अपना ही तमाशा बनाने वाली एक लड़की : भाग 4

यह कह कर ऋषिराज वहां से चला गया. उस के जाने के बाद उर्वशी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया था. उर्वशी को एमएनआईटी छोड़ने के बाद ऋषिराज अपने फ्लैट पर पहुंचा और सामान समेट कर कमरे को खाली कर के फरार हो गया.

शुरुआती पूछताछ में उर्वशी ऋषिराज के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार करती रही, लेकिन जब मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसे पकड़ कर दोनों का आमनासामना कराया गया तो उर्वशी ने सारा सच उगल दिया.

पूछताछ में पता चला कि दोनों ब्लैकमेलिंग करने के लिए पहले युवकों को ढूंढते थे और फिर पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे कर उन से रकम ऐंठते थे. इस मामले में उर्वशी ने रिपोर्ट दर्ज कराते समय संदीप और ब्रजेश का नाम लिया था.

संदीप ने उर्वशी से उस की सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे. लेकिन संदीप से उर्वशी को कुछ नहीं मिला तो उस ने पुलिस के सामने संदीप का नाम ले लिया. संदीप खुद को बैंक मैनेजर का लड़का बताता था, इसलिए उर्वशी को उस से मोटी रकम मिलने की उम्मीद थी.

संदीप लांबा को जब इस षडयंत्र का पता चला तो उस ने जवाहर सर्किल थाने में खुद के साथ ब्लैकमेलिंग व आपराधिक षडयंत्र की लिखित रिपोर्ट दी. जांच में यह भी सामने आया कि उर्वशी ब्रजेश से भी पहले से ही अच्छी तरह परिचित थी. उन की फोन पर बातें होती रहती थीं. ऋषिराज ने ही ब्रजेश को उर्वशी से मिलवाया था. उर्वशी ब्रजेश को फोन कर के बुलाती थी, लेकिन वह उन के झांसे में नहीं आया.

पुलिस का कहना था कि ऋषिराज मीणा ने उर्वशी के साथ मिल कर लोगों को दुष्कर्म के केस में फंसाने की धमकी दे कर उन्हें ब्लैकमेल कर के मोटी रकम ऐंठने की योजना बनाई थी. ऋषिराज संदीप और ब्रजेश से करीब 5 लाख रुपए में सौदा करना चाहता था. इन पैसों से वह अपना कोई व्यापार करना चाहता था.

पुलिस ने षडयंत्र रच कर गैंगरेप की मनगढं़त कहानी बना कर झूठा मुकदमा दर्ज कराने, अवैध व फरजी आईडी से अलगअलग सिम व मोबाइल रखने और ब्लैकमेलिंग कर के धन ऐंठने के आरोप में उर्वशी और ऋषिराज मीणा को 13 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने इन के कब्जे से 6 मोबाइल फोन और 15 सिम बरामद किए. ऋषिराज मीणा सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर थाना इलाके के बढोद गांव के रहने वाले रामफल मीणा का बेटा था. उस के खिलाफ चोरी व गबन के 2 मामले पहले से दर्ज हैं.

पुलिस जांच में सामने आया है कि उर्वशी के जयपुर आने के बाद से ऋषिराज उस के साथ रिलेशनशिप में रह रहा था. उस ने लोगों को फंसाने के लिए घटना से 20 दिनों पहले ही प्रेमनगर में 8 हजार रुपए महीने पर किराए का फ्लैट लिया था. वह जल्दी ही उर्वशी से शादी करना चाहता था और उर्वशी के माध्यम से लोगों को दुष्कर्म के केसों में फंसा कर ब्लैकमेल करने के बाद मोटी रकम ऐंठ कर पैसे वाला बनना चाहता था.

इस के लिए उस ने उर्वशी का ब्रेनवाश भी कर दिया था. उर्वशी भी सहयोग करने के लिए तैयार हो गई थी. जांचपड़ताल में यह भी सामने आया है कि ऋषिराज और उर्वशी मिल कर आगरा और मैनपुरी में ब्लैकमेलिंग की 5 वारदात कर चुके थे. उर्वशी जब काशीपुर छोड़ कर आगरा आ गई थी तो ऋषिराज उस से मिलने आगरा जाया करता था.

पुलिस ने 14 जनवरी को ऋषिराज व उर्वशी को मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर के एक दिन के रिमांड पर लिया. पूछताछ में पता चला कि उर्वशी और उस के पिता के 4 बैंक खातों में करीब 5 लाख रुपए की रकम जमा है. पुलिस को शक है कि यह राशि ब्लैकमेलिंग की है.

उर्वशी ने इस रकम के बारे में पुलिस को बताया कि उस के पिता ने गांव में जमीन बेची थी, जबकि मैनपुरी से पुलिस को पता चला कि उर्वशी के पिता ने अभी तक कोई जमीन नहीं बेची है. उर्वशी के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि बैंक खातों में 5 लाख रुपए जमा कर सके. इसलिए पुलिस इस रकम के बारे में भी जांच कर रही है.

पुलिस ने रिमांड अवधि पूरी होने पर 15 जनवरी को दोनों आरोपियों को फिर मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. मजिस्ट्रैट ने ऋषिराज व उर्वशी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है. पुलिस उर्वशी की ओर से सदर थाने में दर्ज कराए गए मामले और जवाहर सर्किल थाने में संदीप लांबा की ओर से दर्ज कराए गए मामले की जांचपड़ताल कर रही है.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, उर्वशी परिवर्तित नाम है.

संत आसाराम : जिस ने आस्था को सब से बड़ी चोट पहुंचाई

17 अप्रैल, 1941 को बंटवारे से पहले के भारत के नवाबशाह जिले के बेराणी गांव, जो अब पाकिस्तान में है, वहां आसूमल सिरूमलानी का जन्म हुआ था. उस की मां का नाम महंगीबा एवं पिता का नाम थाऊमल सिरूमलानी था.

1947 में भारतपाक विभाजन के समय वह और उस के परिवार के सभी लोग भारत के गुजरात राज्य के अहमदाबाद में बस गए. धनवैभव सब कुछ छूट जाने के कारण परिवार आर्थिक संकट में फंस गया.

अहमदाबाद आने के बाद आजीविका के लिए थाऊमल ने शक्कर बेचने का धंधा शुरू किया. पिता के निधन के बाद, अपनी मां से ध्यान और आध्यात्मिकता की शिक्षा प्राप्त कर आसूमल ने घर छोड़ दिया और देश भ्रमण पर निकल गया. भ्रमण करतेकरते वह स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के आश्रम नैनीताल पहुंच गए. नैनीताल में गुरु से दीक्षा लेने के बाद गुरु ने आसूमल को नया नाम दिया आसाराम.

इस के बाद आसाराम घूमघूम कर आध्यात्मिक प्रवचन के साथसाथ स्वयं भी गुरुदीक्षा देने लगा. उस के सत्संग में श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचने लगे. आसाराम बापू पहली बार अगस्त, 2013 में कानून के शिकंजे में फंसा, जब उस के ऊपर जोधपुर में उस के ही आश्रम में 16 साल की एक लड़की के साथ अप्राकृतिक दुराचार के आरोप लगे.

लड़की के पिता ने दिल्ली जा कर पुलिस में इस कांड की रिपोर्ट दर्ज कराई. बाद में लड़की का बयान दर्ज कर सारा मामला राजस्थान पुलिस को ट्रांसफर कर दिया.

आसाराम को पूछताछ के लिए 31 अगस्त 2013 तक का समय देते हुए सम्मन जारी किया गया. इस के बावजूद जब वह हाजिर नहीं हुआ तो दिल्ली पुलिस ने उस के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 376 (बलात्कार), 506 (आपराधिक हथकंडे) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने हेतु जोधपुर की अदालत में सारा मामला भेज दिया.

फिर भी आसाराम गिरफ्तारी से बचने के उपाय करता रहा. पहली सितंबर 2013 को राजस्थान पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार कर लिया . इस मामले में 25 अप्रैल, 2018 को आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

साबरमती नदी के किनारे एक झोपड़ी से शुरुआत करने से ले कर देश और दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम बनाने वाले आसाराम ने 4 दशक में 10,000 करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा कर लिया था. आसाराम बापू को अब तक दुष्कर्म के 2 मामलों में अदालत से सजा मिल चुकी है.

अध्यात्म यूनिवर्सिटी के नाम पर अय्याशी का घिनौना सच 

जिन दिनों देश में धर्म और अध्यात्म के नाम पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम के पाखंड और बड़ी संख्या  में महिलाओं के यौनशोषण की गूंज सुनी जा रही थी. उसी वक्त देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसे बाबा के रंगीन किस्से सामने आ रहे थे, जो महिलाओं को अध्यात्म दीक्षा के नाम पर उन का यौन शोषण करता था.

वीरेंद्र देव दीक्षित नाम के इस बाबा के आश्रमों से 190 नाबालिग व बालिग लड़कियों और महिलाओं को मुक्त  कराया गया, जिन्हें अध्यात्म के नाम पर यौनशोषण का शिकार बनाया गया था.

दिल्ली के रोहिणी, नांगलोई, द्वारका जैसे इलाकों में बड़े भूभाग पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से बने इन आश्रमों के अलावा देश के करीब 9 राज्यों में इस रंगीनमिजाज बाबा के 80 आश्रम थे.

वीरेंद्र देव दीक्षित उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद जिले के गांव चौधरियान का रहने वाला है. 1975 में वीरेंद्र देव का अपने पिता से किसी बात को ले कर विवाद हो गया था.

इस से नाराज हो कर वह घर से निकल गया. इस के बाद उस ने गुजरात यूनिवर्सिटी में संस्कृत में शोध शुरू किया. बाद में वह राजस्थान के माउंट आबू में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़ गया, लेकिन जल्दी  ही उसे वहां से भगा दिया गया.

1984 में पिता की मृत्यु के बाद वीरेंद्र देव घर लौटा तो अपने पैतृक मकान में कुछ स्थानीय लोगों के सहयोग से आध्यात्मिक कार्यक्रम शुरू किया. कुछ समय बाद ही उस ने आश्रम का निर्माण कराया.

यह आश्रम पहली बार 1998 में तब चर्चा में आया जब 3 अलगअलग राज्यों के लोगों की शिकायतों पर पुलिस ने 3 लड़कियों को बरामद कर उसे व उस के कई सेवादारों को गिरफ्तार किया. इस के बाद उस ने खुद को बाबा के तौर पर स्थापित किया और देशभर में 80 आश्रम खोले.

12 नवंबर को यह मामला तब सामने आया, जब राजस्थान के झुंझनूं व दिल्ली के 2 परिवारों ने रोहिणी के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पहुंच कर हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि उन की बेटी वहां जबरन कैद है और उन के साथ सैक्सुअल हिंसा होती है.

मामला बढ़ा तो फाउंडेशन फौर सोशल एम्पावरमेंट नाम के एनजीओ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आश्रम के क्रियाकलापों की जांच की मांग की. हाईकोर्ट के आदेश पर आश्रम की छानबीन के लिए बनी कमेटी में दिल्ली पुलिस के अलावा दिल्ली महिला आयोग और शिकायकर्ता पक्ष तथा कुछ अन्य एजेंसियों के सदस्यों को भी शामिल किया गया.

21 दिसंबर से छापेमारी शुरू हुई तो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की सच्चाई सामने आई. दिल्ली के 8 आश्रमों से शुरू हुई जांच दूसरे राज्यों तक पहुंच गई. हर जगह एक ही शिकायत मिली कि आश्रमों में लड़कियों का यौन शोषण होता था. बाबा खुद उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाता था.

हाईकोर्ट ने अपराध का दायरा बढ़ता देख इस मामले की छानबीन और वीरेंद्र देव को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया.

पैसे का गुमान : सस्ती दोस्ती की मिली सजा – भाग 3

4 साल पहले मुरादाबाद के रहने वाले नंदकिशोर से कुलदीप की मुलाकात एक वैवाहिक आयोजन के दौरान हुई थी. उस के बाद से दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे.

वैसे नंदकिशोर उर्फ नंदू चाऊ की बस्ती लाइनपार का रहने वाला था. उस के पिता मुरादाबाद रेलवे में टैक्नीशियन के पद पर थे, जो रिटायर हो चुके थे. नंदकिशोर खुद एमटेक की पढ़ाई पूरी कर एक दवा कंपनी में मैडिकल रिप्रजेंटेटिव का काम करता था. उस ने एक दवा कंपनी की फ्रैंचाइजी भी ले रखी थी और दवाओं का कारोबार शुरू किया था.

इस काम को शुरू करने के लिए उस ने 20 लाख का गोल्ड लोन ले रखा था. संयोग से लौकडाउन में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिस कारण वह लोन की किस्त नहीं जमा कर पाया था.

इस वजह से वह काफी परेशान चल रहा था. वह अपनी सारी तकलीफें कुलदीप को बताया करता था.

उस ने अपने कर्ज और किस्त नहीं जमा करने की मुसीबत भी बताई थी. उसे पता था कि कुलदीप का कारोबार अच्छी तरह से चल रहा है. इसे देखते हुए उस ने मदद के लिए उस के सामने हाथ फैला दिया.

उस से 65 हजार रुपए उधार मांगे और उसे विश्वास दिलाया कि पैसे जल्द वापस कर देगा. ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का समय लगेगा. कुलदीप ने पैसे देने से इनकार तो नहीं किया, मगर वह कई दिनों तक उसे टालता रहा.

नंदकिशोर के बारबार कहने पर कुलदीप बोला, ‘‘यार तू तो पहले से ही कर्जदार है तो मेरा 65 हजार कैसे वापस कर पाएगा? और फिर तेरी इतनी औकात अभी नहीं है.’’

यह सुन कर पहले से ही टूट चुका नंदकिशोर बहुत मायूस हो गया. उस ने केवल इतना कहा कि यदि तुम्हें नहीं देना था तो पहले दिन ही मना कर देता.

यहां तक तो ठीक था. उन की दोस्ती पर जरा भी फर्क नहीं पड़ा. लेकिन कुलदीप बारबार उस के जले पर नमक छिड़कता रहा. एक दिन तो कुलदीप ने हद ही कर दी. एक पार्टी में नंदकिशोर की कई लोगों के सामने बेइज्जती कर दी.

पार्टी छोटेबड़े कारोबारियों की थी. इस में शामिल लोगों की अपनीअपनी साख थी. कौन कितनी हैसियत वाला है और कौन किस कदर भीतर से खोखला, इसे कोई नहीं जानता था. कहने का मतलब यह था कि सभी एकदूसरे की नजर में अच्छी हैसियत वाले थे.

पार्टी के दरम्यान कोरोना काल में कई तरह के बिजनैस में नुकसान होने की बात छिड़ी, तब कुलदीप ने नंदकिशोर पर ही निशाना साध दिया.

पहले तो उस ने सब के सामने कह दिया कि वह लाखों का कर्जदार बना हुआ है. यह बात कुछ लोगों को ही मालूम थी. इस भारी बेइज्जती से नंदकिशोर तिलमिला गया. उस वक्त तो खून का घूंट पी कर रह गया.

ऐसा कुलदीप ने उस के साथ कई बार किया. नंदकिशोर ने अपना गुनाह कुबूल करते हुए पुलिस को बताया कि कुलदीप पैसे के घमंड में चूर था. बड़ेबड़े दावे करना, बेइज्ज्ती करना उस के लिए मनोरंजन का साधन बन गया था.

उस ने बताया कि इस से वह काफी तंग आ चुका था. तभी उस ने निर्णय लिया वह कुलदीप को सबक जरूर सिखाएगा. उस ने कसम खाई और योजना बना कर उस में अपने बुआ के लड़के कर्मवीर उर्फ भोलू और रणबीर उर्फ नन्हे को शामिल  कर लिया. कर्मवीर और रणबीर दोनों सगे भाई थे.

योजना के अनुसार, कुलदीप की हत्या से कुछ दिन पहले नन्हे को बताया कि कुलदीप ने हाल में ही अपनी पोलो कार बेची है. उस से मिले 4 लाख रुपए उस के पास हैं. पैसा हड़पने में मदद करने पर उसे भी हिस्सेदार बनाया जाएगा. नन्हे इस के लिए तैयार हो गया.

नंदकिशोर ने कुलदीप को अच्छी हालत में मारुति स्विफ्ट कार दिलवाने का सपना दिखाया. उसी कार को दिखाने के बहाने से वह 4 जून, 2021 को अपनी बाइक से कुलदीप को ले कर कांठ में डेंटल हौस्पिटल के सामने पहुंच गया.

वहां पहले से ही नन्हे और भोलू एंबुलेंस ले कर उस का इंतजार कर रहे थे. एंबुलेंस भोलू चलाता था. वहां उस ने कहा कि आज ही बिजनौर जा कर पेमेंट करनी होगी. कुलदीप उस की बातों में आ गया. उस के साथ एंबुलेंस में बैठ गया. रास्ते में नंदकिशोर ने शराब की एक बोतल खरीदी. आगे चल कर स्यौहारा कस्बे में गाड़ी रोक कर तीनों ने शराब पी.

कुलदीप जब शराब के नशे में धुत हो गया, तब नंदकिशोर ने उस के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस से बोला, ‘‘अगर वह अपनी जिंदगी बचाना चाहता है तो 4 लाख रुपए मंगवा ले.’’

मरता क्या न करता, कुलदीप ने अपनी पत्नी सुनीता को फोन कर पैसे दुकान पर मंगवा लिए. इधर नंदकिशोर ने कर्मवीर उर्फ भोलू को भेज कर दुकान से वह पैसे मंगवा लिए.

पैसा मिल जाने पर भी नंदकिशोर ने उसे नहीं छोड़ा. एंबुलेंस में औक्सीजन सिलेंडर का मीटर खोलने वाले औजार (स्पैनर) से उस ने कुलदीप के सिर पर कई वार कर दिए.

नशे की हालत में होने के कारण कुलदीप खुद को संभाल नहीं पाया. कुछ समय में ही उस की वहीं मौत हो गई.

बाद में कुलदीप की लाश को एंबुलेंस में डाल कर धामपुर, नगीना, नजीबाबाद और भी कई जगह ले कर घूमते रहे. अगले दिन 5 जून को रात के 8 बजे उन्होंने लाश को गंगाधरपुर के पर सड़क पर डाल कर दोनों मुरादाबाद वापस लौट आए.

मुरादाबाद पुलिस ने नंदकिशोर और उस के साथी से साढ़े 3 लाख रुपए बरामद कर लिए. पूछताछ में नंदकिशोर ने इस योजना में शामिल 2 और लोगों के नाम बताए. उस के बताए सुराग से एक पकड़ा गया, लेकिन रणबीर उर्फ नन्हे 50 हजार रुपए ले कर फरार हो चुका था.

बताते हैं कि कुलदीप के गले से हनुमान का 3 तोले का लौकेट भी गायब था. मुरादाबाद पुलिस ने 7 जून, 2021 को प्रैसवार्ता कर पूरी घटना की जानकारी दी.

 

सोनू पंजाबन : गोरी चमड़ी के कारोबार की बड़ी खिलाड़ी – भाग 3

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 2011 में प्रीति नाम की एक लड़की को खरीदने के आरोप में उसे 24 साल तक जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा मिलेगी, यह उस ने कभी नहीं सोचा था.

दरअसल, उन दिनों प्रीति 13 साल की थी. जब वह कोंडली में स्थित दिल्ली सरकार के स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ती थी. गरीब परिवार में जन्मी प्रीति के पिता एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे.

अभावों में पलीबढ़ी लेकिन सूरत व शरीर से बेहद खूबसूरत प्रीति की दोस्ती स्कूल आतेजाते संदीप बेलवाल से हो गई, जो उस से 4-5 साल बड़ा था.

संदीप कभी उसे कार तो कभी मोटरसाइकिल से घुमाने लगा. संदीप से प्रभावित होने के बाद प्रीति उस के प्यार में कुछ ऐसी दीवानी हो गई कि वह उस पर आंख बंद कर के भरोसा करने लगी.

एक दिन इसी विश्वास में प्रीति संदीप के साथ उस के जन्मदिन की पार्टी मनाने नजफगढ़ में उस की किसी सीमा आंटी के पास चली गई. बस यही उस के जीवन की सब से बड़ी भूल थी.

संदीप ने उस दिन कोल्डड्रिंक में उसे कोई मदहोश करने वाली दवा पिला कर उस की इज्जत को तारतार कर दिया. इतना ही नहीं वह उसे सीमा आंटी के पास एक लाख रुपए में बेच कर चला गया. बाद में उसे पता चला कि सीमा आंटी देहव्यापार करने वाली औरत थी और संदीप उस के साथ जुड़ा था.

इस के बाद शुरू हुआ प्रीति की जिंदगी में हर रोज होने वाले यौनशोषण का ऐसा सिलसिला जो कई साल तक चला.  सीमा आंटी ने करीब एक साल तक जबरन प्रीति से जिस्मफरोशी का धंधा कराने के बाद उसे एक दिन साउथ दिल्ली में रहने वाली सोनू पंजाबन के सुपुर्द कर दिया.

सोनू ने सीमा को कितने नोट दिए ये तो नहीं पता, लेकिन सोनू पंजाबन ने 3 महीने तक प्रीति को अपने कई ग्राहकों के पास भेजा और उस की मोटी कीमत वसूली. लेकिन 3 महीने बाद वह उसे अपने साथ लखनऊ ले गई. यहां उस ने लाला नाम के एक कालगर्ल सरगना के हवाले कर दिया.

लाला ने 2 साल तक न जाने कितने लोगों से उस के जिस्म का सौदा किया. लाला ने इस के बाद प्रीति को दिल्ली में रहने वाली मधु आंटी को बेच दिया.

वहीं पर प्रीति की मुलाकात हरियाणा के रहने वाले सतपाल व राजपाल हुई दोनों रिश्ते में सगे भाई थे. लेकिन दोनों ही जिस्मफरोशी के धंधे के दलाल थे.

एक दिन राजपाल उसे मधु आंटी के चंगुल से मुक्त कराने का झांसा दे कर अपने साथ अपने गांव पानीपत ले गया, जहां 60 साल के राजपाल ने उस से जबरन शादी कर के अपनी बीवी के रूप में घर में रख लिया.

राजपाल पहले से शादीशुदा था. परिवार में 3 बेटियां और 2 बेटे थे. एक बेटे और 2 बेटियों की शादी हो चुकी थी. इस बीच प्रीति गर्भवती हो गई तो राजपाल ने शहर ले जा कर उस का जबरन गर्भपात करवा दिया. अपने गर्भपात के बाद प्रीति के मन में राजपाल के लिए भी खटास भर गई.

बस इसी के बाद एक दिन प्रीति राजपाल की गैरमौजूदगी में उस के घर से निकल भागी और पानीपत से दिल्ली जाने वाली बस में बैठ कर नजफगढ़ पहुंच गई. यह 28 अगस्त, 2014 की बात है जब नजफगढ़ पुलिस ने प्रीति को बदहाल हालत में बरामद किया और मदद करने के लिए उसे थाने ले आई.

वहीं पर प्रीति ने पुलिस को 3 साल में अपने साथ हुए उत्पीड़न की सारी कहानी सुनाई.

नजफगढ़ पुलिस ने प्रीति के बयान पर आईपीसी की धारा 363, 366, 342, 370, 370, 372, 373, 376, 34, 120बी और पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया.

प्रीति के बयान मजिस्ट्रैट के सामने दर्ज कर पुलिस ने उसे वूमन शेल्टर होम भेज दिया, जहां उस की काउंसलिंग होने लगी. इधर प्रीति के बयान के आधार पर जब पुलिस पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि 2011 में पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी.

सुराग लगातेलगाते पुलिस प्रीति के परिजनों तक पहुंच गई और बाद में उसे कोर्ट के आदेश से उस के मातापिता को सौंप दिया गया.

पिछले 4 सालों में प्रीति जिस्मफरोशी की दुनिया में रहने के कारण नशे की आदी हो चुकी थी. इसलिए परिवार के बीच आ कर बंदिशों में रहने के कारण जल्द ही उस का दम घुटने लगा. अगस्त, 2014 में ही एक दिन प्रीति अपने घर से किसी को बिना कुछ बताए फिर से गायब हो गई.

बेटी के दोबारा गायब होने से परिवार परेशान हो गया. प्रीति के पिता ने नजफगढ़ पुलिस से संपर्क कर जब प्रीति के फिर से गायब होने व उस के किडनैप होने की आशंका जताई.

इस के बाद नजफगढ़ पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी. लेकिन पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी प्रीति का कोई सुराग नहीं मिला.

वक्त धीरेधीरे गुजरने लगा और प्रीति का रहस्यमय ढंग से गायब हो जाना एक मिस्ट्री बन गया. अगस्त 2017 में 3 साल बीत जाने के बाद तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने इस मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी.

जिस के बाद साइबर सेल के एसीपी संदीप लांबा की देखरेख में एक टीम बनाई गई. टीम में इंसपेक्टर उपेंद्र सिंह और लेडी सबइंसपेक्टर पंकज नेगी को शामिल किया गया.

इस टीम ने लंबी कवायद की और 23 नवंबर, 2017 को प्रीति को पानीपत के उस पार्लर से बरामद कर लिया, जहां वह नौकरी करती थी.

इस के बाद क्राइम ब्रांच ने एकएक कर उन लोगों को गिरफ्तार करने का सिलसिला शुरू किया जो प्रीति की जिंदगी को बरबाद करने के जिम्मेदार थे. पुलिस ने इस मामले में 2018 में सोनू पंजाबन के साथ संदीप बेदवाल को गिरफ्तार किया. उस के बाद राजपाल व सतपाल को गिरफ्तार किया.

बाद में लखनऊ से लाला नाम के दलाल की गिरफ्तारी की गई. इसी मामले में तेजी से सुनवाई करते हुए द्वारका कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सोनू पंजाबन को 24 साल की सजा सुनाई.

देरसबेर सोनू पंजाबन अपनी सजा के खिलाफ अपील के बाद अदालत से जमानत ले कर सलाखों से बाहर आ ही जाएगी, लेकिन उस के बाद जिस्मफरोशी के कारोबार में उस की क्या भूमिका होगी, यह देखना होगा.द्य

—कथा पुलिस की जांच पर आधारित

लुधियाना के होटल में बिकता जिस्म

शहर में चल रहे जिस्मफरोशी के धंधे पर लगातार लुधियाना पुलिस शिकंजा कस रही है, लेकिन बारबार ऐसे मामले सामने आ ही जाते हैं. ऐसे ही एक मामले में एक मकान पर छापेमारी कर एक महिला को गिरफ्तार किया. वह ग्राहकों और लड़कियों को अपने घर पर ही बुलाती थी.

जबकि दूसरे मामले में 2 सितंबर, 2021 को पुलिस ने लुधियाना के बस स्टैंड के पास स्थित होटल पार्क ब्लू में रेड कर के वहां पर चल रहे देह व्यापार के अड्डे पर छापेमारी की. मौके पर पहुंची पुलिस पार्टी और सीआईए-2 टीम ने वहां पर ऐशपरस्ती कर रहे 6 युवक व 6 युवतियों को गिरफ्तार किया. मौका देख कर होटल का मालिक व मैनेजर पुलिस को गच्चा दे कर फरार हो गए.

घटना 2 सितंबर को शाम करीब पौने 8 बजे की है. थाना डिवीजन नंबर 5 व सीआईए-2 टीम बस स्टैंड के आस पास स्थित होटलों में रुटीन जांच करने पहुंची थी. उस दौरान पुलिस ने कई होटलों में जा कर चैकिंग की.

वहां रह रहे लोगों का रिकौर्ड चैक किया. इसी बीच पुलिस की टीम जब होटल पार्क ब्लू में पहुंची तो उस के अलगअलग कमरों में 6 जोड़े आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए. जिन्हें साथ में आई महिला पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

करीब एक साल पहले भी इसी होटल में पुलिस ने दबिश दे कर वहां रंगरलियां मना रहे कई जोड़ों को गिरफ्तार किया था. लुधियाना ही नहीं पंजाब के जालंधर व अन्य शहरों में भी देह व्यापार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

लुधियाना पुलिस ऐसे मामलों में काफी तेजी से काररवाई कर रही है लेकिन जालंधर पुलिस ऐसे मामलों में ढीली साबित हो रही है. जालंधर में कई होटलों, गेस्ट हाउसों व अन्य स्थानों पर ऐसे गलत धंधे चल रहे हैं, पर पुलिस मूकदर्शक बनी तमाशा देखती रहती है.

आटा-साटा कुप्रथा में पिसी सुमन

सहयोग: मनीष व्यास

सुमन 3 भाइयों के बीच अकेली बहन थी, इसलिए वह घर में सभी की लाडली थी. वह पढ़ाईलिखाई में होशियार थी लेकिन पिता की मृत्यु हो जाने के बाद वह ग्रैजुएशन से आगे नहीं पढ़ सकी.

अन्य लड़कियों की तरह सुमन ने भी रंगीन ख्वाब देखे थे. उस की चाहत थी कि उसे भी सपनों का राजकुमार मिलेगा, जो सुंदर और बांका होने के साथ पढ़ालिखा और उस का हर तरह से खयाल रखने वाला होगा.

जवान होने पर सुमन का रूपसौंदर्य निखर आया था. उस की मोहक मुसकान देख कर देखने वाला एकटक उसे ताकता रह जाता था. सुमन चौधरी जाट थी. इसलिए उस के रिश्तेदारों और उस की बिरादरी के कई लोग अपने घर की बहू बनाने को लालायित हो उठे.

रिश्तेदार सुमन के लिए अच्छेअच्छे रिश्ते लाने लगे. मगर सुमन के चाचा व भाइयों ने ये रिश्ते लौटा दिए और रिश्तेदारों से कहा, ‘‘सुमन का रिश्ता तो बचपन में ही तय हो चुका है. बात पक्की हो रखी है आटासाटा प्रथा के तहत.’’

तब रिश्तेदार शांत बैठ गए. सुमन जब 19 बरस की हो गई थी तो आज से 2 साल पहले उस की शादी तय कर दी गई. सुमन की शादी गांव भूणी जिला नागौर के नेमाराम चौधरी से तय कर दी. सुमन उस वक्त नहीं जानती थी कि उस का पति न केवल मामूली सा पढ़ालिखा है बल्कि उम्र में भी उस से दोगुना है और वह बकरियां चराने वाला व खेती करने वाला मजदूर है.

सुमन के चाचा और भाइयों ने सुमन के बदले 4 शादियों की सौदेबाजी की. वैसे भी राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी लड़की का रिश्ता उस के परिजन ही तय करते हैं. परिजन लड़की का रिश्ता जिस युवक से कर देते हैं, उसी से लड़की को शादी करनी पड़ती है. लड़की को भले ही वह लड़का पसंद न हो, मगर परिजनों द्वारा किए गए रिश्ते को लड़की को निभाना ही होता है.

सुमन के बदले हुईं 4 शादियां

सुमन भी ग्रामीण परिवेश की शर्मीली लड़की थी. उस ने सोचा था कि उस की पढ़ाई और उस की सुंदरता के अनुरूप हमउम्र युवक से शादी तय की होगी, मगर जब नेमाराम शादी करने हेमपुरा आया और दुलहन बना कर सुमन को अपने साथ भूणी गांव ले गया, तब सुमन को अपने पति की असलियत पता चली.

सुमन ससुराल चली तो गई लेकिन अपने भाग्य को कोसने लगी. मगर अब क्या हो सकता था. वह चुप लगा गई. सुमन की 2 ननदों की शादी गांव लिचाना जिला नागौर में सुमन के भाइयों के सालों से की गई.

इस शादी के बाद सुमन के 2 भाई उस की ननदों की 2 ननदों से शादी कर अपने घर हेमपुरा ले आए. सुमन को अब जा कर आटासाटा के खेल के बारे में पूरा पता लगा था.

सुमन को उस के पति नेमाराम ने एक दिन कहा, ‘‘तुझ से शादी करने के लिए मैं ने अपनी 2 बहनें तुम्हारे भाइयों के 2 सालों से ब्याही हैं. और मेरी बहनों की 2 ननदें तुम्हारे भाइयों से ब्याही हैं. यानी तेरे बदले 4 शादियों की सौदेबाजी हुई है. अब समझ गई न कि तेरी जैसी ग्रैजुएट और सुंदर लड़की की मुझ गंवार व उम्र में दोगुने से शादी किस कारण की गई. तेरे कारण 4 घर और बसे हैं.’’

सुन कर सुमन को सारा माजरा समझ में आ गया. उस के सगे भाइयों ने अपना घर बसाने के लिए उस का सौदा किया था. वह टूट गई. उसे रिश्ते बेमानी लगने लगे. उस के सगे भाइयों और चाचाताऊ ने अपने फायदे के लिए उसे एक ऐसे व्यक्ति के पल्लू से बांध दिया था, जो उस के किसी तरह काबिल नहीं था.

सुमन ने अपने आसपास अपने जाट समाज के अलावा अन्य कई जातियों में आटासाटा कुप्रथा का कुरूप चेहरा देखा था. उस ने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि वह भी इस प्रथा के तहत ऐसे व्यक्ति से ब्याह दी जाएगी जो उस के लायक नहीं होगा.

सुमन ने सोचा कि वह तलाक ले कर अपनी मरजी से शादी कर लेगी. मगर जब उसे पता चला कि उस की शादी से पहले ही नेमाराम के घर वालों ने यह भी शर्त रखी थी कि अगर शादी के बाद सुमन ने नेमाराम से तलाक लिया तो उस के बदले में की गई चारों शादियां टूट जाएंगी.

सुमन के तलाक लेने पर सुमन की ननदें और भाभियां भी तलाक ले लेंगी. यानी सुमन की शादी टूटने पर 4 शादियां और टूट जाएंगी. इस कारण सुमन ने तलाक लेने का खयाल अपने मन से निकाल दिया. वह अपनी सुख की खातिर 4 परिवार नहीं बिखरने देना चाहती थी.

सुमन अपने जीवन में सामंजस्य बिठाने की कोशिश करने लगी. इस के अलावा वह कुछ कर भी नहीं सकती थी. समय का पहिया अपनी गति से घूम रहा था. सुमन की शादी को सवा साल हो गया था.

उन्हीं दिनों नेमाराम ने सुमन से एक दिन कहा, ‘‘मैं इराक काम करने जा रहा हूं.’’

सुन कर सुमन बोली, ‘‘आप 3-4 साल बाद आओगे. मैं अकेली कैसे जी सकूंगी. आप इराक मत जाओ. हम यहीं पर कोई कामधंधा देख लेंगे.’’

‘‘तुम समझती क्यों नहीं, बड़ी मुश्किल से नंबर आया है. मैं किसी हाल में नहीं रुक सकता और तुम अकेली कहां हो, भरापूरा परिवार है तो सही.’’ नेमाराम ने कहा.

‘‘तुम्हें इराक में भी मजदूरी ही करनी है तो फिर यहीं रह कर करो न. तुम जितना कमाओगे, मैं उसी में खुश रहूंगी.’’ सुमन बोली.

‘‘सुमन, तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारा पति परदेश में कमाने जा रहा है. यह सब मैं अपने घरपरिवार के लिए ही तो कर रहा हूं.’’ नेमाराम ने समझाया.

सुमन ने खूब मिन्नतें कीं मगर नेमाराम नहीं माना और करीब 8 महीने पहले वह इराक चला गया. सुमन भरी दुनिया में तनहा और अकेली रह गई. वह टूट गई और कुछ दिन बाद ससुराल से मायके हेमपुरा आ गई.

सुमन मायके में रह रही थी. उस ने ससुराल का रास्ता भुला दिया था. उस का पति इराक जा बैठा था. वह शादीशुदा हो कर भी मायके में बैठी थी. उस की मायके में अब पहले जैसी इज्जत भी नहीं थी. उस की भाभियां उस से सीधे मुंह बात नहीं करती थीं. भाई भी उस से पल्ला झाड़ने लगे थे.

सुमन का छोटा भाई जरूर उस का लाडला था. दोनों भाईबहन अपना दुखसुख आपस में जरूर बांट लेते थे.

सुमन ने मन ही मन विचार किया कि वह शादीशुदा हो कर मायके में कितने दिन गुजारेगी. पति जाने कब इराक से लौटेगा. उस के जीने की इच्छा खत्म हो गई थी.

वह दुनियादारी को समझ गई थी. रिश्तेनाते सब मतलब के हैं. मतलब निकलने के बाद कोई उसे पूछ नहीं रहा था.

कुप्रथा ने झकझोर दिया सुमन को

इसी दौरान वह 28-29 जून, 2021 की रात को घर के पास वाले कुएं में कूद गई. सुमन के कुएं में कूदने पर घरपरिवार में हड़कंप मच गया. गांव वालों ने नावां थाने में सूचना दी और सुमन को कुएं से निकाला. वह उसे अस्पताल ले गए. लेकिन डाक्टर ने सुमन को मृत घोषित कर दिया.

सुमन के चाचा तब नावां थाने पहुंचे और थानाप्रभारी धर्मेश दायमा को तहरीर दे कर बताया कि पति के इराक जाने के बाद सुमन मायके आ कर रहने लगी. पिछले 4-5 दिनों से वह मानसिक रोगी और पागलों जैसी हरकतें कर रही थी. आज उस ने घर के पास बने कुएं में कूद कर आत्महत्या कर ली.

थानाप्रभारी धर्मेश दायमा रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. गांव वालों से इस संबंध में बात करने के बाद वह अस्पताल पहुंचे और सुमन का पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया.

पुलिस इसे आत्महत्या मान कर जांच कर रही थी. वहीं परिजन सुमन को मानसिक रोगी व पागल बता कर आटासाटा के तहत हुई शादी की बात को दबाना चाहते थे.

मगर इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो गई. वह सुमन का सुसाइड नोट था, जो उस ने आटासाटा कुप्रथा के खिलाफ लिखा था. आत्महत्या करने से पहले उस ने उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था. उस ने उस में लिखा था—

मेरा नाम सुमन चौधरी है. मुझे पता है कि सुसाइड करना गलत है, पर सुसाइड करना चाहती हूं. मेरे मरने की वजह मेरा परिवार नहीं, पूरा समाज है, जिस ने आटासाटा नाम की कुप्रथा चला रखी है. इस में लड़कियों को जिंदा मौत मिलती है. लड़कियों ंको समाज के समझदार परिवार अपने लड़कों के बदले बेचते हैं.

समाज के लोगों की नजरों में तलाक लेना गलत है, परिवार के खिलाफ शादी करना गलत है तो फिर यह आटासाटा प्रथा भी गलत है. आज इस कुप्रथा के कारण हजारों लड़कियों की जिंदगी और परिवार बरबाद हो गए हैं.

इस कुप्रथा के कारण पढ़ीलिखी लड़कियों की जिंदगी खराब हो जाती है. इसी प्रथा के तहत 17 साल की लड़की की शादी 70 साल के बुजुर्ग से कर दी जाती है. केवल अपने स्वार्थ के कारण.

मैं चाहती हूं कि मेरी मौत के बाद यह बातें बनाने और मेरे परिवार वालों पर अंगुली उठाने के बजाय इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं. इस प्रथा को बंद करने के लिए शुरुआत करनी होगी. मेरी हरेक भाइयों को अपनी बहन की राखी की सौगंध, अपनी बहन की जिंदगी खराब कर के अपना घर न बसाएं.

आज इस प्रथा के कारण समाज की सोच इतनी खराब हो गई है कि लड़की के पैदा होते ही तय कर लेते हैं कि इस के बदले किस की शादी करानी है.

सुसाइड नोट में सुमन ने लिखा कि आज समाज के लोगों से मेरी हाथ जोड़ कर विनती है इस प्रथा को बंद कर दें. मेरे मरने की वजह समाज है. सजा देनी है तो उन को दें.

और मेरी इच्छा है कि मेरी लाश को अग्नि मेरा छोटा भाई दे और कोई नहीं. मेरा पति भी नहीं. मेरे इन विचारों को सभी लोग अपने परिवार वालों में समझाएं व स्टेटस लगाएं.

सुमन ने अपने पापा के लिए आई लव यू लिखा और साथ ही कहा कि इस प्रथा के खिलाफ जानकारी स्कूलकालेज की पुस्तकों तथा अखबारों में दें, जिस से कुछ की जिंदगी बचेगी तो मैं सोचूंगी कि मेरी जिंदगी किसी के काम आ गई.

नावां थानाप्रभारी धर्मेश दायमा कथा लिखने तक सुमन सुसाइड मामले की जांच कर रहे थे. सुमन ने सुसाइड नोट में समाज को ही अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है. उस ने व्यक्ति विशेष को मौत का जिम्मेदार नहीं बताया. इस कारण पुलिस भी इस मामले में कोई काररवाई कर पाएगी, यह लगता नहीं है.

जिंदा मौत है आटासाटा कुप्रथा

आटासाटा एक सामाजिक कुप्रथा है. इस के तहत किसी एक लड़की की शादी के बदले ससुराल पक्ष को भी अपने घर से एक लड़की की शादी उस के पीहर पक्ष में करानी होती है. इस में योग्यता और गुण नहीं बल्कि लड़की के बदले लड़की की सौदेबाजी होती है.

वर्तमान दौर में जब लड़कियों की बेहद कमी है तो कई समाज में इसे खुले तौर पर किया जाने लगा है. इस के चलते कई पढ़ीलिखी जवान लड़कियों की शादी अनपढ़ और उम्रदराज लोगों से कर दी जाती है. जिस के चलते सुमन जैसी अनेक लड़कियों की जिंदगी तबाह हो रही है.

सुमन के घर वाले उसे पागल और मानसिक बीमार भले ही अपने बचाव के लिए कह रहे हों लेकिन सुमन का सुसाइड नोट साफ इशारा कर रहा है कि वह आटासाटा कुप्रथा के चक्रव्यूह में ऐसी उलझी कि उसे अपनी मुक्ति के लिए मौत ही दिखी.

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में समाज की कई जातियों में फैली इस कुप्रथा के बारे में लेखक ने पड़ताल की तो सामने आया कि आटासाटा एक ऐसी कुप्रथा है जहां लड़कियों की 2 नहीं 3 से 4 परिवारों के बीच सौदेबाजी होती है. वह भी सिर्फ इसलिए ताकि उन के नाकारा और उम्रदराज बेटे की शादी हो जाए.

और उन के घरपरिवारों में दूसरे जो लड़के हैं, जिन की किसी कारणवश शादी नहीं हो पा रही है, उन की भी शादी हो जाए.

वैसे राजस्थान के ज्यादातर गांवों में इस कुप्रथा का चलन है. ऐसे में पढ़ीलिखी लड़कियों की जिंदगी भी खराब हो रही है. इस कुप्रथा का एक दर्दनाक सच यह भी है कि बेटी होने से पहले ही उस का रिश्ता तय कर दिया जाता है.

कई बार ऐसा भी होता है कि बेटी नहीं होती तो रिश्तेदार की बेटी को दबावपूर्वक दिलाया जाता है. इस शर्त पर कि उन्हें भी वे बेटी दिलाएंगे.

ज्यादातर मामलों में लड़के और लड़की के बीच उम्र को भी नजरअंदाज कर  दिया जाता है और 21 साल की लड़की  45-50 साल के व्यक्ति से ब्याह दी जाती है.

कई मामलों में घर में बड़ी बहन होती है और भाई छोटा होता है. दोनों में 7-8 साल का अंतर होता है.

ऐसे में घर वाले बड़ी लड़की की तब तक शादी नहीं करते, जब तक उन का छोटा बेटा शादी लायक न हो जाए.

जब वह शादी लायक हो जाता है तो बड़ी बेटी के आटासाटा के बदले में उस की शादी की जाती है. ऐसे में बेटियों की उम्र निकलने के बाद उम्रदराज व्यक्ति से जबरदस्ती शादी कर दी जाती है.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा का कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारा समाज अभी भी इस तरह की प्रथाओं का पालन कर रहा है. महिलाओं को अपना जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता है और हम अपनी बेटियों को नहीं खो सकते. राजस्थान सरकार को इस प्रथा को रोकने के लिए उपाय करने चाहिए.

राजस्थान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा ने इस बारे में कहा, ‘‘आटासाटा प्रथा बहुत ही कष्टदायक है, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जिन का कुरीतियों के नाम पर पूरा जीवन ही कुरबान कर दिया गया हो.

‘‘जब मैं आयोग की अध्यक्ष थी तो मेरे पास आटासाटा से जुड़ी 4 बड़ी घटनाएं आई थीं जो इतनी पीड़ादायक थीं कि बेवजह 2 घरों की जिंदगियां बरबाद हो रही थीं. इस में कुछ लोगों को हम ने सजा भी दिलाई थी पर सीधे तौर पर इस में कोई कानून न होने से कोई सख्त काररवाई नहीं की जा सकती थी.

‘‘आजादी के बाद से महिलाओं के कल्याण के लिए कई सुधार हुए और कानूनी प्रावधान भी लाए गए पर दुर्भाग्य है कि अब तक आटासाटा पर रोकथान के लिए कोई कानून या नियमकायदे ही नहीं हैं. जबकि राजस्थान के कई इलाकों में ये बहुतायत से किया जा रहा है. सरकार को चाहिए कि इस कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जल्द से जल्द कानून बनाए जाए.’’

मृत्युदूत बने तांत्रिक : तंत्रमंत्र के चक्कर में गई अनीता की जान

“भैया, दरवाजा खोलो.’’ गेट की कुंडी खटखटाते हुए मोहिनी ने तेज आवाज में कहा.

घर के अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो मोहिनी ने और तेज आवाज लगाते हुए एक बार फिर दरवाजे की कुंडी खटखटाई. इस बार घर के अंदर से किसी पुरुष की आवाज आई, ‘‘कौन है?’’

‘‘भैया, मैं हूं.’’ मोहिनी ने बाहर से जवाब दिया.

इस के बाद घर के अंदर से किसी के चल कर आने की पदचाप सुनाई दी तो मोहिनी आश्वस्त हो गई.

दरवाजा श्याम सिंह ने खोला. गेट पर छोटी बहन मोहिनी को देख कर उस ने पूछा, ‘‘मोहिनी, रात को आने की ऐसी क्या जरूरत पड़ गई. घर पर मम्मीपापा तो सब ठीक हैं न?’’

‘‘भैया, मम्मीपापा तो सब ठीक हैं, लेकिन बड़ी दीदी ठीक नहीं हैं.’’ मोहिनी ने चिंतित स्वर में कहा, ‘‘भैया, अंदर चलो. मैं सारी बात बताती हूं.’’ मोहिनी श्याम सिंह को घर के अंदर ले गई.

श्याम सिंह ने पहले घर का दरवाजा बंद किया, फिर मोहिनी को ले कर अपने कमरे में आ गया. मोहिनी से कमरे में बिछी चारपाई पर बैठने को कह कर वह उस के लिए मटके से पानी का गिलास भर कर ले आया. गिलास मोहिनी के हाथ में देते हुए श्याम सिंह ने कहा, ‘‘मोहिनी, तुम पहले पानी पी लो, फिर बताओ ऐसी क्या बात हुई, जिसे ले कर तुम परेशान हो.’’

मोहिनी एक ही बार में पूरा पानी पी गई. फिर लंबी सांस ले कर कुछ देर चुपचाप बैठी रही. मोहिनी को चुप बैठा देख श्याम सिंह बेचैन हो गया. उस ने मोहिनी के सिर पर स्नेह से हाथ रख कर पूछा, ‘‘आखिर बात क्या है?’’

चुप बैठी मोहिनी की आंखों में आंसू आ गए. वह बोली, ‘‘भैया, आप को यह तो पता ही है कि अनीता दीदी बहुत दिनों से बीमार थीं. दीदी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन ज्यादा बीमार हो गईं. फिर अगले दिन बेहोश हो गई थीं. उस दिन के बाद से मैं ने दीदी को नहीं देखा, पता नहीं वह जिंदा भी हैं या नहीं?’’

श्याम सिंह ने बहन की आंखों में डबडबा आए आंसू पोंछ कर उस के इस शक की वजह पूछी.

‘‘मुझे शक इसलिए है कि घर में जिन तांत्रिकों ने डेरा जमा रखा है, वे मुझे दीदी के कमरे में जाने तक नहीं देते. दीदी के कमरे से बदबू आती है, लेकिन तांत्रिक दिन भर अगरबत्ती जलाए रखते हैं और इत्र छिड़कते रहते हैं ताकि बदबू न आए.’’

बहन की बातें सुन कर श्याम सिंह चिंता में पड़ गया. उसे पता था कि उस की बड़ी बहन अनीता बीमार रहती है और कुछ तांत्रिक उस का इलाज करने के नाम पर लंबे समय से घर में डेरा जमाए हुए हैं. उन तांत्रिकों ने उस के मातापिता को भी अपने जाल में कुछ इस तरह फंसा रखा था कि वे उन के कहे अनुसार ही चलते थे.

श्याम सिंह ने मोहिनी से पूछा, ‘‘मम्मीपापा को इस बात का पता है या नहीं कि दीदी के कमरे से बदबू आ रही है?’’

‘‘भैया, तांत्रिकों ने तंत्रमंत्र के नाम पर मम्मीपापा को अंधविश्वास में इतना डुबो दिया है कि वे उन की बातों से आगे कुछ नहीं सोचतेसमझते.’’ मोहिनी ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘अब तो तांत्रिक मम्मीपापा को भी दीदी के कमरे में नहीं जाने देते.’’

कुछ देर चुप रहने के बाद मोहिनी ने कहा, ‘‘भैया, कुछ करो वरना वे तांत्रिक मम्मीपापा और मुझे भी मार देंगे.’’

‘‘तू चिंता मत कर, हम अभी थाने चलते हैं और उन तांत्रिकों की करतूत पुलिस को बता देते हैं.’’

यह बीती 27 फरवरी की रात करीब 9-10 बजे की बात है. श्याम सिंह छोटी बहन मोहिनी को साथ ले कर गंगापुर सिटी थाने जा पहुंचा.

थाने में मौजूद ड्यूटी अफसर को श्याम सिंह ने सारी बातें बताईं. मामला गंभीर था. ड्यूटी अफसर ने सूचना दे कर थानाप्रभारी दीपक ओझा को बुलवाया.

थानाप्रभारी ओझा ने श्याम सिंह से पूरी बात पूछी और लिखित में शिकायत देने को कहा. श्याम सिंह ने पुलिस को लिखित शिकायत दे दी. थानाप्रभारी ओझा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी नरेंद्र शर्मा को सारी जानकारी दी. इस पर डीएसपी ने कहा कि वे गंगापुर सिटी थाने आ रहे हैं और अभी तुरंत काररवाई करेंगे.

कुछ ही देर में डीएसपी नरेंद्र शर्मा थाने पहुंच गए. थानाप्रभारी दीपक ओझा से सारा मामला समझ कर शर्मा ने कहा कि यह एक लड़की के जीवनमरण से जुड़ा मामला है. पता नहीं कि वह लड़की जिंदा भी है या नहीं. इसलिए हमें अभी रात में ही काररवाई करनी होगी. उन्होंने थानाप्रभारी को तुरंत एक टीम तैयार करने को कहा. इसी के साथ उन्होंने श्याम सिंह को बुला कर उस से तांत्रिकों के बारे में कुछ सवाल पूछे. इतनी देर में पुलिस टीम तैयार हो गई. तब तक रात के करीब 11 बज गए थे. डीएसपी नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गंगापुर सिटी थानाप्रभारी दीपक ओझा अपनी टीम के साथ श्याम सिंह और मोहिनी को साथ ले कर उन के बताए पते पर रवाना हो गए.

10-15 मिनट में पुलिस टीम इंद्रा मार्केट पहुंच गई. मोहिनी अपने मातापिता के साथ इसी मार्केट में बने मकान में रहती थी. श्याम सिंह ने इंद्रा मार्केट में एक जगह पुलिस टीम को रोक कर एक मकान की ओर इशारा कर के बताया कि यह हमारा मकान है.

पुलिस टीम उस मकान पर पहुंची, लेकिन वहां ताला लटक रहा था. पुलिस को पता लगा कि घर के लोग और तांत्रिक अंदर ही हैं. इस पर पुलिस टीम ने पड़ोस के मकान से हो कर उस घर में प्रवेश किया.

पुलिस टीम जब घर के अंदर पहुंची तो हैरान रह गई. एक कमरे में जमीन पर लगे बिस्तर पर अनीता की लाश पड़ी थी. उस की लाश पर चादर डाली हुई थी. अनीता के शरीर पर कपड़े भी नहीं थे. शरीर पर कई जगह पट्टियां बंधी हुई थीं.

घर में 6 लोग मौजूद थे. इन में मोहिनी के पिता ताराचंद राजपूत और मां उर्मिला देवी के अलावा 4 तांत्रिक थे. पुलिस ने ताराचंद और उस की पत्नी उर्मिला से पूछताछ की तो पता चला कि तांत्रिक उन्हें लगातार डरातेधमकाते रहे, उन्होंने अनीता का इलाज नहीं करवाने दिया. तांत्रिक उन से कहते रहे कि अनीता जीवित है और जल्दी ही ठीक हो जाएगी. इस के लिए तांत्रिक कमरे में तंत्रमंत्र का नाटक करते रहे.

पुलिस रात को ही अनीता के पिता ताराचंद राजपूत, मां उर्मिला के अलावा चारों तांत्रिकों को पकड़ कर गंगापुर सिटी थाने ले आई. पुलिस ने मकान सीज कर के वहां पुलिस कांस्टेबल तैनात कर दिया.

थाने ला कर चारों तांत्रिकों से पूछताछ की गई. पूछताछ में पता चला कि उस दिन रात घिरते ही मोहिनी मौका देख कर बिना किसी को बताए घर से निकल गई थी. वह अपने भाई श्याम सिंह को तांत्रिकों की करतूत बताने के लिए गई थी. तांत्रिकों को जब पता चला कि मोहिनी घर से गायब है तो एक तांत्रिक सपोटरा निवासी गजेंद्र उर्फ पप्पू शर्मा उस की तलाश में घर से निकला.

जाते समय गजेंद्र ने घर के बाहर से ताला लगा दिया था. इसी वजह से वह मौके पर नहीं मिला. बाद में वह फरार हो गया था. पुलिस ने 28 फरवरी को अनीता के मातापिता और चारों तांत्रिकों को गैरइरादतन हत्या और आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया. इन तांत्रिकों में सपोटरा निवासी गजेंद्र उर्फ पप्पू शर्मा की पत्नी मंजू, मथुरा निवासी बंटी उर्फ संदीप शर्मा, महूकलां निवासी नीटू चौधरी और धूलवास निवासी गोपाल सिंह शामिल थे.

उसी दिन पुलिस ने विधिविज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों की टीम बुला कर मौके की जांचपड़ताल कराई. इस के बाद अनीता का शव सिविल अस्पताल पहुंचाया गया. शव का पोस्टमार्टम अस्पताल में 3 डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से कराया गया. मैडिकल बोर्ड में डा. बी.एल. बैरवा, डा. कपिल जायसवाल और डा. मनीषा गोयल शामिल थीं.

बाद में डा. बी.एल. बैरवा ने बताया कि शव काफी दिनों पुराना था. जांच के लिए विसरा ले कर विधिविज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया. पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने अनीता का शव अंतिम संस्कार के लिए उस के भाई को सौंप दिया.

पुलिस की पूछताछ और जांचपड़ताल में अंधविश्वास की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

रणथंभौर अभयारण्य बाघों की शरणस्थली के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है. यह बाघ अभयारण्य राजस्थान के सवाई माधोपुर में है. इसी सवाई माधोपुर जिले में गंगापुर सिटी है. गंगापुर सिटी के इंद्रा मार्केट में ताराचंद राजपूत अपनी पत्नी उर्मिला और परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में 3 बेटे श्याम सिंह, गोविंद और नरेंद्र तथा 2 बेटियां थीं अनीता और मोहिनी.

अनीता कई साल पहले से बीमार रहती थी. ताराचंद ने बेटी का इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. ताराचंद पुराने विचारों के आदमी थे. कुछ लोगों ने उन्हें सयानेभोपों से बेटी का इलाज कराने की बात कही. उस दौरान तांत्रिक गजेंद्र और उस के साथी गोपाल सिंह, नीटू चौधरी और बंटी उर्फ संदीप शर्मा ताराचंद के संपर्क में आए. इन लोगों ने अनीता पर भूतप्रेत का साया बताया और ताराचंद के घर पर ही आ कर तंत्रमंत्र के नाम पर उस का इलाज करते रहे.

उन्होंने अपने अंधविश्वास से ताराचंद को इस कदर वशीभूत कर लिया कि उस की सोचनेसमझने की शक्ति कमजोर पड़ती गई. ताराचंद पूरी तरह उन तांत्रिकों के चंगुल में फंस गया.

कुछ दिन पहले इन तांत्रिकों ने ताराचंद से कहा कि अनीता अब बिलकुल ठीक हो गई है. साथ ही उसे यह भी बताया कि तंत्रमंत्र से उन्होंने अनीता के शरीर में देवी का प्रवेश करवा दिया है. इस के बाद इन तांत्रिकों ने अनीता को मोहरा बना कर ताराचंद के मकान के एक कमरे में मंदिर बना दिया. उस मंदिर में उन्होंने अनीता को एक गद्दी पर बैठा दिया.

बाद में ये तांत्रिक अनीता के शरीर में देवी होने की बात प्रचारित करके तंत्रमंत्र से दूसरे लोगों का इलाज करने लगे. गांवदेहात के नासमझ लोग बहकावे में आ कर ताराचंद के मकान पर इन तांत्रिकों के पास आने लगे. ये लोग इलाज करने के बहाने लोगों से किसी न किसी रूप में जेवर व पैसा आदि वसूलने लगे.

अपने घर में तांत्रिकों का डेरा देख कर ताराचंद के बेटे विरोध करने लगे. उन्होंने मातापिता को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वे नहीं माने. तीनों बेटे बड़े हो गए थे. अनीता भी बड़ी थी.

पहले बीमार रहने और फिर तांत्रिकों के चक्कर में पड़ने की वजह से उस की शादी की उम्र भी निकल गई थी. बड़ी बहन की शादी नहीं होने और मातापिता के लगातार उन तांत्रिकों पर बढ़ते विश्वास के कारण घर में कलह रहने लगी.

रोजरोज की कलह से तंग आ कर तीनों भाई अलगअलग रहने लगे. उन्होंने अपने मातापिता का मकान छोड़ दिया. इन में 2 भाई श्याम सिंह और गोविंद गंगापुर सिटी में ही नहर रोड पर रहने लगे थे. तीसरा भाई नरेंद्र हरियाणा के बल्लभगढ़ में जा कर रहने लगा था. बड़ी बेटी अनीता और छोटी बेटी मोहिनी मातापिता के साथ इंद्रा मार्केट में अपने मकान में ही रहती रहीं.

तांत्रिकों ने ताराचंद को पूरी तरह से अपने प्रभाव में ले रखा था. अनीता के बहाने उन्हें लोगों को ठगने का ठिकाना मिल गया था. हालांकि इन सभी तांत्रिकों के अपने घरपरिवार थे, लेकिन ये दिनरात ताराचंद के मकान पर जब चाहे आतेजाते रहते थे.

इसी साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर अनीता ज्यादा बीमार हो गई. इन तांत्रिकों ने ताराचंद और उस की पत्नी को डरा दिया कि अगर उसे अस्पताल ले गए तो यह मर जाएगी. इस का इलाज हम ही करेंगे.

ताराचंद पहले से ही तांत्रिकों के अंधविश्वास में डूबा हुआ था. अनीता की मां उर्मिला भी उन तांत्रिकों को बेटी पर तंत्रमंत्र करने से मना नहीं कर सकी. तांत्रिकों ने अनीता पर तंत्रमंत्र किया, लेकिन अगले ही दिन यानी 15 जनवरी को अनीता की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. वह बेहोश हो गई.

इस के बाद उन तांत्रिकों ने अनीता को एक कमरे में बंद कर दिया और तंत्रमंत्र के नाम पर उस का इलाज करने की बात कहते रहे. उस कमरे में केवल ये तांत्रिक ही आतेजाते थे. ये लोग दूसरे लोगों को उस कमरे में नहीं जाने देते थे.

ताराचंद और उर्मिला के बहुत जिद करने पर उन्हें कभीकभार उस कमरे में जाने देते थे. मोहिनी को भी वे लोग अनीता के कमरे में नहीं जाने देते थे. तांत्रिक मोहिनी को घर से बाहर भी नहीं निकलने देते थे.

ताराचंद या उर्मिला जब उस कमरे में जाते तो अनीता उन्हें बिस्तर पर लेटी ही मिलती. कमरे में दिनरात अगरबत्ती जलती रहती थीं. कमरा इत्र की खुशबू से महकता रहता था. तांत्रिक कहते थे कि अनीता जीवित है, लेकिन अभी वह तुम से बात नहीं कर सकती. कुछ दिन ठहर जाओ, वह पूरी तरह ठीक हो जाएगी, तब बात कर लेना. ताराचंद और उर्मिला उन तांत्रिकों की बातों पर भरोसा कर के चुप रह जाते थे.

मोहिनी उसी घर में रह रही थी. वह नहीं समझ पा रही थी कि बहन अगर जीवित है तो कमरे से बाहर क्यों नहीं निकलती? उसे बहन से मिलने क्यों नहीं दिया जाता? कुछ दिनों से उसे अनीता के कमरे से दुर्गंध आने लगी थी. कई बार वह उस कमरे में जाने की कोशिश करती, लेकिन तांत्रिक उसे रोक देते थे. उस कमरे में लगातार सुगंधित अगरबत्ती जलने और इत्र का छिड़काव होने से दुर्गंध इतनी ही थी कि घर में लेगों को महसूस हो जाए. घर से बाहर तक दुर्गंध नहीं जा रही थी.

लगातार कई दिनों तक बदबू आने से मोहिनी को शक हुआ कि दाल में जरूर कुछ काला है. उसे सब से ज्यादा चिंता अपनी बहन अनीता की थी, इसीलिए 27 फरवरी की रात मौका मिलते ही वह घर से निकल कर सीधे नहर रोड स्थित अपने भाई श्याम सिंह के घर पहुंच गई थी.

भाई को तांत्रिकों की सारी करतूतें बता कर उस ने अपना शक जाहिर कर दिया था. इस के बाद श्याम सिंह ने कोतवाली थाने पहुंच कर रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस ने उस के मातापिता सहित चारों तांत्रिकों को गिरफ्तार कर लिया.

करीब 35 साल की बीमार युवती को इलाज के नाम पर डेढ़ महीने तक कमरे में बंद रखने और इस बीच उस की मौत हो जाने के बाद उस का शव घर में ही रख कर तंत्रमंत्र करने वाले तांत्रिकों को डर था कि मोहिनी उन का भेद खोल सकती है.

इसलिए वे उसे घर से बाहर नहीं निकलने देते थे. एक दिन मोहिनी ने उन तांत्रिकों से अनीता की मौत की आशंका जताई तो उन्होंने पिस्तौल दिखा कर उसे डरायाधमकाया कि उस ने अगर इस बारे में किसी से जिक्र किया तो अच्छा नहीं होगा.

तांत्रिकों ने अनीता के मातापिता और बहन मोहिनी को उन के ही घर में एक तरह से कैद कर के रखा हुआ था. उन के बाहर आनेजाने, किसी को फोन करने, मिलनेजुलने और बाहर की दुनिया से किसी तरह का संबंध रखने की सख्त मनाही थी. तांत्रिकों व उन के साथियों का 24 घंटे उन पर अघोषित पहरा रहता था.

तांत्रिक और उन के साथी अपने लिए कोई सामान खरीदने बाहर जाते तो वे घर के बाहर ताला लगा कर जाते थे ताकि बाहर का कोई आदमी अंदर न आ सके और अंदर से कोई बाहर न जा सके.

पुलिस ने तांत्रिकों से पूछताछ के बाद नीटू चौधरी की निशानदेही पर ताराचंद के मकान में उस कमरे से एक पिस्तौल और 8 जिंदा कारतूस बरामद किए, जिस कमरे में तांत्रिकों ने मंदिर बना रखा था. इसी कमरे की तलाशी में पुलिस को लाखों रुपए के जेवरात भी मिले. ये जेवरात ताराचंद और उस के परिवार के नहीं थे, बल्कि तांत्रिकों ने तंत्रमंत्र के नाम पर लोगों से ठगे थे. पुलिस ने अवैध हथियार मिलने पर नीटू चौधरी और फरार गजेंद्र शर्मा के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत अलग मामला दर्ज किया.

कथा लिखे जाने तक एक तांत्रिक गजेंद्र शर्मा फरार था. गिरफ्तार किए गए चारों तांत्रिक और मृतका अनीता के मातापिता अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल में थे. गंगापुर सिटी थाने के सबइंसपेक्टर महेंद्र राठी इस मामले की जांच कर रहे थे.

यह विडंबना ही है कि विज्ञान के इस युग में तंत्रमंत्र के नाम पर ठगों ने अपना ऐसा जाल बिछा रखा है कि नासमझ और गांवदेहात को छोडि़ए, पढ़ेलिखे और अमीर लोग भी अंधविश्वास में फंस कर इन के बहकावे में आ जाते हैं. लेकिन यह अंधविश्वास की पराकाष्ठा है कि करीब एकडेढ़ महीने तक मृत युवती के शव को जीवित करने के नाम पर तांत्रिक कथित तौर पर जादूटोना करते रहे. दूसरों का भविष्य बताने वाले इन तांत्रिकों को खुद के भविष्य का पता नहीं था कि उन्हें जेल जाना पड़ेगा.

दब गया ममता का सुर : किन बातों में उलझी रह गई थी वो

18 जनवरी, 2016 को थाना कलानौर पुलिस को हरियाणा पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि बनियानी गांव के पास एक खेत में महिला की लाश पड़ी है. खबर मिलते ही कलानौर के थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ बनियानी गांव पहुंच गए. जहां लाश पड़ी थी, वहां काफी लोग जमा थे. जिस खेत में लाश पड़ी थी, वह बनियानी गांव के ही लाला का था.

गांव वालों ने पुलिस को बताया कि मरने वाली महिला का नाम ममता शर्मा है और वह हरियाणवी भजन और लोकगीत गाती हैं. पुलिस ने लाश का मुआयना किया तो पता चला कि उस का गला कटा हुआ है. इस के अलावा उस के सीने पर भी कई घाव थे.

जिस बनियानी गांव में यह लाश मिली थी, वह गांव प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का था. इस के अलावा मरने वाली महिला एक जानीमानी लोकगायिका थी. मामला तूल न पकड़ ले, यह सोच कर थानाप्रभारी ने इस बात की जानकारी तुरंत अधिकारियों के अलावा फोरैंसिक टीम को दे दी. मृतका ममता शर्मा को सभी जानते थे. वह रोहतक के कलानौर कस्बे के डीएवी चौक की रहने वाली थीं. पुलिस ने ममता शर्मा के घर वालों को भी घटना की सूचना दे दी थी.

सूचना पा कर एसपी पंकज नैन, डीएसपी रोहताश सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. फोरैंसिक टीम ने भी पहुंच कर अपना काम शुरू कर दिया था. कुछ देर में मृतका का बेटा भारत शर्मा और पति कुछ लोगों के साथ वहां पहुंच गए थे. लाश देख कर वे फफकफफक कर रोने लगे थे. एसपी पंकज नैन ने मृतक के घर वालों को सांत्वना दे कर बातचीत शुरू की.

इस बातचीत में 20 वर्षीय मृतका के बेटे भारत शर्मा ने बताया कि उस की मां को गोहाना की गऊशाला में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में जाना था. वह 14 जनवरी, रविवार को सुबह साढ़े 8 बजे के करीब मोहित के साथ घर से निकली थीं. मोहित रोहतक की कैलाश कालोनी में रहता है. वह उन का साथी कलाकार था. पिछले 2 सालों से वह उन के साथ काम कर रहा था.

मां के घर से निकलने के 2 घंटे बाद मोहित ने फोन कर के उसे बताया था कि उस की मां रास्ते में ब्रेजा गाड़ी में बैठ कर 2 लोगों के साथ चली गई हैं. उन्होंने जाते समय उस से कहा था कि वह सीधे गोहाना के प्रोग्राम में पहुंच जाएंगी.

पूछताछ में भारत ने पुलिस को बताया कि मोहित उस की मां का साथी कलाकार था, इसलिए उस ने उस की बातों पर विश्वास कर लिया. यह भी सोचा कि मां को कहीं और जाना होगा, इसलिए वह अपने किसी परिचित की ब्रेजा कार से चली गई होंगी.

मोहित गोहाना की उस गऊशाला पहुंच गया था, जहां ममता शर्मा के साथ उस का कार्यक्रम था. ममता को न देख कर उस ने कार्यक्रम के आयोजकों से पूछा. आयोजकों ने बताया कि वह अभी तक नहीं आई हैं. भारत शर्मा ने पुलिस को बताया कि जब मोहित ने उसे बताया कि ममता शर्मा गोहाना प्रोग्राम में नहीं पहुंची हैं तो वह परेशान हुआ. उस ने मां को फोन किया तो उन के फोन की घंटी तो बज रही थी, पर वह फोन नहीं उठा रही थीं.

घर वालों ने अपनी रिश्तेदारियों और अन्य संभावित जगहों पर फोन कर के उन के बारे में पूछा, पर कहीं भी उन का पता नहीं चला. तब थाना कलानौर में उन की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. भारत ने एसपी को बताया कि वह 4 दिनों से थाने के चक्कर लगा रहा था, लेकिन थाने वालों ने कुछ नहीं किया. उन्होंने उन्हें ढूंढने की बिलकुल कोशिश नहीं की.

अगले दिन भी मां के मोबाइल फोन की घंटी बजती रही. यह बात उस ने पुलिस को भी बताई, लेकिन पुलिस ने उन के फोन की भी जांच करने की जरूरत नहीं समझी. अगर पुलिस उन के फोन की जांच करते हुए काररवाई करती तो उस की मां की शायद यह हालत न होती.

एसपी के पास में थाना कलानौर के थानाप्रभारी भी खड़े थे. अपनी लापरवाही सामने आने पर वह सकपका गए. उन के चेहरे का रंग उड़ गया. चूंकि एसपी ने उस समय थानाप्रभारी से कुछ नहीं पूछा, इसलिए एसपी के सामने उन्होंने चुप रहना ही उचित समझा. थानाप्रभारी को मामले का खुलासा करने से संबंधित जरूरी निर्देश दे कर एसपी साहब रोहतक लौट गए.

लाश की शिनाख्त हो चुकी थी, इसलिए थानाप्रभारी ने मौके की जरूरी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

अखबारों ने ममता शर्मा की हत्या की खबर को महत्त्व दे कर छापा. इस की वजह यह थी कि एक तो मृतका जानीमानी हरियाणवी लोकगायिका थीं और दूसरे उन की लाश मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के गांव में मिली थी. बहरहाल, लोकगायिका ममता शर्मा की हत्या की खबर से लोगों में हड़कंप मच गया. लोग कानूनव्यवस्था पर अंगुली उठाने लगे.

कई कलाकारों की हो चुकी है हत्या

एक वजह यह भी थी कि करीब 3 महीने पहले हरियाणवी सिंगर हर्षिता दहिया की पानीपत में गोली मार कर हत्या हुई थी. भले ही उस की हत्या उस के जीजा ने की थी, पर किसी कलाकार की हत्या होना कानूनव्यवस्था पर तो प्रश्नचिह्न उठाता ही है.

हरियाणा में बढ़ती रेप की घटनाओं से वैसे भी वहां की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं. पिछले साल हरियाणवी डांसर आरती भौरिया को भी जान से मारने और रेप की धमकी दी गई थी. सोचने वाली बात यह है कि हरियाणा की जो सरकार बेटियों को बचाने की बात करती है, वहीं पर सब से ज्यादा दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं.

पुलिस के लिए यह मामला एक तरह से चुनौती था. पुलिस ने एक बार फिर मृतका के घर वालों से बात की. उन से पूछताछ के बाद मोहित कुमार से बात की. कार्यक्रम में जाने के लिए मोहित भी उन के साथ घर से निकला था. मोहित ने बताया कि गोहाना जाते हुए रास्ते में उन्हें लाहली गांव के पास ब्रेजा कार सवार 2 युवक मिले थे, जो शायद ममता की जानपहचान वाले थे. वह उन्हीं युवकों के साथ उन की कार में बैठ कर चली गई थीं. उन्होंने कहा था कि वह सीधे गोहाना के प्रोग्राम में पहुंच जाएंगी.

पुलिस ने मोहित से उस ब्रेजा कार का नंबर पूछा तो वह नंबर नहीं बता सका. इस का मतलब लाहली गांव तक ममता शर्मा को देखा गया था. उस के बाद वह कहां गईं, पता नहीं था. कोई क्लू न मिलने पर पुलिस ने मोहित को हिदायत दे कर घर भेज दिया.

पुलिस ने मृतका के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि 14 जनवरी को लापता होने के बाद उन का मोबाइल फोन 58 घंटे तक औन रहा. पुलिस को संदेह होने लगा कि क्या लापता होने के 3 दिनों बाद तक ममता शर्मा जीवित थीं या फिर उन का फोन 3 दिनों तक किसी के पास था, जिस पर फोन आते रहे.

रोहतक के कस्बा कलानौर की रहने वाली 40 वर्षीया ममता शर्मा के परिवार में 20 साल का बेटा भारत शर्मा और एक बेटी है. पति एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं. संगीत से एमए ममता शर्मा को हरियाणवी भजन और लोकगायकी का पहले से ही शौक था. लेकिन पहले वह व्यावसायिक रूप से नहीं गाती थीं. पर करीब 6 साल पहले उन्होंने स्टेज कार्यक्रम करने शुरू कर दिए. लोगों ने उन के भजन और फोक सौंग बहुत पसंद किए.

धीरेधीरे उन की आवाज और प्रस्तुति लोगों को भाने लगी तो उन्हें कार्यक्रमों में भी बुलाया जाने लगा. वह स्थानीय भाषा में जिस अंदाज में भजन और लोकगीत गातीं तो लोग झूमने लगते थे. धीरेधीरे प्रदेश में उन की पहचान बनती गई और उन के फैंस की संख्या बढ़ती गई.

ममता शर्मा के साथ पहले गोरड़ का एक युवक रहता था. उस ने उन के साथ करीब 4 सालों तक काम किया, पर उस की शादी हो गई तो दोनों में दूरियां बन गईं. इस के बाद ममता ने मोहित शर्मा के साथ काम करना शुरू किया. जब भी दोनों किसी कार्यक्रम में जाते, मोहित ही गाड़ी चलाता था.

ममता के पहले साथी से भी की गई पूछताछ

पुलिस ने गोरड़ के उस युवक से भी पूछताछ की, जो ममता के साथ 4 साल काम करने के बाद किनारा कर गया था. अलगअलग तरीके से की गई पूछताछ के बाद भी उस युवक से हत्या के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी तो पुलिस ने उसे भी घर भेज दिया.

काफी कोशिशों के बावजूद भी पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ रही थी. न ही ऐसा कोई क्लू मिल रहा था, जिस से जांच कर के केस का खुलासा हो सके. आला अधिकारियों का थानाप्रभारी पर काफी दबाव था.

थानाप्रभारी एक बार फिर बनियानी के उस खेत पर उसी जगह पहुंचे, जहां ममता शर्मा की लाश मिली थी. जहां लाश मिली थी, वह रास्ता रोहतक भिवानी रोड से करीब 500 मीटर अंदर की तरफ पड़ता है. जहां लाश मिली थी, वह जगह एकदम सुनसान सी रहती है. पर भाली और बनियानी गांव जाने का यह मुख्य रास्ता है. पुलिस ने इन दोनों गांवों के कुछ संदिग्ध लोगों से भी पूछताछ की, पर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा.

मोहित ने पुलिस को ब्रेजा कार में ममता शर्मा के जाने की बात बताई थी. उस का नंबर नहीं मिला था, इसलिए पुलिस ने सड़कों के किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे तलाशने शुरू किए, ताकि उधर से गुजरने वाली ब्रेजा कारों को जांच के दायरे में लाया जा सके. काफी भागदौड़ के बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल सकी.

अब तक की जांच से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि ममता शर्मा की हत्या किसी नजदीकी ने ही की है. इसलिए थानाप्रभारी ने मृतका के पति और बेटे से एक बार फिर पूछताछ की. उन से यह भी पूछा कि उन की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं है. घर वालों ने ऐसी बात होने से इनकार कर दिया.

इस के बाद पुलिस ने गोपनीय तरीके से ममता शर्मा के पति की जांच कराई कि कहीं उस का किसी महिला से कोई चक्कर तो नहीं है. क्योंकि ऐसे मामलों में भी लोग पत्नी की हत्या करा देते हैं या खुद कर देते हैं. जांच में पता चला कि ममता का पति बेहद सीधा और सरल स्वभाव का है. वह ममता को बेहद प्यार करता था.

पुलिस जिस भी हिसाब से जांच करती, वह फेल हो जाता. घुमाफिरा कर थानाप्रभारी की नजरों में मोहित कुमार ही आ रहा था. उन्होंने उसे एक बार फिर पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया. मोहित ने इस बार भी पुलिस को वही कहानी सुना दी, जो पहले सुना चुका था. वह रटीरटाई कहानी सुनाने के अलावा आगे कुछ नहीं बता रहा था.

थानाप्रभारी को मोहित की इस कहानी पर कुछ शक हुआ तो उन्होंने एसपी पंकज नैन से बात की. उन के निर्देश पर थानाप्रभारी ने मोहित से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. आखिर उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने ममता शर्मा की हत्या अपने दोस्त संदीप के साथ मिल कर की थी.

उस ने बताया कि बातचीत के दौरान उस की ममता शर्मा से कहासुनी हो गई. 14 जनवरी को वह ममता के साथ गोहाना के कार्यक्रम में जाने के लिए निकला था. रास्ते में उन से उस की कहासुनी हो गई. इसी कहासुनी के बीच कलानौर में स्कूल मोड़ के पास उस ने चाकू से वार कर के उन की हत्या कर दी थी. इस के बाद दोस्त संदीप की मदद से लाश को बनियानी गांव के पास खेत में फेंक आया था.

लाश ठिकाने लगाने के बाद उस ने ममता शर्मा के घर वालों और पुलिस को ब्रेजा कार वाली कहानी सुना दी. पुलिस ने मोहित की निशानदेही पर उस के दोस्त संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया था.

दोनों अभियुक्तों को 20 जनवरी, 2018 को अदालत में पेश कर के 24 घंटे के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में पूछताछ में पुलिस को और भी कुछ तथ्य मिलने की उम्मीद है. कथा लिखने तक दोनों अभियुक्त पुलिस हिरासत में थे.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

ऊधमसिंह नगर में धंधा पुराना लेकिन तरीके नए : भाग 3

इसी तरह से दूसरी 21 वर्षीया युवती ने अपना नाम पूजा यादव बताया. उस ने कहा कि उस का पति उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के गांव सनसडा में रहता है. तीनों से गहन पूछताछ के बाद उन की तलाशी ली गई. तलाशी में उन के पास से 2 स्मार्टफोन बरामद हुए. मोबाइलों में तमाम अश्लील फोटो, वीडियो के साथ ही अनेक अश्लील मैसेज भी भरे हुए थे.

उन्हीं मैसेज से मालूम हुआ कि ये दोनों महिलाएं एक रात के 1000 से 1500 रुपए लेकर ग्राहकों की रातें रंगीन करती थीं.

उन के साथ पकड़ा गया भगवान दास का काम ग्राहक तलाशना होता था. वह उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था. बदले में 500 रुपए वसूलता था. दास ने बताया कि वह ग्राहक की जानकारी होटलों में ठहरने वालों से जुटाता था.

इस के लिए अपने संपर्क में आई युवतियों को किसी एकांत जगह पर कार में बैठा कर रखता था और फिर वहीं से ग्राहकों के फोन का इंतजार करता था. जैसे ही किसी ग्राहक का फोन आता वह 10 से 15 मिनट में उस के बताए स्थान पर लड़की को पहुंचा देता था.

तीनों 21 जुलाई को ग्राहक का फोन आने का ही इंतजार कर रहे थे. उन की कोई सूचना नहीं मिल पाने के कारण वे आपस में ही हंसीमजाक करते हुए टाइमपास कर रहे थे. ऐसा करते हुए वे बीचबीच में अश्लील हरकतें भी करने लगे थे.

उस दिन भगवान दास ने दोनों को 1500-1500 रुपयों में तय किया था. लेकिन जब काफी समय गुजर जाने के बाद भी उसे कोई ग्राहक नहीं आया था. पुलिस मुखबिर की निगाह उन पर गई और उन्होंने पुलिस को इस की सूचना दे दी.

पूछताछ में भगवान दास ने कई मोबाइल नंबर दिए, जो देहव्यापार करने वाली महिलाओं के थे. वे अपनी बुकिंग एक दिन पहले करवा लेती थीं. बुकिंग के आधार पर ही उन्हें होटल या किसी निजी घर पर ले जाया जाता था. उन्हें ले जाने वाला ही उन का सौदा पक्का कर देता था. औनलाइन पेमेंट आने के बाद ही बताए जगह पर पहुंचती थीं.

इस मामले को थाना ट्रांजिट कैंप में दर्ज किया गया. पकड़े गए व्यक्तियों पर  सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकतें कर अनैतिक देह व्यापार करने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज की गई.

उन पर आईपीसी की धारा 294/34 लगाई गईं. इसी के साथ उन्हें अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 5/7/8 के तहत काररवाई की गई.

किसान आंदोलन का भी  पड़ा धंधे पर असर

3 साल पहले यानी 2018 तक काशीपुर की अनाज मंडी भी इस धंधे के लिए काफी बदनाम थी. आज भी स्थिति कमोबेश वैसी ही बनी हुई है. हालांकि कोरोना काल की वजह से उस में थोड़े समय के लिए मंदी जरूर आई, फिर पहले जैसी स्थिति बन गई.

मंडी देह का फूलनेफलने की भी वजह है. फसल ले कर आने वाले किसानों के अनाज की साफसफाई के लिए आढ़तियों की दुकानों पर औरतें काम करती हैं. उन की संख्या वे 2 ढाई सौ के करीब है.

फसल के ढेर पर झाड़ू लगाने वाली अधिकतर औरतें बिजनौर जिले की रहने वाली हैं, लेकिन काशीपुर में ही किराए का कमरा ले कर रहती हैं.

वे औरतें सुबहसुबह सजसंवर कर मंडी पहुंच जाती हैं. अपनी खूबसूरती का जलवा दिखा कर किसानों और व्यापारियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. वह मजदूरों को भी अपने जाल में आसानी से फांस लेती हैं. यह सब उन की आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया होता है.

जितने पैसे वे मंडी में अनाजों के ढेर पर झाड़ू लगा कर नहीं कमा पातीं, उस से कहीं ज्यादा पैसा उन्हें देह व्यापार के धंधे में मिल जाता है.

हालांकि वह सब उन को ठीक भी नहीं लगता. उन्हें न केवल परिवार और समाज की नजरों से छिप कर रहना पड़ता है, बल्कि पुलिसप्रशासन से बच कर भी रहना जरूरी होता है. ऊपर से बदनामी का भी डर लगा रहता है.

उन की कोशिश रहती कि वे किसी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नहीं पकड़ी जाएं. जबकि हमेशा उन के मन के अनुकूल स्थिति बनी रहना संभव नहीं होती. नतीजा पुलिस की छापेमारी में कुछ पकड़ी जाती हैं तो कुछ अड्डे से भागने में सफल हो जाती हैं.

देह व्यापार के धंधे में लगे रहने की उन की मजबूरी थी. एक अड्डा बंद होता है तो उन के द्वारा तुरंत नया ठिकाना बना लिया जाता है. वैसे अधिकतर औरतों के पति दिहाड़ी मजदूरी करने वाले या फिर रिक्शा चलाने वाले हैं. वह शाम तक जितना कमाते हैं, उस का बड़ा हिस्सा शराब में उड़ा देते हैं.

शाम को घर पहुंचने पर घर का खर्च बीवी से चलाने की उम्मीद करते हैं. घर चलाने के खर्च से ले कर कमरे का किराया, कपड़ेलत्ते, बच्चों की परवरिश आदि तक उन्हीं के कंधों पर रहती है.

उस के बावजूद शराबी पतियों की मारपीट भी झेलनी पड़ती है. यह उन की दिनचर्या में शामिल हो चुका है. इस तरह देह के धंधे को अपनाने की मजबूरी बन गई है.

किसान कानून में बदलाव आने का असर उन के धंधे पर भी हुआ. कारण इस कानून के लागू होने पर किसान अपनी फसल कहीं भी बेचने के लिए आजाद हो गए. इस वजह से उन का काशीपुर की मंडी में आनाजाना बहुत कम हो गया. इस का असर उन औरतों के धंधे पर भी हुआ.

अनाज की मंडियों का काम ढीला होने से पहले के मुकाबले वहां औरतें कम आने लगी हैं. मजबूरी में उन्होंने नया तरीका निकाला और अपने घरों में ही धंधा करना शुरू कर दिया. जबकि वह जानती हैं कि यह धंधा किसी भी सूरत में महफूज नहीं है.

अपना ही तमाशा बनाने वाली एक लड़की : भाग 3

उर्वशी अपने पिता व भाईबहनों के साथ उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में रहती थी. उस की मां की कुछ समय पहले मौत हो गई थी. उस के पिता मानसिक रूप से कमजोर थे. परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. उर्वशी के 2 भाई और 2 बहनें हैं.

करीब 2 साल पहले घर में उर्वशी का अपने अविवाहित भाई से झगड़ा हो गया था. तब वह नाराज हो कर अपनी बुआ के पास काशीपुर चली गई थी. काशीपुर में रहते हुए वह प्राइवेट ग्रैजुएशन की तैयारी करने लगी, साथ ही वह सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगी.

करीब 5-6 महीने पहले ऋषिराज मीणा किसी काम से काशीपुर गया था, जहां उस की मुलाकात उर्वशी से हुई. उर्वशी उसे स्वच्छंद लड़की लगी. 2-4 दिन वहां रहने के दौरान ऋषिराज की उर्वशी से घनिष्ठता हो गई. दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. बाद में ऋषिराज जयपुर आ गया. इस के बाद भी उर्वशी और ऋषिराज में लगातार बातें होती रहीं.

उर्वशी आगरा जा कर रहने लगी तो उस दौरान भी ऋषिराज की उस से लगातार बातें होती रहीं. कई बार बातोंबातों में उर्वशी ने ऋषिराज को अपनी पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं होने और नौकरी करने की बात बताई. इस पर ऋषिराज ने उसे जल्दी ही रेलवे में नौकरी लगवाने का विश्वास दिलाया.

घटना से करीब ढाई-3 महीने पहले ऋषिराज ने उर्वशी को फोन कर के कहा कि वह जयपुर आ जाए. वह उसे किराए का मकान दिलवा देगा. जयपुर में रहेगी तो नौकरी तलाशने में आसानी रहेगी. ऋषिराज के कहने पर उर्वशी जयपुर आ गई. ऋषिराज ने जगतपुरा की सरस्वती कालोनी में उसे किराए का मकान दिलवा दिया. ऋषिराज तो उर्वशी का पहले से ही परिचित था. जयपुर में उस की कई अन्य युवकों से भी दोस्ती हो गई. युवकों से दोस्ती के चलते मकान मालिक ने उसे निकाल दिया.

उर्वशी ने ऋषिराज को समस्या बताई तो उस ने जगतपुरा में ही जगदीशपुरी कालोनी में उसे किराए का दूसरा मकान दिलवा दिया. कुछ समय बाद उर्वशी अपने पिता व छोटे भाई को भी जयपुर ले आई. जयपुर आ कर वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगी. उस ने कुछ समय पहले स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की परीक्षा के लिए फार्म भरा था.

उस का परीक्षा केंद्र अलवर में पड़ा था. 9 जनवरी को उस की परीक्षा थी. इस के लिए वह जयपुर से अलवर गई. परीक्षा समाप्त होने के बाद वह 9 जनवरी को अलवर से शाम को मुजफ्फरनगर-पोरबंदर एक्सप्रैस टे्रन में सवार हो कर शाम सवा 7 बजे जयपुर जंक्शन पर उतरी. ट्रेन से उतर कर उर्वशी ने करीब 7 बज कर 20 मिनट पर अपने छोटे भाई को फोन कर के कहा कि उसे घर पहुंचने में देर हो जाएगी. वे लोग खाना खा कर सो जाएं. वह जब घर आएगी तो दरवाजा खटखटा देगी.

उर्वशी जयपुर जंक्शन से औटो में बैठ कर जगतपुरा पहुंची. वहां उसे ऋषिराज मीणा मिला. ऋषिराज ने औटो का 180 रुपए किराया चुकाया और उसे अपनी पल्सर बाइक पर बैठा कर जगतपुरा में ही प्रेमनगर स्थित अपने फ्लैट नंबर 280 पर ले गया. तय योजना के अनुसार, उर्वशी ने रात करीब 10 बजे अपने परिचित युवक संदीप लांबा को अपने पास बुला लिया.

संदीप को उर्वशी ने 9 जनवरी को दिन में ही फोन कर के कहा था कि रात को उस के घर वाले घर पर नहीं रहेंगे, इसलिए वह रात को उस के घर आ जाए. जयपुर जंक्शन से औटो में जगतपुरा जाते समय भी उर्वशी ने संदीप को बता दिया था कि वह रात को 280 प्रेमनगर, जगतपुरा आ जाए.

उर्वशी के इस तरह बुलाने से संदीप लांबा खुश था. संदीप ने अपनी गर्लफ्रैंड उर्वशी के पास जाने के लिए अपने एक मित्र पोलू जाट से 5 सौ रुपए उधार लिए और सजधज कर अपने कमरे से निकला. संदीप नर्सिंग के द्वितीय वर्ष का छात्र था. वह जयपुर में गुर्जर की थड़ी पर किराए के मकान में रहता था. उस की उर्वशी से दोस्ती इस घटना से करीब एक महीने पहले हुई थी.

दोनों एक महीने से फोन पर संपर्क में थे. संदीप ने घर से निकल कर उर्वशी के लिए चौकलेट खरीदी. इस के बाद वह लो फ्लोर बस से रात करीब 10 बजे जगतपुरा पहुंचा. रात का समय होने और उस फ्लैट की सही लोकेशन न मिलने पर संदीप ने उर्वशी को 3-4 बार फोन किया. इस पर उर्वशी उसे लेने के लिए पैदल ही जगतपुरा रेलवे लाइन तक अकेली आई.

रेलवे लाइन से वह संदीप को अपने साथ ऋषिराज के प्रेमनगर स्थित फ्लैट पर ले गई. संदीप के पहुंचने पर ऋषिराज फ्लैट में छिप गया. उर्वशी संदीप को एक कमरे में ले गई, जहां बिस्तर लगा था. कमरे की बिजली जल रही थी. कमरे की बिजली जली होने पर संदीप को कुछ शक हुआ, लेकिन उर्वशी ने उसे बातों में लगा लिया. इस के बाद उर्वशी और संदीप उस कमरे में एक साथ रहे. इस दौरान उन्होंने कई बार शारीरिक संबंध बनाए.

सुबह करीब 3 बजे जब दोनों थक गए तो शांत हुए. उर्वशी ने संदीप का मोबाइल ले कर यह कहते हुए उस का सारा रिकौर्ड डिलीट कर दिया कि किसी को पता लग जाएगा. बाद में उर्वशी ने संदीप के पर्स की तलाशी ली और उस के डेबिट व क्रेडिट कार्ड देखे. इस के बाद उर्वशी ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे कर उस से मोटी रकम मांगी.

संदीप के इनकार करने पर उर्वशी ने उस का एटीएम कार्ड ले लिया और उस का पासवर्ड भी पूछ लिया. इस के बाद उसे घर से निकल जाने को कहा. वह वहां से निकला तो करीब आधे घंटे बाद उर्वशी ने उसे फोन कर के जल्दी से रकम का इंतजाम करने को कहा.

संदीप के जाने के बाद उसी फ्लैट में छिपा ऋषिराज मीणा कमरे में आ गया. सुबह करीब 5 बजे वह उर्वशी को मोटरसाइकिल पर बिठा कर एमएनआईटी के समने ले गया. वहां उस ने उर्वशी के मुंह पर कीटनाशक एल्ड्रीन का घोल लगाया और उस के कपड़ों पर भी कीटनाशक छिड़क दिया. ऋषिराज ने उर्वशी से कहा कि वह पुलिस कंट्रोल रू म को फोन कर के अपने साथ गैंगरेप होने की सूचना दे.