कविता ने लिखी खूनी कविता – भाग 2

शादी के पहले के प्रेमी से जोड़े संबंध

शादी के बाद दीपचंद जैसा पति और हाकम जैसा नेकदिल ससुर पा कर कविता भी काफी खुश थी, उस ने ससुराल को ही अपना घर मान लिया था. कविता के मम्मीपापा राजस्थान के जोधपुर में एक सीमेंट फैक्टी में काम करते थे.

दीपचंद का मन खेतीबाड़ी में नहीं लगता था. इस वजह से वह उन दिनों काम की तलाश कर रहा था. जब कविता के पिता ने उसे जोधपुर में काम दिलाने की बात की तो वह शादी के कुछ महीनों बाद ही राजस्थान पहुंच गया. दीपचंद तब राजस्थान की एक सीमेंट फैक्ट्री में नौकरी पर चला गया.

घर में अकेली कविता को तन्हाई ने डस लिया. उस के मन के एक कोने में अब भी अपने बचपन के प्यार बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू की यादें थीं. जब अकेलापन भारी पड़ने लगा तो उस ने बृजेश से फिर तार जोड़ लिए. कविता का मायका सुनवानी पन्ना में था, वह पहले शराब कंपनी में काम करता था. तब कविता के पापा के घर में ही किराए पर रहता था.

कविता ने बीएससी तक की पढ़ाई की थी और वह शुरू से ही सपनों की दुनिया में सैर करने वाली लड़की थी. बृजेश तब शराब कंपनी में काम कर के अच्छे पैसे कमा रहा था. उसे कविता पहली ही नजर में पसंद आ गई थी. वह आतेजाते कविता से बात करने के बहाने ढूंढता. उस समय कविता की उम्र महज 19 साल थी.

एक दिन बृजेश शाम को जल्दी अपने रूम पर आ गया. उस समय कविता की मां मंदिर गई थीं और पिता किसी काम से बाहर गए हुए थे. बृजेश ने मौका देखते ही अपने प्यार का इजहार करते हुए कहा, “कविता, तुम बहुत खूबसूरत हो. आई लव यू कविता.’’

कविता भी मन ही मन बृजेश को चाहने लगी थी, मगर डर के मारे यह बात दिल में दबाए बैठी थी. जब बृजेश ने प्यार का इजहार किया तो उस ने भी कह दिया, “आई लव यू टू बृजेश.’’

कविता की स्वीकृति मिलते ही बृजेश ने उस का हाथ पकड़ा और गालों पर चुंबन लेते हुए कहा, “कविता, मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता.’’

कविता का चेहरा मारे शर्म के लाल हो गया, उस ने जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया और अपने कमरे की तरफ भाग गई. धीरेधीरे दोनों में गहरी दोस्ती और फिर प्यार परवान चढ़ने लगा. बृजेश अकसर कविता के लिए महंगे गिफ्ट भी ला कर देने लगा.

कविता पटेल और बृजेश बर्मन अलगअलग जाति के थे. दोनों शादी के लिए राजी थे, मगर सामाजिक रीतिरिवाजों में इस की इजाजत नहीं थी. बृजेश उसे घर से भगा कर शादी करना चाहता था, लेकिन कविता घर से भाग कर शादी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. आखिर में मई, 2021 में कविता की शादी उस के घर वालों ने दमोह जिले के खैरा गांव निवासी दीपचंद से कर दी.

किराएदार से हुआ था प्यार

23 साल की कविता की शादी दीपचंद पटेल से हुई थी. उस समय कविता हायर सेकेंडरी तक पढ़ी थी. जब उस ने अपने ससुर से आगे पढ़ने की इच्छा जताई तो उन्होंने उस का एडमिशन पन्ना के अमानगंज कालेज में करवा दिया. शादी से पहले कविता का उस के मकान में रहने वाले किराएदार बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू से अफेयर जरूर था, मगर दोनों की जाति अलग होने की वजह से उन की शादी नहीं हो पाई.

शादी के बाद सब ठीकठाक चल रहा था. कविता के ससुर उसे बेटी की तरह प्रेम करते थे. शादी के बाद कविता अपने प्रेमी बृजेश को भी भुला चुकी थी. कविता के पति की नौकरी राजस्थान की सीमेंट फैक्ट्री में थी. शादी के कुछ दिन बाद दीपचंद वापस नौकरी पर लौट गया तो कविता को खाली घर काटने लगा.

एक दिन वह मोबाइल के कौंटैक्ट नंबर देख रही थी, तभी उसे बृजेश का नंबर दिखा. उसे पुराने दिन याद आने लगे. वह बृजेश से बात करने की कोशिश तो करती, लेकिन कुछ सोच कर रुक जाती थी. आखिरकार एक दिन उस ने बृजेश से बात करने की गरज से फोन किया तो बृजेश ने काल रिसीव करते हुए कहा, “हैलो कौन?’’

“बृजेश, पहचाना नहीं मुझे. तुम तो बहुत बदल गए, अब तो मेरी आवाज भी भूल गए.’’ कविता ने शिकायत की.

“जानेमन तुम्हें कैसे भूल सकता हूं. इस अननोन नंबर से काल आई तो पहचान नहीं सका.’’ बृजेश सफाई देते हुए बोला.

“तुम ने तो मेरी शादी के बाद कभी काल भी नहीं की,’’ कविता बोली.

“कविता, मैं तुम्हें दिल से चाहता था, इसलिए मैं तुम्हारा बसा हुआ घर नहीं उजाड़ना चाहता था. मैं ने अपने दिल पर पत्थर रख कर तुम्हारी खुशियों की खातिर समझौता कर लिया था,’’ बृजेश बोला.

“सच में इतना प्यार करते हो तो मुझ से मिलने दमोह आ जाओ, तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही.’’ कविता ने फिर से उस के प्रति चाहत दिखाते हुए कहा.

कई महीने बाद बृजेश और कविता ने अपने दिल की बातें कीं तो उन का पुराना प्यार जाग गया. उस के बाद दोनों की मेल मुलाकात का सिलसिला चल निकला. बृजेश से जब कविता का दोबारा संपर्क हुआ तो उस समय वह टेंट हाउस में काम करने लगा था. कविता से उस की मुलाकात अकसर कालेज जाते समय होती थी. जब बृजेश कविता की ससुराल भी आने लगा तो कविता ने अपने ससुर और पति से उस का परिचय मुंहबोले भाई के तौर पर कराया.

बृजेश ने दीपचंद से भी दोस्ती कर ली थी. दीपचंद खाने पीने का शौकीन था, इसलिए अकसर ही दीपचंद की बैठक बृजेश के साथ होने लगी. दीपचंद और उस के पिता हाकम को यह शक तक नहीं हुआ कि वह यहां कविता के लिए आता है.

दीपचंद को उस की गैरमौजूदगी में जब बृजेश के कुछ अधिक ही घर आने की खबर मिलने लगी तो उसे संदेह हुआ. फिर दीपचंद राजस्थान से नौकरी छोड़ कर लौट आया. वह पन्ना की सीमेंट फैक्ट्री में काम पर लग गया. वह अपने गांव खैरा के घर से ही ड्यूटी आनेजाने लगा. दीपचंद के लौटने के बाद दोनों का मिलना मुश्किल हो गया था.

धीरेधीरे दीपचंद को पत्नी कविता और बृजेश के संबंधों की भनक लग चुकी थी. हालांकि दोनों ने अपने संबंधों को दीपचंद के सामने स्वीकार नहीं किया. कविता हमेशा बृजेश को मुंहबोला भाई ही बताती रही. शादी के 2 साल बाद भी उन के संतान नहीं हुई थी.

मामी का जानलेवा प्यार – भाग 3

पत्नी ने बनाई हत्या की योजना

रामवीर आरती को बहुत ही प्यार करता था, लेकिन उस की शादी हो जाने के बाद वह मजबूर हो गया था. आरती ने फिर से उसे अपनाने के लिए दूसरा रास्ता दिखाया तो वह रामवीर की हत्या करने के लिए तैयार हो गया था.

वहीं आरती की हरकतों से आजिज आ कर रामवीर भी दिल्ली से नौकरी छोड़ कर बरेली अपने घर चला आया था. घर आते ही उस ने नौकरी की तलाश शुरू कर दी थी. ऐसे में मानवेंद्र और आरती के मिलन में रामवीर सब से बड़ी बाधा बन गया था. रामवीर हर वक्त उसी पर नजर जमाए रहता था. इस के बावजूद भी आरती किसी न किसी तरह से मानवेंद्र से मिलती रहती थी.

आरती को पता था कि आजकल रामवीर बरेली में ही नौकरी की तलाश में लगा हुआ है. वह टाइम टाइम पर इधरउधर जाता ही रहता है. 19 सितंबर, 2023 को भी रामवीर नौकरी की तलाश में गया हुआ था. उसी समय आरती मौका पाते ही मानवेंद्र से मिली. उस ने मानवेंद्र को रामवीर की हत्या करने की योजना पूरी तरह से समझा दी थी.

रामवीर की हत्या की रूपरेखा तैयार होते ही मानवेंद्र ने इस मामले को निपटाने के लिए अपने दोस्त सौरभ को भी शामिल कर लिया था. सौरभ उर्फ छोटे रामवीर के बचपन का दोस्त था. वह भी शराब पीने का आदी था.

उसी योजनानुसार 20 सितंबर, 2023 को मानवेंद्र ने किसी अंजान फोन नंबर से रामवीर को फोन किया, “हैलो, मैं मानवेंद्र बोल रहा हूं.’’

“हां बोल, क्या कह रहा है?’’

तभी मानवेंद्र बोला, “मामा, तुम मुझ पर गलत शक करते हो. जैसा तुम सोचते हो, आरती और मेरे बीच में ऐसा कुछ भी नहीं. मैं तो केवल उस से फोन पर कभीकभार बातचीत ही कर लेता हूं. उस का भी एक कारण है. तुम तो पहले ही जानते हो कि आरती के पड़ोस में मेरे मामा रहते हैं. मेरा वहां पर पहले से ही आनाजाना लगा रहता है. इस रिश्ते से आप तो मेरे मामा हो. फिर मैं आप के साथ ऐसा काम कैसे कर सकता हूं.’’

उस के बाद मानवेंद्र ने कहा, “मामा, आज की पार्टी मेरी तरफ से है. मामा, मैं ने तुम्हारे लिए एक नौकरी की तलाश भी कर ली है. जल्दी ही वहां पर तुम्हें नौकरी मिल जाएगी. सब इंतजाम हो गया है. आप तुरंत ही नकसुआ फाटक के पास आ कर मुझ से मिलो.’’

रामवीर नौकरी के लिए काफी समय से परेशान था. जब मानवेंद्र ने उस से नौकरी लगवाने वाली बात कही तो वह खुश हो गया. रामवीर भी पक्का शराबी था. जब बात नौकरी और शराब पीने की आई तो वह मानवेंद्र के साथ पुरानी दुश्मनी को पलभर में भूल गया.

जिस वक्त वह फोन पर मानवेंद्र से बात कर रहा था, रामवीर का भाई अशोक भी उस की बात सुन रहा था. लेकिन वह किस से बात कर रहा था, वह यह नहीं समझ पाया था. घर से निकलते वक्त रामवीर ने केवल यही कहा था कि वह एक नौकरी के लिए जा रहा है. उस के बाद फोन काटते ही रामवीर ने अपनी बाइक उठाई और वह मानवेंद्र के बुलाई जगह नकसुआ फाटक के पास पहुंच गया. रामवीर के घर से निकलते ही आरती खुश हो गई थी. उसे पता था कि आज रामवीर का आखिरी दिन है.

हत्या करने के बाद लाश फेंकी ट्रैक पर

रामवीर के घर से निकलते ही आरती ने मानवेंद्र को फोन कर कहा, “बकरा हलाल होने के लिए घर से निकल गया है. काम ठीक वैसे ही करना जैसा तुम्हें बताया गया है. इस मामले में तनिक भी चूक नहीं होनी चाहिए. वरना मेरे साथसाथ तुम्हें भी जेल की हवा खानी पड़ेगी और जैसे ही वह खत्म हो जाए उस का फोटो मेरे वाट्सऐप पर भेज देना. ताकि मेरे दुखी मन को कुछ शांति मिल सके.’’

उस दिन मानवेंद्र शराब का पक्का इंतजाम कर के लाया था. रामवीर के वहां पर पहुंचते तीनों ने वहीं बैठ कर शराब पी. शराब पीतेपीते जब तीनों को नशा चढ़ने लगा तो मौका पाते ही मानवेंद्र अपनी लाइन पर आ गया. उस ने उसी समय रामवीर को प्यार से समझाते हुए आरती को तलाक देने के लिए कहा.

लेकिन तलाक की बात सामने आते ही रामवीर बिगड़ गया. फिर वह मानवेंद्र और सौरभ को भलाबुरा कहने लगा था. रामवीर के बिगड़ते ही मानवेंद्र ने रामवीर से क्षमा मांगी. उस के बाद उस ने उसे फिर से और शराब पिलाई,जिस के बाद रामवीर नशे में धुत हो गया.

रामवीर के नशे में होते ही सौरभ ने उस के गले में गमछा डाल कर खींच दिया. गला घुटते ही रामवीर ने चिल्लाने की कोशिश की तो मानवेंद्र ने उस का मुंह दबा दिया. कुछ ही देर में सांस रुकते ही रामवीर की मौत हो गई. उस के बाद दोनों ट्रेन के आने का इंतजार करने लगे. तभी मानवेंद्र ने मृत पड़े रामवीर का फोटो खींचा और आरती को वाट्सऐप कर दिया.

उस के तुरंत बाद ही मानवेंद्र ने आरती को काल कर हत्या की बात बता दी. योजना के मुताबिक सौरभ की सहायता से मानवेंद्र ने रामवीर की लाश को रेलवे ट्रैक पर डाल दिया. फिर दोनों ही रेलवे लाइन के पास छिप गए. जैसे ही ट्रेन आई, रामवीर का शरीर 2 भागों में कट गया. रामवीर के रेल से कटते ही दोनों वहां से फरार हो गए थे.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने तीनों आरोपियों आरती, उस के प्रेमी मानवेंद्र व सौरभ को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

पत्रकारों के पूछने पर आरती ने बेबाकी से जबाव देते हुए कहा कि रामवीर की हत्या का उसे जरा सा भी अफसोस नहीं है. उस का कहना था कि रामवीर के साथ शादी कर के वह खुश नहीं थी. उस ने शादी से ही उसे अपना पति नहीं माना था. वह पहले से ही मानवेंद्र को अपना पति मानती आ रही थी.

उस ने कहा कि वह रामवीर की हत्या के शोक में न तो अपने बिछिया ही उतारेगी और न ही मौत के बाद की जाने वाली कोई भी रस्म निभाएगी. पुलिस पूछताछ के दौरान आरती ने कहा कि उसे तो हर हाल में रामवीर की हत्या करानी ही थी. वह तो उस की हत्या में कुछ गड़बड़ हो गई, अन्यथा वह पकड़ी नहीं जाती.

कविता ने लिखी खूनी कविता – भाग 1

एक दिन कविता पटेल मोबाइल के कौंटैक्ट नंबर देख रही थी, तभी उसे शादी से पहले के प्रेमी बृजेश का नंबर दिखा. नंबर देखते ही उसे पुराने दिन याद आने लगे. वह बृजेश से बात करने की कोशिश तो करती, लेकिन कुछ सोच कर रुक जाती थी.

आखिरकार एक दिन उस ने बृजेश से बात करने की गरज से फोन किया तो बृजेश बर्मन ने काल रिसीव करते हुए कहा, “हैलो कौन?’’

“बृजेश, पहचाना नहीं मुझे. तुम तो बहुत जल्दी बदल गए, अब तो मेरी आवाज भी भूल गए.’’ कविता ने शिकायती लहजे में कहा.

“जानेमन तुम्हें कैसे भूल सकता हूं. इस अननोन नंबर से काल आई तो पहचान नहीं सका.’’ बृजेश सफाई देते हुए बोला.

“तुम ने तो मेरी शादी के बाद कभी काल भी नहीं की,’’ कविता बोली.

“कविता, मैं तुम्हें दिल से चाहता था, इसलिए मैं तुम्हारा बसा हुआ घर नहीं उजाड़ना चाहता था. मैं ने अपने दिल पर पत्थर रख कर तुम्हारी खुशियों की खातिर समझौता कर लिया था,’’ बृजेश बोला.

“सचमुच इतना प्यार करते हो तो मुझ से मिलने दमोह आ जाओ, मुझ से तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही.’’ कविता ने फिर से उस के प्रति चाहत दिखाते हुए कहा.

इतना सुनते ही बृजेश का दिल बागबाग हो गया. फिर एक दिन वह कविता से मिलने उस की ससुराल पहुंच गया. कई महीने बाद बृजेश और कविता ने अपने दिल की बातें कीं तो उन का पुराना प्यार जाग गया. उस के बाद दोनों की मेलमुलाकात का सिलसिला चल निकला. बृजेश से जब कविता का दोबारा संपर्क हुआ तो उस समय वह टेंट हाउस में काम करने लगा था. कविता से उस की मुलाकात अकसर कालेज जाते समय होती थी.

प्रेमी को बताती थी मुंहबोला भाई

जब बृजेश कविता की ससुराल भी आने लगा तो कविता ने अपने ससुर और पति से उस का परिचय मुंहबोले भाई के तौर पर कराया. वैसे तो कविता को दीपचंद जैसा नेक पति मिल गया था, परंतु पति के शादी के बाद नौकरी के लिए चले जाने से कविता का पुराना प्यार जाग गया था.

दीपचंद को जब कविता और बृजेश के प्रेम संबंधों का पता चला तो हंसते खेलते परिवार में कलह होते देर न लगी. लाख समझाने के बाद भी जब कविता नहीं मानी तो दीपचंद ने कविता पर सख्त पहरा लगा दिया. इस का अंजाम यह हुआ कि कविता के कहने पर बृजेश ने कविता की मांग का सिंदूर मिटा दिया.

22 जुलाई, 2023 दोपहर के करीब 2 बज रहे थे. मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के दमोह जिले के गैसाबाद थाने में टीआई विकास सिंह चौहान अपने कक्ष में बैठे कुछ जरूरी फाइल देख रहे थे. तभी अधेड़ उम्र के एक व्यक्ति ने उन के कक्ष के बाहर से आवाज लगाई, “साब, क्या मैं अंदर आ सकता हूं?’’

टीआई चौहान ने एक नजर सामने खड़े उस व्यक्ति पर डालते हुए कहा, “हां, आ जाइए. बैठिए.’’

जब वह व्यक्ति कुरसी पर बैठ गया तो उन्होंने पूछा, “बताइए, क्या काम है?’’

“साहब, मेरा नाम हाकम पटेल है और मैं खैरा गांव का रहने वाला हूं. मेरा बेटा पिछले 3 दिनों से लापता है.’’

टीआई विकास सिंह चौहान ने एक कर्मचारी को पानी लाने का इशारा करते हुए हाकम पटेल से कहा, “आप इत्मीनान से मुझे पूरी बात विस्तार से बताइए.’’

“जी साहब, 19 जुलाई, 2023 की शाम 7 बजे मेरा 26 साल का इकलौता बेटा दीपचंद पटेल घर से निकला था. तब से उस का कुछ पता नहीं चल रहा है. उस का मोबाइल भी बंद आ रहा है.’’ यह कहते हुए हाकम ने कर्मचारी के हाथ से पानी का गिलास ले लिया.

“शादी हो गई बेटे की?’’ टीआई चौहान ने पूछा.

“हां साहब, 2021 में उस की शादी हो गई. बेटेबहू में किसी तरह का कोई मनमुटाव भी नहीं था.’’ गटागट पानी पीने के बाद हाकम ने बताया.

“किसी पर शक है तुम्हें, किसी से कोई रंजिश तो नहीं थी?’’

“नहीं साहब, हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, इसलिए किसी पर शक भी नहीं है.’’

दीपचंद की गुमशुदगी दर्ज कराते हुए टीआई चौहान ने हाकम को भरोसा दिलाया कि पुलिस जल्द ही उस के बेटे दीपचंद को खोज निकालेगी. दीपचंद के लापता होने की खबर उस के ससुराल दमोह से सटे हुए पन्ना तक पहुंची तो दीपचंद के ससुर और साले के साथ कुछ नातेरिश्तेदार भी दमोह पहुंच गए. वे हाकम के साथ मिल कर दामाद की तलाश में जुट गए.

जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, टीआई विकास सिंह चौहान को दीपचंद के बिना वजह लापता होने की बात खटक रही थी. दमोह जिले के एसपी सुनील तिवारी के निर्देश पर एसडीओपी (हटा) नितिन पटेल ने दीपचंद की खोजबीन के लिए एक पुलिस टीम गठित कर टीआई चौहान को पतासाजी करने के निर्देश दिए.

हाकम पटेल अपनी करीब 8-10 एकड़ जमीन पर खेतीबाड़ी करते हैं. हाकम ने 2 शादियां की थीं. पहली पत्नी से कोई बच्चा नहीं हुआ और कुछ समय बाद बीमारी के चलते उस की मौत हो गई तो हाकम ने दूसरी शादी कर ली तो दूसरी पत्नी से दीपचंद पैदा हुआ.

दीपचंद जब छोटा ही था कि उस की मां घर छोड़ कर किसी दूसरे मर्द के साथ चली गई. पिता हाकम ने दीपचंद को लाड़प्यार से पालापोसा. दीपचंद केवल 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाया था. जवान होते ही दीपचंद की शादी पन्ना जिले के सुनवानी गांव की कविता से कर दी गई.

कविता के कदम दीपचंद के घर में पड़ते ही बाप बेटे काफी खुश थे, क्योंकि लंबे अरसे बाद घर में कोई महिला आई थी. दोनों चूल्हा फूंकफूंक कर थक चुके थे, ऐसे में कविता ने जब इस घर की दहलीज पर कदम रखा तो जल्द ही वह दोनों की आंखों का तारा हो गई. ससुर हाकम उसे बेटी की तरह दुलारते तो दीपचंद भी उस की हर ख्वाहिश पूरी करता.

पुलिस के लिए दीपचंद की गुमशुदगी एक पहेली बनी हुई थी. दीपचंद की न तो किसी से रंजिश थी और न ही कोई दुश्मनी. गांव में पूछताछ के दौरान भी कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा, जिस से दीपचंद का पता चल सके. पुलिस की आखिरी उम्मीद दीपचंद की काल डिटेल्स रिपोर्ट पर टिकी हुई थी.

पुलिस ने जब दीपचंद के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि दीपचंद की 19 जुलाई की शाम आखिरी बार पन्ना के लोहरा गांव में रहने वाले बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू से बात हुई थी. इस के बाद पुलिस ने बृजेश बर्मन के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि बृजेश की सब से ज्यादा बात चिकला निवासी गणेश विश्वकर्मा से हुई थी. दीपचंद समेत तीनों के फोन नंबर भी टावर लोकेशन में एक साथ खैरा गांव में मिले. इस से साफ हो गया था कि घर से दीपचंद इन दोनों के साथ ही निकला था.

दीपचंद का मोबाइल बंद होने से पहले की आखिरी टावर लोकेशन गांव वर्धा की थी. इसी टावर लोकेशन में गणेश विश्वकर्मा व बृजेश बर्मन के मोबाइल फोन भी बंद हो गए थे. यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम को पूरा भरोसा हो गया कि दीपचंद के लापता होने के बारे में इन दोनों को जरूर कुछ पता होगा.

पुलिस टीम के लिए एक चौंकाने वाली बात यह पता चली कि बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू की काल डिटेल्स में दीपचंद की पत्नी कविता का नंबर भी मिला. 19 जुलाई, 2023 को भी बृजेश और कविता के बीच बातचीत हुई थी. इस के पहले भी दोनों के बीच लगातार बात होने की पुष्टि हुई.

पुलिस ने बृजेश बर्मन और फिर गणेश विश्वकर्मा को हिरासत में ले कर पूछताछ की. पहले तो बृजेश ने यह कह कर पुलिस को बरगलाने की कोशिश की कि वह कविता को बहुत पहले से जानता है वह उस के मायके में किराए पर रह चुका है. इसी जानपहचान के चलते कविता से बात करता रहता था. पुलिस को उस की बात पर भरोसा नहीं हुआ. पुलिस के संदेह की सुई बृजेश के इर्दगिर्द घूम रही थी.

पुलिस ने तुक्का मारते हुए बृजेश से कहा, “कविता ने सब कुछ बता दिया है, अब तुम्हारी बारी है. सच बताओगे तो ठीक नहीं तो दूसरा ही तरीका अपनाना पड़ेगा.’’

आखिरकार, तीर निशाने पर लगा और पुलिस की सख्ती के आगे बृजेश बर्मन टूट गया. बृजेश ने दीपचंद की हत्या की पूरी साजिश और हत्या की जो कहानी सुनाई, वह पुराने प्रेम संबंधों की कहानी निकली, जिस में अपने प्रेमी के लिए कविता ने अपनी मांग का सिंदूर ही मिटा दिया. बहू की यह करतूत जान कर दीपचंद के पिता हाकम पटेल के पैरों से तो जैसे जमीन ही खिसक गई.

मामी का जानलेवा प्यार – भाग 2

मानवेंद्र सिंह भी बरेली के थाना फतेहगंज (पूर्वी) के गांव निकसुआ का रहने वाला था. आरती के गांव के पास ही मानवेंद्र की ननिहाल थी. वह वहीं पर रह कर पढ़ता था. उस वक्त उस की उम्र भी कम ही थी. मानवेंद्र उस वक्त कक्षा 9 में पढ़ता था. मामा के घर रहते हुए ही उस की जानपहचान आरती से हुई थी.

कुछ समय बाद ही वह जानपहचान दोस्ती में बदली और फिर जल्दी ही दोनों के बीच प्यार हो गया. दोनों ही एकदूसरे को जीजान से चाहने लगे थे. समय के साथ बात यहां तक बढ़ी कि दोनों ने शादी करने का फैसला भी ले लिया था. उन के बीच जल्दी ही शारीरिक संबंध भी बन गए थे.

उन का प्यार ज्यादा दिनों तक समाज की नजरों से छिप न सका. जैसे ही इस बात की जानकारी आरती के घर वालों को हुई तो उन्होंने आरती को समझाने के बाद उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी. लेकिन आरती फिर भी मानवेंद्र से मिलने का कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेती थी. वह चोरीछिपे मानवेंद्र से मिलने लगी थी. जब उस के घर वालों को लगने लगा कि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है तो उन्होंने कम उम्र में ही उस की शादी करने का फैसला किया, जिस से समाज में उन की नाक न कटे.

उसी दौरान घर वालों ने 2019 में आरती की शादी बरेली जिले के शिवपुरी में रहने वाले रामवीर से कर दी. शादी के बाद आरती तो अपनी ससुराल चली आई थी. लेकिन मानवेंद्र सिंह के सपने टूट गए. प्रेमिका की तड़प में उस की हालत पागलों जैसी हो गई. उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि उस के साथ जीनेमरने का वादा करने वाली उस की प्रेमिका एक दिन उसे बीच मंझधार में छोड़ कर यूं चली जाएगी. इस के बाद भी मानवेंद्र को उम्मीद थी कि वह एक न एक दिन वापस आएगी और फिर वह उसी के साथ शादी करेगा.

अनचाहा पति था रामवीर

आरती शादी के बाद जितने दिन भी ससुराल में रही, वह खुश नहीं रही. जबकि कई बार रामवीर ने उस से उस की परेशानी का कारण पूछने की कोशिश भी की, लेकिन उस ने अपना मुंह पूरी तरह से बंद ही रखा. शादी के बाद अनचाहे पति के साथ रात काटना उस की मजबूरी बन गई थी.

उस की शादी को काफी समय हो गया, लेकिन उस के दिल में रामवीर के लिए बिलकुल भी जगह नहीं बन पाई थी. हालांकि बाद में रामवीर को भी पता चल गया था कि वह मानवेंद्र के साथ शादी करना चाहती थी, लेकिन उस के घर वालों ने उस की मरजी के बिना ही उस की शादी उस के साथ कर दी थी.

शादी के कुछ समय बाद आरती एक बच्चे की मां भी बनी, लेकिन उस बच्चे का प्यार भी उसे उस परिवार से नहीं जोड़ पाया. रामवीर को उम्मीद थी कि आरती कुछ ही दिनों में मानवेंद्र को पूरी तरह से भूल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

रामवीर शादी के कुछ ही दिनों बाद दिल्ली में काम करने चला गया. उस के जाते ही आरती ने मानवेंद्र को अपने घर बुलाना शुरू कर दिया था. ससुराल वालों को मानवेंद्र का आनाजाना खलने लगा तो उन्होंने आरती की शिकायत रामवीर से की. रामवीर उस की हरकतों से पहले ही परेशान था. फिर भी उस ने आरती को समझाने की कोशिश की, लेकिन आरती उस की एक बात भी सुनने का तैयार न थी.

इस बात को ले कर आरती और रामवीर में आए दिन कहासुनी होने लगी. यही नहीं, वह हर रोज ही ससुराल वालों की नजरों से बचते बचाते फोन पर प्रेमी मानवेंद्र से बात करती रहती थी. उसी सब के चलते रामवीर और आरती में विवाद रहने लगा था.

उसी दौरान आरती एक दिन मानवेंद्र से मिली और कहा, “इस वक्त रामवीर मुझे कुछ ज्यादा ही परेशान कर रहा है. वह तुम्हारे पर शक कर के तुम से मिलने को मना करता है. अब यह सब बरदाश्त के बाहर हो गया है. तुम्हें पता है कि मैं तो तुम्हीं से शादी करना चाहती थी, लेकिन मेरे घर वालों ने मेरी शादी उस बैल के साथ कर दी. इस में मेरा तो कोई दोष है नहीं.

“मैं ने तुम से पहले ही घर से भाग कर शादी करने को कहा था. लेकिन तुम हिम्मत नहीं जुटा पाए. इस के बावजूद मैं आज तक तुम्हें ही अपना पति मानती हूं. क्या तुम अपनी पत्नी के लिए एक छोटा सा काम नहीं कर सकते.’’

आरती की बात सुन कर मानवेंद्र ने कहा, “मैं भी कई साल से तुम्हें पाने के लिए तरस रहा हूं. बताओ, मुझे तुम्हें पाने के लिए क्या करना होगा?’’

“तुम्हें पता है कि रामवीर हम दोनों की मंजिल का कांटा है. मुझे पाने के लिए तुम्हें उस कांटे को हमेशा हमेशा के लिए दूर करना होगा.’’

आरती की बात सुनते ही मानवेंद्र सहम गया. फिर पल भर में उस ने कहा, “आरती, यह सब तो मैं नहीं कर पाऊंगा. अगर तुम चाहो तो अभी भी हमारे सामने एक रास्ता है, हम दोनों घर से भाग चलते हैं. फिर कहीं भी जा कर गुजरबसर कर ही लेंगे. कुछ समय गुजरने के बाद रामवीर भी तुम्हें भूल जाएगा. फिर हम दोनों घर वापस आ जाएंगे.’’

“नहीं, मैं घर से भाग कर तुम्हारे साथ शादी नहीं कर सकती. लगता है कि तुम मुझे पहले जैसा प्यार नहीं करते. अगर मुझे आज भी पहले की तरह प्यार करते तो यह कायरों वाली भाषा नहीं बोलते. अगर तुम्हें रामवीर की हत्या भी करनी पड़ी तो कुछ समय की जेल हो जाएगी. फिर मैं ही तुम्हें जेल से बाहर निकाल लाऊंगी. क्या तुम मेरे प्यार की खातिर जेल नहीं जा सकते?

“अगर तुम मुझे आज भी थोड़ा सा प्यार करते हो तो तुम रामवीर को किसी भी तरह से खत्म कर डालो. फिर हम दोनों शादी कर लेंगे. यदि तुम यह सब नहीं कर सकते तो आज के बाद मुझ से मिलने की कोई जरूरत नहीं,’’

आरती ने मानवेंद्र को हिम्मत जुटाते हुए बताया, “तुम उस की हत्या करने से डरो नहीं. मैं तुम्हें उस की हत्या करने का एक ऐसा रास्ता बताऊंगी कि कोई भी हम पर शक नहीं कर पाएगा.’’

मामी का जानलेवा प्यार – भाग 1

आरती के गांव के पास ही मानवेंद्र सिंह की ननिहाल थी. वह वहीं पर रह कर पढ़ता था. उस वक्त वह कक्षा 9 में पढ़ रहा था. पड़ोस में मामा के घर रहते हुए ही उस की जानपहचान आरती से हो गई थी.

कुछ समय बाद ही वह जानपहचान दोस्ती में बदली और फिर जल्दी ही दोनों के बीच प्यार हो गया. दोनों ही एकदूसरे को जीजान से चाहने लगे थे. समय के साथ बात यहां तक बढ़ी कि दोनों ने शादी करने का फैसला भी ले लिया था. उन के बीच जल्दी ही शारीरिक संबंध भी बन गए थे.

इस बात की जानकारी आरती के घर वालों को हुई तो उन्होंने आरती को समझाने के बाद उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी. वह चोरीछिपे मानवेंद्र से मिलने लगी थी. जब उस के घर वालों को लगने लगा कि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है तो उन्होंने कम उम्र में ही उस की शादी करने का फैसला किया.

उसी दौरान घर वालों ने 2019 में आरती की शादी बरेली जिले के शिवपुरी में रहने वाले रामवीर से कर दी. आरती शादी के बाद जितने दिन भी ससुराल में रही, वह खुश नहीं रही. शादी के बाद अनचाहे पति के साथ रात काटना उस की मजबूरी बन गई थी क्योंकि वह तो मानवेंद्र से प्यार करती थी.

बरेली के थाना फतेहगंज (पूर्वी) क्षेत्र के गांव शिवपुरी निवासी रामवीर 20 सितंबर, 2023 को टिसुआ में नौकरी की तलाश के लिए निकला था, लेकिन वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा तो उस के घर वालों को उस की चिंता सताने लगी थी. उन्होंने कई बार उस के मोबाइल पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उस का मोबाइल बंद आ रहा था. उस के बाद उन्होंने उसे हर जगह तलाशा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता नहीं चला.

अगले ही दिन सुबह किसी ने उन्हें बताया कि रामवीर की बाइक महेशपुरा रेलवे क्रौसिंग के पास पड़ी हुई है. यह जानकारी मिलते ही रामवीर का भाई अशोक बाइक देखने पहुंचा तो वह रामवीर की ही निकली. उस के कुछ ही देर बाद पता चला कि देर शाम एक युवक की ट्रेन से कट कर मौत हो गई. उस की लाश रेलवे ट्रैक के पास ही पड़ी हुई है.

यह जानकारी मिलते ही अशोक तुरंत ही रेलवे लाइनों में पड़ी लाश को देखने पहुंच गया. वहां पर पहले से ही राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जवान मौजूद थे. जीआरपी अपनी काररवाई में लगी हुई थी, तभी अशोक ने उस लाश को पहचानते हुए बताया कि मृतक उस का भाई रामवीर है, जो रात से गायब था. रामवीर की लाश 2 हिस्सों में कटी हुई थी, जिसे देख कर लग रहा था कि उस ने जानबूझ कर ही रेलवे ट्रैक पर लेट कर अपनी जान दी होगी.

देखते ही देखते आसपास के क्षेत्र में रामवीर के रेल से कट कर आत्महत्या करने वाली बात फैल गई. उस की मौत की खबर सुन कर उस की पत्नी आरती भी घटनास्थल पर पहुंची. वहां पहुंचते ही आरती ने रोनाधोना शुरू कर दिया था. घर वालों ने उसे जैसेतैसे कर के चुप कराया.

शव की शिनाख्त हो जाने के बाद जीआरपी पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. हालांकि पुलिस रामवीर की मौत को आत्महत्या मान रही थी. लेकिन उस का भाई अशोक जीआरपी की बात से सहमत नहीं था.

उस ने बरेली के थाना फतेहगंज (पूर्वी) के एसएचओ ओमप्रकाश गौतम से मिल कर बताया कि शाम को उस के भाई को किसी ने फोन किया था. फोन आते ही वह बाइक ले कर घर से निकला था. इसी कारण उसे शक है कि उस ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि किसी ने उस की जानबूझ कर रेल के सामने धक्का दे कर हत्या की है.

भाई अशोक की तरफ से पुलिस ने धारा 302, 120बी, 34 भादंवि के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस ने काररवाई शुरू कर दी. एसपी (देहात) मुकेश चंद्र मिश्र इस केस को सुलझाने के लिए पुलिस की एक टीम गठित की. जिस में एसएचओ ओमप्रकाश गौतम, एसआई इशरत अली खां, कांस्टेबल पूजा, शिवांशु पांडेय आदि को शामिल किया गया था.

पुलिस ने सब से पहले मृतक रामवीर के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि रामवीर के मोबाइल पर अंत में किसी मानवेंद्र नामक व्यक्ति का फोन आया था. पुलिस ने रामवीर के घर वालों से मानवेंद्र के बारे में जानकारी ली तो वह मृतक का गांव के रिश्ते का भांजा निकला. पुलिस को एक बार तो लगा कि एक भांजा मामा की हत्या क्यों करेगा. फिर भी पुलिस ने मानवेंद्र को पूछताछ के लिए थाने बुलाया.

भांजा ही निकला कातिल

मानवेंद्र ने पुलिस को बताया कि उस ने तो केवल मामा को शराब पिलाने के लिए ही फोन किया था. उस के बाद मामा मेरे पास आए और फिर दोनों ने एक साथ बैठ कर शराब भी पी. बाद में मामा अपनी बाइक ले कर वहां से चले गए थे. मामा ने रेल से कट कर आत्महत्या क्यों की, उसे कुछ नहीं पता.

लेकिन पुलिस को जानकारी मिली थी कि वह अकसर रामवीर की अनुपस्थिति में उस के घर आताजाता था, जिस से उस के परिवार वालों को पूरा शक था कि जरूर मानवेंद्र और आरती के बीच कुछ खिचड़ी पक रही थी. उसी शक के आधार पर फिर पुलिस ने आरती के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि आरती ने मानवेंद्र का फोन आने से कुछ समय पहले ही उस से बात की थी. जिस से पुलिस को पूरा शक हो गया था कि जरूर मानवेंद्र से मिल कर ही आरती ने अपने पति को मौत की नींद सुला दिया है.

इस मामले को शक की निगाहों से देखते हुए पुलिस ने फिर मानवेंद्र से सख्ती से पूछताछ की तो वह जल्दी ही टूट गया. मानवेंद्र ने स्वीकार किया कि रामवीर मामा की पत्नी के साथ उस के अवैध संबंध थे, जिस के चलते रामवीर अपनी पत्नी पर शक करने लगा था. इतना ही नहीं, वह अपनी पत्नी को भलाबुरा कहते हुए मारतापीटता था. पति की हरकतों से परेशान हो कर आरती ने ही उसे मौत की नींद सुलवा दिया.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने मानवेंद्र के साथसाथ मृतक की पत्नी आरती को भी हिरासत में ले लिया था. दोनों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, जहां से शराब के कुछ खाली पव्वे और डिस्पोजल गिलास भी बरामद किए.

आरोपियों और रामवीर के घर वालों से पूछताछ के दौरान इस केस की कहानी जो उभर कर सामने आई, वह दिल को दहला देने वाली थी. रामवीर की मौत की साजिश रचने वाली कोई और नहीं बल्कि उस की पत्नी आरती थी.

शादी से पहले ही थे मानवेंद्र से संबंध

उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली के फतेहगंज (पूर्वी) के शिवपुरी गांव में रहता था रामवीर का परिवार. रामवीर का सामान्य परिवार था. उस के पापा शिवराज सिंह के पास न तो कोई जुतासे की जमीन थी और न ही कोई सरकारी नौकरी. वह अपने गांव के खेतों में ही मेहनतमजदूरी कर के परिवार का पालनपोषण करते आ रहे थे.

उन के 2 बेटे थे. बड़ा रामवीर और उस से छोटा अशोक. कई साल पहले रामवीर की शादी शाहजहांपुर के तिलहर थाना क्षेत्र के गांव धुनकपुर निवासी आरती से हुई थी. आरती की शादी कम उम्र यानी 16 साल में ही हो गई थी. उसी दौरान शादी से पहले ही उस की मुलाकात मानवेंद्र से हुई थी.

मैं चीज बड़ी हूं मस्त मस्त

मैं चीज बड़ी हूं मस्त मस्त – भाग 3

गुड़गांव के अनाथालय में किआरा का एक और दोस्त था गुलफाम. गुलफाम उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का रहने वाला था. वह 4 साल का था तभी उस के अब्बू की मौत हो गई थी. अब्बू की मौत के बाद मां हमीदा बेसहारा हो गई.

हमीदा ने फिर दूसरा निकाह कर लिया. दूसरे पति से उसे 4 बच्चे हुए. हमीदा दूसरे पति के साथ दिल्ली के आयानगर में रहने लगी. फिर सन 2004 में हमीदा की मौत हो जाने के बाद सौतेले पिता ने गुलफाम को गुड़गांव के अनाथालय में भरती करा दिया.

गुलफाम और रफीक अनाथालय में अच्छे दोस्त थे. करीब एक साल पहले गुलफाम किसी तरह अनाथालय से भाग गया. किआरा ने किसी तरह गुलफाम से संपर्क साध लिया.

10 मार्च, 2014 को उन दोनों ने गुड़गांव के एमजी रोड मेट्रो स्टेशन पर मुलाकात की. वहीं पर किआरा का एक दोस्त पवन आ गया. पवन द्वारका सेक्टर-3 में रहता था. फिर तीनों रफीक के कमरे पर पहुंच गए. कमरे पर 2 दिन रुक कर पवन तो चला गया. लेकिन गुलफाम वहीं रुका रहा. रफीक ने किआरा से जब पूछा कि ये गुलफाम यहां कब तक रहेगा तो किआरा ने कहा कि जब तक मैं यहां रहूंगी, ये भी रहेगा.

जब किआरा को रफीक अपनी बहन मान चुका था तो उसे अपने कमरे से जाने को भी नहीं कह सकता था, इसलिए न चाहते हुए भी किआरा को कमरे पर रखने के लिए उसे मजबूर होना पड़ा.

उधर आगरा में रहने वाले रोहित को जब पता चला कि किआरा गुड़गांव में रह रही है तो वह उस के पास आ गया और उसे अपने साथ आगरा ले जाने की जिद करने लगा. लेकिन किआरा ने उस के साथ जाने से मना ही नहीं किया बल्कि लड़ कर उसे कमरे से भगा भी दिया.

रफीक के कमरे पर आनेजाने वालों का तांता लगना शुरू हो गया तो मकान मालिक को शक हुआ. तब उस ने रफीक से कमरे पर आनेजाने वालों के बारे में पूछा और उस से अपना कमरा खाली करा लिया. तब ये तीनों दिल्ली चले आए.

गुलफाम की दिल्ली स्थित एक काल सेंटर में नौकरी लग गई तो उस ने अलग कमरा ले लिया तो वहीं किआरा ने दक्षिणपश्चिमी दिल्ली के थाना बिंदापुर के तहत सुखराम पार्क में रहने वाले अशोक कुमार सेठ के यहां ग्राउंड फ्लोर पर 3 हजार रुपए महीना किराए पर एक कमरा ले लिया. मकान मालिक से रफीक को उस ने अपना भाई बताया था. यह बात 4 अप्रैल, 2014 की है.

कुछ दिनों बाद उत्तम नगर क्षेत्र स्थित एक फोन कंपनी के शोरूम में किआरा की भी नौकरी लग गई. कुछ दिनों बाद गुलफाम ने भी किआरा के पास आना शुरू कर दिया. चूंकि किआरा और गुलफाम के बीच पहले से अवैध संबंध थे, इसलिए वह उसे छोड़ना नहीं चाहती थी.

ऐसा भी नहीं था कि उस के संबंध केवल गुलफाम से ही हों बल्कि पड़ोस में रहने वाले एक अन्य युवक से भी उस के नाजायज संबंध हो गए थे.

इतना ही नहीं, जिस शोरूम में वह नौकरी करती थी, वहां भी 2 लड़कों को उस ने अपने रूपजाल में फांस रखा था. दरअसल अब वह इस क्षेत्र की इतनी माहिर खिलाड़ी हो चुकी थी कि लड़कों को अपने रूपजाल में फांसना उस के बाएं हाथ का खेल बन चुका था. वह होटलों और क्लबों में भी जाने लगी.

यह केवल उस का शौक ही नहीं था बल्कि बदले में वह उन से अपनी जरूरत की चीजें या पैसे भी ऐंठ लेती थी. देर रात को शराब के नशे में कमरे पर लौटना जैसे उस का रूटीन बन चुका था.

रफीक और गुलफाम को पता लग चुका था कि किआरा अब होटलों और क्लबों में भी जाने लगी है. उन्होंने उसे समझाया और कमरे पर जल्दी लौटने की बात कही तो उस ने साफ कह दिया, ‘‘जब मेरी मरजी होगी, घर आऊंगी. मेरी निजी जिंदगी में कोई भी दखल देने की कोशिश न करे.’’

‘‘जब तुझे ऐसा ही करना है तो अलग कमरा ले ले.’’ रफीक बोला.

‘‘मैं हरगिज अलग कमरा नहीं लूंगी. यहीं पर रहूंगी और तुम लोग आइंदा इस बारे में कुछ मत कहना.’’

‘‘तू हमारे ही साथ रह रही है और हमें ही घुड़की दे रही है. कम से कम इतनी शरम तो कर कि हम तुझे खिलाते पिलाते हैं, तेरे कपड़े धोते हैं और सारा खर्चा हम ही उठा रहे हैं. यदि तूने हमारी बात नहीं मानी तो कहीं दूसरा कमरा ले ले.’’ रफीक ने कहा.

‘‘मैं कहीं कमरा नहीं लूंगी, यहीं रहूंगी. और अगर ज्यादा बात की तो तुम्हारे खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा कर जेल भिजवा दूंगी. इसलिए ज्यादा उड़ने की कोशिश मत करो.’’ किआरा ने धमकी दी.

रफीक को किआरा की यह बात बहुत बुरी लगी, क्योंकि उस ने किआरा को उस समय सहारा दिया था जब वह बहुत परेशान हालत में थी. उसे मुंहबोली बहन मान कर उस की सेवा भी की और आज वही उसे बलात्कार के केस में फंसाने की धमकी दे रही है.

बहरहाल, उस की धमकी पर रफीक और गुलफाम डर गए कि किआरा उन्हें वास्तव में जेल भिजवा सकती है. इस तरह वे चाहते हुए भी अपने कमरे से उसे निकाल नहीं सके.

एक दिन ये दोनों दोस्त उत्तम नगर किसी काम से गए हुए थे. घर पर किआरा रह गई थी. जब वे लौट कर आए तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. गुलफाम ने दरवाजे पर जोर से 2-3 धक्के दिए तो सिटकनी खुल गई. कमरे में किआरा और एक युवक अपने अपने कपड़े पहनते दिखे. बंद कमरे में किआरा को दूसरे लड़के साथ देख कर रफीक और गुलफाम हक्केबक्के रह गए.

उधर जब किआरा ने अचानक रफीक और गुलफाम को कमरे में आया देखा तो उस ने उन दोनों को जम कर फटकार लगाई.

रफीक और गुलफाम के लिए किआरा गले की एक ऐसी हड्डी बन चुकी थी जिसे न तो वे निगल सकते थे और न ही उगल सकते थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि उस से कैसे निजात पाएं. दोनों ही उस से निजात पाने के उपाय खोजने लगे. काफी सोचविचार के बाद उन्होंने उस का काम तमाम करने का फैसला कर लिया कि न रहेगा बांस, न बजेबी बांसुरी.

30 अप्रैल, 2014 को आधी रात के करीब किआरा पारकर नशे की हालत में कमरे पर लौटी. थोड़ी देर बाद ही वह सो गई. तभी रात सवा 2 बजे के करीब उन दोनों ने किआरा की गला घोंट कर हत्या कर दी. उस की हत्या करने के बाद दोनों ने राहत की सांस ली. फिर दोनों ने ही उस की लाश के साथ बारीबारी से अपनी हवस पूरी की.

रफीक और गुलफाम ने उस की हत्या तो कर दी लेकिन अब उन के सामने लाश को ठिकाने लगाने की समस्या थी. लाश को घर से बाहर ले जाने की उन की हिम्मत नहीं हो रही थी. तभी उन्हें कमरे की दीवार में बनी अलमारी का ध्यान आया. उस अलमारी को उन्होंने एक बार खोल कर देखा तो उस का बीच का खाना इतना बड़ा था कि उस में उस की लाश रखी जा सकती थी.

फिर दोनों ने उस की लाश उठा कर अलमारी के बीच वाले खाने में रख कर अलमारी के दरवाजे को सिटकनी से बंद कर दिया. फिर सुबह होने से पहले ही बैगों में अपने जरूरी सामान भर कर, कमरे का ताला बंद कर के चले गए.

दिल्ली से वे सीधे छत्तीसगढ़ पहुंचे. वहां पर गुलफाम का एक  दोस्त राजू रहता था. वे उस के पास ही रुक गए. 4-5 दिन छत्तीसगढ़ में रहने के बाद जब दोनों उत्कल एक्सप्रैस से दिल्ली पहुंचे तो वे पुलिस के शिकंजे में आ गए.

पुलिस ने रफीक और गुलफाम को किआरा पारकर की हत्या करने और लाश छिपाने (आईपीसी की धारा 302, 201) के तहत गिरफ्तार कर के 10 मई, 2014 को द्वारका कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी श्री विक्रम के समक्ष पेश कर 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उन से किआरा की पर्सनल डायरी आदि सामान बरामद किया.

12 मई को पुन: न्यायालय में पेश कर उन्हें जेल भेज दिया. मामले की विवेचना इंसपेक्टर सत्यवीर जनौला कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

मैं चीज बड़ी हूं मस्त मस्त – भाग 2

पुलिस मान कर चल रही थी कि यदि वह दिल्ली आ रहा होगा तो या तो बस से आएगा या फिर ट्रेन से. छत्तीसगढ़ से आने वाली बसें सराय कालेखां अंतरराज्यीय बस टर्मिनल पर आती हैं और ट्रेनें हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन. इसलिए 9 मई, 2014 को 2 पुलिस टीमें हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और सराय कालेखां बस टर्मिनल पर लगा दीं.

चूंकि सुखराम पार्क में रहने वाले अशोक कुमार सेठ और उन का बेटा अंकुश रफीक और गुलफाम को जानते थे इसलिए उन दोनों को भी पुलिस ने अपने साथ ले लिया था.

एक पुलिस टीम सर्विलांस के जरिए उस फोन नंबर पर नजर रखे हुई थी. सर्विलांस टीम को जो नई जानकारी मिल रही थी, टीम उस जानकारी को दोनों पुलिस टीमों को शेयर करा रही थी. इसी आधार पर पुलिस ने रफीक और गुलफाम को हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से हिरासत में ले लिया.

थाने ला कर उन दोनों से किआरा पारकर की हत्या की बाबत पूछताछ की तो उन्होंने बड़ी आसानी से किआरा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. उस की हत्या की उन्होंने जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली.

किआरा दिल्ली के रहने वाले विनोद कुमार की बेटी थी. विनोद कुमार एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. उस के 2 बेटियां और एक बेटा था. किआरा दूसरे नंबर की थी. किआरा की मां रेखा को कैंसर था. विनोद ने पत्नी का काफी इलाज कराया लेकिन वह ठीक नहीं हो सकी.

एक दिन डाक्टरों ने विनोद को बता दिया कि रेखा का कैंसर ठीक होने वाला नहीं है, यह अब आखिरी स्टेज पर हैं. डाक्टरों से यह जानकारी मिलने के बाद विनोद ने पत्नी की तीमारदारी करनी बंद कर दी.

बताया जाता है कि विनोद का उस समय किसी महिला के साथ चक्कर चल रहा था. उसे यह तो पता चल ही गया था कि उस की पत्नी अब ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रहेगी इसलिए उस ने पत्नी के जीतेजी उस महिला से शादी कर ली जिस के साथ उस का चक्कर चल रहा था.

रेखा को पति द्वारा दूसरी शादी करने का ज्यादा दुख नहीं हुआ, बल्कि पति की आदतों को देखते हुए उसे इस बात की आशंका थी कि उस के मरने के बाद उस के तीनों बच्चों की दुर्दशा होगी. क्योंकि सौतन उस के बच्चों को तवज्जो नहीं देगी और उस के नातेरिश्तेदार भी ऐसे नहीं हैं जो बच्चों को पालपोस सकें.

बच्चों के भविष्य के बारे में उस ने अपने मिलने वालों से सलाह ली तो उन्होंने बच्चों को किसी अनाथालय में भरती करने की बात कही. इस बीच विनोद रेखा और बच्चों को दिल्ली में छोड़ कर अपनी दूसरी बीवी को ले कर मुंबई चला गया, जो आज तक नहीं लौटा.

पति द्वारा बच्चों को बेसहारा छोड़ जाने पर रेखा को बड़ा दुख हुआ. तब रेखा दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी गांव में रहने वाली अपनी मां के पास चली गई. रेखा नहीं चाहती थी कि उस के मरने के बाद बच्चे दरदर की ठोकरें खाएं इसलिए वह तीनों बच्चों को गुड़गांव के सेक्टर-10 स्थित शांति भवन ट्रस्ट औफ इंडिया नाम के अनाथालय में भरती करा आई.

बताया जाता है कि किआरा का घर का नाम कल्पना था. अनाथालय में उस का नाम किआरा पारकर रखा गया. बच्चों को अनाथालय में भरती कराने के कुछ दिनों बाद रेखा की मौत हो गई. यह करीब 8 साल पहले की बात है. उस समय किआरा करीब 10 साल की थी. अनाथालय में ही तीनों बच्चों की परवरिश होती रही. वहीं पर उन की पढ़ाई चलती रही. किआरा थोड़ी चंचल स्वभाव की थी. जब वह जवान हुई तो अनाथालय में ही रहने वाले कई लड़कों से उस की दोस्ती हो गई.

अधिकांशत: देखा गया है कि ऐसे जवान लड़के और लड़कियां जो आपस में सगेसंबंधी न हों उन की दोस्ती लंबे समय तक पाकसाफ नहीं रह पाती. एकांत में मिलने का मौका पाते ही वह खुद पर संयम नहीं रख पाते और उन के बीच जिस्मानी ताल्लुकात कायम हो जाते हैं. यही किआरा के साथ भी हुआ.

अनाथालय में ही रहने वाले एक नजदीकी दोस्त के साथ किआरा के अवैध संबंध कायम हो गए. काफी दिनों तक वह मौजमस्ती करती रही. इसी दौरान उस ने अपने और भी कई दोस्तों से नाजायज ताल्लुकात बना लिए. इस के बाद तो अनाथालय के तमाम लड़के किआरा के नजदीक आने की कोशिश करने लगे.

अवैध संबंधों को छिपाने के लिए कोई चाहे कितनी भी सावधानी क्यों न बरते, एक न एक दिन उन की पोल खुल ही जाती है. यानी किआरा के संबंधों की जानकारी भी अनाथालय के संचालकों तक पहुंच गई.

संचालकों ने किआरा को बहुत समझाया लेकिन उस ने अपनी आदत नहीं बदली तो उन के लिए यह बड़ी ही चिंता की बात हो गई. खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है. उस की देखादेखी अनाथालय के अन्य बच्चे न बिगड़ जाएं, संचालकों को इस बात की आशंका थी.

काफी सोचनेसमझने के बाद संचालकों ने किआरा को उस अनाथालय से किसी दूसरी जगह भेजने का फैसला ले लिया. करीब 1 साल पहले अनाथालय की तरफ से किआरा को पढ़ाई के लिए आगरा भेज दिया गया. वहां के एक हौस्टल में रह कर वह पढ़ने लगी.

चूंकि किआरा के कदम पहले ही बहक चुके थे इसलिए आगरा में उस के रोहित नाम के लड़के से अवैध संबंध हो गए. रोहित का एक दोस्त था विवेक चौहान जो दिल्ली में रहता था. वह भी आगरा आताजाता रहता था. किआरा ने उसे भी अपने जाल में फांस लिया. इसी दौरान किआरा गर्भवती हो गई. यह बात उस ने जब रोहित को बताई तो उस के हाथपैर फूल गए.

किआरा ने जब रोहित से शादी करने को कहा तो वह उस से कन्नी काटने लगा. उस समय किआरा के पेट में 2 माह का गर्भ था. जब किआरा को लगा कि उस का साथ देने वाला कोई नहीं है तो उस ने दवा खा कर गर्भ गिरा दिया.

किआरा का एक दोस्त था रफीक, जो गुड़गांव के अनाथालय में उस के साथ ही था. उस की उम्र जब 18 साल हो गई तो वह अनाथालय से बाहर आ गया. अनाथालय से निकलने के बाद रफीक ने गुड़गांव स्थित साउथ इंडियन होटल में नौकरी कर ली और में कादीपुर गांव में एक कमरा किराए पर ले कर रहने लगा.

किआरा को किसी तरह रफीक के बारे में जानकारी मिली. तब वह इस साल होली से पहले आगरा से भाग कर गुड़गांव चली आई. वह उस होटल पर पहुंच गई जहां रफीक नौकरी कर रहा था. किआरा को देख कर रफीक खुश हुआ. फिर किआरा ने रफीक को अपना गर्भ गिराने तक की पूरी कहानी बता दी.

उस ने आराम करने के लिए कुछ दिनों उस के यहां रुकने की इजाजत मांगी. रफीक उसे मुंहबोली बहन मानता था इसलिए उस ने उसे हर तरह का सहयोग करने का भरोसा दिया. वह उसे अपने कमरे पर ले गया. फिर वह वहीं रहने लगी. रफीक अपने काम पर निकल जाता तो किआरा घर पर ही रहती थी.

क्यों मजबूर हो गए थे वो दोनों किआरा की हत्या करने पर? जानेंगें कहानी के अंतिम भाग में.

मैं चीज बड़ी हूं मस्त मस्त – भाग 1

2 मई, 2014 को दोपहर 11 बजे दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के थाना बिंदापुर के ड्यूटी औफिसर को पुलिस कंट्रोलरूम द्वारा वायरलैस से एक  मैसेज मिला. मैसेज यह था कि मटियाला इलाके के सुखराम पार्क स्थित मकान नंबर आरजेड-54, 55 के बंद कमरे से बदबू आ रही है. ड्यूटी औफिसर ने यह सूचना थानाप्रभारी किशोर कुमार को बताई तो वह समझ गए कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है.

उन का अनुभव था कि बंद कमरों से बदबू आने के ज्यादातर मामलों में कमरे से लाश ही मिलती है. इसलिए यह खबर मिलते ही वह एसआई सुरेंद्र सिंह को साथ ले कर सूचना में दिए पते पर रवाना हो गए. इस के कुछ देर बाद इंसपेक्टर सत्यवीर जनौला भी सुखराम पार्क की तरफ निकल गए.

पुलिस अधिकारी जब उपरोक्त पते पर पहुंचे तो वहां अशोक कुमार सेठ नाम का आदमी मिला. वही उस मकान का मालिक था. अशोक कुमार अपने मकान में एक जनरल स्टोर चलाता था. पुलिस को फोन उस के बेटे अंकुश ने किया था. अशोक पुलिस को अपने मकान के उस कमरे के पास ले गया, जहां से तेज बदबू आ रही थी. पुलिस ने भी कमरे के पास पहुंच कर बदबू महसूस की. उस कमरे के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था.

थानाप्रभारी ने अशोक कुमार सेठ से पूछा, ‘‘इस कमरे में कौन रहता था?’’

‘‘सर, इस कमरे में एक लड़की और 2 लड़के रहते थे. 2 दिन से ये दिखाई नहीं दे रहे. आज हमें कमरे से बदबू आती महसूस हुई तो शक हुआ. फिर 100 नंबर पर फोन कर दिया.’’ अशोक ने बताया.

थानाप्रभारी ने ताला तोड़ने से पहले क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी वहां बुला लिया. टीम और वहां मौजूद लोगों के सामने पुलिस ने उस कमरे का ताला तोड़ा तो गंध और तेज महसूस हुई. पुलिस की निगाह फर्श पर बहते काले रंग के द्रव पर गई. वह द्रव कमरे में बनी हुई अलमारी से आ रहा था.

पुलिस को लगा कि अलमारी में ही कुछ रखा है, जहां से यह द्रव रिस कर आ रहा है. अलमारी पर लकड़ी का दरवाजा लगा था और वह बाहर लगी सिटकनी से बंद था. मन में आशंका रखते हुए थानाप्रभारी ने वह अलमारी खुलवाई. अलमारी खुलते ही बदबू का भभका आया और जब सामने देखा तो सब की आंखें खुली की खुली रह गईं.

अलमारी के बीच वाले खाने में एक लड़की की लाश रखी थी. लाश देखते ही मकान मालिक अशोक कुमार बोल पड़ा, ‘‘सर, यह लाश तो उसी लड़की की है जो इस कमरे में रहती थी.’’

उन्होंने लड़की का नाम किआरा पारकर बताया.

क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम द्वारा अपना काम निपटाने के बाद थानाप्रभारी किशोर कुमार ने अलमारी से लाश निकलवा कर उस का निरीक्षण किया. लाश सड़ी हुई अवस्था में थी. इस से लग रहा था कि उस की हत्या कई दिन पहले की गई है.

उस के शरीर पर कोई घाव का निशान भी नहीं दिखा तो अनुमान लगाया कि उस की हत्या गला दबा कर की होगी या फिर उसे कोई जहरीला पदार्थ दिया होगा. मकान मालिक से पुलिस को यह पता लग ही गया था कि लाश 18 वर्षीया किआरा पारकर की है. तब पुलिस ने लाश का पंचनामा करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, हरिनगर भेज दिया.

यह काररवाई करने के बाद पुलिस ने अशोक कुमार से बात की तो उस ने बताया कि कमरा किराए पर लेते समय किआरा ने उसे अपने आधार कार्ड की कौपी दी थी. उस लड़की द्वारा दी गई आधार कार्ड की कौपी अपने कमरे से ला कर उस ने थानाप्रभारी को दे दी.

आधार कार्ड की उस फोटोकौपी पर उस का पता मकान नंबर 93, सेक्टर-10, बराई रोड, गुड़गांव, हरियाणा लिखा था. अशोक ने बताया कि किआरा के साथ जो 2 लड़के रहते थे, उन के नाम गुलफाम और रफीक थे. दोनों की ही उम्र 18 साल के आसपास थी.

अशोक से बात करने के बाद पुलिस ने उस कमरे की तलाशी ली. वहां से एक छोटी पौकेट डायरी मिली. उस डायरी में गुलफाम और रफीक के फोन नंबर लिखे थे. थानाप्रभारी ने उन दोनों नंबरों को उसी समय मिलाया तो वे दोनों ही बंद मिले.

घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस थाने लौट गई और अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या कर लाश छिपाने का मामला दर्ज कर लिया. थानाप्रभारी ने 18 वर्षीय लड़की की लाश बरामद करने की जानकारी डीसीपी को भी दे दी.

डीसीपी सुमन गोयल ने हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए थानाप्रभारी किशोर कुमार की देखरेख में एक पुलिस टीम बनाई. पुलिस टीम में इंसपेक्टर सत्यवीर जनौला, सबइंसपेक्टर शक्ति सिंह, सुरेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल भूपसिंह, नरेश, विजयपाल, कांस्टेबल अनिल कुमार, दिनेश, अरविंद आदि को शामिल किया गया.

पुलिस मरने वाली युवती की शिनाख्त कर ही चुकी थी और यह आशंका भी हो रही थी कि उस के साथ रहने वाले लड़कों ने ही उस की हत्या की होगी क्योंकि वे कमरे से फरार थे और उन के फोन भी स्विच्ड औफ आ रहे थे. पुलिस को मरने वाली युवती किआरा का पता मिल चुका था जबकि उस के साथ रहने वाले रफीक और गुलफाम के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई थी कि वे कहां के रहने वाले हैं.

एसआई शक्ति सिंह के नेतृत्व में एक टीम किआरा के पते पर सेक्टर-10, गुड़गांव भेज दी गई. इस पते पर शांति भवन ट्रस्ट औफ इंडिया नाम का एक अनाथालय चल रहा था. शक्ति सिंह ने अनाथालय के संचालकों को किआरा पारकर के आधार कार्ड की कौपी दिखाते हुए उन से उस के बारे में पूछा.

वह फोटोकौपी देखते ही संचालकों ने बताया कि किआरा पारकर इसी अनाथालय में रहती थी जो अब यहां से चली गई है. यहां उस का चालचलन अच्छा नहीं था. उसे हम ने आगरा भेजा था. वहां से वह भाग गई. उसे उस की मां ने इस अनाथालय में भरती कराया था, लेकिन अब मां भी गुजर चुकी है. इतना पता है कि दिल्ली के घिटोरनी गांव में उस की नानी रहती हैं. वही उस से कभीकभी मिलने आती थीं.

पुलिस ने संचालकों से रफीक और गुलफाम के बारे में पूछा तो बताया गया कि ये दोनों भी इसी अनाथालय में रहते थे. किआरा हत्याकांड की जो धुंधली तसवीर पुलिस के दिमाग में बनी हुई थी, अनाथालय से मिली जानकारी के बाद वह तसवीर साफ नजर आने लगी थी. यानी किआरा की उन दोनों लड़कों से जानपहचान पुरानी थी.

एसआई शक्ति सिंह को यह पता चल ही चुका था कि किआरा की नानी घिटोरनी गांव में रहती हैं. उन से बात करने के लिए वह घिटोरनी चले गए. थोड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने किआरा की नानी का पता लगा ही लिया. उन से बातचीत करने के बाद भी उन्हें किआरा के बारे में कोई बहुत ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी.

थाने लौट कर शक्ति सिंह ने सारी जानकारी थानाप्रभारी को दे दी. उधर इंसपेक्टर सत्यवीर जनौला ने फरार युवकों रफीक और गुलफाम के फोन नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया था. दोनों ही फोन बंद थे. लेकिन मई के पहले हफ्ते में उन में से एक फोन औन हो गया. तभी पता चल गया कि उस की लोकेशन छत्तीसगढ़ में है. वह लोकेशन स्थिर नहीं आ रही थी. बदलती लोकेशन से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह दिल्ली की तरफ आ रहा है.

क्या सच में किआरा की हत्या रफीक और गुलफाम ने ही की थी? जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग.

रेशमा की हंसी ने बुलाई मौत

उत्तर प्रदेश के महानगर मुरादाबाद के डीआईजी निवास के नजदीक गौतम नगर की गली नंबर-9 में नन्हे अपनी पत्नी रेशमा और ढाई साल के बेटे व मां के साथ 2 कमरों के मकान में रहता था. 8 मई, 2023 की रात 11 बजे की बात है. नन्हे के पड़ोस में रहने वाली नाजमा की रसोई के शेड पर रात के करीब 11 बजे कुछ गिरने की आवाज आई, जिस से रसोई के ऊपर की सीमेंट की चादरें तक टूट गईं. नाजमा समझी कि घर में चोर आ गए, उस ने अपने परिवार के लोगों को उठाया और जोर से ‘चोर…चोर’ कहते हुए शोर मचा दिया.

शोर सुन कर आसपास के घरों से लोग निकल आए. उन्होंने तभी देखा कि नन्हे अपनी पत्नी रेशमा के बाल पकड़ कर खींचता हुआ अपने घर में ले गया था. उधर नाजमा व अन्य लोगों ने देखा कि रसोई का शेड टूटा हुआ नीचे पड़ा है, वहां पर खून भी पड़ा था. इस के अलावा जिधर से नन्हे अपनी पत्नी रेशमा को घसीट कर ले गया था, वहां पर खून की बूंदें दिखाई दे रही थीं. इकट्ठा हुए लोग यह जानने के लिए नन्हे के घर पहुंच गए थे कि आखिर हुआ क्या है.

खून देख कर लोगों को हुआ शक

नन्हे के घर का गेट अंदर से बंद था. लोगों ने नन्हे को आवाज लगाई और गेट खोलने को कहा. नन्हे बोला कुछ नहीं हुआ मेरी पत्नी रेशमा ने गुस्से में अपनी कलाई की नस काट ली है, वह अस्पताल गई है. पड़ोसी नाजमा ने आवाज दी, ‘‘नन्हे गेट तो खोल, तूने मेरी रसोई का शेड तोड़ दिया है, उसे अब कौन बनवाएगा.’’

इस के बाद नन्हे ने अपने घर का गेट खोल दिया. गेट खुलते ही वहां मौजूद लोग अंदर घर में दाखिल हो गए. उन्होंने नन्हे की पत्नी रेशमा को पूरे घर में तलाशा, वह नहीं मिली. लोगों ने इतना जरूर देखा कि मकान के सेप्टिक टैंक (गटर) के पास खून की बूंदें व खून साफ करने के निशान थे. लोगों को मामला गंभीर दिखा तो उसी समय किसी ने थाना सिविल लाइंस को फोन कर दिया.

उस समय एसएचओ गजेंद्र सिंह रात्रि गश्त की तैयारी कर रहे थे ड्राइवर गाड़ी में बैठा उन के आने का इंतजार कर रहा था. एसएचओ कमरे से बाहर आए. तभी ड्ïयूटी औफिसर ने उन्हें डीआईजी साहब के बंगले के पास गौतम नगर गली नंबर 9 में लोगों की भीड़ जमा होने की सूचना दी.

यह सुन कर एसएचओ सीधे गौतम नगर चले गए. पुलिस को देखते ही लोग अपनेअपने घरों में चले गए. कुछ लोग छतों पर खड़े हुए थे. एसएचओ गजेंद्र सिंह ने पूछा कि नन्हे का घर कौन सा है? लोगों ने इशारे से बताया, ‘‘साहब वो है.’’

नन्हे के मकान का गेट खुला था. पुलिस जब उस के घर में पहुंची तो घर में जगहजगह खून बिखरा पड़ा था. एक छोटा दोढाई साल का बच्चा सोता मिला. पूरा घर खाली था. पुलिस को देख नन्हे के घर में कुछ बुजुर्ग लोग भी आ गए थे. उन्होंने बताया, ‘‘साहब, नन्हे व उस की पत्नी रेशमा में झगड़ा हुआ था, सेप्टिक टैंक के पास ज्यादा खून पड़ा है.’’

एसएचओ गजेंद्र सिंह ने एक सिपाही से कह कर गटर का ढक्कन उठवाया तो उस में कंबल व अंदर कपड़े पड़े थे. उन्हें हटा कर देखा तो वहां मौजूद पुलिस व लोग सन्न रह गए. गटर के अंदर रेशमा की खून से लथपथ लाश पड़ी हुई थी. पुलिस ने शव को गटर से बाहर निकाला. रेशमा का गला काटा गया था.

नन्हे आया पुलिस हिरासत में

इस हत्याकांड की सूचना एसएचओ गजेंद्र सिंह ने अपने उच्च अधिकारियों को दी. सूचना मिलते ही मुरादाबाद के एसएसपी हेमराज मीणा, एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया, सीओ अर्पित कपूर भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने भी घटनास्थल की जांच की.

पुलिस के आने से पहले हत्यारा नन्हे घर से भाग गया था. एसएसपी हेमराज मीणा ने सीओ अर्पित कपूर के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया. पुलिस टीम आरोपी नन्हे की तलाश में जुट गई. पुलिस को 9 मई, 2023 को सफलता मिल गई.

मुखबिर की सूचना पर टीम ने भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी के केंद्रीय पुलिस अस्पताल के सामने से नन्हे को उस समय धर दबोचा, जब वह बाहर भागने की फिराक में था. थाना सिविल लाइंस में उच्च अधिकारियों के सामने नन्हे से पूछताछ की गई तो उस ने पत्नी की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने पत्नी रेशमा के मर्डर की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली—

रेशमा नन्हे की थी दूसरी बीवी

मुरादाबाद शहर के गौतम नगर निवासी नन्हे की पहली शादी काशीपुर निवासी नाजनीन से हुई थी. नन्हे ईरिक्शा चलाता था. पहली पत्नी नाजनीन से 2 बेटियां पैदा हुईं. किसी वजह से दोनों के बीच अकसर झगड़ा होने लगा तो एक दिन गुस्से में नाजनीन अपनी छोटी बेटी को ले कर अपने मायके काशीपुर चली गई. उस ने नन्हे के साथ रहने को मना कर दिया. बड़ी बेटी नन्हे की बड़ी बहिन के पास है.

पत्नी के वापस न आने की शिकायत नन्हे ने थाना सिविल लाइंस में भी की. पुलिस ने नाजनीन को काशीपुर से थाने बुलाया. थाने में ही नाजनीन ने पति के साथ न रहने की बात दोहरा दी. तब नन्हे ने उसे तलाक दे दिया. यह बात करीब ढाई साल पहले की है.

पत्नी से तलाक के बाद नन्हे अकेला हो गया. फिर करीब 2 साल पहले जिला बिजनौर के कस्बा नेहटौर के कासमपुर लेखराज बाग निवासी रेशमा से निकाह कर लिया था. रेशमा भी पहले से शादीशुदा थी. उस के भी 2 बच्चे थे.

रेशमा की पहले लव मैरिज हुई थी. बदायूं निवासी कन्हैया नाम के युवक के पिता नेहटौर, बिजनौर में लेखराज बाग में आम के बाग की रखवाली करते थे. आम के बाग में कन्हैया भी अपने पापा के साथ ही रहता था.

कन्हैया गठे शरीर का गबरू इंसान था. वह गांव में स्थित दुकान से अकसर घरेलू खानेपीने का सामान लेने जाता था. वहीं पर खूबसूरत रेशमा से उस की आखें चार हुईं. दोनों ही एकदूसरे को चाहने लगे. बाग का एकांत क्षेत्र दोनों के मिलने के लिए काफी मुफीद था. नैन मटक्का होतेहोते दोनों में शारीरिक संबंध बन गए थे.

अवैध संबंध हो जाने के बाद एक दिन कन्हैया व रेशमा दोनों गायब हो गए थे. उस के बाद दोनों ने लव मैरिज कर ली थी. रेशमा उस के साथ हंसीखुशी रह रही थी. वह 2 बच्चों की मां बन चुकी थी. बाद में रेशमा अकसर अपने मायके में रहने लगी थी. यह बात कन्हैया को पसंद नहीं थी. जिस कारण कन्हैया व रेशमा में झगड़ा रहने लगा था. रेशमा का बड़ा बेटा अपने पिता कन्हैया से बहुत लगाव रखता था.

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रेशमा ने भी छोड़ रखा था पहला पति

रेशमा के अब्बू मेहंदी हसन का पहले ही इंतकाल हो चुका था. रेशमा का छोटा बेटा उस समय गोद में था. उस के बाद से रेशमा अपनी ससुराल नहीं गई थी. कन्हैया व रेशमा के बीच संबंध बिलकुल खत्म हो गए थे.

उधर रेशमा की अम्मी नसीमा ने अपने एक परिचित की मदद से नन्हे की मां छोटी से संपर्क साधा कि तुम्हारा बेटा भी अपनी पहली पत्नी नाजनीन को तलाक दे चुका है, मेरी बेटी रेशमा भी अपने पहले पति से अलग हो गई. इसलिए क्यों न नन्हे और रेशमा का निकाह कर दिया जाए.

करीब 2 साल पहले नन्हे ने नेहटौर जिला बिजनौर की रेशमा से निकाह कर लिया. नन्हे रेशमा को पा कर बहुत खुश था, क्योंकि रेशमा बला की खूबसूरत थी. नन्हे रेशमा से बहुत प्यार करता था. नन्हे ईरिक्शा चला कर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने में लगा रहता था. थकाहारा नन्हे घर आ कर खाना खा कर सो जाता था.

रेशमा कहीं अपने घर या रिश्तेदारों में हंसहंस कर फोन पर बात करती तो नन्हे को शक पैदा होता था कि उस का किसी गैरमर्द से जरूर कोई चक्कर चल रहा है. इसी बात को ले कर अकसर नन्हे और रेशमा में झगड़ा होता रहता था. शक आदमी को पागल बना देता है, ऐसा ही नन्हे के साथ हुआ था. नन्हे द्वारा पत्नी के चरित्र पर शक करने के बाद रेशमा ने भी नन्हे से दूरी बनानी शुरू कर दी. नन्हे रेशमा की बेवफाई से परेशान था. सुंदर होना भी उस के लिए एक अभिशाप बन गया था.

आदमी की फितरत ही कुछ ऐसी होती है कि सुंदर पत्नी यदि किसी से हंस कर बात कर ले या फोन पर ज्यादा परिवार वालों से बात कर ले तो वह शक करने लगता है. नन्हे के मन में शक ज्यादा गहराने लगा था. घर में आए दिन झगड़े होने लगे थे.

पति को होने लगा रेशमा पर शक

8 मई, 2023 की रात करीब 11 बजे से पहले भी रेशमा के चरित्र को ले कर दोनों में झगड़ा हुआ था. नन्हे का शक इतना बढ़ गया था कि वह कुछ भी करने को तैयार था. उस दिन नन्हे की मां अपनी छोटी लडक़ी शहनाज की ससुराल काशीपुर, उत्तराखंड गई हुई थी. घर में रेशमा के पहले पति कन्हैया से पैदा ढाई साल का बेटा ही मौजूद था.

उस दिन नन्हे खाना खा कर सोने चला गया था. उस की पत्नी रेशमा भी अपने बच्चे के साथ दूसरे कमरे में सोने चली गई थी. उधर नन्हे की नींद जैसे कोसों दूर हो चुकी थी. उसे नींद नहीं आ रही थी. मन में तरहतरह के विचार आ रहे थे.

वह उठा व घर में रखा छुरा उठा कर दूसरे कमरे में सो रही रेशमा के पास पहुंच गया. उस ने उस की गरदन जैसे ही छुरा से रेतनी शुरू की रेशमा की नींद खुल गई. पूरा जोर लगा कर रेशमा ने नन्हे को पलंग से नीचे गिरा दिया और वह कमरे से बाहर आ गई थी.

घायल अवस्था में छत से कूद गई थी रेशमा

जान बचाने का रास्ता नहीं था. घायल रेशमा भाग कर मकान की सीढिय़ों पर चढ़ गई. वहां से उस ने बराबर में रहने वाली नाजमा के घर में छलांग लगा दी. वह घर में न गिर कर गली में गिर गई. ठीक उसी समय नन्हे भी पीछा करते हुए वहां पहुंचा. उस ने भी पड़ोसी के घर में छलांग लगा दी. वह नाजमा की रसोई, जिस की छत सीमेंट के चादरों की थी, पर जा कर गिरा. उस के कूदते ही रसोई का शेड धड़ाम से टूट कर नीचे गिरा. बहुत जोर की आवाज हुई.

शोर सुन कर नाजमा ने समझा कि घर में चोर आ गए हैं, उस ने शोर मचा दिया. चोरचोर सुनते ही पड़ोसी लोग अपनेअपने घरों से निकल आए. नाजमा और पड़ोसियों ने देखा नन्हे रेशमा के बाल पकड़ कर खींचते हुए अपने घर में ले गया. वहां घायल रेशमा नन्हे के पैरों पर पड़ कर अपनी जान की भीख मांगने लगी. नन्हे पर भूत सवार था. उस ने एक झटके में रेशमा का गला रेत कर मौत के घाट उतार दिया.

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आननफानन में नन्हे ने अपने सेप्टिक टैंक (गटर) का ढक्कन उठा कर रेशमा के शव को उस में डाल कर ऊपर से कंबल व अन्य कपड़े डाल दिए. जो खून घर में पड़ा था जो उसे दिखाई दिया, उसे उस ने साफ कर दिया था.

मोहल्ले वाले जब पुलिस बुलाने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस के आने से पहले ही नन्हे फरार हो गया था. पुलिस ने रेशमा की हत्या की सूचना उस के मायके वालों को दी. रेशमा की अम्मी नसीमा सूचना मिलते ही अपने बड़े बेटे नाजिम व छोटी बेटी व बहनोई को ले कर मुरादाबाद आ गई. रेशमा की लाश देख कर घर के लोगों का रोरो कर बुरा हाल था.

रेशमा की अम्मी नसीमा ने थाना सिविल लाइंस में नन्हे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई. पोस्टमार्टम के बाद रेशमा का शव अपने घर नेहटौर ले कर चली गई थी. साथ में रेशमा का ढाई साल का बेटा भी अपने साथ ले गई थी. वहां जा कर उन्होंने रेशमा को दफन कर दिया था. नन्हे से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे 9 मई, 2023 को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.