प्रेमिका को गोली मार की खुदकुशी – भाग 1

दोपहर के 2 बजे का समय हो रहा था. आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के जमसर गांव में स्थित रौयल स्टार ढावा एंड फैमिली रेस्टोरेंट पर एक युवक अपनी गर्लफ्रैंड को ले कर बाइक से पहुंचा. पिछले दिनों होली का त्यौहार होने के कारण रेस्टोरेंट में स्टाफ भी कम था, इसलिए होटल संचालक मनीष ने युवक को साफसाफ बता दिया था कि स्टाफ कम होने की वजह से आज खाना नहीं मिल सकेगा. इस पर युवक ने 2 चाय व साथ में कुछ खाने का आर्डर दिया. तब तक रेस्टोरेंट के भीतर स्थित केबिन में बैठे वे दोनों बातें करने लगे.

इधर मनीष चाय बनाने के लिए किचन में चला गया. जैसे ही उस ने चाय का पानी और दूध गैस पर चढ़ाया, तभी उसे गोली चलने की एक तेज आवाज सुनाई दी. गोली की आवाज उसी केबिन से आई थी जहां पर युवक और और युवती बैठ कर आपस में बातचीत कर रहे थे. मनीष और रेस्टोरेंट में मौजूद कर्मचारी जब वहां पर पहुंचे युवक और युवती के बीच तेज लड़ाई की आवाजें और छीनाझपटी, आपस में गुत्थमगुत्था हो रही थी. जबकि युवती के सिर से काफी खून भी बह रहा था.

बाथरूम में मारी गोली

युवक ने जब होटल के कर्मचारियों को अपनी ओर आते देखा तो वह दौड़ कर केबिन के शौचालय के अंदर घुस गया और उस ने बाथरूम में घुसते ही शौचालय का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया, तभी एक फायर की आवाज बाथरूम के अंदर से आई.

होटल संचालक मनीष समझ गया कि मामला गंभीर है, इसलिए उस ने इस वारदात की सूचना कोतवाली जीयनपुर के कोतवाल यादवेंद्र पांडेय को फोन द्वारा दे दी. कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने जैसे ही घटना के बारे में सुना तो वह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ तुरंत घटनास्थल की ओर चल पड़े. इसी बीच कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने इस वारदात की खबर अपने उच्चाधिकारियों और एफएससल टीम को भी दे दी थी.

कोतवाली जीयनपुर से घटनास्थल की दूरी महज 2 किलोमीटर थी, इसलिए कोतवाल अपनी टीम के साथ वहां थोड़ी देर में ही पहुंच गए थे. कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शौचालय का दरवाजा तुड़वाया. शौचालय के अंदर युवक मृत अवस्था में पड़ा था.

युवक के शव के पास ही वह तमंचा भी पड़ा हुआ था, जिस के द्वारा युवक ने वारदात को अंजाम दिया था. जबकि दूसरी ओर युवती केबिन में अचेत अवस्था में थी. उस के सिर से खून बह रहा था. उसे तुरंत जिला अस्पताल भेज दिया. युवक और युवती के पास मिले मोबाइल फोन में सेव नंबरों में से उन के घर वालों के नंबर खोज कर दोनों के घर वालों पुलिस द्वारा सूचना दी गई.

उसी बीच घटनास्थल पर एसपी (ग्रामीण) राहुल रूसिया भी पहुंच चुके थे. सूचना पा कर दोनों के घर वाले घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. मृतक युवक की शिनाख्त 24 वर्षीय विशाल पुत्र शिववचन निवासी जम्मनपुर, आजमगढ़ के रूप में हुई थी. जबकि युवती की पहचान 23 वर्षीय नित्या निवासी चिलबिली दान, चिलबिली, रौनापार आजमगढ़ के रूप में हुई.

पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर विशाल के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल, आजमगढ़ भेज दिया और रायल स्टार ढाबा ऐंड फैमिली रेस्टोरेंट को सील कर दिया था. पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि युवक और युवती आपस में अच्छे दोस्त थे और दोनों के बीच पिछले करीब डेढ़ साल से प्रेम संबंध थे.

उसी दिन शाम साढ़े 4 बजे घायल युवती नित्या के पिता ने थाना जीयनपुर में एक लिखित तहरीर दे कर विशाल के खिलाफ उन की बेटी को जान से मारने की नीयत से गोली चलाने की रिपोर्ट दर्ज कराई. यह बात 10 मार्च 2023 की है. जिस का मजमून इस प्रकार था-

उन की तहरीर के आधार पर पुलिस ने भादंवि की धारा 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. एसपी अनुराग आर्य ने कोतवाल को आदेश दिए कि वह इस प्रकरण की यथाशीघ्र जांच करें.

11 मार्च, 2023 शनिवार को मृतक विशाल के भाई अनिल ने ग्रामीणों के साथ जीयनपुर कोतवाली पहुंच कर रायल ढाबा ऐंड फैमिली रेस्टोरेंट के संचालक पर साजिश का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि यह रेस्टोरेंट अवैध रूप से चलाया जा रहा था.

पुलिस तहकीकात के बाद इस मामले की जो कहानी निकल कर सामने आई, जो इस प्रकार थी—

खूबसूरती की मिसाल थी नित्या

मृतक विशाल उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के गांव जम्मनपुर, निवासी शिववचन का पुत्र था. उस के परिवार मां के अलावा 2 बड़े भाई थे. विशाल अपने घर में सब से छोटा था. शिववचन कोलकाता में एक रोलिंग मिल में काम करते थे. बड़ा बेटा अनिल एक कालेज में लेक्चरर था, छोटा सुनील ठेकेदारी और खेती का काम करता था.

सब से छोटे विशाल की उम्र 25 वर्ष की हो चुकी थी. वह अपने गांव से 3 किलोमीटर दूरी पर भदौली में स्थित मैना देवी कालेज में बीए की पढ़ाई कर रहा था. इसी कालेज में गांव चिलबिली दानू निवासी नित्या भी बीटीसी की पढ़ाई कर रही थी. नित्या के पिता डिसपेंसरी चलाते थे. नित्या से छोटा एक भाई था, जो स्कूल में पढ़ाई कर रहा था.

नित्या अपने घर की बड़ी लाडली थी, नित्या खूबसूरत व शांत स्वभाव की थी. पतली कमर, सुडौल बदन, लंबी छरहरी, मृगनयनी, एवं गोरे रंग की नित्या बड़ी शांत रहती थी. उस की आवाज में लोच और मधुरता थी. होंठों पर मुस्कान और चेहरे पर सौम्यता थी. समझदार इतनी कि जिस कला या खेल को सीखती, शीघ्र ही निपुण हो जाती थी. पढ़ने में भी वह काफी अच्छी थी. टीचर बनने का एक दिली जुनून था, इसलिए उस ने बीटीसी में प्रवेश लिया था.

विशाल को गाना गाने और एथलेटिक्स का शौक था. कालेज के समारोह में विशाल लगभग हर प्रोग्राम में गीत जरूर गाता था, उस की आवाज में इतनी कशिश थी कि हर कोई उस का बस मुरीद बन कर रह जाता था. लेकिन विशाल में एक बात यह थी कि वह थोड़ा धीर और गंभीर किस्म का इंसान था.

वह न तो किसी से फालतू बात करता था न ही कभी कोई दिखावा करता था. वह जिस बात पर अड़ जाता था, उस बात पर वह किसी भी हद तक जा सकता था. उस का भी अपना एक मकसद था कि जीवन में कभी भी समझौता नहीं करना है, जो चीज अच्छी लगे वह अच्छी जो बात बुरी लगे, उस में वह किसी भी तरह का कंप्रोमाइज करना बिलकुल भी पसंद नहीं करता था.

विशाल के इसी गंभीर स्वभाव के कारण हर कोई उसे अपना दोस्त बनाने के लिए सदा आतुर सा रहता था. चाहे वह युवक हो या युवती, दूसरा विशाल काफा स्मार्ट भी था. दोनों भाई और मातापिता उस की हर जरूरत का विशेष ध्यान भी रखते थे.

कातिल निगाहों ने बनाया कातिल – भाग 1

3 अगस्त, 2023 को रात के कोई 2 बजे का वक्त रहा होगा. उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के शहर रुद्रपुर की घनी आबादी वाले ट्रांजिट कैंप इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ था. उसी दौरान संजय यादव के 12 वर्षीय बेटे जय की चीखपुकार ने सभी लोगों की नींद उड़ा दी थी.

जय जोरजोर से चीख रहा था, ‘‘बचाओबचाओ, बदमाशों ने मेरे मम्मीपापा को मार डाला.’’

उस की चीखपुकार सुन कर लोग इकट्ठा हुए. फिर लोगों ने उस के घर के अंदर का मंजर देखा तो सभी के रोंगटे खड़े हो गए. लोगों ने घटनास्थल पर देखा, एक कमरे में उस के मम्मीपापा की लाश खून से लथपथ पड़ी हुई थी. जबकि दूसरे कमरे में उस की नानी बेहोशी की हालत में पड़ी हुई चीखपुकार मचा रही थी. जय ने लोगों को बताया कि उस ने भी शोर मचाने की कोशिश की तो आरोपी उसे धक्का मार कर एक बदमाश फरार हो गया.

इस जघन्य अपराध को देखते ही वहां पर मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी. सूचना पाते ही आननफानन में घटनास्थल पर पुलिस भी पहुंच गई थी. पुलिस ने इस मामले में मृतक संजय यादव के बेटे जय से जानकारी जुटाई तो उस ने बताया कि रात के कोई 2 बजे उस के घर में बदमाश घुस आए. घर में घुसते ही बदमाशों ने उस के पिता की धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या कर दी.

उस के बाद पास में ही सो रही उस की मां के चेहरे पर कई वार करने के बाद उन के हाथ की नस काट दी, फिर उन की कमर पर धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी. दोनों की चीख सुन दूसरे कमरे में सो रही उस की नानी गौरी मंडल मौके पर पहुंची तो बदमाशों ने उन के पेट पर भी वार कर दिया, जिस के कारण वह भी गंभीर रूप से घायल हो गईं.

दोहरे मर्डर से क्षेत्र में मची सनसनी

3 लोगों की नाजुक हालत को देखते ही पुलिस ने एंबुलेंस भी बुला ली थी. तीनों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पर डाक्टरों ने संजय यादव और उन की पत्नी सोनाली को मृत घोषित कर दिया. जबकि सोनाली यादव की मां गौरी मंडल की हालत गंभीर दखते हुए उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया था. रात अधिक होने के कारण पुलिस ने दोनों मृतकों की लाश को मोर्चरी में रखवा दिया था.

अगले दिन सुबह ही पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर मृतक परिवार के घर की जांचपड़ताल की. जांच के लिए डौग स्क्वायड को भी बुलाया गया था. इस दौरान भी सारे दिन देखने वालों की भीड़ लगी रही.

इस केस की अधिक जानकारी के लिए पुलिस ने कुमाऊं फोरैंसिक टीम भी बुला ली थी. घटना के बाद घर में मौजूद बिस्तर खून से लथपथ पड़ा हुआ था. फर्श पर भी कई जगह खून बिखरा मिला. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचते ही टीम ने साक्ष्य जुटाए. उस के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था.

7 पुलिस टीमों के 45 पुलिसकर्मी जुटे जांच में

इस जघन्य डबल मर्डर के शीघ्र खुलासे के लिए एसएसपी मंजूनाथ टीसी द्वारा जगदीश की गिरफ्तारी हेतु पुलिस अपराध एवं यातायात, एसपी (सिटी), सीओ अनुषा बडोला व पंतनगर के सीओ व एसएचओ कोतवाली सुंदरम शर्मा के निर्देशन में 7 पुलिस टीमों का गठन किया गया.

इस केस की गहराई तक जाने के लिए सब से पहले पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. जिस के द्वारा राजवीर नाम का एक शख्स सुर्खियों में उभर कर सामने आया. पुलिस ने राजवीर की छानबीन की तो उस के कई नाम उभर कर सामने आए. जो जगदीश उर्फ राजकमल उर्फ राज नाम से ज्यादा जाना जाता था. उसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि वह राजवीर नाम से कई साल पहले संजय यादव के घर के सामने किराए पर रह चुका था.

जगदीश उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का मूल निवासी था. इस वक्त वह कहां रह रहा था, किसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं थी. फिर भी पुलिस ने उस के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया. लेकिन वह नंबर काफी समय से बंद आ रहा था, जिस से पता चला कि अभियुक्त पुलिस की पकड़ से बचने के लिए पलपल स्थान बदल रहा था.

उस के बाद गठित टीमों द्वारा अपनाअपना काम करते हुए 5 राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में जा कर लगभग 1200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा था. उस के बाद एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने आरोपी की पकडऩे के लिए 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित करते हुए अखबारों में भी विज्ञापन दिया. साथ ही आरोपी को शीघ्र पकडऩे के लिए पुलिस ने उस के पीछे मुखबिर भी लगा दिए.

9 अगस्त, 2023 को पुलिस को एक मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि डबल मर्डर केस का आरोपी उत्तर प्रदेश के रामपुर शहर में मौजूद है. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुखबिर की लोकेशन के आधार पर चारों तरफ से घेराबंदी करते हुए उसे अपनी हिरासत में ले लिया.

जगदीश को गिरफ्तार करते ही पुलिस टीम रुद्रपुर चली आई. रुद्रपुर लाते ही पुलिस ने इस हत्याकांड के बारे में उस से कड़ी पूछताछ की. जगदीश ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. जगदीश ने बताया कि वह उसे दिलोजान से चाहता था. लेकिन सोनाली उस से प्रेम करने को तैयार न थी, जिस के कारण ही उसे इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा.

संजय और सोनाली ने की थी लव मैरिज

पुलिस पूछताछ और संजय यादव के परिवार से मिली जानकारी से इस मामले में जो कथा उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

संजय यादव उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का मूल निवासी था. 5 भाइयों में सब से छोटा संजय यादव अब से लगभग 17 साल पहले नौकरी की तलाश में रुद्रपुर आया था. उस वक्त वह अविवाहित था. रुद्रपुर आ कर उस ने एक किराए का कमरा लिया और यहीं पर नौकरी भी करने लगा था. उसी नौकरी करने के दौरान उस की मुलाकात सुभाष कालोनी निवासी सोनाली से हुई. उस वक्त सोनाली भी सिडकुल की एक फैक्ट्री में काम करती थी.

दो बहनों का एक प्रेमी – भाग 1

इफ्तखाराबाद के अब्दुल रशीद को कानपुर की एक टेनरी में नौकरी मिल गई थी. कुछ सालों बाद उन्होंने कानपुर के मुसलिम बाहुल्य इलाके राजीवनगर में जमीन खरीदकर अपना छोटा सा  मकान बना लिया और परिवार के साथ उसी में रहने लगे. कालांतर में उन के 7 बच्चे हुए, जिन में 3 बेटे थे और 4 बेटियां. वक्त के साथ उन के सभी बच्चे बड़े हो गए तो उन्होंने 2 बड़ी बेटियों की शादी कर दी.

कई साल पहले अब्दुल रशीद की शरीक ए हयात का इंतकाल हो गया तो वह टेनरी की नौकरी छोड़ कर छोटे बेटे अतीक अहमद के साथ बेल्ट बनाने का काम करने लगे. उन के दोनों बड़े बेटों, रईस अहमद और अनीस अहमद ने अपनी मरजी से शादियां कर ली थीं और अलग मकान ले कर रहने लगे थे. अब अब्दुल रशीद के घर में 4 ही लोग बचे थे, वह, उन की 2 बेटियां शमीम बानो और आफरीन और छोटा बेटा अतीक अहमद.

शमीम और आफरीन दोनों ही जवान थीं, लेकिन आर्थिक परेशानियों के चलते उन की शादियां नहीं हो पा रही थीं. अब्दुल रशीद और अतीक सुबह को काम पर निकल जाते थे तो फिर दिन छिपने के बाद ही घर लौट कर आते थे. शमीम और आफरीन दिन भर घर में अकेली रहती थीं. उन पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी.

खाली रहने की वजह से शमीम की दोस्ती रूबीना नाम की एक युवती से हो गई. रूबीना ने 5 साल पहले अपनी पसंद के एक युवक से शादी की थी. इस में उस के घर वालों की सहमति भी शामिल थी. लेकिन शादी के बाद रूबीना एक बार ससुराल जाने के बाद दोबारा नहीं गई. नतीजतन उस का तलाक हो गया. इस के कुछ दिनों बाद रूबीना ने एक ऐसे आदमी से शादी कर ली, जिस की पहले से ही 2 बीवियां थीं.

इस बात को ले कर खूब हंगामा हुआ. उस आदमी की दोनों बीवियों ने भी रूबीना को जम कर लताड़ा और गालीगलौज की. उन्होंने अपने पति को भी चेतावनी दी. फलस्वरूप रूबीना को उस आदमी का भी साथ छोड़ना पड़ा. इस तरह रूबीना एक बार फिर अकेली रह गई. अब तक उस के मातापिता की मृत्यु हो चुकी थी और वह अपने भाई शाहिद और भाभी जरीना के साथ राजीवनगर में ही रह रही थी. भैयाभाभी का उस पर कोई कंट्रोल नहीं था, वह पूरी तरह आजाद थी.

रूबीना जैसा ही हाल शमीम बानो का भी था. उस के 2 भाई अपनी पत्नियों के साथ अलग रहते थे. पिता और छोटा भाई सुबह काम पर चले जाते थे तो फिर रात में ही लौटते थे. उन के जाने के बाद शमीम पूरी तरह आजाद हो जाती थी यानी अपनी मरजी की मालिक. एक ही मोहल्ले में रहने और एक जैसी आदतों की वजह से दोनों में दोस्ती हो गई. दोनों साथसाथ घूमने लगीं.

शमीम खूबसूरत थी. उस पर मोहल्ले के कई लड़कों की निगाहें जमी थीं, जिन में एक उस के चाचा वहीद का बेटा सिद्दीक भी था. करीबी रिश्तेदार होने की वजह शमीम और सिद्दीक के बीच नजदीकी संबंध बन गए. फिर जल्दी ही ऐसा समय भी आया, जब दोनों एकदूसरे को तनमन से समर्पित हो गए.

इधर बड़ी बहन शमीम चाचा के लड़के सिद्दीक से इश्क लड़ा रही थी तो उधर छोटी आफरीन भी 22 की हो चुकी थी. आफरीन शमीम से ज्यादा खूबसूरत भी थी और स्मार्ट भी. सिद्दीक यूं तो आफरीन को बचपन से देखता आया था, लेकिन शमीम से शारीरिक संबंध बनने के बाद उस का आफरीन को देखने का भी नजरिया बदल गया था. वह शमीम से ज्यादा आफरीन में दिलचस्पी लेने लगा. शमीम को हालांकि यह अच्छा नहीं लगा, लेकिन वह कर भी क्या सकती थी.

सिद्दीक से मोहभंग हुआ तो शमीम अपनी दोस्त रूबीना के और भी ज्यादा करीब आ गई. इस के बाद दोनों कानपुर के ही नहीं बल्कि दिल्ली तक के चक्कर लगाने लगीं. शमीम के पैर चूंकि पहले ही घर से बाहर निकल चुके थे, इसलिए अब्दुल रशीद चाह कर भी उस पर पाबंदी नहीं लगा सके. जब उस का मन होता रूबीना के साथ चली जाती और जब मन होता घर लौट आती. पिछले साल शमीम जब ईद के दिन दिल्ली चली गई तो अब्दुल रशीद को बहुत बुरा लगा. वह वापस लौटी तो उन्होंने उसे डांटाफटकारा भी, पर उस पर कोई असर नहीं हुआ.

शमीम के बाहर चली जाने के बाद आफरीन घर में अकेली रह जाती थी. इस का फायदा उठाया सिद्दीक ने. वह अपना ज्यादा से ज्यादा समय आफरीन के साथ गुजारने लगा. इस का नतीजा यह हुआ कि प्यार के नाम पर दोनों एकदूसरे के बेहद करीब आ गए. यहां तक कि दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया.

इसी बीच शमीम एक बार रूबीना के साथ दिल्ली गई तो उस ने लौट कर बताया कि रूबीना दिल्ली के एक युवक से उस की शादी की बात चला रही है. उस युवक का वह फोटो भी साथ लाई थी. घर में किसी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि उस का विरोध करता. वैसे भी सभी चाहते थे कि किसी तरह उस की शादी हो जाए तो अच्छा है. दिल्ली से लौटने के बाद शमीम का अधिकतर समय फोन पर बतियाने में बीतने लगा. वह आफरीन से बताती थी कि वह उसी युवक से बातें करती है, जिस से शादी करेगी.

जब से शमीम का दिल्ली वाले लड़के से चक्कर चला था, वह ज्यादातर घर में ही रहने लगी थी. इस से आफरीन को परेशानी होती थी, क्योंकि वह सिद्दीक से नहीं मिल पाती थी. यह देख कर उस ने अपने इस प्रेमी से घर के बाहर मिलना शुरू कर दिया. जब यह बात शमीम को पता चली कि उस का पूर्व प्रेमी उस की छोटी बहन के साथ इश्क लड़ा रहा है तो उसे बहुत बुरा लगा. उस ने आफरीन को समझाने की कोशिश की कि वह सिद्दीक के चक्कर में न पड़े, क्योंकि वह अच्छा लड़का नहीं है.

शमीम आफरीन से कई साल बड़ी थी, तजुर्बेकार भी थी. वह जानती थी कि सिद्दीक आफरीन का फायदा उठा कर उसे किनारे लगा देगा. इसलिए वह कोशिश करने लगी कि वे दोनों न मिल पाएं. लेकिन यह बात आफरीन को बुरी लगती थी और सिद्दीक को भी. इस की एक वजह यह थी कि शमीम अपने मामले में हमेशा से आजाद रही थी, जबकि वह उन दोनों पर पाबंदी लगाना चाहती थी.

कैसे हुईं 9 दिन में 3 बहनें गायब – भाग 1

सुबह के 7 बजे थे, शमशाद अली अपने घर के बाहर बैठे हुए थे. उन्होंने किसी काम के लिए अपनी 14 वर्षीय बेटी मनतारा को आवाज लगाई. लेकिन मनतारा ने कोई जबाव नहीं दिया. इस पर पास बैठे बेटे सलमान से उन्होंने मनतारा को बुलाने के लिए कहा.

सलमान बहन को बुलाने घर में गया, लेकिन उसे मनतारा घर में दिखाई नहीं दी. उस ने पूरे घर में बहन को तलाशा, दूसरी बहनों व मां ने भी अनभिज्ञता व्यक्त की. मनतारा नहीं मिली. तब गांव में उसे तलाश किया गया. लेकिन वह गांव में होती तो मिलती. वह कहीं नहीं मिली. दरअसल, मनतारा गायब हो चुकी थी.

उत्तर प्रदेश में मैनपुरी जिले के थाना क्षेत्र कुर्रा का एक गांव है रम्पुरा. जिला मुख्यालय से इस गांव की दूरी करीब 25 किलोमीटर है. इसी गांव का रहने वाला है शमशाद अली. शमशाद की 3 बेटियों में 22 साल की निशा, 16 साल की खुशबू और 14 साल की मनतारा जबकि एक बेटा सलमान है. शमशाद मेहनतमजदूरी कर के परिवार का पालनपोषण करता था. इस काम में बेटा उस का हाथ बंटाता था.

जब मनतारा कहीं नहीं मिली तो परेशान शमशाद थाना कुर्रा जा पहुंचा और एसएचओ जयश्याम शुक्ला से मिला. उस ने उन्हें अपनी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी के लापता होने की जानकारी दी. शमशाद ने आरोप लगाया कि उस की बेटी को कोई किडनैप कर ले गया है. पुलिस ने इस की रिपोर्ट दर्ज कर ली और बेटी को ढूंढने की बात कही. यह भी कहा कि आप भी अपने स्तर से पता लगाइए. यह बात 21 दिसंबर, 2022 की है.

पिता द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराए 8 दिन हो गए थे. पुलिस ने नाबालिग बच्ची को ढूंढने का वायदा भी किया था, लेकिन पुलिस उस का कोई सुराग नहीं लगा पाई थी. शमशाद का आरोप था कि पुलिस ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. पुलिस के ढुलमुल रवैए को देखते हुए शमशाद ने खुद अपनी बेटी की तलाश करने का निर्णय लिया.

शमशाद अली ने अपनी लापता हुई बेटी के संबंध में स्वयं छानबीन शुरू कर दी. इस बीच पड़ोसियों से उसे पता चला कि बेटी पंजाब के मुक्तसर ले जाई गई है. शमशाद के पड़ोसी राकेश के यहां कुछ दिन पहले शादी में पंजाब के मुक्तसर का रहने वाला एक लडक़ा आया था. वही उन की बेटी को बहलाफुसला कर भगा ले गया है. प्रयास करने पर उस लडक़े के पिता का मोबाइल नंबर भी शमशाद को मिल गया.

एक बेटी को ढूंढने गए, 2 और हो गईं गायब

30 दिसंबर, 2022 को शमशाद के मोबाइल पर आरोपी का फोन आया. बेटी से बात भी की. इस संबंध में शमशाद ने थाना कुर्रा जा कर पुलिस को पूरी बात से अवगत कराया. पुलिस ने तब उस मोबाइल की लोकेशन पता की. लोकेशन की जानकारी के बाद शमशाद को लोकेशन दे कर पंजाब के मुक्तसर भेजा.

उसी दिन शमशाद बेटी की तलाश के लिए मुक्तसर के लिए कार बुक करा कर अपने 3 रिश्तेदारों के साथ घर से निकला. शमशाद अभी अलीगढ़ तक ही पहुंचा था कि घर से बेटे का फोन आ गया. बेटे ने कहा, “अब्बा, 2 बहनें और किडनैप हो गई हैं.”

यह सुनते ही शमशाद के होश उड़ गए.

शमशाद ने बिना देर किए अपने मोबाइल से कुर्रा थाने के अलावा पुलिस के कई अधिकारियों को काल किया, लेकिन उसे कोई उत्तर नहीं मिला. उस समय शमशाद ने घर लौटना उचित नहीं समझा और पंजाब पहुंच गया. वहां संबंधित थाने में पहुंचा और कुर्रा थाना द्वारा दी गई आरोपी के मोबाइल की लोकेशन से मुक्तसर स्थित थाना पुलिस को अवगत कराया.

वहां के एसएचओ ने कुर्रा के एसएचओ से बात कराने को कहा. थाने व क्राइम ब्रांच को कई बार फोन किए, लेकिन नेटवर्क न मिलने के कारण बात नहीं हो सकी. शमशाद ने वहां की पुलिस को बताया कि उस के पड़ोसी राकेश के रिश्तेदारों की मदद से हम ने उस लडक़े के बारे में जानकारी जुटाई है कि वह लडक़ा मुक्तसर का रहने वाला है. हमें उस लडक़े के पिता का मोबाइल नंबर भी मिल गया था. उसी के आधार पर थाना कुर्रा से आरोपी की लोकेशन निकलवाई थी.

पंजाब पुलिस ने कहा, आप को अपने राज्य की पुलिस के साथ आना चाहिए था. इस तरह हम आप की कोई मदद नहीं कर सकतेे हैं. थकहार कर शमशाद वापस लौट आया.

पंजाब से खाली हाथ लौटने के बाद शमशाद ने थाना कुर्रा जा कर अपनी 2 और बेटियों निशा और खुशबू के किडनैप होने की जानकारी देते हुए अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई. इन में निशा बालिग जबकि खुशबू नाबालिग थी. थाना कुर्रा में अब तक शमशाद की 3 बेटियों के अपहरण की भादंवि की धारा 363 के अंतर्गत 2 मामले दर्ज किए जा चुके थे. शमशाद ने पुलिस के सामने आशंका व्यक्त की, अपहत्र्ता उस की बेटियों को मार डालेंगे. उन के अंग निकाल लेंगे.

पंजाब के युवक ने किया किडनैप

शमशाद ने बताया कि 4 नवंबर को घर के सामने रहने वाले राकेश की बेटी की शादी थी. शादी में राकेश के रिश्तेदारों के साथ उन के दोस्त भी आए थे. आरोपी युवक भारत सिंह पंजाब के मुक्तसर से आया था. वह यहां करीब 15 दिन रुका था. उस समय घर वालों ने कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में पता चला कि वह लडक़ा उन की बेटियों के पीछे पड़ा था. उसी ने तीनों बेटियों का अपहरण 9 दिन में कराया है.

शमशाद ने आशंका व्यक्त की कि वह युवक किसी बड़े गिरोह का सदस्य भी हो सकता है. वह बेटियों को बेच भी सकता है. उस ने अपनी तीनों बेटियों की जान को खतरा बताया. बेबस पिता शमशाद ने राष्ट्रपति, प्रदेश के मुख्यमंत्री और एसपी (मैनपुरी) के नाम अपनी शिकायत फैक्स द्वारा भेज दी. इस के साथ ही मैनपुरी जा कर एसपी विनोद कुमार से मिल कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी उन्हें देते हुए तीनों बेटियों को बरामद करने की गुहार लगाई.

3 बेटियों के अपहरण पर प्रशासन हुआ अलर्ट

एसपी विनोद कुमार ने शमशाद को आश्वासन देते हुए कहा, जल्द से जल्द आप की तीनों बेटियां आप के पास होंगी. बेटियों को ले जाने वाले अपराधियों को पकडऩे के लिए हम स्पैशल टीम बनाएंगे. उस के बाद एसपी द्वारा 2 टीमें गठित कर दी गईं.

9 जनवरी, 2023 को कुर्रा के एसएचओ जयश्याम शुक्ला से शमशाद मिला. जिस लडक़े पर बेटियों के अपहरण का शक था, उस के पिता को फोन मिलाया. लडक़े के पिता ने फोन उठाया तो पीछे से छोटी बेटी मनतारा की आवाज आई. इस पर बेटी से बात कराने को कहा. बेटी ने डरी आवाज में कहा, “पापा, अब मैं वापस नहीं आ पाऊंगी.”

इस के बाद फोन कट गया. शमशाद ने बताया कि बेटी को ज्यादा बात करने से रोक दिया. बेटी को धमकाने की आवाज फोन में आ रही थी.

एसपी मैनपुरी ने थाना कुर्रा पुलिस को लड़कियों को शीघ्र बरामद करने के निर्देश दिए. इस पर 10 जनवरी, 2023 को शमशाद को साथ ले कर थाना कुर्रा पुलिस पंजाब के लिए रवाना हुई. जिस मोबाइल नंबर पर बात हुई थी, पुलिस ने उस मोबाइल की लोकेशन ट्रैक की.

जब पुलिस वहां पहुंची तो घर पर ताला लटका मिला. आसपास पूछताछ की, लेकिन उन लोगों के बारे में कुछ पता नहीं चला. थकहार कर सभी लोग खाली हाथ वापस आ गए. धीरेधीरे डेढ़ महीने का समय बीत गया.

प्यार का जूनून – भाग 4

रविवार 28 जुलाई, 2013 की सुबह ही राममूर्ति ने दामाद पवन को फोन किया, वह सुमन को ले कर गुरावली आ जाए. उस ने बहाना बनाया कि मुकेश को देखने वाले आ रहे हैं. पवन सुमन को ले कर 12 बजे के आसपास ससुराल जा पहुंचा. लेकिन उसे वहां कोई लड़की वाला नहीं दिखाई दिया. फिर भी वह शाम तक रुका रहा. शाम 6 बजे के आसपास वह अपने गांव के लिए निकल पड़ा.

लेकिन इस बीच राममूर्ति ने जिस काम के लिए सुमन और पवन को बुलाया था, वह हो गया था. दरअसल उसे सुमन के मोबाइल से उदयभान को संदेश भेजना था कि वह गुरावती आई है. रात 10 बजे वह उस से मिलने उस के घर आ जाए. उस समय वह छत पर रहेगी.

राममूर्ति ने सुमन का मोबाइल ले कर यह काम कब किया, उसे पता ही नहीं चला. वह खुशीखुशी पति के साथ आई और खुशीखुशी चली गई.

शाम को ही राममूर्ति अपने दोनों भाइयों, राजाराम, पप्पू, समधी मुन्नालाल और उस के भाई भावसिंह के साथ शराब की बोतल ले कर छत पर बैठ गया और खानापीना होने लगा. उस ने पत्नी को पहले ही राजाराम के घर सोने के लिए भेज दिया था.

दूसरी ओर सुमन का संदेश पा कर उदयभान उस से मिलने के लिए बेचैन था. प्रेमिका से मिलने के लिए ही वह घर में पिनाहट जाने का बहाना बना कर शाम को ही निकल गया. जैसे ही रात के 10 बजे, वह राममूर्ति के घर के सामने जा पहुंचा.

घर का दरवाजा खुला था, इसलिए वह दबे पांव अंदर घुस गया. उसे लगा कि सुमन ने ही दरवाजा खोल रखा है. उस ने छत पर आने को कहा था, इसलिए सीढि़यां चढ़ कर वह सीधे छत पर जा पहुंचा. लेकिन छत पर उस ने राममूर्ति, उस के भाइयों और रिश्तेदारों को देखा तो उसे काटो तो खून नहीं. वह पलट कर भागता, उस के पहले ही राममूर्ति ने लपक कर उसे पकड़ लिया.

राममूर्ति उसे खींच कर कमरे में ले गया, जहां उस के मुंह में कपड़ा ठूंस कर ऊपर से बांध दिया गया. इस के बाद लाठियों और लोहे के रौड से उस की जम कर पिटाई की गई. उदयभान छटपटाने के अलावा और कर ही क्या सकता था. उस ने हाथ जोड़े, पैर पकड़े, लेकिन किसी ने दया नहीं की. इसी मारपीट में उस का बायां पैर टूट गया. पिटतेपिटते उदयभान बेहोश हो गया तो उन लोगों ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी.

राममूर्ति के मकान की छत पर बने उस कमरे में रात को क्या हुआ, गांव वालों की छोड़ो, घर की महिलाएं तक नहीं जान सकीं. उन्होंने उदयभान का मोबाइल फोन तोड़ कर फेंक दिया था. रात 11 बजे अचानक बाहर मोटरसाइकिल आने की आवाज आई तो सभी परेशान हो उठे कि इस समय कौन आ गया. उन्होंने जल्दी से लाश छिपाई और कमरा ठीक किया. राममूर्ति ने दरवाजा खोला तो पता चला, बाहर उस की बुआ का बेटा वीर बहादुर खड़ा था. राममूर्ति उसे भीतर ले आया और सारी बातें बताईं.

उदयभान की हत्या करने के बाद सभी ने निश्चिंत हो कर आराम से शराब पी और खाना खाया. इस के बाद रात के 2 बजे के आसपास उदयभान की लाश को मोटरसाइकिल से ले जा कर गुरावली से 20 मिनट की दूरी पर गांव सड़क का पुरा के मंदिर के पास बने कुएं में फेंक आए. बाकी लोग तो घर लौट आए, जबकि मुन्नालाल और भावसिंह उतनी रात को ही अपने घर चले गए. सुबह वीर बहादुर भी अपने घर चला गया.

सुबह से ही राममूर्ति पप्पू पर नजर रखने लगा था, इसीलिए जैसे ही उसे पता चला कि उदयभान की लाश बरामद हो चुकी है और पप्पू ने शक के आधार पर उस के दोनों भाइयों और मुकेश के नाम रिपोर्ट दर्ज कराई है तो वह सभी को ले कर घर से फरार हो गया था.

राममूर्ति ने भागने से पहले फोन के जरिए अपने समधी मुन्नालाल को भी सूचना दे दी थी. उस के बाद मुन्नालाल भी अपने भाई भावसिंह के साथ वहीं जा कर छिप गया था. राममूर्ति ने अपने फुफेरे भाई वीर बहादुर को भी वहीं बुला लिया था. जबकि परिवार को उस ने राजस्थान के अपने एक रिश्तेदार के यहां भेज दिया था.

पूछताछ के बाद पुलिस ने राममूर्ति के घर से वे लाठीडंडे और लोहे की रौड बरामद कर ली थी, जिन से उदयभान को मारापीटा गया था. सारे सुबूत जुटा कर पुलिस ने सभी को आगरा की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक सभी अभियुक्त जेल में बंद थे.

— कथा पुलिस सूत्रों के अनुसार

जिस्म के आईने में देखी तिजोरी – भाग 3

तरुण बजाज के हत्यारों को गिरफ्तार करने की बात थानाप्रभारी मनीष जोशी ने देहरादून से ही एसीपी एस.के. गिरि को बता दी थी. पुलिस तीनों अभियुक्तों को दिल्ली ले आई. वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में तीनों से तरुण बजाज की हत्या की बाबत पूछताछ की गई तो हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह लव और सैक्स से सराबोर निकली.

दिल्ली के मध्य जिला के न्यू राजेंद्रनगर के एफ ब्लौक में रहने वाला तरुण बजाज केबल आपरेटर था. राजेंद्रनगर क्षेत्र में उस का इमेज केबल नेटवर्क था. उस की शादी रितु बजाज से हुई थी. तरुण बजाज एक संपन्न आदमी था. उस की आमदनी अच्छी थी, लेकिन एक कमी उसे और उस की पत्नी को हमेशा सालती रही कि रितु मां नहीं बन सकी.

तरुण ने पत्नी का काफी इलाज कराया. इस के बावजूद भी बच्चे की किलकारी उन के आंगन में नहीं गूंजी. रितु की नौकरी दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग में लीगल मैनेजर के पद पर लग गई थी.

बजाज दंपति के पास वैसे तो हर तरह की सुखसुविधा थी, लेकिन संतान न होने का दुख उन्हें जबतब विचलित करता रहता था. कहते हैं कि दौलत बढ़ने पर कुछ लोग गलत शौक पाल लेते हैं. तरुण बजाज को भी एक शौक लग गया था. वह था महिलाओं से दोस्ती कर उन से नजदीकी संबंध बनाना. पत्नी के ड्यूटी पर जाने के बाद वह फोन कर के अपनी महिला मित्र को बुला लेता और अपने फ्लैट में ही मौजमस्ती करता.

तरुण बजाज की ऐसी ही एक महिला पूजा से नजदीकी थी. तरुण की उस से करीब डेढ़ साल पहले मुलाकात हुई थी. पूजा कर्मपुरा के रहने वाले सूरज उर्फ साहिल की पत्नी थी. साहिल आवारा किस्म का था. पूजा की तरुण बजाज जैसे कई लोगों से नजदीकी थी, इसलिए उसी के खर्चे से घर का खर्च चलता था.

पूजा जब गर्भवती हो गई तो उस ने तरुण बजाज के पास जाना कम कर दिया. तब पूजा ने तरुण की मुलाकात मुन्नी उर्फ मोनी से कराई. मोनी सुल्तानपुरी में रहती थी. पत्नी की गैरमौजूदगी में तरुण मोनी को भी फ्लैट पर बुला लेता था.

बाद में पूजा ने एक बेटे को जन्म दिया. पूजा ने अपने पुरुष मित्रों के पास जाना बंद कर दिया था. इस से घर खर्च चलाने में परेशानी होने लगी. पैसे के लिए उस का पति साहिल भी परेशान रहने लगा. पतिपत्नी बैठ कर जल्द पैसा कमाने के उपाय खोजते रहते.

पूजा तरुण बजाज की हैसियत जानती थी. तभी उस के दिमाग में एक आइडिया आया कि यदि तरुण बजाज के यहां हाथ साफ कर दिया जाए तो वहां से मोटा माल बटोरा जा सकता है.  पूजा ने इस आइडिया के बारे में पति को बताया तो साहिल को पत्नी का यह आइडिया अच्छा लगा. इस योजना में उस ने कर्मपुरा में रहने वाले अपने दोस्त मोहित शर्मा उर्फ सन्नी को शामिल कर लिया.

चूंकि अब मोनी बजाज के यहां जाती थी, इसलिए काम को आसानी से अंजाम देने के लिए मोनी को भी बजाज के घर लूट करने की योजना में शामिल कर लिया. पूजा ने उन्हें भरोसा दिया कि लूट की रकम में से उन्हें अच्छे पैसे दे दिए जाएंगे.

फिर 21 से 23 जून तक साहिल और मोहित शर्मा ने तरुण बजाज के घर की कुरियर बौय बन कर रेकी की. 25 जून, 2014 को पूजा और साहिल ने फोन कर के मोहित शर्मा और मोनी को दोपहर साढ़े 11 बजे अपने घर बुला लिया. इस से पहले उन्होंने दिल्ली की मादीपुर मार्केट से 3 चाकू खरीद लिए थे. कर्मपुरा से पूजा और मोनी बैटरी रिक्शा से राजेंद्रा प्लेस मैट्रो स्टेशन के नजदीक पहुंचीं.

साहिल और मोहित मोटरसाइकिल से उन के पीछेपीछे आ रहे थे. पूजा और मोनी मैट्रो स्टेशन के पास बैटरी रिक्शा में बैठी रहीं. तरुण बजाज से बात करने के लिए मोनी किसी अनजान आदमी के फोन से बात करना चाहती थी, ताकि वह पुलिस की पकड़ में न आ सकें.

उसी समय उन्होंने मैट्रो स्टेशन की सीढि़यों से उतर चुके एक युवक को अपने पास बुलाया. उस युवक के हाथ में मोबाइल फोन था. मोनी ने उस युवक से फोन मांग कर तरुण बजाज को फोन किया. तब तरुण ने उसे फ्लैट पर आने को कह दिया.

उस युवक का फोन लौटाने के बाद राजेंद्राप्लेस मैट्रो स्टेशन से मोनी और पूजा तरुण बजाज के घर पहुंचीं. दोनों को देख कर 50 वर्षीय तरुण बजाज खुश हो गया. उस ने दोनों को जूस पिलाया. इस के बाद वह उन के साथ मौजमस्ती करने लगा.

उसी दौरान पूजा ने अपने फोन से साहिल को मैसेज भेज दिया. वह मैसेज उस ने पहले से ही लिख रखा था. बेडरूम फ्लैट के मेनगेट से थोड़ा हट कर था, इसलिए मौका पा कर पूजा ने बेडरूम से आ कर दरवाजा खोल दिया.

उधर मैसेज मिलते ही साहिल और मोहित शर्मा बाइक से उस के फ्लैट के नजदीक पहुंच गए. फ्लैट फर्स्ट फ्लोर पर था. जब वे वहां पहुंचे तो दरवाजा पहले से खुला होने की वजह से वे फ्लैट में दाखिल हो गए.

अनजान लोगों को फ्लैट में देख कर तरुण बजाज चौंका. वह कपड़े पहनने के लिए उठने लगा तो उन्होंने चाकू दिखा कर उसे डरा दिया. इस से पहले कि वह कुछ कहता उन लोगों ने उस पर चाकुओं से वार करने शुरू कर दिए. कुछ ही देर में तरुण का शरीर चाकुओं से गोद डाला. वह जिंदा न रह जाए, इसलिए उस की सांस की नली काट दी.

उस के पुरुषांग पर भी चाकू से वार किया और पेट चीर दिया. कुछ देर तड़पने के बाद तरुण बजाज ने दम तोड़ दिया. चूंकि खून से साहिल, मोहित की कमीज सन चुकी थी और मोनी की चुन्नी और सूट पर खून लग चुका था, इसलिए उन्होंने खून सने कपड़े एक पौलीथिन में बांध कर अपने साथ लाए बैग में रख लिए. मोनी की चुन्नी भी उसी में रख ली. मोहित और साहिल ने तरुण की कमीजें अलमारी से निकाल कर पहन लीं.

तरुण को मौत के आगोश में भेजने के बाद उन्होंने अलमारी की तलाशी ली, जिस में रखे 3 लाख रुपए और ज्वैलरी निकाल कर बैग में रख ली. उन्होंने हत्या को लूट का रूप देने के लिए घर का सामान इधरउधर बिखेर दिया. बजाज की हत्या करते समय साहिल के हाथ में भी चाकू लग गया था.

अपना काम करने के बाद साहिल और मोहित मोटरसाइकिल से कर्मपुरा लौट गए. मोनी के कपड़ों पर खून के छींटे आ गए थे. वह किसी को दिखाई न दें, इसलिए पूजा ने उसे अपनी काले रंग की चुन्नी दे दी. जिसे ओढ़ कर वह पूजा के साथ कर्मपुरा पहुंच गई.

साहिल शातिर था. उसे उम्मीद थी कि पुलिस किसी न किसी सुबूत के जरिए उस के पास तक पहुंच सकती है, इसलिए उस ने मोहित और मोनी को फिलहाल 30-30 हजार रुपए दे दिए. बाकी पैसे उस ने ज्वैलरी बेचने के बाद देने को कहा. फिर वह पत्नी पूजा को ले कर हरिद्वार निकल गया. मोहित भी उस के साथ चला गया. खून सने कपड़े उन्होंने गंगा नदी में फेंक दिए.

देहरादून में साहिल का एक रिश्तेदार रहता था. वह उसी रिश्तेदार के घर पहुंच कर सुबहसुबह पत्नी और दोस्त के साथ शराब पी रहा था. उसे पता नहीं था कि दिल्ली पुलिस उस का पीछा करती हुई आ रही है. शराब पीते हुए पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

3 अभियुक्त पुलिस गिरफ्त में आ चुके थे. उन की निशानदेही पर पुलिस ने 28 जून को मुन्नी उर्फ मोनी को सुल्तानपुरी में उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. 28 जून, 2014 को चारों अभियुक्तों को तीसहजारी न्यायालय में महानगर दंडाधिकारी डा. जगमिंदर की कोर्ट में पेश किया, जहां से सूरज उर्फ साहिल, मोहित शर्मा उर्फ सन्नी और मुन्नी उर्फ मोनी को 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर दे कर पूजा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने तीनों अभियुक्तों से कई महत्त्वपूर्ण सुबूत एकत्र किए. घटना से संबंधित कई जगहों की तसदीक भी उन से कराई. विस्तार से पूछताछ के बाद 2 जुलाई को उन्हें पुन: न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया. मामले की तफ्तीश अतिरिक्त थानाप्रभारी विक्रम सिंह राठी कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

फेसबुकिया प्यार बना जी का जंजाल – भाग 3

आखिर विनीत को मुखबिर की सूचना पर लोनी गोल चक्कर से गिरफ्तार कर लिया गया.

आइए, पहले जान लेते हैं कि विनीत पंवार कौन है और उस ने माही की हत्या क्यों की.

विनीत और माही की फेसबुक से हुई थी जानपहचान

उत्तर प्रदेश के जिला बागपत का एक छोटा सा गांव है कागदीपुर. इसी गांव का निवासी था विनय पंवार. उस के 2 बेटे विनीत और मोहित थे तथा एक बेटी थी पारुल. विनय पंवार मेहनतमजदूरी कर के बच्चों का पेट पालता था. उस की पत्नी का देहांत हो गया था. विनय पंवार ने जैसेतैसे बच्चों की परवरिश की.

पारुल सयानी हुई तो उस ने उस की शादी विदिशा के साथ कर दी. विदिशा दिल्ली में काम करता था. बहन की शादी के बाद विनीत भी कामधंधे की तलाश में अपने जीजा के पास रहने आ गया. वह ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, इसलिए उसे अच्छी नौकरी तो नहीं मिली. हां, गुजरबसर करने लायक एक फैक्ट्री में काम जरूर मिल गया. वह बहन और जीजा के पास ही रहने लगा. वह बहन को अपने खाने का खर्चा देने लगा.

विनीत को अच्छा पहनने और फिल्में देखने का शौक था. धीरेधीरे उस ने कुछ रुपए जोड़ कर किस्तों पर मोबाइल फोन भी ले लिया था. वह दिन में फैक्ट्री में काम करता. शाम को नहाधो कर अच्छे कपड़े पहनता और मोबाइल हाथ में ले कर घूमने निकल जाता.

उसी मोबाइल पर फेसबुक द्वारा विनीत की रोहिना उर्फ माही नाम की एक लडक़ी से जानपहचान हो गई. यह जानपहचान धीरेधीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई. विनीत खाली समय में रोहिना उर्फ माही से प्रेम की बातें करता रहता.

दोनों के बीच यह प्यार इस कदर बढ़ा कि माही अपना घरद्वार छोड़ कर विनीत के साथ रहने को राजी हो गई. विनीत उसे लेने के लिए उत्तराखंड पहुंच गया. हरिद्वार के एक गांव मिर्जापुर में रहती थी रोहिना उर्फ माही. वह विनीत से मिलने हरिद्वार आ गई. दोनों पहली बार यूं आपस में गले मिले जैसे उन में बरसों की गहरी मित्रता हो.

माही अपना सामान बैग में भर कर लाई थी. विनीत उसे अपने साथ बागपत के गांव कागदीपुर ले गया. माही बगैर शादी किए उस के साथ लिवइन रिश्ता जोड़ कर रहने लगी. विनीत की इस हरकत पर उस के पिता विनय पंवार ने कोई विरोध नहीं किया.

उसे बेटे की शादी करनी ही थी. बेटा अपनी पसंद की कोई लडक़ी घर ले आया तो विनय पंवार को क्या एतराज होता. बस उसे यही अखरता था, माही के साथ विनीत बगैर शादी किए रह रहा था. लेकिन विनय पंवार खामोश रहा. माही उन के घर में रहती रही.

विनीत के जीवन में आया नया मोड़

लेकिन अभी विनीत की जिंदगी में और भी उतारचढ़ाव आने शेष थे. वह माही के साथ आराम से रह रहा था कि एक दिन उसे और उस के पिता विनय पंवार को पुलिस ने एक हत्या का दोषी मान कर गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया. यह सन 2017 की बात है. जुर्म साबित होने पर उसे सजा हो गई.

पिता विनय पंवार और भाई विनीत जेल चला गया तो माही को पारुल अपने पास दिल्ली ले गई. माही के कदम अच्छे नहीं थे. एक दिन पारुल के पति विदिशा की अचानक मौत हो गई. पारुल खूब रोईधोई, फिर उस ने मन को धीरज दे कर अपनी जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया.

कहा जाता है औरत का एक सहारा टूटता है तो अनेक हाथ उसे सहारा देने के लिए आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन तब जब औरत जवान और सुंदर हो. पारुल जवान भी थी और खूबसूरत भी. उस की तरफ इरफान ने हाथ बढ़ाया तो पारुल ने तुरंत उस का हाथ थाम लिया. पारुल की जिंदगी मजे में कटने लगी. साथ ही वह माही का भी खर्च उठाने में सक्षम हो गई.

पारुल को माही भाभी मानती थी. माही यहां विनीत के भरोसे अपने मांबाप, बहनभाई छोड़ कर आई थी. विनीत जेल चला गया तो माही उदास हो गई. विनीत के बगैर उसे कुछ अच्छा नहीं लगता था. लेकिन वह कर ही क्या सकती थी. वह यह सोच कर संतोष कर रही थी कि विनीत जल्दी ही जेल से छूट कर घर आएगा, तब वह उस से शादी कर के उस की दुलहन बन जा जाएगी.

नवंबर, 2022 में हाईकोर्ट के आदेश पर विनीत पैरोल पर जेल से बाहर आया तो माही उसे सामने देख कर खुशी से नाच उठी. उस ने विनीत के आगे शादी की बात रखी, लेकिन विनीत उसे गले की हड्डी नहीं बनाना चाहता था.

उस ने बहन पारुल से बात की तो पारुल ने संजीदगी से कहा, “विनीत, माही वह लडक़ी नहीं है जिसे मैं भाभी बनाऊं, इसे दफा करो और किसी धनी बाप की बेटी को फांसो, ताकि लडक़ी के साथ मोटी रकम भी हाथ आए.”

“मेरी जिंदगी पर अपराधी का ठप्पा लग गया है बहन, मुझे कोई पैसे वाला अपनी लडक़ी क्यों देगा?”

“तो फिर माही को बेच डालो, मोटी रकम हाथ आएगी तो हमारे दिन संवर जाएंगे.”

“हां, यह ठीक रहेगा.” विनीत ने खुश हो कर कहा.

उसी दिन से वह और पारुल रोहिना उर्फ माही को बेचने की जुगत में लग गए. काफी भागदौड़ करने पर भी माही के लिए मोटी कीमत देने वाला नहीं मिला. इधर माही रोज विनीत पर शादी करने का दबाव बना रही थी. आखिर इस से तंग आ कर विनीत ने माही से पीछा छुड़ाने के लिए उस का गला दबा कर उस की जान ले ली.

माही मर गई तो विनीत डर गया. उस ने माही की लाश दीवान में छिपा कर रखी. फिर पारुल को माही की हत्या कर देने की बात बता दी. पारुल ने माही की लाश ठिकाने लगाने के लिए अपने प्रेमी इरफान की मदद मांगी तो वह तुरंत रात को बाइक ले कर आ गया. उस वक्त पारुल का छोटा भाई मोहित भी घर पर था.

पारुल ने इरफान की बाइक पर रोहिना उर्फ माही की लाश लादने में विनीत और इरफान की मदद की. इरफान और विनीत माही की लाश रात के अंधेरे में करावल नगर के महालक्ष्मी विहार में डाल आए.

क्राइम ब्रांच और करावल नगर थाने की पुलिस टीम के संयुक्त प्रयास से इरफान, विनीत, पारुल और मोहित की गिरफ्तारी संभव हो सकी. विनीत ने भी अपना अपराध कबूल कर लिया था. पुलिस ने उन चारों अभियुक्तों को सक्षम न्यायालय में पेश कर के कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित सत्य कथा का नाट्य रूपांतरण है.

प्यार का जूनून – भाग 3

उदयभान ने सुमन का मोबाइल ठीक कर के अपना नंबर डायल कर के चैक किया. ऐसा उस ने इसलिए किया था, जिस से उसे सुमन का नंबर मिल जाए. इस के बाद उदयभान ने सुमन का मोबाइल उस के हाथ पर रखा तो सुमन ने पूछा, ‘‘कितने रुपए हुए?’’

उदयभान ने सुमन के चेहरे पर नजरें जमा कर मुसकराते हुए कहा, ‘‘बुरा न मानो तो एक बात कहूं सुमन?’’

‘‘अच्छी बात कहोगे तो बुरा क्यों मानूंगी?’’ सुमन ने कहा.

‘‘तुम पैसे देने के बजाय मैं जब भी तुम्हें फोन करूं, मुझ से बात कर लेना.’’ उदयभान ने आग्रह सा किया.

सुमन को भी उदयभान अच्छा लगता था, इसलिए उस ने कहा, ‘‘ठीक है, लेकिन कोई ऐसीवैसी बात मत करना.’’

सुमन की इस बात से उदयभान को मानो मुहमांगी मुराद मिल गई. शाम को दुकान बंद कर के वह घर के लिए चला तो उसे सुमन की याद आ गई. उस ने तुरंत फोन मिला दिया. 2-4 बार घंटी बजने के बाद उस के कानों में सुमन की चहकती आवाज पड़ी तो वह समझ गया कि उस के फोन करने से सुमन खुश है.

इस तरह सुमन और उदयभान के बीच फोन पर बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो दिनोंदिन बढ़ता ही गया. कुछ दिनों बाद फोन पर समय तय कर के दोनों मिलने भी लगे. इस के बावजूद भी दोनों के बीच फोन पर घंटों बातें होती रहती थीं. धीरेधीरे स्थिति यह हो गई कि वे एकांत में मिलने के लिए बेचैन रहने लगे. आखिर इस के लिए उन्होंने मौका निकाल ही लिया.

2 साल पहले की बात है. राममूर्ति का पूरा परिवार किसी रिश्तेदार के यहां दावत में गया था. सुमन पेट दर्द का बहाना कर के घर पर ही रुक गई थी. उस की वजह से चाची को भी रुकना पड़ा था. रात का खाना खा कर सुमन की चाची सो गई तो उस ने फोन कर के उदयभान को घर पर ही बुला लिया. उस के बाद तो पूरी रात उन की अपनी थी. रात 3 बजे तक उदयभान सुमन के साथ रहा. उस रात दोनों को एकदूसरे से जो सुख मिला, उस के लिए दोनों  लालायित ही नहीं रहने लगे, बल्कि इस के लिए हमेशा मौके की तलाश में रहने लगे.

गांवों में इस के लिए वैसे भी मौकों की कमी कहां है. मोबाइल फोन अब इस में और मददगार साबित होने लगा है. सुमन का जब भी मन होता, किसी बहाने से घर से निकलती और फोन कर के कहीं एकांत में उदयभान को बुला लेती. पैसे की कमी न उदयभान के पास थी, न सुमन के पास. इसलिए दोनों एकदूसरे को महंगे महंगे गिफ्ट भी देते थे.

दोनों का प्रेमसंबंध बने अभी 4-5 महीने ही बीते थे कि राममूर्ति का भांजा शहर से उन के यहां घूमने आया. वह ममेरी बहन सुमन का मोबाइल ले कर देखने लगा तो उस में एक ही नंबर पर इनकमिंग और आउटगोइंग कालें थीं. उस ने उस नंबर का काल ड्यूरेशन चैक किया तो पता चला कि उस पर तो खूब लंबीलंबी बातें हुई थीं. हैरानी से उस ने इस बारे में सुमन से पूछा तो वह टाल गई. भांजे को संदेह हुआ तो उस ने इस बारे में अपने मामा राममूर्ति को बताया.

राममूर्ति की समझ में तुरंत सारा मामला आ गया. उस ने सुमन की पिटाई की तो उस ने बता दिया कि वह उदयभान से मोहब्बत करती है.

इज्जत का मामला था, इसलिए राममूर्ति ने होहल्ला करना उचित नहीं समझा. उस ने उदयभान, उस के बड़े भाई पप्पू और पिता छोटेलाल को खेतों पर इसलिए बुलाया, जिस से गांव वालों को पता न चल सके कि क्या हुआ था. खेतों में उस ने उदयभान के साथ मारपीट कर के धमकी दी कि अब अगर उस ने सुमन से मिलने या बात करने की कोशिश की तो वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा.

इस के बाद छोटेलाल ने भी उदयभान को लताड़ते हुए कहा, ‘‘सुमन राममूर्ति की ही नहीं, पूरे गांव की बेटी है. इसलिए तू उसे एकदम से भूल जा, वरना मैं ही तुझे काट कर रख दूंगा.’’

छोटेलाल ने अपने बेटे की इस गलती के लिए राममूर्ति से माफी मांगते हुए कहा कि अब उस का बेटा सुमन की ओर आंख उठा कर भी नहीं देखेगा.

इस के बाद राममूर्ति ने दौड़धूप कर गांव विप्रावली के रहने वाले मुन्नालाल के बेटे पवन के साथ सुमन की शादी कर दी. सुमन जवान थी ही, इसलिए राममूर्ति ने उस के लिए पहले से ही लड़का देख रहा था. यही वजह थी कि बेटी के चालचलन का पता चलते ही उस ने आननफानन में उस की शादी कर दी थी.

सुमन ने पवन से शादी तो कर ली थी, लेकिन उस ने उदयभान से भी कह दिया था कि वह उस का पहला प्यार है, इसलिए उसे न तो यह शादी अलग कर सकती है और न ही उस के पिता. वह उसे पूरी जिंदगी प्यार करती रहेगी.

यही वजह थी कि सुमन मायके आने पर तो उदयभान से मिलती ही थी. मौका निकाल कर उसे अपनी ससुराल भी बुला लेती थी. पवन किसी कंपनी में सेल्समैन था. वह महीने में 5-7 दिनों के लिए घर से बाहर रहता था. लौटता था तो कई दिनों तक औफिस के कामों में व्यस्त रहता था. इसलिए वह सुमन पर ध्यान कम ही दे पाता था.

पति की इस व्यस्तता का फायदा उठाने के लिए सुमन ने एक योजना बनाई. पहले तो वह पति को ले कर सासससुर से अलग हो गई. उस ने कमरा भी वह लिया, जिस का एक दरवाजा घर के पीछे से गांव के बाहर जाने वाली पगडंडी पर खुलता था. लेकिन उसे दिक्कत तब होने लगी, जब पवन के बाहर जाने पर सास उस के साथ सोने लगी.

इस के लिए उदयभान ने एक रास्ता निकाल लिया. उस ने नींद की गोलियां ला कर सुमन को दे दीं. फिर क्या था, पवन जैसे ही बाहर जाता, सुमन खाने में सास को नींद की दवा खिला देती. सास आराम से सोती और वह प्रेमी के साथ रंगरलियां मनाती. लेकिन जैसा कि कहा गया है कि कोई भी नीतिअनीति एक न एक दिन खुल ही जाती है. ऐसा ही सुमन और उदयभान के साथ भी हुआ.

एक दिन रात को मुन्नालाल को पत्नी से किसी सामान के बारे में पूछना हुआ तो उस ने दरवाजा खटखटाया. पवन उस दिन बाहर था. दरवाजा खुलने में देर लगी तो वह पिछवाड़े की ओर चला गया. घर के पीछे कुछ दूरी पर  उसे एक मोटरसाइकिल खड़ी दिखाई दी. उसे शक हुआ तो उस ने मोटर साइकिल का नंबर देखा और छिप कर इंतजार करने लगा कि यह मोटरसाइकिल किस की है और यहां क्यों खड़ी है?

थोड़ी देर में सुमन के कमरे का पीछे वाला दरवाजा खुला और उस में से एक लड़का निकला. उस ने मोटरसाइकिल स्टार्ट की और चला गया.

उस समय मुन्नालाल इसलिए चुप रहा, क्योंकि अगर शोर करता तो गांव में उसी की बदनामी होती. उस समय वह भले ही चुप रहा, लेकिन अगले दिन वह राममूर्ति से मिला. सारी बात बता कर उसे चेतावनी दी कि वह अपनी बेटी को समझाए अन्यथा वह उसे नहीं रखेगा.

राममूर्ति ने जब सुना कि उदयभान सुमन से मिलने विप्रावली जाता है तो उस का खून खौल उठा. बेटी के वैवाहिक जीवन का सवाल था, इसलिए उस ने उसी समय भाइयों को बुलाया और उदयभान को खत्म करने की योजना बना डाली.

जिस्म के आईने में देखी तिजोरी – भाग 2

दिल्ली के कर्मपुरा इलाके की रहने वाली एक महिला का नाम सामने आया तो पुलिस उस महिला के घर पहुंची. लेकिन वह परिवार सहित घर से फरार मिली. पुलिस को उस के फरार होने पर शक हो गया. उस के घर पर निगरानी के लिए 2 कांस्टेबलों को लगा दिया गया.

पुलिस ने फिर से मृतक के मोबाइल फोन और लैपटाप को खंगाला. उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर उस का अध्ययन किया तो पता चला कि घटना वाले दिन दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक काल आई थी. जिस नंबर से उस के मोबाइल पर काल आई थी, उस का पुलिस ने पता लगा लिया. उसे थाने बुला लिया.

उस युवक से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह तरुण बजाज नाम के किसी शख्स को नहीं जानता. उस ने कहा, ‘‘25 जून को दोपहर के समय जो आप फोन करने की बात कर रहे हैं, वह मैं ने नहीं, बल्कि एक महिला ने किया था.’’

‘‘महिला ने, कौन सी महिला ने फोन किया था?’’ एसीपी एस.के. गिरि ने पूछा.

‘‘सर, मैं राजेंद्राप्लेस मैट्रो स्टेशन से नीचे उतरा ही था कि नीचे सउ़क पर खड़े एक बैटरी रिक्शा में 2 महिलाएं बैठी दिखीं. उन में से एक ने मुझ से कहा कि उस का फोन घर पर रह गया है. किसी को काल करने के लिए उस ने मुझ से फोन मांगा. मैं ने उसे अपना फोन दे दिया तो उसी ने किसी को मेरे मोबाइल से फोन किया था.’’ उस युवक ने बताया.

‘‘क्या तुम उन महिलाओं को पहचानते हो?’’ एसीपी एस.के. गिरि ने पूछा.

‘‘नहीं सर, मैं ने उन्हें पहली बार देखा था. मगर सामने आ गईं तो जरूर पहचान लूंगा.’’ उस ने बताया.

पहले भी जांच में कर्मपुरा की एक महिला का नाम सामने आया था और जांच की दूसरी कड़ी में भी फोन करने वाली 2 महिलाएं सामने आईं. इस से पुलिस को लगा कि बजाज के मर्डर में महिलाओं के शामिल होने की संभावना हो सकती है. यानी घटना के पीछे लव और सैक्स की तसवीर साफ नजर आ रही थी. इन दोनों जांचों में पुलिस को सफलता मिलने की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन जांच ऐसी जगह आ कर ठहर गई कि फिलहाल वहां से आगे बढ़ती नहीं दिख रही थी.

न्यू राजेंद्रनगर में जिस ब्लौक में दिल दहला देने वाली इस घटना को अंजाम दिया गया, वहां पर कुछ लोगों ने फ्लैट के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं. तरुण बजाज के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग से पता चला कि 25 जून, 2014 की दोपहर को 2 लड़के एक बाइक से तरुण बजाज के फ्लैट तक गए थे. जो युवक बाइक के पीछे बैठा था, उस ने एक बैग भी थाम रखा था.

बाद में वही लड़के दोपहर करीब 2 बजे फ्लैट की साइड से वापस जाते हुए दिखे, लेकिन वापस जाते समय उन की पहनी हुई कमीजें बदली हुई थीं. यानी वे कपड़े चेंज कर के आए थे.

वारदात में 2 महिलाओं के अलावा 2 युवकों के शामिल होने का शक पुलिस को हो गया, लेकिन ये सब कौन थे, पता लगाना आसान नहीं था.

उधर मृतक के घर वाले और रिश्तेदार हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस पर दबाव डाल रहे थे. एसीपी एस.के. गिरि को टीम में जुटे पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली और क्षमता पर विश्वास था, इसलिए उन्होंने पीडि़त पक्ष को भरोसा दिया कि 2 दिनों के अंदर केस को खोल दिया जाएगा. एसीपी के आश्वासन के बाद घर वाले भी पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे थे.

एसीपी ने जांच में जुटे सभी पुलिसकर्मियों को अलगअलग जिम्मेदारियां सौंप रखी थीं. सभी टीमें जांच में रातदिन एक किए हुए थीं. जांच जिस पड़ाव पर आ कर ठहर गई थी, वहां से आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही थी. तब पुलिस ने तरुण बजाज के फोन की काल डिटेल्स का अध्ययन किया. हालफिलहाल में जिन लोगों से तरुण बजाज की बातें हुई थीं, पुलिस ने उन सभी से पूछताछ करनी शुरू कर दी.

जिन लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही थी, उन्हें सीसीटीवी से बरामद उन 2 लड़कों की फुटेज भी दिखा रही थी, जो 25 जून की दोपहर को बाइक से बजाज के फ्लैट की ओर आए थे.  फुटेज साफ नहीं थी, इसलिए उस में चेहरे साफ नहीं दिखाई दे रहे थे.

पूछताछ के इसी क्रम में एक शख्स ने सीसीटीवी की वह फुटेज पहचान ली. बाइक पर पीछे बैठे युवक को उस ने पहचानते हुए कहा, ‘‘यह तो साहिल है.’’

‘‘क्या तुम इसे जानते हो?’’ एसीपी एस.के. गिरि ने पूछा.

‘‘जी सर, मैं इसे अच्छी तरह जानता हूं. यह साहिल ही है जो कर्मपुरा में रहता है. मैं ने तो इस का घर भी देखा है.’’ उस युवक ने कहा तो उन्हें केस खुलने की उम्मीद दिखाई दी.

एक पुलिस टीम को तुरंत उस युवक के साथ साहिल के घर कर्मपुरा भेजा गया. वहां पता चला कि साहिल अपनी पत्नी पूजा के साथ आज ही 26 जून को हरिद्वार चला गया है.

बजाज की हत्या के बाद साहिल के घर पुलिस एक बार पहले भी गई थी. लेकिन उस समय उस की पत्नी पूजा की तलाश में गई थी. अब साहिल का नाम सामने आने पर पुलिस को विश्वास हो गया कि पति और पत्नी दोनों ही इस मामले में शामिल रहे होंगे, तभी तो दोनों फरार हैं. वहां से पुलिस को साहिल का मोबाइल नंबर मिल गया.

साहिल के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवा कर थानाप्रभारी मनीष जोशी, एसआई गौतम मलिक, एएसआई राजन सिंह दोनों की तलाश में हरिद्वार रवाना हो गए.

यह 26-27 जून, 2014 की रात की बात थी. वे सुबह तड़के हरिद्वार के नजदीक पहुंचे थे कि सर्विलांस टीम ने दिल्ली से खबर दी कि साहिल के फोन की लोकेशन से लग रहा है कि वह हरिद्वार से देहरादून की ओर जा रहा है. दिल्ली पुलिस की टीम ने भी हरिद्वार से देहरादून का रुख कर लिया.

सुबह तक पुलिस टीम देहरादून पहुंच गई. वह सर्विलांस टीम के संपर्क में थी. वहां से पुलिस को जानकारी मिली कि साहिल के फोन की लोकेशन देहरादून के पंडित मोहल्ले में जा कर स्थिर हो गई है. दिल्ली पुलिस टीम वहां के लोगों से पूछते हुए पंडित मोहल्ले में पहुंची. वहां की लोकल पुलिस के सहयोग से दिल्ली पुलिस ने उस मोहल्ले में घर घर सर्चिंग शुरू कर दी.

जिस युवक ने सीसीटीवी फुटेज में साहिल को पहचाना था, वह पुलिस के साथ था. तलाशी लेते हुए पुलिस एक घर में पहुंची तो वहां 2 युवक 1 महिला के साथ बैठ कर शराब पीते मिले. पुलिस को देखते ही युवक भागे, लेकिन दौड़ कर पुलिस ने उन्हें दबोच लिया.

उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम साहिल और मोहित बताए. पुलिस के साथ जो युवक था, उस ने भी साहिल को पहचान लिया. उस के साथ जो महिला शराब पी रही थी, वह उस की पत्नी पूजा थी.

साहिल के पास एक बैग था, जिस में डेढ़ लाख रुपए नकद, कुछ ज्वैलरी और एक चाकू मिला. पूछताछ में उन्होंने स्वीकार कर लिया कि तरुण बजाज की हत्या उन्होंने की थी.

फेसबुकिया प्यार बना जी का जंजाल – भाग 2

आखिरी कैमरे में पुलिस को जो दृश्य नजर आया, वह उन के लिए बड़ी सफलता ले कर आया था. दोनों युवकों में से एक युवक उन्हें बाइक लिए सडक़ पर खड़ा दिखाई दिया, दूसरा युवक गली में से आता नजर आया, आने वाले युवक के कंधे पर लडक़ी थी. वह निर्जीव यानी लाश लग रही थी.

“सर, यहीं कहीं से यह युवक युवती की लाश ले कर महालक्ष्मी विहार के लिए चले थे.” एसआई मनदीप जोश में भर कर बोले, “हमें यहां पर युवती की फोटो दिखा कर मालूमात कर लेनी चाहिए.”

“ठीक कहते हो.” एसएचओ नफे सिंह मुसकरा कर बोले.

आखिर पुलिस पहुंच ही गई ठिकाने

सभी के मोबाइल में उस मृत युवती का फोटो अपलोड था. उसे वहां के दुकानदारों, पटरी वालों और मजदूरी करने वाले लोगों को दिखाया गया तो एक पटरी वाले ने युवती को पहचान लिया. उस ने बताया, “साहब, यह युवती तो रोहिना है, यह छोटा बाजार में स्थित जाट धर्मशाला के पास पारुल के साथ रहती है.”

“क्या तुम हमें पारुल के घर तक पहुंचा सकते हो?” इंसपेक्टर राजेंद्र कुमार ने पटरी वाले से कहा.

“क्यों नहीं साहब,” वह व्यक्ति अपनी जगह पर खड़ा हो कर बोला, “आप किसी को मेरे सामान के पास खड़ा कर दीजिए.”

एसएचओ ने कांस्टेबल शुभम और निखिल को वहां खड़ा कर दिया. बाकी पुलिस टीम उस व्यक्ति के साथ पारुल के घर की ओर चल पड़ी. वह व्यक्ति उन्हें जाट धर्मशाला के पास एक मकान पर ले कर आया. मकान के दरवाजे पर ताला लटक रहा था.

“यहीं पारुल रहती है साहब, आप मकान मालिक से पूछ लीजिए.” उस व्यक्ति ने कहा.

पुलिस टीम को अपने मकान के दरवाजे पर देख कर ऊपर मौजूद मकान मालिक नीचे आ गया. वह काफी डरा हुआ दिखाई दे रहा था.

“क्या बात है साहब, आप मेरे मकान पर किसे तलाशने आए हैं?” मकान मालिक ने कांपती आवाज में पूछा.

“तुम्हारे कमरे में पारुल रहती है, हमें उस से मिलना है.” इंसपेक्टर राजेंद्र कुमार ने पूछा.

“वो तो कल शाम को मेरा कमरा खाली कर के कहीं दूसरी जगह चली गई है साहब.”

“ओह!” इंसपेक्टर ने गहरी सांस ली, फिर कुछ सोच कर उन्होंने मृत युवती का फोटो मकान मालिक को दिखाया, “इसे पहचानते हो?”

“जी हां, यह रोहिना उर्फ माही है. यह पारुल के साथ ही मेरे कमरे में कई सालों से रह रही थी. हां, मैं ने 2-4 दिन से इसे पारुल के साथ नहीं देखा तो पारुल से पूछा था, तब उस ने बताया था कि माही घूमने के लिए कहीं गई है.”

“पारुल तुम्हारा कमरा छोड़ कर अब कहां रहने गई है?”

“मुझे नहीं मालूम साहब, कल तांगे में अपना सामान लाद कर उस ने मुझे बाकी बचा किराया चुकाया और चली गई. कहां गई, मैं नहीं बता सकता.”

हत्यारे चढ़े पुलिस के हत्थे

पुलिस टीम वापस लौट आई. उन्हें पारुल के नए ठिकाने को तलाश करना था. पारुल ने सामान शिफ्ट करने में तांगा इस्तेमाल किया था. उस तांगे को ढूंढ कर पारुल के नए ठिकाने पर पहुंचा जा सकता था. तांगे का स्टैंड शाहदरा में फ्लाईओवर के नीचे था. वहां जा कर ही तांगा वाले का पता लगाया जा सकता था. यह काम एसआई मनदीप और हैडकांस्टेबल मनीष यादव को सौंपा गया. दोनों उसी वक्त शाहदरा में तांगा स्टैंड के लिए थाने से रवाना हो गए.

एसआई मनदीप ने हैडकांस्टेबल मनीष के साथ उस तांगे वाले को खोज निकाला. उस ने बताया कि वह एक महिला का सामान तेलीवाड़ा (शाहदरा) से अपने तांगे में लाद कर कांतिनगर ले गया था. उस ने एसआई मनदीप को कांतिनगर में पारुल के नए आशियाने पर पहुंचा दिया.

पारुल ने यहां कमरा किराए पर लिया था, इस वक्त वह और उस का भाई मोहित घर पर ही थे. एसआई मनदीप और हैडकांस्टेबल ने दोनों को हिरासत में ले लिया. उन दोनों को करावल नगर थाने में लाया गया. इन की गिरफ्तारी की सूचना डीसीपी डा. जौय टिर्की को दी गई तो वह करावल नगर थाने में आ गए. उन की मौजूदगी में पारुल से पूछताछ शुरू की गई.

एसएचओ नफे सिंह ने रोहिना उर्फ माही की तसवीर मोबाइल में पारुल को दिखाते हुए पूछा, “इसे तो पहचानती हो न पारुल?”

पारुल काफी डरी और सहमी हुई लग रही थी. वह थूक गटकती हुई बोली, “जी.. मैं इसे पहचानती हूं, यह माही है.”

“इस की हत्या किस ने की, क्यों की, इस बात का ठीकठीक जवाब दो. अगर चालाकी दिखाने की कोशिश करोगी तो तुम्हारे हक में अच्छा नहीं होगा.”

“साहब, मैं ने माही की हत्या नहीं की है. माही का गला मेरे भाई विनीत ने दबाया था, वह उसे मारना नहीं चाहता था, लेकिन माही की जिद के कारण विनीत को गुस्सा आ गया और उस ने माही का गला दबा दिया. उस ने डर के कारण माही का शव दीवान में छिपा कर रखा. जब अंधेरा फैलने लगा तो विनीत ने मेरे प्रेमी इरफान को घर बुला लिया.

“वह बाइक ले कर आया. मैं ने और विनीत ने माही की लाश को बाइक तक पहुंचाया. विनीत माही की लाश ले कर बैठा और इरफान ने बाइक संभाली. दोनों रात को माही की लाश करावल नगर क्षेत्र में डाल कर आ गए.”

“विनीत कहां छिपा हुआ है? अपने प्रेमी इरफान की भी जानकारी दो हमें.” डीसीपी जौय टिर्की ने सख्त लहजे में पूछा.

“साहब, मैं नहीं जानती विनीत कहां चला गया है. हां, इरफान के घर का पता मैं आप को बता देती हूं.” पारुल ने कहा और इरफान का पता बता दिया.

पुलिस टीम ने इरफान को उस के घर से दबोच लिया. उसे करावल नगर लाया गया तो वहां अपनी प्रेमिका पारुल उर्फ चिंकी को देख कर वह समझ गया कि माही की हत्या का राज पुलिस के सामने खुल गया है. फिर इरफान ने भी अपना गुनाह चुपचाप कुबूल कर लिया. अब असली कातिल विनीत की गिरफ्तारी शेष थी.

पुलिस ने विनीत पंवार की गिरफ्तारी के लिए जगहजगह दबिश दी, लेकिन वह बड़ी चालाकी से इधरउधर भाग रहा था. जब वह पुलिस टीम के हाथ नहीं आया तो डीसीपी जौय टिर्की ने क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज (2) के हाथ में विनीत की गिरफ्तारी की कमान सौंप दी. अपराध शाखा के एसीपी राजकुमार साहा की देखरेख में क्राइम ब्रांच की टीम ने विनीत की खोज शुरू कर दी. मुखबिर भी विनीत की टोह में लगा दिए गए.