जीजा का अजीज साला : पैसों के लिए किया डबल मर्डर

8 मार्च, 2019 को सुबह के यही कोई 9 बजे थे. गोरखपुर के थाना सहजनवा के एसओ वी.के. सिंह को गणेश नाम के एक युवक ने फोन पर सूचना दी कि भकसा गांव के बाहर एक खेत में एक पुरुष और एक महिला की लाशें पड़ी हैं, किसी ने उन की गला रेत कर हत्या की है. उस समय एसओ साहब अपने सरकारी क्वार्टर में थे, जो थाना परिसर में ही था.

एसओ साहब तुरंत थाने पहुंचे और पुलिस टीम के साथ उसी समय भकसा गांव के लिए निकल गए. यह गांव थाने से लगभग 10 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में था. इसलिए वहां पहुंचने में पुलिस को 15 से 20 मिनट लगे.

जहां लाशें पड़ी थीं, वहां भारी संख्या में तमाशबीन जमा थे. पुलिस के पहुंचते ही वे सब इधरउधर हो गए. वहां पर 2 लाशें पड़ी थीं, एक आदमी की दूसरी औरत की. दोनों लाशों के बीच 200 मीटर का अंतर था. दोनों की ही हत्या किसी धारदार हथियार से गला काट कर की गई थी.

घटनास्थल का मुआयना कर के एसओ वी.के. सिंह ने उच्चाधिकारियों को फोन कर के सूचना दे दी. कुछ ही देर में एसपी (साउथ) विपुल कुमार श्रीवास्तव और एसपी (सिटी) विनय कुमार सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वहां पर एक सर्जिकल ब्लेड और एक जोड़ी ग्लव्स मिले. इस आधार पर पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे शायद मैडिकल पेशे से जुड़े रहे होंगे या फिर उन में से कोई ऐसा होगा जिसे मैडिकल के सामान की बखूबी जानकारी हो. पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाशों के बारे में शिनाख्त करानी चाही लेकिन कोई भी उन्हें नहीं पहचान सका.

स्थानीय लोगों से पता चला कि रात में एक एंबुलेंस गांव के बाहर खड़ी देखी गई थी. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि घटना में कम से कम 5-6 लोग शामिल रहे होंगे, क्योंकि मृतकों की कद काठी के हिसाब से वे दोनों 4-5 लोगों के कब्जे में आने वाले नहीं थे. परिस्थितियों को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा था कि मृतक शायद पतिपत्नी  होंगे.

पुलिस ने जरूरी काररवाई कर दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए बाबा राघवदास मैडिकल कालेज, गुलरिहा भेजवा दीं. फिर भकसा के चौकीदार रामसमुझ की तरफ से अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. पुलिस के सामने पहली समस्या मृतकों की शिनाख्त की थी. शिनाख्त हो जाने के बाद ही हत्यारों तक पहुंचा जा सकता था.

उधर घटनास्थल पर जुटे अनेक लोगों ने अपने अपने मोबाइल फोन में घटनास्थल पर पड़ी लाशों के फोटो खींच लिए थे. उन्होंने वह फोटो वाट्सऐप पर वायरल करने शुरू कर दिए. अगले दिन 9 मार्च को वह फोटो वायरल होतेहोते खोरबार थाने के महुलीसुधरपुर के रहने वाले वीरेंद्र निषाद के मोबाइल पर भी पहुंचे.

फोटो देख कर वीरेंद्र बुरी तरह चौंका. क्योंकि वह फोटो उस के भाई रविंद्र निषाद और भाभी संगम देवी के थे. भाई 7 मार्च को रोजाना की तरह घर से अपने काम पर निकला था और भाभी उसी दिन शाम को घर से दवा लेने के लिए डाक्टर के पास गई थी. फोटो देख कर वीरेंद्र की आंखों से आंसू बहने लगे.

9 मार्च के अखबारों में फोटो सहित 2 अज्ञात लाशें मिलने की खबर छपी. वह खबर किसी ने वीरेंद्र को दिखाई. इस से उसे यह जानकारी मिल गई कि भाई और भाभी की लाशें जिस जगह मिली हैं वह इलाका थाना सहजनवा के अंतर्गत आता है. जो उस के गांव से काफी दूर था. इसलिए गांव के कुछ लोगों के साथ वह थाना सहजनवा की तरफ चल दिया. वह सभी मोटरसाइकिलों पर सवार थे.

वीरेंद्र थाने पहुंच कर एसओ वी.के. सिंह से मिला और अखबार में छपी खबर और वाट्सएप के फोटो दिखाते हुए कहा कि मृतक उस के भाई रविंद्र निषाद और भाभी संगम देवी है. यह कहते कहते वीरेंद्र रोने लगा. लाशों की शिनाख्त होने के बाद एसओ ने राहत की सांस ली.

वीरेंद्र ने एसओ वी.के. सिंह को बताया कि रविंद्र ठेकेदार था. वह ठेके पर प्लंबिंग का बड़ा काम करता था. फिलवक्त उस का काम सहजनवा के गांव सरैया में चल रहा था. घर से वह बुलेट मोटरसाइकिल ले कर निकला था. वह अपने पास 2 मोबाइल रखता था लेकिन पुलिस को घटनास्थल से न तो बुलेट मिली थी और न कोई मोबाइल. इस का मतलब यह था कि हत्यारे साक्ष्य मिटाने के लिए उस का मोबाइल और मोटरसाइकिल अपने साथ ले गए थे.

पुलिस ने वीरेंद्र से दोनों की हत्या की वजह पूछी तो उस ने आशंका जताई कि कूड़ाघाट की रहने वाली सरिता से रविंद्र की जमीन के सौदे के ले कर काफी समय से विवाद चल रहा था. कहीं ऐसा तो नहीं कि रुपए हड़पने के लिए सरिता ने भाई और भाभी की हत्या करवा दी हो. पुलिस ने वीरेंद्र के बयान को आधार बना कर जांच की दिशा इसी ओर मोड़ दी.

पुलिस इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई थी, तभी 9 मार्च को दोपहर के वक्त एसओ वी.के. सिंह के मोबाइल पर एक मुखबिर की काल आई. मुखबिर ने बताया कि पीपीगंज थानाक्षेत्र के जरहद गांव के बाहर 2 दिनों से एक लावारिस बुलेट मोटरसाइकिल खड़ी है.

मुखबिर की सूचना पर सहजनवा पुलिस जरहद गांव पहुंच गई और उस बुलेट को थाना सहजनवा ले आई. बुलेट वीरेंद्र को दिखाई तो उस ने बाइक पहचान ली. बुलेट उस के भाई रविंद्र की ही थी.

इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी काफी उलझी हुई थी. पहली बात तो यह कि मृतक गोरखपुर के थाना खोराबार के महुली सुधरपुर के रहने वाले थे. जबकि उन की हत्या सहजहनवा थाने के भकसा गांव में हुई थी. तीसरे मृतक की बुलेट मोटरसाइकिल मिली पीपीगंज थाने के जरहद गांव में. इस तरह यह घटना 3 थानों से जुड़ गई थी.

घटना के फैले हुए तथ्यों से लग रहा था कि हत्यारा बहुत चालाक और शातिर किस्म का है. क्योंकि उस ने पुलिस को इस तरह उलझा दिया था कि हत्या की कोई कड़ी नजर नहीं आ रही थी. एक बात यह भी थी कि हत्यारे या हत्यारों को वहां के भौगोलिक परिवेश की अच्छी जानकारी थी.

दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए एसएसपी डा. सुनील गुप्ता ने 3 टीमें बनाईं. तीनों टीमों के साथ मीटिंग कर के उन्होंने कुछ दिशानिर्देश भी दिए. तीनों टीमें अपनेअपने काम में जुट गईं. इसी क्रम में पुलिस ने  कई संदिग्ध लोगों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दीं. कुछ लोगों को हिरासत में ले कर उन से पूछताछ की गई. लेकिन हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला.

वीरेंद्र ने जिस महिला सरिता पर शक जताया था पुलिस ने उसे भी हिरासत में ले कर कड़ी पूछताछ की. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. सरिता दोहरे मर्डर में कहीं से दोषी नजर नहीं आई तो पुलिस ने उसे भी पूछताछ के बाद कुछ हिदायत दे कर छोड़ दिया.

हफ्ता भर बीत जाने के बाद भी पुलिस जहां से चली थी, वहीं खड़ी नजर आ रही थी. पुलिस ने एक बार फिर से मौके पर जा कर क्राइम सीन को समझने की कोशिश की. साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ की. पूछताछ से पुलिस को कुछ सफलता हाथ लगी.

पता चला कि घटना वाली रात 10-साढ़े 10 बजे गांव के बाहर जो फोरव्हीलर खड़ा हुआ था वह एंबुलेंस नहीं, बल्कि लाल रंग की एक मारुति कार थी. उस कार में 4-5 लोग देखे गए थे. कार आधे घंटे के बाद वापस चली गई थी. उस के बाद क्या हुआ, किसी को कुछ पता नहीं था.

इस बीच पुलिस ने मृतक रविंद्र निषाद और उस की पत्नी संगम देवी के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर अध्ययन किया. पता चला कि घटना वाले दिन सुबह 11 बजे के आसपास रविंद्र के मोबाइल पर एक काल आई थी. उसी नंबर से शाम करीब 4 बजे फिर काल की गई थी. फिर साढ़े 7 बजे रविंद्र और संगम देवी का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ हो गए थे.

संगम देवी के फोन की काल डिटेल्स से पता चला कि शाम करीब साढ़े 4 बजे उस के फोन पर रविंद्र निषाद की काल आई थी. दोनों के बीच करीब 5 मिनट बातचीत भी हुई थी.

फिर 7 बजे दोनों की लोकेशन पीपीगंज इलाके में मिली. काल डिटेल्स के अध्ययन से यह बात साफ हो गई थी कि 7 बजे के करीब रविंद्र और संगम दोनों एक साथ पीपीगंज के किसी एक स्थान पर मौजूद थे. उस के बाद दोनों के मोबाइल फोन एक साथ स्विच्ड औफ हो गए.

मतलब साफ था, दोनों के साथ जो कुछ भी हुआ वह 7 साढ़े 7 बजे के बीच में ही हुआ था. हत्यारों की सुरागरसी के लिए पुलिस ने चारों ओर मुखबिरों का जाल फैला दिया था. जिस मोबाइल नंबर से रविंद्र निषाद के फोन पर आखिरी बार काल आई थी, पुलिस ने उस नंबर का पता लगा लिया था. वह नंबर  अजीज के नाम से लिया गया था. अजीज गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र के काजीपुर डोहरिया का रहने वाला था. इतने सुराग का मिल जाना पुलिस के लिए काफी था.

15 मार्च, 2019 को सुराग मिलते ही पुलिस काजीपुर डोहरिया में अजीज के घर पहुंच गई. संयोग से अजीज घर पर ही मिल गया. पुलिस को देख कर अजीज का पसीना छूटने लगा. उस से पूछताछ करने पर पता चला कि वह एक तांत्रिक है और घर पर ही झाड़फूंक का काम करता है.

अजीत को हिरासत में ले कर पुलिस लौट आई. उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो 2 मिनट में ही उस ने घुटने टेक दिए. अपना जुर्म कबूल करते हुए उस ने बताया कि उस ने उन दोनों की हत्या अपने छोटे भाई नफीस और दोस्त गुलाम सरवर के साथ मिल कर की थी.

घटना के बाद से नफीस फरार है, जबकि गुलाम सरवर सहजनवा के कालेसर गांव में छिपा है. अजीज की निशान देही पर पुलिस ने गुलाम सरवर को गिरफ्तार कर लिया. जैसे ही उस की नजर पुलिस की जीप में बैठे अजीज पर पड़ी तो वह समझ गया कि पुलिस को सब कुछ पता चल गया है.

थाने में पुलिस ने गुलाम सरवर से भी सख्ती से पूछताछ की. सरवर ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी घटना सिलसिलेवार बता दी. पुलिसिया पूछताछ में दोहरे हत्याकांड के पीछे विश्वासघात और रुपए हड़पने की कहानी सामने आई. कभी जीजा कहने वाले तांत्रिक अजीज ने अपनी ही मुंहबोली बहन को विधवा बना दिया.

बहुचर्चित रविंद्र निषाद और संगम देवी हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली थी. 16 मार्च, 2019 को एसएसपी डा. सुनील गुप्ता ने पत्रकार वार्ता का आयोजन कर के पत्रकारों के सामने दोहरे हत्याकांड का सिलसिलेवार तरीके से खुलासा किया. इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

35 वर्षीय रविंद्र निषाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के महुलीसुधरपुर का रहने वाला था. रविंद्र अपने बड़े भाई वीरेंद्र के साथ एक ही मकान में संयुक्त रूप से रहता था. दोनों भाइयों में गजब का आपसी मेलजोल था. दोनों एकदूसरे के सुखदुख में बराबर खड़े रहते थे.

रविंद्र ठेकेदार था. वह दूरदूर तक प्लंबिंग का ठेका लेता था. ठेकेदारी के काम से उस ने खूब पैसा कमाया. उस ने अपना आलीशान मकान बनवाया. बच्चों के सुखसुविधा की सारी भौतिक वस्तुओं का प्रबंध किया. अपने दोनों बेटों आदित्य और अभय को अच्छे स्कूल में दाखिल कराया. उन की शिक्षा पर वह खूब पैसा खर्च कर रहा था.

इस बीच रविंद्र ने कूड़ाघाट की रहने वाली सरिता से इसी इलाके में एक बड़ा प्लौट खरीदा. उस ने जो प्लौट खरीदा था, बाद में पता चला कि वह विवादित है. सरिता ने वही प्लौट एक और व्यक्ति को भी बेच दिया था. रविंद्र को जब इस सच्चाई का पता चला तो उसे अपने साथ हुए धोखे का अहसास हुआ.

रविंद्र समझदार इंसान था. उस ने बड़ी ही सूझबूझ से काम लिया और सरिता से अपना पैसा लौटाने का आग्रह किया. लेकिन सरिता की नीयत बिगड़ चुकी थी. उस ने पैसे देने से इनकार कर दिया. बात लाखों रुपए की थी. रविंद्र यूं ही अपना पैसा आसानी से नहीं जाने देना चाहता था. जब उस ने देखा कि बात आसानी से नहीं बनेगी तो उस ने अदालत का सहारा लिया.

रविंद्र की पत्नी संगम का मायका कुशीनगर में था. जिस गांव में उस का मायका था, उसी गांव में तांत्रिक अजीज का भी पुश्तैनी मकान था. वह संगम को अच्छी तरह जानता पहचानता था. अजीज संगम को बहन कहता था. अजीज का गोरखपुर के चिलुआताल के काजीपुर डोहरिया में भी मकान था. अजीज अपने परिवार के साथ अधिकतर काजीपुर डोहरिया में ही रहता था.

पुलिस के अनुसार, काफी पहले आरोपी अजीज की जिंदगी बड़ी तंगहाली से गुजरी थी. तब वह तंत्रमंत्र नहीं जानता था, बल्कि मेहनतकश इंसान था. बात करीब 8 साल पहले की है. अजीज हैदराबाद में पेंट पौलिश का काम करता था. पेंट पौलिश के काम से इतनी कमाई नहीं होती थी, जितनी उस की ख्वाहिश थी. इसलिए उस ने वह काम छोड़ दिया.

जहां अजीज किराए के कमरे में रहता था, उसी के पड़ोस में एक झाड़फूंक करने वाला आदमी रहता था. अजीज देखता था कि वह बिना मेहनत किए झाड़फूंक से रोज हजारों रुपए कमा लेता है. अजीज के दिमाग में यह बात घर कर गई कि वह भी तंत्र विद्या सीखेगा. फिर क्या था, उस ने चतुराई से उस व्यक्ति को अपना गुरु बना लिया और उस से लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए तथाकथित तंत्र विद्या सीख ली.

तंत्रमंत्र का पाखंड सीखने के बाद वह हैदराबाद से गोरखपुर आ कर यही काम करने लगा. सन 2014 से वह झाड़फूंक कर के लोगों को ठग रहा था. उस की ढंग की दुकान चल निकली. उस के पास दूरदराज से भी बड़ी संख्या में लोग आते थे.

रविंद्र की ससुराल से अजीज का पुराना संपर्क था. रविंद्र के शरीर पर सफेद दाग हो गए थे. ससुराल के लोगों के कहने पर इलाज के लिए वह अजीज से डोहरिया जा कर मिला.

अजीज के झाड़फूंक करने पर रविंद्र के सफेद दागों में थोड़ा फायदा होने लगा. यह देख कर रविंद्र खुश हो गया और अजीज का मुरीद बन गया. इस के बाद से रविंद्र और उस के परिवार के लोगों का उस के पास आनेजाने का सिलसिला शुरू हो गया. अजीज रविंद्र को संगम की वजह से जीजा कहता था.

घर आनेजाने से तांत्रिक अजीज रविंद्र के घर के कोनेकोने से वाकिफ था. वह यह भी जानता था कि रविंद्र मालदार पार्टी है. रविंद्र उस का मुरीद है, यह बात तांत्रिक अजीज भलीभांति जानता था. उस ने सोचा क्यों न इस संबंध का लाभ उठाया जाए. संयोग की बात यह थी कि रविंद्र के पास 5 लाख रुपए घर में रखे थे. यह रकम उस ने जमीन खरीदने के लिए रखी थी.

अजीज को इस की जानकारी हो गई थी. उस ने मकान बनवाने की बात कहते हुए उस से 5 लाख रुपए उधार मांगे. अजीज ने उस से वायदा किया कि जब उसे कहीं जमीन मिल जाएगी तब वह लौटा देगा. रविंद्र इनकार नहीं कर सका और 5 लाख रुपए उसे दे दिए. यह जून 2018 की बात है.

इसी बीच अजीज के छोटे भाई नफीस की शादी पक्की हो गई थी. शादी 17 फरवरी, 2019 को होनी तय हुई. अजीज की मंशा थी कि शादी से पहले घर बनवाया जाए ताकि नई दुलहन आराम से रह सके. रविंद्र से लिए 5 लाख रुपए थे ही. अजीज को 5 लाख रुपए दिए हुए धीरेधीरे 6 महीने बीत गए. रुपए लेने के बाद अजीज ने डकार तक नहीं ली. वह चुप्पी साध कर बैठ गया.

फिर क्या था? रविंद्र ने रुपए वापस करने के लिए अजीज से तगादा करना शुरू कर दिया. रुपए को ले कर दोनों के संबंधों में दरार आ गई. इसी बीच नफीस की शादी भी कैंसिल हो गई. भाई की शादी टूट जाने और रविंद्र के बारबार तगादा करने से अजीज रविंद्र से चिढ़ गया. वैसे भी लौटाने के लिए उस के पास रुपए नहीं थे. वह सब मकान बनवाने में खर्च हो गए थे. अब वह रुपए लौटाता तो कहां से. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

अजीज की नीयत में खोट आ गई थी. वह रविंद्र के रुपए हड़पना चाहता था. उधर, रविंद्र और उस की पत्नी संगम के बारबार के तगादे से अजीज परेशान हो गया था. उस ने उसे कई बार समय दिया लेकिन रुपए नहीं लौटा सका.  परेशानी की इस हालत में अजीज के दिमाग में एक खतरनाक विचार आया. उस ने सोचा कि क्यों न रविंद्र को ही रास्ते से हटा दिया जाए. न वह जिंदा रहेगा और न रुपए के लिए बारबार तगादा करेगा.

गुलाम सरवर तांत्रिक अजीज का परम भक्त था, जो कुशीनगर जिले के पड़रौना के गायत्रीनगर में रहता था. वह बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक आयुर्वेदिक मैडिकल कालेज से बीएमएस की पढ़ाई कर रहा था. तीसरे सेमेस्टर में 2 बार फेल होने के कारण वह पढ़ाई छोड़ कर महाराजगंज में जनसेवा नामक हास्पिटल चलाने लगा था. रोजीरोटी के लिए गुलाम सरवर बेल्डिंग का काम करता था.

परेशान अजीज ने गुलाम सरवर के सामने अपना दुखड़ा रोया और रविंद्र को रास्ते से हटाने में उस से मदद मांगी तो वह बिना सोचेसमझे अजीज का साथ देने के लिए तैयार हो गया. सरवर के साथ आ जाने के बाद उस ने छोटे भाई नफीस को भी साथ मिला लिया.

तीनों ने मिल कर योजना बनाई कि रुपए लौटाने के बहाने रविंद्र को घर बुलाएंगे और उस का काम तमाम कर के लाश को कहीं ठिकाने लगा देंगे. इस बीच नफीस और गुलाम सरवर स्थान की भी रेकी कर आए. गुलाम सरवर पडरौना से सर्जिकल ब्लेड और ग्लव्स खरीद लाया.

सब कुछ तय योजना के मुताबिक चल रहा था. योजना के मुताबिक, 6 मार्च, 2019 को अजीज ने रविंद्र को फोन कर कहा कि तुम 7 मार्च, 2019 को घर आ कर रकम ले जाओ. गुलाम सरवर और नफीस 7 मार्च की सुबह ही अजीज के घर आ गए थे. पिछली रात नफीस पडरौना स्थित गुलाम सरवर के घर रुक गया था. दोपहर में सरवर व नफीस कार से 8 किलोमीटर दूर सहजनवा के भकसा गांव गए. उन्हें वारदात को अंजाम देना था.

रेकी करने के बाद दोनों वापस आए. शाम 4 बजे अजीज ने रविंद्र को फोन कर के पूछा कि कब तक आ रहे हो. रविंद्र ने कुछ समय बाद पहुंचने को कहा. फिर रविंद्र ने उसी समय पत्नी संगम को फोन किया कि तुम तैयार हो जाओ, पैसे लेने अजीज के यहां पहुंचना है.

संगम को डाक्टर के पास चेकअप के लिए भी जाना था सो वह तैयार हो गई. संगम तैयार हो कर कैंट इलाके के रुस्तमपुर पहुंची तब तक रविंद्र भी बुलेट मोटरसाइकिल से सहजनवा की सरैया साइट से वहां पहुंच गया.  पत्नी संगम को साथ ले कर रविंद्र शाम 5 बजे अजीज के घर डोहरिया पहुंच गया.

रविंद्र के साथ उस की पत्नी संगम को देख कर तीनों चौंक गए. अजीज ने मन ही मन सोचा कि शिकार तो एक होना था, यहां तो दोनों ही शिकार होने चले आए. फिर क्या था, अजीज दोनों से कुछ देर इधरउधर की बातें करता रहा. तब तक नफीस दोनों की खातिरदारी के लिए प्लेट में नाश्ता और पीने के लिए पानी ले आया. अजीज ने पानी में पहले ही नशीली गोली डाल दी थी. वही पानी नफीस ने दोनों को पिला दिया.

पानी पीने के कुछ देर बाद दोनों अचेत हो गए. दोनों के बेहोश होने के बाद नफीस और गुलाम सरवर लाल रंग की मारुति कार में डाल कर उन्हें सहजनवा के भकसा गांव ले गए. कार से काजीपुर डोहरिया से भकसा पहुंचने में उन्हें करीब डेढ़ घंटा लगा. कार खुद गुलाम सरवर चला रहा था. उस समय रात के 10 बज रहे थे.

कार उन्होंने गांव के बाहर खड़ी कर दी. नफीस और सरवर ने कार से रविंद्र और संगम को बारीबारी से बाहर निकाला और खेत में ले जा कर लेटा दिया. सरवर ने हाथों में ग्लव्स पहने और सर्जिकल ब्लेड से रविंद्र की गला रेत कर हत्या कर दी.

इत्तफाक से उसी समय संगम को होश आ गया और उस ने पति की हत्या होते देख ली. वह लड़खड़ाती हुई वहां से भागी. लेकिन उन के हाथों से नहीं बच सकी. करीब 200 मीटर दूर दौड़ा कर उस की भी उसी ब्लेड से हत्या कर दी गई.

पुलिस को गुमराह करने के लिए सर्जिकल ब्लेड और ग्लव्स उन्होंने घटनास्थल पर ही छोड़ दिए. रविंद्र की मोटरसाइकिल और दोनों मोबाइल फोन ले कर वे वहां से चले गए. रास्ते में राप्ती नदी थी, अजीज ने दोनों मोबाइल फोन नदी में फेंक दिए और घर जा कर आराम से सो गया. अगले दिन नफीस और सरवर पडरौना चले गए. नफीस पडरौना से फरार हो गया. कथा लिखे जाने तक वह गिरफ्तार नहीं हुआ था.

आरोपी अजीज और गुलाम सरवर जेल में बंद हैं. पुलिस ने रविंद्र की बुलेट मोटरसाइकिल बरामद कर ली थी. नदी में फेंके जाने से मोबाइल बरामद नहीं हो सके. तांत्रिक का नाम था तो अजीज लेकिन वह किसी का भी अजीज नहीं हुआ.

—कथा में सरिता परिवर्तित नाम है. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इश्क के लिए बहनों की हत्या

कमरे में 7 वर्षीय बेटी शिल्पी खून से लथपथ पड़ी थी, उस के गले से खून बह रहा था. सुशीला घबराई हुई दूसरे कमरे की ओर दौड़ी, वहां का दृश्य भी ठीक वैसा ही था. इस कमरे में सब से छोटी 5 वर्षीय बेटी रोशनी का भी गला कटा हुआ था. उस के गले से भी खून बह रहा था.

खून से लथपथ बच्चियों के शव देखते ही घर में कोहराम मच गया. घर में 2 लाशें देख कर सुशीला और उस की बड़ी बेटी अंजलि दोनों दहाड़ें मार कर रोने लगीं. चीखने चिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी भी आ गए. जिस ने भी यह नजारा देखा, वह डर से सहम गया.

इसी बीच सूचना मिलने पर पिता जयवीर सिंह पाल भी बाजार से वापस लौट आए थे. घर में दोनों छोटी बेटियों की हत्या हो जाने से वह जमीन पर माथा पकड़ कर बैठ गए. दिनदहाड़े घर में 2 मासूम बच्चियों की हत्या हो जाने से गांव में सनसनी फैल गई. यह बात 8 अक्तूबर, 2023 शाम की है.

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                मृतक बच्चियां रोशनी और शिल्पी

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के गांव बहादुरपुर का निवासी है जयवीर सिंह पाल. वह खेतीकिसानी व पशुपालन कर अपने परिवार का पालनपोषण करता था. उस के 4 बेटे और 3 बेटियां थीं. बेटियों में सब से बड़ी 19 वर्षीय अंजलि और बेटा कन्हैया के अलावा 7 वर्षीय शिल्पी उर्फ सुरभि व 5 वर्षीय रोशनी थी.

दोपहर में मां सुशीला व पिता जयवीर खेत पर काम करने चले गए थे. 2 बेटे खेत पर बकरी चराने गए थे. जबकि नंदकिशोर 2 छोटे बेटे घर के बाहर गांव के बच्चों के साथ खेल रहे थे. घर पर अंजलि व उस की दोनों छोटी बहनें शिल्पी व रोशनी थीं.

इस से पहले सुशीला देवी अपनी बड़ी बेटी 19 वर्षीय अंजलि व पति जयवीर के साथ खेत से चारा ले कर शाम साढ़े 6 बजे घर लौट रही थी, रास्ते से ही पति बाजार से सौदा लेने चले गए थे. मांबेटी जब घर पहुंचीं तो घर का मेनगेट खुला हुआ था.

दरवाजा खुला देखते ही सुशीला ने कहा, ”अंजलि तूने दरवाजा बंद क्यों नहीं किया था?’’

”मम्मी, खेत पर जाते समय मैं तो बाहर का दरवाजा बंद कर के गई थी, पता नहीं किस ने खोला है?’’ अंजलि ने बोला.

जैसे ही दोनों आंगन में पहुंचीं तो कमरों के दरवाजे भी खुले दिखाई दिए. इस पर सुशीला बेटी पर नाराज होते बोली, ”तुझे शायद ध्यान ही नहीं, तू घर के दरवाजे खुले छोड़ गई थी.’’

”नहीं मम्मी, मैं तो खेत पर जाते समय घर के सारे दरवाजे बंद कर गई थी. उस समय शिल्पी और रोशनी दोनों कमरे में सो रही थीं.’’

घर में सन्नाटा छाया हुआ था. दोनों छोटी बेटियां शिल्पी और रोशनी नजर नहीं आईं. यह सोच कर कि उठने के बाद कहीं खेलने तो नहीं चली गईं. सुशीला ने उन दोनों का नाम ले कर आवाज लगाई. लेकिन न तो घर के अंदर से और न बाहर से बेटियों की आवाज आई.

इस पर सुशीला एक कमरे में गई. कमरे का नजारा देखते ही उस के मुंह से चीख निकल गई. क्योंकि घर में उस की दोनों बेटियों शिल्पी और रोशनी की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं.

नजदीकी पर गया दोहरे हत्याकांड का शक

इसी बीच किसी ने थाना पुलिस को गांव में हुए दोहरे हत्याकांड की सूचना दे दी. वारदात की सूचना पर एसएचओ अनिलमणि त्रिपाठी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए. दोनों बच्चियों की हत्या धारदार हथियार से गला काटकर की गई थी. दोनों की हत्या का तरीका एक जैसा था.

हैरानी की बात यह थी कि घर में सारा सामान अपनी जगह पर रखा हुआ मिला.  इस से साफ जाहिर हो रहा था कि घर में लूटपाट जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी. पूछताछ करने पर गांव वालों ने बताया कि उन्होंने किसी को घर में घुसते और हत्या कर के निकलते नहीं देखा.

इस से पुलिस को यह अंदेशा हुआ कि किसी ने जयवीर सिंह से दिली रंजिश मानते हुए इस वारदात को अंजाम दिया है.

घटना की गंभीरता को भांपते हुए एसएचओ ने विभाग के उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत  करा दिया. इस पर एएसपी (सिटी) कपिलदेव सिंह, सीओ (जसवंतनगर) अतुल प्रधान, एसएचओ (जसवंतनगर) मुकेश कुमार सोलंकी फोरैंसिक टीम सहित घटनास्थल पर आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. दोनों बच्चियों की हत्या जिस हथियार से की गई, वह घटनास्थल पर नहीं मिला. इस संबंध में मृतक बच्चियों के मम्मीपापा से पूछताछ की गई.

उन्होंने बताया कि वे लोग खेत पर गए हुए थे. घर में सब से बड़ी बेटी अंजलि के साथ ही दोनों छोटी बेटियां शिल्पी और रोशनी थीं. दोनों की देखरेख की जिम्मेदारी अंजलि पर थी. जबकि चारों बेटे घर के बाहर थे. लेकिन घटना से कुछ देर पहले अंजलि खेत से चारा लेने चली गई. इस के बाद ही किसी ने बच्चियों को अकेला देख कर उन की हत्या कर दी.

पिता जयवीर ने बताया कि उन की किसी से रंजिश नहीं है, फिर भी उन की मासूम बेटियों की हत्या किस ने और क्यों की, कुछ समझ नहीं आ रहा है. रात में ही आईजी जोन कानपुर क्षेत्र प्रशांत कुमार गांव पहुंचे और घर वालों से घटना की जानकारी ली.

पुलिस पूछताछ में अंजलि ने बताया कि उस के खेत पर जाने के एकडेढ़ घंटे के अंदर ही घटना घटित हो गई. वह अपनी दोनों छोटी बहनों को सोते हुए छोड़ कर गई थी. लेकिन खेत से चारा ले कर मां के साथ लौट कर आई तो दोनों बहनें मृत मिलीं.

अंजलि के बयान पर यकीन किया जाए तो दोहरे हत्याकांड को उस के पीठ फेरते ही लगभग एक पौन घंटे के अंदर अंजाम दिया गया था. अब ऐसे में बड़ा सवाल यह था कि आखिर घर में मौजूद मासूम बच्चियों की भला किसी से क्या दुश्मनी हो सकती थी कि कातिल ने मौका मिलते ही घर में दोनों की गला रेत कर नृशंस हत्या कर दी.

पुलिस ने पूछताछ के बाद रात में ही दोनों बच्चियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. फोरैंसिक टीम ने इस संबंध में जांच की. जयवीर सिंह पाल ने थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

जांच के दौरान पुलिस को किसी नजदीकी का हाथ होने की आशंका दिखाई दी, लेकिन यह केवल कयास भर ही था.

पुलिस दोहरे हत्याकांड के हत्यारों का पता लगाने के लिए छानबीन में पूरी तरह जुट गई. पुलिस को अब तक अंदेशा हो चुका था कि बच्चियों के हत्यारे गांव में ही छिपे हैं. हत्यारे मृतक बच्चियों के परिचित रहे होंगे, इसीलिए किसी ने उन के घर पर आने और जाने पर गौर नहीं किया. जयवीर का घर इस तरह का बना है कि बच्चियों की चीख भी घर से बाहर नहीं आ सकती थी, फिर हत्या कमरों में हुई थी.

अंजलि के बयानों में दिखा विरोधाभास

पूछताछ के दौरान सुशीला और जयवीर के बयान तो एकदूसरे से मैच कर रहे थे, लेकिन अंजलि बारबार अपने बयानों से पलट रही थी. उस ने बताया कि वह तुरंत ही मां के पीछे खेत पर चली गई थी. जबकि सुशीला ने बताया कि उन के जाने के 2 घंटे बाद अंजलि खेत पर पहुंची थी.

सुशीला ने यह भी बताया कि वह अंजलि को दोनों छोटी बहनों का ध्यान रखने की कह कर गई थी. जबकि अंजलि अपने मन से खेत पर पहुंची थी, उसे खेत पर आने को किसी ने नहीं कहा था.

पुलिस और फोरैंसिक टीम सबूत जुटाने व छानबीन में लग गई. घर में हत्या के बाद फर्श पर बहे खून को साफ किया गया था. इस का मतलब था कि हत्यारों ने हत्या के बाद इत्मीनान से खून भी साफ किया था. पुलिस की नजरों में कमरे की ज्यादा सफाई करना खटक गया.

पुलिस ने पूरा घर खंगाला. इस दौरान घर के टिन शेड में रखा फावड़ा मिला. इस फावड़े को पानी से साफ किया गया था, लेकिन उस पर खून के कुछ छींटे दिखाई दे रहे थे. इसी के साथ घर में गीले कपड़े भी मिले, जिन्हें धो कर सूखने के लिए आंगन में तार पर डाला गया था.

शाम के समय कपड़े कौन धोता है? पूछने पर सुशीला ने बताया कि ये कपड़े अंजलि के हैं. गौर से देखने पर पता चला कि कपड़ों को खून के दाग मिटाने के लिए धोया गया था. एसपी (सिटी) कपिलदेव सिंह, सीओ अतुल प्रधान और फोरैंंसिक टीम की पड़ताल में पूरा मामला स्पष्ट हो गया.

अब शक पूरी तरह अंजलि पर था. अंजलि से पूछताछ की तो वह बारबार बयान बदलने लगी. तब एसएचओ अंजलि को महिला पुलिस की मदद से थाने ले गए. वहां पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की.

अब अंजलि के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था. वह पूरी तरह टूट गई. उस ने कुबूल कर लिया कि अपनी सगी दोनों बहनों की हत्या उस ने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए की थी. उस ने पुलिस को हत्या की पूरी दास्तां सुना दी, जिसे सुन कर पुलिस भी सन्न रह गई. पुलिस ने दोहरे हत्याकांड का परदाफाश घटना के 20 घंटे बाद ही कर दिया.

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हत्यारोपी बहन अंजलि और उसका प्रेमी अमन

बहनों ने प्रेमी से मिलते देख लिया था

दोहरे हत्याकांड से एक सप्ताह पहले की बात है. उस दिन भी घर पर अंजलि अपनी दोनों छोटी बहनों शिल्पी और रोशनी के साथ थी. दोनों बहनें घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रही थीं. अंजलि का पास के ही गांव के रहने वाले अमन नाम के युवक से प्यार का चक्कर चल रहा था. मौके का फायदा उठाने के लिए अंजलि ने प्रेमी अमन को फोन कर चुपचाप घर पर बुला लिया.

अमन भी सब की नजरों से बच कर अंजलि के पास आ गया. घर आते ही दोनों एकदूसरे के गले लग गए. अंजलि और अमन छत पर जा कर बातें करने लगे. दोनों बहुत दिनों बाद मिले थे, इसलिए एकदूसरे के लिए तड़प रहे थे.

घर के बाहर अमन से मिलने में खतरा था. क्योंकि यदि उन दोनों को बतियाते या मिलते कोई देख लेता तो बात का बतंगड़ बन जाता, दोनों पकड़े जाते. इसलिए उस दिन मौका अच्छा देख कर अंजलि ने अमन को घर पर ही बुला लिया था.

छत पर एकदूसरे का हाथ थामे दोनों प्यार भरी बातें करते हुए भविष्य के सपने बुन रहे थे. शारीरिक स्पर्श से दोनों उत्तेजित हो गए. उसी समय अमन ने अंजलि को सीने से लगा लिया. फिर दोनों ही अपना नियंत्रण खो कर एकदूसरे में गुंथ गए. इस का पता उन्हें तब चला, जब खेलते खेलते दोनों छोटी बहनें पता नहीं कब छत पर आ गई थीं.

मासूम बच्चियों ने अपनी बहन को प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था. आहट होने पर दोनों झटपट अलग हो गए और अपने कपड़े ठीक किए.

अपनी बहनों को छत पर सामने देख कर अंजलि के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई. उस समय अमन बिना कुछ कहे वहां से चला गया. अंजलि ने अमन के जाने के बाद दोनों बहनों शिल्पी और रोशनी को अमन के घर आने की बात मम्मीपापा व घर में किसी को न बताने को कहा. इस के लिए उस ने दोनों को खाने की चीजें व अच्छे कपड़े दिलवाने की बात कही, लेकिन शाम को दोनों बच्चियों ने मां के खेत से आने के बाद उन से अंजलि की शिकायत कर दी.

सयानी और घर की सब से बड़ी बेटी के इस आचरण से सुशीला बहुत परेशान हो गई. उस ने इस बात को अपने पति को बता दिया. इस पर अंजलि की घर में बहुत फजीहत हुई. मम्मीपापा ने उस की पिटाई करने के साथ ही बेइज्जत भी किया, कहा, ”तुझ से अच्छी तो ये दोनों बहनें हैं.’’

यह भी हिदायत दी गई कि यदि वह लड़का दोबारा घर आया या तूने उस से मोबाइल पर बात की तो बहुत बुरा होगा. इतना ही नहीं उस दिन से अंजलि का घर से बाहर निकलना भी बंद करा दिया गया.

यह बात अंजलि के दिल में घर कर गई. अपनी शिकायत किए जाने से वह दोनों बहनों से बुरी तरह से चिढ़ गई थी. छोटे भाईबहनों के सामने रोजरोज ताने मिलने और होने वाली बेइज्जती उसे नश्तर की तरह चुभ रही थी. इस से वह तंग आ चुकी थी.

25 मिनट में काट डाला दोनों बहनों को

8 अक्तूबर, 2023 को अंजलि के मम्मीपापा दोपहर में ही खेत पर चले गए थे. 2 भाई बकरी चराने खेत पर व 2 भाई खेलने चले गए थे. घर में दोनों छोटी बहनें व अंजलि रह गई थी. मम्मी रात का खाना बनाने व बहनों का ध्यान रखने के लिए कह गई थी.

जब से छोटी बहनों ने अंजलि की शिकायत मम्मीपापा से की थी उसे बहनों पर बहुत गुस्सा आता था, लेकिन वह उसे खून के घंूट की तरह पी जाती थी. उस दिन खाना बनाने के बाद जब वह किचन से बाहर निकली तो दोनों बहनें अलगअलग कमरों में बैठी थीं.

अंजलि ने दोनों को आवाज दे कर अपने पास बुलाया, लेकिन कोई भी बहन उस के पास नहीं आई. बारबार पुकारने पर भी  दोनों कुछ नहीं बोल रहीं थीं. गुस्सा तो पहले से ही था. उस की बात अनसुनी करने पर अंजलि का पारा हाई हो गया और इस के बाद प्यार में अंधी अंजलि ने दोनों को मारने की साजिश रच डाली.

पहले अंजलि ने रोशनी को कमरे में बंद कर दिया. फिर आंगन में रखा फावड़ा उठाया और सीधे शिल्पी के कमरे में गई. अंजलि को देख कर शिल्पी मुसकराई. उस की हंसी अंजलि को बरदाश्त नहीं हुई. शिल्पी कुछ समझ पाती, उस से पहले ही अंजलि ने उस के गले पर फावड़े से वार कर दिया.

एक ही वार में वह जमीन पर गिर गई और तड़पने लगी. उस के शरीर से खून का फव्वारा फूट पड़ा. उस को वहीं छोड़ कर वह रोशनी के कमरे में गई और उस के गले पर भी फावड़े से प्रहार कर उस को भी मार डाला. इस के बाद वह घर के कोने में जा कर बैठ गई.

जब उसे इत्मीनान हो गया कि दोनों बहनें मर गई हैं, तब सब से पहले अंजलि ने दोनों के शवों को कमरों में एक कोने में खींच कर रख दिया. उस के बाद दोनों कमरों में फैला खून साफ किया.

हत्या करते समय अंजलि के कपड़ों पर भी खून लग गया था. वह कपड़े धो कर सूखने को डाल दिए. खून से सने फावड़े को धो कर उसी जगह रख दिया, जहां से उठाया था. इतना सब करने के बाद वह बहनों को देखने गई, दोनों मर चुकी थीं. एक गिलास पानी पीने के बाद अंजलि भी खेत पर पहुंच गई.

सुशीला अपने पति जयवीर सिंह  के साथ दोपहर में खेत पर काम करने चली गई थी. खेत पर जाते समय सुशीला ने बेटी अंजलि से कहा था कि शाम की रोटी बना लेना. अंजलि शाम साढ़े 5 बजे खाना बना कर वारदात को अंजाम दे कर खेत पर अपने मम्मीपापा के पास पहुंच गई थी.

अंजलि ने घर से निकलते समय पूरे घर के दरवाजे खोल दिए थे. घर का मुख्य दरवाजा भी खुला छोड़ दिया था, जिस से उस पर किसी को शक न जाए. उसे उम्मीद थी कि अपनी बनाई योजना से वह पुलिस की नजरों से बच जाएगी.

अपनी सगी 2 बहनों की हत्या के बाद भी उस के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. वह हंसते हुए खेत पर पहुंच कर मम्मी के साथ काम करने लगी. मां ने शिल्पी और रोशनी के बारे में पूछा तो बता दिया कि दोनों खाना खा कर सो रही हैं. खेत पर काम करने के बाद वह पशुओं के लिए चारा ले कर मां के साथ घर वापस आ गई.

प्रेमी अमन ने हत्या के लिए उकसाया अंजलि को

अपने इस दर्द को अंजलि ने फोन से अपने प्रेमी अमन को भी बता दिया था. उन के प्यार के रास्ते में रोड़े अटका रही बहनों को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई. एएसपी (ग्रामीण) सत्यपाल सिंह ने बताया कि अमन ने दोनों बहनों की हत्या के लिए अंजलि को उकसाया था. तब 8 अक्तूबर को घर में अकेली बहनों की फावड़े से गला काट कर अंजलि ने हत्या कर दी. अंजलि को गिरफ्तार करने वाली टीम में एसएचओ अनिलमणि त्रिपाठी, सर्विलांस प्रभारी रमेश सिंह, एसओजी इंसपेक्टर तारिक खान, एसआई समित चौधरी शामिल थे.

पुलिस ने आलाकत्ल फावड़ा, अंजलि के कपड़े, 2 मोबाइल फोन, बाल्टी आदि को बरामद कर लिया. पुलिस ने अंजलि को  9 अक्तूबर, 2023 को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

9 अक्तूबर की शाम 5 बजे गमगीन माहौल में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार पैतृक निजी जमीन पर किया गया. इस दौरान भारी पुलिस बल व सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों व परिजनों ने भरी आंखों से दोनों बच्चियों को अंतिम विदाई दी.

अंतिम संस्कार के समय एसपी (सिटी) कपिलदेव सिंह व सीओ अतुल प्रधान के अलावा जिले के विभिन्न थानों की फोर्स मौजूद रही. इस वारदात के बाद गांव में चर्चाओं का दौर बना रहा.

अंजलि को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. अब पुलिस अंजलि के  प्रेमी की सरगरमी से तलाश में जुटी हुई थी. एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने सीओ अतुल प्रधान के नेतृत्व में एक टीम बनाई. पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर इस घटना के दूसरे आरोपी व अंजलि के प्रेमी अमन निवासी खाका बाग, थाना बलरई को कोकावली अंडावली मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया.

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य सबूतों के आधार पर निकल कर आया है कि प्रेमी अमन ने हत्या के लिए अंजलि को उकसाया था.

पुलिस ने अमन के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 115, 120बी के अंतर्गत मामला दर्ज कर उसे भी कोर्ट के समक्ष पेश कर 11 अक्तूबर, 2023 को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

खुद का पाला सांप : मौसी के प्यार में भाई की हत्या

थाना गोला का मंदिर के थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा क्षेत्र में गश्त कर के अभीअभी लौटे थे. तभी उन के थाना क्षेत्र की गोवर्धन कालोनी में रहने वाली 29-30 वर्षीय रश्मि नाम की महिला कन्हैया, तेजकरण व कुछ अन्य लोगों के साथ थाने पहुंची.

प्रवीण शर्मा ने रश्मि से आने का कारण पूछा. इस पर उस ने बताया कि वह अपने 14-15 साल के 2 बेटों के साथ गोवर्धन कालोनी में रहती है. सुबह उस का बेटा सत्यम रोज की तरह आदर्श नगर में कोचिंग के लिए गया था, पर वह वापस नहीं लौटा. रश्मि के साथ 25-26 साल का एक युवक विवेक उर्फ राहुल राजावत भी था. रश्मि ने उसे अपनी बहन का बेटा बताया.

थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा पूछताछ कर ही रहे थे कि राहुल ने उन्हें बताया कि करीब 2-ढाई महीने पहले सत्यम का इलाके के कुछ लड़कों से झगड़ा हुआ था. उन लड़कों ने सत्यम को बंधक बना कर मारपीट भी की थी. उसे शक है कि सत्यम के गायब होने के पीछे उन्हीं लड़कों का हाथ है.

मामला गंभीर था, इसलिए प्रवीण शर्मा ने सत्यम की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर के इस घटना की जानकारी पुलिस अधीक्षक ग्वालियर नवनीत भसीन व सीएसपी मुनीष राजौरिया को दे दी. इस के साथ ही उन्होंने अपनी टीम को सत्यम की खोज में लगा दिया.

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पूरी रात गुजर गई, लेकिन न तो पुलिस को सत्यम के बारे में कुछ खबर मिली और न ही सत्यम घर लौटा. अगले दिन सुबहसुबह राहुल रश्मि को ले कर थाने पहुंच गया. उस ने थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा से उन 3 लड़कों के खिलाफ काररवाई करने को कहा, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

बच्चों के झगड़े होते रहते हैं, जो खुद ही सुलझ भी जाते हैं. टीआई शर्मा को बच्चों के झगड़े को इतना तूल देने की बात गले नहीं उतर रही थी. सत्यम को लापता हुए 24 घंटे हो चुके थे लेकिन उस का कुछ पता नहीं चल पा रहा था.

इस घटना की जानकारी ग्वालियर रेंज के डीआईजी मनोहर वर्मा को मिली तो उन्होंने अपराधियों के खिलाफ तत्काल सख्त काररवाई का निर्देश दिया. थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा ने विवेक उर्फ राहुल के शक के आधार पर उन तीनों लड़कों को थाने बुला लिया, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

प्रवीण शर्मा ने तीनों लड़कों से पूछताछ की. उन से पूछताछ कर के टीआई शर्मा समझ गए कि सत्यम के गायब होने में उन तीनों की कोई भूमिका नहीं है. इसलिए पूछताछ के बाद उन तीनों को छोड़ दिया गया.

इस बात पर राहुल उखड़ गया और पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाने लगा. इतना ही नहीं, उस ने शहर के एकदो राजनीति से जुड़े रसूखदार लोगों से भी टीआई प्रवीण शर्मा को फोन करवा कर दबाव बनाने की कोशिश की. उस का कहना था कि पुलिस उन 3 लड़कों के खिलाफ सत्यम के अपहरण का केस दर्ज नहीं कर रही है.

लापता हो जाने के बाद से ही राहुल राजावत अपनी रिश्ते की मौसी के साथ सत्यम की खोज में लगा था. लेकिन इस दौरान थानाप्रभारी ने यह बात नोट कर ली थी कि राहुल की रुचि सत्यम से अधिक उन 3 लड़कों को आरोपी बनवाने में है, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

यह बात खुद राहुल को संदेह के दायरे में ला रही थी. इसी के मद्देनजर टीआई प्रवीण शर्मा ने अपने कुछ लोगों को राहुल की हरकतों पर नजर रखने के लिए तैनात कर दिया.

इतना ही नहीं, वह इस बात की जानकारी जुटा चुके थे कि जिस रोज सत्यम गायब हुआ था, उस रोज राहुल खुद ही उसे अपनी कार से कोचिंग सेंटर छोड़ने आदित्यपुरम गया था. इस बारे में उस का कहना था कि उस ने सत्यम को कोचिंग सैंटर के पास पैट्रोल पंप पर छोड़ दिया था.

इस पर पुलिस ने राहुल को बिना कुछ बताए कोचिंग सेंटर के आसपास लगे सीसीटीवी के फुटेज खंगाले, जिन में न तो राहुल वहां दिखाई दिया और न ही उस की कार दिखी.

सब से बड़ी बात यह थी कि उस रोज सत्यम कोचिंग सेंटर पहुंचा ही नहीं था. इस से राहुल पुलिस के राडार पर आ गया. टीआई शर्मा ने इस बात पर भी गौर किया कि राहुल सत्यम के बारे में पूछताछ करने उस की मां के साथ तो थाने आता था, लेकिन सत्यम के पिता के साथ वह कभी नहीं आया.

इसलिए पुलिस ने राहुल की घटना वाले दिन की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई, जिस से यह बात सामने आई कि उस रोज राहुल के साथ जौरा में रहने वाली उस की बुआ का बेटा सुमित सिंह भी देखा गया था. लेकिन राहुल को घेरने के लिए पुलिस को अभी और मजबूत आधार की जरूरत थी.

यह आधार पुलिस को घटना से 4 दिन बाद 10 जनवरी को मिला. हुआ यह कि उस दिन सुबह सुबह जौरा थाने के बुरावली गांव के पास से हो कर गुजरने वाली नहर में एक किशोर का शव तैरता मिला. चूंकि सत्यम की गुमशुदगी की सूचना आसपास के सभी थानों को दे दी गई थी, इसलिए पुलिस ने शव के मिलने की खबर गोला का मंदिर थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा को दे दी.

नहर में मिलने वाले किशोर के शव का हुलिया सत्यम से मिलताजुलता था, इसलिए पुलिस सत्यम के परिजनों को ले कर मौके पर जा पहुंची. घर वालों ने शव की पहचान सत्यम के रूप में कर दी.

शव जौरा के पास के गांव बुरावली के निकट नहर में तैरता मिला था. जिस दिन सत्यम गायब हुआ था, उस दिन इस मामले का संदिग्ध राहुल जौरा में रहने वाली अपनी बुआ के बेटे के साथ देखा गया था. राहुल द्वारा सत्यम को कोचिंग सेंटर के पास छोड़े जाने की बात पहले ही गलत साबित हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने बिना देर किए राहुल उर्फ विवेक राजावत और उस की बुआ के बेटे सुमित को हिरासत में ले लिया.

नतीजतन अब तक पुलिस के सामने शेर बन रहा राहुल हिरासत में लिए जाते ही भीगी बिल्ली बन गया. इस के बावजूद उस ने अपना अपराध छिपाने की काफी कोशिश की, लेकिन पुलिस की थोड़ी सी सख्ती से वह टूट गया.

उस ने सुमित के साथ मिल कर राहुल को नहर में डुबा कर मारने की बात स्वीकार कर ली. पुलिस ने राहुल की वह कार भी जब्त कर ली, जिस में सत्यम को बैठा कर वह सबलगढ़ ले गया था. इस के बाद रिश्तों में आग लगा देने वाली यह कहानी इस प्रकार सामने आई—

सत्यम के पिता मूलरूप से विजयपुर मेवारा के रहने वाले हैं. वह इंदौर के एक होटल में नौकरी करते हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई के लिए मां रश्मि दोनों बेटों के साथ ग्वालियर में रहती थी. रश्मि का परिवार पहले आदित्यपुरम में रहता था.

लेकिन कुछ महीने पहले रश्मि ने आदित्यपुरम का मकान छोड़ कर गोला का मंदिर थाना इलाके की गोवर्धन कालोनी में किराए का दूसरा मकान ले लिया था. ग्वालियर के पास ही रश्मि के एक दूर के रिश्ते की बहन भी रहती थी.

विवेक उर्फ राहुल राजावत उसी का बेटा था. चूंकि रश्मि रिश्ते में राहुल की मौसी लगती थी, इसलिए उस का रश्मि के घर काफी आनाजाना हो गया था. वह जब भी ग्वालियर आता, रश्मि से मिलने उस के घर जरूर जाता था.

35 साल की रश्मि 2 बच्चों की मां होने के बाद भी जवान युवती की तरह दिखती थी. अनजान आदमी उसे देख कर उस की उम्र 25-27 साल समझने का धोखा खा जाता था. धीरेधीरे राहुल की रश्मि से काफी पटने लगी थी. पहले दोनों के बीच रिश्ते का लिहाज था, लेकिन वक्त के साथ उन के बीच दुनिया जहान की बातें होने लगीं. इस से दोनों के रिश्ते में दोस्ती की झलक दिखाई देने लगी.

इसी बीच राहुल पढ़ाई करने गांव से ग्वालियर आया तो रश्मि ने अपने पति से कह कर राहुल को अपने ही घर में रख लिया. चूंकि रश्मि के पति इंदौर में नौकरी करते थे सो उन्हें भी लगा कि राहुल के साथ रहने से रश्मि और बच्चों को सुविधा हो जाएगी. इसलिए उन्होंने भी राहुल को साथ रखने की अनुमति दे दी, जिस से राहुल ग्वालियर में रश्मि के साथ रहने लगा.

इस से दोनों के बीच पहले ही कायम हो चुके दोस्ताना रिश्ते में और भी खुलापन आने लगा. दूसरी तरफ काम की मजबूरी के चलते रश्मि के पति 4-6 महीने में हफ्ते 10 दिन के लिए ही घर आ पाते थे. इस में भी पिता के आने पर बच्चे उन से चिपके रहते, इसलिए वह चाह कर भी रश्मि को अकेले में अधिक समय नहीं दे पाते थे.

फलस्वरूप पति के आने पर भी रश्मि की शारीरिक जरूरतें अधूरी रह जाती थीं. ऐसे में एक बार रश्मि के पति ग्वालियर आए तो लेकिन मामला कुछ ऐसा उलझा कि वह एक बार भी उसे एकांत में समय नहीं दे सके. इस से रश्मि का गुस्सा सातवें आसमान को छूने लगा.

राहुल यह बात समझ रहा था, इसलिए उस ने रश्मि को गुस्से में देखा तो मजाक में कह दिया, ‘‘क्या बात है मौसी, मौसाजी चले गए इसलिए गुस्से में हो?’’

‘‘राहुल, तुम कभी अपनी पत्नी से दूर मत जाना.’’

राहुल की बात का जवाब देने के बजाए रश्मि ने अलग ही बात कही. सुन कर राहुल चौंक गया. उस ने सहज भाव से पूछ लिया, ‘‘क्यों, ऐसा क्या हो गया जो आज आप इतने गुस्से में हो?’’

राहुल की बात सुन कर रश्मि को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उस ने बात बदल दी. लेकिन राहुल समझ गया था कि असली बात क्या है. बस यहीं से उस के मन में यह बात आ गई कि अगर कोशिश की जाए तो मौसी की नजदीकी हासिल हो सकती है.

इसलिए उस ने धीरेधीरे रश्मि की तरफ कदम बढ़ाना शुरू कर दिया. कभी वह रश्मि की तारीफ करता तो कभी उस की सुंदरता की. धीरेधीरे रश्मि को भी राहुल की बातों में रस आने लगा और वह उस की तरफ झुकने लगी. इस का फायदा उठा कर एक दिन राहुल ने डरते डरते रश्मि को गलत इरादे से छू लिया.

रश्मि शादीशुदा थी, राहुल के स्पर्श के तरीके से सब समझ गई. उस ने तुरंत तुरुप का पत्ता खेलते हुए कहा, ‘‘यूं डर कर छूने से आग और भड़कती है राहुल. इसलिए या तो पूरी हिम्मत दिखाओ या मुझ से दूर रहो.’’

राहुल के लिए इतना इशारा काफी था. उस ने आगे बढ़ कर रश्मि को अपनी बांहों में जकड़ लिया, जिस के बाद रश्मि उसे मोहब्बत की आखिरी सीमा तक ले गई. बस इस के बाद दोनों में रोज पाप का खेल खेला जाने लगा. दोनों के बीच रिश्ता ऐसा था कि कोई शक भी नहीं कर सकता था.

वैसे भी राहुल घर में ही रहता था, इसलिए दोनों बेटों के स्कूल जाते ही राहुल और रश्मि दरवाजा बंद कर पाप की दुनिया में डूब जाते थे. रश्मि अनुभवी थी, जबकि राहुल अभी कुंवारा था. रश्मि को जहां अपना अनाड़ी प्रेमी मन भा गया था, वहीं राहुल अनुभवी मौसी पर जान छिड़कने लगा था.

समय के साथ दोनों के बीच नजदीकी कुछ ऐसी बढ़ी कि रात में दोनों बच्चों के सो जाने के बाद रश्मि अपने बिस्तर से उठ कर राहुल के बिस्तर में जा कर सोने लगी. अब जब कभी रश्मि का पति इंदौर से ग्वालियर आता तो रश्मि और राहुल दोनों ही उस के वापस जाने का इंतजार करने लगते.

राहुल लंबे समय से रश्मि के घर में रह रहा था. मोहल्ले में कभी उस के खिलाफ बातें नहीं हुई थीं. लेकिन जब बच्चों के स्कूल जाने के बाद रश्मि और राहुल दरवाजा बंद कर घंटों अंदर रहने लगे तो पासपड़ोस के लोगों ने पहले तो उन के रिश्ते का लिहाज किया, लेकिन बाद में उन के बीच पक रही खिचड़ी चर्चा में आ गई.

बाद में यह बात इंदौर में बैठे सत्यम के पिता तक भी पहुंच गई. इसलिए कुछ महीने पहले उन्होंने ग्वालियर आ कर न केवल आदित्यपुरम इलाके का मकान खाली कर दिया, बल्कि राहुल को भी अलग मकान ले कर रहने को बोल दिया.

इतना ही नहीं, उन्होंने राहुल को आगे से घर में कदम रखने से भी मना कर दिया. इंदौर वापस जाने से पहले उन्होंने अपने बड़े बेटे सत्यम को हिदायत दी कि अगर राहुल घर आए तो वह इस की जानकारी उन्हें दे दे.

अब राहुल और रश्मि का मिल पाना मुश्किल हो गया. क्योंकि एक तो रश्मि आदित्यपुरम छोड़ कर गोवर्धन कालोनी में रहने आ गई थी. दूसरे चौकीदार के रूप में सत्यम का डर था कि वह राहुल के घर आने की खबर पिता को दे देगा. लेकिन दोनों एकदूसरे से दूर भी नहीं रह सकते थे, इसलिए एक दिन मौका देख कर राहुल रश्मि से मिलने उस के घर जा पहुंचा.

राहुल को देखते ही रश्मि पागलों की तरह उस के गले लग गई. उसे ले कर वह सीधे बिस्तर पर लुढ़क गई. राहुल भी सब कुछ भूल कर रश्मि के साथ वासना में डूब गया. लेकिन इस से पहले कि दोनों अपनी मंजिल पर पहुंचते, अचानक घर लौटे सत्यम ने मां और मौसेरे भाई का पाप अपनी आंखों से देख लिया. सत्यम को आया देख कर राहुल और रश्मि दोनों घबरा गए.

फंसने से बचने के लिए राहुल सत्यम को चाट खिलाने ले गया, जहां बातोंबातों में उस ने सत्यम से कहा, ‘‘यार मेरे घर आने की बात पापा को मत बताना.’’

‘‘ठीक है, नहीं बताऊंगा. लेकिन इस से मुझे क्या फायदा होगा?’’ सत्यम ने शातिर अंदाज से कहा तो राहुल बोला, ‘‘जो तू कहेगा, कर दूंगा. बस तू पापा को मत बोलना.’’

राहुल को लगा कि सत्यम राजी हो जाएगा. लेकिन सत्यम तेज था, वह बोला, ‘‘ठीक है, मुझे 2 हजार रुपए दो, दोस्तों को पार्टी देनी है.’’

राहुल के पास पैसों की कमी नहीं थी. उस ने सत्यम को 2 हजार रुपए दे कर उसे बाजार घूमने के लिए भेज दिया और खुद वापस रश्मि के पास लौट आया.

सत्यम बिक गया, यह जान कर रश्मि भी खुश हुई. इस से दोनों के बीच पाप की कहानी फिर शुरू हो गई. आदित्यपुरम में रश्मि और राहुल के रिश्ते की भले ही चर्चा हुई हो, लेकिन नए मोहल्ले में पहले जैसी परेशानी नहीं थी और सत्यम भी चुप रहने के लिए राजी हो गया था.

इस बात का फायदा उठा कर जहां राहुल और रश्मि अपने पाप की दुनिया में जी रहे थे, वहीं सत्यम भी इस का पूरा फायदा उठा रहा था. वह राहुल से चुप रहने के लिए पैसे लेने लगा. लेकिन धीरेधीरे सत्यम की मांगें बढ़ने लगीं.

कुछ दिन पहले उस ने राहुल को ब्लैकमेल करते हुए उस से 20 हजार रुपए का मोबाइल खरीदवा लिया. राहुल रश्मि के नजदीक रहने के लिए सत्यम की हर मांग पूरी करता रहा. कुछ दिन पहले अचानक सत्यम ने उस से नई मोटरसाइकिल खरीद कर देने को कहा.

राहुल के पास इतना पैसा नहीं था. और था भी तो वह एक लाख रुपए रिश्वत में खर्च नहीं करना चाहता था. लेकिन सत्यम अड़ गया. उस ने कहा कि अगर वह मोटरसाइकिल नहीं दिलाएगा तो वह पापा से उस के घर आने की बात कह देगा.

इस से राहुल परेशान हो गया. इसी दौरान करीब 2-3 महीने पहले सत्यम का 3 लड़कों से झगड़ा हो गया, जिस में उन्होंने सत्यम के साथ काफी मारपीट की. यह झगड़ा भी राहुल ने ही शांत करवाया था. लेकिन इस सब से उस के दिमाग में आइडिया आ गया कि इस झगड़े की ओट में सत्यम को हमेशा के लिए अपने और रश्मि के बीच से हटाया जा सकता है.

इस के लिए उस ने अपनी बुआ के बेटे सुमित से बात की तो वह इस शर्त पर साथ देने को राजी हो गया कि काम हो जाने के बाद वह उसे रश्मि के संग एकांत में मिलने का मौका ही नहीं देगा, बल्कि रश्मि को इस के लिए राजी भी करेगा.

राहुल ने उस की शर्त मान ली तो सुमित ने उसे किसी दिन सत्यम को जौरा लाने को कहा. घटना वाले दिन राहुल रश्मि से मिलने उस के घर पहुंचा तो सत्यम वहां मौजूद था.

राहुल को इस से कोई दिक्कत नहीं थी. क्योंकि राहुल जब भी रश्मि से मिलने आता था, तब सत्यम किसी न किसी बहाने से कुछ देर के लिए वहां से हट जाता था. लेकिन उस रोज वह वहीं पर अड़ कर बैठ गया.

राहुल ने उस से बाहर जाने को कहा तो सत्यम बोला, ‘‘पहले मोटरसाइकिल दिलाओ.’’

इस पर राहुल ने उसे समझाया कि तुम बाहर चलो, मैं आधे घंटे में आता हूं. फिर तुम्हारी बाइक का इंतजाम कर दूंगा. इस पर सत्यम राहुल को अपनी मां से अकेले में मिलने का मौका देने की खातिर घर से बाहर चला गया. रश्मि के साथ कुछ समय बिताने के बाद राहुल बाहर जा कर सत्यम से मिला. उस ने सत्यम से जौरा चलने को कहा.

राहुल ने उसे बताया कि जौरा में उसे एक आदमी से उधारी का काफी पैसा लेना है. वहां से पैसा मिल जाएगा तो वह उसे बाइक दिलवा देगा.

बाइक के लालच में सत्यम राहुल के साथ जौरा चला गया, जहां बुआ के घर जा कर राहुल ने सुमित को साथ लिया और तीनों वहां से आ कर सबलगढ़ के बदेहरा गांव की पुलिया पर खड़े हो गए. राहुल ने सत्यम को बताया कि जिस से पैसा लेना है, वह यहीं आने वाला है. इस दौरान सत्यम ने मुरैना ब्रांच कैनाल में झांक कर देखा तो राहुल और सुमित ने उसे पानी में धक्का दे दिया.

सत्यम को तैरना नहीं आता था, फलस्वरूप वह गहरे पानी में डूब गया. इस के बाद सुमित और राहुल ग्वालियर आ गए. इधर सत्यम के कोचिंग से वापस न आने पर रश्मि परेशान हो गई. उस ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी तो राहुल सत्यम के अपहरण में उन युवकों को फंसाने की कोशिश करने लगा, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

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उस का मानना था कि तीनों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज हो जाएगा तो लाश मिलने पर उन्हें हत्यारा बनाना पुलिस की मजबूरी बन जाएगी, जिस से वह साफ बच जाएगा. लेकिन ग्वालियर पुलिस ने लाश बरामद होते ही राहुल की कहानी खत्म कर दी.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

अपने ही परिवार के खून से रंगे हाथ

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कानपुर से 40 किलोमीटर दूर बेलाविधूना मार्ग पर एक कस्बा है रसूलाबाद. इसी कस्बे से सटा एक गांव है बादशाहपुर., जहां रहता था रामचंद्र का परिवार. उस के परिवार में पत्नी जमना के अलावा 2 बेटे रघुनंदन उर्फ रघु, शिवनंदन उर्फ शिव तथा 2 बेटियां सपना और सुरेखा थीं. रामचंद्र गांव का संपन्न किसान था. वह गांव का प्रधान भी रह चुका था, इसलिए गांव में लोग उस की इज्जत करते थे.

रामचंद्र की छोटी बेटी सुरेखा दसवीं में पढ़ रही थी, जबकि बड़ी बेटी सपना ने बारहवीं पास कर के पढ़ाई छोड़ दी थी. रामचंद्र उसे पढ़ालिखा कर मास्टर बनाना चाहता था. लेकिन सपना के पढ़ाई छोड़ देने से उस का यह सपना पूरा नहीं हो सका. पढ़ाई छोड़ कर वह घर के कामों में मां की मदद करने लगी थी.

गांव के हिसाब से सपना कुछ ज्यादा ही सुंदर थी. जवानी में कदम रखा तो उस की सुंदरता में और निखार आ गया. गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें, तीखे नाकनक्श, गुलाबी होंठ और कंधों तक लहराते बाल हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे. अपनी इस खूबसूरती पर सपना को भी बहुत नाज था.

यही वजह थी कि जब कोई लड़का उसे चाहत भरी नजरों से देखता तो वह इस तरह घूरती मानो खा जाएगी. उस की इन खा जाने वाली नजरों से ही लड़के उस से डर जाते थे. लेकिन रामनिवास सपना की इन नजरों से जरा भी नहीं डरा था. वह सपना के घर से कुछ ही दूरी पर रहता था. उस के पिता शिव सिंह की मौत हो चुकी थी. वह मां और भाइयों अनिल तथा रावेंद्र के साथ रहता था.

पिता की मौत के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी, इसलिए उसे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी. पढ़ाई छोड़ कर उस ने अपनी खेती संभाल ली थी. उसे गानेबजाने का शौक था. उस का गला भी सुरीला था, वह भजनकीर्तन अच्छा गा लेता था. उस ने ‘धमाका’ नाम से एक कीर्तन मंडली बना ली और बुकिंग पर जाने लगा था. इस से उसे अच्छी आमदनी हो रही थी.

सपना के भाई रघुनंदन की रामनिवास से खूब पटती थी. आसपड़ोस में होने की वजह से दोनों का एकदूसरे के घर भी आनाजाना होता था. एक दिन दोनों बैठे बातें कर रहे थे तो रघुनंदन ने कहा, ‘‘यार रामनिवास! मुझे भी भजनकीर्तन सिखा कर अपनी मंडली में शामिल कर लो. 4 पैसे मुझे भी मिलने लगेंगे.’’

रामनिवास रघुनंदन को अच्छा दोस्त मानता था, इसलिए उसे भजनकीर्तन सिखाने लगा. रामनिवास जब भी रघुनंदन के घर आता था, सपना उसे घर के कामों में लगी दिखाई देती थी. वैसे तो वह उसे बचपन से देखता आया था, लेकिन पहले वाली सपना में और अब की सपना में काफी फर्क आ गया था. पहले जहां वह बच्ची लगती थी, अब वही सपना जवान होने पर ऐसी हो गई थी कि उस पर से नजर हटाने का मन ही नहीं होता था.

एक दिन रामनिवास सपना के घर पहुंचा तो सामने वही पड़ गई. उस ने पूछा, ‘‘रघु कहां है?’’

‘‘मम्मी और भैया तो कस्बे गए हैं. कोई काम है क्या?’’ सपना बोली.

‘‘नहीं, कोई खास काम नहीं था, बस ऐसे ही आ गया था.’’

‘‘भइया को सचमुच भजनकीर्तन सिखा रहे हो या ऐसे ही टाइम पास करा रहे हो?’’

‘‘भजनकीर्तन गाना इतना आसान नहीं है, जो हफ्ता-10 दिन में सीख जाएगा. इसे भी सीखने में समय लगता है. अगर इसी तरह लगा रहा तो एक दिन जरूर सीख जाएगा. उस के बाद महीने में 5-6 हजार रुपए कमाने लगेगा.’’ रामनिवास ने कहा.

‘‘5-6 हजार रुपए कमाने लगेगा?’’

‘‘मेहनत करेगा तो क्यों नहीं कमाने लगेगा? मैं कमाता नहीं हूं? अच्छा अब मैं चलता हूं. रघु आए तो बता देना, मैं आया था.’’

‘‘बैठो, भइया आते ही होंगे.’’ सपना ने कहा तो वहीं पड़ी चारपाई पर रामनिवास बैठ गया.

रामनिवास बैठ गया तो सपना रसोई की ओर बढ़ी. उसे रसोई की ओर जाते देख रामनिवास ने कहा, ‘‘सपना, चाय बनाने की जरूरत नहीं है. मैं चाय पी कर आया हूं. मेरे लिए बेकार में चूल्हा जलाओगी.’’

‘‘चूल्हा जल रहा है और मैं ने अपने लिए चाय भी चढ़ा रखी है. उसी में थोड़ा दूध और डाल देना है.’’ कह कर सपना रसोई में चली गई.

थोड़ी देर बाद वह 2 गिलासों में चाय ले आई. एक गिलास उस ने रामनिवास को थमा दिया तो दूसरा खुद ले कर बैठ गई. चाय पीते हुए रामनिवास ने कहा, ‘‘सपना बुरा न मानो तो एक बात कहूं?’’

‘‘कहो.’’ उत्सुक नजरों से देखते हुए सपना बोली.

‘‘अगर तुम जैसी खूबसूरत और ढंग से घर के काम करने वाली पत्नी मुझे मिल जाए तो मेरी किस्मत ही खुल जाए.’’

रामनिवास की इस बात का जवाब देने के बजाय सपना उठी और रसोई में चली गई. उसे इस तरह जाते देख रामनिवास को लगा वह नाराज हो गई है, इसलिए उस ने कहा, ‘‘सपना लगता है तुम नाराज हो गई? मेरी इस बात का कोई गलत अर्थ मत लगाना. मैं ने तो यूं ही कह दिया था.’’

इतना कह रामनिवास चला गया. लेकिन इस के बाद वह जब भी रघु के घर जाता, मौका मिलने पर सपना से 2-4 बातें जरूर कर लेता. उन की इस बातचीत का घर वालों को कोई ऐतराज भी नहीं था. क्योंकि रिश्ते में दोनों भाईबहन लगते थे. गांवों में तो वैसे भी रिश्तों को काफी अहमियत दी जाती है. फिर सपना और रामनिवास तो एक ही जाति और परिवार के थे.

लेकिन रामनिवास और सपना रिश्ते की मर्यादा निभा नहीं पाए. मेलमुलाकात और बातचीत में रामनिवास के दिलोदिमाग पर सपना की खूबसूरती और बातव्यवहार ने ऐसा असर डाला कि वह उसे जीवनसाथी के रूप में पाने के सपने देखने लगा. लेकिन अपने मन की बात वह सपना से कह नहीं पाता था. क्योंकि उस का रिश्ता ऐसा था कि इस तरह की बात कहना आसान नहीं था.

कहीं सपना बुरा मान गई और उस ने यह बात घर वालों से बता दी तो वह मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएगा. लेकिन यह उस का भ्रम था. सपना के मन में भी वही सब था, जो उस के मन में था. जब दोनों ही ओर चाहत के दिए जल रहे हों तो खुलासा होने में ज्यादा देर नहीं लगती. ऐसा ही सपना और रामनिवास के साथ भी हुआ.

दोनों के बीच प्यार का इजहार हो गया तो उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. आए दिन होने वाली मुलाकातों ने दोनों को जल्दी ही करीब ला दिया. वे भूल गए कि रिश्ते में भाईबहन हैं. रामनिवास सपना के प्यार के गाने गाने लगा. इस तरह दोनों मोहब्बत की नाव में सवार हो कर काफी आगे निकल गए.

सपना और रामनिवास के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो मनों में शारीरिक सुख पाने की कामना पैदा होने लगी. इस के बाद मौका मिला तो दोनों सारी मर्यादाएं तोड़ कर एकदूसरे की बांहों में समा गए. एक बार दोनों ने पाप के दलदल में कदम रखा तो जल्दी ही उस में गले तक समा गए. घर बाहर जहां भी मौका मिलता, वे शरीर की आग शांत करने लगे.

इसी का नतीजा था कि वे गांव वालों की नजरों मे आ गए. उन के प्यार के चर्चे पूरे गांव में होने लगे. उड़ते उड़ाते यह खबर रामचंद्र के कानों में पड़ी तो सुन कर उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. एकाएक उसे विश्वास नहीं हुआ कि रामनिवास उस की इज्जत पर हाथ डाल सकता है. वह तो उसे अपने बेटों की तरह मानता था. यह सब जान कर उस ने सपना पर तो पाबंदी लगा ही दी, रामनिवास से भी कह दिया कि वह उस के घर न आया करे.

बात इज्जत की थी, इसलिए रघुनंदन को दोस्त की यह हरकत अच्छी नहीं लगी. उस ने रामनिवास को समझाया ही नहीं, धमकी भी दी कि अगर उस ने अब उस की बहन पर नजर डाली तो वह भूल जाएगा कि वह उस का दोस्त और चचेरा भाई है. इज्जत के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है. इस के बाद उस ने सपना की पिटाई भी की और उसे समझाया कि उस की वजह से गांव में सिर उठा कर चलना दूभर हो गया है. वह ठीक से रहे अन्यथा अनर्थ हो जाएगा.

रामचंद्र जानता था कि बात बढ़ाने पर उसी की बदनामी होगी, इसलिए बात बढ़ाने के बजाय वह पत्नी और बेटों से सलाह कर के सपना के लिए लड़के की तलाश करने लगा. इस बात की जानकारी सपना को हुई तो वह बेचैन हो उठी. एक रात मौका निकाल कर वह रामनिवास से मिली और रोते हुए बोली, ‘‘घर वाले मेरे लिए लड़का ढूंढ रहे हैं, जबकि मैं तुम्हारे अलावा किसी और से शादी नहीं करना चाहती.’’

‘‘इस में रोने की क्या बात है? हमारा प्यार सच्चा है, इसलिए दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’ सपना को रोते देख रामनिवास विचलित हो उठा. वह सपना के आंसू पोंछ कर उस का चेहरा हथेलियों में ले कर बोला, ‘‘तुम मुझ पर भरोसा करो. मैं तुम्हारे साथ बिताए मधुर क्षणों को कैसे भूल सकता हूं? मैं ने तुम्हें मनप्राण से चाहा है. मेरे रोमरोम में तुम्हारा प्यार रचाबसा है. तुम्हें क्या लगता है कि तुम से अलग हो कर मैं जी पाऊंगा, बिलकुल नहीं.’’

यह कहतेकहते रामनिवास की आंखें भर आईं. उस की आंखों में आंखें डाल कर सपना बोली, ‘‘मुझे पता है कि हमारा प्यार सच्चा है, तुम दगा नहीं दोगे. फिर भी न जाने क्यों मेरा दिल घबरा रहा है. अच्छा, अब मैं चलती हूं. कोई खोजते हुए कहीं आ न जाए.’’

‘‘ठीक है, मैं कोई योजना बना कर तुम्हें बताता हूं.’’ कह कर रामनिवास अपने घर की ओर चल पड़ा तो मुसकरती हुई सपना अपने घर चली गई.

रामचंद्र सपना के लिए लड़का ढूंढ़ढूंढ़ कर थक गया, लेकिन कहीं शादी तय नहीं हुई. वह जहां भी जाता, बेटी की चरित्रहीनता आड़े आ जाती. शादी तय न होने से जहां सपना के घर वाले परेशान थे, वहीं सपना और रामनिवास खुश थे. इस बीच घर वाले थोड़ा लापरवाह हो गए तो वे फिर से चोरीछिपे मिलने लगे थे.

एक दिन रघुनंदन ने खेतों पर सपना और रामनिवास को हंसीमजाक करते देख लिया तो उस ने सपना की ही नहीं, रामनिवास की भी जम कर पिटाई की. इसी के साथ धमकी भी दी कि अगर फिर कभी उस ने दोनों को इस तरह देख लिया तो उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेगा.

रघुनंदन की इस पिटाई से दोनों का प्यार कम हो जाना चाहिए था. लेकिन उन का प्यार कम होने के बजाए बढ़ गया था. रघुनंदन ने रामनिवास की शिकायत उस के घर वालों से की तो उन्होंने कहा, ‘‘इस सब से तो अच्छा है रामनिवास और सपना की शादी कर दी जाए.’’

इस से रघुनंदन का गुस्सा और बढ़ गया. पैर पटकते हुए वह घर वापस आ गया. फसल की रखवाली के लिए रामनिवास रात को खेतों पर सोता था. सपना को जब कभी मौका मिलता, वह रात में उस से मिलने खेतों पर पहुंच जाती थी. काम हो जाने के बाद वह दबे पांव घर आ जाती.

27 मार्च की सुबह 4 बजे के आसपास सपना घर से दबे पांव रामनिवास से मिलने के लिए निकली. सपना को घर से निकलते हुए रघुनंदन ने देख लिया. उसे संदेह हुआ तो वह उस के पीछेपीछे चल पड़ा.

खेत पर उस ने जो देखा, सन्न रह गया. सपना और रामनिवास आपत्तिजनक स्थिति में थे. उन्हें इस तरह देख कर रघुनंदन की देह में आग लग गई. उस ने कहा, ‘‘हरामजादे, मना करने के बावजूद तू ने मेरी इज्जत पर हाथ डाला. आज मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’’

इतना कह कर रघुनंदन ने दोनों हाथों से कुल्हाड़ी हवा में लहराई और पूरी ताकत से रामनिवास की गरदन पर वार कर दिया. इसी एक वार में रामनिवास धराशाई हो गया. गुस्से में रघुनंदन ने ताबड़तोड़ कई वार कर के उसे खत्म कर दिया.

भाई का गुस्सा देख कर सपना जान बचा कर घर की ओर भागी. रघुनंदन ने पीछे से आवाज दी, ‘‘भाग कर कहां जाएगी. मैं आज तुझे भी नहीं छोड़ूंगा.’’

कहते हुए रघुनंदन ने सपना को दौड़ा लिया. सपना घर तक तो पहुंच गई, लेकिन वह खुद को कमरे में बंद कर पाती, उस के पहले ही आंगन में रघुनंदन ने उस पर भी उसी कुल्हाड़ी से वार कर दिया. सपना चीखी तो घर वाले भाग कर आ गए. उन्होंने रघुनंदन को पकड़ कर कुल्हाड़ी छीन ली. लेकिन सपना पर एक वार जो पड़ चुका था, उस से वह बुरी तरह जख्मी हो गई थी. उस का शरीर खून से तरबतर हो गया.

सूरज की किरण फूटने के साथ ही इस सनसनीखेज घटना की जानकारी रामनिवास के घर वालों और गांव वालों को हुई तो कोहराम मच गया. किसी ने इस घटना की खबर थाना रसूलाबाद पुलिस को दे दी थी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी सुनील कुमार सिपाहियों को साथ ले कर गांव बादशाहपुर पहुंच गए.

सब से पहले तो थानाप्रभारी ने गंभीर रूप से घायल सपना को इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया. इस के बाद वहां जा पहुंचे, जहां रामनिवास की लाश पड़ी थी.

रामनिवास की हत्या बड़ी ही बेरहमी से की गई थी. उस के शरीर पर 8-10 गहरे घाव थे, जिस से उस की मौत हो चुकी थी. घटनास्थल का निरीक्षण कर उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस के बाद पूछताछ में मृतक रामनिवास के भाई अनिल ने बताया कि रामनिवास की हत्या रघुनंदन ने की थी. वह उस की बहन सपना से प्यार करता था और शादी करना चाहता था. रघुनंदन इस बात का विरोध करता था. आज उस ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया तो रामनिवास की हत्या कर दी.

थानाप्रभारी सुनील कुमार ने अनिल की ओर से रामनिवास की हत्या का मुकदमा रघुनंदन के खिलाफ दर्ज कर के उसे उस के घर से हिरासत में ले लिया. पूछताछ में उस ने अपना अपराध स्वीकार कर के वह कुल्हाड़ी भी बरामद करा दी, जिस से उस ने रामनिवास की हत्या की थी और सपना को घायल किया था.

पूछताछ के बाद थाना रसूलाबाद पुलिस ने अभियुक्त रघुनंदन को कानपुर देहात की मांती कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिय गया. कथा लिखे जाने तक रघुनंदन की जमानत नहीं हुई थी. सपना अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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अपने ही परिवार के खून से रंगे हाथ – भाग 4

सुमित ने अपने कनफेशन वीडियो में भी इस सच को स्वीकार किया था कि उसे ड्रग्स की लत है. दरअसल, सुमित बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही ड्रग्स की लत का शिकार हो गया था. लेकिन उस के परिवार को ये बात कभी पता नहीं चली.

बीटेक की पढ़ाई के दौरान जब सुमित हौस्टल में रहता था तब उसे दोस्तों की संगत में ड्रग्स लेने, चरस की सिगरेट पीने और शराब पीने की आदत पड़ गई थी. इसी दौरान जब उस की शादी हो गई तो उस की नशे की लत कुछ कम जरूर हो गई, मगर उस के बाद भी चोरी छिपे वह ड्रग्स लेता रहता था.

1-2 बार उस की पत्नी अंशुबाला को उस पर शक हुआ तो उस ने इधर उधर की बात बना कर पत्नी को बहका दिया. डेढ़ साल पहले सुमित की नशे की लत उस वक्त फिर बढ़ गई जब वह गुरुग्राम की आईटी कंपनी में नौकरी करता था. वहां उस के 1-2 साथी भी नशा करते थे.

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एक साल पहले अंशु ने सुमित के कपड़ों की जेब से नशे की गोलियां पकड़ीं तो दोनों के बीच पहली बार इस बात को ले कर झगड़ा हुआ था. अंशुबाला ने तब ये बात सुमित की बड़ी बहन गुड्डी को बताई थी. गुड्डी ने भी सुमित को डांटते हुए नशा न करने की हिदायत दी थी.

चूंकि सुमित अच्छा कमाता था और पैसे की कोई कमी नहीं थी इसलिए उस ने सोचा ही नहीं कि जब नशा करने के लिए उस के पास पैसा नहीं होगा तो वह क्या करेगा. जनवरी में जब सुमित की नौकरी चली गई तो एक महीना तो सब ठीक रहा. लेकिन जैसे जैसे वक्त बीतने लगा, उस का डिप्रेशन और नशे की लत दोनों बढ़ते गए. जाहिर है नशे की लत के साथ खर्चा भी बढ़ने लगा. जबकि आमदनी कुछ थी नहीं.

सुमित को खुद भी और परिवार को भी ठाठ की जिंदगी जीने की आदत थी. धीरेधीरे उसे लगने लगा कि आने वाले दिनों में पैसे के अभाव में उस की जिंदगी बेहद मुश्किल भरी हो जाएगी. इस बात को ले कर वह चिड़चिड़ा रहने लगा. अब पत्नी से भी उस की बातबात पर झड़प हो जाती थी.

अंशु भी बारबार उसे नशा करने को ले कर ताने देती थी कि नशे में अपना वक्त खराब करने से अच्छा है कि वह नौकरी तलाश करने में वक्त लगाए. दूसरी ओर भरी हुई सिगरेट पीने और नशे की गोलियां लेने की सुमित की क्षमता भी बढ़ चुकी थी. वह हुकुम मैडिकल स्टोर से ही लाखों रुपए की नशे की दवाएं ले कर खा चुका था. अब धीरेधीरे वहां भी उस का उधार खाता शुरू हो गया था.

इस दौरान 8 अप्रैल, 2019 को आरव व आकृति का जन्मदिन मनाने के अगले दिन जब सुमित के सासससुर किसी शादी के लिए बिहार गए तो एक दिन अंशु ने सुमित पर ऐसा तंज कसा कि बात उस के दिल पर लगी. अंशु ने सुमित से कह दिया कि अगर ऐसा नशेड़ी पति ही किस्मत में लिखा था तो भगवान उसे कुंवारी ही रहने देता.

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सुमित को उस दिन लगा कि उस के इतना करने के बावजूद घर में अगर उस की यही कदर है तो ऐसे परिवार से परिवार का न होना बेहतर है. उस दिन की बात सुमित के दिल में ऐसी बैठ गई कि वह दिनरात नशा करता और एक ही बात सोचता कि ऐसे परिवार की फिक्र करने से क्या फायदा जहां इंसान की कदर न हो, इस से तो अच्छा है कि बिना परिवार अकेले रहो और मस्ती से जियो.

एक बार दिमाग में इस विचार ने घर कर लिया तो बस वह इसी बात पर सोचने लगा. उस ने इरादा कर लिया कि वह पूरे परिवार को खत्म कर देगा और अकेला ऐश की जिंदगी जीएगा.

अंशु सुमित को नशे की हालत में देख कर उसे ताने मारती थी. इस से सुमित का इरादा और भी ज्यादा मजबूत होता चला गया. सुमित के पास जमापूंजी भी खत्म होने लगी थी, इसलिए वह और ज्यादा तनाव में रहने लगा था. उस ने परिवार को खत्म करने का पूरा मन बना लिया था.

18 अप्रैल, 2019 को वह अपनी नशे की दवा और पोटैशियम साइनाइड लेने के लिए मुकेश के मैडिकल स्टोर पर गया. दवा लेने के बाद उस ने पेमेंट की. वहां मुकेश के कहने पर उस ने किसी दवा व्यापारी को औनलाइन पेमेंट करने में उस की मदद की. उसी दौरान उस ने मुकेश के खाते से एक लाख रुपए अपने खाते में भी ट्रांसफर कर लिए.

वह जानता था कि 1-2 दिन में मुकेश को यह बात पता चल जाएगी कि चोरीछिपे उस ने उस के खाते से एक लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए हैं. लिहाजा उसी दिन सुमित ने चाकुओं का एक सेट भी खरीद लिया. घर आ कर उस ने जब अंशु को चाकुओं का वह सेट दिया तो उस ने इस बात पर भी सुमित को फटकारा कि जिस चीज की जरूरत नहीं थी उसे वह क्यों लाया.

फिर 20 अप्रैल की वो रात आ गई जब उस ने परिवार को खत्म करने की ठानी. रात को उस ने पहले परिवार के सभी लोगों को खाने के बाद पीने के लिए कोल्डड्रिंक दी जिसमें उस ने नींद की दवा मिला रखी थी. बच्चों पर दवा का असर जल्दी हो गया और वे कोल्डड्रिंक पी कर बेसुध हो गए. लेकिन अंशु पर नशे का असर धीरेधीरे हो रहा था.

सुमित ने सब से पहले अपने बड़े बेटे प्रथमेश का गला काटा. क्योंकि वह प्रथमेश को सब से ज्यादा प्यार करता था. उसे मालूम था कि अगर उस ने प्रथमेश की हत्या पहले कर दी तो वह परिवार के दूसरे सदस्यों को आसानी से मार देगा. क्योंकि सब से ज्यादा प्यारी चीज को खत्म करने के बाद इंसान के लिए कम महत्व की चीजों को मिटाना ज्यादा आसान होता है.

प्रथमेश की हत्या के बाद सुमित अंशुबाला की हत्या करने के लिए उस के पास पहुंचा तो संयोग से तब तक अंशुबाला के ऊपर कोल्डड्रिंक में मिली दवा का असर कम हो चुका था. इसलिए उस ने सुमित का प्रतिरोध शुरू कर दिया.

यही कारण था कि सुमित ने उस का गला काटने से पहले चाकू के कई वार गले के अलावा शरीर के दूसरे अंगों पर भी किए. इस से अंशुबाला के शरीर पर कई जगह खरोचों के निशान आ गए थे. आखिर वह पत्नी की हत्या करने में सफल हो गया. इस के बाद उस ने बारीबारी से जुड़वां बेटा बेटी आरव और आकृति का भी गला काट कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

हत्या करने के बाद उस ने हत्या में इस्तेमाल चाकुओं को बाथरूम में जा कर धो दिया. उस ने अपने खून से लथपथ कपड़ों को बाथरूम में जा कर बदला और रात भर घर में बैठ कर अपने किए पर सोचता विचारता रहा.

उस के मन में विचार आया कि वह खुद भी आत्महत्या कर ले. लेकिन कई घंटे सोचविचार के बाद सुमित ने सुबह करीब 3 बजे एक बैग में कपड़े और घर में रखे गहने व नकदी रखे और घर का ताला लगा कर घर से निकल गया.

रास्ते में उसे गार्ड मिला तो सुमित ने उस से कह दिया कि वह थोड़ी देर में वापस लौट आएगा. घर के बाहर आ कर उस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए ओला कैब बुक की और वहां से स्टेशन पर पहुंच कर तत्काल टिकट ले कर त्रिवेंद्रम जाने के लिए तैयार खड़ी राजधानी एक्सप्रेस में चढ़ गया.

घर से चलते वक्त सुमित अपने घर के दोनों फोन भी साथ ले गया था. उस ने उन दोनों फोनों को ट्रेन में चढ़ते ही बंद कर दिया था. ट्रेन में ही सुमित ने अपना कनफेशन वीडियो बनाया और उसे अपने परिवार के वाट्सगु्रप में डाल दिया. 6 बजे ये वीडियो भेजने के बाद उस ने अपना फोन भी बंद कर दिया था.

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सुमित ने बताया कि पहले तो वह आत्महत्या करना चाहता था, लेकिन जब ट्रेन में बैठ गया तो उस का इरादा बदल गया. उस ने तय किया कि वह कहीं दूर जा कर अपनी पहचान छिपा कर साधु संत बन कर जिंदगी गुजार लेगा ताकि उस की नशे की लत भी पूरी होती रहे. पुलिस ने पूछताछ के बाद सुमित को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया.

— कथा पुलिस की जांच और आरोपी से पूछताछ पर आधारित

अपने ही परिवार के खून से रंगे हाथ – भाग 3

अंतिम संस्कार के बाद अंशुबाला के मातापिता व परिवार के अन्य लोग इंदिरापुरम थाने पहुंचे और वहां उन्होंने थानाप्रभारी संदीप कुमार को बताया कि घर में कोई आर्थिक तंगी नहीं थी. सुमित ने सामूहिक हत्या कर घर में लूटपाट की है. वह गहने और नकदी ले कर फरार हुआ है.

परिजनों का तर्क था कि यदि उसे आत्महत्या करनी होती तो वह पत्नी और बच्चों के साथ ही जान दे देता. परिजनों ने हत्यारोपी सुमित के भाई और बहन को गिरफ्तार करने की मांग की.

परिजनों ने यह भी बताया कि 8 अप्रैल को ही आकृति व आरव का जन्मदिन हंसीखुशी मनाया गया था. अंशुबाला के पिता बी.एन. सिंह ने पुलिस को बताया कि वह चूंकि अपनी पत्नी मीरा सिंह के साथ बेटी अंशुबाला के साथ ही रहते थे, इसलिए उन्होंने देखा कि सुमित अकसर अंशु से लड़ाई करता था. वह उस से बार बार रुपए मांगता था. रुपए न देने पर पिटाई करता था.

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बी.एन. सिंह का यह भी कहना था कि सुमित हर महीने एक लाख रुपए से अधिक कमाता था. उस ने नौकरी जरूर छोड़ दी थी लेकिन घर परिवार चलाने के लिए उसे कोई परेशानी नहीं थी. जबकि सुमित ने वीडियो में आर्थिक तंगी के चलते पत्नी और बच्चों की हत्या करने का दावा किया था.

लेकिन पुलिस ने पूरी कालोनी के लोगों के अलावा किराना, कौस्मेटिक की दुकान और प्रैस वाले से पूछताछ की तो उन्होंने परिवार पर किसी प्रकार का उधार होने से साफ इनकार कर दिया. सभी का कहना था कि सामान खरीदने के बाद तुरंत भुगतान कर दिया जाता था.

सोसायटी में कपड़े प्रेस करने वाले रामलाल ने पुलिस को बताया कि सुमित के घर से उस के पास प्रतिदिन छह जोड़ी कपड़े प्रैस होने आते थे. शुक्रवार सुबह भी कपड़े प्रैस होने आए थे.

कपड़े प्रैस करने के एवज में प्रतिमाह सुमित के घर से 1500 रुपए मिलते थे. परिवार ने कभी रुपए उधार नहीं किए. सोसायटी के पास स्थित किराना दुकान संचालक ने बताया कि अंशुबाला प्रतिमाह 8 हजार रुपए का घरेलू सामान नकद ले कर जाती थी.

कपड़े प्रैस करने वाले धोबी रामलाल ने यह भी बताया कि सुमित जब भी यहां रहता था, घर के नीचे या सोसाइटी में घूम कर सिगरेट पीता था. वह सिगरेट पीने का इतना आदी था कि एक दिन में 3 से 4 डिब्बी सिगरेट पी जाता था. पूछने पर सुमित कहता था कि सिगरेट पर उस का महीने का खर्च 10 हजार रुपए से ज्यादा आता है.

इस पूरी पूछताछ से यह बात तो साफ हो गई कि आर्थिक तंगी की जो बात सामने आ रही थी, उस में बहुत ज्यादा दम नहीं था. इसलिए पुलिस ने अंशुबाला के परिजनों द्वारा हत्याकांड में सुमित के भाई और बहन के शामिल होने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग को दरकिनार कर दिया.

क्योंकि यह बात साफ हो चुकी थी कि परिवार न तो किसी आर्थिक मुसीबत में था न ही परिवार के दूसरे लोगों का सुमित के घर बहुत आनाजाना था. इसलिए पुलिस ने अब अपना सारा ध्यान सुमित की तलाश पर केंद्रित कर दिया.

पुलिस ने सुमित के मोबाइल नंबर की सीडीआर निकाल ली थी. उस में पुलिस को करीब आधा दरजन ऐसे नंबर मिले, जिन पर सुमित की बात होती थी. ये नंबर बिहार, बेंगलुरु, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत अन्य कई स्थानों के थे. पुलिस ने संदिग्ध नंबरों की एकएक कर जांच पड़ताल शुरू कर दी.

सर्विलांस टीम को अचानक उस वक्त सुमित की लोकेशन मिल गई, जब उस ने कुछ देर के लिए अपना मोबाइल औन किया. उस वक्त उस की लोकेशन मध्य प्रदेश के रतलाम में थी. सुमित ने अपनी पत्नी के दोनों मोबाइल तो औन नहीं किए थे. हां, इस दौरान 1-2 बार उस ने अपने भाई अमित से बात करने के लिए अपना फोन खोला तो उस की लोकेशन ट्रेस हो गई.

उस की लोकेशन रतलाम की आ रही थी. सुमित ने जब भी अपने भाई से बात की तो उस ने यह तो नहीं बताया कि वह कहां है लेकिन उस ने बारबार यहीं कहा कि वह बहुत परेशान था, इसलिए उस ने इतना बड़ा कदम उठा लिया.

एसएसपी उपेंद्र अग्रवाल ने इस दौरान मोबाइल की लोकेशन मिलने वाले स्थानों पर वहां की जीआरपी को सुमित के फोटो के साथ जानकारी भेजी ताकि वह किसी को दिखे तो उसे पुलिस हिरासत में लिया जा सके.

आननफानन में एसआई प्रह्लाद व इजहार अली और कांस्टेबल रवि कुमार की टीम को रतलाम रवाना कर दिया गया. साथ ही उन्होंने सर्विलांस टीम को उन के साथ बराबर संपर्क बना कर सुमित की लोकेशन का अपडेट देने के भी आदेश दिया.

चूंकि सुमित के कई रिश्तेदार व जानने वाले मध्य प्रदेश में रहते थे, इसलिए आशंका थी कि वह वहां पर अपनी पहचान छिपा कर कहीं छिपा होगा. भले ही उस ने वीडियो में कहा था कि वह 5 मिनट में आत्महत्या कर लेगा, लेकिन रतलाम में उस की लाकेशन मिलने और अभी तक की जांच से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह मौत को गले लगा चुका होगा.

इस दौरान 22 अप्रैल, 2019 की शाम को अचानक इंदिरापुरम पुलिस ने औषधि विभाग के निरीक्षक वैभव बब्बर के साथ न्याय खंड 3 में स्थित हुकुम मैडिकल स्टोर पर छापा मारा. सुमित ने भेजे गए वीडियो में इसी मैडिकल स्टोर का जिक्र किया था.

पुलिस ने मैडिकल स्टोर के संचालक मुकेश जो मकनपुर का रहने वाला था, को गिरफ्तार कर लिया. छापा मार कर जब पड़ताल की गई तो पता चला कि उस ने 2 सालों से मैडिकल स्टोर के लाइसैंस का नवीनीकरण नहीं कराया था. उस से पूछताछ में पता चला कि सुमित 2 साल में एक लाख रुपए की नशीली दवाइयां खरीद कर खा चुका था.

सुमित कुमार ने वीडियो में बताया था कि वह पोटैशियम साइनाइड खा कर 5 मिनट में अपनी जिंदगी भी खत्म कर लेगा. मगर हुकुम मैडिकल स्टोर के संचालक मुकेश से जब पूछताछ हुई तो उस ने बताया कि उस के पास पौटैशियम साइनाइड नहीं था. सुमित काफी जिद कर रहा था, जिस की वजह से उस ने पोटैशियम साइनाइड बता कर उसे दूसरी दवा दे दी थी.

विश्वास दिलाने के लिए उस ने नशीली दवाओं के एवज में उस से 22,500 रुपए वसूले थे. पुलिस को भी तलाशी में उस की दुकान से पोटैशियम साइनाइड नहीं मिला, अलबत्ता उस की दुकान की तलाशी में कई नशीली व प्रतिबंधित दवाइयां जरूर बरामद हुईं. पुलिस ने मैडिकल स्टोर से ऐसी 2 पेटी दवाइयां कब्जे में लीं.

पुलिस ने औषधि निरीक्षक की शिकायत पर मुकेश के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया और दुकान सील कर दी. लेकिन सुमित की गिरफ्तारी व उस के परिवार के चारों सदस्यों की मौत की गुत्थी अभी तक उलझी थी.

इस दौरान पुलिस को मिली फोरैंसिक रिपोर्ट से पता चला कि सुमित ने पत्नी व बच्चों की हत्या के लिए 2 चाकुओं का प्रयोग किया था. बाथरूम से जो चाकू बरामद हुए थे, उन्हें पानी से साफ किया गया था.

जांच पड़ताल में ये भी पता चला कि सुमित वारदात वाली रात 2 बजे तक वाट्सऐप पर औनलाइन था. यह बात पुलिस को उस ग्रुप से जुडे़ लोगों की मदद से पता चली. सुमित की लोकेशन ट्रेस करने के लिए पुलिस ने उस का फेसबुक अकाउंट खंगाला तो पता चला कि सुमित फेसबुक पर ज्यादा एक्टिव नहीं था.

इस दौरान पुलिस को अचानक एक सफलता  मिली. कर्नाटक के उडुपी शहर में रेलवे पुलिस के एक कांस्टेबल ने टीवी चैनलों पर गाजियाबाद में हुए चौहरे हत्याकांड से जुड़ी खबर देखी थी. इस खबर में हत्या के बाद लापता सुमित की तसवीर भी दिखाई गई थी.

उसी तसवीर के हुलिए से मिलतेजुलते एक शख्स को जब जीआरपी के जवान ने स्टेशन पर देखा तो संदिग्ध मान कर वह उसे थाने ले आया. उस की आईडी चैक करने पर जब उस का संबंध गाजियाबाद से जुड़ा पाया गया तो उडुपी जीआरपी ने इस की सूचना गाजियाबाद पुलिस को दी.

उडुपी पुलिस ने वाट्सऐप के जरिए उस की वीडियो गाजियाबाद पुलिस को भेजी. उस वीडियो को जब गाजियाबाद पुलिस ने पीडि़त परिजनों को दिखाया गया तो उन्होंने तसदीक कर दी कि वह सुमित ही है. इस के बाद तो पुलिस के लिए सब कुछ आसान हो गया. एसएसपी ने रतलाम में सुमित को खोज रही पुलिस टीम को फ्लाइट पकड़ कर उडुपी पहुंचने के आदेश दिए.

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वहां पहुंच कर इंदिरापुरम पुलिस ने सुमित को अपनी कस्टडी में ले लिया. सुमित कुमार को उसी दिन उडुपी की कोर्ट में पेश कर पुलिस ने उस का ट्रांजिट रिमांड लिया और उसे ले कर अगले दिन यानी 24 अप्रैल को गाजियाबाद लौट आई. सुमित को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस ने 2 दिन के रिमांड पर लिया जिस के बाद खुलासा हुआ कि सुमित ने किस वजह से और क्यों इस वारदात को अंजाम दिया था.