजूद उस ने चहलकदमी करनी बंद नहीं की. न जाने वह किस उधेड़बुन में लगी थी, जिस कारण टहलती रही.

सुखविंदर बराबर कुलवंत के घर आताजाता रहता था. कौन सी चीज कहां है, वह बखूबी जानता था. उस ने दरवाजे के पास लगे स्विच बोर्ड से स्विच औन कर दिया. तुरंत ही कमरा रोशनी से जगमगा उठा.

सुखविंदर रूपिंदर कौर के चेहरे पर नजरें जमा कर बोला, ‘‘भाभी, बडे़बुजुर्ग कहते हैं कि जब दिनरात मिल रहे हों, तब घर में अंधेरा नहीं रखना चाहिए, अपशकुन होता है.’’

रूपिंदर के मुंह से आह निकली, ‘‘जिस के जीवन में अंधेरा हो, उस के घर में अंधेरा क्या और शकुनअपशकुन क्या.’’

‘‘आज बड़ी दिलजली बातें कर रही हो. पूरा मोहल्ला जगमगा रहा है और तुम अंधेरा किए टहल रही हो. बात क्या है भाभी?’’ वह बोला.

‘‘कुछ नहीं बस यूं ही.’’ रूपिंदर कौर ने जवाब दिया.

‘‘टालो मत,’’ सुखविंदर ने रूपिंदर का हाथ पकड़ लिया, ‘‘बताओ न भाभी, क्या बात है?’’

प्रेम व अपनत्व से बोले गए शब्द बहुत गहरा असर करते हैं. रूपिंदर कौर पर भी असर हुआ. उस की आंखों से आंसुओं की झड़ी लग गई. सुखविंदर विवाहित था, इसलिए उसे औरतों का मन पढ़ना और समझना आता था.

वह जानता था कि कोई भी औरत पराए मर्द के सामने तभी आंसू बहाती है, जब वह अंदर से बहुत भरी होती है. उस की भड़ास का प्रमुख कारण पति सुख से वंचित होना भी होता है.

सुखविंदर ने हाथ में लिया हुआ रूपिंदर का हाथ आहिस्ता से दबाया, ‘‘बताओ न भाभी, तुम्हें कौन सा दुख है. संभव हुआ तो मैं तुम्हारे जीवन में खुशियां भरने की कोशिश करूंगा.’’

सुखविंदर के हाथों से हाथ छुड़ा कर रूपिंदर कौर ने दुपट्टे के पल्लू से अपने आंसू पोंछे, फिर धीरे से बोली, ‘‘मेरे नसीब में पति का प्यार नहीं है. यही एक दुख है, जो मुझे जलाता रहता है.’’

सुखविंदर चौंका, ‘‘यह क्या कह रही हो भाभी?’’

‘‘हां, सही कह रही हूं सुखविंदर.’’

‘‘अगर कुलवंत सिंह तुम को प्यार नहीं करता तो 2 बेटे कैसे हो गए.’’

‘‘वह तो मिलन का नतीजा है और एक बात बताऊं कि बच्चे तो जानवर भी पैदा करते हैं. औरत सिर्फ प्यार की भूखी होती है. उसे पति से प्यार न मिले तो उसे अपनी जिंदगी खराब लगने लगती है.’’

सुखविंदर आश्चर्य से रूपिंदर कौर का मुंह ताकता रह गया. उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि रूपिंदर मन की बात इस तरह खुल्लमखुल्ला कह सकती है.

सुखविंदर के मनोभावों से बेखबर रूपिंदर अपनी धुन में बोलती रही, ‘‘सैक्स और प्यार में अंतर होता है. खाना, कपड़ा देने और सैक्स करने से औरत के तकाजे पूरे नहीं होते. कोई दिल से चाहता है, खयाल रखता है, तब औरत पूरी तरह से खुश रहती है.’’

सुखविंदर सोचने लगा कि रूपिंदर की बात में दम है. मात्र खाना, कपड़ा, सुहाग की निशानियां और सैक्स ही औरत के लिए सब कुछ नहीं होता. दिल और रूह को छू लेने वाला प्यार भी उसे चाहिए होता है. दिल ठंडा होता है और रूह सुकून पाती है, तब कहीं औरत के प्यार की प्यास बुझती है.

सुखविंदर समझ नहीं पा रहा था कि वह इस सिलसिले में क्या कहे. रूपिंदर का मामला सुखविंदर के अधिकार क्षेत्र से बाहर था. इसलिए उस ने इस मामले में चुप रहना उचित समझा. लेकिन रूपिंदर चुप रहने वाली नहीं थी. जिस मुद्दे को उठा कर उस ने बात शुरू की थी, वह उसे अंजाम तक पहुंचाना चाहती थी.

कुछ देर तक रूपिंदर सुखविंदर का हैरानपरेशान चेहरा ताकती रही. फिर उसी अंदाज में उस का हाथ पकड़ लिया, जिस तरह सुखविंदर ने उस का हाथ पकड़ा था, ‘‘तुम मेरी परेशानियां दूर कर के जिंदगी खुशियों से भरने की बात कह रहे थे, मुझे तुम्हारा प्रस्ताव मंजूर है.’’

सुखविंदर ने रूपिंदर कौर के हाथों से अपना हाथ खींच लिया, ‘‘भाभी, वो तो मैं ने ऐसे ही बोल दिया था.’’

‘‘ऐसे ही नहीं बोले थे,’’ रूपिंदर ने फिर उस का हाथ पकड़ लिया, ‘‘मैं जानती हूं तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार है. उसी प्यार के नाते तुम ने मेरे जीवन को खुशियों से भरने की बात कही. जो कहा है उसे पूरा करो.’’

‘‘भाभी, जो तुम चाहती हो, मुझ से नहीं होगा.’’ वह बोला.

‘‘तुम्हारा यह सोचना गलत है कि मैं तुम से सैक्स संबंध चाहती हूं.’’ रूपिंदर सुखविंदर की आंखों में आंखें डाल कर बोली, ‘‘पति मुझे यह सब तो देता है, लेकिन मुझे प्यार नहीं करता.’’

सुखविंदर उलझने लगा, ‘‘तो मैं क्या करूं?’’

‘‘क्या तुम मुझे प्यार भी नहीं दे सकते,’’ रूपिंदर उस की आंखों में देखते हुए मुसकराई, ‘‘शब्दों से मेरे मर्म को स्पर्श करो. आमनेसामने बात करने में शर्म आए तो फोन पर बात कर लिया करो. अपनी भाभी से बातें करने में तुम्हें किसी किस्म का ऐतराज नहीं होना चाहिए.’’

सुखविंदर से कुछ कहते नहीं बना. रूपिंदर कौर के सामने खड़ा रहना उस ने मुनासिब नहीं समझा. उस से बिना कुछ बोले वह बाहर  निकला, बाहर खड़ी बाइक पर सवार हुआ और वहां से चला गया.

दरवाजे पर आ खड़ी रूपिंदर कौर के चेहरे पर कुटिल मुसकान थी. मर्द पर औरत का वार कभी खाली नहीं जाता. प्यार का जाल फेंकना रूपिंदर कौर का काम था, वह उस ने कर दिया. अब आगे का काम सुखविंदर को करना था.

पंजाब के गुरदासपुर जिले के काहनूवान थाना क्षेत्र के बलवंडा गांव में रहते थे कुलवंत सिंह. वह सेना में थे. सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने पुणे की एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली थी.

उन के परिवार में पत्नी रूपिंदर कौर और 2 बेटे रणदीप उर्फ बौबी (26) और करणदीप (24) थे. रणदीप की शादी हो चुकी थी. उस की पत्नी कनाडा में रहती थी. रणदीप पास के ही एक पैट्रोल पंप पर काम करता था. करणदीप सेना में नौकरी करता था.

45 वर्ष की उम्र हो गई थी रूपिंदर की, 2-2 जवान बेटे थे. लेकिन उस के शरीर की आग इस उम्र में भी भभक रही थी. रूपिंदर स्वभाव की अच्छी नहीं थी. वह काफी स्वार्थी और महत्त्वाकांक्षी औरत थी. उसे सिर्फ अपना सुख प्यारा था, न उसे अपने पति की चिंता होती थी और न ही अपने बेटों की.

कुलवंत जब तक सेना में था तो वहीं रहता था, कभीकभी घर आता था. जब रिटायर हो कर घर आया तो उस का घर में रहना मुश्किल होने लगा. दिन भर रूपिंदर के तरहतरह के ताने, लड़ाईझगड़ा तक उसे झेलना पड़ता.

सैक्स की भूखी रूपिंदर को हर रोज ही बिस्तर पर पति का सुख चाहिए होता था. इस सब से आजिज आ कर ही कुलवंत पुणे चला गया था और वहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा था.

घर पर अकेली ही रहती थी रूपिंदर कौर. बेटा रणदीप रात में ही घर आता था. ऐसे में रूपिंदर का समय काटे नहीं कटता था. पति के अपने से दूर चले जाने के बाद रूपिंदर कौर पति सुख से भी वंचित थी. ऐसे में रूपिंदर ने भी वही करने की ठान ली जो उस जैसी औरतें ऐसे हालात में करती हैं यानी अपने सुख के साथी की तलाश.

रूपिंदर की जानपहचान चक्कशरीफ में रहने वाले सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खा से थी. वह उस के पति का दोस्त था. सुखविंदर उस से मिलने उस के घर आयाजाया करता था.

एक दिन रूपिंदर कौर अपने सुख के साथी के बारे में सोच रही थी कि कौन हो कैसा हो तो अचानक ही उस के जेहन में सुखविंदर का चेहरा कौंध गया. बस, उस के बाद रूपिंदर कौर सुखविंदर को नजदीक जाने की योजना बनाने लगी.

उस शाम वह कमरे में चहलकदमी करते हुए सुखविंदर को अपने जाल में फांसने की सोच रही थी. यही सोचतेसोचते कब अंधेरा हो गया, उसे पता ही नहीं चला. संयोग से तभी सुखविंदर भी आ गया.

उसे देखते ही जिस आइडिया के लिए रूपिंदर कौर कई दिन से परेशान थी, वह एकदम से उस के दिमाग में आ गया. उस के बाद रूपिंदर कौर ने ऐसा प्रपंच रचा कि सुखविंदर उस में फंस गया.

सुखविंदर आपराधिक प्रवृत्ति का था. पठानकोट में उस के खिलाफ लूट के कई मामले दर्ज थे. एक मामले में वह कुछ दिन पहले ही जेल से छूट कर आया था. रूपिंदर कौर क्या चाहती है, क्यों उसे अपने जाल में फांस रही है, यह बात वह बखूबी जान रहा था.

शिकारी रूपिंदर को लग रहा था कि सुखविंदर को अपनी बातों के जाल में फंसा कर उसे अपना शिकार बना लेगी. मगर सुखविंदर खुद ही बड़ा शिकारी था.

उसे तो खुद रूपिंदर का शिकार होने में मजा आ रहा था. वह अपनी मरजी से रूपिंदर का शिकार बन रहा था. उस की बातों व हरकतों का मजा ले रहा था. आखिर इस में फायदा तो उसी का था. रूपिंदर को इस बात का आभास तक नहीं था.

सुखविंदर रूपिंदर की बातों को सोचसोच कर बारबार मुसकराता. उस की आंखों के सामने रूपिंदर कौर का रूप चलचित्र की भांति घूमने लगता. ऐसे में सुखविंदर भी रूपिंदर के रूप का प्यासा बन बैठा.

अब जब भी रूपिंदर के घर जाता तो उसे प्यासी नजरों से निहारता रहता. दिखाने के लिए रूपिंदर की चाहत का मान रखते हुए उस से प्रेम भरी बातें करता. उन प्रेम भरी बातों में पड़ कर रूपिंदर उस से सट कर बैठ जाती.

वह कभी उस के कंधे पर सिर रख कर उस से बातें करती तो कभी उस के सीने पर अपना सिर रख देती और कान से उस के दिल की धड़कनों को सुनती रहती. तेज धड़कनों का एहसास होते ही वह मंदमंद मुसकराने लगती.

एक दिन ऐसे ही सुखविंदर के सीने से अपना सिर लगा कर रूपिंदर बैठी थी. उस की चाहतें उसे कमजोर बनाने लगीं. काफी समय से वह अपनी चाहत को पूरा करने का इंतजार कर रही थी.

अब जब एक पल का इंतजार भी बरदाश्त नहीं हुआ तो उस ने सुखविंदर के होंठों को चूम लिया. सुखविंदर भी इसी मौके की तलाश में था. उस ने भी रूपिंदर को अपनी बांहों में भर लिया.

उस के बाद उन के बीच शारीरिक रिश्ता कायम हो गया. रूपिंदर ने अपनी चाहत को अंजाम तक पहुंचाया. इस के बाद उन के बीच यह रोज का सिलसिला बन गया.

23 मई, 2021 को गांव झंडा लुबाना के डे्रन के पास एक अधजली लाश पड़ी थी. वहीं पास में ही झंडा लुबाना गांव निवासी गुरुद्वारा साहिब कमेटी के प्रधान त्रिलोचन सिंह का खेत था. वह खेत में पानी लगाने के लिए आए, वहां उन्होंने एक युवक की अधजली लाश पड़ी देखी. उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को इस की सूचना दे दी.

घटनास्थल काहनूवान थाना क्षेत्र में आता था, इसलिए घटना की सूचना काहनूवान थाने को दे दी गई.

सूचना मिलने पर थानाप्रभारी सुरिंदर पाल सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. एसएसपी डा. नानक सिंह व अन्य पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए.

लाश पूरी तरह नहीं जली थी. देखने में वह किसी 25 से 28 साल के युवक की लाश लग रही थी. जिस जगह लाश पड़ी थी, उसे देखने पर अनुमान लगाया गया कि हत्यारों ने लाश को वहीं जलाया था. उस जगह पर जलाए जाने के निशान मौजूद थे.

आसपास के लोगों को बुला कर लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन शिनाख्त न हो सकी. शिनाख्त न होने पर लाश के कई कोणों से फोटो खिंचवाने और जरूरी काररवाई करने के बाद थानाप्रभारी सुरिंदर पाल ने लाश सिविल अस्पताल में रखवा दी. उस के बाद थाने वापस आ गए.

इस बीच उन्हें पता चला कि बलवंडा गांव का युवक रणदीप सिंह लापता है. इस पर थानाप्रभारी रणदीप सिंह के घर गए. वहां उस की मां रूपिंदर कौर मिली.

उन्होंने रूपिंदर कौर को बताया कि डे्रन के पास एक अधजली लाश मिली है. उस की शिनाख्त होनी है, हो सकता है वह उन के बेटे की हो.

रूपिंदर कौर ने उन के साथ अस्पताल जा कर लाश को देखा. देखने के बाद रूपिंदर कौर ने लाश अपने बेटे की होने से साफ इनकार कर दिया.

फिलहाल लाश का पोस्टमार्टम कराया गया तो पता चला कि मृतक के एक पैर में रौड पड़ी हुई है. थानाप्रभारी सुरिंदर पाल ने पता किया तो पता चला कि रणदीप के पैर में भी रौड पड़ी हुई थी. इस का मतलब यह था कि लाश रणदीप की ही है.

रणदीप की लाश को उस की मां रूपिंदर कौर ने पहचानने से क्यों इनकार कर दिया. इस का जवाब रूपिंदर ही दे सकती थी. वैसे भी इस स्थिति में थानाप्रभारी सुरिंदर पाल का शक रूपिंदर कौर पर बढ़ गया कि हो न हो इस घटना में रूपिंदर कौर का ही हाथ हो सकता है.

इस के बाद रूपिंदर कौर को हिरासत में ले लिया गया. पहले तो वह पुलिस को गुमराह करती रही, पर जब सख्ती की गई तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया.

घटना में उस का प्रेमी सुखविंदर उर्फ सुक्खा और सुक्खा का दोस्त गुरजीत सिंह उर्फ महिकी भी शामिल था. तत्काल उन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

जांच में पता चला कि रूपिंदर कौर और सुखविंदर सिंह के अवैध संबंधों के बारे में रणदीप को पता लग गया था. इसे ले कर रोज घर में कलह होने लगी. इस के बाद रूपिंदर को अपना ही बेटा दुश्मन लगने लगा. वह बेटे रणदीप से नफरत करने लगी.

रणदीप के बैंक खाते में 5 लाख रुपए थे. रणदीप अपनी पत्नी के पास कनाडा जाना चाहता था, उसी के लिए उस ने पैसे जमा कर रखे थे. शातिर रूपिंदर ने उसे बहलाफुसला कर वे रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए.

रणदीप का विरोध बढ़ता गया. इतना ही नहीं, रूपिंदर का सुखविंदर से मिलना मुश्किल होने लगा तो उस ने रणदीप को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया.

रूपिंदर ने सुखविंदर से बेटे रणदीप की हत्या करने की बात कही. सुखविंदर तो वैसे ही अपराधों में लिप्त रहने वाला इंसान था, इसलिए वह तुरंत तैयार हो गया. रणदीप की हत्या करने के लिए उस ने अपने ही गांव चक्क शरीफ निवासी गुरजीत सिंह उर्फ महिकी को भी शामिल कर लिया. इस के बाद तीनों ने रणदीप की हत्या की योजना बनाई.

22 मई, 2021 की रात रूपिंदर कौर ने रणदीप के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के बाद रणदीप सो गया. गोलियों के कारण नशे की हालत में वह बेसुध था. सुखविंदर तय समय के हिसाब से दोस्त गुरजीत के साथ रूपिंदर के घर पहुंच गया.

तीनों ने मिल कर चाकू और हथौड़ी से वार कर के रणदीप को मौत के घाट उतार दिया. फिर आधी रात को रणदीप की लाश गांव झंडा लुबाना के डे्रन के पास ले जा कर डाल दी और पैट्रोल डाल कर आग लगा दी. फिर वहां से वापस अपने घरों को लौट गए. लेकिन लाश पूरी तरह जल नहीं पाई.

तीनों का गुनाह छिप न सका और पकड़े गए. पुलिस ने उन के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का मुकदमा दर्ज कर दिया. तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

बेवफा बीवी : पति ने किया पत्नी पर वार

30 वर्षीय राहुल गोकुल प्रतापे मूलरूप से महाराष्ट्र में उस्मानाबाद जनपद के घारगांव तालुका पंडारा का रहने वाला था. वह पुणे की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड था. वह पुणे की ही मालवाड़ी चाली में अपने परिवार के साथ किराए पर रहता था.

उस के परिवार में मांबाप, भाईभाभी के अलावा एक बहन थी. परिवार खुश था. घर में अगर किसी बात की चिंता थी तो बस राहुल की शादी की. उस की बढ़ती उम्र को देखते हुए उस के मातापिता ने उस के योग्य लड़की की तलाश शुरू कर दी थी.

उन्होंने अपने नातेरिश्तेदारों में जब राहुल की शादी की बात चलाई तो एक रिश्तेदार ने उन्हें सोलापुर जिले के बारशी लहू चौक सुभाष नगर निवासी संतोष काकंडे की बेटी गौरी का नाम सुझाया था.

परिवार वालों को गौरी पसंद आ गई थी. गौरी के मांबाप का देहांत हो चुका था. वह अपने दादादादी शिवगंगा और अपनी सौतेली मां मनीषा व सौतेले भाई के साथ रहती थी. बिना मांबाप की लड़की की देख दिखाई की सारी रस्में उस के परिवार और नातेरिश्तेदारों ने मिल कर की थीं.

लड़कालड़की के पसंद और मुंहदिखाई की रस्म पूरी होने के बाद 28 अप्रैल, 2017 को रिश्तेदारों और परिवार वालों के साथ मिल कर बालाजी मंदिर में साधारण तरीके से उन दोनों का विवाह हो गया था.

गौरी जैसी सुंदर पत्नी पा कर जहां राहुल खुश था, वहीं परिवार वालों ने भी गौरी को आदरसत्कार और प्यार, मानसम्मान दिया था.

समय अपनी गति से चल रहा था. परिवार में किसी तरह का तनाव नहीं था, सब अपनाअपना काम मिलजुल कर किया करते थे. जिस किराए के मकान में वे रहते थे, वहां के लोगों की भी कुछ समय तक उन से पूरीपूरी सहानुभूति थी.

पूरा परिवार मिलजुल कर रहता था. मकान के किराए से ले कर पूरे परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी गौरी और राहुल के कंधों पर थी. कभी भी किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं था. शादी के 4 साल कब और कैसे बीत गए, इस का उन्हें एहसास नहीं हुआ.

मगर 2021 का साल उन के लिए सुखद नहीं रहा. उन के सुखी जीवन में एक आंधी आई, जिस ने उन का पूरा दांपत्य जीवन तहसनहस कर दिया था.

5 मई, 2021 को गौरी 15 दिनों के लिए अपनी मौसेरी बहन के यहां घूमने गई. वहां से वापस आने के बाद उस का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था. अब वह सीधीसादी गौरी नहीं बल्कि स्मार्ट और तेजतर्रार बन गई थी.

वह जब से अपनी मौसेरी बहन के घर से लौट कर आई थी, तब से उस का एक नया शौक सामने आया था. वह अपना सारा समय मोबाइल पर बिताती थी. घर के किसी भी काम में उस का मन नहीं लगता था. उसे अपने मोबाइल के आगे खानेपीने का भी ध्यान नहीं रहता था.

धीरेधीरे घर का माहौल बिगड़ने लगा था. राहुल अपनी ड्यूटी पर अगर शाम को जाता तो दूसरे दिन सुबह लौटता और जब सुबह जाता था तो शाम को रात 8 बजे घर लौटता था. इस बीच गौरी अपना सारा समय मोबाइल फोन से चिपक कर बिताती थी.

पहले तो परिवार वालों को लगा कि गौरी शायद अपने पति राहुल के साथ टाइम पास करती है. लेकिन जब शक गहराया तो राहुल की बहन ने उस से पूछ लिया, ‘‘भाई, तुम और भाभी सारीसारी रात क्या बातें करते हो?’’

पहले तो राहुल ने इसे मजाक समझा और कहा, ‘‘कैसी बातें करती है पगली, मैं जब ड्यूटी पर रहता हूं, तो फिर मुझे किसी से बात करने का मौका कहां मिलता है.’’

‘‘क्यों झूठ बोलते हो भाई,’’ बहन ने कहा, ‘‘भाभी तो अकसर रात भर मोबाइल फोन से चिपकी रहती हैं. पता नहीं क्याक्या बातें करती हैं. अगर वह तुम से बात नहीं करती हैं तो फिर किस से करती हैं?’’ उस ने पूछा.

इधर कई दिनों से गौरी के बदले व्यवहार और बहन की बातों से राहुल ने ध्यान दिया तो उस का भी माथा ठनका.

7 जून, 2021 के दिन राहुल जब अपनी नाइट ड्यूटी पर गया, तो इस बात की सच्चाई जानने के लिए उस रात एक बजे से ले कर 4 बजे के बीच उस ने कई बार गौरी को फोन लगाया. लेकिन हर बार उस का फोन व्यस्त बता रहा था. इस का कारण यह था कि गौरी ने राहुल के फोन को ब्लैक लिस्ट कर दिया था. उस समय राहुल को गुस्सा तो बहुत आया था, लेकिन उस ने किसी तरह अपने गुस्से को काबू किया.

8 जून, 2021 को राहुल अपनी ड्यूटी से घर जल्दी आया तो गौरी को बैड पर चादर ताने लेटा पाया. उस ने जब गौरी के ऊपर से झटके में चादर खींची तो यह देख कर दंग रह गया कि गौरी का फोन उस के कान के नीचे था. राहुल ने फोन उठा कर जब कान से लगाया तो उस तरफ से किसी पुरुष की आवाज आ रही थी.

राहुल ने जब पूछा कि आप कौन बोल रहे हो, तो फोन कट गया था. राहुल ने जब वापस फोन लगाया तो उस का फोन स्विच्ड औफ बताने लगा था. इस से नाराज राहुल ने गौरी को आड़ेहाथों लिया.

‘‘वह आदमी कौन था जिस से तुम बातें कर रही थी?’’ कई बार पूछने पर जब गौरी ने अपना मुंह नहीं खोला तो राहुल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

वह अपने आप को संभाल नहीं सका और गौरी को कई थप्पड़ जड़ दिए. बात आगे न बढ़े इसलिए घर वालों ने उस समय राहुल को समझाबुझा कर मामला शांत करवा दिया था.

उस दिन तो राहुल शांत हो गया था. लेकिन अब इस मामले को ले कर उस का मन अशांत रहने लगा था. उस ने गौरी के मायके वालों को फोन कर उन्हें सारी बातें बताईं और कहा कि उस का किसी के साथ चक्कर चल रहा है. इस विषय में वह उसे कुछ बता नहीं रही है अच्छा होगा कि आप लोग ही उस से बात करें.

दूसरे दिन राहुल गौरी को बस से ले कर उस के मायके के लिए रवाना हो गया था. इस बीच राहुल ने जब गौरी का फोन ले कर उस के वाट्सऐप मैसेज देखे तो उस में कई चौंका देने वाले मैसेज मिले.

उस मेंअंजान नंबर से कई लव मैसेज आए हुए थे. राहुल ने जब उस नंबर को ट्रूकालर पर जा कर चैक किया तो उस के होश उड़ गए थे. वे सभी लव मैसेज किसी गणेश नाम के व्यक्ति ने किए थे.

उस में कुछ मैसेज तो ऐसे थे, जो काफी अश्लील थे. अब उसे यकीन हो गया कि गौरी भरोसे लायक नहीं है. यानी उस का गणेश से गहरा संबंध है.

उस समय तो वह पत्नी की बेवफाई से खून का घूंट पी कर रह गया था. लेकिन ससुराल पहुंचने के बाद उस का गुस्सा गौरी पर फूट पड़ा था. उस ने गणेश और गौरी के सारे मैसेज उस के मायके वालों के सामने रख दिए और उस पर गणेश को ले कर दबाव डाला. लेकिन गौरी गणेश को ले कर टस से मस नहीं हुई.

इस के बाद मायके वालों ने जब गौरी को समझाबुझा कर वापस पुणे जाने के लिए कहा तो वह इस के लिए तैयार नहीं हुई. उस ने साफ शब्दों में कह दिया कि अब वह राहुल के साथ नहीं रहेगी और न वापस पुणे जाएगी. अब वह अकेली रहेगी.

उस की बात सुन कर मायके वाले सन्न रह गए थे. परिवार और नातेरिश्तेदारों ने गौरी को काफी समझायाबुझाया, लेकिन वह अपनी बात पर अड़ी रही. गौरी के इस व्यवहार से नाराज राहुल ने उसे उस के मायके वालों के हवाले किया और वापस पुणे चला आया.

गौरी मायके में रह कर वही हरकतें किया करती थी, जो अपनी ससुराल में रह कर करती थी. घर का सारा कामकाज छोड़ कर के सारी रात, सारा दिन मोबाइल से चिपकी रहती थी. कुछ दिन निकल जाने के बाद अचानक ही बिना किसी को कुछ बताए बताए घर से गायब हो गई. तब घर वाले घबरा गए थे.

अपने नातेरिश्तेदारों और जानपहचान वालों के यहां उस की तलाश करने के बाद घर वालों ने वारसी पुलिस स्टेशन में जा कर उस की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवा दी. शिकायत दर्ज कराने के 15 दिनों बाद वह खुद ही वापस अपने घर आ गई. और घर वालों को यह विश्वास दिलाया कि वह अपनी एक सहेली के घर पर थी.

21 जुलाई, 2021 को गौरी के घर वालों के बुलाने पर राहुल गौरी के मायके गया और उस के घर वालों के समझानेबुझाने पर गौरी को वापस पुणे अपने घर ले जाने के लिए तैयार हुआ. उसे यह बताया गया था कि अब गौरी के रहनसहन में बदलाव आ गया है.

मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ था. गौरी के स्वभाव में कोई फर्क नहीं आया था. पुणे आते ही अगले दिन उस ने सारा घर अपने सिर पर उठा लिया.

गौरी को अपने और उस के परिवार वालों के दबाव में आ कर राहुल साथ रखने के लिए तैयार तो हो गया था, लेकिन अपनी मन:स्थिति से समझौता नहीं कर पाया था. वह न तो ठीक से अपने काम पर जा रहा था, और न ही ठीक से खानापीना कर रहा था.

मगर गौरी पर इस से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था. वह मौका पाते ही राहुल से उलझ पड़ती थी और बारबार उस पर अपने मायके छोड़ आने का दबाव डालती थी, लेकिन राहुल इस के लिए तैयार नहीं था.

वह दोनों परिवारों को बदनामी से बचाने के लिए गौरी को समझाने की पूरी कोशिश करता था, पर गौरी समझने के लिए तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि अगर 15 अगस्त, 2021 के पहले उसे उस के मायके नहीं छोड़ा तो नतीजा ठीक नहीं होगा.

रोजरोज के गौरी के झगड़े से राहुल और उस का परिवार तंग आ चुका था. क्या करें क्या न करें, यह उन की समझ में नहीं आ रहा था.

17 अगस्त, 2021 को हद तो तब हो गई, जब गौरी ने सारी मर्यादा को ताख पर रख दी. उस दिन गौरी ने घर में महाभारत शुरू की तो पूरे दिन चलती रही. राहुल और उस के घर वालों ने गौरी को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उस का ड्रामा बंद नहीं हुआ.

उस का कहना था कि अगर उस ने उसे मायके नहीं भेजा तो वह लड़कों को बुला कर के राहुल की हत्या करवा देगी.

इस तरह की धमकी से राहुल का मूड इतना खराब हुआ कि उस ने उसी समय गौरी की बुरी तरह पिटाई कर दी. लेकिन गौरी पर इस का कोई फर्क  नहीं पड़ा.

गौरी ने इस पर कुछ इस तरह हंगामा खड़ा किया कि आसपड़ोस वालों के होश उड़ गए. उन्होंने गौरी के घर आ कर उसे समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन गौरी ने उन की एक भी नहीं सुनी. उलटा वह उन लोगों से भी उलझ पड़ी थी, ‘‘यह हमारे घर का मामला है, आप लोगों से कोई मतलब नहीं है.’’

‘‘आप लोगों के घर का मामला है तो इसे शांति से सुलझाइए. शोर मचा कर हम लोगों का चैन क्यों हराम कर रखा है?’’ पड़ोसियों ने कहा.

‘‘हम ऐसे ही रहेंगे, तुम लोगों को जो करना है वह कर लो.’’ गौरी ने उन्हें जवाब दिया.

गौरी की यह बात पड़ोसियों को इतनी खराब लगी कि उन्होंने मकान मालिक नवनाथ रामदास बोरगे से शिकायत कर उस परिवार से मकान खाली करवाने का दबाव बनाया.

पड़ोसियों की शिकायत पर मकान मालिक बोरगे अपना महीने का किराया लेने राहुल के घर आया तो यह कहते हुए राहुल और उस के परिवार वालों को मकान खाली करने के लिए कहा कि उन के रोजरोज के झगड़ों से और किराएदारों को काफी तकलीफ हो रही है. इसलिए वह मकान खाली कर दें.

मकान मालिक बोरगे की इस बात पर राहुल ने उन से कहा कि वह थोड़े दिन का उसे समय दें. वह कोई दूसरा मकान मिलते ही उन का मकान खाली कर देगा.

मकान मालिक महीने भर का समय दे कर चला गया. अभी तक गौरी ही उस के लिए समस्या बनी हुई थी, अब मकान ने उसे और टेंशन दे दी.

मगर गौरी को इस बात से क्या लेनादेना था वह तो सिर्फ एक ही रट लगाए बैठी थी कि उसे मायके जाना है तो जाना है.

शाम को इसी बात को ले कर गौरी ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया था. इस बार राहुल गौरी का हंगामा सुनने को तैयार नहीं था. उस ने गौरी के प्रति एक खतरनाक फैसला ले लिया था.

‘‘मैं आज तुझे तेरे मायके भेज ही दूंगा.’’ कहते हुए उस ने गौरी का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए घर से बाहर ले जा कर छोड़ दिया और कहा कि अब वह अपने मायके चली जाए.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. घर वाले समझाबुझा कर गौरी को वापस घर में ले आए थे. पर राहुल इस बार गौरी को बख्शने के मूड में नहीं था. उस ने सोच लिया कि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.

उस समय रात के यही कोई 8 बजे का समय था. गौरी और राहुल का झगड़ा चालू था. राहुल घर के एक कमरे में गया और वहां रखे हुए कोयते को ले कर बाहर आया.

उस के हाथ में कोयते को देख कर जब तक उस के घर वाले राहुल के इरादे को समझने की कोशिश करते, तब तक राहुल गौरी पर कई वार कर चुका था, जिस से गौरी की एक दर्दनाक चीख निकल कर वातावरण में खो गई थी और वह तड़पकर जमीन पर गिर गई. थोड़ी देर तक तड़पने के बाद वह शांत हो गई थी.

गौरी की हत्या करने के बाद राहुल बड़े शांत मन से हिजवाडी पुलिस थाने पहुंचा. थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत और उन के सहायक थाने आए राहुल का हुलिया देख कर स्तब्ध रह गए. उस के कपड़ों व शरीर पर पड़े खून के छींटे किसी बड़ी घटना की तरफ इशारा कर रहे थे.

थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत उस से कुछ पूछते, इस के पहले ही राहुल ने उन्हें जो कुछ बताया उसे सुन कर उन के पैरों तले की जमीन जैसे खिसक गई.

मामला काफी गंभीर और चौंका देने वाला था. थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत और उन के सहायकों ने उसे तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया था. साथ ही उन्होंने इस मामले की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

इस के बाद थानाप्रभारी अपने साथ पीआई अजय जोगदंड, एसआई समाधान कदम, एपीआई सागर काटे, हैडकांस्टेबल किरण पवार आदि को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

इस के पहले कि थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत अपने सहायकों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण करते, मामले की जानकारी पा कर के पुणे शहर आयुक्त कृष्ण प्रकाश, डीसीपी आनंद भोइट, एसीपी श्रीकांत डिसले के साथ फोरैंसिक टीम के अधिकारी भी घटनास्थल पर आ गए.

फोरैंसिक टीम का काम खत्म होने के बाद सीनियर अधिकारियों ने घटनास्थल और शव का सरसरी तौर पर निरीक्षण कर थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत को कुछ आवश्यक निर्देश दिए और अपने औफिस लौट गए.

वरिष्ठ अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत ने अपने सहायकों के साथ घटनास्थल और मृतक गौरी के शव का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि बड़ी बेरहमी से गौरी की हत्या की गई थी. चेहरे पर 7 गहरे घाव थे. घावों से इस बात का पता चल रहा था कि उस समय हत्यारे की मन:स्थिति कैसी थी.

बहरहाल, अपने सीनियर अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी बालकृष्ण सावंत ने अपने सहयोगियों के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर मृतक गौरी के शव के पास पड़े कोयते को अपने कब्जे में ले कर उसे सील कर लिया .

इस के बाद उन्होंने उस के घर वालों और पड़ोसियों के बयान लिए. शव को पोस्टमार्टम के लिए वाईसीएम अस्पताल भेजने के बाद थाने लौट आए. साथ ही साथ उस के मकान मालिक नवनाथ रामदास बोरगे को भी अपने साथ ले आए.

उस के बयान के आधार पर उन्होंने राहुल गोकुल प्रतापे के खिलाफ भादंवि की धारा 302/4 (25) मुंबई पुलिस अधिनियम 37(1), 135 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था.

विस्तार से पूछताछ करने के बाद जांच अधिकारी बालकृष्ण सावंत ने मेट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर पुणे की यरवदा जेल भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक राहुल गोकुल प्रतापे जेल की सलाखों के पीछे था.

खून में डूबी दूध की धार : माँ हुई मौत का शिकार

20 दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर मां को खाने के लिए देती थी.

उस ने बादाम छीले और मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह उन के कमरे में गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी.

मां को सोता देख कर उसे हैरानी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि हर रोज वह सब से पहले उठ जाती थीं.

मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश उड़ गए.

मां की हालत देख उस की चीख निकल गई. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी.

सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए. हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल. हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे.

हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. यह बात समझ के बाहर थी.

इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की.

पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की तरह सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे.

मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.

घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल कर के जरूरी नमूने ले कर पैक कर लिए. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी.

घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू शाही की तरफ से कोतवाली हल्द्वानी में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया गया.

केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई में फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था.

इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही उस का सहारा थी.

उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था. घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया.

पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे. उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी.

पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के जिस मां ने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक थी.

उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी की ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव है करायल जौलासाल. राजेंद्र शाही का परिवारइसी गांव में रहता था. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था.

राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी ने मन लगा कर पढ़ाई की, जिस की वजह से सभी कामयाब हो गए थे.

राजेंद्र शाही ने बहुत पहले बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के छोर पर काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने एक प्लौट और खरीद लिया था. जिसे उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था.

ममता अपनी मां के साथ रहती थी. दूसरे नंबर की बेटी मंजू की शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था.

रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. राजेंद्र शाही की चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में रहने लगी थी. जबकि पांचवें नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर बन गई थी. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था.

इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना.

हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी. इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया था. मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे.

सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने पत्नी को घर खर्च देना बंद कर दिया था. इस पर हीरा देवी ने अदालत में पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के चलते हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे, जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.

सन 2005 से राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. अपना घर होने के बावजूद राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद उन्होंने रामनगर में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था.

राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद उसे कहीं कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती गई थी.

उस की दिमागी हालत के चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की मां से नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.

गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रही.

गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली.

दिल्ली में नौकरी करने के दौरान उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों में लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी.

राहुल की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उसे नफरत पैदा हो गई थी.

अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन और भी खराब हो गया था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी.

चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था.

घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली. रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. जबकि रवींद्र सिंह परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद परिवार में खुशियां बिलकुल नही थीं.

20 दिसंबर, 2020 को राहुल कुछ ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने की आदत पड़ गई है.’’

हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे.

शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद कमरे में सुला दिया. हीरा देवी बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी.

तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी खुराफातें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, फिर अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह गहरी नींद में सोई पड़ी थीं.

घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरों में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. उन पर दवाओं का नशा हावी रहता था.

मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन गया. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उन के प्राणपखेरू उड़ गए.

मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर का लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा.

उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उसे बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे.

वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को मौत की नींद सुला दिया. हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं. 

मदहोश बाप : मौत के निशाने पर आया बेटा

अस्पताल में दुष्यंत की मौत हो चुकी थी. उस का मंझला भाई आशू लाश को घर लाने का प्रबंध कर रहा था. मां रेखा और भाभी दीपिका को उस ने घर भेज दिया था. घर में पुलिस पूछताछ कर रही थी. रेखा रो रही थी, उस की छोटी बेटी भी. बहू दीपिका का रोरो कर बुरा हाल था.

तभी रेखा का छोटा बेटा विमलेश आया और पुलिस इंसपेक्टर के सामने खड़ा हो गया. वह अपनी अंटी से पिस्तौल निकाल कर इंसपेक्टर की ओर बढ़ाते हुए मुसकरा कर बोला, ‘‘मैं ने मारा है भाई को, इसी से.’’इंसपेक्टर ने उस की ओर हैरानी से देखा और रूमाल में लिपटी पिस्तौल ले ली. साथ ही पास खड़े सिपाही से कहा, ‘‘गिरफ्तार कर लो इसे.’’

घर में मोहल्ले वाले भी थे, रिश्तेदार भी. यह देख कर सब हैरान रह गए. रेखा और बहू दीपिका तक का रोना थम गया था. किसी की समझ में नहीं आया कि यह सब क्या है. पुलिस ने विमलेश को थाने भेज दिया, क्योंकि वह जुर्म भी स्वीकार कर रहा था और उस के पास हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार भी था. रेखा का पति, बच्चों का बाप यानी घर का मालिक वीरेंद्र कौशिक घर में नहीं था. वहां मौजूद लोगों का कहना था कि बड़े बेटे दुष्यंत पर गोली वीरेंद्र ने खुद चलाई थी, जिस से उस की  मौत हुई.

दुष्यंत के गिरते ही वीरेंद्र और विमलेश बाहर भाग गए थे. अब विमलेश तो लौट आया पर वीरेंद्र का कोई पता नहीं था. रेखा का कहना था कि पति ने दुष्यंत पर ही नहीं, उस के पांव के पास भी गोली चलाई थी, जो लगी नहीं थी. दुष्यंत पर ससुर वीरेंद्र द्वारा गोली चलाने की बात दुष्यंत की पत्नी दीपिका भी कह रही थी.

इस का मतलब गोली वीरेंद्र कौशिक ने ही चलाई थी. लेकिन वह फरार था. उस ने न जाने क्यों पिस्तौल दे कर अपने नाबालिग बेटे विमलेश को आगे कर दिया था. आश्चर्य की बात यह कि उस ने जुर्म भी स्वीकार कर लिया था. गोली क्यों चलाई गई, यह अभी रहस्य ही बना हुआ था.

वीरेंद्र कौशिक के बारे में पता चला कि वह कांठ रोड स्थित एक डाक्टर के यहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है. वहां पुलिस भेजी गई, लेकिन वह नहीं मिला.

मृतक दुष्यंत मुरादाबाद की तीर्थंकर यूनिवर्सिटी के मैडिकल कालेज में वार्डबौय की नौकरी करता था. उस की ड्यूटी कोरोना वार्ड में चल रही थी. एक साल पहले 6 जनवरी, 2020 को उस की शादी दीपिका के साथ हुई थी. दीपिका का परिवार लाइनपार सूर्यनगर में रहता था. जबकि वीरेंद्र कौशिक का घर लाइनपार हनुमाननगर में था. शादी के बाद से दुष्यंत और दीपिका दोनों खुश थे.

थाना मझोला को दुष्यंत को गोली लगने और उस की मृत्यु की खबर एपेक्स अस्पताल से मिली थी. इस के तुरंत बाद थाना पुलिस अस्पताल और मृतक के घर पहुंच गई थी. थाना मझोला के क्राइम इंसपेक्टर अवधेश कुमार ने यह सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

सूचना पा कर मुरादाबाद के एसपी (सिटी) अमित कुमार आनंद और एएसपी कुलदीप सिंह गुनावत एपेक्स अस्पताल पहुंच गए, जहां दुष्यंत को भरती कराया गया था. पुलिस ने प्राथमिक जांच और लिखापढ़ी के बाद दुष्यंत के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस बीच मृतक दुष्यंत की पत्नी दीपिका ने थाना मझोला में ससुर वीरेंद्र कौशिक और देवर विमलेश के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी. उस ने यह भी बताया कि  उस का ससुर वीरेंद्र कौशिक दबंग इंसान है. उस के पास एक लाइसैंसी पिस्तौल और एक बंदूक है.

शाम तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. गोली बहुत करीब से मारी गई थी जो दुष्यंत के पेट में लगी थी और पेट को चीरते हुए दाईं ओर से बाहर निकल गई थी. पुलिस अफसरों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो 2 खाली खोखे और एक बुलेट मिला. सीएफएसएल टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए.

छानबीन में जो कहानी सामने आई, वह एक बेगैरत इंसान की शैतानी करतूत से जुड़ी थी. वीरेंद्र कौशिक अपनी पत्नी रेखा, 3 बेटों दुष्यंत, विमलेश, आशू और एक बेटी के साथ हनुमान नगर में रहता था. वहां ज्यादातर दूरसंचार, एफसीआई, बैंक कर्मचारियों, टीचर्स और रिटायर्ड लोगों के घर हैं. वह खुद सिक्योरिटी गार्ड था. उस के बड़े बेटे दुष्यंत की एक साल पहले दीपिका से शादी हो गई थी.

25 नवंबर, 2020 को एक करीबी रिश्तेदारी में शादी थी. रेखा विमलेश, आशू और अपनी बेटी के साथ शादी में चली गई. उन दिनों दुष्यंत की रात की ड्यूटी चल रही थी. खाना खा कर वह भी ड्यूटी पर चला गया था. घर में दीपिका और उस का ससुर वीरेंद्र रह गए.

रात करीब 11 बजे वीरेंद्र कौशिक दबेपांव दीपिका के कमरे में घुसा. उस वक्त वह गहरी नींद में थी. वीरेंद्र ने सोती हुई दीपिका को दबोच लिया. आंखें खुलीं तो दीपिका ने ससुर का भरपूर विरोध किया. कहा भी कि ससुर तो पिता समान होता है, उसे ऐसी गिरी हरकत शोभा नहीं देती. लेकिन वीरेंद्र पर वासना का भूत सवार था. उस ने दीपिका का मुंह दबोच कर उस की इज्जत तारतार कर दी.

बाद में दीपिका ने धमकी दी, ‘‘घर वाले आएंगे, दुष्यंत आ जाएंगे तो मैं तुम्हारी इस हरकत के बारे में सब को बताऊंगी. मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहोगे तुम. मैं छोड़ूंगी नहीं तुम्हें.’’

वीरेंद्र कौशिक ने एक हजार रुपए निकाल कर दीपिका के पास रखते हुए हंस कर कहा, ‘‘रख ले और अपना मुंह बंद रखना. जो चीज मुझे पसंद थी, मैं ने हासिल कर ली.’’

दीपिका ने 5-5 सौ के दोनों नोट ससुर के मुंह पर फेंक कर मारे और गुस्से से फट पड़ी, ‘‘कल पता चलेगी तुझे तेरी औकात. मैं चुप रहने वालों में नहीं हूं.’’

‘जो मन आए करना,’’ वीरेंद्र हंसते हुए बोला, ‘‘कौन करेगा तेरी बात पर यकीन? तेरी ही बदनामी होगी, मैं ससुर हूं तेरा. लोग तुझे झूठी कहेंगे. रहीबची कमी मैं पूरी कर दूंगा, तेरे 10 लक्षण गिना कर. झूठ बोलने में क्या जाता है.’’  उस रात दीपिका को नींद नहीं आई. वह रात भर रोती रही. कोई न उसे देखने वाला था, न सांत्वना देने वाला.

26 नवंबर, 2020 की सुबह दुष्यंत ड्यूटी से घर लौटा तो दीपिका उस से लिपट कर खूब रोई. उस ने रात की पूरी बात पति को बता दी. सुन कर वह गुस्से से आगबबूला हो गया. उस ने पिता को खूब खरीखोटी सुनाई.

तब तक घर के बाकी सदस्य भी लौट आए थे. दुष्यंत की मां रेखा ने सुना तो उस ने भी पति वीरेंद्र को खूब गालियां दीं. उस ने कहा, ‘‘जब यह बात परिवार वालों को पता चलेगी तो किसी को क्या मुंह दिखाएगा?’’

दीपिका रोए जा रही थी. दुष्यंत ने उसे चुप कराया, सांत्वना दी. फिर बोला, ‘‘मेरा बाप मेरे लिए मर चुका. अब हम परिवार के साथ नहीं रहेंगे. कहीं अलग किराए का कमरा ले कर रह लेंगे.’’

उसी दिन वीरेंद्र ने अपना सामान ऊपर की मंजिल पर शिफ्ट कर लिया. खानेपीने का इंतजाम भी अलग. इस बात को ले कर अगले 3 दिन तक वीरेंद्र के घर में झगड़ा चलता रहा. दुष्यंत ने फिर पिता को धमकी दी, ‘‘मैं तुम्हारी करतूत पूरे परिवार को बताऊंगा. पुलिस में भी रिपोर्ट लिखाऊंगा. छोड़ूंगा नहीं तुम्हें.’’

रेखा ने भी कहा, ‘‘मैं तेरी करतूत तेरे बहनबहनोई को बताऊंगी.’’घर में केवल छोटे बेटे विमलेश के अलावा सभी को दीपिका की बात पर यकीन था. दरअसल, वीरेंद्र दबंग आदमी था. किसी से न डरने वाला. विमलेश के वह काफी नजदीक था. पिता की तरह बदतमीज और दबंग स्वभाव का विमलेश कोई गलती करता था तो वीरेंद्र उस पर परदा डाल देता था.

वह बाहर किसी से लड़ कर आता या कोई खुराफात कर के लौटता तो वीरेंद्र उसे कुछ कहने या समझाने के बजाय शिकायत करने वालों से भिड़ जाता था. बापबेटे की यही कैमिस्ट्री नजदीकियों का कारण थी.

वीरेंद्र के घर में 3 दिनों से जो झगड़ा चल रहा था, पड़ोसी भी देखसुन रहे थे. लेकिन दीपिका से दुष्कर्म की बात किसी को पता नहीं थी. वीरेंद्र की पासपड़ोस के लोगों से बातचीत भी नहीं थी, इसलिए उस की दबंगई के कारण किसी को पूछने की हिम्मत नहीं थी.

जबकि मंझला बेटा आशू इस से सहमत था कि उस के पिता ने दुष्कर्म किया है. उस ने कह भी दिया था, ‘‘आज से बाप बेटे का रिश्ता खत्म.’’28 नवंबर को वीरेंद्र और दुष्यंत के बीच खूब कहासुनी हुई. बात हाथापाई तक पहुंच गई. बेटे ने बाप पर हाथ छोड़ दिया. इस पर वीरेंद्र का चेहरा गुस्से से लाल हो गया. उस ने अंटी से पिस्तौल निकाल कर पहले अपनी पत्नी रेखा पर गोली चलाई जो उस के पैर के पास से निकल गई. यह देख कर दुष्यंत बोला, ‘‘मेरी मां को क्यों मार रहा है. हिम्मत है तो मुझे मार. मैं नहीं डरता तेरी पिस्तौल से.’’

वीरेंद्र तैश में था, उस ने सामने खड़े दुष्यंत के पेट को निशाना बना कर गोली चला दी. खून के फव्वारे के साथ दुष्यंत निढाल हो कर फर्श पर गिर पड़ा. जरा सी देर में होहल्ला मच गया.पासपड़ोस के लोगों ने वीरेंद्र और उस के छोटे बेटे को जल्दबाजी में बाहर भागते देखा. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि वीरेंद्र के घर में गोलियां क्यों चलीं और शोर और रोनाधोना क्यों हो रहा है.

कुछ लोग घर में गए तो पता चला दुष्यंत को गोली लगी है. आशू कुछ लोगों केसाथ दुष्यंत को पास के एपेक्स अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अस्पताल ने ही यह सूचना पुलिस को दी और पुलिस अस्पताल पहुंची.

बाद में मृतक दुष्यंत की पत्नी ने थाना मझोला में ससुर वीरेंद्र कौशिक और देवर विमलेश के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या की रिपोर्ट लिखवाई.

उधर वीरेंद्र घर से भाग कर छोटे बेटे विमलेश के साथ मुरादाबाद कचहरी जा पहुंचा था. उस का इरादा आत्मसमर्पण करने का था. इस बारे में उस ने वकीलों से बात की. लेकिन तब तक थाना मझोला में एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी. ऐसे में अदालत में कागजात पेश नहीं किए जा सकते थे. इस पर वीरेंद्र ने वकीलों से पूछा कि वह कैसे बच सकता है.

वकीलों ने उसे राय दी कि यह तभी संभव है जब वह खुद की जगह अपने नाबालिग बेटे विमलेश को पुलिस के सामने पेश कर दे. नाबालिग होने की वजह से उसे सजा भी कम होगी और पुलिस टौर्चर भी नहीं करेगी. तब वीरेंद्र ने विमलेश को समझा कर पिस्तौल दिया और घर भेज दिया. घर जा कर विमलेश ने पिस्तौल पुलिस को सौंप कर दुष्यंत की हत्या की बात स्वीकार कर ली. यह 11 बजे घटी घटना के 2 घंटे बाद 1 बजे की बात है. यह सब मोहल्ले वालों के सामने हुआ. जब विमलेश को गिरफ्तार कर थाना मझोला भेजा गया तब वह मुसकरा रहा था, जैसे उसे बड़े भाई की हत्या से कोई फर्क न पड़ा हो.

विमलेश से वीरेंद्र के बारे में जानकारी मिली तो पुलिस ने कचहरी में दबिश दी लेकिन वीरेंद्र नहीं मिला.  हकीकत सामने आई तो पुलिस को मामले की गंभीरता का पता चला. तब आईजी मुरादाबाद रेंज रमित शर्मा ने एसएसपी प्रभाकर चौधरी को आदेश दिया कि वीरेंद्र कौशिक को तुरंत गिरफ्तार कराएं.

वीरेंद्र पुलिस की पकड़ में नहीं आया तो दीपिका ने एसएसपी प्रभाकर चौधरी को लिखित प्रार्थनापत्र दिया कि उस की जान को खतरा है. उस का ससुर उस की भी हत्या कर सकता है, दीपिका अपने मायके सूर्यनगर चली गई थी. एसएसपी के आदेश पर उस के मायके में पुसिस तैनात कर दी गई.

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने 2 पुलिस टीमों का गठन किया. एक टीम को एसपी (सिटी) अमित कुमार आनंद के नेतृत्व में काम करना था और दूसरी को एएसपी कुलदीप सिंह गुनावत के नेतृत्व मे. दोनों टीमों ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया.

मोबाइल लोकेशन से पता चला कि वीरेंद्र लाइनपार कहीं छिपा है लेकिन पुलिस जब वहां पहुंची तो वह फरार हो गया. फिर भी पुलिस ने उस का पीछा नहीं छोड़ा. आखिर मोबाइल लोकेशन से उसे 30 नवंबर को रामपुर के होटल टूरिज्म से गिरफ्तार कर लिया गया.

गिरफ्तार कर उसे मुरादाबाद लाया गया. पूछताछ में उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. 1 दिसंबर, 2020 को उसे अदालत पर पेश कर के जिला जेल भेज दिया गया. उस के बेटे विमलेश को पहले ही बाल कारागार भेजा चुका था.

वीरेंद्र कौशिक रंगीन तबीयत का आदमी था. एक महिला से छेड़छाड़ के मामले में वह पहले भी जेल जा चुका था. इसी रंगीनमिजाजी में उस ने अपने ही बड़े बेटे की हत्या कर के न केवल उस की पत्नी को विधवा बना दिया था बल्कि अपना ही घर उजाड़ लिया था.

उस का मझला बेटा आशू भी कह चुका है कि बाप से अब उस का कोई रिश्ता नहीं है. उधर बाद में वीरेंद्र का नाबालिग बेटा विमलेश भी अपने बयान से पलट गया. उस ने कहा कि भाई दुष्यंत पर गोली उस ने नहीं, उस के पिता वीरेंद्र कौशिक ने चलाई थी.

वीरेंद्र के पास पिस्तौल और बंदूक के 2 लाइसैंस थे. पुलिस ने दोनों लाइसैंस निरस्त कर दिए. दोनों हथियार भी बरामद कर लिए गए. इस पूरे मामले में महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि कौशिक परिवार अगर 3 दिन तक इस घटना को न छिपाता तो शायद दुष्यंत की जान न जाती.

—दीपिका और विमलेश नाम परिवर्तित हैं

कसरत के लिए मशक्कत : रीमा बनी पति की कातिल

12 नवंबर, 2020 की शाम देहरादून के विकास नगर कोतवाली थाने के प्रभारी निरीक्षक राजीव रौथान के मोबाइल फोन पर किसी महिला ने फोन किया. आवाज से लग रहा था कि महिला डरीसहमी घबराई हुई थी.

महिला ने रोते हुए कहा, ‘‘सर मेरा नाम रीमा है और मैं हरबर्टपुर वार्ड नंबर-2, आदर्श विहार में रहती हूं. मेरे पति राकेश ने आत्महत्या कर ली है. उन की लाश बाथरूम में पड़ी हुई है. प्लीज सर, आप आ जाइए.’’

सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक राजीव रौथान पुलिस टीम के साथ आदर्श विहार की तरफ रवाना हो गए. कुछ ही देर में वह रीमा द्वारा बताए पते पर पहुंच गए.

रीमा घर पर ही मिली. वह पुलिस को बाथरूम में ले गई, जहां उस के पति राकेश नेगी की लाश पड़ी थी. रीमा ने बताया कि यह लाश उस के पति की है.

राकेश की लाश बाथरूम के बाथटब में पड़ी थी. उस के हाथ की नस कटी हुई थी, जिस कारण फर्श पर फैला खून गाढ़ा पड़ कर सूख चुका था और गले पर धारदार हथियार से गोदने के निशान भी साफ दिख रहे थे. उस का गला भी कटा हुआ था.

मृतक के हाथों पर मजबूती से दबोचे जाने के लाल निशान साफ दिखाई दे रहे थे. पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि मृतक फौजी था. वह गढ़वाल राइफल में हवलदार के पद पर  था और उस की पोस्टिंग जम्मू में थी. राकेश पिछले महीने अक्तूबर की 14 तारीख को छुट्टियों पर घर आया था.

लाश देख कर लग रहा था कि उस की मौत हुए 12 घंटे से ज्यादा हो गए होंगे. पुलिस को राकेश के आत्महत्या के एंगल पर संदेह हुआ. उस के शरीर पर चोट के निशान और उस की पत्नी द्वारा पुलिस को आत्महत्या की सूचना देरी से देने की बात ने संदेह को और गहरा कर दिया.

राजीव रौािन को यह मामला आत्महत्या का कम और हत्या का अधिक लग रहा था. बल्कि शरीर के निशान देख कर उन्हें लगने लगा कि हत्या में एक से अधिक लोग शामिल रहे होंगे. उन्होंने इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दे दी.

इस केस को सुलझाने के लिए एसएसपी ने एक पुलिस टीम बनाई, जिस में सीओ धीरेंद्र सिंह रावत, थानाप्रभारी राजीव रौथान, थानाप्रभारी (कालसी) गिरीश नेगी, एसआई रामनरेश शर्मा, जितेंद्र कुमार आदि को शामिल किया गया.

मौके की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने मृतक फौजी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि राकेश नेगी ने खुदकुशी नहीं की थी, बल्कि उस की हत्या की गई थी. हत्या का मामला सामने आने पर पुलिस तहकीकात में जुट गई. पुलिस ने मृतक की पत्नी रीमा नेगी को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया.

सख्ती से की गई इस पूछताछ में रीमा ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. सख्ती से की गई पूछताछ में घटना से जुड़े हैरान करने वाले सच सामने आए, जिस ने सारी सच्चाई सामने  ला दी.

बीते साल की बात है, देहरादून के हरबर्टपुर में रहने वाली 27 वर्षीय रीमा अपनी बेस्वाद जिंदगी से काफी उकता चुकी थी. रीमा का पति राकेश नेगी फौज में था. दोनों की शादी साल 2015 में हुई थी. लेकिन शादी के बाद दोनों ज्यादातर एकदूसरे से दूर ही रहे थे.

राकेश अपने अधिकतर समय में रीमा से दूर किसी दूसरे राज्य में ड्यूटी पर रहता था. बहुत कम मौका होता, जब वह घर पर आता. ऐसे में रीमा को लगता कि उस की शादी तो हुई है, लेकिन शादी के बाद पति से मिलने वाली खुशी के लिए वह कईकई महीनों तक तरसती रहती है.

राकेश घर आता भी था तो बहुत कम समय के लिए आता, फिर वापस चला जाता. जिस में रीमा की शारीरिक हसरतें पूरी नहीं हो पाती थीं.

सब कुछ था रीमा के पास, अच्छाखासा शहरी घर, खानेपीने की कोई कमी नहीं, फौजी की पत्नी होने का सम्मान, जहां चाहे घूमनाफिरना. लेकिन नहीं थी तो वह खुशी, जो शादी के बाद औरत अपने पति से चाहती है. रीमा अपनी जवानी की ऐसी दहलीज पर थी, जहां पर पहुंच कर पत्नी की खुशी पति के बाहों में होती है.

जवान रीमा की जवानी उसे अंदर से कचोटती थी, वह अपने अकेलेपन से खिन्न थी. नयननक्श से सुंदर रीमा खुद की सुंदरता को किसी पर न्यौछावर नहीं कर पा रही थी. वह अपने घर में खुद को अकेला महसूस करने लगी थी.

इस से बचने के लिए रीमा ने सोचा कि अपने अकेलेपन को दूर करने लिए वह अपना समय ऐसी जगह लगाए, जहां उसे यह सब याद ही न आए. इस के लिए उस ने गार्डनिंग, घूमनाफिरना, नई चीजें सीखना और जिम जाना शुरू कर दिया.

यह बात सही है, जब जिंदगी में व्यस्तता होती है तो ध्यान बंट जाता है. लेकिन रीमा ने जैसा सोचा था, ठीक उस से उलटा हो गया. जिस से बचने के लिए उस ने खुद को व्यस्त रखने की कोशिश की, वह उलटा उस के पल्ले बंध गया और ऐसा बंधा कि उस ने सारी हदें पार कर दीं.

पिछले साल रीमा ने विकास नगर के जिस ‘यूनिसेक्स जिम अकैडमी’ में जाना शुरू किया था, वहां उस की मुलाकात 25 वर्षीय शिवम मेहरा से हुई. शिवम उस जिम में ट्रेनर था. सुंदर चेहरा, सुडौल बदन, लंबी कदकाठी, आकर्षक शरीर. जवान मर्द की सारी खूबियां थीं उस में.

शिवम मेहरा विकास नगर में कल्यानपुरी का रहने वाला था. रीमा शिवम के डीलडौल और शरीर को देख कर पहली नजर में ही उस की ओर आकर्षित हो गई. लेकिन उस ने अपनी इच्छा जाहिर नहीं होने दी.

शिवम जिम का ट्रेनर था. उस का काम वहां आए लोगों को एक्सरसाइज के लिए ट्रेनिंग देना था. शिवम जब रीमा की हेल्प के लिए उस के करीब आता, तो तनबदन में मानो बिजली सी कौंध जाती. शिवम की हाथ या कमर पर हलकी सी छुअन भी शरीर में सिहरन पैदा कर देती. यह बात शिवम भी अच्छे से समझ रहा था कि उस के छूने भर से रीमा मदहोश हो जाती है.

लगभग 15 दिन बाद एक रात रीमा के वाट्सऐप पर एक अनजान नंबर से ‘हेलो’ का मैसेज आया. रीमा ने जानने के लिए फटाफट उस नंबर की प्रोफाइल फोटो देखी तो उस की आंखें चमक उठीं. चेहरे पर मुसकान खिल गई. शरीर झनझना गया, वह उस का जिम ट्रेनर शिवम था.

रीमा ने फटाफट रिप्लाई करते हुए ‘हाय’ लिख दिया. थोड़ी देर के लिए उस के दिल की धड़कनें तेज हो गईं. मानो धड़कन, डर और खुशी दोनों का भाव साथ दे रही हों, जो उस के तनबदन में सिहरन पैदा कर रहे थे. शिवम ने रिप्लाई में लिखा, ‘‘सौरी, ज्यादा रात हो गई, आप को परेशान किया.’’

रीमा ने तुरंत जवाब देते हुए लिखा, ‘‘कोई बात नहीं, वैसे भी यहां मुझे रात में परेशान करने वाला कोई नहीं है.’’रीमा का मैसेज पढ़ते ही शिवम की धड़कनें तेज हो गईं. इस बार डर और खुशी के भावों की बारी शिवम की थी. वह रीमा की डबल मीनिंग बात को समझ गया था, उस ने बात आगे बढ़ाते हुए लिखा, ‘‘क्यों, क्या हुआ, आप के हसबैंड कहां हैं?’’

रीमा ने जवाब में लिखा, ‘‘क्यों, तुम्हें मेरे हसबैंड की बड़ी चिंता है, मेरी नहीं?’’‘‘हसबैंड की नहीं, आप की ज्यादा चिंता है. कल जिम बंद रहेगा, यही बताने के लिए मैं ने मैसेज किया है ताकि आप परेशान न हों.’’ शिवम ने जवाब दिया. रीमा ने ‘ओके’ लिखा तो शिवम ने तुरंत लिख दिया, ‘‘अगर आप आना चाहें तो मैं आप के लिए जिम स्पैशली खुलवा दूंगा.’’

दोनों की ये बातें वाट्सऐप पर देर रात तक चलती रहीं. जिम खुला तो शिवम अपना सारा ध्यान रीमा पर ही देने लगा. वह रीमा के करीब आने की कोशिश करता. रात में होने वाली बात से दोनों में एकदूसरे के करीब आने की हिम्मत बढ़ गई थी.

शिवम जानबूझ कर रीमा को छूने की कोशिश करता. ऐसीऐसी एक्सरसाइज कराता, जिस में उसे ज्यादा से ज्यादा छूने का मौका मिले. इस में रीमा को भी कोई ऐतराज नहीं था. वह अंदर से और अधिक बेचैन थी. रीमा के मन में शिवम की बाहों में सिमटने की हसरत जागने लगी थी.

एक दिन रीमा ने शिवम को अपने घर खाने पर बुलाया. रीमा का घर हमेशा की तरह खाली था. शिवम यह जानता था और एक मंशा बना कर तैयारी के साथ वहां गया था. रीमा उस दिन बहुत सजीधजी थी. जिसे देख कर शिवम खुश था.

रीमा जब से जिम जाने लगी थी, तब से काफी खुश थी. लेकिन शिवम के घर आने पर वह सातवें आसमान पर पहुंच गई थी, मानो उस की लंबे समय की हसरत पूरी हो जा रही थी. शिवम भी इसी इंतजार में था. दोनों खाने के लिए साथ में बैठे. शिवम ने खाना खाने के बाद बात छेड़ते हुए रीमा को कहा, ‘‘रीमाजी, वैसे आप जिम आना छोड़ दीजिए.’’

‘‘क्यों?’’ रीमा ने पूछा.  ‘‘वो क्या है न, आप का शरीर पहले ही इतना परफेक्ट है, आप को जिम की क्या जरूरत है?’’

रीमा यह सुन कर शरमा गई, उस के चेहरे पर लालिमा छा गई, उस ने जवाब में आंखें नीचे करते हुए कहा, ‘‘मैं तो वहां तुम्हारे लिए आती हूं.’’ फिर इस बात को मजाक का लहजा देते हुए वह जोर से हंसने लगी.

लेकिन शिवम समझ गया था रीमा की इस बात में हकीकत छिपी है. उस ने रीमा से कहा, ‘‘रीमाजी, अगर आप ने आज साड़ी नहीं पहनी होती तो आप को यहीं जिम की प्रैक्टिस करवा देता, वैसे भी आज नए टिप्स हैं मेरे पास आप के लिए.’’

‘‘इस में कौन सी बड़ी बात है, कहो तो अभी उतार दूं.’’ रीमा ने तुरंत जवाब देते कहा’

यह सुनते ही शिवम समझ गया कि रीमा ने अपनी बात छेड़ दी है अब बारी शिवम की थी. शिवम ने भी चांस गंवाए बगैर कह दिया, ‘‘चलो फिर बैडरूम में, वहां वह सब होगा जो आप चाहती हैं और जो मैं चाहता हूं.’’

यह सुन कर रीमा मदहोश हो गई थी. उस ने शिवम को झट से गले लगा लिया. शिवम ने भी उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया. जिस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. रीमा भूल गई कि उस की शादी राकेश के साथ हो चुकी है. वे दोनों एकदूसरे की बाहों में गोते लगाते रहे.

इस के बाद यह सिलसिला यूं ही चलता रहा. आमतौर पर रीमा का घर खाली ही रहता था. जहां वे जब चाहे मिल लिया करते. कभीकभी शिवम रीमा को जिम में सुबहसुबह जल्दी बुला लिया करता था. जहां वे अनीति की गहराइयों में गोते लगाते.

कोई हकीकत लंबे समय तक दबी जरूर रह सकती है, लेकिन छिप नहीं सकती. और यही हुआ रीमा और शिवम के साथ. लौकडाउन के बाद रीमा का पति राकेश जम्मू से छुट्टी ले कर 14 अक्तूबर को अपने घर देहरादून आया.

घर आ कर उसे रीमा का व्यवहार अलग सा लगा. अब रीमा पहले जैसी रीमा नहीं थी. जहां पहले रीमा राकेश के इर्दगिर्द घूमती थी, उसे हर चीज पूछती थी, अब वह राकेश पर ध्यान नहीं दे रही थी.

वह फोन पर ज्यादा रहने लगी थी. देर रात तक वह फोन पर चैटिंग करती थी. राकेश जब रीमा से पूछता कि कौन है तो वह गुस्सा हो जाती.

रीमा के साथ सहवास में बनने वाले संबंध भी अब राकेश को फीके लगने लगे थे. रीमा में अब राकेश के प्रति दिलचस्पी नहीं थी.

राकेश को रीमा में आए इन बदलाओं को देख कर शक होने लगा. उस ने रीमा के फोन को चैक करने की कोशिश की तो उस में लौक लगा था, जिसे खोलने का प्रयास करने से पहले ही रीमा ने उस से छीन लिया. इस बात को ले कर दोनों में तूतूमैंमैं होने लगी.

यह तूतूमैंमैं बाद इतनी बढ़ गई कि रोज झगड़े शुरू हो गए. वहीं दूसरी तरफ राकेश के घर आ जाने से रीमा भी परेशान हो गई थी. वह शिवम से मिल नहीं पा रही थी. उसे राकेश के साथ समय बिताना चुभ रहा था. उसे शिवम की कमी बहुत खल रही थी.

इसलिए एक दिन उस ने अपने पति को रास्ते से हटाने के लिए अपने प्रेमी शिवम मेहरा के साथ मिल कर एक षडयंत्र रच डाला.रीमा ने सब से पहले अपने मोबाइल फोन का सिम अपने प्रेमी को दे दिया. उस के बाद रीमा व शिवम मोबाइल पर एकदूसरे को मैसेज कर हत्या की योजना बनाने में लगे रहे.

11 नवंबर, 2020 की रात रीमा और उस के प्रेमी शिवम ने फौजी राकेश की हत्या करने की योजना बनाई. जिस के लिए रीमा ने रात को घर का मुख्य गेट बंद नहीं किया, ताकि शिवम घर में आ सके.

फौजी राकेश अपने बिस्तर पर गहरी नींद में सो रहा था. रात करीब 10 बजे शिवम घर के अंदर घुस आया और किचन में जा कर छिप गया. रीमा राकेश के पास गई और योजनानुसार किसी बात पर उस से झगड़ा करने लगी.रीमा राकेश को झगड़े में उलझा कर बरामदे की लौबी तक ले आई, जहां शिवम पहले से ही किचन में मौजूद था. शिवम ने पीछे से राकेश के हाथों को मजबूती से जकड़ लिया. इस के बाद राकेश के सामने खड़ी रीमा ने अपने पति का गला चाकू से रेत दिया. जिस से राकेश की मौके पर ही मौत हो गई.

इस के बाद दोनों ने राकेश की हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उस के हाथ की नसें काट दीं और उस के शव को बाथरूम में डाल दिया.

यह सब करने के बाद दोनों ने लौबी व घर में जगहजगह पड़े खून के धब्बों को पूरी रात कंबल से साफ किया. रात भर दोनों एकदूसरे के साथ रहे.

सुबह होते ही शिवम 5 बजे वापस विकासपुरी स्थित अपने जिम की तरफ चल दिया. इस के ठीक अगले दिन रीमा ने राकेश की झूठी आत्महत्या की सूचना पहले अपने मायके लुधियाना (पंजाब) में रह रहे अपने पिता को दी. उस के बाद उस ने घटना के करीब 18 घंटे बाद 12 नवंबर को विकास नगर पुलिस थाने को सूचना दी.

इस पूरे प्रकरण में पुलिस को शक तभी हो गया था जब पुलिस घटनास्थल पहुंची थी. शव की हालत देख कर सब से पहला संदेह घर के भीतर के ही व्यक्ति पर हुआ और घर में रीमा के अलावा कोई नहीं था. इस से पुलिस के शक की सुई सब से पहले रीमा पर ही जा अटकी थी.

पुलिस द्वारा पूछताछ में रीमा ने अपना जुर्म कबूल लिया. पुलिस ने दोनों आरोपियों रीमा नेगी व शिवम मेहरा को 13 नवंबर, 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल 2 चाकू व ब्लेड, मोबाइल फोन, स्कूटी (यूके16 ए- 7059), मृतक व हत्यारोपी के खून से सने कपड़े व खून से सना कंबल भी बरामद कर लिया.

बेटी ने दी बाप के कत्ल की सुपारी : भाग 4

यदि वह उन्हें रास्ते से हटा दे तो वह उस के साथ शादी कर लेगी. काव्या ने समीर को ये भी लालच दिया कि सहारनपुर में उन का एक 100 वर्गगज का प्लौट है. अगर वो उस के पिता की हत्या कर देगा तो वह प्लौट वह उस के नाम कर देगी.

‘‘काव्या, ये तुम कैसी बात कर रही हो. ठीक है वो तुम लोगों के साथ सख्ती करते हैं, लेकिन इस का मतलब ये तो नहीं कि तुम उन की हत्या करने की बात सोचो.’’ समीर बोला.

‘‘समीर, तुम मेरी बात समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रहे हो. तुम्हें पता नहीं मेरा बाप इंसान नहीं है जानवर है, जानवर. वो सिर्फ मुझे ही नहीं मेरी बहन और मां को भी छोटीछोटी बात पर पीटता है.’’

काव्या ने समीर के सामने अपने पिता को ऐसे जल्लाद इंसान के रूप में पेश किया कि समीर को यकीन हो गया कि राकेश की हत्या के बाद ही काव्या और उस के घर वालों को चैन की सांस मिल सकेगी. लिहाजा उस ने काव्या से वादा किया कि वह किसी भी तरह उस के पिता की हत्या कर के रहेगा.

काव्या ने एक और बात कही, जिस से समीर का मनोबल और बढ़ गया. उस ने समीर को बताया कि उस के पिता कमेटी डालने का धंधा भी करते हैं, जिस की वजह से रोज उन के पास हजारों रुपए रहते हैं. काव्या ने उसे समझाया कि जब तुम उन्हें गोली मारो तो उन का बैग छीन कर भाग जाना, इस से लगेगा कि उन की हत्या लूट के लिए हुई है. और हां, बैग में जो भी रकम हो वो तुम्हारी.

इस के बाद समीर के सामने समस्या यह थी कि वह राकेश की हत्या करने के लिए हथियार कहां से लाए. लिहाजा उस ने काव्या से सवाल किया, ‘‘यार, तुम्हारे बाप को तो मैं मार दूंगा लेकिन समस्या ये है कि मेरे पास कोई पिस्तौल वगैरह तो है नहीं फिर मारूंगा कैसे?’’

‘‘तुम उस की फिक्र मत करो. कैराना में हुए दंगों के वक्त पापा ने अपनी हिफाजत के लिए एक तमंचा खरीदा था, साथ में कुछ कारतूस भी हैं. मैं 1-2 दिन में तुम्हें ला कर दे दूंगी. उसी से गोली मार देना उन को.’’

समीर न तो पेशेवर अपराधी था और न ही उस में अपराध करने की हिम्मत थी. इसलिए उस ने अपने चाचा अनीस के बड़े बेटे शादाब से बात की. वह समीर का ही हमउम्र था. दोनों की खूब पटती थी.

जब समीर ने अपनी मोहब्बत की मजबूरी शादाब के सामने बयां की तो वह भी पशोपेश में पड़ गया. समीर ने शादाब को ये भी बता दिया था कि इस काम को करने के बाद उसे न सिर्फ उस की मोहब्बत मिल जाएगी बल्कि सहारनपुर में 100 वर्गगज का एक प्लौट तथा वारदात के बाद कुछ नकदी भी मिलेगी, जिस में से वह उसे भी बराबर का हिस्सा देगा.

शादाब भी लड़कपन की उम्र से गुजर रहा था. लालच ने उस के मन में भी घर कर लिया. इसलिए उस ने समीर से कह दिया, ‘‘चल भाई, तेरी मोहब्बत के लिए मैं तेरा साथ दूंगा.’’

वारदात से 3 दिन पहले किसी बात पर राकेश ने फिर से अपनी पत्नी कृष्णा और बेटी काव्या की पिटाई कर दी. जिस के बाद काव्या को लगा कि अब पिता को रास्ते से हटाने में देर नहीं करनी चाहिए.

उस ने अगली सुबह ही समीर को फोन कर उसे एक जगह मिलने के बुलाया और वहां उसे घर में रखा पिता का तमंचा और 2 कारतूस ले जा कर सौंप दिए.

खेला मौत का खेल

उसी दिन उस ने अपने पिता की हत्या के लिए 7 अप्रैल की तारीख भी मुकर्रर कर दी. काव्या ने समीर से साफ कह दिया कि अब वह उस से उसी दिन मिलेगी जब वह उस के पिता की हत्या को अंजाम दे देगा. मोहब्बत से मिलने की आस में समीर ने भी अब देर करना उचित नहीं समझा.

7 अप्रैल को जब राकेश अपनी ड्यूटी पर गया तो उस दिन सुबह से ही समीर काव्या से लगातार फोन पर संपर्क में रहा. और दिन भर ये जानकारी लेता रहा कि उस के पिता दिल्ली से कब चलेंगे. काव्या वैसे तो अपने पिता को फोन नहीं करती थी, लेकिन उस दिन उस ने दिन में 2 बार उन्हें किसी न किसी बहाने फोन किया.

शाम को भी करीब साढे़ 8 बजे काव्या ने पिता को फोन कर के पूछा कि वह कहां हैं. राकेश ने बेटी को बताया कि वह ट्रेन में हैं. काव्या ने फोन करने की वजह छिपाने के लिए कहा कि इलैक्ट्रिक प्रेस का प्लग खराब हो गया है, जब वह घर आएं तो बिजली वाले की दुकान से एक प्लग लेते आएं.

बस ये जानकारी मिलते ही काव्या ने समीर को फोन कर के बता दिया कि उस के पिता रोज की तरह 9, सवा 9 बजे तक शामली स्टेशन पहुंच जाएंगे. जिस के बाद समीर भी शादाब को लेकर स्टेशन पहुंच गया.

रात को करीब साढ़े 9 बजे राकेश जब स्टेशन से बाहर आया तो समीर व शादाब उस का पीछा करने लगे. रास्ते में कई जगह ऐसा मौका आया कि एकांत पा कर वे राकेश पर गोली चलाने ही वाले थे कि अचानक किसी गाड़ी या राहगीर के आने पर वे राकेश को गोली न मार सके. इसी तरह पीछा करतेकरते दोनों राकेश के घर के करीब पहुंच गए.

इस दौरान राकेश ने बिजली की दुकान से इलैक्ट्रिक प्रेस का प्लग खरीदा और फिर घर की तरफ चल दिया. समीर को लगा कि अगर वह अब भी राकेश का काम तमाम नहीं कर सका तो मौका हाथ से निकल जाएगा और काव्या कभी उसे नहीं मिल सकेगी. उस ने तमंचा झट से शादाब के हाथ में थमा दिया और बोला, ‘‘ले भाई, मार दे इसे गोली.’’

सब कुछ अप्रत्याशित ढंग से हुआ. शादाब ने तमंचा हाथ में लिया और भागते हुए बराबर में पहुंच कर राकेश पर गोली चला दी. गोली मारने के बाद समीर और शादाब ने पलट कर यह भी नहीं देखा कि गोली राकेश को कहां लगी है और वो जिंदा है या मर गया.

बस उन्हें डर था कि वो कहीं पकड़े न जाएं, इसलिए वे तुरंत घटनास्थल से भाग गए. समीर ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचते ही काव्या को फोन कर के सूचना दे दी कि उस ने उस के पिता को गोली मार दी है.

इस के बाद रात भर में काव्या और समीर के बीच कई बार बातचीत हुई. समीर को ये जान कर सुकून मिला कि गोली सही निशाने पर लगी और उस ने राकेश का काम तमाम कर दिया है.

समीर ने तमंचा और बचा हुआ एक कारतूस उसी रात घर के पास नाले के किनारे एक झाड़ी में छिपा कर रख दिया था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उस की निशानदेही पर बरामद कर लिया. पुलिस ने इस मामले में हत्या के अभियोग के अलावा समीर और शादाब के खिलाफ शस्त्र अधिनियम का मामला भी दर्ज कर लिया.

एक गोली ने खत्म की लव स्टोरी

विस्तृत पूछताछ के बाद थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह कालरा ने समीर और शादाब के साथ काव्या को भी हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

लिहाजा 3 दिन तक जांच और कुछ अन्य साक्ष्य जुटाने के बाद थानाप्रभारी कालरा के निर्देश पर पुलिस टीम ने कृष्णा और वैशाली को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों ने पुलिस पूछताछ में राकेश की हत्या की साजिश में शामिल होने का अपराध कबूल कर लिया. पुलिस ने 17 अप्रैल को दोनों को जेल भेज दिया.

अनैतिक रिश्तों का विरोध करने वाले पति और पिता की हत्या की सुपारी देने वाली मां और बेटियां तो जेल में अपने किए की सजा भुगत ही रही हैं, लेकिन समीर ने प्रेम में अंधे हो कर अपने डाक्टर बनने के सपने को खुद ही तोड़ दिया.

कथा पुलिस की जांच और काररवाई पर आधारित

दुबई में रची हत्या की साजिश : क्यों पत्नी का दुश्मन बना पति

रामाकृष्णनन का दुबई में अच्छा कारोबार था. पत्नी विशाला गनिगा और बेटी के साथ घरगृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि विशाला के भारत आने पर रामाकृष्णनन को दुबई में बैठ कर ही पत्नी की मौत की साजिश रचनी पड़ी?

एनआरआई विशाला दुबई में रह रहे अपने पति से विदा ले कर 2 जुलाई, 2021 को अपनी बेटी के साथ कनार्टक आई थी. उस का कर्नाटक के उडुपी

शहर में अपना अपार्टमेंट है, लेकिन उस समय वह वहां से कुछ दूरी पर स्थित एक सोसाइटी में अपने मातापिता के साथ रह रही थी.

अपने मातापिता से बैंक का काम बता कर 12 जुलाई को वह घर से बाहर निकली थी. उस ने यह भी कहा था कि कुछ समय के लिए अपने अपार्टमेंट में भी जाएगी.

जब वह कई घंटे तक भी वापस नहीं लौटी तो घर वालों को चिंता होने लगी. उस के मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो वह स्विच्ड औफ मिला. घर वाले चिंतित हो गए. वह उस की तलाश में उस के अपार्टमेंट पर पहुंचे तो वहां का दरवाजा भिड़ा हुआ था. उन्होंने उसे हलका सा पुश किया तो खुल गया.

अंदर का दृश्य देख कर परिजनों की चीख निकल गई. विशाला वहां मरी हुई पड़ी थी. घर का सारा सामान इधरउधर बिखरा हुआ था. विशाला के गहने भी गायब थे.

विशाला के पिता ने उसी समय ब्रह्मावर थाने को सूचना दी. सूचना मिलने के बाद थानाप्रभारी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने गहन जांचपड़ताल की. वहां मोबाइल चार्जर का तार पड़ा मिला, लग रहा था कि उसी से गला घोंट कर विशाला की हत्या की गई थी. क्योंकि उस के गले पर निशान भी था.

घर का सारा सामान बिखरा हुआ था. उस के गहने उतार लिए गए थे. पहली नजर में मामला लूट का विरोध करने पर हत्या करने का लग रहा था.

घटनास्थल की पूरी जांच की सूचना थानाप्रभारी ने अपने बड़े अधिकारियों को भी दी. मामला एनआरआई महिला की हत्या का था, जिस से पुलिस में खलबली मच गई.

विशाला की हत्या गला घोंट कर की गई थी. इस की पुष्टि पुलिस के बड़े अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर की. फिर भी कई पहलुओं से जांच की गई.

हत्यारे ने वैसा कोई सुराग नहीं छोड़ा था, जिस से पुलिस हत्यारे तक पहुंच सके. उस ने जिस मोबाइल चार्जर के तार से उस का गला घोंटा गया था, वह चार्जर भी विशाला का ही था.

विशाला का पति रामाकृष्णनन उस समय दुबई में था. पुलिस ने उसे इस घटना की सूचना देने के साथसाथ तत्काल भारत आने को कहा. प्राथमिक औपचारिकताओं के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

उडुपी पुलिस ने विशाला की हत्या का परदाफाश करने के लिए 4 विशेष टीमों का गठन कर दिया. हत्या ब्रह्मावर के पास कुंब्रागोडु में एक निजी अपार्टमेंट में हुई थी. जिस से तटीय शहर में चर्चा होने लगी. इस शहर को दक्षिण भारत का मिनी गोवा कहा जाता है.

अपार्टमेंट वाली इमारत में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था, लेकिन पुलिस ने आसपास के 60 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की. एसपी ने मामले की जांच के लिए 4 टीमों का गठन किया. डीजी और आईजीपी प्रवीण सूद ने मामले का खुलासा करने वाली टीम के लिए 50 हजार रुपए के ईनाम की भी घोषणा कर दी.

दुबई से बुलाया पति को

मृतक का पूरा नाम विशाला गनिगा था, जो 35 वर्ष की थी. दुबई से आ कर वह उडुपी में अपने मातापिता के यहां साल भर की बेटी के साथ महीनों से रह रही थी. उस की किसी से कोई रंजिश नहीं थी. उस के शहर में जानपहचान वाले मातापिता और उन का परिवार ही था.

पति और उस के दूसरे परिजन दुबई में थे. बावजूद इस के उस की हत्या किसी के गले नहीं उतर रही थी. तफ्तीश कर रही पुलिस की टीमें हत्यारे का कोई सुराग ढूंढ निकालने की कोशिश में थीं. पुलिस सोच रही थी कि हत्या अगर लूटपाट के तहत हुई तो हत्यारा स्थानीय हो सकता था. सभी इस तरह की कई अटकलें लगा रहे थे.

विशाला के पति रामाकृष्णनन पत्नी की मौत की सूचना पा कर दुबई से उडुपी आ गया. नम आंखों से उस ने पत्नी को अंतिम विदाई दी. उस का दुबई में अच्छा कारोबार था. पुलिस ने अंत्येष्टि के बाद रामाकृष्णनन से विशाला के संबंध में औपचारिक बातचीत की.

इसी सिलसिले में पता चला कि विशाला के साथ उस का विवाह करीब 10 साल पहले  हुआ था. उन की अरेंज मैरिज थी, लेकिन दोनों के परिजनों ने विवाह से पहले एकदूसरे को समझने का भरपूर मौका दिया था.

उन के बीच काफी समय तक मिलनाजुलना होता रहा. बातें होती रहीं. रामाकृष्णनन विशाला की सुंदरता पर मर मिटा था. उस की बड़ीबड़ी झील सी गहरी आंखें और गोरा रंग देख उस पर फिदा हो गया था. गालों पर सुर्खी और कटावदार शारीरिक बनावट के कारण साधारण लिबास भी उस पर खूब फबता था.

पुलिस के सामने रामाकृष्णनन विशाला की मौत का गम दर्शाने के साथसाथ खूबसूरती की तारीफ करते नहीं थक रहा था. उस ने बताया कि विशाला की हर अदा बेहद निराली और सभी को आकर्षित करने वाली थी.

वह रहनसहन, भोजन और लाइफस्टाइल में हमेशा सर्वश्रेष्ठ की तलाश में रहती थी. उस की जरूरतों की पूर्ति होने पर ही वह पूरी तरह संतुष्ट रहती थी.

विवाह के बाद विशाला पति के साथ दुबई चली गई थी. दुबई भले ही मुसलिम देश कहलाता हो और वहां कई तरह की कानूनी पाबंदियां हों, लेकिन कारोबार या नौकरी को ले कर वहां कोई पाबंदी नहीं है.

विशाला के दुबई जा कर घर बसाने की वजह से उस की गिनती भारत में एनआरआई महिला के रूप में थी. कुछ साल में ही विशाला ने एक बेटी को जन्म दिया. नन्ही परी दोनों की ही दुलारी थी.

पुलिस ने बातोंबातों में रामाकृष्णनन से पूछ लिया कि जब वे दुबई में सेटल थे तो फिर उन्होंने उडुपी में इतना भव्य अपार्टमेंट क्यों खरीदा था. जबकि पास में ही विशाला के मातापिता का भी अच्छाखासा मकान बना हुआ है.

इस सवाल का जवाब रामाकृष्णनन साफसाफ नहीं दे पाया कि काफी इनवैस्टमेंट कर के पत्नी को बच्ची के साथ कर्नाटक में क्यों रखता था.

चाय के प्यालों से पलटी जांच

पुलिस उलझी हुई थी. एक दिन पुलिस आईजी प्रवीण सूद मानसिक एकाग्रता के लिए चाय की चुस्की ले रहे थे. विशाला हत्याकांड की उस प्राथमिक जांच का अध्ययन कर रहे थे. घटनास्थल पर ली गई कुछ तसवीरों में एकबारगी उन की नजर चाय के 2 खाली प्यालों पर गई, जो सेंटर टेबल पर रखे थे.

वह उसे एक सीध में रखे देख चौंक उठे. उन के मुंह से अचानक निकल पड़ा यह मर्डर लूट के लिए किया गया केस नहीं हो सकता. कोई एक या 2 व्यक्ति जरूर घर में आए होंगे. वे करीबी रिश्तेदार या परिचित भी हो सकते हैं. उन्हें विशाला ने चाय पिलाई होगी. आने वाला व्यक्ति एक या 2 हो सकते हैं. एक होने की स्थिति में एक कप की चाय विशाला ने खुद पी होगी.

इस विश्लेषण के बाद विशाला के मोबाइल की काल डिटेल्स का भी अध्ययन किया. उस से मालूम हुआ कि हत्या वाले दिन ही विशाला को उस के पति की काल आई थी. फिर क्या था, यह जानकारी पुलिस के लिए उम्मीद जगा गई और उन के शक की सूई विशाला के पति रामाकृष्णनन पर जा कर रुक गई.

उस के बाद पुलिस द्वारा मामले की जांच के लिए बनाई गई टीमों को गाइडलाइन जारी कर दी गई. जिस में विशाला के पति से सख्ती से पूछताछ करनी थी. जांच टीम ने ऐसा ही किया.

विशाला के पति ने शुरू में तो पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. बीचबीच में घडि़याली आंसू भी बहाता रहा. आखिर में पुलिस ने पूछा कि उस ने हत्या वाले दिन विशाला को किसलिए फोन किया था?

यह सुन कर रामाकृष्णनन आश्चर्य में पड़ गया. उस के मुंह से अचानक निकल गया, ‘‘आप को कैसे मालूम?’’

जांच अधिकारी हवा में तीर चलाते हुए बोले, ‘‘मुझे तो यह भी मालूम है कि तुम्हारी विशाला से क्या बातें हुईं?’’

‘‘वह कैसे हो सकता है, क्या मेरा फोन रिकौर्ड किया गया है?’’ रामाकृष्णनन बोला.

‘‘रिकौर्ड मैं ने नहीं किया है, खुद तुम्हारी पत्नी ने ऐप के जरिए फोन में ही रिकौर्ड कर रखा है.’’ जांच अधिकारी ने दावे के साथ यह भी कहा कि कहो तो अभी सुना दूं वह रिकौर्डिंग.

इतना सुनने के बाद रामाकृष्णनन की स्थिति जड़वत हो गई थी, काटो तो खून नहीं वाला शरीर बन चुका था. उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. जांच अधिकारी डपटते हुए बोले, ‘‘तुम्हारा राज खुल चुका है, गनीमत इसी में है कि तुम सब कुछ सचसच बता दो.’’

इस तरह विशाला हत्याकांड का करीब 20 दिनों में खुलासा हो गया. रामाकृष्णनन ने पुलिस को अपनी पत्नी की हत्या की जो कहानी बताई, दिलचस्प थी.

पति ने अपनी कंपनी के कर्मचारी को दी सुपारी

विशाला के पति ने अपना जुर्म स्वीकारते हुए कहा कि उस की हत्या के लिए सुपारी दी गई. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का एक व्यक्ति स्वामीनाथ निषाद दुबई में रामाकृष्णनन की कंपनी में नौकरी करता था.

वह बहुत विश्वासपात्र व्यक्ति था. एक दिन उस ने उस से कहा कि भारत में किसी व्यक्ति की हत्या करानी है. उस की जानकारी में कोई ऐसा सुपारी किलर है तो बताए.

स्वामीनाथ निषाद पूरी जानकारी ले कर 5 लाख रुपए में काम करवाने के लिए तैयार हो गया. वैसे भी उस का दुबई में नौकरी के अनुबंध का समय पूरा होने वाला था. उस के भारत जाने का समय भी आ गया था.

पत्नी की हत्या करवाने के बारे में उस ने पुलिस को जो कारण बताया, वह इस प्रकार है.

बात मार्च, 2021 की है. रामाकृष्णनन अपनी पत्नी विशाला और बेटी के साथ अपने घर आया. बेटी पैदा होने के बाद दोनों के दांपत्य में किसी बात को ले कर खटास पैदा हो गई थी.

विशाला चाहती थी बाकी की जिंदगी वह भारत आ कर बिताए. दुबई में एक अच्छे सेटलमेंट को छोड़ कर भारत में आ कर बसने की जिद से रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती गई.

रामाकृष्णनन ने यह भी बताया कि विशाला भारत में किसी और व्यक्ति से प्यार करती थी, इस का उसे शक था. शक का कारण भी था कि वह मोबाइल पर काफी देर तक बातें किया करती थी. इस की जानकारी उसे किसी नजदीकी ने दी थी.

कई बार उस के सामने भी इस तरह के संदिग्ध फोन पत्नी के फोन पर आते थे, तब वह अलग जा कर काफी देर तक बातें करती रहती थी. जब उस ने उस से जानना चाहा कि वह किस से लंबी बातें करती है, तब उस ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया था.

उस के भारत में रहने की जिद से उस का शक और पक्का हो गया था.  रामाकृष्णनन ने कहा कि वह विशाला से बेहद प्यार करता था. उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था. यही वजह थी कि उस ने विशाला की

भावनाओं की कद्र करते हुए ब्रह्मावर के कुंब्रागोडू में एक अच्छे अपार्टमेंट की व्यवस्था कर दी थी.

आलीशान तरीके से उस को सजायासंवारा गया. सभी सुविधाओं की व्यवस्था की गई, ताकि  विशाला को खुश किया जा सके. वह भारत में एक संपन्न परिवार की तरह सम्मानपूर्वक इस अपार्टमेंट में रह सके. इसी वर्ष मार्च के महीने में वह अपनी पत्नी और बेटी को ले कर भारत आया था.

कर्नाटक के उडुपी शहर में स्थित अपने निजी अपार्टमेंट में काफी दिनों तक साथ गुजारे थे. उस के बाद वह तीनों वापस दुबई चले गए. जितने दिन विशाला दुबई में रही, वह पति को परेशान करती रही. अंत में ऊब कर वह 2 जुलाई, 2021 को पत्नी विशाला और बेटी के साथ भारत आया. उसी दौरान उस ने स्वामीनाथ निषाद से संपर्क किया था, जो उस समय गोरखपुर आया हुआ था.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से उडुपी, कर्नाटक की दूरी लगभग 2000 किलोमीटर से अधिक है. वहां रेलगाड़ी से पहुंचने में लगभग 2 दिन का वक्त लगता है. उस ने स्वामीनाथ को उडुपी बुला लिया. उस के उडुपी पहुंचने पर एक होटल में उस के रुकने की व्यवस्था की गई थी. ताकि जब वह घर पर आए तो फ्रैश हालत में लोकल सा मालूम हो.

चूंकि उसे पत्नी का चेहरा स्वामीनाथ को दिखाना था, इसलिए वह स्वामीनाथ को घर ले गया और पत्नी से उस की मुलाकात करवाई. उस ने स्वामीनाथ का परिचय अपने दोस्त के रूप में कराया.

पत्नी को बताया कि मेरा यह दोस्त स्वामीनाथ परेशानी या समस्या में मददगार बन सकता है. इस के कुछ दिनों बाद रामाकृष्णनन दुबई चला गया. पत्नी विशाला जब बेटी को ले कर 2 जुलाई को भारत आई थी, तब अपार्टमेंट की चाबी उसी के पास थी, लेकिन वह अपने मांबाप के पास ही रहती थी.

रामाकृष्णन ने बताया कि कौन्ट्रैक्ट किलर को विशाला के मायके की कोई जानकारी नहीं दी गई थी. विशाला की हत्या करने की योजना अपने फ्लैट में ही बनाई गई. वारदात के दिन रामकृष्णनन ने पत्नी को फोन किया कि उस का दोस्त स्वामीनाथ कोई गिफ्ट ले कर अपार्टमेंट पर पहुंचने वाला है. उसे वह रिसीव कर ले.

उस दिन वह वह आटो से बैंक जा रही थी. फोन पर बात होते ही वह तुरंत वापस अपार्टमेंट में पहुंच गई. कुछ ही देर में स्वामीनाथ भी अपने साथी के साथ वहां पहुंच गया.

पति का दोस्त होने के नाते विशाला ने उन दोनों को जलपान करवाया. चाय पिलाई. इसी बीच स्वामीनाथ ने अपना मोबाइल चार्ज करने के लिए विशाला से चार्जर मांगा. विशाला ने पास में लगे चार्जर में स्वामीनाथ का मोबाइल लगा दिया.

विशाला को क्या पता था कि वह पति का दोस्त नहीं, कोई सुपारी किलर है. उस ने अपने साथी की मदद से विशाला को तब दबोच लिया, जब वह उसे विदा करने के लिए पीछेपीछे चल रही थी.

स्वामीनाथ ने वहीं पास में रखे मोबाइल चार्जर के तार को एक झटके में विशाला की गरदन में लपेट दिया.  कुछ समय में उस की दम घुटने से मौत हो गई.

उडुपी पुलिस ने विशाला हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली थी, कथा लिखे जाने तक स्वामीनाथ की तलाश में जुट गई. इस के लिए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के कई चक्कर लगाए.

गोरखपुर पुलिस के सहयोग से आखिरकार स्वामीनाथ पुलिस के हत्थे चढ़ गया. उस के दूसरे साथी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

उधर विशाला के घर वालों का कहना है कि विशाला का पति किसी अन्य महिला के संपर्क में था. वह विशाला को छोड़ कर किसी और महिला के साथ जीवन व्यतीत करना चाहता था. विशाला इस का विरोध करती थी, इसलिए रामाकृष्णनन ने विशाला को अपनी प्रेम कहानी को अंजाम देने के लिए विशाला को रास्ते से हटाया.

बहरहाल, पुलिस ने विशाला की हत्या के आरोप में उस के पति रामाकृष्णनन सुपारी किलर स्वामीनाथ और उस के साथी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

बेटी ने दी बाप के कत्ल की सुपारी : भाग 3

दरअसल, समीर के पिता जरीफ बीएएमएस डाक्टर थे और शामली में अपना क्लीनिक चलाते थे. उन की चाहत थी कि समीर बड़ा हो कर डाक्टर बने. इसीलिए उन्होंने डाक्टरी की कोचिंग के लिए उसे कोटा भेज दिया था. उन के रिश्तेदार का बेटा भी समीर के साथ ही एमबीबीएस की तैयारी कर रहा था.

काव्या से शुरू हुई समीर की दोस्ती गुजरते वक्त के साथ प्यार में बदल गई थी. काव्या के प्रति समीर की चाहत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि एक दिन उस ने अपने हाथ पर उस का नाम भी गुदवा लिया. काव्या को यह तो पता था कि समीर उस पर मरता है लेकिन उसे ये नहीं मालूम था कि उस की दीवानगी में वह उस का नाम अपने हाथ पर भी गुदवा लेगा.

इधर इंटरमीडिएट के बाद दोनों चोरीछिपे पढ़ाई के बहाने कभी घर में तो कभी घर के बाहर मिलतेजुलते थे. धीरेधीरे यह बात राकेश के कानों तक जा पहुंची. राकेश की पत्नी कृष्णा के संबध भी अपने पति से ठीक नहीं थे.

दरअसल, तेजतर्रार और चंचल स्वभाव वाली कृष्णा के चरित्र पर राकेश को पहले से ही शक था. राकेश को भनक थी कि कृष्णा उस के ड्यूटी जाने के बाद घर से बाहर अपने चाहने वालों से मिलती रहती है. राकेश को तो इस बात का भी शक था कि कृष्णा के चाहने वाले उस से मिलने के लिए घर में भी आते हैं.

यही कारण था कि अकसर राकेश और कृष्णा के बीच झगड़ा होता रहता था. अपनी इसी झल्लाहट में राकेश कृष्णा पर अकसर हाथ भी छोड़ देता था. जब राकेश शराब पी लेता तो वह कृष्णा को न सिर्फ गालियां देता, बल्कि मारपीट करने के दौरान यहां तक तंज कस देता कि उसे शक है कि उस की तीनों औलाद असल में उस की हैं या किसी और की.

पिता का विरोध करने के लिए जब उस की दोनों बेटियां वैशाली और वैष्णवी उर्फ काव्या कोशिश करतीं तो उन्हें भी राकेश की मार का शिकार होना पड़ता.

इस दौरान जब एक दिन राकेश को पता चला कि काव्या का चक्कर समीर नाम के एक मुसलिम युवक से चल रहा है तो उन का गुस्सा और बढ़ गया. उस ने पत्नी के साथ अब दोनों बेटियों पर भी लगाम कसनी शुरू कर दी. हालांकि समीर एमबीबीएस की तैयारी करने के लिए कोटा जरूर चला गया था, लेकिन वह हर हफ्ते चोरीछिपे अपने परिवार को बताए बिना शामली आता और काव्या से मिल कर चला जाता था.

काव्या और समीर की दोस्ती और परवान चढ़ रहे प्यार की कहानी की खबर काव्या की मां कृष्णा और उस की बड़ी बहन वैशाली को थी. इस की जानकारी राकेश को जब मोहल्ले के कुछ लोगों से मिली तो उस ने काव्या के साथ सख्ती से पेश आना शुरू कर दिया.

राकेश थक गया था लोगों के ताने सुन कर

शक की आग में जल रहे राकेश के गुस्से में एक दिन उस समय घी पड़ गया, जब वह अपनी ड्यूटी से घर लौट रहा था. मोहल्ले के ही एक व्यक्ति ने उसे रोक कर कहा, ‘‘राकेश भाई, आंखों पर ऐसी कौन से पट्टी बांध रखी है आप ने, जो दूसरे मजहब का एक लड़का सरेआम आप की बेटी को ले कर घूमता है. आप के घर आताजाता है. लेकिन न तो आप उसे रोक रहे हैं और न ही आप की धर्मपत्नी. अरे भाई अगर कोई डर या कोई दूसरी वजह है तो हमें बताओ, हम रोक देंगे उस लड़के को.’’

उस दिन कालोनी के व्यक्ति का ताना सुन कर राकेश के तनबदन में आग लग गई. ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. इस से पहले भी अलगअलग लोगों ने दबी जुबान में इस बात की शिकायत की थी, लेकिन अब काव्या की शिकायतें खुल कर होने लगीं. खुद राकेश ने भी एकदो बार समीर को अपने घर आते देखा था.

राकेश ने पहले समीर को समझा कर कह दिया कि वह उस के घर न आया करे, क्योंकि काव्या से उस का मिलनाजुलना उन्हें पसंद नहीं है. बाद में जब समझाने पर भी समीर नहीं माना तो उस ने समीर को एक बार 2-3 थप्पड़ भी जड़ दिए. साथ ही धमकी भी दी कि अगर फिर कभी काव्या से मिलने की कोशिश की तो वह उसे पुलिस को सौंप देंगे.

इस के बाद से समीर ने काव्या से मिलने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी. अब या तो वह काव्या से सिर्फ उस के घर पर ही मिलता था या फिर दोनों शहर से बाहर कहीं दूर जा कर मिलते थे.

राकेश के ड्यूटी पर निकल जाने के बाद घर में क्याक्या होता, यह खबर रखने के लिए राकेश ने अपने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा लिए. इन सीसीटीवी कैमरों का मौनीटर उस ने अपने मोबाइल फोन में इंस्टाल करवा लिया. इसी सीसीटीवी के जरिए वह राज खुल गया, जिस का राकेश को शक था. उस ने मौनीटर पर खुद देखा कि किस तरह उस की गैरमौजूदगी में उस की पत्नी और बेटी से मिलने के लिए उन के आशिक उसी के घर में आते हैं.

पहले पत्नी उतरी विरोध पर

पत्नी और बेटी के चरित्र के इस खुलासे के बाद राकेश का मन बेटियों और पत्नी के प्रति खट्टा हो गया. राकेश के लिए पत्नी और बेटियों के साथ मारपीट करना अब आए दिए की बात हो गई.

रोजरोज की मारपीट और बंधनों से परेशान कृष्णा ने एक दिन अपनी दोनों बेटियों के सामने खीझते हुए बस यूं ही कह दिया कि जिंदा रहने से तो अच्छा है कि ये इंसान मर जाए, पता नहीं वो कौन सा दिन होगा जब हमें इस आदमी से छुटकारा मिलेगा.

बस उसी दिन काव्या के दिलोदिमाग में ये बात बैठ गई कि जब तक उस का पिता जिंदा है, वह और उस की मांबहनें आजादी की सांस नहीं ले सकतीं, न ही अपनी मरजी से जिंदगी जी सकती हैं.

काव्या के दिमाग में उसी दिन से उधेड़बुन चलने लगी कि आखिर ऐसा क्या किया जाए कि उस का पिता उन के रास्ते से हट जाए. अचानक उस की सोच समीर पर आ कर ठहर गई. उसे लगने लगा कि समीर उस से जिस कदर प्यार करता है, बस एक वही है, जो उस की खातिर ये काम कर सकता है.

लेकिन इस के लिए जरूरी था कि समीर को भावनात्मक रूप से और लालच दे कर इस काम के लिए तैयार किया जाए. इस बात का जिक्र काव्या ने अपनी मां से किया तो उस ने भी हामी भर दी. बस फिर क्या था काव्या मौके का इंतजार करने लगी.

एक दिन मौका मिल गया. समीर ने रोजरोज चोरीछिपे मिलने से परेशान हो कर काव्या से कहा कि वह इस तरह मिलनेजुलने से परेशान हो चुका है, क्यों न वे दोनों भाग जाएं और शादी कर लें.

पिता को बताया जल्लाद

काव्या ने कहा कि वह उस से भाग कर नहीं बल्कि पूरे जमाने के सामने ही शादी करेगी लेकिन इस के लिए एक समस्या है. काव्या ने समीर से कहा कि उस के पिता उन के प्रेम में बाधा बने हैं. उन के जीते जी कभी वे दोनों एक नहीं हो सकते. उन के मेलजोल के कारण ही पिता आए दिन पूरे परिवार के साथ मारपीट करते है.

चाची का चित्तचोर : चाची के जाल में फंसा मदनमोहन

राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी शहर के थाना यूआईटी के थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार को 15 फरवरी, 2021 की सुबह फोन पर सूचना मिली कि सेक्टर  4 व 5 के बीच सड़क पर एक व्यक्ति का शव पड़ा है. सूचना पा कर थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे.

मौके पर उन्हें वास्तव में एक युवक का शव पड़ा मिला. उन्होंने जब शव की जांच की तो उस के दोनों पैरों के अंगूठों से चमड़ी उधड़ी हुई दिखी. प्रथमदृष्टया ऐसा लग रहा था मानो मृतक की हत्या कहीं और कर के शव यहां ला कर डाला गया हो.

पुलिस ने इस नजर से भी जांच की कि मृतक कहीं दुर्घटना का शिकार तो नहीं हो गया. मगर मौकाएवारदात और शव को देखने से ऐसा नहीं लग रहा था. शव पर और किसी जगह चोट या रगड़ के निशान या खून निकला हुआ नहीं था. मामला सीधे हत्या का लग रहा था. मामला संदिग्ध लगा तो थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार ने मामले की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी.

भिवाड़ी एसपी राममूर्ति जोशी के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने एएसपी अरुण मच्या को घटनास्थल पर जा कर मामला देखने के निर्देश दिए. एएसपी अरुण मच्या और फूलबाग थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह भी घटनास्थल पर आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने एफएसएल टीम को भी वहां बुला कर साक्ष्य इकट्ठा करवाए. पुलिस अधिकारियों ने जांचपड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया. शव की शिनाख्त नहीं हुई थी. लेकिन जब तक शिनाख्त नहीं हो जाती. तब तक पुलिस हाथ पर हाथ धर कर बैठने वाली नहीं थी. पुलिस ने अज्ञात शव मिलने का मामला दर्ज कर लिया.

इस केस को सुलझाने के लिए एएसपी अरुण मच्या के निर्देशन में एक पुलिस टीम गठित की गई. इस टीम में यूआईटी थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार के साथ फूलबाग थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह सोलंकी, एसआई अखिलेश, हैडकांस्टेबल मुकेश कुमार, राकेश कुमार, मोहनलाल, कर्मवीर, रामप्रकाश, राजेंद्र, संतराम, सुरेश, ओमप्रकाश व ऊषा को शामिल किया गया.

मृतक की हुई शिनाख्त

इस पुलिस टीम ने मृतक के फोटो एवं पैंफ्लेट बना कर भिवाड़ी में सार्वजनिक स्थानों पर लगवा कर लोगों से शव की शिनाख्त की अपील की. साथ ही पुलिस टीम ने 2 दिन में लगभग 800 घरों में संपर्क कर शव की शिनाख्त कराने की कोशिश की. वहीं पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले.

सीसीटीवी फुटेज में एक बाइक पर एक युवक और महिला किसी व्यक्ति को बीच में बैठा कर ले जाते दिखे. पुलिस ने मृतक की शिनाख्त कर ली. मृतक का नाम कमल सिंह उर्फ कमल कुमार था. मृतक कमल निवासी उमराया, छाता, जिला मथुरा का रहने वाला था और इन दिनों भिवाड़ी की प्रधान कालोनी, सेक्टर-2 में रह रहा था.

पुलिस ने मृतक कमल के घर जा कर पूछताछ की तो मृतक की बीवी जमना देवी अपने पति की हत्या की बात सुन कर रोने लगी.

पुलिस ने उसे ढांढस बंधाया और पूछताछ की. जमना देवी ने बताया कि उस का पति कमल एटीएम से रुपए निकलवाने गया था. जबकि मृतक के बड़े भाई भीम सिंह ने पुलिस को बताया कि 14 फरवरी, 2021 की रात कमल सिंह की पत्नी जमना देवी उन के घर आई थी. वह उस से बाइक की चाबी यह कह कर मांग कर लाई थी कि कमल को बल्लभगढ़ जाना है.

भीम सिंह ने तब बाइक की चाबी जमना को दे दी थी. पुलिस को लगा कि मृतक की बीवी गुमराह कर रही है. तब पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज जमना देवी को दिखाई. सीसीटीवी फुटेज में बाइक पर बैठी महिला के कपड़े एवं जमना के पहने कपड़े एक ही थे.

पुलिस को पक्का यकीन हो गया कि कमल की हत्या में उस की पत्नी जमना का हाथ है. तब पुलिस ने जमना से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में जमना टूट गई. उस ने कबूल कर लिया कि अपने प्रेमी और भतीजे मदनमोहन के साथ मिल कर पति की हत्या की थी.

तब पुलिस ने मृतक कमल सिंह की बुआ के पोते 19 वर्षीय मदनमोहन को फरीदाबाद, हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मदनमोहन को मोबाइल की लोकेशन के आधार पर साइबर सेल एक्सपर्ट की मदद से धर दबोचा था.

पुलिस गिरफ्त में आते ही मदनमोहन समझ गया कि उस का भांडा फूट गया है. इसलिए उस ने भी कमल सिंह की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. इस तरह 19 फरवरी, 2021 को पुलिस ने हत्या के इस मामले से परदा हटा दिया. मदनमोहन को यूआईटी थाना पुलिस थाने ले आई.

शव की शिनाख्त होने के बाद कमल सिंह के शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया. मृतक के भाई भीम सिंह की तरफ से जमना देवी उर्फ लक्ष्मी जादौन और मदनमोहन जादौन के खिलाफ भादंसं की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

आरोपियों जमना देवी उर्फ लक्ष्मी और उस के प्रेमी भतीजे मदनमोहन से की गई पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस प्रकार निकली—

कमल सिंह और भीम सिंह जादौन सगे भाई थे. कई साल पहले वह अपने गांव उमराया, थाना छाता, जिला मथुरा, उत्तरप्रदेश से राजस्थान के अलवर के भिवाड़ी शहर में आ बसे थे. दोनों भाई भिवाड़ी में किराए के मकान में रहते थे. दोनों भाई माश मेटल कंपनी चौक भिवाड़ी में नौकरी करते थे.

शादी के बाद दोनों भाई अलग हो गए थे. कमल सिंह अपनी पत्नी जमना देवी उर्फ लक्ष्मी के साथ प्रधान कालोनी, सेक्टर-2 में किराए के मकान में रहता था. वहीं भीम सिंह अपने बीवीबच्चों के साथ रामनिवास कालोनी, भिवाड़ी में रहता था. दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे. दोनों की तनख्वाह भी अच्छीखासी थी. जिस से घरपरिवार का खर्च आराम से चल रहा था.

शादी में दे बैठे दिल

जमना करीब एक साल पहले कमल की बुआ के पोते की शादी में गांव सांखी, मथुरा गई थी. शादी में वैसे भी सब लोग अच्छे कपड़े और शृंगार कर के शामिल होते हैं. महिलाएं और युवतियां तो ऐसे मौके पर सजनेसंवरने में कोई कसर नहीं छोड़तीं.

जमना ने भी मेकअप करा कर अच्छे कपड़े पहने. वह बहुत खूबसूरत लग रही थी. शादी श्रीचंद जादौन के बड़े बेटे की थी. दूल्हे का छोटा भाई मदनमोहन भी उस समय खूब सजाधजा हुआ था. वह शक्लसूरत से भी ठीक ही था. दूल्हे के आसपास घूमते मदनमोहन और जमना की नजरें एकदूसरे से मिलीं तो दोनों एकदूसरे से नजरें नहीं हटा सके.

मदन को जहां जमना प्यारी लगी थी, वहीं जमना को भी मदन भा गया था. मदन उस समय 18 साल का गबरू जवान था. दोनों का रिश्ता वैसे तो चाचीभतीजे का था मगर उन की आंखों में एकदूजे के लिए अलग ही चाहत थी.

दोनों एकदूसरे को ऐसे देख रहे थे, मानो उन के अलावा उन के लिए वहां कोई और था ही नहीं. मदन ने जब भी इधरउधर देख कर जमना की तरफ देखा, वह उसे ही देखती मिली. मदनमोहन ने तब मौका पा कर जमना चाची से कहा, ‘‘चाची, क्या खूबसूरत लग रही हो. नयनों के तीर चुभो कर मेरा दिन घायल कर दिया.’’

सुन कर जमना हंस कर बोली, ‘‘तुम्हारे नयनों ने मेरा भी दिल घायल कर दिया. अब इस की मरहमपट्टी तुम्हें ही करनी पड़ेगी.’’

‘‘बंदा अभी हाजिर है. आप हुक्म करें. मैं दिल का नया डाक्टर हूं.’’ वह बोला.

‘‘अच्छा, तो डाक्टर साहब से दिल घायल हुआ उस का इलाज आज जरूर कराएंगे.’’ जमना ने हंस कर कहा.

ये बातें हो तो मजाक में रही थीं मगर दोनों के मन में एकदूजे के लिए चाहत जाग उठी थी. दोनों शादी के दौरान एकदूसरे से मिलते रहे. एकदूसरे की खूबसूरती की तारीफों के पुल बांधते रहे.

मौका रात में मिला तो दोनों एकदूसरे की बांहों में समा गए. उन का चाचीभतीजे का रिश्ता वासना की आग में जल कर खाक हो गया. दोनों में एक नया रिश्ता कायम हो गया, जिस का अंत बहुत बुरा होने वाला था.

अगले दिन जमना जब गांव सांखी बुआ सास के घर से भिवानी आने की तैयारी कर रही थी तो मदनमोहन ने कहा, ‘‘चाची, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं. तुम्हारे जाने के बाद मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी.’’

‘‘आज के बाद चाची नहीं जमना कहोगे.’’ जमना बोली.

तब मदनमोहन बोला, ‘‘जैसा आप का हुकम मेरी प्यारी डार्लिंग जमना. मुझे हर रोज फोन करना. मिलने भी बुलाना. क्योंकि मैं तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं कर पाऊंगा.’’

‘‘जरूर मेरे राजा, मुझे भी तुम्हारी बहुत याद सताएगी. याद करूं तब दौड़े आना.’’ वह बोली.

‘‘जरूर आऊंगा.’’ मदन ने जमना की ओर देखते हुए रुआंसे स्वर में कहा.

इस के बाद दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर लिया. जमना भिवाड़ी आ गई. वह भिवाड़ी आ जरूर गई थी, लेकिन अपना दिल तो भतीजे मदनमोहन के पास छोड़ आई थी. यही हाल मदनमोहन का भी था. उसे जमना के बगैर कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. मगर करते भी तो क्या. दोनों फोन पर बातें कर के दिल को तसल्ली देते रहते.

एक दो बार मदनमोहन भिवाड़ी भी आया और हसरतें पूरी कर वापस गांव मथुरा लौट आया. उन के बीच अवैध संबंध बने तो दोनों को दुनिया फीकी लगने लगी. मौका मिलने पर मदन भिवाड़ी आ कर जमना देवी से मिल जाता. दोनों कमल सिंह की गैरमौजूदगी में रास रचाते थे.

दोनों एकदूसरे से कोसों दूर रहते थे. एक भिवाड़ी में तो दूसरा मथुरा में. ऐसे में हर रोज मिलना संभव नहीं था. ऐसे में वे दोनों फोन पर बातें कर जी हलका करते थे.

घटना से 6 महीने पहले एक दिन कमल ने अपनी पत्नी जमना को किसी से हंसहंस कर अश्लील बातें करते पकड़ लिया. तब कमल ने उस से पूछा कि किस से बातें कर रही थी. जमना ने बताया कि वह मदनमोहन से ही बात कर रही थी. तब उस ने कहा, ‘‘अरे शर्म नहीं आई तुझे उस से ऐसी बातें करते. अगर आज के बाद किसी से भी इस तरह की बात की तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

तब जमना ने कसम खा कर पति से कहा कि वह भविष्य में कभी भी मदनमोहन से बात नहीं करेगी. जमना ने पति से यह वादा कर तो लिया लेकिन मदन से बात किए बिना उस का मन नहीं लग रहा था. तब उस ने एक नई सिम ले ली. फिर वह उस नए नंबर से चोरीछिपे मदन से बतिया लेती. कमल ने सोचा कि बीवी ने मदनमोहन से बात करनी छोड़ दी है.

2 महीने बाद जमना को पुन: मदनमोहन से फोन पर बातें करते समय कमल ने पकड़ लिया. तब कमल ने जमना को जम कर पीटा और मदनमोहन को भी फोन कर के धमकाया, ‘‘हरामजादे, तेरे खिलाफ अपनी बीवी से बलात्कार करने का मुकदमा दर्ज कराऊंगा. तब तू सुधरेगा.’’

इतनी पिटाई के बाद भी जमना नहीं सुधरी. उसे अपने प्रेमी से बात करनी नहीं छोड़ी.

इस के बाद कमल सिंह ने एक बार फिर बीवी को मदनमोहन से बात करते पकड़ा. तब बीवी को पीटा और मदनमोहन को धमकी दी कि उस ने अगर 2 लाख रुपए नहीं दिए तो वह बलात्कार का मामला दर्ज करा कर सारे परिवार व रिश्तेदारों से तुम दोनों के अवैध संबंधों की पोल खोल देगा.

मदनमोहन डर गया. उस ने कहा कि उस के पास इतने रुपए नहीं हैं. वह रुपए किस्तों में दे देगा. वह बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज न कराएं. इस के बाद कमल ने 14 फरवरी, 2021 को फोन कर मदनमोहन को भिवाड़ी बुलाया. शाम 5 बजे मदनमोहन भिवाड़ी स्थित कमल के घर आया. इस के बाद कमल और मदनमोहन ने साथ बैठ कर शराब पी.

जब शराब का नशा चढ़ा तो कमल ने मदनमोहन से पूछा कि 2 लाख रुपए देगा तो बलात्कार का मामला दर्ज नहीं कराऊंगा. तब मदनमोहन ने कहा कि वह किस्तों में रुपए जरूर दे देगा.

इस के बाद कमल, जमना व मदनमोहन कमरे में एक ही बैड पर सो गए. कमल के दिमाग में तो उस समय कुछ और ही चल रहा था. वह चुपके से उठा और पास में सो रही अपनी बीवी और मदनमोहन के इस तरह फोटो खींचने लगा जैसे वे दोनों एक साथ सो रहे हैं.

फोटो खींच कर कमल ने मदनमोहन और जमना को जगा कर कहा, ‘‘अब मैं रिश्तेदारों को फोन कर के बुलाता हूं और पूरी कालोनी के लोगों को बुला कर बताता हूं कि मैं ने तुम दोनों को शारीरिक संबंध बनाते रंगेहाथों पकड़ा है.’’

तब कमल की पत्नी जमना बोली कि ऐसा मत करो. लेकिन कमल नहीं माना और जिद करने लगा कि वह लोगों को तुम्हारे अवैध संबंधों के बारे में बता कर ही रहेगा.

अपनी पोल खुलने के डर से मदनमोहन ने कमल सिंह को पकड़ लिया और जमना ने अपनी चुन्नी पति के गले में डाल कर जोर से कस दी, जिस से कमल की मृत्यु हो गई. तब मदन और जमना के हाथपांव फूल गए. मगर कमल तो मर चुका था.

तब दोनों ने कमल की लाश ठिकाने लगाने की योजना बनाई, जिस के तहत जमना उसी समय अपने जेठ भीम सिंह के घर गई और उन की बाइक की चाबी यह कह कर ले आई कि कमल को अभी एटीएम से पैसे निकालने बल्लभगढ़ जाना है.

जमना और मदन ने कमल की बाइक पर रात करीब एक बजे कमल के शव को इस तरह दोनों के बीच बिठा कर रखा जैसे किसी बीमार को अस्पताल ले जा रहे हैं. दोनों बाइक पर शव को बाबा मोहनराम के जंगलों में डालने के लिए रवाना हुए लेकिन सड़क पर आने पर बाइक के पीछे पुलिस गश्त की मोटरसाइकिल देख कर मदनमोहन ने बाइक हेतराम चौक से सेक्टर-5 की तरफ मोड़ दी.

सेक्टर-5 व 6 वाली रोड पर बस की लाइट दिखाई देने पर दोनों ने शव को सेक्टर-5 में खाली प्लौट के सामने सड़क किनारे पटक दिया और वापस घर आ गए. मोटरसाइकिल पर मृतक कमल के पैर जमीन पर लटक रहे थे, जिस के कारण दोनों पैरों के अंगूठे आगे से रगड़ कर छिल गए थे. लाश ठिकाने लगाने के बाद आरोपी मदनमोहन फरीदाबाद चला गया.

अगली सुबह यानी 15 फरवरी, 2021 सड़क पर शव देख कर साढ़े 7 बजे थाना यूआईटी भिवाड़ी फेज-3 के थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार को किसी राहगीर ने शव पड़े होने की सूचना दी. इस के बाद थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.

पुलिस ने मृतक की बाइक और जमना देवी व मदनमोहन के मोबाइल जब्त कर के पूछताछ के बाद दोनों को भिवाड़ी कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.