पुलिस अफसर ने क्यों किए 2 मर्डर

वह सर्दी का महीना था तथा उस समय आसपास काफी कोहरा छाया हुआ था. कोहरा इतना घना था कि 50 मीटर की दूरी के बाद कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था. उस समय सुबह के 8 बज रहे थे. थाना झबरेड़ा (हरिद्वार) के एसएचओ अंकुर शर्मा उस वक्त नहा रहे थे. तभी उन्हें अपने बाथरूम के दरवाजे पर किसी के खटखटाने की आवाज सुनाई दी.

आवाज सुनते ही जल्दीजल्दी नहा कर वह बोले, ”कौन है?’’

तभी बाहर से उन के थाने के सिपाही मुकेश ने बताया, ”सर, गांव भिश्तीपुर के प्रधान जोगेंद्र का अभी फोन आया था, वह बता रहा था कि गांव भिश्तीपुर अकबरपुर झोझा की सड़क के नाले में एक लड़के की लाश पड़ी है. लाश के गले में खून के निशान उभरे हुए हैं.’’

”ठीक है मुकेश, मैं जल्दी तैयार हो कर आता हूं.’ शर्मा बोले.

इस के बाद अंकुर शर्मा जल्दीजल्दी तैयार होने लगे थे. सुबह होने के कारण उस वक्त थानेदार भी थाने में नहीं आए थे. मामला चूंकि हत्या का था, इसलिए एसएचओ ने देर करना उचित नहीं समझा.

इस के बाद उन्होंने इस हत्या की सूचना फोन द्वारा हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल, एसपी (देहात) स्वप्न किशोर सिंह व सीओ (मंगलौर) विवेक कुमार को दी थी. फिर वह अपने साथ सिपाही मुकेश व रणवीर को ले कर घटनास्थल की ओर चल पड़े. घटनास्थल थाने से महज 7 किलोमीटर दूर था, इसलिए उन्हें वहां पहुंचने में 15 मिनट लगे.

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      मृतक बच्चा राजा

घटनास्थल पर काफी भीड़ इकट्ठी थी. वहां पर नाले में एक लड़के का शव पड़ा हुआ था. मृतक की उम्र 15 साल के आसपास थी. पुलिस को देख कर वहां खड़ी भीड़ तितरबितर होने लगी थी. वहां खड़े लोगों से एसएचओ ने शव के बारे में पूछताछ करनी शुरू कर दी थी. यह घटना 9 फरवरी, 2024 को उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के थाना झबरेड़ा क्षेत्र में घटी थी.

वहां मौजूद लोगों ने उन्हें बताया था कि यह शव आज सुबह ही लोगों ने देखा था. ऐसा लग रहा है कि हत्यारों ने इस की हत्या कहीं और की होगी तथा हत्या करने के बाद शव को यहां फेंक दिया होगा. इस के बाद एसएचओ अंकुर शर्मा ने मौजूद लोगों से बच्चे की शिनाख्त करने को कहा था, मगर बच्चे की पहचान नहीं हो सकी थी.

इस के बाद पुलिसकर्मियों ने शव की जामातलाशी ली तो लड़के की शर्ट की जेब में पुलिस को एक टेलर का विजिटिंग कार्ड मिला था. उस टेलर की दुकान हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में थी. पुलिस ने उस टेलर के पास जा कर संपर्क किया. लड़की की लाश के फोटो देखने के बाद टेलर ने भी इस बालक के शव को पहचानने में अपनी अनभिज्ञता जताई.

उधर मौके पर एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल, एसओजी प्रभारी रविंद्र शाह व पुलिस के पीआरओ विपिन चंद पाठक भी फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए थे.

कैसे हुई मृतक की शिनाख्त

लोगों से जानकारी मिलने के बाद एसएसपी इस नतीजे पर पहुंचे थे कि मृतक का कोई न कोई लिंक सिडकुल क्षेत्र से जरूर है. इस के बाद उन्होंने एसएचओ जरूरी काररवाई करने के निर्देश दिए. उन्होंने एसपी (देहात) स्वप्न किशोर सिंह की अध्यक्षता और सीओ विवेक कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में एसएचओ अंकुर शर्मा व एसओजी के इंसपेक्टर को शामिल किया. उन्होंने टीम को सिडकुल क्षेत्र में जा कर बच्चे की जानकारी करने के निर्देश दिए.

श्री डोबाल का निर्देश पा कर पुलिस टीम सिडकुल पहुंच गई थी. यहां पर पुलिस टीम ने बच्चे के फोटो कुछ दुकानदारों को दिखाए. पुलिस की कई घंटों की मशक्कत के बाद एक दुकानदार ने पुलिस को बताया कि यह फोटो 15 वर्षीय नरेंद्र उर्फ राजा की है, जो यहां अपनी दृष्टिहीन मां ममता के साथ रहता था. इस के बाद पुलिस टीम जब ममता के मकान पर पहुंची तो वहां परचून की दुकान चलाने वाला हेमराज मिला.

जब पुलिस ने हेमराज से ममता व उस के बेटे राजा के बारे में पूछताछ की तो हेमराज ने पुलिस को बताया, ”सर, यह मकान मैं ने ममता से पिछले महीने 20 लाख 70 हजार रुपए में खरीदा था. 3 दिन पहले ही ममता ने मकान खाली कर के मुझे कब्जा दिया है. कब्जा देते समय पुलिस लाइंस में तैनात एएसआई छुन्ना यादव व शहजाद नामक युवक भी ममता के साथ थे. मुझे कब्जा दे कर ममता व राजा छुन्ना यादव की न्यू आल्टो कार में बैठ कर गए थे.’’

पुलिस को जब यह जानकारी हुई तो सीओ विवेक कुमार व एसओजी प्रभारी रविंद्र शाह तुरंत ही पुलिस लाइंस पहुंचे और वहां से वे पूछताछ करने के लिए छुन्ना सिंह यादव को अपने साथ ले कर थाना झबरेड़ा आ गए.

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थाने में एसपी (देहात) स्वप्न किशोर सिंह व सीओ विवेक कुमार ने जब एएसआई छुन्ना सिंह से ममता व राजा के बारे में पूछताछ की तो वह पुलिस अधिकारियों को काफी देर तक वह इधरउधर की बातें बताता रहा. छुन्ना यादव कहता रहा कि ममता मेरी परिचित तो थी, मगर मुझे नहीं मालूम कि वह अब कहां है?

इस के बाद जब एसपी (देहात) स्वप्न किशोर ने सख्ती से छुन्ना सिंह से उस की नई आल्टो कार के बारे में पूछा तो वह कोई संतोषजनक उत्तर न दे सका.

तभी एसपी स्वप्न किशोर ने छुन्ना सिंह से कहा, ”देखो छुन्ना, तुम्हें पता है कि पुलिस के सामने मुरदे भी बोलने लग जाते हैं. इसलिए या तो तुम हमें सीधी तरह से राजा की मौत की सच्चाई बता दो, नहीं तो हम तुम्हारे साथ वह सब करेंगे, जो पुलिस अपराधियों के साथ करती है.’’

एएसआई ने ऐसे कुबूला जुर्म

एसपी साहब की इन बातों का छुन्ना यादव के ऊपर जादू की तरह असर हुआ और वह पुलिस को राजा की हत्या की सच्चाई बताने को तैयार हो गया था. फिर छुन्ना यादव ने पुलिस को राजा की हत्या की जो कहानी बताई, उसे सुन कर वहां मौजूद सभी पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए.

एएसआई छुन्ना यादव ने बताया था कि वह 9 फरवरी, 2024 को अपनी नई आल्टो कार में राजा व उस की नेत्रहीन मां ममता को बैठा कर मंगलौर हाईवे की ओर लाया था.

इसी बीच मैं और मेरे दोस्त शहजाद व विनोद ममता का सिडकुल वाला मकान हेमराज को 20 लाख 70 हजार रुपए में बिकवा चुके थे. ममता की रकम को हड़पने के लिए हम तीनों ने मांबेटे की हत्या की योजना बनाई.

योजना के मुताबिक हम तीनों जब मांबेटे को कार में बैठा कर ले जा रहे थे तो चलती कार में हम तीनों ने शहजाद के गमछे से पहले ममता का गला घोंट कर उसे मार डाला था, फिर इस के बाद हम ने नरेंद्र उर्फ राजा का गला घोंट कर उस की हत्या कर दी थी. गला घोंटते वक्त मांबेटा चलती कार में चीखतेचिल्लाते रहे.

दोनों की हत्या करने के बाद हम ने पहले थाना मंगलौर के अंतर्गत लिब्बरहेड़ी नहर पटरी की झाडिय़ों में ममता के शव को फेंक दिया था. इस के बाद 15 वर्षीय राजा की लाश गांव भिश्तीपुर रोड के नाले में फेंक दी थी. दोनों मांबेटे के शवों को ठिकाने लगा कर तीनों लोग आराम से वापस अपनेअपने घर चले गए थे.

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एएसआई छुन्ना यादव के इस अपराध से जहां एक ओर पुलिस की छवि धूमिल हुई थी तो दूसरी ओर छुन्ना जैसे वरदीधारियों से आम जनता में पुलिस पर विश्वास डगमगाने जैसे हालात हो गए थे. इस के बाद एसपी (देहात) स्वप्न किशोर ने छुन्ना की इस करतूत की जानकारी एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को दे दी.

एक नहीं की थीं 2-2 हत्याएं

श्री डोबाल ने वरदी को दागदार करने वाले छुन्ना सिंह यादव के खिलाफ तुरंत कानूनी काररवाई करने तथा छुन्ना की निशानदेही पर मंगलौर की लिब्बरहेड़ी नहर पटरी की झाडिय़ों से ममता का शव बरामद करने के निर्देश एसएचओ अंकुर शर्मा व एसओजी प्रभारी रविंद्र शाह को दिए. दोनों अधिकारी छुन्ना यादव को ले कर लिब्बरहेड़ी नहर पटरी पर पहुंच गए.

छुन्ना यादव ने वह जगह पुलिस को दिखाई, जहां उस ने अपनी आल्टो कार से ममता के शव को फेंका था. छुन्ना की निशानदेही पर पुलिस ने ममता के शव को झाडिय़ों से बरामद कर लिया. शव बरामद होने के बाद अंकुर शर्मा ने ममता के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए राजकीय जे.एन. सिन्हा स्मारक अस्पताल भेज दिया.

ममता का शव बरामद होने के बाद एसओजी प्रभारी रविंद्र शाह अपने साथियों अशोक, रविंद्र खत्री, राहुल, नितिन व महीपाल के साथ इस दोहरे हत्याकांड के शेष बचे 2 आरोपियों शहजाद व विनोद की गिरफ्तारी हेतु निकल पड़े थे. हालांकि छुन्ना यादव की गिरफ्तारी की जानकारी शहजाद व विनोद को मिल चुकी थी. तब वह किसी सुरक्षित स्थान पर छिपने की योजना बना रहे थे.

इस से पहले कि वे दोनों फरार होते, एसओजी टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया था. इस के बाद एसओजी टीम ने शहजाद निवासी गांव अकबरपुर झोझा तथा विनोद निवासी मोहल्ला सराय ज्वालापुर को हिरासत में ले लिया था. पुलिस टीम उन्हें ले कर थाना झबरेड़ा आ गई थी.

वहां पुलिस ने इन तीनों आरोपियों का आमनासामना कराया था. फिर तीनों आरोपियों ने पुलिस के सामने ममता व राजा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. आरोपियों से पूछताछ के बाद इस दोहरे हत्याकांड की जो  कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

छुन्ना यादव उत्तर प्रदेश के शहर औरैया के गांव राठा के रहने वाले भोलानाथ यादव का बेटा है. इस समय वह हरिद्वार पुलिस लाइन में एएसआई के पद पर तैनात है. साल 1995 में वह उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर भरती हुआ था. सन 2000 में जब उत्तर प्रदेश से काट कर उत्तराखंड का पुनर्गठन हुआ तो छुन्ना यादव उत्तराखंड पुलिस में चला गया. बाद में उस का प्रमोशन होता गया तो वह एएसआई बन गया. वर्ष 2011 से 2014 तक मैं यातायात पुलिस हरिद्वार में तैनात रहा था. शहजाद से पिछले 4 सालों से उस की दोस्ती थी.

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मृतका ममता

पिछले साल शहजाद ने छुन्ना यादव को ममता नामक महिला से मिलवाया था, जो अपने 15 वर्षीय बेटे राजा के साथ मोहल्ला सूर्यनगर सिडकुल (हरिद्वार) में रहती थी. ममता मूलरूप से कस्बा कांठ, जिला मुरादाबाद की रहने वाली थी. वह दृष्टिहीन थी. पिछले साल ममता मुरादाबाद से अपनी पुश्तैनी प्रौपर्टी बेच कर सिडकुल में मकान खरीद कर रहने लगी थी.

मुन्ना और शहजाद का अकसर ममता के घर पर आनाजाना लगा रहता था. इसी दौरान दोनों को यह पता चल गया कि किसी दूर के रिश्तेदार तक का ममता के पास आनाजाना नहीं है. इस से इन के मन में लालच आ गया था.

पुलिस वाले के मन में ऐसे जन्मा अपराध

इस के बाद छुन्ना यादव ने शहजाद के साथ मिल कर ममता का मकान बिकवा कर वह रकम हड़पने की योजना बनाई. छुन्ना ने ममता को उस का मकान बिकवा कर उसे रुड़की में मकान खरीदवाने का झांसा दिया.

चूंकि ममता उस की बातों पर विश्वास करती थी, इसलिए उस की बात वह मान गई थी. फिर उस ने व शहजाद ने ममता के पड़ोसी किनारा दुकानदार हेमराज को 20 लाख 70 हजार रुपए में मकान बिकवा दिया था और अधिकांश रकम दोनों शातिरों ने कब्जे में कर ली थी.

ममता के मकान बेचने से मिली रकम में से छुन्ना ने नई आल्टो कार खरीद ली थी. 9 फरवरी, 2024 को ममता को मकान खाली कर हेमराज को कब्जा देना था.

योजना के मुताबिक 9 फरवरी की सुबह को छुन्ना और शहजाद आल्टो कार से उसी समय ममता के घर पहुंचे. उसी समय शहजाद का बेटा भी वहां मिनी ट्रक ले कर आ गया था. उन्होंने ममता के घर का सामान उस मिनी ट्रक में रख कर मकान खाली कर दिया था.

शहजाद का बेटा वहां से मिनी ट्रक ले कर चला गया. छुन्ना ने ममता को आल्टो कार में अगली सीट पर बैठा लिया था. पिछली सीट पर शहजाद व नरेंद्र उर्फ राजा बैठ गए थे. कार ले कर वह रोशनाबाद की ओर चले थे तो रास्ते में उन्हें विनोद भी मिल गया था. छुन्ना ने कार रोक कर उसे भी पीछे बैठा लिया था. इस के बाद वे लोग हर की पौड़ी पहुंचे थे. यहां पर ममता व राजा नहाने लगे थे. उसी दौरान उन तीनों ने कार में बैठ कर शराब पी थी.

शाम को जब कुछ अंधेरा छाने लगा तो हम लोग कार ले कर रुड़की की ओर चल पड़े थे. जब कार रुड़की से पुरकाजी की ओर जा रही थी तो अचानक शहजाद ने अपने गमछे का फंदा बना लिया था और कार में आगे बैठी ममता के गले में डाल कर उस का गला घोंट दिया था.

राजा ने शोर मचाते हुए विरोध किया तो शहजाद और विनोद ने उसे दबोच लिया. ममता के दम तोडऩे के बाद शहजाद व विनोद ने उसी गमछे से नरेंद्र उर्फ राजा का भी गला घोंट कर उसे मार डाला था. फिर उन्होंने ममता के शव को लिब्बरहेड़ी गंगनहर पटरी की झाडिय़ों में फेंक कर भिश्तीपुर की ओर चले गए थे.

रकम बांट कर रह रहे थे बेखौफ

इस के बाद उन्होंने राजा के शव को भिश्तीपुर के एक नाले में फेंक दिया था. ममता व राजा के शवों को ठिकाने लगाने के बाद उन्होंने ममता के मकान को बेचने में मिली रकम को आपस में बांट लिया था और अपने अपने घरों को लौट गए थे.

तीनों आरोपियों छुन्ना यादव, शहजाद व विनोद से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने आईपीसी की धाराओं 302, 201, 34 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था.

वैसे तो ममता के बुरे दिनों की शुरुआत तब से शुरू हो गई थी, जब से वह शहजाद व छुन्ना यादव के संपर्क में आई थी. उस वक्त शहजाद सिडकुल के मोहल्ला सूर्यनगर में ममता के घर के पास ही किराए के कमरे में रहता था.

इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड छुन्ना यादव ने पुलिस को बताया था कि ममता अपनी रकम हड़पने की शिकायत पुलिस से भी कर सकती थी, इसलिए उस ने ममता व उस के बेटे की हत्या की साजिश रची थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ममता व राजा उर्फ नरेंद्र की मौत का कारण गला घोंटने से हुई मौत बताया गया है. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने ममता पत्नी मुनेश व राजा के शवों को सिडकुल निवासी उन के दूर के रिश्तेदार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

पहले पति से तलाक दूसरे से मर्डर

झाड़ी के पीछे लगभग 30-35 साल की एक महिला हरे रंग का फूलदार सलवार सूट पहने खून में लथपथ पड़ी थी तथा दर्द से कराह रही थी. उस में चलने फिरने की भी हिम्मत नहीं थी. उस के शरीर पर धारदार हथियार के घाव थे और लग रहा था कि शायद वह महिला अपने जीवन की अंतिम घड़ियां ही गिन रही थी.

वह रात के 8 बजे का समय था. जेठ के महीने की भीषण गरमी के बाद उस समय ठंडी ठंडी हवा चल रही थी. आसपास के क्षेत्रों के किसान व मजदूर भी अपनेअपने खेतों में धान की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करने के बाद, पैदल ही अपने घरों की ओर वापस लौट रहे थे. खेत में काम कर के कुछ किसान थके हुए थे, इसलिए वे जल्दी में अपने घरों की ओर बढ़ रहे थे.

तभी एक किसान प्रवीण सैनी को पास में बह रहे पानी के रजवाहे के पास से किसी महिला के कराहने की चीख सुनाई दी थी. वैसे तो वह जल्दी में था, मगर महिला के कराहने की आवाज सुन कर प्रवीण सैनी के कदम ठिठक गए थे. उस ने सोचा था कि यह महिला के कराहने व चीखने की आवाज कहां से आ रही है, इस का पता करना चाहिए.

इस के बाद प्रवीण सैनी ने वहां से गुजर रहे कुछ किसानों व मजदूरों को रोका और उन्हें भी रजवाहे के पास से आ रही महिला के चीखने की आवाज से अवगत कराया. इस के बाद सब ने मिल कर जहां से महिला के चीखने व कराहने की आवाज आ रही थी, वहां पर जाने का मन बनाया. फिर सभी लोग उधर ही एक झाड़ी की ओर बढ़ गए, जहां से महिला की आवाज आ रही थी.

शुरू में तो प्रवीण सैनी को कुछ डर भी लग रहा था कि वहां कहीं कोई बदमाश या लुटेरे आदि न मिल जाएं, मगर वे हिम्मत कर के अंधेरे में ही उस झाड़ी की ओर चल पड़े, जहां से महिला की चीख सुनाई दे रही थी. थोड़ी देर में ही वे सभी लोग झाड़ी के पास पहुंच गए थे.

प्रवीण सैनी ने जब अपने मोबाइल की टौर्च जलाई तो झाड़ी के पीछे का दृश्य देख कर उस की व उस के सभी साथियों की रूह कांप गई थी.

प्रवीण सैनी ने उसी वक्त इस घटना की बाबत पुलिस कंट्रोल रूम को 112 नंबर पर सूचना दे दी. जहां पर महिला घायलावस्था में पड़ी थी, वह स्थान हरिद्वार जिले के थाना पिरान कलियर अंतर्गत बावनदरा कहलाता है. जंगल व गंगनहर होने के कारण यह काफी सुनसान क्षेत्र है. गुलदार आदि कुछ जंगली जानवर भी अकसर वहां घूमते रहते हैं.

पुलिस टीमें जुटीं जांच में

लगभग 10 मिनट बाद ही प्रवीण सैनी व उस के साथियों को पुलिस की गाड़ी का सायरन साफ साफ सुनाई देने लगा था. 2 मिनट बाद थाना कलियर के एसएचओ जहांगीर अली वहां पहुंच गए थे.

रुंधे गले से महिला बस केवल इतना ही बता पाई थी कि उस का नाम तसगिरा उर्फ सकीना है तथा वह सहारनपुर के कस्बा गंगोह में अपने दूसरे पति सुहेल के साथ रहती है. आज वह अपने शौहर सुहेल व अपनी 9 महीने की बच्ची के साथ दरगाह पिरान कलियर घूमने आई थी. दरगाह घूमने के बाद शौहर ने इस सुनसान स्थान पर उस के ऊपर चाकुओं से हमला कर दिया.

पुलिस तुरंत ही उसे अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही उस ने दम तोड़ दिया. इस के बाद एसएचओ जहांगीर अली ने इस घटना से सीओ पल्लवी त्यागी व हरिद्वार के एसएसपी अजय सिंह को अवगत करा दिया. अजय सिंह ने तुरंत ही इस संगीन वारदात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल ही कलियर क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाने के आदेश कलियर थाना पुलिस व सीआईयू टीम को दिए.

सीआईयू टीम व कलियर पुलिस द्वारा सकीना के शौहर सुहेल की गिरफ्तारी के लिए एक सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन सुहेल का कुछ भी पता नहीं चल सका था. इस के बाद सीओ (रुड़की) पल्लवी त्यागी ने पुलिस की एक टीम को सुहेल के सहारनपुर के कस्बा गंगोह में स्थित घर भेजा, मगर यहां भी पुलिस को सुहेल की कोई जानकारी नहीं मिली.

सुहेल के घर वालों ने पुलिस को बताया था कि वह हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में स्थित एक फैक्ट्री में काम करता है तथा वह अब अपनी बीवी सकीना के साथ सहारनपुर के गांव दाबकी में रह रहा है.

इस के बाद पुलिस टीम सुहेल की तलाश में गांव दाबकी के लिए चल पड़ी थी, मगर यहां भी पुलिस को सुहेल के मकान पर ताला लगा दिखाई दिया था. वहां से निराश हो कर सुहैल को पकडऩे गई पुलिस टीम वापस कलियर आ गई थी.

सुहेल को पकडऩे के लिए जब सीआईयू टीम ने उस के मोबाइल फोन की लोकेशन चैक की तो वह लोकेशन सहारनपुर में मिली थी. इस के बाद कलियर पुलिस व सीआईयू की टीम वापस सहारनपुर पहुंच गई. यहां पर पुलिस टीम ने सुहेल को ढंूढा तो वह नहीं मिला. काफी तलाश करने पर आखिर सुहेल को पुलिस टीम ने सहारनपुर के गंगोह रोड पर स्थित एक ढाबे से पकड़ लिया.

सुहेल को गिरफ्तार करने की सूचना एसएचओ जहांगीर अली ने सीओ पल्लवी त्यागी व एसएसपी अजय सिंह को दे दी.

लगभग एक घंटे में पुलिस सुहेल को ले कर थाना कलियर आ गई थी. वहां पर सीओ पल्लवी त्यागी व एसएचओ जहांगीर अली ने सुहेल से सकीना की हत्या के बारे में सिलिसिलेवार पूछताछ की और उस के बयानों को रिकौर्ड कर लिया. सुहेल ने बीवी की हत्या के बारे में जो जानकारी दी, वह इस प्रकार निकली—

पहले पत्नी ने क्यों दिया तलाक

सुहेल मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के कस्बा गंगोह का रहने वाला था. 5 साल पहले वह हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र की एक फैक्ट्री में काम करने के लिए आया था.

इसी फैक्ट्री में एक तलाकशुदा महिला सकीना उर्फ तसगिरा भी उस के साथ काम करती थी. दोनों साथ काम करते हुए अपने दुखदर्द की बातें करते थे. कुछ समय बाद उस की सकीना से दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई.

सकीना का परिवार मूलरूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला था, मगर अब उस का परिवार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रह रहा है. 12 साल पहले उस का निकाह गोलाघाट प्रयागराज के हकीम से हुआ था. हकीम से वह 2 बेटियों व एक बेटे की मां बनी.

सकीना के पति हकीम को नशा करने और जुआ खेलने की आदत थी. सकीना उस से यह करने को मना करती थी, लेकिन वह नहीं माना, जिस से उन के बीच कलह शुरू हो गई. शौहर की बुरी आदत से वह तंग आ गई थी. इस के बाद वर्ष 2017 में उस का हकीम से तलाक हो गया था.

2018 में सकीना अपने तीनों बच्चों को हकीम के पास छोड़ कर सिडकुल हरिद्वार आ गई थी और एक फैक्ट्री में नौकरी करने लगी थी. सुहेल और सकीना का प्यार गहरा हो गया था. वह सकीना से निकाह करना चाहता था. जब सुहेल ने सकीना के बारे में अपने घर वालों से कहा तो उन्होंने उसे सकीना के साथ निकाह करने के लिए साफ मना कर दिया.

सुहेल तो उस वक्त सकीना के प्यार में अंधा था और उस से निकाह करना चाहता था, इसलिए उस ने अपने घर वालों के विरोध के बावजूद सकीना के साथ निकाह कर लिया और अपने गंगोह स्थित घर को छोड़ कर सहारनपुर के गांव दाबकी में रहने लगा था. इस के बाद सुहेल से सकीना के 3 बच्चे हुए, जिन में सब से छोटी बेटी 9 महीने की थी. सुहेल सकीना को प्यार से तसगिरा कहता था.

कुछ समय तक उन का दांपत्य जीवन ठीकठाक चला, मगर शादी के 3 साल बाद उन दोनों में मनमुटाव शुरू हो गया था. इस के बाद दोनों में अकसर झगड़े होने लगे थे. इस कारण वह काफी परेशान रहने लगा था, क्योंकि सुहैल ने सकीना के लिए अपने घर वालों तक को छोड़ दिया था. घर आने पर सकीना उस से झगड़ती थी. इस कारण परेशान हो कर उस ने सकीना को तलाक दे दिया.

तलाक से सकीना काफी भड़क गई और अकसर सुहेल से मारपीट करने लगी. तलाक के बाद वह उस से गुजारे के लिए रुपए की मांग करने लगी थी और जैसे ही वह घर जाता तो वह उस पर हमला करने लगी थी.

सकीना की इन हरकतों से वह टूट चुका था. उस ने इस झगड़े से परेशान हो कर सकीना की हत्या की योजना बनाई डाली. अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वह 21 अप्रैल, 2023 को गंगोह स्थित अपने घर गया था.

वहां से सुहेल ने सकीना की हत्या के लिए एक छुरा खरीदा था. इस के बाद उस ने सकीना को कलियर दरगाह घूमने के लिए चलने को कहा था. सकीना कलियर घूमने के लिए तैयार हो गई थी.

दोपहर 3 बजे सकीना अपनी 9 माह की बेटी आयत के साथ बाइक पर बैठ गई थी और तीनों कलियर आ कर शाम तक खूब घूमे थे और वहां की दरगाहों पर जियारत भी की.

दूसरे शौहर ने क्यों की हत्या

उस वक्त शाम के 7 बज गए थे. अंधेरा भी हो चला था. तभी सकीना ने सुहेल से वापस सहारनपुर चलने को कहा. सुहेल बेटी के साथ बाइक पर बैठी सकीना को ले कर कलियर धनौरी रोड पर पानी के रजवाहे बावनदरे की ओर चल दिया. वहां पर जब सुहेल ने बाइक रोकी थी तो सकीना कहने लगी कि मुझे यहां पानी के शोर और अंधेरे से काफी डर लग रहा है.

तभी सुहेल ने फुरती से सकीना की गोद से 9 महीने की बच्ची ले ली और उसे पास ही घास पर लिटा दिया. इस के बाद उस ने पैंट की जेब से छुरा निकाल कर सकीना की छाती, गले व पेट पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए. फिर वह बेटी को ले कर वापस सहारनपुर के कस्बा गंगोह लौट गया.

देखभाल के लिए उस ने बेटी अपने घर वालों को दे दी. पुलिस से बचने के लिए वह इधरउधर छिपता घूम रहा था, लेकिन पुलिस की पकड़ में आ ही गया. एसएचओ जहांगीर अली ने सुहेल की निशानदेही पर सकीना की हत्या में प्रयुक्त छुरा व सकीना को मौके तक ले जाने वाली बाइक भी कस्बा गंगोह से बरामद कर ली थी.

अगले दिन 22 मई, 2023 को सीओ रुड़की पल्लवी त्यागी ने कलियर थाने में आयोजित प्रैसवार्ता में हत्यारोपी सुहेल को मीडिया के सामने पेश कर के सकीना हत्याकांड का परदाफाश कर दिया.

उसी दिन पुलिस ने सुहेल को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया था. सकीना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण धारदार हथियार से घायल होने पर ज्यादा खून निकलना बताया. कथा लिखे जाने तक जहांगीर अली द्वारा सकीना हत्याकांड की विवेचना पूरी होने के बाद सुहेल के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजने की तैयारी की जा रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

आशिकी में भाई को किया दफन

आशिकी में भाई को किया दफन – भाग 3

कोतवाल सिंह ने सेठपाल से उस के पूरे परिवार के सदस्यों के बारे में पूछताछ की. सेठपाल की बातें सुन कर श्री सिंह भी चौंक पड़े, क्योंकि 6 फरवरी की रात से ही कुलवीर के लापता होने की बात बताई गई थी. उन्हें इस के पीछे दाल में काला होने का शक हुआ.

यानी वह समझ गए कि इस मामले में परिवार या पासपड़ोस का ही कोई न कोई शामिल हो सकता है. यह भी सवाल था कि कुलवीर ने ही सब को बेहोश कर दिया हो और खुद भी घर से फरार हो गया हो? लेकिन यह जांच का विषय था कि उस ने आखिर ऐसा क्यों किया होगा? घर में गहने या रुपएपैसे सहीसलामत थे.

उसी तरीख से कुलवीर का मोबाइल फोन भी स्विच्ड औफ था. श्री सिंह ने मामले की जांच करने के लिए एसएसआई अंकुर शर्मा को सेठपाल के साथ उस के गांव भेज दिया.

अंकुर शर्मा ने ढाढेकी ढाणा पहुंच कर सेठपाल के सभी परिजनों से उस की बेहोशी की हालत के बारे में गहन तहकीकात की. इस बाबत पड़ोसियों से भी बात की. इस की सिलसिलेवार जानकारी उन्होंने कोतवाल अमरजीत सिंह को दे दी.

श्री सिंह शर्मा की रिपोर्ट पढ़ कर इस निर्णय पर पहुंचे कि कुलवीर ही अपने घर वालों को बेहोश कर फरार हो गया होगा. सेठपाल की तहरीर पर कुलवीर की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद मामले की विवेचना महिला थानेदार एकता ममगई को सौंप दी गई.

नहीं मिला ठोस सुराग

इस की सूचना सीओ मनोज ठाकुर और एसपी (देहात) स्वप्न किशोर को भी दे दी गई. उन से आगे की जांच और काररवाई के निर्देश के बाद विवेचक एकता ममगई ने कुलवीर के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. जांच शुरू तो हो गई थी, कुलवीर की सरगरमी से तलाश हो रही थी. लेकिन कुलवीर के बारे में कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी थी. जबकि उस की फोटो के साथ आसपास के क्षेत्रों में पैंफ्लेट चिपका दिए गए थे.

कुलवीर के कुछ दोस्तों और घर वालों से भी उस के बारे में और उस की आदतों को ले कर पूछताछ की गई थी. यह सब करते हुए 3 सप्ताह से अधिक का समय निकल गया था. पुलिस को कुलवीर के बारे में कोई भी सटीक जानकारी नहीं मिल पाई थी.

अब बारी थी परिवार के सभी सदस्य और गांव के दूसरे लोगों से बारीबारी पूछताछ की. इस पर जब गहनता से काम किया जाने लगा किसी ने दबी जुबान में बताया कि उस की नाबालिग बहन गीता का पड़ोसी राहुल के साथ प्रेम संबंध है.

पुलिस ने गीता से की पूछताछ

इस सूचना के बाद देरी किए बगैर गीता से पूछताछ करने के लिए उसे थाने बुलाया गया. पहले तो गीता ने पुलिस को झूठी बातों में उलझाने की कोशिश की. उस ने बताया था कि कुलवीर पिता सेठपाल से नाराज हो कर घर से चला गया है. लेकिन वह नाराजगी की कोई ठोस वजह नहीं बता पाई.

इस के बाद जब अमरजीत सिंह ने गीता से उस के पड़ोसी शादीशुदा राहुल से चल रहे प्रेम संबंधों के बारे में पूछा तो उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. थाने में महिला सिपाही की सख्ती के सामने वह अधिक समय तक नहीं टिक पाई.

12 मार्च, 2023 को गीता ने स्वीकार कर लिया कि उसे कुलवीर पीटता रहा है, क्योंकि वह राहुल से प्यार करती है. उस ने उसे राहुल से दूर रहने की सख्त हिदायत दी थी. भाई की धमकी सुन कर वह डर गई थी. उस ने औनर किलिंग के बारे में काफी कुछ सुन रखा था कि कैसे मांबाप, भाई और रिश्तेदार अपनी प्रतिष्ठा की खातिर प्रेमी प्रेमिका को मौत के घाट उतार देते हैं.

इस बारे में उस ने राहुल को बताया, जिस से राहुल भी कुलवीर के खिलाफ आग उगलने लगा. और फिर उस ने गीता के साथ मिल कर एक योजना बनाई. इस से पहले कुलवीर गीता के खिलाफ कोई गंभीर कदम उठाए, उस से पहले क्यों न वही कुलवीर को ही निपटा दे.

इस योजना में उस ने अपने दोस्त कृष्णा को भी 40 हजार रुपए का लालच दे कर शामिल कर लिया. इस योजना को उन्होंने 6 फरवरी, 2023 की रात को अंजाम भी दे दिया.

आशिकी में निपटाया बहन ने भाई को

रात को 11 बजे राहुल ने सेठपाल के दरवाजे पर हल्की सी दस्तक दी थी. गीता ने तुरंत दरवाजा खोल दिया था. उस के साथ एक लड़का कृष्णा भी था. राहुल जब उसे ले कर घर में घुसा, तब बाहर के कमरे में कुलवीर को खाट पर गहरी नींद में सोया पाया.

गीता धीमे से राहुल से बोली, “इसे जल्दी निपटाओ.’’

इस के बाद गीता ने अपने भाई कुलवीर के हाथ पकड़ लिए, जबकि कृष्णा ने कुलवीर के पैर. उस के बाद राहुल ने दोनों हाथों से कुलवीर का गला घोंट दिया.

कुलवीर का शरीर कुछ समय में ही बेजान हो गया. राहुल और कृष्णा ने उस की लाश को एक चादर में बांध लिया. उसे कृष्णा अपने घर में ले आ आया. कृष्णा अपने घर में एक गड्ढा पहले से ही खोद कर रखा था. उस ने कुलवीर की लाश उसी में दबा दी. दूसरी ओर गीता ने कुलवीर का मोबाइल फोन स्विच औफ कर पास के तालाब में फेंक दिया और खुद नींद की गोलियां खा कर घर में ही सो गई.

पुलिस ने गीता से मिली जानकारी के बाद राहुल से भी उसी दिन पूछताछ की. इस के लिए उसे थाने बुलाया. उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया. इस से भी बात नहीं बनी तब पुलिस सेवा की धमकी दी गई. इस धमकी से वह टूट गया और उस ने न केवल गीता के साथ अनैतिक संबंध की बात स्वीकार की, बल्कि कुलवीर की हत्या का जुर्म भी स्वीकार कर लिया.

कुलवीर के बारे में गीता और राहुल से वारदात के बारे में मिली जानकारी के बाद सीओ मनोज ठाकुर कोतवाली लक्सर आ गए थे. उन्होंने भी गीता से गहनता से पूछताछ की. इस के बाद एसएसआई अंकुर शर्मा और महिला थानेदार एकता ममगई ने कृष्णा को भी उस के घर से हिरासत में ले लिया.

गीता, राहुल और कृष्णा के बयान दर्ज कर लिए गए. तीनों के बयानों में एकरूपता थी. गीता और कृष्णा ने भी राहुल के ही बयान का समर्थन किया था. इस के बाद पुलिस ने कुलवीर की गुमशुदगी के मामले में हत्या कर लाश छिपाने की धाराएं जोड़ दीं. इस के बाद पुलिस ने राहुल की निशानदेही पर कृष्णा के घर से कुलवीर का शव भी बरामद कर लिया. उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

अगले दिन पुलिस ने राहुल और कृष्णा को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. गीता की उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण उसे कोर्ट ने बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक कुलवीर हत्याकांड की विवेचना महिला थानेदार एकता ममगई द्वारा की जा रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में गीता नाम परिवर्तित है.

आशिकी में भाई को किया दफन – भाग 2

एक बार राहुल और गीता के प्रेमसंबंध का खुला प्रदर्शन कुलवीर की नजरों के सामने आ गया. कुलवीर की आंखों में खून उतर आया. उस ने राहुल और गीता दोनों को जबरदस्त डांट लगाई. इतना ही नहीं, पारिवारिक रिश्ते और समाज की मानमर्यादा का हवाला देते हुए राहुल को घर आने से मना कर दिया. बहन गीता पर भी राहुल के घर आनेजाने से रोक लगा दी. दरअसल, गीता और राहुल को कुलवीर ने आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था.

गीता हुई राहुल की प्रेम दीवानी

बीते साल 2022 में दशहरे का त्योहार था, इस मौके पर घर के सभी सदस्य मेला घूमने लक्सर गए हुए थे. जबकि गीता किसी कारण साथ नहीं जा पाई थी. उसी समय कुलवीर ने राहुल को गीता के साथ देख लिया था. तभी से उस के दिमाग में खलबली मची हुई थी. वह गीता पर पैनी नजर रखे हुए था और राहुल से भी खिन्न रहने लगा था.

जब कभी राहुल उस के घर आता, तब वह उस से रूखेपन से बात करता. राहुल भी उस के इस व्यवहार से तंग आ गया था. गीता को तो घर से बाहर निकलने तक पर पाबंदी लगा दी थी. गीता जब इस का विरोध जताती थी तब वह उस की पिटाई कर देता था. कुलवीर ने गीता को राहुल से दूर रहने की सख्त चेतावनी दे दी थी. इस के उलट गीता का राहुल से छिप कर मिलना जारी था.

नाबालिग गीता पर राहुल ने ऐसा जादू कर दिया था कि वह उस की प्रेम दीवानी बनी हुई थी, जबकि वह विवाहित और 2 बच्चों का बाप था. उन की आशिकी चरम पर थी. अकसर उन की मुलाकातें रात को होने लगी थीं. उन्हें जब भी मिलना होता था, गीता रात को अपने घर वालों को दूध में नींद की गोलियां मिला कर दे देती थी फिर दोनों एकांत में मिल लेते थे.

एक बार राहुल प्रेमिका को बाहों में भरता हुआ बोला, “गीता, आखिर हम लोग इस तरह छिप कर कब तक मिलते रहेंगे. कुलवीर हम पर हमेशा नजरें गड़ाए रहता है.’’

“हां, सही कहते हो, केवल वही हमारे प्यार का दुश्मन बना बैठा है. मुझे लग रहा है कि उसे ठिकाने लगाना होगा.’’ गीता तल्ख आवाज में बोली.

“क्या मतलब है तुम्हारा.’’ राहुल बोला.

“यही कि कोई तरीका निकालो उसे खत्म करने का,’’ गीता बोली.

“ठीक है, तुम तैयारी करो, मैं किसी से बात करता हूं.’’ राहुल बोला और कपड़े सहेज कर अपने घर चला गया.

राहुल और गीता ने एक योजना बना ली थी. योजना के अनुसार 6 फरवरी, 2023 को रात के खाने के बाद गीता ने अपने घर वालों को दूध में नींद की गोलियां पीस कर दे दीं. कुछ समय में ही घर के सभी लोग अचेतावस्था में आ गए थे.

पूरा परिवार हो गया बेहोश

7 फरवरी की सुबह सूर्योदय होने के काफी समय बाद 55 वर्षीय सेठपाल के मंझले बेटे पंकज की नींद टूट गई. घर में सन्नाटा पा कर वह कुछ समझ नहीं पाया. हालांकि वह भी काफी सुस्ती महसूस कर रहा था. किसी तरह उठ कर अपने कमरे से बाहर निकला तो बाहर पिता को बेसुध सोया पाया. इतनी देर तक सोए रहने पर उसे आश्चर्य हुआ, जबकि वह सुबह के 5 बजे तक उठ जाते थे.

पंकज ने उन्हें झकझोर कर जगाया. उन्होंने आंखें खोलीं जरूर, मगर अर्द्धबेहोशी की हालत में ही रहे. उस वक्त भी उस पर कुछ बेहोशी छाई हुई थी. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि नींद आ रही है. उस ने पाया कि घर में मां और बहन गीता की भी कोई चहलपहल नहीं हो रही है. रसोई में सन्नाटा है. बाथरूम में भी किसी तरह की आवाज नहीं आ रही है. कुलवीर के कमरे में भी सन्नाटा है.

सेठपाल ने बेटे पंकज से चाय लाने को बोला. पंकज ने गीता, मां, छोटे भाई और यहां तक कि अपने बड़े भाई कुलवीर तक को बारीबारी से कई आवाजें लगाईं. उस का कोई जवाब नहीं मिला. वह खुद सुस्ती में था, इसलिए पहले चाय पीने की सोची और रसोई में चाय बनाने चला गया.

चाय का पानी गैस पर चढ़ा कर खुद बाथरूम में मुंह धोने लगा. ब्रश करने और मुंह धोने के क्रम में उस ने चेहरे को कई बार ठंडे पानी से धोया. तब उस की थोड़ी सुस्ती कम हुई. रसोई में आ कर उस ने चाय बनाई और 2 कप में ले कर पिता के कमरे में गया.

पिता वहीं कंबल में ही अधलेटे थे. आंखें बंद कर रखी थीं. पंकज ने उन से मुंहहाथ धोने के लिए कहा. जबकि सेठपाल ने सहारे से उन्हें उठाने का इशारा किया. उस वक्त भी उन्हें नींद आ रही थी. ऐसा लग रहा था, मानो उन की नींद पूरी नहीं हुई हो. एक तरह से वह अर्धनिद्रा की हालत में ही थे. पंकज उन की हालत को देख कर घबरा गया. किसी तरह से उस ने अपनी चाय पी और पड़ोसियों को आवाज लगाई.

पंकज की आवाज सुन कर कुछ पड़ोसी वहां आ गए. उन्होंने सेठपाल की हालत देखते ही पूछा, “इन्होंने कोई दवा खाई है क्या? इन पर किसी नशीली दवाई का रिएक्शन हुआ लगता है.’’

पड़ोसियों ने पाया कि सेठपाल की पत्नी, बेटी और छोटा बेटा भी एक कमरे में बेसुध सोए हैं. जबकि बड़ा बेटा कुलवीर अपने कमरे में नहीं है. उन्हें समझते देर नहीं लगी कि जरूर घर में कोई विवाद हुआ है. हो सकता है इसी कारण कुलवीर ने सभी को नशे की कोई दवा खिला दी हो और घर से चला गया हो.

पड़ोसियों ने सब से पहले गांव के एक आयुर्वेद डाक्टर को सेठपाल के घर पर बुलाया. परिवार के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य की जांच करवाई. उन्होंने जांच में पाया था कि सेठपाल के परिवार वालों ने या तो किसी नशीली वस्तु का सेवन किया है या उन्हें किसी ने धोखे से ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खिला दी हैं.

उन्हें कुछ दवाइयां दे कर प्राथमिक उपचार कर दिया गया. बाद में सभी को सरकारी अस्पताल में भरती करवाया गया. वहां वे 2 दिनों तक भरती रहने के बाद पूरी तरह से ठीक हो पाए. तब तक कुलवीर का कोई पता नहीं था. वह घर से गायब ही था.

कुलवीर की गुमशुदगी कराई दर्ज

तब सेठपाल व उस की पत्नी सुमन ने कुलवीर को ढूंढना शुरू कर दिया था. सेठपाल को कुलवीर की चिंता होनेलगी थी. उन्होंने उस के लापता होने की जानकारी कोतवाली लक्सर को देने का मन बनाया, जो उन के गांव से 5 किलोमीटर दूरी पर है.

वहां वह 10 फरवरी को दिन में 11 बजे के करीब पहुंचे और कोतवाल अमरजीत सिंह को बेटे कुलवीर के लापता होने की जानकारी दी. उस के बयानों के आधार पर कुलवीर की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कर ली गई. शिकायत में उन्होंने पूरे परिवार को किसी के द्वारा बेहोशी दवा खिलाए जाने के बारे में भी बताया.

आशिकी में भाई को किया दफन – भाग 1

नाबालिग गीता पर राहुल ने ऐसा जादू कर दिया था कि वह उस की प्रेम दीवानी हो गई थी, जबकि वह विवाहित और 2 बच्चों का बाप था. उन की आशिकी चरम पर थी. गीता रात को अपने परिवार वालों को दूध में नींद की गोलियां मिला कर दे देती थी फिर दोनों एकांत में मिल लेते थे.

एक बार राहुल प्रेमिका को बाहों में भरता हुआ बोला, “गीता, आखिर हम इस तरह छिप कर कब तक मिलते रहेंगे. कुलवीर हम पर हमेशा नजरें गड़ाए रहता है.’’

“हां, सही कहते हो, घर में केवल वही हमारे प्यार का दुश्मन बना बैठा है. मुझे लग रहा है कि कुछ करना ही होगा.’’ गीता तल्ख आवाज में बोली.

“क्या मतलब है तुम्हारा.’’ राहुल बोला.

“यही कि कोई तरीका निकालो इस समस्या के समाधान का,’’ गीता बोली.

“ठीक है, मैं कुछ सोचता हूं.’’ राहुल बोला और फटाफट अपने कपड़े पहन कर अपने घर चला गया.

इसी दौरान कुलवीर रहस्यमय तरीके से गायब हो गया. हरिद्वार जिले के एसएसपी अजय सिंह को करीब एक माह से लापता कुलवीर के बारे में एक सुराग मिल ही गया था. उस की पुष्टि के लिए उन्होंने तुरंत लक्सर थाने के कोतवाल अमरजीत सिंह को उस दिशा में काम करने का आदेश दे दिया.

आदेश पाते ही 12 मार्च, 2023 को अमरजीत सिंह ने भी फौरी काररवाई करते हुए ढाढेकी ढाणा के राहुल कुमार को थाने बुलवाया. उसे सीओ मनोज ठाकुर के सामने हाजिर किया गया. वह डरासहमा पुलिस के सामने खड़ा था. उस ने बताया कि उस की 9 साल पहले मोनिका से शादी हुई थी. उस से 2 बच्चे भी हैं. अपनी पत्नी मोनिका से बहुत खुश है.

उसी दौरान वह पड़ोसियों के नाम और उन के साथ अच्छे संबंध होने के बारे में बताने लगा, तभी जांच अधिकारी ने बीच में ही टोक दिया, “…अच्छा तो तुम कुलवीर के पड़ोसी हो?’’

“जी सर,’’ राहुल बोला.

“वह महीने भर से लापता है. उस के बारे में तुम क्या जानते हो?

“नहीं मालूम.’’ राहुल बोला.

“कुछ तो पता होगा. पिछली बार तुम उस से कब मिले थे?’’

“याद नहीं, लेकिन एक महीने से ज्यादा हो गया. कहां गया है…नहीं मालूम. उस से मेरे अच्छे संबंध थे.’’ राहुल बोला.

“अच्छे संबंध थे? क्या मतलब है तुम्हारा? अब नहीं है क्या?’’ जांच अधिकारी ने बीच में ही सवाल कर दिया.

यह सुनते ही राहुल थोड़ा असहज हो गया. हड़बड़ाता हुआ बोला, “मेरा मतलब है उस से मेरी पुरानी जानपहचान है. कुछ हफ्तों से वह नहीं दिखाई दिया है. कहीं गया होगा अपने कामधंधे को ले कर!’’

“गीता के बारे में तुम क्या जानते हो?’’ पुलिस ने बात बदल कर दूसरा सवाल किया.

“गीता? वह तो कुलवीर की बहन है. अच्छी लड़की है.’’ राहुल झट से बोल पड़ा.

“हां हां वही गीता, सुबह आई थी यहां. अपने लापता भाई की तहकीकात करने. तुम्हारी तो बहुत शिकायत कर रही थी. बोल गई है कि तुम ने ही उसे उस के खिलाफ भड़का दिया है, जिस से वह घर वालों से नाराज हो कर कहीं चला गया है. इसीलिए तुम्हें यहां बुलवाया गया है.’’ जांच अधिकारी बोले.

“मैं ने उसे भड़काया है? उसे! भला मैं क्यों ऐसा करूंगा, सर?’’ राहुल बोला.

“अपने मतलब के लिए.’’

“मेरा उस से क्या लेनादेना, क्या मतलब उस से…वह अपनी मरजी का मालिक और मैं…’’

“…और तुम अपनी मनमानी के मालिक… यही बात है न!’’ राहुल अपनी सफाई दे रहा था कि बीच में ही जांच अधिकारी बोल पड़े.

“जी…जी सर, मैं ने कोई मनमानी नहीं की उस के साथ.’’ राहुल अचानक घबरा गया.

“तो क्या कुछ किया उस के साथ, जो महीने भर से घर नहीं लौटा है? तुम्हीं बताओ न.’’ पुलिस के इस तर्क पर राहुल की जुबान से एक भी शब्द नहीं निकल पाया. जांच अधिकारी ने उस की चुप्पी और चेहरे पर उड़ती हवाइयों पर तीखी निगाह टिका दी. कुछ सेकेंड कमरे में सन्नाटा छाया रहा.

“कुलवीर के बारे कुछ बताया इस ने?’’ कोतवाल अमरजीत सिंह ने कमरे के दरवाजे से पूछा.

“अभी तक तो नहीं सर!’’ जांच अधिकारी बोले.

“कोई बात नहीं गीता ने सब कुछ बता दिया है. इसे मेरे कमरे में ले कर आओ, अब इस की खबर मैं लूंगा. यह इतनी आसानी से सच नहीं उगलने वाला है. इसे पुलिस सेवा की जरूरत है.’’ अमरजीत बोले.

“पुलिस सेवा!’’ अचानक रहुल बोला.

जांच अधिकारी बोले, “नहीं जानते पुलिस सेवा के बारे में? कोई बात नहीं, अब जान जाओगे. यह ऐसी सेवा होती है, जिसे कभी भी भूल नहीं पाओगे.’’

“सर जी, मैं ने कुछ भी नहीं किया कुलवीर के साथ…जो कुछ हुआ वह गीता के कहने पर ही कृष्णा ने किया…’’

“कृष्णा ने किया? कौन है कृष्णा? क्या किया उस के साथ? गीता ने उस के बारे में कुछ भी नहीं बताया…वह तो सिर्फ तुम्हारा ही नाम ले रही थी.’’ अमरजीत बोले.

“कृष्णा मेरी जानपहचान का है, दूसरे गांव में रहता है.’’ राहुल बोला.

“मुझे तो यह भी पता चला है कि तुम्हारा और गीता का चक्कर चल रहा है.’’ अमरजीत ने कहा.

“गलत बात है सर,’’ राहुल बोला.

“गलत नहीं है, तुम्हारे और गीता का राज कुलवीर को मालूम हो गया था. इसलिए तुम्हारी उस के साथ लड़ाई हो गई थी. अब वह कहां है किसी को नहीं मालूम. परिवार वालों ने उस के लापता होने की रिपोर्ट लिखवाई है. तुम उस के बारे में पूरी बात बताओगे तभी उसे तलाशने में मदद मिलेगी…वरना?’’ जांच अधिकारी ने कहा.

प्रेमी ने खोल दिया राज

पुलिस घुड़की और हमदर्दी से राहुल के चेहरे पर पसीना आ गया था. उस के चेहरे का भाव भांपते हुए अमरजीत समझ चुके थे कि उन्हें कुलवीर के बारे में नया सुराग मिल सकता है. उन्होंने उसे पानी पिलाया और उस के लिए चाय भी मंगवाई, फिर उसे ठंडे दिमाग से गीता, कुलवीर, कृष्णा और उस से जुड़ी सारी बातें बताने को कहा. उस के बाद जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार है—

उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के लक्सर थानांतर्गत गांव ढाढेकी ढाणा में सेठपाल अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी, 3 बेटे और एक बेटी थी. वह एक साधारण किसान था. बड़ा बेटा कुलवीर पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटाता था.

पड़ोस में ही राहुल का भी घर था. वह भी अपने मातापिता, पत्नी और बच्चों के साथ खुशी से जीवनयापन करता रहा था. सेठपाल रिश्ते में उस का चाचा लगता है. राहुल का उन के घर में आनाजाना लगा रहता था. बीते एक साल से वह गीता की सुंदरता पर मर मिटा था. जब भी वह अकेले में मिलती, वह उस की तारीफ करता था. उन के बीच बढ़ती नजदीकियों की भनक परिवार में गीता के भाइयों को भी लग गई थी, लेकिन इसे उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया.

मां ने दिलाई बेटे को मौत

उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के थाना बहादराबाद क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी बी.के. आचार्य को जब किसी ने फोन कर के बताया कि थाना बहादराबाद की धनौरी रिपोर्टिंग पुलिस चौकी के पास स्थित शिवदासपुर तेलीवाला गांव के 17 वर्षीय तनवीर का अपहरण हो गया है तो उन्होंने फोन करने वाले पूछा, ‘‘अपहर्त्ताओं का फिरौती के लिए कोई फोन आया या नहीं?’’

‘‘नहीं सर, तनवीर के घर वाले फिरौती देने लायक ही नहीं हैं. उस का अपहरण फिरौती के लिए नहीं, रंजिश की वजह से किया गया है. गांव के ही कुरबान, जमशेद और शमशेर की तनवीर के घर वालों की पुरानी दुश्मनी है. लोगों का कहना है कि उन्हीं लोगों ने तनवीर का अपहरण किया है.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘तनवीर के घर वालों ने उस के अपहरण की सूचना थाना पुलिस को दी है या नहीं?’’ क्षेत्राधिकारी ने पूछा.

‘‘नहीं सर, तनवीर के घर वालों ने अभी तो पुलिस को उस के अपहरण की सूचना नहीं दी है. तनवीर की मां इमराना अपने एक रिश्तेदार इश्तिखार उर्फ तारी के साथ उस की सैंट्रो कार से तनवीर की तलाश कर रही है. लेकिन अभी तक उस का कुछ पता नहीं चला है. सर आप ही तनवीर को सकुशल बरामद कराने के लिए कुछ करें.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘आप को कैसे पता चला कि तनवीर का अपहरण हुआ है? जब तक अपहर्त्ताओं का फोन न आए, तब तक हम कैसे कह सकते हैं कि उस का अपहरण हुआ है? अच्छा यह बताओ, तुम कौन बोल रहे हो?’’ क्षेत्राधिकारी ने पूछा.

‘‘सर, एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं ने आप को यह सूचना दे दी, बाकी आप को क्या करना है, यह आप जानें. मेरे बारे में जान कर आप क्या करेंगे?’’ कह कर फोन करने वाले ने फोन काट दिया. यह 22 फरवरी, 2014 की दोपहर के 2 बजे के आसपास की बात है.

युवक के अपहरण का मामला संगीन था, इसलिए क्षेत्राधिकारी बी.के. आचार्य ने तुरंत इस मामले की सूचना थाना बहादराबाद के थानाप्रभारी सुंदरम शर्मा को देते हुए कहा कि वह धनौरी पुलिस चौकी के चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी को साथ ले कर तुरंत गांव शिवदासपुर तेलीवाला जा कर तनवीर के अपहरण के बारे में पता करें. इस के बाद उन्होंने इस अपहरण की जानकारी अपने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. सदानंद दाते को दे कर खुद भी शिवदासपुर के लिए निकल पड़े.

क्षेत्राधिकारी बी.के. आचार्य के शिवदासपुर तेलीवाला पहुंचने से पहले थानाप्रभारी सुंदरम शर्मा और चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी पहुंच चुके थे. अपहृत तनवीर के घर के सामने गांव के काफी लोग इकट्ठा थे. थानाप्रभारी और चौकीप्रभारी तनवीर के घर वालों तथा गांव वालों से पूछताछ कर रहे थे.

इस पूछताछ में पता चला कि तनवीर का अपहरण इसी गांव के कुरबान, शमशेर और जमशेद ने सैंट्रो कार से किया था. पुलिस ने उन के बारे में पता किया तो वे गांव में ही मिल गए. पुलिस उन्हें ले कर धनौरी पुलिस चौकी आ गई.

चौकी ला कर पुलिस ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि तनवीर के परिजनों से उन की पुरानी दुश्मनी थी, इसीलिए वे उन्हें फंसा रहे हैं. जिस समय तनवीर का अपहरण हुआ था, उस समय वे अपने खेतों में गन्ने छील रहे थे.

चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी ने जब इस बारे में गांव वालों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि ये सच बोल रहे हैं. जमशेद और शमशेर सचमुच उस समय अपने खेतों में गन्ने छील रहे थे. इस के बाद पुलिस ने तीनों को छोड़ दिया.

तनवीर का अपहरण हुआ था, यह सच था. लेकिन न तो अपहर्त्ताओं का कोई फोन आया  था और न उस का कोई सुराग मिला था, इसलिए पुलिस के पास जांच को आगे बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं था. पुलिस ने तनवीर के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया था. पुलिस को जांच आगे बढ़ाने की कोई राह नहीं सूझी तो तनवीर के बारे में पता लगाने के लिए अपने मुखबिरों को लगा दिया.

अगले दिन चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी ने जानकारी जुटाने के लिए तनवीर की मां इमराना और बाप इसलाम को थाने बुलवाया. पूछताछ करते समय इमराना बुरी तरह रो रही थी, इसलिए रघुवीर चौधरी की नजर उसी पर जमी थी. वह उस से कुछ भी पूछते, जवाब देने के बजाए वह रोने लगती. उसी दौरान इसलाम का एक रिश्तेदार इश्तिखार उर्फ तारी वहां आया तो उसे देख कर इमराना का रोना एकदम से बंद हो गया. यही नहीं, उस ने आंखों से उसे वहां से चले जाने का इशारा भी किया.

चूंकि चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी की नजरें इमराना पर ही जमी थीं, इसलिए उन्होंने उसे यह सब करते देख लिया था. उन्हें उस की यह हरकत बड़ी अजीब लगी. पूछताछ के बाद उन्होंने इमराना को घर भेज दिया, लेकिन उस पर उन्हें संदेह हो गया. इसलिए उन्होंने अपने मुखबिरों से इमराना और उस के रिश्तेदार तारी के बारे में जानकारी जुटाने को कहा.

10 दिन बीत गए. लेकिन तनवीर के बारे में कुछ पता नहीं चला. 2 मार्च, 2014 को कोतवाली रुड़की के अंतर्गत गंगनहर की आसफनगर झाल में एक युवक के शव मिलने की सूचना मिली. कोतवाली पुलिस ने शव बरामद किया. मृतक धारीदार सुरमई कमीज, काला स्वेटर, काली पैंट और सफेद रंग के काली पट्टी के जूते पहने था. इस शव के मिलने की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम ने वायरलैस द्वारा प्रसारित की तो चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी तनवीर के घर वालों को साथ ले कर आसफनगर झाल पर जा पहुंचे.

उस शव की शिनाख्त इसलाम ने अपने बेटे तनवीर के रूप में कर दी. जवान बेटे की लाश से वह लिपट कर रोने लगा था. सूचना पा कर क्षेत्राधिकारी बी.के. आचार्य भी आ गए थे.  लाश के निरीक्षण में पुलिस ने देखा था कि उस के चेहरे पर चोट के गहरे निशान थे. इस से लगा कि हत्यारों ने पहले उसे बड़ी बेरहमी से पीटा था. शायद उसे पीटपीट कर ही मार डाला गया था. उस के बाद उसे गंगनहर में फेंक दिया गया था.

चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी ने घटनास्थल की औपचारिक काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जे.एन. सिन्हा स्मारक राजकीय अस्पताल, रुड़की भिजवा दिया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, तनवीर की मौत चेहरे पर लगी चोटों और फेफड़ों में पानी भरने से हुई थी. उस के जबड़े की हड्डी टूटने के साथ उस का गुप्तांग भी सूजा था. इस रिपोर्ट से साफ हो गया था कि हत्यारों ने उसे गंगनहर में फेंकने से पहले बड़ी बेरहमी से पीटा था.

लाश बरामद होने के बाद पुलिस हत्यारों की खोज में बड़ी तत्परता से जुट गई थी. उसी बीच रघुबीर चौधरी को मुखबिरों से पता चला कि कई सालों से दूध व्यवसाई इश्तिखार उर्फ तारी का इसलाम के घर बहुत ज्यादा आनाजाना था. वह इसलाम के घर तभी जाता था, जब वह घर पर नहीं होता था.

गांव वालों का कहना था कि इसलाम के रिश्तेदार तारी के उस की बीवी इमराना से अवैध संबंध थे. कभीकभी इमराना तारी की सैंट्रो कार से घूमने भी जाती थी. इसलाम मजदूरी करता था. लेकिन इमराना महंगे कपड़े और गहनों से लदी रहती थी. उस के यहां मोटरसाइकिल भी थी. यह सब तारी की ही बदौलत था.

यह जानकारी चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी ने थानाप्रभारी सुंदरम शर्मा और क्षेत्राधिकारी बी.के. आचार्य को दी तो उन्होंने उसे गिरफ्तार कर थाने लाने का आदेश दिया. इस के बाद इश्तिखार उर्फ तारी को उस के गांव शिवदासपुर से गिरफ्तार कर के थाने लाया गया, जहां तनवीर की हत्या के बारे में पूछताछ शुरू हुई. पहले तो तारी स्वयं को निर्दोष बताता रहा, लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो वह टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि तनवीर की हत्या उसी ने अपने 2 साथियों, कुरबान और शहजाद के साथ मिल कर की थी. उस ने यह भी स्वीकार किया कि तनवीर की हत्या की योजना उस की मां इमराना ने ही बनाई थी.

मां ने ही योजना बना कर बेटे की हत्या कराई थी, यह हैरान करने वाली बात थी. एक मां ने हवस की आग में अपने बेटे को ही स्वाहा कर दिया था. तारी ने पुलिस को जो बताया, उस के अनुसार तनवीर के अपहरण और हत्या की यह कहानी कुछ इस प्रकार थी.

आज से 28 साल पहले इसलाम का विवाह इमराना से हुआ था. इसलाम की आर्थिक स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं थी, जबकि इमराना काफी महत्त्वाकांक्षी औरत थी. इमराना इसलाम के 5 बच्चों की मां बनी, जिन में 2 बेटियां आसमां, नगमा तथा 3 बेटे तनवीर, हसीन और गुलाम अली थे.

5 बच्चों की मां बनने के बाद भी इमराना का शरीर कुछ ऐसा था कि कहीं से नहीं लगता था कि वह 5 बच्चों की मां है. भले ही उस की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन वह रहती थी खूब बनसंवर कर. इसलाम के पास कोई बहुत ज्यादा जमीन नहीं थी. जो थी, उसी से किसी तरह गुजरबसर कर रहा था. कभी जरूरत पड़ने पर वह अपने दूध व्यवसाई रिश्तेदार इश्तिखार उर्फ तारी से पैसे उधार ले लेता था. जब उस के पास पैसे हो जाते थे तो वह वापस कर आता था.

अगर कभी इसलाम समय से रुपए नहीं पहुंचा पाता तो तारी खुद रुपए मांगने आ जाता था. इसलाम घर पर नहीं होता तो इमराना उस का स्वागत करती थी. इस बीच इसलाम का इंतजार करते हुए वह इमराना से बातचीत करता रहता. इसी आनेजाने और बातचीत करने में तारी का दिल इमराना पर आ गया. इस के बाद उस के मन में इमराना को पाने की इच्छा जाग उठी तो वह दूसरे तीसरे दिन बहाने से इसलाम के घर आने लगा.

बातचीत, हावभाव से इमराना ने तारी के मन की बात भांप ली तो उस ने भी उस की इच्छा पूरी करने का मन बना लिया. क्योंकि इस में उसे काफी फायदा दिखाई दिया. इसी का नतीजा था कि मौका मिला तो तारी जो चाहता था, वह उस ने पूरा कर दिया. इस के बाद तो यह रोज का खेल बन गया.

तारी इमराना के साथ मुफ्त में मजा नहीं ले रहा था. संबंध बनाने के बाद वह इमराना की हर तरह से मदद करने लगा था. यही नहीं, उस ने इसलाम से उधार दिए पैसे भी मांगने बंद कर दिए थे.

इस तरह के संबंध छिपे तो रहते नहीं, जल्दी ही सब को इमराना और तारी के संबंधों का पता चल गया. इसलाम के कानों तक भी यह बात पहुंची. लेकिन तारी के अहसानों तले दबा इसलाम विरोध नहीं कर सका. वह भले ही इस बात का विरोध नहीं कर सका, लेकिन पड़ोसियों ने जरूर विरोध किया. तब इमराना उन से लड़ पड़ी.

किसी रोज बड़ी बेटी आसमां और तनवीर ने इमराना और तारी को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया तो उन्होंने तारी को अपने घर आने से मना किया. तब इमराना ने दोनों को डांट कर चुप करा दिया. तारी के घर आने की वजह से इसलाम के बच्चे पड़ोसियों और रिश्तेदारों के सामने काफी शर्मिंदगी महसूस करते थे, इसलिए अब वे भरपूर विरोध करने लगे थे.

21 फरवरी, 2014 की सुबह स्कूल जाने के लिए तनवीर अपना बैग लेने छत पर बने कमरे पर पहुंचा तो कमरा अंदर से बंद था. खिड़की की झिरी से उस ने झांका तो अंदर इमराना तारी के साथ रंगरलियां मनाती दिख गई. तनवीर शोर मचाते हुए कमरे का दरवाजा खटखटाने लगा. इमराना ने दरवाजा खोला तो तनवीर ने दोनों को काफी जलील किया. इस के बाद उस ने तारी से साफसाफ कह दिया कि अगर अब कभी वह यहां आया तो वह उसे ही नहीं, इमराना को भी जान से मार देगा.

इस के बाद वह बैग ले कर स्कूल चला गया. बेटे की इस धमकी को इमराना ने बड़ी गंभीरता से लिया. इस धमकी से तनवीर उसे रास्ते का कांटा लगा, इसलिए उस ने उसे हटाने का निर्णय ले लिया. इस के बाद शाम को उस ने तारी को फोन कर के जल्द से जल्द तनवीर को खत्म कर देने के लिए कह दिया.

अगले दिन यानी 22 फरवरी, 2014 को तनवीर सुबह 7 बजे घर से स्कूल के लिए निकला तो इमराना ने इस बात की जानकारी मोबाइल फोन द्वारा तारी को दे दी. तारी ने पहले ही अपने दोस्तों कुरबान और शहजाद से बात कर ली थी. इसलिए सूचना मिलते ही वह अपनी सैंट्रो कार से दोनों को साथ ले कर तनवीर की तलाश में तेलीवाला की ओर चल पड़ा. उन्हें कलियर रोड पर रतमऊ नदी के किनारे तनवीर जाता दिखाई दिया तो कुरबान और शहजाद ने उसे पकड़ लिया. तारी ने उस के गुप्तांग पर जोर से लात मारी तो वह बेहोश हो गया.

इस के बाद तीनों बेहोश तनवीर को कार में डाल कर रुड़की शहर के निकट वाटर स्पोर्ट्स कैंप ले गए. वहां कुरबान ने कार का पहिया खोलने वाले पाने से बेहोश तनवीर के चेहरे और सिर पर वार किए. इस के बाद बेहोशी की हालत में तारी और शहजाद ने तनवीर को उठा कर गंगनहर में फेंक दिया. उन्होंने यह भी नहीं देखा कि तनवीर मरा है या जिंदा. इस के बाद तीनों शिवदासपुर आ गए. घर लौट कर तारी ने इमराना को तनवीर की हत्या की सूचना दे दी थी.

इश्तिखार उर्फ तारी के बयान के बाद पुलिस ने छापा मार कर कुरबान और शहजाद को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. तनवीर की हत्या में प्रयुक्त सैंट्रो कार भी बरामद कर ली गई.

पुलिस इमराना को गिरफ्तार करने पहुंची तो वह अपने घर से फरार मिली. पुलिस ने थाने ला कर कुरबान और शहजाद से पूछताछ की गई तो उन्होंने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद प्रेसवार्ता में तनवीर हत्याकांड के तीनों अभियुक्तों को पत्रकारों के सामने पेश किया गया. इस प्रेसवार्ता में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते ने इस हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को ढाई हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की. इस के अगले दिन तारी, कुरबान और शहजाद को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

इस के बाद चौकीप्रभारी रघुबीर चौधरी को इमराना की तलाश थी. उन्होंने अपने मुखबिरों को उस के पीछे लगा दिया. 10 मार्च को अपने किसी मुखबिर की सूचना पर उन्होंने इमराना को धनौरी तिराहे से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में इमराना ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. सुबूत के लिए रघुबीर चौधरी ने तारी और इमराना के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स और लोकेशन भी निकलवा ली थी.

काल डिटेल्स से पता चला था कि दोनों में लंबीलंबी बातें होती थीं. तारी के मोबाइल फोन की लोकेशन भी घटनास्थल की मिली थी. पूछताछ के बाद पुलिस ने इमराना को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. इमराना और तारी ने सोचा था कि तनवीर की हत्या कर के इस का आरोप अपने दुश्मनों पर लगा देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि दुश्मनों के पास निर्दोष होने के पर्याप्त सुबूत थे. इसी का नतीजा था कि पुलिस असली हत्यारों तक पहुंच सकी.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रोशन न हो सका चोरी का चिराग

हरिद्वार में बेलवाला पुलिस चौकी के फोन की घंटी कुछकुछ देर बाद बज रही थी. 3 बार पहले भी लंबी रिंग के बाद बंद हो चुकी थी. तभी चौकी इंचार्ज प्रवीण रावत वहां पहुंच गए. पास खड़े सिपाही ने उन्हें सैल्यूट मारा. अपनी कुरसी पर बैठने से पहले रावत नाराज होते हुए बोले, “इतनी देर से फोन की घंटी बज रही है, उठाते क्यों नहीं हो?

“उसी का फोन है साहब जी…! सिपाही तुरंत खीजता हुआ बोला.

“किसका? रावत ने पूछा.

“जी साहब जी, उसी लेडी रेखा का! जिस का बच्चा 9 दिनों से लापता है! सिपाही बोला.

“रेखा का है, तो क्या हुआ? उसे जवाब नहीं देना है क्या? तब तक फोन की घंटी बंद हो चुकी थी.

“साहब जी, वह सुबह से दरजनों बार फोन कर चुकी है…मैं उसे जवाब देतेदेते तंग आ गया हूं…बारबार वही रट लगाए रहती है-मेरा बाबू कब मिलेगा… भूखा होगा…मेरा दूध कब पिएगा बाबू!

“अरे, वह मेरे मोबाइल पर भी कई बार कौल कर चुकी है….मैं ने उसे बात कर समझा दिया है. बोल दिया है कि उस का बच्चा जल्द उसे मिल जाएगा.’’ यह कहते हुए रावत अपनी कुरसी पर बैठ गए. वह अपने बगल में रखी फाइल के पन्ने पलटने लगे. तभी फिर फोन पर रिंग होने लगा. इस बार रावत ने ही फोन का रिसीवर उठाया.

“हैलो! बोलो…तुम्हें तो मैं ने आधा घंटा पहले ही बता दिया था न!… तुम्हारे बच्चे की तलाशी के लिए हम ने पुलिस की 4 टीमें लगा दी हैं…अभी मैं उन की ही रिपोर्ट देख रहा हूं. मैं मानता हूं कि बच्चे के बिना आप बेचैन हैं लेकिन बारबार फोन करने से बच्चा तो मिलेगा नहीं. तुम परेशान मत हो, जल्द तुम्हारा बच्चा मिल जाएगा…पुलिस पर भरोसा रखो और अपना भी ख्याल रखो…रोना-बिलखना बंद करो….!’’ यह कहते हुए रावत ने फोन कट कर दिया.

फोन पर रेखा को आश्वसन देने के बाद चौकी इंचार्ज ने पास रखे गिलास का पानी पी लिया और सिपाही से चाय मंगवाने के लिए कहा. सिपाही ने तुरंत औफिस अटेंडेंट को चाय के लिए आवाज लगा दी और रावत  फाइल देखने लगे. कुछ समय में चाय भी आ गई. चाय पर नजर डालते हुए रावत बोले,”अरे, बिस्कुट नहीं मंगवाया’’

“जी सर’’ कह कर सिपाही चुपचाप वहीं खड़ा रहा. रावत बोले “एक पैकेट कोई बिस्कुट ले आओ, और हां, दरोगाजी को यहां आने के लिए बोलते जाना.’’

“जी सर!’’ कहता हुआ सिपाही चला गया.

थोड़ी देर में रावत अपने सामने बैठे एसआई को फाइल के पन्ने पलटते हुए कुछ समझाने लगे. दरअसल, वह फाइल फोन करने वाली लेडी रेखा के बच्चे के लापता होने से संबंधित थी.

हर की पौड़ी से हुआ बच्चा चोरी

रेखा का बच्चा 17 जून, 2023 की आधी रात से ही गायब था. इस की जानकारी उसे 18 जून की सुबह 5 बजे तब हुई, जब वह सो कर उठी. गरमी का मौसम होने के कारण 38 वर्षीया रेखा अपने 6 माह के बेटे अभिजीत के साथ घर के बाहर सोई हुई थी. सुबह उस की नींद खुली तब उस ने पाया कि बेटा पास में नहीं था.

बच्चे को नहीं पा कर उस ने बगल में ही सो रहे अपने पति शिव सिंह को जगाया. रेखा का देवर भोटानी भी उस से कुछ दूरी पर ही सोया हुआ था. बच्चे अभिजीत के लापता होने के कारण तीनों घबरा गए. वे समझ नहीं पा रहे थे कि बच्चा आखिर गया कहां?

वह घुटने और हाथ के बल ही चल पाता था. उसे रेखा ने अपने और पति के बीच में सुलाया था. बिछावन भी जमीन से ऊंचाई पर था. वहां से वह खुद नहीं उतर सकता था. उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि उन का बच्चा किसी ने चुरा लिया है.

यह घटना उत्तराखंड में हरिद्वार स्थित हर की पौडी के निकट ऊर्जा निगम कार्यालय के परिसर की है. धार्मिक स्थान होने के कारण उस समय स्थानीय लोग हर की पौड़ी के निकट पूजाअर्चना और गंगा आरती देखने में व्यस्त थे. चारों ओर लाउडस्पीकरों से भजन और मंदिरों से घंटे घड़ियाल की तेज आवाज आ रही थी. यह स्थान हरिद्वार नगर कोतवाली की रोडी बेलवाला पुलिस चौकी के अंतर्गत आता है.

रेखा अपने पति शिव सिंह और देवर भोटानी के साथ आसपास के क्षेत्र में बच्चे की तलाश करने लगी. वे एकदम बदहवास से हो गए थे. रेखा काफी बदहवास थी. बारबार दुपट्टे से आंखों से आंसू पोछे जा रही थी. जब भी उन्हें आसपास कोई छोटा बच्चा दिखता उसे गौर से देखने लगती.

हर की पौड़ी के निकट वे एक घाट से दूसरे घाट पर घूमघूम कर बच्चे को तलाश करते रहे, मगर उन्हें उन का बच्चा नहीं मिला. उस बारे में कोई जानकारी भी नहीं मिली. जबकि वह सैकड़ों रहागीरों से अपने बच्चे के बारे में पूछ चुकी थी.

इसी प्रकार 3 घंटे बीत चुके थे. अंत में वे तीनों थक हार कर रोडी बेलवाला पुलिस चौकी गए. वहां पर चौकी प्रभारी प्रवीण रावत से मिल कर अपनी परेशानी बताई. उन्होंने प्रवीण रावत को बच्चा चोरी होने की शिकायत दर्ज कर उस की तलाशी की गुहार लगाई.

अपने इलाके से बच्चा चोरी होने की बात सुन कर प्रवीण रावत चौंक पड़े. उन से बच्चे के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद रावत ने उस स्थान पर जा कर मुआयना किया जहां तीनों रात में सोए थे. इस के बाद रावत ने वहां पर आसपास रहने वाले लोगों से बच्चे के बारे में पूछताछ की. रावत ने रेखा के मोबाइल से बच्चे की कई तस्वीरें अपने मोबाइल में वाट्सएप करवा लीं.

बच्चे को तलाशने में जुटी पूरे जिले की पुलिस

जब प्रवीण रावत को लापता बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, तब उन्होंने इस मामले की जानकारी कोतवाल हरिद्वार भावना कैंथोला को भी दी. भावना कैंथोला ने सब से पहले बच्चे अभिजीत के चोरी होने की जानकारी सीओ (सिटी) जूही मनराल, एसपी सिटी स्वतन्त्र कुमार तथा एसएसपी अजय सिंह को भी दे दी. रावत ने इस मामले में उन का काररवाई से संबंधित आदेश और दिशानिर्देश भी मांगा.

अजय सिंह के निर्देश पर भावना कैंथोला ने बच्चा चोरी की घटना का बच्चे के हुलिए सहित प्रसारण हरिद्वार पुलिस कंट्रोल के वायरलैस द्वारा करवा दिया. इस के बाद कैंथोला ने कुछ पुलिसकर्मियों को बच्चे की तलाश में रेलवे स्टेशन तथा स्थानीय बस अड्डों पर भी भेज दिया.

बच्चे के परिजन तथा पुलिस वाले शाम तक बच्चे की तलाश करते रहे, मगर शाम तक पूरा हरिद्वार छान लेने के बाद भी पुलिस को लापता बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई. हालांकि हरिद्वार पुलिस पिछले 6 माह में लापता 3 बच्चों को सकुशल बरामद कर उन के परिजनों को सौंप चुकी थी. रेखा का लापता बेटे की उम्र मात्र 6 माह ही थी. इसे देखते हुए एसएसपी अजय सिंह ने उस की सकुशल बरामदगी करने के लिए मेला नियंत्रण कक्ष में अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की एक मीटिंग बुलाई.

इस मीटिंग में एसपी (सिटी) स्वतंत्र कुमार, सीओ जूही मनराल, कोतवाल नगर भावना कैंथोला, एसपी (क्राइम) रेखा यादव, सीआईयू प्रभारी रणजीत तोमर तथा एसएसपी के जन संपर्क अधिकारी विपिन चंद पाठक शामिल हुए थे. बैठक में ही गहन विचार विमर्श हुआ कि बच्चे की तलाशी किस प्रकार से की जाय. इसी के साथ एकमत से एक निर्णय लिया गया.

साथ ही अजय सिंह ने सीआईयू प्रभारी को सब से पहले ऊर्जा निगम की कालोनी से ले कर रेलवे स्टेशन व बस अड्डे जाने वाले मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरे चेक करने का निर्देश दिया. इस के बाद उन्हें वहां पर बच्चे के लापता होने वाले स्थान का साइट से डाटा जुटाने के निर्देश दिए.

कोतवाल भावना कैंथोला ने रेखा के देवर भोटानी पुत्र धर्म सिंह निवासी अंबेडकर नगर, थाना विजय नगर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश की तहरीर पर बालक अभिजीत के चोरी होने का मुकदमा भादंवि धारा 363 के अंतर्गत अज्ञात चोरों के खिलाफ दर्ज कर लिया.

इस प्रकरण की विवेचना थानेदार सुनील रावत को सौंपी गई थी. भोटानी ने पुलिस को बताया कि वह अपने भाई शिव सिंह, भाभी रेखा तथा अपने 6 माह के भतीजे अभिजीत के साथ गत 15 जून, 2023 को हरिद्वार घूमने के लिए आया था. इसी दौरान 17 व 18 जून 2023 की मध्य रात्रि में उस का भतीजा चोरी हो गया.

तकनीकी जांच के सहारे आगे बढ़ती रही जांच इस तरह तमाम जानकारी के बाद सीआईयू प्रभारी रणजीत तोमर, सीआईयू के सिपाहियों सतीश नौटियाल और निर्मल बच्चा चोरी वाली जगह पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाने में लग गए.

इस के साथ ही भावना कैंथोला ने घटनास्थल से ले कर रेलवे स्टेशन व रोडवेज बस स्टैंड तक लगे लगभग डेढ़ सौ सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को चेक किया. हरिद्वार में चूंकि बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन आमनेसामने ही हैं. अत: वहां पर लगे कैमरों की फुटेज को पुलिस चेक करने में जुट गई.

इस तरह से की गई गहन छानबीन के तहत तोमर ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों को चेक किया. उन्होंने पाया कि कुछ मोबाइल नंबर ऐसे भी थे, जो घटनास्थल के पास भी चले थे और हरिद्वार रोडवेज बस स्टैंड के पास भी उन नंबरों से बातचीत हुई थी. इस के अलावा हर की पौड़ी के निकट कुछ लोग बाद में रेलवे स्टेशन से व बसों द्वारा वापस जाते दिखाई दिए.

वापस जा रहे इन लोगों की छानबीन करने के लिए पुलिस की 4 टीमों का गठन किया था. इन टीमों को संदिग्ध लोगों के मोबाइल की जानकारी करने के लिए लगाया गया था. इस के अलावा पुलिस ने कुछ मुखबिरों को भी लगा दिया था. हरिद्वार जिले की आधी से ज्यादा पुलिस फोर्स बच्चे की तलाश में जीजान से जुट गई थी. फिर भी एक सप्ताह बीत जाने पर भी कोई सुराग नहीं मिल पाया था.

इधर बच्चे के लापता होने के गम में रेखा का रोरो कर बुरा हाल हो गया था. वह बारबार पुलिस को फोन कर बच्चे के बारे में पूछती रहती थी. उस की स्थिति विक्षिप्तों जैसी हो गई थी. पति और देवर भी बारबार थाने का के चक्कर लगा रहे थे. वे अपने स्तर से भी बच्चे की तलाशी के लिए हर की पौड़ी, रेलवे स्टेशन, बाजार, बस स्टैंड आदि जगहों पर दिन में कई बार चक्कर काट चुके थे. यहां तक कि लक्ष्मण झूला तक जा चुके थे.

जांचपड़ताल से मिली जानकारियों के आधार पर तैयार हो चुकी मोटी फाइल का अध्ययन करते हुए रावत को कुछ मोबाइल नंबरों पर संदेह हुआ. वे नंबर शक के दायरे में इसलिए आ गए थे, क्योंकि घटना के दिन कुछ समय बाद ही वह स्विच्ड औफ हो गए थे. पुलिस की 2 टीमें उन मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाने में लगी हुई थी.

वह 29 जून, 2023 का दिन था. सीआईयू प्रभारी रणजीत तोमर और कोतवाल भावना कैंथोला को भी बच्चा चोरी के मामले में एक मोबाइल नंबर पर शक हो रहा था. उन्होंने उस मोबाइल नंबर के बारे में पूरी जानकारी जुटाने की योजना बनाई.

वह मोबाइल नंबर दिल्ली के थाना छावला निवासी प्रसून कुमार पुत्र प्रमोद कुमार का निकला. उन के बारे में आगे की जानकारी लेने के लिए पुलिस की 2 टीमें दिल्ली जा पहुंचीं. जल्द ही उन का पता मालूम हो गया.

स्थानीय लोगों ने हरिद्वार पुलिस को बताया कि प्रसून कुमार दिल्ली में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता है. उस की बीवी प्रीति काफी अरसे से दिल्ली के कुतुब विहार क्षेत्र में एक ब्यूटी पार्लर चलाती है. इस के अलावा हरिद्वार पुलिस को यह भी जानकारी मिली थी कि कुछ दिन पहले प्रीति ने एक पुत्र को जन्म दिया था.

हरिद्वार पुलिस पहुंची दिल्ली

यह जानकारी मिलते ही हरिद्वार पुलिस दिल्ली के दंपति प्रसून और प्रीति के घर जा धमकी. इस से पहले उन्होंने उन के मोबाइल नंबर की लोकेशन का विश्लेषण किया. उस से पता चला कि वे बच्चा गायब होने वाले दिन हरिद्वार में थे.

इस बारे में हरिद्वार पुलिस टीम ने एसएसपी अजय सिंह से विचार विमर्श किया. इस के बाद अजय सिंह ने उन्हें आगे की छानबीन के निर्देश दिए. हरिद्वार पुलिस प्रसून के मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर दिल्ली के मकान नं. 422, कुतुब विहार, गोयल डेरी जा धमकी और उसे गिरफ्तार कर लिया.

प्रसून से जब पुलिस ने बच्चा चुराने की बाबत सख्ती से पूछताछ की, तब उस ने जल्द ही अपना अपराध स्वीकार लिया. साथ ही इस में अपनी पत्नी का हाथ होना बताया.

इस के बाद हरिद्वार पुलिस ने प्रसून की निशानदेही पर उस के घर में सोए बच्चे अभिजीत को बरामद कर लिया. साथ ही दूसरी आरोपी प्रसून की पत्नी प्रीति को महिला सिपाही गुरप्रीत ने हिरासत में ले लिया. बच्चा समेत बच्चा चोर दंपति को जांच टीम हरिद्वार ले आई.

इस तरह से हरिद्वार पुलिस ने बच्चा चोरी की गुत्थी को सुलझा लिया था. बच्चे के लापता होने के 14वें दिन रेखा व शिव सिंह को उन का बच्चा सौंप दिया.

हरिद्वार में आने के बाद प्रसून व प्रीति से एसएसपी अजय सिंह ने बच्चा चुराने की सिलसिलेवार जानकारी ली. इस पूछताछ में प्रीति ने पुलिस से कुछ भी नहीं छिपाया और बच्चा चुराने की घटना को पुलिस के सामने सचसच ब्यान कर दिया. प्रीति ने हरिद्वार पुलिस को जो जानकारी दी, वह इस प्रकार है-

सास के तानों से परेशान हो कर चुराया बच्चा

प्रीति चौडा गांव, जिला संभल, उत्तर प्रदेश की रहने वाली है. प्रसून उस का दूसरा पति है. इस से 16 साल पहले उस की शादी दिल्ली निवासी प्रवीण कुमार से हो चुकी थी. प्रवीण से उस के 2 बच्चे हुए. कुछ दिन बाद प्रवीण से प्रीति का मनमुटाव हो गया और उन के बीच तलाक हो गया. पहले पति से तलाक होने के बाद प्रीति ने भविष्य में संतान नहीं होने के लिए औपरेशन भी करा लिया था.

जब प्रसून से उस की दूसरी शादी हुई तब 2 साल बाद उसे ससुराल में ताने मिलने लगे. सास ने उस की नाक में दम कर दिया. प्रीति ने सास को अपने औपरेशन के बारे में जानकारी नहीं दी थी. परिवार के वारिस न होने के कारण सास के ताने दिनप्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे. एक दिन तो सास ने बच्चा नहीं होने के कारण उसे घर से ही निकाल दिया.

बच्चे की लालसा में प्रीति अकसर परेशान रहने लगी थी. उस का 12 जून, 2023 को अपने पति प्रसून के साथ दिल्ली से हरिद्वार जाना हुआ. उस ने हरिद्वार में रह कर कोई छोटा बच्चा चुराने की योजना बना रखी थी.

17 जून, 2023 की आधी रात को उसे तब मौका मिल गया जब उस ने ऊर्जा निगम परिसर में एक महिला को अपने बच्चे के साथ बेसुध अवस्था में सोते हुए देखा. मौका मिलते ही प्रीति ने चुपचाप बच्चे को गोद में उठा लिया और अपने पति के साथ बस द्वारा दिल्ली चली गई.

इतनी बात बताते बताते प्रीति भावुक हो गई. इस के बाद इस घटना के विवेचक सुनील रावत ने प्रीति के यह बयान रिकौर्ड कर लिए. बाद में पुलिस ने प्रीति के कब्जे से वह मोबाइल फोन जिस में बच्चा चोरी से संबंधित बातचीत रिकौर्ड हुई थी, बरामद कर लिया.

एसएसपी अजय सिंह ने मेला नियंत्रण कक्ष में एक प्रैसवार्ता आयोजित कर बच्चे अभिजीत की चोरी की घटना के खुलासे की जानकारी सार्वजनिक कर दी. अगले दिन पहली जुलाई, 2023 को पुलिस ने प्रसून व प्रीति को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अंधविश्वास में गई जान

उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार में ज्वालापुर स्थित झाडान के बाजार की दुकानें बंद होने का समय हो चुका था. रात के 8 बज चुके थे. सभी दुकानदार अपनीअपनी दुकानें बंद करने लगे थे. उन्हीं में दुकानदार रवि अपने पास की दुकान से शोरशराबा सुन कर चौंक गए. उन्होंने उस ओर एक नजर देखा, फिर फटाफट अपनी दुकान बंद की और वहां तुरंत जा पहुंचे. वहां पहले से ही कुछ लोग जमा थे.

उन से ही रवि को मालूम हुआ कि स्थानीय व्यापारियों के नेता रहे स्वर्गीय अरविंद मंगल की 60 वर्षीया पत्नी सुनीता मंगल अपने घर से अचानक लापता हो गई हैं. सभी को अचरज हो रहा था कि वह कहां गई होगी? सुबह तो अपने ही घर पर ही दिखाई दी थी. कुछ लोगों ने बताया कि करीब 10 बजे के बाद वह नहीं देखी गई. लोगों से बातचीत में ही रवि को यह भी पता चला कि कुछ दिन पहले उन के घर पर मरम्मत और रंगाईपुताई का काम हुआ था.

सुनीता मंगल हुईं लापता

सुनीता मंगल एक संयुक्त परिवार की बुजुर्ग महिला थीं. उन का छोटा बेटा निखिल मंगल नोएडा में नौकरी करता था. सुनीता बड़े दिवंगत बेटे आशुतोष मंगल के 12 साल के बेटे वंश के साथ रहती थी. वंश एक स्थानीय स्कूल में पढ़ाई करता था. थोड़े समय में ही वहां और भी कई दुकानदार जमा हो गए.

सभी ने सुनीता के घर जाने का एकमत से फैसला लिया. वहां से सुनीता का घर थोड़ी दूरी पर था. कुछ समय में सभी उस के घर पर थे. वहां 12 वर्षीय वंश अकेला था. उस ने बताया कि वह सुबह स्कूल चला गया था. दोपहर को वापस घर लौटने पर पाया कि दादी नहीं हैं. फिर उस ने दादी को मोहल्ले में आसपास तलाश किया. मगर उसे दादी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. इस बारे में उस ने चाचा निखिल को फोन से बता दिया था, जो वह नोएडा में थे.

इसी बीच रवि ने सुनीता मंगल के लापता होने की जानकारी सीओ (ज्वालापुर) निहारिका सेमवाल को दे दी. निहारिका सेमवाल ने तुरंत इस बाबत कोतवाल ज्वालापुर कुंदन सिंह राणा और एसएसआई संतोष सेमवाल को मौके पर पहुंच कर मामले की जांच के आदेश दिए. राणा तुरंत पुलिस फोर्स के साथ सुनीता मंगल के घर जा पहुंचे.

कोतवाल राणा और एसएसआई संतोष सेमवाल ने वंश से सुनीता के बारे में पूछताछ की. वंश ने जो कुछ बताया उसे बयान के तौर पर नोट कर लिया गया. उस के बाद राणा और सेमवाल ने पड़ोसियों से सुनीता के बारे में पूछताछ की. उसी दरम्यान वहां सीओ निहारिका सेमवाल और एसपी (क्राइम) रेखा यादव भी पहुंच गईं. उन्होंने भी वंश से पूछताछ की.

इसी बीच वंश के चाचा का फोन आ गया कि वह नोएडा से निकल चुके हैं. ढाईतीन घंटे में ज्वालापुर पहुंच जाएंगे. रेखा यादव ने ज्वालापुर से सुनीता मंगल के लापता होने की जानकारी जिले के एसएसपी अजय सिंह को भी दी. अगले दिन 9 मई, 2023 को एसएसआई संतोष सेमवाल और सीआईयू के प्रभारी रणजीत तोमर ने सब से पहले लापता सुनीता मंगल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने की काररवाई की.

पेंटर नसीम ने स्वीकारा जुर्म

इस के बाद सुनीता के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच करवाई गई. सीसीटीवी फुटेज में पुलिस को एक सुराग मिला, जो सुनीता के एक व्यक्ति के साथ बैट्री रिक्शा से पथरी रोह गंगनहर की ओर जाने का पता चला. पुलिस ने उस समय उस रिक्शा में सुनीता के साथ बैठे व्यक्ति की पहचान जानने की शुरुआत की.

10 मई, 2023 को सुनीता के मोबाइल की काल डिटेल्स भी आ गई, जिस में एक नया नंबर भी था. उस नंबर की जांचपड़ताल से मालूम हुआ कि वह नंबर ज्वालापुर में ही मोहल्ला पावधोई निवासी पेंटर नसीम का है. पेंटर नसीम की तलाश शुरू की गई. निखिल से मालूम हुआ कि नसीम ने कुछ कुछ दिन पहले उस के घर की रंगाईपुताई की थी. वह अपने पिता के साथ मिल कर इस काम को करता है.

नसीम का उस के घर अकसर आनाजाना होता था. कई बार वह पैसे उधार लेने के लिए आता था. सुनीता के बेटे ने नसीम को अपने घर के सदस्य जैसा बताया. उसी दिन शाम को निहारिका सेमवाल ने नसीम को कोतवाली ज्वालापुर पूछताछ के लिए बुलवा लिया. नसीम से सुनीता के बारे में पूछताछ की जाने लगी.

निहारिका ने सीधा सवाल किया, “तुम्हारी 8 मई को मोबाइल पर सुनीता से क्या बात हुई थी? उसी रोज तुम सुनीता के साथ बैट्री रिक्शा में बैठ कर कहां गए थे?”

इस सवाल का नसीम ने कोई जवाब नहीं दिया. नसीम को शांत खड़ा देख पास खड़े कुंदन सिंह राणा ने डांटते हुए पूछा, “क्या सुनीता मंगल के लापता होने में तुम्हारा हाथ है? सचसच बताओ वह कहां है? वरना हमें मुंह खुलवाना भी आता है.”

इस डांट का नसीम पर असर हुआ. वह डर से कांपने लगा. हकलाता हुआ बोला, “जी साहबजी, सब कुछ बताऊंगा, एक गिलास पानी चाहिए.”

“सामने रखा है, पी लो…और पूरी बात बताओ वरना पानी पिलापिला कर डंडे लगाऊंगा.” राणा ने सामने टेबल पर रखे पानी भरे गिलास की ओर इशारा कर डपटते हुए बोले.

नसीम ने गटागट पानी पीने के बाद लंबी सांस ली. कुछ सेकेंड के लिए रुका, फिर बोला, “साहबजी, वह इस दुनिया में नहीं है.”

“इस दुनिया में नहीं है! क्या मतलब है तुम्हारा?” निहारिका ने चौंकते हुए पूछा.

“जी मैडम, वह गंगनहर में डूब गई है.” नसीम बोला.

“डूब गई है? तुम ने डुबाया है?” गुस्से में राणा बोले.

“जी,” नसीम का ‘जी’कहना था कि राणा और निहारिका चौंक गए. उन्होंने एक साथ पूछा, “कैसे डुबाया? क्यों किया ऐसा, पूरी बात बताओ.”

राणा उस का बयान नोट करने के लिए तख्ती पर लगा सादा कागज संभालने लगे. पेन का ढक्कन खोलते हुए बोले, “चलो, बताओ.”

नसीम ने चुरा ली थी ज्वैलरी

नसीम ने पहले अपना पूरा परिचय लिखवाया. परिचय में पिता के नाम के साथ उस ने पूरा पता दिया. उस के बाद उस ने जो बताया, वह चौंकाने वाली थी.

अरविंद मंगल के परिवार से नसीम के परिवार के अच्छे संबंध चले आ रहे थे. मंगल परिवार के तथा उन के कई परिचितों के घरों पर नसीम ही रंगरोगन और पेंट करता था. कुछ दिन पहले ही सुनीता मंगल ने अपने मकान में मरम्मत करवाया था. इस के बाद उन्होंने 15 दिन पहले मकान में पेंट करने के लिए फिर फिर नसीम को बुलवाया. उन्होंने नसीम को पेंट का सामान खरीदवा लिया.

इस के बाद नसीम ने सुनीता मंगल के घर पर पेंट करना शुरू कर दिया. एक कमरे में पेंट करते वक्त नसीम को वहां एक अलमारी की चाबी पड़ी मिली. जब उस ने चुपचाप अलमारी के लौकर में वह चाबी लगाई तो लौकर खुल गया. लौकर में उस वक्त सोने के कुंडल, अंगूठी, लौंग, पैंडल, पायल आदि आभूषण थे, जिन्हें उस ने चुरा लिया था.

इस घटना के 2 दिन बाद सुनीता ने नसीम को बुला कर कहा, “मेरे घर से लाखों रुपए के आभूषण चोरी हो गए हैं. क्या तुम्हें इस की कोई जानकारी है?”

इस के बाद नसीम ने सुनीता को इस बाबत में कोई जानकारी नहीं होने की कह कर टाल दिया, मगर अंदर ही अंदर उसे पकड़े जाने का डर भी सता रहा था.

7 मई, 2023 को उस ने सुनीता से कहा कि पथरी रोड के पास एक तांत्रिक रहता है, वह यह बात बता देगा कि तुम्हारे जेवर किस ने चुराए हैं. तांत्रिक के पास जाने के बहाने नसीम की योजना सुनीता मंगल को गंगनहर के तेज बहाव में धक्का देने की थी.

8 मई, 2023 को सुबह 8 बजे नसीम और सुनीता मंगल बैट्री रिक्शा द्वारा गंगनहर के किनारेकिनारे पथरी रोड पुल के पास पहुंचे थे. यहां पर नसीम ने तांत्रिक से मिलने से पहले सुनीता के कुंडल व अंगूठियां उतरवा ली. इस के बाद उस ने सुनीता मंगल को मां गंगा में जल चढ़ाने के बहाने गंगनहर के तेज बहाव में धक्का दे दिया. जिस से वह पानी में डूब गई.

सुनीता मंगल की हुई लाश बरामद

कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने नसीम के ये बयान दर्ज कर लिए थे और नसीम की निशानदेही पर सुनीता मंगल के घर से चुराए हुए सभी जेवर भी बरामद कर लिए. उसी दिन शाम को ही पथरी रोड पुल के पास से ही सुनीता मंगल का शव पुलिस ने बरामद कर लिया. ज्वालापुर पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम हेतु हरिमिलापी अस्पताल, हरिद्वार भेज दिया.

अगले दिन पुलिस ने सुनीता की गुमशुदगी के मामले में आईपीसी की धारा 379, 411 व 302 की बढ़ोतरी कर दी थी. इस के बाद एसएसपी अजय सिंह ने अपने रोशनाबाद स्थित कार्यालय में प्रैसवार्ता के दौरान नसीम को मीडिया के सामने पेश किया और सुनीता मंगल हत्याकांड का परदाफाश कर दिया.

नसीम के लालच व विश्वासघात के कारण जहां एक ओर सुनीता मंगल को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था तो दूसरी ओर नसीम भी हरिद्वार जेल में अपने किए की सजा भुगत रहा है. अपर सत्र न्यायालय द्वारा नसीम की जमानत की याचिका खारिज कर दी थी.

सुनीता मंगल को अपने घर में हुई ज्वैलरी की चोरी का शक पहले से ही नसीम पर था, मगर सुनीता चाहती थी कि बिना शोर मचाए नसीम उन के जेवरों को वापस कर दे, मगर नसीम भी शातिरदिमाग का निकला. उस ने सुनीता मंगल के जेवर उसे वापस करने के बजाए उसे गुमराह कर के मौत के घाट उतार दिया था. 2 बच्चों का बाप नसीम अब हरिद्वार जेल में बंद है.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित