सपनों के पीछे भागने का नतीजा

29दिसंबर, 2018. समय सुबह के 4 बजे. स्थान थाणे. मुंबई से सटे जनपद थाणे के सिविल अस्पताल से कासारवाडवली पुलिस को एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिली, जिसे थाने में मौजूद इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने गंभीरता से लिया. उन्होंने चार्जरूम की ड्यूटी पर तैनात एसआई संतोष धाडवे को बुला कर अस्पताल से मिली सूचना के बारे में बताया और केस डायरी तैयार करने का निर्देश दिया. साथ ही उन्होंने इस की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पुलिस कंट्रोलरूम को भी दे दी.

थाने में सूचना दर्ज करवाने के बाद इंसपेक्टर वैभव धुमाल अपने सहायक इंसपेक्टर कैलाश टोकले, एसआई विनायक निबांलकर, संतोष धाडवे, कांस्टेबल राहुल दडवे, दिलीप भोसले, राजकुमार महापुरे और महिला कांस्टेबल मीना धुगे को साथ ले कर थाणे सिविल अस्पताल के लिए रवाना हो गए.

जिस समय पुलिस टीम अस्पताल परिसर में दाखिल हुई, तब तक डाक्टरों ने उस व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया था, जिसे संदिग्ध अवस्था में अस्पताल लाया गया था और लाने वाले उसे अस्पताल में छोड़ कर गायब हो गए थे. पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि मृतक को अस्पताल में उपचार के लिए रात के साढे़ 3 बजे लाया गया था.

उसे लाने वालों में एक सुंदर महिला और एक हट्टाकट्टा युवक था. उन का कहना था कि वह व्यक्ति घायल अवस्था में उन्हें कलवा बांध विलगांव की सुरंग के पास सड़क किनारे तड़पता हुआ मिला था. शायद वह किसी भारी वाहन की चपेट में आ गया होगा. इंसानियत के नाते वे उसे अस्पताल ले आए थे.

घायल की स्थित देख कर डाक्टर उस के उपचार में जुट गए. डाक्टर घायल के बारे में कुछ बताते उस से पहले ही उसे लाने वाली महिला और युवक दोनों अस्पताल से गायब हो गए. मृतक की उम्र 30 साल के आसपास थी. उस के सिर पर घाव और गले पर खरोचों के अलावा काले रंग का एक गहरा निशान भी था.

रहस्यमय लाश और अंजान महिला व युवक

अस्पताल के डाक्टरों और अस्पताल में तैनात पुलिस कांस्टेबल के बयानों के हिसाब से मामला काफी जटिल था. इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने मृतक की लाश का बारीकी से निरीक्षण किया तो उन्हें ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया जो महिला और उस के साथी युवक ने अस्पताल के डाक्टरों और कांस्टेबल को बताया था. बहरहाल प्राथमिक काररवाई के बाद इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने लाश का पंचनामा बना कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और थाने लौट आए.

थाने लौट कर इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने अपने सहायकों के साथ विचारविमर्श कर तफ्तीश की रूप रेखा तैयार की. इस के साथ ही उन्होंने इस बारे में डीसीपी अभिनाश आंमोरे, एसीपी महादेव भोर और थानाप्रभारी दत्तात्रेय ढोले को बता कर तफ्तीश शुरू कर दी.

जांच आगे बढ़ाने के लिए मृतक की शिनाख्त जरूरी थी. वह कौन था, कहां रहता था. उसे अस्पताल लाने वाली महिला और युवक कौन थे. जैसे कई सवाल थे, जिन का जवाब मिले बिना तफ्तीश आगे नहीं बढ़ सकती थी.

अस्पताल के सीसीटीवी के जो फुटेज मिले उन में मृतक और उसे लाने वालों की तसवीरें अस्पष्ट थीं. सारी कडि़यों को जोड़ना आसान तो नहीं था, लेकिन नामुमकिन भी नहीं था. सोचविचार कर इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने अपने स्टाफ के अनुभवी कर्मचारियों की एक टीम तैयार की और उसे 2 भागों में बांट कर अलगअलग जिम्मेदारी सौंप दी.

पहली टीम को उन्होंने कलवा बांध विलगांव सुरंग के पास की सच्चाई का पता लगाने भेज दिया. जिस का जिक्र डाक्टर और कांस्टेबल के बयानों में आया था. दूसरी टीम को उन्होंने अस्पताल से मिले सीसीटीवी के उन फुटेज के आधार पर आसपास के गांवों में जा कर मृतक और उसे अस्पताल लाने वालों के बारे में जानकारी हासिल करने को कहा.  कहावत है कि विश्वास का वृक्ष कभी नहीं सूखता. इस मामले में भी यही हुआ.

पहली टीम बांध विलगांव से खाली हाथ लौट आई. बांध विलगांव के पास ऐसा कुछ नहीं हुआ था, जैसा उस महिला और युवक ने डाक्टरों को बताया था. इंसपेक्टर वैभव धुमाल को जो संदेह था सही निकला. इंसपेक्टर वैभव धुमाल को विश्वास था कि कोई न कोई राह जरूर निकलेगी.

शक की सूई सीधे हत्या की तरफ इशारा कर रह थी. यह बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी स्पष्ट हो गई थी. पता चला, उस के सिर पर घातक वार तो किया गया था, लेकिन उस की मौत गला घोंटने से हुई थी. साफ पता चल रहा था कि उस की बेरहमी से हत्या कर के पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई थी. इसी वजह से वह महिला और युवक शक के दायरे में आ गए.

पहली टीम को भले ही कोई सुराग नहीं मिला था, लेकिन दूसरी टीम खाली हाथ नहीं लौटी.

इस टीम ने उस औटो वाले को खोज निकाला, जिस के औटो से मृतक को अस्पताल लाया गया था. औटो वाले की निशानदेही पर पुलिस टीम मृतक के परिवार तक पहुंच गई.

उस के परिवार ने मृतक की शिनाख्त गोपी नाइक के रूप में की. गोपी नाइक पत्नी अैर बेटी के सथ घोड़बंदर रोड गायमुख इलाके की टीएमसी कालोनी में रहता था. वह थाणे म्युनिसिपल कारपोरेशन में नौकरी करता था.

इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने तत्काल मृतक गोपी नाइक के भाई दिलीप नाइक और परिवार वालों से पूछताछ की. जब दिलीप नाइक को अस्पताल ले जा कर लाश दिखाई गई तो वह गोपी नाइक का शव देख कर फूटफूट कर रोने लगा.

दिलीप नाइक को अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई तो उस ने गोपी नाइक को अस्पताल लाने वाली महिला और उस के साथ के युवक को पहचान लिया. वह महिला मृतक की पत्नी प्रिया नाइक थी और उस के साथ वाला युवक उस का बौयफ्रैंड महेश कराले था.

पुलिस ने गोपी नाइक के भाई दिलीप नाइक की तहरीर पर केस दर्ज कर के शव गोपी नाइक को सौंप दिया. इंसपेक्टर वैभव धुमाल अपनी टीम के साथ जब गोपी नाइक के घर पहुंचे तो प्रिया घर में नहीं थी. पूछताछ में आसपड़ोस वालों ने बताया कि उन का घर पिछले 2-3 दिनों से बंद है. जब उन लोगों को यह जानकारी मिली कि गोपी नाइक की हत्या हो गई है, तो वे सन्न रह गए. उन का कहना था कि एक न एक दिन यह तो होना ही था. उन्होंने भी अंगुली प्रिया और महेश कराले की ओर उठाई.

खुलता गया रहस्य

पुलिस टीम को हत्या की सारी कडि़यों को जोड़ने के लिए साक्ष्यों की जरूरत थी. उन्होंने कालोनी के 2 व्यक्तियों को पंच बना कर घर की तलाशी ली तो घर की साफसफाई के बाद भी वहां गुनाह के निशान मिल ही गए, जिन्हें देख कर पुलिस टीम को यह समझने में देर नहीं लगी कि हत्या की साजिश घर के अंदर ही रची गई थी. घर के बैडरूम और बाथरूम के फर्श पर पडे़ खून के धब्बे हत्या की पूरी कहानी बयान कर रहे थे.

पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर के तेजी से तफ्तीश शुरू कर दी. पुलिस टीम ने प्रिया और महेश के सभी उन ठिकानों पर दबिश दी, जहांजहां उन के मिलने की संभावना थी. घटना को 36 घंटे से अधिक बीत गए थे. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना थी कि प्रिया और महेश शहर छोड़ कर कहीं चले गए हों या शहर छोड़ने की कोशिश में हों.

यही सोच कर पुलिस टीमों ने शहर और जनपद की नाकेबंदी करा दी. साथ ही मुखबिरों को भी सचेत कर दिया गया. नतीजा यह निकला कि घटना के एक सप्ताह बाद पुलिस ने मुखबिरों की सूचना पर 5 जनवरी, 2019 की रात प्रिया नाइक और महेश कराले को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे अपने गांव से पैसों का जुगाड़ कर के महाराष्ट्र से बाहर भागने की तैयारी में थे.

मैट्रिक पास 28 वर्षीय प्रिया नाइक जितनी खूबसूरत और स्मार्ट थी, उतनी ही महत्त्वाकांक्षी भी थी. उस के सपने बहुत ऊंचे थे. शादी से पहले उस ने एक सुंदर स्वस्थ जीवनसाथी की कामना की थी. लेकिन उस के सपने उस समय धराशायी हो गए जब उस का विवाह उस के मनमुताबिक न हो कर दिव्यांग गोपी नाइक से हो गया.

गोपी और प्रिया का कोई मेल नहीं था. लेकिन परिवार की गरीबी और सामाजिक दबाव की वजह से उस ने समझौता कर लिया. गोपी को पति के रूप में स्वीकार कर वह अपनी गृहस्थी में रम गई.

गोपी नाइक थाणे म्युनिसिपल कारपोरेशन में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी था. वह अपने परिवार के साथ कलवा के अंकलेश्वर नगर में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के मध्यम वर्गीय परिवार में पिता किसान नाइक, मां, बहन और एक भाई दिलीप नाइक था. भाईबहन सभी की शादी हो चुकी थी और सब सेटल थे.

किशन नाइक सीधेसादे प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. समाज में उन का मानसम्मान था. प्रिया उन के दूर के एक रिश्तेदार की बेटी थी. जिसे किशन नाइक ने स्वयं अपने बेटे गोपी नाइक के लिए चुना था. प्रिया जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर गोपी नाइक और उस का पूरा परिवार बहुत खुश था.

गोपी नाइक प्रिया को बहुत प्यार करता था और उस की हर खुशी का ध्यान रखता था. पूरे परिवार के दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे. शादी के कुछ साल बाद गोपी नाइक को परिवार से अलग रहने के लिए जाना पड़ा.

उसे टीएमसी की तरफ से डा. भीमराव अंबेडकर कालोनी में मकान मिल गया था. यहां आने के कुछ दिनों बाद प्रिया ने एक बेटी को जन्म दिया. इस से गोपी और प्रिया का जीवन और भी हंसीखुशी से बीतने लगा. देखतेदेखते प्रिया की बेटी 7 साल की हो गई. वह सीनियर केजी में पढ़ रही थी. गोपी नाइक नौकरी कर रहा था और प्रिया कुशल गृहिणी की तरह घर संभाल रही थी.

मोबाइल ने बदल दी सोच और दुनिया

सामान्य रूप से चलते उन के दांपत्य जीवन के 8-10 साल कैसे निकल गए पता ही नहीं चला. इस की वजह गोपी का प्रिया के प्रति प्यार और विश्वास था. प्रिया भी गोपी के प्यार और अपनी गृहस्थी में डूबी थी. हालांकि कभीकभी गोपी की दिव्यांगत की सूई प्रिया के दिल में चुभ जाती थी. उस ने जवानी के चौखट पर खड़े हो कर जो सपना देखा था, वह पूरा नहीं हुआ था.

2016 में प्रिया नाइक का यह सपना उस समय अस्तित्व में आने लगा, जब उस के सामने 22 वर्षीय महेश कराले की तसवीर आई. महेश कराले ठीक वैसा ही था, जिस की प्रिया ने कभी कल्पना की थी. सुंदर आंखें, बलिष्ठ बाहें, गठीला बदन, चौड़ी छाती. प्रिया उस की दीवानी हो गई. धीरेधीरे प्रिया की इस दीवानगी ने गोपी और उस के बीच दरार पैदा कर दी. 2018 के मध्य में आ कर दरार इतनी बढ़ गई कि साल पूरा होतेहोते यह दरार गोपी नाइक के पूरे अस्तित्व को ही निगल गई.

22 वर्षीय महेश कराले और प्रिया नाइक की जानपहचान फेसबुक पर हुई थी. प्रिया नाइक जब से टीएमसी कालोनी में रहने आई थी, तब से उस के पास घर का ज्यादा काम नहीं था. बेटी को स्कूल और पति को काम पर भेजने के बाद वह घर में अकेली बोर हो जाती थी. थोड़ाबहुत समय टीवी के साथ जरूर गुजार लेती थी. लेकिन इस से मन को सुकून नहीं मिलता था. ऐसे में गोपी नाइक ने प्रिया को एक महंगा मोबाइल ला कर दे दिया. उस वक्त उस ने सोचा भी नहीं होगा कि वही मोबाइल उस के दांपत्य जीवन के मायने ही बदल देगा.

मोबाइल हाथ में आया तो प्रिया नाइक का दैनिक जीवन ही बदल गया. उस का मन घर के कामों में कम और मोबाइल में ज्यादा लगने लगा. वह फेसबुक पर अपना प्रोफाइल बना कर नएनए दोस्त बनाती और उन से चैटिंग करती. इसी के चलते वह महेश कराले की ओर आकर्षित हो गई. वह भूल गई कि वह 7 साल की बच्ची की मां और उस पर अटूट विश्वास करने वाले पति की पत्नी है.

महेश कराले का परिवार महाराष्ट्र के जनपद रायगढ़ के नेरल गांव का रहने वाला था. उस के पिता गोविंद कराले गांव के सम्मानित किसान थे. महेश कराले उन का सब से छोटा और लाडला बेटा था.

ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद जब उसे मुंबई रेलवे बोर्ड में सर्विस मिली तो उस ने गांव से थाणे आ कर उपनगर कर्जत में किराए का एक कमरा ले लिया. प्रिया की तरह महेश भी फुरसत के समय फेसबुक में डूब जाता था. प्रिया का प्रोफाइल और फोटो देख कर वह इतना प्रभावित हुआ कि उस की दोस्ती की रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली.

फेसबुक के माध्यम से दोनों की 2 सालों तक दोस्ती चलती रही. दोनों फोन पर भी बातें करने लगे थे. मिलनेमिलाने की बात भी होने लगी. घटना से 6 महीने पहले दोनों एक तयशुदा जगह पर मिले और एकदूसरे के आगोश में सुकून खोज लिया. एक बार जब मर्यादा टूटी तो फिर यह एक आम सी बात हो गई. जब भी मौका मिलता दोनों अपनी जरूरतों को पूरा कर लेते थे.

शुरुआती कुछ दिनों तक प्रिया नाइक और महेश कराले का मिलनाजुलना पार्कों और रेस्टोरेंटों तक सी सीमित था. फिर धीरेधीरे यह सिलसिला प्रिया के घर तक पहुंच गया. चूंकि ऐसी बातें छिपती नहीं हैं, इसलिए इस की भनक आसपड़ोस के लोगों तक पहुंची तो उन में कानाफूसी होने लगी. यह भनक गोपी नाइक के कानों तक भी पहुंच गई.

उस ने जब प्रिया से सच्चाई जानने की कोशिश की तो उस ने बड़ी सफाई से इस बात को ऐसा घुमाया कि गोपी चुप रह गया. महेश कराले को उस ने अपना दूर का भाई बताया, जिस से बात वहीं खत्म हो गई.

प्रिया ने महेश कराले को अपना भाई बता कर अपने पापों को छिपाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन इस में वह पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई. उस के कारनामों का सच एक दिन सामने आ ही गया. प्रिया मोबाइल में सेव्ड उस के और महेश कराले के नंबर मैसेज और सेल्फी वगैरह ने हर राज से परदा उठा दिया.

सब कुछ देख कर गोपी नाइक का दिमाग घूम गया. प्रिया से उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. वह प्रिया को बहुत ही प्यार करता था. उस की सारी जरूरतें पूरी करता था. उस ने किसी तरह अपने आप को संभाला और इस मुद्दे पर प्रिया को आडे़ हाथों लिया. यही नहीं उस ने प्रिया का मोबाइल फोन भी ले लिया. इस के साथ ही वह प्रिया को मानसिक और शारीरिक रूप से टौर्चर भी करने लगा.

यह सब प्रिया और महेश की सहनशक्ति से बाहर हो गया था. तंग आ कर उन दोनों ने गोपी नाइक को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया. इसीलिए वह धीरेधीरे पति से दूरियां बढ़ाती गई. लेकिन सीधासादा गोपी इसे समझ नहीं पाया. जब तक यह सब उस की समझ में आया तब तक काफी देर हो चुकी थी.

हत्या की योजना के बाद

अपनी योजना के अनुसार घटना के एक सप्ताह पहले महेश कराले ने गोपी को अपने रास्ते से हटाने के लिए अपने एक परिचित कैमिस्ट की मदद से ढेर सारी नींद की गोलियां खरीदीं और ला कर प्रिया को दे दीं. साथ ही उसे समझा भी दिया कि मौका मिलते ही गोपी को कैसे देगी.

घटना के दिन प्रिया ने वैसा ही किया भी, जैसा महेश कराले ने कहा था. उस ने गोपी नाइक की बीयर में करीब 30 गोलियां डाल दीं. लेकिन पता नहीं क्यों गोपी नाइक पर नींद की गोलियों का उतना असर नहीं हुआ. जितना होना चाहिए था. वह अर्द्धनिद्रा में बैड पर पड़ा करवटें बदलता रहा. प्रिया ने जब यह बात महेश कराले को बताई तो वह गोपी के घर आ गया. उस ने साथ लाए फिनायल का इंजेक्शन गोपी के शरीर में लगा दिया.

जैसेजैसे समय बीत रहा था वैसेवैसे प्रिया और महेश कराले के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं. उन की धड़कनें तब और बढ़ गईं जब गोपी पर फिनाइल के इंजेक्शन का भी कोई खास असर नहीं हुआ. वह बाथरूम में जा कर उल्टियां करने लगा. प्रिया और महेश से यह सब सहन नहीं हुआ तो दोनों ने गोपी को खुद मौत की नींद सुला दिया.

महेश कराले ने गोपी नाइक का गला पकड़ा और प्रिया ने घर के अंदर रखे लोहे की रौड से उस के सिर पर वार किया. इस के बावजूद गोपी अपने आप को बचाने के लिए बाथरूम से भाग कर बैडरूम में आया, लेकिन वह गिर कर बेहोश हो गया. उस के बेहोश होने के बाद भी महेश कराले और प्रिया ने अपनी तसल्ली के लिए एक बार फिर पूरी ताकत से उस का गला दबाया.

गोपी नाइक की बेरहमी से हत्या करने के बाद दोनों ने संतोष की सांस ली. इस के बाद दोनों गोपी के शव को ठिकाने लगाने के बारे में विचारविमर्श करने लगे. काफी सोचविचार के बाद दोनों इस नतीजे पर पहुंचे कि पुलिस को गुमराह करने के लिए गोपी को घायल बता कर थाणे सिविल अस्पताल ले जाएं और उसे डाक्टरों के हवाले कर के वहां से निकल लें.

इसी योजना के तहत रात 2 बजे दोनों मृत गोपी के लहूलुहान शव को स्कूटर पर लाद कर थाणे बांध विलगांव की सड़क पर ले गए. वहां गोपी के शव को लेटा कर महेश ने अपना स्कूटर पास की झाडि़यों में छिपा दिया.

वहां से आटो पकड़ कर दोनों गोपी नाइक के शव को अस्पताल ले गए और डाक्टरों के हवाले कर के वहां से निकल गए. दोनों अस्पताल और पुलिस कांस्टेबल की नजरों से तो बच कर निकल गए. लेकिन अस्पताल की तीसरी आंख से नहीं बच पाए.

अस्पताल से निकल कर प्रिया और महेश कराले गोपी के घर आए. उन्होंने घर के अंदर बैडरूम और बाथरूम के फर्श पर बिखरे खून की साफसफाई कर दी. साढ़े 5 बजे प्रिया ने अपनी बेटी को उठाया और घर में ताला लगा कर महेश कराले के साथ निकल गई. वहां से दोनों सीधे माथेरान हिल चले गए.

लेकिन पैसों की कमी की वजह से महेश प्रिया को ले कर अपने गांव आ गया. ताकि पैसों का जुगाड़ कर के प्रिया को कहीं दूर ले जा सके. दोनों कहीं जा पाते इस से पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए. दोनों ने योजना तो अच्छी बनाई थी, लेकिन उन का गुनाह छिप नहीं सका.

जांचअधिकारी इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने प्रिया नाइक और महेश कराले से पूछताछ के बाद उन के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 228, 201 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया और उन्हें थाणे के मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य- मनोहर कहानियां, अप्रैल 2019

 

हतभागी भाग्यश्री : पिता के फैसले ने की जिंदगी बर्बाद

मध्य महाराष्ट्र की कृष्णा नदी की सहायक नदियों के किनारे निचली पहाडि़यों की लंबी शृंखला है. इन की घाटियों में बसे बीड शहर की अपनी एक अलग पहचान है. पहले यह शहर चंपावती के नाम से जाना जाता था. बीड में अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक इमारतें हैं. इस के अलावा यहां शैक्षणिक संस्थान और कालेज भी हैं, जहां आसपास के शहरों से हजारों लड़केलड़कियां पढ़ने के लिए आते हैं.
घटना 19 दिसंबर, 2018 की है. उस समय शाम के यही कोई पौने 6 बजे का समय था. बीड के जानेमाने आदित्य इलैक्ट्रौनिक टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग कालेज में सेमेस्टर परीक्षा का अंतिम पेपर चल रहा था, हजारों की संख्या में युवकयुवतियां परीक्षा दे रहे थे. इन्हीं में भाग्यश्री और सुमित वाघमारे भी थे. ये दोनों पतिपत्नी थे.
निर्धारित समय पर जब पेपर खत्म हुआ तो अन्य छात्रछात्राओं के साथ ये दोनों भी कालेज से बाहर आ गए. इन दोनों के चेहरों पर खुशी की चमक थी. मतलब उन का पेपर काफी अच्छा हुआ था, जिस की खुशी वह अपने सहपाठियों में बांट रहे थे.
लेकिन कौन जानता था कि उन के खिले चेहरों की खुशी सिर्फ कुछ देर की मेहमान है. परीक्षा के परिणाम आने के पहले ही उन की जिंदगी में जो परिणाम आने वाला था. वह काफी भयानक था. 15-20 मिनट अपने सहपाठियों से मिलनेजुलने के बाद दोनों पार्किंग में पहुंचे, जहां उन की स्कूटी खड़ी थी.
सुमित वाघमारे ने पार्किंग से अपनी स्कूटी निकाली और दोनों उस पर बैठ कर घर जाने के लिए निकल गए. 10 मिनट में वह नालवाड़ी रोड गांधीनगर चौक पर पहुंच गए. तभी उन की स्कूटी के सामने अचानक एक मारुति कार आ कर रुकी. उस वक्त सड़क कालेज के सैकड़ों छात्रों और भीड़भाड़ से भरी थी. मारुति कार उन की स्कूटी के सामने कुछ इस तरह आ कर रुकी थी कि वे दोनों रोड पर गिरतेगिरते बचे थे. इस के पहले कि वे संभल कर कुछ कहते, कार से 2 युवक निकल कर बाहर आ गए.
उन्हें देख कर भाग्यश्री और सुमित वाघमारे के होश उड़ गए. क्योंकि उन में से एकभाग्यश्री का भाई बालाजी लांडगे और दूसरा उस का दोस्त संकेत था. उन के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे.
बालाजी लांडगे सुमित को खा जाने वाली नजरों से घूरे जा रहा था. भाग्यश्री अपने भाई के गुस्से को समझ रही थी. संभावना को देखते हुए भाग्यश्री अपने पति की रक्षा के लिए झट से पति के सामने आ खड़ी हुई. इस के बावजूद भी बालाजी लांडगे ने बहन को धक्का दे कर सुमित के सामने से हटाया और अपने दोस्त संकेत वाघ की तरफ इशारा कर के सुमित को पकड़ने के लिए कहा.
संकेत ने सुमित का कौलर पकड़ लिया. यह देख बालाजी बोला, ‘‘क्यों बे, मैं ने कहा था न कि मेरी बहन से दूर रहना, नहीं तो नतीजा बुरा होगा. लेकिन मेरी बातों का तुझ पर कोई असर नहीं हुआ. इस की सजा तुझे जरूर मिलेगी.’’

गुस्से में चाकू बना तलवार

इस के पहले कि सुमित कुछ कहता या संभल पाता, बालाजी लांडगे ने अपनी जेब से चाकू निकाला और सुमित पर हमला कर दिया. पति पर हमला होता देख भाग्यश्री चीखते हुए बोली, ‘‘भैया, सुमित को छोड़ दो. उस की कोई गलती नहीं है. सजा देनी है तो मुझे दो. मैं ने उसे प्यार और शादी के लिए मजबूर किया था. तुम्हें मेरी कसम है भैया. दया करो, बहन पर.’’
‘‘कैसी बहन, मेरी बहन तो उसी दिन मर गई थी, जब घर से भाग कर तूने इस से शादी की थी. जानती है तेरी इस करतूत से समाज और बिरादरी में हमारी कितनी बदनामी हुई. तूने परिवार को कहीं का नहीं छोड़ा. लेकिन मैं भी इसे नहीं छोड़ूंगा.’’ वह बोला.
अगले ही पल बालाजी लांडगे ने चाकू सुमित वाघमारे के पेट में उतार दिया. इस हमले से सुमित वाघमारे की मार्मिक चीख निकली और वह जमीन पर गिर कर तड़पने लगा. इस के बाद भी बालाजी लांडगे का गुस्सा शांत नहीं हुआ. वह सुमित वाघमारे पर तब तक वार करता रहा, जब तक कि उस की मौत न हो गई.
इस दौरान भाग्यश्री रहम की भीख मांगती रही. पति की जान बचाने के लिए वह मदद के लिए चीखतीचिल्लाती रही. लेकिन उस की सहायता के लिए कोई आगे नहीं आया. सुमित वाघमारे की हत्या करने के बाद बालाजी और उस का दोस्त संकेत दोनों वहां से चले गए.
अचानक घटी इस घटना को जिस ने भी देखा, स्तब्ध रह गया. शहर के बीचोबीच भीड़भाड़ भरे इलाके में घटी इस घटना से पूरे बीड शहर में सनसनी फैल गई. भाग्यश्री पति के शरीर से लिपट कर बुरी तरह चीखचिल्ला कर लोगों से सहायता मांग रही थी कि उस के पति को अस्पताल ले जाने में मदद करें. लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया.
काफी हाथपैर जोड़ने के बाद आखिरकार एक आटो वाले को दया आई और वह सुमित वाघमारे को अपने आटो से जिला अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने सुमित को मृत घोषित कर दिया.
यह सुन कर भाग्यश्री अस्पताल में ही फिर से रोने लगी. अस्पताल स्टाफ ने उसे सांत्वना दी. पुलिस केस था, लिहाजा अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस भी वहां पहुंच गई. भाग्यश्री ने अस्पताल से ही सुमित के घर वालों को फोन कर के उस की हत्या की खबर दे दी थी.
अस्पताल पहुंचे थाना विलपेठ के पीआई ने भाग्यश्री से बात की तो उस ने बता दिया कि उस के पति की हत्या उस के सगे भाई बालाजी लांडगे और उस के दोस्त संकेत ने की है. थानाप्रभारी ने यह सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.
कुछ ही देर में बीड शहर के एसपी जी. श्रीधर, एडीशनल एसपी वैभव कलुबर्मे, डीएसपी (क्राइम) सुधीर खिरडकर, पीआई घनश्याम पालवदे, एपीआई दिलीप तेजनकर, अमोल धंस, पंकज उदावत के साथ अस्पताल आ गए. उन्होंने मृतक के शव का बारीकी से निरीक्षण किया. उस के शरीर पर तेज धार वाले हथियार के कई वार थे.
अस्पताल से पूछताछ करने के बाद पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद पीआई फिर से अस्पताल गए. उन्होंने सुमित की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

औनरकिलिंग के चक्कर में हुई हत्या

भाग्यश्री ने अपने भाई बालाजी लांडगे और संकेत वाघ के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाने के बाद पुलिस को बताया कि जब से उस ने अपने परिवार के विरुद्ध जा कर सुमित वाघमारे से कोर्टमैरिज की थी, तब से उस के परिवार वाले अकसर सुमित को धमकियां देते आ रहे थे, जिस की उन्होंने करीब एक महीने पहले शिवाजी नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी. लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की तो बालाजी के हौसले बुलंद हो गए.
पुलिस को मामला औनरकिलिंग का लग रहा था. दिनदहाड़े हत्या होने की खबर जब शहर में फैली तो एसपी जी. श्रीधर ने लोगों को भरोसा दिया कि हत्यारों को जल्द पकड़ लिया जाएगा. उन्होंने उसी समय इस केस की जांच पुलिस डीएसपी (क्राइम) सुधीर खिरडकर को सौंप दी.
खिरडकर ने जांच का जिम्मा लेते ही स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की कई टीमें बना कर तेजी से जांच शुरू कर दी. पुलिस ने सब से पहले शहर की नाकेबंदी कर के अभियुक्तों के बारे में अलर्ट जारी कर दिया.
घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई तो इस बात की पुष्टि हो गई कि वारदात को बालाजी लांडगे और संकेत वाघ ने ही अंजाम दिया था. लिहाजा पुलिस ने दोनों के फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिए. साथ ही मुखबिरों को भी सजग कर दिया. लेकिन 3 दिनों तक पुलिस और क्राइम ब्रांच को कोई सफलता नहीं मिली.
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि सुमित वाघमारे की हत्या में बालाजी लांडगे के दोस्त कृष्णा क्षीरसागर और उस के भाई गजानंद क्षीरसागर ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बालाजी और उस का दोस्त संकेत फरार हो चुके थे. लिहाजा पुलिस टीम ने दबिश दे कर कृष्णा क्षीरसागर और उस के भाई गजानंद क्षीरसागर को गिरफ्तार कर लिया.
कृष्णा क्षीरसागर और गजानंद क्षीरसागर ने क्राइम ब्रांच को बताया कि बालाजी लांडगे और संकेत वाघ पुणे होते हुए औरंगाबाद में एक मंत्री के घर गए हैं. यह सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम पुणे में उस मंत्री के घर पहुंच गई. पता चला कि टीम के आने के कुछ घंटे पहले ही दोनों वहां से अमरावती के लिए निकल गए थे.
आरोपी अमरावती शहर से बाहर न जा सकें, इस के लिए एसपी जी. श्रीधर ने अमरावती के पुलिस कमिश्नर से अभियुक्तों की गिरफ्तारी में मदद करने को कहा. तब पुलिस कमिश्नर ने अमरावती शहर की पुलिस के साथ जीआरपी को भी सतर्क कर दिया. जीआरपी ने बालाजी लांडगे और संकेत वाघ को अमरावती के बडनेरा रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद उन्होंने दोनों अभियुक्त क्राइम ब्रांच की जांच टीम को सौंप दिए.
क्राइम ब्रांच औफिस में बालाजी लांडगे से पूछताछ की तो उस ने आसानी से अपना गुनाह स्वीकार करते हुए अपनी बहन के सुहाग की हत्या की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली—

25 वर्षीय सुमित वाघमारे महत्त्वाकांक्षी युवक था. मूलरूप से बीड तालखेड़ा, तालुका मांजल, गांव हमुनगोवा का रहने वाला था. उस के पिता शिवाजी वाघमारे गांव के जानेमाने किसान थे. गांव में उन की काफी प्रतिष्ठा थी. परिवार में उन की पत्नी के अलावा एक बेटी और बेटा सुमित वाघमारे थे.
शिवाजी वाघमारे उसे उच्चशिक्षा दिला कर कामयाब इंसान बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सुमित का एडमिशन बीड शहर के आदित्य इलैक्ट्रौनिक टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग कालेज में करवाया. उस के रहने की व्यवस्था उन्होंने बीड शहर में ही रहने वाली अपनी साली के यहां कर दी थी. अपनी मौसी के घर रह कर सुमित इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने लगा.
इसी कालेज से भाग्यश्री लांडगे भी इंजीनियरिंग कर रही थी. दोनों एक ही कक्षा में थे, जिस से उन की अच्छी दोस्ती हो गई. उन की दोस्ती प्यार तक कब पहुंच गई, उन्हें पता ही नहीं चला.
दोनों के दिलों में प्यार के अंकुर फूटे तो वे एकदूसरे को अपने जीवनसाथी के रूप में देखने लगे थे. उन्हें ऐसा लगने लगा जैसे दोनों एकदूसरे के लिए ही बने हों.

पहले दोस्ती, फिर प्यार, बाद में शादी

समय धीरधीरे सरक रहा था. कालेज की पढ़ाई और परीक्षा में सिर्फ 6 महीने रह गए थे. दोनों ने फाइनल परीक्षा के बाद शादी करने का फैसला किया था, लेकिन इस के पहले ही भाग्यश्री के परिवार वालों को उस के और सुमित के बीच चल रहे प्यार की जानकारी हो गई, जिसे जान कर वे सन्न रह गए. उन्होंने भाग्यश्री के लिए जो सपना देखा था, वह टूट कर बिखरते हुए नजर आया.
मामला काफी नाजुक था. भाग्यश्री का फैसला उन की मानमर्यादा के खिलाफ था. लेकिन भाग्यश्री सुमित वाघमारे के प्यार में अंधी हो चुकी थी. फिर भी उन्होंने मौका देख कर भाग्यश्री को समझाने की काफी कोशिश की. उस के भाई बालाजी लांडगे को तो सुमित जरा भी पसंद नहीं था.
वह न तो उन की बराबरी का था और न ही उन की बिरादरी का. उस ने भाग्यश्री को न केवल डांटाफटकारा बल्कि बुरे अंजाम की चेतावनी भी दी. साथ ही यह भी कहा कि अगर उस ने अपनी राह और रवैया नहीं बदला तो उस का कालेज जाना बंद करा देगा.
घर और परिवार का माहौल बिगड़ते देख भाग्यश्री समझ गई कि घर वाले उस की शादी में जरूर व्यवधान डालेंगे. इसलिए किसी भी नतीजे की परवाह किए बगैर कालेज की परीक्षा के 3 महीने पहले उस ने अपने प्रेमी सुमित वाघमारे से कोर्टमैरिज कर ली. इतना ही नहीं, कुछ दिनों के लिए वह पति सुमित के साथ भूमिगत हो गई.
भाग्यश्री के अचानक गायब हो जाने के बाद उस के घर वालों की काफी बदनामी हुई. इतना ही नहीं, जब उन्हें पता चला कि उस ने सुमित से शादी कर ली है तो उन्हें बहुत गुस्सा आया. घर वालों ने दोनों को बहुत तलाशा. जब वे नहीं मिले तो सुमित वाघमारे को जिम्मेदार मानते हुए उन्होंने शिवाजी नगर थाने में सुमित के खिलाफ भाग्यश्री के अपहरण की शिकायत दर्ज करा दी.
पुलिस ने मामले में संज्ञान लेते हुए अपनी काररवाई शुरू कर दी. इसी बीच भाग्यश्री को पता चल गया कि पुलिस उन्हें तलाश रही है. लिहाजा अपनी शादी के एक महीने बाद भाग्यश्री और सुमित वाघमारे दोनों पुलिस के सामने हाजिर हो गए. दोनों ने अपने बालिग होने और शादी करने का प्रमाणपत्र पुलिस को दे दिया. साथ ही अपनी सुरक्षा की भी गुहार लगाई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भाग्यश्री के परिवार वालों को समझा दिया कि दोनों बालिग हैं, इसलिए उन की शादी कानूनन वैध है. इसलिए उन्हें किसी भी तरह तंग न किया जाए. अगर भाग्यश्री या उस के पति ने थाने में अपनी सुरक्षा आदि को ले कर कोई शिकायत की तो पुलिस को काररवाई करनी पड़ेगी.
लेकिन पुलिस की चेतावनी के बाद भी भाग्यश्री के परिवार वालों का रवैया नहीं बदला. उन के अंदर प्रतिशोध की चिंगारी सुलगती रही. भाग्यश्री के भाई बालाजी लांडगे ने भाग्यश्री और सुमित वाघमारे को घटना के एक महीने पहले सबक सिखाने की धमकी दी थी, जिस की शिकायत उन्होंने थाने में भी की थी.

प्रेमी युगल की शिकायत
के बावजूद कुछ नहीं हुआ

पुलिस में की गई इस शिकायत का भी बालाजी पर कोई असर नहीं हुआ. वह अपने परिवार की बेइज्जती पर भाग्यश्री को सबक सिखाना चाहता था. इस के लिए उस ने एक खतरनाक योजना तैयार की, जिस में उस ने अपने दोस्त संकेत वाघ, कृष्णा क्षीरसागर और गजानंद क्षीरसागर की मदद ली. उन्हें उन का काम समझा कर वह मौके की तलाश में रहने लगा था.
19 दिसंबर, 2018 को कृष्णा क्षीरसागर ने बालाजी लांडगे को बताया कि भाग्यश्री और सुमित वाघमारे अपनी परीक्षा देने के लिए कालेज आएंगे. खबर पाते ही बालाजी लांडगे अपनी योजना की तैयारी में लग गया. उस ने अपने दोस्त संकेत वाघ को उस की कार के साथ लिया और कालेज के पास आ कर परीक्षा खत्म होने का इंतजार करने लगा.
परीक्षा खत्म होने के बाद भाग्यश्री और सुमित वाघमारे जब अपनी स्कूटी से कालेज से घर के लिए निकले तो बालाजी लांडगे ने उन का रास्ता रोक लिया और देखते ही देखते बहन के सिंदूर को रक्त के कफन में लपेट दिया.
सुमित वाघमारे की हत्या के बाद संकेत वाघ और बालाजी लांडगे ने कार ले जा कर मित्रनगर छोड़ दी. वहां से वह गजानंद क्षीरसागर की स्कूटी से वाडा रेलवे स्टेशन गए, वहां से वे पुणे, औरंगाबाद और अमरावती पहुंचे, जहां वे रेलवे पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे.
चारों गिरफ्तार अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ करने के बाद बीड क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने उन्हें विलपेठ पुलिस थाने के अधिकारियों को सौंप दिया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

सौजन्य- मनोहर कहानियां, मई 2019

विदेश में रची साजिश : रिश्तों में आई दरार

सरदार हरविंदर सिंह और उन के परिवार के अन्य लोग 27 फरवरी, 2019 को दिल्ली एयरपोर्ट पर आस्ट्रेलिया से आने वाली फ्लाइट का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. क्योंकि उस दिन सरदार हरविंदर सिंह की चहेती बेटी रवनीत कौर शादी के बाद पहली बार आस्ट्रेलिया से इंडिया आ रही थी. शादी के बाद से ही रवनीत अपने पति जसप्रीत सिंह के साथ आस्टे्रलिया जा कर बस गई थी. उस की एक 4 साल की बेटी नवसीरत कौर भी उस के साथ आ रही थी. उस का जन्म भी आस्टे्रलिया में ही हुआ था.

रवनीत के आने की खुशी में उस के मायके और ससुराल वालों ने स्वागत की पूरी तैयारियां कर रखी थीं. अपने निर्धारित समय पर प्लेन ने दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड किया और पंजाब से आया यह काफिला रवनीत और उस की बेटी को दिल्ली से ले कर सेक्टर-47 चंडीगढ़ की ओर रवाना हो गया. रवनीत उस समय करीब 5 महीने की गर्भवती थी.

रवनीत कौर की ससुराल चंडीगढ़ में ही थी. इसलिए उस का पहला हक ससुराल जाने का ही बनता था. बहरहाल रवनीत के आने की खुशी में ससुराल में जश्न मनाया गया, अगले दिन बाहर से आए सभी रिश्तेदार अपनेअपने घरों को लौट गए थे. रवनीत के पिता हरविंदर सिंह भी अपनी पत्नी और बेटे के साथ अपने गांव चले गए थे. यह बात 28 फरवरी, 2019 की है.

सरदार हरविंदर सिंह पंजाब के जिला फिरोजपुर के गांव बग्गे के पीपल के निवासी थे. यह गांव फिरोजपुर से करीब 8 किलोमीटर दूर है. हरविंदर सिंह बेहद शरीफ और मिलनसार इंसान थे. वह गांव बग्गे के पीपल की कोऔपरेटिव सोसाइटी के सेक्रेटरी भी थे.

उन के पास रुपएपैसे की कमी नहीं थी. उन के पास कई एकड़ उपजाऊ भूमि भी थी. परिवार में पत्नी के अलावा उन के 2 बच्चे थे. बड़ी बेटी रवनीत कौर और बेटा जश्नीत सिंह. दोनों की वह शादी कर चुके थे.

हरविंदर सिंह ने लगभग 6 साल पहले रवनीत की शादी चंडीगढ़ निवासी रावल सिंह के बेटे जसप्रीत सिंह के साथ की थी. जसप्रीत आस्टे्रलिया में रहता था. वहां उस का होटल का व्यवसाय था. शादी के कुछ महीने बाद जसप्रीत ने रवनीत को भी अपने पास आस्टे्रलिया बुला लिया. बाद में वे दोनों वहां के स्थाई नागरिक बन गए थे.

शादी के 2 साल बाद रवनीत ने एक बेटी को जन्म दिया जिस का नाम नवसीरत रखा गया. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. पतिपत्नी के अलावा दोनों के परिवार भी आपस में बहुत खुश थे.

रवनीत को आस्टे्रलिया से आए 15 दिन हो चुके थे और वह अपनी ससुराल चंडीगढ़ में ही थी. रवनीत के पिता सरदार हरविंदर ने एक दिन अपने बेटे से कहा, ‘‘पुत्तर रवनीश को आए 15 दिन हो गए हैं. हम चाहते हैं कि उसे तुम बुला लाओ जिस से वह कुछ दिन यहां रह सके.’’

‘‘जी पापाजी, मैं आज ही चंडीगढ़ जा कर रवनीत को ले आता हूं.’’ जश्नीत ने कहा और वह उसी दिन चंडीगढ़ में बहन की ससुराल जा कर उसे अपने साथ लिवा लाया. मायके में आ कर रवनीत की खुशी और बढ़ गई. अपने मातापिता और बचपन की सहेलियों से मिल कर वह बहुत खुश हुई. रवनीत के आने से केवल हरविंदर के परिवार वाले ही नहीं बल्कि गांव में उस के जानने वाले भी खुश थे.

14 मार्च, 2019 की बात है. वक्त करीब 11 बजे का होगा. रवनीत के घर के सभी लोग बैठक में बैठे आपस में हंसीमजाक कर रहे थे कि उसी समय रवनीत के मोबाइल पर आस्ट्रेलिया से उस के पति जसप्रीत की वीडियो काल आई. रवनीत परिवार वालों से बात करना छोड़ कर पति से बातें करने लगी.

फोन पर न जाने कैसी बातें चल रही थीं कि उसे इस बात का अंदेशा ही नहीं रहा कि वह फोन पर बात करतेकरते अपने घर से बाहर निकल आई और अपने पिता के खेतों की ओर चल दी.

वह वहां घूमते हुए पति से बातें करने में मशगूल थी. वहीं खेतों के पास एक कार खड़ी थी. उस कार के नजदीक 2 लोग भी मौजूद थे. फोन पर बातें करते हुए रवनीत जैसे ही उस कार के पास पहुंची तो दोनों लोगों ने रवनीत को उठा कर कार में डाला और वहां से फरार हो गए.

यह नजारा दूर खेत में काम करते केवल एक आदमी ने देखा था. इधर जब आधे घंटे से भी ज्यादा समय हो गया और रवनीत फोन पर बातें कर के घर में नहीं लौटी तो परिजनों को चिंता हुई कि आखिर फोन पर बातें करते हुए वह कहां चली गई.

सब ने उस की तलाश शुरू कर दी, इस बीच जिस व्यक्ति ने रवनीत को कार में ले जाते देखा था, उस ने आ कर पूरी बात सरदार हरविंदर सिंह को बताई तो सब के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

आखिर वो कौन लोग थे जो रवनीत को जबरदस्ती उठा कर ले गए थे. सीधी सी बात यह थी कि वह लोग रवनीत का अपहरण कर के ले गए थे. यह बात कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई. इस के बाद तो पूरा गांव रवनीत की तलाश में जुट गया. पर न तो कार मिली और न ही रवनीत का कोई पता चला. अंत में सभी गांववासी इकट्ठे हो कर थाना फिरोजपुर पहुंचे.

सरदार हरविंदर सिंह ने एसएचओ गुरचरण सिंह को बेटी के अपहरण होने की सारी बात विस्तार से बता दी. सरदार हरविंदर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रवनीत के अपहरण का मामला दर्ज कर उस की तलाश शुरू कर दी थी.

क्योंकि मामला एक ऊंचे रसूखदार और जमींदार की एनआरआई बेटी से जुड़ा था. इसलिए एसएचओ गुरचरण सिंह ने इस घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी. सूचना मिलते ही एसएसपी संदीप गोयल, एसपी बलजीत सिंह सिद्धू क्राइम टीम के साथ मौके पर  पहुंच गए.

एसएसपी के निर्देश पर शहर के बाहर जाने वाली सभी सड़कों पर नाकेबंदी कर दी गई थी. एकएक गाड़ी की तलाशी ली जाने लगी पर कोई फायदा नहीं हुआ. शायद अपहर्त्ता पुलिस की नाकेबंदी से पहले ही सीमा पार कर चुके थे. फिर भी पुलिस ने रवनीत का फोटो जिले के सभी थानों में भेजवा दिया था.

रवनीत को अगवा हुए 24 घंटे से भी ज्यादा बीत चुके थे पर अभी तक पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा था. पुलिस मामले में लापरवाही बरत रही थी. तब परिजन और गांव वाले रवनीत की तलाश के लिए एसएसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए. कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद एसएसपी ने धरने पर बैठे लोगों को भरोसा दिया कि पुलिस बहुत जल्दी केस का खुलासा कर देगी. तब कहीं जा कर 19 मार्च, 2019 को उन्होंने धरना खत्म किया.

एसएसपी ने एसपी बलजीत सिंह की निगरानी में एक टीम गठित की. पुलिस ने हरविंदर सिंह से बात करने के बाद कुछ लोगों के फोन सर्विलांस में लगा दिए थे तथा रवनीत के पति जसप्रीत सिंह और अन्य लोगों के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा ली थी. 19 मार्च को ही पुलिस को जानकारी मिली क कुछ लोग कार से एक महिला की लाश भाखड़ा नहर में फेंक कर फरार हो गए थे.

पुलिस ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए भाखड़ा नहर में दूरदूर तक जाल डलवा दिया. पुलिस की यह कोशिश रंग लाई और एक महिला की लाश नहर से बरामद कर ली. जिस की पुष्टि रवनीत कौर के रूप में हुई. जरूरी काररवाई कर पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

एसपी बलजीत सिंह के नेतृत्व में गठित टीम इस मामले की जांच कर रही थी. पुलिस टीम ने पीडि़त परिवार द्वारा दी गई कुछ जानकारी के अधार पर जांच आगे बढ़ाई तो सफलता मिल गई.

दरअसल रवनीत के अपहरण के बाद हरविंदर सिंह ने यह खबर आस्टे्रलिया में अपने दामाद जसप्रीत सिंह को दे कर फौरन इंडिया आने के लिए कहा था पर वह हर बार टालमटोल करता रहा. कभी कहता कि अभी वीजा नहीं मिल रहा है तो कभी कोई और बहाना बना देता.

जब हरविंदर सिंह ने आस्ट्रेलिया एंबेसी से संपर्क किया तो पता चला कि जसप्रीत ने वीजा एप्लाई किया ही नहीं है. इन सब बातों से हरविंदर और अन्य रिश्तेदारों को शक हुआ कि ऐसी क्या मजबूरी है जो बीवी का अपहरण हो जाने की खबर मिलने के बाद भी जसप्रीत सिंह आराम से अपने घर बैठा रहा. उन्होंने अपने तौर पर जांच पड़ताल शुरू की.

इधर पुलिस ने भी अपने मुखबिरों का जाल बिछा रखा था. और साइबर क्राइम की टीम ने शक की सुई का रुख सीधा आस्टे्रलिया की तरफ मोड़ दिया था. आस्ट्रेलिया से जसप्रीत की इंडिया में पत्नी के अलावा और जिस नंबर पर ज्यादा बातें होती थीं, वह नंबर पटियाला के समाना की तरनजीत कौर का था. तरनजीत कौर के अलावा एक नंबर संदीप सिंह का भी था. संदीप सिलवर सिटी समाना का निवासी था.

इन दोनों नंबरों पर जसप्रीत की घंटों बातें होती थीं. इस मामले को हल करने के लिए पुलिस ने कई पहलुओं पर जांच शुरू कर दी थी. पुलिस ने यह पता लगाया कि जिस दिन रवनीत कौर के पास उस के पति जसप्रीत सिंह का आस्टे्रलिया से फोन आया था उस दिन जसप्रीत ने किनकिन लोगों से बात की थी.

पुलिस ने सभी के फोन नंबरों की लोकेशन टे्रस की इसी जांच के सहारे पुलिस समाना की रहने वाली तरनजीत कौर तक पहुंच ही गई.

पुलिस ने तरनजीत कौर को 24 मार्च, 2019 को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. तरनजीत कौर को पकड़ने से पहले पुलिस ने आरोपितों की आपस में हो रही टेलीफोन पर बातचीत व उन की एक्टिविटी पर नजर रखी.

पूछताछ में तरणजीत कौर ने कई खुलासे किए, जिस से तरनजीत कौर की निशानदेही पर ही पुलिस को रवनीत का शव बरामद करने के साथ मामले का खुलासा करने में बड़ी सफलता मिल गई थी.

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जसप्रीत सिंह ने अपनी प्रेमिका किरणजीत कौर के साथ मिल कर अपनी पत्नी रवनीत कौर की हत्या करवाई थी. इस में किरणजीत की बहन तरनजीत कौर और संदीप सिंह नामक युवक ने साथ दिया था. संदीप सिंह तरनजीत कौर की बुआ का बेटा है. पुलिस ने तरनजीत को कोर्ट में पेश कर 5 दिन के रिमांड पर लिया.

पूछताछ में तरनजीत की निशानदेही पर उस की बुआ के बेटे संदीप सिंह को भी 26 मार्च को गिरफ्तार कर लिया.

रिमांड के दौरान पूछताछ में यह बात सामने आई कि जसप्रीत सिंह के शादी से पहले से ही किरणजीत कौर के साथ अवैध संबंध थे. जसप्रीत सिंह और किरणजीत कौर ने आस्टे्रलिया से कनाडा भाग कर कथित तौर पर शादी कर ली थी. किरणजीत कौर वहां किसी अस्पताल में नर्स की नौकरी करती है और जसप्रीत सिंह एक रेस्टोरेंट में काम करता था. दोनों के बीच संबंध होने के कारण ही रवनीत कौर को ठिकाने लगाया गया था.

अवैध संबंधों में बाधा बन रही पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए ही जसप्रीत ने प्रेमिका किरणजीत के साथ मिल कर आस्टे्रलिया में ही रवनीत की हत्या की साजिश रची थी. पत्नी रवनीत के भारत पहुंचने के कुछ दिन बाद उस ने प्रेमिका किरण को भी आस्ट्रेलिया से भारत भेज दिया था.

इस के बाद उस ने प्रेमिका के रिश्तेदारों की मदद से पत्नी की हत्या करवा दी. हत्या के अगले ही दिन किरणजीत कौर सिंगापुर के रास्ते वापस आस्टे्रलिया लौट गई थी.

एनआरआई महिला रवनीत कौर की हत्या के आरोप में फिरोजपुर पुलिस ने पटियाला जिले की समाना निवासी तरनजीत कौर व उस के रिश्तेदार संदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों ने रवनीत कौर की हत्या 14 मार्च को उस के अगवा करने के कुछ देर बाद उसी दिन समाना में ले जा कर कर दी थी. इस के बाद शिनाख्त मिटाने के लिए शव को भाखड़ा नहर में फेंक दिया था. जिसे फिरोजपुर पुलिस ने बरामद कर लिया था.

जसप्रीत सिंह ने अपनी जिस प्रेमिका के लिए पत्नी रवनीत कौर की हत्या करवा दी. वह पहले से ही शादीशुदा है. हत्याकांड को अंजाम देने व सबूत मिटाने में संदीप सिंह शामिल रहा.

एनआरआई महिला रवनीत कौर की हत्या कैसे की गई, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा. बताया जाता है कि मृतका रवनीत कौर 5 महीने की गर्भवती थी. रवनीत कौर की हत्या में शामिल 2 एनआरआई सहित 4 जनों के खिलाफ मामला दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी.

पुलिस ने एनआरआई जसप्रीत सिंह, किरणजीत कौर, तरनजीत कौर और संदीप सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर एनआरआई जसप्रीत सिंह और किरणजीत कौर को विदेश से मंगवाने के लिए भी कानूनी काररवाई शुरू कर दी. जबकि तरनजीत और संदीप सिंह को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. वारदात में प्रयुक्त सफेद रंग की बीट कार नंबर एचआर51एजी-5522 भी बरामद कर ली गई.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य- सत्यकथा, जुलाई 2019

बेवफाई का लाल रंग : धोकेबाज प्रेमी

5 फरवरी, 2019 मंगलवार की शाम लगभग 4 बजे का समय था. उसी समय आगरा जिले के थाना मनसुखपुरा में खून से सने हाथ और कपड़ों में एक युवक पहुंचा. पहरे की ड्यूटी पर तैनात सिपाही के पास जा कर वह बोला, ‘‘स…स…साहब, बड़े साहब कहां हैं, मुझे उन से कुछ बात कहनी है.’’

थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह उस समय थाना प्रांगण में धूप में बैठे कामकाज निपटा रहे थे. उन्होंने उस युवक की बात सुन ली थी, नजरें उठा कर उन्होंने उस की ओर देखा और सिपाही से अपने पास लाने को कहा. सिपाही उस शख्स को थानाप्रभारी के पास ले गया. थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह उस से कुछ पूछते, इस से पहले ही वह शख्स बोला, ‘‘साहब, मेरा नाम ऋषि तोमर है. मैं गांव बड़ापुरा में रहता हूं. मैं अपनी पत्नी और उस के प्रेमी की हत्या कर के आया हूं. दोनों की लाशें मेरे घर में पड़ी हुई हैं.’’

ऋषि तोमर के मुंह से 2 हत्याओं की बात सुन कर ओमप्रकाश सिंह दंग रह गए. युवक की बात सुन कर थानाप्रभारी के पैरों के नीचे से जैसे जमीन ही खिसक गई. वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मी ऋषि को हैरानी से देखने लगे.

थानाप्रभारी के इशारे पर एक सिपाही ने उसे हिरासत में ले लिया. ओमप्रकाश सिंह ने टेबल पर रखे कागजों व डायरी को समेटा और ऋषि को अपनी जीप में बैठा कर मौकाएवारदात पर निकल गए.

हत्यारोपी ऋषि तोमर के साथ पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां का मंजर देख होश उड़ गए. कमरे में घुसते ही फर्श पर एक युवती व एक युवक के रक्तरंजित शव पड़े दिखाई दिए. कमरे के अंदर ही चारपाई के पास फावड़ा पड़ा था.

दोनों मृतकों के सिर व गले पर कई घाव थे. लग रहा था कि उन के ऊपर उसी फावडे़ से प्रहार कर उन की हत्या की गई थी. कमरे का फर्श खून से लाल था. थानाप्रभारी ने अपने उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत कराया.

डबल मर्डर की जानकारी मिलते ही मौके पर एसपी (पश्चिमी) अखिलेश नारायण सिंह, सीओ (पिनाहट) सत्यम कुमार पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह से घटना की जानकारी ली. वहीं पुलिस द्वारा मृतक युवक दीपक के घर वालों को भी सूचना दी गई.

कुछ ही देर में दीपक के घर वाले रोतेबिलखते घटनास्थल पर आ गए थे. इस बीच मौके पर भीड़ एकत्र हो गई. ग्रामीणों को पुलिस के आने के बाद ही पता चला था कि घर में 2 मर्डर हो गए हैं. इस से गांव में सनसनी फैल गई. जिस ने भी घटना के बारे में सुना, दंग रह गया.

दोहरे हत्याकांड ने लोगों का दिल दहला दिया. पुलिस ने आला कत्ल फावड़ा और दोनों लाशों को कब्जे में लेने के बाद लाशें पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दीं. इस के बाद थानाप्रभारी ने हत्यारोपी ऋषि तोमर से पूछताछ की तो इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला आगरा के थाना मनसुखपुरा के गांव बड़ापुरा के रहने वाले ऋषि तोमर की शादी लक्ष्मी से हुई थी. लक्ष्मी से शादी कर के ऋषि तो खुश था, लेकिन लक्ष्मी उस से खुश नहीं थी. क्योंकि ऋषि उस की चाहत के अनुरूप नहीं था.

ऋषि मेहनती तो था, लेकिन उस में कमी यह थी कि वह सीधासादा युवक था. वह ज्यादा पढ़ालिखा भी नहीं था. बड़ापुरा में कोई अच्छा काम न मिलने पर वह दिल्ली जा कर नौकरी करने लगा.

करीब 2 साल पहले की बात है. ससुराल में ही लक्ष्मी की मुलाकात यहीं के रहने वाले दीपक से हो गई. दोनों की नजरें मिलीं तो उन्होंने एकदूसरे के दिलों में जगह बना ली.

पहली ही नजर में खूबसूरत लक्ष्मी पर दीपक मर मिटा था तो गबरू जवान दीपक को देख कर लक्ष्मी भी बेचैन हो उठी थी. एकदूसरे को पाने की चाहत में उन के मन में हिलोरें उठने लगीं. पर भीड़ के चलते वे आपस में कोई बात नहीं कर सके थे, लेकिन आंखों में झांक कर वे एकदूसरे के दिल की बातें जरूर जान गए थे.

बाजार में मुलाकातों का सिलसिला चलने लगा. मौका मिलने पर वे बात भी करने लगे. दीपक लक्ष्मी के पति ऋषि से स्मार्ट भी था और तेजतर्रार भी. बलिष्ठ शरीर का दीपक बातें भी मजेदार करता था. भले ही लक्ष्मी के 3 बच्चे हो गए थे, लेकिन शुरू से ही उस के मन में पति के प्रति कोई भावनात्मक लगाव पैदा नहीं हुआ था.

लक्ष्मी दीपक को चाहने लगी थी. दीपक हर हाल में उसे पाना चाहता था. लक्ष्मी ने दीपक को बता दिया था कि उस का पति दिल्ली में नौकरी करता है और वह बड़ापुरा में अपनी बेटी के साथ अकेली रहती है, जबकि उस के 2 बच्चे अपने दादादादी के पास रहते थे.

मौका मिलने पर लक्ष्मी ने एक दिन दीपक को फोन कर अपने गांव बुला लिया. वहां पहुंच कर इधरउधर की बातों और हंसीमजाक के बीच दीपक ने लक्ष्मी का हाथ अपने हाथ में ले लिया. लक्ष्मी ने इस का विरोध नहीं किया.

दीपक के हाथों का स्पर्श कुछ अलग था. लक्ष्मी का हाथ अपने हाथ में ले कर दीपक सुधबुध खो कर एकटक उस के चेहरे पर निगाहें टिकाए रहा. फिर लक्ष्मी भी सीमाएं लांघने लगी. इस के बाद दोनों ने मर्यादा की दीवार तोड़ डाली.

एक बार हसरतें पूरी होने के बाद उन की हिम्मत बढ़ गई. अब दीपक को जब भी मौका मिलता, उस के घर पहुंच जाता था. ऋषि के दिल्ली जाते ही लक्ष्मी उसे बुला लेती फिर दोनों ऐश करते. अवैध संबंधों का यह सिलसिला करीब 2 सालों तक ऐसे ही चलता रहा.

लेकिन उन का यह खेल ज्यादा दिनों तक लोगों की नजरों से छिप नहीं सका. किसी तरह पड़ोसियों को लक्ष्मी और दीपक के अवैध संबंधों की भनक लग गई. ऋषि के परिचितों ने कई बार उसे उस की पत्नी और दीपक के संबंधों की बात बताई.

लेकिन वह इतना सीधासादा था कि उस ने परिचितों की बातों पर ध्यान नहीं दिया. क्योंकि उसे अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास था, जबकि सच्चाई यह थी कि लक्ष्मी पति की आंखों में धूल झोंक कर हसरतें पूरी कर रही थी.

4 फरवरी, 2019 को ऋषि जब दिल्ली से अपने गांव आया तो उस ने अपनी पत्नी और दीपक को ले कर लोगों से तरहतरह की बातें सुनीं. अब ऋषि का धैर्य जवाब देने लगा. अब उस से पत्नी की बेवफाई और बेहयाई बिलकुल बरदाश्त नहीं हो रही थी. उस ने तय कर लिया कि वह पत्नी की सच्चाई का पता लगा कर रहेगा.

ऋषि के दिल्ली जाने के बाद उस की बड़ी बेटी अपनी मां लक्ष्मी के साथ रहती थी और एक बेटा और एक बेटी दादादादी के पास गांव राजाखेड़ा, जिला धौलपुर, राजस्थान में रहते थे.

ऋषि के दिमाग में पत्नी के चरित्र को ले कर शक पूरी तरह बैठ गया था. वह इस बारे में लक्ष्मी से पूछता तो घर में क्लेश हो जाता था. पत्नी हर बार उस की कसम खा कर यह भरोसा दिला देती थी कि वह गलत नहीं है बल्कि लोग उसे बेवजह बदनाम कर रहे हैं.

घटना से एक दिन पूर्व 4 फरवरी, 2019 को ऋषि दिल्ली से गांव आया था. दूसरे दिन उस ने जरूरी काम से रिश्तेदारी में जाने तथा वहां 2 दिन रुक कर घर लौटने की बात लक्ष्मी से कही थी. बेटी स्कूल गई थी. इत्तफाक से ऋषि अपना मोबाइल घर भूल गया था, लेकिन लक्ष्मी को यह पता नहीं था. करीब 2 घंटे बाद मोबाइल लेने जब घर आया तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था.

उस ने दरवाजा थपथपाया. पत्नी न तो दरवाजा खोलने के लिए आई और न ही उस ने अंदर से कोई जवाब दिया. तो ऋषि को गुस्सा आ गया और उस ने जोर से धक्का दिया तो कुंडी खुल गई.

जब वह कमरे के अंदर पहुंचा तो पत्नी और उस का प्रेमी दीपक आपत्तिजनक स्थिति में थे. यह देख कर उस का खून खौल उठा. पत्नी की बेवफाई पर ऋषि तड़प कर रह गया. वह अपना आपा खो बैठा. अचानक दरवाजा खुलने से प्रेमी दीपक सकपका गया था.

ऋषि ने सोच लिया कि वह आज दोनों को सबक सिखा कर ही रहेगा. गुस्से में आगबबूला हुए ऋषि कमरे से बाहर आया.

वहां रखा फावड़ा उठा कर उस ने दीपक पर ताबड़तोड़ प्रहार किए. पत्नी लक्ष्मी उसे बचाने के लिए आई तो फावड़े से प्रहार कर उस की भी हत्या कर दी. इस के बाद दोनों की लाशें कमरे में बंद कर वह थाने पहुंच गया.

ऋषि ने पुलिस को बताया कि उसे दोनों की हत्या पर कोई पछतावा नहीं है. यह कदम उसे बहुत पहले ही उठा लेना चाहिए था. पत्नी ने उस का भरोसा तोड़ा था. उस ने तो पत्नी पर कई साल भरोसा किया.

उधर दीपक के परिजन इस घटना को साजिश बता रहे थे. उन का आरोप था कि दीपक को फोन कर के ऋषि ने अपने यहां बहाने से बुलाया था. घर में बंधक बना कर उस की हत्या कर दी गई. उन्होंने शक जताया कि इस हत्याकांड में अकेला ऋषि शामिल नहीं है, उस के साथ अन्य लोग भी जरूर शामिल रहे होंगे.

मृतक दीपक के चाचा राजेंद्र ने ऋषि तोमर एवं अज्ञात के खिलाफ तहरीर दे कर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई.

पुलिस ने हत्यारोपी ऋषि से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया.

उधर पोस्टमार्टम के बाद लक्ष्मी के शव को लेने उस के परिवार के लोग नहीं पहुंचे, जबकि दीपक के शव को उस के घर वाले ले गए.

हालांकि मृतका लक्ष्मी के परिजनों से पुलिस ने संपर्क भी किया, लेकिन उन्होंने अनसुनी कर दी. इस के बाद पुलिस ने लक्ष्मी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया. थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह मामले की तफ्तीश कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य- सत्यकथा, जुलाई 2019

खून में डूबा प्यार का दामन

18वर्ष की वैष्णवी दरमियाने कद की सुंदर युवती थी. उस के पिता हरीराम गुप्ता अपने सब बच्चों से ज्यादा उसे प्यार करते थे. चूंकि वह जवान थी, इसलिए सतरंगी सपने उस के दिल में आकार लेने लगे थे. वह अपने भावी जीवनसाथी के बारे में सोचती रहती थी. कभी खयालों में तो कभी कल्पनाओं में वह उस के वजूद को आकार देने की कोशिश करती रहती.

वैष्णवी उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के संडीला कस्बे के मोहल्ला इमलिया बाग में रहने वाले हरीराम गुप्ता की बेटी थी. हरीराम के 3 बेटे थे, वेद प्रकाश उर्फ उत्तम, ज्ञानप्रकाश उर्फ ज्ञानू, सर्वेश उर्फ शक्कू और 2 बेटियां वैष्णवी और लक्ष्मी थीं.

वेदप्रकाश उर्फ उत्तम ने घर में ही बनी दुकान में किराने की दुकान खोल रखी थी. हरीराम और ज्ञानू उस की मदद करते थे. हरीराम ने तीसरे बेटे सर्वेश को एक पिकअप गाड़ी खरीद कर दे दी थी. वह उसी में सवारियां ढो कर अच्छेखासे पैसे कमा लेता था.

एक दिन वैष्णवी की मुलाकात गांव के ही रहने वाले गोविंदा से हुई तो वह उसे देखती रह गई. वह बिलकुल वैसा ही था, जैसा अक्स उस के ख्वाबोंखयालों में उभरता था. गोविंदा से निगाहें मिलते ही उस के शरीर में सनसनी सी फैल गई.

उधर गोविंदा का भी यही हाल था. वैष्णवी के मुसकराने का अंदाज देख कर उस का दिल भी जोरों से धड़क उठा. मन हुआ कि वह आगे बढ़ कर उसे अपनी बांहों में ले ले, मगर यह मुमकिन नहीं था, इसलिए वह मन मसोस कर रह गया. होंठों की मुसकराहट ने दोनों को एकदूसरे के आकर्षण में बांध दिया था. उस दिन के बाद उन के बीच आंखमिचौली का खेल शुरू हो गया.

गोविंदा भी संडीला के मोहल्ला अशरफ टोला में रहने वाले दिलीप सिंह का बेटा था. दिलीप सिंह के परिवार में पत्नी सुशीला के अलावा 2 बेटियां और 2 बेटे थे, जिस में गोविंदा तीसरे नंबर का था. दिलीप सिंह चाय का स्टाल लगाते थे.

सन 2002 में दिलीप बीमार हो कर बिस्तर से लग गए. उस समय उन के दोनों बेटे गोविंदा और आकाश पढ़ रहे थे. पिता के बीमार होने से घर की आर्थिक स्थिति खस्ता हो गई तो दोनों भाइयों को पढ़ाई छोड़नी पड़ी.

घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए दोनों भाई कस्बे की एक गारमेंट शौप पर नौकरी करने लगे. दिलीप सिंह की बड़ी बेटी का विवाह हो चुका था. 2 बेटे और एक बेटी अविवाहित थे.

नजरें चार होने के बाद गोविंदा रोजाना वैष्णवी के घर के कईकई चक्कर लगाने लगा. वैष्णवी को भी चैन नहीं था. वह भी उस का दीदार करने के लिए जबतब बाहरी दरवाजे की चौखट पर आ बैठती.

जब नजरें मिलतीं तो दोनों मुसकरा देते. इस से उन के दिल को सुकून मिल जाता था. यह उन की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया था.

दिन यूं ही गुजरते जा रहे थे. दिलों ही दिलों में मोहब्बत जवान होती जा रही थी. लब खामोश थे, मगर निगाहें बातें करती थीं और दिल का हाल बयान कर देती थीं. लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलता.

गोविंदा चाहता था कि वह वैष्णवी से बात कर के अपने दिल का हाल बता दे. पर यह बात सरेआम नहीं कही जा सकती थी. आखिर एक दिन गोविंदा को मौका मिल गया तो उस ने अपने दिल की बात उस से कह दी. चूंकि वैष्णवी भी उसे चाहती थी इसलिए मुसकरा कर उस ने नजरें झुका लीं.

प्यार स्वीकार हो जाने पर वह बहुत खुश हुआ. जैसे आजकल अधिकांश लड़के लड़कियों के पास स्मार्टफोन होता है तो वे दूसरों को दिखाने के लिए उसे हाथ में पकड़े रहते हैं. ऐसा करते हुए उस ने वैष्णवी को नहीं देखा था. फिर भी उस ने मौका मिलने पर एक दिन वैष्णवी से उस का मोबाइल नंबर मांगा. वैष्णवी ने उसे बता दिया कि उस के पास फोन नहीं है.

‘‘कोई बात नहीं, मैं जल्द ही एक फोन खरीद कर तुम्हें दे दूंगा.’’ गोविंदा ने कहा.

इतना सुन कर वैष्णवी मन ही मन खुश हुई. अगले ही दिन गोविंदा ने एक मोबाइल खरीद कर वैष्णवी को दे दिया. वैष्णवी ने उसे पहले ही बता दिया था कि मोबाइल इतना बड़ा ले कर आए, जिसे वह आसानी से छिपा कर रख सके, इसलिए गोविंदा उस के लिए बटन वाला फीचर मोबाइल ले कर आया था. उस मोबाइल को वैष्णवी ने छिपा कर रख लिया. जब उसे समय मिलता, वह गोविंदा से बात कर लेती.

दोनों ही फोन पर काफीकाफी देर तक प्यारमोहब्बत की बातें करते थे. उन की मोहब्बत दिनोंदिन बढ़ती गई. दोनों जब तक बात नहीं कर लेते, तसल्ली नहीं होती थी. उन्हें मोहब्बत के सिवाय कुछ और नजर नहीं आता था. दोनों शादी के फैसले के अलावा यह भी तय कर चुके थे कि वे साथ जिएंगे, साथ ही मरेंगे.

बात 2 जनवरी, 2019 की है. दोपहर के समय गोविंदा अपने घर आया. उस समय वह कुछ परेशान था. उस ने खाना भी नहीं खाया. गोविंदा ने अपनी छोटी बहन सोनम से सारी बातें बता देता था. उस ने वैष्णवी और अपने प्यार की बात सोनम को बता दी थी. उस दिन छोटी बहन ने गोविंदा से उस की परेशानी की वजह पूछी तो उस ने अपनी परेशानी बता दी. साथ ही उसे कसम दी कि इस बारे में घर वालों को कुछ न बताए.

इतना कह कर वह अपराह्न 3 बजे के करीब घर से चला गया. जब वह देर रात तक घर नहीं लौटा तो मां सुशीला और भाई आकाश ने उसे सारी जगह खोजा, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला.

4 जनवरी, 2019 को सीतापुर के थाना संदना की पुलिस ने एक अज्ञात युवक की लाश बरामद की. चूंकि लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी थी, इसलिए इस की सूचना आसपास के जिलों की पुलिस को भी भेज दी गई.

गोविंदा के भाई आकाश के किसी दोस्त को वाट्सऐप पर एक लाश की फोटो मिली तो वह उस फोटो को पहचान गया. वह लाश गोविंदा की थी. उस ने वह फोटो आकाश को वाट्सऐप कर के फोन भी कर दिया. आकाश ने जैसे ही भाई गोविंदा की लाश देखी तो वह फफक कर रो पड़ा. घर के सदस्यों को पता चला तो वह भी गमगीन हो गए.

गोविंदा की छोटी बहन सोनम ने रोते हुए मां और भाई को बताया कि गोविंदा इमलिया बाग मोहल्ले में रहने वाले हरीराम की बेटी वैष्णवी से प्यार करता था. 2 जनवरी को वैष्णवी का मोबाइल उस के घर वालों ने छीन लिया था. यह बात गोविंदा को पता चली तो वह वैष्णवी के घर गया था. गोविंदा ने सोनम को कसम दी थी कि वह यह बात किसी को न बताए.

आकाश पता कर के किसी तरह वैष्णवी के घर पहुंचा तो हरीराम घर पर ही मिल गया. उस ने गोविंदा के घर पर आने की बात से साफ इनकार कर दिया.

तब गोविंदा की मां सुशीला कोतवाली संडीला पहुंच गई. उस ने इंसपेक्टर जगदीश यादव को पूरी बात बता दी. इंसपेक्टर यादव ने सुशीला से कहा कि पहले सीतापुर के संदना थाने जा कर बरामद की गई लाश देख लें. हो सकता है वह गोविंदा की न हो कर किसी और की लाश हो.

सुशीला अपने बेटे आकाश को ले कर थाना संदना, सीतापुर पहुंच गई. थानाप्रभारी ने मांबेटों को मोर्चरी में रखी लाश दिखाई तो उन्होंने उस की शिनाख्त गोविंदा के रूप में कर दी. पोस्टमार्टम के बाद गोविंदा की लाश उन्हें सौंप दी गई.

5 जनवरी की देर रात सुशीला ने संडीला कोतवाली के इंसपेक्टर जगदीश यादव को एक तहरीर दी. तहरीर के आधार पर पुलिस ने हरीराम गुप्ता और उस के बेटों वेदप्रकाश गुप्ता, ज्ञानप्रकाश गुप्ता, सर्वेश गुप्ता के अलावा दोनों बेटियों वैष्णवी और लक्ष्मी के खिलाफ भादंवि की धाराओं 147, 148, 302, 201, 342 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

चूंकि रिपोर्ट नामजद थी, इसलिए अगले ही दिन एएसपी ज्ञानंजय सिंह के निर्देश पर इंसपेक्टर यादव ने हरीराम गुप्ता, वेदप्रकाश गुप्ता और ज्ञानप्रकाश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया. उन से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने आसानी से स्वीकार कर लिया कि उन्होंने ही गोविंदा की हत्या की थी. इस के बाद उन्होंने उस की हत्या के पीछे की सारी कहानी बता दी.

गोविंदा और वैष्णवी एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे. उन्होंने अपनी मोहब्बत की कहानी को घर वालों और जमाने से छिपाने की बहुत कोशिश की थी, परंतु कामयाब नहीं हो सके. उन के प्रेम संबंधों की खबर किसी तरह वैष्णवी के घर वालों को लग गई. इस के बाद वे उस पर निगाह रखने लगे.

एक दिन वैष्णवी घर पर अकेली थी. गोविंदा ने वैष्णवी को मोबाइल दे ही रखा था. उस दिन वैष्णवी ने गोविंदा को फोन कर के घर आने को कह दिया. गोविंदा उस के दरवाजे पर पहुंच गया. जैसे ही गोविंदा ने दस्तक दी, वैष्णवी ने दरवाजा खोल दिया. गोविंदा को सामने देख वह खुशी से झूम उठी.

वह उसे घर के अंदर ले गई. गोविंदा के अंदर दाखिल होते ही वैष्णवी ने दरवाजा बंद कर दिया और उस से लिपट गई. वैष्णवी की आंखों में आंसू छलक आए. गोविंदा ने उस से पूछा, ‘‘क्या हुआ वैष्णवी?’’

‘‘गोविंदा, घर में सब को हमारे संबंधों का पता चल गया है. मेरे घर वाले हमें कभी एक नहीं होने देंगे.’’ वह बोली.

‘‘ऐसा नहीं होगा वैष्णवी. तुम मेरे ऊपर विश्वास रखो. मैं जल्द तुम्हें यहां से कहीं दूर ले जाऊंगा. वहां सिर्फ हम दोनों होंगे, हमारा प्यार होगा और हमारी खुशियां होंगी.’’ गोविंदा ने भरोसा दिया.

‘‘सच कह रहे हो?’’ आश्चर्यचकित होते हुए बोली.

‘‘एकदम सच.’’ गोविंदा ने कहा. इस के बाद दोनों ने एकदूसरे को बांहों में लिया तो तनहाई के आलम में उन्हें बहकते देर नहीं लगी.

उस दिन गोविंदा काफी देर तक वैष्णवी के घर में रहा. दोनों ने जी भर कर बातें कीं और भावी जिंदगी के सपने बुने. फिर गोविंदा अपने घर चला गया.

उन की इस मुलाकात की जानकारी किसी तरह हरीराम और उस के बेटों को हो गई. वे सभी गुस्से से भर उठे और अपने घर की इज्जत नीलाम करने वाले को सबक सिखाने की ठान ली.

2 जनवरी, 2019 को हरीराम ने वैष्णवी को मोबाइल पर बात करते पकड़ लिया. हरीराम को समझते देर नहीं लगी कि वह गोविंदा से बात कर रही है और मोबाइल भी उसी का दिया हुआ है. हरीराम ने उस से मोबाइल छीन कर तोड़ दिया और उसे कई तमाचे जड़ दिए.

दूसरी ओर गोविंदा को फोन पर वैष्णवी के पिता की गुस्से से भरी आवाज सुनाई दे गई थी, क्योंकि जिस समय वैष्णवी की गोविंदा से बात चल रही थी, उसी समय हरीराम कमरे में आया था. बेटी को फोन पर बात करते देख वह दरवाजे से ही दहाड़ा था.

पिता के दहाड़ने की आवाज सुन कर गोविंदा को समझते देर नहीं लगी कि वैष्णवी के पिता ने उसे बातें करते पकड़ लिया है. वह परेशान हो उठा.

वह घर पहुंचा तो काफी परेशान था. मां सुशीला ने गोविंदा से खाना खा लेने को कहा, लेकिन उस ने खाना नहीं खाया. छोटी बहन सोनम को समझते देर नहीं लगी कि जरूर कोई बात है.

उस ने पूछा तो गोविंदा ने वैष्णवी के मोबाइल पर बात करते पकड़े जाने की बात बता दी और कहा कि वह वैष्णवी के घर जा रहा है. जाते समय उस ने सोनम को कसम दी कि यह बात किसी को न बताए. इस के बाद वह घर से निकल गया.

गोविंदा सीधे वैष्णवी के घर पहुंचा. घर पर हरीराम मिला तो वह उस से लड़ने लगा. शोर सुन कर हरीराम के तीनों बेटे वेदप्रकाश, ज्ञानप्रकाश और सर्वेश बाहर निकल आए. उन्होंने उसे दबोच लिया और पिटाई शुरू कर दी. फिर उस के मुंह पर टेप चिपकाने के बाद उस के हाथपैर बांध कर जिंदा ही बोरे में बंद कर दिया. यह सब वैष्णवी और लक्ष्मी के सामने हुआ था.

देर रात साढ़े 10 बजे सभी ने बोरे में बंद गोविंदा को सर्वेश की पिकअप गाड़ी में रख लिया. फिर वे सीतापुर की तरफ रवाना हो गए. सीतापुर के संदना थाना क्षेत्र में एक सुनसान जगह पर उन्होंने हाथपैर बंधे गोविंदा को बोरे से निकाला और साथ लाए बांके से उस का गला रेत दिया. उस की हत्या करने के बाद उन लोगों ने उस का पर्स, आधार कार्ड और बोरे को जला दिया. लेकिन वह पूरी तरह नहीं जल पाए थे.

हरीराम, वेदप्रकाश व ज्ञानप्रकाश से पूछताछ करने के बाद इसंपेक्टर यादव ने उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांका और पिकअप गाड़ी भी बरामद कर ली. इस के बाद तीनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया.

फिर 23 जनवरी, 2019 को इंसपेक्टर यादव ने वैष्णवी और सर्वेश को भी गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक लक्ष्मी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी. बाकी अभियुक्त जेल में थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य- सत्यकथामार्च 2018)

मौत की छाया : बाहरी सम्बन्ध ने उजाड़ा परिवार

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद का एक थाना है शिकोहाबाद. इस थाना क्षेत्र में एक गांव है भूड़ा, जो हाइवे के

किनारे बसा है. भोगनीपुर नहर इस गांव से हो कर गुजरती है. इसी वजह से अधिकतर लोग इस नहर को भूड़ा नहर के नाम से जानते हैं.

हर साल देश भर में ज्येष्ठ माह की 10वीं तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है, खासकर उन जगहों पर जहां गंगा या गंगनहर पास होती है. हर साल की तरह इस साल भी भूड़ा नहर पर गंगा दशहरे का भव्य मेला लगा था. इस मौके पर लोग स्नान के लिए सुबह से ही भूड़ा नहर पर आने लगे थे. मेले में धीरेधीरे भीड़ बढ़ने लगी थी.

सुबह लगभग 8 बजे शिकोहाबाद नगर के रहने वाले युवकों की एक टोली नहाने के लिए नहर पर पहुंची. नहर किनारे की पूर्वी पटरी से कुछ ही दूरी पर बालाजी मंदिर है. उन युवकों ने बालाजी मंदिर से थोड़ा पहले नहर की पटरी के किनारे एक मोटरसाइकिल खड़ी देखी.

मोटरसाइकिल पर कपड़ों के अलावा एक मोबाइल भी रखा था. युवकों ने सोचा कि मोटरसाइकिल वाला नहर में नहाने गया होगा. उस ने अपनी मोटरसाइकिल, कपड़े और मोबाइल यहां छोड़ दिया होगा.

युवकों की टोली नहर की पटरी पर कपड़े रख कर नहाने के लिए नहर में उतर गई. नहाते समय एक युवक के पैर में कुछ उलझा तो उस ने अपने साथियों से कहा कि नहर में कुछ है, जो उस के पैरों से टकराया है.

इस पर उस के साथी वहां आ गए. पास आने पर उन के पैरों में भी कुछ टकराया. उन्हें लगा कि वहां कोई डूबा है. संभव है बाइक वाला ही हो. युवकों में से मनोज ने अपने साथियों की मदद से उसे पानी से बाहर निकाला तो सभी के बदन में पांव से सिर तक शीतलहर सी दौड़ गई.

नहर के पानी से एक युवक की लाश निकली थी, जिस के बदन पर केवल अंडरवियर था. उन लोगों ने अनुमान लगाया कि मोटरसाइकिल डूबने वाले युवक की ही है. उन्हें लगा कि वह मोटरसाइकिल से आया होगा. कपड़े उतार कर नहर में उतर गया होगा, जहां डूबने से उस की मौत हो गई.

मनोज के साथी बंटू ने डायल 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस की गाड़ी घटनास्थल पर पहुंच गई. तत्कालीन थानाप्रभारी शिवकुमार शर्मा ने लाश का निरीक्षण किया तो उन्हें युवक की गरदन पर चोट के निशान दिखाई दिए.

साथ ही उस की नाक से खून भी बह रहा था. मनोज ने पुलिस को नहर की पटरी किनारे खड़ी मोटरसाइकिल व उस पर कपड़े व मोबाइल रखा होने की बात बताई.

पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने का प्रयास किया लेकिन कोई भी मृतक को पहचान नहीं सका. यह 12 जून, 2019 की सुबह की बात है. लाश देख कर पहली नजर में ही पुलिस को समझ में आ गया था कि मामला हत्या का है.

क्योंकि मृतक की गरदन पर चोट के निशान दिख रहे थे, जिस से यह समझने में देर नहीं लगी कि हत्या को हादसे का रूप देने के लिए ही मृतक की मोटरसाइकिल नहर की पटरी के किनारे सुनसान जगह पर खड़ी की गई थी.

बाइक पर मृतक के कपड़े और मोबाइल भी इसी उद्देश्य से रखे गए थे ताकि देखने पर लगे कि युवक नहाते समय डूब गया. जाहिर है, कोई भी अपनी मोटरसाइकिल और मोबाइल इस तरह लावारिस छोड़ कर नहाने नहीं जा सकता. थानाप्रभारी शिवकुमार शर्मा ने यह सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी.

शिनाख्त कराने की कोशिश मृतक कौन और कहां का रहने वाला था, यह बात वहां मौजूद लोगों से पता नहीं लग सकी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि युवक की हत्या कर लाश को रात में नहर में फेंका गया था. जाहिर है यह काम अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता. सूचना मिलने पर सीओ अजय सिंह चौहान और एसडीएम डा. सुरेशचंद्र भी मौकाएवारदात पर पहुंच गए.

मृतक की शिनाख्त के लिए पुलिस ने मोबाइल फोन में मौजूद नंबरों पर काल करनी शुरू कर दी. इसी प्रयास में महेशचंद्र नाम के एक व्यक्ति से बात हुई. उस ने बताया कि यह नंबर उस के छोटे भाई पुष्पेंद्र कुमार का है, जो अपने दोनों बच्चों के साथ फिरोजाबाद के थाना उत्तर के कृष्णानगर में रहता है.

वह कल रात घर से मोटरसाइकिल ले कर अपनी ससुराल जाने के लिए निकला था, लेकिन अब तक वापस नहीं आया है. पुलिस ने भाई से घटनास्थल पर पहुंचने को कहा ताकि लाश की शिनाख्त हो सके.

महेशचंद्र की बातों से यह निश्चित हो गया कि लाश उस के भाई पुष्पेंद्र की ही है, साथ ही मोबाइल और बाइक भी. कुछ ही देर में महेशचंद्र ग्राम प्रधान सुनील बघेल व अन्य गांव वालों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गया.

लाश देख कर महेशचंद्र ने रोतेरोते उस की शिनाख्त अपने छोटे भाई पुष्पेंद्र के रूप में कर दी. महेश ने पुलिस को बताया कि पुष्पेंद्र की पत्नी छाया का डेढ़ साल से एक युवक से अफेयर चल रहा है. इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच विवाद होता रहता था.

बात बढ़ी तो मामला मारपीट तक पहुंच गया. छाया ने पुष्पेंद्र पर घरेलू हिंसा का केस कर दिया था. फिलहाल दोनों के बीच कोर्ट में मुकदमा चल रहा था. मुकदमे के बाद से छाया दोनों बच्चों को छोड़ कर फिरोजाबाद में कबीरनगर स्थित अपने मायके में रहने लगी थी. महेश ने पुष्पेंद्र की हत्या में उस की पत्नी छाया और उस के प्रेमी संतोष का हाथ होने की बात कही.

महेश ने इन दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की पुलिस को एक तहरीर भी दी, लेकिन पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने पर केस दर्ज करने को कहा. मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने पुष्पेंद्र की लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल फिरोजाबाद भेज दी.

मायके में रह रही पत्नी छाया को जब पति की हत्या की जानकारी मिली तो वह सुबह ही घर आए अपने दोनों बेटों आलोक व आकाश को साथ ले कर रोतेबिलखते जिला अस्पताल पहुंच गई. दोनों बच्चे भी पिता की मौत से सदमे में थे.

पति की मौत पर छाया का रोरो कर बुरा हाल था. इस हत्या की खबर सुन कर प्रिंट व इलैक्ट्रौनिक मीडिया के पत्रकार भी पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंच गए थे. छाया ने उन्हें बताया कि 11 जून को मेरे पिता ने बच्चों को फोन कर के कह दिया था कि कल दशहरा है, घर आ जाना.

दशहरे के दिन यानी 12 जून को बच्चों के न आने पर उस ने सुबह फोन किया, लेकिन न तो पति पुष्पेंद्र ने फोन उठाया और न बच्चों ने. इस पर उस ने घर के पड़ोस में रहने वाली रिश्ते की बहन को फोन कर के पूछा कि कोई फोन नहीं उठा रहा है, आप बात करा दो. इस के बाद उस बहन ने छोटे बेटे आकाश को बुला कर बात कराई. उस ने छोटे बेटे से पूछा कि आकाश, पापा और तुम कोई भी फोन नहीं उठा रहे हो, क्या बात है?

आकाश ने कहा कि पापा रात को कहीं गए थे. कह रहे थे, सुबह आएंगे लेकिन अभी तक नहीं आए. छाया ने बताया कि उस ने आकाश से कहा कि तुम दोनों आ जाओ. पापा भी आ जाएंगे, बस इतनी ही बात हुई थी.

सुबह उसे खबर मिली कि पति का शव शिकोहाबाद भूड़ा नहर में मिला है. छाया ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि उस का पति से इसलिए विवाद था कि वह उस के चरित्र पर शक करते थे. पारिवारिक हिंसा की वजह से वह करीब डेढ़ साल से पति से अलग रह रही थी. पहले वह दिल्ली में अपने मामा के घर चली गई थी. लेकिन पिछले 6 महीने से मायके में रह रही थी.

दोनों में हो गया था राजीनामा पिछले 2 महीनों से मोबाइल पर पति से रात में बात होती थी. मंगलवार 11 जून को भी बात हुई थी. छाया ने बताया कि हम दोनों के बीच राजीनामा हो गया था. मंगलवार को कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई थी, लेकिन जज नहीं बैठे और अगली तारीख मिल गई.

वहां से हम दोनों शिकोहाबाद स्थित बालाजी मंदिर के दर्शन करने चले गए थे. मंगलवार की रात में भी दोनों की मोबाइल पर बातचीत हुई थी. पुष्पेंद्र ने पूछा था कि तुम डेढ़ साल बाद आ रही हो, खाने में क्या बनाओगी? जवाब में छाया ने पति से उस के मनपसंद व्यंजन बनाने की बात कही थी. छाया ने खुद को निर्दोष बताया.

घटना के 2 दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. रिपोर्ट में पुष्पेंद्र की हत्या का कारण गला घोंटना बताया गया. इस पर पुलिस ने नरेश की ओर से छाया व उस के प्रेमी संतोष शास्त्री, निवासी झलकारी नगर, थाना उत्तर, फिरोजाबाद के विरुद्ध पुष्पेंद्र की हत्या की रिपोर्ट भादंवि की धारा 302, 201 के अंतर्गत दर्ज कर ली.

इसी दौरान थानाप्रभारी शिव कुमार शर्मा का स्थानांतरण हो गया. इस चक्कर में पुष्पेंद्र की हत्या हुए एक महीने का समय बीत गया, लेकिन पुलिस नामजद हत्याभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं कर सकी.

यह देख मृतक के भाई महेश ने अपने गांव रैमजा के प्रधान सुनील बघेल के साथ थाना शिकोहाबाद जा कर पुलिस अफसरों से बात कर के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की. उस ने अफसरों के औफिसों के कई चक्कर काटे. साथ ही एसएसपी सचींद्र पटेल से भी गुहार लगाई. उन्होंने अधीनस्थ अफसरों को पुष्पेंद्र की हत्या के आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने के आदेश दिए.

एसपी (ग्रामीण) राजेश कुमार ने भी नए थानाप्रभारी अजय किशोर द्वारा थाने का चार्ज लेने के तुरंत बाद पुष्पेंद्र हत्याकांड के आरोपियों के विरुद्ध सबूत जुटा कर उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया. साथ ही सर्विलांस टीम की मदद लेने को भी कहा. एसपी के निर्देश पर तत्काल काररवाई शुरू हो गई.

पुलिस ने मृतक की पत्नी छाया के बयानों की सच्चाई जानने के लिए उस के मोबाइल को भी खंगाला. उस के फोन नंबर की काल डिटेल्स में एक ऐसा नंबर शक के दायरे में आया, जिस पर सब से ज्यादा बातें होती थीं. जब पुलिस ने उस नंबर को ट्रैस किया तो वह संतोष शास्त्री का नंबर निकला. पुष्पेंद्र के मोबाइल की आखिरी लोकेशन कबीरनगर की थी. उस के फोन पर रात में जो अंतिम काल आई थी, वह छाया की थी.

छाया को संदेह के दायरे में लाने के लिए इतना ही काफी था. लेकिन अंदाजे के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं था, इसलिए पुलिस टीम ने छाया के मायके जा कर उस से फिर से पूछताछ की.

छाया से की गई पूछताछ में पुलिस वालों को कोई खास जानकारी हाथ नहीं लगी. सिवाय इस के कि पुष्पेंद्र पत्नी के चरित्र पर शक करता था. फिर भी पुलिस यह समझ गई थी कि एक अकेली औरत पुष्पेंद्र जैसे तगड़े मर्द का न तो अकेले गला घोंट सकती थी और न अकेले घर से 20 किलोमीटर दूर ले जा कर शिकोहाबाद की भूड़ा नहर में फेंक सकती थी. पुलिस चाहती थी कि कत्ल की इस वारदात का पूरा सच सामने आए.

मृतक पुष्पेंद्र के दोनों बेटे आलोक व आकाश अपने पिता के साथ रहते थे. उन दोनों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जब पापा घर नहीं लौटे तो उन्होंने समझा कि वह मम्मी के पास कबीरनगर गए होंगे. 12 जून की सुबह 7 बजे मम्मी का फोन आया, जिस में उस ने कहा कि त्यौहार का दिन है, मेरे पास आ जाओ.

हम लोग मम्मी के पास कबीरनगर पहुंच गए. वहां पापा को न देख हम ने मम्मी से पूछा कि पापा कहां हैं, इस पर उस ने बताया कि वे रात में आए थे और कुछ देर रुक कर वापस चले गए थे. इस के थोड़ी देर बाद ही उन्हें पता चला कि पापा की मौत हो गई है.

मृतक के भाई महेश ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि 11 जून को रात लगभग 11 बजे पुष्पेंद्र पत्नी के पास जा रहा था. रास्ते में पुष्पेंद्र का रिश्ते का साढ़ू मिल गया. उस ने पुष्पेंद्र को इतनी रात में छाया के पास जाने से मना भी किया, लेकिन पुष्पेंद्र नहीं माना. ससुराल में ही उस की हत्या कर लाश मोटरसाइकिल से ले जा कर नहर में फेंक दी गई.

पुलिस को मिला सुराग इस बीच जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा. किसी ने इंसपेक्टर को बताया कि छाया चोरीछिपे अब भी अपने प्रेमी संतोष से मिलती है. दोनों के नाजायज संबंध का जो शक किया जा रहा था, वह सच निकला. जाहिर था, हत्या अगर छाया ने की थी तो कोई न कोई उस का संगीसाथी जरूर रहा होगा. इस बीच पुलिस की बढ़ती गतिविधियों की भनक लगते ही छाया और उस का प्रेमी संतोष फरार हो गए.

दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने मुखबिरों का जाल फैला दिया. मुखबिर की सूचना पर घटना के 2 महीने बाद 12 अगस्त को सीओ अजय सिंह चौहान और थानाप्रभारी अजय किशोर ने छाया व उस के प्रेमी संतोष शास्त्री को शिकोहाबाद स्टेशन रोड से हिरासत में ले लिया. दोनों फरार होने के लिए किसी वाहन का इंतजार कर रहे थे.

थाने ला कर दोनों से पूछताछ की गई. छाया पुलिस को दिए अपने बयानों में गड़बड़ा रही थी. जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस ने कहा कि पति ने उस का जीना हराम कर दिया था. वह उस के चालचलन पर शक करता और मारतापीटता था.

इस के साथ ही दोनों बच्चों को भी उस से छीन लिया था. ऐसे में उस के सामने यह कदम उठाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. उस ने पति की हत्या की जो कहानी बताई, इस तरह थी—

पुष्पेंद्र 3 भाइयों महेश और नरेश के बाद तीसरे नंबर का था. ये लोग गांव रैमजा, थाना नारखी, जिला फिरोजाबाद के मूल निवासी थे. लगभग 14 साल पहले पुष्पेंद्र की शादी फिरोजाबाद के थाना उत्तर के कबीरनगर खेड़ा निवासी इश्लोकी राठौर की पुत्री छाया से हुई थी. इश्लोकी की 2 बेटियां और 2 बेटे थे. इन में छाया सब से बड़ी थी. उस के बाद वर्षा और 2 भाई सोनू व मोनू थे.

पुष्पेंद्र के पास अपनी मैक्स गाड़ी थी. वह वाहनों के टायर खरीदने व बेचने का व्यवसाय करता था. 3 साल पहले उस ने फिरोजाबाद के कृष्णानगर में एक मकान खरीद लिया था और परिवार सहित गांव से आ कर उसी मकान में रहने लगा था. शादी के बाद उस के 2 बेटे हुए, इन में 13 वर्षीय आलोक 8वीं में पढ़ रहा था, जबकि 11 वर्षीय आकाश 6ठीं में था.

पुष्पेंद्र की गृहस्थी हंसीखुशी चल रही थी. करीब डेढ़ साल पहले जैसे उस के परिवार को किसी की नजर लग गई. हुआ यह कि कृष्णानगर में भागवतकथा का आयोजन हुआ. भागवतकथा में भजन गायक संतोष शास्त्री का छोटा भाई राजकुमार कृष्ण बना और छाया रुक्मिणी. भजन गायक संतोष भी छाया का हमउम्र था.

भरेपूरे बदन की छाया को देख कोई भी यह नहीं कह सकता था कि वह 2 बच्चों की मां है. 35 की उम्र में भी वह खासी जवान दिखती थी. संतोष के गले से निकली उस की सुरीली आवाज पर छाया रीझ गई. वहीं संतोष भी उस की सुंदरता का दीवाना हो गया.

भागवतकथा में एक सप्ताह तक रुक्मिणी का अभिनय करने के दौरान ही छाया का संतोष शास्त्री से परिचय हुआ. दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर दे दिए. फिर दोनों मोबाइल पर बातें करने लगे. संतोष हंसीठिठोली के दौरान छाया से कहता, ‘‘रुक्मिणी तो अब संतोष की है.’’

आसपास जहां भी भागवतकथा के आयोजन में संतोष आता, फोन कर के छाया को भी बुला लेता था. धीरेधीरे दोनों का एकदूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ता गया. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे. इस बीच दोनों के अवैध संबंध भी बन गए थे. अब छाया फोन पर संतोष से लंबीलंबी बातें करने लगी. वह उस के खयालों में खोईखोई सी रहती थी.

घरेलू हिंसा का केस करा दिया पुष्पेंद्र को जब इस की जानकारी मिली तो इसे ले कर पतिपत्नी में तकरार शुरू हो गई. लेकिन छाया ने संतोष से बात करना या मिलना नहीं छोड़ा. इस से पुष्पेंद्र अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा. पतिपत्नी में आए दिन झगड़े होने लगे. गुस्से में पुष्पेंद्र छाया की पिटाई भी कर देता था. गृह क्लेश के चलते पिछले डेढ़ साल से छाया पति पुष्पेंद्र से अलग रहने लगी थी.

छाया 3 महीने दिल्ली में अपने मामा के पास रही. वहां वह फोन पर प्रेमी संतोष से बात करती रहती थी. इस बीच उस ने कोर्ट में पुष्पेंद्र पर घरेलू हिंसा का केस कर दिया था. यह मुकदमा जिला फिरोजाबाद के न्यायालय में चल रहा था.

पिछले 6 महीने से छाया अपने मायके कबीरनगर में रह रही थी. इस बीच उस के पास संतोष का आनाजाना लगा रहा. जब भी छाया का प्रेमी से मिलने का मन होता, वह उसे फोन कर देती. दोनों एकदूसरे से मिल कर संतुष्ट हो जाते थे. संतोष छाया के पति की कमी पूरी कर देता था. एक दिन छाया ने संतोष से कहा कि हम लोग इस तरह कब तक तड़पते रहेंगे, रास्ते का कांटा हटा दो.

साजिश को ऐसे दिया अंजाम इस के बाद छाया व उस के प्रेमी संतोष ने मिल कर एक षडयंत्र रचा. मुकदमे की तारीख पर पुष्पेंद्र और छाया की बातचीत हो जाती थी. जबतब दोनों मोबाइल पर भी बात कर लेते थे. छाया ने पुष्पेंद्र को मीठीमीठी बातों के झांसे में ले लिया था.

10 जून की रात को छाया ने फोन कर पुष्पेंद्र को अपने मायके बुलाया था. लेकिन उस दिन इन लोगों की योजना सफल नहीं हो सकी. इस पर छाया ने 11 जून की शाम को पुष्पेंद्र को फोन किया और कोल्डड्रिंक की बोतल ले कर रात में आने को कहा. पुष्पेंद्र पत्नी की चाल समझ नहीं सका और 11 बजे जब दोनों बच्चे सो रहे थे, उस ने छोटे बेटे आकाश को जगा कर कहा कि तुम्हारी मम्मी ने बुलाया है, मैं कुछ देर में आ जाऊंगा.

रात 11 बजे वह कोल्डड्रिंक ले कर छाया के पास पहुंच गया. छाया ने पुष्पेंद्र से बोतल ले ली. वह बोतल ले कर किचन में गई और 2 गिलासों में कोल्डड्रिंक ले कर आ गई. उस ने पुष्पेंद्र वाले कोल्डड्रिंक में नींद की गोलियां घोल दी थीं.

दोनों पलंग पर लेट कर प्यारमोहब्बत की बातें करने लगे. कोल्डड्रिंक पीने के बाद पुष्पेंद्र को नींद आ गई. जब वह गहरी नींद में सो गया तो छाया ने योजनानुसार अपने प्रेमी संतोष शास्त्री को फोन कर के घर बुला लिया.

संतोष छाया के फोन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. फोन आते ही वह छाया के घर पहुंच गया. दोनों ने मिल कर सो रहे पुष्पेंद्र को दबोच लिया और उस का गला दबा कर हत्या कर दी. गला घोंटने के दौरान छाया पुष्पेंद्र के दोनों हाथ पकड़े रही.

रात में ही शव को ठिकाने लगाना था, क्योंकि दूसरे दिन गंगा दशहरा था. संतोष ने पुष्पेंद्र की मोटरसाइकिल पर लाश इस तरह बैठी स्थिति में रखी, जिस से वह जिंदा लगे. छाया उस के पीछे बैठ गई.

रात में ही संतोष और छाया उसे बाइक से शिकोहाबाद भूड़ा नहर पर लाए और बालाजी मंदिर की ओर ले गए रात में वह जगह सुनसान रहती थी. दोनों ने पुष्पेंद्र के शरीर से कपड़े उतारने के बाद उस के कपड़े और मोबाइल बाइक पर रख दिए. फिर दोनों ने शव को नहर में फेंक दिया. जल्दबाजी में उन्होंने लाश नहर के किनारे पर ही डाल दी थी, जिस से वह पानी के तेज बहाव में नहीं बह सकी.

सुबह नहर पर मेला लगा और लोग नहर में नहाने के लिए पहुंचे. युवकों की एक टोली जब नहा रही थी, तभी एक युवक के पैर के नीचे पुष्पेंद्र का शव आ गया, जिसे नहर के बाहर निकाल कर पुलिस को सूचना दी गई.

पुलिस ने पुष्पेंद्र हत्याकांड में उस की पत्नी छाया, उस के प्रेमी संतोष शास्त्री को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. पुष्पेंद्र के दोनों बच्चे अपने ताऊ महेशचंद्र के पास रह रहे हैं.

छाया ने वासना में अंधी हो कर पति की हत्या कर अपनी मांग का सिंदूर उजाड़ने के साथ पतिपत्नी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया. वहीं अपनी हंसतीखेलती गृहस्थी के साथ अबोध बच्चों से भी दूर हो गई.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

मोहब्बत में पिता की बली

चारों तरफ घुप अंधेरा था. आसमान में बादल छाए थे और हलकी बूंदाबांदी हो रही थी. रात के 10 बज चुके थे. गांव के अधिकांश लोग गहरी नींद में थे. चारों ओर सन्नाटा पसरा था. श्याम नारायण मिश्रा की बेटी रीना को छोड़ कर उन के घर के सभी सदस्य सो गए थे. लेकिन रीना की आंखों से नींद कोसों दूर थी. वह चारपाई पर लेटी बेचैनी से इधरउधर करवटें बदल रही थी.

जब रीना को इत्मीनान हो गया कि घर के सभी लोग सो गए हैं तो वह चारपाई से आहिस्ता से उठी और दबे पांव दरवाजे की कुंडी खोल कर घर के बाहर पहुंच गई. घर के पड़ोस में रहने वाला अक्षय कुमार उर्फ छोटू बाहर खड़ा उस का इंतजार कर रहा था. रीना उस के पास पहुंची तो वह मुसकराते हुए फुसफुसाया, ‘‘आज आने में बड़ी देर कर दी, मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’

रीना ने एकदम उस के करीब आ कर हौले से कहा, ‘‘घर के लोग जाग रहे थे, इसलिए घर से निकल नहीं सकी. सब के सो जाने के बाद आने का मौका मिला’’

‘‘मुझे तो लग रहा था कि आज तुम नहीं आओगी.’’ अक्षय ने रीना का हाथ पकड़ कर कहा.

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है अक्षय कि तुम बुलाओ और मैं न आऊं. तुम्हारे लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूं.’’ रीना ने अपना सिर अक्षय के सीने पर सटा कर कहा.

‘‘ऐसी बातें मत करो रीना, हमें जिंदा रहना है और अपने प्यार की दास्तान भी लिखनी है.’’ कहते हुए अक्षय ने रीना को अपनी बांहों में कैद कर लिया.

उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के थाना पवई के अंतर्गत एक गांव है सौदमा पवई. आजमगढ़ जाने वाली सड़क के किनारे बसे इस गांव की आबादी मिलीजुली है. इसी सौदमा गांव में श्याम नारायण मिश्रा अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सुमन के अलावा 3 बेटे रत्नेश, उमेश, पिंकू तथा एक बेटी रीना थी. श्याम नारायण किसान थे. उन के बेटे खेती के काम में उन की मदद करते थे. श्याम नारायण गांव में श्याम पंडित के नाम से मशहूर थे.

रीना मिश्रा 3 भाइयों के बीच अकेली बहन थी, सब से छोटी भी, इसलिए सभी उसे स्नेह देते थे. रीना ने बचपन का आंगन लांघ कर यौवन की दहलीज पर कदम रख दिया था. उस का रंग तो सांवला था लेकिन आकर्षण गजब का था. उम्र का 16वां साल पार करते ही उस के रूपलावण्य में जो निखार आया, वह देखते ही बनता था.

श्याम नारायण मिश्रा के घर के ठीक सामने उदयराज मिश्रा का मकान था. उदयराज मिश्रा के परिवार में पत्नी किरन के अलावा 2 बेटे अजय कुमार, अक्षय कुमार तथा बेटी गरिमा थी. बेटी की उन्होंने शादी कर दी थी. उदयराज भी किसान थे.

श्याम नारायण मिश्रा और उदयराज के परिवारों में निकटता थी. दोनों परिवार एकदूसरे के सुखदुख में भागीदार रहते थे. परिवार की महिलाओं व बच्चों का बेरोकटोक एकदूसरे के घर आनाजाना था. रीना और अक्षय की उम्र में 4 साल का अंतर था. रीना 17 साल की उम्र पार कर चुकी थी, वहीं अक्षय 22 साल का हो चुका था.

रीना कभी मां के साथ तो कभी अकेले अक्षय के घर जाती थी. वह जब भी अक्षय के घर आती, अक्षय से पढ़ाई से संबंधित बातें कर लेती थी. बातचीत करते दोनों हंसीठिठोली भी करते तथा एकदूसरे को चिढ़ाते भी थे.

रीना और अक्षय दोनों ही युवा थे. इस उम्र में मन कुलांचे भरता है. दिल में किसी की चाहत पाने की तमन्ना होती है अत: दोनों का रुझान एकदूसरे के प्रति हो गया. मन ही मन वे आपस में प्यार करने लगे.

एक दिन बात करतेकरते अक्षय का मन मचला. उस ने रीना का हाथ पकड़ लिया. वह कुछ नहीं बोली. अक्षय अपने स्थान से उठ कर रीना से सट कर बैठ गया. रीना तब भी मुसकराती रही.

अक्षय के हौसले को हवा मिली तो उस ने रीना का चेहरा हथेलियों में ले लिया. विरोध करने के बजाय रीना मुसकराती रही.

अक्षय ने उस के होंठों की ओर होंठ बढ़ाए तो रीना ने हया से नजरें झुका लीं. होंठों से होंठों का मिलाप हुआ तो रोमांचित हो कर रीना ने आंखें बंद कर लीं. अक्षय ने रीना के होंठों से अपने होंठ अलग किए, तो रीना ने आंखें खोलीं. शरारती अंदाज में होंठों पर जीभ फिराई और मुसकराने लगी.

रीना के इस कातिलाना अंदाज पर अक्षय सौसौ जान से न्यौछावर हो गया.  दोस्ती बदल गई प्यार में  शुरू में अक्षय और रीना के बीच महज दोस्ती थी. लेकिन समय के साथ इस रिश्ते ने कब प्यार का रूप धारण कर लिया, इस का पता न तो अक्षय को लगा और न ही रीना को. दोनों उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके थे, जहां महत्त्वाकांक्षाएं हिलोरें मारने लगती हैं. मन में कुछ नया करने की उत्सुकता जाग उठती है. अक्षय को अब रीना सिर्फ दोस्त ही नहीं, बल्कि और भी बहुत कुछ लगने लगी थी. इसलिए वह रीना से बातें करते समय बेहद संजीदा हो जाता था.

रीना भी अक्षय में आए बदलाव से अनभिज्ञ नहीं थी. उस की शोख निगाहें जब अक्षय की निगाहों से टकरातीं तो उस के दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी. उस का भी मन चाहता था कि अक्षय इसी तरह प्यार भरी निगाहों से उसे निहारता रहे.

दोनों पर प्यार का ऐसा नशा चढ़ा कि उन्हें एकदूसरे के बिना सब कुछ सूना लगने लगा. दोनों घंटों बैठ कर भविष्य की योजनाएं बनाते रहते. साथ जीनेमरने की कसमें भी खाते.

एक रोज अक्षय को जानकारी मिली कि रीना के मातापिता कहीं रिश्तेदारी में गए हैं और भाई खेत पर काम कर रहा है. उचित मौका देख अक्षय पासपड़ोस के लोगों की नजरों से बचते रीना के घर पहुंच गया.

घर के अंदर पहुंचते ही उस ने मुख्य दरवाजा बंद किया और फिर रीना को अपनी बांहों में जकड़ लिया. रीना कसमसाई और बनावटी विरोध भी किया. लेकिन अक्षय ने उसे मुक्त नहीं किया.

आखिर रीना ने भी शरीर ढीला छोड़ कर उस का साथ देना शुरू कर दिया. इस के बाद उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो यह सिलसिला चल निकला. मौका मिलते ही दोनों अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे.

दोनों रीना और अक्षय ने लाख कोशिश की कि उन के प्रेम संबंधों की भनक किसी को न लगे, लेकिन प्यार की महक को भला कौन रोक पाया. वह तो स्वयं ही फिजा में तैरने लगती है. एक रोज गांव के एक युवक ने शाम के वक्त दोनों को गांव के बाहर बगीचे में हंसीठिठोली करते देख लिया. उस युवक ने यह बात रीना के पिता श्याम नारायण मिश्रा को बता दी.

पिता को उस की बातों पर एक बार को तो विश्वास नहीं हुआ. उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन की बेटी कोई ऐसा कदम उठाएगी, जिस के कारण उन का सिर शर्म से झुक जाए. श्याम नारायण ने इस बारे में घर में किसी से कुछ नहीं कहा, लेकिन रीना की निगरानी करने लगे.

पिता ने पकड़ा रंगेहाथों एक दिन श्याम नारायण ने खुद रीना को अक्षय से एकांत में मिलते देख लिया. प्रेमी से मिलने के बाद रीना जब घर लौटी तो उन्होंने उसे न केवल जम कर लताड़ा, बल्कि उस की पिटाई भी कर दी. उन्होंने उसे हिदायत दी कि आज के बाद अगर उस ने अक्षय से मिलने की कोशिश की तो उस के लिए अच्छा नहीं होगा.

रीना की मां सुमन ने भी समाज का हवाला दे कर रीना को समझाया, ‘‘बेटी, अक्षय पड़ोसी है. हमारे ही खानदान का है. हम दोनों एक ही गोत्र के हैं. इस नाते तुम दोनों का रिश्ता भाईबहन का है. इसलिए तेरा उस से मेलजोल बढ़ाना ठीक नहीं है.’’

इस के बाद श्याम नारायण मिश्रा और सुमन ने अक्षय का अपने घर आना तथा रीना का अक्षय के घर जाना बंद कर दिया.

जब दो प्रेमियों के बीच पाबंदियां लगीं तो वे बुरी तरह छटपटाने लगे. दरअसल रीना अक्षय के दिलोदिमाग पर नशा बन कर छा चुकी थी. उस की सांवली सूरत ने अक्षय पर जादू सा कर दिया था. वही हाल रीना का भी था. वह भी अक्षय से एक पल को भी जुदा नहीं होना चाहती थी.

दोनों की प्रेम लगन बढ़ती गई तो उन्होंने मिलने का एक अनोखा रास्ता खोज लिया. एक दिन अक्षय ने रीना को संदेश भिजवाया कि वह रात को 10 बजे के बाद घर के बाहर गली में उस का इंतजार करेगा.

ग्रामीण परिवेश के लोग रात को जल्द सो जाते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं. रीना के घर वाले भी जब रात 10 बजे तक गहरी नींद सो गए तो वह दबे पांव कुंडी खोल कर घर के बाहर चली गई, जहां अक्षय उस का इंतजार कर रहा था.

दोनों ने गिलेशिकवे दूर किए और घर से कुछ दूरी पर स्थित सहकारी भवन में पहुंच गए. वहां किसी के आने या देख लेने की आशंका नहीं थी. अपनी हसरतें पूरी करने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए. उन के आनेजाने की किसी को भनक तक नहीं लगी. इस के बाद तो उन का वहां मिलने का सिलसिला ही चल पड़ा.

अक्षय और रीना मिलने में भले ही सतर्कता बरतते थे, लेकिन इस के बावजूद वे पकड़े गए. दरअसल एक रात रीना ने जैसे ही दरवाजे की कुंडी खोली, तभी श्याम नारायण की आंखें खुल गईं. वह उठे तो उन्हें दरवाजे पर एक साया दिखाई दिया. वह उस जगह पहुंचे तो रीना खड़ी थी.

श्याम नारायण को समझते देर नहीं लगी कि रीना घर के बाहर जा रही थी. उन्होंने सामने गली की ओर नजर डाली तो वहां एक युवक खड़ा था. वह उस की ओर लपके तो वह वहां से भाग कर अंधेरे में गुम हो गया. श्याम नारायण को समझते देर नहीं लगी कि भागने वाला युवक अक्षय था.

श्याम नारायण का गुस्सा सातवें आसमान जा पहुंचा. उन्होंने रीना का हाथ पकड़ा और घसीटते हुए घर के अंदर ले आए. उन्होंने उस की जम कर पिटाई की. रीना रात भर कराहती रही.

सुबह होते ही श्याम नारायण पड़ोसी उदयराज के घर जा पहुंचे. उन्होंने उदयराज को धमकाया कि वह अपने आवारा लड़के अक्षय को समझा लें, वह हमारी बेटी रीना को बरगला रहा है. जिस दिन वह रीना के साथ दिख गया, उस दिन बहुत बुरा होगा.

उदयराज सुलझा हुआ इंसान था. उस ने श्याम नारायण की शिकायत बेहद गंभीरता से ली और भरोसा दिया कि वह अक्षय को डांटडपट कर तथा समझा कर रीना से दूर रहने की नसीहत देगा. साथ ही उस ने श्याम नारायण को भी सलाह दी कि वह भी रीना को प्यार से समझाए कि वह अक्षय से बात न करे.

दोपहर बाद अक्षय घर आया तो उदयराज ने उसे आड़े हाथों लिया. उस ने अक्षय को डांटा तथा रीना से दूर रहने की नसीहत दी. इस पर अक्षय ने पिता को बताया कि वह रीना से प्यार करता है और रीना भी उसे चाहती है. वे दोनों शादी करना चाहते हैं.

बेटे की यह बात सुनकर उदयराज ने उसे  बहुत लताड़ा. उन्होंने साफ कह दिया कि दोनों का गोत्र एक है, इसलिए उन की शादी नहीं हो सकती.

उधर रीना और अक्षय प्यार के उस मोड़ पर पहुंच गए थे, जहां से उन का वापस आना नामुमकिन था. इसलिए घर वालों की नसीहत का उन पर स्थाई असर नहीं हुआ. चोरीछिपे दोनों मिलते रहे. उन्हें जब जैसे घरबाहर जहां भी मौका मिलता, मिल लेते.

घर वालों की सतर्कता रह गई धरी की धरी लेकिन सतर्कता के बावजूद एक रात वे दोनों फिर पकड़े गए. हुआ यह कि श्याम नारायण और उन के बेटे रिश्तेदारी में एक शादी समारोह में शामिल होने मीरजापुर गए थे. घर पर सुमन और रीना ही रह गई थी.

शाम को रीना ने खाना बनाया. उस ने पहले मां को खाना खिलाया फिर खाना खा कर घर का काम निपटाया. इस के बाद वह मां के साथ चारपाई पर लेट गई. सुमन तो कुछ देर बाद सो गई लेकिन रीना की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उसे रहरह कर प्रेमी अक्षय की याद आ रही थी.

रीना की जब बेचैनी बढ़ी तो वह छत पर पहुंच कर टहलने लगी. उसी समय उस की निगाह अक्षय पर पड़ी. वह भी अपनी छत पर चहलकदमी कर रहा था. उसे देखते ही रीना की उस से मिलने की कामना बढ़ गई. उस ने एक कंकड़ फेंक कर अक्षय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. जब अक्षय ने उस की तरफ देखा तो उस ने उसे अपनी छत पर आने का इशारा किया.

इशारा पाते ही अक्षय अपनी छत से नीचे उतर आया. इस के बाद रीना छत से उतर कर नीचे आई और दरवाजे की कुंडी खोल कर अक्षय को अपनी छत पर ले गई. वहां दोनों मौजमस्ती में लग गए.

उसी दौरान रीना की मां सुमन की आंखें खुलीं. चारपाई पर रीना को न देख कर उस का माथा ठनका. उस ने रीना की घर में खोज की. जब वह नहीं दिखी तो वह छत पर पहुंची. छत का दृश्य देख कर सुमन आश्चर्यचकित रह गई. छत पर रीना और अक्षय आपत्तिजनक अवस्था में थे.

सुमन को देख कर अक्षय तो जैसेतैसे कपड़े लपेट कर अपने घर चला गया, पर रीना कहां जाती. सुमन उस के बाल पकड़ कर खींचते हुए छत से नीचे लाई. फिर उस के गाल पर 4-5 तमाचे जड़ दिए और खूब खरीखोटी सुनाई.

सुमन शब्दों के तीर से रीना का सीना छलती करती रही और रीना अपराधबोध से सब सहती रही. सुबह मांबेटी में इतनी नफरत भर गई कि दोनों ने एकदूसरे का मुंह देखना तक मुनासिब नहीं समझा.

दोनों ही अलगअलग कमरे में पड़ी रोती रहीं. उस रोज घर में खाना भी नहीं बना. दूसरे दिन श्याम नारायण अपने बेटों के साथ वापस घर आ गए. घर में कलह न हो इसलिए सुमन ने पति को यह जानकारी नहीं दी.

सुमन अब रीना पर पैनी नजर रखने लगी थी. दिन की बात तो छोडि़ए, रात को भी वह उस की निगरानी रखती थी. लेकिन शातिर रीना मां की आंखों में धूल झोंक कर प्रेमी से मिल ही लेती थी. परंतु अपनी निगरानी से सुमन यह समझने लगी थी कि रीना और अक्षय का मेलजोल अब बंद हो गया है.

23 जून, 2019 को पड़ोस के गांव में एक यज्ञ का आयोजन था. श्याम नारायण तथा उन के बेटे इस आयोजन में शामिल होने के लिए रात 8 बजे अपने घर से चले गए. सुमन भी खाना खा कर चारपाई पर पसर गई. कुछ देर बाद वह गहरी नींद में सो गई.

रीना ने उचित मौका देखा और अपने प्रेमी अक्षय को घर बुला लिया. इस के बाद वह कमरे में जा कर प्रेमी के साथ मौजमस्ती में लग गई.

इसी बीच श्याम नारायण यज्ञ आयोजन से घर वापस आ गया. दरअसल उन्हें नींद आ रही थी. घर पहुंच कर उन्होंने दरवाजे पर दस्तक दी तो दरवाजा खुल गया. कमरे के अंदर का दृश्य देख कर श्याम नारायण का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

कमरे के अंदर रीना और अक्षय आपत्तिजनक स्थिति में थे. श्याम नारायण ने अक्षय को जोर से लात जमाई तो वह लड़खड़ा कर उठा और वहां से अर्धनग्न अवस्था में ही वहां से भाग गया. इस के बाद उन्होंने रीना की जम कर पिटाई की और भद्दीभद्दी गालियां दीं.

बाप की पिटाई ने आग में घी डालने जैसा काम किया. रीना के मन में अब बाप के प्रति नफरत की आग भड़क उठी. उस ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह प्रेमी की मदद से बाप को सबक जरूर सिखाएगी. उस ने यह भी निश्चय कर लिया कि यदि दोबारा बाप ने हाथ उठाया तो वह मुंहतोड़ जवाब देगी.

26 जून, 2019 की सुबह जब पिता व भाई खेत पर काम करने चले गए और मां खाना बनाने में लग गई तब रीना दबे पांव घर से निकली और बिना किसी डर के उस ने गली के मोड़ पर खड़े अक्षय से मुलाकात की. वह गंभीर हो कर बोली, ‘‘अक्षय, मैं तुम से बेहद प्यार करती हूं और तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रहना चाहती. लेकिन मेरा बाप हम दोनों के प्यार में रोड़ा बन रहा है. मैं चाहती हूं कि…’’

‘‘क्या चाहती हो तुम?’’ अक्षय उस की बात पूरी होने से पहले ही बोल पड़ा.

‘‘यही कि इस रोड़े को हमेशा के लिए हटा दो ताकि हमारी मुलाकात में कोई अड़चन न आए.’’ वह बोली.

‘‘तुम ठीक कह रही हो रीना. मैं तुम्हारा साथ जरूर दूंगा. मैं भी उस की लात अभी तक भूला नहीं हूं. जो उस ने मेरी पीठ पर जमाई थी.’’ अक्षय ने कहा.

इस के बाद रीना और अक्षय ने मिल कर श्याम नारायण की हत्या की योजना बनाई. योजना के तहत अक्षय पवई गया और एक मैडिकल स्टोर से नींद की गोलियां ला कर रीना को दे दीं.

योजना के तहत रीना ने 27 जून, 2019 की शाम खाना बनाने के बाद नशीली गोलियां खाने में मिला दीं. इस के बाद उसे छोड़ कर परिवार के सभी सदस्यों ने खाना खाया और अलगअलग चारपाई पर जा कर सो गए.

श्याम नारायण मिश्रा घर के बाहर मड़ई (झोपड़ी) में सोने चले गए. वह वहीं सोते थे. थोड़ी देर बाद नींद की गोलियों के असर से परिवार के लोग गहरी नींद में चले गए. लेकिन रीना की आंखों में नींद नहीं थी. वह तो प्रेमी के आने का इंतजार कर रही थी.

रात करीब 12 बजे अक्षय रीना के घर के बाहर आया. रीना को संकेत देने के लिए उस ने रीना के घर के बाहर सड़क किनारे लगा हैंडपंप चलाया. रीना हैंडपंप की आवाज सुन कर बाहर निकल आई और अक्षय को घर में ले गई. अक्षय ने रीना से पूछा कि मर्डर किस हथियार से करना है. इस पर रीना घर से फावड़ा व खुरपी ले आई.

फिर दोनों श्याम नारायण की चारपाई के पास पहुंचे. रीना ने गहरी नींद में सो रहे पिता पर एक नजर डाली, फिर दोनों श्याम नारायण पर टूट पड़े. अक्षय ने फावड़े से श्याम नारायण के सिर, चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रहार किया. वहीं रीना ने खुरपी से बाप के गले पर प्रहार कर जख्मी कर दिया. श्याम नारायण के लहूलुहान होने पर खून के छींटे दोनों के कपड़ों पर भी पडे़. कुछ देर तड़पने के बाद श्याम नारायण ने दम तोड़ दिया.

हत्या कर शव लगाया ठिकाने हत्या करने के बाद रीना और अक्षय ने लाश ठिकाने लगाने की सोची. रीना के घर के बगल में एक संकरी गली थी, जिस के बीच नाली थी. दोनों ने इसी नाली में लाश छिपाने की योजना बनाई. योजना के तहत रीना ने दोनों हाथ तथा अक्षय ने दोनों पैर पकड़े और शव संकरी गली में बनी नाली में फेंक दिया. शव के ऊपर उन्होंने खरपतवार डाल दी, जिस से शव न दिखे.

शव ठिकाने लगाने के बाद रीना व अक्षय ने खून सना फावड़ा व खुरपी घर के अंदर भूसे की कोठरी में छिपा दी तथा घटनास्थल से खून आदि साफ कर दिया. रीना ने पिता का मोबाइल, चार्जर तथा चुनौटी (तंबाकू, चूना रखने की डब्बी) रसोई में ले जा गैस के पास रख दी. फिर बाथरूम में खून सने कपड़े उतारे और हाथों में लगा खून साफ किया. कपड़े उस ने घर में ही छिपा दिए और चारपाई पर जा कर लेट गई.

उधर अक्षय ने हैंडपंप से खून सने हाथ साफ किए तथा खून सने कपड़े उतार कर दूसरे पहन लिए. खून सने कपड़े उस ने गांव के बाहर झाडि़यों में छिपा दिए. इस के बाद वह इत्मीनान से घर के बाहर पड़ी चारपाई पर आ कर सो गया.

सुबह अलसाई आंखों से सुमन देर से जागी. वह चाय बनाने रसोई में पहुंची तो वहां पति का मोबाइल, चार्जर व चुनौटी रखी थी. सामान देख कर वह असमंजस में पड़ गई, फिर सोचा कि शायद वह भूल गए होंगे.

चाय बना कर वह बाहर आई तो देखा पति चारपाई पर नहीं हैं. उस ने घर के अंदर सो रहे बेटों तथा बेटी रीना को उठाया और बताया कि उन के पापा पता नहीं कहां चले गए हैं? कुछ ही देर बाद श्याम नारायण मिश्रा के गायब हो जाने का हल्ला पूरे गांव में मच गया.

श्याम नारायण मिश्रा की तलाश शुरू हुई तो उसी खोजबीन में किसी ने उन की लाश घर के बगल में संकरी गली में नाली में पड़ी देखी. लाश के ऊपर जो घासफूस डाली गई थी, जो पानी में बह गई थी.

लाश मिलते ही घर में कोहराम मच गया. सुमन मिश्रा दहाड़ें मार कर रोने लगी. परिवार के अन्य सदस्य भी रोनेपीटने लगे. इसी बीच गांव के किसी व्यक्ति ने थाना पवई पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी संजय कुमार पुलिस टीम के साथ सौदमा गांव आ गए.

उन्होंने घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को भी दे दी, फिर शव को नाली से बाहर निकलवाया. श्याम नारायण मिश्रा की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. उन के शरीर पर किसी धारदार हथियार से प्रहार कर मौत के घाट उतारा गया था. उन के सिर, चेहरा व शरीर के अन्य भागों पर एक दरजन से अधिक चोटें थीं.

थानाप्रभारी अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी त्रिवेणी सिंह, एसपी (यातायात) मोहम्मद तारिक तथा सीओ (फूलपुर) शिवशंकर सिंह आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा परिजनों से पूछताछ की. अधिकारियों ने थानाप्रभारी को आदेश दिया कि वह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजें और घटना का जल्द खुलासा करें.

आदेश पाते ही थानाप्रभारी ने शव को पोस्टमार्टम हेतु भिजवाया और मृतक की पत्नी सुमन, बेटी रीना तथा बेटों रत्नेश, रमेश व पिंकू से पूछताछ की. सभी ने हत्या से अनभिज्ञता जाहिर की.

इसी बीच थानाप्रभारी को पता चला कि मृतक की बेटी रीना और पड़ोसी युवक अक्षय के बीच प्रेम संबंध हैं, जिस का श्याम नारायण विरोध करते थे. हत्या का रहस्य इन्हीं दोनों के पेट में छिपा है. यदि दोनों से सख्ती से पूछताछ की जाए तो भेद खुल सकता है.

दोनों प्रेमी हुए गिरफ्तार यह जानकारी मिलते ही पहली जुलाई, 2019 को थानाप्रभारी संजय कुमार ने रीना और उस के प्रेमी अक्षय को हिरासत में ले लिया. थाना पवई ला कर जब दोनों से श्याम नारायण की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछा गया तो दोनों टूट गए और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

रीना की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त फावड़ा, खुरपी तथा खून सने कपड़े बरामद कर लिए.

अक्षय की निशानदेही पर पुलिस ने उस के खून से सने कपड़े बरामद कर लिए जिन्हें उस ने झाडि़यों में छिपा दिया था. मृतक का मोबाइल, चार्जर, चुनौटी भी पुलिस ने बरामद कर ली. बरामद सामान को पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर जाब्ते में शामिल कर लिया.

चूंकि अभियुक्तों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थानाप्रभारी संजय कुमार ने मृतक की पत्नी सुमन मिश्रा की तरफ से रीना और अक्षय के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें बंदी बना लिया.

अभियुक्तों से एसपी त्रिवेणी सिंह ने भी पूछताछ की और उन्हें मीडिया के समक्ष पेश कर घटना का खुलासा किया. 2 जुलाई, 2019 को थाना पवई पुलिस ने अभियुक्त रीना व अक्षय को आजमगढ़ कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

आड़ी टेढ़ी राहों पर नहीं मिलता प्यार

आगरा के गांव खुशहालपुर के रहने वाले जगदीश यादव बरहन तहसील में वकालत करते थे. उन की 3 बेटियां नीलम, पूनम और नूतन के अलावा 2 बेटे हैं मानवेंद्र और राघवेंद्र. जगदीश यादव बेटे मानवेंद्र और 2 बेटियों पूनम व नीलम की शादी कर चुके थे. शादी के लिए अब बेटी नूतन और बेटा राघवेंद्र ही बचे थे.

दोनों पढ़ाई कर रहे थे. सभी कुछ ठीक चल रहा था कि परिवार में अचानक ऐसा जलजला आया कि सब कुछ खत्म हो गया. जगदीश यादव की होनहार बेटी नूतन ने टूंडला से इंटरमीडिएट पास करने के बाद आगरा के बैकुंठी देवी कालेज में दाखिला ले लिया.

अपने ख्वाबों को अमली जामा पहनाने के लिए उस ने खुद को किताबों की दुनिया में खपा दिया था लेकिन इसी बीच एक दिन रिश्ते के चाचा धनपाल यादव से उस की मुलाकात हो गई. कहा जाता है कि धनपाल और जगदीश यादव के परिवार के बीच बरसों पुरानी रंजिश चली आ रही थी. जब नूतन और धनपाल की मुलाकात हुई तो नूतन को लगा कि यदि बातचीत शुरू की जाए तो दोनों परिवारों के रिश्तों में फिर से मिठास आ सकती है.

धनपाल शादीशुदा था. अपनी पत्नी और 2 बेटों के साथ वह खुशहालपुर में ही रहता था. नूतन उसे चाचा कहती थी और पढ़ाई के दौरान आने वाली परेशानियों को भी उस से शेयर करती थी. खूबसूरत नूतन स्वभाव से शालीन और कम बात करने वाली लड़की थी. चाचा धनपाल का सहानुभूति वाला व्यवहार उसे अच्छा लगता था और वह धीरेधीरे कथित चाचा के नजदीक आने लगी.धीरेधीरे जगदीश यादव के घर में भी सब को पता चल गया कि धनपाल नूतन के सहारे सालों से चली आ रही रंजिश को खत्म करना चाहता है. इसलिए नूतन के साथ उस के मेलजोल को नूतन के घर वालों ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. नूतन 20 साल की थी और अपना अच्छाबुरा समझ सकती थी.

वहीं दूसरी ओर धनपाल की पत्नी सरोज को धनपाल और नूतन की नजदीकियां रास नहीं आ रही थीं. वह पति से मना करती थी कि वह नूतन से न मिला करे. इस के बजाय वह अपनी दूध की डेरी पर ध्यान दे लेकिन धनपाल ने पत्नी की बात पर ध्यान नहीं दिया. धीरेधीरे वह नूतन की आर्थिक मदद भी करने लगा था. हालांकि नजदीकियों की शुरुआत चाचाभतीजी के रिश्ते से ही हुई थी, पर बाद में यह रिश्ता कोई दूसरा ही रूप लेने लगा.

नूतन से बढ़ रही नजदीकियों को ले कर धनपाल को पत्नी की खरीखोटी सुननी पड़ती थी, जिस से उस का पत्नी के साथ न सिर्फ झगड़ा होता था बल्कि दोनों के बीच दूरियां भी बढ़ रही थीं. उधर नूतन अपने भविष्य को संवारते हुए एमए की डिग्री लेने के बाद आगरा कालेज से कानून की पढ़ाई करने लगी.

नहीं मानी पत्नी की बात कथित भतीजी नूतन के ख्वाबों को पूरा करने की धुन में धनपाल उर्फ धन्नू अपने डेरी के व्यवसाय को भी बरबाद कर बैठा. वह हर कदम पर नूतन के साथ था. घर पर पत्नी की कलह से तंग आ कर उस ने अपना आशियाना खेत में बना लिया था. वह नूतन की पढ़ाई का पूरा खर्चा उठा रहा था. नूतन के एलएलबी पास कर लेने पर वह बहुत खुश हुआ. इस के बाद उस ने एलएलएम किया.

एलएलएम करने के बाद नूतन ने कोचिंग करने के लिए दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में दाखिला ले लिया. होस्टल में रह कर वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने लगी. नूतन के दिल्ली जाने के बाद धनपाल का मन नहीं लग रहा था.

उस के पास रिवौल्वर का लाइसैंस था. अपनी दूध डेयरी बंद कर वह दिल्ली में किसी नेता के यहां सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने लगा. उस ने यह नौकरी सन 2015 से 2018 तक की. नौकरी के बहाने वह दिल्ली में रहा. दिल्ली में चाचाभतीजी की मुलाकातें जारी रहीं.

आशिकी का यह पागलपन धनपाल को किस ओर ले जा रहा था, यह बात वह समझ नहीं पाया. अपने से 10-12 साल छोटी कथित भतीजी के इश्क में वह एक तरह से अंधा हो चुका था. लेकिन दूसरी ओर इस सब के बावजूद नूतन का पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर था. वह कुछ बनना चाहती थी, जो उसे सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाए.

धनपाल ने भी उस से कह दिया था कि चाहे जितना पैसा खर्च हो वह उस की पढ़ाई में हर तरह से मदद करेगा. आखिर नूतन की मेहनत रंग लाई और न्याय विभाग में उस का सहायक अभियोजन अधिकारी के पद पर सेलेक्शन हो गया, जिस की ट्रेनिंग के लिए उसे मुरादाबाद भेजा गया.

नूतन की ऊंचे पद पर नौकरी लगने पर धनपाल खुश था. उसे लगने लगा कि नूतन की पोस्टिंग के बाद वह पढ़ाई आदि से मुक्ति पा लेगी. तब दोनों अपने जीवन को सही दिशा देने के बारे में सोचेंगे. लेकिन यह उस के लिए केवल खयाली पुलाव बन कर रह गया.

नूतन की सोच कुछ अलग थी. अभी तो उसे केवल सहायक अभियोजन अधिकारी का पद मिला था. जबकि उसे बहुत आगे जाना था. खूब लिखपढ़ कर वह जज बनने का सपना देख रही थी. वह इस सच्चाई से अनभिज्ञ थी कि अधिकतर सपने टूटने के लिए ही होते हैं.

ट्रेनिंग के बाद नूतन की बतौर सहायक अभियोजन अधिकारी पहली पोस्टिंग एटा जिले की जलेसर कोर्ट में हुई. नौकरी मिल जाने पर नूतन और उस के परिवार के लोग बहुत खुश थे. कथित चाचा धनपाल भी बहुत खुश था. अब उस के दिल में एक कसक यह रह गई थी कि क्या नूतन समाज के सामने उस का हाथ थामेगी?

धनपाल आशानिराशा के बीच झूल रहा था. उसे लगता था कि वह नूतन के साथ अपनी दुनिया बसाएगा और उसे सरकारी अधिकारी पत्नी का पति होने का गौरव प्राप्त होगा. पर खुशियां कब किसी की सगी होती हैं, वह तो हवा की तरह उड़ने लगती हैं.

नूतन एटा आ गई. पुलिस लाइन परिसर में उस के नाम एक क्वार्टर अलाट हो गया. यह क्वार्टर महिला थाना और दमकल केंद्र से कुछ ही दूरी था. सरकारी क्वार्टर में आने के बाद भी धनपाल ने नूतन का पूरा ध्यान रखा. उस ने घर की जरूरत का सारा सामान उस के क्वार्टर पर पहुंचा दिया. वह भतीजी के साथ क्वार्टर में रह तो नहीं सकता था, लेकिन वहां उस का आनाजाना बना रहा.

नूतन अपनी जिंदगी व्यवस्थित करने के बाद अपने छोटे भाई राघवेंद्र की जिंदगी संवारना चाहती थी. लेकिन धनपाल को नूतन का यह निर्णय बिलकुल पसंद नहीं आया. लेकिन वह यह बात अच्छी तरह समझता था कि कच्चे कमजोर रिश्तों को संभालने में सतर्कता की जरूरत होती है.

कभीकभी धनपाल के सीने में एक अजीब सी कसक उठती थी कि क्या उस का और नूतन का रिश्ता सिरे चढ़ेगा. एक दिन उस ने अपनी यह शंका अपने दोस्त भारत सिंह से जाहिर की तो उस ने कहा कि ऐसा क्यों सोचते हो, जब तुम ने नूतन को इतना सहयोग किया है तो फिर वह क्यों तुम्हें छोड़ेगी?

दरअसल, धनपाल को नूतन का बढ़ता हुआ कद परेशान कर रहा था. वह उस के सामने खुद को बौना महसूस करने लगा था. इसीलिए उस के मन में इस तरह के विचार आ रहे थे. आखिर उस ने अपनी आशिकी की हिचकोले खाती नाव तूफान के हवाले कर दी और सही समय का इंतजार करने लगा.

बेचैनी थी धनपाल के मन में  नूतन की दिनचर्या व्यवस्थित हो गई थी. वह स्कूटी पर सुबह ड्यूटी पर जाती और शाम को क्वार्टर पर लौटती. अपने पासपड़ोस में रहने वालों से न तो उस की बातचीत थी और न ही उठनाबैठना.

इस बीच नूतन ने धनपाल से कहा कि उसे घर में एक काम वाली बाई की जरूरत है, क्योंकि खाना बनाने में उस का काफी समय खराब होता है. धनपाल ने तुरंत 2700 रुपए प्रतिमाह की सैलरी पर संगीता नाम की महिला का इंतजाम कर दिया. वह नूतन के यहां जा कर रसोई का काम संभालने लगी.

नूतन के अड़ोसपड़ोस में अधिकतर पुलिसकर्मियों के ही क्वार्टर थे. उन पड़ोसियों को बस इतना पता था कि नूतन के साथ उस का छोटा भाई रहता है और जबतब गांव से उस के चाचा आ जाते हैं.

नूतन की नौकरी लग चुकी थी. यहां तक पहुंचतेपहुंचते वह 35 साल की हो गई थी. घर वाले उस की शादी के लिए उपयुक्त लड़का देख रहे थे. घर में अकसर उस की शादी का जिक्र होता था. घर वाले चाहते थे कि उस की शादी किसी अच्छे सरकारी अधिकारी से हो जाए.

शादी की चर्चा सुन कर नूतन को झटका सा लगा, क्योंकि धनपाल के रहते उस ने कभी अपने अलग अस्तित्व के बारे में सोचा ही नहीं था. इसी बीच किसी मध्यस्थ के जरिए नूतन के लिए अलीगढ़ में पोस्टेड वाणिज्य कर अधिकारी राम सिंह (बदला हुआ नाम) का रिश्ता आया. नूतन के परिवार वाले खुश भी थे और इस रिश्ते के पक्ष में भी. लेकिन नूतन की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे.

कुछ नहीं सूझा तो नूतन ने घर वालों से कहा कि वे लोग जिस लड़के से उस की शादी करना चाहते हैं, पहले वह उस के बारे में जानना चाहती है. तब घर वालों ने नूतन का फोन नंबर बिचौलिया के माध्यम से उस लड़के तक पहुंचवा दिया.

फिर एक दिन राम सिंह का फोन आया दोनों ने आपस में बात की, एकदूसरे के फोटो देखे. अचानक नूतन को लगा कि बरसों की कठिन मेहनत के बाद उस ने जो पद हासिल किया है, उस के चलते धनपाल के लिए उस की जिंदगी में अब कोई जगह होनी नहीं चाहिए. जीवनसाथी के रूप में बराबरी के दरजे वाले व्यक्ति का होना ही दांपत्य जीवन को सफल बना सकता है.

उस ने महसूस किया कि अब तक जो कुछ उस के जीवन में चल रहा था, वह केवल एक खेल था. लेकिन इस खेल के सहारे जीवन तो कट नहीं सकता. इस उम्र में उस के लिए यदि रिश्ता आया है तो उस का स्वागत करना चाहिए.

इस के बाद राम सिंह और नूतन के बीच फोन पर अकसर बातचीत होने लगी. वाणिज्य कर अधिकारी राम सिंह को भी नूतन जैसी जीवनसाथी की ही जरूरत थी, अत: नूतन ने एक दिन घर वालों के सामने भी इस रिश्ते के लिए हामी भर ली.

एक दिन धनपाल जब नूतन के आवास पर उस से मिलने आया तो नूतन ने कहा, ‘‘बिना सोचेसमझे मुंह उठाए चले आते हो. जानते हो, अगर आसपास रहने वाले लोगों को शक हो गया तो मेरी कितनी बदनामी होगी?’’

धनपाल को नूतन की यह बात चुभ गई, वह बोला, ‘‘यह क्या कह रही हो, तुम मेरी हो और मैं तुम्हारा, फिर इस में दूसरों की फिक्र का क्या मतलब?’’

‘‘हूं, यह तो है,’’ नूतन ने टालने की गरज से कहा पर धनपाल को लगा कि नूतन के मन में कुछ है, जो वह जाहिर नहीं कर रही है.

दोनों के बीच बनने लगीं दूरियां  उस दिन के बाद नूतन ने धनपाल से दूरी बनानी शुरू कर दी. उस ने उस का फोन भी उठाना बंद कर दिया. वह क्वार्टर पर आ कर शिकायत करता तो नूतन कह देती कि फोन साइलेंट पर था. बड़ेबड़े सपने देखने वाली नूतन को अब तनख्वाह मिलने लगी तो उसे धनपाल से आर्थिक मदद की भी जरूरत नहीं रही. वह अपनी बचकानी गलती को भूल जाना चाहती थी पर धनपाल के साथ ऐसा नहीं था.

इधर नूतन के मांबाप जल्दी ही उस की सगाई करना चाहते थे. लेकिन आने वाले वक्त को कब कोई देख पाया है. नूतन यादव ने तो कभी सोचा भी नहीं था कि उस ने बरसों मेहनत कर के सफलता पाई है. उस का क्या अंजाम होने वाला है. वह मौत की उस दस्तक को नहीं सुन पाई जो उस की खुशियों पर विराम लगाने वाली थी. 5 अगस्त, 2019 का दिन उस के जीवन में तूफान लाने वाला था, जिस से वह बेखबर थी.

6 अगस्त, 2019 को सुबह जब नौकरानी संगीता काम करने आई तो कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी नहीं खुला. तभी उस ने महसूस किया कि दरवाजा अंदर से बंद नहीं है. संगीता ने धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया. अंदर जा कर उस ने जो कुछ देखा, सन्न रह गई. लोहे के पलंग पर नूतन औंधे मुंह पड़ी हुई थी और बिस्तर खून से लाल था.

यह देखते ही नौकरानी भागती हुई बाहर आई और सीधे एटा कोतवाली का रुख किया. वहां पहुंच कर उस ने सारी बात कोतवाल अशोक कुमार सिंह को बता दी. कत्ल की बात सुन कर कोतवाल मय फोर्स के मौके पर पहुंचे. उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को भी इस घटना की सूचना दे दी.

सूचना मिलते ही मौके पर एसएसपी स्वप्निल ममगई, एएसपी संजय कुमार, एसपी (क्राइम) राहुल कुमार घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड टीम भी मौके पर पहुंच गई.

पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया तो पता चला कि एपीओ नूतन यादव को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. मौके पर पुलिस को 5 खोखे मिले. मृतका का चेहरा और शरीर क्षतविक्षत था. पुलिस को मृतका का मोबाइल भी वहीं पड़ा मिल गया.

आसपास पूछताछ करने पर लोगों ने बताया कि संभवत: गोली चलने की आवाज कूलरों की आवाज में दब गई होगी. इसलिए किसी को भी घटना का पता नहीं चल पाया.

घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस को लगा कि हत्यारा नूतन को मारने के इरादे से ही आया था. क्योंकि क्वार्टर का सारा सामान ज्यों का त्यों था. ऐसा लग रहा था कि कोई परिचित रहा होगा, जिस ने बिना किसी विरोध के घर में पहुंचने के बाद नूतन की हत्या की और वहां से चला गया.

घटना की सूचना मिलने पर देर रात मृतका के परिजन भी वहां पहुंच गए. उन्होंने वहां पहुंचते ही चीखचीख कर धनपाल पर अपना शक जताते हुए बताया कि धनपाल इस बात से नाराज था कि नूतन शादी करने वाली थी.

परिजनों की बातचीत से स्पष्ट हो रहा था कि मृतका और धनपाल के बीच नजदीकी संबंध थे. इसीलिए धनपाल शादी का विरोध कर रहा होगा और न मानने पर उस ने नूतन की हत्या कर दी होगी. घर वालों ने धनपाल के अलावा उस के दोस्त भारत सिंह पर भी अपना शक जताया.

पुलिस भारत सिंह और धनपाल की तलाश में लग गई. अगले दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि हत्यारे ने नूतन की हत्या बड़े ही नृशंस तरीके से की थी. उस ने मृतका के मुंह में रिवौल्वर की नाल घुसेड़ कर 3 गोलियां चलाईं और 2 शरीर के अन्य हिस्सों में मारीं.

पुलिस ने भारत सिंह और धनपाल के मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगा दिए. नूतन के फोन की भी काल डिटेल्स खंगाली गई तो पता चला कि घटना वाली रात को भी एक फोन काल देर तक आती रही थी. जांच में पता चला कि नूतन उस नंबर पर घंटों बातें करती थी. जांच में वह नंबर अलीगढ़ के वाणिज्य कर अधिकारी राम सिंह का निकला.

अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उन के घर दबिश डाली लेकिन वे नहीं मिले तो पुलिस ने पूछताछ के लिए धनपाल की पत्नी सरोज और श्यामवीर व उस के साले के बेटे को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उन से पूछताछ की गई तो उन से अभियुक्तों के बारे में जानकारी नहीं मिली. इस के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

पकड़ा गया धनपाल  10 अगस्त को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर माया पैलेस चौराहे से भारत सिंह को हिरासत में ले लिया. उस से पूछताछ में धनपाल और नूतन के संबंधों की बात खुल कर सामने आई. भारत सिंह ने बताया कि नूतन के कत्ल में उस का कोई हाथ नहीं है. धनपाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस के सभी ठिकानों पर छापे मारे. यहां तक कि दिल्ली तक में उस की तलाश की गई.

आखिर 12 अगस्त को पुलिस ने धनपाल को गांव बरौठा, थाना हरदुआगंज, अलीगढ़ में उस के रिश्तेदार के घर से दबोच लिया. थाने में उस से पूछताछ की गई.

धनपाल के चेहरे पर अपनी प्रेयसी की हत्या का जरा सा भी दुख नहीं था. पुलिस के सामने उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और कहा कि नूतन की बेवफाई ही उस की मौत का कारण बनी. जिस नूतन के लिए उस ने अपना घर, बीवीबच्चे सब उस के कहने पर छोड़ दिए थे, उस की पढ़ाई पूरी करने के लिए उस ने अपनी दूध की डेयरी तक खपा दी. उस पर लाखों रुपए का कर्ज चढ़ गया, लेकिन नौकरी मिलते ही वह बदल गई.

धनपाल ने बताया कि जब वह बीए कर रही थी तभी एक दिन आगरा के एक होटल के कमरे में उस ने नूतन की मांग भर कर उसे  अपना बना लिया था. नूतन के कहने पर उस ने पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया. वह उसे बेइंतहा प्यार करता था. पर वह पिछले 4 महीने से अचानक बदलने लगी थी. उस का फोन तक रिसीव नहीं करती थी. जिसे दिलोजान से चाहा, उसी की उपेक्षा ने उसे हत्यारा बना दिया.

नूतन ने 15 साल की मोहब्बत को एक पल में अपने पैरों तले रौंद दिया था. वह तो उस के प्यार में अपनी दुनिया लुटा चुका था, पर अपनी आशिकी को भुलाना उस के लिए मुश्किल था.

उस ने कबूला कि घटना वाले दिन उस ने भारत सिंह के जरिए पता लगा लिया था कि नूतन उस रोज छुट्टी पर है और उस के साथ रहने वाला उस का भाई राघवेंद्र भी अपने गांव गया हुआ है. बस फिर क्या था, अपनी लाइसैंसी रिवौल्वर में गोलियां भर कर वह नूतन के क्वार्टर पर पहुंच गया. उस ने तय कर लिया था कि वह आरपार की बात करेगा. या तो नूतन उस की होगी या फिर वह किसी की भी नहीं.

धनपाल ने बताया, ‘‘नूतन ने मेरे साथ हमेशा रहने का वादा किया था. लेकिन नौकरी मिलने पर उसे समझ आया कि मैं उस के स्तर का नहीं हूं. मेरे प्यार की उपेक्षा कर के वह जीने का अधिकार खो बैठी थी. मैं ने नूतन को मार डाला.

‘‘नूतन ने उस रात मुझ से कहा था कि उस से दूर ही रहूं तो अच्छा, वरना वह पुलिस से मुझे पिटवाएगी. उस ने मेरे इश्क का इतना अपमान किया, जिसे मैं बरदाश्त नहीं कर सका, इसलिए मैं ने उस की जबान ही बंद कर दी. उस के मर जाने का मुझे कोई अफसोस नहीं है.’’

धनपाल ने हत्या में इस्तेमाल की गई रिवौल्वर पुलिस को वहीं परिसर में खड़ी एक पुरानी गाड़ी में से बरामद करा दी. पुलिस ने भारत सिंह और धनपाल से पूछताछ की. उन्हें भादंवि की धारा 302, 120बी के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया.

इस तरह कई साल तक चली एक प्रेम कहानी का दुखद अंत हुआ. कथा लिखने तक दोनों अभियुक्त जेल में थे. मामले की जांच कोतवाल अशोक कुमार सिंह कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित