Uttarakhand News : अंकिता के हत्यारों को मिली उम्रकैद

Uttarakhand News : उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों की नजर 19 वर्षीय अंकिता भंडारी मर्डर केस के फैसले पर टिकी हुई थी. इस की वजह यह थी कि मुख्य आरोपी पुलकित आर्य भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्वमंत्री डा. विनोद आर्य का बेटा था. इस हत्याकांड के विरोध में व्यापक स्तर पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुके इस केस का 30 मई, 2025 को डिस्ट्रिक्ट जज ने ऐसा क्या फैसला सुनाया, जिसे सुन कर लोग आश्चर्यचकित रह गए?

30 मई, 2025 शुक्रवार को हरिद्वार से 70 किलोमीटर दूर स्थित कोटद्वार की जिला अदालत के बाहर सुबह से ही शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 700 से अधिक पुलिसकर्मियों की फौज लगाई जा चुकी थी. अदालत की ओर आने वाले सभी रास्तों को लगभग बंद कर दिया गया था. वकीलों के अलावा अदालत परिसर में किसी अन्य को आने की छूट नहीं थी. फिर भी एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रीना नेगी का फैसला सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ बाहर इकट्ठा हो चुकी थी. मजे की बात यह है कि कोर्ट की स्थापना होने के बाद से आज से पहले कभी इतनी भीड़ अदालत के बाहर इकट्ठा नहीं हुई थी.

उस दिन किस मामले का फैसला आने वाला था? आखिर उस मामले में ऐसी क्या बात थी, जिसे जानने के लिए अदालत के बाहर इतनी भीड़ इकट्ठा हुई थी? यह सब जानने के लिए थोड़ा अतीत में चलते हैं. उत्तराखंड के जिला पौड़ी गढ़वाल का एक छोटा सा गांव है डोभ श्रीकोट. इसी गांव के रहने वाले वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोना देवी के पास केवल एक ही बेटा था. उस के बाद जब एक बेटी पैदा हुई तो पतिपत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा था. बेटी का नाम उन्होंने अंकिता रखा था. पर पिता तो उसे खुशियों का साक्षी मानते थे, इसलिए वह उसे अंकिता के बजाय साक्षी कह कर बुलाते थे.

पढ़ाई में होशियार अंकिता ने बारहवीं में 89 प्रतिशत नंबर पाए थे, लेकिन इस के आगे की पढ़ाई की गांव में कोई व्यवस्था नहीं थी. परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति अंकिता को पता ही थी, इसलिए आगे पढ़ाई करने बजाय होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर के कोई अच्छी नौकरी कर के वह परिवार की आर्थिक मदद करने के बारे में सोचने लगी थी. देहरादून में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए बढिय़ा कालेज था. बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए पिता वीरेंद्र सिंह ने देहरादून में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार से बात की. उन्होंने विश्वास दिलाया कि अंकिता उन के यहां आराम से रह सकती है. उन्होंने उस के खाने की व्यवस्था भी अपने यहां कर दी थी. कालेज की फीस वीरेंद्र सिंह ने उधार ले कर भर दी तो अंकिता होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए देहरादून आ गई.

अंकिता अपने जिस रिश्तेदार के यहां रहती थी, वह उसे अपनी सगी बेटी की तरह रखते थे. 2 साल की फीस भरतेभरते वीरेंद्र सिंह की हालत खराब हो गई थी. तीसरे साल की फीस भरने तक उन की हालत ऐसी हो गई थी कि अब आगे की फीस भरना उन के लिए मुश्किल हो गया था. रुआंसे हो कर उन्होंने अपनी मजबूरी बेटी को बताई तो बिना किसी तरह की किचकिच किए अंकिता घर वापस आ गई. घर आने के बाद उस ने मम्मीपापा से कहा कि अपनी इस 2 साल की पढ़ाई के आधार पर वह कोई नौकरी खोज निकालेगी. पैसा कमा कर परिवार की मदद करने का जुनून था, इसलिए अंकिता ने अलगअलग होटलों के विज्ञापन देख कर नौकरी के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया था.

उस की मेहनत रंग लाई और ऋषिकेश के पास यमकेश्वर इलाके में स्थित वनंतरा  रिसौर्ट से जवाब आया कि उन के यहां रिसैप्शनिस्ट के रूप में काम करने की इच्छा हो तो वह जल्दी से आ जाएं. अंकिता को नौकरी मिलने की बात से पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. पर 19 साल की लड़की को एकदम अंजान जगह पर अंजान लोगों के बीच नौकरी करने जाना था. पेरेंट्स को इस बात की चिंता थी. अंकिता ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मम्मीपापा को विश्वास दिलाया कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेगी, जिस से उन्हें परेशानी हो.

28 अगस्त, 2022 को वीरेंद्र सिंह खुद बेटी को पहुंचाने रिसौर्ट तक आए और उसी दिन से अंकिता की नौकरी शुरू हो गई. इस वनंतरा रिसौर्ट के मालिक का नाम पुलकित आर्य था. पुलकित के पिता डा. विनोद आर्य भाजपा के बड़े नेताओं में थे. वह राज्य मंत्री रह चुके थे. इसलिए पार्टी में उन्हें एक बड़ा ओहदा मिला था. उन का फार्मेसी का काम था. पुलकित की भी भाजपा में अग्रणी कार्यकर्ताओं में गिनती होती थी. यही नहीं, उसे एक सरकारी कारपोरेशन में बड़ा ओहदा मिला था. वह पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष था.

देहरादून में पढ़ाई के दौरान अंकिता की जम्मू के एक अपनी ही तरह की आर्थिक स्थिति वाले लड़के से दोस्ती हो गई थी. उस लड़के का नाम था पुष्पदीप. वह देहरादून के उसी कालेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था. दोनों एकदूसरे से हर तरह की खुल कर बातें करते थे. उसे एक रिसौर्ट में नौकरी मिल गई है, इस बात की जानकारी अंकिता ने पुष्पदीप को वाट्सऐप मैसेज से दे दी थी. पुष्पदीप ने शुभकामनाएं देते हुए बताया था कि अभी वह नौकरी खोज रहा है. इस के बाद रिसौर्ट की वे बातें, जो वह अपने पेरेंट्स से नहीं बता सकती थी, पुष्पदीप के साथ शेयर करती रहती थी.

17 सितंबर, 2022 को अंकिता ने पुष्पदीप को मैसेज किया कि ‘यह रिसौर्ट बहुत गंदा है और मैं यहां से निकलना चाहती हूं. यहां कोई वीवीआईपी मेहमान आने वाला है. मुझ पर दबाव डाला जा रहा है कि मैं उस मेहमान को ‘स्पैशल सेवा’ दूं.’

हैरान रह गए पुलकित ने तुरंत पूछा, ”स्पैशल सेवा यानी सैक्स?’’

”हां,’’ में जवाब देते हुए अंकिता ने आगे लिखा, ”मैं गरीब हूं, इसलिए ये लोग मुझे पैसा दे कर …. बनाना चाहते हैं.’’ इस के आगे उस ने लिखा, ”यहां का मालिक पुलकित आर्य और उस का पर्सनल असिस्टेंट अंकित गुप्ता और रिसौर्ट का मैनेजर सौरभ भास्कर, ये तीनों इस काम के लिए मुझ पर जबरदस्त रूप से दबाव डाल रहे हैं. जबकि इस काम के लिए मैं हरगिज तैयार नहीं हूं. मेरे संस्कार भी ऐसे नहीं हैं. मुझे अपनी सुरक्षा की चिंता है. इसलिए आज ही मैं यह रिसौर्ट छोड़ कर घर चली जाऊंगी.’’

पुष्पदीप ने जवाब में लिखा, ”तुम्हारा निर्णय एकदम सही है. तुम वहां से तत्काल निकल जाओ. कोई तकलीफ हो या मेरे लायक कोई काम हो तो बिना संकोच बताना. मेरी मानो तो तुम वहां से तुरंत निकल जाओ.’’

19 सितंबर, 2022 की सुबह पुलकित आर्य रिसौर्ट के नजदीक के लक्ष्मण झूला थाने पहुंचा. उस ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 20 दिन पहले ही उस ने अपने रिसौर्ट के लिए एक नई रिसैप्शनिस्ट नियुक्त की थी. वह 19 साल की रिसैप्शनिस्ट अंकिता भंडारी कल शाम से गायब है. पुलिस ने लड़की का फोटो और पूरी जानकारी ले कर पूछा कि वह लड़की रिसौर्ट से कुछ ले कर तो नहीं भागी है? तब पुलकित ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है. पूर्व राज्य मंत्री स्तर के बेटे ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी और वह खुद भी सत्ताधारी पार्टी का नेता था, इसलिए सीनियर इंसपेक्टर मनोहर सिंह रावत ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी थी.

जब अंकिता के अचानक गायब होने की जानकारी पुष्पदीप को हुई तो एक मित्र के रूप में उस ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह तुरंत भाग कर थाना लक्ष्मण झूला आया और अंकिता द्वारा किए गए वाट्सऐप मैसेज एसएचओ मनोहर सिंह रावत को दिखा कर कहा कि अंकिता को गायब करने में इन्हीं तीनों का हाथ है. उन मैसेज की सत्यता की जांच करने के बाद मनोहर सिंह रावत ने समय बरबाद किए बगैर उन तीनों को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. इस तरह 24 घंटे के अंदर ही पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई थी.

गहराई से की गई पूछताछ में पुलकित ने स्वीकार कर लिया था कि 18 सितंबर को मैं, अंकित और सौरभ अंकिता को साथ ले कर रिसौर्ट की खरीदारी के लिए ऋषिकेश गए थे. रात 9 बजे लौटते समय गंगा की चीला नहर के पास बैराज पर हम सभी खड़े थे. तभी हंसीमजाक में अंकिता ने मेरा मोबाइल नहर में फेंकने की कोशिश की, तभी उस का पैर फिसला और वह नहर में चली गई. हम लोगों ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की, पर बचा नहीं सके और वह नहर में बह गई. पुलकित का यह बयान जब अखबारों में छपा तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. 22 सितंबर को पुलिस तीनों को घटनास्थल पर ले जा कर घटना की जांच करना चाहती थी.

इस की जानकारी किसी ने वाट्सऐप ग्रुप में डाल दी. इस के बाद तो ऋषिकेश, पौडी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल के हजारों लोग वहां इकट्ठा हो गए. लोगों का कहना था कि अंकिता हमारी बेटी थी, इसलिए उसे गायब करने वाले तीनों लोगों को हमें सौंप दिया जाए, हम न्याय करेंगे. लोगों में काफी गुस्सा था. 10 सिपाहियों की टीम के साथ पुलिस तीनों आरोपियों को ले कर वहां पहुंची. घटनास्थल पर इकट्ठा लोगों का गुस्सा देख कर इंसपेक्टर ने तुरंत फोन कर के अन्य थानों की पुलिस वहां बुलवा ली थी.

लोगों ने पत्थर चलाने शुरू कर दिए थे, जिस से पुलिस की गाडिय़ों के शीशे टूट गए थे. तीनों आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस ने जीप की खिड़की और दरवाजे बंद कर दिए थे तथा जीप को 40 सिपाहियों ने घेर लिया था. इस के बावजूद गुस्साई भीड़ जीप को उठा कर नहर में फेंकने पर आमादा थी. बड़ी मशक्कत से पुलिस ने लाठीचार्ज कर के जीप के निकलने के लिए रास्ता बनाया और किसी तरह तीनों आरोपियों को अदालत तक पहुंचाया. इस के बाद गुस्साई भीड़ रिसौर्ट पर पहुंची और वहां तोडफ़ोड़ की. पुलिस ने अंकिता की लाश की खोज शुरू की तो 25 सितंबर, 2022 को घटनास्थल से 14 किलोमीटर दूर नहर से अंकिता की लाश मिली.

अंकिता की लाश का पोस्टमार्टम एम्स के 4 डाक्टरों के पैनल ने किया. प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाक्टरों के अनुसार अंकिता के शरीर पर किसी बिना धार वाली चीज से की गई चोटों के निशान मिले थे. रिपोर्ट के अनुसार अंकिता की मौत पानी में डूबने से आक्सीजन का स्तर कम होने से हुई थी. यही नहीं, अंकिता की लाश जब नहर से निकाली गई थी तो उस की एक आंख निकली हुई थी. बेटी की लाश देख कर पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी का दिल रो रहा था. बेटी की हत्या से वह पूरी तरह टूट चुके थे. उन का कहना था कि जब तक उन की बेटी के हत्यारों को फांसी नहीं मिल जाती, वह थाना लक्ष्मण झूला से नहीं जाएंगे. वह बेटी का अंतिम संस्कार भी नहीं करेंगे.

लेकिन जब मुख्यमंत्री धामी ने उन से फोन पर बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि हर हालत में उन्हें न्याय मिलेगा, तब वह बेटी का अंतिम संस्कार करने को राजी हुए थे. इस के बाद अलकनंदा नदी के किनारे आईटीआई घाट पर पुलिस की मौजूदगी में अंकिता का अंतिम संस्कार कर दिया गया था. इस घटना से पूरा उत्तराखंड गुस्से में था. अंकिता को न्याय दिलाने के लिए राजनीतिक पार्टियां और सामाजिक संस्थाएं रैलियां और प्रदर्शन कर रही थीं. इस की आग दिल्ली तक पहुंची तो विनोद आर्य और उन के आरोपी बेटे पुलकित आर्य को पार्टी से निकाल दिया गया था.

लोगों के गुस्से को देख कर धामी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए डीआईजी (कानून व्यवस्था) रेणुका देवी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर दिया था. इतना ही नहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री धामी ने अंकिता के पिता को 25 लाख रुपए देने के साथ उन्हें तथा उन के बेटे को सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की थी. जबकि इस पूरे मामले में पुलकित के पिता पूर्व राज्यमंत्री डा. विनोद आर्य का कहना था कि वे जिम्मेदार लोग हैं. मामले की जांच प्रभावित न हो, इसलिए उन लोगों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. पुलकित ने भी पिछड़ा आयोग से इस्तीफा दे दिया है.

उन का बेटा कांड पर कांड करता रहा और वह उस के गुनाहों पर परदा डालते रहते थे. यही वजह थी कि अंकिता को नहर में फेंकते समय उस के हाथ नहीं कांपे थे. पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के बाद भी उस की ठसक कम नहीं हुई थी. इतना बड़ा अपराध करने के बाद भी पिता विनोद आर्य उसे सीधासादा लड़का कह रहे थे. उन का कहना था कि वह अपने काम से काम रखने वाला लड़का है. वह अपने बिजनैस पर ध्यान रखता था. काफी दिनों से पुलकित पिता से अलग ज्वालापौर में अपने घर में रहता था. पुलिस के लिए आगे का काम काफी मुश्किल था. कोई चश्मदीद गवाह नहीं था. रिसौर्ट का स्टाफ पुलिस को उल्टे रास्ते पर ले जा रहा था. सभी पुलिस को गोलगोल घुमा रहे थे.

कोई कुछ बताने को तैयार नहीं था. रिसौर्ट के सीसीटीवी कैमरों की तमाम रिकार्डिंग नष्ट कर दी गई थी. इस के अलावा आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिला था. इसीलिए इस घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. एसआईटी की टीम ने लगातार मेहनत कर के 40 हजार मोबाइल रिकार्डिंग और 800 सीसीटीवी फुटेज की जांच कर के 16 दिसंबर, 2022 को अंकिता हत्याकांड की 500 से अधिक पेजों की चार्जशीट 97 गवाहों की लिस्ट के साथ अदालत में पेश की थी. आरोपियों के वकीलों की दलील थी कि रात 9 बजे अंकिता नहर में गिर पड़ी थी. उस समय चंद्रमा के कुदरती उजाले में इन तीनों ने उसे बचाने की काफी कोशिश की थी. एम्स के विशेषज्ञ डाक्टरों से अंकिता की लाश का पोस्टमार्टम कराया गया था. इस के अलावा क्राइम सीन का विजिट भी कराया गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाक्टरों ने स्पष्ट लिखा था कि घटनास्थल पर ऐसा कोई स्थान नहीं था, जहां से फिसल कर नहर में गिरा जा सके. अंकिता को उठा कर नहर में फेंका गया था. पुलिस ने कोलकाता की केंद्रीय वेधशाला को ईमेल कर के पूछा था कि घटना वाली रात चंद्रमा कितने बजे निकला था. इस ईमेल का जो जवाब आया था, उस के अनुसार उस तारीख को कृष्णपक्ष की अष्टमी होने की वजह से घटनास्थल पर चंद्रमा का उदय रात 11 बजे हुआ होगा. इसलिए रात 9 बजे कुदरती प्रकाश की दलील एकदम गलत थी.

32 महीने यानी 2 साल 8 महीने तक दोनों पक्षों की दलीलों के बाद 19 मई, 2025 को अंकिता हत्याकांड के मामले की सुनवाई पूरी हुई. उसी दिन एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रीना नेगी ने आरोप तय कर दिया था. इस के बाद 30 मई, 2025 को फैसला सुनाने की तारीख तय कर दी थी. 30 मई को कोटद्वार की अदालत के पास अभूतपूर्व भीड़ इकट्ठा होने की आशंका के मद्ïदेनजर शांति और सुरक्षा के लिए काफी पुलिस बल का बंदोबस्त किया गया था, जिस से किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न खड़ी हो. पौड़ी गढ़वाल के एसएसपी लोकेश्वर सिंह सुरक्षा की देखभाल के लिए वहां खुद उपस्थित थे.

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रीना नेगी ने जो फैसला सुनाया था, उस के अनुसार अभियुक्त पुलकित आर्य को आईपीसी की धारा 302 के अंतर्गत कठोर आजीवन कारावास व 50 हजार रुपए का जुरमाना, आईपीसी की धारा 201 के अंतर्गत 5 साल का कठोर कारावास व 10 हजार रुपए जुरमाना, आईपीसी की धारा 354क में 2 साल का कठोर कारावास व 10 हजार रुपए जुरमाना व आईटीपीए एक्ट की धारा 5(1)घ में 5 साल का कठोर कारावास व 2 हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाई.

रिसौर्ट के मैनेजर आरोपी सौरभ भास्कर और पुलकित के असिस्टेंट आरोपी अंकित गुप्ता को आईपीसी की धारा 302 में कठोर आजीवन कारावास व 50 हजार जुरमाना, आईपीसी की धारा 201 में 5 साल का कठोर कारावास व 10 हजार रुपए जुरमाना व आईटीपीए एक्ट की धारा 5(1)घ में 5 साल का कठोर कारावास व 2 हजार रुपए जुरमाना की सजा सुनाई गई. दोनों को कुल 62 हजार रुपए जुरमाना की सजा सुनाई थी. तीनों की सारी सजाएं साथसाथ चलेंगी. आईपीसी की धारा 354 क के तहत कुल 4 लाख रुपए प्रतिकर मृतका अंकिता के घर वालों को दिया जाएगा.

सिसकसिसक कर रोने वाली मृतका अंकिता की मां सोनी देवी इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. उन का कहना है कि उन की मासूम बेटी की जिस कारण और जिस तरह हत्या की गई, उन नराधमों को फांसी होनी चाहिए थी. वह इस के लिए ऊपरी अदालतों में जाने की बात कर रही हैं. बेचारी अंकिता उस दिन शाम को अपने तमाम कपड़े और सर्टिफिकेट्स बैग में रख कर घर जाने की तैयारी कर रही थी. बैग वजनदार था, इसलिए उस ने रिसौर्ट के एक कर्मचारी से विनती की कि वह उस का बैग सड़क तक पहुंचा दे. उस समय पुलकित ने उस आदमी को किसी काम में फंसा कर अंकिता से कहा कि अभी शाम को हमें खरीदारी के लिए ऋषिकेश चलना है. इसलिए वह कल घर जाए.

जबकि पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर ने मिल कर तय कर लिया था कि अगर इस लड़की ने बाहर जा कर ‘स्पैशल सेवा’ की पोल खोल दी तो उन सभी को परेशानी हो जाएगी. इसलिए इसे हमेशा के लिए चुप करा देना ही ठीक होगा. इस तरह तीनों ने अंकिता की हत्या की योजना बना डाली और अंकिता को ले जा कर नहर में फेंक दिया था. इस पूरे मामले में एक महत्त्वपूर्ण मुद्ïदा यह रहा कि पुलिस के इतनी गंभीरतापूर्वक जांच करने, तमाम जहमत उठाने, लोगों द्वारा अनेक बार पूछने के बावजूद एक सवाल का जवाब आज तक नहीं मिल पाया कि किस वीवीआईपी मेहमान की स्पैशल सेवा के लिए अंकिता पर दबाव डाला जा रहा था और यह रहस्य खुलने न पाए, इस के लिए उस की हत्या कर दी गई थी.

आखिर उस वीवीआईपी मेहमान की पहचान अभी तक क्यों गुप्त रखी गई, यह भी एक बड़ा सवाल है. पुलकित के पिता विनोद आर्य को पार्टी से निकाल दिया गया था. पार्टी से निकाले जाने के बाद उन की भी परेशानी बढ़ गई है. उन के 24 साल के ड्राइवर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसे जान से मारने की धमकी दे कर विनोद आर्य उस के साथ अप्राकृतिक सैक्स करते हैं. बहरहाल, अदालती काररवाई पूरी हो जाने के बाद पुलिस ने तीनों मुजरिमों को कस्टडी में ले कर जेल भेज दिया. Uttarakhand News

 

 

Love Story In Hindi : फिजियोथेरेपिस्ट का लालची लव

Love Story In Hindi : रीना सिंधु से लव मैरिज करने के बाद रविंद्र कुमार ने मुरादाबाद में एक आलीशान कोठी बनवाई, जिस की कीमत लगभग 3 करोड़ रुपए है. इसी कोठी के ग्राउंड फ्लोर पर रीना ने फिजियोथेरैपी सेंटर खोल लिया था. उस का काम बहुत अच्छा चलने लगा. एक दिन रीना ने पारितोष नाम के युवक के साथ मिल कर न सिर्फ पति रविंद्र की हत्या की, बल्कि उस की लाश कोटद्वार (उत्तराखंड) में ले जा कर ठिकाने लगा दी. कौन था पारितोष? और क्यों की रीना ने पति की हत्या? जानने के लिए पढ़ें यह सस्पेंस कहानी.

कई दिनों से रीना के चेहरे के हावभाव बदलेबदले नजर आ रहे थे. हर वक्त फूल सा खिलने वाला चेहरा आज ज्यादा ही उदास नजर आ रहा था. रीना ने अपने घर के नीचे ही फिजियोथेरैपी का सेंटर खोल रखा था, जहां हर रोज कई पेशेंट फिजियोथेरैपी कराने आते थे. जिस मकान में रीना सिंधु का फिजियोथेरैपी सेंटर था, वह मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के थाना सिविल लाइंस के रामगंगा विहार में मौजूद था. उस 3 मंजिला मकान की कीमत इस वक्त लगभग 3 करोड़ रुपए है. उसी मकान की बदौलत उस क्षेत्र के लोग रीना का काफी सम्मान करते थे. उस का काम भी ठीकठाक ही चल रहा था.

 

सुबह का वक्त था. रीना अभी थोड़ी देर पहले ही तैयार हो कर अपने फिजियोथेरैपी सेंटर में आ कर बैठी थी. सेंटर पर बैठते ही उस ने आदतन सब से पहले अपना वाट्सऐप चैक किया. सब से पहले उस की नजर पारितोष के मैसेज पर पड़ी.

”गुड मौर्निंग भाभी, कैसी हो?’’

”मैं ठीक हूं, आप कैसे हो पारितोष?’’ रीना ने पारितोष का मैसेज देखते ही जबाव दिया.

”भाभी मैं बिलकुल ठीक हूं, आप सुनाइए.’’ पारितोष जैसे उस के मैसेज के उत्तर का ही इंतजार कर रहा था.

तभी रीना ने पारितोष को मैसेज भेजा, ”पारितोष, आज तुम आ कर मुझ से मिलो, मुझे तुम से कुछ जरूरी काम है.’’

”ओके भाभीजी, मैं 12 बजे तक आप के पास पहुंच जाऊंगा.’’

जिस वक्त पारितोष रीना के सेंटर पर पहुंचा, उस वक्त तक रीना अपने रेगुलर पेशेंट से निपट चुकी थी. रीना को अकेला पा कर पारितोष के चेहरे पर मुसकान उभर आई थी. लेकिन उसे देख कर रीना के चेहरे पर कोई खास बदलाव नहीं आया था. बल्कि पारितोष को देखते ही रीना की आंखों में आंसू भर आए थे.

”क्या बात है भाभी, आप इस तरह से परेशान क्यों हो? आज कोई नई बात हो गई क्या?’’ पारितोष ने रीना से पूछा.

”तुम्हें क्या बताऊं पारितोष, इस इंसान ने मेरा जीना हराम कर रखा है. इस मकान को बेचने के पीछे पड़ा हुआ है. मैं हर तरह से इसे समझासमझा कर हार चुकी हूं. लेकिन यह मेरी एक भी सुनने को तैयार नहीं. पारितोष, तुम अच्छी तरह से जानते हो कि रविंद्र ने अगर इस मकान को बेच दिया तो हम लोग सड़क पर आ जाएंगे. हमारी जिंदगी बरबाद हो जाएगी. हम दोनों की भलाई इसी में है कि इस से पहले कि रविंद्र इस मकान को बेचे, उसे ही ठिकाने लगाना होगा. पारितोष, मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूं, मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती. रविंद्र के खत्म होने के बाद हम दोनों के बीच की दूरियां पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी.’’

रीना सिंधु की बातों ने पारितोष को उलझन में डाल दिया था. वह बोला, ”भाभीजी, मैं आप की परेशानी अच्छी तरह से जानता हूं, रविंद्र आप के और मेरे बीच कांटा बन कर खड़ा है, जिसे अपने बीच से हटाना बेहद ही जरूरी है. लेकिन सवाल इस बात का है कि रविंद्र को किस तरह से ठिकाने लगाया जाए. आप तो देख ही रही हो कि आज दुनिया में ऐसे कितने केस हो रहे हैं. लेकिन पुलिस किसी न किसी तरह से अपराधी तक पहुंच ही जाती है. उस के बाद जेल जाने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता ही नहीं बचता.’’

”पारितोष, तुम्हें इतना बड़ा रिस्क लेने की जरूरत नहीं. तुम इस काम के लिए किसी सुपारी किलर से बात करो. जो भी खर्च आएगा, उस का इंतजाम मैं करूंगी.’’

”भाभीजी, आज सुपारी किलर से भी मर्डर कराना इतना सेफ नहीं है. भेद किसी न किसी तरह से खुल ही जाता है. इस से बेहतर तो यही है कि हम दोनों ही किसी तरह से रविंद्र को मौत के घाट उतार दें.’’

”ठीक है, जैसी तुम्हारी मरजी वैसा ही करो. लेकिन इस काम के बदले में तुम्हें 10 लाख रुपए दे दूंगी. उस के बाद मैं भी तुम्हारी और यह मकान भी तुम्हारा. फिर हम दोनों की जिंदगी में बहार ही बहार होगी.’’ खुश होते हुए रीना बोली.

पारितोष ने रीना के सामने उस के पति रविंद्र को खत्म करने की हामी तो भर ली थी, लेकिन इस काम को किस तरह से अंजाम देना है, इस की रूपरेखा बननी बाकी थी. उस के लिए दोनों को प्लानिंग कुछ इस तरह से करनी थी कि रविंद्र की हत्या भी हो जाए और कोई उन पर किसी तरह का शक भी न कर सके. योजना के तहत दोनों को ही रविंद्र कुमार की हत्या गुप्तरूप से करनी थी. जिस के बाद रविंद्र की हत्या का राज राज ही बन कर रह जाए. रविंद्र कुमार की मौत का चिट्ठा तैयार कर पारितोष अपने घर चला गया था.

पहाड़ों की खाई में मिली रविंद्र की लाश

5 जून, 2025 बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के जिला पौड़ी कोटद्वार दुगड्डा रेंज के वनकर्मी सुबह के समय पांचवें मील के समीप जंगल में गश्त कर रहे थे, उसी दौरान ढाबे वाले ने वनकर्मियों को बताया कि नीचे से किसी चीज के सडऩे की बदबू आ रही है. इस सूचना पर वनकर्मी उस ढाबे से 15-20 मीटर नीचे उतरे तो वहां पर एक युवक का शव पड़ हुआ था. वनकर्मियों ने तुरंत इस की सूचना दुगड्ïडा पुलिस चौकी को दी. इस सूचना के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं.

घटना की जानकारी मिलते ही पौड़ी के एसएसपी लोकेश्वर सिंह व एएसपी चंद्रमोहन सिंह, सीओ (कोटद्वार) निहारिका सेमवाल भी घटनास्थल पर पहुंचीं. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचते ही बारीकी से जांचपड़ताल की. मृतक का शव औंधे मुंह पड़ा हुआ था, जिसे देख कर लग रहा था कि उस का किसी वाहन से एक्सीडेंट हुआ होगा, लेकिन शव के आसपास दूरदूर तक कोई भी वाहन पड़ा हुआ नहीं मिला था. मृतक की लाश बुरी तरह से सड़ चुकी थी, जिसे देख कर लग रहा था कि लाश कई दिनों से वहां पर पड़ी हुई थी. पुलिस ने मृतक की डैडबौडी को बाहर निकाल कर उस की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसे पहचान नहीं सका.

पुलिस ने मृतक के फोटोग्राफ कराने के बाद उस की लाश को कोटद्वार के बेस अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया था. पुलिस को जांचपड़ताल के दौरान शव के नीचे एक परची पड़ी मिली थी. मृतक के फोटो और परची को आधार मान कर पुलिस ने उस की शिनाख्त के लिए सूचना अखबारों में छपवाई. इस के बाद उस की शिनाख्त मुरादाबाद निवासी रविंद्र कुमार के रूप में हुई. मृतक की पहचान होने के बाद उस की लाश को अपनाने के लिए एक नहीं, बल्कि 2-2 औरतें रोतेबिलखते कोटद्वार थाने पहुंचीं. रविंद्र कुमार की लाश पर अपना हक जमाने वाली पहली पत्नी थी आशा देवी.

आशा देवी थाना बसंत कुंज, नई दिल्ली ने पुलिस को बताया कि रविंद्र कुमार उस का पति था, जो इस वक्त मुरादाबाद में रह रहा था. रविंद्र कुमार की डैडबौडी पर अपना अधिकार जमाने वाली दूसरी पत्नी थी मुरादाबाद निवासी रीना सिंधु. दोनों ही उस की लाश को अपने कब्जे में करने की पुलिस से गुहार लगा रही थीं. इस दौरान पुलिस के सामने ही दोनों के बीच काफी गरमागरमी भी हुई. पुलिस ने जैसेतैसे दोनों की आपबीती सुनने के बाद दोनों का आपस में समझौता कराया. फिर लाश का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने उस का दाहसंस्कार भी कोटद्वार के मुक्तिधाम में ही अपने सामने करा दिया.

रविंद्र कुमार केस को ले कर पुलिस अनुमान लगा रही थी कि या तो उस का किसी गाड़ी से एक्सीडेंट हो गया या फिर उस ने ही किसी कारण के चलते सुसाइड किया होगा. इसी शंका के चलते पुलिस ने मृतक की दोनों पत्नियों के साथसाथ उस के अन्य रिश्तेदारों से अधिक से अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की. इसी जांच के दौरान एक अहम जानकारी सामने निकल कर आई कि इस वक्त रविंद्र कुमार काफी कर्ज में दबा हुआ था. कई लोगों का उस पर काफी रुपया था. कई लोगों को उस ने पोस्टडेटेड चैक भी दे रखे थे, जिस के चलते उस पर चैक बाउंस का मुकदमा भी चला था.

उस के बाद रविंद्र पर एक एफआईआर भी दर्ज हो चुकी थी. जिस के कारण वह 6 महीने से फरारी काट रहा था. पुलिस को पूरा शक था कि शायद उस ने इन्हीं सब परेशानियों से तंग आ कर सुसाइड कर लिया होगा.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा

लेकिन जब पुलिस को रविंद्र कुमार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो यह मामला उलझ गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक रविंद्र कुमार का न तो एक्सीडेंट हुआ था और न ही उस ने सुसाइड किया था. उस की हत्या की गई थी. उस की हत्या भी कहीं अन्य स्थान पर की गई थी. फिर उस की लाश घटनास्थल पर ला कर डाली गई. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने सब से पहले मुरादाबाद निवासी रीना सिंधु से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रविंद्र काम के सिलसिले में अधिकांश बाहर ही रहते थे. घर पर कईकई दिनों बाद ही आते थे. रीना ने बताया कि उस ने 31 मई, 2025 को रविंद्र को फोन किया था. उस वक्त रविंद्र ने आने का वादा भी किया था, लेकिन वह किसी काम के चलते उस दिन भी घर नहीं आ पाए थे.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद कोटद्वार पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की तो एक कार पहली जून को कोटद्वार की तरफ आतीजाती दिखाई दी, जिस में ड्राइवर के पास वाली सीट पर एक महिला बैठी नजर आ रही थी. यह फुटेज पुलिस ने मृतक रविंद्र कुमार के भाई रमेश कुमार को दिखाई तो उस ने बताया कि यह कार उस के भाई की है और उस कार में बैठी महिला उस की पत्नी रीना है. इस सबूत के मिलते ही कोटद्वार कोतवाल रमेश तनवार ने अपनी टीम के साथ रीना सिंधु को नगीना से हिरासत में लिया. पुलिस ने सब से पहले उस का मोबाइल अपने कब्जे में किया. उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि पारितोष नाम का युवक काफी समय से रीना सिंधु के संपर्क में था.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने रीना सिंधु से सवाल किया, ”पारितोष से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’

”पारितोष मेरा मुंहबोला भाई है.’’ रीना सिंधु ने जबाव दिया.

”अगर पारितोष तुम्हारा मुंहबोला भाई है तो उस ने तुम्हारे पति की हत्या क्यों की?’’

”नहीं, पारितोष ऐसा नहीं कर सकता.’’ रीना ने पारितोष का बचाव करने की कोशिश की.

”रीनाजी, अब इस बात से कोई लाभ नहीं. पारितोष इस वक्त हमारे कब्जे में है. वह हमें सब कुछ साफसाफ बता चुका है कि उस ने ही आप के कहने पर रविंद्र की हत्या की है.’’ पुलिस के ऐसा कहते ही रीना का चेहरा फीका पड़ गया. पुलिस ने रीना के सामने जो पासा फेंका था, वह ठीक काम कर गया.

पुलिस के इस वाक्य ने रीना के मुंह पर ताला लगा दिया था. इस के बाद रीना ने पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया कि पारितोष के साथ मिल कर उस ने ही रविंद्र की हत्या को अंजाम दिया. उस ने सब कुछ साफसाफ उगल दिया. उस ने पुलिस के सामने कुबूल किया कि मेरा पति रविंद्र इस वक्त पूरी तरह से कर्ज में डूबा था. उस कर्ज को चुकाने के लिए वह मुरादाबाद स्थित मकान 3 करोड़ में बेचना चाहता था. इस मकान के बिकते ही मैं सड़क पर आ जाती. इसी कारण मैं किसी भी कीमत पर उस मकान को बिकने नहीं देना चाहती थी.

इस बारेे में मैं ने पारितोष से बात की. पारितोष काफी समय से मुझे प्यार करता था. मैं ने उसे उस के साथ शादी करने के साथ ही 10 लाख रुपए देने का लालच दिया तो वह रविंद्र की हत्या करने के लिए तैयार हो गया. उस के बाद हम दोनों ने रविंद्र की हत्या कर दी. इस जानकारी के बाद पुलिस ने पारितोष के मोबाइल पर फोन मिलाया तो उस ने फोन नहीं उठाया. फिर पुलिस ने उस की लोकेशन के आधार पर उसे भी नगीना से गिरफ्तार कर लिया था. दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस ने उन से अलगअलग पूछताछ की. उस से की गई पूछताछ के बाद रविंद्र की हत्या की जो कहानी सामने आई, चौंकाने वाली निकली—

20 साल पहले हुआ था रीना से प्यार

रविंद्र कुमार मूलरूप से पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन का निवासी था. वह दिल्ली में रह कर ही प्रौपर्टी का कारोबार करता था. प्रौपर्टी के काम से रविंद्र कुमार ने काफी पैसा कमाया था. उस की शादी कई साल पहले आशा देवी के साथ हुई थी. शादी के कुछ समय बाद तक तो मियांबीवी के विचार मिलते रहे, लेकिन कुछ ही समय के बाद दोनों के संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई थी. समय के साथ आशा देवी एक बेटे की मां बनी.

अब से लगभग 20 साल पहले रविंद्र की जानपहचान मुरादाबाद निवासी रीना सिंधु से हुई थी. उस वक्त रीना दिल्ली में फिजियोथेरैपी की पढ़ाई कर रही थी. दिल्ली के जिस मकान में उस ने कमरा ले रखा था, वह रविंद्र के घर के पास ही था. उसी दौरान एक दिन रविंद्र की जानपहचान रीना सिंधु से हुई थी. जानपहचान के बाद जल्दी ही बात दोस्ती तक जा पहुंची थी. हालांकि उस वक्त दोनों की उम्र में लगभग 20 साल का अंतर था. रविंद्र उस वक्त शादीशुदा और एक बच्चे का बाप भी था. लेकिन प्रेम की राह में किसी इंसान का शादीशुदा या बच्चे का बाप होना कोई मायने नहीं रखता. यही कारण रहा कि रविंद्र के रहनसहन को देख कर रीना सिंधु उस की प्रेम दीवानी हो गई.

रीना सिंधु के साथ प्रेम प्रसंग चालू होने के बाद रविंद्र कुमार ने अपनी पत्नी आशा की ओर से मुंह मोडऩा शुरू कर दिया था, जिस के कारण पतिपत्नी के संबंधों में दूरियां बनती गईं. उस वक्त तक रविंद्र कुमार पैसे में खेल रहा था. इस बात की जानकारी धीरेधीरे रविंद्र की पत्नी आशा को भी हो गई थी, जिस के कारण बसीबसाई गृहस्थी में एक तूफान आ खड़ा हुआ था. रीना के प्यार में पागल हो रविंद्र ने दिल्ली छोड़ दी और फिर वह अपनी पे्रमिका रीना सिंधु को साथ ले कर देहरादून जा कर रहने लगा. देहरादून जाते ही रविंद्र ने एक फ्लैट किराए पर ले लिया और रीना के साथ ही लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगा.

देहरादून आते ही रविंद्र कुमार ने अपना पैसा प्रौपर्टी में लगाना शुरू किया. प्रौपर्टी के बिजनैस का वह पुराना खिलाड़ी था. यही कारण रहा कि उस के देहरादून में प्रौपर्टी में पैसा लगाते ही उस का कामधंधा ठीक से चलने लगा. देहरादून में रह कर उस ने खूब पैसा कमाया. उस के बाद तो वह दिल्ली में रह रहे अपने परिवार को भूल गया और बाद में उस ने रीना के साथ ही शादी कर ली. चूंकि रीना पहले से ही मुरादाबाद में रहती थी, इसी कारण उस ने रविंद्र को मुरादाबाद का रास्ता दिखाया और उस का पैसा मुरादाबाद में भी प्रौपर्टी में लगवा दिया.

उसी दौरान रविंद्र ने दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित अपनी पुश्तैनी जमीन भी बेच दी थी. मुरादाबाद में पैसा लगाने पर उस का काम ठीकठाक चल निकला. उसी समय सन 2011 में रविंद्र ने मुरादाबाद के पौश एरिया रामगंगा विहार में एक तिमंजिला मकान बनवाया. इस मकान की रजिस्ट्री भी रीना ने रविंद्र कुमार के साथ संयुक्त रूप से कराई थी. इस मकान के बनते ही रीना ने उसी मकान के भूतल पर अपना फिजियोथेरैपी का सेंटर खोल लिया था. उस के साथ ही रीना ने उस मकान का अधिकांश हिस्सा किराए पर उठा दिया था, जिस से हर महीने हजारों रुपए का किराया आता था.

उसी वक्त यूपी सरकार की ओर से आवासीय कालोनियों की खरीदफरोख्त पर शिकंजा कसा तो प्रौपर्टी डीलिंग के बिजनैस में अचानक मंदी आ गई, जिस के कारण रविंद्र कुमार को काफी नुकसान उठाना पड़ा. प्रौपर्टी न बिकने के कारण रविंद्र कुमार कर्ज के बोझ तले दबने लगा. रविंद्र कुमार ने कई लोगों से प्रौपर्टी के नाम पर पैसा ले रखा था. उस का काम कम हुआ तो लोगों का उस पर पैसा लौटाने के लिए दबाव बढऩे लगा. रविंद्र कुमार ने कई लोगों को पोस्टडेटेड चैक भी दिए, लेकिन वे बाउंस होने लगे. जिस के बाद उस के ऊपर कई लोगों ने एफआईआर भी दर्ज कराई.

जब रविंद्र सब तरह से फंसने लगा तो उस ने मुरादाबाद का मकान बेचने का प्लान बना लिया. इस बारे में उस ने एक दिन रीना सिंधु से बात की. मकान बेचने की बात सुनते ही रीना का पारा सातवें आसपान पर चढ़ गया. उस ने साफ शब्दों में कहा कि तुम्हारे पास इस के अलावा और भी कई प्रोपर्टी हैं, उन्हीं को बेच कर अपना कर्च चुका लो. यह मकान मेरे नाम है, इस मकान को कभी भूल से भी बेचने की मत सोचना.रविंद्र ने बारबार रीना को समझाया कि इस वक्त हम लोग परेशानियों में आ घिरे हैं. इस मकान को बेच कर हम अपना सारा कर्ज चुका सकते हैं. उस के बाद कोई प्लौट ले कर वैसा ही मकान फिर से बना सकते हैं. लेकिन रीना रविंद्र की एक भी बात सुनने को तैयार नहीं थी.

भले ही रविंद्र कुमार कर्ज के बोझ के नीचे दबा था, लेकिन उस वक्त भी रीना एक लग्जरी लाइफ जी रही थी. क्षेत्र में उस का रुतबा था. सभी उस का सम्मान करते थे. रविंद्र कुमार उस मकान में कभीकभार ही आता था. अगर रीना उस मकान को बेचने देती तो क्षेत्र में उस की इज्जत तारतार हो जाती. यही सोच कर उस ने तय कर लिया कि किसी भी कीमत पर वह उस मकान को बेचने नहीं देगी, चाहे उस के लिए उसे कुछ भी करना पड़े. यह बात रीना ने पारितोष के सामने भी रखी.

पारितोष से उस के काफी पुराने संबंध थे. पारितोष की जानपहचान कई साल पहले फिजियोथेरैपी कराने के दौरान ही हुई थी. पारितोष बिजनौर के नगीना का रहने वाला था. कई साल पहले वह रीना के फिजियोथेरैपी सेंटर पर आया था. फिजियोथेरैपी कराने के दौरान ही दोनों के बीच जानपहचान हुई. पारितोष उम्र में रीना से छोटा था. पहली ही मुलाकात में वह रीना के दिल पर छा गया. उसी दौरान दोनों ने अपने मोबाइल नंबरों का आदानप्रदान भी किया था. जिस के बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ. जल्दी ही दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई. उस के बाद दोनों के बीच प्यार का रिश्ता गहरा होता गया. जल्दी ही दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए थे.

पारितोष के संपर्क में आने के बाद रीना सिंधु रविंद्र से कुछ कटीकटी सी रहने लगी थी. उस के बाद रविंद्र के साथ उस का अनचाहा रिश्ता ही रह गया था, जिस को निभाना उस की मजबूरी थी. अब उस की निगाहें केवल रविंद्र कुमार की प्रौपर्टी और पारितोष पर ही जम कर रह गई थीं. जब रविंद्र कुमार मकान को बेचने के लिए उस के पीछे पड़ गया तो उस ने इस बारे में पारितोष से बात की. लेकिन पारितोष इस में कुछ नहीं कर सकता था. फिर भी रीना ने एक दिन पारितोष के साथ बैठ कर उसे समझाने की कोशिश की.

न चाहते हुए भी करनी पड़ी रविंद्र की हत्या

”पारितोष तुम जानते हो, जिस मकान के नीचे तुम बैठे हो उस की कीमत क्या है? इस मकान की कीमत इस वक्त करीब 3 करोड़ रुपए है. सोचो, अगर इस मकान का मालिक तुम्हें बना दिया जाए तो तुम्हें कैसा लगेगा. यह मैं तुम्हें कोई सपना नहीं दिखा रही, बल्कि अगर तुम चाहो तो यह हकीकत भी बन सकता है. लेकिन इस के लिए तुम्हें मेरा साथ देना होगा. इस मकान की रजिस्ट्री में मेरा भी नाम है.’’

”भाभी, इस में मैं आप की क्या सहायता कर सकता हूंï?’’ पारितोष ने रीना के सामने ही प्रश्न खड़ा कर दिया था.

तब रीना ने पारितोष को समझाने की कोशिश की, ”देखो पारितोष, रविंद्र बहुत समय से इस मकान को बेचने के पीछे पड़ा हुआ है. मैं इस मकान को किसी भी कीमत पर बिकने नहीं दूंगी. अगर तुम चाहो तो यह मकान बिकने से रुक सकता है.’’

”लेकिन वह कैसे?’’ रीना की बात सुनते ही पारितोष चौंका.

तब रीना ने कहा, ”हमारे और तुम्हारे बीच में रविंद्र कुमार जो कांटा बना हुआ है, उसे किसी तरह से तुम्हें हटाना होगा. रविंद्र के खत्म होते ही मेरे और इस मकान के मालिक तुम हो जाओगे.’’

रीना की बात सुनते ही पारितोष कुछ सहम सा गया, ”नहीं भाभीजी, यह काम मुझ से नहीं होगा. मैं किसी का खून नहीं कर सकता.’’ पारितोष ने पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए.

”अरे, मैं तो तुम्हें बड़ा दिलेर समझती थी. लेकिन तुम तो बिल्कुल गीदड़ निकले. अब तो मुझे लगने लगा कि तुम जो मेरे साथ प्यार का नाटक करते हो, वह मात्र दिखावा था. लगता है कि तुम्हें मात्र मेरे जिस्म से प्यार है. अगर तुम अपना प्यार पाने के लिए कुछ नहीं कर सकते तो आज के बाद मुझ से मिलने की कोशिश भी मत करना.’’ रीना ने पारितोष से साफ शब्दों में कहा.

रीना की बात सुन कर पारितोष का चेहरा उतर गया. उस ने फिर भी रीना को समझाने की कोशिश की, ”भाभीजी, रविंद्र भाईसाहब बहुत ही नेकदिल इंसान हैं. उन के बारे में ऐसा मत सोचो.’’

”मुझे जो सोचना था, सोच चुकी हूं. अगर तुम इस काम में मेरी सहायता नहीं कर सकते तो आज के बाद मेरी जिंदगी में दखल देने की जरूरत नहीं है.’’ इतना कहते ही रीना सिंधु अपने केबिन से निकल कर आराम करने अपने रूम की तरफ बढ़ गई थी.

काफी समय तक पारितोष वहीं पर बैठा उस का इंतजार करता रहा. जब काफी देर तक रीना नहीं आई तो वह वहां से चला गया. उस के बाद कई बार पारितोष ने मोबाइल पर उस से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उस ने उस की काल रिसीव नहीं की. फिर पारितोष ने रीना के मोबाइल पर एक मैसेज भेजा, ‘सौरी भाभीजी, मुझे माफ करना. मैं ने आप के दिल को ठेस पहुंचाई. मैं आप के बिना एक पल भी नहीं रह सकता. आप जैसा चाहें, मैं वैसा करने को तैयार हूं.’’

पारितोष का मैसेज पढ़ते ही रीना का चेहरा खिल उठा. फिर रीना ने पारितोष को मैसेज कर के अपने घर बुलाया. जहां पर बैठ कर दोनों ने रविंद्र कुमार की हत्या की साजिश रची. उसी साजिश के तहत 31 मई, 2025 को रीना ने रविंद्र को फोन कर पार्टी के बहाने बिजनौर के नगीना में सराय पुरैनी गांव में पारितोष के घर बुला लिया. रविंद्र के पारितोष के घर पहुंचते ही उस का ठीक प्रकार से आदरसम्मान किया गया. उस रात पारितोष ने रविंद्र को अच्छी ब्रांड की शराब पिलाई. उस के बाद जब रविंद्र नशे में झूमने लगा तो उसे सुलाने के बहाने एक कमरे में ले जा कर पारितोष और रीना ने फावड़े से उस के सिर और गरदन पर ताबड़तोड़ वार करते हुए मौत की नींद सुला दिया.

रविंद्र की हत्या करने के बाद उस की लाश को घर के ही एक हिस्से में छिपा दिया. अगले दिन 2 जून की रात को उन्होंने रविंद्र की लाश को उसी की कार में डाली और फिर उसे ठिकाने लगाने के लिए निकल पड़े. पहले इन दोनों ने उस की लाश को रामनगर की तरफ जाने वाली रोड के किनारे पर फेंकने की कोशिश की, लेकिन वहां पर सफल नहीं हो पाए. उस के बाद इन दोनों ने रविंद्र की लाश उत्तराखंड के कोटद्वार में दुगड्डा के पास जंगल में फेंक दी. रविंद्र की लाश को ठिकाने लगाने के बाद उस की कार को नोएडा में जा कर सड़क किनारे खड़ी कर दी. फिर आरोपी वहां से फरार हो गए.

इस मामले में मृतक रविंद्र के भाई रमेश कुमार की तरफ से रीना सिंधु और पारितोष के खिलाफ भाई की हत्या का केस दर्ज कराया गया था, जिस को कोटद्वार थाने में बीएनएस की धारा 103(1), 238 के तहत दर्ज किया गया था. इस केस के खुल जाने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस हत्याकांड को अंजाम देने से पहले पारितोष ने रीना को काफी समझाया, लेकिन उस ने उस की एक न सुनी. रीना की शुरू से ही सोच थी कि अपने पति को खत्म कर पूरी तरह से बच जाएगी. उस के बाद वह पारितोष के साथ शादी कर उस 3 करोड़ के मकान में मजे से रहेगी. लेकिन लव, लालच और लग्जरी लाइफ जीने की चाहत में उस ने अपनी जिंदगी के साथसाथ अपनी मासूम बेटी की जिंदगी भी डिस्टर्ब कर डाली. Love Story In Hindi