खून में डूबी ‘हिना’ : नफरत की अनूठी दास्तान – भाग 1

5 जुलाई, 2017 को इलाहाबाद और कानपुर के बीच स्थित जिला कौशांबी के थाना कोखराज के गांव पन्नोई के पास सड़क किनारे एक युवती की लाश पड़ी होने की खबर फैलते ही वहां अच्छीखासी भीड़ लग गई. लाश औंधे मुंह पड़ी थी. उस के आसपास खून भी फैला था, जो सूख कर काला पड़ चुका था. किसी ने इस बात की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दी तो थोड़ी ही देर में पुलिस कंट्रोलरूम की सूचना पर थाना कोखराज पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई.

पुलिस ने लाश सीधी कराई तो पता चला कि युवती के माथे के बीचोबीच सटा कर गोली मारी गई थी. वहां बड़ा सा छेद स्पष्ट दिखाई दे रहा था. मृतका ने नीले रंग की जींस और गुलाबीसफेद रंग की डौटेड कुर्ती पहन रखी थी. शक्लसूरत और पहनावे से वह बड़े घर की लग रही थी.

थानाप्रभारी की सूचना पर एसपी अशोक कुमार पांडेय भी घटनास्थल पर आ गए थे. उन्होंने भी थानाप्रभारी बृजेश द्विवेदी के साथ घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. लाश के पास से कोई खोखा नहीं मिला था. वहां जितना खून फैला होना चाहिए था, वह भी नहीं था. इस से अंदाजा लगाया गया कि हत्या कहीं और कर के लाश यहां ला कर फेंकी गई थी.

पुलिस ने वहां जमा लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन शिनाख्त हो नहीं सकी. इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद थाने आ कर पन्नोई गांव के चौकीदार की ओर से अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

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लाश की शिनाख्त के चक्कर में ही उस का पोस्टमार्टम 9 जुलाई को किया गया. 2 डाक्टरों अनुभव शुक्ला और रेखा सिंह के पैनल ने लाश का पोस्टमार्टम किया. इस की वीडियोग्राफी भी कराई गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के साथ दुष्कर्म हुआ था. वह प्रेग्नेंट भी थी. डाक्टरों ने दुष्कर्म और प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए स्वाब और स्मीयर प्रिजर्व कर लिए थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार,युवती की मौत करीब 115 से 120 घंटे पहले हुई थी. इस का मतलब लाश मिलने से करीब 40 घंटे पहले ही उस की हत्या हो चुकी थी यानी उस की हत्या 4/5 जुलाई की रात 12 से 1 बजे के बीच हुई थी. युवती के माथे से जिस तरह सटा कर गोली मारी गई थी, उस से साफ लगता था कि गोली मारने वाला उस का कोई करीबी था.

लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पोस्टमार्टम के बाद 10 जुलाई को पुलिस ने उस का अंतिम संस्कार करा दिया. कौशांबी पुलिस के लिए यह मामला एक चुनौती बन गया था, क्योंकि 7 दिनों बाद भी मृतका की पहचान नहीं हो सकी थी.

एसपी अशोक कुमार पांडेय ने लाश की शिनाख्त और मामले के खुलासे के लिए थाना पुलिस को तो लगाया ही, क्राइम ब्रांच की भी एक टीम को लगा दिया. घटना के 8 दिनों बाद यानी 12 जुलाई को लाश के फोटो वाट्सऐप, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए तो किसी व्यक्ति ने फोन कर के क्राइम ब्रांच को बताया कि कौशांबी में मिली लाश हिना तलरेजा की है. फेसबुक पर इस का एकाउंट है.

पुलिस के लिए यह सूचना काफी महत्त्वपूर्ण थी. पुलिस ने हिना तलरेजा का एकाउंट खंगाला तो उस का पता और मोबाइल नंबर मिल गया. पुलिस ने उस नंबर पर फोन किया तो वह बंद था. उस की लोकेशन पता की गई तो उस की अंतिम लोकेशन इलाहाबाद के मीरापुर से सटे मोहल्ला दरियाबाद की मिली. उसी के आधार पर पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतका इलाहाबाद की रहने वाली हो सकती है.

इस के बाद क्राइम ब्रांच की टीम मृतका के घर वालों की तलाश में इलाहाबाद पहुंची. आखिर 4 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद 18 जुलाई को पुलिस उस की मां नीलिमा तलरेजा तक पहुंच गई. 18 जुलाई को थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम इलाहाबाद के मीरापुर पहुंची तो पता चला कि हिना वहां किराए पर रहती थी.

हिना की लाश का फोटो दिखाने पर मकान मालिक ने बताया कि यह फोटो हिना तलरेजा की है, महीने भर पहले यह अपनी मां के साथ उन के यहां किराए पर रहती थी, लेकिन उन्होंने उन से अपना मकान खाली करा लिया था. उस के पिता की मौत हो चुकी थी. उन के मकान से जाने के बाद मांबेटी कहां रह रही हैं, यह वह नहीं बता सके. उन्होंने यह जरूर बताया था कि हिना सिविल लाइंस स्थित किसी हुक्का बार में काम करती थी.

पुलिस खोजतेखोजते सिविल लाइंस स्थित उस हुक्का बार तक पहुंच गई, जहां हिना काम करती थी. हुक्का बार की मालकिन दामिनी चावला (बदला हुआ नाम) ने भी फोटो देख कर उस की शिनाख्त हिना तलरेजा के रूप में कर दी. उन के बताए अनुसार, खुद को पर्सनैलिटी मेकर बताने वाली हिना का इलाहाबाद के कई बारों में आनाजाना था. उसे शराब की लत लग चुकी थी. शराब का निमंत्रण मिलने पर वह किसी भी समय, किसी के भी साथ, कहीं भी चली जाती थी. कुछ दिनों पहले वह शराब पी कर एक बार में बेहोश हो गई थी, तब 2 लड़कों ने उसे अपनी कार से उस के घर पहुंचाया था.

दामिनी चावला के माध्यम से पुलिस हिना की मां तक पहुंची. वह मीरापुर में ही दूसरी जगह पर किराए पर रह रही थीं. पुलिस ने उन्हें फोटो दिखाई तो बेटी की लाश की फोटो देखते ही वह रो पड़ीं. पुलिस ने उन्हें शांत कराया तो उन्होंने बताया कि 4 जुलाई, 2017 की शाम 7 बजे वह दिल्ली जाने की बात कह कर घर से निकली थी. उसी दिन रात को उस ने 10:44 और 10:45 बजे अपनी 2 फोटो फेसबुक पर शेयर किए थे. उस के बाद से उस के एकाउंट पर कोई अपडेट नहीं था. उस ने मां से भी संपर्क नहीं किया था. वह तो यही समझ रही थीं कि हिना दिल्ली में है.

जांच आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने हिना के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस के नंबर पर अंतिम बार जिन 2 लोगों से बात हुई थी, उन के नाम अदनान खान और खालिद थे. दोनों थाना शाहगंज के रहने वाले थे. पुलिस उन के घर पहुंची तो दोनों ही अपनेअपने घरों से गायब मिले. इस से पुलिस को उन पर शक हुआ.

देवर के प्रेम में पति की आहुति

16 जुलाई, 2017 की सुबह की बात है. लोग रोजाना की तरह उठ कर अपने दैनिक कामों में लग गए थे. उसी दौरान कुछ लोग स्टोन पार्क की ओर गए, तभी किसी व्यक्ति की नजर वहां पड़ी लाश की ओर गई. इस के बाद जल्दी ही यह बात आग की तरह पूरे पुरानी छावनी थानाक्षेत्र में फैल गई. जहां लाश पड़ी थी, वह क्षेत्र पुरानी छावनी थानाक्षेत्र के अंतर्गत आता था.

स्टोन पार्क में लाश पड़ी होने की खबर सुन कर स्टोन पार्क के आसपास रहने वाले लोगों का घटनास्थल पर जमघट लग गया. इसी बीच किसी ने यह सूचना थाना पुरानी छावनी को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी प्रीति भार्गव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने देखा, मृतक 50-55 साल का था और उस की लाश लहूलुहान पड़ी हुई थी.

थानाप्रभारी ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतक की छाती, गले, हाथ व सिर पर किसी तेजधार हथियार के घाव थे. उस की लाश के पास ही शराब की खाली बोतल और 2 गिलास पड़े हुए थे. इस से अनुमान लगाया गया कि हत्या से पहले हत्यारे ने मृतक के साथ शराब पी होगी. घटनास्थल पर काफी भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी.

थानाप्रभारी ने भीड़ से मृतक की शिनाख्त कराई तो किसी ने उस का नाम अंगद कडेरे बताते हुए कहा कि यह स्टोन पार्क की करीबी बस्ती का रहने वाला है और पेशे से हलवाई है. थानाप्रभारी ने एसआई रामसुरेश को अंगद के घर भेज कर उस की हत्या की खबर भिजवा दी. अंगद की पत्नी गीता को जैसे ही पति की हत्या की खबर मिली, उस का रोरो कर बुरा हाल हो गया.

मृतक की पत्नी और बच्चे एसआई रामसुरेश के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. पुलिस ने उन से संक्षिप्त पूछताछ कर के घटनास्थल की काररवाई पूरी की और लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

मृतक अंगद की पत्नी गीता की तरफ से पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. एसपी डा. आशीष ने थानाप्रभारी प्रीति भार्गव को हत्या के शीघ्र खुलासे के निर्देश दिए. थानाप्रभारी ने सब से पहले मृतक अंगद के घर जा कर उस के घर वालों से पूछताछ की. उन लोगों ने बताया कि अंगद की किसी से कोई रंजिश नहीं थी, वह बहुत सीधेसादे इंसान थे. बस उन्हें शराब पीनेपिलाने की आदत थी.

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15 जुलाई, 2017 की रात उन के मोबाइल पर किसी का फोन आया था. फोन पर बात करने के बाद वे यह कह कर घर से निकल गए थे कि उन्हें जरूरी काम है, बस थोड़ी देर में लौट कर आते हैं. लेकिन जाने के बाद वह वापस लौट कर नहीं आए. सुबह को उन की हत्या की जानकारी मिली.

प्रीति भार्गव ने अंगद कडेरे की पत्नी गीता से विस्तार से बातचीत की, लेकिन उस का इतना भर कहना था कि यह सब कैसे हो गया, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है. गीता से बातचीत करते वक्त प्रीति भार्गव की नजर उस के हावभाव पर टिकी हुई थी.

पति के मरने का जो गम होना चाहिए, वह उस के चेहरे पर दिखाई नहीं दे रहा था. गीता थानाप्रभारी से बातचीत करने तक में डर रही थी. यहां तक कि उन से नजरें चुरा रही थी. थानाप्रभारी ने अपने अनुभव से अनुमान लगाया कि कहीं न कहीं दाल में काला जरूर है. लेकिन बिना ठोस सबूत के गीता पर हाथ डालना उन्होंने ठीक नहीं समझा. लिहाजा वे गीता से यह कह कर थाने लौट आईं कि अगर किसी पर संदेह हो तो फोन कर के मुझे बता देना.

इस के बाद थानाप्रभारी ने गीता के मोबाइल नंबर की कालडिटेल्स निकलवाई. कालडिटेल्स से उन्हें पता चला कि घटना वाले दिन गीता के मोबाइल पर देर रात जो आखिरी काल आई थी, वह बंटी जाटव की थी. उन्होंने बिना देरी किए थाने के तेजतर्रार एसआई रामसुरेश और कुछ पुलिसकर्मियों को मुरैना भेजा. पुलिस ने बंटी जाटव के सुभाषनगर स्थित घर से उसे पकड़ लिया और पूछताछ के लिए उसे पुरानी छावनी थाने ले आए.

उस से अंगद कडेरे की हत्या के बारे में गहनता से पूछताछ की तो पहले तो वह खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. बंटी ने अपना अपराध कबूल करते हुए बताया कि अंगद कडेरे की हत्या उस ने ही की थी. उस ने अंगद की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों पर आधारित थी.

अंगद कडेरे पुरानी छावनी थाने के अंतर्गत आने वाले स्टोन पार्क के पीछे बसी बस्ती में रहता था. वह जवान हुआ तो अपनी आजीविका चलाने के लिए हलवाई का काम करने लगा. उस की पहली पत्नी से 4 बच्चे सपना, गजेंद्र, भारती और विकास थे.

दरअसल, अंगद ने पहली पत्नी मीरा की मौत के बाद गीता से दूसरी शादी कर ली थी. इस से पहले अंगद अपनी दूसरी पत्नी गीता के साथ मुरैना के सुभाषपुरा में रहता था. वहीं उस के पड़ोस में बंटी जाटव रहा करता था. गीता से शादी के बाद उस के यहां 2 बेटे दुर्गेश और आकाश पैदा हुए. बंटी का अंगद के यहां काफी आनाजाना था. उस की गीता से बहुत पटती थी. गीता रिश्ते में उस की भाभी लगती थी, इस नाते वह उस से हंसीमजाक कर लेता था.

अंगद हलवाई था. दिन भर अपनी दुकान और कभीकभी रात में शादीविवाह में काम करने की वजह से वह देर रात को थकामांदा घर लौटता तो पत्नी को ज्यादा वक्त नहीं दे पाता था. खाना खाने के बाद वह शराब पी कर सो जाता था. यह बात गीता को काफी अखरती थी. पति की इस उदासीनता के चलते गीता का झुकाव बंटी की ओर हो गया.

भाभी के इस आमंत्रण को बंटी भांप गया. अंगद के काम पर निकलते ही वह उस के घर पहुंच जाता और अपनी लच्छेदार बातों से गीता का मन बहलाता. जल्दी ही एक दिन ऐसा आया, जब दोनों ने अपनी सीमाएं लांघ कर अपनी हसरतें पूरी कर लीं. दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. घर में अंगद के साथ उस के आधा दरजन बच्चे और पत्नी रहती थी. अंगद के काम पर निकलते ही गीता घर में अकेली रह जाती थी. बंटी इसी का फायदा उठा कर उस के घर पहुंच जाता था. इस तरह काफी दिनों तक दोनों ऐश करते रहे.

जाहिर है, अवैध संबंध छिपाए नहीं छिपते. बस्ती की औरतों को इस बात का शक हो गया कि बंटी अंगद की गैरमौजूदगी में ही उस के घर क्यों आता है. किसी तरह यह बात अंगद के कानों तक पहुंच गई. इस से अंगद का माथा ठनका. उस ने गीता से दोटूक कह दिया कि उस की गैरमौजूदगी में बंटी घर पर कतई न आया करे. लेकिन गीता की शह की वजह से बंटी ने अंगद के घर आना बंद नहीं किया.

यह पता चलते ही अंगद ने खुद ही बंटी से सख्त लहजे में कह दिया कि वह उस की गैरमौजूदगी में घर पर न आया करे, वरना इस का अंजाम बुरा होगा. उधर उस ने अपनी पत्नी गीता को भी जम कर खरीखोटी सुनाई. आखिर बंटी ने अंगद के यहां उस की गैरमौजूदगी में आना बंद कर दिया.

अंगद की रोकटोक की वजह से गीता और बंटी की मुलाकात नहीं हो पा रही थी. दोनों ही बहुत परेशान थे. ऐसे में दोनों को अंगद अपनी राह का कांटा दिखाई देने लगा.

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एक दिन मौका मिलते ही गीता ने बंटी से मुलाकात की. उस ने बंटी से कहा कि अंगद को हमारे संबंधों की जानकारी हो चुकी है. उस ने मेरे ऊपर जो सख्ती की है, उस हालत में मैं नहीं रह सकती. मुझे तुम इस घुटनभरी जिंदगी से निकालो. बेहतर होगा, किसी तरह अंगद को ठिकाने लगा दो. इस के बाद ही हम दोनों सुकून से रह सकेंगे. गीता की बातों में आ कर वह अंगद की हत्या करने को तैयार हो गया.

15 जुलाई की रात अंगद खाना खाने बैठा ही था कि उस के मोबाइल पर बंटी जाटव का फोन आया. उस ने यह सोच कर उस का फोन रिसीव किया कि उसे कोई काम होगा, इसी वजह से इतनी रात गए फोन कर रहा है.

बंटी बोला, ‘‘अंगद भाई, तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है. मेरे एक रिश्तेदार को बेटे के जन्मदिन पर बड़ी पार्टी देनी है. ऐसा करते हैं हम दोनों मिल कर ठेके पर कैटरिंग का काम ले लेते हैं. पैसे मैं लगा दूंगा. पार्टी से आज ही बात कर लेते हैं. अगर आज बात नहीं की तो पार्टी किसी दूसरे को कैटरिंग का ठेका दे सकती है. तुम जल्दी आ जाओ, मैं स्टोन पार्क के पास तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. अगर बात बन गई तो आज ही पार्टी से एडवांस ले लेंगे.’’

अंगद बंटी की बातों में आ गया. वह गीता से यह कह कर घर से निकल गया कि थोड़ी देर में लौट कर खाना खाएगा. जब वह स्टोन पार्क के करीब पहुंचा तो बंटी वहां शराब की बोतल लिए खड़ा था. अंगद को देखते ही वह बोला, ‘‘चलो, पार्टी के पास चलने से पहले एकदो पैग लगा लेते हैं.’’

दोनों ने वहीं बैठ कर शराब पी. शराब पीने के बाद बंटी ने क हा, ‘‘अब रात भी काफी हो गई है. गीता भाभी खाने के लिए इंतजार कर रही होंगी. हम पार्टी से सुबह बात कर लेंगे. मैं ऐसा करता हूं कि पहले तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूं, उस के बाद अपने घर चला जाऊंगा.’’

उस के बाद अंगद उस की बाइक के पीछे बैठ गया. कुछ दूर चल कर बंटी ने स्टोन पार्क के निकट अपनी बाइक रोक दी और बाइक की डिक्की में रखी कुल्हाड़ी निकाल ली.

अंगद बंटी की योजना से पूरी तरह अनभिज्ञ था. उसे क्या पता था कि अंगद ने डिक्की से कुल्हाड़ी उस की हत्या करने के लिए निकाली है. उस ने अंगद से कहा, ‘‘भाईसाहब, अभी एक बोतल और रखी है मेरी डिक्की में, 2-2 पैग और ले लेते हैं.’’

अंगद बंटी की बात टाल नहीं सका. दोनों जिस जगह पर खड़े हो कर बातचीत कर रहे थे, वहां बैठ कर शराब पीना ठीक नहीं था. लिहाजा वे वहां से कुछ दूर चले और स्टोन पार्क में झाडि़यों के पास बैठ कर शराब पीने लगे.

अंगद एक तो पहले से ही ज्यादा पिए हुए था. 2 पैग और लगाने के बाद उसे ज्यादा नशा हो गया, जिस से उस के कदम लड़खड़ाने लगे. ठीक उसी समय बंटी ने उस पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार करने शुरू कर दिए.

नशे की हालत में अंगद को संभलने तक का अवसर नहीं मिला. वह निढाल हो कर नीचे गिर पड़ा. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. बंटी ने उसे हिलाडुला कर देखा तो वह मर चुका था. वह वहां से अपने घर मुरैना चला गया. उस ने मुरैना पहुंचते ही गीता को उस के मोबाइल पर अंगद की हत्या की सूचना दे दी.

उस ने बतौर ऐहतियात गीता से कहा कि जब उसे पुलिस द्वारा अंगद की हत्या की खबर मिले तो वह रोने का नाटक करे, जिस से किसी को योजना पर संदेह न हो. पुलिस ने बंटी से पूछताछ के बाद गीता को भी गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी बिना नानुकुर के स्वीकार कर लिया कि पति की हत्या की साजिश में वह भी शामिल थी. बंटी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त वह कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली, जोकि गीता ने उसे धार लगा कर दी थी.

उस के बाद दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. उधर हत्याकांड के खुलासे पर पुलिस अधीक्षक डा. आशीष ने सीएसपी जादौन, टीआई पुरानी छावनी प्रीति भार्गव, एसआई रामसुरेश सिंह कुशवाह को 5 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

यारों की बाहों में सुख की तलाश – भाग 1

‘‘भौजी…ओ भौजी,’’ दरवाजे को थपकी देते हुए राजेश ने जोर से आवाज लगाई. थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला. दरवाजा खोलने वाली युवती काजल थी. गोरे रंग की तीखे नाकनक्श वाली काजल के चेहरे पर उस वक्त उदासी छाई हुई थी. दरवाजा खोल कर उस ने राजेश पर उचटती सी नजर डाली और धीरे से पूछा, ‘‘क्या चाहिए?’’

‘‘उत्तम भैया नहीं हैं क्या घर में?’’ हिचकते हुए राजेश ने पूछा. ‘‘अभी घर नहीं लौटे हैं, आएंगे तो फोन करवा दूंगी, आ जाना.’’ कहते हुए काजल ने दरवाजा बंद करना चाहा तो राजेश ने दरवाजा पकड़ लिया, ‘‘माफ करना भौजी, तुम्हारे चेहरे की उदासी देख कर मेरा मन बैठ गया है. बताओ, हमेशा हंसतामुसकराता रहने वाला चेहरा आज यह उदास क्यों है?’’

‘‘क्या करोगे जान कर…’’ काजल ने बात घुमा दी, ‘‘अपने भैया के लिए आए थे, वह नहीं हैं तो फिर आ जाना.’’

‘‘मैं अपनी भौजी को भी तो अपना मानता हूं.’’ राजेश जल्दी से बोला, ‘‘तुम्हारा उदासी भरा चेहरा क्या मुझे वापस जाने देगा?’’

काजल ने गहरी सांस ली और दरवाजा छोड़ते हुए बोली, ‘‘अंदर आ जाओ.’’

राजेश कमरे में आ गया. काजल ने उसे कुरसी दी तो वह उस पर बैठते हुए बेचैन स्वर में बोला, ‘‘मैं भैया से ज्यादा तुम्हें अपना मानता हूं भौजी. तुम्हारी उदासी देख कर मन विचलित हो गया है. बताओ, क्या भैया से कोई कहासुनी हो गई है?’’

‘‘नहीं, वह घर में नहीं हैं तो उन से कहासुनी क्यों होगी. बस, मन यूं ही उदास हो गया.’’ काजल ने कह कर फिर गहरी सांस भरी.

‘‘नहीं, मैं नहीं मानता. यूं ही तुम उदास नहीं हो सकती. तुम्हें शुभम की…’’

काजल ने झपट कर राजेश के मुंह पर हथेली रख कर उस का वाक्य पूरा नहीं होने दिया. तुरंत बोली, ‘‘शुभम की कसम मत दो, मैं तुम्हें ऐसे ही बता देती हूं.’’

‘‘बताओ,’’ राजेश ने उस का हाथ अपने मुंह से हटा कर उस की आंखों में झांका.

‘‘मेरी उदासी का सबब तुम्हारे भैया ही हैं. आज मैं अकेली बैठी तुम्हारे भैया के साथ अपनी शादी को ले कर विचार कर रही थी.’’ काजल का स्वर गंभीर हो गया, ‘‘पता नहीं क्या देख कर मेरे घर वालों ने मेरी शादी उत्तम के साथ कर दी. यह तो देख लेते कि उत्तम अपाहिज है, उस की जोड़ी मेरे साथ जमेगी भी या नहीं. कुछ नहीं सोचा और मुझे लपेट दिया शादी के बंधन में.’’

‘‘हूं… यह तो उन्हें सोचना ही चाहिए था.’’ राजेश ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘वैसे तो उत्तम में कोई और खोट नहीं है न…मेरा मतलब वह तुम्हें खुश तो रखता ही है न?’’

‘‘हां, खुश तो बहुत रखता है. मेरे लिए दिनरात मेहनत करता है और वैसे भी अब हमारी शादी को 9-10 साल हो गए हैं. शुभम भी 8 साल का हो गया है. अब उत्तम के एक खोट को ले कर क्या गिलाशिकवा करूंगी.’’

‘‘तब उदास क्यों हो गई?’’

‘‘देवरजी, हम एक साथ बाजारहाट को जाते हैं तो मुझे उन के साथ जाने में हिचक होती है. सोचती हूं देखने वाले क्या सोचते होंगे. कहां मैं इतनी सुंदर और कहां वो अपाहिज… मेरे साथ लंगड़ा कर चलता हुआ. मुझे तब अपने आप पर कोफ्त सी महसूस होने लगती है और मैं उदास हो जाती हूं.’’ काजल ने कहने के बाद गहरी सांस भरी.

‘‘मत सोचा करो ऐसा, अब जो नसीब में था, वह हो गया. अब तुम्हें उत्तम भैया के साथ निभा कर ही चलना होगा.’’

‘‘चल तो रही हूं राजेश, लेकिन तुम्हीं बताओ, क्या घर वालों ने मेरे साथ नाइंसाफी नहीं की है? क्या वह मेरे लिए तुम्हारे जैसा सुंदर, सजीला युवक नहीं तलाश सकते थे?’’

काजल की इस बात पर राजेश के दिल में अजीब सी हलचल हुई. उस ने काजल को गहरी नजरों से देखा.नजरें आपस में मिलीं तो काजल ने तुरंत नजरें झुका लीं.

अपनी बात का अर्थ जान कर वह लजा गई थी. राजेश के होंठ मुसकरा दिए. काजल बात को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए बोली, ‘‘बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं.’’

‘‘रहने दो भौजी, चाय फिर किसी दिन पी लूंगा.’’ राजेश जल्दी से बोला, ‘‘भैया आएं तो कहना मैं आया था. कुछ काम था, मुझे बुलवा लेंगे.’’ कहने के साथ राजेश तेजी से दरवाजे की ओर बढ़ गया. उस ने कनखियों से देखा, काजल उसे हसरतभरी नजरों से देख रही थी.

उत्तम मंडल के पिता का नाम गुलाय मंडल था. गुलाय मंडल वार्ड नंबर 13, धूसर, तायकापट्टी, जिला पूर्णिया, बिहार का निवासी था. उस के घर में जब उत्तम का जन्म हुआ तो वह जन्म से ही विकलांग था. उस के जन्म से गुलाय और उस की पत्नी को खुशी की जगह दुख हुआ.

गुलाय इस चिंता में पड़ गया कि उत्तम का भविष्य क्या होगा, उस की शादी कैसे होगी. लेकिन जब उत्तम जवान हुआ तो गुलाय की सोच से परे एक अच्छा रिश्ता उत्तम के लिए आ गया. काजल जैसी सुंदर लड़की से उत्तम का विवाह हो गया. खूबसूरत पत्नी पा कर विकलांग उत्तम अपने भाग्य पर इतरा उठा.

उस ने काजल को खुश रखने के लिए अपने बूते जीतोड़ मेहनत की. घर के आंगन में साल भर बाद एक बेटा आ गया तो उत्तम की खुशी का ओरछोर नहीं रहा. वह खुशी से झूम उठा.

काजल अब तक उत्तम को अपना भाग्य मान कर उस के साथ रहना सीख गई थी. बेटे को जन्म दे कर वह उसी में अपनी खुशी तलाश करती हुई उस की परवरिश में लग गई. उत्तम पहले से ज्यादा कड़ी मेहनत करने लगा, लेकिन जब वहां (गांव में) जरूरत के हिसाब से काम नहीं मिला तो उस ने दिल्ली का रुख किया.

यहां बिहार के काफी लोग पांव जमा कर पैसा कमा रहे थे. दिल्ली में उत्तम को अपने गांव धूसर का रहने वाला राजेश मिल गया. उसी के सहयोग से उत्तम एक कंपनी में काम पर लग गया. उस ने राजेश के ही माध्यम से राजौरी गार्डन के मकान नंबर 496 का फर्स्ट फ्लोर किराए पर ले लिया. यह मकान टी.सी. कैंप में था और इस का मकान मालिक मोहन सिंह था.

सिंदूर मिटाने का जुनून : अवैद्य संबंधों के चलते पति की हत्या – भाग 1

कानपुर शहर के अरमापुर स्टेट के रहने वाले लोग सुबह टहलने के लिए निकले तो उन्हें कैलाशनगर पुलिया के पास सड़क के किनारे खून से लथपथ एक लाश पड़ी दिखाई दी. थोड़ी देर में वहां भीड़ लग गई. उसी भीड़ में से किसी ने इस बात की सूचना थाना अरमापुर पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी आशीष मिश्र पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे. घटनास्थल पर आने से पहले उन्होंने लाश पड़ी होने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी थी. यह 14 मई, 2017 की बात है.

घटनास्थल पर पहुंच कर आशीष मिश्र लाश का बारीकी से निरीक्षण करने लगे. लाश सड़क के किनारे खून से लथपथ पड़ी थी. उस के पास ही एक मोटरसाइकिल खड़ी थी. हत्या किसी मजबूत और भारी चीज से सिर पर प्रहार कर के की गई थी. उस के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के चेहरे को ईंट से बुरी तरह कुचल दिया गया था. खून से सनी सीमेंट वाली वह ईंट वहीं पड़ी थी.

आशीष मिश्र लाश का निरीक्षण कर रहे थे कि एसपी (पश्चिम) संजय कुमार यादव, सीओ ज्ञानेंद्र सिंह और नम्रता श्रीवास्तव भी आ पहुंची थीं. अधिकारियों के आदेश पर फोरैंसिक टीम भी आ गई थी. फोरैंसिक टीम ने अपना काम कर लिया तो पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया.

घटनास्थल पर सैकड़ों लोग जमा थे, पर कोई भी लाश की पहचान नहीं कर सका था. इस से स्पष्ट था कि मृतक कहीं और का रहने वाला था. जब लोग लाश की पहचान नहीं कर सके तो एसपी संजय कुमार यादव ने मृतक के कपड़ों की तलाशी लेने को कहा. सिपाही रामकुमार ने मृतक के पैंट की जेब में हाथ डाला तो उस में एक परिचयपत्र और ड्राइविंग लाइसैंस मिला.

लाइसैंस और परिचयपत्र पर एक ही नाम सुरेंद्र कुमार तिवारी पुत्र नीरज कुमार तिवारी लिखा था. इस का मतलब दोनों चीजें उसी की थीं. दोनों पर पता मसवानपुर कच्ची बस्ती दर्ज था. परिचयपत्र के अनुसार, वह रक्षा प्रतिष्ठान में संविदा कर्मचारी था.

लाइसैंस और परिचयपत्र से मिले पते पर 2 सिपाहियों रामकुमार और मेवालाल को भेजा गया तो वहां एक लड़का मिला. उसे परिचयपत्र और ड्राइविंग लाइसैंस दिखाया गया तो उस ने कहा, ‘‘अरे, यह परिचयपत्र और लाइसैंस तो मेरे पिताजी का है. वह कहां हैं, कल रात 10 बजे घर से निकले तो अभी तक लौट कर नहीं आए हैं?’’

सिपाहियों ने उस का नाम पूछा तो उस ने अपना नाम जय तिवारी बताया. इस के बाद सिपाहियों ने बताया कि अरमापुर स्टेट स्थित कैलाशनगर पुलिया के पास एक लाश मिली है. उसी की पैंट की जेब से यह परिचयपत्र और लाइसैंस मिला है. वह उन के साथ चल कर लाश देख ले, कहीं वह लाश उस के पिता की तो नहीं है.

जय अपने चाचा सर्वेश तिवारी को साथ ले कर सिपाहियों के साथ चल पड़ा. घटनास्थल पर पहुंच कर उस ने लाश देखी तो फफकफफक कर रोने लगा. रोते हुए उस ने कहा, ‘‘सर, यह लाश मेरे पिता सत्येंद्र तिवारी की है. पता नहीं किस ने इन की हत्या कर दी.’’

जय के साथ आए उस के चाचा सर्वेश ने भी लाश की पहचान अपने भाई सत्येंद्र तिवारी के रूप में कर दी थी. घटनास्थल पर मृतक का बेटा और भाई आ गए थे, लेकिन उस की पत्नी अभी तक नहीं आई थी. थानाप्रभारी आशीष मिश्र ने जय से उस की मां के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि उस की मां सुलभ विशधन गांव गई हैं.

थानाप्रभारी ने फोन द्वारा उसे सूचना दी तो थोड़ी देर में वह भी घटनास्थल पर आ गई. पति की लाश देख कर सुलभ बेहोश हो गई. तब साथ आई महिलाओं ने किसी तरह उसे संभाला. उस समय वह कुछ भी बताने की हालत में नहीं थी, इसलिए पुलिस उस से पूछताछ नहीं कर सकी.

सीओ ज्ञानेंद्र सिंह ने मृतक के बेटे जय से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के पिता सत्येंद्र कल रात 10 बजे घर से यह कह कर निकले थे कि वह एक घंटे में वापस आ जाएंगे. जब काफी देर तक वह लौट कर नहीं आए तो उस ने यह बात अपने चाचा सर्वेश तिवारी को बताई. उस के बाद उस ने चाचा के साथ पिता की काफी खोज की, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. सुबह सिपाहियों से पता चला कि उन की तो हत्या हो गई है.

थोड़ी देर बाद मृतक की पत्नी सुलभ सामान्य हुई तो पुलिस अधिकारियों ने उसे सांत्वना दे कर उस से भी पूछताछ की. उस ने बताया कि उस के पति आर्डिनैंस फैक्ट्री में ठेके पर काम करते थे. लेबर कौंट्रैक्ट कंपनी वृंदावन एसोसिएट्स द्वारा उन्हें ओएफसी में काम पर लगाया था.

मां-बाप के हत्यारे संदीप जैन को सजा-ए-मौत – भाग 1

‘‘मीलार्ड!’’ बचाव पक्ष के वकील तारेंद्र जैन ने दुर्ग जिले के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेष कुमार तिवारी के सामने पूरी मजबूती से अपनी बात रखते हुए कहा, ‘‘मेरा मुवक्किल संदीप कुमार जैन उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, जिस वक्त श्री रावतमल जैन और उन की पत्नी सूरजी देवी का कत्ल हुआ. पुलिस किसी रंजिश के तहत संदीप जैन को फंसाने की कोशिश कर रही है. लेकिन हम इस का एग्जामिशन माननीय हाईकोर्ट बिलासपुर से परमिशन ले कर करवा चुके हैं श्रीमान.

‘‘लेकिन मीलार्ड, पुलिस ने और अभियोजन पक्ष ने जिस कलीम खान को साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश किया, वह विश्वसनीय व्यक्ति नहीं है. कोतवाली एसएचओ भावेश साव ने साढ़े 7 बजे पंचनामा बनाया था, जिस में कलीम खान के दस्तखत हैं, जबकि कलीम खान का कहना है कि वह घटनास्थल पर 10 बजे पहुंचा था. इस से ही साबित होता है कि पुलिस के द्वारा कलीम खान को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया, वह फरजी है.’’ तारेंद्र जैन ने अपनी दलील रखी.

‘‘चलो आप की बात मान लेते हैं, लेकिन आप का मुवक्किल संदीप और आप स्वयं कोर्ट में यह साबित नहीं कर सके हैं कि घटना के वक्त वह तीसरा व्यक्ति यदि संदीप नहीं था तो फिर कौन था?’’ अभियोजन पक्ष के वकील सुरेशचंद्र शर्मा ने कहा.

‘‘यह तो पुलिस का काम है श्रीमान.’’ तारेंद्र जैन ने कहा, ‘‘पुलिस को मालूम करना चाहिए था कि वह तीसरा व्यक्ति कौन है.’’

‘‘इस हत्याकांड की जांच करने वाली पुलिस टीम ने पूरे साक्ष्य के साथ यह केस हल किया है, वह तीसरा व्यक्ति पुलिस जांच में आप का मुवक्किल संदीप जैन ही है.’’ इस बार अभियोजन पक्ष के वकील सुरेश चंद्र शर्मा ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘मेरे दोस्त मिस्टर तारेंद्र जैन, यह साबित हो चुकी है कि मांबाप की हत्या स्वयं संदीप जैन ने की है. घटना के वक्त वह अपने घर में मौजूद था. रावतमल जैन और सूरजी देवी का कत्ल पहली जनवरी, 2018 को सुबह पौने 6 बजे हुआ था.

‘‘उस के पहले सूरजी देवी ने अपने नाती सौरभ को फोन कर दिया था. सौरभ गौलछा 6 से 7 मिनट के भीतर ही घटनास्थल पर पहुंच गया, उस वक्त वहां केवल 3 व्यक्ति मौजूद थे. रावतमल जैन, उन की पत्नी सूरजी देवी व उन का बेटा संदीप जैन.

‘‘रावतमल जैन और सूरजी देवी की गोली लगने से मौत हो चुकी थी, बचा केवल संदीप. इसी से यह सिद्ध हो गया है कि हत्यारा संदीप जैन ही है. इसी ने अपने मातापिता की गोली मार कर हत्या की है. मैं माननीय न्यायाधीश से यह गुजारिश करता हूं कि वह ऐसे निर्दयी और क्रूर बेटे संदीप जैन को कड़ी से कड़ी सजा दे. इसे अपने मांबाप की हत्या करने के लिए मृत्युदंड से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए.’’

माननीय न्यायाधीश शैलेष कुमार तिवारी ने कटघरे में खड़े अभियुक्त संदीप जैन पर एक उचटती सी नजर डालने के बाद गंभीर स्वर में कहा, ‘‘काफी लंबी बहस, गवाह और पुख्ता साक्ष्य से यह सिद्ध हो गया है कि रावतमल जैन और उन की पत्नी सूरजी देवी को जिस घर में गोली मारी गई, उस में प्रवेश करने के लिए न रस्सा मिला और न ही कोई सीढ़ी मिली, जिन के सहारे घर में पहुंचा जा सके. चौकीदार रोहित देशमुख ने अपने बयान में कोर्ट को बताया है कि वह कत्ल वाली रात अपनी ड्यूटी पर इसलिए मौजूद नहीं था कि उसे स्वयं अभियुक्त संदीप ने उस रात ड्यूटी पर आने से मना किया था.

‘‘अभियुक्त ने सोचीसमझी योजना के तहत 27 दिसंबर, 2017 को अपनी पत्नी, बच्चे को अपनी ससुराल भेज दिया था. उस ने ऐसा इसलिए किया कि उसे अपने पिता और मां का कत्ल करने के लिए रास्ता साफ मिले. गवाहों के बयान और सबूतों से यही सिद्ध होता है कि संदीप जैन ही अपने मांबाप के कत्ल का दोषी है. इस ने पूरी योजना बना कर इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया.’’

मांबाप के हत्यारे को सुनाई फांसी की सजा

खुद पर दोष साबित होते ही कटघरे में खड़े संदीप जैन का पूरा शरीर कांपने लगा. थोड़ी ही देर में वह गश खा कर कटघरे में ही गिर पड़ा और बेहोश हो गया.

न्यायाधीश शैलेष कुमार तिवारी यह देख रहे थे. तब उन्होंने शाम के 4 बजे इस केस का फैसला सुनाने के लिए कहा और उठ कर कोर्ट से अपने चैंबर में चले गए. यह बात 27 जनवरी, 2023 की है.

इस के बाद पुलिस वाले बेहोश संदीप जैन को होश में लाने का प्रयास करने लगे. कोर्टरूम के कटघरे में इस केस के 2 अन्य सहअभियुक्त भगत सिंह गुरुदत्ता और शैलेंद्र सागर भयभीत नजरों से सारा मंजर देख रहे थे.

शाम को 4 बजे फिर से माननीय न्यायाधीश शैलेष कुमार तिवारी की कोर्ट लगी. अभियुक्त संदीप जैन को कटघरे में लाया गया. न्यायाधीश तिवारी ने अपना फैसला सुनाना शुरू किया—

‘‘आज 23 जनवरी, 2023 का दिन है. आज से 5 साल पहले ऐसा ही पहली जनवरी 2018, नववर्ष की शुरुआत हुई थी. पूरा देश इस दिन हर्षोल्हास के साथ नववर्ष का स्वागत करता है, लेकिन संदीप जैन ने इस दिन अपने जन्मदाता रावतमल जैन और सूरजी देवी को गोलियों से भून कर उन की निर्मम हत्या कर दी.

‘‘ऐसा अपराध अत्यंत ही गंभीरतम, विरल से विरलतम एवं अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए क्रूरतम तरीके से किया गया. आरोपी संदीप जैन का यह कृत्य सामान्य हत्या के अपराधों से भिन्न है. यदि ऐसे अपराधों में अपराधी को कठोरतम दंड से दंडित नहीं किया जाएगा तो समाज का तानाबाना प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा.

प्यार में कुलांचें भरने की फितरत – भाग 1

कानपुर (देहात) जनपद के गजनेर थानांतर्गत भिलसी नाम का एक गांव बसा है. कालीचरन अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटियां और 2 बेटे थे. कालीचरन किसान था. उस के पास 3 बीघा उपजाऊ जमीन थी. कृषि उपज से ही वह परिवार का भरणपोषण करता था. अब तक उस ने अपनी 2 बेटियों की शादी कर दी थी.

सब से छोटी बेटी का नाम सरोजनी था. वह शादी लायक हुई तो मांबाप को उस की शादी की चिंता हुई. कालीचरन उस के लिए लड़का तलाशने लगा. उस की तलाश औरैया जिले के गांव रैपुरा में खत्म हुई. यहीं का रहने वाला दिनेश सरोजनी के लिए सही लगा तो उन्होंने उस की शादी दिनेश से कर दी.

सरोजनी भले ही साधारण परिवार की थी, लेकिन उस के मन में भी तमाम सपने थे. उसे उम्मीद थी कि पति के यहां उस के सारे सपने पूरे हो जाएंगे. जब वह ससुराल गई तो पता चला कि ससुराल में सास जमुना का हुक्म चलता है. वही सब को इधर से उधर नचाती है.

दिनेश दिबियापुर कस्बे में एक आढ़त पर काम करता था. वह कईकई दिनों बाद घर आता था. जब भी घर आता, शराब की बोतल ले कर आता. जब तक यहां रहता, दिन भर घर के बाहर ही रहता. सरोजनी को बहुत जल्दी ही पता चल गया कि दिनेश न केवल दारूबाज है, बल्कि चरित्रहीन भी है.

शादी के एक सप्ताह बाद ही सरोजनी को गृहस्थी की सारी जिम्मेदारी मिल गई. वह अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा भी रही थी, लेकिन सास जमुना की चिकचिक उसे चैन नहीं लेने देती थी. घर पर दिनेश होता तब भी, न होता तब भी. वह उसे छोटीछोटी बातों पर डांटती रहती थी.

एक दिन दिनेश शराब पी कर आया तो सरोजनी ने उसे प्यार व तकरार से समझाया. यह तकरार सास ने सुन ली तो गुस्से में बोली, ‘‘तेरा बाप तो इसे शराब ला कर देता नहीं. अपनी कमाई से पीता है. फिर इस में तुझे क्या परेशानी है?’’

‘‘सासू मां, शराब पीना अच्छी बात नहीं. फिर मुझे बदबू भी आती है,’’ सरोजनी ने कहा.

सरोजनी की यह बात दिनेश को इसलिए बुरी लगी, क्योंकि उस ने मां की बात का जवाब दिया था.

उस ने सरोजनी के बाल पकड़े और घसीटता हुआ कमरे में ले गया. इस के बाद उस की जम कर पिटाई की. अभी शादी को एक महीना भी नहीं बीता था कि पति ने उस पर हाथ उठा दिया था.

उस दिन के बाद दिनेश शराब पी कर किसी न किसी बात पर उस की पिटाई करने लगा. सरोजनी को लगा कि दिनेश के साथ जीवन बिताना संभव नहीं है. उस ने निश्चय कर लिया कि वह मायके जाने के बाद दोबारा ससुराल नहीं आएगी.

रक्षाबंधन का त्यौहार आया तो उस का भाई उसे अपने साथ लिवा लाया. मायके में सरोजनी को उदास देख कर एक दिन उस की मां जयदेवी ने उदासी का कारण पूछा तो उस ने बताया कि दिनेश अच्छा इंसान नहीं है. वह शराब पीता है और उस के साथ मारपीट करता है. इसलिए अब वह उस के साथ रहना नहीं चाहती.

तलाक के बाद बेटी की कर दी दूसरी शादी

बेटी की बात सुन कर जयदेवी परेशान हो उठी. शाम को कालीचरन लौटा तो उस ने सारी बात उसे बताई. बेटी के साथ ज्यादती की बात सुन कर कालीचरन भड़क उठा. उस ने कहा हम ने तो कभी बेटी को डांटा तक नहीं और वह उसे पीटता है. उस की यह ज्यादती बरदाश्त के बाहर है.

कुछ दिन बाद दिनेश पत्नी को विदा कराने ससुराल पहुंचा, लेकिन सरोजनी ने उस के साथ जाने से साफ मना कर दिया. दिनेश अपमानित हो कर वापस घर आ गया. इस के बाद दिनेश कई बार ससुराल गया. पत्नी से मिन्नतें कीं, लेकिन सरोजनी टस से मस नहीं हुई. आखिर सहमति से दोनों का तलाक हो गया.

मायके में सरोजनी तो खुश थी, लेकिन कालीचरन की आंखों की नींद हराम थी. वह तलाकशुदा बेटी का घर बसाना चाहता था, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी. कई महीनों की दौड़धूप के बाद उसे ललित पासवान पसंद आ गया.

ललित पासवान कानपुर शहर से 15 किलोमीटर दूर विधनू कस्बे का रहने वाला था. वह कस्बे के तुलसियापुर (नई बस्ती) मोहल्ले में रहता था. यहां उस का अपना निजी मकान था. मकान के भूतल पर उस की किराने की दुकान थी. ललित दुजहा था. यानी उस की शादी पासी खेड़ा (भीतर गांव) निवासी गीता के साथ हुई थी.

गीता से एक बेटी अनन्या थी. अनन्या जब 5 साल की थी, तभी बीमारी के दौरान गीता की मौत हो गई. ललित को बेटी के पालनपोषण में दिक्कत हो रही थी, सो वह शादी के लिए लालायित था.

ललित और सरोजनी की उम्र में लगभग 10 साल का अंतर था. इस के बाद भी कालीचरन अपनी बेटी का विवाह ललित के साथ करने को राजी हो गया था. उस के 2 कारण थे. पहला कारण यह था कि उस की बेटी सरोजनी भी तलाकशुदा थी.

दूसरा कारण था कि कालीचरन को भय सता रहा था कि बेटी के कदम डगमगा गए तो समाज में उस की बदनामी होगी. अत: खामियों के बावजूद कालीचरन ने 10 जनवरी, 2017 को अपनी बेटी सरोजनी का विवाह ललित पासवान के साथ कर दिया.

शादी के बाद सरोजनी ललित की दुलहन बन कर ससुराल आ गई. उन्होंने बड़े प्यार से जिंदगी की शुरुआत की. दोनों एकदूसरे को असीम प्यार करते थे. ललित सरोजनी की हर जरूरत पूरी करता था. सरोजनी भी ललित की खूब सेवा करती थी. ललित के प्यार में वह इस कदर डूब गई थी कि अपने मांबाप को भी भूल गई थी.

सरोजनी सुंदर होने के साथ तेजतर्रार भी थी, इसलिए ललित उस से दबादबा सा रहता था. कुछ ही दिनों के बाद सरोजनी पति को अपनी अंगुलियों पर नचाने लगी थी. किराने की दुकान से होने वाली आमदनी तथा खेती से होने वाली आमदनी का हिसाब वह खुद रखने लगी थी. उस ने कस्बे की बैंक में बचत खाता भी खोल लिया था.

ललित के परिवार वालों का मानना था कि ललित की दूसरी पत्नी उस की बेटी अनन्या का पालनपोषण ठीक से नहीं करेगी और उस के साथ सौतेला व्यवहार करेगी. लेकिन उन का यह सोचना गलत साबित हुआ. सरोजनी अनन्या का पालनपोषण बड़े लाड़प्यार से कर रही थी. वह उसे अपनी बेटी जैसा व्यवहार कर रही थी.

वह अनन्या की हर जिद पूरी करती थी. अनन्या सरोजनी को मम्मी ही कहती थी. उसे कभी एहसास ही नहीं हुआ कि वह उस की सौतेली मां है. लाड़प्यार और खानपान का ही परिणाम था कि अनन्या अपनी उम्र से अधिक की दिखने लगी थी.

बीवी ने मरवाया अमीर पति को – भाग 1

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का एक बड़ा व्यावसायिक कस्बा है-बिंदकी. इसी कस्बे के कजियानी मोहल्ले में जगदीश गुप्ता अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी माधुरी देवी के अलावा एक बेटा अमित गुप्ता व बेटी अनीता थी. जगदीश गुप्ता व्यापारी थे. उपजाऊ जमीन भी उन के पास थी, जिस से उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. कस्बे में वह प्रतिष्ठित व्यवसाई थे. धर्मकर्म में भी उन की रुचि थी और असहाय लोगों की मदद भी करते रहते थे.

जगदीश गुप्ता ने बड़ी बेटी अनीता का विवाह संपन्न घर में कर दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश वह शादी के कुछ सालों बाद ही विधवा हो गई. तब वह 2 बच्चों के साथ मायके में आ कर ही रहने लगी थी. जगदीश व उन की पत्नी माधुरी देवी उस का पूरा खर्च उठाती थी. उसे किसी चीज की कमी नहीं होने देते थे.

जगदीश कुमार का बेटा अमित कुमार तेज दिमाग का था. वह पढ़लिख कर पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाने लगा. बेटे के साथ देने पर जगदीश कुमार का व्यवसाय और भी बढ़ गया. उधार की रकम वसूलने के लिए अब अमित ही जाने लगा.

एक रोज अमित बाइक से तगादे पर जा रहा था. तभी स्टेशन रोड पर खड़ी एक युवती ने उसे रुकने का इशारा किया. उस खूबसूरत युवती को देख कर अमित ने अपनी बाइक रोक दी. युवती बोली, ‘‘मेरा नाम पूनम कुशवाहा है. मैं कालेज में पढ़ती हूं. काफी देर से आटो का इंतजार कर रही हूं, लेकिन कोई आटो वाला इधर से आ ही नहीं रहा है. आप मुझे कालेज तक छोड़ देंगे तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’

‘‘ठीक है, बैठिए.’’ कह कर अमित ने पूनम को बाइक पर बिठा लिया और उस के कालेज की तरफ चल पड़ा. स्टेशन रोड से कालेज तक वह उस से बातें करती रही. एक मिनट के लिए भी उस का मुंह बंद नहीं हुआ. जिस तरह वह उस से मुसकरामुसकरा कर बातें कर रही थी, उस से अमित बहुत प्रभावित हुआ. बाइक चलातेचलाते वह सामने लगे मिरर में उस का चेहरा देखते हुए उस की बातों का जवाब देता रहा. बातोंबातों में उस ने पूनम का मोबाइल नंबर ले लिया.

पूनम से हुई पहली मुलाकात में ही अमित जैसे उस का दीवाना हो गया. उस का फोन नंबर तो उस के पास था ही, इसलिए जब भी उस का मन करता, फोन पर बातें कर लेता. पूनम को भी अमित से बातें करना अच्छा लगता था. धीरेधीरे उन दोनों के बीच दोस्ती हो गई. यही दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई. दोनों ही एकदूसरे को चाहने लगे.

पूनम के पिता नरेश कुशवाहा बिंदकी कस्बे में ही रहते थे. उन की 2 बेटियां नीलम व पूनम थीं. नीलम की शादी वह फतेहपुर जिले के चमनगंज निवासी राम खेलावन कुशवाहा  के साथ कर चुके थे. पूनम पढ़ रही थी.

लव मैरिज से मांबाप का टूटा दिल

इधर पूनम और अमित का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों ने शादी रचाने का मन बना  लिया. दोनों के घरवालों को शादी करने की बात पता चली तो उन के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. जगदीश गुप्ता रसूखदार व्यक्ति थे. वह बेटे की शादी बड़ी धूमधाम से किसी व्यापारी घराने की लड़की से करना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उन का बेटा किसी विजातीय लड़की से इश्क कर बैठा है और उसी से शादी करना चाहता है तो उन के दिल को ठेस लगी.

चूंकि अमित गुप्ता पूनम के प्यार में आकंठ डूबा था, इसलिए घर वालों की मरजी के बिना ही उस ने पूनम के साथ प्रेम विवाह कर लिया. यह सन 2011 की बात है.

शादी के बाद पूनम अमित की दुलहन बन कर ससुराल आ गई. थोड़ी नाराजगी के साथ माधुरी व जगदीश गुप्ता ने भी पूनम को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया. पूनम ने भी एक आदर्श बहू की तरह घर का कामकाज संभाल लिया और पति तथा सासससुर की सेवा करने लगी. हंसीखुशी से 4 साल बीत गए. इन 4 सालों में पूनम एक बेटे व एक बेटी की मां बन गई.

पूनम 2 बच्चों की मां जरूर बन गई थी, लेकिन गाय की तरह एक खूंटे से बंधना उसे पसंद नहीं था. इसलिए वह अपने यारदोस्तों से फोन पर बतियाती रहती थी. खासकर वह अपने जीजा रामखेलावन से फोन पर खूब बतियाती थी, उस से हंसीमजाक करती थी.

पूनम की सास माधुरी को यह सब पसंद नहीं था. वह उसे टोकती तो कहती, ‘‘सासू मां, जवानी में आप ने भी तो घाटघाट का पानी पिया होगा. कितनों पर बिजलियां गिराई होंगी. फिर मुझे क्यों टोक रही हो. कुछ दिन ऐश की जिंदगी जीने दो.’’

बहू की बात सुन कर माधुरी सन्न रह गईं. वह जान गईं कि पूनम खेलीखाई है. उन्होंने उस के मुंह लगना उचित नहीं समझा. हां, इतना जरूर हुआ कि उन का बहू पर से विश्वास उठ गया. भाभी द्वारा मां की बेइज्जती अनीता को बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने पूनम को लताड़ा और मां से माफी मांगने को कहा तो पूनम ने उस की बेइज्जती कर दी.

मां, बहन से ऊलजुलूल बातों की जानकारी अमित को हुई तो उस ने पूनम की जम कर खबर ली. लेकिन चालाक पूनम ने घडि़याली आंसू बहा कर पति के गुस्से को ठंडा कर दिया. इन्हीं दिनों जगदीश गुप्ता की बीमारी से मौत हो गई. पिता की मौत के बाद परिवार का सारा बोझ अमित पर ही आ गया था. वह व्यापार बढ़ाने की सोचने लगा.

अमित कुमार गुप्ता का एक परिचित भिवंडी (मुंबई) में रहता था. वहां वह किराए का कारखाना ले कर धागा बनाने का काम करता था. इस व्यवसाय से वह अच्छा कमाता था. अमित ने भी इसी व्यवसाय से जुड़ने का मन बनाया.

इस के लिए उस ने अपने परिचित से संपर्क बनाया, फिर उस की मदद से धागा बनाने वाली मशीनें व कारखाना किराए पर ले कर धागा बनाने का काम शुरू कर दिया. शुरू में अमित को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, उस के बाद सब कुछ ठीक हो गया. धागे का काम सुचारु रूप से चलने लगा और कमाई भी होने लगी.

कहते हैं, जब इंसान का सितारा बुलंद होता है तो तरक्की की राहें अपने आप खुलती जाती हैं. अमित के साथ भी ऐसा ही हुआ. उस का धागे का काम तो चल ही रहा था, इसी बीच उसे मिडडे मील का काम भी मिल गया. अमित ने शुद्धता और बेहतर क्वालिटी के साथ मिडडे मील का वितरण कराया तो उस की धाक जम गई. अब उसे इस काम में भी आमदनी होने लगी.

इधर अमित मुंबई गया तो पूनम को आजादी के पंख लग गए. उस का जीजा रामखेलावन भी अब उस की ससुराल आने लगा था. उन दोनों के जिस्मानी संबंध भी बन गए.

अधूरे रह गए अरमान

6 जनवरी, 2018 को मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के बेरछा थाने के थानाप्रभारी उदय सिंह अपने औफिस में बैठे थे. तभी मालीखेड़ी की आदर्श कालोनी का रहने वाला मुकेश नाम का युवक उन के पास आया. उस ने बताया कि उस के छोटे भाई रमेश का 10 महीने का बेटा अनमोल घर से अचानक गायब हो गया है.

उस ने कहा कि शाम 6 बजे तक अनमोल घर पर ही था. उस की मां शीला खाना बना रही थी. खाना बनाने के बाद जब वह बच्चे को दूध पिलाने के लिए आई तो वह बिस्तर से गायब मिला. घर में जितने भी लोग थे, सभी से पूछा पर बच्चे का पता नहीं चला.

मुकेश की बात सुन कर थानाप्रभारी भी चौंक गए कि 10 महीने का बच्चा घर वालों के बीच से आखिर कैसे गायब हो गया. वह अपने आप तो कहीं जा नहीं सकता था और घर में कोई बाहरी व्यक्ति आया नहीं तो वह कहां चला गया.

बहरहाल, उन्होंने मुकेश की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर सूचना आला अधिकारियों को दे दी.

एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने अपहरण के इस केस को सुलझाने के लिए रात में ही एसडीपीओ रवि सिंह अंब की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई, जिस में थानाप्रभारी उदय सिंह, आरक्षक विनोद शर्मा, महेश यादव, अनिल मंडलोई, विक्रम धनवाल, निलेख क्षोत्रिय, सोहन पटेल, महिला आरक्षक मंजू कुमारी, साइबर सेल के भूपेंद्र सिंह आदि को शामिल किया गया. टीम के निर्देशन की जिम्मेदारी एडीशनल एसपी ज्योति ठाकुर को दी गई. यह टीम रात में ही अनमोल की खोज में जुट गई.

एसडीपीओ रवि सिंह अंब ने जब परिवार वालों से विस्तार से बात की तो मुकेश ने बताया कि शाम के लगभग 6 बजे अनमोल झूले में सो रहा था. 3 दिन पहले उस की बहन का बेटा राकेश सिंह देवास से उन के घर आया हुआ है. वह अनमोल को झूले से उठा कर ऊपर गैलरी में ले गया. गैलरी में मेरा छोटा भाई राकेश भी था. भांजा और भाई दोनों अनमोल को काफी देर तक खेलाते रहे.

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इस के बाद भांजा राकेश सिंह यह कहते हुए अनमोल को ले कर नीचे आ गया कि ऊपर बहुत ठंड बढ़ गई है, इसे नीचे मामी को दे कर आता हूं. फिर वह अनमोल को ले कर नीचे आया. इस के कुछ देर बाद दूध पिलाने के लिए जब अनमोल की मां शीला कमरे में आई तो अनमोल वहां नहीं मिला.

जाहिर है कि आखिरी बार अनमोल मुकेश के भांजे राकेश सिंह की गोद में था, इसलिए पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि छत से नीचे आने के बाद उस ने अनमोल को झूले में सुला दिया था. अनमोल को सुलाने के बाद वह वापस गैलरी में चला गया था.

राकेश सिंह की यह बात एसडीपीओ रवि सिंह अंब के गले नहीं उतरी. दूसरे सब से बड़ी बात यह थी कि राकेश सिंह जब अनमोल को गैलरी से लाया था, तब अनमोल जाग रहा था. उसे झूले में सुलाते हुए घर के किसी सदस्य ने नहीं देखा था.

अगर मान भी लिया जाए कि उस ने ऐसा किया था तो गौर करने वाली बात यह थी कि 10 महीने का अनमोल खुद तो झूले से नीचे उतर नहीं सकता था. दूसरे झूला घर के अंदर ऐसी जगह पर था, जहां आ कर कोई बाहरी इंसान आसानी से उसे ले कर घर से बाहर नहीं जा सकता.

एसडीपीओ आर.एस. अंब ने राकेश सिंह का मोबाइल फोन चैक किया तो पता चला कि उस ने अपनी सारी काल हिस्ट्री डिलीट कर दी थी. इस से राकेश सिंह पूरी तरह से पुलिस के शक के घेरे में आ गया. एसडीपीओ रवि सिंह अंब ने एडीशनल एसपी ज्योति ठाकुर को यह सारी बात बताई तो उन्होंने राकेश सिंह की काल डिटेल्स निकलवाने के अलावा उस से सख्ती से पूछताछ करने को कहा.

पुलिस टीम राकेश सिंह को थाने ले आई. जब राकेश सिंह से गंभीरता से पूछताछ की तो वह ज्यादा देर तक नहीं टिक सका. उस ने अनमोल के अपहरण की बात स्वीकार करते हुए बता दिया कि इस समय अनमोल देवास में अमृता शर्मा के पास है. अमृता उस के साथ ही काम करती है.

एसडीपीओ रवि सिंह अंब के निर्देश पर थानाप्रभारी उदय सिंह के नेतृत्व में पुलिस देवास के लिए निकल गई. टीम ने राकेश सिंह को भी अपने साथ ले लिया था.

अमृता शर्मा घर पर ही मिल गई. उस की निशानदेही पर पुलिस ने 10 महीने के अनमोल को सुरक्षित बरामद कर लिया. पुलिस ने अमृता के पति गगन शर्मा को भी हिरासत में ले लिया. बेरछा थाने ले जा कर जब उन सब से विस्तार से पूछताछ की गई तो अनमोल के अपहरण की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

मालीखेड़ी निवासी मुकेश कारपेंटर के परिवार की गिनती क्षेत्र के अच्छे परिवारों में होती थी. मुकेश अपने छोटे भाई राकेश के साथ रहता था. संयुक्त परिवार में दोनों ही खुश थे. मुकेश की बहन का एक बेटा था राकेश सिंह, जो देवास में स्थित रैनबैक्सी कंपनी में नौकरी करता था.

राकेश सिंह की संगत ठीक नहीं थी. वह आवारा, नशेड़ी किस्म का था, इसलिए अनेक रिश्तेदार उस से दूरी बना कर रहते थे. लेकिन बहन का बेटा होने के कारण मुकेश के परिवार में राकेश को भांजे की तरह मानसम्मान और प्यार दिया जाता था. इसलिए राकेश अपने मामा के घर आताजाता रहता था.

राकेश जिस रैनबैक्सी कंपनी में काम करता था, उसी में अमृता शर्मा भी नौकरी करती थी. वह बेहद सुंदर थी, इसलिए राकेश उस से दोस्ती बनाने के चक्कर में लगा रहता था. इसी कारण उस ने अमृता के पति गगन से भी गहरी दोस्ती कर ली थी. गगन इंदौर के एक निजी अस्पताल में काम करता था.

अमृता राकेश की नीयत व हावभाव को समझती थी, इसलिए वह राकेश से हद में रह कर बात करती थी. जबकि राकेश को विश्वास था कि एक न एक दिन अमृता के साथ हुई उस की दोस्ती प्यार में बदल जाएगी.

इस दौरान अमृता ने इंदौर में एक मकान खरीद लिया, जिस से उस पर काफी कर्ज हो गया था. राकेश तो था ही अय्याश प्रवृत्ति का. अमृता को पाने के चक्कर में वह उस के ऊपर काफी पैसे बरबाद कर चुका था. इस से उस पर भी लाखों रुपए का कर्ज हो चुका था.

राकेश भले ही कर्ज में था पर उस के दिमाग पर यही चढ़ा हुआ था कि वह अमृता का कर्ज उतारने में उस की किस तरह मदद कर सकता है. उसे उम्मीद थी कि अगर ऐसा हो गया तो अमृता उस के करीब आ सकती है. इसलिए वह अमृता की मदद करने की योजना बनाने लगा.

अब वह यही सोचने लगा कि इतनी मोटी रकम वह कहां से लाए. तभी उस के दिमाग में आया कि यदि वह अपने छोटे मामा राकेश कुमार के बेटे अनमोल का अपहरण कर ले तो उस के दोनों मामा मिल कर आसानी से 20-25 लाख रुपए की फिरौती तो दे ही देंगे.

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उस ने यह बात अमृता को बताई. अमृता खुश हो गई. उस ने राकेश सिंह से कहा, ‘‘अगर तुम किसी तरह से मेरे ऊपर चढ़े कर्ज से छुटकारा दिलवा दोगे तो तुम मुझ से जो कहोगे, मैं करने को तैयार हूं.’’

‘‘सोच लो, बाद में बदल मत जाना.’’ राकेश ने अपना मतलब सीधा होते देख अमृता से कहा.

‘‘देखो, मैं अपने वादे से पीछे नहीं हटूंगी और मैं योजना को अंजाम देने में भी तुम्हारा हर तरह से सहयोग करने को तैयार हूं.’’

अमृता द्वारा अनमोल के अपहरण में साथ देने की बात सुन कर राकेश खुश हो गया. इस के बाद दोनों अनमोल के अपहरण की योजना बनाने में जुट गए. इस बारे में अमृता ने पति गगन से बात की तो वह भी साथ देने को तैयार हो गया.

योजना में तय हुआ कि राकेश अपने छोटे मामा राकेश कुमार के 10 महीने के बेटे अनमोल का अपहरण कर के अमृता को दे देगा. फिर अमृता पति के साथ अनमोल को कार से देवास ले जाएगी. जिस के बाद तीनों मिल कर अनमोल के बदले 25 लाख की फिरौती वसूल कर लेंगे. यह भी तय हो गया कि फिरौती की रकम राकेश अकेला खुद ले कर आएगा.

योजना के अनुसार, राकेश सिंह कुछ दिन पहले अपने साथ अमृता को ले कर अपने मामा राकेश कुमार के यहां बेरछा आ गया.

मामा से उस ने कहा कि वे दोनों भोपाल से लौटते हुए काफी थक गए हैं, इसलिए रात में यहीं रहेंगे. इस पर मामामामी को भला क्या ऐतराज हो सकता था. इसलिए उन्होंने अपने भांजे राकेश व उस के साथ आई अमृता की खूब खातिरदारी की.

इस दौरान अमृता राकेश के छोटे बेटे अनमोल को खूब खेलाती रही, ताकि वह उसे अच्छी तरह से पहचानने लगे. अमृता और राकेश 2 दिन बेरछा में रहे और लगातार अनमोल को लाड़प्यार करते रहे.

अमृता ने राकेश कुमार के घर के आगेपीछे के रास्तों को भी अच्छी तरह से देख लिया था.

इस के बाद घटना से 3 दिन पहले योजना बना कर राकेश बेरछा आ गया. फिर 6 जनवरी, 2018 को गगन और अमृता अपनी मारुति कार ले कर देवास से निकले.

बेरछा पहुंच कर गगन कुछ दूरी पर कार ले कर खड़ा हो गया, जबकि अमृता अंधेरा होने पर पैदल चल कर राकेश के मामा के घर के पिछवाड़े पहुंच कर खड़ी हो गई.

उस के बाद उस ने राकेश को मिस काल की तो राकेश गैलरी से अनमोल को ले कर नीचे आ गया और उसे अमृता को सौंप दिया. जहां से अमृता उसे पति के साथ ले कर देवास आ गई.

25 लाख रुपए मिलने के सपने देखते हुए वह कार में पति को प्यार करते हुए लिपट गई. दोनों को उम्मीद थी कि अब उन का कर्ज जल्द उतर जाएगा. इधर राकेश अमृता से प्यार के सपने देख रहा था.

उसे उम्मीद थी कि इस अहसान के बदले अमृता उसे किसी बात के लिए इंकार नहीं करेगी. परंतु पुलिस ने अनमोल को सकुशल बरामद कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर के उन के अरमानों पर पानी फेर दिया.

एसपी शैलेंद्र सिंह ने इस केस को सुलझाने वाली पुलिस टीम के कार्य की सराहना की. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

पति के बर्थडे पर पत्नी ने दिया मौत का तोहफा

मूल रूप से चमौली, उत्तराखंड का रहने वाला यशपाल मध्य प्रदेश के पीथमपुर इलाके में बनी सिप्ला दवा कंपनी में काम करता था. यशपाल ने पूजा से पहले प्यार किया, फिर घर वालों के भारी विरोध के बाद उस ने पूजा से शादी की थी. यशपाल और पूजा एक ही कालेज में पढ़ते थे. इस दौरान दोनों में अच्छी दोस्ती थी.

एक दिन पूजा अचानक गश खा कर गिर पड़ी. डाक्टरों ने जांच कर पूजा के दिल में दिक्कत बताई. डाक्टरों के मुताबिक, उस के एक वौल्व में छेद था. जो ठीक तो हो सकता था, पर इस के लिए लंबा समय और महंगी दवा की जरूरत थी. पूजा की बीमारी जान कर यशपाल बहुत दुखी हुआ. पूजा की बीमारी जानने के बावजूद यशपाल ने उस से शादी का प्रपोजल रखा, जिसे पूजा ने तुरंत मान लिया. इस के बाद उन दोनों की प्रेम कहानी की चर्चा पूरे कालेज में होने लगी.

साल 2011 में यशपाल की नौकरी सिप्ला दवा कंपनी, इंदौर में लग गई. नौकरी के बाद जब शादी की बात आई, तो यशपाल के घर वाले लड़की देखने लगे. यशपाल ने कहा कि वह अपनी गर्लफ्रैंड पूजा से ही शादी करेगा.

यशपाल ने घर वालों से पूजा के दिल की बीमारी की बात नहीं छिपाई. पूजा की बीमारी जान कर घर वालों ने यशपाल को काफी समझाने की कोशिश की, पर उस ने किसी की एक न सुनी.

आखिरकार यशपाल की जिद के आगे घर वालों को झुकना पड़ा. साल 2012 में यशपाल और पूजा की शादी बड़े धूमधाम से हो गई. शादी के बाद यशपाल पूजा को ले कर इंदौर आ गया. वह इंदौर के एबी रोड पर राऊ इलाके में ओमप्रकाश चौधरी के मकान में किराए पर रहने लगा.

इंदौर का राऊ इलाका धूल, धुआं और शोरशराबे वाला इलाका है. पूजा को दिल की बीमारी थी, इसलिए प्रदूषण की वजह से उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी. उसे दिखाने पर डाक्टर ने कहा कि पूजा को अगर सेहतमंद देखना चाहते हो, तो उसे किसी हिल स्टेशन पर ले जाओ.

यशपाल पहाड़ी इलाके का रहने वाला था. उस ने देहरादून में अपने मामा के घर के पास ही एक मकान किराए पर ले कर पूजा को वहां शिफ्ट कर दिया. पूजा देहरादून में अकेले रहने लगी. इधर इंदौर में यशपाल पूजा के इलाज के लिए पैसे जुटाने में लग गया. वह हर महीने पूजा से मिलने देहरादून आता था. डाक्टरी चैकअप के बाद उस की दवा वगैरह का इंतजाम कर के फिर इंदौर लौट आता. यह सिलसिला पिछले 3 सालों से चल रहा था.

यशपाल पूजा को खुश देखना चाहता था. पूजा ने भी यशपाल को प्यार देने में कोई कमी नहीं रखी. टाइमपास करने के लिए पूजा अपना समय इंटरनैट पर गुजारने लगी. उस ने फेसबुक पर अंजलि के नाम से अकाउंट खोल लिया.

बस, यहीं से उस का मन बहकने लगा. वह फेसबुक पर नएनए लड़कों से चैटिंग करने लगी. पूजा जिन लड़कों से चैटिंग करती थी, उन में कोटा, राजस्थान का रहने वाला करन सिंह सिद्धू भी था. धीरेधीरे उन की फेसबुक की दोस्ती प्यार में बदल गई. इस के बाद दोनों मोबाइल फोन पर घंटों बातें करने लगे. जब करन को यह पता चला कि पूजा देहरादून में अकेली रहती है, तो उस ने मिलने की इच्छा जाहिर की.

पूजा ने तुरंत करन सिंह को अपना पता दे दिया. पता मिलते ही वह देहरादून पहुंच गया. करन सिंह रात में पूजा के घर पर ही रुका. दोनों में उसी रात सैक्स संबंध बन गए. इस के बाद तो करन सिंह अकसर उस से मिलने कोटा से देहरादून पहुंचने लगा.

पूजा करन सिंह को दिलोजान से इतना चाहने लगी कि अब उसे यशपाल का प्यार फीका लगने लगा था. वह यशपाल को छोड़ कर करन सिंह के साथ घर बसाने की सोचने लगी.

करन सिंह भी पूजा के प्यार में पागल था. उसे पूजा के रूप में सोने के अंडे देने वाली मुरगी मिल गई थी. पूजा उसे प्यार और सैक्स के अलावा पैसा भी देती थी. उधर यशपाल पूजा की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहा था. इस का उसे मलाल था. इस के लिए उस ने इंदौर की दवा कंपनी सिप्ला को छोड़ने का फैसला लिया. यही फैसला उस के लिए जन्मदिन पर मौत का तोहफा साबित हुआ.

पूजा के पास वह रह सके और उस की देखभाल कर सके, इस के लिए यशपाल ने देहरादून की दवा कंपनी में नौकरी के लिए अर्जी दी.चूंकि यशपाल को सिप्ला जैसी अच्छी दवा कंपनी में काम करने का तजरबा था. सो, उसे देहरादून में एक दवा कंपनी में नौकरी मिल गई. उसे 1 जुलाई को कंपनी जौइन करनी थी.

यह खुशखबरी उस ने पूजा को सुनाई, तो वह खुश होने के बजाय दुखी हो गई.  जाहिर सी बात थी, यशपाल के देहरादून आने के बाद करन सिंह के साथ ऐयाशी कर पाना उस के लिए मुश्किल हो जाएगा. उस ने तुरंत करन सिंह को देहरादून बुलाया. पूजा ने उस से कहा कि अगर वह आगे भी उस से जिस्मानी संबंध बनाए रखना चाहता है, तो यशपाल के देहरादून पहुंचने से पहले ही उसे ठिकाने लगाना होगा.

पहले तो यह सुन कर करन सिंह चौंका, पर जब पूजा ने यशपाल को रास्ते से हटाने का प्लान बताया, तो उसे सुन कर करन सिंह राजी हो गया. 20 जून की सुबह इंदौर पुलिस ने यशपाल को अपने कमरे में मरा पाए जाने की बात बताई. यशपाल की मौत की खबर मिलते ही उस का भाई हरी सिंह, ताऊ आनंद सिंह, जीजा व दूसरे रिश्तेदार इंदौर पहुंच गए.

पूजा को भी यशपाल की मौत की सूचना मिल चुकी थी. वह भी इंदौर पहुंच गई. उस का रोतेरोते बुरा हाल था. पूजा की हालत देख कर यशपाल के घर वाले आंसू रोक न सके.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाने के बाद यशपाल की लाश उस के परिवार वालों को दे दी गई. लेकिन अंतिम संस्कार से लौटते ही पुलिस ने पूजा को यशपाल की हत्या के आरोप में हिरासत में ले लिया. यशपाल के घर वालों ने इस का विरोध किया. पूजा भी इस बात से इनकार करती रही.

शाम तक पुलिस टीम करन सिंह को राजस्थान के हनुमानगढ़ से गिरफ्तार कर उसे इंदौर ले कर पहुंची. करन सिंह को अपने सामने देख पूजा टूट गई.

पूजा ने बताया कि यशपाल से दूर रहने के बाद वह करन सिंह से प्यार करने लगी थी. वह यशपाल से अलग हो कर करन सिंह के साथ घर बसाना चाहती थी. जब यशपाल ने फोन पर उसे बताया कि वह देहरादून की कंपनी में 1 जुलाई से जौइन करने वाला है, तो वह चौंक गई. वह हर हाल में करन सिंह को पाना चाहती थी, इसलिए उस ने यशपाल से छुटकारा पाने का प्लान बना लिया.

20 जून को यशपाल का बर्थडे था. प्लान के मुताबिक, पूजा ने यशपाल से फोन पर कहा कि वह इस बार उस के बर्थडे पर एक खास तोहफा देना चाहती है. यह तोहफा उस का फेसबुक फ्रैंड करन सिंह 19 तारीख की रात को ले कर पहुंच जाएगा. यशपाल ने पूजा से बारबार पूछा, वह तोहफे में क्या दे रही है, यह बता दे. पूजा ने सस्पैंस है कह कर उसे चुप करा दिया.

यशपाल की पत्नी पूजा उसे पहली बार उस के बर्थडे पर तोहफा भेजने वाली थी. वह तोहफे में क्या देने वाली है, इसी सोच में वह कई दिनों तक खोया रहा. वह 19 जून की रात को बेसब्री से इंतजार करने लगा.

यशपाल ने करन सिंह के लिए अपने ही घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी थी. 19 तारीख की रात को करीब 10 बजे करन सिंह यशपाल के घर पर पहुंचा. यशपाल ने उस का जोरदार स्वागत किया. दोनों बैठ कर देर रात तक शराब पीते रहे.

करन सिंह दिखावे के लिए शराब लेता रहा. उस ने यशपाल को जम कर शराब पिलाई. नशा होने की वजह से यशपाल बेहोश हो कर बिस्तर पर लुढ़क गया. मौका पा कर करन सिंह ने यशपाल के मुंह में रूई ठूंस दी, ताकि उस की आवाज न निकल सके. इस के बाद गला दबा कर उस की हत्या कर दी और बाहर से दरवाजे पर ताला लगा कर वहां से चला गया.

लेकिन करन सिंह और पूजा का एकसाथ रहने का प्लान धरा रह गया और वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए.