Crime Stories: गहरी साजिश – परिवार हुआ शक का शिकार

सूरज की परेशानी की वजह थी दादा और बहन प्रीति की हुई रहस्यमय मौत. उसे शक था कि मौत स्वाभाविक नहीं, बल्कि साजिश परिवार द्वारा की गई है. जिसके कारण वह अपने घर में किसी को भी मन की बात बता नहीं पाया.

सोचसोच कर जब वह काफी परेशान रहने लगा तो एक दिन अपने नजदीकी थाना झबरेड़ा पहुंच गया. यह थाना उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के अंतर्गत आता है.उस ने थानाप्रभारी रविंद्र कुमार से मुलाकात कर अपने मन की बात बताई. सूरज ने बताया कि वह मानकपुर आदमपुर में रहता है और एक कंपनी में काम करता है. उस ने बताया कि उस के दादा महेंद्र (70 साल) पूरी तरह स्वस्थ थे. वह 2 नवंबर, 2020 की रात को खाना खा कर सोए थे और अगली सुबह बिस्तर पर मृत मिले. इसी तरह 6 दिसंबर, 2020 की सुबह को उस की 21 वर्षीय बहन प्रीति भी बिस्तर पर मृत मिली. इन दोनों की स्वाभाविक मौत पर उसे शक है.

‘‘तुम्हारे घर में कौनकौन रहता है?’’ थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने उस से पूछा ‘‘सर अब तो मेरी परिवार में केवल मेरी बीबी रिया, मेरी 2 वर्षीया बेटी सोनी तथा मेरी मां कैमता ही हैं. वर्ष 2014 में मेरे पिता अरविंद कुमार की हार्टअटैक से मौत हो चुकी है.’’ सूरज ने बताया  ‘‘तुम्हारी शादी कब हुई थी?’’

‘‘सर मेरी शादी साल 2018 में सहारनपुर के गांव दुगचाड़ी निवासी रिया उर्फ अन्नू के साथ हुई थी. मेरे घर में दुलहन बन कर आने के बाद रिया अकसर चिल्लाने लगती थी और कहती थी कि मुझे कोई प्रेतात्मा बुला रही है. वह मुझे अपने साथ ले जाने के लिए कह रही है. इस तरह से रिया का चीखनाचिल्लाना अभी तक जारी है.’’ सूरज बोला ‘क्या तुम्हें किसी पर शक है?’’ रविंद्र कुमार ने पूछा.

‘‘हां सर, मुझे शादी के बाद से ही मेरी बीवी रिया द्वारा प्रेतात्मा का डर दिखा कर डराया जाता रहा है. इस के अलावा हमारे पड़ोस में रहने वाले युवक रोहित उर्फ राजू से मेरी बीबी रिया की नजदीकियां पिछले साल से काफी बढ़ गई हैं. मुझे कुछ महीने पहले मेरे पड़ोसियों से पता चला कि मेरी रात की ड्यूटी के दौरान रोहित अकसर हमारे घर आता है.’’ सूरज बोला‘तुम्हें अपनी पत्नी पर ही शक क्यों है?’’ रविंद्र कुमार बोले

‘‘10 दिन पहले रिया गांव दुगचाड़ी अपने स्थित मायके गई थी. इसी दौरान मैं कुशलक्षेम पूछने के लिए रिया का को फोन करता था, तो उस का नंबर कई बार 20-25 मिनट तक बिजी मिलता था. वह शायद अपने प्रेमी रोहित से ही बात करती होगी. मुझे शक है कि उसी ने ही कोई साजिश रची होगी.’’

इस के बाद थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार ने सूरज से पूछ कर उस की बीवी रिया व उस का मोबाइल नंबर नोट कर लिया और उसे यह कहते हुए घर भेज दिया कि हम पहले इस प्रकरण की अपने स्तर से जांच कर लें, इस के बाद कानूनी काररवाई करेंगे. सूरज के जाने के बाद रविंद्र सिंह ने इस मामले की जानकारी सीओ अभय प्रताप सिंह व एसपी (देहात) स्वप्न किशोर सिंह को दी.

इस मामले में हरिद्वार के एसपी (देहात) स्वप्न किशोर सिंह ने रविंद्र कुमार से कहा कि चूंकि महेंद्र व प्रीति की मौत को सामान्य मानते हुए उन के परिजन पहले ही उन का अंतिम संस्कार कर चुके हैं, अत: अब इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का तो प्रश्न ही नहीं उठता. फिलहाल तुम रिया व रोहित के मोबाईलों की पिछले 2 महीनों की कालडिटेस निकलवा लो और मुखबिरों से भी जानकारी हासिल करो.

रविंद्र कुमार ने ऐसा ही किया. 2 दिन बाद पुलिस को रिया व रोहित के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स भी मिल गई. पता चला कि रोहित और रिया की वक्तबेवक्त काफी देर तक बातें हुआ करती थीं. मुखबिरों से जानकारी मिली कि रोहित सहारनपुर के गांव मुंडीखेड़ी के रहने वाले रतन का बेटा है.

काफी पहले से वह अपने नाना के घर गांव मानकपुर आदमपुर में रहता है. रोहित अपराधी किस्म का है तथा उस के खिलाफ सहारनपुर व मुजफ्फरनगर जिलों के कई थानों में चोरी, जालसाजी व धमकी देने के मुकदमे दर्ज हैं.यह जानकारी थानाप्रभारी रविंद्र सिंह ने सीओ अभय प्रताप सिंह को दी, तो उन्होंने तत्काल रिया व रोहित को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने के निर्देश दिए. तब रविंद्र कुमार ने सूरज को मिलने के लिए थाने में आने को कहा, लेकिन सूरज थाने नहीं आया.

इस के बाद 16 दिसंबर, 2020 को थानाप्रभारी रविंद्र कुमार, एसआई संजय नेगी, मोहन कठैत, कांस्टेबल नूर मलिक व मोहित ने रोहित को उस के घर के पास से गिरफ्तार कर लिया.थाने ला कर उस से महेंद्र व प्रीति की रहस्मय मौतों के बारे में पूछताछ की. पूछताछ के दौरान रोहित अनभिज्ञता जताता रहा. अगले दिन पुलिस ने रिया को भी उस के घर से हिरासत में ले लिया. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने जब रोहित व रिया को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की तो दोनों थरथर कांपने लगे. इस के बाद रिया व रोहित ने महेंद्र व प्रीति की मौत के मामले में अपनी अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली.

रिया ने पुलिस को बताया कि काफी पहले से वह नशे की आदी थी और खुद पर प्रेतात्मा आने का नाटक करती रहती थी. पति सूरज उस की और कम ध्यान देता था. उस ने बताया कि वह अकसर पड़ोस में रहने वाले रोहित से बातें करती थी. धीरेधीरे उन दोनों में प्यार हो गया था. कुछ दिनों बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे.

रिया ने बताया कि वह और रोहित नशे की गोलियों का सेवन करते थे. जिस दिन मेरा पति सूरज रात की ड्यूटी पर फैक्ट्री जाता था तो वह अपनी सास व ससुर को रात के खाने में नींद की गोलियां डाल कर खिला देती थी. जब वे दोनों नशे में सो जाते थे तो फोन कर के रोहित को अपने घर बुला लेती थी.लेकिन एक दिन रात को ददिया ससुर महेंद्र ने रोहित को घर से निकलते हुए देख लिया था. अपनी पोल खुलने के डर से वह घबरा गई और इस के बाद उस ने व रोहित ने ददिया ससुर महेंद्र की हत्या की योजना बनाई.

2 नवंबर, 2020 की रात को योजना के अनुसार, उस ने अपनी सास व ददिया ससुर महेंद्र के खाने में नींद की गोलियां मिला कर उन्हें खाना खिला दीं. उस दिन उस का पति सूरज रात की ड्यूटी पर फैक्ट्री गया हुआ था. उस रात रोहित उस के घर आ गया था. इस के बाद उन दोनों ने महेंद्र की तकिए से मुंह दबा कर हत्या कर दी.

इस के बाद दोनों ने महेंद्र के शव को चारपाई पर लिटा कर उन के ऊपर चादर डाल दी थी, जिस से परिजन उसे सामान्य मौत समझें और किसी को शक न हो. अगले दिन महेंद्र की मौत को सूरज और उस के घर वालों ने सामान्य मौत समझते हुए उन का अंतिम संस्कार कर दिया था.दादा महेंद्र की मौत के बाद सूरज ने फैक्ट्री जाना छोड़ दिया था और घर पर ही रहने लगा था. दादा की मौत के बाद सूरज को लगता था कि दादा महेंद्र एकदम ठीकठाक थे, कोई बीमारी भी नहीं थी तो अचानक उन की मृत्यु कैसे हो गई. वह दादा को बहुत चाहता था, इसलिए उन की मौत के बाद उसे बहुत दुख हुआ.

सूरज की एक बहन थी प्रीति, जो भटौल गांव में रहने वाले मामा के घर रह कर पढ़ाई कर रही थी. वह बीए अंतिम वर्ष में थी. सूरज ने उसे मामा के घर से बुला लिया.ददिया ससुर की हत्या के आरोप से रिया साफ बच गई थी क्योंकि घर वालों ने उन की मौत को स्वाभाविक मान लिया था, इसलिए रिया की हिम्मत बढ़ गई थी. प्रेमी रोहित से उस का मिलना पहले की तरह जारी रहा.

वह घर के सभी लोगों को खाने में नींद की गोलियां देने के बाद प्रेमी को अपने घर बुला लेती. लेकिन एक रात प्रीति की नींद खुल गई तो उस ने भाभी के कमरे से किसी मर्द की आवाज सुनी.प्रीति को शक हुआ कि जब सूरज भैया रात की ड्यूटी पर गए हैं तो भाभी के कमरे में मर्द कौन है. उस ने खिड़की से झांका तो कमरे में उस की भाभी रोहित के साथ मौजमस्ती कर रही थी.

इसी बीच रिया को आहट हुई तो वह फटाफट कपड़े पहन कर दरवाजे के बाहर आई तो उस ने प्रीति को वहां से अपने कमरे की तरफ जाते देखा. इस से रिया को शक हो गया कि प्रीति ने उसे रोहित के साथ देख लिया है.यह बात उस ने प्रेमी रोहित को बताई तो रोहित ने दादा की तरह प्रीति को भी ठिकाने लगाने की सलाह दी. रिया इस के लिए तैयार हो गई. इस के बाद रिया ने दादा महेंद्र की तरह प्रीति को भी ठिकाने लगाने की योजना बनाई ताकि प्रेमी से उस के मिलन में कोई बाधा न आए.

सूरज रात की ड्यूटी पर गया था. रिया ने मौका देख कर योजना के मुताबिक 5 दिसंबर, 2020 को अपनी सास व प्रीति के खाने में नींद की गोलियां मिला कर दे दीं. रात को जब प्रीति को नींद आ गई तो रिया ने रोहित के साथ मिल कर तकिए से प्रीति का दम घोट हत्या कर दी. इस के बाद रोहित चला गया. फिर रिया ने स्वयं पर प्रेतात्मा आने का नाटक करते हुए चीखनाचिल्लाना शुरू कर दिया. पति के घर आने पर उस ने कहा कि प्रीति को कुछ हो गया है.

रिया ने पुलिस को आगे बताया कि वह रोहित से अपने अवैध संबंधों को छिपाने के लिए खुद पर प्रेतात्मा के आने का नाटक करती रही थी. वह अपने पति के साथ खुश नहीं थी. उसे जब कभी पैसों की जरूरत होती तो वह सूरज से नहीं बल्कि रोहित से पैसे लेती थी. सूरज के साथ उस का वैवाहिक जीवन कभी सुखी नहीं रहा.रिया और उस के प्रेमी रोहित से पूछताछ के बाद पुलिस ने रिया की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल शेष बची नींद की गोलियां तथा गला दबाने में प्रयुक्त तकिया बरामद कर लिया.

पुलिस ने सूरज की तहरीर पर भादंवि की धाराओं 302, 201 व 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया. एसपी (देहात) स्वप्न किशोर सिंह ने अगले दिन कोतवाली रुड़की में आयोजित प्रैसवार्ता के दौरान महेंद्र व प्रीति की रहस्यमय मौतों का खुलासा किया.

आरोपी रिया व रोहित को मीडिया के सामने पेश किया गया. इस के बाद पुलिस ने रोहित व रिया को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया. कहते हैं कि गुनाह छिपाए नहीं छिपता. एक न एक दिन सामने आ ही जाता है. ऐसा ही कुछ रिया व रोहित के मामले में भी देखने को मिला. जब रात को महेंद्र ने रिया को रोहित के साथ देखा था तो दोनों ने पहले उन्हें रास्ते से हटा दिया तथा इस के बाद जब उन्हें रंगरलियां मनाते हुए प्रीति ने देखा, तो उन्होंने प्रीति को भी सुनियोजित ढंग से मार डाला था.

सूरज अपने दादा व बहन की मौत के कारण दुखी था और वह ड्यूटी पर भी नहीं जा रहा था, जबकि रिया भविष्य में अपने पति सूरज को भी मारने का तानाबाना बुन रही थी. यदि सूरज रिया की गतिविधियों पर शक होने के पर पुलिस के पास न जाता तो न ही ये केस खुलता और रिया व रोहित का अगला शिकार सूरज खुद बन जाता.

हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णाराज एस ने महेंद्र व प्रीति की मौत से परदा उठाने वाली टीम को ढाई हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की. Crime Stories

Crime News: मां का इश्क चढ़ा परवान – बेटे को उतारा मौत के घाट

Crime News: 10 अगस्त को भागवत नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति की शिकायत सुन कर थाना समानपुर के प्रभारी उमाशंकर यादव सन्न रह गए. उन्होंने हैरत से उस बुजुर्ग पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘‘क्या अनापशनाप बोल रहे हो? ऐसा भी भला कहीं होता है क्या?’’

‘‘जी साहब, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मेरी बहू कविता ने ही 15 साल के अपने बेटे को मारा है क्योंकि वह बदचलन है,’’ बुजुर्ग विश्वास दिलाते हुए बोला.

‘‘तुम्हारे पोते की लाश कहां है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साबजी, लाश दफना दी गई है. आप उस का पोस्टमार्टम करवा लेंगे तो सच्चाई सामने आ जाएगी,’’ बुजुर्ग बोले.

थानाप्रभारी यादव को जब बुजुर्ग भागवत ने अपनी बहू कविता के बारे में विस्तार से जानकारी दी तो वह माजरा समझ गए. भागवत ने थानाप्रभारी को जो कुछ बताया, वह इस प्रकार है—

3 अगस्त, 2021 की सुबह 9 साढ़े 9 बजे के करीब भागवत को अपने 15 वर्षीय पोते सोनू की मृत्यु की खबर मिली थी. सोनू अपने गांव में ही अपनी मां कविता के साथ रहता था. वह घर पास में ही था. कविता का पति शिवराज घर वालों से अलग गांव के बाहर ही रहता था. काम की वजह से उस का आसपास गांवों में आनाजाना लगा रहता था. वह अपने पिता से 8-10 दिनों बाद मिलने आ जाया करता था. शिवराज डिंडोरी में पिछले कुछ महीने से रह रहा था. उस के अलग रहने का कारण उस की पत्नी कविता ही थी. वह उस के व्यवहार और आचरण से वह दुखी था.

भागवत की बातें सुनने के बाद थानाप्रभारी यादव ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने इस की जानकारी एसपी संजय कुमार सिंह को दी. उस के बाद अदालत के आदेश पर सोनू की दफन लाश को निकलवा कर उस का पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम से यह स्पष्ट हो गया कि उस की मृत्यु किसी बीमारी से नहीं, बल्कि सिर में चोट लगने से हुई थी. पोस्टमार्टम में हत्या की बात सामने आते ही पुलिस ने तुरंत सोनू की मां कविता और उस के तथाकथित प्रेमी लालसिंह को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया. उन से सख्ती से पूछताछ की गई.

थाने में उन के खिलाफ सबूत होने की बात कही गई तो कविता ने भी सोनू की मौत से जुड़ी सारी बातें बता दीं. इस के बाद सोनू की हत्या का सच कुछ इस प्रकार सामने आया—

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कविता की जब शिवराज के साथ शादी हुई थी, तब वह मात्र 16-17 साल की थी. आदिवासी परिवार में जन्मी कविता सांवली हो कर भी काफी सुंदर दिखती थी. उस के जैसा समाज में दूरदूर तक कोई नहीं था. उस की नाकनक्श, बड़ीबड़ी आंखें, काले लहराते केश, उन्नत उभार, सुडौल मांसल देह के कमर की लचक आदि पहली नजर में ही किसी को भी आकर्षित करने के लिए काफी थी. इसलिए उस के चाहने वालों की कमी नहीं थी. इस में कविता को भी अच्छा लगता था कि वह कइयों की पसंद बन चुकी है. वह गांव में सभी से हंसबोल कर बातें करती थी, लेकिन किसी को अपने करीब आने से रोकने में भी चतुर थी. बड़ी चतुराई से अपने दीवानों से पल्ला झाड़ लिया करती थी.

शिवराज की दुलहन बनने के बाद कविता और भी बेफिक्री के साथ कभी अपने मायके तो कभी ससुराल आतीजाती रहती थी. क्योंकि उस की ससुराल मायके के पास स्थित गांव में ही थी. बहुत जल्द ही उस के अल्हड़पन से ससुराल के युवक और दूसरे उम्रदराज मर्द भी परिचित हो गए थे. उस पर प्यार का भूत सवार हो चुका था. वह चाहती थी कि पति शिवराज हमेशा उस के साथ रहे. सारे कामधंधे को छोड़ उस की मरजी के मुताबिक उस के साथ बना रहे. और वह हमेशा शिवराज की बाहों में ही सिमटी रहे.

लेकिन रोज खानेकमाने वाले शिवराज के लिए यह कतई संभव नहीं था. कविता तन की प्यासी थी, जबकि उस का पति शिवराज पेट की आग बुझाने की चिंता में घुलता रहता था. उस ने प्यार से कविता को समझाया कि वह उस के साथ हमेशा कमरे में ही बंद रहेगा तो उन का और परिवार का पेट कैसे भरेगा. कविता को शिवराज की बातों का कोई असर नहीं होता था. तन की प्यासी कविता अपने मन को नहीं समझा पाई. नतीजा यह हुआ कि वह दूसरी राह तलाशने लगी. सुंदर तो वह थी ही, इसलिए ससुराल के गांव में भी उस के चाहने वालों की कमी नहीं थी.

फिर क्या था, उस ने शिवराज की गैरमौजूदगी का नाजायज फायदा उठाया और कई युवकों से संबंध बना लिए. किसी के साथ मजेदार बातें कर दिल बहलाया तो किसी के साथ हमबिस्तर हो कर तनमन की प्यास बुझाई. इस की जानकारी जल्द ही शिवराज के मातापिता को भी हो गई. लोग गांव में ही दबी जुबान से कविता की बदचलनी की चर्चा करने लगे. भागवत को इस से काफी दुख पहुंचा. भागवत ने बहू पर लगाम लगाने की कोशिश की. किंतु कोई नतीजा नहीं निकला. उल्टे घर में आए दिन विवाद होने लगा. फिर एक दिन विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि शिवराज और कविता गांव में ही अलग रहने लगे.

अपनी ससुराल के घर से अलग रहना कविता के लिए यह और भी अच्छी बात हुई. उस की एक तरह से मन की मुंहमांगी मुराद पूरी हो गई थी. संयोग से पड़ोस में ही रहने वाले लालसिंह को वह पहले से जानती थी. वह भी कविता का आशिक बना हुआ था, लेकिन उस ने कभी भी अपनी मंशा जाहिर नहीं की थी. कविता के पड़ोस में आने पर एक दिन उस ने मौका पा कर अपने दिल की बात कह डाली. बदले में छोटीमोटी जरूरतों के लिए घर और बाजार के काम में वह उस की मदद करने लगा. इस तरह से वह शिवराज का दोस्त बन गया. संयोग से दोनों शराब के प्रेमी थे. अभी तक शिवराज घर से बाहर ही शराब पीता था, लेकिन लालसिंह के कहने पर शिवराज घर पर ही शराब पीने लगा.

लालसिंह उस के लिए शराब लाया करता था. दोनों शराब की पार्टी करने लगे. शिवराज और लालसिंह के साथसाथ कविता भी शराब पीने लगी. उधर कविता ने मर्दों की आशिकी और मतलबी दुनिया को काफी नजदीक से देखा था. इसलिए वह जल्द ही लालसिंह की मंशा को भी भांप गई. एक समय ऐसा भी आया जब लालसिंह ने शिवराज को नशे में धुत कर दिया और कविता को अपनी बाहों में भर लिया. कविता इसी इंतजार में थी. उस की मंशा पूरी हो गई.

गांव में काम नहीं मिलने की स्थिति में शिवराज मजदूरी करने के लिए कई हफ्तों और महीनों तक बाहर रहता था. इस का फायदा उठाकर कविता की रातें लालसिंह के जरिए ही रंगीन होती थी. समय बीतते देर नहीं लगती है. कविता एक बच्चे की मां बनी और धीरेधीरे उस का बेटा सोनू 15 साल को भी हो गया. फिर भी कविता के चालचलन में कमी नहीं आई. थोड़ा फर्क यह हुआ कि अब वह शिवराज के अलावा सिर्फ लालसिंह की ही चहेती थी. एक के लिए वैध बीवी थी, तो दूसरे के साथ अवैध रखैल की जिंदगी से खुश थी. उसे भी शराब की लत लग चुकी थी.

उधर उस का बेटा सोनू किशोरावस्था में पहुंच चुका था. उस का लगाव जितना अपनी मां और पिता से नहीं था, उस से कहीं अधिक वह दादादादी के करीब था. उस का ज्यादा समय दादादादी के साथ ही बीतता था. वे भी सोनू को बहुत प्यार करते थे. वह कभीकभार ही अपने घर जाता था. कविता के लिए यह और भी अच्छा था. क्योंकि लालसिंह बेफिक्री से उस के पास आताजाता था. सोनू के दादा भागवत को भी कविता और लालसिंह के संबंधों के बारे में भनक लग चुकी थी. इस कारण वह रात के समय सोनू को अपनी मां के पास सोने के लिए भेजने लगे थे.

इसे ले कर कविता और लालसिंह के अवैध संबंधों की जिंदगी में खलल पड़ने लगी. कविता ने जल्द ही इस का हल निकाल लिया. वह बेटे सोनू के सो जाने के बाद लालसिंह को पीछे के दरवाजे से घर बुलाने लगी. सब कुछ पहले जैसा चलने लगा. घटना 2 अगस्त, 2021 की है. सोनू अपने नियत समय पर मां कविता के पास आया और सीधे अपने कमरे में सोने के लिए चला गया. आधी रात होने पर लालसिंह शराब की बोतल ले कर कविता के पास पहुंचा. दोनों ने पहले बोतल खाली की, फिर अय्याशी के नशे मे डूब गए.

उस रोज कविता को कुछ ज्यादा ही नशा हो गया था. इसलिए उसे इस बात का ध्यान नहीं रहा कि उस का किशोर उम्र का बेटा भी घर में मौजूद है. नशे में दोनों कुछ ज्यादा ही मस्ती करने लगे, जिस से शोर होने पर सोनू की नींद टूट गई. उसे मां अपने कमरे में नहीं दिखी तो वह पास वाले दूसरे कमरे में चला गया. कमरे के खुले दरवाजे पर जा कर उस ने जो देखा तो उस की आंखें फटी की फटी रह गईं. मां और पड़ोस के काका लालसिंह को निर्वस्त्र लिपटे देख कर वह सन्न रह गया.

सोनू इतना तो समझ ही गया था कि उस की आंखों के सामने जो कुछ था, वह गलत था. वह समझ नहीं पाया कि क्या करे. वह तुरंत वहां से भाग कर अपने बिस्तर में आ कर एक चादर के नीचे दुबक गया. दरवाजे पर सोनू के आने और उस के हड़बड़ा कर भागने से हुई आवाज की आहट कविता और लालसिंह को भी हुई. वह समझ गए कि उन्हें सोनू ने देख लिया है. लालसिंह तुरंत कपड़े पहन कर भागने लगा, तो कविता ने उसे रोक दिया.

उस ने धीमी आवाज में कहा, ‘‘सोनू ने हम दोनों को रंगेहाथों देख लिया है. सुबह होते ही वह सारी बात अपने दादादादी को बता देगा. उस के बाद बखेड़ा खड़ा हो जाएगा. फिर हम दोनों के खिलाफ कुछ भी कदम उठाए जा सकते हैं.’’

‘‘इस पर क्या किया जाए?’’ लालसिंह ने पूछा तो कविता चुपचाप उठी और कमरे में गई, वहां कोने से 2 लाठी निकाल लाई. एक लाठी लालसिंह को पकड़़ाई और दूसरी अपने हाथ में ले कर सोनू के कमरे की ओर जाने के लिए मुड़ी.

तब तक लालसिंह भी समझ चुका था कि आगे क्या करना है. कुछ पल में ही दोनों बिछावन पर चादर के नीचे बिस्तर में दुबके सोनू के कमरे में थे. उन्होंने एकदूसरे को देखा और एक साथ लाठी से उस के ऊपर वार करने लगे. लगातार लाठी की मार से सोनू की वहीं मृत्यु हो गई. यह देख कर कविता ने राहत की सांस ली. उस के बाद सुबह होते ही लालसिंह अपने घर चला गया और कविता ने फोन लगा कर अपने पति को बेटे सोनू के मौत की खबर दे दी. उस ने पति को बताया कि रात में उठी खांसी से उस की मौत हो गई. चूंकि सोनू किशोर था, इसलिए उस की लाश दफन कर दी गई थी.

कविता अपनी योजना मे सफल हो गई थी, लेकिन सोनू की मौत उस के दादा के गले नहीं उतर रही थी. इसलिए उन्होंने 8 दिन बाद थाने में जा कर अपना शक जाहिर करते हुए थानाप्रभारी से हत्या की शिकायत दर्ज की. उस के बाद पुलिस ने काररवाई कर आरोपी कविता और उस के प्रेमी लालसिंह के खिलाफ काररवाई कर उन दोनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Crime News

Illicit Relationship: ललिता की खतरनाक लीला – पति बना दुश्मन

Illicit Relationship: 32 वर्षीया ललिता झारखंड के कोडरमा जिले के गांव दौंलिया की रहने वाली थी. उस की मां का नाम राजवती और पिता का नाम दुल्ली था. वह 4 भाइयों की इकलौती बहन थी. इसलिए घर में सभी की लाडली थी. 16 साल की होते ही उस पर यौवन की बहारें मेहरबान हो गई थीं. बाद में समय ऐसा भी आया कि वह किसी प्रेमी की मजबूत बांहों का सहारा लेने की कल्पना करने लगी. गांव के कई नवयुवक ललिता पर फिदा थे.

ललिता भी अपनी पसंद के लड़के से नैन लड़ाने लगी. इस के बाद तो दिन प्रतिदिन उस की आकांक्षाएं बढ़ने लगीं तो अनेक लड़कों के साथ उस के नजदीकी संबंध हो गए. दुल्ली के कुछ शुभचिंतक उसे आईना दिखाने लगे, ‘‘तुम्हारी बेटी ने तो यारबाजी की हद कर दी. वह खुद तो खराब है, गांव के लड़कों को भी खराब कर रही है. लड़की जब दरदर भटकने की शौकीन हो जाए तो उसे किसी मजबूत खूंटे से बांध देना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके, ललिता का विवाह कर दो, वरना तुम बहुत पछताओगे.’’

अपमान का घूंट पीने के बाद दुल्ली ने एक दिन ललिता को समझाया. उसी दौरान मां राजवती ने ललिता की पिटाई करते हुए चेतावनी दी, ‘‘आज के बाद तेरी कोई ऐसीवैसी बात सुनने को मिली तो मैं तुझे जिंदा जमीन में दफना दूंगी.’’

उस समय ललिता ने कसम खा कर किसी तरह अपनी मां को यकीन दिला दिया कि वह किसी लड़के से बात नहीं करेगी. ललिता बात की पक्की नहीं, बल्कि ख्वाहिशों की गुलाम थी. कुछ समय तक ललिता ने अपनी जवानी के अरमानों को कैद रखा, लेकिन अरमान बेलगाम हो कर उस के जिस्म को बेचैन करते तो वह अंकुश खो बैठी और फिर से लड़कों के साथ मटरगश्ती करने लगी. लेकिन यह मटरगश्ती अधिक दिनोें तक नहीं चल सकी. इस की वजह थी कि उस के पिता दुल्ली ने उस का रिश्ता तय कर दिया था.

ललिता का विवाह कोडरमा जनपद के ही गांव करौंजिया निवासी काली रविदास के बेटे सिकंदर रविदास से तय हुआ था. सिकंदर किसान था और एकदम सीधासादा इंसान था. लेकिन एक पैर से दिव्यांग था. उस का एक छोटा भाई जितेंद्र रविदास था. सिकंदर की उम्र विवाह योग्य हो चुकी थी, इसलिए ललिता का रिश्ता सिकंदर के लिए आया तो काली रविदास मना नहीं कर सके.

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12 साल पहले दोनों का विवाह बड़ी धूमधाम से हो गया. कालांतर में ललिता 3 बेटों की मां बन गई. विवाह के बाद से ही सिकंदर ललिता के साथ अलग मकान में रहने लगा था. सिकंदर का छोटा भाई जितेंद्र अपने मातापिता के साथ रहता था. सिकंदर दिव्यांग होने पर भी खेतों में दिनरात मेहनत करता रहता था. इसलिए जब वह घर पर आता तो थकान से चूर हो कर सो जाता था, जिस से ललिता की ख्वाहिशें अधूरी रह जाती थीं. पति के विमुख होने से ललिता बेचैन रहने लगी. इस स्थिति में कुछ औरतों के कदम गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं, ऐसा ही ललिता के साथ भी हुआ. अब उसे ऐसे शख्स की तलाश थी, जो उसे भरपूर प्यार दे और उस की भावनाओं की इज्जत करे.

उस शख्स की तलाश में उस की नजरों को अधिक भटकना नहीं पड़ा. घर में ही वह शख्स उसे मिल गया, वह था जितेंद्र. सिकंदर जहां अपने भविष्य के प्रति गंभीर तथा अपनी जिम्मेदारियों को समझने वाला था, वहीं जितेंद्र गैरजिम्मेदार था. जितेंद्र का किसी काम में मन नहीं लगता था. जितेंद्र की निगाहें ललिता पर शुरू से थीं. वह देवरभाभी के रिश्ते का फायदा उठा कर ललिता से हंसीमजाक भी करता रहता था.  जितेंद्र की नजरें अपनी ललिता भाभी का पीछा करती रहती थीं. दरअसल जितेंद्र ने ललिता को विवाह मंडप में जब पहली बार देखा था, तब से ही वह उस के हवास पर छाई हुई थी.

अपने बड़े भाई सिकंदर के भाग्य से उसे ईर्ष्या होने लगी थी. वह सोचता था कि ललिता जैसी सुंदरी के साथ उस का विवाह होना चाहिए था. काश! ललिता उसे पहले मिली होती तो वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाता और उस की जिंदगी इस तरह वीरान न होती, उस की जिंदगी में भी खुशियां होतीं. ललिता के रूप की आंच से आंखें सेंकने के लिए ही वह ललिता के घर के चक्कर लगाता. चूंकि वह घर का ही सदस्य था, इसलिए उस के आनेजाने और वहां हर समय बने रहने पर कोई शक नहीं करता था. जितेंद्र की नीयत साफ नहीं थी, इसलिए वह ललिता से आंखें लड़ा कर और हंसमुसकरा कर उस पर डोरे डाला करता था.

सिकंदर सुबह खेत पर जाता तो दीया बाती के समय ही लौट कर आता. जितेंद्र के दिमाग में अब तक ललिता के रूप का नशा पूरी तरह हावी हो गया था. इसलिए ललिता को पाने की चाह में उस के सिकंदर के घर के फेरे जरूरत से ज्यादा लगने लगे. ललिता घर पर अकेली होती थी, इसलिए जितेंद्र के पास मौके ही मौके थे. एक दिन जितेंद्र दोपहर के समय आया तो ललिता दोपहर के खाने में तहरी बनाने की तैयारी कर रही थी, जिस के लिए आलू व टमाटर काट रही थी. जितेंद्र ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘लगता है, आज अपने हाथों से स्वादिष्ट तहरी बनाने जा रही हो.’’

‘‘हां, खाने का इरादा है क्या?’’

‘‘मेरा ऐसा नसीब कहां, जो तुम्हारे हाथों का बना स्वादिष्ट खाना खा सकूं. नसीब तो सिकंदर भैया का है, जो आप जैसी रूपसी उन को पत्नी के रूप में मिलीं.’’

यह सुन कर ललिता मुसकान बिखेरती हुई बोली, ‘‘ठीक है, मुझ से विवाह कर के तुम्हारे भैया ने अपनी किस्मत चमका ली तो तुम भी किसी लड़की की मांग में सिंदूर भर कर अपनी किस्मत चमका लो.’’

‘‘मुझे कोई दूसरी नहीं, तुम पसंद हो. भाभी, अगर तुम तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ अपना घर बसाने को तैयार हूं.’’

ललिता जितेंद्र के रोज हावभाव पढ़ती रहती थी. इसलिए जान गई थी कि जितेंद्र के दिल में उस के लिए नाजुक एहसास है. लेकिन वह इस तरह चाहत जाहिर कर के उस से प्यार की सौगात मांगेगा, ललिता ने सोचा तक न था. अचानक सामने आई ऐसी असहज स्थिति से निपटने के लिए वह उस से आंखें चुराने लगी और कटी हुई सब्जी उठा कर रसोई की तरफ चल दी. तभी उस के बच्चे भी घर आ गए. प्यार में विघ्न पड़ता देख कर जितेंद्र भी वहां से उठ गया.

उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, वह ललिता के पास पहुंच जाता और अपने प्यार का विश्वास दिलाता. धीरेधीरे ललिता को उस के प्यार पर यकीन होने लगा. उसे भी अपने प्रति जितेंद्र की दीवानगी लुभाने लगी थी. उस की दीवानगी को देख कर ललिता के दिल में उस के लिए प्यार उमड़ पड़ा. कल तक जो ललिता जितेंद्र के हवास पर छाई थी, अब जितेंद्र ललिता के हवास पर छा गया. एक दिन जितेंद्र ने फिर से ललिता के सामने अपने प्यार का तराना सुनाया तो वह बोली, ‘‘जितेंद्र, मेरे प्यार की चाहत में पागल होने से तुम्हें क्या मिलेगा. मैं विवाहित होने के साथसाथ 3 बच्चों की मां भी हूं. इसलिए मुझे पाने की चाहत अपने दिल से निकाल दो.’’

‘‘यही तो मैं नहीं कर पा रहा, क्योंकि यह दिल पूरी तरह से तुम्हारे प्यार में गिरफ्तार है.’’

ललिता कुछ नहीं बोल सकी. जैसे उस के जेहन से शब्द ही मिट गए थे. जितेंद्र ने अपने हाथ उस के कंधे पर रख दिए, ‘‘भाभी, कब तक तुम अपने और मेरे दिल को जलाओगी. कुबूल कर लो, तुम्हें भी मुझ से प्यार है.’’

ललिता ने सिर झुका कर जितेंद्र की आंखों में देखा और फिर नजरें नीची कर लीं. प्रेम प्रदर्शन के लिए शब्द ही काफी नहीं होते, शारीरिक भाषा भी मायने रखती है. जितेंद्र समझ गया कि मुद्दत बाद सही, ललिता ने उस का प्यार कुबूल कर लिया है. उस ने ललिता के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. ललिता भी सुधबुध खो कर जितेंद्र से लिपट गई. उस समय मन के मिलन के साथ तन की तासीर ऐसी थी कि ललिता का जिस्म पिघलने लगा.  इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. यह बात करीब 6 साल पहले की है. बाद में यह मौका मिलने पर चलता रहा.

13 मई, 2021 को दोपहर करीब 12 बजे सिकंदर दास लोचनपुर गांव के निजी कार चालक विजय दास के साथ चरवाडीह के संजय दास के यहां शादी समारोह में गया. सिकंदर और विजय दोनों कार से गए थे. कार विजय की थी. साढ़े 3 बजे शादी से दोनों निकल आए. लेकिन सिकंदर दास घर नहीं लौटा. उस के नंबर पर सिकंदर के चाचा ने फोन किया गया तो विजय ने उठाया. उस से पूछा गया कि सिकंदर कहां है तो विजय द्वारा अलगअलग ठिकाने का पता बताते हुए फोन काट दिया. इस के बाद सिकंदर की काफी तलाश की गई, वह नहीं मिला.

16 मई को ललिता ने कोडरमा के थानाप्रभारी और एसपी को एक पत्र दिया, जिस में उस ने अपने पति सिकंदर दास के लापता होने की बात लिखी. सिकंदर के गायब होने का आरोप उस ने कार चालक विजय दास पर लगाया था. चूंकि मामला चांदवारा थाना क्षेत्र के करौंजिया गांव का था. इसलिए एसपी पुलिस ने मामला चांदवारा थाने में ट्रांसफर कर दिया. चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह ने पूरा मामला जान कर थाने में सिकंदर की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

थानाप्रभारी सोनी प्रताप ने 20 मई को जामू खाड़ी से विजय दास को गिरफ्तार कर लिया. सख्ती से पुलिस ने पूछताछ की तो विजय ने सिकंदर की हत्या करने की बात स्वीकारी. उस ने इस हत्या में सिकंदर की पत्नी ललिता और भाई जितेंद्र का भी हाथ होने की बात बताई. 20 मई को विजय के बाद ललिता और जितेंद्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर रात में कोटवारडीह के बंद पड़े मकान से सिकंदर की लाश बरामद कर ली. वह अर्द्धनिर्मित मकान सिकंदर का था. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह अभियुक्तों को ले कर थाने आ गए. थाने में सख्ती से की गई पूछताछ में उन्होंने हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयां कर दी.

एक दोपहर को जितेंद्र और ललिता घर में बेधड़क रंगरलियां मना रहे थे कि अचानक किसी काम से सिकंदर खेतों से घर लौटा तो उस ने उन दोनों को रंगरलियां मनाते रंगेहाथों पकड़ लिया. यह देख कर उसे एक बार तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उस की पत्नी ऐसा भी कर सकती है. वह ललिता पर खुद से भी ज्यादा विश्वास करता था. लेकिन हकीकत तो सामने उस की दगाबाजी की तरफ इशारा कर रही थी. दूसरी ओर सगा छोटा भाई जितेंद्र था, जिसे वह बहुत प्यार करता था, उस का खूब खयाल रखता था. वही उस की गृहस्थी में आग लगा रहा था.

अपनों की इस दगाबाजी से सिकंदर इतना आहत हुआ कि उस ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया. ललिता और जितेंद्र ने भी उस से अपनी गलती की माफी मांग ली और भविष्य में ऐसा कुछ न करने का वादा किया तो सिकंदर शांत हुआ. जितेंद्र और ललिता ने उस समय तो अपनी जान छुड़ाने के लिए वादा कर दिया था, लेकिन वे इस पर अमल करने को कतई तैयार नहीं थे. लेकिन उन का भेद खुल चुका था, इसलिए मिलन में उन को बहुत ऐहतियात बरतनी पड़ती थी. वे चोरीछिपे फिर से मिल लेते थे.

सिकंदर ने देखा तो उस ने विरोध किया. मामला घर की चारदीवारी से निकल कर गांव के लोगों तक पहुंच गया. पंचायत तक बैठ गई. भरी पंचायत में ललिता ने जितेंद्र के साथ रहने की बात कही. लेकिन फैसला न हो सका. इस के बाद सिकंदर उन दोनों के बीच की एक बड़ी दीवार था, जिसे गिराए बिना वे हमेशा के लिए एक नहीं हो सकते थे. इसलिए ललिता और जितेंद्र ने सिकंदर की हत्या करने की ठान ली.

सिकंदर दास ने विजय दास से लोन दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए लिए थे. सिकंदर ने जब लोन नहीं दिलाया तो विजय उस से अपने दिए रुपए वापस मांगने लगा. सिकंदर रुपए देने में टालमटोल कर रहा था. ऐसे में ललिता ने जितेंद्र से बात कर के विजय को अपने प्लान में शामिल करने की बात कही. उस ने यह भी कहा कि सिकंदर का काम तमाम होने के बाद वह अकेले विजय को उस की हत्या में फंसवा देगी, जिस से वे दोनों बच जाएंगे. जितेंद्र को उस की बात सही लगी. दोनों ने विजय से बात की तो वह सिकंदर की हत्या में उन दोनों का साथ देने को तैयार हो गया.

13 मई, 2021 को एक शादी समारोह से लौटने के बाद विजय सिकंदर को ले कर कोटवारडीह में उस के अर्धनिर्मित मकान पर ले गया. वहां ललिता और जितेंद्र पहले से मौजूद थे. तीनों ने मिल कर सिकंदर की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश एक कमरे में डाल कर कमरा बंद कर दिया. लेकिन सिकंदर की हत्या में विजय को फंसाने की योजना ही ललिता और जितेंद्र को भारी पड़ गई. ललिता ने उस पर शक जताया तो पुलिस विजय को पकड़ कर उन तक पहुंच गई. तीनों अभियुक्तों के खिलाफ हत्या व साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज कर के चांदवारा पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. Illicit Relationship

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

True Crime Story: ऊंचे ओहदे वाला रिश्ता – शक ने ली साक्षी की जान

True Crime Story: हर मातापिता की इच्छा होती है कि उन के बच्चे पढ़ाईलिखाई कर के आगे बढ़ें, उन की शादियां हों और वे अपनी दुनिया में खुश रहें. अशोक कुमार की बेटी साक्षी इंडियन आर्मी में मिलिट्री नर्सिंग सर्विसेज में लेफ्टिनेंट थी. साल 2017 में उस का सेलेक्शन हुआ था.

दिल्ली के तिलकनगर इलाके के रहने वाले अशोक कुमार को बेटी के आर्मी में सेलेक्शन के वक्त बधाइयां देने वालों का तांता लग गया था. तब वह खुशी से फूले नहीं समाए. जाहिर है यह बड़े गर्व की बात थी.

साक्षी की शादी नवनीत शर्मा के साथ हुई थी. नवनीत वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर थे. दोनों ही हरियाणा की अंबाला छावनी में तैनात थे. उन का 2 साल का एक बेटा भी था.

लोग अशोक कुमार को खुशनसीब इंसान मानते थे. कामयाब बेटी के पिता होने के नाते लोगों का सोचना भी ठीक था, लेकिन किसी इंसान की असल जिंदगी में क्या कुछ चल रहा होता है, इस बात को कोई नहीं जान पाता.

अशोक कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही था. बेटी को ले कर वह परेशान रहते थे. इस की बड़ी वजह यह थी कि बेटी का वैवाहिक जीवन उम्मीदों के विपरीत था. 20 जून, 2021 की रात का वक्त था, जब अशोक कुमार के मोबाइल पर साक्षी का फोन आया. उन्होंने बेटी से बात शुरू की.

‘‘हैलो! साक्षी बेटा कैसी हो?’’

‘‘पापा, यहां कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा, मैं बहुत परेशान हो चुकी हूं.’’ साक्षी के लहजे में परेशानी छिपी हुई थी, जिसे अशोक कुमार ने भांप लिया था.

उन्होंने धड़कते दिल से पूछा, ‘‘क्या हुआ बेटा?’’

‘‘पापा, नवनीत मुझे लगातार परेशान करते हैं, हद इतनी हो गई है कि मेरे साथ मारपीट भी की जाती है. पता नहीं कब तक ऐसा चलेगा.’’ वह बोली.

‘‘सब्र कर बेटा. समय के साथ सब ठीक हो जाएगा. मैं समझाऊंगा उसे.’’ अशोक कुमार ने समझाया.

‘‘यह समझने वाले नहीं हैं. पता नहीं क्या होगा पापा. मैं बाद में बात करती हूं.’’ साक्षी ने सुबकते हुए फोन काट दिया.

बेटी की बातों से अशोक परेशान हो गए. उन्होंने अपने दामाद नवनीत का मोबाइल नंबर डायल किया, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला. उन्हें याद आया कि उन का नंबर दामाद ने ब्लौक किया हुआ था.

साक्षी भी यह बात अपने परिजनों को बता चुकी थी कि मायके वालों के नंबर ब्लौक लिस्ट में हैं.

इस के बाद उन्होंने साक्षी के ससुर चेतराम शर्मा को फोन किया, ‘‘भाईसाहब, आप ही बच्चों को समझाइए, काफी समय से यही सब चल रहा है. साक्षी का अभी फोन आया था और वह बता रही थी कि उस के साथ मारपीट भी की जा रही है.’’

‘‘देखिए भाईसाहब, यह उन का आपस का मामला है. नवनीत तो मेरी बात सुनता ही नहीं तो बताओ, मैं भी क्या कर सकता हूं.’’ चेतराम शर्मा बोले.

उन की बात सुन कर अशोक कुमार को बहुत निराशा हुई. इस से ज्यादा वह कर भी क्या कर सकते थे अलबत्ता वह चिंतित जरूर हो गए.

अशोक ने यह बात अपने बेटे सौरभ को बताई. उन का पूरा परिवार पूरी रात चैन की नींद नहीं सो सका. 21 जून की सुबह के करीब साढ़े 6 बजे नवनीत की मां लक्ष्मी का फोन आया और उन्होंने बताया कि साक्षी ने सुसाइड कर लिया है.

यह सुनते ही अशोक के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन का फोन केवल सूचनात्मक था. इस से ज्यादा उन्होंने कोई बात नहीं की. बेटी की मौत की खबर से अशोक के परिवार में कोहराम मच गया. आननफानन में पितापुत्र दिल्ली से अंबाला के लिए रवाना हो गए.

नवनीत और साक्षी रेसकोर्स स्थित आवास नंबर 115/04 में रहते थे. अशोक और सौरभ से वहां कोई बात करने को भी तैयार नहीं था. वह सीधे रेजीमेंट बाजार पुलिस चौकी पहुंचे और नवनीत व उस के परिजनों के खिलाफ बेटी को दहेज के लिए प्रताडि़त करने की तहरीर दे दी. पुलिस पहले ही इस मामले की तहकीकात में जुटी हुई थी.

दरअसल, पुलिस कंट्रोल रूम को 21 जून की सुबह इस घटना की सूचना मिली थी. कंट्रोल रूम से यह सूचना थाने को फ्लैश की गई. मामला हाईप्रोफाइल था, लिहाजा एसएसपी हमीद अख्तर ने अधीनस्थों को इस मामले में तत्काल सक्रिय होने के निर्देश दे दिए थे.

डीएसपी रामकुमार, इंसपेक्टर विजय व चौकी इंचार्ज कुशलपाल ने जांचपड़ताल शुरू की. पुलिस ने साक्षी के परिजनों की तहरीर पर दहेज उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया. साक्षी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. साथ ही उन के पति नवनीत को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

ओहदे थे ऊंचे पर जिंदगी थी नीरस

पुलिस की जांचपड़ताल और परिजनों से की गई पूछताछ में ऊंचे ओहदों के पीछे की ऐसी कहानी निकल कर सामने आई, जिस ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया. देश सेवा के लिए आर्मी जौइन करने वाली साक्षी की निजी जिंदगी में वास्तव में अंधेरा लिए हुए एक बड़ा तूफान चल रहा था.

साक्षी और नवनीत के बीच जानपहचान थी. पहले दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई. नवनीत का परिवार हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजोर कस्बे का रहने वाला था. नवनीत स्क्वाड्रन लीडर थे और साक्षी लेफ्टिनेंट. दोनों ही ऊंचे पद पर थे.

12 दिसंबर, 2018 को दोनों विवाह बंधन में बंध गए. साक्षी के परिजनों की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी. फिर भी उन्होंने अपनी हैसियत के अनुसार शादी में खर्च किया. शादी के बाद कुछ महीनों तक तो सब ठीक चलता रहा.

साक्षी ने एक बेटे को भी जन्म दिया. दोनों अच्छे पद पर थे. परिवार की खुशियों में चारचांद लगाने के लिए बेटा भी हो चुका था, लेकिन जिंदगी में कई बार पद और सुखसुविधाओं से खुशियों के मायने नहीं होते.

साक्षी और नवनीत के बीच मनमुटाव रहने लगा था. साक्षी ने शुरू में तो अपने परिवार में कुछ नहीं बताया, परंतु जब बात हद से ज्यादा बढ़ने लगी तो एक दिन उस ने अपने पिता को सारी बातें बताईं, ‘‘पापा, सोचा नहीं था कि ये लोग ऐसे होंगे.’’

बेटी की बात पर अशोक थोड़ा सकपका गए ‘‘मैं समझा नहीं बेटी?’’

‘‘पापा, ये लोग मुझे दहेज के लिए ताना मारते हैं. कभी कहते हैं कि गाड़ी नहीं दी, कभी कहते हैं कि रिश्तेदारों का मान नहीं रखा.’’ साक्षी ने बताया.

‘‘बेटी, इस से ज्यादा हम कर भी क्या सकते थे. तुम दोनों कमाते हो क्या किसी चीज की कोई कमी है. परिवार में यह सब बातें तो चलती रहती हैं. नवनीत को तुम समझाना.’’ अशोक ने कहा.

‘‘मैं ने बहुत समझाया है पापा, लाइफ को एडजस्ट तो बहुत कर रही हूं.’’ साक्षी बोली.

बेटी की बातें सुन कर अशोक कुमार को बहुत अफसोस हुआ. उन्होंने सोचा कि वक्त के साथ एक दिन सब ठीक हो जाएगा. यूं भी इंसान ऐसे मामलों में सकारात्मक ही सोचता है.

लालच ने घोली कड़वाहट

कहते हैं कि जब किसी परिवार में अनबन, शक और लालच जैसी चीजें घर कर जाएं, तो फिर कलह का वातावरण बन जाता है बिखराव बढ़ता चला जाता है. साक्षी के परिवार में भी ऐसा ही हो रहा था. साक्षी के पिता और भाई ने भी नवनीत को समझाया, लेकिन उन्होंने उन्हें परिवार के मामले में दखल  न देने की नसीहत दे डाली. साक्षी की जिंदगी में एक बार अनबन का सिलसिला शुरू हुआ, तो फिर उस ने रुकने का नाम नहीं लिया. बाद में हालात बिगड़ते देख अशोक खुद भी बेटी के घर गए और दोनों को समझा कर आए.

कुछ दिन तो सब ठीक रहा, बाद में स्थिति पहले जैसी ही हो गई. रिश्तों में दूरियां तब और भी बढ़ गईं जब नवनीत साक्षी पर शक करने लगे. शक का दायरा इतना बढ़ गया कि नवनीत ने घर के बैडरूम तक में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए. साक्षी के पिता और भाई फोन करते तो नवनीत झल्ला जाते. उन्होंने दोनों के नंबर तक ब्लौक कर दिए. साक्षी परिजनों को बताती थी कि उस के साथ मारपीट भी की जाने लगी है.

साक्षी के परिजनों को पूरी उम्मीद थी कि एक दिन सब ठीक जाएगा, लेकिन यह भी सच है कि इंसान सोचता कुछ है और हो कुछ और जाता है. परिवार के बिगड़े हालात के बीच आखिर साक्षी 20 जून, 2021 की रात जिंदगी की जंग हार गई. पतिपत्नी के बीच अनबन में 20 जून को एक तूफान आया. दोनों के बीच झगड़ा और मारपीट हुई. साक्षी ने यह बात अपने पिता को भी फोन पर बताई थी. नवनीत के अनुसार, उन्होंने साक्षी को देर रात कपड़े के सहारे पंखे से झूलते हुए पाया. इस के बाद उन्होंने उसे नीचे उतारा और मिलिट्री हौस्पिटल ले गए, जहां डाक्टरों ने साक्षी को मृत घोषित कर दिया.

इस के बाद हौस्पिटल से पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई. साक्षी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिग आया. नवनीत के घर पर लगे कैमरों की सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो चुकी थी. साक्षी के परिजनों का आरोप था कि सारी फुटेज को सच्चाई छिपाने के मकसद से डिलीट किया गया.

प्रताड़ना बनी मौत की वजह

साक्षी के परिजनों का साफ कहना था कि वह मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से तंग आ चुकी थी. उन के दहेज के आरोपों में सच्चाई है तो सोचने वाली बात है कि बड़े पदों पर नौकरी करने वाले अच्छेखासे पढ़ेलिखे लोग भी दहेज के लालच में किस स्तर तक जा सकते हैं. हालांकि दूसरी तरफ नवनीत शर्मा ने जेल जाने से पहले पुलिस कस्टडी में मीडिया के सामने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से साफ इंकार कर दिया.

साक्षी ने वास्तव में आत्महत्या की या उस की हत्या की गई, पुलिस इस पहलू की भी बारीकी से जांच कर रही थी. प्रकरण की और भी सच्चाई तो पुलिस की पूर्ण जांच के बाद ही सामने आएगी. अदालत इस मामले में सबूतों के आधार पर फैसला भी करेगी. लेकिन जब साक्षी नवनीत और उन के परिजनों की फितरत को समझ गई थी और जब उस का वहां तालमेल नहीं बैठ रहा था, तब वह वक्त रहते ऐसे रिश्ते से पीछा छुड़ा लेती तो शायद ऐसी नौबत कभी नहीं आती. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Hindi Crime Stories: 18 टुकड़ों में मिली लाश का रहस्य

Hindi Crime Stories: टुकड़ों में बरामद लाश की पहचान करना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर होती है. ऐसा ही एक मामला राजधानी दिल्ली में आया. हत्यारे ने लाश के 1-2, नहीं बल्कि 18 टुकड़े कर दिए थे. जानिए हत्यारे की क्रूरता की कहानी…

पश्चिमी दिल्ली में मोहन गार्डन थाने के प्रभारी राजेश मौर्या को 72 साल की वृद्धा के लापता होने की शिकायत मिली थी. शिकायतकर्ता मोहन गार्डन में ही रामा गार्डन के रहने वाले ग्रोवर दंपति थे. वे किराए के मकान में रहते थे. लापता कविता ग्रोवर मनीष ग्रोवर की मां और मेघा की सास थीं. थानाप्रभारी ने मामले को आए दिन की सामान्य घटना मानते हुए मनीष को समझाया कि उन की मां यहीं कहीं आसपास गई होंगी, आ जाएंगी.

साथ ही सुझाव भी दिया कि वह अपनी रिश्तेदारी या जानपहचान में पता कर लें. शायद वहीं मिल जाएं! फिर भी उन्होंने मनीष की तसल्ली के लिए पूछ लिया कि उन की या घर में किसी दूसरे सदस्य की मां के साथ हालफिलहाल में कोई कहासुनी तो नहीं हुई? मनीष ने ऐसी किसी भी बात से इनकार कर दिया. लेकिन मौर्या की निगाह जब खामोश बैठी मेघा पर गई तो उन्हें थोड़ा अजीब लगा. उन्होंने मेघा की ओर सवालिया नजरों से देखा.

मेघा झट से बोल पड़ी, ‘‘सर, जब से मैं ब्याह कर आई हूं, तब से कभी भी मैं ने सास से ऊंची आवाज तक में बात नहीं की. सासूमां भी मुझे बेटी की तरह मानती थीं. वह बिना बताए ऐसे कहीं नहीं जाती थीं.’’

‘‘आप लोगों को ऐसा क्यों लग रहा है कि कविता ग्रोवर गायब हो गई हैं? मुझे थोड़ा और विस्तार से बताइए.’’ मौर्या ने कहा.

‘‘सर, हम लोग रिश्तेदारी में एक मौत की खबर पा कर 30 जून को सिरसा चले गए थे. वहां से जब 3 जुलाई को लौटे तब घर में ताला लगा मिला. हम ने दूसरी चाबी से ताला खोला. पहले तो हम ने सोचा मां इधरउधर कहीं पड़ोस में गई होंगी. थोड़ी देर में आ जाएंगी. लेकिन…’’

मेघा बोल ही रही थी कि बीच में मनीष बोलने लगे, ‘‘सर, एक पड़ोसी ने बताया कि घर में 2 दिनों से ताला लगा हुआ था. उस के बाद से ही हमें चिंता हो गई. हम ने उन की आसपास तलाश भी की.’’

‘‘ठीक है, आप लोग गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवा दीजिए.’’ राजेश मौर्य ने कहा.

मनीष ने सूचना लिखवाने के बाद साथ लाई मां की एक फोटो भी उन्हें दे दी और वापस अपने घर आ गए. पुलिस ने काररवाई शुरू करते हुए गुमशुदा कविता ग्रोवर की तसवीर सभी थानों में भिजवा दी. वृद्धा की तलाश तेजी से जारी थी. 4 दिन गुजर गए थे, फिर भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. मौर्या परेशान थे. पांचवें दिन 8 जुलाई, 2021 को उन्हें मेघा का फोन आया. उन्हें लगा मेघा उन से फिर से अपनी सासूमां की तलाश नहीं हो पाने की शिकायत करेंगी. लेकिन मेघा ने उन्हें फ्लैट में ही कविता ग्रोवर के बारे में कुछ सुराग मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर थानाप्रभारी भागेभागे मनीष के घर आ गए. अपने साथ एसआई अनिल कुमार और हैडकांस्टेबल रतनलाल को भी ले गए थे. मनीष बिल्डिंग में थर्ड फ्लोर पर रहते थे. वे मेघा के साथ कविता के रहने के कमरे में गए. वहां एक पलंग, एक अलमारी और बैठने के लिए 2 आरामदायक कुरसियां थीं.

‘‘कमरे के सामान को हम ने जरा भी छेड़ा नहीं है. आज जब मैं ने कमरे के बिस्तर को ध्यान से देखा. तब मुझे बिस्तर की चादर काफी सिमटी दिखी. उसे देख कर मैं कह सकती हूं कि सासूमां रात भर करवटें बदलती रही होंगी.’’ मेघा बोली.

इस पर इंसपेक्टर ने ध्यान से बिस्तर का निरीक्षण किया. उन्होंने भी अनुमान लगाया कि सामान्य तरह से सोने पर बिस्तर की सिलवटें बहुत अधिक नहीं बनती हैं. तभी उन्होंने सवाल किया, ‘‘मेघाजी, आप सास का एक बैग गायब होने की बात बता रही थीं.’’

‘‘जी हां सर, सासूमां का एक बैग गायब है, जिस में उन की ज्वैलरी और बैंक के कागजात थे. और हां, मेरी सासूमां का मोबाइल भी नहीं मिल रहा है.’’ मेघा बोली.

इस पर थानाप्रभारी मौर्या ने गंभीरता दिखाते हुए कमरे का कोनाकोना छान मारा. इस सिलसिले में बाथरूम की दीवारें संदिग्ध लगीं. कारण दीवारों को रगड़रगड़ कर धोने के निशान साफ दिख रहे थे.

ध्यान से देखने पर एकदो छोटे काले निशान अभी भी दिख रहे थे. उस की जांच के लिए फोरैंसिक टीम बुलाई गई.

जांच के लिए तमाम तरह के नमूने एकत्रित किए गए. घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे से 30 जून और एक जुलाई की रात के फुटेज निकलवाए गए. सीसीटीवी फुटेज में 2 बड़े बैग के साथ घर से रात को निकलते हुए 2 लोग दिखे. उन की तसवीर प्रिंट करवा कर मेघा से पहचान करवाई गई. मेघा ने देखते ही कहा कि ये दोनों उन के पड़ोसी अनिल आर्या और कामिनी आर्या हैं. उन की गैरमौजूदगी में यही सासूमां का खयाल रखते थे. पुलिस ने बताया कि ये दोनों 30 जून की रात को 11 बजे आप के घर आए थे और सुबह साढ़े 6 बजे आप के घर से निकले थे. तब उन के पास 2 बड़े बैग थे.

अब मेघा समझ चुकी थी कि जरूर कुछ गड़बड़ है. उस ने बताया कि उन की सास के पास इतना बड़ा बैग नहीं था. फिर खुद ही सवाल किया, ‘‘बैग में क्या हो सकता है, घर का सारा सामान तो यूं ही पड़ा है.’’

तहकीकात से मालूम हुआ कि आर्या दंपति गुरुद्वारा रोड पर किराए के मकान में रहते थे. पहली जुलाई के बाद से वे नहीं दिखे. उधर फोरैंसिक जांच की रिपोर्ट से पता चला कि बाथरूम की दीवार पर वह काले निशान खून के धब्बे थे. इस का मतलब स्पष्ट था कि कविता ग्रोवर की किसी ने हत्या कर दी. आगे की जांच के लिए जांच टीम बनाई गई और हत्यारे की तलाश की जाने लगी. इस मामले में शक की सुई पूरी तरह से अनिल आर्या और उस की पत्नी कामिनी आर्या की तरफ घूम चुकी थी. सवाल यह था कि दोनों बैग ले कर कहां लापता हो गए?

काफी पूछताछ के बाद मालूम हुआ कि दोनों उत्तराखंड में रानीखेत के मूल निवासी हैं. उन की तलाश के लिए पुलिस टीम रानीखेत पहुंची, लेकिन वे हाथ नहीं आए. केवल इतना पता चल सका कि 3 जुलाई, 2021 को टैक्सी स्टैंड पर दिखे थे. इसी बीच दोनों के बारे में दिल्ली के एक आटो वाले से कुछ जानकारी मिली. उस ने बताया कि दोनों उस के परमानेंट ग्राहक थे. हमेशा उस के आटो से ही कहीं भी आतेजाते थे.

आटो ड्राइवर ने बताया कि 30 जून की आधी रात को मुझे फोन कर अगले रोज सुबह आने के लिए कहा था. मैं उन के पास ठीक सवा 6 बजे पहुंच गया था. अनिल आर्या और उस की पत्नी 2 बैग घसीटते हुए ले कर आए थे. उन्होंने कहा था कि दोस्त के यहां पार्टी है, उन के लिए चिकन का बैग पहुंचाना है. और वे आटो पर सवार हो गए. थोड़ी दूर पर ही वे नजफगढ़ के पास उतर गए. उस के बाद वे कहां गए, मालूम नहीं. पूछने पर सिर्फ इतना बताया कि उन का दोस्त यहीं गाड़ी ले कर आएगा.

पुलिस ने आटो वाले से अनिल आर्या का मोबाइल नंबर ले लिया. मोबाइल से बात नहीं बनी, लेकिन आटो और दूसरे दरजनों टैक्सी वालों से पूछताछ के बाद आर्या दंपति को उत्तर प्रदेश के बरेली से 12 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें दिल्ली लाया गया. उन से गहन पूछताछ की गई. जल्द ही दोनों ने कविता ग्रोवर की हत्या की बात स्वीकार ली. उन्होंने जो बताया, वह किसी हैवानियत से जरा भी कम नहीं था. मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को बड़ी क्रूरता से अंजाम दिया गया. उन्होंने स्वीकार कर लिया कि 30 जून की रात को क्याक्या हुआ था. उन्होंने कविता ग्रोवर की हत्या करने का कारण भी बताया.

इवेंट मैनेजमेंट का काम करने वाले अनिल आर्या के अनुसार उस के लालच और स्वार्थ से भरे इस हत्याकांड की नींव 2 साल पहले ही पड़ गई थी. उस ने कविता ग्रोवर से जानपहचान बढ़ा कर उन से डेढ़ लाख रुपए उधार लिए थे, जिस की मांग वह लगातार करती थीं. अनिल ने बताया कि 30 जून, 2021 को मनीष और मेघा सिरसा चले गए थे. उसी रात वह पत्नी के साथ पूरी तैयारी के साथ कविता के पास जा पहुंचा था. कविता ग्रोवर उन दोनों को अपना हितैषी समझती थीं, इसलिए देर रात को आने पर कोई सवालजवाब नहीं किया.

उन के बीच देर रात तक इधरउधर की बातें होती रहीं. इसी बीच कविता अपनी उधारी मांग बैठीं. बात बढ़ गई. कविता ने नाराजगी दिखाते हुए कह दिया कि पैसे वापस नहीं लौटाए तो वह इस बारे में अपने बहूबेटे को बता देगी. फिर क्या था. तब तक अनिल को भी काफी गुस्सा आ गया था. उस ने तुरंत कविता के मुंह पर जबरदस्त मुक्का जड़ दिया. वह बिछावन पर वहीं गिर पड़ीं. अनिल ने उन के सीने पर सवार हो कर साथ लाई नायलौन की रस्सी से गला घोंट डाला.

कविता की मौत हो जाने के बाद अनिल लाश को बाथरूम में ले गया और साथ लाए बड़े चाकू से लाश के 18 टुकड़े कर डाले. सारे टुकड़े उस ने 2 बड़ेबड़े बैगों में भरे. इस काम में उन दोनों को करीब 4 घंटे का समय लगा. उस की पत्नी कामिनी ने इस में पूरा साथ दिया और उस ने बाथरूम की दीवारें साफ कीं. फिर टुकड़े ठिकाने लगाने के लिए अपने जानपहचान के आटो वाले को फोन कर बुला लिया.

आटो से वह दोनों नजफगढ़ तक आए. आटो के जाने के बाद वहीं नाले में बैग फेंक दिए. उस के बाद वह उसी रोज कविता के घर से लाए जेवरों को मुथुट फाइनैंस में गिरवी रख आए. उस से मिले 70 हजार रुपए ले कर उन्होंने अपने कुछ जेवर छुड़वाए और रानीखेत चले गए. पकड़े जाने के डर से वह वहां 2 घंटे ही रुके. यहां तक कि अपने घर भी नहीं गए. रास्ते में ही अपने मोबाइल का सिम और हत्या में इस्तेमाल चाकू आदि सामान को फेंक दिया. फिर बरेली जा कर एक कमरा किराए पर लिया और रहने लगे.

पुलिस ने उस के बताए अनुसार न केवल थैले से लाश के टुकड़े बरामद कर लिए, बल्कि हत्या में इस्तेमाल सामान भी हासिल कर लिया. लाश के कुल 18 टुकड़े किए गए थे, जो सड़गल चुके थे. पुलिस ने मुथुट फाइनैंस से गिरवी रखे जेवर भी हासिल कर लिए. उन की शिनाख्त मेघा ग्रोवर ने कर दी. इस तरह अनिल और कामिनी द्वारा हत्या का जुर्म स्वीकार करने के बाद अपहरण के केस को हत्या कर लाश ठिकाने लगाने की धारा 302, 201 आईपीसी में तरमीम कर दिया गया. फिर दोनों को अदालत में पेश कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया. Hindi Crime Stories

Thriller Hindi Story: अभिनेत्री शनाया की मोहब्बत का कांटा

Thriller Hindi Story: वह वर्गाकार बड़ा हाल था. हाल में मुख्यद्वार से सटे 3×6 के 2 मेज एकदूसरे को आपस में सटा कर बिछाए गए थे. नया और रंगीन कवर उन पर बिछाया गया था. मेज से सटी 4 कुरसियां थीं. कुरसियों पर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की उभरती हुई अभिनेत्री शनाया काटवे, फिल्म के डायरेक्टर राघवंका प्रभु और 2 अन्य मेहमान बैठे  हुए थे.

मेज के सामने करीब 4 फीट की दूरी पर कुछ और कुरसियां रखी हुई थीं. उन पर शहर के नामचीन, वीआईपी, रिश्तेदार, दोस्त और स्थानीय समाचारपत्रों के खबरनवीस बैठे हुए थे. हाल का कोनाकोना दुलहन की तरह सजा था. रंगीन और दूधिया रौशनी के सामंजस्य से पूरा हाल नहा उठा था. खूबसूरत और शानदार सजावट से किसी की आंखें हट ही नहीं रही थीं.

अभिनेत्री शनाया काटवे की ओर से यह शानदार पार्टी उस के फिल्म प्रमोशन ‘आेंडू घंटेया काठे’ के अवसर पर आयोजित की गई थी. पार्टी देर रात तक चलती रही. घूमघूम कर शनाया मेहमानों का खयाल रख रही थी. पार्टी में शामिल आगंतुकों ने वहां जम कर लुत्फ उठाया था. पार्टी खत्म हुई तो देर रात शनाया काटवे अपने मांबाप के साथ घर पहुंची. वह बहुत थक गई थी. कपड़े वगैरह बदल कर हाथमुंह धो कर अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी तो दिन भर की थकान के चलते लेटते ही सो गई. उस के मांबाप अपने कमरे में जा कर सो गए थे. यह बात 9 अप्रैल, 2021 की है.

अगली सुबह जब शनाया और उस के मांबाप की नींद खुली और वे फ्रैश हो कर डायनिंग हाल में नाश्ता करने बैठे तो उन्हें अपने इर्दगिर्द एक कमी का एहसास हुआ. जब वे देर रात घर वापस लौटे थे तो भी घर पर उन का बेटा राकेश काटवे कहीं नजर नहीं आया था. जब सुबह नाश्ता करने के लिए सभी एक साथ डायनिंग हाल में बैठे तो भी राकेश वहां भी मौजूद नहीं था.

यह देख कर शनाया के पापा बलदेव काटवे थोड़ा परेशान हो गए कि आखिर वह कहां है, घर में कहीं दिख भी नहीं रहा है. ऐसा पहली बार हुआ था जब वह घर से कहीं बाहर गया और हमें नहीं बताया, लेकिन वह जा कहां सकता है. यह तो हैरान करने वाली बात हुई. बलदेव काटवे और उन की पत्नी सोनिया का नाश्ता करने का मन नहीं हो रहा था. दोनों एकएक प्याली चाय पी कर वहां से उठ गए. मांबाप को उठ कर जाते देख शनाया भी नाश्ता छोड़ कर उठ गई और उन के कमरे में जा पहुंची, जहां वे बेटे को ले कर परेशान और चिंतित थे.

बात चिंता करने वाली थी ही. जो इंसान घर छोड़ कर कहीं न जाता हो और फिर वह अचानक से गायब हो जाए तो यह चिंता वाली बात ही है. बलदेव, सोनिया और शनाया ने अपनेअपने स्तर से परिचितों और दोस्तों को फोन कर के राकेश के बारे में पता किया, लेकिन वह न तो किसी परिचित के वहां गया था और न ही किसी दोस्त के वहां ही. उस का कहीं पता नहीं चला.

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राकेश का जब कहीं पता नहीं चला तो बलदेव काटवे ने बेटे की गुमशुदगी की सूचना हुबली थाने में दे दी. एक जवान युवक के गायब होने की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य हरकत में आए और राकेश की खोजबीन में अपने खबरियों को लगा दिया. यह 10 अप्रैल, 2021 की बात है. राकेश काटवे कोई छोटामोटा आदमी नहीं था. उस के नाम के पीछे अभिनेत्री शनाया काटवे का नाम जुड़ा था, इसलिए यह मामला हाईप्रोफाइल बन गया था. मुकदमा दर्ज कर लेने के बाद पुलिस राकेश काटवे का पता लगाने में जुटी हुई थी.

5 टुकड़ों में मिली लाश

इसी दिन शाम के समय हुबली थाना क्षेत्र के देवरागुडीहल के जंगल में एक कटा हुआ सिर बरामद हुआ तो इसी थाना क्षेत्र के गदर रोड से एक कुएं में गरदन से पैर तक शरीर के कई टुकड़े पानी पर तैरते बरामद हुए. टुकड़ों में मिली इंसानी लाश से इलाके में दहशत फैल गई थी. जैसे ही कटा सिर और टुकड़ों में बंटे शरीर के अंग पाए जाने की सूचना थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य को मिली, वह चौंक गए. वह तुरंत टीम ले कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए थे.

चूंकि राकेश काटवे की गुमशुदगी की सूचना थाने में दर्ज थी, घर वालों ने उस की एक रंगीन तसवीर थाने में दी थी. कटा हुआ सिर तसवीर से काफी हद तक मेल खा रहा था, इसलिए थानाप्रभारी ने घटनास्थल पर बलदेव काटवे को भी बुलवा लिया, जिस से उस की शिनाख्त हो जाए.  छानबीन के दौरान संदिग्ध अवस्था में घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक मारुति रिट्ज और एक हुंडई कार बरामद की थी. दोनों कारों की पिछली सीटों पर खून के धब्बे लगे थे, जो सूख चुके थे. पुलिस का अनुमान था कि हत्यारों ने कार को लाश ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया होगा. पुलिस ने दोनों कारों को अपने कब्जे में ले लिया.

दोनों कारों को कब्जे में लेने के बाद उन्होंने इस की सूचना एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और पुलिस कमिश्नर लभु राम को दे दी थी. दिल दहला देने वाली घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने घटनास्थल और कटे हुए अंगों का निरीक्षण किया. शरीर के अंगों को देखने से ऐसा लगता था जैसे हत्यारों ने बड़े इत्मीनान से किसी  धारदार हथियार से उसे छोटेछोटे टुकड़ों में काटा होगा. पुलिस उन तक पहुंच न पाए, इसलिए लाश जंगल में ले जा कर अलगअलग जगहों पर फेंक दी, ताकि लाश की शिनाख्त न हो सके.

बहरहाल, थानाप्रभारी की यह तरकीब वाकई काम कर गई. उन्होंने जब बलदेव काटवे को सिर के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही बलदेव काटवे पछाड़ मार कर जमीन पर गिर गए. यह देख कर पुलिस वालों को समझते देर न लगी कि कटे हुए सिर की पहचान उन्होंने कर ली है. थोड़ी देर बाद जब वह सामान्य हुए तो वह दहाड़ मारमार कर रोने लगे. वह कटा हुआ सिर उन के लाडले बेटे राकेश काटवे का था. पुलिस यह जान कर और भी हैरान थी कि कहीं गदग रोड स्थित कुएं से बरामद कटे अंग राकेश के तो नहीं हैं. लेकिन पुलिस की यह आशंका भी जल्द ही दूर हो गई थी. बलदेव काटवे ने हाथ और पैर की अंगुलियों से लाश की पहचान अपने बेटे के रूप में कर ली थी.

24 घंटे के अंदर पुलिस ने राकेश काटवे की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठा दिया था. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से उसे मौत के घाट उतारा था. पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. लेकिन एक बात से राकेश के मांबाप और पुलिस हैरान थे कि राकेश की जब किसी से दुश्मनी नहीं थी तो उस की हत्या किस ने और क्यों की? इस का जबाव न तो पुलिस के पास था और न ही उस के मांबाप के पास. दोनों ही इस सवाल से निरुत्तर थे.

किस ने और क्यों, का जबाव तो पुलिस को ढूंढना था. राकेश की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को अपना हथियार बनाया. पुलिस ने सब से पहले राकेश काटवे के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुट गई कि आखिरी बार राकेश से किस की और कब बात हुई थी? जांचपड़ताल में आखिरी बार उस की बहन शनाया से बातचीत के प्रमाण मिले थे. रात में 7 और 8 बजे के बीच में शनाया और राकेश के बीच लंबी बातचीत हुई थी. उस के बाद उस के फोन पर किसी और का फोन नहीं आया था. इस का मतलब आईने की तरह साफ था कि राकेश की हत्या रात 8 बजे के बाद की गई थी.

पुलिस के सामने एक और हैरानपरेशान कर देने वाली सच्चाई सामने आई थी. घटना वाले दिन शनाया ने अपने फिल्म के प्रमोशन पर एक पार्टी रखी थी. उस पार्टी में राकेश को छोड़ घर के घर सभी सदस्य शमिल थे तो उस का भाई राकेश पार्टी में शामिल क्यों नहीं हुआ? वह कहां था? इंसपेक्टर एस. शंकराचार्य के दिमाग में यह बात बारबार उमड़ रही थी कि जब घर के सभी सदस्य पार्टी में शमिल थे तो राकेश किस वजह से घर पर रुका रहा? इस ‘क्यों’ का जबाव मिलते ही हत्या की गुत्थी सुलझ सकती थी.

आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई. घटनास्थल से बरामद हुई दोनों कारों में से एक मारुति रिट्ज कार मृतक राकेश काटवे की बहन शनाया काटवे के नाम पर रजिस्टर्ड थी. दूसरी हुंडई कार किसी अमन नाम के व्यक्ति के नाम पर थी. यह जान कर पुलिस के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई कि शनाया काटवे की कार घटनास्थल पर कैसे पहुंची? राकेश के मर्डर से शनाया का क्या संबंध हो सकता है? क्या शनाया का हत्यारों के साथ कोई संबंध है? ऐसे तमाम सवालों ने पुलिस कमिश्नर लभु राम, एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और थानाप्रभारी को हिला कर रख दिया था.

एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत के नेतृत्व में राकेश काटवे हत्याकांड की बिखरी कडि़यों को जोड़ने के लिए थानाप्रभारी बेताब थे. उन्होंने घटना का परदाफाश करने के लिए मुखबिरों को लगा दिया था. घटना के 4 दिनों बाद 14 अप्रैल को मुखबिर ने जो सूचना दी, उसे सुन कर थानाप्रभारी को मामले में प्रगति नजर आई. मुखबिर ने उन्हें बताया था कि भाईबहन शनाया और राकेश के बीच में अच्छे रिश्ते नहीं थे. बरसों से उन के बीच में छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ था.

मुखबिर की यह सूचना पुलिस के लिए काम की थी. पुलिस ने दोनों के बिखरे रिश्तों का सच तलाशना शुरू किया तो जल्द ही सारा सच सामने आ गया. दरअसल, राकेश शनाया के प्रेम की राह में एक कांटा बना हुआ था. शनाया का नियाज अहमद काटिगार के साथ प्रेम संबंध था. इसी बात को ले कर अकसर दोनों भाईबहन के बीच में झगड़ा हुआ करता था. राकेश को बहन का नियाज से मेलजोल अच्छा नहीं लगता था, जबकि शनाया को भाई की टोकाटोकी सुहाती नहीं थी. यही दोनों के बीच खटास की वजह थी. घटना के खुलासे के लिए इतनी रौशनी काफी थी. सबूतों के आधार पर 17 अप्रैल को हुबली पुलिस ने नियाज अहमद काटिगार को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई.

अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थे

थाने में कड़ाई से हुई पूछताछ में नियाज अहमद पुलिस के सामने टूट गया और राकेश की हत्या का अपना जुर्म कबूल कर लिया. आगे की पूछताछ में उस ने यह भी बताया कि इस घटना में उस के साथ उस के 3 साथी तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला शमिल थे. उस के बयान के आधार पर उसी दिन तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.

पुलिस पूछताछ के दौरान नियाज अहमद ने प्रेमिका शनाया काटवे के कहने पर राकेश की हत्या करना कबूल किया था. 5 दिनों बाद 22 अप्रैल, 2021 को राकेश हत्याकांड की मास्टरमाइंड शनाया काटवे को हुबली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. शनाया ने बड़ी आसानी से पुलिस के सामने घुटने टेक दिए. उस ने भाई राकेश की हत्या कराने का अपना जुर्म मान लिया था. पुलिस पूछताछ में राकेश काटवे हत्याकांड की कहानी ऐसे सामने आई—

25 वर्षीया शनाया काटवे मूलरूप से उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले की हुबली की रहने वाली थी. वह मां सोनिया काटवे और पिता बलदेव की इकलौती संतान थी. इस के अलावा काटवे दंपति की कोई और संतान नहीं थी. एक ही संतान को पा कर दोनों खुश थे और खुशहाल जीवन जी रहे थे. लेकिन बेटे की चाहत कहीं न कहीं पतिपत्नी के मन में बाकी थी. पतिपत्नी जब भी अकेले में होते तो एक बेटे की अपनी लालसा जरूर उजागर करते. आखिरकार उन्होंने फैसला किया कि वे एक बेटे को गोद लेंगे, अपनी कोख से नहीं जनेंगे. जल्द ही काटवे दंपति की वह मंशा पूरी हो गई.

गोद लिया भाई था राकेश

उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के बेटे को कानूनी तौर पर गोद ले लिया और पालपोस कर उसे बड़ा किया. तब राकेश साल भर का रहा होगा. काटवे दंपति के गोद में राकेश पल कर बड़ा हुआ. उन की अंगुलियां पकड़ कर चलना सीखा. सयाना और समझदार हुआ तो मांबाप के रूप में उन्हें ही सामने पाया. वही उस के मांबाप थे, राकेश यही जानता था. उन्होंंने भी शनाया और राकेश के बीच कभी फर्क नहीं किया. लेकिन शनाया जानती थी कि राकेश उस का सगा भाई नहीं है, उसे मांबाप ने गोद लिया है.

बचपन से ही शनाया राकेश से नफरत करती थी, उस से चिढ़ती थी. चिढ़ उसे इस बात से हुई थी कि उस के हिस्से की आधी खुशियां और सुख राकेश की झोली में जा रहे थे. शनाया फुरसत में जब भी होती, यही सोचती कि वह नहीं होता तो जो सारी खुशियां, लाड़प्यार राकेश को मिलता है, उसे ही नसीब होता. लेकिन उस के हिस्से के प्यार पर डाका डालने न जाने वह कहां से आ गया.

यही वह खास वजह थी जब शनाया बचपन से ले कर जवानी तक राकेश को फूटी आंख देखना नहीं चाहती थी. उस से नफरत करती थी. लेकिन इस से राकेश को कोई फर्क नहीं पड़ता था कि शनाया उसे प्यार करती थी या नफरत. वह तो उस की परछाईं को अपना समझ कर उस के पीछे भागता था, उसे बहन के रूप में प्यार करता था. क्योंकि उस के मांबाप ने उसे यही बताया था.

खैर, शनाया और राकेश बचपन की गलियों को पीछे छोड़ अब जवानी की दहलीज पर खड़े थे. जिस प्यार को मांबाप ने दोनों में बराबर बांटा था, दोनों के अपने रास्ते अलगअलग थे. हुबली से ही स्नातक की डिग्री हासिल कर शनाया काटवे की बचपन से रुपहले परदे पर स्टार बन कर चमकने की दिली ख्वाहिश थी. अपने सपने पूरे करने के लिए वह दिनरात मेहनत करती थी. इस के लिए उस ने मौडलिंग की दुनिया को सीढ़ी बना कर आगे बढ़ना शुरू किया.

शनाया बला की खूबसूरत और बिंदास लड़की थी. अपनी सुंदरता पर उसे बहुत नाज था. आदमकद आईने के सामने घंटों खड़ी हो कर खुद को निहारना उस के दिल को सुकून देता था. यही नहीं, जीने की हसरत उस में कूटकूट कर भरी थी. उस के खयालों में नियाज अहमद काटिगार सुनहरे रंग भर रहा था.

अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था नियाज

हुबली का रहने वाला 22 वर्षीय नियाज अहमद अमीर मांबाप की बिगड़ी हुई औलाद था. बाप के खूनपसीने से कमाई दौलत यारदोस्तों में दोनों हाथों से पानी की तरह बहा रहा था. उन यारदोस्तों में एक नाम शनाया काटवे का भी था. नियाज के दिल की धड़कन थी शनाया. उस के रगों में बहने वाला खून थी शनाया. शनाया के बिना जीने की वह कभी कल्पना नहीं कर सकता था. शनाया और नियाज एकदूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे. दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. शनाया की खूबसूरती देख कर नियाज घायल हो गया था. वह पहली नजर में ही शनाया को दिल दे बैठा था. उठतेबैठते, सोतेजागते, खातेपीते हर जगह उसे शनाया ही नजर आती थी.

ऐसा नहीं था कि मोहब्बत की आग एक ही तरफ लगी हो. शनाया भी उसी मोहब्बत की आग में जल रही थी. मोहब्बत की आग दोनों ओर बराबर लगी थी. एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें दोनों ने खाईं और भविष्य को ले कर सपने देख रहे थे. खुले आसमान के नीचे अपनी बांहें फैलाए नियाज और शनाया भूल गए थे कि उन का प्यार ज्यादा दिनों तक चारदीवारी में कैद नहीं रह सकता. वह फिजाओं में खुशबू की तरह फैल जाता है.

शनाया और नियाज की मोहब्बत भी ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही. शनाया के भाई राकेश काटवे को बहन के प्रेम की सूचना मिली तो वह आगबबूला हो गया था. उस ने अपनी तरफ से सच्चाई का पता लगाया तो बात सच निकली.

बहन को हिदायत दी थी राकेश ने

शनाया एक मुसलिम युवक नियाज अहमद से प्यार करती थी. उस ने बड़े प्यार से एक दिन बहन से पूछा, ‘‘यह मैं क्या सुन रहा हूं शनाया?’’

‘‘क्या सुन रहे हो भाई, मुझे भी तो बताओ.’’ शनाया ने पूछा.

‘‘क्या तुम सचमुच नहीं जानती कि मैं क्या कहना चाहता हूं?’’ वह बोला.

‘‘नहीं, सचमुच मैं नहीं जानती, आप क्या कहना चाहते हो और मेरे बारे में आप ने क्या सुना है?’’ शनाया ने सहज भाव से कहा.

‘‘उस नियाज से तुम दूरी बना लो, यही तुम्हारी सेहत के अच्छा होगा. मैं अपने जीते जी खानदान की नाक कटने नहीं दूंगा. अगर  तुम ने मेरी बात नहीं सुनी या नहीं मानी तो यह नियाज मियां के सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा.’’ भाई के मुंह से नियाज का नाम सुनते ही शनाया के होश उड़ गए.

‘‘जैसा तुम सोच रहे हो भाई, हमारे बीच में ऐसी कोई बात नहीं है. हम दोनों एक अच्छे दोस्त भर हैं.’’ शनाया ने सफाई देने की कोशिश की, लेकिन वह घबराई हुई थी.

‘‘मेरी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश मत करना. तुम दोनों के बारे में मुझे सब पता है. कई बार मैं ने खुद तुम दोनों को एक साथ बांहों में बांहें डाले देखा है. जी तो चाहा कि तुम्हें वहीं जान से मार दूं, लेकिन मम्मीपापा के बारे में सोच कर मेरे हाथ रुक गए. तुम अब भी संभल जाओ. तुम्हारी सेहत के लिए यही अच्छा होगा. नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है, जो न मैं जानता हूं और न ही तुम, समझी.’’

‘‘प्लीज भाई, मम्मीपापा से कुछ मत कहना,’’ शनाया भाई के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘नहीं तो उन के दिल को बहुत ठेस लगेगी. वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे. मेरी उन की नजरों में सारी इज्जत खत्म हो जाएगी. प्लीज…प्लीज… प्लीज, मम्मीपापा से कुछ मत कहना, मेरे अच्छे भाई.’’

‘‘ठीक है, ठीक है, सोचूंगा. मुझे क्या करना होगा लेकिन तुम ने अपनी आदत में बदलाव नहीं लाया तो सोचना कि मैं तुम्हारे लिए कितना खतरनाक बन जाऊंगा, मैं खुद भी नहीं जानता.’’

राकेश ने शनाया को प्यार से समझाया भी और धमकाया भी. उस के बाद उस ने मम्मीपापा से बहन की पूरी हकीकत कह सुनाई. बेटी की करतूत सुन कर वे शर्मसार हो गए.

मांबाप ने भी बेटी को समझाया और नियाज से दूर रहने की सलाह दी. वैसे भी शनाया भाई से छत्तीस का आंकड़ा रखती थी. उस के मना करने के बावजूद राकेश ने उस के प्यार वाली बात मांबाप से बता दी थी.  यह सुन कर उस के सीने में भाई के प्रति नफरत की आग धधक उठी थी.

प्यार की राह का कांटा बना राकेश

राकेश बहन के प्रेम की राह का कांटा बना हुआ था. राकेश के कई बार समझाने के बावजूद शनाया ने नियाज से मिलना बंद नहीं किया था. इसे ले कर दोनों में अकसर झगड़े होते रहते थे. रोजरोज की किचकिच से शनाया ऊब चुकी थी. वह नहीं चाहती थी कि उस के और उस के प्यार के बीच में कोई कांटा बने. भाई की टोकाटोकी से तंग आ कर शनाया ने उसे रास्ते से हटाने की खतरनाक योजना बना ली. शनाया ने अपनी अदाओं से प्रेमी नियाज अहमद को उकसाया कि अगर मुझे प्यार करते हो तो हमारे प्यार के बीच कांटा बने भाई राकेश को रास्ते से हटा दो, नहीं तो मुझे हमेशा के लिए भूल जाओ.

नियाज अहमद शनाया से दूर हो कर जीने की कल्पना भी कर नहीं सकता था. उस ने प्रेमिका का दिल जीतने के लिए राकेश को रास्ते से हटाने के लिए हामी भर दी. इस खतरनाक योजना को अंजाम देने के लिए उस ने अपने 3 साथियों तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला को शमिल कर लिया. इस के बाद राकेश को रास्ते से हटाने की योजना बनी. खतरनाक योजना खुद शनाया ने ही बनाई. इसे 9 अप्रैल, 2021 को अंजाम देने की तारीख तय की गई. उस दिन उस ने अपनी नई फिल्म ‘आेंडू घंटेया काठे’ की प्रमोशन रखवाई थी. चतुर शनाया ने इसलिए यह तारीख निर्धारित की थी ताकि उस पर किसी का शक न जाए और रास्ते का कांटा सदा के लिए हट भी जाए. यानी सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे.

योजना के मुताबिक, 9 अप्रैल, 2021 को शनाया काटवे फिल्म प्रमोशन के लिए जब पार्टी में पहुंची, तभी उस ने नियाज अहमद को फोन कर के बता दिया कि राकेश पार्टी में नहीं आएगा, वह घर पर अकेला है. मांबाप भी पार्टी में आए हुए हैं. यही सही वक्त है, काम को अंजाम दे दो.

घर पर ही किए थे राकेश के टुकड़े

शनाया की ओर से हरी झंडी मिलते ही नियाज अहमद, साथियों के साथ अमन गिरनीवाला की हुंडई कार ले कर पार्टी वाली जगह पहुंचा. वहां से शनाया की मारुति रिट्ज कार ले कर रात साढ़े 8 बजे उस के घर पहुंचा. उस की कार नियाज अहमद खुद ड्राइव कर रहा था. उस कार में नियाज के साथ तौसीफ चन्नापुर बैठा था जबकि अमन गिरनीवाला की हुंडई कार में अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला सवार था.

खैर, रात साढ़े 8 बजे जब नियाज शनाया के घर पहुंचा तो राकेश काटवे घर पर ही था. नियाज ने कालबैल बजाई तो राकेश ने दरवाजा खोल दिया. सामने नियाज को देख कर वह चौंक गया. इस से पहले कि वह सावधान हो पाता, नियाज और उस के साथी अचानक उस पर टूट पड़े.

नियाज ने गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया. फिर लाश को ठिकाने लगाने के लिए नियाज ने अपने साथ लाए धारदार चाकू से राकेश के शरीर को 5 टुकड़ों में काट दिया और फर्श पर पड़े खून को एक कपड़े से साफ कर साक्ष्य मिटा दिए. फिर एक पैकेट में सिर और दूसरे पैकेट में बाकी अंग रख कर चारों लोग 2 गाडि़यों में सवार हो कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए. नियाज ने राकेश का कटा सिर जंगल में फेंक दिया और दोनों कार वहीं छोड़ कर चारों गदग रोड जा पहुंचे. वहां एक कुएं में कटे अंग डाल कर सभी फरार हो गए.

शनाया काटवे ने मौत की परफैक्ट प्लानिंग की थी. लेकिन वह यह भूल गई थी कि अपराधी कितना ही चालाक क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है. शनाया ने भी वैसा ही किया. वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाई और पुलिस के हत्थे चढ़ गई. सभी अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. Thriller Hindi Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

True Crime Story: जाल में फंसी कुसुमलता – परिवार बना मोहरा

True Crime Story: पहली अप्रैल, 2021 को सुबह के करीब पौने 8 बज रहे थे. राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ थाने  के थानाप्रभारी विनोद सांखला को फोन पर सूचना मिली कि जखराना बसस्टैंड के पास एक बाइक और स्कौर्पियो गाड़ी की भिड़ंत हो गई है. सूचना मिलते ही विनोद सांखला पुलिस टीम ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर काफी भीड़ जमा थी. पुलिस को देखते ही भीड़ थोड़ा हट गई. पुलिस ने देखा कि वहां एक व्यक्ति की दबीकुचली लाश सड़क पर पड़ी थी. थोड़ी दूरी पर मृतक की मोटरसाइकिल गिरी पड़ी थी.

घटनास्थल पर प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि नीमराना की तरफ से स्कौर्पियो गाड़ी आई थी. स्कौर्पियो में सवार लोगों ने जानबूझ कर मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी. बाइक सवार स्कौर्पियो की टक्कर से उछल कर दूर जा गिरा. तब स्कौर्पियो यूटर्न ले कर आई और बाइक से गिरे युवक को कुचल कर चली गई. गाड़ी के टायर युवक के सिर से गुजरे तो सिर का कचूमर निकल गया. जब स्कौर्पियो सवार निश्चिंत हो गए कि बाइक सवार की मौत हो गई है, तब वे वापस उसी रोड से भाग गए.

वहां मौजूद लोगों ने थानाप्रभारी विनोद सांखला को बताया कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है. स्कौर्पियो में सवार अज्ञात लोगों ने बाइक सवार को जानबूझ कर टक्कर मार कर हत्या की है. थानाप्रभारी ने घटना की खबर उच्च अधिकारियों को दे दी. खबर पा कर बहरोड़ के सीओ और एसडीएम घटनास्थल पर आ गए. बाइक सवार युवक की पहचान कृष्णकुमार यादव निवासी भुंगारका, महेंद्रगढ़, हरियाणा के रूप में हुई.

कृष्णकुमार यादव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जखराना में अपर डिविजन क्लर्क के पद पर कार्यरत था. कृष्णकुमार के एक्सीडेंट होने की खबर पा कर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि कृष्णकुमार यादव अपने पिताजी की औन ड्यूटी मृत्यु होने पर उन की जगह मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पर लगा था. कृष्णकुमार अपने मांबाप का इकलौता बेटा था. वह अपने गांव भुंगारका से रोजाना बाइक द्वारा ड्यूटी आताजाता था. सीओ देशराज गुर्जर ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और उपस्थित लोगों से जानकारी ली. जानकारी में यही सामने आया कि कृष्णकुमार की हत्या की गई है.

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज निकाले. फुटेज से पता चला कि प्रत्यक्षदर्शियों ने जो बातें बताई थीं, वह सच थीं. हत्यारे कृष्णकुमार की हत्या को दुर्घटना दिखाना चाह रहे थे. मगर लोगों ने यह सब अपनी आंखों से देखा था.

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मृतक के परिजनों को भी हत्या की खबर दे दी गई. खबर मिलते ही मृतक के घर वाले एवं रिश्तेदार घटनास्थल पर आ गए. उन से भी पुलिस ने पूछताछ की और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद वह परिजनों को सौंप दिया. मृतक के परिजनों की तरफ से कृष्णकुमार की हत्या का मामला बहरोड़ थाने में दर्ज करा दिया गया. थानाप्रभारी विनोद सांखला, एसआई सुरेंद्र सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने सीसीटीवी फुटेज और स्कौर्पियो गाड़ी के नंबरों के आधार पर जांच शुरू की. पुलिस ने स्कौर्पियो गाड़ी का नंबर दे कर सभी थानों से इस नंबर की गाड़ी की जानकारी देने को कहा.

तभी जयपुर पुलिस ने सूचना दी कि इस नंबर की स्कौर्पियो गाड़ी पावटा जयपुर में खड़ी है. पुलिस टीम ने पावटा पहुंच कर वहां से स्कौर्पियो गाड़ी सहित 2 युवकों अशोक और पवन मेघवाल को भी हिरासत में ले लिया. गाड़ी के मालिक अजीत निवासी भुंगारका सहित कुछ और संदिग्ध युवकों को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए उठा लिया.

थाने में इन सभी से पूछताछ की. अशोक व पवन मेघवाल एक ही रट लगाए थे कि उन की कृष्णकुमार से कोई दुश्मनी नहीं थी. अचानक वह गाड़ी से टकरा गया था. बाइक के एक्सीडेंट के बाद हड़बड़ाहट में गाड़ी घुमाई तो कृष्णकुमार पर गाड़ी चढ़ गई. उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात का डर लग रहा था कि लोग उन्हें पकड़ कर मार न डालें, इस डर के कारण वे गाड़ी भगा ले गए. मगर आरोपियों की यह बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. भुंगारका निवासी अजीत ने पुलिस को बताया कि उस ने अपनी स्कौर्पियो गाड़ी एक लाख 80 हजार रुपए में सन्नी यादव को बेच दी. सन्नी ने अशोक के नाम पर यह गाड़ी खरीदी थी.

अजीत ने पुलिस को सन्नी का नाम बताया. तब तक पुलिस को लग रहा था कि अजीत का इस मामले से कोई संबंध नहीं है. अशोक और पवन मेघवाल 4 दिन तक पुलिस को एक ही कहानी बताते रहे कि अचानक बाइक से गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया था. पुलिस को भी लगने लगा था कि मामला कहीं दुर्घटना का ही तो नहीं है. मगर सीसीटीवी फुटेज में जो एक्सीडेंट का दृश्य था, वह बता रहा था कि कृष्णकुमार की साजिश के तहत हत्या की गई थी. हत्या को उन्होंने साजिश के तहत दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की थी.

तब पुलिस अधिकारियों ने अपना पुलिसिया रूप दिखाया. बस फिर क्या था. पुलिस का असली रूप देख कर वे टूट गए और स्वीकार कर लिया कि उन्होंने जानबूझ कर कृष्णकुमार यादव की हत्या की थी, फिर उन्होंने हत्या की कहानी बता दी. हरियाणा के नांगल चौधरी इलाके के भुंगारका गांव में कृष्णकुमार यादव अपनी पत्नी कुसुमलता (35 वर्ष) के साथ रहता था. कृष्णकुमार की 4 बहनें हैं, जिन की शादी हो चुकी थी. वे सब अपनी ससुराल में हैं. पिता की औनड्यूटी मृत्यु होने के बाद आश्रित कोटे के तहत कृष्णकुमार की क्लर्क पद पर सरकारी स्कूल में नौकरी लग गई थी. वह अपने मातापिता का इकलौता बेटा था.

कृष्णकुमार के पड़ोस में उस के चाचा मुकेश यादव रहते थे. उन का बड़ा बेटा सन्नी 10वीं कक्षा में फेल हो गया तो उस ने स्कूल छोड़ दिया. वह कोई कामधंधा नहीं करता था. कृष्णकुमार के परिवार के ठाठबाट देखता तो उसे जलन होती थी. क्योंकि कृष्णकुमार के पास करोड़ों रुपए की संपत्ति थी. कृष्णकुमार के नाम करीब 50 बीघा जमीन थी. जोधपुर, राजस्थान के फलोदी में 17 बीघा जमीन, बहरोड़ में 2 कामर्शियल प्लौट, भुंगारका गांव में 32 बीघा जमीन व आलीशान मकान था. यह सब कृष्णकुमार के नाम था.

सन्नी ने योजना बनाई कि अगर कुसुमलता को वह प्यार के जाल में फंसा क र कृष्णकुमार को रास्ते से हटा दे तो वह कुसुमलता से विवाह कर के उस की करोड़ों की प्रौपर्टी का मालिक बन सकता है. आज से करीब 3 साल पहले सन्नी ने कुसुमलता पर डोरे डालने शुरू किए. कुसुमलता रिश्ते में उस की भाभी लगती थी.

सन्नी से कुसुमलता उम्र में 10 साल बड़ी थी. मगर वह जायदाद हड़प कर करोड़पति बनने के चक्कर में अपने से 10 साल बड़ी भाभी के आसपास दुम हिलाने लगा. कृष्णकुमार ड्यूटी पर चला जाता तो कुसुमलता घर में अकेली रह जाती थी. कृष्णकुमार की गैरमौजूदगी में सन्नी उस की बीवी के पास चला आता था. सन्नी कुसुमलता के चाचा ससुर का बेटा था. वह भाभी से हंसीमजाक करतेकरते उसे बांहों में भर कर बिस्तर तक ले आया. कुसुमलता भी जवान देवर की बांहों में खेलने लगी. वह सन्नी की दीवानी हो गई. सन्नी की मजबूत बांहों में कुसुमलता को जो शारीरिक सुख का चस्का लगा, वह दोनों को पतन के रास्ते पर ले जा रहा था.

सन्नी ने कुसुमलता को अपने रंग में ऐसा रंगा कि वह उस के लिए पति के प्राण तक लेने पर आमादा हो गई. आज से करीब डेढ़ साल पहले सन्नी ने कुसुमलता से कहा, ‘‘कुसुम, तुम रात में कृष्णकुमार को बिजली के करंट का झटका दे कर मार डालो. इस के बाद हम दोनों के बीच कोई तीसरा नहीं होगा. पति की जगह तुम्हारी नौकरी भी लग जाएगी. फिर मैं तुम से विवाह कर लूंगा और फिर हम मौज की जिंदगी जिएंगे.’’

‘‘ठीक है सन्नी, मैं पति को रास्ते से हटाने का इंतजाम करती हूं.’’ कुसुमलता ने हंसते हुए कहा.

वह देवर के प्यार में पति की हत्या करने करने का मौका तलाशने लगी. एक दिन कृष्णकुमार रात में गहरी नींद में था. तब कुसुमलता ने उसे बिजली का करंट दिया. करंट का कृष्णकुमार को झटका लगा तो वह जाग गया. तब बीवी ने कूलर में करंट आने का बहाना बना दिया. कृष्णकुमार को करंट का झटका लगा जरूर था, मगर वह मरा नहीं.

यह सुन कर सन्नी बोला, ‘‘कुसुम, जल्द से जल्द कृष्ण का खात्मा करना होगा.’’

‘‘तुम ही यह काम किसी से करा दो. मैं तुम्हारे साथ हूं मेरी जान.’’ कुसुमलता बोली.

कुसुमलता और सन्नी जल्द से जल्द कृष्णकुमार को रास्ते से हटाना चाहते थे. कृष्ण के ड्यूटी जाने के बाद वाट्सऐप कालिंग पर दोनों बातचीत करते थे. सन्नी ने अपने छोटे भाई की शादी कर दी थी. खुद शादी नहीं की थी. उस का मकसद तो करोड़ों की मालकिन कुसुमलता से शादी करना था. सन्नी भाभी से शादी कर के वह जल्द से जल्द करोड़पति बनना चाहता था.

एक दिन सन्नी और कुसुमलता के संबंधों की जानकारी किसी ने कृष्णकुमार को दे दी. बीवी और चचेरे भाई के संबंधों की बात सुन कर कृष्णकुमार को बहुत गुस्सा आया. उस ने अपनी बीवी से इस बारे में बात की तो वह त्रियाचरित्र दिखाने लगी. आंसू बहाने लगी. मगर कृष्णकुमार के मन में संदेह पैदा हुआ तो वह उन दोनों पर निगाह रखने लगा. इस के बाद कुसुमलता ने सन्नी को सचेत कर दिया. दोनों छिप कर मिलने लगे. मगर उन्हें हर समय इसी बात का डर लगा रहता कि कृष्णकुमार को कोई बता न दे.

कृष्णकुमार ने सन्नी से भी कह दिया था कि वह उस के घर न आए. यह बात कृष्ण, कुसुम और सन्नी के अलावा कोई नहीं जानता था. किसी को पता नहीं था कि कृष्ण अपनी बीवी और सन्नी पर शक करता है. ऐसे में कुसुमलता और सन्नी ने उसे एक्सीडेंट में मारने की योजना बनाई ताकि उन पर कोई शक भी न करे और राह का कांटा भी निकल जाए. सन्नी ने इस काम में कुछ खर्चा होने की बात कही तो कुसुमलता ने खुद के नाम की 4 लाख रुपए की एफडी मार्च 2021 के दूसरे हफ्ते में तुड़वा दी. 4 लाख रुपए कुसुम ने सन्नी को दे दिए.

सन्नी ने योजनानुसार 18 मार्च, 2021 को भुंगारका के अजीत से एक लाख 80 हजार रुपए में एक स्कौर्पियो गाड़ी एग्रीमेंट के तहत अशोक कुमार के नाम से खरीदी. अशोक को उस ने 2 छोटे मोबाइल व सिम दिए. इन्हीं सिम व मोबाइल के जरिए अशोक की बात सन्नी से होती थी. कृष्णकुमार को मारने के लिए सन्नी ने अशोक को डेढ़ लाख रुपए भी दे दिए.

उसी स्कौर्पियो गाड़ी से अशोक ने सन्नी के कहने पर कृष्णकुमार का एक्सीडेंट करने की कई बार कोशिश की मगर वह सफल नहीं हुआ. तब 26 मार्च, 2021 को राहुल अपने दोस्त पवन मेघवाल को भुंगारका के हरीश होटल पर ले आया. यहां अशोक से पवन की जानपहचान कराई. रात में तीनों शराब पी कर खाना खा कर होटल पर रुके और सुबह चले गए. 30 मार्च, 2021 को अशोक ने पवन से कहा कि मुझे स्कौर्पियो से एक आदमी का एक्सीडेंट करना है. तुम मेरे

साथ गाड़ी में रहोगे तो मैं तुम्हें 40 हजार रुपए दूंगा.

पवन की अशोक से नई दोस्ती हुई थी और वैसे भी पवन को सिर्फ गाड़ी में बैठे रहने के 40 हजार रुपए मिल रहे थे, इसलिए 40 हजार रुपए के लालच में पवन ने हां कर दी. 31 मार्च, 2021 को अशोक और पवन मेघवाल स्कौर्पियो गाड़ी ले कर जखराना आए लेकिन उस दिन कृष्णकुमार ड्यूटी पर नहीं गया. अशोक रोजाना की बात सन्नी को बता देता था. सन्नी अपनी प्रेमिका भाभी कुसुमलता को सारी बात बता देता था. पहली अप्रैल 2021 को सुबह साढ़े 7 बजे कृष्णकुमार अपने गांव भुंगारका से ड्यूटी पर जखराना निकला. यह जानकारी कुसुमलता ने अपने देवर प्रेमी सन्नी को दी. सन्नी ने अशोक को यह सूचना दे दी.

अशोक कुमार गाड़ी में पवन को ले कर जखराना बसस्टैंड पहुंच गया. जैसे ही कृष्णकुमार मोटरसाइकिल से जखराना बसस्टैंड से स्कूल की ओर जाने लगा, तभी अशोक ने स्कौर्पियो से कृष्णकुमार को सीधी टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही कृष्णकुमार उछल कर दूर जा गिरा. इस के बाद अशोक ने गाड़ी को यूटर्न लिया और कृष्णकुमार के ऊपर एक बार चढ़ा दी, जिस के बाद उस की मौके पर ही मौत हो गई. इस के बाद सूचना पा कर बहरोड़ पुलिस आई. प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे हत्या बताया. तब पुलिस ने जांच कर हत्या के इस राज से परदा हटाया.

अशोक कुमार और पवन मेघवाल से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल रहे सन्नी और उस की प्रेमिका कुसुमलता को भी गिरफ्तार कर लिया. इन दोनों ने भी कृष्णकुमार की हत्या में शामिल होने का अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद कुसुमलता, सन्नी यादव, अशोक यादव और पवन मेघवाल को बहरोड़ कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

True Crime Story: अधेड़ उम्र का इश्क – पति की कातिल दुलारी

True Crime Story: बांदा जिले के बुधेड़ा गांव के रहने वाले शिवनारायण निषाद 18 जून, 2021 की रात को गांव में रामसेवक के घर एक शादी के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटे तो घर पर मौजूद पत्नी दुलारी की चिंता बढ़ने लगी. उस समय दुलारी घर पर अकेली थी. उस का 20 वर्षीय बेटा और 17 वर्षीय बेटी राधा गांव अलमोर में स्थित एक रिश्तेदारी में गए हुए थे. दुलारी ने पति की चिंता में जैसेतैसे कर के रात काटी.

सुबह होने पर दुलारी ने अपने बेटे को फोन कर के रोते हुए कहा, ‘‘बेटा, तुम्हारे पिताजी गांव में ही रामसेवक चाचा के घर मंडप पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे, लेकिन अभी तक वह घर वापस नहीं लौटे हैं.’’

बेटे दीपक ने जब अपने पिता के गायब होने ही बात सुनी तो वह भी घबरा गया. फिर वह मां को समझाते हुए बोला, ‘‘घबराओ मत मां, मैं घर आ रहा हूं. हो सकता है पिताजी रात होने पर वहीं रुक गए हों. फिर भी आप उन के घर जा कर पूछ आओ.’’

‘‘ठीक है बेटा, मैं रामसेवक चाचा के घर पता करने जा रही हूं.’’ दुलारी ने दीपक से कहा.

दुलारी जब रामसेवक के घर पहुंची तो रामसेवक ने बताया कि शिवनारायण गांव के ही 2 लोगों सूबेदार और चौथैया के साथ रात 10 बजे ही वहां से लौट गए थे.

यह बात दुलारी ने दीपक को फोन कर के बताई तो दीपक के मन में तमाम तरह की आशंकाओं ने जन्म लेना शुरू कर दिया. उसी दिन दीपक अपनी बहन के साथ गांव अलमोर से घर वापस  लौट आया. दुलारी और घर के लोग सोचने लगे कि जब रामसेवक चाचा के यहां से वह लौट आए तो कहां चले गए. अभी तक वह घर क्यों नहीं आए? उस दिन दीपक अपने ताऊ पिता रामआसरे, मां दुलारी और परिजनों के साथ पिता को आसपास खोजने में लगा रहा.

इस के बाद परिजनों ने सूबेदार और चौथैया से शिवनारायण के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि हम लोग रात में 10 बजे साथ ही लौटे थे और गांव के शिवलाखन की पान परचून की दुकान पर गए, लेकिन उस समय उस की दुकान बंद थी. तब हम लोग अलगअलग हो कर अपनेअपने घरों को वापस लौट गए थे. इस के बाद शिवनारायण कहां गया, हमें नहीं पता. शिवनारायण की 2 बेटियां, जो अपनी ससुराल में थीं, वह भी पिता के लापता होने की सूचना मिलने पर मायके आ चुकी थीं.

अब शिवनारायण के घर वालों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं जन्म लेने लगी थीं. बेटे दीपक और बेटियों का रोरो कर बुरा हाल था. इस दौरान बेटे ने अपने सभी रिश्तेदारियों में फोन कर उन के बारे में जानना चाहा. लेकिन सभी जगह निराशा ही हाथ लग रही थी.

शिवनारायण को गायब हुए 2 दिन होने वाले थे, फिर भी घर वाले पुलिस के पास न जा कर इधरउधर खोजने में ही लगे हुए थे. इसी दौरान 20 जून, 2021 की सुबह गांव के सूबेदार और अन्य लोग जब यमुना नदी किनारे से जा रहे थे. तो उन्होंने हाथपैर बंधे घुटनों के बीच डंडा फंसे एक लाश पड़ी देखी. यह बात उन्होंने गांव के अन्य लोगों को बताई. इस के बाद वह लाश देखने के लिए यमुना किनारे गए. वहां ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा होने लगी थी.

गांव वालों ने वह लाश पहचान ली. मृतक और कोई नहीं 2 दिन से गायब हुआ शिवनारायण ही था. इधर ग्रामीणों ने नदी के किनारे लाश मिलने की सूचना स्थानीय थाने जसपुरा के थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह को भी दे दी. थानाप्रभारी सुनील इस घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देने के बाद अपने मातहतों के साथ घटनास्थल पर रवाना हो गए. नदी के किनारे लाश मिलने की सूचना पा कर शिवनारायण निषाद के परिजन भी रोतेबिलखते वहां पहुंच चुके थे. पति की लाश देख कर दुलारी दहाड़ें मार कर रोने लगी.

सूचना पा कर बांदा के एसपी अभिनंदन के अलावा एएसपी महेंद्र प्रताप सिंह चौहान, सीओ (सदर) सत्यप्रकाश शर्मा के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस नें अपनी जांच में पाया कि लाश पानी में फूल कर उतरा कर नदी के किनारे आई है. ऐसे में अनुमान लगाया कि शिवनारायण की हत्या 18 जून की रात में कर दी गई थी. क्योंकि पानी में पड़ा शव करीब 24 घंटे बाद ही उतरा कर ऊपर आता है. थानाप्रभारी ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. फोरैंसिक टीम ने वहां से कुछ सबूत भी जुटाए.

पुलिस ने लाश को देख कर यह कयास लगाया कि हत्या में एक से ज्यादा लोग शामिल रहे होंगे. क्योंकि पुलिस को घटनास्थल पर ऐसा कोई निशान और न ही दोपहिया व चार पहिया वाहनों के टायरों के निशान मिले, जिस से यह कहा जा सके कि हत्या इसी जगह पर की गई थी. इसी को आधार बना कर पुलिस यह मान रही थी कि हत्या कहीं और की गई है. लाश को नदी में ठिकाने लगाने के उद्देश्य से यहां ला कर फेंका गया था.

जिस समय बुधेड़ा गांव में पुलिस अधिकारी व थाने की पुलिस घटनास्थल का मौकामुआयना कर रही थी, पुलिस को वहां जमीन पर खून पड़ा भी दिखा. साथ ही कुछ दूरी पर चूडि़यों के टुकड़े भी बरामद हुए थे. जिन्हें फोरैंसिक टीम ने अपने कब्जे में ले लिया. मौके पर मौजूद गांव वालों ने बताया कि टूटी चूडि़यां मृतक की पत्नी दुलारी की हैं. उन का कहना था कि मामले की जानकारी होने पर दुलारी वहां बैठ कर रो रही थी. हो सकता है उस दौरान चूडि़यां टूट कर बिखर गई हों.

लेकिन पुलिस किसी भी साक्ष्य को हलके में नहीं ले रही थी, इसलिए वहां मौजूद हर संदिग्ध वस्तु को अपने कब्जे में ले रही थी. इस दौरान हत्या से जुड़े साक्ष्यों को इकट्ठा करने के लिए पुलिस ने शव मिलने वाले स्थान से पैदल ही नदी किनारे करीब डेढ़ किलोमीटर तक छानबीन की, लेकिन वहां से पुलिस को कोई अन्य और खास सबूत नहीं मिला.

पुलिस ने जरूरी साक्ष्यों को इकट्ठा करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. इस दौरान पुलिस ने परिजनों से शिवनारायण के घर वालों से किसी से रंजिश होने की बात पूछी तो उन्होंने बताया कि उन की किसी से कोई रंजिश नहीं थी. दोपहर तक पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंट कर हत्या करने और फेफड़ों में पानी न होने की पुष्टि हुई. इस के बाद पुलिस ने शिवनारायण के बेटे दीपक की तहरीर पर हत्या का मुकदमा भादंवि की धारा 302 व 201 के तहत दर्ज कर लिया.

रिपोर्ट दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह ने एसपी के निर्देश पर जांच के लिए एक टीम गठित की, जिस में कांस्टेबल शुभम सिंह, सौरभ यादव, अमित त्रिपाठी, महिला कांस्टेबल अमरावती व संगीता वर्मा को शामिल कर जांच शुरू की. थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह को शुरुआती पूछताछ में मृतक शिवनारायण के बड़े भाई रामआसरे और बेटे दीपक ने बताया कि 6 महीने पहले गांव के ही एक दुकानदार ने शिवनारायण से विवाद किया था और धमकी दी थी.

इस के बाद पुलिस दुकानदार और रात में दावत में साथ रहे व लाश मिलने की सूचना देने वाले सूबेदार सहित 4 लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले गई. लेकिन पुलिस को उन लोगों से पूछताछ में ऐसी कोई बात नहीं मिली, जिस से उन पर हत्या का शक किया जा सके. जसपुरा थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह शिवनारायण निषाद के हत्या की हर एंगल से जांच कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने मृतक के घर के हर सदस्य का बयान दर्ज किया था.

उन्हें जांच में पता चला कि शिवनारायण रात के 9 बजे ही दावत से अपने घर के लिए वापस लौट लिए थे. चूंकि उस समय हलकी बारिश हो रही थी, ऐसे में 45 साल की उम्र में उन के कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता था. ऐसे में पुलिस यह मान कर चल रही थी कि शिवनारायण घर लौटे थे और उन के साथ घर पर ही कोई घटना हुई थी. उस दिन घर पर मृतक शिवनारायण की पत्नी ही मौजूद थी. क्योंकि उस के बच्चे रिश्तेदारी में पैलानी थानांतर्गत अमलोर गांव गए हुए थे. मौके पर मिली चूडि़यों के टुकड़ों के आधार पर पुलिस का शक पत्नी दुलारी पर और भी पुख्ता होता जा रहा था.

उधर पुलिस को मृतक के हाथपांव के बांधने और घुटनों के बीच डंडा बांधने की बात समझ आ चुकी थी. यह हत्या के बाद लाश को उठा कर ले जाने में उपयोग किया गया होगा. इसी दौरान पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि उसी गांव के रहने वाले जगभान सिंह उर्फ पुतुवा का अकसर शिवनारायण निषाद के घर आनाजाना था. चूंकि शिवनारायण जगभान के खेतों में बंटाई पर खेती करता था. इसी दौरान जगभान का  शिवनारायण की पत्नी दुलारी से अवैध संबंध हो गए थे. जिस की जानकारी होने पर शिवनारायण और जगभान के बीच खटास पैदा हो गई थी.

अब पुलिस शिवनारायण की पत्नी दुलारी और जगभान पर अपनी जांच केंद्रित कर आगे बढ़ रही थी. इसी सिलसिले में थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह ने जगभान के घर जा कर पता करना चाहा तो वह घर पर नहीं मिला. लेकिन उस की पत्नी दुलारी ने पुलिस को बताया कि वह शाम को 6 बजे पास के एक गांव में शादी में गए थे. वहां से वह साढ़े 11 बजे रात में लौट कर आए थे. दुलारी ने यह भी बताया कि उन के साथ ही गांव के भोला निषाद की 4 बेटियां भी शादी में गई थीं. जहां भोला की 3 लड़कियां वहीं रुक गई थीं, जबकि एक उन के साथ वापस आई थी.

इस के बाद थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह ने जहां शादी थी, वहां पता किया तो लोगों ने बताया कि जगभान वहां से साढ़े 8 बजे ही निकल  गया था. फिर पुलिस ने भोला निषाद के घर जा कर पूछताछ की तो  लड़कियों ने बताया कि जगभान उन के घर 9 बजे आए थे, उस के बाद तुरंत वह वापस चले गए. अब पुलिस के सामने सवाल यह था कि जगभान जब भोला के घर से साढ़े 8 बजे चला आया तो वह अपने घर साढ़े 11 बजे रात में पहुंचा था. तो इन ढाई घंटों के दौरान वह कहां रहा.

इस आशंका के आधार पर पुलिस ने जगभान सिंह से ढाई घंटे गायब रहने का कारण पूछा तो वह उस का सही जबाब नहीं दे पाया. पुलिस ने जब कड़ाई से मृतक की पत्नी दुलारी और जगभान सिंह से पूछताछ की गई तो उन दोनों ने शिवनारायण की हत्या किए जाने की बात स्वीकारते हुए हत्या का राज उगल दिया. उन दोनों ने शिवनारायण की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी. उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के जसपुरा थाना क्षेत्र के बुधेड़ा गांव के निवासी शिवनारायण गांव में रह कर खेती करता था. वह दूसरों के खेत बंटाई पर ले कर भी खेती करता था.

शिवनारायण ने गांव के ही जगभान सिंह का खेत भी बंटाई पर ले रखा था. खेत बंटाई में लेने के कारण खेत मालिक जगभान शिवनारायण के घर आनेजाने लगा था. इस बीच जगभान और शिवनारायण की पत्नी दुलारी के बीच नजदीकियां बढ़ाने लगी थीं. दोनों की ये नजदीकियां कब शारीरिक संबंधों में बदल गईं, उन्हें पता ही नहीं चला. लेकिन एक दिन शिवनारायण ने जगभान और दुलारी को साथ में देख लिया तो वह आगबबूला हो गया और जगभान सिंह को घर न आने कि कड़ी हिदायत दे डाली. इस के बावजूद भी जगभान सिंह शिवनारायण के घर आता रहा.

लेकिन बारबार शिवनारायण द्वारा जगभान को घर आने से मना करने की वजह से बीते साल जगभान ने शिवनाराण को अपना खेत बंटाई पर नहीं दिया, तभी से दोनों के बीच मनमुटाव हो गया था. इसी बात से जगभान और दुलारी शिवनारायण से खार खाए बैठे थे. वह इसी उधेड़बुन में थे कि किसी तरह शिवनारायण को ठिकाने लगाया जाए. हत्यारोपी दुलारी ने बताया कि घटना वाले दिन उन के अविवाहित बेटाबेटी गांव अलमोर में अपने एक दिश्तेदार के घर गए हुए थे. उस दिन घर में कोई नहीं था. उसी दिन दोनों ने शिवनरायण को ठिकाने लगाने के लिए तानाबाना बुन लिया था.

जगभान दावत से लौटने के बाद  रात के 9 बजे दुलारी के घर पहुंच गया. इधर मंडप कार्यक्रम से घर लौटे शिवनरायण ने दुलारी को जगभान के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा तो गुस्से में उस का खून खौल गया और वह पत्नी को मारनेपीटने लगा और जगभान से गालीगलौज करने लगा. तभी दुलारी ने प्रेमी जगभान के साथ मिल कर अपने पति को चारपाई पर पटक दिया और गला दबा कर उस की हत्या कर दी. उसी दौरान उन लोगों नें लाश को ठिकाने लगाने का प्रयास किया, लेकिन गांव के लोग उस समय जाग रहे थे. ऐसे में उन्होंने शिवनारायण की लाश चारपाई के नीचे छिपा दी. इस के बाद जगभान रात के 11 बजे अपने घर चला आया.

जगभान ने बताया कि रात करीब 2 बजे जब मोहल्ले के लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तब वह रात के सन्नाटे में फिर से शिवनारायण के घर पहुंचा. जहां उस ने और दुलारी ने शिवनारायण की लाश के हाथपांव बांध कर दोनों पैरों के बीच डंडा डाल कर लाश को यमुना नदी में फेंक आए. इतना सब करने के बाद दुलारी और जगभान अपनेअपने घर चले गए. घर आने के बाद दुलारी ने पति के गायब होने की खबर पूरे गांव में फैला दी और जानबूझ कर पति को खोजने का नाटक करती रही. लेकिन पुलिसिया जांच में उन का जुर्म छिप नहीं सका.

पुलिस ने शिवनारायण की पत्नी दुलारी और उस के आशिक जगभान से पूछताछ करने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया. वहीं एसपी अभिनंदन ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को ईनाम देने की घोषणा की है. True Crime Story

 

Hindi Crime Story: सपनों से सस्ता सिंदूर – पति को बनाया शिकार

Hindi Crime Story: 31 वर्षीय कल्पना बसु कर्नाटक के जिला बीवी का धोखा में आने वाले तालुका माहेर की रहने वाली थी. उस का जन्म एक मध्यवर्गीय किसान परिवार में हुआ था. उस के जन्म के कुछ दिनों पहले ही पिता का निधन हो गया था. मां ने मेहनतमजदूरी कर उसे पालापोसा. पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह ज्यादा पढ़ाईलिखाई भी नहीं कर पाई थी.

कल्पना खूबसूरत होने के साथसाथ महत्त्वाकांक्षी भी थी. वह चाहती थी कि उसे ऐसा जीवनसाथी मिले जो उस की तरह हैंडसम हो और उस की भावनाओं की कद्र करते हुए सभी इच्छाओं को पूरा करे. लेकिन उस के इन सपनों पर पानी तब फिर गया जब उस की शादी एक ऐसे मामूली टैक्सी ड्राइवर बसवराज बसु के साथ हो गई, जो उस के सपनों के पटल पर कहीं भी फिट नहीं बैठता था.

38 वर्षीय बसवराज बसु उसी तालुका का रहने वाला था, जिस तालुका में कल्पना रहती थी. प्यार तो उसे बचपन से ही नहीं मिला था. उस के पैदा होने के बाद ही मांबाप दोनों की मौत हो गई थी. उसे नानानानी ने पालपोस कर बड़ा किया था. नानानानी की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह भी पढ़लिख नहीं सका. जिंदगी का बोझ उठाने के लिए जैसेतैसे वह टैक्सी ड्राइवर बन गया था. ड्राइविंग का लाइसैंस मिलने पर वह माहेर शहर आ कर कैब चलाने लगा. जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया तो नातेरिश्तेदारों ने उस की शादी कराने की सोची. आखिरकार उस की शादी कल्पना से हो गई.

खुले विचारों वाली कल्पना से शादी कर के वह खुश था. लेकिन कल्पना उस से खुश नहीं थी. ड्राइवर के साथ शादी हो जाने से उस की सारी ख्वाहिशों और सपनों पर जैसे पानी फिर गया था. पति के रूप में एक मामूली टैक्सी ड्राइवर को पा कर उस के सारे सपने कांच की तरह टूट कर बिखर गए थे.

कुल मिला कर बसवराज बसु और कल्पना का कोई मेल नहीं था, लेकिन मजबूरी यह थी कि वह करती भी तो क्या. बसवराज बसु अपनी आमदनी के अनुसार पत्नी की जरूरतों को पूरी करने की कोशिश करता था, पर पत्नी की ख्वाहिशें कम नहीं थीं. उस की आकांक्षाएं ऐसी थीं, जिन्हें पूरा करना बसवराज के वश की बात नहीं थी. लिहाजा वह अपनी किस्मत को ही कोसती रहती.

समय अपनी गति से चलता रहा. कल्पना 2 बच्चों की मां बन गई. इस के बाद कल्पना की जरूरतें और ज्यादा बढ़ गई थीं, जिन्हें बसवराज बसु पूरा नहीं कर पा रहा था. ऐसी स्थिति में कल्पना की समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे. उस का पति जब घर से टैक्सी ले कर निकलता था तो तीसरेचौथे दिन ही घर लौट कर आता था. घर आने के बाद भी वह कल्पना का साथ नहीं दे पाता था. ऐसे में कल्पना जल बिन मछली की तरह तड़प कर रह जाया करती थी.

उड़ान के लिए कल्पना को लगे पंख

कल्पना खूबसूरत और जवान थी. बस्ती में ऐसे कई युवक थे, जो उस को चाहत भरी नजरों से देखते थे. एक दिन कल्पना के मन में विचार आया कि क्यों न ऐसे युवकों से लाभ उठाया जाए. इस से उस के सपने तो पूरे हो ही सकते हैं, साथ ही शरीर की जरूरत भी पूरी हो जाएगी.

यही सोच कर कल्पना ने उन युवकों को हरी झंडी दे दी. कई युवक उस के जाल में फंस गए. बच्चों के स्कूल और पति के काम पर जाने के बाद वह मौका देख कर उन्हें घर बुला कर मौजमस्ती करने लगी, साथ ही उन से मनमुताबिक पैसे भी लेने लगी.

कल्पना का रहनसहन और घर के बदलते माहौल को पहले तो बसवराज समझ नहीं सका, लेकिन जब सच्चाई उस के सामने आई तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उस ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस पत्नी को वह अपनी जान से भी ज्यादा चाहता है, जिस के लिए वह रातदिन मेहनत करता है, उस के पीठ पीछे वह इस तरह का काम करेगी. उस ने यह भी नहीं सोचा कि दोनों बच्चों पर इस का क्या असर पड़ेगा.

मामला काफी नाजुक था. मौका देख कर बसवराज बसु ने जब कल्पना को समझाना चाहा तो वह उस पर ही बरस पड़ी. उस ने पति को घुड़कते हुए कहा कि तुम्हारे और बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद अगर मैं अकेली रहती हूं. ऐसे में अगर मैं किसी से दोचार बातें कर लेती हूं तो इस में बुरा क्या है. तुम्हें यह अच्छा नहीं लगता तो मैं आत्महत्या कर लेती हूं.

कल्पना का बदला व्यवहार और माहौल देख कर बसवराज बसु यह बात अच्छी तरह से समझ गया कि कल्पना को समझानेबुझाने से कोई फायदा नहीं होगा. इसलिए उस ने उस जगह को छोड़ देना ही सही समझा. वह पत्नी और बच्चों को ले कर बेलगांव शहर चला गया.

वहां बसवराज कुड़चड़े थाने के अंतर्गत आने वाले अनु अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट ले कर रहने लगा. उस ने टैक्सी चलानी बंद कर दी और किसी की निजी कार चलाने लगा. उसे विश्वास था कि बेलगांव में रह कर पत्नी के आशिक छूट जाएंगे और वह सुधर जाएगी.

लेकिन बसवराज की यह सोच गलत साबित हुई. कल्पना चतुर और स्मार्ट महिला थी. बेलगांव आ कर वह और भी आजाद हो गई. यहां उसे न समाज का डर था और न गांव का. उस ने उसी अपार्टमेंट में रहने वाले पंकज पवार नाम के युवक को फांस लिया. पंकज एक निजी कंपनी में डाटा एंट्री औपरेटर था. वह मडगांव का रहने वाला था.

बसवराज की सोच हुई गलत साबित

31 वर्षीय पंकज पवार की शादी हो चुकी थी. उस के 2 बच्चे भी थे. लेकिन वह कल्पना के लटकोंझटकों से बच नहीं सका. कल्पना से संबंध बन जाने के बाद पंकज पवार उस के फ्लैट पर आनेजाने लगा. एक दिन पंकज कल्पना से मुलाकात कराने के लिए अपने 3 दोस्तों सुरेश सोलंकी, अब्दुल शेख और आदित्य को भी साथ ले आया. पहली ही मुलाकात में ही कल्पना ने उस के तीनों दोस्तों पर ऐसा जादू किया कि वे भी उस के मुरीद हो गए. उन तीनों से भी कल्पना के संबंध बन गए.

कुछ ही दिनों में कल्पना के यहां आने वाले युवकों की संख्या बढ़ने लगी. धीरेधीरे कल्पना के कारनामों की जानकारी इलाके भर में फैल गई. उस की वजह से बसवराज बसु की ही नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले की बदनामी होने लगी. ऐसे में बसवराज का वहां रहना मुश्किल हो गया. दोनों बच्चे अब काफी बड़े हो गए थे. बसवराज बसु ने अपने बच्चों के भविष्य के मद्देनजर कल्पना को काफी समझाया, लेकिन अपनी मौजमस्ती के आगे उस ने बच्चों को कोई अहमियत नहीं दी.

कल्पना पर जब पति के समझाने का कोई असर नहीं हुआ तो वह उसे छोड़ कर वहीं पर जा कर रहने लगा, जहां वह नौकरी करता था. इस के बावजूद वह अपनी पूरी पगार ला कर कल्पना को दे जाता था.
हालांकि कल्पना के पास पैसों की कोई कमी नहीं थी. बसवराज बसु के जाने के बाद वह और भी आजाद हो गई थी. वह अपने चारों दोस्तों के साथ बारीबारी से घूमतीफिरती और मौजमजा करती. इस के अलावा वह उन से अच्छीखासी रकम भी ऐंठती थी. वह पूरे समय अपने रूपयौवन को सजानेसंवारने में लगी रहती थी. यहां तक कि अब वह घर पर खाना तक नहीं बनाती थी. खाना पकाने के लिए उस ने अपने प्रेमी अब्दुल शेख की पत्नी सिमरन शेख को सेवा में रख लिया था.

2 अप्रैल, 2018 को बसवराज बसु की जिंदगी का आखिरी दिन था. एक दिन पहले उसे जो पगार मिली थी, उसे पत्नी को देने के लिए वह 2 अप्रैल को दोपहर में फ्लैट पर पत्नी के पास पहुंचा. घर का जो माहौल था, उसे देख कर उस का खून खौल उठा. कल्पना ने बेशरमी की हद कर दी थी. वहां पर सुरेश सोलंकी, आदित्य और अब्दुल शेख जिस अवस्था में थे, उसे देख कर साफ लग रहा था कि कल्पना उन के साथ क्या कर रही थी. यह देख कर बसवराज का खून खौल गया.

वह पत्नी को खरीखोटी सुनाते हुए बोला, ‘‘मैं तुम्हें खर्चे के लिए पैसे देने के लिए आता हूं. लेकिन तुम्हारा यह घिनौना रूप देख कर तुम्हें पैसा देने और यहां आने का मन नहीं होता. लेकिन बच्चों के लिए यह सब करना पड़ता है.’’

बसवराज की मौत आई रस्सी में लिपट कर

पति की बात सुन कर कल्पना डरी नहीं बल्कि वह भी उस पर हावी होते हुए बोली, ‘‘तो मत आओ. मैं ने तुम्हें कब बुलाया और पैसे मांगे. तुम क्या समझते हो, मेरे पास पैसे नहीं हैं? तुम कान खोल कर सुन लो, मैं जिस ऐशोआराम से रह रही हूं, वह तुम्हारे पैसों से नहीं मिल सकता. तुम्हारी पूरी पगार से तो मेरा शैंपू ही आएगा. रहा सवाल बच्चों का तो उन की चिंता तुम छोड़ दो.’’

कल्पना की यह बात सुन कर बसवराज बसु को जबरदस्त धक्का लगा. इस के बाद पतिपत्नी के बीच झगड़ा बढ़ गया. तभी गुस्से में आगबबूला कल्पना ने अपने तीनों प्रेमियों को इशारा कर दिया. कल्पना का इशारा पाते ही उस के तीनों प्रेमियों ने मिल कर बसवराज बसु को पीटपीट कर बेदम कर दिया.
शारीरिक रूप से कमजोर बसवराज बसु बेहोश हो कर जमीन पर गिर गया. उसी समय अब्दुल शेख की बीवी सिमरन भी वहां आ गई. तभी कल्पना के घर के अंदर बंधी नायलौन की रस्सी खोल कर बसवराज के गले में डाल कर पूरी ताकत से उस का गला कस दिया, जिस से उस की मौत हो गई. यह देख कर सिमरन सहम गई.

टुकड़ों में बंट गया पति

अब्दुल शेख और कल्पना ने सिमरन को धमकी दी कि अपना मुंह बंद रखे. अगर मुंह खोला तो उस का भी यही हाल होगा. डर की वजह से सिमरन चुप रही. कल्पना और उस के प्रेमियों का गुस्सा शांत हुआ तो वे बुरी तरह घबरा गए. हत्या के समय पंकज वहां नहीं था.

थोड़ी देर सोचने के बाद कल्पना और उस के प्रेमियों ने बसवराज बसु की लाश ठिकाने लगाने का फैसला ले लिया. कल्पना ने शव ठिकाने लगवाने के मकसद से पंकज को फोन कर के बुला लिया. लेकिन पंकज को जब हत्या का पता चला तो वह घबरा गया. पहले तो पंकज ने इस मामले से अपना हाथ खींच लिया, लेकिन अपनी प्रेमिका कल्पना को मुसीबत में घिरी देख कर वह उस का साथ देने के लिए तैयार हो गया.
चारों ने मिल कर बसवराज बसु के शव को बाथरूम में ले जा कर उस के 3 टुकड़े किए और उन टुकड़ों को कपड़ों में लपेट कर प्लास्टिक की 3 बोरियों में भर दिया. मौका देख कर उसी रात 12 बजे इन लोगों ने तीनों बोरियों को अब्दुल शेख की कार की डिक्की में रख दिया. इस के बाद ये लोग कुड़चड़े महामार्ग के अनमोड़ घाट गए और उन बोरियों को एकएक किलोमीटर की दूरी पर घाट की घाटियों में दफन कर के लौट आए.

जैसेजैसे समय बीत रहा था, वैसेवैसे इस हत्याकांड के सभी अभियुक्त बेखबर होते गए. उन का मानना था कि इस हत्याकांड से कभी परदा नहीं उठेगा और उन का राज राज ही रह जाएगा. लेकिन वे यह भूल गए थे कि उन के इस राज की साक्षी अब्दुल शेख की बीवी सिमरन शेख थी, जिस की आंखों के सामने बसवराज बसु की हत्या का सारा खेल खेला गया था. वह इस राज को अपने सीने में छिपाए हुए थी.
पता नहीं क्यों सिमरन को हत्या में शामिल लोगों से डर लगने लगा था. यहां तक कि अपने पति से भी उस का विश्वास नहीं रहा. उसे ऐसा लगने लगा जैसे उस की जान को खतरा है. वे लोग अपना पाप छिपाने के लिए कभी भी उस की हत्या कर सकते हैं. इस डर की वजह से सिमरन शेख बेलगांव की जानीमानी पत्रकार ऊषा नाईक देईकर से मिली और उस ने बसवराज बसु हत्याकांड की सारी सच्चाई बता दी.

आखिर राज खुल ही गया

बसवराज बसु की हत्या की सच्चाई जान कर ऊषा नाईक के होश उड़ गए. उन्होंने सिमरन शेख को साहस और सुरक्षा का भरोसा दे कर मामले की सारी जानकारी बेलगांव कुड़चड़े पुलिस थाने के थानाप्रभारी रवींद्र देसाई और उन के वरिष्ठ अधिकारियों को दी. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में थानाप्रभारी रवींद्र देसाई ने अपनी जांच तेजी से शुरू कर दी.

उन्होंने 24 घंटे के अंदर बसवराज बसु हत्याकांड में शामिल कल्पना बसु के साथ पंकज पवार, अब्दुल शेख और सुरेश सोलंकी को गिरफ्त में ले कर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पेश किया, जहां सीपी अरविंद गवस ने उन से पूछताछ की. पुलिस गिरफ्त में आए चारों आरोपी कोई पेशेवर अपराधी नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

9 मई, 2018 को उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस अनमोड़ घाट की उस जगह पर ले कर गई, जहां उन्होंने बसवराज बसु के शव के टुकड़े दफन किए थे. उन की निशानदेही पर पुलिस ने शव के तीनों टुकड़ों को बरामद कर लिया. घटना के समय बसवराज जींस पैंट पहने हुए था. उस की पैंट की जेब में उस का ड्राइविंग लाइसेंस मिला, जिस से यह बात सिद्ध हो गई कि शव बसवराज का ही था. शव को कब्जे में लेने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए मडगांव के बांबोली अस्पताल भेज दिया.

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कल्पना बसु, पंकज पवार, सुरेश सोलंकी और अब्दुल शेख से विस्तृत पूछताछ कर के उन के विरुद्ध भांदंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. फिर चारों को मडगांव मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक इस हत्याकांड का एक आरोपी आदित्य गुंजर फरार था, जिस की पुलिस बड़ी सरगरमी से तलाश कर रही थी. Hindi Crime Story

True Crime Story: बेमेल प्यार का एक अनूठा फसाना

True Crime Story: तबरेज इलाहाबाद के विवेकानंद मार्ग पर चमेलीबाई धर्मशाला के पास स्थित प्रभात सिंह की मशीनरी पार्ट्स की दुकान पर नौकरी करता था. वह रोजाना सुबह 10 बजे के करीब दुकान पर पहुंचता तो कुछ देर बाद प्रभात भी वहां पहुंच जाता था. इस के बाद ही तबरेज दुकान खोल कर उस की साफसफाई करता था. 30 नवंबर, 2016 को भी जब तबरेज निर्धारित समय पर दुकान पर पहुंचा तो दुकान का शटर खुला मिला. यह देखते ही उस के मुंह से निकला, ‘‘लगता है भैया आज सुबहसुबह ही दुकान आ गए हैं.’’

लेकिन जब दुकान के भीतर गया तो वहां प्रभात नहीं दिखा. वह मन में बुदबुदाने लगा, ‘‘ऐसे दुकान खोल कर कहां चले गए भला?’’

दुकान के अंदर आड़ातिरछा रखा सामान निकाल कर उस ने दुकान के बाहर लगा दिया. फिर दुकान की साफसफाई कर के वह दुकान में बैठ कर प्रभात के लौटने का इंतजार करने लगा. आधे घंटे से ज्यादा बीत गया पर प्रभात नहीं लौटा तो तबरेज पास की दुकान पर चाय पीने चला गया. प्रभात का जिनजिन दुकानों पर उठनाबैठना था, तबरेज वहां भी गया पर उसे उस का मालिक दिखाई नहीं दिया तो बुदबुदाते हुए वह वापस दुकान पर आ कर बैठ गया.

उसी समय चित्रा दौड़ती हुई बदहवास सी दुकान पर आई. जिस मकान में प्रभात की दुकान थी, चित्रा उसी मकान मालिक सत्येंद्र सिंह की बेटी थी. उस के साथ उस का चचेरा भाई गोलू भी था. वह बोली, ‘‘त…तब… तबरेज…’’

‘‘हां बताओ, तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो?’’

‘‘बात ही कुछ ऐसी है. आओ मेरे साथ, खुद ही चल कर देख लो.’’

किसी अनहोनी की आशंका के साथ तबरेज चित्रा और गोलू के पीछेपीछे उस के घर पहुंच गया. घर दुकान के एकदम पीछे ही था. जैसे ही वह कमरे में पहुंचा तो उस का मालिक प्रभात फांसी के फंदे पर झूला हुआ दिखा. यह देख कर उस की चीख निकल गई, ‘‘यह कैसे हो गया?’’

तभी चित्रा बोली, ‘‘पता नहीं, इन्होंने आत्महत्या क्यों कर ली? इन के हाथ में सुसाइड नोट भी है. तबरेज तुम इन के घर वालों को फोन कर के जानकारी दे दो.’’

तबरेज ने तुरंत अपने मोबाइल से प्रभात के पिता वीरेंद्र प्रताप सिंह को फोन कर के उस की आत्महत्या की जानकारी दे दी. प्रभात का घर वहां से कुछ ही दूरी पर था इसलिए थोड़ी ही देर में वीरेंद्र प्रताप सिंह अपने घर वालों और पड़ोसियों के साथ वहां पहुंच गए. अब तक वहां काफी भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी.

उस समय भी प्रभात रसोईघर के बगल वाले कमरे में फांसी पर लटका पड़ा था. खबर मिलने पर अनेक व्यापारी भी वहां पहुंच गए. घर के जवान आदमी की मौत पर घर वाले बिलखबिलख कर रो रहे थे. किसी ने सूचना थाना कोतवाली पुलिस को भी दे दी.

चूंकि घटनास्थल से थाना कोतवाली महज आधा एक किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए 10 मिनट में ही एसपी (सिटी) विपिन कुमार टांडा व कोतवाली प्रभारी अनुपम शर्मा मय फोर्स घटनास्थल पर पहुंच गए.

अब तक सत्येंद्र सिंह के मकान के बाहर भारी संख्या में भीड़ मौजूद हो चुकी थी, जिस के कारण रोड पर जाम लग गया था. पुलिस ने फांसी पर लटके प्रभात सिंह को नीचे उतारा. उस की मौत हो चुकी थी. शव की बारीकी से जांच की तो पहली ही नजर में मामला संदिग्ध नजर आया. प्रभात के सिर व शरीर पर चोटों के निशान थे.

यह देख प्रभात के घर वाले और अन्य व्यापारी हंगामा करने लगे. उन का आरोप था कि प्रभात की हत्या करने के बाद उसे फांसी पर लटकाया गया है, जिस से मामला आत्महत्या का लगे. मृतक के हाथ में 2 पेज का एक सुसाइड नोट भी था.

उस सुसाइड नोट में एक लड़की से प्रेम संबंध और उस की बेवफाई का जिक्र था. प्रभात और उस की तथाकथित प्रेमिका का कितना पुराना रिश्ता था, इस बात का उल्लेख उस नोट में किया गया था. सुसाइड नोट में कितनी सच्चाई है, यह बात जांच के बाद ही पता चलती.

मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर दुकान मालिक सत्येंद्र सिंह की बेटी चित्रा सिंह पर आरोप लगाया कि उस ने ही अपने सहयोगियों के साथ मिल कर प्रभात की हत्या की है. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए.

प्रभात की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद उस के भाई प्रदीप की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया. पोस्टमार्टम के बाद शाम को जब पुलिस को रिपोर्ट मिली तो उस में भी बताया गया कि प्रभात के सिर पर लोहे की रौड जैसी किसी चीज से वार किया गया था, जिस से उस की मौत हुई थी.

मकान मालिक सत्येंद्र सिंह घटना से एकदो दिन पहले अपनी पत्नी राशि के साथ प्रतापगढ़ चले गए थे. वहां उन के किसी रिश्तेदार की मौत हो गई थी. घर पर उन की बेटी चित्रा और उस का चचेरा भाई कौशिक उर्फ गोलू मौजूद था.

एसपी (सिटी) विपिन कुमार टांडा के समक्ष चित्रा सिंह से पूछताछ की गई तो उस ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा, ‘‘सर, प्रभात सिंह का उस के प्रति एकतरफा प्यार था. वह मुझ से उम्र में भी दोगुना बड़ा था. भला मैं उस से कैसे प्रेम कर सकती हूं. मेरा उस की हत्या या आत्महत्या से कोई वास्ता नहीं है.’’

‘‘जिस वक्त प्रभात तुम्हारे कमरे में घुस कर फांसी पर लटका, उस वक्त तुम कहां थी?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, मैं रोज सुबह नहाने के बाद पूजा करती हूं. बुधवार को भी रोजाना की तरह नहाने के बाद मैं पूजा करने चली गई थी. पूजा के बाद मैं ने बालकनी से नीचे की ओर देखा तो नीचे प्रभात की कार दिखी. मैं यह सोचते हुए सीढि़यों से नीचे उतरी कि प्रभात आज दुकान पर इतनी जल्दी कैसे आ गए. तभी देखा कि वह हमारी रसोई के बगल वाले कमरे में लटका हुआ था. मैं समझ नहीं पाई कि यह काम करने के लिए उस ने मेरा घर ही क्यों चुना?’’ वह बोली.

घर में फर्श पर जो खून का धब्बा मिला था, उस के बारे में पुलिस ने उस से पूछा तो उस ने उसे चुकंदर का रस बताया.

पुलिस को लग रहा था कि यह झूठ बोल रही है इसलिए उस से और उस के चचेरे भाई गोलू से सख्ती से पूछताछ की तो दोनों ने ही अपना जुर्म कबूल कर लिया. उन्होंने कहा कि प्रभात की हत्या करने का उन का कोई इरादा नहीं था. पर हालात ऐसे बन गए जिस से उस का कत्ल हो गया.

प्रभात सिंह इलाहाबाद शहर के कीडगंज थाना क्षेत्र के कृष्णानगर निवासी वीरेंद्र प्रताप सिंह का बेटा था. कारोबारी वीरेंद्र प्रताप सिंह के 4 बेटे और एक बेटी थी. उन की पत्नी कनकलता का देहांत हो चुका था. मांगलिक होने की वजह से प्रभात की शादी नहीं हुई थी.

वीरेंद्र प्रताप सिंह के एक दोस्त थे सत्येंद्र सिंह, जो प्रतापगढ़ में एक सरकारी मुलाजिम थे. कोतवाली थानाक्षेत्र के विवेकानंद मार्ग पर रहते थे. वीरेंद्र प्रताप ने सन 2003 में उन की एक दुकान किराए पर ली थी, जहां उस ने बंधु ट्रेडर्स के नाम से मशीनरी पार्ट्स बेचने का काम शुरू कर दिया. उस दुकान को प्रभात संभालता था.

दोस्ती के नाते सत्येंद्र उन से दुकान का किराया तक नहीं लेते थे. प्रभात का सत्येंद्र सिंह के घर में खूब आनाजाना था. दुकान के पीछे ही सत्येंद्र सिंह का आवास था. उन की एक बेटी चित्रा थी, घर में आनेजाने के कारण उन दोनों के बीच प्रेमसंबंध स्थापित हो गए. उस समय प्रभात की उम्र 36 साल और चित्रा की 16 साल थी.

कुछ दिनों बाद ही उन के संबंधों की खबर उन के घर वालों को भी हो गई. घर वालों ने उन्हें लाख समझानेबुझाने की कोशिश की लेकिन इस का उन पर कोई असर नहीं हुआ. बल्कि उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों की उम्र में काफी अंतर था. लेकिन प्यार का भूत जिन के सिर पर सवार होता है, उन के बीच उम्र आड़े नहीं आती.

धीरेधीरे समय आगे बढ़ने लगा. चित्रा जहां जवान थी तो दूसरी ओर प्रभात की उम्र ढलान की ओर बढ़ रही थी. शायद यही कारण था कि उस पर जान छिड़कने वाला प्रभात अब उसे नीरस नजर आने लगा था. वह उस से इतना प्यार करता था कि वह उसे कालेज तक छोड़ने और लेने जाने लगा था.

लेकिन चित्रा प्रभात से दूरी बनाने लगी थी और अपनी उम्र के लड़कों से मोबाइल पर घंटों बतियाती थी. प्रभात जब भी उसे फोन करता तो वह उस का फोन रिसीव नहीं करती. बारबार फोन करने के बाद वह उस का फोन उठाती तो बेमन से बात करती.

प्रभात समझ नहीं पा रहा था कि पिछले 10 सालों से प्यार करने वाली चित्रा के अंदर यह बदलाव कैसे आ गया. प्रभात के मना करने के बावजूद भी वह वाट्सऐप और फेसबुक पर पता नहीं किसकिस से चैटिंग करती रहती थी. किसी भी तरह वह प्रभात से अपना पीछा छुड़ाना चाहती थी, लेकिन प्रभात उसे किसी भी हाल में छोड़ने या भुलाने को तैयार नहीं था.

29 नवंबर, 2016 की रात को प्रभात ने चित्रा से बात करने के लिए कई बार उस का नंबर मिलाया. पहले तो उस का मोबाइल व्यस्त आ रहा था पर बाद में वह स्विच्ड औफ हो गया. प्रभात ने सुबह उठ कर फिर से उस का मोबाइल नंबर डायल किया. घंटी बजने के बावजूद चित्रा ने फोन नहीं उठाया.

गुस्से में वह सुबह 8 बजे ही अपने घर से निकल गया और दुकान खोलने के बाद सीधे चित्रा के कमरे में पहुंचा. वहां चित्रा बिलकुल अकेली थी. मोबाइल रिसीव न करने की बात को ले कर वह उस से झगड़ने लगा. उन का शोर सुन कर चित्रा का चचेरा भाई कौशिक उर्फ गोलू उठ गया.

उस ने देखा कि गुस्से से लालपीला प्रभात चित्रा के साथ मारपीट कर रहा है तो उस ने बीचबचाव करने की कोशिश की. उस समय प्रभात चित्रा का गला दबाए हुए था. गोलू ने बताया कि उस ने चित्रा दीदी को बचाने की कोशिश की. तब प्रभात उस से उलझ गया और हाथापाई करने लगा.

उसी दौरान गोलू की नजर दीवार से सटा कर रखे सरिए पर गई. किसी तरह उस ने प्रभात के चंगुल से खुद को छुड़ाया तो प्रभात चित्रा से भिड़ गया. तभी गोलू ने सरिया उठा कर पीछे से प्रभात के सिर पर दे मारा. एकदो वार और करने पर प्रभात नीचे गिर गया और मर गया.

इस के बाद दोनों ने एक रस्सी गले में बांध कर उसे कुंडे से लटका दिया ताकि मामला आत्महत्या का लगे. जहांजहां उस का खून गिरा था, उसे साफ कर के चुकंदर का जूस डाल दिया. फिर दोनों रोने का नाटक करने लगे. चित्रा को जब पता चला कि दुकान पर नौकर तबरेज आ चुका है तो वह घबराई हुई उस के पास गई और उसे कमरे में ला कर बताया कि प्रभात ने आत्महत्या कर ली है.

इधर मृतक के छोटे भाई सुधीर सिंह ने बताया कि प्रभात ने चित्रा के नाम लाखों रुपए की प्रौपर्टी और जायदाद कर दी थी. प्रभात उस से प्रौपर्टी वापस न मांग ले, इसलिए उस ने अन्य लोगों के साथ मिल कर उस की हत्या कर दी. उधर चित्रा का कहना है कि वह प्रभात से प्यार नहीं करती थी. प्रभात एकतरफा उसे चाहता था.

पुलिस ने चित्रा और उस के चचेरे भाई गोलू को भादंवि की धारा 302, 201 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. अभी यह पता नहीं लग सका है कि मृतक के हाथ में जो सुसाइड नोट मिला, वह किस ने लिखा था. फोरैंसिक जांच के बाद ही यह स्थिति साफ हो सकेगी. केस की विवेचना कोतवाली प्रभारी अनुपम शर्मा कर रहे हैं. True Crime Story