Crime Story in Hindi: देह व्यापार में प्यार की कोई जगह नहीं

Crime Story in Hindi: 10 नवंबर, 2016 को दोपहर के करीब 2 बजे राजस्थान के जिला राजसमंद के थाना केवला की पुलिस को सूचना मिली कि उदयपुर से गोमती जाने वाले फोरलेन नेशनल हाईवे के किनारे पड़ासली भैरूंघाटी के पास एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी भरत योगी अधिकारियों को घटना के बारे में बता कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे. उन के पहुंचतेपहुंचते एसपी डा. विष्णुकांत भी मौके पर पहुंच गए थे.

लाश सड़क से 2 सौ मीटर की दूरी पर एक खाई में पड़ी थी. वह एक औरत की लाश थी, जो टीशर्ट और लैगिंग पहने हुए थी. मृतका का रंग गोरा, कद ठिगना तथा शरीर थोड़ा मोटा था. हाथ की अंगुलियों पर टैटू बने थे और नाखूनों पर नेलपौलिश लगी थी. बालों का रंग भूरा था, जिस से अंदाजा लगाया गया कि बालों पर कलर किया गया होगा. एक कान में बाली थी. गले पर गहरे जख्म थे. मृतका की उम्र 30-35 साल के बीच थी. लाश के पास बीयर की बोतलें पड़ी थीं. देख कर ही लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के लाश वहां ला कर फेंकी गई थी. पहनावे से मृतका मेवाड़ क्षेत्र की नहीं लग रही थी.

अनुमान लगाया गया कि मृतका किसी बड़े शहर की रहने वाली थी. आसपास बड़ा शहर उदयपुर था. गुजरात की सीमा भी नजदीक थी. पुलिस ने घटनास्थल से मिले सबूतों को जुटा कर आसपास के लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उस की शिनाख्त नहीं कर सका. इस के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए केवला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुर्दाघर में रखवा दिया. लाश देख कर डाक्टरों ने बताया कि मृतका की हत्या 10 से 15 घंटे पहले गला घोंट कर की गई थी. बाद में लाश को राजसमंद के सरकारी अस्पताल भिजवा दिया गया था. इसी के साथ लाश की शिनाख्त होने के बाद ही पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया गया.

पुलिस के सामने समस्या मृतका की शिनाख्त की थी. इस के लिए पुलिस ने लाश के फोटो व वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिए. इस के अलावा उदयपुर, प्रतापगढ़ और डूंगरपुर के सभी थानों को लाश के फोटो भेज कर कहा गया कि मृतका का पता लगाने की कोशिश करें. हो सकता है कहीं उस महिला की गुमशुदगी दर्ज हो. इसी के साथ ही हाईवे पर स्थित नेगडि़या और मांडावाड़ा टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली गईं.

मृतका की लाश के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से पुलिस को सूचनाएं मिलीं कि मृतका उदयपुर की हो सकती है. इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उदयपुर जा कर स्थानीय पुलिस की मदद ली. लाश मिलने के तीसरे दिन यानी 12 नवंबर को पता चला कि वह लाश रोमा उर्फ रेशमा की थी, जो मुंबई की रहने वाली थी. उदयपुर में रोमा जिस्मफरोशी करती थी. पुलिस ने जिस्मफरोशी करने वाली महिलाओं के संपर्क में रहने वाले कुछ लोगों से पता किया तो उन से रोमा का फोन नंबर मिल गया. उस नंबर को वाट्सऐप वाले दूसरे फोन पर डाला गया तो उस की डीपी में मृतका की तसवीर आ गई. वह लाश रोमा उर्फ रेशमा की ही थी.

इस के बाद पुलिस को यह भी पता चल गया कि रोमा उदयपुर में रेखा उर्फ पूजा छाबड़ा के लिए काम करती थी. रेखा उर्फ पूजा छाबड़ा का नाम उदयपुर पुलिस के लिए नया नहीं था. सैक्स रैकेट के मामले में वह उदयपुर की जानीमानी हस्ती थी. रोमा की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने उसे 12 नवंबर को हिरासत में लिया. उस से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के बडे़ बेटे अनिल और ड्राइवर धनराज मीणा को भी हिरासत में ले लिया.

उदयपुर पुलिस ने तीनों को राजसमंद की थाना केवला पुलिस को सौंप दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को 13 नवंबर को रोमा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इस पूछताछ में रोमा के मुंबई से उदयपुर आने और जिस्मफरोशी के धंधे की सरगना रेखा के बेटे से प्रेम करने से ले कर हत्या तक की कहानी सामने आ गई. उदयपुर राजस्थान का पर्यटनस्थल है. यहां रोजाना तमाम देशीविदेशी सैलानी आते हैं. अन्य महानगरों की तरह यहां भी जिस्मफरोशी का कारोबार धड़ल्ले से होता है. उदयपुर की हिरणमगरी कालोनी के सेक्टर-9 की रहने वाली रेखा उर्फ पूजा काफी समय से सैक्स रैकेट चला रही थी.

उस के खिलाफ थाना हिरणमगरी में पीटा के 7 मामले दर्ज हैं. इस के अलावा वह शांतिभंग के मामलों में भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी थी. रेखा की उम्र 50 साल के आसपास है. उस की शादी ललित छाबड़ा से हुई थी, जिस से उस के 2 बेटे हुए, बड़ा अनिल और छोटा मनीष. रेखा पहले उदयपुर की हिरणमगरी के सेक्टर-5 में रहती थी. अभी भी वहां उस का मकान है, जिस में वह लड़कियों से जिस्मफरोशी कराती थी. इसी धंधे की बदौलत उस के संपर्क मुंबई, दिल्ली और कोलकाता की लड़कियों से हो गए थे. उदयपुर के कई नामीगिरामी होटलों के अलावा हाईवे पर स्थित फार्महाउसों व गेस्टहाउसों के संचालकों से उस के संपर्क थे.

जिस्म के शौकीनों के लिए वह मुंबई, दिल्ली और कोलकाता से लड़कियां बुलाती थी. रेखा लड़कियों की खूबसूरती और देह के आधार पर ग्राहकों से रकम वसूलती थी. बाहर से आई लड़कियां कुछ दिन उदयपुर में रह कर लौट जाती थीं. ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से रेखा फोन कर के लड़कियां बुला लेती थी. इस धंधे से उस ने करोड़ों की दौलत कमाई. इसी कमाई से उस ने उदयपुर के हिरणमगरी के सेक्टर-9 में 3 हजार वर्गमीटर का भूखंड खरीद कर आलीशान कोठी बनवाई. कोठी के बेसमेंट में अनैतिक गतिविधियों के लिए ठिकाने बनवाए. उस ने कोठी में चारों तरफ कैमरे लगवाए, ताकि बाहर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. कहा जाता है कि जब रेखा ने यह मकान बनवाना शुरू किया था, उस के कारनामों की वजह से मोहल्ले वालों ने काफी विरोध किया था, लेकिन उस ने आपराधिक लोगों की मदद से सब को चुप करा दिया था. इस मकान की कीमत इस समय करीब 5 करोड़ रुपए है.

रोमा उर्फ रेशमा भी रेखा के बुलाने पर जिस्मफरोशी के लिए मुंबई से उदयपुर आई थी. कहा जाता है कि रोमा मूलरूप से बांग्लादेश की रहने वाली थी. वह गरीबी की वजह से इस दलदल में फंस गई थी. कुछ दिनों वह कोलकाता में रही, फिर वहां से मुंबई चली गई. अन्य कालगर्ल्स की तरह वह भी बुलाने पर मुंबई से दूसरे शहरों में जाने लगी. इसी तरह रेखा के बुलाने पर वह उदयपुर आई थी. रोमा को उदयपुर अच्छा लगा, इसलिए वह रेखा के साथ रह कर जिस्मफरोशी करने लगी. शुरू में तो उस के चाहने वाले काफी थे, लेकिन धीरेधीरे उस का शरीर और उम्र बढ़ी तो चाहने वालों की संख्या घटने लगी.

यह सच्चाई भी है कि उम्र बढ़ने के साथ कालगर्ल्स के चहेतों की तादाद कम होने लगती है. रोमा की उम्र जरूर ज्यादा हो गई थी, लेकिन जब वह टाइट वेस्टर्न ड्रैस पहनती थी तो उस के उभार चाहने वालों को आकर्षित करते थे. बालों को भी वह कलर करने लगी थी. फिर भी उस का धंधा टूटता जा रहा था. इस के अलावा जिस्म बेचने के बाद भी उसे पूरा पैसा नहीं मिलता था. उस की कमाई का अधिकांश हिस्सा रेखा रख लेती थी. इसलिए अब उसे इस धंधे में अपना भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा था.

रोमा के जो भी आशिक थे, वे सिर्फ उस के जिस्म से मतलब रखते थे. उन में से किसी की नजरों में उसे अपनापन नजर नहीं आता था. रोमा जब से उदयपुर आई थी, रेखा के साथ उसी के घर में रह रही थी. वह उस की आंटी भी थी और मालकिन भी. साथ रहने की वजह से रोमा का आमनासामना रोजाना रेखा के छोटे बेटे मनीष से होता था. कभीकभी रोमा अपने छोटेमोटे काम भी मनीष से करा लेती थी. मनीष को पता ही था कि उस की मां रेखा देहव्यापार कराती है. उस के घर एक से एक खूबसूरत और हर उम्र की लड़कियां आतीजाती रहती थीं.

मनीष करीब 28 साल का युवा था. उस की अपनी शारीरिक जरूरतें थीं. अगर वह चाहता तो घर आने वाली किसी भी कालगर्ल्स से अपनी शारीरिक जरूरत पूरी कर सकता था, लेकिन रोमा उस के दिल में जगह बनाने लगी थी. अपनी जरूरतों के हिसाब से वह भी मनीष से प्यार करने लगी थी. कब दोनों एकदूसरे के प्यार में खो गए, पता ही नहीं चला.

रोमा और मनीष के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. ये संबंध लगातर चलते रहे, जिस से रेखा को उन के संबंधों की जानकारी हो गई. रेखा इस धंधे की खेलीखाई और घाघ औरत थी. उसे पता था कि इस तरह के संबंधों का क्या हश्र होता है. भविष्य के बारे में सोच कर रोमा रेखा की चिंता किए बगैर मनीष के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. मनीष से रोमा को गर्भ भी ठहर गया. अब वह मनीष से शादी की बात करने लगी. उसे पता था कि मनीष से शादी करने के बाद वह रेखा की करोड़ों की जायदाद में आधे की हिस्सेदार हो जाएगी. इस के लिए ही वह मनीष पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी.

इस बात की भनक रेखा को लगी तो उसे मामला गड़बड़ नजर आने लगा. वह कतई नहीं चाहती थी कि उस का बेटा कालगर्ल्स से शादी करे और उस की जायदाद में हिस्सा मांगे. पहले उसे लगता था कि इस मामले को वह अपने स्तर से निपटा देगी. लेकिन उस की चिंता तब बढ़ गई, जब उस का अपना बेटा मनीष भी रोमा की भाषा बोलने लगा. रोमा को ले कर घर में लगभग रोज ही झगड़े होने लगे. इस से रेखा परेशान रहने लगी. अब वह रोमा से छुटकारा पाने के उपाय सोचने लगी. काफी सोचविचार कर उस ने फैसला किया कि इस झगड़े की जड़ रोमा है, इसलिए उसे ही मनीष के रास्ते से हटा दिया जाए.

रेखा ने काफी सोचविचार कर साजिश रची. उसी साजिश के तहत उस ने मनीष को तलवारबाजी के एक झगड़े में पुलिस से गिरफ्तार करवा कर जेल भिजवा दिया. मनीष के जेल जाते ही रेखा ने अपने ड्राइवर धनराज मीणा और बड़े बेटे अनिल से बात की. इस के बाद योजना के अनुसार, 9 नवंबर की शाम को धनराज ने रोमा को इतनी शराब पिलाई कि वह सुधबुध खो बैठी. उसी हालत में धनराज और रेखा ने सलवार के नाड़े से रोमा का गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. अधिक नशा होने की वजह से वह विरोध भी नहीं कर सकी.

रेखा को पूरा विश्वास हो गया कि रोमा की मौत हो चुकी है तो उस ने अनिल और धनराज से कहा कि वे लाश को गाड़ी से ले जा कर कहीं फेंक आएं. अनिल और धनराज हुंडई आई10 कार की पिछली सीट पर लाश रख कर निकल पड़े. कार धनराज चला रहा था. दोनों नेगडि़या टोलनाका, नाथद्वारा, राजनगर, केवला होते हुए मांडावाड़ा टोलनाके से हो कर पड़ासली के पास पहुंचे. वहीं हाईवे पर सुनसान जगह देख कर धनराज ने सड़क के किनारे कार रोक दी. फिर अनिल की मदद से कार की पिछली सीट पर पड़ी रोमा की लाश को निकाल कर हाईवे से करीब 2 सौ मीटर दूर ले जा कर खाई में फेंक दिया. इस तरह लाश को ठिकाने लगा कर दोनों उसी कार और उसी रास्ते से रात में ही घर आ गए.

रोमा की हत्या का खुलासा होने पर पुलिस ने सबूत जुटाने के लिए नेगडि़या टोलनाका व मांडावाड़ा टोलनाका की सीसीटीवी फुटेज की फिर से जांच की तो उन की कार आतीजाती दिखाई दे गई. पुलिस ने दोनों की उस रात की मोबाइल की लोकेशन और काल डिटेल्स भी सबूत के तौर पर जुटाए. कथा लिखे जाने तक पुलिस यह पता करने की कोशिश कर रही थी कि रोमा कौन थी, वह कहां की रहने वाली थी, उस के परिवार में कोई है या नहीं? अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रोमा की लाश का पोस्टमार्टम करा कर अंतिम संस्कार करा दिया था.

बहरहाल, देहव्यापार करने वाली रोमा ने कभी नहीं सोचा होगा कि प्यार करने की उसे ऐसी सजा मिलेगी. रोमा के साथ जो हुआ, उस से एक बार फिर साबित हो गया है कि इस तरह की औरतों का कोई भविष्य नहीं होता. Crime Story in Hindi

UP Crime Story: वाराणसी की पौश कालोनी में सजता देह बाजार

UP Crime Story: कोरोना कर्फ्यू का वीकेंड यानी शनिवार का दिन था. चेतगंज की थानाप्रभारी इंसपेक्टर संध्या सिंह लौकडाउन के दौरान सुबहसुबह साढ़े 6 बजे के करीब चाय की चुस्कियों के साथ इलाके का एक बार मुआयना करने की योजना बना रही थीं. तभी अचानक 4 लोग थाने  में आए.

उन्हें देख कर वह बोलीं, ‘‘जी, बताइए मैं आप लोगों की क्या मदद कर सकती हूं?’’

एक आगंतुक दाएंबाएं देखता हुआ हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘साहब, हम लोग पिशाचमोचन क्षेत्र के रहने वाले हैं. हमारे मोहल्ले के एक मकान में इन दिनों तरहतरह के लोगों का आनाजाना होने लगा है.’’

‘‘तरहतरह के लोगों से आप का क्या मतलब है?’’ संध्या सिंह ने पूछा.

‘‘हमें संदेह है कि मकान में कोई गलत काम होता है. क्योंकि वहां हमेशा नएनए लोग आतेजाते देखे गए हैं. प्लीज, आप वहां की जांच कीजिए, अपने आप पता चल जाएगा कि बात क्या है.’’

उस व्यक्ति की बात पूरी होते ही साथ में आया दूसरा व्यक्ति बोल पड़ा, ‘‘जी मैडम, वहां की संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा हो जाएगा.’’

‘‘वे किस तरह के लोग होते  हैं?’’ संध्या को अधिक जानने की जिज्ञासा हुई.

‘‘मैडमजी, आनेजाने वाले लोग दिखने में संभ्रांत लगते हैं, वे 40-45 की उम्र के दिखते हैं. उन के हाथों में रैपर में लिपटा कोई न कोई गिफ्ट पैकेट भी होता है.’’ एक अन्य व्यक्ति बोला.

मोहल्ले के लोगों की बातों को गौर से सुनने के बाद संध्या सिंह ने शिकायत करने वालों के नाम और कौन्टैक्ट के लिए मोबाइल नंबर के साथ कुछ पौइंट नोट कर लिए और छानबीन करने का आश्वासन दे कर उन्हें जाने को कहा.

पिशाचमोचन मोहल्ले के नागरिकों द्वारा बताई गई बातों पर गौर करते हुए उन्होंने तुरंत एसीपी (चेतगंज) नितेश प्रताप सिंह को भी अवगत करवा दिया. उन्हें शिकायत संबंधी पूरी जानकारी दी. मामला उत्तर प्रदेश के पौराणिक शहर वाराणसी का था. ऊपर से यह देश के प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है. इसे देखते हुए पुलिस ने संदिग्ध मकान में छापेमारी की योजना बना ली. संध्या सिंह सहित पुलिस टीम में कुछ और महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया.

सूचना के आधार पर एक पुलिसकर्मी ने पिशाचमोचन स्थित मकान नंबर सी 21/24 के मुख्य गेट पर दस्तक दी. उस की कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. कई बार आवाज लगाने और गेट पीटने के बाद तो एक उम्रदराज व्यक्ति ने मुख्य गेट का चैनल खोल कर बाहर की ओर झांकते हुए तेज आवाज में पूछा, ‘‘कौन है?’’

बाहर पुलिस टीम को देख कर उस की आवाज धीमी पड़ गई. वह धीमे से बोला, ‘‘क्या बात है भई, आप लोग यहां?’’

उस का कोई जवाब दिए बगैर पुलिस टीम गेट को एक झटके में बाहर की ओर खोलते हुए मकान के भीतर धड़धड़ाती हुई घुस गई. कुछ पल में ही पूरी पुलिस टीम एक कमरे में थी. सभी पुलिसकर्मी संदिग्ध निगाहों से कमरे में इधरउधर देखने लगे. संध्या सिंह की पैनी निगाहें कुछ तलाशने की स्थिति में थीं. पुलिस की निगाह कमरे से जुड़े एक दरवाजे की तरफ गई. वहां का परदा हटाते ही एक महिला पुलिसकर्मी अनायास बोल पड़ी, ‘‘मैडमजी, इधर देखिए… ये दुष्ट लोग.’’

जब संध्या ने उस कमरे में जा कर देखा तो उन की आंखें भी फटी की फटी रह गईं. अंदर का नजारा देख कर महिला पुलिसकर्मी शर्म से आंखें झुकाए तुरंत बाहर आ गई. जबकि एसीपी चेतगंज ने फौरन कड़क आवाज में सभी को कपड़े पहन कर बाहर आने को कहा.

एसीपी ने कमरे से बाहर आ कर पूछा, ‘‘मकान का मालिक कौन है?’’

वहीं पास खड़े व्यक्ति ने कहा, ‘‘जी मैं हूं.’’

‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’ एसीपी बोले.

‘‘सुरेश कुमार,’’ वह व्यक्ति बोला.

‘‘ये सब यहां क्या है? कौन हैं  ये लोग?’’

तब तक कई लड़कियां और लड़के अंदर के कमरे से बाहर आ चुके थे. उन की ओर ऊंगली उठाते हुए एसपी ने पूछा.

अब सुरेश को काटो तो खून नहीं. वह हक्काबक्का डरी जुबान में बोला, ‘‘साहब, मैं इन लोगों के बारे में कुछ नहीं जानता, केवल इतना जानता हूं कि ये लोग किसी कंपनी में काम करते हैं.’’

मकान मालिक की बात पूरी होने वाली ही थी कि तभी इंसपेक्टर संध्या सिंह एक जोरदार तमाचा जड़ते हुए बोलीं, ‘‘तुम्हारे मकान में कोई इस प्रकार से रह रहा है और तुम्हें कोई जानकारी नहीं. वह भी एकदो नहीं कई लोग.’’

‘‘…जी…जी साहब, मैं सच कह रहा हूं, मुझे कुछ नहीं पता.’’

इतना कहने पर उस के गाल पर दूसरा जोरदार तमाचा पड़ा. लेडी पुलिस से कई लोगों के सामने तमाचा खा कर वह शर्मसार हो गया.

संध्या सिंह बोलीं, ‘‘जब तुम्हें इन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी तो फिर उन्हें कमरा किराए पर कैसे दे दिया था?’’ इस का जवाब देने के बजाय वह सिर झुकाए खड़ा रहा. पुलिस सभी को थाने ले आई. उन से अलगअलग गहन पूछताछ की जाने लगी.  इस दौरान कालोनी के कई लोग भी काफी संख्या में जमा हो गए. हर कोई जिज्ञासा भरी नजरों से देख रहा था. पूछताछ में कई बातें खुल कर सामने आईं. पुलिस टीम को मौके पर 2 युवतियां व 3 युवक बिलकुल आपत्तिजनक स्थिति में मिले थे. कमरे की तलाशी लेने के दौरान आपत्तिजनक सामग्रियों में कंडोम के पैकेट, 4 मोबाइल फोन व नशीली दवाएं बरामद हुईं.

इस तरह से शहर की पौश कालोनी में सैक्स रैकेट गिरोह का परदाफाश हो चुका था. थोड़े समय में इस की खबर पूरे शहर में फैल गई थी. जिस का असर यह हुआ था कि मीडिया के लोग और कुछ समाजसेवी संगठन भी थाने पहुंच गए. कुछ मानवाधिकार संगठन के लोगों ने चेतगंज थाने जा कर मामले की तह में जाने का दबाव बनाया. इस की सूचना काशी जोन के डीसीपी अमित कुमार को भी दी गई. वे भी चेतगंज थाने पहुंच गए.

पूछताछ के दौरान पकड़ी गई 20 से 25 साल के बीच की उम्र वाली दोनों लड़कियों ने बताया, ‘‘उन्होंने नौकरी करने वाली बता कर कमरा किराए पर लिया था.’’

वह जानबूझ कर ऐशोआराम और मौजमस्ती की जिंदगी के लिए इस धंधे में उतरी थी. उसे अपनी शानोशौकत वाली जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यधिक पैसे की लालसा थी. पुलिस के अनुसार पढ़ाई के साथसाथ वे अन्य कामों के बहाने देह व्यापार के धंधे में उतर आई थीं. पूछताछ के दौरान 25 वर्षीय पारो (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह इस धंधे में पिछले 2 सालों से है. मोबाइल फोन की मदद से वह अपने इस धंधे को अंजाम देती है. इस के लिए उस ने अपना कोडवर्ड बना रखा है. उस के कोडवर्ड को ग्राहक ही समझ पाते हैं.

पारो ने अपने धंधे के बारे में आगे बताया कि उन के इस धंधे में कई लोगों का हिस्सा होता है. उन का वह नाम नहीं जानती है. हां, चेहरा देखने पर जरूर पहचान लेगी. पकड़े गए युवकों में एक रमेश 28 वर्ष, सुमित कुमार 29 वर्ष एवं राठौर 30 वर्ष ने बताया कि वे सभी वाराणसी शहर के ही निवासी हैं. पुलिस हिरासत में आने के बाद वे बारबार अपने बयानों को पलटते हुए अपना सही पताठिकाना बताने से कतराते रहे. उन का कहना था कि उन्हें वहां धोखे से लाया गया था, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तब उन्होंने इस धंधे में शामिल होना स्वीकार कर लिया.

इसी प्रकार पुलिस टीम ने पकड़ी गई दूसरी लड़कियों और लड़कों से अलगअलग कमरों में पूछताछ के बाद पांचों के खिलाफ 29 मई, 2021 को देह व्यापार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. उन की डाक्टरी जांच करवाई गई. बाद में उन्हें न्यायालय में पेश कर न्यायिकहिरासत में भेज दिया गया. कथा के लिखे जाने तक किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल पाई थी.

सैक्स कारोबार का गढ़ बनता जा रहा है मड़ुआडीह 

वाराणसी में सैक्स अपराध का धंधा कोई नया नहीं है. दिल्ली के जीबी रोड, इलाहाबाद, मेरठ इत्यादि शहरों की तरह वाराणसी का मड़ुआडीह इलाका सैक्स बाजार के रूप में कुख्यात बताया गया है. जानकारों की मानें तो वाराणसी में पड़ोसी देश नेपाल से ले कर देश के कई राज्यों मसलन असम, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र इत्यादि से कम उम्र की लड़कियां बुलाई जाती हैं. उन से सैक्स के लिए मोबाइल फोन से संपर्क साधा जाता है. उन का अपना नेटवर्क बना हुआ है.

हाल के महीनों में जिस तेजी के साथ वाराणसी में एक पर एक कई जगहों पर सैक्स रैकेट का पुलिस ने खुलासा किया है, उसे देख कर इस बात को बल मिलने लगा है कि इस गिरोह की जड़ें वाराणसी में काफी गहरी हो चुकी हैं. वाराणसी के पौश इलाकों में से जगतगंज के कैलगढ़ कालोनी में 31 मई, 2021 को एक सैक्स रैकेट का खुलासा हुआ था. तब पुलिस ने एक मकान के फर्स्ट फ्लोर पर चल रहे रैकेट का खुलासा करते हुए 3 युवतियों समेत 6 लोगों को पकड़ा था. पुलिस के अनुसार सैक्स रैकेट के लिए लड़कियां फोन द्वारा बुलाई जाती थीं. फोन पर ही ग्राहकों से सौदा तय हो जाता था.

गिरफ्तार युवतियों में एक प्रयागराज की और 2 वाराणसी की थीं. गिरफ्तार युवकों में शिवपुर के लक्ष्मणपुर निवासी सोनू पटेल, चोलापुर के अतुल सिंह और रोहनिया के राजेश सिंह शामिल थे. सैक्स रैकेट की सूचना मिलने पर रात में छापेमारी की गई थी. इस मामले में मकान मालिक ने बगैर पुलिस सत्यापन के मकान किराए पर उठा लिया गया था. एक अन्य मामला वाराणसी के नाटी इमली मोहल्ले के नई बस्ती का भी सामने आया. वहां के रिहायशी इलाके के एक मकान में जब 30 मई, 2021 को छापेमारी की गई तब सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ.  मौके से मकान मालकिन और 2 युवतियों की गिरफ्तारी हुई. पुलिस की काररवाई के दौरान 2 युवक चकमा दे कर भाग गए.

पुलिस ने मकान से छापे के दौरान कई आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए. महिला और दोनों युवतियों के खिलाफ जैतपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. मौके से भागे खोजवां निवासी राकेश गुप्ता सहित 2 युवकों की तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गईं. नाटी इमली क्षेत्र की नई बस्ती स्थित इस मकान में सैक्स रैकेट चलाए जाने की सूचना पा कर जैतपुरा थाने की पुलिस ने एसीपी (चेतगंज) नितेश प्रताप सिंह के निर्देशानुसार इंसपेक्टर (जैतपुरा) शशिभूषण राय के साथ चिह्नित मकान में छापा मारा था. मकान मालकिन और दोनों युवतियों के खिलाफ देह व्यापार अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए.

इस तरह से एक सप्ताह के भीतर ही वाराणसी पुलिस ने कई सैक्स ठिकानों पर की छापेमारी की. इस में वाराणसी के चेतगंज थाना की पुलिस ने 29 मई को पिशाचमोचन स्थित कालोनी में किराए के मकान में छापेमारी के अलावा 31 मई को चेतगंज थाने की पुलिस ने लहुराबीर क्षेत्र के कैलगढ़ कालोनी स्थित अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में छापेमारी कर 3 युवतियों और 3 युवकों को गिरफ्तार कर लिया. इस के पहले भी वाराणसी की घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में देह व्यापार का धंधा बीते कुछ महीनों में काफी फलफूल गया था.

जैतपुरा, लालपुर, पांडेयपुर, और चेतगंज थाना क्षेत्रों में जो भी सैक्स रैकेट पकड़े गए, वह घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में स्थित किराए के मकानों में संचालित हो रहे थे. इस संबंध में डीसीपी काशी जोन अमित कुमार ने सभी थानाप्रभारियों को किराएदारों के सत्यापन करवाने का निर्देश दिया है. UP Crime Story

—कथा में कुछ पात्रों के नाम काल्पनिक एवं पुलिस सूत्रों व समाचार पत्रों पर आधारित है

Crime Story : दरिंदगी की पराकाष्ठा

Crime Story : समाज में ऐसे दरिंदों की कोई कमी नहीं है जो मौका मिलने पर छोटीछोटी बच्चियों को भी हवस का शिकार बनाने से नहीं चूकते. ऐसे ज्यादातर मामलों में दरिंदगी की शिकार हुई बच्ची को मौत के घाट उतार दिया जाता है. नीरजा के साथ भी यही हुआ था.

पिथौरागढ़ निवासी विशंभरलाल अपने परिवार के साथ जब हल्द्वानी आए थे तो बहुत खुश थे. खुशी स्वभाविक ही थी. 18 नवंबर, 2014 को उन के साले विष्णु की शादी थी. विशंभरलाल भी बड़े व्यवसाई थे और विष्णु भी. खुशीखुशी शादी संपन्न भी हो गई. 20 नवंबर की रात विष्णु ने हल्द्वानी के शीशमहल इलाके के रामलीला मैदान में अपनी शादी की रिसैप्शन पार्टी रखी थी. शानदार पार्टी थी, जिस में कई सौ लोग आए हुए थे. जब पार्टी चल रही थी, तभी साढ़े 7 बजे विशंभरलाल की बेटी नीरजा अचानक लापता हो गई. 7 वर्षीया नीरजा दूल्हे की सगी भांजी थी और विशंभरलाल के परिवार की आंख का तारा. तुरंत उस की खोजबीन शुरू हो गई.

जब वह कहीं नहीं मिली तो रिसैप्शन पार्टी के रंग में भंग पड़ गया. दोनों परिवार, रिश्तेदार और उन के परिचित पार्टी भूल कर नीरजा की खोज में लग गए. जब घंटों तक नीरजा का कोई पता न चला तो उस के लापता होने की सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई. पुलिस ने भी अपने स्तर पर बच्ची को हर जगह खोजा, लेकिन उस का कहीं पता न चला. ऐसे में संभावना व्यक्त की गई कि किसी ने नीरजा का अपहरण कर लिया है. इसी संभावना के चलते पुलिस ने थाना कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया. 21 नवंबर की सुबह से ही नीरजा की खोजबीन शुरू हो गई. बडे़ लोगों का मामला था, इसलिए पुलिस एसओजी टीम और एलआईयू की टीमें नीरजा को ढूंढने में लगी थीं.

बच्ची के पिता और मामा के परिवार और रिश्तेदार तो जीजान से उस की खोज में जुटे थे. लेकिन किसी का कोई भी प्रयास सार्थक नहीं रहा. अपहरण की संभावना इसलिए निर्मूल लग रही थी, क्योंकि फिरौती के लिए कोई फोन नहीं आया था. नीरजा के इस तरह रिसैप्शन पार्टी से गायब हो जाने से सभी आश्चर्य में थे. पुलिस यह मान कर चल रही थी कि यह दुश्मनी का मामला भी हो सकता है और फिरौती के लिए अपहरण का भी. दुश्मनी की बात से विशंभरलाल और विष्णु दोनों ही इनकार कर रहे थे. दूसरी और फिरौती के लिए तीसरे दिन भी कोई फोन नहीं आया तो पुलिस की परेशानी और भी बढ़ गई. स्थानीय मीडिया इसे पुलिस की नाकामी बता कर सुर्खियों पर सुर्खियां बना रहा था.

ऐसी स्थिति में पुलिस ने दुश्मनी और अपहरण की ओर से ध्यान हटा कर अपनी जांच का केंद्रबिंदु शहर के नशेडि़यों, जुआरियों, भिखारियों और पाखंडी बाबाओं को बनाया. क्योंकि ऐसे लोग बच्चों को उठा कर बच्चा चोर गिरोहों को बेच देते हैं और इन गिरोहों के सदस्य उन्हें दूरदराज के प्रदेशों में बेच आते हैं. लेकिन इस का भी कोई नतीजा नहीं निकला. जब कई दिन बीत जाने पर भी नीरजा का कोई पता नहीं चला तो स्थानीय लोगों के सब्र का बांध टूट गया. पुलिस की लचर काररवाई से नाराज हल्द्वानी के लोग सड़कों पर उतर आए. धरनाप्रदर्शन शुरू हो गया. लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. नरीमन तिराहे पर नैनीताल-काठगोदाम मार्ग जाम कर दिया. जिस से सारे शहर की रफ्तार थम गई.

जब नैनीताल काठगोदाम मार्ग पर 2 किलोमीटर लंबा जाम लग गया तो स्थानीय प्रशासन परेशान हो उठा. इस स्थिति से निपटने के लिए उच्चाधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दे कर नीरजा का पता लगाने के लिए एक दिन का समय मांगा. प्रशासनिक आश्वासन के बाद लोगों ने धरना खत्म कर दिया. वादा किया था तो निभाना भी जरूरी हो गया था. मंगलवार 25 नवंबर को क्षेत्राधिकारी जी.सी. टम्टा के नेतृत्व में कई टीमें बना कर पुलिस फोर्स नीरजा की तलाश में जुट गई. लेकिन इस का भी कोई नतीजा नहीं निकला. घबराई हुई पुलिस अभी आगे की योजना बना रही थी कि एक घोड़ेतांगे वाले ने कोतवाली आकर पुलिस को बताया कि उस का घोड़ा छूट कर गोला नदी के जंगल की ओर भाग गया था.

वह उस के पीछे जंगल में गया तो वहां उस ने एक बच्ची की लाश पड़ी देखी. यह खबर सुन कर पुलिस के हाथपांव फूल गए. उसे विश्वास हो गया कि वह लाश नीरजा की ही होगी. पुलिस नीरजा के घर वालों और उस घोड़े वाले बुजुर्ग को साथ ले कर गोला नदी पार कर के जंगल में गई. घोड़े वाले ने जो जगह बताई थी, वहां एक बच्ची की लाश पड़ी थी. वह लाश नीरजा की ही थी. उस का मुंह खून से सना था. उस के अंडरगारमेंट के अलावा उस की टांगों पर भी खून के छींटे थे. जाहिरा तौर पर कहा जा सकता था कि बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ था और बाद में उस की हत्या कर दी गई थी. नीरजा के घर वाले यह देख कर गहरे सदमे में आ गए.

यह खबर मिलते ही एसएसपी सेंथल अबुदई, एएसपी श्वेता चौबे सहित तमाम बड़े पुलिस अफसर घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरेंसिक एक्सपर्ट डा. दयाल शरण को भी बुलवा लिया गया. जिस ने भी मासूम नीरजा की लाश देखी, उसी का कलेजा मुंह को आ गया. बच्ची के साथ हुई दरिंदगी वाकई हैरान कर देने वाली थी. बहरहाल पुलिस ने घटना स्थल से साक्ष्य एकत्र करने की कवायद शुरू की तो वहां बीड़ी और टौफी के रैपर पड़े मिले, जिन्हें जाब्ते की काररवाई में शामिल कर लिया गया. फोरेंसिक विशेषज्ञ डा. दयाल शरण ने वहां से कुछ फिंगरप्रिंट भी लिए.

करीब 2 घंटे तक घटनास्थल की सूक्ष्म जांच के बाद पुलिस ने पंचनामा बना कर नीरजा की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उधर नीरजा की हत्या की खबर मिलते ही शहर भर में आक्रोश फैल गया. उस के परिवार वालों का तो बहुत बुरा हाल था. इस बीच पुलिस ने इस केस में अपहरण के साथसाथ दुष्कर्म और हत्या की धाराएं भी जोड़ दी थीं. नीरजा की लाश का पोस्टमार्टम डाक्टरों के एक पैनल ने किया, जिस की वीडियोग्राफी भी कराई गई. डाक्टरी रिपोर्ट में जो बताया गया था, उस ने सभी के होश उड़ा दिए.

रिपोर्ट के अनुसार, नीरजा की हत्या दुष्कर्म के बाद हुई थी. उस की मौत अत्यधिक खून रिसाव के कारण हुई थी. यहां तक कि दरिंदे ने हैवानियत की सभी हदें पार करते हुए मासूम बच्ची के हाथपैर तक तोड़ दिए थे. नाखूनों से उस का चेहरा बिगाड़ने की भी कोशिश की थी. उस के अंगों पर भी गहरे घाव थे. पोस्टमार्टम के बाद बच्ची की लाश उस के परिजनों को सौंप दी गई. बेटी की मौत और उस के साथ हुई हैवानियत से आहत नीरजा के घर वालों ने कहा कि वे तब तक लाश को नहीं उठाएंगे, जब तक पुलिस कातिल को नहीं पकड़ लेती. उधर नीरजा की मौत की खबर सुन कर उस की दादी और मां की हालत बिगड़ गई थी.

उन्हें अस्पताल में भरती कराना पड़ा. एक नन्ही बच्ची के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे से पूरा कुमांऊ शोक में डूब गया. कातिलों के प्रति मन में गुस्सा लिए हल्द्वानी के लोग फिर सड़कों पर उतर आए. ये लोग जल्दी से जल्दी कातिलों को गिरफ्तार कर के फांसी पर लटकाने की मांग कर रहे थे. 26 नवंबर को पूरा हल्द्वानी दिन भर गुस्से की आग से सुलगता रहा. शहर के सभी सरकारी दफ्तर, शिक्षण संस्थान, बैंक और टेंपोटैक्सी सर्विस पूरी तरह बंद रहे. नीरजा की हत्या से उस के घर वाले इतने आहत थे कि पोस्टमार्टम हो जाने के बावजूद वे बच्ची की लाश तक ले जाने को तैयार नहीं थे. उत्तराखंड के एडीजी राम सिंह मीणा ने नीरजा के घर वालों को लाख मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कातिलों की गिरफ्तारी होने तक बच्ची की लाश उठाने से इनकार कर दिया.

मजबूरी में पुलिस को बच्ची की लाश को मोर्चरी में रखवाना पड़ा. उधर नीरजा के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या से नाराज लोगों ने हल्द्वानी के निकटवर्ती शहर काठगोदाम को भी पूरी तरह से बंद रखा. लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर के पूरे शहर में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया. हालात इतने बिगड़ गए कि मासूम नीरजा के साथ हुए कुकृत्य और उस की हत्या का मामला विधानसभा तक भी पहुंचा. बुधवार 26 नवंबर को इस मामले को ले कर विपक्ष ने जम कर हंगामा किया. इस दौरान नियम 310 के तहत सदन में इस की चर्चा कराने की मांग पर अड़ा विपक्ष वेल में उतर कर धरने पर बैठ गया. विपक्षी नेताओं का कहना था कि इस घटना से यह बात स्पष्ट हो गई है कि प्रदेश में कानूनव्यवस्था चौपट हो चुकी है.

उन्होंने नियम-310 के तहत सदन की काररवाई स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, जिसे पीठ ने स्वीकार नहीं किया. इस से खफा भाजपा विधायक अपनी बैंच पर खड़े हो गए. विधायक मदन कौशिक, बंधीधर भगत, हरबंस कपूर, संजय गुप्ता, यतीश्वरानंद, आदेश चौहान, सुरेंद्र सिंह जीना समेत तमाम सदस्यों ने इस मामले पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की. इस पर संसदीय एवं विधायी कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश ने कहा कि तुरंत चर्चा कराने की स्थिति में सरकार के पास तुरंत जवाब उपलब्ध नहीं होगा. इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई. बाद में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार इस मार्मिक घटना की चर्चा के लिए तैयार है.

उन्होंने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए सरकार पूरी ताकत लगाएगी. हत्यारों को जल्द पकड़ने हेतु स्थानीय पुलिस की मदद के लिए एसटीएफ की टीम को हल्द्वानी भेजा गया है. दूसरी ओर मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और उस की हत्या को ले कर पूरे कुंमाऊ में आक्रोश का लावा फूट पड़ा. उत्तराखंड के सभी शहरों में विरोध प्रदर्शन और जाम की स्थिति बनी रही. जिले के कई संगठनों ने बच्ची की आत्मा की शांति के लिए कैंडिल मार्च निकाला. सभी स्कूल संस्थान बंद रहे, स्कूली बच्चों ने भी कैंडिल मार्च निकाल कर नीरजा को श्रद्धांजलि दी.

इस मामले ने पूरे शासन को हिला कर रख दिया था. जब पुलिस हत्यारों की खोज में हर तरह की खाक छान चुकी और कहीं कुछ पता नहीं चला तो उस का ध्यान घटनास्थल से मिले बीड़ी के बंडल और टौफी के रेपर पर जम गया. इस की तहकीकात के लिए पुलिस ने क्षेत्र के मजदूरों और डंपर चालकों का सत्यापन किया. इसी दौरान पुलिस की नजर 3 ऐसे संदिग्ध लोगों पर पड़ी, जो इस कांड के बाद देर रात घर आते थे और सवेरे ही घर से निकल जाते थे. जबकि इन तीनों में से एक शख्स ऐसा भी था, जो घटना वाले दिन के बाद अपने कमरे पर आया ही नहीं था. इस के साथ ही पुलिस को एक अहम जानकारी यह भी मिली कि घटनास्थल से जिस ब्रांड की बीड़ी के रैपर मिले थे, वे तीनों उसी ब्रांड की बीड़ी पीते थे. उन के साथ रहने वाले अन्य मजदूरों ने पुलिस को बताया कि वे तीनों ही नशेड़ी हैं और अफीम वगैरह खाते हैं.

इस जानकारी के बाद पुलिस उन तीनों की तलाश में लग गई. पुलिस ने देर रात उन के आवास पर छापा मारा तो उन में से 2 पुलिस के हत्थे चढ़ गए. इन में एक का नाम प्रेमपाल और दूसरे का जूनियर मसीह था. पुलिस दोनों को हिरासत में ले कर कोतवाली ले आई. कोतवाली में उन से कड़ी पूछताछ की गई. पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया कि इस अपराध को अंजाम देने वाला अख्तर अली है. पुलिस ने प्रेमपाल और मसीह से उस के बारे में पूछा तो दोनों ने बताया कि अख्तर अली उसी रात से गायब है, जिस रात घटना घटी थी.

पुलिस ने उन दोनों से अख्तर के किसी फोटो के बारे में पूछा. लेकिन उन के पास अख्तर अली का कोई फोटो नहीं था. उस का फोटो नहीं मिला तो पुलिस ने उन दोनों की मदद ले कर उस का स्केच बनवाया. स्केच की मदद से पुलिस ने उस की खोजबीन शुरू कर दी. साथ ही उस के पैंफ्लेट छपवा कर दीवारों पर भी लगवा दिए गए. अख्तर के साथियों से उस का मोबाइल नंबर मिल गया था. पुलिस ने उस के मोबाइल की लोकेशन पता की तो वह दिल्ली की पाई गई. अख्तर की लोकेशन मिलते ही एसटीएफ के एसपी डा. सदानंद दाते पुलिस टीम के साथ बुधवार शाम को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए. लेकिन पुलिस दिल्ली पहुंची तो उस की लोकेशन लुधियाना आने लगी.

फलस्वरूप पुलिस टीम को लुधियाना जाना पड़ा. आखिरकार लोकेशन के आधार पर खोजबीन कर के उसे लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपी के गिरफ्तार होने की सूचना उसी समय नीरजा के घर वालों को दे दी गई. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बाद नीरजा के घर वाले उस की लाश उठाने के लिए तैयार हुए. गुरुवार को फूलों से सजे वाहन में बच्ची के शव को पोस्टमार्टम हाउस से बरेली मार्ग होते हुए रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट ले जाया गया. यह हल्द्वानी में पहला ऐसा मामला था, जिस में हल्द्वानी ही नहीं, पूरे राज्य के वीआईपी, नेता, पत्रकार, वकील और अन्य गणमान्य लोगों के साथ बच्चेबूढ़े व महिला भी शामिल हुईं.

अगले दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, राजस्व मंत्री यशपाल आर्य और आपदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रयाग भट्ट सांत्वना देने के लिए हल्द्वानी पहुंचे तो गुस्साए लोगों ने उन की कारों के शीशे तोड़ दिए. यशपाल आर्य और प्रयाग भट्ट को तो चोटें भी आईं. पुलिस ने जैसेतैसे स्थिति को संभाला. मासूम नीरजा की अंतिम विदाई को अभी कुछ ही समय बीता था कि एसटीएफ की टीम आरोपी अख्तर को लेकर हल्द्वानी पहुंच गई. हल्द्वानी लाते ही अख्तर से कड़ी पूछताछ की गई. पूछताछ में उस ने बताया कि इस घिनौने अपराध में प्रेमपाल और जूनियर मसीह भी ने सहयोग किया था. लेकिन बच्ची जिस हालत में मिली थी, उस से पुलिस को उस की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था.

उन दोनों को पुलिस ने पहले ही हिरासत में ले रखा था. उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया. डंपर चालक अख्तर अली उर्फ शमीम मूलरूप से बिहार के चंपारण जिले के बेतिया थाना के गांव महानाजनी का रहने वाला था, जो हल्द्वानी में रह कर डंपर चलाता था. 20 नवंबर को देर रात शादी के रिसैप्शन के दौरान अख्तर अली शराब के नशे में समारोह में घुस आया. उस ने वहीं खाना भी खाया. खाना खाते समय नीरजा उस की नजरों में चढ़ गई. नीरजा को देखते ही उस के मन में पाप घर कर गया और वह उस के अकेले होने का इंतजार करने लगा.

नीरजा जैसे ही अपने मांबाप से अलग हुई, उस ने उसे अपने विश्वास में ले कर टौफी दिलाने का लालच दिया. वह बच्ची को चुपचाप वहां मौजूद लोगों की नजरों से दूर ले गया. बाहर जा कर एक दुकान से उस ने टौफी खरीदी. इस के बाद वह उस मासूम को बहलाफुसला कर जंगल की तरफ ले गया. उसी जंगल के पास उसे प्रेमपाल और जूनियर मसीह मिल गए. उस वक्त वे दोनों भी नशे में थे. वे समझ गए कि अख्तर बच्ची को क्यों लाया है. वे उस के साथ चल दिए. तब तक मासूम नीरजा रोने लगी थी. उन शैतानों ने उस का मुंह बंद कर दिया और उसे उठा कर जंगल में ले गए. वहां अख्तर ने हैवानियत दिखाते हुए मासूम बच्ची का मुंह बंद कर के उस के साथ दुराचार किया और उसे वैसे ही छोड़ कर साथियों के साथ चला आया. घटना को अंजाम देने के बाद तीनों अपने कमरे पर लौट आए.

अगले दिन बच्ची की खोजबीन को देख कर अख्तर डर की वजह से पहले दिल्ली, फिर गुड़गांव और बाद में लुधियाना चला गया. अख्तर के दिल्ली चले जाने की बात प्रेमपाल और मसीह को मालूम थी. लेकिन फंसने के डर से दोनों ने अपना मुंह बंद रखा और अपनेअपने कमरे से गायब रहे, ताकि पुलिस उन से किसी तरह की पूछताछ न कर सके. बाद में प्रेमपाल और जूनियर मसीह पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे. इस केस में पुलिस ने साक्ष्य छिपाने व आरोपी को बचाने के जुर्म में प्रेमपाल व जूनियर मसीह को भी गिरफ्तार कर लिया. मूलरूप से पीलीभीत का रहने वाला प्रेमपाल घटना के समय काठगोदाम में रह रहा था. जबकि जूनियर मसीह कंटोपा, रुद्रपुर का निवासी था.

केस के खुलने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को बी.डी. पांडे अस्पताल ले जा कर उन का मेडिकल कराया. उन की मेडिकल रिपोर्ट से पता चला कि तीनों ही चरस और शराब पीने के आदी थे. इस घटना को अंजाम देते समय तीनों नशे में थे. मासूम नीरजा के साथ ददिंरगी की हदें पार करने के बाद उसे तड़पता छोड़ कर तीनों वापस चले आए थे. अगले दिन सारे शहर में पुलिस की खोजबीन को देखते हुए मुख्य आरोपी अख्तर दिल्ली भाग गया था और उस ने अपना मोबाइल बंद कर लिया था, ताकि पुलिस उस का पीछा न कर सके.

कड़ी सुरक्षा के बीच अभियुक्तों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें गुप्त रूप से जिला एवं सत्र न्यायाधीश एन.एस. धानिक की अदालत में पेश किया. उसी वक्त महिला संगठन ‘आशा’ की कुछ महिलाएं अदालत में पहुंच गईं. बी.डी. पांडे अस्पताल में जुटीं आशा संगठन की महिलाओं में आरोपियों के प्रति इतना गुस्सा था कि वे उन्हें एक बार जूता मारना चाहती थीं. वे मांग कर रही थीं कि आरोपियों को एक बार जूता मारने दिया जाए तो उन्हें तसल्ली मिल जाएगी. महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने किसी तरह उन्हें झांसा दिया और आरोपियों को अस्पताल के पीछे के रास्ते से निकाल कर अदालत में पेश किया.

तीनों आरोपियों पर भादंवि की धारा 376, 302, 363, 201 और पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे के अवलोकन के बाद जिला जज ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए. इस मामले की विवेचना कर रहे एसआई दिनेश पंत ने बताया कि अदालत से आरोपियों की डीएनए जांच के लिए आवेदन किया गया है. आदेश मिलने के बाद डीएनए जांच कराई गई. जांच से साबित हो गया है कि दुराचार सिर्फ अख्तर ने ही किया था. प्रेमपाल और जूनियर मसीह ने मदद की थी. इस बीच पुलिस ने वारदात के दौरान पहने गए आरोपियों के कपड़े भी बरामद कर लिए थे. जिन्हें जिला जज के अवलोकन के बाद सील कर दिया गया.

पिछले कुछ समय से समाज में यौन अपराधों में दरिंदगी बढ़ती जा रही है. मासूम बच्चियों के मामले में तो अपराधी हैवानियत की सारी हदों को पार कर जाते हैं. ऐसे दरिंदो को जब तक त्वरित रूप से सख्त से सख्त सजा नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना संभव नहीं है. कानून को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए और पुलिस को भी. Crime Story

—कहानी में नीरजा, उस के पिता और मामा के नाम बदल दिए गए हैं.

 

Delhi News : स्टिंग औपरेशन के जरिए ब्लैकमेलिंग

Delhi News : रामशरण और उससके साथियों ने स्टिंग औपरेशन के जरिए एक पैथलैब संचालक से 40 लाख रुपए ऐंठने में तो सफलता पा ली लेकिन डील के बाकी 60 लाख रुपए पाने के लिए उन्होंने दबाव डाला तो वे पुलिस के शिकंजे में ऐसे फंसे कि…

पश्चिमी दिल्ली के शकूरबस्ती इलाके के रहने वाले डी.के. रोहिल्ला के दोनों बेटे डाक्टर बन गए तो उन की खुशी का ठिकाना न रहा. एक बेटा डा. अतुल रोहिल्ला ने डेंटल सर्जन बनने के बाद शकूरपुर में अपना क्लीनिक खोल लिया. जबकि दूसरा बेटा डा. पंकज रोहिल्ला बालरोग विशेषज्ञ हो गया. दोनों के ही क्लीनिक अच्छे चल रहे थे. इस के अलावा इन्होंने वेस्ट पंजाबीबाग के लाल क्वार्टर्स में हेल्थकेयर मंत्र के नाम से एक पैथोलौजी लैब भी खोल ली. दोनों भाई अपने क्लीनिक के अलावा लैब पर भी समय देते हैं. इन की गैरमौजूदगी में पिता डी.के. रोहिल्ला भी पैथोलौजी लैब पर बैठते थे.

3 अक्तूबर, 2014 को डा. अतुल रोहिल्ला अपने भाई डा. पंकज रोहिल्ला के साथ दिल्ली से बाहर गए हुए थे. उन की गैरमौजूदगी में पैथोलौजी लैब पर डी.के. रोहिल्ला बैठे थे. तभी उन के पास एक महिला एक युवक के साथ आई. उस महिला की उम्र करीब 30-35 साल थी. महिला ने बताया कि उस के 5 बेटियां हैं और अब फिर से गर्भवती है. उस ने बताया कि वह अपने गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में जानना चाहती है कि उस का सही विकास हो रहा है या नहीं. उन की लैब में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे करने की सुविधा नहीं थी इसलिए डी.के. रोहिल्ला ने उस महिला से कहा,

‘‘मैडम, यहां पर केवल खून की जांच होती है. बेहतर यही होगा कि आप किसी योग्य गायनेकोलौजिस्ट को दिखा कर कहीं अल्ट्रासाउंड कराएं. उस के बाद ही बच्चे के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी.’’

‘‘कौन सी लैब सही है, कौन सी गलत, यह हमें तो पता नहीं है. आप किसी सही लैब के बारे में बता दें तो मेहरबानी होगी जिस से मैं गर्भ में पल रहे शिशु की जांच करा सकूं.’’ वह महिला बोली. डी.के. रोहिल्ला को उस महिला पर दया आ गई. उन्होंने उसे कीर्तिनगर स्थित एक अल्ट्रासाउंड क्लीनिक का पता बताते हुए वहां भेज दिया. डी.के. रोहिल्ला की पैथोलौजी लैब पर अकसर इस तरह के लोग आते रहते थे, जिस टेस्ट की सुविधा उन के यहां उपलब्ध नहीं होती थी, उसे वह कहीं और से कराने को कह देते थे.

अगले दिन भी डी.के. रोहिल्ला ही अपनी पैथोलौजी लैब पर बैठे थे. शाम साढ़े 5 बजे के करीब उन की लैब में 5-6 युवक आए. उन के गले में एक टीवी न्यूज चैनल के आईडी कार्ड लटके हुए थे. उन युवकों के साथ वह महिला भी थी, जो एक दिन पहले उन के यहां अपने गर्भस्थ शिशु की जांच कराने आई थी. उन युवकों के हावभाव देख कर डी.के. रोहिल्ला चौंक गए. लैब में घुसते ही उन युवकों ने सब से पहले वहां काम करने वाले स्टाफ को यह कहते हुए जबरदस्ती बाहर कर दिया कि उन्हें रोहिल्लाजी से कोई जरूरी बात करनी है. डी.के. रोहिल्ला ने उन युवकों से कहा भी कि उन्हें जो भी बात करनी है, स्टाफ के सामने भी कर सकते हैं. लेकिन उन युवकों ने उन की एक नहीं सुनी. कह दिया कि वे उन से अकेले में ही बात करेंगे.

स्टाफ को बाहर निकालने के बाद उन युवकों में से एक ने डी.के. रोहिल्ला से कहा, ‘‘आप को पता है कि सरकार ने गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण करने पर बैन लगा रखा है, इस के बावजूद भी आप यह काम कर रहे हैं.’’

‘‘यह आप कैसी बातें कर रहे हैं. हमारे यहां तो अल्ट्रासाउंड मशीन तक नहीं है तो हम यह बात कैसे बता सकते हैं. जरूर ही आप को भूल हुई है.’’ 59 वर्षीय डी.के. रोहिल्ला घबरा कर बोले.

‘‘देखिए, आप हमें बेवकूफ नहीं बना सकते. यह लेडी कल आप के ही पास आई थी न?’’ दूसरा युवक बोला.

‘‘हां.’’

‘‘इस लेडी से आप ने गर्भस्थ शिशु के लिंग परीक्षण के बारे में जो बातें कही थीं, वह हमारे पास रिकौर्ड हैं. हम ने आप का स्टिंग औपरेशन कर लिया है. उन बातों से पता चलता है कि आप लंबे समय से इस गैरकानूनी धंधे में लगे हुए हैं.’’

‘‘जब मैं ने इस तरह की कोई बात कही नहीं है तो रिकौर्ड कैसे कर लिया?’’

‘‘यदि आप अपनी गलती नहीं मान रहे तो कोई बात नहीं, हम इसे अपने चैनल पर चलाएंगे. तभी तुम्हारे गोरखधंधे को लोग जानेंगे. पता तब चलेगा जब लैब चलाने वाले तुम सभी लोग जेल जाओगे और यह लैब भी सील होगी.’’

इतना सुनते ही डी.के. रोहिल्ला घबरा गए. कहीं इन लोगों ने उन की आवाज से मिलतीजुलती किसी और की आवाज तो रिकौर्ड नहीं कर ली. वह इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे थे कि टीवी चैनल पर न्यूज चलते ही उन की लैब सील हो जाएगी. भले ही वह कितनी सफाई देते रहें, पुलिस उन की एक नहीं सुनेगी. जब तक रिकौर्डिड आवाज की जांच रिपोर्ट कोर्ट में आएगी, तब तक उन का काफी नुकसान हो जाएगा और बदनामी होगी अलग से. रोहिल्ला अब यही सोच रहे थे कि वह ऐसी हालत में क्या करें. तभी एक युवक आहिस्ता से बोला, ‘‘ये टेप चैनल पर न चले, इस का एक ही रास्ता है कि आप को एक करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे.’’

‘‘एक करोड़ऽऽ’’ रोहिल्ला चौंकते हुए बोले.

‘‘हां, यह कोई ज्यादा नहीं हैं. जानते हो, हमें भी इस में से अपने सीनियर्स को देना होगा, तभी यह न्यूज रुक सकती है. इसलिए गनीमत इसी में है कि तुम जल्द से जल्द पैसों का इंतजाम कर दो, वरना…’’

मामला बड़ा ही पेचीदा होता जा रहा था. रोहिल्ला के दोनों बेटे दिल्ली से बाहर थे. उन की गैरमौजूदगी में वह कोई बड़ा फैसला नहीं लेना चाहते थे. उन्होंने उन युवकों को बताया भी कि बेटे बाहर हैं. जब वे दिल्ली लौट आएं तो उन की मौजूदगी में ही बात करना सही रहेगा. इस पर तीसरे युवक ने कहा, ‘‘हम इस खबर को कल से रोके हुए हैं. इसे अब और ज्यादा रोकना संभव नहीं है. अब आप हमें सीधे बता दें कि आप को हमारी डील मंजूर है या नहीं.’’

‘‘आप लोग 5 मिनट रुकिए. मैं इस बारे में अपने बेटे से बात कर लूं.’’ कह कर रोहिल्ला ने जेब से मोबाइल फोन निकाला और उस पर कोई नंबर मिलाते हुए एक कमरे में चले गए. उन्होंने बेटे डा. अतुल रोहिल्ला को फोन मिलाया था. उन्होंने अतुल को पूरे मामले से अवगत करा दिया. स्टिंग औपरेशन की बात सुन कर डा. अतुल भी परेशान हो गए. उन के पिता इस लफड़े में कैसे फंस गए, यह जानने से पहले उन्हें यह जरूरी हो गया कि इस मुसीबत से बाहर कैसे निकला जाए. डा. अतुल किसी भी तरह के पुलिस के लफड़े से बचना चाहते थे. काफी सोचनेसमझने के बाद उन्होंने अपने पिता से कह दिया कि किसी भी तरह वह इस मामले को निपटा लें.

डी.के. रोहिल्ला ने उन युवकों से मामले को रफादफा करने को कहा लेकिन वे एक करोड़ रुपए से कम पर तैयार नहीं हुए. तब रोहिल्ला ने कहा कि इतनी बड़ी रकम अभी उन के पास नहीं है. जैसेतैसे कर के वह उन्हें 40 लाख रुपए दे सकते हैं. बाकी पैसे बाद में दे देंगे. 40 लाख रुपए भी रोहिल्ला के घर में थोड़े ही रखे थे, जो निकाल कर उन्हें दे दें. उन्होंने अपने परिचितों, रिश्तेदारों को फोन कर के जैसेतैसे कर के इतने रुपए इकट्ठे कर के उन युवकों को दे दिए. 40 लाख रुपए ले कर वे रिपोर्टर वहां से चले गए. जाते समय उन्होंने रोहिल्ला से कह दिया कि बाकी के पैसों का इंतजाम भी वे जल्दी से कर लें.

उन युवकों के जाने के बाद डी.के. रोहिल्ला को इस बात की तसल्ली हुई कि फिलहाल स्टिंग औपरेशन की न्यूज वे लोग चैनल पर तो नहीं दिखाएंगे, लेकिन दूसरी ओर इस बात की फिक्र भी हो रही थी कि बाकी के 60 लाख रुपए का इंतजाम कहां से होगा. 5 अक्तूबर, 2014 की सुबह उन के दोनों बेटे डा. अतुल रोहिल्ला और डा. पंकज रोहिल्ला घर लौटे तो उन्होंने पूरी बात विस्तार से बताई. जो हो चुका था उस पर अफसोस करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. अब उन्होंने यह तय कर लिया कि उन की लैब पर जिन टेस्टों की सुविधा नहीं है, पेशेंट से उस के लिए स्पष्ट मना कर देंगे. उन टेस्टों को वह पेशेंट कहां से कराता है, यह उस की जिम्मेदारी है. वे उसे इस बारे में कोई सलाह भी नहीं देंगे. इस घटना से सीख ले कर डाक्टर बंधुओं ने क्लीनिकों पर बैठना शुरू कर दिया.

उधर जो तथाकथित पत्रकार डी.के. रोहिल्ला से 40 लाख रुपए ले गए थे, उन्होंने बाकी के 60 लाख रुपए लेने के लिए रोहिल्ला को फोन करना शुरू कर दिया. 60 लाख रुपए कोई मामूली रकम तो होती नहीं. उन्होंने जैसेतैसे कर के 40 लाख रुपए इकट्ठा कर उन्हें दिए थे. बकाया के 60 लाख रुपए देने के लिए उन के पास बारबार फोन आने लगे. पहले तो रोहिल्ला उन्हें टालते रहे, लेकिन जब वे लोग ज्यादा ही परेशान करने लगे तो रोहिल्ला ने इतने रुपए देने में असमर्थता जता दी. तब उन तथाकथित पत्रकारों ने उन्हें धमकाया कि अगर बाकी के पैसे नहीं दिए तो स्टिंग वाली टेप को न्यूज चैनल पर चलवा देंगे.

इस तरह के धमकी भरे फोन उन के पास अकसर आने लगे, जिस से परिवार के लोग परेशान रहने लगे. 40 लाख रुपए देने के बावजूद भी उन का उन तथाकथित पत्रकारों से पीछा नहीं छूट रहा था. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी हालत में वे क्या करें. तभी उन के एक दोस्त ने उन्हें इस की शिकायत पुलिस से करने की सलाह दी. तब 21 अक्तूबर, 2014 को डा. अतुल रोहिल्ला अपने पिता को ले कर मादीपुर पुलिस चौकी चले गए. वहां मौजूद एसआई अनूप को उन्होंने पूरी कहानी बता दी. जिन फोन नंबरों से रोहिल्ला के पास पैसे मांगने की काल आई थीं, वह फोन नंबर भी उन्होंने पुलिस को दे दिए.

मादीपुर पुलिस चौकी थाना पंजाबीबाग के तहत आती है, इसलिए डा. अतुल रोहिल्ला की तहरीर पर पंजाबीबाग में पैसे मांगने वालों के खिलाफ भादंवि की धारा 342, 384, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. इस के बाद पंजाबीबाग थाना पुलिस अभियुक्तों की तलाश में जुट गई. अभियुक्तों ने अपने फोन नंबर बंद कर लिए थे इसलिए पुलिस को उन के ठिकानों की जानकारी नहीं मिल पा रही थी. उधर दिल्ली पुलिस की दक्षिणपूर्वी रेंज की क्राइम ब्रांच यूनिट को खास मुखबिर से सूचना मिली कि दिल्ली और इस से सटे शहरों में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो स्टिंग औपरेशन के जरिए लोगों से मोटी रकम की उगाही कर रहा है. उस गिरोह में कुछ पत्रकार भी शामिल हैं.

सूचना महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए डीसीपी भीष्म सिंह ने एसीपी के.पी.एस. मल्होत्रा के निर्देशन में एक टीम बनाई. टीम में इंसपेक्टर सुनील कुमार, सबइंसपेक्टर रविंद्र तेवतिया, मनदीप, हेडकांस्टेबल राकेश रावत, विजय प्रताप, असलूप खान, कांस्टेबल मोहित, अशोक, उदय, सुनील पांडे, मनोज आदि को शामिल किया गया. पुलिस टीम को ब्लैकमेल करने वाले उन कथित पत्रकारों के फोन नंबर भी मिल गए थे. उन नंबरों को पुलिस ने सर्विलांस पर लगा दिया था, लेकिन वह फोन नंबर बंद थे. टीम उन नंबरों की काल डिटेल्स को खंगालने लगी.

काल डिटेल्स के जरिए पुलिस टीम को कुछ सुराग हाथ लग गए. उन सुरागों के जरिए 28 अक्तूबर को धनसिंह और रामशरण नाम के 2 युवकों को दिल्ली के राजेंद्रनगर स्थित सर गंगाराम अस्पताल के पास से हिरासत में ले लिया. क्राइम ब्रांच औफिस में जब इन दोनों युवकों से पूछताछ की तो उन्होंने पंजाबीबाग क्षेत्र के डी.के. रोहिल्ला से 40 लाख रुपए ऐंठने की बात कुबूल कर ली. उन से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि उन के गैंग में और लोग भी शामिल हैं. उन के साथियों के नामपते मालूम करने के बाद एक पुलिस टीम उन के ठिकानों पर भेज दी. तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने उन के साथी जय कोचर और पुष्पा को भी गिरफ्तार कर लिया.

पता चला कि रामशरण और धनसिंह एक टीवी न्यूज चैनल से जुडे़ थे. एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल से जुड़े होने के बावजूद भी वे ब्लैकमेलिंग जैसे धंधे से कैसे जुड़े, इस की एक रोचक कहानी सामने आई. 32 वर्षीय रामशरण मूलरूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला था. वह 12 साल की उम्र में किसी परिचित के साथ दिल्ली आया था. परिचित ने एक दुकान पर उस की नौकरी लगवा दी. बाद में उस ने करोलबाग के एक ब्यूटीपार्लर में नौकरी कर ली. फिर वह करोलबाग में गऊशाला रोड पर किराए पर रहने लगा. पिछले दशक से जिस तरह टीवी न्यूज चैनलों की बाढ़ सी आई है, उसी तरह युवाओं का रुझान भी टीवी पत्रकारिता की तरफ बढ़ा है.

रामशरण भी टीवी पत्रकार बनना चाहता था, लेकिन उस के सामने समस्या यह थी कि वह ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था. वह बनठन कर रहता था. इसलिए उस के बातचीत और पहनावे से नहीं लगता था कि वह कम पढ़ालिखा है. कम पढ़ालिखा होने के बावजूद भी उस के ऊपर पत्रकार बनने की सनक सवार थी. इस बारे में उस ने अपने एक परिचित से बात की. परिचित की एकदो टीवी पत्रकारों से बातचीत थी.परिचित के साथ रामशरण नोएडा के फिल्म सिटी में स्थित एक टीवी न्यूज चैनल पहुंच गया. वहां उस ने खुद को दिल्ली के मध्य जिला से संवाददाता बनाने की गुजारिश की. बताया जाता है कि वहां उस की बात बन गई. उसे स्ट्रिंगर के रूप में काम मिल गया.

स्टिंगर वह होता है, जो अपने साधनों से न्यूज आदि कवरेज कर के न्यूज चैनल के औफिस भेजता है. न्यूज के हिसाब से उस स्ट्रिंगर को चैनल की तरफ से पेमेंट किया जाता है यानी वह न्यूज चैनल का स्थाई कर्मचारी नहीं होता. न्यूज चैनल से जुड़ कर रामशरण बहुत खुश हुआ. बताया जाता है कि उस ने कई लोगों के स्टिंग औपरेशन भी किए. रामशरण का एक दोस्त था धनसिंह, जो उत्तराखंड के गढ़वाल का रहने वाला था. 1999 में वह दिल्ली आया था. बाद में वह भी उस के साथ सहायक के रूप में काम करने लगा. दोनों लोग कम समय में ज्यादा पैसे कमाना चाहते थे. उन के दिमाग में स्टिंग औपरेशन के जरिए लोगों से पैसे ऐंठने की बात आई.

उन के पास स्टिंग औपरेशन करने के लिए कैमरे तो थे ही, इसलिए अब वह ऐसे लोगों को तलाशने लगे, जिन से रकम हासिल की जा सके. बताया जाता है कि दोनों ने मिल कर कई छोटेमोटे स्टिंग औपरेशन किए, जिस से उन की हिम्मत बढ़ी. करीब 3-4 महीने पहले इन दोनों के संपर्क में जय कोचर नाम का युवक आया. जय कोचर दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में रहता था. उसे भी अपने साथ मिला कर वह अपने काम को अंजाम देते रहे. छोटेमोटे स्टिंग औपरेशन से उन्हें मोटी कमाई नहीं हो पाती थी. लिहाजा अब वह ऐसी आसामी तलाशने लगे, जहां से मोटी रकम मिल सके.

अब उन्होंने क्लीनिक और पैथोलौजी लैब को निशाना बनाने का प्लान बनाया. इस काम में उन्होंने दिल्ली के किशनगंज में रहने वाले छोटेलाल की पत्नी पुष्पा को मिला लिया. 3 बच्चों की मां पुष्पा का पेट किसी वजह से बढ़ गया. फूला हुआ पेट देख कर लगता कि जैसे वह गर्भवती हो. पुष्पा किसी नर्सिंगहोम, पैथलैब में जाती और खुद को गर्भवती बताते हुए भ्रूण के लिंग परीक्षण की बात करती थी. उस के साथ रामशरण भी जाता था, वह खुद को पुष्पा का पति बताता था. लिंग परीक्षण से संबंधित होने वाली बात को रामशरण अपने खुफिया कैमरे में रिकौर्ड कर लेता था. बाद में उसी रिकौर्डिंग के जरिए वे लोग नर्सिंगहोम, पैथलैब संचालक से मोटी रकम वसूलते. उस रकम में से 2 हजार रुपए वे पुष्पा को दे देते थे.

छोटे से काम के बदले 2 हजार रुपए पा कर पुष्पा भी खुश रहती थी. मगर उसे यह पता नहीं था कि इस मामूली रकम के बदले वह क्या अपराध कर रही है. रिसर्च के दौरान उन्हें पता लगा कि पंजाबीबाग के लाल क्वार्टर्स में डा. रोहिल्ला की हेल्थकेयर मंत्र के नाम से पैथोलौजी लैब है. अगर वहां स्टिंग औपरेशन किया जाए तो मोटी रकम हासिल हो सकती है. पूरी योजना बना कर 3 अक्तूबर, 2014 को पुष्पा उक्त पैथोलौजी लैब पहुंची. उस समय वहां डा. पंकज रोहिल्ला के पिता डी.के. रोहिल्ला बैठे थे. पुष्पा ने उन्हें बताया कि उस के 5 बेटियां हैं. वह फिर से गर्भवती है. अब वह गर्भ में पल रहे शिशु की जांच कराना चाहती है. रोहिल्ला की लैब में अल्ट्रासाउंड करने की सुविधा नहीं थी.

उन्होंने उसे योग्य गायनेकोलौजिस्ट के पास जाने की सलाह दी. इस दौरान वह उन से शिशु के लिंग परीक्षण के संबंध में बात करती रही. रामशरण उस के पास खड़ा पूरी बात को रिकौर्ड करता रहा. उसी रिकौर्डिड बातचीत के जरिए उन लोगों ने डी.के. रोहिल्ला से एक करोड़ रुपए की मांग की. उन युवकों के गले में पड़े आईडी कार्ड देख कर डी.के. रोहिल्ला समझ गए थे कि वे लोग उस स्टिंग औपरेशन को न्यूज चैनल पर चलवा देंगे तो उन के खिलाफ पुलिस काररवाई तो होगी ही साथ ही लैब भी सील हो जाएगी इसलिए अपने बेटों से बात कर के उन्होंने उन युवकों को 40 लाख रुपए दे दिए थे.

रामशरण और उस के साथियों को विश्वास था कि जिस तरह से रोहिल्ला ने 40 लाख रुपए दिए हैं, उसी तरह वह बाकी 60 लाख भी दे देंगे. 60 लाख वसूलने के लिए ही वे लोग डी.के. रोहिल्ला और उन के बेटों को बारबार धमकी भरे फोन कर रहे थे. लेकिन इस से पहले कि वह उन से 60 लाख रुपए वसूल पाते, पुलिस के हत्थे चढ़ गए. रोहिल्ला से वसूली गई रकम में से जय कोचर को जो हिस्सा मिला था, उसी से उस ने नई स्विफ्ट कार खरीदी थी. पुलिस ने उस से वह कार भी बरामद कर ली. इस के अलावा पुलिस ने उन के कब्जे से 70 हजार रुपए नकद, स्टिंग औपरेशन में प्रयोग होने वाले कैमरे, 7 मोबाइल फोन आदि बरामद किए.

चूंकि इन के खिलाफ थाना पंजाबीबाग में रिपोर्ट दर्ज थी, इसलिए एसआई रविंद्र तेवतिया ने 29 अक्तूबर को चारों अभियुक्तों को तीसहजारी कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया. उसी समय पंजाबीबाग थाना पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर ले लिया. अभियुक्तों ने पुलिस को बताया कि वे अब तक लगभग 50 स्टिंग औपरेशन कर चुके हैं. पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें तीसहजारी कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है. Delhi News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा का नाटकीय रूपांतरण किया गया है.

 

Crime Story : बीवी और मंगेतर को मारने वाला नाइट्रोजन गैस किलर

Crime Story : बठिंडा की रहने वाली सोनू के जीवन में खुशियों की सौगात आने वाली थी, क्योंकि एक लंबे इंतजार के बाद उस की शादी उस के प्रेमी और मंगेतर नवनिंदर से होने वाली थी. पटियाला में मंगेतर नवनिंदर के साथ दिल खोल शौपिंग के बाद वह एक दिन अचानक से गायब हो गई. बाद में इस का राज खुला तो…

11 अक्तूबर 2021 का दिन था. बठिंडा, पंजाब की रहने वाली छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू (28) पटियाला में अपने होने वाले पति से मिलने के लिए जा रही थी. वह बेहद खुश थी क्योंकि एक लंब े अरसे के इंतजार के बाद उस की शादी नवनिंदर प्रीतपाल सिंह उर्फ सिद्धू (39) से होने वाली थी. लंबा इंतजार इसलिए क्योंकि छपिंदरपाल और नवनिंदर दोनों की सगाई पिछले साल मार्च 2020 में ही हो गई थी. लेकिन उन की शादी उन दिनों देश में फैले कोविड की वजह से नहीं हो पाई. जब कोविड का असर धीरेधीरे कम होने लगा और देश में अनलौक की प्रक्रिया को चालू किया गया, उस के बाद नवनिंदर अपने निजी कारणों से शादी की डेट लगातार टाल दिया करता था.

इस शादी के लिए छपिंदर ने लंबा इंतजार किया था, जोकि आने वाले 20 अक्तूबर को खत्म होने वाला था. नवनिंदर पटियाला के अर्बन एस्टेट इलाके में रहता था जोकि पौश इलाकों में माना जाता है. वह अपने मातापिता का एकलौता बेटा था. उस के 80 साल के पिता इंडियन आर्मी के रिटायर्ड कर्नल थे, जिन की आखिरी इच्छा अपने बेटे की खुशहाल जिंदगी देना था. दरअसल, नवनिंदर और छपिंदरपाल उर्फ सोनू दोनों ने एक साथ पंजाबराजस्थान के बौर्डर पर स्थित श्रीगंगानगर में श्री गुरुनानक खालसा ला कालेज से एलएलबी यानी कानून में बैचलर की पढ़ाई की थी. उसी दौरान बठिंडा और पटियाला 2 अलगअलग इलाकों के रहने वाले इन दोनों में दोस्ती गहराई और प्यार हो गया. इस के अलावा नवनिंदर ने समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई भी की थी और वह अमेरिका के एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करने वाले बच्चों को औनलाइन पढ़ाता था.

11 अक्तूबर को जब नवनिंदर ने छपिंदर को शादी की शौपिंग और तैयारियां करने के लिए बुलाया तो छपिंदर उर्फ सोनू की खुशी का ठिकाना नहीं था. छपिंदर के घर वालों ने भी इस के लिए टोकाटाकी नहीं की. उन्होंने खुशी से अपनी बेटी को पटियाला उस के होने वाले पति से मिलने की इजाजत दे दी. 11 अक्तूबर की दोपहर को सोनू पटियाला पहुंच कर नवनिंदर से मिली. सब से पहले नवनिंदर सोनू को अपने साथ एक होटल में ले गया. जहां वह फ्रैश हुई और कपड़े बदल कर वे दोनों पटियाला में लगने वाली बड़ी मार्किट में शौपिंग के लिए निकल गए.

11 अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक नवनिंदर ने सोनू को अपने साथ खूब घुमायाफिराया. सोनू ने नवनिंदर से जिस किसी चीज की मांग की, नवनिंदर ने उन सभी मांगों की पूर्ति की. वे दोनों कभी महंगे 5 स्टार होटल में खाना खाने जाते, कभी बड़ेबड़े शौपिंग कौंप्लेक्स में घूमते और खरीदारी करते. इस बीच मौका मिलते ही सोनू अपने घर वालों से और अपने दोस्तों से फोन कर उन से बात किया करती. अपने घर वालों से उस की लगभग हर दिन ही बातचीत होती थी. सोनू से बातें कर उस के घर वालों के दिल को सुकून मिल जाता था. सोनू के पिता सुखचैन सिंह अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे. घर पर सोनू के नहीं होने से उन्हें घर बेहद सूना लग रहा था. लेकिन 14 अक्तूबर से सोनू ने फोन उठाना बंद कर दिया. उस के घर वाले उस के नंबर पर फोन करते रहे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया.

पहले तो सोनू के घर वालों को लगा कि शायद वह कहीं व्यस्त होगी या फिर शौपिंग करने में मशगूल होगी. लेकिन जब सोनू की तरफ से अपने पिता को या घर में किसी को भी कालबैक नहीं की गई तो उन की चिंता बढ़ने लगी. जब उन को महसूस हुआ कि सोनू फोन नहीं उठा रही तो उन्होंने नवनिंदर के नंबर पर फोन किया. बेटी की खबर से सुखचैन की बढ़ी चिंता सोनू के पिता सुखचैन सिंह की काल देख नवनिंदर ने फोन उठाया और बात की. सुखचैन हड़बड़ाते हुए बोले, ‘‘बेटा, ये सोनू फोन क्यों नहीं उठा रही है? हम काफी देर से उसे फोन कर रहे हैं. न तो वह फोन उठा रही है और न ही कालबैक कर रही है. आखिर वह है कहां पर?’’

पिता की चिंता महसूस कर नवनिंदर हकपका गया. जवाब में उस ने कहा, ‘‘सतश्रीअकाल पापाजी. दरअसल, आज सुबह सोनू के साथ मार्किट शौपिंग के लिए जाना था लेकिन छोटी सी एक बात पर वह रूठ गई. गुस्सा हो कर वह घर से निकल गई, वह भी बिना अपना फोन लिए. मैं ने उस का फोन देखा भी नहीं था. मैं भी उसे तब से फोन मिला रहा हूं, लेकिन अभी देखा कि वह अपना फोन ले जाना भूल गई है. आप चिंता न करें. वह जल्द ही घर लौट आएगी. तब मैं आप की बात उस से करवा दूंगा.’’

अपनी बेटी और होने वाले दामाद के बीच झगड़े की इस बात को सुन कर सुखचैन सिंह के मन का सुख और चैन मानो कहीं गायब सा हो गया. उन के दिल में अपनी बेटी को ले कर बेचैनी पैदा हो गई. वह हर पल सोनू के बारे में ही सोचे जा रहे थे कि आखिर एक बड़े से शहर में उन की बेटी बिना फोन लिए कहां भटक रही होगी या उस के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए. 14 अक्तूबर, 2021 को जब सोनू के घर वालों को यह बात पता चली, उस के बाद से नवनिंदर को हर घंटे फोन आता. लेकिन सोनू के वापस आने की उन्हें कोई खबर नहीं मिली.

सोनू के लापता होने को 24 घंटे हो गए तो घर वालों को अपनी बेटी की चिंता होने लगी कि सोनू का भाई दविंदर सिंह और पिता सुखचैन सिंह अगले दिन 15 अक्तूबर की सुबहसुबह करीब 5 बजे बठिंडा से पटियाला नवनिंदर से मिलने के लिए पहुंच गए. नवनिंदर ने उन्हें अपने और सोनू के बीच होने वाले झगड़े के बारे में बताया लेकिन नवनिंदर की बात सुन कर उन के मन को शांति नहीं हुई. मामले को गंभीर होता देख, दविंदर, सुखचैन सिंह और नवनिंदर, तीनों पटियाला के अर्बन एस्टेट पुलिस स्टेशन जा पहुंचे. अर्बन एस्टेट थाने के थानाप्रभारी रौनी सिंह ने सुखचैन सिंह की शिकायत पर सोनू की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर जल्द ही काररवाई शुरू कर दी. ऐसे में सोनू को ढूंढने के लिए सब से पहले जिस शख्स से पूछताछ होनी थी, वह नवनिंदर ही था.

पुलिस ने नवनिंदर से उन के बीच होने वाले झगड़े की वजह पूछी. जब नवनिंदर ने झगड़े का कारण बताया तो उसे सुन कर पुलिस के मन में पहली नजर में ही उस के ऊपर शक होने लगा. नवनिंदर ने बताया कि मार्किट में एक चीज को खरीदने के लिए उस ने सोनू को मना कर दिया था, जिस के बाद वह रूठ गई थी. होटल में उन के बीच इसी बात को ले कर हलकी नोकझोंक भी हुई थी. नवनिंदर की ये बातें सुन कर थानाप्रभारी के मन में सवाल उठने शुरू हो गए थे. वह सोचने लगे कि जिस जोड़ी की भला कुछ दिनों के बाद शादी होने वाली हो, उन के बीच इस बात पर झगड़ा होना और घर से निकल जाना, कैसे संभव हो सकता है.

ये वजह उन्हें कुछ हजम नहीं हुई. तो ऐसे में नवनिंदर से पुलिस की पूछताछ करने वाली टीम ने कुछ और जरूरी सवालजवाब किए. पुलिस वालों ने नोटिस किया कि नवनिंदर ने उन के जितने सवालों का जवाब दिया, उन से उन्हें नवनिंदर पर शक गहराता जा रहा था. ऐसी स्थिति में थानाप्रभारी ने सोनू के पिता और भाई को तसल्ली दी और जल्द ही सोनू के बारे में पता लगाने का आश्वासन भी दिया. और इस मामले को ले कर पुलिस ने तुरंत काररवाई करनी शुरू कर दी.

पुलिस टीमें जुटीं जांच में 

पुलिस की कई टीमें इस काम में जुट गईं. एक टीम पटियाला में सोनू को ढूंढने में लगी थी तो दूसरी टैक्निकल टीम उस की लास्ट लोकेशन और उस से पहले वह कहांकहां गई, उस के बारे में पता करने में व्यस्त थी. ऐसे में थानाप्रभारी के नेतृत्व में एक टीम ऐसी बनाई गई जोकि सोनू के मंगेतर नवनिंदर की हिस्ट्री का पता लगाने के लिए थी. इस टीम में खुद थानाप्रभारी शामिल थे. एक तरफ पुलिस की सभी टीमें सोनू का पता लगाने का काम कर रही थीं तो दूसरी तरफ समय बीतने के साथसाथ सोनू के घर वालों के सब्र का बांध टूटता जा रहा था. घर वालों के मन में सोनू को ले कर बेचैनी और चिंता ने इस कदर घर कर लिया था कि जिसे निकाल बाहर फंकना बेहद मुश्किल था.

अगले 4-5 दिनों तक पुलिस से सोनू के परिवार वालों को कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन अंदर ही अंदर पुलिस की टीमें अपना काम कर रही थीं. 20 अक्तूबर, 2021 के दिन थानाप्रभारी ने बठिंडा से सोनू के घर वालों को पटियाला अर्बन एस्टेट पुलिस थाने में बुलाया. पुलिस ने नवनिंदर के बारे में कुछ ऐसी चीजों का पता लगा लिया था, जिस का सोनू के घर वालों को पता होना जरूरी था. खबर मिलते ही सुखचैन सिंह, दविंदर और साथ में कुछ और लोग अर्बन एस्टेट पुलिस थाने जल्द से जल्द पहुंच गए. उन के पहुंचते ही थानाप्रभारी ने उन्हें अपने औफिस में बुलाया और उन के होने वाले दामाद नवनिंदर के बारे में कुछ ऐसे खुलासे किए, जिसे सुन कर सोनू के घर वालों के होश उड़ गए थे.

पता चला कि नवनिंदर की पहली शादी 12 फरवरी, 2018 को गांव बिशनपुरा, जिला संगरूर, पंजाब की रहने वाली सुखदीप कौर से हो चुकी थी. सुखदीप उच्चशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती थी और वह खुद भी ट्रिपल एमए थी. लेकिन 19 सितंबर 2021 को उस की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई. रहस्यमयी इसलिए क्योंकि उस की मौत कैसे हुई, इस का किसी के पास कोई प्रूफ नहीं था. पुलिस की टीम ने जब संगरूर में सुखदीप के घर पर जा कर उस की मृत्यु का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि सुखदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. जब उन से पूछा गया कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीन है कि सुखदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई तो उन्होंने बताया कि उस के पूरे शरीर पर किसी चीज का निशान नहीं था, जिस से उन्हें किसी और बात पर शक हो.

मंगेतर ही निकला कातिल परिवार ने यह भी बताया कि सुखदीप 5 महीने की प्रेग्नेंट भी थी. सिर्फ यही नहीं, पुलिस टीम ने नवनिंदर के बारे में कुछ और भी पता लगाया जोकि हैरान करने वाला था. फरवरी 2018 में सुखदीप से पहली शादी के बाद उस ने पहली अक्तूबर, 2018 को भवानीगढ़ संगरूर की रहने वाली लखविंदर कौर से भी शादी की थी. इस की जानकारी सुखदीप के घर वालों को नहीं हुई. लखविंदर के साथ नवनिंदर अर्बन एस्टेट अपने पिता के घर से कुछ दूरी पर किराए के कमरे में रहता था. उन्होंने सुखदीप के घरवालों से नवनिंदर की लखविंदर से शादी के बारे में जब पूछा तो उन्हें इस बात का पता ही नहीं था कि नवनिंदर ने कहीं और भी शादी की थी.

इस का मतलब यह था कि नवनिंदर ने सुखदीप को धोखे में रख कर 6 महीने बाद एक और शादी की थी. इस बीच सब से ज्यादा हैरानी की बात यह थी कि इन सभी बातों के बारे में सोनू के घर वालों को पता ही नहीं था. उन्होंने थानाप्रभारी को बताया कि नवनिंदर और सोनू के बीच पिछले 2 सालों से संबंध था. इस बीच नवनिंदर उन के घर आता था, परिवार वालों से बातचीत करता था, बच्चों के लिए खिलौने लाया करता था लेकिन उस ने कभी भी अपने पुराने रिश्तों के बारे में किसी को नहीं बताया. उन्होंने इस बात को भी माना कि अगर नवनिंदर ने सोनू को भी इस बारे में कुछ भी बताया होता तो सोनू जरूर अपने घर वालों को इस के बारे में बताती.

इस का मतलब यह था कि नवनिंदर सोनू समेत सभी को धोखे में रख कर यह शादी करने वाला था. यह सब जानने और सुनने के बाद अब पुलिस के शक की सुई सिर्फ एक ही शख्स पर आ कर रुक गई, वह था नवनिंदर. सब जानने के बाद सोनू के पिता सुखचैन सिंह ने अगले दिन 21 अक्तूबर को नवनिंदर के खिलाफ अपनी बेटी की किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज करा दी और पुलिस ने सुखचैन सिंह की तहरीर पर नवनिंदर को हिरासत में ले लिया. इस बार नवनिंदर को हिरासत में लेने के बाद पुलिस की पूछताछ करने वाली टीम ने शुरुआत से ही उसे सवालों के ऐसे घेरे में ले लिया कि वह कोई जवाब नहीं दे पाया.

उस ने पुलिस के सवालों पर ऐसी चुप्पी साध ली कि उस से कुबूलवाने के लिए पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ी. सख्ती से पूछताछ करने के बाद नवनिंदर ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने पुलिस के सामने अपने रिश्ते छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू, सुखदीप कौर और लखविंदर कौर के साथ होने की बात को स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि वह इन तीनों के रिश्तों के बीच खुद को काफी उलझा हुआ महसूस करने लगा था, जिस से निकलने के लिए उसे सिर्फ एक ही रास्ता दिखाई देने लगा. वह तीनों में से किन्हीं 2 की मौत ही था.

उस ने अपनी पहली पत्नी सुखदीप को इसलिए जान से मार दिया क्योंकि एक तो वह लखविंदर से उस के रिश्ते के बारे में जान चुकी थी और दूसरी बात यह कि वह उस के बच्चे की मां बनने वाली थी. जबकि नवनिंदर पिता बनने के लिए तैयार नहीं था, वह भी उस स्थिति में जब वह पहले से ही 2 महिलाओं के साथ रिश्ते में बंधा हुआ था. उस ने इस उलझन को खत्म करने के लिए सब से पहले सुखदीप को ठिकाने लगाने के बारे में प्लान किया. चूंकि नवनिंदर ने कानून की पढ़ाई की थी और वह क्रिमिनल लौ के बारे में अच्छे से समझता था, इसलिए वह सुखदीप को मारने के बाद कोई भी सबूत पीछे नहीं छोड़ना चाहता था.

उसे पता था कि हत्या किसी भी तरीके से की जाए, आखिर में कोई न कोई सबूत पीछे छूट ही जाता है. ऐसे में हत्या करने के तरीकों के बारे में वह पिछले 6 महीनों से रिसर्च करने लगा. वह दिनरात इंटरनेट पर तरहतरह के आर्टिकल पढ़ता, क्राइम स्टोरीज पढ़ता और हत्या के तरीके ढूंढता. उस ने पिछले 6 महीनों में हत्या का तरीका ढूंढने के लिए 200 से ज्यादा बौलीवुड, साउथ बौलीवुड और हौलीवुड की फिल्में देख डालीं. वह हर दिन क्राइम पैट्रोल शो भी देखने लगा. अंत में इसी तरह की फिल्में देखने के बाद उसे एक तरकीब सूझी नाइट्रोजन गैस.

उस ने इस बारे में खूब पढ़ा और अंत में इस नतीजे पर पहुंचा कि नाइट्रोजन गैस के इस्तेमाल से शरीर पर किसी तरह के कोई निशान नहीं छूटते और बिना किसी शोरशराबे के पीडि़त पहले बेहोश हो जाता है और उस के बाद उस की मृत्यु तय है. नाइट्रोजन गैस को बनाया मौत का हथियार आखिर उस ने सुखदीप से अपना पीछा छुड़ाने के लिए नाइट्रोजन गैस को अपना हथियार बना लिया. 19 सितंबर, 2021 की रात को नवनिंदर सुखदीप के लिए औक्सीजन गैस के सिलिंडर में नाइट्रोजन भर कर लाया.

रात को सोते समय उस ने सुखदीप से कहा कि अगर वह औक्सीजन गैस इन्हेल (श्वास) करेगी तो यह उस के लिए और उन के बच्चे के लिए अच्छा साबित होगा. सुखदीप पढ़ीलिखी महिला थी और वह भी इस बात को अच्छे से जानती थी. इसलिए नवनिंदर पर किसी तरह का शक होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. नवनिंदर ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए खास तरह का मास्क भी बनवाया था, जिस में छेद नहीं थे. सुखदीप ने नवनिंदर की बात मानते हुए मास्क लगाया और नवनिंदर ने सिलिंडर से धीरेधीरे गैस छोड़नी शुरू कर दी. सुखदीप को क्या मालूम था कि उस का पति औक्सीजन सिलिंडर में नाइट्रोजन गैस भर कर लाया है. नाइट्रोजन गैस उस की नाक से होते हुए उस के फेफड़ों में फैल गई.

धीरेधीरे कुछ ही मिनटों में नाइट्रोजन खून से होते हुए पूरे शरीर में फैल गई, जिस से पहले तो सुखदीप बेहोश हुई और उस के चंद सैकंड बाद उस की मौत हो गई. सुखदीप की हत्या के बाद उस ने सुखदीप के घर वालों को उस की मौत हार्टअटैक से बताई, जिसे सुखदीप के घर वालों ने मान लिया. इसी तरह उस ने सोनू की मौत को भी अंजाम दिया. 11 अक्तूबर को जब सोनू उस से मिलने के लिए बठिंडा से पटियाला आई थी तो उस ने उसी दिन से ही अपने घर, अपने कमरे में सोनू को दफनाने के लिए गड्ढा खोदना शुरू कर दिया था.

गड्ढा खोदने के लिए उस ने बाकायदा टीवी पर तेज वौल्यूम में गाने चला दिए और हाथों में दस्ताने, आंखों पर चश्मा लगा कर फावड़े से गहरा गड्ढा खोद दिया. 11-13 अक्तूबर के बीच उस ने हर दिन थोड़ाथोड़ा कर सोनू की कब्र खोदी. 13 अक्तूबर की शाम को वह शौपिंग कर के घर लौटे तो उस ने अपने वही पुराने नाइट्रोजन गैस सिलिंडर को निकाल लिया. उस ने सोनू से कहा कि अगर वह शुद्ध औक्सीजन इन्हेल करेगी तो उस की मदद से चेहरे पर ग्लो आएगा. नादान सोनू भी सुखदीप की ही तरह नवनिंदर के जाल में फंस गई. उस ने उस की बात मान ली और जैसे ही नाइट्रोजन गैस उस ने कुछ मिनटों के लिए सूंघी, उस के कुछ देर बाद वह बेहोश हुई और ज्यादा गैस इन्हेल करने की वजह से उस की मौके पर ही मौत हो गई.

नवनिंदर ने सोनू की हत्या करने के बाद तुरंत उसे खोदे हुए गड्ढे में डाल दिया. ऊपर से मिट्टी डाल कर जमीन को बराबर किया. फिर टाइल्स का इस्तेमाल कर के उस जगह को एकदम चकाचक बना दिया. उस ने सबूत के कोई निशान नहीं छोड़े. अपना गुनाह कुबूल करने के बाद नवनिंदर की निशानदेही पर पुलिस ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में 368 अर्बन एस्टेट पटियाला, पंजाब (नवनिंदर के घर) पर उस के कमरे में बैड के नीचे के फर्श को उखाड़ा और खुदाई कर के सोनू की लाश बरामद कर ली.

हत्या का परदाफाश करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर 6 दिनों का रिमांड माननीय न्यायाधीश से लिया. रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने उस से विस्तार से पूछताछ की. फिर उसे छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू और पहली पत्नी सुखदीप कौर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. भोलाभाला दिखने वाला शातिर अपराधी नवनिंदर प्रीतपाल सिंह उर्फ सिद्धू अब सलाखों के पीछे है.  Crime Story

 

Ghaziabad News : करोड़ों की चोरियां कर बना रोबिनहुड़

Ghaziabad News : महानगरों की कोठी और बंगलों में चोरी होना कोई नई बात नहीं है. लेकिन देश की राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कवि नगर इलाके की कोठी नंबर केडी-12 में रहने वाले स्टील कारोबारी कपिल गर्ग के घर में 3 सितंबर, 2021 की रात को हुई चोरी की वारदात कुछ अलग थी. पहली खास बात तो यह थी कि कपिल गर्ग उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग के मकान से चंद कदमों कीदूरी पर रहते थे, जिस से वहां की सुरक्षा चाकचौबंद थी. दूसरी बात यह थी कि चोरों ने कपिल गर्ग के मकान में खिड़की की ग्रिल तोड़ कर प्रवेश किया था और वह अलमारी में रखे हुए हीरे व सोने के करोड़ों रुपए के जेवर व नकदी चुरा ले गए थे.

यही कारण था कि चोरी की इस घटना को पुलिस ने असाधारण मान कर इस की गंभीरता से तफ्तीश शुरू की थी. कारोबारी कपिल कुमार गर्ग की कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में हरि स्टील एंड क्रेन सर्विस के नाम से फर्म है. यहां इस कोठी में वह अपने बेटे वंश गर्ग, पुत्रवधू शिवानी और 8 माह की पोती के साथ रह रहे थे. कुछ महीने पहले उन की पत्नी की कोरोना से मृत्यु हो गई थी. 3 सितंबर, 2021 की रात कपिल और उन का बेटा वंश एक कमरे में सोए हुए थे, जबकि पुत्रवधू व पोती दूसरे कमरे में सो रही थी.

इस दौरान रात के किसी वक्त कोठी के पीछे की तरफ से छत से होते हुए चोर कोठी में दाखिल हुए और प्रथम तल पर बनी खिड़की की ग्रिल तोड़ कर कोठी के भीतर प्रवेश किया. चोर सीधे उन की बहू के कमरे में पहुंचे और कमरे के भीतर बने स्टोर में रखी अलमारी में से सोने व हीरे के जेवर चोरी कर ले गए. सुबह उठने पर वारदात का पता चला तो घर में कोहराम मच गया. हैरानी यह थी कि परिवार में सोते हुए किसी भी सदस्य को इस की भनक तक नहीं लगी. तत्काल पुलिस को सूचना दी गई. वारदात चूंकि शहर की सब से पौश कालोनी की थी. इसलिए कविनगर थानाप्रभारी संजीव शर्मा टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंच गए.

एसएसपी पवन कुमार, एसपी (सिटी प्रथम) निपुण अग्रवाल ने भी मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का निरीक्षण किया. मौके पर फोरैंसिक टीम ने भी पहुंच कर जांच के लिए नमूने एकत्र किए. डौग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया, लेकिन उन से कोई खास मदद नहीं मिली. शुरुआत में कपिल गर्ग इतना ही बता सके कि घर में करीब एक करोड़ रुपए से अधिक के गहनों व नकदी की चोरी हुई है. चोरी हुए जेवरों में उन की विवाहित बेटी के भी आभूषण थे, जो उन के पास ही रखे थे. चोरों ने जिस तरह सफाई के साथ घर में प्रवेश किया था और उस स्थान को ही निशाना बनाया था, जहां कीमती गहने रखे थे, उस से साफ था कि चोरी की वारदात में किसी पहचान वाले का ही हाथ होगा.

दरअसल, चोरों ने मकान के पिछले हिस्से से, जोकि बंद रहता है, उस तरफ से कोठी में प्रवेश किया. उन को शायद जानकारी थी कि जेवर कहां रखे हैं. इस के चलते वह कोठी में बने सिर्फ उस कमरे में पहुंचे, जहां जेवर रखे हुए थे. गार्ड व घरेलू सहायक को भी पता नहीं चला कि घर में चोर घुसे हैं. घटना के समय गार्ड व घरेलू सहायक भी घर में मौजूद थे. घरेलू सहायक मनोज पहली मंजिल पर बने कमरे में सोया हुआ था, जबकि गार्ड दिल बहादुर बाहर गार्डरूम में तैनात झपकी ले रहा था. पुलिस ने दोनों से ही पूछताछ की और उन की बैकग्राउंड के बारे में जानकारी हासिल की.

लेकिन कपिल गर्ग ने उन में से किसी पर भी शक जाहिर नहीं किया था. पुलिस ने तहकीकात के लिए दोनों के पहचानपत्र और मोबाइल नंबर ले लिए ताकि उन के फोन की काल डिटेल्स निकाली जा सके. घर में सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे, इसलिए पुलिस को लगा कि चलो जिस ने भी चोरी की है, वह सावधानी बरतने के बावजूद पकड़ में आ जाएगा. लेकिन जब कैमरों की जांच की गई तो पता चला कि पिछले काफी समय से सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हुए थे. पुलिस ने परिवार की इस लापरवाही पर माथा पीट लिया. अकसर ऐसा ही होता है लोग हजारों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन अपनी हिफाजत के लिए लगे सीसीटीवी कैमरे लगवाने के बाद कभी यह देखने की कोशिश नहीं करते कि वे काम कर भी रहे हैं या नहीं.

एसएसपी पवन कुमार के निर्देश पर कपिल गर्ग की शिकायत पर कविनगर थाने में 4 सितंबर, 2021 को भारतीय दंड संहिता में चोरी की धारा 380, 457 के अंतर्गत केस दर्ज कर के थाने के एसएसआई देवेंद्र कुमार सिंह को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी. पहले दिन से ही पुलिस पर वारदात का खुलासा करने के लिए उच्चाधिकारियों का जबरदस्त दबाव था. इसीलिए एसपी (सिटी) निपुण अग्रवाल ने थानाप्रभारी संजीव शर्मा के साथ क्राइम ब्रांच प्रभारी सचिन मलिक की एक विशेष टीम का गठन कर दिया. थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें इलाके में मुखबिरों की सहायता से सुरागसी के काम में जुट गईं.

थाने की पुलिस कपिल गर्ग के परिचितों, उन के घर आने वाले लोगों, फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों के साथ कालोनी में आने वाले वेंडरों की लिस्ट बना कर उन से पूछताछ का काम करने लगी. सीसीटीवी फुटेज से दिखी आशा की किरण दूसरी तरफ क्राइम ब्रांच की टीम ने केडी ब्लौक में सभी कोठियों और रोड साइड में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का काम शुरू कर दिया. पुलिस की टीमों में 2 दिन के भीतर 25 से अधिक सीसीटीवी के फुटेज देखे तो क्राइम ब्रांच की टीम को आशा की किरण दिखाई देनी शुरू हो गई. दरअसल, घटना वाली रात 3 से 4 बजे के बीच एक काले रंग की स्कौर्पियो गाड़ी कपिल गर्ग के घर के आसपास तथा उन की गली के बाहर मंडराती नजर आई.

लेकिन फुटेज इतनी धुंधली थी कि उस में सवार लोगों व गाड़ी का नंबर स्पष्ट नहीं दिखा. लेकिन इस से उम्मीद का एक सिरा पुलिस के हाथ लग गया था. जिस जगह चोरी हुई, वहां से 3 रास्ते शहर से बाहर जाने वाले थे. पुलिस ने उन सभी रास्तों पर आगे की तरफ बढ़ते हुए जितने भी सीसीटीवी कैमरे रोड साइडों में लगे थे, उन्हें खंगालने का काम शुरू कर दिया. जैसेजैसे टीम वहां के सीसीटीवी फुटेज खंगालती रही, वैसेवैसे सुराग पुख्ता होता चला गया. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रैसवे पर बने टोल प्लाजा की तरफ बढ़ते हुए ये काली स्कौर्पियो गाड़ी एक के बाद एक कई सीसीटीवी में कैद हो गई, लेकिन कहीं भी गाडी का नंबर साफतौर पर दिखाई नहीं दिया.

सीसीटीवी की जांच में ये गाड़ी जब टोल प्लाजा के पास एक पैट्रोल पंप पर पहुंची, गाड़ी कुछ देर वहां रुकी, लेकिन उस ने पैट्रोल पंप से उस में तेल नहीं भरवाया. वह गाड़ी थोड़ी देर रुक कर टोल को पार कर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रैसवे पर चढ़ गई, जिस से साफ हो गया कि ये गाड़ी गाजियाबाद से बाहर चली गई थी. लेकिन इस पूरी कवायद का फायदा ये हुआ कि पुलिस को टोल प्लाजा के सीसीटीवी से स्कौर्पियो कार का नंबर मिल गया. इस जगह मिली सीसीटीवी में यह भी साफ हो गया कि गाड़ी में ड्राइवर समेत कुल 2 लोग सवार थे. पुलिस ने टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज को भी जांच के लिए कब्जे में ले लिया. टोल प्लाजा के फास्टटैग एकाउंट की जांचपड़ताल की तो पता चला कि किसी इरफान नाम के व्यक्ति के वालेट से ये पेंमेट हुई थी.

टोल प्लाजा और परिवहन विभाग से सभी डिटेल्स निकलवा कर जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि ये गाड़ी और फास्टटैग से जुड़ा बैंक खाता इरफान पुत्र मोहम्मद अख्तर, निवासी गांव जोगिया गाढ़ा, थाना पुपरी, जिला सीतामढ़ी, बिहार के नाम पर है. कविनगर थानाप्रभारी संजीव कुमार शर्मा ने जब इस जांच प्रगति से एसपी (सिटी) निपुण अग्रवाल को अवगत कराया तो उन्होंने एक टीम तत्काल बिहार के सीतामढ़ी रवाना करने का आदेश दिया. उसी दिन आरटीओ विभाग से भी स्कौर्पियो गाड़ी के बारे में जानकारी हासिल कर ली गई थी.

यूपी पुलिस टीम पहुंची सीतामढ़ी एसएसआई देवेंद्र सिंह और क्राइम ब्रांच प्रभारी सचिन मलिक के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम सीतामढ़ी के लिए भेज दी गई. 7 सितंबर, 2021 को पुलिस की टीम ने स्थानीय पुपरी थाने से इरफान के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि इरफान एक शातिर अपराधी है. उस के खिलाफ पुपरी थाने में ही झगड़ा, जानलेवा हमला करने और धमकी देने के मामले दर्ज हैं. स्थानीय पुलिस से गाजियाबाद पुलिस को पता चला कि दिल्ली, पंजाब, गोवा, कर्नाटक, ओडिशा व तेलंगाना की पुलिस इरफान की तलाश में अकसर उस के गांव में छापा मारती रहती है लेकिन वह इतना शातिर है कि पुलिस के हत्थे नहीं चढता.

स्थानीय पुलिस को साथ ले कर जब पुलिस की टीम ने इरफान के गांव जोगिया गाढ़ा में उस के घर पर छापा मारा तो वहां इरफान नहीं मिला, लेकिन उस की पत्नी गुलशन परवीन पुलिस को मिल गई. पुलिस को गांव में उस के घर में खड़ी वह स्कौर्पियो कार भी मिल गई, जिसे कविनगर में कपिल गर्ग के घर में चोरी के दौरान सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था. इतना ही नहीं, वहां बिहार नंबर की एक महंगी जगुआर कार भी मिली. पुलिस समझ गई कि गाजियाबाद में चोरी के बाद इरफान सीधे अपने गांव आया था और चोरी का माल ठिकाने लगाने के बाद वह वहां से खिसक गया. पुलिस को पूरा यकीन था कि इतनी बड़ी चोरी करने के बाद इतनी जल्दी उस ने चोरी का सारा माल नहीं बेचा होगा, लिहाजा पुलिस ने इरफान के घर की तलाशी ली.

पुलिस को वहां से नकदी तो ज्यादा नहीं मिली, लेकिन कई लाख रुपए के गहने बरामद हुए जो कपिल गर्ग के घर हुई चोरी का माल था या नहीं, यह जानने के लिए पुलिस टीम ने घर से बरामद हुए सामान के फोटो खींच कर गाजियाबाद में एसएचओ संजीव शर्मा को भेजे. संजीव शर्मा ने कपिल गर्ग के परिवार को बुला कर वाट्सऐप से आई फोटो जब परिजनों को दिखाई तो उन्होंने बता दिया कि इस में से अधिकांश गहने उन के घर से ही चोरी हुए हैं. अब यह बात पूरी तरह साफ हो गई कि कपिल गर्ग के घर हुई चोरी में इरफान का ही हाथ है. पुलिस ने उस की पत्नी गुलशन उर्फ परवीन को चोरी का माल घर में रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस को स्थानीय पुलिस से इस बात की जानकारी भी मिल चुकी थी कि इरफान ने अपने गांव व आसपास के इलाकों में बहुत सारे लोगों को शार्टकट से पैसा कमाने का लालच दे कर अपने गैंग में शामिल कर लिया था. इसलिए पुलिस ने उस की पत्नी गुलशन से स्थानीय थाने में महिला पुलिस की मदद से सख्ती के साथ पूछताछ की तो पता चला कि गाजियाबाद के कविनगर में हुई चोरी के दौरान पुपरी थाना क्षेत्र का ही इरफान का ड्राइवर मोहम्मद शोएब पुत्र गुलाम मुर्तजा निवासी राजाबाग कालोनी तथा विक्रम शाह पुत्र रामवृक्ष शाह निवासी गाढ़ा कालोनी भी शामिल था.

पुलिस ने उसी रात छापा मारा. संयोग से दोनों अपने घर पर ही मिल गए और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. उन के घर से भी तलाशी के दौरान चोरी के कुछ आभूषण बरामद हुए जो उन्होंने कपिल गर्ग के घर से चोरी किए थे. तीनों आरोपियों को सीतामढ़ी की अदालत में पेश करने के बाद कविनगर पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर ले कर गाजियाबाद आ गई. यहां पर सक्षम न्यायालय में पेश कर तीनों को पुलिस ने 3 दिन की रिमांड पर ले लिया. जिस के बाद उच्चाधिकारियों ने गुलशन परवीन, शोएब और विक्रम से विस्तृत पूछताछ की. शोएब तथा विक्रम ने घटनास्थल केडी 12 में कपिल गर्ग की कोठी पर जा कर इस बात की पहचान कर दी कि वे इरफान के साथ 3 सितंबर को चोरी करने आए थे. इस के बाद शुरू हुआ ताबड़तोड गिरफ्तारियों का सिलसिला.

पुलिस की टीमों ने इरफान के गिरोह में काम करने वाले इमरान पुत्र अकीउर्रहमान मूल निवासी एकता नगर, थाना क्वारसी, अलीगढ़ जो इन दिनों बरेली के खुशबू एनक्लेव इलाके में रहता था, को भी गिरफ्तार किया. इमरान चोरी के आभूषण बिकवाने में इरफान की मदद करता था. पुलिस ने अलीगढ़ के रहने वाले 3 सर्राफा कारोबारियों मुरारी वर्मा, शिवम वर्मा तथा धीरज वर्मा को भी गिरफ्तार किया. जिन से चोरी के कुछ आभूषण भी बरामद किए गए. इन चारों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीमों ने जांचपड़ताल और पूछताछ को आगे बढ़ाते हुए इरफान के गांव के रहने वाले मोहम्मद मुजाहिद और पड़ोस के जाहिदपुर गांव में रहने मोहम्मद सरबरूल हुदा को भी गिरफ्तार कर लिया. लेकिन यह सिलसिला यहीं खत्म होने वाला नहीं था.

छानबीन आगे बढ़ी तो पता चला कि अलीगढ़ में बरौला जाफराबाद में रहने वाली इरफान की प्रेमिका रूपाली उर्फ संगीता गांव गाढ़ा जोगिया में रहने वाली उस की विधवा बहन लाडली खातून को भी इरफान के चोरी के कारनामों की पूरी जानकारी रहती है. वे दोनों न सिर्फ पुलिस से बचने के लिए छिपने में उस की मदद करती हैं, बल्कि चोरी के माल को ठिकाने लगाने से ले कर उस से ऐश भरी जिंदगी जीने में भी हिस्सेदार बनी रहती हैं. एक के बाद एक पुलिस इरफान से जुड़े 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी, लेकिन पुलिस के लिए छलावा बन चुका इरफान उर्फ उजाला हर बार पुलिस की पकड़ से फिसल जाता था.

इस दौरान साक्ष्यों के अभाव में उस की बहन लाडली खातून तथा प्रेमिका रूपाली उर्फ संगीता की जमानत भी हो गई. लेकिन इरफान फिर भी पुलिस की पकड़ में नहीं आया. कविनगर पुलिस तथा क्राइम ब्रांच की टीम लगातार उस की गिरफ्तारी के प्रयास में लगी रही. इस दौरान कविनगर थाने के प्रभारी संजीव शर्मा का तबादला हो गया था. उन की जगह अब्दुल रहमान सिद्दीकी कविननगर थाने के नए थानाप्रभारी बन कर आए. उन्होंने जांच अधिकारी देवेंद्र सिंह के साथ मिल कर नई रणनीति तैयार की और अब तक पूछताछ में आए तमाम लोगों की निगरानी का काम शुरू करा दिया जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इरफान के साथ जुड़े थे.

लगातार प्रयास के बाद पुलिस टीम को जानकारी मिली कि इरफान 24 अक्तूबर को गाजियाबाद कोर्ट में अपने वकील से मिलने के लिए आएगा. क्योंकि उस ने अपने गिरोह के गिरफ्तार साथियों की जमानत करानी है. पुलिस ने 24 अक्तूबर को इरफान को पकड़ने के लिए बड़ा जाल बिछाया. अदालत में वकीलों के चैंबर से ले कर अदालत के बाहर जाने वाले रास्तों पर सादा लिबास में पुलिस की टीमों ने जाल बिछा दिया. दोपहर बाद करीब साढ़े 3 बजे जब इरफान अपने वकील से मिल कर आरडीसी कालोनी से निकल कर बसअड्डे की तरफ जाने के लिए कचहरी के गेट से बाहर निकला तो सादा लिबास में खड़ी पुलिस की टीमों ने उसे दबोच लिया और गाड़ी में डाल कर कविनगर थाने ले आई.

जिस इरफान को पकड़ने के लिए कविनगर थाने की पुलिस 2 महीनों से हाथपांव मार रही थी, उस से पूछताछ करने के लिए एसपी (सिटी) निपुण अग्रवाल और एसएसपी पवन कुमार ने खुद इरफान उर्फ उजाला उर्फ आर्यन से पूछताछ की तो उस के बारे में जान कर सभी की आंखें हैरत से फैल गईं. शातिर चोर निकला इलाके का रौबिनहुड क्योंकि जिस शख्स को वे महानगर का सब से बड़ा चोर मान कर पकड़ने में लगे थे, असल में अपराधी के रूप में वह एक रौबिनहुड था, जो अमीरों के घर में चोरी कर के उन से की गई कमाई को गरीबों में बांट देता था. वह गरीब परिवार की लड़कियों की शादियां कराता था.

सीतामढ़ी में उस के गांव में रहने वाला कोई गरीब अगर बीमार पड़ता या किसी ऐसी गंभीर बीमारी से पीडि़त हो जाता कि उस का इलाज करना उस की सामर्थ्य में नहीं होता तो वह ऐसे लोगों के इलाज का पूरा खर्च खुद उठाता था. किसी गरीब की बेटी की डोली अगर पैसे के बिना न उठ रही हो तो इरफान पैसा दे कर इस नेक काम में परिवार की मदद करता. इरफान दिल्ली के कुख्यात चोर बंटी के कारनामे से बेहद प्रभावित था और उसे वह अपना आदर्श मानता है.

मूलरूप से बिहार के सीतामढ़ी में जोगिया गाढ़ा गांव के रहने वाले इरफान (35) का परिवार पहले बहुत गरीब था. पिता खेतों में मजदूरी किया करते थे और साल 2000 में उन की मौत हो गई. छोटे से टूटेफूटे मकान में रहने वाले इरफान के परिवार में उस के 2 भाई और 2 बहनें हैं. इरफान के साथ उस की 65 साल की मां नसीमा खातून, बड़ा भाई फरमान भाभी गिन्नी खातून और इरफान की पत्नी गुलशन परवीन तथा उस की 2 बेटियां रहते हैं. उस की एक बड़ी विधवा बहन लाडली खातून भी अपने एक बच्चे के साथ उसी के साथ रहती थी. पांचवीं कक्षा तक पढ़ा इरफान लिखना नहीं जानता. बस वह अपने हस्ताक्षर कर सकता है. लेकिन इस के बावजूद उस के अंदर ऐसी खासियत है कि वह जिस से भी एक बार मिल ले, वह उस का मुरीद हो कर रह जाता है.

इरफान ने 2 शादियां की थीं. उस की दोनों ही शादियां प्रेम विवाह थीं. पहली शादी उस ने सीतामढ़ी की गुलशन परवीन से की, जबकि दूसरी मुंबई में रहने वाली हिंदू भोजपुरी एक्ट्रैस से. पहली चोरी में ही मिले थे 35 लाख रुपए पहली पत्नी गुलशन को उस ने पहली बार अपनी बड़ी भाभी के घर जाने के दौरान देखा था. वहीं दोनों में प्यार हो गया और जल्द ही दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. उस वक्त इरफान चोरी के धंधे में नहीं था और परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी. दोनों की शादी के लिए उन के परिवार वाले रजामंद नहीं थे, लेकिन उन की मरजी के खिलाफ दोनों ने शादी कर ली.

शादी के बाद गुलशन परवीन ने पति इरफान के साथ घर की गरीबी को दूर करने के लिए एक छोटा सा होटल खोलने से ले कर कपड़े की दुकान चलाने तक के कई छोटेबड़े काम किए. लेकिन हालात नहीं सुधरे. इसीलिए कुछ समय बाद अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इरफान पत्नी को गांव में छोड़ कर मुंबई से दिल्ली तक घूमा. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. तभी उस की छोटी बहन की शादी तय हो गई. लेकिन परिवार के पास इतना भी पैसा नहीं था कि उस की शादी की जा सके. यह 11 साल पहले की बात है. तब इरफान को लगा कि सीधे रास्ते से जिदंगी में कुछ नहीं किया जा सकता. इरफान ने बहन की शादी के लिए पहली बार बिहार में ही बड़ी चोरी की थी, जिस में उसे 35 लाख रुपए मिले.

बहन की शादी हो गई, लेकिन इस के बाद इरफान की जिदंगी बदल गई. इस के बाद इरफान ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. उसे लगा कि अगर किसी नेक काम के लिए अमीर लोगों के घर से माल उड़ा कर जरूरतमंदों की मदद की जाए तो यह पाप नहीं, बल्कि दुनिया का सब से नेक काम है. बस रौबिनहुड के इसी सिद्धांत को अपना कर इरफान अपराध के दलदल में उतरा तो फिर उस ने वापस मुड़ कर नहीं देखा. वह चोरी दर चोरी करता चला गया. इरफान उर्फ उजाला 22 साल की उम्र में ही मुंबई चला गया. उस के बारे में लोगों को यही जानकारी थी कि वह मुंबई, हैदराबाद, कानपुर, दिल्ली में बैग बनाने का बिजनैस करता है. बाद में 2012 में जब वह घर आया तो उस ने लोगों को बताया कि कि वह मुंबई में बियर बार चलाता है.

हालांकि एक जमाना था जब इरफान का परिवार मजदूरी करता था. रहने के नाम पर बस एक झोपड़ी थी. काम नहीं मिलने पर खाने को लाले पड़ जाते थे. लेकिन परिवार की माली हालत सुधारने के लिए जब उस ने चोरी करनी शुरू की तो उस का रुतबा ही बदल गया था. गांव वालों को वह अपने काम के बारे में कुछ नहीं बताता था. गांव आते ही करीब करीब 10 साल पहले उस ने गांव में पहले जमीन खरीदी, उस के बाद जब और पैसा आया तो आलीशान घर बनवाया. फिर एक से एक महंगी बाइक खरीदी और लाखों रुपए की कीमत की लग्जरी कारें खरीदीं. बाद में उस ने अपने गैंग में गांव के कुछ युवकों को भी शामिल कर लिया और उन्हें अपने साथ घुमाने लगा.

गांव के युवकों पर वह पानी की तरह रुपए खर्च करता, जिस से वह भी उस की तरह जिंदगी बसर करने के लिए उस के चोरी के धंधे से जुड़ते चले गए. धीरेधीरे महंगी कार खरीदने के बाद उसे विदेशी गाडि़यां खरीदने का शौक लग गया. जगुआर से जाता था चोरी करने  साल 2012 में वह पहली बार तब खबरों में आया जब उस ने दरभंगा में एक नाचने वाली पर लाखों रुपए उड़ाए. बाद में 2013 में कानपुर पुलिस उसे 30 लाख की ज्वैलरी चोरी के मामले में गिरफ्तार करने गांव आई तो वह पुपरी थाने से भाग गया.

फिर वह 2014 में चुनाव के दौरान अपनी महंगी गाड़ी में 4 लाख रुपए के साथ पकड़ा गया था. इस के बाद धीरेधीरे लोगों को पता चलने लगा कि वह एक अपराधी है और बड़े महानगरों में रहने वाले लोगों के घरों में चोरियां करता है. कविनगर (गाजियाबाद) में चोरी की वारदात से कुछ दिन पहले बिहार जाते हुए इरफान की जगुआर कार सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी. इस के बाद उस ने अपनी पत्नी गुलशन के नाम से नई स्कौर्पियो कार खरीद ली. कपिल गर्ग के घर चोरी करने के लिए इरफान इसी स्कौर्पियो से अपने ड्राइवर शोएब के साथ आया था. इरफान ने दिल्ली में नोटबंदी से पहले एक जज के घर 65 लाख रुपए की चोरी की थी. जब वह चोरी करने के लिए घर में घुसा तो अलमारी में नोटों की गड्डियां मिलीं.

उस ने 2 बैगों में नोट भरे, लेकिन वह एक ही बैग उठा पाया और ले कर चला गया. चोरी के बाद नोट गिने तो 65 लाख रुपए निकले. बाद में पता चला कि जज ने केस ही दर्ज नहीं कराया था.  इरफान अपराध की दुनिया का अब वह नाम बन चुका नाम था, जो चोरी के मामले में एक्सपर्ट बन चुका था. वह बंटी चोर की तरह अकेले ही चोरी की वारदात को अंजाम दिया करता था. चोरी की वारदात को अंजाम देने के समय इरफान अपने साथ महज पेचकस रखता था. पूरे तरीके से काले कपड़े पहन कर घर में प्रवेश किया करता था. आमतौर वह नंगे पांव ही घरों में घुसता था. वह दीवार पर नंगे पैर चढ़ कर कोठियों में ऐसे घुस जाता था जैसे स्पाइडरमैन फिल्म का हीरो दीवारों पर चढ़ता है. वह कभी भी मेनगेट से नहीं जाता, बल्कि पिछली दीवार से चढ़ कर चोरी करता था.

कविनगर के कारोबारी कपिल गर्ग की कोठी में भी वह पीछे के रास्ते से ही अकेले घुसा था. पिछले 10 सालों से चोरी की वारदात करने के बावजूद इरफान आज तक किसी भी वारदात में रंगेहाथ नहीं पकड़ा गया. वारदात के दौरान न तो किसी कोठी के गार्ड ने उसे पकड़ा और न ही कोठियों में पलने वाले कुत्तों ने उस पर हमला किया. इरफान चोरी के दौरान कीमती गहनों और नकदी पर ही हाथ साफ करता था. घर के सामान में वह कीमती इलैक्ट्रौनिक सामानों को ही अपने साथ ले जाता था.

इरफान जब चोरी करने के लिए जाता तो वह यह नहीं देखता कि घर किस का है और उस के आसपास कौन रहता है. बस उस के दिल से अगर ये आवाज निकल जाती कि फलां घर पर हाथ साफ करना है तो वह बेधड़क उस घर में रखे कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता. देश के बड़े शहरों में थे इस शातिर चोर की गैंग के सदस्य 2 साल पहले उस ने गोवा के राज्यपाल के घर के पास से एक व्यापारी के घर से लाखों रुपए की नकदी और गहने चुरा लिए क्योंकि उस के दिल से आवाज निकली कि इस घर में मोटा माल मिलेगा.

इरफान की खूबी थी कि किसी भी वारदात को करने से पहले खुद कभी रेकी नहीं करता था. हां, देश के कई बड़े शहरों में फैले उस के गैंग के सदस्य जरूर रेकी कर के उसे जरूर बता देते थे कि अमुक घर में मोटा माल मिल सकता है या उस में रहने वाले लोग घर से बाहर हैं. लेकिन तब भी इरफान तब तक चोरी नहीं करता था, जब तक मौके पर जा कर उस के दिल से आवाज नहीं निकलती. वह अपनी महंगी गाड़ी से निकलता और दिल की गवाही देते ही वारदात को अंजाम दे देता था. उस का अंदाजा इतना सटीक था कि वह आज तक जिस घर में गया, लाखों रुपया ले कर ही निकला.

इरफान उर्फ उजाला लग्जरी गाडि़यों से अपने ड्राइवर व साथियों के साथ चोरी करने निकलता. कविनगर में चोरी करने के बाद वह अपने गांव सीतामढ़ी, बिहार चला गया था. वहां उस ने कुछ दिनों के लिए चुराई गई ज्वैलरी अपने खेत के गड््ढे में दबा दी थी. इस के बाद ज्वैलरी को बिहार के मुजफ्फरपुर व दरभंगा के सुनारों के यहां गिरवी रख कर मोटी रकम ले ली थी. कुछ ज्वैलरी उस ने बेच भी दी थी. इस के बाद वह अलीगढ़ चला गया, जहां 3 सुनारों को उस ने चोरी के कुछ जेवर बेचे. 1-2 दिन अपनी माशूका रूपाली के पास रहा उस के बाद वहीं से नेपाल भाग गया. इस दौरान उस के लोग चोरी के मामले में गिरफ्तार हो चुकी गुलशन, बहन लाडली व माशूका रूपाली की जमानत कराने में जुटे रहे. इरफान लगातार अपने लोगों के संपर्क में था.

इरफान ने पूछताछ में बताया कि वह तो बस गरीबों की मदद करने के लिए चोरी करता है, लेकिन पुलिस तो उस से भी बड़ी चोर है. जिस का उदाहरण देने के लिए इरफान ने गाजियाबाद पुलिस को एक किस्सा सुनाया. उस ने बताया कि बंगलुरु में उस ने चोरी की एक वारदात को अंजाम दिया था, जिस में उसे मात्र डेढ़ लाख रुपए मिले थे. इस वारदात के बाद उस ने हैदराबाद में चोरी की एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया. लेकिन तब तक बंगलुरु पुलिस ने उसे अपने इलाके में हुई चोरी की वारदात में गिरफ्तार कर लिया और उस के घर से 40 लाख रुपए बरामद हुए. लेकिन यह रकम को बंगलुरु पुलिस ने बरामदगी में नहीं दिखाई थी और डेढ़ लाख रुपए की चोरी का खुलासा कर दिया.

इरफान ने दिल्ली में चोरी की कई वारदातों को अंजाम दिया, लेकिन वह केवल 2 बार पकड़ा गया. पहली बार 2017 में इरफान को दक्षिणपूर्वी दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. दरअसल इस मामले में गिरफ्तारी की भी एक दिलचस्प कहानी है. 24 मई, 2017 को उस ने न्यू फ्रैंड्स कालोनी में रहने वाले राजीव खन्ना के घर में लाखों रुपए के सोने और हीरे के आभूषण चोरी किए थे. इस मामले में स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र कुमार ने सीसीटीवी फुटेज तथा मौके पर मिले एक मोबाइल फोन से सुराग लगा कर इरफान व उस के एक साथी को गिरफ्तार कर लिया था.

दरअसल, इस वारदात में इरफान गलती से अपना मोबाइल घटनास्थल पर भूल गया था. यही मोबाइल फोन उस की गिरफ्तारी का सबब बन गया. हालांकि इस वारदात के बाद उस ने अपने व अपने घर वालों तक के फोन नंबर बदलवा दिए थे, मगर अंत में पकड़ा गया. दूसरी बार इरफान उर्फ उजाला को जनवरी 2021 में दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच की इंटरस्टेट यूनिट के एसीपी संदीप लांबा व इंसपेक्टर गुरमीत की टीम ने गिरफ्तार किया था. तब उस ने दिल्ली एनसीआर सहित आधा दरजन राज्यों में चोरी करने का खुलासा किया था.

उस ने पुलिस को बताया था कि उस के गैंग के सदस्य दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब आदि राज्यों में फैले हुए हैं. दिन के समय वे गरीबों की मदद के लिए चंदा मांगने के बहाने रेकी करते थे और जो घर बंद मिलता, उस के बारे में उसे बता देते थे. इरफान उर्फ उजाला ने करीब 3 साल पहले दिल्ली में ताबड़तोड़ चोरी की घटनाएं कर दिल्ली पुलिस की नींद उड़ा दी थी. बाद में जब लांबा की टीम ने उसे पकड़ा तो उन्होंने इरफान को कुरान शरीफ की कसम दिला कर दिल्ली में चोरी न करने का वादा लिया. तब उस ने भरोसा दिया था कि वह आज के बाद दिल्ली में कभी चोरी नहीं करेगा.

दिल्ली पुलिस को किए वादे पर इरफान खरा भी उतर रहा था. इसीलिए इरफान ने दिल्ली को छोड़ कर गाजियाबाद को अपना निशाना बना लिया था. 2 बीवी और 4 प्रेमिकाएं हैं इस चोर की इंसान में कुछ खूबियां होती हैं तो कुछ बुरी लतें भी होती हैं. इरफान की 2 बीवी तथा  4 प्रेमिकाएं हैं. चोरी में मोटा माल हाथ लगने के बाद सब से पहले किसी प्रेमिका के पास ही जाता था. दोनों बीवियों के अलावा वह अपनी इन प्रेमिकाओं पर भी दिल खोल कर पैसा खर्च करता था. इन में से अलीगढ़ में रहने वाली प्रेमिका रूपाली को तो कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. जबकि उस की दूसरी माशूकाएं आगरा, सवाई माधोपुर तथा बंगलुरु की रहने वाली हैं. चोरी की रकम से वह इन्हें महंगे उपहार देता था. बदले में वे उसे न सिर्फ छिपने में मदद करतीं बल्कि उस की अय्याशी का सामान भी बनतीं.

इरफान मुंबई, चंडीगढ़, बंगलुरु और दिल्ली के लाउंज व बारों में जम कर मौजमस्ती करता व रुपए उड़ाता था. महंगी कारों, डिजाइनर कपड़ों और विलासितापूर्ण जीवन का शौकीन इरफान बार में एकएक गाने की फरमाइश पूरी करने पर 10-10 हजार रुपए उड़ाता था. भोजपुरी फिल्मों की एक अभिनेत्री मुंबई में रहने के दौरान उस की दोस्त बन गई थी, जो मुंबई में रहती थी, जब भी चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम देता तो पहले गांव जाता, वहां लोगों की मदद करने के लिए जो भी पैसा खर्च करना होता करता. कुछ रोज अपनी पत्नी गुलशन के साथ गुजरता, उस के बाद वह मुंबई चला जाता और अपनी भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री प्रेमिका के साथ रह कर जम कर मौजमस्ती करता.

उस की पहचान एक पैसे वाले के रूप में होने लगी. अपनी फिल्मी माशूका पर दिल खोल कर पैसे खर्च करता और जब पैसा खत्म होने लगता तो किसी दूसरे शिकार की तलाश में मोटा हाथ मारने के लिए किसी दूसरे शहर का रुख कर लेता. बाद में उस ने इस एक्ट्रैस से शादी कर ली. उस की कमजोरी थी फेसबुक, जिस पर इरफान अपनी विलासितापूर्ण जिदंगी की फोटो और वीडियो अपलोड करता रहता था. इरफान ने एक साल पहले ही अपनी पत्नी के नाम से महंगी जगुआर कार खरीदी थी, जिस से इलाके में उस की शान और भी बढ़ गई. शोएब नाम के अपने ड्राइवर के साथ वह कार में चलता था.

जब वह दूसरे महानगरों में चोरी करने के लिए जाता तो अकसर अपने ड्राइवर व गाड़ी को ले कर चोरी करने जाता था. इतनी महंगी कार होने के कारण कोई भी उस पर शक नहीं करता था. वह महंगे होटलों में रुकता है. जब वह कार से चोरी करने नहीं जाता तो बिहार से दूसरे शहरों में आनेजाने के लिए हवाई जहाज से सफर करता था. धीरेधीरे जब दूसरे राज्यों की पुलिस उसे गिरफ्तार करने गांव पहुंचने लगी तो गांव वालों को पता चल गया कि वह एक कुख्यात चोर है. लेकिन तब तक वह गांव वालों के बीच अपनी छवि एक फरिश्ते के रूप में गढ़ चुका था. पुलिस कुछ भी कहती, लेकिन लोग उस के खिलाफ न तो कुछ बोलते न ही उस के बारे में गलत सुनने को तैयार होते थे.

चोरी के पैसों से उस ने धीरेधीरे अपने गांव व आसपास के लोगों को सहयोग करना शुरू कर दिया. अपने गांव की नाली खडं़जे से ले कर जर्जर सड़कों को भी बनवाना शुरू कर दिया. धीरेधीरे लोग उस के पास मदद मांगने आने लगे तो उसे भी अपनी तारीफें सुनने के कारण उन की मदद करने का चस्का लग गया. वह कभी किसी गरीब की बेटी की शादी करा देता तो कभी गांव में किसी बीमार के इलाज का खर्च उठा लेता. जरूरतमंदों की खुले रूप से करता था आर्थिक मदद उस की छवि गांव में रौबिनहुड जैसी बन गई. सामाजिक काम में इरफान किस कदर सक्रिय हो चुका था, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2 साल पहले अपने पड़ोस में रहने वाली एक गरीब लड़की के कैंसर के औपरेशन पर उस ने 20 लाख रुपए खर्च कर दिए थे.

वह अपने गांव में हर महीने चिकित्सा शिविर का आयोजन करता था. गांव के लोगों को अब पता था कि वह बड़े शहरों का महाचोर है. इस के बावजूद गांव के लोगों के लिए वह फरिश्ता ही था, जो उन की जिंदगी में उजाला भरने के लिए चोरी कर अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहा था. इसीलिए लोग उस के नाम के आगे उजाला लगाने लगे थे. इरफान जब लोगों की मदद करता तो इस में वह ये नहीं देखता था कि मदद मांगने वाला किस मजहब का है. इरफान के मुसलिम बहुल गांव जोगिया में केवल 4 हिंदू परिवार रहते हैं. वहां के जोगिंदर राम की भी उजाला ने मदद की है.

उस ने 3 महीने पहले ही जोगिंदर की बेटी की शादी में 4 हजार रुपए से मदद की तो कुछ साल पहले लीवर इंफेक्शन के औपरेशन के लिए उसे 5 हजार रुपए दिए थे. इसी गांव में रहने वाली रामसती का 2 साल पहले बच्चेदानी का औपरेशन कराने के लिए इरफान उर्फ उजाला ने उसे 10 हजार रुपए दिए थे. सामाजिक काम कर के फरिश्ते के रूप में बनाई गई छवि के कारण गांव तथा आसपास के इलाकों के लोग अब इरफान पर दबाव डालने लगे कि अगर वह राजनीति में आ जाएगा तो उन की जिंदगी संवर जाएगी. इरफान भी जानता था कि राजनीति में आने के बाद ही वह अपनी कौम और लोगों की मदद कर सकता है.

लोगों ने उस पर ज्यादा दबाव डाला तो उस ने गांव व आसपास के क्षेत्र में और तेजी से सामाजिक कार्य शुरू कर दिए. उस ने राजनीति में कदम रखने के लिए अपनी पत्नी गुलशन परवीन को आगे कर दिया. वह गांव और इलाके की राजनीति से राजनीति में आगे बढ़ना चाहता था. इसलिए उस ने कुछ दिन पहले ही पुपरी के जिला परिषद क्षेत्र संख्या 34 से अपनी पत्नी को प्रत्याशी बनाया. नामांकन से ले कर चुनाव प्रचारप्रसार में उस ने दिल खोल कर रुपए खर्च किए. हालांकि इस दौरान पुलिस ने गुलशन को गिरफ्तार कर के जेल भी भेजा, लेकिन जेल से निकलने के बाद उस ने नामांकन किया और लोगों ने जम कर उस के प्रचार में साथ दिया.

इसे इरफान की पत्नी की मेहनत कहें या इरफान की सामाजिक कामों से मिली शोहरत, उस की पत्नी भारी मतों से चुनाव जीत गई. दरअसल, चुनाव से कुछ दिन पहले ही इरफान ने करीब डेढ़ करोड़ रुपया खर्च कर के 7 गांवों की सड़कें बनवाई थीं. इस से इलाके के लोगों को लगने लगा कि वह चुनाव जीतने से पहले इतना विकास कर सकती है तो चुनाव जीतने के बाद इलाके को जन्नत बना देगी. कविनगर पुलिस ने इरफान व उस के पकड़े गए साथियों से अब तक चोरी में प्रयुक्त की जाने वाली स्कौर्पियो व जगुआर समेत एक करोड़ की कीमत से अधिक के सोने व हीरे के जेवर बरामद किए हैं. उस के खिलाफ विभिन्न प्रदेशों में चोरी के 25 मामले दर्ज हैं. तथा उस ने अब तक करीब 20 करोड़ से अधिक की चोरियां की हैं.

उस ने अपनी पत्नी गुलशन परवीन से चुनाव जीतने के बाद चोरी न करने का वायदा किया था. उस की पत्नी अब जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत चुकी है. लेकिन रौबिनहुड बनने का उस का ख्वाब उसे जरायम की दुनिया से दूर नहीं रख पाया. Ghaziabad News

—कथा पुलिस की जांचपड़ताल व आरोपियों से हुई पूछताछ पर आधारित)

 

Kerala Crime News : पत्नी की हत्या करने के बाद चलाया फेसबुक लाइव

Kerala Crime News : एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक पति ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर डाली. हैरानी की बात यह रही कि वारदात के बाद वह खुद थाने पहुंचा और गुनाह कुबूल कर लिया. आखिर ऐसा क्या हुआ था कि उस ने अपनी ही पत्नी की जान ले ली. इस खौफनाक मर्डर मिस्ट्री के पीछे का रहस्य क्या है? चलिए जानते हैं इस पूरी स्टोरी को विस्तार से

यह सनसनीखेज घटना केरल के कोल्लम जिले के कूथानाडी गांव से सामने आई है, जहां सोमवार को 42 साल के इशहाक ने अपनी पत्नी शालिनी की चाकू से बेरहमी से हत्या कर डाली. पत्नी जब नहाने गई थी, तब उस ने इस घटना को अंजाम दिया. उस ने पत्नी शालिनी  के छाती और पीठ पर जोरदार हमला किया जिस से उस की मौत हो गई.

हत्या के बाद हुआ फेसबुक लाइव

इशहाक ने हत्या के 2 मिनट बाद फेसबुक लाइव किया और कहा कि पत्नी उस पर कभी भरोसा नहीं करती थी. और उस की बातों पर हमेशा अनदेखी किया करती थी. जब कभी पतिपत्नी के बीच विवाद हो जाता तो वह मायके में अपनी मम्मी के पास जा कर रहने लग जाती. वापस आती तो घर को छोड़ने की धमकी भी दिया करती.

पुलिस के अनुसार, आरोपी का नाम इशहाक का उस की पत्नी लंबे समय से विवाद चल रहा था. मृतका हमेशा आरोपी पति के चरित्र पर शक किया करती थी. आरोपी ने बताया कि गहने गिरवी रख कर गाड़ी खरीदी थी. इस के अलावा आरोपी अपनी पत्नी की राजनीतिक बैठकों और नौकरी करने से नाराज था.

हत्या करने के बाद आरोपी पुलिस स्टेशन पहुंचा और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. इस के बाद पुलिस तुंरत घटना स्थल पर पहुंची तो शव को देख हैरान थी. देखा कि शालिनी खून से लथपथ पड़ी हुई थी. उस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस के द्वारा अब विस्तार से जांच करने के लिए एक टीम गठित कर दी गई है. Kerala Crime News

Family Dispute : नफरत का खौफनाक अंजाम

Family Dispute : पति नीरज से अनबन हो जाने के बाद आयशा अपने 12 वर्षीय बेटे सक्षम के साथ मायके में रहने लगी थी. पत्नी के प्रति नीरज के मन में उपजी इस नफरत का ऐसा खौफनाक अंजाम निकला कि…

21 अक्तूबर, 2021 की रात के करीब साढ़े 11 बजे फरीदाबाद के गोठड़ा मोहब्ताबाद का रहने वाला गगन (26 वर्ष) अपने परिवार के साथ खाटू श्याम के दर्शन कर के घर लौटा था. गगन हर साल इसी समय के आसपास अपने पूरे परिवार के साथ खाटू श्याम मंदिर में दर्शन के लिए जाया करता था. उस मंदिर के प्रति उस की आस्था बहुत थी. वह इस साल अपनी माता सुमन (50 वर्ष), अपनी बहन आयशा (30 वर्ष), अपने छोटे भांजे सक्षम (12 वर्ष) और अपने दोस्त राजन शर्मा के साथ मंदिर में दर्शन कर के लौटा था.

गगन राजन के साथ ही फरीदाबाद सेक्टर 55-56 में प्रौपर्टी डीलिंग और पुरानी गाडि़यों की खरीदफरोख्त का काम करता था. इस से पहले गगन अपने परिवार के साथ फरीदाबाद सेक्टर 55 में किराए पर ही रहता था. लेकिन इसी साल सितंबर में उस ने गोठड़ा मोहब्ताबाद में किराए के एक मकान में, जो कि एक पूर्व सरपंच का मकान है, वहां रहने लगा था. उस के पुराने घर से इस नए मकान के बीच करीब 30 मिनट पैदल की दूरी थी. 21 अक्तूबर को मंदिर से दर्शन कर देर रात घर लौटने की वजह से गगन ने राजन को अपने घर पर ही रुकने का आग्रह किया था, क्योंकि रात बहुत हो चुकी थी और वह अपने इलाके में देर रात होने वाली घटनाओं और वारदातों के बारे में अच्छे से जानता था.

राजन ने भी गगन की बात मान ली और वह उस रात उसी के घर पर ही रुक गया. देर रात को लंबा सफर कर के लौटे सभी लोग पहले फ्रैश हुए और हलकाफुलका खाना खा कर वे सब सोने के लिए अपनेअपने कमरे में चले गए. आयशा व उस की मां सुमन मकान में नीचे के कमरे में सोने चली गईं और गगन, राजन वह सक्षम पहली मंजिल पर सोने चले गए. सब थकेहारे थे तो हर किसी को जल्दी नींद भी आ गई थी और सभी गहरी नींद में सो भी गए थे. बस सक्षम ही रात को जागा हुआ था.

नींद तो सक्षम को भी तेज आ रही थी, लेकिन वह किसी का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहा था. वह रात को जगे हुए अपने मम्मी के फोन में गेम खेल रहा था. रात के करीब ढाई बजे के आसपास उस का फोन बजा. इस से पहले कि फोन की घंटी हर किसी को नींद से जगा देती कि उस से पहले ही सक्षम ने तुरंत फोन उठा लिया. यह उस के पिता नीरज चावला (35 वर्ष) का फोन था. सक्षम ने फोन उठा कर फुसफुसाते हुए कहा, ‘‘हैलो पापा.’’

नीरज अपने बेटे को पुचकारते हुए बोला, ‘‘अरे मेरा बेटा कैसा है? खाटू श्याम घूम कर आ गए सब? कैसा लगा वहां घूम कर? मजा आया?’’

सक्षम ने फिर से फुसफुसाते हुए अपने पिता के सवालों का जवाब दिया, ‘‘जी पापा. वहां तो खूब मजा आया पापा. काश! आप भी साथ होते और मजा आता. हमें तो काफी रात हो गई थी वहां से वापस आते हुए.’’

ये सुन कर नीरज ने कहा, ‘‘कोई बात नहीं बेटे. सुनो, जो हमारी बीच बात हुई थी तुम्हें याद है न?’’

सक्षम ने उत्सुकता के साथ कहा, ‘‘जी पापा, मुझे याद है. आप क्या लाए हो मेरे लिए?’’

नीरज ने जवाब दिया, ‘‘वो तो सरप्राइज है मेरे बच्चे. मैं अभी तुम्हारे घर के बाहर ही तो खड़ा हूं. नीचे आ कर दरवाजा खोलो और अपना गिफ्ट ले जाओ. और हां, किसी को इस बारे में बताने की जरूरत नहीं है. ये गिफ्ट स्पैशल तुम्हारे लिए मंगवाया है बाहर से. अब जल्दी से नीचे आ कर अपना गिफ्ट ले लो. इसी बहाने मैं अपने बेटे से भी मिलूंगा.’’

अपने पिता के द्वारा लाए हुए गिफ्ट की बात सुन कर सक्षम के मन में खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. वह तुरंत अपने बिस्तर से इस तरह से उठा कि किसी और को उस के उठने की भनक तक नहीं लगी और वह जल्द ही नीचे दरवाजे की ओर भागा. आहिस्ता से सक्षम ने अंदर से लगी दरवाजे की कुंडी खोली और धीरे से दरवाजा खोला. उस ने देखा उस के पिता दरवाजे के ठीक सामने अपने हाथों में एक थैली लिए खड़े थे. सक्षम न समझ सका पिता के इरादे सक्षम के दरवाजा खोलने पर नीरज ने झुक कर उसे पहले अपने गले लगा लिया और फुसफुसाते हुए उस से पूछा, ‘‘कोई जागा तो नहीं बेटा?’’

सक्षम ने भी उसी तरह से नीरज को जवाब दिया, ‘‘नहीं पापा, कोई नहीं जागा.’’

यह सुन कर नीरज ने सक्षम के कंधे पर हाथ रखा और घर के अंदर आ गया. सक्षम को यह देख कर थोड़ा अजीब लगा. उस ने अपने पिता को रोकना चाहा, लेकिन वह कहां रुकने वाला था. उन दोनों के अंदर घुसते ही बाहर से एक और आदमी मकान में आ घुसा. यह शख्स नीरज का दोस्त लेखराज था. लेखराज के अंदर आते ही उस ने भीतर से मुख्य दरवाजे की कुंडी बंद कर दी और भाग कर पहली मंजिल पर जा पहुंचा. लेखराज को देखते ही इस से पहले कि सक्षम कुछ कहता, नीरज ने उस के मुंह पर हाथ रख दिया और उसे अपनी गोद में उठा कर उस कमरे की ओर चल पड़ा, जहां पर उस की पत्नी आयशा और उस की सास सुमन सोए हुए थी.

एक तरफ नीचे ग्राउंड फ्लोर पर नीरज अपने बेटे के साथ था तो दूसरी ओर लेखराज पहली मंजिल पर गगन और राजन के कमरे में था. लेखराज ने अपनी कमर से एक देसी तमंचा निकाल कर सोते हुए राजन पर गोली चला दी. गोली चलने की आवाज सुन कर गगन नींद से जाग गया और उस की नजर लेखराज और उस के हाथ में तमंचे पर पड़ी. गगन के अवचेतन दिमाग ने खुद को बचाने के लिए अपने बिस्तर किनारे रखे फोन को लेखराज की ओर जोर से फेंका.

वह फोन लेखराज के चेहरे पर जा कर लगा और कुछ पलों के लिए उस का ध्यान गगन से हट गया. इतने में गगन भाग कर दरवाजे की ओर से निकलने ही वाला था कि लेखराज ने गगन पर पीछे से गोली चला दी, जोकि उस की कमर पर लगी. गोली लगते ही वह गिर पड़ा. गगन के शरीर से निकला खून पूरे फर्श पर फैल चुका था, जिसे देख लेखराज को लगा कि वह मर गया है, क्योंकि गगन के शरीर से किसी तरह की कोई हरकत नहीं हो रही थी. पहली मंजिल पर गोली चलने की आवाज सुन कर 12 साल का छोटा बच्चा इस से पहले कि कुछ समझ पाता, नीरज ने उसे नीचे उतार दिया. फिर उस ने अपने थैले में से तमंचा बाहर निकाल कर अपनी सास सुमन पर निशाना साधते हुए 2 गोलियां चला दीं.

नीरज की पत्नी आयशा जो गहरी नींद में सो रही थी, बाहर होने वाले शोर से वह भी जाग गई. इस से पहले कि वह कुछ समझ पाती, नीरज ने मौका देख कर एक गोली अपनी पत्नी की छाती पर दाग दी. गोली मारने के बाद नीरज ने इधरउधर देखा तो सक्षम वहां मौजूद नहीं था. नीरज ने जब उसे अपनी गोद से उसे नीचे उतारा था, तब वह भाग कर बाथरूम में चला गया था. उस ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया. सक्षम इतनी दहशत में था कि उस ने बाथरूम में किसी तरह की कोई हरकत करने की हिम्मत नहीं दिखाई.

इतने में लेखराज अपना काम पूरा कर के नीचे आया और उस ने नीरज से पूछा, ‘‘काम हो गया, अब आगे क्या करना है?’’

नीरज ने अपने थैले में से 2 धारदार चाकू निकाले और एक उस के हाथ में थमाते हुए बोला, ‘‘ये दोनों किसी भी कीमत पर जिंदा नहीं रहने चाहिए. इन्होंने मेरा जीना हराम कर दिया है, इसलिए इन्हें पूरी तरह से खत्म कर दो.’’

गोली मारने के बाद चाकुओं से गोदा दोनों को कहते हुए लेखराज और नीरज दोनों सुमन और आयशा की लाश की ओर बढ़े और दोनों उन के शरीर पर चढ़ कर उन के शरीर पर लगातार चाकू से वार करने लगे. उन्होंने उन का शरीर गोदने के बाद महसूस किया कि मकान में उन का नौकर भी रहता है, उस नौकर को भी उन्होंने ठिकाने लगाना जरूरी समझा. उसी समय उन्होंने महसूस किया कि कोई मकान का मेन दरवाजा खोल रहा है. यह उस मकान में काम करने वाला नौकर शिवा ही था. उसे देख कर नीरज उस की ओर अपना तमंचा ले कर दौड़ा. शिवा अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागा और दीवार फांदते हुए वह मकान के इर्दगिर्द खाली पड़े प्लौट को पार करते हुए भाग निकला.

इस बीच नीरज ने उस की ओर निशाना साध कर गोली भी चलाई थी, लेकिन गोली के तमंचे में फंस जाने की वजह से शिवा अपनी जान बचाने में कामयाब रहा. नीरज और लेखराज सक्षम को छोड़ घर में सभी को गोली मारने के बाद तुरंत वहां से नौ दो ग्यारह हो गए. हत्यारों की गोली से बच गया गगन नीरज और लेखराज ने सभी को गोली तो मार दी थी, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि गगन को गोली लगने के बाद भी वह बच जाएगा. गगन को उस की कमर पर गोली लगी थी, उस का खून भी काफी बह चुका था लेकिन वह जिंदगी और मौत के बीच लटक गया था.

नीरज और लेखराज के हत्या कर के वहां से निकल जाने के बाद सक्षम रोताबिलखता एकएक कर अपने परिवार के पास जा कर उन्हें देख रहा था, तभी उस ने देखा कि उस के मामा के शरीर में हरकत हो रही थी. यह देख कर फोन ले कर वह भागते हुए अपने मामा गगन के पास पहुंचा. गगन ने 100 नंबर डायल कर पुलिस को फोन लगाया और पुलिस को कराहती आवाज में जल्द ही अपने घर पर आने के लिए कहा. सुबह के करीब साढ़े 3 बज रहे थे, जब इस घटना की सूचना फरीदाबाद में धौज थाना क्षेत्र को मिली. धौज थाना परिसर गगन के नए घर से मात्र 5 मिनट की दूरी पर ही था.

मामले की सूचना मिलते ही धौज थानाप्रभारी दयानंद अपनी टीम के साथ कुछ ही देर में गगन के घर जा पहुंचे और उन्होंने सब से पहले मकान में गगन को ढूंढ निकाला और उसे पास के अस्पताल ले गए. उसी दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले की सूचना दी. सूचना मिलने पर थोड़ी देर में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. फोरैंसिक टीम द्वारा अपना काम निपटाने के बाद पुलिस ने दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए भेज दीं. इस के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर थानाप्रभारी ने जांच शुरू कर दी. पुलिस ने सक्षम से उस के पिता का मोबाइल नंबर ले कर टेक्निकल टीम को दे दिया. टीम ने ट्रेसिंग कर के नीरज की लोकेशन का पता लगा लिया.

घटना के 9 घंटे बाद डीएलएफ और धौज की क्राइम ब्रांच की टीमों ने 22 अक्तूबर को एनआईटी फरीदाबाद से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पत्नी के बर्ताव से उपजी कलह इस हत्या के दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उन से पूछताछ के दौरान इस पूरे हत्याकांड की वजह सामने आई. दरअसल, नीरज और उस की पत्नी आयशा के जीवन में सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन नीरज के मन में आयशा को ले कर उसे शक होता था. आयशा अकसर अपने बचपन के दोस्तों के साथ फोन पर बातचीत किया करती थी. कई बार वह बातों में इतनी मशगूल हो जाती थी कि आयशा का ध्यान नीरज पर होता ही नहीं था.

इस के अलावा आयशा खुले दिमाग वाली युवती थी. दोस्तों के संग बातचीत, हंसीमजाक करना उसे बेहद पसंद था. लेकिन कहीं न कहीं आयशा का इस तरह का बर्ताव करना नीरज को पसंद नहीं आता था. इसी को ले कर अकसर नीरज और आयशा के बीच झगड़े होते रहते थे. दोनों के बीच झगड़े इतने बढ़ जाते थे कि उन के बीच सुलह के लिए आयशा के मायके वालों को आना पड़ता था. इसी बीच पिछले साल, नीरज ने आयशा के भाई यानी अपने साले गगन से 10 लाख रुपए उधार भी मांगे थे. एनआईटी फरीदाबाद का रहने वाला नीरज अपने इलाके में एक टेलर मैटेरियल की दुकान खोलना चाहता था, जिस के लिए उसे पैसों की जरूरत थी.

उस ने गगन से पैसे ले कर साल भर में वापस करने की बात भी कही थी. लेकिन जब एक साल से ज्यादा का समय हो गया तो गगन नीरज को पैसे लौटाने के लिए कहने लगा. कोरोना की वजह से धंधा नहीं चलने के कारण नीरज के पास गगन को लौटाने के लिए पैसा इकट्ठे नहीं हो सके. वह गगन को आज कल कह कर हर दिन पैसे लौटाने की बात किया करता, लेकिन वह पैसों का जुगाड़ नहीं कर पा रहा था. ये बात कहीं न कहीं गगन को भी समझ आ गई थी कि उस के जीजा के पास पैसे नहीं है. सास भी मारती थी ताने जब यह बात उस ने अपने घर वालों को बताई तो आएशा की मां सुमन ने नीरज को ताना मारना शुरू कर दिया. सुमन और गगन के साथसाथ आएशा को जब कभी मौका मिलता, वे सब उसे पैसे लौटाने के लिए कहते, नहीं तो उसे किसी न किसी बहाने ताने मारते थे.

यही नहीं, पिछले एक साल से आयशा अपने बेटे सक्षम के साथ अपने मायके में ही थी. दोनों के बीच झगड़े के बाद आयशा अपने बेटे को ले कर अपने मायके रहने के लिए आ गई थी. और यह बात नीरज को काफी खटकने लगी थी. ये सब देखते हुए और इन सभी चीजों से परेशान हो कर उस ने इस हत्याकांड की प्लानिंग अपने दिमाग में ही रच ली थी. पूरी प्लानिंग के चलते नीरज ने बीते कुछ दिनों से ससुराल के लोगों को राजीनामे के बहाने अपनी बातों में फंसाना शुरू कर दिया, ताकि उस पर कोई शक न कर सके.

इसी के चलते 15-16 दिन पहले नीरज ससुराल के लोगों से राजीनामा करने के बहाने मोहब्ताबाद गया और पूरी कोठी को अपनी नजरों में उतार लिया था. उस ने इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पैसों का लालच दे कर अपने करीबी दोस्त लेखराज को भी इस में शामिल कर लिया था. इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए नीरज ने एक महीने पहले हापुड़ से 35 हजार रुपए में 2 देसी तमंचे, 2 चाकू और कुछ कारतूस खरीद लिए थे.

नीरज ने कभी न तो हथियार रखे और न ही चलाए थे, लेकिन पत्नी के चरित्र और पैसे के लेनदेन के चलते तीनों की हत्या करने के लिए उस ने तमंचा चलाना भी सीख लिया था. फिर उस ने 21 अक्तूबर, 2021 की रात को घटना को अंजाम दे दिया. कोई भी जीवित न बचे, इसलिए नीरज और लेखराज ने गोली चलाने के साथसाथ चाकुओं से भी वार किए सास सुमन को एक गोली लगी और चाकू के कई वार किए गए. आयशा को 2 गोली लगी थीं. राजन शर्मा को एक गोली सीने में लगी, जबकि गगन के कमर में गोली लगी थी.

नीरज को अनुमान था कि इस गोली से गगन की मौत हो जाएगी. लेकिन वह जीवित बच गया. दोनों आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. Family Dispute

 

Police Story : जिस्म सौंप कर इंतकाम लेने वाली पुलिस वाली

Police Story : हैडकांस्टेबल शिवाजी माधवराव सानप के साथ अय्याशी करने वाली कांस्टेबल शीतल पांसरी का स्वार्थ पूरा नहीं हुआ तो उस के दिल पर ऐसी चोट लगी कि इंतकाम लेने के लिए उस ने एक नहीं बल्कि 2 मर्दों को अपने जिस्म का लालच दे कर अपने इंतकाम की आग बुझाई.

शिवाजी माधवराव सानप (54) मुंबई पुलिस के नेहरू नगर थाने में हैडकांस्टेबल के पद पर तैनात था. वह पुणे में रहता था. वहीं से रोजाना ड्यूटी के लिए अपडाउन करता था. पुणे से वह बस से पनवेल जाता था, फिर पनवेल से दूसरी बस पकड़ कर कुर्ला पहुंचता और कुर्ला से लोकल ट्रेन के जरिए वह नेहरू नगर थाने पहुंचता. आनेजाने के लिए उस का रुटीन ठीक उसी तरह तय था, जैसे सुबह उठ कर लोग दैनिक काम करते हैं. 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कारण काफी भागदौड़ रही. दिन भर की थकान के बाद वह उस रात भी कुर्ला स्टेशन से उतरने के बाद पनवेल के लिए बस पकड़ने के लिए लगभग रात के साढ़े 10 बजे सड़क से गुजर रहा था.

तभी सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार नैनो कार ने शिवाजी को इतनी जोर की टक्कर मारी कि उस का शरीर हवा में उछलता हुआ सड़क के किनारे दूर जा गिरा. इस बीच शिवाजी को टक्कर मारने वाली कार हवा की गति से नौ दो ग्यारह हो गई. शिवाजी सानप गंभीर रूप से घायल हो गया. आनेजाने वाले कुछ राहगीरों ने यह माजरा अपनी आखों से देखा था. लिहाजा वहां मोजूद हुए लोगों में से किसी ने उसी समय पुलिस कंट्रोल रूम को इस की सूचना दे दी. पहले पीसीआर की गाड़ी आई जिस ने घायल शिवाजी को पास के एक अस्पताल में भरती करा दिया. लेकिन कुछ देर की जद्दोजहद के बाद आखिरकार शिवाजी की को मृत घोषित कर दिया गया.

मामला बिलकुल सीधासाधा सड़क हादसे का दिख रहा था, इस में शक की कोई गुंजाइश भी नहीं लग रही थी. लिहाजा पनवेल शहर पुलिस स्टेशन के सीनियर पीआई अजय कुमार लांडगे ने सड़क दुर्घटना का मामला दर्ज करवा दिया. शिवाजी के कपड़ों की तलाशी लेने के बाद जेब से उस का महाराष्ट्र पुलिस का परिचय पत्र, आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज मिले थे. इस से पुलिस को उस की पहचान कराने में भी ज्यादा जहमत नहीं उठानी पड़ी. सड़क दुर्घटना का केस दर्ज करने के बाद पनवेल पुलिस स्टेशन ने पुणे में रहने वाले शिवाजी के घर वालों को भी हादसे की खबर कर दे दी. अगली सुबह ही शिवाजी सानप की पत्नी गायित्री अपने भाई व रिश्तेदारों को ले कर पनवेल पुलिस स्टेशन पहुंची, जहां उन्हें हादसे के बारे में बताया गया.

पुलिस ने विभाग का आदमी होने के कारण जल्दी ही शिवाजी के शव का पोस्टमार्टम करवा कर शव उस के परिजनों का सौंप दिया. 1-2 दिन गुजरने के बाद अचानक शिवाजी की पत्नी गायित्री अपने भाई के साथ पनवेल पुलिस स्टेशन पहुंची और सीनियर पीआई अजय कुमार लांडगे से मुलाकात की. गायत्री ने अपने मन में छिपे शक का इजहार करते हुए कहा, ‘‘सर, मेरे पति का ऐक्सीडेंट नहीं हुआ उन की हत्या की गई है. हत्या भी इस तरह कि लोगों को लगे कि ये सड़क दुर्घटना है.’’

यह सुन कर अजय लांडगे के होंठों पर हलकी सी मुसकान तैर गई. वह बोले, ‘‘देखो गायत्री, मैं तुम्हारा दुख समझता हूं. तुम्हारे पति की मौत हुई है और तुम्हारे दिमाग की हालत अभी ठीक नहीं है. लेकिन इस का मतलब ये नहीं कि तुम्हारे पति की हत्या हुई है. भला तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है. सड़कों पर हर रोज ऐसे हजारों ऐक्सीडेंट होते हैं, लेकिन इस का मतलब ये तो नहीं कि सब हत्या कही जाएंगी.’’

‘‘हां साहब, इस की वजह मैं आप को बताती हूं,’’ कहने के बाद गायत्री ने इंसपेक्टर कुमार लांडगे को जो कुछ बताया, उसे सुन कर लांडगे की आंखें फैल गईं.

कुछ देर शांत रहने के बाद इंसपेक्टर लांडगे ने कहा, ‘‘ठीक है गायत्री, तुम ने जो कुछ बताया, अगर वो सच है तो हम इस की जांच करेंगे. अगर तुम्हारे पति की मौत हत्या है तो तुम्हें इंसाफ जरूर मिलेगा और कातिल जेल की सलाखों के पीछे होगा.’’ इंसपेक्टर लांडगे ने उसी दिन पनवेल डिवीजन के एसीपी भगवत सोनावने को शिवाजी की पत्नी और उस के साले के इस शक के बारे में जानकारी दे कर यह भी बता दिया कि उन्हें क्यों शक है कि शिवाजी की मौत सड़क हादसा नहीं बल्कि मर्डर है.

सुनने के बाद एसीपी सोनावने भी सोच में पड़ गए, ‘‘लांडगे साहब, हम ऐसे ही किसी पर हाथ नहीं डाल सकते, क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं हैं. आप ऐसा करो, एक टीम तैयार करो और जरा पता करो कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है.’’

शिवाजी की पत्नी के कहने पर पनवेल पुलिस ने जांच तो शुरू कर दी, लेकिन खुद लांडगे के पास अभी भी इस केस को सड़क दुर्घटना नहीं मानने के लिए कोई सबूत नहीं था. हालांकि पुलिस को अभी तक यह भी नहीं पता था कि शिवाजी का ऐक्सीडेंट जिस कार से हुआ था, वह कौन सी कार थी. लेकिन कहानी में पहला ट्विस्ट तब आया, जब इंसपेक्टर लांडगे को पता चला कि शिवाजी सानप के ऐक्सीडेंट वाले स्थान से 2 किलोमीटर की दूरी पर एक सुनसान जगह पर उसी रात एक नैनो कार जली हालत में मिली.

संबंधित चौकी के स्टाफ से जानकारी मिलने के बाद लांडगे सोच में पड़ गए. लांडगे एक ही रात में शिवाजी तथा ऐक्सीडेंट स्पौट से करीब 2 किलोमीटर दूर एक जली हुई कार के मिलने की कडि़यों को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे. इस के अगले ही दिन जब शिवाजी की पत्नी गायत्री ने यह शक जताया कि उस के पति की मौत सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सोचीसमझी साजिश के तहत की गई है तो पुलिस मौत की जांच का काम करने में जुट गई. जिस जगह यह हादसा हुआ था, पुलिस ने उस के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकालनी शुरू कर दी. पुलिस ने थाना नेहरू नगर के ड्यूटी औफिसर और शिवाजी के परिवार वालों से शिवाजी के आनेजाने के रुटीन का पता किया कि वह पुणे से नेहरू नगर पुलिस स्टेशन कैसे आताजाता था.

इस के बाद उन्होंने नेहरू नगर थाने से ले कर कुर्ला स्टेशन तक जितने भी सीसीटीवी लगे थे, सब को चैक किया. यह एक लंबी कवायद थी, लेकिन मामला चूंकि अपने ही विभाग से जुड़े हैडकांस्टेबल की संदिग्ध मौत से जुड़ी जांच का था, लिहाजा पुलिस ने कोई कसर नहीं छोड़ी. करीब 250 सीसीटीवी फुटेज को खंगालने के बाद 15 अगस्त की रात शिवाजी कुर्ला रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने की एक फुटेज कैमरे में मिल ही गई.

जांच आगे बढ़ी तो पनवेल के बस स्टैंड पर बस पकड़ने के लिए पैदल चलते एक और सीसीटीवी कैमरे में उन की फुटेज मिल गई. कडि़यों को जोड़ते हुए सड़क को कवर करने वाले सीसीटीवी कैमरों को भी खंगालना शुरू किया तो एक कैमरे में वह वारदात भी कैद मिली, जिस में शिवाजी को तेज रफ्तार नैनो कार कुचलती हुई आगे निकली थी. इस से एक बात साफ हो गई कि घटना वाली रात करीब 2 किलोमीटर दूर जो नैनो कार जली मिली, उस का संबंध शिवाजी सानप से ही था. अब नेहरू नगर सीनियर पीआई अजय कुमार लांडगे को यह समझ आने लगा कि शिवाजी के परिवार ने उन की हत्या की जो आशंका जताई थी, उस में जरूर सच्चाई छिपी थी क्योंकि अगर शिवाजी की मौत सिर्फ हादसा होती तो नैनो कार को जलाने की जरूरत ही नहीं थी.

यानी साफ था कि कातिल सबूत मिटाने के लिए कत्ल के लिए इस्तेमाल हुई कार को जला कर सबूत खत्म करना चाहता था. पुलिस ने जब कुछ और कैमरों को खंगाला तो पता चला कि उस में 2 लोग सवार थे. पुलिस ने एक्सपर्ट की मदद से कार में बैठे दोनों लोगों की तसवीर जूम कर के तैयार करवाई. पहले पुलिस ने अपने रिकौर्ड खंगाले कि कहीं ऐसा तो नहीं किसी पुराने अपराधी ने शिवाजी से अपनी पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए उन की योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी हो. पुलिस रिकौर्ड में जितने भी अपराधी दर्ज थे, सीसीटीवी से मिले फोटो कहीं भी मैच नहीं हुए.

इस दौरान पुलिस की एक दूसरी टीम जो इस बात की जांच कर रही थी कि शिवाजी सानप की तैनाती कहांकहां रही और उन का रिकौर्ड कैसा था. इस बिंदु पर तफ्तीश करने वाली पुलिस टीम को एक और कहानी पता चली. कहानी के मुताबिक, साल 2019 में शीतल पंचारी नाम की एक महिला कांस्टेबल ने शिवाजी के खिलाफ 2 अलगअलग पुलिस थानों में 2 रिपोर्ट लिखाई थीं. ये दोनों रिपोर्ट छेड़खानी और यौनशोषण की थी. नई कहानी सामने आने के बाद पुलिस ने 2019 में झांकने का फैसला किया, तब एक नई कहानी सुनने को मिली.

दरअसल, 2019 तक शिवाजी सानप और शीतल पंचारी मुंबई के नेहरू नगर पुलिस स्टेशन में एक साथ काम करते थे. इन दोनों के बीच काफी गहरे रिश्ते भी थे. लेकिन फिर अचानक रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई. दोनों के बीच झगड़े होने लगे और इसी झगड़े के बाद 2019 में शीतल ने 2 अलगअलग पुलिस थानों में शिवाजी के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी. यह बात शिवाजी की पत्नी और साले को भी पता थी. यही वजह है कि दोनों ने यह शक जताया कि शिवाजी की मौत सड़क हादसा नहीं, बल्कि कत्ल है और इस कत्ल में शीतल का हाथ होने का उन्होंने इशारा किया था.

पनवेल पुलिस स्टेशन नवी मुंबई के जोन-2 एरिया में आता है जिस के डीसीपी हैं शिवराज पाटिल. मामला चूंकि एक पुलिस वाले की मौत का था और शक की सुई विभाग की ही एक महिला कांस्टेबल की तरफ घूम रही थी. इसलिए इंसपेक्टर लांडगे और एसीपी भगवत सोनावने ने शीतल पंचारी के बारे में डीसीपी पाटिल को बताया गया तो उन्होंने लांडगे को क्लीन चिट दे दी कि कोशिश कर के शीतल के खिलाफ पहले सबूत एकत्र करें, उस के बाद ही उस पर हाथ डालें.

लेकिन अभी तक शीतल के खिलाफ केवल शक था. पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था कि वह उसे कातिल ठहरा सके. इसीलिए इंसपेक्टर लाडंगे ने अपनी टीम को बड़ी खामोशी के साथ शीतल के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के काम पर लगा दिया. शीतल उस समय शस्त्र शाखा में काम करती थी. पुलिस ने शीतल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा ली. इतना ही नहीं, उस के सोशल मीडिया अकांउट का पता लगा कर उस में भी झांकना शुरू किया, कोशिश रंग लाई. शीतल के इंस्टाग्राम पर पुलिस को एक मर्द का चेहरा और एक पोस्ट नजर आई, जिस का नाम धनराज यादव था. पुलिस ने शीतल के परिचितों को खंगालना शुरू किया तो जानकारी मिली कि धनराज यादव पेशे से एक बस ड्राइवर है.

शीतल की इंस्टाग्राम पर धनराज से दोस्ती हुई थी. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि शीतल ने धनराज से दोस्ती करने के 5 दिनों बाद ही उस से शादी कर ली. यह बात 2019 के आखिर की है. यह अपने आप में हैरानी की बात जरूर थी. इंसपेक्टर लांडगे को लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं धनराज यादव ने ही अपनी पत्नी के साथ हुए यौन शोषण का बदला लेने के लिए शिवाजी की सड़क हादसा कर हत्या कर दी हो. वह पेशे से ड्राइवर भी था. पुलिस को लगने लगा कि कातिल अब उस से एक हाथ की दूरी पर है. गुपचुप तरीके से शीतल के जानकारों से पुलिस ने पता कर लिया कि धनराज तमिलनाडु का रहने वाला है.

शादी के सिर्फ एक महीने बाद ही धनराज रहस्यमय तरीके से अचानक शीतल को छोड़ कर तमिलनाडु चला गया. उस के बाद धनराज को किसी ने नहीं देखा. डीसीपी शिवराज पाटिल को केस की इस नई जानकारी का पता चलने पर एक टीम को तमिलनाडु भेज दिया गया. एक सप्ताह तक सुरागरसी करतेकरते पुलिस टीम आखिर तमिलनाडु में धनराज के घर तक पहुंच गई और उसे पकड़ कर मुंबई पनवेल ले आई.

हालांकि पुलिस ने नैनो कार में बैठे जिन 2 लोगों की सीसीटीवी फुटेज हासिल की थी, उन से धनराज का चेहरा कहीं भी मेल नहीं खाता था. लेकिन फिर भी उस से पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ तो उस ने कुबूल कर लिया कि उस ने इंस्टाग्राम पर कांस्टेबल शीतल से दोस्ती करने के बाद 5 दिनों में ही शादी कर ली थी, लेकिन एक महीने के बाद ही वह शीतल को छोड़ कर अपने गांव चला गयाथा.

‘‘क्यों, ऐसा क्यों किया तुम ने?’’ इंसपेक्टर लांडगे ने सवाल किया.

‘‘सर, मैं बहुत डर गया था. पहले तो दोस्ती करने के बाद इतनी जल्द मेरे जैसे ड्राइवर से एक पुलिस वाली के शादी करने का राज ही मेरी समझ में नहीं आया था. लेकिन शादी के 5 दिन बाद ही जब शीतल ने मुझ से एक खतरनाक काम करने के लिए कहा तो मेरी समझ में आ गया कि उस ने अपना काम कराने के लिए मुझ से शादी की है और मुझे हथियार बनाना चाहती है.’’ धनराज ने सहमते हुए एकएक राज उगलना शुरू कर दिया.

उस ने बताया कि शीतल ने उसे शिवाजी सानप द्वारा अपने यौनशोषण की कहानी सुना कर भावुक कर दिया था. इस के बाद शीतल ने उस से कहा कि अगर वह उस से प्यार करता है तो वह अपनी पत्नी के साथ हुई नाइंसाफी का बदला ले और शिवाजी को ट्रक से कुचल कर मार दे. यह सुन कर धनराज बहुत डर गया… क्योंकि वह मुंबई शहर में रोजीरोटी कमाने के लिए आया था. ऐसे में एक कत्ल वह भी पुलिस वाले का… ऐसा सुनते ही धनराज के रोंगटे खड़े हो गए. उस ने शीतल को समझाया, ‘‘शीतल, जो हुआ उसे भूल जाओ. यह सब जान कर भी तुम्हारे लिए मेरा प्यार कम नहीं हुआ है. वैसे भी यह काम बहुत रिस्क वाला है मैं ने जीवन में कभी ऐसा काम नहीं किया है… सोचो मैं ने यह काम कर भी दिया तो एक न एक दिन भेद खुल जाएगा. फिर मैं और तुम दोनों ही पकड़े जाएंगे.’’

लेकिन शायद शीतल के ऊपर शिवाजी से इंतकाम लेने का जुनून इस कदर सवार था कि वह आए दिन धनराज पर दबाव डालने लगी कि चाहे जैसे भी हो, उसे शिवाजी की हत्या करनी ही होगी. वह तो पेशे से ड्राइवर है इसलिए किसी को भी शक नहीं होगा. अगर पकड़े भी गए तो केवल लापरवाही से हुई दुर्घटना का केस चलेगा. इसी तरह 3 सप्ताह गुजर गए. धनराज अजीब पशोपेश में था. क्योंकि वह दिल से नहीं चाहता था कि ऐसा गलत काम करे. उसे अब इस बात का भी डर सताने लगा था कि अगर वह लगातार शीतल का काम करने से मना करता रहा तो वह कहीं उसे पुलिस विभाग में अपनी तैनाती का फायदा उठा कर किसी झूठे आरोप में फंसवा कर जेल न भिजवा दें.

उस के सामने अब यह भी साफ हो गया था कि शीतल ने उस से शादी अपना यह काम करवाने के लिए ही की थी. लिहाजा एक दिन डर की वजह से धनराज अपनी नौकरी छोड़ कर सारा सामान समेट कर अपने गांव तमिलनाडु भाग गया. धनराज से पूछताछ के बाद पुलिस एक बार फिर अंधेरे मोड़ पर खड़ी हो गई. क्योंकि पुलिस पहले ही इस बात की तसदीक कर चुकी थी कि 2019 में तमिलनाडु जाने के बाद धनराज कभी अपने राज्य से बाहर या मुंबई नहीं गया था.

‘‘अच्छा, तुम ये दोनों फोटो देख कर बताओ कि इन में से किसी को पहचानते हो? ये उस कार में बैठे लोगों की फोटो हैं जिस से शिवाजी का ऐक्सीडेंट हुआ था.’’

धनराज से पूछताछ के बाद निराश इंसपेक्टर लांडगे ने धनराज को सीसीटीवी से हासिल हुई दोनों संदिग्धों की फोटो दिखाईं तो धनराज बोला, ‘‘अरे सर, ये तो विशाल है. मैं 2019 में शीतल से शादी के बाद जिस सोसाइटी में रहता था, उसी सोसाइटी के चौकीदार बबनराव का बेटा है ये.’’

पूरी तरह से निराश हो चुके इंसपेक्टर लांडगे के चेहरे पर धनराज का जवाब सुनते ही अचानक चमक आ गई. अब उन्हें लगने लगा कि शिवाजी सानप हत्याकांड की गुत्थी सुलझ जाएगी. धनराज की इस गवाही से जब डीसीपी पाटिल को अवगत कराया गया तो उन्होंने तत्काल पुलिस कमिश्नर को इस पूरे केस की जानकारी दे कर शीतल की गिरफ्तारी का आदेश हासिल कर लिया. 12 सितंबर की रात पुलिस ने ताबड़तोड छापेमारी कर पहले शीतल को हिरासत में लिया, उस के बाद उसी रात विशाल बबनराव जाधव को. उन दोनों से पूछताछ के बाद गणेश लक्ष्मण चव्हाण उर्फ मुदावथ को भी हिरासत में ले लिया.

इन लोगों के पास से पुलिस ने 3 मोबाइल फोन, एक कार और कुछ कपड़े बरामद किए. तीनों ने कड़ी पूछताछ में शिवाजी सानप की हत्या का गुनाह कुबूल कर लिया. शिवाजी माधवराव सानप की सड़क दुर्घटना में मौत का मामला पनवेल पुलिस ने भादंसं की धारा 302 व 201 में दर्ज कर लिया. अगले दिन तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया. इस दौरान पुलिस ने घटना की एकएक कडि़यों को जोड़ कर तीनों आरोपियों के खिलाफ कड़े सबूत एकत्र करने का काम किया.

इन से की गई पूछताछ के बाद इस अपराध की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली— शीतल पंचारी महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली थी. स्नातक की पढ़ाई करने के बाद उसे महाराष्ट्र पुलिस में नौकरी मिल गई. 28 साल की शीतल 4 साल नौकरी के बाद जब 2018 में नेहरू नगर थाने में तैनात हुई तो उस की दोस्ती जल्द ही अपने ही थाने में तैनात हैडकांस्टेबल शिवाजी माधवराव सातप से हो गई. दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई और दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ता भी कायम हो गया. दोनों के बीच लंबे समय तक प्यार की कहानी चली.

उन दोनों के रिश्ते के बारे में अब विभाग में भी चर्चा होने लगी थी. शीतल के साथ काम करने वाले साथी पुलिसकर्मी भी अब उसे शिवाजी का माल कह कर चिढ़ाने लगे थे. ऐसे में बदनामी बढ़ती देख एक दिन शीतल ने शिवाजी से कहा कि हम दोनों के संबंधों को ले कर अब लोग अंगुलियां उठाने लगे हैं, इसलिए हमें अब शादी कर लेनी चाहिए. यह सुनते ही शिवाजी को झटका लगा. क्योंकि वह तो पहले से ही शादीशुदा था, उस के 2 बच्चे भी थे. लिहाजा शादी की बात सुनते ही शिवाजी ने शीतल को डपट दिया और बोला, ‘‘संबध रखने हैं तो रखो नहीं तो छोड़ दो. लेकिन मैं किसी भी हालत में शादी नहीं कर सकता. क्योंकि मैं अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता हूं.’’

शादी से इंकार की बात सुनते ही शीतल शिवाजी पर बिफर पड़ी. क्योंकि शिवाजी ने ऐसी कड़वी बात कह दी थी, जिस ने शीतल के तन, मन और आत्मा को बुरी तरह झुलसा दिया था. शिवाजी ने तंज कसा था, ‘‘शादी से पहले जो औरत एक हैडकांस्टेबल के नीचे लेट सकती है वह अपना काम निकलवाने के लिए तो न जाने कितने बड़े अफसरों के नीचे लेटेगी. अपनी प्यार करने वाली बीवी को छोड़ कर ऐसी औरत से कौन शादी करेगा?’’

उस दिन शिवाजी और शीतल में खूब लड़ाई हुई और उसी दिन से दोनों के बीच दूरियां आ गईं. चूंकि शीतल के शिवाजी से संबंधों की बात पूरे थाने को और विभाग के दूसरे लोगों को भी पता थी. इसलिए खुद को पाकसाफ दिखाने के लिए शीतल ने पहले उस के खिलाफ उसी नेहरू नगर थाने में छेड़छाड़ की धारा 354 तथा उस के बाद कल्याण थाने में बलात्कार की धारा 376 में शिकायत दर्ज करवा दी थी. इन दोनों ही शिकायतों पर शिवाजी सानप के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई. शीतल के साथ संबंधों की जानकारी शिवाजी के परिवार तक पहुंच गई थी.

चूंकि शिवाजी सातप तेजतर्रार हैड कांस्टेबल था. मुंबई पुलिस में कई सीनियर अफसरों के साथ रहते हुए उस ने कई गुडवर्क किए थे, इसलिए वे तमाम अधिकारी उसे पसंद करते थे. सभी को ये भी पता था कि शिवाजी के शीतल के साथ संबंध थे, लेकिन उस ने कभी शीतल से जबरदस्ती नहीं की थी. यही कारण रहा कि ऐसे तमाम अधिकारियों के दबाव में शिवाजी के खिलाफ की गई शीतल की शिकायत ठंडे बस्ते में डाल दी गई. जब काफी वक्त गुजर गया और शीतल को लगने लगा कि शिवाजी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ कर वह उसे सजा नहीं दिलवा पाएगी तो उस ने खुद ही उसे सजा देने का निर्णय कर लिया.

शीतल पहले ही नेहरू नगर थाने से आर्म्स यूनिट में अपना तबादला करा चुकी थी. मन ही मन वह किसी ऐसी तरकीब पर विचार करने लगी, जिस से वह शिवाजी से अपने अपमान का इंतकाम भी ले सके और उस पर आंच भी ना आए. इसी सोचविचार में काफी वक्त गुजर गया. अचानक उसे खयाल आया कि क्यों न शिवाजी को सड़क हादसे में करवा दिया जाए. एक बार इस खयाल ने मन में जगह बनाई तो रातदिन वह इसी रास्ते से शिवाजी से बदला लेने की साजिश रचने लगी.

इसी साजिश के तहत उस ने ट्रक ड्राइवर का पेशा करने वाले धनराज यादव की इंस्टाग्राम पर प्रोफाइल देखी तो साजिश का खाका उस के दिमाग में फिट बैठ गया. शीतल ने शिवाजी को रास्ते से हटाने के लिए हथियार के रूप में धनराज को मोहरा बनाने के लिए पहले इंस्टाग्राम पर रिक्वेस्ट भेज कर धनराज से दोस्ती की और 5 दिन बाद ही उस ने धनराज को शादी के लिए प्रपोज भी कर दिया. चंद रोज के भीतर दोनों ने शादी कर ली.

एक हफ्ते बाद ही शीतल ने धनराज को शिवाजी की कहानी सुनाई और कहा कि वह उस से बदला लेना चाहती है. तुम ड्राइवर हो, तुम से सड़क हादसा हो जाए तो तुम पर कोई शक भी नहीं करेगा. लेकिन धनराज तैयार नहीं हुआ और डर कर अपने गांव भाग गया. शीतल का पहला दांव ही खाली चला गया. जिस मकसद से उस ने धनराज से शादी की थी, वह अधूरा रह गया. पर वह किसी भी कीमत पर शिवाजी से बदला लेना चाहती थी. इसी उधेड़बुन में काफी वक्त गुजर गया. इसी बीच मुंबई में 2020 की शुरुआत से कोविड महामारी का प्रकोप फैलने लगा.

कोविड का पहला दौर ठीक से खत्म भी नहीं हुआ था कि महामारी की दूसरी लहर भी शुरू हो गई. जून महीने के बाद जब हालत कुछ सुधरने लगे तो शीतल के दिमाग में फिर से शिवाजी से बदला लेने की धुन सवार हो गई. शीतल खुद इस काम को अंजाम नहीं देना चाहती थी, इसलिए अबकी बार उस ने दूसरा मोहरा चुना अपनी सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड बबनराव के बेटे विशाल जाधव को. दरअसल, सोसाइटी में आतेजाते शीतल ने एक बात नोटिस की थी कि गार्ड बबनराव का 18 साल का बेटा विशाल जाधव उसे चोरीछिपी नजरों से देखता है. शीतल एक खूबसूरत और जवान युवती थी. किसी मर्द की नजर को वह भलीभांति जानती थी कि उन नजरों में उस के लिए कौन सा भाव छिपा है.

अचानक विशाल के रूप में शीतल को शिवाजी से बदला लेने का दूसरा हथियार नजर आने लगा. उस ने मन ही मन प्लान कर लिया कि अब विशाल को कैसे अपने काबू में करना है. एक जवान और जिस पर कोई लड़का पहले से ही निगाह लगाए हो, उसे काबू में करना तो बेहद आसान होता है. कुछ रोज में ही विशाल पूरी तरह शीतल के काबू में आ कर उस के आगेपीछे मंडराने लगा. शीतल ने विशाल की आंखों में अपने लिए छिपी जिस्मानी भूख को पढ़ लिया था. थोड़ा तड़पाने के बाद उस ने जब विशाल की इस जिस्मानी भूख की ख्वाहिश को पूरा कर दिया तो इस के बाद विशाल पूरी तरह उस के इशारे पर नाचने लगा.

विशाल के पूरी तरह मोहपाश में फंसते ही एक दिन शीतल ने उसे भी भावुक कर के हैडकांस्टेबल शिवाजी द्वारा अपनी इज्जत लूटने की एक झूठी कहानी सुना कर अपना बदला लेने के लिए उकसाना शुरू कर दिया. शीतल के प्यार में विशाल पागल था, लिहाजा लोहा गर्म देख कर जब कई बार विशाल से प्यार की खातिर शिवाजी से बदला लेने के लिए कहा तो एक दिन विशाल ने उस का काम करने के लिए हामी भर दी, लेकिन साथ ही कहा कि इस काम के लिए उसे एक और साथी की जरूरत पड़ेगी और इस में कुछ पैसा भी खर्च होगा.

शीतल ने तुरंत हां कर दी. बस इस के बाद शीतल ने शिवाजी को खत्म करने की साजिश को अमली जामा पहनाने का काम शुरू कर दिया. विशाल ने इस काम के लिए अपने एक दोस्त गणेश चौहान से बात की. गणेश तेलंगाना से रोजीरोटी की तलाश में मुंबई आया था. संयोग से कोरोना महामारी के कारण उन दिनों उस के पास कोई कामकाज नहीं था और पैसों की बड़ी तंगी थी.

जब विशाल ने उसे बताया कि उन्हें किसी का ऐक्सीडेंट करना है इस के बदले अच्छीखासी रकम मिलेगी तो मजबूरी में दबा गणेश भी तैयार हो गया. दोनों से शीतल ने मुलाकात की. शिवाजी को ठिकाने लगाने के लिए शीतल ने विशाल को 50 हजार और गणेश को 70 हजार रुपए एडवांस दे दिए. जिस के बाद विशाल और गणेश ने सब से पहले शिवाजी का पीछा करना शुरू किया. उस के आनेजाने के समय को नोट किया. इस के बाद उन्होंने तय किया कि वो कुर्ला से पनवेल के बीच ही शिवाजी को मार डालेंगे. इस काम के लिए शीतल ने उन्हें एक सेकेंडहैंड नैनो कार खरीदवा दी. और 15 अगस्त की रात को इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया गया.

प्लान के मुताबिक 15 अगस्त, 2021 की रात साढ़े 10 बजे पनवेल रेलवे स्टेशन से मालधक्का जाने वाली सड़क पर शिवाजी को उन की नैनो कार से जोरदार टक्कर मार दी. संयोग से राष्ट्रीय अवकाश के कारण व कम रोशनी के कारण कोई न तो यह देख सका कि टक्कर किस नंबर की कार से लगी है. शिवाजी को टक्कर मारने के वक्त शीतल एक दूसरी कार से पीछा करते हुए पूरा नजारा देख रही थी. उस ने सड़क पर घायल शिवाजी को देख कर ही समझ लिया था कि वह जिंदा नहीं बचेगा.

योजना के मुताबिक ऐक्सीडेंट करने के बाद करीब 2 किलोमीटर आगे जा कर विशाल व गणेश ने नैनो कार पर पैट्रोल डाल कर पूरी तरह जला दी ताकि कोई सबूत पीछे न छूटे. वारदात के बाद दोनों का पीछा कर रही शीतल उन्हें कार जलाने के बाद अपनी कार में बैठा कर साथ ले गई और उन्हें उन के घर छोड़ दिया. बाद में पुलिस ने जब शीतल, विशाल व गणेश के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर उन के मोबाइल की लोकेशन देखी तो उन की मौजूदगी उसी जगह के आसपास दिखी, जहां शिवाजी सानप का ऐक्सीडेंट हुआ था. पुलिस ने रिमांड अवधि में पूछताछ के बाद तीनों को न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Police Story

—कथा पुलिस की जांच व आरोपियों से पूछताछ पर आधारित

 

Delhi Crime : पति बनाता रहा वीडियो, पत्नी ने फंदे पर लटकर लगा ली फांसी

Delhi Crime : एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिस ने रिश्तों शर्मनाक कर रख दिया है. जहां एक पत्नी ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी, वहीं उस का पति उसी समय उस का वीडियो बना रहा था. आखिर क्या है इस आत्महत्या केस का सच जिस ने सबको झकझोर कर रख दिया है? आइए जानते हैं इस अपराध से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से.

यह हैरान कर देनी वाली घटना दिल्ली के गाजीपुर से  सामने आई है. जहां बिहार के भागलपुर के कहलगांव की रहने वाली 31 साल की चांदनी ने सुसाइड कर लिया. चांदनी की शादी मुजफ्फरपुर जिला के पिपरा थाना क्षेत्र के निवासी सुनील राय के बेटे विधानराय राय से 12 साल पहले हुई थी. हाल ही में उसने माइक्रोफाइनेंस से करीब 4 लाख का लोन लिया था. इसी लोन को विद्यानंद चुका नहीं पा रहा था. रोजरोज फाइनेंस कर्मी की तरफ से फोन आ रहे थे. इसी लोन को चुकाने के लिए चांदनी पति से कहती तो दोनों के बीच विवाद शुरू हो जाता था. इसी विवाद ने पत्नी की जान ले ली.

सुसाइड वीडियो में सामने आया कि विद्यानंद चांदनी को फांसी के लिए उकसाता हुआ देखा गया है.जब वह  फंदे पर लटकर अपनी जान दे रही थी तो उसी समय उस का पति विद्यानंद वीडियो बना रहा था. वीडियो में उस की बेटी रो रही थी. एक मिनट और 12 सेकंड की वीडियो में देखा गया है कि चांदनी बाल्टी पर चढ़कर पंखे के ऊपर फंदा बना रही थी. बेटी मां को देख रो रही थी तो पिता ने डांट कर उसे चुप करा दिया और वीडियो बनाता रहा.

पुलिस के अनुसार, आरोपी पति को अरेस्ट कर लिया गया है और उस से पूछताछ की जा रही है. वहीं मृतका के भाई राकेश ने बताया है कि बहन के देवर ने धमकी दी है कि अगर तुम लोग दिल्ली आए तो जान से मार डालेंगे. फिलहाल पुलिस ने मृतका की डेड बौडी को कब्जे में ले कर मोर्चरी में रख दिया है. पुलिस पूरे मामले की जांच विस्तार से कर रही है. Delhi Crime