कोबरा से डसवाने वाली प्रेमिका

15 जुलाई, 2023 की सुबह सैर पर निकले कुछ लोगों की नजर नाले के पास खड़ी एक कार पर पड़ी. पोलो कार वहां पर काफी समय से खड़ी थी. कार स्टार्ट थी, लेकिन काफी समय से न तो उस कार में कोई आया और न ही कार से बाहर निकला. कार के सभी शीशे भी पूरी तरह से बंद थे. इस कार को इस तरह से खड़े देख वहां पर राहगीर जमा हो गए थे.

तभी एक व्यक्ति ने हिम्मत जुटाई और कार का दरवाजा खोला तो उस कार की पिछली सीट पर एक व्यक्ति बैठा हुआ था. लेकिन कार का दरवाजा खुलने के बाद भी उस व्यक्ति ने किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं की, जिस से लोगों का शक हुआ. वहां पर मौजूद लोगों ने उस व्यक्ति को कई बार आवाज लगाई, लेकिन उस की तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला.

तब तक वहां पर काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी. उसी भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उसे पहचानते हुए बताया कि वह रामबाग कालोनी रामपुर रोड हल्द्वानी का होटल मालिक अंकित चौहान पुत्र धर्मपाल चौहान है. अंकित की पहचान होते ही उस के एक परिचित ने उस के छोटे भाई अभिमन्यु को सूचना दी. साथ ही वहां पर मौजूद लोगों ने हल्द्वानी कोतवाली में फोन कर इस की सूचना दे दी थी.

अंकित के इस हालत में मिलने की सूचना पाते ही उस का छोटा भाई अभिमन्यु और कोतवाल हरेंद्र चौधरी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए थे. पुलिस ने कार खोल कर स्थिति का जायजा लिया. पुलिस ने अंकित चौहान को आवाज देते हुए हिलाया तो वह सीट पर ही लुढक़ गया. उस की नाक के पास हाथ लगा कर सांस चैक की तो उस की सांस नहीं चल रही थी.

पुलिस की मदद से भाई अभिमन्यु अंकित को ले कर सीधा सुशीला तिवारी अस्पताल गया, जहां पर उसे देखते ही डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. उस के बाद अंकित के शव को मोर्चरी ले जाया गया. जहां पर उस की मौत की खबर सुन कर परिचितों के साथसाथ सगेसंबंधियों की भीड़ लग गई. अंकित के पापा की कई साल पहले किसी बीमारी के चलते मौत हो गई थी.

घर में मां ऊषा देवी के अलावा भाईबहन रहते थे. 5 दिन पहले ही अंकित की मां ऊषा देवी अपनी बेटियों के साथ माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गई हुई थी. उस वक्त सभी कटरा के पास थे. अंकित की मौत की सूचना पाते ही वे वहां से घर की तरफ वापस चल पड़े.

उधर पुलिस उस के शव को मोर्चरी में रखवा कर सीधे उस की कार के पास पहुंची. पुलिस ने गहनता से कार की जांचपड़ताल की. जिस वक्त सूचना पर पुलिस कार के पास पहुंची थी, कार स्टार्ट थी और एसी भी चल रहा था. लेकिन उस जांचपड़ताल के दौरान पुलिस को ऐसी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिस से अंकित की मौत का पता चल सके.

जांच के दौरान पुलिस को कार से 53 हजार रुपए नकद और एक मोबाइल फोन भी मिला था. मोबाइल अंकित का ही था.  शुरुआती जांच में पुलिस ने अनुमान लगाया कि अंकित की मौत कार्बन मोनोआक्साइड गैस से हुई होगी. लेकिन इस के बावजूद भी पुलिस संशय में थी कि अंकित पिछली सीट पर क्यों बैठा था? उस वक्त उस की कार भी लौक नहीं थी. उस के सभी शीशे भी पूरी तरह से बंद थे.

इस में भी सब से बड़ा सवाल यह उठता था कि अगर अंकित पिछली सीट पर बैठा था तो उस की कार कौन चला रहा था. अंकित के पिछली सीट पर बैठे होने से यह तो पक्का हो ही गया था कि उस कार में उस के अलावा भी कोई दूसरा व्यक्ति रहा होगा.  पुलिस ने अपनी काररवाई कर मृतक की लाश का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था.

पोस्टमार्टम के दौरान डाक्टरों को मृतक के शरीर पर किसी भी तरह के निशान नहीं मिले. लेकिन उस के दोनों ही पैरों पर एक जैसे सर्पदंश जैसे निशान जरूर नजर आए थे. जिस से कयास लगाया जा रहा था कि अंकित वहां पर पेशाब करने गाड़ी से उतरा होगा और उसी दौरान उस के पैरों में सांप ने काट लिया हो. लेकिन इस बात के भी 2 पहलू थे. अगर सांप काटता तो एक ही पैर में काटता. लेकिन उस के दोनों ही पैरों में एक जैसे ही निशान मिले थे. जिस से अंकित की मौत का मामला उलझता ही जा रहा था.

सोमवार को पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली. जिस में साफ लिखा गया था कि अंकित की मौत सांप के काटने से ही हुई थी. लेकिन इस बात को उस के घर वाले बिलकुल भी मानने को तैयार नहीं थे. कारण वही था कि अगर उस के पैर में सांप ने ही काटा था तो एक ही सांप ने उस के दूसरे पैर में ठीक उसी जगह पर कैसे काटा? उस के बाद उस की मौत का दूसरा पहलू यह भी था कि वह पिछली सीट पर क्यों बैठा पाया गया?

इस मामले को ले कर मृतक अंकित चौहान की बहन ईशा चौहान की तरफ से पुलिस को एक लिखित तहरीर दी गई थी, जिस के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया.

व्यापारियों के दबाव में आई पुलिस

अंकित के घर वालों के साथसाथ कुछ व्यापारियों की जिद के आगे पुलिस की एक न चली. व्यापारियों के दबाव के चलते नैनीताल के एसएसपी पंकज भट्ट ने तत्काल अधीनस्थों के साथ एक मीटिंग की. उस के बाद पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों से मृत्यु के कारणों के संबंध में चर्चा करने के बाद पुलिस अन्य पहलुओं को ले कर फिर से उस की जांच में जुट गई.

केस के खुलासे के लिए एसएसपी पंकज भट्ट ने एक पुलिस टीम का गठन किया. टीम में कोतवाल हरेंद्र चौधरी, एसएसआई विजय मेहता, महेंद्र प्रसाद, मंगलपड़ाव चौकीप्रभारी जगदीप नेगी, एसआई कुमकुम धानिक, मंडी चौकीप्रभारी गुलाब कांबोज, इसरार नबी, घनश्याम रौतेला, चंदन नेगी, अरुण राठौर, बंशीधर जोशी, छाया, एसओजी प्रभारी राजवीर नेगी, कुंदन कठावत, त्रिलोक रौतेला, दिनेश नागर, अनिल गिरि, भानुप्रताप व अशोक को शामिल किया.

जिस जगह अंकित की कार खड़ी पाई गई थी, उस से काफी दूरी पर एक सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था. पुलिस ने उस की फुटेज निकाल कर चैक की तो रात के 12 बजे के समय घटनास्थल पर एक कार की लाइट दिखाई दी थी. जिस के कुछ समय बाद ही कार की लाइट बंद हो गई थी. उस के बाद उस कार के पास एक और कार आ कर रुकी, जो थोड़ी देर बाद ही वहां से चली गई थी.

मृतक के दोनों पैरों में एक ही जैसे 2 निशान मिलने से पुलिस को भी शक था कि कहीं किसी ने जानबूझ कर तो सांप से कटवा कर उस की हत्या तो नहीं कर दी. उसी शक की बुनियाद पर पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई. पुलिस ने फिर से मृतक के घर वालों से पूछताछ की.

घर वालों ने बताया कि रामपुर रोड छठ पूजा स्थल के पास रामबाग कालोनी से शुक्रवार की देर शाम वह अपनी कार सेनिकला था. लेकिन देर रात तक वह घर नहीं पहुंचा. घर वालों ने उस का देर रात तक इंतजार किया. अंकित कई बार होटल में ही सो जाता था. जिस के कारण उन्हें उस की कोई चिंता नहीं थी. उस के साथ उस रात क्या हुआ पता नहीं.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस के पास एक ही रास्ता बचा था. वह था अंकित के मोबाइल की काल डिटेल्स खंगालना. पुलिस को पूरी उम्मीद थी कि उस की मौत का राज जरूर उस के मोबाइल से ही मिल सकता है. यही सोच कर पुलिस ने अंकित के मोबाइल की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में एक फोन नंबर ऐसा सामने आया, जिस पर अंकित की सब से ज्यादा बातें होती थीं. वह नंबर था हल्द्वानी के बरेली रोड गोरापड़ाव क्षेत्र में रहने वाली माही आर्या उर्फ डौली का. लेकिन वह उस वक्त बंद आ रहा था.

उस के बाद पुलिस ने माही के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सर्च किया तो सभी अकाउंट बंद मिले. इस केस की तह तक जाने के लिए पुलिस को एक छोटा सा क्लू मिला तो पुलिस ने माही के मोबाइल की भी काल डिटेल्स निकलवाई. जिस से जानकारी मिली कि कई दिन से उस की लगातार 2 मोबाइल नंबरों पर बातें हो रही थीं. उस में एक नंबर था दीप कांडपाल का और दूसरा रमेश नाथ का. इन नंबरों के मिलते ही पुलिस ने इन को डायल किया तो ये दोनों नंबर भी बंद पाए गए.

काल डिटेल्स से मिली सफलता

इन दोनों नंबरों के बंद आने से पुलिस को एक आशा की किरण दिखाई दी. पुलिस को लगा कि जरूर अंकित की मौत का राज इन्हीं 2 फोन नंबरों में छिपा हुआ है. इस तरह से कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने दीप कांडपाल की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में भी एक ऐसा नंबर मिला, जिस पर वह हर रोज बातें करता था.

पुलिस उसी नंबर पर काल कर किसी तरह से उस के पास पहुंचने में कामयाब हो गई. उस युवक ने बताया कि वह दीप कांडपाल के साथ मिल कर शराब का कारोबार करता है. दीप कांडपाल दिल्ली, हरियाणा से शराब ला कर हल्द्वानी और उस के आसपास के क्षेत्र में सप्लाई करता है.

पुलिस ने उस युवक को अपनी गिरफ्त में ले कर पूछताछ की तो उस ने बताया कि माही आर्या अंकित चौहान की गर्लफ्रैंड है. वह हर रोज रात में उसी से मिलने जाता था. हर रात वह उसी के साथ खातापीता था. शराब पीने के बाद वह गालीगलौज भी करता था, जिस से माही आर्या तंग आ गई थी. उस के बाद से ही दोनों के संबंधों में खटास आने लगी थी.

पुलिस ने रमेशनाथ, दीप कांडपाल और माही के फोन नंबरों को पहले ही सर्विलांस पर लगा रखा था. सभी नंबर काफी समय से बंद चल रहे थे. लेकिन अचानक ही रमेश नाथ का मोबाइल औन हुआ. उसी दौरान पुलिस को उस की लोकेशन मिल गई. लोकेशन मिलते ही पुलिस आननफानन में उस के पीछे लग गई.

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए रमेश नाथ को बरेली से गिरफ्तार कर लिया. रमेश नाथ एक सपेरा था. सपेरे को गिरफ्तार कर पुलिस ने उस से कड़ी पूछताछ की. उस ने अंकित हत्याकांड का खुलासा कर दिया. रमेश नाथ ने स्वीकार किया कि अंकित की हत्या उस के द्वारा लाए गए सांप से कटवा कर ही की गई थी.

सपेरे रमेश नाथ ने बताया कि वह हल्द्वानी में मानपुर पश्चिम में किराए के मकान में रहता है. वहीं से वह घरघर जा कर मांगने, खाने व सांप पकडऩे का काम करता है. रमेश नाथ ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि अब से लगभग 7-8 महीने पहले एक युवक ने उसे माही उर्फ डौली से मिलवाया था.

युवती को किसी ज्योतिष ने बताया था कि उस पर कालसर्प योग है, जिस के उपचार के लिए किसी जहरीले नाग की पूजा करनी होगी. उस के बाद उस का कालसर्प योग खत्म हो जाएगा. सपेरे ने उस वक्त माही की मांग पर उसे एक सांप ला कर दिया था. जिस के बाद से सपेरे का उस के घर आनाजाना शुरू हो गया था.

सपेरा रमेश नाथ ने खोला मुंह

माही के घर पर अंकित चौहान, दीप कांडपाल, नौकर रामऔतार और नौकरानी ऊषा का आनाजाना लगा रहता था. उसी दौरान एक दिन अंकित को छोड़ कर सभी माही के घर पर मौजूद थे. उसी दौरान दीप कांडपाल ने उसे बताया, “अंकित ने माही को परेशान कर रखा है. माही अब अंकित को प्यार नहीं करती. माही अब मुझ से प्यार करती है, लेकिन अंकित फिर भी उसे तंग करता रहता है. कभी भी वह उस के घर आ जाता है और शराब पी कर मारपीट करता है. उस ने इस का जीना हराम कर रखा है.

“माही की परेशानी को देख कर मुझे गुस्सा भी आ जाता है. मन करता है कि उस का खेल खत्म ही कर दूं. लेकिन पुलिस हम पर शक करके तुरंत ही गिरफ्तार कर लेगी. इसलिए हम चाहते हैं कि तुम हमें एक जहरीला सांप ला कर दे दो, जिस से कटवा कर हम उस की हत्या कर सकें. जिस से लोगों को लगे कि सांप के काटने से अंकित की मौत हो गई.”

इस काम के बदले माही ने उसे, नौकर रामऔतार व नौकरानी ऊषा को 10-10 हजार रुपए भी दिए.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने माही के नौकर और उस की नौकरानी की तरफ ध्यान दौड़ाया. पुलिस दिनरात एक कर के नौकर रामऔतार के पीछे पड़ी तो उस का कनेक्शन पीलीभीत से जुड़ा हुआ मिला. पुलिस जैसेतैसे कर के रामऔतार के घर पहुंची तो पता चला कि वह नेपाल भाग गया है. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस टीम नेपाल पहुंची.

नेपाल पहुंचते ही पुलिस ने वहां के तमाम होटल और कैसीनो भी छान मारे. लेकिन कहीं भी रामाऔतार का पता नहीं चल सका. उस के बाद नेपाल की सीमा पर भी निगरानी रखी,लेकिन कहीं भी कोई सफलता नहीं मिली. उस के बाद पुलिस टीम ने इन चारों की तलाश में दिल्ली व पीलीभीत में डेरा डाल दिया. साथ ही पुलिस ने माही समेत चारों पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया था.

आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने पहले ही मुखबिरों को लगा रखा था. उसी दौरान 23 जुलाई, 2023 को पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली कि दीप कांडपाल और उस की प्रेमिका माही आर्या पुलिस की पकड़ से बचने के लिए रुद्रपुर की कोर्ट में सरेंडर करने जा रहे हैं.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस और एसओजी की टीम ने घेराबंदी कर दोनों को कोर्ट में पेश होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया. दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस टीम उन्हें हल्द्वानी कोतवाली ले आई. कोतवाली लाते ही माही आर्या ने सहज ही अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने स्वीकार किया कि उस ने ही सपेरे से सांप मंगा कर अंकित को कटवाया था, जिस के कारण ही उस की मौत हुई थी.

पुलिस के सामने उस ने अपनी जिंदगी की जो फाइल खोल कर रखी, उस से इश्क, सैक्स, धोखा और कत्ल की लंबी कहानी उभर कर सामने आई.

स्कूल टाइम में ही बहक गई थी माही

नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर से रामपुर रोड पर लगभग 3 किलोमीटर दूर एक गांव पड़ता है प्रेमपुर लोश्यानी. माही आर्या उर्फ डौली का जन्म इसी गांव के एक साधारण परिवार में हुआ था. भले ही माही आर्या ने एक साधारण परिवार में जन्म लिया था. लेकिन जितनी देखनेभालने में वह खूबसूरत थी, उस से कहीं ज्यादा महत्त्वाकांक्षी भी थी. गरीबी में जन्म लेने के बाद उस का पालनपोषण भी आर्थिक तंगी में ही हुआ. लेकिन उस की खूबसूरती ने गरीबी के आगे भी हार नहीं मानी थी.

जैसेजैसे उस ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा, उस की सुंदरता में और भी निखार आता गया. जिस के कारण वह आसपड़ोसियों की भी चहेती बनी हुई थी. गरीबी से लड़तेझगड़ते उस ने किसी तरह से हाईस्कूल पास कर लिया. लेकिन हालात से हार कर उसे अपनी आगे की पढ़ाई बंद करनी पड़ी.

हाईस्कूल तक आतेआते कई युवक उस की खूबसूरती के दीवाने बन गए थे. उन सब में उस का सब से ज्यादा चहेता था विपिन कुमार (काल्पनिक नाम). स्कूल में सब से ज्यादा उस का टाइम उसी के साथ व्यतीत होता था. विपिन उस के दुखदर्द को भलीभांति समझता था.

यही कारण था कि माही सब से ज्यादा उसी पर विश्वास करती थी, जिस के कारण दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी. उसी दोस्ती के सहारे माही ने उसे अपना जीवनसाथी बनाने का प्रण भी कर लिया था. उसी दौरान दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए थे. यह सिलसिला दोनों के बीच काफी समय चलता रहा. लेकिन उन की यह प्रेमगाथा जल्दी ही जगजाहिर हो गई. जिस के कारण माही पर उस के घर वालों की पाबंदी लग गई और उस की आगे की पढ़ाई पर रोक लग गई.

आगे की पढ़ाई पर रोक लगते ही माही तिलमिला उठी. वह विपिन के वियोग में घुटघुट कर जीने लगी. उस के बाद भी दोनों ने जैसेतैसे मोबाइल के द्वारा संपर्क बनाए रखा. अपने घर वालों की पाबंदी से तंग आ कर माही ने विपिन पर घर से भागने का दबाव बनाया तो उस ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया.

विपिन ने अपने घर वालों से माही के साथ शादी करने की बात रखी तो उन्होंने उसे अपनाने से साफ मना कर दिया. यह बात सुनते ही माही को जिंदगी का सब से बड़ा झटका लगा. जब उस के घर वालों को पता चला कि वह अभी भी विपिन की पीछे पड़ी हुई है तो उन्होंने उसे घर से निकाल दिया. यह 2008 की बात है.

माही के साथ हुआ गैंगरेप

उस के बाद वह जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए इधरउधर भटकने लगी. उस वक्त उस की खूबसूरती ही उस के लिए अभिशाप बन गई थी. घर वालों ने ठुकराया तो वह हल्द्वानी आ गई. हल्द्वानी आते ही उस के साथ गैंगरेप की घटना घटी. जिस से आहत हो कर उस ने अधिक मात्रा में नींद की गोलियां खा लीं.

उस की हालत बिगड़ गई. लेकिन जैसे ही उसे होश आया तो उस ने अपने को एक बूढ़ी औरत के घर में पाया. उस के ठीक होने तक उस बूढ़ी औरत ने उस की खूब सेवा की. बूढ़ी औरत की तरफ से सहानुभूति मिलते ही वह उसी के पास रहने लगी. लेकिन कुछ ही दिन बाद उसे पता चला कि वह उस औरत के पास आने के बाद एक दलदल में फंस कर रह गई.

हालांकि वह औरत बड़े लोगों के यहां पर काम कर के अपनी गुजरबसर करती थी. लेकिन उस के कुछ ऐसी औरतों से भी संबंध थे, जो जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी थीं. माही ने जिंदगी से हार मानने हुए उन्हीं औरतों के साथ काम करना शुरू कर दिया. जहां पर रह कर माही की आर्थिक स्थिति सुधरी तो उसे पैसे का लालच आने लगा.

उसी धंधे के सहारे वह कुछ ही दिनों में पैसों में खेलने लगी और जल्दी ही उस ने शहर के बड़ेबड़े लोगों के साथ मजबूत संबंध बना लिए थे. उसी दौरान उस पर शहर के एक नामीगिरामी कांग्रेस नेता की कृपा बरसी और वह मकान मालिक बन बैठी.

उस कांग्रेसी नेता ने उस से खुश हो कर हल्द्वानी के गोरापड़ाव में उस का मकान ही बनवा दिया था. मकान बनते ही माही उस घर में अकेली ही ठाटबाट से रहने लगी थी. यही नहीं, उस ने अपने घर के कामकाज के लिए एक नौकरानी और नौकर भी रख लिया था.

कालगर्ल माही के ठाटबाट और रहनसहन से हल्द्वानी के पूर्व सभासद का बेटा भी उस के संपर्क में आया. वह माही की सुंदरता पर रीझ गया और उस ने उस के साथ दोस्ती करने के बाद उस से शादी भी कर ली थी. सभासद के बेटे के साथ शादी करने के बाद वह कुछ दिन अपनी ससुराल में रही.

लेकिन शादी के बाद भी उस की पुरानी हरकतें छूटने को तैयार नही थीं. जिस से उस के ससुराल वाले बुरी तरह से तंग आ चुके थे. यही कारण रहा कि कुछ ही दिनों में उसे शादी जैसा बंधन अखरने लगा. उस के बाद वह ट्रांसपोर्ट नगर स्थित अपनी ससुराल छोड़ कर गोरापड़ाव में अपने घर आ कर रहने लगी थी.

जिस्म परोस कर कमाने लगी पैसे

अपनी ऊंची ख्वाहिशों के कारण माही समाज में अकेली ही रह गई थी. उस ने अपने जिस्म को बेच कर इतना पैसा  कमा लिया था कि वह ऐशोआराम की जिंदगी जी रही थी. एक बार वह जिस्मफरोशी के धंधे में उतरी तो उस ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. अपने जिस्म के बूते पर उस ने जो चाहा उसे हासिल कर लिया. उसी वक्त उस ने एक कार खरीदने का मन बनाया.

कार खरीदने का मन बनाते ही उस ने पुरानी कार की तलाश शुरू कर दी थी. अंकित चौहान पुरानी कार खरीदनेबेचने का काम करता था. वह कार खरीदने के लिए उस से मिली. माही की खूबसूरती देखते ही अंकित चौहान भी उस का दीवाना हो गया. उसी बहाने से अंकित चौहान ने उस का मोबाइल नंबर भी ले लिया था.

फिर दोनों में जल्दी ही दोस्ती भी हो गई. धीरेधीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ीं तो वह भी उस के घरेलू कामों में उस की सहायता करने लगा था. अंकित हर रोज रात को माही के पास जाता था. वहीं पर रात का खाना खाता और उस के साथ ही रात रंगीन करता था. माही को पता था कि अंकित बहुत बड़ी प्रौपर्टी का मालिक है. उस के पास उस का अपना होटल भी है.

यही सोच कर उस ने उस के साथ शादी करने का मन बनाया. उस ने कई बार उस से शादी करने वाली बात भी कही, लेकिन उस ने एक कान से सुन कर दूसरे कान से बाहर निकाल दिया. जिस से माही को लगने लगा था कि वह केवल उस की देह का ही दीवाना है.

उसी दौरान माही को जानकारी मिली कि वह उस के साथसाथ किसी अन्य युवती से भी प्यार करता है. यह जानकारी मिलते ही माही परेशान हो उठी. फिर माही ने उस से पूरी तरह से पीछा छुड़ाने का मन बना लिया था. लेकिन इस के बावजूद अंकित उस पर अपना ही अधिकार जमाता था. हर रात उसी के साथ खातापीता और फिर उसे मारनेपीटने भी लगा था.

अंकित के व्यवहार से वह समझ गई कि वह उस से किसी भी कीमत पर शादी करने वाला नहीं. वह केवल उस के शरीर का ही उपयोग कर रहा है. उस के बाद धीरेधीरे उस के मन में अंकित के प्रति नफरत पैदा हो गई थी.

दीप कांडपाल बना नया प्रेमी

साल 2016 में उस की मुलाकात मोटाहल्दू निवासी दीप कांडपाल से हुई. दीप कांडपाल शराब बेचने का अवैध धंधा करता था. उस के साथ ही वह प्रौपर्टी खरीदनेबेचने का काम भी करता था. उस के पास काफी रुपयापैसा था. दीप कांडपाल भी उस की खूबसूरती पर इस कदर लट्टू हुआ कि उसे देखते ही पहली मुलाकात में उस से दोस्ती कर ली.

दीप कांडपाल से दोस्ती होते ही माही ने अंकित की अनदेखी करना शुरू कर दिया था. माही के लिए मर्द बदलना कपड़े बदलने के बराबर हो चुका था. कुछ ही दिनों में उस ने दीप कांडपाल के साथ भी संबंध बना लिए. वह भी उस के घर आनेजाने लगा था. यही नहीं, दीप कांडपाल ने उसे प्रौपर्टी डीलिंग के काम में अपने साथ रख लिया था.

माही ने पहले से ही अपने घर के काम के लिए ऊषा, उस के पति रामऔतार को रख रखा था. ऊषा ही माही के घर के कामकाज करने के साथ ही उस का खाना भी बनाती थी. माही के घर के सामने ही एक खाली प्लौट पड़ा हुआ था. ऊषा ने वहीं पर एक झोपड़ी डाल कर अपना बसेरा बना लिया था. अंकित ऊषा से बुरी तरह से चिढ़ता था. उस का भी एक कारण था कि ऊषा हर वक्त उसी के घर पर पड़ी रहती थी.

अंकित की मारपीट से बचने के लिए वह कभीकभी खाना भी वहीं पर खाती थी, जिस के कारण वह ऊषा देवी और उस के पति को अपनी अय्याशी में बाधा मानता था. जबकि उस से तंग आ कर दीपू कांडपाल, रामऔतार व उस की पत्नी ऊषा से उस की घनिष्ठता बढ़ गई थी.

अंकित से परेशान एक दिन माही ने किसी ज्योतिष को अपना हाथ दिखाया. तब उस ज्योतिष ने माही का हाथ देखते हुए बताया कि उस पर कालसर्प दोष चल रहा है, उस से छुटकारा पाने के लिए उसे कालसर्प दोष की पूजा करानी होगी. उस के लिए एक जहरीले नाग की जरूरत होगी.

अब से लगभग 8 महीने पहले माही की मुलाकात सपेरे रमेश नाथ से हुई. रमेश नाथ गलीगली घूम कर अपनी रोजीरोटी चलाता था. रमेश नाथ से मिल कर उस ने उस से एक जहरीला सांप लाने को कहा. रमेश नाथ जंगल से एक सांप पकड़ कर लाया. उस के बाद माही ने अपने घर में कालसर्प दोष की पूजा कराई. जिस के बाद उस ने रमेश नाथ को अपना गुरु मान लिया था.

रमेश नाथ तभी से बराबर उस के संपर्क में बना हुआ था. उसी आनेजाने के दौरान माही ने सपेरे रमेश नाथ के साथ भी अबैध संबंध बना लिए थे. वही पर रमेश नाथ की मुलाकात दीप कांडपाल, ऊषा और उस के पति रामऔतार से हुई.

अंकित नहीं छोड ऱहा था माही का पीछा

हालांकि माही ने अंकित से बात करना बिल्कुल ही बंद कर दिया था, इस के बावजूद अंकित उस का पीछा छोडऩे को तैयार न था. अंकित से तंग आ कर एक दिन माही स्कूटी से उस के घर के पास पहुंची और उस से कहा कि वह आज उस के घर वालों से उस की शिकायत करने आई है.

यह बात सुनते ही अंकित ने उसे उस वक्त तो समझाबुझा कर वापस भेज दिया. लेकिन कुछ ही दिनों में वह फिर से अपनी हरकतों पर आ गया. अंकित ने सोचा यह सब उस की नौकरानी ऊषा ही करा रही है. अंकित ने उस पर शक किया. उस के बाद उस ने खाली प्लौट के मालिक से शिकायत कर कहा कि वह बंगालन है वह आप के प्लौट पर टोनाटोटका भी करा सकती है. यह बात सुनते ही उस प्लौट के मालिक ने अपने प्लौट से उस की झोपड़ी हटवा दी.

इस मामले में दीप कांडपाल और अंकित में भी मनमुटाव हो गया था. झोपड़ी हटने के बाद ऊषा और उस का पति रामऔतार माही के घर पर ही रहने लगे थे. इस सब से तंग आ कर माही ने दीप कांडपाल के साथ मिल कर अंकित को मारने का प्लान बनाया.

अंकित को मौत की नींद सुलाने की योजना बनते ही माही और दीप कांडपाल ने एक टीवी सीरियल देखना शुरू किया. जिस से उन्हें सहज ही अंकित को मौत देने का कोई उचित तरीका मिल सके. सीरियल देख कर उन्हें सब से अच्छा तरीका सांप से कटवा कर मौत की नींद सुलाने का अच्छा लगा. उन के लिए सांप की व्यवस्था करने के लिए रमेश नाथ मौजूद था.

माही ने तुरंत ही रमेश नाथ को फोन कर के अपने घर बुला लिया. उस के बाद माही, दीप कांडपाल, ऊषा, रामऔतार और रमेश नाथ सब एक हो गए. जब अंकित को मौत की नींद सुलाने का पक्का प्लान बन गया तो माही ने रमेश नाथ से एक सांप की व्यवस्था करने को कहा.

उसी दौरान 6 जुलाई, 2023 को रमेश को फोन पर किसी ने बताया कि पंचायतघर के पास ब्यूटीपार्लर में एक सांप घुसा हुआ है. यह जानकारी मिलते ही रमेश नाथ ने मौके पर जा कर कोबरा प्रजाति का वह सांप पकड़ कर अपने पास रख लिया. यह बात उस ने माही और दीप कांडपाल को भी बता दी.

कोबरा से डसवा कर प्रेमी को दी मौत

सांप की व्यवस्था होते ही माही ने 8 जुलाई, 2023 को अंकित को मौत की नींद सुलाने का प्लान बनाया. क्योंकि उस दिन अंकित का बर्थडे था. उस दिन अंकित माही के घर पहुंचा और वहां पर मौजूद सभी लोगों के साथ शराब पी कर मौजमस्ती की. लेेकिन उस दिन ये लोग अंकित को मारने में नाकामयाब रहे.

उस के बाद 14 जुलाई को योजनानुसार माही ने अंकित को अपने घर बुलाया. उस दिन माही के घर दीप कांडपाल, सपेरा रमेश नाथ, नौकरानी ऊषा और उस का पति रामऔतार सभी मौजूद थे. माही ने सपेरे रमेश नाथ, ऊषा और उस के पति को इस मामले में सहयोग करने के लिए 10-10 हजार रुपए भी दिए.

अंकित के आने से पहले माही ने चारों को मंदिर वाले कमरे में रहने को कहा था. अंकित के आते ही वह उसे ले कर अपने बैडरूम में चली गई. माही ने वहीं पर पहले से ही जहर मिली शराब रख रखी थी. अंकित के साथ प्यार का नाटक करते हुए उस ने उसे जहरीली शराब पिला दी. जिस के पीते ही वह बेहोश हो गया.

अंकित के बेहोश होते माही ने चारों को बाहर बुला लिया. माही ने चारों आरोपियों की सहायता से उसे बैड पर उलटा लिटा कर उस के ऊपर एक कंबल डाल दिया. उस को उलटा लिटाते ही दीप कांडपाल ने उस के हाथ पकड़े और ऊषा व उस के पति ने उस के पैर पकड़े. उस के बाद सपेरे ने कोबरे से उस के पैर में डसवाया. फिर सभी उस के खत्म होने का इंतजार करने लगे.

लेकिन 10 मिनट गुजर जाने पर भी अंकित के शरीर में यूं ही हलचल होती रही. जिस के बाद फिर से दूसरे पैर में कोबरा से डसवा दिया, ताकि वह जल्दी खत्म हो जाए. इस के कुछ देर बाद ही अंकित की मौत हो गई.

लाश नहीं लगा सके ठिकाने

अंकित की हत्या करने के बाद उस की लाश को भुजियाघाट के पास फेंकने की योजना थी. अंकित की मौत हो जाने के बाद उस के शव को उसी की कार की पिछली सीट पर डाला. दीप कांडपाल कार चला रहा था. रमेश नाथ अगली सीट पर बैठा था.

रात के 11 बजे दोनों कार में शव डाल कर भुजियाघाट पहुंचे, लेकिन उस वक्त वहां पर कुछ कारें खड़ी थीं. जिस के कारण उन्हें वहां पर शव फेंकने का मौका नहीं मिला. इस की जानकारी दीप कांडपाल ने माही को दी और फिर कार को ले कर तीनपानी रेलवे क्रौसिंग के पास पहुंचे.

माही ने पहले ही दिल्ली के लिए कार बुक कर रखी थी. दीप कांडपाल से बात होते ही माही नौकर नौकरानी को साथ ले कर रेलवे क्रौसिंग पर पहुंची. उस के बाद अंकित की कार का एसी औन कर कार स्टार्ट कर के छोड़ दी. बाद में सभी आरोपी दिल्ली के लिए बुक कार से फरार हो गए.

माही की एक बहन की शादी दिल्ली में हुई थी. दिल्ली पहुंचते ही माही ने अपनी बहन से कहा कि हम 5 लोग तेरे घर पर आ रहे हैं. लेकिन उस की बहन उस की हरकतों को अच्छी तरह से जानती थी. इसी कारण उस ने उसे अपने घर आने से मना कर दिया.

उस के बाद पांचों ने रात दिल्ली में गुजारी और अगले ही दिन बस से बरेली पहुंचे. जहां पर पहुंचते ही सपेरा रमेश नाथ अपने गांव भोजीपुरा जाने की बात करने लगा. रमेश के अलग होने से पहले ही माही ने उस से कहा था कि वह अपना मोबाइल बंद ही रखे अन्यथा उस के कारण हम मुसीबत में भी फंस सकते हैं.

बरेली से नौकर नौकरानी दीप कांडपाल और माही को साथ ले कर अपने घर चले गए. उस के बाद वहां से नेपाल भाग गए. इन चारों से अलग होते ही रमेश नाथ ने अपना मोबाइल औन कर लिया था. उस ने सोचा था कि अगर किसी की काल भी आई तो वह उसे उठाएगा ही नहीं. लेकिन उसे पता नहीं था कि मोबाइल औन होते ही पुलिस उस के पास पहुंच जाएगी.

दुनिया में सब से ज्यादा शातिर इंसान का दिमाग ही होता है. जिस को चाहे जैसे यूज करो. इस केस की मास्टमाइंड रही जहरीली प्रेमिका माही उर्फ डौली ने भी यही सोचा था कि वह अंकित को सांप से कटवा कर पाकसाफ बच जाएगी. लेकिन पुलिस के लंबे हाथों से वह नहीं बच पाई.

इस मर्डर केस का खुलासा करने वाली टीम को एसएसपी पंकज भट्ट ने 5 हजार रुपए बतौर पुरस्कार देने की घोषणा की.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

शादी के लिए टीवी ऐंकर प्रणव का अपहरण

29 वर्षीय भोगिरेड्डी तृष्णा ने एक मैट्रिमोनी ऐप पर एक युवक की तसवीर जैसे ही देखी, वह उस के प्रति आकर्षित हो गई थी. उसे अपने दिल में उस के प्रति धड़कन सी महसूस होने लगी थी. तृष्णा ने उस के प्रोफाइल को गौर से पढ़ा तो एक ही नजर में दिल चुराने वाले अंजान शख्स का नाम प्रणव सिस्टला था, जो एक सौफ्टवेयर इंजीनियर होने के साथ एक प्रसिद्ध तेलुगू टीवी शो का ऐंकर व वेब सीरीज का अभिनेता भी था.

वह पहली ही नजर में उसे अपना दिल दे बैठी थी. इस के बाद धीरेधीरे दोनों के बीच इंस्टाग्राम और वाट्सऐप के जरिए बातचीत होने लगी. दोनों एकदूसरे से अब अपने दिल की बातें भी शेयर करने लगे थे.

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तृष्णा तो उसे अपना दिल ही दे बैठी थी. तभी एक दिन टीवी ऐंकर ने उसे मैसेज में लिखा, ”तृष्णा, मैं शेयर मार्केट व अन्य फाइनैंशियल कंपनियों में अपना पैसा इनवैस्ट करता रहता हूं, जिस से मुझे करोड़ों का फायदा होता है. तुम्हारे लिए मेरी ओर से एक औफर है, क्या तुम स्वीकार करना चाहोगी?’’

अपने प्रेमी की ओर से ऐसा मैसेज पा कर तृष्णा का तो दिल पहले से ही बागबाग हो उठा था. उस ने लिखा, ”प्रणव, मैं ने तो अपना दिल तुम्हारी फोटो देख कर ही दे दिया था. तुम्हारी हर बात मुझे मंजूर है.’’

उस के बाद प्रणव ने उसे 40 लाख रुपए इनवैस्ट करने को कहा तो तृष्णा तुरंत तैयार हो गई और उस ने टीवी एंकर के बताए अनुसार बैंक खाते में उसी दिन 40 लाख रुपए ट्रांसफर करवा दिए.

जब से तृष्णा ने टीवी एंकर प्रणव के बताए खाते में 40 लाख रुपए डाले थे, तब से ही उस ने अपना इंस्टाग्राम और वाट्सऐप नंबर ब्लौक कर दिया था.

40 लाख गंवाने के बाद हुआ असली टीवी एंकर प्रणव सिस्टला से परिचय

इन सब बातों से तृष्णा का माथा एकदम से ठनक सा गया था. उस ने जब मैट्रिमोनी की साइट ठीक से देखनी शुरू की तो उस में उसे फोन नंबर मिल गया. तृष्णा ने तुरंत उस मोबाइल पर फोन कर दिया.

”हैलो, आप कौन बोल रहे हैं? मुझ से क्या काम है?’’ दूसरी ओर से एक पुरुष स्वर सुनाई दिया.

”देखिए, मैं भोगिरेड्डी तृष्णा बोल रही हूं. आप कौन बोल रहे हैं?’’ तृष्णा ने पूछा.

”मैं प्रणव सिस्टला बोल रहा हूं, बताइए मुझे आप ने क्यों फोन किया है?’’ दूसरी ओर से सुनाई पड़ा.

”आप ने लोगों को ठगने का कोई धंधा खोल रखा है क्या? बताओ, मेरे भेजे हुए 40 लाख रुपए का तुम ने क्या किया? तुम तो एक धोखेबाज इंसान निकले.’’ तृष्णा ने चीखते हुए कहा.

”देखिए मैम, लगता है आप भी दूसरे लोगों की तरह चैतन्य की धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं. मुझे पहले भी कुछ लोगों की ओर से इस बारे में शिकायत आ चुकी है, जिस के बाद मैं ने अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक के माध्यम से लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी थी. इस में मेरा कोई दोष नहीं है,’’ प्रणव ने विनम्रता से कहा.

इस का मतलब साफ था कि प्रणव सिस्टला के नाम से चैतन्य रेड्डी ठगी का काम कर रहा था. उस के बाद प्रणव ने पुलिस स्टेशन जा कर शिकायत की कि उस की तसवीर का चैतन्य रेड्डी नामक व्यक्ति गलत इस्तेमाल कर लोगों से धोखाधड़ी कर रहा है.

उस की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली और केस वहीं पर बंद हो गया. हालांकि हैदराबाद पुलिस धोखेबाज चैतन्य को अभी तक गिरफ्तार करने में कामयाब नहीं हो पाई है.

तृष्णा प्रणव पर क्यों डाल रही थी शादी का दबाव

चैतन्य रेड्डी द्वारा भारत मैट्रिमोनी पर फरजी अकाउंट बनाने की जब सिस्टला ने पुलिस में शिकायत की, तब से चैतन्य रेड्डी फरजी अकाउंट बंद कर फरार हो गया था. उस के बाद से तृष्णा हर दिन प्रणव को फोन करने लगी थी. पहले तो वह 2-3 बार ही फोन करती थी, मगर कुछ दिनों से वह दिनरात कई बार प्रणव को फोन करने लगी थी.

एक दिन तो तृष्णा ने अपने दिल की बात प्रणव से कह ही डाली थी. जब प्रणव ने उस का फोन उठाया तो तृष्णा ने कहा, ”प्रणव, एक बात कई दिनों से मैं आप से कहना चाह रही थी, यदि आप नाराज न हों तो क्या मैं कह सकती हूं?’’

”तृष्णा, देखो मैं बहुत बिजी रहता हूं, आप बारबार फोन कर देती हैं जिस के कारण मैं डिस्टर्ब हो जाता हूं. हां बोलो, क्या कहना चाहती थी आप?’’ प्रणव ने कहा.

”प्रणवजी, मैं ने जिस दिन आप की फोटो मैट्रिमोनी साइट पर देखी थी, बस उसी दिन से मेरे मनमंदिर में आप की छवि घर कर गई है. मुझे अपने 40 लाख रुपए खोने का बिलकुल भी मलाल नहीं, मुझे तुम मिल गए तो सचमुच दुनिया की सब से बड़ी खुशी मिल गई है.

”अब मैं शादी करूंगी तो केवल तुम्हीं से करूंगी. बोलो, करोगे न तुम मुझ से शादी? मुझे कहीं तुम मझधार में तो नहीं छोड़ोगे? मैं तुम्हें यकीन दिलाती हूं कि मैं कभी तुम्हें शिकायत का मौका नहीं दूंगी. मैं जिंदगी की सारी खुशियां तुम्हारे कदमों में डाल दूंगी. तुम सुन रहे हो न प्रणव!’’ तृष्णा ने आखिरकार अपने दिल की बात प्रणव से कह ही डाली.

”देखो तृष्णा, ये प्यार व्यार से मैं काफी दूर रहता हूं. अच्छा होगा कि तुम ये नाटक किसी और के साथ करो तो बेहतर होगा. मेरे पास तुम्हारी इस तरह की फालतू बातें सुनने के लिए बिलकुल भी वक्त नहीं है.’’ कहते हुए प्रणव ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

रोजरोज तृष्णा की ओर से इस तरह की बातें सुनसुन कर अब प्रणव काफी बोर और परेशान हो चुका था. उस ने तंग आ कर तृष्णा का मोबाइल नंबर ही ब्लौक कर दिया था.

प्रणव की कार पर क्यों लगाया ट्रैकर

भोगिरेड्डी तृष्णा प्रणव सिस्टला को इस कदर चाहने लगी थी कि उस ने उस से शादी का मन ही बना लिया था. उस ने अपने दिल की बात प्रणव को फोन पर भी बता दी थी, मगर दूसरी तरफ प्रणव ने तृष्णा का मोबाइल नंबर ही ब्लौक कर दिया था.

प्रणव के इस कदम से तृष्णा बुरी तरह से बौखला गई थी. उस के पास पैसों की कोई कमी नहीं थी. उस ने अपनी एक कंपनी से अपने 4 जूनियर साथियों, जोकि अपराधी प्रवृत्ति के थे, से बात की. उस ने उन्हें एक बड़ी रकम का लालच दे कर प्रणव सिस्टला की गाड़ी में एक एयरटैग (जीपीएस) ट्रैकर लगवा दिया था. इस के बाद वह प्रणव की हर गतिविधि पर नजर रखने लगी थी.

तृष्णा अभी भी इस बात का इंतजार कर रही थी कि प्रणव उस के फोन नंबर को अनब्लौक कर देगा, लेकिन जब 3 महीने तक भी प्रणव ने उस का नंबर अनब्लौक नहीं किया तो वह प्रतिशोध में बेहद आक्रामक हो गई थी.

शादी के लिए किया ऐंकर का अपहरण

जब प्रणव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो तृष्णा ने प्रणव का अपहरण करने की योजना बना डाली. उस ने अपने कार्यालय में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को अपनी इस योजना में शामिल कर लिया.

उस ने अपने एक कर्मचारी को इस अपहरण के लिए 50 हजार रुपए एडवांस भी दे दिए. प्रणव की गाड़ी में तो तृष्णा ने पहले से ही जीपीएस ट्रैकर लगवा रखा था, जिस से वह उस की हर गतिविधि पर नजर रख रही थी. वह बस मौके की तलाश में थी.

आखिरकार 11 फरवरी, 2024 की रात को उन्हें मौका मिल गया और तृष्णा के भाड़े के बदमाशों ने प्रणव का अपहरण कर लिया और अपहरण के बाद उसे तृष्णा के औफिस ले जा कर उसे तृष्णा के सुपुर्द कर दिया.

”अच्छा तो इन सब के पीछे तुम थी? मेरा जबरन किडनैप क्यों करवा लिया तुम ने? आखिर मुझ से क्या चाहती हो तुम?’’ प्रणव ने चीखते हुए कहा.

”मेरे भोले प्रेमी, इतना गुस्सा तुम्हारे चेहरे पर कुछ अच्छा नहीं लगता. लगता है तुम्हारी खातिरदारी करनी ही पड़ेगी. शायद जब तुम्हें मार पड़ेगी, तब मेरी बात तुम समझ पाओगे!’’ तृष्णा ने गुस्से से कहते हुए अपने शागिर्दों को इशारा कर दिया.

इशारा मिलते ही तृष्णा के किराए के चारों बदमाश प्रणव सिस्टला पर बुरी तरह से टूट पड़े थे, उन्होंने मिल कर लातघूंसों और बेल्ट से अच्छी तरह से प्रणव की पिटाई कर दी, जिस से वह लहूलुहान हो कर जमीन पर गिर पड़ा था.

”हां, कैसी लगी खातिरदारी मेरे प्रणवजी? तसल्ली हो गई या अभी और करनी है?’’ तृष्णा ने रिवौल्विंग चेयर पर बैठेबैठे घूमते हुए मुसकराते हुए पूछा.

अब तक प्रणव सिस्टला अच्छी तरह से समझ चुका था कि उस का पाला वाकई काफी धुरंधरों से पड़ चुका है.

इधर प्रणव सिस्टला लहूलुहान हो कर फर्श पर गिरा पड़ा था तो दूसरी तरफ तृष्णा और उस के किराए के गुंडे प्रणव की स्थिति देख कर ठहाके लगा रहे थे. प्रणव की स्थिति अब करो या मरो की हो गई थी. वह अब इस बात को अच्छी तरह से समझ चुका था कि ऐसी स्थिति में उन लोगों से किसी तरह समझौता हो तो कम से कम अपनी जान तो बचा ली जाए.

वैसे भी प्रणव केवल एक सौफ्टवेयर इंजीनियर ही नहीं बल्कि एक मंझा हुआ कलाकार भी था ,जो स्क्रिप्ट पर अभिनय भी करता था. उस के अंदर का कलाकार अब पूरी तरह से जाग चुका था. वह जमीन पर घुटनों के बल बैठा हुआ था. उस के दोनों हाथ रस्सी से बंधे हुए थे.

”मैम, आखिर आप मुझ से क्या चाहती हैं? मैं आप की हर बात मानने के लिए तैयार हूं.’’ प्रणव बड़े मायूस स्वर में बोला.

”अच्छा तो अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे. पहले मेरा नंबर ब्लौक कर दिया, अब कह रहे हो कि मैं हर बात मानने के लिए तैयार हूं.’’ तृष्णा ने बड़ी अदा से मुसकराते हुए कहा.

”जी, मैं अभी आप का नंबर अनब्लौक कर दूंगा.’’ प्रणव घिघियाते हुए बोला.

”मुझ से बातें करोगे न?’’ तृष्णा ने पूछा.

”जी, जब आप का मन करे, आप मुझ से बातें कर सकती हैं. अब तो मैं रोज आप से खुद बातें किया करूंगा.’’ प्रणव बोला.

”मुझ से शादी करोगे या नहीं? अभी बता दो?’’ जब तृष्णा ने यह पूछा तो प्रणव ने बड़े नाटकीय अंदाज में जवाब दिया, ”तृष्णाजी, आप ने मेरी इतनी पिटाई करवा दी. इस समय तो मैं बुरी तरह से घायल हूं. लेकिन मैं वादा करता हूं कि तुम्हारे साथ ही शादी करूंगा. लेकिन अभी मुझे थोड़ा वक्त चाहिए.’’

”ये हुई न बात! मैं तुम्हारे पौजिटिव एटीट्यूट से बहुत खुश हूं प्रणव. बोलो, अब तुम क्या चाहते हो?’’ तृष्णा ने खुश होते हुए कहा.

”तृष्णाजी, मैं ने आप से फोन पर बातें करने का और शादी करने का वायदा तो कर लिया है न. प्लीज, अभी आप मुझे मेरे घर जाने की अनुमति दें तो आप की बहुत मेहरबानी होगी!’’ प्रणव ने बड़े शायराना अंदाज में यह बात कही तो तृष्णा खुश हो गई थी, ”प्रणव, तुम्हें अपने आदमियों के साथ तुम्हारे घर पर छुड़वा दूं. आप की तबीयत शायद ठीक सी नहीं लग रहा है.’’ तृष्णा ने कहा.

”तृष्णाजी, जब आप के आदमी मुझे मेरे घर छोडऩे जाएंगे तो मुझे इस हालत में देख कर किसी को भी शक हो जाएगा, क्योंकि मैं बहुत अधिक घायल अवस्था में हूं. वैसे मैं अपनी गाड़ी खुद ड्राइव कर के अपने घर तक अकेले जा सकता हूं. फिर मैं अकेले रहूंगा तो कोई न कोई बहाना जरूर बना लूंगा, किसी को बिलकुल भी शक नहीं होगा,’’ प्रणव बोला.

उस के बाद प्रणव वहां से अपनी गाड़ी में बैठ कर चला गया.

तृष्णा के चंगुल से छूट कर प्रणव घर जा रहा था. वह अब तक के 2 सालों के तृष्णा के व्यवहार को पूरी तरह समझ चुका था. वह जान चुका था कि तृष्णा एक सामान्य व्यवहार वाली युवती नहीं, बल्कि मानसिक रोग से पीडि़त है और अपनी खुशी के लिए कुछ भी कर सकती है.

प्रणव ने अब आखिरी फैसला कर लिया था कि वह तृष्णा की इस हरकत को कभी माफ नहीं करेगा और उस के खिलाफ पुलिस में शिकायत अवश्य करेगा ताकि भविष्य में वह तृष्णा के कहर से बच सके.

जब प्रणव गाड़ी चला रहा था तो उस समय तक सुबह के 6 बज चुके थे. वह सीधा उप्पल पुलिस स्टेशन में पहुंचा और एसएचओ एन. इलेक्शन रेड्डी को अपनी लिखित शिकायत दे दी.

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        एसएचओ इलेक्शन रेड्डी

एसएचओ इलेक्शन रेड्डी ने जब शिकायत पढ़ी और प्रणव से विस्तृत पूछताछ की तो उन का माथा भी ठनक गया. एसएचओ ने इस घटना की खबर तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को दी. पुलिस ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए भोगिरेड्डी तृष्णा को गिरफ्तार कर लिया.

इस घटना के संबंध में मीडिया को विस्तृत जानकारी देते हुए हैदराबाद मल्काजगिरी के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) पुरुषोत्तम रेड्डी ने कहा, ”उप्पल पुलिस स्टेशन के तहत मल्काजगिरी उपखंड के निवासी सौफ्टवेयर इंजीनियर और टीवी एंकर प्रणव सिस्टला ने भोगिरेड्डी तृष्णा नाम की महिला के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया था, जो उस से जबरदस्ती शादी करना चाहती थी, लेकिन प्रणव ने उस से शादी करने से इंकार कर दिया.

उक्त महिला तृष्णा को उप्पल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है. तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग करते हुए मामला दर्ज कर लिया गया है और अब उसे अदालत भेजा जाएगा.’’

भोगिरेड्डी तृष्णा केवल एक या दो नहीं, बल्कि पूरी 8 स्टार्टअप कंपनियों के निदेशक (डायरेक्टर) जैसे उच्च पद पर थी. जेएनटीयूएच कालेज औफ इंजीनियरिंग हैदराबाद से इनफार्मेशन टेक्नोलौजी से बीटेक करने के बाद भोगिरेड्डी तृष्णा ने इंडियन इंस्टीट्यूट औफ मैनेजमेंट, कोझिकोड से बिजनैस एडमिनिस्ट्रैशन से एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी. तृष्णा की तेलुगू, अंगरेजी, हिंदी और तमिल भाषाओं पर अच्छी पकड़ है.

भोगिरेड्डी तृष्णा कारपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) में निदेशक के रूप में पंजीकृत निदेशक है. वह आई सिक्योर क्लाउड टेक्नोलोजीज प्राइवेट लिमिटेड, तृष्णा सोशल बाट्स टेक्नोलोजिज प्राइवेट लिमिटेड,

तृष्णा ट्रिशन पिक्सेलाइड्स प्राइवेट लिमिटेड, तृष्णा ब्रांडबे सोशल प्राइवेट लिमिटेड, मार्श मेलोकौस्मेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड, गरुड़ सेवेन फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, फार्मूला ओप्स टेक प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर थी. इस के अलावा वह एक्सट्रीम कम्यूट टेक्नोलौजीज प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक रह चुकी है.

टीवी ऐंकर प्रणव सिस्टला ने सोशल मीडिया पर शेयर की कहानी

प्रणव सिस्टला हैदराबाद से है. हैदराबाद के सेंट पौल स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उस ने सीवीआर कालेज औफ इंजीनियरिंग हैदराबाद से इलैक्ट्रिक ऐंड कम्युनिकेशन में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी. एक सौफ्टवेयर इंजीनियर होने के साथसाथ वह एक मौडल, अभिनेता और टीवी एंकर के रूप में भी काम कर रहा था. उस ने ‘लघु जर्नी’ नामक फिल्म में भी अभिनय किया था.

इस के अलावा प्रणव ने ‘वेब सीरीज अन्ना सीजन-2’ और ‘सौफ्टवेयर सत्यभामा’ वेब सीरीज में भी अभिनय किया है. प्रणव एक तेलुगु ऐंकर भी है, जिस ने कई कार्यक्रमों की मेजबानी भी की. इस के अतिरिक्त प्रणव वेब सीरीज ‘ट्विन सिस्टर्स’ में भी अभिनय कर रहा है, जो अभी रिलीज नहीं हुई है.

अपने अपहरण कांड को ले कर तरहतरह की खबरों और कहानियों की पृष्ठभूमि में ऐंकर प्रणव ने सोशल मीडिया पर खुद 3 पेज का एक पत्र जारी करते हुए अपने प्रशंसकों से कहा कि उन्होंने इस मामले में अभी तक किसी से भी मुलाकात नहीं की है. वह हैदराबाद पुलिस को अपना काम करने में सहयोग करेंगे.

इस अपहरण कांड में भोगिरेड्डी तृष्णा सहित कुल 5 लोग शामिल हैं. प्रणव का कहना है कि अजनबियों ने मेरी इंस्टाग्राम तसवीरों का उपयोग कर के वैवाहिक वेबसाइटों पर फरजी अकाउंट बनाए और मेरी फोटो का गलत उपयोग कर के लोगों को गुमराह करते रहे. मुझे पता नहीं कि वह (भोगिरेड्डी तृष्णा) कौन है. मैं ने उसे पहले कभी नहीं देखा. फोन पर बात नहीं हुई.

प्रणव ने आगे बताया कि उस ने पिछले साल सितंबर में मुझ से इंस्टाग्राम पर संपर्क किया था, जब कुछ मेरी समझ में नहीं आया तो मैं ने उसे सुझाव दिया कि मैं साइबर पुलिस में शिकायत कर रहा हूं. उसे भी साइबर पुलिस में शिकायत करनी चाहिए.

उस ने आगे लिखा है कि चाहे कुछ भी हो, परिणाम हमेशा सुखद ही होते हैं. इस घटनाक्रम में किसी को मेरे लिए दुखी होने या खेद महसूस करने की जरूरत नहीं.

इस घटना से दुनिया को पता चल गया है कि कैसेकैसे साइबर अपराध हो रहे हैं. मैं तो यही चाहता हूं कि कोई भी व्यक्ति साइबर क्राइम का शिकार न हो. इस के साथ ही प्रणव सिस्टला ने सभी को सलाह ही कि ‘नौकरी, ऋण, लौटरी और सब से महत्त्वपूर्ण विवाह जैसे घोटालों का शिकार आप में से कोई न बने.’

कहानी लिखे जाने तक हैदराबाद पुलिस भोगिरेड्डी तृष्णा को जेल भेज चुकी थी, जबकि उस के 4 अन्य साथियों की पुलिस सरगरमी से तलाश कर रही थी.

प्यार का जुनून बन जाता है बीमारी

आमतौर पर किसी का पीछा करना, ब्लैकमेल करना, लगातार मैसेज और काल करना आदि स्टाकिंग कहलाता है. लेकिन यदि मनोवैज्ञानिकों की मानें तो यह औब्सेसिव लव डिसऔर्डर भी हो सकता है. अमेरिकी हेल्थ वेबसाइट ‘हेल्थलाइन’ के अनुसार, ‘औब्सेसिव लव डिसऔर्डर (डीएलडी) एक तरह की साइकोलौजिकल कंडीशन है, जिस में लोग किसी एक शख्स पर असामान्य रूप से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि वो उस से प्यार करते हैं.

उन्हें फिर धीरेधीरे ऐसा लगने लगता है कि उस शख्स पर सिर्फ उन का हक है और उसे बदले में उन से प्यार करना चाहिए. अगर दूसरा शख्स उन से प्यार नहीं करता तो वे इसे स्वीकार नहीं कर पाते. वो दूसरे शख्स और उस की भावनाओं पर पूरी तरह से काबू पाना चाहते हैं, जोकि इस डिसऔर्डर के अंदर आती है.

यदि हम इस के लक्षणों की बात करें तो इस बीमारी से महिला और पुरुष दोनों ही औब्सेसिव लव डिसऔर्डर के शिकार हो सकते हैं.

इस के कई कारण हो सकते हैं, परंतु मुख्य रूप से किसी के ऊपर एकाएक अधिक आकर्षित होना, खुद पर नियंत्रण न हो पाना और उस के बारे में लगातार सोचते रहना, सामने वाले के रिजेक्शन को स्वीकार न कर पाना, दूसरे की भावनाओं को न समझ कर उसे काबू करने की कोशिश करना, उस के आगे हर तरह के रिश्ते को भूल जाना, उसे बारबार मैसेज या फिर काल करना, उस का बारबार सोशल मीडिया स्टाक करना, लगातार उसे ब्लैकमेल करना या उस पर अपनी बात को मनवाने के लिए दवाब बनाना हो सकता है.

इस के बारे में साइकोथेरेपिस्ट का कहना है कि इस की कई वजहें हो सकती हैं. औब्सेसिव लव डिसऔर्डर की कोई एक ही वजह हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार इस का संबंध दूसरी मानसिक तकलीफों से भी होता है. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी समस्याएं भी औब्सेसिव लव डिसऔर्डर की वजह बन सकती हैं.

वहीं दूसरी ओर साइकोथेरेपिस्ट का इस के बारे में कहना है कि हम कई बार औब्सेसिव लव डिसऔर्डर को बेइंतहा प्यार और दीवानगी समझने की गलती कर बैठते हैं, जबकि ऐसा नहीं होता. उन के मुताबिक औब्सेसिव डिसऔर्डर से पीडि़त व्यक्ति न सिर्फ खुद को नुकसान पहुंचाता है बल्कि किसी दूसरे इंसान को भी मुश्किल और मुसीबत में डाल सकता है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है.

मंगेतर की जिद ने ले ली जान

उस युवती की उम्र कोई ज्यादा नहीं होगी. 20-22 साल के आसपास की थी वह. एकएक अंग सांचे में ढला हुआ था. ऐसा लग रहा था कि किसी मूर्तिकार ने बहुत फुरसत से उसे तराशा है. उस की हिरणी सी आंखों में गजब का आकर्षण था, उस के संतरे की फांक जैसे पतले और रसीले होंठों की मुसकान बरबस मन को मोह लेती थी. यौवन रस से भरपूर उस की जवानी उफान पर थी.

सुलतान की नजरें उस हसीन युवती पर से हट ही नहीं रही थीं. हटतीं भी कैसे. पार्टी के जश्न में आई हुई अनेक युवतियों में एक वह ही हसीन और बला की खूबसूरत नजर आ रही थी.

वह हसीना लाल रंग की शार्ट कुरती और मखमली शरारा पहने हुई थी. वक्ष पर गुलाबी रंग का सितारों जड़ा दुपट्टा था, जो उस के कंधे से बारबार फिसल रहा था. जब उस का दुपट्टा फिसलता था, उस के उन्नत उभारों की झलक मिल जाती थी, जो दिल की धड़कनें बढ़ा देती थीं.

वह हसीन युवती अपनी सहेली से बातें कर रही थी, किंतु तिरछी नजर से वह सुलतान को भी घूर रही थी. शायद उसे यह अहसास हो गया था कि वह युवक उसे बहुत देर से देख रहा है.

सुलतान को जैसे उस का कोई खौफ नहीं था. होता भी क्यों, भला उस की आंखों का क्या दोष, वह हसीन चीजों को तो ताकेंगी ही. वह अपनी आंखों से उस युवती की खूबसूरती को अपलक ताक रहा था.

एकाएक वह हसीन युवती अपनी जगह से हिली. उस ने सुलतान को फाड़ खाने वाली नजरों से देखा, फिर उस की तरफ बढ़ गई. सुलतान संभल कर खड़ा हो गया. उस की आंखें अब भी उस युवती के ऊपर जमी हुई थीं.

वह युवती पास आ कर रुकी और नागिन की तरह फुंफकार कर बोली, ”ऐ मिस्टर, यह क्या बदतमीजी है.’’

सुलतान ने चौंकने का शानदार अभिनय किया, ”क्या आप ने मुझ से कुछ कहा?’’

”नहीं,’’ युवती ने उसे घूरा, ”यहां आप का जिन्न खड़ा है, मैं उसी से कह रही हूं.’’

”तो कहिए, आप को किस ने रोका है.’’

”ऐ मिस्टर, मैं आप से कह रही हूं.’’

”मेरा नाम सुलतान है मिस हसीना.’’ सुलतान ने मुसकरा कर कहा.

”मेरा नाम भी हसीना नहीं, शमा है.’’ युवती ने झुंझला कर कहा, ”मैं काफी देर से देख रही हूं, आप मुझे घूर रहे हैं.’’

”आप बेहद हसीन हैं इसलिए. हसीन चीज को देखना गुनाह नहीं हो सकता.’’ सुलतान ने सादगी से कहा.

”मैं इसे गुस्ताखी कहूंगी. यहां पार्टी में मैं अकेली तो नहीं हूं, जो मुझे ही देखा जाए.’’

”कमाल हो तुम.’’ सुलतान तुरंत तुम पर उतर आया, ”कभी आईना देखना. इस महफिल में तुम से हसीन कोई भी नहीं है.’’

”तुम बातूनी और चालाक हो.’’ शमा झुंझला कर बोली.

”शुक्रिया मेरी तारीफ के लिए.’’

”मुझे तुम से हसीन युवती यहां नजर आती तो मैं उसे देखता, लेकिन सच कह रहा हूं, तुम्हारे मुकाबले में एक भी लड़की यहां नहीं है.’’

”लेकिन मिस्टर सुलतान, इस तरह युवतियों को घूरना अच्छे इंसान को शोभा नहीं देता. मैं काफी देर से देख रही थी, तुम एकटक मुझे ही देखे जा रहे थे, इसलिए मुझे यहां आना पड़ा.’’ इस बार शमा कुछ नरम लहजे में बोली.

सुलतान ने आह भरी, ”मशविरे के लिए शुक्रिया. वैसे इतनी गुस्ताखी कर चुका हूं तो एक गुस्ताखी और कर लेता हूं. क्या मुझे बताओगी, तुम कहां रहती हो?’’

”क्या करोगे जान कर?’’ शमा ने उसे घूरा.

”तुम्हारे घर आऊंगा और तुम्हारे अब्बा से तुम्हारा हाथ मागूंगा.’’

”शक्ल देखी है आईने में?’’ शमा ने मुंह बिगाड़ा, ”लंगूर जैसे लगते हो तुम.’’

सुलतान हंसा, ”निकाह के बाद तुम्हें अपनी उछलकूद से खूब हंसाऊंगा. इस लंगूर के साथ तुम्हारी जिंदगी हंसीखुशी से गुजर जाएगी.’’

”ख्वाब देखते रहो. मेरे लिए एक से एक खूबसूरत लड़कों की लाइन लगी हुई है. मैं तुम्हें घास नहीं डालने वाली.’’

”देखूंगा.’’ सुलतान इस बार गंभीर हो गया, ”तुम मुझे घास भी डालोगी और प्यार से मुझ से गले भी मिलोगी.’’

”इतना कौंफीडेंस है तुम्हें.’’ शमा ने उसे घूरा.

”हां, मेरी जिंदगी भी अब रोशन इसी शमा से होगी. यह याद रखना.’’ सुलतान दृढ़ स्वर में बोला.

”मुंह धो लेना किसी गटर के पानी से. तुम्हारी यह हसरत कभी पूरी नहीं होगी.’’ शमा ने कहा और पांव पटकती हुई अपनी सहेली की तरफ बढ़ गई.

सुलतान मुसकरा कर उस ओर बढ़ गया जहां कोल्ड ड्रिंक सर्व की जा रही थी. शमा उस के जज्बात भड़का गई थी. सुलतान ठंडा पी कर उन जज्बातों को शांत करना चाहता था.

आज मौसम बहुत सर्द था. नवंबर महीने का बेहद ठंडा दिन कह सकते है इसे. मंसूर ऊपर से नीचे तक गरम कपड़े पहन कर काम पर आया था. वह दिल्ली के विश्वास नगर में स्थित एक मकान के फस्र्ट फ्लोर पर आ कर बंद दरवाजे के पास बैठ गया था, क्योंकि शानू अभी तक नहीं आया था. इस फ्लोर की चाबी शानू के पास ही रहती थी.

इस फ्लोर पर मोहम्मद सुलतान ने फ्लिपकार्ट के डिलीवरी होने वाले सामानों का गोदाम बना रखा था. शानू और मंसूर वहीं पर पैकिंग का काम करते थे.

पौलीथिन में पैक मिली लड़की की लाश

सर्दी से मंसूर कांप रहा था. वह चाहता था कि शानू जल्दी से आ जाए ताकि दरवाजा खोल कर वह इत्मीनान से कमरे में बैठ सके. दोपहर 2 बजे शानू आया. वह भी गरम जैकेट, टोपी पहने था.

”कितनी देर से बैठे हो?’’ उस ने मंसूर से पूछा.

”बाद में पूछना यार. जल्दी से दरवाजा खोल, मेरी कुल्फी जम रही है.’’

शानू ने जेब से चाबी निकाल कर दरवाजे पर लटक रहा ताला खोलते हुए कहा, ”आज कल से ज्यादा ठंड है.’’

मंसूर बोला नहीं. शानू ने जैसे ही ताला खोला, मंसूर दरवाजे को धकेल कर अंदर आ गया.

शानू भी अंदर आ गया. उस ने लाइट जलाई और दरवाजा बंद कर के कुरसी की तरफ बढ़ा तो सामने दीवार से टिके एक बड़े से पौलीथिन बैग को देख चौंक पड़ा.

”इतना बड़ा बैग यहां कहां से आ गया, हमारे यहां से तो छोटे बंडल पैक होते हैं.’’

”सुलतान ने माल मंगवाया होगा. यह तो सुलतान ही बताएगा कि उस ने फ्लिपकार्ट से क्या आइटम मंगवाया है.’’ मंसूर ने बैग पर एक सरसरी नजर डाल कर कहा और कुरसी सरका कर बैठ गया. शानू भी बैठ गया.

यह सुलतान का औफिसनुमा गोदाम था. वह यहां ईकामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट का माल मंगवा कर औनलाइन बेचता था. मंसूर और शानू उस के इस काम में हैल्पर थे. सुलतान ने इन्हें अच्छी तनख्वाह पर काम पर लगा रखा था.

दोनों बहुत भरोसे के आदमी थे. सुलतान के इस औफिस की एक चाबी शानू के पास रहती थी, एक सुलतान अपने पास रखता था. सुलतान की गैरमौजूदगी में औफिस खोल लेता था. उन की ड्यूटी डेढ़ बजे से रात 9 बजे तक की थी.

दोनों अपने काम में लग गए. जो माल का और्डर सुलतान ने रजिस्टर में दर्ज किया हुआ था, उस की वह पैकिंग बनाने में लग गए. वे काम में इस कदर मशगूल हुए कि उन्हें समय का कुछ पता ही नहीं चला.

शाम के साढ़े 6 बजे मंसूर उठा और बाथरूम की ओर वह गया. जब वह वापस आया तो उस ने दीवार से सटे बैग की ओर देखा. उस में से हलकी बदबू आ रही थी.

नथुनों को सिकोड़ कर उस ने लंबी सांस खींची तो उस का जी खराब हो गया. तेज बदबू आ कर नाक में समा गई थी.

”यार शानू, तुझे कुछ बदबू सी आ रही है क्या?’’ मंसूर ने पूछा.

”हां. मैं काफी समय से महसूस कर रहा हूं कि कमरे में अजीब सी बदबू भरी है ऐसी जैसे कोई चीज सड़ रही हो यहां. तू खामोशी से काम कर रहा था, इसलिए मैं ने कुछ नहीं बोला. यह बदबू इस पौलीथिन बैग से आ रही है. मैं ने अभी जोर से सांस ली तो मुझे यह महसूस हुई है. जरा देख तो इस में क्या चीज है.’’ मंसूर ने कहा.

शानू अपनी कुरसी से खड़ा हो गया. पौलीथिन बैग के पास आ कर उस ने उस की रस्सी खोली तो उस के मुंह से दहशत भरी चीख निकल गई.

”लाऽऽश…’’

लाश का नाम सुनते ही मंसूर घबरा गया. वह लपक कर पास आ गया. उस ने बैग के खुले मुंह से अंदर झांका तो उस के हाथपांव कांप गए. वह घबरा कर पीछे हट गया.

”शानू, इस में किसी युवती की लाश है. यहां से भाग चलते हैं.’’

”भागने से तो हम ही फंस जाएंगे.’’ शानू हिम्मत बटोर कर बोला, ”सभी जानते हैं हम यहां दोपहर की ड्यूटी में काम करने आते हैं.’’

”तो क्या करें?’’ मंसूर ने पूछा.

”पुलिस को फोन करते हैं. ऐसा करने से हमारी जिम्मेदारी पुलिस महसूस करेगी और हम लपेटे में नहीं आएंगे.’’

”चल, तू जैसा ठीक समझे. नीचे पब्लिक बूथ से हम पुलिस को यहां लाश मिलने की जानकारी दे देते हैं.’’

शानू ने सिर हिलाया और मंसूर के साथ वह पहली मंजिल से नीचे गली में आ गया. नीचे पब्लिक बूथ से शानू ने उसी समय फर्श बाजार थाने की पुलिस को विश्वास नगर की गली नंबर-10 के मकान नंबर डी-510 में एक युवती की लाश पड़ी होने की सूचना दे दी. दोनों इस वक्त काफी डरे हुए थे.

मंसूर ने कांपती हुई आवाज में शानू से कहा, ”तुम सुलतान को भी फोन कर दो. वह यहां आ जाएगा.’’

शमा की किस ने की थी हत्या

शानू ने अपने मोबाइल से सुलतान को फोन मिलाया तो दूसरी ओर से स्विच्ड औफ होने की सूचना मिली. काफी समय तक वह सुलतान से संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ ही बताता रहा.

इसी बीच वहां पर पुलिस जीप आ गई. पुलिस जिप्सी से इंसपेक्टर बाबूलाल उतरे. उन के साथ 3 पुलिसकर्मी भी थे.

शानू और मंसूर उन के पास आ गए. बाबूलाल ने दोनों को सिर से पांव तक देखा और पूछा, ”क्या तुम ने ही पुलिस को फोन किया था?’’

”हां सर!’’

”लाश कहां है?’’

”आप साथ आइए.’’ शानू हिम्मत बटोर कर बोला और सीढिय़ों से उन को ऊपर ले आया. कमरे में ला कर उस ने पौलीथिन बैग दिखा दिया.

इंसपेक्टर बाबूलाल ने आगे बढ़ कर पौलीथिन बैग को टटोला. अंदर युवती की लाश देख कर उन्होंने सब से पहले इस की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी. फोरैंसिक टीम को भी उन्होंने इत्तला दे दी. उन्होंने उच्चाधिकारियों के आने तक कमरे का निरीक्षण किया और शानू तथा मंसूर से पूछताछ करते रहे.

”यहां क्या काम होता है?’’

”साहब हमारे मालिक का नाम मोहम्मद सुलतान है. यहां पर वह ईकामर्स फ्लिपकार्ट से माल मंगवा कर औनलाइन सप्लाई करते हैं. मैं और मंसूर उन के पास काम करते हैं.’’

”यह लाश यहां गोदाम में किस ने ला कर रखी?’’

”मालूम नहीं साहब. मैं शानू और मेरा साथी मंसूर दोपहर 2 बजे काम पर आए थे. एक चाबी मेरे पास रहती है. मैं ने ताला खोला था. यह पौलीथिन बैग मुझे और मंसूर को कमरे में घुसते ही नजर आ गया था. हम ने सोचा सुलतान ने माल मंगवाया होगा. ज्यादा इस पर ध्यान न दे कर हम काम करने में व्यस्त हो गए. 2-ढाई घंटे बाद मंसूर और मुझे बदबू महसूस हुई तो मैं ने बैग देखने की इच्छा से इस का मुंह खोल दिया. अंदर नजर पड़ी तो दहशत से मेरी चीख निकल गई. अंदर युवती की लाश देख कर हम घबरा गए. हम ने पब्लिक बूथ से फोन कर के थाने में इत्तला दे दी.’’

”मोहम्मद सुलतान आज नहीं आया क्या?’’ इंसपेक्टर बाबूलाल ने पूछा.

”वह सुबह आते हैं. किसी दिन नहीं आते तो फोन से हमारी बात हो जाती है. आज वह यहां आए थे या नहीं, मालूम नहीं. उन का फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा है.’’

”सुलतान का नंबर लिखवा दो मुझे.’’

शानू ने सुलतान का नंबर बता दिया. इंसपेक्टर बाबूलाल ने यह नंबर अपने फोन से मिलाया तो उन्हें भी स्विच्ड औफ होने का संदेश सुनाई दिया.

नीचे डीसीपी रोहित मीणा, एडीशनल डीसीपी राजीव कुमार, एसीपी विजय नागर (शाहदरा) और एसीपी गुरुदेव आ गए थे. वह सब ऊपर कमरे में आ गए. फोरैंसिक टीम भी उन के साथ आ गई थी. फोरैंसिक टीम ने डीसीपी रोहित मीणा के इशारे पर अपना काम शुरू कर दिया. पौलीथिन बैग के ऊपर से फिंगरप्रिंट्स उठाने के बाद उस की फोटोग्राफी की गई, फिर उस में से लाश को बाहर निकाला गया.

यह 20-22 साल की जवान युवती की लाश थी. उस के हाथपांव रस्सी से बंधे हुए थे और गले में चुन्नी लिपटी हुई थी. चुन्नी से उस का गला घोंटा लगता था, क्योंकि युवती की आंखें दम घुटने से फट पड़ी थीं. वह छरहरे जिस्म वाली खूबसूरत युवती थी.

शानू और मंसूर उस युवती की लाश देख कर हैरत में आ गए थे. इंसपेक्टर बाबूलाल ने यह बात महसूस की तो शानू के पास आ गए.

”कौन है यह युवती?’’ शानू के चेहरे पर नजरें जमा कर उन्होंने धीरे से पूछा.

”इस का नाम शमा है साहब, यह हमारे मालिक की मंगेतर है.’’

”ओह!’’ इंसपेक्टर बाबूलाल ने होंठ सिकोड़े, ”तुम्हारा मालिक सुलतान मोबाइल स्विच्ड औफ कर के बैठा है. जाहिर है उस ने अपनी मंगेतर की गला घोंट कर हत्या कर दी और फरार हो गया.’’

”ऐसा नहीं है साहब. हमारे मालिक सुलतान तो शमा भाभी को दिल से प्यार करते रहे हैं.’’ शानू ने अपनी बात कही तो इंसपेक्टर बाबूलाल मुसकरा दिए, ”ऐसी बात है तो वह फोन स्विच्ड औफ क्यों कर के बैठा है.’’

”यह तो मैं नहीं बता सकता, साहब.’’

”शमा कहां रहती है और तुम्हारे मालिक सुलतान का ठिकाना कहां है, सब सहीसही हमें नोट करवा दो. झूठ बोलोगे तो मैं तुम्हें अंदर कर दूंगा.’’

शानू ने शमा और सुलतान के एड्रैस इंसपेक्टर बाबूलाल को बता दिए.

मंगेतर सुलतान पर हुआ शक

डीसीपी रोहित मीणा और एडिशनल डीसीपी राजीव कुमार ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. यह युवती का गला घोंट कर हत्या किए जाने का मामला था. फोरैंसिक टीम ने अपनी ओर से सारे सबूत एकत्र कर लिए थे.

इंसपेक्टर बाबूलाल ने अधिकारियों को शानू द्वारा पूछताछ में मिली सारी जानकारी दे दी.

पुलिस को मृतका का नाम और पता मालूम हो गया था. उन का पूरापूरा संदेह सुलतान पर जा रहा था. उन्होंने इंसपेक्टर बाबूलाल को निर्देश दिया कि वह मोहम्मद सुलतान को दोषी मान कर अपनी जांच करें. इस के बाद उच्चाधिकारी वहां से चले गए.

लाश की कागजी काररवाई निपटाने के बाद उसे पोस्टमार्टम हेतु सरकारी अस्पताल भेज दिया गया.

इंसपेक्टर बाबूलाल ने सुलतान का फोन फिर मिलाया, किंतु वह अभी भी स्विच औफ ही आ रहा था. थाने आ कर उन्होंने मुकदमा संख्या 548/23, आईपीसी की धारा 302/201 के अंतर्गत मामला रजिस्टर में दर्ज कर लिया.

उसी दिन 25 नवंबर, 2023 की रात करीब 10 बजे शमा के परिजन थाना फर्श बाजार (शाहदरा) पहुंचे. उन्होंने थाने में शमा की गुमशुदगी दर्ज करवाई. उस वक्त इंसपेक्टर बाबूलाल थाने में ही मौजूद थे.

पुलिस की 2 टीमें जुटीं जांच में

शमा की हत्या का केस डीसीपी रोहित मीणा ने उन्हें ही देखने के लिए कहा था और इस सिलसिले में वह फर्श बाजार के एसएचओ अमूल त्यागी के साथ बैठ कर विचारविमर्श कर रहे थे. तभी एक सिपाही ने यह सूचना दी कि शमा नाम की लड़की की गुमशुदगी दर्ज करवाने उस के परिजन आए हैं. इंसपेक्टर बाबूलाल और एसएचओ अमूल त्यागी उठ कर अपने कक्ष से बाहर आ गए. वहां बाहर शमा की अम्मी और चाचा खड़े थे.

”आप ही शमा की गुमशुदगी दर्ज करवाने आई हैं?’’ इंसपेक्टर बाबूलाल ने पूछा.

”जी साहब, मेरी बच्ची सुबह अपने काम पर गई थी, वह अभी तक वापस नहीं आई है. हम यहां उस की गुमशुदगी दर्ज करवाने आए हैं. आप मेरी बच्ची को ढूंढ दीजिए.’’ शमा की अम्मी गिड़गिड़ाते हुए बोली.

”शमा कहां काम करती थी?’’

”जी हेडगेवार हौस्पिटल के पास ब्यूटी पार्लर है, वह वहीं काम करने जाती थी.’’

”आप को किसी पर संदेह है क्या?’’

”मुझे सुलतान पर शक है, साहब. मेरी बेटी शमा उस से प्यार करती है. उसी के साथ शमा की शादी हम लोगों ने तय कर दी है लेकिन…’’

”लेकिन क्या?’’ बाबूलाल ने शमा की अम्मी के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

”सुलतान चालाक है, वह मेरी बेटी के लायक नहीं है, लेकिन शमा की खातिर हमें सुलतान की मम्मी के आगे झुकना पड़ा है. अब देखें आप, हम दोपहर से सुलतान को फोन लगा रहे हैं, लेकिन वह फोन उठा ही नहीं रहा है. अब तो उस का फोन भी बंद हो गया है.’’

”वह फोन उठाएगा भी नहीं,’’ इंसपेक्टर बाबूलाल गंभीर हो गए, ”क्योंकि वह शमा की हत्या कर के फरार हो गया है.’’

इंसपेक्टर बाबूलाल के मुंह से यह सुनते ही शमा की मां दहाड़े मार कर रोने लगी. अन्य परिजन भी गमगीन हो गए. कुछ देर तक वहां पर गम का माहौल बना रहा. फिर शमा की मां ने सिसकते हुए पूछा, ”यह आप किस आधार पर कह रहे हैं कि मेरी बेटी शमा की हत्या हो गई है.’’

”हम ने शाम को विश्वास नगर की गली नंबर 10 से शमा की लाश बरामद की है. उस को गला घोंट कर मारा गया है. अब उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में है, आप लोग वहां जा कर पोस्टमार्टम के बाद लाश को अपने कब्जे में ले कर उस का क्रियाकर्म करवाइए. मैं आप लोगों के साथ सिपाही यतेंद्र को भेज रहा हूं.’’

”साहब, मेरी बेटी का कातिल सुलतान ही है. विश्वास नगर में गली नंबर-10 में उसी का गोदाम है. मेरी बेटी उसी से मिलने उस के गोदाम पर गई होगी, जहां उस ने शमा की हत्या कर दी.’’ शमा की मां ने भर्राए गले से कहा.

”हमें भी सुलतान पर शक है. उस की तलाश की जा रही है.’’ इंसपेक्टर बाबूलाल ने कहा फिर कांस्टेबल यतेंद्र को समझा कर उन लोगों को जिला अस्पताल के लिए भेज दिया.

मामला दिल्ली ईस्टर्न रेंज के एडिशनल सीपी सागर कलसी की जानकारी में आ चुका था, इसलिए डीसीपी रोहित मीणा ने शमा की हत्या में संदिग्ध मोहम्मद सुलतान को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस और स्पैशल स्टाफ की एक टीम गठित कर दी.

टीम में थाना फर्श बाजार (शाहदरा) के इंसपेक्टर बाबूलाल, एएसआई दीपक (टेक्नीकल सर्विस) डा. विजय खोखर, एसआई सुनील (स्पैशल स्टाफ शाहदरा), हैडकांस्टेबल शशांक (फर्श बाजार थाना), कांस्टेबल यतेंद्र, एसआई पंकज कसाना और स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर विकास कुमार को शामिल किया गया. इस टीम का नेतृत्व विकास कुमार को सौंपा गया था.

इस टीम ने विश्वास नगर की गली नंबर 10 को जोडऩे वाले मुख्य मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों को चैक किया. सुलतान के घर दबिश दी गई, लेकिन वह घर नहीं मिला. उस की मां नूरजहां ने पुलिस पर आरोप मढ़ा कि वह उस के बेटे सुलतान को फंसाना चाहती है. वह तो खुद 25 नवंबर से लापता है.

नूरजहां ने 26 नवंबर को फर्श बाजार थाने में जा कर सुलतान के गुम होने की सूचना लिखवा दी. उस ने कहा कि वह कल 25 नवंबर को सुबह ही शमा के घर न्यू संजय अमर कालोनी में जा कर सुलतान का रिश्ता शमा से तय कर आई है. ऐसे में सुलतान अपनी मंगेतर शमा की हत्या क्यों करेगा. सुलतान से चिढऩे वाले किसी व्यक्ति ने सुलतान का अपहरण कर लिया है.

पुलिस उस के किसी तर्क को मानने को तैयार नहीं थी. चूंकि सुलतान कल से ही लापता था और उस ने फोन भी औफ कर लिया था, शक उसी पर जा रहा था कि वह अपनी मंगेतर शमा की हत्या कर के फरार हो गया है.

पुलिस टीम ने सुलतान के फोन की लोकेशन मालूम करने के लिए उस का नंबर सर्विलांस पर लगा दिया. आखिर 27 नवंबर, 2023 को पुलिस को सफलता मिली. सर्विलांस टीम को उस के फोन की लोकेशन मुंबई की मिली.

तुरंत एक टीम मुंबई भेज दी गई. उस ने सर्विलांस की मदद से आखिर में मुंबई के मुलुंद इलाके से सुलतान को दबोच लिया. वहां पुलिस औपचारिकता पूरी करने के बाद टीम 28 नवंबर को सुलतान को दिल्ली ले कर चल दी. दिल्ली पहुंच कर उसे कोर्ट में पेश कर के 3 दिन की रिमांड पर ले लिया गया.

सुलतान ने क्यों की मंगेतर शमा की हत्या

रिमांड में पूछताछ हुई तो सुलतान ने चुपचाप स्वीकार कर लिया कि उस ने 25 नवंबर, 2023 की शाम को अपने विश्वास नगर वाले औफिस में शमा का उसी की चुन्नी से गला घोंट कर हत्या कर दी थी. शव छिपाने के उद्ïदेश्य से उस ने शमा की लाश बड़े पौलीथिन बैग में हाथपांव बांध कर ठूंस दी थी. वह उसे ठिकाने नहीं लगा सका. डर की वजह से वह लाश औफिस में छोड़ कर ताला बंद कर के भाग गया था.

उस ने नई दिल्ली से रात 10 बजे मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ ली थी. रास्ते में उस ने शमा का फोन फेंक दिया था. उस ने शमा को क्यों मारा, इस सवाल पर उस ने बताया, ”3 साल पहले शमा को मैं ने एक पार्टी में देखा था, तभी उस के लिए मेरे दिल में प्यार जाग गया था. शमा गुरूर से भरी थी, वह मुझ से शुरू में दोस्ती नहीं करना चाहती थी, लेकिन मैं उसे बारबार फोन करता रहा तो वह पिघल गई और मुझ से मिलने आने लगी. मैं और शमा 3 साल से गहरे अटूट प्यार में बंधे खुशीखुशी जी रहे थे. मैं शमा को अपनी पत्नी बनाना चाहता था.

”मेरे पिता मोहम्मद सलाउद्दीन गांव चिरइया, जिला मोतिहारी (बिहार) में रहते है. मेरी मां नूरजहां दिल्ली में मेरी बड़ी बहन के पास रहती है. मैं भी फर्श बाजार में बहन के साथ रहता हूं. मेरी 5 बहनें हैं. 3 की शादी हो गई है. 2 कुंवारी हैं. मैं फ्लिपकार्ट कंपनी के माल को औनलाइन बेचने का खुद का काम करता हूं. विश्वास नगर में राजीव शर्मा के फ्लैट में मैं ने फस्र्ट फ्लोर पर अपना औफिस बना रखा है. यह फ्लैट गली नंबर 10 में है. मेरे साथ मंसूर और शानू भी काम करते थे.

”मैं शमा को दिल से चाहता था, लेकिन मैं ने उसे किसी दूसरे युवक से बातें करते देख लिया था. शमा का मेरी तरफ झुकाव भी कम होने लगा था. मैं परेशान था, इसलिए मैं ने फोन कर के शमा को 25 नवंबर को विश्वास नगर बुलाया. वह ब्यूटी पार्लर में नौकरी करती है. मेरी उम्र 19 साल है, जबकि 4 साल बड़ी शमा 23 साल की है. शमा काम पर नहीं गई, वह सुबह मेरे औफिस में आ गई थी. शानू और मंसूर 2 बजे औफिस में आते थे.

”शमा को मैं ने प्यार से समझाया कि वह मुझ से प्यार करती है, शादी करना चाहती है तो दूसरे युवक से बात न करे. शमा ने कहा कि मैं उसे दूसरे युवक से बातें करने से नहीं रोकूंगा. मेरा मन जहां चाहेगा, मैं वहां हंसूंगी बोलूंगी. शादी के बाद भी यही होगा.

”साहब, बहुत समझाने पर भी शमा नहीं मानी तो मैं ने गुस्से में उसे नीचे पटक दिया और चुन्नी से उस का गला घोंट कर मार दिया. मुझे उस की हत्या करने का दुख है, लेकिन वह जिद्दी थी, इसलिए मैं ने उसे मार दिया.’’

सुलतान ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था. पुलिस ने उसे फिर से कोर्ट में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इश्क में दिल हुआ बागी : प्रेमी ही बना अपराधी

गुरुवार 10 फरवरी, 2022 का दिन ढल चुका था. शाम के यही कोई 6 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के जिला भिंड के सिटी कोतवाली स्थित थाने के ड्यूटी अफसर थाने पहुंचे ही थे कि एक युवक बदहवास हालत में थाना परिसर में दाखिल हुआ. उस के बाल बिखरे हुए थे. कपड़ों पर भी खून के ताजा दाग लगे हुए थे.

पहरा ड्यूटी पर मुस्तैदी के साथ तैनात संतरी ने उसे रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन वह सीधे ड्यूटी अफसर के सामने जा खड़ा हुआ और फिर हाथ जोड़ कर नमस्कार कर अपना परिचय देते हुए कहा, ‘‘सर, मेरा नाम रितेश शाक्य है. मैं भिंड जिला अस्पताल में वार्डबौय के पद पर नौकरी करता हूं और गांधीनगर में अपनी पत्नी और 2 बच्चों के साथ रहता हूं.

कुछ देर पहले मैं ने स्टाफ नर्स के पद पर काम करने वाली अपनी प्रेमिका नेहा की गोली मार कर हत्या कर दी है. उस की लाश नवीन आईसीयू वार्ड के स्टोर रूम में पड़ी हुई है. सर, क्योंकि मैं ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर के बड़ा अपराध किया है, अत: मुझे गिरफ्तार कर लीजिए.

युवक की बातें सुन कर ड्यूटी पर तैनात सुरजीत तोमर सन्न रह गए. वह आंखें फाड़े उस युवक को देखने लगे कि कहीं यह नशेड़ी या सनकी तो नहीं है जो इस तरह की बात कर रहा है.

हालांकि थाने में आ कर कोई इस तरह का मजाक करने का साहस तो नहीं कर सकता, इसलिए जब उन्होंने उस युवक को गौर से देखा तो मासूम सा दिखने वाला वह युवक काफी संजीदा लगा. इस का मतलब साफ था कि वह जो कुछ कह रहा है, सच है.

तोमर ने इस बात की जानकारी कार्यवाहक थानाप्रभारी सुरजीत यादव को दी तो उन्होंने तुरंत उस युवक को हिरासत में लेने के निर्देश दिए. तोमर ने तुरंत युवक को हिरासत में ले लिया. थानाप्रभारी उस समय क्षेत्र में थे. सूचना पा कर वह तुरंत थाने पहुंच गए.

सुरजीत यादव ने आरोपी रितेश से पूछताछ करने के बाद अस्पताल परिसर में स्थित पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल नागेंद्र राजावत से बात की तो उन्होंने भी घटना की पुष्टि कर दी.

साथ ही यह भी बताया कि घटना के विरोध में अस्पताल की नर्सें और अन्य कर्मचारी अस्पताल में धरने पर बैठ गए हैं. धरने को ले कर लोगों में काफी आक्रोश है.

थानाप्रभारी ने यह जानकारी एसपी शैलेंद्र सिंह को दी. इस के बाद एसपी के आदेश पर जिले के कई थानों की पुलिस जिला अस्पताल पहुंच गई. पुलिस ने सब से पहले अस्पताल के स्टोर रूम में पहुंच कर स्टाफ नर्स नेहा की लाश अपने कब्जे में ली. वह वहां खून से लथपथ पड़ी थी.

उस की कनपटी के बाईं ओर गोली मारी गई थी. वह सलवारसूट के ऊपर सफेद रंग का एप्रिन पहने हुए थी, जो खून से भीगा हुआ था.

घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद नर्सों से पूछताछ करने पर यह मालूम हुआ कि मृतका आज ड्यूटी खत्म होने के बाद छुट्टी की एप्लीकेशन दे कर एक सप्ताह के लिए अपने मातापिता के पास अपना जन्मदिन मनाने के लिए मंडला जाने वाली थी. इस से पहले कि नेहा अवकाश पर मंडला के लिए रवाना हो पाती, यह घटना घट गई.

नेहा का जन्मदिन 14 फरवरी, 2022 को उस के गृहनगर मंडला में धूमधाम से मनाया जाने वाला था. स्टाफ नर्स की हत्या के बाद दिए जा रहे धरने से स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ा जाने और वहां से तनावपूर्ण हालात के बारे में सूचना पा कर एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान एसपी (सिटी) आनंद राय, एसडीएम उदय सिंह सिकरवार फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए थे.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए. फोरैंसिक टीम का काम खत्म होते ही एसपी ने सीएमओ डा. अजीत मिश्रा, सिविल सर्जन डा. अनिल गोयल सहित जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. देवेश शर्मा की मौजूदगी में घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण तो किया ही, साथ ही जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ से पूछताछ कर नेहा के अतीत के बारे में जानकारी एकत्र की.

इस से पता चला कि जिला अस्पताल में वार्डबौय के पद पर कार्यरत रितेश नेहा से प्रेम करता था और उस से मिलने उस के धर्मपुरी स्थित कमरे पर भी आताजाता रहता था. लेकिन आज उन दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ, किसी को पता नहीं था.

इस के बाद पुलिस ने नेहा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और उस के परिजनों को भी इस घटनाक्रम से अवगत कराते हुए शीघ्र भिंड आने के लिए कहा.

वहीं इस हत्याकांड की विवेचना का दायित्व सीएसपी आनंद राय को सौंप दिया. इस से पहले जिला अस्पताल पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल नागेंद्र राजावत की तहरीर पर भादंवि की धारा 302 तथा आर्म्स एक्ट 25, 27, 54, 59 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया.

जिला अस्पताल की नर्स नेहा चंदेला की हत्या के विरोध में नर्सों का दूसरे दिन भी धरना जारी रहा. इस से जिला अस्पताल के अंदर वार्डों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह लड़खड़ा गई थी. तमाम लोग अपने मरीज की वक्त पर देखभाल न होने की वजह से मरीज को बिना छुट्टी के ही बेहतर उपचार के लिए वहां से ग्वालियर ले कर रवाना हो गए.

हड़ताली नर्सों को समझाने के लिए एसडीएम उदय सिंह सिकरवार, सीएमओ डा. अजीत मिश्रा, सिविल सर्जन डा. अनिल गोयल ने काफी जतन किया, लेकिन जब वे इस में सफल नहीं हुए तो उन्हें थकहार कर नर्सेज एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष रेखा पवार को ग्वालियर वाहन भेज कर बुलाना पड़ा, जिस के बाद उन की समझाइश पर आक्रोशित नर्सें शाम 4 बजे काम पर लौटने के लिए राजी हुईं.

हालांकि इस से पहले जिला अस्पताल के द्वार पर ताला जड़े रहने से उपचार के अभाव में नयापुरा निवासी फिरोज खान की बेगम नाजिया की मृत्यु हो गई थी.

रोज की तरह 10 फरवरी, 2022 को भी नेहा चंदेला अपनी ड्यूटी पर पहुंच कर अपने कामकाज में जुट गई थी. शाम के कोई 5 बजे के करीब उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी तो उसे हैरानी हुई कि ड्यूटी समाप्त होने को है इस वक्त कौन फोन कर रहा है.

लेकिन जब मोबाइल फोन की स्क्रीन पर चिरपरिचित नंबर देखा तो वह चौंकी भी और परेशान भी हुई कि रितेश कैसा बेशरम शख्स है जो उस के मना करने के बावजूद भी हाथ धो कर पीछे पड़ गया है.

फोन रिसीव न करना शिष्टाचारवश उसे उचित नहीं लगा, क्योंकि वह इस बात को भलीभांति जानती थी कि रितेश तब तक काल करता रहेगा, जब तक कि वह उस की काल रिसीव नहीं कर लेगी.

लिहाजा नेहा ने मन मार कर रितेश का फोन रिसीव कर लिया तो रितेश ने उस से अनुरोध किया, ‘‘आज शाम छुट्टी खत्म करने के बाद मंडला जाने से पहले प्लीज एक मर्तबा तुम मुझ से अकेले में मुलाकात कर लो. इस के बाद मुझे कभी भी तुम से बात करने का मौका नहीं मिलेगा.’’

नेहा असमंजस में पड़ गई कि क्या करे क्या न करे. रितेश शाक्य नेहा का बौयफ्रैंड था. वह भी उसी अस्पताल में वार्डबौय था.

6 दिसंबर को नेहा की सगाई गौरव पटेल के साथ तय हो जाने के बाद उस ने रितेश से न सिर्फ बातचीत करनी बंद कर दी थी, बल्कि मेलमुलाकात करनी भी लगभग बंद कर दी थी. नेहा ने रितेश से साफतौर पर कह दिया था कि मेरी सगाई हो जाने के बाद मैं अब तुम से किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहती.

नेहा का रिश्ता तय होने से खार खाए बैठे रितेश ने नेहा से मोबाइल पर गिड़गिड़ाते हुए कहा था कि आज मिलने के बाद आइंदा वह न तो कभी फोन करेगा और न कभी मिलने की कोशिश करेगा, यह उस का वायदा है.

जिस दिन से नेहा ने रितेश से बात करनी और अकेले में मेलमुलाकात का सिलसिला बंद किया था, उसी दिन से रितेश काफी तनाव में रहने लगा था. रितेश के अनुरोध पर नेहा ने ड्यूटी खत्म होने के बाद स्टोररूम में सिर्फ अंतिम बार बात करने के लिए इस शर्त के साथ अनुमति दे दी थी कि वह अपनी बात मनवाने के लिए किसी तरह की हठ नहीं करेगा.

ड्यूटी समाप्त होने से कुछ समय पहले शाम 5 बज कर 10 मिनट पर रितेश कमर में देशी पिस्टल लगा कर स्टोररूम में दाखिल हुआ. रितेश को देख कर नेहा ने रूखी आवाज में कहा, ‘‘जो भी बात करनी है जल्दी करो, मुझे छुट्टी का एप्लीकेशन दे कर मंडला के लिए निकलना भी है.’’

वार्डबौय रितेश को इतनी तो समझ थी ही कि जिस नम्रता के साथ अपनी प्रेमिका से अंतिम बार मिलने के बहाने स्टोररूम में दाखिल हुआ है, उसी का आश्रय ले कर वह अपनी बात मनवाने के लिए नेहा पर दबाव बनाने का प्रयास करेगा.

बातचीत की शुरुआत में ऐसा हुआ भी. उस ने नेहा से एक बार फिर गुजारिश की कि वह उस का ज्यादा वक्त नहीं लेगा, सिर्फ 10 मिनट ही इत्मीनान के साथ बातचीत करेगा.

नेहा चूंकि जिला अस्पताल में ड्यूटी पर थी, इसलिए उसे किसी तरह का खतरा रितेश से महसूस नहीं हुआ. नेहा का सोचना था कि रितेश अंतिम बार उस से इत्मीनान के साथ बातचीत कर अपनी भड़ास निकाल लेगा तो उस की शादी करने वाली हठ खत्म हो जाएगी.

इस के बाद हमेशा के लिए उस का रितेश से पीछा छूट जाएगा. यही सब सोच कर उस ने रितेश को बातचीत करने के लिए अपनी सहमति दी थी. उस वक्त उसे इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि आज रितेश के सिर पर हैवानियत सवार है. और वह उसे चिरनिद्रा में सुलाने की मंशा से आ रहा है.

बातचीत का दौर शुरू करने से पहले जैसे ही रितेश ने कमर में लगा देसी पिस्टल निकाल कर मेज पर रखा तो नेहा को यह समझते जरा भी देर नहीं लगी कि उस ने रितेश को बातचीत के लिए बुला कर बहुत बड़ी मुसीबत मोल ले ली है.

नेहा के साथ बातचीत का दौर शुरू होते ही रितेश ने नेहा से दोटूक शब्दों में कहा, ‘‘तुम सिर्फ मेरी हो, मेरी ही रहोगी. मैं हरगिज किसी भी सूरत में तुम्हारी शादी गौरव पटेल के साथ नहीं होने दूंगा. बोलो, मेरे से शादी करोगी या नहीं?’’

नेहा ने रितेश से कहा, ‘‘तुम पहले से ही शादीशुदा ही नहीं 2 बच्चों के बाप भी हो. इसलिए मैं तुम से शादी नहीं कर सकती. मेरे मांबाप ने जिस लड़के से मेरा रिश्ता तय किया है, मैं उसी के साथ शादी करूंगी.’’

इतना सुनते ही रितेश बुरी तरह बौखला गया. उस ने तत्काल मेज पर रखी देसी पिस्टल उठा कर उस की नाल का रुख नेहा की बाएं कनपटी की ओर कर के ट्रिगर दबा दिया. गोली लगते ही नेहा कुरसी पर बैठे ही बैठे चिरनिद्रा में डूब गई.

गोली चलने की आवाज सुनते ही अस्पताल का स्टाफ स्टोर रूम की ओर गया तो नेहा को कुरसी पर लहूलुहान देख कर सभी के जैसे होश उड़ गए. वार्डबौय रितेश के हाथ में तमंचा देख कर उन्हें वाकया समझने में देर नहीं लगी. रितेश सभी को धमकाते हुए अस्पताल से निकल कर सिटी कोतवाली थाने में चला गया और आत्मसमर्पण कर दिया.

कार्यवाहक थानाप्रभारी सुरजीत यादव ने मृतका के मातापिता का पता ले कर उस के घर वालों को मंडला फोन कर के घटना की सूचना दे दी. सूचना पा कर नेहा का बड़ा भाई करीबी रिश्तेदारों को ले कर दूसरे दिन भिंड पहुंच गया.

पुलिस ने रितेश के पिता को भी थाने बुला कर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रितेश का नेहा नाम की नर्स से प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिस की वजह से रितेश की अपनी पत्नी से भी अनबन चल रही थी. वह नेहा से शादी करना चाह रहा था, लेकिन उन्हें इस बात की कतई जानकारी नहीं थी कि वह उक्त नर्स की हत्या कर देगा.

पूछताछ के बाद रितेश के पिता को घर जाने की अनुमति दे दी गई. पोस्टमार्टम के बाद नेहा का शव उस के घर वाले अंतिम संस्कार के लिए मंडला ले आए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नेहा की मौत गोली लगने से हुई थी.

जांच में पुलिस को पता चला कि नेहा और रितेश के इश्क की नींव वर्ष 2018 में उस वक्त रखी गई, जब वह मंडला से भिंड जिला अस्पताल में बतौर स्टाफ नर्स की नौकरी करने आई थी.

उन दोनों की पहली मुलाकात अस्पताल परिसर में बनी चाय की गुमटी पर हुई थी. उस समय नेहा चाय पीने वहां आई थी, संयोग से तभी रितेश भी वहां पर चाय पीने आया हुआ था. चूंकि रितेश भी जिला अस्पताल में वार्डबौय के पद पर कार्यरत था.

दरअसल, वह नेहा से काफी सीनियर था इसलिए नौकरी के साथ शुरुआती दौर में नर्स के कार्य के गुर सिखाने में उस ने नेहा की काफी मदद की थी.

नेहा उस के इस उपकार से काफी प्रभावित हुई थी. दोनों की जान पहचान होने के बाद उन के बीच मोबाइल पर बातचीत होनी शुरू हो गई. हालांकि रितेश की नौकरी 2009 में संविदा वार्डबौय के तौर पर भिंड के जिला अस्पताल में लगी थी. लेकिन उसे इस बात की उम्मीद थी कि निकट भविष्य में वह स्थाई हो जाएगा. नेहा से मोबाइल पर होने वाली लंबी बातचीत से उस की दोस्ती गहरी होती गई और मित्रता कब इश्क में बदल गई पता नहीं चला.

कहते हैं कि इश्क अंधा होता है वह जातपात के भेद को नहीं मानता. नेहा और रितेश अलगअलग जाति के थे, इस के बावजूद भी रितेश ने तय कर रखा था कि वे ताउम्र साथ रहेंगे और दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें जुदा नहीं कर सकेगी.

नेहा से रोज मुलाकात कर के वह अपने भावी जीवन के सुनहरे सपने देखने लगा था. कहते हैं कि इश्क को कितना भी छिपाने का जतन किया जाए, वह छिपता नहीं है.

नेहा के साथ काम करने वाले स्टाफ से ले कर रितेश के घर वालों को पता चल गया था कि ड्यूटी खत्म होने के बाद रितेश नेहा को बाइक पर ले कर खुल्लम खुल्ला घूमता फिरता है.

रितेश नेहा के प्यार में इतना दीवाना हो गया था कि वह अपनी पत्नी प्रीति की भी उपेक्षा करने लगा था. इस बारे में प्रीति ने रितेश से बात की तो उस ने झिड़कते हुए साफतौर पर कह दिया था कि वह नेहा से सिर्फ प्यार ही नहीं करता है, बल्कि उसे अपने दिल की रानी बना चुका है. निकट भविष्य में वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने वाला है.

पति का यह फैसला सुनने के बाद प्रीति भी परेशान रहने लगी कि आखिर वह पति को कैसे समझाए. इस बात को ले कर उन दोनों का आपस में झगड़ा भी रहता था.

रितेश से विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया. इस के बाद उसे भिंड जिला अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

रितेश ने नासमझी और मूर्खतापूर्ण कदम उठा कर न सिर्फ नेहा को असमय मौत की नींद सुला दिया, बल्कि अपने सुनहरे भविष्य पर भी कालिख पोत ली. रितेश के जेल जाने के बाद उस के दोनों मासूम बच्चों सहित पत्नी के भविष्य पर भी ग्रहण लग गया है.

—पंकज द्विवेदी

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 3

गड़े धन के लालच में क्यों फंसा अजय शुक्ला

परिवार व गांव वालों ने नीरज विश्वकर्मा को ले कर अजय शुक्ला के कान भरने शुरू किए तो उस ने उस के घर आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी. इस के बाद संतोष कुमारी ने प्रेम प्रसंग में बाधा बन रहे पति को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक भी बात नहीं मानी.

संतोष कुमारी जानती थी कि उस का पति गड़े धन के लालच में कुछ भी कर सकता है. क्योंकि इस से पहले भी वह गड़े धन की लालसा में कई बार तांत्रिकों से मिल चुका था.

उस के बाद भी वह गड़ा धन पाने के लिए कुछ न कुछ हरकतें करता ही रहता था. इस के लालच में वह कहीं भी जा सकता है, जिस के सहारे उसे मौत की नींद सुलाना भी बहुत ही आसान काम था. प्रेमी को पाने के लिए उस ने उस के पति को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया.

इस के बाद वह एक दिन नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर मिली और उसे अपनी योजना के बारे में बताया. नीरज विश्वकर्मा तो पूरी तरह से संतोष कुमारी का दीवाना हो चुका था. वह उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. संतोष कुमारी की बात सुनते ही वह उस का साथ देने को तैयार हो गया.

फिर उसी योजना के तहत एक दिन गड़े धन का लालच दे कर नीरज ने अजय शुक्ला से बात की. कहीं पर गड़े धन की जानकारी मिलते ही अजय शुक्ला उस के साथ जाने के लिए तैयार हो गया.

यह बात अजय शुक्ला ने अपनी पत्नी संतोष कुमारी को बताई तो उस ने भी उस की हां में हां कर दी. वह तो पहले से ही चाहती थी कि वह किसी तरह से उस के प्रेमी नीरज विश्वकर्मा के साथ चला जाए.

योजना बनाने के बाद नीरज विश्वकर्मा और उस की प्रेमिका संतोष ने टीवी पर क्राइम स्टोरीज के सीरियल देखने शुरू किए. क्राइम सीरियलों में हमेशा ही अपराध करना और उस से बचने के उपायों को बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया जाता है. उन सीरियलों को देख कर संतोष कुमारी को पूरा विश्वास हो गया था कि वह भी अपने पति की हत्या करवा कर उस के जुल्म से पूरी तरह से बच जाएगी.

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10 बच्चे कैसे हुए अनाथ 

एक दिन नीरज विश्वकर्मा का फोन आते ही अजय घर से बाइक उठा कर चलने को तैयार हुआ तो संतोष कुमारी ने उस का मोबाइल घर पर ही यह कह कर रखवा लिया कि कहीं रात में गिर गया तो कहां कहां ढूंढोगे.

संतोष कुमारी जानती थी कि पुलिस मोबाइल की लोकेशन निकाल कर उस का पता कर सकती है. अगर उस के पास मोबाइल नहीं होगा तो उस के मरने के बाद पुलिस भी उस का अता पता नहीं कर पाएगी और जंगली जानवर उस की लाश को खा जाएंगे.

पत्नी के कहने पर अजय शुक्ला ने मोबाइल घर पर ही छोड़ दिया. उस के बाद वह सीधा नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर उस से मिला. उस वक्त तक शाम हो चुकी थी. अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज विश्वकर्मा अपनी बाइक से अजय शुक्ला के साथ चल दिया. नीरज कुमार ने अपनी बाइक रास्ते में पडऩे वाले पैट्रोल पंप पर खड़ी कर दी.

फिर वह अजय शुक्ला की बाइक पर बैठ कर उसे ले कर रामसनेही घाट कोतवाली के प्रतापपुरवा के जंगल में ले गया. वहां पर जा कर नीरज विश्वकर्मा ने अजय शुक्ला को एक जगह दिखाते हुए बताया कि गड़ा धन इसी जगह के नीचे है. इस जगह को किसी तरह से खोदना होगा.

अजय शुक्ला गड़े धन के लालच में पूरी तरह से पागल सा हो गया था. उस के मन में अमीर बनने के सपने घूमने लगे थे. जैसे ही अजय शुक्ला अपनी बाइक से उतर कर उस जगह की तरफ को जाने लगा तो पीछे से मौका पाते ही नीरज विश्वकर्मा ने उसी के हेलमेट से उस के सिर पर जोरदार वार कर दिया.

अचानक सिर पर ताबड़तोड़ हैलमेट की चोट से अजय शुक्ला बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़ा. उस के बाद नीरज ने चाकू से उस की हत्या कर दी.

अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज विश्वकर्मा अपने घर चला आया. अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज शुक्ला ने उसी के नंबर पर फोन कर उस की सूचना अपनी प्रेमिका संतोष कुमारी को दी, ताकि अगर यह भेद खुलता भी है तो पुलिस उस की बीवी पर शक न कर सके.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने अपने पति की हत्या की साजिश रचने वाली संतोष्ज्ञ कुमारी और नीरज विश्वकर्मा को अजय शुक्ला को अगवा कर उस की हत्या करने के आरोप में कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था.

इस मामले में मृतक अजय शुक्ला की पत्नी की तरफ से 5 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बदलाव किया गया. उसी अभियोग में धारा 34 भादंवि को जोड़ दिया गया तथा आलाकत्ल चाकू की बरामदगी के आधार पर धारा 4/25 आम्र्स ऐक्ट व धारा 120 बी/201 भी जोड़ दी गई. भले ही अपने प्रेम प्रसंग को छिपाने और अपने प्रेम में बाधा बने अजय शुक्ला को उसी की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर षडयंत्र के तहत रास्ते से हटा दिया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते दोनों ही जेल की सलाखों के पीछे चले गए थे.

उन के जेल जाते ही 10 बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए थे. आरोपी नीरज विश्वकर्मा के भी 5 बच्चे थे और संतोष कुमारी के भी 5.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 2

इस कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी के थाना असंद्रा के एक छोटे से गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से. 40 वर्षीय अजय शुक्ला इसी गांव का रहने वाला था और वह किसी तरह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. उस की शादी कई साल पहले संतोष कुमारी के साथ हुई थी.

समय के साथसाथ संतोष कुमारी 5 बच्चों की मां बनी. घर में बच्चों के हो जाने के बाद अजय शुक्ला बहुत ही खींचतान कर बच्चों का लालनपालन कर पाता था.

घर की आर्थिक स्थिति डगमगाने से वह लगभग 15 लाख रुपयों के कर्ज के बोझ में दब गया था. नशे और जुए का आदी होने के कारण उस ने अपनी जुतासे की जमीन भी बेच डाली थी. लेकिन जमीन बेच कर उस ने पैसे जुए और शराब में उड़ा दिए. जिस के बाद उस की पत्नी हर वक्त उस से खफा रहती थी.

अब से लगभग 6 साल पहले संतोष कुमारी कुछ सामान खरीदने के लिए महमूदपुर गई थी. नीरज कुमार विश्वकर्मा महमूदपुर में ही एक घड़ी और मोबाइल की दुकान चलाता था. अपने घर का सामान खरीदने के बाद वह जैसे ही अपने घर वापस आ रही थी, उस की नजर एक मोबाइल की दुकान पर बैठे नीरज कुमार पर पड़ी.

संतोष कुमारी का चलते वक्त मोबाइल नीचे गिर गया था, जिस के कारण उस का मोबाइल का स्क्रीन गार्ड टूट गया था. वह स्क्रीन गार्ड लगवाने के लिए उस के पास पहुंची. उसी दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई थी. नीरज कुमार के व्यवहार से संतोष कुमारी पहली ही मुलाकात में काफी प्रभावित हुई थी.

जब तक नीरज कुमार ने उस के मोबाइल पर स्क्रीन गार्ड लगाया, तब तक उस ने नीरज से सारी जानकारी जुटा ली थी. उस के बाद वह उस का मोबाइल नंबर भी ले आई थी.

उस दिन के बाद नीरज कुमार संतोष कुमारी के दिल में बस गया. संतोष कुमारी उस से बात करने के लिए बेचैन हो उठी. उस ने कई बार उसे फोन मिलाने की कोशिश की, लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह किस बहाने से उसे फोन करे.

आखिरकार उस ने एक दिन हिम्मत कर के उस ने फोन मिलाया. नीरज कुमार तुरंत ही उस की आवाज पहचान गया. फिर उस दिन दोनों की काफी समय तक बात हुई. दोनों के बीच एक बार फोन पर बात हुई तो आगे यह सिलसिला बढ़ता ही गया.

दरअसल, संतोष कुमारी को नीरज कुमार से प्यार हो गया, जिस से वह अकसर उस से घंटों घंटों तक बात करने लगी थी. उस के बाद दोनों ही मिलने के लिए बेचैन रहने लगे थे. संतोष कुमारी उस से मिलने के लिए कोई न कोई बहाना बना कर घर से निकल जाती और फिर उस की दुकान पर पहुंच जाती. अजय शुक्ला तो सुबह ही रिक्शा ले कर घर से निकल जाता और देर शाम को ही घर पहुंचता था.

इस दौरान संतोष कुमारी नीरज कुमार को फोन करती. वह नीरज कुमार से अपने घर आने के लिए कहती, लेेकिन नीरज अपनी दुकान के चलते उस के पास नहीं आ पाता था. फिर उस के घर आने पर उस के अन्य परिवार वाले भी ऐतराज उठा सकते थे.

हसरतों ने इस तरह भरी उड़ान

इसी सब से बचने के लिए संतोष कुमारी के दिमाग में एक आइडिया आया. उस ने सोचा कि अगर किसी तरह से उस के पति की दोस्ती नीरज कुमार से हो जाए तो उस के घर आने की सारी बाधाएं खत्म हो जाएंगी. यही सोच कर उस ने एक दिन अपने मोबाइल का स्क्रीन गार्ड जानबूझ कर तोड़ दिया.

अगली सुबह जब उस का पति अजय शुक्ला घर से निकल रहा था तो उस ने कहा, ”तुम महमूदपुर में तो आते जाते रहते हो. मेरा मोबाइल ले जाओ.’’

उस के बाद उस ने नीरज कुमार की दुकान का हवाला देते हुए कहा, ”आप उस पर नीरज की दुकान से स्क्रीन गार्ड लगवा लाना.’’

अजय शुक्ला अपनी बीवी का मोबाइल ले कर नीरज कुमार की दुकान पर पहुंचा. उस के पहुंचने से पहले ही संतोष कुमारी ने नीरज को फोन कर समझा दिया था कि आज मेरे पति तुम्हारी दुकान पर आएंगे. किसी भी तरह से तुम उन के साथ दोस्ती गांठ लेना. अगर तुम ने उन से दोस्ती कर ली तो हमारा मिलनेजुलने का रास्ता साफ हो जाएगा.

अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज कुमार ने उस के साथ मीठीमीठी बातें की, जिस के बाद अजय शुक्ला भी उस से काफी प्रभावित हुआ. फिर जल्दी ही दोनों के बीच दोस्ती भी हो गई. उसी दोस्ती की आड़ में नीरज कुमार उस के घर आनेजाने लगा था. जिस के बाद दोनों प्रेमियों के बीच मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

अजय शुक्ला हमेशा ही शाम को शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर पहुंचता था. उस के बाद नीरज कुमार भी अपनी दुकान बंद कर के अजय शुक्ला के घर आ जाता था. देखते ही देखते दोनों में दांत काटी दोस्ती हो गई, जिस के बाद वह अजय शुक्ला के हर दुखसुख में काम आने लगा था.

कभी कभार ज्यादा रात हो जाने के कारण नीरज कुमार अजय शुक्ला के घर पर ही रुक जाता था. इस दौरान जब कभी भी अजय शुक्ला को पैसे की जरूरत होती तो नीरज ही उस के काम आता था.

धीरेधीरे अजय शुक्ला नीरज कुमार का लाखों रुपयों का कर्जदार हो गया था. जिस के कारण अजय शुक्ला नीरज कुमार के अहसानों तले दबता चला गया, जिस का नीरज कुमार भरपूर लाभ ले रहा था.

जब नीरज कुमार विश्वकर्मा का उस के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना हो गया तो उस के परिवार वाले ऐतराज करने लगे. उन्होंने कई बार इस बात की शिकायत अजय शुक्ला से की, लेकिन उस ने हर बार उन की बातों को एक कान सुना और दूसरे से निकाल दिया.

यही बात जब घर से निकल कर गांव में फैलनी शुरू हुई तो अजय शुक्ला को थोड़ा बुरा लगने लगा. उस के बाद उसे भी अपनी पत्नी और नीरज विश्वकर्मा के बीच अवैध संबंधों का शक हो गया था. जिस के बाद अजय शुक्ला अकसर ही अपनी पत्नी से झगडऩे लगा था, जिस की जानकारी संतोष कुमारी ने नीरज विश्वकर्मा को भी दे दी थी.

अजय ने कई बार नीरज को अपने घर आने जाने से रोकना चाहा तो उस ने उस से साफ कहा कि भाई मेरा पैसा मुझे वापस कर दो. मैं तुम्हारे घर क्या तुम्हारे गांव की तरफ नहीं आऊंगा. लेकिन अजय शुक्ला को उस समय बहुत ही मजबूरी थी. न तो वह जुआ खेलना ही छोड़ सकता था और न ही वह बिना शराब के रह सकता था.

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 1

लाश की सूचना पाते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस ने देखा तो वहां पर एक व्यक्ति की लाश क्षतविक्षत हालत में पड़ी हुई थी. पुलिस ने वहां पर मौजूद लोगों से उस लाश की शिनाख्त करानी चाही लेकिन किसी ने भी उसे नहीं पहचाना. उस के बाद पुलिस को ध्यान आया कि उसी दिन के अखबारों में एक व्यक्ति की गुमशुदगी की खबर छपी थी.

इस बात के सामने आते ही पुलिस ने सब से पहले असंद्रा थाने से संपर्क किया, क्योंकि वह गुमशुदगी की खबर उसी थाने की थी. असंद्रा थाने से संपर्क होते ही पुलिस ने उस फोटो से मृतक का चेहरा मिलाया तो शिनाख्त हुई कि मृतक अजय शुक्ला ही था.

पुलिस काररवाई कर रही थी कि उसी समय संतोष कुमारी नाम की महिला रोती बिलखती अपने 5 बच्चों के साथ घटनास्थल पर पहुंची.

लाश को देखते ही संतोष कुमारी अपना आपा खो बैठी. क्योंकि वह लाश उस के पति अजय शुक्ला की थी. वह पति की लाश से लिपट लिपट कर बुरी तरह से रोने चिल्लाने लगी. उस के बच्चों का भी रोरो कर बुरा हाल था. पुलिस ने किसी तरह से संतोष कुमारी को शांत कराया. उस के बाद पुलिस ने जांचपड़ताल की तो अजय शुक्ला के सिर व पेट पर चोटों के काफी निशान थे.

इस से एक दिन पहले ही संतोष कुमारी 18 दिसंबर, 2023 की शाम के वक्त बाराबंकी जिले के थाना असंद्रा पहुंची थी. उस ने एसएचओ संतोष कुमार सिंह को बताया था कि वह मल्लपुर मजरे सुपामऊ गांव की रहने वाली है. सुबह लगभग 11 बजे उस के पति अजय कुमार शुक्ला बाइक से किसी काम से मस्तान बाबा की कुटी पर जाने के लिए निकले थे. लेकिन उस के बाद वह वापस नहीं लौटे.

उस ने बताया था कि जाने से पहले वह अपना मोबाइल भी घर पर ही भूल गए थे. एसएचओ ने संतोष कुमारी से उस के पति के बारे में कुछ और जानकारी हासिल करने के बाद अजय कुमार की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली थी.

उसी जांचपड़ताल के तहत सब से पहले एसएचओ पुलिस टीम के साथ गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर रह रहे मस्तान बाबा की कुटिया पर पहुंचे. कुटिया पर पहुंच कर उन्होंने वहां पर अजय कुमार शुक्ला के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि अजय कुमार शुक्ला वहां पर आया ही नहीं था. उस के बाद पुलिस ने अजय कुमार शुक्ला की हर जगह तलाश की, लेकिन कहीं भी उस का अतापता नहीं चला.

इस के बाद पुलिस ने उस के गुमशुदा होने की सूचना स्थानीय अखबारों में छपवाई, लेकिन उस के बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली. इस सब का कारण था कि अजय शुक्ला अपने साथ मोबाइल नहीं ले गया था, जिस के कारण उसे तलाशने में पुलिस के सामने बड़ी समस्या आ खड़ी हुई थी.

उसी दौरान 19 दिसंबर, 2023 को गांव प्रताप पुरवा के पास एक व्यक्ति की लाश पड़ी होने की सूचना रामसनेही घाट कोतवाली को मिली. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई. रामसनेही घाट पुलिस ने इस की सूचना असंद्रा थाने में भी दे दी थी, क्योंकि उस थाने के एक लापता व्यक्ति की सूचना अखबार में छपी थी.

इस जानकारी के मिलते ही सब से पहले असंद्रा पुलिस ने उस की पत्नी संतोष कुमारी को इस की जानकारी दी. उस के तुरंत बाद ही असंद्रा थाने के एसएचओ भी उस जगह पहुंच गए, जहां पर अजय शुक्ला की लाश मिली थी. संतोष कुमारी ने उस लाश की शिनाख्त अपने पति अजय शुक्ला के रूप में कर ली.

घटनास्थल से समस्त जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई आगे बढ़ाई. फिर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उस के बाद पुलिस ने संतोष कुमारी से पूछा कि गांव में तुम्हारे पति की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी.

यह बात सुनते ही संतोष कुमारी पहले तो चुप्पी साध गई, फिर उस ने बताया कि उस के पति का गांव के ही कुछ लोगों से जमीन को ले कर विवाद चल रहा था, जिस के कारण ही उन लोगों ने उन की हत्या की होगी.

संतोष कुमारी के शक के आधार पर पुलिस ने गांव के ही 5 लोगों माताबदल, महेश, रामकुमार, बाबा सोनी व प्रदीप को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने संतोष कुमारी की तरफ से शक के आधार पर इन पांचों पर भादंवि की धारा 302/34 के तहत मामला दर्ज कर लिया.

इन पांचों से पुलिस ने कड़ी पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी उस की हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली. पुलिस ने इस मामले में उन के गांव जा कर अन्य लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि पांचों ही लोग बेहद ही शरीफ और सज्जन इंसान थे.

गांव वालों की जानकारी से पुलिस को भी लगने लगा था कि कहीं न कहीं ये पांचों निर्दोष हैं. उसी दौरान गांव वालों का संतोष कुमारी पर दबाव बना तो वह भी उन की गिरफ्तारी को ले कर कुछ ढीली नजर आई. उस के बाद वह भी उन की पैरवी पर उतर आई थी, जिस के बाद अजय शुक्ला की हत्या के शक की सूई संतोष कुमारी की ओर ही घूम गई थी.

फिर पुलिस ने उस के परिवार वालों के साथसाथ गांव वालों से भी उस के चरित्र के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि अजय शुक्ला के एक दोस्त नीरज विश्वकर्मा का उस के घर पर आनाजाना था. वह अजय शुक्ला की गैरमौजूदगी में भी उस के घर आयाजाया करता था. उस के बाद संतोष कुमारी स्वयं ही पुलिस की शक की निगाहों में चढ़ गई थी.

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पुलिस को मृतक की पत्नी पर क्यों हुआ शक

शक की सूई संतोष कुमारी की तरफ घूमते ही पुलिस ने उस के और मृतक अजय शुक्ला और उस की पत्नी के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया. इस से पुलिस को एक खास जानकारी मिली.

तहकीकात के दौरान पता चला कि संतोष कुमारी काफी समय से महमूदपुर निवासी नीरज कुमार विश्वकर्मा से मोबाइल पर बात करती थी. घटना वाले दिन भी संतोष कुमारी ने नीरज कुमार से बात की थी.

इस बात की जानकारी मिलते ही सब से पहले पुलिस नीरज कुमार के घर पहुंची, लेकिन नीरज कुमार घर से लापता मिला. उस के बाद पुलिस ने उस के मोबाइल पर कई बार काल की तो पहले तो उस ने उठाया नहीं, दूसरी बार करने पर उस ने फोन स्विच्ड औफ कर दिया. इस के बावजूद भी पुलिस ने उस की लोकेशन के आधार पर उसे अपनी हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने उस से अजय शुक्ला की हत्या के संबंध में कड़ी पूछताछ की तो उस ने हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. फिर उस ने हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली निकली—

संतोष कुमारी भले ही पढ़ीलिखी नहीं थी, लेकिन उस का दिमाग इतना तेज था कि वह अपने पति अजय शुक्ला को कुछ भी नहीं समझती थी. अजय शुक्ला एक रिक्शाचालक था. उस के 5 बच्चे थे, जिस से परिवार की गुजरबसर ठीक से नहीं हो पा रही थी. उस के साथ ही उस में शराब पीने की लत भी थी.

यही कारण रहा कि उस ने नीरज कुमार विश्वकर्मा के साथ दोस्ती होते ही अपने पति को अपनी जिंदगी का कांटा समझ कर उसे हटाने के लिए एक सुनियोजित रास्ता चुना. लेकिन पुलिस के लंबे हाथों से वह बच नहीं पाई.

बहन के प्रेमी के साथ मिल कर रची अपने ही अपहरण की साजिश

बात 12 दिसंबर, 2018 की है. भोपाल के ऐशबाग के टीआई अजय नायर रात 8 बजे के करीब अपने औफिस में थे तभी ऐशबाग के रहने वाले शील कुमार अपनी 24 वर्षीय बेटी रुचिका चौबे के साथ थाने पहुंचे.

उन्होंने बताया कि उन का 19 वर्षीय बेटा आयुष शाम को किसी से मिलने एक कोचिंग की तरफ घर से निकला था. लेकिन इस के कुछ देर बाद ही बेटे के मोबाइल फोन से किसी ने काल कर के कहा कि आयुष उस के कब्जे में है. बेटे को छोड़ने के बदले उस ने एक करोड़ रुपए की फिरौती मांगी. शील कुमार ने बेटे के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर उसे बरामद करने की मांग की.

मामला अपहरण का था, इसलिए टीआई ने उसी समय सूचना एसपी राहुल लोढ़ा व एडीशनल एसपी संजय साहू तथा जहांगीरबाद सीएसपी सलीम खान को भी दे दी. सूचना मिलते ही दोनों पुलिस अधिकारी ऐशबाग थाने पहुंच गए.

शील कुमार अपनी बेटी के साथ थाने में ही मौजूद थे. एसपी राहुल लोढा ने बाप बेटी दोनों से गहन पूछताछ की. पर उन की कहानी एसपी साहब के गले नहीं उतरी. इस का कारण यह था कि शील कुमार एक निजी बस कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करते थे. उन का वेतन इतना कम था कि घर भी ठीक से नहीं चल सकता था. जबकि उन की बेटी रुचिका एक बीमा कंपनी में 14 हजार रुपए महीने की सैलरी पर नौकरी कर रही थी.

जाहिर है, कोई बदमाश एक करोड़ रुपए की फिरौती के लिए ऐसे साधारण परिवार के बेटे का अपहरण नहीं करेगा. बाप बेटी ने यह भी बताया कि आयुष के घर से निकलने के कुछ ही घंटे बाद बदमाश ने फिरौती की रकम के लिए फोन किया था. जबकि बदमाश किसी का अपहरण कर के 2-4 दिन बाद फिरौती की मांग तब करते हैं जब पीडि़त परिवार टूट चुका होता है.

फिरौती के लिए शील कुमार के घर जो फोन काल आई थी वह भी आयुष के फोन से की गई थी. बाद में फोन स्विच्ड औफ कर दिया गया था. बहरहाल, पुलिस ने शील कुमार और उन की बेटी से जरूरी जानकारी लेने के बाद आयुष के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली और उन्हें यह आश्वासन दे कर घर भेज दिया कि पुलिस जल्द ही आयुष को तलाश लेगी.

इस के बाद एसपी के निर्देशन में थानापुलिस आयुष को तलाशने लगी. पुलिस ने आयुष के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया था. इस के अलावा पुलिस ने जांच कर यह भी पता लगा लिया कि जिस समय आयुष के फोन से फिरौती की काल की गई, उस समय उस की लोकेशन बीना शहर में थी.

इस के बाद फोन बंद कर दिया गया था. कोई और रास्ता मिलते न देख पुलिस अपहर्त्ताओं के फोन आने का इंतजार करने लगी. पुलिस ने शील कुमार को समझा दिया था कि उन्हें फोन पर अपहर्त्ताओं से कैसे बात करनी है.

एक तरफ पुलिस आयुष का पता लगाने में जुटी हुई थी, वहीं दूसरी ओर उस पर आयुष को सुरक्षित बरामद करने का दबाव बढ़ता जा रहा था. आयुष की बहन रुचिका और उसी क्षेत्र में रहने वाला उन के परिवार का पुराना परिचित गौरव जैन थानाप्रभारी से मिलने रोज थाने आते और आयुष के बारे में जल्द पता लगाने की मांग करते थे.

अपहर्त्ता ने बताई जगह

पुलिस ने अपने मुखबिरों का जाल फैला रखा था. आयुष के साथ पढ़ाई कर रहे उस के दोस्तों से भी आयुष के बारे में पूछताछ की कि उस की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी या किसी लड़की के साथ प्यार का चक्कर तो नहीं था. दोस्तों ने दोनों ही बातों से इनकार किया. पुलिस को कोई ऐसा ठोस सुराग हाथ नहीं मिला, जिस से जांच की काररवाई आगे बढ़ पाती.

उधर समय बीतने के साथ अपहर्त्ता बारबार फोन कर के आयुष के परिवार पर जल्द से जल्द फिरौती की रकम पहुंचाने का दबाव बना रहे थे. लेकिन समस्या यह थी कि वह हर बार नई जगह से फोन करते थे. 24 दिसंबर को एक बदमाश ने आयुष के पिता को फोन कर के धमकी दी और कहा कि वह कल यानी 25 दिसंबर को दोपहर में सीहोर के क्रिसेन वाटर पार्क पर पैसा ले कर पहुंच जाए. पैसे मिलने के बाद आयुष को रिहा कर दिया जाएगा.

शील कुमार ने यह बात एडीशनल एसपी संजय साहु और टीआई अजय नायर को बता दी. एसपी ने इस बात से अनुमान लगा लिया कि बदमाश बहुत चालाक हैं. क्योंकि 25 दिसंबर को प्रदेश में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह था और आला अधिकारियों को उस समारोह में व्यस्त रहना था.

लेकिन एडीशनल एसपी संजय साहू यह मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने टीआई के अलावा अन्य पुलिस टीमों को सादा कपड़ों में सुबह से ही सिहोर के क्रिसेन वाटर पार्क में तैनात कर दिया ताकि अपहर्त्ता किसी भी हाल में बच न पाएं.

पुलिस को यह पता लग गया था कि 24 दिसंबर को अपहर्त्ता के फोन की लोकेशन विदिशा जिले के गंज वासोदा में थी. बहरहाल पुलिस ने सुबह से ही क्रिसेन वाटर पार्क में घेराबंदी कर दी और शपथ ग्रहण कार्यक्रम से फुरसत होते ही एडीशनल एसपी भी सादा कपड़ों में वहां जा पहुंचे. पुलिस वहां दिनभर नजरें गड़ाए रही लेकिन शील कुमार से रुपयों से भरा बैग लेने कोई नहीं पहुंचा, इसलिए पुलिस टीम निराश हो कर शाम को वापस लौट आई. लेकिन इस बीच टीआई अजय नायर को आशा की एक किरण नजर आने लगी थी.

हुआ यूं कि घर वापस आने के कुछ देर बाद ही शील कुमार के पास अपहर्त्ता की तरफ से फोन आया जिस में उस ने पुलिस को साथ लाने के लिए उन्हें भद्दीभद्दी गालियां दीं. साथ ही धमकी भी दी कि आगे से पुलिस को साथ ले कर आए तो आयुष की लाश तुम्हारे घर भेज दी जाएगी. यह सुन कर शील कुमार घबरा गए. उन्होंने बदमाश की इस नई धमकी के बारे में टीआई अजय नायर को भी बता दिया.

पुलिस को मिली जांच की सही दिशा

अब तक पुलिस बाहरी लोगों पर ही शक कर रही थी. अब वह समझ गई कि आयुष के परिवार के साथ ऐसा व्यक्ति मिला हुआ है जो उन की सारी गतिविधियों की जानकारी बदमाशों तक पहुंचा रहा है. इसीलिए टीआई अजय नायर ने शील कुमार से पूछा कि ‘‘आप के अलावा आप के परिवार में या फिर जानपहचान वालों में से ऐसा कौन व्यक्ति है जिसे पुलिस की एकएक गतिविधि की जानकारी मिल रही है.’’

‘‘सर, मैं अपनी बेटी रुचिका के अलावा और किसी को कुछ नहीं बताता.’’ शील कुमार बोले. टीआई ने सोचा कि सगी बहन भाई का अपहरण करने वाले का साथ क्यों देगी.

एएसपी संजय साहू के निर्देश पर टीआई नायर ने रुचिका चौबे की काल डिटेल्स निकलवाई. साथ ही रुचिका के बारे में और भी जांच कराई. पता चला कि मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाली रुचिका की न केवल जीवनशैली हाईप्रोफाइल थी, बल्कि उस के सपने भी ऊंचे थे.

पुलिस को यह खबर भी लग गई थी रुचिका का एक बौयफ्रैंड गौरव जैन भी उस आयुष के बारे में काफी रुचि ले रहा था. गौरव जैन रुचिका का पड़ोसी था और दवा कारोबारी था. ऐसे में पुलिस के समाने शक करने के लिए 2 नाम थे. पहला रुचिका जो खुद आयुष की सगी बड़ी बहन थी और दूसरा गौरव जैन जो शहर का बड़ा थोक दवा कारोबारी था.

पुलिस ने रुचिका और गौरव जैन के फोन नंबरों की काल डिटेल्स का अध्ययन किया तो एएसपी साहू के चेहरे पर मुसकान दौड़ गई. उन्होंने देखा कि जितनी बार भी अपहर्त्ता ने शील कुमार के नंबर पर फिरौती के लिए फोन किया था, उस के कुछ देर पहले और कुछ देर बाद रुचिका ने गौरव से फोन पर बात की थी.

घर से ही खेला जा रहा था खेल

इतना ही नहीं रुचिका से बात होने के ठीक बाद गौरव ने हर बार एक दूसरे फोन नंबर पर बात की थी. यह संयोगवश नहीं हो सकता था. क्योंकि संयोग एक बार होता है, बारबार नहीं. पुलिस ने यह जानकारी भी जुटा ली कि रुचिका से बात करने के बाद गौरव जिस फोन नंबर पर बात करता था, वह उस की दुकान पर काम करने वाले नौकर अतुल का है. पुलिस टीम ने अतुल के बारे में पता कराया तो मालूम हुआ कि वह उसी दिन से छुट््टी ले कर गायब है, जिस दिन आयुष लापता हुआ था.

इस जानकारी के बाद एएसपी संजय साहू के सामने पूरी कहानी साफ हो गई. इसलिए उन्होंने पुलिस टीम को गौरव को हिरासत में लेने के निर्देश दे दिए. पता चला कि गौरव भी भोपाल में नहीं है. उस के मोबाइल की लोकेशन आगरा की आ रही थी. इसलिए ऐशबाग थाने की टीम आगरा रवाना हो गई.

लेकिन इस से पहले कि टीम आगरा पहुंचती, गौरव के मोबाइल की लोकेशन आगरा से चल कर भोपाल की तरफ बढ़ने लगी. लोकेशन बदलने के समयानुसार पुलिस ने हिसाब लगाया कि गौरव तमिलनाडु एक्सप्रेस में सवार हो कर भोपाल आ रहा है. इसलिए ट्रेन के भोपाल पहुंचने से पहले ही पुलिस की टीम ने वहां पहुंच कर टे्रन से उतरे गौरव को हिरासत में ले लिया.

जाहिर है इस बात की उम्मीद गौरव के अलावा किसी और को भी नहीं थी. जैसे ही गौरव को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में थाने लाया गया. उस के पकड़े जाने की बात सुन कर रुचिका भी थाने पहुंच गई. यह देख कर एएसपी श्री साहू समझ गए कि पुलिस ने सही जगह निशाना साधा है.

गौरव आदतन अपराधी तो था नहीं, जो पुलिस को चकमा देने की कोशिश करता, इसलिए जरा सी पूछताछ में ही वह टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि अपनी प्रेमिका रुचिका की आर्थिक मदद करने के लिए उस ने आयुष के अपहरण का नाटक रचा था, जिस में रुचिका के साथ खुद आयुष भी शामिल था. गौरव ने यह भी बताया कि इस काम में उस ने अपने नौकर अतुल को भी शामिल कर रखा था.

गौरव ने पुलिस को यह भी बता दिया कि कल तक आयुष और अतुल भी उस के साथ आगरा में थे. वहां से तीनों साथ ही लौटे थे. आयुष अलग डिब्बे में सवार था. आयुष भोपाल स्टेशन पर उतर कर दूसरी ट्रेन में सवार हो कर इंदौर चला गया. जबकि अतुल उस के साथ ही था. चूंकि पुलिस अतुल को नहीं पहचानती थी इसलिए जैसे ही स्टेशन पर पुलिस ने गौरव को दबोचा उस से चंद कदम पीछे चल रहा अतुल वहां से गायब हो गया.

अब आगे की काररवाई से पहले आयुष को गिरफ्तार करना जरूरी था. पुलिस ने गौरव से यह जानकारी ले ली कि आयुष इंदौर में कहां ठहरेगा. इस के बाद भोपाल पुलिस ने यह जानकारी इंदौर पुलिस को दे दी. इंदौर पुलिस ने आयुष को गिरफ्तार कर लिया और उसे लाने के लिए भोपाल पुलिस की एक टीम इंदौर के लिए रवाना हो गई.

भोपाल पुलिस टीम आयुष को इंदौर से ले कर आ गई. पूरे मामले में रुचिका का नाम पहले ही सामने आ चुका था. इसलिए पुलिस ने रुचिका को भी गिरफ्तार कर लिया. इन तीनों की गिरफ्तारी के बाद आयुष के अपहरण की सनसनीखेज कहानी सामने आई.

दवाइयों का थोक कारोबारी गौरव जैन भी ऐशबाग थाना इलाके की उसी गली में रहता था जिस में रुचिका अपने मातापिता और छोटे भाई आयुष के साथ रहती थी. सीमित आय वाले परिवार के पास जो कुछ उल्लेखनीय था वह केवल रुचिका की सुंदरता और गरीबी में भी अच्छे तरीके से रहने का उस का अंदाज था.

रुचिका के सपने भी बड़े थे. वह अपने भाई को बड़ा आदमी बनाना चाहती थी. इसलिए स्वयं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने एक निजी बीमा कंपनी में नौकरी कर ली थी. वैसे रुचिका के पिता मूलरूप से जबलपुर के रहने वाले थे.

संयोग से पड़ोस में रहने वाले गौरव जैन का अपनी दुकान पर जाने और रुचिका का औफिस के लिए निकलने का समय एक ही था, सो गली में दोनों का अकसर रोज ही आमनासामना हो जाता था. जिस के चलते पहले आंखों से आंखें टकराईं फिर एकदूसरे को देख कर चेहरे पर मुसकराहटें आनी शुरू हो गईं.

गौरव और रुचिका की प्रेम कहानी

गौरव का दिल रुचिका पर आ गया था. दूसरी ओर रुचिका के मन को भी गौरव भा गया था. आखिर रुचिका ने जल्द ही उस के बढ़े कदमों को दिल तक आने का रास्ता दे दिया. दोनों में प्यार हुआ तो पहले घर से बाहर मुलाकातों का सिलसिला चला, फिर गौरव ने रुचिका के परिवार वालों से भी मिलना शुरू कर दिया.

बाद में गौरव रुचिका के घर भी आनेजाने लगा. रुचिका के परिवार की आर्थिक स्थिति गौरव से छिपी नहीं थी. जबकि गौरव की जेब में कभी पैसों की कमी नहीं रहती थी. वह समयसमय पर रुचिका के कहने पर उस के परिवार की आर्थिक मदद करने लगा.

जाहिर सी बात है ऐसे मददगार के लिए आदमी खुद अपनी आंखें बंद कर लेता है, यह समझते हुए भी कि जवान खूबसूरत बेटी का दोस्त बिना किसी मतलब के यूं मेहरबान नहीं होता. रुचिका के मातापिता सब कुछ जान कर अंजान बने रहे. जिस से रुचिका और गौरव का प्यार दिनबदिन गहराता गया.

इतना ही नहीं गौरव रुचिका को अपने साथ ले कर घूमने जाता तो लौटने पर उस की मां भी बेटी से कोई सवाल नहीं करती. क्योंकि गौरव ने उस समय इस परिवार की मदद की थी जब पैसों के अभाव में रुचिका के छोटे भाई आयुष का दाखिला अटकता दिखाई दे रहा था.

आयुष अब बड़ा हो चुका था. वह अच्छी तरह से जानता था कि गौरव केवल उस की बहन से दोस्ती रखने के लिए ही परिवार की मदद करता है. यह जानने के बाद भी वह गौरव को पसंद करता था. इतना ही नहीं कई बार तो वह गौरव और बहन के साथ घूमने भी चला जाता था. जब उसे लगता कि उसे दोनों के साथ नहीं होना चाहिए तो वह किसी बहाने से दाएं बाएं हो जाता था. इसलिए धीरेधीरे रुचिका और गौरव का प्यार इस हद तक पहुंच गया कि उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया.

रुचिका के परिवार को तो इस शादी से कोई ऐतराज नहीं था. गौरव की जिद के चलते उस के परिवार वाले भी उन दोनों के विवाह के लिए मन बना चुके थे. गौरव रुचिका की लगातार आर्थिक मदद कर रहा था. लेकिन रुचिका की जरूरतें गौरव की मदद से कहीं बड़ी थीं. जरूरतें पूरी करने के लिए रुचिका ने विभिन्न बैंकों से बड़ा कर्ज ले लिया था. वह सोचती थी कि कुछ समय बाद जब गौरव से उस की शादी हो जाएगी तो गौरव उस का कर्ज चुका देगा.

 पिता ने शराब के नशे में बिगाड़ा खेल

लेकिन इसी बीच हालात ने पलटा खाया. हुआ यह कि करीब 2 साल पहले गौरव के घर में आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम में रुचिका के परिवार को भी आमंत्रित किया गया. रुचिका अपनी मां और भाई के साथ उस कार्यक्रम में शामिल हुई. उस के पिता उस समय कंपनी की बस ले कर खंडवा गए थे.

संयोग से जब रुचिका का परिवार कार्यक्रम में गया हुआ था. तभी उस का पिता शील कुमार शराब पी कर घर लौट आया. घर पर ताला बंद देख कर उसे गुस्से आ गया. जब उसे पता चला कि रुचिका के साथ पूरा परिवार गौरव के यहां गया हुआ है, तो वह नशे की हालत में वहां पहुंच कर गालीगलोच करने लगा. उस ने गौरव के रिश्तेदारों के सामने रुचिका और गौरव के संबंधों को भी उजागर कर दिया.

इस घटना के बाद गौरव के घर वाले इस रिश्ते के खिलाफ हो गए, जिस के चलते गौरव को मजबूरी में रुचिका के बजाए परिवार की पसंद की लड़की से शादी करना पड़ी. इस घटना के बाद गौरव का रुचिका के घर भले ही आनाजाना कम हो गया लेकिन दोनों के प्रेमसंबंध पहले की तरह बने रहे. इस में रुचिका का भाई आयुष भी दोनों की मदद करता था.

इस के बदले गौरव भी दोनों की कुछ न कुछ मदद करता रहता था. लेकिन गौरव से शादी हो जाने के भरोसे रुचिका ने बैंकों से जो लोन लिया था, वह उस के गले की फांस बन गया. क्योंकि रुचिका की आय इतनी नहीं थी कि वह उस लोन की किश्त भी समय पर चुका पाती.

गौरव उस की मदद तो करना चाहता था पर इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कर पाना उस के लिए भी संभव नहीं था. इसलिए आयुष, रुचिका और गौरव तीनों मिल कर इस समस्या से निपटने का रास्ता खोजने लगे. इस के लिए रुचिका और आयुष ने अपने पिता पर भी दबाव बनाया कि वह जबलपुर स्थित अपने हिस्से की पुश्तैनी जमीन बेच दे.

दोनों का मानना था कि उस से लगभग एक करोड़ रुपए हाथ आ जाएंगे. लेकिन शील कुमार इस के लिए तैयार नहीं था. गौरव की पत्नी के पेट में इन दिनों 7 महीने का गर्भ था. इसलिए गौरव ज्यादा से ज्यादा वक्त रुचिका के साथ बिताना चाहता था. उस की योजना आयुष की मदद से नए साल पर रुचिका को ले कर भोपाल से बाहर जाने की थी.

उस का विचार था कि आयुष अपनी बहन को साथ ले कर निकलेगा और पीछे से वह उन के साथ हो जाएगा. इस की योजना बनाने के लिए कुछ दिन पहले तीनों एक होटल में मिले. आयुष ने गौरव से कहा कि तुम दीदी को ले कर कहीं चले जाओ. इधर हम उस के अपहरण की बात फैला कर पिताजी से एक करोड़ रुपए की फिरौती मांग लेंगे. इस तरह आप को दीदी के साथ नया साल मनाने का मौका मिल जाएगा और हमें पैसा.

‘‘आइडिया अच्छा है, लेकिन तुम्हारी दीदी और मैं एक साथ गायब हुए तो पल भर में सब को बात समझ में आ जाएगी. हां, एक काम हो सकता है कि तुम गायब हो जाओ. तुम्हारे अपहरण के नाम पर 2-4 दिन में ही तुम्हारे पिता से मैं ओर रुचिका पैसा ले लेंगे. फिर नए साल पर हम तीनों घूमने चलेंगे.’’ गौरव ने कहा.

मिलजुल कर बनाई योजना

गौरव का सुझाया यह आइडिया तीनों को अच्छा लगा. योजना बनी कि आयुष गायब हो जाएगा और इधर बेटे को बचाने के लिए रुचिका के पिता शील कुमार आसानी से जबलपुर की जमीन बेच कर फिरौती में एक करोड़ रुपए दे देंगे. जिस से रुचिका का कर्ज भी चुक जाएगा और बाकी की जिंदगी भी आराम से गुजर जाएगी.

इस काम में फिरौती के लिए फोन करने और फिरौती की रकम लेने जाने के लिए गौरव ने अपनी दुकान के एक नौकर अतुल को पैसों का लालच दे कर शामिल कर लिया. इस के बाद पूरी योजना को फाइनल कर 12 दिसंबर को कोचिंग के नाम पर आयुष घर से निकल कर गौरव से मिला. गौरव ने उसे अतुल के साथ मिसरोद के एक होटल में ठहरा दिया. कुछ ही देर बाद अतुल ने आयुष के घर फिरौती के लिए फोन कर दिया.

एक करोड़ रुपए की फिरौती के लिए फोन आने के बाद पुलिस सक्रिय हो गई तो आयुष को मिसरोद से निकाल कर पहले कुछ दिन छतरपुर में रखा गया और फिर उसे अतुल के साथ आगरा भेज दिया गया. लेकिन इस बीच एसपी अतुल लोढ़ा के निर्देशन और एएसपी संजय साहू के नेतृत्व में आयुष की तलाश में जुटी पुलिस टीम ने एकएक कदम आगे बढ़ाते हुए केस का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने रुचिका उस के भाई आयुष और प्रेमी गौरव जैन से विस्तार से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. जबकि कथा लेखन तक अतुल की तलाश जारी थी.