Top 5 love Murder story : टॉप 5 लव मर्डर स्टोरी

Top 5 love Murder story  : इन लव क्राइम स्टोरी को पढ़कर आप जान पाएंगे कि कैसे समाज में प्रेम ने कईओं के घर बर्बाद किये है और किसी ने प्यार के लिए अपनों को ही शिकार बना लिया. और अपने ही प्यार को धोखा देकर उसे मार देना. अपने और अपने परिवार को ऐसे हो रहे क्राइम से सावधान करने के लिए पढ़िए Top 5 love Murder story in Hindi मनोहर कहानियां जो आपको गलत फैसले लेने से बचा सकती है.

1. प्रेमिका के बाप ने कहा मर के दिखाओ, बच गए तो होगी शादी

बीती 4 जुलाई को प्रीति जब मीडिया से रूबरू हुई, तब उस का चेहरा हालांकि उतरा और निचुड़ा हुआ था, लेकिन इस के बावजूद वह यह जताने की कोशिश करती नजर आई कि अतुल लोखंडे उर्फ अत्तू की आत्महत्या में उस का या उस के पिता का कोई हाथ नहीं हैमतलब उसे खुदकुशी के लिए उकसाया नहीं गया था. यह खुद अतुल का फैसला था, लेकिन जबरन उस के पिता का नाम बीच में घसीटा जा रहा है

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

2. पापा को मरवाने की सुपारी दे डाली प्रेम में पागल बेटी ने

कुलदीप की पत्नी गीता पुलिस को दिए अपने बयान में खुद ही बुरी तरह फंस गई थीउस ने पुलिस को बताया कि जब वह सुबह उठी तो सीढि़यों के दरवाजे की कुंडी उस ने ही खोली थी. नीचे आई तो घर के मेन गेट के लौक में अंदर से चाबी लगी थी और वह खुला हुआ था. पुलिस को संदेह हुआ तो. अपनी नौकरी के चलते गीता को घर का काम निपटा कर जल्दी सोना होता था और सुबह जल्दी ही उठना पड़ता था.

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

3. शादीशुदा महिला ने दो प्रेमियों के साथ मिलकर किया तीसरे का कत्ल

उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के थाना औरास के अंतर्गत आने वाले गांव गागन बछौली का रहने वाला उमेश कनौजिया बहुत ही हंसमुख और मिलनसार स्वभाव का था. इसी वजह से उस का सामाजिक और राजनीतिक दायरा काफी बड़ा था. उन्नाव ही नहीं, इस से जुड़े लखनऊ और बाराबंकी जिलों तक उस की अच्छीखासी जानपहचान थी. वह अपने सभी परिचितों के ही सुखदुख में नहीं बल्कि पता चलने पर हर किसी के सुखदुख में पहुंचने की कोशिश करता था

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

4. दोस्त से कराई प्रेमिका की हत्या

सूचना गंभीर थी, इसलिए घटना की सूचना अपने सीनियर पुलिस इंसपेक्टर चंद्रशेखर नलावड़े को दे कर वह तुरंत कुछ सिपाहियों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. सबइंसपेक्टर माली के पहुंचने तक वहां काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. आग बुझाने वाली गाडि़यां भी चुकी थीं और उन्होंने आग पर काबू भी पा लिया था. सबइंसपेक्टर माली साथियों के साथ फ्लैट के अंदर पहुंचे तो वहां की स्थिति देख कर स्तब्ध रह गए

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

5. बाइक रोक कर प्रेमिका के मुंह में कट्टा घुसेड़ मारी गोली

पहनावे से मृतका मध्यमवर्गीय परिवार की लग रही थी. उस की उम्र यही कोई 25 साल के आसपास थी. उस के मुंह और सीने में एकदम करीब से गोलियां मारी गई थीं. मुंह में गोली मारी जाने की वजह से चेहरा खून से सना था. घावों से निकल कर बहा खून सूख चुका था. मृतका की कदकाठी ठीकठाक थी. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे कम से कम 2 तो रहे ही होंगे. पुलिस ने घटनास्थल से 315 बोर के 2 खोखे बरामद किए थे.

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Emotional Story : पहले भागकर असफल रहा प्रेमी पर दूसरी बार भागकर हुआ सफल

Emotional Story : पूनम से प्यार कर के मोहित ने कोई गुनाह नहीं किया था, लेकिन उस के घर वालों ने पुलिस से मिल कर सचमुच इसे गुनाह बना दिया, जिस की सजा मोहित और पूनम दोनों को भोगनी थी. 14साल की पूनम ने हाईस्कूल की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास कर ली थी और आगे की पढ़ाई के लिए उसी स्कूल में 11वीं का फार्म भर दिया था. बोर्ड की परीक्षा पास करने के बाद दूसरे स्कूलों के स्टूडेंट भी पूनम के स्कूल में एडमिशन के लिए आए थे. पूनम की कक्षा में कई नए छात्र थे.

हमारी जिंदगी में रोजाना कई चेहरे आते हैं और बिना कोई असर छोड़े चले जाते हैं. लेकिन जिंदगी के किसी मोड़ पर कोई ऐसा भी आता है, जिस की एक झलक ही दिल की हसरत बढ़ा देती है. कुछ ऐसा ही पूनम के साथ भी हुआ था. उस की क्लास में मोहित ने भी एडमिशन लिया था. पूनम की उस से दोस्ती हुई तो कुछ ही दिनों में वह उसे दिल दे बैठी थी. फतेहपुर की पूनम और नूरपुर के मोहित दो अलगअलग गांवों में पलेबढ़े थे. लेकिन उन का स्कूल एक ही था और यहीं दोनों ने एकदूसरे से कुछ वादे किए.

पहले तो दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होती थी, सिर्फ नजरें मिलने पर मुसकरा कर खुश हो जाया करते थे, लेकिन जल्द ही मोहब्बत के अल्फाजों ने इशारों की जगह ले ली जो एक नया एहसास दिलाने लगे. पहली नजर में किसी को प्यार होता है या सिर्फ चंद दिनों की चाहत होती है, इस का नतीजा निकालना थोड़ा मुश्किल होता है. लेकिन कुछ नजरें ऐसी भी होती हैं जो दिलों में हमेशा के लिए मुकाम बना लेती हैं. पूनम ने अपने प्यार का पहले इजहार नहीं किया था, क्योंकि वह प्यारमोहब्बत के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती थी. लेकिन कभीकभी ऐसा होता है कि जो न चाहो वही होता है. पूनम भी इसी चाहत का शिकार हो गई और मोहित से दिल के बदले दिल का सौदा कर बैठी.

पूनम और मोहित का प्यार भले ही 2 नाबालिगों का प्यार था, लेकिन उन के प्यार में पूरा भरोसा और यकीन था. उसी प्यार की गहराई में डूब कर पूनम सब कुछ छोड़ कर मोहित का हाथ थामे प्यार में गोते लगाती चली गई. 2 प्यार करने वाले भले ही ऊंचनीच, दौलत शोहरत न देखें, लेकिन घर और समाज के लोग यह सब जरूर देखते हैं. इसी ऊंचनीच के फेर में दोनों बुरी तरह फंस कर उलझ गए. पूनम सवर्ण थी तो मोहित दलित परिवार से ताल्लुक रखता था.

पूनम का भरापूरा परिवार जरूर था, जिस में मांबाप और बड़े भाई साथ रहते थे. लेकिन उसे कभी घर वालों का प्यार नहीं मिला. आए दिन छोटीछोटी गलतियों की वजह से उसे मारपीट और गालीगलौज के दौर से गुजरना होता था. ये सब कुछ वह चुपचाप बरदाश्त करती थी. लेकिन उसे इस बात की खुशी थी कि स्कूल में उसे मोहित का प्यार मिल रहा था. मोहित को देखते ही उस का सारा दुखदर्द छूमंतर हो जाता था. एक दिन उस ने मोहित से अपने साथ की जाने वाली मारपीट (Emotional Story) की पूरी बात बताई. उस की कहानी सुन कर मोहित द्रवित हो गया. बाद में एक दिन पूनम और मोहित घर से भाग गए.

जिस समय मोहित और पूनम घर से भागे, उस वक्त दोनों नाबालिग थे. पहले तो दोनों के घर वालों ने भागने की बात को छिपा लिया, लेकिन उसे कब तक छिपाए रखते. कहते हैं कि दीवारों के भी कान होते हैं. देखते ही देखते यह बात पूनम के गांव से होते हुए मोहित के गांव तक जा पहुंची. अब हर ओर उन्हीं दोनों की चर्चा हो रही थी. कुछ लोग इसे सही ठहरा रहे थे, जबकि कुछ का यह कहना भी था कि मोहित ने ठीक किया. इस से पूनम के घर वाले अब समाज में सिर उठा कर नहीं बोल सकेंगे. बड़ी दबंगई दिखाते थे. बेटी ने नाक कटवा कर सारी दबंगई निकाल दी.

अफवाहों के भले ही पर नहीं होते, लेकिन परिंदों से भी ज्यादा तेजी से उड़ती हैं. आसपास के गांवों में पूनम और मोहित के भागने की खबर फैल गई. आखिर पूनम के घर वालों ने पुलिस थाने में जा कर मोहित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी. इस के बाद पुलिस उन दोनों को तलाश करने लगी. लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. पुलिस वालों ने दूसरे जिलों के थानों में भी खबर कर दी थी. काफी दिन बाद पूनम और मोहित दिल्ली पुलिस को मिल गए. दिल्ली पुलिस ने उन की गिरफ्तारी की सूचना संबंधित थाने को दे दी तो उस थाने की पुलिस दोनों को अपने साथ ले गई. क्योंकि पूनम के पिता मोहित के खिलाफ पहले ही पूनम को भगाने और रेप की एफआईआर दर्ज करवा चुके थे.

पुलिस के हत्थे चढ़ने पर पूनम मोहित को ले कर बहुत परेशान थी क्योंकि उसे मालूम था कि उस के घर वाले पुलिस से मिल कर मोहित के साथ क्या करवाएंगे. इस के अलावा उस की जिंदगी भी घर में नरक बन जाएगी. यही सोचसोच कर पूनम रो रही थी क्योंकि उस के बाद जो होना था, उस का उसे अंदाजा था. मोहित को पुलिस ने हवालात में डाल दिया और पूनम को उस के घर वालों के सुपुर्द कर दिया. जबकि वह उन के साथ नहीं जाना चाहती थी. वह मोहित के साथ ही रहना चाहती थी. लेकिन मजबूर थी. क्योंकि उन लोगों ने मोहित के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था.

घर पहुंच कर पिता और भाई ने पूनम को जम कर पीटा और उसे धमकाया कि अगर उस ने कोर्ट में मोहित के खिलाफ बयान नहीं दिया तो उसे और मोहित को जान से मार डालेंगे. पूनम घर वालों की धमकियों से बहुत डर गई. लेकिन अपने लिए नहीं, बल्कि मोहित के लिए वह घर वालों के कहे अनुसार बयान देने को राजी हो गई. घर वालों ने पूनम को दबाव में ला कर कोर्ट में जबरदस्ती बयान दिलवाया कि मोहित उसे जबरदस्ती भगा कर ले गया था और उस ने उस के साथ रेप भी किया था. पूनम के लिए यह बहुत बुरा दौर था. उसे उसी के पति के खिलाफ झूठी गवाही के लिए मजबूर किया जा रहा था. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसे प्यार करने की इतनी बड़ी सजा क्यों दी जा रही है. एक तरफ पूनम अपने घर में ही रह कर बेगानी थी तो वहीं दूसरी तरफ मोहित पर पुलिस का सितम टूट रहा था.

जब पूनम और मोहित घर से भागे थे, तभी उन्होंने शादी कर ली थी. पुलिस ने जब दोनों को दिल्ली से पकड़ा तब मोहित बालिग हो चुका था, जबकि घर से भागे थे तब दोनों नाबालिग थे. पुलिस ने मोहित को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. पूनम के घर वालों ने पुलिस से सांठगांठ कर के मोहित पर अत्याचार करवा कर अपनी बेइज्जती का बदला तो लिया ही साथ ही अपना प्रभाव भी दिखाया. पूनम के घर वालों में से कोई भी उस के साथ हमदर्दी तक नहीं दिखा रहा था. इस दुनिया में मां ही ऐसी होती है, जिसे अपने बच्चों से सब से ज्यादा प्यार होता है. लेकिन उस की मां सरिता एकदम पत्थरदिल हो गई थी. उसे अपनी बेटी की जरा भी परवाह नहीं थी.

अगर परवाह थी तो अपने परिवार की इज्जत की, जो पूनम ने सरेबाजार नीलाम कर दी थी. बल्कि सरिता तो उसे ताने देते हुए यही कह रही थी कि अगर उसे प्यार ही करना था तो क्या दलित ही मिला था. क्या बिरादरी में सब लड़के मर गए थे. यही बात सोचसोच कर उस की आंखों में शोले भड़कने लगते थे. करीब 5 महीने बाद मोहित के केस की सेशन कोर्ट में काररवाई शुरू हुई तो हर सुनवाई से पहले पूनम को उस के घर वाले समझाते कि उसे कोर्ट में क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना. बाप और भाई के रूप में राक्षसों के जुल्मोसितम के आगे पूनम ने घुटने टेक दिए थे. उस से जो कहा जाता वही वह अदालत में कहती. ये पूनम की गवाही का ही नतीजा था कि मोहित को हाईकोर्ट से जमानत मिलने में 22 महीने लगे.

मोहित जब जमानत पर जेल से बाहर आया तो किसी तरह पूनम को भी उस की खबर लग गई. वह मोहित को एक नजर देखने के लिए बेकरार हो गई. लेकिन उस के लिए मिलना तो नामुमकिन सा था. पूनम को मोहित के घर वालों का नंबर अच्छी तरह से याद था. एक दिन अकेले कमरे में किसी तरह से मोबाइल ले कर उस ने नंबर डायल कर दिया. दूसरी ओर फोन की घंटी बज रही थी, लेकिन उस से तेज पूनम के दिल की धड़कनें बढ़ चुकी थीं. वह यही चाह रही थी कि मोहित ही फोन रिसीव करे तो अच्छा रहेगा. आखिर उस की आरजू पूरी हुई और मोहित ने ‘हैलो’ बोला, जिसे सुन कर पूनम सुधबुध खो बैठी. कई बार उधर से हैलो की आवाज से उसे होश आया और रुंधे गले से सिर्फ लरजती आवाज में बोल पाई मोहित. मोहित उस की आवाज को पहचान गया और ‘पूनम पूनम’ कह कर चीख पड़ा.

खैर, उस दिन दोनों के बीच थोड़ी बातचीत हुई. इस के बाद एक बार फिर से पहले की तरह सब कुछ चलने लगा. फोन पर बातें होती रहीं और दोनों ने एक बार फिर पहले की तरह साथ रहने का फैसला कर लिया. तय वक्त पर पूनम और मोहित दोबारा घर से भाग गए और गांव से दूर आर्यसमाज मंदिर में शादी कर ली, जिस का उन्हें प्रमाणपत्र भी मिला. पहले जब उन्होंने शादी की थी, उस समय वे नाबालिग थे. उन्होंने शादी तो कर ली, लेकिन पूनम के घर वालों ने उसे हमेशा के लिए छोड़ दिया. क्योंकि उस ने दोबारा से उन्हें समाज में मुंह दिखाने के काबिल नहीं छोड़ा था. काफी अरसे तक पूनम ने अपने घर वालों से कोई बातचीत नहीं की, जबकि मोहित के घर वालों ने उन दोनों को अपना लिया था.

पूनम मोहित के घर पर ही रह रही थी. मोहित के पिता की मौत पहले ही हो चुकी थी. अब घर में सास और एक ननद थी. उन के बीच ही वह हंसीखुशी से रह रही थी. पूनम को अब एक खुशी मिलने वाली थी, क्योंकि वह मां बनने वाली थी. उस ने एक खूबसूरत बच्ची को जन्म दिया, जिस से पूरा घर खुश था. अब सब सामान्य था लेकिन उस का एक जख्म भरता नहीं था कि दूसरा बन जाता था. अभी उस की मासूम बच्ची ने सही तरह से आंखें भी नहीं खोली थीं कि उस के ऊपर (Emotional Story) मुसीबतों का एक और पहाड़ टूट पड़ा. हुआ यूं कि मोहित पर पहले का जो केस चल रहा था, उस का फैसला आ गया, जिस में सेशन कोर्ट ने मोहित को 7 साल की सजा और 5 हजार रुपए जुरमाने का आदेश दिया.

इस फैसले से पूनम के पैरों तले से जैसे जमीन ही खिसक गई. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि जब मोहित से उस ने शादी कर ली और वह बालिग भी है, तब क्यों ऐसा फैसला आया. इस से तो हमारा पूरा परिवार ही बिखर जाएगा. उस ने कोर्ट में इंसानियत के नाते मोहित को छोड़ने की गुजारिश की, पर कोई लाभ नहीं मिला. पूनम को अपनी बेटी पर बड़ा तरस आ रहा था, जिसे बिना किसी कसूर के इतनी बड़ी सजा मिल रही है, जो उसे 7 सालों तक बाप के प्यार से दूर रहना पड़ेगा. इस दुधमुंही की क्या गलती थी, जो इसे हमारे किए की सजा मिलेगी.

Sad Story : आत्महत्या का निर्णय ले चुकी दिशा को एक रिंगटोन ने कैसे रोका

Sad Story :  कहते हैं, हताशनिराश या दुखी हो कर इंसान जब आत्महत्या की सोचता है तो सिर्फ एक पल ऐसा होता है, जो उसे आत्महत्या करने को उकसाता है. अगर किसी तरह वह एक पल निकल जाए, तो इंसान आत्महत्या का इरादा छोड़ देता है दिशा की तरह. आत्महत्या को ले कर बुनी गई एक रोचक कहानी…

दिशा को उस के प्रेमी ने तो धोखा दिया ही था, साथ ही उस की वजह से दिशा की अच्छीभली नौकरी भी चली गई थी. भेद खुला तो घर वाले बहुत नाराज हुए. साथ ही सगेसंबंधियों और जानपहचान वालों में उस की खासी बदनामी हुई. शरम के मारे दिशा ने बाहर आनाजाना तक बंद कर दिया था. वह घर में ही पड़ीपड़ी घुटती रहती थी. जिस की वजह से वह इतनी हताश और निराश हो गई कि उसे अपना जीवन व्यर्थ सा लगने लगा था.

एक दिन शाम को घर के सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां शादी में गए हुए थे. वह दिशा को अपने साथ इसलिए नहीं ले गए थे कि लोग पता नहीं कैसेकैसे सवाल पूछें. पहले ही हताशनिराश दिशा घर वालों के इस व्यवहार से और ज्यादा निराश हुई. उसे लगा कि इस तरह जीने से तो मर जाना ही बेहतर है. उस समय वह घर में अकेली थी. उस के लिए यह अच्छा मौका था, इसलिए उस ने आत्महत्या करने का फैसला ले लिया.

नींद न आने की वजह से उस ने नींद की गोलियां पहले ही खरीद रखी थीं. उस ने झटपट सुसाइड नोट लिखा और नींद की गोलियों की पूरी शीशी और एक गिलास पानी अपने पास रख लिया. इस के बाद वह सोचने लगी कि उस के जीवन की यह अंतिम शाम होगी, क्योंकि ऐसे जीवन का कोई मतलब नहीं है, जिस में कोई अपना हो ही नहीं. अब न तो कोई उस की चिंता करने वाला है और न कोई उस के बारे में सोचने वाला. अगर वह जिंदा रहती है तो पूरी जिंदगी उसे इसी तरह घर वालों के ताने सुनते रहना पड़ेगा. अब उस की सहन करने की सारी हदें पार हो गई हैं. जब घर वाले ही उस के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं तो जीने से क्या फायदा.

हाथ में नींद की गोलियों की शीशी लिए दिशा की सोच (Sad Story) आगे बढ़ पाती, इस से पहले ही बैड पर पड़े मोबाइल फोन की घंटी बजने लगी. दिशा ने नफरत से मोबाइल की ओर देखा. उस ने सोच लिया कि फोन किसी का भी हो, वह नहीं उठाएगी. जब उस ने मरने का फैसला कर ही लिया है तो फोन उठाने की जरूरत ही क्या है. उस ने यह भी नहीं देखा कि फोन किस का है.

दूसरी ओर फोन करने वाले ने भी जैसे ठान लिया था कि जब तक फोन उठेगा नहीं, वह घंटी बजाता रहेगा. निश्चित समय तक घंटी बजने के बाद कुछ सैकेंड के लिए बंद होती और फिर बजनी शुरू हो जाती. यही क्रम लगातार चलता रहा. लगातार घंटी बजती रही तो उकता कर दिशा ने यह सोच कर फोन उठा लिया कि देखें कौन है, जो उस से बातें करने के लिए मरा जा रहा है. फोन रिसीव कर जैसे ही दिशा ने हैलो कहा तो दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘क्या मैं यश से बात कर सकता हूं?’’

‘‘कौन यश?’’ जवाब देने के बजाय दिशा ने सवाल किया.

‘‘यश…यश ठाकुर.’’ वह बोला.

‘‘सौरी रौंग नंबर, यहां कोई यश नहीं रहता.’’ दिशा ने कहा.

‘‘तो कौन रहता है?’’

‘‘क्या मतलब?’’ दिशा थोड़ी नाराज हो कर बोली.

‘‘मेरे पूछने का मतलब यह कि आप कौन बोल रही हैं?’’

‘‘मैं यश तो नहीं हूं न, आप के लिए इतना पर्याप्त नहीं है क्या?’’

‘‘यह तो मैं भी जान रहा हूं कि आप यश नहीं हैं, क्योंकि यह आवाज यश की नहीं है. लेकिन आप बुरा मत मानिएगा, आप की आवाज बहुत मधुर है. एकदम शहद जैसी. आप की आवाज अच्छी लगी, इसीलिए पूछ लिया. आई एम वेरीवेरी सौरी, अगर बुरा लगा हो तो…’’

मस्का लगाने पर दिशा की नाराजगी थोड़ी कम हुई. क्षण भर चुप्पी साधे रहने के बाद उस ने कहा, ‘‘मैं दिशा बोल रही हूं. आई मीन मेरा नाम दिशा है.’’

‘‘ओह ग्रेट, जीवन में सब को गाइड करने वाली यानी दिशा दिखाने वाली…सचमुच बड़ा सुंदर नाम है.’’

‘‘सौरी, मैं न किसी को गाइड करती हूं और न ही दिशा दिखाती हूं.’’

‘‘अगेन सौरी…मैं तो मजाक कर रहा था.’’

‘‘अनजान लोगों से आप की मजाक करने की आदत है क्या?’’

‘‘नहीं, आप अनजान नहीं लगीं, इसीलिए…’’

‘‘बातें करने में आप बहुत स्मार्ट लगते हैं.’’

‘‘सिर्फ बातें करने में ही नहीं, मैं तो पूरा का पूरा स्मार्ट हूं.’’

‘‘आप अपने बारे में ऊंची मान्यता रखने वाले लगते हैं.’’

‘‘अपने बारे में अच्छा सोचना, सम्मान रखना कोई बुरी बात तो नहीं. आप ही बताओ, अपनी उपेक्षा क्यों की जाए?’’

‘‘लेखक हो क्या?’’

‘‘हूं तो नहीं पर बनने के सपने देख रहा हूं.’’

‘‘सपना…केवल सपना ही देखते हो या मेहनत भी करते हो?’’ अब दिशा धीरेधीरे उस अनजान की बातों में उलझती जा रही थी.

‘‘इस समय मैं कर क्या रहा हूं, मेहनत ही तो कर रहा हूं. दिशा नाम की लड़की को पटाने की मेहनत…’’

‘‘व्हाट?’’ दिशा नाराज हो कर बोली.

‘‘सौरी…सौरी, मिठास के साथ आप में कड़वाहट भी है. मैं ने यही जानने के लिए पटाने वाली बात कही थी. क्योंकि केवल मिठास होना ही अच्छी बात नहीं है. आप में तो मिठास के साथसाथ कड़वाहट भी है.’’

‘‘बातें बनाना और मस्का लगाना आप को बहुत अच्छा आता है.’’

‘‘थैंक्स फौर कांप्लीमेंट्स. हमारे ऊपर हमेशा आप जैसी सुंदर लड़कियों की शुभकामनाओं की मेहरबानी रही है.’’

‘‘मैं सुंदर हूं, यह आप से किस ने कहा?’’

‘‘मैं लड़कियों को सुंदर ही मानता हूं. कहा जाता है कि सुंदरता नजरों में होती है और मेरी नजर सुंदर है. मैं तो उन्हीं कवियों को पसंद करता हूं जो प्रेम (Sad Story) की कविताएं लिखते हैं.’’ इतना कह कर वह जोर से हंसा. उस के इस तरह हंसने से दिशा खीझ कर बोली, ‘‘खुद को स्मार्ट साबित करने का तुम्हारा यह आइडिया बहुत सुंदर है. लगता है, तुम ने ‘रौंग नंबर’ कहानी पढ़ ली है.’’

‘‘आप बेकार ही इस कहानी को बीच में ला रही हैं. वैसे भी इस कहानी से हमें काफी सुविधा मिली है. फोन पर कैसे बात की जाए, यह तो पता चल ही जाता है.’’

‘‘कहीं वह कहानी आप ने ही तो नहीं लिखी है. इस तरह बातचीत कर के एक और कहानी लिखना चाहते हों. आप ने पहले ही बताया है कि आप लेखक बनने का सपना देख रहे हैं. इसी तरह कहानी लिख कर लेखक बन जाएं. वैसे आप का सेंस औफ ह्यूमर बहुत अच्छा है.’’

न चाहते हुए भी दिशा के चेहरे पर मुसकान की हलकी लहर दौड़ गई. आत्महत्या के अंतिम पलों में हंसी भला कहां आती है. अगर जीवन में हंसने के ही मौके होते तो मन में आत्महत्या का विचार ही क्यों आता.

‘‘मेरे सेंस औफ ह्यूमर के लिए तो मेरे दोस्त भी दाद देते हैं.’’ वह बोला.

‘‘लेकिन मैं आप की दोस्त थोड़े ही हूं.’’

‘‘मुझे तो यही लगता है कि अब तक आप मेरी दोस्त बन गई हैं. वरना कोई रौंग नंबर पर इतनी देर बातें करता है क्या?’’

दिशा ने तुरंत फोन काट दिया. वह बुदबुदाने लगी, ‘अपने आप को समझता क्या है?’

5-7 मिनट तक शांति छाई रही. उस के बाद फिर फोन बजा. इस बार न जाने क्यों दिशा ने तुरंत फोन उठा लिया. जबकि उसे उम्मीद थी कि फोन उसी अनजान आदमी का होगा. दिशा को लगा, यह आदमी आसानी से पीछा छोड़ने वाला नहीं है. इसे थोड़ा हड़काना ही पड़ेगा. इसलिए दिशा ने गुस्से में तेज आवाज में कहा, ‘‘हैलो.’’

‘‘हैलो.’’ फिर वही आवाज आई. शायद उस की समझ में आ गया कि दिशा उस के फोन करने से नाराज है, इसलिए उस ने सहानुभूति पाने के लिए बात बदल दी. उस ने कहा, ‘‘सौरी दिशाजी, मेरा इरादा आप को हर्ट करने का नहीं था. मुझे लगा कि जीवन के अंतिम पलों में किसी अच्छे व्यक्ति से बात कर के इस दुनिया को अलविदा (Sad Story) कहूं. लेकिन…’’

दिशा चौंकी. इस का मतलब यह भी उसी की तरह दुखी है. बीमार तो है नहीं, शायद प्रेम में धोखा खाया होगा. इसलिए न चाहते हुए भी उस के मुंह से निकल गया, ‘‘यानी आप भी मेरी तरह..?’’

पलभर मौन के बाद दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘तो क्या आप भी मेरी तरह..?’’

‘‘हां, मेरी भी इस अंतिम शाम की यह अंतिम बातचीत है. अपनी मुलाकात आप को कुछ अनोखी नहीं लगती.’’

‘‘हां, अनोखी ही है, अंतिम पलों के साथी बन गए हैं हम.’’

‘‘पर आप तो पुरुष हैं. आप को आत्महत्या करने की क्या जरूरत है?’’

थोड़ी देर शांति के बाद दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘क्यों, ऐसा कोई नियम है क्या कि पुरुष को कोई परेशानी नहीं हो सकती?’’

‘‘नहीं…नहीं, नियम तो नहीं है लेकिन सामान्य रूप से हमारा समाज पुरुष प्रधान है. इसलिए जब सहन करने की बात आती है तो वह स्त्रियों के हिस्से में आता है.’’

‘‘यह आप का भ्रम है लेकिन अब अंतिम समय में आप का यह भ्रम तोड़ने से कोई फायदा नहीं है, वरना जरूर पूरी बात कहता. पर जाने से पहले दिल हलका करने के लिए एक बात…पर जाने दो. अंतिम समय में दिल हलका हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है.’’

‘‘हमेशा ऐसा नहीं होता. अगर कोई सहृदय बात सुने तो जरूर अच्छा लगता है. और वैसे भी हंसतेहंसते दुनिया को अलविदा कहना हर आदमी के भाग्य में नहीं होता.’’

‘‘आप तो दार्शनिक की तरह बातें करने लगीं.’’

‘‘अंतिम पलों में शायद हर आदमी अपने आप दार्शनिक हो जाता है.’’ दिशा अनायास ही बातों के प्रवाह में बहती चली गई. उस ने आगे कहा, ‘‘पर अपनी बातें सुनने का समय अब किस के पास है.’’

‘‘आप की बात सच है. पर मुझे इस समय मौत जैसा कोई दूसरा सुख दिखाई नहीं दे रहा.’’ दूसरी ओर से निराशा भरी आवाज आई.

‘‘नहीं…नहीं, ऐसी बात नहीं है. आप तो पुरुष हैं, पुरुष हो कर भी हिम्मत हार गए. इस तरह निराशावादी होना आप के लिए शोभा नहीं देता.’’

‘‘मुझे कुछ भी ठीक नहीं लग रहा. दिशाजी, आप ही सोचो कि अगर सब अच्छा होता तो मरने के बारे में सोचता ही क्यों.’’

‘‘अच्छे में तो सभी जी लेते हैं, बात तो मुश्किलों से सामना करने की है. मरना तो आसान है. आप ने मुश्किलों से मुकाबला कर के जीने की कोशिश नहीं की?’’ अब तक दिशा जानेअनजाने में काउंसलर की भूमिका में आ गई थी.

‘‘हो सकता है. लेकिन एक बार जो निर्णय कर लिया, अब उसे बदलने की मेरी इच्छा नहीं हो रही है.’’

‘‘जीवन में हम कितनी बार अपना फैसला बदलते हैं. आप अपना नजरिया तो बदलिए और थोड़ा पौजिटिव बनिए. हो सकता है, दुनिया कुछ अलग ही दिखाई दे.’’

‘‘शायद आप की बात सच हो…’’

‘‘सौ प्रतिशत सच है.’’ दिशा जैसे जुनून में आ गई थी.

‘‘होगी, पर अब मैं इस तरह कुछ नहीं सोचना चाहता. जीने के लिए कितने समझौते करने होते हैं. कभीकभी हमें भी…’’ दूसरी ओर से इतना कह कर बात अधूरी छोड़ दी गई.

‘‘परेशानियों से डर कर मैदान छोड़ देना कायरता कही जाएगी.’’ दिशा की काउंसलर की भूमिका आगे बढ़ी, ‘‘कभीकभी हम छोटी से छोटी बात को ले कर आवेश में आ जाते हैं और बिना सोचेसमझे उलटासीधा कदम उठा लेते हैं.’’

‘‘आप तो काफी पढ़ेलिखे लगते हैं. फिर भी…’’

‘‘थैंक फौर कांप्लीमेंट्स. पर कभीकभी ज्यादा पढ़लिख लेना भी काम नहीं आता. उस का ढंग से उपयोग नहीं किया जा सकता. किताबों में जो पढ़ाया जाता है, वह जीवन में किस काम आता है. मुझे तो यह सब बेकार की चीजें लगती हैं. दूसरों को कहना आसान है. जब खुद पर जरा भी परेशानी आती है तो सारा ज्ञान धरा का धरा रह जाता है.’’

‘‘ऐसा हमेशा थोड़े ही होता है.’’

‘‘वैसे आप की बात निश्चित रूप से विचार करने लायक है. सच कहूं, मन में यह विचार तो आता ही है कि मैं तो आत्महत्या कर के इस समाज और दुनिया से छुटकारा पा जाऊंगा, पर क्या यह स्वार्थ नहीं होगा? क्या मैं स्वार्थी नहीं कहलाऊंगा? मेरे चले जाने के बाद दुनिया पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन कोई तो होगा, जिसे मेरे जाने का दुख होगा. यही मैं इतनी देर से सोच रहा हूं.’’

‘‘इतना सोचनेविचारने के बाद भी आखिर में आप ने नेगेटिव ही सोचा.’’

‘‘क्या करूं दिशाजी, आदत से मजबूर हूं.’’

‘‘आप जो कह रहे हैं, यह कह कर छुटकारा पाने का हमारा हक नहीं है. हमारी अब तक की जिंदगी में कितने लोगों का सहयोग है. मातापिता, सगेसंबंधी, मित्र…कोई तो होगा जो हमारे लिए…’’ कहतेकहते दिशा अचानक रुक गई. दिशा बातों के प्रवाह में इस कदर बह गई थी कि उसे इस बात का भी भान नहीं रहा कि वह एक अपरिचित व्यक्ति से बात कर रही है. जबकि वह खुद भी आत्महत्या करने का निर्णय किए बैठी थी. ऐसे में इस तरह की दलीलें करना शोभा देता है क्या? पर नहीं, अपनी दलीलों से अगर किसी का जीवन बच जाता है तो…जातेजाते एक नेक काम तो करती जाए.

‘‘आप अचानक चुप क्यों हो गईं? अपनी बात आती है तो सभी इसी तरह चुप हो जाते हैं. देखिए, दूसरों को उपदेश देना या बड़ीबड़ी बातें करना बड़ा आसान होता है लेकिन उन्हें अमल में लाना आसान नहीं है.

‘‘मुझे पता था कि आप यही सब प्रवचन देंगी कि जीवन अनमोल है, समाज में हम से भी ज्यादा दुखी तमाम लोग हैं,जो मजे से जी रहे हैं. उन की तरफ देखो, तब पता चलेगा कि हमारे पास कितना कुछ है. यही सब कहना चाहती हैं न आप. अरे मोहतरमा, यह सब मैं खूब सुन चुका हूं. पर अब इन सब बातों का मेरे ऊपर कोई असर नहीं होने वाला.’’

दिशा को उस की इन बातों पर गुस्सा आया. जब उसे सब पता ही है तो इसे क्या समझाना. ऐसे आदमी को समझाया भी नहीं जा सकता. लेकिन जानते हुए किसी को मरने के लिए कैसे छोड़ा जा सकता है?

इसलिए उस ने एक बार और कोशिश की, ‘‘देखिए मिस्टर, आप कोई भी हैं. फिर भी लेट मी टेल वनथिंग… आप ने भले ही निर्णय कर लिया है, लेकिन एक काम कीजिए. आप ज्यादा दिनों के लिए नहीं, बस एक दिन के लिए इस विचार को मुल्तवी कर दीजिए. आप को आत्महत्या ही करनी है तो आज के बजाय कल कर लीजिएगा.’’

‘‘एक दिन में क्या फर्क पड़ने वाला है. अरे जो काम कल करना है, उसे आज ही कर के छुट्टी पा लो.’’

‘‘यह तो मुझे नहीं पता कि एक दिन में क्या फर्क पड़ेगा, पर शायद आप ने यह निर्णय किसी क्षणिक आवेश में लिया हो तो हो सकता कल का सूरज आप के लिए कोई शुभ संदेश ले कर उदय हो. आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह तो मुझे नहीं पता, पर हो सकता है कि कल आप को जिंदगी जीने लायक लगे. जैसा आप ने कहा है, शायद उसी तरह अगला बसंत आप की प्रतीक्षा में…’’

‘‘वैसे आप की सारी बातें सच हैं. किसी को भी आप बहुत अच्छी तरह से समझा लेती हैं. आप एक काम कीजिए, काउंसलिंग सर्विस खोल लीजिए, बहुत अच्छी चलेगी.’’

‘‘जब आप पर मेरी काउंसलिंग का कोई असर नहीं हो रहा है तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि मेरी काउंसलिंग सर्विस अच्छी चलेगी.’’

‘‘यह किस ने कहा कि आप की काउंसलिंग का मेरे ऊपर असर नहीं हो रहा.’’

‘‘यानी आप ने मेरी बात मान ली है?’’ दिशा इस तरह उत्साह में कैसे आ गई, यह उस की समझ में नहीं आया.

‘‘इस समय तो यही लग रहा है कि आप जो एक दिन के लिए मुल्तवी करने को कह रही हैं, वह ठीक ही है. आप की इस बात पर विचार तो किया ही जा सकता है.’’

‘‘केवल विचार ही नहीं किया जा सकता, इस पर अमल करना जरूरी है.’’ दिशा ने यह बात एकदम गंभीर हो कर कही.

‘‘ओके मैडम, आप जीतीं, मैं हारा. आप की बात मान कर मैं आज के दिन…केवल आज के दिन मरने यानी आत्महत्या करने का कार्यक्रम टाल रहा हूं. हो सकता है, आप मेरे लिए सही अर्थ में मार्गदर्शक बन कर आई हों. मैं ने तो आप की बात मान ली, अब आप को भी मेरी बात माननी होगी. आप भी आज आत्महत्या नहीं करेंगी.’’

‘‘ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है.’’

‘‘क्या?’’

‘‘आप कल मुझे फोन करेंगे.’’

‘‘मुझे आप की यह शर्त मंजूर है.’’ कह कर रौंग नंबर ने फोन काट दिया.

इस के बाद दिशा रौंग नंबर के नाम से नंबर सेव कर रही थी तो रौंग नंबर दिशा के नाम से. नंबर सेव करते हुए दिशा के कानों में अपने ही शब्द गूंज रहे थे. 5-7 मिनट तक वह नींद की गोलियों की शीशी को देखती रही. उस के दिलोदिमाग में अपनी ही बातें गूंज रही थीं. वह जल्दी से उठी, शीशी का ढक्कन खोल कर सारी गोलियां नाली में फेंक दी. दूसरी ओर रौंग नंबर इस बात से खुश था कि उस ने अपनी साइकोलौजी से एक जान बचा ली.

Murder Story : होटल में मिली ब्यूटीशियन की लाश, ट्रैक पर प्रेमी का शव

Murder Story : दिल्ली के पश्चिम विहार में स्थित एक होटल में ब्यूटीशियन का शव और अगले दिन रेलवे ट्रैक पर उस के प्रेमी का शव मिलने से सनसनी फैल गई है. इन दोनों घटनाओं ने लोगों के जहन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

होटल में मिली लाश की पहचान 28 वर्षीय काजल के रूप में हुई. वह मंगोलपुरी के आर ब्लौक में रहती थी और पेशे से ब्यूटीशियन थी. पुलिस को जांच में पता चला कि काजल का विवाह जोधपुर निवासी रवि नाम के युवक के साथ हुआ था, लेकिन उस की पति से नहीं बनी. जब उन दोनों के बीच ज्यादा तकरार रहने लगी तो काजल ने पति रवि से साल 2022 में तलाक ले लिया था.

फिर एक सहेली के माध्यम से काजल की जानपहचान जोधपुर के सुरेंद्र नाम के युवक से हुई. यह जानपहचान बाद में प्यार में बदल गई. इस के बाद काजल सुरेंद्र के साथ ही रहने लगी. कुछ दिनों तो दोनों मौजमजे में रहे, लेकिन किसी बात पर काजल की सुरेंद्र के साथ भी कलह रहने लगी. लगभग एक महीने पहले इन दोनों के बीच झगड़ा हुआ तो काजल दिल्ली के मंगोलपुरी में स्थित अपने मायके आ गई. काजल के 3 भाई और 2 बहनें हैं.

14 दिसंबर, 2024 को साक्षी नाम की एक सहेली ने काजल को अपने बच्चे के जन्मदिन पार्टी में बुलाया. काजल जब देर रात घर नहीं पहुंची तो उस के घर वालों ने उसे फोन किया, लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ था. घर वालों ने साक्षी से उस के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि काजल उस से मिलने के बाद चली गई थी. तब घर वालों ने थाना राज पार्क में 16 दिसंबर को उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी.
उधर काजल के प्रेमी सुरेंद्र (23 साल) ने दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित एक होटल में 14 दिसंबर को एक कमरा बुक करा रखा था.

14-15 दिसंबर की रात करीब डेढ़ बजे काजल उस होटल में पहुंची. फिर 15 दिसंबर को सुरेंद्र अकेला ही होटल से चला गया. 17 दिसंबर को होटलकर्मियों ने कमरे का दरवाजा न खुलने पर पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची तो कमरे में काजल की लाश (Murder Story) मिली. मृतका के गले और चेहरे पर निशान मिले हैं.
शुरुआती जांच में पुलिस समझ नहीं पाई कि यह हत्या का मामला है या आत्महत्या का. पुलिस ने मृतका का विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेज दिया.

इस घटना के अगले दिन गुरुग्राम पुलिस को पटौदी रेलवे ट्रैक पर काजल के प्रेमी सुरेंद्र का शव मिला. उस के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस को फिलहाल दोनों की मौत की असली वजह पता नहीं लग सकी है. फोरैंसिक जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. बहरहाल, प्रेमीप्रेमिका की अलगअलग जगहों पर हुई मौत क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.

Love story : लिव इन पार्टनर की हत्या कर सूटकेस में डाली लाश

Love story : किसी तरह से जब सूटकेस खुला, तब पुलिस टीम देख कर चौंक गई. क्योंकि उस में थोड़े से  कपड़ेलत्तों के बीच एक युवती का शव था. शव को किसी तरह से ठूंस कर सूटकेस को बंद किया गया था. उस के बाल और दुपट्टे का एक कोना सूटकेस की चेन में फंसा हुआ था.

सूटकेस में मिली लाश की खबर मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को दे दी गई. शव की हालत देख कर यह निश्चित था कि युवती की हत्या कर उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की गई है.

कोरोना काल 2020 का समय चरम पर था. पूरे देश में लौकडाउन लग चुका था. सभी तरह के यातायात ठप थे. दुकानें, औफिस, छोटेबड़े कलकारखाने सब बंद कर दिए गए थे. सुनसान सड़कों पर केवल वही गाडिय़ां दौड़ रही थीं, जिन में खानेपीने और रोजमर्रा के जरूरी सामान, हरी सब्जियां, दूध, दवाइयां आदि होते थे या फिर सुरक्षा में जुटे पुलिसकर्मी और मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाने वाली एंबुलेंस आदि थी.

दूरदराज से रोजीरोटी के लिए आए शहरों और महानगरों में लाखों लोग हर हाल में जल्द से जल्द अपने घर जाना चाहते थे. उन्हीं दिनों मजदूरों के लिए मुंबई से अलगअलग राज्यों के मुख्य शहरों तक जाने वाली कुछ स्पैशल ट्रेनें चलाई गई थीं. मुंबई से ओडिशा तक जाने वाली खचाखच भरी एक स्पैशल ट्रेन में मनोज किसी तरह से सवार हो गया था.

उस ने बड़ी मुश्किल से बैठने के लिए सीट पर जगह बना ली थी. पसीने से लथपथ था. बोगी में काफी शोरगुल था. छोटे तौलिए से अपना मुंह पोंछने के बाद सीट के नीचे घुसाए अपने बैग से पानी की बोतल निकालने के लिए झुका ही था कि इसी बीच एक लड़की उसे डपटती हुई बोली, ”अरे! तुम मेरी सीट पर कैसे बैठ गए? यहां तो मैं बैठी थी.’’

”तुम कैसे बैठी थी. यहां पहले से 5 लोग थे. मैं किसी तरह से बैठ पाया हूं. तुम्हारा सामान कहां है?’’ मनोज बोला.

”मैं एक बैग सीट पर रख कर दूसरा बड़ा सामान लाने गई थी. तुम ने मेरे बैग को सीट के नीचे डाल दिया और मजे में बैठ गए. गलत बात है.’’ लड़की नाराजगी से बोली.

बैठने को ले कर बहस होते देख सामने बैठी एक महिला बोली, ”कोई बात नहीं, सभी को जाना है, तुम भी इसी में किसी तरह जगह बना लो. दिल में जगह होनी चाहिए, बस!’’

”कहां जगह है?’’ लड़की बोली.

तभी मनोज के बगल में बैठा आदमी बोल पड़ा, ”यहां बैठ जाना, मैं ट्रेन चलने पर ऊपर चला जाऊंगा.’’

”चलो, हो गया इंतजाम. लाओ दूसरा सामान, इसे सीट के नीचे डाल देता हूं.’’ मनोज बोला.

थोड़ी देर में ट्रेन चल पड़ी. लड़की को भी बैठने की जगह मिल गई थी. बगल में बैठे मनोज ने पूछा, ”तुम्हें कहां जाना है?’’

”आखिरी स्टेशन तक, ओडिशा!’’ लड़की बोली.

”वहां से?’’ मनोज दोबारा पूछा.

”वहां से अपने गांव…पता नहीं वहां जाने के लिए कोई सवारी मिलेगी या नहीं?’’ लड़की गांव का नाम बताती हुई वहां तक पहुंचने को ले कर चिंतित भी हो गई.

”चिंता की कोई बात नहीं है, कोई न कोई गाड़ी तो मिल ही जाएगी?’’ मनोज बोला.

इसी के साथ मनोज ने बताया कि वह ओडिशा के एक गांव का रहने वाला है, लेकिन बेंगलुरु में काम करने गया था. वहां मन लायक काम नहीं मिला, तब कुछ समय पहले ही काम की तलाश में मुंबई आया था, लेकिन वहां आ कर वह फंस गया था.

बातों बातों में दोनों अपनीअपनी समस्याएं बताने लगे. बोलचाल की भाषा और लहजे से मालूम हुआ कि दोनों एक ही प्रदेश के हैं, लेकिन उन के गांव अलगअलग हैं. उन के बीच दोस्ती हो गई. लड़की ने मनोज को अपना नाम प्रतिमा पवल किस्पट्टा बताया. उस ने कहा कि मुंबई में काफी समय से हाउसकीपिंग का काम कर रही है.

ट्रेन के सफर में हुई जानपहचान के दौरान ही उन्हें मालूम हुआ कि वे दोनों क्रिश्चियन समुदाय से हैं. उन्होंने अपनेअपने फोन में एकदूसरे का नंबर सेव कर लिया. साथ ही मनोज ने मुंबई में उस के लिए कोई काम तलाशने का आग्रह किया.

स्पैशल ट्रेन काफी देरी से ओडिशा की राजधानी पहुंच गई थी. वहां से दोनों अपनेअपने गांव चले गए. उन के बीच फोन पर बातें होती रहीं. उन्होंने फोन पर ही अपनी मोहब्बत का इजहार भी कर दिया था. कोरोना का दौर खत्म होने में काफी वक्त लग गया था. पूरी तरह से लौकडाउन खत्म होने के बाद ही प्रतिमा मुंबई काम के लिए साल 2022 के शुरुआती माह में लौट पाई थी. वहां उस की बहन अपने परिवार समेत पहले से रहती थी. उस की मदद से उसे हाउसकीपिंग का काम मिल गया था.

इस बीच उस की फोन पर मनोज से भी बात होती रहती थी. वह मनोज से प्यार करने लगी थी, लेकिन उसे ओडिशा में कोई ढंग का काम नहीं मिल पाया था. काम की तलाश में बेंगलरु चला गया था, लेकिन उसे वहां भी पहले जैसा काम नहीं मिल पाया था.

कारण बिल्डिंग कंस्ट्रशन का काम पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया था. इस बारे में उस ने प्रेमिका को फोन पर ही अपनी समस्याएं गिनाई थीं. एक दिन प्रतिमा ने उस से कहा, ”मनोज, अगर वहां रेगुलर काम नहीं मिल रहा है तो क्यों नहीं मुंबई आ जाते हो.’’

”कोरोना से पहले मुंबई गया था, लेकिन वहां भी काम नहीं मिला था. कंस्ट्रक्शन वाले उन कंपनियों के बंदों को लेते हैं, जिन का मुंबई में काम चल रहा हो.’’ मनोज ने अपनी समस्या बताई.  ”कोई बात नहीं, यहां की किसी कंपनी में तुम्हारा रजिस्ट्रैशन मैं करवाने का इंतजाम करती हूं.’’ प्रतिमा बोली.

”अगर ऐसा हो जाए, तब मुझे वहां काम मिल सकता है.’’ मनोज खुशी से बोला.

”तुम आज ही मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ लो. यहां आते ही कोई न कोई काम मिल जाएगा. तुम्हें नहीं पता मुंबई एक मायावी नगरी है, यहां कोई भी भूखा नहीं सोता. मेहनत और ईमानदारी से काम करने पर दो पैसे जरूर मिलते हैं.’’ प्रतिमा समझाने लगी.

बीच में ही मनोज बोल पड़ा, ”ठीक है, ठीक है मैं कल की किसी ट्रेन से मुंबई के लिए निकल पड़ूंगा. अपना एड्रेस और लोकेशन भेज देना.’’ मनोज ने कहा.

कुछ ही देर में मनोज को प्रतिमा ने मुंबई का एड्रैस भेज दिया. उस ने तुरंत मुंबई जाने की तैयारी की और अगले रोज मुंबई जाने वाली ट्रेन की लोकल बोगी में सवार हो गया.

सूटकेस खुलते ही क्यों चौंकी पुलिस

बात बीते साल 2023 में नवंबर माह के 19 तारीख की है. मुंबई के कुर्ला इलाके में मेट्रो कंस्ट्रक्शन साइट पर गश्त करती पुलिस को एक लावारिस सूटकेस मिला. संदिग्ध सूटकेस में विस्फोटक होने की आशंका के साथ इस की सूचना निकट के थाने को दे दी गई.

सूचना पाते ही बम स्क्वायड पहुंच गया. सूटकेस के नंबर वाला लौक बड़ी मुश्किल से खुल पाया. उस की चेन भी भीतर पड़े कपड़े और महीन धागे से फंस गई थी. सूटकेस खुला तो उस के अंदर एक युवती की लाश निकली. क्राइम ब्रांच के सामने सब से पहला सवाल था कि लाश किस की है?

इस की तहकीकात के लिए क्राइम ब्रांच के डीसीपी राज तिलक रौशन ने अलगअलग टीमें बनाईं. लावारिस लाश भरा सूटकेस उस वक्त मिला था, जब पूरे देश की निगाहें क्रिकेट वल्र्ड कप के फाइनल मुकाबले पर टिकी थीं.

आरोपी तक कैसे पहुंची पुलिस

पुलिस की एक जांच टीम मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरे और इंटेलीजेंस की मदद से तहकीकात में जुट गई, जबकि दूसरी टीम लाश की पहचान के लिए उस की शिनाख्त करने लगी.

मामला कुर्ला पुलिस स्टेशन में दर्ज कर लिया गया था. शव को राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया. वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उस के बाद महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की गला दबा कर हत्या की बात सामने आई. उस आधार पर कुर्ला पुलिस धारा 302, 201 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई. इस दौरान मृत महिला के गले में क्रास और शरीर पर कपड़ों से पुलिस ने उस के ईसाई समाज के मध्यमवर्गीय परिवार से होने का अंदाजा लगाया.

पुलिस की टीम ने मौके पर लगे हुए सीसीटीवी कैमरों और इंटेलीजेंस की मदद से आरोपी के बारे में पता लगाना शुरू किया. सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की.

press-conference-suitcase-mumbai-case

अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त लखमी गौतम, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शशि कुमार मीना के आदेशानुसार एवं पुलिस उपायुक्त राज तिलक रौशन के मार्गदर्शन में गठित कुल 8 टीमें लावारिस लाश की गुत्थी सुलझाने में जुट गई थीं. सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच करने लगीं. गुप्त खबरची के माध्यम से मृतका के पहचान की भी कोशिश होने लगी. उस की तसवीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी गईं. जल्द ही इस के नतीजे भी सामने आ गए. मृतका की बहन ने लाश की पहचान कर ली. मृतका की पहचान प्रतिमा पवल किस्पट्टा के रूप में हुई. उस की उम्र 25 साल के करीब थी.

उन से मिली जानकारी के अनुसार मृतका धारावी में किराए की एक खोली (कमरा) में रह रही थी. उस के साथ पति भी रहता था. पति मूलत: ओडिशा के एक गांव का रहने वाला था. उस के बारे में आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद सिर्फ यही मालूम हो पाया कि वह गांव गया हुआ है. उस ने पड़ोसियों को बताया था कि उस की बहन बीमार है. लोगों ने पति का नाम मनोज बताया.

पड़ोसियों से मालूम हुआ कि पहले प्रतिमा अकेली ही थी, लेकिन वह बीते एक माह से मनोज उस के साथ रह रहा था. उस के बारे में पुलिस को यह भी मालूम हुआ कि वह 18 नवंबर, 2023 के बाद नहीं देखा गया था.

इस तहकीकात के साथसाथ सीसीटीवी खंगालने वाली दूसरी टीम को मनोज के कुछ सुराग हाथ लग गए थे. 18 नवंबर की रात को वह एक आटो धारावी से ले कर आसपास के कुछ इलाके में घूमता नजर आया था. आटो किसी रेलवे स्टेशन के रास्ते पर जाने के बजाए कुर्ला में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर रुक गया था. उस के बाद उस का पता नहीं चल पाया था.

जांच की एक अन्य टीम मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर भी जा पहुंची थी, उन में मुंबई का लोकमान्य तिलक टर्मिनस खास था. वहां पुलिस टीम को एक घबराया हुआ युवक दिख गया, जिस का हुलिया दूसरी जांच टीम से मिली जानकारी से मेल खाने वाला था. उस के पास पुलिस तुरंत जा पहुंची. पास आई पुलिस को देख कर युवक भागने लगा, जिसे पुलिस ने दौड़ कर पकड़ लिया.

पकड़ा गया युवक मनोज बारला था. उसे ठाणे पुलिस ला कर पूछताछ की गई. जब सूटकेस वाली लावारिस महिला की लाश के बारे में उस से पूछा गया, तब वह खुद को रोक नहीं पाया. रोने लगा. एक पुलिसकर्मी ने उसे पीने के लिए पानी दिया. कुछ सेकेंड बाद पानी पी कर जब वह सामान्य हुआ, तब उस से दोबारा पूछताछ की जाने लगी. फिर उस ने लाश के साथ अपने संबंध के बारे में जो कुछ बताया, वह काफी दिल दहला देने वाला था.

दरअसल, यह अभावग्रस्त जिंदगी से तंग आ चुके प्रेमियों की कहानी थी, जो बीते एक माह से बिना शादी किए रह रहे थे. इसे पुलिस रिकौर्ड में लिवइन रिलेशन दर्ज कर लिया गया. उन का प्रेम खत्म हो चुका था और प्रेमी सलाखों के पीछे जाने के काफी करीब था. उस ने जो आगे की कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

मनोज ने पुलिस को बताया कि मुझे दुख है कि मैं ने अपने हाथों से अपनी ( Love story ) प्रेमिका प्रतिमा पवल किस्पट्टा का गला घोंट दिया. उसी प्रेमिका को मार डाला, जिस ने मुझ से प्रेम किया और मुझे नौकरी दिलाने के लिए ओडिशा से यहां बुलाया था.

उस ने बताया कि प्रतिमा के कहने पर ही वह मुंबई में आया था. मुंबई में स्थित वड़ापाव की एक मशहूर दुकान पर काम करना शुरू कर दिया था. वह एमजी नगर रोड, धारावी में प्रेमिका प्रतिमा के साथ ही रहने लगा था. उन्होंने शादी नहीं की थी, लेकिन प्रतिमा उसे अपना पति बना चुकी थी. इस तरह से उन के लिवइन रिलेशनशिप की शुरुआत हो गई थी.

उन्होंने साथ रहते हुए भविष्य के सुनहरे सपने देखे थे. किंतु वे आर्थिक तंगी से भी गुजर रहे थे. पैसे की कमी को ले कर उन के बीच कभीकभार बहस भी हो जाती थी.

मनोज शिकायती लहजे में बताने लगा, ”सर, प्रतिमा मेरी प्रेमिका जरूर थी, पैसा भी कमाती थी. मैं जब भी अपने खर्चे के लिए मांगता था, तब किचकिच करने लगती थी. इसी बात पर मेरी उस से लड़ाई हो जाती थी. वह बारबार कहती थी कि अपना खर्च कम करो, अपनी कमाई के पैसे लाओ, फिर मुझ से मांगना.’’

इसी के साथ मनोज ने प्रतिमा के चरित्र पर भी शंका के लहजे में बोला, ”सर, प्रतिमा का कोई यार भी था. उस से बहुत देर तक वह फोन पर बातें करती थी. मैं सब समझता हूं सर! एक समय में कभी वह मुझ से भी फोन पर देरदेर तक बातें करती थी…’’

हत्या की बताई चौंकाने वाली वजह

इस शिकायती और संदेह वाली बातों पर पुलिस ने पूछा, ”तुम ने इस बारे में कभी पता लगाने की कोशिश की कि उस के पास पैसे हैं या नहीं? हो सकता है उस के पास उस वक्त पैसे नहीं हों, जब तुम मांगते होगे.’’

”नहीं सर, उस के पास पैसे होते थे, लेकिन नहीं देती थी.’’ मनोज बोला.

”चलो मान लिया, उस के पास पैसे होते थे, लेकिन उसी ने तुम्हें काम पर भी रखवाया था. वहां से पैसे मिले होंगे…उस का तुम ने क्या किया?’’ पुलिस ने पूछा.

”एक माह के ही मिले थे, सारे पैसे मैं ने अपने घर भेज दिए थे.’’ मनोज बोला.

”प्रतिमा को कुछ भी नहीं दिया?’’

”उसे क्यों देता, उसे भी तो पैसे मिले थे?’’ मनोज बोला.

”तुम्हें उस ने साथ रखा था, पति की तरह रहते थे. तुम्हारी भी तो घर चलाने की जिम्मेदारी थी.’’ पुलिस ने समझाया.

”लेकिन सर, वह अपने पैसे दूसरों पर खर्च करती थी, मुझे मालूम था वह कोई रिश्तेदार नहीं था. उस का एक प्रेमी था.’’ मनोज फिर प्रेमिका के चरित्र पर शंका के लहजे में बोला.

”इस का तुम ने कुछ पता किया या फिर यूं ही संदेह करते रहे?’’

”मैं क्या उस के बारे में पूछता. एक बार कुछ बोलने वाला ही था कि वह चीखने लगी… ताने मारने लगी… मुझे ही भलाबुरा कहने लगी थी.’’

”मुझे तो मालूम हुआ है कि प्रतिमा की कुछ माह से नौकरी छूट गई थी.’’

”हां, इस की जिम्मेदार भी वही थी. झगड़ालू स्वाभाव था. अपने मालिक से बातबात पर झगड़ पड़ती थी. उसे नौकरी से निकाल दिया था.’’ मनोज ने बताया.

”हो सकता है, दूसरे काम की तलाश में लोगों से फोन पर बात करती हो और तुम उसी को ले कर शक करने लगे हो.’’

”मैं इतना बुद्धू नहीं हूं सर, जो किसी लड़की के फोन पर हंस हंस कर बात करने का मतलब नहीं समझ पाऊं.’’ मनोज बोला.

”खैर, छोड़ो इन बातों को, सचसच बताओ 18 नवंबर, 2023 को क्या हुआ था?’’ पुलिस अब असली मुद्दे पर आ गई थी.

”असल में 18 तारीख को उस ने मुझ से कमरे का किराया देने के लिए पैसे मांगे. मेरे पास पैसे नहीं थे. इस पर उस ने मुझे दुकान से एडवांस मांगने को कहा, जो मुझ से नहीं हो सकता था. कारण, वहां से पहले ही एडवांस ले चुका था.’’

”फिर तुम ने क्या किया?’’

”मैं क्या करता, पैसे मेरे पास नहीं थे. इस बात को ले कर काफी बहस होने लगी. मैं परेशान हो गया. उस ने मुझे गालियां देनी शुरू कर दीं. दोपहर से हमें झगड़ते हुए शाम घिर आई. मैंं गुस्से से घर से बाहर निकल पड़ा. कुछ समय में ही वापस लौट आया. आते ही वह बरस पड़ी, ”आ गए, आटा लाए?’’

इस पर मैं ने जैसे ही कहा कि मेरे पास पैसे नहीं है तो वह एक बार फिर बरस पड़ी. गालियां देती हुई बोली, ”नहीं है तो भूखे रहो… मरो यहीं, मैं चली.’’

accused-in-police-custody-suitcase

इत्मीनान से रखी सूटकेस में लाश

मनोज ने आगे बताया, ”तब तक रात के साढ़े 9 बज चुके थे. प्रतिमा ने अपना बैग उठाया और पैर पटकती हुई घर से जाने लगी. मैं ने तुरंत उस का हाथ खींच लिया, जिस से उस का संतुलन बिगड़ गया और गिरने को हो आई. उस के बाद प्रतिमा और भी गुस्से में आ गई. आंखें लाल करती हुई गालियां देने लगी. मेरे खानदान तक को कोसने लगी.’’

मनोज ने आगे बताया, ”असल में उस का हाथ खींचने से चुन्नी उस के गले में फंस गई थी. इस कारण उस ने समझा कि मैं ने उस का गला जानबूझ कर कसने की कोशिश की है. गालियां देती हुई  मुझ पर आरोप लगा दिया कि मैं उसे गला कस कर मारना चाहता हूं.

”यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई और उस की हत्या की बात कीड़े की तरह पलक झपकते ही दिमाग में कुलबुलाने लगी. फिर क्या था, ऐसा हुआ कि मानो मैं ने अपना होश खो दिया हो…

”मेरा गुस्सा चरम पर पहुंच चुका था. मैं ने 2-3 जोरदार थप्पड़ जड़ दिया. थप्पड़ खा कर वह जमीन पर गिर गई. तिलमलाती हुई वह उठने लगी, लेकिन जब तक वह उठ पाती, मैं ने दोनों हाथों से उस का गला दबा दिया. अपनी भाषा में गाली दी और हाथों की पकड़ मजबूत कर दी.

”कुछ सेकेंड बाद ही दुबलीपतली प्रतिमा बेजान हो चुकी थी. उस की चीख भी बंद हो चुकी थी. गुस्से में आ कर उस की हत्या तो हो गई, लेकिन उस के बाद मैं घबरा गया.’’

”और इस तरह तुम ने अपनी प्रेमिका (  Love story ) की हत्या कर डाली. उस के बाद तूने क्या किया?’’ जांच अधिकारी ने पूछा.

”रात के 10 बजने को हो आए थे. मैं अपने हाथों से प्रतिमा (Love story) की हत्या से घबरा गया था. थोड़ी देर तक उस के पास बैठा सोचता रहा, उस की मौत का मातम मनाता रहा, लेकिन पकड़े जाने, कड़ी सजा होने…जैसे खयाल मन में आने लगे. इसी बीच मेरी नजर घर में रखे उसी के एक बड़े सूटकेस पर गई. मैं ने झट उसे खाली किया और कपड़ों की तह के बीच जैसेतैसे कर के उस की लाश को ठूंस दिया.

”उस सूटकेस को ले कर कमरे पर से निकल गया. उस वक्त रात के करीब पौने 12 हो चुके थे. सायन से आटोरिक्शा लिया और कुर्ला लोकमान्य तिलक टर्मिनस जा पहुंचा. मैं सूटकेस को रेलवे स्टेशन के किसी इलाके में छोडऩा चाहता था, लेकिन लोगों की भीड़ देख कर ऐसा नहीं कर पाया. वापस लौट आया…’’ मनोज बोलतेबोलते रुक गया.

”आगे बताओ,’’ जांच अधिकारी ने कहा.

”उस के बाद मैं और भी घबरा गया क्योंकि आटोरिक्शा वाला बारबार मुझ से कह रहा था कि साहब जल्दी उतरो स्टेशन आ गया है. मैं पशोपेश में था कि क्या करना है और क्या नहीं! आखिरकार मैं ने आटो वहीं छोड़ दिया.

”वापस कमरे पर जाने के बारे में सोचते हुए दूसरा आटोरिक्शा लिया और सीएसटी पुल के नीचे सार्वजनिक शौचालय के सामने चेंबूर सांताक्रुज चैनल कुर्ला पश्चिम में एक जगह पर आया. वहां मेट्रो का काम चल रहा था. रात का समय था. एकदम सुनसान. वह जगह मुझे उचित लगी.’’

मनोज ने आगे बताया, ”मैं ने आटो वहीं छोड़ दिया. उस के जाने के बाद इधरउधर देखा. कहीं कोई नजर नहीं आ रहा था. वहां मेट्रो का काम चल रहा था. आम लोगों को जाने से रोकने के लिए कई बैरिकेड्स लगे थे. मैं ने तुरंत एक बैरिकेड को थोड़ा खिसका कर सूटकेस को अंदर सरका दिया. कुछ देर वहां रुकने के बाद मैं आगे बढ़ गया और आटो ले कर सायन धारावी लौट आया.’’

आगे की जानकारी देता हुआ मनोज बारला बोला, ”मैं कमरे पर जा कर फिर गहरी नींद में सो गया. अगले रोज 19 नवंबर को देर से नींद खुली. फटाफट तैयार हुआ और सुबह 11 बजे के करीब ओडिशा जाने के लिए रेलवे स्टेशन चला आया, किंतु ट्रेन पकडऩे से पहले ही क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़ लिया गया.’’

पुलिस ने मनोज बारला के इस बयान को दर्ज कर लिया गया. आगे की काररवाई के बाद उसे गिरफ्तार कर मजिस्ट्रैट के सामने हाजिर कर दिया गया. वहां से जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Top 5 Love Crime Story : टॉप 5 लव क्राइम स्टोरी

Top 5 love Crime Story Of 2022 : इन लव क्राइम स्टोरी को पढ़कर आप जान पाएंगे कि कैसे समाज   में प्रेम ने कईओं के घर बर्बाद किये है और किसी ने प्यार के लिए अपनों को ही शिकार बना लिया. और अपने ही प्यार को धोखा देकर उसे मार देना. अपने और अपने परिवार को ऐसे हो रहे क्राइम से सावधान करने के लिए पढ़िए Top 5 love Crime story in Hindi मनोहर कहानियां जो आपको गलत फैसले लेने से बचा सकती है.

1. प्रेमिका बनी भाभी तो किया भाई का कत्ल

नौशहरा गांव में एक कत्ल की वारदात हो गई है. मकतूल का बाप और 2 आदमी बाहर बैठे आप का इंतजार कर रहे हैं.’ मैं उन लोगों के साथ फौरन मौकाएवारदात पर जाने के लिए रवाना हो गया. मकतूल का नाम आफताब था, वह फय्याज अली का बड़ा बेटा था. उस से छोटा नौशाद उस की उम्र 20 साल थी. आफताब उस से 2 साल बड़ा था. उस की शादी एक महीने पहले ही हुई थी. मकतूल का बाप फय्याज अली छोटा जमींदार था. उस के पास 10 एकड़ जमीन थी, जिस पर बापबेटे काश्तकारी करते थे. मैं खेत में पहुंचा, जहां पर 2 छोटे कमरे बने हुए थे. बरामदे में कटे हुए गेहूं का ढेर लगा था. फय्याज के साथ मैं कमरे के अंदर पहुंच गया. मकतूल की लाश कमरे में पड़ी चारपाई के पायंते पर पड़ी थी.

पूरी लव क्राइम स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

2. भाई ने बहन को दोस्त के साथ रंगे हाथ पकड़ा तो दबा दिया तमंचे का ट्रिगर

निश्चित जगह पर पहुंच कर अखिलेश उर्फ चंचल को प्रियंका दिखाई नहीं दी तो वह बेचैन हो उठा. उस बेचैनी में वह इधरउधर टहलने लगा. काफी देर हो गई और प्रियंका नहीं आई तो वह निराश होने लगा. वह घर जाने के बारे में सोच रहा था कि प्रियंका उसे आती दिखाई दे गई. उसे देख कर उस का चेहरा खुशी से खिल उठा. प्रियंका के पास आते ही वह नाराजगी से बोला, ‘‘इतनी देर क्यों कर दी प्रियंका. मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. अच्छा हुआ तुम आ गईं, वरना मैं तो निराश हो कर घर जाने वाला था.

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

3. महिला को गैस नली लगाकर जला डाला जिंदा

अवैध संबंधों की राह बड़ी ढलवां होती है. दीपा ने इस राह पर एक बार कदम रखा तो वह संभल नहीं सकी. फिर इस का जो नतीजा निकला, वह बड़ा ही भयावह था. टना 18 मई, 2018 की है. माधव नगर थाने के थानाप्रभारी गगन बादल अपने औफिस में बैठे विभागीय कार्य निपटा रहे थे तभी उन्हें सूचना मिली कि थाना क्षेत्र के वल्लभ नगर में मां बादेश्वरी मंदिर के सामने रहने वाली दीपा वर्मा के घर से बड़ी मात्रा में धुआं निकल रहा है.

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

4. ट्रॉली बैग में 72 घंटे तक रखा प्रेमिका की लाश को

नोएडा के खोड़ा कालोनी के वंदना एनक्लेव स्थित 4 मंजिला मकान में कुल 33 कमरे थे. सभी कमरों में नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में काम करने वाले किराएदार रह रहे थे. इन में से कुछ लोग अपने परिवार के साथ रहते थे. लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे थे जो अकेले ही रहते थे. चूंकि सभी लोग नौकरीपेशा थे, इसलिए वे सुबह ही अपनी ड्यूटी पर चले जाते और देर शाम या रात को वापस अपने कमरों पर लौटते थे.

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

5. विवाहिता के प्यार में 4 हत्याएं

चंदन वर्मा ने 12 सितंबर, 2024 को अपने वाट्सऐप पर लिखा, ‘5 लोग मरने वाले हैं. मैं जल्दी कर के दिखाऊंगा (5 people are going to die. I will show you soon.)उस का इशारा अपनी प्रेमिका पूनम व उस के परिवार, स्वयं और पूनम के भाई सोनू की तरफ था. चंदन वर्मा ने इस के लिए अवैध पिस्टल का इंतजाम तो कर लिया था, लेकिन गोलियों का इंतजाम नहीं हो पा रहा था. इस के लिए उस ने जानपहचान के अपराधियों से संपर्क किया और 10 राउंड गोलियों वाली मैगजीन मुंहमांगी कीमत पर खरीद कर रख ली,

पूरी लव क्राइम स्टोरी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

प्यार की जीत : सुनीता और सुमेर की प्रेम कहानी

प्यार की जीत : सुनीता और सुमेर की प्रेम कहानी – भाग 3

भगवानदास सोनी के पड़ोस में ही ईश्वरनाथ गोस्वामी परिवार के साथ रहते थे. उन्हीं का बेटा था सुमेरनाथ गोस्वामी. ईश्वरनाथ गोस्वामी के एक भाई पुलिस की नौकरी से रिटायर हो कर जयपुर में रहते थे. उन के बच्चे नहीं थे, इसलिए सुमेरनाथ को उन्होंने गोद ले रखा था. पढ़ाई पूरी कर के सुमेरनाथ एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगा था.

सुमेरनाथ नौकरी करने लगा तो घर वालों ने अपनी जाति की लड़की से उस की शादी कर दी थी. चली आ रही परंपरा के अनुसार सुमेरनाथ शादी के पहले पत्नी को देख नहीं सका था. इसलिए शादी के पहले वह उस के बारे में कुछ भी नहीं जान सका. शादी के बाद पत्नी घर आई तो दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर था. सुमेरनाथ जितना सीधा और सरल था, उस की पत्नी उतनी ही गरममिजाज थी. परिणामस्वरूप दोनों में निभ नहीं पाई.

सुमेरनाथ ने पत्नी को ले कर जो सपने देखे थे, कुछ ही दिनों में सब बिखर गए. पत्नी की वजह से घर में हर समय क्लेश बना रहता था. उस ने पत्नी को बहुत समझाया, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा. वह किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं थी. पत्नी की वजह से सुमेर परेशान रहने लगा था.

पत्नी के दुर्व्यवहार से तंग सुमेरनाथ का झुकाव पड़ोस में रहने वाली सुनीता सोनी की ओर हो गया था. पड़ोस में रहने की वजह से वह सुनीता को बचपन से देखता आया था. लेकिन उस ने कभी उस से प्यार या शादी के बारे में नहीं सोचा था.

सुनीता सुंदर तो थी ही, इसलिए वह उसे अच्छी भी लगती थी. लेकिन एक तो दोनों की जाति अलग थी, दूसरे मोहल्ले की बात थी, इसलिए सुमेरनाथ ने उस के बारे में कभी इस तरह की बात नहीं सोची थी.

सुनीता को कभी पढ़ाई में कोई परेशानी होती तो वह मदद के लिए सुमेरनाथ के पास आ जाती थी. ऐसे में कभी सुमेरनाथ पत्नी की वजह से परेशान रहता तो वह सहानुभूति जता कर उस की परेशानी को कम करने की कोशिश करती. कभीकभी उसे सुमेरनाथ पर दया भी आती.

परेशानी में सुनीता का सहानुभूति जताना सुमेरनाथ को धीरेधीरे अच्छा लगने लगा था. इसलिए उस की सहानुभूति पाने के लिए वह अकसर उस के सामने पत्नी की व्यथा ले कर बैठ जाता. सुनीता जवान भी हो चुकी थी और खूबसूरत भी थी. बात और व्यवहार से वह समझदार लगती थी, इसलिए सुमेरनाथ उस की ओर आकर्षित होने लगा. उसे लगता, सुनीता जैसी पत्नी मिली होती तो जीवन सुधर गया होता.

मन में आकर्षण पैदा हुआ तो सुनीता के प्रति सुमेरनाथ की नजरें बदलने लगीं. नजरें बदलीं तो बातें भी बदल गईं और उन के कहने का तरीका भी. इस बदलाव को सुनीता ने भांप भी लिया. सुनीता को भी सुमेरनाथ भला आदमी लगता था. सीधासरल भी था और पढ़ालिखा भी. फिर उस के लिए उस के मन में दया और सहानुभूति भी थी.

उसी दौरान जहां सुमेरनाथ का पत्नी की सहमति से तलाक हो गया, वहीं सुनीता की शादी उस के पिता और ताऊ ने एक ऐसे लड़के से तय कर दी, जो अंगूठाछाप था. इस विरोधाभास से सुनीता के मन में घर वालों के प्रति जो विद्रोह उपजा, उस ने सुमेरनाथ के लिए उस के मन में जो सहानुभूति और दया थी, उसे चाहत में बदल दिया. जब दोनों ओर दिलों में चाहत पैदा हुई तो इजहार होने में देर नहीं लगी.

इजहार हो गया तो कभी पढ़ाई के बहाने सुनीता सुमेरनाथ से मिलने उस के घर आ जाती तो कभी किसी बहाने से कहीं बाहर मिलने चली जाती. इन मुलाकातों ने जहां प्यार को बढ़ाया, वहीं व्याकुल मन को शांत करने के लिए मुलाकातें भी बढ़ने लगीं. इन्हीं मुलाकातों ने जब लोगों के मन में संदेह पैदा किया तो लोग उन पर नजरें रखने लगे. इस का नतीजा यह निकला कि लोगों को उन के प्यार की जानकारी हो गई. बात एक ही मोहल्ले और अलगअलग जाति के लड़केलड़की की थी, इसलिए दोनों को ले कर खुसुरफुसुर होने लगी.

बात दोनों के घर वालों तक पहुंची तो रोकटोक शुरू हुई. लेकिन आज मोबाइल के जमाने में रोकटोक का कोई फायदा नहीं रह गया. दूसरे सुनीता और सुमेरनाथ प्यार की राह पर अब तक इतना आगे निकल चुके थे कि घर वालों की रोकटोक या बंदिशें उस पर जरा भी असर नहीं डाल सकती थीं. क्योंकि अब उन का प्यार मंजिल पाने यानी शादी के मंसूबे तक पहुंच चुका था.

इस की वजह यह थी कि दोनों बालिग थे और अपनाअपना भलाबुरा समझते थे. इसलिए अगर वे अपनी मरजी से भी शादी कर लेते थे तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता था.  सुनीता किसी अनपढ़ से शादी कर के अपनी जिंदगी बरबाद नहीं करना चाहती. इसलिए वह मांबाप की इज्जत को दांव पर लगा कर सुमेरनाथ से शादी के लिए तैयार थी.

एक औरत के दुर्व्यवहार से दुखी सुमेरनाथ भी सुनीता के व्यवहार का कायल था. इसलिए बाकी की जिंदगी वह सुनीता की जुल्फों तले खुशी से गुजारना चाहता था. उन्हें पता था कि समाज ही नहीं, घर वाले भी उन की शादी कभी नहीं होने देंगे, इसलिए उन्होंने किसी अन्य शहर में जा कर शादी करने का निर्णय लिया.

सुनीता और सुमेरनाथ ने शादी के लिए जरूरी कागजात यानी स्कूल के प्रमाणपत्र आदि सहेज कर रखने के साथ रुपएपैसों की व्यवस्था कर ली. उन्हें पता था कि वे अलगअलग जाति के हैं, इसलिए उन्हें आर्यसमाज मंदिर में शादी करनी होगी. उस के बाद अदालत से विवाह की मान्यता मिल जाएगी. पूरी तैयारी कर के उन्होंने भागने की तारीख भी 2 जुलाई तय कर ली.

योजना के अनुसार, 2 जुलाई, 2014 की रात 3 बजे अपने कपड़े लत्ते ले कर सुनीता तय जगह पर पहुंच गई. सुमेरनाथ वहां पहले ही पप्पूराम की गाड़ी ले कर पहुंच गया था. सुनीता के आते ही उस ने उसे गाड़ी में बिठाया और अपनी मंजिल पर निकल पड़ा.

अपने बयान में सुनीता ने कहा था कि वह बालिग है और उस ने खूब सोचसमझ कर सुमेरनाथ गोस्वामी से शादी की है. अब वह उसी के साथ रहना चाहती है, इसलिए पुलिस सुरक्षा में उसे सुमेरनाथ के साथ सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कृपा की जाए.

इस के बाद मजिस्ट्रेट ने सुनीता को सुमेरनाथ के साथ भेजने का आदेश दे दिया. सुनीता अदालत से बाहर निकलने लगी तो उस की एक झलक पाने के लिए भीड़ टूट पड़ी. पुलिस ने हलका बल प्रयोग कर के भीड़ को हटाया और अपनी सुरक्षा में इस प्रेमी युगल को जयपुर पहुंचा दिया. कथा लिखे जाने तक यह दंपति जयपुर में ही था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार की जीत : सुनीता और सुमेर की प्रेम कहानी – भाग 2

जहांजहां उन के मिलने की संभावना थी, पुलिस टीम भागती रही. पुलिस टीम तो सुमेरनाथ और सुनीता के बारे में कुछ भी पता नहीं कर सकी, लेकिन मुखबिरों ने जरूर कामयाबी हासिल कर ली. मुखबिरों ने पुलिस को बताया कि सुमेरनाथ सुनीता को जिस गाड़ी से ले गया है, वह जैसलमेर के थाना सदर के गांव रिदवा के रहने वाले पप्पूराम ओड़ की थी. उस के बाप का नाम पोकराम ओड़ है और गाड़ी का नंबर है आरजे-15टीए-1058.

पुलिस टीम को पप्पूराम का मोबाइल नंबर भी मिल गया था. पुलिस ने तुरंत पप्पूराम को फोन कर के पूछा कि इस समय वह कहां है तो उस ने बताया कि वह जोधपुर के रातानाडा में है. जैसलमेर पुलिस ने तुरंत थाना रातानाडा पुलिस से संपर्क किया और पप्पूराम ओड़ की गाड़ी का नंबर दे कर उसे पकड़ने के लिए कहा. पकड़े जाने पर तुरंत सूचना देने के लिए भी कह दिया था.

रातानाडा पुलिस पप्पूराम ओड़ को गाड़ी  सहित पकड़ कर थाने ले आई. इस के बाद सूचना पा कर जैसलमेर पुलिस थाना रातानाडा पहुंच गई. सुमेरनाथ और सुनीता के फोटो दिखा कर जब पप्पूराम ओड़ से उन के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उन दोनों को उस ने 2 जुलाई की शाम को जयपुर हाईकोर्ट के पास छोड़ा था. उन्होंने उस की गाड़ी किराए पर ली थी.

पुलिस टीम पप्पूराम को साथ ले कर जयपुर पहुंची. उस ने सुमेरनाथ और सुनीता को जहां छोड़ा था, पुलिस ने वहां दोनों के फोटो दिखा कर आसपास की दुकानों, होटलों और धर्मशालाओं में काफी खोजबीन की, लेकिन वहां उन का कुछ पता नहीं चला. निराश हो कर पुलिस वापस लौट आई. इस के बाद मुखबिरों से पुलिस को सूचना मिली कि सुमेरनाथ सुनीता को ले कर दिल्ली गया है, जहां वे तीसहजारी कोर्ट में शादी करने की कोशिश कर रहे हैं.

पुलिस टीम दिल्ली के तीसहजारी कोर्ट पहुंची. दिल्ली में तीस हजारी कोर्ट के आसपास ठहरने के जितने अड्डे थे, सभी जगह सुनीता और सुमेरनाथ की तलाश की गई. लेकिन कुछ पता नहीं चला. पुलिस टीम दोनों को दिल्ली में तलाश रही थी, तभी सूचना मिली कि दोनों ने आर्यसमाज मंदिर में शादी कर ली है और दिल्ली से सटे गुड़गांव में कहीं रह रहे हैं. पुलिस टीम ने पहले तो आर्यसमाज मंदिर जा कर उन के विवाह से संबंधित सारे दस्तावेज प्राप्त किए, उस के बाद गुड़गांव जा कर उन की तलाश शुरू की.

गुड़गांव कोई छोटी सी जगह तो है नहीं कि लोग सुमेरनाथ और सुनीता का फोटो देख कर पुलिस को बता देते. पुलिस ने अपने हिसाब से गुड़गांव में दोनों की काफी खोजबीन की. जब पुलिस टीम ने देखा कि उन की मेहनत का कोई फल नहीं निकल रहा है तो वह जयपुर लौट गई.

सुमेरनाथ के एक चाचा जयपुर में रहते थे. पुलिस को संदेह था कि वह अपने चाचा के यहां भी जा सकता है, इसलिए पुलिस उन के घर पर भी बराबर नजर रख रही थी. अब तक जैसलमेर पुलिस ने सुमेरनाथ को गिरफ्तार कर सुनीता को बरामद करने की हरसंभव कोशिश की थी, लेकिन सुमेरनाथ ने अपनी चालाकी से पुलिस की हर कोशिश को नाकाम कर दिया था.

पुलिस और सुमेरनाथ के बीच चूहाबिल्ली का खेल चल ही रहा था कि 8 जुलाई, 2014 को जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक विजय शर्मा को सुनीता सोनी का भेजा एक पत्र मिला. उस पत्र में उस ने लिखा था, ‘‘मैं जैसलमेर के कल्लू की हट्टो के पास स्थित कंसारपाड़ा के वार्ड नंबर 16 में रहने वाले भगवानदास सोनी की बेटी सुनीता सोनी आप को अपनी व्यथा से अवगत कराना चाहती हूं. मैं बालिग हूं, जिस के प्रमाण में मैं प्रमाणपत्रों की प्रतिलिपियां संलग्न कर रही हूं. मैं अपना अच्छाबुरा समझने लायक हूं. मेरे पिताजी और बड़े पिताजी (ताऊजी) ने जहां मेरी शादी तय की थी, वहां कोई ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था.

‘‘जिस लड़के से मेरी शादी की जा रही थी, वह भी अनपढ़ है. जबकि मैं इस समय बीए अंतिम वर्ष में पढ़ रही हूं. ऐसे लड़के के साथ मेरा गुजारा नहीं हो सकता था, इसलिए मैं ने अपनी पसंद के लड़के के साथ शादी कर ली है. जल्दी ही मैं आप को अपनी शादी के मूल प्रमाणपत्र उपलब्ध करवा दूंगी. मेरा आप से निवेदन है कि मेरे अधिकारों की रक्षा करने में मेरी मदद करें और मुझे पुलिस सुरक्षा प्रदान करें, जिस से मैं एक सभ्य नागरिक की तरह रह सकूं. मेरी आप से विनती है कि आप उचित काररवाई करते हुए प्रशासन का अमूल्य समय बरबाद करने से बचाएं.’’

सुनीता ने इस पत्र की प्रतियां माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय जयपुर, महिला आयोग, उच्च न्यायालय जोधपुर, जिला कलेक्टर जैसलमेर एवं जैसलमेर के जिला जज को भी भेजी थीं. सुनीता के इस निवेदन का पुलिस पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह सुमेरनाथ को पकड़ कर उसे बरामद करने की कोशिश में लगी रही. इस की वजह यह थी कि सोनी समाज का पुलिस पर काफी दबाव था. पुलिस की इतनी कोशिश के बावजूद सोनी समाज पुलिस पर आरोप लगा रहा था कि पुलिस सुमेरनाथ से मिली हुई है. आरोप ही नहीं लगा रहा था, बल्कि इसी बात को ले कर कलेक्ट्रेट के सामने धरनाप्रदर्शन भी शुरू कर दिया था.

16 जुलाई, 2014 को पुलिस पर अभियुक्त से मिलीभगत और लापरवाही का आरोप लगाते हुए सोनी समाज ने मौन जुलूस निकाला. यह जुलूस कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने लगा तो पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की. जुलूस में शामिल लोग पुलिस से धक्कामुक्की करने लगे तो महिलाएं ‘पुलिस प्रशासन हायहाय’ और ‘कलेक्टर हायहाय’ के नारे लगाने लगीं. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाबुझा कर आश्वासन दिया कि जल्दी ही सुमेरनाथ को पकड़ कर सुनीता को बरामद किया जाएगा, तब कहीं जा कर लोग शांत हुए.

इस के बाद कुछ लोगों ने कलेक्टर औफिस जा कर ज्ञापन भी दिया. उसी दिन यानी 16 जुलाई को ही जैसलमेर के विधायक छोटू सिंह भाटी ने विधानसभा में सुनीता सोनी को भगाने वाले अभियुक्त सुमेरनाथ की गिरफ्तारी न होने की बात कहते हुए पुलिसप्रशासन की लापरवाही का मुद्दा उठाया. इस के बाद जब जैसलमेर पुलिस पर दबाव पड़ा तो अगले ही दिन यानी 17 जुलाई, 2014 को पुलिस ने सुमेरनाथ गोस्वामी को सुनीता के साथ गिरफ्तार कर लिया और जैसलमेर ले आई.

18 जुलाई, 2014 को जब जैसलमेर में लोगों को पता चला कि सुमेरनाथ गोस्वामी और सुनीता सोनी को पुलिस ने पकड़ लिया है और आज दोपहर को दोनों को अदालत में पेश किया जाएगा तो सोनी समाज के सैकड़ों स्त्री, पुरुष और बच्चे अदालत के बाहर इकट्ठा हो गए. इस तरह तमाशा देखने वालों की वहां भीड़ इकट्ठा हो गई. भीड़ देख कर किसी अनहोनी से बचने के लिए पुलिस को भारी पुलिस बल की व्यवस्था करनी पड़ी.

सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच सबइंसपेक्टर भवानी सिंह सुनीता सोनी और सुमेरनाथ गोस्वामी को ले कर सीजेएम की अदालत पहुंचे. सुमेरनाथ को तो बाहर ही रोक लिया गया, जबकि सुनीता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. अदालत में ही सुनीता को उस के मातापिता और वकील से मिलवाया गया. भगवानदास और उन की पत्नी रोरो कर कह रहे थे कि उस की वजह से समाज में उन की नाक कट गई है. लोग तरहतरह की बातें कर रहे हैं. वह घर लौट चले. कुछ दिनों में लोग इसे भूल जाएंगे.

वकील ने भी सुनीता को भलाबुरा समझाया. प्रेम विवाह के दुष्परिणाम भी बताए. इस के बावजूद सुनीता अपने फैसले पर अडिग रही. उस ने कहा, ‘‘मैं ने सुमेर से शादी कर ली है. मैं ने उस से जीवन भर साथ निभाने का वादा किया है. उसे तोड़ूंगी नहीं. वह मुझे बहुत प्यार करता है. मुझे लगता है, मैं उस के साथ खुश रहूंगी. अब हम दोनों साथ जीना और मरना चाहते हैं, इसलिए आप लोग मेरी चिंता छोड़ दीजिए.’’

सुनीता जब किसी भी सूरत में घर जाने को तैयार नहीं हुई तो मांबाप पीछे हट गए. इस के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष उस का बयान दर्ज कराया गया. मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान के आधार पर सुनीता सोनी और सुमेरनाथ गोस्वामी की जो प्रेम कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर शहर के कल्लू की हट्टो के पास स्थित मोहल्ला कंसारपाड़ा में ज्यादातर घर सोनियों (सुनारों) के हैं. इन का काम सोनीचांदी के गहने बनाना है. कुछ लोगों ने अपने घरों में ही दुकानें खोल रखी हैं तो कुछ लोगों की दुकानें बाहर बाजारों में हैं. ठीकठाक आमदनी होने की वजह से यहां रहने वाले ज्यादातर सोनी साधनसंपन्न हैं. इसी मोहल्ले में भगवानदास सोनी भी अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी और 2 बच्चे थे. बड़ी बेटी सुनीता इन दिनों बीए अंतिम वर्ष में पढ़ रही थी.

प्यार की जीत : सुनीता और सुमेर की प्रेम कहानी – भाग 1

राजस्थान की स्वर्णनगरी जैसलमेर शहर के कल्लू की हट्टो के पास स्थित मोहल्ला कंसारापाड़ा के रहने वाले भगवानदास सोनी की पत्नी  सुबह सो कर उठीं तो उन्हें बेटी की चारपाई खाली दिखी. उन्हें लगा, सुनीता वौशरूम गई होगी. लेकिन जब वह वौशरूम की तरफ गईं तो उस का दरवाजा खुला था. सुनीता वैसे भी उतनी सुबह उठने वालों में नहीं थी. वौशरूम खाली देख कर उन्हें हैरानी होने के साथसाथ बेटी को ले कर उन्होंने जो अफवाहें सुन रखी थीं, संदेह भी हुआ.

वह भाग कर कमरे में पहुंची तो अलमारी खुली पड़ी थी और उस में से सुनीता के कपड़े गायब थे. अलमारी में रखा एक बैग भी गायब था. अब उन्हें समझते देर नहीं लगी कि सुनीता कहां है? वह सिर थाम कर वहीं बैठ गईं और जोरजोर से रोने लगीं.

उन के रोने की आवाज पति भगवानदास और बेटे ने सुनी तो वे भाग कर उन के पास आ गए और पूछने लगे कि सुबहसुबह ऐसा क्या हो गया कि वह इस तरह रो रही हैं. वह इतने गहरे सदमे में थीं कि उन के मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी. भगवानदास ने जब झकझोर कर पूछा, ‘‘अरे बताओगी भी कि क्या हुआ?’’

तो उन्होंने कहा, ‘‘क्या बताऊं, गजब हो गया. जिस बात का डर था, आखिर वही हुआ. सुनीता कहीं दिखाई नहीं दे रही है. अलमारी से उस के कपड़े और बैग भी गायब है.’’

भगवानदास सोनी को भी समझते देर नहीं लगी कि सुनीता प्रेमी के साथ भाग गई है. वह भी सिर थाम कर बैठ गए. पलभर में यह खबर पूरे घर में फैल गई. पूरा परिवार इकट्ठा हो गया. इस के बाद सुनीता के प्रेमी सुमेरनाथ गोस्वामी के बारे में पता किया गया. वह भी घर से गायब था.

संदेह यकीन में बदल गया. धीरेधीरे बात पूरे मोहल्ले में फैलने लगी. लोग भगवानदास सोनी के घर इकट्ठा होने लगे. बात इज्जत की थी, समाज बिरादरी में हंसी फजीहत की थी, इसलिए सलाहमशविरा होने लगा कि अब आगे क्या किया जाए.

दुनिया बहुत आगे निकल चुकी है, इसी के साथ तमाम बदलाव भी आए हैं. इस के बावजूद आज भी देश में ऐसे तमाम इलाके हैं, जहां आधुनिक होते हुए भी लोग अपनी परंपराओं में जरा भी बदलाव नहीं ला पाए हैं. वैसे ही इलाकों में एक है पश्चिमी राजस्थान का जैसलमेर. यहां हर जाति की अपनी अलगअलग परंपराएं हैं.

दुनिया भले ही 21वीं सदी में पहुंच गई है, कंप्यूटर ने पूरी दुनिया को एक जगह समेट दिया है, पर जैसलमेर के लोग अपनी परंपराओं को बिलकुल नहीं बदल पाए हैं. जबकि यह भारत का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जहां पूरी दुनिया से लोग आते रहते हैं. कह सकते हैं कि एक तरह से यह नगर पूरी दुनिया की सभ्यता का केंद्र है.

विदेशों से आने वाले पर्यटक लड़कियों का हाथ पकड़ कर घूमते हैं. यह सब देख कर भी यहां के लोग प्रेम या प्रेम विवाह के नाम से घबराते हैं. यहां के लोग अपने ही समाज और जाति बिरादरी में शादी करते हैं. अगर किसी की लड़की या लड़के ने गैरजाति में शादी कर ली तो उसे जाति से बाहर कर दिया जाता है. कोई भी न उस के घर जाता है और न उसे अपने घर आने देता है. ऐसे में घर के अन्य बच्चों की शादियों में रुकावट आ जाती है. इसीलिए यहां के लोग प्रेम विवाह करने से बचते हैं.

नई पीढ़ी इस परंपरा से परेशान तो है, लेकिन इसे तोड़ने की हिम्मत नहीं कर पा रही है. इस परंपरा में सब से बड़ी परेशानी यह है कि घर वाले शादी अपनी मरजी से करते हैं. कुछ जातियों में तो आज भी शादी के पहले लड़का न लड़की को देख सकता है और न लड़की लड़के को. ऐसे में घर वाले कभी पढ़ेलिखे लड़के की शादी अनपढ़ लड़की से कर देते हैं तो कभी पढ़ीलिखी लड़की अनपढ़ लड़के से ब्याह दी जाती है.

इस का दुष्परिणाम भी सामने आ रहा है. तमाम पतिपत्नी में विलगाव हो रहा है. लेकिन ज्यादातर लड़केलड़कियां ऐसे हैं, जो न चाहते हुए भी जिंदगी निर्वाह करते हैं. बालविवाह पर रोक तो लग गई है, लेकिन रिवाज के अनुसार यहां आज भी सगाई किशोरावस्था तक पहुंचतेपहुंचते कर दी जाती है. बाद में शादी उसी से होती है, जिस के साथ सगाई हुई होती है. सगाई भी इस तरह होती है कि जान कर हैरानी होती है.

एक कोठरी में बड़ेबुजुर्ग बैठ कर लड़का लड़की के नाम खोलते हैं. जिस लड़की का जिस लड़के के साथ नाम खुल जाता है, अफीम और गुड़ बांट कर उस के साथ उस की सगाई पक्की कर दी जाती है. इस के बाद अगर कोई सगाई तोड़ता है तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ता है. इसलिए सगाई हो गई तो शादी पक्की मानी जाती. ये परंपराएं तब बनी थीं, जब लोग अनपढ़ थे. आज लोग पढ़लिख गए हैं, लेकिन परंपराओं और प्रथाओं में कोई बदलाव नहीं आया है.

परंपराओं और प्रथाओं में बंधे होने की वजह से बेटी के इस तरह भाग जाने से  भगवानदास सोनी और उन के घर वालों को भी जाति से बाहर किए जाने और अन्य बच्चों की शादियों की चिंता सताने लगी थी. उन के लिए परेशानी और चिंता की बात यह थी कि वे बात को आगे बढ़ाते थे तो उन्हीं की बदनामी होती थी. इस के बावजूद वे शांत हो कर बैठ भी नहीं सकते थे.

बात बिरादरी की इज्जत की थी, इसलिए सभी ने सलाहमशविरा कर के तय किया कि जो हुआ, वह ठीक नहीं हुआ. आगे फिर कभी ऐसा न हो, इसलिए सुनीता को भगा कर ले जाने वाले सुमेरनाथ को सबक सिखाने के लिए उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना जरूरी है. इस के बाद भगवानदास सोनी अपने कुछ शुभचिंतकों के साथ महिला थाने पहुंचे और सुमेरनाथ गोस्वामी के खिलाफ सुनीता को भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जो तहरीर दी,

उस में लिखा, ‘मेरी बेटी को दिनांक 2 जुलाई, 2014 को 3 बजे सुबह के आसपास मेरे घर से सुमेरनाथ गोस्वामी पुत्र ईश्वरनाथ गोस्वामी बहलाफुसला कर शादी करने की नीयत से भगा ले गया है.’

महिला थाने में सुमेरनाथ गोस्वामी के खिलाफ सुनीता सोनी को भगा ले जाने की रिपोर्ट भगवानदास सोनी द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर दर्ज कर ली गई. इस के बाद इस घटना की जानकारी पुलिस अधीक्षक विजय शर्मा और उपपुलिस अधीक्षक अशोक कुमार को दे दी गई. पुलिस अधिकारियों ने महिला थाना की थानाप्रभारी को जल्दी से जल्दी अभियुक्त सुमेरनाथ को गिरफ्तार कर लड़की बरामद करने के निर्देश दिए.

अधिकारियों के निर्देश पर महिला थाने की थानाप्रभारी ने सबइंसपेक्टर भवानी सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित कर अभियुक्त सुमेरनाथ की गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सौंप दी. भवानी सिंह का मुखबिर तंत्र बहुत मजबूत था. उन्होंने अपने मुखबिरों को सुमेरनाथ के बारे में पता लगाने के लिए लगा दिया.

इसी के साथ सुमेरनाथ और सुनीता की खोज रेलवे स्टेशनों और बसअड्डों पर की जाने लगी. लेकिन इन जगहों से उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. इसी क्रम में पुलिस टीम पोकरण, फलोदी, बालोतरा, पाली, अजमेर, अलवर और बीकानेर तक ढूंढ़ने गई, लेकिन इन जगहों पर भी उन के बारे में कुछ पता नहीं चला.