UP Crime News : एक नाबालिग के 2 दीवाने दोनों ने कर दी हत्या

UP Crime News : कुशीनगर की 17 वर्षीय अमृता शर्मा और 26 वर्षीय सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली एकदूसरे को दिलोजान से प्यार करते थे. सैफ अली का लंगोटिया यार इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू भी अमृता से एकतरफा मोहब्बत करता था. प्यार में अंधी अमृता एक दिन अपना घर छोड़ कर प्रेमी सैफ अली के पास आ गई. इस के बाद इन दोनों दोस्तों ने अमृता के साथ जो किया वो…

26 वर्षीय सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली घर में नमाज अता करते वक्त इबादत कर रहा था, ”मेरी महबूबा अमृता पर किसी आवारा आशिक की बुरी नजर न लगे. वह मेरी थी, मेरी है और मेरी ही रहेगी. किसी आवारा आशिक की जब भी उस पर गंदी नजर पड़ती है या उसे घूर कर कोई देखता है तो मेरे कलेजे में आग सी लग जाती है. उस समय जी तो यही चाहता है कि उसे कत्ल कर दूं, लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सकता. क्योंकि बेपनाह मोहब्बत करता हूं मैं उसे. पलकों पर बैठा कर रखना चाहता हूं उसे. या मेरे परवरदिगार, अगर कहीं मेरे से महबूबा की शान में कोई गुस्ताखी हो जाए तो मुझे माफ करना. आमीन.’’

सैफ अली ने अपने एक कमरे में तरीके से सारा सामान सजा कर रखा था. कमरे में एक तख्त था, जिस पर बिस्तर बिछा हुआ था. फर्श पर वह एक साफसुथरी चादर बिछा कर नमाज अता कर रहा था और महबूबा अमृता की सलामती के लिए दुआ मांग रहा था. उस वक्त शाम ढल चुकी थी. नमाज अता कर के जैसे ही सैफ अली फारिग हुआ, तभी उस का अजीज दोस्त इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू उस से मिलने आया. दोनों ने एकदूसरे से दुआसलाम की. तभी इम्तियाज बोला, ”कई दिनों से मैं तुम से मुलाकात करने की सोच रहा था. फिर आज आ ही गया.’’

”अच्छा किया, जो मिलने आ गए. तुम से मिलने के लिए मेरा मन भी बेचैन था.’’ सैफ अली ने कहा.

”और भाभीजान कैसी हैं?’’ टिंकू ने सैफ अली की महबूबा अमृता के बारे में सवाल किया था.

”मजे में है.’’ उस ने सपाट लहजे में जवाब दिया.

जवाब सुन कर टिंकू चुप रह गया. पल भर कमरे में सन्नाटा छा गया था. फिर सन्नाटे को टिंकू ही तोड़ा, ”दोस्त, मुझ से नाराज हो क्या?’’

”नहीं तो, बाई दि वे तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं तुम से नाराज हूं?’’

”मेरी दिल्लगी करने की आदत जो है, वही कर रहा था.’’

”लेकिन मेरी ऐसा करने की कोई आदत नहीं, सो प्लीज यार, सीरियस हो जाओ.’’

”कहीं ऐसा तो नहीं, जानेअनजाने में मैं ने तेरा दिल दुखा दिया हो. अगर ऐसी बात है तो यार माफ करना मुझे, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था, जिस से तेरा दिल दुखे और तू तकलीफ में आ जाए.’’

”खैर, छोड़ यार. वैसे भी मेरा मूड कुछ अपसेट है. थोड़ा फ्री रहना चाहता हूं. कल मिलता हूं, फिर बात करता हूं.’’

”चलता हूं.’’ इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू दोस्त को सलाम कर वहां से अपने घर के लिए चला गया. रास्ते भर वह यही सोचता रहा कि सचमुच दोस्त किसी बात को ले कर परेशान दिख रहा था. कहीं भाभीजान की खैरियत पूछ लेने से तो नाराज नहीं हो गया या कोई और बात है. कल मुलाकात करने पर जरूर पूछूंगा. सोचतेसोचते टिंकू घर पहुंच गया.

सैफ अली अजीज दोस्त टिंकू से वाकई नाराज था. क्योंकि उस की प्रेमिका अमृता ने सैफ को बताया था कि टिंकू उस पर बुरी तरह से फिदा है. वह भी उसे चाहता है. उस ने अपना प्रेम निवेदन मुझ तक शेयर कर के अपने दिल की बात बताई थी कि वह भी उस से दिलोजान से मोहब्बत करता है. उसे अपने दिल रूपी घर में पनाह ले लेने दे.

सैफ अली ने अमृता के मुंह से जब से यह बात सुनी, तब से उस के तनबदन में आग सी लग गई थी. उस की हिम्मत कैसे हुई कि उस ने मेरे प्यार को बहकाने की जुर्रत की. मजा तो इस का उसे चखा कर ही रहूंगा. अमृता मेरी थी, मेरी है और मेरी ही रहेगी. कोई भी हमारे बीच में आने की जुर्रत करेगा तो उसे अपनी जान से हाथ धोना पडेगा. टिंकू ने अमृता को बुरी नजर से देख कर उसे नापाक करने की कोशिश की है, छोड़ूंगा नहीं उसे, कल मिलता हूं फिर उसे मजा चखाता हूं. इसीलिए उसे देख कर सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली का मूड खराब हो गया था और अपने घर से उसे जल्दी से लौटा दिया था.

सैफ अली उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के हाटा पिपरा कपूर गांव का रहने वाला था. 3 भाइयों में वह सब से बड़ा था. पढ़लिख कर भी वह बेरोजगार था. नौकरी की तलाश में वह जुटा हुआ था, लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर वह खाली बैठा था. इसी गांव में उस की प्रेमिका अमृता शर्मा भी रहती थी.

7171 गैंग के सदस्य थे दोनों दोस्त

सोशल मीडिया पर ‘लाला 7171 गैंग’ सक्रिय था. यह रील बना कर सोशल मीडिया पर खतरनाक असलहों और धारदार हथियारों के साथ रील बना कर पोस्ट कर के लोगों में अपने गैंग का खौफ भरते थे. सैफ अली और टिंकू दोनों उस खतरनाक गैंग के सक्रिय सदस्य थे. 20 सदस्यों वाला यह गैंग किसी से झगड़ा होने पर एकजुट हो कर खतरनाक असलहे और लाठीडंडा ले कर मारपीट करने पर उतारू हो जाता था. कुशीनगर जिले में इस गैंग की इतनी दहशत थी कि कोई गलती से भी पंगा लेने के बारे में सोचता नहीं था.

इसी गैंग के सदस्य बनने के बाद सैफ अली और टिंकू दोनों एकदूसरे के निकट आए और दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी. इम्तियाज उर्फ टिंकू हाटा कस्बे के अंबेडकर नगर मोहल्ले में अपने परिवार के साथ रहता था. परिवार में मम्मीपापा के अलावा 4 भाईबहन थे. उन में वह दूसरे नंबर का था. वह भी पढ़लिख कर बेरोजगार था और कामधंधे की तलाश थी, इसलिए वह भर दिन यहांवहां तफरीमस्ती करता था.

पड़ोस में रहने वाली नाबालिग अमृता शर्मा (17 वर्षीय) से सैफ अली प्यार करता था. अपने दिल की हर बात वह दोस्त इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू से शेयर करता था. टिंकू से दिल की बात शेयर किए बिना उस का जैसे खाना हजम ही नहीं होता था. एक दिन की बात है. शाम का वक्त हो रहा था. घर पर सैफ अली का मन नहीं लग रहा था. वह हाटा कस्बे में घूमने आया तो वहां उसे टिंकू मिल गया.

उस समय सैफ अली के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे दुनिया भर की खुशियां उस की झोली में आ गिरी हों या कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो. सैफ अली  के चमकते चेहरे को देख कर उसे रहा नहीं गया तो वह दोस्त से खुशी का राज पूछ बैठा, ”क्या बात है यार, आज तो बड़े खुश नजर आ रहे हो. भाभी ने किसविस दे दी क्या?’’

”तुम्हें जलन हो रही है मेरी खुशी देख कर,’’ टिंकू की बात सुन कर उस का पूरा मूड खराब हो गया, ”हां, किस दे दी है तो… देख रहा हूं आजकल तेरी मेरे प्यार पर कुछ खास ही नजर रहती है. बड़ा मेहरबान रहता है तू उस पर.’’

”दोस्त, मैं ने तो मजाक में ऐसे ही कह दिया था.’’ टिंकू समझ गया था कि वह नाराज हो गया है, इसीलिए वह बात बदलते हुए आगे बोला, ”अगर तुम्हें बुरा लगा हो तो माफ कर देना.’’

”देख, तू मेरा यार है, बात यारी तक ही रह जाए तो अच्छा है, वरना दोस्ती में खटास आ जाएगी, कह देता हूं.’’

”मतलब! ऐसा मैं ने क्या किया, जो तुम मेरे को धमका रहे हो कि दोस्ती में खटास आ जाएगी.’’

”तू तो ऐसा भोला बन रहा है, जैसे तेरे को कुछ पता ही नहीं. लेकिन मैं तेरे को आखिरी बार समझा देता हूं कि तू मेरे प्यार से जितनी दूरी बना कर रखेगा, तेरी सेहत के लिए उतना ही अच्छा होगा. अमृता ने मुझ से सब साफसाफ बता दिया है कि तू उस पर डोरे डाल रहा है, उसे लाइन मारता है.’’

”क्यों बकवास किए जा रहा है यार.’’ टिंकू दोस्त पर बिदक गया, ”झूठ बोलती है, वो. मैं सच कहता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है. दोस्त, हमारी पाक दोस्ती के बीच गलतफहमी पैदा कर वह हमें आपस में लड़ाना चाहती है. दोस्तों के बीच दरार पैदा करना चाहती. कसम से कह रहा हूं कि मेरे दिल में भाभी के लिए सिर्फ इज्जत है और कुछ नहीं.’’

”झूठ नहीं बोलती वो.’’ सैफुद्दीन जोर से चीखा. चीख सुन कर आसपास के लोग दोनों को देखने लगे कि वे क्यों झगड़ रहे हैं.

”झूठ तू बोल रहा है. हमारे बीच गलतफहमी का बीज वो नहीं बो रही है, तू बो रहा है. तू उस पर फिदा है, मरता है तू उस पर. तूने अपनी मोहब्बत का पैगाम उसे दिया, उस ने तेरे प्यार को ठुकरा दिया और कहता कि वह हमारे बीच दरार डालने की कोशिश कर रही है. देख टिंकू, मैं सब कुछ बरदाश्त कर सकता हूं, लेकिन मेरे प्यार के साथ कोई छेड़छाड़ करे, ये कतई बरदाश्त नहीं कर सकता. समझे.’’

”बात मान यार मेरी तू, अमृता भाभी मेरे पर जो इलजाम लगा रही है, सरासर गलत है. ऐसा मैं ने कुछ नहीं किया है, जो मेरे पर इलजाम लगाए. ये सब बेबुनियाद इलजाम हैं. तू यकीन कर मेरे दोस्त.’’

”चल, कुछ देर के लिए मैं ने तेरी बात मान ली, अमृता तुझे बदनाम करने के लिए झूठ बोल रही थी. तू सोच वह झूठ क्यों बोलेगी? ऐसा कर के उसे क्या मिलेगा? वह क्यों खुद के ऊपर कीचड़ उछालेगी, जिस से वह खुद ही गंदी हो जाए. है तेरे पास इस का कोई जबाव तो बता.’’

सैफ अली की बात सुन कर टिंकू एकदम चुप रह गया. कोई उत्तर नहीं दिया.

”नहीं हैं न, तेरे पास इस का कोई जवाब. मतलब साफ है कि तू झूठ बोलता है न कि अमृता. बस बहुत हो गया, उस से दूर हो जा, नहीं तो मैं दोस्ती तोडऩे में जरा भी वक्त नहीं लगाऊंगा. ये मेरी पहली और आखिरी चेतावनी है. आगे तेरी मरजी.’’

इम्तियाज ने इस तरह रची खतरनाक साजिश

एक लड़की के चलते पहली बार टिंकू को इतना जलील होना पड़ा था. सैफ अली ने पहली बार अपनी प्रेमिका के लिए अपने अजीज दोस्त को जलालतमलामत का सबक सिखाया था. जबकि उन की दोस्ती लोगों में मिसाल बना करती थी. यह बात टिंकू को बहुत बुरी लगी थी. उसे कतई अमृता से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि मेरे प्रेम निवेदन वाली बात दोस्त से साझा कर देगी. उसी पल टिंकू ने कसम खाई कि अमृता मेरी नहीं हुई तो मैं किसी और की नहीं होने दूंगा. उस के जीवन में ऐसी आग लगाऊंगा कि वह उस की आग में अपनी सारी खुशियां झुलसा देगी. दोस्तों के बीच गहरी खाई खोद कर अच्छा नहीं किया है.

दरअसल, टिंकू दोस्त की प्रेमिका अमृता शर्मा से एकतरफा प्यार करने लगा था. चूंकि अमृता अपने प्रेमी का दोस्त समझ कर उस से हंसबोल लिया करती थी. उस की उसी हंसी को वह प्यार समझने की भूल कर बैठा था. ऊपर से सैफ अली भी अपने प्यार का बखान समयसमय पर उस के सामने करता रहता था. इसी से उस का झुकाव अमृता की ओर बढ़ता गया और उसे उस से प्यार हो गया था. लेकिन अमृता उसे प्यार नहीं करती थी, बल्कि वह इस बात से अंजान थी टिंकू भी उस से प्यार करता था.

खैर, टिंकू दोस्त से हुए अपमान को बदला लेने के लिए फडफ़ड़ाने लगा था. उस ने फैसला कर लिया था कि अगर वह मेरी नहीं हुई तो मैं किसी और की भी नहीं होने दूंगा. दोस्त सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली और अमृता के बीच चल रहे प्यार वाली बात अमृता के घर वालों को बता देगा. उस के बाद जो खेल होगा, उस में हाथ सेंकने में बड़ा मजा आएगा. तब कहीं जा कर मेरे कलेजे को ठंडक पहुंचेगी. टिंकू ने जैसा सोचा था, वैसा ही किया. 10 जुलाई, 2025 की दोपहर वह अमृता के घर पहुंच गया. उस समय वह घर पर नहीं थी, स्कूल गई थी. उस के घर पर उस की मम्मी और उस क ी बहनें थीं. यही मौका उसे सही और उचित लगा था घर वालों को भड़काने के के लिए.

फिर क्या था, टिंकू ने मौका देख कर चौका मार दिया. उस ने अमृता की मम्मी से सैफ अली और उस की बेटी की प्रेम लीला वाली बात खोल अपनी जलन पर बर्फ का मरहम लगा लिया और वहां से अपने घर लौट आया. अब जा कर उस के कलेजे को ठंडक पहुंची थी. एक दूसरे समुदाय के लड़के से अमृता प्यार करती है, यह बात सुन कर फेमिली वाले आगबबूला हो गए थे. बेटी से उन्हें कतई ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह अपनी कुलच्छन हरकत से घर वालों का नाम डुबोएगी. शाम में जब अमृता के पापा राघव कामधंधे से वापस घर लौटे तो उन की पत्नी ने बेटी की करतूतों की पोटली उन के सामने खोल कर रख दी थी.

बेटी की करतूत सुन कर राघव का खून खौल उठा था. उन्होंने आव देखा न ताव, हाथ में जो भी मिला, उसी से बेटी को पीटने लगे. उसे बुरी तरह लात, चप्पल और डंडे से तब तक पीटते रहे, जब तक उन का गुस्सा शांत नहीं हुआ. जब गुस्सा शांत हुआ, तब पत्नी से बोल दिया कि उसे घर में कैद कर के रखो और इस का स्कूल जाना बंद कर दो. इस पर इतनी कड़ाई करो कि इस के सिर से उस बेहूदा इश्क का भूत उतर जाएगा. अगर तुम से यह नहीं हो सकता तो बता दो मैं ही कोई इंतजाम कर दूं. इस नालायक ने तो हमारी इज्जत मटियामेट कर दी है.

अमृता पापा की मार से बुरी तरह आहत थी. रोरो कर उस का बुरा हाल था. गनीमत थी कि उस का फोन उसी के पास सुरक्षित रह गया था. वह छीन नहीं पाए थे. यह सोच कर उसे थोड़ी तसल्ली हुई. थोड़ी देर बाद जब उस का मन शांत हुआ तो उस ने प्रेमी सैफ अली के पास चुपके से फोन किया. उस समय रात के करीब 9 बज रहे थे. प्रेमिका का रात के समय फोन आया देख सैफुद्दीन घबरा गया और कमरे से फोन ले कर बाहर निकल आया.

”हैलो! इतनी रात गए तुम ने फोन क्यों किया?’’ दबी जुबान में उस ने पूछा.

”मैं हमेशाहमेशा के लिए घर छोड़ कर आप के पास रहने आ रही हूं.’’ अमृता सुबकती हुई बोली.

”पहले तुम रोनाधोना बंद करो और बताओ बात क्या है? किसी ने तुम्हें कुछ कहा है या कोई और बात है. साफसाफ बताओ मुझे.’’

”हमारे प्यार के बारे में मेरे घर वालों को पता चल गया. पापा ने डंडे से मुझे बहुत मारा है. मुझे घर से निकलने पर पाबंदी लगा दिए हैं. मैं आप के बिना  जी नहीं सकती, मर जाऊंगी. मुझे आप के साथ रहना है.’’

”आखिर उन्हें हमारे प्यार के बारे पता कैसे चला?’’

”कैसे पता चला! अपने दोस्त टिंकू से पूछिए. उसी ने जा कर मेरे घर वालों को बताया है.’’

”टिंकू ने ऐसा किया!’’ सैफुद्दीन चौंक पड़ा, ”मुझे यकीन नहीं हो रहा कि टिंकू ने ऐसी गद्दारी की हमारे साथ. उस हरामी के पिल्ले को तो मैं छोड़ूंगा नहीं, लेकिन तुम इतनी रात गए घर से निकलना मत. थोड़ा सोचने का मौका दो.’’

”मैं कुछ नहीं जानती हूं. मुझे अब घर नहीं रहना तो नहीं रहना. बस कह दिया मैं ने. मैं आ रही हूं घर छोड़ कर.’’

”ठीक है, नहीं मानोगी तो गांव के बाहर आ कर मिलो. मिल कर फिर सोचता हूं कि क्या करना है.’’ कह कर फोन डिसकनेक्ट कर दिया सैफ अली ने और आगे के रास्ते के बारे में सोचने लगा.

अमृता अपनी जिद पर अड़ी रही और उस ने घर छोडऩे का पक्का मूड बना लिया. बस घर वालों के गहरी नींद में जाने के इंतजार में बेकरार थी.

अमृता का फोन आने के बाद से सैफ अली का दिमाग काम करना बंद कर दिया था. जैसे उस की सोचनेसमझने की शक्ति कम हो गई थी. वह बुरी तरह परेशान हो कर इधरउधर टहलता रहा. दिल जोरजोर से सीने में बेखौफ धड़कने लगा था और माथे पर पसीने की बूंदें चुहचुहा उठी थीं. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे इतनी रात गए घर पर तो नहीं ला सकता था. घर वाले जानेंगे तो क्या सोचेगें. अब्बूअम्मी तो मेरी जान ले लेंगे. यह किस मुसीबत में डाल दिया तूने टिंकू. मैं तेरे को छोड़ूंगा नहीं.

सैफ अली सोचता हुआ घर वालों से झूठ बोल कर बाइक ले कर गांव के बाहर चकरी पट्टी नहर पहुंच गया, जहां अमृता शर्मा उस से मिलने आ रही थी. इस से पहले उस ने टिंकू को फोन कर के गांव के बाहर बुला लिया था. टिंकू की हरकतों से वह गुस्से से लालपीला हुआ जा रहा था.

साजिश में शमिल हो गया सैफ अली

सैफ अली का फोन रिसीव कर टिंकू गांव के बाहर पैदल ही आ चुका था. टिंकू को देखते ही सैफुद्दीन का पारा सावतें आसमान पर चढ़ गया. इस बात पर दोनों आपस में झगड़ते रहे कि उस ने प्यार वाली बात अमृता के फेमिली वालों को क्यों बताई? इस पर सफाई देते हुए उस ने कहा, ”तू उस की मक्कारी को समझ नहीं रहा है, वह तुझे अंधेरे में रख कर मेरे से नैन मटक्का करती है. पूछने पर कहती है कि वह मुझ से प्यार करती है. तुम से नहीं.’’

”जानता है तू इस प्यार के लफड़े ने हमें कितनी बड़ी मुसीबत में डाल दिया है. वह हमेशाहमेशा के लिए अपना घर छोड़ कर मेरे पा रहने आ रही है. तू बता मैं क्या करूं? कहां रखूं उसे?’’

”क्या..? अमृता घर छोड़ कर आ रही है? वह भी इतनी रात गए?’’ टिंकू भी चौंके बिना नहीं रह सका. वह भी उतना ही परेशान हुआ था, जितना सैफ अली परेशान था.

”यार, मैं तो कहता हूं इस संकट की घड़ी में हम अपनी दुश्मनी भुला कर कोई रास्ता निकालते हैं, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.’’

”सारे फसाद की जड़ तू है. न तू अकड़ दिखाता और न ही हमें फंसना पड़ता.’’

”देख भाई, जो होना था सो हो गया. अब क्या करना है उस के बारे में सोच. कैसे इस मुसीबत से बाहर निकला जाए, उस के बारे में सोच.’’

”तू ही बता इस मुसीबत से कैसे बाहर निकला जाए?’’

”बात मानोगे भाई मेरी?’’

”बक, क्या बकना चाहता है?’’

”इस लड़की ने हमारी दोस्ती में दरार डाली और हमारे बीच गलतफहमी पैदा की है. जब तक जिंदा रहेगी, यूं ही परेशान करती रहेगी.’’

”क्या मतलब है तेरा?’’

”इसे रास्ते से हटा दो भाई. सारा लफड़ा ही खत्म हो जाएगा.’’ टिंकू ने उसे सुझाव दिया.

”कह तो तू ठीक ही रहा है.’’ सैफ अली को टिंकू की बात में दम दिखाई दिया, ”जैसे भी हो, गले की इस हड्डी को अपनी जिंदगी से दूर करना है, वरना हमारा मरना तय है.’’

”तो ठीक है, आने दो साली को, आज ही निबटा देते हैं. सारे फसाद की जड़ ही खत्म हो जाएगी.’’

”तो ठीक है, जो करना है आज ही करना है, मार दो साली को.’’ सैफ अली ने सारे शिकवेगिले भुला कर टिंकू से हाथ मिला लिया और चकरी पट्टी नहर पर अमृता के आने का इंतजार करने लगा. टिंकू को भी वहीं मिलने को बुलाया था. फिर दोनों ने मिल कर आगे की योजना बनाई. अमृता की हत्या कर उस की लाश वहां दूर रामपुर कारखाना स्थित नहर में डाल देंगे, जिस का पता किसी को कभी नहीं हो सकता.

दोनों की जैसे ही बातें पूरी हुईं, अमृता वहां आ धमकी थी. उसे सामने देख दोनों ही हक्काबक्का रह गए थे. मन ही मन उस की दिलेरी को सलाम किया और उस की हिम्मत देख कर दंग रह गए. गजब की दिलेर लड़की है, बिना डरे इतनी रात गए यहां आ सकती है तो आगे हमारे लिए परेशानी का बड़ा सबब भी बन सकती है, इसे जल्द से जल्द रास्ते से हटा देना ही अच्छा होगा. उस समय दोनों के सिर से इश्क का भूत उतर चुका था. अब वही अमृता दोनों के लिए विष का प्याला जैसी दिख रही थी.

आते ही अमृता सैफ अली से बोली, ”सदा के लिए मैं ने अपने मम्मीपापा का घर छोड़ कर आप के पास आ गई हूं. चलिए, यहां से कहीं दूर ले चलिए मुझे, जहां हमारे प्यार के सिवाय कोई और न रहता हो. हमें कोई रोकनेटोकने वाला न हो और न ही बोलने वाला हो. दोनों एकदूसरे की बाहों में लिपटे प्यार करते रहें. बस, ऐसी जगह हमें ले चलिए.’’

सैफ अली को अमृता की इन रोमांटिक बातों में जरा सी भी दिलचस्पी नहीं थी. वह तो पहले से ही यह सोचसोच कर परेशान हो रहा था कि इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाए. ऊपर से यह थी कि बकबक किए जा रही थी. सैफ अली उस के किसी भी सवाल का जबाव देना उचित नहीं समझ रहा था. योजना के मुताबिक, इतने में उस ने टिंकू को इशारा किया कि वह धीरे से अमृता के पीछे पहुंचे और उसे दबोच ले. इशारा पा कर वह दबे पांव अमृता के पीछे जा पहुंचा और उसे कस कर अपनी मजबूत बांहों में जकड़ लिया. अचानक खुद को टिंकू की बाहों में जकड़ा देख वह घबरा गई और उस की बाहों से आजाद होने के लिए छटपटाने लगी, ”यह क्या बत्तमीजी है टिंकू. छोड़ो मुझे.’’

”सौरी अमृता, हमें माफ कर देना. तुम्हारा खेल खत्म. तुम्हारे सपने कभी पूरे नहीं हो सकते. तुम हमेशा के लिए हमें छोड़ कर जा रही हो, अलविदा.’’ कह कर सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली के दोनों हाथ उस की गरदन की ओर बढ़ गए. उस ने उस का गला तब तक कस कर दबाए रखा, जब तक कि अमृता की मौत न हो गई. दोनों ने अमृता को हिलाडुला कर देखा. उस के शरीर में कोई हरकत नहीं थी. जब वे पूरी तरह संतुष्ट हो गए कि वह मर चुकी है तो सैफ अली ने बाइक स्टार्ट कर ड्राइविंग खुद संभाली.

टिंकू अमृता को बीच में बैठा कर खुद पीछे बैठ गया और दोनों अपनी योजना में तबदीली लाते हुए देवरिया के बजाय कुशीनगर के ही हाटा रजवाहा नहर पहुंचे. वहां लाश नहर में फेंक कर अपनेअपने घर वापस लौट आए. यह सब करतेकरते रात के करीब 3 बज गए थे. घर आ कर दोनों आराम से सो गए.

नहर में मिली अमृता की लाश

इधर पूरी रात बीत गई. अगली सुबह यानी 11 जुलाई, 2025 को अमृता घर नहीं लौटी तो घर वालों को चिंता सताने लगी थी. उस के नाना विश्राम शर्मा ने नतिनी अमृता की चिंता में पूरी रात आंखों में काट दी थी. जब उन्हें उस का कहीं पता नहीं लगा तो वह तहरीर ले कर हाटा कोतवाली पहुंच गए और कोतवाल रामसहाय चौहान को विस्तार से पूरी बात बता कर अमृता की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने आगे की काररवाई शुरू की.

12 जुलाई, 2025 को देवरिया जिले के थाना रामपुर कारखाना स्थित नहर में एक लड़की की लाश पाई गई. यह सूचना हाटा कोतवाली को मिली तो यहां की पुलिस वादी विश्राम शर्मा को साथ ले कर रामपुर कारखाना पहुंची, ताकि लाश की शिनाख्त की जा सके. क्योंकि लाश की कदकाठी 2 दिनों से गुम हुई अमृता शर्मा की कदकाठी से काफी मेल खा रही थी. नाना विश्राम शर्मा ने लाश की पहचान कर ली. वह लाश अमृता की थी. फिर क्या था? लाश मिलते ही घर में कोहराम मच गया था. सभी का रोरो कर हाल बुरा हुए जा रहा था.

हाटा पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए कुशीनगर जिला अस्पताल भेजवा दी और अपनी टीम के साथ थाने वापस लौट आए और आगे की काररवाई में जुट गए. उन्होंने अमृता की गुमशुदगी को बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या) और 238 (सबूत मिटाने) में तरमीम कर कातिलों की तलाश शुरू कर दी थी. कोतवाल रामसहाय चौहान ने घटना की सूचना एसपी संतोष कुमार मिश्र और एएसपी निवेश कटियार को दे दी. एसपी संतोष मिश्र ने एएसपी निवेश कटियार के नेतृत्व में पुलिस की 4 टीमें गठित कर के केस का जल्द से जल्द खुलासा करने का निर्देश दिया. निवेश कटियार ने कोतवाल रामसहाय चौहान को मृतका के सिम नंबर की काल डिटेल्स निकाल कर उसे खंगालने के आदेश दिए, ताकि जल्द से जल्द सच तक पहुंचा जा सके.

काल डिटेल्स की गहन जांचपड़ताल करने पर 2 फोन नंबर ऐसे मिले थे, जिस से मृतका की अकसर लंबीलंबी बातें होती थीं. घटना वाली रात भी उन्हीं दोनों में से एक नंबर पर उस की बात हुई थी. उस के बाद मृतका का फोन स्विच्ड औफ हो गया था. जांच में दोनों नंबरों में एक नाम सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली निवासी पिपरा कपूर (हाटा) और दूसरा नाम इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू प्रकाश में आया. आगे की काररवाई और कौल डिटेल्स की पड़ताल से मामला दोनों प्रेमियों द्वारा प्रेम संबंधों में दावे को ले कर हुई हत्या के रूप में सामने आया. जैसे ही यह खुलासा हुआ कि हत्या में विशेष समुदाय के लोग शामिल हैं, कस्बा तनाव की आग में जल उठा.

चूंकि दोनों प्रेमी विशेष समुदाय के थे, यह बात गांव की फिजा से तैरती हुई पौलिटिक्स के गलियारों तक पहुंच गई थी. सूचना मिलते ही कुशीनगर के सांसद विजय कुमार दूबे, हाटा के विधायक मोहन शर्मा, रामकोला के विधायक विजय प्रकाश गौड़ और खड्डा के विधायक विवेकानंद पांडेय पिपरा कपूर गांव पहुंच गए और उन्होंने मृतका के फेमिली वालों से मिल कर उन्हें न्याय दिलाने और बेटी के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया. इस के बाद गांव वालों को साथ मिला कर आंदोलन छेड़ दिया और थाने का घेराव कर के बेटी अमृता के कातिलों को अतिशीघ्र गिरफ्तार करने का दवाब बनाया.

आंदोलन भयानक रूप ले चुका था. तनावपूर्ण स्थिति देखते हुए एसपी संतोष कुमार मिश्र ने पिपरा कपूर गांव में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी थी, ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके. इधर पुलिस कातिलों की तलाश में जुटी हुई थी. कातिलों के जहां छिपे होने की संभावना थी, वहां छापे डाल रही थी, लेकिन वे उन की पकड़ से काफी दूर थे. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई और 15 जुलाई, 2025 को रात के समय आरोपी सैफुद्ïदीन उर्फ सैफ और इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू को हाटा से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे कहीं भागने की फिराक में बस का इंतजार कर रहे थे. इस के बाद पुलिस ने ‘लाला 7171 गैंग’ के दरजन भर सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया.

गैंग के सभी सदस्यों ने थाने में हाथ जोड़ कर माफी मांगते हुए कसम खाई कि भविष्य में वह कोई भी गलत काम नहीं करेंगे और एएसपी निवेश कटियार के सामने सख्ती से पूछताछ की तो दोनों आरोपियों ने उन के सामने घुटने टेक दिए. उन्होंने कुबूल कर लिया कि उन दोनों ने ही मिल कर अमृता की हत्या की थी. अगले दिन यानी 16 जुलाई को एसपी संतोष कुमार मिश्र और एएसपी निवेश कटियार दोनों अधिकारियों ने कुशीनगर पुलिस लाइंस में संयुक्त प्रैसवार्ता बुला कर घटना का खुलासा कर दिया और आरोपियों को अदालत में पेश कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

17 वर्षीय अमृता शर्मा कुशीनगर के हाटा कोतवाली के पिपरा कपूर गांव की रहने वाली थी. राघव शर्मा उस के पिता का नाम था. उन का अपना खुद का व्यापार था. उसी की आमदनी से घरपरिवार चलाते थे. मजे से परिवार का भरणपोषण होता था. राघव के पड़ोस में सरफुद्दीन अली परिवार के साथ रहते थे. सैफुद्दीन उर्फ सैफ अली उन का बड़ा बेटा था. इंटर तक पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने आगे की पढ़ाई छोड़ कर ‘लाला 71-71 गैंग’ जौइन कर लिया था, जिस का कहानी में पहले जिक्र किया जा चुका है.

किशोरावस्था में ऐसे परवान चढ़ा प्यार

बात करीब 3 साल पहले की थी. अमृता शर्मा बेहद चंचल और हंसमुख के साथ खूबसूरत भी थी. सजसंवर कर जब घर से निकलती थी तो सैफ की नजर उस पर पड़ ही जाती थी और उसे तब तक निहारता रहता था, जब तक वह उस की नजर से ओझल नहीं हो जाती थी. सैफ का प्रेम भरी नजरों से उसे देखना बहुत अच्छा लगता था. उस का रोमरोम खिल उठता था. मन ही मन वह बहुत खुश होती थी. बदले में अमृता भी उसे चाहत भरी नजरों से देखती थी.

धीरेधीरे दोनों के दरमियान दोस्ती हुई. इस दोस्ती ने प्यार का रूप ले लिया, न तो अमृता जान पाई और न ही सैफ को अहसास हुआ. दोनों को इस का तब पता चला, जब वे एकदूसरे से अलग होते थे. उस के बाद जो तड़प होती थी, वे दोनों समझ नहीं पाते थे ऐसा क्यों हो रहा है. दिल की तड़प ने अहसास दिलाया. उन्हें एकदूसरे से प्यार हो गया है. फिर दोनों ने अपने प्यार का इजहार एकदूसरे के सामने कर दिया. धीरेधीरे दोनों का प्यार जवां होता गया. दोनों ही भविष्य के सपने संजोने लगे थे. चाहत की दुनिया बसाने के लिए अपने पंख फैलाए जीने की हसरतें पालने लगे.

उसी गांव में सैफ का दोस्त इम्तियाज अहमद उर्फ टिंकू पुत्र मैनुद्दीन भी रहता था. टिंकू का एक मकान हाटा कस्बे के वार्ड नंबर 10, अंबेडकरनगर में भी था. घर के आधे सदस्य वहां रहते थे और आधे गांव वाले मकान में. सैफ अली और टिंकू के बीच दांत काटी रोटी जैसी दोस्ती थी. एकदूसरे के दुखसुख में साथ देते थे. अमृता से प्यार हो गया है, सैफ अली ने जब अपने दिल का हाल दोस्त टिंकू के सामने बयान किया तो वह खुशी से झूम उठा था. सैफ ने ही प्रेमिका अमृता से दोस्त टिंकू का परिचय करवाया था, ”अमृता, ये मेरा बचपन का दोस्त टिंकू है. समझो, दो जिस्म एक जान हैं हम. इस के बिना मैं नहीं और मेरे बिना ये नहीं.  एकदूसरे के बिना हम दोनों अधूरे हैं.’’

टिंकू का परिचय जान कर अमृता हौले से मुसकरा दी थी. कोई जवाब नहीं दिया. अपनी प्रेमिका अमृता के सामने दोस्त सैफ अली द्वारा दोस्ती का बखान सुन कर टिंकू का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था. उसे अपनी दोस्ती पर नाज हो गया था. टिंकू जब भी सैफ से मिलता था, वह अपनी प्रेम कहानी उसे सुनाने लगता था. दोस्त की जुबान से उस की प्रेम कहानी सुनसुन कर टिंकू भी अमृता की ओर आकर्षित होता चला गया. चंूकि वह जब भी टिंकू से कहीं भी मिलती थी तो उसे रोक कर अपने प्रेमी सैफ का हालचाल पूछ बैठती थी. खुशदिलमिजाज अमृता की बात करने की अंदाज और बातबात पर मुसकरा कर बात करने की अदा ने टिंकू के दिल में घर बना लिया था.

टिंकू अमृता से एकतरफा प्यार करने लगा था. जबकि अमृता उस के इस भाव से बेखबर थी कि टिंकू के दिल में उस के प्रति प्रेम का अंकुर फूट चुका है और वह उसे चाहता है. एक फूल पर 2 आवारा भौंरों ने अपना कब्जा जमा लिया था. एक दिन टिंकू ने अपना प्रेम निवेदन अमृता के सामने रख दिया कि वह भी उस से बेहद प्यार करता है. उस के बिना जी नहीं सकता. उस के प्यार पर अपनी स्वीकृति की मोहर लगा कर जीवनदान दे दो.

टिंकू की जुबान से यह सुन कर वह हक्कीबक्की रह गई थी. उस ने साफसाफ कह दिया था कि वह सिर्फ सैफ से प्यार करती है, सिर्फ उस के बारे में सोचती है. उस के अलावा किसी के बारे में सपने में भी नहीं सोचती. वही उस का पहला और आखिरी प्यार है. थोड़ी सी हंस कर बात क्या कर ली, उसे प्यार समझ बैठे तो इस में मेरी क्या गलती है. टिंकू के प्रेम निवेदन वाली बात अमृता ने अपने प्रेमी सैफ को बता दी थी. उस के जुबान से यह बात सुन कर वह आगबबूला हो गया था. इस बात को ले कर दोनों के बीच में झगड़ा भी हो गया था. अपनेअपने तरीके से दोनों दावे करने लगे थे कि अमृता तुम से नहीं मुझ से प्यार करती है. इसी टकराव के चलते उन की दोस्ती में खटास आ गई थी.

टिंकू ने तय कर लिया था कि अगर अमृता मेरी नहीं हो सकती तो किसी और की भी नहीं होने दूंगा. साम दाम दंड भेद चाहे जैसे भी हो, उस की जिंदगी झंड बना दूंगा. और फिर उस ने अमृता के घर वालों के सामने उस की और सैफ की प्यार वाली बातें बता कर आग लगा दी. प्यार का दावा करने वाले दोनों प्रेमियों ने इस आग के दरिया में अमृता को झोंक कर उस की जिंदगी लील ली.             खैर, कुशीनगर सांसद विजय कुमार दूबे, हाटा विधायक मोहन शर्मा, रामकोला विधायक विजय प्रकाश गोंड और खड्डा विधायक विवेकानंद पांडेय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने और कातिलों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की गुहार लगाई.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की सही जांच करने और अमृता के कातिलों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिलाया है. यही नहीं, आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलवाने के जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर जांच जारी थी. कथा लिखे जाने तक उन के घरों पर कोई काररवाई नहीं हुई थी. UP Crime News

(कथा में अमृता शर्मा परिवर्तित नाम है)

 

 

UP News : हत्या को बना न पाए आत्महत्या

UP News : 15 साल की आशू और 19 साल के राहुल निषाद को साथसाथ पढ़ते हुए ही प्यार हो गया था. कई साल बाद जब उन के प्यार की पोल खुली, तब तक उन के संबंध बहुत गहरे हो चुके थे. घर वालों ने उन के प्यार पर नकेल कसने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. अंत में यह जोड़ा भी औनर किलिंग के गर्त में इस तरह समा गया कि…

उत्तर प्रदेश का कुशीनगर जिला एक पर्यटनस्थल के रूप में जाना जाता है. यहां देशविदेश से बौद्ध भिक्षु घूमने आया करते हैं. बताया जाता है कि यहीं पर गौतम बुद्ध ने अपनी अंतिम सांस ली थी, इसलिए यह जिला देशविदेश में काफी प्रसिद्ध है. इसी जिले के तमकुहीराज थाना अंर्तगत परसौनी गांव में 58 वर्षीय रामदेव कुशवाहा अपने परिवार के साथ रहता था. परिवार में 3 बेटियां थीं. पत्नी की कई साल पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी. बेटियों के अलावा रामदेव के कोई बेटा नहीं था.

रामदेव के बड़े भाई के 3 बेटे थे, इसलिए उन्हें कभी इस बात का मलाल नहीं हुआ कि उन्हें बेटा क्यों नहीं पैदा हुआ. बड़े भाई के दूसरे नंबर का बेटा, जिस का नाम सिकंदर कुशवाहा था, दुखसुख में चाचा रामदेव के पास हर घड़ी खड़ा रहता था. उन की एक आवाज पर कड़ी धूप हो या चाहे तूफान आ जाए, उन का आदेश सिरआंखों पर रख पहले फरमाइश पूरी करता था.

रामदेव सिकंदर को बेटे की तरह मानते थे और उस के लिए हमेशा समर्पित रहते थे. उस की बातों और भावनाओं को सिर माथे लगाए रखते थे. बेटियां भी सिंकदर को अपने सगे भाई से कम नहीं समझती थीं. हर साल रक्षाबंधन के त्योहार पर सिकंदर की कलाई पर राखी बांध कर उस से ढेरों आशीर्वाद लेती थीं. इस दिन सिकंदर दिल खोल कर बहनों को आशीर्वाद देता था.

बात 30 जून, 2025 की रात की है. गांव के पट्टीदारी में एक बारात आई थी. उस बारात में रामदेव कुशवाहा भी पूरे परिवार के साथ आमंत्रित थे. वह तीनों बेटियों विमला, सुमन, आशू और बेटे सिकंदर के साथ लड़की के घर बारात में पहुंचे थे. वहां पहुंच कर सभी पार्टी एंजौय करने में मशगूल हो गए थे. सिकंदर अपने हमजोलियों के साथ मस्त था तो रामदेव की सब से छोटी बेटी आशू कुशवाहा अपनी बहनों और सहेलियों के साथ पार्टी एंजौय करने में मस्त थी.

पार्टी एंजौय करतेकरते आशू कहीं नजर नहीं आ रही थी. चचेरा भाई सिकंदर भले ही पार्टी एंजौय कर रहा था, लेकिन उस का पूरा ध्यान पार्टी नहीं सिर्फ आशू पर था. वह क्या कर रही है, किस से मिल रही है, उन के बीच क्या बातचीत कर रही है, घूमघूम कर यही निगरानी वह कर रहा था. अचानक से जब आशू पार्टी में कहीं नहीं दिखी तो उस का माथा ठनक गया. पागल कुत्ते के माफिक वह आशू को पार्टी में इधरउधर ढूंढने लगा. वह कहीं नहीं दिखी. चाचा रामदेव ने भी सिकंदर को हिदायत दी थी कि आशू पर निगरानी रखे. इतना समझाने के बावजूद अगर उस के पांव उस के बस में नहीं होते हैं तो इज्जत बचाने के लिए जो अच्छा लगे, फैसला कर सकते हो.

रंगेहाथों पकड़ी गई आशू

बहन आशू को ढंूढतेढूंढते सिकंदर पार्टी वाली जगह से थोड़ा बाहर निकला तो अंधेरे में उसे किसी के फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी. वह दबे पांव और आहिस्ताआहिस्ता वहां पहुंचा तो उसे आशू दिख गई. वह अपने प्रेमी राहुल निषाद से बातें कर रही थी. पास खड़े चचेरे भाई को देख कर आशू एकदम सकपका गई. उस का चेहरा पीला पड़ गया था. बहन की इस हरकत पर सिकंदर गुस्से से लाल हो गया. उस ने आव देखा न ताव, बहन की बाजू पकड़ कर खींचता हुआ वहां से ले कर घर चल दिया.

”क्या कर रहे हो भैया?’’ आशू दर्द से बिलबिलाई और भाई की मजबूत पकड़ से छूटने की कोशिश की, ”दर्द हो रहा है, छोड़ो मेरा हाथ. टूट जाएगा.’’

”तुझे दर्द हो रहा है, हाथ टूट जाएगा तेरा, चल घर चल.’’ घसीटते हुए सिकंदर आगे बोला, ”बताता हूं तुझे. घर की इज्जत डुबोते हुए तुझे तब दर्द नहीं हो रहा था, बेशरम कहीं की.’’

”मेरा हाथ छोड़ दो.’’

”तू घर तो चल पहले, फिर तेरा हाथ भी छोड़ दूंगा और तेरी अच्छे से खातिर भी करूंगा. तूने समझ क्या रखा है हमें. इतना समझाने के बाद भी तेरे कान पर जूं तक नहीं रेगती और तू फिर उस लुच्चे से चोंच मिलाने चली गई. तेरी इस गुस्ताखी की तो आज सजा मिल कर ही रहेगी. थोड़ी देर तू और रुक जा. चाचा को आ जाने दे. उस के बाद बताता हूं तेरे को.’’ कहता हुआ सिकंदर आशू को कमरे में धकेल कर बाहर से दरवाजे पर सिटकनी लगा दी.

गुस्से के मारे सिकंदर का नथुना फूलपिचक रहा था और बदन थरथरा रहा था. उस समय वह अपने काबू में नहीं था. क्षण भर बाद जैसेतैसे उस ने खुद पर काबू पाया और मोबाइल निकाल कर चाचा रामदेव को फोन कर के फौरन घर आने को कह दिया. जिस लहजे में सिकंदर ने बात की थी, उस से रामदेव को समझने में देर नहीं लगी थी कि वह बहुत गुस्से में है. फिर वह सोचने लगे, अभी तो वह यहीं था, कब घर चला गया और ऐसी क्या बात हो गई कि उस ने तुरंत घर पहुंचने को कहा है.

रामदेव खाना बीच में छोड़ कर बहू रामदुलारी और बेटियों को साथ ले कर लंबेलंबे डग भरते हुए घर निकल पड़े. थोड़ी देर में वह अपने घर पहुंचे तो देखा कि सिंकदर दरवाजे पर खड़ा था और लंबीलंबी सांसें ले रहा था, ”सिकंदर, क्या बात हो गई, जो तुम ने फौरन घर बुला लिया, खाने भी नहीं दिया. आखिर क्या बात है?’’

”आप को खाना खाने की पड़ी है? सुनोगे तो आप के पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी.’’

”बात बताओ, जलेबी की तरह गोलगोल मत घुमाओ, आसमान टूट पड़ा या जमीन फट गई? बात क्या है, जो तुम इतने गुस्से में हो.’’

”न आसमान टूट पड़ा और न ही जमीन फट पड़ी, सुनोगे तो आप भी गुस्से से दहकने लगोगे.’’

”अब मुझ से और सब्र नहीं हो रहा, जो कहना है जल्दी कह.’’ रामदेव ने इधरउधर देखते हुए भतीजे सिकंदर से सवाल किया, ”यहां सब तो दिख रहे हैं, लेकिन आशू कहीं दिख नहीं रही है, कहां है? पार्टी से आई नहीं क्या?’’

”अरे चाचा, जब हम पार्टी में मशगूल थे तब वह घर के पिछवाड़े अपने यार की बाहों में चिपकी झप्पी ले रही थी. वहां जब कहीं नहीं दिखी तो मैं ने उसे ढूंढना शुरू किया, तब वह पकड़ में आई थी. उसे पकड़ कर घर लाया और कमरे में बंद कर दिया हूं. फडफ़ड़ा रही है, बंद कमरे में आजाद होने के लिए.’’

”क्या कह रहे हो?’’ रामदेव भतीजे की बात सुन कर गुस्से से तमतमा उठा, ”उस बेशरम नालायक की इतना मजाल, बारबार समझाने के बावजूद भी उस के सिर से राहुल के इश्क का भूत उतर नहीं रहा है, आज तो उस ने सारी हदें ही पार कर दीं, इस गुस्ताखी की सजा तो उसे जरूर मिलेगी. खोल री दरवाजा. जवानी का सारा पानी नींबू की तरह निचोड़ नहीं दिया तो… रोजरोज की बदनामी का किस्सा ही खत्म कर देते हैं,  खोल दरवाजा सिकंदर, जल्दी खोल.’’

चाचा रामदेव का आदेश पा कर सिकंदर ने दरवाजा खोल दिया. एलईडी की सफेद रोशनी से कमरा नहा रहा था और आशू दीवार के एक कोने से दुबकी, डरीसहमी घुटने मोड़ कर बैठी हुई थी. रामदेव की नजर जैसे ही उस की नजर से टकराई, गुस्से से लाल हो गया. उस ने आव देखा न ताव, उस पर लातघूसों की बरसात शुरू कर दी.

डरीसहमी आशू अपनी जान की भीख मांगती रही, उन के सामने गिड़गिड़ाती रही, लेकिन इंसान से हैवान बन चुके रामदेव ने उस की एक न सुनी. कल तक जिस बेटी की एक आवाज पर सारी दुनिया को सिर पर उठा लेने को तैयार था, आज वही पिता पूरी तरह शैतान बन चुका था, ”तुझे बारबार समझाया था बेशरम, उस आवारा राहुलवा से दूर रहना, मत करना नैन मटक्का. तेरे चलते गांव में मेरी कितनी बदनामी हो रही है, लेकिन तूने मेरी एक न सुनी, करती रही नैन मटक्का तो ले भुगत.’’

पीटपीट कर मार डाला फेमिली वालों ने

रामदेव, चचेरा भाई सिकंदर और उस की पत्नी रामदुलारी तीनों मिल कर आशू पर हैवानों की तरह टूट पड़े और जिसे जो हाथ मिला, उसी से तब तक मारते रहे, जब तक उस की मौत न हो गई. लहूलुहान आशू अपने ही खून में डूबी फर्श पर औंधे मुंह निढाल पड़ी हुई थी. थोड़ी देर बाद जब उन का गुस्सा शांत हुआ और होश में आए तो तीनों में से सिकंदर ने उसे हिलाडुला कर देखा. उस के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी. वह मर चुकी थी. इस के बाद उन्होंने लाश पर चादर डाल दी और दरवाजे पर ताला जड़ दिया.

फिर तीनों एक पेट हो हत्या की बात हजम कर गए. घर के सभी सदस्यों को धमका दिया था कि किसी ने भी इस घटना को घर से बाहर किया तो उस का भी वही हाल होगा, जो आशू का हुआ है. इसलिए चुप रहने में सब की भलाई है आशू की निर्मम हत्या करने बाद भी तीनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था. उसी रात उन्होंने आशू के प्रेमी राहुल को भी जान से मार डालने की योजना को अंतिम रूप दे दिया. योजना के अनुसार, अगली सुबह यानी पहली जुलाई के दिन सुबह से ही सिकंदर राहुल को गांव में यहांवहां ढंूढता रहा, लेकिन वह उसे कहीं नजर नहीं आया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर गया तो गया कहां? कहीं दिख क्यों नहीं रहा है वह उसे.

इकहरे बदन वाला सिकंदर था तो एकदम दुबलापतला, लेकिन दिमाग से शातिरों का शातिर था. काफी देर तक मंथन करने के बाद उस ने राहुल तक पहुंचने का एक नायाब और आसान सा रास्ता निकाल ही लिया. उसे पता था विनय और विकास नाम के 2 युवक उस के जिगरी यार थे. तीनों में गहरी छनती थी. किसी तरह उन्हें अपनी ओर मिला लें तो काम आसान हो सकता है. फिर क्या था, यह सोच कर वह मन ही मन गदगद हो उठा और विनय और विकास से जा मिला.

”हैलो विनय, कैसे हो?’’ मुसकराते हुए सिकंदर आगे बोला, ”आओ, चलो चाय पीते हैं.’’

उस समय विनय अपने दोस्त विकास के साथ गांव के बीच स्थित चाय की दुकान पर खड़ा था और राहुल का इंतजार कर रहा था.

”नहीं भैया, मैं चाय नहीं पीता.’’ विनय ने सामान्य तरीके से उत्तर दिया.

”तो बिसकुट ही खा लो,’’ कह कर सिकंदर ने डिब्बे में रखे 4 बिसकुट निकाले और 2 बिसकुट विनय की ओर और 2 बिसकुट विकास की ओर बढ़ाए. दोनों ने बिसकुट पकड़ लिए और खाने लगे. फिर बड़ी चालाकी से अपनी बातों में दोनों को उलझाते हुए वहां से बाहर ले गया और बातों बातों में उस से राहुल के बारे में पूछा कि राहुल कहां है, आज दिख नहीं रहा. आशू उसे याद कर रही थी, मिलना चाहती थी उस से, तभी तो मैं तुम्हारे पास मिलने आया हूं. तुम दोनों उस के सब से अच्छे दोस्त हो, मेरी बात उस से करा सकते हो क्या? तुम उसे यहां बुला दो. बड़ा एहसान होगा तुम दोनों का.’’

”इस में एहसान की क्या बात है भैया,’’ इस बार विकास बोला था, ”मैं अभी फोन कर के बुला देता हूं. दोस्त दोस्त के काम न आए तो फिर दोस्ती किस काम की.’’

सिकंदर ने दोनों की थोड़ी तारीफ क्या कर दी थी, वे चने के झाड़ पर चढ़ गए. वाहवाही में विकास ने फोन कर के राहुल को चाय की दुकान पर बुला लिया. लोमड़ी से ज्यादा शातिर सिकंदर तो यही चाहता था, किसी तरह राहुल बिल से बाहर निकले. उस के बाद क्या करना है, पहले से सोच रखा था. विनय और विकास शातिर सिकंदर के दिमाग को पढ़ नहीं सके और दोनों उस के चक्रव्यूह में फंस गए. दोस्त विकास का फोन रिसीव करते ही राहुल चाय की दुकान पर पहुंच गया. जैसे ही उस की नजर सिकंदर पर पड़ी तो वह घबरा गया और वापस मुडऩे लगा. बड़ी मुश्किल से शिकार चंगुल में फंसा था और उस के हाथों से फिसल रहा था. वह उसे हाथों से फिसलने देना नहीं चाहता था.

वह राहुल के नजदीक जा कर बोला, ”डरो मत भाई, जो होना था सो हो गया. मुझे अपनी गलतियों का पश्चाताप है, माफी चाहता हूं. आशू तुम से मिलना चाहती है. मैं तुम्हें उस से मिलाना चाहता हूं. मिलना चाहोगे?’’

कह कर सिकंदर ने राहुल के चेहरे को पढऩे की कोशिश की कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है. राहुल कुछ सोच कर आशू से मिलने के लिए तैयार हो गया था. उस ने अपने साथ विनय और विकास को भी चलने के लिए तैयार कर लिया था. आगेआगे सिकंदर और राहुल चल रहे थे, पीछेपीछे विनय और विकास. उस ने राहुल को भरोसा दिला दिया था कि घर पर चाचा रामदेव नहीं हैं, किसी काम से बाहर गए हुए हैं और शाम तक आएंगे. तभी वह प्रेमिका आशू से मिलने के लिए तैयार हुआ था.

इधर बातोंबातों में उस ने कब चाचा रामदेव को फोन कर ‘शिकार खुद बलि चढऩे के लिए आ रहा है, सतर्क हो जाएं.’ कह कर उन्हें अलर्ट कर दिया था. इस की भनक न तो राहुल को लगी थी और न ही विनय और विकास को ही. राहुल निषाद को देखते ही सिकंदर का खून खौल उठा था, लेकिन अपनी भावनाओं को उन के सामने जाहिर नहीं होने दिया था. उस के दिल में कसक तो इस बात की थी कि इसी कमीने के चलते बहन को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था तो ये कैसे जिंदा रहे. इसे भी बहन की तरह तड़पतड़प कर मरना होगा, बस किसी तरह घर तक पहुंच जाए, फिर देखेंगे क्या होता है.

इधर भतीजे से सूचना मिलते ही रामदेव सतर्क हो गया था और बहू को भी सतर्क कर दिया था ताकि शिकार चंगुल से छूट कर भाग न सके. उसे भी जान से मार देना होगा. इस कमीने की वजह से इज्जत तारतार हुई है, किसी कीमत पर जिंदा बच कर जाना नहीं चाहिए.

एक ही कमरे में मार डाला प्रेमीप्रेमिका को

घर पहुंचते ही सिकंदर के शरीर में जैसे शैतानी ताकत कुलांचे मारने लगी. गजब की फुरती आ गई थी उस में. उस ने राहुल को अपनी दोनों मजबूत भुजाओं में कस कर जकड़ लिया. जोरजोर से आवाज दे कर चाचा रामदेव को बाहर बुलाया. राहुल खुद को सिकंदर की भुजाओं में जकड़ा देख समझ गया कि उस के साथ बड़ा धोखा हुआ है. उस ने दोस्तों के साथ मिल कर धोखा किया है. राहुल ने सिकंदर की मजबूत बाहों से आजाद होने के लिए बहुत दम लगाया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उस की मजबूत पकड़ से वह आजाद नहीं हो सका. चाचाभतीजा दोनों मिल कर उसे उसी कमरे में धकेल कर ले गए थे, जहां पहले से आशू की लाश पड़ी थी.

इधर सिकंदर ने विनय और विकास को धमका कर अपने पक्ष में मिला लिया था कि अगर किसी से कुछ भी कहा तो दोनों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है, इसलिए भलाई इसी में है कि हमेशा के लिए अपनी जुबान बंद कर लें. सिकंदर की धमकियों से दोनों बुरी तरह डर गए और चुप हो गए. उस ने दोनों को दूसरे कमरे में बंद कर दिया था. भतीजा सिकंदर, चाचा रामदेव और बहू रामदुलारी तीनों मिल कर उस पर टूट पड़े. लाठी, डंडे और लातघंूसों से उसे मारने लगे.

राहुल जान बचाने के लिए भीख मांग रहा था. कमरे में चीखताचिल्लाता इधरउधर भाग रहा था, लेकिन उन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. गुस्से से लाल हुए तीनों बस लाठी, डंडे की बरसात करते रहे. इस से भी जब उन का मन नहीं भरा तो सिकंदर दरवाजे पर रखी एक ईंट उठा लाया और उसी ईंट से राहुल के सिर के पीछे जोरदार वार किया. ईंट का वार इतना जोरदार था कि पल भर में उस की आवाज शांत हो गई और उस का शरीर निढाल हो कर शांत हो गया.

सिकंदर ने राहुल को हिलाडुला कर देखा. उस की सांसें टूट चुकी थीं. शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी. वह मर चुका था. सिर से खून का रिसाव हो रहा था. लाश देख कर तीनों नफरत भरी हुंकार भर और लाश वहीं छोड़ कर कमरे से बाहर निकल आए और फिर उस कमरे में दाखिल हुए, जहां मृतक राहुल के दोस्तों विनय और विकास को बंद कर के रखा था. शातिर सिकंदर ने दोनों को धमकाते हुए इस शर्त पर वहां से जाने दिया कि वह जब भी उसे बुलाएगा, दोनों को आना होगा और यहां जो कुछ भी हुआ है, अगर किसी से भी कुछ कहा तो उन्हें भी जान से मार देंगे, इसलिए चुप रहने में ही दोनों की भलाई है.

रामदेव के घर में 2 लाशें पड़ी हुई थीं. इस के बावजूद उन के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी. तीनों खुद को बचाते हुए कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहते थे, जिस में यह घटना मर्डर के बजाए आत्महत्या की लगे. इस के लिए मतबूत और लंबी रस्सी की जरूरत थी. सिकंदर बाजार से नायलोन की 2 बंडल मजबूत और मोटी रस्सी खरीद कर ले आया और घर में छिपा कर रख दी और रात होने का इंतजार करने लगे.

इधर राहुल को घर से निकले 4 घंटे बीत चुके थे. वह तक घर वापस नहीं पहुंचा था. यह देख कर उस के फेमिली वाले परेशान हो गए थे. राहुल की मम्मी ने फोन कर के पति अशरफी निषाद को बताया कि 10 बजे का निकला बेटा अभी तक घर नहीं लौटा है, मेरा दिल बैठा जा रहा है. उस समय अशरफी अपनी नौकरी पर थे. बेटे के गायब होने की सूचना मिलते ही वह बुरी तरह परेशान हो गए और ड्यूटी से छुट्टी ले कर वापस घर आ गए.

अशरफी ने अपने गांव और आसपास के गांवों में बेटे की तलाश की, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. देखते ही देखते गांव में राहुल के गायब होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई थी. बेटा जब कहीं नहीं मिला तो शाम को थाना तमकुहीराज में गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. उसी दौरान रामदेव तक खबर पहुंची तो उस के हाथपांव फूल गए. आननफानन में उस ने भी बेटी आशू के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबर गांव में फैला दी, ताकि उस पर किसी का शक न जाए.

अचानक आशू और राहुल दोनों के एक साथ गायब होने से गांव में यही चर्चा होने लगी कि कहीं दोनों गांव से भाग तो नहीं गए. यह बात सभी पहले से जानते थे कि दोनों के बीच में 4 सालों से लव अफेयर है. इसे ले कर 2 बार पंचायत भी बुलाई गई थी. दोनों के अचानक गायब हो जाने से गांव में खुसरफुसर शुरू हो गई. मामले की नजाकत को समझते हुए उसी शाम रामदेव भतीजे सिकंदर के साथ तमकुहीराज थाने पहुंचा और बेटी आशू के रहस्यमय तरीके से गायब होने की सूचना दर्ज करा दी, ताकि वह ऐसा कर के खुद सुरक्षित रह सके.

तमकुहीराज के इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला को जब परसौनी गांव की आशू और राहुल के गायब होने की तहरीर मिली थी. छानबीन में पता चला कि दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. इस के अलावा कोई और खास जानकारी नहीं मिल सकी थी. पुलिस अपनी आगे की काररवाई में जुटी रही. पुलिस रामदेव कुशवाहा तक पहुंच पाती, इस से पहले वे दोनों लाशों को ठिकाने लगा देना चाहता था. क्योंकि 2-2 लाशों को हजम कर पाना रामदेव के बस की बात नहीं थी. वह रात गहराने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. रात जैसे गहराई, सिकंदर ने विनय को काल कर के उस की स्कूटी मंगाई.

हत्या को दे दिया आत्महत्या का रूप

विनय और विकास चुपके से उस समय अपने घर से स्कूटी ले कर निकले थे, जब घर वाले गहरी नींद में जा चुके थे. सिकंदर की धमकी से दोनों बुरी तरह डरे हुए थे. अगर वे उस का साथ नहीं देंगे तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता था. सिकंदर, विनय और विकास के सहारे स्कूटी पर पहले आशू की लाश घर से करीब 400 मीटर दूर आम के घने बगीचे में पहुंचा दी. वहां पहले से रामदेव मौजूद था. फिर चाचा रामदेव को वहीं छोड़ कर विनय और विकास को साथ ले कर वापस घर आया और राहुल की लाश को स्कूटी पर लाद कर बगीचे में पहुंचा दी.

फिर साथ लाई रस्सी को 2 बराबर टुकड़ों में काट कर बारीबारी से दोनों लाशें आम की मजबूत डाली से लटका दी, ताकि देखने से लगे कि दोनों ने आत्महत्या की है, इस काम को अंजाम देने में सिकंदर का साथ चाचा रामदेव, विनय और विकास तीनों ने बराबरबराबर साथ दिया था. लाश ठिकाने लगाने के बाद चारों ने राहत भरी सांसें लीं और मोबाइल की टौर्च के उजाले में बगीचे के चारों ओर देखा. जब चारों आश्वस्त हो गए कि उन्हें कोई देख नहीं रहा है, तब वहां से अपनेअपने घरों को लौट गए और घर जा कर इत्मीनान से सो गए.

अगले दिन यानी 2 जुलाई, 2025 की सुबह परसौनी गांव का तापमान उस समय बढ़ गया था, जब गांव से 400 मीटर दूर आम के बगीचे में आशू और राहुल की पेड़ से लटकती हुई लाशें मिलने की खबर गांव वालों को मिली. खबर मिलते ही गांव वाले मौके पर पहुंच गए थे. बेटे की लाश मिलने की सूचना जैसे ही अशरफी को मिली तो उन के तो हाथपांव ढीले हो गए और गश खा कर नीचे गिर गए और घर में कोहराम मच गया था. लाश की सूचना मिलते ही दिखावे के तौर पर रामदेव और सिकंदर भी मौके पर पहुंच गए थे, ताकि किसी को उन पर कोई शक न हो.

थोड़ी देर में ये खबर तमकुहीराज थाने तक पहुंच गई. सूचना मिलते ही इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला आननफानन में पुलिस टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे और निरीक्षण में जुट गए. प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का नहीं, मर्डर का लग रहा था. पेड़ की जिस ऊंचाई से मृतक लटक कर आत्महत्या किए थे, उन के घुटने जमीन पर मुड़े हुए थे और दोनों की जीभ भी बाहर नहीं निकली थी. अमूमन आत्महत्या के केस में मृतक की जीभ बाहर निकल जाती है, यही बात इंसपेक्टर शुक्ला को खटक रही थी. घटनास्थल की छानबीन के दौरान मौके से एक ईंट बरामद हुई थी. ईंट पर खून लगा हुआ था, जो सूख चुका था. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर वह अपने कब्जे में ले ली.

इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला ने घटना की सूचना एसपी संतोष कुमार मिश्रा और एएसपी निवेश कटियार को दे दी. सूचना पा कर दोनों पुलिस अधिकारी और फोरैंसिक टीम मौके पर पहुंच गई थी. एजेंसी अपनी जांच में जुट गई थी. कागजी काररवाई पूरी कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल कुशीनगर भेज दिया और आगे की काररवाई में जुट गई थी. अगले दिन 3 जुलाई, 2025 को आशू और राहुल की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इंसपेक्टर सुशील कुमार शुक्ला के सामने थी. जिसे पढ़ कर वह चौंके बिना नहीं रहे. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि जो उन की आंखें देख रही हैं, वो सच हो सकता है. रिपोर्ट में उल्लेख था कि दोनों मौतों के बीच में करीब 8 से 10 घंटे का अंतर है.

दोनों ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उन की मौतें सिर पर लगे गहरे जख्म की वजह से हुई थीं. जिस का मतलब शीशे की तरह साफ था कि दोनों की हत्या कर के उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद इंसपेक्टर शुक्ला की जांच की दिशा तेज हो गई थी. वैज्ञानिक साक्ष्य, कौल डिटेल्स और मुखबिर की निशानदेही ने पुलिस के शक की सूई रामदेव कुशवाहा की ओर घुमा दी थी. तब उन का शक और पुख्ता हो गया था, जब घटनास्थल से बरामद ईंट रामदेव के दरवाजे पर रखे ईंट के मार्का आपस में मेल खा लिए थे. फिर क्या था? पुलिस अधिकारियों के दिशानिर्देश से सप्ताह के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो गया.

शक के आधार पर तमकुहीराज पुलिस 9 जुलाई, 2025 की दोपहर रामदेव कुशवाहा को उस के घर से हिरासत में ले लिया. उस से कड़ाई से पूछताछ की तो उस ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और अपना जुर्म कुबूल कर लिया कि उस ने अपने भतीजे सिकंदर, बहू रामदुलारी देवी, राहुल के दोस्तों विनय और विकास की मदद से बेटी आशू और उस के प्रेमी राहुल को मौत के घाट उतारा था. बेटी और उस के प्रेमी ने इज्जत का बट्टा लगा दिया था. गांव और इलाके में थूथू हो रही थी. बेटी को बहुत समझाया, लेकिन उस के सिर से राहुल के इश्क का भूत उतर ही नहीं रहा था तो क्या करता? इज्जत की खातिर उसे ये खौफनाक कदम उठाना ही पड़ा.

किशोर उम्र में हो गया आशू और राहुल को प्यार

रामदेव कुशवाहा कुशीनगर जिले के तमकुहीराज थानाक्षेत्र के परसौनी गांव में परिवार सहित रहता था. परिवार में 3 बेटियां ही थीं. तीनों बेटियों में सब से छोटी बेटी आशू थी. आशू गजब की खूबसूरत थी. उस पर किसी की नजर पड़ जाती तो उस के सुंदर चेहरे से जल्दी नजर हटती नहीं थी. आशू थी तो 15 साल की. उस का अंगअंग विकसित हो चुका था. देखने से कोई नहीं कह सकता था कि पूरी तरह परिपक्व नहीं है. औसत कदकाठी की आशू नागिन सी लहराती कालीकाली जुल्फें खुली छोड़ कर जब घर से बाहर निकलती थी, मनचलों के दिलों पर छुरियां चल जाती थीं. बिलकुल कीचड़ में खिली कमल जैसी थी.

राहुल निषाद आशू का पड़ोसी था. वह 19 साल का था और 10वीं में उसी स्कूल में पढ़ता था, जहां आशू पढ़ती थी. वह 8वीं क्लास की छात्रा थी. करीब 4 साल पहले ही राहुल आशू के जुल्फों में इस कदर कैद हो चुका था कि अपना दिल उस के नाम कुरबान कर दिया था. तब उस की उम्र 15 साल के करीब रही होगी और आशू यही कोई 12 साल के करीब रही होगी, जिस ने अपने दिल के कोरे पन्ने पर प्रेमी राहुल का नाम लिख दिया था. कच्ची उम्र में आशू राहुल को दिल दे बैठी थी.

समय के साथ दोनों ने अपने प्यार का इजहार कर दिया था. उम्र के साथसाथ दोनों का प्यार भी प्रगाढ़ होता चला गया था. जिस कच्ची उम्र में दोनों ने प्यार की दहलीज पर पांव रखा था, उस उम्र में उन्हें प्यार का मतलब समझ में आ रहा था या नहीं, ये बता पाना मुश्किल होगा, लेकिन उन के बीच में गजब का आकर्षण था. आलम यह था कि एक दिन वे एकदूसरे को देखे बिना रह नहीं पाते थे.

चूंकि दोनों के घर अगलबगल थे, इसलिए वे एकदूसरे के घरों को आतेजाते भी थे. घंटों बैठ कर वे आपस में प्रेमभरी मीठी बातें करते थे. घर वालों को उन पर शक नहीं हुआ कि उन के बीच में क्या खिचड़ी पक रही है. घर वाले यही समझते थे कि दोनों बच्चे हैं, एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, साथसाथ आतेजाते हैं तो आपस में स्कूल को ले कर बातचीत करते होंगे, इसलिए उन पर कोई खास तवज्जो नहीं देते थे.

धीरेधीरे 3 साल बीत गए थे. आखिरकार उन के प्यार की गगरी फूट ही गई. इश्क का भांडा फूटते ही घर वालों की चिंता बढ़ गई. रामदेव कुशवाहा को तो ऐसा लगा, जैसे उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. जिस बेटी को वह अभी छोटी सी बच्ची समझ रहा था, वह तो प्रेम की पाठशाला में अव्वल निकली. माथे पर हाथ रख कर रामदेव जमीन पर बैठ गया था. बेटी ने इज्जत की धज्जियां उड़ा दी थीं. गांव में रामदेव की किरकिरी मची हुई थी. उस का घर से निकलना मुश्किल हो गया था. वह जहां जाता था, वहीं बेटी के प्यार के चर्चे चटखारे ले कर होते थे. सुनसुन कर रामदेव के कान पक गए. अब और बदनामी उस से बरदाश्त नहीं हो पा रही थी, इसलिए उस ने कारगर फैसला करने का निर्णय ले लिया था.

रामदेव कुशवाहा ने बेटी को समाज की ऊंचनीच का पाठ तो पढ़ाया ही, साथ ही भतीजे सिकंदर को साथ ले कर उस के प्रेमी राहुल के घर पहुंच कर पिता अशरफी निषाद से राहुल की शिकायत करते हुए आड़े हाथों लेते हुए उसे समझाया, ”देख अशरफी, तुम से या तुम्हारे परिवार से मेरा कोई बैर नहीं है. पड़ोसी होने के नाते हमारे रिश्ते अच्छे हैं. हम दोनों एकदूसरे के दुखसुख में बराबर खड़े रहते हैं. बता, सच है कि नहीं.’’

”सच तो है.’’ असमंजस की स्थिति में अशरफी ने उत्तर दिया, ”लेकिन बात क्या है, रामदेव भाई. आज आप ये कैसी बात कर रहे हैं? मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है. क्या कहना चाहते हो?’’

”सब समझ में आ जाएगा अशरफी, चिंता मत कर. तुझे सब समझाता हूं. लगता है, इसी उमर में तेरा बेटा जवान हो गया है.’’

”मतलब?’’

”मतलब यह कि आजकल तेरा बेटा राहुल मेरी बेटी के पीछे हाथ धो कर पड़ा है.’’

”मेरा बेटा तुम्हारी बेटी के पीछे हाथ धो कर पड़ा है, अभी भी मैं समझा नहीं. जो कहना है, खुल कर कर कहो भाई.’’

”लगता है तुम्हारी खोपड़ी में बात उतरी नहीं.’’ इस बार रामदेव का भतीजा सिकंदर गुर्राते हुए बोला था, ”चाचा कह रहे हैं कि तुम्हारा बेटा राहुल मेरी बहन के पीछे हाथ धो कर पड़ा है तो बात समझ में नहीं आ रही है या समझाऊं तुम्हें. देखो अशरफी चाचा, मैं तुम्हें हिंदी में समझा रहा हूं कि अपने बेटे को समझा लो. उस से कह दो कि आशू से दूरी बना ले, अगर वह दूरी नहीं बनाता है तो उस की सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा. मैं आप को समझा कर जा रहा हूं, दोबारा उस से बातें करते या उस से मिलते देख लिया तो जान से मार दूंगा. समझा देना अपने बेटे को.’’

चेतावनी से बुरी तरह डर गए थे अशरफी

सिकंदर अशरफी निशाद को चेता कर चाचा रामदेव के साथ घर वापस लौट गया, लेकिन उस के कानों में सिकंदर की धमकी भरी बातें गंूजती रहीं. उस की धमकी से वह बुरी तरह डर गया था. राहुल उस का इकलौता बेटा था. सचमुच उस के साथ कुछ अनहोनी हो गई तो वह तो जीते जी मर जाएगा. उस शाम उस ने बेटे को बुलाया और अपने पास बैठा कर उसे समझाया कि अभी ये उम्र पढऩेलिखने की है. मन लगा कर पढ़ाई करो, जब समय आएगा तो अच्छी सी लड़की देख कर उस से तुम्हारा ब्याह रचा दूंगा. तुम आशू से दूरियां बना लो, इसी में हम सभी की भलाई है.

आशू के पापा रामदेव और उस का भाई सिकंदर धमकी दे कर गए हैं कि अगर तुम ने उस से बात की या उस से मिला तो तुम्हें जान से मार देंगे. इसलिए मेरा कहना मान ले बेटा, तू आशू नाम की उस बला से दूरियां बना ले, नहीं तो कोई अनहोनी तुम्हारे साथ हो गई तो जीवन भर हम रोते रहेंगे. मेरी बात मान ले और उस से दूरी बना ले.’’

सिर नीचे झुकाए राहुल अपने पापा की बातें ध्यान से सुनता रहा, मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे धरती फटे और वह उस में समा जाए. उस समय उस ने पापा को भरोसा दिलाया कि दोबारा उन्हें शिकायत का मौका नहीं देगा. राहुल ने अपने पापा से झूठ बोल कर खुद को बचा लिया था. अगले दिन किसी तरह वह आशू से मिला और सारी बातें उसे बता दीं कि उस के पापा को हमारे प्यार वाली बात पता चल गई. और तुम से मिलने से मना कर रहे थे. ऐसे में आशू ने भी उसे बता दिया कि उस के घर वालों ने इज्जत की दुहाई देते हुए तुम से मिलने से मना किया है.

”चाहे कुछ भी हो जाए आशू, हमें प्यार करने से कोई रोक नहीं सकता. हमारा प्यार अमर है, क्या हुआ अगर जमाने वाले हमारे प्यार को नहीं समझते. वक्त आने दो, मैं जैसे ही अपने पैरों पर खड़ा होऊंगा, भाग कर हम दोनों शादी कर लेंगे. फिर घर लौट कर कभी नहीं आएंगे.’’ राहुल बोला.

मांबाप के समझाने का आशू और राहुल दोनों पर कोई असर नहीं हुआ था. दोनों छिपछिप कर मिलते रहे और प्यार की गाड़ी मजे से चलती रही, लेकिन उन की ज्यादा दिनों तक फर्राटे नहीं भर सकी थी. घरवालों को पता चल गया कि आशू उन की आंखों में धूल झोंक कर अपने प्रेमी से छिपछिप कर मिलती है. यह बात न तो रामदेव को हजम हुई और न ही भतीजे सिकंदर को ही. दोनों का खून खौल उठा और राहुल को सबक सिखाने की ठान लिया.

इस के बाद रामदेव कुशवाहा और सिकंदर दोनों ने मिल कर गांव में पंचायत बुलाई. पंचायत में अशरफी निषाद और राहुल को खड़ा किया. घंटों पंचायत चली. इस दौरान पंचों ने निर्णय लिया कि राहुल को समझाबुझा कर छोड़ दिया जाए, दोबारा गलती करते पकड़े जाने पर पंचायत सख्त काररवाई करने के लिए बाध्य होगी. पंचों का निर्णय सुन कर रामदेव और सिकंदर अंदर ही अंदर झुलस कर रह गए. उन्हें इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि पंचायत ऐसा छोटा निर्णय ले कर राहुल को छोड़ देगी. लेकिन उन्हें पंचों के निर्णय के आगे झुकना पड़ा. सिकंदर भी चुप रहने वालों में से नहीं था. उस दिन के बाद से वह दोनों पर और कड़ी नजर रखने लगा था, ताकि मौका मिलते ही राहुल को सजा दे सके.

पंचायत में बदनामी होने के बाद अशरफी निषाद ने बेटे को टाइट कर के रखा और आशू से मिलते पर सख्त पाबंदी लगा दी. बेटे की करतूत से उसे काफी बदनामी झेलनी पड़ी थी. अब और बदनामी झेलने की क्षमता नहीं थी. लेकिन राहुल पर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा था और वह आशू से मिलताजुलता रहा. फिर यह खबर रामदेव तक पहुंच गई थी. खबर मिलते ही वह आगबबूला हो गया था और एक बार फिर पंचायत बुलाई गई. उस पंचायत में राहुल के साथसाथ आशू को भी पेश किया गया था. पंचायत के दौरान काफी हंगामा हुआ और गुस्साए सिकंदर ने भरी पंचायत में राहुल को ललकारा, जहां देखेंगे, उसे जान से मार देंगे. इस ने हमारी इज्जत की छिछालेदर मचा दी है, छोड़ूंगा नहीं किसी कीमत पर, चाहे कुछ भी हो जाए. मरना है तो उसे मरना है.

बात आई गई, खत्म हो गई. पंचायत की यह बात घटना से 2 दिन पहले यानी 28 जून, 2025 की थी. 2 दिन बाद यानी 30 जून को गांव में एक लड़की की शादी थी. शादी का कार्यक्रम रात में होना तय था. शादी में गांव के सभी लोग आमंत्रित थे. उस में रामदेव और अशरफी दोनेां का परिवार भी आमंत्रित था. सभी के साथ दोनों परिवार वाले पार्टी का आनंद ले रहे थे. इसी बीच आशू और राहुल दोनों के घर वाले जब पार्टी में व्यस्त हो गए थे, तभी मौका देख कर आशू और राहुल घर के पिछवाड़े जा पहुंचे और प्यार भरी बातें करने लगे थे. सिकंदर ने उन दोनों को पकड़ लिया. इस के बाद दोनों की हत्या कर दी गई.

पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले रामदेव कुशवाहा के इकरारेजुर्म के बाद उस के भतीजे सिकंदर, रामदुलारी, विनय और विकास को गिरफ्तार कर लिया. पहले से दी गई अशरफी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103/238/61 (2)/315 के तहत रामदेव कुशवाहा, सिकंदर कुशवाहा, रामदुलारी देवी को जेल और नाबालिग विनय और विकास को बाल सुधार गृह भेज दिया. UP News

(कथा में विनय और विकास परिवर्तित नाम है.)

 

 

Family Crime News : यूट्यूबर कंचन पर निहंगों का चाबुक

Family Crime News : लुधियाना की कंचन कुमारी सोशल मीडिया पर कमल कौर भाभी के नाम से मशहूर थी. उस के रील्स की सनसनी गजब की थी. लाखों फालोअर्स पंजाब से ले कर विदेशों तक के थे. हर रील पर मिले कमेंट में तारीफों के पुल बंधे होते थे तो भद्दी गालियां और धमकियां तक होती थीं. उस का कत्ल हो गया. उसे किस ने और क्यों मारा? आखिर क्या हुआ, जो इस कत्ल से हंगामा भारत से ले कर यूएई तक मच गया? पढ़ें, इस कहानी में सब कुछ.

पंजाब की बेहद फेमस इंफ्लुएंसर कमलजीत कौर उर्फ कंचन कुमारी की पहचान ‘कमल कौर भाभी’ के  रूप में थी. वह पिछले 7 सालों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर सनसनी बनी हुई थी. उस के ओनलीफैंस पर भी सब्सक्राइबर्स थे, जहां वह अपने वीडियो पोस्ट करती थी. बात दिसंबर 2024 की है. उसे उस के अश्लील वीडियो के लिए अर्श डल्ला नाम के व्यक्ति की धमकी मिली. उस ने चेतावनी दी कि अश्लील वीडियो बनाना बंद करे, वरना उसे जान से हाथ धोना पड़ेगा.

जबकि लुधियाना के लक्ष्मण नगर में अपनी मम्मी के साथ रह रही 27 वर्षीया कमलजीत कौर द्वारा  वीडियो बनाना रोजीरोटी से जुड़ा था. इस से वह पैसे कमाती थी. घर चलता था. परिवार को मदद मिलती थी. वह छोटेबड़े दुकानदारों के लिए प्रचार का काम करती थी. उन के सामान का वीडियो बना कर अपने सोशल मीडिया चैनल पर डालती थी. बदले में उन से पैसे मिलते थे. उस के द्वारा मौडलिंग में पहनी जाने वाली सैक्स अपील की ड्रेस, अदाएं आदि पर आपत्ति थी. इस तरह के कंटेंट बनाने वाली वह अकेली नहीं थी. पंजाब में कई लड़कियां सोशल मीडिया पर मौडलिंग कर पैसा कमाती हैं. उन्हें वीडियो शूट करने या फिर प्रमोशन के लिए बुलाया जाता है. क्लाइंट की जरूरत के मुताबिक वे वीडियो शूट करने  के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाती रहती हैं.

कमलजीत कौर को जब से जान से मारने की धमकी मिली थी, तब से वह परेशान रहने लगी थी. वह वीडियो बनाने के लिए मना करने वालों से दुखी थी. उसे जानने वाले लोग उसे शालीनता की नसीहत देते थे. अपने सिख समुदाय की गरिमा का पाठ पढ़ाते हुए उस के वीडियो को गलत बताते थे, जबकि उस के वीडियो उन्हें भी पसंद थे. जून के पहले सप्ताह में 3 तारीख को उस ने खिन्न मन से इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया था. उस पर हिंदी और अंगरेजी में कैप्शन लिखा था, ‘नो इमोशन, नो लव, नो एफ. ओनली डाउट, डाउट, डाउट इज लेफ्ट!’

इस पर 3,800 से ज्यादा कमेंट्स आए थे. कुछ में ‘वाहेगुरु’ कह कर शोक जताया गया तो कुछ में गुस्सा और सामाजिक टिप्पणियां की गईं. उस के बाद से वह एकांत में खो गई थी. उस की चंचलता और चपलता को मानो किसी की नजर लग गई हो. उसे उदास देख कर खाने के टेबल पर उस की मम्मी पूछ बैठीं, ”क्या बात है, तुम इतनी गुमसुम क्यों हो? किसी ने फिर कुछ कहा?’’

”कुछ नहीं मम्मी.’’

”क्या सब्सक्राइबर कम हो गए?’’

”नहीं.’’

”तो क्या बात है? मम्मी को नहीं बताएगी… किसी ने फिर धमकी दी? भाई ने कुछ कहा?’’ कमलजीत की मम्मी उस की चुप्पी तोडऩे का प्रयास करती रहीं.

”प्लीज मम्मा! मुझे कल एक इवेंट पर जाना है. उस की तैयारी करनी है.’’ कमलजीत धीमी आवाज में बोली.

”चलो अच्छा है, तुम पिछले 6 दिनों से घर में पड़ी थी… वैसे कहां जाना है?’’

”बठिंडा.’’

”संभल कर जाना.’’ मम्मी बोलीं.

अगले रोज 9 जून, 2025 को सुबह में ही कमलजीत कौर अपने घर से मम्मी को कह कर निकली थी कि वह एक प्रमोशनल इवेंट के लिए बठिंडा जा रही है. उस रोज शाम तक उस की मम्मी से फोन पर बात होती रही, किंतु रात होने तक उस का फोन बंद हो गया. मम्मी ने उस पर ध्यान नहीं दिया, किंतु जब देर रात तक वापस नहीं लौटी, तब उन को उस की चिंता सताने लगी. उन्होंने अपने बेटे को काल कर अपनी चिंता बताई. बेटे ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया. उस ने कहा, ”आ जाएगी.’’

अगले रोज 10 जून को भी कमलजीत घर नहीं लौटी. उस रोज सुबह से ही उस का फोन बंद आ रहा था. मम्मी ने अपने बेटे और बेटी को भी इस बारे में बताया. फिर उन्होंने अपनी जानपहचान वालों से संपर्क कर कमल के बारे में पता लगाने की कोशिश की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला

इंस्टाक्वीन की कार में मिली लाश

11 जून, 2025 की रात को एक समाजसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने पाया कि बठिंडाचंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित आदेश मैडिकल यूनिवर्सिटी की पार्किंग में खड़ी कार में से तेज दुर्गंध फैल रही है. उन्होंने पास जा कर देखा. कार के शीशे बंद थे और उस की पिछली सीट पर एक महिला का शव पड़ा था. उस से ही तेज बदबू फैल रही थी. उन्होंने घटना की सूचना बठिंडा कैंट थाने को दी. कैंट थाने के एसएचओ दलजीत सिंह पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अज्ञात महिला के शव की शिनाख्त के लिए जांच शुरू की.

जांच में गाड़ी की पहचान नहीं हो पाई. पुलिस ने घटनास्थल से कार को कब्जे में लिया, जिस पर लुधियाना का नंबर था, लेकिन पुलिस को उस के नकली नंबर होने का शक हुआ. शव 3 से 4 दिन पुराना लग रहा था. सूचना मिलने पर एसपी (सिटी) नङ्क्षरदर सिंह भी मौके पर पहुंच गए. वहां की काररवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया. गाड़ी में मिले सामान की जांच की गई, जिस से मृतका का नाम कंचन कुमारी पता चला. उस की पहचान सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के रूप में हुई. पता चला कि गाड़ी में मिली लाश ‘इंस्टाक्वीन’ कमल कौर भाभी की थी. उस के घर का फोन नंबर भी पुलिस को मिल गया तो फेमिली वालों को घटना की सूचना दे दी गई.

कमल कौर भाभी की मौत की खबर थोड़ी देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जिस ने भी सुना, हैरान रह गया. दूसरी तरफ बठिंडा की पुलिस इस की तहकीकात में जुट गई थी. तुरंत सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. पुलिस की 5 टीमें बनाई गईं. शुरुआती जांच में अस्पताल की सिक्योरिटी ने बताया कि गाड़ी 10 जून से वहां पार्किंग में खड़ी थी. बदबू आने पर कार के पास गए तो गाड़ी अंदर से लौक मिली. इस के बाद पुलिस को जानकारी दी गई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि गाड़ी वहां कौन लाया था? क्या कमलजीत कौर खुद गाड़ी चला कर आई थी या फिर उस की हत्या कर कोई और उसे गाड़ी के अंदर छोड़ कर चला गया था?

जांच में पुलिस को उस आडियो के बारे में पता चला, जिस में करीब 7 महीने पहले विदेश में बैठे आतंकी अर्श डल्ला द्वारा उसे जान से मारने की धमकी दी थी. इसी बीच कमल कौर भाभी की हत्या मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब एक शख्स ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इस हत्या की जिम्मेदारी ली. हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला वह व्यक्ति अमृतपाल सिंह मेहरों था. उस ने लिखा, ‘खालसा कभी भी महिलाओं पर हमला नहीं करता है, लेकिन जब एक महिला ने हमारे तख्तों पर हमला किया तो उसे मार दिया गया. कंचन, जिस ने सिख इतिहास और संस्कृति को बदनाम करने के लिए ‘कौर’ नाम का दुरुपयोग किया था, को सजा दी गई है.’

यानी कि कंचन कुमारी उर्फ कमलजीत कौर की हत्या के बाद अमृतपाल सिंह मेहरों ने एक वीडियो पोस्ट की, जिस में इस काररवाई के पीछे का कारण बताया गया. उस ने सबूत के तौर पर कंचन का एक अश्लील वीडियो दिखाया. अमृतपाल सिंह मेहरों ने अन्य इंस्टाग्राम यूजर्स को ऐसी सामग्री पोस्ट न करने की भी चेतावनी दी. मेहरों ने धमकी देते हुए कहा कि अगर ऐसे लोग ऐसा करना बंद नहीं करते तो उन का भी यही हाल होगा. उस ने कहा कि जब तक वह जिंदा है, वह पंजाब में ऐसी अश्लील सामग्री फैलने नहीं देगा.

जल्द ही इंस्टाक्वीन कमल कौर भाभी की हत्या के मामले में बठिंडा पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस बारे में बठिंडा की एसएसपी अमनीत कौंडल ने खुलासा किया कि उन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. अलगअलग टीमें बना कर जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान पता चला कि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता जसप्रीत सिंह है, जिस ने अपना नाम अमृतपाल सिंह मेहरों बताया था. वह 7-8 जून को कंचन के घर भी गया था, लेकिन कंचन घर पर नहीं मिली थी. वह कंचन को 9 जून को प्रमोशन के बहाने अपने साथ कार में ले गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक कमल कौर की हत्या बीती 9 व 10 जून, 2025 की मध्यरात्रि को की गई थी. अमृतपाल मेहरों ने अपने साथियों जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह के साथ मिल कर कंचन कुमारी की कार में गला घोंट कर हत्या कर दी थी. इस के बाद उस का शव भुच्चो स्थित आदर्श मैडिकल कालेज और अस्पताल की पार्किंग में कार छोड़ कर फरार हो गए थे. वही कार 11 जून की शाम को बरामद हुई थी. पुलिस ने जांच में पाया कि कंचन की सोशल मीडिया पोस्टों को ले कर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हवाला दे कर यह हत्या की गई थी, इसे ‘अनधिकृत नैतिक पुलिसिंग’ (मोरल पुलिसिंग) करार दिया गया.

पता चला कि रंजीत ने ही मेहरों को अमृतसर पहुंचाने में मदद की थी. साथ ही उसे अमृतसर छोडऩे में सहायता करने वाले पांचवें आरोपी की पहचान और बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानी थी. आरोपी रंजीत सिंह तरनतारन का रहने वाला है और निहंग पंथ से जुड़ा बताया जा रहा है. उस की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी गई.

सौफ्ट पोर्न’ जैसी अश्लील बताईं रील्स

कमल कौर की लाइफ बेहद लग्जरी थी. वह एक निजी बैंक में नौकरी करती थी, लेकिन कोरोना काल के दौरान उस ने नौकरी छोड़ दी थी. नौकरी छोडऩे के पीछे की वजह जो भी हो, वह महंगे कपड़े पहनने की शौकीन थी और अकसर बड़े होटलों व सैलून में जाती थी. वह सोशल मीडिया पर अकसर शौपिंग और जीवनशैली से जुड़ी रील्स पोस्ट करती थी. कई बार वह महिलाओं के अंडरगारमेंट्स पर भी कंटेंट बना कर पोस्ट करती थी. कंचन की कुछ रील्स में वह बारबार जस्सी नाम का जिक्र करती थी. यह जस्सी कौन है, इस पर भी पुलिस जांच कर रही है. साथ ही कंचन की काल डिटेल्स की भी गहराई से जांच की जा रही है, जिस से कुछ संदिग्ध नंबरों की सूची तैयार की जा रही है. उस की बहन नीतू ने बताया कि कमलजीत ही घर का पूरा खर्च उठाती थी.

उस का कमल कौर भाभी नाम का सोशल मीडिया पर वेरिफाइड अकाउंट था. इस में उस के 1,351 से अधिक तरहतरह के वीडियो पोस्ट थे. उन की वीडियो के दीवाने किस कदर थे, इस का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है. इंस्टाग्राम पर 4.27 लाख फालोअर्स थे, जिन की संख्या उस की मौत के बाद और बढ़ गई. यूट्यूब पर उस के 2.39 लाख सब्सक्राइबर थे और फेसबुक पर 7.7 लाख फालोअर्स. उस के कुछ वीडियो निहंग संप्रदाय के कुछ कट्टरपंथियों को फूटी आंख नहीं सुहाते थे. उन्हें उन में अश्लीलता नजर आई थी. हाल की पोस्ट्स में वह कार में अपने भतीजों के साथ मस्ती करती दिखी या किसी गाने पर डांस कर रही होती है.

उस का कंटेंट कभीकभी पीजी-रेटेड लेवल पर इशारों वाला होता था— जैसे कि डीप नेक ड्रेस पहन कर पोज करना या शाट्र्स पहन कर घूमना. लेकिन अब कुछ डिलीट हो चुकी पोस्ट्स इस से भी आगे ‘सौफ्ट पोर्न’ को दर्शाती थीं, जिन्हें कुछ लोग देसी ओनलीफैंस जैसा मानते हैं.

ओनलीफैंस (OnlyFans) लंदन, यूनाइटेड किंगडम में इंटरनेट कंटेंट की वेबसाइट है. इस सेवा का उपयोग मुख्य रूप से वैसे यौनकर्मी यानी सैक्सवर्कर करते हैं, जो अश्लील कंटेंट बनाते हैं. इस वेबसाइट पर पोस्ट किए जाने वाले कंटेंट यूजर्स द्वारा बनाए जाते हैं, जिस से उन की मासिक सदस्यता राशि, टिप और हर बार देखने के लिए ‘पे पर व्यू’ के जरिए आमदनी होती है. ओनलीफैंस का उपयोग मुख्यरूप से अश्लील सामग्री बनाने वालों द्वारा किया जाता है.

कमल कौर अकसर ऐसे परिधानों में नजर आती थी, जिन्हें पंजाब के रुढि़वादी मानकों के हिसाब से सही नहीं माना जाता. कमल कौर सिर्फ ध्यान खींचने के लिए ऐसा नहीं कर रही थी. यह उस के पेड सब्सक्राइबरों और फेसबुक पर ‘कस्टम वीडियो’ के जरिए एक बिजनैस की रणनीति थी. उल्लेखनीय है कि एडल्ट एंटरटेनमेंट का बाजार बहुत बड़ा है. इस की वैश्विक वैल्यू 71.95 बिलियन डालर है और 2034 तक इस के 100 बिलियन डालर पार करने का अनुमान है. भारत में इस का कोई सटीक आंकड़ा भले ही नहीं है, लेकिन स्टेटिस्टा के मुताबिक हर महीने 1.5 करोड़ भारतीय ओनलीफैंस पर लौगिन करते हैं, जहां यूजर्स अपने सब्सक्राइबरों के लिए विशेष तरह के कंटेंट पोस्ट करते हैं. भारत में अश्लील कंटेंट पोस्ट करना गैरकानूनी है, लेकिन ऐसा कंटेंट इंटरनेट पर आम है.

बताते हैं कि इसी में कमल कौर के वीडियो होते थे, जो मेहरों की नजर में सिख संप्रदाय की नैतिकता के खिलाफ था. कमल की हत्या के बाद मेहरों ने एक वीडियो बयान में कहा, ”तो क्या हुआ अगर वो मारी गई? अच्छा हुआ मारी गई. असल में उसे 5-7 साल पहले ही मार देना चाहिए था.’’

मेहरों के वीडियो में कमल कौर के कुछ पुराने वीडियो के क्लिप्स जोड़े गए हैं. एक में वह कहती है, ”गंदी बात करनी है तो काल करो.’’

दूसरे में वह चमकीला का एक गाना बजाते हुए शावर ले रही है. एक और में वह अपनी प्यूबिक हेयर शेव करने की बात कर रही है. मेहरों के अनुसार इसी तरह की वीडियो ने कमल कौर की हत्या करने के लिए मजबूर किया.

मेहरों का कहना है, ”मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मैं सही हूं या गलत. मुझे पंजाबी पीढ़ी को बचाना है, अगर पंजाब की धरती पर ऐसा कोई और वीडियो बना तो देख लेना!’’

कमल कौर भाभी की हत्या मामले में बठिंडा की एसएसपी अमनीत कोंडल ने बताया कि मुख्य आरोपी निहंग अमृतपाल सिंह मेहरों हत्या के कुछ घंटे बाद ही विदेश भाग गया था. पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कमल कौर की हत्या के बाद अमृतपाल अपने साथी रणजीत सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ उन की कार में बैठ कर सीधा अमृतसर के एयरपोर्ट गया और वहां से 10 जून की सुबह सवा 9 बजे फ्लाइट पकड़ कर यूएई भाग गया. इस की पुष्टि अमृतपाल के पासपोर्ट की डिटेल निकालने पर हो गई. उस के बाद पंजाब पुलिस ने अमृतपाल का लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है. उस के सभी सोशल मीडिया अकाउंट बैन करवा दिए हैं.

आरोपी के खिलाफ जारी हुआ लुकआउट सर्कुलर

अमृतपाल ने विदेश जाने के बाद भी पंजाब के अन्य सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को धमकियां दी हैं. इन में अमृतसर की इंफ्लुएंसर दीपिका लूथरा और तरनतारन की इंफ्लुएंसर प्रीत जट्टी को भी जान से मारने की धमकी मिली है. सिमरनजीत प्रीत जट्टी गांव बाणियां की रहने वाली है. इसी नाम से उन का सोशल मीडिया अकाउंट है, जिस में वह पोस्ट डालती है. शनिवार 14 जून, 2025 को उस ने एसएसपी कार्यालय जा कर शिकायत की कि विदेशी नंबरों से उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. उस का कहना था कि उस ने अभी तक कोई ऐसी आपत्तिजनक वीडियो बना कर पोस्ट नहीं की है.

सिमरनजीत के लिखित बयान के आधार पर एसपी (आई) अजयराज सिंह ने सब डिविजन गोइंदवाल साहिब के डीएसपी अतुल सोनी को जांच के आदेश दे दिए. इसी तरह दूसरे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर दीपिका लूथरा को निहंग अमृतपाल सिंह मेहरों ने ईमेल पर भी जान से मारने की धमकी दी थी. मेल से मिली इस धमकी में आतंकी संगठन बब्बर खालसा भी लिखा है. अमृतसर पुलिस साइबर सेल ने मेहरों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद दीपिका की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है. जिस ईमेल और मोबाइल नंबरों से धमकियां मिलीं, उन की भी जांच की जा रही है.

दीपिका लूथरा को वीडियो जारी कर कहा गया कि पार्किंग सिर्फ बठिंडा में नहीं होती और हर बार लाश मिले, यह भी जरूरी नहीं. उस के मन में खौफ का माहौल है. अमृतपाल सिंह मेहरों के नाम का डर ऐसा फैल गया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले कई इंफ्लुएंसर अब पंजाब पुलिस की शरण में हैं. धमकी के बाद अमृतसर पुलिस के साइबर सेल ने अमृतपाल सिंह मेहरों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 79, 351 (3), 324 (4) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है.

अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अनुसार दीपिका लूथरा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा मुहैया करा दी गई है. उन के घर के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है. लगातार मिल रही धमकियों के चलते उन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया है. अमृतसर की एक युवा कंटेंट क्रिएटर दीपिका लूथरा ने धीरेधीरे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान बनाई थी. वह अमृतसर और आसपास के जिलों में किसी कपड़ों के शोरूम या नए कैफे जैसे छोटे हाइपरलोकल ब्रांड्स का प्रचार कर के अतिरिक्त कमाई करती है.

इसलिए जब फरवरी के आखिरी सप्ताह में उसे तरनतारण के चीमा कलां गांव में एक नए मोबाइल फोन स्टोर का प्रचार करने के लिए काल आया तो यह उस के लिए कोई असामान्य बात नहीं थी. क्लाइंट ने एडवांस में 2 हजार रुपए भी भेजे. 2 मार्च, 2024 को वह तय जगह पर पहुंची, लेकिन यह एक बुरा सपना बन गया. लूथरा और उस के कैमरा परसन को कथित तौर पर अमृतपाल सिंह मेहरों और उस के साथियों ने बंधक बना लिया. उन की कार को लौक कर दिया गया, ताकि वे वहां से निकल न सकें और उन्हें घुटनों के बल बैठ कर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया.

लूथरा ने इस वारदात के बारे में पुलिस को बताया, ”7-8 लोग नीले (निहंग कपड़ों) में वहां मौजूद थे. उन्होंने मेरा फोन और कार की चाबियां छीन लीं और मेरा फोन चैक करने लगे. वे मेरी पोस्ट की गई कंटेंट को ले कर मुझ पर चिल्ला रहे थे.’’

माहौल को जल्दी शांत करने के लिए लूथरा ने वादा किया कि वह अपने पेज पर ‘डबल मीनिंग’ यानी अश्लील संकेत वाले पोस्ट करना बंद कर देगी, लेकिन उन लोगों ने इस पर जोर दिया कि वह अपनी पूरी सोशल मीडिया पर मौजूदगी हटा दे. यह उस के लिए संभव नहीं था, क्योंकि यही उस की आमदनी का जरिया है.

लूथरा ने कहा, ”उस ने भीड़ के बीच सड़क पर अपनी कृपाण रखी और मुझे कहा कि मैं उस पर झुक कर माफी मांगूं, पंजाब की जनता से माफी मांगूं कि मैं कैसी कंटेंट पोस्ट कर रही हूं. मैं ने लिखित रूप में भी माफी मांगी. मैं ने पूरा सहयोग किया, फिर भी उन की धमकियां बंद नहीं हुईं.’’

पंजाब पुलिस और साइबर सेल की काररवाई में अमृतपाल के ब्लौक किए गए इंस्टाग्राम हैंडल्स में amritpalsinghmehron, amritpalsingh_mehron, amritpal.singh.mehron ¥æñÚU kaum.de.rakhe हैं. ये 4 इंस्टाग्राम हैंडल्स मौजूदा समय में भारत में नहीं देखे जा सकते हैं.

इस से पहले मार्च 2023 में भी अमृतपाल के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आरोप लगा था, जिस में उस का व्यक्तिगत और संगठनात्मक द्मड्डह्वद्व.स्रद्ग.ह्म्ड्डद्मद्धद्ग अकाउंट शामिल था. साथ ही उसे टिंडर पर भी एक प्रोफाइल के आरोप में जांच के दायरे में लाया गया है. पंजाब पुलिस ने मई 2025 में टिंडर से उस के अकाउंट (स्थान, आईपी, चैट हिस्ट्री) की जानकारी मांगी थी.

मुसलिम से सिख बना था अमृतपाल

पंजाब पुलिस की निगाह में वही कमल कौर भाभी की हत्या का मास्टरमाइंड बताया जाता है. उस के बारे में छानबीन करने पर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में सामने आया है कि निहंग अमृतपाल मेहरों पहले से सिख नहीं था, बल्कि वह मुसलमान था. और तो और, भारतपाक बंटवारे के वक्त अमृतपाल के पूर्वज पाकिस्तान से भारत आए थे. अमृतपाल ने करीब 12 साल पहले पूरे परिवार समेत सिख धर्म अपना लिया था. 30 वर्षीय अमृतपाल सिंह मेहरों मोगा जिले के गांव मेहरों का रहने वाला है. उस ने 12वीं तक की स्कूली पढ़ाई की है, लेकिन 2014 में उस ने मोगा की आईटीआई से डीजल मैकेनिक का डिप्लोमा किया है.

उस का पूरा परिवार इसी गांव में रहता है. उस के परिवार में मातापिता और एक बड़ा भाई भी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृतपाल के अपने फेमिली वालों के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं. उस का एक बड़ा भाई परिवार से अलग रहता है. अमृतपाल की एक शादीशुदा बहन है, जो अपनी ससुराल में रहती है. वह वर्ष 2022 में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर तरनतारन के धर्मकोट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है. चुनाव के दौरान उस पर लुधियाना में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग को धमकाने के आरोप में मामला भी दर्ज किया गया था.

अमृतसर में मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 427 के तहत उस के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इस के अलावा बरनाला जिले के धनौला थाने में उस के खिलाफ धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 506 (आपराधिक धमकी), 148 (दंगा करने के लिए हथियारों से लैस होना), और 149 (गैरकानूनी जमावड़े के लिए जिम्मेदारी) सहित अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.

‘कौम दे राखे’ नामक कट्टरपंथी संगठन का मुखिया अमृतपाल सिंह मेहरों को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाने की प्रक्रिया पुलिस ने तेज कर दी है. बठिंडा पुलिस ने ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप कर मेहरों के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की है.

पुलिस ने 17 जून को स्थानीय अदालत से उस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी हासिल कर लिया. एसएसपी अमनीत कोंडल का कहना है कि उन्होंने ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआई) को जो पत्र भेजा है, उस में हत्या और आरोपी की भूमिका से जुड़ी तमाम जानकारियां दी गई हैं. यह पत्र इंटरपोल की मदद से उस की विदेश में गिरफ्तारी के लिए महत्त्वपूर्ण साबित होगा. इस के बावजूद पंजाब और हरियाणा के कई धार्मिक नेताओं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने मेहरों के पक्ष में बयान दिए हैं, लेकिन उन के खिलाफ अब तक कोई काररवाई नहीं की गई है.

जबकि कथा लिखे जाने तक इस मामले में 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एक अन्य आरोपी रंजीत सिंह तरनतारन का रहने वाला है, फरार था. उस के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है. पता चला है कि रंजीत ने ही मेहरों को अमृतसर पहुंचाने में मदद की थी.

लाखों फालोअर्स, लेकिन क्रियाकर्म में सिर्फ 3 लोग

सोशल मीडिया पर चमकने वाली कमल कौर के कत्ल के साथसाथ हैरान करने वाली एक बात और सामने आई. वह यह कि उन के अंतिम संस्कार के मौके पर केवल 3 लोग ही आए, जबकि इंस्टाग्राम पर लाखों फालोअर्स थे और उस की आकस्मिक मौत की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई थी. यानी कि लाखों चहेतों में से एक ने भी मशहूर कमल भाभी को अंतिम विदाई नहीं दी. बेरहमी से हत्या के बाद कमल कौर को पूरे मोहल्ले, यहां तक कि अपने परिवार ने भी ठुकरा दिया. अब कोई उस से जुडऩा नहीं चाहता. कोई भी उस की हत्या की निंदा नहीं करना चाहता.

उस का शव लुधियाना स्थित पुश्तैनी घर नहीं लाया गया. उस का अंतिम संस्कार बठिंडा में ही कर दिया गया. भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 103 (हत्या), 238 (लापता होना), और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. उस के अंतिम संस्कार के मौके सिर्फ उस का भाई, बहन और मम्मी ही शामिल हुए थे. उन्होंने मृतका का अंतिम संस्कार जनसेवा संस्था की सहायता से बठिंडा के श्मशान घाट में किया गया. वैसे उस की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार आरोपी सिख युवा हैं. बताते हैं कि आरोपियों ने अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को ले कर कमल कौर की हत्या की थी.

उन का आरोप है कि कमल कौर इंस्टाग्राम पर विवादित और अश्लील रील बनाती थी और वह अपनी मम्मी के साथ रहती थी. वह अकसर सोशल मीडिया पर लाइव आ कर परिवार के सदस्यों को गालियां देती थी. Family Crime News

 

 

Social Crime Story : काल बन गई सुहागरात

Social Crime Story : 45 वर्षीय टीचर इंद्रकुमार तिवारी द्वारा कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के सामने अपनी शादी होने की बात कहने का वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो गया था. इस का नतीजा यह निकला कि उन के पास देवरिया से शादी का प्रस्ताव गया. वह बहुत खुश हुए. उन की शादी हो भी गई, लेकिन सुहागरात से पहले उन के साथ जो हुआ, उस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.

इंद्रकुमार तिवारी अपने घर पर दोपहर का खाना खा कर आराम कर रहे थे, तभी उन के मोबाइल की घंटी बजी. जैसे ही इंद्रकुमार ने काल रिसीव की, दूसरी तरफ से आवाज आई, ”हैलो, इंद्रकुमार तिवारीजी बोल रहे हैं क्या?’’

”जीहां, मैं इंद्रकुमार ही बोल रहा हूं, कहिए क्या काम है?’’ इंद्रकुमार ने जबाव दिया.

”देखिए, मैं उत्तर प्रदेश के देवरिया से संदीप तिवारी बोल रहा हूं. अपनी बहन खुशी के विवाह के लिए आप से मिलना चाहता हूं.’’ संदीप तिवारी ने कहा.

”आप अपनी बहन का फोटो और बायोडाटा भेज दीजिए, फिर इस के बाद आगे देखा जाएगा. संयोग बना तो रिश्ता बन सकता है.’’ इंद्रकुमार ने जवाब दिया.

”फोटो तो मैं भेज दूंगा, लीजिए मेरी बहन खुशी से बात कर लीजिए.’’ यह कह कर संदीप ने खुशी को मोबाइल पकड़ा दिया.

”हैलो, मैं खुशी बोल रही हूं. मैं ने आप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था, जिस में आप अनिरुद्धाचार्यजी से अपनी शादी के संबंध में बात कर रहे थे. वीडियो देख कर मैं आप के व्यक्तित्त्व से बहुत प्रभावित हुई और अपने भाई से शादी के बारे में बात की तो इन्होंने आप का मोबाइल नंबर खोज कर आप से बातचीत कर ली.’’

 

”अच्छा, मुझे जान कर बहुत खुशी हुई कि आप मुझ से शादी करना चाहती हैं, मगर हम गांव में रहने वाले गेस्ट टीचर हैं, थोड़ीबहुत खेतीबाड़ी भी है. मेरे परिवार में मेरे अलावा और कोई नहीं है. क्या यह सब जान कर भी तुम्हें रिश्ता मंजूर है?’’ इंद्रकुमार ने कहा.

”मैं भी ग्रैजुएट हूं, जनरल कोटा की वजह से कहीं नौकरी नहीं मिली तो घर संभाल रही हूं. मैं घर के सभी काम कर लेती हूं. मेरे भी मम्मीपापा नहीं हैं. मेरे भाई ही मेरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. माली हालत भी ठीक नहीं है. मेरी तरफ से तो हां है, बाकी फैसला भैया के हाथ है. लीजिए, भैया को फोन दे रही हूं. इन से बात कर लीजिए.’’ इतना कहते ही फोन संदीप तिवारी को दे दिया.

”हां तिवारीजी, मैं खुशी की फोटो आप को भेजता हूं और यदि आप की सहमति हो तो मैं आप से मिलने आ जाऊंगा.’’ संदीप तिवारी बोला.

”हां भाई, यहां आ कर मेरा घरद्वार जरूर देख लीजिए. आखिर आप की बहन की जिंदगी का सवाल है.’’ इंद्रकुमार ने सहमति देते हुए कहा. यह बात 17 मई, 2025 की है.

इंद्रकुमार तिवारी की उम्र करीब 45 साल हो चुकी थी, मगर उन की शादी नहीं हो पा रही थी. ऐसे में शादी का रिश्ता आते ही इंद्रकुमार का मन खुशी से उछल रहा था. गांव में थोड़ीबहुत जमीनजायदाद और सरकारी स्कूल में 14 हजार रुपए की नौकरी इंद्रकुमार की गुजरबसर के लिए काफी थी, मगर आसपास के इलाकों में कोई उन्हें लड़की ब्याहने को तैयार नहीं था. आसपड़ोस के लोग भी इंद्रकुमार की शादी में बांधा बने हुए थे, इस लिहाज से इंद्रकुमार ने लड़की वालों को जब घर बुलाया तो उन्होंने अपने चचेरे भाइयों तक को खबर नहीं दी थी.

26 मई, 2025 को खुशी का रिश्ता ले कर संदीप तिवारी मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचा और अपनी बहन खुशी के कुछ और फोटो मोबाइल में दिखाए. इंद्रकुमार को लड़की पसंद थी, इसलिए बातचीत के बाद दोनों तरफ से शादी पक्की हो गई. बातचीत के दौरान तय हुआ कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 जून, 2025 को खुशी के साथ इंद्रकुमार का विवाह होगा. इंद्रकुमार ने संदीप तिवारी को शगुन के रूप में 1100 रुपए भी दिए. इस के बाद संदीप जबलपुर से वापस लौट गया.

इंद्रकुमार शादी तय होने से इतना खुश थे कि वह अपनी शादी में सब कुछ लुटाने को तैयार थे. यही वजह थी कि इंद्रकुमार ने अपनी एक एकड़ जमीन गिरवी रख कर करीब डेढ़ लाख रुपए जुटा कर मझौली कस्बे के ही एक सुनार से गहने बनवाए. कुछ पुश्तैनी आभूषण भी उस के पास थे. सोनेचांदी के गहने के साथ कुछ कैश ले कर वह 2 जून को गोरखपुर रवाना हो गए. 3 जून को वह गोरखपुर के एक होटल में रुके. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 जून को एक होटल में खुशी के साथ उन की शादी कराई गई.

इंद्रकुमार ने शादी के बाद 5 जून को ही खुशी के साथ अपना फोटो अपने फेमिली वालों और पड़ोसियों को भेजते हुए कहा था कि विवाह के बाद दुलहन को ले कर 6 जून को गांव वापस आ जाएंगे, लेकिन 5 जून को विवाह के फोटो भेजने के बाद से ही इंद्रकुमार का फोन स्विच्ड औफ हो गया.

अनिरुद्धाचार्य से लगाई थी शादी कराने की गुहार

सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर के रूप में नौकरी करने वाले इंद्रकुमार तिवारी मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के छोटे से गांव पड़वार के रहने वाले थे. वह गांव में अकेले ही रहते थे. उन के पास 3 एकड़ जमीन थी. इंद्रकुमार ने बचपन में ही अपने मांबाप को खो दिया था. इंद्रकुमार से छोटे 4 भाई उन्हीं पर आश्रित थे. समय के साथ 3 भाइयों की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई. इंद्रकुमार के साथ एक छोटा भाई अभी भी रहता है, लेकिन वह भी कुछ करने में सक्षम नहीं है. उस की सारी जिम्मेदारी भी इन्हीं के ऊपर थी.

इंद्रकुमार सुबह जल्दी उठ कर खाना बना कर खेत चले जाते थे और वहां से आने के बाद स्कूल जाते थे और शाम को फिर खेत जा कर काम करते थे और रात को खाना बना कर भाई को भी खिलाते थे. इस तरह से उन का जीवन संघर्ष से भरा था. कथावाचक अनिरुद्धाचार्य भी इसी गांव के रहने वाले हैं. 2025 में 3 से 10 मई तक रिमझा गांव में अनिरुद्धाचार्य के प्रवचनों का आयोजन किया गया था. इसी दौरान शिक्षक इंद्रकुमार तिवारी इस शिविर में शामिल हुए थे. शिविर में उन्हें भी अनिरुद्धाचार्य से सवाल करने का मौका मिला था. तब उन्होंने माइक लेते हुए उन से सवाल पूछा, ”महाराजजी, मेरी शादी कब होगी?’’

”क्या करते हो तुम? कुछ कामधंधा करते हो कि नहीं?’’ अनिरुद्धाचार्य ने पूछा.

”महाराजजी,  मैं गांव के सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर हूं. मेरे पास 18 एकड़ जमीन है, अच्छी प्रौपर्टी है, लेकिन मेरी शादी नहीं हो पा रही है.’’ इंद्रकुमार ने अनिरुद्धाचार्य को बताया.

”कितनी उम्र हो गई है तुम्हारी?’’

”महाराजजी, 45 साल का हो गया हूं.’’

”तो फिर क्या जरूरत है शादी की, साधु बन जाओ और लोगों का कल्याण करो.’’ चुटकी लेते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा.

”महाराजजी, मेरा वंश कैसे चलेगा, इसलिए शादी करना जरूरी है.’’

”लोगों को पता है कि तुम्हारे पास 18 एकड़ जमीन है?’’

”हां महाराजजी, इस के बावजूद भी  कोई लड़की शादी के लिए राजी नहीं है.’’ इंद्रकुमार बोले.

”अब जब लड़कियों को पता चलेगा तो तुम से शादी करने को जरूर राजी होंगी.’’ अनिरुद्धाचार्य ने दिलासा देते हुए कहा.

बाद में सवालजवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था. इसी वीडियो को देख कर खुशी और कौशल ने इंद्रकुमार से शादी के लिए संपर्क किया था. मझौली से इंद्रकुमार के जाने के बाद पड़ोसी सुरेंद्र तिवारी ने अगले दिन 6 जून को इंद्रकुमार को फोन किया तो एक महिला ने फोन रिसीव करते हुए कहा, ”अभी वो बात नहीं कर पाएंगे, सो रहे हैं.’’

जब  दोबारा फोन करने पर पूछा गया तो वह महिला इंद्रकुमार से बात कराने की बात को टालती रही. जब इंद्रकुमार का फोन स्विच्ड औफ बताने लगा तो चचेरे भाइयों ने मझौली थाने में 8 जून को इंद्रकुमार की गुमशुदगी दर्ज करा दी. चचेरे भाइयों को इंद्रकुमार की खोजबीन करतेकरते लगभग 20 दिन बीत चुके थे. इसी दौरान पुलिस ने परिजनों को बताया कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक 40-45 साल के व्यक्ति का शव मिला है.

दरअसल, 6 जून, 2025  को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र के सुकरौली गांव में मझना नाले के पास झाडिय़ों में एक व्यक्ति की लाश मिली थी. लाश खून से सनी हुई थी और गले में चाकू फंसा हुआ था. लाश मिलने की सूचना बकरी चराने वाली महिलाओं ने पुलिस को दी थी. शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने उस का विवरण सेंट्रल पोर्टल पर अपलोड किया. इस के बाद मध्य प्रदेश के जिला जबलपुर की मझौली पुलिस ने कुशीनगर पुलिस से संपर्क साधा और इंद्रकुमार के फेमिली वालों को ले कर एक टीम कुशीनगर रवाना हो गई. कुशीनगर जा कर जब पुलिस ने शव की शिनाख्त कराई तो वह शव इंद्रकुमार तिवारी का ही निकला.

शव की पहचान इंद्रकुमार के रूप में होने के बाद कुशीनगर पुलिस मोबाइल काल डिटेल्स, सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से हत्याकांड का परदाफाश करने में जुट गई. इंद्रकुमार के पड़ोसी और चचेरे भाई के मोबाइल में मिली फोटो से पुलिस ने शादी करने वाली खुशी और संदीप तिवारी की तलाश शुरू कर दी. इस के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और 700 वाहनों को खंगालने के बाद  कुशीनगर पुलिस ने घटना का परदाफाश कर दिया.

पुलिस ने इस मामले में गोरखपुर, झंगहा के मीठाबेल गांव की साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी, बिछिया कालोनी में रहने वाले देवरिया, गौरीबाजार स्थित सांडा के मूल निवासी संदीप तिवारी उर्फ कौशल कुमार गौर तथा झंगहा के सोनबरसा स्थित कोनी के रहने वाले शमसुद्दीन अंसारी को तितला गांव के पास ढाबे से गिरफ्तार कर लिया. हत्यारोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने इंद्रकुमार की हत्या कर शव को झाडिय़ों में फेंकने का जुर्म स्वीकार कर लिया. घटना में प्रयुक्त चाकू भी बरामद हो गया है.

काल बन गई सुहागरात

पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि हत्या की मास्टरमाइंड खुशी तिवारी का असली नाम साहिबा बानो है और अपने आप को खुशी का भाई बताने वाला संदीप उस का प्रेमी कौशल गौर था. जिन्होंने ङ्क्षहदू नाम रख कर और उसी नाम का फरजी आधार कार्ड बनवा कर इंद्रकुमार को ठगने का प्लान  तैयार किया था. 5 जून को गोरखपुर मंडल के जिला कुशीनगर के कसया इलाके में एक होटल बुक हुआ. वहीं इंद्रकुमार तिवारी और खुशी तिवारी की शादी कराई गई. जयमाला पहनाई गई, मांग में सिंदूर भरा गया, फोटो और वीडियो शूट कर शादी को वैधता देने की कोशिश की गई.

 

इंद्रकुमार इस रिश्ते को ले कर पूरी तरह आश्वस्त थे. लेकिन सुहागरात की रात जब इंद्रकुमार अपनी नईनवेली दुलहन के साथ एक नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीद में होटल के कमरे में थे, उसी रात उन की पत्नी और उस के प्रेमी ने मौत की पटकथा पूरी कर ली. इंद्रकुमार तिवारी ने बड़े अरमानों के साथ अपनी होने वाली दुलहन खुशी तिवारी की मांग में सिंदूर भरा. जयमाला पहनाई, तसवीरें खिंचवाईं, वीडियो शूट हुआ. हर पल को उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत मान कर जी लिया. उन्हें क्या पता था कि यही पल उन की जिंदगी का आखिरी पल साबित होगा. शादी की तमाम रस्मों के बाद सुहागरात की तैयारी चल रही थी.

इंद्रकुमार तिवारी अपनी नईनवेली दुलहन के साथ भविष्य के सपनों में खोए हुए थे. एक तरफ वह शादी के सपनों में खोए थे तो दूसरी तरफ साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी और संदीप तिवारी उर्फ कौशल साजिश को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी में जुटे थे. खुशी तिवारी ने इंद्रकुमार से शादी से पहले ही एक हलफनामा बनवाया, जिस में लिखा गया कि इंद्रकुमार की मृत्यु के बाद उन की 18 एकड़ जमीन की मालिक खुशी और उस का भाई संदीप (असल में प्रेमी कौशल) होंगे. इंद्र ने इस पर भरोसे से इसलिए दस्तखत  कर दिए कि शादी के बाद उस की प्रौपर्टी की असली वारिस खुशी ही तो होगी.

सुहागरात से ठीक पहले, जब होटल में रात का भोजन होना था तो खुशी ने अपने प्रेमी कौशल के साथ मिल कर पनीर राइस में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के करीब घंटे भर बाद इंद्रकुमार जैसे ही बेहोश हुए, खुशी तिवारी ने अपने प्रेमी कौशल और ड्राइवर शमसुद्दीन अंसारी के साथ मिल कर इंद्रकुमार को कार में डाला और कुशीनगर के एक सुनसान इलाके में ले जा कर चाकू से गोदगोद कर बेरहमी से हत्या कर दी. इस के बाद शव को झाडिय़ों में फेंककर तीनों फरार हो गए.

इंद्रकुमार घर पर वह यही बोल कर निकले थे कि 4-5 दिन में बहू ले कर गांव वापस आ जाएंगे. शादी के लिए उन्होंने अपने हिस्से के जेवर और पैसे भी ले लिए थे. पड़ोसियों ने भी उन्हें समझाया कि किसी को पैसों का लालच दे कर शादी मत करो, लेकिन उन की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी. पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि कौशल और साहिबा का प्लान टीचर को तुरंत मारने का नहीं था. उन का इरादा था कि शादी के बाद खुशी टीचर के साथ मध्य प्रदेश के गांव में जाएगी और वहां कुछ दिन उन के साथ रहेगी. फिर इंद्रकुमार की हत्या कर उन्हें ठिकाने लगा दिया जाएगा, ताकि किसी को शक न हो और इंद्रकुमार की विधवा होने के नाते पूरी प्रौपर्टी उसी की हो जाएगी.

मगर बात तब बिगड़ गई, जब साहिबा ने अपने नाम पर जमीन का हलफनामा बनवाने के लिए इंद्रकुमार से जमीन के कागजात मंगवाए. कागजात देख कर पता चला कि टीचर के पास 18 एकड़ नहीं, सिर्फ 3 एकड़ ही जमीन है. इस के बाद खुशी और कौशल ने टीचर की लूट के बाद हत्या का प्लान बना लिया. हलफनामे पर साइन करने के बाद इन लोगों ने इंद्रकुमार तिवारी की हत्या कर दी.

इंद्रकुमार को मारने के बाद खुशी उस का सेलफोन इस्तेमाल कर रही थी. जब पुलिस ने जांचपड़ताल के बाद इंद्र के नंबर पर काल किया तो वह बंद मिला, जिस से पुलिस को शक हुआ. फोन की लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस खुशी तक पहुंची. खुशी से पूछताछ के बाद केस की सारी परतें खुलती चली गईं. फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. कौशल गौर और साहिबा बानो गोरखपुर के रहने वाले हैं. दोनों के प्रेम प्रसंग की वजह से इन के घर वालों ने भी इन से नाता तोड़ लिया था. इसलिए दोनों देवरिया में रहने लगे. यहां कौशल मजदूरी करता था और किराए के कमरे में साहिबा के साथ पतिपत्नी के रूप में रहता था.

साहिबा बानो और उस के प्रेमी ने देखा कि इंद्रकुमार के पास जमीन के साथसाथ नौकरी भी है और वह विवाह करने के लिए परेशान है. इसी बात का फायदा उठाते हुए दोनों ने फरजी शादी कर उस का धन हड़पने की योजना बनाई. सब से पहले साहिबा बानो ने इंद्रकुमार पर प्रभाव डालने और खुद को उस का सजातीय बताने के लिए खुशी तिवारी नाम से फरजी आधार कार्ड बनवाया. इस के बाद सोशल मीडिया पर खुशी तिवारी नाम से ही अपना अकाउंट बना कर इंद्रकुमार से चैटिंग शुरू की. जिस से इंद्रकुमार जल्द ही उस के झांसे में आ गए.

एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने 27 जून को प्रैस कौन्फ्रेंस कर केस का खुलासा किया. पुलिस ने महिला समेत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.