रोहित शेखर का पितृ दोष – भाग 1

अपने वक्त के जमीनी, धाकड़ और लोकप्रिय कांग्रेसी नेता एन.डी. तिवारी का अपना अलग कद था और अलग  साख थी. उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे इस कद्दावर नेता की कांग्रेसी आलाकमान कभी अनदेखी नहीं कर सका. वे केंद्रीय मंत्री भी रहे और राजनैतिक कैरियर के उत्तरार्द्ध में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी बनाए गए थे.

ब्राह्मण समुदाय में खासी पैठ रखने वाले एन.डी. तिवारी की गिनती रंगीनमिजाज और विलासी नेताओं में भी होती थी. इस की एक उजागर मिसाल था उन का जैविक बेटा रोहित शेखर, जिस की हत्या  28 अप्रैल को अपने ही घर में हो गई थी. हत्या करने वाली भी उस की अपनी पत्नी अपूर्वा शुक्ला थी.

इस हाइप्रोफाइल हत्याकांड में कोई खास पेंचोखम नहीं हैं, लेकिन रोहित की कहानी फिल्मों से भी परे अकल्पनीय है. खासे गुलाबी रंगत वाले इस युवा के नैननक्श पहाड़ी इलाकों में रहने वाले युवाओं सरीखे ही थे. क्योंकि उस की पैदाइश और परवरिश भी वहीं की थी.

साल 2007 तक रोहित को नहीं मालूम था कि वह कोई ऐरागेरा नहीं बल्कि एन.डी. तिवारी जैसी सियासी शख्सियत का खून है. रोहित शेखर को जब अपनी मां से पता चला कि वह नारायण दत्त तिवारी का बेटा है तो उस ने विकट का दुस्साहस दिखाते हुए उन पर अपने बेटे होने का दावा कर डाला.

रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा कभी एन.डी. तिवारी की प्रेमिका हुआ करती थीं. जिन्होंने तनमन से खुद को उन्हें सौंप दिया था. इस प्यार या अभिसार, कुछ भी कह लें, की देन था रोहित शेखर जिसे कोर्ट के आदेश के बाद ही एन.डी. तिवारी ने बेटा माना.

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उज्ज्वला गर्भवती हुईं तो एन.डी. तिवारी यह सोच कर घबरा उठे थे कि कहीं वह होने वाली संतान को ले कर होहल्ला न मचाने लगे. क्योंकि वे पहले से शादीशुदा थे और पत्नी सुशीला से उन्हें कोई संतान नहीं हुई थी, जिन की मृत्यु 1991 में हुई थी.

कभी पेशे से दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत की शिक्षिका रहीं उज्ज्वला खुद भी कांग्रेसी कार्यकर्ता और छोटीमोटी पदाधिकारी थीं, इसलिए एन.डी. तिवारी के रसूख से वाकिफ थीं. लंबे समय तक उन्हें देह सुख देती रही उज्ज्वला एक हद तक ही एन.डी. तिवारी पर दबाव बना पाई थीं कि वे उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लें और होने वाली संतान को भी अपना नाम दें.

उज्ज्वला के पिता प्रोफेसर शेरसिंह भी कांग्रेस के जानेमाने नेता थे और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे थे. दरअसल, उज्ज्वला अपने पति बी.पी. शर्मा को छोड़ अपने पिता के घर आ कर रहने लगी थीं. उन की गोद में पहले पति से पैदा हुआ 2 साल का बेटा सिद्धार्थ भी था.

एन.डी. तिवारी से उज्ज्वला की पहली मुलाकात 1968 में हुई थी, जब वह युवक कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उज्ज्वला की खूबसूरती पर मर मिटे एन.डी. तिवारी लगातार उस से प्रणय निवेदन करते रहे और अंतत: पहली बार 1977 में दोनों के पहली बार शारीरिक संबंध बने.

एन.डी. तिवारी जानते थे कि अगर वे उज्ज्वला के दबाव में आ गए तो इतनी बदनामी होगी कि वे फिर कहीं के नहीं रहेंगे, लिहाजा उन्होंने अपनी इस प्रेमिका को भाव नहीं दिया. यह वक्त था जब एन.डी. तिवारी का कैरियर और शोहरत दोनों शवाब पर थे.

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उन के एक इशारे पर किसी का भी काफी कुछ बन और बिगड़ जाता था. उज्ज्वला को समझ आ गया था कि बेवजह के होहल्ले से कुछ हासिल नहीं होने वाला, उलटे यह जरूर हो सकता है कि वह इस दुनिया में कहीं दिखे ही नहीं.

बेमन से उन्होंने एन.डी. तिवारी का रास्ता छोड़ दिया. इस वक्त चूंकि वह गर्भवती थीं, इसलिए रोहित को पिता के रूप में मां के पहले पति का ही का नाम मिला जो वास्तव में उस के पिता थे ही नहीं. इस से एन.डी. तिवारी ने भी चैन और सुकून की सांस ली कि चलो बला सस्ते में टली.

एक ऐतिहासिक मुकदमा

उज्ज्वला समझदार और चालाक थीं. इस बात को ले कर वह हमेशा एक कुढ़न में रहीं कि एन.डी. तिवारी उन के यौवन से तो खूब खेले, लेकिन जब बात शादी की आई तो साफसाफ मुकर गए. वक्त और हालात देख कर वह अपनी गृहस्थी में रम गईं. लेकिन एन.डी. तिवारी की बेवफाई और बेरुखी को वह कभी भूली नहीं.

वक्त का पहिया घूमता रहा और रोहित बड़ा होता गया. उधर एन.डी. तिवारी भी कामयाबी की सीढि़यां चढ़ते रहे. वह भूल गए थे कि उज्ज्वला नाम की बला टली नहीं है बल्कि वक्ती तौर पर खामोश हो गई है, जो एक दिन ऐसा तूफान उन की जिंदगी में लाएगी कि वे वाकई कहीं के नहीं रहेंगे.

ऐसा हुआ भी. किशोर होते रोहित को जब उज्ज्वला ने यह सच बताया कि एन.डी. तिवारी उस के पिता हैं तो रोहित के दिमाग की नसें हिल उठीं. एन.डी. तिवारी से उस के नाना प्रोफेसर शेर सिंह के पारिवारिक संबंध थे, इस नाते वह अकसर उस के घर आयाजाया करते थे. लेकिन उन के साथ सुरक्षाकर्मियों की फौज रहती थी.

ऐसा भी नहीं है कि एन.डी. तिवारी उज्ज्वला को एकदम भूल गए थे. वे दरअसल उन से मिलने ही आते थे और रोहित को खिलाते भी थे और उसे अपने जमाने की हिट फिल्म ‘नूरी’ के गाने भी सुनाते थे.

यह जान कर कि वह एन.डी. तिवारी का बेटा है, रोहित मां की तरह अपने नाजायज पिता के रसूख और झांसे में नहीं आया. इस की एक वजह यह भी थी कि अब तक एन.डी. तिवारी की राजनीति का ग्राफ उतर चला था और वे 88 साल के भी हो चले थे. रोहित ने हिम्मत दिखाते हुए एन.डी. तिवारी पर अपने पिता होने का मुकदमा दायर कर दिया.

अदालती काररवाई के दौरान भी वह डिगा नहीं. एन.डी. तिवारी ने उस पर दबाव बनाने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन मात खा गए. बात डीएनए जांच तक आ पहुंची, जिस से यह साबित हो सके कि वाकई एन.डी. तिवारी रोहित शेखर के पिता हैं या नहीं जैसा कि वह दावा कर रहा है.

भारतीय मुकदमों के इतिहास का यह सब से दिलचस्प, अनूठा और ऐतिहासिक मुकदमा था. क्योंकि पहली बार किसी बेटे ने एक ऐसे शख्स को अदालत की चौखट पर एडि़यां रगड़ने के लिए मजबूर कर दिया था जिस की तूती बोलती थी. हर किसी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार था.

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आखिरकार 7 साल की लंबी लड़ाई के बाद सब से बड़ी अदालत ने फैसला रोहित के हक में सुनाते उसे एन.डी. तिवारी का जैविक पुत्र करार दिया. रोहित की जिंदगी का यह दुर्लभ क्षण था. वह ऐसी लड़ाई जीत गया था, जो उस के नाम और वजूद से भी ताल्लुक रखती थी.

मीडिया और अदालती प्रक्रिया में बारबार उस के लिए नाजायज शब्द का इस्तेमाल हुआ था, जिस पर जीत के बाद सफेद शर्ट में चमकते हुए उस ने कहा था कि नाजायज बेटा नहीं बल्कि बाप होता है. भारत के परंपरागत और पितृ सत्तात्मक समाज पर भी उस ने दार्शनिकों सरीखी बातें कही थीं. जीत के बाद उस ने यह भी कहा था कि मां को भी इंसाफ मिला.

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मुकदमे के दौरान वह इतने तनाव में रहा था कि एक बार तो उसे हार्ट अटैक भी आ गया था, जिस से वह जिंदगी भर आंशिक रूप से लंगड़ा कर चलता रहा. यह रोहित की इच्छाशक्ति और साहस ही था कि उस ने एन.डी. तिवारी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और उन के चेहरे पर से शराफत और चरित्रवान नेता होने का नकाब उतार दिया था.

एन.डी. तिवारी अब तक अंदर से भी टूट चुके थे. एक पुराना पाप हकीकत बन कर उन के सामने खड़ा था. अब उन के सामने रोहित को अपना लेने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता न था. यहां भी वे नेतागिरी दिखाने से बाज नहीं आए और रोहित को गले लगा लिया.

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महत्त्वपूर्ण राजनैतिक पदों पर रहते एन.डी. तिवारी ने करोड़ोंअरबों की जो जायदाद बनाई थी, रोहित उस का अघोषित वारिस बन बैठा. उस के दबाव के चलते ही एन.डी. तिवारी ने विधिवत वैदिक रीतिरिवाजों से 14 मई, 2014 को उज्ज्वला से शादी भी कर ली. इन दोनों की ही यह दूसरी शादी थी.

लिपस्टिक की चोरी

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल

लेस्बियन मां ने की बेटे की हत्या

महत्त्वाकांक्षी आंचल का अंजाम

सूइयों के सहारे सीने में उतरी मौत

राजेश विश्वास के घर पर कोहराम मचा हुआ था. सुबहसवेरे उस की पत्नी प्रिया जोरजोर से रो रही थी और राजेश को पुकार रही थी. रोने की आवाज सुन कर पड़ोसी भी वहां आ गए. लोगों ने घर में देखा तो राजेश मृत अवस्था में पड़ा हुआ था.

लोगों ने कयास लगाया कि राजेश की  मौत हो गई है. राजेश विश्वास का बड़ा भाई  रमेश विश्वास, उस की पत्नी और समाज के लोग भी आ जुटे और फटाफट उसे यह सोच कर स्थानीय सरकारी अस्पताल ले जाया गया कि शायद उस की सांस चल रही हो, लेकिन डाक्टरों ने परीक्षण के बाद राजेश विश्वास की मृत्यु की घोषणा कर दी.

चूंकि उस की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई लग रही थी, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने इस की सूचना धर्मजयगढ़ पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही सुबहसवेरे एसएचओ अमित तिवारी सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे और राजेश विश्वास के शव की जांच कर उस का पंचनामा बनाया गया. कागजी काररवाई पूरी कर वह थाने लौट आए.

यह करीब एक साल पहले की बात है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मोवा स्थित बालाजी हौस्पिटल में एक बिस्तर पर लीवर और किडनी का इलाज करवा रहे राजेश विश्वास ने रुंधे गले से बमुश्किल कहा, ”यह लाइलाज बीमारी मेरा पीछा पता नहीं कब छोड़ेगी. कितने रुपए लग गए, मगर मैं ठीक ही नहीं हो पा रहा हूं. और शायद कभी हो भी नहीं पाऊंगा…’’

यह सुनते ही उस की पत्नी प्रिया ने अपने हाथ की अंगुलियां पति राजेश के मुंह पर रख चुप कराते हुए ढांढस बंधाते कहा, ”ऐसा नहीं कहते, मर्ज जब आता है तो धीरेधीरे ठीक भी हो जाता है…’’

इस पर दुखी स्वर में राजेश ने कहा, ”मेरे गैरेज का कामधंधा बंद हो गया, इनकम का साधन भी नहीं रहा. मैं कमाऊंगा नहीं तो मेरा इलाज कैसे होगा. फिर तुम्हारे लिए भी तो कुछ जिम्मेदारियां हैं मेरी.’’

इस पर प्रिया ने कहा, ”आप के घर वाले देखो, किस तरह हाथ पैर बांधे बैठे हुए हैं. उन्हें कम से कम इस समय तो मदद के लिए आना चाहिए. कितने दिन बीत गए, मदद की बात तो दूर कोई देखने तक भी नहीं आया है.’’

ऐसी ही अनेक परेशानियों को झेलते हुए राजेश विश्वास (32 वर्ष) और प्रिया विश्वास (24 वर्ष) युगल दंपति छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बालाजी हौस्पिटल में महीना भर रहे. इलाज के बाद जब राजेश विश्वास कुछ स्वस्थ हुआ तो दोनों वापस रायगढ़ के धर्मजयगढ़ में स्थित अपने घर आ गए.

राजेश विश्वास का प्रिया से कुछ महीनों पहले ही विवाह हुआ था. विवाह से पहले भी वह यदाकदा बीमार रहता था, मगर प्रिया को अपनी बुरी आदत और बीमारी के बारे में बिना बताए ही विवाह की डोर में बंध गया.

उन का दांपत्य जीवन धीरेधीरे आगे बढ़ रहा था और उस के साथ ही राजेश की बीमारी सामने आती चली गई. अब सब कुछ प्रिया के सामने था. मगर विवाह बंधन के बाद उस के पास और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था. रायपुर में इलाज चलने लगा था.

राजेश और प्रिया का जीवन इस तरह धीरेधीरे जिंदगी की दुश्वारियों से गुजरता हुआ खट्टेमीठे रिश्तों के साथ आगे बढऩे लगा.

अस्पताल में प्रिया ने की खूब सेवा

प्रिया विश्वास पति की देखरेख करती थी और जिंदगी की गाड़ी धीरेधीरे चल रही थी. वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ही उस के चेहरे की खुशियां मानो उड़ सी गई थीं. वह चाह कर भी हंस नहीं पाती थी. पति की बीमार सूरत हमेशा उस के आगे घूमती रहती थी. वह क्या करे, जिस से कि उस का जीवन खुशियों से भर जाए. सोचती रहती थी.

उसे धीरेधीरे लगने लगा कि उस की जिंदगी रेगिस्तान बन गई है, जहां उसे आने वाले समय में दूरदूर तक कहीं भी खुशियों की आहट दिखाई नहीं दे रही थी. वह कभीकभी अपने भाग्य को रोती आंसू बहा लेती थी.

धर्मजयगढ़ के पास ही दुर्गापुर में रहने वाली प्रिया उस दिन को कोसती थी, जब उस ने राजेश को पसंद किया था और उस के प्रपोज करने पर उस के साथ जिंदगी के रास्ते तय करने की स्वीकृति दे कर विवाह बंधन में बंध गई थी.

धीरेधीरे राजेश के स्वास्थ्य को ले कर सारा सच उस के सामने आईने की तरह उजागर हो चुका था. साथ ही कभीकभी वह दुव्र्यवहार पर उतर आता था. ज्यादा शराब पीने के बाद लीवर और फिर किडनी की दिक्कत के कारण राजेश का मिजाज नरम गरम बना रहता था.

यह देखते समझते प्रिया की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा था. क्या वह जिंदगी भर दुखदर्द से जिएगी, यह सोच कर ही प्रिया बहुत परेशान हो गई. मगर अब देर हो चुकी थी, उस के पास रास्ता क्या बचा था?

नवंबरदिसंबर 2023 के एक दिन प्रिया पति राजेश विश्वास को बालाजी हौस्पिटल में इलाज के लिए फिर रायपुर ले आई. राजेश को अस्पताल में भरती कर लिया गया था. प्रिया सब कुछ संभाल रही थी. एक स्त्री होने के बावजूद जिस तरह राजेश का सहारा बन कर पत्नी के रूप में प्रिया ने अस्पताल में भूमिका निभाई, उस से राजेश विश्वास भी मन ही मन प्रिया का मुरीद  हो गया था.

दूसरी तरफ आत्मविश्वास के साथ हौस्पिटल के डाक्टर से बात करती और दवाइयों की व्यवस्था करती. पति के इलाज के लिए उस ने अपना सोने का एक कंगन भी बेच दिया था. यह सब राजेश देख रहा था और मन ही मन प्रिया के प्रति उस का प्रेम बढ़ता चला गया.

कभीकभी राजेश सोचता कि प्रिया जैसी पत्नी उसे मिल गई, यह उस का भाग्य ही तो है वरना कौन आज किसी का इस तरह साथ देता है.

मगर प्रिया के पत्नी भाव को देख कर राजेश की आंखें भर आती हैं. आखिरकार एक दिन राजेश से रहा नहीं गया तो उस ने कहा, ”तुम ने मुझे बताया भी नहीं और अपना सोने का कंगन बेच दिया, तुम ने भला ऐसा क्यों किया?’’

इस पर इठला कर प्रिया ने कहा, ”सोने का कंगन मैं ने अपने सुहाग के लिए बेचा है तो भला क्या गलत किया है. बताओ तो सही.’’

”नहींनहीं तुम्हें अपने गहने बेचने की जरूरत नहीं है, मै कहीं से भी रुपए की व्यवस्था कर लूंगा.’’ राजेश ने कहा.

”वह जब होगा, कर लेना, आज आप के इलाज के लिए हमे यहां रुपयों की जरूरत है. भला हमें यहां कौन पैसे देगा और फिर यह सोनाचांदी होता ही इसी दुख की घड़ी के लिए तो है.’’

”तुम ठीक कर रही हो,’’ राजेश की आंखें भींग आईं.

इसी दरमियान एक दिन राजेश और प्रिया की मुलाकात अस्पताल के कंपाउंडर फिरीज यादव उर्फ कृष से हुई. उस समय राजेश को कुछ दवाइयों की जरूरत थी और प्रिया के पास रुपए खत्म हो गए थे. प्रिया सोच रही थी कि क्या करूं. प्रिया को असमंजस में देख कर फिरीज ने पूछ लिया था, ”क्या हुआ, क्या बात है? आप दवाइयां क्यों नहीं ला रही हैं?’’

प्रिया के भावशून्य चेहरे को देख कर के शायद फिरीज समझ गया. बिना कुछ कहे उस ने प्रिया के हाथ से दवाइयां लिखा कागज ले कर उधार में दवाइयां ले कर इलाज शुरू करवा दिया. इस घटना के बाद राजेश, प्रिया विश्वास और फिरीज यादव में एक तरह से आत्मीय संबंध बनते चले गए.

धीरेधीरे प्रिया का आकर्षण फिरीज यादव के प्रति बढऩे लगा. बालाजी अस्पताल में कोई भी आवश्यकता होती, इशारा करते ही फिरीज यादव सामने खड़ा होता.

दोनों ही आपस में बातें करते. प्रिया उसे अपना सारा दुखदर्द बताती कि अब तो राजेश उस के साथ मारपीट भी करने लगा है. एक दिन तो गुस्से में उस पर मिट्टी का तेल उड़ेल दिया था और वह थाने तक चली गई थी. अब तो उस की जिंदगी मानो उजाड़ हो गई है.

प्रिया की दास्तां सुन कर फिरीज यादव सहानुभूति व्यक्त कर कोई न कोई रास्ता निकल आने की बात कह तसल्ली देता.

प्रिया को चिकनीचुपड़ी बातों में फंसा लिया कंपाउंडर ने

एक दिन बातोंबातों में फिरीज यादव ने कहा, ”तुम सचमुच ग्रेट हो, आज की दुनिया में तुम जैसा मैं ने नहीं देखा. पति के प्रति तुम्हारा समर्पण प्रेम पागलपन से भरा हुआ है. मगर एक बात कहूं, बुरा मत मानना.’’

”नहींनहीं बोलिए क्या बात है, क्या कहना चाहते हैं.’’ वह बोली.

”तुम्हारे पति राजेश ने तुम्हें धोखा दिया है, तुम से झूठ बोला और शादी कर ली.’’

”क्या झूठ बोला है मेरे सुहाग ने मुझ से.’’ अंजान सी बन प्रिया विश्वास बोली.

”वह खुद बिस्तर पर है गंभीर बीमारी से घिरा हुआ है और तुम से उस ने झूठ बोल कर विवाह कर लिया. उस ने तुम्हें बताया भी नहीं कि ऐसी बीमारियों के बाद उसे तुम से प्यार और ब्याह नहीं करना चाहिए था. यह तो सरासर धोखा है. मैं तो कहता हूं कि तुम जैसी मासूम की जिंदगी बरबाद करने का उसे क्या अधिकार था.’’

”नहींनहीं, इस में सिर्फ उन की ही गलती नहीं, यह सब ऊपर वाले का दोष है.’’ आंसू बहाते हुए प्रिया विश्वास ने कहा.

इस पर फिरीज यादव उर्फ कृष ने कहा, ”तुम जैसी भोलीभाली लड़कियां इस तरह भ्रमजाल में फंस कर अपनी जिंदगी बरबाद कर लेती हैं. मगर मैं यह मानता हूं कि तुम्हारे साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है.’’

धर्मजयगढ़ वापस आ जाने के बाद राजेश और प्रिया विश्वास की जिंदगी की गाड़ी धीरेधीरे चल रही थी. राजेश कभी बीमार पड़ जाता तो स्थानीय स्तर पर ही उस का इलाज करा लेते थे. उस ने बीमारी के कारण अपने गैरेज के साथ एक स्कौर्पियो खरीद ली, जिसे वह किराए पर चला रहा था, जिस से परिवार का खर्च आराम से निकल रहा था.

एक दिन फिरीज यादव को प्रिया विश्वास ने मोबाइल पर काल की. उस ने मधुर स्वर में कहा, ”प्रिया, कैसी हो, मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है. तुम्हारी जिंदगी का दर्द, तुम्हारा चेहरा मैं भूल नहीं पाता हूं और सोचता हूं कि इस में भला तुम्हारी मैं क्या मदद कर सकता हूं.’’

फिरीज यादव की बातें सुन कर प्रिया विश्वास ने कहा, ”क्या तुम मेरी कोई मदद नहीं कर सकते. मेरी जिंदगी दोराहे पर खड़ी है, जहां सिर्फ पतझड़ ही पतझड़ नजर आती है. सच कहूं तो मुझे समझ में नहीं आता कि मैं किस पिंजरे में आ कर फंस गई हूं. मेरा क्या होगा, मैं अब जिंदगी से निराश हो चली हूं.’’

”बताओ, मैं क्या कर सकता हूं?’’ फिरीज यादव ने असहाय स्वर में कहा.

”देखो, मेरी एक सहेली है पायल, मैं उस से दिल की हर बात करती हूं. वह कह रही थी कि तुम एक डाक्टर हो, इतने बड़े अस्पताल में हो, कुछ तो रास्ता होगा?’’ प्रिया विश्वास ने आशा के भाव से कहा.

”अच्छा कौन है पायल, बात करवाना मुझ से. खैर, तुम इतना कह रही हो तो मैं कुछ योजना बनाता हूं. मेरे अनुसार अगर तुम दोनों चल सकीं तो कुछ दिनों में तुम्हारी जिंदगी बदल जाएगी.’’

”सच! भला वह कैसे?’’ उत्सुकता से प्रिया विश्वास ने कहा.

इस के बाद फिरीज यादव ने प्रिया की सहेली पायल से बात की और फिर यह सिलसिला चल निकला. एक दिन प्रिया को विश्वास में लेते हुए भविष्य के लिए कुछ करने को कहा तो प्रिया तुरंत तैयार हो गई और फिर आगे एक ऐसी योजना बनाई गई, जिसे भविष्य में 4 लोगों ने अंजाम दिया.

फिल्म अभिनेत्री पायल को किया साजिश में शामिल

15 जनवरी, 2024 दिन सोमवार की शाम फिरीज यादव रायपुर से चल कर के खरसिया स्टेशन पर उतरा और वहां से बस से धर्मजयगढ़ पहुंच गया. यहां उसे प्रिया विश्वास के कहने पर शेख मुईन ने बाइक से पहुंच कर रिसीव किया और होटल सीएम में पहले बुक किए गए रूम में ठहराया. दूसरी तरफ राजेश और प्रिया विश्वास अपने घर पर सामान्य सा दिन व्यतीत कर रहे थे. राजेश ने देर शाम तक शराब पी और खाना खा कर रात 11 बजे बिस्तर पर लेट गया.

फिरीज यादव को प्रिया की पड़ोस में रहने वाली सहेली पायल विश्वास के कहने पर बौयफ्रेंड शेख मुईन रात को फिरीज यादव को होटल से ले कर आ गया. उस समय राजेश गहरी नींद में सो रहा था. मौका देख कर फिरीज एक इंजेक्शन राजेश के सीने में लगा रहा था तभी आधी नींद में राजेश ने चीख कर एक लात पैरों के पास खड़ी प्रिया को मारी. फिरीज यादव घबरा गया, जिस से इंजेक्शन की सुई भी टेढ़ी हो गई. मगर राजेश विश्वास अभी भी नींद में था और उस पर इंजेक्शन का असर दिखाई देने लगा था.

इस के बाद सोए हुए राजेश विश्वास के पैर उस की पत्नी प्रिया विश्वास ने पकड़े, हाथों को शेख मुईन ने पकड़ लिया और राजेश के सीने में फिरीज यादव ने एनेस्थीसिया के कुल 3 इंजेक्शन एकएक कर के लगा दिए.

इस से निपट कर फिरीज यादव ने कहा, ”प्रिया, मेरे अनुमान से अब यह कभी होश में नहीं आएगा…’’

और वह रहस्यमय ढंग से मुसकराने लगा. इस पर प्रिया बोली, ”मुझे तो शक है, कहीं यह होश में आ गया तो?’’

कुछ सोचविचार करने के बाद फिर फिरीज ने कहा, ”ऐसा है तो मैं कुछ और इंजेक्शन लगा देता हूं.’’ और उस ने 3 इंजेक्शन और सीने में लगा दिए. थोड़ी ही देर में उन्होंने महसूस किया कि राजेश विश्वास की नींद में ही मौत हो गई है.

16 जनवरी, 2024 को सुबह के समय प्रिया के रोने की आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग जमा हो गए. सभी लोग अचानक राजेश की मौत पर अचंभे में पड़ गए. राजेश का भाई तुरंत राजेश को अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई. पुलिस ने शव को कब्जे में ले कर आवश्यक काररवाई शुरू कर दी.

इस दरमियान डाक्टरों की टीम ने सनसनीखेज खुलासा किया कि मृतक राजेश विश्वास के सीने में 6 निशान सूई से इंजेक्ट हैं. यह सुनते ही एसएचओ अमित तिवारी के कान खड़े हो गए. उन्हें लगभग 10 साल पहले हुए एक हत्याकांड की याद आ गई.

छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में ऐसे ही हृदय के पास इंजेक्शन दे कर 2 व्यक्तियों की हत्या की गई थी, जिस का आरोपी पकड़ते पकड़ते बच निकला था. अमित तिवारी ने दृढ़ निश्चय किया कि राजेश की हत्या के मामले में तत्काल जांचपड़ताल शुरू की जाएगी, ताकि आरोपी कानून की जद से बच न सके.

एसएचओ अमित तिवारी ने तत्काल अपने उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लिया और जांच तेज कर दी. दूसरी तरफ राजेश विश्वास के घर और शहर का माहौल गमगीन बन गया था. राजेश विश्वास लोकप्रिय शख्स था, जिस के कारण लोग और परिचित तरहतरह की बातें करने लगे थे. पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद राजेश विश्वास का शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया.

17 जनवरी को आशीष विश्वास अध्यक्ष बंग समाज, धर्मजयगढ़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने थाने पहुंच कर के एसडीपीओ दीपक मिश्रा से मुलाकात की और मृतक राजेश विश्वास की संदिग्ध मृत्यु को ले कर एक ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच कर के दोषियों को पकडऩे की गुहार लगाई.

राजेश विश्वास का मामला दीपक मिश्रा के निगाहों में था. उन्होंने एसपी (रायगढ़) सदानंद कुमार से मार्गदर्शन लिया और एसएचओ अमित तिवारी व साइबर सेल को जांच कर के आरोपियों को पकडऩे की जिम्मेदारी दे दी.

प्रिया ने उगल दिया सारा राज

राजेश विश्वास की पत्नी प्रिया से एसएचओ अमित तिवारी ने पूछताछ शुरू की और पहला सवाल किया, ”यह बताओ कि राजेश विश्वास की हत्या करने में और किस ने तुम्हारा साथ दिया है?’’

यह सुनते ही प्रिया विश्वास घबरा कर इधरउधर देखने लगी और कोई जवाब नहीं दिया.

इस पर अमित तिवारी ने उसे अलग से बुला कर कहा, ”देखो, अगर तुम से अनजाने में यह भूल हो गई है तो सच बता दो. आज तो मैं जा रहा हूं, मगर कल तुम्हें मैं हिरासत में ले लूंगा.’’

पुलिस ने प्रिया विश्वास के मोबाइल को अपने कब्जे में ले लिया और दूसरे दिन पाया कि बहुत सी जानकारियां मोबाइल से डिलीट कर दी गई हैं. साइबर क्राइम के सहयोग से जब मोबाइल की जानकारियां रिकवर की गईं तो कई ऐसी बातें सामने आ गईं, जिस से प्रिया विश्वास के फिरीज यादव से बातचीत और वाट्सऐप और सीसीटीवी के सबूतों से खुलासा होता चला गया कि प्रिया विश्वास का पति राजेश विश्वास की हत्या में हाथ है.

इस के बाद तथ्यों को सामने रखते हुए मनोवैज्ञानिक तरीके से प्रिया से पूछताछ की तो आखिरकार प्रिया विश्वास टूट गई और अपना अपराध स्वीकार कर के अपना इकबालिया बयान दिया, जिस की पुलिस ने वीडियो रिकौर्डिंग भी करा ली.

प्रिया से पूछताछ के बाद फिरीज यादव को रायपुर  पुलिस की मदद से मोवा में पकड़ लिया. उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि प्रिया विश्वास के प्यार में पागल हो कर उस ने राजेश विश्वास के सीने में बेहोशी के इंजेक्शन में काम आने वाली एनेस्थीसिया का प्रयोग किया था और राजेश को मौत की नींद सुला दिया. उसे विश्वास था कि पोस्टमार्टम होते होते एनेस्थीसिया का असर खत्म हो जाएगा और उसे कोई पकड़ नहीं सकता.

राजेश विश्वास की हत्या में इस तरह प्रिया विश्वास, उस की खास सहेली छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेत्री और धर्मजयगढ़ निवासी पायल विश्वास और उस के बौयफ्रेंड शेख मुईन ने साथ दिया था. पुलिस ने इन्हें भी हिरासत में ले लिया और उन के बयान दर्ज कर लिए.

19 जनवरी, 2024 को पुलिस अधिकारियों ने प्रैस कौन्फ्रेंस कर के मामले का खुलासा कर दिया. एसडीपीओ (धर्मजयगढ़) दीपक मिश्रा ने मीडिया को बताया कि आरोपियों के कब्जे से हत्या की वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, फिरीज यादव से बस टिकट, होटल के फुटेज, इस्तेमाल किए गए ग्लव्स और सिरिंज, घटना के समय फिरीज यादव द्वारा पहने गए कपड़े, सभी के मोबाइल फोन पुलिस द्वारा जब्त कर लिए.

पूछताछ में पता चला कि वारदात को अंजाम देने के लिए मृतक की पत्नी प्रिया विश्वास, प्रेमी फिरीज यादव, फिल्म अभिनेत्री पायल विश्वास और उस के प्रेमी शेख मुईन राजा ने मिल कर योजना बनाई. योजना के तहत फिरीज यादव के रुकने की व्यवस्था करने के लिए पायल विश्वास ने नकद और फोन पे के जरिए पैसे शेख मुईन को दिए थे. उस ने धर्मजयगढ़ के होटल सीएम पार्क में अपनी आईडी से रूम बुक किया.

चारों आरोपी गिरफ्तार कर भेजे जेल

फिरीज यादव उर्फ कृष रायपुर बस से 15 जनवरी की शाम धर्मजयगढ़ पहुंचा. इस केबाद शेख मुईन से वाट्सऐप काल के जरिए बात की. फिर चारों ने 15 की रात तक राजेश की हर गतिविधि पर नजर रखी और मौका देख कर जब प्रिया ने काल की तो फिरीज यादव होटल से राजेश के घर पंहुच गया.

एसएचओ अमित तिवारी के नेतृत्व में प्रिया विश्वास और पायल विश्वास को धर्मजयगढ़ के निवास से गिरफ्तार किया गया. शेख मुईन खान पहले से भाग कर छाल में छिपा बैठा था. पुलिस टीम ने छाल हाटी रोड पर घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. वारदात के बाद फिरीज यादव रायपुर आ गया था. प्रिया विश्वास की गिरफ्तारी के बाद पहले से रायपुर में उपस्थित एसडीओपी दीपक मिश्रा ने रायपुर एएसपी और क्राइम डीएसपी की निगरानी में पंडरी मोवा थाना पुलिस

की मदद से उसे हिरासत में लिया.

पुलिस की जांच में यह बात सामने आई  कि फिरीज यादव ने अपने सोशल मीडिया में स्वयं को डाक्टर बताया है. पुलिस ने चारों आरोपियों फिरीज यादव उर्फ कृष उर्फ बबलू यादव (24 साल) निवासी गोपाल भौना, जिला सारंगढ़- बिलाईगढ़ हाल मुकाम दलदल सिवनी, जिला रायपुर, शेख मुईन राजा (20 साल) निवासी बेहरा पारा, धरमजयगढ़, जिला रायगढ़, प्रिया विश्वास (24 साल) निवासी धर्मजयगढ़ जिला रायगढ़ और पायल उर्फ मोनी विश्वास (28 साल) को भादंवि की धारा 302, 201, 120 के तहत गिरफ्तार कर लिया.

चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने 19 जनवरी, 2024 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया, जहां से चारों आरोपियों को पुलिस रिमांड में जिला जेल रायगढ़ भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस की जांच जारी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 3

गड़े धन के लालच में क्यों फंसा अजय शुक्ला

परिवार व गांव वालों ने नीरज विश्वकर्मा को ले कर अजय शुक्ला के कान भरने शुरू किए तो उस ने उस के घर आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी. इस के बाद संतोष कुमारी ने प्रेम प्रसंग में बाधा बन रहे पति को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक भी बात नहीं मानी.

संतोष कुमारी जानती थी कि उस का पति गड़े धन के लालच में कुछ भी कर सकता है. क्योंकि इस से पहले भी वह गड़े धन की लालसा में कई बार तांत्रिकों से मिल चुका था.

उस के बाद भी वह गड़ा धन पाने के लिए कुछ न कुछ हरकतें करता ही रहता था. इस के लालच में वह कहीं भी जा सकता है, जिस के सहारे उसे मौत की नींद सुलाना भी बहुत ही आसान काम था. प्रेमी को पाने के लिए उस ने उस के पति को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया.

इस के बाद वह एक दिन नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर मिली और उसे अपनी योजना के बारे में बताया. नीरज विश्वकर्मा तो पूरी तरह से संतोष कुमारी का दीवाना हो चुका था. वह उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. संतोष कुमारी की बात सुनते ही वह उस का साथ देने को तैयार हो गया.

फिर उसी योजना के तहत एक दिन गड़े धन का लालच दे कर नीरज ने अजय शुक्ला से बात की. कहीं पर गड़े धन की जानकारी मिलते ही अजय शुक्ला उस के साथ जाने के लिए तैयार हो गया.

यह बात अजय शुक्ला ने अपनी पत्नी संतोष कुमारी को बताई तो उस ने भी उस की हां में हां कर दी. वह तो पहले से ही चाहती थी कि वह किसी तरह से उस के प्रेमी नीरज विश्वकर्मा के साथ चला जाए.

योजना बनाने के बाद नीरज विश्वकर्मा और उस की प्रेमिका संतोष ने टीवी पर क्राइम स्टोरीज के सीरियल देखने शुरू किए. क्राइम सीरियलों में हमेशा ही अपराध करना और उस से बचने के उपायों को बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया जाता है. उन सीरियलों को देख कर संतोष कुमारी को पूरा विश्वास हो गया था कि वह भी अपने पति की हत्या करवा कर उस के जुल्म से पूरी तरह से बच जाएगी.

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10 बच्चे कैसे हुए अनाथ 

एक दिन नीरज विश्वकर्मा का फोन आते ही अजय घर से बाइक उठा कर चलने को तैयार हुआ तो संतोष कुमारी ने उस का मोबाइल घर पर ही यह कह कर रखवा लिया कि कहीं रात में गिर गया तो कहां कहां ढूंढोगे.

संतोष कुमारी जानती थी कि पुलिस मोबाइल की लोकेशन निकाल कर उस का पता कर सकती है. अगर उस के पास मोबाइल नहीं होगा तो उस के मरने के बाद पुलिस भी उस का अता पता नहीं कर पाएगी और जंगली जानवर उस की लाश को खा जाएंगे.

पत्नी के कहने पर अजय शुक्ला ने मोबाइल घर पर ही छोड़ दिया. उस के बाद वह सीधा नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर उस से मिला. उस वक्त तक शाम हो चुकी थी. अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज विश्वकर्मा अपनी बाइक से अजय शुक्ला के साथ चल दिया. नीरज कुमार ने अपनी बाइक रास्ते में पडऩे वाले पैट्रोल पंप पर खड़ी कर दी.

फिर वह अजय शुक्ला की बाइक पर बैठ कर उसे ले कर रामसनेही घाट कोतवाली के प्रतापपुरवा के जंगल में ले गया. वहां पर जा कर नीरज विश्वकर्मा ने अजय शुक्ला को एक जगह दिखाते हुए बताया कि गड़ा धन इसी जगह के नीचे है. इस जगह को किसी तरह से खोदना होगा.

अजय शुक्ला गड़े धन के लालच में पूरी तरह से पागल सा हो गया था. उस के मन में अमीर बनने के सपने घूमने लगे थे. जैसे ही अजय शुक्ला अपनी बाइक से उतर कर उस जगह की तरफ को जाने लगा तो पीछे से मौका पाते ही नीरज विश्वकर्मा ने उसी के हेलमेट से उस के सिर पर जोरदार वार कर दिया.

अचानक सिर पर ताबड़तोड़ हैलमेट की चोट से अजय शुक्ला बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़ा. उस के बाद नीरज ने चाकू से उस की हत्या कर दी.

अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज विश्वकर्मा अपने घर चला आया. अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज शुक्ला ने उसी के नंबर पर फोन कर उस की सूचना अपनी प्रेमिका संतोष कुमारी को दी, ताकि अगर यह भेद खुलता भी है तो पुलिस उस की बीवी पर शक न कर सके.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने अपने पति की हत्या की साजिश रचने वाली संतोष्ज्ञ कुमारी और नीरज विश्वकर्मा को अजय शुक्ला को अगवा कर उस की हत्या करने के आरोप में कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था.

इस मामले में मृतक अजय शुक्ला की पत्नी की तरफ से 5 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बदलाव किया गया. उसी अभियोग में धारा 34 भादंवि को जोड़ दिया गया तथा आलाकत्ल चाकू की बरामदगी के आधार पर धारा 4/25 आम्र्स ऐक्ट व धारा 120 बी/201 भी जोड़ दी गई. भले ही अपने प्रेम प्रसंग को छिपाने और अपने प्रेम में बाधा बने अजय शुक्ला को उसी की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर षडयंत्र के तहत रास्ते से हटा दिया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते दोनों ही जेल की सलाखों के पीछे चले गए थे.

उन के जेल जाते ही 10 बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए थे. आरोपी नीरज विश्वकर्मा के भी 5 बच्चे थे और संतोष कुमारी के भी 5.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

लिपस्टिक की चोरी – भाग 4

निक उछल कर खिड़की की चौखट पर चढ़ गया. फिर पाइप पर लटक कर वह धीरेधीरे विलियम के औफिस की तरफ बढ़ने लगा. वह सोच रहा था कि अगर किसी ने उसे इस तरह लटकते देख लिया तो बचना मुश्किल होगा. इस से बड़ा खतरा एक और भी था. दरअसल एडगर के फ्लैट की खिड़की पर पाइप का सिरा 6 फुट अंदर था, जबकि विलियम के औफिस की खिड़की का छज्जा डेढ़-2 फुट चौड़ा था.

अगर पाइप छज्जे से हट जाता तो उस की हड्डियों का चूरा हो सकता था. तीसरी मंजिल से गिर कर बचना असंभव था. इसलिए वह बहुत सावधानी से बहुत धीरेधीरे आगे बढ़ रहा था, ताकि पाइप को झटका न लगे और वह अपनी जगह पर टिका रहे.

आखिर वह दूसरे किनारे पर पहुंच गया. पाइप छोड़ कर वह छज्जे से लटक गया. ऊपर चढ़ने में उसे कोई खास मुश्किल नहीं हुई. यह उस की खुशकिस्मती थी कि खिड़की अंदर से बंद नहीं थी. अंदर पहुंच कर निक ने फूली सांसें दुरुस्त कीं, फिर कमरे का निरीक्षण करने लगा. इस के लिए उस ने अपनी पेंसिल टौर्च निकाल ली थी.

यह एक कमरे का औफिस था. दीवार में अलमारियां बनी हुई थीं, जिन में कानून की ढेरों किताबें रखी थीं.एक तरफ फाइल कैबिनेट थी. एक लोहे की तिजोरी लगी थी. निक वेल्वेट ने पहले दराजों की तलाशी ली, फिर तिजोरी पर ध्यान दिया. वालकाट कंपनी की तिजोरी का मेक देख कर निक खुश हो गया. इसे खोलना उस के बाएं हाथ का खेल था. वह अपने सामान के साथ तिजोरी पर झुक गया.

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3 मिनट में उस ने तिजोरी खोल ली. तिजोरी में कई खास केसेज की फाइलें रखी हुई थीं. एक खाने में उसे लिपस्टिक भी मिल गई. उस ने उसे संभाल कर जेब में रखा, फिर उसी खाने में रखी एक फाइल उठा कर पढ़ने लगा. यह किसी के कत्ल का केस था. निक को यह केस खासा दिलचस्प लगा. वह देर तक फाइल देखता रहा, पढ़ता रहा. फिर उस ने फाइल वहीं रख कर तिजोरी बंद कर दी और खिड़की से निकल कर जिस रास्ते आया था, उसी रास्ते वापसी का सफर तय करने लगा.

वह एडगर की खिड़की से करीब 4 फुट दूर था कि एक कार गली में दाखिल हुई. कार की छत पर जलने वाली नीली लाल बत्ती बता रही थी कि वह पुलिस की पैट्रोलिंग कार थी. कार गली में ठीक पाइप के नीचे रुक गई. निक को अपनी सांस रुकती हुई लगी. उस ने नीचे झांक कर देखा, 2 पुलिस वाले कार से निकल आए थे. उन में से एक के हाथ में रिवाल्वर था.

उन्होंने निक वेल्वेट को देख लिया था. एक ने चीख कर कुछ कहा पर निक की समझ में नहीं आया. एक पुलिस वाला इमारत के दरवाजे की तरफ दौड़ा. निक तेजी से आगे बढ़ने लगा, 4 फुट का फासला उसे इस वक्त जैसे 4 मील का लग रहा था. पाइप को झटके लग रहे थे. उसे डर था कि दूसरी खिड़की के छज्जे से पाइप सरक न जाए.

आखिरकार वह खिड़की तक पहुंच गया. उस ने जैसे ही पाइप को छोड़ा, एक जोरदार झटका लगा. दफ्तर वाली खिड़की के छज्जे से पाइप हट गया और वह नीचे गिरने लगा. निक चौखट पर चढ़ चुका था. उस ने जैसे ही कमरे में छलांग लगाई, गली में पाइप के गिरने की आवाज आई. पाइप शायद पुलिस की कार पर गिरा था.

निक वेल्वेट यूं ही दरवाजा बंद कर के फ्लैट से बाहर निकला तो नीचे सीढि़यों पर भारी कदमों की आवाज सुनाई दी. पुलिस वाले तेजतेज कदमों से ऊपर आ रहे थे. निक ने इधरउधर देखा और फौरन ऊपर जाने वाले जीने की तरफ दौड़ पड़ा. वहां से तीसरी इमारत में पहुंच कर पीछे के जीने से होता हुआ वह अपनी कार तक पहुंच गया. फिर उस ने इंजिन स्टार्ट कर तेजी से एक तरफ गाड़ी दौड़ा दी. अब वह पुलिस की पहुंच से बाहर था.

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मिस स्वीटी और निक वेल्वेट की मुलाकात एक रेस्टोरेंट में हुई. निक के साथ ग्लोरिया भी थी. बातचीत के बाद निक ने जेब से लिपस्टिक निकाल कर स्वीटी को थमाते हुए कहा, ‘‘अच्छे से चैक कर लो, वही लिपस्टिक है न?’’

‘‘हां, बिलकुल वही है. बहुत बहुत शुक्रिया. तुम ने मुझे बड़ी मुसीबत से बचा लिया.’’ स्वीटी ने लिपस्टिक को ध्यान से देख कर कहा.

‘‘अब की बार तुम बच गई, लेकिन आइंदा ऐसी हरकत मत करना, वरना…’’ निक ने बात अधूरी छोड़ दी.

‘‘…वरना क्या?’’ स्वीटी ने उलझन भरी नजरों से निक की ओर देखते हुए कहा.

‘‘वरना यह भी हो सकता है कि फांसी का फंदा तुम्हारे गले में फिट हो जाए.’’ निक रूखे स्वर में बोला.

स्वीटी का चेहरा एकदम उतर गया. कुछ पल वह निक को देखती रही, फिर बिना कुछ कहे उठ खड़ी हुई और रेस्टोरेंट से बाहर निकल गई.

‘‘क्या मामला था निक?’’ ग्लोरिया ने पूछा तो निक बोला, ‘‘यह लिपस्टिक सुबूत के तौर पर एक कत्ल के मुकदमे में पेश होने वाली थी. अगर यह अदालत तक पहुंच जाती तो स्वीटी को सजा ए मौत नहीं तो उम्रकैद जरूर हो सकती थी.’’

‘‘मैं समझी नहीं.’’

‘‘बात दरअसल यह है कि स्वीटी जेम्स नाम के एक आदमी से मोहब्बत करती थी. बहुत दिनों बाद राज खुला कि उस की दोस्त क्लारा भी जेम्स को चाहती थी. एक रात जब स्वीटी जेम्स के घर पहुंची तो वहां कोई भी नहीं था. वहां उसे ड्रेसिंग टेबल पर क्लारा का एक खत मिल गया, जो जेम्स के नाम था.

उन दोनों ने किसी और जगह मुलाकात का प्रोग्राम बनाया था. स्वीटी जल कर रह गई. उस ने गुस्से में पर्स से लिपस्टिक निकाली और जेम्स की तसवीर पर, जो ड्रेसिंग टेबल पर रखी थी, कई आड़ीतिरछी लकीरें खींच दीं. तसवीर को उस ने क्रौस भी कर दिया.

‘‘यह लिपस्टिक प्रोडक्शन मैनेजर ने उसे उसी दिन दी थी, जो बदहवासी में उस ने ड्रेसिंग टेबल पर फेंक दी और पैर पटकती हुई बाहर निकल गई. इत्तफाक से थोड़ी देर बाद क्लारा वहां पहुंच गई. उस ने लिपस्टिक उठा कर अपने पर्स में डाली और वहां से चली गई.

‘‘उसी रात किसी ने जेम्स को कत्ल कर दिया. पुलिस के ख्याल में कातिल वही था, जिस ने लिपस्टिक से जेम्स की तसवीर पर क्रौस का निशान लगाया था. पुलिस को इस लिपस्टिक की तलाश थी, ताकि उस के मालिक का पता लगाया जा सके. जेम्स के भाई ने विलियम को वकील किया, विलियम को इस लिपस्टिक की तलाश थी, ताकि इसे सुबूत के तौर पर अदालत में पेश कर सके.

‘‘विलियम को स्वीटी पर शक था. किसी तरह उसे पता चल गया था कि स्वीटी को भी उस लिपस्टिक की तलाश है. उसे यह मालूम हो गया था कि वही लिपस्टिक मिस क्लारा के कब्जे में है. उसे यह भी पता चल गया था कि स्वीटी मेरे जरिए वह लिपस्टिक हासिल करना चाहती है. इस के बाद उस ने मेरे पीछे अपने आदमी लगा दिए.

‘‘मैं जैसे ही क्लारा के घर से लिपस्टिक चुरा कर निकला, विलियम के आदमियों ने मुझे घेर लिया और मुझे बेहोश कर के लिपस्टिक ले उड़े. गनीमत यही थी कि मुझे उस की गाड़ी का नंबर याद रह गया था. फिर मैं ने तुम्हारे जरिए उस गाड़ी के मालिक के बारे में मालूमात हासिल की और पिछली रात जुगाड़ कर उस के दफ्तर में जा घुसा, जहां से यह लिपस्टिक हासिल की.

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‘‘उस के दफ्तर में कत्ल के केस की एक फाइल मुझे दिखी, मैं ने उसे पढ़ा तो पता चला कि कत्ल किसी और ने किया था, पर विलियम और जेम्स का भाई जेम्स के कत्ल का इल्जाम स्वीटी पर लगा कर उसे फंसाना चाहते थे. वे उसी लिपस्टिक को सुबूत के तौर पर स्वीटी के खिलाफ पेश करना चाहते थे.

‘‘लेबोरेटरी टेस्ट से जब यह साबित हो जाता कि जेम्स की तसवीर पर लकीरें स्वीटी की लिपस्टिक से लगाई गई थीं तो उन के लिए यह प्रूव करना मुश्किल नहीं था कि नफरत और जलन की भावना से तैश में आ कर पहले उस ने उस की तसवीर बिगाड़ी, फिर उसे कत्ल कर दिया. यह स्वीटी की खुशकिस्मती थी कि वह लिपस्टिक मुझे मिल गई थी.’’

‘‘ओह तो यह चक्कर था.’’ ग्लोरिया ने ताज्जुब से कहा.

‘‘यह चक्कर तो अब खत्म हो गया, पर इस बार मुझे बहुत पापड़ बेलने पड़े. मेरी जान तक खतरे में पड़ गई.’’

बातचीत के बाद दोनों रेस्टोरेंट से निकल कर दरिया के किनारे सैर को निकल गए.

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 2

इस कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी के थाना असंद्रा के एक छोटे से गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से. 40 वर्षीय अजय शुक्ला इसी गांव का रहने वाला था और वह किसी तरह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. उस की शादी कई साल पहले संतोष कुमारी के साथ हुई थी.

समय के साथसाथ संतोष कुमारी 5 बच्चों की मां बनी. घर में बच्चों के हो जाने के बाद अजय शुक्ला बहुत ही खींचतान कर बच्चों का लालनपालन कर पाता था.

घर की आर्थिक स्थिति डगमगाने से वह लगभग 15 लाख रुपयों के कर्ज के बोझ में दब गया था. नशे और जुए का आदी होने के कारण उस ने अपनी जुतासे की जमीन भी बेच डाली थी. लेकिन जमीन बेच कर उस ने पैसे जुए और शराब में उड़ा दिए. जिस के बाद उस की पत्नी हर वक्त उस से खफा रहती थी.

अब से लगभग 6 साल पहले संतोष कुमारी कुछ सामान खरीदने के लिए महमूदपुर गई थी. नीरज कुमार विश्वकर्मा महमूदपुर में ही एक घड़ी और मोबाइल की दुकान चलाता था. अपने घर का सामान खरीदने के बाद वह जैसे ही अपने घर वापस आ रही थी, उस की नजर एक मोबाइल की दुकान पर बैठे नीरज कुमार पर पड़ी.

संतोष कुमारी का चलते वक्त मोबाइल नीचे गिर गया था, जिस के कारण उस का मोबाइल का स्क्रीन गार्ड टूट गया था. वह स्क्रीन गार्ड लगवाने के लिए उस के पास पहुंची. उसी दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई थी. नीरज कुमार के व्यवहार से संतोष कुमारी पहली ही मुलाकात में काफी प्रभावित हुई थी.

जब तक नीरज कुमार ने उस के मोबाइल पर स्क्रीन गार्ड लगाया, तब तक उस ने नीरज से सारी जानकारी जुटा ली थी. उस के बाद वह उस का मोबाइल नंबर भी ले आई थी.

उस दिन के बाद नीरज कुमार संतोष कुमारी के दिल में बस गया. संतोष कुमारी उस से बात करने के लिए बेचैन हो उठी. उस ने कई बार उसे फोन मिलाने की कोशिश की, लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह किस बहाने से उसे फोन करे.

आखिरकार उस ने एक दिन हिम्मत कर के उस ने फोन मिलाया. नीरज कुमार तुरंत ही उस की आवाज पहचान गया. फिर उस दिन दोनों की काफी समय तक बात हुई. दोनों के बीच एक बार फोन पर बात हुई तो आगे यह सिलसिला बढ़ता ही गया.

दरअसल, संतोष कुमारी को नीरज कुमार से प्यार हो गया, जिस से वह अकसर उस से घंटों घंटों तक बात करने लगी थी. उस के बाद दोनों ही मिलने के लिए बेचैन रहने लगे थे. संतोष कुमारी उस से मिलने के लिए कोई न कोई बहाना बना कर घर से निकल जाती और फिर उस की दुकान पर पहुंच जाती. अजय शुक्ला तो सुबह ही रिक्शा ले कर घर से निकल जाता और देर शाम को ही घर पहुंचता था.

इस दौरान संतोष कुमारी नीरज कुमार को फोन करती. वह नीरज कुमार से अपने घर आने के लिए कहती, लेेकिन नीरज अपनी दुकान के चलते उस के पास नहीं आ पाता था. फिर उस के घर आने पर उस के अन्य परिवार वाले भी ऐतराज उठा सकते थे.

हसरतों ने इस तरह भरी उड़ान

इसी सब से बचने के लिए संतोष कुमारी के दिमाग में एक आइडिया आया. उस ने सोचा कि अगर किसी तरह से उस के पति की दोस्ती नीरज कुमार से हो जाए तो उस के घर आने की सारी बाधाएं खत्म हो जाएंगी. यही सोच कर उस ने एक दिन अपने मोबाइल का स्क्रीन गार्ड जानबूझ कर तोड़ दिया.

अगली सुबह जब उस का पति अजय शुक्ला घर से निकल रहा था तो उस ने कहा, ”तुम महमूदपुर में तो आते जाते रहते हो. मेरा मोबाइल ले जाओ.’’

उस के बाद उस ने नीरज कुमार की दुकान का हवाला देते हुए कहा, ”आप उस पर नीरज की दुकान से स्क्रीन गार्ड लगवा लाना.’’

अजय शुक्ला अपनी बीवी का मोबाइल ले कर नीरज कुमार की दुकान पर पहुंचा. उस के पहुंचने से पहले ही संतोष कुमारी ने नीरज को फोन कर समझा दिया था कि आज मेरे पति तुम्हारी दुकान पर आएंगे. किसी भी तरह से तुम उन के साथ दोस्ती गांठ लेना. अगर तुम ने उन से दोस्ती कर ली तो हमारा मिलनेजुलने का रास्ता साफ हो जाएगा.

अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज कुमार ने उस के साथ मीठीमीठी बातें की, जिस के बाद अजय शुक्ला भी उस से काफी प्रभावित हुआ. फिर जल्दी ही दोनों के बीच दोस्ती भी हो गई. उसी दोस्ती की आड़ में नीरज कुमार उस के घर आनेजाने लगा था. जिस के बाद दोनों प्रेमियों के बीच मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

अजय शुक्ला हमेशा ही शाम को शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर पहुंचता था. उस के बाद नीरज कुमार भी अपनी दुकान बंद कर के अजय शुक्ला के घर आ जाता था. देखते ही देखते दोनों में दांत काटी दोस्ती हो गई, जिस के बाद वह अजय शुक्ला के हर दुखसुख में काम आने लगा था.

कभी कभार ज्यादा रात हो जाने के कारण नीरज कुमार अजय शुक्ला के घर पर ही रुक जाता था. इस दौरान जब कभी भी अजय शुक्ला को पैसे की जरूरत होती तो नीरज ही उस के काम आता था.

धीरेधीरे अजय शुक्ला नीरज कुमार का लाखों रुपयों का कर्जदार हो गया था. जिस के कारण अजय शुक्ला नीरज कुमार के अहसानों तले दबता चला गया, जिस का नीरज कुमार भरपूर लाभ ले रहा था.

जब नीरज कुमार विश्वकर्मा का उस के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना हो गया तो उस के परिवार वाले ऐतराज करने लगे. उन्होंने कई बार इस बात की शिकायत अजय शुक्ला से की, लेकिन उस ने हर बार उन की बातों को एक कान सुना और दूसरे से निकाल दिया.

यही बात जब घर से निकल कर गांव में फैलनी शुरू हुई तो अजय शुक्ला को थोड़ा बुरा लगने लगा. उस के बाद उसे भी अपनी पत्नी और नीरज विश्वकर्मा के बीच अवैध संबंधों का शक हो गया था. जिस के बाद अजय शुक्ला अकसर ही अपनी पत्नी से झगडऩे लगा था, जिस की जानकारी संतोष कुमारी ने नीरज विश्वकर्मा को भी दे दी थी.

अजय ने कई बार नीरज को अपने घर आने जाने से रोकना चाहा तो उस ने उस से साफ कहा कि भाई मेरा पैसा मुझे वापस कर दो. मैं तुम्हारे घर क्या तुम्हारे गांव की तरफ नहीं आऊंगा. लेकिन अजय शुक्ला को उस समय बहुत ही मजबूरी थी. न तो वह जुआ खेलना ही छोड़ सकता था और न ही वह बिना शराब के रह सकता था.

लिपस्टिक की चोरी – भाग 3

क्लारा ने पिछले दिन उसे बताया था कि उस के कमरे में बिना उस की इजाजत कोई नहीं आ सकता, इसीलिए निक ने यह रिस्क लिया था. क्लारा को ठीक से लिटाने के बाद उस ने कमरे का दरवाजा बंद किया और उस की ड्रेसिंग टेबल की तलाशी लेनी शुरू कर दी. ‘लीलाली’ वाली जामुनी रंग की लिपस्टिक ड्रेसिंग टेबल की दराज में मिल गई. उस ने लिपस्टिक का केस और पुराने टिकट की डिबिया अपने पास संभाल कर रख ली. पैसों को उस ने हाथ भी नहीं लगाया. वह चाहता तो 3 लाख डौलर ले सकता था, पर यह उस के उसूल के खिलाफ था.

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नीचे आ कर वह बिना किसी रुकावट के अपनी कार तक पहुंच गया. जब वह कार में बैठ रहा था तो क्लारा की मेड सैंड्रा ने उस की ओर देख कर हाथ हिलाया. उस ने भी खुशदिली से हाथ हिला कर कार स्टार्ट कर दी. गार्ड्स ने भी फौरन गेट खोल दिया. निक आराम से गाड़ी बाहर निकाल ले गया.

करीब 2-3 मील का फासला तय करने के बाद निक ने एक मोड़ पर गाड़ी घुमाई ही थी कि अचानक एक तेज रफ्तार कार ने पीछे से आ कर उस का रास्ता रोक दिया. निक ने फुरती से ब्रेक लगाया. इस के पहले कि निक संभल पाता, आने वाली गाड़ी से 2 आदमी उतरे और उस के दाईं और बाईं ओर खड़े हो गए. तीसरा आदमी स्टीयरिंग पर बैठा था. उन की सूरत देखते ही निक समझ गया कि मामला गड़बड़ है.

निक ने सोचा कि कहीं क्लारा की बेहोशी का राज तो नहीं खुल गया. हो सकता है उसी के आदमी पीछे आ गए हों. लेकिन उस ने यह खयाल दिमाग से निकाल दिया, क्योंकि क्लारा को इतनी जल्दी होश आना मुमकिन नहीं था.

आगेपीछे सड़क बिलकुल वीरान पड़ी थी. जो आदमी निक के पास खड़ा था, वह खिड़की पर झुका, उस के हाथ में भारी रिवाल्वर था. उस का दूसरा साथी भी पिस्तौल निकाल चुका था.

‘‘कौन हो तुम लोग, क्या चाहते हो?’’ निक ने पूछा.

‘‘मेरी तरफ देखो, मैं बताता हूं कि हम कौन हैं?’’ एक आदमी ने कहा तो निक ने गरदन घुमा कर उस की तरफ देखा. तभी उस के सिर पर जोरों से रिवाल्वर का दस्ता पड़ा और उस की आंखों के आगे अंधेरा छा गया.

होश में आते ही निक वेल्वेट ने अपनी जेबें टटोलीं. उस की जेबों में सब चीजें मौजूद थीं सिवाय ‘लीलाली’ वाली उस लिपस्टिक के, जिसे वह क्लारा के पास से चुरा कर लाया था. वह सोचने लगा, ‘अगर ये लुटेरे थे तो इन्हें लिपस्टिक में क्या दिलचस्पी हो सकती थी? जेब में करीब 4 हजार डौलर थे, घड़ी थी, लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं लिया था.’

उस ने घड़ी पर नजर डाली. साढ़े 7 बज रहे थे. इस का मतलब वह करीब 2 घंटे बेहोश रहा था. वह सिर सहला ही रहा था कि अचानक दिमाग में धमाका सा हुआ. उसे उस गाड़ी का नंबर याद रह गया था, जिस ने रास्ता रोका था. उस ने जल्दी से वह नंबर अपनी डायरी में नोट किया और गाड़ी स्टार्ट कर दी. उस की वह रात सिर की सिंकाई में गुजरी.

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निक की जिंदगी का यह पहला मौका था, जब कोई उसे इस तरह चूना लगा गया था. उन लोगों के बारे में सोचसोच कर उस का दिमाग थक गया, पर कुछ समझ में नहीं आया. इस का मतलब वह लिपस्टिक बहुत महत्त्व की थी.

दूसरे दिन सुबह नाश्ते के बाद वह सीधा मोटर व्हीकल रजिस्ट्रेशन के औफिस पहुंच गया. नंबर से पता चला कि वह गाड़ी किसी विलियम के नाम पर रजिस्टर्ड थी. यह जानकारी जुटा कर वह एक रेस्टोरेंट में घुस गया. वहां सुकून से बैठ कर उस ने ग्लोरिया को रेस्टोरेंट में आने को कहा. कौफी का और्डर दे कर वह उस की राह देखने लगा. ग्लोरिया 5-7 मिनट में पहुंच गई. निक ने उस से कहा, ‘‘ग्लोरिया, मुझे तुम से एक काम लेना है.’’

‘‘मैं पहले ही समझ गई थी कि कोई गड़बड़ है. इसलिए मैं लंच ब्रेक तक छुट्टी ले कर आई हूं.’’

‘‘यह तुम ने ठीक किया,’’ निक ने एक कागज उसे देते हुए कहा, ‘‘यह किसी विलियम का पता है. इस के बारे में पूरी मालूमात कर के आओ. मैं घर पर तुम्हारा इंतजार करूंगा. मेरा खयाल है कि तुम 12 बजे तक लौट आओगी.’’

‘‘ठीक है, अगर घर न आ सकी तो 12 बजे तक तुम्हें फोन कर दूंगी.’’ ग्लोरिया ने वादा किया.

कौफी पीने के बाद दोनों रेस्टोरेंट से निकल गए.

करीब 12 बजे फोन की घंटी बजी. निक ने लपक कर फोन उठाया. फोन ग्लोरिया का ही था. वह अपने औफिस से बोल रही थी. वह बोली, ‘‘मैं ने विलियम के बारे में मालूम कर लिया है. वह एक बड़ा वकील है और आमतौर पर क्रिमिनल केस लेता है. उस के 2 असिस्टेंट भी हैं, जो उस के साथ ही रहते हैं. इत्तफाक से मैं उन दोनों को भी देख चुकी हूं.’’

ग्लोरिया ने उन दोनों का हुलिया भी बयान कर दिया.

‘‘गुड.’’ निक ने मुसकराते हुए कहा. हुलिए के हिसाब से वे दोनों वही थे, जिन्होंने उस की कार रोकी थी. तीसरे को वह इसलिए नहीं देख सका था, क्योंकि वह कार के अंदर ही बैठा था. उस ने ग्लोरिया को शाबाशी देते हुए कहा, ‘‘तुम ने काफी बड़ा काम कर दिखाया है.’’

निक ने टेलीफोन डायरैक्टरी के जरिए विलियम के औफिस का पता मालूम कर लिया. फिर वह फ्लैट से निकल गया. विलियम का औफिस एक तंग सी गली में तीसरी मंजिल पर था. निक ने कुछ आगे जा कर गली के मोड़ पर गाड़ी रोकी और पैदल ही विलियम के औफिस के ठीक सामने वाली इमारत में घुस गया. यह उस की खुशकिस्मती थी कि इस इमारत में रिहायशी फ्लैट थे. तीसरी मंजिल पर वह उस फ्लैट के दरवाजे पर रुक गया, जो गली के पार विलियम के दफ्तर के ठीक सामने था.

निक ने उस फ्लैट का दरवाजा खटखटाया. करीब 2 मिनट बाद दरवाजा खुला. दरवाजा खोलने वाला एक खस्ताहाल आदमी था, जिस ने पुराने मैले से कपडे़ पहन रखे थे. उसे देख कर निक समझ गया कि वह बड़ी गरीबी में दिन गुजार रहा है.

‘‘मिस्टर निक्सन?’’ निक ने सवालिया अंदाज में पूछा.

‘‘नहीं, मेरा नाम एडगर है.’’ उस ने जवाब दिया.

‘‘माफ करना मिस्टर एडगर, क्या तुम मुझे अंदर आने को नहीं कहोगे?’’ कहते हुए निक ने जेब से पर्स निकाला और उस में से 10 डौलर निकाले. डौलर देख कर एडगर की आंखों में चमक आ गई. उस ने जल्दी से कहा, ‘‘अरे आओ अंदर, मिस्टर…’’

निक ने अंदर आते ही नोट उस के हाथ में दे दिया. एडगर ने झट से दरवाजा बंद कर दिया. निक कमरा देखने लगा. फर्श पर फटापुराना कालीन बिछा था. फरनीचर काफी पुराना और सस्ता सा था. वह सिटिंग रूम था. निक दूसरे कमरे में गया, जिस की एक खिड़की सड़क पर खुलती थी. खिड़की पर मैला सा परदा पड़ा हुआ था. उस कमरे में एक बेड और अलमारी के सिवाय कुछ नहीं था.

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निक ने खिड़की का परदा उठा कर बाहर देखा. सामने ही विलियम के दफ्तर की खुली खिड़की थी. उस के औफिस में 4 लोग बैठे थे. उन में से 2 तो वही थे, जो उसे चोट पहुंचा कर लिपस्टिक ले गए थे. टेबल के पीछे रिवाल्विंग चेयर पर एक अजनबी आदमी बैठा था. वही शायद विलियम था.

निक एडगर की तरफ देख कर बोला, ‘‘तुम्हारी हालत बहुत खराब दिख रही है.’’

‘‘मैं एक रेस्टोरेंट में वेटर था, पर शराब की लत की वजह से मेरी नौकरी चली गई. 2 महीने से बेकार हूं. 2 दिनों से कुछ खाया भी नहीं है. तुम ने मेरी बड़ी मदद कर दी है.’’

‘‘निक्सन, मेरे बचपन के दोस्त का नाम है. 20 साल पहले उस से मेरी आखिरी मुलाकात इसी फ्लैट में हुई थी. पर अब वह यहां नहीं रहता. उसे कहीं और ढूंढने जाना होगा.’’

‘‘मुझे अफसोस है, तुम्हारे दोस्त से तुम्हारी मुलाकात नहीं हो सकी.’’

‘‘लेकिन मैं कुछ और ही सोच कर परेशान हूं. मैं ने यह जाने बगैर कि मेरा दोस्त यहां है या नहीं, अपने 2 दोस्तों को पुरानी यादें ताजा करने के लिए उन्हें भी यहां बुला लिया. आज रात वे यहां पहुंचने वाले हैं. हम यहां पुरानी यादें ताजा करना चाहते थे. पर सब गड़बड़ हो गया.’’ निक ने उदासी भरे स्वर में कहा.

‘‘अगर तुम्हारे दोस्त यहां आने वाले हैं तो मुझे कोई ऐतराज नहीं है. मैं तुम्हें डिस्टर्ब नहीं करूंगा.’’ एडगर ने खुशीखुशी कहा.

‘‘गुड. क्या यह मुमकिन है कि हम तीनों दोस्त यहां मस्ती करें और तुम आज रात कहीं दूसरी जगह चले जाओ. मेरा मतलब है कि किसी होटल वगैरह में. बात दरअसल यह…’’

‘‘मैं समझ गया.’’ एडगर ने कहा, ‘‘दोस्तों के बीच अजनबी का क्या काम?’’ एडगर ने चापलूसी से कहा. निक ने 50 डौलर उसे थमाए तो मारे खुशी के उस के हाथ कांपने लगे. वह जल्दी से बोला, ‘‘यह लो चाबी, मैं जा रहा हूं. बहुत भूख लगी है. मैं कल दोपहर बाद फ्लैट पर आऊंगा. तुम ताला लगा कर चाबी पड़ोस में दे देना. अगर खुला भी छोड़ दोगे तो कोई बात नहीं. क्योंकि कुछ जाने का डर नहीं है.’’

एडगर ने चाबी निक को थमाई और खुद बाहर निकल गया. उसे डर था कि कहीं वह पैसे वापस न मांग ले.

निक उस की सादगी पर मुसकराया. उसे उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी काम बन जाएगा. एडगर के जाने के बाद वह भी फ्लैट से बाहर निकल गया.

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इस इमारत में निक वेल्वेट की वापसी रात को साढ़े 11 बजे हुई. उस वक्त इलाके में पूरी तरह सन्नाटा छा चुका था. किसी किसी इमारत में हलकी सी रोशनी थी. इस बार भी निक ने अपनी गाड़ी फ्लैट से दूर ही खड़ी की थी. उस ने गाड़ी में से एक बंडल उठाया, जिस में 5-5 फुट के लोहे के 6 चूड़ीदार पाइप थे. ये पाइप निक ने आज दिन में ही खरीदे थे.

उस ने फ्लैट में पहुंच कर खिड़की खोल कर बाहर देखा. सड़क सुनसान थी. सामने वाली इमारत भी अंधेरे में डूबी थी. विलियम के औफिस में भी अंधेरा था. निक देर तक उस औफिस की खिड़की को ध्यान से देखता रहा. उस ने कुरसी पर बैठ कर एक सिगरेट सुलगा ली.

रात के करीब डेढ़ बजे उस ने पाइप निकाले और उन्हें सौकिट की मदद से जोड़ने लगा. हर पाइप में चूडि़यां थीं, इसलिए सब आसानी से जुड़ गए. इस तरह 30 फुट लंबा पाइप तैयार हो गया.

निक ने कमरे के बीच का दरवाजा भी खोल लिया था. पाइप तैयार होने के बाद उस ने ध्यान से बाहर देखा, कहीं कोई हलचल नहीं थी. अब मंसूबे पर काम करने का वक्त आ गया था. उस ने पाइप खिड़की से बाहर निकाला. एक इंच मोटा पाइप धीरेधीरे बाहर निकलने लगा. उसे संभालने के लिए निक को बहुत ताकत लगानी पड़ रही थी, जैसे तैसे उस ने पाइप का दूसरा सिरा विलियम के औफिस के छज्जे पर टिका दिया. फिर उस ने पाइप को अच्छे से सेट कर के एक बार फिर नीचे देखा. नीचे बिलकुल सन्नाटा था.

यह बात निक ने दिन में ही नोट कर ली थी कि गली करीब 20 फुट चौड़ी है. फिर भी उस ने सावधानी के लिए 30 फुट का पाइप लिया था. विलियम के औफिस तक पहुंचने का उसे बस यही एक रास्ता समझ में आया था. क्योंकि दिन में वह देख चुका था कि इमारत में 2-3 वर्दीवाले बंदूकधारी गार्ड्स रहते हैं और रात के वक्त उन्हें धोखा दे कर इमारत में दाखिल होना मुमकिन नहीं है. वह जो कर रहा था, उस में रिस्क तो था, पर रिस्क लिए बिना काम होना संभव नहीं था.