सगे भतीजे की नृशंस हत्या करने वाला चाचा

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में चरगवां पुलिस थाने के अंतर्गत एक छोटा सा गांव है सगड़ा. इस गांव की आबादी बमुश्किल 700-800 होगी. गांव के अधिकांश लोग खेतीबाड़ी का काम करते हैं. सगड़ा गांव में उत्तम गिरि का 6 भाइयों का परिवार रहता है. उत्तम गिरि और सब से बड़े भाई सतमन गिरि एक साथ रहते हैं. जबकि 4 अन्य भाई घर से कुछ दूरी पर बने मकान में रहते हैं. मूलत: किसानी करने वाले इस परिवार के पास लगभग 40 एकड़ खेती की जमीन है.

8 अप्रैल, 2019 की बात है. उत्तम गिरि की पत्नी ममता परिवार के लिए खाना बना रही थी. ममता का 10 साल का बेटा बादल खेलने की बात कह कर घर से बाहर चला गया था, जबकि 5 साल की बेटी मानवी घर पर ही खेल रही थी.

ममता खाना बना कर रसोई के सारे काम निपटा चुकी थी. तब तक दोपहर के 12 बज गए थे. लेकिन उस का बेटा बादल खेल कर नहीं लौटा था. वह बुदबुदाई, ‘‘खेल में इतना डूब जाता है कि खानेपीने का भी खयाल नहीं रहता.’’

उसी समय ममता का पति उत्तम गिरि भी खेत से घर आ गया. जब उसे पता चला कि बादल बाहर खेलने गया है तो उस ने उसे बुलाने के लिए बेटी मानसी को भेजा ताकि वह भी सब के साथ खाना खा ले.

कुछ देर बाद मानसी अकेली ही लौट आई. उस ने बताया कि बादल बाहर नहीं है. यह सुन कर उत्तम गिरि खुद बेटे को खोजने के लिए निकल गया. आसपड़ोस में रहने वाले लोगों ने उत्तम को बताया कि बादल खेलने आया तो था. सुबह साढ़े 10 बजे के आसपास वह मोहल्ले में ही साहबलाल के घर के सामने खेल रहा था.

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              बादल

चूंकि साहबलाल का बेटा भी बादल के साथ स्कूल में पढ़ता था, इसलिए दोनों प्राय: रोज ही साथ खेलते रहते थे. उन्होंने साहबलाल के घर जा कर बेटे के बारे में पूछा तो उस के बेटे ने बताया कि आज वह खेलने के लिए घर से निकला ही नहीं है. इस के बाद बादल की मम्मी, पापा के अलावा उस के बड़े पापा (ताऊ) सतमन गिरि की चिंता बढ़ गई.

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जैसे ही गांव बालों को उत्तम के 10 वर्षीय बेटे बादल के गुम होने की जानकारी मिली तो उत्तम के घर लोगों की भीड़ जुटने लगी. जब शाम तक बादल का पता नहीं चला तो उत्तम गिरि के बड़े भाई सतमन गिरि ने शाम को चरगवां थाने पहुंच कर बादल के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

चूंकि फरवरी माह में मध्य प्रदेश के चित्रकूट में 2 बच्चों के अपहरण के बाद हत्या करने की घटना हो चुकी थी, इसलिए थानाप्रभारी ने इस मामले को गंभीरता लिया. उन्होंने इस की सूचना पुलिस कप्तान निमिष अग्रवाल को भी दे दी. उन्होंने थानाप्रभारी को इस मामले में त्वरित काररवाई करने के निर्देश दिए.

एसएसपी के निर्देश पर एसपी (ग्रामीण) रायसिंह नरवरिया थाना चरगवां प्रभारी नितिन कमल के साथ सगड़ा गांव पहुंच गए.

पुलिस ने बादल के मातापिता को भरोसा दिया कि पुलिस बहुत जल्द बादल का पता लगा लेगी. लेकिन अगले दिन सोशल मीडिया और स्थानीय अखबारों में घटना की खबर प्रकाशित होते ही पुलिस की नींद उड़ गई.

एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने 2 दिन और 2 रात गांव सगड़ा में कैंप कर गांव में घर घर जा कर करीब 100 से अधिक महिलाओं, पुरुषों व बादल के हमउम्र बच्चों से सघन पूछताछ की, लेकिन बादल का कहीं कोई सुराग नहीं मिला.

घटना को ले कर गांव में तरहतरह की चर्चाएं होने लगीं. कोई कहता कि बादल का अपहरण हो गया है तो कोई नवरात्रि में किसी तांत्रिक क्रिया के लिए देवी मां को बलि चढ़ाने की बात कहता. पुलिस किसी से जाती दुश्मनी और अन्य पहलुओं पर भी छानबीन कर रही थी. उसे यह भी शक था कि कहीं किसी ने बादल के साथ कुकर्म कर हत्या न कर दी हो.

10 अप्रैल की रात गांव में पुलिस बल की मौजूदगी में बादल के परिजनों और गांव के प्रमुख लोगों ने रात 2 बजे तक बादल की खोजबीन की, लेकिन उस का कोई अता पता नहीं लग सका. बादल के गायब होने की गुत्थी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी. इस बीच एसपी साहब ने बादल की सूचना देने वाले को 25 हजार रुपए का ईनाम देने की घोषणा कर दी.

उधर बादल की मां ममता का रोरो कर बुरा हाल था. किसी अज्ञात आशंका के डर से उस का कलेजा रहरह कर कांप उठता.

गुरुवार 11 अप्रैल, 2019 की सुबह साढ़े 8 बजे के लगभग गांव के कुछ लोगों को पास में बने एक खाली मकान से अजीब सी बदबू आती महसूस हुई. जब उत्तम और गांव के लोग उस मकान के अंदर पहुंचे तो उन्हें एक जर्जर कमरे में प्लास्टिक की बोरी नजर आई. तत्काल बोरी खोल कर देखी गई तो उस के अंदर बादल की लाश मिली. उस के दोनों हाथ और पैर तार से बंधे हुए थे. बौडी गल चुकी थी.

जिस मकान में बादल की लाश मिली, वह मकान रामजी नाम के व्यक्ति का था, जो कुछ साल से पास के गांव कमतिया में रह रहा था. उस का यह घर खाली पड़ा रहता था. रामजी के 3 भाइयों का परिवार गांव में रहता था.

कमरे के अंदर गोबर से लिपाई की गई जगह पर एक कोने में पत्थर पर उकेरी गई देवी की मूर्ति रखी थी. मूर्ति के पास ही त्रिशूल, मोर पंख, बुझे हुए दीपक के साथ 2 नारियल भी थे. घर के आंगन और पिछले दरवाजे तक खून के धब्बे मिले. पिछले दरवाजे में बाहर की ओर से ताला लगा हुआ था, लेकिन रामजी और गांव वालों ने बताया कि पिछले दरवाजे में सिर्फ सांकल लगी रहती थी.

गांव वालों ने आशंका प्रकट की कि शायद लाश को छिपाने वाले बाहर से ताला लगा कर गए होंगे. बादल के गायब होने के बाद से उत्तम गिरि के परिवार के लोग रामजी के इस घर में कई बार बच्चे को ढूंढने पहुंचे थे, लेकिन उस समय वहां कुछ नहीं मिला था.

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बादल की लाश मिलते ही उस के परिजनों के साथ गांव के लोग आक्रोशित हो गए. इसलिए रामजी के भाइयों के परिवार को गांव वालों ने घेर लिया. सुबह साढ़े 8 बजे रामजी के भतीजे मुकेश ने फोन पर अपने चाचा रामजी को बताया कि उन के घर में बादल की लाश मिली है, जिस के कारण गोस्वामी परिवार के लोग उन सभी को परेशान कर रहे हैं.

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यह जानकारी मिलते ही रामजी भी सगड़ा पहुंच गया. उधर गोस्वामी परिवार के साथ गांव के कई युवकों ने गांव की घेराबंदी कर रखी थी. इस बीच किसी ने पुलिस को खबर की तो चरगवां थाने की पुलिस वहां पहुंच गई.

गांव में उस समय तनाव जैसा माहौल था. तनाव की स्थिति को देख एसपी निमिष अग्रवाल, एएसपी (ग्रामीण) रायसिंह नरवरिया के साथ पुलिस के सभी अधिकारी भारी फोर्स ले कर गांव पहुंच गए और एफएसएल टीम ने लाश मिलने वाली जगह का निरीक्षण कर सबूत इकट्ठा किए.

एसपी ने मौके पर मौजूद थानाप्रभारी (चरगवां) नितिन कमल, थानाप्रभारी (ओमती) नीरज वर्मा और थानाप्रभारी (शहपुरा) घनश्याम सिंह मर्सकोले एवं एफएसएल, साइबर सेल, क्राइम ब्रांच के साथ जवानों की टीमें बनाईं और गांव के एकएक घर की तलाशी लेने के निर्देश दिए. इस तलाशी अभियान के बाद भी हत्यारों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

चरगवां थानाप्रभारी नितिन कमल द्वारा की गई जांच एवं पूछताछ में एक बात तो तय मानी जा रही थी कि बादल के अपहरण एवं हत्या में किसी करीबी का हाथ है. विवेचना के दौरान गांव की महिलाओं एवं पुरुषों और बच्चों से लगातार सघन पूछताछ की गई. पूछताछ के आधार पर संदेह की सुई मुकेश श्रीपाल के इर्दगिर्द घूमने लगी.

बादल का शव जिस मकान में मिला, उस के मालिक रामजी के भतीजे मुकेश श्रीपाल के बारबार बयान बदलने से पुलिस को संदेह हुआ. पुलिस ने जब मुकेश के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि मुकेश अपने पुराने साथी गुड्डू उर्फ मनोहरलाल तिवारी और अनिल उर्फ अन्नू गोस्वामी के साथ रहता है.

अनिल उर्फ अन्नू गोस्वामी मृतक बादल का ताऊ यानी उस के पिता का बड़ा भाई था. तीनों जुआ खेलने के आदी थे और उन पर लाखों रुपयों का कर्ज था. मुकेश के साथ रहने वाला गुड्डू तिवारी भेड़ाघाट में हुई एक हत्या का आरोपी भी है.

पुलिस टीम ने जब मुकेश से पूछताछ की तो वह इस मामले में खुद पाकसाफ बताता रहा लेकिन पुलिस की सख्ती पर वह टूट गया. मुकेश ने पुलिस को जो कहानी बताई, वह दिल दहला देने वाली थी. पता चला कि मासूम बादल के अपहरण और हत्या की साजिश में बादल का सगा ताऊ अनिल गोस्वामी उर्फ अन्नू और उस का दोस्त मनोहर तिवारी शामिल थे.

जुए, सट्टे की गलत आदत के चलते लाखों रुपए के कर्ज में डूबे इन दरिंदों ने पैसे के लिए मासूम बादल का कत्ल किया था. मुकेश की निशानदेही पर पुलिस ने अनिल और गुड्डू तिवारी को भी हिरासत में ले कर उन से सघन पूछताछ की.

पुलिस पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उस के अनुसार गांव सगड़ा निवासी मुकेश श्रीपाल, गुड्डू उर्फ मनोहरलाल तिवारी और अनिल गिरि को जुआ खेलने और शराब पीने की लत थी. कुछ दिन पहले ही तीनों नरसिंहपुर जिले की सीमा से सटे नगर गोटेगांव में जुआ खेलने गए थे.

वहां बड़ी रकम हारने के कारण तीनों पर लाखों रुपए का कर्ज हो गया था. जब कर्जदारों ने उन्हें धमकाना शुरू किया तो तीनों परेशान रहने लगे. कर्ज से मुक्ति पाने के लिए तीनों लूट, डकैती और अपहरण की योजना बनाने लगे.

तीनों को जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो इस के लिए अनिल उर्फ अन्नू ने सुझाव दिया कि उस के छोटे भाई उत्तम के बेटे बादल का अपहरण कर लिया जाए तो 10-12 लाख की फिरौती मिल सकती है. उत्तम कुछ भी कर के रुपए दे देगा. यह सुन कर मुकेश, गुड्डू और अन्नू ने योजना बनानी शुरू कर दी. इस के बाद वे तीनों बादल के अकेले घर से निकलने का इंतजार करने लगे.

8 अप्रैल, 2019 की सुबह लगभग पौने 11 बजे गुड्डू, मुकेश और अन्नू गांव में खाली पड़ी दलान पर जुआ खेल रहे थे. तभी उन की नजर अकेले घर जाते हुए बादल पर पड़ी तो उन्होंने जुआ खेलना बंद कर दिया और अनिल गिरि उर्फ अन्नू बादल के पास पहुंच गया. उस ने बड़े प्यार से बादल से घूमने चलने को कहा तो वह ताऊ की बात नहीं टाल सका.

जैसे ही बादल को ले कर अनिल वहां से जाने लगा तो लोगों से नजर चुरा कर मुकेश और गुड्डू तिवारी भी उस के पीछेपीछे चलने लगे. गांव से बाहर निकलते ही तीनों बादल से मीठीमीठी बातें करने लगे. बादल इन तीनों को पहले से जानता था, इसलिए वह बातें करता रहा.

तीनों बड़ी सफाई और चालाकी से उसे गांव के बाहर खेत में बने सूने मकान में ले गए. यह मकान लखन गौड़ का था, जिस में कोई नहीं रहता था. काफी देर तक वहां रहने के बाद जब बादल ने घर जाने की जिद की तो तीनों ने पास में पड़े बिजली के तार से उस के हाथपैर बांध कर मुंह पर कपड़ा बांध दिया ताकि उस की आवाज न निकल सके.

बादल को वहीं छोड़ कर तीनों गांव आ कर यह योजना बनाने लगे कि उत्तम गिरि से कैसे फिरौती मांगी जाए. गांव में जब पुलिस बादल की तलाश करने पहुंची तो बादल के परिजनों और गांव वालों के साथ तीनों लोग भी बादल की खोज के बहाने पुलिस और परिवार की गतिविधियों पर नजर रखने लगे.

पुलिस के साथ बादल के पिता उत्तम और परिजन बादल की तलाश करने लगे. यह देख कर तीनों अपहर्त्ता डर गए. माहौल देख कर उन्हें लगने लगा कि उत्तम से फिरौती की रकम वसूलना अब मुश्किल है.

तीनों अपहर्त्ता एक बार फिर से खेत में बने मकान में आ गए. उन्हें भय लगा कि अगर बादल को छोड़ दिया तो वे पकड़े जाएंगे. क्योंकि बादल तीनों को पहचानता था. हाथपैर और मुंह बंधा बादल हाथपैर पटक कर छूटने का प्रयास कर रहा था कि उसी समय गुड्डू तिवारी ने बादल की गला दबा कर हत्या कर दी.

गुड्डू शातिर अपराधी था. पहले भी वह एक युवक की हत्या कर के शव को नदी में फेंकने के आरोप में जेल की हवा खा चुका था. गुड्डू ने कहा कि अगर बादल की लाश नहीं मिली तो वे सभी बच जाएंगे. इस के बाद तीनों आरोपियों ने बादल के शव को बोरी में भर कर नर्मदा नदी में फेंकने की योजना बनाई.

8 और 9 अप्रैल को पुलिस और गांव वालों ने बादल को सभी जगह तलाशा, जिस से कारण तीनों को लाश ठिकाने लगाने का मौका नहीं मिला. 10 अप्रैल की रात वे तीनों लखन गौड़ के सूने मकान में पहुंचे और बादल के शव को बोरी में भर कर बाइक से नदी में फेंकने के लिए ले जाने लगे.

तीनों गांव के बाहरी रास्ते से जा रहे थे, तभी खेत की ओर से किसी ने बाइक पर तीनों को जाते देख कर टौर्च जलाई, जिसे देख कर तीनों डर गए और शव को ले कर गांव के अंदर सुनसान जगह में घुस गए. इस के बाद शव वाली बोरी को एक मकान में रख कर बैठ गए. इस दौरान कुछ खून बोरी से इधरउधर टपक गया.

तीनों ने कुछ लोगों को आते देखा तो जल्दबाजी में शव की बोरी को मुकेश श्रीपाल के घर के पास उस के चाचा रामजी के खंडहरनुमा मकान में छिपा दिया. इस के बाद  तीनों वहां से भाग कर अपनेअपने घर आ गए.

गांव के चप्पेचप्पे पर पुलिस बल की मौजूदगी और सर्चिंग के कारण मुकेश लाश की बोरी को ठिकाने नहीं लगा पाया और 11 अप्रैल की सुबह साढ़े 8 बजे रामजी के मकान से बदबू आने के कारण गोस्वामी परिवार को प्लास्टिक की बोरी में बादल का शव मिल गया.

जब पुलिस ने गांव में उत्तम गोस्वामी, सतमन गोस्वामी और उस के अन्य भाइयों को अनिल उर्फ अन्नू गोस्वामी के बारे में बताया तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि उन का भाई बादल का अपहरण और कत्ल कर सकता है. इस के बाद पुलिस ने सभी भाइयों से एक कमरे में अनिल से बातचीत करने के लिए कहा तो बातचीत में अनिल ने हत्या करना स्वीकार कर लिया, जिसे सुन कर उत्तम और अन्य भाई सहम गए.

उत्तम और उस के अन्य भाइयों को यह तो मालूम था कि अनिल कर्ज में डूबा है, जिसे चुकाने के लिए वे सभी उसे रुपए भी दे चुके थे. साथ ही दूसरी फसल पर रुपए देने का वादा किया था, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि कर्ज चुकाने के लिए वह उन के कलेजे के टुकड़े का ही कत्ल कर देगा.

अनिल के जुर्म कबूलने के बाद गोस्वामी परिवार के लोग मायूस हो कर कमरे से बाहर निकल आए और पुलिस से उसे गिरफ्तार कर सख्त काररवाई करने को कहा.

जबलपुर जिले के एसपी निमिष अग्रवाल ने 18 अप्रैल, 2019 को प्रैस कौन्फ्रैंस में बताया कि चरगवां थाना अंतर्गत 10 वर्षीय बादल की हुई नृशंस हत्या के हत्यारे मोहनलाल उर्फ गुड्डू तिवारी, मुकेश श्रीपाल, अनिल उर्फ अन्नू गोस्वामी को गिरफ्तार कर उन की निशानदेही पर उन के पहने हुए कपड़े मोटरसाइकिल और घटनास्थल से मिले तार के टुकड़ों को जब्त कर लिया.

पुलिस ने तीनों आरोपियों को भादंवि की धारा 363, 364, 302, 201 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

महाभारत सीरियल के कृष्ण का आईएएस पत्नी संग पंगा

पशु चिकित्सक से अभिनेता बने नीतीश भारद्वाज की आईएएस पत्नी स्मिता भारद्वाज के साथ फिर सुबह सुबह बहस हो गई थी. नाराज पत्नी चीखती हुई हिदायत के साथ बोल पड़ी थी, ”मैं ने तुम्हें कितनी बार कहा है कि बच्चों को महाभारत के किस्से कहानियों से दूर रखा करो. अभी उन की पढ़ाई का समय है.’’

”धर्म और अध्यात्म की बातों से ज्ञान मिलता है,’’ नीतीश ने चाय का प्याला उठाते हुए कहा.

”मिलता होगा, लेकिन उस की एक उम्र होती है. और वैसे भी महाभारत की कौन सी बातें सीख कर ज्ञान हासिल करेंगे?’’ पत्नी बोली.

”महाभारत में सीखने की बहुत सारी बातें हैं. उस में गलत क्या है?’’ नीतीश ने कहा.

”क्या सीखेगी उस से हमारी 7 साल की बेटी? चीर हरण, औरतों का अपमान और जुआ…’’ पत्नी चीखती हुई बोली.

”तुम तो बेकार में बात खींच रही हो. बच्चों को आध्यात्मिक किताबों का ज्ञान तो होना ही चाहिए.’’ नीतीश ने समझाने की कोशिश की.

”कोर्स की किताबों का क्या होगा?’’ कह कर गुस्से में पत्नी अपने कमरे में चली गई और काफी देर तक बड़बड़ाती रही. नई पुरानी बातों से उन के बीच बहस और तेज हो गई.

उन के बीच यह आए दिनों की बात थी. अकसर वे धर्म, अध्यात्म और आजकल के माहौल में बच्चों की परवरिश को ले कर दोनों झगड़ पड़ते थे. जब उन के बीच तनाव काफी बढ़ जाता था, तब पत्नी स्मिता नीतीश को पहली पत्नी और बच्चों को छोड़ कर चले जाने का ताना मारने लगती थी. कई बार चेतावनी दे चुकी थी, ”यही रवैया रहा तो मैं भी बच्चों संग अपनी अलग दुनिया बसा लूंगी.’’

स्मिता के व्यवहार से परेशान हो कर नीतीश भारद्वाज ने उस के खिलाफ 14 फरवरी, 2024 को पुलिस में लिखित शिकायत दे दी. उस ने पत्नी पर मानसिक उत्पीडऩ का आरोप लगाया. स्मिता मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस है. अपनी शिकायत में नीतीश भारद्वाज ने बताया कि उस की पत्नी स्मिता भारद्वाज उसे काफी लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताडि़त कर कर रही है.

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नीतीश भारद्वाज ने यह शिकायत भोपाल के पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्र से खुद मिल कर की. इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने स्मिता को फोन लगाया और अपना पक्ष रखने के लिए अपने कार्यालय में बुलाया, लेकिन स्मिता ने कहा कि नीतीश ही घर आ जाएं.

अपने शिकायती आवेदन में नीतीश भारद्वाज ने यह भी लिखा कि उस की पत्नी सीनियर आईएएस अधिकारी है और इस बात का अनुचित फायदा उठा कर एक पिता को उस की दोनों बेटियों से अलग कर दिया है. वे अपनी बेटियों से मिलना चाहता है, देखना चाहता है, लेकिन उस की पत्नी उसे बेटियों से मिलने तक नहीं दे रही है.

नीतीश भारद्वाज ने कहा कि उस का अपनी पत्नी से तलाक का केस चल रहा है और अब ऐसा कभी संभव नहीं हो सकेगा कि उस का अपनी पत्नी से समझौता हो जाए और वापस शादी बहाल हो सके.

इसी के साथ नीतीश ने मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग में अपर मुख्य सचिव के पद पर पदस्थ स्मिता भारद्वाज पर कई गंभीर आरोप लगाए. इस का खुलासा नीतीश ने खुद 15 फरवरी को मीडिया के सामने कर दिया. उस ने पत्नी पर बेटियों के अपहरण करने तक के आरोप लगा दिए.

खुद के घर में कैसे शुरू हुई महाभारत

नीतीश ने पीडि़त मन से कहा, ”मैं ने महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाया. श्रीमदभगवत गीता के उपदेश दिए, लेकिन आज मैं अपने निजी जीवन में बेहद दुखी हो गया हूं. मेरी आईएएस पत्नी स्मिता घाटे उर्फ स्मिता भारद्वाज महाभारत के दुर्योधन की तरह मनमानी कर रही है. मुझे मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा है. मुझे मेरी बेटियों की चिंता है, क्योंकि पिछले 4 सालों से मुझे उन से दूर रखा गया है और आप सभी बताएं कि इसे मैं अपहरण क्यों न कहूं?’’

नीतीश ने पत्नी पर आरोप लगाया कि उन की जानकारी के बगैर जुड़वां बेटियों का नामांकन भोपाल के स्कूल में करवाया. जब मुझे उन के बारे में जानकारी हुई, तब उस ने बिना बताए इस स्कूल निकाल कर ऊटी के स्कूल में डलवा दिया.

अब मुझे मालूम हुआ है कि मेरी बेटियों को ऊटी के स्कूल से भी निकाल लिया है. एक पिता होने के नाते मुझे पता होना चाहिए कि मेरी बेटियां कहां हैं, लेकिन मुझे आज की तारीख में उन के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है.

नीतीश ने बताया कि 26 जनवरी, 2024 को मैं ने स्कूल से जानकारी ली तो पता चला कि ऊटी के स्कूल से भी बेटियों को निकाल लिया गया है. इस के बाद 8 और 9 फरवरी को मैं ने स्मिता को मेल कर बेटियों के बारे में जानना चाहा, किंतु इस का उस ने कोई जबाब ही नहीं दिया. बेटियों की जानकारी के मामले में वह मुझे अंधेरे में रखे हुए है. मुझे बेटियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

पुलिस में शिकायत दर्ज किए जाने के वक्त उस की जुड़वां बेटियों की उम्र 11 वर्ष 9 महीने थी. नीतीश ने मीडिया को पत्नी के साथ विवाद होने के कारण भी बताए. उस ने बताया कि बेटियां जब 7 साल की थीं, तब उसे वह महाभारत धारावाहिक दिखाया करता था. इस पर स्मिता ने बेटियों को महाभारत नहीं दिखाने को कहा.

उस ने अपने बारे में बताया कि वह वर्ष 1999 से 2007 तक मध्य प्रदेश में रहते हुए मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली थी. उस ने बताया कि वह कई आईएएस अधिकारियों के साथ काम करने का मौका मिला है.

नीतीश भारद्वाज का यह भी कहना था कि स्मिता जैसी अडिय़ल आईएएस अधिकारी उस ने नहीं देखी. उस ने आशंका जताई कि स्मिता अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है. मुंबई कुटुंब न्यायालय से मैं ने उस की मानसिक स्थिति की जांच कराने का लिखित में आग्रह भी किया है. अब उस ने मेरा नंबर ब्लौक कर दिया है और ईमेल का जवाब तक नहीं देती है.

दरअसल, 23 जनवरी, 2020 को स्मिता भारद्वाज ने तलाक की अरजी दी थी. उस के बाद से ही उस ने नीतीश का नंबर ब्लौक कर दिया था. उस वक्त उस की दोनों बेटियां इंदौर के एक स्कूल में पढ़ रही थीं. वर्ष 2019 में स्कूल के वार्षिकोत्सव में नीतीश अपनी बेटियों से मिला था. इस के बाद मुंबई न्यायालय में बेटियों से मिलने की गुहार लगाने के बाद 2 जनवरी, 2024 को न्यायालय में उन से मिलना संभव हो पाया था.

नीतीश का आरोप है कि पत्नी स्मिता ने बेटियों को उस के खिलाफ भड़का दिया है. न्यायालय में मुलाकात के वक्त एक बेटी ने मुझ पर ही आरोप लगा दिया कि मैं उसे बहन से अलग करना चाहता हूं.

कौन है नीतीश भारद्वाज

नीतीश भारद्वाज का जन्म 2 जून, 1963 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था.  पिता जनार्दन उपाध्याय मुंबई हाईकोर्ट में सीनियर वकील थे. माता साधना उपाध्याय विलसन कालेज, मुंबई में मराठी साहित्य की लेक्चरर थीं. पिता वकील होने के साथसाथ 60 और 70 के दशक में श्रमिक आंदोलन में जार्ज फर्नांडीस के करीबी सहयोगी थे.

नीतीश भारद्वाज की स्कूली शिक्षा मुंबई के गोखले एजुकेशन सोसाइटी के डीजीटी हाईस्कूल और रौबर्ट मनी स्कूल प्राक्टर रोड से हुई थी. इस के बाद उस ने अपनी बी.एससी. मुंबई में विलसन कालेज से (1977-1979) पूरी की.

बाद में उस ने बौंबे वेटरनरी कालेज (1979-1983) से पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन में स्नातक की डिग्री हासिल कर ली. हालांकि परिवार के लोग उसे एमबीबीएस डाक्टर के रूप में देखना चाहते थे.

कालेज के दिनों में वह अभिनय को ले कर भी गंभीर था. उस ने कई नाटकों में अभिनय और निर्देशन किया था. साथ ही उस ने मुंबई के बच्चों के थिएटर संगठन में प्रशिक्षण दिया, जिसे लिटिल थिएटर कहा जाता है.

नीतीश भारद्वाज वैसे तो एक पेशेवर पशु चिकित्सा सर्जन बन गया, लेकिन फिल्मों और टेलीविजन में एक अभिनेता रूप में शुरुआत बौंबे दूरदर्शन के लिए एक उद्घोषक और न्यूज रीडर के रूप में हुई. वैसे मुंबई में रेसकोर्स में नीतीश को एक सहायक पशुचिकित्सक की नौकरी मिल गई थी. इस काम में उस का मन नहीं लगा और जल्दी ही उस ने नौकरी छोड़ दी.

बौंबे दूरदर्शन पर न्यूज रीडर की नौकरी करने के साथ ही उस ने मराठी थिएटर में अपने अभिनय करिअर की शुरुआत की. मराठी डेब्यू फिल्म ‘खटियाल सासु नथमल सन’ (1987) थी. उस की पहली हिंदी फिल्म 1988 में ‘त्रिशाग्नि’ आई थी. वह एक मलयालम फिल्म ‘नजन गंधर्वन’ में भी दिखाई दिया.

उन्हीं दिनों 1988 में नीतीश ने बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ से टेलीविजन में शुरुआत की. उस के बाद वह बी.आर. चोपड़ा के ‘विष्णु पुराण’ (2003) और ‘रामायण’ (2003) में भी दिखाई दिया. इस के बाद नीतीश ने कुछ फिल्में भी कीं, लेकिन उन में कोई भी हिट नहीं हुई.

इन विफलताओं के बाद नीतीश ने लंदन का रुख किया. उस का विचार मातापिता से भिन्न था. अपने 4 साल के लंदन प्रवास के दौरान नीतीश ने कई फ्रेंच थिएटर अंगरेजी में किए. वहां पर उस ने रेडियो 4 के लिए भगवत गीता और रामायण पर कई कार्यक्रम किए.

शुरू हुआ महाभारत से संसद तक का सफर

सन 2013 में उस ने मराठी फिल्म ‘पित्रु रौन’ के साथ एक लेखक और निर्देशक के रूप में अपनी शुरुआत की. इस के अतिरिक्त उस ने कुछ लोकप्रिय बौलीवुड फिल्मों में दोबारा पारी शुरू की. जिन में ‘मोहेनजो दारो’ (2016) और ‘केदारनाथ’ (2018) प्रमुख हैं.

नीतीश भारद्वाज को वर्ष 2014 में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए स्क्रीन अवार्ड मिला. 2014 में मराठी फीचर फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखक के लिए सह्याद्री फिल्म पुरस्कार मिला. 2014 में ही 2 बार सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार मिला. 2014 में ही 2 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों के लिए महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार मिला.

1995 में लंदन से भारत लौटने के बाद नीतीश ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया और राजनीति में सक्रिय हो गया. अरविंद त्रिवेदी (रामायण में रावण के पात्र), दीपिका चिखलिया (रामायण में सीता) की तरह ही नीतीश भाजपा के लिए एक पौराणिक ट्रंप कार्ड बन गया था. बी.आर. चोपड़ा की महाभारत में कृष्ण के रूप में सवारी करते हुए नीतीश भारद्वाज ने बिहार के जमशेदपुर से (अब झारखंड में) लोकसभा सीट हासिल की.

हालांकि उस ने बाद में राजगढ़ सीट से भी चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया. 1999 के लोकसभा चुनाव में वह मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह से चुनाव हार गया. उस ने मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (2004-05) के बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी संभाला. वर्ष 2002 में उस ने ‘इन क्वेस्ट औफ गौड- कैलाश मानसरोवर की यात्रा’ शीर्षक से एक पुस्तक का सहलेखन भी किया.

नीतीश भारद्वाज का वैवाहिक जीवन अधिक सफल नहीं रहा. उस ने 2 शादियां कीं. पहली शादी 27 दिसंबर, 1991 को मोनिषा पाटिल से हुई थी. वह उस दौर की एक पौपुलर मैगजीन के डायरेक्टर की बेटी है. सन 2005 में उस का किसी वजह से मोनिषा से तलाक हो गया. मोनिषा-नीतीश का एक बेटा और एक बेटी है. दोनों बच्चे लंदन में अपनी मां मोनिषा के साथ रहते हैं.

मध्य प्रदेश कैडर से 1992 बैच की आईएएस अधिकारी स्मिता घाटे से नीतीश भारद्वाज की पहली मुलाकात पुणे में हुई थी. इस के बाद दोनों मध्य प्रदेश में मिले. दोनों के कौमन दोस्त ने नीतीश को स्मिता से शादी की सलाह दी. नीतीश ने स्मिता से 14 मार्च, 2009 को दूसरी शादी कर ली. स्मिता घाटे भारद्वाज से 2 जुड़वां बेटियां पैदा हुईं.

स्मिता घाटे और नीतीश कैसे आए संपर्क में

स्मिता घाटे का जन्म 16 मार्च, 1966 को पुणे में हुआ था. उस ने 1978 से 1980 तक सेंट्रल स्कूल लोहेगांव पुणे में पढ़ाई की, उस के बाद उस ने पुणे के सिंबायोसिस कालेज औफ आट्र्स ऐंड कौमर्स से 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की.

बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने 1987 में पुणे के गरवारे कालेज औफ साइंस एवं आट्र्स से समाजशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की.

स्मिता को 1992 में एमपी कैडर के आईएएस अधिकारी के रूप में चुना गया था. उसे 2009 में सिंथेटिक और रेयान टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया.

मई 2010 में स्मिता को दोबारा उस के कैडर में नियुक्त किया गया. इस तरह वह 2015 में इंदौर में एमपी फाइनैंशियल कारपोरेशन में प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त की गई.

वर्तमान में स्मिता घाटे मध्य प्रदेश की सीनियर आईएएस अधिकारी है. हाल ही में वह इंदौर से ट्रांसफर हो कर भोपाल आई है. यहां पर वह पहले मानवाधिकार आयोग में पदस्थ रह चुकी है. इस बार उसे खेल एवं युवा कल्याण विभाग में अपर मुख्य सचिव पद पर रखा गया है. स्मिता घाटे अपनी सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के लिए जानी जाती है.

स्मिता ने भी अपने जीवन में 2 शादियां की हैं. पहले पति से शादी के कुछ साल बाद ही तलाक हो गया था. उस के बाद उस ने नीतीश भारद्वाज से शादी की थी. तब ऐसा लगा था कि इस जोड़े की शादी खुशहाल और सौहार्दपूर्ण गुजरेगी. लेकिन 2022 में चीजें और हालात तब खराब हो गए, जब उस ने अलग होने और तलाक की घोषणा कर दी थी.

कलयुगी बेटे ने पीट पीट कर की पिता की हत्या

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 25 किलोमीटर दूर है तहसील मोहनलालगंज, इसी तहसील के कोराना गांव में 70 साल के बाबूलाल रावत अपने इकलौते बेटे रामकिशुन उर्फ कालिया, उस की पत्नी रेखा और बच्चों के साथ रहते थे. बाबूलाल खेतीकिसानी  कर के परिवार का गुजारा करते थे. इस गांव के तमाम लोग नशा करने के आदी हो गए थे.

गांव के लोगों की संगत का असर रामकिशुन पर भी हुआ. वह भी शराब के अलावा दूसरी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन करने लगा. लंबे समय तक नशे में रहने का प्रभाव रामकिशुन के शरीर और सोच पर भी पड़ रहा था. वह पहले से अधिक गुस्से में रहने लगा था.

चिड़चिड़े स्वभाव की वजह से वह बातबात पर मारपीट करने लगता. केवल बाहर के लोगों के साथ ही नहीं बल्कि घर में भी वह पत्नी और बच्चों से झगड़ कर मारपीट करता था. उस की नशे की लत से घर के ही नहीं, मोहल्ले के लोग भी परेशान रहते थे.

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रात में जब वह ठेके से शराब पी कर चलता तो गांव में घुसते ही गाली देनी शुरू कर देता था. चीखचीख कर गाली देने से गांव वालों को उस के घर लौटने का पता चल जाता था. घर पहुंचते ही वह घर में मारपीट करने लगता था, कभी पिता से कभी पत्नी से तो कभी बेटे के साथ.

जून, 2019 के पहले सप्ताह की बात है. रामकिशुन नशे में धुत हो कर घर आया. पत्नी रेखा ने उसे समझाना शुरू किया, ‘‘इतनी रात गए शराब पी कर घर आते हो, ऊपर से लड़ाई झगड़ा करते हो, यह कोई अच्छी बात है क्या. जानते हो, तुम्हारी वजह से गांव वाले कितना परेशान होते हैं.’’

रामकिशुन भी लड़खड़ाई आवाज में बोला, ‘‘मैं शराब अपने पैसे से पीता हूं. इस से गांव वालों का क्या लेना देना. किसी के कहने का मेरे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. तुम भी कान खोल कर सुन लो, मुझे ज्यादा समझाने की कोशिश मत करो. बस अपना काम करो.’’

रेखा भी मानने वाली नहीं थी. उसे पता था कि वह अभी नशे में है. ऐसी हालत में समझाने का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि सुबह नशा उतरने पर वह सब भूल जाएगा. इस से बेहतर तो यह है कि इस से कल दिन में बात की जाए.

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अगले दिन रेखा ने घर वालों के सामने पति रामकिशुन को समझाना शुरू किया. शुरुआत में तो वह इधर उधर की बातें कर के खुद को बचने की कोशिश करता रहा, इस के बाद भी जब रेखा ने रात के नशे की बात को ले कर बवाल जारी रखा तो रामकिशुन झगड़ा करने लगा. रेखा भी चुप रहने वालों में नहीं थी. उस ने झगड़े के बीच ही अपना फैसला सुना दिया, ‘‘अगर तुम नहीं सुधर सकते तो अपना घर संभालो, मैं अपने मायके चली जाऊंगी.’’

रेखा की धमकी ने 1-2 दिन तो असर दिखाया, इस के बाद रामकिशुन फिर से नशा कर के आने लगा. अब पानी सिर से ऊपर जा रह था, रेखा ने सोचा कि समझौता करने से कोई लाभ नहीं. उसे घर छोड़ कर चले जाना चाहिए. इस के बाद रेखा पति और बेटे को छोड़ कर अपने मायके चली गई.

रामकिशुन नशे का आदी था. पत्नी के घर छोड़ कर जाने का उस के ऊपर कोई असर नहीं पड़ा बल्कि पत्नी के जाने के बाद तो वह और भी अधिक आजाद हो गया. वह देर रात तो वापस आता ही, अब वह दिन में भी नशा करने लगा था.

नशे में वह घर में सभी से मार पिटाई करता था. उस की पत्नी रेखा 15 दिन बीत जाने के बाद भी घर वापस नहीं आई थी. ऐसे में घर की जिम्मेदारी भी रामकिशुन के ऊपर आ गई थी. जिस से वह और भी अधिक चिड़चिड़ा हो गया था. 18 जून, 2019 की शाम 5 बजे रामकिशुन नशे में धुत हो कर घर आया. सुबह वह अपने बेटे रामकरन को घर के कुछ काम करने के लिए कह कर गया था, वह काम पूरे नहीं हुए तो गुस्से में आ कर रामकिशुन ने बेटे रामकरन की पिटाई शुरू कर दी.

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                         रामकिशुन

अपने पोते की पिटाई होते देख रामकिशुन के पिता बाबूलाल गुस्से में आ गए. उन्हें नशा करने की वजह से बेटे पर गुस्सा तो पहले से था. अब यह गुस्सा और भी अधिक बढ़ गया था.

वह बोले, ‘‘पत्नी घर छोड़ कर चली गई, इस के बाद भी तुम्हें समझ नहीं आया कि शराब छोड़ दो. ध्यान रखो, यदि नशा करना बंद नहीं किया तो एकएक कर के सारा परिवार तुम्हें छोड़ देगा. बेटे को पीटते हुए तुम्हें शर्म नहीं आ रही.’’

रामकिशुन ने पिता की बात को दरकिनार कर के बेटे की पिटाई जारी रखी. वह बोला, ‘‘जब मैं इसे समझा कर गया था तो इस ने काम क्यों नहीं किया? इस की मां घर छोड़ कर चली गई है तो बदले में इसे ही काम करना होगा.’’

बाबूलाल अपने पोते को बचाने के लिए आए तो वह बोला, ‘‘देखो, यह मामला हमारे बापबेटे के बीच का है. तुम बीच में मत बोलो.’’ यह कह कर उस ने पिता को झगड़े से दूर रहने को कहा.

बाबूलाल के हाथ में कुल्हाड़ी थी. वह जंगल से लकड़ी काट कर वापस आ रहे थे. पोते की पिटाई का विरोध करते और उसे बचाने के प्रयास में कुल्हाड़ी रामकिशुन को लग गई. इस से उस की आंखों के पास से खून निकलने लगा. रामकिशुन को इस बात की गलतफहमी हो गई कि पिता ने उस पर कुल्हाड़ी से हमला किया है. आंख के पास से खून बहता देख कर वह पिता पर आगबबूला हो गया.

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                              मृतक बाबूलाल

रामकिशुन बेटे को पीटना छोड़ कर पिता बाबूलाल की तरफ बढ़ गया. उस ने पिता के हाथ से कुल्हाड़ी ले कर फेंक दी और डंडे से पिता की पिटाई शुरू कर दी. पिटाई में बाबूलाल का सिर फूट गया पर इस बात का खयाल रामकिशुन को नहीं आया. बेतहाशा पिटाई से बाबूलाल की हालत खराब हो गई. रामकिशुन उन्हें मरणासन्न अवस्था में छोड़ कर भाग निकला.

बाबूलाल की खराब हालत देख कर पोता रामकरन बाबा को इलाज के लिए सिसेंडी कस्बे के एक निजी अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने बाबूलाल की खराब हालत और पुलिस केस देख कर जवाब दे दिया. वहां से निराश हो कर रामकरन बाबा को ले कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मोहनलालगंज ले गया.

वहां डाक्टरों ने बाबूलाल की गंभीर हालत देखते हुए उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया. ट्रामा सेंटर के डाक्टरों ने बाबूलाल को एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया. बाबा के इलाज में पैसा खर्च होने लगा. रामकरन के पास जो पैसे थे वह जल्दी ही खत्म हो गए.

रामकरन ने पैसों के इंतजाम के लिए प्रयास किए, पर कोई मदद करने वाला नहीं था. लोगों ने समझाया कि पैसे नहीं हैं तो अब बाबूलाल को यहां रखना ठीक नहीं है. अच्छा होगा कि घर पर ही रखा जाए. वहीं इन की सेवा की जाए.

इलाज का कोई रास्ता न देख कर रामकरन ने डाक्टरों से कहा कि उस के पास पैसे खत्म हो चुके हैं ऐसे में हम बाबा को अपने गांव वापस ले जाना चाहते हैं. डाक्टरों से मिन्नतें कर के रामकरन अपने बाबा को अस्पताल से डिस्चार्ज करा कर घर ले आया. उसी दिन देर रात बाबूलाल ने अपने घर पर दम तोड़ दिया.

बाबूलाल की मौत के बाद सुबह को रामकरन ने पूरे मामले की सूचना मोहनलालगंज पुलिस को दे दी तो इंसपेक्टर जी.डी. शुक्ला बाबूलाल के घर पहुंच गए.

जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पुलिस ने रामकरन की सूचना पर उस के पिता रामकिशुन के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर के उस की पड़ताल शुरू कर दी. इंसपेक्टर जी.डी. शुक्ला ने एक पुलिस टीम का गठन कर के रामकिशुन की तलाश शुरू कर दी.

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इसी बीच पुलिस को पता चला कि रामकिशुन गांव के बाहर छिपा हुआ है, पुलिस ने पिता बाबूलाल की हत्या के आरोप में रामकिशुन को गांव के बाहर से गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. अगर रामकिशुन नशे का आदी नहीं होता तो वह पिता की हत्या नहीं करता और न ही उसे जेल जाना पड़ता. नशे की आदत ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया.

आग बनी शोला : जब पति और बेटे बने जान के दुश्मन

उस दिन जून 2019 की 10 तारीख थी. रात के 10 बज रहे थे. कानपुर के थाना अनवरगंज के थानाप्रभारी रमाकांत  पचौरी क्षेत्र में गश्त पर थे. गश्त करते हुए जब वह डिप्टी पड़ाव चौराहा पहुंचे, तभी उन के मोबाइल पर एक काल आई.

उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘सर, मैं गुरुवतउल्ला पार्क के पास से पप्पू बोल रहा हूं. हमारे घर के सामने पूर्व सभासद नफीसा बाजी की बेटी शहला परवीन किराए के मकान में रहती है. उस के घर के बाहर तो ताला बंद है, लेकिन घर के अंदर से चीखने चिल्लाने की आवाजें आ रही हैं. लगता है, उस घर के अंदर किसी की जान खतरे में है. आप जल्दी आ जाइए.’’

डिप्टी पड़ाव से गुरुवतउल्ला पार्क की दूरी ज्यादा नहीं थी. अत: थानाप्रभारी रमाकांत पचौरी चंद मिनटों बाद ही बताई गई जगह पहुंच गए. वहां एक मकान के सामने भीड़ जुटी थी.

भीड़ में से एक व्यक्ति निकल कर बाहर आया और बोला, ‘‘सर, मेरा नाम पप्पू है और मैं ने ही आप को फोन किया था. अब घर के अंदर से चीखनेचिल्लाने की आवाजें आनी बंद हो चुकी हैं.’’

रमाकांत पचौरी ने सहयोगी पुलिसकर्मियों की मदद से उस मकान का ताला तोड़ा फिर घर के अंदर गए. कमरे में पहुंचते ही पचौरी सहम गए. क्योंकि कमरे के फर्श पर एक महिला की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. पड़ोसियों ने बताया कि यह तो शहला परवीन है. इस की हत्या किस ने कर दी.

शव के पास ही खून सनी ईंट तथा एक मोबाइल फोन पड़ा था. लग रहा था कि उसी ईंट से सिर व मुंह पर प्रहार कर बड़ी बेरहमी से उस की हत्या की गई थी. शहला की उम्र यही कोई 35 साल के आसपास थी. पुलिस ने लाश के पास पड़ा फोन सबूत के तौर पर सुरक्षित कर लिया.

घनी आबादी वाले मुसलिम इलाके में पूर्व पार्षद नफीसा बाजी की बेटी शहला परवीन की हत्या की सूचना थानाप्रभारी ने पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ ही देर में एसएसपी अनंतदेव तिवारी, एसपी (क्राइम) राजेश कुमार, एसपी (पूर्वी) राजकुमार, सीओ (कलेक्टरगंज) श्वेता सिंह तथा सीओ (अनवरगंज) सैफुद्दीन भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

एसएसपी अनंतदेव ने फारैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. बढ़ती भीड़ तथा उपद्रव की आशंका को देखते हुए एसएसपी ने रायपुरवा, चमनगंज तथा बेकनगंज थाने की फोर्स भी बुलवा ली. पूरे क्षेत्र को उन्होंने छावनी में तब्दील कर दिया.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वह भी आश्चर्यचकित रह गए. शहला परवीन की हत्या बड़ी ही बेरहमी से की गई थी. उस के शरीर पर लगी चोटों के निशानों से स्पष्ट था कि हत्या से पहले शहला ने हत्यारों से अपने बचाव के लिए संघर्ष किया था.

कमरे के अंदर रखी अलमारी और बक्सा खुला पड़ा था, साथ ही सामान भी बिखरा हुआ था. देखने से ऐसा लग रहा था कि हत्या के बाद हत्यारों ने लूटपाट भी की थी. शहला का शव जिस कमरे में पड़ा था, उस का एक दरवाजा पीछे की ओर गली में भी खुलता था.

पुलिस अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारे पीछे वाले दरवाजे से ही फरार हुए होंगे और इसी रास्ते से अंदर आए होंगे. पुलिस अधिकारियों के मुआयने के बाद फोरैंसिक टीम ने भी जांच की और साक्ष्य जुटाए. टीम ने अलमारी, बक्सा, ईंट आदि से फिंगरप्रिंट भी उठाए.

भाई ने बताए हत्यारों के नाम

अब तक सूचना पा कर मृतका का भाई तारिक शादाब भी वहां आ गया था. बहन की लाश देख कर वह फफकफफक कर रोने लगा. थानाप्रभारी ने उसे धैर्य बंधाया फिर पूछताछ की. तारिक शादाब ने बताया कि उस की बहन की हत्या उस के पति मोहम्मद शाकिर और बेटों शाकिब व अर्सलान उर्फ कल्लू ने की है. उस ने कहा कि हत्या में शाकिर का बहनोई गुड्डू भी शामिल है, जो कुख्यात अपराधी है.

पुलिस अधिकारियों ने पड़ोसी पप्पू से पूछताछ की. उस ने भी बताया कि शहला के पति व बेटों को उस ने शहला के घर के आसपास देखा था. उस ने उन्हें टोका भी था. तब उन्होंने उसे धमकी दी थी कि टोकाटाकी करोगे तो परिणाम भुगतोगे.

उन की धमकी से वह डर गया था. पप्पू ने भी शहला के पति व बेटों पर शक जाहिर किया. कुछ अन्य लोगों ने बताया कि शहला का पति उस के चरित्र पर शक करता था. शायद अवैध संबंधों में ही उस के पति ने उसे हलाल कर दिया है.

अब तक हत्या को ले कर वहां मौजूद भीड़ उत्तेजित होने लगी थी. अत: पुलिस अधिकारियों ने आनन फानन में शहला परवीन के शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भिजवा दिया. बवाल व तोड़फोड़ की आशंका को देखते हुए घटनास्थल के आसपास पुलिस तैनात कर दी.

चूंकि मृतका शहला परवीन के भाई तारिक शादाब ने अपने बहनोई व भांजे पर हत्या का शक जाहिर किया था, अत: थानाप्रभारी रमाकांत पचौरी ने तारिक शादाब की तरफ से भादंवि की धारा 302 के तहत मोहम्मद शाकिर, उस के दोनों बेटे शाकिब, अर्सलान तथा शाकिर के बहनोई गुड्डू हलवाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हत्यारोपियों को पकड़ने के लिए एसएसपी अनंतदेव ने एसपी (क्राइम) राजेश कुमार की अगुवाई में एक पुलिस टीम गठित कर दी. टीम में थानाप्रभारी रमाकांत, सीओ (अनवरगंज) सैफुद्दीन, एसआई राम सिंह, देवप्रकाश, कांस्टेबल अतुल कुमार, दयाशंकर सिंह, राममूर्ति यादव, मोहम्मद असलम तथा अब्दुल रहमान को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया फिर मृतका के भाई तारिक शादाब से विस्तृत जानकारी हासिल कर उस का बयान दर्ज किया. पुलिस ने मृतका के पड़ोसी पप्पू से भी कुछ अहम जानकारियां हासिल कीं. इस के बाद पुलिस टीम मृतका शहला परवीन की मां नफीसा बाजी (पूर्व पार्षद) के घर दलेलपुरवा पहुंची. नफीसा बाजी बीमार थीं. बेटी की हत्या की खबर सुन कर उन की तबीयत और बिगड़ गई. पुलिस ने जैसे तैसे कर के उन का बयान दर्ज किया.

चूंकि रिपोर्ट नामजद थी, इसलिए पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए उन के घर दबिश दी तो वह सब घर से फरार मिले. पुलिस टीम ने उन्हें तलाशने के लिए उन के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी. लेकिन आरोपी पकड़ में नहीं आए. तब इंसपेक्टर रमाकांत पचौरी ने अपने कुछ खास मुखबिरों को आरोपियों की टोह में लगा दिया और खुद भी उन्हें तलाशने में लगे रहे.

12 जून, 2019 की दोपहर को मुखबिर ने थानाप्रभारी को आरोपियों के बारे में खास सूचना दी. मुखबिर की सूचना पर थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ तुरंत हमराज कौंप्लैक्स पहुंच गए.

जैसे ही उन की जीप रुकी तो वहां से 3 लोग चाचा नेहरू अस्पताल की ओर भागे, लेकिन पुलिस टीम ने उन को कुछ ही दूरी पर धर दबोचा. उन से पूछताछ की तो उन्होंने अपने नाम मोहम्मद शाकिर, शाकिब तथा अर्सलान उर्फ कल्लू बताए. इन में शाकिब तथा अर्सलान शाकिर के बेटे थे. पुलिस उन तीनों को थाने ले आई. उन की गिरफ्तारी की खबर सुन कर एसपी (क्राइम) राजेश कुमार और सीओ सैफुद्दीन भी थाने पहुंच गए.

थाने में एसपी (क्राइम) राजेश कुमार तथा सीओ सैफुद्दीन ने उन तीनों से शहला परवीन की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछताछ की तो वे टूट गए और उन्होंने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

मोहम्मद शाकिर ने बताया कि उस की पत्नी शहला परवीन चरित्रहीन थी. उस की बदलचलनी की वजह से समाज में उस की इज्जत खाक में मिल गई थी. हम ने उसे बहुत समझाया, नहीं मानी तो अंत में उस की हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा. हम तो उस के आशिक रेहान को भी मार डालते, लेकिन वह बच कर भाग गया.

चूंकि मोहम्मद शाकिर तथा उस के बेटों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था. अत: पुलिस ने उन तीनों को हत्या के जुर्म में विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच तथा अभियुक्तों के बयानों के आधार पर एक ऐसी औरत की कहानी सामने आई, जिस ने बदचलन हो कर न सिर्फ अपने शौहर से बेवफाई की बल्कि बेटों को भी समाज में शर्मसार किया.

उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर के अनवरगंज थानांतर्गत एक मोहल्ला है दलेलपुरवा. इसी मोहल्ले में हरी मसजिद के पास मोहम्मद याकूब अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी नफीसा बाजी के अलावा 2 बेटे तारिक शादाब, असलम और एक बेटी शहला परवीन थी. मोहम्मद याकूब का कपड़े का व्यापार था. व्यापार से होने वाली आमदनी से वह अपने परिवार का भरणपोषण करते थे. व्यापार में उन के दोनों बेटे भी उन का सहयोग करते थे.

मोहम्मद याकूब जहां व्यापारी थे, वहीं उन की पत्नी नफीसा बाजी की राजनीति में दिलचस्पी थी. वह समाजवादी पार्टी की सक्रिय सदस्य थीं. दलेलपुरवा क्षेत्र से उन्होंने 2 बार पार्षद का चुनाव लड़ा, पर हार गई थीं. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. वह पार्टी के साथसाथ समाजसेवा में जुटी रहीं. तीसरी बार जब उन्हें पार्टी से टिकट मिला तो वह पार्षद का चुनाव लड़ीं. इस बार वह जीत कर दलेलपुरवा क्षेत्र की पार्षद बन गईं.

नफीसा बाजी की बेटी शहला परवीन भी उन्हीं की तरह तेजतर्रार थी. वैसे तो शहला बचपन से ही खूबसूरत थी, लेकिन जब वह जवान हुई तो वह पहले से ज्यादा खूबसूरत दिखने लगी थी. जब वह बनसंवर कर घर से निकलती तो देखने वाले देखते ही रह जाते. शहला पढ़ने में भी तेज थी. उस ने फातिमा स्कूल से हाईस्कूल तथा जुबली गर्ल्स इंटर कालेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी.

शहला शादी लायक हो चुकी थी, मोहम्मद याकूब उस का निकाह कर उसे मानमर्यादा के साथ ससुराल भेजना चाहते थे. एक दिन मोहम्मद याकूब ने अपने पड़ोसी जावेद खां से बेटी के रिश्ते के बारे में बात की तो वह उत्साह में भर कर बोला, ‘‘याकूब भाई, मेरी जानपहचान में एक अच्छा लड़का है मोहम्मद शाकिर. वह चमनगंज में रहता है और कपड़े का व्यवसाय करता है. जिस दिन फुरसत में हो, मेरे साथ चमनगंज चल कर उसे देख लेना. सब कुछ ठीक लगे तो बात आगे बढ़ाएंगे.’’

शाकिर से हो गया निकाह

एक सप्ताह बाद मोहम्मद याकूब जावेद के साथ चमनगंज गए. मोहम्मद शाकिर साधारण शक्ल वाला हंसमुख युवक था. उस में आकर्षण जैसी कोई बात नहीं थी. परंतु वह कमाऊ था, उस का परिवार भी संपन्न था. इस के विपरीत शहला परवीन चंचल व खूबसूरत थी.

कहीं बेटी गलत रास्ते पर न चल पड़े, सोचते हुए मोहम्मद याकूब ने शाकिर को अपनी बेटी शहला परवीन के लिए पसंद कर लिया. इस बारे में उन्होंने बेटी की राय लेनी भी जरूरी नहीं समझी. इस के बाद आगे की बातचीत शुरू हो गई. बातचीत के बाद दोनों पक्षों की सहमति से रिश्ता पक्का हो गया.

तय तारीख को मोहम्मद शाकिर की बारात आई, निकाह हुआ और शहला परवीन शाकिर के साथ विदा कर दी गई. यह सन 1998 की बात है.

सुहागरात को शहला परवीन ने अपने शौहर शाकिर को देखा तो उस के अरमानों पर पानी फिर गया. पति मोहमद शाकिर किसी भी तरह से उसे पसंद नहीं था. उस रात वह दिखावे के तौर पर खुश थी, पर मन ही मन कुढ़ रही थी.

सप्ताह भर बाद शहला का भाई तारिक उसे लेने आ पहुंचा. तभी मौका देख कर शाकिर ने शहला से कहा, ‘‘दुलहन का मायके जाना रिवाज है. रिवाज के मुताबिक तुम्हें मायके भेजना ही पड़ेगा. खैर तुम जाओ. तुम्हारे बिना किसी तरह हफ्ता 10 दिन रह लूंगा.’’

शहला परवीन ने शौहर को घूर कर देखा और कर्कश स्वर में बोली, ‘‘अपनी यह मनहूस सूरत ले कर मेरे मायके मत आना. नहीं तो तुम्हें देख कर मेरी सहेलियां हंसेंगी. कहेंगी देखो शहला जैसी हूर का लंगूर शौहर आया है.’’

यह सुन कर शाकिर को लगा, जैसे किसी ने उस के कानों में गरम शीशा उड़ेल दिया हो. वह पत्नी को देखता रहा और वह भाई के साथ मायके चली गई. 8-10 दिन बाद जब शहला को विदा कर लाने की तैयारी शुरू हुई तो शाकिर ने घर वालों के साथ ससुराल जाने से इनकार कर दिया. तब घर वाले ही शहला को विदा करा लाए.

शाकिर को विश्वास था कि ससुराल आ कर शहला शिकायत करेगी कि सब आए पर तुम नहीं आए. लेकिन ऐसा कुछ कहने के बजाए शहला ने उलटा शौहर की छाती में शब्दों का भाला घोंप दिया, ‘‘अच्छा हुआ तुम नहीं आए, वरना तमाशा बन जाते और शर्मिंदा मुझे होना पड़ता.’’

छाती में शब्दों के शूल चुभने के बावजूद शाकिर चुप रहा. उस का विचार था कि वह अपने प्रेम से शहला का दिल जीत लेगा और खुदबखुद सब ठीक हो जाएगा. शहला को उस की जो शक्ल बुरी लगती है, वह अच्छी लगने लगेगी.

शाकिर ने की दिल जीतने की कोशिश

शाकिर पत्नी को प्यार से जीतने की कोशिश करता रहा और शहला उसे दुत्कारती रही. इस तरह प्यार और नफरत के बीच उन की गृहस्थी की गाड़ी ऐसे ही चलती रही.

समय बीतता गया और शहला 2 बेटों शाकिब व अर्सलान की मां बन गई. शाकिर को विश्वास था कि बच्चों के जन्म के बाद शहला के व्यवहार में कुछ बदलाव जरूर आएगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. उस का बर्ताव पहले जैसा ही रहा.

वह बच्चों की परवरिश पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देती थी और अपनी ही दुनिया में खोई रहती थी. उसे घर में कैद रहना पसंद न था, इसलिए वह अकसर या तो मायके या फिर बाजार घूमने निकल जाती थी. शाकिर रोकटोक करता तो वह उस से उलझ जाती और अपने भाग्य को कोसती.

शहला परवीन की अपने शौहर से नहीं पटती थी. इसलिए दोनों के बीच दूरियां बनी रहती थीं. शहला का मन पुरुष सुख प्राप्त करने के लिए भटकता रहता था, लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था.

उन्हीं दिनों शहला के जीवन में मुबीन ने प्रवेश किया. मुबीन अपराधी प्रवृत्ति का था. अनवरगंज क्षेत्र में उस की तूती बोलती थी. व्यापारी वर्ग तो उस के साए से भी डरता था.

वह व्यापारियों से हफ्ता वसूली करता था. शाकिर का कपड़े का व्यवसाय था. मुबीन शाकिर से भी रुपए वसूलता था. शहला परवीन मुबीन को अच्छी तरह जानती थी लेकिन शौहर के रहते वह उस के सामने नहीं आती थी.

एक रोज शहला घर में अकेली थी, तभी मुबीन उस के घर में बेधड़क दाखिल हुआ और दबे पांव जा कर शहला के पीछे खड़ा हो गया. शहला किसी काम में ऐसी व्यस्त थी कि उसे भनक तक नहीं लगी कि कोई उस के पीछे आ खड़ा हुआ है. शहला तब चौंकी जब मुबीन ने कहा, ‘‘शहला भाभी नमस्ते.’’

शहला फौरन पलटी. मुबीन को देख कर उस का चेहरा फूल की तरह खिल गया. वह अपने चेहरे पर मुसकान बिखरते हुए बोली, ‘‘नमस्ते मुबीन भाई, तुम कब आए, मुझे पता ही नहीं चला. बताओ, कैसे आना हुआ? तुम्हारे भैया तो घर पर हैं नहीं.’’

‘‘भैया नहीं हैं तो क्या हुआ. क्या भाभी से मिलने नहीं आ सकता?’’ मुबीन भी हंसते हुए बोला.

‘‘क्यों नहीं?’’ कहते हुए शहला उस के पास बैठ कर बतियाने लगी. बातों ही बातों में मुबीन बोला, ‘‘भाभी, एक बात कहूं, बुरा तो नहीं मानोगी.’’

‘‘एक नहीं चार कहो, मैं बिलकुल बुरा नहीं मानूंगी.’’ शहला ने कहा.

‘‘भाभी, कसम से तुम इतनी खूबसूरत हो कि कितना भी देखूं, जी नहीं भरता.’’ वह॒ बोला.

‘‘धत…’’ कहते हुए शहला के गालों पर लाली उतर आई. कुछ देर बतियाने के बाद मुबीन वहां से चला गया.

इस के बाद मुबीन का शहला के घर आनेजाने लगा. दोनों एकदूसरे की बातों में रमने लगे. शहला और मुबीन हमउम्र थे, जबकि शहला का पति शाकिर उम्र में उस से 6-7 साल बड़ा था. मुबीन शरीर से हृष्टपुष्ट तथा स्मार्ट था. क्षेत्र में उस की हनक भी थी, सो शहला उस से प्यार करने लगी. वह सोचने लगी कि काश उसे मुबीन जैसा छबीला पति मिलता.

मुबीन भी शहला को चाहने लगा था. आते जाते मुबीन ने शहला से हंसीमजाक के माध्यम से अपना मन खोलना शुरू किया तो शहला भी खुलने लगी. आखिर एक दिन दोनों के बीच नाजायज संबंध बन गए. इस के बाद जब भी मौका मिलता, दोनों शारीरिक भूख मिटा लेते. शहला को अब पति की कमी नहीं खलती थी.

शहला और मुबीन के नाजायज रिश्ते ने रफ्तार पकड़ी तो पड़ोसियों के कान खड़े हो गए. एक आदमी ने शाकिर को टोका, ‘‘शाकिर भाई, तुम दिनरात कमाई में लगे रहते हो. घर की तरफ भी ध्यान दिया करो.’’

‘‘क्यों, मेरे घर को क्या हुआ? साफ साफ बताओ न.’’ शाकिर ने पूछा.

‘‘साफ साफ सुनना चाहते हो तो सुनो. तुम्हारे घर पर बदमाश मुबीन का आना जाना है. तुम्हारी लुगाई से उस का चक्कर चल रहा है.’’ उस ने सब बता दिया.

उस की बात सुन कर शाकिर का माथा ठनका. जरूर कोई चक्कर है. अफवाहें यूं ही नहीं उड़तीं. उन में कुछ न कुछ सच्चाई जरूर होती है.

शाम को शाकिर जब घर लौटा तो उस ने पत्नी से पूछा, ‘‘शहला, मैं ने सुना है मुबीन तुम से मिलने घर आता है. वह भी मेरी गैरमौजूदगी में.’’

शहला न डरी न घबराई बल्कि बेधड़क बोली, ‘‘मुबीन आता है पर मुझ से नहीं तुम से मिलने आता है. तुम नहीं मिलते तो चला जाता है.’’

‘‘तुम उसे मना कर दो कि वह घर न आया करे. उस के आने से मोहल्ले में हमारी बदनामी होती है.’’

‘‘मुझ से क्यों कहते हो, तुम खुद ही उसे क्यों नहीं मना कर देते.’’

‘‘ठीक है, मना कर दूंगा.’’

इस के बाद शाकिर मुबीन से मिला और उस ने उस से कह दिया कि वह उस की गैरमौजूदगी में उस के घर न जाया करे.

शाकिर की बात सुनते ही मुबीन उखड़ गया. उस ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई. शाकिर डर गया और अपनी जुबान बंद कर ली. मुबीन बिना रोकटोक उस के घर आता रहा और शहला के साथ मौजमस्ती करता रहा.

मुबीन ने जब शाकिर का सुखचैन छीन लिया तब उस ने अपने रिश्तेदारों को घर बुलाया और इस समस्या से निजात पाने के लिए विचार विमर्श किया. आखिर में तय हुआ कि इज्जत तभी बच सकती है, जब मुबीन को ठिकाने लगा दिया जाए.

इस के बाद शाकिर के भाई, शहला के भाई और मामा ने मिल कर दिनदहाड़े खलवा में मुबीन की हत्या कर दी. हत्या के आरोप में सभी को जेल जाना पड़ा. यह बात सन 2012 की है.

इस घटना के बाद करीब 4 साल तक घर में शांति रही. शहला का शौहर के प्रति व्यवहार भी सामान्य रहा. अब तक शहला के दोनों बेटे शाकिब और अर्सलान भी जवान हो गए थे. बापबेटे रोजाना सुबह 10 बजे घर से निकलते तो फिर देर शाम ही घर लौटते थे. कपड़ों की बिक्री का हिसाब किताब लगा कर, खाना खा कर वे सो जाते थे.

शहला परवीन न शौहर के प्रति वफादार थी और न ही उसे बेटों से कोई लगाव था. वह तो खुद में ही मस्त रहती थी. बनसंवर कर रहना और घूमना फिरना उस की दिनचर्या में शामिल था. उस का बनाव शृंगार देख कर कोई कह नहीं सकता था कि वह 2 जवान बच्चों की मां है.

शहला को घर में सभी सुख सुविधाएं हासिल थीं पर शौहर की बांहों का सुख प्राप्त नहीं हो पाता था. शाकिर अपने धंधे में लगा रहता था. काम की वजह से बीवी से भी दूरियां बनी रहती थीं. दूसरी ओर शहला उसे पसंद भी नहीं करती थी. वह तो किसी नए प्रेमी की तलाश में थी. हालांकि इस खेल में उसे शौहर तथा जवान बच्चों का डर लग रहा था.

उसी दौरान उस की नजर रेहान पर पड़ी. रेहान गम्मू खां के अहाते में रहता था और प्रौपर्टी डीलिंग का काम करता था. वह उस का दूर का रिश्तेदार भी था. उस का जब तब शहला के यहां आनाजाना लगा रहा था. वह हैंडसम था.

शहला परवीन का दिल रेहान पर आया तो वह उसे खुला आमंत्रण देने लगी, आंखों के तीरों से उसे घायल करने लगी. खुला आमंत्रण पा कर रेहान भी उस की ओर आकर्षित होने लगा. जब भी उसे मौका मिलता, शहला के साथ हंसीमजाक और छेड़छाड़ कर लेता. शहला उस की हंसीमजाक का जरा भी बुरा नहीं मानती थी. दोनों के पास एकदूसरे का मोबाइल नंबर था. जल्दी ही दोनों की मोबाइल पर प्यारभरी बातें होने लगीं.

आदमी हो या औरत, मोहब्बत होते ही उस का मन कल्पना की ऊंची उड़ान भरने लगता है. रेहान और शहला का भी यही हाल था. दोनों मोहब्बत की ऊंची उड़ान भरने लगे थे. आखिर एक रोज रेहान ने चाहत का इजहार किया तो शहला ने इकरार करने में जरा भी देर नहीं लगाई. इतना ही नहीं, शहला ने उसी समय अपनी बांहों का हार रेहान के गले में डाल दिया.

इस के बाद दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता बनते देर नहीं लगी. एक बार अवैध रिश्ता बना तो उस का दायरा बढ़ता गया. शहला अब पति की कमी प्रेमी से पूरी करने लगी. उसे जब भी मौका दिखता, फोन कर रेहान को अपने यहां बुला लेती और दोनों रंगरलियां मनाते.

कभी कभी रेहान शहला को होटल में भी ले जाता था, जहां वे मौजमस्ती करते. शहला परवीन रेहान के साथ घूमने फिरने भी जाने लगी. रेहान उसे कभी बाहर पार्क में ले जाता तो कभी तुलसी उपवन. वहां दोनों खूब बतियाते.

पर एक दिन शाकिर ने शहला और रेहान को अपने ही घर में आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया. वे दोनों एकदूसरे की बांहों में इस कदर मस्त थे कि उन्हें खबर ही नहीं हुई कि दरवाजे पर खड़ा शाकिर उन की कामलीला देख रहा है.

घर में अनाचार होते देख शाकिर का खून खौल उठा. उस ने दोनों को ललकारा तो रेहान सिर पर पैर रख कर भाग गया लेकिन शहला कहां जाती. शाकिर ने सारा गुस्सा उसी पर उतारा. उस ने पीट पीट कर पत्नी को अधमरा कर दिया.

शाकिर ने शहला को रंगे हाथों पकड़ने की जानकारी अपने दोनों बेटों को दी तो बेटों ने भी मां को खूब लताड़ा. शौहर और बेटों ने शहला को जलील किया. इस के बावजूद उस ने रेहान का साथ नहीं छोड़ा.

कुछ दिनों बाद ही वह घर से बाहर रेहान से मिलने लगी. चोरी छिपे मिलने की जानकारी शाकिर को हुई तो उस ने फिर से शहला की पिटाई की. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा.

जब भी शाकिर को दोनों के मिलने की जानकारी होती, उस दिन शहला की शामत आ जाती. लेकिन पिटाई के बावजूद जब शहला ने रेहान का साथ नहीं छोड़ा तो आजिज आ कर शाकिर ने शहला को तलाक दे दिया. तलाक के मामले में बेटों ने बाप का ही साथ दिया. यह बात जनवरी, 2018 की है.

शौहर से तलाक मिलने के बाद शहला कुछ महीने मायके दलेलपुरवा में रही. उस के बाद उस ने अनवरगंज थाना क्षेत्र के डिप्टी पड़ाव में गुरुवतउल्ला पार्क के पास किराए पर मकान ले लिया और उसी में रहने लगी. इस मकान में उस का प्रेमी रेहान भी आने लगा. शहला को अब कोई रोकने टोकने वाला नहीं था, सो वह प्रेमी के साथ खुल कर मौज लेने लगी.

रेहान के पास पैसों की कमी नहीं थी, सो वह शहला पर दिल खोल कर खर्च करता था. पे्रमी के आनेजाने की जानकारी पड़ोसियों को न हो, इस के लिए वह मकान के आगे वाले गेट पर ताला लगाए रखती थी और पीछे के दरवाजे से आती जाती थी. इसी पीछे वाले दरवाजे से उस का प्रेमी रेहान भी आता था.

शहला और रेहान के अवैध संबंधों की जानकारी शाकिर के घर वालों व नाते रिश्तेदारों को भी थी. इस से पूरी बिरादरी में उस की बदनामी हो रही थी. उस के दोनों बेटे शादी योग्य थे. पर मां शहला की चरित्रहीनता के कारण बेटों का रिश्ता नहीं हो पा रहा था. आखिर आजिज आ कर शाकिर ने शहला और रेहान को सबक सिखाने की योजना बनाई. अपनी इस योजना में शाकिर ने अपने बहनोई गुड्डू हलवाई तथा दोनों बेटों को भी शामिल कर लिया.

बन गई हत्या की योजना

10 जून, 2019 की रात 8 बजे शाकिर को एक रिश्तेदार के माध्यम से पता चला कि शहला के घर में रेहान मौजूद है और वह आज रात को वहीं रुकेगा. यह खबर मिलने के बाद शाकिर ने अपने बहनोई गुड्डू हलवाई को बुला लिया. फिर बहनोई व बेटों के साथ शाकिर शहला के घर जा पहुंचा. घर के बाहर गेट पर ताला लगा था. वे लोग पीछे के दरवाजे से घर के अंदर दाखिल हुए.

घर के अंदर कमरे में रेहान और शहला आपत्तिजनक अवस्था में थे. शाकिर ने उन दोनों को ललकारा और सब मिल कर रेहान को पीटने लगे. प्रेमी को पिटता देख शहला बीच में आ गई. वह प्रेमी को बचाने के लिए पति और बेटों से भिड़ गई. दोनों बेटे मां को पीटने लगे. इसी बीच मौका पा कर रेहान वहां से भाग निकला.

रेहान को भगाने में शहला ने मदद की थी, सो वे सब मिल कर शहला को लात घूंसो से पीटने लगे. इसी समय शाकिर की निगाह वहीं पड़ी ईंट पर चली गई. उस ने लपक कर ईंट उठा ली और उस से शहला के सिर व मुंह पर ताबड़तोड़ प्रहार किए. जिस से शहला का सिर फट गया और खून बहने लगा.

कुछ देर तड़पने के बाद शहला ने दम तोड़ दिया. हत्या के बाद उन सब ने मिल कर अलमारी व बक्से के ताले खोले और उस में रखी नकदी तथा जेवर निकाल लिए तथा सामान बिखेर दिया. फिर पीछे के रास्ते से ही फरार हो गए.

इधर पड़ोसी पप्पू ने शहला के घर चीखनेचिल्लाने की आवाज सुनी तो उस ने थाना अनवरगंज पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पाते ही इंसपेक्टर रमाकांत पचौरी घटनास्थल पर आए और शव को कब्जे में ले कर जांच शुरू की. जांच में अवैध रिश्तों में हुई हत्या का परदाफाश हुआ और कातिल पकड़े गए.

13 जून, 2019 को पुलिस ने अभियुक्त मोहम्मद शाकिर, उस के बेटों शाकिब और अर्सलान को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया.

कथा संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी. एक अन्य अभियुक्त गुड्डू हलवाई फरार था. पुलिस उसे पकड़ने का प्रयास कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इश्क के लिए बहनों की हत्या

कमरे में 7 वर्षीय बेटी शिल्पी खून से लथपथ पड़ी थी, उस के गले से खून बह रहा था. सुशीला घबराई हुई दूसरे कमरे की ओर दौड़ी, वहां का दृश्य भी ठीक वैसा ही था. इस कमरे में सब से छोटी 5 वर्षीय बेटी रोशनी का भी गला कटा हुआ था. उस के गले से भी खून बह रहा था.

खून से लथपथ बच्चियों के शव देखते ही घर में कोहराम मच गया. घर में 2 लाशें देख कर सुशीला और उस की बड़ी बेटी अंजलि दोनों दहाड़ें मार कर रोने लगीं. चीखने चिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी भी आ गए. जिस ने भी यह नजारा देखा, वह डर से सहम गया.

इसी बीच सूचना मिलने पर पिता जयवीर सिंह पाल भी बाजार से वापस लौट आए थे. घर में दोनों छोटी बेटियों की हत्या हो जाने से वह जमीन पर माथा पकड़ कर बैठ गए. दिनदहाड़े घर में 2 मासूम बच्चियों की हत्या हो जाने से गांव में सनसनी फैल गई. यह बात 8 अक्तूबर, 2023 शाम की है.

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                मृतक बच्चियां रोशनी और शिल्पी

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के गांव बहादुरपुर का निवासी है जयवीर सिंह पाल. वह खेतीकिसानी व पशुपालन कर अपने परिवार का पालनपोषण करता था. उस के 4 बेटे और 3 बेटियां थीं. बेटियों में सब से बड़ी 19 वर्षीय अंजलि और बेटा कन्हैया के अलावा 7 वर्षीय शिल्पी उर्फ सुरभि व 5 वर्षीय रोशनी थी.

दोपहर में मां सुशीला व पिता जयवीर खेत पर काम करने चले गए थे. 2 बेटे खेत पर बकरी चराने गए थे. जबकि नंदकिशोर 2 छोटे बेटे घर के बाहर गांव के बच्चों के साथ खेल रहे थे. घर पर अंजलि व उस की दोनों छोटी बहनें शिल्पी व रोशनी थीं.

इस से पहले सुशीला देवी अपनी बड़ी बेटी 19 वर्षीय अंजलि व पति जयवीर के साथ खेत से चारा ले कर शाम साढ़े 6 बजे घर लौट रही थी, रास्ते से ही पति बाजार से सौदा लेने चले गए थे. मांबेटी जब घर पहुंचीं तो घर का मेनगेट खुला हुआ था.

दरवाजा खुला देखते ही सुशीला ने कहा, ”अंजलि तूने दरवाजा बंद क्यों नहीं किया था?’’

”मम्मी, खेत पर जाते समय मैं तो बाहर का दरवाजा बंद कर के गई थी, पता नहीं किस ने खोला है?’’ अंजलि ने बोला.

जैसे ही दोनों आंगन में पहुंचीं तो कमरों के दरवाजे भी खुले दिखाई दिए. इस पर सुशीला बेटी पर नाराज होते बोली, ”तुझे शायद ध्यान ही नहीं, तू घर के दरवाजे खुले छोड़ गई थी.’’

”नहीं मम्मी, मैं तो खेत पर जाते समय घर के सारे दरवाजे बंद कर गई थी. उस समय शिल्पी और रोशनी दोनों कमरे में सो रही थीं.’’

घर में सन्नाटा छाया हुआ था. दोनों छोटी बेटियां शिल्पी और रोशनी नजर नहीं आईं. यह सोच कर कि उठने के बाद कहीं खेलने तो नहीं चली गईं. सुशीला ने उन दोनों का नाम ले कर आवाज लगाई. लेकिन न तो घर के अंदर से और न बाहर से बेटियों की आवाज आई.

इस पर सुशीला एक कमरे में गई. कमरे का नजारा देखते ही उस के मुंह से चीख निकल गई. क्योंकि घर में उस की दोनों बेटियों शिल्पी और रोशनी की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं.

नजदीकी पर गया दोहरे हत्याकांड का शक

इसी बीच किसी ने थाना पुलिस को गांव में हुए दोहरे हत्याकांड की सूचना दे दी. वारदात की सूचना पर एसएचओ अनिलमणि त्रिपाठी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए. दोनों बच्चियों की हत्या धारदार हथियार से गला काटकर की गई थी. दोनों की हत्या का तरीका एक जैसा था.

हैरानी की बात यह थी कि घर में सारा सामान अपनी जगह पर रखा हुआ मिला.  इस से साफ जाहिर हो रहा था कि घर में लूटपाट जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी. पूछताछ करने पर गांव वालों ने बताया कि उन्होंने किसी को घर में घुसते और हत्या कर के निकलते नहीं देखा.

इस से पुलिस को यह अंदेशा हुआ कि किसी ने जयवीर सिंह से दिली रंजिश मानते हुए इस वारदात को अंजाम दिया है.

घटना की गंभीरता को भांपते हुए एसएचओ ने विभाग के उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत  करा दिया. इस पर एएसपी (सिटी) कपिलदेव सिंह, सीओ (जसवंतनगर) अतुल प्रधान, एसएचओ (जसवंतनगर) मुकेश कुमार सोलंकी फोरैंसिक टीम सहित घटनास्थल पर आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. दोनों बच्चियों की हत्या जिस हथियार से की गई, वह घटनास्थल पर नहीं मिला. इस संबंध में मृतक बच्चियों के मम्मीपापा से पूछताछ की गई.

उन्होंने बताया कि वे लोग खेत पर गए हुए थे. घर में सब से बड़ी बेटी अंजलि के साथ ही दोनों छोटी बेटियां शिल्पी और रोशनी थीं. दोनों की देखरेख की जिम्मेदारी अंजलि पर थी. जबकि चारों बेटे घर के बाहर थे. लेकिन घटना से कुछ देर पहले अंजलि खेत से चारा लेने चली गई. इस के बाद ही किसी ने बच्चियों को अकेला देख कर उन की हत्या कर दी.

पिता जयवीर ने बताया कि उन की किसी से रंजिश नहीं है, फिर भी उन की मासूम बेटियों की हत्या किस ने और क्यों की, कुछ समझ नहीं आ रहा है. रात में ही आईजी जोन कानपुर क्षेत्र प्रशांत कुमार गांव पहुंचे और घर वालों से घटना की जानकारी ली.

पुलिस पूछताछ में अंजलि ने बताया कि उस के खेत पर जाने के एकडेढ़ घंटे के अंदर ही घटना घटित हो गई. वह अपनी दोनों छोटी बहनों को सोते हुए छोड़ कर गई थी. लेकिन खेत से चारा ले कर मां के साथ लौट कर आई तो दोनों बहनें मृत मिलीं.

अंजलि के बयान पर यकीन किया जाए तो दोहरे हत्याकांड को उस के पीठ फेरते ही लगभग एक पौन घंटे के अंदर अंजाम दिया गया था. अब ऐसे में बड़ा सवाल यह था कि आखिर घर में मौजूद मासूम बच्चियों की भला किसी से क्या दुश्मनी हो सकती थी कि कातिल ने मौका मिलते ही घर में दोनों की गला रेत कर नृशंस हत्या कर दी.

पुलिस ने पूछताछ के बाद रात में ही दोनों बच्चियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. फोरैंसिक टीम ने इस संबंध में जांच की. जयवीर सिंह पाल ने थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

जांच के दौरान पुलिस को किसी नजदीकी का हाथ होने की आशंका दिखाई दी, लेकिन यह केवल कयास भर ही था.

पुलिस दोहरे हत्याकांड के हत्यारों का पता लगाने के लिए छानबीन में पूरी तरह जुट गई. पुलिस को अब तक अंदेशा हो चुका था कि बच्चियों के हत्यारे गांव में ही छिपे हैं. हत्यारे मृतक बच्चियों के परिचित रहे होंगे, इसीलिए किसी ने उन के घर पर आने और जाने पर गौर नहीं किया. जयवीर का घर इस तरह का बना है कि बच्चियों की चीख भी घर से बाहर नहीं आ सकती थी, फिर हत्या कमरों में हुई थी.

अंजलि के बयानों में दिखा विरोधाभास

पूछताछ के दौरान सुशीला और जयवीर के बयान तो एकदूसरे से मैच कर रहे थे, लेकिन अंजलि बारबार अपने बयानों से पलट रही थी. उस ने बताया कि वह तुरंत ही मां के पीछे खेत पर चली गई थी. जबकि सुशीला ने बताया कि उन के जाने के 2 घंटे बाद अंजलि खेत पर पहुंची थी.

सुशीला ने यह भी बताया कि वह अंजलि को दोनों छोटी बहनों का ध्यान रखने की कह कर गई थी. जबकि अंजलि अपने मन से खेत पर पहुंची थी, उसे खेत पर आने को किसी ने नहीं कहा था.

पुलिस और फोरैंसिक टीम सबूत जुटाने व छानबीन में लग गई. घर में हत्या के बाद फर्श पर बहे खून को साफ किया गया था. इस का मतलब था कि हत्यारों ने हत्या के बाद इत्मीनान से खून भी साफ किया था. पुलिस की नजरों में कमरे की ज्यादा सफाई करना खटक गया.

पुलिस ने पूरा घर खंगाला. इस दौरान घर के टिन शेड में रखा फावड़ा मिला. इस फावड़े को पानी से साफ किया गया था, लेकिन उस पर खून के कुछ छींटे दिखाई दे रहे थे. इसी के साथ घर में गीले कपड़े भी मिले, जिन्हें धो कर सूखने के लिए आंगन में तार पर डाला गया था.

शाम के समय कपड़े कौन धोता है? पूछने पर सुशीला ने बताया कि ये कपड़े अंजलि के हैं. गौर से देखने पर पता चला कि कपड़ों को खून के दाग मिटाने के लिए धोया गया था. एसपी (सिटी) कपिलदेव सिंह, सीओ अतुल प्रधान और फोरैंंसिक टीम की पड़ताल में पूरा मामला स्पष्ट हो गया.

अब शक पूरी तरह अंजलि पर था. अंजलि से पूछताछ की तो वह बारबार बयान बदलने लगी. तब एसएचओ अंजलि को महिला पुलिस की मदद से थाने ले गए. वहां पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की.

अब अंजलि के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था. वह पूरी तरह टूट गई. उस ने कुबूल कर लिया कि अपनी सगी दोनों बहनों की हत्या उस ने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए की थी. उस ने पुलिस को हत्या की पूरी दास्तां सुना दी, जिसे सुन कर पुलिस भी सन्न रह गई. पुलिस ने दोहरे हत्याकांड का परदाफाश घटना के 20 घंटे बाद ही कर दिया.

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हत्यारोपी बहन अंजलि और उसका प्रेमी अमन

बहनों ने प्रेमी से मिलते देख लिया था

दोहरे हत्याकांड से एक सप्ताह पहले की बात है. उस दिन भी घर पर अंजलि अपनी दोनों छोटी बहनों शिल्पी और रोशनी के साथ थी. दोनों बहनें घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रही थीं. अंजलि का पास के ही गांव के रहने वाले अमन नाम के युवक से प्यार का चक्कर चल रहा था. मौके का फायदा उठाने के लिए अंजलि ने प्रेमी अमन को फोन कर चुपचाप घर पर बुला लिया.

अमन भी सब की नजरों से बच कर अंजलि के पास आ गया. घर आते ही दोनों एकदूसरे के गले लग गए. अंजलि और अमन छत पर जा कर बातें करने लगे. दोनों बहुत दिनों बाद मिले थे, इसलिए एकदूसरे के लिए तड़प रहे थे.

घर के बाहर अमन से मिलने में खतरा था. क्योंकि यदि उन दोनों को बतियाते या मिलते कोई देख लेता तो बात का बतंगड़ बन जाता, दोनों पकड़े जाते. इसलिए उस दिन मौका अच्छा देख कर अंजलि ने अमन को घर पर ही बुला लिया था.

छत पर एकदूसरे का हाथ थामे दोनों प्यार भरी बातें करते हुए भविष्य के सपने बुन रहे थे. शारीरिक स्पर्श से दोनों उत्तेजित हो गए. उसी समय अमन ने अंजलि को सीने से लगा लिया. फिर दोनों ही अपना नियंत्रण खो कर एकदूसरे में गुंथ गए. इस का पता उन्हें तब चला, जब खेलते खेलते दोनों छोटी बहनें पता नहीं कब छत पर आ गई थीं.

मासूम बच्चियों ने अपनी बहन को प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था. आहट होने पर दोनों झटपट अलग हो गए और अपने कपड़े ठीक किए.

अपनी बहनों को छत पर सामने देख कर अंजलि के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई. उस समय अमन बिना कुछ कहे वहां से चला गया. अंजलि ने अमन के जाने के बाद दोनों बहनों शिल्पी और रोशनी को अमन के घर आने की बात मम्मीपापा व घर में किसी को न बताने को कहा. इस के लिए उस ने दोनों को खाने की चीजें व अच्छे कपड़े दिलवाने की बात कही, लेकिन शाम को दोनों बच्चियों ने मां के खेत से आने के बाद उन से अंजलि की शिकायत कर दी.

सयानी और घर की सब से बड़ी बेटी के इस आचरण से सुशीला बहुत परेशान हो गई. उस ने इस बात को अपने पति को बता दिया. इस पर अंजलि की घर में बहुत फजीहत हुई. मम्मीपापा ने उस की पिटाई करने के साथ ही बेइज्जत भी किया, कहा, ”तुझ से अच्छी तो ये दोनों बहनें हैं.’’

यह भी हिदायत दी गई कि यदि वह लड़का दोबारा घर आया या तूने उस से मोबाइल पर बात की तो बहुत बुरा होगा. इतना ही नहीं उस दिन से अंजलि का घर से बाहर निकलना भी बंद करा दिया गया.

यह बात अंजलि के दिल में घर कर गई. अपनी शिकायत किए जाने से वह दोनों बहनों से बुरी तरह से चिढ़ गई थी. छोटे भाईबहनों के सामने रोजरोज ताने मिलने और होने वाली बेइज्जती उसे नश्तर की तरह चुभ रही थी. इस से वह तंग आ चुकी थी.

25 मिनट में काट डाला दोनों बहनों को

8 अक्तूबर, 2023 को अंजलि के मम्मीपापा दोपहर में ही खेत पर चले गए थे. 2 भाई बकरी चराने खेत पर व 2 भाई खेलने चले गए थे. घर में दोनों छोटी बहनें व अंजलि रह गई थी. मम्मी रात का खाना बनाने व बहनों का ध्यान रखने के लिए कह गई थी.

जब से छोटी बहनों ने अंजलि की शिकायत मम्मीपापा से की थी उसे बहनों पर बहुत गुस्सा आता था, लेकिन वह उसे खून के घंूट की तरह पी जाती थी. उस दिन खाना बनाने के बाद जब वह किचन से बाहर निकली तो दोनों बहनें अलगअलग कमरों में बैठी थीं.

अंजलि ने दोनों को आवाज दे कर अपने पास बुलाया, लेकिन कोई भी बहन उस के पास नहीं आई. बारबार पुकारने पर भी  दोनों कुछ नहीं बोल रहीं थीं. गुस्सा तो पहले से ही था. उस की बात अनसुनी करने पर अंजलि का पारा हाई हो गया और इस के बाद प्यार में अंधी अंजलि ने दोनों को मारने की साजिश रच डाली.

पहले अंजलि ने रोशनी को कमरे में बंद कर दिया. फिर आंगन में रखा फावड़ा उठाया और सीधे शिल्पी के कमरे में गई. अंजलि को देख कर शिल्पी मुसकराई. उस की हंसी अंजलि को बरदाश्त नहीं हुई. शिल्पी कुछ समझ पाती, उस से पहले ही अंजलि ने उस के गले पर फावड़े से वार कर दिया.

एक ही वार में वह जमीन पर गिर गई और तड़पने लगी. उस के शरीर से खून का फव्वारा फूट पड़ा. उस को वहीं छोड़ कर वह रोशनी के कमरे में गई और उस के गले पर भी फावड़े से प्रहार कर उस को भी मार डाला. इस के बाद वह घर के कोने में जा कर बैठ गई.

जब उसे इत्मीनान हो गया कि दोनों बहनें मर गई हैं, तब सब से पहले अंजलि ने दोनों के शवों को कमरों में एक कोने में खींच कर रख दिया. उस के बाद दोनों कमरों में फैला खून साफ किया.

हत्या करते समय अंजलि के कपड़ों पर भी खून लग गया था. वह कपड़े धो कर सूखने को डाल दिए. खून से सने फावड़े को धो कर उसी जगह रख दिया, जहां से उठाया था. इतना सब करने के बाद वह बहनों को देखने गई, दोनों मर चुकी थीं. एक गिलास पानी पीने के बाद अंजलि भी खेत पर पहुंच गई.

सुशीला अपने पति जयवीर सिंह  के साथ दोपहर में खेत पर काम करने चली गई थी. खेत पर जाते समय सुशीला ने बेटी अंजलि से कहा था कि शाम की रोटी बना लेना. अंजलि शाम साढ़े 5 बजे खाना बना कर वारदात को अंजाम दे कर खेत पर अपने मम्मीपापा के पास पहुंच गई थी.

अंजलि ने घर से निकलते समय पूरे घर के दरवाजे खोल दिए थे. घर का मुख्य दरवाजा भी खुला छोड़ दिया था, जिस से उस पर किसी को शक न जाए. उसे उम्मीद थी कि अपनी बनाई योजना से वह पुलिस की नजरों से बच जाएगी.

अपनी सगी 2 बहनों की हत्या के बाद भी उस के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. वह हंसते हुए खेत पर पहुंच कर मम्मी के साथ काम करने लगी. मां ने शिल्पी और रोशनी के बारे में पूछा तो बता दिया कि दोनों खाना खा कर सो रही हैं. खेत पर काम करने के बाद वह पशुओं के लिए चारा ले कर मां के साथ घर वापस आ गई.

प्रेमी अमन ने हत्या के लिए उकसाया अंजलि को

अपने इस दर्द को अंजलि ने फोन से अपने प्रेमी अमन को भी बता दिया था. उन के प्यार के रास्ते में रोड़े अटका रही बहनों को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई. एएसपी (ग्रामीण) सत्यपाल सिंह ने बताया कि अमन ने दोनों बहनों की हत्या के लिए अंजलि को उकसाया था. तब 8 अक्तूबर को घर में अकेली बहनों की फावड़े से गला काट कर अंजलि ने हत्या कर दी. अंजलि को गिरफ्तार करने वाली टीम में एसएचओ अनिलमणि त्रिपाठी, सर्विलांस प्रभारी रमेश सिंह, एसओजी इंसपेक्टर तारिक खान, एसआई समित चौधरी शामिल थे.

पुलिस ने आलाकत्ल फावड़ा, अंजलि के कपड़े, 2 मोबाइल फोन, बाल्टी आदि को बरामद कर लिया. पुलिस ने अंजलि को  9 अक्तूबर, 2023 को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

9 अक्तूबर की शाम 5 बजे गमगीन माहौल में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार पैतृक निजी जमीन पर किया गया. इस दौरान भारी पुलिस बल व सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों व परिजनों ने भरी आंखों से दोनों बच्चियों को अंतिम विदाई दी.

अंतिम संस्कार के समय एसपी (सिटी) कपिलदेव सिंह व सीओ अतुल प्रधान के अलावा जिले के विभिन्न थानों की फोर्स मौजूद रही. इस वारदात के बाद गांव में चर्चाओं का दौर बना रहा.

अंजलि को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. अब पुलिस अंजलि के  प्रेमी की सरगरमी से तलाश में जुटी हुई थी. एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने सीओ अतुल प्रधान के नेतृत्व में एक टीम बनाई. पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर इस घटना के दूसरे आरोपी व अंजलि के प्रेमी अमन निवासी खाका बाग, थाना बलरई को कोकावली अंडावली मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया.

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य सबूतों के आधार पर निकल कर आया है कि प्रेमी अमन ने हत्या के लिए अंजलि को उकसाया था.

पुलिस ने अमन के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 115, 120बी के अंतर्गत मामला दर्ज कर उसे भी कोर्ट के समक्ष पेश कर 11 अक्तूबर, 2023 को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

पहले पति से तलाक दूसरे से मर्डर

झाड़ी के पीछे लगभग 30-35 साल की एक महिला हरे रंग का फूलदार सलवार सूट पहने खून में लथपथ पड़ी थी तथा दर्द से कराह रही थी. उस में चलने फिरने की भी हिम्मत नहीं थी. उस के शरीर पर धारदार हथियार के घाव थे और लग रहा था कि शायद वह महिला अपने जीवन की अंतिम घड़ियां ही गिन रही थी.

वह रात के 8 बजे का समय था. जेठ के महीने की भीषण गरमी के बाद उस समय ठंडी ठंडी हवा चल रही थी. आसपास के क्षेत्रों के किसान व मजदूर भी अपनेअपने खेतों में धान की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करने के बाद, पैदल ही अपने घरों की ओर वापस लौट रहे थे. खेत में काम कर के कुछ किसान थके हुए थे, इसलिए वे जल्दी में अपने घरों की ओर बढ़ रहे थे.

तभी एक किसान प्रवीण सैनी को पास में बह रहे पानी के रजवाहे के पास से किसी महिला के कराहने की चीख सुनाई दी थी. वैसे तो वह जल्दी में था, मगर महिला के कराहने की आवाज सुन कर प्रवीण सैनी के कदम ठिठक गए थे. उस ने सोचा था कि यह महिला के कराहने व चीखने की आवाज कहां से आ रही है, इस का पता करना चाहिए.

इस के बाद प्रवीण सैनी ने वहां से गुजर रहे कुछ किसानों व मजदूरों को रोका और उन्हें भी रजवाहे के पास से आ रही महिला के चीखने की आवाज से अवगत कराया. इस के बाद सब ने मिल कर जहां से महिला के चीखने व कराहने की आवाज आ रही थी, वहां पर जाने का मन बनाया. फिर सभी लोग उधर ही एक झाड़ी की ओर बढ़ गए, जहां से महिला की आवाज आ रही थी.

शुरू में तो प्रवीण सैनी को कुछ डर भी लग रहा था कि वहां कहीं कोई बदमाश या लुटेरे आदि न मिल जाएं, मगर वे हिम्मत कर के अंधेरे में ही उस झाड़ी की ओर चल पड़े, जहां से महिला की चीख सुनाई दे रही थी. थोड़ी देर में ही वे सभी लोग झाड़ी के पास पहुंच गए थे.

प्रवीण सैनी ने जब अपने मोबाइल की टौर्च जलाई तो झाड़ी के पीछे का दृश्य देख कर उस की व उस के सभी साथियों की रूह कांप गई थी.

प्रवीण सैनी ने उसी वक्त इस घटना की बाबत पुलिस कंट्रोल रूम को 112 नंबर पर सूचना दे दी. जहां पर महिला घायलावस्था में पड़ी थी, वह स्थान हरिद्वार जिले के थाना पिरान कलियर अंतर्गत बावनदरा कहलाता है. जंगल व गंगनहर होने के कारण यह काफी सुनसान क्षेत्र है. गुलदार आदि कुछ जंगली जानवर भी अकसर वहां घूमते रहते हैं.

पुलिस टीमें जुटीं जांच में

लगभग 10 मिनट बाद ही प्रवीण सैनी व उस के साथियों को पुलिस की गाड़ी का सायरन साफ साफ सुनाई देने लगा था. 2 मिनट बाद थाना कलियर के एसएचओ जहांगीर अली वहां पहुंच गए थे.

रुंधे गले से महिला बस केवल इतना ही बता पाई थी कि उस का नाम तसगिरा उर्फ सकीना है तथा वह सहारनपुर के कस्बा गंगोह में अपने दूसरे पति सुहेल के साथ रहती है. आज वह अपने शौहर सुहेल व अपनी 9 महीने की बच्ची के साथ दरगाह पिरान कलियर घूमने आई थी. दरगाह घूमने के बाद शौहर ने इस सुनसान स्थान पर उस के ऊपर चाकुओं से हमला कर दिया.

पुलिस तुरंत ही उसे अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही उस ने दम तोड़ दिया. इस के बाद एसएचओ जहांगीर अली ने इस घटना से सीओ पल्लवी त्यागी व हरिद्वार के एसएसपी अजय सिंह को अवगत करा दिया. अजय सिंह ने तुरंत ही इस संगीन वारदात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल ही कलियर क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाने के आदेश कलियर थाना पुलिस व सीआईयू टीम को दिए.

सीआईयू टीम व कलियर पुलिस द्वारा सकीना के शौहर सुहेल की गिरफ्तारी के लिए एक सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन सुहेल का कुछ भी पता नहीं चल सका था. इस के बाद सीओ (रुड़की) पल्लवी त्यागी ने पुलिस की एक टीम को सुहेल के सहारनपुर के कस्बा गंगोह में स्थित घर भेजा, मगर यहां भी पुलिस को सुहेल की कोई जानकारी नहीं मिली.

सुहेल के घर वालों ने पुलिस को बताया था कि वह हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में स्थित एक फैक्ट्री में काम करता है तथा वह अब अपनी बीवी सकीना के साथ सहारनपुर के गांव दाबकी में रह रहा है.

इस के बाद पुलिस टीम सुहेल की तलाश में गांव दाबकी के लिए चल पड़ी थी, मगर यहां भी पुलिस को सुहेल के मकान पर ताला लगा दिखाई दिया था. वहां से निराश हो कर सुहैल को पकडऩे गई पुलिस टीम वापस कलियर आ गई थी.

सुहेल को पकडऩे के लिए जब सीआईयू टीम ने उस के मोबाइल फोन की लोकेशन चैक की तो वह लोकेशन सहारनपुर में मिली थी. इस के बाद कलियर पुलिस व सीआईयू की टीम वापस सहारनपुर पहुंच गई. यहां पर पुलिस टीम ने सुहेल को ढंूढा तो वह नहीं मिला. काफी तलाश करने पर आखिर सुहेल को पुलिस टीम ने सहारनपुर के गंगोह रोड पर स्थित एक ढाबे से पकड़ लिया.

सुहेल को गिरफ्तार करने की सूचना एसएचओ जहांगीर अली ने सीओ पल्लवी त्यागी व एसएसपी अजय सिंह को दे दी.

लगभग एक घंटे में पुलिस सुहेल को ले कर थाना कलियर आ गई थी. वहां पर सीओ पल्लवी त्यागी व एसएचओ जहांगीर अली ने सुहेल से सकीना की हत्या के बारे में सिलिसिलेवार पूछताछ की और उस के बयानों को रिकौर्ड कर लिया. सुहेल ने बीवी की हत्या के बारे में जो जानकारी दी, वह इस प्रकार निकली—

पहले पत्नी ने क्यों दिया तलाक

सुहेल मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के कस्बा गंगोह का रहने वाला था. 5 साल पहले वह हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र की एक फैक्ट्री में काम करने के लिए आया था.

इसी फैक्ट्री में एक तलाकशुदा महिला सकीना उर्फ तसगिरा भी उस के साथ काम करती थी. दोनों साथ काम करते हुए अपने दुखदर्द की बातें करते थे. कुछ समय बाद उस की सकीना से दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई.

सकीना का परिवार मूलरूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला था, मगर अब उस का परिवार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रह रहा है. 12 साल पहले उस का निकाह गोलाघाट प्रयागराज के हकीम से हुआ था. हकीम से वह 2 बेटियों व एक बेटे की मां बनी.

सकीना के पति हकीम को नशा करने और जुआ खेलने की आदत थी. सकीना उस से यह करने को मना करती थी, लेकिन वह नहीं माना, जिस से उन के बीच कलह शुरू हो गई. शौहर की बुरी आदत से वह तंग आ गई थी. इस के बाद वर्ष 2017 में उस का हकीम से तलाक हो गया था.

2018 में सकीना अपने तीनों बच्चों को हकीम के पास छोड़ कर सिडकुल हरिद्वार आ गई थी और एक फैक्ट्री में नौकरी करने लगी थी. सुहेल और सकीना का प्यार गहरा हो गया था. वह सकीना से निकाह करना चाहता था. जब सुहेल ने सकीना के बारे में अपने घर वालों से कहा तो उन्होंने उसे सकीना के साथ निकाह करने के लिए साफ मना कर दिया.

सुहेल तो उस वक्त सकीना के प्यार में अंधा था और उस से निकाह करना चाहता था, इसलिए उस ने अपने घर वालों के विरोध के बावजूद सकीना के साथ निकाह कर लिया और अपने गंगोह स्थित घर को छोड़ कर सहारनपुर के गांव दाबकी में रहने लगा था. इस के बाद सुहेल से सकीना के 3 बच्चे हुए, जिन में सब से छोटी बेटी 9 महीने की थी. सुहेल सकीना को प्यार से तसगिरा कहता था.

कुछ समय तक उन का दांपत्य जीवन ठीकठाक चला, मगर शादी के 3 साल बाद उन दोनों में मनमुटाव शुरू हो गया था. इस के बाद दोनों में अकसर झगड़े होने लगे थे. इस कारण वह काफी परेशान रहने लगा था, क्योंकि सुहैल ने सकीना के लिए अपने घर वालों तक को छोड़ दिया था. घर आने पर सकीना उस से झगड़ती थी. इस कारण परेशान हो कर उस ने सकीना को तलाक दे दिया.

तलाक से सकीना काफी भड़क गई और अकसर सुहेल से मारपीट करने लगी. तलाक के बाद वह उस से गुजारे के लिए रुपए की मांग करने लगी थी और जैसे ही वह घर जाता तो वह उस पर हमला करने लगी थी.

सकीना की इन हरकतों से वह टूट चुका था. उस ने इस झगड़े से परेशान हो कर सकीना की हत्या की योजना बनाई डाली. अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वह 21 अप्रैल, 2023 को गंगोह स्थित अपने घर गया था.

वहां से सुहेल ने सकीना की हत्या के लिए एक छुरा खरीदा था. इस के बाद उस ने सकीना को कलियर दरगाह घूमने के लिए चलने को कहा था. सकीना कलियर घूमने के लिए तैयार हो गई थी.

दोपहर 3 बजे सकीना अपनी 9 माह की बेटी आयत के साथ बाइक पर बैठ गई थी और तीनों कलियर आ कर शाम तक खूब घूमे थे और वहां की दरगाहों पर जियारत भी की.

दूसरे शौहर ने क्यों की हत्या

उस वक्त शाम के 7 बज गए थे. अंधेरा भी हो चला था. तभी सकीना ने सुहेल से वापस सहारनपुर चलने को कहा. सुहेल बेटी के साथ बाइक पर बैठी सकीना को ले कर कलियर धनौरी रोड पर पानी के रजवाहे बावनदरे की ओर चल दिया. वहां पर जब सुहेल ने बाइक रोकी थी तो सकीना कहने लगी कि मुझे यहां पानी के शोर और अंधेरे से काफी डर लग रहा है.

तभी सुहेल ने फुरती से सकीना की गोद से 9 महीने की बच्ची ले ली और उसे पास ही घास पर लिटा दिया. इस के बाद उस ने पैंट की जेब से छुरा निकाल कर सकीना की छाती, गले व पेट पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए. फिर वह बेटी को ले कर वापस सहारनपुर के कस्बा गंगोह लौट गया.

देखभाल के लिए उस ने बेटी अपने घर वालों को दे दी. पुलिस से बचने के लिए वह इधरउधर छिपता घूम रहा था, लेकिन पुलिस की पकड़ में आ ही गया. एसएचओ जहांगीर अली ने सुहेल की निशानदेही पर सकीना की हत्या में प्रयुक्त छुरा व सकीना को मौके तक ले जाने वाली बाइक भी कस्बा गंगोह से बरामद कर ली थी.

अगले दिन 22 मई, 2023 को सीओ रुड़की पल्लवी त्यागी ने कलियर थाने में आयोजित प्रैसवार्ता में हत्यारोपी सुहेल को मीडिया के सामने पेश कर के सकीना हत्याकांड का परदाफाश कर दिया.

उसी दिन पुलिस ने सुहेल को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया था. सकीना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण धारदार हथियार से घायल होने पर ज्यादा खून निकलना बताया. कथा लिखे जाने तक जहांगीर अली द्वारा सकीना हत्याकांड की विवेचना पूरी होने के बाद सुहेल के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजने की तैयारी की जा रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

खुद का पाला सांप : मौसी के प्यार में भाई की हत्या

थाना गोला का मंदिर के थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा क्षेत्र में गश्त कर के अभीअभी लौटे थे. तभी उन के थाना क्षेत्र की गोवर्धन कालोनी में रहने वाली 29-30 वर्षीय रश्मि नाम की महिला कन्हैया, तेजकरण व कुछ अन्य लोगों के साथ थाने पहुंची.

प्रवीण शर्मा ने रश्मि से आने का कारण पूछा. इस पर उस ने बताया कि वह अपने 14-15 साल के 2 बेटों के साथ गोवर्धन कालोनी में रहती है. सुबह उस का बेटा सत्यम रोज की तरह आदर्श नगर में कोचिंग के लिए गया था, पर वह वापस नहीं लौटा. रश्मि के साथ 25-26 साल का एक युवक विवेक उर्फ राहुल राजावत भी था. रश्मि ने उसे अपनी बहन का बेटा बताया.

थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा पूछताछ कर ही रहे थे कि राहुल ने उन्हें बताया कि करीब 2-ढाई महीने पहले सत्यम का इलाके के कुछ लड़कों से झगड़ा हुआ था. उन लड़कों ने सत्यम को बंधक बना कर मारपीट भी की थी. उसे शक है कि सत्यम के गायब होने के पीछे उन्हीं लड़कों का हाथ है.

मामला गंभीर था, इसलिए प्रवीण शर्मा ने सत्यम की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर के इस घटना की जानकारी पुलिस अधीक्षक ग्वालियर नवनीत भसीन व सीएसपी मुनीष राजौरिया को दे दी. इस के साथ ही उन्होंने अपनी टीम को सत्यम की खोज में लगा दिया.

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पूरी रात गुजर गई, लेकिन न तो पुलिस को सत्यम के बारे में कुछ खबर मिली और न ही सत्यम घर लौटा. अगले दिन सुबहसुबह राहुल रश्मि को ले कर थाने पहुंच गया. उस ने थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा से उन 3 लड़कों के खिलाफ काररवाई करने को कहा, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

बच्चों के झगड़े होते रहते हैं, जो खुद ही सुलझ भी जाते हैं. टीआई शर्मा को बच्चों के झगड़े को इतना तूल देने की बात गले नहीं उतर रही थी. सत्यम को लापता हुए 24 घंटे हो चुके थे लेकिन उस का कुछ पता नहीं चल पा रहा था.

इस घटना की जानकारी ग्वालियर रेंज के डीआईजी मनोहर वर्मा को मिली तो उन्होंने अपराधियों के खिलाफ तत्काल सख्त काररवाई का निर्देश दिया. थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा ने विवेक उर्फ राहुल के शक के आधार पर उन तीनों लड़कों को थाने बुला लिया, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

प्रवीण शर्मा ने तीनों लड़कों से पूछताछ की. उन से पूछताछ कर के टीआई शर्मा समझ गए कि सत्यम के गायब होने में उन तीनों की कोई भूमिका नहीं है. इसलिए पूछताछ के बाद उन तीनों को छोड़ दिया गया.

इस बात पर राहुल उखड़ गया और पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाने लगा. इतना ही नहीं, उस ने शहर के एकदो राजनीति से जुड़े रसूखदार लोगों से भी टीआई प्रवीण शर्मा को फोन करवा कर दबाव बनाने की कोशिश की. उस का कहना था कि पुलिस उन 3 लड़कों के खिलाफ सत्यम के अपहरण का केस दर्ज नहीं कर रही है.

लापता हो जाने के बाद से ही राहुल राजावत अपनी रिश्ते की मौसी के साथ सत्यम की खोज में लगा था. लेकिन इस दौरान थानाप्रभारी ने यह बात नोट कर ली थी कि राहुल की रुचि सत्यम से अधिक उन 3 लड़कों को आरोपी बनवाने में है, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

यह बात खुद राहुल को संदेह के दायरे में ला रही थी. इसी के मद्देनजर टीआई प्रवीण शर्मा ने अपने कुछ लोगों को राहुल की हरकतों पर नजर रखने के लिए तैनात कर दिया.

इतना ही नहीं, वह इस बात की जानकारी जुटा चुके थे कि जिस रोज सत्यम गायब हुआ था, उस रोज राहुल खुद ही उसे अपनी कार से कोचिंग सेंटर छोड़ने आदित्यपुरम गया था. इस बारे में उस का कहना था कि उस ने सत्यम को कोचिंग सैंटर के पास पैट्रोल पंप पर छोड़ दिया था.

इस पर पुलिस ने राहुल को बिना कुछ बताए कोचिंग सेंटर के आसपास लगे सीसीटीवी के फुटेज खंगाले, जिन में न तो राहुल वहां दिखाई दिया और न ही उस की कार दिखी.

सब से बड़ी बात यह थी कि उस रोज सत्यम कोचिंग सेंटर पहुंचा ही नहीं था. इस से राहुल पुलिस के राडार पर आ गया. टीआई शर्मा ने इस बात पर भी गौर किया कि राहुल सत्यम के बारे में पूछताछ करने उस की मां के साथ तो थाने आता था, लेकिन सत्यम के पिता के साथ वह कभी नहीं आया.

इसलिए पुलिस ने राहुल की घटना वाले दिन की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई, जिस से यह बात सामने आई कि उस रोज राहुल के साथ जौरा में रहने वाली उस की बुआ का बेटा सुमित सिंह भी देखा गया था. लेकिन राहुल को घेरने के लिए पुलिस को अभी और मजबूत आधार की जरूरत थी.

यह आधार पुलिस को घटना से 4 दिन बाद 10 जनवरी को मिला. हुआ यह कि उस दिन सुबह सुबह जौरा थाने के बुरावली गांव के पास से हो कर गुजरने वाली नहर में एक किशोर का शव तैरता मिला. चूंकि सत्यम की गुमशुदगी की सूचना आसपास के सभी थानों को दे दी गई थी, इसलिए पुलिस ने शव के मिलने की खबर गोला का मंदिर थानाप्रभारी प्रवीण शर्मा को दे दी.

नहर में मिलने वाले किशोर के शव का हुलिया सत्यम से मिलताजुलता था, इसलिए पुलिस सत्यम के परिजनों को ले कर मौके पर जा पहुंची. घर वालों ने शव की पहचान सत्यम के रूप में कर दी.

शव जौरा के पास के गांव बुरावली के निकट नहर में तैरता मिला था. जिस दिन सत्यम गायब हुआ था, उस दिन इस मामले का संदिग्ध राहुल जौरा में रहने वाली अपनी बुआ के बेटे के साथ देखा गया था. राहुल द्वारा सत्यम को कोचिंग सेंटर के पास छोड़े जाने की बात पहले ही गलत साबित हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने बिना देर किए राहुल उर्फ विवेक राजावत और उस की बुआ के बेटे सुमित को हिरासत में ले लिया.

नतीजतन अब तक पुलिस के सामने शेर बन रहा राहुल हिरासत में लिए जाते ही भीगी बिल्ली बन गया. इस के बावजूद उस ने अपना अपराध छिपाने की काफी कोशिश की, लेकिन पुलिस की थोड़ी सी सख्ती से वह टूट गया.

उस ने सुमित के साथ मिल कर राहुल को नहर में डुबा कर मारने की बात स्वीकार कर ली. पुलिस ने राहुल की वह कार भी जब्त कर ली, जिस में सत्यम को बैठा कर वह सबलगढ़ ले गया था. इस के बाद रिश्तों में आग लगा देने वाली यह कहानी इस प्रकार सामने आई—

सत्यम के पिता मूलरूप से विजयपुर मेवारा के रहने वाले हैं. वह इंदौर के एक होटल में नौकरी करते हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई के लिए मां रश्मि दोनों बेटों के साथ ग्वालियर में रहती थी. रश्मि का परिवार पहले आदित्यपुरम में रहता था.

लेकिन कुछ महीने पहले रश्मि ने आदित्यपुरम का मकान छोड़ कर गोला का मंदिर थाना इलाके की गोवर्धन कालोनी में किराए का दूसरा मकान ले लिया था. ग्वालियर के पास ही रश्मि के एक दूर के रिश्ते की बहन भी रहती थी.

विवेक उर्फ राहुल राजावत उसी का बेटा था. चूंकि रश्मि रिश्ते में राहुल की मौसी लगती थी, इसलिए उस का रश्मि के घर काफी आनाजाना हो गया था. वह जब भी ग्वालियर आता, रश्मि से मिलने उस के घर जरूर जाता था.

35 साल की रश्मि 2 बच्चों की मां होने के बाद भी जवान युवती की तरह दिखती थी. अनजान आदमी उसे देख कर उस की उम्र 25-27 साल समझने का धोखा खा जाता था. धीरेधीरे राहुल की रश्मि से काफी पटने लगी थी. पहले दोनों के बीच रिश्ते का लिहाज था, लेकिन वक्त के साथ उन के बीच दुनिया जहान की बातें होने लगीं. इस से दोनों के रिश्ते में दोस्ती की झलक दिखाई देने लगी.

इसी बीच राहुल पढ़ाई करने गांव से ग्वालियर आया तो रश्मि ने अपने पति से कह कर राहुल को अपने ही घर में रख लिया. चूंकि रश्मि के पति इंदौर में नौकरी करते थे सो उन्हें भी लगा कि राहुल के साथ रहने से रश्मि और बच्चों को सुविधा हो जाएगी. इसलिए उन्होंने भी राहुल को साथ रखने की अनुमति दे दी, जिस से राहुल ग्वालियर में रश्मि के साथ रहने लगा.

इस से दोनों के बीच पहले ही कायम हो चुके दोस्ताना रिश्ते में और भी खुलापन आने लगा. दूसरी तरफ काम की मजबूरी के चलते रश्मि के पति 4-6 महीने में हफ्ते 10 दिन के लिए ही घर आ पाते थे. इस में भी पिता के आने पर बच्चे उन से चिपके रहते, इसलिए वह चाह कर भी रश्मि को अकेले में अधिक समय नहीं दे पाते थे.

फलस्वरूप पति के आने पर भी रश्मि की शारीरिक जरूरतें अधूरी रह जाती थीं. ऐसे में एक बार रश्मि के पति ग्वालियर आए तो लेकिन मामला कुछ ऐसा उलझा कि वह एक बार भी उसे एकांत में समय नहीं दे सके. इस से रश्मि का गुस्सा सातवें आसमान को छूने लगा.

राहुल यह बात समझ रहा था, इसलिए उस ने रश्मि को गुस्से में देखा तो मजाक में कह दिया, ‘‘क्या बात है मौसी, मौसाजी चले गए इसलिए गुस्से में हो?’’

‘‘राहुल, तुम कभी अपनी पत्नी से दूर मत जाना.’’

राहुल की बात का जवाब देने के बजाए रश्मि ने अलग ही बात कही. सुन कर राहुल चौंक गया. उस ने सहज भाव से पूछ लिया, ‘‘क्यों, ऐसा क्या हो गया जो आज आप इतने गुस्से में हो?’’

राहुल की बात सुन कर रश्मि को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उस ने बात बदल दी. लेकिन राहुल समझ गया था कि असली बात क्या है. बस यहीं से उस के मन में यह बात आ गई कि अगर कोशिश की जाए तो मौसी की नजदीकी हासिल हो सकती है.

इसलिए उस ने धीरेधीरे रश्मि की तरफ कदम बढ़ाना शुरू कर दिया. कभी वह रश्मि की तारीफ करता तो कभी उस की सुंदरता की. धीरेधीरे रश्मि को भी राहुल की बातों में रस आने लगा और वह उस की तरफ झुकने लगी. इस का फायदा उठा कर एक दिन राहुल ने डरते डरते रश्मि को गलत इरादे से छू लिया.

रश्मि शादीशुदा थी, राहुल के स्पर्श के तरीके से सब समझ गई. उस ने तुरंत तुरुप का पत्ता खेलते हुए कहा, ‘‘यूं डर कर छूने से आग और भड़कती है राहुल. इसलिए या तो पूरी हिम्मत दिखाओ या मुझ से दूर रहो.’’

राहुल के लिए इतना इशारा काफी था. उस ने आगे बढ़ कर रश्मि को अपनी बांहों में जकड़ लिया, जिस के बाद रश्मि उसे मोहब्बत की आखिरी सीमा तक ले गई. बस इस के बाद दोनों में रोज पाप का खेल खेला जाने लगा. दोनों के बीच रिश्ता ऐसा था कि कोई शक भी नहीं कर सकता था.

वैसे भी राहुल घर में ही रहता था, इसलिए दोनों बेटों के स्कूल जाते ही राहुल और रश्मि दरवाजा बंद कर पाप की दुनिया में डूब जाते थे. रश्मि अनुभवी थी, जबकि राहुल अभी कुंवारा था. रश्मि को जहां अपना अनाड़ी प्रेमी मन भा गया था, वहीं राहुल अनुभवी मौसी पर जान छिड़कने लगा था.

समय के साथ दोनों के बीच नजदीकी कुछ ऐसी बढ़ी कि रात में दोनों बच्चों के सो जाने के बाद रश्मि अपने बिस्तर से उठ कर राहुल के बिस्तर में जा कर सोने लगी. अब जब कभी रश्मि का पति इंदौर से ग्वालियर आता तो रश्मि और राहुल दोनों ही उस के वापस जाने का इंतजार करने लगते.

राहुल लंबे समय से रश्मि के घर में रह रहा था. मोहल्ले में कभी उस के खिलाफ बातें नहीं हुई थीं. लेकिन जब बच्चों के स्कूल जाने के बाद रश्मि और राहुल दरवाजा बंद कर घंटों अंदर रहने लगे तो पासपड़ोस के लोगों ने पहले तो उन के रिश्ते का लिहाज किया, लेकिन बाद में उन के बीच पक रही खिचड़ी चर्चा में आ गई.

बाद में यह बात इंदौर में बैठे सत्यम के पिता तक भी पहुंच गई. इसलिए कुछ महीने पहले उन्होंने ग्वालियर आ कर न केवल आदित्यपुरम इलाके का मकान खाली कर दिया, बल्कि राहुल को भी अलग मकान ले कर रहने को बोल दिया.

इतना ही नहीं, उन्होंने राहुल को आगे से घर में कदम रखने से भी मना कर दिया. इंदौर वापस जाने से पहले उन्होंने अपने बड़े बेटे सत्यम को हिदायत दी कि अगर राहुल घर आए तो वह इस की जानकारी उन्हें दे दे.

अब राहुल और रश्मि का मिल पाना मुश्किल हो गया. क्योंकि एक तो रश्मि आदित्यपुरम छोड़ कर गोवर्धन कालोनी में रहने आ गई थी. दूसरे चौकीदार के रूप में सत्यम का डर था कि वह राहुल के घर आने की खबर पिता को दे देगा. लेकिन दोनों एकदूसरे से दूर भी नहीं रह सकते थे, इसलिए एक दिन मौका देख कर राहुल रश्मि से मिलने उस के घर जा पहुंचा.

राहुल को देखते ही रश्मि पागलों की तरह उस के गले लग गई. उसे ले कर वह सीधे बिस्तर पर लुढ़क गई. राहुल भी सब कुछ भूल कर रश्मि के साथ वासना में डूब गया. लेकिन इस से पहले कि दोनों अपनी मंजिल पर पहुंचते, अचानक घर लौटे सत्यम ने मां और मौसेरे भाई का पाप अपनी आंखों से देख लिया. सत्यम को आया देख कर राहुल और रश्मि दोनों घबरा गए.

फंसने से बचने के लिए राहुल सत्यम को चाट खिलाने ले गया, जहां बातोंबातों में उस ने सत्यम से कहा, ‘‘यार मेरे घर आने की बात पापा को मत बताना.’’

‘‘ठीक है, नहीं बताऊंगा. लेकिन इस से मुझे क्या फायदा होगा?’’ सत्यम ने शातिर अंदाज से कहा तो राहुल बोला, ‘‘जो तू कहेगा, कर दूंगा. बस तू पापा को मत बोलना.’’

राहुल को लगा कि सत्यम राजी हो जाएगा. लेकिन सत्यम तेज था, वह बोला, ‘‘ठीक है, मुझे 2 हजार रुपए दो, दोस्तों को पार्टी देनी है.’’

राहुल के पास पैसों की कमी नहीं थी. उस ने सत्यम को 2 हजार रुपए दे कर उसे बाजार घूमने के लिए भेज दिया और खुद वापस रश्मि के पास लौट आया.

सत्यम बिक गया, यह जान कर रश्मि भी खुश हुई. इस से दोनों के बीच पाप की कहानी फिर शुरू हो गई. आदित्यपुरम में रश्मि और राहुल के रिश्ते की भले ही चर्चा हुई हो, लेकिन नए मोहल्ले में पहले जैसी परेशानी नहीं थी और सत्यम भी चुप रहने के लिए राजी हो गया था.

इस बात का फायदा उठा कर जहां राहुल और रश्मि अपने पाप की दुनिया में जी रहे थे, वहीं सत्यम भी इस का पूरा फायदा उठा रहा था. वह राहुल से चुप रहने के लिए पैसे लेने लगा. लेकिन धीरेधीरे सत्यम की मांगें बढ़ने लगीं.

कुछ दिन पहले उस ने राहुल को ब्लैकमेल करते हुए उस से 20 हजार रुपए का मोबाइल खरीदवा लिया. राहुल रश्मि के नजदीक रहने के लिए सत्यम की हर मांग पूरी करता रहा. कुछ दिन पहले अचानक सत्यम ने उस से नई मोटरसाइकिल खरीद कर देने को कहा.

राहुल के पास इतना पैसा नहीं था. और था भी तो वह एक लाख रुपए रिश्वत में खर्च नहीं करना चाहता था. लेकिन सत्यम अड़ गया. उस ने कहा कि अगर वह मोटरसाइकिल नहीं दिलाएगा तो वह पापा से उस के घर आने की बात कह देगा.

इस से राहुल परेशान हो गया. इसी दौरान करीब 2-3 महीने पहले सत्यम का 3 लड़कों से झगड़ा हो गया, जिस में उन्होंने सत्यम के साथ काफी मारपीट की. यह झगड़ा भी राहुल ने ही शांत करवाया था. लेकिन इस सब से उस के दिमाग में आइडिया आ गया कि इस झगड़े की ओट में सत्यम को हमेशा के लिए अपने और रश्मि के बीच से हटाया जा सकता है.

इस के लिए उस ने अपनी बुआ के बेटे सुमित से बात की तो वह इस शर्त पर साथ देने को राजी हो गया कि काम हो जाने के बाद वह उसे रश्मि के संग एकांत में मिलने का मौका ही नहीं देगा, बल्कि रश्मि को इस के लिए राजी भी करेगा.

राहुल ने उस की शर्त मान ली तो सुमित ने उसे किसी दिन सत्यम को जौरा लाने को कहा. घटना वाले दिन राहुल रश्मि से मिलने उस के घर पहुंचा तो सत्यम वहां मौजूद था.

राहुल को इस से कोई दिक्कत नहीं थी. क्योंकि राहुल जब भी रश्मि से मिलने आता था, तब सत्यम किसी न किसी बहाने से कुछ देर के लिए वहां से हट जाता था. लेकिन उस रोज वह वहीं पर अड़ कर बैठ गया.

राहुल ने उस से बाहर जाने को कहा तो सत्यम बोला, ‘‘पहले मोटरसाइकिल दिलाओ.’’

इस पर राहुल ने उसे समझाया कि तुम बाहर चलो, मैं आधे घंटे में आता हूं. फिर तुम्हारी बाइक का इंतजाम कर दूंगा. इस पर सत्यम राहुल को अपनी मां से अकेले में मिलने का मौका देने की खातिर घर से बाहर चला गया. रश्मि के साथ कुछ समय बिताने के बाद राहुल बाहर जा कर सत्यम से मिला. उस ने सत्यम से जौरा चलने को कहा.

राहुल ने उसे बताया कि जौरा में उसे एक आदमी से उधारी का काफी पैसा लेना है. वहां से पैसा मिल जाएगा तो वह उसे बाइक दिलवा देगा.

बाइक के लालच में सत्यम राहुल के साथ जौरा चला गया, जहां बुआ के घर जा कर राहुल ने सुमित को साथ लिया और तीनों वहां से आ कर सबलगढ़ के बदेहरा गांव की पुलिया पर खड़े हो गए. राहुल ने सत्यम को बताया कि जिस से पैसा लेना है, वह यहीं आने वाला है. इस दौरान सत्यम ने मुरैना ब्रांच कैनाल में झांक कर देखा तो राहुल और सुमित ने उसे पानी में धक्का दे दिया.

सत्यम को तैरना नहीं आता था, फलस्वरूप वह गहरे पानी में डूब गया. इस के बाद सुमित और राहुल ग्वालियर आ गए. इधर सत्यम के कोचिंग से वापस न आने पर रश्मि परेशान हो गई. उस ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी तो राहुल सत्यम के अपहरण में उन युवकों को फंसाने की कोशिश करने लगा, जिन के साथ सत्यम का झगड़ा हुआ था.

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उस का मानना था कि तीनों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज हो जाएगा तो लाश मिलने पर उन्हें हत्यारा बनाना पुलिस की मजबूरी बन जाएगी, जिस से वह साफ बच जाएगा. लेकिन ग्वालियर पुलिस ने लाश बरामद होते ही राहुल की कहानी खत्म कर दी.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

पत्नी के शौक ने ली पति की जान

रामप्रवेश अपने बेटे महेश्वर की ससुराल पहुंचा, उस समय महेश्वर के शरीर में कोई हरकत नहीं थी. ससुराल वाले उस के शव को ठिकाने लगाने की नीयत से ले जाने की तैयारी में जुटे हुए थे, लेकिन इसी दौरान मृतक के पिता रामप्रवेश और अन्य के पहुंच जाने से वे लोग सकपका गए.

बेटे की ससुराल वालों ने रामप्रवेश को गुमराह करने की भरसक कोशिश की, लेकिन बेटे की मौत पर गमजदा महेश्वर के पिता ने हठ पकड़ ली कि जब तक पुलिस नहीं आ जाती, तब तक लाश किसी भी सूरत में नहीं उठने दूंगा.

बिहार के बेगूसराय जिले का एक थाना है खोदाबंदपुर. इसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फफौत गांव में पति द्वारा अपनी पत्नी को इंस्टाग्राम पर उत्तेजक गानों पर वीडियो बनाने से क्या टोका, वह तो इस कदर तिलमिला गई कि उस ने अपने आशिक और बहनों के साथ मिल कर पति को ही मौत के घाट उतार दिया. यह घटना 7 जनवरी, 2024 की है.

दरअसल, बिहार के जिला समस्तीपुर स्थित नरहन गांव के रहने वाले महेश्वर राय की एक दिन समस्तीपुर के एक कैफे में रानी से मुलाकात हुई थी. वह बेगूसराय के गांव फफौत की रहने वाली थी.

रानी बेहद खूबसूरत तो थी ही, साथ में बातूनी भी कुछ ज्यादा ही थी. इसलिए पहली ही मुलाकात में वह बिना किसी हिचकिचाहट के हंसहंस कर बातें कर रही थी. इस से महेश्वर काफी प्रभावित हुआ.

कैफे में नाश्ता करने के दौरान उस ने रानी का मोबाइल नंबर ले लिया. रानी से पहली मुलाकात में ही महेश्वर उस का दीवाना हो गया. उस का मोबाइल नंबर तो उस के पास था ही, इसलिए जब उस का मन करता, उस से फोन पर बातें कर लेता था.

रानी को भी महेश्वर से बातचीत करना अच्छा लगता था, धीरेधीरे उन दोनों में दोस्ती हो गई. यही दोस्ती कुछ समय बाद प्यार में बदल गई, दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, इसलिए उन्होंने लव- मैरिज कर ली. यह सन 2018 की बात है.

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         आरोपी पत्नी रानी

रानी से लवमैरिज करने के बाद महेश्वर अपने घर वालों के साथ नरहन गांव में रहने लगा और गांव में ही छोटा मोटा काम करके जैसेतैसे अपनी गृहस्थी चलाने लगा. इसी दौरान वह एक बच्चे का बाप बन गया. बच्चे के पैदा होने के बाद खर्चा बढ़ गया तो अच्छी आमदनी के लिए पत्नी को अपने मातापिता के पास छोड़ कोलकाता चला गया.

पति के कोलकाता जाने के बाद रानी का अपनी ससुराल में कतई मन नहीं लगता था, इसलिए उस ने शर्म और हिचकिचाहट का परदा हटा कर इंस्टाग्राम पर मादक अदाओं वाले वीडियो बना कर पोस्ट करने शुरू कर दिए. देखते ही देखते थोड़े समय में ही उस के फालोअर्स की तादाद बढऩे लगी.

इंस्टाग्राम का वीडियो ले गया जुर्म तक

इतना ही नहीं, फालोअर्स की संख्या बढऩे की होड़ में मादक अदाओं वाले गरमागरम वीडियो बनाने के लिए रानी ने घर से बाहर अंजान युवकों के साथ ज्यादा समय बिताना शुरू कर दिया. लेकिन इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाने का चस्का एक दिन उसे रियल लाइफ में जुर्म के दलदल में धकेल देगा, ये किसी ने भी नहीं सोचा था.

इंस्टाग्राम पर वीडियो डालने का चस्का इस कदर हावी हुआ कि जब रानी के पति महेश्वर ने रानी को इंस्टाग्राम पर वीडियो बना कर डालने से मना किया तो रानी अपने बेटे को साथ ले कर बेगूसराय जिले के गांव फफौत में स्थित अपने मायके में आ कर रहने लगी, लेकिन पति के मना करने के बावजूद रानी ने अपनी मादक अदाओं वाले वीडियो इंस्टाग्राम पर बनाने और डालने का सिलसिला जारी रखा. यह जान कर महेश्वर को गुस्सा आ गया.

7 जनवरी, 2024 को कोलकाता से महेश्वर अपने गांव नरहन आया और कुछ समय अपने मातापिता के पास गुजारने के बाद उन से अनुमति ले कर वह अपनी पत्नी और बेटे से मिलने के बहाने अपनी ससुराल फफौत के लिए निकल पड़ा. शाम के वक्त वह फफौत पहुंच गया.

महेश्वर पत्नी द्वारा अपना कहा न मानने से गुस्से में तो था ही, उस ने अपनी ससुराल पहुंच कर रानी को जम कर खरीखोटी सुनाई और कहा कि अभी भी वक्त है, संभल जा और ये बेशर्मी के वीडियो इंस्टाग्राम पर डालना और अंजान युवकों के साथ घूमनाफिरना बंद कर दे. तेरा ये कृत्य अब मुझे कतई पसंद नहीं है.

महेश्वर के मुंह से यह सुनते ही रानी बिफर पड़ी. रानी को बिफरता देख महेश्वर को और अधिक गुस्सा आ गया. उस ने उसी समय रानी के गाल पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया.

अपनी बहनों के सामने पति द्वारा थप्पड़ जड़े जाने से तिलमिलाई रानी भी अपना आपा खो बैठी और पति से भिड़ गई. इसी दौरान अचानक रानी का आशिक शहजाद भी वहां आ गया. रानी ने बिना देरी किए अपनी बहन रोजी के गले में पड़ी चुन्नी ले कर पति के गले में डाल दी. इस के बाद प्रेमी शहजाद और दोनों बहनों रोजी व सुनीता के सहयोग से पति का गला चुन्नी से कस दिया.

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सिर चढ़ कर कैसे बोला जुर्म

थोड़ी ही देर में उस की मौत हो गई. तभी इत्तफाक से महेश्वर के भाई रुदल का फोन महेश्वर के मोबाइल पर बारबार आना शुरू हो गया. जब यह सिलसिला नहीं थमा तो महेश्वर की नाबालिग साली रोजी ने मोबाइल काल रिसीव कर ली.

महेश्वर के बड़े भाई ने कहा, ”मैं इतनी देर से तुझे फोन कर रहा हूं, रिसीव क्यों नहीं कर रहा तू? अब मेरी बात का जवाब क्यों नहीं देता?’’

रोजी कुछ नहीं बोली. इसी दौरान महेश्वर के मोबाइल पर शोरगुल सुन कर उस के भाई को संदेह हुआ. उस ने तुरंत अपने पिता रामप्रवेश राय को सारा घटनाक्रम बताते हुए कहा, ”मुझे लगता है, महेश्वर के साथ ससुराल में कोई अनहोनी घट गई है. आप बिना देरी किए गांव के कुछ दबंग लोगों को ले कर महेश्वर की ससुराल फफौत पहुंच कर पता करो आखिर माजरा क्या है.’’

बेटे के कहने पर गांव के 5-7 लोगों को ले कर रामप्रवेश बेटे की ससुराल पहुंच गया. वहां बेटे की लाश देखते ही रामप्रवेश को शक हो गया कि उस के बेटे ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई है.

इसी बीच रामप्रवेश के साथ आए लोगों में से किसी ने खोदाबंदपुर थाने को फोन कर इस घटनाक्रम की जानकारी दे दी. कुछ ही देर में एसएचओ मिथलेश कुमार मौके पर पहुंच गए.

घटनास्थल की स्थिति और मृतक के पिता रामप्रवेश राय के बयान के आधार पर महेश्वर की पत्नी रानी, उस की दोनों बहनों समेत रानी के आशिक शहजाद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर एसएचओ ने महेश्वर की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. उधर जब रानी को थाने ला कर पूछताछ की तो उस ने बताया कि मेरे पति को किसी ने नहीं मारा बल्कि उन्होंने मेरी बहन की चुन्नी से फांसी लगा कर खुदकुशी की है.

यह कह कर उस ने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया, लेकिन जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि महेश्वर की हत्या उसी ने अपने आशिक शहजाद और बहनों के साथ मिल कर की है.

रानी ने पुलिस को हत्या की ऐसी वजह बताई, जिसे सुन कर पुलिस वाले भी हैरान रह गए. उस ने बताया, ”मुझे इंस्टाग्राम पर वीडियो डालने का शौक है, लेकिन मेरे पति को यह कतई पसंद नहीं था. इस से आए दिन हम दोनों में झगड़ा होने लगा तो मैं बेटे को ले कर मायके में आ गई. मेरा मायके में रहना ससुराल वालों को रास नहीं आया. उसी बीच मैं शहजाद नाम के युवक के संपर्क में आ गई और मैं ने महेश्वर से किनारा कर लिया.

”इस के बावजूद भी शहजाद से मेरी निकटता उसे खटकती थी, अत: महेश्वर से पीछा छुड़ाने के लिए मैं ने शहजाद की मदद से चुन्नी से गला कस कर पति को मार डाला.’’

रानी और शहजाद को उम्मीद थी कि महेश्वर की हत्या पहेली बन कर रह जाएगी और वे दोनों हत्या के जुर्म में कभी नहीं पकड़े जाएंगे.

विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने रानी और उस की बहनों रोजी और सुनीता तथा आशिक शहजाद को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

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