ज्ञानेश्वर के ड्यूटी पर जाने के बाद वह वनिता को फोन कर के धमकी देता था कि अगर उस ने उस का कहना नहीं माना तो वह उस के बच्चों, मां और भाई की हत्या करवा देगा.
रावसाहेब की धमकी से वह इतनी घबरा गई थी कि उस के बुलावे पर उस की बताई जगह पर पहुंच जाती. रावसाहेब वनिता को कभी किसी फ्लैट में तो कभी किसी लौज या होटल में बुलाता था. उस के साथ मौजमस्ती कर के वह उसे भेज देता.
करीब 10 सालों तक चले इन संबंधों से वनिता ऊब चुकी थी. समाज और परिवार में उस की खूब थूथू हो रही थी. इस सब से बचने के लिए वनिता ने एक अहम फैसला लिया. उस ने रावसाहेब पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया.
जिस तरह से रावसाहेब उसे धमकाता था, वनिता ने भी उसे उसी अंदाज में धमकाना शुरू कर दिया. वनिता ने कहा कि अगर वह उस से शादी नहीं करेगा तो वह उसे कहीं का नहीं छोड़ेगी. वनिता की इस इस धमकी से वह बुरी तरह घबरा गया था.
इस के पहले कि वनिता उस के खिलाफ कोई कदम उठाती, रावसाहेब ने वनिता को ठिकाने लगाने के लिए एक खतरनाक योजना तैयार कर ली. पूरी योजना बनाने के बाद रावसाहेब दुसिंग ने अपनी कार में वनिता की मौत का सामान रखा और किसी बहाने से वनिता को कार में बैठा कर होटल वीरपार्क पहुंच गया.
होटल पहुंच कर पहले रावसाहेब ने वनिता के साथ मौजमस्ती की. फिर शादी की बात को ले कर दोनों में जोरदार तकरार हुई.
रावसाहेब ने अपनी योजना के अनुसार वनिता के साथ मारपीट की. फिर कमरे की कुरसी से वनिता को पीट कर घायल कर दिया. इस के बाद उस का गला घोंट कर हत्या कर दी.
इस के बाद उस की योजना थी कि वह उस की डैडबौडी को कहीं किसी सुनसान जगह पर ले जा कर पैट्रोल और कैमिकल डाल कर जला देगा, जिस से सारे सबूत नष्ट हो जाएंगे.
लेकिन उसे इस का मौका नहीं मिला. तब उस ने वनिता का शव होटल में ही छोड़ देने का फैसला किया.
इस के लिए पहले उस ने वनिता का चेहरा कैमिकल से जला कर खराब कर दिया. वह खुद होटल से निकल जाना चाहता था लेकिन उसे इस का भी मौका नहीं मिला.
रावसाहेब उस समय बहुत डर गया, जब पुलिस, कानून और हथकड़ी उस की आंखों के सामने घूमने लगे. इसी डर की वजह से उस ने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली.
थानाप्रभारी नागेश मोरे के निर्देशन में महिला इंसपेक्टर सुप्रिया फड़तरे ने इस मामले की जांच पूरी की. चूंकि इस प्रकरण में हत्या और आत्महत्या करने वाला कोई भी जीवित नहीं था, इसलिए जांच अधिकारी ने मामले की फाइल बंद कर दी.
प्यार में धोखे को बरदाश्त न कर सकी पूजा
घर पहुंचते ही उस ने यह बात अपने भाई भरत आर्या को बताई. बहन की बात सुनते ही उस की आंखों में खून उतर आया. उसे दुख इस बात का था कि सुहेल ने उन की गरीबी का नाजायज फायदा उठाते हुए उस की बहन की इज्जत भी लूट ली थी.
उस समय भरत आर्या आर्मी के लिए सेलेक्ट हो चुका था. पूजा की बात सुन कर उस के तनबदन में आग लग गई. लेकिन उस वक्त वह मजबूर था. अगर उस वक्त उस के हाथों कुछ अनर्थ हो जाता तो नौकरी पर जाने से पहले ही जेल की सलाखों के पीछे होता.
भरत आर्या ने यह बात अपने घर वालों को भी नहीं बताई. फिर भी अपनी बहन की खुशी के लिए वह सुहेल की दुकान पर जा कर उस से मिला. उस ने उस से विनती की कि उस की बहन उस के वियोग में जहर खा कर आत्महत्या करने को तैयार है. वह अपनी बहन को बहुत ही प्यार करता है. अगर वह चाहे तो वह अपने परिवार वालों से लड़झगड़ कर उस के साथ उस की शादी करने को भी तैयार है.
लेकिन सुहेल ने साफ मना कर दिया कि उस के घर वाले किसी दूसरे मजहब की लड़की से उस की शादी करने के लिए तैयार ही नहीं. इस बात को सुन कर भरत आर्या अपने घर वापस आ गया.
घर आ कर भरत ने पूजा को समझाने की कोशिश की. लेकिन वह उस की एक भी मानने को तैयार न थी. सुहेल के वियोग में उस की मानसिक स्थिति भी खराब हो गई थी. जब सुहेल ने पूजा के साथ शादी करने से इंकार कर दिया तो एक दिन पूजा ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली. यह 2017 की बात है.
बहन द्वारा आत्महत्या किए जाने से भरत आर्या को बहुत दुख हुआ. वह उस को न्याय दिलाना चाहता था. लेकिन उस के पास कोई ऐसे पक्के सबूत नहीं थे, जिस के आधार पर वह सुहेल को जेल की सलाखों के पीछे तक ले जा सके.
उस के बाद भी सुहेल भरत आर्या को देख कर भद्दी छींटाकशी करता रहता था, जिस को भरत आर्या जहर समझ कर निगलता आ रहा था. लेकिन उस ने तभी प्रण कर लिया था कि एक न एक दिन तो वह उस से अपनी बहन की मौत का बदला ले कर ही रहेगा.
सुहेल को सबक सिखाने की ठान ली भरत ने
नौकरी लगते ही भरत आर्या के घर की स्थिति भी ठीकठाक हो गई थी. उस का बड़ा भाई भी वन विभाग में फोरेस्ट गार्ड की नौकरी करने लगा था. उस से छोटा भी आर्मी में भरती हो गया था. भरत आर्या 14 जुलाई, 2022 को एक महीने की छुट्टी ले कर घर आया हुआ था.
एक दिन भरत आर्या अपने पापा हरीश राम की दुकान पर गया तो सामने से सुहेल सिद्दीकी आ गया. उस को देखते ही सुहेल अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. उस ने उसे देखते ही मजाक उड़ाने की कोशिश की. सुहेल की बात से भरत के तनबदन में आग लग गई.
उसी शाम भरत के दोस्त उस से मिलने उस के घर पर आए हुए थे. शाम को खानेपीने के बाद भरत आर्या ने अपनी परेशानी उन के सामने रखते हुए उस का हल निकालने वाली बात रखी तो उस के दोस्तों ने उस का पूरा सहयोग देने वाली बात कही.
उसी वक्त सुहेल सिद्दीकी का काम तमाम करने की योजना बनी. भरत आर्या ने सभी दोस्तों को विश्वास दिलाया कि अगर यह पुलिस केस बनता भी है तो उन का सारा खर्च वह स्वयं ही उठाएगा.
सुहेल को उस की करनी का फल देने के लिए एक योजना बनी. उसी योजनानुसार 2 अगस्त, 2022 को सभी दोस्त एक साथ बैठे और उसी दिन सुहेल सिद्दीकी की मौत की स्क्रिप्ट भी लिखी गई.
फिर भरत आर्या का दोस्त दिनेश टम्टा, योगेश सिंह और मनोज सिंह एल्टो कार से उसे साथ ले कर कोटद्वार रोड की तरफ नहर के किनारे खड़े हो गए थे.
सुहेल हर रोज रात के 9 बजे अपनी दुकान बंद कर घर जाता था. उसी समय दिनेश सुहेल की दुकान की तरफ रैकी करने पहुंचा. उस वक्त सुहेल दुकान बंद करने की तैयारी कर ही रहा था.
कुछ समय बाद ही सुहेल अपनी बाइक प्लेटिना से जैसे ही कार के सामने आता दिखाई दिया, योगेश ने कार से उस की बाइक में जोरदार टक्कर मार दी.
टक्कर लगते ही सुहेल बाइक से नहर की पटरी पर जा गिरा. उस के सिर में गहरी चोट लग गई थी. उस के बाद भी सुहेल ने खड़ा होने की कोशिश की तो भरत आर्या के दोस्तों ने कार में रखी रौड से उस के सिर पर तेज प्रहार किए. जिस के कारण उस की मौके पर ही मौत हो गई.
सुहेल की मौत हो जाने के बाद चारों दोस्तों ने उस की लाश कार में डाली और काशीपुर होते हुए ठाकुरद्वारा करनपुर मार्ग से थाना छजलैट के जंगलों में पहुंचे. सुहेल का मोबाइल, आधार कार्ड व पर्स भी नहर के तेज बहाव में फेंक दिया गया. उस के साथ ही उस की बाइक भी सड़क किनारे चाबी सहित फेंक दी थी.
उस जगह से लगभग 500 मीटर आगे जा कर मेनरोड से बाईं ओर जाने वाले रास्ते पर गन्ने के खेत में उस की लाश भी फेंक दी. उस के बाद शव की पहचान छिपाने के लिए उस के चेहरे पर पैट्रोल डाल कर आग लगा दी, जिस से उस की शिनाख्त न होने पाए. सुहेल की लाश को ठिकाने लगाने के बाद सभी कार से रामनगर आ गए थे.
इस केस के खुलते ही पुलिस ने गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को भादंवि की धारा 302/364/201 के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. द्य
जेब में नकदी, एटीएम कार्ड, कैमरा आदि ले कर राजेंद्र रावतसर पहुंच गया था. खेतरपाल मंदिर तक पहुंचाने के लिए उस ने अपने ममेरे भाई सुभाष बावरी, जो नजदीकी गांव कणवाणी में रहता था, को फोन कर मोटरसाइकिल सहित रावतसर बुला लिया था.
सुभाष के साथ राजेंद्र बावरी 3 किलोमीटर दूर खेतरपाल मंदिर पहुंच गया था. वहां राजेंद्र व संजू ने फोन के सहारे एकदूसरे को पहचान लिया था. मेकअप से लकदक व मनमोहक कपड़े पहने संजू राजेंद्र को हूर की परी लग रही थी.
संजू ने साथ में खड़े प्रेम को अपना भाई बताया. संजू ने चायपानी के बाद प्रेम को नजदीक गांव 4 सीवाईएम में छोड़ आने की बात कही थी.
इंद्रपाल की योजना के मुताबिक, प्रेम संजू और राजेंद्र को मोटरसाइकिल पर बिठा कर गांव के लिए चल पड़ा था. तब तक अंधेरा घिर आया था. जैसे ही कच्ची सड़क पर मोटरसाइकिल उतरी, वहीं घात लगाए बैठे पांचों दोस्त राजेंद्र पर टूट पड़े. लाठियां व ठोकरें लगने से घायल हुआ राजेंद्र बेहोश हो गया था. उन्होंने उसे घसीट कर झाडि़यों में डाल दिया. उसी दौरान राजेंद्र ने दम तोड़ दिया था.
सुबह एक अज्ञात राहगीर ने झाडि़यों में शव पड़े होने की सूचना रावतसर थाने में दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी रविंद्र नरूका मौके पर पहुंच गए. लोगों ने उस की शिनाख्त गांव बड़ोपल निवासी धर्मपाल बावरी के बेटे फोटोग्राफर राजेंद्र के रूप में की.
पुलिस ने शव बरामद कर उस के घर वालों को सूचना दे दी थी. राजेंद्र के फोन में आखिरी काल संजू की थी. अत: पुलिस ने तुरंत संजू को हिरासत में ले लिया.
सख्ती से की गई पूछताछ में संजू ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. तब पुलिस ने संजू के बताए अनुसार, अन्य मुलजिमों की पहचान कर उन के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 364, 382, 201 व 120बी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.
रावतसर की डीएसपी सुश्री पूनम चौहान के निर्देश पर प्रकरण की जांच थानाप्रभारी रविंद्र नरूका ने अपने हाथ में ले ली थी.
पुलिस ने दबिश दी मगर संजू के अलावा अन्य आरोपी फरार हो गए थे. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 8 टीमों ने अथक भागदौड़ कर शेष आरोपियों जीतराम, सोनू, मांगीलाल, इंद्रपाल, राधेश्याम व नाबालिग प्रेम को अलगअलग जगहों से गिरफ्तार कर लिया.
रिमांड अवधि में पुलिस ने लाठियां, मोटरसाइकिल आदि बरामद कर प्रेम के अलावा सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भिजवा दिया था. प्रेम को बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया. सभी आरोपी बावरी जाति से हैं जबकि संजू पत्नी शिवलाल निवासी संगारिया धानक है.
निर्मम हत्याकांड का चश्मदीद गवाह सुभाष बावरी है, जो अपने ममेरे भाई राजेंद्र को मंदिर छोड़ने पहुंचा था. सुभाष ने संजू व प्रेम के अलावा वहां संदिग्ध लग रहे अन्य आरोपियों को देखा था.
अपनी बहन गोपी के दांपत्य जीवन को बचाने के लिए इंद्रपाल के अविवेकपूर्ण निर्णय ने न केवल अपना बल्कि 6 अन्य नौजवानों का भविष्य भी अंधकारमय कर दिया. द्य
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में प्रेम परिवर्तित नाम है.
अगस्त, 2016 की सुबह मध्य प्रदेश के जिला ग्वालियर के थाना पुरानी छावनी के खेरिया गांव के अटल गेट के पास खेत में 24-25 साल के एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना गांव वालों ने पुलिस को दी तो अधिकारियों को सूचना दे कर थानाप्रभारी प्रीति भार्गव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं. वह घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर रही थीं कि एसपी हरिनारायण चारी मिश्र और एएसपी दिनेश कौशल भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर गांव वालों की भीड़ लगी थी. थानाप्रभारी प्रीति भार्गव ने लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन कोई भी मृतक को पहचान नहीं सका. इस से साफ हो गया कि मृतक वहां का रहने वाला नहीं था. मृतक की जेबों की तलाशी ली गई तो उस की पैंट की जेब से मोटरसाइकिल की चाबी मिली. लाश से थोड़ी दूरी पर एक मोटरसाइकिल खड़ी थी. पुलिस ने मृतक की जेब से मिली चाबी उस मोटरसाइकिल में लगाई तो वह स्टार्ट हो गई. इस से पुलिस को लगा कि इस मोटरसाइकिल से मृतक की शिनाख्त हो सकती है.
पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर अन्य तमाम काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. लेकिन जब पुलिस ने आरटीओ औफिस से मोटरसाइकिल के बारे में पता किया तो पता चला कि वह मोटरसाइकिल विनयनगर, सेक्टर 3, पत्रकार कालोनी के रहने वाले संतोष किरार की थी.
पुलिस ने उस के घर जा कर पता किया तो घरवालों ने बताया कि संतोष एक अगस्त की सुबह अपनी मोटरसाइकिल से निकला है तो अब तक घर लौट कर नहीं आया है. इस से पुलिस को लगा कि खेत में पड़ी लाश संतोष की हो सकती है. लेकिन जब पुलिस ने वह लाश उस के पिता रामकिशोर को दिखाई तो उन्होंने बताया कि यह लाश उन के बेटे संतोष की नहीं है. इस के बाद पुलिस को लगा कि इस हत्याकांड में संतोष की कोई न कोई भूमिका जरूर है.
प्रीति भार्गव लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश कर रही थीं कि शाम को थाना हजीरा के रहने वाले तुलसीराम पिछली शाम से गायब अपने बेटे की तलाश करतेकरते उन के पास आ पहुंचे. दरअसल, पिछली शाम को घर से निकला उन का बेटा शीतल न लौट कर आया था और न उस का फोन मिला था, तब परेशान हो कर वह थाना हजीरा में उस की गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंच गए थे. वहां से जब उन्हें बताया गया कि थाना पुरानी छावनी पुलिस ने एक लड़के की लाश बरामद की है तो वह थाना पुरानी छावनी पहुंच गए थे. थाना पुरानी छावनी पुलिस ने तुलसीराम को बरामद लाश दिखाई तो वह फफकफफक कर रोने लगे. इस के बाद उन्होंने खेतों में मिली लाश की शिनाख्त अपने बेटे शीतल की लाश के रूप में कर दी थी.
प्रीति भार्गव ने हत्यारे का पता लगाने के लिए तुलसीराम से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन की किसी से ऐसी दुश्मनी नहीं थी कि उन के बेटे की इस तरह हत्या कर दी जाती. उन से पत्रकार कालोनी के रहने वाले संतोष के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उस के बारे में जानने से मना कर दिया. तुलसीराम के बताए अनुसार, उन की किराने की दुकान थी. दोपहर को दुकान पर उन का बेटा शीतल बैठता था. इस तरह वह पिता के कारोबार में हाथ बंटाता था.
पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे के लिए जितने भी लोगों से पूछताछ की, उन में से कोई भी ऐसी बात नहीं बता सका, जिस से वह हत्यारे तक पहुंच पाती. प्रीति भार्गव की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर शीतल खेरिया गांव क्यों गया? अगर वह संतोष के साथ वहां गया था तो उन के बीच ऐसा क्या हुआ कि संतोष ने उसे मौत के घाट उतार दिया? यह सब जानने के लिए पुलिस को संतोष की तलाश थी. आखिर आठवें दिन काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में वह असलियत छिपा नहीं सका और उस ने शीतल की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने शीतल की हत्या की जो कहानी सुनाई वह हैरान करने वाली तो थी ही, साथ ही आज के युवाओं में स्त्रीसुख की जो लालसा उपजी है, उस की हकीकत बयां करने वाली थी. पत्रकार कालोनी का रहने वाला इलेक्ट्रिशियन संतोष 31 जुलाई, 2016 की शाम घर लौट रहा था तो रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क पर खड़े एक युवक ने उसे हाथ दे कर रोक कर कहा, ‘‘भाई साहब, मैं यहां काफी देर से किसी सवारी का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन कोई सवारी मिल नहीं रही है. अगर आप मुझे अपनी मोटरसाइकिल से लिफ्ट दे दें तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’
संतोष ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठा लिया. इस के बाद उस युवक ने अपना नाम शीतल बताते हुए कहा, ‘‘हजीरा के इंद्रनगर में मेरे पिता की किराने की दुकान है. मैं उसी पर बैठता हूं. लेकिन अब मेरा मन दुकान पर बैठने को नहीं होता, इसलिए मैं नौकरी खोज रहा हूं. इंटरव्यू देने ही मैं झांसी जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्य से मेरी ट्रेन छूट गई.’’
‘‘कोई बात नहीं, यार, मैं तुम्हारी नौकरी यहीं लगवा दूंगा.’’ संतोष ने कहा. विजयनगर पहुंचतेपहुंचते दोनों में ऐसी दोस्ती हो गई कि उन्होंने पीनेपिलाने का प्रोग्राम बना डाला. फिर इस नई दोस्ती के नाम पर दोनों में एकदूसरे को शराब पिलाने की होड़ लग गई, जिस में करीब 500 रुपए खर्च हो गए. शराब के नशे ने अपना असर दिखाया तो संतोष ने जाने कितनी बार शीतल को भरोसा दिलाया कि जल्द ही वह उस की नौकरी ग्वालियर में लगवा देगा.
उसे यह शहर छोड़ कर कहीं दूसरी जगह जाना नहीं पड़ेगा. संतोष शीतल से बातें कर रहा था, तभी उस की प्रेमिका रेखा (बदला हुआ नाम) का उस के मोबाइल पर फोन आ गया. शीतल से उस की दोस्ती हो ही चुकी थी, इसलिए उस से बिना कुछ छिपाए वह रेखा से अश्लील यानी शारीरिक संबंधों की बातें करने लगा. संतोष रेखा से जो बातें कर रहा था, उन्हें सुनसुन कर शीतल उत्तेजित हो उठा. तब उस ने बिना किसी संकोच के संतोष से कहा, ‘‘कल तुम अपनी प्रेमिका से मिलने जा रहे हो न, मुझे भी कल उस से मिलवा दो.’’
‘‘तुम उस से मिल कर क्या करोगे?’’ संतोष ने कहा तो जरा भी झिझके बिना शीतल ने कहा, ‘‘जो तुम करोगे, वही मैं भी करूंगा.’’
इस पर संतोष नाराज होते हुए बोला, ‘‘रेखा ऐसी लड़की नहीं है. वह केवल मुझ से ही बातें करती है और केवल मुझ से उस के शारीरिक संबंध हैं.’’ उस समय तो संतोष ने शीतल को समझाबुझा कर उस के घर भेज दिया. लेकिन सुबह होते ही शीतल संतोष को फोन कर के कहने लगा कि वही उस का सच्चा दोस्त है. सिर्फ एक बार वह अपनी प्रेमिका से उसे भी मौजमजा ले लेने दे. यही नहीं, उस ने यहां तक पूछ लिया कि वह कितनी देर में रेखा को उस के पास भिजवा रहा है.
नए दोस्त के मुंह से सुबहसुबह प्रेमिका के बारे में ऐसी बातें सुन कर संतोष को गुस्सा आ गया. किसी तरह अपने गुस्से पर काबू पाते हुए उस ने कहा, ‘‘एक घंटे के भीतर तू मेरे घर आ जा, आज मैं तुझे रेखा से मिलवा ही देता हूं. तू भी याद करेगा कि कोई दोस्त मिला था.’’ शीतल के आने से पहले संतोष ने तय कर लिया था कि प्रेमिका पर बुरी नजर रखने वाले शीतल को अब वह जिंदा नहीं छोड़ेगा. जैसे ही शीतल उस के घर पहुंचा, वह उसे ले कर निकल पड़ा.
संतोष ने ठेके से शराब की 2 बोतलें खरीदीं और मोटरसाइकिल से शीतल को ले कर पुरानी छावनी की ओर चल पड़ा. वहां एक पेड़ के नीचे बैठ कर दोनों ने शराब पी. अपनी योजना के अनुसार संतोष ने शीतल को कुछ ज्यादा शराब पिला दी थी. शीतल को जैसे ही शराब का नशा चढ़ा, उस ने कहा, ‘‘चलो बुलाओ रेखा को. तुम ने उस के साथ बहुत मजा लिया है, आज मैं उस के साथ ऐसा मजा लूंगा कि वह भी याद करेगी.’’
संतोष रात से ही शीतल की इन बातों से जलाभुना बैठा था. उस ने पैंट की जेब में रखा चाकू निकाला और एक ही झटके में शीतल का गला रेत कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद उस ने शराब की बोतल उठा कर एक ही सांस में पूरी शराब पी ली और शीतल की लाश को वहीं अटल गेट के पास एक खेत में छोड़ कर चला आया. मोटरसाइकिल वह इसलिए नहीं ला सका, क्योंकि उस की मोटरसाइकिल रास्ते में शीतल ने चलाने के लिए ले ली थी और उस की चाबी उस ने अपनी जेब में रख ली थी.
इसलिए शीतल की हत्या करने के बाद जब संतोष ने अपनी जेब में मोटरसाइकिल की चाबी देखी. चाबी न पा कर नशे में होने की वजह से उसे लगा कि चाबी कहीं गिर गई है. हड़बड़ाहट में वह गाड़ी वहीं छोड़ कर घर चला और घर से कानपुर चला गया. उसे उम्मीद थी कि पुलिस उस तक कभी नहीं पहुंच पाएगी. एक सप्ताह तक वह निश्चिंत हो कर कानपुर में रहा. लेकिन शायद उसे पता नहीं था कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से क्यों न किया जाए, एक न एक दिन उस का राज खुल ही जाता है. पैसे खत्म होने के बाद संतोष पैसे लेने के लिए जैसे ही घर आया, थानाप्रभारी प्रीति भार्गव ने उसे पकड़ लिया. संतोष से पूछताछ में पता चला कि उस ने शीतल की हत्या जिस खेत में की थी, लाश वहां नहीं मिली थी.
पुलिस ने खेत की रखवाली करने वाले सोनू कुशवाह से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस ने लाश पड़ी देखी तो डर के मारे उस ने अपने रिश्तेदार सैकी कुशवाह की मदद से लाश ले जा कर खेरिया मोड़ पर अटल गेट के पास रमेश शर्मा के खेत में फेंक दी थी. पुलिस ने सोनू और सैकी को हिरासत में ले लिया. इन का दोष यह था कि इन्होंने लाश पड़ी होने की सूचना पुलिस को नहीं दी थी, इस के अलावा सबूत नष्ट किए थे. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भिजवा दिया गया.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
अब अड़ोसपड़ोस अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 103 में महिम लगभग रोज आने लगा. वह सधा हुआ खिलाड़ी था, जिस से उसे देख कर औरों की तरह जीभ लपलपाने के बजाय मुकम्मल सब्र से काम लेते हुए उसे फंसाया. चंदन का अंदाजा सही निकला, जल्दी ही तनु और महिम में शारीरिक संबंध बन गए. तनु की मर्द की जरूरत अब महिम पूरी करने लगा.
जब इन दोनों को यकीन हो गया कि तनु अब न नहीं करेगी तो एक दिन उन्होंने उस के सामने अपना ब्लैकमेलिंग वाला राज खोल कर उसे भी इस धंधे में शामिल होने का न्यौता दिया. इस पर तनु भड़क उठी और सीधेसीधे मना कर दिया. जोशजोश में दोनों ने अपने सारे राज उस पर खोल दिए थे कि वे कैसे शिकार को फंसा कर उसे ब्लैकमेल करते हैं.
चूंकि तनु से न की उम्मीद नहीं थी, इसलिए दोनों दिक्कत में पड़ गए. डर इस बात का था कि कहीं ऐसा न हो कि यह नादान लड़की कभी उन का राज दुनिया के सामने उजागर कर दे. फिर भी हिम्मत न हारते हुए चंदन और महिम उसे पटाने की कोशिशें करते रहे और ढेर सारी दौलत का सब्जबाग दिखाते रहे.
लाख मनाने के बाद भी तनु राजी न हुई तो चंदन और महिम ने उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का खतरनाक फैसला न केवल ले डाला, बल्कि उस पर इस तरह अमल भी कर डाला कि अगर अनीता सजगता न दिखातीं तो तनु की मौत हमेशा के लिए एक राज बन कर रह जाती.
इंदौर में होली के पांचवें दिन रंगपंचमी का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. सारे शहर की दुकानें बंद रहती हैं और जगहजगह रंगपंचमी के जुलूस निकलते हैं और लोग तबीयत से रंग का यह त्यौहार मनाते हैं.
17 मार्च को महिम, चंदन और तनु ने रंगपंचमी की पार्टी रखी, जिस में तनु ने छक कर भांग पी. नशा ज्यादा हो जाने से उस की तबीयत बिगड़ने लगी तो चंदन उसे अपने साथ ले गया. अगले 3-4 दिनों तक वह लगातार तनु के फ्लैट पर आता रहा तो एक दिन किसी पड़ोसन ने तनु के बारे में पूछ लिया. चंदन ने उसे बताया कि तनु का इलाज उस के पिता के घर चल रहा है. वह तो यहां दीपक रखने आता है.
सभी की निगाह में चूंकि चंदन तनु का पति था, इसलिए उस की बात पर किसी ने किसी तरह का शक नहीं किया. 25 मार्च को तनु का जन्मदिन था. उस दिन मौसी अनीता उसे बधाई देने के लिए फोन लगाती रहीं, पर उस का फोन लगातार स्विच्ड औफ जा रहा था. लिहाजा उन्होंने खुद उस के घर जा कर उसे बधाई देने का फैसला किया.
25 मार्च की सुबह जब वह तनु के फ्लैट पर पहुंची तो वहां झूलता ताला देख कर हैरान रह गईं, क्योंकि तनु बगैर बताए गायब थी. इस पर उन्होंने पड़ोस में पूछताछ की तो पता चला कि तनु ने ज्यादा भांग पी ली थी, इसलिए उस का पति चंदन उसे पिता के घर ले गया था.
अनीता ने श्याम सिंह को फोन किया तो जवाब मिला कि तनु तो उन के यहां नहीं आई है. वह किसी अनहोनी की आशंका से घबरा गए, साथ ही अनीता के माथे पर भी बल पड़ गए. उन्होंने चंदन को फोन किया तो उस का भी फोन नहीं लगा.
श्याम सिंह भागेभागे अनीता के पास आए और तनु की खोजबीन की. लेकिन वह कहीं नहीं मिली तो उन्होंने थाना तिलकनगर में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. तलाक होने के बाद भी चंदन तनु के पास आताजाता रहता था, यही बात पुलिस को चौंकाने वाली भी थी और सुराग देने वाली भी.
इंदौर के डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने तनु की खोज के लिए एएसपी अमरेंद्र सिंह को नियुक्त कर दिया. उन्होंने पहले उन दोनों की जन्म कुंडलियां खंगाली तो जल्द ही सारा सच सामने आ गया.
पता चला कि चंदन और महिम अव्वल दरजे के ब्लैकमेलर हैं, पर अभी तक किसी ने उन के खिलाफ रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई है. अलबत्ता दोनों अन्नपूर्णा इलाके में सन 2012 में हुई गोलीबारी में भी शामिल थे. इन पर एक और दूसरा आपराधिक मामला इसी साल फरवरी में दर्ज हुआ था.
शक के आधार पर क्राइम ब्रांच ने चंदन और महिम को गिरफ्तार किया, पर पूछताछ में कुछ हासिल नहीं हुआ. दोनों ही पुलिस को गुमराह करने वाले बयान देते रहे. दरअसल, इस में दिक्कत यह थी कि एक पत्रकार था और दूसरा बड़े कांग्रेसी नेता का चेला. ऐसे में अगर इन के साथ जोरजबरदस्ती की जाती तो खासा बवाल मच सकता था.
सब कुछ साफ समझ में आ रहा था, इसलिए अमरेंद्र सिंह ने जोखिम उठाया और चंदन तथा महिम से सख्ती की तो वे टूट गए और सारा सच उगल दिया. सच बड़ा वीभत्स था. दोनों ने 17 मार्च को ही तनु की हत्या उस के फ्लैट में कर दी थी. भांग के नशे में चूर तनु को शायद पता भी नहीं चला था कि उसे किस ने और कैसे मार डाला. चूंकि त्यौहारी सन्नाटा था, इसलिए तनु की हत्या कर उस की लाश ज्यों की त्यों छोड़ कर दोनों अपनेअपने घर चले गए थे.
अगले दिन दोनों फिर फ्लैट पर आए और तनु की लाश के 16 टुकड़े कर उन्हें फ्रिज में ठूंस दिया, जिस से बदबू न आए. 3-4 दिन चंदन अपना डर मिटाने फ्लैट पर आताजाता रहा. चौथे दिन फ्लैट में दाखिल होते ही उसे मांस के टुकड़ों से गंध आती महसूस हुई तो दोनों ने मिल कर लाश के उन टुकड़ों को अलगअलग थैलियों में पैक कर के उन्हें कार में रख कर बड़वाह के जंगल में फेंक आए.
चंदन और महिम के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के लिए जरूरी था कि तनु की लाश का कोई टुकड़ा मिले. इस बाबत पुलिस वाले लगातार भागादौड़ी करते रहे. पुलिस की आधा दर्जन टीमें जंगलों की खाक छानती रहीं, पर तनु की लाश का कोई टुकड़ा उन्हें नहीं मिला. नदियों में भी तलाशी ली गई, पर उस से भी कुछ हासिल नहीं हुआ. बस एक गुदड़ी ही बरामद हो पाई.
इस बिना पर आईपीसी की धाराओं 302 व 201 के तहत हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने चंदन राजौरिया और पत्रकार महिम शर्मा को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. इन के बयानों से जो कहानी सामने आई, उसे आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं.
दोनों मुजरिमों ने अपने बयान में जुर्म जरूर स्वीकार कर लिया है, पर अदालत में उसे साबित कर पाना टेढ़ी खीर होगी, क्योंकि तनु की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है, उस की लाश भी बरामद नहीं हुई है. इस के अलावा हत्या में प्रयुक्त हथियार भी नहीं मिले हैं. ऐसे में संदेह का लाभ उन्हें मिल सकता है. तय है, बचाव पक्ष का वकील यह दलील भी देगा कि इस से तो यह भी साबित नहीं होता कि वाकई तनु की हत्या हुई है. पुलिस ने जोरजबरदस्ती कर उस के मुवक्किलों से झूठ बुलवा लिया है.
अंजाम कुछ भी हो, पर अपनी इस हालत की एक बड़ी जिम्मेदार तनु खुद भी थी, जो 2 में से एक पति की भी न हुई और एक ऐसे ब्लैकमेलर पर अपना सब कुछ लुटा बैठी, जिस ने अंतत: उस की सांसें छीन लीं. क्योंकि वह गुनाह में उस का साथ देने को तैयार नहीं हो रही थी.
पूजा सुहेल को जितना प्यार करती थी उस से कहीं ज्यादा उस पर विश्वास भी करती थी.
सुहेल ने रूम में पड़ी टेबल पर रखी मेनू कार्ड उठाया और फिर पूजा से बोला, ‘‘जो तुम्हें पसंद हो आर्डर करो. आज मैं अपनी पसंद का नहीं, बल्कि तुम्हारी पसंद का ही नाश्ता करूंगा.’’
उस दिन पूजा की पसंद का नाश्ता आया. नाश्ता करने के बाद पूजा ने चलने के लिए कहा. इस पर सुहेल ने कहा, ‘‘पूजा, अब इतनी जल्दी भी क्या है. पहली बार तो हम दोनों एकांत में मिले हैं. फिर एकांत पलों का क्यों न फायदा उठाया जाए.’’ कहते हुए पूजा को अपनी आगोश में समा लिया.
सुहेल की यह हरकत शायद पूजा को अच्छी नहीं लगी. उस ने सुहेल को अपने से अलग करते हुए कहा, ‘‘मुझे यह हरकतें पसंद नहीं. ठीक है, मैं तुम्हें प्यार करती हूं, लेकिन यह सब शादी से पहले मैं शायद बरदाश्त नहीं कर पाऊंगी.’’
सुहेल ने पूजा के साथ होटल में की मनमरजी
पूजा की ऐसी प्रतिक्रिया देख सुहेल ने कहा, ‘‘लगता है तुम मुझे दिल से प्यार नहीं करती. वरना ऐसा व्यवहार नहीं करती. पूजा मैं तुम्हें दिलोजान से प्यार करता हूं और एक पल भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. अगर तुम्हें अभी भी ऐसा लगता है कि मैं तुम्हारे साथ प्यार का दिखावा कर रहा हूं तो तुम इसी वक्त जा सकती हो.’’ यह कहते ही सुहेल का चेहरा उतर गया.
उस वक्त पूजा उस के प्यार में इतना आगे बढ़ चुकी थी कि वह उस की जुदाई भी बरदाश्त नहीं कर सकती थी. उस के उतरे चेहरे को देखते ही पूजा ने सुहेल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वह प्यार की भावनाओं में बह गई.
उस ने सामने खड़े सुहेल को अपनी बाहों में भर लिया. फिर पूजा ने कहा कि तुम मुझे कैसे भी प्यार करो, लेकिन एक लिमिट में ही रहना. मैं अभी तुम्हारे साथ वह सब कुछ नहीं कर सकती जो शादी के बाद होता है.
सुहेल पूजा की बात सुनता रहा. फिर बोला, ‘‘फिर हमारे होटल आने का क्या फायदा? यह बात मुझे मालूम नहीं थी कि तुम मेरे साथ केवल प्यार का दिखावा ही कर रही हो.’’
पूजा भले ही काफी समय से सुहेल के संपर्क में थी. लेकिन इस से पहले उस ने कभी भी ऐसा नहीं किया था. लेकिन उस दिन उसे सुहेल की जिद के आगे हार मानने पर मजबूर होना पड़ा. उस दिन होटल में सुहेल ने प्यार की सीमाएं लांघते हुए वह सब कुछ कर डाला, जिस की पूजा ने शादी से पहले करने की कल्पना भी नहीं की थी.
पूजा उस सब के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन सुहेल ने अपनी जिद पकड़ कर उस के साथ बलात्कार ही कर डाला था. उस दिन सुहेल ने पूजा के साथ अपनी मनमानी कर डाली थी. लेकिन पूजा को उस दिन पहली बार एहसास हुआ कि सुहेल ने जो आज उस के साथ किया, वह अच्छा नहीं किया.
सुहेल पूजा से करने लगा किनारा
पूजा ने एक बार सुहेल के साथ अपने को समर्पित किया तो फिर दोनों के बीच सैक्स संबंध बनते रहे. पूजा को उम्मीद थी कि कुछ ही समय बाद वह सुहेल की संगिनी बनेगी, लेकिन हुआ इस का उलटा. कुछ समय बाद सुहेल का उस के प्रति व्यवहार बदलने लगा.
स्टेशनरी की दुकान पर आने के बाद वह पूजा से पहले की तरह बात नहीं करता था. दुकान के बाद वह अपने घर जाती तो वह उस की काल रिसीव नहीं करता था. पूजा झुंझला कर उस का कारण पूछती तो वह हर वक्त कोई न कोेई बहाना तैयार रखता था. दुकान पर आने के बाद भी वह अकसर अपने फोन पर व्यस्त रहता.
सुहेल के बदले व्यवहार को देखते ही उस का दिमाग घूमने लगा. फिर उसे शक हुआ कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह किसी और लड़की से बात करता हो. यह बात दिमाग में आते ही उस का ध्यान सुहेल के मोबाइल पर केंद्रित हो गया.
एक दिन की बात है सुहेल किसी काम से शहर गया तो भूल से उस का मोबाइल दुकान पर ही रह गया. उस के जाने के बाद ही उस के मोबाइल पर किसी की मिस्ड काल आई. उस के कुछ समय बाद फिर से उसी नंबर से मिस्ड काल आई.
लगातार कई मिस्ड काल आने के बाद पूजा ने उस नंबर को देखा तो वह किसी लड़की के नाम से सेव था. लड़की की मिस्ड काल आने के बाद पूजा समझ गई कि सुहेल उस के साथ प्यार का खेल खेल रहा था.
सुहेल के आते ही उस ने उस के मोबाइल पर किसी की मिस्ड काल आने वाली बात बताई तो वह उस पर ही आगबबूला हो गया, ‘‘तुम्हें मेरा फोन देखने की क्या जरूरत थी? मेरा दुकानदारी का काम है किसी को माल देना होता है और किसी से पेमेंट लेनी होती है. आज के बाद मेरे फोन को हाथ लगाने की जरूरत नहीं.’’
पूजा को हो गया छले जाने का अहसास
उस दिन खून के आंसू बहाती हुई पूजा घर पहुंची तो उस के भाई भरत ने उस से पूछा, ‘‘पूजा दीदी, क्या हुआ? आज लगता है कि तुम्हारी तबियत सही नहीं है.’’
‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है भाई, थोड़ा थक गई हूं. इसीलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है.’’
उस से अगले दिन पूजा दुकान पर भी नहीं गई. उसे उम्मीद थी कि सुहेल उसे जरूर फोन करेगा. लेकिन उस का कोई फोन नहीं आया तो उसे बहुत ही दुख हुआ. उसे लगा कि वह प्यार में छली गई.
उस के बाद भी उस का मन नहीं माना तो उस ने सुहेल को फोन किया. लेकिन उस ने उस की काल रिसीव नहीं की. उस ने कई बार उसे वाट्सऐप मैसेज किया, लेकिन उस ने उस का कोई जवाब नहीं दिया. उस के अगले दिन भी वह काम पर नहीं गई. उस दिन भी उसे सुहेल का फोन आने का इंतजार था.
दोपहर तक पूजा ने कई बार उस के नंबर पर काल की. लेकिन उस की तरफ से कोई उत्तर न मिलने पर वह दुकान पर पहुंची तो वह दुकान पर नहीं मिला. उस के बाद वह अपने घर आ गई.
तीसरे दिन पूजा अपने काम के वक्त पर ही उस की दुकान पर पहुंची तो उस वक्त वह दुकान पर बैठा किसी से वाट्सऐप पर चैटिंग कर रहा था. यह देख कर वह समझ गई कि उस ने किसी दूसरी लड़की को अपने प्यार में फंसा लिया है.
पूजा को देखते ही उस के चेहरे का रंग उड़ गया, ‘‘बोलो, तुम क्या कहना चाहती हो?’’
‘‘तुम ने मेरा फोन उठाना क्यों बंद कर दिया?’’ पूजा ने उस से पूछा.
‘‘देखो पूजा, तुम बुरा मत मानना. दरअसल, मेरे घर वालों को किसी ने तुम्हारे और मेरे संबंधों के बारे में बता दिया है, जिस के कारण घर में फसाद चल रहा है. इसलिए हम दोनों के लिए बेहतर यही होगा कि हम समय से पहले ही अलगअलग हो जाएं.’’
‘‘क्या मतलब? लेकिन तुम ने मेरे साथ शादी का जो वायदा किया था, वह सब तुम्हारा ढोंग दिखावा था.’’ पूजा सुहेल की बात सुन कर हतप्रभ रह गई.
‘‘पूजा, ऐसी कोई बात नहीं. लेकिन मैं अपने घर वालों के सामने बेबस हो गया हूं. इस में मैं कुछ नहीं कर सकता.’’
सुहेल ने उस का पहले से ही हिसाब बना रखा था. उस ने यह बात कहते हुए उस की पेमेंट भी देने की कोशिश की. लेकिन उस की बात सुनते ही पूजा पर जैसे बिजली गिर गई थी. उस की मीठीमीठी बातों में आ कर उस ने अपनी इज्जत भी तारतार कर डाली थी.
‘‘जाओ यहां से, मरने का शौक है तो सुसाइड का सामान भेज दूंगी. जो भी करना लाइव करना मैं अपने मायके से देखूंगी तुम्हारा तमाशा.’’ वंदना की बोली गई इस बात से विशाल भीतर से छिल गया. उस रोज चुपचाप घर आ गया, लेकिन दिमाग में खलबली मची रही.
खाना खाने के बाद विशाल अपने कमरे में आ गया था. रोज की तरह कंप्यूटर औन कर लिया था. कुछ समय काम करता रहा, लेकिन मन को एकाग्र नहीं कर पाया. फिर इंटरनेट पर देश दुनिया की खबरें पढ़ने लगा. उस में भी मन नहीं लग रहा था. इसी तरह आधी रात बीत चुकी थी.
अब नींद आने लगी थी. सोने की तैयारी करने लगा. कंप्यूटर शटडाउन करने के दौरान उस का ध्यान उस पौलीथिन में पर गया, जो वंदना का आदमी दे गया था.
उस ने पैकेट खोला. बड़ी मजबूती से पैक किया हुआ था. जैसे ही पैकेट का आखिरी आवरण हटा, वह चौंक गया. उस में रिवौल्वर था. वह भी गोलियों से भरा हुआ. रिवौल्वर देखते ही उस का माथा एक बार फिर भन्ना गया. उसे वंदना की वह बात याद आ गई. उस ने कहा था, ‘‘घर पर लाइसैंसी रिवौल्वर छोड़ कर आई हूं. दम है तो खुदकुशी कर के दिखाओ. मैं मां के घर टीवी के सामने बैठी हूं. सभी के साथ बैठ कर तुम्हारी मौत की खबर देखूंगी.’’
लोडेड रिवौल्वर देखने के बाद विशाल ने बेचैनी के साथ वंदना को कई काल किए. उस वक्त रात के 2 बज रहे थे. वंदना ने कोई काल रिसीव नहीं की. वह और भी बेचैन हो गया.
वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे और क्या नहीं. रिवौल्वर को पौलीथिन में रख कर सोने की कोशिश करने लगा. मन में कई तरह के खयाल आते रहे. एक खयाल सुबहसुबह वंदना के घर जा कर रिवौल्वर लौटाने का था जबकि दूसरा खयाल उस के ताने देने और किसी और के साथ चल रहे अफेयर का था. इन्हीं विचारों में कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला.
सुबह देर तक सोया रहा. कमरे का दरवाजा भिड़ा हुआ था. कमरे के बाहर चहलपहल शुरू हो चुकी थी. सभी अपनेअपने रोजमर्रा के काम से निपट कर पूजापाठ तक कर चुके थे. रसोई में सुबह का नाश्ता भी बनने लगा था.
मां ने वैशाली से कहा कि विशाल को जगा दे 10 बजने वाले हैं. इस पर वैशाली ने कहा जाग जाएंगे भैया. मां कुछ और बोलने ही वाली थी कि विशाल के कमरे से गोली चलने की आवाज आई.
सभी भागेभागे विशाल के कमरे में गए. उस ने कनपटी से रिवौल्वर सटा कर गोली मार ली थी. पिता अनूपम कुमार सिन्हा, मां शारदा सिन्हा व छोटी बहन वैशाली सिन्हा कमरे का दृश्य देख कर दहल गए. विशाल बैड पर खून से लथपथ पड़ा था. पास में एक रिवौल्वर पड़ी थी.
बुरी तरह से जख्मी विशाल को उस की छोटी बहन वैशाली तुरंत सगुना मोड़ स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले कर गई. उस की गंभीर हालत देख कर वहां के डाक्टर ने राजाबाजार स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान जाने को कहा. वहां देर शाम तक विशाल का इलाज हुआ, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.
इतने समय में पूरे शहर में पत्रकार विशाल द्वारा गोली मार कर आत्महत्या की खबर फैल गई. खगौल थाने की पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली. थानाप्रभारी फूलदेव चौधरी ने घटनास्थल का मुआयना किया. विशाल के सभी घर वालों के बयान लिए. उन में बहन वैशाली के बयान को प्रमुखता से रिपोर्ट में दर्ज किया गया.
वैशाली ने बताया कि घटना के बाद उस ने जब अपना मोबाइल देखा तब उस में विशाल का मैसेज था. मैसेज में विशाल ने खुदकुशी करने की बात लिखी थी. वह एक तरह से उस का सुसाइड नोट था.
इस के अलावा थानाप्रभारी फूलदेव चौधरी ने विशाल के कमरे से लाइसैंसी रिवौल्वर और एक मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर कमरे को सील कर दिया. इस से पहले फोरैंसिक जांच टीम ने नमूने इकट्ठा कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए थे.
विशाल का सुसाइड नोट कंप्यूटर के टेबल पर मिला था. उसे ही विशाल ने वैशाली को वाट्सऐप किया था. इस में विशाल ने लिखा था, ‘मुझे सुसाइड के लिए वंदना और उस के बच्चों ने उकसाया है. वंदना ने इस के लिए मुझ से कहा था… दम है तो खुदकुशी कर के दिखाओ. मैं ने वंदना को कई फोन किए, लेकिन उस ने नहीं उठाया.’
विशाल ने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि वंदना और उस ने 2 अक्तूबर, 2020 को शादी कर ली थी.
वैशाली ने पुलिस को दिए बयान में साफतौर पर उस की खुदकुशी का आरोप वंदना पर लगाते हुए कहा कि वह भैया को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त कर रही थी. शादी को सामाजिक रूप से उजागर नहीं करना चाहती थी.
इस बयान और सुसाइड नोट के आधार पर 32 वर्षीय पत्रकार विशाल कुमार सिन्हा की मौत को ले कर 30 जुलाई, 2022 को खगौल थाने में 4 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया गया. इस में वंदना सिंह, उस के भाई मिथिलेश सिंह, अभिषेक सिंह और वंदना के नाबालिग बेटे को घटना का आरोपी बनाया गया. पुलिस इन के खिलाफ भादंवि की धारा 306, 34 आईपीसी, 25 (1-बी)/26/30 आर्म्स ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया.
पुलिस का मानना है कि जिस रिवौल्वर से विशाल ने खुद को गोली मारी थी, वह गैरलाइसेंसी है. घटना के बाद पुलिस ने विशाल के घर पर 9 एमएम का एक पिस्टल, जिस से विशाल ने खुद को गोली मारी थी, के साथ ही एक राइफल व 13 गोलियां भी बरामद कीं.
कथा लिखे जाने तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके थे. पुलिस उन की गिरफ्तारी के लए संभावित ठिकानों पर दबिशें डाल रही थी. द्य
दोनों के बीच प्यार की राह खुली तो दोनों एक साथ जीनेमरने की कसमें खाने लगे थे. फायजा को हसन के प्यार में किसी भी तरह से हल्कापन नजर नहीं आया था. उस के बाद दोनों के बीच विश्वास बढ़ा तो हसन भी उस पर पैसा लुटाने लगा था.
हसन ने कई बार फायजा को उस की पसंद का मोबाइल भी ले कर दिया, ताकि वह उस के संपर्क में बनी रहे. हसन कुछ ही समय में उस का इतना दीवाना बन बैठा कि उस ने एक दिन अपने सीने पर फायजा का नाम ही गुदवा लिया था.
फायजा भी उसे दिलोजान से प्यार करती थी. इंस्टाग्राम पर वह कभीकभार अपनी फोटो शेयर करती तो हमेशा ही उसे नाजिम नाम के युवक की तरफ से जरूर लाइक और कमेंट मिलता था. नाजिम से जुड़ते ही उस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उस की कुंडली खंगाली.
पता चला कि नाजिम लखनऊ शहर से था और एक प्राइवेट कंपनी में जौब करता था. नाजिम देखने में सुंदर था. यही कारण था कि कुछ ही दिनों में नाजिम और फायजा के बीच वाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हायहैलो होने लगी. धीरेधीरे नाजिम के प्रति उस की उत्सुकता बढ़ी और बात दोस्ती तक जा पहुंची.
नाजिम से दोस्ती का हाथ बढ़ाते ही उस ने हसन से बात करनी कुछ कम कर दी थी. हसन जब कभी भी फायजा को फोन मिलाता तो उस का फोन व्यस्त मिलता था. उस के बाद वह कई बार उस से मिलने उस के घर पर भी गया. लेकिन उस ने देखा कि उस का व्यवहार उस के प्रति काफी बदल गया है.
खाली वक्त में फायजा सोशल मीडिया पर समय गुजारने लगी थी. कुछ ही समय में उस ने वाट्सऐप व फेसबुक पर ढेरों दोस्त बना लिए थे. वाट्सऐप व फेसबुक पर उसे बोरियत होने लगी तो उस ने इंस्टाग्राम पर भी अपना एकाउंट बना लिया था. उस के बाद वह इंस्टाग्राम पर भी अपने फोटो शेयर करने लगी.
हसन उस के गांव से काफी दूर का रहने वाला था, जिस के कारण वह उस पर हर वक्त तो नजर रख नहीं सकता था. फिर भी उस की नजर फायजा के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जरूर जमी रहती थी. जिस के कारण ही उसे उस की हकीकत का पता चल सका कि वह नाजिम की ओर फिसलती जा रही है.
उस के बदले हालात देखते ही हसन के तनबदन में आग लग गई. उसे सब से ज्यादा अफसोस इस बात का था कि उस ने फायजा पर विश्वास कर के उस पर अपनी गाढ़ी कमाई के 6-7 लाख रुपए बरबाद कर दिए थे. फिर भी उसे बेवफाई ही हाथ लगी थी.
पहली अगस्त, 2022 को हसन ने कई बार उस के मोबाइल पर फोन मिलाया, लेकिन हर बार उस का मोबाइल व्यस्त ही आया. जिस के कारण उस के दिमाग में एक शैतान जाग उठा.
उस ने उसी दिन तय कर लिया कि आज आर या पार. आज वह फायजा से फैसला कर के ही रहेगा कि उसे उस के साथ रहना है या फिर किसी और के साथ.
यही सोच कर वह शाम के कोई 5 बजे उस के घर पहुंच गया था. फायजा के घर पहुंचते ही उस ने प्रश्न किया, ‘‘फायजा, तुम्हारे दिल में क्या चल रहा है, आज मुझे साफसाफ बताओ? आज सुबह से ही मैं तुम्हें कई बार फोन मिला चुका हूं लेकिन तुम ने एक बार भी मेरा फोन रिसीव नहीं किया. मैं ने कई बार वाट्सऐप पर मैसेज भी भेजा, लेकिन तुम ने उस का भी कोई जवाब नहीं दिया. मुझे आज साफसाफ बताओ कि तुम मुझ से क्या चाहती हो?’’
इस से पहले कि फायजा उस के सवालों का कोई जबाव दे पाती, उस की अम्मी आ गई. आसिफा के आते ही हसन शांत हो गया. मां आते ही फायजा हसन को साथ ले कर दूसरी मंजिल पर चली गई. हसन का गुस्सा देख कर उस ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘हसन, जैसा तुम सोच रहे हो वैसा कुछ भी नहीं है. मैं कल भी तुम्हें प्यार करती थी और आज भी करती हूं. लेकिन किसी काम के चलते मैं तुम्हारा फोन रिसीव नहीं कर सकी. इस में परेशान होने वाली क्या बात है?’’
फायजा की बात सुनते ही हसन का गुस्सा शांत हो गया. उस के बाद उसे लगा कि कहीं न कहीं उस के मन का ही वहम है. उस के बाद दोनों छत से नीचे चले आए.
छत से आने के बाद दोनों ने एक साथ बैठ कर चाय पी. उसी समय उस ने फायजा को खर्च के लिए 3 हजार रुपए भी दिए. काफी देर हो जाने के कारण हसन अपने घर के लिए निकलने ही वाला था, तभी फायजा के मोबाइल पर किसी की काल आई. स्क्रीन पर उभर रहे नाम को देखते ही फायजा ने काल डिसकनेक्ट कर दी. उस के बाद वह उसे विदा करने के लिए घर के दरवाजे पर आ गई.
हसन अभी उस के घर से निकला भी नहीं था कि उसी समय फिर से फायजा के मोबाइल पर फिर से फोन आ गया. उस ने सोचा हसन चला गया होगा. यही सोच कर उस ने नाजिम को फोन मिला दिया. फिर वह उस से बात करने लगी.
हसन को इसी पल का इंतजार था. वह चुपके से दबे पांव गेट के पास आया और उस की बात सुनने लगा. उस की बातों से हसन को लगने लगा था कि वह वाकई उस के साथ प्यार का खेल खेल रही है. उस वक्त दोनों के बीच जो बातें उस ने सुनीं, उन्हें सुन कर उस के तनबदन में आग लग गई.
उस ने उसी समय अपने बैग में रखा चाकू निकाला और सामने फोन पर बात कर रही फायजा पर अनगिनत वार कर डाले. लहूलुहान होने के बावजूद भी फायजा चीखतीचिल्लाती अपने बचाव के लिए घर के अंदर भागी.
लेकिन कुछ ही पलों में वह बेहोश हो कर नीचे गिर पड़ी. उस की चीखपुकार सुन कर उस की अम्मी आसिफा नीचे आ गई थी. उस के बाद हसन आसिफा को धक्का मार कर वहां से भाग गया.
आरोपी हसन से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे आईपीसी की धारा 452, 302 के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. द्य
—कहानी में कुछ पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.