Love Crime : गर्लफ्रेड ने ली बॉयफ़्रेंड की जान

Love Crime :  एसचओ ने ग्रामीणों की मदद से शव को तालाब से बाहर निकलवाया. शव पूरी तरह नग्न अवस्था में था. शव का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि मृतक की उम्र लगभग 30 साल थी और उस के शरीर पर धारदार हथियार से गोदे जाने के कई निशान थे.

उसी दौरान एक युवक ने लाश की शिनाख्त पिडरुआ निवासी तुलसीराम प्रजापति के रूप में की. उस की हत्या किस ने और क्यों की, यह बात कोई भी व्यक्ति नहीं समझ पा रहा था. 26 वर्षीय सविता और 28 वर्षीय तुलसीराम पहली मुलाकात में ही एकदूसरे को दिल दे बैठे थे, सविता को पाने की अभिलाषा तुलसीराम के दिल में हिलोरें मारने लगी थी, इसलिए वह किसी न किसी बहाने से सविता से मिलने उस के खेत पर बनी टपरिया में अकसर आने लगा था.

तुलसीराम प्रजापति के टपरिया में आने पर सविता गर्मजोशी से उस की खातिरदारी करती, चायपानी के दौरान तुलसीराम जानबूझ कर बड़ी होशियारी के साथ सविता के गठीले जिस्म का स्पर्श कर लेता तो वह नानुकुर करने के बजाय मुसकरा देती. इस से तुलसीराम की हिम्मत बढ़ती चली गई और वह सविता के खूबसूरत जिस्म को जल्द से जल्द पाने की जुगत में लग गया. एक दिन दोपहर के समय तुलसीराम सविता की टपरिया में आया तो इत्तफाक से सविता उस वक्त अकेली चक्की से दलिया बनाने में मशगूल थी. उस का पति पुन्नूलाल कहीं गया हुआ था. इसी दौरान तुलसीराम को देखा तो उस ने साड़ी के पल्लू से अपने आंचल को करीने से ढंका.

तुलसीराम ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ”सविता, तुम यह आंचल क्यों ढंक रही हो? ऊपर वाले ने तुम्हारी देह देखने के लिए बनाई है. मेरा बस चले तो तुम को कभी आंचल साड़ी के पल्लू से ढंकने ही न दूं.’’

”तुम्हें तो हमेशा शरारत सूझती रहती है, किसी दिन तुम्हें मेरे टपरिया में किसी ने देख लिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी.’’

”ठीक है, आगे से जब भी तेरे से मिलने तेरी टपरिया में आऊंगा तो इस बात का खासतौर पर ध्यान रखूंगा.’’

सविता मुसकराते हुए बोली, ”अच्छा एक बात बताओ, कहीं तुम चिकनीचुपड़ी बातें कर के मुझ पर डोरे डालने की कोशिश तो नहीं कर रहे?’’

”लगता है, तुम ने मेरे दिल की बात जान ली. मैं तुम्हें दिलोजान से चाहता हूं, अब तो जानेमन मेरी हालत ऐसी हो गई है कि जब तक दिन में एक बार तुम्हें देख नहीं लेता, तब तक चैन नहीं मिलता है. बेचैनी महसूस होती रहती है, इसलिए किसी न किसी बहाने से यहां चला आता हूं. तुम्हारी चाहत कहीं मुझे पागल न कर दे…’’

तुलसीराम प्रजापति की बात अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि सविता बोली, ”पागल तो तुम हो चुके हो, तुम ने कभी मेरी आंखों में झांक कर देखा है कि उन में तुम्हारे लिए कितनी चाहत है. मुझे तो ऐसा लगता है कि दिल की भाषा को आंखों से पढऩे में भी तुम अनाड़ी हो.’’

”सच कहा तुम ने, लेकिन आज यह अनाड़ी तुम से बहुत कुछ सीखना चाहता है. क्या तुम मुझे सिखाना चाहोगी?’’ इतना कह कर तुलसीराम ने सविता के चेहरे को अपनी हथेलियों में भर लिया.

सविता ने भी अपनी आंखें बंद कर के अपना सिर तुलसीराम के सीने से टिका दिया. दोनों के जिस्म एकदूसरे से चिपके तो सर्दी के मौसम में भी उन के शरीर दहकने लगे. जब उन के जिस्म मिले तो हाथों ने भी हरकतें करनी शुरू कर दीं और कुछ ही देर में उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

सविता के पति पुन्नूलाल के शरीर में वह बात नहीं थी, जो उसे तुलसीराम से मिली. इसलिए उस के कदम तुलसीराम की तरफ बढ़ते चले गए. इस तरह उन का अनैतिकता का खेल चलता रहा.

सविता के क्यों बहके कदम

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक गांव है पिडरुआ. इसी गांव में 26 वर्षीय सविता आदिवासी अपने पति पुन्नूलाल के साथ रहती थी. पुन्नूलाल किसी विश्वकर्मा नाम के व्यक्ति की 10 बीघा जमीन बंटाई पर ले कर खेत पर ही टपरिया बना कर अपनी पत्नी सविता के साथ रहता था. उसी खेत पर खेती कर के वह अपने परिवार की गुजरबसर करता था. उस की गृहस्थी ठीकठाक चल रही थी.

उस के पड़ोस में ही तुलसीराम प्रजापति का भी खेत था, इस वजह से कभीकभार वह सविता के पति से खेतीबाड़ी के गुर सीखने आ जाया करता था. करीब डेढ़ साल पहले तुलसीराम ने ओडिशा की एक युवती से शादी की थी, लेकिन वह उस के साथ कुछ समय तक साथ रहने के बाद अचानक उसे छोड़ कर चली गई थी.

सविता को देख कर तुलसीराम की नीयत डोल गई. उस की चाहतभरी नजरें सविता के गदराए जिस्म पर टिक गईं.  उसी क्षण सविता भी उस की नजरों को भांप गई थी. तुलसीराम हट्टाकट्टा नौजवान था. सविता पहली नजर में ही उस की आंखों के रास्ते दिल में उतर गई. सविता के पति से बातचीत करते वक्त उस की नजरें अकसर सविता के जिस्म पर टिक जाती थीं.

सविता को भी तुलसीराम अच्छा लगा. उस की प्यासी नजरों की चुभन उस की देह को सुकून पहुंचाती थी. उधर अपनी लच्छेदार बातों से तुलसीराम ने सविता के पति से दोस्ती कर ली. तुलसीराम को जब भी मौका मिलता, वह सविता के सौंदर्य की तारीफ करने में लग जाता. सविता को भी तुलसीराम के मुंह से अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता था. वह पति की मौजूदगी में जब कभी भी उसे चायपानी देने आती, मौका देख कर वह उस के हाथों को छू लेता. इस का सविता ने जब विरोध नहीं किया तो तुलसीराम की हिम्मत बढ़ती चली गई.

धीरेधीरे उस की सविता से होने वाली बातों का दायरा भी बढऩे लगा. सविता का भी तुलसीराम की तरफ झुकाव होने लगा था. तुलसीराम को पता था कि सविता अपने पति से संतुष्ट नहीं है. कहते हैं कि जहां चाह होती है, वहां राह निकल ही आती है. आखिर एक दिन तुलसीराम को सविता के सामने अपने दिल की बात कहने का मौका मिल गया और उस के बाद दोनों के बीच वह रिश्ता बन गया, जो दुनिया की नजरों में अनैतिक कहलाता है. दोनों ने इस रास्ते पर कदम बढ़ा तो दिए, लेकिन सविता ने इस बात पर गौर नहीं किया कि वह अपने पति के साथ कितना बड़ा विश्वासघात कर रही है.

जिस्म से जिस्म का रिश्ता कायम हो जाने के बाद सविता और तुलसीराम उसे बारबार बिना किसी हिचकिचाहट के दोहराने लगे. सविता का पति जब भी गांव से बाहर जाने के लिए निकलता, तभी सविता तुलसीराम को काल कर अपने पास बुला लेती थी. अनैतिक संबंधों को कोई लाख छिपाने की कोशिश करे, एक न एक दिन उस की असलियत सब के सामने आ ही जाती है. एक दिन ऐसा ही हुआ. सविता का पति पुन्नूलाल शहर जाने के लिए घर से जैसे ही निकला, वैसे ही सविता ने अपने प्रेमी तुलसीराम को फोन कर दिया.

अवैध संबंधों का सच आया सामने

सविता जानती थी कि शहर से घर का सामान लेने के लिए गया पति शाम तक ही लौटेगा, इस दौरान वह गबरू जवान प्रेमी के साथ मौजमस्ती कर लेगी. सविता की काल आते ही तुलसीराम बाइक से सविता के टपरेनुमा घर पर पहुंच गया. उस ने आते ही सविता के गले में अपनी बाहों का हार डाल दिया, तभी सविता इठलाते हुए बोली, ”अरे, यह क्या कर रहे हो, थोड़ी तसल्ली तो रखो.’’

”कुआं जब सामने हो तो प्यासे व्यक्ति को कतई धैर्य नहीं होता है,’’ इतना कहते हुए तुलसीराम ने सविता का गाल चूम लिया.

”तुम्हारी इन नशीली बातों ने ही तो मुझे दीवाना बना रखा है. न दिन को चैन मिलता है और न रात को. सच कहूं जब मैं अपने पति के साथ होती हूं तो सिर्फ तुम्हारा ही चेहरा मेरे सामने होता है,’’ सविता ने भी इतना कह कर तुलसी के गालों को चूम लिया.

तुलसीराम से भी रहा नहीं गया. वह सविता को बाहों में उठा कर चारपाई पर ले गया. इस से पहले कि वे दोनों कुछ कर पाते, दरवाजा खटखटाने की आवाज आई. इस आवाज को सुनते ही दोनों के दिमाग से वासना का बुखार उतर गया. सविता ने जल्दी से अपने अस्तव्यस्त कपड़ों को ठीक किया और दरवाजा खोलने भागी. जैसे ही उस ने दरवाजा खोला, सामने पति को देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया, ”तुम तो घर से शहर से सौदा लाने के लिए निकले थे, फिर इतनी जल्दी कैसे लौट आए?’’ सविता हकलाते हुए बोली.

”क्यों? क्या मुझे अब अपने घर आने के लिए भी तुम से परमिशन लेनी पड़ेगी? तुम दरवाजे पर ही खड़ी रहोगी या मुझे भीतर भी आने दोगी,’’ कहते हुए पुन्नूलाल ने सविता को एक तरफ किया और जैसे ही वह भीतर घुसा तो सामने तुलसीराम को देख कर उस का माथा ठनका.

”अरे, आप कब आए?’’ तुलसीराम ने पूछा तो पुन्नूलाल ने कहा, ”बस, अभीअभी आया हूं.’’

सविता के हावभाव पुन्नूलाल को कुछ अजीब से लगे, उस ने सविता की तरफ देखा, वह बुरी तरह से घबरा रही थी. उस के बाल बिखरे हुए थे. माथे की बिंदिया उस के हाथ पर चिपकी हुई थी.

यह सब देख कर पुन्नूलाल को शक होना लाजिमी था. डर के मारे तुलसीराम भी उस से ठीक से नजरें नहीं मिला पा रहा था. ठंड के मौसम में भी उस के माथे पर पसीना छलक रहा था. पुन्नूलाल तुलसीराम से कुछ कहता, उस से पहले ही वह अपनी बाइक पर सवार हो कर वहां से भाग गया.

उस के जाते ही पुन्नूलाल ने सविता से पूछा, ”तुलसीराम तुम्हारे पास क्यों आया था और तुम दोनों दरवाजा बंद कर क्या गुल खिला रहे थे?’’

”वह तो तुम से मिलने आया था और कुंडी इसलिए लगाई थी कि आज पड़ोसी की बिल्ली बहुत परेशान कर रही थी.’’ असहज होते हुए सविता बोली.

”लेकिन मेरे अचानक आ जाने से तुम दोनों की घबराहट क्यों बढ़ गई थी?’’

”अब मैं क्या जानूं, यह तो तुम्हें ही पता होगा.’’ सविता ने कहा तो पुन्नूलाल तिलमिला कर रह गया. उस के मन में पत्नी को ले कर संदेह पैदा हो गया था.

पुन्नूलाल ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पति पर निगाह रखनी शुरू कर दी और हिदायत दे दी कि तुलसीराम से वह आइंदा से मेलमिलाप न करे. पति की सख्ती के बावजूद सविता मौका मिलते ही तुलसीराम से मिलती रहती थी.

सविता और उस के प्रेमी को चोरीछिपे मिलना अच्छा नहीं लगता था. उधर तुलसीराम चाहता था कि सविता जीवन भर उस के साथ रहे, लेकिन सविता के लिए यह संभव नहीं था.

सविता क्यों बनी प्रेमी की कातिल

वैसे भी जब से पुन्नूलाल और गांव वालों को सविता और तुलसीराम प्रजापति के अवैध संबंधों का पता लगा था, तब से सविता घर टूटने के डर से तुलसीराम से छुटकारा पाना चाह रही थी, लेकिन समझाने के बावजूद तुलसीराम उस का पीछा नहीं छोड़ रहा था. तब अंत में सविता ने अपने छोटे भाई हल्के आदिवासी के साथ मिल कर अपने प्रेमी तुलसीराम को मौत के घाट उतारने की योजना बना डाली.

अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 8 जनवरी, 2024 को सविता अपने मायके साईंखेडा चली गई, जिस से किसी को उस पर शक न हो. वहां से वह 11 जनवरी की दोपहर अपनी ससुराल पिडरुआ वापस लौट आई. उसी दिन शाम के वक्त उस ने तुलसीराम को फोन करके मिलने के लिए मोतियाहार के जंगल में बुला लिया.

अपनी प्रेमिका के बुलावे पर उस की योजना से अनजान तुलसीराम खुशी खुशी मोतियाहार के जंगल में पहुंचा. तभी मौका मिलते ही सविता ने अपने मायके से साथ लाए चाकू का पूरी ताकत के साथ तुलसीराम के गले पर वार कर दिया. अपनी जान बचाने के लिए खून से लथपथ तुलसीराम ने वहां से बच कर भाग निकलने की कोशिश की तो सविता ने चाकू उस के पेट में घोंप दिया. पेट में चाकू घोंपे जाने से उस की आंतें तक बाहर निकल आईं. कुछ देर छटपटाने के बाद ही उस के शरीर में हलचल बंद हो गई.

इस के बाद सविता के भाई हल्के आदिवासी ने तुलसीराम की पहचान मिटाने के लिए उस के सिर को पत्थर से बुरी तरह से कुचल दिया. फिर सविता ने अपने प्रेमी की नाक के पास अपनी हथेली ले जा कर चैक किया कि कहीं वह जिंदा तो नहीं है. दोनों को पूरी तरह तसल्ली हो गई कि तुलसीराम मर चुका है, तब उन्होंने तुलसीराम के सारे कपड़े उतार कर उस के कपड़े, जूते एक थैले में रख कर तालाब में फेंक दिए. लाश को ठिकाने लगाने के लिए सविता और उस का भाई हल्के तुलसी की लाश को कंधे पर रख कर हरा वाले तालाब के करीब ले गए. वहां बोरी में पत्थर भर कर रस्सी को उस की कमर में बांध कर शव को तालाब में फेंक दिया.

नग्नावस्था में मिली थी तुलसी की लाश

12 जनवरी, 2024 की सुबह उजाला फैला तो पिडरुआ गांव के लोगों ने तालाब में युवक की लाश तैरती देखी. थोड़ी देर में वहां लोगों की भीड़ जुट गई. भीड़ में से किसी ने तालाब में लाश पड़ी होने की सूचना बहरोल थाने के एसएचओ सेवनराज पिल्लई को दी.

सूचना मिलते ही एसएचओ कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर मौके पर पहुंच गए. लाश तालाब से बाहर निकलवाने के बाद उन्होंने उस की जांच की. उस की शिनाख्त पिडरुआ निवासी तुलसीराम प्रजापति के रूप में की. वहीं पर पुलिस को यह भी पता चला कि तुलसीराम के पिछले डेढ़ साल से गांव की शादीशुदा महिला सविता आदिवासी से अवैध संबंध थे. इसी बात को ले कर पतिपत्नी में तकरार होती रहती थी.

लेकिन तुलसीराम की हत्या इस तरह गोद कर क्यों की गई, यह बात पुलिस और लोगों को अचंभे में डाल रही थी. मामला गंभीर था. एसएचओ ने घटना की सूचना एसडीओपी (बंडा) शिखा सोनी को भी दे दी थी. वह भी मौके पर आ गईं. इस के बाद उन्होंने भी लाश का निरीक्षण कर एसएचओ को सारी काररवाई कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के निर्देश दिए. एसएचओ पिल्लई ने सारी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. फिर थाने लौट कर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

एसडीओपी शिखा सोनी ने इस केस को सुलझाने के लिए एक पुलिस टीम गठित की. टीम में बहरोल थाने के एसएचओ सेवनराज पिल्लई, बरायथा थाने के एसएचओ मकसूद खान, एएसआई नाथूराम दोहरे, हैडकांस्टेबल जयपाल सिंह, तूफान सिंह, वीरेंद्र कुर्मी, कांस्टेबल देवेंद्र रैकवार, नीरज पटेल, अमित शुक्ला, सौरभ रैकवार, महिला कांस्टेबल प्राची त्रिपाठी आदि को शामिल किया गया.

चूंकि पुलिस को सविता आदिवासी और मृतक की लव स्टोरी की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी, इसलिए पुलिस टीम ने गांव के अन्य लोगों से जानकारी जुटाने के बाद सविता आदिवासी को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया.

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सविता से तुलसीराम की हत्या के बारे में जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने पुलिस को गुमराह करने की भरसक कोशिश की, लेकिन एसएचओ सेवनराज पिल्लई के आगे उस की एक न चली और उसे सच बताना ही पड़ा. सविता के खुलासे के बाद पुलिस ने सविता के भाई हल्के आदिवासी को भी साईंखेड़ा गांव से गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना जुर्म कुबूल कर लिया सविता और उस के भाई हल्के आदिवसी से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

सविता और उस के भाई हल्के ने सोचा था कि तुलसीराम को मौत के घाट उतार देने से बदनामी से छुटकारा और बसा बसाया घर टूटने से बच जाएगा, लेकिन पुलिस ने उन के मंसूबों पर पानी फेर कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. तुलसीराम की हत्या कर के सविता और उस का भाई हल्के आदिवासी जेल चले गए. सविता ने अपनी आपराधिक योजना में भाई को भी शामिल कर के अपने साथ भाई का भी घर बरबाद कर दिया. Love Crime

प्रेमिका क्यों बनी कातिल

मुकेश ने खेत में देखा तो हैरान रह गया. वहां भारी मात्रा में खून फैला हुआ था. यह देखते ही वह वहां से तुरंत उल्टे पैर भागा और सीधे  गांव के मास्टर हरिराम के घर पहुंचा.

मास्टर हरिराम ने जब यह बात सुनी तो वह भी हैरान रह गए. उन्होंने फोन कर के गांव के पूर्व सरपंच लाखन सिंह ठाकुर को भी बुला लिया. तीनों उसी जगह पर पहुंचे तो जहां खून पड़ा था, वहां घसीटने के भी निशान थे. उसी घसीटती हुई फसल का पीछा करते करते वह 100-200 मीटर भी नहीं पहुंचे थे कि तीनों के कदम ठहर गए. क्योंकि उन के सामने औंधे मुंह एक व्यक्ति की लाश पड़ी थी.

वह जिस व्यक्ति की लाश थी, उसे पूर्व सरपंच लाखन सिंह ठाकुर जानते थे. लाश गांव की ही मौजूदा सरपंच फूलबाई कुशवाह के बेटे विशाल कुशवाहा की थी. पूर्व सरपंच ने देरी न करते हुए बैरसिया थाने के एसएचओ नरेंद्र कुलस्ते को फोन कर के सूचना दे दी.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के देहात क्षेत्र में स्थित बैरसिया थाना है. इस में गांव दामखेड़ा पड़ता है. यह गांव थाने से करीब 15-16 किलोमीटर दूर है. इसी गांव में मास्टर हरिनारायण सक्सेना भी रहते हैं. उन्हें पूरा गांव मास्साब के नाम से ही जानता है. उन के ही खेत में एक टपरा है, जिस में उन का बेलदार मुकेश रहता था.

वह 10 मार्च की सुबह जल्दी उठा. क्योंकि उस दिन अमावस्या थी, इसलिए उसे गांव में स्थित हनुमान मंदिर में जल चढ़ाने जाना था. वह उठा और मंदिर में सुबह लगभग 7 बजे चला गया. मंदिर में जल चढ़ा कर वह आ रहा था, तब उसे दूर से मास्साब के खेत में लगी फसल का कुछ हिस्सा बिखरा नजर आया.

मुकेश को लगा कि कोई फसल काट ले गया है. इसलिए वह तुरंत तेज कदमों से वहां पहुंचा था.

एएसपी डा. नीरज चौरसिया

लाश मिलने की सूचना पाते ही एसएचओ तुरंत घटनास्थल के लिए निकल पड़े. रास्ते में ही एसएचओ ने एसपी प्रमोद कुमार सिन्हा, एएसपी डा. नीरज चौरसिया और प्रभारी एसडीओपी मंजू चौहान को यह जानकारी साझा कर दी.

एसडीओपी मंजू चौहान

एसएचओ नरेंद्र कुलस्ते मौके पर जा रहे थे, तभी उन के पास बैरसिया के एसडीओपी आनंद कलादगी की भी काल आ गई. वह भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं और इस वक्त बैरसिया (देहात) में एसडीओपी का चार्ज देख रहे थे. हालांकि जब यह घटना हुई तो वह अवकाश पर पुश्तैनी गांव कर्नाटक गए हुए थे. एसएचओ ने उन्हें सारी जानकारी दे दी. शव पड़े होने की जानकारी देते हुए एसएचओ ने बताया कि वह मौके पर पहुंच रहे हैं.

इस के बाद घटनास्थल पर फिंगरप्रिंट के अधिकारियों और डौग स्क्वायड को भी बुला लिया था. इस के अलावा उन्होंने लललिया चौकी के प्रभारी एसआई शंभू सिंह सेंगर और थाने में तैनात एसआई रिंकू जाटव को भी मौके पर बुला लिया.

ये 2 बातें मौके पर हो चुकी थीं तय

थानाप्रभारी नरेंद्र कुलस्ते हरिनारायण सक्सेना के खेत पर पहुंचते, उस से पहले ही उन्हें गोलू साहू के खेत पर भारी भीड़ नजर आई. उन्होंने वहां मौजूद भीड़ को नगर रक्षा समिति के सदस्य इजरायल की मदद से हटाया.

उस के बाद शव और जहां खून फैला था, उस जगह को सुरक्षित कराया. वहां धीरेधीरे कर के सारे अफसर आना शुरू हो गए. खबर मीडिया तक पहुंच गई थी तो पत्रकारों का भी वहां जुटना शुरू हो गया.

उसी समय वहां सरपंच फूलबाई कुशवाहा के पति रमेश कुशवाहा भी कुछ लोगों के साथ पहुंच गए. अपने 25 वर्षीय बेटे विशाल कुशवाहा की लाश देख कर वह फूटफूट कर रोने लगे. उस की कुछ महीने पहले ही शादी भी हुई थी. वह नौजवान और हैंडसम युवक था. इस के अलावा सरपंच का बेटा होने के कारण उस का गांव में जलवा था.

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मृतक विशाल कुशवाहा

वह गांव में उगने वाली फसल को अपने लोडिंग वाहन में लोड कर के विदिशा जिले में लगने वाली मंडी में बेचने जाया करता था. जिस ग्रामीण को फसल उसे देनी होती थी, वह उसे पहले बता दिया करता था. इस कारण गांव के कई घरों में विशाल कुशवाहा का सीधा संपर्क था.

सबूत जुटाने में जुटे एसएचओ समेत तीनों अफसर नरेंद्र कुलस्ते, रिंकू जाटव और शंभू सिंह सेंगर मौके पर ही रणनीतियां बना रहे थे. इस दौरान हर स्तर का अफसर मौके पर आ कर एक नया टास्क टीम को दे कर जा रहा था.

एसएचओ मृतक विशाल कुशवाहा के शरीर में आए घावों को देख चुके थे. उस के बाएं कान के ऊपर भारी वस्तु से किए गए प्रहार के कारण सिर के भीतर दबा हिस्सा दिख रहा था. इस के अलावा सिर के पीछे और माथे पर धारदार हथियार के वार थे.

यह सभी अलगअलग तरह के थे. इसलिए यह तो साफ हो गया था कि उस की कई लोगों ने मिल कर हत्या की है. गरदन रेती गई थी, वह भी पेशेवर तरीके से. यानी यह भी साफ हो गया था कि वारदात करने वाला पेशेवर अपराधी है. गले को जिस जगह धारदार हथियार से रेता गया था, उस नाजुक जगह की जानकारी हर कोई नहीं रखता.

गांव से भागी महिला और उस के पति पर गया शक

घटनास्थल की बारबार तफ्तीश करने और विशाल कुशवाहा के कपड़ों की तलाशी लेने के बाद एसएचओ को सरकारी अस्पताल के 4 कंडोम मिले, इसलिए यह भी यकीन हो गया कि मामला अवैध संबंध से जुड़ा हो सकता है.

तभी एसएचओ का दिमाग ठनका और उन्होंने वहां मौजूद विशाल कुशवाहा के छोटे भाई मिथुन कुशवाहा से बातचीत शुरू की. क्योंकि वह उस वक्त होश में था.

उस ने बताया कि वह 2 भाई और 3 बहनें हैं, जिस में एक बहन की शादी हो गई है. मिथुन कुशवाहा से बातचीत में पता चला कि उन के गांव में चाची चली गई थी. वह गांव के दबंग अर्जुन कुशवाहा के साथ गई थी. उस से जरूर कुछ महीनों पहले विवाद की स्थिति बनी थी. लेकिन चाची और अर्जुन कुशवाहा घर छोड़ कर दूसरे गांव में रहने चले गए थे.

पुलिस ने उस की लोकेशन खंगाली तो वह संदेह के दायरे से बाहर हो गया. फिर आखिरी वक्त में कौन उस के साथ था, वह पता लगाया गया. तब मालूम हुआ कि गांव में रहने वाला बबलू कुशवाहा मृतक के पास आखिरी वक्त में था.

वह विशाल कुशवाहा की फसल और अपनी गाजर बेचने विदिशा गया हुआ था. उसे पुलिस ने काल करने की बजाय ग्रामीणों से काल लगा कर मौके पर बुलाया. उस को सीधे थाने ले जाया गया, जहां उस से पूछताछ अलग से की गई.

पड़ताल में मालूम हुआ कि बबलू कुशवाहा और विशाल कुशवाहा साथ में थे. जिस दिन लाश मिली, उस से एक दिन पहले रात 11 बजे लोडिंग वाहन उस के हवाले कर के वह चला गया था. लोडिंग वाहन में ही बबलू कुशवाहा को नींद की झपकी लग गई. बबलू कुशवाहा की नींद रात लगभग एक बजे खुली तो उस ने कई बार विशाल को फोन किया.

जब विशाल ने फोन नहीं उठाया तो बबलू ने उस के पापा रमेश कुशवाहा को फोन लगा कर बताया. उस ने बताया कि विशाल कुशवाहा ने सब्जी लोडिंग आटो में लोड कर ली थी. वह सुबह तक मंडी नहीं पहुंचाई तो खराब हो जाएगी. इस कारण रमेश कुशवाहा ने बबलू कुशवाहा के साथ दूसरे को भेज दिया.

यह बात पता चलने के बाद पुलिस ने बबलू कुशवाहा के अलावा विशाल कुशवाहा के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकालने का काम शुरू कर दिया.

प्रेमिका के कांफिडेंस को देख कर थानाप्रभारी का हौसला हुआ पस्त

एसएचओ ने मिथुन कुशवाहा से पूछा, ”तुम्हारे भाई के किसी महिला से संबंध थे?’’

यह सुन कर वह बोला, ”हां, कुछ साल पहले तक उस के नीतू शाक्य के साथ रिश्ते थे. दोनों शादी भी करना चाहते थे. लेकिन पिता दूसरी जाति होने के कारण इस रिश्ते को अपनाने के लिए तैयार नहीं थे.’’

यह पता चलने के बाद उन्होंने विशाल कुशवाहा का रिश्ता विदिशा जिले के गंजबासौदा में स्थित गांव सलोई में रहने वाली हरीबाई से तय कर दिया गया. यह पता चलने के बाद नीतू शाक्य ने विशाल को फोन भी किया था. उस ने कहा था कि वह शादी करेगा तो अच्छा नहीं होगा.

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आरोपी नीतू शाक्य

इस धमकी को घर वालों ने नजरअंदाज कर के शादी कर दी थीं. यह सुनने के बाद एसएचओ ने देर नहीं की और वह महिला कांस्टेबल शीला दांगी के साथ नीतू शाक्य के घर पहुंच गए और पूछताछ के लिए उसे थाने ले आए.

सरपंच के बेटे का दोस्त थाने पहुंच कर क्यों गिड़गिड़ाया

अब एसएचओ के सामने इस अंधे कत्ल को सुलझाने के लिए कई रास्ते थे. वह किन रास्तों पर जाएं, तय नहीं कर पा रहे थे. क्योंकि उन के सामने दामखेड़ा गांव के दबंग अर्जुन कुशवाहा की कहानी थी तो वहीं बबलू कुशवाहा भी था, जो घटना से कुछ देर पहले तक मृतक के साथ था. तीसरी नीतू शाक्य जो कुछ महीने पहले तक मृतक विशाल कुशवाहा की प्रेमिका थी.

इन सभी बातों के बीच एसएचओ ने मौके पर मिले कंडोमों के आधार पर तय किया कि वह नीतू शाक्य को फोकस करेंगे. इसी बीच उन्हें विशाल कुशवाहा के मोबाइल की काल डिटेल्स भी मिल गई. जांच में पता चला कि मृतक की आखिरी बातचीत अजय नामदेव के साथ हुई थी. वह विदिशा जिले का रहने वाला था.

पुलिस ने उसे भी पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. उस ने बताया कि यह सिम उस ने खरीद कर विशाल कुशवाहा को दी जरूर थी, लेकिन इस का इस्तेमाल वह नहीं करता था.

इस के बाद पुलिस ने अजय नामदेव के ही मोबाइल में हो रहे एक अन्य नंबर से बातचीत वाले को तलब किया. क्योंकि उस ने अजय नामदेव को उसी दिन कई बार फोन लगाया था.

उस का नाम आमीन मंसूरी था, जो दामखेड़ा गांव के नजदीक दूसरे गांव बबचिया का रहने वाला था. उस से पूछताछ का जिम्मा ललरिया चौकी में बैठे एसआई शंभु सिंह सेंगर को दिया गया. इधर, नीतू शाक्य पुलिस को कोई सहयोग नहीं कर रही थी. कई बार पुलिस पूछताछ की नाव गोते खा कर पलट रही थी.

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थाने में एकमात्र महिला कांस्टेबल नीतू शाक्य से पूछताछ करने में कमजोर साबित हो रही थी. उधर, आमीन मंसूरी ने भी कम परेशान नहीं किया. उस के रिश्तेदार भी हत्याकांड में उसे घेरे जाने का पता चलने पर एकएक कर के थाने के बाहर जमा होने लगे. इस के बावजूद एसआई शंभु सिंह सेंगर की टीम ने सख्ती बरती तो वह टूट गया.

उस ने हत्याकांड को करना कुबूल लिया, जिस में नीतू शाक्य की सीधी भूमिका थी. उस ने यह भी बताया कि वह हत्या करने के लिए राजी नहीं था. लेकिन नीतू शाक्य ने उस को प्यार का हवाला दे कर हत्या करने के लिए मजबूर कर दिया था.

शारीरिक संबंध बनाने से पहले नीतू ने रखी थी कौन सी शर्त

आमीन मंसूरी (18 वर्ष) द्वारा गुनाह कुबूल कर लेने के बाद नीतू ने भी रट्टू तोते की तरह सारी कहानी बयां कर दी. उस ने बताया कि वह विशाल कुशवाहा की बेवफाई से काफी आहत हो गई थी. इसलिए उस ने तय कर लिया था कि वह उस की हत्या करेगी.

आरोपी आमीन मंसूरी

इस के लिए उस ने गांव के ही कई युवकों के साथ दोस्ती भी की थी. उन के साथ रिश्ते बनाने से पहले यह शर्त थी कि उन्हें विशाल कुशवाहा को निपटाना होगा.

नीतू से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने एकएक कर के सभी युवकों को थाने बुलाया. पता चला कि आमीन मंसूरी मटनचिकन की दुकान में काम भी करता था. उस के साथ 3 महीने पहले ही नीतू शाक्य ने दोस्ती की थी. एसएचओ इस बात को ले कर परेशान थे कि उस के पास विशाल कुशवाहा के दोस्त अजय नामदेव की मोबाइल सिम कैसे मिली. तब उस ने बताया कि वह मोबाइल और सिम उस को विशाल कुशवाहा ने ही खरीद कर बातचीत करने के लिए दी थी. शादी से पहले उसी मोबाइल के जरिए बातचीत होती थी.

हत्याकांड को अंजाम देने के लिए नीतू शाक्य ने विशाल कुशवाहा को फोन लगा कर हनुमान मंदिर के पास बुलाया था. लेकिन उस दिन घर में उस की मौसी आ गई थी. इस कारण वह रात 11 बजे उस के पास पहुंची थी. हालांकि इस से पहले 9 बजे मुलाकात होनी थी.

मर्डर करने के बाद लाश क्यों जलाना चाहती थी नीतू

उधर, आमीन मंसूरी ने बताया कि हत्याकांड में उस का दोस्त मनोज वंशकार भी शामिल था. 20 वर्षीय मनोज बबचिया गांव का रहने वाला था. लेकिन भोपाल के कोलार रोड स्थित ललिता नगर में रहने वाले भाई बलराम वंशकार और भाभी सुनीता वंशकार के साथ वह रहता था.

आरोपी मनोज वंशकार

आमीन मंसूरी ने बताया कि उस ने हत्या तो नहीं की थी, लेकिन उस की बाइक से वह मौके पर पहुंचा था. वह यह जानता था कि मैं अपनी प्रेमिका नीतू शाक्य के दुश्मन को मारने वाला हूं.

आमीन मंसूरी की कहानी और नीतू शाक्य की पटकथा मेल खाने लगी. यह देख कर पुलिस ने नीतू शाक्य को संदेही मान कर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इधर, बैरसिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए विशाल कुशवाहा के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ चुकी थी.

रिपोर्ट में आईं इन चोटों को ले कर नीतू शाक्य ने राज उजागर किया. उस ने बताया कि उसे पता था कि मृतक के साथ बबलू कुशवाहा है, इसलिए उसे अकेले नीतू ने बुलाया था.

विशाल को लगा कि आज वह एक बार फिर पुरानी यादों को नीतू के साथ शारीरिक संबंध बना कर ताजा करेगा. इस कारण वह अपने साथ 4 कंडोम ले कर पहुंचा था. वह नीतू को देख कर अपने अरमानों को रोक नहीं पा रहा था. विशाल यह नहीं जानता था कि नीतू आज प्रेमिका नहीं, बल्कि बदला लेने वाली दुश्मन है.

वह योजना के तहत पीछे की तरफ जा रही थी. जबकि विशाल उसे आलिंगन करने के लिए बढ़ रहा था. तभी नीतू ने विरोध करते हुए बोला कि वह उस का फोन क्यों नहीं उठाता. विशाल बोला कि अब वह शादीशुदा है. पत्नी को पता चलता है तो घर में बवाल होता है.

यह बोलते हुए वह नीतू को दबोचने के लिए आगे बढ़ा. लेकिन नीतू पीछे हुई, तभी उस के पैर से पत्थर टकराया जो उस ने कब उठाया, यह विशाल समझ ही नहीं पाया. विशाल ने जैसे ही कमर के पीछे से दोनों हाथ डाल कर दबोचना चाहा. तभी उस ने विशाल के कान के बाएं तरफ जोरदार पत्थर का वार किया.

लाश को छिपाने में दोस्त ने क्यों नहीं की मदद

विशाल कुशवाहा को जैसे ही बाएं कान की तरफ पत्थर लगा तो वह चीख पड़ा. उसी वक्त पीछे से आ कर आमीन मंसूरी ने छुरी से विशाल के सिर पर वार किया और उसे दबोच लिया. यह देख कर वह समझ गया कि उस के साथ क्या होने वाला है. उस ने तुरंत ही मास्टर हरिनारायण सक्सेना के खेत में रहने वाले बेलदार को नाम ले कर बचाने के लिए पुकारा.

उस की आवाज सुन कर नीतू बोली, ”आमीन, इस का मुंह बंद करो नहीं तो पूरे गांव वाले जाग जाएंगे.’’

यह बोलने के साथ ही उस ने अपना दुपट्टा भी उसे दिया. दुपट्टे से आमीन मंसूरी ने उस का मुंह बंद किया और चाकू से विशाल कुशवाहा का गला रेत दिया. इस काम में आमीन मंसूरी काफी एक्सपर्ट था. क्योंकि वह मीट की दुकान में काम करता था.

गला रेतने के बाद खून का फव्वारा छूट पड़ा था. इसलिए खेत में चारों तरफ खून ही खून फैल गया. फिर तय किया गया कि उसे दूसरी जगह ले जा कर जला देते हैं, ताकि उस का शव पहचान में नहीं आ सके.

सिरहाने की तरफ से आमीन मंसूरी ने पकड़ा. वहीं पैर की तरफ से नीतू शाक्य पकड़ कर खींचने लगी, लेकिन मरने के बाद विशाल का शरीर भारी हो गया था.

बदले की आग जब शांत हुई तो नीतू खून से सने विशाल को देख कर घबरा गई. लाश खींचने के दौरान मृतक की पैंट नीतू के हाथों में खिंच आई और वह गिर गई.

यह देख कर आमीन ने अपने दोस्त मनोज वंशकार को बुलाया. आमीन ने उस से कहा कि वह लाश को घसीटने में मदद करे, ताकि उसे जला कर उस की पहचान मिटा सकें. लेकिन ऐसा करने के लिए मनोज वंशकार राजी नहीं हुआ.

नतीजतन दोनों गोलू कुशवाहा के खेत तक ही लाश को ले जा सके. उसे वहीं पटक कर तीनों मौके से भाग गए.

सारी रात कैसे मिटाए सबूत

नीतू शाक्य की योजना यह थी कि विशाल कुशवाहा की हत्या में उस का दोस्त अजय नामदेव फंसे. इसलिए उस के नाम पर खरीदे गए मोबाइल और सिम का इस्तेमाल नीतू ने किया था. लेकिन सब कुछ उलटा हो गया तो रणनीतियां बदली जाने लगीं.

हत्याकांड के बाद आरोपी आमीन मंसूरी मृतक का मोबाइल और पर्स ले कर भाग गया. ताकि लाश देखने के बाद पुलिस को यह लगे कि उस की लूट के इरादे से हत्या की गई है. आमीन मंसूरी ने बबचिया गांव के नाले में उस का मोबाइल फेंक दिया.

खून से सना दुपट्टा और कपड़े उतार कर नीतू शाक्य ने घर की छत पर एक कोने में छिपा दिए. उन्हें अगले दिन जलाने की योजना थी. लेकिन उस से पहले ही पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले आई थी.

पुलिस ने पहले आमीन मंसूरी और उस की प्रेमिका नीतू शाक्य को गिरफ्तार किया. उस के अगले दिन मनोज वंशकार को भी हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने हत्याकांड में इस्तेमाल की गई मनोज वंशकार की बाइक भी जब्त कर ली. नीतू शाक्य ने मोबाइल की सिम तोड़ दी थी. लेकिन अजय नामदेव के नाम पर खरीदा गया मोबाइल उस के घर से बरामद किया गया.

पुलिस ने हत्या करने और सबूत मिटाने का मामला दर्ज करने के बाद आम्र्स एक्ट, लूट, साजिश रचने समेत कई अन्य धाराएं भी बढ़ा दीं. आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव

हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव – भाग 3

होटल के सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

मृतक संदीप कांबले शादीशुदा था व एक 13 साल की बेटी का पिता था. मृतक के छोटे भाई विशाल कांबले ने जुलकबारी पुलिस स्टेशन में भादंवि की धारा 302/34 के तहत एफआईआर भी दर्ज करा दी थी.

पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि मृतक संदीप सुरेश कांबले के साथ पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले की 25 वर्षीय अंजलि शा ने होटल के कमरा नंबर 922 में चेक इन किया था. अंजलि का विवरण उस की फोटो पहचान (आईडी) के साथ पुलिस को मिला था.

होटल के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने पर यह बात भी सामने आई कि अंजलि शा 5 फरवरी, 2024 अपराह्नï पौने 3 बजे 27 वर्षीय विकास शा के साथ कमरे से निकली थी.

पुलिस टीम ने दोनों संदिग्धों अंजलि और विकास की तसवीरों से पूरा विवरण तत्काल वायरलेस सैट पर पूरे गुवाहाटी में प्रसारित करवा दिया, उस के बाद पुलिस टीम को गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एलजीबीआईए) पर दोनों संदिग्धों के नामों की जांच करने पर पता चला कि दोनों संदिग्धों ने गुवाहाटी से पश्चिम बंगाल के कोलकाता के लिए हवाई टिकट बुक किया था. उन के प्रस्थान का समय दिनांक 5 फरवरी, 2024 की रात सवा 9 बजे का था.

संदिग्धों के बारे में एकत्र की गई जानकारी के आधार पर लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली सभी सड़कों के किनारे बोरझार चौकी (ओपी) क्षेत्र में एक पुलिस नाका (चैकिंग) स्थापित कर दिया गया.

पुलिस की यह कोशिश आखिरकार रंग लाई और 5 फरवरी, 2024 की शाम 5 बज कर 42 मिनट पर जब वे दोनों एक किराए की टैक्सी से हवाई अड्डे की ओर जा रहे थे, उन्हें पुलिस टीम द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों संदिग्धों से गहन पूछताछ के बाद इस हत्याकांड की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह एक प्रेम त्रिकोण की थी.

44 वर्षीय संदीप सुरेश कांबले पुणे जिले का रहने वाला हीरा व्यापारी और कार डीलर थे. 25 वर्षीय अंजलि शा कोलकता के होटल में काम करती थी. दोनों का एक बार परिचय हुआ तो यह परिचय दोस्ती और उस के बाद धीरेधीरे प्यार में बदल गया था. संदीप सुरेश कांबले भले ही अंजलि से करीब दोगुने उम्र का था, लेकिन बहुत पैसे वाला था, इसीलिए अवैध संबंध बन गए थे.

संदीप उसे काफी महंगे महंगे तोहफे देता रहता था. उन के बीच यह संबंध तकरीबन एक साल तक बदस्तूर जारी रहा, लेकिन इस बीच अंजलि शा की जिंदगी में विकास शा की एंट्री हो गई. 27 वर्षीय विकास भी कोलकाता में रह कर ही नौकरी करता था. अंजलि काफी समय तक 2 नावों पर सवारी करती रही.

एक ओर जहां अंजलि 2 नावों पर सवार हो कर जिंदगी के अनमोल सुख ले रही थी, वहीं दूसरी तरफ उस के पहले प्रेमी संदीप सुरेश कांबले को उस के दूसरे प्रेम संबंध के बारे में पता चल गया. उस ने जब अंजलि से जवाबतलब किया तो इस दोहरी जिंदगी से परेशान हो कर अंजलि ने संदीप सुरेश कांबले के बजाय विकास को चुना.

यह बात सुरेश कांबले को नागवार गुजरी और फिर उस ने अंजलि को अंतरंग फोटो के जरिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.

संदीप कांबले अब अंजलि शा पर शादी करने का दबाव भी डालने लगा था, जबकि अंजलि उस से शादी करना तो दूर, अब दोस्ती भी नहीं करना चाहती थी. उस ने संदीप से सारे रिश्ते भी तोड़ दिए थे. संदीप अंजलि को किसी भी हालत में अपने से दूर नहीं होने देना चाहता था.

संदीप अंजलि को क्यों करता था ब्लैकमेल

जब अंजलि उस से किनारा करने लगी तो संदीप अब काफी आक्रामक हो गया था और उस ने अंजलि और विकास के परिवार के सदस्यों से संपर्क करना शुरू कर दिया ताकि अंजलि उस से शादी करने के लिए मजबूर हो सके. यहां तक कि संदीप ने विकास के साथ अपनी और अंजलि की तसवीरें भी साझा कीं ताकि उन दोनों का रिश्ता टूट सके.

अंजलि ने संदीप के साथ अपना रिश्ता खत्म कर दिया था, मगर संदीप उस पर लगातार दबाब डाल रहा था और उस ने अंजलि का पीछा करना जारी रखा, जबकि दूसरी तरफ अंजलि अब विकास के साथ प्रेम में थी.

इस के कुछ समय बाद अंजलि ने विकास शा को संदीप सुरेश कांबले बारे में सब कुछ सचसच बता दिया. यह भी बताया कि संदीप कांबले ने उस की कुछ अंतरंग तसवीरें खींच ली थीं, जोकि उस के पास हैं.

विकास अब अंजलि से प्यार करने लगा था. उन का प्यार परवान चढऩे लगा, इसलिए दोनों ने मिल कर एक योजना बनाई कि अंजलि कोलकाता में संदीप को मिलने के लिए अकेले में बुलाएगी. जिस मीटिंग में विकास भी उस के साथ शामिल होगा. दोनों मिल कर संदीप को जबरदस्ती पकड़ लेंगे और उस से उस के वो दोनों मोबाइल फोन छीन लेंगे, जिन में अंजलि और संदीप की अंतरंग तसवीरें कैद थीं. उस के बाद दोनों संदीप को बेहोश कर वहां से भाग जाएंगे.

प्रेमिका क्यों बनी कातिल

लेकिन संदीप को अंजलि पर न जाने क्यों शक सा हो गया था, इसलिए उस ने कोलकाता में मिलने से मना कर दिया. मगर संदीप के दिल में अंजलि के प्रति अभी भी काफी प्रेम था, इसलिए उस ने अंजलि से कहा कि यदि वह अकेले में उस से मिलना चाहती है तो वह गुवाहाटी में उस से मिल सकती है.

संदीप ने उस से कहा कि एक बार वह गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर के दर्शन कर ही आए थे, इस बार एक फिर से देवी के दर्शन भी कर सकते हैं और मिल भी सकते हैं.

अंजलि ने यह बात विकास को बता दी तो दोनों ने अलग अलग गुवाहाटी जाने का प्रोग्राम बना लिया. वे दोनों संदीप से किसी भी तरह मोबाइल फोन छीन लेना चाहते थे.

प्लान के मुताबिक अंजलि गुवाहाटी एयरपोर्ट पर संदीप से मिली और फिर रेडिसन ब्लू होटल के लिए रवाना हो गई, जहां उन्होंने होटल के कमरा नंबर 922 में चैक इन किया. यह जानकारी अंजलि ने विकास को दे दी. अपना कमरा नंबर बता कर उसे रेडिसन ब्लू होटल में ही कमरा लेने को कहा. विकास भी होटल आ गया और उस ने कमरा नंबर 1024 में चैकइन किया.

इस बीच संदीप बाथरूम में गया तो अंजलि ने कमरे का दरवाजा खोल दिया और विकास को जल्दी कमरे में आने को कहा. विकास सारे सामान के साथ जो पहले से ही उन के प्लान में शामिल था, कमरा नंबर 922 में पहुंच गया. कमरे के अंदर दाखिल होते ही विकास ने कमरे का दरवाजा भीतर से बंद कर दिया.

विकास अपने साथ नींद की गोलियां और भांग के लड्डू (गोल मिठाई) और रस्सी भी लाया था ताकि संदीप को काबू किया जा सके. संदीप जैसे ही बाथरूम से बाहर आया और जब उस की नजर विकास पर पड़ी तो वह आगबबूला हो गया.

विकास और संदीप के बीच हाथापाई होने लगी. अंजलि भी हाथापाई करने में पीछे नहीं रही और वह भी विकास का भरपूर साथ देने लगी थी. संदीप अकेला काफी देर तक उन दोनों का मुकाबला करता रहा, लेकिन वे दोनों अब उसे बुरी तरह से पीटने लगे थे, जिस के कारण संदीप की नाक और मुंह से खून बहने लगा था. लेकिन वे दोनों तब तक संदीप के साथ बुरी तरह मारपीट करते रहे, जब तक वह बेहोश हो कर फर्श पर गिर नहीं गया.

संदीप के फर्श पर गिरते ही दोनों ने उस के दोनों मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए. जब उन्होंने रस्सी से संदीप को बांधना चाहा तो उन्होंने देखा कि संदीप मर चुका था. इस के बाद दोनों घबरा गए और अपना अपना सामान ले कर होटल से दोपहर पौने 3 बजे चले गए.

पहले वे दोनों कोलकाता के लिए ट्रेन पकडऩे के लिए गुवाहाटी के कामाख्या रेलवे स्टेशन गए थे. वहां वे दोनों काफी देर तक बैठे भी रहे थे. उस के बाद विकास ने रेडिसन ब्लू होटल के रिसैप्शन में फोन कर रूम नंबर 922 में ठहरे व्यक्ति के अस्वस्थ होने की सूचना दी.

उस समय कोलकाता के लिए कोई ट्रेन उपलब्ध न होने के कारण उन्होंने ट्रेन से कोलकाता जाने का इरादा बदल दिया और उस दिन रात को सवा 9 वाले प्लेन से कोलकाता जाने का टिकट बुक करा लिया. मगर इस के पहले वहां पर गुवाहाटी पुलिस सजग और सतर्क हो चुकी थी, जिस के कारण जब वे दोनों एलजीबीआईए की तरफ जा रहे थे तो पुलिस ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने दोनों आरोपियों से महत्त्वपूर्ण सबूत बरामद किए, जिन में खून से सने कपड़े, मृतक के दोनों मोबाइल फोन व भांग की मिठाई, नींद की गोलियों के साथसाथ आपत्तिजनक बातचीत वाले दोनों आरोपियों के मोबाइल शामिल थे.

गुवाहाटी पुलिस ने अंजलि शा और उस के प्रेमी विकास शा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

—कहानी पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित है. तथ्यों का नाट्य रूपांतरण किया गया है.

हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव – भाग 2

वे जाड़ों के दिन थे. संदीप कई दिनों से अंजलि को अपने होटल के कमरे में आमंत्रित करता रहता था. उस दिन रेस्टोरेंट में संदीप ने अंजलि से कहा, ”अंजलि, आज मेरा जन्मदिन है, इसलिए आज आप को मेरे कमरे में जन्मदिन सेलिब्रेट करने आना ही होगा. मैं बिलकुल भी ‘न’ शब्द तुम्हारे मुंह से नहीं सुनना चाहता.’’

”ठीक है, मैं शाम 6 बजे आप के कमरे में पहुंच जाऊंगी, आप अपने होटल का पता और कमरा नंबर मुझे मैसेज कर दीजिएगा,’’ अंजलि ने कहा.

ऐसे हुई नए संबंधों की शुरुआत

अपने तय समय के मुताबिक अंजलि ठीक 6 बजे शाम को संदीप कांबले के कमरे में पहुंच गई थी. उस ने डोरबेल बजाई तो संदीप उसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था.

”सच में अंजलिजी, आप के इंतजार का एकएक पल मुझे एक युग के समान लग रहा था. देखिए, आप ठीक 15 मिनट देरी से पहुंची हैं. आइए, आप का तहेदिल से स्वागत है,’’ संदीप ने अंजलि का स्वागत करते हुए कहा.

”आप के जन्मदिन का गिफ्ट लेने में थोड़ी देर हो गई थी जनाब!’’ अंजलि ने उसे गिफ्ट देते हुए जन्मदिन की बधाई दी.

संदीप ने तुरंत अपने कोट की जेब से एक हीरे की अंगूठी निकाली, ”ये हमारी दोस्ती की पहली मुलाकात के लिए है,’’ संदीप ने उस के हाथ में अंगूठी देते हुए कहा.

”अरे संदीपजी, आप यह क्या कर रहे हैं? इतनी महंगी वो भी हीरे की अंगूठी देने की भला क्या जरूरत थी? देखिए, यह बात ठीक नहीं है,’’ अंजलि ने हिचकिचाते हुए कहा.

”अंजलि, अब तुम मेरी एक अच्छी दोस्त बन चुकी हो, वैसे भी मैं हीरे का व्यापारी हूं इसलिए तुम्हें मेरी ओर से यह भेंट स्वीकार करनी ही पड़ेगी.’’ संदीप ने कहा.

उस के बाद संदीप का बर्थडे केक काटा गया. आज की शाम को संदीप रंगीन करना चाहता था, इसलिए उस ने अपने साथ 3-4 पैग स्काच के दोस्ती का हवाला दे कर अंजलि को पिला डाले थे. उस के बाद रात के खाने का भी समय हो गया था.

दोनों ने खाना खाया और ठंड का बहाना करते हुए संदीप अपने बिस्तर पर रजाई ओढ़ कर लेट सा गया. नशे का असर अब अंजलि पर धीरेधीरे हावी होने लगा था, उसे लग रहा था जैसे वह आसमान में उड़ी जा रही हो.

अंजलि कमरे में रखे सोफे पर संदीप के ठीक सामने बैठी हुई थी. संदीप ने उस की ओर देखा तो वह अब सोफे से खड़ी हो कर संदीप के एकदम नजदीक आ कर खड़ी हो गई थी. संदीप ने जब उस की आंखों में झांका तो उसे साफसाफ दिखाई पड़ा कि अंजलि की आंखें नशे से गुलाबी सी हो गई थीं और उस के सीने का उतारचढ़ाव जैसे बेकाबू सा होता चला जा रहा था.

संदीप अब अंजलि के दिल की बात अच्छी तरह से भांप चुका था. फिर भी उस ने अपनी ओर से पहल करते हुए कहा, ”अंजलि, अगर तुम्हें ठंड लग रही है तो यहां मेरे पास रजाई के अंदर आ जाओ. लगता है अब तुम काफी थक चुकी हो.’’

”तुम नहीं समझोगे संदीपजी, ये निगोड़ी ठंड रजाई का गरमी से नहीं भाग सकती. चलो, अगर तुम कहते हो तो आ ही जाती हूं.’’ कहते हुए अंजलि संदीप के साथ बैड पर उस की रजाई के अंदर घुस गई.

जैसे ही अंजलि उस की बगल में रजाई के भीतर आई तो संदीप को ऐसा लगा कि उस के बगल में लेटी हुई अंजलि के शरीर से लपटें निकल रही हैं और वह उन लपटों में जल रहा है. अब संयम की लगाम संदीप के हाथों से बिलकुल ही छूट चुकी थी. जैसा मंसूबा उस ने तैयार किया था, वह जैसे पूरा हो चुका था.

उस ने अंजलि के शरीर को बुरी तरह से भींच लिया था और वे दोनों सारी रात एकदूसरे की अतृप्त कामनाओं को पूरा करने में जुट गए थे.

गुवाहाटी के फाइव स्टार होटल रेडिसन ब्लू में हुई हत्या

असम के गुवाहाटी स्थित जुलकबारी थाने के एसएचओ अपने औफिस में बैठ कर आवश्यक काम निपटा रहे थे, तभी उन का मोबाइल फोन बजने लगा.

”हैलो, मैं जुलकबारा एसएचओ इंसपेक्टर रंजीत कुमार रे बोल रहा हूं. कहिए, हम आप की क्या सहायता कर सकते हैं?’’ एसएचओ ने फोन उठाते हुए.

”सर, मैं रेडिसन ब्लू होटल से प्रकाश थापा बोल रहा हूं. सर, यहां पर रूम नंबर 922 में एक व्यक्ति का मर्डर हो गया है. आप यहां जल्दी आ जाइए.’’ दूसरी ओर से मैनेजर ने कहा.

”अरे फाइव स्टार होटल में मर्डर हो गया? कौन था वह आदमी? कहां का रहने वाला था? जरा विस्तार से बताओ तो?’’ एसएचओ ने पूछा.

”सर, मृतक का नाम संदीप सुरेश कांबले है. उन की उम्र लगभग 44 वर्ष की है. वह पिछले कई सालों से हमारे रेगुलर कस्टमर थे. उन का हीरे और कारों का व्यवसाय था, वह अपनी एक महिला मित्र के साथ होटल के कमरा नंबर 922 में ठहरे हुए थे,’’ होटल मैनेजर प्रकाश थापा ने जल्दीजल्दी कहा.

”ठीक है प्रकाश थापाजी, आप अपने कर्मचारियों को होटल के उस कमरे के बाहर तैनात करवा दीजिए. कमरे के भीतर कोई भी व्यक्ति न जाए, हम तुरंत आ रहे हैं.’’ कहते हुए एसएचओ ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

जुलकबारी एसएचओ रंजीत कुमार रे ने घटना की सूचना तुरंत अपने उच्चाधिकारियों को दी और अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर निकल गए. जब जुलकबारी थाने के प्रभारी होटल रेडिसन ब्लू में पहुंचे, तब तक घटनास्थल पर पुलिस कमिश्नर दिगंता बराह, डीसीपी (वेस्ट) पद्मनाभ बरुआ, एडीसीपी (वेस्ट) नंदिनी ककाटी, डौग स्क्वायड की टीम और फोरैंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी.

होटल के कमरा नंबर 922 में एक व्यक्ति की लाश पड़ी थी. उस की नाक और मुंह से खून निकल रहा था तथा शरीर पर भी चोटों के निशान थे. होटल में जमा की गई आईडी के आधार पर उस की पहचान पुणे निवासी संदीप सुरेश कांबले के रूप में हुई.

पुलिस ने काररवाई पूरी करने के बाद मृतक की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

पुलिस टीम गठित होने के बाद टीम को पता चला कि 5 फरवरी, 2024 को होटल रेडिसन ब्लू के रिसैप्शन में दोपहर को किसी अनजान नंबर से काल आई थी कि आप के रेडिसन ब्लू के कमरा नंबर 922 में जो व्यक्ति ठहरा हुआ है, उस की तबीयत अचानक खराब हो गई है, इसलिए आप लोग तुरंत उसे प्राथमिक चिकित्सा देने का इंतजाम करें.

जांच करने पर जब होटल के कर्मचारी कमरा नंबर 922 में पहुंचे तो वहां पर संदीप सुरेश कांबले मृत पड़े थे, जिस की सूचना तुरंत होटल मैनेजर ने पुलिस को दे दी थी. अब तक पुलिस की टीम सारे सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी थी. एक सीसीटीवी में होटल रेडिसन ब्लू के कर्मचारियों ने मृतक महिला मित्र को पहचान लिया, जो अकसर मृतक के साथ होटल में ठहरने को आती रहा करती थी.

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सीसीटीवी फुटेज 

उस की पहचान अंजलि शा के रूप में हुई. सीसीटीवी फुटेज में वह महिला एक पुरुष के साथ दिखाई दे रही थी, जो होटल कर्मचारियों के लिए एकदम अंजान चेहरा था. होटल के रजिस्टर को बारीकी से चैक किया गया तो यह जानकारी निकल कर सामने आई कि

सीसीटीवी फुटेज में अंजलि शा होटल के कमरा नंबर 1024 में भी दाखिल होते देखी गई थी. उस के बाद सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध महिला ने कमरा नंबर 922 का पिछला दरवाजा खोला था, जिस में एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति कमरा नंबर 922 में दाखिल हुआ था. उस के बाद वे दोनों एक साथ होटल रेडिसन ब्लू के बाहर के दरवाजे में बदहवासी की स्थिति में देखे गए थे.

पुलिस टीम ने जब कमरा नंबर 1024 के ग्राहक का बायोडाटा और फोन नंबर खंगाला गया तो  वह 27 वर्षीय विकास शा पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के गोलाबारी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत 12/6 ऋषिकेश घोष लेन सैकिया का निकला. एक और बात निकल कर सामने आई कि रेडिसन ब्लू होटल के रिसैप्शन पर फोन विकास शा ने ही किया था.

अब पुलिस ने अंजलि शा और विकास शा का फोन नंबर सर्विलांस पर लगवा दिया था. अब तक मृतक के छोटे भाई विशाल कांबले भी गुवाहाटी पहुंच चुके थे. मृतक की पहचान संदीप सुरेश कांबले, निवासी जिला पुणे के अंतर्गत 11, पर्णकुटी पायथा, यरवदा के रूप में हो चुकी थी.

हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव – भाग 1

रेडिसन ब्लू होटल के कमरा नंबर 922 में हीरा व्यापारी संदीप सुरेश कांबले का शव फर्श पर पड़ा हुआ था. उस की लाश खून से लथपथ थी. चारों तरफ खून ही खून बिखरा पड़ा था.

मृतक की स्थिति देखने से साफसाफ पता चल रहा था कि उस ने आखिरी क्षणों तक काफी संघर्ष किया था, लेकिन हत्यारे शायद एक से अधिक थे, इसलिए उसे अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

पुलिस कमिश्नर गुवाहाटी दिगंता बराह ने डीसीपी (वेस्ट) पद्मनाभ बरुआ और एडीसीपी (वेस्ट) नंदिना ककाटी के सुपरविजन में तुरंत पुलिस टीम का गठन कर दिया. इंसपेक्टर संजीत कुमार रे को केस का जांच अधिकारी बनाया गया.

44 वर्षीय संदीप सुरेश कांबले और 25 वर्षीय अंजलि की मुलाकात 10 फरवरी, 2023 को कोलकाता में हुई थी. संदीप सुरेश कांबले पुणे का निवासी था और उस का डायमंड व कार का व्यवसाय था. वह अकसर बड़ेबड़े शहरों में अपने व्यवसाय के सिलसिले में आताजाता रहता था, जबकि अंजलि शा पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के अंतर्गत दक्षिण बक्सर संतरागाछी पुलिस स्टेशन की मूल निवासी थी, जो अभी भोपाल में रहती थी.

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      मृतक संदीप सुरेश कांबले

संदीप और अंजलि की मुलाकात नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनैशनल एयरपोर्ट, कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में हुई थी, जहां पर अंजलि स्टोर मैनेजर के पद पर कार्य कर रही थी.

असल में संदीप अपने व्यापार के सिलसिले में कोलकाता आया हुआ था. उस ने खाने के और्डर में चिकन सूप मांगा, लेकिन वेटर ने भूलवश उसे वेजेटेबल सूप दे दिया और सूप भी टेबल पर रखते समय छलक कर संदीप के कीमती कपड़ों पर आ गिरा था. जिस के कारण संदीप ने गुस्से में पूरा रेस्टोरेंट ही सिर पर उठा लिया था.

वेटर जल्दी से भाग कर अंजलि के पास आया और उस ने कहा, ”अंजलि मैम, यह ग्राहक तो थोड़ी ही गलती पर मुझ पर बुरी तरह से भड़क गया. उस ने मुझे गालियां तक दे डालीं. अब उस ने पुलिस को बुलाने की धमकी भी दे दी है.’’

अंजलि ने देखा कि वेटर गिरीश डर से बुरी तरह कांप रहा था. अंजलि ने उसे समझाबुझा कर किचन में भेज दिया और खुद संदीप के पास चली गई. उस ने संदीप से बड़े ही शिष्ट अंदाज में वेटर की भूल के लिए क्षमा मांगी. खुद अपने रुमाल को गीला कर उस से संदीप के कपड़ों को साफ किया और संदीप को एक अलग कमरे में ले जा कर उसे खुद ही सूप सर्व किया.

संदीप एक ही पल में अंजलि की बातों, उस के व्यवहार और उस के खूबसूरत चेहरे का दीवाना सा हो गया था. उस ने फिर वहां पर लंच और डिनर भी किया और दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. अब जब कभी संदीप का कोलकाता में आना होता था तो वह अंजलि के रेस्टोरेंट में ही खाना खाया करता था. इस बीच वह एकदूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके थे.

एक दिन ऐसे ही संदीप ने अंजलि से पूछ लिया, ”अंजलि, आप को जीवन में अकेलापन नहीं खलता?’’

”देखिए संदीपजी, अकेलापन तो जरूर खलता है, मगर हमेशा एक उम्मीद भी बनी रहती है कि मैं अकेली नहीं हूं. किसी को ऊपर वाले ने मेरे लिए जरूर बना रखा है. वैसे आप को तो अकेलापन नहीं खलता होगा. आप की तो पत्नी है और 2 प्यारे प्यारे बच्चे भी हैं.’’ अंजलि ने बेहद गंभीरता से कहा.

”अंजलिजी, कभीकभी जीवन में सब कुछ होते हुए भी अकेलापन खलता रहता है. मानता हूं कि मेरी पत्नी है, बच्चे भी हैं, मगर जीवन में मुझे अभी भी अकेलापन लगता है. मैं जैसी पत्नी चाहता था, वैसी पत्नी शायद मुझे मिल न सकी. इसलिए भटकता रहता हूं.’’ संदीप ने उदासी भरे स्वर में कहा.

”अरे सर, आप तो इतने पैसे वाले हैं, करोड़पति आदमी हैं. आप तो जिस पर भी नजर मारें, वह आप की हो जाएगी.’’ अंजलि ने मुसकराते हुए कहा.

”अरे, अपने ऐसे नसीब कहां? हां, मगर आप की बातों से लगता है जैसे आप अब अपने जीवनसाथी की तलाश में हैं.’’ संदीप ने कहा.

”देखिए जनाब, मैं ने ऐसा तो नहीं कहा कि शादी करने के बाद अकेलापन बिलकुल भी दूर हो जाता है या बिलकुल खत्म सा हो जाता है. इसलिए मैं शादी झंझट से दूर ही रहना चाहती हूं. वैसे शादी करने के बाद इंसान अपने जीवन में कितना सुखी रह सकता है, यह बात तो मुझ से बेहतर आप जानते हैं. वैसे सच कह रही हूं मैं न? हां, मुझे एक सच्चे दोस्त की तलाश अवश्य है, मगर यह तलाश कब और कहां खत्म होगी, इस बात का पता मुझे बिलकुल भी नहीं है. हां, तलाश जारी है.’’ अंजलि ने अपनी आंखें आकाश की तरफ घुमाते हुए कहा.

अंजलि की बातें वाकई इतनी सही और सटीक थीं कि उन बातों ने संदीप के दिल को भीतर तक हिला कर रख डाला था. उसे अंजलि की बातों में एकदम सच्चाई नजर आ रही थी. शादी होने और बच्चों के बावजूद भी तो वह खुद हमेशा कितना अकेलापन महसूस करता था. वह आज भी सचमुच कितना अकेला था.

”चलो, मैं मानता हूं कि मैं शादी करने के बाद भी आज भी अपने आप को अकेला महसूस करता हूं. मगर क्या आप ने अपने अकेलेपन को दूर करने के बारे में कभी सोचा भी है?’’ संदीप ने पूछा.

”संदीपजी, अपनी तो तलाश जारी है. मैं ने अभीअभी आप से यह बात कही तो है न!’’ अंजलि ने कहा.

”आप एकदम सही कह रही हैं कि आप की तलाश तो मैं आप से कुछ कहना चाहता हूं, यदि आप मेरी बात का बुरा न मानें तो..?’’ संदीप ने हिचकते हुए कहा.

”जी, आप तो मेरे अपने से हैं, आप की बात का भला मैं क्यों बुरा मानने लगी.’’ अंजलि को संदीप की बातों में कोई विशेष ऐसी बात लग रही थी, मानो जिसे वह दिल से सुनना चाहती थी. उस ने एक बार संदीप की आंखों में आंखें डाल कर देखा, फिर अगले ही पल शरमाते हुए अपनी नजरें झुका दी थीं.

संदीप ने अंजलि पर क्यों डाले डोरे

संदीप तो जैसे अपने दिल की बात कहने के लिए कब से उतावला सा हो रहा था. उस ने अपनी ही रौ मैं बहते हुए आखिरकार दिल की बातें अंजलि से कह ही डाली थी, ”अंजलिजी, सचमुच मैं अपने दिल से कह रहा हूं आप को यदि बुरा भी लगेगा तो मुझ पर इस का कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा. सच कहूं तो आप से मिलने से पहले मैं वाकई अपने आप को हमेशा अधूरा सा महसूस करता था, मगर जिस दिन से मुझे आप मिलीं, आप का व्यवहार, स्वभाव, बातें, आप का अपनापन सब मुझे ऐसा लगा जैसे आप मेरी अपनी हैं.

”आप आज से नहीं, बल्कि जैसे जन्म जन्मांतर से मेरी अपनी हैं. आप से मिलने से पहले मुझे लगता था जैसे मैं ने अपने जीवन में कुछ पाया ही नहीं है. मगर, अब मुझे ऐसा लगने लगा है जैसे आप ही मेरा सब कुछ हैं. मैं हमेशा यही सोचता हूं कि मैं आप के सामने बैठ कर आप को निहारता रहूं, आप से बातें करता रहूं, मेरा पूरा जीवन बस आप को देखते हुए गुजर जाए.’’

”देखिए संदीपजी, आप जो कुछ कह रहे हैं, मैं मानती हूं कि आप शायद सच कह रहे हैं. मगर ये बात भी सच है कि आप एक शादीशुदा इंसान हैं, आप का अपना एक संयुक्त परिवार है, आप का एक छोटा भाई भी है. आप के ऊपर अपने परिवार की पूरी पूरी जिम्मेदारी भी है. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप मुझे भूल कर कुछ नई शुरुआत करें.’’ अंजलि ने कहा.

”देखो अंजलि, यह बात सही है कि मैं एक विवाहित पुरुष हूं, मेरा अपना एक परिवार भी है. मगर ये बात भी, बिलकुल सच है कि जिस दिन से मैं ने तुम्हें देखा है, मैं अपना दिल हार चुका हूं. मैं आप को अपने दिल की गहराइयों से बेइंतहा प्यार करने लगा हूं.’’ ऐसा कहते हुए संदीप ने अंजलि के दोनों हाथों को थाम लिया था.

”देखो संदीप, कहीं तुम बीच में मुझे कभी धोखा तो नहीं दोगे न? मुझे मंझधार में छोड़ कर तो नहीं चले जाओगे?’’ अंजलि ने भी अपने दिल की बात कह ही डाली.

”ऐसा भला तुम सोच भी कैसे सकती हो अंजलि,’’ कहते हुए संदीप ने अंजलि को अपनी बाहों में भर लिया था.

कहावत भी है कि जहां चाह होती है, वहां राह अपने आप निकल आती है. पहले तो अंजलि यह सोच कर कि संदीप एक शादीशुदा है, उस से बचती रही. संदीप की कामुकता भरी छेड़छाड़ को वह नजरअंदाज करती रही, परंतु एक दिन तो संदीप ने मर्यादा और नैतिकता की सारी हदें ही तोड़ डाली थीं.

प्रेमिका पर विश्वास का उल्टा नतीजा

पहली ही मुलाकात में रश्मि और मनोज एकदूसरे के प्रति आकर्षित हुए तो चंद दिनों में ही उन के  दिलों में चाहत पैदा हो गई थी. यही वजह थी कि दोस्ती के बीच प्यार के खुशनुमा रंग कब भर गए, उन्हें पता नहीं चला था. मनोज और रश्मि एक ही फैक्ट्री में एकसाथ काम करते थे. दिनभर साथ रहने से भी उन का मन नहीं भरता था, इसलिए फैक्ट्री के बाहर भी दोनों मिलने लगे थे. वैसे तो दोनों एक ही मोहल्ले में रहते थे. लेकिन उन के घरों के बीच काफी दूरी थी, इसलिए रश्मि से मिलने के लिए मनोज को बहाने से उस के घर आना पड़ता था.

मनोज जब भी रश्मि के घर आता, घंटों बैठा बातचीत करता रहता. इसी आनेजाने में मनोज की दोस्ती रश्मि के पति सोनू सोनकर से भी हो गई थी. रश्मि की नजदीकी पाने के लिए मनोज अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा सोनू पर लुटाने लगा था. इसी से सोनू मनोज को अपना अच्छा दोस्त समझने लगा था.

सोनू से दोस्ती होने के बाद मनोज रोज ही रश्मि के घर जाने लगा. देर रात तक दोनों साथ बैठ कर खातेपीते. उस के बाद सोनू मनोज को अपने घर पर ही रुक जाने के लिए कह देता. सोनू मनोज को अपना अच्छा दोस्त मानता था, इसलिए उसे काफी महत्त्व देता था.

मनोज सोनू के साथ उठताबैठता है और खातापीता है, जब इस बात की जानकारी उस के बड़े भाई विनोद को हुई तो उस ने मनोज को रोका. लेकिन मनोज नहीं माना. तब उस ने मनोज को घर से भगा दिया. जब इस बात की जानकारी सोनू और रश्मि को हुई तो सहानुभूति दिखाते हुए सोनू ने उसे अपना छोटा भाई मान कर अपने साथ रख लिया. इस की एक वजह यह भी थी कि मनोज सोनू के लिए दुधारू गाय की तरह था.

मनोज के साथ रहने से रश्मि बहुत खुश हुई थी. फिर तो कुछ ही दिनों में मनोज और रश्मि के बीच शारीरिक संबंध बन गए. रश्मि से शारीरिक सुख पा कर मनोज उस का दीवाना हो गया. हर पल वह रश्मि के आसपास छाया की भांति मंडराता रहता. यही सब देख कर पड़ोसियों को उन पर शक हुआ तो लोग आपस में चर्चा करने लगे.

लोगों की चिंता किए बगैर मनोज और रश्मि एकदूसरे में इस तरह डूबे रहे कि उन्हें जैसे किसी बात की परवाह ही नहीं थी. इस प्रेम कहानी का अंत क्या हुआ, यह जानने से पहले आइए थोड़ा इस कहानी के पात्रों के बारे में जान लेते हैं.

रश्मि कानपुर के जूही के रतूपुरवा की रहने वाली थी. 18 साल की होते ही वह हवा में उड़ने लगी. इस उम्र की लड़कियों की तरह रश्मि भी भावी जीवन के युवराज के बारे में तरहतरह की कल्पनाएं संजोने लगी. उस का मन करता कि एक सुंदर और जोशीला युवराज उसे पलकों पर बिठा कर अपने घर ले जाए और खूब प्यार करे. इन्हीं कल्पनाओं के बीच कानपुर के ही बादशाही नाका के रहने वाले बेदी सोनकर पर उस की नजर पड़ी.

गठीले बदन का खूबसूरत बेदी उस के पड़ोसी के यहां आताजाता था. इसी आनेजाने में रश्मि की आंख लड़ी तो पहली ही नजर में वह उसे अपना दिल दे बैठी. वही क्यों, बेदी भी उस पर कुछ इस तरह फिदा हुआ कि वह भी उस की एक झलक पाने के लिए उस के घर के चक्कर लगाने लगा. चाहत दोनों ओर थी, इसलिए दोनों एकदूसरे की ओर तेजी से बढ़ने लगे.

उस समय रश्मि अल्हड़ उम्र के दौर से गुजर रही थी. इसलिए दिमाग के बजाए दिल की भावनाओं के प्रबल प्रवाह में तेजी से बहती गई. यह भी सच है कि प्यार छिपता नहीं. मोहल्ले में रश्मि और बेदी के प्यार के भी चर्चे होने लगे. जैसे ही इस बात की खबर रश्मि के घर वालों को लगी, उन्होंने उस का घर से निकलना बंद कर दिया. लेकिन वह बेदी के प्यार में पागल हो चुकी थी, इसलिए वह बगावत पर उतर आई और घर वालों के मना करने के बावजूद वह बेदी से मिलतीजुलती रही.

मातापिता ने बहुत समझाया कि बेदी शहर का कुख्यात बदमाश है, इसलिए उस से मिलनाजुलना ठीक नहीं है. उस की वजह से उस की जिंदगी बरबाद हो सकती है, लेकिन बेदी के प्यार में अंधी रश्मि बेदी से लगातार मिलतीजुलती रही.

बेदी दूसरों के लिए भले ही कितना भी बड़ा बदमाश रहा हो, रश्मि के लिए वह बहुत ही सीधा, सरल और भावुक युवक था. वह देखने में काफी हैंडसम था, इसलिए रश्मि उस पर जान छिड़कती थी. रश्मि को बेकाबू होते देख उस के मातापिता उस के विवाह के लिए लड़का ढूंढ़ने लगे.

जब इस बात की जानकारी रश्मि और बेदी को हुई तो साथ रहने के लिए उन्होंने एक योजना बना डाली. फिर उसी योजना के तहत एक दिन रश्मि चुपके से मातापिता का घर छोड़ कर बेदी के घर रहने आ गई और बिना विवाह के ही उस के साथ पत्नी की तरह रहने लगी.

बेदी से रश्मि को 2 बच्चे पैदा हुए. दोनों की जिंदगी आराम से कट रही थी. लेकिन सब्जी मंडी में जबरन वसूली के विवाद में 2003 में बेदी की हत्या हो गई. बेदी की मौत के बाद रश्मि की जिंदगी में अंधेरा छा गया. पति की मौत के बाद भी रश्मि अपने दोनों बच्चों के साथ बेदी के मातापिता के साथ रहती रही.

बेदी की मौत के करीब 2 सालों के बाद बेदी का चाचा श्यामप्रकाश उर्फ सोनू उस के घर आया तो वह रश्मि को देख कर उस पर लट्टू हो गया. इस के बाद किसी न किसी बहाने वह उस से मिलने उस के घर आने लगा. सोनू रश्मि के उम्र का ही था और देखने में भी स्वस्थ और सुंदर था, इसलिए रश्मि को भी वह भा गया.

यही वजह थी कि जब सोनू ने उस से अपने प्यार का इजहार किया तो उस के प्यार को स्वीकार कर के रश्मि बेदी के दोनों बचों को छोड़ कर सोनू के साथ आर्य समाज मंदिर में सन् 2008 में शादी कर ली. शादी के बाद कानपुर में ही वह सोनू के साथ रहने लगी. साल भर बाद ही वह सोनू के बेटे की मां बन गई. सोनू के साथ रहते हुए ही रश्मि की मुलाकात साथ काम करने वाले मनोज से हुई तो वह उसे दिल दे बैठी.

मनोज को जब पता चला कि रश्मि उसी की जाति की है तो वह उसे और अधिक प्यार करने लगा. यही नहीं, वह उसे पत्नी का दर्जा देने को भी तैयार हो गया. इस के बाद उस ने यह भी कहा कि जब उस के मातापिता और भाई को पता चलेगा कि उस ने अपने ही जाति के लड़के से शादी कर ली है तो वे भी उसे अपना लेंगे.

मनोज के इस प्रस्ताव पर रश्मि गंभीर हो गई, क्योंकि वह सोनू के साथ खुश नहीं थी. आखिर काफी सोचविचार कर रश्मि एक बार फिर मनोज के साथ भाग कर जिंदगी बसर करने का सपना देखने लगी. इस के बाद वह मनोज का कुछ ज्यादा ही खयाल रखने लगी. जब इस ओर सोनू का ध्यान गया तो उसे रश्मि और मनोज पर शक होने लगा.

सोनू भी अपराधी किस्म का आदमी था. सच्चाई का पता लगाने के लिए उस ने एक योजना बनाई. फिर उसी योजना के तहत एक दिन उस ने रश्मि से कहा कि वह अपने घर सीतापुर जा रहा है. यह कह कर वह 2 बजे दोपहर को घर से निकला, लेकिन वह सीतापुर गया नहीं. शहर में ही इधरउधर घूमता रहा. रात 11 बजे वह वापस आया और अपने कमरे के दरवाजे की झिर्री पर कान लगा कर अंदर की आहट लेने लगा. अंदर से आने वाली आवाजों से उस ने समझ लिया कि उस की योजना सफल हो गई है.

फिर तो वह जोर से चीखा, ‘‘जल्दी दरवाजा खोलो, अंदर क्या हो रहा है, मैं जान गया हूं.’’

सोनू की आवाज सुन कर कमरे के अंदर तेज हलचल हुई. उस के बाद एकदम से सन्नाटा पसर गया. लेकिन दरवाजा नहीं खुला.

सोनू एक बार फिर दरवाजा खुलवाने के लिए चिल्लाया, ‘‘दरवाजा खोल रही है या तोड़ डालूं?’’

रश्मि के दरवाजा खोलते ही सोनू अंदर आ गया. बल्ब जलाने पर दोनों के झुके सिर देख कर वह सारा माजरा समझ गया. उस ने गालियां देते हुए मनोज की लातघूसों से पिटाई शुरू कर दी.

इस के बाद उसे कमरे से भगा कर रश्मि की जम कर पिटाई की. मारपीट कर उस ने रश्मि से मनोज और उस के अवैध संबंधों की सारी सच्चाई उगलवा ली. जब रश्मि ने उसे बताया कि मनोज उसे भगा कर ले जाने वाला था तो सोनू को उस पर इतना गुस्सा आया कि उस ने मनोज की हत्या करने का निश्चय कर लिया.

सोनू ने रश्मि से कहा कि कल रात वह मनोज को यह कह कर बुलाए कि वह शराब के नशे में गुमराह हो गया था. सुबह समझाने पर उसे अपनी गलती का एहसास हो गया है, इसलिए वह माफी मांग कर पहले की तरह अपने साथ रखना चाहता है. क्योंकि मनोज ने दोस्ती के नाम पर उसे जो धोखा दिया था, उस की हत्या कर के वह उसे उस की सजा देना चाहता था. रश्मि को उस ने धमकाते हुए कहा कि अगर उस ने ऐसा नहीं किया तो वह उस के प्रेमी मनोज के साथ उस की भी हत्या कर के हमेशा के लिए कानपुर छोड़ कर चला जाएगा.

रश्मि असमंजस में फंस गई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे.

चूंकि रश्मि मनोज को दिल से चाहती थी, इसलिए अगले दिन फैक्ट्री में मनोज उसे मिला तो उस ने उसे सोनू की साजिश के बारे में बता कर कहीं बाहर चले जाने के लिए कह दिया. उस ने मनोज से यह भी कहा था कि सोनू सीतापुर में एक पीएसी कंपनी कमांडर की हत्या कर के यहां छिप कर रह रहा है, इसलिए ऐसे आदमी पर भरोसा नहीं किया जा सकता. वह उसे ढूंढ़ कर निश्चित उस की हत्या कर देगा.

रश्मि की बात सुन कर मनोज डर गया और उसी समय वह कानपुर छोड़ कर जिला फतेहपुर स्थित अपने गांव चला गया. शाम को रश्मि अकेली घर आई तो सोनू ने पूछा, ‘‘मनोज कहां है?’’

‘‘वह उसी रात अपने गांव भाग गया था.’’ रश्मि ने कहा.

रश्मि की बात पर सोनू को विश्वास नहीं हुआ. उस ने रश्मि को गालियां देते हुए कहा, ‘‘वह खुद नहीं भागा, तूने उसे भगाया है. तुझ से रहा नहीं गया होगा. तू ने मेरी योजना के बारे में बता कर उसे भगा दिया होगा.’’

सोनू को रश्मि की इस धोखेबाजी से उस से भी नफरत हो गई. अब वह रोज शराब पी कर उस की पिटाई करने लगा. रश्मि को पिटाई करते हुए वह कहता भी था, ‘‘जब तक तू मनोज को नहीं बुलाती और मैं उस की हत्या नहीं कर देता, तब तक तुझे इसी तरह नियमित मारता पीटता रहूंगा.’’

रोजरोज की मारपीट से तंग आ कर आखिर एक दिन रश्मि ने अपने सहकर्मी के फोन से मनोज को फोन कर के कहा कि सोनू उस पर बहुत अत्याचार कर रहा है. इसलिए अब वह उस के साथ रहना नहीं चाहती और भाग कर उस के पास आ रही है. अब वह उसी के साथ उस की बन कर रहना चाहती है.

मनोज ने रश्मि को समझाते हुए कहा, ‘‘मैं यहां गांव में रह रहा हूं. यहां किसी तरह 2 जून की रोटी मिल जाती है, बाकी यहां कमाई का कोई जरिया नहीं है. इसलिए तुम थोड़ा इंतजार करो. मैं कोई व्यवस्था कर के तुम्हें जल्दी ही यहां बुला लूंगा. उस के बाद तुम्हें अपनी पत्नी बना कर साथ रखूंगा.’’

मनोज की इन बातों से रश्मि का कलेजा बैठ गया. वह जिंदगी के ऐसे मोड़ पर खड़ी थी, जहां उस के लिए चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था. काफी सोचविचार कर उस ने सोनू के साथ ही जिंदगी गुजारने का इरादा बना लिया. फिर उस ने सोनू से माफी मांगी और भविष्य में किसी तरह की कोई गलती न करने की कसम खाई. लेकिन सोनू मनोज की हत्या से कम पर उसे माफ करने को तैयार नहीं था.

जिंदगी और भविष्य के लिए रश्मि को सोनू की जिद के आगे झुकना पड़ा. वह मनोज की हत्या की साजिश में पति का साथ देने को तैयार हो गई. इस के बाद योजना के अनुसार सोनू ने नटवनटोला, किदवईनगर का अपना वह किराए का कमरा खाली कर के जूही गढ़ा में सुरजा के मकान में किराए का कमरा ले कर रहने लगा. रश्मि मनोज को फोन कर के बुलाने लगी. लेकिन मनोज कानपुर आने को तैयार नहीं था.

रश्मि के बारबार आग्रह पर मनोज को जब रश्मि से मिलने वाले सुख की याद आई तो 29 जनवरी को रश्मि से मिलने के लिए वह कानपुर आ गया. सोनू और रश्मि ने पहले की ही तरह मनोज को हाथोंहाथ लिया. दोनों उस से इस तरह हंसहंस कर बातें कर रहे कि उसे लगा सोनू ने सचमुच उसे माफ कर दिया है.

मनोज रश्मि और सोनू के जाल में पूरी तरह फंस गया. रात 8 बजे के आसपास सोनू उसे शराब के ठेके पर ले गया, जहां दोनों ने थोड़ीथोड़ी शराब पी. इस के बाद 2 बोतल ले कर वह घर आ गया. उस ने रश्मि से कहा, ‘‘आज बढि़या खाना बनाओ, बहुत दिनों बाद मेरा दोस्त आया है. आज देर रात तक हम दोनों की महफिल जमेगी.’’

रश्मि को खाना बनातेबनाते रात के 11 बज गए. इस के बाद उस ने सोनू और मनोज के लिए खाना परोसा. सोनू ने होशियारी से मनोज को बड़ेबड़े पैग बना कर ज्यादा शराब पिला दी थी. ज्यादा नशा होने की वजह से मनोज खाना खा कर अपने लिए लगे बिस्तर पर लेटते ही बेसुध हो कर सो गया.

सोनू को उस के सोने का इंतजार था. रात साढ़े 12 बजे उस ने रश्मि को अपने पास बुला कर मनोज के सिर के ऊपर से रजाई हटाने को कहा. रश्मि ने जैसे ही मनोज के सिर से रजाई हटाई, सोनू गड़ासे से उस के सिर और गरदन पर लगातार वार करने लगा.

मनोज ने अपने ऊपर हुए इस प्राणघातक हमले से बचने की कोशिश तो की, लेकिन रश्मि उस के सिर के बाल पकड़ कर नीचे दबाए थी, इसलिए वह उठ नहीं सका. लगातार वार होने से मनोज की गरदन कट गई तो वह मर गया. उस के मरते ही सोनू ने उस के हाथपैर समेट कर रस्सी से बांध दिए, ताकि वह अकड़ न जाए, क्योंकि अकड़े हुए शव को घर से बाहर ले जाने में काफी परेशानी होती.

मनोज की हत्या कर उस की लाश को ठिकाने लगाने के बारे में पूरी रात सोनू और रश्मि सोचते विचारते रहे. सोनू ने सोचा कि अगर लाश को रजाई में लपेट कर दिन में रिक्शे से बाहर ले जाया जाए तो कोई शक नहीं करेगा.

यही सोच कर उस ने मनोज की लाश को रजाई में लपेटा और रस्सी से बांध कर रजाई भराने की बात कह कर एक रिक्शा बुलाया.  रजाई में बंधी मनोज की लाश उस ने रिक्शे के पायदान पर रखा और रश्मि तथा 5 साल के बेटे के साथ रिक्शे पर बैठ कर वह स्वदेशी कौटन मिल की ओर चल पड़ा.

स्वदेशी कौटन मिल के पास सड़क के किनारे की एक चाय की दुकान पर कुछ लोगों ने रिक्शे पर रखी उस रजाई को देखा तो उन्हें शक हुआ. उन्होंने रिक्शा रोक कर सोनू से उस के बारे में पूछा तो वह सकपका गया.

एकदम से वह जवाब नहीं दे सका. काफी देर बाद उस ने कहा कि इसे वह भरवाने ले जा रहा है. उन लोगों में से किसी ने कहा, ‘‘इस तरह रस्सी से बांध कर रुई तो नहीं ले जाई जाती, इस में जरूर कुछ और है.’’

यह कह कर उस आदमी ने रजाई के अंदर हाथ डाला तो एकदम से चिल्लाया, ‘‘अरे यह रुई नहीं, किसी की लाश है.’’

सभी सोनू को पकड़ कर लातघूसों से पिटाई करने लगे. उसी बीच मौका पा कर रश्मि अपने बेटे को ले कर भाग गई. किसी ने इस बात की सूचना थाना जूही पुलिस को दी तो पुलिस ने मौके पर आ कर लाश और सोनू को कब्जे में ले लिया. थाना जूही पुलिस ने मौके की काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए हैलेट अस्पताल भिजवा दी. उस के बाद थाने ला कर सोनू से पूछताछ की गई. सोनू ने मनोज की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करते हुए पूरी कहानी पुलिस को सुना दी, जिसे आप पहले ही पढ़ चुके हैं.

पूछताछ के बाद सबइंस्पेक्टर आमोद कुमार ने सोनू की निशानदेही पर उस के कमरे से शराब की 2 खाली बोतलें, खून से सनी साड़ी, वह गड़ासा, जिस से मनोज की हत्या की गई थी और मनोज का मोबाइल फोन बरामद कर लिया. इस के बाद उन्होंने उस के खिलाफ मनोज की हत्या का मुकदमा दर्ज कर 30 जनवरी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

अगले दिन पुलिस ने रश्मि को भी उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह कमरे पर अपने और बच्चे के कपड़े लेने आई थी. पूछताछ कर के पुलिस ने उसे भी अदालत में पेश किया, जहां से उसे भी जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित