Hindi Crime Story: रजनी को भाया प्रेमी का धमाल

Hindi Crime Story: रजनी उर्फ कुंजावती अपने भाईबहनों में सब से बड़ी ही नहीं बल्कि कदकाठी से भी ठीक ठाक थी. इसलिए अपनी उम्र से काफी बड़ी लगती थी. उस का परिवार उत्तर प्रदेश के शहर इटावा में रहता था. उस के पिता किसान थे. जैसे ही वह जवान हुई तो उस के मातापिता उस के लिए योग्य वर की तलाश में लग गए.

उन्हें इस बात का डर था कि कहीं रजनी के कदम बहक गए तो उन की इज्जत पर दाग लग जाएगा. उन्होंने रजनी की शादी के लिए ग्वालियर जिले के महाराजपुरा कस्बे के गांव गुठीना में रहने वाले सुलतान माहौर को पसंद कर लिया. फिर जल्द ही उन्होंने उस की शादी सुलतान के साथ कर दी.

रजनी सुंदर तो थी ही, दुलहन बनने के बाद उस की सुंदरता में पहले से ज्यादा निखार आ गया. रजनी जैसी सुंदर पत्नी पा कर सुलतान बेहद खुश था. दोनों के दांपत्य की गाड़ी खुशहाली के साथ चलने लगी. समय का पहिया अपनी गति से घूमता रहा और रजनी 3 बच्चों की मां बन गई. लेकिन कुछ दिनों बाद आर्थिक परेशानियों ने परिवार की खुशी पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया. शादी से पहले सुलतान छोटामोटा काम कर के गुजरबसर कर लेता था, लेकिन 3 बच्चों का बाप बन जाने से घर के खर्चे भी बढ़ गए थे. वहीं रजनी की बढ़ती ख्वाहिशों ने उस के खर्चों में काफी इजाफा कर दिया था.

आर्थिक परेशानी से उबरने के लिए  वह एक शोरूम में रात के समय चौकीदारी भी करने लग गया था. इस दौरान उसे शराब पीने की भी लत लग गई, जिस की वजह से वह पैसे शराबखोरी में उड़ा देता था. इस के चलते घर की माली हालत डांवाडोल होने लगी थी. यहां तक कि उस ने कई लोगों से कर्ज ले लिया था. उधर जब से कोविड के कारण लौकडाउन लगा, तब से सुलतान की मजदूरी और चौकीदारी का काम भी छूट गया था. इस के बावजूद वह लोगों से पैसा उधार ले कर शराब पी लेता था और हद तो तब हो गई जब अपनी पत्नी रजनी उर्फ कुंजावती को शराब के नशे में जराजरा सी बात पर पीटना शुरू कर देता था.

पति की ये आदतें रजनी को काफी सालती थीं. सुलतान के पड़ोस में अजीत उर्फ छोटू कोरी रहता था. वह रजनी को भाभी कहता था, इसलिए दोनों में हंसीमजाक होता रहता था. रजनी को अजीत से मजाक करने में किसी तरह का संकोच नहीं होता था. एक दिन दोनों हंसीमजाक कर रहे थे तो रजनी ने कहा, ‘‘देवरजी, कब तक इस तरह हंसीमजाक कर के दिन काटोगे? कहीं से घरवाली ले आओ.’’

‘‘भाभी, घरवाली मिलती तो जरूर ले आता. जब तक कोई नहीं मिल रही आप से हंसीमजाक कर संतोष करना पड़ रहा है.’’ अजीत ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘जब तक घरवाली नहीं मिल रही तो इधरउधर से जुगाड़ कर लो.’’ रजनी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अजीत की आंखों में आंखें डाल कर कहा.

‘‘कौन फिक्र करता है भाभी भूखे आदमी की. जिस का पेट भरा रहता है, उसे ही हर कोई पूछता है,’’ अजीत ने शरमाते हुए कहा.

‘‘क्या तुम ने कभी किसी से अपनी परेशानी का जिक्र कर के देखा है?’’

‘‘कोई फायदा नहीं भाभी, लोग मेरी हंसी ही उड़ाएंगे.’’ वह बोला.

‘‘अजीत, जब तक तुम किसी से कहोगे नहीं, कोई तुम्हारी मदद कैसे करेगा?’’ रजनी ने कहा.

‘‘भाभी, अगर आप से कहूं तो क्या आप मेरी मदद करना पसंद करेंगी? भलाबुरा कहते हुए गालियां जरूर देंगी,’’ अजीत ने रजनी के चेहरे पर नजरें गड़ा कर कहा.

रजनी ने चेहरे पर मुसकान लाते हुए कहा, ‘‘एक बार कह कर तो देखो. अरे, मैं तुम्हारी मुंहबोली भाभी हूं अजीत, भला पड़ोसी पड़ोसी की मदद नहीं करेगा तो क्या बाहर वाला मदद करने आएगा.’’

अब इस से भी ज्यादा रजनी क्या कहती. अजीत इतना भी नासमझ नहीं था कि वह रजनी की बात का मतलब न समझ पाता.

‘‘जरूर भाभी, मौका मिलने पर कह दूंगा.’’ वह मुसकराते हुए बोला.

संयोग से अगले दिन अजीत को पता चला कि सुलतान किसी काम से बाहर गया है. उस दिन अजीत का मन अपने काम में नहीं लगा रहा था. दिन भर उसे रजनी की याद सताती रही. शाम होने पर घर आने पर वह रजनी की एक झलक देखने को बेचैन हो उठा.

रजनी भी पति की गैरमौजूदगी में अजीत को रिझाने के लिए जैसे ही सजसंवर कर दरवाजे पर आई  तो उस की नजर अजीत पर पड़ी. अजीत भी रजनी को देख कर बिना वक्त जाया किए उस के घर पर जा पहुंचा.

अजीत को अचानक इस तरह आया देख कर रजनी ने हंसते हुए कहा, ‘‘देवरजी, आज आप अपने काम से जल्दी लौट आए?’’

‘‘क्या बताऊं भाभी, आज मेरा मन काम में जरा भी नहीं लगा.’’

‘‘क्यों?’’ रजनी ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘सच बताऊं?’’

‘‘हां, मुझे तो सचसच बताओ.’’

‘‘भाभी, जब से तुम्हें और तुम्हारी सुंदरता  को देखा है, मेरा मन किसी काम में लगता ही नहीं है. आप सच में बेहद खूबसूरत है.’’

‘‘ऐसी सुंदरता किस काम की, जिस की कोई कदर ही न हो,’’ रजनी ने लंबी सांस लेते हुए कहा.

‘‘क्या भैया तुम्हारी कोई कदर नहीं करते भाभी?’’

‘‘सब कुछ जानते हुए भी अनजान मत बनो, तुम तो जानते हो कि मेरे वो रात में चौकीदारी करते हैं, सो रात को घर से बाहर रहते हैं. ऐसे में मेरी रातें कैसे गुजरती हैं, वो तो मुझे ही पता है.’’

‘‘भाभीजी, जिस स्थिति से आप गुजर रही हैं, ठीक वही स्थिति मेरी है. मैं भी रात भर करवटें बदलता रहता हूं. अगर आप मेरा साथ दें तो हम दोनों की समस्या खत्म हो सकती है,’’ यह कहते हुए अजीत ने रजनी को अपनी बांहों में भर लिया.

पुरुष सुख से वंचित रजनी चाहती तो यही थी, मगर उस ने हावभाव बदलते हुए बनावटी गुस्से में कहा, ‘‘यह क्या कर रहे हो, छोड़ो मुझे. बच्चे देख लेंगे.’’

‘‘बच्चे तो अपनी मौसी के बच्चों के साथ बाहर खेल रहे हैं. भाभी, आप ने तो मेरा सुखचैन सब छीन रखा है,’’ अजीत ने कहा.

‘‘नहीं अजीत, छोड़ो मुझे. मैं बदनाम हो जाऊंगी, कहीं की नहीं रहूंगी मैं.’’ वह बनावटी बोली.

‘‘नहीं भाभी, अब यह संभव नहीं है. कोई बेवकूफ ही होगा जो रूपयौवन के इस प्याले के इतने नजदीक पहुंच कर पीछे हटेगा,’’ इतना कह कर अजीत ने बांहों का कसाव बढ़ा दिया.

दिखाने के लिए रजनी न…न…न करती रही, जबकि वह स्वयं अजीत के जिस्म से बेल की तरह लिपटी जा रही थी. इस के बाद वह पल भी आ गया, जब दोनों ने मर्यादा भंग कर दी. एक बार मर्यादा मिटी तो यह सिलसिला चल निकला. जब भी उन्हें मौका मिलता, इच्छाएं पूरी कर लेते. दोनों पड़ोस में रहते थे, इसलिए उन्हें मिलने में कोई परेशानी भी नहीं होती थी. रजनी अब कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगी थी, क्योंकि उस का प्रेमी मौका मिलने पर बिस्तर पर धमाल मचाने आ जाता था.

अब उस की आर्थिक परेशानी भी दूर हो गई थी. रजनी खर्चे के लिए अजीत से जब भी रुपए मांगती, वह बिना नानुकुर के चुपचाप निकाल कर रजनी के हाथ पर रख देता था. रजनी और अजीत के बीच अवैध संबंध बने तो उन की बातचीत और हंसीमजाक का लहजा बदल गया. अब दोनों एकदूसरे का खयाल भी कुछ ज्यादा ही रखने लगे थे, इसलिए आसपड़ोस वालों को शक होने लगा.

लोग इस बात को ले कर चर्चा करने लगे. नतीजा यह निकला कि इस बात की जानकारी सुलतान को भी हो गई. सुलतान ने लोगों की बातों पर विश्वास न कर के खुद सच्चाई का पता लगाने का निश्चय किया. वह जानता था कि यदि इस बारे में पत्नी से पूछताछ करेगा तो वह सच बात बताएगी नहीं, बल्कि होशियार हो जाएगी. सच पता लगाने के लिए वह एक दिन बाहर जाने के बहाने घर से निकला और छिप कर रजनी और अजीत पर नजर रखने लगा.

एक दिन दोपहर के समय उस ने रजनी और अजीत को रंगेहाथों पकड़ लिया. गुस्से में  उस ने रजनी की जम कर पिटाई कर दी. रजनी के पास सफाई देने को कुछ नहीं था, इसलिए वह भविष्य में कभी ऐसा न करने की कसम खाते हुए माफी मांगने लगी. गुस्से में सुलतान ने अजीत को भी कई थप्पड़ जड़ दिए. साथ ही चेतावनी दी कि आज के बाद वह उस के घर के आसपास भी दिखाई दिया तो ठीक नहीं होगा.

रजनी सुलतान की सिर्फ पत्नी ही नहीं, उस के 3 बच्चों की मां भी थी, इसलिए बच्चों के भविष्य की फिक्र करते हुए उस ने दोबारा ऐसी गलती न करने की चेतावनी दे कर उसे माफ कर दिया. यह बात सच है कि जिस महिला का पैर एक बार बहक चुका हो, उसे संभालना मुश्किल होता है. यही हाल रजनी का भी था. कुछ दिनों तक अपनी कामोत्तेजना पर जैसेतैसे काबू रखने के बाद वह फिर चोरीछिपे अजीत से मिलने लगी.

इस का पता सुलतान को चला तो उस ने रजनी को काफी बुराभला कहा. इस के बाद रजनी का अजीत से मेलजोल कुछ कम हो गया, लेकिन बंद नहीं हुआ. जब मिलने में परेशानी होने लगी तो एक दिन रजनी ने अजीत से कहा, ‘‘मुझ से तुम्हारी दूरी बरदाश्त नहीं होती. अब मैं सुलतान के साथ नहीं रहना चाहती.’’

‘‘अगर ऐसा है तो उसे ठिकाने लगा देते हैं. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. वह शराब पीता ही है, खाना खा कर बेसुध हो जाता है, इसलिए उस की हत्या करना भी आसान है.’’

इसी के साथ दोनों ने सुलतान की हत्या की योजना बना ली.

5 जून, 2021 की रात सुलतान शराब पी कर बेसुध सो गया. सोने से कुछ समय पहले ही उस ने रजनी के साथ मारपीट की थी. पति के सोने के बाद रजनी ने प्रेमी अजीत को फोन कर के बुला लिया. मगर जैसे ही अजीत आया सुलतान की नींद खुल गई. रजनी और अजीत ने सुलतान को पकड़ा और उस के गले में रस्सी का फंदा बना कर उस का गला घोंट दिया. इस के बाद अजीत काफी डर गया तो वह अपने घर भाग गया, मगर रजनी कशमकश में फंस गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे?

आखिर उस का मन नहीं माना तो वह घर के पास में रहने वाली अपनी बहन के घर चली गई. यहां पर रजनी की मां भी आई हुई थी. उस ने हिचकियां लेले कर रोते हुए बहन और मां को बताया कि उस के पति ने आत्महत्या कर ली है. इन लोगों को रजनी की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था. शायद इसी वजह से एक बार तो लगा कि वह फूटफूट कर रो पड़ेगी, लेकिन किसी तरह खुद को संभालते हुए आखिर उस ने पूछ ही लिया, ‘‘क्या आप लोगों को मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है?’’  बाद में यह बात पूरे मोहल्ले में फैल गई.

सुबह होते ही गंधर्व सिंह ने महाराजपुरा थानाप्रभारी प्रशांत यादव को फोन कर इस घटना की सूचना दे दी. थानाप्रभारी प्रशांत यादव ने इस घटना को काफी गंभीरता से लिया. बात सिर्फ आत्महत्या कर लेने भर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इस से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि गुठीना जैसे छोटे से गांव में इस तरह की घटना घट गई और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं हुई.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी प्रशांत यादव  एसआई जितेंद्र मवाई के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. चलने से पहले उन्होंने इस की सूचना सीएसपी रवि भदौरिया को भी दे दी थी. प्रशांत यादव घटनास्थल का निरीक्षण शुरू करने वाले थे कि सीएसपी भदौरिया भी आ पहुंचे. उन के साथ फोरैंसिक टीम भी आई थी. फोरैंसिक टीम का काम खत्म हो गया तो सीएसपी लौट गए. उन के जाने के बाद  थानाप्रभारी प्रशांत यादव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घटनास्थल की औपचारिक काररवाई निपटा कर सुलतान की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

रजनी और उस के प्रेमी ने जिस रस्सी से फंदा बना कर सुलतान का गला घोंटा था, वह भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली. उस के बाद थानाप्रभारी ने गंधर्व सिंह की तरफ से अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली. थानाप्रभारी इस केस की जांच में जुट गए. उन्होंने इस बारे में मृतक की पत्नी रजनी से पूछताछ की. थाने पहुंचते ही रजनी डर गई और उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपने प्रेमी अजीत के साथ मिल कर पति को ठिकाने लगाया था.

पुलिस ने 6 जून, 2021 को ही रजनी के प्रेमी अजीत को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों ने ही सुलतान की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. इस के बाद दोनों ने सुलतान की हत्या की जो सनसनीखेज कहानी सुनाई, वह परपुरुष की बांहों में सुख तलाशने वाली औरत के अविवेक का नतीजा थी. पूछताछ  और सारे साक्ष्य जुटाने के बाद  पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. रजनी के साथ उस का 3 वर्षीय सब से छोटा बेटा भी जेल गया है.

रजनी ने जो सोचा था, वह पूरा नहीं हुआ. वह एक हत्या की अपराधिन बन गई. उस के साथ उस का पे्रमी भी. जो सोच कर उन दोनों ने सुलतान की हत्या की, वह अब शायद ही पूरा हो, क्योंकि यह तय है कि दोनों को सुलतान की हत्या के अपराध में सजा होगी. Hindi Crime Story

दहेज में आया बहू का प्रेमी भाई

उत्तर प्रदेश के जिला आगरा की तहसील एत्मादपुर के थाना बरहन के क्षेत्र में एक गांव है खांडा. यहां के निवासी सुरेंद्र सिंह का 27 वर्षीय बेटा विक्रम सिंह उर्फ नितिन नोएडा के सेक्टर-6 में स्थित एक प्राइवेट कंपनी में कंप्यूटर आपरेटर था. उस की शादी नवंबर 2015 में अछनेरा थानांतर्गत कुकथला निवासी किशनवीर सिंह की बेटी रानी उर्फ रवीना के साथ हुई थी. दोनों का 2 साल का एक बेटा है.

विक्रम नोएडा में अपने मातापिता, भाई अमित, बीवी व बच्चे के साथ रहता था. कोरोना वायरस फैलने और लौकडाउन की घोषणा के बाद 27 मार्च, 2020 को विक्रम परिवार सहित अपने गांव खांडा आ गया था. इस के लिए विक्रम को 50 किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा था. उस के पिता सुरेंद्र सिंह नोएडा में ही रह गए थे.

विक्रम को घर आए 5 दिन हो गए थे. 31 मार्च की रात विक्रम अपनी बीवी रानी के साथ कमरे में सोने चला गया. जबकि उस की मां कृपा देवी मकान की छत पर सोने चली गई. छोटा भाई अमित गांव में ही रहने वाली मौसी के यहां सो रहा था. रात डेढ़ बजे रानी अचानक कमरे से चीखती हुई बाहर निकली और छत पर बने कमरे में सो रही सास को जगा कर बताया कि विक्रम ने आत्महत्या कर ली है.

यह सुनते ही कृपा देवी बदहवास सी नीचे उतर कर कमरे में पहुंचीं. कमरे का मंजर देख उन के होश उड़ गए. बिस्तर पर विक्रम खून से लथपथ पड़ा था. उस की गरदन से खून निकल रहा था. जिस से तकिया व चादर खून से रंग गए थे.

घटना की जानकारी मिलते ही मृतक का चचेरा भाई राजेश सिकरवार घटनास्थल पर पहुंच गया. विक्रम की मौत की जानकारी होते ही परिवार की महिलाओं में कोहराम मच गया. राजेश ने इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही थाना बरहन के थानाप्रभारी महेश सिंह पुलिस टीम के साथ मौकाए वारदात पर पहुंच गए. तब तक सुबह हो चुकी थी. हत्या की जानकारी होते ही आसपड़ोस के लोग एकत्र हो गए थे.

पूछताछ में मां कृपा देवी ने बताया, ‘‘रात सभी ने हंसीखुशी खाना खाया था. उस समय विक्रम के चेहरे पर किसी प्रकार का कोई तनाव नहीं दिख रहा था. न ही उस ने किसी बात का जिक्र किया था. उस ने अचानक आत्महत्या क्यों कर ली, समझ से परे है.’’

सूचना मिलते ही सीओ (एत्मादपुर) अतुल सोनकर भी पहुंच गए. फोरैंसिक टीम भी बुला ली गई थी.

मृतक की बीवी रानी से भी पूछताछ की गई. उस ने बताया कि खाना खाने के बाद हम लोग कमरे में सो गए. रात में पति से झगड़ा हुआ था, हो सकता है उन्होंने गुस्से में गला काट कर आत्महत्या कर ली हो. मुझे तो आंखें खुलने पर घटना के बारे में पता चला, तभी मैं ने शोर मचाया और सास को छत पर जा कर जगाया. विक्रम ने बंद कमरे में आत्महत्या कैसे की? यह रानी नहीं बता सकी.

पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतक का गला रेता हुआ था. लेकिन कमरे में कोई चाकू या धारदार हथियार नहीं मिला था.

रानी की यह बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी कि बिस्तर पर आत्महत्या करते समय रानी भी सो रही थी लेकिन उसे आत्महत्या की कोई जानकारी नहीं हुई. ऐसा कैसे हो सकता है? पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

घटना की जानकारी मिलने पर मृतक के पिता भी नोएडा से आ गए. उन्होंने अपनी बहू रानी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस के प्रेम संबंध उस के फुफेरे भाई प्रताप सिंह उर्फ अनिकेत से हैं, जो खांडा का रहने वाला है. सुरेंद्र सिंह ने पहली अप्रैल को पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में भी विक्रम की हत्या का आरोप रानी अनिकेत पर लगाया. इस पर पुलिस रानी को पूछताछ के लिए अपने साथ थाने ले गई.

मृतक के घरवालों ने पुलिस को बताया कि विक्रम की पत्नी रानी हर महीने बीमारी का बहाना बना कर इलाज के नाम पर विक्रम से दवाइयों का 28,000 रुपए तक का बिल लेती थी. इतना ही नहीं उस ने अपने खर्चे पूरे करने के लिए 10 हजार रुपए में अपनी सोने की चेन भी गिरवी रख दी थी. पुलिस ने थाने में रानी से घटना के बारे में गहराई से पूछताछ की, ‘‘जब विक्रम ने चाकू से अपना गला अपने आप काट कर आत्महत्या की है तो चाकू भी वहीं होना चाहिए था.’’ इस पर रानी ने चुप्पी साध ली.

पुलिस ने यह भी पूछा, ‘‘अगर विक्रम की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने की तो कमरे का दरवाजा किस ने खोला? और वह आदमी कौन था?’’

इन सवालों के भी रानी के पास कोई जवाब नहीं थे. उस की चुप्पी सच्चाई बयां कर रही थी. पहले दिन तो रानी पुलिस को गुमराह करती रही, लेकिन दूसरे दिन यानी 2 अप्रैल, 2020 को पुलिस ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई.

उस ने पति की हत्या का जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उस ने अपने प्रेमी फुफेरे भाई प्रताप जो गांव में ही रहता है के साथ मिल कर रात में विक्रम की हत्या कर दी थी. पुलिस पूछताछ में विक्रम की हत्या की जो कहानी सामने आई वह कुछ इस तरह थी—

रानी की शादी उस के बुआ के बेटे प्रताप ने अपने ही गांव खांडा निवासी विक्रम सिंह से कराई थी. बहन के घर प्रताप का आनाजाना था. दोनों के बीच 2 साल से नजदीकियां बढ़ गई थीं. धीरेधीरे दोनों का प्रेमसंबंध नाजायज संबंधों में बदल गया.

बीवी की हरकतें देख कर विक्रम को उस पर शक हो गया था. यह बात रानी ने प्रताप को बताई. इस पर उस ने रानी के घर आना बंद कर दिया था. रानी जब मायके जाती तो प्रताप वहां पहुंच जाता था. वहां दोनों किसी तरह मिल कर अपने दिल की प्यास बुझा लेते थे.

जब रानी गांव में रहती थी, तो पति से रुपए मंगा कर अपने प्रेमी के ऊपर खर्च करती थी. इस की जानकारी होने पर विक्रम ने बीवी के मायके जाने पर रोक लगा दी थी. उस ने रानी को समझाया भी, लेकिन रानी पर पति की बातों का कोई असर नहीं हुआ. इस पर विक्रम रानी को नोएडा में अपने साथ रखने लगा था. लौकडाउन होने पर विक्रम परिवार सहित 5 दिन पहले गांव आया था. गांव आने पर रानी को पता चला कि प्रताप की शादी तय हो गई है. 25 अप्रैल को उस की बारात जानी थी. रानी को यह बात नागवार गुजरी.

वह चाहती थी कि प्रताप शादी न करे. वह उस के बिना नहीं रह सकती. वह प्रताप से मिलना चाहती थी. जबकि विक्रम उसे घर से बाहर नहीं जाने दे रहा था. इस पर उस ने मोबाइल पर प्रताप से बात की. इस बातचीत के दौरान मिल कर विक्रम की हत्या की योजना बनाई.

योजना के मुताबिक रानी ने 31 मार्च की रात आलू की सब्जी में नींद की 8 गोलियां मिला कर विक्रम को खिला दीं. गोलियां प्रताप ने ला कर दी थीं. रात करीब एक बजे विक्रम की तबियत खराब हुई. उस ने रानी से कहा कि उसे बैचेनी हो रही है. इस पर रानी ने पति को अंगूर खिलाए. फिर जैसे ही वह सोया, रानी ने मैसेज कर के प्रताप को बुला लिया. प्रताप और रानी ने उस का गला दबा दिया. वह जिंदा न बच जाए. इस के लिए हंसिए से उस का गला भी रेत दिया. हत्या के बाद प्रताप हंसिया ले कर फरार हो गया.

रानी और प्रताप की साजिश थी कि विक्रम की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप दे देंगे. अगर विक्रम की मां रात में चिल्लाचिल्ला कर भीड़ जमा न करती तो वे ऐसा प्रयास भी करते. लेकिन हड़बड़ाहट में रानी मौके से खून नहीं साफ  कर सकी थी.

रानी को पुलिस ने 3 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस के बाद पुलिस हत्यारोपी प्रताप की तलाश में जुट गई.

3 अप्रैल को ही पुलिस ने प्रताप को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हंसिया भी बरामद कर लिया.  रानी ने रिश्तों को कलंकित कर एक हंसतेखेलते परिवार को उजाड़ लिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य- मनोहर कहानियां, जून 2020  

लव मैरिज का कर्ज : भारी पड़ी विदेशी लव मैरिज

लौैकडाउन में जहां लोगों का बाहर निकलना प्रतिबंधित है वहीं अपराधियों के हौसले और भी बुलंदी पर हैं. लौकडाउन की वजह से लोग घर से बाहर न निकलने को मजबूर हैं, लेकिन ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो बिना निकले पेट नहीं पाल सकते. ऐसे ही लोगों में हैं अपराधी. दरअसल, अपराधियों की सोच यह होती है कि पुलिस तो कोरोना के चलते व्यवस्था ठीक करने में लगी है, क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाए.

जनपद मथुरा के राया कस्बे की परशुराम कालोनी में रहने वाले लेखपाल राजेंद्र प्रसाद की बीवी कुसुम घर के कामों में व्यस्त थीं. सुबह 11 बजे फुर्सत मिलने पर उन्हें घर के बाहर चबूतरे पर खेल रहे अपने 3 वर्षीय बेटे युवान उर्फ गोलू ॒की याद आई.

वे उसे बुलाने घर के बाहर आईं. चबूतरे पर उन की दोनों बेटियां खेल रहीं थीं. उन्होंने पूछा, ‘‘गोलू कहां है.’’ इस पर बेटियों ने कहा, ‘‘हमें नहीं मालूम.’’

गोलू अक्सर पड़ौसी अमित के घर उन के बच्चे के साथ खेलने चला जाता था. यह सोच कर कि गोलू वहीं होगा. कुसुम अमित के घर पहुंची.

उन्होंने अमित की बीवी मधु से गोलू के बारे में पूछा  तो मधु ने बताया, गोलू व दोनों बहनें आईं थीं सभी बच्चे खेल कर चले गए. कुसुम ने घबराते हुए कहा, ‘‘गोलू कहीं दिखाई नहीं दे रहा. पता नहीं कहां चला गया है.’’

मधु ने कहा किसी के घर खेल रहा होगा. कुसुम ने उसे मौहल्ले में तलाश किया, लेकिन कोई पता नहीं लगा.

कुसुम ने यह जानकारी पति राजेंद्र को दी. राजेंद्र और पड़ौसी गोलू को मोहल्ले के साथसाथ कालोनी के आसपास भी तलाशने लगे. तभी कुसुम को घर के पास गोलू की चप्पलें मिल गईं. चप्पलों में एक पर्ची लगी थी. पर्ची में लिखा था, आप का बेटा सही सलामत है, 20 लाख रुपए ले कर हाथिया आ जाना.

पर्ची पढ़ते ही हड़कंप मच गया. बेटे के अपहरण से राजेंद्र और कुसुम का बुरा हाल था. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी. यह 8 मई, 2020 की बात है.

सूचना पर थाना राया के थानाप्रभारी सूरजप्रकाश शर्मा मौके पर पहुंच गए. उन की सूचना पर एसपी देहात श्रीश चंद्र और सीओ (महावन)  विजय सिंह चौहान भी आ गए. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही चप्पलों में लगी पर्ची भी कब्जे में ले ली.

पुलिस ने घटनास्थल से थोड़ी दूर लगे शिवकुमार लेखपाल के यहां के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी खंगाली, लेकिन उस में कोई भी आताजाता नहीं दिखा. पुलिस ने गोलू के घरवालों के साथ मौहल्ले का एकएक घर छान मारा, लेकिन गोलू के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.  इस के बाद पिता राजेंद्र प्रसाद ने थाना राया में अज्ञात के विरूद्ध अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया.

सर्विलांस टीम से भी मदद ली गई, लेकिन समस्या यह थी कि अपहरणकर्ताओं ने अभी तक बच्चे के घरवालों को फिरौती के लिए फोन नहीं किया था. घटना के बाद से पुलिस कई स्थानों पर दबिश भी दे चुकी थी.

लौकडाउन के कारण पुलिस ने राया से ले कर मथुरा एनएच-2 और एक्सप्रेस-वे तक को सील कर रखा था. ऐसे में बच्चे का अपहरण और फिरौती पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी. क्योंकि गाड़ी में बच्चे को ले जाने के लिए पुलिस के हर बैरियर पर चैकिंग से गुजरना पड़ता था. इस के साथ ही एक्सप्रेस वे से ले कर एनएच-2 पर भी वाहन चैकिंग हो रही थी, वहां जा कर भी खोजबीन की गई. पुलिस ने लौकडाउन में ड्यूटी पर लगे पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की, लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात ही रहा.

गोलू के अचानक अपहरण हो जाने की खबर पूरी कालौनी में फैल चुकी थी. लौकडाउन होने के बावजूद तमाम पुरूष, महिलाएं व बच्चे राजेंद्र के घर पर जुटने लगे. सब की जुबान पर एक ही बात थी कि आखिर 3 साल के गोलू का अपहरण कौन कर ले गया? गोलू के अपहरण से मां कुसुम और दोनों बहनों का रोरो कर बुरा हाल था.

थानाप्रभारी सूरजप्रकाश शर्मा ने राजेंद्र से पूछा, ‘‘तुम्हारी किसी से रंजिश वगैरह तो नहीं हैं? या तुम्हें किसी पर कोई शक है तो बताओ. राजेंद्र के इनकार करने पर थानाप्रभारी ने कहा, ‘‘आप के पास अपहरणकर्ताओं का कोई फोन आए तो बताना.’’

कालोनी में बच्चे के अपहरण के बाद तरहतरह की चर्चाएं शुरू हो गई थी. पुलिस ही नहीं लोगों को डर सता रहा था कि लौकडाउन के चलते बदमाश फिरौती की रकम न मिलने पर कहीं बच्चे की हत्या न कर दें. गोलू के घरवालों की पूरी रात आंखों में कटी. घर में चूल्हा भी नहीं जला.

दूसरे दिन शनिवार की सुबह अपहर्त्ता लेखपाल राजेंद्र के बच्चे गोलू को कालोनी से 15 किमी दूर राया सादाबाद रोड पर गांव तंबका के पास छोड़ गए. ग्रामीणों को बालक रोता हुआ मिला. इस पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी. सूचना पर पीआरवी 112 मौके पर पहुंची और गोलू को कब्जे में ले लिया. बालक की बरामदगी की सूचना जैसे ही घर वालों को मिली उन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

पुलिस ने गाड़ी भेज कर बच्चे के मातापिता को पुलिस चौकी बिचपुरी पर बुला लिया.

गोलू को देखते ही मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए. मां की गोद में आते ही गोलू मां से लिपट गया.

उन्होंने उसे सीने से लगा लिया. बदमाशों ने 20 लाख की फिरौती मांगी थी, जो नहीं दी गई. जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर पूरे मामले कर खुलासा कर दिया जाएगा.

परशुराम कालोनी से राया सादाबाद रोड पर जाने के 3 रास्ते हैं. मुख्य मार्ग मांट रोड, फिर हाथरस रोड और फिर यहां से सीधा राया सादाबाद रोड है. इस दौरान रेलवे फाटक, नेहरू पार्क आदि स्थानों पर भी लौकडाउन के चलते पुलिस मौजूद रहती है.  यहां से राया सादाबाद रोड पर जाने के लिए 2 रास्ते और भी हैं. बच्चे के अपहरण के बाद पुलिस ने इन सभी रास्तों पर नाकेबंदी कर दी थी. इस के बावजूद बदमाशों ने सुबह 5 बजे तंबका गांव के मंदिर पर बालक को छोड़ दिया.

पुलिस इस क्षेत्र के आगे तथा पीछे मौजूद थी परंतु उसे बदमाशों की गतिविधि की भनक तक नहीं लग सकी थी. अपहर्त्ताओं ने बालक के अपहरण में चौपहिया वाहन का इस्तेमाल किया था. इस की पुष्टि बच्चे गोलू ने भी की. साथ ही बताया कि बदमाशों ने उस के सिर पर कपड़ा डाला और गाड़ी में ले गए.

सवाल यह था कि चौपहिया वाहन लौकडाउन के चलते इतनी दूर कैसे चला गया? बालक तो बरामद हो गया लेकिन सघन चैकिंग का दावा कर रही पुलिस बदमाशों को नहीं पकड़ सकी थी.

इस से पुलिस की किरकिरी हो रही थी. अपहरणकर्ताओं की चुनौती को पुलिस ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया. पुलिस अधिकारियों ने वारदात के तरीके से यह निष्कर्ष निकाला कि यह किसी संगठित गिरोह की गतिविधि नहीं थी. इसलिए पुलिस ने अब लेखपाल राजेंद्र के नजदीकी लोगों की छानबीन शुरू करने का निर्णय लिया.

पुलिस मान रही थी कि फिरौती के लिए जिन्होंने पर्ची लिखी, वे बहुत कम पढ़ेलिखे थे. क्योंकि पर्ची में पहले 10 और बाद में 20 लाख की फिरौती लिखी गई थी. एसपी देहात श्रीश चंद्र ने बताया कि इस संबंध में जहां लेखपाल के नजदीक रहे लोगों की जानकारी ले रहे हैं, वहीं मामले की जांच गहनता से फिर से की जाए. ताकि बच्चे के अपहर्त्ताओं तक पहुंचा जा सके.

पुलिस ने गोलू की मां से पर्ची मिलने के बारे में पूछताछ की. उस से जानकारी मिली कि गोलू की चप्पलों को उठाते वक्त नीचे दबी फिरौती की पर्ची उड़ गई थी, उस समय उस ने गौर नहीं किया था. बाद में पर्ची पड़ौस में रहने वाले अमित की पत्नी मधु ने ला कर दी थी. इस पर पुलिस ने मधु से पूछताछ की, मधु इनकार करने लगी. मधु की हरकत से पुलिस को उस पर शक हो गया. पुलिस ने 12 मई को मधु को हिरासत में लेने के बाद उस से सख्ती से पूछताछ की.

इस पर मधु ने फिरौती की पर्ची कुसुम को देने की बात स्वीकार करते हुए गोलू के अपहरण में अपने पति अमित, सगे देवर विनय उर्फ वीनू तथा ममेरे देवर विशाल के शामिल होने की बात बताई.

पुलिस ने इस संबंध में अमित, मधु, विशाल निवासी तिरवाया, थाना राया को गिरफ्तार कर लिया. अमित का भाई  विनय  निवासी टोंटा, हाथरस फरार था. गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. पूछताछ करने पर गोलू के अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.—

अमित मैजिक चालक था. महाराष्ट्र की मधु नाइक मथुरा में गोवर्धन की परिक्रमा के लिए आई थी. अमित ने मधु को अपनी मैजिक में बैठा कर गोवर्धन की परिक्रमा कराई.

इस मुलाकात के बाद दोनों का झुकाव एकदूसरे के प्रति हो गया. बाद में उस ने 2015 में मधु से प्रेम विवाह कर लिया. उस ने मधु से खुद को बहुत पैसे वाला बताया था. जबकि वह टेंट की सिलाई का काम करने के साथ ही मैजिक भी चलाता था. शादी के बाद शानोशौकत में धीरेधीरे उस पर 5 लाख रुपए का कर्जा हो गया.

इस वारदात से 2 माह पहले ही अमित ने परशुराम कालोनी में रामबाबू का मकान किराए पर लिया था. इस से पहले वह भोलेश्वर कालोनी में किराए पर रहता था. वह मूल रूप से टोंटा, हाथरस का रहने वाला था. पड़ोसी होने के नाते गोलू व उस की बहनें उस के यहां खेलने आती थीं.

कर्जा चुकाने के लिए दंपति ने गोलू के अपहरण की साजिश रची थी. इस योजना में अमित ने पत्नी मधु के साथ ही अपने छोटे भाई विनय उर्फ वीनू व मामा के लड़के विशाल को भी शामिल कर लिया था. गोलू रोजाना की तरह 8 मई को भी अपनी 2 बहनों के साथ पड़ोसी अमित के घर खेलने आया था.

उस दिन दोनों बहनें घर के अंदर लूडो खेलती रहीं और योजना के मुताबिक मधु ने गोलू को अपने पति अमित के साथ मैजिक में बैठा दिया और कहा, ‘‘अंकल तुम्हें घुमाने ले जा रहे हैं. बच्चे को बहलाफुसला कर अमित गोलू को कच्चे रास्ते से होता हुआ छोटे भाई

वीनू के पास नगला टोंटा, हाथरस ले गया.  वहां वीनू को बच्चा देने के बाद कहा, ‘‘जब विशाल फोन करे बच्चे को तभी छोड़ना.’’

बच्चे के अपहरण के बाद पुलिस का दवाब बढ़ा तो अपहरणकर्ता डर गए. पकड़े जाने के भय से उन्होंने बालक को दूसरे दिन बिना फिरौती वसूले ही छोड़ दिया. यह बालक गांव तंबका के पास ग्रामीणों को रोता हुआ मिला था. एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने प्रैस वार्ता में बताया, शादी के बाद अमित पर 5 लाख का कर्जा हो गया था उसे उतारने के लिए दंपति ने गोलू के अपहरण की साजिश रची थी.

पुलिस का दवाब बढ़ा तो इन लोगों ने बच्चे को अगले दिन ही सड़क पर छुड़वा दिया था. प्रोत्साहन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम में शामिल एसपी देहात श्रीश चंद्र, सीओ विनय चौहान, थानाप्रभारी सूरजप्रकाश शर्मा, स्वाट व सर्विलांस टीम को 50 हजार रुपए के इनाम की घोषणा की है. गिरफ्तार तीनों आरोपियों को पुलिस ने अदालत में पेश कर जिला जेल भेज दिया.

दंपति का एक साल का बेटा भी उन के साथ जेल में है क्योंकि उस की सुपुर्दगी लेने वाला कोई नहीं था. जबकि चौथे आरोपी विनय उर्फ वीनू की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है. अपने को अमीर दिखाने के चक्कर में यदि अमित ने अपने सिर पर कर्ज का बोझ न चढ़ाया होता तो आज उस की हंसती खेलती जिंदगी होती लेकिन पैसे की झूठी शान दिखाने में उसे जुर्म का सहारा लेना पड़ा, जिस के चलते परिवार सहित जेल की हवा खानी पड़ी.

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

सौजन्य- मनोहर कहानियां, जून 2020   

यार की खुशबू: प्यार के लिए पति से धोखा

दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना शाहीनबाग के अंतर्गत नई बस्ती ओखला के रहने वाले कपिल की ससुराल उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के आसफाबाद में थी. करीब 3 साल पहले किसी बात को ले कर उस का अपनी पत्नी खुशबू से विवाद हो गया था. तब खुशबू अपने मायके चली गई थी और वापस नहीं लौटी थी. इतना ही नहीं, ढाई साल पहले खुशबू ने फिरोजाबाद न्यायालय में कपिल के खिलाफ घरेलू हिंसा व गुजारा भत्ते का मुकदमा दायर कर दिया था.

कपिल हर तारीख पर फिरोजाबाद कोर्ट जाता था और तारीख निपटा कर देर रात दिल्ली लौट आता था. 10 फरवरी, 2020 को भी वह इसी मुकदमे की तारीख के लिए दिल्ली से फिरोजाबाद आया था. वह रात को घर नहीं पहुंचा तो घर वालों ने उसे 11 फरवरी की सुबह फोन किया. लेकिन उस का फोन बंद मिला. इस से घर वाले परेशान हो गए. उन्होंने 11 फरवरी की शाम तक कपिल का इंतजार किया. इस के बाद उन की चिंता और भी बढ़ गई.

12 फरवरी को कपिल की मां ब्रह्मवती, बहन राखी, मामा नेमचंद और मौसी सुंदरी फिरोजाबाद के लिए निकल गए. कपिल की ससुराल वाला इलाका थाना रसूलपुर क्षेत्र में आता है, इसलिए वे सभी थाना रसूलपुर पहुंचे और कपिल के रहस्यमय तरीके से गायब होने की बात बताई.

थाना रसूलपुर से उन्हें यह कह कर थाना मटसैना भेज दिया गया कि कपिल कोर्ट की तारीख पर आया था और कोर्ट परिसर उन के थानाक्षेत्र में नहीं बल्कि थाना मटसैना में पड़ता है. इसलिए वे सभी लोग उसी दिन थाना मटसैना पहुंचे, लेकिन वहां भी उन की बात गंभीरता से नहीं सुनी गई. ज्यादा जिद करने पर मटसैना पुलिस ने कपिल की गुमशुदगी दर्ज कर ली. गुमशुदगी दर्ज कर के उन्हें थाने से टरका दिया. इस के बाद भी वे लोग कपिल की फिरोजाबाद में ही तलाश करते रहे.

इसी बीच 15 फरवरी की दोपहर को किसी ने थाना रामगढ़ के बाईपास पर स्थित हिना धर्मकांटा के नजदीक नाले में एक युवक की लाश पड़ी देखी. इस खबर से वहां सनसनी फैल गई. कुछ ही देर में भीड़ एकत्र हो गई. इसी दौरान किसी ने इस की सूचना रामगढ़ थाने में दे दी.

कुछ ही देर में थानाप्रभारी श्याम सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. उन्होंने शव को नाले से बाहर निकलवाया. मृतक के कानों में मोबाइल का ईयरफोन लगा था.

पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद लोगों में से कोई भी उसे नहीं पहचान सका. पुलिस ने उस अज्ञात युवक की लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय फिरोजाबाद भेज दी.

कपिल की मां ब्रह्मवती और बहन राखी उस समय फिरोजाबाद में ही थीं. शाम के समय जब उन्हें बाईपास स्थित नाले में पुलिस द्वारा किसी अज्ञात युवक की लाश बरामद किए जाने की जानकारी मिली तो मांबेटी थाना रामगढ़ पहुंच गईं. उन्होंने थानाप्रभारी श्याम सिंह से अज्ञात युवक की लाश के बारे में पूछा तो थानाप्रभारी ने उन्हें फोन में खींचे गए फोटो दिखाए.

फोटो देखते ही वे दोनों रो पड़ीं, क्योंकि लाश कपिल की ही थी. इस के बाद थानाप्रभारी ब्रह्मवती और उस की बेटी राखी को जिला अस्पताल की मोर्चरी ले गए. उन्होंने वह लाश दिखाई तो दोनों ने उस की शिनाख्त कपिल के रूप में कर दी. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी ने भी राहत की सांस ली.

थानाप्रभारी ने शव की शिनाख्त होने की जानकारी एसपी (सिटी) प्रबल प्रताप सिंह को दे दी और उन के निर्देश पर आगे की काररवाई शुरू कर दी. थानाप्रभारी श्याम सिंह ने मृतक कपिल की मां ब्रह्मवती और बहन राखी से बात की तो उन्होंने बताया कि कपिल की पत्नी खुशबू चरित्रहीन थी.

इसी बात पर कपिल और खुशबू के बीच अकसर झगड़ा होता था, जिस के बाद खुशबू मायके में आ कर रहने लगी थी. राखी ने आरोप लगाया कि खुशबू ने ही अपने परिवार के लोगों से मिल कर उस के भाई की हत्या की है.

पुलिस ने राखी की तरफ से मृतक की पत्नी खुशबू, सास बिट्टनश्री, साले सुनील, ब्रजेश, साली रिंकी और सुनील की पत्नी ममता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी.

चूंकि रिपोर्ट नामजद थी, इसलिए पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई. पुलिस ने मृतक की पत्नी खुशबू व उस की मां को हिरासत में ले लिया. उन से कड़ाई से पूछताछ की गई. खुशबू से की गई पूछताछ में पुलिस को कोई खास जानकारी हाथ नहीं लगी, बस यही पता चला कि कपिल पत्नी के चरित्र पर शक करता था.

फिर भी पुलिस यह समझ गई थी कि एक अकेली औरत कपिल का न तो मर्डर कर सकती है और न ही शव घर से दूर ले जा कर नाले में फेंक सकती है. पुलिस चाहती थी कि कत्ल की इस वारदात का पूरा सच सामने आए.

इस बीच जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा. किसी ने थानाप्रभारी को बताया कि खुशबू चोरीछिपे अपने प्रेमी चंदन से मिलती थी. दोनों के नाजायज संबंधों का जो शक किया जा रहा था, उस की पुष्टि हो गई.

जाहिर था कि हत्या अगर खुशबू ने की थी तो कोई न कोई उस का संगीसाथी जरूर रहा होगा. इस बीच पुलिस की बढ़ती गतिविधियों और खुशबू को हिरासत में लिए जाने की भनक मिलते ही खुशबू का प्रेमी चंदन और उस का साथी प्रमोद फरार हो गए.

इस से उन दोनों पर पुलिस को शक हो गया. उन की सुरागरसी के लिए पुलिस ने मुखबिरों का जाल फैला दिया. मुखबिर की सूचना पर घटना के तीसरे दिन पुलिस ने खुशबू के प्रेमी चंदन व उस के साथी प्रमोद को कनैटा चौराहे के पास से हिरासत में ले लिया. दोनों वहां फरार होने के लिए किसी वाहन का इंतजार कर रहे थे.

थाने ला कर दोनों से पूछताछ की गई. थाने में जब चंदन और प्रमोद से खुशबू का आमनासामना कराया गया तो तीनों सकपका गए. इस के बाद उन्होंने आसानी से अपना जुर्म कबूल कर लिया.

अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने खुशबू, उस के प्रेमी चंदन उर्फ जयकिशोर निवासी मौढ़ा, थाना रसूलपुर, उस के दोस्त प्रमोद राठौर निवासी राठौर नगर, आसफाबाद को कपिल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.

उन की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त रस्सी, मोटा सरिया व मोटरसाइकिल बरामद कर ली. खुशबू ने अपने प्यार की राह में रोड़ा बने पति कपिल को हटाने के लिए प्रेमी व उस के दोस्त के साथ मिल कर हत्या का षडयंत्र रचा था. खुशबू ने पति की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस तरह थी—

दक्षिणपूर्वी दिल्ली की नई बस्ती ओखला के रहने वाले कपिलचंद्र  की शादी सन 2015 में खुशबू के साथ हुई थी. शादी के डेढ़ साल तक सब कुछ ठीकठाक रहा. कपिल की गृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. करीब 3 साल पहले जैसे उस के परिवार को नजर लग गई. हुआ यह कि खुशबू अकसर मायके चली जाती थी. इस से कपिल को उस के चरित्र पर शक होने लगा. इस के बाद पतिपत्नी में तकरार शुरू हो गई.

पतिपत्नी में आए दिन झगड़े होने लगे. गुस्से में कपिल खुशबू की पिटाई भी कर देता था. गृहक्लेश के चलते खुशबू अपने बेटे को ले कर अपने मायके में आ कर रहने लगी. ढाई साल पहले उस ने कपिल पर घरेलू हिंसा व गुजारा भत्ते के लिए फिरोजाबाद न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया.

मायके में रहने के दौरान खुशबू के अपने पड़ोसी चंदन से प्रेम संबंध हो गए थे. हालांकि चंदन शादीशुदा था और उस की 6 महीने की बेटी भी थी. कहते हैं प्यार अंधा होता है. दोनों एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे थे. मायके में रहने के दौरान चंदन खुशबू के पति की कमी पूरी कर देता था. लेकिन ऐसा कब तक चलता.

एक दिन खुशबू ने चंदन से कहा, ‘‘चंदन, हम लोग ऐसे चोरीछिपे आखिर कब तक मिलते रहेंगे. तुम मुझ से शादी कर लो. मैं अपने पति से पीछा भी छुड़ाना चाहती हूं. लेकिन वह मुझे तलाक नहीं दे रहा. अगर तुम रास्ते के इस कांटे को हटा दोगे तो हमारा रास्ता साफ हो जाएगा.’’

दोनों एकदूसरे के साथ रहना चाहते थे. चंदन को खुशबू की सलाह अच्छी लगी. इस के बाद खुशबू व उस के प्रेमी चंदन ने मिल कर एक षडयंत्र रचा. मुकदमे की तारीख पर खुशबू और कपिल की बातचीत हो जाती थी.

खुशबू ने चंदन को बता दिया था कि कपिल हर महीने मुकदमे की तारीख पर फिरोजाबाद कोर्ट में आता है. 10 फरवरी को अगली तारीख है, वह उस दिन तारीख पर जरूर आएगा. तभी उस का काम तमाम कर देंगे.

कपिल 10 फरवरी को कोर्ट में अपनी तारीख के लिए आया. कोर्ट में खुशबू व कपिल के बीच बातचीत हो जाती थी. कोर्ट में तारीख हो जाने के बाद खुशबू ने उसे बताया, ‘‘अपने बेटे जिगर की तबीयत ठीक नहीं है. वह तुम्हें बहुत याद करता है. उस से एक बार मिल लो.’’

अपने कलेजे के टुकड़े की बीमारी की बात सुन कर कपिल परेशान हो गया और तारीख के बाद खुशबू के साथ अपनी ससुराल पहुंचा.

कपिल शराब पीने का शौकीन था. खुशबू के प्रेमी व उस के दोस्त ने कपिल को शराब पार्टी पर आमंत्रित किया. शाम को ज्यादा शराब पीने से कपिल नशे में चूर हो कर गिर पड़ा.

कपिल के गिरते ही खुशबू ने उस के हाथ पकड़े और प्रेमी चंदन व उस के साथी प्रमोद ने साथ लाई रस्सी से कपिल के हाथ बांधने के बाद उस के सिर पर मोटे सरिया से प्रहार कर उस की हत्या कर दी.

कपिल की हत्या इतनी सावधानी से की गई थी कि पड़ोसियों को भी भनक नहीं लगी. हत्या के बाद उसी रात उस के शव को मोटरसाइकिल से ले जा कर बाईपास के किनारे स्थित नाले में डाल दिया गया. 15 फरवरी को शव से दुर्गंध आने पर लोगों का ध्यान उधर गया.

एसपी (सिटी) प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि कपिल की हत्या के मुकदमे में नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है. जो लोग निर्दोष पाए जाएंगे, उन्हें छोड़ दिया जाएगा.

पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया. निजी रिश्तों में आई खटास के चलते खुशबू ने अपनी मांग का सिंदूर उजाड़ने के साथ पतिपत्नी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया. वहीं कांच की चूडि़यों से रिश्तों को जोड़ने के लिए मशहूर सुहागनगरी फिरोजाबाद को रिश्तों के खून से लाल कर दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य: मनोहर कहानियां, अप्रैल 2020

फेसबुकिया प्यार: ऑनलाइन मोहब्बत बनी जी का जंजाल

19 जनवरी, 2020 की सुबह लगभग 10 बजे की बात है. जयपुर के तालुका जयसिंह पुरा की रहनेवाली 22 वर्षीय नैना उर्फ रेशमा मंगलानी अपनी स्कूटी ले कर पति के साथ घर से बाहर निकली तो वह वापस घर नहीं लौटी.

घरवालों ने उस का फोन नंबर मिलाया तो फोन बंद आ रहा था. काफी रात बीत जाने के बाद भी जब वह नहीं आई तो उस के मातापिता और परिवार वालों को चिंता होने लगी. घर वालों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह अपने 2 महीने के दुधमुंहे बच्चे को छोड़ कर कहां चली गई.

घरवालों ने रेशमा मंगलानी के पति अयाज अंसारी से बात की तो उस ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया. बेटी के इस तरह गायब होने से मांबाप का तो दिल बैठने लगा. वे अपने स्तर पर उस की तलाश में जुट गए. उन्होंने बेटी के दोस्तों और सहेलियों से उस के बारे में पूछताछ की.

फोन कर के सगेसंबंधियों से भी पूछताछ करते रहे. लेकिन कहीं से भी राहत देने वाली कोई जानकारी नहीं मिली. 20 घंटे गुजर जाने के बाद भी जब नैना उर्फ रेशमा मंगलानी की कोई खबर नहीं मिली तो किसी अज्ञात अनहोनी को ले कर परिवार वालों का मन अशांत हो गया.

सगेसंबंधियों और पड़ोसियों की सलाह पर रेशमा के पिता थाना आमेर पहुंचे और थानाप्रभारी को सारी बातें बता कर बेटी की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. थानाप्रभारी ने जब उन से किसी पर शक होने के बारे में पूछा तो उन्होंने रेशमा के पति अयाज अंसारी पर संदेह जाहिर किया. क्योंकि वह उस के साथ ही निकली थी.

मामला पौश कालोनी के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़ा हुआ था. इसलिए थानाप्रभारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए यह जानकारी उच्च अधिकारियों के साथसाथ पुलिस कंट्रौल रूम को भी दे दी.

चूंकि नैना के पिता और परिवार वालों ने उस के पति अयाज अंसारी पर अपना संदेह जाहिर किया था. इसलिए पुलिस ने अयाज अंसारी को थाने बुला कर पूछताछ की. अयाज अंसारी ने बताया कि रेशमा सुबह 11 बजे से ले कर रात 9 बजे तक उस के साथ उस के घर पर रही. इस के बाद वह चली गई थी. वह कहां गई इस बात को ले कर वह खुद परेशान है और उसे खोज रहा है.

अयाज से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे घर भेज दिया और पुलिस अपने स्तर से रेशमा की खोज करने लगी. पुलिस के सामने यह बात आई कि नैना उर्फ रेशमा बहुत खूबसूरत थी. वह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय रहती थी. यूट्यूब, फेसबुक और वाट्सएप पर वह अपने दोस्तों और सहेलियों के साथ चैटिंग में व्यस्त रहती थी. फेसबुक और वाट्सऐप पर वह नएनए पोज में अपने फोटो खींच कर शेयर करती, जिन्हें काफी लोग पसंद भी करते थे.

थोड़े ही दिनों में नैना उर्फ रेशमा मंगलानी फेसबुक और यूट्यूब पर फेमस हो गई. फेसबुक पर उस के 2 हजार, 300 से अधिक फ्रेंड और 6 हजार, 400 से ज्यादा फोलोअर्स हो गए थे. वह अकसर फोन पर बिजी रहती थी. नैना के पास घूमने के लिए एक स्कूटी थी. जिसे ले कर वह अकसर अपने दोस्तों और सहेलियों से मिलने के लिए आतीजाती थी.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस को संदेह हुआ कि नैना उर्फ रेशमा मंगलानी की गुमशुदगी के पीछे कोई गहरा रहस्य है. आगे की जांच के लिए पुलिस ने रेशमा के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पहले कि पुलिस उस की काल डिटेल्स का अध्ययन करती, पुलिस को एक सनसनीखेज सूचना मिली.

रेशमा की मिली लाश

21 जनवरी, 2020 की सुबह के समय किसी राहगीर ने थाना आमेर में फोन कर के सूचना दी कि जयपुरदिल्ली राजमार्ग स्थित नए माता मंदिर के सामने झाडि़यों में किसी युवती का शव पड़ा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई. मृतका का चेहरा इतना विकृत था कि उस की शिनाख्त करना मुश्किल था. हत्यारे ने लाश की पहचान मिटाने की पूरी कोशिश की थी.

लाश से कुछ दूर एक स्कूटी खड़ी थी. एक दिन पहले ही नैना के पिता ने थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. रेशमा भी स्कूटी ले कर घर से निकली थी. इसलिए थानाप्रभारी ने रेशमा के घरवालों को फोन कर के मौके पर बुलवा लिया. घरवालों ने लाश की शिनाख्त नैना उर्फ रेशमा के रूप में कर दी. इस के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

नैना मंगलानी की हत्या की खबर पाते ही उस के घर में मातम छा गया. परिवार के लोग रोतेपीटते थाने पहुंचे. उन्होंने पुलिस को बताया कि नैना की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उस के पति अयाज अंसारी ने ही की है. उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जानी चाहिए. उन्होंने अयाज के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखा दी. जब यह खबर मीडिया द्वारा लोगों को पता चली तो जयपुर और आसपास के शहरों में रहने वाले नैना (रेशमा) के फालोअर्स भी सकते में आ गए.

उन्होंने सोशल मीडिया में अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. मामला तूल पकड़ने लगा तो डीसीपी (क्राइम) अशोक कुमार गुप्ता ने इस केस को अपने हाथों में ले कर जांच के लिए पुलिस टीम बना दी.

चूंकि नैना के घर वालों ने नामजद रिपोर्ट लिखाई थी इसलिए पुलिस ने अयाज अंसारी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. थाने आ कर उस ने वही राग अलापना शुरू किया जो पहले अलापा था. लेकिन इस बार उस का कोई पैंतरा नहीं चला. क्योंकि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और काल डिटेल्स से उस के खिलाफ सारे सबूत इकट्ठे कर लिए थे. अयाज अंसारी से विस्तार से पूछताछ के लिए पुलिस ने उसे 2 दिन के रिमांड पर लिया.

रिमांड के दौरान वह पुलिस के सवालों के चक्रव्यूह में ऐसा फंसा कि उस के सामने अपना गुनाह स्वीकार करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा.

उस ने अपनी पत्नी नैना उर्फ रेशमा मंगलानी की बिंदास जिंदगी और बेरहम हत्या की जो कहानी बताई उस की पृष्ठभूमि कुछ इस तरह थी.

26 वर्षीय अयाज अंसारी एक महत्त्वाकांक्षी युवक था. वह अपने परिवार के साथ जयपुर के धारगेट सराय मोहल्ला में रहता था. उस के पिता का नाम रियाज मोहम्मद अंसारी था. छोटा सा कारोबार था. ग्रैजुएशन करने के बाद वह अजमेर स्थित एक फाइनैंस कंपनी में सर्विस करने लगा.

मनमौजी और रंगीन स्वभाव का होने के नाते नैना मंगलानी की तरह वह भी सोशल मीडिया पर सक्रिय था. उस ने भी यूट्यूब और फेसबुक पर अपना अकाउंट खोल रखा था. काम से समय मिलने पर वह अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर चैटिंग में व्यस्त हो जाता था.

एक दिन जब फेसबुक पर उस ने नैना नाम की लड़की का फोटो देखा तो वह उस की तरफ आकर्षित हो गया. उस ने नैना के फोटो को लाइक किया और नैना को फ्रैंड रिक्वेस्ट भेज दी. नैना ने भी अयाज अंसारी की दोस्ती स्वीकार कर ली. नैना के सैकड़ों दोस्तों के साथ एक नाम और जुड़ गया. इस के बाद दोनों के बीच चैटिंग शुरू हो गई थी. करीब 4 महीने तक चली चैटिंग के बाद जब दोनों एकदूसरे के आमनेसामने आए तो उन के बीच गहरी दोस्ती हो गई.

अयाज से हुई दोस्ती

जुलाई, 2017 तक सब कुछ ठीकठाक था. नैना मंगलानी और अयाज अंसारी की बातचीत सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित थी, लेकिन इस के बाद सब कुछ बदल गया था. जुलाई के ही महीने में एक दिन नैना मंगलानी अपना क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए एक कंपनी में गई. अयाज उसी कंपनी में सर्विस करता था. फेसबुक फ्रेंड होने के नाते दोनों एकदूसरे को तुरंत पहचान गए और बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया.

अपने बिंदास और मौडर्न स्वभाव की वजह से नैना मंगलानी को अयाज अंसारी से घुलनेमिलने में समय नहीं लगा. इस एक मुलाकात से नैना मंगलानी की जिंदगी के मायने ही बदल गए. नैना मंगलानी अयाज अंसारी के स्वभाव और बातचीत से काफी प्रभावित थी. इतना ही नहीं वह उसे अपना दिल दे बैठी थी. अयाज अंसारी तो पहले से नैना मंगलानी का दीवाना था. उस के दिल में भी नैना के लिए एक खास जगह बन गई थी.

जिस दिन से दोनों की मुलाकात और जानपहचान हुई थी. उस दिन से दोनों की आंखों की नींद उड़ गई थी. उन की सुबह की चैटिंग गुड मौर्निंग से शुरू होती थी और पूरे दिन चलती थी.

दोस्ती प्यार में बदल गई थी, चैटिंग के बाद दोनों की मुलाकातें भी होने लगीं. दोनों साथसाथ सैरसपाटा करते. फिर एक दिन ऐसा भी आया कि उन्होंने अपनी सीमाएं भी तोड़ डालीं.

एक बार जब मर्यादा की दीवार टूटी तो फिर टूटती ही चली गई. अब वह जब तक एकदूसरे को मिल या देख नहीं लेते थे, मन बेचैन रहता था. अपनी इस बेचैनी को खत्म करने के लिए दोनों ने साथसाथ रहने का मन बनाया. उन्होंने शादीनिकाह करने का फैसला कर लिया था.

वैसे तो दोनों के परिवार वाले खुले और आजाद विचारों के थे. लेकिन मजहब अलगअलग होने के कारण मन में थोड़ा डर भी था, कि उन के रास्ते में कोई समस्या न खड़ी हो जाए. यह सोच कर वह अक्तूबर, 2017 में अपना घर छोड़ कर जयपुर से भाग कर गाजियाबाद आ गए.

गाजियाबाद में दोनों ने पहले एक मंदिर में जा कर हिंदू रीतिरिवाज से शादी की. उस के बाद उन्होंने एक मसजिद में निकाह कर लिया. निकाह के बाद वह नैना से रेशमा अंसारी बन गई.

नैना मंगलानी और अयाज अंसारी के परिवारों में थोड़ी सी नाराजगी जरूर हुई थी. लेकिन बेटी और बेटे की खुशी के लिए दोनों परिवारों ने समझौता कर लिया था. शादी और निकाह के बाद इन लोगों ने जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित एक हाउसिंग कालोनी में एक फ्लैट फाइनेंस करा लिया और उसी में रहने लगे. शादी के कुछ दिनों बाद रेशमा गर्भवती हो गई.

एक कहावत है कि दूर के ढोल सुहावने लगते हैं. लेकिन जैसेजैसे उन के नजदीक पहुंचते हैं तो उन की आवाज शोर लगने लगती है. यही हाल नैना और अयाज अंसारी के बीच हुआ. 2 सालों तक चली दोनों की लव स्टोरी में धीरेधीरे दरार आने लगी. जिस मीडिया ने उन्हें मिलाया था वही मीडिया अब उन के विवाद का कारण बन गया.

अपनी प्रशंसा की भूखी नैना का सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने का भूत उतरा नहीं था. वह शादी के बाद भी लगातार एक्टिव रहती थी. उस ने फेसबुक पर अपनी आईडी बना रखी थी. एक नैना के नाम से तो दूसरी रेशमा के नाम से. उस का हेडफोन हमेशा उस के कानों में लगा रहता था, जिस पर वह अकसर बातें किया करती, वह पति अयाज अंसारी की उपेक्षा करने लगी थी, जो उसे पसंद नहीं थी.

इस से अयाज अंसारी के दिल में कहीं न कहीं संदेह पैदा हो रहा था. उसे ऐसा लग रहा था कि जिस तरह से वह सोशल मीडिया के जरिए उस की जिंदगी में आई, उसी प्रकार कहीं वह किसी और की जिंदगी में तो नहीं दाखिल हो रही है. इस संदेह को ले कर पहले तो अयाज अंसारी ने उसे समझाया और सोशल मीडिया से बैकआउट करने का भी दबाव बनाया. लेकिन नैना को उस का यह दबाव पसंद नहीं आया, उस का कहना था कि वह आजाद और आधुनिक विचारों वाली है. उसे किसी तरह के बंधन में बंधना स्वीकार नहीं है.

शादी हो गई पर आदत नहीं बदली नैना की

नैना की इस बात से अयाज अंसारी सहमत नहीं था. नतीजा यह हुआ कि दोनों की तकरार बढ़ गई. इस बीच अयाज ने गुस्से में कई बार उस का फोन छीन कर तोड़ डाला था, लेकिन नैना हर बार नया फोन खरीद लेती थी, फिर रेशमा की डिलीवरी के बाद माहौल ऐसा बना कि वह अपने एक माह के बच्चे को ले कर अपने मायके आ गई और उसे तलाक का नोटिस दे दिया.

नोटिस पा कर अयाज अंसारी बौखला गया. इस के बाद विश्वास हो गया कि उस की पत्नी का किसी न किसी फ्रेंड से चक्कर चल रहा है. कहा जाता है कि संदेह और ईर्ष्या में इंसान खुद ही खोखला हो जाता है. यही हाल अयाज का भी था.

अयाज ने पहले तो पत्नी से कहा कि वह मायके से लौट आए लेकिन जब वह आने के लिए तैयार नहीं हुई तो उस ने एक खतरनाक फैसला कर लिया.

योजना के अनुसार वह पत्नी को मनाने के लिए उस के मायके पहुंच गया और उस ने अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगते हुए उस के सामने सुलह का प्रस्ताव रखा. जिसे रेशमा ने स्वीकार कर लिया. यही समझौता रेशमा को महंगा पड़ा.

19 जनवरी, 2020 की सुबह जब नैना अपने बच्चे को मां के पास छोड़ स्कूटी से अयाज अंसारी के साथ घर से बाहर निकली तो वापस घर नहीं आई. अयाज अंसारी पहले नैना पत्नी को अपने घर कालवाड़ ले कर गया. वहां दोनों ने जम कर बीयर पी और मौजमस्ती कर रात 9 बजे के करीब दिल्लीजयपुर राजमार्ग पर स्थित आमेर आ गए. वहां दोनों ने चाय की दुकान पर जा का चाय पी. थोड़ी देर बाद अयाज अंसारी उसे माता मंदिर के पास ले कर गया.

पहले तो नैना उस सुनसान जगह तक जाने के लिए तैयार नहीं थी. लेकिन अयाज अंसारी ने रिक्वेस्ट की तो उस पर विश्वास कर के वह उस के साथ चली गई. उस समय भी नैना के कान से हेडफोन लगा था. वह किसी फ्रेंड से चैटिंग कर रही थी. जिसे सुनसुन कर अयाज गुस्से में जलभुन रहा था. तभी अयाज ने उस का फोन छीन कर माता मंदिर के पीछे फेंक दिया.

उस समय मंदिर के पास अंधेरा था और जगह सुनसान थी. मोबाइल को ले कर रेशमा पति से उलझ गई तो अयाज ने अपने दोनों हाथों से उस का गला पकड़ कर घोट दिया. कुछ ही देर में नैना की मृत्यु हो गई और वह जमीन पर गिर गई. इस के बाद अयाज घबरा गया.

लाश पहचानी न जा सके, इस के लिए अयाज पास ही पड़ा एक बड़ा सा पत्थर उठा लाया, जिस से उस ने नैना का सिर कुचल दिया. उस की स्कूटी ले जा कर उस ने मंदिर के पीछे की घनी झाडि़यों में छिपा दी. फिर कैब पकड़ कर घर आ गया.

पुलिस टीम ने 12 घंटे के अंदर केस का परदाफाश कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. उस से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उसे जयपुर की सेंट्रल जेल भेज दिया था.

निशानेबाज का अपनो पर ही निशाना

पीयूष गोयल के सूचना अफसर के रूप में तैनात थे. जबकि उन का परिवार लखनऊ में रह रहा था. परिवार में उन की पत्नी मालिनी, बेटा सर्वदत्त और बेटी दीपा थी. उन की सरकारी कोठी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास से करीब 30 मीटर दूर थी.

29 अगस्त, 2020 की बात है. 15 वर्षीय दीपा ने घबराई सी आवाज में अपनी नानी को फोन किया, ‘‘नानी जल्दी से एंबुलैंस ले कर आ जाओ, मां और भाई को चोट लगी है.’’ नानी का घर दीपा के घर से केवल 5 किलोमीटर दूर लखनऊ के गोमतीनगर में था.

दीपा की घबराई आवाज में यह सूचना पाते ही नानी चिंतित हो गईं. वह उसी समय पति विजय मिश्रा के साथ चल पड़ीं. करीब 10 मिनट में वह विवेकानंद मार्ग स्थित कोठी नंबर 9 पर पहुंच गईं.

वहां की हालत देख कर दोनों अवाक रह गए. कमरे में उन की 45 साल की बेटी मालिनी और 17 साल का नाती सर्वदत्त बैड पर खून में लथपथ पडे़ थे. दोनों की गोली मार कर हत्या की गई थी. सर्वदत्त को सिर पर गोली लगी थी, मालिनी को भी सिर के पास गोली लगी थी. वह करवट लेटी थीं. दीपा घबराई हुई थी और कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी.

नाना विजय मिश्रा ने तुरंत 112 नंबर पर डायल कर के इस की सूचना लखनऊ पुलिस को दी. इस के अलावा उन्होंने यह जानकारी दिल्ली में रह रहे अपने दामाद आरडी बाजपेई को भी दे दी. मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण पुलिस आननफानन में कोठी नंबर 9 की तरफ रवाना हुई.

कोठी नंबर 9 अंगरेजों के जमाने की सरकारी कोठी है. यह रेलवे विभाग के अधिकारियोंं को ही रहने के लिए मिलती है. लालसफेद रंग में रंगी यह आलीशान कोठी दूर से ही नजर आती है. कोठी के सामने वीवीआईपी गेस्टहाउस है. बगल में लैरोटो स्कूल है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इतने सुरिक्षत इलाके में इस घटना से सभी के होश उड़ गए. वैसे भी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की हत्या एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. ऐसे में रेलवे में काम करने वाले ब्राह्मण जाति के एक बड़े अधिकारी के आवास में दिनदहाडे़ 2-2 हत्याएं होने से राजनीति गर्म हो गई.

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने योगी सरकार में ब्राह्मण उत्पीड़न का मुद्दा उठा दिया. कांग्रेस नेता पिं्रयका गांधी ने महिलाओं के असुरक्षित होने का मुद्दा उठाया, जिस से योगी सरकार सकते में आ गई थी.

आर.डी. बाजपेई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल के सूचना अफसर के पद पर तैनात हैं. अपने अफसर के परिवार में हुए हादसे को संज्ञान में लेते हुए खुद पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फोन कर पूरे मामले की जानकारी ली.

कुछ ही देर में लखनऊ से ले कर दिल्ली तक हड़कंप मच गया. लखनऊ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू है. पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने पूरे मामले की कमान स्वयं अपने हाथों में ले ली. लखनऊ पुलिस के सब से काबिल असफरों की टीम को इस मामले के खुलासे में लगाया दिया गया.

उत्तर प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. डीसीपी (उत्तरी) शालिनी ने मामले में पूछताछ शुरू की. शनिवार-रविवार को उत्तर प्रदेश में 2 दिन का लौकडाउन होने के कारण दिल्ली से लखनऊ के बीच कोई हवाई सेवा नहीं थी. इस कारण आर.डी. बाजपेई को कार से सड़क मार्ग द्वारा लखनऊ के लिए निकलना पड़ा.

पुलिस के लिए सब से अजीब बात यह थी कि कोठी के अंदर जाने के 4 रास्ते थे. वहां आने और भागने का कोई सबूत पुलिस को नहीं दिख रहा था. घटना के समय घर में मां मालिनी, बेटा सर्वदत्त और बेटी दीपा ही मौजूद थी. उस समय दीपा बदहवास हालत में थी. घर के अंदर छानबीन से पुलिस को दीपा के बाथरूम में शीशे पर गोली चलने के निशान मिले. एक अलमारी खुली मिली. पर उस से कुछ गायब नहीं था.

बाथरूम के अंदर शीशे पर खाने वाले जैम से ‘डिसक्वालीफाइड ह्यूमन’ लिखा था. उसी जगह पर गोली मारी गई थी, जिस से शीशा टूट गया था. वहां पास ही मेज पर .22 बोर की एक पिस्टल रखी मिली. इसे ले कर पुलिस का शक दीपा पर ही गहराने लगा.

पुलिस ने जब भी दीपा से बात करनी चाही, वह दीवार की तरफ देख कर ‘भूत…भूत…’ चिल्लाने लगती थी. दीपा ने अपने दोनों हाथ अपनी पैंट की जेब में डाल रखे थे. लग रहा था जैसे वह कुछ छिपाने का प्रयास कर रही हो. वह अंगरेजी में पुलिस को जो बता रही थी, उस का अर्थ यह था कि रेशू एक भूत है. वह कई दिनों से उस के सपने में आता है. उस ने ही कहा था कि ऐसा करो. इस के बाद उस ने पिस्टल निकाली और शीशे पर ‘डिसक्वालीफाइड ह्यूमन’ लिख कर गोली मार दी.

पुलिस ने जब दीपा से हाथ खोलने को कहा तो वह मना करने लगी. ऐसे में उस के नाना विजय मिश्रा की मदद से हाथ खोला गया तो हाथ में कटने के निशान मिले, जिसे पट्टी से बांधा गया था. उस के हाथ पर 50 से अधिक घाव के निशान थे. इन में से कुछ निशान ताजा थे. दीपा ने बताया, ‘‘यह काम उस ने किया है, यह काम कोई बड़ा नहीं है. दुनिया भर में लाखों लोग ऐसा करते हैं.’’

दीपा की बातों और उस के हावभाव से उस की हालत अच्छी नहीं लग रही थी. पुलिस को यह भी पता चला कि दीपा को डिप्रेशन की बीमारी है, जिस का इलाज भी चला था. ऐसे में पुलिस उस से ज्यादा पूछताछ करने लगी. पुलिस ने उस से पूछना शुरू किया कि उस ने हाथ कैसे और किस चीज से काटे?

इस पर दीपा ने पुलिस को माचिस की डिब्बी में रखा ब्लेड दिखाया. इस के बाद पुलिस को दीपा पर ही अपने भाई और मां को गोली मारने का शक गहराया.

सारे सबूत दीपा की तरफ इशारा कर रहे थे. घटना के महज 4 घंटे के अंदर ही शाम के 7 बजे पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए दीपा को हत्या का आरोपी माना और उसे अपनी हिरासत में ले लिया.

दीपा के नाबालिग होने के कारण उसे आगे की पूछताछ के लिए थाने के बजाय उस के घर में ही रखा गया. पुलिस ने दीपा को मानसिक रूप से बीमार मान कर बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पूछताछ शुरू की. मानसिक रोग के डाक्टर और काउंसलर से भी मदद ली गई.

शाम करीब 8 बजे दीपा के पिता आर.डी. बाजपेई जब दिल्ली से लखनऊ पहुंचे तो दीपा उन से लिपट कर रोने लगी. पिता के लिए यह बेहद मुश्किल समय था. वह पत्नी और बेटे के कत्ल के आरोप में अपनी ही बेटी को देख कर कुछ भी समझ पाने की हालत में नहीं थे. दीपा के लिए उन्होंने कितने सपने संजोए थे.

वह उसे शूटिंग की दुनिया में नाम कमाते देखना चाहते थे. शूटिंग की शौकीन दीपा पदक जीतने की जगह अपने ही लोगों को निशाना बना देगी, किसी ने नहीं सोचा था.

दीपा बहुत ही काबिल निशानेबाज थी. घरपरिवार ही नहीं, शूटिंग रेंज में उसे ट्रैनिंग देने वालों को भी यकीन था कि वह निशानेबाजी में बड़ा नाम कमाएगी. निशानेबाजी मंहगा खेल है, जिस में घरपरिवार का सहयोग ही नहीं आर्थिक रूप से सक्षम होना भी जरूरी होता है. दीपा के मामले में यह अच्छी बात थी. उस के पिता रेलवे के बड़े अधिकारी थे.

बेटी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए वह हर तरह की सुविधा जुटाने में सक्षम थे. आर.डी. बाजपेई का लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर हो गया था. वह जल्दी ही बेटी और परिवार को ले कर दिल्ली जाने वाले थे, जहां दीपा को शूटिंग की अच्छी ट्रेनिंग की सुविधा मिल जाती.

लखनऊ में बेटी की अच्छी ट्रेनिंग हो सके, इस के लिए आर.डी. बाजपेई ने विवेकानंद मार्ग स्थित अपनी कोठी के पीछे 10 मीटर एयर पिस्टल की शूटिंग रेंज बनवा दी थी. दीपा केवल शूटिंग में ही अव्वल नहीं थी, उसे पेंटिंग, डांस और म्यूजिक का भी शौक था. 7वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान उस ने पेंटिग में बुक मार्क बनाने की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पुरस्कार हासिल किया था.

दीपा ने कुछ दिन शूटिंग की ट्रेनिंग दिल्ली के कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में की थी. वह अपनी मां मालिनी के ही साथ कार से दिल्ली आतीजाती थी. कभीकभी उस के पिता उसे छोड़ने आते थे.

दीपा ने 10 साल की उम्र से शूटिंग करना शुरू किया था. 2 से 3 माह में ही वह राज्य स्तर की निशानेबाज बन गई थी. इस के बाद उस ने महाराष्ट्र और कोलकाता में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था. कई पदक जीते. दीपा शूटिंग में पश्चिम बंगाल की तरफ से खेलती थी. वह आसनसोल राइफल क्लब की मेंबर भी थी.

बंगाल की राज्य निशानेबाजी प्रतियोगिता में उस ने कई पुरस्कार जीते थे. दीपा .22 की 25 मीटर स्पर्धा, 10 मीटर और 25 मीटर एयर राइफल में भी हिस्सा लेती थी. .22 की 25 मीटर स्पर्धा में जब दीपा ने राज्य स्तर पर चैंपियनशिप जीती और जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीता तो उसे अपना हथियार खरीदने का लाइसैंस मिल गया था. तभी पिता ने उस के लिए पिस्टल खरीद दी थी.

दीपा को अंगरेजी उपन्यास पढ़ने का शौक था. कई बार वह खुद में गुमसुम सी दिखती थी. पिता के दिल्ली ट्रांसफर के समय स्कूल चल रहे थे. दीपा और उस का भाई सर्वदत्त बाजपेई स्कूल में पढ़ते थे.

दीपा कक्षा 9 में थी और भाई कक्षा 12 में. बीच सत्र में दिल्ली में बच्चों के एडमिशन में दिक्कत आ रही थी, इस कारण आर.डी. बाजपेई ने सोचा था कि जुलाई से जब सत्र शुरू होगा, पत्नी और बच्चों को अपने पास दिल्ली बुला लेंगे.

इसी बीच कोविड 19 का संकट पूरे विश्व में छा गया. लौकडाउन हो जाने पर स्कूलकालेज बंद हो गए. दीपा भी अकेली पड़ गई थी. वैसे भी दीपा दोस्त कम बनाती थी. वह अपने आप में ही मस्त रहती थी. जैसेजैसे लौकडाउन खुल रहा था, घर में इस बात की खुशी थी कि जल्द ही सभी दिल्ली चले जाएंगे.

घर में दिल्ली शिफ्ट होने की तैयारियां चल रही थीं. यह सोच रहा था. पर समय का चक्र किसी दूसरी दिशा में ही घूम रहा था, जिस का अंदाजा किसी को नहीं था. समय का तूफान अपनी गति से चल रहा था.

घर में सभी लोग अपनेअपने सामान की पैकिंग करने लगे थे. दीपा ने भी अपने दोस्तों से अपने सामान की पैकिंग में मदद करने के लिए कहा था. 29 अगस्त, 2020 शनिवार को दीपा के पिता आर.डी. बाजपेई का जन्मदिन था. रात को ही परिवार ने फोन से बात कर के उन्हें बधाई दी थी.

पत्नी मालिनी और दोनों बच्चों ने भी जन्मदिन की बधाई दी. आपस में तय हुआ कि आर.डी. बाजपेई शाम को दिल्ली में अपने जन्मदिन का केक काटेंगे और लखनऊ से घरपरिवार के लोग ‘हैप्पी बर्थडे’ का गीत गाएंगे. वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए बर्थडे पार्टी का पूरी थीम तैयार हो चुकी थी.

29 अगस्त की सुबह 9 बजे मालिनी ने अपनी बेटी दीपा और बेटे सर्वदत्त के साथ नाश्ता किया. इस के बाद दीपा अपने कमरे में चली गई. मालिनी और सर्वदत्त भी एक कमरे में ही बिस्तर पर सो गए. उस दिन शाम को बर्थडे पार्टी मनानी थी, लेकिन पार्टी मनाने की जगह दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जा रहे थे.

हत्या का आरोप बेटी पर ही लगा, कोठी नंबर 9 में खुशियों की जगह मातम पसर गया. आर.डी. बाजपेई के लिए यह मुश्किल हो गया कि वह पत्नी और बेटे को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करें या बेटी को बचाने के लिए.

आर.डी. बाजपेई व्यवहारकुशल और खुशदिल अफसरों में माने जाते हैं. वह उत्तर मध्य रेलवे जोन में सीपीआरओ के पद पर भी रह चुके हैं. बाजपेई 1998 बैच के आईआरटीएस अफसर हैं. आगरा, मालदा, आसनसोल जगहों पर उन्होंने उच्च पदों पर काम किया. वह उत्तर रेलवे लखनऊ में सीनियर डीसीएम भी रहे. लखनऊ में ट्रै्रनिंग सेंटर के बाद वह रेलवे बोर्ड दिल्ली में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (इनफारमेशन) के पद पर काम कर रहे थे. उन की लोकप्रियता पूरे विभाग में थी.

आर.डी. बाजपेई ने अपनी छवि के अनुकूल नाजुक हालत में भी बेहद समझदारी भरा फैसला लेते हुए बेटी का साथ देना स्वीकार किया. बेटी को दोष देने की जगह वह उस के डिप्रेशन को ही गुनहगार मान रहे थे. 30 अगस्त को जब पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने मालिनी और बेटे सर्वदत्त का शव अंतिम क्रिया के लिए उन्हें सौंपा तो कलेजे पर पत्थर रख कर उन्होंने उन का दाहसंस्कार किया.

इस के बाद भी वह बेटी को हत्यारा मानने को तैयार नहीं थे. लखनऊ पुलिस में आर.डी. बाजेपई ने अपनी पत्नी और बेटे की हत्या के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई.

उधर पुलिस ने दीपा को हत्या का आरोपी मान कर उसे इलाज के लिए लखनऊ मैडिकल कालेज में भरती कराया. यहां से डाक्टरों की राय पर उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया.

पुलिस का दावा है कि दीपा मानसिक रूप से बीमार थी. उस का पहले इलाज भी चला था. लौकडाउन के समय उस ने भूतप्रेतों और अंधविश्वास के उपन्यास पढ़े, जिस से उस के मन में भूत की कहानियों ने घर बना लिया था, उसे लगता था कि उस के सपने में भूत आता है. वह जैसा कहता है, वह वैसा ही करती थी.

भूतप्रेत की कहानियां बच्चों के मन पर किस तरह से असर डालती हैं, लखनऊ का डबल मर्डर इस की मिसाल है. दीपा को लगता था कि रेशू नाम का भूत उस के सपने में आ कर उसे गाइड करता है. अपनी मां और भाई की हत्या के बाद भी दीपा कह रही थी कि ‘रेशू केम….एंड गाइड मी’.

रेशू तो नहीं आया पर दीपा अपना सुनहरा भविष्य और अपनी मांभाई को हमेशा के लिए खो बैठी है. इस घटना से पता चलता है कि भूतप्रेत की बात करना और उन की उपस्थिति को मानना एक तरह से मानसिक बीमारी है.

जब दीपा ने खुद अपने हाथ की नस काटनी शुरू की थी मानसिक बीमारी की वह खतरनाक अवस्था थी. उस समय अगर दीपा का उचित इलाज कराया गया होता तो अंत इतना खतरनाक नहीं होता.

—कहानी में नाबालिग दीपा की पहचान छिपाने के कारण उस का नाम बदला हुआ है.

सौजन्य: सत्यकथा, सितंबर 2020

मौत का आशीर्वाद : ससुर बना दामाद का हत्यारा

प्रेम सिंह खेतीकिसानी के अलावा एक बैंक के एटीएम पर गार्ड की नौकरी भी करते थे. परिवार में पत्नी रमा एक बेटी रिंकी और 2 बेटे अंकित व अमित थे.

भाइयों की एकलौती बहन थी रिंकी. चंचल स्वभाव की रिंकी पढ़ाई में तेज थी. वह पढ़लिख कर पुलिस में जाना चाहती थी. पढ़ाई के बाद जब भी समय मिलता तो वह टीवी से चिपक जाती. रिंकी को फिल्म देखने का शौक था. वह टीवी पर आने वाली सभी फिल्में देखती थी. फिल्मों और फिल्मों के गानों का रिंकी पर इतना प्रभाव पड़ा कि वह अपने आप को किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं समझती थी.

चूंकि फिल्मों में प्यारमोहब्बत को हमेशा महिमामंडित किया जाता है, इसलिए रिंकी को भी किसी ऐसे युवक की तलाश थी जो फिल्मी हीरो की तरह उस के सामने प्यारमोहब्बत का प्रस्ताव रखे. उसे चाहे, उसे सराहे. उस के हुस्न की तारीफ करे और उस की याद में तड़पे.

रिंकी के घर से 200 मीटर की दूरी पर मनीष का घर था. मनीष के पिता विश्वनाथ सिंह लोधी खेतीकिसानी करते थे. मनीष का एक छोटा भाई था मंदीप जो बीए की पढ़ाई कर रहा था.

मनीष भी पढ़ाई में तेज था. वह भी पुलिस विभाग में जाना चाहता था. इसी उद्देश्य से वह अपनी पढ़ाई में जी जान से जुटा रहता था. रिंकी की तरह मनीष को भी फिल्मों का जबरदस्त शौक था. पढ़ाई के दौरान वह मनोरंजन के लिए कुछ समय निकाल लेता था.

मनीष पहनावे से संभ्रांत युवक नजर आता था. शरीर पर भी वह विशेष ध्यान देता था. हमेशा फैशनेबल कपड़े पहनता था. मनीष को भी पागलपन की हद तक फिल्में देखने का शौक था. उस के मोबाइल का मेमोरी कार्ड फिल्मों से भरा रहता था. बड़ी स्क्रीन के मोबाइल पर वह जब चाहे अपनी मनपसंद फिल्म देख लेता था. उस पर फिल्मों का असर  इस हद तक था कि उस का बात करने और चलने का स्टाइल भी फिल्मी हो गया था.

मनीष उम्र के उस मोड़ पर था, जहां स्वभाव में आशिकी अपने आप शामिल हो जाती है. मनीष भी इस का अपवाद नहीं था. लव स्टोरी वाली फिल्में देखदेख कर उस का मिजाज भी आशिकाना हो गया था.

मनीष का रिंकी के घर आनाजाना था. दोनों परिवार सजातीय थे. दोनों के घरवाले एकदूसरे के घर आतेजाते थे. रिंकी और मनीष अलगअलग कालेज में पढ़ते थे, फिर भी पढ़ाई को ले कर उन के बीच खूब बातचीत होती रहती थी.

दोनों की आदतें, शौक और विचार मेल खाते थे. पढ़ाई के साथसाथ दोनों के बीच फिल्मों को ले कर भी बातचीत होती थी. दोनों एक ही शौक के शिकार थे. दोनों घंटों बैठ कर बातें करते रहते, जिन में आधी बातें फिल्मों की होती थीं. एक जैसी रूचि के चलते दोनों काफी समय साथसाथ बिताते थे.

इंटरमीडिएट कर के दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लग गए. पुलिस विभाग में भरती होती तो दोनों ही फार्म भरते और साथसाथ पेपर देने जाते. साथ समय बिताने और बाहर जा कर घूमते. इसी सब के चलते दोनों एकदूसरे के करीब आने लगे. वैसे भी हर मामले में दोनों के बीच समानताएं थीं. ऐसे में दोनों के दिल कब तक करीब आने से बच पाते.

समय के साथ दोनों को एकदूसरे का संग खूब भाने लगा था. दोनों साथसाथ रोमांटिक मूवी भी देखते. फिर फिल्म के कलाकारों की नकल करते, उन के डायलौग बोलते और उसी अंदाज में एकदूसरे को बांहों में भर कर आंखों में आंखें डाल कर उसी तरह बोलते जैसे फिल्म में कलाकार करते हैं. इस से दोनों एकदूसरे के काफी नजदीक आ गए थे.

दोनों एकदूसरे के दिल की धड़कनों की आवाज और सांसों की सरगम को बखूबी महसूस करते थे. दोनों को नजदीकियां अच्छी लगने लगी थीं. जब वे नजदीक होते तो अलग होने की बात को दिमाग में आने ही नहीं देते थे. लेकिन मजबूर हो कर उन्हें एकदूसरे से अलग होना ही पड़ता. फिल्मी कलाकारों के लव सीन की ऐक्टिंग करतेकरते दोनों एकदूसरे से प्यार कर बैठे. अब प्यार का इजहार बाकी था.

एक दिन लव सीन की ऐक्टिंग करतेकरते मनीष ने रिंकी को अपनी बांहों में लिया तो फिल्म के डायलौग न बोल कर उस ने अपने दिल की बात कहनी शुरू कर दी, ‘‘रिंकी, देखता तो मैं तुम्हें बचपन से आया हूं. लेकिन जब से हम ऐक्टिंग के जरिए एकदूसरे के नजदीक आए हैं, तब से मैं ने तुम्हें बेहद करीब से देखा. अब ये नजरें तुम्हारे सिवा कुछ और देखना ही नहीं चाहतीं.

‘‘तुम्हारी झील सी आंखों की गहराइयों में डूब कर तुम्हारे दिल का हाल जाना तो लगा कि तुम्हारा दिल भी मेरे पास आना चाहता है. इस बात की गवाही तुम्हारे दिल की धड़कनें देती हैं.

‘‘मैं तो तुम्हें दिलोजान से चाहता हूं. मुझे अपने प्यार पर भी पूरा भरोसा है कि वह मुझे बेइंतहा चाहता है, बस देर है तो उसे तुम्हारी जुबां से कुबूल करने की.’’

रिंकी तो जैसे उस के प्रेम से सराबोर हो गई और उस की आंखों में देखती हुई फिल्मी स्टाइल में बेसाख्ता बोली, ‘‘कुबूल है…कुबूल है…कुबूल है मेरे महबूब.’’

यह सुन कर मनीष की खुशी का ठिकाना न रहा. उस ने रिंकी को अपने सीने से लगा लिया और बोला, ‘‘आई लव यू…आई लव यू रिंकी.’’

उस के प्यार भरे शब्द रिंकी के कानों में रस घोल रहे थे. उसे मीठा सुखद एहसास हुआ तो उस ने अपनी आंखें बंद कर लीं और मनीष के कंधे पर सिर रख दिया. काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में बैठे रहे. बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे खिले हुए थे.

इस के बाद तो रिंकी और मनीष की तूफानी मोहब्बत तेजी के साथ बुलंदियों की तरफ बढ़ने लगी.

सन 2018 में रिंकी का चयन पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर हो गया. इटावा में टे्रनिंग के बाद उस की पोस्टिंग उरई (जालौन) के थाना रमपुरा में हुई. उरई में वह शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला शिवपुरी में किराए का कमरा ले कर रहने लगी.

दूसरी ओर मनीष बीसीए करने के बाद एलएलबी कर रहा था. उस ने पुलिस विभाग में भरती का फार्म भरा था, जिस का पेपर देने वह कानपुर गया. पेपर देने के बाद वह वहां से घर जाने के बजाय रिंकी के पास उरई चला गया. दोनों में फोन पर बात कर के तय कर लिया था कि मनीष पेपर दे कर कानपुर से सीधे उरई आ जाएगा. मनीष रिंकी के साथ उसी के कमरे पर रहने लगा.

रिंकी को पता था कि उस के पिता प्रेम सिंह गुस्सैल स्वभाव के है. वह उस की मरजी के बजाय उस की शादी अपनी मरजी से कराएंगे. इसलिए उन्हें बिना बताए रिंकी ने मनीष से शादी करने का फैसला कर लिया. 8 फरवरी, 2019 को 2 रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों ने उरई के राधाकृष्ण मंदिर में विवाह कर लिया.

रिंकी के विवाह कर लेने की बात पिता प्रेम सिंह को लगी तो वह आगबबूला हो उठा.

उस ने मनीष के घर जा कर उस के पिता विश्वनाथ सिंह को खूब खरीखोटी सुनाई और मरनेमारने पर उतारू हो गया. उस ने मनीष के पिता विश्वनाथ से कहा कि जिस तरह उस के बेटे ने उस की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया है. उसी तरह भविष्य में एक दिन वह भी उस के परिवार की लड़की की ऐसे ही बिना मरजी के शादी करवा कर मानेगा. गांव वालों ने जैसेतैसे दोनों का बीचबचाव किया.

प्रेम सिंह को लगता था कि रिंकी ने अपनी मरजी से शादी कर के गांव में उस की नाक कटवा दी है.

इस में वह मनीष को दोषी मान रहा था कि उस ने ही रिंकी को बरगलाया होगा. जब बेटी कमाने लायक हुई तो अपनी मरजी से शादी कर के घर से दूर हो गई.

हालांकि रिंकी घर नहीं जाती थी लेकिन अपने वेतन में से कुछ रकम घर भेज दिया करती थी. जब रिंकी 7 माह की गर्भवती हुई तो उस ने मातृत्व अवकाश ले लिया, जिस से बच्चे की डिलीवरी और उस की देखभाल अच्छी तरह से हो सके.

घर में नए मेहमान के आने की खुशी में दोनों खुश थे. रिंकी ने जो चाहा था, वह उसे सब मिल रहा था. पहले पुलिस में नौकरी, जिसे चाहा उस का जीवन भर का साथ और अब उस के प्यार की निशानी जिंदगी में आने वाली थी. रिंकी मनीष को अपनी जान से भी ज्यादा चाहती थी. उस के आने से ही उस की जिंदगी में खुशी के रंग बिखरे थे.

इसी साल अपै्रल में रिंकी ने बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम दोनों ने शिवाय रखा. समय कुछ आगे बढ़ा तो दोनों शिवाय के मुंडन संस्कार की तैयारी करने लगे. इस वजह से रिंकी ने घर पैसा भेजना बंद कर दिया.

दूसरी ओर प्रेम सिंह पहले से ही जलाभुना बैठा था. वह समय की ताक में था. माथे पर लगा बदनामी का दाग प्रेम सिंह को दिनरात चैन नहीं लेने देता था. प्रेम सिंह ने अपने साले देशराज सिंह को घर बुला कर इस मुद्दे पर बात की, उस समय प्रेम सिंह का बेटा अंकित भी मौजूद था.

देशराज फतेहपुर के थाना हुसैनगंज क्षेत्र के गांव सुखपुर का निवासी था. करीब 6 साल पहले उस ने गौसपुर में ही मकान बनवा लिया था. वह अपनी मां के साथ रहता था. उस की पत्नी और बच्चे उस के साथ नहीं रहते थे. देशराज अपराधी किस्म का था, वह कई बार जेल भी जा चुका था.

प्रेम सिंह ने अपने बेटे अंकित और साले देशराज के साथ मिल कर मनीष और रिंकी की हत्या की योजना बनाई. प्रेम सिंह के मन में दोनों के लिए इतनी नफरत थी कि वह दोनों को जिंदा नहीं देखना चाहता था.

योजनानुसार 22 अगस्त को अंकित अपनी बहन रिंकी के घर गया. भाई अंकित को घर आया देख रिंकी बहुत खुश हुई कि वह  उस से मिलने और अपने भांजे को देखने आया है.

जबकि अंकित वहां रेकी करने आया था. सारी स्थिति का मुआयना करने के बाद चलते समय उस ने रिंकी से मोबाइल खरीदने के लिए 10 हजार रुपए मांगे. रिंकी ने उसे 4 हजार रुपए दिए और कहा कि इस समय उस के पास इस से ज्यादा पैसे नहीं है.

अंकित उन रुपयों को ले कर वहां से चला आया. आ कर उस ने अपने पिता और मामा देशराज को सारी स्थिति से अवगत करा दिया.

27 अगस्त की शाम साढ़े 7 बजे प्रेम सिंह, देशराज और अंकित रिंकी के शिवपुरी वाले किराए के कमरे पर पहुंचे. पिता, मामा और भाई को एक साथ घर आया देख रिंकी खुशी से फूली नहीं समाई.

वह उन के लिए खाना बनाने के लिए किचन में चली गई. उस समय मनीष बेटे शिवाय को बैड पर लिटा कर दूध पिला रहा था. रिंकी के किचन में जाते ही प्रेम सिंह ने देशराज को इशारा किया तो देशराज ने किचन में जा कर रिंकी को दबोच लिया.

इधर प्रेम सिंह ने अंकित के साथ मिल कर मनीष को दबोच लिया. साथ में लाए 2 चाकुओं से दोनों ने मनीष के पेट पर ताबड़तोड़ प्रहार करने शुरू कर दिए. बेदर्दी से वार करते हुए प्रेम सिंह का चाकू तक टूट गया. मनीष की चीखों से कमरा और आसपास के लोग दहल उठे.

रिंकी यह सब देख कर बदहवास हालत में चीखनेचिल्लाने लगी. शोर सुन कर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए. तब तक मनीष की हत्या की जा चुकी थी. अपने आप को लोगों से  घिरा देख कर तीनों ने भागने की कोशिश नहीं की. तीनों कमरे में ही बैठ गए. उन्हें रिंकी को मारने का मौका नहीं मिला.

इसी बीच किसी पड़ोसी ने घटना की सूचना शहर कोतवाली को दे दी. सूचना पा कर इंसपेक्टर जे.पी. पाल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. तीनों हत्यारों को हिरासत में लेने के बाद उन्होंने लाश का निरीक्षण किया.

मनीष के पेट पर लगभग 15-16 घाव थे. पास में ही 2 रक्तरंजित चाकू पड़े थे, जिन्हें इंसपेक्टर पाल ने अपने कब्जे में ले लिया. प्रेम सिंह और अंकित के चेहरे व हाथ पर खून के निशान मौजूद थे, जो उन की करनी की गवाही दे रहे थे.

आवश्यक पूछताछ के बाद इंसपेक्टर जे.पी. पाल ने बदहवास रिंकी को उस के बच्चे के साथ उरई में ही एक रिश्तेदार के यहां भेज दिया. इस के बाद उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया और कमरे को सील कर के तीनों हत्याभियुक्तों को साथ ले कर कोतवाली आ गए.

कोतवाली आ कर उन्होंने रिंकी को वादी बना कर प्रेम सिंह लोधी, देशराज सिंह लोधी और अंकित सिंह लोधी के खिलाफ भादंवि की धारा 302/34 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अगले दिन 28 अगस्त को तीनों हत्याभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक केस से संबंधित सभी साक्ष्य पुलिस द्वारा संकलित किए जा चुके थे. जल्द ही आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर देने की बात पुलिस द्वारा कही जा रही थी.

एक ससुर द्वारा दामाद को दिया जाने वाला ‘मौत का आशीर्वाद’ की चर्चा चारों ओर फैल चुकी थी. लोग उस के कुकृत्य पर उसे कोस रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य: सत्यकथा, सितंबर 2020

शिवानी भाभी : पति की कातिल

सिंहराज को शराब पीने की लत थी. उस की इसी लत के चलते उस के दोस्त देवेंद्र ने घर आना शुरू किया. उस की कुछ ही देर पहले शिवानी का अपने पति सिंहराज से झगड़ा हुआ था. वह आज की बात नहीं थी, हर रोज का वही हाल था. सिंहराज एक नंबर का पियक्कड़ था. आज फिर सुबह होते ही अद्धा ले कर बैठ गया था. शिवानी ने उसे टोका लेकिन वह कहां मानने वाला था. कुछ देर तक तो वह पत्नी की बातें सुनता रहा, मगर 2-4 पैग हलक से नीचे उतरते ही उस का दिमाग घूम गया. बिना कुछ कहे उस ने शिवानी की चोटी पकड़ कर उसे रुई की भांति धुन दिया. फिर अद्धा बगल में दबाए घर के बाहर चला गया.

28 वर्षीय सिंहराज सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर  जनपद के थाना चांदपुर के बागड़पुर गांव में रहता था. वह चांदपुर के एक ज्वैलर की गाड़ी चलाता था. उस के पिता किसान थे. भाईबहन सभी शादीशुदा थे और अपनेअपने परिवारों के साथ अलगअलग रहते थे.

सिंहराज सिंह का विवाह लगभग 4 वर्ष पूर्व पड़ोस के गांव केलनपुर निवासी शिवानी से हुआ था. शिवानी बीए पास थी. सुंदर पत्नी पा कर हाईस्कूल पास सिंहराज फूला नहीं समाया. आम नवविवाहितों की तरह उन दोनों के दिन सतरंगी पंख लगाए उड़ने लगे.

खूबसूरत बीवी पा कर सिंहराज खुद को दुनिया का सब से खुशनसीब व्यक्ति समझने लगा था. एक बेटी ने उस के घर जन्म ले कर उस की बगिया को महका दिया.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि वक्त ने करवट बदली. नौकरी से सिंहराज सिंह की इतनी आमदनी हो जाती थी कि दालरोटी चल सके. दिक्कत उस समय होने लगी, जब उसे शराब की लत लग गई.

शिवानी कुशल गृहिणी थी. कम आमदनी में ही उसे गृहस्थी चलाना  आता था, परंतु पति की शराब पीने की लत ने घर के बजट को गड़बड़ा दिया. फलस्वरूप शिवानी परेशान रहने लगी. उस ने पति को हर तरीके से समझाना चाहा. बेटी की भी दुहाई दी, लेकिन सिंहराज को बीवीबेटी से ज्यादा शराब प्यारी थी.

सिंहराज सुधरा तो नहीं, उलटे शिवानी की सीख ने उसे ढीठ जरूर बना दिया. परिणाम यह हुआ कि पहले केवल शाम को पीने वाला सिंहराज अब दिनरात शराब में डूबा रहने लगा. उसे न बीवी की फिक्र सताती, न ही बेटी की चिंता. वेतन के सारे पैसे वह बोतलों में ही गर्क कर देता.

वह नशे में इतना डूब चुका था कि नौकरी में भी लापरवाही बरतने लगा. पैसों की किल्लत होती तो घर के कीमती बरतन व कपड़े शराब की भेंट चढ़ जाते. शिवानी रोकती तो बुरी तरह पिटती. वह अपनी बदकिस्मती पर आंसू बहा कर रह जाती. बागड़पुर में ही रहता था देवेंद्र उर्फ बच्चू. वह अविवाहित था और अपने पिता सूरज सिंह के साथ खेती में हाथ बंटाता था. देवेंद्र और सिंहराज में दोस्ती थी. इसलिए देवेंद्र का सिंहराज के घर आनाजाना था.

देवेंद्र ही वह शख्स था, जिसे शिवानी से हमदर्दी थी. उस ने भी सिंहराज को शराब छोड़ने और गृहस्थी पर ध्यान देने की सलाह दी थी, लेकिन उस ने सारी नसीहत एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल दी थी. मियांबीवी के झगड़े की वजह से देवेंद्र कभीकभार ही सिंहराज के घर चला जाता था.

उस रोज भी देवेंद्र कई दिनों बाद सिंहराज के घर गया था. उस के पहुंचने से कुछ देर पहले ही सिंहराज शिवानी को पीट कर बाहर गया था. जब वह पहुंचा तो शिवानी रो रही थी. उस की नजर जैसे ही देवेंद्र पर पड़ी, वह अपने आंसू पोंछने लगी. फिर मुसकराने का प्रयास करते हुए बोली, ‘‘अरे तुम, आज यहां का रास्ता कैसे भूल गए?’’

‘‘सच पूछो भाभी तो आज भी नहीं आता,’’ देवेंद्र ने शिवानी की नम आंखों में झांकते हुए कहा, ‘‘मगर तुम्हारा दर्द मुझ से नहीं देखा जाता, इसलिए आ जाता हूं. लगता है सिंहराज अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा.’’

‘‘किसी को क्या दोष देना देवेंद्र, जब अपनी ही किस्मत खोटी हो.’’

देवेंद्र और शिवानी हमउम्र थे और एकदूसरे की भावनाओं से अच्छी तरह परिचित थे. शिवानी जहां देवेंद्र की सादगी और भोलेपन पर फिदा थी, वहीं देवेंद्र उस की कोमल काया पर मोहित था.

शिवानी का पोरपोर जवानी से लबालब था. उस के तीखे नैननक्श एवं कटीली मुसकान किसी को भी घायल कर देने में समर्थ थी. लेकिन शराबी सिंहराज को प्यालों की गहराई मापने से फुरसत नहीं थी, वह पत्नी की आंखों के राज क्या समझता.

दूसरी ओर शिवानी की जिस्मानी ख्वाहिश पूरे जलाल पर थी. ऐसे में उस का झुकाव देवेंद्र की ओर होने में ज्यादा समय नहीं लगा. इधर देवेंद्र की हालत भी शिवानी से जुदा नहीं थी.

उस दिन शिवानी का रोना देख कर देवेंद्र तड़प उठा. उस ने भावावेश में शिवानी का हाथ पकड़ कर कहा,‘‘ऐसा न कहो भाभी, मैं सारी दुनिया की बातें तो नहीं जानता, लेकिन अपनी गारंटी देता हूं यदि तुम साथ दो तो सारी जिंदगी तुम पर वार दूंगा.’’

यह सुनना था कि शिवानी देवेंद्र से लिपट कर जारजार रोने लगी. देवेंद्र उसे कस कर भींचते हुए बोला,‘‘असल में, तुम गलत आदमी से बंध गई…खैर, अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, तुम चाहो तो फिर से सब कुछ बदल सकता है.’’

शिवानी ने कुछ कहने के बजाय देवेंद्र को चूम लिया. शिवानी के चूमते ही देवेंद्र उसे किसी बावले की तरह यहांवहां चूमने लगा. शिवानी उस के अनाड़ीपने पर रोतेरोते मुसकरा उठी. उस ने खुद को देवेंद्र से अलग करते हुए पहले दरवाजा बंद किया, फिर मुसकरा कर हाथ पकड़ा और उसे अंदर के कमरे में ले गई.

कामना की आंच में देवेंद्र की कनपटियां सनसना रही थीं. शिवानी ने पहले देवेंद्र के कपड़े उतारे, फिर खुद भी बेलिबास हो गई. देवेंद्र शिवानी का तराशा हुआ बदन देख चकित रह गया.

शिवानी देवेंद्र की हालत देख कर मंदमंद मुसकराने लगी. फिर धीरेधीरे दोनों के बदन एकदूसरे से गुंथते गए और फिर उन के दरमियान सारे फासले मिट गए.

दोनों अलग हुए तो बहुत खुश थे. उन्होंने बदकिस्मती को धता बताते हुए अपने रिश्ते की नई बुनियाद रखी थी.

उस दिन के बाद देवेंद्र और शिवानी की दुनिया ही बदल गई. दोनों पतिपत्नी का सा व्यवहार करने लगे.

अब देवेंद्र शिवानी का तो खयाल रखता ही, उस की घरगृहस्थी का खर्च भी उठाने लगा.

शिवानी की बेजान दुनिया में फिर से जीवन लौट आया. अब बढि़या खाना पकता और सिंहराज के साथ देवेंद्र भी उस के साथ जम कर भोजन करता.

ऐसी बात नहीं कि सिंहराज देवेंद्र और शिवानी के रिश्तों से अंजान था, उसे सब कुछ पता था, लेकिन वह यही सोच कर खुश था कि उसे अब कोई शराब पीने से नहीं रोकता था, बल्कि पैसे कम पड़ने पर देवेंद्र उस की मदद ही कर दिया करता था. इन सब की एवज में सिंहराज ने देवेंद्र और शिवानी के रिश्ते को मौन स्वीकृति दे दी थी.

15 मार्च की सुबह धनौरा मार्ग पर मिर्जापुर गांव के पास एक अज्ञात युवक की लाश पड़ी थी. गांव के लोगों ने देखा तो इस की सूचना चांदपुर थाने को दे दी.

सूचना पा कर थाने से इंसपेक्टर लव सिरोही पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. मृतक की उम्र लगभग 25 से 30 वर्ष के बीच रही होगी.

उस के सिर के पिछले हिस्से में गहरा घाव था, जिस से खून काफी बहा था. किसी भारी ठोस वस्तु से प्रहार कर के उसे मौत के घाट उतारा गया प्रतीत हो रहा था. घटनास्थल का निरीक्षण करने पर कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा.

इंसपेक्टर सिरोही ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करने को कहा तो पता चला कि मृतक बागड़पुर गांव का सिंहराज सिंह है.

पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना भेजी तो परिजन वहां पहुंच गए. शिवानी पति की लाश के पास बैठ कर फूटफूट कर रोने लगी. सिंहराज के भाई सुशील ने अपने भाई की लाश की शिनाख्त कर ली. शिनाख्त होने के बाद इंसपेक्टर सिरोही ने आवश्यक पूछताछ की, उस के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी.

थाने वापस आ कर सुशील की लिखित तहरीर पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

केस की जांच शुरू करते हुए इंसपेक्टर सिरोही ने सब से पहले मृतक सिंहराज की पत्नी शिवानी से पूछताछ की तो शिवानी ने बताया कि सिंहराज के किसी युवती से अवैध संबंध थे.

वह नशे का आदी था. नशे में वह उसे मारतापीटता था. सिंहराज हाईस्कूल पास था और वह बीए पास थी. इस के बावजूद भी वह अपनी गृहस्थी को बचाने के लिए उस के साथ निभा रही थी. किसी ने भी उसे मारा हो, लेकिन उस के मरने से मुझे जिंदगी में सुकून मिल गया.

इंसपेक्टर सिरोही को उस की बातों में अपने पति के लिए बेपनाह नफरत की झलक मिली थी. इसलिए उन का शक शिवानी पर गया. इस के बाद उन्होंने शिवानी से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. उस के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो शिवानी के नंबर पर एक नंबर से काफी काल होने का पता चला.

उस नंबर की जानकारी की गई तो वह  बागड़पुर गांव के देवेंद्र का निकला. देवेंद्र की जानकारी जुटाई तो पता चला कि देवेंद्र की दोस्ती मृतक सिंहराज से थी, देवेंद्र का उस के घर काफी आनाजाना था.

एक बार फिर इंसपेक्टर सिरोही ने शिवानी से पूछताछ की तो वह गोलमोल जबाव देने लगी. इंसपेक्टर सिरोही ने शिवानी का मोबाइल ले कर उस की जांच की तो पता चला कि वाट्सऐप पर शिवानी और देवेंद्र द्वारा एकदूसरे को भेजे गए फोटो डिलीट किए गए थे.

मोबाइल की गैलरी की जांच करने पर उस में शिवानी के जींस पहने कई फोटो देवेंद्र के साथ मिले, जिस के बाद इंसपेक्टर सिरोही ने शिवानी को हिरासत में ले लिया और थाने आ गए. वहां महिला कांस्टेबल की मौजूदगी में उस से कड़ाई से पूछताछ की तो शिवानी टूट गई. उस ने अपने प्रेमी देवेंद्र द्वारा अपने पति की हत्या करवाने की बात स्वीकार कर ली. इस के बाद देवेंद्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

सिंहराज की मूक सहमति पाते ही देवेंद्र और शिवानी की बांछें  खिल उठी थीं. शराब के नशे ने सिंहराज को बेगैरत बना दिया था, लेकिन एक दिन नशे की हालत में सिंहराज की गैरत जाग उठी. उस ने शिवानी को टोका, ‘‘शिवानी, बस बहुत हो चुका रासरंग अब और नहीं… आज के बाद तुम देवेंद्र से कोई रिश्ता नहीं रखोगी. बेहयाई की भी हद होती है.’’

सिंहराज के इस बदले हुए रूप ने शिवानी को हैरान कर दिया. उस ने पूछा,‘‘आज अचानक क्या हुआ तुम को?’’

सिंहराज शिवानी को घूर कर बोला,‘‘क्यों, समझ नहीं आ रहा क्या, या बेगैरती ने तुम्हारा भेजा चाट लिया है?’’

‘‘गैरत और बेगैरती की बातें तुम्हारे मुंह से अच्छी नहीं लगतीं. अच्छा होगा, अब इस मामले में न ही पड़ो,’’ आवेश में शिवानी की सांसें फूलने लगी थीं. क्षण भर रुक कर वह पुन: बोली, ‘‘जरा सोचो, बेगैरती का यह रास्ता मुझे किस ने दिखाया? तुम ने… अगर तुम अच्छे पति, बढि़या पिता और सच्चे इंसान होते तो मैं राह क्यों भटकती? अब कुछ भी नहीं हो सकता, क्योंकि अब तीर कमान से निकल चुका है.’’

‘‘मैं कुछ सुनना नहीं चाहता, आइंदा वही होगा, जो मैं चाहूंगा.’’ सिंहराज ने कड़े शब्दों में कहा.

‘‘असंभव, अब ऐसा नहीं हो सकता.’’ शिवानी के दो टूक जबाव से सिंहराज पागल हो उठा.

वह चीखते हुए उस पर झपटा,‘‘ठहर मैं अभी बताता हूं कि क्या हो सकता है और क्या नहीं हो सकता.’’

सिंहराज ज्यों ही शिवानी को पीटने दौड़ा, संयोग से तभी देवेंद्र वहां आ गया. पल भर में उस ने सारा माजरा समझ लिया और आगे बढ़ कर उस ने सिंहराज को धक्का दे कर गिरा दिया.

अचानक लगे धक्के से सिंहराज चारों खाने चित गिर गया. उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. खड़े होते हुए बोला,‘‘देवेंद्र खबरदार… जो हम दोनों के बीच आए…तुम्हारा सिर तोड़ दूंगा.’’

इतना सुनना था कि देवेंद्र सिंहराज पर टूट पड़ा. मुक्कों और लातों से उस की बुरी गत बना दी. जिंदगी भर पति से पिटने वाली शिवानी ने जब पति को पिटते देखा, तब उस के प्रतिशोध ने भी सिर उठा लिया. उस ने भी देवेंद्र के साथ पति सिंहराज पर हाथ आजमाए.

उस दिन की पिटाई पर सिंहराज ने दोनों को धमकी दी कि वह दोनों को अब जिंदा नहीं छोडे़गा. उस की इस धमकी ने शिवानी और देवेंद्र को सोचने पर मजबूर कर दिया. वह दोनों जानते थे कि सिंहराज नशे और गुस्से में कुछ भी कर सकता है. इसलिए दोनों ने सिंहराज के कुछ करने से पहले ही उसे खत्म करने का फैसला कर लिया. इस के लिए दोनों ने योजना बनाई.

14 मार्च, 2020 की शाम भी सिंहराज नशे में धुत था. योजना के तहत देर रात उसे देवेंद्र ने बहाने से गांव के बाहर बुलाया. उस के आने पर देवेंद्र ने चारा काटने वाली मशीन के हत्थे से उस पर वार किया.

सिंहराज बच कर भागा तो देवेंद्र ने उस का पीछा किया. लगभग 100 मीटर की दूरी पर सिंहराज की जैकेट को पीछे से देवेंद्र ने पकड़ कर उसे रोका और पीछे से ही मशीन के लोहे के हत्थे से उस के सिर के पिछले हिस्से पर वार कर दिया, जिस से सिंहराज जमीन पर गिर कर कुछ देर तड़पा, फिर मौत के आगोश में समा गया. सिंहराज की मौत की सूचना शिवानी को देने के बाद देवेंद्र अपने घर चला गया.

लेकिन दोनों पुलिस के शिकंजे से बच न सके. अभियुक्त देवेंद्र की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का हत्था पुलिस ने बरामद कर लिया. फिर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शिवानी और देवेंद्र को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्यसत्यकथा, जून 2020

पति की दूरी ने बढ़ाया यार से प्यार

घटना मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र की है. 17 मार्च, 2019 की दोपहर 2 बजे का समय था. इस समय अधिकांशत:
घरेलू महिलाएं आराम करती हैं. ग्वालियर के पुराने हाईकोर्ट इलाके में स्थित शांतिमोहन विला की तीसरी मंजिल पर रहने वाली मीनाक्षी माहेश्वरी काम निपटाने के बाद आराम करने जा रही थीं कि तभी किसी ने उन के फ्लैट की कालबेल बजाई. घंटी की आवाज सुन कर वह सोचने लगीं कि पता नहीं इस समय कौन आ गया है.बैड से उठ कर जब उन्होंने दरवाजा खोला तो सामने घबराई हालत में खड़ी अपनी सहेली प्रीति को देख कर वह चौंक गईं. उन्होंने प्रीति से पूछा, ‘‘क्या हुआ, इतनी घबराई क्यों है?’’
‘‘उन का एक्सीडेंट हो गया है. काफी चोटें आई हैं.’’ प्रीति घबराते हुए बोली.‘‘यह तू क्या कह रही है? एक्सीडेंट कैसे हुआ और भाईसाहब कहां हैं?’’ मीनाक्षी ने पूछा.‘‘वह नीचे फ्लैट में हैं. तू जल्दी चल.’’ कह कर प्रीति मीनाक्षी को अपने साथ ले गई.
मीनाक्षी अपने साथ पड़ोस में रहने वाले डा. अनिल राजपूत को भी साथ लेती गईं. प्रीति जैन अपार्टमेंट की दूसरी मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 208 में अपने पति हेमंत जैन और 2 बच्चों के साथ रहती थी.
हेमंत जैन का शीतला माता साड़ी सैंटर के नाम से साडि़यों का थोक का कारोबार था. इस शाही अपार्टमेंट में वे लोग करीब साढ़े 3 महीने पहले ही रहने आए थे. इस से पहले वह केथ वाली गली में रहते थे. हेमंत जैन अकसर साडि़यां खरीदने के लिए गुजरात के सूरत शहर आतेजाते रहते थे. अभी भी वह 2 दिन पहले ही 15 मार्च को सूरत से वापस लौटे थे.
मीनाक्षी माहेश्वरी डा. अनिल राजपूत को ले कर प्रीति के फ्लैट में पहुंची तो हेमंत की गंभीर हालत देख कर वह घबरा गईं. पलंग पर पड़े हेमंत के सिर से काफी खून बह रहा था. वे लोग हेमंत को तुरंत जेएएच ट्रामा सेंटर ले गए, जहां जांच के बाद डाक्टरों ने हेमंत को मृत घोषित कर दिया.
पुलिस केस होने की वजह से अस्पताल प्रशासन द्वारा इस की सूचना इंदरगंज के टीआई को दे दी. इस दौरान प्रीति ने मीनाक्षी को बताया कि उसे एक्सीडेंट के बारे में कुछ नहीं पता कि कहां और कैसे हुआ.
प्रीति ने बताया कि वह अपने फ्लैट में ही थी. कुछ देर पहले हेमंत ने कालबेज बजाई. मैं ने दरवाजा खोला तो वह मेरे ऊपर ही गिर गए. उन्होंने बताया कि उन का एक्सीडेंट हो गया. कहां और कैसे हुआ, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया और अचेत हो गए. हेमंत को देख कर मैं घबरा गई. फिर दौड़ कर मैं आप को बुला लाई.
अस्पताल से सूचना मिलते ही थाना इंदरगंज के टीआई मनीष डाबर मौके पर पहुंचे तो प्रीति जैन ने वही कहानी टीआई मनीष डाबर को सुनाई, जो उस ने मीनाक्षी को सुनाई थी.

एक्सीडेंट की कहानी पर संदेह

टीआई मनीष डाबर को लगा कि हेमंत की कहानी एक्सीडेंट की तो नहीं हो सकती. इस के बाद उन्होंने इस मामले से एसपी नवनीत भसीन को भी अवगत करा दिया. एसपी के निर्देश पर टीआई अस्पताल से सीधे हेमंत के फ्लैट पर जा पहुंचे.
उन्होंने हेमंत के फ्लैट की सूक्ष्मता से जांच की. जांच में उन्हें वहां की स्थिति काफी संदिग्ध नजर आई. प्रीति ने पुलिस को बताया था कि एक्सीडेंट से घायल हेमंत ने बाहर से आ कर फ्लैट की घंटी बजाई थी, लेकिन न तो अपार्टमेंट की सीढि़यों पर और न ही फ्लैट के दरवाजे पर धब्बे तो दूर खून का छींटा तक नहीं मिला. कमरे में जो भी खून था, वह उसी पलंग के आसपास था, जिस पर घायल अवस्था में हेमंत लेटे थे.
बकौल प्रीति हेमंत घायलावस्था में थे और दरवाजा खुलते ही उस के ऊपर गिर पड़े थे, लेकिन पुलिस को इस बात का आश्चर्य हुआ कि प्रीति के कपड़ों पर खून का एक दाग भी नहीं था.
टीआई मनीष डाबर ने इस जांच से एसपी नवनीत भसीन को अवगत कराया. इस के बाद एडीशनल एसपी सत्येंद्र तोमर तथा सीएसपी के.एम. गोस्वामी भी हेमंत के फ्लैट पर पहुंच गए. सभी पुलिस अधिकारियों को प्रीति द्वारा सुनाई गई कहानी बनावटी लग रही थी.
प्रीति के बयान की पुष्टि करने के लिए टीआई ने फ्लैट के सामने लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज अपने कब्जे में लिए. फुटेज की जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई. पता चला कि घटना से करीब आधा घंटा पहले हेमंत के फ्लैट में 2 युवक आए थे. दोनों कुछ देर फ्लैट में रहने के बाद एकएक कर बाहर निकल गए थे.
उन युवकों के चले जाने के बाद प्रीति भी एक बार बाहर आ कर वापस अंदर गई और कपड़े बदल कर मीनाक्षी को बुलाने तीसरी मंजिल पर जाती दिखी.
मामला साफ था. सीसीटीवी फुटेज में घायल हेमंत घर के अंदर या बाहर आते नजर नहीं आए थे. अलबत्ता 2 युवक फ्लैट में आतेजाते जरूर दिखे थे. प्रीति ने इन युवकों के फ्लैट में आने के बारे में कुछ नहीं बताया था. जिस की वजह से प्रीति खुद शक के घेरे में आ गई.
जो 2 युवक हेमंत के फ्लैट से निकलते सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे, पुलिस ने उन की जांच शुरू कर दी. जांच में पता चला कि उन में से एक दानाखोली निवासी मृदुल गुप्ता और दूसरा सुमावली निवासी उस का दोस्त आदेश जैन था.
दोनों युवकों की पहचान हो जाने के बाद मृतक हेमंत की बहन ने भी पुलिस को बताया कि प्रीति के मृदुल गुप्ता के साथ अवैध संबंध थे. इस बात को ले कर प्रीति और हेमंत के बीच विवाद भी होता रहता था.
यह जानकारी मिलने के बाद टीआई मनीष डाबर ने मृदुल और आदेश जैन के ठिकानों पर दबिश दी लेकिन दोनों ही घर से लापता मिले. इतना ही नहीं, दोनों के मोबाइल फोन भी बंद थे. इस से दोनों पर पुलिस का शक गहराने लगा.
लेकिन रात लगभग डेढ़ बजे आदेश जैन अपने बडे़ भाई के साथ खुद ही इंदरगंज थाने आ गया. उस ने बताया कि मृदुल ने उस से कहा था कि हेमंत के घर पैसे लेने चलना है. वह वहां पहुंचा तो मृदुल और प्रीति सोफे के पास घुटने के बल बैठे थे जबकि हेमंत सोफे पर लेटा था.
इस से दाल में कुछ काला नजर आया, जिस से वह वहां से तुरंत वापस आ गया था. उस ने बताया कि वह हेमंत के घर में केवल डेढ़ मिनट रुका था. आदेश के द्वारा दी गई इस जानकारी से हेमंत की मौत का संदिग्ध मामला काफी कुछ साफ हो गया.
दूसरे दिन पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई. रिपोर्ट में बताया गया कि हेमंत के माथे पर धारदार हथियार के 5 और चेहरे पर 3 घाव पाए गए. उन के सिर पर पीछे की तरफ किसी भारी चीज से चोट पहुंचाई गई थी, जिस से उन की मृत्यु हुई थी.
इसी बीच पुलिस को पता चला कि मृतक की पत्नी प्रीति जैन रात के समय घर में आत्महत्या करने का नाटक करती रही थी. सुबह अंतिम संस्कार के बाद भी उस ने आग लगा कर जान देने की कोशिश की. पुलिस उसे हिरासत में थाने ले आई.
दूसरी तरफ दबाव बढ़ने पर मृदुल गुप्ता भी शाम को अपने वकील के साथ थाने में पेश हो गया. पुलिस ने प्रीति और मृदुल से पूछताछ की तो बड़ी आसानी से दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उन्होंने स्वीकार कर लिया कि हेमंत की हत्या उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से की थी.
पूछताछ के बाद हेमंत की हत्या की कहानी इस तरह सामने आई—

हेमंत के बड़े भाई भागचंद जैन करीब 20 साल पहले ग्वालियर के खिड़की मोहल्लागंज में रहते थे. हेमंत का अपने बड़े भाई के घर काफी आनाजाना था. बड़े भाई के मकान के सामने एक शुक्ला परिवार रहता था. प्रीति उसी शुक्ला परिवार की बेटी थी. वह हेमंत की हमउम्र थी.
बड़े भाई और शुक्ला परिवार में काफी नजदीकियां थीं, जिस के चलते हेमंत का भी प्रीति के घर आनाजाना हो जाने से दोनों में प्यार हो गया. यह बात करीब 18 साल पहले की है. हेमंत और प्रीति के बीच बात यहां तक बढ़ी कि दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. लेकिन प्रीति के घर वाले इस के लिए राजी नहीं थे. तब दोनों ने घर वालों की मरजी के खिलाफ प्रेम विवाह कर लिया था.
इस से शुक्ला परिवार ने बड़ी बेइज्जती महसूस की और वह अपना गंज का मकान बेच कर कहीं और रहने चले गए जबकि प्रीति पति के साथ कैथवाली गली में और फिर बाद में दानाओली के उसी मकान में आ कर रहने लगी, जिस की पहली मंजिल पर मृदुल गुप्ता अकेला रहता था. यहीं पर मृदुल की प्रीति के पति हेमंत से मुलाकात और दोस्ती हुई थी.
हेमंत ने साड़ी का थोक कारोबार शुरू कर दिया था, जिस में कुछ दिन तक प्रीति का भाई भी सहयोगी रहा. बाद में वह कानपुर चला गया. इधर हेमंत का काम देखते ही देखते काफी बढ़ गया और वह ग्वालियर के पहले 5 थोक साड़ी व्यापारियों में गिना जाने लगा. हेमंत को अकसर माल की खरीदारी के लिए गुजरात के सूरत शहर जाना पड़ता था.
हेमंत का काम काफी बढ़ चुका था, जिस के चलते एक समय ऐसा भी आया जब महीने में उस के 20 दिन शहर से बाहर गुजरने लगे. इस दौरान प्रीति और दोनों बच्चे ग्वालियर में अकेले रह जाते थे. इसलिए उन की देखरेख की जिम्मेदारी हेमंत अपने सब से खास और भरोसेमंद दोस्त मृदुल को सौंप जाता था.
हेमंत मृदुल पर इतना भरोसा करता था कि कभी उसे बाहर से बड़ी रकम ग्वालियर भेजनी होती तो वह मृदुल के बैंक खाते में ही ट्रांसफर कर देता था. इस से हेमंत की गैरमौजूदगी में भी मृदुल का प्रीति के घर में लगातार आनाजाना बना रहने लगा था.
प्रीति की उम्र 35 पार कर चुकी थी. वह 2 बच्चों की मां भी बन चुकी थी लेकिन आर्थिक बेफिक्री और पति के अति भरोसे ने उसे बिंदास बना दिया था. इस से वह न केवल उम्र में काफी छोटी दिखती थी बल्कि उस का रहनसहन भी अविवाहित युवतियों जैसा था.
कहते हैं कि लगातार पास बने रहने वाले शख्स से अपनापन हो जाना स्वाभाविक होता है. यही प्रीति और मृदुल के बीच हुआ. दोनों एकदूसरे से काफी घुलेमिले तो थे ही, अब एकदूसरे के काफी नजदीक आ गए थे. उन के बीच दोस्तों जैसी बातें होने लगी थीं, जिस के चलते एकदूसरे के प्रति उन का नजरिया भी बदल गया था. इस का नतीजा यह हुआ कि लगभग डेढ़ साल पहले उन के बीच शारीरिक संबंध बन गए.
दोस्त बन गया दगाबाज

प्रीति का पति ज्यादातर बाहर रहता था और मृदुल अभी अविवाहित था. इसलिए दैहिक सुख की दोनों को जरूरत थी. उन्हें रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था. क्योंकि खुद हेमंत ने ही मृदुल को प्रीति और बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंप रखी थी. इसलिए हेमंत के ग्वालियर में न रहने पर मृदुल की रातें प्रीति के साथ उस के घर में एक ही बिस्तर पर कटने लगीं.
दूसरी तरफ प्रीति के नजदीक बने रहने के लिए मृदुल जहां हेमंत के प्रति ज्यादा वफादारी दिखाने लगा, वहीं जवान प्रेमी को अपने पास बनाए रखने के लिए प्रीति न केवल उसे हर तरह से सुख देने की कोशिश करने लगी, बल्कि मृदुल पर पैसा भी लुटाने लगी थी.
इसी बीच करीब 6 महीने पहले एक रोज जब हेमंत ग्वालियर में ही बच्चों के साथ था, तब बच्चों ने बातोंबातों में बता दिया कि मम्मी तो मृदुल अंकल के साथ सोती हैं और वे दोनों दूसरे कमरे में अकेले सोते हैं.
बच्चे भला ऐसा झूठ क्यों बोलेंगे, इसलिए पलक झपकते ही हेमंत सब समझ गया कि उस के पीछे घर में क्या होता है. हेमंत ने मृदुल को अपनी जिंदगी से बाहर कर दिया और उस के अपने यहां आनेजाने पर भी रोक लगा दी.

इस बात को ले कर उस का प्रीति के साथ विवाद भी हुआ. प्रीति ने सफाई देने की कोशिश भी की लेकिन हेमंत ने मृदुल को फिर घर में अंदर नहीं आने दिया. इस से प्रीति परेशान हो गई.
दोनों अकेलेपन का लाभ न उठा सकें, इसलिए हेमंत अपना घर छोड़ कर परिवार को ले कर अपनी बहन के साथ आ कर रहने लगा. ननद के घर में रहते हुए प्रीति और मृदुल की प्रेम कहानी पर ब्रेक लग गया.
लेकिन हेमंत कब तक अपना परिवार ले कर बहन के घर रहता, सो उस ने 3 महीने पहले पुराना मकान बेच कर इंदरगंज में नया फ्लैट ले लिया. यहां आने के बाद प्रीति और मृदुल की कामलीला फिर शुरू हो गई.
प्रीति अपने युवा प्रेमी की ऐसी दीवानी थी कि उस ने मृदुल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह उसे अपने साथ रख ले. इस पर जनवरी में मृदुल ने प्रीति से कहीं दूर भाग चलने को कहा लेकिन प्रीति बोली, ‘‘यह स्थाई हल नहीं है. पक्का हल तो यह है कि हम हेमंत को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दें.’’
मृदुल को भी अपनी इस अनुभवी प्रेमिका की लत लग चुकी थी, इसलिए वह इस बात पर राजी हो गया. जिस के बाद दोनों ने घर में ही हेमंत की हत्या करने की योजना बना कर 17 मार्च, 2019 को उस पर अमल भी कर दिया.
योजना के अनुसार उस रोज प्रीति ने पति की चाय में नींद की ज्यादा गोलियां डाल दीं, जिस से वह जल्द ही गहरी नींद में चला गया. फिर मृदुल के आने पर प्रीति ने गहरी नींद में सोए पति के पैर दबोचे और मृदुल ने हेमंत की गला दबा दिया.
इस दौरान हेमंत ने विरोध किया तो दोनों ने उसे उठा कर कई बार उस का सिर दीवार से टकराया, जिस से उस के सिर से खून बहने लगा और कुछ ही देर में उस की मौत हो गई.
टीआई मनीष डाबर ने प्रीति और मृदुल से विस्तार से पूछताछ के बाद दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से प्रीति को जेल भेज दिया और मृदुल को 2 दिनों के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया ताकि उस से वह कपड़े बरामद हो सकें जो उस ने हत्या के समय पहन रखे थे.
कथा लिखने तक पुलिस मृदुल से पूछताछ कर रही थी. हेमंत की हत्या में आदेश जैन शामिल था या नहीं, इस की पुलिस जांच कर रही थी.

सौजन्य- मनोहर कहानियां, मई 2019

5 सालों का रहस्य : किस वजह से जागीर को जान गंवानी पड़ी

मनप्रीत कौर सालों के बाद मामा के घर आई थी. गुरप्रीत सिंह और उस की पत्नी ने मनप्रीत की खूब खातिरदारी की. मामामामी और मनप्रीत के बीच खूब बातें हुईं. बातोंबातों में मनप्रीत ने गुरप्रीत से पूछा, ‘‘मामाजी, बड़े मामा जागीर सिंह के क्या हालचाल हैं. उन से मुलाकात होती है या नहीं?’’

‘‘नहीं, हम 5 साल पहले मिले थे अनाजमंडी में. जागीर उस समय परेशान भी था और दुखी भी. गले लग कर खूब रोया. उस ने बताया कि भाभी (मंजीत कौर) के किसी कुलवंत सिंह से संबंध हैं और दोनों मिल कर उस की हत्या भी कर सकते हैं.’’

गुरप्रीत ने यह भी बताया कि उस ने जागीर सिंह से कहा था कि वह भाभी का साथ छोड़ कर मेरे साथ मेरे घर में रहे. लेकिन उस ने इनकार कर दिया. वजह वह भी जानता था और मैं भी. उस ने मुझे समझाने के लिए कहा कि वह भाभी को अपने ढंग से संभाल लेगा. बस उस के बाद जागीर सिंह मुझे नहीं मिला.

‘‘वाह मामा वाह, बड़े मामा ने तुम से अपनी हत्या की आशंका जताई और आप ने 5 साल से उन की खबर तक नहीं ली?’’

‘‘खबर कैसे लेता, भाभी ने तो लड़झगड़ कर घर से निकाल दिया था. मैं उस के घर कैसे जाता? जाता तो गालियां सुननी पड़तीं.’’ गुरमीत ने अपनी स्थिति साफ कर दी.

बात चिंता वाली थी. मनप्रीत ने खुद ही बड़े मामा जागीर सिंह का पता लगाने का निश्चय किया. उस ने मामा के पैतृक गांव से ले कर गुरमीत द्वारा बताई गई संभावित जगह रेलवे बस्ती, गुरु हरसहाय नगर तक पता लगाया. उस की इस छानबीन में जागीर सिंह का तो कोई पता नहीं लगा, पर यह जानकारी जरूर मिल गई कि जागीर सिंह की पत्नी मंजीत कौर रेलवे बस्ती में किसी कुलवंत सिंह नाम के व्यक्ति के साथ रह रही है.

सवाल यह था कि मंजीत कौर अगर किसी दूसरे आदमी के साथ रह रही थी तो जागीर सिंह कहां था? मंजीत ने ये सारी बातें छोटे मामा गुरमीत को बताईं. इन बातों से साफ लग रहा था कि जागीर सिंह के साथ कोई दुखद घटना घट गई थी. सोचविचार कर गुरमीत और मंजीत ने थाना गुरसहाय नगर जा कर इस बारे में पूरी जानकारी थानाप्रभारी रमन कुमार को दी.

बठिंडा (पंजाब) के रहने वाले गुरदेव सिंह के 2 बेटे थे जागीर सिंह और गुरमीत सिंह. उन के पास खेती की कुछ जमीन थी, जिस से जैसेतैसे घर का खर्च चलता था. सालों पहले उन के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था. पत्नी के बीमार होने पर उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ी. इस के बावजूद वह उसे बचा नहीं पाए थे.

पत्नी की मौत के बाद गुरदेव सिंह टूट से गए थे. जैसेतैसे उन्होंने अपने दोनों बेटों की परवरिश की. आज से करीब 15 साल पहले गुरदेव सिंह भी दुनिया छोड़ कर चले गए. पर मरने से पहले गुरदेव सिंह यह सोच कर बड़े बेटे जागीर सिंह का विवाह अपने एक जिगरी दोस्त की बेटी मंजीत कौर के साथ कर गए थे कि वह जिम्मेदारी के साथ उस का घर संभाल लेगी.

मंजीत कौर तेजतर्रार और झगड़ालू किस्म की औरत थी. उस ने घर की जिम्मेदारी तो संभाल ली, लेकिन पति और देवर की कमाई अपने पास रखती थी. दोनों भाई जमींदारों के खेतों में मेहनतमजदूरी कर के जो भी कमा कर लाते, मंजीत कौर के हाथ पर रख देते. लेकिन पत्नी की आदत को देखते हुए जागीर सिंह कुछ पैसे बचा कर रख लेता था.

इसी बीच जागीर सिंह ने जैसेतैसे अपने छोटे भाई गुरमीत की भी शादी कर दी थी. गुरमीत की शादी के बाद मंजीत कौर और गुरमीत की पत्नी के बीच आए दिन लड़ाईझगड़े होने लगे थे. रोज के क्लेश से दुखी हो कर गुरमीत सिंह अपनी पत्नी को ले कर अलग हो गया. उस के अलग होने के बाद दोनों भाइयों का आपस में मिलना कभीकभार ही हो पाता था. ऐसे ही दोनों भाइयों का जीवनयापन हो रहा था.

समय का चक्र अपनी गति से चलता रहा. इस बीच जागीर सिंह और मंजीत कौर के बीच की दूरियां बढ़ती गईं. उन के घर में हर समय क्लेश रहने लगा था.

जागीर सिंह की समझ में यह नहीं आ रहा था कि अब मंजीत कौर घर में टेंशन क्यों करती है. पहले तो उस के भाई गुरमीत की पत्नी की वजह से वह घर में झगड़ा करती थी, पर अब उसे भी घर से अलग हुए कई साल हो गए थे. फिर एक दिन जागीर सिंह को पत्नी द्वारा घर में कलह रखने का कारण समझ आ गया था.

दरअसल, मंजीत कौर के पड़ोसी गांव जुवाए सिंघवाला निवासी कुलवंत सिंह के साथ गलत संबंध थे. दोनों के बीच के संबंधों के बारे में उसे कई लोगों ने बताया था. लेकिन उसे लोगों की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. जब एक दिन उस ने दोनों को अपनी आंखों से देखा और रंगेहाथों पकड़ लिया तो अविश्वास की कोई वजह नहीं बची.

उस दिन वह सिरदर्द होने की वजह से समय से पहले ही काम से घर लौट आया था. तभी उसे पत्नी की सच्चाई पता चली थी. पत्नी की यह करतूत देख कर उसे गहरा आघात लगा.

शोर मचाने पर उस के घर की ही बदनामी होती, इसलिए उस ने पत्नी को समझाना उचित समझा. उस ने उस से कहा, ‘‘मंजीत, तुम जो कर रही हो उस से बदनामी के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. समझदारी से काम लो. अब तक जो हुआ, उसे मैं भी भूल जाता हूं और तुम भी यह सब भूल कर आगे से एक नया जीवन शुरू करो.’’

उस समय तो मंजीत कौर ने अपनी गलती मान कर पति से माफी मांग ली, पर उस ने अपने प्रेमी कुलवंत से मिलनाजुलना बंद नहीं किया. बल्कि कुछ समय बाद ही उस ने कुलवंत के साथ मिल कर जागीर सिंह को ही रास्ते से हटाने की योजना बना ली.

मंजीत कौर ने घर में क्लेश कर पति जागीर सिंह को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह गांव वाला घर छोड़ कर गुरुसहाय नगर की रेलवे बस्ती में किराए का मकान ले कर रहे.

मकान बदलने की योजना कुलवंत ने बनाई थी. उसी के कहने पर मंजीत कौर ने यह फैसला लिया था. उस ने जानबूझ कर पति को मकान बदलने के लिए मजबूर किया था. पत्नी की बातों और हावभाव से जागीर सिंह को इस बात की आशंका होने लगी थी कि कहीं जागीर कौर उस की हत्या न करा दे. अचानक उन्हीं दिनों अनाजमंडी में जागीर सिंह की मुलाकात अपने छोटे भाई गुरमीत सिंह से हुई.

दोनों भाई आपस में गले मिल कर बहुत रोए. अपनेअपने मन का गुबार शांत करने के बाद जागीर सिंह ने अपने और मंजीत कौर के रिश्तों के बारे में उसे बताते हुए यह भी शक जताया था कि मंजीत कौर किसी दिन उस की हत्या करा सकती है.

गुरमीत सिंह ने बड़े भाई से कहा कि घर का माहौल ऐसा है तो उस का मंजीत कौर के साथ रहना ठीक नहीं है. उस ने जागीर सिंह को यह सलाह भी दी कि वह मंजीत कौर को छोड़ दे और बाकी जिंदगी उस के घर आ कर गुजारे. लेकिन जागीर सिंह ने उसे आश्वासन देते हुए कहा, ‘‘तुम चिंता मत करो, मैं मंजीत को समझा कर उसे सीधे रास्ते पर ले आऊंगा.’’

इस बातचीत के बाद दोनों भाई अपनेअपने रास्ते चले गए थे. उस दिन के बाद वे दोनों आपस में फिर कभी नहीं मिले. यह बात सन 2013 के आसपास की है.

गुरमीत सिंह 5 वर्ष पहले अपने भाई से हुई मुलाकात को भूल गया था. एक दिन उस के घर उस के साले बलदेव सिंह की बड़ी बेटी मनप्रीत कौर मिलने के लिए आई और बातोंबातों में उस ने पूछ लिया, ‘‘मामाजी, बड़े मामा जागीर सिंह के क्या हाल हैं और आजकल वह कहां रह रहे हैं?’’

गुरमीत सिंह ने उसे बताया कि करीब 5 साल पहले अनाजमंडी में मुलाकात हुई थी. तब उन्होंने बताया था कि वह गुरु हरसहाय नगर में रह रहे हैं. उस दिन के बाद फिर कभी उन से नहीं मिला.

बहरहाल, 20 सितंबर 2018 को गुरमीत सिंह की तहरीर पर एसएचओ रमन कुमार ने मंजीत कौर और कुलवंत सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी. जरूरी जांच के बाद उन्होंने अगले दिन ही मंजीत कौर और कुलवंत को हिरासत में ले लिया.

थाने ला कर जब दोनों से जागीर सिंह के बारे में पूछताछ की तो मंजीत कौर ने बताया कि उस के पति के किसी महिला के साथ नाजायज संबंध थे. उस महिला की वजह से वह उससे मारपीट किया करता था. फिर 5 साल पहले एक दिन वह उस से झगड़ा और मारपीट करने के बाद घर से निकल गया. इस के बाद वह कहां गया, पता नहीं.

रमन कुमार समझ गए कि मंजीत झूठ बोल रही है. इसलिए उन्होंने उस से और उस के प्रेमी से सख्ती से पूछताछ की. आखिर उन्होंने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि 5 साल पहले 23 अप्रैल, 2013 को उन्होंने जागीर सिंह की हत्या कर उस की लाश घर के सीवर में डाल दी थी.

मंजीत कौर ने बताया कि पिछले लगभग 12 सालों से कुलवंत के साथ उस के अवैध संबंध थे, जिन का जागीर सिंह को पता लग गया था और वह इस बात को ले कर उस से झगड़ा किया करता था. इसीलिए उस ने अपने प्रेमी कुलवंत के साथ मिल कर पति को अपने रास्ते से हटाने के लिए उस की हत्या करने की योजना बनाई.

योजनानुसार 23 अप्रैल, 2013 को जागीर सिंह को चाय में नशे की गोलियां मिला कर पिला दीं. जब वह बेहोश हो गया तो गला दबा कर उस की हत्या करने के बाद उन्होंने उस की लाश सीवर में डाल दी.

एसएचओ रमन कुमार ने मंजीत कौर और कुलवंत सिंह को 21 सितंबर, 2018 को अदालत में पेश कर 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड के दौरान दोनों की निशानदेही पर गांव वालों, गांव के सरपंच और मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में उस के घर के सीवर से हड्डियां बरामद कीं.

उस समय म्युनिसिपल कारपोरेशन के अधिकारियों के साथ एफएसएल टीम भी मौजूद थी. पुलिस ने जरूरी काररवाई के बाद हड्डियां एफएसएल टीम के सुपुर्द कर दीं.

दोनों हत्यारोपियों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 23 सितंबर, 2018 को मंजीत कौर और कुलवंत सिंह को अदालत में पेश कर जिला जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कहानी सौजन्यसत्यकथा, मई 2019