Short love Story in Hindi: जानी जान का दुश्मन – क्या किया उमा के साथ

Short love Story in Hindi: राजवीर देखने में भले ही साधारण व्यक्ति था, लेकिन वह बातों का धनी था. अपनी लच्छेदार बातों से वह किसी का भी मन मोह लेता था. राजवीर मेवाराम की पत्नी उमा के खूबसूरत हुस्न का दीवाना था. उमा भी उस की जवांदिली पर लट्टू थी.

शाम का समय था. राजवीर घर आया तो उमा उस के लिए चाय बना लाई. चाय के साथ गरमागरम पकौड़े भी थे. पकौड़े राजवीर को बहुत पसंद हैं, यह बात उमा जानती थी. राजवीर चहक उठा, ‘‘भई वाह, ये हुई न बात.’’फिर एक पकौड़ा मुंह में रख कर स्वाद लेते हुए पूछ बैठा, ‘‘तुम मेरे दिल की बात कैसे जान गईं?’’
उमा मुसकराते हुए बोली, ‘‘जब हमारे दिल के साथसाथ शरीर भी एक हो चुके हैं तो दिल की बात एकदूसरे से कैसे छिपी रह सकती है.’’

‘‘वाकई तुम्हारी यह बात बिलकुल सही है. देखो, तुम्हारी चाय का रंग भी तुम्हारे रंग जैसा है. लगता है जैसे चाय में तुम ने अपने हुस्न का रंग मिला दिया हो. चाय का स्वाद भी तुम्हारे जैसा मीठा है. पकौड़े भी तुम्हारे जिस्म के अंगों की तरह गर्म और स्वादिष्ट है.’’अपने हुस्न की तारीफ का यह अंदाज उमा को अच्छा लगा. वह राजवीर से सट कर उस की आंखों में आंखें डाल कर बोली, ‘‘जो कुछ मेरे पास है, उस पर तुम्हारा ही तो अधिकार है.’’

राजवीर ने उस की दुखती रग को छेड़ते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे खूबसूरत जिस्म पर तो तुम्हारे पति मेवाराम का सर्वाधिकार है. लोग भी उस के ही अधिकार को स्वीकृति देंगे.’’‘‘वह तो सिर्फ नाम का पति है. बीवी की जगह शराब की बोतल को सीने से लगाए घूमता है, मुझे बिस्तर पर तड़पने के लिए छोड़ देता है. वैसे भी शराब ने उस के शरीर को इतना खोखला कर दिया है कि उस में शबाब के उफनते तटबंधों की गरमी शांत करने का माद्दा नहीं बचा.’’‘‘तुम्हारी हसीन चाहतों की कसौटी पर मैं खरा उतरा हूं कि नहीं?’’ कह कर राजवीर ने उमा के दिल की बात जाननी चाही.

मन के भंवर में डूबी उमा के कानों में राजवीर की बात पहुंची तो एकाएक उस के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई, वह बोली, ‘‘तुम ने मेरे हुस्न की बगिया को अपने प्रेम की बरसात से ऐसा सींचा है कि रोमरोम खिल कर महकने लगा है. तुम्हारे जोश की तो मैं कायल हूं. तुम्हारे साथ आनंदलोक की यात्रा करना सुखद अहसास होता है. मैं तो सोचसोच कर ही रोमांचित हो जाती हूं.’’ उमा बेबाकी से कहती चली गई.
‘‘तो फिर चलें आनंदलोक की यात्रा पर…’’ राजवीर ने उमा के गले में हाथ डाल कर उसे अपने बदन से सटाते हुए कहा. इस पर उमा ने मुसकरा कर मूक सहमति दे दी.

राजवीर उमा के कपोलों को चूमने के साथसाथ उस के होंठों का भी रसपान करने लगा. उमा ने शरमा कर अपना मुंह उस के सीने में छिपा लिया. साथ ही उस ने राजवीर के गले में बांहों का हार डाल दिया. फिर दोनों एकदूसरे में समा गए. आनंदलोक की यात्रा पूरी कर के दोनों एकदूसरे से अलग हुए. उन के शरीर पसीने से लथपथ थे, लेकिन चेहरों पर संतुष्टि के भाव थे.

जिला हरदोई के थाना कोतवाली हरपालपुर के अंतर्गत एक गांव है कूड़ा नगरिया. मेवाराम अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. परिवार में पत्नी उमा और 5 बेटियों के अलावा 2 बेटे अश्विनी और अंकुर थे. मेवाराम के पास खेती की जमीन थी, जिस की आय से उस के परिवार का गुजारा हो जाता था.

मेवाराम भागवत कथा करने का भी काम करता था. उस के काम में उस के बड़े भाई सेवाराम भी साथ देते थे. धार्मिक कार्यों में रमे रहने की वजह से मेवाराम पत्नी की शारीरिक जरूरतों पर ध्यान नहीं दे पाता था. वैसे भी वह 50 साल से ऊपर का हो गया था. थोड़ाबहुत दमखम था भी तो उसे धीरेधीरे शराब पी रही थी.
दूसरी ओर 7 बच्चे पैदा करने के बाद भी उमा के बदन की आग अभी तक सुलग रही थी. 45 साल की उम्र में उस ने खुद को टिपटौप बना रखा था. उस की खूबसूरती अभी तक कहर ढाती थी.

शरीर की आग ठंडी न हो तो इंसान में चिड़चिड़ापन आ जाता है, उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता. उमा के साथ भी ऐसा ही था. ऐसे में उस ने अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरा ठौर तलाशना शुरू कर दिया. उसे अपने सुख के साधन की तलाश थी. उस की तलाश खत्म हुई राजवीर पर.

वह भी कूड़ा नगरिया में ही रहता था. उस के पिता रामकुमार चौकीदारी का काम करते थे. 22 साल पहले राजवीर का विवाह कमला से हुआ था. उस से 3 बच्चे हुए. उस की शादी को अभी 6 साल ही बीते थे कि पति की रंगीनमिजाजी से परेशान हो कर कमला अपने 2 छोटे बच्चों को ले कर हमेशा के लिए मायके चली गई.

पत्नी के जाने के बाद राजवीर को शारीरिक सुख मिलना बंद हो गया. उमा की तरह वह भी शारीरिक सुख के लिए दूसरा ठौर ढूंढ रहा था. उस की नजर कई औरतों पर पड़ी, लेकिन उन में से उसे उमा ही मन भाई. उमा की कदकाठी और खूबसूरत देह राजवीर के दिलोदिमाग में उतर गई.

दूसरी ओर उमा भी राजवीर को पसंद करने लगी थी. जब दोनों सामने पड़ते तो एकदूसरे पर नजरें जम जातीं. आग दोनों तरफ लगी थी. दोनों को अपनी अंदरूनी तपिश का अहसास हो गया था.

एक दिन जब मेवाराम घर में नहीं था तो राजवीर उस के घर पहुंच गया. उस के आने का मकसद उमा से नजदीकियां बना कर उस का सान्निध्य पाना था. उमा को उस का आना अच्छा लगा. उस दिन दोनों काफी देर तक बातें करते रहे. न तो उन की बातें खत्म होने का नाम ले रही थीं और न ही उन का मन भर रहा था.
लेकिन जुदा तो होना ही था, दिल पर पत्थर रख कर राजवीर उमा से विदा ले कर घर आ गया. लेकिन दिल की चाहत फिर भी तनमन को बेचैन करती थी. यह ऐसी बेचैनी थी जो दोनों के दिलों को और करीब ला रही थी.

चिंगारी को जब तक हवा नहीं लगती, तब तक वह शोला नहीं बनती. उमा के मन में दबी चिंगारी को अब तक हवा नहीं लगी थी. लेकिन उस दिन राजवीर उस के पास आ कर दबी चिंगारी को एकाएक शोला बना गया था.

मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा तो दोनों एकदूसरे से काफी खुल गए. राजवीर हंसीमजाक करते वक्त जानबूझ कर उमा के शरीर के नाजुक अंगों को छू लेता तो उमा के चेहरे पर मादक मुसकराहट उतर आती. राजवीर का शरीर भी झनझना जाता, दिल बेकाबू होने लगता.

आखिर एक दिन मुलाकात रंग ले ही आई. राजवीर के मन की बात होंठों पर आ गई. उस ने उमा के हाथों को अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘तुम बहुत सुंदर हो, उमा.’’

‘‘सचऽऽ’’ उमा ने उस की आंखों में आंखें डाल कर पूछा.

‘‘हां, तुम बहुत सुंदर हो.’’

‘‘कितनी?’’ उमा ने फुसफुसाते हुए पूछा.

‘‘चांद से भी…’’ इस के आगे वह कुछ नहीं कह सका. वह उस के बदन की गरमी से पिघलने लगा था.
राजवीर की बात सुन कर उमा के चेहरे पर चमक आ गई. राजवीर को नशीली मदमस्त निगाहों से देखते हुए वह उस से सट गई और उस के कानों में फुसफुसा कर बोली, ‘‘शादी कर लो, तुम्हें मुझ से भी सुंदर पत्नी मिल जाएगी.’’

उस की बातों ने आग में घी का काम किया. वह बोला ‘‘लेकिन फिर तुम तो नहीं मिलोगी.’’
‘‘अगर मैं मिल जाती तो तुम क्या करते..?’’ उमा ने शरारत में कहा और बदन को मोड़ कर नशीली अदा से अंगड़ाई ली. उसी वक्त राजवीर के हाथ उस के वक्षस्थल से टकरा गए.

उमा की कातिल अदा उसे पागल कर गई. वह बोला, ‘‘मैं तुम्हें जी भर कर प्यार करता.’’

‘‘कितना?’’ उमा ने उसे उकसाया तो राजवीर ने साहस जुटा कर उमा को अपनी बांहों में ले कर जोर से दबाते हुए कहा, ‘‘इतना.’’उमा ने राजवीर के अंदर दबी चिंगारी को हवा दे दी, ‘‘बस, इतना ही.’’

‘‘नहीं, इस से भी ज्यादा…और इतना ज्यादा.’’ कहने के साथ ही राजवीर ने उसे बांहों में लिए लिए पलंग पर लिटा दिया.

अपनी अतृप्त प्यास बुझाने की चाह में उमा ने उस का रत्ती भर विरोध नहीं किया. इस की जगह वह उसे और उकसाती रही. लोहार की धौंकनी की तरह चलती दोनों की तेज सांसें और उन के मिलन की सरगम ने कमरे में तूफान सा ला दिया. राजवीर के सामीप्य से उमा को एक अलौकिक सुख का आनंद मिला.

उमा को अपने पति मेवाराम का सामीप्य बिलकुल नहीं भाता था, लेकिन राजवीर को वह दिल से चाहने लगी. वह राजवीर के बारे में सोचने लगी कि क्यों न हमेशा के लिए उसी की हो कर रह जाए.
उस की यह सोच गलत नहीं थी, क्योंकि उस के भीतर मचलते जिस तूफान को उस का पति एक बार भी शांत नहीं कर पाया था, राजवीर ने उस तूफान को पहली मुलाकात में ही शांत कर दिया था.

फिर एकाएक उमा उसे बेतहाशा प्यार करने लगी. उस की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बह निकली. उसे रोते देख राजवीर घबरा गया. वह बोला, ‘‘यह तुम्हें क्या हो गया उमा? तुम पागल तो नहीं हो गईं?’’

‘‘नहीं राजवीर, आज मैं बहुत खुश हूं. तुम ने आज जो सुख, जो खुशी मुझे दी है, उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती. आज तक इतना सुख, इतनी खुशी मुझे मेरे पति से नहीं मिली.

‘‘सुहागरात से मैं जिस सुख की कल्पना करती आ रही थी, आज तुम से मिल गया. उस रात जब वह कमरे में आए और मैं ने घूंघट की आड़ से देखा तो मंत्रमुग्ध सी देखती रह गई. भरेपूरे शरीर और उन की गहरी नशीली आंखों में मैं डूबती चली गई. मैं उन को और वह मुझे देर तक एकदूसरे को देखते रहे, फिर एकाएक उन के स्पर्श ने मेरी तंद्रा भंग कर दी.’’

थोड़ा रुक कर वह बोली, ‘‘वह आए और मेरी बांहों को पकड़ कर बैठ गए. फिर धीरे से घूंघट उठा दिया. कुछ देर वह सम्मोहित से मुझे देखते रहे. उन के होंठ मेरी ओर बढ़े और उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में समेट लिया, फिर मेरे होंठों पर अपने तपते होंठ रख दिए. उन का स्पर्श पा कर मैं सिहर उठी.‘‘मैं लाज से दोहरी होती गई. मगर मेरा दिल कह रहा था कि वह इसी तरह हरकत करते रहें. उन्होंने बेझिझक मुझे सहलाना शुरू कर दिया, मेरे ऊपर जैसे नशा छा गया. मेरी आंखें धीरेधीरे बंद होती जा रही थीं और बदन अंगारों की तरह दहकने लगा था. फिर मैं भी उन का सहयोग करने लगी.

‘‘बंद कमरे में फूलों की सेज पर जैसे तूफान आ गया था. लेकिन थोड़ी देर में वह तूफान तो शांत हो गया लेकिन मैं फिर भी जलती रही. उस वक्त वह मेरे बदन पर ही नहीं, मेरे दिल पर भी बोझ लग रहे थे. उस का एक ही कारण था कि उन्होंने जो आग मुझ में लगाई थी, उसे बुझाए बिना निढाल हो गए थे.

‘‘पहली रात ही क्या, किसी भी रात वह मुझे सुख नहीं दे पाए. मेरे दुख का कारण वे रातें थीं, जो मैं ने उन के बगल में तड़पते और जलते हुए गुजारी थीं. हमारी जिंदगी जैसेतैसे कट रही थी. देखने वालों को लगता कि मैं बहुत खुश हूं, मगर वास्तविकता ठीक इस के विपरीत थी. मैं ठीक वैसे ही जल रही थी, जैसे राख के नीचे दबी चिंगारी.’’

इतना कह कर उमा ने दुखी मन से अपना चेहरा झुका लिया. राजवीर ने देखा तो उस से रहा न गया, ‘‘दुखी क्यों होती हो उमा, अब तो मैं तुम्हारी जिंदगी में आ गया हूं. मैं तुम्हारी चाहतों को पूरी करूंगा.’’
इस के बाद दोनों के बीच कुछ देर और बातें होती रहीं. फिर राजवीर वहां से चला गया.

उस दिन के बाद से उमा खुश और खिलीखिली सी रहने लगी. दोनों की चाहतें, जरूरतें एकदूसरे से पूरी होने लगीं. किसी को भी इस सब की कानोंकान खबर तक नहीं लगी.अब जब दोनों का मन होता, एक हो जाते. दोनों का यह खेल बेरोकटोक चलने लगा. देखतेदेखते 5 साल गुजर गए. रात में खेतों की रखवाली के लिए उमा खेत में बनी झोपड़ी में रुक जाती थी. उस के खेतों के बराबर में ही पड़ोसी गांव प्रतिपालपुर के राजेश (परिवर्तित नाम) का खेत था.

जब वह खेत पर होती तो राजेश से बातें करती रहती. दोनों एकदूसरे के खेतों में जानवर घुसने पर भगा देते थे. खेतों के मामले में दोनों पड़ोसी थे. पड़ोसी ही पड़ोसी के काम आता है. यह सब राजवीर ने देखा तो वह उमा पर शक करने लगा कि वह अब उस के बजाए राजेश में रुचि ले रही है. जब वह अपने पति के होते हुए उस से संबंध बना सकती है तो राजेश के साथ संबंध बनाने में उसे क्या दिक्कत होगी.

उस ने कई बार उमा को राजेश से काफी नजदीक हो कर बातें करते देखा तो उस ने समझ लिया कि दोनों के बीच नाजायज संबंध बन गए हैं. राजवीर को यह बात नागवार गुजरी. उस की प्रेमिका उस के होते हुए किसी और से संबंध रखे, यह उसे मंजूर नहीं था.

8 जनवरी, 2020 की शाम 4 बजे उमा खेतों की रखवाली के लिए गई. अगले दिन सुबह उस की लाश खेत में पड़ी मिली. गांव वालों के बताने पर उमा के बच्चे खेतों पर पहुंचे. मेवाराम भागवत कथा के लिए कहीं गया हुआ था, किसी ने इस घटना की सूचना हरपालपुर थाना कोतवाली को दे दी थी.

सूचना पा कर इंसपेक्टर भगवान चंद्र वर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतका के शरीर पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं थे. लेकिन गले पर दबाए जाने के निशान थे.

निरीक्षण के बाद उन्होंने उमा के बच्चों व ग्रामीणों से पूछताछ की तो उन्होंने उस के प्रेमी राजवीर पर शंका जताई. इस के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और उमा की बेटी मुसकान को ले कर थाने आ गए.

इंसपेक्टर वर्मा ने मुसकान की तरफ से लिखित तहरीर ले कर राजवीर के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.राजवीर घर से फरार था. 13 जनवरी, 2020 की सुबह 5:20 बजे एक मुखबिर की सूचना पर इंसपेक्टर वर्मा ने राजवीर को गांव अर्जुनपुर के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने उमा की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया.

8 जनवरी को उमा खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की रखवाली के लिए गई थी. रात 8 बजे राजवीर उस के पास पहुंचा तो वह अकेली थी. राजेश से संबंध होने की बात कह कर वह उमा से भिड़ गया. वादविवाद होने पर दोनों में गालीगलौज होने लगी. इस पर राजवीर ने उमा को दबोच कर दोनों हाथों से उस का गला दबा दिया, जिस से उमा की मौत हो गई. उस के मरते ही राजवीर वहां से फरार हो गया.राजवीर की गिरफ्तारी के बाद इंसपेक्टर वर्मा ने आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी कर के उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. Short love Story in Hindi

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime : हत्यारे प्रेमी बने गुनाहगार : प्यार ने की हद पार

Love Crime :  अपर सत्र न्यायालय (चतुर्थ) देहरादून के में उस दिन काफी गहमागहमी का माहौल था. अनेक अधिवक्ता न्यायालय में तेजी से आ रहे थे तथा वे पेशकार से अपनेअपने मुकदमों की तारीखों की बाबत जानकारी ले कर वापस लौट रहे थे. वह दिन कुछ इसलिए भी खास था कि उस दिन देहरादून में हुई एक शिक्षक किशोर चौहान की हत्या के बहुचर्चित मामले में न्यायालय में फैसला सुनाया जाना था.

3 साल पहले हुई शिक्षक की हत्या के आरोप में पुलिस ने शिक्षक की पत्नी शिक्षिका स्नेहलता व उस के प्रेमी सिपाही अमित पारले पर आरोप लगाते हुए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी. इस हत्याकांड की विवेचना एक थानेदार सहित 2 पुलिस इंसपेक्टर कर चुके थे. पुलिस के आला अधिकारियों ने भी इस हत्याकांड की विवेचना में मानीटरिंग की थी.

पुलिस के आला अधिकारी यह चाहते थे कि शिक्षक किशोर चौहान की हत्या की विवेचना निष्पक्ष हो, हत्या के इस मामले में किसी निर्दोष को सजा न मिले. इस हत्याकांड की जांच एक इंसपेक्टर चंद्रभान अधिकारी ने भी की थी. श्री अधिकारी पूर्व में सीबीआई देहरादून में कुछ वर्ष कार्य कर चुके थे. तभी कोर्ट में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) जयकृष्ण जोशी भी आ गए थे. जोशी ने आ कर पहले कोर्ट की काररवाई की तैयारी की बाबत पेशकार से बात की. इस के बाद अदालत में किशोर चौहान की हत्या के मामले के आरोपियों स्नेहलता व सिपाही अमित पारले को भी जेल से लाया गया था. कटघरे में उन दोनों के चेहरों पर हवाइयां उड़ी हुई थीं.

कुछ समय बाद अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्तागण यशपाल सिंह पुंडीर व विवेक गुप्ता भी पहुंच गए थे. इस के बाद इन दोनों अधिवक्ताओं ने वहां मौजूद आरोपियों स्नेहलता व अमित पारले से उन के कानों में कुछ बातें की तथा उन्हें कुछ आश्वासन भी दिया. इस के बाद कोर्ट में थाना रायपुर की पुलिस तथा कुछ पत्रकार भी पहुंच गए थे. वे सभी कोर्ट की काररवाई शुरू होने का इंतजार करने लगे. उस समय 10 बज रहे थे. तभी न्यायालय में अपर सत्र न्यायिक मजिस्ट्रैट चंद्रमणि राय आ गए थे. उन के आने पर वहां मौजूद अधिवक्ताओं व पुलिस वालों ने उन्हें अभिवादन किया था.

इस के बाद वहां पर मजिस्ट्रैट ने कोर्ट की काररवाई शुरू करने के आदेश दिए. तभी कोर्ट में तैनात दोनों कोर्ट मोहर्रिर सावधान हो कर खड़े हो गए थे. इस दौरान पेशकार का संकेत पा कर अर्दली ने कोर्ट के गेट पर आवाज लगाई कि राज्य बनाम स्नेहलता व अमित हाजिर हो. किशोर चौहान की हत्या के मुकदमे में वादी किशोर चौहान के भाई आनंद चौहान तथा प्रतिवादियों स्नेहलता व अमित पारले के बयान पूर्व में ही दर्ज हो चुके थे तथा इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष के अधिवक्तागण पूर्व में बहस भी कर चुके थे.

सीआरपीसी की धारा 313 के तहत आरोपियों स्नेहलता व उस के प्रेमी सिपाही अमित पारले ने अपने बयानों में कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया था. अभियोजन पक्ष ने इस मुकदमे की जोरदार पैरवी करते हुए आरोपियों के खिलाफ 36 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए थे. देहरादून के थाना रायपुर में किशोर चौहान हत्याकांड का मुकदमा 17 जून, 2018 को आईपीसी की धाराओं 302, 201 व 120 के तहत दर्ज हुआ था.

इस मामले के वादी किशोर चौहान के भाई आनंद चौहान ने रायपुर पुलिस को सूचना दी थी कि गत 15 जून, 2018 की रात 8 बजे मेरा भाई किशोर चौहान अपनी पत्नी स्नेहलता के साथ अपनी वैगनआर कार द्वारा घूमने के लिए घर से निकला था. उस वक्त कार स्नेहलता चला रही थी. आराघर चौकी से 20 मीटर आगे किशोर चौहान ने कार को रुकवाया था और स्नेहलता को कोल्ड ड्रिंक लाने के लिए भेजा था. जब स्नेहलता कोल्ड ड्रिंक ले कर पैदल आई थी तो तब तक किशोर चौहान वहां से जा चुका था. इस के बाद स्नेहलता ने इस की सूचना अपने परिजनों को फोन कर के दी थी व किशोर को आसपास तलाश किया था.

रात 9 बज कर 10 मिनट पर स्नेहलता का फोन किशोर ने रिसीव किया और कहा कि तुम परेशान मत हो, मैं आ जाऊंगा. इस के बाद स्नेहलता ने यह सूचना अपनी जेठानी को देनी चाही तो जेठानी का मोबाइल बंद मिला. इस के बाद 16 जून, 2018 की सुबह को थाना रायपुर पुलिस ने किशोर के भाई आनंद को सूचना दी कि तुम्हारे भाई किशोर चौहान रिंग रोड किसान भवन के पास अपनी कार में मृत मिले हैं. इस सूचना पर किशोर के घर वाले मौके पर पहुंचे थे.

रायपुर पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर के शव पोस्टमार्टम के लिए दून अस्पताल भेज दिया था और आनंद चौहान की ओर से किशोर की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था. मुकदमा दर्ज होने के बाद इस प्रकरण की जांच थानेदार मनोज रावत को सौंप दी गई थी. किशोर की मौत का मामला बेहद पेचीदा था. अत: श्री रावत ने कोतवाल हेमेंद्र नेगी के निर्देश पर मृतक किशोर व उस की पत्नी स्नेहलता के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. अगले दिन दोनों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स उन्हें मिल गई.

शिक्षक किशोर चौहान की मौत के मामले को किशोर के भाई आनंद सहित उन के परिजन साजिश के तहत हत्या बता रहे थे तथा इस हत्या का आरोप वे स्नेहलता व उस के प्रेमी सिपाही अमित पारले पर लगा रहे थे. पुलिस भी इस मामले में सबूत एकत्र कर रही थी. सबूत एकत्र करने के बाद ही पुलिस ने इस मामले में स्नेहलता व अमित पारले के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजी थी. पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद स्नेहलता को शिक्षा विभाग ने भी निलंबित कर दिया था.

तभी अदालत में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) जयकृष्ण जोशी ने न्यायिक मजिस्ट्रैट महोदय से किशोर चौहान की हत्या के मामले में आरोपियों स्नेहलता व सिपाही अमित पारले को कठोर दंड देने का अनुरोध किया. जोशी ने कहा कि दोनों आरोपियों पर दोष सिद्ध हो चुका है तथा उन्होंने इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया है इसलिए वे दोनों कठोर दंड पाने के अधिकारी हैं. इस के बाद जैसे ही मजिस्ट्रैट महोदय ने किशोर हत्याकांड में फैसला सुनाना शुरू किया तो अदालत में सन्नाटा छा गया.

मजिस्ट्रैट ने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए सबूतों व गवाहों की गवाही से यह सिद्ध होता है कि शिक्षक किशोर चौहान की साजिश के तहत हत्या स्नेहलता व सिपाही अमित पारले द्वारा ही की गई थी. दोनों के द्वारा यह गंभीर प्रकृति का अपराध किया गया है. दोनों ही आरोपी पढ़ेलिखे हैं. वे अपराध की गंभीरता व परिणाम से पूर्णतया वाकिफ हैं. अत: दोषसिद्ध अभियुक्तगण स्नेहलता चौहान व अमित पारले प्रत्येक को धारा 302, 120बी भादंसं 1860 के आरोप में आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया जाता है. अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्तगण 4-4 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगेंगे.

दोषसिद्ध अभियुक्तगण स्नेहलता चौहान व अमित पारले को धारा 201 भादंसं 1860 के आरोप में 5 साल के कठोर कारावास एवं 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया जाता है. अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्तगण 3-3 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगेंगे. सभी सजाएं साथसाथ चलेंगीं. अभियुक्तगण के द्वारा जांच के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी. न्यायिक अभिरक्षा में न्यायालय में उपस्थित अभियुक्तगणों का वारंट बना कर उन्हें सजा भुगतने के लिए जिला कारागार देहरादून भेजा जाए.

अदालत के इस फैसले की एक एक प्रति अभियुक्तगणों को अविलंब नि:शुल्क दी जाए. यदि अपील होती है तो माननीय अपीलीय न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन हो. अदालत के इस फैसले को सुन कर स्नेहलता व अमित पारले की आंखों में आंसू छलक आए. ऐसा लग रहा था कि उन दोनों को अपने किए पर पछतावा हो रहा था. कुछ ऐसा भी था कि वे दोनों अभी तक विचाराधीन कैदी थे, मगर अदालत के इस फैसले के बाद वे सजायाफ्ता कैदी बन गए थे. 2 सितंबर, 2021 को सजा सुनने के बाद उन दोनों को देहरादून जेल ले जाया गया.

अपने प्रेमी सिपाही के साथ मिल कर अपने शिक्षक पति की हत्या करने वाली शिक्षिका स्नेहलता की कहानी इस प्रकार है. वर्ष 1999 में स्नेहलता की पहली मुलाकात अमित पारले निवासी कावली रोड देहरादून से हुई थी. उस वक्त अमित डीएवी कालेज से बीए कर रहा था, जबकि स्नेहलता डीबीएस पीजी कालेज से बीएससी कर रही थी. पढ़ाई के दौरान दोनों में काफी घनिष्ठता बढ़ गई थी. वर्ष 2000 में अमित भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) में भरती हो गया था, जबकि स्नेहलता आगे की पढ़ाई करती रही. कुछ समय बाद अमित पारले ने आईटीबीपी से इस्तीफा दे दिया था और उत्तराखंड पुलिस में भरती हो कर हरिद्वार आ गया.

पढ़ाई के बाद स्नेहलता की बतौर शिक्षक नौकरी लग गई थी तथा उस की शादी शिक्षक किशोर चौहान के साथ हो गई थी. उस वक्त स्नेहलता राजकीय इंटर कालेज शिवाली घाट ऊखीमठ रुद्रप्रयाग में तैनात थी तथा किशोर चौहान जीआईसी सजवाण कांडा देवप्रयाग में तैनात थे. इस के बाद स्नेहलता 2 बच्चों की मां बन गई थी. अमित पारले से स्नेहलता की अकसर बातें होती रहती थीं. वर्ष 2004 में अमित पारले की भी शादी हो गई थी तथा वर्तमान में वह 2 बेटियों व एक बेटे का बाप है.

इस के बाद स्नेहलता व अमित पारले का प्यार परवान चढ़ने लगा था. अकसर अमित पारले जब स्नेहलता से मिलने आता था तो वह किशोर चौहान से भी श्चमिलता था. जब किशोर चौहान को स्नेहलता व अमित पारले के प्रेम संबंधों की जानकारी हुई थी, तो उन्होंने इस का विरोध किया था. जब स्नेहलता किशोर चौहान के समझाने पर भी नहीं मानी तो परेशान हो कर किशोर चौहान डिप्रेशन में रहने लगे थे और शराब को ही उन्होंने अपना सहारा बना लिया था. 15 जून, 2018 को घटना वाले दिन स्नेहलता खुद कार चला कर अपने पति को रिंग रोड पर ले कर पहुंची थी. बाद में अगले दिन सुबह किशोर चौहान कार में मृत मिले थे.

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किशोर चौहान के भाई आनंद चौहान ने किशोर की मौत का मुकदमा थाना रायपुर में दर्ज कराया था और उन की मौत का शक उन की पत्नी स्नेहलता व उस के प्रेमी सिपाही अमित पारले पर जताया था. मामले की जांच थानेदार मनोज रावत तथा कोतवाल हेमेंद्र नेगी द्वारा की गई थी. इस दौरान पुलिस ने स्नेहलता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई थी. किशोर चौहान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना तथा शरीर पर लगी चोटें बताया गया था. इस के बाद किशोर चौहान की मौत के मामले में एसओजी टीम के प्रभारी पी.डी. भट्ट को लगाया गया था.

पी.डी. भट्ट ने जब स्नेहलता के फोन की काल डिटेल्स खंगाली तो उन्हें किशोर चौहान की मौत से 2 दिन पहले आई एक काल पर संदेह हुआ था. जब उन्होंने काल करने वाले की लोकेशन निकाली तो उन्हें जानकारी हुई कि यह काल हरिद्वार के कुशल कुमार ड्राइवर द्वारा की गई थी. इस के बाद जब पी.डी. भट्ट हरिद्वार जा कर कुशल कुमार ड्राइवर से मिले, तो उस ने भट्ट को यह जानकारी दी कि यह मोबाइल मेरे नाम से अवश्य है, मगर इस मोबाइल को सिपाही अमित पारले द्वारा चलाया जाता है.

इस के बाद भट्ट ने सिपाही अमित पारले को रोशनाबाद हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया था और उसे ले कर देहरादून एसओजी कार्यालय आ गए थे. यहां पर भट्ट व एसओजी सिपाही आशीष शर्मा ने किशोर चौहान की मौत के मामले में अमित पारले से पूछताछ की थी. पहले तो अमित पारले ने पूछताछ के दौरान श्री भट्ट को गच्चा देने का प्रयास किया था, मगर जब भट्ट ने अमित से तारीखों के अनुसार तथा उस की लोकेशन के अनुसार पूछताछ की तो वह टूट गया और उस ने पुलिस के सामने किशोर चौहान की मौत का सच उगल दिया.

अमित पारले ने पुलिस को बताया कि वह 8 जून, 2018 को देहरादून की त्यागी रोड स्थित एक होटल में स्नेहलता के साथ आ कर ठहरा था. होटल में हम दोनों ने किशोर चौहान की हत्या की साजिश रची थी. घटना वाले दिन यानी 15 जून, 2018 को वह अपने दोनों मोबाइल फोन हरिद्वार स्थित घर पर छोड़ कर गया था, जिस से उस की लोकेशन देहरादून की न मिल सके. घटना वाले दिन जब स्नेहलता रात को कोल्ड ड्रिंक लेने गई थी तो अपने पति को कार सहित उस के हवाले कर गई थी.

इस के बाद उस ने किशोर पर हमला कर के तथा उस का गला दबा कर उस की हत्या कर दी थी. किशोर का मोबाइल भी उस ने पास की झाडि़यों में फेंक दिया था. स्नेहलता व खुद के बचाव के लिए वह अपने फोन से स्नेहलता के फोन पर कम बात करता था तथा कुशल कुमार ड्राइवर के नाम से खरीदे गए सिम से ही बात करता था, जिस से पुलिस उस की लोकेशन न जान सके. अमित ने हरिद्वार के मोबाइल दुकान संचालक मनीष से कुशल कुमार ड्राइवर की आईडी पर सिम खरीदा था.

दुकान संचालक को अमित ने यह बताया था कि वह अपनी पत्नी के लिए सिम खरीद रहा है. उस सिम का प्रयोग उस ने स्नेहलता से बातचीत के लिए ही किया था. इस के बाद पुलिस ने अमित पारले के बयान दर्ज कर लिए थे तथा उसी दिन शाम को रायपुर पुलिस ने स्नेहलता को भी किशोर चौहान की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. स्नेहलता ने अपने बयानों में भी अमित पारले के बयानों का ही समर्थन किया था. 25 जून, 2018 को एसटीएफ की प्रभारी एसएसपी रिद्धिम अग्रवाल ने देहरादून में एक प्रैसवार्ता के दौरान स्नेहलता व अमित पारले को मीडिया के सामने पेश किया और किशोर चौहान हत्याकांड का खुलासा किया था.

रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि जब अमित पारले व स्नेहलता का प्यार परवान चढ़ रहा था तो स्नेहलता ने शिक्षा विभाग से 2 साल की छुट्टी बिना वेतन ले ली थी, जिस से वह अमित पारले के साथ रह सके. न्यायालय द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद से अमित पारले व स्नेहलता देहरादून जेल में बंद थे. इस के अलावा दोनों की ओर से न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर दी गई है. स्नेहलता को सजा सुनाए जाने के बाद अपर निदेशक, शिक्षा विभाग महाबीर सिंह बिष्ट ने 21 जनवरी, 2022 को शिक्षिका स्नेहलता को बर्खास्त करते हुए उस की सेवा समाप्त कर दी हैं. Love Crime

(कथा पुलिस सूत्रों व अदालत के फैसले पर आधारित)

True Crime Stories : अवैध रिश्तों का नतीजा – क्यों किया दगाबाज दोस्त का मर्डर

True Crime Stories : घटना 25 सितंबर, 2019 की है. शाम के करीब 4 बजे थे. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ क्षेत्र का रहने वाला मयंक  जब रात 10 बजे तक घर नहीं पहुंचा तो उस के पिता सुभाष खरे ने उसे खोजना शुरू कर दिया. मयंक शाम को कार ले कर घर से निकला था. मयंक खरे के छोटे भाई प्रियंक खरे ने जब मयंक के मोबाइल पर फोन लगाया तो उस का फोन स्विच्ड औफ था. मयंक अविवाहित और बेरोजगार था. कोई काम करने के बजाए वह अपने पिता की कार ले कर दिन भर इधरउधर घूमता रहता था, जिस से उस के पिता परेशान थे.

मयंक के पिता सुभाष खरे शिक्षा विभाग में क्लर्क थे. उस समय टीकमगढ़ में भारी बारिश हो रही थी. समस्या यह थी कि ऐसे मौसम में उसे खोजने जाएं भी तो कहां जाएं. पिता सुभाष ने यह सोच कर मयंक के खास दोस्त इशाक खान को फोन लगाया कि हो न हो उसे मयंक के बारे में कोई जानकारी हो. लेकिन उस के फोन की घंटी बजती रही, उस ने काल रिसीव नहीं की. इस से सुभाष खरे का माथा ठनका कि इशाक ने फोन क्यों नहीं उठाया.

रात भर परिवार के सभी लोग मयंक की चिंता करते रहे. अगले दिन पिता सुभाष ने टीकमगढ़ थाने में मयंक की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. टीआई अनिल मौर्य ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए यह जानकारी टीकमगढ़ के एसपी अनुराग सुजनिया को दे दी. साथ ही मयंक का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिया. मयंक का परिवार उस की खोज में लगा हुआ था. परिवार वालों की दूसरी चिंता यह थी कि मयंक के दोस्त इशाक खान ने उन का फोन क्यों रिसीव नहीं किया, उस की दुकान भी बंद थी. इशाक का भी कोई अतापता नहीं था. उस के घर वालों से जब उस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने भी अनभिज्ञता जताई.

दरअसल, इशाक और मयंक के बीच कुछ कहासुनी हुई थी. वजह यह थी कि मयंक और इशाक की पत्नी शबाना के बीच नजदीकी संबंध थे. इस बात की जानकारी उस के परिवार वालों को भी थी. इसलिए पूरा संदेह इशाक पर जा रहा था. इशाक के इस तरह लापता होने व मयंक के परिवार वालों का फोन नहीं उठाने से उन की चिंता बढ़ने लगी थी. मयंक के परिवार वालों ने इशाक और मयंक के बीच हुई कहासुनी की सारी जानकारी टीआई अनिल मौर्य को दी. टीआई मौर्य को घटना में अवैध संबंधों की बात पता लगी तो उन्हें मामला गंभीर नजर आया.

उन्होंने इस नई सूचना से एसपी अनुराग सुजनिया को अवगत करा दिया. एसपी ने इस केस को सुलझाने की जिम्मेदारी एडिशनल एसपी एम.एल.चौरसिया को सौंप दी. उन्होंने एसडीपीओ सुरेश सेजवार की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई, जिस में टीआई अनिल मौर्य, टीआई (जतारा) आनंद सिंह परिहार, टीआई (बमोरी कलां) एसआई बीरेंद्र सिंह पंवार आदि तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया.

इस पुलिस टीम ने तेजी से जांचपड़ताल शुरू कर दी. पुलिस जांच में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी यह मिली कि इस घटना में मयंक खरे के पड़ोसी इशाक के अलावा उस का एक रिश्तेदार इकबाल नूरखान भी शामिल है. पुलिस ने दोनों के घर दबिश दी, लेकिन दोनों ही घर से फरार मिले. 4-5 दिन कोशिश करने के बाद भी जब ये लोग नहीं मिले तो पुलिस ने पहली अक्तूबर को दोनों के खिलाफ मयंक खरे के अपहरण का मामला दर्ज कर लिया.

कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस मयंक खरे के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा सकी तो कायस्थ समाज ने विरोध प्रदर्शन कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की. यह प्रदर्शन पूरे जिले में व्यापक स्तर पर किया था, जिस की गूंज आईजी सतीश सक्सेना के कानों तक पहुंची. आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी अनुराग सुजनिया को निर्देश दिए कि केस का जल्द से जल्द परदाफाश किया जाए. उन्होंने अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर 25-25 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर दिया. उच्चाधिकारियों के दबाव में जांच टीम रातदिन काम करने लगी.

आखिर पता चल ही गया मयंक का

मयंक के लापता होने के एक हफ्ता के बाद पुलिस को पहली सफलता उस समय मिली, जब उस ने 4 अक्तूबर को मयंक के अपहरण के मामले में इशाक खान, इकबाल और इन का साथ देने वाले रहीम खान, मजीद खान, रहमान खान को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उन से मयंक के बारे में पूछताछ की तो आरोपियों ने स्वीकार कर लिया कि वे मयंक की हत्या कर चुके हैं और उस की लाश घसान नदी में फेंक दी थी.

हत्या की बात सुन कर पुलिस चौंकी. लाश बरामद करने के लिए पुलिस पांचों आरोपियों को ले कर उस जगह पहुंची, जहां उन्होंने मयंक खरे की लाश घसान नदी में फेंकी थी. पुलिस ने नदी में गोताखोरों से लाश तलाश कराई, लेकिन लाश वहां नहीं मिली. घटना की रात तेज बारिश की वजह से नदी में बाढ़ जैसी स्थिति थी. इस से लाश दूर बह जाने की आशंका थी. एक आशंका यह भी थी कि लाश बरामद न हो, इस के लिए आरोपी झूठ बोल रहे हों, इसलिए टीकमगढ़ के आसपास नदी तालाबों में लाश की तलाश तेज कर दी गई.

आरोपियों से पूछताछ के बाद मयंक खरे की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह नाजायज संबंधों की बुनियाद पर टिकी थी. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ शहर के चकरा तिराहा इलाके में एक आवासीय इलाका है शिवशक्ति नगर. सुभाष खरे अपने परिवार के साथ शिवशक्ति नगर में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे थे, जिन में मयंक बड़ा था. सुभाष खरे के घर के ठीक बगल में रहमान खान का घर था. इशाक रहमान का ही बेटा था. इशाक की शादी हो चुकी थी, उस की बीवी शबाना बहुत खूबसूरत थी.

मयंक और इशाक की उम्र में ज्यादा अंतर नहीं था. दोनों की बचपन से अच्छी दोस्ती थी. इशाक ड्राइवर था, जिस की वजह से वह अधिकांश समय घर से बाहर रहता था. छोटीमोटी आमदनी घर बैठे होती रहे, इस के लिए उस ने परचून की दुकान खोल ली थी, जिस पर उस की पत्नी शबाना बैठती थी. मयंक के घर में जरूरत का सामान शबाना की दुकान से ही आता था. मयंक खाली घूमता था, इसलिए शबाना की दुकान पर खड़े हो कर उस से बातें करता रहता था. शबाना खूबसूरत और चंचल स्वभाव की थी, इसलिए मयंक उसे चाहने लगा. शबाना को भी मयंक की बातों में रस आता था, इसलिए उस का झुकाव मयंक खरे की तरफ हो गया.

मयंक ने खुद डाला आग में हाथ

कुछ ही दिनों में मयंक शबाना का ऐसा दीवाना हो गया कि उसे दिनरात उस के अलावा कुछ सूझता ही नहीं था. इशाक से दोस्ती होने के कारण वह शबाना को भाभीजान कहता था. शबाना का दिल भी मयंक के लिए धड़कने लगा. आग दोनों तरफ लगी थी, इसलिए उन के बीच जल्द ही अवैध संबंध बन गए. इशाक जब कभी शहर से बाहर जाता तो मयंक और शबाना को वासना का खुला खेल खेलने का मौका मिल जाता था. जिस के चलते शबाना को मयंक अपने शौहर से ज्यादा अच्छा लगने लगा. लेकिन यह बात इशाक से ज्यादा दिनों तक छिपी न रह सकी.

धीरेधीरे इशाक को अपनी पत्नी और मयंक के बीच पक रही अवैध रिश्तों की खिचड़ी की महक महसूस हुई. फिर भी उस ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन जब पानी सिर के ऊपर जाने लगा तो वह दोनों पर कड़ी नजर रखने लगा. आखिर एक दिन उस ने शबाना को मयंक के साथ नैनमटक्का करते देख लिया. उस दिन उस ने शबाना की खासी पिटाई की. साथ ही उस ने मयंक से भी दूरी बनानी शुरू कर दी.

लेकिन एक बार पास आने के बाद दूर जाने की बात न तो मयंक को सुहाई और न शबाना इस के लिए राजी थी, इसलिए शौहर के विरोध के बावजूद शबाना ने मयंक के साथ रिश्ते खत्म नहीं किए. इस के चलते इशाक और मयंक के बीच एकदो बार विवाद भी हुआ. इशाक के मना करने के बावजूद शबाना और मयंक अपनी इश्कबाजी से बाज नहीं आ रहे थे. यही नहीं, इस बीच इशाक के घर में कुछ दिनों के लिए उस के रिश्तेदार की एक नाबालिग लड़की आई तो मयंक ने उस किशोरी से भी संबंध बना लिए. इस बात की खबर इशाक को लगी तो उस का खून खौल उठा. लिहाजा इशाक ने ऐसे दगाबाज दोस्त को ठिकाने लगाने की ठान ली.

इशाक की मयंक से अनबन हो चुकी थी, जबकि अपनी योजना को अंजाम देने के लिए इशाक की मयंक से नजदीकी जरूरी थी. उस स्थिति में योजना को आसानी से अंजाम दिया जा सकता था. मयंक से फिर से दोस्ती बढ़ाने के लिए इशाक ने अपने चचेरे भाई इकबाल का सहारा लिया. इकबाल के सहयोग से उस ने मयंक से बात की. मयंक वैसे तो काफी चालाक था. इशाक से वह सतर्क भी रहता था. लेकिन इशाक ने उसे समझाया कि देख भाई जो हुआ, सो हुआ अब आगे से ध्यान रखना कि ऐसा न हो. रही हमारी दोस्ती की बात तो वह पहले की तरह चलती रहेगी. क्योंकि हमारे झगड़े में दूसरों को हंसने का मौका मिल जाता है.

इशाक की बात सुन कर मयंक खुश हो गया. उसे लगा कि इस से वह अपनी भाभीजान शबाना से पुरानी नजदीकी पा लेगा. लिहाजा उस का फिर से इशाक के यहां आनाजाना शुरू हो गया. लेकिन उसे यह पता नहीं था कि इशाक के रूप में मौत उस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रही है. इशाक ने मयंक को ठिकाने लगाने के लिए अपने चचेरे भाई इकबाल, पत्नी शबाना और दोस्त पन्नालाल व कल्लू के साथ योजना बना ली.

शराब का घातक दौर

योजना के अनुसार 25 सितंबर, 2019 को इशाक ने फोन कर के मयंक को शराब की पार्टी के लिए बीलगाय कलां बुलाया. शाम के समय मयंक अपनी कार से 30 किलोमीटर दूर बीलगाय कलां पहुंच गया. वहां पर इशाक, इकबाल, कल्लू और पन्नालाल उस का इंतजार कर रहे थे. इशाक का एक घर बीलगाय कलां में भी था. सब उसी घर में बैठ कर सब शराब पीने लगे.

इशाक के दोस्त इकबाल ने मौका मिलते ही मयंक के शराब के गिलास में नींद की गोलियां डाल दीं. शराब पीने के बाद वे सभी मयंक की कार में बैठ गए. कार इशाक चला रहा था और मयंक उस के बराबर में बैठा था. एक जगह कार रोक कर इशाक ने अपने साथ लाई लाइसेंसी दोनाली बंदूक से मयंक पर गोली चलाई जो उस के कंधे में लगी. मयंक घबरा गया. डर की वजह से उस का नशा उतर चुका था. इशाक ने उस पर दूसरी गोली चलाई तो मयंक झुक गया, जिस से गोली कार का शीशा तोड़ कर निकल गई. इशाक केवल 2 गोलियां लोड कर के लाया था जो इस्तेमाल हो चुकी थीं.

मयंक को बचा देख इशाक ने इकबाल की मदद से मयंक का गला घोंट दिया. फिर वे लाश को ठिकाने लगाने के लिए निकल पड़े. कार ले कर वे वहां से 7-8 किलोमीटर दूर इटाली गांव पहुंचे, जहां कार खराब हो गई. इस से सभी परेशान हो गए, क्योंकि कार में लाश थी. वहां से 3-4 किलोमीटर दूर बाबई गांव था, जहां इकबाल के रिश्तेदार रहते थे, जो कार मैकेनिक थे. इकबाल ने फोन किया तो सईद, रईस और मजीद वहां पहुंच गए. उन्होंने कार ठीक कर दी तो वे लाश को नौगांवा ले गए और लाश चादर में लपेट कर घसान नदी में फेंक दी. इस के बाद इशाक बाबई गांव में अपने दूल्हाभाई रहमान के यहां गया. रात को  सभी वहां रुके और अगले दिन अपने घर आ गए.

हत्यारोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने रईस, शबाना, पन्नालाल को भी गिरफ्तार कर लिया. एक आरोपी कल्लू फरार था. पुलिस ने उस की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया. अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने लाइसेंसी बंदूक, मयंक की कार, चप्पल, खून सना कार सीट कवर बरामद कर लिया. सीट कवर के खून को पुलिस ने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया. साथ ही मयंक के पिता का खून का सैंपल भी ले लिया ताकि डीएनए जांच से यह पता चल सके कि कार के सीट कवर पर लगा खून मयंक का था.

Crime Story : खून से सनी नशे की लकीर

Crime Story : मनमोहन गली नंबर-24, बस्ती टोकावली, फिरोजपुर निवासी सुभाष ठाकुर का पुत्र था. मनमोहन की शादी 4 साल पहले बी1-5/6, गली नंबर-3, जनता कालोनी, जालंधर में रहने वाले चानन सिंह राजपूत की बेटी पूजा के साथ हुई थी. दोनों राजपूत परिवारों से थे, दोनों के बीच आपसी प्रेमप्यार था.

पूजा के पिता चानन सिंह आर्मी में थे. उन की 2 ही संतानें थीं, बेटा विनोद और बेटी पूजा. दोनों ही शादीशुदा थे और अपनेअपने परिवारों के साथ खुश थे. पूजा की शादी चानन सिंह ने 4 साल पहले मनमोहन के साथ की थी. पूजा बीए पास और अच्छे संस्कारों वाली समझदार लड़की थी. ससुराल आ कर उस ने पति ही नहीं, बल्कि सब का मन मोह लिया था. मनमोहन ने एमबीए कर रखा था. कोई अच्छी सरकारी नौकरी न मिलने के कारण वह हिंदुस्तान हाइड्रोलिक कंपनी में नौकरी कर रहा था.

मनमोहन की मां के निधन के बाद वह और उस के पिता जब काम पर चले जाते थे, तो पूजा दिन भर घर में अकेली रहती थी. घर का मुख्यद्वार पूरे दिन बंद रहता था, क्योंकि उन के यहां किसी का आनाजाना नहीं था. शाम को मनमोहन या उस के पिता के घर लौटने पर ही मुख्यद्वार खोला जाता था. लेकिन उस दिन मनमोहन घर लौटा तो ऐसा नहीं हुआ. मनमोहन के 2-3 बार डोरबैल बजाने के बाद भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उस ने दरवाजा थपथपाया तो दरवाजा हाथ रखते ही खुल गया.

यह देख कर मनमोहन को और अधिक आश्चर्य हुआ. असमंजस की स्थिति में  अपनी पत्नी पूजा को आवाज देते हुए उस ने घर के भीतर जा कर देखा तो कमरे का दृश्य देख उस के होश उड़ गए. भीतर पूरा सामान बिखरा पड़ा था. देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कमरे में 2 लोगों का आपस में जबरदस्त संघर्ष हुआ हो.b घर के सभी कमरे खुले हुए थे और उन का सामान बिखरा पड़ा था. घर में ऐसा क्या हुआ, यह जानने के लिए वह पूजा को लगातार आवाज देता रहा, पर पूजा कहीं नहीं दिखी. पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. उस के काम से लौटने पर पूजा होंठों पर मुसकान लिए दरवाजा खोलती थी.

मनमोहन किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा. पागलों की तरह पूजा को आवाज देते हुए वह घर से बाहर निकल आया. उस की पड़ोसन ने बताया कि दोपहर को उन के घर कोई रिश्तेदार आया था और पूजा ने उस के लिए दरवाजा खोला था. आने वाला कौन था, यह वह नहीं बता सकी. हां, उस ने इतना जरूर बताया कि शाम को उसी ने दरवाजा अंदर की ओर धकेला था, क्योंकि कुत्ते घर के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे. पड़ोसन की बात सुन कर मनमोहन को चिंता हुई. उस की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि आखिर ऐसा कौन रिश्तेदार था, जिस के घर आने के बाद यह हालत हुई. इस से भी बड़ा सवाल यह था कि पूजा कहां गई?

उस की समझ में यह भी नहीं आ रहा था कि घर बैठ कर पूजा का इंतजार करे या उस की तलाश में कहीं जाए. लेकिन जाए तो कहां जाए. फिर भी मनमोहन ने पड़ोसियों के साथ पूजा की तलाश की, उसे अस्पतालों में भी देखा. पर पूजा का पता नहीं चला. मनमोहन बदहवासी में कुछ सोचने का प्रयास कर रहा था कि तभी उस के पिता सुभाष भी घर पहुंच गए. वह पिछले एक सप्ताह से संगत के लिए हिमाचल स्थित बाबा बालक नाथ के डेरे पर गए हुए थे.

बेटे को यूं बदहवास देख और पूजा के गायब होने की बात सुन कर उन्हें भी चिंता होने लगी. इस के बाद पूरे मोहल्ले में पूजा के घर से लापता होने की बात फैल गई. सांत्वना और सहयोग के लिए पूरा मोहल्ला उन के घर आ जुटा था. अचानक एक पड़ोसी की नजर मनमोहन के कमरे में पड़े पर बैड पर गई तो वह चौंका. बंद बैड पर गद्दे के नीचे से किसी औरत की चोटी के बाल बाहर झांक रहे थे. उस के बताने पर वहां मौजूद सभी लोगों ने बैड को देखा.

गद्दे को उठा कर बैड का बौक्स खोला गया तो बौक्स के भीतर का दृश्य देख सभी लोगों के मुंह से चीख निकल गई. बैड के भीतर पूजा की लाश पड़ी थी. एकाएक किसी को भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. उस समय मनमोहन की जो हालत थी, उस का अनुमान लगाना मुश्किल था. वह बैड पकड़ कर वहीं फर्श पर बैठ गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि पूजा की हत्या कर के लाश बैड में किस ने छिपाई. काफी देर बाद लोगों के सांत्वना देने पर जब वह सामान्य हुआ. घर के अंदर के किसी भी सामान को छुए बिना सब से पहले उस ने इस घटना की सूचना थाना कैंट, फिरोजपुर पुलिस को दी. साथ ही उस ने पूजा की हत्या की खबर अपने ससुर चानन सिंह को भी दे दी. यह घटना 27 नवंबर, 2018 की है.

पूजा की हत्या की खबर मिलते ही उस के मातापिता वहां पहुंच गए. पुलिस ने क्राइम टीम सहित वहां पहुंच कर अपनी काररवाई शुरू कर दी. पूरे घर को सील कर दिया गया. फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट ने जगहजगह से अंगुलियों के निशान उठाए. सबूतों की तलाश में घर की बारीकी से तलाशी ली गई. थाना कैंट एसएचओ इंसपेक्टर जसबीर सिंह ने बड़ी बारीकी से लाश का मुआयना किया. पूजा की हत्या गला घोंट कर की गई थी. उस के गले पर दबाव के निशान स्पष्ट नजर आ रहे थे.

इस घटना की सूचना मिलते ही एसपी (डी) बलजीत सिंह सिद्धू, डीएसपी जसपाल सिंह ढिल्लों, सीआईए प्रभारी तरलोचन सिंह ने भी घटनास्थल पर पहुंच कर मुआयना किया. क्राइम टीम का काम खत्म हो गया तो इंसपेक्टर जसबीर सिंह पूजा के पिता चानन सिंह को थाने ले गए. वहां उन के बयान पर अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 302 के तहत पूजा की हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया. इस के बाद पूजा की लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया.

शुरुआती जांच में इंसपेक्टर जसबीर सिंह को मनमोहन के बयानों से पता चला कि उस के घर में किसी बाहरी व्यक्ति का आनाजाना बिलकुल नहीं था. रिश्तेदारों का आनाजाना भी न के बराबर था. इस परिवार की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी. बापबेटा अपने काम से काम रखने वाले थे. ऐसे में शहर के व्यस्ततम इलाके में दिनदहाड़े किसी के घर में घुस कर उस की हत्या करने जैसी बात न तो पुलिस को हजम हो रही थी और न ही मोहल्ले वालों को.

इंसपेक्टर जसबीर को एक बात शुरू से ही खटक रही थी कि यह काम घर के ही किसी आदमी का हो सकता है. किसी बाहरी व्यक्ति की संभावना कम नजर आ रही थी. बहरहाल, पुलिस ने मनमोहन को शक के दायरे में रख कर जांच शुरू कर दी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय मनमोहन और उस के पिता सुभाष भले ही अपने घर के आसपास नहीं थे, पर यह काम पैसे दे कर किसी किराए के हत्यारे से भी करवा सकते थे.

घटना वाले दिन मनमोहन और सुभाष घटनास्थल से दूर थे. उन के फोन रिकौर्ड से भी पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा. मृतका पूजा के फोन रिकौर्ड भी चैक किए गए, सब बेदाग थे. पोस्टमार्टम के अनुसार पूजा की हत्या गला घोंट कर की गई थी. पोस्टमार्टम के बाद उस की लाश घर वालों के हवाले कर दी गई. उसी शाम उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

पूजा की हत्या की खबर शहर भर में चर्चा का विषय बन गई थी. एसपी साहब खुद पलपल की रिपोर्ट ले रहे थे. लेकिन अभी तक पुलिस के हाथ खाली थे. पूजा का पति मनमोहन शुरू से ही शक के दायरे में था, इसलिए पुलिस ने मनमोहन और उस के पिता से कई बार अलगअलग घुमाफिरा कर पूछताछ की, लेकिन वे लोग निर्दोष लग रहे थे. पूजा के पति पर शक करने की वजह यह थी कि पूजा संतानहीन थी. शादी के 4 साल बाद भी उस की गोद नहीं भरी थी. पुलिस सोच रही थी कि कहीं संतानहीन पत्नी से पीछा छुड़ाने के लिए मनमोहन ने ही तो पूजा की हत्या नहीं कर दी.

पुलिस ने मनमोहन के अलावा उस के खास दोस्तों और करीबी रिश्तेदारों से भी पूछताछ की. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इस केस पर जिले के स्पैशल स्टाफ के अलावा और भी कई टीमें काम कर रही थीं. पुलिस के मुखबिर इस मामले में कोई खास जानकारी नहीं जुटा पाए थे. इंसपेक्टर जसबीर सिंह ने इस मामले को लूटपाट के नजरिए से भी देखा और इलाके के छोटेबड़े सभी हिस्ट्रीशीटरों से ले कर चोरों, जेबतराशों और उठाईगीरों को भी राउंडअप किया. लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. पूजा की हत्या हुए एक महीने से ऊपर का वक्त गुजर चुका था. धीरेधीरे यह केस ठंडे बस्ते की ओर बढ़ने लगा था.

हालांकि इंसपेक्टर जसबीर सिंह ने अभी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा था. यह अलग बात है कि उन के तमाम प्रयासों के बाद भी कोई ऐसा सूत्र हाथ नहीं लगा था, जिस से इस मामले की कोई भी कड़ी जुड़ती नजर आती. लोग भी धीरेधीरे इस घटना को भूलने लगे थे. 2 महीने से भी ज्यादा गुजर चुके थे, तभी एक दिन एक ऐसा सूत्र खुद सामने से चल कर आया कि जसबीर सिंह की बांछें खिल गईं. इस सूत्र ने इस केस को एक नई दिशा दे दी थी. इस घटना के लगभग 2 महीने बाद मनमोहन घर की अलमारी के लौकर में कोई जरूरी कागजात ढूंढ रहा था, तभी अचानक उसे झटका सा लगा. अलमारी के लौकर में रखे कीमती जेवरात गायब थे.

मनमोहन ने इस बात की खबर इंसपेक्टर जसबीर सिंह को दी. जेवरात कैसे गायब हुए, यह तो वह ठीक से नहीं बता पाया, पर यह बात उस ने दावे के साथ कही कि जेवरात पूजा की हत्या से पहले ही गायब हुए थे. क्योंकि उस के और पूजा के अतिरिक्त जेवरातों की जानकारी किसी को नहीं थी. पूजा मरने के बाद जेवरात अपने साथ नहीं ले जा सकती थी. जाहिर है उस के सामने या उस की हत्या के बाद ही जेवरात गायब हुए होंगे.

यह भी संभव थी कि इन्हीं जेवरातों की वजह से पूजा की हत्या की गई हो. यह जबरदस्त पौइंट इंसपेक्टर जसबीर के सामने था. उन्होंने अपनी जांच का दायरा बदलते हुए शहर के सुनारों, खासकर उन सुनारों की तरफ मोड़ दिया जो चोरी का माल खरीदते थे. इंसपेक्टर जसबीर सिंह ने उन्हें मनमोहन के घर से गायब सामान की लिस्ट देते हुए सख्त चेतावनी दी कि अगर कोई चोर चोरी का सामान बेचने आए तो उन्हें खबर दें. और फिर एक दिन पुलिस की मेहनत रंग लाई.

20 फरवरी, 2019 को शहर के एक सुनार ने फोन द्वारा इंसपेक्टर जसबीर सिंह को सूचना दी कि अजय पटियाल नाम का एक व्यक्ति उस की दुकान पर मनमोहन के घर से चोरी हुए गहनों से मिलतेजुलते गहने बेचने आया है. इस सूचना पर इंसपेक्टर जसबीर सिंह एएसआई जसपाल सिंह, बलविंदर सिंह, हवलदार गुरतेज सिंह और जसवीर सिंह के साथ सुनार की दुकान पर पहुंचे. अजय को देख कर सभी चौंके. अजय मनमोहन का ही रिश्तेदार था. वह वीर नगर गली नंबर-1 निवासी उस के मामा का बेटा था. मजे की बात यह कि इंसपेक्टर जसबीर सिंह शक के आधार पर उसे 3 बार पूछताछ के लिए थाने बुला चुके थे, लेकिन ठोस सबूतों के अभाव में उसे छोड़ना पड़ा था. बहरहाल, वे गहनों सहित अजय को गिरफ्तार कर थाने ले आए.

पूछने पर अजय ने बताया कि गहने उस के अपने हैं. फिर बताया कि गहने उस के किसी दोस्त के हैं और उस ने अपनी बीमार मां का इलाज करवाने के लिए उसे बेचने के लिए दिए थे. किस दोस्त ने गहने दिए थे, यह बात वह नहीं बता पाया. इंसपेक्टर जसबीर सिंह ने मनमोहन और उस के पिता सहित मृतक पूजा के मातापिता को भी थाने बुलवा कर जब गहनों की शिनाख्त करवाई तो उन्होंने तुरंत गहने पहचान लिए.

अजय से बरामद गहने पूरे नहीं थे, इसलिए इंसपेक्टर जसबीर ने अजय को अदालत में पेश कर उस का 2 दिन का रिमांड ले लिया. रिमांड के दौरान अजय से बाकी गहने भी बरामद कर लिए गए जो उस ने अपने घर में छिपा कर रखे थे. दरअसल, अजय नशे का आदी था. पूजा की हत्या उस ने नशे की पूर्ति के लिए की थी. इसे इत्तफाक समझा जाए या कुछ और कि घटना वाले दिन वह पूजा की हत्या के इरादे से मनमोहन के घर नहीं गया था. अजय के नशेड़ी होने की वजह से कोई रिश्तेदार उसे पसंद नहीं करता था. न ही कोई उसे अपने घर में घुसने देता था.

पूछताछ के दौरान अजय ने बताया कि उस दिन वह मनमोहन से कुछ रुपए उधार लेने उस के घर गया था. लेकिन मनमोहन अपने काम पर जा चुका था. पूजा घर में अकेली थी. पूजा ने अजय को इज्जत से बिठाया और उस के लिए चाय बनाने रसोईघर में चली गई. क्योंकि अजय रिश्ते में मनमोहन के मामा का बेटा था, चायपानी के लिए पूछना उस का फर्ज था. जिस समय अजय मनमोहन के घर आया था, उस समय पूजा अलमारी खोल कर उस में कुछ सामान रख रही थी. अजय के आ जाने की वजह से वह अलमारी खुली छोड़ कर चाय बनाने चली गई.

अचानक अजय की नजर खुली अलमारी पर पड़ी तो वह यह सोच कर अलमारी की ओर चला गया कि संभव है उस में रखे कुछ रुपए उस के हाथ लग जाएं. लेकिन अलमारी में रखे जेवर देख कर उस की आंखें चमक उठीं. गहने देख कर उसे लगा जैसे उस की कई दिन की नशापूर्ति का इंतजाम हो गया हो. उस ने अलमारी में रखे सारे गहने उठा लिए. तभी पूजा ने चाय ले कर कमरे में प्रवेश किया. अजय को गहने चोरी करते देख वह भौचक्की रह गई. हैरान हो कर उस ने अजय के हाथों से गहने छीनने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘भैयाजी, यह आप क्या कर रहे हैं?’’

अजय के सिर पर तो नशे का भूत सवार था, सो उस ने पूजा को एक ओर धकेलते हुए घर से भाग जाने की कोशिश की. पर पूजा ने उस का रास्ता रोक लिया. वह किसी भी कीमत पर अजय को वहां से गहने ले कर नहीं जाने देना चाहती थी. पूजा द्वारा विरोध करने पर अजय को ऐसा लगा जैसे वह उस की दुनिया छीन लेना चाहती हो. इसी छीनाझपटी में अजय ने पूजा का गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया. पूजा की हत्या करने के बाद अजय घबरा गया. उस ने पूजा की लाश को एक सूटकेस में भरा और सूटकेस बैड में रख कर वहां से चुपचाप निकल आया.

काररवाई और पूछताछ के बाद पुलिस ने 22 फरवरी, 2019 को अजय को अदालत में पेश किया, जहां से अदालत के आदेश पर उसे जिला जेल भेज दिया गया. Crime Story

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News : रुपाली का घिनौना रुप

UP News : 13 जून, 2017 को पुलिस कंट्रोलरूप द्वारा उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर की कोतवाली मडि़या हूं पुलिस को गांव सुभाषपुर में एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी इंसपेक्टर नरेंद्र कुमार सिंह पुलिस बल के साथ सुभाषपुर गांव स्थित उस जगह पहुंच गए, जहां लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी. घटनास्थल केडीएस स्कूल के पीछे था.

अब तक वहां गांव वालों की काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. लेकिन पुलिस को देखते ही लोग एक किनारे हो गए थे. नरेंद्र कुमार सिंह ने लाश का निरीक्षण शुरू किया. मृतक की हत्या किसी धारदार हथियार से बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस की उम्र यही कोई 27-28 साल थी. देखने से ही वह गांव का रहने वाला लग रहा था.

पुलिस कंट्रोलरूम से इस घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को भी मिल गई थी. उसी सूचना के आधार पर एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय भी घटनास्थल पर आ गए थे. उन्होंने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. काफी प्रयास के बाद भी लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. मृतक के कपड़ों की तलाशी में भी कोई ऐसी चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की शिनाख्त हो सकती.

पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी कर रही थी, तभी कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार सिंह एक बार फिर घटनास्थल का निरीक्षण बारीकी से करने लगे. इस का नतीजा यह निकला कि लाश से कुछ दूरी पर उन्हें एक टूटा हुआ सिम मिला. इस से जांच में मदद मिल सकती थी, इसलिए उन्होंने उसे सुरक्षित रख लिया.

एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने का आदेश दे कर चले गए थे. इस के बाद नरेंद्र कुमार सिंह भी लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर थाने आ गए. थाने में उन्होंने अपराध संख्या 461/2017 पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने के लिए एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय ने थाना पुलिस की मदद के लिए क्राइम ब्रांच के अलावा सर्विलांस टीम को भी लगा दिया था. जांच को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र कुमार सिंह ने घटनास्थल से मिले सिमकार्ड पर लिखे नंबर के आधार पर संबंधित कंपनी से पता किया तो जानकारी मिली कि वह सिम महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी के रहने वाले पंकज का था. वह सिम महाराष्ट्र से खरीदा गया था.

इस का मतलब यह हुआ कि मृतक का आसपास के रहने वाले किसी से कोई संबंध था या फिर वह यहां घूमने आया था. उस का किस से क्या संबंध था, यह पता करने के लिए पुलिस ने नंबर पता कर के उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस नंबर से अंतिम नंबर पर जिस से बात हुई थी, उस का नाम सत्यम था.

13 जून को सत्यम की पंकज से कई बार बात हुई थी. यही नहीं, उस के नंबर की लोकेशन भी 13 जून को घटनास्थल की पाई गई थी. अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रही. नरेंद्र कुमार सिंह ने सत्यम के नंबर को सर्विलांस पर लगवा कर उस की लोकेशन पता कराई, क्योंकि फोन करने पर उसे शक हो जाता और फरार हो सकता था.

सर्विलांस के आधार पर ही उन्होंने 24 जुलाई, 2017 की सुबह इटाए बाजार के आगे नहर की पुलिया के पास से सत्यम और उस के साथ एक युवक तथा एक युवती को गिरफ्तार कर लिया. तीनों एक मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे. बाद में पूछताछ में पता चला कि तीनों कहीं दूर भाग जाना चाहते थे, जिस से पुलिस उन्हें पकड़ न सके.

तीनों को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम सत्यम उर्फ छोटू गौड़, सचिन गौड़ उर्फ चिंटू और रूपाली बताए. इन में सत्यम और सचिन वाराणसी के थाना फूलपुर के गांव करियांव के रहने वाले थे. युवती का नाम रूपाली था. वह मृतक पंकज उर्फ प्रेम उर्फ बबलू की पत्नी थी. वह महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी की रहने वाली थी.

पुलिस ने तीनों से पूछताछ शुरू की तो थोड़ी हीलाहवाली के बाद उन्होंने पंकज की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस ने उन की मोटरसाइकिल संख्या यूपी65बी क्यू 7062 जब्त कर ली थी. इस के बाद इन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, दस्ताने भी बरामद कर लिए गए थे. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में तीनों ने पंकज की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी का रहने वाला 28 साल का पंकज उर्फ प्रेम उर्फ बबलू उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी के थाना फूलपुर के गांव करियांव में आ कर रह रहा था. वह यहां शादीविवाहों या किसी अन्य कार्यक्रमों में डांस करता था. इसी से होने वाली आमदनी से उस का और उस के परिवार वालों का भरणपोषण हो रहा था. वह डांस कर के इतना कमा लेता था कि उस का और उस के परिवार का गुजारा आराम से हो रहा था.

करियांव में ही सत्यम उर्फ छोटू गौड़ भी रहता था. पंकज से उस की दोस्ती हो गई तो वह उस के घर भी आनेजाने लगा, घर आनेजाने से उन की दोस्ती तो गहरी हुई ही, पंकज की पत्नी रूपाली से भी उस की अच्छी पटने लगी. वह उसे भाभी कहता था. चूंकि सत्यम की शादी नहीं हुई थी, इसलिए जल्दी ही रूपाली पर उस का दिल आ गया. इस के बाद वह पंकज की अनुपस्थिति में भी उस के घर जाने लगा, क्योंकि उस के सामने वह दिल की बात नहीं कह सकता था.

आखिर एक दिन पंकज की अनुपस्थिति में सत्यम ने रूपाली से दिल की बात कह ही नहीं दी, बल्कि दिल की मुराद भी पूरी कर ली. एक बार मर्यादा भंग हुई तो सिलसिला चल निकला. दोनों को जब भी मौका मिलता, इच्छा पूरी कर लेते. पंकज इस सब से अंजान था. जिस पत्नी को ले कर वह अपने घरपरिवार से इतनी दूर आ गया था, उसी पत्नी ने उस से बेवफाई करने में जरा भी संकोच नहीं किया था.

पंकज की गैरमौजूदगी में सत्यम का आनाजाना कुछ ज्यादा बढ़ गया तो लोगों की नजरों में यह बात खटकने लगी. लोगों ने इस बात पर ध्यान दिया तो उन्हें मामला गड़बढ़ लगा. लोग इस बात को ले कर चर्चा करने लगे तो यह बात पंकज के कानों तक पहुंची. पहले तो उस ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब लोगों ने टोकाटाकी शुरू की तो उस ने सच्चाई का पता करना चाहा. इस के लिए उस ने एक योजना बनाई.

एक दिन वह रूपाली से कार्यक्रम में जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक वापस आ गया. अचानक पंकज को देख कर रूपाली घबरा गई. इस की वजह यह थी कि उस समय सत्यम उस के घर में ही मौजूद था. पंकज को देख कर सत्यम तो पिछवाड़े से भाग निकला, लेकिन रूपाली पकड़ी गई. उस की हालत ने सच्चाई उजागर कर दी. पंकज ने उसे खरीखोटी तो सुनाई ही, इतने से मन नहीं माना तो पिटाई भी कर दी.

रूपाली ने उस समय वादा किया कि अब वह फिर कभी ऐसी गलती नहीं करेगी. पंकज ने भी उस की बात पर विश्वास कर लिया. माफ करना उस की मजबूरी भी थी. आखिर उसे भी तो अपना घर बचाना था. उसे लगा कि गलती सभी से हो जाती है, रूपाली से भी हो गई. अब संभल जाएगी.

लेकिन रूपाली संभली नहीं, कुछ दिनों तक तो वह सत्यम से बिलकुल नहीं मिली. लेकिन धीरेधीरे दोनों लोगों की नजरें बचा कर फिर चोरीचुपके मिलने लगे. रूपाली पंकज से ऊब चुकी थी. वह पूरी तरह से सत्यम की हो कर रहना चाहती थी, इसलिए वह जब भी सत्यम से मिलती, एक ही बात कहती, ‘‘सत्यम, अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती. इस तरह छिपछिप कर मिलना मुझे अच्छा नहीं लगता. मैं पूरी तरह तुम्हारी हो कर रहना चाहती हूं. चलो, हम कहीं भाग चलते हैं.’’

‘‘मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता रूपाली, लेकिन थोड़ा शांति से काम लो. देखो, मैं कोई उपाय करता हूं.’’ जवाब में सत्यम कहता.

सत्यम उपाय सोचने लगा. उस ने जो उपाय सोचा, उस के बारे में एक दिन रूपाली से कहा, ‘‘रूपाली, क्यों न हम पंकज को हमेशाहमेशा के लिए रास्ते से हटा दें. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.’’

रूपाली पहले तो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन उस के बाद धीरे से बोली, ‘‘कहीं हम पकड़े न जाएं?’’

‘‘इस की चिंता तुम बिलकुल मत करो. उसे तो मैं ऐसा निपटा दूंगा कि किसी को कानोकान खबर नहीं होगी.’’ सत्यम ने कहा.

इस के बाद सत्यम ऐसा मौका ढूंढने लगा, जब वह अपना काम कर सके. 12 जून, 2017 को पंकज को कार्यक्रम में डांस करने के लिए थाना मडि़याहूं के गांव सुभाषपुर जाना था. वह अपनी पार्टी के साथ निकल भी गया.

पंकज के घर से निकलते ही रूपाली ने सत्यम को बता दिया. चूंकि वाराणसी और जौनपुर की सीमा सटी हुई है और मडि़याहूं तथा फूलपुर के बीच की दूरी तकरीबन 40 किलोमीटर है, इसलिए सत्यम रूपाली के सूचना देते ही अपने साथी सचिन के साथ सुभाषपुर गांव के लिए निकल पड़ा.

आधी रात के बाद लोगों की नजरें बचा कर सत्यम ने बहाने से पंकज को गांव के बाहर केडीएस स्कूल के पीछे बुलाया और सचिन की मदद से चाकू से उस की हत्या कर दी. इस के बाद पंकज के मोबाइल से उस का सिम निकाल कर तोड़ कर झाडि़यों में फेंक दिया और मोबाइल ले कर चला गया.

पंकज के अचानक गायब होने से उस के साथियों ने सोचा, शायद किसी बात से नाराज हो कर वह घर चला गया होगा और अपना मोबाइल भी बंद कर लिया होगा. पति के इस तरह गायब होने से रूपाली रोनेधोने का नाटक करती रही. काफी दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंची तो उचित मौका देख कर उस ने सत्यम के साथ भाग जाने की योजना बना डाली.

संयोग से पुलिस ने उन्हें उसी दिन पकड़ लिया, जिस दिन सत्यम और रूपाली भाग रहे थे. मामले का त्या कर रूपाली और सत्यम को मिला क्या? पंकज तो जान से गया, लेकिन अब उन दोनों की जिंदगी भी अबखुलासा होने के बाद पुलिस ने अज्ञात की जगह सत्यम, सचिन और रूपाली को नामजद कर तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. सोचने वाली बात तो यह है कि पंकज की ह जेल में ही कटेगी. ? UP News

Crime News : नाजायज संबंधों से बढ़ रहे अपराध

Crime News : आम तौर पर समाज में घटित होने वाले अपराधों के तीन कारण होते हैं जर (रूपया-पैसा), जोरू(औरत),और जमीन.मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा अपराधिक घटनाएं नाजायज संबंधों की वजह से हो रही हैं.

समाज में सेक्स को लेकर खुलकर चर्चा न होने से नौजवानों के मन में सेक्स संबंधों को लेकर जिज्ञासा बनी रहती है. सेक्स का मजा लेने के लिए महिला, पुरुषों द्वारा बनाए गए नाजायज संबंध समाज की नजरों में देर तक छुपे नहीं रहते. नाजायज संबंधों के खुलासा होने पर परिवार में कलह और समाज में बदनामी होने लगती है. दोस्ती में विश्वासघात करके बनाये गये नाजायज संबंधों में लोग एक दूसरे के जान के प्यासे तक हो जाते हैं. दोस्ती के नाम पर विश्वासघात करने का ऐसा ही मामला नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से करीब ५० किमी दूर गोटेगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत जामुनपानी गांव  में सामने आया है.

लॉक डाउन की सख्ती के बीच जामुनपानी गांव के पास खेत में 21-22 अप्रैल की दरम्यानी रात दो युवकों की धारदार हथियार से गला काट कर नृशंस हत्या कर दी गई.पिपरिया लाठ गांव निवासी मोहन उम्र 30 साल  और कुंजी यादव  उम्र 18 साल दोनों ही जमीन सिकमी पर लेकर खेती करते थे . 21 अप्रैल को  रात 9 बजे दोनों अपने घरों से खाना खाकर खेत पर गए थे. दूसरे दिन दोपहर तक जब दोनों घर नहीं आए और मोबाइल पर संपर्क नहीं हुआ तो मोहन के पिता हीरालाल ने खेत सोचा कि खेत पर जाकर देखते हैं. खेत पर जाकर हीरालाल ने दोनों के शव रक्त रंजित अवस्था में पड़े देखे तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं .

हीरालाल द्वारा पुलिस चौकी झोतेश्वर में इसकी सूचना देने के पर गोटेगांव से पुलिस टीम  मामले की जांच के लिए पहुंची.  मौका मुआयना के बाद लाश का पंचनामा बनाकर गोटेगांव के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शवों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया. पुलिस की उपस्थिति में पिपरिया(लाठगांव) में दोनों की अर्थी एक साथ उठीं. लेकिन गांव के लोगों में मोहन और कुंजी के नाजायज संबंधों की खुसर-पुसर होती रही.

दोनों नौजवानों के नाजायज संबंधों की जानकारी गांव के लोगों के साथ घर परिवार के लोगों को भी थी.मृतक कुंजी यादव की दादी ने तो पुलिस के सामने ही गांव के एक युवक गुड्डा ठाकुर पर दोनों की हत्या का आरोप लगा दिया. पुलिस टीम भी  तफशीश में जुट गई.पुलिस ने 22 अप्रैल की रात खेत में बनी गुड्डन गौड़ की झोपड़ी में दबिश दी तो वह झोपड़ी में नहीं मिला।

23 अप्रैल को तड़के पुलिस ने एक बार फिर झोपड़ी में दबिश दी मगर उसकी झोपड़ी में मौजूद कुत्ता दूर से ही पुलिस को देख कर भौंकने लगा , जिस पर गुड्न गौड बिस्तर से उठा और चड्डी बनियान में ही जंगल की ओर भाग गया .जब पुलिस झोपड़ी में पहुंची तो चूल्हा की आग गरम थी, बिस्तर बिछा हुआ था उसने कपड़े और जूते वहीं पर उतार कर रखे थे. झोपड़ी में पुलिस को गुड्डन की बैंक पास बुक और फोटो मिली थी.

जंगली रास्तों में पुलिस से छिपता फिर रहा गुड्डन

आखिरकर 23 अप्रैल की शाम को झोतेश्वर के हनुमान टेकरी मंदिर के पास पकड़ में आ ही गया.पुलिस पूछताछ में मोहन और कुंजी की हत्या करने का जुर्म कबूल करने के साथ जो कहानी सामने आई , उसमें हत्या का कारण दोस्ती में विश्वासघात कर बनाये गये नाजायज संबंध ही थे.

मोहन और कुंजी , गुड्डा ठाकुर के अच्छे दोस्त थे और इसी वजह से वे गुड्डा के घर आते जाते रहते थे. लेकिन मोहन की नजर गुड्डा की खूबसूरत बीबी रति (परिवर्तित नाम) पर टिकी रहती थी. तीखे नैन-नक्श और गठीले बदन की रति से मोहन हंसी मजाक कर लिया करता था. जब भी गुड्डा ठाकुर घर से बाहर रहता तो मोहन गुड्डा के घर पहुंच जाता. हंसी मज़ाक का सिलसिला धीरे धीरे आगे बढते देख एक दिन मोहन ने रति से कहा – ,” रति भाभी तुम तो मुझे इतनी सुन्दर लगती हो कि जी चाहता है तुम पर सब कुछ लुटा दूं”. रति को भी मोहन की ये अदायें भाने लगी थी तो उसने भी कह दिया-” तुम्हें रोका किसने है”.

फिर क्या था मोहन ने रति को अपनी बाहों में भर लिया और उसके ओंठ चूमने लगा. देखते ही देखते दोनों तरफ से लगी जिस्मानी प्यास तभी बुझी थी, जब तक वे एक उन्हें तृप्ति का एहसास न हो गया. आखिरकार इन नाजायज संबंधों की जानकारी एक दिन गुड्डा को भी लग गई तो उसने दोनों दोस्तों को समझाने का प्रयास किया,मगर मोहन और कुंजी ने अपनी गल्ती मानने की बजाय उल्टे गुड्डा की मर्दानगी का मजाक बनाना शुरू कर दिया.नाजायज संबंधो की बजह से पति-पत्नी में झगड़े होने लगे और उसकी बीवी अपने मायके जबलपुर के पास चरगवा चली गई.

गुड्डा अपनी घर गृहस्थी उजड़ने से परेशान रहने लगा था .समाज में भी उसकी बदनामी हो गई थी. ऐसे में गुड्डा के दिलों दिमाग में मोहन को  अपने रास्ते से हटाने की योजना बनती रहती थी.

प्रतिशोध की आग में जल रहे गुड्डा ने  निश्चय कर लिया था कि वह मोहन को मौत के घाट उतारकर ही दम लेगा. गुड्डा को पता तो था ही कि मोहन और कुंजी रोज ही खेत पर आते हैं . 21 अप्रैल की रात वह खेत की टपरिया से ही मोहन और कुंजी पर नजर रख रहा था. फसल की गहाई पूरी होने के बाद जब मोहन और कुंजी खेत पर सो गये तो रात 2 बजे के लगभग वह कुल्हाड़ी लेकर खेत पर पहुंच गया और गहरी नींद सो रहे मोहन और कुंजी के सिर पर धड़ाधड़ क‌ई वार करके उन्हें हमेशा के लिए गहरी नींद सुला दिया.उसने कुंजी की हत्या इसलिए की कि कुंजी मोहन और  रति के मिलने में सहायता करता था.

अक्सर ही नाजायज संबंधों का  इसी तरह से दुखद अंत होता है.इस घटना में भी जहां मोहन और कुंजी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा तो पत्नी की वजह से हुई बदनामी के कारण गुड्डा ठाकुर को दोहरी हत्या करने के लिए मजबूर कर दिया. Crime News

Crime News : प्यार में चाल – दबाव में आकर किया कत्ल

Crime News : बिल्हौर मार्ग पर एक कस्बा है ककवन. इसी कस्बे से सटा एक गांव है नदीहा धामू. यहीं पर रामदयाल गौतम अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी कुसुमा के अलावा 2 बेटे सर्वेश, उमेश तथा 2 बेटियां राधा व सुधा थीं.रामदयाल गांव का संपन्न किसान था. उस का बेटा सर्वेश गांव में डेयरी चलाता था. संपन्न होने के कारण जातिबिरादरी में रामदयाल की हनक थी.

रामदयाल की छोटी बेटी सुधा 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी, जबकि बड़ी बेटी ने 12वीं पास कर के पढ़ाई छोड़ दी थी. रामदयाल उसे पढ़ालिखा कर मास्टर बनाना चाहता था, लेकिन राधा के पढ़ाई छोड़ देने से उस का यह सपना पूरा नहीं हो सका. पढ़ाई छोड़ कर वह मां के साथ घरेलू काम में मदद करने लगी थी. गांव के हिसाब से राधा कुछ ज्यादा ही सुंदर थी. जवानी में कदम रखा तो उस की सुंदरता में और निखार आ गया. उस का गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें और कंधों तक लहराते बाल, हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे. अपनी इस खूबसूरती पर राधा को भी नाज था.

यही वजह थी कि जब कोई लड़का उसे चाहत भरी नजरों से देखता तो वह इस तरह घूरती मानो खा जाएगी. उस की इन खा जाने वाली नजरों से ही लड़के डर जाते थे.लेकिन आलोक राजपूत राधा की इन नजरों से जरा भी नहीं डरा था. वह राधा के घर से कुछ ही दूरी पर रहता था. आलोक के पिता राजकुमार राजपूत प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे. लेकिन रिटायर हो चुके थे. उन की एक बेटी तथा एक बेटा आलोक था. बेटी का वह विवाह कर चुके थे.

पिता के रिटायर हो जाने के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी आलोक पर आ गई थी. बीए करने के बाद वह नौकरी की तलाश में था. लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो उस ने अपनी खेती संभाल ली थी. इस के अलावा उस ने घर में किराने की दुकान भी खोल ली थी. इस से उसे अतिरिक्त आमदनी हो जाती थी. राधा के भाई सर्वेश की आलोक से खूब पटती थी. आसपड़ोस में रहने की वजह से दोनों का एकदूसरे के घर भी आनाजाना था. आलोक जब भी सर्वेश के घर आता था, राधा उसे घर के कार्यों में लगी नजर आती थी. वैसे तो वह उसे बचपन से देखता आया था, लेकिन पहले वाली राधा में और अब की राधा में काफी फर्क आ गया था.

पहले जहां वह बच्ची लगती थी, अब वही जवान होने पर ऐसी हो गई थी कि उस पर से नजर हटाने का मन ही नहीं होता था.एक दिन आलोक राधा के घर पहुंचा तो सामने वही पड़ गई. उस ने पूछा, ‘‘सर्वेश कहां है?’ ‘‘मम्मी और भैया तो कस्बे में गए हैं. कोई काम था क्या?’’ राधा बोली.

‘‘नहीं, कोेई खास काम नहीं था. बस ऐसे ही आ गया था. सर्वेश आए तो बता देना कि मैं आया था.’’‘‘बैठो, भैया आते ही होंगे.’’ राधा ने कहा तो आलोक वहीं पड़ी चारपाई पर बैठ गया.  आलोक बैठा तो राधा रसोई की ओर बढ़ी. उसे रसोई की ओर जाते देख आलोक ने कहा, ‘‘राधा, चाय बनाने की जरूरत नहीं है. मैं चाय पी कर आया हूं.’’

‘‘कोई बात नहीं, मैं ने अपने लिए चाय भी चढ़ा रखी है. उसी में थोड़ा दूध और डाल देती हूं.’’ कह कर राधा रसोेई में चली गई.थोड़ी देर बाद वह 2 गिलासों में चाय ले आई. एक गिलास उस ने आलोक को थमा दिया, तो दूसरा खुद ले कर बैठ गई. चाय पीते हुए आलोक ने कहा, ‘‘राधा, बुरा न मानो तो मैं एक बात कहूं.’’

‘‘कहो.’’ उत्सुक नजरों से देखते हुए राधा बोली.‘‘अगर तुम जैसी खूबसूरत और ढंग से घर का काम करने वाली पत्नी मुझे मिल जाए तो मेरी किस्मत ही खुल जाए.’’ आलोक ने कहा.आलोक की इस बात का जवाब देने के बजाय राधा उठी और रसोई में चली गई. उसे इस तरह जाते देख आलोक को लगा, वह उस से नाराज हो गई है, इसलिए उस ने कहा, ‘‘राधा लगता है मेरी बात तुम्हें बुरी लग गई. मेरी बात का कोई गलत अर्थ मत लगाना. मैं ने तो यूं ही कह दिया था.’’

इतना कह आलोक वहां से चला गया. लेकिन इस के बाद वह जब भी सर्वेश के घर जाता, मौका मिलने पर राधा से 2-4 बातें जरूर करता. उन की इस बातचीत पर घरवालों को कोई ऐतराज भी न था. क्योंकि मोहल्ले के नाते रिश्ते में दोनों भाईबहन लगते थे. गांवों में तो वैसे भी रिश्तों को काफी अहमियत दी जाती है. लेकिन आलोक और राधा रिश्तों की मर्यादा निभा नहीं पाए. मेलमुलाकात और बातचीत से आलोक के दिलोदिमाग पर राधा की खूबसूरती और बातव्यवहार का ऐसा असर हुआ कि वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने के सपने देखने लगा. लेकिन अपने मन की बात वह राधा से कह नहीं पाता था.

वह सोचता था कि कहीं राधा बुरा मान गई और उस ने यह बात घर वालों से बता दी तो वह मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएगा. लेकिन यह उस का भ्रम था. राधा के मन में भी वही सब था, जो उस के मन में था.जब दोनों ओर ही चाहत के दीए जल रहे हों तो मौका मिलने पर उस का इजहार भी हो जाता है. ऐसा ही राधा और आलोक के साथ भी हुआ. फिर एक दिन उन्होंने अपने मन की बात जाहिर भी कर दी.

दोनों के बीच प्यार का इजहार हो गया तो उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. आए दिन होने वाली मुलाकातों ने दोनों को जल्द ही करीब ला दिया. वे भूल गए कि उन का रिश्ता नाजुक है. आलोक राधा के प्यार के गाने गाने लगा. इस तरह दोनों मोहब्बत की नाव में सवार हो कर काफी आगे निकल गए. राधा और आलोक के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो मनों में शारीरिक सुख पाने की कामना भी पैदा होने लगी. इस के बाद मौका मिला तो दोनों सारी मर्यादाएं तोड़ कर एकदूसरे की बांहों में समा गए. इस के बाद तो उन्हें जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी कर लेते.

इस का नतीजा यह निकला कि कुछ दिनों बाद ही दोनों गांव वालों की नजरों में आ गए. उन के प्यार के चर्चे पूरे गांव में होने लगे. उड़तेउड़ते यह खबर राधा के पिता रामदयाल के कानों में पड़ी तो सुन कर उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे एकाएक विश्वास नहीं हुआ कि आलोक उस की इज्जत पर हाथ डाल सकता है. वह तो उसे अपने बेटों की तरह मानता था.यह सब जान कर उस ने राधा पर तो पाबंदी लगा ही दी, साथ ही आलोक से भी कह दिया कि वह उस के घर न आया करे.

बात इज्जत की थी, इसलिए राधा के भाई सर्वेश को दोस्त की यह हरकत अच्छी नहीं लगी. उस ने आलोक को समझाया ही नहीं, धमकी भी दी कि अगर उस ने अब उस की बहन पर नजर डाली तो वह भूल जाएगा कि वह उस का दोस्त है. इज्जत के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है. इस के बाद उस ने राधा की पिटाई भी की और उसे समझाया कि उस की वजह से गांव में सिर उठा कर चलना दूभर हो गया है. वह ठीक से रहे अन्यथा अनर्थ हो जाएगा. रामदयाल जानता था कि बात बढ़ाने पर उसी की बदनामी होगी, इसलिए बात बढ़ाने के बजाय वह पत्नी व बेटों से सलाह कर के राधा के लिए लड़के की तलाश करने लगा. इस बात की जानकारी राधा को हुई तो वह बेचैन हो उठी.

एक शाम वह मौका निकाल कर आलोक से मिली और रोते हुए बोली, ‘‘घर वाले मेरे लिए लड़का ढूंढ रहे हैं. जबकि मैं तुम्हारे अलावा किसी और से शादी नहीं करना चाहती.’’ ‘‘इस में रोने की क्या बात है? हमारा प्यार सच्चा है, इसलिए दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’ राधा को रोते देख आलोक भावुक हो उठा. वह राधा के आंसू पोंछ उस का चेहरा हथेलियों में ले कर उसे विश्वास दिलाते हुए बोला, ‘‘तुम मुझ पर भरोसा करो, मैं तुम्हारे साथ हूं. मेरे रोमरोम में तुम्हारा प्यार रचा बसा है. तुम्हें क्या लगता है कि तुम से अलग हो कर मैं जी पाऊंगा, बिलकुल नहीं.’’

उस की आंखों में आंखें डाल कर राधा बोली, ‘‘मुझे पता है कि हमारा प्यार सच्चा है, तुम दगा नहीं दोगे. फिर भी न जाने क्यों मेरा दिल घबरा रहा है. अच्छा, अब मैं चलती हूं. कोई खोजते हुए कहीं आ न जाए.’’

‘‘ठीक है, मैं कोई योजना बना कर तुम्हें बताता हूं.’’ कह कर आलोक अपने घर की तरफ चल पड़ा तो मुसकराती हुई राधा भी अपने घर चली गई.रामदयाल राधा के लिए लड़का ढूंढढूंढ कर थक गया, लेकिन कहीं उपयुक्त लड़का नहीं मिला. इस से राधा के घर वाले परेशान थे, वहीं राधा और आलोक खुश थे. इस बीच घर वाले थोड़ा लापरवाह हो गए तो वे फिर से चोरीछिपे मिलने लगे थे.

एक दिन सर्वेश ने खेतों पर राधा और आलोक को हंसीमजाक करते देख लिया तो उस ने राधा की ही नहीं, आलोक की भी पिटाई की. इसी के साथ धमकी भी दी कि अगर फिर कभी उस ने दोनों को इस तरह देख लिया तो अंजाम अच्छा न होगा.सर्वेश ने आलोक की शिकायत उस के घर वालों से की तो घर वालों ने उसे भरोसा दिया कि वे आलोक को समझाएंगे. इस के बाद सर्वेश घर आ गया. इधर शाम को आलोक घर पहुंचा तो पिता राजकुमार ने टोका, ‘‘सर्वेश उलाहना देने आया था. तुम्हारी शिकायत कर रहा था कि तुम उस की बहन के पीछे पड़े हो. सच्चाई क्या है?’’

‘पिताजी, मैं और राधा एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.’  ‘‘तुम्हारा दिमाग फिर गया है क्या? जो उस लड़की से शादी करना चाहते हो. क्या तुम्हें मालूम नहीं कि राधा दूसरी जाति की है और हम राजपूत हैं. यदि तुम ने उस से ब्याह रचाया तो समाज में हम मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे. बिरादरी के लोग हमारा हुक्कापानी बंद कर देंगे. इसलिए कान खोल कर सुन लो, उस लड़की से तुम्हारा रिश्ता हरगिज नहीं हो सकता. भूल जाओ उसे.’’ राजकुमार ने कहा.

पिता की फटकार और स्पष्ट चेतावनी से आलोक परेशान हो उठा. उस का एक दोस्त छोटू उर्फ नीलू था. उस ने इस बारे में छोटू से बात की तो उस ने उस के पिता की बात को जायज ठहराया और राधा से संबंध तोड़ लेने का सुझाव दिया.आलोक ने अपनी मां का दिल टटोला तो उस ने भी साफ कह दिया कि जिस दिन राधा की डोली उस के घर आएगी, उसी दिन उस की अर्थी उठेगी. मां की इस धमकी से आलोक कांप उठा. उस पर सवार राधा के प्यार का भूत उतरने लगा. मातापिता और दोस्त की नसीहत उसे भली लगने लगी. अत: उस ने निश्चय किया कि वह राधा से दूरी बनाएगा और प्यारमोहब्बत की बात नहीं करेगा. अब उस ने राधा से ब्याह रचाने की बात दिमाग से निकाल दी.

इस के बाद जब कभी आलोक का सामना राधा से होता, तो वह उस से बेमन से मिलता. बेरुखी से बात करता. न होंठों पर मुसकराहट, न चेहरे पर दमक होती. राधा नजदीकियां बढ़ाने की पहल करती, तो वह मना कर देता.फोन पर भी उस ने बात करना एक तरह से बंद ही कर दिया था. राधा दस बार फोन करती तो वह मुश्किल से एक बार रिसीव करता, उस पर भी ज्यादा बात न करता और फोन कट कर देता.

आलोक के इस रूखे व्यवहार से राधा परेशान हो उठी. उसे शक होने लगा कि आलोक किसी दूसरी लड़की के चक्कर में तो नहीं पड़ गया. अत: वह आलोक पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. वह जब भी मिलती या फोन पर बात करती तो शादी की ही बात करती. इधर कुछ समय से राधा आलोक को धमकाने भी लगी थी कि यदि उस ने शादी नहीं की तो वह पुलिस में उस की शिकायत कर देगी, तब उसे जेल भी हो सकती है. 24 अगस्त, 2020 की शाम 4 बजे राधा घर से गायब हो गई. वह देर शाम तक घर वापस नहीं लौटी तो रामदयाल को चिंता हुई. उस ने अपने बेटे सर्वेश व उमेश को साथ लिया और रात भर उस की खोज करता रहा.

लेकिन राधा का कुछ भी पता न चला. रामदयाल को शक हुआ कि कहीं आलोक उसे भगा तो नहीं ले गया. वह आलोक के घर पहुंचा, तो आलोक घर पर ही मिला.26 अगस्त की सुबह गांव का ही किसान विमल अपने खेत पर पानी लगाने पहुंचा तो उस ने अपने खेत की मेड़ के पास पीपल के पेड़ के नीचे राधा का शव देखा. उस ने खबर राधा के घर वालों को दी. उस के बाद तो रामदयाल के घर में रोनापीटना शुरू हो गया.

घर के सभी लोग घटनास्थल पहुंच गए. लाश मिलते ही आलोक का परिवार घर से गुपचुप तरीके से फरार हो गया.रामदयाल गौतम ने थाना ककवन पुलिस को सूचना दी तो थानाप्रभारी अमित कुमार मिश्रा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन की सूचना पर एसपी केशव कुमार चौधरी तथा एएसपी अनूप कुमार आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. उस के गले में दुपट्टा था. इस से अंदाजा लगाया गया कि राधा की हत्या दुपट्टे से गला घोंट कर की गई होगी. उस की उम्र 19 वर्ष के आसपास थी.

घटनास्थल पर मृतका का पिता रामदयाल तथा भाई सर्वेश मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने उन दोनों से पूछताछ की तो सर्वेश ने उन्हें बताया कि उस की बहन की हत्या गांव के आलोक व उस के दोस्त छोटू ने की है. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने राधा के शव को पोेस्टमार्टम हेतु माती स्थित अस्पताल भिजवा दिया तथा थानाप्रभारी अमित मिश्रा को आदेश दिया कि वह मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करें. आदेश पाते ही अमित कुमार मिश्रा ने मृतका के भाई सर्वेश की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत आलोक व छोटू के खिलाफ रिपोेर्ट दर्ज कर ली और उन्हें गिरफ्तार करने में जुट गए. इस के लिए उन्होंने मुखबिरों को भी लगा दिया.

29 अगस्त, 2020 की रात 10 बजे अमित कुमार मिश्रा ने मुखबिर की सूचना पर आलोक व छोटू को ककवन मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. उन्हें थाना ककवन लाया गया. थाने पर जब दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने राधा की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में आलोक ने बताया कि राधा उस पर शादी का दबाव बना रही थी, जबकि वह राधा से शादी नहीं करना चाहता था. उस ने जब पुलिस में शिकायत दर्ज करने की धमकी दी, तो उस ने राधा को ही मिटाने की योजना बनाई. इस में उस ने अपने दोस्त छोटू को शामिल कर लिया.

योजना के तहत उस ने 24 अगस्त की शाम 4 बजे राधा को खेतों पर बुलाया फिर उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया. 30 सितंबर, 2020 को पुलिस ने अभियुक्त आलोक राजपूत व छोटू को कानपुर देहात की माती कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.Crime News

Patna News : ‘हावड़ा पटना लव ऐक्सप्रैस’ वाया फेसबुक

Patna News : ‘तुम क्या काम करते हो? तुम्हारा घर कहां है?’ लड़की ने अपने फेसबुक फ्रैंड के चैट बौक्स में मैसेज डाला.

लड़के ने तुरंत जवाब दिया, ‘तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मेरा घर पटना में है. तुम कहां रहती हो?’

लड़की ने भी पलट कर जवाब दिया, ‘मैं कोलकाता में रहती हूं. तुम भी मुझे काफी अच्छे लगते हो.’

लड़के ने मैसेज टाइप किया, ‘कोलकाता में कहां रहती हो? मैं तुम से मिलना चाहता हूं. हमारा मिलन कैसे होगा? मैं तुम्हारे बगैर जिंदा नहीं रह सकता हूं.’

लड़की ने लिखा, ‘‘मैं हावड़ा में रहती हूं. मैं भी तुम्हारे बिना जिंदगी की सोच नहीं सकती हूं….’’

इस तरह की मुहब्बत से भरी चैटिंग का सिलसिला चलता रहा. इस के बाद उन दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल फोन नंबर मांगा. दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला भी चल पड़ा. उन दोनों की मुहब्बत इतनी परवान चढ़ी कि वे मिलने के लिए बेताब हो उठे. दोनों मिले भी. शादी भी कर ली. उस के बाद लड़की के साथ जो कुछ घटा, वह रूह कंपा देने वाला था.

दरअसल, पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले की रहने वाली 22 साल की लड़की सुलेखा को फेसबुक और ह्वाट्सऐप के जरीए बिहार के एक लड़के आसिफ से दोस्ती हुई. सोशल साइटों के जरीए शुरू हुई उन की प्रेमकहानी इस कदर परवान चढ़ने लगी कि लड़की अपने फेसबुकिया आशिक से मिलने पटना पहुंच गई.

मुहब्बत की आस में हावड़ा से पटना पहुंची सुलेखा को पटना में उस के प्रेमी से छलावा और ब्लैकमेलिंग के सिवा कुछ नहीं मिला. प्रेम में पागल उस लड़की ने अपने बदमाश प्रेमी को काफी समझाने की कोशिश की, पर बात नहीं बनी. प्रेमी की खातिर लड़की ने अपना धर्म भी बदलवा लिया, पर उस के बाद भी उस के हाथ कुछ नहीं आया. थकहार कर उस ने पुलिस और अदालत का दरवाजा खटखटाया.

सुलेखा ने 13 जून, 2016 की रात को पटना के महिला थाने में दुष्कर्म, धोखेबाजी और साइबर क्राइम का मामला दर्ज कराया. इस में उस ने पटना के फुलवारीशरीफ के हारुननगर के रहने वाले आसिफ के साथसाथ 5 लड़कों को आरोपी बनाया.

इस लड़की की शिकायत मिलने के बाद छापामारी कर पुलिस ने 2 लड़कों रिजवी और फैज को गिरफ्तार कर लिया. सुलेखा ने बताया कि अप्रैल, 2015 में उसे फुलवारीशरीफ के एक लड़के का फोन आया और उस के बाद ह्वाट्सऐप पर भी मैसेज आए. दोनों फेसबुक फ्रैंड थे. उस ने बताया कि उसे किसी काम से पटना आना था, तो उस ने अपने फेसबुक फ्रैंड को फोन किया. वह उस से मिलने मीठापुर महल्ले में आया. सुलेखा मीठापुर के ही ‘सौरभगौरव’ होटल में ठहरी हुई थी.

होटल में बातचीत और नाश्ते के दौरान आसिफ ने सुलेखा की कोल्ड ड्रिंक में नशीली चीज मिला दी. जब वह बेहोश हो गई, तो उस लड़के ने उस के साथ बलात्कार किया और उस का वीडियो भी बना लिया. इस के बाद वह सुलेखा को वीडियो दिखा कर उसे ब्लैकमेल करने लगा.

ब्लैकमेलिंग से परेशान सुलेखा 28 जनवरी, 2016 को पटना आई और लड़के से मिल कर मामले को खत्म करने की कोशिश की.

आसिफ ने उस से शादी करने का भरोसा दे कर अपने जाल में फिर फंसा लिया. उस ने उसे पटना कालेज के पास के एक गर्ल्स होस्टल में ठहराया. उस के बाद गांधी मैदान के आसपास के पार्क में उस का जबरन धर्म बदलवा कर निकाह कराया गया.

निकाह के बाद वे दोनों एनआईटी कालेज के पास नफीस कालोनी में रहने लगे. सुलेखा को लगा कि अब आसिफ सुधर गया है और उस की जिंदगी पटरी पर लौट आई है.

कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीकठाक चला, पर 15-16 दिनों के बाद ही आसिफ फिर अपने पुराने रंग में आ गया. निकाह के 25 दिनों के बाद अचानक आसिफ गायब हो गया. उस ने अपना मोबाइल फोन भी स्विच औफ कर दिया.

सुलेखा ने 5 दिनों तक अपने शौहर के आने का इंतजार किया, लेकिन जब वह कई दिनों तक नहीं लौटा, तो सुलेखा आसिफ के फुलवारीशरीफ वाले घर पर पहुंच गई.

पहले तो आसिफ के घर वालों ने उसे जलील किया और चले जाने को कहा. जब वह आसिफ से मिलने और उस के ही घर में रहने की जिद पर अड़ी रही, तो लड़के के भाई ने उसे अपने दोस्त के मकान में किराए पर रहने का इंतजाम करा दिया.

सुलेखा ने बताया कि उस के बाद उसे यह कह कर जलील किया जाता था कि उस ने सही तरीके से इसलाम नहीं अपनाया है. अच्छी तरह से सीखने के लिए उसे एक मदरसे में रख दिया गया. वहां भी उस के साथ बदसलूकी की गई. जब वह पेट से हुई, तो जबरन उस का बच्चा गिरा दिया गया.

14 जून, 2016 को अदालत में सुलेखा का बयान दर्ज कराया गया. आसिफ और उस के दोस्तों के खिलाफ किसी के धर्म को ठेस पहुंचाने के लिए धारा 295/ए, पेट गिराने के लिए धारा 313, मारपीट के लिए धारा 323, बंधक बनाने के लिए धारा 344, बलात्कार के लिए धारा 376, नशा कराने के लिए धारा 328, हत्या करने की धमकी देने के लिए धारा 387, धोखाधड़ी करने के लिए धारा 420, धोखे से शादी करने के लिए धारा 496 और धमकी देने के लिए धारा 506 के तहत केस दर्ज किया गया है.

तारतार यह फेसबुकिया प्यार

बिहार के भागलपुर शहर की रहने वाली सीमा (बदला हुआ नाम) बनारस के चेतगंज के इंटर कालेज में पढ़ती थी. पढ़ाई के दौरान ही फेसबुक के जरीए उस की दोस्ती रोहित नाम के लड़के से हुई. वह बनारस के धोरौया थाने के लोहरिया गांव का रहने वाला था.

फेसबुक के जरीए ही रोहित ने सीमा को बताया कि वह ‘मनमोहिनी’ नाम की फिल्म बना रहा है. उस ने सीमा को अपनी फिल्म में हीरोइन बनने का लालच दिया. इस के बाद उन दोनों के बीच चैटिंग शुरू हो गई.

जब वे दोनों चैटिंग के जरीए गहरे दोस्त बन गए, तो एक दिन सीमा रोहित से मिलने पहुंच गई. रोहित ने स्क्रीन टैस्ट के बहाने उस के जिस्म को खूब सहलाया और उस से लिपटने की कोशिश की.

सीमा को उस की हरकत पसंद नहीं आई और वह वहां से जाने लगी. रोहित ने उसे समझाया कि फिल्मों में काम करने के लिए बहुतकुछ करना पड़ता है और बहुतकुछ सहना भी पड़ता है. इस के बाद रोहित ने उस से कहा कि पटना में शूटिंग होनी है, इसलिए वह पटना में उस से मिले.

पटना पहुंचने से पहले सीमा ने रोहित से फोन पर बात की और ठहरने का ठिकाना पूछा. रोहित ने उसे एक होटल का पता बताया. पटना पहुंच कर सीमा उसी होटल में ठहरी.

सीमा को यह पता नहीं चला कि कब उसे गहरी नींद लग गई. कुछ देर बाद रोहित उस के कमरे में पहुंचा और उस के जिस्म से खेलने लगा. उस ने सीमा के साथ बलात्कार किया और उस की वीडियो फिल्म भी बना ली.

रोहित ने उसे धमकाया कि अगर वह किसी को कुछ बताएगी, तो उस की ब्लू फिल्म इंटरनैट पर डाल दी जाएगी. सीमा रोतेबिलखते बनारस लौट गई.

सीमा की तकलीफों का यहीं खात्मा नहीं हुआ. इस के बाद रोहित फोन कर के बताई हुई जगह पर आने के लिए उस पर दबाव बनाने लगा.

सीमा ने उस की बात नहीं मानी, तो उस ने उस के साथ बलात्कार के वीडियो को इंटरनैट पर डाल दिया. रोहित ने सीमा को इस बारे में बता भी दिया.

सीमा ने तुरंत चेतनगंज थाने में रोहित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी. पुलिस ने रोहित को वाराणसी कैंट स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया. अब रोहित जेल की हवा खा रहा है और पुलिस उस के पुराने रिकौर्ड को खंगालने में लगी हुई है. Patna News

UP News : दूसरी औरत के जाल में फंसा इदरीस

UP News : मुरादाबाद से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा कांठ के मोहल्ला पट्टीवाला के रहने वाले कारोबारी इदरीस 11 जनवरी, 2018 को गायब हो गए. दरअसल, इदरीस की कांठ में ही कपड़ों की सिलाई की फैक्ट्री है. उन की फैक्ट्री में सिले कपड़े कई शहरों के कारोबारियों को थोक में सप्लाई होते हैं.

11 जनवरी को वह प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों से पेमेंट लेने के लिए घर से निकले थे. जब भी वह पेमेंट के टूर पर जाते तो फोन द्वारा अपने परिवार वालों के संपर्क में रहते थे. घर से निकलने के 2 दिन बाद भी जब उन का कोई फोन नहीं आया तो उन की पत्नी कनीजा ने बड़े बेटे शहनाज से पति को फोन कराया तो इदरीस का फोन स्विच्ड औफ मिला. शहनाज ने अब्बू को कई बार फोन मिलाया, लेकिन हर बार फोन बंद ही मिला. इस पर कनीजा भी परेशान हो गई.

इदरीस की फैक्ट्री के रिकौर्ड में उन सारे कारोबारियों के नामपते व फोन नंबर दर्ज थे, जिन के यहां फैक्ट्री से तैयार माल जाता था. चूंकि इदरीस प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के लिए निकले थे, इसलिए शहनाज ने प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों को फोन कर के अपने अब्बू के बारे में पूछा. कारोबारियों ने शहनाज को बता दिया कि इदरीस उन के पास आए तो थे लेकिन वह 11 जनवरी को ही पेमेंट ले कर चले गए थे. पता चला कि दोनों कारोबारियों ने इदरीस को 5 लाख रुपए दिए थे. यह जानकारी मिलने के बाद इदरीस के घर वाले परेशान हो गए. सभी को चिंता होने लगी.

इदरीस ने जानपहचान वाले सभी लोगों को फोन कर के अपने अब्बू के बारे में पूछा लेकिन उसे उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. तभी कनीजा शहनाज के साथ प्रतापगढ़ पहुंच गईं. वहां के एसपी से मुलाकात कर उन्होंने पति के गायब होने की बात बताई. एसपी ने इदरीस का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया. इस से उस की अंतिम लोकेशन अमरोहा जिले के गांव रायपुर कलां की पाई गई. यह गांव अमरोहा देहात थाने के अंतर्गत आता है. प्रतापगढ़ पुलिस ने उन्हें अमरोहा देहात थाने में संपर्क करने की सलाह दी.

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30 जनवरी, 2018 को शहजाद और कनीजा थाना अमरोहा देहात पहुंचे. उन्होंने इदरीस के गुम होने की जानकारी थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह को दी. थानाप्रभारी ने शहनाज की तरफ से उस के पिता की गुमशुदगी दर्ज कर ली. शहनाज ने शक जताया कि उस के घर के सामने रहने वाली फरीदा और उस के पति आरिफ ने ही उस के पिता को कहीं गायब किया होगा.

रहस्य से उठा परदा

मामला एक कारोबारी के गायब होने का था, इसलिए थानाप्रभारी ने सूचना एसपी सुधीर यादव को दे दी. एसपी सुधीर यादव ने सीओ मोनिका यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की. टीम में थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह, एसआई सुनील मलिक, डी.पी. सिंह, महिला एसआई संदीपा चौधरी, कांस्टेबल सुखविंदर, ब्रजपाल सिंह आदि को शामिल किया गया. पुलिस ने सब से पहले इदरीस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि इदरीस के घर के सामने रहने वाली फरीदा ने 13 जनवरी को इदरीस के मोबाइल पर 50 बार काल की थी. शहनाज ने भी फरीदा और उस के पति पर शक जताया था, इसलिए पुलिस को भी फरीदा पर शक हो गया.

पुलिस ने फरीदा और उस के पति आरिफ को पूछताछ के लिए उठा लिया. उन दोनों से पुलिस ने इदरीस के बारे में सख्ती से पूछताछ की. पुलिस की सख्ती के आगे फरीदा और उस के पति ने स्वीकार कर लिया कि उन्होंने शहजाद की हत्या कर उस की लाश बशीरा के आम के बाग में दफन कर दी है.

थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने इदरीस का कत्ल हो जाने वाली बात एसपी को बता दी. यह जानकारी पा कर एसपी सुधीर कुमार थाना अमरोहा देहात पहुंच गए. उन की मौजूदगी में थानाप्रभारी ने अभियुक्तों को रायपुर कलां निवासी बशीरा के आम के बाग में ले जा कर खुदाई कराई तो इदरीस की लाश करीब 5 फीट नीचे दबी मिली.

पुलिस ने वह लाश अपने कब्जे में ले ली. जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने इदरीस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. फरीदा और आरिफ ने पूछताछ के दौरान इदरीस की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों पर आधारित निकली—

इदरीस की कांठ में ही कपड़ों की सिलाई करने की फैक्ट्री थी. उस की फैक्ट्री में फरीदा नाम की महिला भी सिलाई करती थी. वह इदरीस के घर के सामने ही रहती थी. उस का पति साइकिल मरम्मत करता था. अन्य कारीगरों के मुकाबले इदरीस फातिमा का बहुत खयाल रखता था. इतना ही नहीं, वह अन्य कारीगरों से उसे ज्यादा पेमेंट करता था. इस मेहरबानी की वजह यह थी कि इदरीस फरीदा को चाहने लगा था. इदरीस की कोशिश रंग लाई और उस के फरीदा से प्रेम संबंध बन गए.

इदरीस और फरीदा दोनों ही बालबच्चेदार थे, जहां इदरीस के 5 बच्चे थे, वहीं फरीदा भी 2 बच्चों की मां थी. करीब डेढ़ साल से दोनों के नाजायज संबंध चले आ रहे थे. इसी दौरान फरीदा एक और बेटे की मां बन गई. इदरीस फरीदा के छोटे बेटे को अपना बेटा बताता था, इसलिए वह उस का कुछ खास ही खयाल रखता था. इदरीस फरीदा को बहुत चाहता था. वह चाहता था कि फरीदा जिंदगी भर के लिए उस के साथ रहे, इसलिए वह फरीदा पर निकाह करने का दबाव बना रहा था.

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समझाने पर भी नहीं माने फरीदा और इदरीस

उधर इदरीस और फरीदा के प्रेमसंबंधों की जानकारी पूरे मोहल्ले को थी. फरीदा के पति आरिफ ने भी फरीदा को बहुत समझाया कि उस की वजह से परिवार की मोहल्ले में बदनामी हो रही है. वह इदरीस से मिलना बंद कर दे. उधर इदरीस के पिता बाबू ने भी इदरीस को समझाया कि वह क्यों अपनी घरगृहस्थी और कारोबार को बरबाद करने पर तुला है. फरीदा को भूल कर वह अपने परिवार पर ध्यान दे.

लेकिन इदरीस फरीदा के प्रेमजाल में ऐसा फंसा था कि उसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. उस के सिर पर एक ही धुन सवार थी कि फरीदा अपने पति को तलाक दे कर उस के साथ निकाह कर ले. वह यही दबाव फरीदा पर लगातार बना रहा था, पर फरीदा ऐसा करने को मना कर रही थी. वह कह रही थी कि जैसा चला आ रहा है, वैसा ही चलता रहने दे.

घटना के करीब 15 दिन पहले जब रात में फरीदा के पास इदरीस का फोन आया तो फोन की घंटी बजने से आरिफ की नींद खुल गई. फरीदा लिहाफ के अंदर ही इदरीस से बातें करने लगी. किसीकिसी फोन के स्पीकर की आवाज इतनी तेज होती है कि पास का आदमी भी बातचीत सुन सकता है. फरीदा के पास भी ऐसा ही फोन था. वह अपने प्रेमी इदरीस से जो भी बात कर रही थी, वह आरिफ भी सुन रहा था. इदरीस उस से कह रहा था कि वह अपने पति आरिफ को ठिकाने लगवा दे. इस काम में वह उस की पूरी मदद करेगा. उस के बाद हम दोनों निकाह कर लेंगे.

अपनी हत्या की बात सुन कर आरिफ के होश उड़ गए. उस ने उस समय पत्नी से कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा. सुबह होते ही आरिफ ने इस बारे में पत्नी से बात की. वह झूठ बोलने लगी. इस बात पर दोनों के बीच नोकझोंक भी हुई. इस के बाद आरिफ ने फरीदा को विश्वास में लिया और घरगृहस्थी का वास्ता दे कर कहा, ‘‘देखो फरीदा, इदरीस कितना गिरा हुआ आदमी है, वह मेरी हत्या कराने पर तुला है. अपने स्वार्थ में वह तुम्हारी भी हत्या करवा सकता है. तुम खुद सोच लो कि अब क्या चाहती हो. यहां रहोगी या उस के साथ?’’

फरीदा ने अपने बच्चों का वास्ता दे कर आरिफ से कहा, ‘‘मैं इसी घर में तुम्हारे और बच्चों के साथ रहूंगी. उस के साथ नहीं जाऊंगी.’’

बन गई कत्ल की भूमिका

आरिफ ने सोचा कि आज नहीं तो कल इदरीस उस के लिए नुकसानदायक साबित होगा, इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह इदरीस को सबक सिखाएगा. इस काम में उस ने पत्नी फरीदा को भी मिला लिया. फरीदा ने पति को यह भी बता दिया कि इदरीस पार्टियों से पेमेंट लेने के लिए प्रतापगढ़ और सुलतानपुर गया हुआ है. इस पर आरिफ ने उस से कहा कि किसी बहाने से उसे बुला लो तो बाकी का काम वह कर देगा.

आरिफ के साले फरियाद को यह पता था कि इदरीस की वजह से उस की बहन के घर में तनाव रहता है, इसलिए आरिफ के कहने पर फरियाद भी इदरीस की हत्या के षडयंत्र में शामिल हो गया. उधर प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों से करीब 5 लाख रुपए का कलेक्शन कर के इदरीस 13 जनवरी को कांठ लौट रहा था. सफर में उस ने अपना फोन साइलेंट मोड पर लगा लिया था. फरीदा ने इदरीस से बात करने के लिए फोन किया पर इदरीस को इस का पता नहीं चला. फरीदा उसे लगातार फोन कर रही थी.

कांठ पहुंचने पर इदरीस ने जैसे ही अपना फोन देखा तो प्रेमिका की 50 मिस्ड काल देख कर चौंक गया. उसे लगा कि पता नहीं क्या बात है जो उस ने इतनी बार फोन मिलाया. इदरीस ने फरीदा को फोन कर के कहा, ‘‘फरीदा, मेरा फोन साइलेंट मोड पर था, इसलिए तुम्हारी काल के बारे में पता नहीं लगा. बताओ, क्या बात है?’’

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‘‘मैं ने तय कर लिया है कि मैं आरिफ को तलाक दे कर तुम से निकाह करूंगी. इसी बारे में तुम से बात करना चाह रही थी.’’ फरीदा बोली, ‘‘मैं चाहती हूं कि तुम अभी कांठ बसअड्डे पर आ जाओ, वहीं पर हम बात कर लेंगे.’’

प्रेमिका के मुंह से अपने मन की बात सुन कर इदरीस खुश हो गया. उस ने कहा, ‘‘फरीदा, मैं कुछ देर में ही वहां पहुंच रहा हूं. तुम भी जल्द पहुंच जाना.’’

‘‘ठीक है, तुम आ जाओ, मैं वहीं मिलूंगी.’’ फरीदा बोली.

इदरीस थोड़ी देर में बसअड्डे पर पहुंच गया. फरीदा अपने पति के साथ वहां पहले से ही मौजूद थी. औपचारिक बातचीत के बाद फरीदा ने कहा, ‘‘रायपुर खास गांव में मेरे भाई के यहां खाने का इंतजाम है. वहां चलते हैं, वहीं बातचीत हो जाएगी.’’

इदरीस खानेपीने का शौकीन था. उस समय भी वह शराब पिए हुए था, इसलिए फरीदा के साथ रायपुर खास गांव जाने के लिए तैयार हो गया. जब वह वहां पहुंचा तो फरीदा के भाई फरियाद ने इदरीस का गर्मजोशी से स्वागत किया. उस ने चिकन बना रखा था. कुछ देर बातचीत के बाद फरियाद ने उस से खाना खाने को कहा तो शराब के शौकीन इदरीस ने शराब पीने की इच्छा जताई. इस पर फरियाद ने कहा कि यह सब घर पर संभव नहीं है. पीनी है तो कांठ बसअड्डे पर ठेका है, वहीं पर पी लेंगे.

इदरीस को मिली मौत की दावत

इदरीस बसअड्डे पर जाने के लिए तैयार हो गया. इदरीस और आरिफ फरियाद की मोटरसाइकिल पर बैठ कर कांठ बसअड्डे पहुंच गए. इदरीस ने पैसे दे कर एक बोतल रम मंगा ली. फरियाद एक बोतल रम और पकौड़े ले आया तो आरिफ बोला, ‘‘चलो, बाग में बैठ कर पिएंगे. उस के बाद खाना खाएंगे. वहीं बात भी हो जाएगी.’’

शराब की बोतल और पकौड़े ले कर तीनों मोटरसाइकिल से आम के बाग में पहुंच गए. बाग में बैठ कर तीनों ने शराब पी. योजना के अनुसार आरिफ व फरियाद ने कम पी और इदरीस को कुछ ज्यादा ही पिला दी थी. इदरीस जब ज्यादा नशे में हो गया तो आरिफ इदरीस से बोला, ‘‘देखो इदरीस भाई, तुम पैसे वाले हो. मैं छोटा सा एक साइकिल मैकेनिक हूं. मेरी तुम्हारी क्या बराबरी. तुम यह बताओ कि मेरा घर क्यों बरबाद कर रहे हो. तुम्हारी वजह से वैसे भी मोहल्ले में मेरी बहुत बदनामी हो गई है. अब तो पीछा छोड़ दो.’’

‘‘देखो आरिफ, तुम एक बात ध्यान से सुन लो. मैं फरीदा से बहुत प्यार करता हूं. अब फरीदा मेरी है. उसे मुझ से कोई भी अलग नहीं कर सकता. तुम्हें यह भी बताए देता हूं कि उस का जो 5 महीने का बच्चा है, वह मेरा ही है.’’

आरिफ भी नशे में था. यह सुनते ही उस का और फरियाद का खून खौल उठा. दोनों ने उस से कहा कि लगता है तू ऐसे नहीं मानेगा. इस के बाद दोनों ने इदरीस के गले में पड़े मफलर से उस का गला घोंट दिया, जिस से उस की मौत हो गई. इदरीस की हत्या करने के बाद उन्होंने उस की लाश मोटरसाइकिल से बाग के बीचोबीच ले जा कर डाल दी. तलाशी लेने पर इदरीस की जेब से 5 लाख रुपए और एक मोबाइल फोन मिला. दोनों ही चीजें उन्होंने निकाल लीं.

उस के बाद फरियाद घर से फावड़ा ले आया. आरिफ और फरियाद ने करीब 5 फुट गहरा गड्ढा खोद कर इदरीस की लाश दफन कर दी. लाश ठिकाने लगा कर वे अपने घर लौट गए. इदरीस की जेब से मिले पैसे दोनों ने आपस में बांट लिए. पुलिस ने फरीदा, उस के पति आरिफ के बाद फरियाद को भी गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर पुलिस ने 70 हजार रुपए, इदरीस का मोबाइल फोन और फावड़ा बरामद कर लिया.

पुलिस ने 11 फरवरी, 2018 को तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक तीनों अभियुक्त जेल में बंद थे. UP News

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime News : प्यार की वो आखिरी रात

UP Crime News :  25 मई, 2022 की रात करीब 3-साढ़े 3 बजे प्रयागराज में यमुनापार इलाके के चकहीरानंद मोहल्ले में पुलिस की कई गाडि़यां हूटर बजाते हुए एक के बाद एक देखते ही देखते प्रवेश करती गईं. गरमी की उमस से बेहाल मोहल्ले वालों को सुबह में गरमी से थोड़ी राहत मिली थी. सभी सोने का प्रयास कर रहे थे कि हूटर बजाती गाडि़यों से लोगों की नींद टूट गई. सभी गाडि़यां सुनील मिश्रा के घर के पास कर रुक गईं.

लोगों की नींद में खलल पड़ चुकी थी. सभी आश्चर्यचकित थे. अचरज से अपनेअपने मकानों की छतों पर खड़े हो कर एकदूसरे से आंखों ही आंखों में इशारे से मानो पूछ रहे हों, ‘‘आखिर इतनी सुबह भारी पुलिस फोर्स हमारे मोहल्ले में क्यों आई है? क्या कोई आतंकी सुनील मिश्रा के मकान में घुसा है? आखिर माजरा क्या है? अभी तो रात के 3-साढ़े 3 बजे हैं. लेकिन इतनी रात पुलिस की दस्तक क्यों?’’

इस तरह के तमाम विचार चकहीरानंद मोहल्ले में रहने वालों के मन में उमड़घुमड़ रहे थे. चूंकि इस समय गंगापार के हालात सही नहीं चल रहे थे. सामूहिक हत्याओं, नरसंहार से पूरा प्रयागराज जिला थर्रा उठा था, सो मोहल्ले वालों का यह सोचना लाजिमी था. बहरहाल, कुछ देर में ही इस सवाल का जवाब भी मिल गया. खुद सुनील मिश्रा ने पहले पुलिस की हेल्पलाइन नंबर 112 पर डायल कर के सूचना दी थी कि उस के घर में चोर घुस आया है, जिसे उस की बेटी अमायरा ने गोली मार दी है और मौके पर ही उस की मौत हो गई है. बेटी अमायरा भी बुरी तरह से घायल फर्श पर पड़ी तड़प रही है.

यह सूचना मिलते ही आननफानन में पुलिस नैनी थानाक्षेत्र में स्थित घटनास्थल पर पहुंची थी. जब पुलिस के जवानों ने सुनील मिश्रा के मकान में प्रवेश किया तो घटनास्थल का सीन देख कर सब सन्न रह गए.
छत की सीढि़यों के नीचे स्लैब पर सुनील मिश्रा की बेटी अमायरा घायल अवस्था में पड़ी तड़प रही थी. उस के हाथ और पेट में गोली लगी थी. रिवौल्वर भी उस की हथेली में था. छत पर 22-23 साल के एक नौजवान की लाश पड़ी थी. पुलिस अफसरों को देखते ही मकान मालिक सुनील मिश्रा और उस के घर के सदस्य गला फाड़फाड़ कर रोने लगे.

एसएसपी अजय कुमार एसपी सौरभ दीक्षित ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. बहरहाल, घटनास्थल का क्राइम सीन कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा था और सुनील मिश्रा का कथन कुछ और. फिलहाल प्रारंभिक काररवाई करते हुए सुनील मिश्रा की घायल बेटी मृत युवक, जिस का नाम अरनव था, की डैडबौडी को फौरन जिला अस्पताल एसआरएन पहुंचाया गया. क्योंकि अमायरा की जान खतरे में थी और वह बुरी तरह से पेट पकड़ कर फर्श पर तड़प रही थी. एक गोली उस की हथेली में लगी थी तो दूसरी उस के पेट में फंसी हुई थी. अरनव की डैडबौडी का पोस्टमार्टम होना जरूरी था और अमायरा का प्राथमिक उपचार.

अब तक घटना की सूचना पा कर अरनव के परिजन भी चुके थे. जवान बेटे की लाश को जब पुलिस वाले पोस्टमार्टम के लिए भेज रहे थे तो उस के मातापिता, भाईबहन का रोरो कर बुरा हाल था. अरनव का घर सुनील मिश्रा के मकान से महज एक किलोमीटर की दूरी पर था. उपरोक्त घटना की सूचना जंगल की आग की तरह पूरे नैनी क्षेत्र और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे शहर में फैल चुकी थी. खैर, आगे की काररवाई करते हुए सब से पहले पुलिस को सूचना देने वाले अमायरा के पिता सुनील मिश्रा को ही थाने ला कर पूछताछ शुरू की गई.

सुनील मिश्रा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. वह फूटफूट कर अधिकारियों के सामने बस रोए जा रहा था. उसे ढांढस बंधाते हुए एसएसपी अजय कुमार ने कहा, ‘‘देखिए मिश्राजी, इस तरह रोनेधोने से काम नहीं चलेगा. आप की बेटी को गोली लगी है और वह जीवनमौत के बीच संघर्ष कर रही है. ईश्वर ने चाहा तो उस की जिंदगी बच जाएगी और सच्चाई भी सामने जाएगी.

‘‘पहले हमें आप यह बताइए कि आप ने क्या देखा था मृतक युवक कौन है? क्योंकि आप ही ने सब से पहले इस वारदात की सूचना पुलिस को मोबाइल से दी थी, इसलिए आप ने जो कुछ भी देखा हो उसे बता दीजिए ताकि हम अपराधियों तक पहुंच सकें.’’

अधिकारियों की बात सुन कर सुनील मिश्रा थोड़ा शांत हुआ और बोला, ‘‘साहब, मुझे नहीं मालूम कि मृत कौन है? यह किस का बेटा है और कहां का रहने वाला है. मेरे खयाल से यह लड़का चोरीचकारी की नीयत से मेरे घर में घुसा होगा, जिसे मेरी बेटी ने देख लिया होगा. वह किसी घटना को अंजाम देने में कामयाब हो पाता उस से पहले बेटी अमायरा ने मेरी रिवौल्वर से उस पर फायर कर दिया होगा. अपने बचाव के लिए मरने से पहले उस ने अमायरा से रिवौल्वर छीन कर उसे भी गोली मार दी.

‘‘उमस बहुत ज्यादा हो रही थी. मैं पानी पीने के लिए उठा था और गरमी से राहत के लिए ऊपर एसी वाले कमरे में जा रहा था, जहां घर के बाकी सदस्य सो रहे थे. तभी मैं ने देखा कि मेरी बेटी खून से लथपथ पड़ी फर्श पर तड़प रही थी. मैं भागते हुए छत पर गया तो देखा उस लड़के की लाश पड़ी थी. उस लड़के को मैं नहीं जानता. उसे मोहल्ले में भी कभी नहीं देखा.’’

पुलिस के लिए बड़ा ही दिलचस्प और संगीन मामला था. एसएसपी की दूरदृष्टि और पुलिसिया नजरिया कुछ और ही कह रही थी तथा सुनील मिश्रा का बयान कुछ और. कारण, अगर सुनील की बातों पर यकीन कर भी लिया जाए तो उस की बेटी अमायरा ने पहले ही किसी भी नीयत से उस के मकान में दाखिल युवक को अपने पिता की रिवौल्वर से जान से मार डाला था तो फिर उस के बाद अपने पेट और हथेली पर गोली मारने की क्या जरूरत थी. अब कातिल उन की निगाहों के सामने था, जो पूरे घटनाक्रम को छिपाने की साजिश बड़ी ही होशियारी से कर रहा था.

उस के परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की गई. सभी का कहना था कि उस समय सब लोग गहरी नींद में थे. फायरिंग सुनील मिश्रा की चीखपुकार सुन कर जागे थे.
सुनील मिश्रा से अधिकारियों ने दोबारा घुमाफिरा कर सवालों की झड़ी लगा दी तो वह पुलिस के सामने टूट गया और फूटफूट कर रोने लगा. भर्राए गले से बताया कि वह युवक उस की बेटी का प्रेमी अरनव है. उस की हत्या का जुर्म और बेटी पर गोली चलाने की बात सुनील मिश्रा ने स्वीकार कर ली.
शर्म और ग्लानि से भरे सुनील मिश्रा ने औनर किलिंग की जो कहानी पुलिस अधिकारियों को सुनाई, वह इस प्रकार निकली.

पेशे से ढाबा चलाने वाला सुनील मिश्रा अधिकतर घर से बाहर ही रहता था. उस का घूरपुर रोड परमिश्रा फैमिली रेस्टोरेंट ढाबाहै. परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और एक बेटी अमायरा. सुनील का अपने घर चकहीरानंद में महीने में एक बार ही आना होता था.

कथा में आगे बढ़ने से पहले अरनव के परिवार के बारे में संक्षिप्त जानकारी जरूरी है.

असमय ही प्रेम में फना हुए अरनव के पिता सत्यप्रकाश एलआईसी एजेंट हैं. पत्नी संध्या के अलावा 2 बेटे अरनव और विकास (बदला हुआ नाम) थे, जिन में अरनव की मौत हो चुकी है.
अरनव सिंह इस साल 12वीं कक्षा में नैनी के महर्षि विद्या मंदिर इंटर कालेज रामनगर में पढ़ता था. उस का घर पीएसी कालोनी स्थित नैनी क्षेत्र में है. अरनव के पिता मूलरूप से सुलतानपुर जिले के रहने वाले हैं. वह काफी सालों से इलाहाबाद यमुनापार इलाके में पूरे परिवार के साथ रह रहे थे.

दोनों के परिवार वाले अमायरा और अरनव की प्रेम कहानी से अनभिज्ञ थे. अरनव और अमायरा दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे. किताबों के लेनदेन से उन का प्रेम परवान चढ़ा था. जिस के चलते अरनव को अपने प्राण गंवाने पड़े. सुनील मिश्रा का समय अकसर परिवार से दूर बाहर ही बीतता था. परिवार के भरणपोषण के लिए ढाबा चलाता था. काफी दिनों के बाद वह एक दिन पहले ही अपने घर आया था.
रात को मंगलवार का व्रत खोलने के बाद वह पत्नी के साथ बिना एसी वाले कमरे में सो रहा था. बच्चे एसी वाले कमरे में थे. उस रात गरमी बहुत ज्यादा थी.

गरमी से बेहाल पतिपत्नी एसी वाले कमरे में सोने के लिए गए तो देखा सभी बच्चे तो कमरे में सो रहे थे लेकिन अमायरा वहां नहीं थी. आखिर कहां गई होगी वह? सुनील बस यही सोच रहा था कि उसी समय कुछ खटपट की आवाज सुनाई दी.

बदहवास हालत में अमायरा कमरे में आई. उस की मां ने पूछा तो उस ने जवाब दिया कि पेट में हलका दर्द हो रहा है. इतना कहने के बाद वह फिर से पानी पीने जाने की बात कह कर कमरे से बाहर निकली.
अब तक सुनील मिश्रा को अमायरा पर शक हो चला था. आखिर वह उस का बाप था. जमाने के रंगढंग देख रहा था. उस ने एक बात गौर की थी, जब पतिपत्नी बच्चों के कमरे में सोने गए थे तो उस समय बेटी सीढि़यों से उतर कर कमरे में आई थी. आखिर इतनी रात गए वह छत पर क्या कर रही थी?

यह सवाल उस के जहन में बारबार घूम रही थी. जब वह पानी पीने का बहाना कर के कमरे से दोबारा निकली तो उस का रुख फिर से छत की ओर था. सुनील मिश्रा भी उस के पीछेपीछे छत की तरफ बढ़ा.
अमायरा को पिता के पीछेपीछे आने का अहसास हुआ तो उस ने पैर पकड़ लिए, ‘‘पापा, कहां जा रहे हैं?’’
उस समय वह बेहद घबराई हुई थी.

‘‘पर कोई नहीं है. चलिए, चल कर सोते हैं. आप थकेमांदे इतने दिनों बाद आए हैं चलिए कमरे में.’’

सुनील मिश्रा ने रोते हुए बताया, ‘‘साहब, मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटी जिसे मैं बहुत प्यार करता था, वह मेरी इज्जत खाक में मिला देगी. हकीकत तो यह है कि जब वह छत पर गई तो कुछ देर बाद मैं भी दबेपांव वहां गया. वह अपने प्रेमी के साथ आलिंगनबद्ध थी.

‘‘मुझे सारा माजरा समझ गया. क्योंकि मैं ने उसे रंगेहाथों आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. मैं वह सीन देख करअब क्या बताऊं एक जवान बेटी का पिता क्या कर सकता है. अपनी बेटी को आपत्तिजनक अवस्था में देख कर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं.

‘‘मेरा शरीर गुस्से से थरथर कांपने लगा. खून खौल उठा था मेरा. मैं नीचे कमरे में आया और अपनी रिवौल्वर उठा ली. अमायरा ने मुझे रोकने की बहुत कोशिश की. लेकिन मैं उसे धकियाते हुए छत पर पहुंचा तो देखा वह लड़का छत पर उकड़ूं बैठा हुआ था.

‘‘मैं ने क्रोध में कर उस पर रिवौल्वर तानी तो बेटी ने फिर मेरे पैर पकड़ लिए. उस ने अरनव के जान की भीख मांगी तो मुझे और भी ज्यादा गुस्सा गया. गुस्से में मैं ने पहली गोली अमायरा पर ही चला दी. गोली उस के हाथों को छूते हुए निकल गई. वह गिर पड़ी. उस के बाद उस के प्रेमी अरनव को 2 गोलियां मारीं. फिर घूमा और एक गोली अमायरा पर दोबारा चलाई जो सीधे उस के पेट में जा कर लगी.

‘‘गोली चलने की आवाज से घर वाले भी जाग गए थे. वे बदहवास भागे आए. अब तक मैं ने खुद को भी खत्म करने का निर्णय ले लिया था. मैं ने रिवौल्वर अपनी कनपटी पर सटाई और ट्रिगर दबा दिया लेकिन बुलेट फंस गई. दोबारा ट्रिगर दबाना चाहा तब तक घर वालों ने मुझे पकड़ लिया.’’

बयान देते हुए वह फिर से फूटफूट कर रोने लगा क्योंकि वह अपनी बेटी अमायरा को बेटों से ज्यादा चाहता था. बड़ी मन्नतों से वह पैदा हुई थी. अमायरा सीए बनना चाहती थी, जिस के लिए उस ने कौमर्स विषय चुना था. वह उसे हर खुशी देना चाहता था. उस के सीए बनने के सपने को भी पूरा करना चाहता था. एक ओर जहां सुनील मिश्रा बेटी को बहुत प्यार करता था तो वहीं दूसरी ओर बेटी के पैर बहक गए. वह पिता की

गैरमौजूदगी में अपने प्रेमी अरनव से रोज मिलती थी और उस के मिलन में सहायक थी उस की बुआ की बेटी. वही घर वालों की आंखों में धूल झोंक कर कर दोनों का मिलन करवाती थी. बहरहाल, बेटी के विश्वासघात ने जहां उस के प्रेमी अरनव की जिंदगी छीन ली तो दूसरी ओर पिता का साया और विश्वास भी. अमायरा के नसीब में अब प्रेमी का प्यार है और ही पिता की सरपरस्ती. पुलिस ने कानूनी काररवाई करते हुए रिपोर्ट दर्ज कर सुनील मिश्रा को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है. द्य
कथा में अमायरा परिवर्तित नाम है. UP Crime News