Extramarital affair : प्रेमिका के पति को मार कर कुएं में दफनाया

Extramarital affair : नरेंद्र की अच्छीभली गृहस्थी थी. सरकारी नौकरी कर रही बीवी और 2 बच्चे. लेकिन वह रूबी के हुस्न में ऐसा अंधा हुआ कि घरपरिवार छोड़ कर उस के साथ किराए के मकान में रहने लगा. लेकिन जब वही रूबी सिपाही योगेश के इश्क में अंधी हुई तो…

जिला अमरोहा के थाना रजबपुर के गांव शकरपुर निवासी नरेंद्र कुमार 27 सितंबर, 2019 को अपनी पत्नी वालेश देवी की दवा लाने के लिए नजीबाबाद के लिए निकला. दरअसल, उस की पत्नी वालेश को एलर्जी की शिकायत रहती थी, जिस का इलाज वह नजीबाबाद के एक डाक्टर से करा रहा था. नरेंद्र घर से दोपहर 12 बजे निकला था. हर बार की तरह उसे शाम तक घर आ जाना चाहिए था. लेकिन उस दिन जब वह शाम तक घर नहीं लौटा तो पत्नी वालेश को चिंता हुई. उस ने पति को फोन किया तो फोन नहीं लगा. यह कोशिश उस ने कई बार की लेकिन असफलता ही हाथ लगी. रात करीब 12 बजे वालेश ने फिर से पति को फोन लगाया. इस बार भी उस का फोन स्विच्ड औफ आया.

वालेश ने सोचा कि संभव है, पति के फोन की बैटरी डिस्चार्ज हो गई हो. इसलिए वह सो गई. अगले दिन वालेश ने फिर से पति का नंबर मिलाया. इस बार भी उस का फोन स्विच्ड औफ मिला. नरेंद्र को अगर कहीं रुकना होता तो वह बता कर जाता, लेकिन वह ऐसा कुछ भी बता कर नहीं गया था. वालेश ने पति की जानपहचान वालों को फोन कर के पति नरेंद्र के बारे में पूछताछ की. लेकिन उस के बारे कहीं भी कुछ पता नहीं लगा. इस के बाद वालेश ने अपने ससुर समरपाल सिंह को यह जानकारी दे दी. समरपाल सिंह ने अपने सभी रिश्तेदारों, परिचितों में नरेंद्र को ढुंढवाया लेकिन उस का कहीं पर भी पता नहीं लग पाया. देखतेदेखते 8 दिन गुजर गए तो गांव वालों और रिश्तेदारों ने उन्हें थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराने की सलाह दी.

6 अक्तूबर, 2019 को वालेश ससुर समरपाल सिंह के साथ थाना रजबपुर पहुंची और थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह को अपने पति नरेंद्र कुमार (30) के गायब होने की बात विस्तार से बता दी. थानाप्रभारी ने उस की गुमशुदगी दर्ज कर ली. कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस ने नरेंद्र का पता नहीं लगाया तो वालेश ने फिर से थानाप्रभारी से संपर्क किया. तब थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह ने उस से कहा कि पुलिस अपने स्तर से आप के पति को तलाश रही है, इस के अलावा अगर आप को किसी पर शक हो तो बताओ.

‘‘साहब, मुझे अपने पति की रखैल रूबी पर शक है.’’ वालेश ने बताया.

‘‘रूबी रहती कहां है?’’ सत्येंद्र सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, वह मुरादाबाद के कांशीराम नगर में रहती है. उस का मकान मालिक योगेश है, जो यूपी पुलिस में सिपाही है. इस समय वह मुरादाबाद के थाना बिलारी में तैनात है. रूबी के चक्कर में कई बार योगेश से उस का झगड़ा भी हुआ था. मुझे पता चला है कि अब रूबी योगेश के साथ खुलेआम घूमती है.’’ वालेश ने बताया. वालेश ने थानाप्रभारी को रूबी का मोबाइल नंबर भी दे दिया. यह जानकारी मिलने के बाद थानाप्रभारी को इस मामले में किसी अप्रिय घटना की आशंका नजर आने लगी. उन्होंने उसी दिन 19 अक्तूबर को नरेंद्र के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर सूचना अमरोहा के एसपी डा. विपिन टाडा को दे दी.

थानाप्रभारी ने सब से पहले नरेंद्र के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई, तो उस के फोन पर अंतिम काल रूबी ने की थी, जिस की लोकेशन कांशीराम नगर, मुरादाबाद की मिली. पुलिस ने रूबी के फोन को सर्विलांस पर लगवा दिया. पता चला कि रूबी के फोन से एक अन्य फोन नंबर पर भी कई बार बात की गई थी. सिपाही योगेश आया संदेह के घेरे में पुलिस ने उक्त नंबर को ट्रैस किया, तो पता चला, वह नंबर सिपाही योगेश का है. थानाप्रभारी ले उस नंबर पर बात की और योगेश को थाना रजबपुर आने को कहा. योगेश ने थानाप्रभारी से कहा, ‘‘मैं बिलारी थाने में तैनात हूं, बताइए क्या बात करनी है?’’

‘‘कुछ पूछताछ करनी है, जो फोन पर नहीं हो सकती?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

इस के बाद योगेश थाना रजबपुर पहुंच गया. थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह ने उस से पूछा, ‘‘योगेश, क्या तुम नरेंद्र कुमार को जानते हो?’’

‘‘हां सर, वह तो मेरा किराएदार है. वह अपनी पत्नी रूबी के साथ मेरे यहां रहता है. लेकिन पिछले कुछ समय से वह नहीं आ रहा है. उस के कमरे में ताला लगा हुआ है.’’ उस ने बताया.

‘‘पता है, वह कहां है?’’

‘‘सर, मैं तो अपनी ड्यूटी पर बिलारी चला जाता हूं, मुझे कुछ नहीं मालूम.’’

‘‘देखो योगेश, तुम पुलिस में हो. यह तो जानते ही होगे कि पुलिस के हाथ कितने लंबे होते हैं. हमें तुम्हारे और रूबी के फोन की काल डिटेल्स से पता चल चुका है कि रूबी से तुम्हारी लंबीलंबी बातें होती रहती हैं. तुम उसे अपने साथ घुमानेफिराने भी ले जाते थे. इसलिए अपने आप ही बता दो कि नरेंद्र कहां है?’’

‘‘सर, आजकल वह मुझे दिखाई नहीं दे रहा है. दिखाई दिया तो जरूर आप को बताऊंगा.’’ बातचीत के दौरान योगेश के होश उडे़ हुए थे. थानाप्रभारी ने योगेश से फिर कहा, ‘‘योगेश, अब तुम पुलिस की गिरफ्त में हो. अगर सच बता दोगे तो हम तुम्हारे बचाव का रास्ता भी ढूंढ लेंगे.’’

थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह को उसी समय एक मामले में दबिश में जाना था, इसलिए उन्होंने पहरेदार (संतरी) को बुला कर कहा कि ये पुलिस हिरासत में है. इसे हवालात में डाल दो. मैं इस से बाद में बात करूंगा. इतना कह कर वह थाने से बाहर चले गए. थाने में एसएसआई ओमपाल सिंह मौजूद थे. योगेश ने उन्हें बताया कि साहब मैं स्टाफ का आदमी हूं. इंचार्ज साहब को मेरे बारे में कुछ गलतफहमी हो गई है. इस पर एसएसआई ओमपाल सिंह ने कहा, ‘‘देखो योगेश, साहब बहुत सुलझे हुए अफसर हैं. जो भी बात है, उन्हें सचसच बता दो, इसी में तुम्हारी भलाई है. उन्हें तुम्हारे व नरेंद्र की कथित रखैल रूबी के बारे में सब मालूम है.’’

इस पर भी योगेश कुछ नहीं बोला, वह उस समय घबराया हुआ था. थानाप्रभारी आधे घंटे बाद थाने लौटे तो उन्होंने योगेश से पूछताछ की. अंतत: वह टूट गया. उस ने जो कुछ उन्हें बताया, उसे सुन कर थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह के भी होश उड़ गए. योगेश ने उन्हें बताया कि नरेंद्र कुमार अब इस दुनिया में नहीं है. मैं ने रूबी व अपने 2 साथियों के साथ मिल कर उस की हत्या कर दी. हम ने उस की लाश थाना बिलारी के गांव अमरपुर काशी के एक कुएं में मिट्टी डाल कर दफन कर दी थी. इतना सुनते ही थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह ने सब से पहले इस की सूचना एसपी डा. विपिन टाडा को दी. चूंकि हत्यारों ने लाश दूसरे जिले (मुरादाबाद) में ठिकाने लगाई थी, इसलिए एसपी डा. विपिन टाडा ने फोन पर मुरादाबाद के एसएसपी अमित पाठक से बात कर नरेंद्र की लाश थाना बिलारी क्षेत्र के कुएं से बरामद कराने के लिए सहयोग मांगा.

मुरादाबाद के एसएसपी अमित पाठक ने सीओ (बिलारी) महेंद्र कुमार शुक्ला को केस के बारे में समझा कर अमरोहा पुलिस का सहयोग करने को कहा. नरेंद्र सिंह की लाश बरामद करने के लिए थाना रजबपुर (अमरोहा) की पुलिस आरोपी सिपाही योगेश को उसी बिलारी थाने में ले कर पहुंची, जहां उस की तैनाती थी. योगेश को पुलिस कस्टडी में देख कर वहां सभी चौंके. इस के बाद सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला, थानाप्रभारी (बिलारी) गजेंद्र त्यागी और एसआई उमेश कुमार यादव को ले कर अमरपुर काशी में उस सूखे कुएं पर पहुंचे, जहां नरेंद्र कुमार की लाश फेंक कर ऊपर से मिट्टी डाली गई थी.

कई घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ने रात में ही 25 फीट गहरे कुएं से नरेंद्र का शव निकलवा लिया. शव की शिनाख्त मृतक की पत्नी वालेश व उस के पिता समरपाल सिंह ने कर दी. योगेश ने बताए 2 साथियों के नाम थाना रजबपुर पुलिस को योगेश ने हत्या में शामिल अपने 2 दोस्तों के नाम पहले ही बता दिए थे. लिहाजा पुलिस ने योगेश की निशानदेही पर अमरपुर काशी गांव के ही 2 युवकों वीरपाल और विशेष सैनी को हिरासत में ले लिया. इस हत्याकांड में नरेंद्र कुमार की प्रेमिका रूबी अग्रवाल भी शामिल थी. पुलिस ने उसे भी हिरासत में ले लिया. चारों आरोपियों से रजबपुर थाना पुलिस ने विस्तार से पूछताछ की तो उन्होंने नरेंद्र कुमार की हत्या की जो कहानी बताई, वह प्रेम प्रसंग की बुनियाद पर गढ़ी हुई निकली—

नरेंद्र कुमार मूलत: अमरोहा (ज्योतिबा फुले नगर) के थाना रजबपुर के पास स्थित गांव शकरपुर का रहने वाला था. उस के पिता समरपाल सिंह किसान थे. पिता ने सन 2003 में नरेंद्र की शादी अमरोहा जिले के ही कस्बा धनौरा के निकटवर्ती गांव नेकपुर की वालेश के साथ कर दी थी. वालेश स्वास्थ्य विभाग में आशा वर्कर थी. नरेंद्र की घरगृहस्थी ठीक चल रही थी. समय के साथ पर वह एक बेटी व 2 बेटों का पिता बन गया था. उस की सब से बड़ी बेटी 13 साल की थी. नरेंद्र दबंग युवक था. उस की अमरोहा के पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल से घनिष्ठता थी. वह एक तरह से उन का बौडीगार्ड बन कर रहता था. पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल का गजरौला में ‘मेला रेस्टोरेंट’ है, जहां कुछ समय के लिए दिल्ली आनेजाने वाली रोडवेज की बसें रुकती हैं.

इसी रेस्टोरेंट पर नरेंद्र ने जनरल स्टोर खोल ली थी. अपनी दुकान चलाने के अलावा वह पूरे दिन रेस्टोरेंट की देखभाल करता था. उस का धंधा अच्छा चल रहा था. इस रेस्टोरेंट में बने उड़द और खीर बहुत प्रसिद्ध थे. इसी दौरान नरेंद्र का संपर्क रूबी अग्रवाल से हुआ था. रूबी अग्रवाल अकसर उस रेस्टोरेंट पर खाना खाने आती थी. वह मूलत: मुजफ्फरनगर निवासी सुरेश अग्रवाल की बेटी थी. उस के 2 भाई थे. उस के बड़े भाई की शादी गजरौला में हुई थी. शादी के बाद वह गजरौला के बस्ती मोहल्ले में रहने लगा था, जबकि दूसरा भाई पानीपत में रहता था.

रूबी अग्रवाल की शादी हसनपुर निवासी उमेश कुमार अग्रवाल के बेटे संजीव अग्रवाल से हुई थी. रूबी अग्रवाल शुरू से ही खुले विचारों वाली पढ़ीलिखी युवती थी. उसे घर में रहने के बजाय बाहर घूमनाफिरना पसंद था. जबकि पति ऐसा नहीं चाहता था, इसलिए रूबी पति को पसंद नहीं करती थी. वह गजरौला में रहने वाले अपने भाई के पास गई तो उसे पता चला कि मेला रेस्टोरेंट की उड़द और खीर बहुत स्वादिष्ट होती है. जब वह उस रेस्टोरेंट पर गई तो उस की मुलाकात नरेंद्र कुमार से हुई. पहली मुलाकात में ही वह नरेंद्र के मन को भा गई. उस की ससुराल से गजरौला 14 किलोमीटर दूर था, इसलिए वह अकसर रेस्टोरेंट पर जा कर नरेंद्र से मिलने लगी.

रूबी को उस के ससुराल वालों ने कई बार समझाया, लेकिन उस ने अपनी आदत नहीं छोड़ी. उधर नरेंद्र से दोस्ती हो जाने के बाद रूबी की उस से नजदीकियां भी बढ़ गईं. एक तरह से रूबी नरेंद्र पर पूरी तरह फिदा हो गई थी. नरेंद्र के लिए उस ने अपने पति तक को छोड़ने का फैसला कर लिया था. कई बार वह नरेंद्र के साथ रेस्टोरेंट पर ही रुक जाती थी. इस बात को ले कर नरेंद्र व रूबी के ससुराल वालों के बीच कई बार झगड़ा भी हुआ. बात थाने तक पहुंची तो रूबी ने साफ कह दिया कि उस का पति नरेंद्र है. वह उसी के साथ रहेगी. समाज के लोगों ने पंचायत कर दोनों को काफी समझाया लेकिन दोनों में से कोई भी नहीं माना.

घरपरिवार तक छोड़ दिया था रूबी के लिए नरेंद्र और रूबी के संबंधों की जानकारी नरेंद्र के पिता और उस की पत्नी वालेश को भी हो गई थी. दोनों ने उसे बहुत समझाया लेकिन नरेंद्र रूबी का साथ छोड़ने को राजी नहीं हुआ. इस पर उन्होंने लड़झगड़ कर रेस्टोरेंट पर चल रही उस की दुकान भी बंद करवा दी. तब नरेंद्र घर रहने लगा तो रूबी उस के घर पहुंच गई. तब भी घर वालों ने काफी हंगामा किया. इतना ही नहीं नरेंद्र के पिता समरपाल रूबी को थाना रजबपुर ले गए. रूबी ने थाने में भी कह दिया कि वह नरेंद्र को हरगिज नहीं छोड़ेगी. पुलिस ने भी समझाबुझा कर उसे भेज दिया तो वह फिर नरेंद्र के घर ही चली गई.

इस के बाद नरेंद्र रूबी को ले कर गजरौला में किराए का कमरा ले कर रहने लगा. तब रूबी की ससुराल वाले वहां पहुंच गए. उन्होंने रूबी और नरेंद्र से झगड़ा किया. चूंकि रूबी ने अपने पति संजीव अग्रवाल से कानूनन तलाक नहीं लिया था, लिहाजा रूबी की ससुराल वाले थाने पहुंच गए. संजीव अग्रवाल की शिकायत पर गजरौला पुलिस ने नरेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर के उसे जेल भेज दिया. करीब 3 महीने बाद उसे जमानत मिली. यह बात करीब 11 साल पहले की है. जेल से बाहर आने के बाद नरेंद्र फिर से रूबी के साथ रहने लगा. उस की खातिर उस ने अपना घरबार बीवीबच्चों तक को छोड़ दिया था. उस की पत्नी वालेश बहुत परेशान रहने लगी. वह बारबार पति के पास आ कर झगड़ती थी, पर नतीजा कुछ नहीं निकला.

आए दिन के झगड़ों से तंग आ कर नरेंद्र ने मुरादाबाद के थाना मझोला क्षेत्र में स्थित कांशीराम नगर में किराए पर एक कमरा ले लिया. यह मकान उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही योगेश कुमार का था. नरेंद्र अकसर अपने गांव शकरपुर आताजाता रहता था. नरेंद्र शराब पीने का शौकीन था. कुछ ही दिनों में नरेंद्र और योगेश के बीच दोस्ती हो गई. इस के बाद दोनों की घर में ही शराब की महफिल जमने लगी. रूबी खूबसूरत थी. वह योगेश से भी बातें कर लेती थी. योगेश उसे भाभी कहता था और उस से कभीकभी मजाक भी कर लेता था. रूबी उस की बातों का बुरा नहीं मानती थी. इस से योगेश का हौसला बढ़ता गया. वह उसे चाहने लगा.

एक बार बातचीत के दौरान योगेश कुमार ने रूबी को झूठ बोलते हुए बताया, ‘‘भाभी, मैं कुंवारा हूं और मुझे तो बस तुम्हारी जैसी हसीन बीवी चाहिए.’’

जबकि हकीकत यह थी कि वह शादीशुदा था. उस की पत्नी मेरठ के गांव में स्थित ससुराल में एक बच्चे के साथ रहती थी. अपनी तारीफ सुन कर रूबी खुश हुई. धीरेधीरे योगेश ने रूबी को अपनी लच्छेदार बातों में फांस लिया. फिर एक दिन ऐसा भी आया कि योगेश और रूबी के बीच शारीरिक  संबंध बन गए. एक बार शुरुआत हुई तो यह सिलसिला शुरू हो गया. मौका मिलते ही दोनों हसरतें पूरी कर लेते थे. किसी तरह नरेंद्र को योगेश व रूबी के संबंधों का पता चला तो उस ने रूबी से बात की. रूबी ने साफ कह दिया कि अब तुम्हारा मेरा कोई साथ नहीं है. मेरा पीछा छोड़ कर तुम अपनी घरगृहस्थी देखो. मैं ने योगेश से शादी का मन बना लिया है, क्योंकि वह भी कुंवारा है और अपना घर भी बसाना चाहता है. यह बात घटना से एक साल पहले की थी.

नरेंद्र ने योगेश से इस संबंध में बात की. योगेश ने कहा, ‘‘देखो नरेंद्र, अब तुम रूबी का साथ छोड़ कर अपने घर चले जाओ, क्योंकि रूबी अब मेरी है.’’

इस बातचीत के बाद नरेंद्र ने योगेश को दबंगई दिखाते हुए कहा, ‘‘योगेश, तुम मुझे नहीं जानते. मेरे ऊपर पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल का हाथ है. तुम्हें 2 मिनट में उठवा लूंगा.’’

इस के बाद दोनों में झगड़ा इतना बढ़ गया कि मारपीट तक हो गई. उसी दौरान नरेंद्र ने योगेश से कह दिया था कि मैं ने रूबी के चक्कर में अपना घरबार सब कुछ छोड़ा है. तुम मेरे और रूबी के बीच से नहीं हटे तो अंजाम बुरा होगा. योगेश ने उस की धमकी को गंभीरता से नहीं लिया. क्योंकि उसे इस बात का घमंड था कि वह पुलिस में है और नरेंद्र उस का कुछ नहीं कर सकता.  बहरहाल, अब योगेश रूबी को ले कर खुलेआम घूमने लगा. रूबी योगेश के प्यार में पागल थी, क्योंकि वह एक तो सरकारी नौकर था और दूसरे वह उस की हर जरूरत को पूरा कर रहा था.

नरेंद्र की धमकी से डर गया था योगेश एक दिन नरेंद्र ने योगेश से कहा, ‘‘योगेश, तुम मान जाओ, वरना मैं तुम्हारी शिकायत पुलिस के आला अफसरों से कर दूंगा.’’

अधिकारियों से शिकायत की बात सुन कर योगेश सहम गया. यह बात योगेश ने रूबी को बता दी. तब योगेश ने रूबी से अपने घर में बात करनी बंद कर दी. अब उन्होंने बाहर मिलने की प्लानिंग कर ली. रूबी ब्यूटीपार्लर का काम भी जानती थी. वह मोहल्ले की औरतों से यह कह कर घर से निकल जाती थी कि वह ब्यूटीपार्लर के काम के सिलसिले में बाहर जा रही है. नरेंद्र आए तो बता देना. इस के बाद रूबी अपने कथित प्रेमी योगेश के साथ होटलों में रात गुजारती थी. नरेंद्र जब कमरे पर लौटता तो रूबी को न देख कर वह खून का घूंट पी कर रह जाता था. उधर रूबी ने योगेश को बता दिया था कि नरेंद्र दबंग है. वह किसी से डरता नहीं है. रूबी ने नरेंद्र की दबंगई के तमाम किस्से योगेश को बताते हुए कहा कि नरेंद्र नाम के इस कांटे को तुम जल्दी से निकाल फेंको वरना यह बारबार चुभ कर नासूर बना देगा. यह सलाह योगेश को सही लगी. वैसे भी नरेंद्र सिपाही योगेश पर भारी पड़ रहा था.

रूबी व योगेश ने एक योजना बना ली. घटना से 2 महीने पहले योगेश से नरेंद्र की मुलाकात हुई थी. योगेश ने नरेंद्र से कहा कि देखो नरेंद्र भाई, मेरा ट्रांसफर बाहर किसी दूसरे जिले में होने वाला है. मैं अब यहां से चला जाऊंगा. तुम लोग आराम से रहना. इस के बाद उस ने नरेंद्र से मिलनाजुलना छोड़ दिया. रूबी ने भी नरेंद्र से मीठीमीठी बातें करनी शुरू कर दीं. नरेंद्र को दोनों के प्लान का जरा सा भी आभास नहीं हुआ. वैसे भी रूबी का योगेश के साथ रहने पर नरेंद्र अपने गांव अपनी पत्नी के पास चला गया था. रूबी उस से कभीकभी फोन पर बात कर लेती थी.

27 सितंबर, 2019 को नरेंद्र के पास रूबी का फोन आया. उस ने कहा कि तुम मुरादाबाद आ जाओ तो नरेंद्र ने कहा कि मुझे वालेश की दवा के लिए नजीबाबाद (बिजनौर) जाना है. तुम जोया आ जाओ तो साथ चलेंगे. रूबी जोया पहुंच गई. वहां नरेंद्र उस का इंतजार कर रहा था. दोनों जोया में बिजनौर जाने वाली बस का इंतजार कर रहे थे. ठीक उसी समय सिपाही योगेश योजनानुसार कार ले कर वहां आ गया. उस ने पूछा, ‘‘कहां जा रहे हो?’’

नरेंद्र ने कहा कि मुझे दवा लेने नजीबाबाद जाना है. बस का इंतजार कर रहे हैं तो योगेश बोला, ‘‘आओ, तुम दोनों गाड़ी में बैठो. मैं तुम्हें नजीबाबाद छोड़ दूंगा. क्योंकि मुझे भी कोटद्वार जाना है.’’

नरेंद्र से रूबी बोली, ‘‘चलो, बैठो. पता नहीं बस कब तक आएगी.’’

रूबी और नरेंद्र कार में बैठ गए. रास्ते में योगेश बोला, ‘‘नरेंद्र, अब तो मुझ से आप को कोई शिकायत नहीं है?’’

नरेंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया. योजना के मुताबिक रास्ते में वीरपाल और विशेष सैनी भी मिल गए, जो योगेश के दोस्त थे. योगेश ने उन्हें भी कार में बैठा लिया. फिर उस ने नरेंद्र से पूछा, ‘‘थोड़ीथोड़ी ले लें क्या?’’

नरेंद्र ने तबीयत ठीक न होने की बात कह कर इनकार कर दिया. पर बारबार कहने पर वह पीने को तैयार हो गया. कार में ही मार डाला नरेंद्र को नरेंद्र और योगेश नूरपुर-मुरादाबाद मार्ग के एक ढाबे पर बैठ कर शराब पीने लगे. योगेश ने योजनानुसार कम पी, नरेंद्र को ज्यादा पिलाई. इस के बाद सभी ने ढाबे पर खाना खाया. नशा चढ़ने पर नरेंद्र कार में सो गया. मौका पा कर रूबी ने नरेंद्र के पैर पकडे़ और योगेश व उस के साथियों ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी. इस के बाद वह गाड़ी ले कर मुरादाबाद की तरफ चलते हुए लाश ठिकाने लगाने की जगह देखने लगे. पर उन्हें कहीं मौका नहीं मिला. कई जगह लाश फेंकने की कोशिश भी की गई, लेकिन उसी समय कोई न कोई व्यक्ति दिखाई दे जाता था.

सिपाही की गाड़ी में वीरपाल और विशेष सैनी भी बैठे हुए थे. इन दोनों ने कहा, ‘‘दीवानजी, ऐसे लाश कहीं फेंकेंगे तो पकड़े जाएंगे, क्योंकि दिन का समय है. यह रात में ही ठिकाने लग सकती है.’’

इस के बाद चारों रात होने का इंतजार करने लगे. वे फिर अमरोहा लौटे. शाम हो चुकी थी. वीरपाल और विशेष थाना बिलारी के गांव अमरपुर काशी के रहने वाले थे. उन के कहने पर योगेश लाश सहित कार को अमरपुर काशी ले गया. विशेष ने योगेश से कहा कि नरेंद्र की लाश को इधरउधर डालेंगे तो पकड़े जा सकते हैं. मेरे निजी नलकूप का 25 फीट गहरा कुआं है. नरेंद्र की लाश उसी में डाल देते हैं. ऊपर से मिट्टी डाल देंगे तो किसी को पता भी नहीं चलेगा. इस के बाद योगेश, वीरपाल और विशेष ने मिल कर नरेंद्र की लाश कुएं में डाल दी. ऊपर से कुएं में कूड़ाकरकट डाल दिया. फिर दूसरे दिन एक ट्रौली मिट्टी भी डलवा दी. इस तरह लाश ठिकाने लगा कर सभी निश्चिंत हो गए थे.

योजना को अंजाम देने के बाद योगेश अपनी ड्यूटी पर थाना बिलारी चला गया. रूबी अपने घर चली गई थी. पुलिस ने आरोपी योगेश कुमार, रूबी, वीरपाल और विशेष सैनी से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

 

 

Crime Story : मिट्टी का तेल डालकर प्रेमिका को जलाया

Crime Story : नंदिनी के साथ जो हुआ, वह बहुत दुखदायी था. इस मामले में पुलिस और प्रशासन दोनों ने नंदिनी के दर्द को नहीं समझा. काश! समय रहते उस की बात सुन कर आरोपियों पर सख्ती की गई होती तो…

देश भर में विकास हो रहा है, रेल की पटरियों पर इंजन की तरह दौड़ता विकास गांव, कस्बों, शहरों और महानगरों का विकास कागजों पर खड़ी इमारतों, सड़कों और कारखानों का विकास शहरों, महानगरों और कस्बों में भले ही दिख जाए, लेकिन गांवों में कम ही जगहों पर विकास के चरण कमल पड़े नजर   आएंगे. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 60 किलोमीटर दूर उन्नाव जिले का गांव हिंदूपुर ऐसा ही गांव है जहां अभी तक विकास नाम की योजना की हवा नहीं गई है. हिंदूपुर में गरीबों की बस्ती दूर से ही नजर आती है. गांव में प्रवेश के 2 रास्ते हैं. सड़क भी गांव से कुछ दूर है. गांव के एक ओर 20 साल की नंदिनी (बदला हुआ नाम) का घर है. वह 5 बहनों और 2 भाइयों में सब से छोटी थी.

विश्वकर्मा बिरादरी की नंदिनी का घर गांव के गरीब परिवारों में आता था. कच्ची दीवारें और धान के पुआल से बने छप्पर वाला घर. नंदिनी पढ़ाई में तेज थी. उत्तर प्रदेश में जब सपा का शासन था और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे तब उसे मेधावी छात्रा के रूप में कक्षा 12 पास करने के बाद लैपटौप उपहार में दिया गया था. नंदिनी के घर के सामने ही एक मंदिर बना था, यहीं पर शिवम त्रिवेदी का अकसर उठनाबैठना होता था. शिवम गांव के प्रभावशाली ब्राह्मण परिवार का था. वह घंटों तक यहीं अपना समय गुजारता रहता था. शिवम नंदिनी के घरपरिवार की मदद भी करता रहता था. इस मदद की एक बड़ी वजह नंदिनी थी, जिसे वह मन ही मन पसंद करने लगा था. यह बात शिवम के परिवार के लोगों को पसंद नहीं थी. जैसेजैसे गांव में शिवम और नंदिनी की दोस्ती आगे बढ़ रही थी, शिवम के परिजन उस का विरोध करने लगे थे.

एक दिन की बात है शिवम और नंदिनी मंदिर पर बैठ कर बातें कर रहे थे. यह बात शिवम की मां को पता चली तो वह अपने छोटे बेटे शुभम के साथ वहां आई और लड़की को बुराभला कहना शुरू कर दिया. शिवम के घर वालों ने जब नंदिनी को भलाबुरा कहना शुरू किया तो नंदिनी ने भी उन्हें इसी तरह जवाब दिया. यह बात शिवम के भाई शुभम को बुरी लगी. उस ने नंदिनी के साथ झगड़ा शुरू कर दिया. झगड़े के दौरान शिवम पूरी तरह चुप रहा. झगड़े के बाद शिवम के घर वालों ने उसे नंदिनी से दूर रहने की सलाह दी. शिवम ने भी घर वालों की बात मानते हुए नंदिनी से बात करनी बंद कर दी. कुछ दिन शिवम नंदिनी से दूर रहा भी, लेकिन यह दूरी ज्यादा समय तक बनी नहीं रह पाई. नंदिनी शिवम से शादी करना चाहती थी, इसलिए वह शिवम पर शादी करने का दबाव बनाने लगी.

शिवम घर वालों और नंदिनी के बीच फंसा रहा. आखिर नंदिनी के दबाव में 19 जनवरी, 2018 को नोटरी शपथपत्र के जरिए शिवम त्रिवेदी ने नंदिनी से शादी कर ली. दोनों ने शादी तो कर ली लेकिन अब उन के सामने समस्या यह थी कि गांव और घर के लोगों को अपनी शादी की बात कैसे बताएं. शादी के बाद दोनों अपने गांव से दूर रायबरेली शहर के साकेतनगर में रहने लगे. जब घर वालों को पता चला तो रायबरेली पहुंच कर उन्होंने शिवम को समझाया. शिवम घर वालों के दबाव में आ गया. इस के बाद वह शादी से मुकरने लगा. बस यहीं से नंदिनी और शिवम के बीच रिश्ते बिगड़ने लगे. मामला थाना, कोर्टकचहरी तक पहुंच गया.

पुलिस और प्रशासन ने नहीं सुनी फरियाद शिवम पर कानूनी शिकंजा कसा जाने लगा तो वह परेशान हो गया. नंदिनी ने शिवम पर जो आरोप लगाए उस के अनुसार झगड़े के बाद शिवम सुलह और शादी कराने के लिए उसे एक मंदिर में ले गया. लेकिन मंदिर में पहले से कई लड़के मौजूद थे. शिवम और उस के साथियों ने वहीं पर नंदिनी के साथ गैंगरेप किया. इतना ही नहीं, उन्होंने उसे चुप रहने की धमकी भी दी. अपने साथ हुए इस धोखे पर नंदिनी ने भी सोच लिया कि वह अब चुप नहीं बैठेगी. उस ने मामला पुलिस में ले जाने और शिवम को सजा दिलाने की ठान ली.

12 दिसंबर, 2018 को नंदिनी रायबरेली जिले की लालगंज कोतवाली पहुंची और आपबीती सुना कर शिवम व उस के साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की दरख्वास्त की, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया. तब 8 दिन बाद 20 दिसंबर को नंदिनी ने एसपी रायबरेली को रजिस्टर्ड डाक से अपना शिकायती पत्र भेजा. इस की भी कोई सुनवाई नहीं हुई. पुलिस उस की शिकायत पर काररवाई क्यों नहीं कर रही थी, यह बात वह नहीं समझ सकी. पुलिस से निराश हो कर पीडि़त नंदिनी ने रायबरेली में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट की कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र दिया. 10 जनवरी, 2019 को मजिस्ट्रैट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया.

26 फरवरी, 2019 को पुलिस को कोर्ट की अवमानना का नोटिस दिया गया. तब पुलिस ने दबाव में आ कर मजबूरी में 5 मार्च, 2019 को मुकदमा दर्ज किया. फिर भी कोई काररवाई नहीं हुई तो नंदिनी ने मुख्यमंत्री से शिकायत की. फलस्वरूप 22 सितंबर को शिवम ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस के देर से मुकदमा दर्ज करने और धीमी गति से जांच के चलते शिवम को जल्दी जमानत मिल गई. जमानत देने के पहले कोर्ट ने नंदिनी से कोई संपर्क नहीं किया. 30 नवंबर, 2019 को जब शिवम जेल से छूट कर गांव पहुंचा तो उस के जेल से आने की खुशी में मिठाइयां बंटने लगीं. नंदिनी को हैरानी हुई कि शिवम इतनी जल्दी जमानत पर जेल से बाहर कैसे आ गया.

उस ने अपने परिवार से यह बात बताई और कहा कि कल वह रायबरेली जा कर अपने वकील से मिल कर पता करेगी कि यह कैसे हो गया है? रायबरेली जाने के लिए नंदिनी को सुबह 5 बजे कानपुर से रायबरेली जाने वाली टे्रन पकड़नी थी. नंदिनी नहीं पहुंच पाई स्टेशन 3 दिसंबर, 2019 की सुबह नंदिनी ट्रेन पकड़ने के लिए अपने घर से निकली. घर से स्टेशन करीब 2 किलोमीटर दूर था. नंदिनी सुबह 4 बजे जब अपने घर से निकली. तब जाड़े का समय था. रास्ते में अंधेरा भी था. नंदिनी के पिता ने उसे स्टेशन छोड़ने के लिए कहा तो उस ने बूढ़े पिता की परेशानी को देखते हुए मना कर दिया. वह अकेली ही घर से निकल गई.

गांव से स्टेशन के रास्ते में कुछ रास्ता ऐसा था, जो सुनसान रहता था. इसी जगह पर नंदिनी पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी गई. नंदिनी खुद को बचाने के लिए मदद के लिए दौड़ रही थी. जली हालत में खुद को बचाने के लिए नंदिनी दौड़ी तो आग और भड़क गई. उस के कपड़े जल कर उस के जिस्म से चिपक गए थे. रास्ते में एक जगह कुछ लोग दिखे तो नंदिनी वहीं गिर पड़ी. नंदिनी के कहने पर रास्ते में मिले लोगों ने डायल 112 को फोन कर के जानकारी दी. बुरी तरह जली नंदिनी ने वहां पहुंची पुलिस को और बाद में प्रशासन को बताया कि उस के ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर जलाने वाले शिवम और उस के साथी थे.

90 फीसदी जली हालत में नंदिनी को पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ले जाया गया. लेकिन उस की गंभीर हालत को देखते हुए उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. 3 दिन जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद आखिर नंदिनी ने दम तोड़ दिया. पूरे इलाज के दौरान नंदिनी की बहन और मां लखनऊ से ले कर दिल्ली तक साथ रहीं. उन्होंने उसे तिलतिल कर मरते देखा. नंदिनी के पिता को दुख है कि घटना के दिन वह उसे स्टेशन तक छोड़ने नहीं गए. नंदिनी खुद अपनी लड़ाई लड़ रही थी. इसलिए वह बेटी के साथ नहीं गए थे. इस के पहले वह उसे स्टेशन तक छोड़ने जाते थे. शिवम द्विवेदी और दूसरे आरोपियों के परिवार के लोग इस घटना के संबंध में तर्क देते हुए कहते हैं कि गुनाह उन के घर वालों ने नहीं किया. उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है.

परिवार के लोग कहते हैं कि नंदिनी को जलाने की घटना जिस समय की है, उस समय उन के लड़के घरों में सो रहे थे. पुलिस ने उन को सोते समय घर से पकड़ा है. अगर उन्होंने अपराध किया होता तो आराम से घर में नहीं सो रहे होते. शिवम के घर वालों का कहना है कि जब नंदिनी को शिवम से मिलने पर रोक लगा दी गई थी तो उस ने रेप का मुकदमा लिखा कर शिवम और उस के करीबियों को जेल भिजवाने की धमकी दी थी. उन्होंने नंदिनी और शिवम के रायबरेली में रहने की बात से खुद को अनजान बताया. इन के समर्थक बताते हैं कि जेल से शिवम के छूटने के बाद लड़की ने उसे फिर से जेल भिजवाने की धमकी दी. इस के बाद खुद ही मिट्टी का तेल डाल कर खुद को जलाया. ये लोग सोशल मीडिया पर  इस बात का प्रचार भी कर रहे हैं कि शिवम को फंसाने और जेल भिजवाने के नाम पर लड़की 15 लाख रुपए मांग रही थी. इस में से 7 लाख रुपए शिवम के परिवार वाले दे भी चुके थे.

लड़की के भाई का कहना है कि उस की बहन पढ़लिख कर परिवार की मदद करना चाहती थी. शिवम के संपर्क में आ कर उसे इस स्थिति का सामना करना पड़ा. कानून मानता है कि मरते समय दिया बयान सत्य माना जाता है. सवाल यह उठता है कि नंदिनी जली अवस्था में निर्दोषों को क्यों फंसाएगी? उस समय तक नंदिनी यह समझ चुकी थी कि उस की मौत तय है. वह सब से पहले अपने साथ हुई घटना की गवाही देना चाहती थी, जिस की वजह से उस ने पुलिस और प्रशासन को बयान दिया. नंदिनी और शिवम के बीच विवाह का नोटरी शपथपत्र हर बात को साफ करता है. नंदिनी के परिजन पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि पुलिस ने किसी हालत में उन की मदद नहीं की.

रेप के मामलों में उन्नाव आया चर्चा में उत्तर प्रदेश उन्नाव रेप को ले कर पहले भी चर्चा में रहा है. भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समय मामला राजनीतिक था. अब दूसरी घटना में लड़की को जलाने के बाद मामला राजनीतिक कम सामाजिक ज्यादा बन गया है. एक तरफ समाज के लोग लड़की और उसे दिए गए संस्कारों को जिम्मेदार मान रहे हैं. उन्नाव में रेप की दूसरी घटना के चर्चा में आने के बाद विपक्ष को सत्तापक्ष को घेरने का पूरा मौका मिल गया. लोकसभा में बहस और हंगामा कर मांग की गई कि महिला सुरक्षा दिवस मनाया जाए. उत्तर प्रदेश की विधानसभा के बाहर प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव धरने पर बैठ गए. उन की पार्टी ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार को घेरने का काम किया.

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा लखनऊ के 2 दिन के दौरे से वक्त निकाल कर उन्नाव में नंदिनी के घर वालों से मिलने गईं. इस से एक बार फिर रेप की घटना चर्चा में आ गई. प्रदेश सरकार ने मामले को हलका करने के लिए लड़की के घर वालों को मुआवजा देने का काम किया. योगी सरकार ने नंदिनी के घर वालों को 25 लाख रुपए की आर्थिक मदद, गांव में 2 मकान और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया. उन्नाव के मामले के बाद तमाम ऐसी घटनाएं प्रकाश में आने लगीं. इन घटनाओं से समाज की हकीकत का पता चलता है. इस बार रेप कांड सामाजिक है. समाज उन्नाव जिले की घटना को प्रेम प्रसंग मान कर दरकिनार कर रहा है. नंदिनी की मौत के बाद गांव का माहौल गमगीन है. पूरा गांव 2 पक्षों में बंट चुका है. दोनों पक्षों की अलगअलग राय भी है.

नंदिनी के मरने के बाद उस के घर वालों ने नंदिनी का दाह संस्कार या उसे नदी में प्रवाहित करने से इनकार कर दिया. उन्होंने प्रशासन से कहा कि एक बार जल चुकी नंदिनी का दोबारा दाहसंस्कार नहीं करेंगे. इस की जगह उसे दफनाया जाएगा. ऐसा ही हुआ. सरकार ने पूरे मामले में लापरवाही बरतने

वाले दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया.

—नंदिनी और उस से जुड़े नाम बदले हुए हैं

 

Agra Crime : रस्सी से गला घोंट कर पत्नी की हत्या की, फिर तिरपाल में लपेट कर जला डाला

Agra Crime : रशादी के कुछ सालों के बाद पतिपत्नी के रिश्तों में ठंडापन आने लगता है. समझदार लोग उस समय को अपनी बातों से गरमा कर बोरियत से निजात पा लेते हैं. लेकिन पुष्कर और शिवानी जैसे लोगों की कमी नहीं है, जो अपने ही जीवनसाथी की कमतरी ढूंढने लगते हैं. फलस्वरूप…

विश्वप्रसिद्ध ताज नगरी आगरा के थाना शाहगंज क्षेत्र के मोहल्ला पथौली निवासी पुष्कर बघेल की शादी अप्रैल, 2016 में आगरा के सिकंदरा की सुंदरवन कालोनी निवासी गंगासिंह की 21 वर्षीय बेटी शिवानी के साथ हुई थी. पुष्कर दिल्ली के एक प्रसिद्ध मंदिर के सामने बैठ कर मेहंदी लगाने का काम कर के परिवार की गुजरबसर करता था. बीचबीच में उस का आगरा स्थित अपने घर भी आनाजाना लगा रहता था. पुष्कर के परिवार में कुल 3 ही सदस्य थे. खुद पुष्कर उस की पत्नी शिवानी और मां गायत्री. 20 नवंबर, 2018 की बात है. सुबह जब पुष्कर और उस की मां सो कर उठे तो शिवानी घर में दिखाई नहीं दी. उन्होंने सोचा पड़ोस में कहीं गई होगी.

लेकिन इंतजार करने के बाद भी जब शिवानी वापस नहीं आई तब उस की तलाश शुरू हुई. जब वह कहीं नहीं मिली तो पुष्कर ने अपने ससुर गंगासिंह को फोन कर के शिवानी के बारे में पूछा. यह सुन कर गंगासिंह चौंके. क्योंकि वह मायके नहीं आई थी. उन्होंने पुष्कर से पूछा, ‘‘क्या तुम्हारा उस के साथ कोई झगड़ा हुआ था?’’

इस पर पुष्कर ने कहा, ‘‘शिवानी के साथ कोई झगड़ा नहीं हुआ. सुबह जब हम लोग जागे, शिवानी घर में नहीं थी. इधरउधर तलाश किया, जब वह कहीं नहीं मिली तब फोन कर आप से पूछा.’’

बाद में पुष्कर को पता चला कि शिवानी घर से 25 हजार की नकदी व आभूषण ले कर लापता हुई है. ससुर गंगासिंह ने जब कहा कि शिवानी मायके नहीं आई है तो पुष्कर परेशान हो गया. कुछ ही देर में मोहल्ले भर में शिवानी के गायब होने की खबर फैल गई तो पासपड़ोस के लोग पुष्कर के घर के सामने जमा हो गए.  उस ने पड़ोसियों को शिवानी द्वारा घर से नकदी व आभूषण ले जाने की बात बताई. इस पर सभी ने पुष्कर को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी. जब शिवानी का कहीं कोई सुराग नहीं मिला, तब पुष्कर ने 23 नवंबर को थाना शाहगंज में शिवानी की गुमशुदगी दर्ज कराई. पुष्कर ने पुलिस को बताया कि शिवानी अपने किसी प्रेमी से मोबाइल पर बात करती रहती थी.

दूसरी तरफ शिवानी के पिता गंगासिंह भी थाना पंथौली पहुंचे. उन्होंने थाने में अपनी बेटी शिवानी के साथ ससुराल वालों द्वारा मारपीट व दहेज उत्पीड़न की तहरीर दी. गंगासिंह ने आरोप लगाया कि ससुराल वाले दहेज में 2 लाख रुपए की मांग करते थे. कई बार शिवानी के साथ मारपीट भी कर चुके थे. उन्होंने ही उन की बेटी शिवानी को गायब किया है. साथ ही तहरीर में शिवानी के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी जताई गई. गंगासिंह ने पुष्कर और उस के घर वालों के खिलाफ थाने में दहेज उत्पीड़न व मारपीट का केस दर्ज करा दिया. जबकि पुष्कर इस बात का शक जता रहा था कि शिवानी जेवर, नकदी ले कर किसी के साथ भाग गई है.

पुलिस ने शिवानी के रहस्यमय तरीके से गायब होने की जांच शुरू कर दी. थाना शाहगंज और महिला थाने की 2 टीमें शिवानी को आगरा के अछनेरा, कागारौल, मथुरा, राजस्थान के भरतपुर, मध्य प्रदेश के मुरैना, ग्वालियर में तलाशने लगीं. लेकिन शिवानी का कहीं कोई पता नहीं चल सका. काफी मशक्कत के बाद भी शिवानी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. कई महीनों तक पुलिस शिवानी की तलाश में जुटी रही फिर भी उसे कुछ हासिल नहीं हुआ. शिवानी का लापता होना पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया था. लेकिन पुलिस के अधिकारी इसे एक बड़ा चैलेंज मान रहे थे. पुलिस अधिकारी हर नजरिए से शिवानी की तलाश में जुटे थे, लेकिन शिवानी का कोई पता नहीं चल पा रहा था.

यहां तक कि सर्विलांस की टीम भी पूरी तरह से नाकाम साबित हुई. कई पुलिसकर्मी मान चुके थे कि अब शिवानी का पता नहीं लग पाएगा. सभी का अनुमान था कि शिवानी अपने किसी प्रेमी के साथ भाग गई है और उसी के साथ कहीं रह रही होगी. उधर गंगासिंह को इंतजार करतेकरते 6 महीने बीत चुके थे, पर अभी तक न तो बेटी लौट कर आई थी और न ही उस का कोई सुराग मिला था. ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा रहा था, त्योंत्यों गंगासिंह की चिंता बढ़ रही थी. शिवानी के साथ कोई अप्रिय घटना तो नहीं हो गई, इस तरह के विचार गंगासिंह के मस्तिष्क में घूमने लगे थे.

उन्होंने बेटी की खोज में रातदिन एक कर दिया था. रिश्तेनाते में भी जहां भी संभव हो सकता था, फोन कर के उन सभी से पूछा. उधर पुलिस ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था. लेकिन गंगासिंह ने हिम्मत नहीं हारी. इस घटना ने गंगासिंह को अंदर तक तोड़ दिया था. वह गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहे थे. न्याय न मिलता देख गंगासिंह ने प्रयागराज हाईकोर्ट की शरण ली. जिस के फलस्वरूप जुलाई 2019 में हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया. माननीय हाईकोर्ट ने आगरा के एसएसपी को कोर्ट में तलब कर के उन्हें शिवानी का पता लगाने के आदेश दिए. कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस हरकत में आई.

एसएसपी बबलू कुमार ने इस मामले को खुद देखने का निर्णय लेते हुए शिवानी के पिता गंगासिंह को अपने औफिस में बुला कर उन से शिवानी के बारे में पूरी जानकारी हासिल की. इस के बाद बबलू कुमार ने एक टीम का गठन किया. इस टीम में सर्विलांस टीम के प्रभारी इंसपेक्टर नरेंद्र कुमार, इंसपेक्टर (सदर) कमलेश कुमार, इंसपेक्टर (ताजगंज) अनुज कुमार के साथ क्राइम ब्रांच को भी शामिल किया गया था. पुलिस टीम ने अपनी जांच तेज कर दी. लापता शिवानी की तलाश में पुलिस की 2 टीमें उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान के जिलों में भेजी गईं. पुलिस ने शिवानी के मायके से ले कर ससुराल पक्ष के लोगों से जानकारियां जुटाईं. फिर कई अहम साक्ष्यों की कडि़यों को जोड़ना शुरू किया. शिवानी के पति पुष्कर के मोबाइल फोन की घटना वाले दिन की लोकेशन भी चैक की.

करीब एक साल तक पुलिस शिवानी की तलाश में जुटी रही. जांच टीम ने शिवानी के लापता होने से पहले जिनजिन लोगों से उस की बात हुई थी, उन से गहनता से पूछताछ की. इस से शक की सुई शिवानी के पति पर जा कर रुकने लगी थी.

जांच के दौरान पुष्कर शक के दायरे में आया तो पुलिस ने उसे थाने बुला लिया और उस से हर दृष्टिकोण से पूछताछ की. लेकिन ऐसा कोई क्लू नहीं मिला, जिस से लगे कि शिवानी के गायब होने में उस का कोई हाथ था. पुष्कर पर शक होने के बाद जब पुलिस ने उस से पूछताछ की तो वह कुछ नहीं बोला. तब पुलिस ने उस का नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर ली थी. नार्को टेस्ट कराने के डर से पुष्कर टूट गया और उस ने 2 नवंबर, 2019 को अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

पुष्कर दिल्ली में रहता था, जबकि उस की पत्नी शिवानी आगरा के शाहगंज स्थित अपनी ससुराल में रहती थी. वह कभीकभी अपने गांव जाता रहता था. उस की गृहस्थी ठीक चल रही थी. लेकिन शादी के 2 साल बाद भी शिवानी मां नहीं बनी तो इस दंपति की चिंता बढ़ने लगी.  पुष्कर ने पत्नी का इलाज भी कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इस के बाद बच्चा न होने पर दोनों एकदूसरे को दोषी ठहराने लगे. लिहाजा उन के बीच कलह शुरू हो गई. अब शिवानी अपना अधिकतर समय वाट्सऐप, फेसबुक पर बिताने लगी.  पुष्कर जब दिल्ली से घर आता तब भी वह उस का ध्यान नहीं रखती. वह पत्नी के बदले व्यवहार को वह महसूस कर रहा था. वह शिवानी से मोबाइल पर ज्यादा बात करने को मना करता था. लेकिन वह उस की बात को गंभीरता से नहीं लेती थी. इस बात को ले कर दोनों में अकसर झगड़ा भी होता था.

पुष्कर को शक था कि शिवानी के किसी और से नाजायज संबंध हैं. घर में कलह करने के अलावा शिवानी ने पुष्कर को तवज्जो देनी बंद कर दी तो पुष्कर ने परेशान हो कर शिवानी को ठिकाने लगाने का फैसला ले लिया. इस बारे में उस ने अपनी मां गायत्री और वृंदावन निवासी अपने ममेरे भाई वीरेंद्र के साथ योजना बनाई. योजनानुसार 20 नवंबर, 2018 को उन दोनों ने योजना को अंजाम दे दिया. उस रात जब शिवानी सो रही थी. तभी पुष्कर शिवानी की छाती पर बैठ गया. मां गायत्री ने शिवानी के हाथ पकड़ लिए और पुष्कर ने वीरेंद्र के साथ मिल कर रस्सी से शिवानी का गला घोंट दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद शिवानी की मौत हो गई.

हत्या के बाद पुष्कर की आंखों के सामने फांसी का फंदा झूलता नजर आने लगा. पुष्कर और वीरेंद्र सोचने लगे कि शिवानी की लाश से कैसे छुटकारा पाया जाए. काफी देर सोचने के बाद पुष्कर के दिमाग में एक योजना ने जन्म लिया. पकड़े जाने से बचने के लिए रात में ही पुष्कर ने शिवानी की लाश एक तिरपाल में लपेटी. फिर लाश को अपनी मोटरसाइकिल पर रख कर घर से 10 किलोमीटर दूर ले गया. वीरेंद्र ने लाश पकड़ रखी थी. वीरेंद्र और पुष्कर शिवानी की लाश को मलपुरा थाना क्षेत्र की पुलिया के पास लेदर पार्क के जंगल में ले गए, जहां दोनों ने प्लास्टिक के तिरपाल में लिपटी लाश पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी. प्लास्टिक के तिरपाल के कारण शव काफी जल गया था.

इस घटना के 17 दिन बाद मलपुरा थाना पुलिस को 7 दिसंबर, 2018 को लेदर पार्क में एक महिला का अधजला शव पड़ा होने की सूचना मिली. पुलिस भी वहां पहुंच गई थी. पुलिस ने लाश बरामद कर उस की शिनाख्त कराने की कोशिश की लेकिन शिनाख्त नहीं हो सकी. शिनाख्त न होने पर पुलिस ने जरूरी काररवाई कर वह पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. साथ ही उस की डीएनए जांच भी कराई.  पुष्कर द्वारा अपराध स्वीकार करने के बाद मलपुरा थाना पुलिस को भी बुलाया गया. पुष्कर पुलिस को उसी जगह ले कर गया, जहां उस ने शिवानी की लाश जलाई थी.

इस से पुलिस को यकीन हो गया कि हत्या उसी ने की है. मलपुरा थाना पुलिस ने 7 दिसंबर, 2018 को यह बात मान ली कि महिला की जो लाश बरामद की गई थी, वह शिवानी की ही थी. उस की निशानदेही पर पुलिस ने घटनास्थल से हत्या के सुबूत के रूप में पुलिया के नीचे कीचड़ में दबे प्लास्टिक के तिरपाल के अधजले टुकड़े, जूड़े में लगाने वाली पिन, जले और अधजले अवशेष व पुष्कर के घर से वह मोटरसाइकिल बरामद कर ली, जिस पर लाश ले गए थे. डीएनए जांच के लिए पुलिस ने शिवानी के पिता का खून भी अस्पताल में सुरक्षित रखवा लिया.

पुलिस ने पुष्कर से पूछताछ के बाद उस की मां गायत्री को भी गिरफ्तार कर लिया लेकिन वीरेंद्र फरार हो चुका था. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. जबकि हत्या में शामिल तीसरे आरोपी वीरेंद्र की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. पति और पत्नी के रिश्ते की नींव एकदूसरे के विश्वास पर टिकी होती है, कई बार यह नींव शक की वजह से कमजोर पड़ जाती है. इस के चलते मजबूत से मजबूत रिश्ता भी टूटने की कगार पर पहुंच जाता है या टूट कर बिखर जाता है. शिवानी के मामले में भी यही हुआ. काश! पुष्कर पत्नी पर शक न करता तो शायद उस का परिवार बरबाद न होता.

 

Hyderabad Crime : प्रेमी के साथ मिलकर मां का चुन्नी से घोंटा गला

Hyderabad Crime : बेटियां मांबाप का मानसम्मान होती हैं, लेकिन वही बेटियां अगर गलत राह पर उतर जाएं तो न केवल परिवार की इज्जत के लिए खतरा बन जाती हैं, बल्कि कई बार तो…

श्री निवास रेड्डी अपनी पत्नी और एकलौती बेटी कीर्ति रेड्डी के साथ हैदराबाद (Hyderabad Crime) के ब्लौक हयातनगर स्थित मुनागानुरु गांव में रहते थे. वह एक ट्रक चालक थे. एक बार जब वह अपना ट्रक ले कर कामधंधे के लिए बाहर निकलते थे, तो हफ्तों तक घर नहीं लौट पाते थे. उन की ख्वाहिश थी कि वह अपनी बेटी को उच्चशिक्षा दिलाएं ताकि पढ़लिख कर वह किसी अच्छी सरकारी नौकरी में चली जाए. इसलिए वह अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते थे. बेटी कीर्ति रेड्डी से वह बेटे की तरह व्यवहार करते थे. उन्होंने बेटी को पूरी आजादी दे रखी थी. लेकिन उस की यही आजादी एक दिन उन के परिवार को बिखेर देगी, ऐसा उन्होंने कभी नहीं सोचा था.

19 अक्तूबर, 2019 की दोपहर के करीब 2 बजे कीर्ति रेड्डी अपने एक मित्र कोथा शशिकुमार के साथ थाना हयातनगर पहुंची. उस ने थाने में अपनी मां पल्लेरला रंजीता की गुमशुदगी दर्ज करवाई. शिकायत में कीर्ति रेड्डी ने अपनी मां की गुमशुदगी का जिम्मेदार अपने पिता श्रीनिवास रेड्डी को ठहराया. कीर्ति ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को बताया कि मां के प्रति उस के पिता का व्यवहार ठीक नहीं था. वह शराब पी कर जब घर लौटते थे तो मां के साथ लड़ाईझगड़ा और मारपीट करते थे. पिता के इसी व्यवहार से मां परेशान रहती थीं, जिस की वजह से 2 दिन पहले वह घर छोड़ कर चली गई. उस ने मां को काफी खोजा, लेकिन कहीं पता नहीं लग सका.

पुलिस ने कीर्ति की शिकायत पर गुमशुदगी दर्ज कर के काररवाई शुरू कर दी. इस घटना के 4-5 दिन बाद जब श्रीनिवास रेड्डी अपना ट्रक ले कर घर लौटे तो घर के दरवाजे पर ताला लटका मिला. ताला बंद देख वह समझ गए कि घर पर कोई नहीं है. पहले तो उन्होंने सोचा कि पत्नी और बेटी कहीं आसपास गई होंगी. वह वहीं पर उन के लौटने का इंतजार करने लगे. लेकिन जब वे काफी देर बाद भी नहीं लौटीं तो उन्हें चिंता हुई. उन्होंने आसपड़ोस के लोगों से अपने परिवार के बारे में पूछा तो पता चला कि उन के घर पर कई दिनों से ताला लटक रहा है. यह जान कर उन्हें झटका लगा. ऐसा कभी नहीं हुआ था कि उन की पत्नी और बेटी उन्हें बिना बताए कहीं गई हों. क्योंकि उन्हें यह बात अच्छी तरह मालूम थी कि वह कभी भी घर आ सकते थे. अगर वे कहीं जाती भी थीं तो उन्हें फोन कर जानकारी अवश्य देती थीं.

इस बीच उन की बेटी और पत्नी में से किसी का भी फोन उन के पास नहीं आया था. जब उन्होंने पत्नी का फोन मिलाया तो वह स्विच्ड औफ था. कई बार कोशिश करने के बाद जब बेटी कीर्ति रेड्डी से उन का संपर्क हुआ तो उस ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर उन के होश उड़ गए. कीर्ति ने बताया कि मां कई दिन पहले पता नहीं कहां चली गईं और वह कुछ काम से विशाखापट्टनम आई हुई है. 2 दिन बाद वह घर आएगी. कीर्ति ने यह भी बताया कि उस ने मां को तमाम संभावित जगहों पर तलाश किया, जब वह नहीं मिली तो थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी. बेटी की यह बात सुन कर श्रीनिवास रेड्डी के होश उड़ गए. वह समझ नहीं पा रहे थे कि पत्नी बिना बताए कहां और क्यों चली गई.

लिहाजा वह भी पत्नी को इधरउधर खोजने लगे. श्रीनिवास रेड्डी की समझ में यह भी नहीं आ रहा था कि जब मां लापता थी तो बेटी को उस की तलाश करनी चाहिए थी. आखिर ऐसा कौन सा जरूरी काम आ गया, जो वह विशाखापट्टनम चली गई. उस के विशाखापट्टनम जाने की बात उन के गले नहीं उतर रही थी. बहरहाल, 2 दिनों बाद कीर्ति रेड्डी जब घर वापस आई तो वह अपनी मां की गुमशुदगी को ले कर पिता से ही उलझ पड़ी. उस का कहना था कि उन के व्यवहार की वजह से मां घर छोड़ गई है. बेटी के इस आरोप से भी श्रीनिवास रेड्डी स्तब्ध रह गए. वह पत्नी की तलाश के लिए थाने के चक्कर लगाते रहे. पत्नी को गायब हुए 8 दिन बीत चुके थे, लेकिन उस का पता नहीं लग पा रहा था. इस से श्रीनिवास रेड्डी की चिंता बढ़ती जा रही थी. वह थाने के चक्कर लगालगा कर परेशान हो चुके थे. थाना पुलिस से आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल पा रहा था.

हार कर श्रीनिवास रेड्डी ने पुलिस कमिश्नर महेश भागवत से मुलाकात की. पुलिस कमिश्नर ने इस मामले को गंभीरता से लिया. उन के निर्देश पर एसीपी शंकर व हयाननगर क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर सतीश इस केस की जांच में जुट गए.  इंसपेक्टर सतीश ने श्रीनिवास रेड्डी के पड़ोसियों और जानपहचान वालों से पूछताछ करते हुए जब उन के परिवार को खंगाला तो कीर्ति रेड्डी शक के दायरे में आ गई. वह बारबार अपने बयान बदल रही थी. इसी दौरान जांच में यह बात भी पता चली कि वह अपनी मां के गायब होने के बाद विशाखापट्टनम गई ही नहीं थी. वह अपने प्रेमी और मंगेतर चिमूला बाल रेड्डी के घर में थी. यह बात श्रीनिवास रेड्डी को तब पता चली, जब चिमूला बाल रेड्डी के पिता कृष्णा रेड्डी श्रीनिवास रेड्डी को सहानुभूति देने उन के पास आए.

रहीसही कमी पल्लेरला रंजीता के मोबाइल फोन की लोकेशन ने पूरी कर दी. 23 अक्तूबर, 2019 तक कीर्ति रेड्डी और उस की मां रंजीता रेड्डी के फोन नंबरों की काल डिटेल्स खंगाली गई तो 19 अक्तूबर को दोनों के फोन की लोकेशन साथसाथ पाई गई. फिर 4 दिन बाद मां पल्लेरला रंजीता का मोबाइल फोन बंद हो गया था. अब सवाल यह था कि रंजीता के गायब होने के 4 दिनों बाद उन का मोबाइल कैसे चालू हुआ और वह किस ने चालू किया. इस शक के आधार पर क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर सतीश ने कीर्ति रेड्डी को पूछताछ के लिए अपने औफिस बुलाया. कीर्ति जब वहां पहुंची तो उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थीं. फिर भी वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही. खुद को वह मां की गुमशुदगी से अनभिज्ञ और निर्दोष

बताती रही. लेकिन इंसपेक्टर सतीश ने जब उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो वह प्रश्नों के जाल में उलझ गई और उसे सच बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा. उस ने अपनी मां की गुमशुदगी के ऊपर पड़ा रहस्यमयी परदा उठा दिया. कीर्ति रेड्डी के बयान और पुलिस जांच के अनुसार मल्लेरला रंजीता की गुमशुदगी की जो कहानी सामने आई, उस की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार से थी. 19 वर्षीय कीर्ति शोख और चंचल स्वभाव की थी. वह आधुनिक विचारों वाली फैशनपरस्त युवती थी. वह माइक्रोबायलौजी से बीएससी कर रही थी. कालेज में पढ़ाई के दौरान कई लड़के उसे चाहते थे. लेकिन वह जिस की तरफ आकर्षित थी, वह था उस का बचपन का साथी चिमूला बाल रेड्डी.

बाल रेड्डी उसी इलाके का रहने वाला था, जहां कीर्ति रहती थी. बाल रेड्डी के पिता कृष्णा रेड्डी सरकारी नौकरी में थे. उन का भरापूरा परिवार था. बाल रेड्डी बी.टेक. कर चुका था. बाल रेड्डी के पिता कृष्णा और कीर्ति के पिता श्रीनिवास दोनों दूर के रिश्तेदार भी थे. एक ही इलाके में रहने के कारण एकदूसरे के घरों में अकसर आनाजाना होता रहता था. कीर्ति से सीनियर होने के कारण बाल रेड्डी कभीकभी कीर्ति की पढ़ाई में उस की मदद कर दिया करता था. यही कारण था कि जब भी वह कीर्ति के घर आता था, कीर्ति उस के साथ हिलमिल जाती थी. इसी में कब बचपना गया और जवानी ने अपना रंगरूप बदला, यह दोनों को मालूम नहीं पड़ा. उन का दोस्ती जैसा रिश्ता खत्म हो गया, उस की जगह प्यार ने ले ली.

बाल रेड्डी खातेपीते परिवार का लड़का था. उस के पास मोटरसाइकिल थी, जिस पर वह अकसर कीर्ति रेड्डी को कालेज छोड़ देता था. यही कारण था कि कीर्ति उस के प्यार में कुछ इस तरह डूब गई कि वह अपनी सीमा और मर्यादा को भी भूल गई. किशोरावस्था में ही वह गर्भवती हो गई थी. यह भूल दोनों ने एक शादी समारोह के दौरान की थी. वे अपने एक रिश्तेदार की शादी में गए थे. उन्होंने जब शादी के पंडाल में दूल्हादुलहन को देखा तो उन के मन में एक हूक सी उठी. वे भी अपने आप को दूल्हा और दुलहन समझने लगे और सुहागरात की कल्पना कर दोनों एकांत में चले गए. उस रात एक तरफ दूल्हादुलहन जहां शादी के फेरों की रस्में पूरी कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कीर्ति और बाल रेड्डी एक अलग ही दुनिया में विचरण कर रहे थे. वे जिंदगी के खुमार और उन्माद में डूबे हुए थे.

इस उन्माद का नतीजा जब सामने आया तो उन के होश उड़ गए, जो उन के परिवार और समाज के लिए ठीक नहीं था. कीर्ति को गर्भ ठहर गया था. जब यह बात कीर्ति ने बाल रेड्डी को बताई तो वह भी घबराया. उन के सामने अब एक ही रास्ता था कि किसी भी तरह गर्भपात कराया जाए. बाल रेड्डी का एक दोस्त था काथा शशिकुमार. बाल रेड्डी ने कीर्ति का गर्भपात कराने के संबंध में उस से बात की. शशिकुमार ने अपनी पहचान वाले डाक्टर से कीर्ति का गर्भपात करा दिया. गर्भपात हो जाने के बाद कीर्ति रेड्डी ने अपनी इस मुसीबत से तो छुट्टी पा ली लेकिन अब वह एक दूसरी मुसीबत में फंस गई. काथा शशिकुमार उसी कालोनी में रहता था, जिस में कीर्ति रहती थी. कीर्ति के घर और शशिकुमार के घर के बीच की दूरी यही कोई 100 फुट थी. शशिकुमार एक खातेपीते परिवार का था. उस के पिता हैदराबाद के एक पौलिटेक्निक इंस्टीट्यूट में नौकरी करते थे.

बाल रेड्डी और शशिकुमार दोनों बचपन के मित्र थे. दोनों ने एक ही कालेज से ग्रैजुएशन की थी. बाल रेड्डी ने बी.टेक तो शशिकुमार ने एमबीए किया था. अच्छे दोस्त होने के नाते बाल रेड्डी ने कीर्ति के मामले में शशिकुमार की मदद ली थी. पड़ोसी होने के कारण शशिकुमार भी उतना ही कीर्ति के परिवार के करीब था, जितना बाल रेड्डी था. उस के दिल के एक कोने में भी कीर्ति की तसवीर थी. वह भी कीर्ति के करीब आना चाहता था. लेकिन कीर्ति ने उसे अपने पास आने का मौका नहीं दिया था, जिस की कसक उस के दिल में बनी हुई थी. गर्भपात कराने के दौरान उसे कीर्ति के पास आने का मौका मिल गया था. कीर्ति भी उस के अहसानों के नीचे दब गई थी. शशिकुमार ने कीर्ति से कहा कि वह उस के लिए भी अपने दिल के दरवाजे खोल दे अन्यथा वह गर्भपात वाली बात जगजाहिर कर देगा.

कीर्ति ने बदनामी के डर से शशिकुमार को भी अपने दिल में जगह दे दी. अब वह शशिकुमार के साथ भी मौजमस्ती करने लगी. समय अपनी गति से चल रहा था. कीर्ति अब कई परवानों की शमां बन चुकी थी. इन के बीच 3 साल का समय कैसे निकल गया, उन्हें इस का पता ही नहीं चला. कीर्ति रेड्डी अब उन्नीसवां बसंत पार कर चुकी थी. कीर्ति को ले कर उस की मां पल्लेरला रंजीता और पिता श्रीनिवास रेड्डी को उस की शादी की चिंता थी, वे उस के लिए एक वर की तलाश में जुटे थे. इस से पहले कि उन्हें कोई वर मिलता, उन्हें चिमूला बाल रेड्डी और कीर्ति के प्यार की बात पता चल गई. तब कीर्ति रेड्डी के पिता श्रीनिवास ने बाल रेड्डी के घर वालों से मिल कर उन की शादी तय कर दी.

शादी तय होने के बाद जब कीर्ति की मां को यह बात मालूम पड़ी कि कीर्ति के नाजायज संबंध बाल रेड्डी के अलावा कालेज और इलाके के कई और युवकों से भी हैं तो उन्हें बड़ा दुख हुआ. कीर्ति का सब से गहरा रिश्ता उन के पड़ोस में रहने वाले शशिकुमार से था. शशिकुमार अकसर उन के घर आताजाता था. वह घंटों कीर्ति के साथ रहता था. उसे महंगे गिफ्ट दिया करता था. यह जान कर कीर्ति की मां के पैरों तले से जमीन खिसक गई, उन्होंने इस के लिए कीर्ति को आड़े हाथों लिया और काफी खरीखोटी सुनाई. इतना ही नहीं, उन्होंने इस के लिए कीर्ति की पिटाई भी कर दी थी. यह बात कीर्ति और उस के प्रेमी शशिकुमार दोनों को चुभ गई. शशिकुमार की सहानुभूति पा कर कीर्ति ने अपनी आजादी और मां के बंधनों से मुक्त होने के लिए शशिकुमार के साथ मिल कर एक खतरनाक योजना बना ली.

इतना ही नहीं, पिता के बाहर जाने के बाद कीर्ति और शशिकुमार ने इस योजना को साकार भी कर दिया. घटना की रात जब शशिकुमार कीर्ति रेड्डी के घर आया तो उसे देख कीर्ति की मां पल्लेरला रंजीता ने काफी डांटाफटकारा और अपने घर से धक्का मार कर बाहर निकाल दिया. उन्होंने शशिकुमार को चेतावनी भी दी कि अगर उस ने उन के घर आने और कीर्ति से मिलने की कोशिश की तो उस से बुरा कोई नहीं होगा.  घर का माहौल गरम देख कर उस समय तो वह वहां से चला गया था, लेकिन जातेजाते शशिकुमार कीर्ति को इशारोंइशारों में समझा गया. आधी रात के बाद वह लौटा तो कीर्ति की मां पल्लेरला रंजीता अपने कमरे में जा कर सोने की कोशिश कर रही थी.

आहट सुन कर रंजीता ने करवट बदली तो शशिकुमार को देख चौंक गईं. इस के पहले कि वह अपने बिस्तर से उठ पातीं, उन की बेटी कीर्ति अपने हाथों में मिर्च का पाउडर ले आई और मां की आंखों में झोंक कर उन की छाती पर सवार हो गई. इस के बाद उस ने अपनी चुन्नी मां के गले में डाल दी. तभी शशिकुमार भी वहां आ गया. दोनों ने मिल कर उन का गला घोंट दिया. मां की हत्या करते समय कीर्ति मुसकराती रही. पल्लेरला रंजीता की हत्या के बाद दोनों ने चैन की सांस ली, क्योंकि अब उन्हें रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था. उन्होंने लाश चादर में लपेट कर घर के एक कोने में छिपा दी. दोनों ने पहले जम कर तनमन की प्यास बुझाई और फिर पुलिस थाने में जा कर शिकायत दर्ज करवा दी.

3 दिनों तक लाश घर में ही रही. जब उस से सड़ने की गंध फैलने लगी, तब उन्हें शव को ठिकाने लगाने की चिंता सताने लगी. सब से पहले उन्होंने आत्महत्या का रूप देने के लिए लाश के गले में रस्सी बांध कर उसे पंखे से लटकाने की कोशिश की, लेकिन तब तक लाश काफी डैमेज हो चुकी थी. इसलिए वह ऐसा नहीं कर सके. इस के बाद उन्होंने उसे बाहर ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया. 22 अक्तूबर, 2019 को शशिकुमार ने रात 12 बजे के करीब अपनी कार में पल्लेरला रंजीता की लाश रखी और कीर्ति के साथ उसे रमन्नापेट के नजदीक टुम्मालागूडेम के रेलवे ट्रैक पर ले गया. वहां दोनों ने कार से उतार कर लाश ट्रैक पर डाल दी ताकि ट्रेन हादसा लगे. जिस चादर में लाश लपेटी गई थी, वह चादर और रस्सी रास्ते में फेंक दी मां का मोबाइल फोन कीर्ति ने स्विच्ड औफ कर के अपने पास रख लिया था.

हत्या जैसे जघन्य अपराध के सारे सबूत मिटाने के बाद कीर्ति ने 23 अक्तूबर, 2019 को अपनी मां रंजीता रेड्डी के मोबाइल से अपनी होने वाली ससुराल में बाला के पिता कृष्णा से बात कर कहा, ‘‘समधीजी, मैं अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए नालकोंडा अस्पताल जा रही हूं, तब तक हमारी बेटी कीर्ति आप के यहां रहे तो आप को कोई परेशानी तो नहीं होगी.’’

कृष्णा रेड्डी ने समझा कि फोन नंबर उन की समधिन पल्लेरला रंजीता का है, इसलिए उन्होंने कह दिया कि बिटिया को आप बिना किसी चिंता के यहां भेज दो. इस के बाद 24-25 अक्तूबर को कीर्ति बाला रेड्डी के यहां रही. वहां जाने से पहले उस ने अपने पड़ोसियों व नातेरिश्तेदारों में यह अफवाह फैला दी थी कि उसे विशाखापट्टनम में कुछ काम के लिए जाना पड़ रहा है. कीर्ति और उस के दोस्त शशिकुमार ने पल्लेरला रंजीता की हत्या का जो फूलप्रूफ प्लान तैयार किया था, वह पुलिस जांचपड़ताल में खुल कर सामने आ गया. उधर रमन्नापेट रेलवे स्टेशन के नजदीक शशिकुमार ने पल्लेरला रंजीता की जो लाश फेंकी थी, वह जीआरपी ने बरामद की थी. लेकिन शिनाख्त न होने के कारण लाश का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया था.

कीर्ति रेड्डी से विस्तृत पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर सतीश ने 28 अक्तूबर, 2019 की सुबह कोथा शशिकुमार को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने नाबालिग उम्र में कीर्ति को गर्भवती करने वाले चिमूला बाल रेड्डी को रेप करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. तीनों अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उन के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 376 (2), 312 और 383एन के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया गया था. साथ ही पोक्सो एक्ट के अंतर्गत भी मामला दर्ज किया गया. तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

 

Love Crime : ब्लैकमेल से परेशान प्रेमी ने शादीशुदा प्रेमिका का किया कत्ल

Love Crime : कंचन शादीशुदा थी. उस के मायके वालों और ससुराल पक्ष, खासकर पति ने उसे हौस्टल में रह कर एएनएम का कोर्स करने की इजाजत दी तो उसे उन लोगों का मान रखना चाहिए था. लेकिन कंचन ने जब पूर्वप्रेमी आनंद किशोर के साथ रंगरलियां मनानी शुरू कीं तो…

सैफई थानाप्रभारी चंद्रदेव यादव अपने कक्ष में बैठे थे, तभी 30-32 साल का एक युवक उन के पास आया. वह घबराया हुआ था. उस के माथे पर भय और चिंता की लकीरें थीं. थानाप्रभारी के पूछने पर उस ने बताया, ‘‘सर, मेरा नाम अनुपम है. मैं मूलरूप से मैनपुरी जिले के किशनी थानांतर्गत गांव खड़ेपुर का रहने वाला हूं. मेरी पत्नी कंचन सैफई के चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैरा मैडिकल कालेज में हौस्टल में रह कर नर्सिंग की

पढ़ाई कर रही थी. 2 दिनों से वह लापता है. उस का कहीं भी पता नहीं चल

रहा है.’’

‘‘तुम ने पता करने की कोशिश की कि वह अचानक कहां लापता हो गई?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, मैं गुरुग्राम (हरियाणा) में प्राइवेट नौकरी करता हूं. कंचन से मेरी हर रोज बात होती थी. 24 सितंबर, 2019 को भी दोपहर करीब पौने 2 बजे मेरी उस से बात हुई थी. लेकिन उस के बाद बात नहीं हुई. मैं शाम से ले कर देर रात तक उस से बात करने की कोशिश करता रहा, पर उस का फोन बंद था.

‘‘आशंका हुई तो मैं सैफई आ कर हौस्टल गया तो पता चला कि कंचन 24 सितंबर को 2 बजे हौस्टल से यह कह कर निकली थी कि वह अस्पताल जा रही है. उस के बाद वह हौस्टल नहीं लौटी. इस के बाद मैं ने कंचन की हर संभावित जगह पर खोज की लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. सर, आप मेरी रिपोर्ट दर्ज कर मेरी पत्नी को खोजने में मदद करें.’’ अनुपम ने कहा. सैफई मैडिकल कालेज के हौस्टल से नर्सिंग छात्रा का अचानक गायब हो जाना वास्तव में एक गंभीर मामला था. थानाप्रभारी चंद्रदेव ने आननफानन में कंचन की गुमशुदगी दर्ज कर सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी. यह 26 सितंबर, 2019 की बात है.

इस के बाद थानाप्रभारी ने अनुपम से पूछा, ‘‘अनुपम, तुम्हारी पत्नी का चरित्र कैसा था? कहीं उस का किसी से कोई चक्कर तो नहीं चल रहा था?’’

‘‘नहीं सर, उस का चरित्र ठीकठाक था. वैसे भी वह अपना कैरियर दांव पर लगा कर किसी के साथ नहीं जा सकती.’’ अनुपम बोला, ‘‘सर, मुझे लगता है कि गलत इरादे से किसी ने उस का अपरहण कर लिया है.’’

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ यादव ने अनुपम से पूछा.

‘‘नहीं सर, मेरा किसी से झगड़ा नहीं है. इसलिए किसी पर शक भी नहीं है.’’ अनुपम ने बताया.

अनुपम से पूछताछ के बाद चंद्रदेव यादव सैफई मैडिकल कालेज पहुंचे. वहां जा कर उन्होंने हौस्टल की वार्डन भारती से पूछताछ की. भारती ने बताया कि कंचन का व्यवहार बहुत अच्छा था. वह अपनी साथी छात्राओं के साथ मिलजुल कर रहती थी. 24 सितंबर को दोपहर 2 बजे वह हौस्टल से अस्पताल गई थी, लेकिन अस्पताल नहीं पहुंची. हौस्टल और अस्पताल के बीच उस के साथ कुछ हुआ है. उस का मोबाइल फोन भी बंद है. अस्पताल प्रशासन भी अपने स्तर से कंचन की खोज में जुटा है. पर उस का पता नहीं चल पा रहा है.

थानाप्रभारी चंद्रदेव यादव ने मैडिकल कालेज में जांचपड़ताल की तो पता चला कालेज में कंचन ने वर्ष 2017-18 सत्र में एएनएम प्रशिक्षण हेतु नर्सिंग छात्रा के रूप में प्रवेश लिया था. वह इस साल अंतिम वर्ष की छात्रा थी. वह व्यवहारकुशल थी. यादव ने कंचन के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कई छात्राओं से पूछताछ की तो उन्होंने उसे बेहद शालीन और मृदुभाषी बताया. साथी छात्राओं ने इस बात को भी नकारा कि उस का किसी से विशेष मेलजोल था.

थानाप्रभारी ने हौस्टल वार्डन भारती के सहयोग से कंचन के हौस्टल रूम की तलाशी ली, लेकिन रूम में कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली. न ही कोई ऐसा प्रेमपत्र मिला, जिस से पता चलता कि उस का किसी से प्रेम संबंध था. हौस्टल व कालेज के बाहर कई दुकानदारों से भी यादव ने पूछताछ की लेकिन उन्हें कंचन के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कंचन कहां चली गई. थानाप्रभारी चंद्रदेव यादव ने कंचन की ससुराल खड़ेपुर जा कर उस के ससुराल वालों से पूछताछ की, लेकिन उन्होंने पुलिस का सहयोग नहीं किया. उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि कंचन ससुराल में बहुत कम रही है. वह या तो मायके में रही या फिर हौस्टल में. इसलिए उस के बारे में कुछ भी नहीं बता सकते.

कंचन का मायका इटावा जिले के थाना जसवंत नगर के गांव जगसौरा में था. यादव जगसौरा पहुंचे और कंचन के पिता शिवपूजन तथा मां उमादेवी से पूछताछ की. कंचन के मातापिता के लापता होने से दुखी तो थे, लेकिन उस के संबंध में जानकारी देने में संकोच कर रहे थे. जब वहां से भी कंचन के बारे में कोई काम की बात पता नहीं चली तो वह थाने लौट आए. अनुपम, पत्नी के लापता होने से बेहद परेशान था. जसवंत नगर, सैफई, इटावा जहां से भी अखबार के माध्यम से उसे अज्ञात महिला की लाश मिलने की खबर मिलती, वह वहां पहुंच जाता. धीरेधीरे 10 दिन बीत गए. लेकिन पुलिस कंचन का पता लगाने में नाकाम रही. अनुपम हर दूसरेतीसरे दिन थाना सैफई पहुंच जाता और पत्नी के संबंध में थानाप्रभारी से सवालजवाब करता. चंद्रदेव उसे सांत्वना दे कर भेज देते थे.

जब अनुपम के सब्र का बांध टूट गया तो वह एसपी (ग्रामीण) ओमवीर सिंह के औफिस पहुंचा. उस ने उन्हें अपनी पत्नी के गायब होने की बात बता दी. नर्सिंग छात्रा कंचन के लापता होने की जानकारी ओमवीर सिंह को पहले से ही थी. वह इस मामले की मौनिटरिंग भी कर रहे थे, ओमवीर सिंह ने अनुपम को आश्वासन दिया कि पुलिस जल्द ही उस की लापता पत्नी की खोज करेगी. आश्वासन पा कर अनुपम वापस लौट आया. एसपी (ग्रामीण) ओमवीर सिंह ने लापता कंचन को खोजने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम में उन्होंने सैफई थानाप्रभारी चंद्रदेव यादव, एसआई राजवीर सिंह, वासुदेव सिंह, विपिन कुमार, महिला एसआई अंजलि तिवारी, सर्विलांस प्रभारी सत्येंद्र सिंह, कांस्टेबल अभिनव यादव तथा सर्वेश कुमार को शामिल किया. टीम की कमान खुद एसपी (ग्रामीण) ओमवीर सिंह ने संभाली.

विशेष टीम ने सब से पहले कंचन के पति अनुपम तथा उस के मातापिता से पूछताछ की. इस के बाद टीम ने कंचन के मातापिता तथा पड़ोस के लोगों से जानकारी हासिल की. टीम को आशंका थी कि कंचन का अपहरण दुष्कर्म करने के लिए किया जा सकता है. अत: टीम ने क्षेत्र के इस प्रवृत्ति के कुछ अपराधियों को पकड़ कर उन से पूछताछ की, लेकिन कंचन के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी. सर्विलांस प्रभारी सत्येंद्र सिंह ने कंचन का मोबाइल फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिया, ताकि कोई जानकारी मिल सके पर मोबाइल फोन बंद होने से कोई जानकारी नहीं मिल सकी. इधर थानाप्रभारी, एसआई अंजलि तिवारी व टीम के अन्य सदस्यों के साथ मैडिकल कालेज पहुंचे और कंचन के हौस्टल रूम की एक बार फिर छानबीन की. गहन छानबीन के दौरान उन्हें वहां मोबाइल फोन के 2 खाली डिब्बे मिले. दोनों डिब्बे उन्होंने सुरक्षित रख लिए.

टीम ने सैफई मैडिकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव सुरेशचंद्र शर्मा से भी बात की. साथ ही अन्य कई लोगों से भी कंचन के संबंध में जानकारी जुटाई. कुलसचिव कहा कि वह स्वयं भी कंचन के लापता होने से चिंतित हैं, क्योंकि यह उन की प्रतिष्ठा का सवाल है. महिला एसआई अंजलि तिवारी ने कंचन के हौस्टल रूम से बरामद दोनों डिब्बों पर अंकित आईएमईआई नंबरों की जांच की तो पता चला कि इन आईएमईआई नंबरों के दोनों फोनों में 2 सिम नंबर काम कर रहे थे. एक फोन का सिम कंचन के नाम से खरीदा गया था, जबकि दूसरा आनंद किशोर पुत्र हाकिम सिंह, निवासी नगला महाजीत सिविल लाइंस इटावा के नाम से खरीदा गया था.

पुलिस टीम 12 अक्तूबर, 2019 की रात को आनंद किशोर के घर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गया तो पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. थाना सैफई ला कर आनंद किशोर से पूछताछ शुरू की गई. तब आनंद किशोर ने बताया, ‘‘सर, मैं किसी कंचन नाम की लड़की को नहीं जानता.’’

‘‘तुम सरासर झूठ बोल रहे हो. तुम कंचन को अच्छी तरह जानते हो. तुम्हारे द्वारा दिया गया मोबाइल फोन का डिब्बा उस के हौस्टल रूम से बरामद हुआ है. अब तुम्हारी भलाई इसी में है कि सारी सच्चाई बता दो वरना…’’

थानाप्रभारी चंद्रदेव का कड़ा रुख देख कर आनंद किशोर डर गया. वह बोला, ‘‘सर, यह सच है कि मैं ने ही बात करने के लिए उसे मोबाइल फोन खरीद कर दिया था.’’

‘‘तो बताओ कंचन कहां है? उसे तुम ने कहां छिपा कर रखा है?’’ यादव ने पूछा.

‘‘सर, कंचन अब इस दुनिया में नहीं है. मैं ने उस की हत्या कर दी है.’’ आनंद ने बताया.

‘‘क्याऽऽ कंचन को मार डाला?’’ वह चौंके.

‘‘हां सर, मैं ने कचंन की हत्या कर दी है. मैं जुर्म कबूल करता हूं.’’

‘‘उस की लाश कहां है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, लाश मैं ने भितौरा नहर में फेंक दी थी. फिर उस के दोनों मोबाइल तोड़ कर जगसौरा बंबा के पास फेंक दिए थे. खून से सने अपने कपड़े, शर्ट, पैंट तथा तौलिया भी वहीं जला दिए थे, चाकू भी वहीं फेंक दिया था.’’

इस के बाद पुलिस टीम ने आनंद किशोर की निशानदेही पर जगसौरा बंबा के पास से 2 टूटे मोबाइल तथा आलाकत्ल चाकू बरामद कर लिया. इस के बाद पुलिस टीम आनंद किशोर को साथ ले कर जसवंत नगर क्षेत्र की भितौरा नहर पहुंची. वहां आनंद किशोर ने नहर किनारे जलाए गए अधजले कपड़े बरामद करा दिए. हत्या में इस्तेमाल आनंद किशोर की ओमनी कार भी पुलिस ने उस के घर से बरामद कर ली. आनंद किशोर की निशानदेही पर पुलिस ने अब तक मोबाइल फोन, चाकू, अधजले कपडे़ तथा हत्या में प्रयुक्त कार तो बरामद कर ली थी, लेकिन कंचन की लाश बरामद नहीं हो पाई थी.

अत: लाश बरामद करने के लिए पुलिस आनंद को एक बार फिर भितौरा नहर ले गई, जहां उस ने लाश फेंकने की बात कही थी, वहां तलाश कराई. लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी कंचन की लाश बरामद नहीं हो सकी. चूंकि आनंद किशोर ने कंचन की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया था और हत्या में इस्तेमाल कार तथा चाकू भी बरामद करा दिया था, इसलिए थानाप्रभारी चंद्रदेव यादव ने गुमशुदगी के इस मामले को हत्या में तरमीम कर दिया और भादंवि की धारा 302, 201 के तहत आनंद किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

थानाप्रभारी ने कंचन की हत्या का परदाफाश करने तथा उस के कातिल को पकड़ने की जानकारी एसपी (ग्रामीण) ओमवीर सिंह को दे दी. उन्होंने पुलिस लाइंस सभागार में प्रैसवार्ता की और हत्यारोपी को मीडिया के सामने पेश कर नर्सिंग छात्रा कंचन की हत्या का खुलासा कर दिया. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के थाना जसवंतनगर क्षेत्र में एक गांव है जगसौरा. इसी गांव में शिवपूजन अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी उमा देवी के अलावा 2 बेटियां कंचन, सुमन तथा एक बेटा राहुल था. शिवपूजन खेतीकिसानी करते थे. उन की आर्थिक स्थिति सामान्य थी. शिवपूजन के तीनों बच्चों में कंचन सब से बड़ी थी. वह खूबसूरत तो थी ही, पढ़नेलिखने में भी तेज थी. उस ने गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कालेज जसवंतनगर से इंटरमीडिएट साइंस विषय से प्रथम श्रेणी में पास किया था.

कंचन पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी, जबकि उस की मां उमा देवी उस की पढ़ाई बंद कर के कामकाज में लगाना चाहती थी. उमा देवी का मानना था कि ज्यादा पढ़ीलिखी लड़की के लिए घरवर तलाशने में परेशानी होती है. लेकिन बेटी की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा. कंचन ने इटावा के महिला महाविद्यालय में बीएससी में दाखिला ले लिया. बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही एक रोज कंचन की निगाह अखबार में छपे विज्ञापन पर पड़ी. विज्ञापन द्रोपदी देवी इंटर कालेज नगला महाजीत सिविल लाइंस, इटावा से संबंधित था. कालेज को जूनियर सेक्शन में विज्ञान शिक्षिका की आवश्यकता थी.

विज्ञापन पढ़ने के बाद कंचन ने शिक्षिका पद के लिए आवेदन करने का निश्चय किया. उस ने सोचा कि पढ़ाने से एक तो उस का ज्ञानवर्द्धन होगा, दूसरे उस के खर्चे लायक पैसे भी मिल जाएंगे. कंचन ने अपने मातापिता से इस नौकरी के लिए अनुमति मांगी तो उन्होंने उसे अनुमति दे दी. कंचन ने द्रोपदी देवी इंटर कालेज में शिक्षिका पद हेतु आवेदन किया तो प्रबंधक हाकिम सिंह ने उस का चयन कर लिया. हाकिम सिंह इटावा शहर के सिविल लाइंस थानांतर्गत नगला महाजीत में रहते थे. यह उन का ही कालेज था. कंचन इस कालेज में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को विज्ञान पढ़ाने लगी. कंचन पढ़नेपढ़ाने में लगनशील थी, इसलिए कुछ महीने बाद वह बच्चों की प्रिय टीचर बन गई.

इसी स्कूल में एक रोज आनंद किशोर की निगाह खूबसूरत कंचन पर पड़ी. आनंद किशोर कालेज प्रबंधक हाकिम सिंह का बेटा था. हाकिम सिंह कालेज के प्रबंधक जरूर थे, लेकिन कालेज की देखरेख आनंद किशोर ही करता था. कंचन हुस्न और शबाब की बेमिसाल मूरत थी. उसे देख कर आनंद किशोर उस पर मोहित हो गया. वह उसे दिलोजान से चाहने लगा. कंचन यह जानती थी कि आनंद किशोर कालेज मालिक का बेटा है, इसलिए उस ने भी उस की तरफ कदम बढ़ाने में अपनी भलाई समझी. उसे लगा कि आनंद ही उस के सपनों का राजकुमार है. जब चाहतें दोनों की पैदा हुईं तो प्यार का बीज अंकुरित हो गया.

कंचन आनंद के साथ घूमनेफिरने लगी. इस दौरान उन के बीच अवैध संबंध भी बन गए. आनंद के प्यार में कंचन ऐसी दीवानी हुई कि घर भी देरसवेर पहुंचने लगी. मां उसे टोकती तो कोई न कोई बहाना बना देती. उमा देवी उस की बात पर सहज ही विश्वास कर लेती थी. लेकिन विश्वास की भी कोई सीमा होती है. कंचन जब आए दिन देरी से घर पहुंचने लगी तो उमा देवी का माथा ठनका. उस ने पति शिवपूजन को कंचन पर नजर रखने को कहा. शिवपूजन ने कंचन की निगरानी की तो जल्द ही सच्चाई सामने आ गई. उन्हें पता चला कि कंचन कालेज प्रबंधक के बेटे आनंद किशोर के प्रेम जाल में फंस गई है और उसी के साथ गुलछर्रे उड़ाती है.

शिवपूजन ने इस सच्चाई से पत्नी को अवगत कराया तो उमा देवी ने माथा पीट लिया. पतिपत्नी ने इस मुद्दे पर विचारविमर्श किया और बदनामी से बचने के लिए कंचन का विवाह जल्दी करने का निश्चय किया. तब तक कंचन बीएससी पास कर चुकी थी, इसलिए मां ने एक दिन उस से कहा, ‘‘कंचन, अब तेरा बीएससी पूरा हो चुका है. अब स्कूल में पढ़ाना छोड़ दे. प्राइवेट नौकरी से तेरा भला होने वाला नहीं है.’’

कंचन ने कुछ कहना चाहा तो मां ने बात साफ कर दी, ‘‘क्या यह सच नहीं है कि तेरे और आनंद के बीच गलत रिश्ता है. तुम दोनों के प्यार के चर्चे पूरे स्कूल में हो रहे हैं, इसलिए अब तू उस स्कूल में पढ़ाने नहीं जाएगी.’’

उमा देवी ने जो कहा था, वह सच था. स्कूल प्रबंधक हाकिम सिंह भी उसे सावधान कर चुके थे. पर अपने बेटे आनंद के कारण वह उसे स्कूल से निकाल नहीं पा रहे थे. चूंकि सच्चाई सामने आ गई थी. इसलिए कंचन ने भी स्कूल छोड़ने का मन बना लिया. उस ने इस बात से आनंद किशोर को भी अवगत करा दिया. चूंकि बेटी के बहकते कदमों से शिवपूजन परेशान थे, इसलिए उन्होंने कंचन के लिए घरवर की तलाश शुरू कर दी. कुछ महीने की भागदौड़ के बाद उन्हें एक लड़का पसंद आ गया. लड़के का नाम था अनुपम कुमार.

अनुपम कुमार के पिता रामशरण मैनपुरी जिले के किशनी थानांतर्गत गांव खड़ेपुर के रहने वाले थे. 3 भाईबहनों में अनुपम कुमार सब से बड़ा था. रामशरण के पास 5 बीघा जमीन थी. उसी की उपज से परिवार का भरणपोषण होता था. अनुपम गुरुग्राम (हरियाणा) में प्राइवेट नौकरी करता था. दोनों तरफ से बातचीत हो जाने के बाद 7 फरवरी, 2014 को धूमधाम से कंचन का विवाह अनुपम के साथ हो गया. शादी के एक महीने बाद जब अनुपम नौकरी पर चला गया तो कंचन मायके आ गई. कंचन कुछ दिन बाद आनंद से मिली तो उस ने शादी करने को ले कर शिकवाशिकायत की. कंचन ने उसे धीरज बंधाया कि जिस तरह वह उसे शादी के पहले प्यार करती थी, वैसा ही करती रहेगी.

कंचन जब भी मायके आती, आनंद के साथ खूब मौजमस्ती करती. आनंद किशोर के माध्यम से कंचन अपना भविष्य भी बनाना चाहती थी, वह मैडिकल लाइन में जाने के लिए प्रयासरत थी. दरअसल, वह एएनएम बनना चाहती थी. इधर पिता के दबाव में आनंद किशोर ने भी ऊषा नाम की खूबसूरत युवती से शादी कर ली. लेकिन खूबसूरत पत्नी पा कर भी आनंद किशोर कंचन को नहीं भुला पाया. वह उस से संपर्क बनाए रहा. आनंद किशोर के पास ओमनी कार थी. इसी कार से वह कंचन को कभी आगरा तो कभी बटेश्वर घुमाने ले जाता था. आनंद की पत्नी ऊषा को उस के और कंचन के नाजायज रिश्तों की जानकारी नहीं थी. वह तो पति को दूध का धुला समझती थी.

सन 2017-18 में कंचन का चयन बीएससी नर्सिंग के 2 वर्षीय एएनएम प्रशिक्षण के लिए हो गया. सैफई मैडिकल कालेज में कंचन एएनएम की ट्रैनिंग करने लगी. वह वहीं के हौस्टल में रहने भी लगी. कंचन का जब कहीं बाहर घूमने का मन करता तो वह प्रेमी आनंद को फोन कर बुला लेती थी. आनंद अपनी कार ले कर कंचन के मैडिकल कालेज पहुंच जाता, फिर दोनों दिन भर मस्ती करते. आनंद कंचन की भरपूर आर्थिक भी मदद करता था और उस की सभी डिमांड भी पूरी करता था. आनंद ने कंचन को एक महंगा मोबाइल भी खरीद कर दिया था. इसी मोबाइल से वह आनंद से बात करती थी.

कंचन आनंद किशोर से प्यार जरूर करती थी, लेकिन उस का अपने पति अनुपम कुमार से भी खूब लगाव था. वह हर रोज पति से बतियाती थी. अनुपम भी उस से मिलने उस के कालेज आताजाता रहता था. इस तरह कंचन ने एएनएम प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले लिया. कंचन और उस के प्रेमी आनंद किशोर के रिश्तों में दरार तब पड़ी, जब आनंद ने शहरी क्षेत्र में 5-6 लाख की जमीन अपनी पत्नी ऊषा के नाम खरीदी. यह जमीन खरीदने की जानकारी जब कंचन को हुई तो उस ने विरोध जताया, ‘‘आनंद, ऊषा तुम्हारी घरवाली है तो मैं भी तो बाहरवाली हूं. मुझे भी 3 लाख रुपए चाहिए.’’

धीरेधीरे कंचन आनंद को ब्लैकमेल करने पर उतर आई. अब जब भी दोनों मिलते, कंचन रुपयों की डिमांड करती. असमर्थता जताने पर कंचन दोनों के रिश्तों को सार्वजनिक करने तथा ऊषा को सब कुछ बताने की धमकी देती. कंचन की ब्लैकमेलिंग और धमकी से आनंद घबरा गया. आखिर उस ने इस समस्या से निजात पाने के लिए कंचन की हत्या करने की योजना बना ली. 24 सितंबर, 2019 की दोपहर आनंद किशोर ने कंचन को घूमने के लिए राजी किया. फिर पौने 2 बजे वह अपनी कार ले कर सैफई मैडिकल कालेज पहुंच गया. कंचन हौस्टल से यह कह कर निकली कि वह हौस्पिटल जा रही है. लेकिन वह आनंद किशोर की कार में बैठ कर घूमने निकल गई. आनंद उसे बटेश्वर ले कर गया और कई घंटे सैरसपाटा कराता रहा.

वापस लौटते समय कंचन ने उस से पैसों की डिमांड की. इस बात को ले कर दोनों में कहासुनी भी हुई. तब तक शाम के 7 बज चुके थे और अंधेरा छाने लगा था. आनंद किशोर ने अपनी कार जसवंतनगर क्षेत्र के भितौरा नहर पर रोकी और फिर सीट पर बैठी कंचन को दबोच कर उसे चाकू से गोद डाला. हत्या करने के बाद उस ने कंचन के शव को नहर में फेंक दिया. फिर वहीं नहर की पटरी किनारे खून से सने कपडे़ जला दिए. वहां से चल कर आनंद ने जगसौरा बंबा पर कार रोकी. वहां उस ने कंचन के दोनों मोबाइल फोन तोड़ कर झाड़ी में फेंक दिए. साथ ही खून सना चाकू भी झाड़ी में फेंक दिया. इस के बाद वह वापस घर आ गया. किसी को कानोंकान खबर नहीं लगी कि उस ने हत्या जैसी वारदात को अंजाम दिया है.

24 सितंबर को करीब पौने 2 बजे अनुपम कुमार की कंचन से बात हुई थी. उस के बाद जब बात नहीं हुई तो वह सैफई आ गया और कंचन की गुमशुदगी दर्ज कराई. सैफई पुलिस 18 दिनों तक लापता कंचन का पता लगाने में जुटी रही. उस के बाद हत्या का खुलासा हुआ. लेकिन कंचन की लाश फिर भी बरामद नहीं हुई. 14 अक्तूबर, 2019 को थाना सैफई पुलिस ने हत्यारोपी आनंद किशोर को इटावा कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट ए.के. सिंह की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. सैफई पुलिस कंचन की लाश बरामद करने के प्रयास में जुटी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 Facebook पर रिक्वेस्ट भेज पाकिस्तानी जासूस लड़कियां भारत के अधिकारियों को फंसाती

फेसबुक  (Facebook) और वाट्सऐप सोशल मीडिया के ऐसे आसान और सर्वसुलभ साधन हैं, जो परिचितों, मित्रों से निरंतर संपर्क बनाए रखने का जरिया तो हैं ही, लेकिन अब इन माध्यमों का उपयोग जासूसी के लिए भी होने लगा है. उत्तर प्रदेश एटीएस ने ऐसे ही मामले का भंडाफोड़ किया…   

दे के लिए रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनी में काम करने वाले विकास को इस बात का पता तक नहीं था कि वह एक विदेशी युवती के चक्कर में फंस कर हनीट्रैप का शिकार हो रहा है. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले तमाम भारतीयों की तरह विकास भी खाली समय में फेसबुक पर एक्टिव हो जाता था. एक दिन फेसबुक पर उसे एक पाकिस्तानी युवती सना और एक कश्मीरी युवती की फ्रैंड रिक्वेस्ट मिली. अधिकांश युवक लड़कियों से दोस्ती करना पसंद करते हैं. विकास को भी लड़कियों से दोस्ती करना अच्छा लगता था, इसलिए उस ने दोनों की फ्रैंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली.

उन युवतियों के विकास के अलावा भारत में अन्य दोस्त भी थे. दोनों लड़कियां अपने उन दोस्तों के बारे में भी विकास से बातें किया करती थीं. धीरेधीरे उन के बीच आपस में निजी बातें होने लगीं. दोस्ती, लाइफस्टाइल और एकदूसरे की हौबीज से शुरू हुई बातचीत में कभीकभी काम के बारे में ज्यादा बात हो जाती थी. विदेशी युवतियां बातचीत में इतनी माहिर थीं कि उन की हकीकत का पता ही नहीं चला. वह अकसर रात में ही बात करती थीं. ज्यादातर बातें आपसी पसंदनापसंद की होती थीं. विकास को यह पता भी नहीं था कि इस के पीछे कोई वजह हो सकती है. कुछ दिन की बातचीत से विकास को यह अनुभव हो रहा था कि उस की महिला दोस्त उस के कामकाज के बारे में ज्यादा बात करती हैं. एक बार पाकिस्तानी महिला दोस्त सना ने उस से पूछा, ‘‘विकास, तुम अपने औफिस में क्याक्या करते हो?’’

‘‘मैं औफिस में डिजाइन वर्क देखता हूं. यह बहुत महत्त्वपूर्ण होता है. इस में मैं कई लोगों को सहयोग भी करता हूं.’’ विकास ने उसे बताया.

‘‘अच्छा, कभी हमें भी अपने डिजाइन दिखाओ. हम भी देखें कि तुम कैसे डिजाइन करते हो?’’ सना ने कहा.

‘‘नहीं भाई, यह बहुत ही कौन्फीडेंशियल होता है. हर किसी को नहीं दिखाया जा सकता.’’ कह कर विकास ने बात टाल दी.

कुछ दिन शांत रह कर सना ने इधरउधर की बातें कीं और फिर एक दिन वह घूमफिर कर डिजाइन और उस के काम की चर्चा करने लगी. विकास यह तो समझ रहा था कि इस तरह की जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए, पर वह सना की बातों में फंस जाता था. सना को वह इतना पसंद करता था कि वह उस से बातचीत किए बिना अधूराअधूरा महसूस करता था. उन के बीच वीडियो कौलिंग भी होने लगी थी. सना की अंगरेजी भाषा पर अच्छी पकड़ थी. वह फर्राटेदार अंगरेजी बोलती थी. इस के अलावा जब वह विकास से बात करती तो उस की बातों में अपनत्व झलकता था. वह उसे अपने फोटो भी भेजती थी. अलगअलग रोमांटिक अंदाज में खींचे गए उस के फोटो विकास के दिल में हलचल पैदा कर देते थे.

विकास को उस पर किसी तरह की शंका हो, इस के लिए सना अपने घरपरिवार के बारे में भी विकास को बताती थी. उस ने खुद को अविवाहित बताया था. विकास से वह भारत की बहुत तारीफ करती थी. कई बार वह विकास को यह भी बता चुकी थी कि इस बार वह ईद के मौके पर भारत घूमने आएगी. तब दोनों खूब घूमेंगे और मस्ती करेंगे. सना की यह बात सुन कर विकास मानो आसमान में उड़ने लगा था. उस ने उसी समय तय कर लिया था कि वह सना को घुमाने कहांकहां ले कर जाएगा.

विकास ने उस से कहा, ‘‘सना, वैसे तो हमें लंबी छुट्टी नहीं मिलती, क्योंकि आजकल हम लोग बहुत ही खास मिशन पर काम कर रहे हैं. लेकिन जब तुम भारत आओगी तो हम तुम्हारे साथ घूमने जरूर चलेंगे. मेरे लिए तुम्हारे साथ घूमना सपने जैसा है.’’

‘‘विकास, तुम चिंता मत करो, मैं जब भारत आऊंगी तो दोनों खूब ऐश करेंगे. तुम्हें तो पता ही है कि भारत पाकिस्तान में रहने वालों की बात छोड़ दी जाए तो बाकी देशों के लोग कितना घूमते हैं. केवल हम लोगों के ही पास घूमने और मजे करने का समय नहीं होता

‘‘तुम चिंता मत करो, बस अपनी बातें मुझ से शेयर करते रहो. इस तरह बातचीत करते रहने से हमारी दोस्ती मजबूत होती रहेगी.’’ सना ने विकास को समझाने की पूरी कोशिश की. विकास को अब सना की बातों में सच्चाई नजर आने लगी थी. वह उस के और करीब जाने लगा. अब वह अपने औफिस की बातें भी सना से शेयर करने लगा. बीचबीच में वह अपने काम के फोटो भी सना से शेयर करता थासना भी विकास की पर्सनल बातों से अधिक औफिस के कामों में रुचि लेने लगी थी. सना के साथ ही साथ एक और लड़की से भी उस की दोस्ती हो गई, जिस का नाम निक्की था. निक्की खुद को कश्मीरी बताती थी.

निक्की की बातों का फोकस कश्मीर को ले कर चल रही भारत की गतिविधियों पर था. वह उसे अपने बहुत ही ग्लैमरस फोटो भेजा करती थी. कई बार तो विकास अपनी तरफ से डिमांड कर देता था कि इस तरह की फोटो भेजो. निक्की उसे उसी तरह के फोटो भेज देती थीनिक्की हर दिन नए अंदाज में फोटो भेजने में माहिर थी. ऐसे में विकास जल्दी ही उस के जाल में फंस गया. वह यह पूछा करती थी कि कश्मीर में युद्ध कैसे होता है. वहां के लिए कैसी तैयारी होती है. इन सवालों से विकास को यह समझ गया कि वह किसी जाल में फंसता जा रहा है, इसलिए उस ने निक्की से दूरी बनानी शुरू कर दी.

खुफिया विभाग को इस बात की जानकारी मिल रही थी कि कुछ विदेशी ताकतें भारत की महत्त्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए हनीट्रैप का सहारा ले रही हैं. इस के बाद खुफिया विभाग ने डेढ़ सौ से अधिक फेसबुक खातों को निशाने पर लिया. इस से कई ऐसे खाते मिले जो संदिग्ध लग रहे थे. उत्तर प्रदेश एटीएस और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने जासूसी के आरोप में 8 अक्तूबर, 2018 को डीआरडीओ के सीनियर इंजीनियर निशांत को गिरफ्तार किया. आरोप है कि उस ने ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट से अहम तकनीकी जानकारियां चोरी कर के अमेरिका और पाकिस्तान में हैंडलर्स तक पहुंचाईं. यह इंजीनियर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की एक महिला एजेंट के जाल में फंसा था

आरोपी के लैपटौप को चैक किया गया तो उस के लैपटौप में कई संवेदनशील जानकारियां मौजूद थीं. जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई कि वह पाकिस्तान के किसी व्यक्ति के साथ फेसबुक पर चैटिंग करता था. आरोपी निशांत अग्रवाल डीआरडीओ के ब्रह्मोस एयरोस्पेस में 4 साल से सीनियर सिस्टम इंजीनियर के पद पर कार्यरत था. वह हाइड्रोलिक न्यूमेटिक्स और वारहेड इंटीग्रेशन प्रोडक्शन डिपार्टमेंट के 40 लोगों की टीम को लीड करता थानिशांत ब्रह्मोस की सीएसआर और आर ऐंड डी ग्रुप का सदस्य भी था. फिलहाल वह ब्रह्मोस के नागपुर और पिलानी साइट्स के प्रोजेक्ट का कामकाज देख रहा था

पिछले साल यूनिट की ओर से उसे युवा वैज्ञानिक का पुरस्कार मिला था. वह बहुत प्रतिभाशाली था. निशांत पर आरोप लगा कि वह सोशल मीडिया से खुफिया एजेंसियों को जानकारी भेजता था. निशांत दिल्ली में मौजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की एजेंट के करीब था. उस की बातचीत पाकिस्तान के हैंडलर से भी होती थी. वह मिसाइल तकनीक की जानकारियां भेजने के लिए सोशल मीडिया के एनक्रिप्टेड कोडवर्ड और गेम के चैट जोन का इस्तेमाल कर रहा था. मामला प्रकाश में आने पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने मिसाइल से जुड़ी कौनकौन सी सूचनाएं लीक की हैं. इस से पहले पुलिस ने कानपुर से एक महिला को भी गिरफ्तार किया था.

आईजी (एटीएस) असीम अरुण की अगुआई में कुछ समय पहले एटीएस ने बीएसएफ की एक महिला सिपाही को गिरफ्तार किया था, जिसे फेसबुक से फंसाया गया था. जांच के दौरान 2 फेसबुक की आईडी मिली थीं, जिन के आधार पर एटीएस ने जांच करते हुए गुजरात में निशांत की डिटेल चैक की तो उस के लैपटौप में कई संवेदनशील जानकारियां मिलीं. निशांत रुढ़की का रहने वाला है. उस के पास अतिगोपनीय दस्तावेज थे. उस ने कितने दस्तावेज किसी और को दिए, इस पर जांच चल रही है. उस से फेसबुक के द्वारा संपर्क साधा गया था. वहां से जौब औफर करने के बाद उसे फंसाया गया

उस के पास 2 लड़कियों की फेसबुक आईडी थीं, जो फरजी पाई गईं. इन का आईपी एड्रेस पाकिस्तान का पाया गया. लड़कियों की आईडी के जरिए वह लोगों को अपने जाल में फांसता था. लड़कियों की इन आईडी से किनकिन लोगों से संपर्क किया गया था, पुलिस जांच करने लगी. सेना के जंगी बेड़े में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल परमाणु हथियारों के साथ हमला करने में सक्षम है. यह 3700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से 290 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता रखती है. कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के कारण यह राडार की पकड़ में भी नहीं आती. इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है

ब्रह्मोस मिसाइल को ले कर विदेशियों में एक डर बना हुआ है. ऐसे में वह इस बात की फिराक में रहते हैं कि भारत की रक्षा संबंधी ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल हो सके. आज के दौर में जासूसी करना सरल हो गया है. क्योंकि अब सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए जासूसी होने लगी है. फेसबुक और वाट्सऐप के जरिए लोगों को हनीट्रैप में फंसाना सरल हो गया है. ऐसे में जरूरी है कि कुछ ऐसे उपाय हों, जिस से हमारे खास लोगों को फंसाया जा सके.

   —कहानी में कुछ पात्रों के नाम परिवर्तित हैं

 

Uttar Pradesh Crime : कामोत्तेजक दवा खा कर बहन के साथ रेप किया और ईट से कुचल डाला

Uttar Pradesh Crime : इरफान और सादिया अपने 3 बच्चों के साथ चैन की जिंदगी गुजार रहे थे. तभी जहरीली हवा का झोंका आया, जिस ने इरफान के घर में 3 लाशें बिछा दीं. पुलिस जांच में पता चला कि जहरीली हवा का वह झोंका नसीरुद्दीन का हमराही बन कर आया था…

उस दिन नवंबर, 2019 की 25 तारीख थी. सुबह के 10 बज रहे थे. आजमगढ़ के गांव इब्राहीमपुर भलवारिया का रहने वाला अनीस अहमद गांव के बाहर अपने खेतों पर पहुंचा. फसल व ट्यूबवेल पर नजर डालने के बाद वह खेत के नजदीक ही मछलियां पकड़ने तालाब पर जा पहुंचा. उस ने तालाब में जाल डाला ही था कि उसे अपने दोस्त इरफान की याद आ गई. उस के खेत के पास ही इरफान का घर था. वह अकसर इरफान के साथ ही मछलियां पकड़ता था. अत: उस ने इरफान को बुलाने के लिए फोन किया. लेकिन काल रिसीव नहीं हुई. बारबार रिडायल करने पर भी जब इरफान ने उस की काल रिसीव नहीं की तो अनीस का माथा ठनका.

उस ने तालाब से जाल निकाल कर वहीं किनारे पर रख दिया और तेज कदम बढ़ाता हुआ इरफान के दरवाजे पर पहुंच गया. उस ने इरफान को कई आवाज लगाईं पर कोई जवाब नहीं मिला. इस से अनीस की धड़कनें तेज हो गईं. वह सोचने लगा कि इरफान जवाब क्यों नहीं दे रहा, अनीस ने उस के मकान के चारों तरफ बनी बाउंड्री से झांक कर देखा तो कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला था. वहीं से उसे दरवाजे के पास जमीन पर पड़ी इरफान की पत्नी सादिया का हाथ दिखा. किसी अनहोनी की आशंका भांप कर अनीस ने इस मामले की जानकारी गांव के प्रधान सलाहुद्दीन तथा इरफान के भाइयों को दे दी. सूचना मिलते ही प्रधान सलाहुद्दीन इरफान के घर आ गए. उन के साथ इरफान के भाई इमरान, इरशाद तथा इकबाल भी थे.

तीनों भाई घर के अंदर जा कर हकीकत जानना चाहते थे लेकिन प्रधान ने उन्हें रोक दिया और उसी समय मोबाइल से थाना मुबारकपुर पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी अखिलेश मिश्रा पुलिस टीम के साथ इब्राहीमपुर भलवारिया गांव पहुंच गए. इरफान का घर गांव के बाहर खेत पर था. तब तक वहां काफी भीड़ जुट गई थी. मिश्रा पुलिसकर्मियों के साथ घर के अंदर गए तो वहां का दृश्य बड़ा ही वीभत्स था. कमरे के अंदर 3 लाशें पड़ी थीं. एक मासूम बालक और बालिका घायल अवस्था में पडे़ थे. पूछताछ से पता चला कि मरने वालों में घर का मुखिया इरफान, उस की पत्नी सादिया तथा 4 माह की मासूम बेटी नूर थी. घायलों में इरफान का 5 वर्षीय बेटा अमन तथा 10 वर्षीया बेटी अमायरा थी.

दोनों को किसी भारी वस्तु से सिर व माथे पर प्रहार कर चोट पहुंचाई गई थी. दोनों घायल बच्चे इस हालत में नहीं थे कि पुलिस को कुछ बता सकें. उन्हें तत्काल इलाज के लिए मुबारकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया. थानाप्रभारी अखिलेश मिश्रा ने घटना स्थल का निरीक्षण शुरु किया. सादिया की लाश दरवाजे के पास नग्नावस्था में पड़ी थी. उस के सिर व चेहरे पर किसी भारी वस्तु से प्रहार किया गया था. उस की उम्र 32 वर्ष के आसपास थी और ऐसा लग रहा था जैसे उस के साथ बलात्कार किया गया हो. क्योंकि शव के पास ही प्रयोग में लाया गया कंडोम भी पड़ा था. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर उस कंडोम को सुरक्षित कर लिया.

एक साथ 3 कत्ल सादिया के पति इरफान का शव उस के बगल में जमीन पर पड़ा था. उस का सिर फटा हुआ था जिस से खून रिसा हुआ था. उस की मौत हो चुकी थी. इरफान की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी. इरफान की 4 माह की बेटी नूर का शव चारपाई पर पड़ा था. उस के शरीर पर चोट का निशान नहीं था. उस की मौत संभवत: दम घुटने से हुई थी. इस तिहरे हत्याकांड की खबर जंगल की आग की तरह आसपास के गांवों में फैली तो सैकड़ों लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई. भीड़ बढ़ती देख थानाप्रभारी अखिलेश मिश्रा ने सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी और मौके पर अतिरिक्त पुलिस फोर्स भेजने का अनुरोध किया.

कुछ ही देर बाद आजमगढ़ के एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह, एसपी (सिटी) पंकज कुमार पांडेय तथा सीओ (सदर) अकमल खां पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ गए. एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने मौकाएवारदात पर डौग स्क्वायड तथा फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण कर मृतक के भाइयों से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की. डौग स्क्वायड टीम ने खोजी कुत्ते श्वान फैंटम को घटनास्थल पर छोड़ा गया तो वह वहां की गंध सूंघ कर मकान के आसपास चक्कर लगाते हुए भीड़ में मौजूद एक युवक की ओर लपका. डर की वजह से वह युवक गांव की ओर भाग गया. वह गांव का ही था. पुलिस ने उस की पहचान तो कर ली, पर बिना किसी ठोस सबूत के उसे गिरफ्तार नहीं किया.

लोग हो गए आक्रोशित घटना स्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस अधिकारी जब तीनों शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेजने की तैयारी करने लगे तो वहां मौजूद भीड़ उत्तेजित हो उठी. भीड़ ने मांग की कि जब तक आईजी (जोन), डीआईजी या क्षेत्रीय प्रतिनिधि आ कर काररवाई का आश्वासन नहीं देते तब तक शवों को नहीं उठने देंगे. इस पर एसपी (सिटी) पंकज कुमार पांडेय तथा सीओ (सदर) अकमल खां ने भीड़ को काफी समझाया. पुलिस अधिकारियों के समझाने का उत्तेजित लोगों पर कोई असर नहीं पड़ा. वह अपनी मांग पर डंटे रहे. कानूनव्यवस्था न बिगड़ जाए, इसलिए एसपी (सिटी) पंकज कुमार पांडेय ने डीआईजी तथा क्षेत्रीय विधायक गुड्डू जमाली से फोन पर बात की और वस्तुस्तिथि से अवगत कराया.

कुछ देर बाद डीआईजी मनोज तिवारी तथा क्षेत्रीय विधायक गुड्डू जमाली घटनास्थल आ गए. डीआईजी मनोज तिवारी ने उत्तेजित लोगों को समझाया कि आप का गुस्सा जायज है, हम आप की भावनाओं की कद्र करते हैं. लेकिन आप लोग पुलिस की काररवाई में बाधा न पहुंचाएं. हम आप को आश्वासन देते हैं कि हत्यारा भले ही जमीन में छिपा हो, उसे खोज निकालेंगे और इस जघन्य हत्याकांड के लिए उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे. क्षेत्रीय विधायक गुड्डू जमाली ने मृतक के घरवालों को भरोसा दिया कि जो भी मदद संभव होगी वह मृतक के परिजनों को दिलाएंगे. साथ ही मृतक के बच्चों के पालनपोषण व पढ़ाई का खर्चा वह स्वयं उठाएंगे. विधायक के आश्वासन का भी लोगों ने स्वागत किया.

डीआईजी व विधायक के आश्वासन के बाद उत्तेजित लोग शांत हो गए. इस के बाद पुलिस ने तीनों शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिए. चूंकि पुलिस अधिकारियों को उपद्रव की आशंका थी. इसलिए उन्होंने गांव में भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात कर दी. रात में ही पोस्टमार्टम करा कर शव उन के भाइयों को सौप दिए गए. शवों को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच दफन करा दिया गया. एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह के सेवा काल का यह जघन्यतम हत्याकांड था. उन्होंने इस तिहरे हत्याकांड के खुलासे के लिए एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम को एसपी (सिटी) पंकज कुमार पांडेय की निगरानी में काम करना था. टीम में मुबारकपुर थानाप्रभारी अखिलेश कुमार मिश्रा, एसआई ए.के. सिंह, सीओ (सदर) अकमल खां और सर्विलांस टीम को शामिल किया गया.

गठित टीम ने सब से पहले घटना स्थल का निरीक्षण किया, फिर तीनों मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया. रिपोर्ट के मुताबिक सादिया की मौत सिर में घातक चोट लगने व ज्यादा खून बहने से हुई थी. उस के साथ दुष्कर्म भी किया गया था. जबकि उस के पति इरफान की मौत सिर तथा दिमाग की नशें फटने  से हुई थी. 4 माह की नूर की मौत दम घुटने से हुई थी.सोचविचार के बाद पुलिस टीम को लगा कि मामला अवैध रिश्तों का है. अत: टीम ने इस बाबत मृतक इरफान के भाई इरशाद व इमरान से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि सादिया मिलनसार थी. उस के घर किसी बाहरी व्यक्ति का आनाजाना नहीं था. वह अपने शौहर के अलावा किसी और को पसंद नहीं करती थी.

भाइयों के बयान से साफ  हो गया कि सादिया पाकसाफ औरत थी. उस के किसी गैर मर्द के साथ नाजायज ताल्लुकात नहीं थे. इस से लगने लगा कि किसी वहशी दरिंदे ने सादिया को अपनी हवस का शिकार बनाया और विरोध करने पर मार डाला. यह दरिंदा कौन हो सकता है? इस विषय पर जब टीम के सदस्यों ने मृतक के भाइयों से पूछताछ की तो इमरान ने बताया कि नटबस्ती का एक युवक ऐसा कुकृत्य कर सकता है. शक के आधार पर पुलिस टीम ने नटबस्ती के उस युवक को हिरासत में ले लिया और उस से कड़ाई से पूछताछ की, लेकिन उस ने जुर्म कबूल नहीं किया. उस ने कहा कि उसे रंजिशन फंसाया जा रहा है. वह बेकसूर है. पुलिस टीम किसी निर्दोष को नहीं फंसाना चाहती थी. चूंकि वह शक के दायरे में था इसलिए उसे छोड़ा भी नहीं गया.

अब तक अस्पताल में भरती मासूम अमन और अमायरा के स्वास्थ्य में काफी सुधार आ गया था. वह बयान दर्ज कराने की स्थिति में थे. पुलिस उन दोनों का बयान दर्ज करने स्वास्थ्य केंद्र पहुंची. उन का इलाज कर रहे डा. प्रदीप ने पुलिस को बताया कि दोनों के सिर पर चोट थी, जो अब काफी हद तक ठीक है. डाक्टर ने एक चौंकाने वाली बात यह बताई कि 10 वर्षीया अमायरा के साथ कुकर्म किया गया है. यह जान कर पुलिस सोच में पड़ गई. पुलिस ने दोनों बच्चों से पूछताछ की तो अमायरा ने बताया कि उस रात कोई चोर घर में घुसा था. वह उठी और मां से पानी मांगा तो उसे चोर ने दबोच लिया. उस ने माथे पर ईंट से प्रहार किया, जिस से वह बेहोश सी हो गई. इस के बाद चोर ने उस के साथ गंदा काम किया.

वह चीखी तो भाई अमन रोने लगा. तब उस ने उस के माथे पर भी ईंट से चोट पहुंचाई, जिस से दोनों बेहोश हो गए.

‘‘अगर उस चोर को तुम्हारे सामने लाया जाए तो तुम उसे पहचान लोगी?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘हां, पहचान लूंगी.’’ अमायरा ने जवाब दिया.

पुलिस हिरासत में लिए गए नट बस्ती के संदिग्ध युवक की पहचान कराने अस्पताल लाई. अमायरा ने उसे गौर से देखा फिर कुछ देर मौन रहने के बाद बोली, ‘‘शायद यही था.’’ पहचान होने पर पुलिस ने उस युवक से फिर सख्ती से पूछताछ की लेकिन वह नहीं टूटा. उस ने कहा, ‘‘बच्ची के पहचानने में चूक हुई होगी. मैं निर्दोष हूं.’’ पुलिस टीम को भी लगा कि शायद वह निर्दोष है, इसलिए उसे जाने दिया. पुलिस टीम ने अब अपनी जांच की दिशा बदल दी. सर्विलांस टीम ने घटना वाली रात इलाके में लगे मोबाइल टावर के संपर्क में आए डंप फोन नंबरों में से एक ऐेसे मोबाइल नंबर का पता लगाया जो वारदात के समय वहां 3 घंटे तक मौजूद रहा था. इस मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो पता चला कि वह मोबाइल नंबर नसीरुद्दीन उर्फ अउवापउवा का था, जो इब्राहीमपुर भलवारियां गांव का रहने वाला था.

नसीरुद्दीन था वह हैवान नसीरुद्दीन शक के घेरे में आया तो पुलिस टीम ने उस के पीछे महिला मुखबिर लगा दी, जो उस के परिवार की ही थी. उस ने पुलिस को 2 रोज बाद चौंकाने वाली जानकारी दी. उस ने बताया कि नसीरुद्दीन दिन में तो घर में पड़ा रहता है लेकिन रात को वह घर से निकलता है. घर से वह सीधे कब्रिस्तान जाता है, जहां सादिया, उस के शौहर और बेटी की कब्र के पास बैठ कर रोता है और अपने गुनाहों की तौबा करता है. यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने 2 दिसंबर, 2019 को नसीरुद्दीन उर्फ  अउवापउवा को सुबह 5 बजे उस के घर से हिरासत में ले लिया और शिनाख्त हेतु अस्पताल ले गई, जहां मासूम अमन और अमायरा का इलाज चल रहा था.

नसीरुद्दीन को देखते ही अमायरा चीख पड़ी, ‘‘यही, वह चोर है जिस ने मेरे साथ गंदा काम किया था और ईंट मार कर घायल कर दिया था. इसे छोड़ना नहीं. इसे फांसी पर लटका देना.’’

पुलिस टीम नसीरुद्दीन को साथ ले कर थाना मुबारकपुर आ गई. थाने पर जब उस से तिहरे हत्याकांड के संबंध में सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. उस ने अपराध कबूल कर लिया. इस के बाद उस ने हत्या की पूरी कहानी पुलिस को बता दी. पुलिस ने तिहरे हत्याकांड का खुलासा करने तथा हत्यारे को पकड़ने की जानकारी एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह को दी. जानकारी मिलते ही त्रिवेणी सिंह थाना मुबारकपुर आ गए. उन्होंने प्रैसवार्ता में कातिल को मीडिया के सामने पेश कर घटना का खुलासा कर दिया. उन्होंने केस का खुलासा करने वाली टीम की पीठ थपथपाई और 25 हजार रुपए नकद पुरस्कार की घोषणा की.

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के थाना मुबारकपुर के अंतर्गत एक गांव है इब्राहीमपुर भलवारिया. मुसलिम बाहुल्य इस गांव में अब्दुल कय्यूम अपने परिवार के साथ रहता था. उस के 4 बेटे इमरान, इरशाद, इकबाल तथा इरफान थे. इन सभी के विवाह हो चुके थे. उन्होंने चारों बेटों में घर जमीन का बंटवारा कर दिया था. उन के 3 बेटे इमरान, इरशाद और इकबाल बीवीबच्चों के साथ गांव में पैतृक मकान में रहते थे लेकिन सब से छोटे बेटे इरफान ने इब्राहीमपुर भलवरिया गांव के बाहर अपने खेत में टिन शेड वाला मकान बनवा लिया था. वह बीवीबच्चों के साथ वहीं रहता था. लगभग 10 साल पहले इरफान की शादी इसी गांव की सादिया से हुई थी. दरअसल, सादिया एक गरीब परिवार की खूबसूरत बेटी थी. इरफान का सादिया के घर आनाजाना था. आतेजाते इरफान की नजर सादिया पर पड़ी.

पहली ही मुलाकात में दोनों एकदूसरे को दिल बैठे. दोनों की मोहब्बत परवान चढ़ने लगी तो घरवालों को जानकारी हुई. दोनों के परिवार वालों ने आपस में विचारविमर्श कर सादिया और इरफान का निकाह कर दिया. सादिया जैसी खूबसूरत और नेक दिल वाली बीवी पा कर इरफान खुश था. पतिपत्नी के दिन हंसीखुशी से बीतने लगे. हंसतेबतियाते शादी के 5 साल कब बीत गए, पता ही नहीं चला. इन 5 सालों में सादिया ने बेटी अमायरा और बेटे अमन को जन्म दिया. बेटीबेटा के जन्म से उन की खुशियां दोगुनी हो गईं.

वक्त बीतता गया. वक्त के साथ सादिया के बच्चे बड़े हुए तो गांव के ही मदरसे में तालीम हासिल करने जाने लगे. इरफान खेतीकिसानी के साथसाथ दरी बुनाई का काम भी करता था, ताकि अतिरिक्त आमदनी हो.  अमन के जन्म के 4 साल बाद सादिया ने एक बेटी नूर को जन्म दिया. नन्हीं सी नूर इरफान और सादिया की आंखों की नूर बन गई थी. इरफान अपने बीवीबच्चों के साथ खुश था. लेकिन उस की यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम न रह सकी. दरअसल इरफान के गांव में ही अजीज अहमद रहते थे. उन के 2 बेटे अजरुद्दीन और नसीरुद्दीन थे. अजरुद्दीन तो सीधासादा और व्यावहारिक था. वह पिता के साथ किसानी करता था. उस की शादी भी हो चुकी थी. लेकिन छोटा बेटा नसीरुद्दीन झगड़ालू और बददिमाग था.

वह गांव के आवारा लड़कों के साथ घूमता, बातबेबात लोगों से उलझता और उन के साथ मारपीट करता. वह आवारा लड़कों के साथ शराब पीता और गांव की लड़कियों से छेड़खानी करता था. नौकरी छोड़ कर लौट आया घर नसीरुद्दीन के कारनामों की शिकायत जब अजीज अहमद के पास आने लगी तो उन्होंने उसे सही रास्ते पर लाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं सुधरा. बल्कि ज्यादा शराब पी कर सड़क, नाली में गिरता रहता था, जिस से गांव के लोगों ने उस का नाम अउवापउवा रख दिया था. बिगडै़ल बेटे को सुधारने के लिए अजीज के पास एक ही उपाय बचा था कि उस की शादी कर दी जाए. लेकिन आवारा लड़के से कोई भी अपनी बेटी ब्याहने को तैयार नहीं था. काफी दौड़धूप के बाद उन्होंने एक गरीब परिवार की रेहाना से उस की शादी कर दी.

रेहाना कम पढ़ीलिखी साधारण रंगरूप की युवती थी. उस ने शौहर को अपने प्रेम बंधन में बांधने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वह असफल रही. नसीरुद्दीन की आवारागर्दी से तंग आ कर रेहाना ने उसे कई बार फटकारा और जलील भी किया. साथ ही परिवार का बोझ उठाने के लिए उसे कुछ कामधंधा करने की सलाह भी दी. नसीरुद्दीन ने पहले तो बीवी की बात को अनसुना कर दिया पर जब रेहाना आए दिन उस से झगड़ा करने लगी तो उस ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया. नसीरुद्दीन उर्फ  अउवापउवा के कुछ दोस्त फरीदाबाद (हरियाणा) में रहते थे और मशीनों के पार्ट्स बनाने वाली किसी कंपनी में काम करते थे. उस ने अपने दोस्तों से बात की और गांव छोड़ कर फरीदाबाद चला गया.

दोस्तों ने उस के रहने का बंदोबस्त कर उस की वहां नौकरी लगवा दी. नसीरुद्दीन के हाथ में पैसे आने लगे तो वह शराब के साथसाथ दूसरे नशे भी करने लगा. यही नहीं वह अय्याशी के लिए दिल्ली के रेडलाइट एरिया में भी जाने लगा. नसीरुद्दीन कमाता जरूर था, पर वह सारा पैसा नशे और अय्याशी में खर्च कर देता था. वह 3-4 महीने में जब भी घर आता, खाली हाथ ही आता. रेहाना, शौहर से अपने खर्च को पैसा मांगती तो वह उसे दुत्कार देता था. वह रेहाना के शरीर को रौंदता तो था पर उस की चाहत को वह पूरा नहीं कर पाता था. इतना ही नहीं रेहाना को वह अपने साथ भी नहीं रखना चाहता था.

नसीरुद्दीन उर्फ  अउवापउवा जून 2019 में नौकरी छोड़ कर गांव आ गया. इस के बाद वह जलालपुर स्थित एक बुनाई कारखाने में काम करने लगा. रेहाना की अपने शौहर से नहीं पटती थी. इस के 2 कारण थे. एक तो वह कमाई का एकचौथाई हिस्सा भी उस के हाथ पर नहीं रखता था. दूसरे वह कामवर्धक दवाओं का प्रयोग कर उस के साथ संबंध बनाता था. झगड़ा तब ज्यादा होता था जब वह उस के ऊपर अप्राकृतिक संसर्ग के लिए दबाव बनाता था. धीरेधीरे झगड़ा बढ़ता गया और रेहाना, शौहर की गंदी हरकतों से आजिज आ कर अक्तूबर में अपने मायके चली गई.

रेहाना रूठ कर मायके चली गई तो अय्यास नसीरुद्दीन उर्फ अउवापउवा सेक्स के लिए परेशान रहने लगा. उस का दिन तो कामधाम में कट जाता, लेकिन रात में औरत की कमी सताने लगती. उस के मन में अपनी भाभी जुनैदा के प्रति भी खोट था, पर भाई के डर से वह उस की तरफ कदम नहीं बढ़ा पा रहा था. यद्यपि वह भाभी के साथ हंसीमजाक तथा अश्लील हरकतें कर देता था. जुनैदा उसे डांटफटकार देती थी. एक रोज अपने काम पर जाते समय नसीरुद्दीन की नजर इरफान की खूबसूरत पत्नी सादिया पर पड़ी. 30 वर्ष की उम्र पार कर चुकी 3 बच्चों की मां सादिया की खूबसूरती में कमी नहीं आई थी. नसीरुद्दीन ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाने का निश्चय कर लिया.

उस ने सोचा कि सादिया अपने शौहर और बच्चों के साथ गांव के बाहर खेत पर बने मकान पर रहती है, इसलिए उसे आसानी से शिकार बनाया जा सकता है. अगर उस ने शोर मचाया भी तो उस की चीखपुकार गांव तक सुनाई नहीं देगी. जिस से उसे कोई बचाने भी नहीं आएगा. सादिया पर जम गईं निगाहें इस के बाद वह सादिया व उस के शौहर की रेकी करने लगा. 20 नवंबर, 2019 को वह रात 9 बजे सादिया के दरवाजे पर पहुंचा. उसने बाउंड्री से झांका तो सादिया मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी. अत: वह वापस घर आ गया. नसीरुद्दीन वापस जरूर आ गया था पर उस की सेक्स की भूख बढ़ गई थी. वह सादिया के शरीर से हर हाल में खिलवाड़ करना चाहता था.

24 नवंबर, 2019 की शाम नसीरुद्दीन अपने गांव के मैडिकल स्टोर से कामोत्तेजक दवा तथा कंडोम खरीद लाया. दवा खाने के बाद उस ने निश्चय कर लिया था कि चाहे जो भी हो, वह आज सादिया के साथ संबंध बना कर ही रहेगा. रात 10 बजे वह घर से निकला और घूमतेफिरते रात साढ़े 10 बजे इरफान के घर जा पहुंचा. उस ने बाउंड्री से झांक कर देखा तो पूरा परिवार टिन शेड के नीचे सो रहा था. दरवाजे में अंदर से कुंडी नहीं लगी थी. बांस का डंडा लगा था, जो दरवाजे को खुलने से रोके हुए था. नसीरुद्दीन ने आहिस्ता से डंडे को सरकाया और दरवाजे को अंदर की ओर धकेला, इस से दरवाजा खुल गया. लेकिन इसी बीच डंडा जमीन पर गिर पड़ा. डंडे के गिरने की आवाज से इरफान की आंखें खुल गईं.

वह जैसे ही उठ कर खड़ा हुआ, नसीरुद्दीन ने लपक कर बाउंड्री से ईंट उठाई और इरफान के सिर पर भरपूर प्रहार किया. इरफान का सिर फट गया. खून की धार बह निकली और वह कराहता हुआ जमीन पर धराशायी हो गया. शौहर के कराहने की आवाज सुन कर तख्त पर अपनी 4 महीने की बच्ची नूर के साथ लेटी सादिया की आंखें खुल गईं. वह उठने को हुई तो नसीरुद्दीन ने उस के सिर पर भी ईंट का प्रहार कर दिया. सादिया का सिर फट गया. वह तड़पने लगी. नसीरुद्दीन को इस सब से कोई लेनादेना नहीं था. उस ने सादिया को दबोच लिया और उस के शरीर से एकएक कपड़ा उतार फेंका. इस के बाद उस ने सादिया के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए. सादिया विरोध करती रही और नसीरुद्दीन उस के जिस्म को रौंदता रहा. इसी बीच वह बेहोश हो गई.

इसी दौरान दूसरी चारपाई पर अपने 5 वर्षीय भाई अमन के साथ लेटी 10 वर्षीया अमायरा की आंखें खुल गईं. उस ने मां से पानी मांगा. तभी नसीरुद्दीन अमायरा के पास जा पहुंचा. उसे देख कर अमायरा को लगा कि घर में चोर घुस आया है. वह शोर मचाने लगी. नसीरुद्दीन ने उस के माथे पर ईंट से प्रहार कर दिया. अमायरा अर्द्धबेहोश हो गई. नसीरुद्दीन कामोत्तेजक दवा खा कर आया था, वह दरिंदा बना हुआ था. उस ने अपने साथ लाए कंडोम का उपयोग किया और मासूम अमायरा को दबोच कर उस के साथ अप्राकृतिक मैथुन किया. इस दौरान वह बच्ची असहनीय दर्द से छटपटाती रही. पर उस दरिंदे को जरा भी दया नहीं आई. उसी समय मासूम अमन भी जाग गया. वह रोने लगा तो वहशी अउवापउवा ने उस के माथे पर ईंट से प्रहार कर दिया. वह डर व भय से कांपने लगा और फिर बेहोश हो गया.

अब तक नसीरुद्दीन पस्त पड़ गया था. वह कुछ देर सुस्ताता रहा तभी नग्नावस्था में पड़ी सादिया के कराहने की आवाज उस के कानों में पड़ी. उस के नग्न शरीर को देख कर एक बार फिर उस की कामेच्छा भड़क उठी. उस ने फिर सादिया के जिस्म को रौंदा, साथ ही उस ने अपने मोबाइल से वीडियो भी बनाया. सादिया की 4 माह की मासूम बेटी नूर कंबल से ढंकी उस के साथ ही लेटी थी. संबंध बनाने के दौरान वह दब गई और उस का दम घुट गया. संबंध बनाने के बाद नसीरुद्दीन ने सादिया का चेहरा ईंट से कुचल दिया, जिस से उस की मौत हो गई. उस का शौहर पहले ही दम तोड़ चुका था. नसीरुद्दीन ने 3 घंटे तक वहशी खेल खेला फिर सादिया का मोबाइल ले कर वापस घर आ गया.

जुनैदा के कहने पर फेंके मोबाइल सुबह को उस ने अपनी भाभी जुनैदा को सादिया की अश्लील वीडियो दिखाई. जिसे देख कर जुनैदा भड़क गई और बोली, ‘‘पउवा तू ने यह क्या कुकर्म कर डाला. तू ने जिस सादिया को हवस का शिकार बनाया है वह इसी गांव की बेटी है और रिश्ते में तेरी बहन थी. तू ने जो गुनाह किया है उस के लिए कोई भी तुझे माफ नहीं करेगा. तू अभी जा और इस मोबाइल को किसी नदीनाले में फेंक आ.’’

भाभी की बात सुन कर नसीरुद्दीन को पछतावा हुआ. वह गांव के बाहर गया और नदी में दोनों मोबाइल फोन फेंक दिए. घर आ कर कमरे में पड़ गया. रात को मृतकों की कब्र पर जा कर शांत कब्रों से वह अपने गुनाहों की माफी मांगता. बाद में जब पुलिस ने जुनैदा को अपना गवाह बना लिया तो उस ने सारी बातें सचसच बता दीं. इधर सुबह 10 बजे घटना का खुलासा तब हुआ, जब अनीस अहमद अपने खेत पर गया और मछली पकड़ने के लिए इरफान को बुलाना चाहा. पुलिस की अथक मेहनत पर आरोपी एक सप्ताह बाद पकड़ा गया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त खून से सनी ईंट एक खेत से बरामद कर ली. मोबाइल फोन बरामद करने के लिए पुलिस ने गोताखोरों को तालाब में उतारा, लेकिन फोन बरामद नहीं हो सके.

हत्यारोपी नसीरुद्दीन से पूछताछ करने के बाद थानाप्रभारी ने 3 दिसंबर, 2019 को उसे आजमगढ़ कोर्ट में पेश किया. जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. मृतक के मासूम बच्चों अमन और अमायरा की जिम्मेदारी बड़े भाई इमरान ने ले ली थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, अमन व अमायरा परिवर्तित नाम है

 

Crime news : लेडी डाक्टर के साथ गैंगरेप किया और जला डाला

Crime news : दुर्दांत दरिंदों के जाल में फंस कर जान गंवा चुकी दिल्ली की निर्भया के गुनहगारों को सजा मिलने से पहले, हैदराबाद में भी एक लेडी डाक्टर के साथ बर्बरतापूर्ण ऐसी ही दरिंदगी हुई. फर्क बस इतना रहा कि दिल्ली के गुनहगारों को सजा नहीं मिली पर हैदराबाद के दरिंदों ने अपनी सजा खुद चुन ली…

अगर कोई युवती या महिला शिक्षित होने के साथसाथ खूबसूरत, हंसमुख, मृदुभाषी, शालीन और आत्मनिर्भर हो तो उसे सर्वगुण संपन्न माना जाता है. हैदराबाद की 27 वर्षीय डा. प्रियांशी रेड्डी ऐसी ही युवती थी. पेशे से पशु चिकित्सक प्रियांशी रेड्डी 27 नवंबर, 2019  को औफिस जाने के लिए सुबह 8 बजे घर से निकली. उस का औफिस घर से काफी दूर था, इसलिए उसे घर से जल्दी निकलना पड़ता था. वह शमशाबाद स्थित टोल प्लाजा के नजदीक एक जगह अपनी स्कूटी पार्क करती थी और फिर कैब से कोल्लुरु स्थित पशु चिकित्सालय जाती थी. छुट्टियों को छोड़ कर डा. प्रियांशी का यह रोजमर्रा का काम था. शाम को औफिस से लौटते वक्त वह पार्किंग से स्कूटी ले कर घर आती थी.

27 नवंबर, 2019 को हौस्पिटल से घर लौटने में उसे थोड़ी देर हो गई थी. साढ़े 7 बजे जब वह टोल प्लाजा पार्किंग पहुंची तो देखा उस की स्कूटी का पिछला पहिया पंक्चर था. रात का अंधेरा गहरा चुका था. प्रियांशी यह सोच कर परेशान हो गई कि घर कैसे जाएगी. इतनी रात गए पंक्चर लगना मुश्किल था. दूरदूर तक पंक्चर बनाने वाला कोई नहीं था. स्कूटी को ले कर प्रियांशी काफी परेशान हुई. पार्किंग में जहां स्कूटी खड़ी थी, उस के पास ही एक लोडेड ट्रक खड़ा था. जैसेजैसे रात गहरा रही थी, प्रियांशी की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं. परेशानी स्वाभाविक ही थी. वजह यह कि एक तो वह अकेली महिला थी, ऊपर से सुनसान इलाका. वैसे भी वहां सब अजनबी थे.

वहां से थोड़ी दूर अंधेरे में खडे़ 4 लोगों की आंखें प्रियांशी पर जमी थीं. उस की परेशानी को समझ कर वे खुश थे. जब उन्हें लगा कि वह कुछ ज्यादा ही परेशान है तो वे प्रियांशी के पास आए. उन 4 अजनबियों को देख वह और ज्यादा डर गई. उन चारों में से एक हट्टाकट्टा युवक बोला, ‘‘काफी देर से देख रहे हैं कि आप काफी परेशान हैं. क्या हम आप की कोई मदद कर सकते हैं?’’

प्रियका ने सहम कर उन चारों को देखा और कुछ सोच कर दबी जुबान में बोली, ‘‘पता नहीं कैसे मेरी स्कूटी का पहिया पंक्चर हो गया. आसपास कोई दुकान भी नहीं दिख रही, जहां इसे ठीक करा लूं.’’

‘‘इस में परेशानी की क्या बात है मैडम?’’ वह युवक उतावला हो कर बोला, ‘‘आप कहें तो हम आप की परेशानी दूर कर सकते हैं. मैं एक पंक्चर बनाने वाले को जानता हूं, जो देर रात तक पंक्चर बनाता है.’’

‘‘प्लीज, आप मेरी मदद कीजिए, किसी भी तरह मेरी स्कूटी ठीक करा दीजिए. आप लोगों का बहुत अहसान होगा मुझ पर.’’

‘‘अरे मैडम, इस में अहसान की क्या बात है. हम भी तो इंसान हैं. इंसान एकदूसरे के काम न आए तो धिक्कार है इंसानियत पर.’’ उस युवक की भावनात्मक बातें सुन कर प्रियांशी का डर थोड़ा कम हुआ. उस ने चारों युवकों को स्कूटी ठीक कराने को कह दिया. प्रियांशी की स्वीकृति मिलते ही चारों युवकों ने स्कूटी का पिछला पहिया खोल कर निकाल लिया और पंक्चर बनवाने के लिए वहां से चले गए. युवकों के वहां से जाने के बाद प्रियांशी ने अपनी छोटी बहन रुचिका को फोन कर के सारी स्थिति बता दी. साथ ही कहा कि उसे घर पहुंचने में देर हो सकती है. स्कूटी ठीक होते ही वह घर के लिए निकल जाएगी. दोनों बहनों के बीच करीब 15 मिनट तक बातें होती रहीं. आखिर में प्रियांशी ने थोड़ी देर बाद बात करने के लिए कहा. प्रियांशी ने जब अपनी ओर से फोन डिसकनेक्ट किया, तब 9 बज कर 22 मिनट हो रहे थे.

कहीं नहीं मिली प्रियांशी कुछ देर रुक कर रुचिका ने यह जानने के लिए प्रियांशी को फोन किया कि स्कूटी ठीक हुई या नहीं. लेकिन दूसरी ओर से फोन स्विच्ड औफ बताया गया. इस के बाद रुचिका प्रियांशी का नंबर लगातार मिलाती रही, लेकिन उस का फोन बंद ही मिला. इस से रुचिका परेशान हो गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि जिस नंबर पर उस ने थोड़ी देर पहले बात की थी, वह बंद कैसे हो गया. घबराहट के मारे उस की धड़कनें बढ़ गईं. तब तक रात के करीब 10 बज गए थे. रुचिका ने जब यह बात मातापिता को बताई तो वे भी घबरा गए. उस के पिता पी.एस. रेड्डी बगैर समय गंवाए रुचिका और बेटे समीर को साथ ले कर प्रियांशी की तलाश में टोल प्लाजा जा पहुंचे, जहां प्रियांशी ने अपनी मौजूदगी बताई थी.

पी.एस. रेड्डी और उन के दोनों बच्चों ने आसपास सब जगह छान मारीं, लेकिन न तो प्रियांशी कहीं दिखी और न ही उस की स्कूटी. टोल प्लाजा के पास लोडेड ट्रक खड़ा था. यह देख कर वे लोग और भी ज्यादा परेशान हुए. प्रियांशी ने फोन पर रुचिका को वहीं होने की बात कही थी. जब प्रियांशी कहीं नहीं मिली तो वह यह सोच कर डर गए कि कहीं उस के साथ कोई अनहोनी तो नहीं घट गई है. ऐसे में पी.एस. रेड्डी के मन में बुरेबुरे खयाल आने लगे. वह मन ही मन फरियाद करने लगे कि उन की बेटी जहां भी हो, सहीसलामत और सुरक्षित हो. रेड्डी के मन में खयाल आ रहा था कि क्यों न घर फोन कर के पत्नी से पूछ लें कि बेटी कहीं घर तो नहीं पहुंच गई.

रेड्डी ने पत्नी को फोन कर के बेटी के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि प्रियांशी अभी घर नहीं पहुंची है. जवाब सुन कर रेड्डी और भी ज्यादा परेशान हो गए. परेशानी के आलम में रात गहराती जा रही थी. जब कुछ भी समझ में नहीं आया तो रुचिका, पिता और भाई को ले कर साइबराबाद थाने पहुंच गई. उस समय रात के करीब 12 बज रहे थे. थाने पहुंच कर उस ने दीवान को अपनी परेशानी बताई और आवश्यक काररवाई करने के लिए बहन की गुमशुदगी की तहरीर दी. साइबराबाद पुलिस ने काररवाई करने के बजाए कहा कि यह मामला उन के थाना क्षेत्र का नहीं है. वहां की पुलिस ने उन्हें थाना शमशाबाद भेज दिया. जिस जगह से प्रियांशी गुम हुई थी, वह इलाका थाना शमशाबाद में आता था.

शमशाबाद पुलिस ने उन की बात सुनी और प्रियांशी की तलाश में रेड्डी परिवार के साथ कई सिपाही लगा दिए. रेड्डी परिवार और पुलिस ने मिल कर सुबह 4 बजे तक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन प्रियांशी का कहीं पता नहीं चला. उस के अचानक गुम हो जाने से रेड्डी परिवार के अड़ोसपड़ोस वाले भी हैरानपरेशान थे. प्रियांशी को तलाश करतेकरते सुबह हो गई थी, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. परिवार वालों ने अपने परिचितों और नातेरिश्तेदारों को भी फोन कर के पता किया लेकिन प्रियांशी का कोई पता नहीं चला. उस की गुमशुदगी से नातेरिश्तेदार भी परेशान थे. रेड्डी परिवार समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे.

परेशान हो कर रेड्डी बच्चों के साथ घर लौट आए. तब तक सुबह के 7 बज गए थे. थकेहारे रेड्डी अपने बरामदे में चिंतातुर कुरसी पर बैठे थे. तभी करीब 8 बजे उन के मोबाइल पर फोन आया, फोन शमशाबाद थाने से आया था. उन्हें तत्काल शमशाबाद थाने पहुंचने को कहा गया था. फोन पर आई काल सुनते ही पी.एस. रेड्डी का कलेजा धक से रह गया. रुचिका और समीर को साथ ले कर वह थाना शमशाबाद पहुंच गए. थाने पर उन्हें बताया गया कि करीब 40 किलोमीटर दूर हैदराबाद-बेंगलुरु हाइवे पर चत्तनपल्ली पुलिया के नीचे एक महिला की जली हुई लाश मिली है, आप हमारे साथ चल कर शिनाख्त कर लें.

लाश बरामद होने की बात सुन कर भाईबहन और पिता सन्न रह गए. रेड्डी साहब को तो ऐसा झटका लगा कि वह घुटनों में सिर रख कर पास पड़ी कुरसी पर बैठ गए. रुचिका ने पिता को संभाला और उन्हें पुलिस के साथ ले कर घटनास्थल जा पहुंची. हैदराबाद-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग की पुलिया के नीचे एक युवती की बुरी तरह जली लाश पड़ी थी. लाश इतनी ज्यादा जल गई थी कि पहचानना मुश्किल था. उत्सुकतावश रुचिका लाश के पास पहुंची और ध्यान से देखने लगी. लाश के गले में लौकेट पड़ा था. प्रियांशी ऐसा ही लौकेट पहनती थी. गले में पड़े लौकेट को देख रुचिका दहाड़ मार कर रोने लगी.

इस से यह बात साफ हो गई कि लाश डा. प्रियांशी रेड्डी की थी. यह देख पुलिस समझ गई कि मृतका डा. प्रियांशी रेड्डी ही है. वही प्रियांशी जो कोल्लुरु स्थित पशु चिकित्सालय में बतौर डाक्टर तैनात थी. डा. प्रियांशी रेड्डी की लाश बरामद होते ही यह मामला हाईप्रोफाइल बन गया. यह खबर तेजी से फैली. प्रियांशी की हत्या की सूचना मिलते ही लोग उग्र और आक्रोशित हो गए. शहरी नागरिकों के आक्रोश को देख पुलिस के हाथपांव फूल गए. शहर के लोगों में इस बात को ले कर आक्रोश था कि हत्यारों ने प्रियांशी की हत्या क्यों की और हत्या के बाद उसे जलाया क्यों?

जिले की कानूनव्यवस्था गड़बड़ाती, इस से पहले ही पुलिस सक्रिय हो गई. पुलिस फोर्स को यहांवहां मुस्तैदी से तैनात कर दिया गया. बात बढ़े, इस से पहले ही पुलिस ने चतुराई से लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया. 29 नवंबर, 2019 को मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ कर पुलिस के हाथपांव फूल गए. रिपोर्ट में बताया गया था कि पहले मृतका के साथ बलात्कार किया गया और बाद में उस का गला घोंटा गया. मतलब मामला बलात्कार और कत्ल का था. प्रियांशी के साथ बलात्कार के बाद हत्या की पुष्टि होेते ही हाहाकार मच गया. न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से यह खबर देश भर में फैल गई.

इस घटना को ले कर देश भर में गुस्सा फूटने लगा. सोशल मीडिया से ले कर आम नागरिक तक सड़क पर उतर आए. लोग दरिंदों के लिए फांसी की मांग कर रहे थे. इस घटना ने करीब 7 साल पहले दिल्ली के धौला कुआं में निर्भया के साथ घटी घटना की यादें ताजा कर दी थीं. दरिंदों ने निर्भया के साथ हद दरजे की दरिंदगी की थी. दरिंदगी और बर्बरता की वजह से निर्भया की मौत हो गई थी. प्रियांशी का परिवार ही नहीं देश भर के लोग सरकार से दुष्कर्मियों को मार डालने की गुहार लगा रहे थे. डा. प्रियांशी रेड्डी के रेप और हत्या की हर तबके, हर धर्म के लोगों ने न केवल निंदा की बल्कि हत्यारों को तुरंत फांसी पर चढ़ाने को कहा. घटना में पुलिस की घोर लापरवाही को ले कर लोग उस पर तमाम तरह के आरोप लगा रहे थे.

जब देश भर में बेंगलुरु पुलिस की किरकिरी होने लगी तो प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आदेश दिया. डीजीपी का आदेश मिलते ही साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने इस मामले को गंभीरता से लिया. उन के आदेश पर पुलिस गुनहगारों की सघन तलाशी में जुट गई. सज्जनार के आदेश पर पुलिस ने जांच वहीं से शुरू की, जहां से डा. प्रियांशी गुम हुई थी. सज्जनार ने सब से पहले खुद टोल प्लाजा के आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे. सीसीटीवी ही ऐसा चश्मदीद हो सकता था, जो पुलिस को बलात्कारी हत्यारों तक पहुंचा सकता था.

टोल प्लाजा पर पूछताछ करने पर पता चला था कि बीती रात एक लोडेड ट्रक वहां रुका था, जिस में केवल 4 युवक सवार थे. टोल प्लाजा के पास एक कैमरे में 4 युवक, जिन की उम्र 22 से 27 साल के बीच थी, चहलकदमी करते हुए दिखाई दिए. पहनावे से वे चारों ड्राइवर जैसे दिख रहे थे. पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने टोल प्लाजा के आसपास के लोगों से पूछताछ की तो उन से भी यही पता चला कि काफी देर तक खड़ी रहे लोडेड ट्रक के आसपास 4 युवक देखे गए थे. सीसीटीवी फुटेज में चारों युवक संदिग्ध दिख रहे थे. सीसीटीवी कैमरे और लोगों से की गई पूछताछ से यह बात तय हो गई थी कि संदिग्ध दिखने वाले चारों युवक ही दोषी थे.

ट्रक वाले युवक आए संदेह के दायरे में पूछताछ में पुलिस ने जैसेतैसे चारों युवकों के नाम खोज निकाले. उन में से एक का नाम मोहम्मद पाशा उर्फ आरिफ, जोलू नवीन, जोलू शिवा और चिंताकुंता चेन्नाकेशवुलू उर्फ चेन्ना था. इन में से 26 साल का पाशा और 20 साल का जोलू शिवा लौरी ड्राइवर थे, जबकि 23 वर्षीय जोलू नवीन और 20 साल का चिंताकुंता चेन्नाकेशवुलू क्लीनर थे. यह बात सज्जनार के लिए काफी काम की साबित हुई. निर्दयी हत्यारों तक पहुंचने के लिए शादनगर पुलिस और शमशाबाद पुलिस को साथ काम करने को कहा गया. पुलिस ने चारों हत्यारों तक पहुंचने के लिए मुखबिरों का जाल बिछा दिया. जांचपड़ताल में मोहम्मद पाशा उर्फ आरिफ के बारे में जानकारी मिली. वह महबूबनगर जिले के नारायणपेट का रहने वाला था.

पाशा के बारे में सूचना मिलते ही पुलिस ने उसे उस के घर से धर दबोचा. पुलिस उसे थाना शादनगर ले आई. कमिश्नर सज्जनार की देखरेख में थाने में उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने जुबान खोल दी. पाशा ने प्रियांशी की स्कूटी से ले कर उसे जलाने तक की कहानी बता दी. उस ने कमिश्नर के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उस ने अपने 3 साथियों जोलू नवीन, जोलू शिवा और चेन्ना के साथ मिल कर प्रियांशी रेड्डी के साथ बलात्कार किया था. राज छिपाने के लिए बाद में चारों ने मिल कर उस की हत्या कर दी थी और लाश को जला दिया था. उस ने इस से आगे की सारी बातें विस्तार से बता दीं कि क्याक्या और कैसे हुआ था. पाशा का बयान दिल दहलाने वाला था.

खैर, सज्जनार ने काफी समझदारी से काम लेते हुए पाशा उर्फ आरिफ की निशानदेही पर तीनों दरिंदों जोलू नवीन, जोलू शिवा और चेन्ना को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. ये तीनों भी महबूबनगर के नारायणपेट के रहने वाले थे, जिन में नवीन और शिवा सगे भाई थे. इन तीनों ने भी अपनाअपना जुर्म कबूल कर लिया. 30 नवंबर, 2019 को डा. प्रियांशी रेड्डी केस के चारों मुलजिमों की गिरफ्तारी की खबर लगते ही स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने शादनगर थाने पर धावा बोल दिया. लोगों का कहना था कि चारों दरिंदों को उन के हवाले कर दिया जाए. जिस तरह इन दरिंदों ने मिल कर प्रियांशी के साथ बर्बरता की, उसी तरह उन के साथ भी किया जाएगा.

काफी मशक्कत के बाद जैसतैसे सज्जनार ने स्थिति को संभाला और भीड़ को भरोसा दिया कि प्रियांशी का बलिदान बेकार नहीं जाएगा. उस के चारों गुनहगारों को कड़ी सजा दिलाने में वह पीछे नहीं रहेंगे. उन के आश्वासन पर लोगों का आक्रोश शांत हुआ. लोगों के आक्रोश को देख कर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने पहली बार कहा कि प्रियांशी के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए मुकदमा फास्टट्रैक कोर्ट में चलेगा और मुलजिमों को 6 महीने के अंदर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी. इस के बाद पुलिस कमिश्नर सज्जनार ने चारों अभियुक्तों को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. उन से की गई पूछताछ के बाद दुष्कर्म, हत्या और वहशत से जुड़ी दुर्दांत हत्यारों की हकीकत पता चली.

27 वर्षीय प्रियांशी रेड्डी मूलरूप से हैदराबाद के साइबराबाद की रहने वाली थी. पी.एस. रेड्डी की 3 संतानों में प्रियांशी बड़ी थी. जबकि भाई समीर और रुचिता छोटे थे. प्रियांशी अपनी मेहनत के बूते पर पशु चिकित्सक बनी थी. प्रियांशी रेड्डी का औफिस घर से करीब 30-35 किलोमीटर दूर नवाबपेट मंडल के कोल्लुर में था. ड्यूटी के लिए वह रोजाना सुबह लगभग 8 बजे अपनी स्कूटी से घर से निकलती थी. स्कूटी को वह शमशाबाद टोल प्लाजा के नजदीक पार्क कर के वहां से कैब ले कर कोल्लुर जाती थी. फिर शाम 5 बजे के करीब वह कोल्लुर से कैब ले कर टोल प्लाजा आती और वहां से अपनी स्कूटी ले कर घर पहुंच जाती थी.

घटना से कुछ दिनों पहले उसी टोल प्लाजा पर महबूबनगर के नारायणपेट का रहने वाला मोहम्मद आरिफ उर्फ पाशा अपनी लौरी ट्रक ले कर रुका था. उस की लौरी में हेल्पर के रूप में उसी के गांव के 3 युवक जोलू नवीन, जोलू शिवा और चिंताकुंता चेन्नाकेशवुलू सवार थे. आरिफ जब भी लौरी ले कर बाहर निकलता था, ये तीनों उस के साथ रहते थे. मोहम्मद आरिफ उर्फ पाशा शादीशुदा था. उस की पत्नी ससुराल में पति और सासससुर के साथ रहती थी. आरिफ अपने गांव और घर में किसी से कोई खास मेलजोल नहीं रखता था. वह अपने काम से काम रखता था, जबकि जोलू नवीन, जोलू शिवा और चेन्ना खुराफाती दिमाग के थे.

गांव में हमेशा सब से झगड़ा करते थे, झगड़ालू प्रवृत्ति के तीनों युवकों से गांव वाले अलगथलग रहते थे, ताकि अपना सम्मान बचाए रखें. कम पढ़ेलिखे तीनों युवक बातबात पर भद्दीभद्दी गालियां देने से भी नहीं चूकते थे. कैसे आई प्रियांशी हैवानों के निशाने पर बहरहाल, जिस समय आरिफ लौरी ले कर टोल प्लाजा पर रुका था, उसी समय प्रियांशी भी टोल प्लाजा अपनी स्कूटी लेने पहुंची थी. प्रियांशी की खूबसूरती देख कर आरिफ के मन में पाप जाग उठा. वह तब तक प्रियांशी को देखता रहा, जब तक उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई. प्रियांशी के जाने के बाद आरिफ होंठों ही होंठों में बुदबुदाया, ‘‘क्या माल है यार.’’

आरिफ को बुदबुदाता देख जोलू पूछ बैठा, ‘‘क्या बात है पाशा उस्ताद, किस की बात कर रहे हो?’’

आरिफ ने जवाब दिया, ‘‘कुछ नहीं यार, बस ऐसे ही कह रहा था. कोई बात नहीं है. चलो, चायशाय पीते हैं. फिर अपनी धन्नो को आगे बढ़ाएंगे.’’

आरिफ ने जोलू की बात टाल दी और चाय की दुकान की ओर बढ़ गया. चारों चाय पी कर लौरी से आगे चले गए. आरिफ माल की डिलिवरी दे कर जब 2 दिनों बाद शाम को उसी रास्ते पर लौटा तो उस ने टोल प्लाजा पर फिर अपनी लौरी रोक दी. उसे चाय की जोरों से तलब लगी थी. जब उस ने लौरी सड़क किनारे लगाई, तभी उस की नजर प्रियांशी पर पड़ी. प्रियांशी पार्किंग से अपनी स्कूटी निकाल रही थी. वह उसे तब तक खा जाने वाली नजरों से घूरता रहा, जब तक वह दिखती रही. डा प्रियांशी रेड्डी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया और वह अपनी स्कूटी ले कर घर चली गई.

उस दिन के बाद आरिफ जब भी लौरी ले कर माल की डिलिवरी करने जाता, टोल प्लाजा के पास अपनी लौरी खड़ी कर के चाय की चुस्की लेने के बहाने प्रियांशी की स्कूटी देखता और चाय पी कर चला जाता. उसे यकीन हो गया था कि प्रियांशी रोज अपनी स्कूटी यहीं खड़ी करती है और फिर कहीं जाती है. आरिफ को बस इतना पता था कि उस के दिमाग में कुछ हलचल सी हुई है. उस के जिस्म में अय्याशी के कीड़े कुलबुलाने लगे. उस ने अपने साथियों के साथ मिल कर एक खरतनाक योजना बना ली थी और उस दिन के बाद वह प्रियांशी पर नजर रखने लगा था. वह सही मौके की तलाश में जुट गया. आखिरकार वह मौका उसे 27 सितंबर, 2019 को मिल ही गया.

उस दिन शाम करीब 5 बजे आरिफ लौरी ट्रक ले कर टोल प्लाजा पहुंचा और लौरी को एक ओर खड़ी कर के चाय की दुकान पर चाय पीने चला गया. उस के साथ तीनों हेल्पर जोलू शिवा, जोलू नवीन और चेन्ना भी थे. आरिफ को पता था कि प्रियांशी के आने का समय हो रहा है. चाय पीने के बाद उस ने अपने साथियों को वहां से उठने का इशारा किया. योजनानुसार प्रियांशी को किसी भी तरह रात 9 बजे तक रोकना था. इस के लिए आरिफ ने नुकीली कील से प्रियांशी की स्कूटी का पिछला पहिया पंक्चर कर दिया और चारों वहां से थोड़ी दूर हट कर उस पर नजर रखने लगे. रात करीब 7 बजे प्रियांशी टोल प्लाजा पहुंची. वहां से वह पार्किंग में गई, जहां उस ने अपनी स्कूटी पार्क की थी. स्कूटी पंक्चर देख कर उस का माथा चकरा गया कि वह घर कैसे पहुंचेगी? स्कूटी को ले कर वह परेशान हो गई.

योजना के अनुसार, तभी आरिफ तीनों साथियों के साथ प्रियांशी के पास पहुंचा और परेशानी का सबब पूछा तो उस ने बता दिया कि उस की स्कूटी पंक्चर है और इतनी रात गए कहीं पंक्चर लग नहीं सकता. आरिफ और उस के तीनों साथी मन ही मन खुश हुए. शिकार जाल में फंस गया था. बस चोट करने की देरी थी. तभी आरिफ ने उस के सामने पंक्चर लगवा देने की पेशकश की तो प्रियांशी ने सकुचाते हुए हां कर दी. प्रियांशी की ओर से हरी झंडी मिलते ही आरिफ ने पिछला पहिया खोल कर जोलू शिवा को सौंप दिया कि वह पंक्चर लगवा कर ले आए. इसी बीच प्रियांशी ने छोटी बहन रुचिका को फोन कर के बता दिया कि उस की स्कूटी पंक्चर है. कुछ लोग उस की मदद के लिए तैयार हैं. लेकिन पता नहीं क्यों उसे डर सा लग रहा है. उस ने आगे कहा कि वह तब तक बात करती रहे, जब तक कि पंक्चर लग कर आ न जाए.

प्रियांशी की आखिरी फोन काल इस पर रुचिका ने उसे सलाह दी कि डर लग रहा है तो पुलिस को फोन कर दे या आसपास कोई ओर हो तो उस की मदद ले ले. या फिर स्कूटी वहीं छोड़ कर कैब ले कर घर चली आए. उस समय रात के 9 बज कर 22 मिनट हो रहे थे और चारों ओर सन्नाटा फैल चुका था. रात के सन्नाटे में प्रियांशी तीनों लड़कों के बीच अकेली डरीसहमी खड़ी थी. छोटी बहन से बात करने के बाद प्रियांशी को उस की बात जंच गई और कैब ले कर घर जाने का मन बना लिया. उसी समय आरिफ ने देखा कि शिकार उस के हाथ से निकल रहा है. फिर क्या था, अचानक आरिफ, चेन्ना और नवीन फुरती से प्रियांशी पर झपट पड़े और उसे अपनी मजबूत बांहों में जकड़ लिया.

सब से पहले आरिफ ने उस का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर स्विच्ड औफ किया ताकि वह किसी से बात न कर पाए. उस के बाद तीनों उस का मुंह दबा कर घसीटते हुए पीछे खेत में ले गए. तीनों ने बारीबारी से अपनी हवस मिटाई. उसी समय पंक्चर लगवा कर जोलू शिवा भी वहां पहुंचा. बाद में उस ने भी अपनी जिस्मानी भूख मिटाई. अंत में एक बार फिर आरिफ ने प्रियांशी के साथ मुंह काला किया. उस समय उस के मजबूत हाथ की पकड़ प्रियांशी के मुंह और नाक पर बनी रही, जिस से दम घुटने से उस की मौत हो गई. प्रियांशी की मौत होते ही चारों के सिर से हवस का जुनून उतर गया. डर के मारे वे चारों थरथर कांपने लगे थे. आरिफ ने सुझाया कि लाश यहां छोड़ी तो पकड़े जाएंगे.

इसे ठिकाने लगाना होगा. उस के बाद चारों ने पहले प्रियांशी की लाश लौरी में लादी फिर उस की स्कूटी. उस के बाद उस ने शिवा को एक कैन दे कर पैट्रोल पंप से पैट्रोल मंगवाया. पैट्रोल लेते शिवा की तसवीर पैट्रोल पंप के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी. शिवा पैट्रोल ले कर आया और चारों वहां से लौरी ले कर करीब 40 किलोमीटर दूर हैदराबाद-बेंगलुरु हाइवे के चत्तनपल्ली पहुंचे. इन लोगों ने हाइवे के नीचे स्थित पुलिया के अंदर लौरी खड़ी कर दी. फिर चारों ने मिल कर लौरी से प्रियांशी की डेडबौडी और स्कूटी नीचे उतारी. स्कूटी एक ओर खड़ी कर दी. फिर उस की लाश पर पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. आग लगाने के बाद चारों वहां से अपनेअपने घर पहुंच गए.

वहीं मिली सजा, जहां प्रियांशी की लाश जलाई गई रात 2 बजे के करीब आरिफ अपने घर पहुंचा तो उस की मां ने उस से इतनी देर से आने का कारण पूछा. वह कुछ बोला नहीं बस इतना ही कहा कि मुझे सोने दो, सुबह बात करेंगे. फिर वह अपने कमरे में चला गया. उस समय वह बुरी तरह घबराया हुआ था. उस की मां भी उससे कुछ पूछ नहीं पाई थी. इधर प्रियांशी के घर वाले उस से बात न होने और मोबाइल स्विच्ड औफ आने के बाद टोल प्लाजा पहुंचे तो वहां न तो प्रियांशी दिखाई दी और न ही उस की स्कूटी. वह दिखाई तो तब देती जब वह वहां होती. दरिंदे तो उस का काम तमाम कर के वहां से भाग चुके थे. घर वाले रात भर उस की तलाश में मारेमारे यहांवहां फिरते रहे. अगली सुबह जब उस की जली हुई लाश बरामद हुई तो उस की तपिश से पूरा देश धधक उठा. फिर क्या हुआ, कहानी में ऊपर वर्णित है.

बहरहाल, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों मोहम्मद पाशा उर्फ आरिफ, जोलू नवीन, जोलू शिवा और चेन्ना को 5 दिसंबर, 2019 को पुलिस ने अदालत से रिमांड पर लिया. उन्हें ले कर पुलिस क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए उसी घटनास्थल पर पहुंची, जहां डा. प्रियांशी को जलाया था. उसी दौरान अंधेरे का लाभ उठा कर अभियुक्तों ने पुलिस के हथियार छीन कर उलटे पुलिस पर ही हमला बोल दिया और भागने की कोशिश की. इस का नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने चारों मार गिराए. हैदराबाद के चारों हैवानों के किस्से 10 दिनों में ही खत्म हो गए.

कुछ सफेदपोशों ने इसे जानबूझ कर बदले की भावना में की गई हत्या करार दिया. उस के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मामले की जांच के लिए मैजिस्ट्रियल जांच बैठा दी गई. अब सच्चाई जो भी निकले, लेकिन देश का हर तबका उन के मारे जाने पर खुश हुआ.

—कथा में मृतका और उस के परिजनों के नाम  परिवर्तित हैं. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

 

 

Rajasthan Crime : ठेकदारों को पैसा नहीं दिया तो कर लिया अपहरण

Rajasthan Crime : नैचुरल पावर एशिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को बाड़मेर के गांव उत्तरलाई में सोलर प्लांट लगाना था. इस के लिए नैचुरल पावर कंपनी ने बंगलुरु की सबलेट कंपनी को ठेका दिया, जो काम अधूरा छोड़ कर भाग गई. प्लांट की स्थिति जानने के लिए जब हैदराबाद से कंपनी के एमडी के. श्रीकांत रेड्डी अपने दोस्त सुरेश रेड्डी के साथ बाड़मेर आए तो…    

हैदराबाद निवासी के. श्रीकांत रेड्डी नैचुरल पावर एशिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे. हैदराबाद की यह कंपनी भारत के विभिन्न राज्यों में सरकारी कामों का ठेका ले कर काम करती है. इस कंपनी को राजस्थान के जिला बाड़मेर के अंतर्गत आने वाले उत्तरलाई गांव के पास सोलर प्लांट के निर्माण कार्य का ठेका मिला था. बड़ी कंपनियां प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए छोटीछोटी कंपनियों को अलगअलग काम का ठेका दे देती हैं. नैचुरल पावर एशिया प्रा. लि. कंपनी ने भी इस सोलर प्लांट प्रोजेक्ट का टेंडर सबलेट कर दिया था

बंगलुरू की इस सबलेट कंपनी ने बाड़मेर और स्थानीय ठेकेदारों को प्लांट का कार्य दे दिया. ठेकेदार काम करने में जुट गएतेज गति से काम चल रहा था कि इसी बीच नैचुरल पावर एवं सबलेट कंपनी के बीच पैसों को ले कर विवाद हो गया. ऐसे में सबलेट कंपनी रातोंरात काम अधूरा छोड़ कर स्थानीय ठेकेदारों का लाखों रुपयों का भुगतान किए बिना भाग खड़ी हुई. स्थानीय ठेकेदारों को जब पता चला कि सबलेट कंपनी उन का पैसा दिए बगैर भाग गई है तो उन के होश उड़ गए क्योंकि सबलेट कंपनी ने इन ठेकेदारों से करोड़ों का काम करवाया था, मगर रुपए आधे भी नहीं दिए थे. स्थानीय ठेकेदार नाराज हो गए. उन्होंने एमइएस के अधिकारियों से मिल कर अपनी पीड़ा बताई. एमइएस को इस सब से कोई मतलब नहीं था.

मगर जब काम बीच में ही रुक गया तो एमईएस ने मूल कंपनी नैचुरल पावर एशिया प्रा. लि. से कहा कि वह रुके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करे. तब कंपनी ने अपने एमडी के. श्रीकांत रेड्डी को हैदराबाद से उत्तरलाई (बाड़मेर) काम देखने पूरा करने के लिए भेजा. के. श्रीकांत रेड्डी अपने मित्र सुरेश रेड्डी के साथ उत्तरलाई (बाड़मेर) पहुंच गए. यह बात 21 अक्तूबर, 2019 की है. वे दोनों राजस्थान के उत्तरलाई में पहुंच चुके थे. जब ठेकेदारों को यह जानकारी मिली तो उन्होंने अपना पैसा वसूलने के लिए दोनों का अपहरण कर के फिरौती के रूप में एक करोड़ रुपए वसूलने की योजना बनाई.

ठेकेदारों ने अपने 3 साथियों को लाखों रुपए का लालच दे कर इस काम के लिए तैयार कर लिया. यह 3 व्यक्ति थे. शैतान चौधरी, विक्रम उर्फ भीखाराम और मोहनराम. ये तीनों एक योजना के अनुसार 22 अक्तूबर को के. श्रीकांत रेड्डी और सुरेश रेड्डी से उन की मदद करने के लिए मिलेश्रीकांत रेड्डी एवं सुरेश रेड्डी मददगारों के झांसे में गए. तीनों उन के साथ घूमने लगे और उसी शाम उन्होंने के. श्रीकांत और सुरेश रेड्डी का अपहरण कर लिया. अपहर्त्ताओं ने सुनसान रेत के धोरों में दोनों के साथ मारपीट की, साथ ही एक करोड़ रुपए की फिरौती भी मांगी

अपहर्त्ताओं ने उन्हें धमकाया कि अगर रुपए नहीं दिए तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा. अनजान जगह पर रेड्डी दोस्त बुरे फंस गए थे. ऐसे में क्या करें, यह बात उन की समझ में नहीं रही थी. दोनों दोस्त तेलुगु भाषा में एकदूसरे को तसल्ली दे रहे थेचूंकि अपहर्त्ता केवल हिंदी और राजस्थान की लोकल भाषा ही जानते थे, इसलिए रेड्डी बंधुओं की भाषा नहीं समझ पा रहे थे. यह बात रेड्डी बंधुओं के लिए ठीक थी. इसलिए वे अपहर्त्ताओं के चंगुल से छूटने की योजना बनाने लगेअपहर्त्ता मारपीट कर के दिन भर उन्हें इधरउधर रेत के धोरों में घुमाते रहे. इस के बाद एक अपहर्त्ता ने के. श्रीकांत रेड्डी से कहा, ‘‘एमडी साहब अगर आप एमडी हो तो अपने घर वालों के लिए हो, हमारे लिए तो सोने का अंडा देने वाली मुरगी हो.

इसलिए अपने घर पर फोन कर के एक करोड़ रुपए हमारे बैंक खाते में डलवा दो, वरना आप की जान खतरे में पड़ सकती है.’’ कह कर उस ने फोन के श्रीकांत रेड्डी को दे दिया. श्रीकांत रेड्डी बहुत होशियार और समझदार व्यक्ति थे. वह फर्श से अर्श तक पहुंचे थे. उन्होंने गरीबी देखी थी. गरीबी से उठ कर वह इस मुकाम तक पहुंचे थेश्रीकांत करोड़पति व्यक्ति थे. वह चाहते तो करोड़ रुपए अपहर्त्ताओं को फिरौती दे कर खुद को और अपने दोस्त सुरेश रेड्डी को मुक्त करा सकते थे, मगर वह डरपोक नहीं थे. वह किसी भी कीमत पर फिरौती दे कर अपने दोस्त और खुद की जान बचाना चाहते थे

अपहत्ताओं ने अपने मोबाइल से के. श्रीकांत रेड्डी के पिता से उन की बात कराई. श्रीकांत रेड्डी ने तेलुगु भाषा में अपने पिताजी से बात कर कहा, ‘‘डैडी, मेरा और सुरेश का उत्तरलाई (बाड़मेर) के 3 लोगों ने अपहरण कर लिया है और एक करोड़ रुपए की फिरौती मांग रहे हैं. आप इन के खाते में किसी भी कीमत पर रुपए मत डालना

‘‘जिस बैंक में मेरा खाता है, वहां के बैंक मैनेजर से मेरी बात कराना. आप चिंता मत करना, ये लोग हमारा बाल भी बांका नहीं करेंगे. हमें मारने की सिर्फ धमकियां दे सकते हैं ताकि रुपए ऐंठ सकें. आप बैंक जा कर मैनेजर से मेरी बात कराना. बाकी मैं देख लूंगा.’’

इस स्थिति में भी उन्होंने धैर्य और साहस से काम लिया. उन्होंने नैचुरल पावर कंपनी के अन्य अधिकारियों को भी यह बात बता दी. इस के बाद वह कंपनी के अधिकारियों के साथ हैदराबाद की उस बैंक में पहुंचे, जहां श्रीकांत रेड्डी का खाता थाश्रीकांत रेड्डी ने बैंक मैनेजर को मोबाइल पर सारी बात बता कर कहा, ‘‘मैनेजर साहब, मैं अपने दोस्त के साथ बाड़मेर में कंपनी का काम देखने आया था, लेकिन मददगार बन कर आए 3 लोगों ने हमारा अपहरण कर लिया और एक करोड़ की फिरौती मांग रहे हैं. आप से मेरा निवेदन है कि आप 25 लाख रुपए का आरटीजीएस करवा दो

‘‘लेकिन ध्यान रखना कि यह धनराशि जारी करते ही तुरंत रद्द हो जाए. ताकि अपहर्त्ताओं को धनराशि खाते में आने का मैसेज उन के फोन पर मिल जाए लेकिन बदमाशों को रुपए नहीं मिले.’’ उन्होंने यह बात तेलुगु और अंग्रेजी में बात की थी, जिसे अपहर्त्ता नहीं समझ सके. बैंक मैनेजर ने ऐसा ही किया. बदमाशों से एमडी के पिता और कंपनी के अधिकारी लगातार बात करते रहे और झांसा देते रहे कि जैसे ही 75 लाख रुपए का जुगाड़ होता है, उन के खाते में डाल दिए जाएंगे. चूंकि एक अपहर्त्ता के फोन पर खाते में 25 लाख रुपए जमा होने का मैसेज गया था इसलिए वह मान कर चल रहे थे कि उन्हें 25 लाख रुपए तो मिल चुके हैं और बाकी के 75 लाख भी जल्द ही मिल जाएंगे

अपहर्त्ताओं ने के. श्रीकांत रेड्डी से स्टांप पेपर पर भी लिखवा लिया था कि वह ये पैसा ठेके के लिए दे रहे हैं. अपहर्त्ता अपनी योजना से चल रहे थे, वहीं एमडी, उन के पिता और कंपनी मैनेजर अपनी योजना से चल रहे थे. उधर नैचुरल पावर कंपनी के अधिकारी ने 24 अक्तूबर, 2019 को हैदराबाद से बाड़मेर पुलिस कंट्रोल रूम को कंपनी के एमडी के. श्रीकांत रेड्डी और उन के दोस्त सुरेश रेड्डी के अपहरण और अपहत्ताओं द्वारा एक करोड़ रुपए फिरौती मांगे जाने की जानकारी दे दी. कंपनी अधिकारी ने वह मोबाइल नंबर भी पुलिस को दे दिया, जिस से अपहर्त्ता उन से बात कर रहे थे

बाड़मेर पुलिस कंट्रोल रूम ने यह जानकारी बाड़मेर के एसपी शरद चौधरी को दी. एसपी शरद चौधरी ने उसी समय बाड़मेर एएसपी खींव सिंह भाटी, डीएसपी विजय सिंह, बाड़मेर थाना प्रभारी राम प्रताप सिंह, थानाप्रभारी (सदर) मूलाराम चौधरी, साइबर सेल प्रभारी पन्नाराम प्रजापति, हैड कांस्टेबल महीपाल सिंह, दीपसिंह चौहान आदि की टीम को अपने कार्यालय बुलायाएसपी शरद चौधरी ने पुलिस टीम को नैचुरल पावर कंपनी के एमडी और उन के दोस्त का एक करोड़ रुपए के लिए अपहरण होने की जानकारी दी उन्होंने अतिशीघ्र उन दोनों को सकुशल छुड़ाने की काररवाई करने के निर्देश दिए. उन्होंने टीम के निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी एएसपी खींव सिंह भाटी को.

इस टीम ने तत्काल अपना काम शुरू कर दिया. साइबर सेल और पुलिस ने कंपनी के मैनेजर द्वारा दिए गए मोबाइल नंबरों की काल ट्रेस की तो पता चला कि उन नंबरों से जब काल की गई थी, तब उन की लोकेशन सियाणी गांव के पास थीबस, फिर क्या था. बाड़मेर पुलिस की कई टीमों ने अलगअलग दिशा से सियाणी गांव की उस जगह को घेर लिया जहां से अपहत्ताओं ने काल की थी. पुलिस सावधानीपूर्वक आरोपियों को दबोचना चाहती थी, ताकि एमडी और उन के साथी सुरेश को सकुशल छुड़ाया जा सके

पुलिस के पास यह जानकारी नहीं थी कि अपहर्त्ताओं के पास कोई हथियार वगैरह है या नहीं? पुलिस टीमें सियाणी पहुंची तो अपहर्ता सियाणी से उत्तरलाई होते हुए बाड़मेर पहुंच गए. आगेआगे अपहर्त्ता एमडी रेड्डी और उन के दोस्त सुरेश रेड्डी को गाड़ी में ले कर चल रहे थे. उन के पीछेपीछे पुलिस की टीमें थींएसपी शरद चौधरी के निर्देश पर बाड़मेर शहर और आसपास की थाना पुलिस ने रात से ही नाकाबंदी कर रखी थी. अपहर्त्ता बाड़मेर शहर पहुंचे और उन्होंने बाड़मेर शहर में जगहजगह पुलिस की नाकेबंदी देखी तो उन्हें शक हो गया. वे डर गए. वे लोग के. श्रीकांत रेड्डी और सुरेश रेड्डी को ले कर सीधे बाड़मेर रेलवे स्टेशन पहुंचे. बदमाशों ने दोनों अपहर्त्ताओं को बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर वाहन से उतारा. तभी पुलिस ने घेर कर 3 अपहर्त्ताओं शैतान चौधरी, भीखाराम उर्फ विक्रम एवं मोहनराम को गिरफ्तार कर लिया.

शैतान चौधरी और भीखाराम उर्फ विक्रम चौधरी दोनों सगे भाई थे. पुलिस तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर थाने ले आई. अपहरण किए गए हैदराबाद निवासी नैचुरल पावर एशिया प्रा. लि. कंपनी के एमडी के. श्रीकांत रेड्डी और उन के दोस्त सुरेश रेड्डी को भी थाने लाया गयापुलिस ने आरोपी अपहरण कार्ताओं के खिलाफ अपहरण, मारपीट एवं फिरौती का मुकदमा कायम कर पूछताछ कीश्रीकांत रेड्डी ने बताया कि उत्तरलाई के पास सोलर प्लांट निर्माण का ठेका उन की नैचुरल पावर एशिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हैदराबाद को मिला था

उन की कंपनी ने यह काम सबलेट कंपनी बंगलुरु को दे दिया. सबलेट कंपनी ने स्थानीय ठेकेदारों को पावर प्लांट का कार्य ठेके पर दिया. कार्य पूरा होने से पूर्व सबलेट कंपनी और नैचुरल पावर एशिया कंपनी में पैसों के लेनदेन पर विवाद हो गया. सबलेट कंपनी ने जितने में ठेका नैचुरल कंपनी से लिया था, उतना पेमेंट नैचुरल कंपनी ने सबलेट कंपनी को कर दिया. मगर काम ज्यादा था और पैसे कम थे. इस कारण सबलेट कंपनी ने और रुपए मांगेनैचुरल पावर कंपनी ने कहा कि जितने रुपए का ठेका सबलेट को दिया था, उस का पेमेंट हो चुका है. अब और रुपए नैचुरल कंपनी नहीं देगी

तब सबलेट कंपनी सोलर प्लांट का कार्य अधूरा छोड़ कर भाग गई. सबलेट कंपनी ने स्थानीय ठेकेदारों को जो ठेके दिए थे, उस का पेमेंट भी सबलेट ने आधा दिया और आधा डकार गई. तब एमइएस ने मूल कंपनी नैचुरल पावर एशिया प्रा. लि. के एमडी को बुलाया. मददगार बन कर शैतान चौधरी, भीखाराम उर्फ विक्रम चौधरी और मोहनराम उन से मिलेउन के लिए यह इलाका नया था. इसलिए उन्हें लगा कि वे अच्छे लोग होंगे, जो मददगार के रूप में उन्हें साइट वगैरह दिखाएंगे. मगर ये तीनों ठेकेदारों के आदमी थे, जो दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति के थे

इन्होंने ही उन का अपहरण कर एक करोड़ रुपए की फिरौती मांगी. एमडी रेड्डी ने इस अचानक आई आफत से निपटने के लिए अपनी तेलुगु और अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर के सिर्फ स्वयं को बल्कि अपने दोस्त को भी बचा लिया. पुलिस अधिकारियों ने थाने में तीनों अपहर्त्ताओं से पूछताछ की. पूछताछ में आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के नाम बताए, जो इस मामले में शामिल थे और जिन के कहने पर ही इन तीनों ने एमडी और उन के दोस्त का अपहरण कर एक करोड़ की फिरौती मांगी थी. तीनों अपहर्त्ताओं से पूछताछ के बाद पुलिस ने 25 अक्तूबर, 2019 को अर्जुनराम निवासी बलदेव नगर, बाड़मेर, कैलाश एवं कानाराम निवासी जायड़ु को भी गिरफ्तार कर लिया. इस अपहरण में कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे. आरोपियों को थाना पुलिस ने 26 अक्तूबर 2019 को बाड़मेर कोर्ट में पेश कर के उन्हें रिमांड पर ले लिया.

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन लोगों का ठेकेदारी का काम है. कुछ ठेकेदार थे और कुछ ठेकेदारों के मुनीम कमीशन पर काम ले कर करवाने वाले. अर्जुनराम, कैलाश एवं कानाराम छोटे ठेकेदार थे, जो ठेकेदार से लाखों रुपए का काम ले कर मजदूर और कारीगरों से काम कराते थेसबलेट कंपनी ने जिन बड़े ठेकेदारों को ठेके दिए थे. बड़े ठेकेदारों से इन्होंने भी लाखों रुपए का काम लिया था. मगर सबलेट कंपनी बीच में काम छोड़ कर बिना पैसे का भुगतान किए भाग गई तो इन का पैसा भी अटक गया. मजदूर और कारीगर इन ठेकेदारों से रुपए मांगने लगे, क्योंकि उन्होंने मजदूरी की थी. जब ठेकेदारों ने पैसा नहीं दिया तो ये लोग परेशान हो गए

ऐसे में इन लोगों ने जब नैचुरल पावर कंपनी के एमडी के आने की बात सुनी तो इन्होंने उस का अपहरण कर के फिरौती के एक करोड़ रुपए वसूलने की योजना बना लीइन लोगों ने सोचा था कि एक करोड़ रुपए वसूल लेंगे तो मजदूरों एवं कारीगरों का पैसा दे कर लाखों रुपए बच जाएंगेसभी आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

Murder Story : दोस्त को सुपारी देकर कराया प्रेमिका का मर्डर

Murder Story : किसी युवती या महिला से संबंध बनाते समय लोग यह भूल जाते हैं कि कोई भी महिला जब इस स्थिति तक पहुंचती है तो उस की भावनाएं भी साथ होती हैं. स्वाति सुखविंदर से भावनात्मक रूप से जुड़ी थी. जब सुखविंदर ने…

तारीख 15 नवंबर. वक्त शाम 4 बजे. जगह उज्जैन के थाना महाकाल क्षेत्र का नैशनल ढाबा. बाईपास इनर रिंगरोड स्थित नैशनल ढाबे से कुछ दूरी पर एक आटोरिक्शा आ कर रुका. आटो से स्वाति नाम की एक सुंदर युवती उतरी. नीचे उतर कर स्वाति ने आटोचालक को पैसे दिए. तभी स्वाति के मोबाइल फोन की घंटी बज उठी, जिस से वह सड़क पर उसी जगह खड़ी हो कर बात करने लगी. आटोचालक वहां से जा चुका था. किसी को भी मालूम नहीं था कि वहां क्या घटने वाला है. कुछ ही दूरी पर खड़ी एक गाड़ी में बैठे शख्स की आंखें लगातार स्वाति पर गड़ी थीं. उसे बेपरवाह देख वह गाड़ी तेजी से स्वाति की ओर बढ़ने लगी. स्वाति सड़क पर दाहिनी ओर खड़ी थी.

तेज गति से आ रही गाड़ी रौंग साइड से आई और स्वाति को जोरदार टक्कर मार कर वहां से निकल गई. सब कुछ इतनी जल्दी और तेजी से हुआ कि आसपास मौजूद लोगों में न तो कोई कुछ देख सका और न ही कोई कुछ समझ पाया. सड़क पर घायल पड़ी स्वाति को देख कर आसपास भीड़ जमा हो गई. उसी भीड़ में नैशनल ढाबा का मालिक सुखविंदर सिंह खनूजा भी शामिल था, जिस ने देर किए बिना स्वाति को अपनी बांहों में उठाया और तत्काल सीएचएल हौस्पिटल ले गया, जहां उपचार के दौरान उस की मौत हो गई. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए हौस्पिटल प्रबंधन ने तत्काल यह जानकारी टीआई गगन बादल को दे दी. सूचना पा कर महाथाने की एक टीम सीएचएल हौस्पिटल पहुंच गई. स्वाति को ले कर हौस्पिटल आया सुखविंदर भी वहीं मौजूद था.

उस ने टीआई गगन बादल को बताया कि वह मृतका को अच्छी तरह पहचानता है. वह भाक्षीपुरा लखेखाड़ी की रहने वाली है और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थी. टीआई गगन बादल और एसआई वीरेंद्र सिंह बंदेवार ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. सूचना पा कर स्वाति के घर वाले भी वहां आ गए. अब तक जो मामला सीधा सा सड़क एक्सीडेंट लग रहा था, वह उन के वहां पहुंचने से संदिग्ध हो गया. परिवार वालों ने बताया कि सुखविंदर सिंह खनूजा नाम का जो युवक स्वाति को हौस्पिटल ले कर आया था, वह मृतक का पूर्वप्रेमी है. सन 2014 में स्वाति ने उस के खिलाफ महिला थाने में रेप का केस भी दर्ज कराया था. इस मामले में खनूजा 21 दिन जेल में भी रहा था, लेकिन बाद में स्वाति के साथ शादी का वादा करने पर उसे जेल से जमानत मिल गई थी. इस के बावजूद दोनों की प्रेम कहानी बदस्तूर जारी रही थी.

स्वाति खनूजा से मिलने उस के नैशनल ढाबे पर आती रहती थी. घटना के समय भी वह उसी से मिलने आई थी. टीआई बादल ने उसी समय घटना की जानकारी उज्जैन के एसपी सचिन अतुलकर को दे दी. वह भी अस्पताल आ गए. एसपी ने मामले को संदिग्ध माना. उन्होंने एफएसएल अधिकारी अरविंद नायक को भी वहां बुला लिया. नायक ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. एसपी ने टीआई गगन बादल के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. इस टीम में एसआई वीरेंद्र बंदेवार, संजय यादव, एएसआई अनिल ठाकुर, मनीष यादव आदि को शामिल किया गया. पुलिस टीम मौके पर ऐसे गवाहों की खोज में जुट गई, जो घटना में प्रत्यक्षदर्शी थे. परंतु यह काम इतना आसान नहीं था. स्वाति को किस गाड़ी ने टक्कर मारी, इस बारे में भी लोगों के अलगअलग बयान थे.

टीआई गगन बादल ने मृतका स्वाति और उस के प्रेमी सुखविंदर खनूजा की कालडिटेल्स निकलवाई. इस के साथ ही उन्होंने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जुटाईं. इस जांच से सामने आया कि स्वाति को एक टाटा मैजिक ने टक्कर मारी थी, जिस का नंबर एमपी09 टीजी6900 था. यह गाड़ी इंदौर की थी. इस का मतलब यह था कि इंदौर की टाटा मैजिक उज्जैन में आ कर एक्सीडेंट कर लापता हो गई थी. इस मामले में पुलिस को गहरी साजिश की बू आने लगी. इंदौर टोल नाके के फुटेज भी पुलिस ने देखे, जिस से पता चल रहा था कि मैजिक गाड़ी केवल इस घटना को अंजाम देने के लिए इंदौर से उज्जैन आई थी, जो एक्सीडेंट के बाद वापस इंदौर चली गई थी.

एसआई वीरेंद्र बंदेवार ने टाटा मैजिक के मालिक का नामपता हासिल कर लिया. यह गाड़ी इंदौर के जकी अंसारी के नाम पर रजिस्टर्ड थी. एसआई बंदेवार एक टीम ले कर मैजिक मालिक जकी अंसारी के घर पहुंच गए. जकी को यह भी पता नहीं था कि उस की मैजिक उज्जैन गई थी. जकी ने बताया कि उस की गाड़ी इंदौर के ही गांधीनगर का वाहिद चलाता है. जकी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने गांधीनगर, इंदौर से वाहिद को उठा लिया. वाहिद के हाथ आते ही महाकाल पुलिस के हाथ जैसे सफलता की चाबी लग गई.

पुलिस ने वाहिद से सख्ती बरती तो उस ने बता दिया कि वह अपने दोस्त समीर उर्फ मोहसिन के कहने पर 15 नवंबर को टाटा मैजिक ले कर उज्जैन गया था. उस ने यह भी बताया कि समीर उर्फ मोहसिन को इस काम के लिए उस के दोस्त संजू धुर्वे ने बोला था. संजू की मैजिक उस वक्त खराब थी, इसलिए संजू से दोस्ती के चलते उस के कहने पर वाहिद अपनी मैजिक ले कर उज्जैन आया था. पुलिस ने उस से पूछताछ में सख्ती बरती तो कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई और अंत में सुखविंदर सिंह खनूजा का नाम सामने आ गया. पता चला कि सुखविंदर ने इस काम के लिए गांधीनगर, इंदौर निवासी दंपति पंकज और उमा शर्मा को एक लाख रुपए की सुपारी दी थी.

सुखविंदर पहले दिन से ही पुलिस के शक के दायरे में था, सो उस का नाम सामने आते ही पुलिस की एक टीम ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. जबकि बाकी के 4 आरोपी पंकज शर्मा, पंकज की पत्नी उमा और दोस्त समीर उर्फ मोहसिन व संजू धुर्वे फरार हो गए. पुलिस ने सुखविंदर सिंह से पूछताछ की तो पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई. स्वाति और सुखविंदर की प्रेम कहानी नई सड़क, उज्जैन निवासी सुखविंदर सिंह खनूजा की नई सड़क पर मोबाइल फोन की दुकान थी. साथ ही वह चिंतामन गणेश बाईपास पर शहर का मशहूर ढाबा चलाता था. पैसों की कमी न होने के कारण सुखविंदर राजनीति में भी हाथ आजमाना चाहता था, जिस के चलते वह शिवसेना में शामिल हो कर जिला स्तर का पदाधिकारी बन गया था.

स्वाति से उस की मुलाकात करीब 8 साल पहले तब हुई थी, जब स्वाति 21 साल की खूबसूरत युवती थी. मुलाकात दोस्ती में बदली और फिर प्यार होने के बाद शारीरिक संबंध भी बन गए. स्वाति एक निजी स्कूल में टीचर थी, सो पैसे वाला प्रेमी पा कर वह खुद को धन्य समझने लगी थी. सुखविंदर के बुलाने पर वह उस से मिलने कहीं पहुंच जाती थी. सुखविंदर ने उस से शादी का भी वादा किया था, लेकिन कुछ समय बाद सुखविंदर ने घर वालों की मरजी से दूसरी लड़की से शादी कर ली थी. स्वाति ने इस का विरोध किया तो सुखविंदर ने उसे भरोसा दिलाया कि कुछ दिनों में वह पत्नी को तलाक दे कर उस के साथ शादी कर लेगा.

स्वाति ने उस की बात पर भरोसा कर लिया, जिस से दोनों के बीच शारीरिक रिश्तों का धारावाहिक लिखा जाता रहा. सुखविंदर स्वाति पर खूब पैसे लुटाता था, स्वाति भी उस की हर इच्छा पूरी करने के लिए तैयार रहती थी. इस बीच सुखविंदर ने नैशनल ढाबा खोल लिया था, जहां स्वाति रोज उस से मिलने आने लगी. यहां विशेष तौर पर बनाए गए केबिन में सुखविंदर  स्वाति के साथ दोपहर में मस्ती करता था. दोनों के बीच विवाद की शुरुआत तब हुई, जब स्वाति खर्च के लिए आए दिन सुखविंदर से बड़ी रकम मांगने लगी. पहले तो सुखविंदर उस की मांग पूरी करता रहा, लेकिन रोजरोज की मांग से तंग आ कर उस ने हाथ तंग होने की बात कह कर पैसा देना बंद कर दिया. यह देख कर स्वाति उस पर कई तरह के दबाव बनाने लगी.

इस से दोनों के बीच विवाद बढ़ा तो सन 2014 में स्वाति ने सुखविंदर के खिलाफ महिला थाने में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. इस मामले में सुखविंदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. लेकिन इस दौरान सुखविंदर ने स्वाति को यह भरोसा दिला कर समझौता कर लिया कि वह जेल से बाहर आ कर 6 महीने में उस के साथ शादी कर लेगा. इस समझौते के बाद सुखविंदर बाहर आया तो दोनों के शारीरिक संबंध पहले की तरह पटरी पर लौट आए. लेकिन स्वाति अब काफी समझदार हो चुकी थी. अब वह आए दिन उस से कभी 3 हजार तो कभी 5 हजार तो कभी 10 हजार रुपए मांगने लगी.

सुखविंदर मना करता तो वह उस पर दबाव बनाती कि वह या तो अपनी पत्नी को तलाक दे कर उस से शादी करे, नहीं तो वह उस के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज करवा देगी. इतना ही नहीं, पहले तो सुखविंदर ही उसे रोज ढाबे पर मिलने बुलाया करता था, लेकिन अब वह खुद ही दोपहर में उस से मिलने के लिए ढाबे पर आने लगी, जहां कभीकभी दोनों में विवाद भी हो जाता था. सुखविंदर के ढाबे पर गांधीनगर, इंदौर का बदमाश पंकज शर्मा अकसर शराब पीने आया करता था. सुखविंदर की उस से दोस्ती हो गई थी. सुखविंदर ने पंकज से स्वाति के बारे में बताया तो उस ने लगे हाथ उस से छुटकारा पाने की सलाह दे डाली. जिस के चलते घटना से 15 दिन पहले सुखविंदर ने एक लाख रुपए में उस से ही स्वाति की हत्या का सौदा कर लिया.

इस के आगे की कमान पंकज की पत्नी उमा ने संभाली. इस के लिए उस ने समीर उर्फ मोहसिन और संजू से संपर्क किया. ये दोनों भी गांधीनगर, इंदौर के पुराने बदमाश थे. पहले संजू की टाटा मैजिक से स्वाति को कुचलने की योजना थी, लेकिन उस की गाड़ी खराब होने के कारण संजू ने इस काम के लिए अपने दोस्त वाहिद को कहा. संजू के कहने पर वाहिद 15 नवंबर, 2019 को अपनी मैजिक गाड़ी ले कर उज्जैन आया तो उस के साथ पंकज और समीर भी थे. उमा और संजू मोटरसाइकिल से उज्जैन पहुंचे थे. यहां ये लोग सुखविंदर के ढाबे से कुछ दूरी पर खड़े हो कर स्वाति के आने का इंतजार करने लगे.

रोज की तरह स्वाति आटो से आ कर सामने सड़क पर उतरी तो वाहिद ने उसे अपनी मैजिक गाड़ी से कुचल दिया और सब मौके से फरार हो गए. इन सभी ने सोचा था कि पुलिस इसे सामान्य एक्सीडेंट मान कर केस खत्म कर देगी. लेकिन एसपी सचिन अतुलकर के नेतृत्व में महाकाल थाना पुलिस ने जांच कर केस के मुख्य आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.