Hindi Stories Love : टीचर के प्यार में स्टूडेंट ने फांसी लगाकर दे दी जान

Hindi Stories Love : आराधना एक्का ओम की टीचर थी, गुरु शिष्य का नाता था दोनों में. लेकिन अराधना ने ओम को शिष्य नहीं बल्कि एक नवयुवक समझ कर पेंच लड़ाए और इस स्थिति तक पहुंचा दिया कि एक अभागिन मां के एकलौते बेटे को…

इसी साल 18 मार्च की बात है. शाम का समय था. करीब 6-साढ़े 6 बज रहे थे. छत्तीसगढ़ के शहर बिलासपुर में रहने वाली सरिता श्रीवास्तव मंदिर जाने की तैयारी कर रही थीं. बेटा ओम प्रखर घर पर अपने कमरे में पढ़ रहा था. इसी दौरान डोर बेल बजी. सरिता ने बाहर आ कर गेट खोला. गेट पर 25-30 साल की एक युवती खड़ी थी.

सरिता ने युवती की ओर देख कर सवाल किया, ‘‘हां जी, बताओ क्या काम है?’’

युवती ने अपने दोनों हाथ जोड़ कर सरिता से कहा, ‘‘मैम नमस्ते. ओम घर पर है क्या?’’

‘‘हां, ओम घर पर ही है.’’ सरिता ने युवती को जवाब दे कर सवाल किया, ‘‘आप को उस से क्या काम है?’’

‘‘मैम, मेरा नाम आराधना एक्का है. मैं ओम के स्कूल में टीचर हूं. इधर से जा रही थी, तो सोचा ओम से मिलती चलूं.’’ युवती ने बताया.

बेटे की टीचर होने की बात जान कर सरिता ने आराधना को अंदर बुलाते हुए ओम को आवाज दे कर कहा, ‘‘ओम, आप की मैम मिलने आई हैं.’’

ओम बाहर आया, तो टीचर उसे देख कर मुसकरा दी. सरिता को मंदिर जाने को देर हो रही थी. इसलिए उन्होंने ओम से कहा, ‘‘ओम, अपनी टीचर को चायपानी पिलाओ. मुझे मंदिर के लिए देर हो रही है.’’

‘‘ठीक है मम्मी, आप मंदिर जाइए.’’ ओम ने मम्मी को आश्वस्त किया और अपनी टीचर से कहा, ‘‘मैम, आ जाओ, कमरे में बैठते हैं.’’

‘‘हां बेटे, तुम बातें करो. मैं मंदिर हो कर आती हूं.’’ कह कर सरिता घर से निकल गईं.

मंदिर सरिता के घर से दूर था. जब वह मंदिर से घर लौटीं, तो रात के करीब 8 बज गए थे. घर का गेट खुला देख कर सरिता को थोड़ा ताज्जुब हुआ, ओम की लापरवाही पर खीझ भी हुई. वह ओम को आवाज देती हुई घर में घुसीं. ओम का जवाब नहीं आने पर उन्होंने कमरे में जा कर देखा, तो उन के मुंह से चीख निकल गई. ओम अपने कमरे में पंखे के हुक से लटक रहा था. सरिता पढ़ीलिखी हैं. वह निजी स्कूल चलाती हैं. अपने 16-17 साल के बेटे ओम को फंदे पर लटका देख कर वह कुछ समझ नहीं पाईं. उन्होंने रोते हुए तुरंत घर से बाहर आ कर जोर से आवाज दे कर पड़ोसियों को बुलाया.

पड़ोसियों की मदद से पंखे से लटके ओम को नीचे उतारा गया. ओम को फंदे से उतार कर उस की नब्ज देखी, तो सांस चलती हुई नजर आई. सरिता पड़ोसियों की मदद से बेटे को तुरंत बिलासपुर के अपोलो हौस्पिटल ले गईं. डाक्टरों ने बच्चे की जांचपड़ताल करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. अस्पताल वालों ने इस की सूचना तोरवा थाना पुलिस को दी. मामला सुसाइड का था, इसलिए पुलिस अस्पताल पहुंच गई. पुलिस ने सरिता से पूछताछ के बाद ओम का शव पोस्टमार्टम के लिए अपने कब्जे में ले लिया. इस के बाद पुलिस देवरीखुर्द हाउसिंग बोर्ड इलाके में सरिता के घर पहुंची. उस समय तक रात के करीब 10 बज गए थे. इसलिए पुलिस ने वह कमरा सील कर दिया, जिस में ओम ने फांसी लगाई थी.

दूसरे दिन तोरवा थाना पुलिस ने ओम के शव का पोस्टमार्टम कराया. एक पुलिस टीम ने सरिता के मकान पर पहुंच कर ओम के कमरे की जांचपड़ताल की. कमरे में पुलिस को ओम का मोबाइल स्टैंड पर लगा हुआ मिला. मोबाइल का डिजिटल कैमरा चालू था. पुलिस ने मोबाइल की जांच की, तो उस में ओम के फांसी लगाने का पूरा वीडियो मिला. ओम ने अपना मोबाइल स्टैंड पर इस तरह सेट किया था कि उस के फांसी लगाने की प्रत्येक गतिविधि कैमरे में कैद हो गई थी. पुलिस ने मोबाइल जब्त कर लिया. पुलिस ने ओम की किताब, कौपियां भी देखीं, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. उस के कमरे से दूसरी कोई संदिग्ध चीज भी नहीं मिली.

पुलिस ने सरिता श्रीवास्तव से ओम के फांसी लगाने के कारणों के बारे में पूछा, लेकिन उन्हें कुछ पता ही नहीं था, तो वे क्या बतातीं. उन्होंने मंदिर जाने से पहले ओम की टीचर आराधना के घर आने और मंदिर से वापस घर आने तक का सारा वाकया पुलिस को बता दिया. लेकिन इस से ओम के आत्महत्या करने के कारणों का पता नहीं चला. तोरवा थाना पुलिस ने ओम की आत्महत्या का मामला दर्ज कर लिया. जब्त किए उस के मोबाइल पर कुछ चीजों में लौक लगा हुआ था. मोबाइल का लौक खुलवाने के लिए उसे साइबर सेल में भेज दिया गया. पुलिस जांचपड़ताल में जुट गई, लेकिन यह बात समझ नहीं आ रही थी कि ओम ने सुसाइड क्यों किया और सुसाइड का वीडियो क्यों बनाया?

ओम प्रखर एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था. इस के साथ ही एक इंस्टीट्यूट में कोचिंग भी कर रहा था. ओम सरिता का एकलौता बेटा था. पति सुनील कुमार से अनबन होने के कारण सरिता बेटे के साथ घर में अकेली रहती थीं. सरिता परिजात स्कूल की प्राचार्य थीं. यह स्कूल वह खुद चलाती थीं. पुलिस ओम के सुसाइड मामले की जांचपड़ताल कर रही थी, इसी बीच उस के कुछ दोस्तों के मोबाइल पर डिजिटल फौर्मेट में कुछ सुसाइट नोट पहुंचे. पता चलने पर पुलिस ने ये सुसाइड नोट जब्त कर लिए. इन सुसाइड नोट में ओम ने कई तरह की बातें लिखी थीं, जिन में वह जीने की इच्छा जाहिर कर रहा था और अपने व अपनों के लिए कुछ करने की बात भी कह रहा था.

सुसाइड नोट में ओम ने किसी लड़की का जिक्र करते हुए लिखा था कि वह उस का मोबाइल नंबर कभी ब्लौक तो कभी अनब्लौक कर देती है. उस ने सुसाइड नोट में अपनी मौत से उसे दर्द पहुंचाने की बात भी लिखी थी. यह सुसाइड नोट सामने आने से पुलिस को यह आभास हो गया कि यह मामला प्रेम प्रसंग का हो सकता है. इसलिए पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. इस दौरान ओम के दोस्तों के पास उस के सुसाइड से जुड़े मैसेज आते रहे. जांच में पता चला कि ओम ने सुसाइड से पहले मोबाइल में 2-3 सुसाइड नोट रिकौर्ड किए थे. इस के अलावा कुछ अन्य मैसेज भी लिखे थे.

ये मैसेज और सुसाइड नोट दोस्तों को अलगअलग समय पर मिलें, इस के लिए उस ने टाइम सेट किया था. टाइम सेट किए जाने के कारण ही ओम के दोस्तों को उस के सुसाइड नोट और मैसेज अलगअलग समय पर मिले. सुसाइड नोट और मैसेज के आधार पर पुलिस ने 23 मार्च को ओम को आत्महत्या के लिए उकसाने और पोक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर शिक्षिका आराधना एक्का को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की ओर से एकत्र किए सबूतों के आधार पर जो कहानी सामने आई है, वह 16-17 साल के किशोर ओम प्रखर को उस की टीचर आराधना एक्का द्वारा अपने प्रेमजाल में फंसाने और उस का दैहिक शोषण करने की कहानी थी.

30 साल की आराधना एक्का बिलासपुर के सरकंडा इलाके में एक निजी स्कूल में कैमिस्ट्री की टीचर थी. ओम भी इसी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था. ओम अपनी क्लास का होशियार विद्यार्थी था. पढ़ातेपढ़ाते आराधना का झुकाव ओम की ओर होने लगा. वह गुरुशिष्य का रिश्ता भूल कर ओम को प्यार करने लगी. आराधना ने ओम का मोबाइल नंबर भी ले लिया. वह कभी ओम को क्लास में रोक कर उसे छूती और प्यार भरी बातें करती, तो कभी घर पर बुला लेती. ओम जवानी की दहलीज पर खड़ा था. वह प्रेम प्यार का ज्यादा मतलब तो नहीं समझता था, लेकिन इस उम्र में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण बढ़ जाना स्वाभाविक है.

आराधना जब उसे छूती और उस के नाजुक अंगों को सहलाती, तो ओम को अच्छा लगता. किशोरवय ओम जल्दी ही अपनी टीचर के प्यार की गिरफ्त में आ गया. आराधना उस का शारीरिक शोषण भी करने लगी. इसी बीच आराधना का अपने स्कूल के एक शिक्षक से प्रेम प्रसंग शुरू हो गया. इस के बाद आराधना ने ओम की तरफ ध्यान देना कम कर दिया. इस से ओम बेचैन रहने लगा. आराधना ने उसे प्यार की ऐसी गिरफ्त में ले लिया था कि ओम को उस के बिना सब कुछ सूनासूना सा लगता था. ओम जब आराधना को फोन करता, तो कई बार वह फोन नहीं उठाती थी. इस पर ओम को कोफ्त होती थी.

ओम ने पता किया, तो मालूम हुआ कि आराधना का एक टीचर से चक्कर चल रहा है. यह बात जान कर ओम परेशान हो उठा. एक दिन आराधना ने ओम को बिलासपुर के एक मौल में बुलाया. ओम वहां गया, तो उस ने बहाने से आराधना का मोबाइल ले लिया. ओेम ने आराधना की आंख बचा कर उस के मोबाइल को हैक कर लिया. इस के बाद आराधना जब भी अपने प्रेमी टीचर से बातें करती या सोशल मीडिया पर कोई मैसेज भेजती, तो सारी बातें ओम को पता चल जातीं. आराधना की बेवफाई की बातें सुन और पढ़ कर ओम ज्यादा परेशान रहने लगा.

18 मार्च को आराधना जब ओम के घर आई, तब उस की मम्मी सरिता श्रीवास्तव मंदिर जा रही थीं. मां के मंदिर जाने के बाद ओम ने आराधना से उस की बेवफाई के बारे में पूछा, तो आराधना ने उसे फटकार दिया और अपनी मनमर्जी की मालिक होने की बात कहते हुए चली गई. आराधना की बातों से किशोरवय ओम के दिल को गहरी ठेस पहुंची. नासमझी में उस ने सुसाइड करने का फैसला कर लिया. उस ने किसी खास ऐप की मदद से कोड लैंग्वेज में कुछ सुसाइड नोट लिखे. एकदो सुसाइड नोट उस ने हिंदी में भी लिखे. ये सुसाइड नोट लिख कर उस ने टाइम सेट कर दिया और अपने दोस्तों को भेज दिए.

इस के बाद घर में अकेले ओम ने एक रस्सी से फांसी का फंदा बनाया और कमरे में लगे पंखे से लटक कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. सुसाइड नोट के टाइम सेट किए जाने के कारण ओम के दोस्तों को उस के सुसाइड नोट अलगअलग तय समय पर मिले. दोस्तों को सुसाइड नोट मिलने पर ओम के सुसाइड करने के कारणों का पता चला. पुलिस ने ओम के मोबाइल का लौक खुलवा कर जांचपड़ताल की, तो उस में कोड वर्ड में लिखा सुसाइड नोट मिला. पुलिस ने साइबर विशेषज्ञों की मदद से सुसाइड नोट के कोड वर्ड को डिकोड कराया.

सुसाइड नोट में आराधना के लिए एक जगह लिखा था कि उसे पता था कि मैं बेस्ट हूं लेकिन उस ने मुझे बरबाद कर दिया. मैं जिंदा रहना चाहता हूं, अपने लिए, अपने घर वालों के लिए. जो मुझ से प्यार करते हैं, उन के लिए बहुत कुछ करना चाहता हूं. मैं जिंदगियां बचाना चाहता हूं, लेकिन मुझे कोई नहीं बचा सकता. आराधना की बेवफाई का जिक्र करते हुए ओम ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह मुझे अकसर ब्लौक कर देती थी और खुद की जरूरत पड़ने पर अनब्लौक. मैं ने उस से पूछा था कि वास्तविक जीवन में कैसे ब्लौक करोगी?

मैं ने उस से मजाक में यह भी पूछा था कि क्या कोई और मिल गया है, तो उस ने कहा था, क्या मेरा एक साथ 10 के साथ चक्कर चलेगा? फिर बोली थी कि कभी शक मत करना. पहले उस ने मुझे प्यार में फंसाया. फिर जब मुझे गहराई से प्यार हो गया, तो वह मुझे छोड़ने की बात करने लगी. मैं मनाता था, तो मान भी जाती थी. वह मुझे इस्तेमाल करती थी. मैं ने उसे सब कुछ दे दिया. आरोपी टीचर आराधना ने पुलिस से बताया कि ओम ही उसे परेशान करता था. वह कम उम्र का था, इसलिए उस ने कभी उस की शिकायत उस के घर वालों से नहीं की.

पुलिस ने आरोपी टीचर को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया. अदालत के आदेश पर उसे 24 मार्च को जेल भेज दिया गया. पुलिस ने उस का मोबाइल भी जब्त कर लिया. बहरहाल, आराधना ने अपनी काम इच्छा की पूर्ति के लिए किशोर उम्र के ओम का इस्तेमाल किया. हवस में अंधी आराधना की बेवफाई ने ओम को तोड़ दिया. उस ने सुसाइड कर लिया. बेटे ओम की मौत से सरिता श्रीवास्तव पर दोहरा वज्रपात हुआ. एक तो वह पति से पहले ही अलग रहती थीं. अब बेटे की मौत ने उन की जिंदगी की रहीसही खुशियां भी छीन लीं. Hindi Stories Love

Best Crime Story : प्रेमिका का चुन्नी से गला घोंटा फिर सबूत मिटाने के लिए चुन्नी और मोबाइल फोन नहर में फेंका

Best Crime Story : राजेंद्र और रीता बालबच्चेदार थे. दोनों के बच्चे जवान थे. इस के बावजूद दोनों के बीच नाजायज संबंध बन गए. अधेड़ उम्र के संबंध इतने खतरनाक साबित हुए कि…

36 वर्षीया रीता मनचली भी थी और महत्त्वाकांक्षी भी. कस्बे के तमाम लोग उस से नजदीकियां बढ़ाना चाहते थे. मगर पिछले 4 सालों से उस के मन में बसा हुआ था, पड़ोस में रहने वाला 41 वर्षीय राजेंद्र सिंह. वह उस का रिश्तेदार भी था और हर समय उस का ध्यान भी रखता था. शादीशुदा होते हुए भी रीता और राजेंद्र के संबंध बहुत गहरे थे. राजेंद्र 3 बच्चों का बाप था तो रीता भी 2 बच्चों की मां थी. राजेंद्र और रीता का पति मनोज दोनों ईंट भट्ठे पर काम करते थे. वहीं पर दोनों के बीच नजदीकियां बनी थीं.

राजेंद्र व रीता के संबंधों की जानकारी रीता के पति मनोज को भी थी और कस्बे के लोगों को भी. इस बाबत रीता के पति मनोज ने दोनों को समझाने का काफी प्रयास भी किया था, मगर न तो रीता मानी और न ही राजेंद्र. उन दोनों का आपस में मिलनाजुलना चलता रहा. दोनों का लगाव इस स्थिति तक पहुंच गया था कि दोनों एकदूसरे के बगैर नहीं रह सकते थे. इसी दौरान 16 मार्च, 2021 को रीता गायब हो गई. उस के पति मनोज ने उसे सभी संभावित जगहों पर ढूंढा. वह नहीं मिली तो वह झबरेड़ा थाने जा पहुंचा. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार को उस ने बताया, ‘‘साहब, कल मेरी पत्नी रीता काम से अपनी सहेली हुस्नजहां के साथ बैंक गई थी लेकिन आज तक वापस नहीं लौटी है.

मैं उसे आसपास व अपनी सभी रिश्तेदारियों में जा कर तलाश कर चुका हूं, मगर उस का कुछ पता नहीं चल सका.’’

थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने रीता की बाबत मनोज से कुछ जानकारी ली. साथ ही उस का मोबाइल नंबर भी नोट कर लिया. पुलिस ने रीता की गुमशुदगी दर्ज कर मनोज को घर भेज दिया. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने रीता की गुमशुदगी को गंभीरता से लिया. उन्होंने रीता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई और इस प्रकरण की जांच थाने के तेजतर्रार थानेदार संजय नेगी को सौंप दी. मामला महिला के लापता होने का था, इसलिए रविंद्र कुमार ने इस बाबत सीओ पंकज गैरोला व एसपी (क्राइम) प्रदीप कुमार राय को जानकारी दी. अगले दिन रीता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स पुलिस को मिल गई.

संजय नेगी ने विवेचना हाथ में आते ही क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में रीता अपने पड़ोसी राजेंद्र के साथ बाइक पर बैठ कर जाती दिखाई दी. इस के बाद शक के आधार पर एसआई संजय नेगी ने राजेंद्र को हिरासत में ले लिया और उस से रीता के लापता होने के बारे में गहन पूछताछ की. पूछताछ के दौरान राजेंद्र पुलिस को बरगलाते हुए कहता रहा कि उस की रीता से रिश्तेदारी है और उस ने 2 दिन पहले रीता को थोड़ी दूर तक बाइक पर लिफ्ट दी थी. लेकिन अब रीता कहां है, उसे इस बाबत कोई जानकारी नहीं है.

शाम तक राजेंद्र इसी बात की रट  लगाए रहा. शाम को अचानक ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी कि सैदपुरा के पास गंगनहर में एक महिला का शव तैर रहा है. इस सूचना पर थानेदार संजय नेगी अपने साथ रीता के पति मनोज को ले कर वहां पहुंचे. संजय नेगी ने ग्रामीणों की मदद से शव को गंगनहर से बाहर निकलवाया. मनोज ने शव को देखते ही पहचान लिया कि वह शव उस की पत्नी रीता का ही है. शव के गले पर निशान थे. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर शव पोस्टमार्टम के लिए राजकीय अस्पताल रुड़की भेज दिया. रीता का शव बरामद होने की सूचना पा कर एसपी (क्राइम) प्रदीप कुमार राय थाना झबरेड़ा पहुंचे.

राय ने जब राजेंद्र से पूछताछ की तो वह अपने को बेगुनाह बताने लगा. राय व थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने जब सख्ती से राजेंद्र से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने रीता की हत्या करना स्वीकार कर लिया और उस से पिछले कई सालों से चल रहे आंतरिक संबंधों को भी कबूल कर लिया. रीता की हत्या करने की राजेंद्र ने पुलिस को जो जानकारी दी, वह इस तरह थी—

राजेंद्र जिला हरिद्वार के कस्बा झबरेड़ा स्थित एक ईंट भट्ठे पर पिछले 20 साल से काम कर रहा था. उस के परिवार में उस की पत्नी सुनीता, बेटी प्रिया (21), दूसरी बेटी खुशी (15) व बेटा कार्तिक (12) था. ईंट भट्ठे पर काम कर के राजेंद्र को 15 हजार रुपए प्रतिमाह की आमदनी हो जाती थी. इस तरह से राजेंद्र के परिवार की गाड़ी अच्छी से चल रही थी. उसी ईंट भट्ठे पर रीता का पति मनोज भी काम करता था. साथ काम करतेकरते मनोज और राजेंद्र में दोस्ती हो गई. फिर दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना शुरू हो गया. इस आनेजाने में रीता और राजेंद्र के बीच नाजायज संबंध बन गए.

वह दोनों आपस में दूर के रिश्तेदार भी थे. दोनों के संबंधों की खबर उन के घर वालों को ही नहीं बल्कि गांव वालों को भी हो गई थी. इस के बावजूद उन्होंने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा. उन के संबंध करीब 7 सालों तक बने रहे. पिछले साल अचानक राजेंद्र व रीता के जीवन में एक ऐसा मोड़ आ गया कि दोनों के बीच में दूरियां बढ़ने लगीं. 30 मार्च, 2020 का दिन था. उस समय देश में लौकडाउन चल रहा था. उस दिन जब राजेंद्र से रीता मिली तो उस ने राजेंद्र के सामने शर्त रखी कि वह उस के साथ शादी कर के अलग घर में रहना चाहती है.

रीता की बात सुन कर राजेंद्र सन्न रह गया. उस ने रीता को समझाया कि अब इस उम्र में यह सब करना हम दोनों के लिए ठीक नहीं होगा, क्योंकि हम दोनों पहले से ही शादीशुदा व बड़े बच्चों वाले हैं. अलग रहने से हम दोनों के परिवार वालों की जगहंसाई होगी. हम किसी परेशानी में भी पड़ सकते हैं. राजेंद्र के काफी समझाने पर भी रीता नहीं मानी और राजेंद्र से शादी करने के लिए जिद करने लगी. खैर उस वक्त तो राजेंद्र किसी तरह से रीता को समझाबुझा कर वापस आ गया. इस के बाद उस ने रीता से दूरी  बनानी शुरू कर दी. उस ने उस का मोबाइल अटैंड करना कम कर दिया और उस से कन्नी काटने लगा.

अपनी उपेक्षा से आहत रीता घायल शेरनी की तरह क्रोधित हो गई. उस ने मन ही मन में राजेंद्र से बदला लेने का निश्चय कर लिया. उस दौरान राजेंद्र अपनी बड़ी बेटी प्रिया की शादी के लिए वर की तलाश में था. राजेंद्र अपनी बिरादरी के लोगों से शादी के लिए प्रिया के संबंध में बात करता रहता था. जब इस बात का पता रीता को चला कि राजेंद्र अपनी बेटी के लिए लड़का तलाश रहा है तो उस ने राजेंद्र की बेटी की शादी में अड़ंगा लगाने का निश्चय किया. इस के बाद जो भी लोग प्रिया को शादी के लिए देखने आते रीता उन लोगों से संपर्क करती और उन्हें बताती कि राजेंद्र की बेटी प्रिया का किसी से चक्कर चल रहा है.

रीता के मुंह से यह सुन कर राजेंद्र की बेटी से शादी करने वाले लोग शादी का विचार बदल देते थे. इस तरह रीता ने प्रिया से शादी करने वाले 2 परिवारों को झूठी व भ्रामक जानकारी दे कर प्रिया के रिश्ते तुड़वा दिए थे. जब इस बात की जानकारी राजेंद्र को हुई तो वह तिलमिला कर रह गया. धीरेधीरे समय बीतता गया. वह 28 फरवरी, 2021 का दिन था. उस दिन अचानक एक ऐसी घटना घट गई, जिस से राजेंद्र तड़प उठा और उस ने रीता की हत्या करने की योजना बना डाली. हुआ यूं कि 28 फरवरी, 2021 को कस्बे में रविदास जयंती मनाई जा रही थी. उस समय राजेंद्र की छोटी बेटी खुशी ट्यूशन पढ़ कर वापस घर जा रही थी. तभी रास्ते में उसे रीता का बेटा सौरव खड़ा दिखाई दिया.

खुशी कुछ समझ पाती, इस से पहले ही सौरव ने खुशी के साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दीं. इस पर खुशी ने शोर मचा दिया. खुशी के शोर मचाने पर सौरव वहां से भाग गया. खुशी ने घर आ कर इस छेड़खानी की जानकारी अपने पिता राजेंद्र को दी. इस के बाद राजेंद्र ने रीता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. राजेंद्र रीता की हत्या का तानाबाना बुनने लगा. दूसरी ओर रीता राजेंद्र के इस खतरनाक इरादे से बेखबर थी. योजना के तहत राजेंद्र ने 15 मार्च, 2021 को रीता को फोन कर के कहा कि वह उसे 20 हजार रुपए देना चाहता है, इस के लिए उसे मंगलौर आ कर मिलना पड़ेगा.

उस की इस बात पर लालची रीता राजी हो गई. 16 मार्च को रीता उस के साथ बाइक पर बैठ कर मंगलौर के लिए चल पड़ी. जब दोनों सैदपुरा की गंगनहर पटरी पर पहुंचे तो राजेंद्र ने बाइक रोक कर रीता से कहा, ‘‘मैं तुम्हें सरप्राइज दे कर 20 हजार रुपए देना चाहता हूं, तुम जरा मुंह दूसरी ओर घुमा लो.’’

जैसे ही रीता ने मुंह दूसरी ओर घुमाया तो राजेंद्र ने रीता के गले में लिपटी चुन्नी से उस का गला घोंट दिया. रीता की हत्या के सबूत मिटाने के लिए उस ने उस का मोबाइल व चुन्नी गंगनहर के पानी में फेंक दिए. फिर वह बाइक से अपने घर लौट आया. पुलिस ने राजेंद्र के बयान दर्ज कर लिए और इस प्रकरण में उस के खुलासे के बाद इस मुकदमे में धारा 302 व 201 बढ़ा दी. एसआई संजय नेगी ने अभियुक्त की निशानदेही पर गंगनहर की पटरी से सही झाडि़यों में फंसी रीता की चुन्नी बरामद कर ली. रीता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया. राजेंद्र से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Best Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime Kahani : पत्नी ने दो प्रेमियों संग साजिश रचकर गला दबाकर पति की कराई हत्या

Crime Kahani : अवैध संबंधों का नतीजा अकसर एक गुनाह को जन्म देता है. इस बात को अगर मंजू समझ जाती तो अपने प्रेमियों के साथ जेल जाने के बजाय वह अपनी घरगृहस्थी को संभाल रही होती…

सुबह के यही कोई 7 बजे थे, तभी धार जिले के अमझेरा थानाप्रभारी रतनलाल मीणा को थाना इलाके में एक युवक द्वारा आत्महत्या करने की खबर मिली.  सूचना पाते ही टीआई मीणा के निर्देश पर एसआई राजेश सिंघाड पुलिस टीम को ले कर मौके पर पहुंच गए, जहां कमरे की छत पर लगभग 28 वर्षीय अजय भायल की लाश छत में लगे कुंदे के सहारे फांसी पर लटकी थी. घटना के समय घर में अजय की पत्नी मंजू मौजूद थी, जिस ने शुरुआती पूछताछ में बताया कि रात को हम दोनों खाना खा कर अपने बिस्तर पर सो गए थे. जिस के बाद सुबह उठ कर उस ने पति को फांसी पर लटका देखा तो उस ने लोगों को घटना की जानकारी दी.

एसआई सिंघाड को मंजू के हावभाव कुछ अजीब लगे. क्योंकि मंजू बेबाक हो कर घटना की जानकारी दे रही थी. जबकि एक जवान पति के मरने के बाद किसी भी औरत का इस तरह बात करना असंभव था. वह भी तब जब उस के पति का शव उस के सामने फांसी के फंदे पर झूल रहा हो. एसआई राजेश सिंघाड ने यह बात अपने ध्यान में नोट कर शव को फंदे से उतारा. उन्होंने पूरी स्थिति से टीआई रतनलाल मीणा को अवगत कराया. शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने से पहले उन्होंने पूरे घर की अच्छी तरह से तलाशी ली, पर वहां कहीं भी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. यह बात 26 अगस्त, 2020 की है.

यह आत्महत्या है या अजय की हत्या की गई है, यह तय करने के लिए पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था. तब तक मामला संदिग्ध था. इस दौरान प्रारंभिक पूछताछ में अजय के घर वालों ने अपने बेटे की मौत को हत्या बताते हुए उस की पत्नी मंजू पर शक जाहिर किया. उन का कहना था कि मंजू का चालचलन ठीक नहीं था, जिस के कारण पतिपत्नी में आए दिन झगड़ा होता रहता था. इतना ही नहीं, जिस रात अजय का शव फांसी पर लटका मिला उस रात भी उस की पत्नी और अजय के बीच झगड़ा होने की बात पुलिस की जानकारी में आई, मगर मंजू ने इस बात से इनकार कर दिया.

उस का कहना था कि उस के पति कई दिनों से परेशान रहने लगे थे. मैं ने उन से परेशानी का कारण भी जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया. जांच अधिकारी एसआई राजेश सिंघाड ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही जांच कर पता कर लिया था कि मृतक अजय और उस की पत्नी दोनों न केवल शराब पीने के शौकीन थे, बल्कि गांव में अवैध रूप से शराब का धंधा भी करते थे. जाहिर सी बात है जहां शराब का धंधा होता हो, वहां लड़ाईझगड़ा होना कोई अजूबा नहीं है. इसलिए दोनों के झगडे़ पर कोई ध्यान नहीं देता था. इस बीच पुलिस को अजय की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई, जिस में साफ बताया गया कि अजय की मौत फांसी लगने के पहले ही हो चुकी थी.

बात साफ थी कि उस की हत्या करने के बाद उसे आत्महत्या साबित करने की गरज से फांसी पर लटकाया गया था. चूंकि अजय का शव घर के अंदर मिला था और रात में उस की 25 वर्षीय बेहद खूबसूरत पत्नी मंजू उस के साथ में थी. इसलिए टीआई मीणा जानते थे कि यह संभव नहीं है कि पत्नी घर में सोती रहे और कोई बाहर से आ कर पति की हत्या कर के चला जाए. इसलिए उन के निर्देश पर जांच अधिकारी एसआई सिंघाड ने मृतक की पत्नी मंजू से बारबार पूछताछ की, जिस में एक समय ऐसा आया कि वह खुद अपने बयानों में उलझ गई, जिस से उस ने अपने 2 प्रेमियों मनोहर और सावन निवासी राजपुरा के साथ मिल कर पति की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापे मार कर उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया, जिस के बाद अपने दोनों प्रेमियों के साथ मिल कर हत्या कर दिए जाने की कहानी इस प्रकार से सामने आई. अजय मध्य प्रदेश के जिला धार के गांव नालापुरा में अपनी पत्नी मंजू के साथ रहता था. अजय के पास आय का कोई साधन नहीं था. इसलिए अजय ने घर पर छोटीमोटी किराने की दुकान खोल रखी थी, जिस से उस का मुश्किल से ही गुजारा हो पाता था. अजय की पत्नी मंजू जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही दिमाग से तेज भी थी इसलिए उस ने अजय को सलाह दी कि अकेला गुड़, तेल बेचने से उन की दालरोटी नहीं चलने वाली, इसलिए हम किराने की ओट में शहर से शराब ला कर बेचना शुरू कर देते हैं, जिस से काफी कमाई हो सकती है.

इस काम में अजय ने पुलिस का डर होने की बात कही तो मंजू ने कहा कि यह बात तुम मुझ पर छोड़ दो. अजय पत्नी की बात पर राजी हो गया, जिस से उस ने शहर से शराब ला कर दुकान में रख कर बेचनी शुरू कर दी थी. कहना नहीं होगा कि शराब पीने वाले रेट के चक्कर में नहीं पड़ते, इसलिए गांव के शौकीन लोग मंजू से मुंहमांगे दाम पर शराब खरीदने लगे. गांव का संपन्न किसान मनोहर पडियार भी शराब का शौकीन था. इसलिए जब उसे पता चला कि मंजू और अजय गांव में शराब बेचने लगे हैं, तब से मनोहर ने शहर से शराब खरीदनी ही बंद कर दी.

मंजू जानती थी कि शराब के शौकीन मजबूरी में ही महंगी शराब उस से खरीदते हैं, वरना लोग शहर से ही अपने लिए शराब खरीद कर लाते थे. लेकिन मनोहर उस का रोज का ग्राहक था. इसलिए एक दिन मंजू ने मनोहर से पूछ लिया, ‘‘अब शहर से शराब खरीद कर नहीं लाते क्या?’’

‘‘मेरा यहां रोजरोज आना तुम्हें अच्छा नहीं लगता क्या?’’ मनोहर ने उलटा उसी से सवाल कर दिया.

‘‘नहीं, यह बात नहीं है, बस ऐसे ही पूछ लिया.’’ वह बोली.

‘‘अब पूछ लिया है तो कारण भी सुन लो. तुम जिस बोतल को हाथ लगा देती हो न, उस बोतल का नशा और भी बढ़ जाता है. इसलिए मुझे तुम्हारे यहां की शराब अच्छी लगती है.’’  मनोहर ने मंजू की प्रशंसा करते हुए कहा.

‘‘ऐसा है क्या?’’ मनोहर की बात सुन कर मंजू ने मुसकराते हुए बोली.

‘‘हां, क्योंकि तुम्हारे छू भर लेने से शराब में तुम्हारा नशा भी घुल जाता है.’’ मनोहर ने मुसकराते हुए कहा और शराब की बोतल पकड़ते समय मंजू की अंगुलियां दबा दीं.

मंजू बच्ची तो थी नहीं, जो इस का मतलब न समझती हो. लेकिन वह अपने रोज के ग्राहक को नाराज नहीं करना चाहती थी, इसलिए मुसकराते हुए बोली, ‘‘क्या बात है मनोहर बाबू, आज पीने से पहले ही चढ़ गई क्या?’’

‘‘हां, तुम से चार बातें जो हो गईं.’’ मनोहर ने उस से कहा और अपनी बोतल ले कर चला गया. उस दिन के बाद से मनोहर और मंजू के बीच अनकहे तौर पर नजदीकी बढ़ने लगी. जिस से कुछ दिनों बात मनोहर मंजू के घर में ही बैठ कर शराब पीने लगा. मंजू भी शराब पीने की शौकीन थी, सो एक दिन वह भी मनोहर के साथ पेग से पेग भिड़ाने लगी. जिस के चलते शराब के नशे में दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. मंजू खूबसूरत और जवान थी. मनोहर को उस की जरूरत थी और मंजू को मनोहर के पैसों की. इसलिए मनोहर उस पर पैसे लुटाते हुए लगभग रोज ही मंजू के साथ उस वक्त समय बिताने लगा, जब उस का पति अजय दुकान का सामान लेने शहर गया होता था.

राजपुरा गांव का रहने वाला सावन हेयर कटिंग सैलून चलाता था. वह शराब का शौकीन भी था और मनोहर का दोस्त भी. इसलिए कभीकभार वह मनोहर के साथ मंजू के यहां शराब पीने चला जाया करता था. इस दौरान वह जल्दी ही समझ गया कि मनोहर और मंजू के बीच शारीरिक संबंध भी हैं तो मौके का फायदा उठा कर उस ने मनोहर से कहा कि वह उसे भी मंजू संग सोने का मौका दिलवा दे. मनोहर ने मंजू से सावन को एक बार खुश करने को कहा तो मंजू थोड़ी नानुकुर के बाद मान गई. लेकिन इस के बाद कुछ ऐसा हुआ कि मनोहर के अलावा सावन के साथ भी मंजू के स्थाई अवैध संबंध बन गए.

चूंकि मनोहर और सावन दोनों दोस्त थे और साथ में ही शराब पीया करते थे, इस कारण कई बार वे दोनों एक साथ मंजू के संग अय्याशी कर चुके थे. लेकिन कोरोना के कारण देश में लौकडाउन लग जाने से अजय का सामान खरीदने के लिए शहर जाना बंद हो गया. दूसरा उस के पास शराब का स्टौक भी खत्म हो गया. इस से अजय और मंजू की कमाई पर ब्रेक तो लगा ही, साथ ही मंजू के संग मनोहर और सावन की अय्याशी पर भी ब्रेक लग गया. जिस से दोनों दोस्त मंजू से मिलने के लिए परेशान होने लगे. इस बीच एक दिन गांव में अपने दोस्तों के साथ अजय को ताश खेलते देख मनोहर और सावन मंजू के घर पहुंच गए और एक साथ मंजू के संग वासना का खेल खेलने लग गए.

इसी बीच अजय के घर आ जाने से तीनों रंगेहाथ पकड़े गए. पत्नी को अय्याशी का घिनौना खेल खेलते देख अजय पागल हो कर गुस्से में उस की पिटाई करने लगा. जिस के बाद तो यह आए दिन का काम होने लगा. अजय बातबात पर उस की अय्याशी का ताना दे कर उसे पीटने लगा. इस से मंजू तंग आ गई. उस ने यह बात अपने प्रेमियों को बताई तो वे अजय के साथ रंजिश रखने लगे. इस दौरान लौकडाउन फिर से हट जाने से मंजू अवैध शराब बेचने लगी, मनोहर शराब लेने उस की दुकान पर अभी भी जाया करता था. लेकिन अब पहले जैसी अय्याशी संभव नहीं थी. इसलिए मनोहर और सावन दोनों ही अजय को रास्ते से हटाने की सोचने लगे थे.

आरोपियों ने बताया कि घटना की रात अजय फिर मंजू को उस के अवैध संबंध को ले कर उस के साथ मारपीट कर रहा था. इस बात की जानकारी मंजू ने मनोहर को फोन पर दी तो मनोहर सावन को ले कर मंजू के घर पहुंच गया. जहां उस ने अजय को समझाबुझा कर अपने साथ शराब पीने को राजी कर लिया. इस के बाद उस ने अजय से ही खरीद कर उसे खूब शराब पिलाई और जब उस ने देखा कि पर्याप्त नशा हो गया है तो सावन, मंजू और मनोहर तीनों ने मिल कर गला दबा कर अजय की हत्या कर दी. उस के बाद लाश को फांसी पर लटका दिया ताकि पुलिस समझे कि उस ने आत्महत्या की है. लेकिन टीआई रतनलाल मीणा के नेतृत्व में एसआई राजेश सिंघाड की सटीक जांच से तीनों आरोपी हफ्ते भर में ही कानून की गिरफ्त में आ गए.

मंजू के बारे में बताया जाता है कि पति की हत्या करने के बाद उसे कानून का जरा भी डर नहीं था. इसलिए दोनों प्रेमियों संग मिल कर पति की हत्या के बाद उस के शव को फंदे पर लटका कर दोनों प्रेमियों संग मस्ती करते हुए शराब पीने के बाद खाना भी खाया और फिर जिस कमरे में पति की लाश लटकी थी, उसी कमरे में सो गई थी. उस ने पुलिस को बताया कि सुबह उठने के बाद उस ने मोहल्ले वालों को बुला कर पति द्वारा आत्महत्या करने की बाद बताई.  पुलिस ने मंजू और उस के दोनों प्रेमियों मनोहर व सावन को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Crime Kahani

Family Story in Hindi : स्मार्ट मदर जवान प्रेमी और मर्डर

Family Story in Hindi : रेखा 2 बच्चों की मां जरूर बन गई थी, लेकिन अपनी खूबसूरती और शारीरिक कसावट की वजह से वह वास्तविक उम्र से कम की दिखती थी. तभी तो गांव का ही रहने वाला 18 वर्षीय मंजीत उस पर फिदा हो गया था. वह अपनी कार से रोजाना रेखा को उस के औफिस छोडऩे जाने लगा. इसी दौरान इस एकतरफा प्यार ने रेखा पर ऐसा खूनी वार किया कि… 

दिन के 9 बजने को आए थे. झज्जर जिले के गांव बहू में रहने वाले रवि की पत्नी रेखा ने जल्दीजल्दी घर के काम निपटा लिए थे और काम पर जाने के लिए तैयार होने लगी थी. उस की एक नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर थी. जैसे ही घड़ी ने सवा 9 बजाए, रेखा अपना बैग कंधे पर टांग कर घर से बाहर हो गई. वह लंबेलंबे कदम बढ़ाते हुए घर से कुछ दूर बने बस स्टाप पर आ गई और बस का इंतजार करने लगी. समय धीरेधीरे आगे बढ़ रहा था. बस उसे दूरदूर तक आती हुई नजर नहीं आ रही थी.

रेखा के माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं, क्योंकि 10 से ज्यादा का समय हो गया, किंतु बस नदारद थी. ‘इस मुई बस के चक्कर में मुझे रोज ही काम पर पहुंचने में लेट होना पड़ता है.’ वह झल्लाते हुए बड़बड़ाई. अभी तक उस बस स्टाप पर रेखा अकेली ही खड़ी थी, कोई दूसरा व्यक्ति वहां नहीं आया था. रेखा की झल्लाहट बढऩे लगी. आज उस बस का दूर तक कोई अतापता नहीं था, जो रोज 10 बजे तक बस स्टाप पर आ जाती थी. ‘लगता है आज बस खराब हो गई है, मुझे अब पैदल ही झाड़ली के एनटीपीसी पावर प्लांट तक जाना पड़ेगा. क्योंकि वह उसी प्लांट में नौकरी करती थी. मौसम बड़ा ठंडा है.

लेकिन घबराहट में मुझे पसीने छूटने लगे हैं, लगता है किसी दिन मुझे इस बस के चक्कर में काम से हाथ धोना पड़ेगा.’ सोचते हुए रेखा ने दूरदूर तक सुनसान नजर आ रही उस डामर की सड़क पर कदम बढ़ा दिए. सफर लंबा था. अभी वह थोड़ी ही दूरी पार कर पाई थी कि पीछे से उसे किसी गाड़ी का हार्न सुनाई दिया. रेखा ने पीछे मुड़ कर देखा. यह एक कार थी, जो उसी की साइड पर आ रही थी. रेखा जल्दी से सड़क से नीचे कच्चे राह पर उतर गई. कार तेजी से आ कर उस के बराबर में रुक गई. ब्रेक लगने से कार के टायर सड़क पर रगड़ खा गए थे और उस में से अजीब सी आवाज आई थी. रेखा की ओर की खिड़की खुली और उस में से एक युवक का सिर बाहर निकला. यह युवक 18-19 साल का युवा ही नजर आता था.

”आज बस नहीं आई है क्या, जो तुम पैदल ही सफर करने के लिए निकल गई हो?’’ उस युवक ने पूछा.

रेखा उसे देख कर उपेक्षा से कंधे झटक कर बोली, ”बस खराब हो गई होगी. मैं काम पर जाने के लिए लेट हो रही हूं, इसलिए पैदल जाना पड़ रहा है.’’

”आओ, मेरी कार में बैठ जाओ, मैं तुम्हें तुम्हारे काम पर पहुंचा देता हूं.’’ युवक ने कहा.

”नहीं, मैं पैदल ही चली जाऊंगी.’’ रेखा ने गंभीरता से कहा और आगे बढ़ गई.

”मैं तुम्हारे लिए अजनबी हो सकता हूं रेखा, लेकिन मैं तुम्हें अच्छे से जानता हूं. आओ कार में बैठ जाओ.’’

युवक की बात पर रेखा चौंकी, ”तुम मुझे कैसे जानते हो, मेरा नाम भी तुम्हें मालूम है.’’

युवक ने बताया, ”मैं बहू गांव में ही रहता हूं, तुम्हारा घर मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.’’ युवक ने बताया, ”मैं ने तुम्हें कई बार हाटबाजार में देखा है. एक ही गांव का हूं, इसलिए नाम भी जानता हूं. संकोच मत करो, मैं गांव के नाते से तुम्हारी मदद करना चाहता हूं, ज्यादा सोचोगी तो लेट हो जाओगी काम से.’’

रेखा को युवक की बात पर विश्वास करना पड़ा. वैसे भी उसे काम पर पहुंचने में देर हो रही थी. वह कार में बैठ गई. युवक ने उसे अपनी बाईं ओर बिठा लिया था. कार को युवक ने तेजी से आगे बढ़ा दिया. थोड़ी देर तक दोनों मौन रहे, फिर रेखा ने ही मुंह खोला, ”तुम मेरा नाम जानते हो, लेकिन तुम ने अपना नाम नहीं बताया मुझे.’’

”मेरा नाम मंजीत है.’’ युवक बोला.

”क्या करते हो मंजीत?’’

”फिलहाल कुछ नहीं. अभी मैं ने 12वीं पास की है. सोच रहा हूं कालेज में दाखिला ले लूं.’’

”अच्छा विचार है, आजकल पढऩेलिखने से ही अच्छी नौकरी मिलती है. तुम किसी कालेज में एडमिशन ले लो.’’

”हां.’’ मंजीत ने धीरे से कहा और कार की विंडस्क्रीन से बाहर देखने लगा. कुछ ही दूरी पर झाड़ली पावर प्लांट नजर आ रहा था. कार जब वहां पहुंची तो रेखा ने जल्दी से कहा, ”मंजीत, यहीं कार रोक दो. मैं यहीं पर काम करती हूं.’’

मंजीत ने कार एक साइड कर के रोक दी. रेखा दरवाजा खोल कर नीचे उतरी और उस ने शिष्टाचार दिखाते हुए मंजीत का मुसकरा कर शुक्रिया किया, फिर अपने काम पर झाड़ली पावर प्लांट की तरफ बढ़ गई. मंजीत कुछ देर तक रेखा को देखता रहा, जब वह आंखों से ओझल हो गई तो उस ने कार को घुमा लिया और वापस गांव की ओर लौटने लगा. उस के जेहन में रेखा को ले कर तरहतरह के विचार आने लगे थे. रेखा बला की हसीन और भरेपूरे बदन की युवती थी. वह उस के मन को भा गई थी. मंजीत उसे अपने दिल में जगह देने का सपना संजोने लगा.

इस के बाद वह अकसर रोजाना ही अपनी कार से रेखा को बस स्टाप से एनटीपीसी पावर प्लांट तक छोडऩे जाने लगा. इस तरह दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई. शाम ढलने को थी. भैंसें चराने वाला चरवाहा अपनी भैंसों को ले कर अब गांव के लिए लौट जाने की तैयारी करने लगा था. उस ने पेड़ के सहारे रखा लट्ठ उठाया और उठ कर खड़ा हो गया. भैंसें अभी भी खेतों में चर रही थीं. उस ने उन्हें इकट्ठा करना शुरू किया और पानी पिलाने के विचार से उन्हें पास में ही स्थित तालाब की तरफ हांक कर ले आया. जैसे ही वह तालाब पर पहुंचा, उस के मुंह से चीख निकल गई.

तालाब की सतह पर एक युवती की लाश तैर रही थी. चरवाहा बुरी तरह घबरा गया. वह कुछ क्षण बुत बना वहां खड़ा लाश को देखता रहा. फिर गांव की तरफ दौड़ पड़ा. यह झज्जर जिले का ही रुडिय़ावास गांव था, जो हरियाणा के झज्जर जिले के अंतर्गत आता है. चरवाहा यहां अकसर भैंसें चराने आता रहता था, इसलिए वह गांव के चौकीदार को अच्छी तरह जानता था. चरवाहे को चौकीदार गांव की चौपाल पर हुक्का पीता हुआ मिल गया. वहां गांव के कुछ बड़ेबूढ़े भी बैठे हुए थे. बदहवास हालत में चरवाहे को वहां भागता हुआ आया देख कर चौकीदार उठ कर खड़ा हो गया. उस ने उसे देख कर हैरानी से पूछा, ”क्या हुआ, तुम इतने घबराए हुए क्यों हो?’’

”चाचा…म..मैं ने तालाब में एक युवती की लाश देखी है.’’ चरवाहे ने हांफते हुए बताया.

”लाश!’’ चौकीदार घबरा कर बोला, ”सुबह तो तालाब में कुछ नहीं था.’’

”मैं ने अपनी आंखों से देखी है.’’ चरवाहे ने कहा, ”तुम चल कर देख लो.’’

लाश की बात सुन कर वहां बैठे गांव वाले भी घबरा कर खड़े हो गए. चौकीदार के साथ वह लोग भी तालाब की तरफ चल पड़े. चरवाहा भी उन के पीछे था.

कुछ ही देर में वह सब तालाब पर पहुंच गए. वास्तव में तालाब में एक युवती की लाश तैर रही थी.

रुडिय़ावास गांव के चौकीदार और गांव वाले बुजुर्गों ने उस युवती की लाश को ध्यान से देखा.

वह जवान और सुंदर थी. पेट में पानी चले जाने की वजह से लाश फूल कर पानी के ऊपर तैरने लगी थी.

”यह गांव की तो नहीं है चौधरी.’’ एक बुर्जुग बोला, ”मुझे तो लग रहा है किसी ने इसे मार कर यहां ला कर डाल दिया है.’’

”ऐसा ही लग रहा है ताऊ.’’ दूसरा व्यक्ति जो उम्र में इन से कम लग रहा था, अपनी बात कहता हुआ चौकीदार की तरफ घूमा, ”भाई, तुम पुलिस थाना साल्हावास में इस लाश की खबर दे दो. पुलिस तहकीकात कर लेगी कि यहां यह लाश कैसे आई.’’

चौकीदार ने सिर हिलाया और जेब से मोबाइल निकाल कर उस ने थाना साल्हावास से संपर्क कर लिया. कुछ देर घंटी बजती रही फिर किसी ने काल अटेंड की, ”हैलो! मैं थाना साल्हावास से एसएचओ हरीश कुमार बोल रहा हूं. आप को किस से बात करनी है?’’

”मैं साल्हावास गांव का चौकीदार बोल रहा हूं साहब. यहां तालाब में एक युवती की लाश तैर रही है.’’

”लाश!’’ दूसरी ओर एसएचओ चौंके, ”लाश तुम ने देखी है क्या?’’

”हां साहब, मैं इस समय तालाब के किनारे पर ही खड़ा हूं. लाश अभी भी तालाब में तैर रही है.’’ चौकीदार ने बताया.

”तुम वहीं रहो. मैं आधा घंटा में वहां पहुंच रहा हूं.’’ एसएचओ हरीश कुमार बोले. चौकीदार ने मोबाइल स्विच्ड औफ किया और मोबाइल को जेब में डाल लिया.

अब तक इस लाश की खबर गांव रुडिय़ावास में फैल गई थी. गांव के तमाम लोग वहां लाश देखने के लिए आ कर इकट्ठा हो गए. चौकीदार ने सभी को तालाब से दूर खड़े रहने की हिदायत दे दी. सभी लाश को बड़ी हैरानी से देख रहे थे. अभी तक एक भी ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया, जो मृतका को पहचानने का दावा करता हो. पुलिस वहां पौना घंटा में पहुंची. सूरज इस बीच पश्चिम दिशा में आ चुका था और अस्त होने जा रहा था. रोशनी घटने लगी थी, लेकिन अभी लाश दूर से भी देखी जा सकती थी. एसएचओ ने उस युवती की लाश को पानी से निकलवाने के बाद उस का बारीकी से निरीक्षण किया.

वह युवती गोरे रंग की बेहद खूबसूरत थी. नाकनक्श सांचे में ढले प्रतीत हो रहे थे. मृतका के शरीर पर कहीं भी चोट का निशान नजर नहीं आ रहा था. कपड़े भी सहीसलामत दिखाई दे रहे थे. ऐसा नहीं लग रहा था कि किसी ने इस के साथ जोरजबरदस्ती की हो और फिर मार कर फेंक दिया हो. डैडबौडी पर कहीं भी खरोंच के निशान नहीं थे. एसएचओ ने अनुमान लगाया कि इस का गला दबा कर मारा गया है. यह आपसी रंजिश का मामला नजर आता था. जांच पूरी कर लेने के बाद एसएचओ ने कागजों की खानापूर्ति की और फिर ऊंची आवाज में वहां मौजूद लोगों से पूछा, ”क्या आप में से कोई इस युवती को पहचानता है?’’

”नहीं साहब.’’ कई स्वर एक साथ उभरे.

लाश की जामातलाशी में भी कुछ हाथ नहीं आया था. एक प्रकार से उस मृतका की शिनाख्त नहीं हो पाई थी. एसएचओ हरीश कुमार ने मौके की काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए झज्जर के सरकारी अस्पताल में भिजवा दिया.

यहां के काम को पूरा कर के उन्होंने चौकीदार से पूछा, ”तुम्हें इस लाश की जानकारी कैसे मिली थी?’’

”यह चरवाहा यहां भैंसें चराने आया हुआ था साहब, इस ने ही तालाब में इस की लाश देखी और मुझे इत्तला देने दौड़ता हुआ गांव रुडिय़ावास पहुंच गया.’’ चौकीदार ने बताते हुए चरवाहे के कंधे पर हाथ रख दिया.

”तुम यहां भैंसें चराने कब से आते हो?’’

”मैं सर्दी में यहां आता हूं साब, गरमी में मैं गांव बहू के खेतों में जानवर चरा लेता हूं. मैं ने आज शाम को घर जाने से पहले भैंसें इकट्ठी कीं और इन्हें पानी पिलाने के लिए तालाब पर आया तो उस लाश तैरती देखी थी.’’

”दिन भर तुम यहीं थे आज?’’ एसएचओ ने पूछा.

”जी हां.’’ चरवाहे ने बताया, ”लेकिन मैं ने दिन में इधर किसी को भी नहीं देखा है.’’

”तुम यहां कितने बजे आ गए थे?’’

”मैं दोपहर में एक बजे यहां भैंसें ले कर आया था. तब से कोई इधर आया ही नहीं.’’

”शायद हत्या कहीं और कर के कोई यहां लाश फेंकने आया होगा तो वह एक बजे से पहले आया होगा.’’ एसएचओ हरीश कुमार ने गंभीर स्वर में कहा, ”अब तुम अपना नामपता दरोगाजी को लिखवा दो और चले जाओ. जरूरत पडऩे पर तुम्हें याद कर लिया जाएगा.’’

”ठीक है साहब.’’ चरवाहे ने धीरे से कहा और भैंसें ले कर वह गांव बहू की ओर रवाना हो गया. रुडिय़ावास गांव के लोग भी गांव में लौट गए. एसएचओ जीप में सवार हुए और थाने की तरफ रवाना हो गई.

हरियाणा के झज्जर जिले के अंतिम छोर पर बसे गांव बहू का रहने वाला रवि 4 मई, 2025 को बारबार घड़ी देख रहा था. घड़ी शाम के 7 बजा रही थी. उस की पत्नी रेखा 6 बजे तक रोज ड्ïयूटी से लौट कर घर आ जाती थी, लेकिन उस दिन एक घंटा ऊपर हो गया था, वह काम से घर नहीं लौटी थी. रवि के माथे पर अब चिंता की रेखाएं उभरने लगी थीं. घड़ी ने जब साढ़े 7 बजाए तो वह पत्नी रेखा की तलाश में पैदल ही बस स्टाप की तरफ बढ़ गया.

बस स्टैंड दूर था और अंधेरा भी घिर आया था. रवि जब बस स्टैंड पर पहुंचा तो वहां गहरा सन्नाटा फैला हुआ था. दूरदूर तक कोई इंसान वहां नजर नहीं आ रहा था. रवि परेशान हालत में घर लौट कर आया तो रेखा अभी तक घर नहीं पहुंची थी.

‘कहां रह गई यह… साढ़े 8 से ऊपर का समय हो गया. पहले तो वह कभी इतनी देर घर से बाहर नहीं रही.’ रवि बड़बड़ाया और उस ने अपने छोटे भाई को बताया कि रेखा घर नहीं आई है आज.

”कहीं वह अपने मायके में तो नहीं चली गई है भैया!’’ नवीन (काल्पनिक नाम) ने कहा, ”आप उन के घर फोन कर के पूछो. हो सकता है वहीं गई हों.’’

रवि ने मोबाइल निकाल कर झज्जर जिले के ही कड़ौधा गांव में रहने वाले रेखा के पापा अजमेर को काल लगा दी. रेखा से उस की शादी 8 साल पहले हुई थी, जिस के 2 बच्चे भी हैं. दूसरी ओर घंटी बजी और फिर काल उठा ली गई, ”हां दामादजी, कैसे फोन कर रहे हो? घर में सब ठीकठाक है न?’’ अजमेर ने पूछा.

”सब ठीक है पापा.’’ रवि जल्दी से बोला, ”क्या रेखा वहां पहुंची है? अभी तक वह काम से नहीं लौटी है.’’

”नहीं दामादजी, रेखा तो यहां नहीं आई.’’ अजमेर के स्वर में परेशानी के भाव थे, ”रेखा से तुम्हारी कहासुनी हुई थी क्या?’’

”नहीं पापाजी, वह सुबह अच्छे मूड में काम पर निकली थी.’’ कहने के बाद रवि ने फोन काट दिया.

”नवीन, रेखा कडौधा में नहीं गई है. उस के पापा ने बताया है.’’ रवि चिंतित स्वर में बोला, ”तुम अपनी भाभी के काम पर झाड़ली जा कर पता लगाओ, यारदोस्तों से भी कहो, वह रेखा को ढूंढें. मुझे तो बहुत घबराहट हो रही है.’’

”आप बैठ जाइए, आप की तबियत वैसे भी ठीक नहीं रहती है. मैं झाड़ली में पावर प्लांट पर जा कर मालूम करता हूं. 1-2 दोस्तों को भी साथ ले जाऊंगा. हो सकता है भाभी का ओवरटाइम चल रहा हो.’’ नवीन ने कहा और घर से साइकिल ले कर निकल गया.

नवीन ने झाड़ली जा कर पावर प्लांट में भाभी रेखा के बारे में मालूम किया तो उसे बताया गया कि रेखा आज तो काम पर आई ही नहीं थी. नवीन हैरान रह गया. उस ने सुबह भाभी रेखा को बैग कंधे पर टांग कर काम के लिए घर से निकलते देखा था. अगर वह काम पर नहीं पहुंची तो फिर कहां चली गई. नवीन अपने एक दोस्त श्याम को साथ ले कर आया था. वह उस के साथ भाभी को तलाश करने लगा. झाड़ली की तरफ आने वाले रास्ते के दोनों ओर उन्होंने अच्छी तरह देखा कि कहीं रेखा भाभी का सुबह रास्ते में एक्सीडेंट वगैरह न हुआ हो. वह रेखा को तलाश करते हुए गांव बहुलौर आए. गांव में भी रेखा की ढूंढाढांढी चलती रही, लेकिन उस का कहीं पर भी पता नहीं चला.

रेखा की तलाश करते हुए सुबह हो गई. पूरा घर और पड़ोसी पूरी रात रेखा को ढूंढते रहे, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. किसी पड़ोसी ने अपने वाट्सऐप पर सुबह एक युवती के शव का फोटो देखा. वह रेखा लग रही थी. उस ने यह बात नवीन और रवि को बताई तो उन्होंने वाट्सऐप पर पुलिस की ओर से शेयर की गई उस युवती की तसवीर को देख कर पहचान लिया कि वह रेखा ही है. तसवीर एक मृत युवती की थी और पुलिस की ओर से इस मृत युवती की पहचान करने की अपील की गई थी. रेखा की यह तसवीर देखते ही घर में कोहराम मच गया. सभी रोने लगे. थोड़ी देर बाद नवीन, रवि और 2-3 पड़ोस के लोग साल्हावास थाने के लिए एक ट्रैक्टर से निकल गए. रेखा की यह तसवीर वाट्सऐप पर यहीं के थाने से शेयर की गई थी.

उधर जब पुलिस को मृत युवती की पहचान कराने में सफलता नहींमिली तो उस का फोटो गांव वालों के वाट्सऐप पर शेयर कर दिया. इस के अलावा किसी सूत्र की तलाश में 2 कांस्टेबल रुडिय़ावास भेजे गए. उन्हें वहां तालाब के किनारे घास में एक महिला का पर्स मिला था. उस पर्स में एक आईकार्ड मिला, जो एनटीपीसी पावर प्लांट झाड़ली का था. इस से अनुमान लगाया गया कि मृत मिली वह युवती इस पावर प्लांट में नौकरी करती थी. एसएचओ झाड़ली जा कर इस आईकार्ड के बारे में मालूम करना चाहते थे कि उस से पहले एक कांस्टेबल ने अंदर कक्ष में आ कर बताया, ”सर, एक ट्रैक्टर में कुछ ग्रामीण लोग थाने आए ओर वह आप से मिलना चाहते हैं.’’

एसएचओ उठ कर बाहर आ गए. ट्रैक्टर से आए लोग उतर कर उन के पास आ गए. उन्हें ‘रामराम’ करने के बाद नवीन ने आगे आ कर बताया, ”साहब, हम गांव बहू से आए हैं. वाट्सऐप पर जिस युवती की लाश का फोटो शेयर किया गया है, पहचान के लिए वह मेरी भाभी रेखा से मिलतीजुलती है. मेरी भाभी रेखा कल शाम को काम से घर नहीं लौटी है.’’

”क्या? तुम्हारी भाभी रेखा झाड़ली में एनटीपीसी पावर प्लांट में नौकरी करती थी?’’ एसएचओ हरीश कुमार ने पूछा.

”हां साहब,’’ नवीन ने कहा.

”तो हमें जो लाश रुडिय़ावास तालाब में मिली है, वह रेखा की है. हमें एक पर्स तालाब के पास से मिला है. उसे पहचान कर बताओ क्या वह पर्स तुम्हारी भाभी रेखा का ही है.’’ कहने के बाद एसएचओ ने कांस्टेबल को कक्ष में रखा पर्स ले कर आने को कहा.

कांस्टेबल वह पर्स उठा लाया तो नवीन ने देखते ही बता दिया, ”यह पर्स मेरी भाभी रेखा का ही है साहब.’’

”लाश पोस्टमार्टम के लिए झज्जर भेजी गई है.’’ एसएचओ ने बताया, ”तुम यह बताओ कि तुम्हें किसी पर शक है? ऐसा व्यक्ति जो तुम्हारी भाभी से खुंदक रखता हो.’’

नवीन कुछ देर के लिए सोच में पड़ गया फिर बोला, ”ऐसा तो कोई व्यक्ति नहीं था साहब, मेरी भाभी लड़ाकू टाइप की नहीं थी. वह किसी से ज्यादा वास्ता भी नहीं रखती थी.’’

”लेकिन कोई ऐसा व्यक्ति तुम्हारी भाभी की जिंदगी में जरूर रहा है नवीन, जिस ने किसी बात पर उस की हत्या कर दी और लाश को रुडिय़ावास में ले जा कर तालाब में फेंक दिया.’’ एसएचओ ने बहुत गंभीर स्वर में कहा, ”तुम्हारी भाभी अकेली तो रुडिय़ावास नहीं जा सकती.’’

”ऐसा कौन हो सकता है साहब!’’ नवीन ने दिमाग पर जोर डाला फिर जैसे कोई तसवीर उस की आंखों के सामने उभरी. नवीन ने राजदाराना अंदाज में कहा, ”साहब, आजकल भाभी किसी की कार में बैठ कर झाड़ली पावर प्लांट पर जाने लगी थी. मैं ने खुद भाभी को उस कार में बस स्टैंड से बैठते हुए कई बार देखा था. शुरू मे मुझे लगा कि गाड़ी पावर प्लांट वालों की ओर से लगाई गई है, उस में पावर प्लांट में काम करने वाले और भी वर्कर आते होंगे, लेकिन बाद में मुझे संदेह हुआ कि कार में सिर्फ भाभी ही बैठती है, दूसरा कोई और नहीं.’’

”कार किस रंग की है?’’

”रंग को छोडि़ए साहब, मैं ने उस कार का नंबर दिमाग में बिठा रखा है. मैं इस के विषय में मौका देख कर भाभी से पूछताछ करने वाला था कि यह हादसा हो गया.’’

”मुझे कार का नंबर बताओ.’’ एसएचओ ने उत्सुकता से पूछा.

नवीन ने कार का नंबर बता दिया, जिसे एसएचओ हरीश कुमार ने डायरी में नोट कर लिया. फिर उन्होंने एक कांस्टेबल के साथ इन लोगों को झज्जर के सरकारी हौस्पिटल जाने के लिए भेज दिया और केस डायरी में अज्ञात के खिलाफ रेखा की हत्या का मामला दफा दर्ज कर लिया.

एसएचओ ने एसआई को बुला कर उसे नवीन द्वारा नोट कराए कार का नंबर दे कर कहा कि वह मालूम करें कि यह कार किस के नाम से रजिस्टर्ड है. एसआई ने एक घंटे में ही उस कार के नंबर से उस के मालिक का नामपता मालूम कर लिया और एसएचओ को जानकारी दे दी. यह कार गांव बहू के एक व्यक्ति के नाम रजिस्टर थी, जिस का नाम जयपाल (काल्पनिक) था. गांव बहू का नाम सुन कर एसएचओ हरीश कुमार बुरी तरह से चौंके. रेखा भी तो गांव बहू की ही थी. एसएचओ तुरंत 4 कांस्टेबल साथ ले कर उस व्यक्ति से मिलने गांव बहू के लिए चल पड़े, जिस के नाम से कार का रजिस्ट्रैशन था. वह व्यक्ति गांव बहू में अपने घर पर ही मिल गया.

पूछताछ करने पर उस ने कहा, ”साहब, यह कार मेरे ही नाम से है, लेकिन मैं ने यह अपने भांजे मंजीत को दे रखी है. मेरी बहन आजकल बीमार रहती है. मेरे जीजा का 2021 में रोड एक्सीडेंट हो गया था. उन के बाद अपनी बहन के घर की मैं ही देखभाल करता हूं. कार मैं ने इसलिए दी कि मंजीत अपनी मम्मी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाए और ले कर आए. क्या कुछ एक्सीडेंट कर दिया मंजीत ने?’’

”नहीं. बात कुछ और है, तुम हमें अपनी बहन के घर ले चलो. हमें मंजीत से कुछ पूछताछ करनी है.’’ एसएचओ ने कहा.

जयपाल एसएचओ को अपनी बहन के घर ले गया. यहां मंजीत के बारे में पूछने पर मालूम हुआ कि वह कल से कहीं गया हुआ है. कार घर पर खड़ी कर गया है.

एसएचओ का शक मंजीत पर गहरा हो गया. उन्होंने मंजीत का फोटो मंजीत की मम्मी से मांगा और उसे ले कर थाने लौट आए. उन्होंने मंजीत का फोटो मुखबिरों को दिखा कर उन्हें मंजीत की टोह लेने के काम पर लगा दिया. मुखबिर अपने काम में लग गए. एसएचओ खुद मंजीत के मिलने वाली संभावित स्थानों पर दबिश देने लगे.

काफी भागदौड़ करने के बाद मंजीत 10 मई, 2025 को एक मुखबिर की काल आने के बाद पकड़ लिया गया. उसे थाना साल्हावास लाया गया. वह अभी 18 वर्ष का युवा था. वह काफी डरा हुआ था. उस से कड़ी पूछताछ शुरू की गई तो उस ने रेखा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

”तुम ने रेखा की हत्या क्यों की?’’ एसएचओ हरीश कुमार ने पूछा.

”सर, यह सुनने से पहले आप मेरे प्रेम की दास्तां सुन ले, आप को मालूम हो जाएगा, मुझे रेखा की हत्या क्यों करनी पड़ी.’’ मंजीत ने गंभीर स्वर में कहा और बगैर इजाजत मिले वह अपनी प्रेम कहानी के पन्ने खोलने लगा.

”सर, मैं गांव बहू का रहने वाला हूं, रेखा भी इसी गांव की थी. मैं ने उसे कई बार देखा था. उस का पति शराबी और कामचोर था, इसलिए रेखा ने घर चलाने के लिए झाड़ली पावर प्लांट में साफसफाई का काम पकड़ लिया था. वह रोज बस से झाड़ली जाती थी. एक दिन वह मुझे गांव के बाहर बस स्टाप पर परेशान हालत में मिली थी. उस दिन बस खराब थी, आई नहीं थी.’’

मंजीत ने आगे बताया, ”मैं ने रेखा को कार में लिफ्ट देनी चाही. काफी नानुकुर के बाद वह मेरी कार में बैठी. मैं उसे झाड़ली छोड़ कर आया. उस दिन के बाद से मैं हर रोज रेखा को उस के काम पर छोडऩे जाने लगा. साथ मिला तो मेरे दिल में रेखा के लिए प्यार का अंकुर फूट गया. मैं रेखा को चाहने लगा. उस का खयाल रखने लगा.

”मुझे अपने पापा रामपाल के एक्सीडेंट क्लेम का रुपया मिलता था. मेरे मामा हरपाल भी मदद करते थे. मैं उन पैसों में से रेखा को गिफ्ट वगैरह देने लगा तो धीरेधीरे रेखा भी मेरी तरफ झुक गई. हम दोनों प्यार करने लगे.’’

मंजीत कुछ देर के लिए रुका, फिर सांसें दुरुस्त कर के आगे बताने लगा.

”सर, रेखा को मैं सच्चा प्यार करने लगा था. वह 2 बच्चों की मां जरूर थी, लेकिन लगती नहीं थी. मैं रेखा को अपनी बनाने का ख्वाब सजाने लगा था कि एक दिन यानी 4 मई, 2025 को मैं ने रेखा को अपनी कार में बस स्टाप से बिठाया तो वह काफी खुश थी.

”मैं ने उस से खुशी का कारण पूछा तो उस ने कुछ नहीं बताया. कार चलाते हुए मैं ने यूं ही रेखा का मोबाइल हाथ में ले लिया और उसे औन किया तो उस में किसी के साथ रेखा की चैटिंग देख कर चौंक पड़ा. मैं ने रेखा से पूछा कि वह किस के साथ चैटिंग कर रही थी?

”रेखा ने मुझे जवाब नहीं दिया. मैं ने कहा तुम मेरे सामने उस युवक को काल लगा कर बात करो, लेकिन रेखा ने यह कह कर बात समाप्त करनी चाही कि वह उस युवक से मिल कर काल आदि करने के लिए मना कर देगी. चूंकि मेरे मन में शक घर कर गया था, इसलिए मैं रेखा पर दबाव बनाने लगा कि वह उस युवक से मेरे सामने बात करे.’’

मंजीत ने गहरी सांस ली, ”रेखा नहीं मानी सर. मैं ने गुस्से में उस का फोन छीन कर तोड़ डाला. इस बात पर रेखा को गुस्सा आ गया. उस ने मुझे थप्पड़ मार दिया. कोई लड़की लड़के को थप्पड़ मारेगी तो कहां बरदाश्त होगा. मैं ने क्रोध में रेखा की चुन्नी से उस का गला घोंटना शुरू कर दिया.

 

”कार मैं ने सड़क के किनारे खड़ी कर दी थी. यहां गहरा सन्नाटा था. मैं ने क्रोध में रेखा का गला इतनी जोर से दबाया कि उस की सांसें थम गईं. वह मर गई तो मैं बुरी तरह घबरा गया. मेरी समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं.

”मैं काफी देर तक बेमतलब कार को सड़क पर दौड़ाता रहा, फिर मैं रुडिय़ावास की ओर चला गया. वहां एक तालाब मुझे दिखाई दिया. यहां सन्नाटा था. मैं ने रेखा की लाश उस तालाब में फेंक दी और उस का बैग झाडिय़ों में डाल कर वापस गांव बहू आ गया.

”यहां घर पर मैं ने कार खड़ी की और राजस्थान भाग गया. एक हफ्ते बाद मैं गांव की तरफ लौटते वक्त मुखबिर द्वारा पहचान लिया गया और मुझे पकड़ लिया गया. मैं रेखा की हत्या का गुनाह कुबूल करता हूं.’’

चूंकि मंजीत ने गुनाह कुबूल कर लिया था और रेखा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हो गया था कि उस की मौत गला घुटने से हुई है. एसएचओ हरीश कुमार ने दोबारा मंजीत को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस ने मंजीत की कार, रेखा का बैग और मोबाइल जो टूटी दशा में था, जब्त कर लिया. रेखा की लाश उस के फेमिली वालों को सौंप दी. वह लोग रेखा का अंतिम क्रियाकर्म करने में व्यस्त हो गए. अपने से कम उम्र के लड़के की ओर रेखा ने झुक कर अपना विवेक, पति और बच्चे खोए और भरी जवानी में ही वह प्रेमी के हाथों अपना जीवन गंवा बैठी. Family Story in Hindi

Hindi Love Story in Short : मंगेतर की हत्या – प्रेमी संग मिलकर कुत्ते की बांधने वाली जंजीर से घोंटा गला

Hindi Love Story in Short : हसमतुल निशां शाने अली से प्यार करती थी तो उसे अपने घर वालों से साफसाफ बता देना चाहिए था और उसे शहाबुद्दीन से मंगनी हरगिज नहीं करनी चाहिए थी. इस दौरान ऐसा क्या हुआ कि उस ने अपने मंगेतर शहाबुद्दीन को ही बलि का बकरा बना दिया…

शहाबुद्दीन ने अपनी होने वाली पत्नी हसमतुल निशां से कहा. ‘‘निशां अपने जन्मदिन की पार्टी पर हमें दावत नहीं दोगी क्या?’’

‘‘क्यों नहीं, जब आप ने मांगी है तो पार्टी जरूर मिलेगी. हम कार्यक्रम तय कर के आप को बताते हैं.’’ निशा ने अपने मंगेतर को भरोसा दिलाया. निशां घर वालों के दबाव में बेमन से शहाबुद्दीन से शादी करने के लिए तैयार हुई थी, क्योंकि वह तो शाने अली को प्यार करती थी. इसलिए मंगेतर द्वारा शादी की पार्टी मांगने वाली बात उस ने अपने प्रेमी शाने अली को बताई तो वह भड़क उठा. उस ने कहा ‘‘निशा तुम एक बात साफ समझ लो कि जन्मदिन की पार्टी में शहाबुद्दीन और मुझ में से केवल एक ही शामिल होगा. तुम जिसे चाहो बुला लो.’’

निशा को इस बात का अंदाजा पहले से था कि शाने अली को यह बुरा लगेगा. उस ने कहा, ‘‘शाने अली, तुम तो खुद जानते हो कि मुझे वह पसंद नहीं है. लेकिन अब घर वालों की बात को नहीं टाल सकती.’’

‘‘निशा, तुम यह समझ लो कि यह शादी केवल दिखावे के लिए है.’’ शाने अली ने जब यह कहा तो निशा ने साफ कह दिया कि शादी दिखावा नहीं होती. शादी के बाद उस का मुझ पर पूरा हक होगा.’’

‘‘नहीं, शादी के पहले और शादी के बाद तुम्हारे ऊपर हक मेरा ही रहेगा. जो हमारे बीच आएगा, उसे हम रास्ते से हटा देंगे.’’ यह कह कर शाने अली ने फोन रख दिया. हसमतुल निशां ने बाद में शाने अली से बात की और उन्होंने यह तय कर लिया कि वे दोनों एक ही रहेंगे. उन को कोई जुदा नहीं कर पाएगा. दोनों के बीच जो भी आएगा, उसे राह से हटा दिया जाएगा. शहाबुद्दीन की शादी हसमतुल निशां के साथ तय हुई थी. निशां लखनऊ स्थित पीजीआई के पास एकता नगर में रहती थी. वह अपने 2 भाइयों में सब से छोटी और लाडली थी. शहाबुद्दीन भी अपने घर में सब से छोटा था. वह निशां के घर से करीब 35 किलोमीटर दूर बंथरा में रहता था.

शहाबुद्दीन ट्रांसपोर्ट नगर में एक दुकान पर नौकरी करता था, जो दोनों के घरों के बीच थी. हसमतुल निशां ने अपने घर वालों के कहने पर शहाबुद्दीन के साथ शादी के लिए हामी तो भर दी थी पर वह अपने प्रेमी शाने अली को भूलने के लिए भी तैयार नहीं थी. ऐसे में जैसेजैसे शहाबुद्दीन के साथ शादी का दिन करीब आ रहा था, दोनों के बीच तनाव बढ़ रहा था. हसमतुल निशां ने पहले ही फैसला ले लिया था कि वह शादी का दिखावा ही करेगी. बाकी मन से तो अपने प्रेमी शाने अली के साथ रहेगी. शहाबुद्दीन के साथ हसमतुल निशां की सगाई होने के बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी. शहाबुद्दीन अकसर उसे फोन करने लगा.

मिलने के लिए भी दबाव बनाने लगा. यह बात निशां को अच्छी नहीं लग रही थी. शाने अली भी नहीं चाहता था कि निशां अपने होने वाले पति शहाबुद्दीन से मिलने जाए. जब भी उसे यह पता चलता कि दोनों की फोन पर बातचीत होती है और वे मिलते भी हैं. इस बात को ले कर वह निशां से झगड़ता था. दोनों के बीच लड़ाईझगड़े के बाद यह तय हुआ कि अब शहाबुद्दीन को रास्ते से हटाना ही होगा. शहाबुद्दीन को अपनी होने वाली पत्नी और उस के प्रेमी के बारे में कुछ भी पता नहीं था. वह दोनों को आपस में रिश्तेदार समझता था और उन पर भरोसा भी करता था.

अपनी होने वाली पत्नी हसमतुल निशां को अच्छी तरह से जाननेसमझने के लिए वह उस के करीब आने की कोशिश कर रहा था. उसे यह नहीं पता था कि उस की यह कोशिश उसे मौत की तरफ ले जा सकती है. शहाबुद्दीन अपनी मंगेतर के साथ संबंधों को मधुर बनाने की कोशिश कर रहा था पर प्रेमी के मायाजाल में फंसी हसमतुल निशां अपने को उस से दूर करना चाहती थी. परिवार के दबाव में वह खुल कर बोल नहीं पा रही थी. 12 मार्च, 2021 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में स्थित कल्लू पूरब गांव के पास झाडि़यों में शहाबुद्दीन उर्फ मनीष की खून से लथपथ लाश पड़ी मिली. करीब 26 साल के शहाबुद्दीन के सीने में चाकू से कई बार किए गए थे.

गांव वालों की सूचना पर पुलिस ने शव को बरामद किया. शव मिलने वाली जगह से कुछ दूरी पर ही एक बाइक खड़ी मिली. बाइक में मिले कागजात से पुलिस को पता चला कि वह बाइक मृतक शहाबुद्दीन की ही थी. इस के आधार पर पुलिस ने उस के घर पर सूचना दी. शहाबुद्दीन के भाई ने अनीस ने शव को पहचान भी लिया. अनीस की तहरीर पर पुलिस ने धारा 302 आईपीसी के तहत मुकदमा कायम किया. हत्या की घटना को उजागर करने और अपराधियों को पकड़ने के लिए डीसीपी (दक्षिण लखनऊ) रवि कुमार, एडिशनल डीसीपी पुर्णेंदु सिंह, एसीपी (दक्षिण) दिलीप कुमार सिंह ने घटनास्थल पर पहुंच कर फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड बुला कर मामले की पड़ताल शुरू की.

शहाबुद्दीन के शव की तलाशी लेने पर पर्स और मोबाइल गायब मिला. शव के पास 2 टूटी कलाई घडि़यां और एक चाबी का गुच्छा मिला. यह समझ आ रहा था कि हत्या के दौरान आपसी संघर्ष में यह हुआ होगा. पुलिस के सामने शहाबुद्दीन के घर वालों ने उस की होने वाली पत्नी हसमतुल निशां के परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया. डीसीपी रवि कुमार ने इस केस को सुलझाने के लिए एसीपी दिलीप कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की. टीम में इंसपेक्टर दीनानाथ मिश्रा, एसआई रमेश चंद्र साहनी, राजेंद्र प्रसाद, धर्मेंद्र सिंह, महिला एसआई शशिकला सिंह, कीर्ति सिंह, हैडकांस्टेबल अश्वनी दीक्षित, कांस्टेबल संतोश मिश्रा, शिवप्रताप और विपिन मौर्य के साथ साथ सर्विलांस सेल के सिपाही सुनील कुमार और रविंद्र सिंह को शामिल किया गया. पुलिस ने सर्विलांस की मदद से जांच शुरू की.

शहाबुद्दीन बंथरा थाना क्षेत्र के बनी गांव का रहने वाला था. वह ट्रांसपोर्ट नगर में खराद की दुकान पर काम करता था. 11 मार्च, 2021 को वह अपने पिता मीर हसन की बाइक ले कर घर से जन्मदिन की पार्टी में हिस्सा लेने के लिए निकला था. शहाबुद्दीन की मंगेतर हसमतुल निशां ने उसे जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था. शहाबुद्दीन ने यह बात अपने घर वालों को बताई और दुकान से सीधे पार्टी में शामिल होने चला गया था. देर रात वह घर वापस नहीं आया. अगले दिन यानी 12 मार्च की सुबह 11 बजे पुलिस ने उस की हत्या की सूचना उस के घर वालों को दी.

अनीस ने पुलिस का बताया कि 27 मई को शहाबुद्दीन और हसमतुल निशां का निकाह होने वाला था. बारात लखनऊ में पीजीआई के पास एकता नगर में नवाबशाह के घर जाने वाली थी. शहाबुद्दीन की हत्या की सूचना पा कर पिता मीर हसन, मां कमरजहां, भाई इश्तियाक, शफीक, अनीस और राजू बिलख रहे थे. मां कमरजहां रोते हुए कह रही थी, ‘‘मेरे बेटे की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. वह घर का सब से सीधा लड़का था. उस ने किसी का कुछ भी नहीं बिगाड़ा था. ऐसे में उस के साथ क्या हुआ?’’

पुलिस ने जन्मदिन में बुलाए जाने और लूट की घटना को सामने रख कर छानबीन शुरू की. शहाबुद्दीन की हत्या को ले कर परिवार के लोगों को एक वजह शादी लग रही थी. परिवार को शहाबुद्दीन की हत्या के पीछे उस की होने वाली पत्नी और उस के भाइयों पर शक था. इसलिए अनीस की तहरीर पर पुलिस ने हसमतुल निशां और उस के भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस की विवेचना में यह बात खुल कर सामने आई कि शहाबुद्दीन की हत्या में उस की होने वाली पत्नी हसमतुल निशां का हाथ था. यह भी साफ था कि हसमतुल निशां का साथ उस के भाइयों ने नहीं, बल्कि उस के प्रेमी शाने अली ने दिया था.

शहाबुद्दीन उर्फ मनीष की हत्या की साजिश उस की मंगेतर हसमतुल निशां और उस के प्रेमी शाने अली ने अपने 6 अन्य साथियों के साथ मिल कर रची थी. मोहनलालगंज कोतवाली के इंसपेक्टर दीनानाथ मिश्र के मुताबिक बंथरा कस्बे के रहने वाले शहाबुद्दीन की शादी हसमतुल निशां के साथ 27 मई को होनी थी. इस से हसमतुल खुश नहीं थी. वह पीजीआई के पास रहने वाले शाने अली से प्यार करती थी. इस के बाद भी परिवार वालों के दबाव में शहाबुद्दीन से मिलती रही. जैसेजैसे शादी का समय पास आता जा रहा हसमतुल निशां अपने मंगेतर शहाबुद्दीन से पीछा छुड़ाने के बारे में सोचने लगी.

इस के लिए उस ने अपने प्रेमी शाने अली के साथ मिल कर योजना बनाई. हसमतुल निशां चाहती थी कि शाने अली उस के मंगेतर शहाबुद्दीन को किसी तरह रास्ते से हटा दे. योजना को अंजाम देने के लिए शाने अली ने अपने जन्मदिन के अवसर पर 11 मार्च, 2021 को शहाबुद्दीन को मिलने के लिए बुलाया. गुरुवार रात के करीब साढ़े 8 बजे शाने अली और उस के दोस्त बाराबंकी निवासी अरकान, मोहनलालगंज निवासी संजू गौतम, अमन कश्यप और पीजीआई निवासी समीर मोहम्मद बाबूखेड़ा में जमा हुए. जैसे ही शहाबुद्दीन वहां पहुंचा शाने अली और उस के दोस्तों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया.

अपने ऊपर चाकू से हमला होने के बाद भी शहाबुद्दीन ने हार नहीं मानी और अपनी जान बचाने के लिए वह हमलावरों से भिड़ गया. शाने अली और उस के हमलावर दोस्तों को जब लगा कि शहाबुद्दीन बच निकलेगा तो उन लोगों ने कुत्ते को बांधी जाने वाली जंजीर से शहाबुद्दीन का गला कस दिया, जिस से शहाबुद्दीन अपना बचाव नहीं कर पाया और अपनी जान से हाथ धो बैठा. अगले दिन जब शहाबुद्दीन का शव मिला तो उस के भाई अनीस ने हसमतुल निशां के भाइयों पर हत्या का शक जताया. पुलिस ने संदेह के आधार पर ही उन से पूछताछ शुरू की थी. इस बीच पुलिस को हसमतुल निशां और शाने अली के प्रेम संबंधों के बारे में पता चला. पुलिस ने जब हसमतुल निशां से पूछताछ शुरू की तो वह टूट गई.

हसमतुल निशां ने पुलिस को बताया कि उस ने प्रेमी शाने अली के साथ मिल कर मंगेतर शहाबुद्दीन की हत्या कर दी. इस के बाद पुलिस ने शाने अली और उस साथियों को पकड़ने के लिए उन के घरों पर दबिशें दे कर गिरफ्तार कर लिया. शहाबुद्दीन की हत्या के आरोप में पुलिस ने हसमतुल निशां, शाने अली, अरकान, संजू गौतम, अमन कश्यप, समीर मोहम्मद को जेल भेज दिया. पुलिस को आरोपियों के पास से एक चाकू, गला घोटने के लिए प्रयोग में लाई गई चेन, संजू की मोटरसाइकिल, 2 कलाई घडि़यां, 6 मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद हुए.

सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. 24 घंटे के अंदर केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की डीसीपी (दक्षिण) रवि कुमार ने सराहना की. Hindi Love Story in Short

Noida News : प्यार में फंसाया फिर किया अपहरण और मांगी 70 लाख की फिरौती

Noida News : गौरव हलधर डाक्टरी की पढ़ाई करतेकरते प्रीति मेहरा के जाल में ऐसा फंसा कि जान के लाले पड़ गए. डा. प्रीति को गौरव को रंगीन सपने दिखाने की जिम्मेदारी उस के ही साथी डा. अभिषेक ने सौंपी थी. भला हो नोएडा एसटीएफ का जिस ने समय रहते…

एसटीएफ औफिस नोएडा में एसपी कुलदीप नारायण सिंह डीएसपी विनोद सिंह सिरोही के साथ बैठे किसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. तभी अचानक दरवाजा खुला और सामने वर्दी पर 3 स्टार लगाए एक इंसपेक्टर प्रकट हुए. उन्होंने अंदर आने की इजाजत लेते हुए पूछा, ‘‘मे आई कम इन सर.’’

‘‘इंसपेक्टर सुधीर…’’ कुलदीप सिंह ने सवालिया नजरों से आगंतुक की तरफ देखते हुए पूछा.

‘‘यस सर.’’

‘‘आओ सुधीर, हम लोग आप का ही इंतजार कर रहे थे.’’ एसपी कुलदीप सिंह ने सामने बैठे विनोद सिरोही का परिचय कराते हुए कहा,  ‘‘ये हैं हमारे डीएसपी विनोद सिरोही. आप के केस को यही लीड करेंगे. जो भी इनपुट है आप इन से शेयर करो फिर देखते हैं क्या करना है.’’

कुछ देर तक उन सब के बीच बातें होती रहीं. उस के बाद कुलदीप सिंह अपनी कुरसी से खड़े होते हुए बोले, ‘‘विनोद, मैं एक जरूरी मीटिंग के लिए मेरठ जा रहा हूं. आप दोनों केस के बारे में डिस्कस करो. हम लोग लेट नाइट मिलते हैं.’’

इस बीच उन्होंने एसटीएफ के एएसपी राजकुमार मिश्रा को भी बुलवा लिया था. कुलदीप सिंह ने उन्हें निर्देश दिया कि गौरव अपहरण कांड में अपहर्त्ताओं को पकड़ने में वह इस टीम का मार्गदर्शन करें. एसपी के जाते ही वे एक बार फिर बातों में मशगूल हो गए. सुधीर कुमार सिंह डीएसपी विनोद सिरोही और एएसपी मिश्रा को उस केस के बारे में हर छोटीबड़ी बात बताने लगे, जिस के कारण उन्हें पिछले 24 घंटे में यूपी के गोंडा से ले कर दिल्ली के बाद नोएडा में स्पैशल टास्क फोर्स के औफिस का रुख करना पड़ा था. इस से 2 दिन पहले 19 जनवरी, 2021 की बात है. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एसपी शैलेश पांडे के औफिस में सन्नाटा पसरा हुआ था. क्योंकि मामला बेहद गंभीर था और पेचीदा भी.

पड़ोसी जिले बहराइच के पयागपुर थाना क्षेत्र के काशीजोत की सत्संग नगर कालोनी के रहने वाले डा. निखिल हलधर का बेटा गौरव हलधर गोंडा के हारीपुर स्थित एससीपीएम कालेज में बीएएमएस प्रथम वर्ष का छात्र था. वह कालेज के हौस्टल में रहता था. गौरव 18 जनवरी की शाम तकरीबन 4 बजे से गायब था. इस के बाद गौरव को न तो हौस्टल में देखा गया न ही कालेज में. 18 जनवरी की रात को गौरव के पिता डा. निखिल हलधर के मोबाइल फोन पर रात करीब 10 बजे एक काल आई. काल उन्हीं के बेटे के फोन से थी, लेकिन फोन पर उन का बेटा गौरव नहीं था.

फोन करने वाले ने बताया कि उस ने गौरव का अपहरण कर लिया है. गौरव की रिहाई के लिए आप को 70 लाख रुपए की फिरौती देनी होगी. जल्द पैसों का इंतजाम कर लें, वह उन्हें बाद में फोन करेगा. डा. निखिल हलधर ने कालबैक किया तो फोन गौरव ने नहीं, बल्कि उसी शख्स ने उठाया, जिस ने थोड़ी देर पहले बात की थी. डा. निखिल ने बेटे से बात कराने के लिए कहा तो उस ने उन्हें डांटते हुए कहा, ‘‘डाक्टर, लगता है सीधी तरह से कही गई बात तेरी समझ में नहीं आती. तू क्या समझ रहा है कि हम तुझ से मजाक कर रहे हैं? अभी तेरे बेटे की लेटेस्ट फोटो वाट्सऐप कर रहा हूं देख लेना उस की क्या हालत है.

और हां, एक बात कान खोल कर सुन ले, यकीन करना है या नहीं ये तुझे देखना है. यह समझ लेना कि पैसे का इंतजाम जल्द नहीं किया तो बेटा गया तेरे हाथ से. ज्यादा टाइम नहीं है अपने पास.’’

अभी तक इस बात को मजाक समझ रहे निखिल हलधर समझ गए कि उस ने जो कुछ कहा, सच है. कुछ देर बाद उन के वाट्सऐप पर गौरव की फोटो आ गई, जिस में वह बेहोशी की हालत में था. जैसे ही परिवार को इस बात का पता चला कि गौरव का अपहरण हो गया है तो सब हतप्रभ रह गए. निखिल हलधर संयुक्त परिवार में रहते थे. उन के पूरे घर में चिंता का माहौल बन गया. बात फैली तो डा. निखिल के घर उन के रिश्तेदारों और परिचितों का हुजूम लगना शुरू हो गया. डा. निखिल हलधर शहर के जानेमाने फिजिशियन थे, शहर के तमाम प्रभावशाली लोग उन्हें जानते थे. उन्होंने शहर के एसपी डा. विपिन कुमार मिश्रा से बात की.

उन्होंने बताया कि गौरव गोंडा में पढ़ता था और घटना वहीं घटी है, इसलिए वह तुरंत गोंडा जा कर वहां के एसपी से मिलें. डा. निखिल हलधर रात को ही अपने कुछ परिचितों के साथ गोंडा रवाना हो गए. 19 जनवरी की सुबह वह गोंडा के एसपी शैलेश पांडे से मिले. शैलेश पांडे को पहले ही डा. निखिल हलधर के बेटे गौरव के अपहरण की जानकारी एसपी बहराइच से मिल चुकी थी. डा. निखिल हलधर ने शैलेश पांडे को शुरू से अब तक की पूरी बात बता दी. एसपी पांडे ने परसपुर थाने के इंचार्ज सुधीर कुमार सिंह को अपने औफिस में बुलवा लिया था. क्योंकि गौरव जिस एससीपीएम मैडिकल कालेज में पढ़ता था, वह परसपुर थाना क्षेत्र में था.

सारी बात जानने के बाद एसपी शैलेश पांडे ने कोतवाली प्रभारी आलोक राव, सर्विलांस टीम के इंचार्ज हृदय दीक्षित तथा स्वाट टीम के प्रभारी अतुल चतुर्वेदी के साथ हैडकांस्टेबल श्रीनाथ शुक्ल, अजीत सिंह, राजेंद्र , कांस्टेबल अमित, राजेंद्र, अरविंद व राजू सिंह की एक टीम गठित कर के उन्हें जल्द से गौरव हलधर को बरामद करने के काम पर लगा दिया. एसपी पांडे ने टीम का नेतृत्व एएसपी को सौंप दिया. पुलिस टीम तत्काल सुरागरसी में लग गई. पुलिस टीमें सब से पहले गौरव के कालेज पहुंची, जहां उस के सहपाठियों तथा हौस्टल में छात्रों के अलावा कर्मचारियों से जानकारी हासिल की गई. नहीं मिली कोई जानकारी मगर गौरव के बारे में पुलिस को कालेज से कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी.

इंसपेक्टर सुधीर सिंह डा. निखिल हलधर के साथ परसपुर थाने पहुंचे और उन्होंने निखिल हलधर की शिकायत के आधार पर 19 जनवरी, 2021 की सुबह भादंसं की धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण का मामला दर्ज कर लिया. एसपी शैलेश पांडे के निर्देश पर इंसपेक्टर सुधीर कुमार सिंह ने खुद ही जांच की जिम्मेदारी संभाली. साथ ही उन की मदद के लिए बनी 6 पुलिस टीमों ने भी अपने स्तर से काम शुरू कर दिया. चूंकि मामला एक छात्र के अपहरण का था, वह भी फिरौती की मोटी रकम वसूलने के लिए. इसलिए सर्विलांस टीम को गौरव हलधर के मोबाइल की काल डिटेल निकालने के काम पर लगा दिया गया.

मोबाइल की सर्विलांस में उस की पिछले कुछ घंटों की लोकेशन निकाली गई तो पता चला कि इस वक्त उस की लोकेशन दिल्ली में है. पुलिस टीमें यह पता करने की कोशिश में जुट गईं कि गौरव का किसी से विवाद या दुश्मनी तो नहीं थी. लेकिन ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली. गौरव और उस से जुड़े लोगों के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर ले लिया गया था. पुलिस की टीमें लगातार एकएक नंबर की डिटेल्स खंगाल रही थीं. गौरव के फोन की लोकेशन संतकबीर नगर के खलीलाबाद में भी मिली थी. पुलिस की एक टीम बहराइच तो 2 टीमें खलीलाबाद व गोरखपुर रवाना कर दी गईं. खुद इंसपेक्टर सुधीर सिंह एक पुलिस टीम ले कर दिल्ली रवाना हो गए.

20 जनवरी की सुबह दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सर्विलांस टीम की मदद से उस इलाके में छानबीन शुरू कर दी, जहां गौरव के फोन की लोकेशन थी. लेकिन अब उस का फोन बंद हो चुका था इसलिए इंसपेक्टर सुधीर सिंह को सही जगह तक पहुंचने में कोई मदद नहीं मिली. इस दौरान गोंडा में मौजूद गौरव के पिता डा. निखिल हलधर को अपहर्त्ता ने एक और फोन कर दिया था. उस ने अब फिरौती की रकम बढ़ा कर 80 लाख कर दी थी और चेतावनी दी थी कि अगर 22 जनवरी तक रकम का इंतजाम नहीं किया गया तो गौरव की हत्या कर दी जाएगी.

दूसरी तरफ जब गोंडा एसपी शैलेश पांडे को पता चला कि दिल्ली पहुंची पुलिस टीम को बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिल रही है तो उन की चिंता बढ़ गई. अंतत: उन्होंने एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश को लखनऊ फोन कर के गौरव अपहरण कांड की सारी जानकारी दी और इस काम में एसटीएफ की मदद मांगी. अमिताभ यश ने एसपी शैलेश पांडे से कहा कि वे अपनी टीम को नोएडा में एसटीएफ के औफिस भेज दें. एसटीएफ के एसपी कुलदीप नारायण गोंडा पुलिस की पूरी मदद करेंगे.

पांडे ने दिल्ली में मौजूद इंसपेक्टर सुधीर सिंह को एसटीएफ के एसपी कुलदीप नारायण से बात कर के उन के पास पहुंचने की हिदायत दी तो दूसरी तरफ एडीजी अमिताभ यश ने नोएडा फोन कर के एसपी कुलदीप नारायण सिंह को गौरव हलधर अपहरण केस की जानकारी दे कर गोंडा पुलिस की मदद करने के निर्देश दिए. यह बात 20 जनवरी की दोपहर की थी. गोंडा कोतवाली के इंसपेक्टर सुधीर सिंह नोएडा में एसटीएफ औफिस पहुंच कर एसपी एसटीएफ कुलदीप नारायण सिंह तथा डीएसपी विनोद सिरोही से मिले.

विनोद सिरोही बेहद सुलझे हुए अधिकारी हैं. उन्होंने अपनी सूझबूझ से कितने ही अपहरण करने वालों और गैंगस्टरों को पकड़ा है. उन्होंने उसी समय अपहर्त्ताओं को दबोचने के लिए इंसपेक्टर सौरभ विक्रम सिंह, एसआई राकेश कुमार सिंह तथा ब्रह्म प्रकाश के साथ एक टीम का गठन कर दिया. काल डिटेल्स से मिले सुराग अपराधियों तक पहुंचने का सब से बड़ा हथियार इन दिनों इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस है. एसटीएफ की टीम ने उसी समय गौरव के फोन की सर्विलांस के साथ उस की सीडीआर खंगालने का काम शुरू कर दिया. गौरव के फोन की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में एक ऐसा नंबर मिला, जिस में उस के फोन पर कुछ दिनों से एक नए नंबर से न सिर्फ काल की जा रही थी, बल्कि यह नंबर गौरव की कौन्टैक्ट लिस्ट में ‘माई लव’ के नाम से सेव था.

दोनों नंबरों पर 5 से 18 जनवरी तक 40 बार बात हुई थी और हर काल का औसत समय 10 से 40 मिनट था. इस नंबर से गौरव के वाट्सऐप पर अनेकों काल, फोटो, वीडियो का भी आदानप्रदान हुआ था. इस नंबर के बारे में जानकारी एकत्र की गई तो यह नंबर दिल्ली के एक पते पर पंजीकृत पाया गया. लेकिन जब पुलिस की टीम उस पते पर पहुंची तो पता फरजी निकला. जब इस नंबर की लोकेशन खंगाली गई तो पुलिस टीम यह जान कर हैरान रह गई कि 18 जनवरी की दोपहर से शाम तक इस नंबर की लोकेशन गोंडा में हर उस जगह थी, जहां गौरव के मोबाइल की लोकेशन थी.

पुलिस टीम समझ गई कि जिस के पास भी यह नंबर है, उसी ने गौरव का अपहरण किया है. पुलिस टीमों ने इसी नंबर की सीडीआर खंगालनी शुरू कर दी. पता चला कि यह नंबर करीब एक महीना पहले ही एक्टिव हुआ था और इस से बमुश्किल 4 या 5 नंबरों पर ही फोन काल्स की गई थीं या वाट्सऐप मैसेज आएगए थे.   एसटीएफ के पास ऐसे तमाम संसाधन और नेटवर्क होते हैं, जिन से वह इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस के माध्यम से अपराधियों की सटीक जानकारी एकत्र करने के साथ उन की लोकेशन का भी सुराग लगा लेती है. एसटीएफ ने रात भर मेहनत की. जो भी फोन नंबर इस फोन के संपर्क में थे, उन सभी की कडि़यां जोड़ कर उन की मूवमेंट पर नजर रखी जाने लगी.

रात होतेहोते यह बात साफ हो गई कि अपहर्त्ता नोएडा इलाके में मूवमेंट करने वाले हैं. वे अपहृत गौरव को छिपाने के लिए दिल्ली से किसी दूसरे ठिकाने पर शिफ्ट करना चाहते हैं. बस इस के बाद सर्विलांस टीमों ने अपराधियों की सटीक लोकेशन तक पहुंचने का काम शुरू कर दिया और गोंडा पुलिस के साथ एसटीएफ की टीम ने औपरेशन की तैयारी शुरू कर दी. 21 जनवरी की देर रात गोंडा पुलिस व एसटीएफ की टीमों ने ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे जीरो पौइंट के पास अपना जाल बिछा दिया. पुलिस टीमें आनेजाने वाले हर वाहन पर कड़ी नजर रख रही थीं. किसी वाहन पर जरा भी संदेह होता तो उसे रोक कर तलाशी ली जाती. इसी बीच एक सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार पुलिस की चैकिंग देख कर दूर ही रुक गई.

उस गाड़ी ने जैसे ही रुकने के बाद बैक गियर डाल कर पीछे हटना और यूटर्न लेना शुरू किया तो पुलिस टीम को शक हो गया. एसटीएफ की टीम एक गाड़ी में पहले से तैयार थी. पुलिस की गाड़ी उस कार का पीछा करने लगी जो यूटर्न ले कर तेजी से वापस दौड़ने लगी थी. देखते ही पहचान लिया गौरव को मुश्किल से एक किलोमीटर तक दौड़भाग होती रही. आखिरकार नालेज पार्क थाना क्षेत्र में एसटीएफ की टीम ने डिजायर कार को ओवरटेक कर के रुकने पर मजबूर कर दिया. खुद को फंसा देख कार में सवार 3 लोग तेजी से उतरे और अलगअलग दिशाओं में भागने लगे. एसटीएफ को ऐसे अपराधियों को पकड़ने का तजुर्बा होता है. पीछा करते हुए एसटीएफ तथा गोंडा पुलिस की दूसरी टीम भी वहां पहुंच चुकी थी.

पुलिस टीमों ने जैसे ही हवाई फायर किए, कार से उतर कर भागे तीनों लोगों के कदम वहीं ठिठक गए. पुलिस टीमों ने तीनों को दबोच लिया. उन्हें दबोचने के बाद जब पुलिस टीमों ने स्विफ्ट डिजायर कार की तलाशी ली तो एक युवक कार की पिछली सीट पर बेहोशी की हालत में पड़ा था. इंसपेक्टर सुधीर सिंह युवक की फोटो को इतनी बार देख चुके थे कि बेहोश होने के बावजूद उन्होेंने उसे पहचान लिया. वह गौरव ही था. पुलिस टीमों की खुशी का ठिकाना न रहा, क्योंकि अभियान सफल हो गया था. पुलिस टीमें तीनों युवकों के साथ गौरव व कार को ले कर एसटीएफ औफिस आ गईं.

इंसपेक्टर सुधीर सिंह ने गौरव के पिता डा. निखिल व एसपी गोंडा शैलेश पांडे को गौरव की रिहाई की सूचना दे दी. वे भी तत्काल नोएडा के लिए रवाना हो गए. गौरव के अपहरण में पुलिस ने जिन 3 लोगों को गिरफ्तार किया था, उन में से एक की पहचान डा. अभिषेक सिंह निवासी अचलपुर वजीरगंज, जिला गोंडा के रूप में हुई. वही इस गिरोह का सरगना था और फिलहाल बाहरी दिल्ली के बक्करवाला में डीडीए के ग्लोरिया अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 310 में किराए पर रहता था. डा. अभिषेक सिंह पेशे से चिकित्सक था और नांगलोई-नजफगढ़ रोड पर स्थित राठी अस्पताल में काम करता था.

उस के साथ पुलिस ने जिन 2 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया, उन में नीतेश निवासी थाना निहारगंज, धौलपुर, राजस्थान तथा मोहित निवासी परौली, थाना करनलगंज गोंडा शामिल थे. जब उन तीनों से पूछताछ की गई, तो अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह काफी दिलचस्प थी.  डा. अभिषेक सिंह ने गौरव का अपहरण करने के लिए हनीट्रैप का इस्तेमाल किया था. यानी गौरव को पहले एक खूबसूरत लड़की के जाल में फंसाया गया था. जब गौरव खूबसूरती के जाल में फंस गया तो उस का फिरौती वसूलने के लिए अपहरण कर लिया गया.

मूलरूप से गोंडा के अचलपुर का रहने वाला डा. अभिषेक सिंह 2013-2014 में बेंगलुरु के राजीव गांधी यूनिवर्सिटी औफ हेल्थ साइंस से बीएएमएस की पढ़ाई करने के बाद जब अपने शहर लौटा तो उस के दिल में बड़े अरमान थे. डाक्टरी के पेशे से बहुत सारी कमाई करने और बड़ा सा बंगला बनाने के सपने देखे थे. लेकिन कुछ समय बाद ही ये सपने चकनाचूर होने लगे. अच्छी नौकरी नहीं मिली तो बन गया अपराधीउसे गोंडा के किसी भी अस्पताल में ऐसी नौकरी नहीं मिली, जिस से अच्छे से गुजरबसर हो सके. छोटेछोटे अस्पतालों में नौकरी करने के बाद तंग आ कर डा. अभिषेक 2018 में दिल्ली आ गया. यहां कई अस्पतालों में नौकरी करने के बाद वह सन 2019 में नजफगढ़ के राठी अस्पताल में नौकरी करने लगा.

हालांकि इस अस्पताल में उसे पहले के मुकाबले तो अच्छी तनख्वाह मिलती थी, लेकिन इस के बावजूद वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं था. इसी दौरान डा. अभिषेक की दोस्ती उसी अस्पताल में काम करने वाली एक लेडी डाक्टर प्रीति मेहरा से हो गई. प्रीति भी बीएएमएस डाक्टर थी. खूबसूरत और जवान प्रीति प्रतिभाशाली थी. उस के दिल में भी अपना अस्पताल बनाने की महत्त्वाकांक्षा पल रही थी. लेकिन इस सपने को पूरा करने में समर्थ नहीं होने के कारण अक्सर मानसिक परेशानी से घिरी रहती थी. जब अभिषेक से उस की दोस्ती हुई तो लगा कि वे दोनों एक ही मंजिल के मुसाफिर हैं. दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई.

दोनों के सपने भी एक जैसे थे, लाचारी भी एक जैसी थी. लेकिन सपनों को पूरा करने की धुन दोनों पर सवार थी. पिछली दीपावली पर नवंबर, 2019 में जब अभिषेक अपने घर गोंडा गया तो उस की मुलाकात अपनी बुआ के बेटे रोहित से हुई. बुआ की शादी बहराइच के पयागपुर इलाके में हुई थी. रोहित भी पयागपुर में ही रहता था. रोहित की जानपहचान मोहित सिंह से भी थी. मोहित सिंह गोंडा में रहने वाले अभिषेक के दोस्त राकेश सिंह का साला था. मोहित दिल्ली के करोलबाग की एक दुकान में काम करता है. रोहित भी मोहित को जानता है. रोहित व मोहित दोनों की जानपहचान एससीपीएम कालेज गोंडा से आयुर्वेदिक चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे गौरव हलधर से थी.

दोनों ही गौरव के अलावा उस के परिवार के बारे में भी अच्छी तरह से जानते थे. अभिषेक जब दीपावली पर अपने घर गया तो पयागपुर से बुआ का बेटा रोहित उस के घर आया हुआ था. रोहित के सामने अभिषेक का दर्द छलक गया. शराब पीने के बाद उस ने रोहित से यहां तक कह दिया कि अगर उसे चोरी, डाका या किसी का अपहरण भी करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगा. अभिषेक की बात सुनते ही रोहित का माथा ठनक गया. पहले तो उस ने अभिषेक को समझाना चाहा. लेकिन अभिषेक नहीं माना और बोला भाई बस तू एक बार किसी ऐसे शिकार के बारे में बता दे, जिस से मेरा सपना पूरा करने के लिए रकम मिल सकती हो.

अभिषेक नहीं माना तो रोहित ने उसे गौरव हलधर के बारे में बताया और उस के पूरे परिवार की जानकारी भी दे दी. रोहित ने अभिषेक को बताया कि डा. निखिल हलधर का बेटा गौरव गोंडा में ही फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहा है. अगर किसी तरीके से उस का अपहरण कर लिया जाए तो फिरौती के रूप में बड़ी रकम मिल सकती है. डा. अभिषेक ने जब डा. प्रीति मेहरा को गौरव का अपहरण करने की अपनी योजना के बारे में बताया तो उस ने नाराजगी नहीं जताई बल्कि खुश हुई और उस ने ही अपनी तरफ से सुझाव दिया कि गौरव का अपहरण करने में वह खुद उस की मदद करेगी.

प्रीति ने अभिषेक को बताया कि एक जवान लड़के का अगर अपहरण करना हो तो किसी जवान लड़की को उस के सामने चारा बना कर डाल दो, वह खुदबखुद उस जाल में फंस जाएगा. अभिषेक से उस ने गौरव का नंबर देने के लिए कहा तो अभिषेक ने उसे रोहित से गौरव का नंबर ले कर दे दिया. इस के बाद डा. प्रीति मेहरा ने एक रौंग नंबर के बहाने गौरव को काल कर बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया. पहली ही बार में बात करने के बाद गौरव उस के जाल में फंस गया और दोनों का एकदूसरे से परिचय कुछ ऐसा हुआ कि उस दिन के बाद वे दोनों एकदूसरे से बात करने लगे.

प्रीति मेहरा वीडियो काल के जरिए जब गौरव से बात करती तो कई बार गौरव को अपने नाजुक अंग दिखा कर अपने लिए उसे बेचैन कर देती. दरअसल, साजिश के इस मुकाम तक पहुंचने से पहले डा. अभिषेक ने इसे अंजाम देने के लिए कुछ लोगों को भी अपने साथ जोड़ लिया था. करोलबाग में कपड़े की दुकान पर काम करने वाले मोहित को जब अभिषेक ने गौरव का अपहरण करने की योजना बताई और उस से मदद मांगी तो मोहित ने अभिषेक को अपने एक दोस्त  नितेश से मिलवाया. दरअसल, नितेश व मोहित एक ही जिम में व्यायाम करने के लिए जाते थे. इसीलिए दोनों के बीच दोस्ती थी. नितेश इंश्योरेंस कराने का काम करता था.

इंश्योरेंस के साथ वह लोगों के बैंक में खाते खुलवाने से ले कर उन्हें लोन दिलाने का काम करता था. इसीलिए फरजी आईडी से ले कर जाली आधार कार्ड व पैन कार्ड बनाने में उसे महारथ हासिल थी. मोहित ने उसे मोटी रकम मिलने का सब्जबाग दिखा कर अपहरण की इस वारदात में अपने साथ मिला लिया. इस के बाद नितेश ने 3 आईडी तैयार कीं और उन्हीं आईडी के आधार पर उस ने 3 सिमकार्ड खरीदे. फरजी आईडी से खरीदे गए तीनों सिम कार्ड डा. प्रीति मेहरा, डा. अभिषेक व मोहित ने अपने पास रख लिए. डा. प्रीति ने तो अपने सिम कार्ड का इस्तेमाल गौरव हलधर से दोस्ती करने के लिए शुरू कर दिया. लेकिन अभिषेक व मोहित ने अपहरण करने से चंद रोज पहले ही अपने सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था.

प्रीति मेहरा ने गौरव को अपने प्रेमजाल में इस तरह फंसा लिया कि वह उस के एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार था. जब सब ने यह देख लिया कि शिकार जाल में फंसने का तैयार है तो प्रीति ने गौरव को वाट्सऐप मैसेज दिया कि वह 18 जनवरी को उस से मिलने गोंडा आ रही है. रोहित भी उस समय दिल्ली आया हुआ था. दिल्ली से स्विफ्ट डिजायर कार ले कर डा. अभिषेक, डा. प्रीति मेहरा, मोहित, रोहित व नितेश गोंडा पहुंच गए. गोंडा पहुंचने से पहले रोहित बहराइच में ही उतर गया. इधर गोंडा पहुंच कर डा. प्रीति ने एक राहगीर से किसी बहाने फोन ले कर गौरव को मिलने के लिए फोन किया और उस के कालेज से एक किलोमीटर दूर एक जगह पर बुलाया.

प्रीति मेहरा का रंगीन वार प्रीति के मोहपाश में फंसा गौरव वहां चला आया. गौरव को प्रीति ने अपने साथ कार में बैठा लिया, जहां बैठे बाकी अन्य लोगों ने उसे दबोच कर नशे का इंजेक्शन दे दिया. इस के बाद वे गोंडा से चल दिए. उन की योजना गौरव को संतकबीर नगर के खलीलाबाद में रहने वाले सतीश के घर पर छिपाने की थी. वे वहां पहुंच भी गए, लेकिन बाद में इरादा बदल दिया और कुछ ही देर में कार से दिल्ली के लिए रवाना हो गए. 18 जनवरी की रात को ही दिल्ली पहुंच गए. रास्ते में गाजियाबाद के पास उन्होंने गौरव के फोन से गौरव के पिता निखिल को फिरौती के लिए पहला फोन कर 70 लाख की फिरौती की मांग की.

इसके बाद उन्होंने गौरव को अभिषेक के बक्करवाला स्थित डीडीए फ्लैट में छिपा दिया. नितेश या मोहित उसे खाना देने जाते थे और डा. अभिषेक व प्रीति उसे लगातार नशे के इंजेक्शन देते थे ताकि वह होश में आ कर शोर न मचा दे. उन लोगों ने कई बार गौरव के साथ मारपीट भी की. इधर रोहित ने जब गोंडा व बहराइच में गौरव के अपहरण कांड को ले कर छप रही खबरों के बारे में अभिषेक को बताया कि पुलिस की एक टीम दिल्ली में गौरव की तलाश कर रही है तो अभिषेक ने गौरव को अपने फ्लैट से कहीं दूसरी जगह रखने की योजना बनाई.

इसीलिए डा. अभिषेक मोहित व नितेश के साथ 21 जनवरी की रात को गौरव को बेहोशी का इंजेक्शन दे कर उसे कार से ले कर ग्रेटर नोएडा जा रहा था, तभी पुलिस ने सर्विलांस के जरिए उन की लोकेशन का पता लगा कर उन्हें दबोच लिया. नितेश के पिता व गोंडा पुलिस के नोएडा पहुंचने के बाद एसटीएफ ने उन्हें  गोंडा पुलिस के हवाले कर दिया. इधर पुलिस को जब इस में रोहित व सतीश नाम के 2 और लोगों के शामिल होने की खबर लगी तो गोंडा पुलिस की टीम ने दबिश दे कर उसी रात रोहित व सतीश को भी गिरफ्तार कर लिया.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की खबर पा कर डा. प्रीति फरार हो चुकी थी. उस की तलाश में एसटीएफ और गोंडा पुलिस ने कई जगह छापे मारे, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में नहीं आई. गोंडा पुलिस ने प्रीति की गिरफ्तारी पर 25 हजार के इनाम की घोषणा की थी. जिस के बाद गोंडा पुलिस ने 1 फरवरी को प्रीति को उस के गांव धौर जिला झज्जर, हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया. मूलरूप से हरियाणा की प्रीति मेहरा वर्तमान में दिल्ली के प्रेमनगर में रहती थी. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में हैं. कैसी विडंबना है कि सालों की मेहनत के बाद डाक्टर बनने वाले अभिषेक व प्रीति अपने अधूरे ख्वाब को पूरा करने के लिए शार्टकट से पैसा कमाने के चक्कर में जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए.

डीजीपी ने फिरौती के लिए हुए अपहरण कांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली गोंडा पुलिस की टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है.

—कथा पुलिस की जांच, पीडि़त व अभियुक्तों के बयान पर आधारित

 

Rajasthan News : शादीशुदा प्रेमिका को प्यार में फंसाया फिर हत्या कर सरसों के खेत में फेंका

Rajasthan News : कभीकभी इंसान छोटी सी समस्या से निजात पाने के लिए अपराध कर बैठता है, जिस से उस की जिंदगी बरबाद हो जाती है. प्रेमिका कमला से निजात पाने के लिए हरिराम मीणा भी ऐसा ही एक अपराध कर बैठा. इस का नतीजा यह हुआ कि…

राजस्थान के टोंक जिले की देवली तहसील के थाना घाड़ के अंतर्गत एक गांव बड़ोली आता है. इसी गांव के रहने वाले गोकुल के खेत पर सरसों की फसल की कटाई का काम मजदूरों द्वारा किया जा रहा था. यह बात 10 फरवरी, 2021 की है. सरसों काटते हुए मजदूरों की निगाह एक मानव कंकाल पर पड़ी. इस कंकाल के पास महिला की शृंगार सामग्री यानी चूडि़यां, बिछिया, नीली साड़ी वगैरह पड़ी थी. कंकाल साड़ी में लिपटा था. देखने पर लग रहा था कि कंकाल किसी महिला का है. यह बात मजदूरों ने खेत के मालिक गोकुल को बताई. गोकुल ने भी मौके पर आ कर देखा. बात सही थी.

गोकुल ने फोन कर के गांव के सरपंच धनपत माली को खेत में कंकाल मिलने की बात बताई. कुछ ही देर में सरपंच भी खेत पर पहुंच गए. फिर उन्होंने फोन कर के धाड़ थाने में इस की सूचना दी. सूचना पा कर धाड़ थानाप्रभारी इंसपेक्टर रामेश्वर प्रसाद पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. घटनास्थल का मुआयना किया. वहां पर नीले रंग की साड़ी में लिपटा कंकाल मिला. थानाप्रभारी रामेश्वर प्रसाद ने इस घटना की सूचना सीओ (देवली) दीपक कुमार, एएसपी राकेश कुमार और एसपी ओमप्रकाश को दे दी. सूचना मिलने पर सीओ दीपक कुमार एवं एफएसएल टीम मौके पर पहुंच गई.

एफएसएल टीम द्वारा साक्ष्य उठाए गए, साथ ही 11 फरवरी को महिला के कंकाल को पोस्टमार्टम एवं डीएनए जांच के लिए अजमेर मैडिकल कालेज भेजा गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी (टोंक) ने अपने निर्देशन में एक टीम का गठन किया. इस टीम को जल्द से जल्द अज्ञात महिला कंकाल के बारे में पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई. इस टीम में एएसपी (मालपुरा) राकेश कुमार, सीओ दीपक कुमार, थानाप्रभारी (धाड़) रामेश्वर प्रसाद, हैडकांस्टेबल हरफूल, भैरूलाल, कांस्टेबल भागचंद, बजरंग, मेघराज, रामराज, कन्हैयालाल, महिला कांस्टेबल ज्योति और साइबर सेल के हैडकांस्टेबल सुरेशचंद शामिल थे.

पुलिस टीम ने सब से पहले महिला कंकाल से लिपटी हुई नीली साड़ी के पल्लू से बंधी मिली एक परची पर लिखे मोबाइल नंबर  की काल डिटेल्स निकाली. यह मोबाइल नंबर हरिराम मीणा पुत्र रामलाल मीणा, निवासी गांव भरनी का था. इस नंबर से सब से आखिर में महावीर मीणा से बात हुई थी. महावीर और हरिराम मीणा काल डिटेल्स में संदिग्ध लगे तो पुलिस टीम ने 13 फरवरी को हरिराम को उठा लिया और उस से पूछताछ की. थोड़ी देर तक तो वह आनाकानी करता रहा. मगर फिर जब पुलिसिया तेवर दिखाए तो वह तोते की तरह बोलने लगा. उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

पता चला कि वह लाश टोंक जिले के गांव जगनतन ढिकला निवासी कमला मोग्या की थी. वह राजू मोग्या की बेटी थी. इस के बाद दूसरे आरोपी महावीर मीणा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उस से पूछताछ की गई तो उस ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. तब पुलिस ने महिला कंकाल के पास मिले सामान को देखने के लिए राजू मोग्या, उस की पत्नी रतनीबाई और मृतका कमला मोग्या की छोटी बहन को धाड़ थाने पर बुलाया. इन्होंने महिला कंकाल के पास मिले सामान को देख कर अपनी बेटी कमला मोग्या पत्नी कालूलाल मोग्या के रूप में शिनाख्त कर ली.

लाश की शिनाख्त हो जाने और आरोपियों के गिरफ्तार होने पर पुलिस ने चैन की सांस ली. कमला की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. मैडिकल कालेज में कंकाल की जांच हो जाने के बाद वह मृतका के पिता राजू मोग्या को सौंप दिया. उन्होंने कंकाल का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस ने मृतका के मातापिता राजू एवं रतनीबाई का डीएनए टेस्ट भी कराया ताकि सच सामने आ सके. पुलिस अधिकारियों ने कमला के खून से हाथ रंगने वाले आरोपी महावीर मीणा और हरिराम मीणा से कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई, वह कुछ इस प्रकार से है—

कमला मोग्या की शादी आज से करीब 10 साल पहले कालूलाल मोग्या से हुई थी. कमला के मातापिता ने गरीबी में जीवन गुजारा था. मगर अपनी बेटी कमला की हर ख्वाहिश पूरी की थी. कमला सांवले रंग की आकर्षक नैननक्श की नवयौवना थी. शादी के बाद उसे कालूलाल जैसा मेहनतकश इंसान पति के रूप में मिला था. वक्त के साथ कमला 3 बच्चों की मां बनी. ये तीनों बेटे हैं. इस समय इन की उम्र 7 साल, 5 और 3 साल है. कालूलाल मेहनतमजदूरी में दिनरात खटता था. इस कारण वह थकामांदा रात को घर लौट कर खाना खा कर बिस्तर पर पड़ता और सो जाता था. कालू की पत्नी कमला की हसरतें अभी जवान थीं. वह चाहती थी कि उस का पति उसे बांहों में ले कर आनंदलोक की सैर कराए.

मगर कालू की हाड़तोड़ मेहनत ने उसे थका दिया था. अगर इंसान के तन की ज्वाला ठंडी नहीं हो तो वह बहकने लगता है. अपने सुख के लिए उस के कदम बहकने लगते हैं. कालू तो अपनी बीवी और बच्चों के भरणपोषण के लिए रातदिन मेहनतमजदूरी कर रहा था. वहीं कमला अपने देहसुख के लिए अपने जुगाड़ में लगी थी. आज से करीब 10 महीने पहले कालू ने ढिकला निवासी दिव्यांग युवक महावीर मीणा का खेत बटाई (हिस्सेदारी) पर ले लिया. इस के बाद कालू अपनी पत्नी कमला एवं तीनों बेटों के साथ जंगलतन से ढिकला स्थित महावीर के खेत में झोपड़ी बना कर रहने लगा.

खेत में रहते हुए कुछ दिन ही हुए थे कि एक रोज महावीर खेत देखने आया. उस समय कालू खेत में काम कर रहा था. कालू की बीवी कमला झोपड़ी में बैठी खाना बना रही थी. महावीर सीधे झोपड़ी में चला गया. उस समय कमला घुटनों तक साड़ी उठा कर बैठी थी. महावीर की नजर कमला की गोरी पिंडलियों पर पड़ी. उस की कामवासना जाग उठी. महावीर ने कहा, ‘‘क्या पका रही है कालू भाई के लिए?’’

सुन कर कमला चौंकी. उस ने आगंतुक पर नजर डाली. वह उस की गोरी पिंडलियों की तरफ ताक रहा था. कमला ने झट से साड़ी नीचे की. इसी हड़बड़ाहट में उस के उभारों पर से साड़ी हट गई. उन्नत उभार देख कर तो महावीर बावला ही हो गया. कमला ने साड़ी को ठीक किया और बोली, ‘‘आप को पहचाना नहीं.’’

‘‘मैं महावीर हूं. यह खेत मेरा ही है.’’ सुन कर कमला बोली, ‘‘अच्छा, तो आप महावीरजी हैं. आइए, बैठिए. मैं चाय बनाती हूं.’’

महावीर खटिया पर बैठ गया. कमला चाय बनाने लगी. तभी कालू भी आ गया. महावीर और कालू बातें करने लगे. कमला चाय बना लाई. सभी ने चाय पी. इस के बाद महावीर ने कहा कि कोई चीज चाहिए तो बोल देना. परेशान मत होना. मुझे अपना ही समझना. इस के बाद महावीर खेत में फसल देख कर गांव चला गया. महावीर की आंखों में 3 बच्चों की मां कमला का मादक बदन बस गया. वह सारी रात उसे पाने का षडयंत्र मन ही मन करता रहा. महावीर 2 दिन बाद फिर खेत जा पहुंचा. खेत तो बहाना था. उसे तो कमला को रिझाना था. इस कारण वह दुकान से बच्चों के लिए खानेपीने की चीजें भी लाया था.

कमला से महावीर हंसीठिठोली करने लगा. वह उस की सुंदरता की तारीफ भी करता था. कमला द्वारा बनी चाय का बखान भी करता था. महावीर इस के बाद अकसर 2-4 दिन बाद खेत जाने लगा. वह कमला को ललचाई नजर से देखता. उस रोज कालू काम से कहीं गया हुआ था. महावीर आ गया खेत पर. कमला से पता चला कि कालू शाम तक घर लौटेगा. बस उस रोज महावीर ने बिसकुट, भुजिया दे कर बच्चों को झोपड़ी से बाहर खेलने भेज दिया. उस के बाद महावीर ने कमला से पूछा, ‘‘लगता है, मेरा आना तुम्हें अच्छा नहीं लगता.’’

‘‘नहींनहीं, ऐसी कोई बात नहीं. मुझे तो तुम बहुत अच्छे लगते हो.’’ कमला ने कहा.

सुन कर महावीर ने आव देखा न ताव, कमला को बांहों में भर लिया. थोड़ी सी नानुकुर के बाद कमला ने अपना तन महावीर के हवाले कर दिया. महावीर और कमला वासना के दरिया में गोते लगाने लगे. कमला को महावीर ने ऐसा शारीरिक सुख दिया कि वह उस की दीवानी हो गई. कमला भूल गई कि वह शादीशुदा और 3 बेटों की मां है. उस के ये बहके कदम उसे कहीं का नहीं छोडेंगे अवैध संबंधों का परिणाम बहुत खतरनाक होता है. कमला को जो शारीरिक सुख महावीर ने कई बरसों बाद दिया था, उस सुख की खातिर वह अपने पति और बच्चों तक को ताक पर रख कर महावीर के साथ भाग जाने को तैयार हो गई थी.

कालू शरीफ था. उसे पता नहीं था कि उस की गैरमौजूदगी में उस की बीवी गैरमर्द के साथ रंगरलियां मनाती है. वह तो सोचता था कि महावीर अपनी खेती देखने आता है. जबकि महावीर तो कमला से मिलने आता था. कालू वहीं खेत पर रहता था. इस कारण कमला और महावीर का मिलन नहीं हो पाता था. ऐसे में वासना की आग में जल रहे महावीर और कमला ने योजना बनाई कि वे दोनों चुपके से भाग जाएंगे. महावीर ने कमला से कहा, ‘‘मैं ने देवली में कमरा किराए पर ले लिया है. तुम वहीं रहना. मैं भी आताजाता रहूंगा. बाद में जब सब कुछ ठीक हो जाएगा, तब मैं तुम से शादी कर लूंगा और बच्चों को भी अपना लूंगा.’’

सुन कर कमला बहुत खुश हुई. करीब 7 महीने पहले एक रोज कमला बिना कुछ बताए कहीं चली गई. महावीर योजनानुसार कमला को ले कर देवली कस्बे पहुंचा और किराए के कमरे में कमला को छोड़ कर वापस गांव ढिकला आ गया ताकि उस पर कोई शक न करे. उधर पत्नी के अचानक गायब हो जाने पर कालू को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि उस की पत्नी गई तो गई कहां. कालू ने उस की बहुत खोजबीन की. रिश्तेदारी में ढूंढा. मगर कमला का कोई पता नहीं चल सका. उसे जमीन खा गई थी या आसमान निगल गया था. थकहार कर कालू ने थाना दूनी में कमला की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

पुलिस ने उस की कोई खोजबीन नहीं की. पुलिस वालों ने कहा कि कहीं गई होगी. अपने आप आ जाएगी. गरीब की भला कौन सुनता है. कालू बीवी की खोजबीन कर के थक गया. वह अपने तीनों बच्चों की परवरिश करने लगा. कालूलाल अब बच्चों की देखभाल करने लगा. उस का कामधंधा छूट गया था. कालू काम पर जाए तो बच्चों की देखरेख कौन करे. इस कारण कालू अपनी बीवी के वियोग में मासूम बच्चों को जैसेतैसे पालने लगा. उधर महावीर का जब मन होता तो वह देवली जाता और कमला के साथ रंगरलियां मनाता. वह कभी गांव तो कभी देवली में प्रेमिका कमला के साथ रातें रंगीन कर रहा था. कुछ समय बाद महावीर ने कमला को देवली से निवाई कस्बे में किराए के कमरे में शिफ्ट कर दिया.

महावीर अब निवाई में कमला के साथ मौजमस्ती करने लगा. कमरे का किराया और कमला के खानेपीने का सारा खर्च महावीर मीणा उठाता था. महावीर निवाई में 2 दिन रहता. फिर गांव ढिकलाआ जाता. गांव में 2-3 दिन रहता फिर निवाई कमला के पास चला जाता. महावीर के निवाई से वापस गांव जाने के बाद कमला अकेली रह जाती थी. वह बमुश्किल समय अकेले काटती थी. ऐसे में कमला ने तय कर लिया कि वह अब महावीर के साथ ढिकला जा कर रहेगी. उसे अपने बच्चों की भी याद सता रही थी. महावीर जब जनवरी के दूसरे हफ्ते में निवाई कमला से मिलने आया तब कमला ने उस से कहा कि अब वह यहां अकेली नहीं रहेगी.

कमला ने दबाव बनाया कि वह अपने साथ उसे गांव ढिकला में रखे और बच्चों को भी अपनाए. सुन कर महावीर मीणा के हाथों के तोते उड़ गए. महावीर और कमला के अवैध संबंधों की खबर उस के गांव ढिकला में भी पता चल चुकी थी. महावीर के अकसर देवली और बाद में निवाई जा कर रहने का राज गांव में उजागर हो गया था. अब कमला उस के साथ ढिकला चलने की जिद करने लगी थी. ऐसे में अब तक महावीर गांव के लोगों से कहता रहा था कि कमला के बारे में जो बातें कही जा रही हैं, वह गलत हैं. उसे तो पता तक नहीं कि कमला है कहां.

ऐसे में जब उस के साथ कमला को लोग देखेंगे तो उस की समाज और गांव में बदनामी होगी. तब महावीर ने बदनामी के डर से कमला को ही रास्ते से हटाने का निर्णय ले लिया. महावीर ने कमला को झूठा विश्वास दिलाया कि वह एकदो दिन में उसे गांव ढिकला ले जाएगा. उस की बात सुन कर कमला खुश हो गई. महावीर ने भरनी निवासी अपने ममेरे भाई हरिराम मीणा से इस बारे में बात की और अपने पास बुलाया. इस के बाद योजनानुसार 11 जनवरी, 2021 को महावीर और हरिराम मीणा बाइक द्वारा निवाई कमला के पास पहुंचे. रात वहीं कमला के पास रुके.

अगले दिन कमरे का हिसाब वगैरह कर के कमला के साथ मोटरसाइकिल पर टोंक पहुंचे. टोंक घूमने के बाद 12 जनवरी, 2021 को चौथ का बरवाड़ा घुमाते रहे. फिर शाम हो जाने के बाद केरली कुंड आए. वहां महावीर और हरिराम ने शराब पी. इस के बाद बड़ोली के जंगल में पहुंचे और वहां एक नीम के पेड़ के नीचे बैठ गए. वहीं पर उन्होंने मौका पा कर कमला को गला दबा कर मार डाला और उस के शव को सरसों के खेत में डाल कर ढिकला में अपने घर आधी रात को आ कर सो गए. कमला ने हरिराम के मोबाइल नंबर की परची अपनी साड़ी के पल्लू में बांध रखी थी ताकि कभी उस से बात करेगी. इसी परची ने पुलिस को हत्यारों तक पहुंचा दिया.

सरसों के खेत में कमला की लाश पड़ी रही. 12 जनवरी, 2021 की रात 11 बजे कमला की हत्या कर शव गोकुल जाट के खेत में सरसों की फसल के बीच फेंका गया था. लाश सरसों के बीच खेत में पड़ी रही. करीब एक महीने तक पड़ी यह लाश सड़गल कर कंकाल बन गई. जब 10 फरवरी, 2021 को हत्याकांड से करीब महीने भर बाद सरसों की कटाई मजदूरों द्वारा की जा रही थी, तब उन की नजर कंकाल पर पड़ी. इस के बाद खेत मालिक गोकुल जाट ने सरपंच धनपत माली को कंकाल मिलने की खबर दी. सरपंच ने धाड़ थाने के थानाप्रभारी रामेश्वर प्रसाद को सूचना दी. पुलिस ने पूछताछ पूरी होने पर दोनों आरोपियों महावीर मीणा और हरिराम मीणा को कोर्ट में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Jharkhand News : 10 दिन तक सिर कटी लाश बनी रही रहस्य, आखिर किसकी थी

Jharkhand News : युवावस्था में किसी लड़की के कदम बहक जाएं तो उसे सही रास्ते पर लाना कोई आसान नहीं होता. मोहम्मद जमशेद ने बहकी हुई बेटी सुफिया को सही रास्ते पर लाने की लाख कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. इस का नतीजा जो निकला वह…

झारखंड की राजधानी रांची के थाना ओरमांझी स्थित साई यूनिवर्सिटी के परिसर में छात्र चहलकदमी कर रहे थे. घूमते हुए कुछ छात्र विश्वविद्यालय के पीछे स्थित जीराबेर जंगल में मस्ती करने पहुंच गए थे. जंगल में वे इधरउधर घूमते हुए जब इस के बीचोबीच पहुंचे तो वहां एक महिला की सिरकटी नग्न लाश देख कर चौंक गए. वे उसी क्षण उलटे पांव दौड़ते हुए विश्वविद्यालय के कैंपस पहुंचे. धौंकनी के समान उन की सांसें तेजतेज चल रही थीं. थोड़ी देर बाद जब वे सामान्य हुए तो उन्होंने लाश वाली बात अपने दोस्तों को बता दी.

जिस ने भी यह खबर सुनी, वह चौंके बिना नहीं रह पाया था. मुंहमुंह होते हुए यह खबर विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंच गई थी. कैंपस के पीछे लाश की सूचना मिलते ही प्रशासनिक भवन में हड़कंप मच गया. सूझबूझ का परिचय देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना की जानकारी ओरमांझी थाने के थानाप्रभारी श्याम किशोर महतो को दे दी. विश्वविद्यालय कैंपस के पीछे जीराबेर जंगल में सिरकटी लाश की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी श्याम किशोर महतो चौंक गए. फिर वह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

उन के साथ एसआई जयप्रकाश दास, संजय दास और 3 सिपाही थे. मौके पर पहुंच कर महिला की सिर कटी नग्न लाश का निरीक्षण किया. हत्यारों ने युवती की बर्बरतापूर्वक हत्या की थी. गहनतापूर्वक छानबीन करने पर पता चला कि हत्यारों ने युवती के गुप्तांग पर धारदार हथियार से कई वार किए थे और सिर भी काट कर साथ लेता गया था. क्योंकि पुलिस ने जंगल की छानबीन की थी, लेकिन मृतका का सिर कहीं नहीं मिला था. थानाप्रभारी श्यामकिशोर महतो ने दिल दहला देने वाली इस घटना की सूचना एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा, एसपी (ग्रामीण) नौशाद अली और डीएसपी चंद्रशेखर आजाद को भी दे दी थी.

सूचना पा कर पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. अधिकारियों ने भी मौके का मुआयना किया. लाश के पास से शराब की कुछ शीशियां भी पाई गई थीं. इस से यही अनुमान लगाया जा रहा था हत्यारों ने युवती के साथ दुष्कर्म करने के पश्चात अपनी पहचान छिपाने के लिए हत्या कर दी होगी और सिर काट कर अपने साथ ले गया होगा और कहीं छिपा दिया होगा. इसलिए लाश की पहचान नहीं हो पाई थी. थानाप्रभारी श्यामकिशोर महतो ने मौके की काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए रिम्स अस्पताल भिजवा दी और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 324, 201, 120बी भादंसं के तहत मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी. यह बात 3 जनवरी, 2021 की है.

अगले दिन रांची के सभी स्थानीय अखबारों ने इस घटना को प्रमुखता से छापा. अखबार में छपी खबर पढ़ कर एक दंपति ने ओरमांझी थाने पहुंच कर थानाप्रभारी से मुलाकात की. थानाप्रभारी ने जब दंपति को अस्पताल ले जा कर वह सिरकटी लाश दिखाई तो दंपति ने उस की शिनाख्त अपनी बेटी के रूप में कर ली. तब पुलिस ने थोड़ी राहत की सांस ली. सोचा कि मृतका की शिनाख्त हो गई है तो हत्या की वजह भी सामने आ ही जाएगी. लेकिन अगले दिन हैरान करने वाली बात सामने आई. जिस दंपति ने सिरकटी लाश को अपनी बेटी के रूप में पहचाना था, उन की बेटी जिंदा घर लौट आई थी.

पता चला कि वह अपने घर से भाग कर शहर में छिप कर अपने प्रेमी के साथ कई दिनों से रह रही थी. जब मामला बिगड़ता देखा तो वह मांबाप के सामने आ गई थी. मतलब साफ था कि मृतका उस दंपति की बेटी नहीं थी तो वह कौन थी? यह पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन गई. उसी दिन लाश की शिनाख्त के लिए एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने 25 हजार रुपए का ईनाम रख दिया. यह भी ऐलान कर दिया था पता बताने वाले की पहचान छिपा कर रखी जाएगी. 2 दिन बीत जाने के बावजूद भी न तो मृतका की शिनाख्त हो सकी थी और न ही उस के बारे में कोई सूचना ही मिली. जबकि एसएसपी ने इस केस के खुलासे के लिए 2 टीमें गठित कर दी थीं और मुखबिर भी लगा दिए थे. बावजूद इस के पुलिस के हाथ खाली थे.

तो आईजी (रांची) ने ईनाम की रकम 25 हजार रुपए से बढ़ा कर 50 हजार कर दी. फिर 2 दिनों बाद 8 जनवरी को शासन स्तर से ईनाम की यह रकम 50 हजार से बढ़ा कर सीधे 5 लाख रुपए कर दी गई. लाश की पहचान के लिए ओरमांझी पुलिस ने जिले के सभी शहरी और ग्रामीण इलाके के थानों से पता करा लिया था कि 2 जनवरी के पहले किसी थाने में किसी युवती के गुम होने की कोई रिपोर्ट तो नहीं दर्ज है? लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. किसी थाने में किसी युवती की गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं थी. पुलिस जहां से चली थी वहीं आ कर खड़ी हो गई.

कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था कि लाश की पहचान कैसे कराई जाए. 10 जनवरी, 2021 की दोपहर में चान्हों थाने के चटवल के रहने वाली राबिया परवीन और मोहम्मद जमशेद नाम के एक वृद्ध दंपति रिम्स अस्पताल पहुंचे. अखबारों के माध्यम से उन्हें पता चला था कि 2 जनवरी को जीराबेर जंगल में 18 से 22 साल के बीच एक युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी. जिस दिन लाश बरामद हुई थी, उस के 2 दिन पहले से उन की ब्याहता बेटी सुफिया परवीन अपनी ससुराल चंदवे, थाना पिठौरिया से रहस्यमय तरीके से गायब थी. अपने दामाद शेख बिलाल से जमशेद ने कई बार फोन कर के बेटी के बारे में पूछा भी, लेकिन उस ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया.

मोहम्मद जमशेद और उस की पत्नी राबिया परवीन ने अपने स्तर से संबंधियों और रिश्तेदारों सभी से पता लगा लिया. न तो सुफिया वहां गई थी और न ही उस का फोन काम कर रहा था. सुफिया का फोन लगातार बंद आ रहा था. जमशेद ने अखबारों में जब से सिरकटी लाश के बारे में पढ़ा था, तब से उसे देखने के लिए परेशान और बेचैन था. यही सोच कर वह पत्नी को ले कर 10 जनवरी के दोपहर में रिम्स अस्पताल पहुंचे थे. मोहम्मद जमशेद और राबिया परवीन लाश को देखते ही पहचान गए. लाश उन की बेटी सुफिया परवीन की ही थी, जो पिछले 14 दिनों से अपनी ससुराल चंदवे से गायब थी. राबिया परवीन ने लाश के दाईं पैर पर जले के निशान से उस की पहचान की थी.

दरअसल, सुफिया बचपन में आग से बुरी तरह झुलस गई थी. इलाज के बाद सुफिया के जख्म तो भर गए थे लेकिन दाग अभी भी मौजूद थे. लाश की पहचान होते ही थानेदार श्याम किशोर महतो ने दंपति को थाने बुलाया और दोनों से जानकारी हासिल की. मोहम्मद जमशेद के बयान के आधार पर पुलिस की नजरों में दोषी के रूप में उन का दामाद शेख बिलाल चढ़ गया. पुलिस ने मोहम्मद जमशेद से शेख बिलाल की तसवीर मांगी. अगले दिन मोस्टवांटेड के रूप में शेख बिलाल की तसवीर जिले के हर थाने में चस्पा करा दी और अखबारों में भी प्रकाशित करा दी. पता बताने वालों को ईनाम देने की भी घोषणा कर दी थी.

11 जनवरी को मोहम्मद जमशेद ने दामाद शेख बिलाल के बारे में पुलिस को जो जानकारी दी थी, उसी आधार पर पुलिस ने चंदवे स्थित गांव उस के मकान पर जा कर दबिश दी. घर पर शेख बिलाल की पत्नी शब्बो खातून और उस का नाबालिग बेटा मिला. दोनों से पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि शेख बिलाल 2 जनवरी से ही घर से गायब है. इस पर पुलिस का शक पुख्ता हो गया कि सुफिया का कत्ल उसी ने किया है, तभी वह घर से फरार है. शब्बो खातून और उस के बेटे से पूछताछ में पुलिस को उन दोनों पर शक हो गया था कि जरूर सुफिया की हत्या की जानकारी दोनों को थी, लेकिन वे कुछ भी नहीं बता रहे थे.

इसी शक के आधार पर पुलिस सिर्फ शब्बो को हिरासत में ले कर थाने ले आई और वहां उस से गहन पूछताछ की. शब्बो पहले नानुकुर करती रही. अंतत: पुलिस के बारबार पूछने पर वह टूट गई और कबूल कर लिया कि उसे अपनी सौतन सुफिया परवीन की हत्या की जानकारी पहले से थी. उस का पति शेख बिलाल ही सुफिया परवीन का कातिल है, उसी ने उस का सिर काट कर घर से 2 किलोमीटर दूर अपने खेत में गड्ढा खोद कर दफना दिया था. शब्बो खातून के मुंह से इतना सुनते ही थानाप्रभारी श्यामकिशोर चौंक गए. फिर तो वह रट्टू तोते की तरह पूरी कहानी उगलती गई. पूरी कहानी सुनने के बाद वह अपना चेहरा हथेलियों बीच छिपा कर सुबकने लगी और पुलिस अधिकारियों से माफी मांगने लगी.

इस के बाद मजिस्ट्रैट की उपस्थिति में पुलिस शब्बो खातून को ले कर चंदवे गांव में स्थित उस खेत में गई जहां सुफिया का कटा सिर दफनाया गया था. पुलिस के पैरों तले से जमीन तब खिसक गई थी जब सिर के इर्दगिर्द बड़ी मात्रा में नमक मिला. हत्यारे शेख बिलाल का तर्क था कि पुलिस उस के गुनाहों से कभी परदा नहीं उठा पाएगी. जब तक उस के गिरेहबान पर हाथ डालेगी तब तक वारदात का नामोनिशान मिट चुका होगा. लेकिन पुलिस ने उस के मंसूबों पर पानी फेर दिया. 10 दिनों से रहस्य बनी सिर कटी लाश की शिनाख्त सुफिया परवीन के रूप में हो गई थी.

सौतन सुफिया की हत्या का राज छिपाने के जुर्म में पुलिस ने शब्बो खातून को गिरफ्तार कर लिया और उस के पति शेख बिलाल की तलाश में उस के ठिकानों पर दबिश दी. 2 दिनों की मेहनत ने अपना रंग दिखाया. आखिरकार 14 जनवरी, 2021 को शेख बिलाल अपने इलाके से उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह भागने की फिराक में रोड पर खड़ा हुआ बस का इंतजार कर रहा था. गिरफ्तार कर पुलिस उसे थाने ले आई. सुफिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी शेख बिलाल के गिरफ्तार होते ही थानाप्रभारी श्यामकिशोर ने पुलिस अधिकारियों को सूचना दे दी थी.

एसपी (ग्रामीण) नौशाद अली थोड़ी देर में ओरमांझी थाने पहुंच गए और हत्या के संबंध में आरोपी शेख बिलाल से कड़ाई से पूछताछ शुरू की. बिना हीलाहवाली के शेख बिलाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उसी ने प्रेमिका से दूसरी पत्नी बनी सुफिया परवीन की हालात के हाथों मजबूर हो कर हत्या की थी. फिर उस ने सुफिया से प्यार से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस उसे हिरासत में ले कर वहां गई, जहां सुफिया परवीन की हत्या कर के लाश फेंकी थी. फिर पुलिस उसे वहां ले कर गई, जहां सुफिया का सिर काट कर जमीन के भीतर दफनाया था.

उस के बाद उसी दिन घर ले जा कर शेख बिलाल ने हत्या में प्रयुक्त धारदार हथियार खून में सना दाउली बरामद करा दिया. पुलिस ने दाउली अपने कब्जे में ले लिया और आरोपी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया. क्रूर हत्यारा शेख बिलाल ने सुफिया परवीन की हत्या की जो कहानी पुलिस को बताई, वह कुछ ऐसे सामने आई है—

21 वर्षीय सुफिया परवीन मूलरूप से राजधानी रांची के थाना चान्हों के चटवल इलाके की रहने वाली थी. उस के पिता का नाम मोहम्मद जमशेद और मां का नाम राबिया परवीन था. जमशेद और राबिया की 6 बेटियों और 3 बेटों में वह पांचवें नंबर की थी. प्राइवेट नौकरी कर के जमशेद इतना कमा लेता था जिस से वह अपना और अपने परिवार का भरणपोषण कर लेता था. बच्चों में बेटियां सब से बड़ी थीं. पुराने खयालातों वाला जमशेद बेटियों को नौकरी के लिए कहीं बाहर जाने नहीं देता था. वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता है. समाज में इज्जत ही बेटियों का गहना होती है, जिसे जितना ढक कर रखा जाए वह उतनी पाकीजा रहती है.

इसलिए वह अपनी छोटी सी कमाई में परिवार को खुश रखने की हरसंभव कोशिश करता था, ताकि आधुनिक भौतिक वस्तुओं की चकाचौंध में वे बहकने न पाएं. मोहम्मद जमशेद की सभी संतानों में सुफिया परवीन अलग किस्म की लड़की थी. औसत कदकाठी और गोरे रंग की सुंदर सुफिया चंचल मन और स्वच्छंद खयालातों वाली लड़की थी. सुफिया ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ दी थी, क्योंकि उस का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था. जमशेद ने 4 बेटियों के हाथ पीले कर दिए थे. मजे से उस की गृहस्थी चल रही थी. अब अच्छा सा घरवर देख कर सुफिया के हाथ पीले करा दे तो एक और बेटी की जिम्मेदारी में रह जाएगी.

जमशेद बेटी की शादी के बारे में पत्नी से विचारविमर्श कर रहा था कि सुफिया के कोरे मन पर मोहब्बत की सुनहरी स्याही से खालिद ने अपनी मोहब्बत की दास्तान लिख दी. अब सुफिया के अस्तित्व पर खालिद का पूरा कब्जा था. दोनों ही एकदूसरे से बेपनाह प्यार करते थे. सुफिया और खालिद के दिलों में मोहब्बत की मीठी उमंग उस समय पनपी थी, जब दोनों की आंखें चार हुई थीं. बलसोकरा गांव निवासी खालिद की शादी सुफिया के घर के बगल में रहने वाली फातिमा से हुई थी. पड़ोसी होने के नाते प्यारी सहेली फातिमा से मिलने सुफिया उस के घर जाती थी. आतेजाते फातिमा के पति खालिद की नजरें सुफिया के हुस्न से टकराईं तो वह उस की जवानी की तीखी तलवार से घायल हो गया था.

उसी दिन उसे पाने की हसरत अपने मन में ठान ली. फातिमा की अजीज सहेली होने के नाते सुफिया से खालिद ने मजाकमजाक में साली का रिश्ता जोड़ लिया था. उसी रिश्ते की आड़ में वह उस से अश्लील मजाक करने लगा. खालिद का मजाक करना सुफिया को अच्छा लगता था. खालिद की चिकनीचुपड़ी और मीठी बातों से उस रोमरोम खिल उठता था. उस के मन को गहराई तक गुदगुदाता था. धीरेधीरे सुफिया खालिद की ओर खिंचती गई और उस की मोहब्बत में गिरफ्तार हो गई थी. यह जानते हुए भी कि खालिद उस की प्यारी सहेली फातिमा का शौहर है, फिर भी सुफिया ने सहेली के पति पर बुरी नजर डाल कर उसे अपने हुस्न के मकड़जाल में कैद कर लिया था.

मोहब्बत की आग में जलते दीवानों ने एकदूसरे के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाईं और एकदूसरे के साथ अपने घरौंदे बसाने के हसीन ख्वाब देखे. खालिद के बिना जीवन अधूरा समझने वाली सुफिया घटना से 10 महीने पहले फरवरी, 2020 में घर छोड़ कर खालिद के साथ भाग गई और दिल्ली जा कर उस के साथ निकाह कर लिया. न जाने सुफिया की हंसतीखेलती गृहस्थी में किस की बुरी नजर लगी कि उस के प्यार का घरौंदा रेत के महल की तरह भरभरा कर ढह गया. खालिद और सुफिया के बीच 2 महीने तक सब कुछ इसी तरह चलता रहा. धीरेधीरे सुफिया के सिर से खालिद की मोहब्बत का जूनुन पूरी तरह उतर गया था.

उन दोनों के बीच में कड़वाहट ने अपना कब्जा जमा लिया था. नए जमाने के खयालातों में जीने वाली सुफिया को पति की बंदिशें अखरने लगीं तो उन के बीच में टकराहट ने पांव जमा लिए थे. अब खालिद के साथ रहना उसे एक पल गवारा नहीं था, लिहाजा सुफिया खालिद को छोड़ कर दिल्ली से अपने मायके चटवल (रांची) आ गई थी. सुफिया ने जो किया था, वह माफी के लायक नहीं था, लेकिन उसे बुरा सपना समझ कर उस के नेकदिल मांबाप ने बेटी को माफ कर घर में जगह दे दी थी. उन का सोचना था सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते, फिर वह तो उस का अपना खून है, लड़की है, कहां जाएगी.

बेटी के बातव्यवहार और विचारों में बदलाव देख कर मांबाप धीरेधीरे सब कुछ भूलते गए. सुफिया भी खुद को बदलने में जुट गई थी. लेकिन यह सब उस का सिर्फ दिखावा था. मोहब्बत के जिस भंवर से वह अभीअभी बाहर निकली थी, फिर उस के पांव उसी भंवर में जा फंसे थे. सुफिया दिल के हाथों एक बार फिर मजबूर हो गई थी. इस बार उस का दिल खालिद के मामू के शादीशुदा बेटे शेख बिलाल पर आ गया था. कसरती और सुडौल बदन वाले साधारण शक्लसूरत के शेख बिलाल को जब से देखा था, उस दिन से ही उस पर मर मिटी थी.

शेख बिलाल भी सुफिया को देख कर उस पर फिदा था. किसी का भी दिल उस पर आ सकता था. सुफिया को देख कर शेख बिलाल अपने होशोहवास खो बैठा था और उस से प्यार करने लगा था, हालांकि दोनों के दरमियान करीब 14-15 साल का फासला था. कहते हैं प्यार अंधा होता है, न उम्र देखता है न जातपात, बस हो जाता है. सुफिया के साथ भी ऐसा हुआ था. 40 वर्षीय शेख बिलाल मूलरूप से रांची जिले के चंदवे गांव का रहने वाला था. वह पहले से शादीशुदा था. उस की पत्नी शब्बो खातून उर्फ अफसाना थी और एक 14 साल का बेटा भी. शेख बिलाल अपराधी किस्म का था. जिले के कई थानों में उस के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. वह कई मामलों में वांछित भी था.

खैर, धीरेधीरे सुफिया और शेख बिलाल का प्यार जवां हो रहा था. बेटी के दोबारा फिसलते कदम की जानकारी जब सुफिया के मांबाप को हुई तो उन्हें उस की करतूत पर यकीन नहीं हुआ. फिर भी मांबाप ने उसे समझाने की कोशिश की. सुफिया के सिर पर शेख बिलाल के इश्क का भूत सवार था. उस के प्यार में इस कदर डूब चुकी थी कि शेख के अलावा उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, मांबाप की तो बात ही छोड़ दीजिए. मांबाप ने जब देखा कि बेटी को समझाने का उस पर कोई असर नहीं हो रहा है तो उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. इधर शेख बिलाल ने सुफिया से अपनी शादीशुदा जिंदगी की कहानी छिपा रखी थी और यह भी छिपा रखा था कि वह एक बेटे का बाप है.

बहरहाल, सितंबर, 2020 में दोनों ने निकाह कर लिया. निकाह के बाद शेख बिलाल सुफिया को अपने घर लाया और जब उसे उस की शादीशुदा जिंदगी के बारे में पता चला तो उस ने घर में तूफान खड़ा कर दिया. उस ने पति से कह दिया कि घर में या तो वह रहेगी या उस की सौतन शब्बो. उसे दोनों में से किसी एक को चुनना होगा. असमंजस के भंवर में डूबा शेख बिलाल फैसला नहीं कर पा रहा था कि वह क्या करे. क्योंकि सुफिया का रौद्र रूप देख कर वह डर गया था. वह दोनों में से किसी को भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं था इसलिए सब कुछ हालात पर छोड़ दिया.

इधर सुफिया सौतन शब्बो को घर से निकालने की अपनी जिद पर अड़ी हुई थी. सुफिया की जिद ने शेख बिलाल की हंसतीखेलती गृहस्थी को अखाड़ा बना दिया था. शब्बो को ले कर दोनों के बीच घर में रोज झगड़े होने लगे थे. पति के सामने सुफिया ने एक शर्त रख दी. वह शर्त यह थी कि शब्बो को नहीं छोड़ सकते तो मेरे रहने का कहीं और इंतजाम कर दो या तो मुझे पैसे दे दो, जिस से मैं कहीं अलग रह लूं. शेख बिलाल सुफिया की किसी भी शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ. जब सुफिया ने जिद की तो गुस्से में उस ने सुफिया को लातघूंसों से खूब मारा.

पति की पिटाई से सुफिया अंदर तक हिल गई. दोनों के बीच का प्रेम अब नफरत का रूप ले चुका था और नौबत मरनेमारने की आ गई थी. पति की पिटाई से आहत सुफिया ने पति को सबक सिखाने के लिए पिठौरिया थाने में दहेज उत्पीड़न और मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया. उस की लिखित शिकायत पर पुलिस ने शेख बिलाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. शेख बिलाल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उस की ही पत्नी उस के साथ ऐसा कर सकती है. उस के इस दुस्साहस से बिलाल नफरत से बिलबिला उठा और उस ने सुफिया को सजा देने की ठान ली. इधर सुफिया पति को जेल भिजवाने के बावजूद उसी के घर में सीना ताने डटी रही, तनिक भी डरी नहीं.

उस के डर से सौतन शब्बो खातून और नाबालिग बेटे की घिग्घी बंध गई थी. मांबेटे दोनों घर में डरडर कर रहते रहे और शब्बो पति की जमानत की तैयारी में जुट गई थी. महीना भर जेल में रहने के बाद शेख बिलाल जमानत पर छूट कर घर आया तो सुफिया को देख कर उस का खून खौल उठा. वह उसे अपने घर में एक पल के लिए बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. उस का चेहरा देखते ही उसे जेल की सलाखें याद आ रही थी. उस ने सोच लिया था कि उसे अब क्या करना है. शेख बिलाल ने पहली पत्नी शब्बो खातून के साथ मिल कर एक खतरनाक योजना बनाई. योजना सुफिया को रास्ते से हटाने की थी.

पति का साथ देने के लिए वह तैयार हो गई. पहले उसे रास्ते से हटाने के लिए गोली मार कर हत्या करने की योजना बनाई. इस के लिए उस ने एक कट्टा भी खरीद लिया था लेकिन बाद में उस ने अपनी योजना बदल दी. वह कुछ ऐसा करना चाहता था कि न तो लाश को पुलिस पहचान सके और न ही पुलिस कभी उस तक पहुंच सके, एकदम फूलप्रूफ योजना बनाना चाहता था और ऐसी ही योजना बनाई भी. योजना के अनुसार, शेख बिलाल भले ही सुफिया से नफरत करता था लेकिन जानता था कि जब तक वह सुफिया का भरोसा नहीं जीतेगा, तब तक उस की योजना सफल नहीं हो सकती है. षडयंत्र सफल बनाने के लिए उस ने एक चाल चली.

बिलाल ने सुफिया से माफी मांग कर उस का दिल जीत लिया. उस ने उसे भरोसा दिलाया कि वह जो चाहती है, वह वही करेगा. इस के लिए उसे उस का साथ देना होगा. इस पर खुश हो कर सुफिया साथ देने के लिए तैयार हो गई. वह चाहती थी कि उस की सौतन शब्बो जल्दी से जल्दी उस के रास्ते से हट जाए ताकि पति पर उस का पूरा अधिकार हो जाए. चिडि़या को फंसाने के लिए जाल पर शेख बिलाल ने जो दाना डाला था, उस का निशाना एकदम सही जगह पर बैठ गया था. उस ने पत्नी को धीरे से इशारा कर दिया कि शिकार जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है, उसे रास्ते से हटाने की देरी है.

तय योजना के मुताबिक, 2 जनवरी, 2021 को शेख बिलाल ने विश्वास में ले कर सुफिया से यह कहा कि आज रात शब्बो का काम तमाम करना है तो सुफिया ने अपनी ओर से हरी झंडी दे दी और खुश भी थी. उस के बाद वह पूरी तैयारी के साथ रात साढ़े 10 बजे के करीब शब्बो खातून और सुफिया परवीन को मोटरसाइकिल पर बैठा कर जीराबेर जंगल की ओर ले गया. बीच में सुफिया बैठी थी, पीछे शब्बो और शेख बिलाल मोटरसाइकिल चला रहा था. जंगल में जैसे ही तीनों बाइक से नीचे उतरे और शेख बिलाल ने बाइक स्टैंड के सहारे खड़ी की, तब तक शब्बो सुफिया पर भेडि़ए की तरह झपटी तो पलट कर शेख भी उस पर झपट पड़ा और उसे जमीन पर पटक दिया.

फिर गला दबा कर सुफिया को मौत के घाट उतार दिया. उस के बाद साथ लाए धारदार हथियार से सिर काट कर धड़ से अलग कर दिया. इस से भी जब उस का मन नहीं भरा तो उस ने सुफिया के सारे कपड़े उतार लिए ताकि उस की पहचान न हो सके. फिर उसी धारदार हथियार से उस के गुप्तांग पर कई वार किए और अपने मन की भड़ास निकाली. सुफिया को मौत के उतारने के बाद शेख बिलाल शब्बो को बाइक पर बिठा कर कपड़े और कटा सिर साथ लेता गया. करीब ढाई किलोमीटर दूर जा कर अपने खेत पर रुका और खेत में 4 फीट गहरा गड्ढा खोद कर सिर दफना दिया और उस पर बड़ी मात्रा में नमक डाल दिया ताकि सिर मिट्टी में गल जाए और पुलिस के हाथों कोई सबूत न लगे.

उस के बाद सुफिया के सारे कपड़े जला दिए और आखिरी सबूत भी नष्ट कर दिया. यह सब करने के बाद घर जा कर दोनों पतिपत्नी आराम से सो गए. उस ने सोचा था कि सबूत के बिना पुलिस उस तक पहुंच नहीं सकेगी, लेकिन उस की यह सोच गलत साबित हुई. शेख बिलाल ने फूलप्रूफ योजना बनाई थी. लेकिन सुफिया के मांबाप ने बेटी की लाश पहचान कर उस की योजना पर पानी फेर दिया और उस के असल ठिकाने पहुंच गया. सुफिया की हत्या में पति के साथ शब्बो खातून भी थी, इसलिए उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक दोनों जेल में बंद थे. सुफिया की हत्या का जेल में बंद शेख बिलाल को तनिक भी मलाल नहीं था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Faridabad Crime News : भाभी संग मिलकर क्यों रचा भाई के कत्ल का खौफनाक खेल

Faridabad Crime News : दिनेश धवन से प्रेम विवाह करने के बाद अनु जब मां नहीं बनी तो उस ने पहले हरजीत से फिर नितिन से नजदीकियां बढ़ाईं. उस के रास्ते में पति बाधक बना तो उस के अगले कदम ने एक ऐसे अपराध को जन्म दिया कि…

28 जनवरी, 2021 को फरीदाबाद के डबुआ कालोनी थाने की पुलिस को सूचना मिली कि गहरे नाले में एक लाश पड़ी है. इस बात की जानकारी मिलते ही वहां के थानाप्रभारी संदीप कुमार अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान और कुछ पुलिसकर्मियों को साथ ले कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि नाले की कीचड़ में एक लाश पड़ी थी, जिस से काफी दुर्गंध आ रही थी. लाश पुरानी थी, जिसे देख कर पहचानना काफी मुश्किल था. लगता था हत्यारों ने वह कई दिन पहले नाले में फेंकी होगी.

थानाप्रभारी संदीप कुमार ने पुलिसकर्मियों की मदद से लाश बाहर निकलवाई. क्राइम टीम द्वारा लाश की विभिन्न ऐंगल से फोटो लेने के बाद उस की शिनाख्त के प्रयास किए गए. लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हो सकी तो उसे फरीदाबाद के बी.के. अस्पताल में सुरक्षित रखवा दिया गया. उसी दिन थानाप्रभारी संदीप कुमार ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर के जांच अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान को सौंप दी. इस केस को सुलझाने के लिए डबुआ थाने की एक पुलिस टीम गठित की गई, जिस में थानाप्रभारी संदीप कुमार, एसआई यासीन खान, एएसआई कुलदीप और कांस्टेबल पवन शामिल थे.

जांच अपने हाथ में लेने के बाद विवेचनाधारी अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान अपने आसपास के इलाके से इस बात का पता लगाने का प्रयास किया कि पिछले कुछ दिनों में शहर का कोई व्यक्ति गायब तो नहीं है. कई लोगों से पूछताछ करने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि दिनेश धवन नाम का एक व्यक्ति सैनिक कालोनी से लापता है. उस का मोबाइल भी इन दिनों स्विच्ड औफ चल रहा है. कहीं मरने वाला वही तो नहीं, ऐसा विचार करते हुए अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान सैनिक कालोनी स्थित दिनेश धवन के घर पहुंचे.

वहां उस की पत्नी अनु मिली. अनु के साथ एक व्यक्ति और था. उस का नाम पूछने पर उस ने अपना नाम हरजीत बताया. उन्होंने अनु को नाले से मिली लाश की फोटो दिखाई तो अनु और उस के साथ बैठे हरजीत ने उसे देखने के बाद लाश पहचानने से इनकार कर दी. सैनिक कालोनी से वापस लौट कर अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान ने थानाप्रभारी संदीप कुमार को मृतक की पत्नी अनु से हुई पूछताछ के बारे में जानकारी दी तो थानाप्रभारी ने मृतक की फोटो को सोशल मीडिया के अतिरिक्त उस के पोस्टर बनवा कर फरीदाबाद के प्रमुख चौकचौराहों पर चस्पा करने की सलाह दी.

यासीन खान ने ऐसा ही किया. ऐसा करने पर अगले दिन यानी 29 जनवरी को दीपा नाम की औरत डबुआ थाने में आई और उस ने लाश को देखने की इच्छा जाहिर की. तब पुलिस ने उसे फरीदाबाद के बी.के. अस्पताल में रखी लाश दिखाई. लाश काफी बदतर अवस्था में थी, उसे देख कर उस की शिनाख्त करना मुश्किल था लेकिन लाश की दाहिनी कलाई पर एक ब्रेसलेट था, जिसे देख कर दीपा ने बताया कि उस ने यह ब्रेसलेट रक्षाबंधन पर अपने मुंहबोले भाई दिनेश धवन को पहनाया था. इस ब्रेसलेट पर धवन गुदा हुआ था.  दिनेश धवन के कुछ और दोस्तों को बुला कर जब यह लाश दिखाई गई तो उन लोगों ने भी बे्रसलेट देखने के बाद उस की शिनाख्त दिनेश धवन के रूप में की.

यह सब जानने के बाद अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान को दिनेश धवन की पत्नी अनु पर शक हो गया. क्योंकि वह लाश की फोटो देखने के बाद उसे पहचानने से साफ इनकार कर चुकी थी. जबकि दूसरी तरफ दिनेश धवन की मुंहबोली बहन दीपा और दोस्त अस्पताल में रखी लाश को दिनेश धवन का होने का दावा कर रहे थे. यासीन खान ने एएसआई कुलदीप को दिनेश धवन के घर भेज कर उस की पत्नी अनु को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया. पहली फरवरी, 2021 को अनु थाने में पहुंची. पूछताछ के दौरान उस के पति के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि करीब 20 दिन पहले वह नौकरी करने झारखंड चला गया है जिस से उस की वाट्सऐप पर रोज चैटिंग होती है.

लेकिन जब अनु से दिनेश धवन का मोबाइल नंबर ले कर उस की लोकेशन निकाली गई तो मोबाइल की लोकेशन फरीदाबाद में ही मिली. यह देख कर यासीन खान ने अनु से दोबारा सख्तीपूर्वक पूछताछ की तो वह टूट गई और उस ने अपने प्रेमी नितिन और उस के साथियों के साथ मिल कर अपने पति दिनेश धवन की हत्या की बात स्वीकार कर ली.

पूछताछ के दौरान अनु ने अपने बयान में जो कुछ बताया और पुलिस की जांच के दौरान दिनेश की हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

35 वर्षीय दिनेश धवन पेशे से प्रौपर्टी डीलर था. वह पत्नी अनु के साथ फरीदाबाद की सैनिक कालोनी में रहता था. घर से कुछ ही दूरी पर उस का औफिस था, जहां बैठ कर वह मकान की खरीदफरोख्त और लोगों को दुकान आदि किराए पर दिलवाने का काम करता था. इस काम में उसे अच्छाखासा कमीशन मिल जाता था, जिस से वह बड़े आराम की जिंदगी गुजार रहा था. दिनेश ने लगभग 10 साल पहले अनु से प्रेम विवाह किया था. अनु का मायका भी सैनिक कालोनी में ही था, जहां उस के पिता भाई और अन्य रिश्तेदार रहते थे.

दिनेश धवन और अनु दोनों एकदूसरे को जीजान से प्यार करते थे. वह अनु के सभी नाजनखरे उठाता तो अनु भी दिनेश के मूड का खयाल रखती थी. वह कभी कोई ऐसा काम नहीं करती, जो दिनेश को नागवार गुजरे. धीरेधीरे वक्त गुजरता गया. जिंदगी के खुशनुमा लम्हों को गुजरने में पता कहां चलता है. देखते ही देखते कई साल गुजर गए, लेकिन अनु की गोद हरी नहीं हुई. संतान नहीं होने के कारण उन के जीवन में नीरसता घुलने लगी तो अनु को चिंता हुई. उस ने दिनेश के सामने अपनी चिंता जाहिर की तो उस ने शहर के कई अच्छे डाक्टरों से अपना इलाज करवाया मगर कोई नतीजा नहीं निकला. आखिर में रिश्तेदारों के कहने पर दिनेश धवन और अनु ने बाल आश्रम से एक बच्ची गोद ले ली और उस की परवरिश करने लगे.

दिनेश धवन के औफिस में मिलने के लिए तरहतरह के लोग आते थे. कभीकभार पीनेपिलाने का दौर भी चलता था. वह खुद भी पीने का शौकीन था. पहले तो इतना ही पीता था, जितना पीने के बाद वह अपना होश कायम रख सके. लेकिन बाद में उस के पीने की लिमिट ज्यादा बढ़ गई तो अनु के साथ उस के संबंधों में कड़वाहट आने लगी. अनु दिनेश को पीने से मना करती तो दिनेश एक कान से उस की बात सुनता दूसरे से बाहर निकाल देता था. वह रोज अनु के सामने नहीं पीने की कसम खा कर घर से औफिस निकलता था, लेकिन जब वह वापस लौटता तो उस के कदम लड़खड़ा रहे होते थे.

पति की पीने की आदत से परेशान अनु अपना दुखड़ा लोगों को सुनाती रहती थी. उस की इस परेशानी का फायदा पड़ोस में रहने वाले हरजीत ने उठाया. उस की नजर अनु के खूबसूरत बदन पर टिकी थी. अनु की दुखती रग पर हाथ रख कर वह धीरेधीरे अनु के दिल के करीब आ गया. अनु को भी लगा एक हरजीत ही उस का दुख समझता है. वह कोई भी काम उसे कहती तो वह सब से पहले अनु का कहा काम पूरा करता फिर बाद में अपना काम करता था. दिनेश की शराब की लत के कारण हर रात अनु का उस से विवाद हो जाता था.

सुबह उस के औफिस चले जाने के बाद अनु अपना अपना दुखड़ा हरजीत को सुनाती थी.  हरजीत पहले से अनु को पाने की फिराक में था. वह अनु की हां में हां मिला कर उस के जख्मों पर मरहम लगा कर उस के कोमल दिल में अपनी जगह बनाने की कोशिश करता था. कुछ ही महीनों में अनु के दिल में इस का असर हुआ और हरजीत मौका देख कर उस के साथ जिस्मानी संबंध बनाने में कामयाब हो गया. हरजीत और अनु के इन संबंधों की जानकारी काफी दिनों तक दिनेश धवन को नहीं हुई, मगर जब आसपड़ोस में उस की पत्नी और हरजीत के अवैध संबंधों के बारे में तरहतरह के चर्चे होने लगे तो दिनेश ने अनु से पूछा कि उस के औफिस जाने के बाद हरजीत यहां क्यों आता है.

अनु ने पति के आरोप सिरे से खारिज करते हुए कहा कि हरजीत उम्र में उस से काफी बड़ा है, जिसे वह चाचा कह कर पुकारती है. वह कभीकभार जरूरत पड़ने पर घर का कोई काम उस से करवाती है. जिसे देख कर लोग बेवजह उस से जलते हैं और तुम्हें मेरे खिलाफ भड़काने का काम कर रहे हैं. लेकिन दिनेश ने अपनी गैरमौजूदगी में हरजीत के घर आने पर रोक लगा दी और उसे अपना काम खुद ही निबटाने के लिए कहा. पति की बात सुन कर अनु ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए हरजीत को भविष्य में कभी नहीं बुलाने की कसम खाई.

अनु की गलती मानने पर दिनेश ने उसे माफ कर दिया. लेकिन हरजीत और अनु का रिश्ता खत्म नहीं हुआ. पति की नजरों में धूल झोंक कर अनु ने हरजीत से मिलना जारी रखा. दिनेश घवन के दोस्तों में एक नाम नितिन पंडित का था. दिनेश धवन से उम्र में करीब 10 साल छोटा नितिन बल्लभगढ़ की एक कैमिकल फैक्ट्री में नौकरी करता था. छोटा होने के बावजूद उस की दिनेश के साथ खूब छनती थी. दोनों साथ दारू पीते और लंबीलंबी डींगे हांका करते थे. दिनेश धवन जब शराब के नशे में टल्ली हो जाता तो नितिन उसे संभाल कर उस के घर सैनिक कालोनी पहुंचा आता था. नितिन दिनेश की पत्नी अनु को भाभी कहता था. भाभीदेवर का रिश्ता होने के कारण दोनों अकसर हंसीमजाक करते रहते थे. नितिन अनु की खूबसूरती की जी भर कर तारीफ करता था.

धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के करीब आ गए और उन के बीच मधुर संबंध कायम हो गए. इस के बाद अनु और नितिन को जब भी मौका मिलता, वे अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे. पिछले साल जब पूरे देश में लौकडाउन शुरू हुआ तो सारी दुनिया जैसे ठहर सी गई. लोगों के कामधंधे बंद हो गए. दिनेश घवन की आमदनी बंद हो गई तो वह परेशान रहने लगा. अनु को ऐसी हालत में पति की मदद करनी चाहिए थी, लेकिन हुआ एकदम उलटा. वह दिनेश को अपने जरूरत की चीजें नहीं देने पर उसे ताना मारने लगी. एक तो आमदनी बंद दूसरे अनु के व्यवहार ने उसे अंदर से तोड़ दिया. परेशान हो कर वह हर वक्त नशा करने लगा. इस प्रकार अनु और दिनेश के बीच की दूरी बढ़ती चली गई.

दूसरी तरफ पति के हमेशा घर में रहने से उस के और नितिन के प्यार की कहानी में ब्रेक लग गया. वे दोनों मोबाइल पर बातें कर अपने प्यार का इजहार करते, लेकिन अकेले में मिल कर अपने दिल की प्यास नहीं बुझा पाते थे. घटना से करीब 2 महीने पहले अनु धवन ने नितिन के साथ मिल कर पति को हमेशा के लिए रास्ते से हटा देने की योजना तैयार की. इस काम में मदद के लिए उस का पुराना प्रेमी हरजीत भी राजी हो गया. नितिन ने अपने दोस्त विनीत और विष्णु को इस योजना में शामिल कर लिया. 11 जनवरी, 2021 की शाम को नितिन, विष्णु और विनीत दिनेश के औफिस से घर लौटने के पहले ही अनु के घर में आ कर छिप गए. रोज की तरह उस दिन भी दिनेश धवन नशे में धुत हो कर घर लौटा था.

वह खाना खा कर सो गया. रात के लगभग एक बजे अनु ने अपने प्रेमी नितिन से कहा कि दिनेश नशे में बेसुध है उस का जल्दी से काम तमाम कर दो. अनु का इशारा पा कर नितिन, विनीत और विष्णु दबे पांव गहरी नींद में सो रहे दिनेश धवन के पास पहुंचे और गला दबा कर उसे मौत की नींद सुला दिया. कहीं वह जिंदा न रह जाए, इसलिए उन्होंने उस के सिर परभी डंडे मारे. सुबह लगभग 4 बजे हरजीत अनु के घर पहुंचा तो नितिन ने उस से कहा कि वह अपना काम कर चुका है. वह दिनेश की लाश को अच्छी तरह पैक कर घर में ही छिपा दे. मौका मिलते ही वे लाश को कहीं ठिकाने लगा देंगे.

इतना कह कर नितिन अपने दोस्तों के साथ अनु के घर से निकल गया. हरजीत ने दिनेश धवन की लाश बैडशीट और प्लास्टिक में पैक कर घर के बाथरूम में छिपा दी. 4-5 दिन बाद जब लाश से बदबू आने लगी तब अनु ने घबरा कर नितिन तथा हरजीत से उसे जल्दी ठिकाने लगाने के लिए कहा. तब 18 जनवरी, 2021 को नितिन, हरजीत, विष्णु और दीपक अनु के घर पहुंचे और लाश बैड के अंदर छिपा दी. फिर बैड सहित लाश को एक रेहड़ी के ऊपर डाल कर गहरे नाले के पास ले गए और ठिकाने लगा दी. जब रास्ते में लोगों ने बैड के बारे में पूछा तो हरजीत ने बताया कि वह बैड को रिपेयर कराने के लिए ले जा रहा है. लाश उन्होंने नाले में डाल दी.

लाश ठिकाने लगाने के बाद हरजीत बैड को वापस अनु के घर ले आया, जिसे अनु ने घर की छत पर रखवा दिया. नितिन ने विष्णु को दिनेश धवन की हत्या करने के बदले 41 हजार रुपए देने का वादा किया था, जो अनु ने अपने अकाउंट से विष्णु को ट्रांसफर कर दिए. दिनेश धवन की हत्या करने के बाद अनु और नितिन अपनी आने वाली नई जिंदगी गुजारने के हसीन सपने देख रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर उन के सपनों को चकनाचूर कर दिया. अनु को पहली फरवरी, 2021 को गिरफ्तार  करने के बाद अगले दिन पुलिस ने पहले अनु के प्रेमी नितिन तथा उस के दोस्तों विनीत, विष्णु, हरजीत और दीपक को भी गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

अवैध संबंध का नतीजा : भांजे संग मिलकर कर डाला पति का कत्ल

Rajasthan Crime News :  कभीकभी औरतें मौजमजे के चक्कर में अपनी गृहस्थी खुद ही उजाड़ लेती हैं. 4 बच्चों की मां किरण की घरगृहस्थी अच्छीखासी चल रही थी, लेकिन उस ने 18 वर्षीय भांजे शंभूदास को अपने प्रेमजाल में फांस लिया. इस का जो नतीजा निकला वह…

मंगलवार, 5 जनवरी 2021 का सूरज उदय ही हुआ था कि मूंडवा थाने में फोन द्वारा सूचना मिली के मूंडवा गांव के सरोवर के पास मंदिर से सटे घर में चारपाई पर सुरेश की लाश पड़ी है. सुरेश की रात में अज्ञात हत्यारों ने सोते समय धारदार हथियार से हत्या कर दी है. सूचना मिलते ही मूंडवा थानाप्रभारी बलदेवराम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे. घटनास्थल पास में ही था, इसलिए वह वहां 10 मिनट में ही पहुंच गए. वहां आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई थी. उन्हें हटा कर पुलिस मकान के अंदर पहुंची, जहां चारपाई पर मृतक सुरेश साद (35 वर्ष) की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. मृतक पुजारी परिवार से था.

खून के छींटे फर्श और दीवारों पर भी लगे थे. थानाप्रभारी बलदेवराम ने जांचपड़ताल और मौकामुआयना किया. घर की दीवारें काफी ऊंची थीं, इस कारण प्रथमदृष्टया ऐसा लग रहा था कि जिस ने भी हत्या की थी, वह दीवार फांद कर घर में नहीं आया था. तो क्या हत्या में घर के किसी सदस्य का हाथ है? अगर हाथ है तो वह कौन है और उस ने हत्या क्यों की? ये तमाम सवाल थानाप्रभारी के जेहन में आजा रहे थे. थानाप्रभारी बलदेवराम ने सुरेश साद हत्याकांड की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी. मामला मंदिर के पुजारी से जुड़ा था. ऐसे मामले में राजनीति बहुत जल्द शुरू हो जाती है.

इस कारण घटना की खबर मिलते ही एएसपी राजेश मीणा, सीओ विजय कुमार सांखला और एसपी (नागौर) श्वेता धनखड़ घटनास्थल पर आ पहुंचे. घटनास्थल पर पुलिस अधिकारियों ने मौकामुआयना किया और नागौर से एफएसएल की टीम और एमओबी टीम को मौके पर बुला कर साक्ष्य इकट्ठा किए. पुलिस टीम ने मृतक के घर वालों से पूछताछ की. पूछताछ में घर वालों ने बताया कि सुरेश रात में पशुओं को चारा खिलाने गया था. रात में वह चारा खिलाने के बाद बरामदे में चारपाई पर आ कर सो गया. अगली सुबह 5 जनवरी को जब मृतक सुरेश की पत्नी किरण ने आ कर पति को आवाज दी तो कोई जवाब नहीं मिला.

फिर वह किरण बरामदे में आई और जैसे ही चारपाई पर खून से लथपथ पति की लाश देखी तो वह रोनेचिल्लाने लगी. तब घर के अन्य सदस्य दौड़ कर आए. उन्होंने देखा कि सुरेश की खून से लथपथ लाश बिस्तर पर पड़ी थी. तब उन्होंने थाना मूंडवा में फोन कर खबर दी. इस के बाद मूंडवा थाना पुलिस घटनास्थल पर आई और जांच शुरू की. मृतक मंदिर में बने घर में रहता था. सुरेश के परिवार में उस की पत्नी किरण (30 साल) के अलावा 4 बच्चे थे. घटना वाली रात किरण कमरे में बच्चों के साथ सो रही थी जबकि सुरेश बाहर बरामदे में ही सोता था. एसपी श्वेता धनखड़ ने मृतक की पत्नी किरण से पूछा, ‘‘आप ने रात में क्या कोई चीख सुनी थी?’’

‘‘नहीं, मैं ने कुछ भी नहीं सुना.’’ किरण बोली.

मृतक के अन्य परिजनों से भी पूछताछ की गई. मगर सभी ने यही कहा कि उन्होंने कोई आवाज या खटका वगैरह नहीं सुना था. तब एसपी श्वेता धनखड़ ने पूछा, ‘‘किसी से कोई दुश्मनी थी क्या सुरेश की? किसी से कोई लड़ाईझगड़ा हुआ हो या किसी पर शक हो तो बताएं.’’

मृतक के परिजनों ने कहा कि मृतक शांत स्वभाव का था. उस की किसी से दुश्मनी नहीं थी. न ही किसी से उस का लड़ाईझगड़ा हुआ था. मृतक के परिजनों का कहना था कि उन्हें किसी पर शक नहीं है. कोई घर में आ कर सोते व्यक्ति को धारदार हथियार से मार कर चला गया और मृतक के बीवीबच्चे और भाई तथा अन्य सदस्यों को भनक तक नहीं लगी. घर की दीवार इतनी ऊंची थी कि उस पर चढ़ कर अंदर आना संभव नहीं था. न ही घर के चारों ओर की दीवारों के पास किसी के पैरों के निशान थे. अगर कोई दीवार पर चढ़ता तो उस के पदचिह्न जरूर होते. मगर पैरों के निशान नहीं थे. ऐसे में पुलिस अधिकारियों को मृतक के परिवार के लोगों पर शक हुआ कि हो न हो इस हत्याकांड में परिवार का कोई व्यक्ति शामिल है.

पुलिस टीम ने शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया. एफएसएल टीम ने साक्ष्य एकत्र किए. शव पर धारदार हथियार के 3-4 गहरे जख्म थे. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक का इंतजार करना था. पुलिस टीम ने मृतक के परिजनों सहित ग्रामीणों से भी पूछताछ की. हालांकि उस समय तक इस मामले में कोई सुराग हाथ नहीं लगा था. फिर भी पुलिस अधिकारी हत्याकांड के परदाफाश के लिए जीजान से जुटे थे. एसपी श्वेता धनखड़ ने एएसपी राजेश मीणा, डिप्टी विजय कुमार सांखला और मूंडवा थानाप्रभारी बलदेवराम को दिशानिर्देश दे कर कहा कि जल्द से जल्द हत्याकांड का परदाफाश कर हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए.

एसपी श्वेता धनखड़ दिशानिर्देश दे कर नागौर लौट गईं. पुलिस अधिकारियों का शक मृतक की पत्नी किरण पर था. इस का कारण था कि बरामदे के पास के कमरे में वह अपने चारों बच्चों के साथ सोई थी. सुरेश का मकान सुनसान इलाके में था, जहां शोरशराबा नहीं था. ऐसे में कोई आ कर हत्या कर दे और बरामदे से सटे कमरे में पता नहीं चले, यह असंभव था. इस कारण एकबार किरण पुलिस की निगाहों में आई तो उस की कुंडली खंगाली जाने लगी. सुरेश का शव पोस्टमार्टम के बाद उस के परिजनों को सौंप दिया गया. परिजनों ने उस का अंतिम संस्कार कर दिया. एसपी के निर्देश पर सुरेश साद हत्याकांड का परदाफाश करने के लिए एएसपी राजेश मीणा, सीओ विजय कुमार सांखला के नेतृत्व में थानाप्रभारी बलदेवराम सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने जांच शुरू की.

मृतक की पत्नी किरण साद के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई गई. साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. काल डिटेल्स से पता चला कि जोधपुर जिले के बनाड़ थाने के गांव दईकड़ा निवासी शंभूदास साद से किरण की दिन में कईकई बार घंटों तक बातें होती थीं. शंभूदास मृतक का भांजा था. पुलिस अधिकारियों को मुखबिर से भी सूचना मिल चुकी थी कि शंभूदास और किरण के अवैध संबंध हैं. बस फिर क्या था, पुलिस ने मृतक सुरेश के 21 साल के भांजे शंभूदास को पूछताछ के लिए दबोच लिया. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो पहले तो वह टालमटोल करता रहा मगर पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया कि मामी किरण से उस के अवैध संबंध हैं.

मामा सुरेश को उन के संबंधों पर शक हो गया था. इस कारण वह मामीभांजे के संबंधों के बीच रोड़ा बनने लगा था. इस कारण उन दोनों ने योजनानुसार उस की हत्या कर दी. जुर्म कबूल करते ही पुलिस ने किरण को भी हिरासत में ले लिया और पूछताछ की. किरण पहले तो मना करती रही मगर जब उसे बताया गया कि शंभूदास ने सब कुछ बता दिया है तो वह टूट गई और उस ने भी अपना जुर्म कबूल लिया कि नाणदे (भांजे) के साथ उस के अवैध संबंध थे. तब पुलिस ने मृतक सुरेश साद के भाई की रिपोर्ट पर सुरेश की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और हत्यारोपी शंभूदास और किरण को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने शंभूदास और किरण को 8 जनवरी, 2020 को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया और कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई वह इस प्रकार से है—

राजस्थान के नागौर जिले के अंतर्गत एक कस्बा मूंडवा आता है. मूंडवा के छोर पर तालाब है, जहां मंदिर बना है. इस मंदिर के पुजारी साद परिवार के लोग हैं. इस साद परिवार में सुरेश साद थे. सुरेश साद की शादी करीब 12 साल पहले किरण से हुई थी. सुरेश मंदिर में पुजारी का काम करने के अलावा पशुधन भी रखता था. पशुधन के अलावा वह गांव में यजमानों के घर से अनाज व आटा भी लाता था. इस से उस के परिवार की गुजरबसर आराम से होती थी. सुरेश साद सीधासादा व सरल स्वभाव का व्यक्ति था. वह अपनी पूजापाठ व गृहस्थी में मस्त था. समय के साथ सुरेश की पत्नी किरण 4 बच्चों की मां बन गई थी. 4 बच्चे पैदा करने के बाद भी 30 साल की किरण की आकांक्षाएं अब भी जवान थीं.

सुरेश की उम्र 35 साल के आसपास थी. वह दिन भर पूजापाठ के अलावा पशुओं में खटता था और थकामांदा रात को आ कर बिस्तर पर सो जाता और खर्राटे भरने लगता. जबकि किरण शारीरिक सुख के लिए तड़प कर रह जाती थी. ऐसे में करीब ढाईतीन साल पहले जब शंभूदास अपनी ननिहाल मूंडवा आया तो वह मामी किरण की आंखों को भा गया. शंभूदास भी 18 साल का था. वह इंटरनेट पर अश्लील फिल्में देख कर औरत का सामीप्य पाने को आतुर था. ऐसे में जब उस की निगाह सांवलीसलोनी मामी किरण पर पड़ी तो वह उस का दीवाना हो गया. वह मामी पर लार टपकाने लगा.

मामी भी कोई नादान नहीं थी कि नाणदा (भांजे) के व्यवहार को न समझती. शंभूदास मामी के शरीर को छूने की कोशिश करता. सुरेश एक रोज बाहर गया था. उस रोज रात में एक ही कमरे में सो रहे शंभूदास और किरण मामी के बीच शारीरिक संबंधों की नींव पड़ गई. उस रात शंभूदास और किरण ने जी भर कर हसरतें पूरी कीं. किरण को कई साल बाद उस रात शारीरिक सुख की तृप्ति मिली थी. वह शंभूदास के पौरुष की कायल हो गई. वे दोनों अपना मामीभांजे का पवित्र रिश्ता शर्मसार कर बैठे थे. एक बार वासना के गर्त में डूबे तो उस में वक्त के साथ डूबते ही चले गए. शंभूदास अकसर ननिहाल के चक्कर काटने लगा. ननिहाल आने का मकसद सिर्फ मामी किरण थी. दोनों मौका मिलते ही हसरतें पूरी कर लेते.

शंभूदास का ननिहाल था. मगर जब वह महीने में 3-4 बार आने लगा तो सुरेश को थोड़ा अजीब लगा. एक दिन उस ने कहा, ‘‘शंभू, कुछ कामधंधा करो. अब तुम बच्चे नहीं हो, जो गाहेबगाहे यहां चले आते हो. बहन और बहनोई सा को कुछ कमा कर दो. वे कितने दिन तक तुम सब का पेट भरेंगे.’’ मामा सुरेश की बात शंभू को कांटे की तरह चुभ गई. मगर वह कुछ बोला नहीं. इस के बाद शंभूदास महीने में एक बार आने लगा. किरण उसे फोन कर के कहती कि मामा की बात का बुरा नहीं मानो, वह ऐसे ही हैं. तुम्हारे बगैर मैं जल बिन मछली की तरह तड़पती हूं. आ कर मेरी तड़प शांत तो किया करो. यह तनमन सब तुम्हारा है. ऐसे में शंभूदास को आना ही पड़ता था. उस का मन तो मामी को छोड़ने का होता ही नहीं था. मगर बिछुड़ने की मजबूरी थी.

इस कारण मन मार कर दोनों को जुदाई सहनी पड़ती थी. सुरेश सीधासादा जरूर था मगर वह नासमझ नहीं था. वह अपने भांजे शंभू के आने पर पत्नी के चेहरे पर खुशी की लकीरें देखता था. शंभू के जाने पर किरण का चेहरा मुरझा जाता था. तब सुरेश को इन के संबंधों पर शक होने लगा. अगली बार जब शंभूदास ननिहाल आया तो सुरेश साद ने वह सब अपनी आंखों से देख लिया जिस का उसे शक था. सुरेश ने किरण और भांजे शंभूदास को रंगरलियां मनाते देख लिया. पत्नी के इस रूप को देख कर सुरेश हतप्रभ रह गया. शंभू के आने पर पत्नी के चेहरे की खुशी का यह राज है, जान कर वह परेशान हो गया. वह करे तो क्या? अगर बात खुली तो जगहंसाई होगी.

सोचविचार कर सुरेश ने किरण से एकांत में कहा, ‘‘अपने जैसा शंभू को भी बना दिया. वह तेरे बेटे जैसा है. उस के साथ रंगरलियां मनाने से पहले तू मर क्यों नहीं गई. अगर आज के बाद तू शंभू से मिली तो मैं तुझे जान से मार दूंगा.’’

सुन कर किरण के पैरों तले से जमीन सरक गई. वह नजरें नीची किए जमीन कुरेदती रही. उस ने पति से अपने किए की माफी मांगी और कहा कि वह अब शंभू से कभी नहीं मिलेगी. उस का यहां आना बंद करा देगी. किरण ने त्रियाचरित्र दिखाया तो भोलाभाला सुरेश समझा कि वह सुधर जाएगी. उस ने बीवी को माफ कर दिया. मगर यह सुरेश की गलतफहमी थी. किरण ने शंभू को बता दिया कि उस के मामा ने उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया है. वह सचेत रहे. शंभू और किरण एकदूसरे के सामीप्य को तरस उठे. सुरेश उन्हें राह का कांटा लगा. उसे हटाए बिना वे मिल नहीं सकते थे. ऐसे में दोनों ने योजना बना ली. योजना यह थी कि शंभूदास छिप कर कुल्हाड़ी ले कर किरण के घर आ कर नीचे वाले कमरे में छिप जाएगा.

रात में सुरेश बरामदे में ही सोता था. सुरेश को नींद आने पर किरण खाली गिलास जमीन पर गिराएगी. यह इशारा मिलते ही शंभूदास सो रहे मामा सुरेश साद को कुल्हाड़ी से मार देगा और रात के अंधेरे में वापस चला जाएगा. मामा के रास्ते से हटने के बाद उन दोनों का मिलन रोकने वाला कोई नहीं होगा. साजिश के तहत शंभूदास 4 जनवरी, 2021 को शाम होते ही कुल्हाड़ी ले कर किरण के घर पहुंच गया. किरण ने उसे सारी योजना समझा कर नीचे कमरे में छिपा दिया. उस समय सुरेश पशुओं को चारा डालने गया हुआ था. चारा डाल कर सुरेश घर लौटा और फिर खाना खा कर फिर से पशु देखने गया. उस के बाद आ कर बरामदे में सो गया.

रात के 12 बजे किरण ने खाली गिलास नीचे पटका. शंभूदास के लिए यह एक इशारा था. इशारा मिलते ही सधे कदमों से शंभू कमरे से निकला और बरामदे में आ गया. उस समय सुरेश गहरी नींद में था. पलक झपकने की देर में शंभूदास ने कुल्हाड़ी का वार सो रहे मामा सुरेश पर किया. उस ने एक के बाद एक 4 वार सुरेश पर किए. खून का फव्वारा फूट पड़ा. वह मौत की नींद सो गया. शंभूदास अपना काम कर के चला गया. सुबह होने पर किरण ने योजना के अनुसार उठ कर बरामदे में जा कर रोनाधोना शुरू किया. तब घर के अन्य लोग वहां आए. फिर मूंडवा थाने में सूचना दी गई. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची व मौका मुआयना किया.

रिमांड अवधि के दौरान शंभूदास से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी, खून सने कपड़े और मोबाइल भी बरामद कर लिया गया. एसपी श्वेता धनखड़ ने सुरेश साद हत्याकांड का खुलासा करते हुए प्रैसवार्ता की. रिमांड अवधि पूरी होने पर शंभूदास व किरण को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.