बेवफाई का बदनाम वीडियो : प्रेमी को सिखाया सबक – भाग 1

बात 24 मई, 2021 की है. दोपहर करीब सवा बजे जबलपुर जिले के थाना खितौली की टीआई जगोतिन मसराम के मोबाइल पर किसी ने काल की.

काल करने वाले ने बताया, ‘‘मैडम, मेरा नाम नारायण पटेल है. सिहोरा थाने के गुरजी गांव का रहने वाला हूं. मेरे पिता प्रेमनारायण पटेल के मोबाइल पर किसी ने सूचना दी थी कि पान उमरिया रोड किनारे उस की मोटरसाइकिल पड़ी है. उस के थोड़ी दूरी पर ही एक लाश से दुर्गंध आ रही है. मुझे डर लग रहा है मैडम, क्योंकि मेरा छोटा भाई सोनू 16 मई से ही लापता है.’’

‘‘तुम डरो मत, तुम हरगढ़ जंगल पहुंचो, मैं भी एक घंटे में पहुंच रही हूं.’’ टीआई ने कहा.

टीआई अपनी जांच टीम के साथ साढ़े 3 बजे हरगढ़ जंगल में पहुंच गईं. वास्तव में वहां एक लाश सड़ीगली हालत में मिली. थोड़ी दूर एक बाइक भी गिरी हालत में मिली.

पुलिस टीम के सभी सदस्य कोरोना किट में थे. वहां तेज दुर्गंध भी फैल रही थी. लाश के पास से जूट की करीब एकएक मीटर की 2 रस्सियां, नीले रंग का लोअर, टीशर्ट, बनियान, चमड़े के चप्पल और 2 मास्क बरामद किए.

जांचपड़ताल चल ही रही थी कि तभी नारायण भी भागता हुआ आया, उस ने अपनी मोटरसाइकिल भी पहचान ली. लाश बुरी तरह से सड़गल चुकी थी. चेहरा तो बिलकुल ही पहचान में नहीं आ रहा था.

मांस से बाहर निकली कुछ हड्डियां दिख रही थीं. खून तो सूख कर काला पड़ चुका था. आंखों का पता नहीं चल रहा था. लगता था वे बुरी तरह से कुचल दी गई हों. पास में ही करीब 10-15 किलोग्राम का एक पत्थर दिखा.

उस पर चिपकी मिट्टी का नमूना ले लिया गया. उस पर भी कीड़े चल रहे थे और पास में मक्खियां भिनभिना रही थीं. जांचकर्मियों ने अनुमान लगाया  कि इसी पत्थर से चेहरे को कुचला  गया होगा.

नारायण ने बरामद सामानों में कपड़े और चप्पल के आधार पर चेहरा कुचले जाने के बावजूद लाश की पहचान कर दी, जो उस के छोटे भाई सोनू की ही थी.

सारे कपड़े वही थे, जो उसे शादी में मिले थे. यहां तक कि उन पर लगे हल्दी के दाग भी वैसे के वैसे थे, जिसे नारायण ने ही उन पर मात्र एक सप्ताह पहले लगाए थे दागधब्बे काले जरूर हो गए थे, लेकिन स्वास्तिक का निशान देख कर नारायण ने कपड़े सोनू के होने की पुष्टि कर दी.

थोड़ी देर में ही जबलपुर के एडिशनल एसपी शिवेश सिंह बघेल, एसडीपीओ (सिहोरा) श्रुत कीर्ति सोमवंशी और फोरैंसिक जांच टीम घटनास्थल पर पहुंच गई.

वहां से बरामद सारी सामग्री को जब्त कर मैडिको लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल भेजने के निर्देश दे दिए गए. लाश बड़ी मुश्किल से सील पैक कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई.

टीआई मसराम अपने साथ नारायण को ले कर थाने पहुंचीं. उन्होंने घर वालों को भी थाने बुलवा लिया. शाम 7 बजे के करीब घरवालों में उस के पिता और पत्नी गायत्री से मसराम ने पूछताछ की.

शुरुआती जांच की पूरी रिपोर्ट तैयार कर आगे की जांच और काररवाई के लिए फाइल तैयार कर दी गई. उस में सोनू की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कर ली गई, जिस की तहकीकत जबलपुर जिले के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा के दिशानिर्देश पर की जा जारी थी.

सोनू की गुमशुदगी की शिकायत 17 मई, 2021 को सिहोरा थाने में तुलसीराम के बड़े बेटे नारायण पटेल ने लिखवाई थी.

उस शिकायत के अनुसार सोनू 16 मई, 2021 की सुबह 10 बजे घर से अपनी नवविवाहिता पत्नी का मोबाइल ठीक कराने को कह कर सिहोरा गया था. उस के देर रात तक वापस नहीं लौटने पर रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां फोन कर के पूछताछ की गई, लेकिन जब उस का कोई पता नहीं चला, तब थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज की गई.

सोनू की 4 दिन पहले ही 12 मई, 2021 को कटनी जिले में बहोरीबंद थानांतर्गत बासन गांव की गायत्री के साथ शादी हुई थी.

इस बारे में पुलिस ने गायत्री से पूछताछ की तो गायत्री ने पुलिस को बताया कि पति के शाम तक वापस नहीं आने पर उस ने पति के मोबाइल पर काल की थी, लेकिन फोन आउट औफ कवरेज बताया गया था.

उसे लगा कि वह रात तक वापस आ जाएंगे, लेकिन नहीं आए. उन के न आने पर मन कई तरह की आशंकाओं से घिर गया और फिर उस ने ही अगले दिन सुबह नारायण को गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने के लिए कहा.

जांच और दूसरे किस्म की तहकीकात से यह साफ हो गया था कि बरामद लाश सोनू की ही थी, लेकिन अहम सवाल उस की मौत को ले कर बना हुआ था. पहला और ठोस कारण हत्या का ही सामने आ रहा था.

यानी हत्या हुई थी तो क्यों और कैसे के सवालों के जवाब तलाशने बाकी थे. साथ ही जल्द से जल्द हत्यारे तक पहुंचने और उसे सजा दिलवानी भी जरूरी थी. 10 दिन बाद ही मैडिको लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल की रिपोर्ट भी आ गई थी. उस रिपोर्ट ने पुलिस को हैरत में डाल दिया.

रिपोर्ट के अनुसार मृतक के गले में जूट की एक पतली रस्सी भी लिपटी थी, जो भीतर की ओर धंस गई थी. इस आधार पर ही उस की मौत को पहले आत्महत्या कहा गया था.

हालांकि उस के दोनों हाथों की कलाइयां और पैरों को घुटने के ठीक ऊपर रस्सियों से बांधने के निशान पाए गए थे. ये सबूत सोनू की हत्या की ओर इशारा कर रहे थे, जिस में एक से अधिक व्यक्ति के शामिल होने की भी बात कही गई थी.

अब पुलिस के सामने सवाल था कि कोई एक व्यक्ति कैसे एक हष्टपुष्ठ नौजवान की रस्सियों से गला घोंट कर हत्या कर सकता है? किस तरह से उसने उस के हाथ और पैर बांधे होंगे?

इस मामले को खितौला पुलिस थाने में 10 जून को दर्ज किया गया. सिहोरा तहसील के एसडीपीओ की कमान संभाले 2018 बैच के आईपीएस श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने इसे गंभीरता से लिया.

उन्होंने सोनू के मोबाइल काल की पूरी डिटेल्स निकलवाई. उस में पता चला कि सोनू के मोबाइल नंबर से 16 मई को किसी मधु पटेल नाम की लड़की से 4-5 बार बात हुई थी.

ख्वाहिश का अंत : क्या हुआ था वी.जे. चित्रा के साथ

अगर कोई नामचीन एक्टर अपनी अदाकारी छोड़ दे तो उस का महत्त्व खुदबखुद खत्म हो जाएगा. उस की एक्टिंग ही तो उसे सितारा बनाती है. एक्टिंग छोड़ कर उस की महत्त्वाकांक्षाओं का क्या होगा, वह तो जिंदा रह कर भी मर जाएगा. उस के जीने का मकसद ही खत्म हो जाएगा.

शायद ऐसा ही कुछ दक्षिण भारत की सुप्रसिद्ध टीवी स्टार और एंकर वी.जे. चित्रा के साथ भी था, जो उस ने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया. होटल के कमरे में उन का शव पंखे से लटकता हुआ पाया गया.

9 दिसंबर, 2020 की सुबह के करीब 4 बजे थे. चेन्नै के नाजरथपेठ स्थित एक अस्पताल में कुछ लोग एक महिला को ले कर गए. डाक्टरों ने उस महिला का परीक्षण किया तो वह मृत पाई गई. जो लोग उस महिला को अस्पताल लाए थे, उन्होंने डाक्टरों को बताया कि वह टीवी स्टार वी.जे. चित्रा है. इस ने होटल के कमरे में फांसी लगा ली थी. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए अस्पताल की तरफ से इस की खबर थाने में दे दी गई.

अस्पताल नाजरथपेठ थाने से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए सूचना के 10 मिनट बाद ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंच गई.

मृतका एक हाईप्रोफाइल टीवी स्टार और एंकर थी. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया तो उस के गले पर हलके काले रंग का निशान मिला. डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि इन की मौत शायद फंदे से लटक कर दम घुटने की वजह से हुई है.

शव का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने अस्पताल में ही मौजूद मृतका के मंगेतर हेमंत रवि से पूछताछ की.

हेमंत रवि ने बताया  कि कल रात करीब ढाई बजे चित्रा चेन्नै के ईवीपी फिल्म सिटी से शूटिंग खत्म कर उस के साथ लौटी थी. होटल के कमरे में आने के बाद चित्रा कुछ मिनटों बाद नहाने के लिए बाथरूम चली गई थी.

उस के बाथरूम जाने के बाद वह भी अपना समय व्यतीत करने के लिए होटल के कमरे से बाहर निकल गया था. लगभग आधा घंटे बाद जब वह होटल के कमरे में आया तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. कई बार कमरे का दरवाजा खटखटाने और कालबैल बजाने के बाद जब दरवाजा नहीं खुला और अंदर कोई आहट भी नहीं हुई तो वह घबरा गया.

किसी अनहोनी की आशंका से वह भाग कर होटल की लौबी में गया और होटल मैनेजर को सारी बात बताई. होटल मैनेजर भी उस की बातें सुन कर परेशान हो गया. वह कुछ कर्मचारियों के साथ तुरंत होटल के कमरे पर पहुंचा. जब मैनेजर ने डुप्लीकेट चाबी से कमरे का दरवाजा खोला तो कमरे के अंदर का दृश्य देख कर उस के होश उड़ गए. चित्रा पंखे से लटकी हुई थी.

किसी करिश्मे की उम्मीद से उस ने होटल कर्मचारियों के सहयोग से पंखे से लटकी चित्रा को नीचे उतारा और स्थानीय अस्पताल ले गया. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.

हेमंत रवि से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने शव का पुन: निरीक्षण किया और साथ आए पति का सरसरी तौर पर बयान ले कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल को सौंप दिया और सीधे घटनास्थल पर आ गई.

घटनास्थल चेन्नै नाजरथपेठ इलाके का एक जानामाना फाइवस्टार होटल था. उस होटल में इस प्रकार की यह पहली घटना थी, जिसे ले कर होटल का मैनेजमेंट काफी परेशान था.

इस होटल में अपने कारोबार के सिलसिले में शहर के संपन्न लोग ही आ कर ठहरते थे. टीवी स्टार और एंकर वी.जे. चित्रा भी एक टीवी सीरियल की शूटिंग के बाद अपने मंगेतर हेमंत रवि के साथ आ कर वहां ठहरी थी.

पुलिस ने होटल के कमरे का बारीकी से निरीक्षण कर होटल के स्टाफ से पूछताछ की और मामले की सारी औपचारिकताएं पूरी कीं.

मशहूर अभिनेत्री और एंकर चित्रा ने कदमकदम पर कामयाबी की सीढि़यां चढ़ कर बहुत कम समय में लाखों लोगों के दिलों में अपनी एक खास जगह बना ली थी. पता नहीं क्यों वह दुनिया को छोड़ कर अलविदा कह गई थी.

सुबह जैसे ही टीवी और अखबारों में अभिनेत्री वी.जे. चित्रा की मौत की खबर सामने आई, चेन्नै के साथ पूरे दक्षिण भारत में आग की तरह फैल गई. वी.जे. चित्रा के अनगिनत चाहने वालों को गहरा सदमा लगा. लोग समझ नहीं पा रहे थे कि चित्रा ने खुदकुशी की थी या फिर उस की हत्या की गई थी.

यही सवाल पुलिस के लिए भी पहेली बना हुआ था. पुलिस भी मृतका के मंगेतर हेमंत रवि और होटल वालों के बयानों से सहमत नहीं थी. वी.जे. चित्रा की मौत की सुई सिर्फ उस के मंगेतर हेमंत रवि की तरफ घूम रही थी. वजह यह थी कि उस रात चित्रा के साथ मंगेतर हेमंत रवि के अलावा होटल के कमरे में और कोई नहीं था.

सवाल यह भी उठ रहा था कि चित्रा को अकेला छोड़ कर होटल के बाहर क्यों गया था. हेमंत रवि के होटल के बाहर जाने के बाद ही चित्रा रहस्यमयी हालत में होटल के कमरे के पंखे से लटकी मिली थी. जरूर कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ थी.

पुलिस जांच टीम ने अपनी जांच की शुरुआत वी.जे. चित्रा के मंगेतर हेमंत रवि से पूछताछ के साथ ही की. उधर वी.जे. चित्रा के पिता जो रिटायर्ड पुलिस इंसपेक्टर थे और परिवार यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि उन की बेटी ने बिना किसी वजह खुदकुशी की होगी.

उन का तो यहां तक कहना था कि उन की बेटी की हत्या कर उसे खुदकुशी का रूप देने की कोशिश की है.

लेकिन सवाल यह था कि आखिर वी.जे. चित्रा की मौत के पीछे कौन था. कुल मिला कर पुलिस टीम किसी भी नतीजे पर पहुंचने के पहले सारे पहलुओं को पूरी तरह से खंगाल लेना चाहती थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि चित्रा की मौत स्वाभाविक तौर पर पंखे के फंदे से लटकने की वजह से दम घुट कर हुई थी. उस के गले और गालों पर आए नाखूनों के जख्म उस के खुद के हाथों के ही पाए गए.

कुल मिला कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट वी.जे. चित्रा को ही अपनी मौत का जिम्मेदार बता रही थी, जबकि बाकी परिस्थितिजन्य साक्ष्य कुछ अलग ही कहानी कह रहे थे कि खुदकुशी के पीछे कहीं न कहीं उस के मंगेतर हेमंत रवि का रोल जरूर रहा होगा.

इन सब के आधार पर पुलिस टीम ने लगभग 6 दिनों तक लगातार हेमंत रवि से पूछताछ करने के बाद सच्चाई का पता लगा लिया. पता चला कि हेमंत रवि ने ही चित्रा को मानसिक रूप से इतना प्रताडि़त किया था कि उसे आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़ा. इस के बाद पुलिस ने हेमंत रवि को आईपीसी की धारा 306 के तहत चित्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ के बाद जो कहानी उभर कर सामने आई थी, वह चौंका देने वाली थी.

तमिल सीरियल और रियल्टी शोज की जान वी.जे. चित्रा की खुदकुशी सुशांत सिंह राजपूत की मर्डर मिस्ट्री की याद दिला रही थी. उस के चाहने वालों को भी यह यकीन नहीं हो रहा था कि चित्रा खुदकुशी कर सकती है. सवाल यह भी उठ रहा था कि आखिर उस की मौत की वजह क्या थी?

जिस के आने से रुपहले परदे पर नूर आ जाए, जिस के नशीले नैन चाहने वालों को मदहोश कर दें, ़जिस की दिलकश मुसकान दिल थामने के लिए विवश कर दे, ऐसी अभिनेत्री आखिर दुनिया को छोड़ कर क्यों चली गई.

तमिल इंडस्ट्री की जान वी.जे. चित्रा अपने आप में अदाकारी का एक कंप्लीट पैकेज थी. जब वह नाचती थी तो डांसर बन जाती थी. जब किसी किरदार में आती थी तो अदाकारा बना जाती थी और जब वह निजी जिंदगी में किसी से मिलती थी तो उसे अपना बना लेती थी.

28 वर्षीय वी.जे. चित्रा का जन्म 2 मई, 1992 को तमिलनाडु के चेन्नै में हुआ था. उन के पिता चेन्नै शहर के एक सशक्त छवि वाले पुलिस इंसपेक्टर थे. जबकि मां कुशल गृहिणी थीं. वी.जे. चित्रा उन की एकलौती और लाडली बेटी थी. परिवार साधारण व सुखीसंपन्न था.

वी.जे. चित्रा बचपन से ही होनहार थी. उस के दिल में फिल्म और टीवी कलाकार बनने की चाह थी. वह अकसर टीवी के सामने बैठ कर उस पर आने वाले सभी शोज को बड़े ध्यान से देखती थी. उस की नकल करती थी.

चहेती बेटी होने के कारण उस के मांबाप उस पर ध्यान नहीं देते थे, क्योंकि उन के सपने बेटी के सपनों से अलग थे. वे चाहते थे कि उन की बेटी उच्चशिक्षा पा कर किसी उच्चपद पर काम करे.

लेकिन बेटी की पसंद के कारण उन्हें उस के सामने झुकना पड़ा था. चित्रा ने चेन्नै कालेज से बीएससी करने के बाद चेन्नै माइकल टीवी से अदाकारी और एंकरिंग का डिप्लोमा ले कर उसी चैनल से अपना कैरियर शुरू कर दिया था.

टीवी की एंकर और शोज को होस्ट करतेकरते जब चित्रा ने टीवी सीरियल की तरफ कदम बढ़ाया तो उसे हर कदम पर कामयाबी मिली. देखते ही देखते उस की झोली में कई तमिल सीरियल आ गए थे.

चिन्ना पापा पेरिया पापा, वेलुनाची और पंडियन स्टोर में मुल्लई की भूमिका में आई वी.जे. चित्रा ने पूरे तमिलभाषियों के दिलों में अपनी एक जगह बना ली और रातोंरात वह सुपर तमिल स्टारों की श्रेणी में आ खड़ी हुई थी. उसे अदाकारी में इज्जत और मानसम्मान सब मिलने लगा.

बेटी सुपरस्टार बन गई थी. इस बात की खुशी सब से अधिक उस के मांबाप और नातेरिश्तेदारों को हुई थी. थोड़े ही दिनों में चित्रा बुलंदियों के उस मुकाम पर पहुंच गई थी, जहां पर लोगों को पहुंचने के लिए लंबा वक्त लगता है.

जैसेजैसे चित्रा के स्टारडम का दायरा बढ़ता गया, वैसेवैसे तमिल टीवी स्टार और रियल्टी शोज की होस्ट के कदम भी बढ़ते गए. टीवी रियल्टी शोज की पार्टियों में चित्रा का आनाजाना भी बढ़ गया था. इसी तरह लौकडाउन के पहले की एक पार्टी में उस की मुलाकात उस के होने वाले हमसफर हेमंत रवि से हो गई.

32 वर्षीय हेमंत रवि वैसे तो एक साधारण परिवार से संबंध रखता था, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उस ने शहर में एक कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना ली थी. दोनों की पहले नजरें मिलीं और धीरेधीरे दिल भी मिल गए.

हेमंत रवि के व्यवहार को देख कर चित्रा भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उस से आकर्षित हो कर उस की तरफ खिंची चली गई. यही हाल हेमंत रवि का भी था. चित्रा के बिना उसे एकएक पल भारी लगता था. उसे जब भी मौका मिलता था, वह चित्रा से मिलने के लिए उस के शूटिंग सेट पर पहुंच जाता और उस की शूटिंग खत्म होने तक इंतजार करता रहता.

शूटिंग खत्म होने के बाद दोनों मन बहलाने के लिए लंबी ड्राइव पर चले जाते, घूमतेफिरते खातेपीते थे. यह सिलसिला कुछ दिनों तक चलने के बाद जब हेमंत रवि को लगने लगा कि अब बिना चित्रा के नहीं रह सकता तो मौका देख कर उस ने शादी का प्रपोजल रख दिया. चित्रा को भी हेमंत रवि की आंखों में अपने लिए मोहब्बत दिखाई दी तो उस ने भी हां कर दी.

एक उभरती हुई अदाकारा और टीवी रियल्टी शोज की होस्ट चित्रा ने अगस्त 2020 में जब अपने होने वाले हमसफर हेमंत रवि का हाथ दुनिया के सामने थामा तो उस के लाखों चाहने वालों ने अपना दिल थाम लिया था. दोनों ने इस रिश्ते को एक नाम देने का फैसला किया और उन्होंने सगाई कर ली. दोनों परिवार इस रिश्ते से बेहद खुश थे, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई.

वी.जे. चित्रा और हेमंत रवि की जिंदगी में वैसे तो कोई ट्विस्ट नहीं था, जैसा कि आमतौर पर लवस्टोरीज में हुआ करता है. और तो और दोनों ने यह भी तय कर लिया था कि लौकडाउन की पाबंदियों से आजाद होने के बाद जनवरी 2021 में शादी कर के एक शानदार रिसैप्शन पार्टी आयोजित करेंगे, लेकिन उन का यह सपना पूरा नहीं हुआ.

कारण यह था कि सगाई हो जाने के 2-3 महीने बाद ही हेमंत रवि का व्यवहार चित्रा के प्रति बदलने लगा था. इस की वजह यह थी कि उसे चित्रा द्वारा सीरियलों में दिए इंटीमेट सीनों से चिढ़ थी.

सीरियल और रियल्टी शोज में इंटीमेट रोमांटिक सीनों को ले कर हेमंत ने कई बार टोका और मना भी किया था. वह चाहता था कि वह इंटीमेट सीन दुनिया के सामने न आए, पर यह बात चित्रा को पसंद नहीं थी. वह हेमंत के मना करने के बावजूद ऐसे एसाइनमेंट करती रही.

इसी बात को ले कर दोनों के बीच कहासुनी हो जाती जो झगड़े तक पहुंच जाती थी. हेमंत की इस तरह की टीकाटिप्पणी से चित्रा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी.

घटना वाली रात भी शूटिंग से लौटने के बाद होटल के कमरे में दोनों में इंटीमेट सीनों को ले कर कहासुनी हुई थी. जिस से नाराज हो कर चित्रा ने हेमंत से पीछा छुड़ाने के लिए नहाने की इच्छा जाहिर की और बाथरूम में चली गई.

यह देख कर हेमंत होटल के कमरे से बाहर चला गया. इतनी कहासुनी के बाद  चित्रा अपने आप को नौर्मल नहीं रखपाई और होटल के कमरे के पंखे से लटक कर सदासदा के लिए ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कह दिया.

हेमंत रवि से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

 ये भी पढ़े  : बातूनी औरत की फितरत
 ये भी पढ़े  : हत्यारा आशिक

छीन ली सांसों की डोर-भाग 1: एकतरफा प्यार की सजा

खुशमिजाज रागिनी दुबे सुबह तैयार हो कर अपनी छोटी बहन सिया के साथ घर से पैदल ही स्कूल के लिए निकली थी. वह बलिया जिले के बांसडीह की रहने वाली थी. दोनों बहनें सलेमपुर के भारतीय संस्कार स्कूल में अलगअलग कक्षा में पढ़ती थीं. रागिनी 12वीं कक्षा में थी तो सिया 11वीं में.

उस दिन रागिनी महीनों बाद स्कूल जा रही थी. स्कूल जा कर उसे अपने बोर्ड परीक्षा फार्म के बारे में पता करना था कि परीक्षा फार्म कब भरा जाएगा. वह कुछ दिनों से स्कूल नहीं जा पाई थी, इसलिए परीक्षा फार्म के बारे में उसे सही जानकारी नहीं थी.

दोनों बहनें पड़ोस के गांव बजहां के काली मंदिर के रास्ते हो कर स्कूल जाती थीं. उस दिन भी वे बातें करते हुए जा रही थीं, जब दोनों काली मंदिर के पास पहुंची तभी अचानक उन के सामने 2 बाइकें आ कर रुक गईं. दोनों बाइकों पर 4 लड़के सवार थे. अचानक सामने बाइक देख रागिनी और सिया सकपका गईं, वे बाइक से टकरातेटकराते बचीं.

‘‘ये क्या बदतमीजी है, तुम ने हमारा रास्ता क्यों रोका?’’ रागिनी लड़कों पर गुर्राई.

‘‘एक बार नहीं, हजार बार रोकूंगा.’’ उन चारों में से एक लड़का बाइक से नीचे उतरते हुए बोला. उस का नाम प्रिंस उर्फ आदित्य तिवारी था. प्रिंस आगे बोला, ‘‘जाओ, तुम्हें जो करना हो कर लेना. तुम्हारी गीदड़भभकी से मैं डरने वाला नहीं, समझी.’’

‘‘देखो, मैं शराफत से कह रही हूं, हमारा रास्ता छोड़ो और स्कूल जाने दो.’’ रागिनी बोली.

‘‘अगर रास्ता नहीं छोड़ा तो तुम क्या करोगी?’’ प्रिंस ने अकड़ते हुए कहा.

‘‘दीदी, छोड़ो इन लड़कों को. मां ने क्या कहा था कि इन के मुंह मत लगना. इन के मुंह लगोगी तो कीचड़ के छींटे हम पर ही पड़ेंगे. चलो हम ही अपना रास्ता बदल देते हैं.’’ सिया ने रागिनी को समझाया.

‘‘नहीं सिया नहीं, हम बहुत सह चुके इन के जुल्म. अब और बरदाश्त नहीं करेंगे. इन दुष्टों ने हमारा जीना हराम कर रखा है. इन से जितना डरोगी, उतना ही ये हमारे सिर पर चढ़ कर तांडव करेंगे. इन्हें इन की औकात दिखानी ही पड़ेगी.’’

‘‘ओ झांसी की रानी,’’ प्रिंस गुर्राया,  ‘‘किसे औकात दिखाएगी तू, मुझे. तुझे पता भी है कि तू किस से पंगा ले रही है. प्रधान कृपाशंकर तिवारी का बेटा हूं, मिनट में छठी का दूध याद दिला दूंगा. तेरी औकात ही क्या है. मैं ने तुझे स्कूल जाने से मना किया था ना, पर तू नहीं मानी.’’

‘‘हां, तो.’’ रागिनी डरने के बजाए प्रिंस के सामने तन कर खड़ी हो गई. ‘‘तुम मुझे स्कूल जाने से रोकोगे, ऐसा करने वाले तुम होते कौन हो?’’

‘‘दीदी, क्यों बेकार की बहस किए जा रही हो,’’ सिया बोली, ‘‘चलो यहां से.’’

‘‘नहीं सिया, तुम चुप रहो.’’ रागिनी सिया पर चिल्लाई, ‘‘कहीं नहीं जाऊंगी यहां से. रोजरोज मर के जीने से तो अच्छा होगा कि एक ही दिन मर जाएं. कम से कम जिल्लत की जिंदगी तो नहीं जिएंगे. इन दुष्टों को इन के किए की सजा मिलनी ही चाहिए.’’ रागिनी सिया पर चिल्लाई.

‘‘तूने किसे दुष्ट कहा?’’ प्रिंस गुस्से से बोला.

‘‘तुझे और किसे…’’ रागिनी भी आंखें दिखाते हुए बोली.

आतंक पहुंचा हत्या तक

इस तरह दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया. विवाद बढ़ता देख कर प्रिंस के सभी दोस्त अपनी बाइक से नीचे उतर कर उस के पास जा खड़े हुए. सिया रागिनी को समझाने लगी कि लड़कों से पंगा मत लो, यहां से चलो. लेकिन उस ने बहन की एक नहीं सुनी. गुस्से से लाल हुए प्रिंस ने आव देखा न ताव उस ने रागिनी को जोरदार धक्का मारा.

रागिनी लड़खड़ाती हुई जमीन पर जा गिरी. अभी वह संभलने की कोशिश कर ही रही थी कि वह उस पर टूट पड़ा. पहले से कमर में खोंस कर रखे चाकू से उस ने रागिनी के गले पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. कुछ देर तड़पने के बाद रागिनी की मौत हो गई. उस की हत्या कर वे चारों वहां से फरार हो गए.

घटना इतने अप्रत्याशित तरीके से घटी थी कि न तो रागिनी ही कुछ समझ पाई थी और न ही सिया. आंखों के सामने बहन की हत्या होते देख सिया के मुंह से दर्दनाक चीख निकल पड़ी. उस की चीख इतनी तेज थी कि गांव वाले अपनेअपने घरों से बाहर निकल आए और जहां से चीखने की आवाज आ रही थी, वहां पहुंच गए. उन्होंने मौके पर पहुंच कर देखा तो रागिनी खून से सनी जमीन पर पड़ी थी. वहीं उस की बहन उस के पास बैठी दहाड़ें मार कर रो रही थी.

दिनदहाड़े हुई दिन दहला देने वाली इस घटना से सभी सन्न रह गए. लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि समाज में कानून नाम की कोई चीज नहीं रह गई है. बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि राह चलती बहूबेटियों का जीना तक मुश्किल हो गया है. इस बीच किसी ने फोन द्वारा घटना की सूचना बांसडीह रोड थानाप्रभारी बृजेश शुक्ल को दे दी थी.

गांव वाले रागिनी को पहचानते थे. वह पास के गांव बांसडीह के रहने वाले जितेंद्र दुबे की बेटी थी, इसलिए उन्होंने जितेंद्र दुबे को भी सूचना दे दी. बेटी की हत्या की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया, रोनापीटना शुरू हो गया. उन्हें जिस अनहोनी की चिंता सता रही थी आखिरकार वो हो गई.

जितेंद्र दुबे जिस हालत में थे, उसी हालत में घटनास्थल की तरफ दौडे़. वह बजहां गांव के काली मंदिर के पास पहुंचे तो वहां उन की बेटी की लाश पड़ी थी.

लाश के पास ही छोटी बेटी सिया दहाड़े मार कर रो रही थी. बेटी की रक्तरंजित लाश देख कर जितेंद्र भी फफकफफक कर रोने लगे. उन्हें 2-3 दिन पहले ही कुछ शरारती तत्व घर पर धमकी दे कर गए थे कि रागिनी स्कूल गई तो वह दिन उस की जिंदगी का आखिरी दिन होगा. आखिरकार वे अपने मंसूबों में कामयाब हो गए.

सूचना पा कर एसआई बृजेश शुक्ल फोर्स के साथ मौके पे पहुंच चुके थे. उन्होंने शव का मुआयना किया. मृतका के गले पर अनेक घाव थे. चूंकि पूरी वारदात मृतका की छोटी बहन सिया के सामने घटित हुई थी, इसलिए उस ने एसआई बृजेश शुक्ल को सारी बातें बता दीं. उस ने बताया कि बजहां गांव के रहने वाले ग्राम प्रधान कृपाशंकर तिवारी का बेटा प्रिंस उर्फ आदित्य तिवारी, प्रधान का ही भतीजा सोनू तिवारी, नीरज तिवारी और दीपू यादव ने दीदी की हत्या की है.

मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. पुलिस ने जितेंद्र दुबे की तहरीर पर ग्रामप्रधान कृपाशंकर तिवारी, उस के बेटे आदित्य उर्फ प्रिंस, सोनू तिवारी, नीरज तिवारी और दीपू यादव के खिलाफ हत्या और छेड़छाड़ की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया.

दरवाजे के पार-भाग 2 : क्यों किया अपनों ने वार

आज सोना 12 बजे आई थी. बंद कमरे में दोनों का झगड़ा हो रहा था. तेज आवाजें आ रही थीं. लेकिन हम लोगों ने ध्यान नहीं दिया. घटना की जानकारी तब हुई, जब मकान मालकिन चीखी.

किराएदारों से पूछताछ में एक किराएदार कमल ने बताया कि आशीष ने एक बार बताया था कि वह कानपुर के गजनेर का रहने वाला है.

सीओ मनोज कुमार गुप्ता अभी किराएदारों से पूछताछ कर ही रहे थे कि मृतका सोना की मां गीता, बहन बरखा, निशू, भाभी ज्योति तथा भाई विक्की, सूरज, सनी और पीयूष आ गए. सोना का शव देख सभी दहाड़ मार कर रोने लगे. किसी तरह पुलिस अधिकारियों ने उन्हें शव से अलग किया और फिर पूछताछ की.

एसपी अपर्णा गुप्ता को मृतका की मां गीता ने बताया कि 3 साल पहले उन की बेटी सोना की आशीष से दोस्ती हो गई थी. दोनों एक ही फैक्ट्री में काम करते थे. जब उसे दोनों की दोस्ती की बात पता चली तो उस ने सोना का विवाह कर दिया. लेकिन सोना की अपने पति व ससुरालियों से नहीं पटी, वह मायके आ कर रहने लगी. अपने खर्चे के लिए उस ने गोविंद नगर स्थित एक स्कूल में नौकरी कर ली.

इस बीच आशीष ने सोना को फिर अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और वह उसे अपने कमरे पर बुलाने लगा. कभीकभी वह घर भी आ जाता था. हम सब उसे अच्छी तरह जानते थे. पिछले कुछ दिनों से वह सोना पर शादी करने का दबाव डाल रहा था, लेकिन सोना शादी को राजी नहीं थी. आज भी आशीष ने सोना को अपने रूम में बुलाया और शादी का दबाव डाला. उस के न मानने पर आशीष ने जोरजबरदस्ती की और बेटी को मार डाला.

सोना को मौत की नींद सुलाने के बाद आशीष ने मेरी बहू ज्योति के मोबाइल पर हत्या की सूचना दी कि आ कर लाश ले जाओ. तब उस के सभी बेटे काम पर गए थे. वह बहू ज्योति को साथ ले कर दबौली आई और मकान मालकिन पुष्पा से मिली. लेकिन पुष्पा ने यह कह कर लौटा दिया कि आशीष अभी घर पर नहीं है. पुष्पा अगर हमें आशीष के कमरे तक जाने देती तो शायद उस की बेटी की जान बच जाती.

पूछताछ के बाद एसपी अपर्णा गुप्ता ने थानाप्रभारी अनुराग सिंह को आदेश दिया कि वह मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे और रिपोर्ट दर्ज कर के कातिल आशीष को गिरफ्तार करें. उस की गिरफ्तारी के लिए उन्होंने सीओ मनोज कुमार गुप्ता के निर्देशन में एक पुलिस टीम भी गठित कर दी.

पुलिस अधिकारियों के आदेश पर थानाप्रभारी अनुराग सिंह ने घटनास्थल से बरामद खून सनी कैंची, सोना का मोबाइल फोन और पर्स आदि चीजें जाब्ते की काररवाई में शामिल कर लीं. इस के बाद मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भेज दिया गया. थाने लौट कर अनुराग सिंह ने मृतका के भाई सूरज की तहरीर पर धारा 302 आईपीसी के तहत आशीष के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस टीम आशीष की गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई. पुलिस टीम ने मृतका सोना का मोबाइल फोन खंगाला तो आशीष का नंबर मिल गया, जिसे सर्विलांस पर लगा दिया गया.

सर्विलांस से उस की लोकेशन गीतानगर मिली. पुलिस टीम रात 2 बजे गीतानगर पहुंची, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही आशीष का फोन स्विच्ड औफ हो गया, जिस से उस की लोकेशन मिलनी बंद हो गई. निराश हो कर पुलिस टीम वापस लौट आई.

निरीक्षण के दौरान एक किराएदार ने सीओ मनोज कुमार गुप्ता को बताया था कि आशीष कानपुर देहात के गजनेर कस्बे का रहने वाला है. इस पर उन्होंने एक पुलिस टीम को गजनेर भेज दिया, जहां आशीष की तलाश की गई. सादे कपड़ों में गई पुलिस टीम ने दुकानदारों व अन्य लोगों को आशीष की फोटो दिखा कर पूछताछ की.

लेकिन फोटो में आशीष चश्मा लगाए हुए था, जिस की वजह से लोग उसे पहचान नहीं पा रहे थे. पुलिस टीम पूछताछ करते हुए जब मुख्य रोड पर आई तो एक पान विक्रेता ने फोटो पहचान ली. उस ने बताया कि वह अजय ठाकुर है जो कस्बे के लाल सिंह का छोटा बेटा है.

आशीष के पहचाने जाने से पुलिस को अपनी मेहनत रंग लाती दिखी. पुलिस टीम लाल सिंह के घर पहुंची. पुलिस ने लाल सिंह को फोटो दिखाई तो वह बोला, ‘‘यह फोटो मेरे बेटे आशीष सिंह की है. घर के लोग उसे अजय ठाकुर के नाम से बुलाते हैं. आशीष कानपुर में नौकरी करता है. मेरा बड़ा बेटा मनीष सिंह भी गीतानगर, कानपुर में रहता है. पर आप लोग हैं कौन और आशीष की फोटो क्यों दिखा रहे हैं. उस ने कोई ऐसावैसा काम तो नहीं कर दिया?’’

पुलिस टीम ने अपना परिचय दे कर बता दिया कि उन का बेटा सोना नाम की एक युवती की हत्या कर के फरार हो गया है. पुलिस उसी की तलाश में आई है. अगर वह घर में छिपा हो तो उसे पुलिस के हवाले कर दो, वरना खुद भी मुसीबत में फंस जाओगे.

पुलिस की बात सुन कर लाल सिंह घबरा कर बोला, ‘‘हुजूर, आशीष घर पर नहीं आया है. न ही उस ने मुझे कोई जानकारी दी है.’’

यह सुन कर पुलिस ने लाल सिंह को हिरासत में ले लिया. चूंकि लाल सिंह का बड़ा बेटा गीतानगर में रहता था और आशीष के मोबाइल फोन की लोकेशन भी गीता नगर की ही मिली थी. पुलिस को शक हुआ कि अजय ठाकुर उर्फ आशीष सिंह अपने बड़े भाई के घर में छिपा हो सकता है.

पुलिस टीम लाल सिंह को साथ ले कर वापस कानपुर आ गई और उस के बताने पर गीता नगर स्थित बड़े बेटे मनीष के घर छापा मारा. छापा पड़ने पर घर में हड़कंप मच गया. पिता के साथ पुलिस देख कर आशीष ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया और थाना गोविंद नगर ले आई.

थाना गोविंद नगर में जब आशीष सिंह से सोना की हत्या के संबंध में पूछा गया तो उस ने सहज ही हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. आशीष ने बताया कि शादी के पहले से दोनों के बीच प्रेम संबंध थे. सोना के घर वालों को पता चला तो उन्होंने उस की शादी कर दी, लेकिन सोना की पति से पटरी नहीं बैठी.

दरवाजे के पार-भाग 1 : क्यों किया अपनों ने वार

उस दिन मार्च, 2020 की 17 तारीख थी. शाम के 4 बजे थे. मकान मालकिन पुष्पा किचन में चाय बनाने जा रही थी. तभी किसी ने डोरबैल बजाई. पुष्पा ने दरवाजा खोला तो दरवाजे पर 2 महिलाएं खड़ी थीं. उन में एक जवान थी, जबकि दूसरी अधेड़ उम्र की थी. पुष्पा ने अजनबी महिलाओं को देख कर परिचय पूछा तो उन्होंने कोई जवाब न दे कर पर्स से एक फोटो निकाली और पुष्पा को दिखाते हुए पूछा, ‘‘क्या यह आप के मकान में रहता है?’’

पुष्पा ने फोटो गौर से देखी फिर बोली, ‘‘हां, यह तो आशीष है. अपनी पत्नी सोना के साथ पिछले 6 महीने से हमारे मकान में रह रहा है. उस की पत्नी सोना कहीं बाहर काम करती है. इसलिए सप्ताह में 2-3 दिन ही आ पाती है. आज वह 12 बजे घर आई थी. आशीष भी घर पर था, लेकिन आधा घंटा पहले कहीं चला गया है.’’

मकान मालकिन पुष्पा से पूछताछ करने के बाद दोनों महिलाएं वापस चली गईं. दरअसल, ये महिलाएं गीता और उन की बहू ज्योति थीं, जो सरायमीता पनकी, कानपुर की रहने वाली थीं. सोना गीता की बेटी थी और आशीष सोना का प्रेमी था.

आशीष ने कुछ देर पहले ज्योति के मोबाइल पर काल कर के जानकारी दी थी कि उस ने उस की ननद सोना को मार डाला है और उस की लाश दबौली निवासी पुष्पा के मकान में किराए वाले कमरे में पड़ी है, आ कर लाश ले जाओ. ज्योति ने यह बात अपनी सास गीता को बताई. फिर सासबहू जानकारी लेने के लिए पुष्पा के मकान पर पहुंची, लेकिन वहां हत्या जैसी कोई हलचल न होने से दोनों वापस लौट आई थीं.

चाय पीतेपीते पुष्पा के मन में आशीष को ले कर कुछ शंका हुई तो वह पहली मंजिल स्थित उस के कमरे पर पहुंची. कमरे के दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद थी और अंदर से खून बह कर बाहर की ओर आ रहा था.

खून देख कर पुष्पा चीख पड़ी. मालकिन की चीख सुन कर अन्य किराएदार कमल, सुनील, टिंकू तथा शिवानंद आ गए. इस के बाद पुष्पा ने कमरे का दरवाजा खोल कर अंदर झांका तो उन की आंखें फटी रह गईं.

कमरे में फर्श पर खून से लथपथ सोना की लाश पड़ी थी. लाश से खून रिस कर कमरे के बाहर तक आ गया था. सोना की लाश देख कर किराएदार भी भयभीत हो उठे. इस के बाद तो हत्या की खबर थोड़ी देर में पूरे दबौली (उत्तर) में फैल गई. लोग पुष्पा के मकान के बाहर जुटने लगे.

शाम लगभग 5 बजे पुष्पा ने थाना गोविंद नगर फोन कर के किराएदार आशीष की पत्नी सोना की हत्या की जानकारी दे दी. हत्या की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अनुराग सिंह ने इस घटना से अधिकारियों को अवगत कराया और पुलिस टीम के साथ दबौली (उत्तर) स्थित पुष्पा के मकान पर जा पहुंचे.

मकान के बाहर भीड़ जुटी थी. लोग तरहतरह की बातें कर रहे थे. भीड़ को पीछे हटा कर थानाप्रभारी अनुराग सिंह पुलिस टीम के साथ मकान की पहली मंजिल स्थित उस कमरे में पहुंचे जहां लाश पड़ी थी.

सोना की हत्या बड़ी निर्दयता से की गई थी. लाश के पास ही खून से सनी कैंची तथा मोबाइल पड़ा था. देखने से लग रहा था कि हत्या के पहले मृतका से जोरजबरदस्ती की गई थी. विरोध करने पर उस के पति आशीष ने कैंची से वार कर उस की हत्या कर दी थी. न केवल सोना के पेट में कैंची घोंपी गई थी, बल्कि उस के गले को भी कैंची से छेदा गया था.

थानाप्रभारी अनुराग सिंह अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि एसएसपी अनंत देव, एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता और सीओ (गोविंद नगर) मनोज कुमार गुप्ता भी वहां आ गए. अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया था.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और इंसपेक्टर अनुराग सिंह से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की. फोरैंसिक टीम ने निरीक्षण कर घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए. कैंची, दरवाजा और मेज पर रखे गिलास से फिंगरप्रिंट उठाए. जमीन पर फैले खून का नमूना भी जांच हेतु लिया गया.

निरीक्षण के दौरान सीओ मनोज कुमार गुप्ता की नजर मेज पर रखे लेडीज पर्स पर पड़ी. उन्होंने पर्स की तलाशी ली तो उस में साजशृंगार का सामान, कुछ रुपए तथा एक आधार कार्ड मिला. आधार कार्ड में युवती का नाम सोना सोनकर, पिता का नाम मुन्ना लाल सोनकर, निवासी सराय मीता, पनकी कानपुर दर्ज था. गुप्ताजी ने 2 सिपाहियों को आधार कार्ड में दर्ज पते पर सूचना देने के लिए भेज दिया.

एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता ने मकान मालकिन पुष्पा देवी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के पति देवकीनंदन की मृत्यु हो चुकी है. 2 बेटे हैं, अजय व राकेश, जो बाहर नौकरी करते हैं. मकान के भूतल पर वह स्वयं रहती है, जबकि पहली मंजिल पर बने कमरों को किराए पर उठा रखा है.

मकान में 4 किराएदार शिवानंद, कमल, सुनील व टिंकू पहले से रह रहे थे. 6 महीना पहले आशीष नाम का युवक एक युवती के साथ किराए पर कमरा लेने आया था.

उस ने उस युवती को अपनी पत्नी बताया, साथ ही यह भी बताया कि उस की पत्नी सोना दूरदराज नौकरी करती है. वह सप्ताह में 2 या 3 दिन ही आया करेगी. मैं ने उसे रूम का किराया 1600 रुपए बताया तो वह राजी हो गया और किराएदार के रूप में रहने लगा. उस की पत्नी सोना सप्ताह में 2 या 3 दिन आती थी.

पुष्पा ने बताया कि आज 12 बजे सोना आशीष से मिलने आई थी. उस के बाद कमरे में क्या हुआ, उसे मालूम नहीं. आशीष 3 बजे चला गया था. उस के जाने के बाद 2 महिलाएं उस के बारे में पूछताछ करने आईं. लेकिन आशीष रूम में नहीं था, यह जान कर वे दोनों चली गईं. महिलाओं की बातों से मुझे कुछ शक हुआ, तो मैं आशीष के रूम पर गई. वहां कमरे के बाहर खून देख कर मैं चीखी तो बाकी किराएदार आ गए. उस के बाद मैं ने यह सूचना पुलिस को दे दी.

घटनास्थल पर अन्य किराएदार कमल, सुनील, टिंकू व शिवानंद भी मौजूद थे. सीओ मनोज कुमार गुप्ता ने उन से पूछताछ की तो उन सब ने बताया कि आशीष ने उन से सोना को अपनी पत्नी बताया था. वह हफ्ते में 2-3 बार आती थी. कमरा बंद कर दोनों खूब हंसतेबतियाते थे, कभीकभी उन दोनों में तूतूमैंमैं भी हो जाती थी.

आगे पढ़िए क्या थी सोना और आशीष की कहानी…

जिम ट्रेनर की आखिरी ट्रेनिंग : सृष्टि ने कैसे जितेंद्र को निपटाया – भाग 1

जितेंद्र मान ग्रेटर नोएडा स्थित एवीजे हाइट्स सोसाइटी में छठी मंजिल के फ्लैट में रहता था. यह फ्लैट उस के फुफेरे भाई प्रीतम का था. इस फ्लैट की एक चाबी प्रीतम के पास रहती थी और दूसरी जितेंद्र के पास. 12 जनवरी, 2018 को प्रीतम अपने भाई जितेंद्र से मिलने फ्लैट पर पहुंचा. जैसे ही उस ने फ्लैट का मुख्य दरवाजा खोला तो उसे अंदर कमरे का दरवाजा खुला मिला. दरवाजे से लौबी साफ दिख रही थी. वहीं से उस ने देखा कि फर्श पर गद्दा बिछा है और उस गद्दे पर कोई कंबल ओढ़े सो रहा है.

फ्लैट में घुसते ही उसे थोड़ी दुर्गंध आती महसूस हुई तो घबरा कर वह सीधे लौबी में पहुंचा. थोड़ा अजीब तो लग रहा था, पर यह सोच कर उस ने जितेंद्र को आवाज दी कि कंबल में वही सोया होगा. जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो प्रीतम ने कंबल हटाया. कंबल के नीचे जितेंद्र की लाश पड़ी थी. भाई की लाश देखते ही प्रीतम की चीख निकल गई.

चीख की आवाज सुन कर कई पड़ोसी भी वहां आ गए. प्रीतम ने फोन कर के इस की सूचना पुलिस को भी दे दी. कुछ देर बाद ही सूरजपुर थाने के थानाप्रभारी अखिलेश प्रधान एसआई सोहनवीर मलिक, हरिराज, कांस्टेबल कृष्णकुमार और राजेश कुमार घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस ने जितेंद्र की लाश पर से कंबल हटा कर देखा तो गद्दा खून से सना हुआ था. खून भी जम कर काला पड़ गया था. लाश से आ रही बदबू से लग रहा था कि उस की हत्या कई दिन पहले की गई होगी.

जितेंद्र मान की लाश चित अवस्था में थी. लाश पलटी तो उस की पीठ पर गोलियों के 3 निशान मिले. एक गोली उस की गरदन पर भी लगी थी. थानाप्रभारी ने इस की सूचना एसपी (देहात) सुनीति शर्मा और सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव को भी दे दी.

कमरे का निरीक्षण किया गया तो वहां शराब और सोडे की खाली बोतलें और 2 खाली गिलासों के अलावा कुछ जूठे बरतन भी पड़े मिले. इस से लगा कि वहां 2 लोगों ने शराब पी थी और जितेंद्र की हत्या किसी जानकार ने ही की होगी.

थानाप्रभारी प्रधान मौकामुआयना कर ही रहे थे कि एसपी (देहात) सुनीति शर्मा और सीओ (ग्रेटर नोएडा) अमित किशोर भी मौके पर पहुंच गए. एसपी (देहात) सुनीति शर्मा ने पड़ोसियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें गोलियों की आवाज नहीं आई थी. इस बात पर पुलिस भी हैरत में पड़ गई कि 4 गोलियां चलीं और पड़ोसी आवाज भी नहीं सुन सके.

फ्लैट में सारा सामान अपनी जगह रखा था, इसलिए वहां लूट की संभावना नजर नहीं आ रही थी. मृतक का मोबाइल फोन और पर्स नदारद था. यानी ये दोनों चीजें हत्यारा अपने साथ ले गया था.

प्रीतम ने जितेंद्र की हत्या की खबर उस के घर वालों को भी दे दी थी. उस के घर वाले भी वहां पहुंच गए. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

प्रीतम की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात हत्यारे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया. इस केस की जांच थानाप्रभारी ने खुद संभाली.

जितेंद्र मान की पृष्ठभूमि

13 जनवरी को पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. मरने की वजह गोलियों से शरीर के अंदरूनी अंगों की क्षति पहुंचना बताया गया था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हत्या 10 जनवरी को दोपहर से शाम के बीच की गई थी.

14 जनवरी, 2018 को सुबह के समय थानाप्रभारी अखिलेश प्रधान फिर से एवीजे हाइट्स सोसाइटी पहुंचे. उन्होंने गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की. आगंतुक रजिस्टर भी चैक किया, पर वहां से कोई क्लू नहीं मिला. तब उन्होंने सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का निरीक्षण किया.

फुटेज से जानकारी मिली कि 10 जनवरी को दोपहर करीब साढ़े 11 बजे जितेंद्र मान सीढि़यों से फ्लैट में गया और 4 बज कर 20 मिनट पर फ्लैट से बाहर निकला और चला गया. इस के बाद थानाप्रभारी सोसाइटी से चले आए.

उन्होंने जांच की तो पता चला कि दिल्ली के मुनीरका के रहने वाले प्रीतम ने अपने दोस्त नितिन चौधरी के साथ ग्रेटर नोएडा में कुछ दिनों पहले ही एक जिम खोला था. प्रीतम जिम में ज्यादा समय नहीं दे पाता था. घर से रोजाना ग्रेटर नोएडा आनाजाना उस के लिए संभव नहीं था, इसलिए उस ने जिम के नजदीक स्थित एवीजे हाइट्स सोसाइटी में किराए पर एक फ्लैट ले लिया था.

प्रीतम का एक ममेरा भाई था जितेंद्र मान, जो बाहरी दिल्ली के अलीपुर में रहता था. फिलहाल वह बेरोजगार था. उस ने कई साल जिम में प्रैक्टिस कर के अपना शरीर बना रखा था और एक अच्छा खिलाड़ी भी था. इसलिए प्रीतम ने उसे अपने जिम में ट्रेनर के रूप में रख लिया था.

चूंकि हत्या वाले दिन जितेंद्र प्रीतम के फ्लैट पर आया था, इसलिए थानाप्रभारी पूछताछ करने के लिए उस के जिम में पहुंच गए.

थानाप्रभारी ने जिम में पूछताछ की तो मालूम हुआ कि 10 जनवरी को जितेंद्र अपनी शिफ्ट पूरी कर के पौने 12 बजे घर जाने के लिए निकला था. एवीजे हाइट्स सोसाइटी जिम के पास है. अगर किसी गाड़ी से जाया जाए तो सोसाइटी का रास्ता 10 मिनट का है. एवीजे हाइट्स की सीसीटीवी फुटेज में जितेंद्र साढ़े 11 बजे सीढि़यां चढ़ कर फ्लैट में जाता दिखा था.

इस से साफ हो गया कि जिम से निकलने के बाद जितेंद्र सीधे घर आया था. इस के बाद दोपहर करीब साढ़े 12 बजे कोई जितेंद्र के फ्लैट में आया. वहां शराब पी गई. पुलिस ने जितेंद्र की काल डिटेल्स निकलवाई. उस काल डिटेल्स में 17 मोबाइल नंबरों को चिह्नित किया. इन में से एक फोन नंबर प्रीतम का निकला और 5 फोन नंबर जिम के कर्मचारियों व परिवार के लोगों के थे. इसलिए इन 6 नंबरों को संदेह से अलग कर दिया गया.

पुलिस ने 11 नंबरों की गहन छानबीन की तो चौंकाने वाली बात यह पता चली कि वह सभी फोन नंबर लड़कियों के थे. उन में से 10 लड़कियां घर पर ही मिल गईं. थानाप्रभारी ने उन्हें एसपी (देहात) सुनीति शर्मा के सामने पेश किया.

पुलिस इन्वैस्टीगेशन में आया लड़की का नाम

एसपी (देहात) सुनीति शर्मा ने सभी लड़कियों से अलगअलग बात की मगर कोई काम की बात पता नहीं चली. अब केवल एक लड़की बची थी, उस का फोन स्विच्ड औफ आने की वजह से संपर्क नहीं हो सका. पुलिस ने उस के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि वह फोन नंबर ग्रेटर नोएडा की होराइजन सोसाइटी के फ्लैट टी-1103 में रहने वाली सृष्टि गुप्ता का है. मोबाइल कंपनी से पते के साथ सृष्टि गुप्ता का फोटो भी मिल गया.

पतंगे से हारी रोशनी: शादीशुदा प्रेमी का धोखा

स्वप्नरोहिदास के लिए महानगर मुंबई एक अच्छा शहर था. खुले विचारों आधुनिकता और ग्लैमर के आवरण में लिपटा शहर. मुंबई आ कर उसे आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने वाली एक कंपनी में काम मिल गया था. वहां काम करतेकरते वह ज्वैलरी बनाने का अच्छा कारीगर बन गया था.

इस कंपनी की डिजाइन की गई ज्वैलरी फिल्म और सीरियल बनाने वाली प्रोडक्शन कंपनियों के लिए भी सप्लाई की जाती थी. स्वप्न को अच्छी सैलरी मिल रही थी, जिस से वह खुश रहता था.

स्वप्न के मातापिता पश्चिम बंगाल स्थित गांव में रहते थे. स्वप्न हर महीने अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा उन्हें भेज देता था. बाकी बचे पैसे वह अपने ऊपर खर्च करता था. वह पैसे खानेपीने और अपनी मौजमस्ती पर खर्च करता था.

स्वप्न दिन भर काम करने के बाद शाम को जब अपने आवास पर आता तो फ्रैश हो कर अमूमन घूमने के लिए निकल जाता था उस की मंजिल ज्यादातर बीयर बार होती थी. देर रात तक बीयर बार में बैठना जैसे उस की दिनचर्या बन चुकी थी. उस का पसंदीदा बार संदेश बीयर बार ऐंड रेस्टोरेंट था. यह बीयर बार उसे इसलिए पसंद था क्योंकि वहां कई महिला वेटर बंगाल की थीं.

एक रात स्वप्न रोहिदास बीयर बार में बैठा बीयर पी रहा था, तभी अचानक उस की निगाह एक खूबसूरत और कमसिन बाला पर गई, जो बंगाली थी और बार में बैठे कस्टमर को मुसकरा कर बीयर सर्व कर रही थी. उस के कपड़े आधुनिक और ग्लैमर से भरपूर थे.

वह स्वप्न की आंखों के रास्ते दिल में उतर गई. जब तक वह बीयर बार में रहा, उस की निगाहें उस बाला का ही पीछा करती रहीं. जब वह बार से लौटा तो घर में उसे चैन नहीं मिला. उस रात चाह कर भी वह सो नहीं सका. रात भर उस की आंखों के सामने वही बार बाला घूमती रही. वह यह भी भूल गया था कि उस की शादी हो चुकी है और वह एक बेटी का पिता है.

अगले दिन वह थोड़ा जल्दी संदेश बीयर बार ऐंड रेस्टोरेंट पहुंच गया और उसी टेबल पर जा कर बैठा, जिसे वह लड़की अटेंड करती थी. स्वप्न के बैठते ही वह लड़की उस के पास आई और अपनी चिरपरिचित मुसकान के साथ उस के सामने मेन्यू कार्ड रख कर और्डर देने का आग्रह किया.

उस की मीठी आवाज सुन कर एक मिनट के लिए स्वप्न को कुछ नहीं सूझा फिर अपने आप को संभाल कर उस ने अपनी मनपसंद व्हिस्की के साथसाथ खाने का भी और्डर दे दिया. खानेपीने के बाद स्वप्न ने उस लड़की को अच्छी टिप दी और घर लौट आया.

घर लौट कर वह बिस्तर पर लेटा तो जरूर, लेकिन नींद उस की आंखों से कोसों दूर थी. नशे की हालत में भी उस बाला का मुसकराता हुआ चेहरा सामने आ जाता था. वह उस की नजरों से एक मिनट के लिए भी ओझल नहीं हो पा रही थी. रात तो रात उसे दिन में भी चैन नहीं आया.

काम के दौरान बारबार उस की छवि उस के सामने आ जाती थी. स्वप्न रोजाना बार में जा कर उसी टेबल पर जा कर बैठता और मौका मिलने पर उस बारबाला से बात करने की कोशिश करता.

उस बाला से परिचय हुआ तो पता चला उस का नाम रोजीना शेख उर्फ रोशनी है और वह उसी प्रांत और जिले की रहने वाली है, जहां का स्वप्न रोहिदास था.

जानकारी के बाद तो उस का दिल बल्लियों उछलने लगा. वह अपने आप को रोक नहीं पाया, उस ने भी रोजीना शेख को अपना परिचय दे दिया. इतना ही नहीं उस ने रोशनी के सामने दोस्ती का प्रस्ताव भी रख दिया.

स्वप्न रोहिदास रोजीना शेख की नजर में अच्छा युवक था. हैंडसम होने के साथ वह अच्छा पैसा भी कमाता था, इसलिए उस के साथ दोस्ती करने में उसे कोई संकोच नहीं हुआ. उस ने मुसकराते हुए स्वप्न का दोस्ती का आमंत्रण स्वीकार कर लिया. रोजीना शेख उर्फ रोशनी ने सोचा भी नहीं था कि अचानक उस की जिंदगी में कोई युवक आएगा और उस के दिलोदिमाग पर छा जाएगा.

उस दिन के बाद रोजीना और स्वप्न अकसर रोज मिलनेजुलने लगे. पहले तो उन का मिलने का ठिकाना संदेश बीयर बार ही था. दोनों रेस्टोरेंट चालू होने के पहले ही पहुंच जाते थे और मौका मिलने पर वहीं बातें हो जाती थीं. जब रोजीना की ड्यूटी खत्म हो जाती तो स्वप्न उसे उस के घर छोड़ कर आता था. जिस दिन रोजीना की छुट्टी होती, उस दिन स्वप्न उस के साथ ही रहता था.

वह उसे रेस्टोरेंट, मौल ले जा कर उस पर खुले हाथों से पैसे खर्च करता था. इस के अलावा उसे महंगे उपहार देता. यह सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा.

रोजाना  ने देखा एक सपना

रोजीना उसे अपना एक सच्चा दोस्त मानती थी, इसलिए वह दिन प्रतिदिन उस के करीब आती गई. वह स्वप्न के इतना करीब आ गई कि उस के साथ अपनी गृहस्थी बसाने के सपने देखने लगी.

एक दिन अपने दिल की यह बात उस ने स्वप्न को बताई तो उस का अस्तित्व डगमगा गया, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा था. वह रोजीना के साथ टाइम पास और मौजमस्ती के लिए जाता था. इस के अलावा उस का और कोई मकसद नहीं था. इसलिए वह रोजीना की बात को बड़ी सफाई से टाल गया, जिस से रोजीना के सारे सपने कांच की तरह टूट कर बिखर गए. उसे गहरा झटका तब लगा, जब उसे पता चला कि उस का प्रेमी शादीशुदा ही नहीं, बल्कि एक बच्ची का पिता भी है.

इस के बाद रोजीना ने स्वप्न से दूरियां बनानी शुरू कर दीं. अब वह बार में स्वप्न का उतना ही सहयोग करती थी, जितना वह अपने अन्य ग्राहकों का करती थी. चूंकि स्वप्न ने रोजीना के साथ खूब मौजमस्ती की थी, इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह स्वप्न से इस का हरजाना वसूल करेगी. वह स्वप्न रोहिदास को धमकी देने लगी कि वह उस की पत्नी और परिवार वालों को अपने प्रेम और अवैध संबंधों की बात बता देगी.

32 वर्षीय स्वप्न रोहिदास पश्चिम बंगाल के जिला हावड़ा के तालुका शहापुर आमरदाहा गांव के रहने वाले परेश रोहिदास का बेटा था. उन का पूरा परिवार खेती पर निर्भर था. लेकिन महत्त्वाकांक्षी स्वप्न रोहिदास को खेती का काम पसंद नहीं था. वह ज्यादा पढ़ालिखा तो नहीं था लेकिन आकांक्षाएं ऊंची थीं. वह शहर में रह कर नौकरी करना चाहता था. उस के गांव के कई दोस्त मुंबई में रहते थे. उन से बात कर के वह मुंबई आ गया था.

दोस्तों ने उस की मदद की और आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने वाली एक कंपनी में उस की नौकरी लगवा दी. वहां काम करतेकरते वह ज्वैलरी डिजाइन का काम सीख कर कुशल कारीगर बन गया. उसे वहां से अच्छी तनख्वाह मिलने लगी. रहने के लिए उस ने दहिसर रावलपाडा में किराए का कमरा ले लिया था.

स्वप्न जब ठीकठाक कमाने लगा तो घर वालों ने अपने इलाके की एक लड़की से उस की शादी कर दी. खूबसूरत पत्नी को पा कर स्वप्न खुश था. शादी के महीना भर बाद वह मुंबई चला गया क्योंकि उसे नौकरी भी करनी थी. लेकिन वह महीने 2 महीने में अपने घर आता रहता था. इसी तरह कई साल बीत गए और वह एक बेटी का पिता भी बन गया.

अकेले रहने का फायदा उठाया स्वप्न ने

स्वप्न मुंबई में अकेला रहता था. दिन में तो वह काम पर चला जाता था, लेकिन उस के लिए रात मुश्किल हो जाती थी. वह परिवार, पत्नी और बच्ची से दूर था. रंगीन तबीयत का होने की वजह से उसे अकसर पत्नी की याद सताती थी.

जवान खून था, ऊपर से कमाई भी अच्छी थी उस ने जल्द ही मन बहलाने का रास्ता खोज लिया. काम से छूटने के बाद वह घर आता और फ्रैश हो कर मन बहलाने के लिए बीयर बारों के चक्कर लगाता. जल्द ही वह दिन भी आ गया, जब बीयर बार स्वप्न को मौजमस्ती के लिए अच्छी जगह लगने लगे. वहां जा कर वह 2-4 पैग ले कर खाना खाता और घर आ कर के सो जाता. उसी दौरान उस की दोस्ती रोजीना शेख उर्फ रोशनी से हो गई जो बाद में प्यार में बदल गई.

मुसलिम समुदाय की खूबसूरत रोजीना शेख उर्फ रोशनी भी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की रहने वाली थी. उस के पिता की मृत्यु हो चुकी थी. मां के अलावा उस की एक छोटी बहन थी. पिता की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां उस की मां के कंधो पर आ गई थीं. मां ने मेहनतमजदूरी कर जैसेतैसे दोनों बेटियों को पाला.

बालिग होने के बाद रोजीना अपनी एक सहेली रुबिका के साथ मुंबई आ गई थी. जिस सहेली के साथ वह आई थी, वह मुंबई के दहिसर में रह कर बीयर बारों में काम करती थी.

पहले तो रोजीना शेख को बीयर बार के कामों में रुचि नहीं थी,लेकिन घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वह बीयर बारों में अपना नाम बदल कर नौकरी करने लगी. इधरउधर कई बारों में काम करने के बाद वह दहिसर के संदेश बीयर बार ऐंड रेस्टोरेंट में आ गई, जहां उस की अच्छी कमाई हो जाती थी. अपनी कमाई का आधा हिस्सा वह अपनी मां के पास भेज देती थी. दहिसर की जनकल्याण सोसायटी में उस ने 7 हजार रुपए महीना किराए पर एक कमरा ले लिया था.

उस दिन रविवार था, स्वप्न रोहिदास की छुट्टी का दिन. उस ने रोजीना को फोन किया लेकिन उस ने काल रिसीव नहीं की. कई बार फोन करने के बाद जब रोजीना ने फोन उठाया तो स्वप्न ने उसे तय जगह पर मिलने के लिए बुलाया, पर वह नहीं आई. इस पर स्वप्न को गुस्सा आ गया.

हार गई रोशनी

शाम को स्वप्न ने दहिसर की एक शराब की दुकान से बीयर की एक बोतल खरीदी और रोजीना शेख उर्फ रोशनी के घर पहुंच गया. उस ने वहीं बैठ कर बीयर पी. फिर उस ने रोजीना से उस के बुलाने पर न आने का कारण पूछा तो रोजीना ने उसे दोटूक जवाब दिया, ‘‘मेरा मूड ठीक नहीं था. गांव से मां का फोन आया था. मुझे पैसों की सख्त जरूरत है. बताओ, क्या तुम मेरी मांग पूरी कर सकते हो?’’

‘‘तुम ने मुझे क्या बैंक समझ रखा है, जब देखो तुम पैसों की मांग करती रहती हो?’’ स्वप्न के दिमाग पर बीयर का सुरूर चढ़ चुका था.

उस की यह बात सुन कर रोजीना ने भी उस की ही भाषा में जवाब दिया, ‘‘तो तुम ने क्या मुझे अपनी बीवी समझ रखा है कि मैं तुम्हारी हर बात मानूं?’’

इन बातों को ले कर बात इतनी बढ़ी कि स्वप्न अपना विवेक खो बैठा और पास रखी तौलिया उठा रोजीना के गले में डाल कर कस दी. थोड़ी देर में दम घुटने से रोजीना की मृत्यु हो गई.

रोजीना उर्फ रोशनी की हत्या के बाद जब उस का गुस्सा शांत हुआ तो उस के हाथपैर फूल गए. हाथ में हथकड़ी और कानून के डर से वह बुरी तरह घबरा गया.

पुलिस से बचने और कानून को गुमराह करने के लिए उस ने घटना का रुख चोरी की तरफ मोड़ने की कोशिश की. उस ने कमरे की अलमारी खोल कर सारा सामान इधरउधर डाल दिया और उस में रखे कीमती गहने, पौने 2 लाख नगदी के अलावा कमरे में रखे 2 मोबाइल फोन अपने पास रख लिए और वहां से भाग कर अपने कमरे पर जा पहुंचा. फिर वहां से वह पश्चिम बंगाल स्थित अपने गांव चला गया.

29 दिसंबर, 2019 को रोजीना ने अपना रूम नहीं खोला तो उस की नौकरानी को दाल में कुछ काला नजर आया. वह 2 बार रोशनी के घर पर आ कर लौट गई थी. तीसरी बार जब वह आई, तब भी रोजीना का फ्लैट बंद पा कर उस ने यह बात पड़ोसियों और फ्लैट मालिक सुनील सखाराम को बताई.

फ्लैट मालिक सुनील सखाराम ने डुप्लीकेट चाबी से जब घर का दरवाजा खोला तो अंदर का दृश्य देख हैरान रह गया. पड़ोसियों के भी होश फाख्ता हो गए. मामला गंभीर था, अत: उन्होंने इस की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम के साथसाथ थाने को भी दे दी.

वह इलाका दहिसर पुलिस थाने के अंतर्गत आता था. थाने की ड्यूटी पर तैनात एसआई सिद्धार्थ दुधमल ने तुरंत मामले की जानकारी इंसपेक्टर मराठे, असिस्टेंट इंसपेक्टर जगदाले को दे दी और घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पर पहुंच कर पुलिस ने कमरे का सरसरी निगाहों से निरीक्षण किया.

एसआई सिद्धार्थ ने पूछताछ की प्रक्रिया अभी शुरू ही की थी कि मामले की जानकारी पा कर थानाप्रभारी एम.एम. मुजावर, इंसपेक्टर सुरेश रोकड़े (क्राइम) घटनास्थल पर पहुंच गए. उन के साथसाथ मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिलीप सावंत, डीसीपी डा. डी.एस. स्वामी और एसीपी सुहास पाटिल के अलावा फोरैंसिक टीम भी मौकाएवारदात पर पहुंच गई.

अधिकारियों ने घटनास्थल का फौरी तौर पर निरीक्षण कर थानाप्रभारी एम.एम. मुजावर को आवश्यक दिशानिर्देश दिए. घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मामले की तफ्तीश की जिम्मेदारी इंसपेक्टर सुरेश रोकड़े को सौंपी गई.

अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर इंसपेक्टर सुरेश रोकड़े ने अपनी जांच टीम का गठन किया, जिस में असिस्टेंट इंसपेक्टर डा. चंद्रकांत धार्गे, ओम टोटावर, विराज जगदाले, एसआई सिद्धार्थ दुधमल, कांस्टेबल परब, जगताप, नाइक, तटकरे आदि को शामिल किया गया. टीम ने सरगरमी से मामले की जांच शुरू कर दी.

पुलिस ने रोजीना उर्फ रोशनी के मोबाइल  फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. साथ ही कमरे में मिली बीयर की बोतल के बैच नंबर के आधार पर उस शराब की दुकान का पता लगा लिया, जहां से वह बोतल खरीदी गई थी. इस के बाद घटनास्थल और शराब की दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से पता चल गया कि रोशनी की हत्या स्वप्न रोहिदास ने की थी.

फोन कंपनी से उस के पश्चिम बंगाल स्थित घर का पता लग गया था. लिहाजा पुलिस टीम फ्लाइट से उस के गांव पहुंच गई. वह अपने घर पर ही मिल गया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस मुंबई लौट आई.

दहिसर पुलिस की गिरफ्त में आए स्वप्न रोहिदास ने बिना किसी हीलाहवाली के अपना गुनाह स्वीकार कर लिया. जांच अधिकारी इंसपेक्टर सुरेश रोकड़े ने उस से विस्तृत पूछताछ के बाद उसे भादंवि की धारा 302 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

भूल का शूल: क्यों बहके उसके कदम

तारीख 15 नवंबर. वक्त शाम 4 बजे. जगह उज्जैन के थाना महाकाल क्षेत्र का नैशनल ढाबा.

बाईपास इनर रिंगरोड स्थित नैशनल ढाबे से कुछ दूरी पर एक आटोरिक्शा आ कर रुका. आटो से स्वाति नाम की एक सुंदर युवती उतरी. नीचे उतर कर स्वाति ने आटोचालक को पैसे दिए. तभी स्वाति के मोबाइल फोन की घंटी बज उठी, जिस से वह सड़क पर उसी जगह खड़ी हो कर बात करने लगी.

आटोचालक वहां से जा चुका था. किसी को भी मालूम नहीं था कि वहां क्या घटने वाला है. कुछ ही दूरी पर खड़ी एक गाड़ी में बैठे शख्स की आंखें लगातार स्वाति पर गड़ी थीं. उसे बेपरवाह देख वह गाड़ी तेजी से स्वाति की ओर बढ़ने लगी. स्वाति सड़क पर दाहिनी ओर खड़ी थी. तेज गति से आ रही गाड़ी रौंग साइड से आई और स्वाति को जोरदार टक्कर मार कर वहां से निकल गई.

सब कुछ इतनी जल्दी और तेजी से हुआ कि आसपास मौजूद लोगों में न तो कोई कुछ देख सका और न ही कोई कुछ समझ पाया. सड़क पर घायल पड़ी स्वाति को देख कर आसपास भीड़ जमा हो गई. उसी भीड़ में नैशनल ढाबा का मालिक सुखविंदर सिंह खनूजा भी शामिल था, जिस ने देर किए बिना स्वाति को अपनी बांहों में उठाया और तत्काल सीएचएल हौस्पिटल ले गया, जहां उपचार के दौरान उस की मौत हो गई.

चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए हौस्पिटल प्रबंधन ने तत्काल यह जानकारी टीआई गगन बादल को दे दी. सूचना पा कर महाथाने की एक टीम सीएचएल हौस्पिटल पहुंच गई. स्वाति को ले कर हौस्पिटल आया सुखविंदर भी वहीं मौजूद था.

उस ने टीआई गगन बादल को बताया कि वह मृतका को अच्छी तरह पहचानता है. वह भाक्षीपुरा लखेखाड़ी की रहने वाली है और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थी. टीआई गगन बादल और एसआई वीरेंद्र सिंह बंदेवार ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया.

सूचना पा कर स्वाति के घर वाले भी वहां आ गए. अब तक जो मामला सीधा सा सड़क एक्सीडेंट लग रहा था, वह उन के वहां पहुंचने से संदिग्ध हो गया. परिवार वालों ने बताया कि सुखविंदर सिंह खनूजा नाम का जो युवक स्वाति को हौस्पिटल ले कर आया था, वह मृतक का पूर्वप्रेमी है. सन 2014 में स्वाति ने उस के खिलाफ महिला थाने में रेप का केस भी दर्ज कराया था.

इस मामले में खनूजा 21 दिन जेल में भी रहा था, लेकिन बाद में स्वाति के साथ शादी का वादा करने पर उसे जेल से जमानत मिल गई थी. इस के बावजूद दोनों की प्रेम कहानी बदस्तूर जारी रही थी. स्वाति खनूजा से मिलने उस के नैशनल ढाबे पर आती रहती थी. घटना के समय भी वह उसी से मिलने आई थी.

टीआई बादल ने उसी समय घटना की जानकारी उज्जैन के एसपी सचिन अतुलकर को दे दी. वह भी अस्पताल आ गए. एसपी ने मामले को संदिग्ध माना. उन्होंने एफएसएल अधिकारी अरविंद नायक को भी वहां बुला लिया. नायक ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

एसपी ने टीआई गगन बादल के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. इस टीम में एसआई वीरेंद्र बंदेवार, संजय यादव, एएसआई अनिल ठाकुर, मनीष यादव आदि को शामिल किया गया. पुलिस टीम मौके पर ऐसे गवाहों की खोज में जुट गई, जो घटना में प्रत्यक्षदर्शी थे. परंतु यह काम इतना आसान नहीं था. स्वाति को किस गाड़ी ने टक्कर मारी, इस बारे में भी लोगों के अलगअलग बयान थे.

टीआई गगन बादल ने मृतका स्वाति और उस के प्रेमी सुखविंदर खनूजा की कालडिटेल्स निकलवाई. इस के साथ ही उन्होंने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जुटाईं. इस जांच से सामने आया कि स्वाति को एक टाटा मैजिक ने टक्कर मारी थी, जिस का नंबर एमपी09 टीजी6900 था.

यह गाड़ी इंदौर की थी. इस का मतलब यह था कि इंदौर की टाटा मैजिक उज्जैन में आ कर एक्सीडेंट कर लापता हो गई थी. इस मामले में पुलिस को गहरी साजिश की बू आने लगी. इंदौर टोल नाके के फुटेज भी पुलिस ने देखे, जिस से पता चल रहा था कि मैजिक गाड़ी केवल इस घटना को अंजाम देने के लिए इंदौर से उज्जैन आई थी, जो एक्सीडेंट के बाद वापस इंदौर चली गई थी.

एसआई वीरेंद्र बंदेवार ने टाटा मैजिक के मालिक का नामपता हासिल कर लिया. यह गाड़ी इंदौर के जकी अंसारी के नाम पर रजिस्टर्ड थी. एसआई बंदेवार एक टीम ले कर मैजिक मालिक जकी अंसारी के घर पहुंच गए. जकी को यह भी पता नहीं था कि उस की मैजिक उज्जैन गई थी.

जकी ने बताया कि उस की गाड़ी इंदौर के ही गांधीनगर का वाहिद चलाता है. जकी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने गांधीनगर, इंदौर से वाहिद को उठा लिया. वाहिद के हाथ आते ही महाकाल पुलिस के हाथ जैसे सफलता की चाबी लग गई.

पुलिस ने वाहिद से सख्ती बरती तो उस ने बता दिया कि वह अपने दोस्त समीर उर्फ मोहसिन के कहने पर 15 नवंबर को टाटा मैजिक ले कर उज्जैन गया था. उस ने यह भी बताया कि समीर उर्फ मोहसिन को इस काम के लिए उस के दोस्त संजू धुर्वे ने बोला था. संजू की मैजिक उस वक्त खराब थी, इसलिए संजू से दोस्ती के चलते उस के कहने पर वाहिद अपनी मैजिक ले कर उज्जैन आया था.

पुलिस ने उस से पूछताछ में सख्ती बरती तो कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई और अंत में सुखविंदर सिंह खनूजा का नाम सामने आ गया. पता चला कि सुखविंदर ने इस काम के लिए गांधीनगर, इंदौर निवासी दंपति पंकज और उमा शर्मा को एक लाख रुपए की सुपारी दी थी.

सुखविंदर पहले दिन से ही पुलिस के शक के दायरे में था, सो उस का नाम सामने आते ही पुलिस की एक टीम ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. जबकि बाकी के 4 आरोपी पंकज शर्मा, पंकज की पत्नी उमा और दोस्त समीर उर्फ मोहसिन व संजू धुर्वे फरार हो गए. पुलिस ने सुखविंदर सिंह से पूछताछ की तो पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई.

स्वाति और सुखविंदर की प्रेम कहानी

नई सड़क, उज्जैन निवासी सुखविंदर सिंह खनूजा की नई सड़क पर मोबाइल फोन की दुकान थी. साथ ही वह चिंतामन गणेश बाईपास पर शहर का मशहूर ढाबा चलाता था. पैसों की कमी न होने के कारण सुखविंदर राजनीति में भी हाथ आजमाना चाहता था, जिस के चलते वह शिवसेना में शामिल हो कर जिला स्तर का पदाधिकारी बन गया था.

स्वाति से उस की मुलाकात करीब 8 साल पहले तब हुई थी, जब स्वाति 21 साल की खूबसूरत युवती थी. मुलाकात दोस्ती में बदली और फिर प्यार होने के बाद शारीरिक संबंध भी बन गए. स्वाति एक निजी स्कूल में टीचर थी, सो पैसे वाला प्रेमी पा कर वह खुद को धन्य समझने लगी थी. सुखविंदर के बुलाने पर वह उस से मिलने कहीं पहुंच जाती थी.

सुखविंदर ने उस से शादी का भी वादा किया था, लेकिन कुछ समय बाद सुखविंदर ने घर वालों की मरजी से दूसरी लड़की से शादी कर ली थी. स्वाति ने इस का विरोध किया तो सुखविंदर ने उसे भरोसा दिलाया कि कुछ दिनों में वह पत्नी को तलाक दे कर उस के साथ शादी कर लेगा.

स्वाति ने उस की बात पर भरोसा कर लिया, जिस से दोनों के बीच शारीरिक रिश्तों का धारावाहिक लिखा जाता रहा. सुखविंदर स्वाति पर खूब पैसे लुटाता था, स्वाति भी उस की हर इच्छा पूरी करने के लिए तैयार रहती थी.

इस बीच सुखविंदर ने नैशनल ढाबा खोल लिया था, जहां स्वाति रोज उस से मिलने आने लगी. यहां विशेष तौर पर बनाए गए केबिन में सुखविंदर  स्वाति के साथ दोपहर में मस्ती करता था. दोनों के बीच विवाद की शुरुआत तब हुई, जब स्वाति खर्च के लिए आए दिन सुखविंदर से बड़ी रकम मांगने लगी. पहले तो सुखविंदर उस की मांग पूरी करता रहा, लेकिन रोजरोज की मांग से तंग आ कर उस ने हाथ तंग होने की बात कह कर पैसा देना बंद कर दिया. यह देख कर स्वाति उस पर कई तरह के दबाव बनाने लगी.

इस से दोनों के बीच विवाद बढ़ा तो सन 2014 में स्वाति ने सुखविंदर के खिलाफ महिला थाने में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. इस मामले में सुखविंदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. लेकिन इस दौरान सुखविंदर ने स्वाति को यह भरोसा दिला कर समझौता कर लिया कि वह जेल से बाहर आ कर 6 महीने में उस के साथ शादी कर लेगा.

इस समझौते के बाद सुखविंदर बाहर आया तो दोनों के शारीरिक संबंध पहले की तरह पटरी पर लौट आए. लेकिन स्वाति अब काफी समझदार हो चुकी थी. अब वह आए दिन उस से कभी 3 हजार तो कभी 5 हजार तो कभी 10 हजार रुपए मांगने लगी.

सुखविंदर मना करता तो वह उस पर दबाव बनाती कि वह या तो अपनी पत्नी को तलाक दे कर उस से शादी करे, नहीं तो वह उस के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज करवा देगी. इतना ही नहीं, पहले तो सुखविंदर ही उसे रोज ढाबे पर मिलने बुलाया करता था, लेकिन अब वह खुद ही दोपहर में उस से मिलने के लिए ढाबे पर आने लगी, जहां कभीकभी दोनों में विवाद भी हो जाता था.

सुखविंदर के ढाबे पर गांधीनगर, इंदौर का बदमाश पंकज शर्मा अकसर शराब पीने आया करता था. सुखविंदर की उस से दोस्ती हो गई थी. सुखविंदर ने पंकज से स्वाति के बारे में बताया तो उस ने लगे हाथ उस से छुटकारा पाने की सलाह दे डाली. जिस के चलते घटना से 15 दिन पहले सुखविंदर ने एक लाख रुपए में उस से ही स्वाति की हत्या का सौदा कर लिया.

इस के आगे की कमान पंकज की पत्नी उमा ने संभाली. इस के लिए उस ने समीर उर्फ मोहसिन और संजू से संपर्क किया. ये दोनों भी गांधीनगर, इंदौर के पुराने बदमाश थे. पहले संजू की टाटा मैजिक से स्वाति को कुचलने की योजना थी, लेकिन उस की गाड़ी खराब होने के कारण संजू ने इस काम के लिए अपने दोस्त वाहिद को कहा.

संजू के कहने पर वाहिद 15 नवंबर, 2019 को अपनी मैजिक गाड़ी ले कर उज्जैन आया तो उस के साथ पंकज और समीर भी थे. उमा और संजू मोटरसाइकिल से उज्जैन पहुंचे थे. यहां ये लोग सुखविंदर के ढाबे से कुछ दूरी पर खड़े हो कर स्वाति के आने का इंतजार करने लगे.

रोज की तरह स्वाति आटो से आ कर सामने सड़क पर उतरी तो वाहिद ने उसे अपनी मैजिक गाड़ी से कुचल दिया और सब मौके से फरार हो गए.

इन सभी ने सोचा था कि पुलिस इसे सामान्य एक्सीडेंट मान कर केस खत्म कर देगी. लेकिन एसपी सचिन अतुलकर के नेतृत्व में महाकाल थाना पुलिस ने जांच कर केस के मुख्य आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

प्रेम कहानी का भयानक अंत: क्यों हुआ प्यार का ऐसा अंजाम

देश भर में विकास हो रहा है, रेल की पटरियों पर इंजन की तरह दौड़ता विकास गांव, कस्बों, शहरों और महानगरों का विकास कागजों पर खड़ी इमारतों, सड़कों और कारखानों का विकास शहरों, महानगरों और कस्बों में भले ही दिख जाए, लेकिन गांवों में कम ही जगहों पर विकास के चरण कमल पड़े नजर आएंगे.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 60 किलोमीटर दूर उन्नाव जिले का गांव हिंदूपुर ऐसा ही गांव है जहां अभी तक विकास नाम की योजना की हवा नहीं गई है.

हिंदूपुर में गरीबों की बस्ती दूर से ही नजर आती है. गांव में प्रवेश के 2 रास्ते हैं. सड़क भी गांव से कुछ दूर है. गांव के एक ओर 20 साल की नंदिनी (बदला हुआ नाम) का घर है. वह 5 बहनों और 2 भाइयों में सब से छोटी थी. विश्वकर्मा बिरादरी की नंदिनी का घर गांव के गरीब परिवारों में आता था. कच्ची दीवारें और धान के पुआल से बने छप्पर वाला घर.

नंदिनी पढ़ाई में तेज थी. उत्तर प्रदेश में जब सपा का शासन था और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे तब उसे मेधावी छात्रा के रूप में कक्षा 12 पास करने के बाद लैपटौप उपहार में दिया गया था. नंदिनी के घर के सामने ही एक मंदिर बना था, यहीं पर शिवम त्रिवेदी का अकसर उठनाबैठना होता था. शिवम गांव के प्रभावशाली ब्राह्मण परिवार का था. वह घंटों तक यहीं अपना समय गुजारता रहता था.

शिवम नंदिनी के घरपरिवार की मदद भी करता रहता था. इस मदद की एक बड़ी वजह नंदिनी थी, जिसे वह मन ही मन पसंद करने लगा था. यह बात शिवम के परिवार के लोगों को पसंद नहीं थी. जैसेजैसे गांव में शिवम और नंदिनी की दोस्ती आगे बढ़ रही थी, शिवम के परिजन उस का विरोध करने लगे थे.

एक दिन की बात है शिवम और नंदिनी मंदिर पर बैठ कर बातें कर रहे थे. यह बात शिवम की मां को पता चली तो वह अपने छोटे बेटे शुभम के साथ वहां आई और लड़की को बुराभला कहना शुरू कर दिया.

शिवम के घर वालों ने जब नंदिनी को भलाबुरा कहना शुरू किया तो नंदिनी ने भी उन्हें इसी तरह जवाब दिया. यह बात शिवम के भाई शुभम को बुरी लगी. उस ने नंदिनी के साथ झगड़ा शुरू कर दिया. झगड़े के दौरान शिवम पूरी तरह चुप रहा. झगड़े के बाद शिवम के घर वालों ने उसे नंदिनी से दूर रहने की सलाह दी.

शिवम ने भी घर वालों की बात मानते हुए नंदिनी से बात करनी बंद कर दी. कुछ दिन शिवम नंदिनी से दूर रहा भी, लेकिन यह दूरी ज्यादा समय तक बनी नहीं रह पाई. नंदिनी शिवम से शादी करना चाहती थी, इसलिए वह शिवम पर शादी करने का दबाव बनाने लगी.

शिवम घर वालों और नंदिनी के बीच फंसा रहा. आखिर नंदिनी के दबाव में 19 जनवरी, 2018 को नोटरी शपथपत्र के जरिए शिवम त्रिवेदी ने नंदिनी से शादी कर ली. दोनों ने शादी तो कर ली लेकिन अब उन के सामने समस्या यह थी कि गांव और घर के लोगों को अपनी शादी की बात कैसे बताएं.

शादी के बाद दोनों अपने गांव से दूर रायबरेली शहर के साकेतनगर में रहने लगे. जब घर वालों को पता चला तो रायबरेली पहुंच कर उन्होंने शिवम को समझाया. शिवम घर वालों के दबाव में आ गया. इस के बाद वह शादी से मुकरने लगा. बस यहीं से नंदिनी और शिवम के बीच रिश्ते बिगड़ने लगे. मामला थाना, कोर्टकचहरी तक पहुंच गया.

पुलिस और प्रशासन ने नहीं सुनी फरियाद

शिवम पर कानूनी शिकंजा कसा जाने लगा तो वह परेशान हो गया. नंदिनी ने शिवम पर जो आरोप लगाए उस के अनुसार झगड़े के बाद शिवम सुलह और शादी कराने के लिए उसे एक मंदिर में ले गया.

लेकिन मंदिर में पहले से कई लड़के मौजूद थे. शिवम और उस के साथियों ने वहीं पर नंदिनी के साथ गैंगरेप किया. इतना ही नहीं, उन्होंने उसे चुप रहने की धमकी भी दी. अपने साथ हुए इस धोखे पर नंदिनी ने भी सोच लिया कि वह अब चुप नहीं बैठेगी. उस ने मामला पुलिस में ले जाने और शिवम को सजा दिलाने की ठान ली.

12 दिसंबर, 2018 को नंदिनी रायबरेली जिले की लालगंज कोतवाली पहुंची और आपबीती सुना कर शिवम व उस के साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की दरख्वास्त की, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया. तब 8 दिन बाद 20 दिसंबर को नंदिनी ने एसपी रायबरेली को रजिस्टर्ड डाक से अपना शिकायती पत्र भेजा. इस की भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

पुलिस उस की शिकायत पर काररवाई क्यों नहीं कर रही थी, यह बात वह नहीं समझ सकी. पुलिस से निराश हो कर पीडि़त नंदिनी ने रायबरेली में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट की कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र दिया. 10 जनवरी, 2019 को मजिस्ट्रैट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया.

26 फरवरी, 2019 को पुलिस को कोर्ट की अवमानना का नोटिस दिया गया. तब पुलिस ने दबाव में आ कर मजबूरी में 5 मार्च, 2019 को मुकदमा दर्ज किया. फिर भी कोई काररवाई नहीं हुई तो नंदिनी ने मुख्यमंत्री से शिकायत की. फलस्वरूप 22 सितंबर को शिवम ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस के देर से मुकदमा दर्ज करने और धीमी गति से जांच के चलते शिवम को जल्दी जमानत मिल गई. जमानत देने के पहले कोर्ट ने नंदिनी से कोई संपर्क नहीं किया. 30 नवंबर, 2019 को जब शिवम जेल से छूट कर गांव पहुंचा तो उस के जेल से आने की खुशी में मिठाइयां बंटने लगीं.

नंदिनी को हैरानी हुई कि शिवम इतनी जल्दी जमानत पर जेल से बाहर कैसे आ गया. उस ने अपने परिवार से यह बात बताई और कहा कि कल वह रायबरेली जा कर अपने वकील से मिल कर पता करेगी कि यह कैसे हो गया है? रायबरेली जाने के लिए नंदिनी को सुबह 5 बजे कानपुर से रायबरेली जाने वाली टे्रन पकड़नी थी.

नंदिनी नहीं पहुंच पाई स्टेशन

3 दिसंबर, 2019 की सुबह नंदिनी ट्रेन पकड़ने के लिए अपने घर से निकली. घर से स्टेशन करीब 2 किलोमीटर दूर था. नंदिनी सुबह 4 बजे जब अपने घर से निकली. तब जाड़े का समय था. रास्ते में अंधेरा भी था. नंदिनी के पिता ने उसे स्टेशन छोड़ने के लिए कहा तो उस ने बूढ़े पिता की परेशानी को देखते हुए मना कर दिया. वह अकेली ही घर से निकल गई.

गांव से स्टेशन के रास्ते में कुछ रास्ता ऐसा था, जो सुनसान रहता था. इसी जगह पर नंदिनी पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी गई. नंदिनी खुद को बचाने के लिए मदद के लिए दौड़ रही थी. जली हालत में खुद को बचाने के लिए नंदिनी दौड़ी तो आग और भड़क गई. उस के कपड़े जल कर उस के जिस्म से चिपक गए थे.

रास्ते में एक जगह कुछ लोग दिखे तो नंदिनी वहीं गिर पड़ी. नंदिनी के कहने पर रास्ते में मिले लोगों ने डायल 112 को फोन कर के जानकारी दी. बुरी तरह जली नंदिनी ने वहां पहुंची पुलिस को और बाद में प्रशासन को बताया कि उस के ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर जलाने वाले शिवम और उस के साथी थे.

90 फीसदी जली हालत में नंदिनी को पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ले जाया गया. लेकिन उस की गंभीर हालत को देखते हुए उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. 3 दिन जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद आखिर नंदिनी ने दम तोड़ दिया. पूरे इलाज के दौरान नंदिनी की बहन और मां लखनऊ से ले कर दिल्ली तक साथ रहीं. उन्होंने उसे तिलतिल कर मरते देखा.

नंदिनी के पिता को दुख है कि घटना के दिन वह उसे स्टेशन तक छोड़ने नहीं गए. नंदिनी खुद अपनी लड़ाई लड़ रही थी. इसलिए वह बेटी के साथ नहीं गए थे. इस के पहले वह उसे स्टेशन तक छोड़ने जाते थे. शिवम द्विवेदी और दूसरे आरोपियों के परिवार के लोग इस घटना के संबंध में तर्क देते हुए कहते हैं कि गुनाह उन के घर वालों ने नहीं किया. उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है.

परिवार के लोग कहते हैं कि नंदिनी को जलाने की घटना जिस समय की है, उस समय उन के लड़के घरों में सो रहे थे. पुलिस ने उन को सोते समय घर से पकड़ा है. अगर उन्होंने अपराध किया होता तो आराम से घर में नहीं सो रहे होते.

शिवम के घर वालों का कहना है कि जब नंदिनी को शिवम से मिलने पर रोक लगा दी गई थी तो उस ने रेप का मुकदमा लिखा कर शिवम और उस के करीबियों को जेल भिजवाने की धमकी दी थी. उन्होंने नंदिनी और शिवम के रायबरेली में रहने की बात से खुद को अनजान बताया.

इन के समर्थक बताते हैं कि जेल से शिवम के छूटने के बाद लड़की ने उसे फिर से जेल भिजवाने की धमकी दी. इस के बाद खुद ही मिट्टी का तेल डाल कर खुद को जलाया. ये लोग सोशल मीडिया पर  इस बात का प्रचार भी कर रहे हैं कि शिवम को फंसाने और जेल भिजवाने के नाम पर लड़की 15 लाख रुपए मांग रही थी. इस में से 7 लाख रुपए शिवम के परिवार वाले दे भी चुके थे.

लड़की के भाई का कहना है कि उस की बहन पढ़लिख कर परिवार की मदद करना चाहती थी. शिवम के संपर्क में आ कर उसे इस स्थिति का सामना करना पड़ा. कानून मानता है कि मरते समय दिया बयान सत्य माना जाता है. सवाल यह उठता है कि नंदिनी जली अवस्था में निर्दोषों को क्यों फंसाएगी? उस समय तक नंदिनी यह समझ चुकी थी कि उस की मौत तय है.

वह सब से पहले अपने साथ हुई घटना की गवाही देना चाहती थी, जिस की वजह से उस ने पुलिस और प्रशासन को बयान दिया. नंदिनी और शिवम के बीच विवाह का नोटरी शपथपत्र हर बात को साफ करता है. नंदिनी के परिजन पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि पुलिस ने किसी हालत में उन की मदद नहीं की.

रेप के मामलों में उन्नाव आया चर्चा में

उत्तर प्रदेश उन्नाव रेप को ले कर पहले भी चर्चा में रहा है. भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समय मामला राजनीतिक था. अब दूसरी घटना में लड़की को जलाने के बाद मामला राजनीतिक कम सामाजिक ज्यादा बन गया है. एक तरफ समाज के लोग लड़की और उसे दिए गए संस्कारों को जिम्मेदार मान रहे हैं.

उन्नाव में रेप की दूसरी घटना के चर्चा में आने के बाद विपक्ष को सत्तापक्ष को घेरने का पूरा मौका मिल गया. लोकसभा में बहस और हंगामा कर मांग की गई कि महिला सुरक्षा दिवस मनाया जाए. उत्तर प्रदेश की विधानसभा के बाहर प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव धरने पर बैठ गए. उन की पार्टी ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार को घेरने का काम किया.

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा लखनऊ के 2 दिन के दौरे से वक्त निकाल कर उन्नाव में नंदिनी के घर वालों से मिलने गईं. इस से एक बार फिर रेप की घटना चर्चा में आ गई. प्रदेश सरकार ने मामले को हलका करने के लिए लड़की के घर वालों को मुआवजा देने का काम किया.

योगी सरकार ने नंदिनी के घर वालों को 25 लाख रुपए की आर्थिक मदद, गांव में 2 मकान और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया.

उन्नाव के मामले के बाद तमाम ऐसी घटनाएं प्रकाश में आने लगीं. इन घटनाओं से समाज की हकीकत का पता चलता है. इस बार रेप कांड सामाजिक है. समाज उन्नाव जिले की घटना को प्रेम प्रसंग मान कर दरकिनार कर रहा है. नंदिनी की मौत के बाद गांव का माहौल गमगीन है. पूरा गांव 2 पक्षों में बंट चुका है. दोनों पक्षों की अलगअलग राय भी है.

नंदिनी के मरने के बाद उस के घर वालों ने नंदिनी का दाह संस्कार या उसे नदी में प्रवाहित करने से इनकार कर दिया. उन्होंने प्रशासन से कहा कि एक बार जल चुकी नंदिनी का दोबारा दाहसंस्कार नहीं करेंगे. इस की जगह उसे दफनाया जाएगा. ऐसा ही हुआ. सरकार ने पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया.

—नंदिनी और उससे जुड़े नाम बदले हुए हैं

इश्क का एक रंग: प्यार की क्या कीमत चुकाई गौरी ने

आगरा के थाना खेरागढ़ क्षेत्र में एक गांव है खां का गढ़. गांव का एक युवक नेहनू गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित पुराने प्राइमरी स्कूल की खंडहर इमारत के पास से गुजर रहा था. नया स्कूल बन जाने के बाद पुराने स्कूल की इमारत लगभग खंडहर हो गई थी. नेहनू की नजर स्कूल के एक कमरे की ओर गई तो वहां का दृश्य देख कर नेहनू को सर्दी में भी पसीना आ गया.

स्कूल के एक कमरे में 16-17 साल की युवती की लाश पड़ी थी. उस के चारों ओर खून फैला हुआ था, जिसे देखते ही नेहनू के मुंह से चीख निकल गई. वह गांव की ओर भागा. रास्ते में कुछ लोग अलाव ताप रहे थे. उस ने इस बात की जानकारी उन्हें दे दी. खां का गढ़ के लोगों को किसी मृत लड़की की खबर मिली तो लोग स्कूल की ओर दौड़े. कुछ ही देर में वहां भीड़ जुट गई.

यह 30 नवंबर, 2019 की सुबह की बात है. ग्रामीणों ने पास जा कर देखा तो युवती उन्हीं के गांव के हरिओम की 17 वर्षीय बेटी गौरी थी. गौरी के घर वालों को भी घटना से अवगत करा दिया गया. खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी थी.

गौरी के घर वाले भी गांव के लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. सूचना मिलने के लगभग एक घंटे बाद खेरागढ़ के थानाप्रभारी शेर सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. युवती की हत्या की खबर आसपास के गांवों में भी फैल चुकी थी, जिस से वहां देखने वालों की भीड़ एकत्र हो गई.

लाश देख कर लोग आक्रोशित थे और हंगामा कर रहे थे. पुलिस ने जब मृतका की लाश कब्जे में लेनी चाही तो लोगों ने विरोध किया. वे आरोपी को पकड़ने की मांग कर रहे थे. भीड़ बढ़ती देख किसी अनहोनी की आशंका के डर से थानाप्रभारी ने उच्चाधिकारियों को भी घटना से अवगत करा दिया.

सूचना मिलने पर एसएसपी बबलू कुमार, एसपी (ग्रामीण) रवि कुमार, सीओ (खेरागढ़) प्रदीप कुमार के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. एसएसपी के आदेश पर फोरैंसिक टीम, डौग स्क्वायड और आसपास के थानों की फोर्स भी वहां पहुंच गई.

उच्चाधिकारियों ने युवती के शव का निरीक्षण किया. स्कूल के कमरे में मृतका गौरी का लहूलुहान शव पड़ा था. उस का गला किसी तेज धारदार हथियार से रेता गया था. गले पर कट के 2 निशान थे, एक हलका था और दूसरा गहरा. सिर में भी पीछे की ओर चोट थी.

फोरैंसिक टीम को तलाशी के दौरान मृतका के कपड़ों से एक सामान्य सा मोबाइल भी मिला, जो स्विच्ड औफ था. इस से जाहिर हो रहा था कि हत्यारे ने हत्या के बाद मोबाइल स्विच औफ कर मृतका के कपड़ों में रख दिया होगा. पानी से भरा लोटा भी शव के पास रखा था.

पुलिस को नहीं मिला कोई सुराग

पुलिस ने मृतका के परिवार वालों से बात की. उन्होंने बताया कि गौरी आज तड़के 5 बजे अपने घर से शौच के लिए निकली थी. लेकिन जब वह 2 घटे तक वापस नहीं आई तो घर वाले उस की तलाश में जुट गए. इसी बीच उन्हें उस की हत्या की खबर मिली.

अधिकारियों ने जब उन से पूछा कि उन की किसी से दुश्मनी या रंजिश तो नहीं है तो गौरी के पिता हरिओम ने बताया कि गांव में उन की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है.

इस बीच फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से जरूरी सबूत जुटाए. पुलिस का खोजी कुत्ता भी घटनास्थल से लगभग 400 मीटर तक खेतों में गया. इस पर पुलिस ने खेतों में तलाशी की, लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिल सका, जिस से कातिल का सुराग मिलता.

कई घंटे तक जांच करने के बाद जब पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को उठाना चाहा तो ग्रामीणों ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि हत्या की गुत्थी सुलझने के बाद ही शव उठने दिया जाएगा.

एसएसपी बबलू कुमार ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझाया कि मृतका के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाल कर हत्यारों का पता लगाया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस शीघ्र ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लेगी. उन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हो गए. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

एसएसपी ने जानकारी दी कि गौरी के शव का पोस्टमार्टम पैनल से कराया जाएगा. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा तय होगी. मृतका के पिता हरिओम सिंह की तहरीर पर थाना खेरागढ के थानाप्रभारी शेर सिंह ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली. एसएसपी ने इस केस की जांच में कई टीमें लगा दीं. पुलिस ने सब से पहले मृतका गौरी के पास मिले फोन की काल डिटेल्स निकलवाई.

गौरी के मोबाइल में जिस का भी नंबर मिला, उसे ही पुलिस ने पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. इन में 3 युवकों पर शक हुआ. उन तीनों से 2 दिन तक पूछताछ चली. इस के बाद 25 और संदिग्धों से पूछताछ की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका.

काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा था, जिस पर बारबार बात की गई थी. पुलिस को उसी नंबर पर सब से ज्यादा शक था, लेकिन वह नंबर बंद था. पुलिस ने उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला वह नंबर 21 वर्षीय हेत सिंह तोमर उर्फ छोटू उर्फ कमल, निवासी गांव छिछावली, थाना मुरैना, मध्य प्रदेश का है. पुलिस ने जब इस पते पर दबिश दी तो हेत सिंह घर पर नहीं मिला. पुलिस ने उस के परिजनों से कह दिया कि वह आए तो उसे खेरागढ़ थाने भेज दें.

2 दिसंबर की शाम को पुलिस ने 2 युवक थाने बुलाए. पुलिस उन दोनों से पूछताछ कर रही थी. इसी बीच रात लगभग 8 बजे हेत सिंह थाने में पहुंचा. उस के कदम लड़खड़ा रहे थे. उस के हाथ में पानी की एक बोतल थी. वह बारबार बोतल से पानी पी रहा था.

थाने में दरोगा और सिपाहियों को देखते ही हेत सिंह ने कहा, ‘‘अब मैं बचूंगा नहीं. दरोगाजी, मैं ने अपने प्यार को मार डाला. मैं ही गौरी का हत्यारा हूं. मेरे मांबाप को परेशान मत करो, जो सजा देनी है मुझे दो. मैं ने जहर खा लिया है. मैं भी उस के पास जाना चाहता हूं.’’

इतना सुनते ही थाने में हड़कंप मच गया. हेत सिंह के हाथ से बोतल छीन ली गई. एक सिपाही उस का वीडियो बनाने लगा. इस के बाद पूछताछ के लिए लाए गए सभी लोग थाने से छोड़ दिए गए.

हेत सिंह को तुरंत गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. उस की हालत खराब होने पर उसे आगरा के एस.एन. मैडिकल कालेज ले जाया गया. सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी अस्पताल पहुंच गए. अधिकारियों द्वारा हेत सिंह से गौरी की हत्या के संबंध में विस्तार से पूछताछ की गई. लेकिन उपचार के दौरान ही उस की मौत हो गई. इस बीच उस ने गौरी की हत्या का जुर्म कबूल करते हुए जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

थाना खेरागढ़ के अंतर्गत स्थित खां का गढ़ गांव में हेत सिंह की बहन की ससुराल है. उस का बहन के यहां आनाजाना लगा रहता था. एक बार पड़ोस में रहने वाली गौरी जब उस की बहन के यहां आई तो हेत सिंह की नजर उस पर पड़ी. गौरी सुंदर लड़की थी. वह उस का अनगढ़ सौंदर्य देख ठगा सा रह गया. उस ने उसी क्षण उस से दोस्ती करने का निर्णय ले लिया.

गौरी की प्रेम कहानी

हेत सिंह टकटकी लगाए उसे निहारता रहा. गौरी को भी इस बात का अहसास हो गया कि हेत सिंह उसे देख रहा है. हेत सिंह कसी हुई कदकाठी का जवान था. जवानी की दहलीज पर पहुंची गौरी का दिल भी उस पर रीझ गया. उसे देख गौरी का दिल तेजी से धड़कने लगा था. वहीं पर दोनों में परिचय हुआ.

गौरी खां का गढ़ के रहने वाले हरिओम सिंह की बेटी थी. गौरी के अलावा हरिओम सिंह का एक बेटा था. हरिओम की पत्नी को कैंसर था, जिस का कुछ दिन पहले ही औपरेशन हुआ था.

मां की बीमारी की वजह से घर के काम गौरी ही करती थी, जिस से वह इंटरमीडिएट से आगे की पढ़ाई नहीं कर सकी थी. इंटरमीडिएट भी उस ने प्राइवेट किया था. गौरी और हेत सिंह की यह मुलाकात धीरेधीरे दोस्ती में बदल गई. फिर दोनों चोरीचोरी गांव के बाहर मिलने लगे.

दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए थे, जिस से फोन पर भी उन की बातें होने लगीं. इस के बाद उन का प्यार और गहराता गया. उन के प्रेम संबंधों की किसी को भनक तक नहीं लगी.

पुलिस को हेत सिंह ने बताया कि वह गौरी को बेइंतहा प्यार करता था. वह भी उसे बहुत चाहती थी. उस के लिए गौरी ही सब कुछ थी.

दोनों ने साथ जीनेमरने की कसम खाई थी. लेकिन उन की शादी नहीं हो पा रही थी. इसलिए उन्होंने तय किया कि जब वे एक साथ रह नहीं सकते तो साथसाथ जान तो दे ही सकते हैं. अत: उन्होंने एक साथ जान देने का निर्णय ले लिया.

योजना के अनुसार हेत सिंह अपने घर से 28 नवंबर, 2019 को ही गांव खां का गढ़ आ गया था. उस ने शनिवार को फोन कर गौरी को पुराने स्कूल में बुला लिया. गौरी वहां आ तो गई लेकिन वह अपने वायदे से मुकर गई.

पिछले कुछ दिनों से उस का व्यवहार भी बदल गया था. इस से हेत सिंह को शक हो गया कि गौरी की जिंदगी में शायद कोई और आ गया है. उसे डर था कि उस की मोहब्बत उस से छिन न जाए. इसलिए गौरी उस के साथ मरने को मना कर रही है. हेत सिंह नहीं चाहता था कि उस की गौरी किसी और की हो जाए. लिहाजा उस ने गौरी को उसी समय सजा देने की ठान ली.

खुद डर गया मौत से

उस ने गौरी को धक्का दे कर गिरा दिया. उस के गिरते ही हेत सिंह ने अपने साथ लाए चाकू से उस का गला काटना चाहा, लेकिन गौरी के विरोध के चलते उस के गले पर हलका कट लगा. किसी तरह उस ने गौरी को काबू कर चाकू से उस का गला रेत दिया. हेत सिंह ने गौरी के मोबाइल को स्विच्ड औफ कर के उस के कपड़ों में रख दिया.

इस के बाद उस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू स्कूल के पास स्थित तालाब में फेंक दिया और वहां से फरार हो गया.

गौरी की हत्या करने के बाद हेत सिंह अपने घर गया. जब उस ने घर वालों को एक युवती की हत्या की बात बताई तो पूरा परिवार सन्न रह गया.

पुलिस से बचने के लिए हेत सिंह वहां से मथुरा स्थित अपनी रिश्तेदारी में चला गया. दूसरे दिन उसे पता चला कि पुलिस उस के घर दबिश देने आई थी. उस ने मथुरा से जहर खरीदा और खेरागढ़ आ कर एक जगह पर जहर का सेवन किया. इस के बाद वह थाना खेरागढ़ पहुंच गया.

पोस्टमार्टम गृह पर आए हेत सिंह के भाई राहुल ने पुलिस को बताया कि हेत सिंह टैक्सी चलाता था. वह दिन भर घर नहीं आता था. परिवार वालों से उस का संपर्क कम ही हो पाता था.

घटना को अंजाम देने के बाद जब पुलिस घर आई, तब उस की करतूत का पता चला. घर वालों ने उस से कहा, ‘‘तुम मर जाओ या फिर थाने जा कर गुनाह कबूल करो. हम से कोई संबंध नहीं है.’’

घर वालों ने एक तरह से हेत सिंह से पल्ला झाड़ लिया था. परिचितों ने उस पर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का दबाव बनाया था. गौरी के प्यार में पागल हुआ हेत सिंह कोई निर्णय नहीं ले पा रहा था.

गुस्से में उस ने गौरी की हत्या तो कर दी थी, लेकिन अब वह पछता रहा था. उसे कुछ सूझ नहीं रहा था. ऐसी स्थिति में उस ने आत्महत्या करने का निर्णय लिया.

परिजनों ने हेत सिंह के शव को मुरैना ले जा कर उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित