स्मार्ट वाच में छिपा हत्या का राज

ग्रीस में 20 वर्षीया युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या हुई थी. उस के 33 वर्षीय पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस, जोकि हेलीकौप्टर पायलट था, ने 11 मई को पुलिस को फोन द्वारा सूचना दी थी कि उस की पत्नी की हत्या अज्ञात लुटेरों ने ग्लयका नेरा स्थित उस के ही घर के बैडरूम में कर दी है.

सूचना पा कर ग्रीक पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने देखा कि घर में बाबिस की पत्नी कैरोलिन की लाश के अलावा एक कुत्ता भी मरा पड़ा था. घर का सामान भी बिखरा पड़ा था. पुलिस को मामला लूट का ही लग रहा था.

बाबिस ने पुलिस को बताया कि उन्हें लुटेरों ने बांध दिया था. वे 3 थे. उन्होंने घर से पैसे लूटने के बाद उस की पत्नी का गला घोंट डाला था. उस ने लुटेरों से अपने परिवार को नुकसान नहीं पहुंचाने की गुहार भी लगाई थी.

पुलिस ने घटनास्थल से सारे सबूत इकट्ठे कर जांच शुरू कर दी. इतना ही नहीं, पुलिस ने इस हाईप्रोफाइल अपराध की जानकारी देने वाले को 2,57,000 पाउंड स्टर्लिंग (करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपए) ईनाम देने की भी घोषणा कर दी. इस ईनाम की घोषणा एथेंस की पुलिस औफिसर्स एसोसिएशन के डिप्टी चेयरमैन निकोस रिगास ने की थी.

उन्होंने मीडिया को भी जांच में अपनाई जाने वाली तमाम लेटेस्ट सिस्टम इस्तेमाल करने की बात कहते हुए दावा किया कि बहुत जल्द ही वे इस मामले का पता लगा लेंगे.

इस पर मीडिया ने उन्हें निशाने पर ले लिया था. कारण कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुए लौकडाउन के बाद से महिलाओं की हत्या और घरेलू अपराध की घटनाएं वहां काफी बढ़ गई थीं.

इसे देखते हुए रिगास ने घटनास्थल से मोबाइल उपकरणों, एक स्मार्टवाच और कैमरों की जांच करने के लिए एक समयरेखा भी निर्धारित कर दी.

घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद एथेंस पुलिस  की क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम इस नतीजे पर पहुंची थी कि युवती की हत्या जिन 3 लुटेरों ने की, उन्हें दबोचा जाना बाकी है. क्योंकि पुलिस को वहां से काफी सबूत मिल चुके थे.

इसी बीच पुलिस के अधिकारी ने अपने सहकर्मियों से सवाल किया, ‘‘तुम यह कैसे कह सकते हो कि हत्या प्रोफैशनल लुटेरों ने ही की है?’’

‘‘सर घटनास्थल पर मिले सारे प्रमाण तो यही बताते हैं. इस के अलावा, लुटेरों ने युवती के हाथपांव बांध दिए थे, और…’’ एक सहकर्मी पुलिस ने कहा.

‘‘… और उस ने पालतू कुत्ते को भी मार डाला था. तुम तो यही कहोगे न?’’ अधिकारी ने दूसरे सहकर्मी को देखते हुए सवाल किया.

‘‘ यस सर! ’’

‘‘वाट यस सर..? लुटेरों ने घर से जो रुपए लूटे, वे कहां रखे थे? तुम लोगों को तो केवल 13 हजार पाउंड अमाउंट के बारे पता चला है.’’

‘‘उस की डिटेल्स नहीं मिली सर. कोई निशान नहीं मिल पाया.’’ फोरैंसिक जांच वाले ने सफाई दी.

‘‘तुम्हें तो यह भी पता नहीं चला है कि लुटेरों के गिरोह ने युवती को कैसे बांधा, उस की मौत दम घुटने से हुई या फिर कोई और वजह थी.’’ अधिकारी ने सभी को जबरदस्त डांट पिलाई.

‘‘सर, सीसीटीवी कैमरे घटना के समय बंद थे,’’ तकनीकी जांच करने वाले ने बताया.

‘‘अब तुम लोग मुझे यह समझाओ कि मृत युवती की बगल में सिरहाने 11 माह की बच्ची चुपचाप कैसे लेटी थी?’’ जांच अधिकारी ने सख्ती के साथ पूछा.

ग्रीक जांच अधिकारी की बात सुन कर सभी चुप हो गए थे. क्योंकि यह मामला साधारण नहीं था.

मृतका के पति पायलट बाबिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पुलिस ने जांच शुरू की, जिस में कई विरोधाभास देखने को मिले. बाबिस ने मीडिया को बताया था कि वह घटना के समय लुटेरों से घिरा हुआ था.

जबकि पुलिस जांच में पता चला कि उस दौरान वह घर के बाहर चारों ओर घूम रहा था. उस का आवागमन बेसमेंट से ले कर बालकनी तक हुआ था. इस विरोधाभास पर पुलिस को बाबिस पर ही शक हो गया.

डेटा एनालिस्ट की ली मदद

इस आधार पर पुलिस औफिसर निकोस रिगास ने अपने सहकर्मियों को नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया. उन्होंने जांच टीम से कहा, ‘‘संदिग्ध युवती का पति भी हो सकता है. यह भी हो सकता है कि क्राइम सीन उस के द्वारा बनाया गया हो. वह खुद को बचाने की कोशिश में हो.’’

‘‘…लेकिन सर, इस पालतू कुत्ते को किस ने मारा होगा?और सर वह छोटी बच्ची..?’’ एक सहकर्मी ने जिज्ञासा जताई.

‘‘यही तो समझने की बात है, जिस ओर तुम लोगों का ध्यान ही नहीं गया?’’ निकोस रिगास बोले.

‘‘वह कैसे सर?’’ फोरैंसिक जांचकर्ता ने सवाल किया.

‘‘मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पालतू कुत्ते को संदिग्ध ने ही मारा होगा और हत्या को सही ठहराने के लिए बच्ची को उस की मां के मृत शरीर के बगल में रख दिया. हैरत की बात है कि उसे कोई चोट नहीं आई. यह भी हो सकता है उस वक्त बच्ची कहीं और सो रही हो.’’ रिगास ने समझाया.

‘‘तो सर, हमें अब क्या करना चाहिए?’’

‘‘आप लोग इस में अब कुछ अधिक नहीं कर पाएंगे. इस केस को डेटा एनलिस्ट की मदद से हैंडल किया जाएगा.’’

‘‘वह कैसे सर?’’ सभी चौंक पड़े.

‘‘बस आप सभी देखते जाइए और अपनीअपनी रिपोर्ट का डेटा सौफ्ट कौपी के साथ हार्ड कौपी में 12 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाइए.’’ रिगास ने आदेश दिया.

‘‘यस सर!’’ सभी सहकर्मियों ने एक साथ कहा.

‘‘और हां, आईटी के क्राइम सेल के साथ अभी घंटे भर के अंदर मीटिंग तय करवाइए.’’ यह आदेश उन्होंने अपने पीए को दिया.

इसी दौरान एक सहकर्मी ने उत्सुकता के साथ बताया, ‘‘सर, क्या मृतका के पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलास से पूछताछ की जाए?’’

‘‘अभी उस पर नजर रखिए. मुझे जानकारी मिली है कि वह इस समय ग्रीस में नहीं है, लेकिन इंस्टाग्राम पर सक्रिय है. उस ने पुर्तगाल यात्रा के दौरान अपनी पत्नी के साथ एक तसवीर पोस्ट की है.’’

‘‘जी सर, मैं ने वह तसवीर देखी है. उस में उस ने लिखा है— हमेशा एक साथ! विदाई, मेरे प्यार!’’ महिला सहकर्मी तपाक से बोल पड़ी.

‘‘तुम उस पर नजर रखो. उस के डेटा का कलेक्शन करो. हर तरह की डिटेल्स जुटाओ… जैसे उन के आपसी संबंध, शादीब्याह, अफेयर, डेटिंग, चैटिंग, डिनर, साथसाथ ट्रैवलिंग, फैमिली बैकग्राउंड, हौबी, उन के फ्रैंड सर्कल, प्रोफेशन इत्यादिइत्यादि. इंस्टाग्राम के अतिरिक्त दूसरे सोशल साइट्स और डेटिंग ऐप को भी खंगालो.’’

जांच दल की महिला सहकर्मी के द्वारा हेलीकौप्टर पायलट बाबिस और कैरोलिन के बारे में जुटाई गई जानकारी के बाद पता चला कि कैरोलिन क्राउच और बाबिस का प्रेम विवाह हुआ था. उन की शादी जुलाई, 2019 में अलगार्वे में हुई थी.

सोशल साइट पर उस की शादी की कई यादगार तसवीरें देखने को मिलीं. उन में एक मार्मिक तसवीर उस की शादी के लिए तैयार होने की है, जिस में उस के बाल और मेकअप 2 स्थानीय स्टाइलिस्टों द्वारा किया गया था.

इस तसवीर को उतारने वाले फोटोग्राफर को जब कैरोलिन की हत्या की जानकारी मिली तो वह स्तब्ध हो गया था, क्योंकि उसे मिला वह पहला असाइनमेंट था.

 

कैरोलिन जब 15 साल की थी, तभी उस की मुलाकात बाबिस से हुई थी. उन के बीच प्यार हो गया. उन की शादी एथेंस के उसी अपमार्केट इलाके में हुई थी, जहां कैरोलिन मृत पाई गई.

शादी के समय वह 18 साल की थी. बाबिस के मातापिता एथेंस में रहते हैं, जबकि कैरोलिन के मातापिता एलोनिसोस द्वीप पर वहां से 6 घंटे की दूरी पर रहते हैं. हालांकि कैरोलिन का जन्म यूके में हुआ था, जिस से वह ब्रिटिश नागरिक बन गई थी.

शादी के बाद वह अपने पति और बच्ची के साथ ग्लाइका नेरा में रह रही थी. इसी तरह से पुलिस ने उन के बारे में कई जानकारियां जुटाईं, जिन में कैरोलिन द्वारा लिखी गई डायरी भी थी. डायरी में उस ने अपने से करीब दोगुनी उम्र के पति के साथ संबंधों की अंतरंगता के बारे में लिखा था.

कैरोलिन की हत्या की जांच ग्रीक पुलिस ने नए सिरे से शुरू की. उन्होंने तमाम तकनीकी उपकरणों को अपने कब्जे में ले लिया और उन में दर्ज डेटा का विश्लेषण किया.

इसी क्रम में पुलिस अधिकारी को वह सुराग मिल गया, जिस की उन्हें तलाश थी. वह सुराग कैरोलिन के स्मार्टवाच में छिपा था.

खास तरह की उस बायोमैट्रिक घड़ी में उन की मौत का दिन और उन की नाड़ी के जीवित रहने तक चलने की रीडिंग दर्ज थी. उस के साथ बाबिस के मोबाइल की काल डिटेल्स आदि का मिलान किया गया. इस काम के लिए पुलिस ने गूगल के सर्विलांस सिस्टम का उपयोग किया.

इस तरह से की गई तकनीकी जांच में संदिग्ध के तौर पर कैरोलिन के पति बाबिस के होने का शक पुख्ता हो गया. बाबिस ने भले ही कहा कि उसे लुटेरों ने बांध दिया था, लेकिन जांच में इस बात का पुष्टि हो गई कि उस दौरान उस का फोन इस्तेमाल में था. उस का डेटा उस की पत्नी के स्मार्टवाच के डेटा से मेल नहीं खा रहा था.

कैरोलिन की स्मार्टवाच से पता चला कि कैरोलिन का दिल उस वक्त भी धड़क रहा था, जिस वक्त उस के पति द्वारा हत्या किए जाने का दावा किया गया था. उस के फोन पर गतिविधि ट्रैकर ने उसे घर के चारों ओर घूमते हुए दिखाया, जबकि उस ने कहा कि वह बंधा हुआ था.

इस तरह से रिकौर्ड किए गए समय, जिस पर घर के सीसीटीवी कैमरे से डेटा कार्ड निकाल लिए गए थे, से घटना की अलग ही कहानी सामने आई.

बाबिस ने पुलिस को बताया था कि 11 मई, 2021 की सुबह 5 बजे के आसपास लुटेरों ने उस के घर में दरवाजा तोड़ कर प्रवेश किया और उस के साथ कैरोलिन को बांध दिया. घर में लूटपाट की और कैरोलिन की गला घोंट कर हत्या कर दी. सुबह 6 बजे पुलिस को बुलाने पर लुटेरे भाग गए.

दिल की धड़कनें घड़ी में हुईं कैद

इस के विपरीत जांच में पाया गया कि आधी रात को 12 बज कर 35 मिनट पर दंपति की ग्राउंड फ्लोर पर लगी सीसीटीवी कैमरे ने आखिरी तसवीर उतारी थी. उस में बाबिस सोफे पर बैठा दिखा था. उस की गोद में बेटी बैठी थी, उस के हाथ में फोन था. उस समय उस की कैरोलिन से बातचीत चल रही थी, जो किसी बात को ले कर कड़वी बहस में बदल गई थी.

रात 1.20 बजे कैमरे की डिवाइस में स्टोर डेटा के अनुसार उस में से मेमोरी कार्ड हटा दिया गया था. पुलिस का कहना है कि ऐसा कैरोलिन द्वारा स्टूपिड कहने के बाद किया गया. पुलिस ने पाया कि मेमोरी कार्ड को आधा काट कर शौचालय में बहा दिया गया था. इसे अधिकारी ने पूर्वनियोजित हत्या की योजना बताया.

रात 12.35 बजे से सुबह 4 बजे तक बाबिस और कैरोलिन के बीच टेक्स्ट मैसेज के साथ बहस होती रही. उस दौरान कैरोलिन ने अपने एक दोस्त को भी मैसेज किया, जिस में उस ने लिखा कि वह अपने पति को छोड़ रही है और अभी रात में ही घर से किसी होटल में चली जाएगी.

उसी बहस में बात इतनी बिगड़ गई कि कैरोलिन ने बाबिस से तलाक लेने तक के लिए कह दिया.

कैरोलिन की कलाई से जुड़े फिटनैस ट्रैकर से पुलिस को पता लग गया कि उस दिन सुबह 4 बजे कैरोलिन के दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं. अचानक दिल की बदली हुई गतिविधि से पता चला कि इस से दंपति के बीच लड़ाई बढ़ गई थी.

बाबिस ने इस बारे में पूछने पर बताया कि कैरोलिन ने उसे मारा, जिस से उसे भी उस पर गुस्सा आ गया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया. उस के बाद उस ने तकिए से चेहरा दबा दिया.

कैरोलिन के फिटनैस ट्रैकर से ही पता चला कि 4.11 बजे उस के दिल की धड़कनें रुक गईं. उस समय वह मर चुकी थी. पुलिस जांच में पता चला कि बाबिस ने उस के मुंह में रुई भर दी थी और फिर उस का गला घोंट दिया था.

इस के बाद बाबिस ने ठंडे दिमाग से हत्या को नाटकीय रूप देने की योजना बनाई. पुलिस जांच के अनुसार, उस ने खिड़की के नीचे की कुंडी तोड़ी और अलमारी में थोड़ी तोड़फोड़ की. घर में लूटपाट का सीन बनाया.

इसी तरह से उस ने अपने पालतू कुत्ते को मार कर सीढ़ी के डब्बे में लटका दिया. उसे दिखा कर ही पुलिस को बताया लुटेरों ने उसे रास्ते में ही मार डाला होगा. फिर उस ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और खुद को बिस्तर से बांध लिया. उस के बाद पड़ोसी को फोन कर लुटेरों के बारे में बताया.

इस डेटा ट्रेल के आगे बाबिस की एक नहीं चली. हालांकि उसे दबोचने में भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

कारण जब तक पुलिस को उस के आरोपी होने का प्रमाण मिला था, तब तक वह दूसरे देश में जा छिपा था. इस तरह से स्मार्टवाच ने कैरोलिन के अंतिम क्षण की जानकारी दे कर इस केस को खोलने में मदद की.

बाद में पुलिस ने बाबिस को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. उसे ग्रीक की बड़ी जेल कोरयाडालोस में रखा गया. उस की गिरफ्तारी एक बहुचर्चित घटना थी.

मीडिया जगत से ले कर सोशल एक्टिविस्टों में उन की घोर निंदा हुई. सामाजिक संस्थाओं ने उसे सख्त सजा देने की मांग के साथ प्रदर्शन किए.

पुलिस के सामने बाबिस को जेल से कोर्ट तक ले जाने की समस्या थी. इस की वजह यह थी कि प्रदर्शनकारी बाबिस को अपने हाथों से सजा देने की मांग कर रहे थे. रास्ते में बाबिस की जान को खतरा भी था, इसलिए भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बाबिस को बुलेटपू्रफ जैकेट पहना कर जेल ले जाया गया और जज के सामने पेश किया.

वकीलों की शुरू हुई बहस में वह जल्द ही टूट गया और उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने 17 जून, 2021 को अपनी पत्नी को गला घोंट कर मारने की बात स्वीकार कर ली.

साथ ही भावुकता के साथ कहा कि वह उस दौर के 6 मिनट का समय कभी नहीं भूल सकता है. क्योंकि पत्नी का गला घोंटते वक्त उस की बेटी लिडिया का चेहरा उस के सामने ही था.

हालांकि उस ने हत्या का नाटक रचने के बारे में बताया कि ऐसा उस ने इसलिए किया, क्योंकि वह जेल नहीं जाना चाहता था और अपनी बेटी की परवरिश करना चाहता था.

पूछताछ में बाबिस ने अपने पालतू कुत्ते का गला घोंटने की भी बात स्वीकार ली. उस ने कहा कि उस ने ऐसा बनावटी घटना को प्रभावशाली दिखाने के लिए किया.

हैलीकौप्टर पायलट बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस के अपना जुर्म स्वीकार करने के बाद अदालत ने 17 जून, 2021 को उसे कैरोलिन क्राउच और पालतू कुत्ते की हत्या का दोषी ठहराते हुए 15 साल जेल की

सजा सुनाई.

खूबसूरत पत्नी की हत्या के बाद बाबिस को अब पछतावा हो रहा है, जबकि उस की बेटी लिडिया के पालनपोषण की जिम्मेदारी कैरोलिन क्राउच के ब्रिटिश पिता ने उठा ली है.

हालांकि बाबिस चाहता है कि सजा काटने के बाद वही अपनी बेटी की देखभाल करे, लेकिन लिडिया के नानानानी नहीं चाहते कि वह अपनी ही मां के हत्यारे पिता की

बेटी कहलाए.

बेखौफ गैंग्स्टर : 2 पुलिस अफसरों की हत्या

फिरोजपुर निवासी कुख्यात बदमाश जयपाल भुल्लर ने जगराओं में 2 पुलिस अधिकारियों की हत्या कर अपने आतंक का रौब दिखाने की कोशिश की थी. इस घटना ने पंजाब पुलिस के 4 सालों में 3300 से ज्यादा गैंगस्टरों को गिरफ्तार करने के दावे पर सवालिया निशान लगा दिया है.

पंजाब का लुधियाना शहर हौजरी और गर्म कपड़ों के थोक व्यापार के लिए पूरे भारत में जाना जाता है. लुधियाना और उस के आसपास गर्म कपड़े बनाने के सैकड़ों छोटेबड़े उद्योग हैं. हर साल सर्दियों की शुरुआत से पहले ही खरीदारी के लिए यहां देश भर के व्यापारी आते हैं. इसी लुधियाना शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर एक शहर जगराओं है.

इसी साल 15 मई की बात है. पुलिस के सीआईए स्टाफ के एएसआई दलविंदर सिंह और भगवान सिंह को शाम को करीब 6 बजे सूचना मिली कि जगराओं की नई दाना मंडी में एक ट्र्रक में नशे की बड़ी खेप आई है. इस सूचना पर दोनों एएसआई एक होमगार्ड जवान राजविंदर के साथ अपनी निजी स्विफ्ट कार से मौके पर रवाना हो गए.

15-20 मिनट बाद जब वह वहां पहुंचे तो उन्होंने वहां एक कैंटर ट्र्रक खड़ा देखा. पुलिस वाले अपनी गाड़ी एक तरफ साइड में खड़ी कर उस ट्र्रक के पास पहुंचे और आसपास खड़े लोगों से पूछताछ करने लगे.

वहां मौजूद लोगों से उन्हें कुछ पता नहीं चला, तो एएसआई भगवान सिंह ट्र्रक में आगे बने ड्राइवर केबिन में चढ़ गए. भगवान सिंह ने ट्र्रक में ड्राइविंग सीट पर बैठे शख्स को पहचान लिया. उसे देखते ही बोले, ‘‘ओए पुत्तर, तू तो जयपाल भुल्लर है.’’

वह शख्स भी भगवान सिंह की बात सुन कर समझ गया कि यह पुलिसवाला है. उस ने फुरती से अपने कपड़ों में से पिस्तौल निकाली और उस की कनपटी पर गोलियां मार दीं. गोलियां लगने से भगवान सिंह ट्र्रक से नीचे गिर गए. उन के सिर से खून बह निकला. गोली की आवाज सुन कर ट्र्रक के पास खड़े दूसरे एएसआई दलविंदर सिंह तेजी से ट्र्रक में चढ़ने लगे, तो पास में खड़ी एक आई-10 कार में सवार कुछ लोग बाहर निकल आए.

वे लोग उन पुलिस वालों से मारपीट करने लगे. मारपीट के दौरान एक शख्स ने दलविंदर सिंह को भी गोली मार दी. गोली लगने से वह भी लहूलुहान हो गए. इस के बाद भी बदमाश नहीं रुके बल्कि दलविंदर और होमगार्ड जवान राजविंदर सिंह से मारपीट करते रहे. राजविंदर जैसेतैसे बदमाशों से अपनी जान बचा कर भाग निकला.

जब यह घटनाक्रम चल रहा था तो मंडी में कुछ युवक क्रिकेट खेल रहे थे. उन युवकों ने गोलियां चलने की आवाज सुनी तो वे वीडियो बनाने लगे और बदमाशों को पकड़ने के लिए दौड़े. इस पर बदमाशों ने गोलियां चला कर उन युवकों को धमकाया.

उन युवकों के डर कर रुक जाने पर बदमाशों ने ट्र्रक से सामान निकाल कर अपनी आई-10 कार में रखा. इस के बाद बदमाशों ने वहां लहूलुहान पड़े पुलिस के दोनों अधिकारियों की पिस्तौलें निकालीं और उस ट्र्रक व कार में सवार हो कर भाग गए.

पुलिस के दोनों एएसआई गोलियां लगने से तड़प रहे थे. बदमाशों के भागने के बाद वहां लोगों की भीड़ जुट गई. पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने घायल पड़े दोनों एएसआई को अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया.

सरेआम दिनदहाड़े पुलिस के 2 अधिकारियों की गोलियां मार कर हत्या कर देने की घटना से पूरे शहर और आसपास के इलाकों में सनसनी फैल गई. अफसरों ने पहुंच कर मौकामुआयना किया. जांच शुरू कर दी गई. बदमाशों की तलाश में शहर के सभी रास्तों पर नाके लगा दिए. पूरे पंजाब में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया.

बदमाशों की तलाश में भागदौड़ कर रही पुलिस को कुछ ही देर बाद मोगा रोड पर एक ढाबे के बाहर वह ट्र्रक खड़ा मिल गया, जिसे बदमाश भगा ले गए थे. ट्र्रक में अफीम और चिट्टा बरामद हुआ. ट्र्रक के पिछले हिस्से में तलाशी के दौरान पुलिस को कई ब्रांडेड कपड़े मिले. इस से यह अंदाज लगाया गया कि ट्र्रक में कई लोग सवार थे. पुलिस ने वह ट्र्रक जब्त कर लिया.

ट्र्रक के नंबर की जांचपड़ताल की, तो वह फरजी निकला. यह नंबर फरीदकोट के एक जमींदार की मर्सिडीज कार का निकला. जांच में पता चला कि यह ट्र्रक मोगा के गांव धल्ले के रहने वाले एक शख्स के नाम पर था. उस ने ट्र्रक दूसरे को बेच दिया. इस के बाद भी यह ट्र्रक 2 बार आगे बिकता रहा.

पुलिस अधिकारियों ने बदमाशों के चंगुल से जान बचा कर भागे होमगार्ड जवान राजविंदर सिंह से पूछताछ की तो पता चला कि ड्रग्स की सूचना पर वे मौके पर गए थे. वहां ट्र्रक की चैकिंग के दौरान एएसआई भगवान सिंह ने जयपाल भुल्लर को पहचान लिया था. इस पर जयपाल ने उसे गोलियां मार दी थीं.

बाद में एएसआई दलविंदर आगे बढ़े तो जयपाल के साथी बदमाशों ने उन पर भी गोलियां चला दीं. होमगार्ड जवान राजविंदर सिंह के परचा बयान पर पुलिस ने जयपाल भुल्लर और उस के साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

दूसरे दिन पुलिस ने दोनों शहीद एएसआई भगवान सिंह और दलविंदर सिंह के शवों का पोस्टमार्टम कराया. इस के बाद शव उन के घरवालों को सौंप दिए. दलविंदर का शव उन के घर वाले अपने पैतृक गांव तरनतारन ले गए.

भगवान सिंह का अंतिम संस्कार जगराओं में शेरपुरा रोड पर राजकीय सम्मान से किया गया. उन के 11 साल के बेटे ने मुखाग्नि दी. भगवान सिंह के अंतिम संस्कार में डीजीपी (रेलवे) संजीव कालड़ा, आईजी नौनिहाल सिंह, डीसी वरिंदर शर्मा आदि मौजूद रहे. डीजीपी ने ट्वीट कर दोनों शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार वालों को एकएक करोड़ रुपए और आश्रित को नौकरी देने का ऐलान किया.

पुलिस ने जांचपड़ताल के लिए मौके के आसपास और बदमाशों के भागने के रास्तों की सीसीटीवी फुटेज देखी. इन से साफ हो गया कि दोनों पुलिसकर्मियों की हत्या कुख्यात गैंगस्टर जयपाल भुल्लर और उस के साथियों ने की थी.

पुलिस ने जयपाल के 3 साथियों की पहचान खरड़ निवासी जसप्रीत सिंह जस्सी, लुधियाना के सहोली निवासी दर्शन सिंह और मोगा के माहला खुर्द निवासी बलजिंदर सिंह उर्फ बब्बी के रूप में की.

हमलावरों पर किया ईनाम घोषित

जगराओं पुलिस ने इन चारों के पोस्टर जारी कर ईनाम भी घोषित कर दिया. पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने जयपाल पर 10 लाख रुपए, बलजिंदर सिंह उर्फ बब्बी पर 5 लाख रुपए, जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सी और दर्शन सिंह पर 2-2 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया.

जयपाल भुल्लर का नाम पंजाब पुलिस के लिए नया नहीं है. पुलिस का हर नयापुराना मुलाजिम उस के नाम से परिचित है. जयपाल पर हत्या, अपहरण, डकैती, तसकरी, फिरौती आदि संगीन अपराधों के 45 से ज्यादा मामले दर्ज हैं. बलजिंदर उर्फ बब्बी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज है. जस्सी और दर्शन कुख्यात तसकर हैं. जयपाल पंजाब सहित कई राज्यों का मोस्टवांटेड अपराधी है.

जयपाल का दोनों एएसआई की हत्या की वारदात से 5 दिन पहले ही पुलिस से आमनासामना हुआ था. 10 मई को लुधियाना के दोराहा में जीटी रोड पर नाकेबंदी के दौरान पुलिस ने कार में सवार 2 युवकों को रोका था. चैकिंग के दौरान बहसबाजी होने पर दोनों युवकों ने वहां तैनात एएसआई सुखदेव सिंह और हवलदार सुखजीत सिंह को हमला कर घायल कर दिया था. बाद में दोनों युवक कार से भाग गए थे.

हुलिया बदलने में माहिर था जयपाल

भागते समय ये युवक एएसआई सुखदेव सिंह से पिस्तौल भी छीन ले गए थे. पुलिस वालों से मारपीट करने वाले दोनों युवक करीब 25-30 साल के पगड़ीधारी सिख थे. उन्होंने सफेद कुरतापायजामा पहन रखा था. हाथापाई के दौरान एक युवक का पर्स गिर गया था. इस पर्स में गुरप्रीत सिंह के नाम से ड्राइविंग लाइसैंस मिला था.

पुलिस को बाद में जांच में पता चला कि इस घटना में हमलावरों में एक युवक जयपाल था. पर्स भी उसी का गिरा था. पर्स में मिले ड्राइविंग लाइसैंस पर फोटो जयपाल की लगी थी, लेकिन फरजी नाम गुरप्रीत सिंह लिखा हुआ था.

खास बात यह थी कि जगराओं में दोनों एएसआई की हत्या की वारदात के वक्त जयपाल क्लीन शेव था. यानी उस ने 5 दिन में ही अपना हुलिया बदल लिया था. वह बारबार हुलिया बदल कर ही पुलिस को चकमा देता रहता था.

पुलिस ने जयपाल और उस के साथियों की तलाश में छापे मारे, तो पता चला कि गैंगस्टर जयपाल भुल्लर जोधां के गांव सहोली में अपने साथी कुख्यात तसकर दर्शन सिंह के खेतों में पिछले डेढ़ महीने से रहा था. दोराहा नाके पर हुई घटना से पहले वह केशधारी सरदार के रूप में रहता था. बाद में उस ने अपना रूप बदल कर चेहरा क्लीन शेव कर लिया.

जयपाल की तलाश में पुलिस ने सर्च अभियान शुरू किया. पुलिस को इनपुट मिले थे कि वारदात से पहले और बाद में जयपाल लुधियाना के आसपास के गांवों में आताजाता रहा है. इन गांवों में उस के ठिकाने हैं.

इसे देखते हुए 17 मई को एडिशनल डीपीसी जसकिरणजीत सिंह तेजा, एसीपी जश्नदीप सिंह और डेहलो थानाप्रभारी सुखदेह सिंह बराड़ के नेतृत्व में पुलिस ने करीब डेढ़ दरजन गांवों में एकएक घर की तलाशी ली. इस दौरान किराएदारों का भी रिकौर्ड जुटाया गया.

दूसरी ओर, कुछ सूचनाओं के आधार पर लुधियाना और जगराओं पुलिस ने चंडीगढ़ में छापे मारे. इन छापों में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया. इन लोगों से पता चला कि जयपाल फरजी ड्राइविंग लाइसैंस दिखा कर कई महीने तक चंडीगढ़ में एक एनआरआई के मकान में किराए पर भी रहा था.

जयपाल के छिपने के ठिकानों का पता लगाने के लिए पुलिस की आर्गनाइज्ड क्राइम कंट्र्रोल यूनिट (ओक्कू) टीम ने उस के भाई अमृतपाल को बठिंडा जेल से प्रोडक्शन वारंट पर हासिल किया. उस से पूछताछ की, लेकिन कोई पते की बात मालूम नहीं हो सकी. बाद में पुलिस ने उसे वापस जेल भेज दिया.

बदमाशों की तलाश में पुलिस ने लुधियाना, अमृतसर और मालेरकोटला सहित कई शहरों में छापे मारे और कई लोगों से पूछताछ की. विभिन्न जेलों में बंद जयपाल के साथियों से भी पूछताछ की.

इन में पता चला कि दोनों पुलिस मुलाजिमों की हत्या की वारदात तक जयपाल करीब 6 महीने से जगराओं के गांव कोठे बग्गू में किराए के मकान में रह रहा था. वह इसी मकान से नशीले पदार्थों की तसकरी का धंधा चला रहा था.

पुलिस ने 19 मई, 2021 को जयपाल के साथी ईनामी बदमाश दर्शन सिंह के मकान की तलाशी ली. इस में जिम की एक किट बरामद हुई. इस किट में हथियार और 300 कारतूस मिले.

इस के अलावा अलगअलग वाहनों की 8-10 आरसी भी मिलीं. ये आरसी उन वाहनों की थीं, जो हाईवे पर लूटे या चोरी किए गए थे. पुलिस ने दर्शन सिंह की पत्नी सतपाल कौर को हिरासत में ले कर उस से पूछताछ की.

8 राज्यों की पुलिस जुटी तलाश में

पुलिस ने पंजाब और राजस्थान के उस के छिपने के संभावित ठिकानों पर भी छापे मारे. इस के अलावा ओक्कू टीम ने जयपाल के साथी गगनदीप जज को बठिंडा जेल से प्रोडक्शन वारंट पर हासिल किया.

गगनदीप ने जयपाल के साथ मिल कर फरवरी 2020 में लुधियाना में एक कंपनी से 32 किलोग्राम सोना लूटा था. गगनदीप को जयपाल के लगभग हर राज पता थे. इसी उम्मीद में उस से पूछताछ की गई, लेकिन पुलिस उस से भी कुछ नहीं उगलवा सकी. गगन से मिली कुछ जानकारियों के आधार पर पुलिस ने जयपाल की तलाश में उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 8-10 गांवों में छापे मारे, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ.

2 पुलिसकर्मियों की हत्या की वारदात के एक सप्ताह बाद भी जयपाल और उस के साथियों का कोई सुराग नहीं मिलने पर पंजाब पुलिस ने अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क किया. इस के बाद 8 राज्यों की पुलिस की कोऔर्डिनेशन टीम बनाई गई. इस में पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनिंदा पुलिस अफसरों को शामिल किया गया.

जयपाल के साथ फरार उस के साथी खरड़ निवासी जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सी की पत्नी लवप्रीत कौर को मोहाली की सोहाना थाना पुलिस ने 20 मई को गिरफ्तार कर लिया. मोहाली में पूर्वा अपार्टमेंट में उस के फ्लैट से करीब 8 बैंकों की पासबुक और दूसरे अहम दस्तावेज मिले. पुलिस ने बैंकों से स्टेटमेंट निकलवाई, तो पता चला कि इन खातों में करोड़ों रुपए का लेनदेन हो रहा था.

कहा जाता है कि लवप्रीत इस फ्लैट में अकेली रहती थी जबकि उस की ससुराल खरड़ गांव में है.

लोगों को गुमराह करने के लिए जसप्रीत उस से अलग रहता था, लेकिन असल में उस का पत्नी लवप्रीत से लगातार संपर्क था. वह इसी फ्लैट में आ कर पत्नी से मिलता था.

लगातार चल रहे तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने जयपाल को शरण देने और उस की मदद करने वाले 5 लोगों को 21 मई को गिरफ्तार कर लिया. इन से कई हथियार और कारतूसों के अलावा 29 वाहनों की फरजी आरसी, 8 खाली आरसी कार्ड, टेलीस्कोप, पंप एक्शन गन आदि भी बरामद हुए.

गिरफ्तार आरोपियों में कैंटर मालिक मोगा के गांव धल्ले का रहने वाला गुरुप्रीत सिंह उर्फ लक्की और उस की पत्नी रमनदीप कौर, दर्शन सिंह का दोस्त सहोली गांव निवासी गगनदीप सिंह, जगराओं के आत्मनगर का रहने वाला जसप्रीत सिंह और सहोली गांव के रहने वाले नानक चंद धोलू शामिल रहे.

इन से पूछताछ में पता चला कि जयपाल और उस के साथी गाडि़यां लूटने और चोरी करने के बाद उन की फरजी आरसी और नंबर प्लेट तैयार करते थे. फरजी आरसी तैयार करने के लिए उन्होंने एक माइक्रो मशीन ले रखी थी.

पूछताछ के बाद पुलिस ने जयपाल और जसप्रीत सिंह के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लौक करवा दिए. पता चला था कि ये बदमाश अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए युवाओं को जोड़ते और गैंग में शामिल होने के लिए तैयार करते थे.

फिरोजपुर निवासी जयपाल भुल्लर पंजाब ही नहीं कई राज्यों में खौफ का पर्यायवाची नाम है. जिस जयपाल के पीछे 8 राज्यों की पुलिस लगी हुई थी, उस जयपाल के पिता भूपिंदर सिंह पंजाब पुलिस में इंसपेक्टर थे. कहा जाता है कि पिता के कारण ही जयपाल के पुलिस महकमे में कई मुलाजिम अच्छे जानकार हैं. इसलिए वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहता था.

पुलिस को जांच में यह भी पता लग गया था कि इस वारदात में जयपाल और उस का साथी जस्सी शामिल था. इसी का नतीजा रहा कि जयपाल ने 5 दिन बाद ही 15 मई को जगराओं में 2 एएसआई को मौत की नींद सुला दिया.

बदमाश दर्शन सिंह कुख्यात तसकर है. उस के खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं. उस के नजदीकी रिश्तेदार पंजाब पुलिस में एसपी के पद पर हैं. दर्शन सिंह जेल भी जा चुका है.

करीब 5 साल पहले हत्या के मामले में अच्छा चालचलन बता कर लुधियाना की ब्रोस्टल जेल से 2 साल 4 महीने की उस की सजा माफ कर दी गई थी. जेल से बाहर आने के बाद वह जयपाल के साथ मिल कर नशा तसकरी और लूटपाट की बड़ी वारदातें करने लगा.

पंजाब पुलिस की ओक्कू टीम ने दोनों एएसआई की हत्या की वारदात में शामिल गैंगस्टर दर्शन सिंह और बलजिंदर सिंह उर्फ बब्बी को 29 मई, 2021 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से गिरफ्तार कर लिया. इन को पनाह देने वाले हरचरण सिंह को भी पकड़ लिया गया है.

अपराध की दुनिया में जयपाल भले ही ऊंची उड़ान भर रहा था, लेकिन उस का हश्र भी वही हुआ, जो ऐसे अपराधियों का होता है. पकड़े गए उस के सहयोगियों से पुलिस को जयपाल का सुराग मिल गया. इस के बाद 9 जून, 2021 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुए एक एनकाउंटर में जयपाल भुल्लर और उस का साथी जसप्रीत जस्सी मारा गया.

ये लोग फरजी नाम से कोलकाता के पास बीरभूम के सिगुरी इलाके के शापूरजी हाउसिंग कौंप्लैक्स में छिपे हुए थे. इन के किराए के इस फ्लैट में लाखों रुपए नकद, आधुनिक हथियार, ड्रग्स के पैकेट, फरजी ड्राइविंग लाइसैंस, पासपोर्ट आदि बरामद हुए. पंजाब पुलिस को जयपाल का सुराग मध्य प्रदेश के एक टोलनाके के सीसीटीवी कैमरों से मिला था. इन बदमाशों के मारे जाने से इन के आतंक का अंत हो गया.

 

ब्यूटी पार्लर: क्वीन का मायाजाल

प्रियंका चौधरी अपनी खूबसूरती और टैलेंट से 2019 में मिसेज इंडिया राजस्थान चुनी गई थी. इस ब्यूटी क्वीन की लाइफ में आखिर ऐसी कौन सी वजह रही, जिस के कारण उसे हनीट्रैप के आरोप में जेल जाना पड़ा?

3 जून, 2021 की बात है. सरिया व्यापारी घासीराम चौधरी जब जयपुर में श्यामनगर थाने पहुंचा, तो उसे गेट पर संतरी खड़ा मिला. उस ने संतरी से पूछा, ‘‘एसएचओ मैडम बैठी हैं क्या?’’

संतरी ने उस पर एक नजर डालते हुए पूछा, ‘‘मैडम से क्या काम है?’’

‘‘भाईसाहब, एक रिपोर्ट दर्ज करानी है, इसलिए मैडम से मिलना है.’’ घासीराम ने संतरी को अपने हाथ में लिए कागज दिखाते हुए कहा.

‘‘मैडम तो अपने औफिस में बैठी हैं. अगर आप को रिपोर्ट लिखानी है तो वहां ड्यूटी औफिसर के पास चले जाओ.’’ संतरी ने हाथ से इशारा करते हुए घासीराम से कहा.

‘‘भाईसाहब, रिपोर्ट लिखाने वहां चला तो जाऊंगा, लेकिन पहले मैं एक बार मैडम से मिलना चाहता हूं.’’ घासीराम ने विनती करते हुए कहा.

‘‘ठीक है, आप की जैसी मरजी. मैडम अपने औफिस में बैठी हैं. जा कर मिल लो.’’ संतरी ने घासीराम को हाथ के इशारे से थानाप्रभारी का कमरा बता दिया.

घासीराम थानाप्रभारी के कमरे के सामने जा कर एक बार ठिठका. फिर गेट खोल कर सीधा उन के कमरे में चला गया. सामने एसएचओ संतरा मीणा किसी फाइल को पढ़ रही थीं. कमरे में आगंतुक की आहट सुन कर उन्होंने सिर उठा कर देखा तो सामने 40-45 साल का एक शख्स खड़ा था.

उन्होंने उस से पूछा, ‘‘बताएं, क्या काम है?’’

‘‘मैडम, मैं बड़ी परेशानी में फंसा हुआ हूं. एक महिला मुझ से नजदीकियां बढ़ा कर लाखों रुपए ऐंठ चुकी है और अब बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराने की धमकी  दे रही है.’’ घासीराम ने खड़ेखड़े ही अपनी व्यथा बताई.

‘‘आप कुरसी पर बैठ जाओ और बताओ कि आप कौन हैं और आप को ब्लैकमेल करने वाली महिला कौन है?’’ मैडम ने अपने हाथ में पकड़ी फाइल को बंद कर मेज पर रखते हुए उस से कहा.

‘‘मैडम, मेरा नाम घासीराम चौधरी है. जयपुर में निर्माण नगर की पार्श्वनाथ कालोनी में रहता हूं और सरियों का व्यापारी हूं.’’ घासीराम ने कुरसी पर बैठते हुए अपना परिचय दिया.

‘‘ठीक है, घासीरामजी, आप के साथ हुआ क्या है, वह बताएं?’’ एसएचओ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, ‘‘अगर आप को कोई ब्लैकमेल कर रहा है तो हम काररवाई करेंगे.’’

‘‘मैडम, मैं इसी उम्मीद से आप के पास आया हूं.’’ घासीराम ने चेहरे पर संतोष के भाव ला कर कहा, ‘‘मैडम, परेशानी यह है कि उस महिला का पति आप के पुलिस डिपार्टमेंट में ही हैडकांस्टेबल है. इसलिए मुझे संदेह है कि पुलिस कोई काररवाई करेगी या नहीं?’’

‘‘घासीरामजी, अपराधी कोई भी हो. अपराधी सिर्फ अपराधी होता है. पति के पुलिस डिपार्टमेंट में होने से किसी महिला को अपराध करने की छूट नहीं मिल जाती है.’’ थानाप्रभारी मीणा ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘आप के साथ क्या वाकयात पेश आए हैं, तफसील से सारी बात बताओ.’’

थानाप्रभारी के आश्वासन पर घासीराम ने प्रियंका चौधरी से मुलाकात होने और बाद में उस से किसी न किसी बहाने से लाखों रुपए ऐंठने और अब बलात्कार का झूठा मामला दर्ज करवाने की धमकी देने तक की सारी बातें विस्तार से बता दीं.

घासीराम से सारा वाकया सुनने के बाद थानाप्रभारी संतरा मीणा ने उस से कहा, ‘‘आप सारी बातें लिख कर दे दें. हम रिपोर्ट दर्ज कर लेंगे. जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उस पर काररवाई होगी.’’

‘‘मैडम, मैं तहरीर लिख कर लाया हूं.’’ घासीराम ने कुछ कागज उन की ओर बढ़ाते हुए कहा.

थानाप्रभारी ने उन कागजों पर सरसरी नजर डाली. फिर घंटी बजा कर अर्दली को बुलाया. अर्दली कमरे में आया, तो उसे वे कागज दे कर कहा, ‘‘इन साहिबान को ड्यूटी औफिसर के पास ले जाओ और ड्यूटी औफिसर से कहना कि यह रिपोर्ट दर्ज कर लें.’’

थानाप्रभारी ने घासीराम को अर्दली के साथ जाने का इशारा किया. घासीराम कुरसी से उठ कर मैडम को धन्यवाद देता हुआ ड्यूटी औफिसर के पास चला गया. पुलिस ने उसी दिन उस की रिपोर्ट दर्ज कर ली.

घासीराम की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह था कि सन 2016 में प्रियंका चौधरी अपने पति रामधन चौधरी के साथ एक दिन उस के घर आई थी. प्रियंका राजस्थान के टोंक जिले की रहने वाली थी. घासीराम की ससुराल भी टोंक जिले में प्रियंका के गांव के पास ही थी. इसलिए घासीराम की पत्नी सीता उसे पहचान गई. प्रियंका को वह अच्छी तरह जानती थी. शादी होने के बाद सीता जयपुर आ गई थी.

प्रियंका उस दिन जयपुर में पहली बार सीता के घर आई थी. सीता ने अपने पति घासीराम का परिचय प्रियंका से कराते हुए कहा कि यह मेरी छोटी बहन जैसी है. प्रियंका कहां चूकने वाली थी. उस ने घासीराम की ओर मुसकरा कर देखते हुए सीता से कहा कि दीदी, अब मैं इन को जीजाजी ही कहूंगी. जीजासाली का रिश्ता बनने पर घासीराम मंदमंद मुसकरा कर रह गए.

इस दौरान प्रियंका ने भी अपने पति का परिचय कराया कि ये रामधन चौधरीजी पुलिस में हैडकांस्टेबल हैं. सीता के पीहर वालों के प्रियंका के परिवार वालों से गांव में अच्छे संबंध थे. इसलिए सीता और घासीराम ने प्रियंका और उस के पति रामधन की खूब आवभगत की.

बातों ही बातों में प्रियंका ने घासीराम से कहा, ‘‘जीजाजी, हम जयपुर में किराए का मकान तलाश कर रहे हैं, लेकिन हमें कोई अच्छा मकान नहीं मिल रहा है. आप की नजर में कोई अच्छा मकान हो तो हमें किराए पर दिलवा दीजिए.’’

प्रियंका आई घासीराम के संपर्क में

प्रियंका को किराए के मकान की जरूरत का पता लगने पर सीता ने अपने पति से कहा कि अपना गौतम मार्ग निर्माण नगर वाला फ्लैट खाली पड़ा है, वो इन्हें ही किराए पर दे दो. हमें इन से अच्छा किराएदार और कौन मिलेगा?

पत्नी से बात करने के बाद घासीराम ने प्रियंका को अपना निर्माण नगर वाला फ्लैट किराए पर दे दिया. इस के बाद प्रियंका का घासीराम के घर आनाजाना शुरू हो गया. कई बार प्रियंका पूरेपूरे दिन सीता के घर पर ही रहती और उस के साथ घर के कामों में भी हाथ बंटाती थी.

सीता के घर पर लगातार आनेजाने से प्रियंका ने उस के परिवार की तमाम जानकारियां हासिल कर लीं. घासीराम के व्यापार और कमाई वगैरह की जानकारी भी ले ली.

प्रियंका जब सीता के घर आती थी, तब अगर घासीराम मिल जाते तो वह जीजाजी जीजाजी कह कर चुहलबाजी भी कर लेती थी. घासीराम भी कभीकभी अपनी पत्नी के साथ प्रियंका के फ्लैट पर चले जाते. इस तरह दोनों परिवारों में घनिष्ठ संबंध बन गए.

आरोप है कि कुछ दिनों बाद प्रियंका ने किसी काम से घासीराम को अपने फ्लैट पर बुलाया. घर पर प्रियंका अकेली थी. घासीराम ने उस के पति रामधन के बारे में पूछा तो प्रियंका ने बताया कि वे कहीं गए हुए हैं. इस दौरान अकेली प्रियंका ने घासी से नजदीकियां बढ़ाने की बातें कीं.

नजदीकियों से हुई जेब खाली

बाद में धीरेधीरे उस ने घासी से नजदीकियां बढ़ा लीं. एक बार प्रियंका ने घासी से कहा कि जीजाजी, आप के पास पैसे की कोई कमी नहीं है. हमारा कुछ सहयोग कर दोगे तो हम भी जयपुर में एक फ्लैट या मकान ले लेंगे. इस के लिए जितना लोन मिलेगा, लेंगे और बाकी पैसे आप उधार दे देना. घासीराम ने उस समय उसे टाल दिया.

बाद में प्रियंका और उस के पति रामधन ने घासीराम के मकान के पास ही फ्लैट खरीद लिया. घासीराम ने बताया कि यह फ्लैट खरीदने और वुडन वर्क के नाम पर प्रियंका ने उस से 49 लाख रुपए ले लिए. इस रकम के बदले प्रियंका और उस के पति ने उसे ब्लैंक चैक दिए और स्टांप पेपर पर लिखित लेनदेन किया. इस फ्लैट की किस्त 28 हजार रुपए महीना थी.

इस बीच, सन 2019 में जयपुर में हुए आयोजन में प्रियंका मिसेज इंडिया राजस्थान चुनी गई. ब्यूटी पीजेंट पौश इंफोटेनमेंट के इस आयोजन में 100 से ज्यादा महिलाओं ने भाग लिया था. फाइनल के अलगअलग राउंड में 27 महिलाओं ने भागीदारी की थी. इस में प्रियंका चौधरी विनर घोषित हुई थी.

बाद में प्रियंका फ्लैट के लोन के रुपए जमा कराने की बात कह कर घासीराम से रुपए मांगने लगी और नहीं देने पर बलात्कार का मामला दर्ज कराने की धमकी देने लगी.

घासीराम डर गया. वह झूठे केस में जेल जाने और व्यापार बरबाद होने की चिंता में दबाव में आ गया. वह समयसमय पर प्रियंका को लाखों रुपए देता रहा और उस की फरमाइशें पूरी करता रहा. प्रियंका की फरमाइश पर घासी ने उसे 30 लाख रुपए के जेवर भी दिलवा दिए. उसे नई लग्जरी कार दिलवाई.

घासी के पैसों से ही प्रियंका ने अपने फ्लैट में महंगे सोफे, एसी, एलईडी और दूसरे कीमती सामान ले लिए. बच्चों की फीस के नाम पर 5 लाख रुपए लिए. प्रियंका ने अपनी बेटियों के नाम सुकन्या योजना के पैसे भी घासीराम से ही जमा करवाए.

घासीराम का आरोप है कि प्रियंका और उस के पति रामधन ने अलगअलग बहाने से उस से करीब सवा करोड़ रुपए ऐंठ लिए थे. इस के बाद प्रियंका उस से 400 गज का प्लौट मांग रही थी.

इसी साल अप्रैल में वाट्सऐप काल कर प्रियंका ने घासी से प्लौट दिलाने की बात कही थी. वह जिस प्लौट की बात कर रही थी, उस की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए के आसपास थी.

घासीराम ने प्लौट दिलाने से इनकार कर दिया तो उस ने बलात्कार का मामला दर्ज कराने की धमकी दी. प्रियंका की धमकियों से डर कर घासीराम ने उस के खाली चैक और स्टांप पेपर उसे लौटा दिए.

प्रियंका ने कराई रिपोर्ट दर्ज

बाद में पूर्व मिसेज इंडिया राजस्थान प्रियंका चौधरी ने 21 मई, 2021 को श्यामनगर थाने में घासीराम के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस में कहा कि घासीराम 20 मई को मेरे घर पर आया और गालीगलौज की. घर में घुसने से रोकने पर मारपीट करने लगा. मैं ने बचाव किया तो हाथ पर काट खाया. मेरे सीने और पेट पर लात मारी. मैं नीचे भाग कर आई. मेरी बहन और बेटियों के चिल्लाने पर आसपास के लोग बाहर आ गए, तब वह वहां से भाग गया.

बाद में मुझे और मेरे पति को जान से मारने की धमकी दी. मुझ से कहा कि तेजाब फेंक कर जला दूंगा. पुलिस ने प्रियंका की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर उस का मैडिकल कराया.

आरोप है कि घासीराम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद प्रियंका ने उसे धमकी दी कि यह तो ट्रेलर है. चाहती तो बलात्कार का मामला भी दर्ज करा सकती थी और अब भी करा सकती हूं. राजीनामा करने के लिए वह 400 गज का प्लौट और रुपए मांग रही थी.

प्रियंका की धमकियों और उस की डिमांड से परेशान हो कर घासीराम ने 3 जून, 2021 को प्रियंका और उस के पति रामधन चौधरी के खिलाफ श्यामनगर थाने में मामला दर्ज करा दिया.

डीसीपी (दक्षिण) हरेंद्र महावर ने इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच के लिए एडिशनल डीसीपी अवनीश कुमार, सोडाला एसीपी भोपाल सिंह भाटी के निर्देशन और श्यामनगर थानाप्रभारी संतरा मीणा के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की. इस टीम में एएसआई जयसिंह, कांस्टेबल राजेश और महिला कांस्टेबल बीना व बाला कुमारी को शामिल किया गया.

पुलिस ने जांचपड़ताल के बाद हनीट्रैप का मामला बताते हुए 12 जून, 2021 को 33 वर्षीया पूर्व मिसेज इंडिया राजस्थान प्रियंका चौधरी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उसे रिमांड पर ले कर पूछताछ की.

पूछताछ के आधार पर पुलिस ने प्रियंका के कब्जे से 3 एसी, एलईडी और लैपटौप आदि बरामद किए. पुलिस ने 13 जून को उसे अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे जेल भेज दिया.

लग्जरी लाइफ थी प्रियंका की

प्रियंका चौधरी के ब्यूटी क्वीन बनने से जेल जाने तक का सफर उस के लग्जरी लाइफ जीने के सपनों से भरा रहा है. टोंक जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली प्रियंका सरकारी स्कूल में पढ़ी थी.

वह भले ही गांव में रहती थी, लेकिन उस का रूपसौंदर्य सब से अलग था. प्रियंका को अपनी सुंदरता पर नाज था, लेकिन गांव में रहने के कारण वह अपने सपनों की उड़ान नहीं भर पा रही थी.

सन 2008 में उस की शादी रामधन से हो गई. रामधन राजस्थान पुलिस में नौकरी करता है. रामधन जैसे गबरू जवान को पति के रूप में पा कर प्रियंका मन ही मन निहाल हो उठी. रामधन भी खुश था और प्रियंका भी. समय अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा. प्रियंका ने 2 बेटियों को जन्म दिया.

प्रियंका के अपने सपने थे. वह महत्त्वाकांक्षी थी, इसलिए शादी के बाद भी वह पढ़ाई करती रही. पति पुलिस में नौकरी करता था, लेकिन उस की तनख्वाह से उस के शौक पूरे नहीं हो सकते थे. उस ने अपने शौक पूरे करने के लिए जयपुर में रहने का फैसला किया. वह 2016 में जयपुर आ गई.

2019 में जब उसे पता चला कि जयपुर में मिसेज इंडिया राजस्थान कांटेस्ट हो रहा है, तो उस ने इस में भाग लेने का फैसला किया. रूपसौंदर्य में वह किसी से कम नहीं थी. इसलिए उसे पूरा भरोसा था कि वह कंटेस्ट जीतेगी. हुआ भी वही. प्रियंका मिसेज इंडिया राजस्थान चुनी गई.

आरोप है कि ब्यूटी क्वीन बनने के बाद प्रियंका की दबी हुई महत्त्वाकांक्षाएं हिलोरें मारने लगीं. उस के लग्जरी लाइफ जीने के सपने उड़ान भरने लगे. पति की तनख्वाह से ऐशोआराम की जिंदगी संभव नहीं थी. इसलिए उस ने घासीराम से नजदीकियां बढ़ाईं. वह उस से समयसमय पर रुपए ऐंठती रही.

2 बेटियों के भविष्य के नाम पर जब उस ने घासीराम पर 400 गज का प्लौट दिलाने का दबाव बनाया तो बात बिगड़ गई. नतीजा यह हुआ कि प्रियंका को जेल जाना पड़ा. लग्जरी लाइफ जीने की शौकीन प्रियंका के पास लग्जरी गाड़ी, फ्लैट है. उस की 2 बेटियां महंगे स्कूलों में पढ़ती हैं.

ब्यूटी क्वीन हुई गिरफ्तार

प्रियंका कितनी पाकसाफ है, यह अदालत तय करेगी, लेकिन उस की गिरफ्तारी को ले कर पुलिस पर आरोप लग रहे हैं. पुलिस ने घासीराम की रिपोर्ट पर प्रियंका को गिरफ्तार कर लिया.

उस से न तो किसी तरह की कोई अश्लील वीडियो बरामद हुई और न ही कोई दूसरी आपत्तिजनक सामग्री मिली, जिस से यह साबित हो कि प्रियंका उस आधार पर उसे बलात्कार के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दे रही थी. पुलिस ने घासीराम के मोबाइल में रिकौर्ड बातचीत के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया. पैसों के लेनदेन के मामले में पुलिस जांचपड़ताल कर रही है.

दूसरी तरफ, प्रियंका ने 21 मई को श्यामनगर थाने में घासीराम के खिलाफ घर आ कर मारपीट करने और तेजाब डालने की धमकी देने का जो मामला दर्ज कराया था, उस पर पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की.

पुलिस का कहना है कि इस मामले की अभी जांच चल रही है. घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई हैं. उस में घासीराम कहीं नजर नहीं आ रहा है. उस आवासीय परिसर में रहने वाले लोगों ने भी मारपीट की घटना होने से इनकार किया है.

क्षेत्र में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर प्रियंका के हाथ व्यापारी घासीराम की ऐसी कौन सी कमजोर कड़ी हाथ लग गई थी, जिस से उस ने लाखों रुपए प्रियंका को आसानी से दे दिए. वरना बिना किसी लालच व स्वार्थ के कोई किसी पर इतनी बड़ी राशि खर्च नहीं कर सकता. जरूर कोई तो ऐसा राज है, जिसे केवल घासीराम और प्रियंका ही जानते हैं. अब देखना यह है कि पुलिस जांच में वह राज सामने आ सकेगा या नहीं.

बहरहाल, घासीराम की रिपोर्ट पर पुलिस ने प्रियंका के साथ उस के पति रामधन चौधरी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. रामधन टोंक जिले में हैडकांस्टेबल के पद पर तैनात है. कथा लिखे जाने तक पुलिस को रामधन के खिलाफ इस मामले में कोई सबूत नहीं मिले थे.

ख्वाहिश का अंत : क्या हुआ था वी.जे. चित्रा के साथ

अगर कोई नामचीन एक्टर अपनी अदाकारी छोड़ दे तो उस का महत्त्व खुदबखुद खत्म हो जाएगा. उस की एक्टिंग ही तो उसे सितारा बनाती है. एक्टिंग छोड़ कर उस की महत्त्वाकांक्षाओं का क्या होगा, वह तो जिंदा रह कर भी मर जाएगा. उस के जीने का मकसद ही खत्म हो जाएगा.

शायद ऐसा ही कुछ दक्षिण भारत की सुप्रसिद्ध टीवी स्टार और एंकर वी.जे. चित्रा के साथ भी था, जो उस ने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया. होटल के कमरे में उन का शव पंखे से लटकता हुआ पाया गया.

9 दिसंबर, 2020 की सुबह के करीब 4 बजे थे. चेन्नै के नाजरथपेठ स्थित एक अस्पताल में कुछ लोग एक महिला को ले कर गए. डाक्टरों ने उस महिला का परीक्षण किया तो वह मृत पाई गई. जो लोग उस महिला को अस्पताल लाए थे, उन्होंने डाक्टरों को बताया कि वह टीवी स्टार वी.जे. चित्रा है. इस ने होटल के कमरे में फांसी लगा ली थी. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए अस्पताल की तरफ से इस की खबर थाने में दे दी गई.

अस्पताल नाजरथपेठ थाने से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए सूचना के 10 मिनट बाद ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंच गई.

मृतका एक हाईप्रोफाइल टीवी स्टार और एंकर थी. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया तो उस के गले पर हलके काले रंग का निशान मिला. डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि इन की मौत शायद फंदे से लटक कर दम घुटने की वजह से हुई है.

शव का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने अस्पताल में ही मौजूद मृतका के मंगेतर हेमंत रवि से पूछताछ की.

हेमंत रवि ने बताया  कि कल रात करीब ढाई बजे चित्रा चेन्नै के ईवीपी फिल्म सिटी से शूटिंग खत्म कर उस के साथ लौटी थी. होटल के कमरे में आने के बाद चित्रा कुछ मिनटों बाद नहाने के लिए बाथरूम चली गई थी.

उस के बाथरूम जाने के बाद वह भी अपना समय व्यतीत करने के लिए होटल के कमरे से बाहर निकल गया था. लगभग आधा घंटे बाद जब वह होटल के कमरे में आया तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. कई बार कमरे का दरवाजा खटखटाने और कालबैल बजाने के बाद जब दरवाजा नहीं खुला और अंदर कोई आहट भी नहीं हुई तो वह घबरा गया.

किसी अनहोनी की आशंका से वह भाग कर होटल की लौबी में गया और होटल मैनेजर को सारी बात बताई. होटल मैनेजर भी उस की बातें सुन कर परेशान हो गया. वह कुछ कर्मचारियों के साथ तुरंत होटल के कमरे पर पहुंचा. जब मैनेजर ने डुप्लीकेट चाबी से कमरे का दरवाजा खोला तो कमरे के अंदर का दृश्य देख कर उस के होश उड़ गए. चित्रा पंखे से लटकी हुई थी.

किसी करिश्मे की उम्मीद से उस ने होटल कर्मचारियों के सहयोग से पंखे से लटकी चित्रा को नीचे उतारा और स्थानीय अस्पताल ले गया. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.

हेमंत रवि से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने शव का पुन: निरीक्षण किया और साथ आए पति का सरसरी तौर पर बयान ले कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल को सौंप दिया और सीधे घटनास्थल पर आ गई.

घटनास्थल चेन्नै नाजरथपेठ इलाके का एक जानामाना फाइवस्टार होटल था. उस होटल में इस प्रकार की यह पहली घटना थी, जिसे ले कर होटल का मैनेजमेंट काफी परेशान था.

इस होटल में अपने कारोबार के सिलसिले में शहर के संपन्न लोग ही आ कर ठहरते थे. टीवी स्टार और एंकर वी.जे. चित्रा भी एक टीवी सीरियल की शूटिंग के बाद अपने मंगेतर हेमंत रवि के साथ आ कर वहां ठहरी थी.

पुलिस ने होटल के कमरे का बारीकी से निरीक्षण कर होटल के स्टाफ से पूछताछ की और मामले की सारी औपचारिकताएं पूरी कीं.

मशहूर अभिनेत्री और एंकर चित्रा ने कदमकदम पर कामयाबी की सीढि़यां चढ़ कर बहुत कम समय में लाखों लोगों के दिलों में अपनी एक खास जगह बना ली थी. पता नहीं क्यों वह दुनिया को छोड़ कर अलविदा कह गई थी.

सुबह जैसे ही टीवी और अखबारों में अभिनेत्री वी.जे. चित्रा की मौत की खबर सामने आई, चेन्नै के साथ पूरे दक्षिण भारत में आग की तरह फैल गई. वी.जे. चित्रा के अनगिनत चाहने वालों को गहरा सदमा लगा. लोग समझ नहीं पा रहे थे कि चित्रा ने खुदकुशी की थी या फिर उस की हत्या की गई थी.

यही सवाल पुलिस के लिए भी पहेली बना हुआ था. पुलिस भी मृतका के मंगेतर हेमंत रवि और होटल वालों के बयानों से सहमत नहीं थी. वी.जे. चित्रा की मौत की सुई सिर्फ उस के मंगेतर हेमंत रवि की तरफ घूम रही थी. वजह यह थी कि उस रात चित्रा के साथ मंगेतर हेमंत रवि के अलावा होटल के कमरे में और कोई नहीं था.

सवाल यह भी उठ रहा था कि चित्रा को अकेला छोड़ कर होटल के बाहर क्यों गया था. हेमंत रवि के होटल के बाहर जाने के बाद ही चित्रा रहस्यमयी हालत में होटल के कमरे के पंखे से लटकी मिली थी. जरूर कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ थी.

पुलिस जांच टीम ने अपनी जांच की शुरुआत वी.जे. चित्रा के मंगेतर हेमंत रवि से पूछताछ के साथ ही की. उधर वी.जे. चित्रा के पिता जो रिटायर्ड पुलिस इंसपेक्टर थे और परिवार यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि उन की बेटी ने बिना किसी वजह खुदकुशी की होगी.

उन का तो यहां तक कहना था कि उन की बेटी की हत्या कर उसे खुदकुशी का रूप देने की कोशिश की है.

लेकिन सवाल यह था कि आखिर वी.जे. चित्रा की मौत के पीछे कौन था. कुल मिला कर पुलिस टीम किसी भी नतीजे पर पहुंचने के पहले सारे पहलुओं को पूरी तरह से खंगाल लेना चाहती थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि चित्रा की मौत स्वाभाविक तौर पर पंखे के फंदे से लटकने की वजह से दम घुट कर हुई थी. उस के गले और गालों पर आए नाखूनों के जख्म उस के खुद के हाथों के ही पाए गए.

कुल मिला कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट वी.जे. चित्रा को ही अपनी मौत का जिम्मेदार बता रही थी, जबकि बाकी परिस्थितिजन्य साक्ष्य कुछ अलग ही कहानी कह रहे थे कि खुदकुशी के पीछे कहीं न कहीं उस के मंगेतर हेमंत रवि का रोल जरूर रहा होगा.

इन सब के आधार पर पुलिस टीम ने लगभग 6 दिनों तक लगातार हेमंत रवि से पूछताछ करने के बाद सच्चाई का पता लगा लिया. पता चला कि हेमंत रवि ने ही चित्रा को मानसिक रूप से इतना प्रताडि़त किया था कि उसे आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़ा. इस के बाद पुलिस ने हेमंत रवि को आईपीसी की धारा 306 के तहत चित्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ के बाद जो कहानी उभर कर सामने आई थी, वह चौंका देने वाली थी.

तमिल सीरियल और रियल्टी शोज की जान वी.जे. चित्रा की खुदकुशी सुशांत सिंह राजपूत की मर्डर मिस्ट्री की याद दिला रही थी. उस के चाहने वालों को भी यह यकीन नहीं हो रहा था कि चित्रा खुदकुशी कर सकती है. सवाल यह भी उठ रहा था कि आखिर उस की मौत की वजह क्या थी?

जिस के आने से रुपहले परदे पर नूर आ जाए, जिस के नशीले नैन चाहने वालों को मदहोश कर दें, ़जिस की दिलकश मुसकान दिल थामने के लिए विवश कर दे, ऐसी अभिनेत्री आखिर दुनिया को छोड़ कर क्यों चली गई.

तमिल इंडस्ट्री की जान वी.जे. चित्रा अपने आप में अदाकारी का एक कंप्लीट पैकेज थी. जब वह नाचती थी तो डांसर बन जाती थी. जब किसी किरदार में आती थी तो अदाकारा बना जाती थी और जब वह निजी जिंदगी में किसी से मिलती थी तो उसे अपना बना लेती थी.

28 वर्षीय वी.जे. चित्रा का जन्म 2 मई, 1992 को तमिलनाडु के चेन्नै में हुआ था. उन के पिता चेन्नै शहर के एक सशक्त छवि वाले पुलिस इंसपेक्टर थे. जबकि मां कुशल गृहिणी थीं. वी.जे. चित्रा उन की एकलौती और लाडली बेटी थी. परिवार साधारण व सुखीसंपन्न था.

वी.जे. चित्रा बचपन से ही होनहार थी. उस के दिल में फिल्म और टीवी कलाकार बनने की चाह थी. वह अकसर टीवी के सामने बैठ कर उस पर आने वाले सभी शोज को बड़े ध्यान से देखती थी. उस की नकल करती थी.

चहेती बेटी होने के कारण उस के मांबाप उस पर ध्यान नहीं देते थे, क्योंकि उन के सपने बेटी के सपनों से अलग थे. वे चाहते थे कि उन की बेटी उच्चशिक्षा पा कर किसी उच्चपद पर काम करे.

लेकिन बेटी की पसंद के कारण उन्हें उस के सामने झुकना पड़ा था. चित्रा ने चेन्नै कालेज से बीएससी करने के बाद चेन्नै माइकल टीवी से अदाकारी और एंकरिंग का डिप्लोमा ले कर उसी चैनल से अपना कैरियर शुरू कर दिया था.

टीवी की एंकर और शोज को होस्ट करतेकरते जब चित्रा ने टीवी सीरियल की तरफ कदम बढ़ाया तो उसे हर कदम पर कामयाबी मिली. देखते ही देखते उस की झोली में कई तमिल सीरियल आ गए थे.

चिन्ना पापा पेरिया पापा, वेलुनाची और पंडियन स्टोर में मुल्लई की भूमिका में आई वी.जे. चित्रा ने पूरे तमिलभाषियों के दिलों में अपनी एक जगह बना ली और रातोंरात वह सुपर तमिल स्टारों की श्रेणी में आ खड़ी हुई थी. उसे अदाकारी में इज्जत और मानसम्मान सब मिलने लगा.

बेटी सुपरस्टार बन गई थी. इस बात की खुशी सब से अधिक उस के मांबाप और नातेरिश्तेदारों को हुई थी. थोड़े ही दिनों में चित्रा बुलंदियों के उस मुकाम पर पहुंच गई थी, जहां पर लोगों को पहुंचने के लिए लंबा वक्त लगता है.

जैसेजैसे चित्रा के स्टारडम का दायरा बढ़ता गया, वैसेवैसे तमिल टीवी स्टार और रियल्टी शोज की होस्ट के कदम भी बढ़ते गए. टीवी रियल्टी शोज की पार्टियों में चित्रा का आनाजाना भी बढ़ गया था. इसी तरह लौकडाउन के पहले की एक पार्टी में उस की मुलाकात उस के होने वाले हमसफर हेमंत रवि से हो गई.

32 वर्षीय हेमंत रवि वैसे तो एक साधारण परिवार से संबंध रखता था, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उस ने शहर में एक कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना ली थी. दोनों की पहले नजरें मिलीं और धीरेधीरे दिल भी मिल गए.

हेमंत रवि के व्यवहार को देख कर चित्रा भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उस से आकर्षित हो कर उस की तरफ खिंची चली गई. यही हाल हेमंत रवि का भी था. चित्रा के बिना उसे एकएक पल भारी लगता था. उसे जब भी मौका मिलता था, वह चित्रा से मिलने के लिए उस के शूटिंग सेट पर पहुंच जाता और उस की शूटिंग खत्म होने तक इंतजार करता रहता.

शूटिंग खत्म होने के बाद दोनों मन बहलाने के लिए लंबी ड्राइव पर चले जाते, घूमतेफिरते खातेपीते थे. यह सिलसिला कुछ दिनों तक चलने के बाद जब हेमंत रवि को लगने लगा कि अब बिना चित्रा के नहीं रह सकता तो मौका देख कर उस ने शादी का प्रपोजल रख दिया. चित्रा को भी हेमंत रवि की आंखों में अपने लिए मोहब्बत दिखाई दी तो उस ने भी हां कर दी.

एक उभरती हुई अदाकारा और टीवी रियल्टी शोज की होस्ट चित्रा ने अगस्त 2020 में जब अपने होने वाले हमसफर हेमंत रवि का हाथ दुनिया के सामने थामा तो उस के लाखों चाहने वालों ने अपना दिल थाम लिया था. दोनों ने इस रिश्ते को एक नाम देने का फैसला किया और उन्होंने सगाई कर ली. दोनों परिवार इस रिश्ते से बेहद खुश थे, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई.

वी.जे. चित्रा और हेमंत रवि की जिंदगी में वैसे तो कोई ट्विस्ट नहीं था, जैसा कि आमतौर पर लवस्टोरीज में हुआ करता है. और तो और दोनों ने यह भी तय कर लिया था कि लौकडाउन की पाबंदियों से आजाद होने के बाद जनवरी 2021 में शादी कर के एक शानदार रिसैप्शन पार्टी आयोजित करेंगे, लेकिन उन का यह सपना पूरा नहीं हुआ.

कारण यह था कि सगाई हो जाने के 2-3 महीने बाद ही हेमंत रवि का व्यवहार चित्रा के प्रति बदलने लगा था. इस की वजह यह थी कि उसे चित्रा द्वारा सीरियलों में दिए इंटीमेट सीनों से चिढ़ थी.

सीरियल और रियल्टी शोज में इंटीमेट रोमांटिक सीनों को ले कर हेमंत ने कई बार टोका और मना भी किया था. वह चाहता था कि वह इंटीमेट सीन दुनिया के सामने न आए, पर यह बात चित्रा को पसंद नहीं थी. वह हेमंत के मना करने के बावजूद ऐसे एसाइनमेंट करती रही.

इसी बात को ले कर दोनों के बीच कहासुनी हो जाती जो झगड़े तक पहुंच जाती थी. हेमंत की इस तरह की टीकाटिप्पणी से चित्रा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी.

घटना वाली रात भी शूटिंग से लौटने के बाद होटल के कमरे में दोनों में इंटीमेट सीनों को ले कर कहासुनी हुई थी. जिस से नाराज हो कर चित्रा ने हेमंत से पीछा छुड़ाने के लिए नहाने की इच्छा जाहिर की और बाथरूम में चली गई.

यह देख कर हेमंत होटल के कमरे से बाहर चला गया. इतनी कहासुनी के बाद  चित्रा अपने आप को नौर्मल नहीं रखपाई और होटल के कमरे के पंखे से लटक कर सदासदा के लिए ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया.

हेमंत रवि से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

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संदेह का वायरस : ऐसे कर रहा परिवार को बर्बाद

संदेह और कलह ऐसी चीजें हैं, जो हंसतेखेलते परिवार को बरबादी के कगार  पर ले जा कर खड़ा कर देती हैं. अंबुज ने तो दोनों को ही प्यार से पाल रखा था, नतीजा यह…

नवी मुंबई के उपनगर घनसोली के रहने वाले महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी की बहू नीलम और बेटा अंबुज तिवारी 22

जुलाई, 2020 की शाम साढ़े 5 बजे बिना किसी को बताए घर से निकल गए. पतिपत्नी थे, कहीं भी घूमने जा सकते थे, इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया.

घर वाले तब परेशान हुए, जब दोनों शाम को लौट कर नहीं आए. परेशानी तब हदें पार कर गई जब अगले दिन भी दोनों न तो घर लौटे और न ही फोन किया. दोनों के फोन भी स्विच्ड औफ थे, सो उन से बात भी नहीं हो पा रही थी.

मामला जवान बहू और बेटे का था, इसलिए घर वाले सोच रहे थे कि दोनों जवान हैं, कहीं दूर घूमने भी जा सकते हैं. फिर भी जैसेजैसे समय बीत रहा था, घर वालों की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, इस की खास वजह थी उन के मोबाइल स्विच्ड औफ होना.

हैरानपरेशान महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी पूरी रात पूरे दिन 10 बजे तक उन की तलाश जानपहचान वालों और नातेरिश्तेदारों के यहां करते रहे. जब कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली तो उन के मन में किसी तरह की अनहोनी को ले कर तरहतरह के विचार आने लगे.

जब सारी कोशिशें बेकार गईं तो महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी रात साढ़े 10 बजे कुछ नातेरिश्तेदारों के साथ थाना रबाले पहुंचे और थानाप्रभारी योगेश गावड़े को सारी बातें बता दीं. योगेश गावड़े ने उन के बेटे और बहू की गुमशुदगी दर्ज करवा दी.

गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होते ही थानाप्रभारी योगेश गावड़े हरकत में आ गए. उन्होंने इस मामले की जानकारी पहले पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, जौइंट सीपी राजकुमार व्हटकर, डीसीपी जोन-1 पंकज दहाणे, एसीपी (वाशी डिवीजन) विनायक वस्त के साथ नवी मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी.

इस के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इस की जांच की जिम्मेदारी इंसपेक्टर गिरधर गोरे को सौंप दी. उन की सहायता के लिए इंसपेक्टर उमेश गवली, सहायक इंसपेक्टर तुकाराम निंबालकर, प्रवीण फड़तरे, संदीप पाटिल और अमित शेलार को नियुक्त किया गया.

जांच की जिम्मेदारी मिलते ही इंसपेक्टर गिरधर गोरे ने अपने सहायकों के साथ मामले पर गहराई से विचार कर के जांच की रूपरेखा तैयार की ताकि जांच तेजी से हो सके. सब से पहले उन्होंने गुमशुदा अंबुज तिवारी और उस की पत्नी नीलम तिवारी के हुलिए सहित उन की फोटो नवी मुंबई के सभी पुलिस थानों को भेजे. साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि उन के बारे में कहीं से कोई सूचना मिले तो जानकारी दें. साथ ही तेजतर्रार मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया था.

इस के बाद इंसपेक्टर गिरधर गोरे ने अंबुज और नीलम के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए. जहांजहां उन के मिलने की संभावना थी, गिरधर गोरे ने वहांवहां अपनी टीम भेजी. लेकिन अंबुज और नीलम के बारे में कहीं से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली, जिस के सहारे उन तक पहुंचा जा सके.

उन के पड़ोसियों ने यह जरूर बताया कि अंबुज और नीलम की अकसर तकरार होती थी. लेकिन दोनों घर छोड़ कर कहां गए होंगे, किसी को कोई जानकारी नहीं थी. जिस फर्म में अंबुज काम करता था, वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

इंसपेक्टर गिरधर गोरे अपनी टीम के साथ जांच तो कर रहे थे, लेकिन उन की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि पतिपत्नी दोनों वयस्क थे, जहां जाना चाहते, आजा सकते थे. फिर लौकडाउन में उन का बिना किसी को कुछ बताए घर से निकल जाना और पूरे दिनरात घर न आना, रहस्यमय था.

कहां गए होंगे और क्यों गए होंगे, यह गुत्थी सुलझ नहीं रही थी. इस गुत्थी को सुलझाने में पुलिस टीम को 4 से 5 दिन लग गए. जब यह गुत्थी सुलझी तो जांच टीम अवाक रह गई.

मुखबिर ने दिया सूत्र

28 जुलाई, 2020 को इंसपेक्टर गिरधर गोरे को एक मुखबिर ने खबर दी कि जिस अंबुज और नीलम तिवारी को वह खोज रहे हैं, उन्हें घनसोली की अर्जुनवाड़ी में देखा गया है. यह खबर मिलते ही इंसपेक्टर गिरधर गोरे ने अपनी काररवाई के लिए टीम को सजग कर दिया.

उन की टीम ने छापा मार कर अंबुज तिवारी को अपनी गिरफ्त में लिया और उसे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ले जाया गया. अधिकारियों ने उस से फौरी तौर पर पूछताछ कर के जांच टीम के हवाले कर दिया.

जांच टीम ने जब उस से नीलम के बारे में पूछताछ की तो उस ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन जांच टीम उस की बातों से सहमत नहीं थी. उस के चेहरे से मक्कारी साफ झलक रही थी, वह कुछ छिपा रहा था. सच की तह में जाने के लिए जब उसे रिमांड पर लिया तो उसे बोलना पड़ा.

अंबुज ने बताया कि उस ने अपने दोस्त के साथ मिल कर नीलम की हत्या कर दी है. उस ने आगे बताया कि नीलम के शव को प्लास्टिक के ड्रम में डाल कर वह और उस का दोस्त टैंपो से मुंबई-पुणे हाइवे होते हुए लोनावला के पास गांव दापोली के पास पहुंचे और लाश घनी झाडि़यों में छिपा दी.

पुलिस टीम को नीलम तिवारी का शव बरामद करना था. अंबुज तिवारी के बयान पर पुलिस टीम ने अपराध में शामिल उस के दोस्त श्रीकांत चौबे को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने अंबुज तिवारी की बातों की पुष्टि की.

श्रीकांत चौबे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम दोनों को ले कर मुंबई-पुणे हाइवे के लोनावला, दापोली के बीच पहुंची और प्लास्टिक का वह ड्रम बरामद कर लिया. ड्रम का ढक्कन खोल कर नीलम तिवारी का शव बाहर निकाला गया फिर बारीकी से उस का निरीक्षण कर के पंचनामा बनाया गया. शव को पोस्टमार्टम के लिए मुंबई के गांधी अस्पताल भेज कर पुलिस टीम थाने लौट आई. पूछताछ में नीलम तिवारी हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस की पृष्ठभूमि कुछ इस तरह थी—

65 वर्षीय महेंद्रनाथ हरिहर तिवारी मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के लालगंज बाजार के रहने वाले थे. अच्छे काश्तकार होने के साथ वह एक उच्चकुल के ब्राह्मण थे. गांव में उन की काफी इज्जत थी. उन का पूरा परिवार गांव में रहता था. महेंद्रनाथ सालों पहले मुंबई आ बस गए. वह करीब 30 सालों से महानगर नवी मुंबई के घनसोली इलाके में रहते आ रहे थे और फलों का व्यवसाय करते थे.

28 वर्षीय अंबुज तिवारी उन का बेटा था, जिसे वह बहुत प्यार करते थे. स्वस्थ, सुंदर अंबुज तिवारी ने साइंस से अपनी पढ़ाई पूरी की थी. फलस्वरूप उसे मुंबई जैसे महानगर में नौकरी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ा.

पढ़ाई पूरी कर के वह सन 2010 में नौकरी के लिए पिता के पास मुंबई आ गया था. मुंबई में उसे कुर्ला की एक जानीमानी सीमेंट मिक्सिंग कंपनी में क्वालिटी सुपरवाइजर की नौकरी मिल गई. अंबुज तिवारी जिस फर्म में काम करता था, उसी में श्रीकांत चौबे भी नौकरी कर रहा था. वह फर्म में टैंपो ड्राइवर था. वह माल डिलिवरी करता था.

23 वर्षीय श्रीकांत जयनारायण चौबे भी मूलरूप से आजमगढ़ का ही रहने वाला था. जल्दी ही दोनों की जानपहचान दोस्ती में बदल गई. जब भी मौका मिलता, दोनों घूमनेफिरने निकल जाते थे.

अच्छी नौकरी और अंबुज की बढ़ती उम्र को देखते हुए महेंद्रनाथ तिवारी अंबुज की शादी कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना चाहते थे. उन्होंने जानपहचान और नातेरिश्तेदारी में अंबुज की शादी की बात चलाई तो उन्हें नीलम के बारे में जानकारी मिली.

बातचीत के बाद 2016 में नीलम और अंबुज की शादी हो गई. शादी के बाद अंबुज ने कुछ दिनों के लिए नीलम को अपनी मां की सेवा के लिए गांव में छोड़ दिया था. वह खुद पिता के साथ मुंबई में रहता रहा. बीचबीच में वह छुट्टी ले कर गांव जाता रहता था.

मगर नीलम इस से संतुष्ट नहीं थी. वह उस से इस बात की शिकायत करती थी कि उस के बिना उसे गांव अच्छा नहीं लगता. वह सारी रात उस को याद करकर के करवटें बदलती है. वैसे भी तुम्हें और पापा को खाना बनाने में तकलीफ होती होगी. नीलम की शिकायत वाजिब थी. क्योंकि वह जवान और नईनवेली दुलहन थी. उस के भी अपने सपने और अरमान थे. उस का भी दिल पति के साथ रहने के लिए मचलता था, पर अंबुज की अपनी कुछ विवशताएं थीं.

उस की मां बूढ़ी हो चली थी. मुंबई में वह पिता के साथ रहता था. घर छोटा था, ऐसे में वह घर में कैसे रहेगी. काफी सोचविचार के बाद उसे नीलम की जिद पर उसे मुंबई ले कर आना पड़ा.

नीलम को अपने पति और ससुर के साथ रहते हुए लगभग एक साल से अधिक हो गया था. मुंबई आ कर नीलम ने घर और रसोई का सारा काम संभाल लिया था. पति के साथ नीलम बहुत खुश थी. मगर उस की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रही. उस के सुखी जीवन में परेशानी कुछ इस कदर आ कर बैठ गई कि उस का मानसम्मान सब रेत की दीवार की तरह ढह गया.

फोन बना परेशानी

नीलम का कुसूर सिर्फ इतना था कि वह चंचल स्वभाव और खुले विचारों वाली हंसमुख और मिलनसार युवती थी. घर का कामकाज निपटा कर वह दिल बहलाने के लिए फोन पर अपनी फ्रैंड्स और मायके वालों के साथ चिपक जाती थी.

इस बीच जब अंबुज को नीलम से बात करने की इच्छा होती थी तो उस का फोन बिजी रहता था, जिसे ले कर अंबुज के मन में तरहतरह के खयाल आने लगे थे. धीरेधीरे यही खयाल संदेह का वायरस बन कर अंबुज के दिमाग में बैठ गया.

उसे लगा कि नीलम का गांव में किसी युवक के साथ चक्कर है. इस बारे में अंबुज ने जब नीलम से बात की तो वह स्तब्ध रह गई. फिर उस ने अपने आप को संभाल लिया और कहा कि यह सब उस के मन का वहम है.

नीलम के लाख सफाई देने के बाद भी संदेह का वायरस अंबुज के दिमाग से नहीं गया. वह बातबात पर अकसर नीलम से लड़ाई और मारपीट करने लगा. संदेह का वायरस उस के दिमाग में कुछ इस प्रकार घुसा था कि उस ने नीलम को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया.

घटना वाली रात अंबुज पिता महेंद्रनाथ तिवारी को बिना बताए नीलम को यह कह कर साथ ले गया कि उस के दोस्त की बर्थडे पार्टी है. दोनों श्रीकांत चौबे के घर अर्जुनवाड़ी आ गए.

अर्जुनवाड़ी में श्रीकांत चौबे के घर कोई पार्टी न देख नीलम को ठीक नहीं लगा क्योंकि अंबुज उसे झूठ बोल कर लाया था. इसलिए वह अंबुज से घर लौटने की जिद करने लगी. इस पर अंबुज ने उस के दुपट्टे से गला कस दिया और तब तक कसता रहा जब तक नीलम के प्राणपखेरू नहीं उड़ गए.

अंबुज की इस हरकत से श्रीकांत चौबे बुरी तरह डर गया. श्रीकांत को अंबुज तिवारी की यह योजना मालूम नहीं थी. उस ने अंबुज को खाना खाने के लिए बुलाया था. नीलम की हत्या करने के बाद अंबुज ने उस के शव को ठिकाने लगाने के लिए श्रीकांत चौबे से मदद मांगी.

दोस्ती के नाते श्रीकांत उस की मदद करने को तैयार हो गया. उस की मजबूरी यह भी थी कि लाश उस के घर में पड़ी थी. दोनों ने नीलम के शव को प्लास्टिक के ड्रम में डाल कर टैंपो पर लाद दिया और मुंबई-पुणे हाइवे के दोपाली और लोनावला के बीच घनी झाडि़यों में डाल आए, जहां से पुलिस ने शव बरामद कर लिया.

अंबुज महेंद्रनाथ तिवारी और श्रीकांत जयनारायण चौबे से विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. बाद में दोनों को अदालत पर पेश कर के तलोजा जेल भेज दिया गया. वारदात में इस्तेमाल टैंपो को पुलिस ने कब्जे में ले लिया था.

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37 सेकेंड में 35 लाख की लूट

यूंतो ज्यादातर दुकानदार कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हैं, लेकिन बड़े दुकानदार खासकर शोरूम मालिक अपने और ग्राहकों के नजरिए से नियमों का पूरा पालन करते हैं. इस से ग्राहकों पर भी अच्छा इंप्रेशन पड़ता है. इसी के मद्देनजर सुंदर ज्वैलर्स के मालिक सुंदर वर्मा ने यह जिम्मेदारी गेट के पास बैठने वाले सेल्समैन को सौंप रखी थी.

कोई भी ग्राहक आता तो सेल्समैन सेनेटाइजर की बोतल उठा कर पहले उसके हाथ सेनेटाइज कराता, फिर वेलकम के साथ अंदर जाने को कहता.

उस दिन शोरूम में जूलरी खरीदने वाले 2-3 ग्राहक मौजूद थे. तभी मास्क लगाए 2 युवकों ने शोरूम में प्रवेश किया. गेट के पास काउंटर पर बैठे सेल्समैन ने सेनेटाइजर से दोनों के हाथ सेनेटाइज कराए. तभी दोनों युवकों ने अपनीअपनी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर तमंचे निकाल लिए. उसी वक्त उन का तीसरा साथी अंदर आ गया.

यह देख शोरूम में मौजूद सभी लोग दहशत में आ गए. एक युवक ने तमंचा तानते हुए काउंटर पर रखा जूलरी बौक्स उठा लिया. इतना ही नहीं, सुंदर वर्मा के बेटे यश को तमंचे के निशाने पर ले कर वह काउंटर लांघ कर तिजोरी के पास पहुंच गया.

तिजोरी में कीमती जेवर रखे हुए थे. तिजोरी से जेवरों के डिब्बे, नकदी निकाल कर वह अपने साथी को देने लगा. साथी लुटेरे के पास बैग था, वह जेवर बैग में भरता रहा. इस काम में उस का तीसरा साथी भी मदद कर रहा था.

बैग को जेवरों के डिब्बों और नकदी से भर कर वे तीनों तमंचे लहराते हुए शोरूम से बाहर निकल गए. यह सारा काम महज 37 सेकेंड में निपट गया.

शोरूम के बाहर लुटेरों की मोटरसाइकिल खड़ी थी. तीनों बाइक पर बैठ कर भाग निकले. यह 11 सितंबर, 2020 की बात है.

लुटेरों ने शोरूम में प्रवेश कर के जब अपने हाथ सैनेटाइज किए, तभी उन के हावभाव से खतरे की आशंका भांप कर शोरूम मालिक सुंदर वर्मा फुरती से शोरूम के पिछले गेट से बाहर निकल कर पीछे बने जीने से छत पर चढ़ गए थे. ऊपर जा कर वह चोरचोर चिल्लाते हुए शोर मचाने लगे.

इसी बीच लुटेरे लूट की घटना को अंजाम दे कर शोरूम से भाग निकले. सुंदर वर्मा के शोर मचाने पर आसपास के दुकानदारों और सड़क पर आतेजाते लोगों का ध्यान उन की तरफ गया, लेकिन बदमाशों के हाथों में हथियार देख कर लोग दहशत में आ गए. किसी ने भी बदमाशों को रोकने या टोकने की हिम्मत नहीं दिखाई. लुटेरे खैर रोड की ओर भाग गए.

दिनदहाड़े जूलरी शोरूम में हुई लूट की जानकारी होते ही आसपास के दुकानदारों में सनसनी फैल गई. घटना की खबर मिलने पर आईजी पीयूष मोर्डिया, एसएसपी मुनिराज, एसपी (सिटी) अभिषेक, थाना बन्नादेवी के प्रभारी निरीक्षक रविंद्र दुबे, एसओजी और सर्विलांस टीमें शोरूम पर पहुंच गईं.

पुलिस अधिकारियों ने शोरूम मालिक सुंदर वर्मा से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली.

पुलिस पूछताछ में सुंदर वर्मा से पता चला कि 37 सेकेंड की लूट में लुटेरों ने लगभग 35 लाख की जूलरी और 50 हजार की नकदी लूट ली थी.

शोरूम में मौजूद महिला ग्राहक ने लुटेरों की नजरों से बचा कर अपना बैग पीछे छिपा कर बचा लिया था. एक पुरुष ग्राहक काउंटर पर जिस बौक्स में जूलरी देख रहा था, लुटेरे ने उस बौक्स को खींच कर बैग में डाल लिया था. इस दौरान शोरूम के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे. सुंदर वर्मा ने एसएसपी पर बिफर कर गुस्से का इजहार किया. उन्होंने कहा कि 4 साल पहले भी उन के शोरूम पर लूट हुई थी. आज तक न तो माल मिला और न ही लुटेरे पकड़े गए. इस पर इलाके के लोग भी सुंदर वर्मा के समर्थन में आ गए. दिनदहाड़े हुई इस लूट पर सभी ने नाराजगी जताई.

एसएसपी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि संयम रखें. इलाके में पुलिस का विश्वास कायम होगा. इस में कुछ समय जरूर लग सकता है, लेकिन इस बार आप को लगेगा कि पुलिस आप के साथ है.

बहरहाल, सुंदर वर्मा की तहरीर पर 3 अज्ञात लुटेरों के विरुद्ध लूट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया, जिस में 50 हजार रुपए नकदी और करीब 35 लाख रुपए मूल्य के आभूषण लूटने की बात कही गई. घटना के बाद जांच में जुटी पुलिस टीमों ने खैर रोड के सीसीटीवी देखे तो तीनों बदमाश नादा चौराहे से पहले गोमती गार्डन गेस्टहाउस की ओर जाते दिखे. बाद में उन के खैर रोड पर भागने का पता चला. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि बदमाश खैर या खोड़ा क्षेत्र के रहे होंगे.

इस को आधार बना कर पुलिस ने अपना ध्यान इसी क्षेत्र के बदमाशों पर लगाया. शोरूम के सीसीटीवी में पूरी घटना रिकौर्ड हुई थी. वहां से जो फुटेज मिले, वे बिलकुल साफ थे, उस से तीनों बदमाशों को पहचाना जा सकता था. इसलिए पुलिस ने उसी फुटेज से बदमाशों के फोटो निकलवा कर जारी कर दिए गए. इस के साथ ही लोगों को बदमाशों का हुलिया बता कर जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाने लगा.

ज्वैलरी शोरूम में दिनदहाड़े लूट को अंजाम देने वाले तीनों लुटेरे बेशक मास्क पहने थे, लेकिन उन के चेहरे और कदकाठी सीसीटीवी में कैद हो गई थी, जिसे पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था.

एसएसपी मुनिराज की ओर से लोगों से अपील की गई कि जो भी लुटेरों के बारे में जानकारी देगा, उस का नाम गुप्त रखा जाएगा, साथ में पुलिस स्तर से उसे पुरस्कार भी दिया जाएगा. लूट के खुलासे के लिए पुलिस ने एड़ीचोटी का जोर लगा दिया था. इस के साथ ही एसएसपी ने पुलिस पैट्रोलिंग में लापरवाही को ले कर इंसपेक्टर रविंद्र दुबे को निलंबित कर दिया. लूट के दूसरे दिन यानी शनिवार को एडीजी (जोन) अजय आनंद भी घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने सुंदर वर्मा से पूरी घटना के बारे में बारीकी से जानकारी ली.

इस लूटकांड के लिए इंसपेक्टर बन्नादेवी को निलंबित किए जाने के बाद से जांच टीम से थाना पुलिस को अलग कर दिया गया था. एसपी (सिटी) अभिषेक और एसपी (क्राइम) के नेतृत्व में एसओजी, सर्विलांस के अलावा इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल व एसओ (जवां) अभय कुमार की टीमें जांच में लगाई गईं.

बदमाशों की कदकाठी, बालों के स्टाइल से एक सवाल यह भी खड़ा हुआ कि बदमाश कहीं पुलिस मैडीकल में शामिल होने तो नहीं आए थे. इस बात की तस्दीक करने के लिए एक टीम ने पुलिस लाइन मेडीकल बोर्ड कक्ष के अंदर व बाहर लगे सीसीटीवी चैक कर के बदमाशों के हुलिया का मिलान किया, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ.

इस लूटकांड की जांच में जुटी पुलिस को अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले सुराग हाथ लगे. इन में सब से खास यह था कि घटना के समय शोरूम में मौजूद 3 ग्राहकों में जहां एक दंपति थे, वहीं एक पुरुष ग्राहक पेशेवर लुटेरा भी था, जो अपने गिरवी जेवर छुड़ाने के लिए पहुंचा था. हालांकि ज्वैलर ने उसे पुलिस के सामने क्लीन चिट दे दी थी कि वह पुराना कस्टमर है.

मगर पुलिस ने उस से भी व्यापक पूछताछ की. वह मूलरूप से खैर क्षेत्र का रहने वाला था, जो थाना बन्नादेवी क्षेत्र में आता था. वह पहले भी देहली गेट की एक लूट में जेल गया था. पुलिस ने उस से पूछताछ की. कुछ हाथ नहीं लगा तो उसे छोड़ दिया गया.

घटना के समय शोरूम में मौजूद ग्राहक दंपति नगला कलार के रहने वाले थे, वे भी पुराने ग्राहक थे. बदमाशों के भागते समय कुछ जेवर शोरूम के फर्श पर गिर गए थे, उन्हें महिला ने बटोर कर अपने कपड़ों में छिपा लिया था. यह दृश्य सीसीटीवी में कैद हो गया था.

पुलिस ने दंपति को पूछताछ के लिए बुला लिया. पहले तो महिला ने जेवर बटोरेने की बात से इनकार किया. लेकिन जब सीसीटीवी में घटना रिकौर्ड होने की बात बताई गई तो महिला डर गई. उस ने चुपचाप जेवर वापस कर दिए.

नहीं जुड़ी टूटीफूटी कडि़यां

35 लाख के जेवरात की लूट में अभी कोई लुटेरा पुलिस के हाथ नहीं लगा था. जबकि पुलिस दावा कर रही थी कि वह लूट के खुलासे के करीब है.

शिनाख्त के बाद पुलिस लूट और लुटेरों की कडि़यां जोड़ रही थी. पुलिस टीमें लुटेरों की धरपकड़ के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए थीं. उम्मीद की जा रही थी कि जल्द ही पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगेगी. एक पुलिस टीम यह पता लगाने में जुटी थी कि लुटेरे किस की मुखबिरी से लूट करने आए थे. लूट के बाद कहां गए और उन्होंने लूटा हुआ माल कहां गलाया या छिपाया.

पुलिस ने उस बदमाश को भी क्लीनचिट नहीं दी थी जो मौके पर अपने गिरवी जेवरात छुड़ाने पहुंचा था. इसी बीच अचानक कुछ ऐसा हुआ कि अलीगढ़ पुलिस हैरान रह गई.

16 सितंबर बुधवार की शाम नोएडा पुलिस ने मुठभेड़ के बाद अलीगढ़ के एक ज्वैलर के यहां लूट करने वाले 3 लुटेरों को सेक्टर 38ए स्थित जीआईपी मौल के पास से गिरफ्तार कर लिया. मुठभेड़ के दौरान तीनों बदमाशों को पैर में गोली लगी.

कोतवाली सेक्टर-39 पुलिस ने तीनों घायल लुटेरों को अस्पताल में भरती कराया. पुलिस ने उन से सुंदर ज्वैलर्स शोरूम से लूटी गई 35 लाख की जूलरी में से लगभग 6 लाख की जूलरी, एक मोटरसाइकिल और 3 तंमचे, जिंदा कारतूस व खोखे बरामद किए.

गिरफ्तार बदमाशों की पहचान अलीगढ़ के गांव सोफा खेड़ा निवासी सौरव कालिया, रोहित और मोहित के रूप में हुई.

पूछताछ में तीनों ने सुंदर ज्वैलर्स शोरूम में दिनदहाड़े लूट करने का जुर्म कबूल करते हुए जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

इन बदमाशों ने सुंदर ज्वैलर्स को लूटने की योजना फरवरी महीने में ही बना ली थी. तीनों बदमाश नोएडा की एक नामचीन पान मसाला बनाने वाली फैक्टरी में नौकरी करते थे और गाहेबगाहे अपराधों को भी अंजाम देते थे.

तीनों बदमाशों में से एक का चाचा अलीगड़ में खैर रोड स्थित नादा पुल के पास रहता था. बदमाश अकसर उस के पास आया करते थे. इसी दौरान इन की नजर खैर रोड स्थित सुंदर ज्वैलर्स के शोरूम पर पड़ी.

फरवरी में तीनों बदमाश सुंदर ज्वैलर्स शोरूम के सामने से हो कर गुजरे थे. लूट को अंजाम देने से पहले इन बदमाशों ने शोरूम की लोकेशन देखने के साथ आसपास के पूरे इलाके की रेकी की थी.

वारदात को अंजाम देने के बाद इन्हें वापसी के लिए यह शोरूम सब से सही लगा था, लेकिन फरवरी महीने के बाद लौकडाउन लगने से ये लोग लूट को अंजाम नहीं दे पाए. इस के बाद लौकडाउन में तीनों की नौकरी चली गई.

पैसों की जरूरत महसूस हुई तो तीनों को एक बार फिर खैर रोड स्थित सुंदर ज्वैलर्स के शोरूम की याद आई और फिर मौका मिलते ही इन्होंने वारदात को अंजाम दे दिया.

ज्वैलर लूटकांड में शामिल लुटेरे पेशेवर अपराधी हैं. खास बात यह है कि ये लोग उत्तर प्रदेश में पहली बार पकड़े गए हैं. इस से पहले इन की गिरफ्तारी गुरुग्राम में हुई थी. वहां से जमानत पर छूटने के बाद तीनों गाजियाबाद के खोड़ा में जा कर रहने लगे थे.

ये लोग वहीं से इधरउधर अपराध करने जाते थे. चूंकि तीनों बदमाश पान मसाला फैक्टरी में नौकरी करते थे, इसलिए गांव के आसपास के ज्यादा लोगों को इन पर शक नहीं होता था. बाद में जब इन के कारनामे उजागर हुए तो लोग हैरान रह गए. 11 सितंबर को अलीगढ़ स्थित जूलरी शोरूम में लूट की घटना को अंजाम के बाद तीनों मोटरसाइकिल पर सवार हो कर फरार हो गए थे.

घटना के बाद ये लोग फरीदाबाद में छिप गए. मुठभेड़ वाले दिन तीनों लुटेरे मोटरसाइकिल से खोड़ा में किराए पर लिए कमरे पर जा रहे थे. पुलिस ने जब खोड़ा स्थित इन बदमाशों के कमरे की तलाशी ली तो वैसे ही कपड़े मिले जैसे एक बदमाश घटना के समय पहने था, जो सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दे रहे थे.

लौकडाउन में आई याद ज्वैलरी शोरूम की

सुंदर ज्वैलर्स के शोरूम पर लूट करने वाले तीनों बदमाशों ने एक साल पहले 12 अक्टूबर, 2019 को अपने गांव सोफा खेड़ा की प्रधान शांतिदेवी के 53 वर्षीय पति कालीचरण की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

कालीचरण की हत्या इन्होंने सुपारी ले कर की थी. कालीचरण पर गांव के ही हरिओम की हत्या का आरोप था. हरिओम का बेटा अमन जो जेल में है, ने इन तीनों लुटेरों को सुपारी दे कर कालीचरण की हत्या कराई थी. इस के बाद से ये तीनों गांव से फरार थे.

तीनों बदमाशों का अपराधों से गहरा संबंध रहा है. इन का गिरोह अलीगढ़ जनपद में डी श्रेणी में सौरभ गैंग के रूप में दर्ज है. अलीगढ़ के अलावा दिल्ली एनसीआर क्षेत्र, गुरुग्राम, नोएडा, सिकंदराराऊ, अतरौली और खैर आदि में भी इन पर संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं. इन में सौरव कालिया पर 7, रोहित पर 8 तथा मोहित पर 9 मुकदमे लूट, चोरी, धमकी देने, आर्म्स एक्ट, हत्या और हत्या के प्रयास के मुकदमे दर्ज हैं.

सौरव और मोहित पर गैंगस्टर एक्ट में काररवाई भी हो चुकी है. लौकडाउन में भी गुरुग्राम की पुलिस खैर स्थित सोफा खेड़ा में इन बदमाशों के घर पहुंची थी और कुर्की नोटिस चस्पा कर गई थी.

बन्नादेवी पुलिस ने न्यायालय में बी वारंट के लिए आवेदन किया था, जिस पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को अलीगढ़ न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया. नोएडा पुलिस ने 21 सितंबर को बी वारंट पर तीनों को अलीगढ़ न्यायालय में पेश किया. अदालत ने इन तीनों को लूट के मुकदमे में अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया.

पकड़े गए बदमाशों की आजीविका का मुख्य आधार लूटपाट ही था. लूटपाट कर के ये लोग उस पैसे को अपने शौक और ऐशोआराम पर खर्च करते थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्यमनोहर कहानियां, नवंबर 2020

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छोटा पाखंडी, बड़ा अपराध: पुजारी का कारनामा

 छत्तीसगढ़ के जिला बलौदा बाजार भाटापारा के पलारी थाने के अंतर्गत एक गांव है छेरकाडीह. यशवंत साहू इसी गांव में अपनी पत्नी, छोटे भाई जितेंद्र साहू व मातापिता के साथ संयुक्त परिवार में रहता था. यह परिवार धार्मिक आस्थावान था. घर में अकसर पूजापाठ, कथा का आयोजन होता रहता था. यह पूजापाठ के ये कार्यक्रम पंडित रविशंकर शुक्ला संपन्न कराता था.

पंडित रविशंकर पास के ही गांव जारा में रहता था. आसपास के कई गांवों के लोग उसी के यजमान थे. रविशंकर शुक्ला ने होश संभालने के साथ ही पुरोहित का काम करना शुरू कर दिया था.

एक बार की बात है. सुबह के 10 बजे यशवंत साहू के यहां सत्यनारायण की कथा का आयोजन था. उस दिन 32 वर्षीय रविशंकर शुक्ला यशवंत साहू के घर पहुंचा. यशवंत साहू ने उस का स्वागत किया. रविशंकर शुक्ला ने घर में इधरउधर नजरें दौड़ाने के बाद पूछा, ‘‘यजमान, देवी माहेश्वरी कहां हैं, दिखाई नहीं दे रहीं.’’

‘‘रसोई में है महराज, अभी आ जाएगी. आप बैठिए, मैं पूजा की कुछ सामग्री लाना भूल गया हूं, बाजार से ले कर आता हूं, तब तक आप चाय आदि ग्रहण करें.’’ यशवंत साहू ने कहा.

यशवंत साहू मोटरसाइकिल ले कर बाजार के लिए रवाना हुआ तो पंडित रविशंकर उठ खड़ा हुआ और रसोई की ओर दबे पांव आगे बढ़ा.

रसोई में माहेश्वरी साहू पूजा के लिए प्रसाद बना रही थी. तभी पंडित रविशंकर ने किचन में पहुंच कर पीछे से माहेश्वरी के गले में बांहें डाल दीं.

‘‘अरे! कौन.’’ माहेश्वरी ने घबरा कर देखा तो पीछे पंडितजी थे. वह बोली, ‘‘अरे महाराज आप?’’

‘‘हां, साहूजी को मैं ने बाजार भेजा है. घबराने की जरूरत नहीं है.’’ कह कर पंडित रविशंकर रहस्यमय भाव से  मुसकराया .

‘‘अरे, घर में  पूजा है ,बच्चे हैं और तुम…’’

‘‘अरेअरे, क्या कहती हो… चलो.’’ पंडित अपने रंग में आने लगा.

‘‘नहीं… नहीं तुम आज पूजा कराने आए हो… तुम्हें थोड़ी भी समझ नहीं है क्या.’’ माहेश्वरी ने मीठी झिड़की दी.

‘‘मुझे तुम्हारे अलावा कुछ दिखाई नहीं देता… सच कहूं तो तुम ही मेरी भगवान हो.’’ वह बेशरमी से बोला.

‘‘छि…छि… यह क्या कह रहे हो. थोड़ी तो शर्म करो, मैं तुम्हें कितना अच्छा समझती थी.’’

‘‘क्यों, मुझे क्या हो गया है… मैं तो तुम्हें अभी भी उसी तरह चाहता हूं जैसा कि ठीक 2 साल पहले… जब तुम्हारीहमारी पहली मुलाकात हुई थी.’’

‘‘अच्छा, सब याद है,’’ अचरज से माहेश्वरी का मुंह खुला का खुला रह गया.

‘‘हां तारीख, दिन, समय… सब कुछ… वह दिन मैं भला कैसे भूल सकता हूं. क्या तुम भूल गई हो?’’ रविशंकर शुक्ला ने पूछा .

‘‘अच्छा, अभी तुम बैठक मैं पहुंचो… मैं 2 मिनट में आती हूं…’’ कह कर माहेश्वरी ने रविशंकर को जाने को कहा तो रविशंकर इठला कर बोला, ‘‘मैं चाय पीऊंगा तुम्हारे हाथों की. इस के बाद ही यहां से टलूंगा.’’

‘‘हां, मैं बनाती हूं महाराज,’’ कह कर माहेश्वरी मुसकराई और बोली, ‘‘अब तुम मुझ से दूर रहा करो. बच्चे बड़े हैं, अच्छा नहीं लगता. कहीं किसी ने देख लिया तो मुझे जहर खा कर मरना पड़ेगा.’’

रविशंकर और माहेश्वरी अभी बातें कर ही रहे थे कि यशवंत साहू पूजा की सामग्री ले कर आ गया. पंडितजी को बैठक में न पा कर वह स्वाभाविक रूप से रसोई की ओर बढ़ा तो पंडित रविशंकर की आवाज सुन वह ठिठक कर रुक गया.

यशवंत साहू ने रविशंकर और माहेश्वरी की बातें सुनी तो उस के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह गुस्से के मारे चिल्ला कर बोला, ‘‘पंडित, यह क्या हो रहा है?’’

‘‘अरे, यजमान… भाभीजी चाय बना रही थीं, तो हम ने सोचा कि यहीं बैठ कर पी लें.’’ मीठी वाणी में रविशंकर शुक्ला ने बात बनानी चाही.

‘‘मगर तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां तक घुसने की… और सुनो, मैं ने सब सुन लिया है. मुझे  तुम  पर बहुत  दिनों से  शक था, आज तू पकड़ा गया. तू पंडित नहीं, राक्षस है. चला जा, मेरे घर से.’’ यशवंत साहू ने आंखें दिखाईं तो पंडित घबराया मगर हिम्मत कर के बोला, ‘‘यजमान, तुम कहना क्या चाहते हो? तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हुई है. तुम ने मुझे  सत्यनारायण की कथा के लिए बुलाया है.’’

‘‘देखो, मैं तुम से साफसाफ कह रहा हूं… मेरे घर से अभी चले जाओ.’’

‘‘मगर मैं तो पूजा करने आया था… तुम नाराज क्यों हो रहे हो भाई?’’ रविशंकर ने बात बनाने की पूरी कोशिश की मगर यशवंत साहू की आंखों के सामने से मानो परदा उठ चुका था.

यशवंत साहू ने जलती हुई आंखों से देखते हुए कहा, ‘‘भाग जाओ, यहां से. अब तुम्हारी पोल खुल गई है.’’

मामले की गंभीरता को देखते हुए रविशंकर वहां से चले जाने में ही भलाई समझी.

इस घटना के बाद यशवंत और माहेश्वरी के वैवाहिक जीवन पर मानो ग्रहण लग गया. माहेश्वरी ने यशवंत के पैरों पर गिर कर सब कुछ स्वीकार कर लिया और फिर कभी दोबारा गलती नहीं करने की कसम खाई.

परिवार की इज्जत बचाए रखने और बच्चों के भविष्य को देखते हुए यशवंत साहू ने उसे एक तरह से खून का घूंट पी कर माफ कर दिया.

पुजारी ने दी धमकी

मगर पंडित रविशंकर शुक्ला जब कभी गांव छेरकाडीह आता और कहीं अचानक से उसे माहेश्वरी दिख जाती तो वह उस से बात करने की कोशिश करता. लेकिन माहेश्वरी उसे देख मुंह फेर लेती तो रविशंकर मनुहार करता. जब कई बार के प्रयासों से भी महेश्वरी नहीं पिघली तो अंतत: एक दिन गुस्से में आ कर उस ने कहा, ‘‘माहेश्वरी, मैं तुम्हें आसपास के सभी गांव में बदनाम कर दूंगा… तुम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगी.’’

माहेश्वरी यह सुन कर घबराई फिर बोली, ‘‘तुम क्या चाहते हो, क्या यह चाहते हो कि मेरा पति और परिवार वाले मुझे अहिल्या की तरह त्याग दें. नहीं… मैं ऐसा नहीं होने दूंगी. तुम चले जाओ…’’

मगर पंडित रविशंकर शुक्ला धमकी दे कर चला गया. जब यह बात यशवंत को मालूम हुई तो वह चिंता में पड़ गया. एक दिन वह अपने मित्र और गांव जारा के सरपंच नारायण दास से मिला. सरपंच को सारी बात बताते हुए यशवंत ने उस से मदद मांगी तो सरपंच ने कहा, ‘‘साहूजी, मामला घरेलू है, मगर मैं इस में तुम्हारी पूरी मदद करूंगा.’’

एक दिन सरपंच ने चुनिंदा लोगों की सभा बुलाई. वहां पुजारी रविशंकर शुक्ला को बुला कर सरपंच ने सब के सामने साफसाफ कहा, ‘‘पंडितजी, अगर तुम ने दोबारा माहेश्वरी

भाभी को देखने, धमकाने की कोशिश की तो मामला पुलिस तक पहुंच जाएगा और तुम्हारी पुरोहिती सभी  गांवों  में बंद करा दी जाएगी.’’

मामला हाथ से निकलता देख कर पुजारी रविशंकर शुक्ला ने उस दिन हाथ जोड़ कर माफी मांगी और वहां से चला गया.

यशवंत साहू और माहेश्वरी को लगा कि मामले का पटाक्षेप हो गया है, मगर ऐसा हुआ नहीं था.

यशवंत साहू का परिवार मूलत: किसान था. छेरकाडीह में रह रहे उस के संयुक्त परिवार में पिता दानसाय साहू, मां लक्ष्मी, भाई  जितेंद्र साहू जो शिक्षक थे, उन की पत्नी मीना, बेटा शशिमणि व बेटी तनिशा थे.

यह गांव का धनाढ्य परिवार था. यही कारण था कि हाल ही में घर के

पास पिछवाड़े में आलीशान घर बनवाया था, जिस में छोटा भाई  जितेंद्र साहू अपने परिवार व पिता और मां के साथ रहता था. जबकि यशवंत साहू पत्नी व बेटे देवेंद्र के साथ

पुराने मकान में ही रह रहा था. बेटी पूनम ज्यादातर दादादादी और चाचा की लड़की तनिशा के साथ रहना पसंद करती थी, वह रहती भी वहीं थी.

जब यशवंत साहू ने पंडित रविशंकर को भलाबुरा कह कर घर से निकाला था तो उस समय यशवंत का बेटा देवेंद्र साहू भी मौजूद था. बाद में जब एक बार पंडित रविशंकर गांव छेरकाडीह आया तो उस की देवेंद्र साहू से मुठभेड़ हो गई थी.

इस पर पंडित रविशंकर ने धान काटने के हंसिए से देवेंद्र को मार फेंकने की धमकी दी थी. मगर यशवंत साहू ने इसे  गंभीरता से लेते हुए बेटे देवेंद्र को समझाया कि पंडित रविशंकर से मुंह न लगा करे.

चाह कर भी रविशंकर शुक्ला माहेश्वरी को भुला नहीं पा रहा था. गांव में सभा हो जाने के बाद कुछ समय वह शरीफ बना रहा, फिर उस के भीतर का प्रेमी जागृत हो उठा. उस ने सोचा, जरूर माहेश्वरी पति के दबाव में उसे नकार रही है. वह उस से अभी भी प्यार करती है. उस ने सोचा कि क्यों न माहेश्वरी से बात करे… मिले… अंतिम बार.

यही सोच कर रविशंकर शुक्ला ने माहेश्वरी को मोबाइल पर काल की लेकिन माहेश्वरी ने उस की काल रिसीव नहीं की. कई बार काल करने पर भी काल रिसीव नहीं हो रही थी, ऐसे में पंडित के मन में कई शंकाएं जन्म ले रही थीं. वह सोच में डूबा था कि उस का मोबाइल घनघना उठा.

उस ने देखा काल माहेश्वरी की तरफ से आ रही थी, वह खुश हो कर काल रिसीव करते हुए वह बोला, ‘‘माहेश्वरी, मैं जानता था कि तुम मुझे नहीं छोड़ सकतीं… मुझे विश्वास था कि तुम्हारा फोन आएगा. सुनो, तुम मेरे पास आ जाओ.’’

तभी माहेश्वरी गुस्से में बोली, ‘‘देखो पंडितजी, पंचायत में तुम्हें हिदायत दे दी थी, अब तुम मर्यादा में रहो.’’

‘‘मैं…मैं जानता हूं, तुम दबाव, पति के प्रभाव में हो, सचसच कहो.’’ पंडित ने पूछा .

‘‘नहीं, मैं किसी दबाव में नहीं हूं. मैं ने विवाह किया है, मेरे 2 बच्चे हैं. और तुम भी शादीशुदा हो. इसलिए आगे से फोन किया तो ठीक नहीं होगा.’’ कह कर माहेश्वरी ने गुस्से से फोन बंद कर दिया.

रविशंकर शुक्ला के माथे में बल पड़ गए. वह सोचने लगा कि यह तो अलग ही सुर निकाल रही है, मैं इस को ऐसा सबक सिखाऊंगा कि इस की सात पुश्तें भी याद रखेंगी.

पुजारी ने रची खूनी साजिश

रविशंकर शुक्ला माहेश्वरी को सबक सिखाने की योजना बनाने में जुट गया. उस ने अपनी ससुराल के एक दोस्त दुर्गेश वर्मा से बात की. फिर गांव के तालाब किनारे ले जा कर उसे अपनपा दर्द बताया और सहयोग मांगा.

जब वह साथ देने और मरनेमारने पर उतारू हो गया तो रविशंकर शुक्ला बहुत खुश हुआ और बोला, ‘‘मैं माहेश्वरी को सबक सिखाना चाहता हूं. उस के बेटे देवेंद्र व पति का काम तमाम करते ही वह मजबूर  हो कर मेरे आगोश मे आ जाएगी.’’

दुर्गेश ने पंडित रविशंकर की दोस्ती के कारण शनिवार 11-12 अप्रैल 2020 की रात यशवंत साहू के घर में घुस कर यशवंत साहू की हत्या की योजना बनाई. दोनों रविशंकर शुक्ला की बाइक सीजी22 एसी 7453 पर गांव गातापारा से छेरकाडीह के लिए रवाना हुए.

इसी दौरान दुर्गेश वर्मा को अपने  घर के पास एक मित्र नेमीचंद धु्रव दिखाई दिया. उस ने उसे भी बाइक पर बैठा लिया और कहा, ‘‘चल, तुझे भी एक मिशन पर ले चलते  हैं.’’

रात लगभग 11 बजे छेरकाडीह पहुंच कर इन लोगों ने एक जगह बाइक खड़ी कर के नेमीचंद को वहीं खड़ा छोड़ दिया और एक टंगिया, एक फरसी ले कर दोनों  यशवंत साहू के घर की ओर बढ़े. पंडित रविशंकर जानता था कि पिछवाड़े से यशवंत के घर में आसानी से दाखिल हुआ जा सकता है. वह दुर्गेश के साथ भीतर गया.

एक कमरे में यशवंत साहू अपने बेटे देवेंद्र के साथ सोया था. रविशंकर ने नींद में सोए देवेंद्र पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. फरसे  की चोट लगते ही देवेंद्र उठ खड़ा हुआ तो दोनों ने मिल कर उसे वहीं ढेर कर दिया. इस बीच यशवंत की नींद टूट गई. वह डर से कांप रहा था. दोनों ने हमला कर के उस भी मार डाला.

दूसरे कमरे में माहेश्वरी अकेली सो रही थी. चीखपुकार सुन वह जब घटनास्थल पर पहुंची तो पति यशवंत व बेटे देवेंद्र की लाश देख कर चीख पड़ी. इस पर पंडित रविशंकर शुक्ला ने पोल खुल जाने के डर से वहां रखे  सब्बल से उस के सिर पर वार कर उसे भी मार डाला.

उसी समय  घर के पिछवाड़े में नए घर में बैठी यशवंत की बेटी पूनम ने मां के चीखने की आवाज सुनी और घबरा कर चार कदम आगे बढ़ी. मगर यह सोच कर खामोश बैठ गई कि मां का पिताजी के साथ झगड़ा हो रहा होगा.

उधर चारों तरफ खून फैला हुआ था, जिसे देख कर दुर्गेश और रविशंकर शुक्ला घबराए और वहां से भाग खड़े हुए. बाहर थोड़ी दूरी पर नेमीचंद धु्रव उन का इंतजार कर रहा था. तीनों बाइक से गातापार की तरफ चले गए.

सुबह 6 बजे यशवंत के पिता दानसाय साहू उठे और टहलते हुए जब यशवंत के घर की ओर बढ़े तो परछी में बहू माहेश्वरी को खून से लथपथ पडे़ देख घबरा कर उलटे पांव वापस लौटे और पत्नी लक्ष्मी को वहां की यह बात बताई. सुनते ही पास बैठी पूनम दौड़ कर घटनास्थल पर पहुंची.

वह मां को मृत देख रोने लगी. जब उस ने कमरे में लाइट जलाई तो वहां पिता और भाई की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं. यह देख कर वह फूटफूट कर रोने लगी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब कैसे और क्या हो गया. पूनम के रोने की आवाज सुन चाचा जितेंद्र व सारा परिवार वहां आ गया. ग्राम पंचायत छेरकाडीह के सरपंच रामलखन भी घटनास्थल पर पहुंचे और थाना पलारी फोन कर के घटना की जानकारी दी.

12 अप्रैल, 2020 को लगभग 8 बजे पलारी थानाप्रभारी प्रमोद कुमार सिंह डौग स्क्वायड टीम व स्टाफ के साथ छेरकाडीह पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया. चारों तरफ खून फैला हुआ था. उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि किसी ने दुश्मनी के कारण यह नृशंस हत्याकांड किया है.

पुलिस ने जरूरी काररवाई कर तीनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए भेज दीं. इसी दरम्यान थानाप्रभारी को यह खबर मिली कि हाल ही में यशवंत साहू ने सरपंच से कह कर सभा बुलाई थी, जिस में सरपंच ने पुजारी रविशंकर को हिदायत दी थी कि वह माहेश्वरी के पीछे न पड़े.

पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी

थानाप्रभारी प्रमोद कुमार सिंह को पूरा मामला शीशे की तरह साफ नजर आ रहा था. शक की सुई पुजारी रविशंकर की ओर घूम चुकी थी. उन्होंने एसपी प्रशांत ठाकुर बलोदाबाजार, भाटापारा  को संपूर्ण जानकारी दे कर मार्गदर्शन मांगा. तब एसपी ने इस केस को खोलने के लिए थाना गिधौरी के थानाप्रभारी ओमप्रकाश त्रिपाठी और थाना सुहेला के थानाप्रभारी रोशन सिंह को भी उन के साथ लगा दिया.

पुलिस टीम ने रविशंकर शुक्ला को शाम को ही धर दबोचा. उसे पलारी थाना ला कर पूछताछ शुरू की गई, लेकिन वह शातिराना ढंग से स्वयं को पंडित बता कर  बचना चाह रहा था मगर जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गया और तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने की कहानी बता दी. उस ने बताया कि उस के इस काम में दुर्गेश व नेमीचंद भी साथ थे.

पुजारी रविशंकर शुक्ला ने बताया कि वह 5 वर्षों से गांवगांव घूम कर यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराता था, 2 साल पहले यशवंत साहू ने उसे पहली बार सत्यनारायण की कथा के लिए बुलाया था, जहां उस का परिचय उस की पत्नी माहेश्वरी से हुआ और बहुत जल्द दोनों के अंतरंग संबंध बन गए.

मगर बाद में माहेश्वरी उस से दूर छिटकने की कोशिश करने लगी और वह एक बार रंगेहाथों पकड़ा भी गया था.

पंचायत में बात जाने के बाद वह माहेश्वरी से बातचीत कर उसे भगा ले जाने को तैयार था मगर जब माहेश्वरी ने साफ इंकार कर दिया तो उस ने दुर्गेश को विश्वास में ले कर यशवंत साहू को सबक सिखाने की सोची. फिर माहेश्वरी सहित उस के बेटे देवेंद्र साहू को मार डाला.

आरोपी रविशंकर शुक्ला ने जांच अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह को अपने इकबालिया  बयान में  बताया कि वह माहेश्वरी से दिलोजान से प्रेम करता था, इसलिए प्रेम में अंधे हो कर उस के हाथों यह हत्याकांड हो गया.

पुलिस ने आरोपी पंडित रविशंकर शुक्ला और दुर्गेश वर्मा से हत्या में इस्तेमाल हथियार  टंगिया, फरसा व खून से सने कपड़े जब्त कर लिए.

प्राथमिक विवेचना के बाद पुलिस ने पलारी थाने में धारा 302 भादंवि के तहत केस दर्ज किया और मुख्य आरोपी पंडित रविशंकर शुक्ला, सहआरोपी दुर्गेश और नेमीचंद को गिरफ्तार कर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कृष्णकुमार सूर्यवंशी की अदालत में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया. द्य   —कथा पुलिस सूत्रों से बातचीत पर आधारित

सौजन्य: मनोहर कहानियां, सितबंर 2020

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फिरौती 1 करोड़ की: अपराधियों का आतंक

लगातार बढ़ रही घटनाओं से पुलिस भी शक के घेरे में आ रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में 14 वर्षीय बलराम गुप्ता की अपहरण के बाद हुई हत्या से प्रदेश के लोगों में डर बैठ गया है. लोगों का सोचना है कि जब मुख्यमंत्री के जिले के लोग ही सुरक्षित नहीं हैं तो और लोग कैसे सुरक्षित रह सकते हैं.

गोरखपुर जिले के थाना पिपराइच के गांव जंगल छत्रधारी टोला मिश्रौलिया के रहने वाले बच्चे बलराम गुप्ता का जिस तरह अपहरण करने के बाद उस की हत्या कर दी गई, उस से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई.

5वीं कक्षा में पढ़ने वाला बलराम गुप्ता 26 जुलाई, 2020 को दोपहर 12 बजे खाना खा कर रोजाना की तरह घर से बाहर खेलने निकला. अपने दोस्तों के साथ खेलने के बाद वह अकसर डेढ़दो घंटे में घर लौट आता था, लेकिन उस दिन वह घर नहीं लौटा. उस की मां और बहन ने उसे आसपास ढूंढा, लेकिन बलराम के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

बलराम के पिता महाजन गुप्ता घर के पास में ही पान की दुकान चलाते थे. इस के अलावा वह प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी करते थे. जब उन्हें पता लगा कि बलराम दोपहर के बाद से गायब है तो वह भी परेशान हो गए. करीब 3 बजे महाजन गुप्ता के मोबाइल फोन पर एक ऐसी काल आई जिस से घर के सभी लोग असमंजस में पड़ गए.

फोन करने वाले ने कहा कि तुम्हारा बेटा बलराम हमारे कब्जे में है. अगर उसे जिंदा चाहते हो तो एक करोड़ रुपए का इंतजाम कर लो, अन्यथा बहुत पछताना पड़ेगा.

यह खबर सुनते ही महाजन गुप्ता घबरा गए. उन्होंने अपहर्त्ता से कहा कि वह उन के बेटे का कुछ न करें. जैसा वे कहेंगे वैसा ही करने को तैयार हैं. बलराम अपनी 5 बहनों के बीच इकलौता भाई था, इसलिए वह घर में सभी का लाडला था. बलराम के अपहरण की जानकारी उस की मां और बहनों को हुई तो सभी परेशान हो गईं.

महाजन गुप्ता की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वह एक करोड़ रुपए की व्यवस्था कर सकें, इसलिए वह यह सोचसोच कर परेशान हो रहे थे कि इतने पैसों का इंतजाम कहां से करें. उसी दौरान अपहर्त्ताओं ने उन्हें दोबारा फोन किया, ‘‘एक बात याद रखना पुलिस को सूचना देने की भूल मत करना…’’

‘‘नहींनहीं, मैं ऐसा हरगिज नहीं करूंगा. लेकिन आप जितने पैसे मांग रहे हैं, मेरे पास नहीं हैं. अगर कुछ कम कर लेंगे तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’ महाजन गुप्ता ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

‘‘इस बारे में हम 5 बजे के करीब फिर बात करेंगे. तब तक तुम पैसों का इंतजाम करो.’’ अपहर्त्ता ने कहा.

महाजन को लगा कि वह अपहर्त्ताओं द्वारा मांगी गई फिरौती का इंतजाम नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने इस की जानकारी पुलिस को दे दी. बच्चे के अपहरण की सूचना मिलते ही थाना पपराइच पुलिस उसी समय महाजन के घर पहुंच गई. घर वालों से बातचीत करने के बाद पुलिस ने उन बच्चों से भी पूछताछ की, जिन के साथ बलराम अकसर खेला करता था.

थाना पुलिस अभी यह जांच कर ही रही थी कि पुलिस को सूचना मिली कि गांव से 3-4 किलोमीटर दूर नहर में एक बच्चे की लाश पड़ी है. सूचना मिलने पर पुलिस महाजन गुप्ता को ले कर नहर पर पहुंच गई. नहर में मिली लाश बलराम की ही निकली, जिस की शिनाख्त महाजन ने कर ली.

बेटे की लाश देखते ही महाजन गुप्ता गश खा कर वहीं गिर गए. गांव में यह खबर फैली तो सभी सन्न रह गए. महाजन के घर में तो हाहाकार मच गया. गांव वाले समझ नहीं पा रहे थे कि प्रदेश में यह क्या हो रहा है. अपराधी बेलगाम हो कर वारदात पर वारदात कर रहे हैं और पुलिस कान में तेल डाले सो रही है.

लिहाजा बलराम की हत्या के बाद ग्रामीणों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ने लगा, जिस के बाद खबर मिलने पर जिला स्तर के पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. चूंकि मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद का था, इसलिए मुख्यमंत्री को भी इस घटना की जानकारी मिल गई. उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ही केस का खुलासा करने के आदेश दिए.

मुख्यमंत्री के आदेश पर थाना पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच और एसटीएफ भी केस को खोलने में जुट गई. पुलिस टीमों ने सब से पहले महाजन गुप्ता से पूछा कि उन की किसी से कोई रंजिश तो नहीं है. महाजन ने जब दुश्मनी होने से इनकार कर दिया तो जांच टीमों ने उस फोन नंबर की जांच शुरू कर दी,जिस से महाजन के पास फिरौती की काल आई थी.

उस फोन नंबर की जांच के सहारे पुलिस रिंकू नाम के उस शख्स के पास पहुंच गई, जिस ने वह सिम कार्ड फरजी आईडी पर दिया था. रिंकू ने बताया कि वह सिम उस ने दयानंद राजभर नाम के व्यक्ति को दिया था.

रिंकू को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने  उस की निशानदेही पर दयानंद राजभर को भी गिरफ्तार कर लिया. उस ने स्वीकार कर लिया कि बलराम की हत्या में अजय चौहान और नितिन चौहान भी शामिल थे. उन्होंने फिरौती के चक्कर में उस की हत्या की थी.

बलराम की हत्या का केस लगभग खुल चुका था. अब केवल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी बाकी थी. पुलिस टीमों ने अन्य अभियुक्तों की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश डालनी शुरू की. अगले दिन 27 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अजय चौहान और नितिन उर्फ मुन्ना चौहान को हैदरगंज के गुलरिहा गांव में रहने वाले उन के एक रिश्तेदार ने कमरे में बंद कर लिया है.

सूचना मिलने पर भारी तादाद में पुलिस गुलरिहा पहुंच गई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर थाने ले आई. अब तक पुलिस के हत्थे 5 आरोपी चढ़ चुके थे, जिन में 3 लोग बलराम के अपहरण और हत्या में शामिल थे और 2 पर फरजी कागजात के जरिए सिम कार्ड बेचने की बात सामने आई.

पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि उन्हें खबर मिली थी कि महाजन गुप्ता प्रौपर्टी डीलिंग में अच्छी कमाई करते हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी कोई जमीन अच्छे पैसों में बेची थी. मोटी फिरौती के लालच में उन्होंने उन के इकलौते बेटे बलराम का अपहरण किया था. बलराम का अपहरण करने के बाद वे उसे एक दुकान में ले गए थे और भेद खुलने के डर से उस की गला घोंट कर हत्या कर दी थी.

फिर उस की लाश नहर में डाल आए थे. लाश ठिकाने लगाने के बाद आरोपी नितिन उर्फ मुन्ना चौहान और अजय चौहान गुलरिहा स्थित अपनी मौसी के घर छिपने के लिए पहुंचे. उन्होंने मौसी को सच्चाई बता दी. मौसी को इस बात का डर था कि कहीं उन के चक्कर में पुलिस एनकाउंटर कर के उस के बच्चों की जान न ले ले, इसलिए उन्होंने आत्मसमर्पण करने की सलाह दी.

दोनों आरोपियों को डर था कि आत्मसमर्पण के बाद भी पुलिस उन का एनकाउंटर कर सकती है. तब रिश्तेदारों ने पूरे गांव वालों के सामने उन का आत्मसमर्पण करने की योजना बनाई. अजय और नितिन को एक कमरे में बंद कर उन्होंने पुलिस को फोन कर दिया और जब पुलिस उन दोनों को गिरफ्तार कर ले जा रही थी तो उस समय पूरा गांव जमा हो गया था.

14 वर्षीय बलराम के अपहरण और हत्या के आरोप में पुलिस ने 5 अभियुक्तों को गिरफ्तारकर लिया. एसएसपी डा. सुनील गुप्ता ने लापरवाही बरतने के आरोप में एक दरोगा और 2 सिपाहियो ंको सस्पेंड कर दिया.

उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलराम गुप्ता की हत्या पर संवेदना व्यक्त की और उस के परिजनों को 5 लाख रुपए की सहायता राशि जिलाधिकारी के माध्यम से भिजवाई.

बलराम एक साल पहले एक रिश्तेदार के घर से रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था, जिसे 4-5 दिन बाद पुलिस ने कुसमही के जंगल से बरामद किया था. लेकिन इस बार गायब होने पर उस की लाश मिली.

सौजन्य: मनोहर कहानियां, सितबंर 2020

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गुरू-चेले का खेल : खौफनाक संधि विच्छेद

42वर्षीय अजय पाठक जानेमाने सिंगर थे. भजन गायन में उन का देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नाम था. वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला शामली के लाइनपार क्षेत्र में स्थित पंजाबी कालोनी में अपने परिवार के साथ रहते थे. यह एक पौश कालोनी है.

उन के परिवार में पत्नी स्नेहलता के अलावा एक बेटी वसुंधरा (15 वर्ष) और बेटा भागवत (10 वर्ष) था. जिस मकान में उस का परिवार रहता था, उस के भूतल पर अजय पाठक के चाचा दर्शन पाठक रहते थे. 31 दिसंबर, 2019 की सुबह जब बुजुर्ग दर्शन पाठक सो कर उठे तो उन्हें अपने भतीजे अजय और उस के बच्चों की आवाज सुनाई नहीं दी.

दर्शन जब उन्हें देखने ऊपर की मंजिल पर गए तो वहां ताला लगा मिला. उन की ईको स्पोर्ट कार भी वहां नहीं थी. यह देख कर वह समझे कि अजय बीवीबच्चों के साथ ससुराल करनाल गया होगा. क्योंकि अजय ने उन से पिछली शाम ही कहा था कि वह कल सुबह करनाल जाएगा. जब भी अजय को ससुराल जाना होता था वह सुबह 5 बजे के करीब बीवीबच्चों को ले कर निकल जाया करते थे. यही सोच कर दर्शन पाठक अपने रोजमर्रा के कामों में लग गए.

अजय पाठक के अन्य भाई उसी कालोनी में अलगअलग मकानों में रहते थे. शाम के समय जब वह चाचा दर्शन पाठक के पास आए तो उन्हें पता चला कि अजय अपनी बीवी और बच्चों के साथ ससुराल करनाल गए हैं. उसी समय एक भाई दिनेश ने अजय से बात करने के लिए उन का फोन मिलाया. लेकिन अजय का फोन स्विच्ड औफ था.

इस के बाद दिनेश ने अजय की ससुराल वालों को फोन किया तो उन्होंने बताया कि अजय और स्नेहलता में से कोई भी यहां नहीं आया है. यह सुन कर वह आश्चर्यचकित रह गए. अजय और उन के बच्चे करनाल नहीं पहुंचे तो कहां चले गए. अजय की कार भी नहीं थी. इस से उन्हें लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह कार से बच्चों को ले कर कहीं घूमने निकल गया हो.

लेकिन अजय के फोन का स्विच्ड औफ होना घर वालों के मन में शक पैदा कर रहा था. दिनेश पाठक ने अजय की पत्नी स्नेहलता का फोन मिलाया तो उन के फोन ने भी आउट औफ कवरेज एरिया बताया. दोनों के ही फोन कनेक्ट न हो पाने पर घर वालों की चिंता बढ़नी लाजिमी थी. यह जानकारी मिलने पर दिनेश पाठक के घर के अन्य लोग और पड़ोसी भी आ गए.

अजय के मकान के ऊपर के फ्लोर का ताला बंद था. वहां मौजूद सभी लोगों को जिज्ञासा हुई कि क्यों न ऊपर के फ्लोर के दरवाजे पर लगा ताला तोड़ कर अजय के कमरे को देख लिया जाए.

लिहाजा अजय के भाई ताला तोड़ने की कोशिश करने लगे. किसी तरह ताला टूटा तो लोग कमरे में पहुंचे, लेकिन वहां का दृश्य देख सब की चीख निकल गई. कमरे में अजय पाठक, पत्नी स्नेहलता और 15 वर्षीय बेटी वसुंधरा की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं.

दृश्य बड़ा ही वीभत्स था, घर में 3-3 लाशें देख कर घर में चीखपुकार होने लगी. रोने की आवाज सुन कर मोहल्ले के लोग भी वहां पहुंच गए. सभी आश्चर्यचकित थे कि आखिर इतने भले इंसान और उस के घर परिवार को किस ने मौत के घाट उतार दिया.  घर में अजय का 10 वर्षीय बेटा भागवत कहीं नजर नहीं आया. वह तो गायब था ही, अजय की कार भी लापता थी. इस से लोगों ने अनुमान लगाया कि हत्यारे भागवत का अपहरण कर ले गए होंगे.

पंजाबी कालोनी थाना आदर्शनगर क्षेत्र में आती थी. इसी दौरान मोहल्ले के किसी व्यक्ति ने थाना आदर्शनगर में फोन कर के इस तिहरे हत्याकांड की सूचना दे दी. थानाप्रभारी कर्मवीर सिंह उस समय थाने में ही मौजूद थे.

सूचना मिलते ही वह पुलिस टीम के साथ पंजाबी कालोनी स्थित अजय पाठक के घर पहुंच गए. उस समय वहां भारी तादाद में लोग जमा थे. कर्मवीर उस कमरे में पहुंचे, जहां तीनों लाशें पड़ी थीं.

घटनास्थल का दृश्य बड़ा ही भयावह था. अजय पाठक, उन की पत्नी स्नेहलता और बेटी वसुंधरा की लाशें फर्श पर पड़ी थीं. उन सभी के गले किसी धारदार हथियार से काटे गए थे, जिस से कमरे के फर्श पर खून ही खून फैला हुआ था.

कमरे की अलमारियां खुली हुई थीं और सामान फर्श पर फैला हुआ था. इस से यही लग रहा था कि हत्यारों ने अलमारी में कोई खास चीज ढूंढने की कोशिश की थी. थानाप्रभारी ने इस मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

मामला एक प्रतिष्ठित परिवार और जानेमाने सिंगर की हत्या से जुड़ा था, इसलिए कुछ ही देर में एसपी विनीत जायसवाल और डीएम अखिलेश कुमार सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

एक ही परिवार के 3 लोगों की लाशें देख कर डीएम और एसपी भी आश्चर्यचकित रह गए. लोगों ने उन्हें बताया कि मृतक अजय पाठक का 10 वर्षीय बेटा भागवत गायब है. इस के अलावा अजय पाठक की ईको स्पोर्ट कार भी लापता थी.

पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे भागवत का अपहरण कर ले गए हैं. पुलिस को गायब हुए भागवत की भी चिंता होने लगी. हत्यारे बच्चे को कोई नुकसान न पहुंचा सकें, इसलिए एसपी विनीत जायसवाल ने सीमावर्ती जिलों के पुलिस कप्तानों से फोन से संपर्क कर घटना की जानकारी दे दी और कह दिया कि हत्यारे ईको स्पोर्ट कार में 10 वर्षीय बच्चे भागवत को भी साथ ले गए हैं.

इस सूचना के बाद आसपास के जिलों की पुलिस भी सतर्क हो गई. पुलिस बैरिकेड्स लगा कर कारों की चैकिंग करने लगी. पर वह ईको स्पोर्ट्स कार नहीं मिली.

31 दिसंबर, 2019 की रात के समय पानीपत पुलिस रोड गश्त पर थी, तभी रात करीब 12 बजे टोलप्लाजा के पास एक जलती कार दिखी. पुलिस जब वहां पहुंची तो कार के पास एक युवक खड़ा मिला. पुलिस ने उस से कार में आग लगने की वजह जाननी चाही तो वह वहां से भागने लगा. लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी.

पुलिस ने देखा तो यह वही ईको स्पोर्ट्स कार थी, जिस के गायब होने की सूचना शामली पुलिस ने दी थी. पानीपत पुलिस ने उस युवक से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना नाम हिमांशु सैनी निवासी झाड़खेड़ी, थाना कैराना बताया.

उस ने पुलिस को बताया कि उस ने ही शामली में भजन गायक अजय पाठक, उन की पत्नी और बेटी की हत्या की है और कार की डिक्की में उन के बेटे भागवत की लाश है, जो उस ने जला दी है. पुलिस ने हिमांशु सैनी को हिरासत में ले लिया.

तब तक फायर ब्रिगेड कर्मचारी भी आ गए थे. उन्होंने कुछ ही देर में कार की आग बुझा दी. इस के बाद पानीपत पुलिस ने भागवत का अधजला शव बरामद कर उसे सिविल अस्पताल भेज दिया. हिमांशु को हिरासत में लेने की जानकारी शामली पुलिस को भी दे दी गई. पानीपत पुलिस हिमांशु को ले कर थाना सदर लौट आई.

अजय पाठक के भाइयों वगैरह को जब 10 वर्षीय भागवत की भी हत्या की जानकारी मिली तो उन्हें एक और झटका लगा. हिमांशु सैनी को वह अच्छी तरह जानते थे, वह अजय पाठक का शिष्य था. वह भी सिंगर था और उन के घर आताजाता था. वही घर का सर्वनाश करने वाला निकलेगा, ऐसा उन्होंने सोचा तक नहीं था.

अगले दिन यानी पहली जनवरी, 2020 को थाना आदर्श मंडी पुलिस के साथ विजय पाठक और उन के रिश्तेदार पानीपत के थाना सदर पहुंच गए ताकि पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए भागवत की लाश शामली ले आएं, लेकिन जली हुई लाश का पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर उस दिन छुट्टी पर था.

घर वालों को शामली के अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद 3 अन्य लाशें भी लेनी थीं, लिहाजा वे पानीपत से शामली लौट आए. शामली के सरकारी अस्पताल में अजय पाठक, उन की पत्नी स्नेहलता और बेटी वसुंधरा की लाशें पोस्टमार्टम के बाद उन के घर वालों को सौंप दी गईं.

उधर शामली के थाना आदर्श मंडी के थानाप्रभारी कर्मवीर सिंह हत्यारोपी हिमांशु सैनी को पूछताछ के लिए पानीपत से आदर्श मंडी ले आए. शामली के लोगों को जब यह जानकारी मिली कि जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाले हिमांशु सैनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है तो हजारों लोग थाना आदर्श मंडी के बाहर एकत्र हो गए. लोग मांग कर रहे थे कि हत्यारे को उन के हवाले किया जाए, उसे वे खुद सजा देंगे.

भीड़ का गुस्सा स्वाभाविक था, लेकिन पुलिस को तो कानून के हिसाब से चलना पड़ता है. लिहाजा वहां पहुंचे एसपी विनीत जायसवाल ने भीड़ को समझाया और भरोसा दिया कि वह हत्यारे को सख्त सजा दिलाने की कोशिश करेंगे. इस के बाद भीड़ शांत हुई.

एसपी विनीत जायसवाल की मौजूदगी में थानाप्रभारी कर्मवीर सिंह ने अभियुक्त हिमांशु सैनी से इस चौहरे हत्याकांड के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो इस जघन्य हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहर शामली के लाइनपार इलाके में स्थित है पंजाबी कालोनी. हंसराज पाठक अपने परिवार के साथ यहीं पर रहते थे.

उन के परिवार में पत्नी के अलावा 6 बेटे थे, क्रमश: सूरज पाठक, विनय पाठक, दिनेश पाठक, हरिओम पाठक, कपिल पाठक और अजय पाठक. अजय सब से छोटे थे. पाठक परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का था. शहर में होने वाली रामलीला में इस परिवार के बच्चे अलगअलग किरदार का अभिनय करते थे. अजय ने 15 साल की उम्र से रामलीला में भिन्नभिन्न किरदारों का अभिनय करना शुरू कर दिया था.

इस के बाद अजय पाठक की रुचि गायन के प्रति हो गई. वह भजन गाने लगे. उन की आवाज और भजन गाने का अंदाज लोगों को बहुत पसंद आया, जिस से उन की ख्याति बढ़ने लगी. इसी दौरान उन का विवाह स्नेहलता से हो गया.

समय का पहिया अपनी गति से घूमता रहा. अजय पाठक के सितारे बुलंदियां छूने लगे थे. भजन गायन के क्षेत्र में उन की पहचान बन चुकी थी. इस के साथ ही वह 2 बच्चों, एक बेटी वसुंधरा और बेटे भागवत के पिता बन गए थे. भजन गायन में उन्होंने अपनी अलग पहचान तो बनाई, साथ ही काफी पैसा भी कमाया. उन की अपनी जागरण मंडली थी, जिस में संगीत से जुड़े कई कलाकार शामिल थे.

हिमांशु सैनी करीब ढाई साल पहले अजय पाठक के संपर्क में आया था. वह नजदीक के ही कस्बा कैराना  का रहने वाला था. हिमांशु अजय पाठक से बहुत प्रभावित था. वह उन की तरह सिंगर बनना चाहता था.

इस बारे में उस ने अजय से बात की तो उन्होंने उसे अपनी मंडली में शामिल कर लिया. भजन मंडली में रह कर हिमांशु गानाबजाना सीखने लगा. शिष्य की मर्यादा निभाते हुए हिमांशु अपने गुरु अजय पाठक की खूब सेवा करता था. जब वह अजय के घर जाता तो उन के पैर तक दबाता था. अजय भी हिमांशु की लगन से खुश थे. वह उसे अपने हुनर देने लगे. इन ढाई सालों में हिमांशु गानेबजाने के काफी गुर सीख गया था. गुरु के घर उस का अकसर आनाजाना लगा रहता था. कई बार वह उन के यहां ठहर भी जाता था.

पिछले कुछ दिनों से हिमांशु कुछ ज्यादा ही परेशान था. इस की वजह यह थी कि उस ने एक बैंक से 5 लाख रुपए का लोन ले रखा था, जिस की किस्तें वह अदा नहीं कर पा रहा था. इस के अलावा उस ने कुछ लोगों से भी पैसे उधार ले रखे थे. उन पैसों को भी वह नहीं चुका पा रहा था, जिस से वह आए दिन लोगों के तगादों से परेशान हो गया था. बैंक ने तो उसे पैसे रिकवरी का नोटिस भी भेज दिया था, जिस से उस की चिंताएं बढ़ती जा रही थीं. इस सब की जानकारी उस ने अपने गुरु अजय पाठक को भी दे दी थी. हिमांशु का आरोप है कि अजय पाठक पर उस के मेहनताने के 60 हजार रुपए बकाया थे. वह उन से जब भी अपने पैसे मांगता तो वह उसे न सिर्फ टाल देते बल्कि गालियां देते हुए बेइज्जत भी कर देते थे.

हिमांशु पाईपाई के लिए मोहताज था. ऐसे में उसे पैसे मिलना तो दूर, बेइज्जती सहनी पड़ती थी. हिमांशु की समझ में नहीं आता था कि वह करे तो क्या करे. हिमांशु चारों तरफ से परेशानियों से घिरा था. 30 दिसंबर, 2019 की शाम को अजय पाठक किसी कार्यक्रम से घर लौटे. उस समय हिमांशु भी उन के साथ था. अजय ने अपने मकान के ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले चाचा दर्शन पाठक से कह दिया था कि कल सुबह उसे बच्चों के साथ करनाल जाना है. अजय के अन्य 5 भाइयों में से सब से बड़े सूरज पाठक लुधियाना में रहते हैं, बाकी सभी पंजाबी कालोनी में ही अलगअलग रहते हैं.

30 दिसंबर को हिमांशु अपने गुरु अजय के कहने पर वहीं रुक गया. रात का खाना खाने के बाद हिमांशु ने अजय पाठक के पैर दबाए. उसी समय हिमांशु ने अजय के सामने अपनी समस्या रखते हुए अपने पैसे मांगे. हिमांशु का आरोप है कि अजय ने उस दिन भी अपशब्द कहते हुए उसे बेइज्जत किया.

यह बात हिमांशु को नागवार लगी. उसी समय उस ने एक भयानक फैसला कर लिया. उस ने तय कर लिया कि वह आज इस बेइज्जती का जवाब जरूर देगा. लिहाजा वह मौके का इंतजार करने लगा.

कुछ देर बाद अजय पाठक और परिवार के सभी लोग गहरी नींद में सो गए, लेकिन हिमांशु की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उस के दिमाग में खूनी योजना घूम रही थी. रात करीब साढ़े 4 बजे वह आहिस्ता से अपने बिस्तर से उठा.

हिमांशु वहां अकसर आताजाता रहता था, इसलिए उसे पता था कि घर में कौन सी चीज कहां रखी है. वह चुपके से मकान के निचले हिस्से में गया. वहां कार में रखी छोटी तलवार और चाकू ले आया.

इन्हीं हथियारों से उस ने सब से पहले अपने गुरु अजय पाठक पर वार कर के उन्हें मौत के घाट उतार दिया. इस के बाद उस ने अजय की पत्नी स्नेहलता, 15 वर्षीय बेटी वसुंधरा और 10 वर्षीय भागवत को एकएक कर के मौत के घाट उतारा. चूंकि ये सभी लोग गहरी नींद में थे, इसलिए वार करते वक्त उन की चीख तक नहीं निकली.

चारों को मौत के घाट उतारने के बाद उस ने घर की अलमारियों के ताले तोड़ कर नकदी और ज्वैलरी ढूंढी, लेकिन उस के हाथ कुछ नहीं लगा.

इस के बाद उस ने भागवत की लाश उठा कर अजय की कार में रखी, फिर ऊपर वाले फ्लोर का ताला बंद कर के वह कार ले कर निकल गया. ताकि लोग समझें कि बदमाश लूट और हत्या के बाद भागवत का अपहरण कर के ले गए.

दिन में वह इधरउधर घूमता रहा. रात के समय वह पानीपत के टोलप्लाजा के पास पहुंचा. हिमांशु भागवत के शव को आग के हवाले कर के सारे सबूत नष्ट करना चाहता था ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके. लेकिन वह पानीपत पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

हिमांशु से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे कैराना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इसी दौरान कचहरी में वकीलों ने हिमांशु को घेर लिया और पुलिस की गिरफ्त से उसे छीनने का प्रयास करने लगे. पुलिस ने जैसेतैसे वकीलों को शांत कर हत्यारोपी को जेल तक पहुंचाया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य- मनोहर कहानियां, जून 2020

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3 साल बाद: एक भयानक हमले की कहानी

बंगलादेश की राजधानी ढाका में होली आर्टिसन बेकरी नाम का एक कैफे है. उस दिन शाम सुहानी थी. तारिषी  जैन अपने पिता संजीव जैन व 2 दोस्तों अबिंता कबीर व फराज अयाज हुसैन के साथ कैफे में डिनर पर गई थी. यह कैफे ढाका के दूतावास क्षेत्र में था. डिनर आया भी नहीं था कि तारिषी के पिता के मोबाइल पर किसी का फोन आया, जिस की वजह से उन्हें जरूरी काम से कैफे से जाना पड़ गया.

पिता संजीव जैन को गए अभी कुछ समय ही हुआ था कि अचानक कैफे गोलियों और धमाकों की आवाज से गूंज उठा. पता ही नहीं चला कि कैफे में कब दबेपांव आतंकवादी घुस आए थे. ताबड़तोड़ गोलियां चलते ही कैफे में अफरातफरी मच गई. आतंकवादियों ने गोलियां चलाते हुए कैफे में घुस कर डिनर कर रहे मेहमानों को बंधक बना लिया.

उन्होंने कैफे में मौजूद मेहमानों को 12 घंटे तक अपने कब्जे में रखा. बंधक बनाने के बाद उन्होंने एकएक कर 22 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. मरने वालों में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद शहर की छात्रा तारिषी जैन सहित इटली के 9, जापान के 7, बंगलादेश में जन्मा एक अमेरिकी, बंगलादेश के 2 नागरिकों के अलावा 2 पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.

कुछ देर में सेना के कमांडो भी वहां पहुंच गए. कमांडो औपरेशन में वे 5 आतंकवादी मारे गए, जिन्होंने कैफे में गोलीबारी की थी. यह घटना पहली जुलाई, 2016 को घटी थी. हमले के बाद बंगलादेश में चरमपंथ को ले कर नई बहस छिड़ गई. इतना ही नहीं, देश के उद्योग, व्यापार को ले कर भी चिंता बढ़ गई थी. क्योंकि देश के इतिहास में यह सब से भीषण आतंकवादी हमला था.

करीब 3 साल तक इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई ढाका की आतंकरोधी विशेष ट्रिब्यूनल में चल रही थी. विशेष ट्रिब्यूनल द्वारा 27 नवंबर, 2019 को इस केस का फैसला सुनाया जाना था.

हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण कोर्ट परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. इस विशेष अदालत में इन आतंकियों को कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया था. फैसले को ले कर कोर्टरूम पत्रकारों, वकीलों व अन्य लोगों से भरा हुआ था. सभी को इस फैसले का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार था. निर्धारित समय पर विशेष अदालत के जज मुजीबुर रहमान कोर्टरूम में आ कर अपनी कुरसी पर बैठे तो वहां मौजूद सभी लोगों की नजरें उन पर जम गईं.

आगे बढ़ने से पहले आइए हम इस आतंकवादी हमले को याद कर लें. यह आतंकवादी हमला इतना वीभत्स था कि विश्वभर में इस की गूंज सुनाई दी. इस आतंकवादी हमले ने बंगलादेश को ही नहीं, भारत सहित कई देशों को स्तब्ध कर दिया था. दूतावास इलाके में हमला होने से बंगलादेश की छवि धूमिल हुई थी. इस के बाद पुलिस ने जगहजगह छापेमारी कर सैकड़ों संदिग्धों को हिरासत में लिया था.

इस आतंकी हमले के तुरंत बाद इस की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली थी. लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि इन आतंकियों का आईएस से कोई संबंध नहीं था. यह बात बंगलादेश सरकार ने भी स्वीकारी कि इस हमले में किसी विदेशी आतंकी संगठन का हाथ नहीं था. हमले के पीछे जिहादी संगठन जमायतुल मुजाहिदीन बंगलादेश (जेएमबी) का हाथ था. जांच में यह भी सामने आया था कि कमांडो औपरेशन में मारे गए 5 आतंकियों में से 2 आतंकी जाकिर नाइक से प्रभावित थे.

बंगलादेश पुलिस मामले की जांच में जुट गई. जांच में पता चला कि इस हमले में कई संदिग्ध हमलावर थे. इन में से 5 हमलावर कमांडो ने मौके पर ही ढेर कर दिए थे, अन्य की जांच एजेंसियों ने तलाश शुरू कर दी. अपने तलाशी अभियान में पुलिस ने अलगअलग मुठभेड़ के दौरान 8 आतंकी और मार गिराए, जबकि 8 जीवित आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया.

गिरफ्तार हुए दहशतगर्दों में जहांगीर हुसैन, रकीबुल हसन, असलम हुसैन, अब्दुल सबूर, सोहिल महफूज, हादुर रहमान और शरीफुल इसलाम मामूनुर रशीद थे.

हमले में मारे गए लोगों में शामिल 19 वर्षीय भारतीय लड़की तारिषी जैन का परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित मोहल्ला सुहागनगर का रहने वाला था. तारिषी बर्कले यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया की मेधावी छात्रा थी. वह वहां एमबीए (इकोनौमिक्स) कर रही थी.

तारिषी के पिता संजीव कुमार जैन ढाका में कपड़े का कारोबार करते थे. पिता संजीव जैन बिजनैस के सिलसिले में करीब 20 साल पहले हांगकांग शिफ्ट हो गए थे. उन के 2 बच्चे थे, तारिषी और संचित. तारिषी की शुरुआती पढ़ाई हांगकांग में ही हुई. संचित कनाडा में इंजीनियर की नौकरी कर रहा है.

गारमेंट कारोबार की वजह से संजीव जैन का परिवार सन 2007 में ढाका शिफ्ट हो गया था. 3 महीने की छुट्टियां होने पर तारिषी अपने मातापिता के साथ ढाका आई हुई थी. दूसरे दिन वह पिता संजीव जैन, मां तूलिका जैन व बड़े भाई संचित के साथ अपने चाचा राकेश मोहन के पास फिरोजाबाद जाने वाली थी. उस का भाई संचित जैन भी कनाडा से दिल्ली पहुंच गया था. सभी लोगों को दिल्ली से फिरोजाबाद जाना था. लेकिन खानाखाने गई तारिषी दहशतगर्दों का निवाला बन गई.

सेना के कमांडो ने लोगों को बचाने की काररवाई के दौरान कैफे में घुस कर 22 लोगों की हत्या करने वाले पांचों दहशतगर्दों को मार गिराया था. इन में निबरस इसलाम, रिहान इम्तियाज, मीर समी मुबस्सिर, रिपान व बिकाश शामिल थे.

घटना के बाद इन पांचों के फोटो आईएसआईएस द्वारा जारी किए गए. फोटो में ये लोग एके-47 व आईएसआईएस के झंडे के साथ दिखाई दे रहे थे.

खास बात यह कि इन पांचों ने मदरसे में तालीम नहीं ली थी, बल्कि सभी नामचीन स्कूलों के पढ़ने वाले, बड़े घरानों के युवक थे. इन के मासूम चेहरों के पीछे छिपी हैवानियत का किसी को पता नहीं था. ये लोग आईएसआईएस से कैसे जुडे़, इन के घर वालों तक को पता नहीं थी.

मृत आतंकियों के घर वालों को इस घटना के दूसरे दिन अखबारों व टीवी की खबरों से उन के मरने की जानकारी मिली. पहचान होने के बाद आतंकी के दोस्तपरिचित हैरान रह गए. इन में एक तो हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री श्रद्धा कपूर का प्रशंसक था.

पांचों आतंकी जनवरी, 2016 से अपनेअपने घरों से गायब हुए थे. कुछ के घर वालों ने थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करा रखी थी. सवाल यह था कि आखिर किस ने उन के हाथ से किताबें ले कर बंदूक थमा दी और उन के बस्तों में बारूद भर दी.

हमले के दौरान तारिषी जैन अपने दोस्तों अबिंता कबीर व फराज अयाज हुसैन के साथ कैफे के टौयलेट में छिप गई थी. वहीं से उस ने अपने पिता संजीव जैन व चाचा राकेश मोहन को फोन किया था. तारिषी के अंतिम शब्द रोंगटे खड़े करने वाले थे. उस ने कहा, ‘आतंकी रेस्तरां में घुस आए हैं. मैं बुरी तरह से डरी हुई हूं और दोस्तों के साथ टौयलेट में छिपी हूं. पापा, मुझे नहीं लगता कि मैं जिंदा बच पाऊंगी. आतंकी एकएक कर के लोगों को मार रहे हैं.’

तारिषी निरीह परिंदे की तरह फड़फड़ा रही थी. संजीव जैन भले ही बेटी का हौसला बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन का दिल बैठा जा रहा था.

आयतें सुन कर अलग किए गैरइसलामी

सेना के कमांडो द्वारा रेस्क्यू में बचाए गए 18 प्रत्यक्षदर्शियों में से एक हसनात करीम भी थे. उन के पिता रिजाउल करीम के अनुसार पांचों आतंकवादियों ने रेस्टोरेंट के हाल में सभी बंधकों को बंदूक की नोंक पर इकट्ठा किया.

फिर उन से कुरआन की 1-2 आयतें सुनाने को कहा. जो लोग आयतें सुना देते, उन्हें एक ओर कर देते थे और जो नहीं सुना पाते थे, उन्हें दूसरी ओर खड़ा कर दिया जाता था. इस के बाद आयतें न सुना पाने वाले लोगों की तेज धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई. इन में तारिषी के साथ अधिकतर विदेशी शामिल थे.

जब आतंकी मजहब जानने के लिए आयतें सुन कर लोगों को मार रहे थे, तब तारिषी के दोस्त इंसानियत का धर्म निभा रहे थे. तारिषी के दोनों दोस्त अबिंता और फराज ने आखिरी वक्त तक दोस्ती और इंसानियत का साथ नहीं छोड़ा.

फराज ने आतंकियों को कुरआन की आयतें सुना दी थीं. इस पर फराज से उन्होंने दूसरी ओर जाने को कहा, लेकिन फराज ने अपनी दोस्त तारिषी और अबिंता के बिना जाने से इनकार कर दिया. इस पर आतंकियों ने तीनों दोस्तों की हत्या कर दी थी.

तारिषी जैन की हत्या की खबर मिलने के बाद उस के परिजनों व परिचितों में मातम छा गया. पलभर में परिवार की खुशियां काफूर हो गईं. घटना वाली रात तारिषी ने फिरोजाबाद में रहने वाले अपने चाचा राकेश मोहन से फोन पर बात की थी और वहां के हालात के बारे में भी बताया था.

राकेश मोहन के अनुसार, 3 जुलाई, 2016 रविवार को तारिषी परिवार के साथ फिरोजाबाद आने वाली थी, लेकिन उस से पहले दरिंदों ने उन की बेटी की हत्या कर दी.

तारिषी की मौत के बाद फिरोजाबाद व देश में अलगअलग स्थानों पर घटना की निंदा की गई. कैंडल मार्च निकाल कर श्रद्धांजलि दी गई.

भारत सरकार की सक्रियता के कारण तारिषी का शव 4 जुलाई, 2016 को बंगलादेश से नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लाया गया. वहां से कार द्वारा शव को गुरुग्राम (हरियाणा) ले जाया गया, जहां तारिषी के पिता संजीव जैन का घर था. गुरुग्राम में ही तारिषी का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

लंबी सुनवाई के बाद सुनाया गया फैसला

लगभग 3 साल तक यह मामला विशेष ट्रिब्यूनल में चला. जांच अधिकारी हुमायूं कबीर ने 113 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए. पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 8 दहशतगर्दों ने अदालत में खुद को बेकसूर बताया. गवाहों के बयान और दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह सुनने के बाद जज मुजीबुर रहमान ने सबूतों के आधार पर 27 नवंबर, 2019 को अपना फैसला सुनाया.

जज मुजीबुर रहमान ने इसलामी आतंकवादी संगठन के 7 आतंकियों जहांगीर हुसैन, रकीबुल हसन रेगन, असलम हुसैन उर्फ रशीदुल इसलाम, अब्दुल सबूर खान उर्फ सोहिल महफूज, हादुर रहमान सागर, शरीफुल इसलाम, खालिद और मामूनुर रशीद को फांसी की सजा सुनाई.

अदालत ने आतंकी हमले में 22 निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत को अमानवीय करार दिया. जज ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार टका का जुरमाना भी लगाया. जब कोर्ट ने फैसला सुनाया तो दोषी बिना किसी पछतावे के बेखौफ खड़े थे और उन्होंने अल्लाह हू अकबर का नारा भी लगाया.

न्यायाधीश ने आठवें आरोपी मिजानुर रहमान को बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष प्रतिबंधित संगठन नव-जमायतुल मुजाहिदीन बंगलादेश (नव जेएमबी) द्वारा किए गए हमले में उस के संबंध को साबित नहीं कर सका था.

अपने फैसले में न्यायाधीश ने बंगलादेशी मूल के कनाडाई नागरिक तमीम चौधरी को हमले का मास्टरमाइंड बताया, जो हमले के बाद राष्ट्रव्यापी आतंकवादरोधी सुरक्षा अभियान के दौरान मारा गया था. आतंकरोधी शाखा ने आतंकी हमले की 2 साल की जांच के बाद पिछले साल जुलाई में अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी.

फैसला सुनाए जाने के बाद सरकारी वकील गुलाम सरवर खान ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि मामले की जांच में पता चला कि दोषियों ने आतंकवादियों को धन मुहैया कराया था. हथियारों की आपूर्ति की थी या फिर हमले में सीधे तौर पर शामिल लोगों की मदद की थी. उन के खिलाफ जो आरोप थे, वे साबित हो गए.

जिन 7 आतंकियों को सजा सुनाई गई है, वे हमले की साजिश में शामिल थे. कोर्ट ने उन्हें अधिकतम सजा सुनाई. सभी दोषी करार दिए गए अपराधियों का संबंध जमायतुल मुजाहिदीन बंगलादेश से था. यह संगठन बंगलादेश में शरिया कानून लागू करना चाहता था.

फिरोजाबाद के सुहागनगर में रहने वाले तारिषी के ताऊ राजीव जैन को 27 नवंबर, 2019 की शाम यह खबर मिली कि ढाका के रेस्टोरेंट में आतंकी हमला करने वाले 7 आतंकियों को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई है तो उन के दिल को सुकून मिला.

बेटी को खोने का गम आज भी परिवार के सदस्यों की आंखों में झलकता है. बर्कले यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया की छात्रा तारिषी मेधावियों में अपना स्थान रखती थी. तारिषी के मातापिता ने बेटी की स्मृति में बर्कले यूनिवर्सिटी में एक मेधावी स्कौलरशिप शुरू करने की घोषणा की है.

सौजन्य: मनोहर कहानियां, जनवरी 2020

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