विनोद उपाध्याय : एक थप्पड़ ने बनाया गैंगस्टर – भाग 1

मुखबिर के जरिए एसटीएफ को पक्की सूचना मिली थी कि विनोद सुलतानपुर के रास्ते प्रयागराज भागने की कोशिश में है. सूचना मिलते ही  डीएसपी सिंह भी सुलतानपुर पहुंच चुके थे और टीम के साथ उसे हनुमानगंज गोपालपुरवा इलाके में घेर लिया.

खुद को पुलिस टीम से घिरा देख माफिया विनोद पसीना पसीना हो गया और किसी कीमत पर पुलिस के हाथों चढऩा नहीं चाहता था. उस ने पुलिस के ऊपर स्टेनगन से फायर झोंक दिया. इंसपेक्टर हेमंत सिंह और हैडकांस्टेबल शशिकांत बालबाल बचे. एसटीएफ ने भी अपनी सुरक्षा में जबावी काररवाई शुरू कर दी.

गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा था जैसे दीपावली की आतिशबाजी हो रही हो. गोलियों की आवाज सुन कर गांव वालों की नींद टूट गई थी. वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि रात के समय कौन आतिशबाजी कर रहा है.

इधर जब दूसरी ओर से फायरिंग होनी बंद हुई, तब एसटीएफ सावधानी बरतते हुए दबेपांव मिट्टी के टीले के पीछे पहुंची तो देखा हाथ में स्टेनगन लिए माफिया विनोद लुढ़का पड़ा था. पुलिस विनोद के पास पहुंची तो देखा कि गोलियों से उस का जिस्म छलनी हो चुका था, लेकिन अभी भी उस की हलकी हलकी सांसें चल रही थीं.

एसटीएफ ने तुरंत सरकारी एंबुलेंस को फोन कर मौके पर बुलाया और उसे सरकारी अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया था.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रहने वाला माफिया विनोद कुमार उपाध्याय पिछले 17 सालों से आतंक का पर्याय बना हुआ था. वह बहुजन समाज पार्टी के बैनर तले विधायक का चुनाव भी लड़ चुका था. राज्य के टौप टेन अपराधियों में शुमार था, जिस की गोरखनाथ थाने में हिस्ट्रीशीट नंबर-1 बी दर्ज थी.

इस पर गोरखपुर के एडीजी (जोन) डा. के.एस. प्रताप कुमार ने एक लाख रुपए का इनाम रखा था. यह इनाम गोरखपुर के गुलरिहा थाने में दर्ज एक गंभीर मामले में वांछित होने पर रखा गया था और पिछले 8 महीने से पुलिस को विनोद उपाध्याय की तलाश जारी थी.

एडीजी (जोन) डा. के.एस. प्रताप कुमार ने नवयुवकों के रोलमाडल बने माफिया विनोद कुमार उपाध्याय को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक सिंह को सौंपी थी. उन्होंने अपने कुछ तेजतर्रार और पुलिस अधिकारियों को अपनी टीम में शामिल किया था, जो विनोद की जिंदगी का एकएक राज जानते थे.

इस बार उस की युद्ध स्तर पर तलाश हो रही थी और उन के बीच में लड़ाई आरपार की थी. मुख्यमंत्री का सख्त आदेश पा कर पुलिस अधिकारी सक्रिय हो गए थे. इस मिशन पर स्थानीय पुलिस के साथसाथ एसटीएफ को भी लगा दिया गया था और मिशन अतिगोपनीय रखा गया था, ताकि चाटुकार पुलिसकर्मी गुप्त मिशन की जानकारी डौन विनोद तक पहुंचा न सकें.

गोपनीय औपरेशन की काररवाई एडीजी (जोन) प्रताप कुमार के साथसाथ एसटीएफ के हैड अमिताभ यश के हाथों संचालित हो रही थी और दोनों पुलिस अधिकारियों का दिशानिर्देश डीएसपी दीपक को मिल रहा था. इस मिशन में डीएसपी दीपक सिंह के साथ इंसपेक्टर हेमंत सिंह और हैडकांस्टेबल शशिकांत भी शामिल थे.

कुख्यात गैंगस्टर कैसे मिला मिट्टी में

मुखबिर के जरिए एसटीएफ को माफिया डौन विनोद उपाध्याय के लखनऊ या प्रयागराज में छिपे होने की सूचना मिल रही थी. अपनी तरफ से पुलिस ने इन्हीं दोनों जिलों में छापेमारी तेज कर दी थी.

4 जनवरी, 2024 को फिर मुखबिर के जरिए एसटीएफ को सूचना मिली कि डौन उपाध्याय लखनऊ में छिपा था और वह पुलिस से बचने के लिए छिपतेछिपाते प्रयागराज की ओर अपनी स्विफ्ट कार से अकेला जा रहा है. उस की कार में 9 एमएम की फैक्ट्री मेड स्टेनगन भी है.

सूचना अहम थी. एसटीएफ टीम किसी भी सूरत में माफिया विनोद को इस बार हाथ से निकलना नहीं देना चाहती थी. इसलिए सूचना मिलते ही डीएसपी दीपक सिंह सचेत हो गए और उन्होंने अपनी टीम को सतर्क कर दिया था.

यही नहीं, पुलिस अधिकारी बुलेटप्रूफ जैकेट और एके 47 असलहे से लैस हो गए थे ताकि किसी काररवाई का मुंहतोड़ जबाव दिया जा सके. आखिर सुलतानपुर के हनुमानगंज गोपालपुरवा इलाके में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की टीम ने डौन विनोद उपाध्याय को मुठभेड़ के बाद ढेर कर दिया. उस के मरने पर पुलिस ने राहत की सांस ली.

पुलिस और माफिया के बीच करीब 8 राउंड फायरिंग हुई थी. थोड़ी ही देर में माफिया विनोद कुमार उपाध्याय के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर पूरे जिले में फैल गई थी.

पोस्टमार्टम के बाद विनोद के शव को उस के घर वालों को सौंप दिया गया. फिलहाल चेले का भी अंत वैसा ही हुआ, जैसा उस के गुरु श्रीप्रकाश शुक्ला का हुआ था. आखिर विनोद उपाध्याय एक सीधेसादे नौजवान से आतंक का पर्याय कैसे बन गया था, उस के सिर पर किनकिन बाहुबलियों का हाथ था, उस ने कैसे माफियागिरी से राजनीति का सफर तय किया था? आइए जानते हैं—

विनोद श्रीप्रकाश शुक्ला को मानता था आदर्श

विनोद उपाध्याय के पिता राजकुमार उपाध्याय मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के मुइयां माया बाजार के रहने वाले थे. वह करीब 35 साल पहले पत्नी शोभा को साथ ले कर गोरखपुर आ गए और गोरखनाथ थाना क्षेत्र के धर्मशाला बाजार में एक किराए का कमरा ले कर रहने लगे.

जीवनयापन के लिए उन्होंने एक सुनार की दुकान पर मुनीम की नौकरी कर ली. आगे चल कर वह 3 बच्चों के पिता बने. उन का जीवन खुशियों से भर गया था और घर में किसी चीज की कमी नहीं थी.

राजकुमार जिस सुनार के यहां नौकरी करते थे, वह सूद पर पैसे बांटने का भी काम करता था. जिस का लेखाजोखा वही रखते थे. जब इस गोरखधंधे में वह पूरी तरह पारंगत हो गए तो आगे चल कर उन्होंंने भी यही धंधा शुरू किया. इस धंधे में मुनाफा ही मुनाफा था.

देखते ही देखते वह सूद कारोबारी बन गए और छोटे कारोबारियों को सूद पर पैसे बांटने लगे. जो भी कारोबारी पैसे देने से आनाकानी करता, वसूलने के लिए वह अपने बेटे विनोद उपाध्याय को लगाते थे. विनोद दबंगई से उस के साथ पेश आता था और रकम वसूल हो जाती थी.

दरअसल, 21 साल की उम्र में ही विनोद उपाध्याय ने जुर्म की दुनिया में पांव रख दिया था. उस ने कुख्यात माफिया डान श्रीप्रकाश शुक्ला को अपना आदर्श और गुरु मान लिया था, जिस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ली थी.

शक्की शौहर की भयानक करतूत : पत्नी और मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 4

22 जून, 2023 को गाजेबाजे के साथ निकासी हुई और शाम 4 बजे बारात गंगापुरा के लिए रवाना हुई. रात 8 बजे वेदराम व उस के परिजनों ने बारात का स्वागत किया. बारात में शिववीर ने जम कर डांस किया. डीजे की धुन पर दूल्हा दुलहन भी खूब थिरके.

शिववीर वैसे तो खुश था, लेकिन छोटीछोटी बातों को ले कर वह लड़की पक्ष के लोगों से भिड़ जा रहा था. कभी लाइट को ले कर तो कभी पानी को ले कर वह नाराज हो रहा था. घर वालों के समझाने पर वह चुप हो जाता. डीजे बंद होने पर तो वह इतना नाराज हुआ कि वह रात में ही मोटरसाइकिल से घर वापस आ गया.

23 जून की सुबह वेदराम व उस की पत्नी सुषमा ने अपनी लाडो को लाल जोड़े में आंसुओं के बीच विदा किया. दोपहर बाद बारात गोकुलपुरा गांव वापस आ गई. उस के बाद ज्यादातर रिश्तेदार तो चले गए, लेकिन सोनू की बहन प्रियंका, जीजा सौरभ, मामी सुषमा तथा दोस्त दीपक उपाध्याय रुक गए. शाम तक मुंहदिखाई व अन्य रस्मेें होती रहीं.

ढोलक की थाप पर नाचगाना भी हुआ. फिर देर रात तक डीजे पर डांस होता रहा. सोनू, सोनी भी खूब थिरके. दीपक, सौरभ व शिववीर ने भी खूब डांस किया.

क्या हुआ था नशीली कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद

रात 12 बजे कर्ज से परेशान शिववीर कोल्ड ड्रिंक लाया. बस यहीं से उस ने अपने मंसूबों को अंजाम देना शुरू कर दिया. उस ने चालाकी से कोल्ड ड्रिंक में नशीली गोलियों का पाउडर मिला दिया. फिर एकएक गिलास सभी को थमा दिया. सभी कोल्ड ड्रिंक पीने लगे. कोल्ड ड्रिंक पीने के दौरान ही सोनी की मां सुषमा की काल आई. सोनी ने काल रिसीव की और बताया कि ससुराल में सब ठीक है. अभी चंद मिनट पहले ही डांस बंद हुआ है. जेठजी (शिववीर) कोल्ड ड्रिंक ले कर आए हैं, हम सभी पी रहे हैं.

इधर कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद सौरभ, भुल्लन व दोस्त दीपक उपाध्याय आंगन में जा कर लेट गए तथा सोनू की मामी सुषमा, भाभी डौली, बहन प्रियंका तथा मां शारदा देवी बरामदे में सो गईं. बरामदे के पास ही सुभाषचंद्र खटिया पर लेट गए. सोनू व उस की पत्नी सोनी सुहागरात मनाने छत पर बने कमरे में जा कर लेट गए. उन्होंने जीने का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.

नशीली कोल्ड ड्रिंक पी कर कुछ देर बाद सभी सो गए. लेकिन शिववीर की आंखों से नींद कोसों दूर थी. रात 3 बजे के बाद वह कमरे में आया. उस ने छिपा कर रखा तमंचा निकाला, फिर लोड कर कमर में खोंस लिया.

इस के बाद फरसा ले कर कमरे से बाहर आया. चूंकि जीने का दरवाजा बंद था, अत: वह दीवार के सहारे सीढ़ी लगा कर छत पर पहुंचा. कमरे के अंदर सोनू व सोनी अस्तव्यस्त हालत में लेटे थे. शायद वे सुहागरात मनाने के बाद सुख की नींद सो रहे थे. शिववीर ने एक घृणाभरी नजर दोनों पर डाली फिर फरसे से गले पर वार कर दोनों को मार डाला.

Ghatna Sthan Par Pada Nav-Dampati Ke Shav

घटनास्थल पर पड़े नव दंपति के शव

नवदंपति की हत्या करने के बाद शिववीर जीने का दरवाजा खोल कर आंगन में आया. यहां भाई भुल्लन, बहनोई सौरभ व भाई का दोस्त दीपक सो रहा था. शिववीर ने फरसे से गरदन व चेहरे पर बारीबारी से वार कर तीनों को मौत की नींद सुला दिया.

5 हत्याएं करने के बाद शिववीर आंगन से बरामदे में आया. यहां उस ने फावड़े से अपनी पत्नी डौली व मामी सुषमा पर वार किया. डौली का पैर तथा सुषमा का हाथ जख्मी हो गया. वे दोनों चीखीं तो सुभाष, उस की पत्नी शारदा तथा बेटी प्रियंका जाग गईं.

उन तीनों ने शिववीर का रौद्र रूप देखा तो वे कांप उठीं. फिर भी वह उसे पकडऩे दौड़ीं. इसी बीच शिववीर ने फरसे से पिता पर वार कर दिया. लेकिन फरसा घूम जाने से उस की जान बच गई. केवल हाथ में ही मामूली चोट आई.

हिम्मत जुटा कर सुभाष, शारदा व प्रियंका ने शिववीर को पकडऩे का प्रयास किया तो वह मकान के पीछे की ओर भागा. परिवार का कत्ल करने के बाद शिववीर ने कमर में खोंसा तमंचा निकाला और कनपटी से सटा कर फायर कर दिया. फायर की आवाज सुन कर प्रियंका व शारदा वहां पहुंचीं तो शिववीर की मौत हो चुकी थी. मांबेटी तब चीखनेचिल्लाने लगीं.

शारदा व प्रियंका की चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग आ गए. उन्होंने घर के अंदर का खौफनाक मंजर देखा तो सभी की रूह कांप उठी. उस के बाद तो गांव में सनसनी फैल गई. गोकुलपुरा ही नहीं, बल्कि आसपास के गांव के लोग उमड़ पड़े.

पुलिस को सूचना मिली तो आला अधिकारी भी मौके पर आ गए और जांच में जुट गए. प्रिंट और इलैक्ट्रौनिक मीडिया के पत्रकारों का जमावड़ा भी शुरू हो गया.

Deepak Kumar (I.G.)

आईजी दीपक कुमार

पुलिस अधिकारियों ने सब से पहले घायलों को अस्पताल भेजा, फिर जरूरी काररवाई पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया. उस के बाद घटना के संबंध में घर के मुखिया सुभाष से जानकारी हासिल की.

Rajesh Kumar (A.S.P.)

एएसपी राजेश कुमार

पूछताछ के बाद किशनी थाने के एसएचओ अनिल कुमार ने घर के मुखिया सुभाषचंद्र यादव की तहरीर पर बड़े शिववीर के खिलाफ हत्या का मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन आरोपी द्वारा भी आत्महत्या कर लेने से उन्होंने फाइल बंद कर दी.

कथा संकलन तक डौली और सुषमा का इलाज सैफई के अस्पताल में चल रहा था. उन की जान तो बच गई, लेकिन दिल के जख्म शायद ही जीवन में भर सकें.

प्रियंका का सुहाग भाई ने ही उजाड़ दिया. उस के जीवन में अब शायद ही कभी बहार आए. सुभाष यादव व उन की पत्नी शारदा भी पश्चाताप के आंसू बहा रहे थे. उन का कहना था कि जब परिवार ही नष्ट हो गया तो वह जिंदा रह कर क्या करेंगे?

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मौसी के हुस्न का शिकारी

नय अपने दोस्त पिंटू के साथ होटल खोलना चाहता था, इसलिए उसे 15 हजार रुपयों की सख्त जरूरत थी. उस ने पिंटू को पूरा भरोसा दिलाया था कि रुपयों  की व्यवस्था कर लेगा. क्योंकि उसे विश्वास था कि उस की मौसी इंद्रा उसे रुपए दे देंगी. लेकिन मौसी ने तो रुपए देने से साफ मना कर दिया था. यह बात विनय को बड़ी नागवार लगी थी, क्योंकि मौसी के इस तरह मना कर देने से दोस्त के सामने उस की बड़ी बेइज्जती हुई थी.

इस बात को ले कर पिंटू अकसर उस की हंसी उड़ाने लगा था. मजबूरी में विनय खून का घूंट पी कर रह जाता था. तब उसे मौसी पर बहुत गुस्सा आता था. धीरेधीरे उस का यह गुस्सा इस कदर बढ़ता गया कि उस ने धोखा देने वाली मौसी को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया. वह उस की हत्या कर के उस के घर में रखी नकदी और गहने लूट लेना चाहता था.

हमेशा की तरह 27 जनवरी को जब पिंटू ने विनय को चिढ़ाने के लिए रुपयों के बारे में पूछा तो उस ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘चिंता मत करो दोस्त, अब बहुत जल्द रुपयों की व्यवस्था हो जाएगी.’’

‘‘वह कैसे, मौसी रुपए देने को तैयार हो गई क्या? पहले तो उस ने मना कर दिया था, अब कैसे राजी हो गई?’’ पिंटू ने उसे जलाने के लिए मुसकराते हुए कहा.

‘‘भई सीधी अंगुली से घी न निकले तो अंगुली टेढ़ी कर देनी चाहिए. मौसी सीधे रुपए नहीं दे रही न, देखो अब मैं कैसे उस से रुपए लेता हूं.’’ विनय ने कहा.

‘‘भई, जरा हमें भी तो बता मौसी से कैसे रुपए लेगा?’’ पिंटू ने हैरानी से पूछा.

‘‘मौसी के पास काफी गहने हैं. घर खर्च के लिए 10-5 हजार रुपए हमेशा घर में रखे ही रहते हैं. इस के अलावा आलोक भैया बिजनैस करते हैं, उन के भी कुछ न कुछ रुपए रखे ही रहते होंगे. मैं सोच रहा हूं मौसी की हत्या कर के उन के गहने और रुपए हथिया लूं.’’ विनय ने कहा, ‘‘अब तू बता, तेरा क्या इरादा है? इस मामले में तू मेरा साथ देगा या नहीं?’’

‘‘यार जिंदगी का सवाल है. इसलिए मैं तेरा साथ देने को तैयरा हूं. लेकिन पकड़े गए तो जिंदगी बनने के बजाय बिगड़ जाएगी.’’ पिंटू ने चिंता व्यक्त की.

‘‘मैं ने ऐसी योजना बना रखी है कि किसी को पता ही नहीं चलेगा. फिर मौसी पूरे दिन घर में अकेली ही रहती हैं. हम अपना काम कर के आराम से चुपचाप चले जाएंगे. बस इतना ध्यान रखना होगा कि कोई पड़ोसी न देखने पाए.’’ विनय ने कहा.

पिंटू ने हामी भर दी तो विनय ने उसे अपनी योजना समझा कर अगले दिन यानी 28 जनवरी को ही उसे अंजाम देने की तैयारी कर ली. अगले दिन सुबह ही पिंटू विनय के घर पहुंच गया. दोनों ट्रक से उन्नाव के लिए रवाना हो गए. विनय की मौसी का घर उन्नाव बाईपास के पूरननगर में था. इसलिए दोनों बाईपास पर ही उतर गए. वहां से दोनों पैदल ही चल पड़े.

जिस समय विनय पिंटू के साथ अपनी मौसी इंद्रा के घर पहुंचा, उस के मौसा प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव अपनी ड्यूटी पर राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय जा चुके थे तो मौसेरा भाई आलोक लुकइयाखेड़ा स्थित अपनी कंप्यूटर की दुकान पर. इंद्रा घर में अकेली ही थी. विनय ने घंटी बजाई तो उन्होंने झट दरवाजा खोल दिया.

विनय और पिंटू को देख कर इंद्रा ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘आओ, अंदर आओ. आज बहुत दिनों बाद आए हो?’’

‘‘हां, आप से मिले बहुत दिन हो गए थे, इसीलिए सोचा कि चलो आज मौसी से मिल आते हैं.’’ कहते हुए विनय अंदर आ गया.

‘‘बहुत अच्छा किया. इधर कई दिनों से तुम्हारी याद आ रही थी.’’ इंद्रा ने विनय के कंधे पर हाथ रख कर सोफे पर बैठते हुए कहा, ‘‘तुम दोनों बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूं.’’

इतना कह कर इंद्रा रसोई में चाय बनाने चली गई तो विनय और पिंटू अपनी योजना को अंजाम देने के बारे में खुसुरफुसुर करने लगे. विनय ने टीवी की आवाज तेज कर दी, जिस से हत्या करते समय मौसी चीखे भी तो उस की आवाज उसी में दब जाए. इंद्रा ने चाय और नमकीन ला कर रखी तो सभी खानेपीने लगे.

चाय पीते हुए विनय ने कहा, ‘‘मौसी, मैं आप से होटल खोलने के लिए 15 हजार रुपए कब से मांग रहा हूं. लेकिन आप दे नहीं रहीं हैं. आप के अलावा कोई दूसरा मेरी मदद नहीं कर सकता, इसलिए आप कैसे भी रुपयों की व्यवस्था कर दीजिए.’’

‘‘मैं तुम्हें न जाने कितने रुपए दे चुकी हूं, इस का तुम्हारे पास कोई हिसाब है. जब देखो, तब तुम रुपए लेने आ जाते हो,’’ इंद्रा ने नाराज हो कर कहा, ‘‘तुम्हारी आदत पड़ गई है, मुझ से रुपए ऐंठने की. लेकिन अब मैं तुम्हें एक कौड़ी नहीं दूंगी. अगर तुम ने ज्यादा परेशान किया तो तुम्हारी शिकायत तुम्हारे मौसा से कर दूंगी.’’

मौसी की बातें सुन कर विनय गुस्से से पागल हो उठा. वह तो पिंटू के साथ उस की हत्या की योजना बना कर ही आया था, इसलिए फुरती से उठा और सामने बैठी मौसी को दबोच कर बोला, ‘‘तू मौसा से मेरी शिकायत करेगी, शिकायत तो तब करेगी, जब जिंदा रहेगी. मैं अभी तुझे जान से मारे देता हूं.’’

कह कर विनय ने अपने गले में लिपटा मफलर निकाला और मौसी के गले में लपेट कर कसने लगा. दबाव से इंद्रा की सांस रुकने लगी तो वह छटपटाने लगी. उस ने बचाव के लिए हाथपैर बहुत मारे, लेकिन गुस्से में पागल विनय फंदे को कसता गया. कुछ देर छटपटाने के बाद इंद्रा का शरीर शिथिल पड़ गया.

विनय को लगा कि मौसी का खेल खत्म हो गया है तो उस ने मफलर छोड़ दिया. उस के मफलर छोड़ते ही इंद्रा लुढ़क गई. विनय के साथ आए पिंटू को लगा कि अगर इंद्रा जिंदा रह गई तो उन का भेद खुल जाएगा. उस के बाद उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी. यह सोच कर पिंटू ने घर में रखी सिल उठा कर इंद्रा के सिर पर पटक दिया, जिस से उस का सिर फट गया.

इंद्रा की हत्या करने के बाद विनय और पिंटू अलमारी की चाबी ढूंढ़ने लगे. जल्दी ही उन्हें चाबी मिल गई. विनय ने अलमारी खोल कर उस के लौकर में रखे सोने के एक जोड़ी झुमके, सोने की एक जंजीर, अंगूठी, 1 जोड़ी चांदी की पायल निकाल लिए. विनय को अलमारी में उतने रुपए नहीं मिले, जितने कि उसे उम्मीद थी. अलमारी से उसे मात्र 15 सौ रुपए ही मिले. चलते समय उस ने मौसी का मोबाइल भी ले लिया था. घर से निकल कर उन्होंने बाहर से दरवाजे की कुंडी बंद कर दी और भाग गए. घर से बाहर आते ही विनय ने मौसी के मोबाइल का स्विच औफ कर दिया था.

दोपहर को आलोक को कोई काम पड़ा तो उस ने अपनी मम्मी इंद्रा को फोन किया. लेकिन मम्मी के फोन का स्विच औफ था. काफी देर यही हाल रहा तो परेशान हो कर वह घर आ गया. उस ने दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगी देखी तो सकते में आ गया. उसे लगा कि शायद मम्मी घर पर नहीं हैं. दरवाजा खोल कर वह घर के अंदर दाखिल हुआ तो खून से सनी मम्मी की लाश देख कर वह चीखने लगा. उस का चीखना सुन कर आसपड़ोस वाले आ गए.

इंद्रा की खून से सनी लाश देख कर पड़ोसियों को समझते देर नहीं लगी कि कोई उस की हत्या कर गया है. सूचना पा कर प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव भी आ गए. अलमारी खुली थी और उस में रखे गहने, नकदी और उन की पत्नी का मोबाइल गायब था. लूट और हत्या के इस मामले की जानकारी थाना कोतवाली को दी गई.

एक महिला की हत्या और लूट की सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी सिपाहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने डौग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम को भी बुला लिया था. सारी काररवाई निपटाने के बाद कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी मृतका इंद्रा के बेटे आलोक कुमार श्रीवास्तव को साथ ले कर कोतवाली आ गए, जहां उस की तहरीर पर हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

अभियुक्तों तक पहुंचने का पुलिस के पास एक ही सूत्र था, मृतका का मोबाइल. पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगवा दिया. लेकिन मोबाइल का स्विच औफ था, इसलिए उस की लोकेशन नहीं मिल रही थी. पुलिस ने इंद्रा के हत्यारों तक पहुंचने के लिए बहुत हाथपैर मारे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

इस मामले का खुलासा न होते देख पुलिस अधीक्षक रतन कुमार श्रीवास्तव ने अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशन यादव और क्षेत्राधिकारी (सदर) मनोज अवस्थी की देखरेख में एक पुलिस टीम गठित की, जिस का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी को ही सौंपा गया.

टीम का गठन होते ही संयोग से घटना के लगभग महीने भर बाद इंद्रा के मोबाइल की लोकेशन कानपुर के नौबस्ता की मिल गई. उस नंबर का भी पता चल गया, जो नंबर उस में उपयोग में लाया जा रहा था.

पुलिस टीम ने लोकेशन और नंबर के आधार पर उस आदमी को पकड़ लिया, जिस के पास वह मोबाइल फोन था. पूछताछ में उस ने बताया कि यह मोबाइल फोन उस ने सपई गांव के रहने वाले पिंटू सिंह चंदेल से खरीदा था.

पुलिस को उस आदमी से पिंटू का पता मिल गया था. छापा मार कर पुलिस ने 3 मार्च को पिंटू सिंह चंदेल को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी ने कोतवाली ला कर जब उस से इंद्रा की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के स्वीकार कर लिया कि मृतका की बहन के बेटे विनय के साथ मिल कर उस ने इस घटना को अंजाम दिया था.

पिंटू से पूछताछ के बाद पुलिस ने विनय की तलाश में उस के घर छापा मारा. लेकिन वह नहीं मिला. तब पुलिस ने पिंटू को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस विनय श्रीवातस्तव की तलाश में पूरे जोरशोर से लग गई थी, लेकिन पुलिस से बचने के लिए वह छिप गया था. आखिर 13 मार्च को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर विनय को भी गिरफ्तार कर लिया.

जब उस का दोस्त पकड़ा जा चुका था तो विनय के झूठ बोलने का सवाल ही नहीं था. इसलिए उस ने मौसी की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. इस पूछताछ में उस ने जो कहानी सुनाई, वह हैरान करने वाली थी. क्योंकि विनय के अपनी मां समान ही नहीं, उम्र में दोगुनी से भी ज्यादा मौसी से अवैध संबंध थे. इस तरह अवैध संबंधों की नींव पर टिकी लूट और हत्या की यह कहानी कुछ इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के थाना कोतवाली के मोहल्ला पूरननगर में रहते थे प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव. वह राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में वार्डब्वाय थे. उन के परिवार में पत्नी इंद्रा के अलावा बेटा आलोक और बेटी ज्योति थी. पढ़ाई पूरी कर के आलोक ने लुकइयाखेड़ा में कंप्यूटर की दुकान खोल ली थी. ज्योति की भी पढ़ाई पूरी हो गई तो प्रकाशचंद्र ने उस की शादी कर दी थी.

इंद्रा की बड़ी बहन मंजूलता की शादी कानपुर के थाना नौबस्ता के सरस्वतीनगर के रहने वाले अरुणकुमार श्रीवास्तव के साथ हुई थी. अरुण कुमार लोहिया फैक्ट्री में नौकरी करते थे. उन के कुल 3 बेटे थे, विकास, विनय और विनीत. पढ़ाई पूरी होने के बाद विकास ने लिटिल स्टार एंजल स्कूल में नौकरी कर ली थी, तो बीकौम करने के बाद विनय जूते का काम करने लगा था. सब से छोटे विनीत ने बीकौम कर के लैपटौप रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया था. 6 साल पहले अरुण कुमार की मौत हो गई तो घर की सारी जिम्मेदारी मंजूलता पर आ गई थी.

विनय का मन जूते के काम में कम, क्रिकेट खेलने में ज्यादा लगता था. मैच खेलने के चक्कर में ही वह इधरउधर घूमता रहता था. खाली होने की वजह से वह अकसर अपनी मौसी इंद्रा के घर भी चला जाता था, जहां वह कईकई दिनों तक रुका रहता था. इंद्रा उस का बहुत खयाल रखती थी.

एक तो प्रकाशचंद्र की उम्र हो गई थी, दूसरे बच्चे सयाने हो गए थे, इसलिए वह पत्नी में कम ही रुचि लेते थे जबकि इंद्रा चाहती थी कि पति रोजाना उस के पास आए और उसे संतुष्ट करे. पति से इच्छा पूरी न होने से इंद्रा का मन भटकने लगा तो वह, किसी युवक की तलाश में रहने लगी. लेकिन उसे इस बात का भी डर सता रहा था कि किसी युवक से संबंध बनाने पर अगर बात खुल गई तो बड़ी बदनामी होगी.

तब वह किसी ऐसे युवक की तलाश में लग गई, जिस से संबंध बनाने पर किसी को पता न चल सके. ऐसा युवक वही हो सकता था, जिस से उस के घरेलू संबंध हों यानी जिस के घर आनेजाने पर किसी को संदेह न हो. इस बारे में उस ने काफी सोचाविचारा तो उस की नजर अपनी बहन के बेटे विनय पर टिक गई. क्योंकि विनय उस के घर में ही रहता था. दूसरे बहन का बेटा होने की वजह से जल्दी उस पर कोई संदेह भी नहीं कर सकता था.

विनय उस उम्र में था, जिस उम्र में स्त्री देह कुछ ज्यादा ही आकर्षित करती है. तब रिश्तेनाते का भी खयाल नहीं रहता. विनय की शादी भी नहीं हुई थी. ऐसे में इंद्रा ने रिश्ते नाते, लाजशरम त्याग कर अपनी देह को उस के सामने परोसा तो जवानी की दहलीज पर खड़े विनय को फिसलते देर नहीं लगी. मौसी की देह तो उस के लिए अंधे सियार को पीपल ही मेवा की तरह लगा. वह निश्चिंत हो कर मौसी के साथ मौज करने लगा.

इंद्रा ने विनय को हिदायत दे रखी थी कि यह बात वह अपने दोस्तों तक को भी नहीं बताएगा. इसलिए विनय ने यह बात कभी किसी को नहीं बताई. उस का जब भी मन होता, वह मौसी के यहां आ जाता और जितने दिन मन होता, आराम से रहता. मौसा और मौसेरे भाई के जाने के बाद वही दोनों घर पर रह जाते थे, इसलिए उन का जो मन होता, आराम से करते.

इंद्रा विनय को न सिर्फ शारीरिक सुख देती थी, बल्कि उसे अपने आकर्षण में बांधे रहने के लिए उस की छोटीमोटी जरूरतें भी पूरी करती थी. वह उसे जेब खर्च के लिए रुपए भी देती थी. विनय को दोहरा लाभ था, इसलिए वह मौसी से खूब खुश रहता था.

क्रिकेट खेलने में ही विनय की दोस्ती कानपुर के थाना बिधनू के गांव सपई के रहने वाले वीरेंद्र सिंह चंदेल के बेटे पिंटू से हो गई थी. पिंटू नौबस्ता में चाय की दुकान चलाता था. विनय का जूते के काम में मन नहीं लगता था, इसलिए उस ने पिंटू के साथ होटल खोलने की योजना बनाई. होटल खोलने के लिए उसे 15 हजार रुपयों की जरूरत थी.

विनय को पूरा यकीन था कि मौसी इंद्रा उसे ये रुपए दे देंगी. इसीलिए उस ने बड़े ही विश्वास के साथ पिंटू से कह दिया था कि उस की मौसी एक बार मांगने पर रुपए दे देंगी. लेकिन मौसी ने रुपए नहीं दिए. उसी का नतीजा था कि नाराज हो कर विनय ने पिंटू के साथ मिल कर उन के यहां लूट के इरादे से उन की हत्या कर दी थी.

पूछताछ के बाद प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी ने विनय को पत्रकारों के सामने भी पेश किया. प्रेसवार्त्ता करा कर उन्होंने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक विनय और पिंटू की जमानत नहीं हुई थी.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मजबूत डोर के कमजोर रिश्ते : भाई क्यों बना कसाई?

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 3

कुछ दिन बाद डौली के वापस आने की जानकारी शिववीर को हुई तो वह उसे लेने आ पहुंचा. लेकिन सुभाष ने डौली को यह कह कर उस के साथ नोएडा नहीं भेजा कि बहू के जाने से घर में रोटीपानी की परेशानी होगी. क्योंकि डौली की सास शारदा की तबियत खराब चल रही थी.

शिववीर अब 15 दिन में घर आता. 2-3 दिन रहता, उस के बाद फिर नौकरी पर नोएडा चला जाता. लेकिन जब भी आता, पापा से पैसों की डिमांड करता. न देने पर लड़ाईझगड़ा करता. मां शारदा से भी उलझ जाता. एक दिन तो हद ही हो गई. शिववीर ने पापा सुभाष पर हाथ छोड़ दिया. पति पर हाथ छोडऩा शारदा को नागवार लगा, इसलिए वह उस से भिड़ गई और कई तमाचे शिववीर के गाल पर जड़ दिए.

घर आतेजाते एक रोज शिववीर को पता चला कि पापा व दोनों भाइयों ने मिल कर सड़क किनारे एक प्लौट तथा 5 बीघा उपजाऊ भूमि खरीदी है. लेकिन प्लौट व जमीन में उस का नाम दर्ज नहीं कराया गया है. वह मन ही मन जलभुन उठा. उस के मन में घर वालों के प्रति नफरत की आग सुलगने लगी.

शिववीर ने इस बाबत पापा से पूछा तो उन्होंने कहा कि सोनूू और भुल्लन ने अपनी कमाई से खेत खरीदे हैं. यह सुन कर शिववीर गुस्से से बोला, ”खेत, प्लौट खरीदने को तुम लोगों के पास पैसा है, लेकिन हमारा कर्ज चुकाने को तुम्हारे पास पैसा नहीं है. यह नाइंसाफी है.’’

शिववीर ने इस नाइंसाफी के बारे में बहनोई सौरभ तथा मामा विनोद से भी बात की, लेकिन उन लोगों ने भी उस की एक न सुनी. शिववीर अब मामा व बहनोई से भी नफरत करने लगा.

सुभाष का मंझला बेटा सोनू राजस्थान की खुशखेरा स्थित जिस फैक्ट्री में काम करता था, उसी में वेदराम यादव भी नौकरी करता था. वेदराम यादव इटावा जिले के गंगापुरा गांव का रहने वाला था. चूंकि सोनू और वेदराम एक ही क्षेत्र के रहने वाले थे, इसलिए परिचय होने के बाद दोनों के बीच घनिष्ठता बढ़ गई थी. जब भी दोनों को फुरसत मिलती तो साथ बैठ कर घरगांव की बातें करते थे. चूंकि दोनों यादव जाति के थे, सो दिन पर दिन उन की दोस्ती बढ़ती गई.

वेदराम यादव के परिवार में पत्नी सुषमा के अलावा 4 बेटियां सोनी (18 वर्ष), अंजलि (16 वर्ष), खुशबू (14 वर्ष), खुशी (13 वर्ष) तथा एक बेटा यश (7 वर्ष) था. वेदराम स्वयं तो नौकरी करता था, लेकिन उस की पत्नी सुषमा घरखेत की जिम्मेदारी संभाले थी. पांचों बच्चों की देखरेख व पालनपोषण की जिम्मेदारी सुषमा की ही थी.

वेदराम की बेटी सोनी भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह खूबसूरत तो बचपन से ही थी, लेकिन 16 बसंत पार कर जब उस ने जवानी की डगर पर कदम रखा तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया था. असित इंटर कालेज, गंगापुरा से उस ने हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी. वह आगे पढऩा चाहती थी, लेकिन मम्मी ने उस की पढ़ाई बंद करा दी थी और घरेलू काम में लगा दिया था.

वेदराम अपनी जवान बेटी के ब्याह के लिए चिंतित रहता था. वह फैक्ट्री में जब भी सोनू से मिलता तो उसे अपनी बेटी सोनी की याद आ जाती. उसे लगता कि सोनू ही उस की बेटी के योग्य है. वह उसे सदा खुश रखेगा.

रिश्ता हो गया तो दोनों की जोड़ी खूब फबेगी. इशारेइशारे में वेदराम ने कई बार सोनू का मन टटोला तो वह हंस कर टाल गया और बोला, ”शादी विवाह मम्मीपापा की मरजी से होते हैं. पहले उन की हां फिर मेरी हां.’’

वेदराम सोनू का इशारा समझ गया. इस बार मार्च, 2023 में होली त्यौहार की छुट्टी में जब वेदराम घर आया तो वह बेटी का रिश्ता ले कर सोनू के गांव गोकुलपुरा अरसारा पहुंच गया. उस ने बिना कोई भूमिका बांधे सोनू के पापा सुभाष यादव से कहा कि वह अपनी बेटी सोनी का रिश्ता ले कर उन के पास आए हैं. उन का बेटा सोनू उन्हें पसंद है.

Soni (Mratika)

मृतका सोनी

आपस की बातचीत के बाद सोनी का रिश्ता सोनू के साथ तय हो गया. शादी की तारीख 22 जून, 2023 तय हुई. इस के बाद दोनों परिवार शादी की तैयारी में जुट गए.

भाई की शादी पर क्यों चिढ़ा शिववीर

शिववीर को सोनू का ब्याह तय होने की बात पता चली तो वह मन ही मन जल उठा. वह नोएडा से घर आया तो मम्मीपापा से झगडऩे लगा और बोला, ”तुम्हारे पास शादी रचाने को रकम है, लेकिन मेरा कर्ज चुकाने को नहीं. क्या मैं सौतेला बेटा हूं या फिर किसी की नाजायज औलाद. आखिर घर में मेरी अनदेखी क्यों की जा रही है?’’

शिववीर ने शादी की तैयारी के बहाने सुभाष से 20 हजार रुपया मांगा, लेकिन उन्होंने पैसा देने से साफ इंकार कर दिया. इस इंकार से शिववीर की नफरत चरम पर पहुंच गई. वह सोचने लगा कि उसे इस तरह तो कुछ भी हासिल न होगा. उसे सब कुछ छीनना ही पड़ेगा.

उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह पूरे परिवार का सफाया कर देगा. उस के बाद आराम की जिंदगी बिताएगा. जमीनजायदाद, घर, प्लौट का वही मालिक होगा.

अपने खतरनाक मंसूबों को सफल बनाने के लिए वह तैयारी में जुट गया. सब से पहले उस ने चारा काटने वाली मशीन के ब्लेड से तेज धार वाला फरसा तैयार कराया. इस के बाद उस ने एक स्थानीय अपराधी की मदद से तमंचा व कारतूस खरीदा.

फरसे व तमंचे को उस ने अपने कमरे में सुरक्षित रख दिया. यही नहीं, उस ने हर खतरे से निपटने के लिए अन्य तैयारियां भी पूरी कर लीं. मिर्च का स्प्रे व नींद की गोलियों का इंतजाम भी उस ने कर लिया.

शिववीर ने अपने खतरनाक मंसूबों की किसी को भनक तक न लगने दी. वह सामान्य तरीके से रहने लगा. सुभाष यादव व उस के दोनों बेटे शादी की तैयारियों में जुटे थे. निमंत्रण कार्ड आदि बांटे जा चुके थे. गांव में शादी की रस्में एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती हैं. रिश्तेदारों व महिलाओं का आनाजाना भी शुरू हो गया था. सोनू की बहन प्रियंका, मौसी, मामी भी आ चुकी थीं. 20 जून को मंडप गाड़ा गया. उस के बाद से मंडप के नीचे ढोलक की थाप पर मंगल गीत गाए जाने लगे.

सुभाष यादव ने बड़े बेटे शिववीर को शादी में नहीं बुलाया था, फिर भी वह 3 दिन पहले ही नोएडा से घर आ गया. वह हर काम हंसीखुशी से करने लगा. उस ने भाइयों को तनिक भी आभास नहीं होने दिया कि उस के मन में क्या चल रहा है.

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 2

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के किशनी थाना अंतर्गत एक गांव है-गोकुलपुरा अरसारा. यादव बाहुल्य इसी गांव में सुभाषचंद्र यादव सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शारदा देवी के अलावा 3 बेटे शिववीर, सोनू, अभिषेक उर्फ भुल्लन तथा एक बेटी प्रियंका थी. सड़क किनारे उन का पक्का मकान था. वह किसान थे. खेती से ही वह परिवार का भरणपोषण करते थे.

सुभाषचंद्र यादव खुद तो पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन बेटों को पढ़ालिखा कर योग्य बनाना चाहते थे. इसलिए वह उन की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देते थे. अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वह बेटों की पढ़ाई पर खर्च करते थे. 2 बेटे सोनू व भुल्लन तो पढऩे में तेज थे, लेकिन बड़ा बेटा शिववीर पढऩे में कमजोर था. इंटरमीडिएट की परीक्षा जैसेतैसे पास कर उस ने पढऩा बंद कर दिया और पिता के साथ खेती में हाथ बंटाने लगा.

Shiv veer (Hatyara)

हत्यारा शिववीर

लेकिन शिववीर का मन खेती किसानी में भी नहीं लगा. इस के बाद वह नौकरी की तलाश में जुट गया. काफी प्रयास के बाद उसे मैनपुरी में स्थित एक फर्म में सेल्समैन की नौकरी मिल गई. चूंकि कृषि यंत्र बेचने में उसे कमीशन भी मिलता था, इसलिए उस की अच्छी कमाई होने लगी. अब वह ठाठबाट से रहने लगा.

शिववीर कमाने लगा तो सुभाषचंद्र उस के ब्याह की सोचने लगे. वह ऐसी लड़की चाहते थे, जो उन का घर संभाल सके, भले ही वह ज्यादा पढ़ीलिखी न हो. उन्हीं दिनों करहल (मैनपुरी) निवासी हरीसिंह यादव अपनी बेटी डौली का रिश्ता ले कर सुभाष के पास आए.

सुभाष यादव तो शिववीर के रिश्ते के लिए लालायित ही थे, सो उन्होंने रिश्ता मंजूर कर लिया. फिर दोनों तरफ से बात तय होने के बाद 8 फरवरी, 2019 को हरीसिंह ने डौली का विवाह शिववीर के साथ कर दिया.

डौली शिववीर की दुलहन बन कर ससुराल आई तो उस के जीवन में बहार आ गई. डौली सुंदर तो थी ही, साथ ही सुशील व सदाचारी भी थी. उस ने ससुराल आते ही घर संभाल लिया था. वह पति की सेवा तो करती ही थी, सासससुर की सेवा में भी कोई कसर न छोड़ती थी.

शादी के एक साल बाद डौली ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने पीहू रखा. पीहू के जन्म से घर की खुशियां और बढ़ गई. शिववीर डौली से बहुत प्यार करता था. वह उस के प्यार में ऐसा खोया कि कामधंधा ही भूल गया. लापरवाही बरतने व काम पर न जाने के कारण उस की नौकरी भी छूट गई.

शिववीर बेरोजगार हुआ तो वह आवारा घूमने लगा. उस की संगत कुछ अपराधी प्रवृत्ति के लोगों से हो गई, जिन के साथ वह नशापत्ती करने लगा. डौली मना करती तो वह उसे झिड़क देता. कभीकभी उस पर हाथ भी उठा देता था.

बेटे को गलत रास्ते पर जाते देख कर सुभाष की चिंता बढ़ गई. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह शिववीर को कैसे सुधारें. काफी विचारविमर्श के बाद उन्होंने किशनी कस्बे में शिववीर को फ्लैक्स की दुकान खुलवा दी.

बैनर, पोस्टर बनाने के इस धंधे में शिववीर को शुरू में तो आमदनी हुई, लेकिन उधारी के कारण बाद में नुकसान होने लगा. यहां तक कि दुकान का किराया तथा कारीगरों की मजदूरी भी निकालनी मुश्किल हो गई. धंधे में नुकसान हुआ तो उस ने दुकान बंद कर दी. इस धंधे में वह कमाने के बजाय कर्जदार हो गया.

घर वालों ने शिववीर की क्यों नहीं की मदद

सुभाषचंद्र की बेटी प्रियंका अब तक जवान हो गई थी. वह उस के हाथ जल्द ही पीले कर देना चाहते थे. प्रियंका खूबसूरत तो थी, लेकिन ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी.

आठवीं कक्षा पास करते ही मां शारदा ने उस की पढ़ाई बंद करा दी थी और अपने साथ घरेलू काम में लगा लिया था. उन का मानना था कि ज्यादा पढ़ीलिखी लड़की के लिए योग्य लड़का खोजना मुश्किल होता है. जबकि सुभाष यादव पत्नी की बात से सहमत नहीं थे.

सुभाष यादव ने प्रियंका के लिए योग्य वर की खोज शुरू की तो उन्हें एक लड़का सौरभ पसंद आ गया. सौरभ के पिता रामकिशन यादव मैनपुरी जिले के गांव चांद हविलिया के रहने वाले थे. 24 वर्षीय सौरभ दूध का व्यवसाय करता था और पिता के साथ खेती में भी हाथ बंटाता था.

सुभाष को सौरभ पसंद आया तो उन्होंने 6 जून, 2021 को प्रियंका का विवाह सौरभ के साथ कर दिया. प्रियंका को ससुराल में किसी चीज की कमी न थी, सो वह सुखपूर्वक ससुराल में पति के साथ जीवन बिताने लगी.

सुभाष जहां अपने बड़े बेटे शिववीर से दुखी था तो वहीं अन्य 2 बेटों से संतुष्ट भी था. मंझला बेटा सोनू पढ़लिख कर अकाउंटेंट की नौकरी पा गया था. वह राजस्थान की खुशखेरा स्थित एक फैक्ट्री में काम करता था. उसे अच्छी सैलरी मिलती थी.

सब से छोटे अभिषेक उर्फ भुल्लन को नौकरी तो नहीं मिली थी, लेकिन उस ने किशनी तहसील के पास फोटोकापी की दुकान खोल ली थी. दुकान से उसे अच्छी आमदनी होने लगी थी. अभिषेक व सोनू पिता की मरजी से हर काम करते थे, इसलिए वे दोनों उन की आंखों के तारे बन गए थे.

इधर शिववीर ने फ्लैक्स के काम में पैसा गंवाने के बाद कर्ज ले कर गल्ले का धंधा किया, लेकिन इस में भी वह मात खा गया. अब वह पहले से ज्यादा कर्जदार हो गया. उस ने पिता व भाइयों से कर्ज उतारने के लिए पैसा मांगा, लेकिन उन्होंने पैसा नहीं दिया. कर्जदार होने से घर वाले उस की उपेक्षा करने लगे.

कर्जदारों से परेशान शिववीर घर छोड़ कर पुणे चला गया. वहां वह किसी फैक्ट्री में काम करने लगा. एक साल तक शिववीर घर से गायब रहा. उस के बाद फिर घर वापस आ गया. वापस आते ही कर्ज वाले उस के घर के चक्कर लगाने लगे. शिववीर ने फिर घर वालों से पैसे मांगे, लेकिन सभी ने उसे दुत्कार दिया. एक पैसा भी नहीं दिया.

पत्नी भी क्यों हुई शिववीर के खिलाफ

शिववीर ने तब लड़झगड़ कर डौली के जेवर छीन लिए और बेच दिए. एकदो लोगों का उस ने मामूली कर्ज अदा किया. फिर घर छोड़ कर खोड़ा (नोएडा) आ गया. यहां वह किसी प्रिंटिंग प्रेस में काम करने लगा.

कुछ दिनों बाद वह अपनी पत्नी डौली को भी ले आया. डौली एकदो माह तो उस के साथ खुश रही, फिर दोनों में झगड़ा होने लगा. झगड़ा जेवर बेचने को ले कर होता था.

एक रोज तो झगड़े ने बड़ा रूप ले लिया. शिववीर ने पहले तो पत्नी को पीटा, फिर दीवार में उस का सिर पटक दिया, जिस से डौली का सिर फट गया. गुस्से में डौली ने अपनी मासूम बच्ची को साथ लिया और आनंद विहार बसअड्डे आ गई.

यहां से बस पर सवार हो कर करहल आ गई, फिर वहां से अपने मायके आ गई. मम्मीपापा को उस ने पति की करतूत बताई तो उन्होंने बेटी को गले लगा लिया और बेटी को शिववीर के साथ न भेजने का फैसला लिया.

कुछ दिनों बाद शिववीर डौली को लेने ससुराल आया तो डौली के मम्मीपापा का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने शिववीर को खूब खरीखोटी सुनाई और बेटी को साथ भेजने से साफ मना कर दिया. शिववीर ने डौली को लाख मनाने की कोशिश की. माफी भी मांगी, लेकिन डौली नरम नहीं हुई. उस ने भी पति के साथ जाने को साफ मना कर दिया. अपमानित हो कर शिववीर घर आ गया. उस ने सारी बात अपने मम्मीपापा को बताई, फिर वह नोएडा चला गया.

इधर जब डौली कई माह तक ससुराल वापस नहीं आई तो डौली को ले कर गांव में कानाफूसी होने लगी. इज्जत बचाने के लिए सुभाष बहू के मायके गए और उसे किसी तरह मना कर विदा करा लाए. डौली के मम्मीपापा ने कई शर्तों के साथ डौली को उस समय ससुराल भेजा था.

रेप के आरोप में पुलिस अफसर

जब विनीता होटल के अपने कमरे में चली गई तो थोड़ी देर बाद राहुल भी उस के कमरे में आ गए. विनीता को यह नहीं पता था कि राहुल भी उसी होटल में रह रहे हैं, जहां उसे ठहराया गया था. विनीता का आरोप है कि राहुल ने बातचीत के दौरान उसे कौफी में नशीला पदार्थ पिलाया. जब वह नशे में हो गई, तब राहुल ने उस के साथ मनमानी की. अपने मोबाइल में उस की न्यूड फोटो भी ले लीं.

होश आने पर जब विनीता को उस सब का पता चला तो उस ने विरोध किया, तब बेहतर कोचिंग के माध्यम से तैयारी कराने का राहुल ने उसे भरोसा दिया. लेकिन इस के बाद कभी होटल, तो कभी अपने दोस्त विक्रम के घर ले जा कर वह विनीता के साथ मनमानी करते रहे.

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली विनीता ने युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही रंगीन सपने देखने शुरू कर दिए थे. उस की तमन्ना एक बड़ा अधिकारी बनने की थी. इसलिए वह सिविल सर्विस (यूपीएससी) परीक्षा की तैयारी में जुट गई. उस समय वह 16-17 साल की थी. परीक्षाओं की तैयारी के दौरान ही विनीता की वर्ष 2018 में फेसबुक के जरिए राहुल श्रीवास्तव से दोस्ती हुई थी.

Aropi ASP Rjjahul Srivastava

राहुल श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश में एडिशनल एसपी थे. उन की तैनाती लखनऊ में थी. पहले ‘हायहैलो’ से शुरुआत हुई. इस के बाद विनीता से राहुल ने पूछा, ”पढ़ाई करती हो?’’

तब विनीता ने बताया कि वह यूपीएससी की तैयारी कर रही है. एडिशनल एसपी राहुल श्रीवास्तव ने विनीता को यूपीएससी एग्जाम क्वालीफाई करने में उस की सहायता करने का भरोसा दिलाया.

विनीता समझ गई कि राहुल श्रीवास्तव पुलिस में सीनियर औफिसर हैं, उन से यूपीएससी परीक्षा के संबंध में काफी हेल्प मिल सकती है. वह उन से स्टडी मटीरियल लेती रही. स्टडी मटीरियल देने लेने के दौरान उन के बीच नजदीकियां बढऩे लगीं.

तब दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने मोबाइल नंंबर भी दे दिए. धीरेधीरे दोनों का मेलजोल इस कदर बढ़ गया कि ऐसा कोई दिन नहींं जाता था, जब दोनों के बीच बातचीत न होती हो. दोनों के बीच अंतरंगता बढ़ती गई. अब दोनों का ये हाल हो गया कि जब तक दोनों एक दूसरे से मिल न लेते या बातचीत न कर लेते उन्हें चैन ही नहीं मिलता था.

वर्ष 2019 में प्रयागराज में कुंभ मेला लगा था. राहुल ने स्टडी मटीरियल देने और रिसर्च वर्क कराने के लिए विनीता को वहां बुलाया.  कुंभ के दौरान राहुल श्रीवास्तव ने नैनी के पास टेंट मे विनीता के रहने का इंतजाम कराया. बाद में सेफ्टी की बात कहकर होटल में भेज दिया.

उसी दौरान राहुल ने विनीता को अपने दोस्त सतीश से मिलवाया और बताया कि सतीश इग्नू में पौलिटिकल साइंस के प्रोफेसर हैं और रिसर्च में उस की मदद करेंगे.

नहीं भुलाई जा सकती होटल की वह रात

विनीता का कहना है कि राहुल ने एक दिन होटल में नशीली कौफी पिलाने के बाद रेप किया. विनीता को उस ने पुलिस का रौब दिखाते हुए काफी डरा दिया था, जिस से वह यह बात किसी से कह भी नहीं सकी थी.

राहुल के मामा का लखनऊ के मंदाकिनी एनक्लेव में फ्लैट था. साल 2022 में राहुल ने उन से वो फ्लैट ले लिया. राहुल मामा के उस फ्लैट पर आने के लिए उसे खींची गई उस की न्यूड फोटो दिखाकर आने को मजबूर करते रहे. वह हर वीकेंड उसे वहां बुलाते और उस के साथ मनमानी करते थे. यह सिलसिला 5 सालों तक निरंतर चलता रहा. इस दौरान राहुल ने विनीता को कीमती गिफ्ट और गहने भी दिलाए.

अप्रैल, 2023 में विनीता राहुल श्रीवास्तव से प्रेग्नेंट हो गई. जब इस बात की जानकारी विनीता ने राहुल को दी तो एक दिन धोखे से विनीता को राहुल सहारा हौस्पिटल में लेडी डाक्टर के पास ले गए. उस समय राहुल का दोस्त विक्रम भी साथ था. कुछ देर में वहां सिद्धार्थ, सतीश और सौरभ भी आ गए.  उन्होंने विनीता का अबार्शन करा दिया.

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बाद में विनीता का चैकअप मेदांता अस्पताल में कराया गया. इस दौरान विनीता का आधार कार्ड या अन्य कोई डाक्युमेंट भी नहीं लिया गया. विनीता का कहना था कि उस की उम्र और पिता का नाम भी वहां गलत लिखवाया. अबार्शन के बाद विनीता की राहुल से खूब लड़ाई हुई.

अबार्शन के कुछ दिनों बाद विनीता के शरीर पर असर पड़ा. तब विनीता ने फैसला लिया कि वह राहुल की इस करतूत को उस की पत्नी मानिनी श्रीवास्तव को बताएगी. इस के बाद वह मानिनी के घर जा पहुंची. उस ने मानिनी को उस के पति राहुल श्रीवास्तव की काली करतूतों के बारे में बताया कि वह पिछले 5 सालों से उसे उस की न्यूड फोटो के बल पर ब्लैकमेल कर उस का लगातार शारीरिक शोषण कर रहे हैं.

विनीता ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह पुलिस में उस की शिकायत जरूर करेगी. इस की जानकारी होने पर राहुल फोन कर के विनीता के घर वालों को धमकी देने लगे कि तुम लोगों को झूठे केस में फंसा दूंगा.

जब विनीता ने साफ शब्दों में कहा कि वह उन की पुलिस से शिकायत करेगी तो वह बोले, ”मैं पुलिस के ऐसे डिपार्टमेंट में हूं कि कोई तुम्हारी एफआईआर भी नहीं लिखेगा.’’ इतना ही नहीं, उन्होंने धमकी भी दी कि तुम्हारी फोटो फैमिली को भेज दूंगा.

विनीता और राहुल के बीच चल रहे इस लुकाछिपी के खेल में तब नया मोड़ आया, जब विनीता ने इस संबंध में राहुल की पत्नी मानिनी श्रीवास्तव, जोकि लखनऊ विश्वविद्यालय के साइकोलौजी डिपार्टमेंट में प्रोफसर हैं, को जानकारी दी.

विनीता ने बताया कि राहुल उसे ब्लैकमेल कर उस का लगातार शारीरिक शोषण कर रहे हैं. धोखे से उस का गर्भपात करा देने से अब उस के शरीर पर असर पड़ रहा है. इस पर मानिनी व राहुल के दोस्तों ने विनीता को राहुल के खिलाफ कोई शिकायत न करने के लिए कहा. शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी.

इन सभी आरोपियों ने उसे व उस के घर वालों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी. इस से विनीता घबरा गई. विनीता के परिवार में उस के मम्मीपापा के अलावा उस का छोटा भाई है. यदि परिवार के लोगों को कुछ हो जाता है तो वह क्या करेगी? इस बात को  सोचसोच कर वह परेशान हो गई.

राहुल श्रीवास्तव अभी लखनऊ में एंटी टेररिस्ट स्क्वायड यानी एटीएस में पोस्टेड हैं. उन के पास यूपी पुलिस के सोशल मीडिया के काम की भी जिम्मेदारी है.

गर्भपात से शरीर में असर पडऩे पर आखिरकार विनीता ने हिम्मत जुटाई. विनीता ने राहुल की पुलिस हैडक्वार्टर में शिकायत की. पुलिस हैडक्वार्टर से एफआईआर की जगह पहले डिपार्टमेंटल जांच कराई गई.

विनीता का कहना है कि उस ने जौइंट सीपी (कानूनव्यवस्था) उपेंद्र कुमार अग्रवाल को भी फोन कर मदद मांगी थी, जिस पर अधिकारी ने जांच की बात कही थी. विनीता एफआईआर के लिए इधर से उधर 2 महीने तक चक्कर काटती रही, लेकिन उसे हर तरफ से निराशा ही मिल रही थी.

पुलिस क्यों नहीं लिख रही थी रिपोर्ट

विनीता द्वारा राहुल के खिलाफ शिकायत किए जाने की जानकारी जैसे ही उस की पत्नी मानिनी श्रीवास्तव को हुई, तब उस ने व राहुल के दोस्त सौरभ, सतीश, विक्रम, सिद्धार्थ व अन्य ने मिल कर विनीता पर उस के द्वारा की गई शिकायतों को वापस लेने का दबाव बनाया.

मानिनी ने धमकाया कि उन का भाई आईएएस अफसर है, जबकि पति पुलिस में अफसर हैं. तुम्हारी एफआईआर नहीं लिखी जाएगी. तुम्हारी बात कोई नहीं सुनेगा.

विनीता का कहना है कि इस संबंध में कंप्रोमाइज की बात कहते हुए उस के एक दोस्त के बैंक एकाउंट में कुछ धनराशि भी जमा करा दी. लेकिन उस ने इस धनराशि को लेने से साफ इंकार कर दिया. विनीता ने डीजीपी और स्पैशल डीजी से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई. तब अधिकारियों ने जांच के बाद काररवाई की बात कही.

पीडि़ता विनीता की शिकायत को एडीजी पद्मजा चौहान ने गंभीरता से लिया और 4 नवंबर, 2023 को पुलिस आयुक्त एस.बी. शिरोडकर को पत्र लिख कर विनीता को सुरक्षा देने को कहा था. इस के बाद उसे सुरक्षा मुहैया कराई गई.

19 दिसंबर, 2023 को महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन मुख्यालय की एसपी रवीना  त्यागी ने पत्र भेज कर 22 दिसंबर, 2023 को बयान के लिए विनीता के मम्मीपापा को बुलाया था. उन्होंने एसपी रवीना के पास अपने बयान दर्ज कराए. राहुल श्रीवास्तव को भी बयान के लिए तलब किया था, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए थे. इस की सारी जानकारी एडीजी ने अधिकारियों को बता दी.

विनीता के पापा ने कहा कि वह बेटी के साथ हैं. उन्होंने इस मामले में सीएम योगी से मिलने की बात भी कही. उन्होंने कहा, ”मैं राहुल श्रीवास्तव को नहीं जानता. अक्तूबर, 2023 में उन की पत्नी ने मुझे काल की थी. राहुल की पत्नी ने मुझ से कई बातें कहीं. मैं ने अपनी बेटी से इस बारे में पूछा. पहले तो वह कुछ बताने को तैयार नहीं थी. काफी समझाने पर रोने लगी. फिर उस ने राहुल की हरकत के बारे में बताया. कहा कि उसे धमकी दे कर डराया जा रहा है. मैं अपनी बेटी के साथ मजबूती से खड़ा हंू. उस की हर लड़ाई में साथ दंूगा.’’

एटीएस में तैनात एएसपी राहुल श्रीवास्तव पर यौन शोषण और जबरन गर्भपात का आरोप लगाने वाली पीडि़ता विनीता 2 महीने तक गोमती नगर विस्तार थाने, 1090 और अधिकारियों के चक्कर लगाती रही. हर बार अधिकारी जांच की बात कह कर उसे टालते रहे. लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी.

विनीता ने कई महीने पहले 28 नवंबर, 2023 को शिकायत की थी. पुलिस अधिकारियों को रजिस्टर्ड पोस्ट से भी शिकायत भेजी. वीमेन पावर लाइन में तैनात एसपी रवीना त्यागी प्रकरण की जांच कर रही थीं. कुछ दिन पहले विनीता के बयान के कई वीडियो वायरल हुए. इस में उस ने आरोप लगाया था कि मामले में काररवाई नहीं हो रही है.

एक्स पर पोस्ट के बाद क्यों सक्रिय हुए अधिकारी

विनीता ने 25 दिसंबर, 2023 को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर सीएम योगी, डीजीपी समेत कई अफसरों से काररवाई की गुहार लगाई थी. इस के बाद 5 जनवरी, 2024 को विनीता ने एक्स पर पोस्ट की. इस में लिखा, ”मामले में काररवाई नहीं हो रही है. आखिर में कोर्ट जाने का ही रास्ता बचा है. अगर अब मुझे कुछ होता है तो पुलिस जिम्मेदार होगी.’’

सोशल मीडिया पर इंसाफ पाने के लिए वह ट्वीट कर न्याय के लिए लगातार गुहार लगती रही. मामले को गले की फांस बनता देख आखिरकार पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट दर्ज करने का फरमान जारी कर दिया. 6 जनवरी, 2024 को लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन थाने में रेप, धमकी देने एवं महिला की सहमति के बिना अबार्शन कराने में भादंवि की धारा 376, 506 व 313 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज हुई.

विनीता ने पुलिस आयुक्त, लखनऊ के अलावा अन्य को भी अपनी जो शिकायत 28 नवंबर, 2023 को डाक से भेजी थी. इसी तहरीर के आधार पर 6 जनवरी, 2024 को एफआईआर थाना गोमती नगर विस्तार में राहुल श्रीवास्तव, मानिनी श्रीवास्तव, सौरभ, सतीश, विक्रम, सिद्धार्थ व अन्य के खिलाफ दर्ज की गई.

आरोपी को क्यों नहीं किया गया निलंबित

मुकदमे की काररवाई आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक जांच के बाद ही हुई. जांच का जिम्मा महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की एसपी रवीना त्यागी के पास था.

लखनऊ के गोमती नगर विस्तार थाना के प्रभारी निरीक्षक सुधीर अवस्थी ने बताया कि एक युवती की शिकायत पर एएसपी व अन्य के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है. एसएचओ ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और साक्ष्य मिलने पर काररवाई की जाएगी.

ब्लैकमेल और यौन शोषण की पीडिता विनीता ने अधिकारियों से मांग की है कि आरोपी एएसपी राहुल श्रीवास्तव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है. अब उसे तुरंत निलंबित किया जाए इस के साथ ही उस की पत्नी समेत सभी दोस्तों पर सख्त काररवाई की जाए.

विनीता ने दावा किया है कि उस के पास हर आरोप के साक्ष्य मौजूद हैं. उस के पास होटल्स में चेक-इन और चेक-आउट के समय बातचीत के कुछ स्क्रीनशौट भी हैं. राहुल देर रात तक काल पर बात करता था. स्नैपचैट पर अपनी प्राइवेट फोटो भेजता था.

महंगे गिफ्ट और ज्वैलरी दिया करता था. उन बिलों पर भी राहुल की ईमेल आईडी है. मेरे अबार्शन की मैडिकल रिपोर्ट पर चैकअप और टॢमनेशन की सारी डिटेल है.

फिलहाल राहुल कहां हैं? ये पुलिस को भी नहीं पता. जांच अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि हमें एएसपी राहुल श्रीवास्तव का एड्रेस नहीं पता है. मोबाइल नंबर भी नहीं है, इसलिए उन से संपर्क नहीं हो पा रहा है. पता चला कि 50 वर्षीय राहुल श्रीवास्तव का होम प्लेस यूपी का सोनभद्र है. इस समय वह छुट्टी पर हैं और अभी शहर से बाहर है.

7 जनवरी, 2024 को रविवार का अवकाश होने के कारण विनीता के कोर्ट में कलमबंद बयान नहीं हो सके, न ही मैडिकल कराया जा सका. अगले दिन पुलिस मैडिकल करा सकती है. इस के बाद कोर्ट में बयान कराएगी. तब आगे की काररवाई करेगी. केस के विवेचक ने मामले में साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं.

आरोपी क्यों बता रहे हैं बेकसूर

एएसपी राहुल श्रीवास्तव की पत्नी मानिनी श्रीवास्तव का कहना है कि शिकायतकर्ता ने मेरे खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय में अक्तूबर 2023 में एक फरजी शिकायत की थी. इस शिकायत में उस ने स्वयं मेरे पति राहुल श्रीवास्तव से किसी भी तरह के संबंध होने से नकारा था.

पिछले कई महीनों से मुझे व मेरी बेटियों पर एसिड अटैक करवाने व जान से मारने की धमकी दी जा रही है. मेरे परिवार को ब्लैकमेल किया जा रहा है. इस की शिकायत उस ने नवंबर, 2023 में पुलिस कमिश्नर से की थी. इस की जांच वीमेन पावर लाइन ने की, जिस में पूरे साक्ष्य दिए गए हैं. मानिनी भरोसा जताया है कि सच सामने आएगा.

उधर एक चैनल से एएसपी राहुल श्रीवास्तव ने बात की. उन्होंने बताया कि युवती की काउंसलिंग चल रही थी. वह मेरी पत्नी के पास काउंसलिंग के लिए आई थी. इस दौरान ही उस से मुलाकात हुई. वह मेरी बेटी के समान है. उस के द्वारा मेरे ऊपर लगाए गए आरोप झूठे हैं. अपने से उम्रदराज व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है.

कोर्ट से मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोक

विनीता की पढ़ाई में मदद के बहाने उस के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी एडिशनल एसपी राहुल श्रीवास्तव और उस की पत्नी मानिनी श्रीवास्तव को 16 जनवरी, 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान फिलहाल राहत मिल गई है.

लखनऊ बेंच में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में दोनों की गिरफ्तारी पर बुधवार तक के लिए रोक लगा दी थी. कोर्ट ने 17 जनवरी को दोबारा सुनवाई की तारीख निश्चित कर सरकारी वकील को याचियों के खिलाफ एकत्र किए गए साक्ष्य, अगर कोई हों, तो उन की जानकारी पेश करने को कहा था. साथ ही याचियों को भी मामले की तफ्तीश में सहयोग करने का आदेश दिया.

बताते चलें कि याचिका में इस मामले में दर्ज कराई गई एफआईआर को चुनौती दे कर याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आग्रह कोर्ट से किया गया था. याचियों की ओर से दलील दी गई कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है. उधर, सरकारी वकील ने दायर की गई याचिका का विरोध किया था.

एक तरफ यूपी सरकार कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा का दंभ भरती है. वहीं ऐसे दावों के बीच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर लगे आरोप महिला सुरक्षा को ले कर कई सवाल खड़े कर रहे हैं.

निंदनीय घटना है, पीडि़ता को मिले न्याय

विवेक श्रीवास्तव, एडवोकेट (आगरा)

Vivek Srivastava, Advocate

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक श्रीवास्तव का कहना है कि एक सीनियर पुलिस अधिकारी पर छात्रा के साथ रेप करने का आरोप बहुत चिंता का विषय है. कानून की रक्षा करने वाले ही जब भक्षक बन जाएं तब सामाजिक असंतुलन होना तय है. प्रशासन को इस विषय में आरोपी के विरूद्ध सख्त निर्णय लेना चाहिए.

यह विश्वास को भंग करने का अपराध है. समाज या परिवार जिन पर आंख मंूद कर विश्वास करता हो, वे जब इस विश्वास का अनुचित लाभ उठा कर किसी की अस्मत पर हाथ डालें तो उस की सजा उसे जरूर मिलनी चाहिए.

आरोपी एडिशनल एसपी राहुल श्रीवास्तव को तुरंत सस्पेंड कर समाज के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए, ताकि वह आगे की काननूनी काररवाई में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न कर सके. इस के साथ ही एफआईआर के अन्य आरोपियों के पर भी प्रभावी काररवाई की जानी चाहिए. पीडि़ता को पुलिस प्रशासन की तरफ से उस की सुरक्षा का उचित प्रबंध भी करना चाहिए.

अधिवक्ता विवेक श्रीवास्तव का कहना है कि नैतिकता और सामाजिक दृष्टिकोण से ऐसी घटना जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा करना बहुत ही निंदनीय है. आरोपी पर धारा 376, 506, 313 के अंतर्गत कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है तथा धारा 506 के अंतर्गत भी 7 साल तक की सजा का प्रावधान भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दिया गया है.

जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तब देश की बेटियां कहां जाएंगी? इस मामले में पीडिता को जल्द से जल्द न्याय मिले.

थाने का होगा घेराव

छात्रा विनीता को ब्लैकमेल कर यौन शोषण करने के मामले में राष्ट्रवादी जनसत्ता दल ने विरोध व्यक्त करते हुए एटीएस में तैनात एडिशनल एसपी राहुल श्रीवास्तव की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है.

Rastravadi Jansatta Dal Je Mahasachiv Dr.BPS Tyagi

दल के महासचिव डा. बी.पी.एस. त्यागी

दल के महासचिव डा. बी.पी.एस. त्यागी ने कहा कि विनीता नीले आकाश में अपने पंखों से ऊंची उड़ान भरना चाहती थी. उसे सहारे की जरूरत थी. लेकिन जिन हाथों ने उसे सहारा देने का भरोसा दिया, उन्हीं हाथों ने उस की अस्मत लूट ली. वह कटे पंखों के पङ्क्षरदे की तरह जमीन पर गिर कर तडफ़ड़ाने लगी.

दल के महासचिव ने कहा कि पहले पुलिस एफआईआर दर्ज करने में देरी करती रही. अब आरोपी की गिरफ्तारी में देर कर रही है. उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक घटना है. पढ़ाई में मदद के बहाने छात्रा का शारीरिक शोषण एक पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया. उस की तुरंंत गिरफ्तारी की मांग करते हुए उन्होंने कहा यदि गिरफ्तारी में देरी होगी तो उन का दल संबंधित थाने का घेराव करेगा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में विनीता परिवर्तित नाम है

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 1

पुलिस अधिकारियों को बरामदे में ही 2 महिलाएं घायल पड़ी दिखाई दीं. पूछने पर सुभाष ने बताया कि एक महिला उस की बहू डौली है तथा दूसरी रिश्तेदार सुषमा है. पुलिस अधिकारियों ने इन दोनों को इलाज हेतु सैफई अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद पुलिस अधिकारी आंगन में पहुंचे तो वहां 3 लाशें पड़ी थीं. इन की हत्या गला काट कर बड़ी बेरहमी से की गई थी. आंगन में खून ही खून फैला था.

पूछने पर सुभाष ने बताया कि एक लाश उस के छोटे बेटे अभिषेक उर्फ भुल्लन (20 वर्ष) की है, जबकि दूसरी लाश दामाद सौरभ (26 वर्ष) की है. तीसरी लाश बेटे के दोस्त दीपक (21 वर्ष) की है.

Bhullan (Mratak)               Sonu (Mratak)

     अभिषेक उर्फ भुल्लन                                 मृतक सोनू

लाश के पास ही खून सना फरसा पड़ा था. शायद उसी फरसे से उन का कत्ल किया गया था, इसलिए फरसे को पुलिस ने सुरक्षित कर लिया.

एसपी विनोद कुमार सहयोगियों के साथ आंगन से जीने के रास्ते छत पर पहुंचे तो वहां का दृश्य देख कर वह चौंक गए. कमरे के अंदर सुभाष के बेटे सोनू व उस की नई नवेली दुलहन सोनी की लाश पड़ी थी. उन दोनों के हाथ की मेहंदी व पैरों की महावर अभी छूटी भी न थी कि उन्हें मौत की नींद सुला दिया गया था. उन दोनों की हत्या भी गला काट कर ही की गई थी. सोनू की उम्र 23 साल के आसपास थी, जबकि सोनी की उम्र 20 वर्ष थी.

निरीक्षण करते हुए एसपी विनोद कुमार जब मकान के पिछवाड़े पहुंचे तो वहां एक और युवक की लाश पड़ी थी. पूछताछ से पता चला कि वह लाश सुभाष के बड़े बेटे शिववीर (Shivvir) की है.

पता चला कि शिववीर ने ही पूरे परिवार का कत्ल किया था, फिर पकड़े जाने के डर से खुदकुशी कर ली थी. शिववीर की उम्र 28 साल के आसपास थी.

शिववीर के शव के पास ही एक तमंचा पड़ा था. इसी तमंचे से गोली मार कर उस ने खुदकुशी की थी. पुलिस ने तमंचे को सुरक्षित कर लिया. पुलिस ने शिववीर की तलाशी ली तो उस की जेब से मिर्च स्प्रे तथा नींद की गोलियों के 2 खाली पत्ते मिले. पुलिस ने इसे भी सुरक्षित कर लिया.

इस के अलावा पुलिस ने कमरे से कुल्हाड़ी व फावड़ा भी कब्जे में लिया, जिस से शिववीर ने पत्नी, भाभी व पिता पर हमला किया था.  यह बात 24 जून, 2023 की है.

शिववीर ने घर के 5 जनों को क्यों काटा

यह वीभत्स घटना उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मैनपुरी (Mainpuri) जिले के किशनी थाने के गांव गोकुलपुरा अरसारा में बीती रात घटित हुई थी. सामूहिक नरसंहार (Mainpuri Mass Murder Case) की खबर थाना किशनी पुलिस को मिली तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया.

पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल की तरफ रवाना हो लिए. कुछ ही देर में एसएचओ अनिल कुमार, एसपी विनोद कुमार, एएसपी राजेश कुमार तथा सीओ चंद्रशेखर सिंह घटनास्थल पर आ गए.

सुभाष के दरवाजे पर अब तक भारी भीड़ जुट चुकी थी. ग्रामीणों की इतनी भीड़ देख कर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए. उन्हें लगा कि असामाजिक तत्त्व भीड़ को गुमराह कर कहीं कोई बवाल खड़ा न कर दें. इसलिए उन्होंने अतिरिक्त फोर्स मंगा कर गोकुलपुरा गांव में तैनात करा दी.

सामूहिक हत्याकांड (Mainpuri Mass Murder) की खबर सुन कर अब तक सुभाष यादव के घर पर रिश्तेदारों का जमावड़ा शुरू हो गया था. जब भी कोई खास रिश्तेदार आता, महिलाओं का करुण रुदन कलेजा चीरने लगता. माहौल उस समय तो बेहद गमगीन हो उठा, जब नईनवेली दुलहन मृतका सोनी के मम्मीपापा के साथ सैकड़ों लोग आ गए.

वेदराम व उन की पत्नी सुषमा बेटी दामाद का शव देख कर बिलख पड़े. उन का करुण रुदन इतना द्रवित कर देने वाला था कि वहां मौजूद शायद ही कोई ऐसा हो, जिस की आंखों में आंसू न आए हों. पुलिसकर्मी तक अपने आंसू न रोक सके.

Deepak (Mratak)                  Saurabh (Mratak)

मृतक दीपक                                              मृतक सौरभ

मृतक दीपक के मम्मीपापा भी फिरोजाबाद से आ गए थे. वह भी बेटे की लाश के पास सुबक रहे थे. प्रियंका भी पति सौरभ की लाश के पास बिलख रही थी. उस की मम्मी शारदा देवी उसे ढांढस बंधा रही थी. यह बात दीगर थी कि उन की आंखों से भी लगातार आंसू बह रहे थे. क्योंकि उन की आंखों के सामने ही बेटे, बहू और दामाद की लाश पड़ी थी.

पुलिस अधिकारियों ने संवेदना व्यक्त करते हुए किसी तरह समझाबुझा कर मृतकों के घर वालों को शवों से अलग किया, फिर पंचनामा भरवा कर मृतक सोनू, भुल्लन, दीपक, सौरभ, शिववीर तथा सोनी के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मैनपुरी के जिला अस्पताल भिजवा दिया.

शवों को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने के बाद एसपी विनोद कुमार ने घर के मुखिया सुभाष यादव से घटना के बारे में जानकारी जुटाई. सुभाष यादव ने बताया कि यह खूनी खेल उस के बड़े बेटे शिववीर ने ही खेला है. 22 जून को उस के मंझले बेटे सोनू की शादी थी. बारात गंगापुरा (इटावा) गई थी. 23 जून को दोपहर बाद बारात वापस आई. घर में बहू की मुंहदिखाई व अन्य रस्में पूरी हुईं. खूब गाना बजाना हुआ.

रात 12 बजे तक डीजे पर सब नाचतेझूमते रहे. शिववीर भी जश्न में शामिल रहा. लेकिन उस के मन में क्या चल रहा है, हम लोग भांप नहीं पाए. रात के अंतिम पहर में इस क्रूर हत्यारे ने हमला कर 5 जनों को काट कर मौत की नींद सुला दिया. शायद उस का इरादा सभी को खत्म करने का था, लेकिन पत्नी बेटी सहित वह बच गए.

Ghar Ke Mukhiya Se Puch-Tach Karte S.P. Vinod Kumar

घर के मुखिया सुभाषचंद यादव से बातचीत करते हुए एसपी विनोद कुमार

एसपी विनोद कुमार ने गोकुलपुरा अरसारा गांव में डेरा जमा लिया था. शवों के अंतिम संस्कार तक वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे. देर शाम एडीजी राजीव कृष्ण व आईजी दीपक कुमार गोकुलपुरा पहुंचे और उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर घर के मुखिया सुभाषचंद यादव से बातचीत की. उन्होंने एसपी विनोद कुमार से भी घटना से संबंधित जानकारी हासिल की तथा कुछ आवश्यक निर्देश दिए.

मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ 3 डाक्टरों के पैनल ने किया. वहां क्षेत्रीय विधायक बृजेश कठेरिया मृतकों के परिजनों के साथ रहे और उन्हे धैर्य बंधाते रहे.

पोस्टमार्टम के बाद शव उन के परिजनों को सौंप दिए गए. पुलिस व्यवस्था के साथ दीपक का शव फिरोजाबाद तथा सौरभ का शव उस के गांव चांद हविलिया (किशनी) भेज दिया गया. 3 बेटों सोनू, भुल्लन व शिववीर का दाह संस्कार सुभाष ने किया.

इधर वेदराम यादव अपनी बेटी सोनी का शव ले कर अपने गांव गंगापुरा पहुंचे तो माहौल बेहद गमगीन हो गया. लाडली बेटी का शव देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा. हर आंख में आंसू थे.

दर्द इस बात का था कि जिस बेटी को पूरे गांव ने हंसी खुशी से ससुराल भेजा था, उस का कफन में लिपटा शव गांव आया था. पूर्व दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री रामसेवक यादव भी बेहद दुखी थे. क्योंकि लाडली बेटी सोनी उन के गांव व परिवार की थी. वेदराम को ढांढस बंधाते वह स्वयं भी रो रहे थे.

Ghatna Sthal Par Pahuchi Sansad Dimple Yadav

घटनास्थल पर पहुंची डिंपल यादव

सामूहिक नरसंहार से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल शुरू हो गई थी. चूंकि मामला यादव परिवार से जुड़ा था और डिंपल यादव भी मैनपुरी से सांसद हैं, इसलिए वह दूसरे रोज ही गोकुलपुरा गांव जा पहुंचीं.

पर्यटन राज्यमंत्री जयवीर सिंह ने भी सामूहिक नरसंहार (Mainpuri Mass Killing) पर गहरा दुख व्यक्त किया. शिववीर ने अपने सगे भाइयों की हत्या क्यों की? परिवार के प्रति उस के मन में ईष्र्या, द्वेष और नफरत की भावना क्यों पनपी? वह क्या हासिल करना चाहता था? यह सब जानने के लिए हमें उस की पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझना होगा.

रूपम के बहके कदमों का नतीजा

9 मई की रात तकरीबन साढ़े 8 बजे का वक्त था. उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद के थाना इंदिरापुरम  में किसी ने फोन कर के सूचना दी कि न्याय खंड-3 में एक महिला को किसी ने गोली मार दी है.

इस संवदेनशील सूचना के मिलते ही थानाप्रभारी वीरेंद्र सिंह मय पुलिस बल के सूचना में बताए स्थान पर पहुंच गए. उस इलाके में सैकड़ों की तादाद में जनता फ्लैट बने हुए हैं. जिस जगह यह वारदात हुई, वह गली एकदम सुनसान थी. गली फ्लैटों के पीछे की साइड में होने की वजह से लोग उस का इस्तेमाल कम ही किया करते थे.

थानाप्रभारी ने मौका मुआयना किया तो वहां करीब 28-30 साल की महिला खून से लथपथ पड़ी थी. गोली उस की कनपटी पर मारी गई थी. मौके पर मोबाइल फोन और एक थैला भी पड़ा था, जिस में सब्जियां थीं. महिला शायद जिंदा बच जाए इसलिए आननफानन में पुलिस उसे नजदीक के एक निजी अस्पताल ले गई. लेकिन डाक्टरों ने उस महिला को देख कर मृत घोषित कर दिया.

महिला के पास से ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी जिस से तुरंत उस की शिनाख्त हो सके. लिहाजा घटनास्थल के आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों से पुलिस उस महिला के बारे में पूछताछ करने लगी.

उसी समय अजय झा नाम का एक युवक पुलिस के पास पहुंचा. उस ने बताया कि उस की पत्नी रूपम काफी देर पहले सब्जी लेने गई थी, वह अभी तक नहीं लौटी है. पुलिस ने अजय को लाश दिखाई तो उस ने तुरंत लाश को पहचान लिया और उस की पुष्टि अपनी पत्नी रूपम के रूप में कर दी.

मामला हत्या का था, इसलिए थानाप्रभारी ने इस की सूचना आला अधिकारियों को भी दे दी. सूचना मिलने पर एसपी सिटी शिवहरि मीणा और सीओ सिटी रणविजय सिंह भी अस्पताल पहुंच गए.  मृतका का पति बुरी तरह बिलख रहा था. पुलिस ने उसे ढांढस बंधा कर शुरुआती पूछताछ की. उस ने बताया कि शाम करीब 7 बजे रूपम बाजार से सब्जी लेने के लिए घर से निकली थी.

पुलिस ने उस समय उस से ज्यादा पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा और पंचनामा भर कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

अजय झा की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. थानाप्रभारी ने केस की छानबीन शुरू कर दी. वह इतना तो समझ गए थे कि हमलावर का मकसद केवल रूपम की हत्या करना था और उस के सिर में गोली इसलिए मारी गई थी ताकि वह जिंदा न बच सके.

चूंकि रूपम का पर्स, पहने हुए आभूषण और मोबाइल फोन सलामत था, इसलिए लूट की वजह से हत्या करने की संभावना बिलकुल नहीं थी. एसएसपी शुचि घिल्डियाल ने अगले दिन मृतका के पति को अपने औफिस में बुला कर पूछताछ की. उस ने बताया कि वह प्रौपर्टी डीलिंग का काम करता है. किसी के साथ अपनी रंजिश या झगड़ा होने से भी उस ने इनकार कर दिया.

उस से पूछताछ में यह पता जरूर चला कि कुछ समय पहले उस ने अंतरिक्ष सोसायटी के पास एक प्रौपर्टी खरीदी थी. सीओ रणविजय सिंह ने एसएसपी के आदेश पर जब प्रौपर्टी वाले बिंदु पर जांच की तो आशंका खारिज हो गई.

आगे बढ़ने का कोई और रास्ता न देख पुलिस ने रूपम के मोबाइल फोन की जांच की. उस में अंतिम काल उस के पति की थी. इस बारे में पुलिस ने अजय से पूछा तो उस ने बताया, ‘‘मेरे पास रूपम का फोन करीब 8 बजे आया था. उस ने बताया था कि उस की सहेली मिल गई है इसलिए थोड़ा लेट हो जाएगी.’’

जांच के दौरान यह भी पता लगा कि रूपम एक दूसरा मोबाइल भी इस्तेमाल करती थी. पुलिस ने उस का दूसरा नंबर भी हासिल कर लिया.  उस के नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई गई.

काल डिटेल्स की जांच में एक ऐसा नंबर पुलिस को मिल गया, जिस पर रूपम अकसर बातें किया करती थी. हत्या वाली शाम भी उस की उस नंबर पर बात हुई थी, लेकिन बात करने के बाद उस ने वह नंबर डिलीट कर दिया था. फोन की डायल सूची से रूपम ने वह नंबर डिलीट क्यों किया, इस बात को पुलिस नहीं समझ पा रही थी.

पुलिस ने उस नंबर की पड़ताल की तो वह न्याय खंड-3 के ही फ्लैट नंबर-553जी निवासी रोहित राणा का निकला. एक और चौंकाने वाली बात यह भी थी कि रूपम का जो दूसरा नंबर था, उस का सिम भी रोहित के नाम पर खरीदा गया था.

इन दोनों बातों से रोहित अब पुलिस के शक के दायरे में आ गया. पुलिस ने उस के घर दबिश दी लेकिन वह लापता था. इस से उस पर पुलिस का शक और भी पुख्ता हो गया.

सीओ रणविजय सिंह ने यह पूरी जानकारी एसएसपी को दी तो एसएसपी ने रोहित राणा की तलाश करने के लिए एक पुलिस टीम बनाई जिस में थानाप्रभारी वीरेंद्र सिंह, एसएसआई विशाल, एसआई सुभाष गौतम, अंजनी कुमार, कांस्टेबल विपिन चावला आदि को शामिल किया गया.

सीओ रणविजय सिंह के निर्देशन में पुलिस रोहित की तलाश में संभावित जगहों पर दबिश डालने लगी. इस की भनक शायद रोहित को लग चुकी थी जिस से वह पुलिस से बचने के लिए इधरउधर भागता रहा. अंतत: एक मुखबिर की सूचना पर उसे रात 8 बजे के करीब एक शौपिंग मौल के पास से गिरफ्तार कर लिया गया.

तलाशी में उस के पास से एक .32 बोर की पिस्टल और एक कारतूस भी बरामद हुआ. थाने ला कर उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने रूपम की हत्या से परदा उठा दिया. वही उस का हत्यारा था. हत्या की जो वजह उस ने बताई. उसे सुन कर सभी चौंक गए.

30 वर्षीया रूपम का पति अजय झा मूलरूप से बिहार के दरभंगा जिले के न्यू बलभद्रपुर, भदेरिया सराय के रहने वाले श्यामधर का बेटा था. सालों पहले अजय भी अन्य युवकों की तरह कामधंधे की तलाश में दिल्ली चला आया था. उस ने कई छोटेमोटे काम कर के किसी तरह अपने पैर जमाए. 8 साल पहले उस का विवाह रूपम झा से हुआ.

रूपम खूबसूरत युवती थी. चूंकि अजय भी दिल्ली में काम करता था इसलिए शादी के बाद वह पत्नी को भी अपने साथ दिल्ली ले आया. रूपम वक्त के साथ 2 बच्चों की मां बन गई थी. वह बनसंवर कर रहती थी.

3 साल पहले अजय ने गाजियाबाद में प्रौपर्टी डीलिंग का मामूली सा काम शुरू किया. बाद में वह दिल्ली से गाजियाबाद शिफ्ट हो गया. अपने काम की उलझनों में अजय पत्नी पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता था.

इस के विपरीत रूपम की हसरतें जवान थीं. उसे देख कर नहीं लगता था कि वह 2 बच्चों की मां है. पति सुबह ही घर से निकल जाता था इसलिए घरेलू कामों के लिए रूपम को ही बाजार जाना पड़ता था. इसी दौरान उस की नजरें रोहित से चार हो गईं.

रोहित मूलत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अग्रवाल मंडी, टटीरी कस्बे का रहने वाला था. फिलहाल वह न्याय खंड-3 में ही रहता था. वहीं वह ज्वैलरी की छोटी सी दुकान चलाता था. रोहित नवयुवक था.

एक बार रूपम उस के यहां से बिछुए खरीद कर लाई थी. उस छोटी सी मुलाकात में ही वह रोहित को भा गई. यह करीब 5 महीने पहले की बात है.

रोहित थोड़ा बातूनी स्वभाव का था. उस ने उस समय रूपम की सुंदरता की थोड़ी तारीफ क्या कर दी कि वह गदगद हो गई. इस के कुछ दिनों बाद रूपम की एक सहेली को भी अपने गले की चेन के लिए एक लौकेट खरीदना था, तब रूपम सहेली को रोहित की दुकान पर ले गई. रूपम को अपनी दुकान पर फिर आया देख रोहित बहुत खुश हुआ. उस के हावभाव और आंखों की भाषा से रूपम उस के मन की बात समझ गई थी.

शादी के कई साल बाद भी अजय उस की महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सका था. रोहित की चाहत को देख कर रूपम के दिल की घंटी सी बज उठी. उसे लगा कि रोहित उस के ख्वाबों को हकीकत में बदल सकता है इसलिए मुसकरा कर उस ने रोहित के प्यार को हरी झंडी दे दी. उस दिन रोहित ने रूपम का फोन नंबर ले लिया.

बातों ही बातों में रूपम ने उसे बता दिया कि उस का पति प्रौपर्टी डीलर है जो देर रात को ही घर लौटता है. इसलिए रूपम उस की दुकान से जाने के थोड़ी देर बाद ही रोहित ने उसे फोन कर दिया. इधरउधर की बातें करने के बाद रोहित ने उस से अपने मन की बात खुल कर कह दी. रूपम ने भी बिना कोई देर किए उस के प्यार को स्वीकार कर लिया. प्यार का इजहार कर के दोनों ही खुश थे.

इस के बाद दोनों एकदूसरे से मोबाइल पर अकसर बातें करने लगे. रूपम अपने घर से किसी न किसी बहाने निकलती और रोहित के साथ रेस्टोरेंट व पार्कों में चली जाती. एकांत में होने वाली बातों के जरिए दोनों एकदूसरे के बेहद करीब आ गए.

दिल तो कब के मिल चुके थे. फिर एक दिन एक होटल में उन्होंने अपनी हसरतें भी पूरी कर लीं. जब पति अपने काम पर निकल जाता और बच्चे स्कूल, तभी रूपम रोहित को फोन कर देती. मौका देख कर रोहित उस के घर आ जाता था. इस तरह वे दोनों खूब मौजमस्ती करते रहे.

पति को शक न हो, इस से बचने के लिए रूपम मोबाइल पर बातें कर के प्रेमी रोहित का नंबर डिलीट कर देती थी. बाद में रोहित ने उसे एक मोबाइल और सिमकार्ड भी खरीद कर दे दिया. रोहित से बात करने के लिए वह ज्यादातर उसी नए नंबर का उपयोग करती थी.

प्यार की दीवानगी हदों को लांघने लगी थी. वह पति और बच्चों को छोड़ कर प्रेमी के साथ ही घर बसाने की सोचने लगी. एक दिन उस ने रोहित से अपने मन की बात कह भी दी, ‘‘रोहित, क्यों न हम कहीं जा कर शादी कर लें और फिर एक हो कर रहें.’’

रूपम की बात सुन कर रोहित सकते में आ गया. एकाएक उस से कोई जवाब नहीं बना क्योंकि उस ने कभी सोचा ही नहीं था कि ऐसी नौबत भी आ सकती है. वह रूपम को प्यार तो करता था लेकिन उस से शादी जैसी बात कभी नहीं सोची थी. उसे खामोश देख कर रूपम ने टोका, ‘‘क्या सोच रहे हो, क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं?’’

‘‘ऐसी बात नहीं है रूपम. तुम ने जो बात कही है उस पर मुझे सोचने का मौका दो.’’

उस रात रोहित को ठीक से नींद नहीं आई. रूपम उस से उम्र में बड़ी थी. वह उसे इस्तेमाल तो करना चाहता था लेकिन उस के साथ बंध कर रहना नहीं चाहता था. काफी सोचने समझने के बाद उस ने रूपम से पीछा छुड़ाने का फैसला ले लिया और उस से पीछा छुड़ाने की सोचने लगा.

इस के बाद रोहित ने रूपम से दूरियां बनानी शुरू कर दीं. रूपम को जब लगा कि प्रेमी ने उस से मिलना कम कर दिया है तो एक दिन वह बोली, ‘‘रोहित, तुम आजकल कुछ बदलेबदले लगते हो. कहीं तुम मुझे धोखा तो नहीं दे रहे?’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है रूपम.’’ रोहित ने कहा.

‘‘तो फिर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम मुझ से दूर होते जा रहे हो. वैसे शादी के बारे में तुम ने क्या सोचा?’’

‘‘मैं हर पल तुम्हारे साथ हूं रूपम. मैं तुम से प्यार भी बहुत करता हूं. मेरा कहना यह है कि शादी के लिए अभी रुक जाओ. वैसे भी शादी की तुम इतनी जल्दी क्यों कर रही हो? हम मिलते तो रहते हैं.’’

‘‘रोहित, तुम्हारी बातों से मुझे यह लग रहा है कि तुम मुझे शादी के लिए टाल रहे हो. लेकिन मैं भी तुम्हें एक बात बताना चाहती हूं.’’

‘‘क्या?’’

‘‘अगर तुम ने मुझ से शादी नहीं की और धोखा दिया तो मैं आत्महत्या कर लूंगी और सुसाइड नोट में तुम्हारा नाम लिख दूंगी.’’

रूपम की इस धमकी से रोहित के पसीने छूट गए. वह बोला, ‘‘मुझे थोड़ा समय तो दो.’’

‘‘बस अब और नहीं. मुझे जल्दी जवाब चाहिए.’’ रूपम के तेवर देख कर रोहित डर गया. उस ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही.

रोहित समझ गया था कि रूपम किसी भी सूरत में उस का पीछा छोड़ने वाली नहीं है.  उस से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने एक खतरनाक योजना बना ली.

रोहित का एक दोस्त था गौरव त्यागी. गौरव को रोहित ने अपनी परेशानी बताई और उस से किसी हथियार का इंतजाम करने को कहा. गौरव ने बहुत जल्द एक पिस्टल का इंतजाम कर के उसे दे दिया.

रोहित ने सोच लिया था कि वह आखिरी बार रूपम को समझाने की कोशिश करेगा. अगर वह फिर भी नहीं मानी तो उसे रास्ते से हटा देगा. योजना बना कर उस ने  शाम को रूपम को फोन किया, ‘‘रूपम, मुझे आज तुम से मिलना है. एक जरूरी बात करनी है.’’

रूपम खुश हुई कि रोहित ने शायद उस की बात मान ली है. वह बोली, ‘‘ठीक है, मैं तुम से 8 बजे के बाद घर के पीछे वाली उसी गली में मिलूंगी, जहां हम पहले मिलते थे.’’

उस गली का चुनाव रूपम ने इसलिए किया था क्योंकि वह सुनसान रहती थी.

उस शाम रूपम बाजार के लिए घर से निकली. उस ने घर के लिए सब्जियां खरीदीं. इसी बीच उस ने अपने पति को फोन भी कर दिया कि वह सहेली के पास जाएगी इसलिए घर थोड़ी देरी से आएगी. वह तय समय पर रोहित से मिलने गली में पहुंच गई. रोहित भी वहां पहुंच गया था. वह रोहित के खतरनाक इरादों से पूरी तरह अनजान थी.

उसे देखते ही रूपम ने पूछा, ‘‘क्या सोचा तुम ने?’’

‘‘रूपम, तुम मेरी मजबूरी समझो. मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ यह सुनते ही रूपम के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे उम्मीद नहीं थी कि रोहित उसे ऐसा जवाब देगा.

‘‘मैं अब तुम्हें छोड़ूंगी नहीं. तुम ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया.’’ कहने के साथ ही रूपम ने गुस्से में रोहित के साथ हाथापाई शुरू कर दी. उसे नहीं पता था कि रोहित उस की मौत बनने जा रहा है.

‘‘पीछा तो तुम्हें छोड़ना ही पड़ेगा रूपम.’’ रोहित गुस्से में बोला और पलक झपकते ही पिस्टल निकाल ली. यह देख कर रूपम के होश उड़ गए. वह कुछ कर पाती, उस से पहले ही रोहित ने उस के सिर से पिस्टल सटा कर गोली चला दी. गोली लगते ही रूपम गिर पड़ी. उसे तड़पता छोड़ रोहित वहां से भाग गया.

पुलिस उस तक न पहुंच सके, इसलिए वह घर से भी फरार हो गया. लेकिन पुलिस के जाल में वह फंस ही गया. उस से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या के समय पहनी गई टीशर्ट जिस पर खून के छींटे लगे थे, बरामद कर ली. उस का मोबाइल भी पुलिस ने जब्त कर लिया.

अगले दिन पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उस की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस उसे पिस्टल मुहैया कराने वाले उस के दोस्त गौरव त्यागी की तलाश कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित