अय्याशी में डूबा रंगीन मिजाज का कारोबारी- भाग 2

अस्पताल में पता चला कि जिन तीनों महिलाओं को गोली मारी गई थी, उन की मौत हो चुकी है. उन की लाशें कब्जे में ले कर पुलिस ने शंटू के बयान दर्ज किए और उन्हीं की ओर से भादंवि की धारा 302, 307, 452, 34 और 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तीनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय अस्पताल भेज दिया.

मामला करोड़पति बिजनैसमैन के परिवार में हुई 3 हत्याओं का था, इसलिए खबर मिलते ही पुलिस कमिश्नर (जालंधर) अर्पित शुक्ला सहित पुलिस के तमाम अधिकारी अपनेअपने लावलश्कर के साथ लाजपतनगर की कोठी नंबर-141 पर पहुंच गए. कोठी के ड्राइंगरूम में खून फैला था. क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ मौके से सबूत ढूंढने का प्रयास कर रहे थे.

घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पुलिस अधिकारियों को लगा कि हत्याएं लूटपाट के इरादे से नहीं की गईं, क्योंकि कोठी का सारा कीमती सामान अपनी जगह पर यथावत था. एक जगह कुरसियां और चाय के बरतन जमीन पर गिरे पडे़ थे, जिस से अनुमान लगाया गया कि वहां संघर्ष हुआ होगा.

हत्यारे जिस तरह कोठी के पीछे का दरवाजा खोल कर निकले थे, उस से यही अनुमान लगाया गया कि वह लूंबा परिवार के परिचित रहे होंगे, जिन का कोठी में आनाजाना रहा होगा. क्योंकि वह दरवाजा अकसर बंद रहता था और उस की चाबी फ्रिज के पीछे टंगी रहती थी. उन का मकसद केवल परमजीत कौर उर्फ पम्मी और उस की सास दलजीत कौर की हत्या करना था.

चश्मदीद गवाह न रहे, इसलिए उन्होंने कोठी में मौजूद खुशवंत कौर को भी मार दिया था. शंटू ने पुलिस को बताया था कि उस के परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. पुलिस मामले की जांच में जुट गई. पुलिस को पता चला कि उस कोठी में 4 नौकरानियां काम करती थीं.

सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक 3 नौकरानियां बरतन झाड़ूपोंछा, कपड़े धोने आदि का काम कर के अपने घर चली जाती थीं. एक नौकरानी रीतू लगभग 3, साढ़े 3 बजे की चाय बनाने के बाद घर जाती थी. पुलिस ने चारों नौकरानियों और उन के पतियों से गहन पूछताछ करने के साथ उन की पारिवारिक कुंडली को भी खंगाला.

क्योंकि अकसर बड़े घरों में होने वाली ऐसी वारदातों के पीछे किसी न किसी नौकर का हाथ होता है. पर ये सब बेकसूर पाए गए. पुलिस को घटनास्थल से 2 खाली कारतूस मिले थे, जबकि तीनों मृतक महिलाओं पर 7 गोलियां चलाई गई थीं, इस का मतलब यह था कि शेष 5 गोलियां मृतकों के शरीर में रह गई थीं.

अगले दिन डा. चंद्रमोहन, डा. प्रिया और डा. राजकुमार के पैनल ने तीनों लाशों का पोस्टमार्टम किया. एक्सरे और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार, दलजीत कौर को कुल 3 गोलियां मारी गई थीं, जिस में से एक गोली उन के दिल के पास और एक सिर में फंसी थी. परमजीत कौर को भी 3 गोलियां लगी थीं, जिन में एक गोली उस के माथे के ठीक बीचोबीच लगी थी और एक खोपड़ी और एक बाजू में फंसी हुई थी. इस के अलावा उस के शरीर पर चोटों के 6 निशान पाए गए थे.

खुशवंत कौर के सिर में एक गोली उस की कनपटी से हो कर खोपड़ी में फंस गई थी. उस की गरदन में 16 सेंटीमीटर लंबा एक पेचकस भी फंसा हुआ था. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तीनों लाशें परिजनों को सौंप दीं. उन के अंतिम संस्कार में शहर के अनेक व्यापारी, गणमान्य व्यक्तियों के अलावा हजारों लोग शामिल हुए थे.

पुलिस को अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू से पूछताछ करनी थी, इसलिए अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने उसे थाने बुला लिया. उस समय वहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे. थानाप्रभारी ने उस का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर चैक किया तो पता चला कि उस की सारी काल डिटेल्स डिलीट की हुई थी. उस का फोन नंबर सर्विलांस पर लगाने के बाद संबंधित फोन कंपनी से उस के नंबर की काल डिटेल्स हासिल की गई.

काल डिटेल्स की जांच में पुलिस को कई फोन नंबर संदिग्ध मिले. उन नंबरों के बारे में शंटू से पूछताछ की गई तो इस तिहरे हत्याकांड का खुलासा हो गया.

मामले का 24 घंटे में खुलासा होने पर पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली. हत्याकांड की साजिश में शामिल तेजिंदर कौर उर्फ रूबी नाम की महिला की गिरफ्तारी के लिए एक टीम फगवाड़ा भेज दी.

उस की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कमिश्नर अर्पित शुक्ला ने उसी शाम प्रैसवार्ता कर पत्रकारों को बताया कि लाजपतनगर के तिहरे हत्याकांड के साजिशकर्ता और कोई नहीं, बल्कि अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू और उस की प्रेमिका तेजिंदर कौर उर्फ रूबी है. इन दोनों अभियुक्तों ने पत्रकारों के सामने हत्या की कहानी बयान कर दी. इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी—

जगजीत सिंह लूंबा की सारी कंपनियां दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रही थीं. वह बड़े बिजनैसमैन थे, इसलिए उन का समाज में एक अलग ही रुतबा था. अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू और उस की पत्नी परमजीत कौर में बड़ा गहरा प्यार था. शंटू और जगजीत सिंह सुबह एक साथ घर से निकलते थे. जगजीत सिंह का अधिकांश समय पैट्रोल पंपों पर गुजरता था, जबकि शंटू स्वतंत्र रूप से फैक्ट्री को देखता था. दोनों ने अपनेअपने काम बांट रखे थे, पर सारे कारोबार का लेखाजोखा जगजीत ऐंड कंपनी में होता था.

लूंबा परिवार की बरबादी के दिन की शुरुआत उस समय हो गई थी, जब सन 2013 में उन की कंपनी में तेजिंदर कौर उर्फ रूबी ने बतौर हैड एकाउंटैंट का कार्यभार संभाला. इस के पहले जगजीत ऐंड कंपनी में उस का पति सुखजीत बतौर कैशियर काम करता था. सुखजीत सिंह रूबी का नाम का ही पति था. क्योंकि उस पर सुखजीत सिंह का कोई नियंत्रण नहीं था.

अपना जीवन कैसे जीना है, इस बात के फैसले रूबी खुद लेती थी और उस में वह किसी का भी दखल बरदाश्त नहीं करती थी. कुल मिला कर वह एक आजाद खयाल महिला थी. कालेज के दिनों में ही रूबी ने तय कर लिया था कि वह भारत छोड़ कर विदेश जाएगी, जहां खूब दौलत कमा कर अपनी जिंदगी का लुत्फ उठाएगी.

इस के लिए उस ने कोई भी कीमत चुकाने का फैसला कर लिया था, पर विदेश जाने के लिए उस के पास पर्याप्त धन नहीं था. आखिर उस ने स्कौलरशिप ले कर आस्ट्रेलिया जाने का फैसला लिया. बारहवीं करने के बाद रूबी ने कंप्यूटर एजूकेशन में डिप्लोमा किया. इस के बाद उस ने सन 2009 में आईईएलटीएस की परीक्षा दी.

इस परीक्षा के तहत विदेश में नौकरी करने के लिए इच्छुक लोगों का अंगरेजी भाषा का टेस्ट लिया जाता है. फिर इस में मिले स्कोर बैंड के आधार पर उसे वीजा देने का फैसला लिया जाता है. इस परीक्षा में रूबी का स्कोर बैंड 5.5 आया. यह स्कोर बैंड अंगरेजी भाषा के मामूली उपयोगकर्ता का होता है, इसलिए कम स्कोर बैंड आने पर रूबी को आस्ट्रेलिया का वीजा नहीं मिला.

रूबी ने हिम्मत नहीं हारी. उस ने एक बार फिर आईईएलटीएस की परीक्षा दी. इस बार उसे 6.5 स्कोर बैंड प्राप्त हुए. यह स्कोर बैंड सक्षम उपयोगकर्ता का माना जाता है. पर उसे कम से कम 7 बैंड की जरूरत थी. इस बार भी वीजा न मिलने पर उस की विदेश जाने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी. उसी दौरान उस की शादी सुखजीत सिंह से हो गई.

सुखजीत सिंह एक शरीफ युवक था. रूबी उसे ज्यादा महत्त्व नहीं देती थी. बातबात पर वह उस से क्लेश करती थी. क्लेश से बचने के लिए वह शांत रहता था. रूबी पति के साथ जालंधर के सोढल चौक पर किराए के मकान में रहती थी. पर अपनी महत्त्वाकांक्षा के चलते उस ने विदेश जाने का इरादा नहीं छोड़ा था.

वह किसी ऐसे आदमी की तलाश में थी, जो उस पर ढेर सारी दौलत लुटाए और उस के सपने पूरे करे. इस बीच उस की नौकरी अच्छे वेतन और अन्य सुविधाओं के साथ जगजीत ऐंड कंपनी में लग गई थी. इस नौकरी को उस ने अपने सपने पूरे करने का जरिया बना डाला था.

अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू पहली ही मुलाकात में तेजिंदर कौर उर्फ रूबी का दीवाना हो गया था. रूबी भी अपने बौस की नजरों को ताड़ गई थी. यही तो वह चाहती थी. जिस आदमी की उसे तलाश थी, वह तलाश उस की पूरी हो गई थी.

2 भाइयों की करतूत : परिवार से ही लिया बदला – भाग 3

उस ने नीलम को डांटा और सख्त हिदायत दी कि विजय के साथ घूमनाफिरना बंद कर दे. नीलम ने डर की वजह से मामा से वादा तो कर दिया कि अब वह ऐसा नहीं करेगी. लेकिन वह विजय को दिल दे बैठी थी. फिर उस के बिना कैसे रह सकती थी. सोचविचार कर उस ने तय किया कि अब वह विजय से मिलने में सावधानी बरतेगी.

नीलम ने विजय प्रताप को फोन पर अपने मामा द्वारा दी गई चेतावनी बता दी. लिहाजा विजय भी सतर्क हो गया. मिलना भले ही बंद हो गया लेकिन दोनों ने फोन पर होने वाली बात जारी रखी. जिस दिन नीलम का मामा घर पर नहीं होता, उस दिन वह विजय से मिल भी लेती थी. इस तरह उन का मिलने का क्रम जारी रहा.

नीलम की जातिबिरादरी का एक लड़का था सुबोध. वह नीलम के घर के पास ही रहता था. वह नीलम को मन ही मन प्यार करता था. नीलम भी उस से हंसबोल लेती थी. उस के पास नीलम का मोबाइल नंबर भी था. इसलिए जबतब वह नीलम से फोन पर बतिया लेता था.

सुबोध नीलम से प्यार जरूर करता था, लेकिन प्यार का इजहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था. नीलम जब विजय प्रताप से प्यार करने लगी तो सुबोध के मन में प्यार की फांस चुभने लगी. वह दोनों की निगरानी करने लगा.

एक दिन सुबोध ने नीलम को विजय प्रताप के साथ घूमते देखा तो उस ने यह बात नीलम के मामा श्यामबाबू को बता दी. श्यामबाबू ने नीलम की पिटाई की और उस का घर के बाहर जाना बंद करा दिया. नीलम पर प्रतिबंध लगा तो वह घबरा उठी.

उस ने इस बाबत मोबाइल फोन पर विजय से बात की और घर से भाग कर शादी रचाने की इच्छा जाहिर की. विजय प्रताप भी यही चाहता ही था, सो उस ने रजामंदी दे दी. इस के बाद दोनों कानपुर छोड़ने की तैयारी में जुट गए.

विजय प्रताप का एक रिश्तेदार दिल्ली में यमुनापार लक्ष्मीनगर, मदर डेयरी के पास रहता था और रेडीमेड कपड़े की सिलाई का काम करता था. उस रिश्तेदार के माध्यम से विजय प्रताप ने दिल्ली में रहने की व्यवस्था बनाई और नीलम को दिल्ली ले जा कर उस से शादी करने का फैसला कर लिया. उस ने फोन पर अपनी योजना नीलम को भी बता दी.

4 अगस्त, 2019 को जब श्यामबाबू काम पर चला गया तो नीलम अपना सामान बैग में भर कर घर से निकली और कानपुर सेंट्रल स्टेशन जा पहुंची. स्टेशन पर विजय प्रताप उस का पहले से इंतजार कर रहा था. उस समय दिल्ली जाने वाली कालका मेल तैयार खड़ी थी. दोनों उसी ट्रेन पर सवार हो कर दिल्ली रवाना हो गए.

उधर देर रात को श्यामबाबू घर आया तो घर से नीलम गायब थी. उस ने फोन पर नीलम से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उस का फोन बंद था. श्यामबाबू को समझते देर नहीं लगी कि नीलम अपने प्रेमी विजय प्रताप के साथ भाग गई है. इस के बाद उस ने न तो थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और न ही उसे खोजने का प्रयास किया.

उधर दिल्ली पहुंच कर विजय प्रताप अपने रिश्तेदार के माध्यम से लक्ष्मीनगर में एक साधारण सा कमरा किराए पर ले कर रहने लगा. एक हफ्ते बाद उस ने नीलम से प्रेम विवाह कर लिया और दोनों पतिपत्नी की तरह रहने लगे. नीलम ने विजय से विवाह रचाने की जानकारी अपने मामा श्यामबाबू को भी दे दी. साथ ही यह भी बता दिया कि वह दिल्ली में रह रही है.

इधर विजय प्रताप के परिवार वालों को जब पता चला कि विजय ने नीलम नाम की एक दलित लड़की से शादी की है तो उन्होंने विजय को जम कर फटकारा और नीलम को बहू के रूप में स्वीकार करने से साफ मना कर दिया.

यही नहीं, परिवार वालों ने उस पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि वह नीलम से रिश्ता तोड़ ले. पारिवारिक दबाव से विजय प्रताप परेशान हो उठा. उस का छोटा भाई अजय प्रताप भी रिश्ता खत्म करने का दबाव डाल रहा था.

हो गई कलह शुरू

नीलम अपने पति विजय के साथ 2 महीने तक खूब खुश रही. उसे लगा कि उसे सारा जहां मिल गया है. लेकिन उस के बाद उस की खुशियों में जैसे ग्रहण लग गया. वह तनावग्रस्त रहने लगी. नीलम और विजय के बीच कलह भी शुरू हो गई. कलह का पहला कारण यह था कि नीलम सीलन भरे कमरे में रहते ऊब गई थी.

वह विजय पर दबाव डालने लगी थी कि उसे अपने घर ले चले. वह वहीं रहना चाहती है. लेकिन विजय प्रताप जानता था कि उस के घर वाले नीलम को स्वीकार नहीं करेंगे. इसलिए वह उसे गांव ले जाने को मना कर देता था.

कलह का दूसरा कारण था नीलम का फोन पर किसी से हंसहंस कर बतियाना. जिस से विजय को शक होने लगा कि नीलम का कोई प्रेमी भी है. हालांकि नीलम जिस से बात करती थी, वह उस के मायके के पड़ोस में रहने वाला सुबोध था. उस से वह अपने मामा तथा घर की गतिविधियों की जानकारी लेती रहती थी. कभीकभी वह मामा से भी बात कर लेती थी.

एक तरफ परिवार का दबाव तो दूसरी तरफ शक. इन बातों से विजय प्रताप परेशान हो गया. मन ही मन वह नीलम से नफरत करने लगा. एक दिन देर शाम नीलम सुबोध से हंसहंस कर बातें कर रही थी, तभी विजय प्रताप कमरे में आ गया.

उस ने गुस्से में नीलम का मोबाइल तोड़ दिया और उसे 2 थप्पड़ भी जड़ दिए. इस के बाद दोनों में झगड़ा हुआ. नीलम ने साफ कह दिया कि अब वह दिल्ली में नहीं रहेगी. वह उसे ससुराल ले चले. अगर नहीं ले गया तो वह खुद चली जाएगी.

नीलम की इस धमकी से विजय प्रताप संकट में फंस गया. उस ने फोन पर इस बारे में अपने छोटे भाई अजय से बात की. अंतत: दोनों भाइयों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए नीलम की हत्या की योजना बना ली. योजना बनने के बाद विजय प्रताप ने नीलम से कहा कि वह जल्दी ही उसे गांव ले जाएगा. वह अपनी तैयारी कर ले.

11 दिसंबर, 2019 की सुबह विजय प्रताप ने नीलम से कहा कि उसे आज ही गांव चलना है. नीलम चूंकि पहली बार ससुराल जा रही थी, इसलिए उस ने साजशृंगार किया, पैरों में महावर लगाई, फिर पति के साथ ससुराल जाने के लिए निकल गई.

विजय प्रताप नीलम को साथ ले कर बस से दिल्ली से निकला और रात 11 बजे कन्नौज पहुंच गया. विजय की अपने छोटे भाई अजय से बात हो चुकी थी. अजय प्रताप मोटरसाइकिल ले कर कन्नौज बसस्टैंड पर आ गया.

नीलम ने दोनों भाइयों को एकांत में खुसरफुसर करते देखा तो उसे किसी साजिश का शक हुआ. इसी के मद्देनजर उस ने कागज की परची पर पति का मोबाइल नंबर लिखा और सलवार के नाड़े के स्थान पर छिपा लिया.

रात 12 बजे विजय प्रताप, नीलम और अजय प्रताप मोटरसाइकिल से पैथाना गांव की ओर रवाना हुए. जब वे ईशन नदी पुल पर पहुंचे तो अजय प्रताप ने मोटरसाइकिल रोक दी. उसी समय विजय प्रताप ने नीलम के गले में मफलर लपेटा और उस का गला कसने लगा. नीलम छटपटा कर हाथपैर चलाने लगी तो अजय प्रताप ने उसे दबोच लिया और पास पड़ी ईंट से उस का चेहरा कुचल दिया.

हत्या करने के बाद दोनों नीलम के गले में अंगौछा डाल बांध कर शव को घसीट कर पुल के नीचे नदी किनारे ले गए और झाडि़यों में फेंक दिया. पहचान मिटाने के लिए उस का चेहरा तेजाब डाल कर जला दिया. तेजाब की बोतल अजय प्रताप ले कर आया था. शव को ठिकाने लगाने के बाद दोनों भाई मोटरसाइकिल से अपने गांव पैथाना चले गए.

17 दिसंबर, 2019 को थानाप्रभारी टी.पी. वर्मा ने अभियुक्त विजय प्रताप तथा अजय प्रताप को कन्नौज कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अक्षम्य अपराध : कृष्णा को बनाया शिकार – भाग 1

16 सितंबर, 2019 की बात है. फिरोजाबाद जिले के गांव लालपुर की रहने वाली शशि यादव घर के कामों में व्यस्त थी. शाम 5 बजे जब उसे अपने बच्चों की याद आई तो वह उन्हें खोजने लगी. उस का 4 साल का बड़ा बेटा कान्हा तो घर में ही खेल रहा था, लेकिन 2 साल का छोटा बेटा लौकिक उर्फ कृष्णा कहीं नजर नहीं आ रहा था.

शशि ने पहले घर में ही कृष्णा की खोज की, फिर पासपड़ोस के घरों में जा कर देखा. लेकिन वह वहां भी नहीं था. शशि की जेठानी नीतू पड़ोस में ही दूसरे घर में रहती थी. शशि ने सोचा कि कृष्णा कहीं अपनी ताई के घर खेलने

न चला गया हो. अत: वह जेठानी के घर जा पहुंची. नीतू उसे घर के बाहर ही मिल गई. शशि ने उस से पूछा, ‘‘दीदी, कृष्णा क्या आप के यहां खेल रहा है?’’

‘‘नहीं तो,’’ नीतू हड़बड़ा कर बोली, ‘‘कृष्णा, हमारे घर नहीं आया.’’

‘‘फिर भी दीदी, एक बार देख लो. शायद कहीं छिप कर बैठा हो.’’ शशि ने आग्रह किया.

‘‘तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं तो खुद आ कर देख लो.’’ नीतू तुनक कर बोली.

‘‘दीदी, मेरा तो कलेजा फटा जा रहा है और आप भरोसे की बात कर रही हैं.’’ कहते हुए शशि ने जेठानी के साथ उस के मकान के भूतल का कोनाकोना छान मारा, लेकिन कृष्णा का कुछ भी पता नहीं चला.

कृष्णा को ढूंढतेढूंढते एक घंटे से ज्यादा बीत गया, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चल पाया, जिस से शशि के मन में घबराहट होने लगी. बेटे के लापता होने की खबर उस ने अपने पति सत्येंद्र यादव को दे दी.

सत्येंद्र उस समय अपने भाई महेश के शराब के ठेके पर बैठा था. वहां वह सेल्समैन था. उस का छोटा भाई कुलदीप भी यही काम करता था. सत्येंद्र ने अपने दोनों भाइयों को कृष्णा के लापता होने की सूचना दी तो वे तीनों ठेका बंद कर घर आ गए.

इस के बाद सत्येंद्र अपने भाइयों कुलदीप तथा महेश के साथ कृष्णा को खोजने लगा. तीनों भाइयों ने गांव का एकएक घर छान मारा, लेकिन कृष्णा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. फिर उन के दिमाग में विचार आया कि कहीं कोई बाबा या तांत्रिक कृष्णा का अपहरण कर के तो नहीं ले गया.

उन्होंने परिवार के कुछ अन्य लोगों को साथ लिया और रेलवे स्टेशन, बसअड्डा तथा टैंपो स्टैंड पर जा कर खोजबीन की. उन्होंने संदिग्ध दिखने वाले बाबाओं को रोक कर भी पूछताछ की तथा उन की झोली की तलाशी ली. तंत्रमंत्र करने वालों के यहां जा कर भी तलाशी ली. लेकिन कृष्णा का कुछ भी पता नहीं चला.

कृष्णा के लापता होने की खबर पूरे गांव में फैल चुकी थी. इसलिए गांव के तमाम पुरुष और महिलाएं सत्येंद्र के घर पर जुटने लगे. सब की जुबान पर एक ही बात थी, आखिर 2 साल का बच्चा कृष्णा कहां चला गया. ऐसे में सत्येंद्र की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बच्चे को कहां ढूंढे.

अगले दिन 17 सितंबर की सुबह 10 बजे सत्येंद्र अपने भाइयों के साथ थाना रसूलपुर जा पहुंचा. थाने में उस समय थानाप्रभारी बी.डी. पांडेय मौजूद थे. सत्येंद्र ने थानाप्रभारी को अपना परिचय देते हुए अपने 2 साल के बेटे लौकिक उर्फ कृष्णा के लापता होने की जानकारी दी.

2 साल के बच्चे के गायब होने की बात सुन कर पांडेय भी दंग रह गए, क्योंकि इतना छोटा बच्चा अकेला कहीं दूर नहीं जा सकता था. उन्होंने सत्येंद्र से पूछा, ‘‘तुम्हें किसी पर कोई शक है या किसी से कोई रंजिश वगैरह है तो बताओ.’’

सत्येंद्र कुछ बोलता, उस से पहले ही उस के साथ आए भाई कुलदीप व महेश बोल पड़े, ‘‘नहीं सर, हम लोगों का किसी से कोई झगड़ा नहीं है. जरूर किसी ने बच्चे का अपहरण किया है.’’

थानाप्रभारी ने सत्येंद्र यादव की तरफ से अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया तथा सत्येंद्र व उस के भाइयों को आश्वासन दिया कि वह बच्चे की खोज में कोई कसर न छोड़ेंगे. आश्वासन पा कर सत्येंद्र अपने भाइयों के साथ वापस घर चला गया.

उन लोगों के जाने के बाद थानाप्रभारी के मन में एक सवाल बारबार कौंध रहा था कि आखिर 2 साल के बच्चे का अपहरण कोई क्यों करेगा. इस की 2 ही वजह दिखाई दे रही थीं, पहली दुश्मनी और दूसरी फिरौती. इधर बड़ा लालपुर गांव और आसपास के गांवों में तरहतरह की चर्चाएं होने लगी थीं.

कोई बच्चों के गायब करने वाले गिरोह की गांव में सक्रियता बढ़ने का अंदेशा जता रहा था, तो कोई तांत्रिकों आदि पर शक जता रहा था. कुछ लोगों को यह शक हो रहा था कि कहीं कोई ऐसी महिला तो बच्चे का अपहरण कर के नहीं ले गई, जिस की गोद सूनी हो.

बहरहाल, जितने मुंह उतनी बातें होने लगी थीं. थानाप्रभारी ने इस मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया था.

थानाप्रभारी भी बच्चे की खोज में जुटे थे. उन्होंने परिवार के लोगों से हर छोटीबड़ी जानकारी एकत्र की, लेकिन उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिल पाई, जिस के आधार पर कोई क्लू मिल सके.

उन्होंने अपने खास मुखबिरों को भी लगा रखा था. लेकिन उन से भी कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी. जैसेजेसे समय बीतता जा रहा था, वैसेवैसे गांव के लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. गांव के लोग एसएसपी औफिस के बाहर धरनाप्रदर्शन की तैयारी में जुट गए थे.

पुलिस को आशंका थी कि हो न हो कृष्णा का किसी ने फिरौती के लिए अपहरण कर लिया हो. लेकिन पुलिस की यह आशंका भी बेकार साबित हुई, क्योंकि 48 घंटे बीतने के बाद भी कृष्णा के घर वालों के पास फिरौती का फोन नहीं आया था. पुलिस ने क्षेत्र के आधा दरजन से अधिक आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को हिरासत में ले कर उन से कड़ाई से पूछताछ तो की, लेकिन पुलिस के हाथ खाली के खाली ही रहे.

19 सितंबर, 2019 की सुबह करीब 5 बजे बड़ा लालपुर गांव का अंशु अपने साथियों के साथ फुटबाल खेलने जा रहा था. दुर्गामाता मंदिर के पास पहुंचने पर उसे बदबू महसूस हुई. वह बदबू आने वाली दिशा की ओर बढ़ा तो कुछ दूरी पर उसे लगा कि मिट्टी में कुछ दबा हुआ है. बनियान मिट्टी से बाहर दिख रही थी. दुर्गंध वहीं से आ रही थी.

अंशु ने शोर मचाया तो भीड़ जुट गई. सत्येंद्र तथा उस की पत्नी शशि यादव भी आ गए. सत्येंद्र के भाई महेश, कुलदीप तथा अन्य परिजन भी वहां आ गए. सभी दबी जुबान से चर्चा करने लगे कि मिट्टी में कहीं कृष्णा तो दफन नहीं है. गांव के कुछ लोगों का मानना था कि पुलिस के आने के बाद ही यहां की मिट्टी हटाई जाए, लेकिन सत्येंद्र और उस के घर वालों को भला तसल्ली कहां थी.

वासना की कब्र पर : पत्नी ने क्यों की बेवफाई – भाग 1

कानपुर नगर के थाना नर्वल के थाना प्रभारी रामऔतार को कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि नरौरा गांव के राजेश कुरील ने अपनी पत्नी तथा उस के आशिक की हत्या कर दी है. दोनों की लाशें उसी के घर में पड़ी हैं. सुबहसुबह डबल मर्डर की सूचना पा कर थाना प्रभारी विचलित हो उठे.

हालांकि कंट्रोल रूप से यह सूचना जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी मिल गई थी, फिर भी थाना प्रभारी ने घटना स्थल पर रवाना होने से पहले यह जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी. यह बात 11 अक्तूबर, 2019 की है.

थाना नर्वल से नरौरा गांव 7 किलोमीटर दूर था पुलिस आधे घंटे में घटनास्थल पर पहुंच गई. थानाप्रभारी जब राजेश के घर पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा था. लग ही नहीं रहा था कि गांव में डबल मर्डर हुआ है. पासपड़ोस के लोग पुलिस देख कर सकते में थे और अपने घरों से बाहर झांक रहे थे. हेडकांस्टेबल रामसिंह ने राजेश के घर का दरवाजा थपथपाया तो उस ने ही दरवाजा खोला. वह पुलिस को देख बोला, ‘‘साहब, मैं ने ही आप को फोन किया था.’’

थानाप्रभारी जब पुलिस टीम के साथ घर के अंदर गए तो घर के आंगन में खून से लथपथ 2 लाशें पड़ी थीं. एक लाश युवक की थी जबकि दूसरी युवती की थी. दोनों को चाकू से गोदा गया था और गरदन रेती गई थी. कमरे से ले कर आंगन तक खून ही खून फैला था. देखने से ऐसा लग रहा था कि युवक को कमरे से घसीट कर आंगन तक लाया गया था.

युवक की उम्र 24-25 साल थी जबकि युवती की उम्र लगभग 35 वर्ष थी. दोनें की लाशें अर्धनग्नावस्था में थीं. युवक कच्छा बनियान पहने था, जबकि युवती पेटीकोट ब्लाउज में थी. ब्लाउज के हुक खुले थे. दोनों लाशों के बीच खून से सना चाकू भी पड़ा था. पुलिस ने चाकू अपने कब्जे में ले लिया.

थाना प्रभारी रामऔतार ने इस बारे में राजेश से पूछा तो उस ने बताया कि मृतका उस की पत्नी सुनीता है और मृतक मनीष है, जो औंग थाने के गलाथा गांव का रहने वाला है. रिश्ते में वह उस का फुफेरा भाई है. राजेश अपना जुर्म स्वीकार कर रहा था. थाना प्रभारी ने राजेश को हिरसत में ले लिया और मनीष के घर वालों को उस की मौत की सूचना भेज दी. सुनीता के मायके वालों को राजेश ने ही अपने मोबाइल से खबर दे दी थी.

राजेश का पिता मौजीलाल कुरील पास के ही मकान में रहता था. उसे इस मामले की जानकारी पुलिस के आने के बाद ही मिली थी. बेटे के इस कृत्य से वह बदहवास था. वह कभी राजेश को तो कभी उस के बच्चों को निहार रहा था.

राजेश के 2 बेटे मुकेश, सनी तथा एक बेटी कंचन थी. जब मातापिता ने बच्चों का खयाल रखना छोड़ दिया था तब बच्चों की देखभाल मौजीलाल करने लगा था. घटना के वक्त बच्चे उसी के घर में थे. तीनों बच्चे मां की मौत पर फूटफूट कर रो रहे थे.

अब तक दोहरे हत्याकांड की खबर नरौरा गांव में ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों में भी फैल गई थी. अत: थोड़ी देर में घटना स्थल पर देखने वालों की भीड़ जुट गई. मनीष के घरवाले भी आ गए थे और वह उस की लाश के पास फूटफूट कर रो रहे थे. लेकिन सुनीता के मायके से कोई नहीं आया था. उस के भाई अरविंद ने आने से साफ मना कर दिया था.

उसी दौरान एसएसपी अनंतदेव तिवारी तथा प्रद्युम्न सिंह आ गए. उन्होंने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने मृतक मनीष के पिता कल्लू से पूछताछ की. कल्लू ने बताया कि मनीष के चचेरे भाई राजे का तिलक था. मनीष वैन से अपने मामा मौजीलाल व गोरे लाल को लेने नरौरा आया था. राजेश ने मनीष की हत्या क्यों की, इस का उसे कुछ पता नहीं.

पुलिस अधिकारियों ने कमरे का निरीक्षण किया तो जमीन पर बिछे बिस्तर पर खून के दाग थे. कमरे से ले कर आंगन तक खून फैला था. कमरे की खूंटी पर पैंटकमीज टंगी थी. पूछने पर कल्लू ने बताया कि वह पैंटकमीज मनीष की है.

पुलिस ने पैंटकमीज की जेबें खंगाली तो कमीज की जेब से ड्राइविंग लाइसेंस तथा पैंट की जेब से मृतक का पर्स तथा वैन की चाबी मिली. यह सामान पुलिस अधिकारियों ने कल्लू को सौंप दिया. कमरे से 2 मोबाइल फोन भी मिले जिस में एक सुनीता का था और दूसरा मनीष का. दोनों मोबाइल फोन पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए.

फोरैंसिक टीम का काम निपट जाने के बाद पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिए.

आरोपी राजेश कुरील को हिरासत में ले कर पुलिस थाने लौट गई. एसएसपी अनंतदेव तिवारी की मौजूदगी में थानाप्रभारी रामऔतार ने डबल मर्डर के संबंध में राजेश से पूछताछ की तो वह फफक पड़ा, ‘‘साहब, मेरी पत्नी सुनिता और मनीष के अवैध संबंधों की चर्चा घरपरिवार में ही नहीं बल्कि पूरे गांव में आम हो चुकी थी. मैं कई दिनों से घुटघुट कर जी रहा था. पत्नी से विरोध करता तो वह मारपीट और झगड़े पर उतारू हो जाती थी.

‘‘कई बार मन में आत्महत्या का विचार भी आया, लेकिन बच्चों की वजह से ऐसा नहीं किया. मना करने के बावजूद मनीष घर आया और रात में रुक गया. देर रात दोनों को रंगरलियां मनाते देख मेरे सिर पर खून सवार हो गया. विरोध करने पर दोनों मेरे ऊपर ही टूट पड़े. इस के बाद मैं ने झल्लाहट में और खुद को बचाने के लिए दोनों को चाकू मार दिए, फिर दोनों की गरदन रेत कर हत्या कर दी.’’

‘‘वे 2 थे और तुम अकेले. फिर दोनों की हत्या कैसे की, कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारा साथ किसी और ने दिया हो?’’ एसएसपी साहब ने सवाल किया.

‘‘नहीं साहब, मेरे साथ दूसरा कोई नहीं था. दरअसल मनीष ज्यादा नशे में था. इसलिए जब मैं ने उसे कमर पर लात जमाई तो वह लड़खड़ा कर जमीन पर गिर पड़ा. उस के बाद मैं ने उस पर चाकू से वार किया और उसे कमरे से घसीट कर आंगन में लाया. फिर उस की गरदन रेत दी. सुनीता उसे बचाने आई तो मैं ने उस पर भी वार कर दिया और चाकू से गरदन रेत दी.’’ राजेश ने पूरी बात एसएसपी को बता दी.

कातिल बहन की आशिकी : क्या था पूजा का गुनाह – भाग 1

इस साल गणतंत्र दिवस की बात है. अन्य शहरों की तरह इस मौके पर उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में भी स्कूल, कालेज, व्यापारिक प्रतिष्ठान व मुख्य चौराहों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा रहा था. शहर का ही सराय एसर निवासी श्याम सिंह यादव भी अपने स्कूल में मौजूद था और बच्चों के रंगारंग कार्यक्रम को तन्मयता से देख रहा था. श्याम सिंह यादव एक प्राइवेट स्कूल में वैन चालक था. वैन द्वारा सुबह के समय बच्चों को स्कूल लाना फिर छुट्टी होने के बाद उन्हें उन के घर छोड़ना उस का रोजाना का काम था.

स्कूल में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम समाप्त होने के बाद श्याम सिंह ने स्कूल के बच्चों को घर छोड़ा, फिर वैन को स्कूल में खड़ा कर के वह दोपहर बाद अपने घर पहुंचा. घर में उस ने इधरउधर नजर दौड़ाई तो उसे बड़ी बेटी पूजा तो दिखाई पड़ी, लेकिन छोटी बेटी दीपांशु उर्फ रचना दिखाई नहीं दी. रचना को घर में न देख कर श्याम सिंह ने पूजा से पूछा, ‘‘पूजा, रचना घर में नहीं दिख रही है. कहीं गई है क्या?’’
‘‘पापा, रचना कुछ देर पहले स्कूल से आई थी, फिर सहेली के घर चली गई. थोड़ी देर में आ जाएगी.’’ पूजा ने बताया.

श्याम सिंह ने बेटी की बात पर यकीन कर लिया और चारपाई पर जा कर लेट गया. लगभग एक घंटे बाद उस की नींद टूटी तो उसे फिर बेटी की याद आ गई. उस ने पूजा से पूछा, ‘‘बेटा, रचना आ गई क्या?’’
‘‘नहीं पापा, अभी तक नहीं आई.’’ पूजा ने जवाब दिया.
‘‘कहां चली गई जो अभी नहीं आई.’’ श्याम सिंह ने चिंता जताते हुए कहा.
इस के बाद वह घर से निकला और पासपड़ोस के घरों में रचना के बारे में पूछा. लेकिन रचना का पता नहीं चला. फिर उस ने रचना के साथ पढ़ने वाली लड़कियों से उस के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि रचना आज स्कूल गई ही नहीं थी.

श्याम सिंह का माथा ठनका. क्योंकि पूजा कह रही थी कि रचना स्कूल से वापस आई थी. श्याम सिंह के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगीं. उस के मन में तरहतरह के विचार आने लगे. श्याम सिंह की पत्नी सर्वेश कुमारी अपने बेटे विवेक के साथ कहीं रिश्तेदारी में गई हुई थी. श्याम सिंह ने रचना के गुम होने की जानकारी पत्नी को दी और तुरंत घर वापस आने को कहा.

शाम होतेहोते 17 वर्षीय दीपांशी उर्फ रचना के गुम होने की खबर पूरे मोहल्ले में फैल गई. कई हमदर्द लोग श्याम सिंह के साथ रचना की खोज में जुट गए. जब कोई जवान लड़की घर से गायब हो जाती है तो तमाम लोग तरहतरह की कानाफूसी करने लगते हैं. श्याम सिंह के पड़ोस की महिलाएं भी कानाफूसी करने लगीं.

श्याम सिंह ने लोगों के साथ तमाम संभावित जगहों पर बेटी को तलाशा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. इटावा के रेलवे स्टेशन, रोडवेज व प्राइवेट बसअड्डे पर भी रचना को ढूंढा गया. लेकिन उस का कहीं कोई पता नहीं लगा.

जब रचना का कुछ भी पता नहीं चला, तब श्याम सिंह थाना सिविल लाइंस पहुंचा. उस ने वहां मौजूद ड्यूटी अफसर आर.पी. सिंह को अपनी बेटी दीपांशी उर्फ रचना के गुम होने की जानकारी दी. थानाप्रभारी ने दीपांशु उर्फ रचना की गुमशुदगी दर्ज कर ली. इस के बाद उन्होंने इटावा जिले के सभी थानों में रचना के गुम होने की सूचना हुलिया तथा उम्र के साथ प्रसारित करा दी.

बड़ी बेटी पर हुआ शक

रात 10 बजे तक श्याम सिंह की पत्नी सर्वेश कुमारी बेटे के साथ अपने घर पहुंच गई. पतिपत्नी ने सिर से सिर जोड़ कर परामर्श किया तो उन्हें बड़ी बेटी पूजा पर शक हुआ. उन्हें लग रहा था कि रचना के गुम होने का रहस्य पूजा के पेट में छिपा है. इसलिए श्याम सिंह ने पूजा से बड़े प्यार से रचना के बारे में पूछा.

लेकिन जब पूजा ने कुछ नहीं बताया तो श्याम सिंह ने उस की पिटाई की. इस के बाद भी पूजा ने अपनी जुबान नहीं खोली. रात भर श्याम सिंह व सर्वेश कुमारी परेशान होते रहे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर रचना कहां गुम हो गई.

अगले दिन 27 जनवरी की सुबह गांव के कुछ लोग तालाब की तरफ गए तो उन्होंने तालाब के किनारे पानी में एक बोरी पड़ी देखी. बोरी को कुत्ते पानी से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे. बोरी को देखने से लग रहा था कि उस में किसी की लाश है.

यह तालाब श्याम सिंह के घर के पिछवाड़े था, इसलिए बहुत जल्द उसे भी तालाब में संदिग्ध बोरी पड़ी होने की जानकारी मिल गई. खबर पाते ही वह तालाब किनारे पहुंच गया. उस ने बोरी पर एक नजर डाली फिर तमाम आशंकाओं के बीच बदहवास हालत में थाना सिविल लाइंस पहुंचा. थानाप्रभारी जे.के. शर्मा को उस ने तालाब किनारे मुंह बंद बोरी पड़ी होने की सूचना दी और आशंका जताई कि उस में कोई लाश हो सकती है.

सूचना मिलने पर थानाप्रभारी जे.के. शर्मा पुलिस टीम के साथ सराय एसर गांव के उस तालाब के किनारे पहुंचे, जहां संदिग्ध बोरी पड़ी थी. उन्होंने 2 सिपाहियों की मदद से बोरी को तालाब से बाहर निकलवाया. बोरी का मुंह खुलवा कर देखा गया तो उस में एक लड़की की लाश निकली.

लाश बोरी से निकाली गई तो उसे देखते ही श्याम सिंह फफक कर रो पड़ा. लाश उस की 17 वर्षीय बेटी दीपांशी उर्फ रचना की थी. रचना की लाश मिलने की खबर पाते ही उस की मां सर्वेश कुमारी रोतीबिलखती तालाब किनारे पहुंच गई.

इधर थानाप्रभारी जे.के. शर्मा ने रचना की लाश मिलने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ देर में एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी तथा एडीशनल एसपी डा. रामयश सिंह घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतका के पिता श्याम सिंह से इस बारे में पूछताछ की.

श्याम सिंह ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि रचना की हत्या का राज उन की बड़ी बेटी पूजा के पेट में छिपा है जो इस समय घर में मौजूद है. अगर उस से सख्ती से पूछताछ की जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी.

अपनी ही बेटी पर छोटी बेटी की हत्या का आरोप लगाने की बात सुन कर एसएसपी त्रिपाठी भी चौंके. उन्होंने पूछा, ‘‘बड़ी बहन अपनी छोटी बहन की हत्या आखिर क्यों कराएगी?’

’‘‘साहब, मेरी बड़ी बेटी के लक्षण ठीक नहीं हैं. हो सकता है इस हत्या में पड़ोस का अनिल और उस का दोस्त अवध पाल भी शामिल रहे हों.’’ श्याम सिंह ने बताया.

श्याम सिंह की बातों से एसएसपी को मामला प्रेम प्रसंग का लगा. अत: उन्होंने थानाप्रभारी को निर्देश दिया कि वह डेडबौडी को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने के बाद आरोपियों को हिरासत में ले कर उन से पूछताछ करें. इस के बाद थानाप्रभारी जे.के. शर्मा ने मौके की काररवाई पूरी करने के बाद रचना का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

फिर उन्होंने महिला पुलिस के सहयोग से मृतका की बड़ी बहन पूजा यादव को हिरासत में ले लिया. इस के अलावा आरोपी अनिल व उस के दोस्त अवध पाल को भी सरैया चुंगी के पास से पकड़ लिया गया.

थाने में एडीशनल एसपी डा. रामयश सिंह की मौजूदगी में पुलिस ने सब से पहले श्याम सिंह की बड़ी बेटी पूजा यादव से पूछजाछ शुरू की. शुरू में तो पूजा अपनी बहन की हत्या से इनकार करती रही लेकिन जब थोड़ी सख्ती की गई तो उस ने बताया कि छोटी बहन रचना से उस का झगड़ा हुआ था. झगडे़ के बाद उस ने कमरा बंद कर फांसी लगा ली थी. इस से वह बुरी तरह डर गई. इसलिए शव को उस ने बोरी में भरा और साइकिल पर लाद कर घर से थोड़ी दूर स्थित तालाब में फेंक आई.

दूल्हेभाई का रंगीन ख्वाब – भाग 1

दिल्ली की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में लोनी बौर्डर थाना एकदम दिल्ली की सीमा से सटा है. यूपी और दिल्ली की सीमा से सटा होने के कारण लोनी बौर्डर थाने की पुलिस अपराधियों पर नजर रखने के लिए 24 घंटे सतर्क रहती है. आमतौर पर इस थाने के इंचार्ज भी रातरात भर जाग कर क्षेत्र में गश्त करते रहते हैं.

11 और 12 जनवरी, 2020 की रात को लोनी बौर्डर थाने के एसएचओ इंसपेक्टर शैलेंद्र प्रताप सिंह अदालत में एक जरूरी एविडेंस के लिए शहर से बाहर गए हुए थे. थाने के एसएसआई राजेंद्र पाल सिंह थानाप्रभारी की जिम्मेदारी उठा रहे थे.

रात के करीब 4 बजे का वक्त था जब राजेंद्र पाल सिंह सरकारी जीप में अपने हमराहियों के साथ पूरे क्षेत्र में गश्त कर के थाने की तरफ लौट रहे थे कि उन्हें पुलिस नियंत्रण कक्ष से वायरलैस पर सूचना मिली कि 3-4 बदमाशों ने बेहटा हाजीपुर में मेवाती चौक पर रहने वाले कारोबारी आसिफ अली सिद्दीकी के घर में घुस कर डाका डाला है और लूटपाट का विरोध करने पर व्यापारी की पत्नी समरीन का गला दबा दिया है.

वायरलैस से मिली सूचना इतनी ही थी, लेकिन इतनी गंभीर थी कि राजेंद्र पाल सिंह ने थाने न जा कर घटनास्थल पर पहुंचने को प्राथमिकता दी. वहां से मेवाती चौक की दूरी करीब 4 किलोमीटर थी, वहां तक पहुंचने में उन्हें महज 10 मिनट का वक्त लगा.

मेवाती चौक पर आसिफ अली सिद्दीकी का घर मुख्य सड़क पर ही था. वहां आसपड़ोस के काफी लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा थी. घर में रोनेपीटने की आवाजें आ रही थीं.

वहां पहुंचने पर पता चला कि आसिफ अली सिद्दीकी कुछ लोगों के साथ अपनी पत्नी समरीन को जीटीबी अस्पताल ले गया है, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया है. वारदात के बारे में ज्यादा जानकारी तो कोई नहीं दे सका, लेकिन यह जरूर पता चल गया कि पुलिस नियंत्रण कक्ष को वारदात की सूचना पड़ोस में रहने वाले रईसुद्दीन ने दी थी.

रईसुद्दीन ने एसएसआई राजेंद्र पाल सिंह को बताया कि रात करीब पौने 4 बजे आसिफ ने अपनी छत पर चढ़ कर ‘‘बचाओ… बचाओ.. डकैत.. डकैत’’ कह कर चिल्लाना शुरू किया था. जिस के बाद आसपड़ोस में रहने वाले वहां एकत्र हो गए थे. पड़ोसियों ने आसिफ के घर के मुख्यद्वार के बाहर से लगी कुंडी खोली थी, जिसे बदमाश भागते समय बाहर से लगा गए थे.

चूंकि समरीन की हत्या आपराधिक वारदात के दौरान हुई थी, इसलिए उस का पोस्टमार्टम कराने की काररवाई पुलिस को ही करनी थी. इसलिए राजेंद्र पाल सिंह ने अपने सहयोगी एसआई विपिन कुमार को स्टाफ के साथ जीटीबी अस्पताल रवाना कर दिया. विपिन कुमार ने जीटीबी अस्पताल पहुंच कर इमरजेंसी में मौजूद डाक्टरों से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि समरीन को जब लाया गया था, उस से पहले ही उस की मृत्यु हो चुकी थी.

विपिन कुमार ने डाक्टरों से बातचीत कर उन के बयान दर्ज किए और शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. लिखापढ़ी की औपचारिकताओं को पूरी करने में सुबह के करीब 6 बज चुके थे. आसिफ का रोरो कर बुरा हाल था. विपिन कुमार ने आसिफ को ढांढस बंधाया और उसे अपने साथ ले कर उस के घर मेवाती चौक पहुंच गए.

इस दौरान एसएसआई राजेंद्र पाल सिंह ने घटना की सूचना से लोनी के सीओ राजकुमार पांडे, एसपी (देहात) नीरज जादौन और एसएसपी कलानिधि नैथानी को अवगत करा दिया था. एसएसपी कलानिधि नैथानी ने एक दिन पहले ही गाजियाबाद में एसएसपी का पद संभाला था. उन के आते ही जिले में गंभीर अपराध की ये पहली घटना थी.

सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी कुछ ही देर बाद घटनास्थल पर पहुंच गए. सीओ राजकुमार पांडे ने डौग स्क्वायड की टीम के साथ फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और क्राइम टीम को भी मौके पर बुला लिया था. इन सभी टीमों ने घटनास्थल पर पहुंच कर अपना अपना काम शुरू कर दिया.

यह सब काररवाई चल ही रही थी कि एसआई विपिन कुमार आसिफ को ले कर उस के घर पहुंच गए. इस के बाद आसिफ से पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ. उस ने अपने साथ हुई घटना का ब्यौरा देना शुरू कर दिया.

आसिफ ने सुनाया वाकया

आसिफ ने बताया कि शनिवार रात को वह मकान की पहली मंजिल पर अपनी पत्नी समरीन (32) व 2 बच्चों के साथ सो रहा था. रात करीब एक बजे कमरे में आहट हुई. वह उठा तो सामने मुंह पर कपड़ा बांधे 2 बदमाश खड़े थे. जब तक वह कुछ समझ पाता, बदमाशों ने उस पर तमंचा तान दिया और शोर मचाने पर गोली मारने की धमकी दी.

इस बीच एक बदमाश ने साथ में सो रहे डेढ़ वर्षीय बेटे तैमूर और पत्नी की गरदन पर छुरा रख दिया. इस के बाद बदमाशों ने उस के और पत्नी के हाथ बांध दिए. बदमाशों ने उन से मारपीट करते हुए पूछा कि 5 लाख रुपए कहां हैं.

‘‘कैसे रुपए, कौन से रुपए…’’ उस ने बदमाशों से पूछा.

उस ने बदमाशों को बता दिया कि वह छोटा सा कारोबार करता है, उस के घर में इतनी बड़ी रकम कहां से आएगी. जब आसिफ ने रुपए न होने की बात कही तो एक बदमाश ने धमकी दी कि तुम्हारी गरदन काट देंगे.

यह सुन कर उस की पत्नी समरीन की चीख निकल गई. इस से घबराए एक बदमाश ने रजाई से समरीन का मुंह दबा दिया. इस के बाद एक बदमाश ने अलमारियों की चाबी ले कर अंदर रखे एक लाख 30 हजार रुपए कैश व करीब 70 हजार रुपए के गहने निकाल लिए. आसिफ ने यह भी बताया कि ये गहने उस ने अपनी साली की शादी में देने के लिए बनवाए थे, जिस की मार्च में शादी है.

आसिफ ने बताया कि इस बीच एक बदमाश बाहर गया और जीने पर खड़े अपने साथी से बात करने लगा, जीने पर खड़ा बदमाश अंदर नहीं आना चाह रहा था. घर से बाहर गए बदमाश ने उस से कहा कि 5 लाख रुपए नहीं मिल रहे, इस पर बाहर खड़े बदमाश ने कहा कि 5 लाख रुपए घर में ही हैं. ऊपर वाले कमरे में जा कर देखो.

आसिफ ने बताया कि गहने व कैश निकालने के बाद एक बदमाश आसिफ को गनपौइंट पर मकान की तीसरी मंजिल पर ले गया, जबकि दूसरा बदमाश समरीन का मुंह रजाई से दबाए वहीं खड़ा रहा. तीसरी मंजिल पर उन का साला जुनैद (15 साल), बेटी उजमा (12 साल) और बेटा आतिफ (9 साल) सो रहे थे. वहां पहुंच कर बदमाशों ने जुनैद को उठाया और उस के हाथ पैर बांध दिए. उन्होंने जुनैद से 5 लाख रुपए के बारे में पूछा और मारपीट की.

इस बीच पहली मंजिल पर समरीन का मुंह दबाने वाला बदमाश उस के डेढ़ साल के बेटे तैमूर को ऊपर ले कर आया और उस की गरदन पर छुरा रख कर 5 लाख रुपए मांगे. आसिफ का कहना था कि यह देख वह रोते हुए बदमाशों के पैरों मे गिर पड़ा और उसे छोड़ने के लिए कहा.

इस पर बदमाशों ने बच्चे को छोड़ दिया और उन सभी को कमरे में बंद कर के धमकी दी कि यदि आधे घंटे से पहले कमरे से बाहर निकले तो सभी को मार डालेंगे. इस के बाद वे फरार हो गए. जाने से पहले वे घर के मुख्यद्वार की कुंडी भी बाहर से लगा गए.

बदमाशों के जाने के बाद मचाया शोर

आसिफ के साले का कहना था कि डर की वजह से वे लोग 20 मिनट तक चुप रहे. इस के बाद आसिफ ने किसी तरह हाथ की रस्सी खोली और खिड़की के पास जा कर पड़ोसी राशिद को आवाज लगाई. पड़ोसियों ने पहले मुख्यद्वार की कुंडी खोली फिर मकान के भीतर आ कर कमरे को बाहर से खोला.

वह वहां से पहली मंजिल पर पत्नी को देखने गया तो वह बेहोश मिली. पड़ोसियों की मदद से वह पत्नी को अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

आसिफ के मुंह से पूरी वारदात की कहानी सुनने के बाद एसएसपी ने एसपी (देहात) को इस वारदात का जल्द से जल्द  खुलासा करने की हिदायत दी.

जिस के बाद सीओ राजकुमार पांडे के निर्देश पर लोनी बौर्डर थाने में 12 जनवरी की सुबह धारा 452/394/302/34/120बी/ भादंवि के तहत मुकदमा पंजीकृत करा लिया गया. इस केस की जांच का काम एसएसआई राजेंद्र पाल सिंह को सौंपा गया.

घटना का खुलासा करने के लिए सीओ राजकुमार पांडे ने राजेंद्र पाल सिंह के अधीन एक विशेष टीम का गठन भी कर दिया, जिस में एसआई विपिन कुमार, हैड कांस्टेबल मनोज कुमार, कांस्टेबल विपिन कुमार, मनोज और दीपक को शामिल किया गया.

उसी दोपहर पुलिस ने समरीन के शव का पोस्टमार्टम करवा कर शव उस के परिजनों के सुपुर्द कर दिया. परिजनों ने उसी शाम गमगीन महौल में समरीन के शव को सुपुर्दे खाक कर दिया.

आसिफ अली सिद्दीकी मूलरूप से मेरठ के जानी कलां गांव का रहने वाला है. उस के पिता अफसर अली गांव में खेतीबाड़ी का काम करते हैं. अफसर अली की 6 संतानों में 5 लड़के और एक लड़की है. आसिफ (43) भाइयों में तीसरे नंबर पर है. सभी भाईबहनों की शादी हो चुकी है.

आसिफ अली ने युवावस्था में बैटरी की प्लेट बनाने का काम सीखा था. सन 2006 में उस की शादी जानी कलां के रहने वाले तनसीन की बेटी समरीन से हुई थी, जिस से उस के 3 बच्चे हुए, 2 बेटे और एक बेटी. बड़ा बेटा आतिफ (9) साल का है जबकि सब से छोटा तैमूर अभी डेढ़ साल का है. बेटी उजमा तीनों बच्चों में सब से बड़ी है.

तनसीन अली बेटी समरीन की शादी से कई साल पहले गांव छोड़ कर लोनी के बेहटा की उत्तरांचल विहार कालोनी में आ बसे थे. उन्होंने छोटा सा प्लौट खरीद कर अपना घर बना लिया था.

तनसीन फैक्ट्रियों से माल खरीद कर किराने की दुकानों पर सप्लाई करते थे, जिस से उन के परिवार की गुजरबसर ठीकठाक हो रही थी. बेटी समरीन के निकाह में भी उन्होंने अच्छा पैसा खर्च किया था. शादी के बाद समरीन गांव में पति आसिफ के साथ हंसीखुशी जीवन बिता रही थी.

आसिफ भी खूबसूरत पत्नी को बेइंतहा प्यार करता था. वक्त तेजी से गुजर रहा था. समरीन एक के बाद 2 बच्चों की मां बन गई. पहले उजमा का जन्म हुआ फिर आतिफ पैदा हुआ. 2 बच्चे हो गए तो घर के खर्च भी बढ़ गए, लेकिन कमाई कम थी. इसलिए आसिफ ने गांव छोड़ कर शहर में बसने का फैसला किया.

आसिफ ने लोनी में बढ़ाया अपना धंधा

सन 2014 में सासससुर की सलाह पर आसिफ लोनी के बेहटा आ कर किराए के मकान में रहने लगा. यहीं पर उस ने अपना बैटरी की प्लेट बनाने का कारोबार बढ़ाना शुरू किया. एक साल के भीतर ही उस ने अपने पिता और ससुर की मदद से मेवाती चौक के पास 50 गज का एक प्लौट ले कर उस में तीनमंजिला मकान बना लिया.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

अंजाम ए मोहब्बत : पिता कैसे बने दोषी – भाग 1

सुहाग सेज पर बैठी मीनाक्षी काफी परेशान थी, क्योंकि उस ने अपनी मरजी से जो कदम उठाया था वह उस के परिवार वालों की इच्छा के खिलाफ था. उस ने अपने ही गांव के रहने वाले बृजेश चौरसिया के साथ कोर्टमैरिज की थी.

सुहागसेज पर बैठी वह सोच रही थी कि उस ने अपनी पसंद से यह शादी कर तो ली है और यदि बृजेश उस की कसौटी पर खरा न उतरा या प्यार का जुनून खत्म होने के बाद उस ने उसे अपने जीवन से दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया तो क्या होगा. ऐसी स्थिति में वह क्या करेगी, कहां जाएगी?

इन्हीं विचारों के बीच वह अपने आप को सहज करने की कोशिश भी कर रही थी. इस भंवरजाल से उस का ध्यान तब भंग हुआ जब पति बृजेश ने उस के कंधे पर अपना हाथ रखते हुए कहा, ‘‘क्या बात है मीनू, किन खयालों में खोई हो?’’

‘‘अरे आप कब आए, पता ही नहीं चला.’’ मीनाक्षी अपने कंधे पर रखे बृजेश के हाथ का स्पर्श पा कर चौंकते हुए बोली.

‘‘जब तुम अपने खयालों में गहरी खोई थी.’’ बृजेश ने मुसकरा कर कहा, ‘‘बताओ, क्या सोच रही थी?’’

‘‘बृजेश, मैं अंदर से बहुत डरी हुई हूं क्योंकि मैं ने अपने पिता की मरजी के खिलाफ तुम से विवाह किया है. बस मैं तुम से यही चाहती हूं कि मुझे मझधार में मत छोड़ना वरना मैं कहीं की नहीं रहूंगी.’’ कहते हुए मीनाक्षी का चेहरा उदास हो गया.

‘‘मीनू, तुम ऐसा क्यों सोच रही हो?’’ बृजेश ने उस के चेहरे को अपनी दोनों हथेलियों में ले कर कहा, ‘‘तुम्हें मेरे प्यार पर भरोसा नहीं है क्या, या फिर 4 सालों में तुम मुझे समझ नहीं पाई? मीनू, मैं आज भी वादा करता हूं कि मैं तुम्हें कभी अपने जीवन से अलग नहीं होने दूंगा, इसलिए इस तरह के विचार अपने मन से निकाल दो. मैं तुम्हें हमेशा खुश रखने की कोशिश करूंगा.’’

बृजेश ने मीनाक्षी के अंदर बैठी असुरक्षा की भावना को निकालने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘रही तुम्हारे मांबाप और परिवार की बात तो उस की चिंता तुम बिलकुल मत करो. समय के साथ सब ठीक हो जाएगा. यह तुम भी जानती हो कि किसी के भी मांबाप पत्थरदिल नहीं होते. उन की नाराजगी सिर्फ थोड़े ही दिनों की रहती है. बाद में वह सब भूल कर अपने बच्चों को गले लगा लेते हैं.’’

बृजेश की इन बातों से मीनाक्षी को काफी हिम्मत मिली थी और वह सामान्य हो गई. तब उन्होंने वह रात और भी ज्यादा खुशनुमा बनाई. इस के बाद बृजेश और मीनाक्षी की वैवाहिक जिंदगी हंसीखुशी से बीत रही थी. मीनाक्षी को पति से कोई शिकायत नहीं थी. ससुराल में मीनाक्षी का मन लग रहा था. वह बहुत खुश थी.

कुछ महीनों बाद मीनाक्षी ने फोन पर अपनी मां से भी बातें करनी शुरू कर दीं. वह पिता से भी बात करना चाहती थी. पिता राजकुमार ने उसे इस शर्त पर क्षमा किया कि वह अपने गांव प्रयागराज कभी नहीं जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

15 जुलाई, 2019 की बात है. सुबह के यही कोई 6 बजे का समय था. महानगर मुंबई के उपनगर घाटकोपर (पूर्व) स्थित नारायण नगर के मधुबन टोयटा शोरूम के पास रिक्शा स्टैंड के नजदीक एक युवती की लाश पड़ी मिली. कुछ ही देर में लाश मिलने की खबर पूरे इलाके में फैल गई. देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो गई थी.

वह लाश खून से लथपथ थी. जिस ने भी वह लाश देखी, उस का कलेजा कांप गया. चूंकि वह युवती उसी क्षेत्र की रहने वाली थी, इसलिए कई लोगों ने उसे पहचान लिया. वह और कोई नहीं बल्कि शिवपुरी की चाल में पति बृजेश चौरसिया के साथ रहने वाली मीनाक्षी चौरसिया थी.

वहां मौजूद लोगों में से किसी ने युवती की हत्या की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. चूंकि जिस स्थान पर लाश मिली थी, वह इलाका घाटकोपर थाने के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना थाना घाटकोपर में दे दी गई.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी विश्वनाथ कोलेकर सहायक इंसपेक्टर विलाख दातीर, दीपवने आदि के साथ मौके पर रवाना हो गए. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने शव का निरीक्षण किया तो पता चला कि युवती की हत्या बड़ी ही बेरहमी से की गई थी.

देखने से ऐसा लग रहा था जैसे कि हत्यारे से उस की किसी बात को ले कर गहरी रंजिश थी. मृतका के सिर, गले और पीठ पर चाकुओं के कई गहरे जख्म थे. उन्होंने इस की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

वहां मौजूद लोगों ने मृतका की शिनाख्त करते हुए जानकारी पुलिस को दे दी थी. तब थानाप्रभारी ने मृतका के पति बृजेश चौरसिया को बुलाने के लिए 2 सिपाहियों को शिवपुरी की चाल में भेजा. जब पुलिस वाले वहां पहुंचे तो बृजेश उस समय सो रहा था. पुलिस वाले उसे बुला कर मौके पर ले आए. वहां पत्नी मीनाक्षी का रक्तरंजित शव देख कर बृजेश दहाड़ें मार कर रोने लगा.

उसी समय एडिशनल सीपी लखमी गौतम, डीसीपी अखिलेश सिंह, एसीपी मानसिंह पाटिल मौके पर पहुंच गए. डौग स्क्वायड टीम भी वहां पहुंच कर अपने काम में जुट गई. टीम का काम निपट जाने के बाद पुलिस ने मीनाक्षी की लाश पोस्टमार्टम के लिए घाटकोपर के ही राजावाड़ी अस्पताल भेज दी.

बृजेश की शिकायत पर थानाप्रभारी ने मुकदमा दर्ज कर उस की जांच असिस्टेंट इंसपेक्टर विलाख दातीर को सौंप दी थी.

अगले दिन पुलिस को मीनाक्षी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. रिपोर्ट से पता चला कि मीनाक्षी 4 महीने की गर्भवती थी. उस के शरीर पर 7 गहरे घाव थे, जो किसी धारदार हथियार से किए गए थे.

प्यार में जहर का इंजेक्शन – भाग 1

26 वर्षीय रवि कुमार दिल्ली के सदर बाजार स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में कैशियर थे. रोज की तरह 7 जनवरी, 2017 को ड्यूटी खत्म कर के वह घर जाने के लिए निकले. वह उत्तरी दिल्ली के शास्त्रीनगर में रहते थे. वह बैंक से निकले थे तो उन के साथ साथ काम करने वाले शतरुद्र भी थे. सदर दिल्ली का थोक बाजार है, जिस से वहां दिन भर भीड़ लगी रहती है. माल लाने और ले जाने वाले रिक्शों की वजह से सड़कों पर जाम सा लगा रहता है. इसी वजह से रवि कुमार शतरुद्र के साथ पैदल ही जा रहे थे.

दोनों बैंक से कुछ दूर स्थित वेस्ट एंड सिनेमा के नजदीक पहुंचे, तभी उन के बीच एक ठेले वाला आ गया, जिस से दोनों अलगअलग हो गए. उसी बीच रवि कुमार की गरदन में किसी ने सुई जैसी कोई चीज चुभो दी. गरदन में जिस जगह सुई सी चुभी थी, रवि कुमार का हाथ तुरंत उस जगह पर तो गया ही, उन्होंने पलट कर भी देखा. एक युवक उन्हें भागता दिखाई दिया तो उन्हें लगा कि उसी ने उन की गरदन में कुछ चुभाया है.

रवि कुमार ने गरदन से हाथ हटा कर देखा तो उस में खून लगा था. उन्होंने उस युवक की ओर इशारा कर के शोर मचाया कि ‘पकड़ो पकड़ो’ तो उन के साथी शतरुद्र उस युवक के पीछे भागे. सदर और खारी बावली बाजार में अकसर छिनैती की घटनाएं होती रहती हैं, इसलिए लोगों ने यही समझा कि युवक पैसे वगैरह छीन कर भागा है. कुछ अन्य लोग भी उसे पकड़ने के लिए उस के पीछे दौड़ पड़े.

बाराटूटी के पास भाग रहे उस युवक का पैर फिसल गया तो पीछे दौड़ रहे लोगों ने उसे पकड़ लिया और उस की पिटाई करने लगे. तभी किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर के उस के पकड़े जाने की सूचना दे दी. रवि अभी अपनी जगह पर ही खडे़ थे. उन का हाथ गरदन पर उसी जगह था, जहां कोई चीज चुभी थी. अब तक उन्हें चक्कर से आने लगे थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर गरदन पर क्या चीज चुभाई गई है. लेकिन यह साफ हो गया था कि उसी नुकीली चीज के चुभन से उन की तबीयत बिगड़ रही है. इस का मतलब वह कोई जहरीली चीज थी.

बाजार के तमाम लोग रवि को जानते थे. हमदर्दी में वे उन के पास आ कर खडे़ हो गए थे. उन्हीं लोगों में अजय साहू का बेटा इंद्रजीत भी था. अजय साहू सदर बाजार में ही कोटक महिंद्रा बैंक के पास गत्ते के डिब्बे बेचते हैं. इस में उन का बेटा इंद्रजीत हाथ बंटाता था. उस का कोटक महिंद्रा बैंक में एकाउंट था, जिस की वजह से कैशियर रवि कुमार से उस की दोस्ती थी.

रवि की बिगड़ती हालत देख कर लोग ऐंबुलैंस बुलाने की बात कर रहे थे. उस भीड़भाड़ वाली जगह में ऐंबुलैंस का जल्दी पहुंचना आसान नहीं था. इसलिए इंद्रजीत उन्हें मोटरसाइकिल से सेंट स्टीफंस अस्पताल ले गया. जांच के बाद डाक्टरों ने बताया कि जिस ने इन्हें जो भी चीज चुभोई है, उसी की वजह से इन की हालत बिगड़ रही है.

रवि की हालत देख कर साफ लग रहा था कि उन पर जहरीली दवा का असर हो रहा है. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए डाक्टरों ने थाना सदर पुलिस को फोन द्वारा सूचना दे कर उन का इलाज शुरू कर दिया. शाम साढ़े 7 बजे के करीब पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि सदर बाजार में बाराटूटी के पास कुछ लोगों ने एक चोर को पकड़ रखा है.

इस सूचना को थाना सदर के ड्यूटी अफसर ने एएसआई निक्काराम के नाम कर इस की जानकारी थानाप्रभारी रमेश दहिया को दे दी थी. इसी के कुछ देर बाद थाना सदर पुलिस को सेंट स्टीफंस अस्पताल से भी सूचना मिली कि कोटक महिंद्रा बैंक के कैशियर रवि कुमार को किसी ने जहरीला इंजेक्शन लगा दिया है, उन का इलाज वहां चल रहा है.

बाराटूटी थाने से लगभग 5-6 सौ मीटर ही दूर है, इसलिए एएसआई निक्काराम हैडकांस्टेबल विजय को ले कर तुरंत वहां पहुंच गए. कुछ लोग 24-25 साल के एक युवक को पकड़े थे. पुलिस ने उसे अपने कब्जे में ले कर पूछा तो उस ने अपना नाम डा. प्रेम सिंह बताया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि वह चोर नहीं है.

‘‘तू चोर नहीं है तो लोगों ने तुझे क्यों पकड़ा?’’ थानाप्रभारी रमेश दहिया ने पूछा.

‘‘सर, मैं चोरी कर के नहीं, कोटक महिंद्रा बैंक के कैशियर रवि कुमार की गरदन पर जहर का इंजेक्शन लगा कर भाग रहा था, तभी लोगों ने मुझे पकड़ लिया था.’’ प्रेम सिंह ने कहा.

चाकू, गोली मार कर किसी की जान लेने की वारदातें तो अकसर होती रहती हैं, लेकिन राह चलते किसी को जहर का इंजेक्शन लगा कर जान लेने की कोशिश करने का यह अपनी तरह का अलग ही मामला था. इसलिए मामले की सूचना एसीपी आर.पी. गौतम और डीसीपी जतिन नरवाल को देने के बाद रमेश दहिया अतिरिक्त थानाप्रभारी इंसपेक्टर मनमोहन कुमार को साथ ले कर सेंट स्टीफंस अस्पताल पहुंच गए.

रवि कुमार के उपचार में जुटे डाक्टरों को रमेश दहिया ने बता दिया कि इन्हें जहर का इंजेक्शन लगाया गया है. डाक्टर चाहते थे कि यह पता लग जाता कि इंजेक्शन में कौन सा जहर इस्तेमाल किया गया था, जिस से उपचार में उन्हें आसानी हो जाती.

बहरहाल, डाक्टर रवि कुमार के शरीर में फैले जहर का असर कम करने की कोशिश कर रहे थे. अब तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी आ गए थे. डीसीपी और एसीपी के सामने प्रेम सिंह से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि रवि कुमार को जो इंजेक्शन लगाया गया था, उस में कोबरा सांप के जहर के अलावा मिडाजोलम और फोर्टविन नाम के कैमिकल भी मिले थे.

पुलिस ने प्रेम कुमार के खिलाफ धारा 328 (जहर देने) का मामला दर्ज कर के जहर के बारे में मिली जानकारी रवि कुमार के इलाज में जुटे डाक्टरों को दे दी. चूंकि अब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका  था, इसलिए रवि कुमार की हालत चिंताजनक होती जा रही थी.

पूछताछ में पता चला कि प्रेम कुमार से यह वारदात रवि कुमार के साले बौबी ने कराई थी. रवि कुमार अपनी पत्नी सविता के साथ मारपीट कर के उसे परेशान करते थे. उन की इस हरकत से बौबी बहुत परेशान रहता था, इसीलिए उस ने अपने बहनोई की हत्या की जिम्मेदारी उसे सौंपी थी.

बहन के सुहाग पर कब्जा : बबीता ने डाला बबली के सुहाग पर डाका – भाग 1

11 सितंबर, 2018 की सुबह करीब 8 बजे कानपुर शहर के थाना कैंट के थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी थाने में पहुंचे ही थे कि उसी समय एक व्यक्ति बदहवास हालत में उन के पास पहुंचा. उस ने थानाप्रभारी को सैल्यूट किया फिर बताया, ‘‘सर, मेरा नाम दिलीप कुमार है. मैं सिपाही पद पर पुलिस लाइन में तैनात हूं और कैंट थाने के पुलिस आवास ब्लौक 3, कालोनी नंबर 29 में रहता हूं. बीती रात मेरी दूसरी पत्नी बबीता ने पंखे से फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है. आप को सूचना देने थाने आया हूं.’’

चूंकि विभागीय मामला था. अत: थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी ने दिलीप की सूचना से अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया फिर सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस टीम जब दिलीप के आवास पर पहुंची तो बबीता का शव पलंग पर पड़ा था. उस की उम्र करीब 23 साल थी. उस के गले में खरोंच का निशान था. वहां एक दुपट्टा भी पड़ा था. शायद उस ने दुपट्टे से फांसी का फंदा बनाया था.

थानाप्रभारी अभी जांच कर ही रहे थे कि एसएसपी अनंत देव, एसपी राजेश कुमार यादव तथा सीओ (कैंट) अजीत प्रताप सिंह फोरैंसिक टीम के साथ वहां आ गए. पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया फिर सिपाही दिलीप कुमार व उस की पत्नी बबली से पूछताछ की.

दिलीप ने बताया कि उस की ब्याहता पत्नी बबली है. बाद में उस ने साली बबीता से दूसरा ब्याह रचा लिया था. दोनों पत्नियां साथ रहती थीं. बीती रात बबीता ने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली जबकि बबली ने बताया कि बबीता को मिरगी का दौरा पड़ता था. वह बीमार रहती थी, जिस से परेशान हो कर उस ने आत्महत्या कर ली.

पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ के बाद मृतका के परिवार वालों को भी सूचना भिजवा दी. फोरैंसिक टीम ने जांच की तो पंखे, छत के कुंडे व रौड पर धूल लगी थी. अगर पंखे से लटक कर बबीता ने जान दी होती तो धूल हटनी चाहिए थी. मौके से बरामद दुपट्टे पर भी किसी तरह की धूल नहीं लगी थी.

गले पर मिला निशान भी फांसी के फंदे जैसा नहीं था. टीम को यह मामला आत्महत्या जैसा नहीं लगा. फोरैंसिक टीम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने शक से अवगत कराया और शव का पोस्टमार्टम डाक्टरों के पैनल से कराने का अनुरोध किया. इस के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भिजवा दी.

एसएसपी अनंत देव ने तब मृतका बबीता के शव का पोस्टमार्टम डाक्टरों के पैनल से कराने को कहा. डाक्टरों के पैनल ने बबीता का पोस्टमार्टम किया और अपनी रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को भेज दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पढ़ कर थानाप्रभारी चौंक पड़े, क्योंकि उस में साफ कहा गया था कि बबीता की मौत गला दबा कर हुई थी. यानी वह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला निकला.

श्री त्रिपाठी ने अपने अधिकारियों को भी बबीता की हत्या के बारे में अवगत करा दिया. फिर उन के आदेश पर सिपाही दिलीप कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

अब तक मृतका बबीता के मातापिता भी कानपुर आ गए थे. आते ही बबीता के पिता डा. बृजपाल सिंह ने थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी व सीओ अजीत प्रताप सिंह चौहान से मुलाकात की. उन्होंने आरोप लगाया कि सिपाही दिलीप व उस के परिवार वालों ने दहेज के लिए उन की बेटी बबीता को मार डाला. उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की.

चूंकि बबीता की मौत गला घोंटने से हुई थी और सिपाही दिलीप कुमार शक के घेरे में था. अत: थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी ने मृतका के पिता डा. बृजपाल सिंह की तहरीर पर सिपाही दिलीप कुमार उस के पिता सोनेलाल व मां मालती के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर के जांच शुरू कर दी.

बबीता की मौत की बारीकी से जांच शुरू की तो उन्होंने सब से पहले हिरासत में लिए गए सिपाही दिलीप कुमार से पूछताछ की. दिलीप कुमार ने हत्या से साफ इनकार कर दिया. उस की ब्याहता बबली से पूछताछ की गई तो वह भी साफ मुकर गई. पासपड़ोस के लोगों से भी जानकारी जुटाई गई, पर हत्या का कोई क्लू नहीं मिला.

सिपाही दिलीप के पिता सोनेलाल भी यूपी पुलिस में एसआई हैं. वह पुलिस लाइन कानपुर में तैनात हैं. सोनेलाल भी इस केस में आरोपी थे. फिर भी उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और बताया कि बबीता की हत्या उन के बेटे दिलीप ने नहीं की है.

उन्होंने कहा कि बबीता के पिता बृजपाल ने झूठा आरोप लगा कर पूरे परिवार को फंसाया है. पुलिस जिस तरह चाहे जांच कर ले, वह जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि जांच में मेरा बेटा और मैं दोषी पाया जाऊं तो कतई न बख्शा जाए.

एसपी राजेश कुमार यादव व सीओ प्रताप सिंह भी चाहते थे कि हत्या जैसे गंभीर मामले में कोई निर्दोष व्यक्ति जेल न जाए, अत: उन्होंने एसआई सोनेलाल की बात को गंभीरता से लिया और थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी को आदेश दिया कि वह निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द हत्या का खुलासा कर दोषी के खिलाफ काररवाई करें.

अधिकारियों के आदेश पर थानाप्रभारी ने केस की सिरे से जांच शुरू की. उन्होंने मामले का क्राइम सीन दोहराया. इस से एक बात तो स्पष्ट हो गई कि बबीता का हत्यारा कोई अपना ही है. क्योंकि घर में उस रात 4 सदस्य थे. सिपाही दिलीप कुमार, उस की ब्याहता बबली, 3 वर्षीय बेटा और दूसरी पत्नी बबीता. अब रात में बबीता की हत्या या तो दिलीप ने की या फिर बबली ने या फिर दोनों ने मिल कर की या किसी को सुपारी दे कर कराई.

दिलीप कुमार बबीता की हत्या से साफ मुकर रहा था. उस का दरोगा पिता सोनेलाल भी उस की बात का समर्थन कर रहा था. यदि दिलीप ने हत्या नहीं की तो बबली जरूर हत्या के राज से वाकिफ होगी. अब तक कई राउंड में पुलिस अधिकारी दिलीप तथा उस की ब्याहता बबली से पूछताछ कर चुके थे. पर किसी ने मुंह नहीं खोला था.

इस पूछताछ में बबली शक के घेरे में आ रही थी. पुष्टि करने के लिए पुलिस ने बबली के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. उस से पता चला कि उस ने घटना वाली शाम को अपने देवर शिवम से बात की थी. अत: 14 सितंबर को बबली को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया.

महिला पुलिसकर्मियों ने जब उस से उस की छोटी बहन बबीता की हत्या के संबंध में पूछा तो वह साफ मुकर गई. लेकिन मनोवैज्ञानिक तरीके से की गई पूछताछ से बबली टूट गई. उस ने बबीता की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

बबली ने बताया कि उस की सगी छोटी बहन बबीता उस की सौतन बन गई थी. पति बबीता के चक्कर में उस की उपेक्षा करने लगा था. इतना ही नहीं, वह शारीरिक और मानसिक रूप से भी उसे प्रताडि़त करता था. पति की उपेक्षा से उस का झुकाव सगे देवर शिवम की तरफ हो गया. फिर शिवम की मदद से ही रात में बबीता की रस्सी से गला कस कर हत्या कर दी.